1
00:00:07,360 --> 00:00:11,760
जी सभी को नमस्कार सत साहेब।

2
00:00:11,760 --> 00:00:16,000
अ मेरा नाम गणेश दास है और मैं झारखंड

3
00:00:16,000 --> 00:00:20,880
से हूं। गोडा जिला पड़ता है। मैंने

4
00:00:20,880 --> 00:00:24,880
संत रामपाल जी महाराज से 2014 में नाम

5
00:00:24,880 --> 00:00:30,880
दीक्षा लिया है। हम्म। तो

6
00:00:32,720 --> 00:00:38,240
2014 मतलब उनके वो क्या था? बरवाला कांड था।

7
00:00:38,240 --> 00:00:42,240
बरवाला कांड से ठीक करें। ये बरवाला कांड से

8
00:00:42,240 --> 00:00:44,960
पहले लिया है।

9
00:00:44,960 --> 00:00:49,120
जी। अच्छा ठीक है। तो हम लोग ना विस्तार

10
00:00:49,120 --> 00:00:53,120
से बात करेंगे और हो सकता है ये हमारी चर्चा कई एपिसोड्स में हो क्योंकि बहुत

11
00:00:53,120 --> 00:00:57,600
सारी चीजें हम लोग डिस्कस करेंगे आराम आराम से। तो

12
00:00:57,600 --> 00:01:01,680
सर्वप्रथम एक यह बात आती है कि रामपाल

13
00:01:01,680 --> 00:01:06,160
जी महाराज की कहानी जो समाज में शुरू होती है वो यहां से होती है

14
00:01:06,160 --> 00:01:10,160
कि उन्होंने सभी धर्मों के पवित्र सद

15
00:01:10,160 --> 00:01:14,240
ग्रंथों से खोल खोल कर दिखाकर सिद्ध कर दिया है कि

16
00:01:14,240 --> 00:01:18,240
वास्तविक ज्ञान क्या है? वास्तविक ईश्वर कौन है? वास्तविक तत्वदर्शी

17
00:01:18,240 --> 00:01:22,400
कौन है? है ना? जी जी तो

18
00:01:22,400 --> 00:01:28,400
इसमें तीन विशेषण आए हैं। धर्म

19
00:01:29,040 --> 00:01:33,760
और उसके बाद पवित्र और उसके बाद

20
00:01:33,760 --> 00:01:37,920
सद ग्रंथ तो रामपाल जी महाराज के

21
00:01:37,920 --> 00:01:42,160
द्वारा किसी भी आईडियोलॉजी को धर्म

22
00:01:42,160 --> 00:01:46,240
के रूप में स्वीकार करने का आधार क्या है? जी एक बार फिर से प्रश्न को

23
00:01:46,240 --> 00:01:50,960
दोहराइएगा। मैं समझा नहीं कि आप कहना क्या चाह रहे हैं।

24
00:01:50,960 --> 00:01:55,200
रामपाल जी महाराज के द्वारा और उनके अनुयायियों के द्वारा

25
00:01:55,200 --> 00:01:59,280
आपके जो रामपाल जी महाराज हैं उनके द्वारा और आप लोगों के द्वारा

26
00:01:59,280 --> 00:02:03,360
एक क्लेम सबसे पहला जो क्लेम है जिस पर पूरी इमारत खड़ी हुई है।

27
00:02:03,360 --> 00:02:07,600
है ना? उस पर यह है कि उन्होंने सभी

28
00:02:07,600 --> 00:02:11,920
धर्मों के पवित्र सद ग्रंथों से यह सिद्ध

29
00:02:11,920 --> 00:02:16,000
कर दिया है कि परमेश्वर कबीर है। वो तत्वदर्शी

30
00:02:16,000 --> 00:02:20,320
है और गीता का ज्ञान काल ने बोला है। ये सब चीजें उन्होंने बोली है।

31
00:02:20,320 --> 00:02:24,320
तो जी अब जब वो आप लोग जब यह क्लेम कर रहे हो कि सभी

32
00:02:24,320 --> 00:02:28,560
धर्मों के यानी कि जिन जिन बुक्स को उन्होंने

33
00:02:28,560 --> 00:02:32,720
यूज किया है उन बुक्स वो बुक्स जिन आईडियोलॉजी से जुड़ी जैसे इस्लाम

34
00:02:32,720 --> 00:02:36,800
से क्रिश्चियनिटी से किसी भी आईडियोलॉजी से जुड़ी हुई वो चीजें

35
00:02:36,800 --> 00:02:37,600
हैं तो

36
00:02:37,600 --> 00:02:41,840
उनको भी उन्होंने धर्म माना है। क्रिश्चियनिटी को भी धर्म माना

37
00:02:41,840 --> 00:02:46,320
है। इस्लाम को भी धर्म माना है। सबको उन्होंने धर्म माना है। ठीक है?

38
00:02:46,320 --> 00:02:51,040
जी जी तो दूसरी बात उनके जो ग्रंथ है स्क्रिप्चर्स

39
00:02:51,040 --> 00:02:55,680
हैं उनको उन्होंने पवित्र और सद ग्रंथ भी बोला है।

40
00:02:55,680 --> 00:03:00,320
ठीक है? तो सबसे पहला सवाल यह है

41
00:03:00,320 --> 00:03:05,120
कि अ

42
00:03:05,120 --> 00:03:09,200
किसी भी विचारधारा को धर्म के रूप में किसी भी ज्ञान को

43
00:03:09,200 --> 00:03:13,280
धार्मिक ज्ञान के रूप में स्वीकार करने का रामपाल

44
00:03:13,280 --> 00:03:18,480
दास जी का आधार क्या है?

45
00:03:18,480 --> 00:03:22,480
किसी भी बात को स्वीकार करने का आधार उनके शास्त्र है। जैसे

46
00:03:22,480 --> 00:03:26,560
हम हिंदू धर्म की बात कर रहे थे। हिंदू धर्म में जो भी शास्त्र है जैसे

47
00:03:26,560 --> 00:03:30,640
वेद हो गया। मेरी बात आप समझ नहीं रहे। जैसे जैसे कि मैं आपको उदाहरण दे

48
00:03:30,640 --> 00:03:35,200
दूं। जैसे कि मान लीजिए कि मेरे पास एक बुक है।

49
00:03:35,200 --> 00:03:38,480
जी।

50
00:03:38,480 --> 00:03:42,560
एक मिनट दिखाता हूं। मान लीजिए ये है।

51
00:03:42,560 --> 00:03:46,720
ठीक है। इसमें मैंने कुछ बातें लिखी है। जो

52
00:03:46,720 --> 00:03:50,800
मुझे ठीक लगे। ओके। जी। भगवान के

53
00:03:50,800 --> 00:03:55,440
बारे में भी लिखा है। और भी कुछ बातें लिखी है।

54
00:03:55,440 --> 00:04:00,160
इस इस किताब को कुछ 10 20 लोग मानते भी हैं।

55
00:04:00,160 --> 00:04:02,800
जी।

56
00:04:02,800 --> 00:04:06,960
और धर्म भी कहते हैं। तो क्या इस किताब को भी आप धर्म

57
00:04:06,960 --> 00:04:10,960
मान लेंगे, धार्मिक किताब मान लेंगे या कोई कारण होगा जिस कारण से

58
00:04:10,960 --> 00:04:15,120
आप इसको किसी भी किताब को धार्मिक किताब मानेंगे। वह क्या कारण

59
00:04:15,120 --> 00:04:17,920
है?

60
00:04:17,920 --> 00:04:22,400
वो कारण यही है कि

61
00:04:22,400 --> 00:04:26,560
जो किताब को हम लोग धर्म के रूप में मानते हैं वो वास्तव में

62
00:04:26,560 --> 00:04:30,720
ईश्वर प्रदत है। इसीलिए उनको ग्रंथ माना गया है। सद ग्रंथ

63
00:04:30,720 --> 00:04:34,880
माना गया है। जिसको कि आप बोल रहे हैं किसी व्यक्ति के द्वारा

64
00:04:34,880 --> 00:04:38,880
लिखा गया ऐसा नहीं है। जैसे वेद ईश्वर कृत है। गीता

65
00:04:38,880 --> 00:04:43,280
भी गया। मैं आपकी बात समझ गया

66
00:04:43,280 --> 00:04:47,920
कि जो ग्रंथ ऐसा होगा जो ईश्वर प्रदत्त होगा

67
00:04:47,920 --> 00:04:51,920
उसको आप पवित्र सद ग्रंथ और धार्मिक

68
00:04:51,920 --> 00:04:56,000
मानते हैं। जी जी जी अच्छा तो

69
00:04:56,000 --> 00:05:00,000
मैं भी कह रहा हूं कि ये ईश्वर प्रदत्त है मुझे। फिर इसको

70
00:05:00,000 --> 00:05:04,080
धार्मिक मानेंगे आप? नहीं आपके कहने से केवल

71
00:05:04,080 --> 00:05:09,040
नहीं हो जाएगा। उसको प्रमाणित करना होगा कि वास्तव में ईश्वर प्रदत है।

72
00:05:09,040 --> 00:05:13,040
तो आपने आपने यह जो क्रिश्चियन वाला

73
00:05:13,040 --> 00:05:19,040
है वह कैसे प्रमाणित किया है कि वो ईश्वर प्रदत्त है

74
00:05:22,000 --> 00:05:26,080
हम कर देंगे पर जैसा कि आपने शुरुआत में कहा था कि

75
00:05:26,080 --> 00:05:30,240
संत रामपाल जी महाराज ने सर्व धर्म ग्रंथों से

76
00:05:30,240 --> 00:05:34,240
ये प्रमाणित किया कि कबीर साहब भगवान है

77
00:05:34,240 --> 00:05:38,320
पूर्ण परमात्मा है। मैं वो नहीं पूछ रहा हूं। नहीं सबसे

78
00:05:38,320 --> 00:05:42,560
शुरू में आपने हम पहले इस पर भी आएंगे। आपके हर प्रश्न का उत्तर देंगे

79
00:05:42,560 --> 00:05:46,880
लेकिन शुरुआत में जैसा कि आपने कहा कि संत रामपाल जी महाराज सभी धर्म ग्रंथों

80
00:05:46,880 --> 00:05:51,120
को लेकर के खुद को खोल के दिखाते हैं और कहते हैं कि कबीर साहब

81
00:05:51,120 --> 00:05:55,600
परमात्मा है। तो इस विषय को

82
00:05:55,600 --> 00:05:59,680
आगे बढ़ाते हुए सबसे पहले हम आपसे जानना चाहते हैं कि आपका ईश्वर के

83
00:05:59,680 --> 00:06:03,680
विषय में क्या विचार है? ईश्वर ये विषयांतर हो रहा है। देखिए

84
00:06:03,680 --> 00:06:07,840
ऐसा है ये विषयांतर हो रहा है। अभी एक विषय चल रहा है कि अगर

85
00:06:07,840 --> 00:06:12,320
रामपाल जी अगर रामपाल जी ने किसी आईडियोलॉजी को किसी विचारधारा

86
00:06:12,320 --> 00:06:16,320
को धर्म कहा है तो किसी भी आईडियोलॉजी को धर्म के

87
00:06:16,320 --> 00:06:20,880
रूप में स्वीकार करने का आधार आपने बताया कि वो ईश्वर प्रवृत्त होना चाहिए।

88
00:06:20,880 --> 00:06:25,120
इसमें हमें आपकी ओर से आप नहीं दे रहे हैं। मगर आपकी ओर से एक हम तर्क

89
00:06:25,120 --> 00:06:29,760
खुद ले लेते हैं कि भाई आपको विश्वास है कि मोहम्मद साहब ने सही कहा था।

90
00:06:29,760 --> 00:06:34,080
आपको विश्वास है ईसा मसीह ने सही कहा था। ठीक है?

91
00:06:34,080 --> 00:06:37,120
रामपाल जी को विश्वास है। अब मुझे

92
00:06:37,120 --> 00:06:41,200
पहले तो एक बात बताइए क्या गीता जी काल के

93
00:06:41,200 --> 00:06:45,440
द्वारा प्रदत्त है या ईश्वर के द्वारा प्रदत्त है? ये फिर विषय

94
00:06:45,440 --> 00:06:49,520
अंतर होने लगा। जैसा कि हमने आप जो प्रारंभ में जो

95
00:06:49,520 --> 00:06:53,520
बात शुरू किया था हम उस पर हम आना चाहेंगे। इसके बाद भाई साहब

96
00:06:53,520 --> 00:06:57,760
मेरी बात मैं आपको कनेक्ट बता देता हूं। वो कनेक्शन क्या है?

97
00:06:57,760 --> 00:07:01,760
आपकी जो यह जो लाइन है ना यह गलत लाइन है। इसको मैं सिद्ध

98
00:07:01,760 --> 00:07:06,000
करूंगा। इसी को सिद्ध कर रहा हूं। आपने जो यह कहा है कि ईश्वर

99
00:07:06,000 --> 00:07:10,160
द्वारा प्रदत्त जो धर्म जो शास्त्र होगा वो हमारे

100
00:07:10,160 --> 00:07:14,160
लिए धार्मिक ग्रंथ है। तो जो ये जो गीता का ज्ञान

101
00:07:14,160 --> 00:07:20,160
है क्या वो ईश्वर के द्वारा प्रदत्त है? बिल्कुल।

102
00:07:20,880 --> 00:07:24,960
अच्छा वो स्वयं ईश्वर ने दिया है या काल ने दिया है? यह तो

103
00:07:24,960 --> 00:07:30,080
काल के द्वारा दिया गया है। और ईश्वर शब्द जो है

104
00:07:30,080 --> 00:07:34,080
यह हर के लिए प्रयुक्त होता है। आम भाषा में

105
00:07:34,080 --> 00:07:38,160
ईश्वर भगवान को भी कहा जाता है। ब्रह्मा विष्णु महेश को भी कुछ लोग ईश्वर

106
00:07:38,160 --> 00:07:42,800
कहते हैं। ईश्वर शब्द केवल एक व्यक्ति के लिए नहीं होता है। बल्कि

107
00:07:42,800 --> 00:07:46,880
भाई साहब मैं आपसे ये कह रहा हूं कि आपकी किसी भी शास्त्र को

108
00:07:46,880 --> 00:07:50,880
धर्म के रूप में स्वीकार किसी भी आईडियोलॉजी को धर्म के रूप में स्वीकार

109
00:07:50,880 --> 00:07:52,400
करने का आधार जो आपका पूर्ण

110
00:07:52,400 --> 00:07:56,400
ब्रह्म है। उसके द्वारा प्रदत्त ज्ञान है। किसी किसी को भी जिसको

111
00:07:56,400 --> 00:08:02,400
ईश्वर कहा जाएगा उसके द्वारा जो है आप मान लेंगे कि ईश्वर द्वारा प्रदत्त है।

112
00:08:05,440 --> 00:08:09,600
देखिए पूर्ण ब्रह्म के द्वारा जो ज्ञान प्रदत है उनहीं से मिलता जुलता

113
00:08:09,600 --> 00:08:13,680
ज्ञान अगर अन्य शास्त्रों में है तो हमारे लिए मान्य है। चाहे वो कुरान

114
00:08:13,680 --> 00:08:17,680
शरीफ में हो चाहे बाइबल में हो चाहे वेदों में हो कहीं भी हो

115
00:08:17,680 --> 00:08:21,760
तो हमारे लिए मान्य है। यानी कि जिस शास्त्र में

116
00:08:21,760 --> 00:08:26,240
पूर्ण ब्रह्म की बातों के अनुसार बात लिखी होगी कहीं भी

117
00:08:26,240 --> 00:08:31,680
थोड़ी बहुत भी वो आपके लिए धर्म धार्मिक ग्रंथ हो जाएगा। जी

118
00:08:31,680 --> 00:08:36,640
तो ये मैंने लिखा है पूर्ण ब्रह्म की भक्ति करो।

119
00:08:36,640 --> 00:08:40,640
दिख रहा है आपको? जी तो क्या

120
00:08:40,640 --> 00:08:44,720
अब ये धार्मिक ग्रंथ हो गया आपके लिए? नहीं केवल एक

121
00:08:44,720 --> 00:08:48,720
शब्द लिख देने से तो फिर मुझे बताइए कितने शब्द

122
00:08:48,720 --> 00:08:52,960
कितने शब्द लिखने पर हो जाएगा बताइए ग्रंथ के कुछ नियम

123
00:08:52,960 --> 00:08:57,120
होते हैं वो क्या है सिद्धांत होते हैं वो हम

124
00:08:57,120 --> 00:09:01,760
वो अलग विषय है अलग विषय नहीं है आप

125
00:09:01,760 --> 00:09:05,760
अलग विषय नहीं है मैं कनेक्ट बता रहा हूं आपकी बात कट रही है आपने अभी एक

126
00:09:05,760 --> 00:09:07,520
बात कही कि जिस ग्रंथ

127
00:09:07,520 --> 00:09:11,680
में थोड़ी बहुत बात भी भगवान से जुड़ी हुई होगी भगवान वो वाले

128
00:09:11,680 --> 00:09:15,920
भगवान नहीं जिनको वाइस कैप्टन के रूप में देखते हैं मेन भगवान।

129
00:09:15,920 --> 00:09:19,920
ठीक है? पूर्ण ब्रह्म। पूर्ण ब्रह्म के अनुसार जिस भी ग्रंथ में कहीं भी

130
00:09:19,920 --> 00:09:24,160
लिखा होगा वो हमारे लिए धार्मिक ग्रंथ है। वो धर्म है। तो ये

131
00:09:24,160 --> 00:09:28,240
आपका धार्मिक ग्रंथ माना जाएगा क्या ये? अब आप कह रहे

132
00:09:28,240 --> 00:09:33,920
हैं अब आप कह रहे है कि नहीं और भी कुछ होता है। वो और भी कुछ क्या है?

133
00:09:33,920 --> 00:09:37,920
देखिए उसके विषय में हम आ रहे है। उस पर भी आएंगे कि ग्रंथ क्या

134
00:09:37,920 --> 00:09:41,920
होता है? महाकाव्य क्या होता है? मैंने ग्रंथ नहीं कहा

135
00:09:41,920 --> 00:09:44,880
है। मैंने कहा है धर्म।

136
00:09:44,880 --> 00:09:49,040
धर्म आप किसी को भी किसी किसी भी बात को समाज में कोई

137
00:09:49,040 --> 00:09:53,600
भी संस्था है, कोई भी मत है, कोई भी पंथ है, उस

138
00:09:53,600 --> 00:09:57,760
पंथ मत के द्वारा दी जाने वाली शिक्षा, ज्ञान को आप धर्म

139
00:09:57,760 --> 00:10:02,400
जब कब कहते हैं? किस कारण से कहते हैं? यह पूछ रहा हूं मैं।

140
00:10:02,400 --> 00:10:06,640
आपने कहा कि ईश्वर द्वारा प्रदत्त ज्ञान से मिलता जुलता होगा। उसको हम धर्म

141
00:10:06,640 --> 00:10:10,800
कहेंगे। तो यह मिलता जुलता है। पूर्ण ब्रह्म की भक्ति करो।

142
00:10:10,800 --> 00:10:13,520
तो इसको भी

143
00:10:13,520 --> 00:10:18,080
जिसमें भी ऐसा कुरान शरीफ है चाहे

144
00:10:18,080 --> 00:10:22,400
इसको आपने एक बात कही अभी इसको भी ये धार्मिक ग्रंथ है आपका

145
00:10:22,400 --> 00:10:22,900
ये

146
00:10:22,640 --> 00:10:28,640
ग्रंथ का क्या नाम है बताइए

147
00:10:28,800 --> 00:10:34,160
शिवांश

148
00:10:34,160 --> 00:10:38,320
उसको हम पढ़ेंगे तभी तो हम कुछ कह सकेंगे बिना पढ़े हम कह सकते हैं आपने

149
00:10:38,320 --> 00:10:42,640
कहा था मिलती जुलती कहीं पे भी बात होती है वो धार्मिक ग्रंथ होता है तो ये मिलती जुलती

150
00:10:42,640 --> 00:10:46,960
बात दिखा दी ना पूर्ण ब्रह्म की भक्ति करो

151
00:10:46,960 --> 00:10:52,720
हमको हम तो नहीं पढ़े हैं आपके दिखा

152
00:10:52,720 --> 00:10:57,120
आपको दिख नहीं रहा है क्या दिख नहीं रहा है जूम कर दिख

153
00:10:57,120 --> 00:11:01,440
रहा है कि नहीं वो हमको दे दीजिए पूरा हम पढ़ लेंगे इसके बाद हम निर्णय

154
00:11:01,440 --> 00:11:05,600
करेंगे कि ये है कि नहीं है तो वो तो यानी कि मिलती जुलती

155
00:11:05,600 --> 00:11:09,760
बात होने के बावजूद भी कुछ कारण ऐसे होते हैं जिन कारणों से आप डिसाइड

156
00:11:09,760 --> 00:11:15,760
करेंगे वो धार्मिक ग्रंथ है कि नहीं। वो कारण क्या है?

157
00:11:18,480 --> 00:11:22,480
यानी मेरी बात समझिए। देखिए मैं मैं आपसे शायद आप मेरा

158
00:11:22,480 --> 00:11:26,480
प्रश्न समझ नहीं पा रहे हैं। इसलिए ऐसा हो रहा है। यानी कि सिर्फ

159
00:11:26,480 --> 00:11:30,480
मिलती जुलती बात होने का होने से आप किसी को धर्म ग्रंथ नहीं मानेंगे।

160
00:11:30,480 --> 00:11:34,480
आप उसमें और भी जांच करेंगे। वो जांच का आधार क्या होगा?

161
00:11:34,480 --> 00:11:40,080
यह पूछ रहा हूं।

162
00:11:40,080 --> 00:11:44,240
जांच का आधार होगा

163
00:11:44,240 --> 00:11:48,400
कि वो उनका जो लेखक है वो कौन है?

164
00:11:48,400 --> 00:11:52,560
वो कोई प्रमाणित व्यक्ति है अथवा नहीं

165
00:11:52,560 --> 00:11:56,800
इसके कौन लेखक होगा? क्या प्रमाणित

166
00:11:56,800 --> 00:12:00,880
व्यक्ति किसके द्वारा प्रमाणित होगा? किसी संत महात्मा

167
00:12:00,880 --> 00:12:04,960
के द्वारा लिखा होना चाहिए या जिसके बारे में हम जानते हैं कि वो भगवान का भेजा

168
00:12:04,960 --> 00:12:09,120
हुआ है उनके द्वारा होना चाहिए। किसी आम व्यक्ति के लिख देने

169
00:12:09,120 --> 00:12:13,120
से कोई ग्रंथ नहीं हो जाता। जैसे हम कोई शिवश आपके बारे में

170
00:12:13,120 --> 00:12:17,280
कुछ उल्टा सीधा या कोई भगवान के बारे में लिख दे तो वो ग्रंथ नहीं माना

171
00:12:17,280 --> 00:12:21,360
जाएगा। तो यानी कि अब आपने कहा कि किसी संत कोई

172
00:12:21,360 --> 00:12:25,600
संत होना चाहिए। है ना? जी। तो तो

173
00:12:25,600 --> 00:12:29,680
इसका मतलब यह है कि संत के द्वारा जो लिखा

174
00:12:29,680 --> 00:12:33,680
गया होगा वो आपका धार्मिक ग्रंथ है। जी और संत

175
00:12:33,680 --> 00:12:39,680
की परिभाषा क्या है आपके अनुसार? संत कौन है?

176
00:12:42,320 --> 00:12:47,200
शांति को जो प्राप्त कर ले वह संत कहलाते हैं।

177
00:12:47,200 --> 00:12:52,080
शांति को जो प्राप्त कर ले वो संत कहलाते हैं। तो

178
00:12:52,080 --> 00:12:56,080
आज के टाइम में कोई आपके सामने ये रामपाल जी को छोड़कर के संत है

179
00:12:56,080 --> 00:13:01,760
क्या?

180
00:13:01,760 --> 00:13:05,760
नहीं। अच्छा शांति से मतलब है वो

181
00:13:05,760 --> 00:13:09,760
युद्ध वगैरह ना करे। नहीं शांति का मतलब

182
00:13:09,760 --> 00:13:13,840
होता है जैसे श्रीमद् भगवत गीता अध्याय

183
00:13:13,840 --> 00:13:18,000
18 श्लोक 62 में कहा गया है कि भारत तू सब प्रकार प्रकाश उस परमेश्वर की शरण में

184
00:13:18,000 --> 00:13:22,400
जा उनहीं की कृपा से तू परम शांति को यहां परम शांति

185
00:13:22,400 --> 00:13:26,480
जिस परम शांति की बात हो रही है उनको जो प्राप्त कर ले वो

186
00:13:26,480 --> 00:13:29,680
संत होता है

187
00:13:29,680 --> 00:13:34,160
वो संत होता है उसके द्वारा लिखा हुआ कोई भी ग्रंथ आप धार्मिक मानेंगे

188
00:13:34,160 --> 00:13:38,240
जी तो कुरान को किसने लिखा और क्या

189
00:13:38,240 --> 00:13:44,240
वह शांति को प्राप्त थे?

190
00:13:45,440 --> 00:13:50,000
कुरान शरीफ मोहम्मद साहब के द्वारा

191
00:13:50,000 --> 00:13:54,560
लिखा हुआ है और वो भगवान से

192
00:13:54,560 --> 00:13:58,640
मैं पूछ रहा हूं क्या वो शांति को प्राप्त थे? बिल्कुल।

193
00:13:58,640 --> 00:14:02,800
आपने कहा जो संत जो संत महात्माओं के द्वारा लिखा गया ग्रंथ होगा वो

194
00:14:02,800 --> 00:14:06,800
धार्मिक ग्रंथ है। अब उसके बाद आप आपने बताया कि संत वो है

195
00:14:06,800 --> 00:14:10,880
जो शांति को प्राप्त हो चुका हो। यानी कि जो परम शांति होती है मोक्ष को है

196
00:14:10,880 --> 00:14:15,120
ना मोक्ष अलग विषय है। मोक्ष नहीं

197
00:14:15,120 --> 00:14:19,200
तत्व से तत्व से जान लेना। तत्व से जान लेना। इतना ही बहुत

198
00:14:19,200 --> 00:14:23,280
है। हां। तो क्या मोहम्मद साहब आपकी उस संत की कसौटी

199
00:14:23,280 --> 00:14:29,280
पर खरे उतरते हैं?

200
00:14:38,000 --> 00:14:42,240
जी नहीं नहीं तो फिर वो आपका धार्मिक ग्रंथ कैसे

201
00:14:42,240 --> 00:14:45,120
हुआ?

202
00:14:45,120 --> 00:14:49,360
इसलिए हुआ क्योंकि उसमें जो भी ज्ञान दिया गया है यानी

203
00:14:49,360 --> 00:14:54,160
देखिए भाई साहब अब थोड़ा सा मैं अब कहूंगा आपकी बातें बदल रही

204
00:14:54,160 --> 00:14:58,160
आपने कहा था कि संत के द्वारा जो भी लिखा गया होगा वो धार्मिक

205
00:14:58,160 --> 00:15:02,160
ग्रंथ माना जाएगा ऐसे किसी के भी लिख देने से नहीं माना जाएगा फिर मैंने संत की

206
00:15:02,160 --> 00:15:06,160
परिभाषा पूछ ली संत के कसौटी पर वो जो है मोहम्मद साहब वो खरे नहीं उतर रहे

207
00:15:06,160 --> 00:15:10,640
मैं जानता हूं कोई नहीं उतरता सिवाय आप आप जिनको मानते उनके अलावा

208
00:15:10,640 --> 00:15:14,720
तो जब वो खरे नहीं उतर रहे हैं संत के द्वारा जो लिखे हुए

209
00:15:14,720 --> 00:15:18,800
जो ये हैं वो संत है ही नहीं वो शांति को प्राप्त है ही नहीं

210
00:15:18,800 --> 00:15:24,800
तो फिर आप उनके ग्रंथों को धार्मिक ग्रंथ कैसे बोल रहे हैं क्यों बोल रहे हैं

211
00:15:28,000 --> 00:15:32,320
देखिए शांति को वो प्राप्त है कि नहीं

212
00:15:32,320 --> 00:15:36,320
इस विषय पर विचार करने से पूर्व हम अचानक

213
00:15:36,320 --> 00:15:40,480
ऐसा नहीं कह सकते हैं कि उन्होंने शांति को प्राप्त कर लिया कि नहीं किया ऐसे फिलहाल

214
00:15:40,480 --> 00:15:44,640
हम कहा आपने मैं आपको क्लियर कर दूं। पहली बात तो

215
00:15:44,640 --> 00:15:48,800
आपने भी कहा है कि वो संत नहीं थे क्योंकि वो शांति को प्राप्त

216
00:15:48,800 --> 00:15:52,880
नहीं थे। दूसरी बात मैं आपके द्वारा बता दूं। आपने एक किताब लिखी है मुसलमान

217
00:15:52,880 --> 00:15:56,880
नहीं समझे कुरान का ज्ञान। जी यानी वो तत्व से

218
00:15:56,880 --> 00:16:01,040
नहीं जान पाए। जी मुसलमान तो उसमें मोहम्मद भी आते

219
00:16:01,040 --> 00:16:03,360
हैं।

220
00:16:03,360 --> 00:16:07,520
बिल्कुल। आते हैं तो फिर कहां से वो शांति को प्राप्त होने वाले हो जाएंगे?

221
00:16:07,520 --> 00:16:11,600
उसमें मतलब कि जो आप वो कह रहे हैं ना कि ऐसा हम

222
00:16:11,600 --> 00:16:15,680
लोग क्लियर नहीं कह सकते कि वो शांति को प्राप्त है कि नहीं है। ये कह रहे हैं

223
00:16:15,680 --> 00:16:19,840
आप मगर आपकी ओर से क्लियर है कि वो शांति को प्राप्त नहीं है क्योंकि

224
00:16:19,840 --> 00:16:23,840
वो जान नहीं पाए कुरान का ज्ञान

225
00:16:23,840 --> 00:16:28,000
ये ये केवल मोहम्मद साहब के लिए नहीं है। आम जो मुसलमान है

226
00:16:28,000 --> 00:16:32,080
वर्तमान के समय उनके लिए वो किताब लिखा केवल नहीं केवल नहीं

227
00:16:32,080 --> 00:16:36,240
जो जो आज के जो मुसलमान है वो मोहम्मद साहब को जो आयतें

228
00:16:36,240 --> 00:16:40,240
उतरती थी मोहम्मद साहब अपने लोगों को बताते थे कि इस आयत का ये मतलब

229
00:16:40,240 --> 00:16:43,440
है उस आयत का वो मतलब है वो आगे चला

230
00:16:43,440 --> 00:16:47,520
तो मोहम्मद साहब आपके अनुसार संत नहीं है। मोहम्मद साहब आपके अनुसार जो

231
00:16:47,520 --> 00:16:51,520
है वह शांति को प्राप्त नहीं है। मोहम्मद साहब कुरान के ज्ञान को

232
00:16:51,520 --> 00:16:56,000
समझने वाले भी नहीं है। तो जब वह नहीं है

233
00:16:56,000 --> 00:17:00,240
तो फिर उनके द्वारा दिया गया जो ग्रंथ है वह

234
00:17:00,240 --> 00:17:04,640
आपके लिए धार्मिक कैसे हुआ?

235
00:17:04,640 --> 00:17:09,280
असल में बात ये है मैं बताऊं। बात ये है कि इसका

236
00:17:09,280 --> 00:17:13,840
जो ये प्रश्न चल रहा है, इस प्रश्न में एक महत्वपूर्ण

237
00:17:13,840 --> 00:17:17,840
बात यह है कि इस प्रश्न में बात करने से पहले हमें यह पता होना चाहिए कि धर्म क्या

238
00:17:17,840 --> 00:17:22,000
है? जब हम यह पता कर लेंगे कि धर्म क्या है? तो हमारे

239
00:17:22,000 --> 00:17:26,160
लिए स्पष्ट हो जाएगा कौन सा धार्मिक है कौन सा नहीं है। धर्म क्या है?

240
00:17:26,160 --> 00:17:30,240
जीव की चाह का जो वास्तविक विषय है मैं बोल लूं धर्म यह

241
00:17:30,240 --> 00:17:34,240
है क्योंकि वो वो प्रश्न छेड़ दूंगा उसमें भी आपको घंटा भर लग

242
00:17:34,240 --> 00:17:38,320
जाएगा। जीव की चाह का जो वास्तविक विषय है

243
00:17:38,320 --> 00:17:42,880
सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त को परिभाषित

244
00:17:42,880 --> 00:17:46,880
कर सकने वाले शास्त्रों द्वारा सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को

245
00:17:46,880 --> 00:17:51,120
प्राप्त करने के निमित्त बताई गई विधि विधान मर्यादा का नाम धर्म है।

246
00:17:51,120 --> 00:17:55,200
तो यानी कि जो शास्त्र सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर की बात

247
00:17:55,200 --> 00:17:58,640
करेंगे और उसको प्राप्त कराने की बात करेंगे

248
00:17:58,640 --> 00:18:02,800
सर्वशक्तिमान ईश्वर की बात करेंगे वो हमारे लिए और उनके

249
00:18:02,800 --> 00:18:07,360
उसको प्राप्त करने के लिए प्रमाण और युक्ति के साथ तर्क के साथ जो परंपरा

250
00:18:07,360 --> 00:18:11,680
प्राप्त रूप से हमें प्राप्त हुआ होगा तो उन शास्त्रों

251
00:18:11,680 --> 00:18:15,760
को हम हम धार्मिक कहते हैं। हमारी परिभाषा है। अब आपकी परिभाषा यह है किसी

252
00:18:15,760 --> 00:18:20,240
ने संत ने लिखा हो तो आपके ही अनुसार कोई संत है नहीं। यहां तक कि

253
00:18:20,240 --> 00:18:24,240
व्यास इत्यादि भी संत नहीं थे। महर्षि वेदव्यास जी

254
00:18:24,240 --> 00:18:28,400
जिनके द्वारा आपको वेद मिल रहे हैं, जिनके द्वारा आपको पुराण मिल रहे हैं, वो भी संत

255
00:18:28,400 --> 00:18:32,480
नहीं थे क्योंकि उनको भी तत्व ज्ञान नहीं हुआ था। तो

256
00:18:32,480 --> 00:18:36,560
फिर ये धार्मिक ग्रंथ कहने का दिखावा क्यों नहीं? आप

257
00:18:36,560 --> 00:18:40,560
सीधे कहिए कि हम कबीर सागर को धार्मिक ग्रंथ मानते हैं और उसके अनुसार जो

258
00:18:40,560 --> 00:18:44,720
होता है उसको हम कह देते हैं ये धार्मिक ग्रंथ है। मगर वास्तविकता में

259
00:18:44,720 --> 00:18:49,040
वो तत्व ज्ञान को ना जानने वालों ने लिखे हुए ग्रंथ है। इसलिए हम नहीं मानते।

260
00:18:49,040 --> 00:18:53,040
वास्तव में ये है मगर हम कह देते हैं। आपको ये मानना पड़ेगा इस

261
00:18:53,040 --> 00:18:59,040
चीज को।

262
00:18:59,600 --> 00:19:03,600
देखिए आप बोले जा रहे हैं, बोले जा रहे हैं। हमने ऐसा

263
00:19:03,600 --> 00:19:07,680
कहां कहा कि व्यास जी संत नहीं थे या फिर गीता

264
00:19:07,680 --> 00:19:11,760
जी क्या कहता है? वेद आदि ये ग्रंथ नहीं है।

265
00:19:11,760 --> 00:19:15,760
क्योंकि ये संत के द्वारा लिखा हुआ नहीं। ऐसा हमने कहा नहीं। ये आप पहले पूर्व

266
00:19:15,760 --> 00:19:20,000
में क्या जाने रामपाल दास जी ने लिखा है व्यास इत्यादि को भी तत्व

267
00:19:20,000 --> 00:19:22,800
ज्ञान नहीं था।

268
00:19:22,800 --> 00:19:26,880
ये तो शास्त्रों में भी लिखा अन्य ग्रंथों में भी लिखा हुआ है। ठीक है। वो

269
00:19:26,880 --> 00:19:30,880
ठीक है। हम आपकी बात वो बाद में देखेंगे। वो लिखा है उसका मतलब क्या है? मगर फिलहाल

270
00:19:30,880 --> 00:19:36,640
वो संत नहीं थे। उनके द्वारा दिया गया जो ग्रंथ है वो धर्म ग्रंथ क्यों?

271
00:19:36,640 --> 00:19:41,040
उसको जब आपको संत रामपाल जी महाराज ने ऐसा कह दिया

272
00:19:41,040 --> 00:19:45,360
कि अभ्यास आदि को तत्व ज्ञान नहीं थे। यही बात

273
00:19:45,360 --> 00:19:49,600
अगर पुराणों में लिखा हुआ है अन्य शास्त्र ये दूसरी बात है

274
00:19:49,600 --> 00:19:53,760
आपका यह मानना है कि व्यास को तत्व ज्ञान नहीं था ये आपका

275
00:19:53,760 --> 00:19:58,480
मानना है वो कारण उसका कुछ भी हो शास्त्र हो या कुछ भी हो

276
00:19:58,480 --> 00:20:02,800
सुन लीजिए सुन लीजिए सुन लीजिए देखिए व्यास जी व्यास

277
00:20:02,800 --> 00:20:07,040
जी को तत्व ज्ञान नहीं था कारण इसका कुछ भी हो

278
00:20:07,040 --> 00:20:11,280
मगर आप तो ये स्वीकार अंतत गतवा कर रहे हैं कि व्यास जी को तत्व

279
00:20:11,280 --> 00:20:14,880
ज्ञान नहीं था तो जब आप ये स्वीकार कर रहे तो उनके द्वारा प्राप्त

280
00:20:14,880 --> 00:20:18,880
होने वाले जो धर्म ग्रंथ है लिखे गए जो धर्म ग्रंथ है मोहम्मद को भी मोहम्मद जी

281
00:20:18,880 --> 00:20:23,120
को भी तत्व ज्ञान नहीं था आपके अनुसार तो फिर उनके द्वारा मिलने

282
00:20:23,120 --> 00:20:27,280
वाला ईसा को ईसा को भी तत्व ज्ञान नहीं था आपके अनुसार

283
00:20:27,280 --> 00:20:31,520
तो फिर उनके द्वारा ये सब मिलने वाले जो धर्म ग्रंथ है इनको आप धर्म

284
00:20:31,520 --> 00:20:34,640
ग्रंथ क्यों कह रहे हो

285
00:20:34,640 --> 00:20:38,720
आप देखिए या तो आप अपनी परिभाषा को चेंज करिए वो सही परिभाषा बताइए जिससे

286
00:20:38,720 --> 00:20:42,720
कि हम इन सबको धर्म ग्रंथ मान सके आपने जो परिभाषा बताई है उसके अनुसार

287
00:20:42,720 --> 00:20:46,800
ये धर्म धर्म ग्रंथ सिद्ध ही नहीं हो रहे तो फिर आप क्या ढोंग करते

288
00:20:46,800 --> 00:20:50,960
हो बोलने का कि ये धर्म धर्म ग्रंथ है सभी धर्मों के ग्रंथों से हमने प्रमाणित कर दिया

289
00:20:50,960 --> 00:20:54,960
वो परिभाषा सही नहीं बताई आपने इसका मतलब आपने कहा कि

290
00:20:54,960 --> 00:20:59,040
जो संत के द्वारा दिया गया होगा ऐसे किसी के भी द्वारा लिख देने पर नहीं माना जाएगा

291
00:20:59,040 --> 00:21:03,200
किसी संत प्रमाणिक भाई आपके आपके अनुसार ना व्यास

292
00:21:03,200 --> 00:21:07,360
प्रमाणिक संत है आपके अनुसार ना मोहम्मद प्रामाणिक संत है आपके अनुसार

293
00:21:07,360 --> 00:21:12,240
ना ईसा ईशु ऐसा प्रमाणिक संत है

294
00:21:12,240 --> 00:21:16,560
जवाब बोल रहे हैं ये मैंने कुछ कहा आपको? अरे भाई आप

295
00:21:16,560 --> 00:21:20,560
अच्छा तो मैंने अभी आपसे पूछा अभी चलिए ठीक है। आपने कहा नहीं कि मोहम्मद

296
00:21:20,560 --> 00:21:24,880
संत नहीं थे। कहा नहीं व्यास

297
00:21:24,880 --> 00:21:29,120
जी का नाम ले रहे हैं और सबका नाम ले व्यास जी के लिए भी लिखा है ब्रह्मा

298
00:21:29,120 --> 00:21:29,920
जी के लिए

299
00:21:29,920 --> 00:21:34,080
भी लिखा है कि इनको तत्व ज्ञान नहीं था। सब के

300
00:21:34,080 --> 00:21:38,880
लिए लिखा है इनको तत्व ज्ञान नहीं था। यह कोई संत सिद्ध नहीं हुआ।

301
00:21:38,880 --> 00:21:43,280
आपकी परिभाषा मैं मैं आपकी बात पर बात कर रहा हूं।

302
00:21:43,280 --> 00:21:47,360
अच्छा आपको तत्व ज्ञान हुआ फिर विषयंतर

303
00:21:47,360 --> 00:21:51,440
मैं अभी एक चीज क्लियर कर रहा हूं। देखिए मैं ये क्यों पूछ रहा हूं जिससे जब हम

304
00:21:51,440 --> 00:21:55,440
आगे बात करें तो हमें पता हो कि किस शास्त्र से प्रमाण लेना

305
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है। समझ रहे हो? इसलिए यह जानना आवश्यक

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है कि आप जिनको जिन जिन व्यक्तियों को मानते

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ही नहीं है कि वो तत्व ज्ञान वाले थे वो जो है वो संत

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थे और आपकी परिभाषा है कि जो संत के द्वारा दिए गए शास्त्र

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होंगे वो हम मानेंगे कि धार्मिक है ये आपने कहा तो इसलिए अब

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हम चेक करेंगे कि भाई ये धार्मिक तो सिद्धि नहीं हो रहे क्योंकि आप ही कह रहे हो

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कि मोहम्मद वशिष्ठ और जो ईसा है ईशु है ये सब जो है

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प्रामाणिक संत नहीं थे हमारे लिए भी नहीं हमारे लिए

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व्यास प्रमाणिक संत है। आपके लिए व्यास भी नहीं है। और

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अगर अगर केवल भगवान की बात लिख देने से ही वो

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संत होने की आवश्यकता नहीं है। प्रामाणिक होने की आवश्यकता नहीं है। केवल भगवान

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की बात होनी चाहिए। तो तो फिर ये भी मान लो इसको भी ग्रंथ

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कह दो धार्मिक ग्रंथ।
