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00:00:02:21 तो सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे और मुख्य विषय पर आने से पहले मैं आप लोगों को एक बार याद दिला दूं कि रामपालियों का बहिष्कार करें। आप जहां पर भी रह रहे हैं अपने आसपास वाले रामपालियों को ढूंढे और समाज को उनके द्वारा रामपाल से जुड़े होने और रामपाल द्वारा किए जाने वाले कुकृत्यों से अवगत कराएं और किसी भी प्रकार का व्यवहार भले ही वह फिर व्यवसायिक हो अथवा घरेलू किसी भी प्रकार का व्यवहार ना रखने की अपील समाज से करें। इस संबंध में हमारे जो प्रचार सामग्री है, पोस्टर्स इत्यादि वह हमने ड्राइव पर अवेलेबल कराया है। इसकी भी डिस्क्रिप्शन में डाल देंगे। तो जितना हो सकता है रामपालियों का बहिष्कार करें। अपने आसपास रहने वाले रामपाल से मत लड़िए। वो तो केस चल रहा है, मुकदमा चल रहा है, जब होगा तब होगा मगर आज से अभी से रामपालियों के बहिष्कार का प्रण लें।
00:01:15:20 हमारे साथ एक रामपाल को मानने वाले ही जुड़े हुए हैं। जी जय श्री राम। ये आपने क्या नाम डाला है अपना? क्यों फोन कर रहा है? ये आपने नाम डाला है क्या अपना? जी। आवाज नहीं आ रही आपकी? मेरी आ रही है? एक मिनट। एक मिनट इसमें आ रही होगी। जी नहीं आ रहा है। जी अब बोलिए नहीं आपका वीडियो नहीं वो जो वीडियो नहीं आ रहा है आपने वीडियो ऑफ कर रखा होगा शायद मेरा वीडियो दिखाई दे रहा है लोगों को मुझे आप देख पा रहे हैं जी आपके पीछे खाली कमरा दिख रहा है जिसमें सीलन दिखाई दे रही है अलमारी में मैं एक दूसरे घर में आया हूं नेटवर्क नहीं है मेरा मेरे घर में तो मैं आपको देख नहीं पा रहा हूं। अब भाई मैं क्या बताऊं कैसे देख कैसे दिखाऊं अपने आपको बताइए एक बार रिमूव हो के वापस आ जाइए एक बार चले जाइए फिर आ जाइए दोबारा ओके सर
00:02:34:00 जय श्री राम सभी को मैं रिमूव कर देता हूं आपको। ओके। [गला साफ़ करने की आवाज़] सभी सतलोक आश्रम गुंडे के हैं। रामपाल का कोई भी आश्रम नाम दान
00:03:08:28 और पुस्तक नहीं है राम रतन भंडारी अच्छा जी तो ये बहिष्कार अभियान धीरे-धीरे जोर पकड़ रहा है। आज हरियाणा का ही कोई गांव है मंडी वहां पर इसका पुतला जलाया गया है। पुतला नहीं जलाया गया मतलब बहिष्कार घोषित किया गया है। कोई गौशाला है वहां से लोग खड़े होकर के कर रहे हैं घोषणा और इसी तरीके से पूरा आप जागरूक हो जाइए। अपने घर अपने बगल में रहने वाले रामपाल को यह बता दीजिए कि रामपाल का समर्थन करने वाला हमारे आसपास के एरिया में चैन से नहीं सोएगा। बस रामपाल अपने आप खत्म हो जाएगा। हां जी जय श्री राम। नमस्कार जी। नहीं आपको वीडियो नहीं आ रहा है। तो बताइए बिना वीडियो के चर्चा कर लीजिए। क्या दिक्कत है? आपको नहीं दिख रहा है। सबको तो दिख रहा है।
00:04:17:15 एक बार फिर ट्राई करते हैं। और इनका मूल सिद्धांत कुछ नहीं है। इनका मूल सिद्धांत कुछ नहीं है।
00:04:55:01 हां जी। हां जी। पहाड़ी जी। ये कौन है भाई? ललित राजक। क्यों दे रहे हो नंबर अपना? बेचारा राघव दास भी बौखलाया हुआ है। उसको जो सुना दिया अच्छे से वो भी तरह-तरह की जुगाड़ लगा रहा है। किस तरीके से अपनी जो कायरता है या नपुंसकता है उस पर लीपापोती कर लूं।
00:05:27:25 अकेले ही अकेले वीडियो बना लिया। शिवश नारायण द्विवेदी को मैंने कॉल किया। उसने फोन नहीं उठाया और उसके बुबक लोग पूछ भी नहीं रहे हैं कि शिवश नारायण द्विवेदी ने तो वीडियो डाला है और उसमें तुम्हारी और उसकी चर्चा हुई है। तुम क्यों नहीं जा रहे हो बीच मैदान में? ये सब कोई नहीं पूछ रहा। हां जी। अब दिख रहा है? नहीं नहीं दिख रहा है। छोड़िए। छोड़िए। हम बताइए कहां से शुरू करना चाहते हैं आप? मेरा बोलना है कि मैं एक महीने से जुड़ा हुआ हूं। किससे? तो मैं मेरा हिंदी थोड़ा कमजोर है। मैं ओसा से बोल रहा हूं। तो आप ये बताइए कि आपने ब्लूटूथ लगाया है कि क्या? कैसे बात कर रहे हैं आप? नहीं ब्लूटूथ नहीं लगाया है। बड़ा डिस्टर्बिंग है आपका। बड़ा डिस्टर्बिंग है आपका हम
00:06:32:16 बड़ा डिस्टर्बिंग है आपका जो वो है ना वॉइस वगैरह वो डिस्टर्बिंग है बहुत अच्छा एक रूम में है तो इसीलिए हो रहा हूं कोई बात नहीं बताइए आपको कहां से शुरू करना है आपको एक महीने हुआ है रामपाल से जुड़े हुए हैं नहीं रामपाल तो डायरेक्ट में कभी नहीं आया हूं मेरे आसपास एक दो राम रामपाल के लोगों रामपाल के तंत्र से जुड़े हुए एक महीना हुआ है। हां [गला साफ़ करने की आवाज़] तो क्यों जुड़े हैं आप? नहीं मुझे हमारे यहां एक जो मुझे बता रहे हैं ऐसे इसीलिए मैं कंफ्यूज हो गया और जुड़ा हुआ हूं। मैं मुझे बोला गया है कि जो देखिए मैं समझ गया आपको क्या बोला है। अब सुनिए। देखिए किसी से भी हम आध्यात्म के लिए जब जुड़ते हैं तो हमारे हम इसलिए जुड़ते हैं क्योंकि हम संतुष्ट नहीं है अपने मानव जीवन से। हम अधूरे हैं। समझ रहे हैं? और हमको चाहिए पूर्णता। पूर्णता
00:07:48:09 इसी पूर्णता की खोज हमें ले जाती है ईश्वर तक। ठीक है? यह सब बातें आपको रामपाल नहीं बताएगा। मैं बता रहा हूं। हमारे अंदर एक प्यास है। हमारे अंदर एक प्यास है। उस प्यास के कारण ही हमें ईश्वर चाहिए। और उस ईश्वर के कारण ही ईश्वर को ठीक ठीक समझा सकने वाला कोई मार्गदर्शक चाहिए, आचार्य चाहिए, गुरु चाहिए। और फिर उसी ईश्वर तक पहुंचा सकने वाला पहुंचाने के लिए सही सही मार्ग बताने वाला हमें धर्म चाहिए। ठीक है? तो तीन चीजें हो गई। धर्म, गुरु और ईश्वर। ये तीन चीजें हो गई। क्योंकि हमको क्या चाहिए? इन तीनों चीजों के मिश्रण से हमें क्या मिलता है? वह खुशी जो हमें भौतिक संसार नहीं दे पा रहा है, वह रुक रहा है। जैसे कि मैं जवान हूं तो मैं बहुत सारे भोग भोग सकता हूं पर मैं बूढ़ा हो जाऊंगा कुछ दिन के बाद। दांत टूट जाएंगे तो टेस्ट भी नहीं ले पाऊंगा ठीक से। हो सकता है विभिन्न बीमारियां मुझे ग्रसित कर ले। है ना? इस कारण से हम भगवान को ढूंढते हैं।
00:09:03:27 भगवान के कारण हम गुरु को ढूंढते हैं। और गुरु से हमको भगवान की सही व्याख्या, आपके जीवन की सही व्याख्या और भगवान को प्राप्त करने की विधि सही व्याख्या में प्राप्त होती है। इसमें से मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि ना तो भगवान के स्वरूप को ठीक से समझाया गया आपको ना धर्म के स्वरूप को समझाया गया आपको और जब इन दोनों को स्वरूप को नहीं समझाया गया तो ऐसे ना समझाने ना समझा सकने वाले व्यक्ति के द्वारा आपको अपने मनगढ़ंत तरीके से एक बात बता दी गई कि भैया यह जपो या यह करो इसको गाली दो इसको छोड़ दो और जो है आपका कल्याण हो जाएगा आपको मोक्ष मिल जाएगा अब आप बताइए ठीक है। मेरे पास एक मुझे एक बुक दिया गया है। उनहीं लोगों के द्वारा एक ज्ञान गंगा बोल के एक बुक है जो रामपाल जी महाराज का है। तो मैं बाहर चला आया हूं इसीलिए वो बुक नहीं आया। तो उन्होंने कहा कि तुम कंफर्म हो क्या एक चीज जानने के लिए? मुझे वो बोला मैं मेरे पास जवाब नहीं था। उसके लिए मैं उनके पास गया और
00:10:19:06 यहां पर बहुत नहीं दो जन है जो कि रामपाल को बहुत मानते हैं और मुझे मनाने के लिए आए और मैं भी उसके बाद में सहमत हुआ मेरा मेरा ज्ञान कितने तक ठीक है मतलब मुझे मालूम नहीं लेकिन मैं आपको बोलना चाहता हूं कि भागवत गीता में एक नौवा अध्याय का श्लोक नंबर 25 है जो देवता को पूजने वाला देवता प्राप्त होते पितों को पूजा वाला पितों को भूतों को पूजने वाला भूतों को मिलते और मेरे पूजने वाला मुझे प्राप्त होता तो इसका मतलब है कि पितरों को ना पूछे इसका मतलब यह है कि पितरों की यदि हम ईश्वर से स्वतंत्र सत्ता मान करके उन्हें पूज रहे हैं। हम अपने आप में पितरों को ही यह समझ रहे हैं कि इनका अपने आप ईश्वर से स्वतंत्र होकर के इनका अस्तित्व है या देवताओं का ईश्वर से स्वतंत्र होकर के कोई अस्तित्व है तब उनकी जो पूजा है उसका निषेध किया गया। निषेध क्या? उनका कहना चाहिए कि निम्न बताया गया है। निषेध नहीं किया गया है। मगर उसको निकृष्ट बताया गया है। जैसे कि जैसे कि मैं बता रहा हूं आपको।
00:11:35:01 जैसे कि अह कोई [गला साफ़ करने की आवाज़] कोई ऑफिस का कोई बॉस है। ठीक है? उस बॉस ने आप उसके यहां पर काम कर रहे हो। और उस बॉस ने आपको जो है एक आपका टीम लीडर दे दिया। यह आपकी टीम का लीडर है। और इसी तरीके से और भी कुछ हेड ऑफ आपके डिपार्टमेंट के कुछ एचओडी तैयार कर दिए गए। यह एचओडी हैं। आपको इनकी बात माननी है। ठीक है? मगर आप थोड़े दिन बाद यह कहने लगो यह अपना मन बना लो कि यही सर्वे सर्वा हैं और यह एचओडी जो है यह अपने आप में ही सब कुछ है और वो जो बॉस है उनको भूल जाओ उनको अलग हटा दो तो बॉस के बॉस को अलग हटा के आपका जो टीम लीडर है क्या वो टीम लीडर रह जाएगा बॉस को अलग हटा के क्या टीम लीडर टीम लीडर रह जाएगा या एचओ डी एचओ डी रह जाएगा उसी भाव आपको यहां पर दर्शाया गया है कि पितृ देवता और क्या भूत भूत इत्यादि मतलब जैसे हम जैसे हम माता-पिता को पूजते हैं, गुरु को पूजते हैं इस रूप में भी तो हम यह हटा दें कि भैया ईश्वर
00:12:50:02 से ईश्वर का इन पर नियंत्रण नहीं है। ठीक है? हम यह बात हटा दें कि ईश्वर का इन पर नियंत्रण है और यह कहने लग जाए यह अपने आप में स्वतंत्र सत्ता हैं। मतलब यह स्वयंभू हैं। स्वयंभू इनका कोई और करता नहीं है। इनसे ऊपर और कोई नहीं है। इस रूप में यदि हम पितृ को भूतों को या फिर देवताओं को एक्सेप्ट करते हैं तो वो उस रूप में कहा गया कि वो उन्हीं को प्राप्त होगा। यानी कि उसको निकृष्ट बताया गया है। और सबसे बड़ी बात तो यह है कि आपने यह कह मान लिया ना कि वो उसको ही प्राप्त होगा। गीता बोलने वाले को गीता बोलने वाले को प्राप्त होगा। यानी कि जब पितृ भूत और पितों भूतों और देवताओं से अलग किया जा रहा है तो उस समय किसके पास जाने की जाने को श्रेष्ठ कहा जा रहा है कि जो देवताओं को भजेगा वह देवताओं को प्राप्त होगा। किस रूप में? स्वतंत्र सत्ता के रूप में जो पितरों को पूजेगा वो पितरों कुछ लोग होते नहीं जादू टोना यह मेरा भगवान है या यह शैतान की पूजा करने लगते हैं भूत प्रेत इत्यादि की पूजा करने लगते हैं तंत्र बाधा करने लगते हैं ऐसे लोग होते हैं कि नहीं होते हैं या कुछ लोग यही कहने लगते हैं कि नहीं नहीं मेरा कोई भगवान नहीं
00:14:05:08 है मेरे तो फलाने वो हैं वही भगवान है कुछ लोग ऐसे कहने लगते हैं हां तो जो इस तरह के लोग हैं उनको कहा गया है कि अगर तुम ऐसा करोगे तो क्योंकि क्योंकि वो लोग बाधित हैं। उनकी स्वतंत्र सत्ता नहीं है। मेरे से अलग कोई उनकी पूजा विधि मैंने इसलिए बताई है कि उस पूजा विधि के द्वारा तुम अगर उनकी पूजा विधि जो मैंने मेरे द्वारा उनकी पूजा विधि बताई गई है। उन पूजा विधियों के द्वारा निष्काम कर्म के रूप में कर्तव्य कर्म के रूप में समझते हुए यदि तुम उनके प्रति आचरण करोगे तो तुम मेरी तरफ ही आगे बढ़ोगे। मगर तुम उसी में ही लिप्त हो जाओ। तुम उसी को ही मान लो। यही है मेरा सब कुछ। तब वहां पर उन्होंने कहा कि अगर ऐसा करोगे तो तुम उनको ही प्राप्त होगे। मुझे प्राप्त नहीं होगे। तो यहां से दो चीजें निकल के आई। एक कि जो पित हैं या भूत हैं या देवता हैं इनकी पूजा का निषेध नहीं किया गया है। इनकी पूजा करने को कहा गया है। परंतु यह सोचते हुए कि यह भी भगवान द्वारा नियंत्रित है। इनका भी आधार भगवान ही है। अगर आप यह सोचोगे कि ये स्वतंत्र रूप से इनका कुछ अस्तित्व स्वतंत्र सत्ता है तो फिर इनकी पूजा निकृष्ट है। फिर वो ग्राह नहीं है। मोक्षदायक नहीं है। एक मिनट एक मिनट। उसके बाद
00:15:20:09 आगे इसी श्लोक से यह सिद्ध हो जाता है कि जब हम इन चीजों को नगन निम्न कह रहे हैं। इनकी पूजा को अलग हटा रहे हैं। कब? जब उनकी स्वतंत्र सत्ता मानी गई तब वहां पर श्रेष्ठ किसे बताया जा रहा है? जो गीता बोल रहा है। यानी हमारे अनुसार भगवान श्री कृष्ण। ठीक है? समझ रहे हैं? ठीक है। तो पितरों को पूजा करना चाहिए। वो बोल रहे हैं कि पितरों को पूजा नहीं करना है क्योंकि पितरों की पूजा [गला साफ़ करने की आवाज़] पितरों की पूजा ईश्वर के रूप में नहीं करनी है कि यह अपने आप में ईश्वर है। पितरों की पूजा इसलिए करनी है कि ईश्वर प्रदत्त शास्त्रों में वो कर्म आपके बताए गए हैं। पितरों की पूजा इसलिए नहीं करनी है कि यह ईश्वर है। पितरों की पूजा इसलिए करनी है क्योंकि वह कर्तव्य कर्म के रूप में शास्त्रों द्वारा बताए गए हैं जो ईश्वर ने आपको दिए हैं। समझ गए और और एक बात जैसे कि इसको छोड़ दीजिए। जैसे कि इसको छोड़ दीजिए। हमारे घर में कोई अतिथि आता है तो उसका सत्कार करना हमें बताया गया है कि नहीं? अतिथि की पूजा भी करना बताया गया है कि नहीं बताया गया है?
00:16:36:24 बताया गया है जिस दिन जन्म दिवस होता है बालकों का बच्चों का उस दिन जन्मदिवस के दिन उनकी भी पूजा होती है। ठीक जिस दिन कन्यादान होता है, विवाह होता है उस दिन जो वर होता है उसकी पूजा होती है। वधू की भी समय-समय पर पूजा होती है। दोनों की पूजा होती है। अलग-अलग अनुष्ठानों में होती है ना? होती है ना? तो ये ये हम क्यों कर रहे हैं पूजा? इनकी पूजा हम क्यों कर रहे हैं? क्योंकि यह हमें शास्त्रों ने बताया गया है। बताया है। शास्त्रों द्वारा मांगलिक कार्य बताए गए हैं कि इस इस तरीके से अतिथि का सत्कार करो। इस इस तरीके से किसी का जन्म दिवस हो तो उसको इस इस तरीके से उसका पूजन अर्चन करो। इस इस तरीके से वधू का पूजन अर्चन करो। वर का पूजन अर्चन करो। यह सब शास्त्रों ने बताया गया। इसलिए हम करते हैं। यह हमारी शास्त्रों द्वारा बताई गई संस्कृति है। मगर इसका मतलब यह नहीं कि जिस समय जिसकी बर्थडे होती है ये सोचते हैं ये भगवान है। ऐसा है क्या? यही भगवान है। कृष्ण को मैं नहीं जानता या उसको मैं नहीं जानता। राम को मैं नहीं जानता। ईश्वर को और किसी ईश्वर को मैं नहीं जानता। इसी को जानता हूं। इसके लिए मना किया गया है। इस रूप में अगर आप इनको भगवान
00:17:52:07 समझ के पूजा कर रहे हो। स्वतंत्र भगवान स्वतंत्र सत्ता के रूप में इनको पूजा कर रहे हो तब वहां पर भगवान ने उसका उसको निकृष्ट कहा है। समझ गए? और एक पूछना चाहता हूं कि वो बोले यदि गीता में या शास्त्रों में कुछ लिखा नहीं है जात पात के विषय में तो उन्हें क्या है कि महाभारत में कर्म को सूत पुत्र बोल के उन्हें द्रोणाचार्य क्यों शिक्षा नहीं दी?
00:18:32:12 पहले देखिए ऐसा है कि मान लीजिए शास्त्रों में जातपात के लिए तो एक बहुत लंबा चैप्टर हो जाएगा। पहली बात तो यह है कि शास्त्रों में वर्ण आश्रम धर्म, कुल धर्म इत्यादि के बारे में लिखा हुआ है। [नाक से की जाने वाली आवाज़] दूसरी बात यह है कि अगर हम डिवाइड जैसे मान लीजिए कि शास्त्रों ने डिवाइड नहीं किया तो हम डिवाइड करते हैं कि नहीं करते हैं? अपनी मनुष्य डिवाइड करता है कि नहीं करता है। अभी हिंदू धर्म को भूल जाइए। कोई भी सिस्टम चलाने के लिए, कोई भी ऑर्गेनाइजेशन को चलाने के लिए, किसी भी तंत्र को मैनेज करने के लिए, समुदाय को मैनेज करने के लिए एक कुछ वर्गीकरण होता है कि नहीं होता है? ठीक है। वो ठीक है। मैं तो वो मान रहा हूं कि वो ब्राह्मण
00:19:24:09 वर्गीकरण वर्गीकरण इसलिए होता है वर्गीकरण इसलिए होता है जिससे कि चीजें व्यवस्थित रहे। जैसे कि कोर्ट रूम न्यायालय ठीक है उसमें वर्गीकरण कर दिया गया कि एक व्यक्ति जज है एक व्यक्ति प्यून है एक व्यक्ति जो है पेशकार है एक व्यक्ति स्टेनोग्राफर है हो गया वर्गीकरण कर दिया अब क्या है कि हम यह कहें कि प्यून को जो है जज की कुर्सी पे नहीं बैठने दिया जाता हालांकि उसमें कोई आपत्ति नहीं है। मनुष्य वो भी है। मनुष्य वो भी है। बिगड़ क्या जाएगा व्यवस्था। कोई व्यक्ति प्यून को जज ना समझ ले या प्यून के अंदर अपने जज के ऊपर ओवरकम करने का भार ना आ जाए। इसलिए कैटेगराइज किया गया कि जज की कुर्सी ऐसी होगी जो सबसे ऊंची होगी। जिससे कि व्यवस्था बनी रहे और जज का जो वाक्य हो वो वहां पे अंतिम वाक्य माना जाए। क्योंकि वहां पर इन चारों लोगों के होने का जो प्रयोजन है वह इस बात में नहीं है कि कौन कहां पर बैठेगा, किसको ज्यादा आराम
00:20:39:13 मिलेगा, किसको कम मिलेगा। वहां पर इन चारों लोगों के होने का जो मुख्य प्रयोजन है वह है जो व्यक्ति वहां पर आया है अपना निर्णय कराने के लिए उसको कितनी सुगमता से निर्णय प्राप्त हो। अगर हम इसमें लग जाएंगे कि पून ज्यादा जैसे मान लीजिए कि बाहर से निर्णय होकर नहीं आया है तो रोज जब अंदर आए चारों लोग उनमें हो पहले मल युद्ध मल युद्ध के बाद जो जीता वो जज बना या और किसी तरह का कंपटीशन उन चारों लोगों में डेली हो कि आज मेरे अंदर योग्यता ज्यादा है। आज मेरे अंदर योग्यता ज्यादा है। और उन चारों में जब वो कंपटीशन हो उसके बाद ये तय हो कि जज कौन बना? स्टेनोग्राफर कौन बना? और पेशकार कौन बना और प्यून कौन बना? पहली बात तो यह है इससे कितनी अव्यवस्था आ जाएगी? इससे कितनी अव्यवस्था आ जाएगी? वैसे ही इतने करोड़ों केस पेंडिंग पेंडिंग पड़े हैं और अगर हम यह लागू कर दें कि रोज वहां पर भिड़न प्रतियोगिता होगी तब जो है कोई कुर्सी पर बैठेगा जज की। तो ऐसा पॉसिबल नहीं है ना। इसलिए जज कोर्ट रूम में घुसने से पहले ही यह तय किया जाता है कि कौन जज है। कौन
00:21:54:21 वह जिससे कि वहां जाने के बाद व्यक्ति इस बात को लेकर ना भिड़े आपस में कि मैं कुर्सी पर बैठूंगा मैं वहां खड़ा हऊंगा इस बात को लेकर के आपस में ना भिड़े बल्कि इस बात पर ध्यान दें कि जनता को जल्दी से जल्दी जो पीड़ित व्यक्ति है उसको न्याय मिले इस पर ध्यान दें। इसी प्रकार से यह सब चीजें जो हैं किसका क्या अधिकार है यह जन्म से पहले ईश्वर के द्वारा सुनिश्चित की जाती हैं। जिससे कि वहां जाने के बाद इस चीज में ध्यान कम जाए कि मुझे ब्राह्मणों वाली जगह मिल जाए। ब्राह्मण कहे मुझे वैश्य वाला एसी मिल जाए और वैश्य कहे कि मुझे जो है शूद्र वाला बिल्कुल फ्रीलांस होकर के जीने का जीवन मिल जाए। तो यह ना सोच करके वहां जाने के बाद यह सभी जीव आत्माएं यह ध्यान दें कि अपने स्वधर्म का पालन करते हुए किस तरीके से मुझे मनुष्य जीवन की सद्गति प्राप्त हो। ठीक है? तो अगर अगर वर्ण व्यवस्था है तो उसके अनुसार जैसे कि कोर्ट में एक व्यवस्था है कि जज की कुर्सी प्यून को नहीं मिलेगी। मिलेगी क्या? मिलेगी क्या? एक मिनट। जज की कुर्सी प्यून को मिलेगी क्या? नहीं मिलेगी। अच्छा जज भले ही 20 साल का हो, प्यून भले ही 60
00:23:09:25 साल का हो तो मिलेगी नहीं मिलेगी। इसी प्रकार से इस मर्यादा का इस मर्यादा की रक्षा करने के लिए ही जो जिसके अधिकार अथवा अनाधिकार हैं उनका ध्यान रखते हुए इस प्रकार का व्यवहार होता है कि जिसके अधिकार अब जैसे कोई अगर यह नहीं जानता है कि भाई वो कर्ण जो है वह सूत पुत्र है या कुंती पुत्र है कोई नहीं जानता है जिस प्रकार से कोई यह नहीं जानता कि जो प्यून है वह जज का ही जज से भी बड़े ओदे पे है और यहां पर जो है वह छुप करके खड़ा हुआ है प्यून बन के ठीक तो उसने आकर के पून से कहा कि तुम जज की कुर्सी पर नहीं बैठोगे भाई तो गलत किया क्या? नहीं ठीक है मैं आपका बात समझ गया और मैं भी समझ रहा हूं लेकिन मैं कहने का मतलब ये शिक्षा का अधिकार सबको मिलना चाहिए कि नहीं ये बता रहा हूं ये बोल रहा हूं ठीक है हो गया ये बताइए शिक्षा के अधिकार से किसको वंचित किया है शिक्षा का अधिकार और शिक्षा का विशेष प्रकार से उपयोग इसमें अंतर है। शिक्षा के अधिकार में और कुछ विशेष प्रकार की शिक्षा और विशेष प्रकार का उपयोग उसमें अंतर
00:24:25:03 है। शिक्षा से किसको वंचित किया गया है? अगर शिक्षा से वंचित किया जाता तो शिक्षा से वंचित किया जाता तो विदुर जी कैसे बन जाते? विदुर जी को कैसे ज्ञान हो जाता? शिक्षा से वंचित नहीं किया है। शिक्षा के उपयोग और विनियोग की विधि अलग-अलग है। जैसे कि जिसका वेद में अधिकार नहीं है तो वो वेदों का जो भाष्य पुराण के रूप में उसका श्रवण करेगा या फिर जो आचार्य गण होंगे, गुरुगण होंगे उनका वो सुनेगा प्रवचन। किसका मना है? क्या शंकराचार्य के यहां जब प्रवचन होता है ब्रह्म और धर्म की व्याख्या होती है तो वहां बोर्ड लगा होता है क्या? शूद्र नहीं आके सुनेगा लगा है क्या बोर्ड कहीं नहीं कहीं लगा है हां इनके यहां जरूर बोर्ड लगा है रामपालियों के यहां मैंने सुना है कि वहां पर जो है चश्मे वगैरह चेक होते हैं अंदर जाने से पहले आप चश्मा भी पहन के जाओगे तो वो भी चेक हो जाएगा वो अभी जो एसजे करके जो गया था रिपोर्टर उसका उसने बताया है यह सब कि भाई अंदर जाकर के आपको आपका कैमरा नहीं चालू करने दिया जाएगा यह सब नहीं होता वहां शंकराचार्य के सबके कैमरे चलते हैं कोई चेकिंग नहीं होती। चेकिंग करने के लिए उतनी व्यवस्था ही कहां है? वहां तो ज्ञान है। शुद्ध
00:25:40:14 ज्ञान। यह सब ढकोसलेबाजी नहीं है ना वहां कि दो व्यक्ति वहां गार्ड खड़े करें AK-47 लेकर के और एक एक व्यक्ति जो अंदर आ रहा है आश्रम के उसकी चेकिंग होनी चाहिए। उसने कहीं वो वाला चश्मा तो नहीं पहना हुआ जासूसी वाला। यह सब कुछ नहीं है। शंकराचार्य के हैं। ठीक है। जी। अब बताइए आगे। और उसी के बारे में बता रहा हूं जो परशुराम जी है उन्हें मना कर उनके पास जाने से पहले कल उनको ब्राह्मण के रूप में शिक्षा देने के लिए ब्राह्मण रूप में शिक्षा पाने के लिए गए लेकिन उन तो वो तो सूत पुत्र है लेकिन वहां पर जो सूत पुत्र और ब्राह्मण इसके बारे में क्या बोलना चाहेंगे आपने ने क्या कहा है समझ में नहीं आया। नहीं मैं बोल रहा हूं कि जो कण कर कण गए परशुराम के पास शिक्षा लेने के लिए। अच्छा वो ब्राह्मण के रूप में गए। कौन? कर्म। हां।
00:26:55:25 ठीक है तो वो तो सूत पुत्र है तो सूत पुत्र के नाते वो नहीं गए वो ब्राह्मण के रूप में गए तो इसमें सवाल क्या है इसके सवाल इसका सवाल इसका जवाब सवाल है कि मेरा मतलब है कि वो जो गए तो सूत पुत्र को वो क्यों नहीं पढ़ाए और ब्राह्मण पुत्र को क्यों पढ़ाए बता तो दिया मैंने बता तो दिया मैंने हैं वो क्या पढ़ा रहे थे? क्या पढ़ा रहे थे? वो धनुष विद्या वगैरह शिक्षा देने इसको ऐसे कर लेते हैं कि यदि कोई नर्सरी ना पढ़ा हुआ बच्चा या फिर फिफ्थ क्लास ना पढ़ा हुआ बच्चा सीधे पीएचडी में पढ़ने के लिए जाएगा तो उसको पढ़ने दिया जाएगा या बाहर निकाल दिया जाएगा?
00:27:56:24 अरे भाई पीएचडी में एडमिशन लेने के लिए उससे पहले मास्टर की डिग्री चाहिए ना ग्रेजुएशन की डिग्री चाहिए ना तो इस रूप में जो जो ये बता रहा है कि मैं शूद्र हूं एक मिनट एक मिनट एक मिनट जो ये बता रहा है पहाड़ी जी आप आ जाइए मुझे लग रहा है कि भैया जो है बहुत कुछ लेके नहीं आए खास। ठीक है? कोई है शास्त्रवाद जी या फिर वो आप लोग जुड़ जाइए।
00:28:35:15 अब देखिए जी। तो कहने का तात्पर्य यह है कि यह जो व्यवस्था है इस व्यवस्था में बहुत सी चीजें घटक होते हैं जिनके आधार पर अधिकार और अनाधिकार तय होता है। जैसे कि हमारी आज की व्यवस्था में भी बोर्ड का एग्जाम वही देगा। दसवीं का एग्जाम वही बैठेगा जिसके पास नाइंथ की मार्कशीट होगी। इसी प्रकार से जब कोई यह कह रहा है कि मैं शूद्र हूं तो इसका मतलब है कि उसने उस अमुक विद्या को ग्रहण नहीं की है। ऐसी योग्यता [नाक से की जाने वाली आवाज़] प्राप्त नहीं की गई है। की है जिसके कारण उसको उसमें अधिकार दिया जाए। उस विद्या में जिसको वो सीखने जा रहा है। और जो आप कह रहे हैं शिक्षा यह एक अलग चीज है और वो एक विशेष किसी विद्या की बात है जिसके लिए कुछ ना कुछ ऐसी योग्यता आवश्यक है जिसके कारण उसका वहां निषेध किया गया। समझ में आया?
00:29:33:08 अब अब कुल मिलाकर के बात यह आती है कि आप जब रामपाल से जुड़े हो मुझे नहीं लगता आज के बाद जुड़ोगे आप जब रामपाल से जुड़े हो ठीक है ठीक है आप उससे ये पूछना कि धर्म किसे कहते हैं ईश्वर है ये कैसे सिद्ध होगा सीधी बात यहां से शुरू करो ना परमात्मा कौन कौन नहीं है और एक मिनट रामपाल का सूक्ष्म ज्ञान आज मैंने देखा दिन में एक व्यक्ति बता रहा था कि रामपाल का सूक्ष्म ज्ञान है छमम छक्षम ज्ञान सूक्ष्म ज्ञान नहीं वो छमम छक्षम ज्ञान है छमम छमम छमम छमम छमम छमम [हंसी] छमम छमम ज्ञान तो रामपाल का जो छमम छमम ज्ञान है ना वो ये है कि [हंसी] इसकी भक्ति नहीं करनी है इसकी करनी है क्यों भाई शास्त्रवाद जी हैं। जी हां सही बात है। रामपाल का चमचम ज्ञान ये है। अरे भाई पहले ये तो बताओ कि मुझे किस भक्ति करनी क्यों है? तुम ये बता रहे हो इसकी नहीं करनी इसकी करनी है। करनी क्यों है? क्यों मानू
00:30:48:12 मैं परमात्मा को? क्यों मानू मैं धर्म को? यह बातें ना तो बाबा ने कभी बताई है ना उसके कोई व्यक्ति आपको बता पाएगा। ठीक है? पहले परमात्मा है यह तो सिद्ध हो तब तो मैं यह सोचूंगा कि परमात्मा कौन है पहले परमात्मा है यह सिद्ध हो तब मैं सोचूंगा कि परमात्मा कौन है फिर मैं ये सोचूंगा कि इसकी भक्ति किस प्रकार से करनी है समझ रहे हैं तो परमात्मा है इसके बारे में तो कोई बात करता ही नहीं है ना वह बता पाते हैं कि धर्म है दूसरी बात शास्त्र की बात करते हैं वो लोग कहते हैं कि शास्त्र की बात करते हैं हम जिस शास्त्र से अपनी बात को प्रामाणिक बता रहे हैं। जिस शास्त्र से अपना अध कचरा ज्ञान बता रहे हैं कि ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी हैं। ठीक है? उसी शास्त्र में दूसरी जगह कुछ लिखा हुआ होगा तो कह देंगे यह तो मिलावट की है। काल ने अपने मन से कर दिया है। यह कह दिया है। कहने का मतलब यह है कि जो जो शास्त्र या जो वक्ता आपसे झूठ बोल सकता है वो तो कहीं भी बोल सकता है ना। बोल सकता है ना? हां। तो
00:32:03:18 फिर आप यह कैसे कह रहे हो कि नहीं पुराण के आधार पर यह तो मान लो कि ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी हैं। ब्रह्मा विष्णु महेश नाशवान है। मगर पुराण के ही आधार पर यह मत मानो कि कि वो जो वो जो आप जिसको नाशवान समझ रहे हो वो केवल प्रकट और अप्रकट है। लीला में लीला में प्रकट होना लीला से लुप्त होना। वस्तुतः अंतत गत्वा ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी परमात्मा है। परम परमेश्वर हैं। परमेश्वर के ही तीन स्वरूप हैं। अलग-अलग तो जो जो शास्त्र एक जगह झूठ बोल सकता है वो सब जगह झूठ बोल सकता है। जो वक्ता एक जगह झूठ बोल सकता है वो कहीं भी झूठ बोल। फिर आप उसकी वाणी को लेकर के मत आओ। ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी है। दूसरी बात तुम ये दावा करते हो कि हम आपको हिंदू धर्म से जोड़ रहे हैं। सनातन धर्म से जोड़ रहे हैं। हालांकि वो आदि सनातन भी एक अलग चैप्टर हो जाएगा। मगर सनातन धर्म से जोड़ने के नाम पर तुम क्या कह रहे हो? कि सनातन धर्म के शास्त्र जिसने लिखे हैं उसने एक जगह पे झूठ बोला है। एक जगह पे सच बोला है। हां। सनातन धर्म के शास्त्र जिसने लिखे हैं वो एक जगह पे झूठ बोला। मतलब कोई हिंदू है। कोई हिंदू है जो ये मानता है मैं भगवत गीता को नमस्कार करता हूं। मैं भगवत गीता को
00:33:18:19 प्रणाम करता हूं। जो ये मानता है कि मैं भगवत गीता का सम्मान करता हूं। ऐसा हिंदू उसको आप ये बताते हो कि हम तुम्हें कुछ ऐसा बताने वाले हैं कि आज के बाद आप भगवत गीता को और अच्छे से प्रणाम करोगे। वो कहता है अच्छा ठीक है भाई। उसके बाद बताते हो कि भगवत गीता में आधी भगवत गीता फाड़ दो और आधी भगवत गीता रखो। उसका वो मतलब रखो जो मैंने बताया है। मतलब भगवत गीता से प्रेम करवाने के नाम पे भगवत गीता का नाश करवा रहे हो। वेद से वेद के प्रति श्रद्धा रखने के नाम पे वेद से दूर ले जा रहे हो व्यक्ति को। क्योंकि वेद तो काल ने बोला है। जहां पर ब्रह्मचारी ही आचार्य बनता है। आएगा तो कह देंगे। ये तो काल का मत है। हम जहां पर ब्रह्मचारी ही आचार्य बनता है आएगा तो वहां पर तुम कह दोगे कि ये तो काल का मत है। तो फिर फिर कोई हम जैसा व्यक्ति आएगा खड़ी करेगा
00:34:26:16 95% ज्ञान तो काल का है और 5% 95 परमेश्वर परम परमेश्वर 95 परमेश्वर का है और 5% काल का है। अब यह बताइए उन्होंने आज तक आपको मार्क लगा के दिया है क्या काल के कितने काल के कितने श्लोक हैं? जो बोल रहा है बोल रहे हैं तो मैं बोल रहा हूं इनका एक इनका एक दावा है
00:35:01:01 मेरे कहने का मतलब है मैं देखिए मैं एक महीना पहले पूरा जुड़ा हुआ हूं लेकिन वो इस तरह बोल रहे हैं कि हर लोग उनसे जुड़ जाएंगे मेरे पास दो दो जन है जो कि उनके एकदम भगत है। आप एक काम करो। आप ये कहो उनसे आप आप ये कहो मैं समझ गया। आप ये कहो उनसे कि आप मनुवादी शिवश नारायण द्विवेदी को निरुत्तर कर दीजिए। उसकी लाइव में जाकर के तो मैं भगत हूं। वरना मैं भगत नहीं हूं। और फिर देखना उनके कैसे परखच्चे उड़ाते हैं। आपके साथ
00:35:47:08 क्या आपके यहां लाइव लाऊंगा क्या? मैं उनको आपके यहां लाइव लाऊंगा क्या? हां ले आओ लाइव ले आओ। उनको लाइव ले आओ। ठीक है। तो मुझे बोलना बोलना भूल गया था। ये जो द्रोणाचार्य जी और ये जो क्या है कि परशुराम जी मुझे क्यों बोल रहे मैं तुम एक ब्राह्मण ब्राह्मण हो मुझे बोल रहे कि तुम ब्राह्मण इसीलिए ब्राह्मण को सपोर्ट कर रहे हो ऐसा बोल रहे हैं लेकिन वो सूत पुत सब इसको ऐसा घुमा बोल रहे हैं तो जिसका भी माइंड है माइंड घूम जाएगा आप मत घूमने दीजिए आपका कर्तव्य है आप ब्राह्मण है आपकी सबसे ज्यादा ड्यूटी है धर्म की रक्षा करने की आपको मालूम नहीं है आपका जन्म हुआ है धर्म को धारण और उसकी रक्षा करने के लिए आप कभी भी अपने धर्म से मत चूकिए। आपका कर्तव्य है जो लोग घूम रहे हैं उनको घूमने से बचाना। एक ब्राह्मण का कर्तव्य है। ब्राह्मण ही शिक्षक है। सबसे पहला आप ब्राह्मण है। आपका कर्तव्य है। और सुनिए अगर आपने अपनी ड्यूटी नहीं अगर आपने
00:37:02:16 अपनी ड्यूटी नहीं निभाई तो अन्य लोग अपनी ड्यूटी नहीं निभाते हैं तो उनको दंड कम मिलेगा। ब्राह्मण अपनी ड्यूटी नहीं निभाता तो उसको दंड ज्यादा मिलता है मनुस्मृति के अनुसार क्योंकि विवेकी का दायित्व ज्यादा होता है। ब्राह्मण को विवेकी माना गया है। उसका दायित्व ज्यादा है। ठीक है? तो अब आप अब यहां पर हां हां बोलिए बोलिए। यहां पर जो रामपाल जो है और एक चीज मुझे बहुत तकलीफ देता है जो नास्तिक है वो बोलने का वो उसको समझाएं कैसे हमारे पास वर्ड नहीं है नास्तिक का हमारा नास्तिकों का खंड नास्तिकों के नास्तिकों के खंडन का हमारा आप वीडियो देख लीजिएगा और हमारी क्लासेस चलती है फ्री हमारा फॉर्म भर दीजिए उसमें आया करिए और यह सब सीखिए रामपालियों को कैसे सबक सिखाया जाए या अन्य जो सनातन परंपरा विरोधी है उनको कैसे सबक सिखाया जाए यह सब आप उसमें सीख जाएंगे ट्रेंड हो जाएंगे अपने ब्राह्मणत्व का कर्तव्य का पालन करिए वहां पर आकर के आप तो भगवान जगन्नाथ के पास के क्षेत्र के व्यक्ति हैं आप अपने आप अपने कर्तव्य को मत भूलिए ठीक है
00:38:18:26 मेरा जो नंबर है मेरा जो नंबर है उसी नंबर पे उसी नंबर पर WhatsApp करके आपको क्लासेस का फॉर्म मिलेगा भर दीजिए उसमें आइए उसमें सीखिए और और हां कोई नास्तिक ज्यादा टफ लगता है तो उसको हमारा नंबर दे दीजिए। वो हमसे चर्चा करे आकर के। ठीक है। और एक बात बोलना चाहता हूं। ये अंतिम बात है ना आपकी? जी जी जी बोलिए बोलिए। हां और एक बात है कि जब नीम ने
00:38:58:09 भीम [गला साफ़ करने की आवाज़] के बेटे घटत वो भीम को लेकर गए उनके जी अब ये बात ये देखिए ऐसा है कि आपके पास आप यहां पे एक जिज्ञासु की तरीके से बात कर रहे हैं। हमारा जो ये लाइव है वो इस उद्देश्य से है कि रामपालियों की खाट खड़ी की जाए। ठीक है? रामपालियों को निरुत्तर किया जाए। तो यह बातें आप आराम से आप आप यह बातें जो है आराम से कक्षा में पूछ लीजिएगा। आपको भरभ के वहां पर जवाब दिया जाएगा। अब आगे आप जो है आगे के आगे की चीजों को प्रोसीड करें। जी बोलिए।
00:39:47:22 जय श्री राम। हेलो हां जी हां जी जी जी बोलिए आपका समझा ना बढ़िया मुझे तो आज तक नहीं कोई नहीं समझ समझा पा रहा था बढ़िया तरह से समझ गया मैंने और एक ही चीज डाउट है जो बल गए तो अरे यार तुम तो ऐसे वही सारे
00:40:21:10 ये सब इन सब प्रश्नों के जवाब आपको क्लासेस में मिल जाएंगे। आप उसमें आइए। ये जैसे आपने बलि प्रथा बोला यह अपने आप में आधे घंटे का इसमें 15 मिनट का लेक्चर है। जैसे आपने वर्ण व्यवस्था बोला था तो मुझे कितनी देर लग रही थी? ये एक मिनट का क्वेश्चन नहीं है ना ये। आप क्लास में आइए। आप क्लास में आइए। मेरी बात सुनिए। आप क्लास में ज्वाइन करिए। कल भी हमारी क्लास है। एक मिनट। हां हां बोलिए। बोलिए। आया हूं तो एक बात थोड़ा कंफर्म हो चले जाऊंगा असल में हां बोलिए चलिए [हंसी] मेरा मूड है थोड़ा सा होते हैं कि नहीं पता नहीं आपने बोला मैंने जान लिया आपका क्लास होता है वगरा जो है मैं आपके कांटेक्ट तो हमारे हमारे यहां दिया जाता है लगभग 30 से 40 हजार इस बारे में आप क्लास में पूछिएगा मैं बताऊंगा आपको है ना अभी मत करिए ये बात इस बारे में क्लास में पूछ लीजिएगा मैं बता दूंगा जय श्री राम ओके ठीक
00:41:30:07 हां जी शास्त्रवाद जी आज आपको कुछ मिल आप लोगों को क्षमा करिएगा आप लोगों को कुछ मैं रात में डिनर नहीं करा पाया सबसे मेरी क्षमा है [हंसी] मैंने सोचा था कि आप लोगों के लिए डिनर की व्यवस्था करूंगा भोजन की मुझे [गला साफ़ करने की आवाज़] भी नहीं मिला मैं भी बड़ा थोड़ा तृप्त रहा। ये व्यक्ति तो जिज्ञासु बन के आ गया। नहीं नहीं [गला साफ़ करने की आवाज़] ठीक है। वो तो जिज्ञासु है ही वो देख पता चल जाता है व्यक्ति के उससे जो आचार विचार होते हैं व्यवहार से पता लग जाता है। जी राजेश राजेश राजेश आचार्य जी जय श्री राम। हम जय श्री राम जी आज बहुत समय बाद मौका मिला जी आपसे बात करने का। आज अभी हम भोजन ही कर रहे थे। भोजन छोड़ के आए हम आपके लिंक को देख के। अरे अरे आवश्यकता नहीं बिल्कुल वो थोड़ा सा हमें लगा कि थोड़ा विचार क्योंकि उनके लिए ना हमने बहुत कुछ लिख के रख रखा था। अगर हमारा परामर्श होता तो उनको जैसे वो बातें करते हैं ना बहुत कुछ लिख रखा था। [हंसी] और ये लिखा हुआ भी ये लिखा हुआ भी इतना प्रमाणित है जी कि उनको मैं जैसे वो प्रश्न करते हैं ना ब्रह्मा का दादा कौन है? शंकर का
00:42:45:10 पिता ये जो उन्होंने जो ढकोसला बनाया हुआ है तो हमने उनके लिए क्या लिखा था जी कि कबीर का दादा कौन है और कौन है उसकी बुआ कबीर का फूफा कौन है तुम जीत जाओगे तुम ये बता दो हमें केवल [हंसी] वाह वाह वाह क्या बात है अगर हम तुम्हें ब्रह्मा के पिता बता दे सुनो सुनिए इसमें थोड़ा सा एक मिनट इसमें थोड़ा सा चेंज करें असल में है क्या कबीर का सम्मान हम भी करते हैं आप भी करते हैं तो ये क्या है कबीर कबीर के नाम के पीछे ये कबीर के नाम के पीछे छुप रहे हैं। इसको बदल करके ये ऐसा कुछ निकालिए कि कौन है रामपाल कौन है रामपाल की कौन है रमलू की बुआ कौन है रमलू का दादा और जीत जाओगे जुआ वो जो आपने बोला वो वो फिर बढ़िया रहेगा रमलू रमलू रमलू कर दीजिए रमलू जैसे जैसे इनकी बात है ना कि ब्रह्मा के पिता कौन है तो अगर हम इनको ब्रह्मा के पिता भी बताएं फिर कहेंगे परब्रह्म के नाना का नाम कौन है तो ये दूसरा प्रश्न हमारे बीच में ला देंगे क्योंकि इनके मनगढ़ंत प्रश्न बनाने का काम है इनका बहुत कुछ लिखा था जी इनके बारे में अथा लिखा कह जब बात हो जाती तो अच्छा हम एक छोटी सी बात आपसे पूछना चाहते हैं। जी छोटी सी बात है हमारी ज्यादा बड़ी नहीं है। जैसे ये कबीर को भगवान कहते हैं कि कबीर भगवान है। ठीक है जी। और आप ये कहते हैं कबीर परब्रह्म
00:44:00:16 है। कबीर से बड़ा कोई नहीं है। काल काल कबीर से नीचे है और काल से ऊपर कबीर है। तो एक हमने छोटा सा कबीर के लिए लिखा था। जैसे कबीर का जो धुआ है ग्रथावली का पष्ठ नंबर 178 में कबीर का है कि कबीर कुता राम का मुतिया मेरो नाम गले गले राम की जेवड़ी जित खींचे तित जाऊं तो कबीर जब स्वयं परब्रह्म है तो फिर राम का कुत्ता क्यों बनना चाहते हैं वो मैं आज मैं आपके प्रश्न मैं आपके प्रश्न का उत्तर देते हुए और इस समय जितने भी लोग देख रहे हैं उन सबके लिए बहुत विशेष और महत्वपूर्ण बात कहना चाहता हूं जो लोग बहुत पुराने से इस खेल को देख रहे हैं। वो लोग इस जो चीज मैं कहने वाला हूं वो जानते हैं। बाकी सबके लिए जरूरी और नई बात है। वो क्या है कि हम सब लोग मेहनत कर रहे हैं कि हम शास्त्रों से रामपालियों का जवाब दें उत्तर दें। इसी बारे में मेहनत कर रहे हैं। उसमें खूब प्रयास कर रहे हैं। मुतियामेरी म्याऊ निकाला। कबीर बीजक का कुछ निकाल दिया। मगर हम रामपाली से तब से लड़ रहे हैं और रामपाली की रगररग से वाकिफ हैं। उसका एक-एक पैतरा जो जो वो कर सकता है उन सबको करने के बाद जो किया जाएगा मतलब रामपाली
00:45:16:09 अपना आखिरी दांव जो खेल लेगा खेलेगा उसके बाद जो उसको चोट दी जाएगी हम वो चोट देते हैं सीधे हम वो चोट देते हैं। मैं बता रहा हूं कैसे मैं बता रहा हूं कैसे मैं बता रहा हूं कैसे जैसे हमने जैसे हमने पुराण का कुछ दिखा दिया ये देखो ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी नहीं है ये ब्रह्मा विष्णु महेश नाशवान नहीं है हमने दिखा दिया हमने 10 जगह दिखा दिया वेद में दिखा दिया वो कहेंगे ये तो काल ने कहा है ये तो काल ने मिलावट कर दी है फिर हमने जो है भगवत गीता फिर हमने हम कहेंगे कि ये भगवत गीता में लिखा है ये तो काल का अपना अपना मत है वो ऋषियों का अपना मत है वो वेद ऋषियों का अपना मत है यह सब होते होते होते फिर हम लोग आएंगे नहीं नहीं नहीं अब कबीर भी जग अब कबीर भी जग ये तो इसमें काल ने इसमें मिलावट कर दी है फिर काल सही बात है क्योंकि मेरे कहने की ना पूरा तो पूरा करने फिर कबीर कबीर वाणी कबीर वाणी लाएंगे लो तोप का गोला हम लोग ऐसे ही लाते हैं ना प्रमाण भाटी जी हां बिल्कुल जी हां जी हां वो लोग कहेंगे हम लोग लाएंगे प्रमाण ये लो
00:46:31:13 तोप का गोला वो कहेंगे आठ [हंसी] ये भी विचार कर रही है सुनिए सुनिए ये जो आप पुराण वाली बात कह रहे थे ना ये मैं एक दिन इनकी इनके जुड़ा था तो मैंने कोई प्रमाण रखे पुराण से तो कहा ये तो ऋषियों का मत है और ये इसका वक्ता कौन है कौन कह रहा है मैं कह रहा हूं मूर्खों सुनो मैं कह रहा हूं मूर्ख को तुम दो लाइन काट के दिखाते हो और कहते हमने सिद्ध कर दिया तब तुम वक्ता का नहीं रोना रोते हो इस दर्जे के ये मूर्ख है मतलब मतलब इनका जो धोखलापन है ना इनका धोगलापन है ना जी जी जी बोलिए बोलिए मेरे मेरे को पूरा करना चाहिए इनका धोगलापन देखिए ये तो क्या है नंदिकेश्वर कह रहा है ये तो ब्रह्मा जी का मत है अच्छा तुम जब प्रमाण दिखाते हो तो वो कहते हो कौन कह रहा है ये इनका धोगलापन है मैं मैं समझ रहा हूं आप इस समय किस स्टेज से गुजर रहे हैं? मैं उसको अनुभव किए हुए हूं और सारी चीजें वो कहते हैं ना कि वो घट घाट घाट का पानी पीने के बाद जो निष्कर्ष निकलता है मैं वो हूं। मैं वो हूं। मैं तो ये घाट ये विचार कर रहा था। मैं तो ये विचार कर रहा था। मैंने कहा जो प्रमाण मैं निकाल रहा हूं। मैंने कहा जी आप तो मेरे से परे हो। आपने तो पहले बातें पहले सोच के रखी होंगी कि मैं इनको प्रमाण रखूं। लेकिन आप इन प्रमाणों को
00:47:46:14 देख क्यों नहीं रहे हो उनको? तो आपने ये विचार सोच रखा है। बहुत अच्छा समझ में आ गया मेरे जी। देखो प्रमाण आप रखो ऐसा नहीं है। प्रमाण प्रमाण तो रखने चाहिए। है ना? मगर बुद्धिजीवियों के लिए बुद्धिजीवियों के लिए प्रमाण रखिए। रमलुओं के लिए प्रमाण मत रखिए। रमलुओं को तो पहले आप क्या फायदा? रमलुओं को तो पहले आप ये पूछिए कि प्रमाण है क्या? किसको मानते हो और क्यों मानते हो? बस यहीं से पिक्चर शुरू होती है। आप प्रमाण किसको मानते हो? और क्यों मानते हो? धर्म क्या है? ईश्वर क्या है? जब वो ऐसे मानते हुए आएगा जब वो ऐसे मानते हुए आएगा तब तो किसी प्रमाण को प्रमाण हम मान बता पाएंगे। वरना हम इसी पे उलझ के रह जाएंगे। ये तो अपना मत है। ये उसका मत है। ये उसकी बबिता का मत है और ये उसकी ये उसके वो ब्लॉक कोऑर्डिनेटर डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर का मत है और ये मुनि धर्मार ट्रस्ट है और ये सब वो करते रहेंगे। ठीक है? तो सभी लोग इन चीजों सभी लोग इस चीज पर ध्यान दें कि प्रमाण से रमलुओं का कुछ नहीं होना है। जैसे ही प्रमाण आपके पक्ष में जाएगा रमलु कह देगा यह काल ने कहा है। काल ने मिलावट की है। ऋषियों का मत है। काल का अपना मत
00:49:01:22 है। प्रमाण से हम जंग नहीं जीत पाएंगे। हमको तो इनके द्वारा स्वीकार इन हमको इनके द्वारा स्वीकार्य बातें जैसे कि इनहीं की गरमा गीता की अब आ बेटा अब बोल अब बोल कि ये गलत है इनहीं की छपी हुई किताबों से कुछ निकालना है और या फिर सीधे जो सार्वभौम सिद्धांत है उनको रख देना है परम स्वतंत्र परम स्वतंत्र मोक्ष सर्वशक्तिमान ईश्वर और शाश्वत धर्म ये तरीका है रमलुओं से लड़ने का ठीक है उनकी क्योंकि वो जिस भी शास्त्र का नाम ले अब जैसे आज अगर ये अगर ये वो होते मतलब हार्ड कोर कबीरपंथी होते अगर ये तो मैं इनसे पूछने वाला था कि आपके शास्त्रों में लिखा है आपके राम अब मैं ना तो कबीर बीजक लाता हूं बीच में ना कबीर वाणी ना मैं कबीर वाणी का कबीर बीजक का कबीर की किसी भी वाणी का वो हिस्सा लाता हूं जो ज्ञान गंगा में लिखा है और जिसके लिए उसने नहीं कहा है कि यह काल काल ने मिलावट की ठीक अब वो मैं ले आया कि भाई जीने की राह में ज्ञान गंगा में लिखा हुआ है कि गुरु के बिना जो भी वेद पढ़ता है वो मूर्ख है। ये लिखा है। ठीक। अब मुझे ये बता दो।
00:50:17:22 अब मुझे ये बता दो कि रामपाल ने वेद किससे पढ़े हैं? [हंसी] इसका उत्तर उनके पास ही नहीं है। उनके उनके जो प्रमाण है ना हां हां हां जी हां जी हां जी। उनके जो मैं तो खुद इस बात का क्यों एक पूरा कर लूं क्योंकि रामपाल ने वेद नहीं पढ़े हैं क्योंकि कबीर ने कभी वेद भाष्य किया नहीं या वेदों के जो अन्य शास्त्र वेदों से संबंधित उपनिषद इत्यादि उस पर बात की नहीं उसका भाष्य किया नहीं उसके यहां तो वेद के वेद की परंपरा ही नहीं है तो वो वेद पे वेद पढ़ेगा कैसे अपने गुरु से अगर मान भी लिया जाए कि भैया धर्मदास वो कौन थे गरीब दास कौन थे वो राम क्या नाम है गरीब नहीं
00:51:08:28 रामपाल किसको गुरु रामपाल किसको गुरु बताता है अपना रामंद रामंद रामंद तो क्या राम तो क्या रामदेवनंद संस्कृतज्ञ थे या वैदिक थे वेदों पर भाष्य किया है जिससे इन्होंने पढ़ा इनहीं की इन्हीं का जूता इन्हीं के सर मारो बस इनको कहीं से कुछ निकाल के नहीं देना है इनको इनहीं इन्हीं का जूता इन्हीं के सर मारना है। ये तरीका है इनसे बात करने का। उन्हीं का जूता कि उस जूते को ठुकरा उस जूते को ठुकरा ना पाए ये लोग मना ना कर पाए कि नहीं नहीं ये काल का मत है। ठीक है। अब आप लोग अपनीपनी बातें बोलिए। जी अब आप राजेश आचार्य जी आप अपनी बात पूरी कर जय श्री राम। मेरा मेरा कहने का सीधा मतलब ये था जी क्योंकि अब तक मैं जो प्रमाण लेकर बैठा था ना इसका कारण केवल इतना था जैसे हमारे जैसे वेदव्यास जी थे हमारे वेदव्यास जी को भगवान विष्णु का अवतार कहा जाता है जी तो कहते वेदव्यास जी ने जो पुराण लिखे वेद लिखे सब कुछ लिखा लेकिन वह स्वयं को कभी परब्रह्म नहीं कहते थे वो खुद भगवान अपने आप को नहीं कहते थे उन्होंने भगवान के बारे में लिखा तो यहा पर में जब उनको वेदव्यास जी के बारे में उनको बताता तो यहाँ पर क्या बात है कहते वेदव्यास स्वयं को दास कहते थे भगवान का तब जाकर के उन्होंने भगवान के बारे में इतना सब कुछ
00:52:24:04 लिखा तब भी उन्होंने जब जो भागवत का महात्म का जो पहला जो मंत्र उन्होंने लिखा श्लोक सच्चिदानंद रूपाय वाला उसमें भी भगवान के चरित्र के बारे में बताया। ऐसे तुलसीदास जी अपने आप को दास कहते थे तो भगवान के बारे में बताते थे। तो कबीर दास अगर अपने आप को भगवान परब्रह्म कहते थे तो यहां लिखा है साईं इतना दीजिए जा में कुटुंब समाए। मैं भी भूखा ना रहूं। मेरा साधु ना भूखा जाए। तो यह बात कबीर कह रहे हैं कि साईं मुझे इतना दीजिए और जब मैं था तब हरी नहीं अब हर मैं ना हूं। अब कबीर खुद हरि के बारे में इतनी सब बातें कह रहे हैं तो वो अपने आप को दास बता रहे हैं। कबीर के एक भी दोहे में एक भी चौपाई में मैंने कभी भी उनका परब्रह्म का स्वरूप नहीं देखा। कबीर अपने आप को परब्रह्म कह रहे हैं। इनके लिए ये प्रमाण मैंने यहां पर रखे हुए थे। और भी काफी थे। वो तो बात वो संयोग की नहीं हो पाई जो करके जो इन्होने बोला ना ब्रह्मा का पिता कौन है? कौन है? विष्णु की मां शंकर का दादा कौन हमको दे बताइए मन मन गंत बना दिया उन्होंने जो मन का रूप बनाया था समझ गए आपकी बात बिलकुल समझ गया जी मैं बिल्कुल समझ गया मैं आपको रामपाल की ओर से एक उत्तर दे दूं आपने जो प्रमाण दिए हैं है ना उत्तर दे दूं ये काल का मत है ये काल ने मिलावट कर दी है [हंसी] सुन लिया वही बात है
00:53:39:08 बिल्कुल जी बिल्कुल समझ रहे इस पर आप एक डिटेल वीडियो बनाइए हम सबके लिए भी उपयोगी होगा। आप जो ये प्रमाण लाए हैं ना विस्तार से वीडियो बनाइए। कबीर जी की वाणी का जो आप प्रमाण लाए हैं ना डिटेल एक वीडियो बना दीजिए। एक बिल्कुल बिल्कुल वीडियो देखिए वीडियो वीडियो बनाइए। उपयोगी प्रबुद्ध जनों के लिए जरूर होगा। जैसे मान लीजिए कि किसी के समक्ष रामपाल और मुझ में चर्चा हो रही है। ठीक है? किसी के समक्ष तो हमने रामपाल को तो ताबड़तोड़ सब फेल कर दिया। उसके बाद उस व्यक्ति को उस जो तीसरा व्यक्ति है जो निष्पक्ष है न्यूट्रल है उसको कम से कम हमें जैसे इन्होंने कहा कि ब्रह्मा विष्णु महेश ब्रह्मा विष्णु महेश नाशवान है ठीक है तो हमने फिर बताया कि नहीं यहां केवल आविर्भाव और प्रादुर्भाव की बात है और ब्रह्मा विष्णु महेश वस्तुत अविनाशी नहीं है। देखो यहां यहां पर लिखा है वो नाशवान नहीं है। देखो यहां यहां पर लिखा है कि वो अविनाशी है। ठीक है? ठीक है ना? ठीक है जी। तो यह हम जनता के लिए जो सामने जो रमलुओं के लिए कभी ये उपयोगी नहीं मगर रमलू और हमारे बीच की बात जो देख रही है देख रहा है जो दृष्टा मात्र है उनके लिए प्रमाण बहुत उपयोगी रहेंगे ठीक है जिससे
00:54:54:12 वो इनके द्वारा उत्पन्न होने वाले संशय का निवारण पा सके जी पहाड़ी जी जय श्री हां प्रमाण इसलिए उपयोगी है जय श्री राम कि मैं मेरा बताता हूं थोड़ा अनुभव 12th किया था 2013 में तभी कोई कहीं से इसका का मिल गया था कि भाई ज्ञान गंगा है फ्री में मिलती है तो मैंने मंगवा ली मेरे एड्रेस पे उससे पहले मेरे गीता जरूर पढ़ी हुई थी उस समय विद्यार्थी था ठीक है ना इतनी समझ थी लेकिन वो पढ़ा पूरी पढ़ी तो मुझे वो पूरी गपोड़ बाजी लगी ये कहते हैं ना प्रमाण है वो है बस ज्ञान गंगा पढ़ो या सत्संग सुनो तो मैंने ना तो इसका कोई सत्संग सुना था ना कुछ सिर्फ गीता पढ़ी हुई थी उसी समय विवेक से ये हो गया ये फर्जी आदमी है और ये अपने आप को मतलब पॉप घोषित करना चाहता है। तो थोड़ी जो जनता है ना उनसे मेरा निवेदन है जो दर्शक है कि थोड़ा अपना विवेक को काम में ले। वो जो गपोड़बाजी कर रहा है क्या वो वास्तव में है? अब जब हम इन रामपालियों से दो चार होते हैं तब ये अटकते कहां है? बस सत्संग सुनो या ज्ञान गंगा वहां से इधरउधर जो भी प्रमाण दो उनसे कोई मतलब नहीं। काल काल का ज्ञान हो जाता है। क्यों हो जाता है? इन्होंने इतना ही पढ़ा है जितना इनको रटाया
00:56:09:25 गया है। तो जो दर्शक है उनके लिए बिल्कुल निश्चित रूप से ये विवेक से तोलना चाहिए। मैंने विवेक लगाया जिनके चक्कर में नहीं पड़ा। [गला साफ़ करने की आवाज़] 2012-13 में ज्ञान गंगा पड़ी थी फिर वापस 2026 में इसका रामपाल का नाम सुना। बीच में बस उसी टाइम नकार दिया गया। कोई मतलब की चीज नहीं है। गुरु जी अगर मैं अगर मैं ये कहूं कि मेरे गुरु जी ने कहा है कि सूरदास का नाम संत कबीर सूरदास है और जो कबीर है वो मेरे सूरदास कबीर है जिनका नाम संत कबीर है मेरे गुरु ने कहा है। मैं उनको ये भी बात बोलने वाला था। मैंने कहा तुम्हारा जो कबीर है उसका नाम सूरदास कबीर संत कबीर सूरदास है। मेरे गुरु ने तो मुझे ये बताया। मैं तो उसको मानने को तैयार नहीं हूं। उनकी बातों को इस बात को मैं उनको बताने वाला था। मेरा ग्रंथ का नाम है सूर रस सागर। अब है नहीं यह ग्रंथ लेकिन प्रिंट कराने में कितनी देर लगेगी? किसी किताब को प्रिंट कराने में कितनी देर लगेगी? बस ऐसे ही खेलना है इनके साथ। इनके साथ ऐसे ही खेलना है। इनको इनको कभी भी इस मामले में नहीं परेशान होना है कि भैया इनको हम लोग शास्त्रों से क्योंकि होगा क्या? आप लोग जैसे ही शास्त्रों का नाम लोगे आपके शास्त्रों की आपके शास्त्र वचनों की बेइज्जती होगी। अपमान होगा। ठीक है। आज जैसे उससे बात हो रही थी शास्त्रवाद जी आज दिन में उससे बात हो रही थी। एक दो जैसे
00:57:25:01 शास्त्र श्लोक की बात की कितना कितना वैसे अपमानित तरीके से उसने बात की थी। वही तो सारी बात सुन के ना मुझे मुझे लगता है फिर वो होता है। मैं कहा भगवान शंकर के बारे में इतनी बातें सुना। मैं तो भोजन कर रहा था। पहली बार इतना गलत इनके मुंह से सुना। मैंने भगवान के बारे में जीवन में पहली बार इतना गलत सुना जी भगवान के बारे में। अब थोड़ा पहाड़ी जी की बात सुन ले। जी पहाड़ी जी। हां बोलिए। जय श्री राम। आवाज आ रही है मेरी क्लियर? बस बस क्लियर बिल्कुल क्लियर। अच्छा अच्छा ठीक है। ये आप बीच में एक बात कर रहे थे ना कि क्या वेद पढ़े जो अज्ञानी क्या था वो? एक बार दोबारा बोलिए एक बार। हां। वो गुरु के बिना जो वेद पढ़ता है उसकी बात कर रहे हैं क्या? अज्ञानी रहते हैं। ये तो खुद रमन ने बोला है कि मेरे को वेदों का ज्ञान नहीं था 2003 तक। हां। हां बाद में इसको मतलब इसको वीडियो को निकालना तो भाई किससे पढ़ा भेद बस बस बस काम का है वो
00:58:33:25 नंबर दो बात [गला साफ़ करने की आवाज़] ये राघवदास जो थे आपके बारे में बोल रहे थे तो इसकी मैंने पुरानी रिकॉर्डिंग आपकी चैनल पे थी आपकी आवाज वो है क्या कहते हैं डिस्टर्ब हो रही है एक इनकी एक वाणी और है मैं थोड़ा सा बस 10 सेकंड एक वाणी और है जब ये पुराण और वेद पे अटकते हैं ना तो ऐसा और कोई कहता है वेद पुराण चित रे मतलब ये तो चित ज्ञान है ये और कहते हैं
00:59:06:09 ज्ञान बस असली प्रमाण कबीर सागर ही है इनके लिए अंत में ये अटकते कबीर सागर पे फिर फिर गीता तेरा ज्ञान गंगा में भी लिख दिया है कबीर सागर भी बेकार है कुल मिला के रमलू की खीर खाओ और रमलू जो जिस समय रमलू की बात भी पक्की नहीं है बदलती है। तो इसलिए रमलू जिस समय जो बात कह रहा हो वह बात प्रमाण है। उसने पहले कुछ कह रखा है तो वो भी कटिंग है। जिस समय वो जो बात कह रहा है वही प्रमाण है। वही धर्म है। ये है इनका एजेंडा। जी पार्टी सही है। आवाज क्लियर नहीं आ रही है मेरी। अब अब क्लियर आ रही है। हां मैं कह रहा हूं कि जो राघव दास जो फूहड़ता फैला रहा है कि मेरे से ज्ञान चर्चा कर ले डर गया ये सो रहा है। तो पुरानी रिकॉर्डिंग मैंने आज देखी उसकी अब तो वो तो पहले भगवाड़ा घोषित हुआ है। है उसको आज से एक साल पहले ज्ञान चर्चा के लिए बुलाया था और यहां तक कहा था कि हम दिल्ली में आएंगे तू जगह स्थान बता अच्छा उस बारे में हम चर्चा करेंगे हां मैंने भी कहा था मैंने भी कहा था ये बात उससे फोन पे बात कही थी दिल्ली
01:00:21:22 में कहां चर्च होगी कहां कैसे होगी ये हम चर्चा करेंगे लाइव में पहले ये तैयार हुआ था लास्ट टाइम पे इसने ये कह कहकर ताना मार के भाग गया था ये भोड़ा ये फोन से कि तुम लोग ज्ञान चर्चा करने लायक नहीं हो और आपने उसमें व्याख्या कर रखी है उधर आपने ये चीज बोल रखा है अच्छे से आप एक बात देखो आपके इनके पाणी जी के चैनल पे वो रिकॉर्डिंग पड़ी है जिसमें राघव दास खुद भागा हुआ है बहाने बना करके दूसरी बात यह है कि जो राघव दास है उसने अपने लोगों को बेवकूफ बनाने के लिए यह तो दिखाया कि मैंने उसको ब्लॉक कर रखा है। पर उस ब्लॉक होने से पहले की बातचीत उसने नहीं दिखाई कि मैंने कब ब्लॉक किया और उसमें फुल एक्टिंग दिखा रहा है कि देखो मैं इसको संपर्क कर रहा हूं। अरे मूर्ख लोगों को यह तो बता कि पहले उससे पहले मेरी और तेरी बात भी हुई है। वो क्यों नहीं तूने रिकॉर्डिंग दिखाई? बात भी हुई है। मैंने तुझसे बीच बाजार में आकर के बात करने को कहा है कि ना तेरी जगह ना मेरी जगह बीच में आकर के बात कर। तूने वह तो दिखाया नहीं तू अपने लोगों को यह लोग केवल अपने लोगों को मूर्ख बनाने में लगे हैं बस कि अपने लोग शांत हो जाए किसी प्रकार
01:01:36:28 से तो क्या है रिकॉर्डिंग दिखाओ भैया शिवश फोन नहीं उठा रहा है अरे भाई हम तेरे से क्या गाली गलौज गाली गलौज की प्रतियोगिता करें क्या कि कौन कितनी गंदी गाली दे लेता है तुम्हारे तो मुंह से गालियां ऐसे निकलती है जैसे गीली मिट्टी में हल चलता है क्योंकि खीर से सबसे पहली जो उपलब्धि प्राप्त होती है योग्यता प्राप्त होती है खीर से वो यही होती है भैया गाली देने में एक्सपर्टीज होनी चाहिए तो गाली तुम्हारे से ऐसे निकलती है हम थोड़ी ना गाली सुनने बैठे हैं चर्चा ज्ञान चर्चा करनी है कि गालियों की प्रतियोगिता करनी है तो इसने मूर्ख इसने अपने लोगों को मूर्ख क्या बनाया कि मैंने इसका नंबर ब्लॉक किया है ब्लॉक करने से पहले ये बात दिखाई नहीं कि मैं उसको बीच में चर्चा करने के लिए बुला रहा हूं कि ना तेरी जगह ना मेरी जगह और जब ये उस चर्चा में नहीं आ रहा है बहानेबाजी कर रहा है और गंदे शब्द बोल रहा है तो मैंने इसका फोन कट करके ब्लॉक में लगा दिया। जब निर्णय हो गया कि इसको आना नहीं है बीच में। इसकी औकात नहीं है और यह नपुंसकता का प्रदर्शन वहां कर रहा है तो मैंने इसको ब्लॉक में लगा दिया। मैं क्यों इसको फोन उठाऊं बार-बार और फिर इसकी ये गंदी छिछ रही नीच आवाज सुनू। नीच बातें इन नीच लोगों की नीच बातें क्यों सुनू मैं? ये नीच लोग हैं। कैसे नीच लोग हैं?
01:02:52:00 क्योंकि ये लोग गाली देते हैं। ये लोग अभद्र भाषा का उपयोग करते हैं। इस प्रकार से नीच लोग हैं। नीच है ना? और तुम्हारे लिए तुम्हारे जैसों के लिए अनपढ़ शब्द तो तुम्हारे बाबा जी ने ही लिखा हुआ है कि तुम अनपढ़ हो। तब भी हम तुम्हें मौका दे रहे हैं कि हमसे तुम बात कर लो। उसके बाद में तुम ना आकर के जो है गालीबाजी पर उतर रहे हो कि गरमा गरमा गर्मी हो जाए और सीधी-सीधी बात जो हो सकती है वो ना हो। तो नहीं हो रही बात तुम्हारे रमलू से करेंगे किसी ना किसी दिन बाकी अभियान तो जारी है ही है बहुत आनंद आ रहा है समोसे वाला परेशान है अभी प्लास्टिक की दुकान एक मैंने ढूंढी है वहां पे छापा में डाला जाएगा एक दिन वहां होगा तो अब जगह-जगह अब रामपालियों का विरोध होगा ठीक है उसमें बहुत आनंद आ रहा है कोई जरूरत नहीं है हमें रामपाल को कुछ करने की ना आपसे एक एक आपसे एक छोटी सी बात पूछना चाहते हैं जी ये सनातन धर्म का बंटवारा होने का मुख्य कारण क्या हो सकता है? हमारी ना पूरी बात एक बार सुनिएगा। हमारी आवाज ठीक आ रही है आपको? ये रणनीतिक विषय है। आप आप व्यक्तिगत रूप से आप जो है कॉल करिएगा तब हम इस बारे में बात करेंगे। इसका इसका
01:04:07:27 मुख्य बात इसकी वो हमने कई वीडियो कई वीडियोस कई वीडियो अभी मैं आपको शॉर्ट आंसर दे देता हूं। वैसे हमने इस पर वीडियोस बनाए हैं। इसका कारण है कि जो व्यक्ति के अंदर होती है ना वासना लालसा लालच माया के प्रति भौतिकता के प्रति भौतिकवाद ये सब इसका कारण है मूल ठीक है बाकी हम लोग इस विषय में अलग से बात कर लेंगे ठीक है तो और किसी को यदि कुछ और विशेष ना कहना हो तो हम इस चर्चा को फिर विराम देते हैं आज की चर्चा वैसे बड़ी वैसी रही है सौहार्द पूर्वक ना जी जी बिल्कुल जी बिल्कुल क्योंकि यह केवल रामपाल जी नहीं यह केवल रामपाल जी नहीं और भी हैं बहुत जिनके बारे में बहुत देखता हूं आर्य समाज ब्रह्मकुमारी बहुत जितने जिनके बारे में मैं सुनता हूं वो सब सनातन धर्म से ही निकला है आप उस फुअर व्यक्ति को रामपाल जी क्यों कह रहे हैं अनपढ़ टाइप का व्यक्ति वो फुहड़ व्यक्ति हमारे गुरु ने गुरु का आदर वो कहते गुरु ने जो आदर देना सिखाया है तो वो वाला कार्य बड़े तो है तो उस करके जी लगा देते नहीं वाला नहीं नहीं नहीं रावण कितना बड़ा था रावण से तो तड़ाक में बात की थी भगवान ने
01:05:24:14 बिल्कुल एक छोटी सा छोटी सी बात ना इसी बात को ले जैसे बौद्धिज्म आ गई बौद्धिज्म विपासना नाम का मेडिटेशन होता है वो बज्म विपासना जो मेडिटेशन है वो पूरा अनुलोम विलोम के ऊपर डिपेंड है तो ये जो हां जी हां जी जो आपकी मां को गाली दे रहा है उसके प्रति आप वैसा आचरण करेंगे बिल्कुल भी पूर्वक सच महाभारत में लिखा है कि नहीं स वो व्यक्ति स है उसके साथ हां ठीक है चलिए फिर बहुत-बहुत धन्यवाद सभी का शास्त्रवाद जी और ये दो लोग और है ये कुछ बोल नहीं पाए हैं कुछ अगर विशेष बात हो तो बता दीजिए संक्षिप्त में जी जय श्री राम शिवा जी जी जय श्री राम बताइए जी आज लोहा बहुत गर्म था और पहाड़ी जी ने एकदम से हथड़ा मार दिया गीदड़ के ऊपर
01:06:24:28 युवराज जी हां वो भी बड़ा बड़ा मतलब बड़ा ड्रामेबाज है घर में घुसकर पहले पहले तो देखो पहले तो अपनी महिला को आगे कर दिया महिला झूठ बोलने में एक्सपर्ट जो कि हमेशा मैंने देखा ही होती है वो झूठ बोलने में एक्सपर्ट यहां नहीं है। फिर वह लोग अंदर जा रहे हैं। तुमको निकाल के ला रहे हैं। तुमको पीट रहे हैं। तुम्हारे बाबा का पोस्टर पीछे लगा है। तुम उसके स्टार प्रचारक हो। बाबा तुम्हारे पास उड़ के नहीं आया बचाने। देख कंटा देख कंटाप तौल ततल के पीटे जा रहे हो। और फिर वही बात 100-100 100-100 जूते खा के तमाशा घुस घुस के देख वो वाली बात। फिर तुम बाद में जब कोई नहीं है कोई नहीं है तो ताल ठोक रहे हो। हैं? यह है तुम्हारी हालत। शेर को गुफा में से घट के मार [हंसी] दिया। [गला साफ़ करने की आवाज़] और आप जाने वाले थे राघव दास के डिबेट करने। आप अगले साल जाने वाले थे। आपने पूरी तैयारी भी कर ली थी। आप जाने वाले ही थे अगले साल। दिल्ली ना? हां दिल्ली दिल्ली। दिल्ली हां हां ऐसा कुछ है। एक्सैक्ट
01:07:40:04 राघव दास से बात हुई क्या? क्या नहीं हुई मुझे नहीं याद है। आप ही लोग बता रहे हैं। नहीं हुई हुई थी आपके बात हुई थी राघव दास से जी की उसमें है। अच्छा हां कल सुन ले [गला साफ़ करने की आवाज़] ये जो रामपाल है ना ये वो लोग ये ये लोग क्या खबर फैला रहे हैं कि वो देखो वो जेल में पड़े हैं सड़ रहे हैं। ये देख लो सब के सब ये बैठे हैं वो सब जिन्होंने पीटा है तुम्हारे औरतों को मैं
01:08:24:02 कमावा देना ये देखिए चंदन की एक बार बेटा ये पढ़ी लिखी बात है हमारी बच्चे हैं बच्चे खेल रहे हैं। ये भाई लड़की है ना बिल्कुल भी नहीं बताती। ये देख लो वो अंदर छिपे हुए हैं दोनों। अभी भी आए तो थोड़ी देर पहले कहां गए? देखिए ये अंदर मत लेंगे। हां इधर नहीं है ना कोई भी अगले रूम में देख तुम यहां देखिए एक मु डंडा तो यू बैठा है ये यही तो है अभी तक बाहर [हंसी] यही तो एक तो मिल गया
01:09:31:03 छुपाने का कैसा हो रहा है। चलो चलो चलो बाहर चलो एक आ जाओ आ जाओ दोनों हाथ लगा जितनी भी डाल रखी सारी अभी डिलीट कर
01:10:06:07 डिलीट कर दूसरा अकाउंट बना लियो इसने एक मिनट पॉज करिए यहां पे एक चीज और है। इसका जो Instagram अकाउंट है ना वो बंद हो गया है। ये आप लोगों में से किसी ने नोटिस किया हो या नहीं। युवराज का जो Instagram अकाउंट था वही सबसे मेन अकाउंट था बड़ा वह भी बंद हो गया है। बाबा जी उसको भी नहीं बचा पा रहे हैं। ठीक है ये भी ध्यान देने लायक बात है। जीवा रहे
01:10:39:10 देख जुबान भी बकर उतरवाना भी उठता होता। जो भी [हंसी] क्यों ना विष्णु भगवान का है विष्णु भगवान का विष्णु भगवान का
01:11:20:00 ले भाई देख ले बकल तार दिया इससे चू भी नहीं होती है बोला भी नहीं जाता इससे पीटने लग रहा है हर कोई भी इसकी हेल्प करने वाले इसके घर वाले इसके मां बाप कोई इसकी बहन है ये कोई भी हेल्प करने वो भी इसकी हेल्प करने के लिए बाहर सच्चाई के सच्चाई बताओ [हंसी] सच्चाई के सच्चाई बताओ क्या सच्चाई बताओ शकल तो देखो ये बाबा जी का पोस्टर पीछे है। देखो सच्चाई बताओ सच्चाई बताओ। सच्चाई बताओ।
01:12:01:25 ये क्या हो गया? एक एक बात कहनी थी छोटी सी। नहीं मेरी ओर से कोई गलती हुई है क्या? ये देखिए जरा। जॉ डाउन। इसको कैसे कट करूं भाई? ये क्या स्क्रीन पे आ रहा है? अच्छा अच्छा वो तो ठीक है। मेरी स्क्रीन पे कुछ आ रहा है लिख ओनली वििबल हम ठीक है। तो
01:12:42:26 आज की लाइव को विराम देते हैं। मुझे लगता है सभी की बातें हो गई हैं। और अब जो है नेक्स्ट हम चर्चा में जुड़ेंगे। आज विलंब काफी हो गया है। वह तो इनसे कल की बात हो रखी थी तो हम आए थे लाइव आज। सभी को जय श्री राम। समय देने के लिए बहुत-बहुत आभार। और जिनको समय नहीं मिल पाया है वो थोड़ा सा धैर्य रखें। अगली बार उनसे जरूर बात होगी। ठीक है? जय श्री राम। जय श्री राम। हर हर महादेव। जय श्री राम। जय श्री राम। हर हर महादेव। जय श्री जय श्री राम।
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