1
00:00:03,200 --> 00:00:08,080
क्या ब्रह्मा कुमारीज के द्वारा पूजित होने वाला ईश्वर

2
00:00:08,080 --> 00:00:14,080
परिभाषित होने वाला ईश्वर सर्वशक्तिमान है या नहीं?

3
00:00:16,640 --> 00:00:20,880
है या नहीं तो जो भी है वो पूरी

4
00:00:20,880 --> 00:00:24,880
चर्चा में समझ में आ जाएगा। मगर आप क्या मानते

5
00:00:24,880 --> 00:00:29,840
हैं? मान के चलते हैं कि है। मैं मानता हूं कि है हां

6
00:00:29,840 --> 00:00:35,840
ठीक है। तो क्या वो अवतार ले सकता है?

7
00:00:37,280 --> 00:00:41,680
अवतार का मतलब क्या आप कहने का है कि अवतार

8
00:00:41,680 --> 00:00:46,160
का मतलब वो शरीर में जन्म ले सके। जन्म लेने से

9
00:00:46,160 --> 00:00:50,320
एक ऐसा रूप धारण करके हमें हमारे समक्ष आता है जो

10
00:00:50,320 --> 00:00:56,320
हमारे व्यवहार का विषय बन सके। आंखों का विषय बन सके।

11
00:00:57,920 --> 00:01:00,320
अच्छा

12
00:01:00,320 --> 00:01:04,480
तो ऐसा वो स्वयं को

13
00:01:04,480 --> 00:01:08,800
नहीं लेता है। लेकिन वो एक्चुअल

14
00:01:08,800 --> 00:01:12,880
में क्यों नहीं लेता है ये आगे समझेंगे तो इस बात को समझ

15
00:01:12,880 --> 00:01:16,880
पाएंगे कि ले लेगा कि नहीं लेगा। एक एक करके

16
00:01:16,880 --> 00:01:21,680
चलेंगे। सबसे पहली बात यह है कि वो अनंत सामर्थ्यवान

17
00:01:21,680 --> 00:01:25,120
है या नहीं।

18
00:01:25,120 --> 00:01:28,720
अनंत सामर्थ्यवान

19
00:01:28,720 --> 00:01:32,960
देखिए अनंत को पहले आप अपने शब्दों में समझाएंगे क्या

20
00:01:32,960 --> 00:01:37,200
एक दो तीन चार करते हुए हम अनंत तक पहुंच जाएंगे अनंत

21
00:01:37,200 --> 00:01:41,280
अनंत का मतलब है कि ऐसा

22
00:01:41,280 --> 00:01:45,600
कोई कार्य ना हो जो वो ना कर सके अनंत सामर्थवान सभी कार्यों

23
00:01:45,600 --> 00:01:49,600
को करने की जिसमें क्षमता हो ऐसा कुछ ऐसी दुनिया में

24
00:01:49,600 --> 00:01:54,560
ऐसी संसार में कोई क्रिया घटित नहीं हो रही हो जो वह ना कर सके

25
00:01:54,560 --> 00:01:59,280
ऐसी किसी क्रिया का अस्तित्व ना हो संसार में जो वो क्यों ना कर सके?

26
00:01:59,280 --> 00:02:03,760
हां वो वो देखिए वो समझ में हमें तो आया है

27
00:02:03,760 --> 00:02:07,760
ऐसी कोई भी नहीं लेकिन ये सबको समझ में आएगा भाई जी

28
00:02:07,760 --> 00:02:11,840
ना तो सब तो फिर देखिए समझ में आपको क्या

29
00:02:11,840 --> 00:02:16,000
आया वो यहां का विषय नहीं है कि आपको समझ में क्या आया क्या नहीं आया

30
00:02:16,000 --> 00:02:20,160
विषय यह है कि ब्रह्मा कुमारी जिसको ईश्वर बनाकर पुजवा

31
00:02:20,160 --> 00:02:24,320
रही हैं और वो कह रही है कि सर्वशक्तिमान है अनंत सामर्थ्यवान है

32
00:02:24,320 --> 00:02:28,480
तो क्या वो उसको आगे निभाती हैं। अपने इस क्लेम

33
00:02:28,480 --> 00:02:32,480
को जो उन्होंने क्लेम किया है, दावा किया है, वह इस क्लेम के

34
00:02:32,480 --> 00:02:36,480
अनुरूप ईश्वर की व्याख्या करती हैं या वो व्याख्या बदल जाती है आगे जाकर के।

35
00:02:36,480 --> 00:02:40,240
कैसे? कि जब हमने कहा कि वो अनंत सामर्थ्यवान है

36
00:02:40,240 --> 00:02:44,240
तो वो अवतार नहीं

37
00:02:44,240 --> 00:02:48,320
ले सक रहा है। वो कई क्रियाएं ऐसी हैं दुनिया में जो बाधित हो

38
00:02:48,320 --> 00:02:52,400
रहा है। तो जब वो उसकी शक्तियां बाधित हो रही है कि जब उसकी

39
00:02:52,400 --> 00:02:56,400
शक्तियां बाधित हो रही हैं तो फिर यह क्लेम छोड़ना चाहिए कि ईश्वर

40
00:02:56,400 --> 00:03:00,560
अनंत सामर्थ्यवान है। ये क्लेम छोड़ना चाहिए। ईश्वर सर्वशक्तिमान है।

41
00:03:00,560 --> 00:03:04,960
दूसरे क्लेम करो। दूसरे क्लेम करो। आप यह कहो कि

42
00:03:04,960 --> 00:03:09,040
एक भाई साहब एक मिनट मुझे पूरा करने दीजिए। बात यह है कि

43
00:03:09,040 --> 00:03:13,200
जब हम यह कह रहे हैं कि उसमें अवतार लेने की क्षमता नहीं

44
00:03:13,200 --> 00:03:17,360
है। उसमें झूठ बोलने की क्षमता भी नहीं है। यह

45
00:03:17,360 --> 00:03:21,680
भी आप मानते हो। दुनिया में जो बुराई का अस्तित्व है अपने आप हो गया है। वह

46
00:03:21,680 --> 00:03:25,760
उसने नहीं बनाई है। जबकि हम यह मानते हैं कि उसके लिए बनाया है। सब

47
00:03:25,760 --> 00:03:29,840
बनाया है। सब उसी ने बनाया है। एक एक मिनट भाई साहब एक मिनट भाई साहब एक

48
00:03:29,840 --> 00:03:33,920
मिनट एक मिनट हमारा ये मानना है कि ईश्वर के दृष्टिकोण

49
00:03:33,920 --> 00:03:38,240
से कुछ भी अच्छा या बुरा है ही नहीं। जो भी अच्छाई बुराई है हमारे दृष्टिकोण से है।

50
00:03:38,240 --> 00:03:42,240
ईश्वर के लिए सब बराबर है। है ना? हम लोग क्योंकि बंधन में

51
00:03:42,240 --> 00:03:46,400
है तो हमारे लिए कुछ अच्छा और बुरा है। तब ईश्वर ने बताया कि यह जो बुरी चीज है

52
00:03:46,400 --> 00:03:50,640
इसके साथ ऐसा व्यवहार करो तो मुक्ति मिलेगी। यह जो अच्छी चीज है इसके साथ ऐसा व्यवहार

53
00:03:50,640 --> 00:03:54,640
करोगे तो मुक्ति मिलेगी। ईश्वर के लिए कुछ भी नहीं है। ईश्वर ने तो सब कुछ बनाया। हमारी

54
00:03:54,640 --> 00:03:55,520
नजरों में जो अच्छा

55
00:03:55,520 --> 00:04:00,000
बुरा है वो सब कुछ उसका जो मूल कारण है वो ईश्वर ही है।

56
00:04:00,000 --> 00:04:04,080
ठीक है? तो हमारी दृष्टि में तो ये है। आपकी दृष्टि में आपके लोग यह कहते

57
00:04:04,080 --> 00:04:09,520
हैं कि ईश्वर ने जो है झूठ बोलने वालों को नहीं बनाया।

58
00:04:09,520 --> 00:04:14,000
झूठ बोलने वालों को ईश्वर ने नहीं बनाया। बुराई को ईश्वर ने नहीं बनाया।

59
00:04:14,000 --> 00:04:18,160
एक तो यह बात हो गई। यहां बाधित है। फिर दूसरी जगह

60
00:04:18,160 --> 00:04:22,640
वो अवतार नहीं ले सकता। वहां बाधित है। और तमाम सारी जगह अवतार

61
00:04:22,640 --> 00:04:26,880
ले सकता है। नहीं से ले सकता। इसको भी हम थोड़ा एक्सप्लेन कर दूंगा

62
00:04:26,880 --> 00:04:31,040
बाद में। आप एक्सप्लेन करिएगा। मैं अपनी चीजें बता दूं। आप एक्सप्लेन

63
00:04:31,040 --> 00:04:35,120
करिएगा। तो अब यहां बात आती है कि वो अवतार अवतार इसलिए

64
00:04:35,120 --> 00:04:39,120
नहीं लेता है। इसलिए नहीं लेता है कि जो हमारी

65
00:04:39,120 --> 00:04:43,280
पहली वाली बात है ना सर्वशक्तिमान वो किसी भी कारण से ना

66
00:04:43,280 --> 00:04:47,360
लेता हो। अगर यदि वह नहीं ले सकता है तो हमें यह क्लेम नहीं

67
00:04:47,360 --> 00:04:51,920
करना चाहिए कि वह सर्वशक्तिमान है। क्योंकि लोग सर्व

68
00:04:51,920 --> 00:04:56,160
ईश्वर को सर्वशक्तिमान समझ के ढूंढ रहे हैं, पूज रहे हैं।

69
00:04:56,160 --> 00:05:00,400
तो ऐसे में जब हमें जो वास्तव में सर्वशक्तिमान

70
00:05:00,400 --> 00:05:04,560
ईश्वर की जहां पर पूजा हो रही है उसके विरोध में अपनी पूजा को खड़ा करना है

71
00:05:04,560 --> 00:05:08,720
तो हमने वहां से शब्द तो ले लिया कि हम भी वैदिक है। हम भी सर्वशक्तिमान

72
00:05:08,720 --> 00:05:10,640
को पूज रहे हैं। हम भी जो है अनंत

73
00:05:10,640 --> 00:05:14,640
सामर्थ्यवान को पूज रहे हैं। वहां से शब्द तो ले लिया पर उस अमुक शब्द

74
00:05:14,640 --> 00:05:18,960
की व्याख्या अपनी दे दी तो ये धोखा है

75
00:05:18,960 --> 00:05:23,120
या तो आप उस शब्द को वो करिए सर्वशक्तिमान को आप अगर

76
00:05:23,120 --> 00:05:27,200
यह कहेंगे कि उसका कारण है वो नहीं लेता वो एक अलग चीज हो गई

77
00:05:27,200 --> 00:05:31,360
कारण किसी वजह से वो बाधित है। एक मिनट भाई साहब किसी वजह

78
00:05:31,360 --> 00:05:35,600
से वो बाधित है। किसी वजह से वो बाधित है। किसी वजह से वो अनंत

79
00:05:35,600 --> 00:05:39,680
नहीं है। किसी वजह से वो सर्वशक्तिमान नहीं है। वो वजह आपकी जायज है कि

80
00:05:39,680 --> 00:05:43,840
नहीं है वो हम बाद में देखेंगे। पहले आपको एक क्लेम छोड़ देना चाहिए कि वह अनंत

81
00:05:43,840 --> 00:05:48,320
सामर्थ्यवान है। वह सर्वशक्तिमान है। ठीक है? अब आप बताइए।

82
00:05:48,320 --> 00:05:51,040
जी।

83
00:05:51,040 --> 00:05:55,040
देखिए सर्व को समझने के लिए सर्व समझे तो

84
00:05:55,040 --> 00:05:59,040
अनंत। अनंत समझे तो एक दो तीन चार पांच

85
00:05:59,040 --> 00:06:03,280
करते हुए एक करोड़ दो करोड़ करते हुए अनंत तक तो पहुंच नहीं पाएंगे।

86
00:06:03,280 --> 00:06:07,280
तो आप जो कुछ भी बोल रहे हैं वो सर्व में आ जाएगा।

87
00:06:07,280 --> 00:06:11,360
और सर्व में मेरा सर्व तो मैं जो बोल रहा हूं

88
00:06:11,360 --> 00:06:15,360
मेरा मन जहां तक जा रहा है आप समझिए जैसे कि मेरा मन

89
00:06:15,360 --> 00:06:19,760
अगर अमेरिका के बारे में कुछ जानकारी है जा रहा है वहां तक

90
00:06:19,760 --> 00:06:23,760
तो मेरा संसार मेरा सर्व तो वहीं तक है

91
00:06:23,760 --> 00:06:27,840
समझ गए ना और अगर मैं वहां गया हूं तो उसके बारे में और भी

92
00:06:27,840 --> 00:06:31,840
ज्यादा जाएगा तो इस ब्रह्मांड में मेरा मन जहां तक जा

93
00:06:31,840 --> 00:06:36,720
रहा है मेरा स्वयं का सर्व जो है वही है

94
00:06:36,720 --> 00:06:41,040
अब वो आपका सर्व कुछ हो सकता है लेकिन मेरा सर्व

95
00:06:41,040 --> 00:06:45,120
और मेरा शक्तिमान वो शिव बाबा है।

96
00:06:45,120 --> 00:06:49,120
ब्रह्मा कुमारी में सब इस चीज को कितना समझते

97
00:06:49,120 --> 00:06:53,280
हैं और कौन मानते हैं और कितना मानते हैं वो अलग भी हो सकता है।

98
00:06:53,280 --> 00:06:57,760
लेकिन मैं अपना बता समझ भी पाया वो बता रहा हूं आपको।

99
00:06:57,760 --> 00:07:02,400
ठीक है। ठीक है। ठीक है। ठीक है। इसका मतलब आपने कहा कि

100
00:07:02,400 --> 00:07:06,160
मैं मैं अब आपकी बात समझ गया। आपकी सोच जहां तक

101
00:07:06,160 --> 00:07:10,640
जा रही है वहां तक के सारे काम वो कर सकता है।

102
00:07:10,640 --> 00:07:14,640
हां वो कर सकता है मेरे स्वयं से। ठीक है। ठीक है। ठीक

103
00:07:14,640 --> 00:07:18,720
है। ठीक है। सबसे पहली बात ये हो गई कि ये आपकी सोच के

104
00:07:18,720 --> 00:07:22,960
अनुसार ईश्वर सर्वशक्तिमान है। पहली बात तो ये हो गई। हां हां

105
00:07:22,960 --> 00:07:28,160
हो गई। ठीक। अब इसमें बात ये आती है सर्वशक्तिमान है। हां।

106
00:07:28,160 --> 00:07:32,640
अब इसमें बात यह आती है कि आपकी सोच अभी तक अमेरिका तक नहीं जैसे अमेरिका

107
00:07:32,640 --> 00:07:37,360
अमेरिका तक जा रही है उसके बाद आगे आप गए नहीं

108
00:07:37,360 --> 00:07:41,440
भाई साहब मैं आपके आपके बीच में इंटरप्ट नहीं कर रहा था अब आप इंटरप्ट ना करें मुझे

109
00:07:41,440 --> 00:07:45,440
बोलने दें आपने बोला ना पूरा ठीक है

110
00:07:45,440 --> 00:07:49,600
तो आप आपने कहा कि सर्व के अनुसार आप अमेरिका तक गए

111
00:07:49,600 --> 00:07:53,760
हैं तो इसलिए क्योंकि आपका ईश्वर तक अमेरिका तक जा रहा है तो इसलिए आपके

112
00:07:53,760 --> 00:07:59,120
लिए आपका ईश्वर सर्वशक्तिमान है पहली बात ठीक तो

113
00:07:59,120 --> 00:08:03,200
क्या कहते हैं इसमें सबसे पहली बात तो ये आ गई कि अगर

114
00:08:03,200 --> 00:08:07,360
आप अमेरिका तक जा सकते हैं तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप अमेरिका

115
00:08:07,360 --> 00:08:11,600
के आगे जा नहीं सकते। दिक्कत यहां है। जा नहीं सकते

116
00:08:11,600 --> 00:08:15,680
पे दिक्कत है। स सकता आप यह कहोगे हां अगर यह

117
00:08:15,680 --> 00:08:19,680
कहा जाएगा तो यह भी कर सकता है। यह कहा जाएगा तो यह भी कर सकता। यानी कि अमेरिका तक

118
00:08:19,680 --> 00:08:21,360
आपका जो मन जा रहा है।

119
00:08:21,360 --> 00:08:25,360
उसके आगे ये नहीं आपने मान लिया कि अमेरिका के आगे मेरा मन जा ही नहीं सकता।

120
00:08:25,360 --> 00:08:29,440
यह मान लिया क्या? यह मान लिया आपने? नहीं नहीं। नहीं नहीं

121
00:08:29,440 --> 00:08:34,400
अनंत में तो है नहीं। जो चीज बाहर होगी वहां

122
00:08:34,400 --> 00:08:38,480
एक मिनट। अनंत से बाहर कुछ कैसे हो सकता है? अनंत की जब कोई सीमा ही नहीं है। बाहर

123
00:08:38,480 --> 00:08:42,480
तो वो कहलाएगा ना जो सीमा हो कहीं

124
00:08:42,480 --> 00:08:46,560
बात है। एक मिनट भाई साहब एक मिनट।

125
00:08:46,560 --> 00:08:50,560
अब आपने एक तो अपने मन का उदाहरण दिया कि मेरा मन अमेर तक

126
00:08:50,560 --> 00:08:54,720
अमेरिका तक जा सकता है। मगर आपने अपने मन पर यह लगाम नहीं लगाई है कि

127
00:08:54,720 --> 00:08:58,720
मेरा मन अमेरिका के आगे तक नहीं जा सकता है। आपने यह कहा

128
00:08:58,720 --> 00:09:02,960
है कि अभी तक मेरा मन अमेरिका तक गया है। मगर यह लगाम नहीं लगाई कि अमेरिका

129
00:09:02,960 --> 00:09:07,360
के आगे नहीं जा सकता है। पहली बात। दूसरी बात ये आती है

130
00:09:07,360 --> 00:09:11,680
कि आपके ही मन के अनुसार वो अमेरिका तक नहीं गया था। ठीक है?

131
00:09:11,680 --> 00:09:16,000
मगर जब हम आए जब हम आए और हमने क्वेश्चन

132
00:09:16,000 --> 00:09:20,080
उठाया और जैसे ही वह क्वेश्चन आपने सुना आपका मन उसी

133
00:09:20,080 --> 00:09:24,240
समय अमेरिका से आगे जा चुका है। जैसे ही हमने वो क्वेश्चन आपने

134
00:09:24,240 --> 00:09:28,240
कभी उस क्वेश्चन पे ध्यान नहीं दिया कि ईश्वर अवतार ले सकता है

135
00:09:28,240 --> 00:09:32,400
कि नहीं ले सकता है। ठीक है? ईश्वर शरीर धारण कर सकता है कि नहीं

136
00:09:32,400 --> 00:09:36,560
कर सकता है। मगर जैसे ही हमने इस क्वेश्चन को आप उठाया और आपने

137
00:09:36,560 --> 00:09:40,640
सुन लिया समझ लिया हमारा क्वेश्चन। वैसे ही आपने अमेरिका को पार

138
00:09:40,640 --> 00:09:44,800
कर लिया। अब आपके मन में भी वो विचार है कि क्या मेरा ईश्वर

139
00:09:44,800 --> 00:09:48,960
फलाना काम कर सकता है कि नहीं जिस काम के बारे में हमें सुनने से पहले तक

140
00:09:48,960 --> 00:09:53,280
आपने नहीं सोचा था। समझ में आ रहा है? दो बातें।

141
00:09:53,280 --> 00:09:57,440
तीसरी बात तीसरी बात जब आपका ईश्वर आपके

142
00:09:57,440 --> 00:10:01,600
अनुसार ईश्वर है आपके अनुसार सर्वशक्तिमान है और आपको नहीं पता कि

143
00:10:01,600 --> 00:10:05,600
दूसरा अमेरिका तक गया है कि दूसरा इंग्लैंड तक गया है कि दूसरा चंद्रमा

144
00:10:05,600 --> 00:10:09,760
तक गया है आपको पता ही नहीं है तो आप दूसरे से क्यों कह रहे हो कि ईश्वर है इसकी पूजा

145
00:10:09,760 --> 00:10:13,840
कर चल के मेरे साथ क्यों कह रहे हो भाई पहले उससे

146
00:10:13,840 --> 00:10:18,000
पूछो कि तुम अमेरिका तक गए हो कि नहीं गए हो अमेरिका से आगे तो नहीं

147
00:10:18,000 --> 00:10:22,000
गए हो उससे पहले पूछो और फिर उसको कहो कि हां अगर तुम अमेरिका

148
00:10:22,000 --> 00:10:26,000
तक वाले व्यक्ति हो तो ईश्वर है और चलो मेरे साथ पूजा करो।

149
00:10:26,000 --> 00:10:30,240
इसको कहते हैं जो आपने कहा जो ईश्वर है ना वो

150
00:10:30,240 --> 00:10:34,880
सच्चिदानंद उसकी परिभाषा है देश कृत देशकृत

151
00:10:34,880 --> 00:10:38,960
कालकृत परिस्थिति कृत किसी भी प्रकार की

152
00:10:38,960 --> 00:10:43,440
बाधा से बाधित ना हो उसको कहते हैं ईश्वर। आपने

153
00:10:43,440 --> 00:10:47,440
यहां पे परिस्थिति डाल दी। आपने यहां पे परिस्थिति डाल दी कि भाई मेरे

154
00:10:47,440 --> 00:10:51,440
अनुसार वो ईश्वर है। तो आपके अनुसार वो ईश्वर है। आप रखो अपने ईश्वर को

155
00:10:51,440 --> 00:10:52,240
पूजो।

156
00:10:52,240 --> 00:10:56,880
फिर उसको सबका ईश्वर बनाकर क्यों चिपका रहे हो दुनिया को?

157
00:10:56,880 --> 00:11:00,880
और अगर चिपकाना भी है तो आप पहले जाकर के व्यक्ति से पूछिए

158
00:11:00,880 --> 00:11:04,880
कि तुम कहां तक गए हो? तुम अमेरिका से आगे तो नहीं चले गए कहीं।

159
00:11:04,880 --> 00:11:09,040
उस स्थिति से आगे तो नहीं चले गए जो स्थिति हमारी है। और यदि ऐसा

160
00:11:09,040 --> 00:11:13,040
है तो हमारा जो ईश्वर है वो तुम्हारा ईश्वर नहीं है। यह क्या हुआ? परिस्थिति कृत

161
00:11:13,040 --> 00:11:17,040
बाधा से बाधित। देश कृत बाधा से एक मिनट। देश कृत

162
00:11:17,040 --> 00:11:22,160
बाधा से बाधित। जी बोले।

163
00:11:22,160 --> 00:11:28,160
एक्चुअल में भाई जी आप जो कह रहे हैं ना

164
00:11:28,320 --> 00:11:32,480
सब कुछ जान लेने के बाद देखो पहले तो सब कुछ शुरू में तो पता

165
00:11:32,480 --> 00:11:36,640
नहीं था थोड़ा तो थोड़ा पता चला उसी को हमने मान लिया कि अरे मैंने

166
00:11:36,640 --> 00:11:40,640
सब जान लिया फिर उसके आगे पता चल गया देखिए

167
00:11:40,640 --> 00:11:44,720
सुनिए सुनिए सुनिए आगे तो सुनिए मेरी भी बात एक विषय है उसको मत हटाइए मैं

168
00:11:44,720 --> 00:11:48,880
मैं अभी सीधा मूल विषय आपको बता देता हूं आपको उत्तर किस बात पे देना है ये बताइए

169
00:11:48,880 --> 00:11:52,880
अब आपको मालूम चल गया ना कि ईश्वर अवतार लेने के विषय में भी क्वेश्चन हो सकता है।

170
00:11:52,880 --> 00:11:56,880
ले सकता है कि नहीं ले सकता? पहले आपने नहीं सोचा था। उसका समाधान मैं

171
00:11:56,880 --> 00:12:00,960
बताऊंगा ना। हां। तो अब अब बताइए कि अब आप अमेरिका से आगे

172
00:12:00,960 --> 00:12:06,240
सोच रहे हैं तो आपका ईश्वर अमेरिका से आगे है या नहीं है? अब बताइए।

173
00:12:06,240 --> 00:12:07,360
अनंत है हमारा

174
00:12:07,360 --> 00:12:11,840
ईश्वर। सर्वशक्तिमान है भाई। तो ले सकता है कि नहीं? अवतार

175
00:12:11,840 --> 00:12:15,840
ले सकता है कि नहीं?

176
00:12:15,840 --> 00:12:21,440
अवतार क्या वो अजन्मा है? हमें भी अजन्मा बना दिया है।

177
00:12:21,440 --> 00:12:25,520
अब हमें अज्मा बना दिया। आपको भी अजमा बना दिया। ये

178
00:12:25,520 --> 00:12:30,160
बताओ ये बताओ अजन्मा कौन नहीं है? आप अजन्मे नहीं हो।

179
00:12:30,160 --> 00:12:34,160
आप भी अजन्मे हैं। आप अजन अजन्मे है तो फिर यहां

180
00:12:34,160 --> 00:12:38,400
पर रूप धारण किया ना हमने अजन्मा होते हुए भी

181
00:12:38,400 --> 00:12:42,560
तो रूप रूप तो सब उसी के रूप है। सब उसी

182
00:12:42,560 --> 00:12:46,720
के रूप है। उसी के सब उसी के रूप है। अद्वैत हो गया। अब

183
00:12:46,720 --> 00:12:51,600
कुछ भी बोल दो। हां अद्वैत हो गया। गलत बात है

184
00:12:51,600 --> 00:12:55,920
कौन कहता है कौन कहता है बाबा खुद ही कहते हैं कि

185
00:12:55,920 --> 00:13:00,160
हम अद्वैत अद्वैत में ले जाने आए हैं सबको अद्वैत

186
00:13:00,160 --> 00:13:04,160
दो नहीं एक बनाने आए हैं और अच्छा ये

187
00:13:04,160 --> 00:13:08,240
भाव मैं ब्राह्मण परिवार से मैं खुद ही था नहीं

188
00:13:08,240 --> 00:13:12,320
वो वो सब बातें मत बताइए आप किस तरह से भटके हैं वो वो मत बताइए ब्राह्मण आप अपने

189
00:13:12,320 --> 00:13:16,480
व्यक्तिगत चीजों को वो मत दीजिए आप ये बताइए कि एक ही ईश्वर

190
00:13:16,480 --> 00:13:22,480
सभी समस्त रूपों में प्रकट हुआ ये मानते हैं आप

191
00:13:24,880 --> 00:13:28,880
एक ही है जहां एक अद्वैत हो गया ना फिर बोल रहे

192
00:13:28,880 --> 00:13:33,040
भाई साहब हां तो अद्वैत जब द्वैत

193
00:13:33,040 --> 00:13:37,120
में आएंगे तो कुछ भी तीन 13 करेंगे मतलब एक

194
00:13:37,120 --> 00:13:41,280
ही सत्ता एक ही एक ही सत्ता है जो समस्त रूपों में

195
00:13:41,280 --> 00:13:47,280
परिलक्षित हो रही है

196
00:13:48,320 --> 00:13:52,480
देखो ये उस स्थिति में चल के कहेंगे

197
00:13:52,480 --> 00:13:56,640
तो हां अगर उससे नीचे द्वैत में रह के देखना है

198
00:13:56,640 --> 00:14:00,720
हम दोनों ही द्वैत में है तब तो ना तब तो बाबा जो कह रहे हैं

199
00:14:00,720 --> 00:14:05,360
उसी को मानते चले क्योंकि मैं भी उसी को मानता हुआ

200
00:14:05,360 --> 00:14:10,720
ये समझ में आया बाबा ने अद्वैत की बात कहां कही है ये बताइए

201
00:14:10,720 --> 00:14:16,720
पूरी मुरली को जब सुनेंगे पूरे ज्ञान को सुनेंगे तो अद्वैत ही हो जाएगा

202
00:14:16,800 --> 00:14:21,120
अनुभव कोई एक कोई एक वीडियो दिखाइए अद्वैत

203
00:14:21,120 --> 00:14:23,520
वाला

204
00:14:23,520 --> 00:14:27,520
वो अच्छा आप बाबा के सेंटर पे जाते आते

205
00:14:27,520 --> 00:14:31,600
हैं किसी और पे वहां पूछिएगा वो जो अरे तो मैं पूछ चुका

206
00:14:31,600 --> 00:14:35,600
हूं ना एक मिनट एक मिनट भाई साहब मैं पूछ चुका

207
00:14:35,600 --> 00:14:39,600
हूं वो यहां से आगे नहीं जाते हैं कि एक ही परम तत्व ये वाली बात आज आप

208
00:14:39,600 --> 00:14:40,100
पहली बार

209
00:14:40,080 --> 00:14:44,400
आप बोल रहे हो दूसरी बात यह है अगर आप अद्वैत को मानते हो तो सिद्धांत की तो दिक्कत

210
00:14:44,400 --> 00:14:48,480
है नहीं। अब दिक्कत क्या आ गई कि सबसे बड़ी बात है आपने

211
00:14:48,480 --> 00:14:52,480
जो यह कहा कि वह रूप धारण नहीं कर सकता तो आपको मानना पड़ेगा वो

212
00:14:52,480 --> 00:14:56,800
रूप धारण कर सकता है।

213
00:14:56,800 --> 00:15:00,960
अरे एक ही है तो फिर रूप क्या सारे रूप ही एक है।

214
00:15:00,960 --> 00:15:05,280
तो ये कहना गलत फिर सत्य असत्य भी नहीं बचा ना।

215
00:15:05,280 --> 00:15:09,440
एक एक अद्वैत सत्य भी नहीं बचेगा ना। आप भाई साहब आप

216
00:15:09,440 --> 00:15:13,760
भाई साहब अद्वैती हो गए। अच्छी बात है। अब मैं यह पूछ रहा हूं। जब वो

217
00:15:13,760 --> 00:15:17,760
रूप धारण कर सकता है तो यह प्रश्न क्यों किया जाता है कि वह पर काया प्रवेश

218
00:15:17,760 --> 00:15:21,760
ही करेगा? यह प्रश्न क्यों किया जाता है? रूप

219
00:15:21,760 --> 00:15:25,680
धारण कर सकता है ना वो?

220
00:15:25,680 --> 00:15:29,680
तो रूप धारण क्या जब बात एक

221
00:15:29,680 --> 00:15:33,920
हो गया तो फिर तो सारे रूप वही उसी के हैं। भाई साहब क्या पूछ रहा हूं मैं?

222
00:15:33,920 --> 00:15:38,320
दो करते हैं तो फिर आपकी आपकी

223
00:15:38,320 --> 00:15:42,320
दीदियां क्या कहती है? पहले पता तो कर लो भैया। आपकी दीदी कहती

224
00:15:42,320 --> 00:15:47,120
है वो रूप धारण नहीं कर सकता। वो परकाया प्रवेश ही करता है।

225
00:15:47,120 --> 00:15:51,200
तो वो समझाने के लिए हमें भी हम भी कहते हैं। मैं भी यही तो आप

226
00:15:51,200 --> 00:15:55,200
आप मुझे प्रमाण दो ना कि कौन सी चीज को माना जाए, कौन सी को नहीं माना जाए। प्रमाण

227
00:15:55,200 --> 00:15:59,360
दो फिर उसके लिए आपकी चीजों का तो यहां पे

228
00:15:59,360 --> 00:16:03,760
आप को सुने साथ का कोर्स करें। देखिए सुनिए

229
00:16:03,760 --> 00:16:07,920
के लिए सुनिए सुनिए सुनिए सुनिए

230
00:16:07,920 --> 00:16:12,160
कि एक बात निश्चित हो गई कि ईश्वर अवतार

231
00:16:12,160 --> 00:16:17,040
ले सकता है और आप अद्वैत को ही मान गए ठीक है मान गए

232
00:16:17,040 --> 00:16:21,040
हो गया अंतिम अंतिम सत्य अद्वैत है

233
00:16:21,040 --> 00:16:25,120
अंतिम सत्य अंतिम सत्य अंतिम सत्य अद्वैत है ये आपने

234
00:16:25,120 --> 00:16:30,160
मान लिया हां बस उसके बाद

235
00:16:30,160 --> 00:16:34,160
एक एक मिनट भाई साहब उसके नीचे है कुछ भी सत्य नहीं है। अवतार

236
00:16:34,160 --> 00:16:38,400
अवतार ले सकता है वो

237
00:16:38,400 --> 00:16:42,560
अवतार ले सकता है वो लेता ही है समय-समय

238
00:16:42,560 --> 00:16:46,720
पे सब अवतार ही लेते हैं। उसी के रूप सब अवतार लेते हैं। बदल

239
00:16:46,720 --> 00:16:51,040
बदल बदल बदल वो वो परकाया प्रवेश जरूरी

240
00:16:51,040 --> 00:16:56,640
नहीं है वो परकाया प्रवेश ही करे।

241
00:16:56,640 --> 00:17:00,720
परकाया प्रवेश भी करते हैं और

242
00:17:00,720 --> 00:17:04,720
अवतार भी ले लेते हैं। मतलब जरूरी नहीं है ना कि परकाया प्रवेश

243
00:17:04,720 --> 00:17:08,720
करके ही ज्ञान दे। ये कह रहा हूं। डायरेक्ट खुद से भी दे

244
00:17:08,720 --> 00:17:12,720
सकते हैं।

245
00:17:12,720 --> 00:17:16,800
हमें तो ऐसे ही मिलता मिल रहा है। आप ही लोगों से मिल रहा है।

246
00:17:16,800 --> 00:17:21,920
मैं आपको क्या बताऊं? मैं यह कह रहा हूं कि आप

247
00:17:21,920 --> 00:17:25,920
जब ईश्वर रूप धारण कर सकता है तो वो जो है

248
00:17:25,920 --> 00:17:31,360
उसका मन कि वो परकाया प्रवेश करे या फिर वो खुद से ज्ञान दे। ठीक?

249
00:17:31,360 --> 00:17:35,440
ठीक है। ठीक। तो अब जो भगवान अब जो भगवान

250
00:17:35,440 --> 00:17:40,080
श्री कृष्ण ने भगवत गीता का ज्ञान दिया है। वहां पे उन्होंने कहा है कि यदा

251
00:17:40,080 --> 00:17:45,040
धर्मस गन भवती भारत अभत्तान धर्मस तदात्म सजाम।

252
00:17:45,040 --> 00:17:49,200
उन्होंने कहा मैं अपने रूप का सृजन करता हूं। उन्होंने यह नहीं कहा

253
00:17:49,200 --> 00:17:53,280
पर काया प्रवेश। ठीक है? तो आप यहां क्या मानते हैं?

254
00:17:53,280 --> 00:17:57,360
ईश्वर ने खुद खुद श्री कृष्ण के रूप में अवतरित होकर के ज्ञान

255
00:17:57,360 --> 00:18:01,440
दिया है या फिर उनके अंदर घुस के श्री कृष्ण अलग है।

256
00:18:01,440 --> 00:18:05,520
वो देवी देवता है और उनके अंदर घुस के ईश्वर ने वो दिया ज्ञान। क्या

257
00:18:05,520 --> 00:18:08,400
मानते हैं?

258
00:18:08,400 --> 00:18:12,560
मैं जब शुरू में तो यही मानता था कि पर काया प्रवेश करके

259
00:18:12,560 --> 00:18:16,880
ज्ञान रहा है। ब्रह्मा कुमारी क्या कहती है वो बताइए

260
00:18:16,880 --> 00:18:21,200
ब्रह्मा कुमारी के ज्ञान में बस वो बताइए

261
00:18:21,200 --> 00:18:25,440
शुरू के ज्ञान में तो मुझे ऐसे ही होता था बाद में तो

262
00:18:25,440 --> 00:18:27,920
मुझे अपना जो पर्सनल अनुभव हुआ वो

263
00:18:27,920 --> 00:18:32,000
भी बहुत लंबा नहीं थोड़े ही समय अनुभव की यहां पर

264
00:18:32,000 --> 00:18:36,080
कोई बात नहीं भाई साहब आप पूरी तरीके से ब्रह्मा कुमारी की सारी आईडियोलॉजी

265
00:18:36,080 --> 00:18:40,720
के विरुद्ध जा रहे हैं और यहां पर यही होता है अक्सर जब व्यक्ति

266
00:18:40,720 --> 00:18:44,880
परेशान होने लगता है जिसका खंभा उसने पकड़ रखा है तो वो उसके नाम

267
00:18:44,880 --> 00:18:48,880
पर वही आने लगता है जहां पर हम खड़े हुए हैं। चाहे वो

268
00:18:48,880 --> 00:18:52,960
आर्य समाजी हो, चाहे वो स्कनी हो, चाहे वो ब्रह्मपाली हो, चाहे वो

269
00:18:52,960 --> 00:18:58,000
ब्रह्मा कुमारी हो। आप वही कर रहे हैं। अपने सिद्धांतों को छोड़ के चले आ रहे हो।

270
00:18:58,000 --> 00:19:02,160
सिद्धांत देखिए मैंने पूछा है। भाई साहब मैंने

271
00:19:02,160 --> 00:19:06,240
आपसे ये पूछा है कि श्री कृष्ण ने श्री कृष्ण स्वयं

272
00:19:06,240 --> 00:19:12,240
भगवान थे या उनके अंदर भगवान ने घुस के ज्ञान दिया था? यह बताइए।

273
00:19:15,280 --> 00:19:20,240
उनके अंदर भगवान ने प्रवेश करके ज्ञान दिया था।

274
00:19:20,240 --> 00:19:24,480
लेकिन लोगों को बाद में ऐसा लगने लगा। एक एक मिनट

275
00:19:24,480 --> 00:19:28,480
भाई साहब एक मिनट मुझे बहुत ज्यादा एक्स्ट्रा बोलने की जरूरत

276
00:19:28,480 --> 00:19:32,560
ही नहीं। आपने कहा उनके अंदर भगवान ने घुस के ज्ञान दिया था। ये सवाल का जवाब हो गया। अब

277
00:19:32,560 --> 00:19:36,960
आप जब मैं उस पर कुछ एक्सप्लेनेशन मांगू तब आप एक्सप्लेनेशन दीजिए।

278
00:19:36,960 --> 00:19:41,520
जिस दिशा में मांगू उस दिशा में दीजिए। ठीक है?

279
00:19:41,520 --> 00:19:45,520
तो है क्या कि अब आपका जब यह मानना है कि भगवान

280
00:19:45,520 --> 00:19:49,520
अवतरित हो सकते हैं स्वयं से तो फिर आपका यहां पर यह क्यों मानना

281
00:19:49,520 --> 00:19:53,680
है कि नहीं वहां पर भगवान श्री कृष्ण नहीं थे बल्कि उनके अंदर भगवान ने घुस

282
00:19:53,680 --> 00:19:59,680
के वो दिया था ज्ञान ये क्या आधार है इसका

283
00:20:03,840 --> 00:20:08,160
देखिए बीच में जब हम लोग चलते रहे

284
00:20:08,160 --> 00:20:12,320
तो श्री कृष्ण को ही भगवान मान लिया लेकिन

285
00:20:12,320 --> 00:20:16,880
उसके पीछे की भाई साहब मैंने क्या कहा है मैंने क्या कहा है भाई साहब

286
00:20:16,880 --> 00:20:20,880
जब ईश्वर खुद अवतरित हो सकता है किसी रूप में

287
00:20:20,880 --> 00:20:25,040
तो आपका यह बात मानने का आधार क्या है कि वहां पर श्री कृष्ण ने ज्ञान नहीं दिया

288
00:20:25,040 --> 00:20:29,040
बल्कि वहां पर जो है उनके अंदर घुस के और जो है ईश्वर

289
00:20:29,040 --> 00:20:33,120
ने अलग से ईश्वर अलग है श्री कृष्ण अलग है इसका आधार क्या है

290
00:20:33,120 --> 00:20:37,760
अच्छा ये बताइए ये बताइए कि जैसे हम

291
00:20:37,760 --> 00:20:41,760
मैं बोल रहा हूं या मेरे अंदर की वो चेतना वो

292
00:20:41,760 --> 00:20:46,800
बोल रहा है क्या देखेंगे जो देखेंगे उस हिसाब से उसको अपना अलग कर लीजिए

293
00:20:46,800 --> 00:20:52,400
जो मानना है वो मान लीजिए शुरुआत समय

294
00:20:52,400 --> 00:20:56,960
इस समय मैं बोल रहा हूं या मेरी चेतना बोल रही है कौन बोल रहा है

295
00:20:56,960 --> 00:21:01,040
जैसे आप आप लोगों के हिसाब से ये बात आती है ना मैं

296
00:21:01,040 --> 00:21:05,440
आपसे पूछ रहा हूं भाई साहब मेरे पास मेरे पास व्यर्थ का समय नहीं है आप

297
00:21:05,440 --> 00:21:09,520
प्लीज आप जो है विषय पर रहिए मैं बोल रहा हूं या मेरी मेरी चेतना

298
00:21:09,520 --> 00:21:12,480
बोल रही है ये बताइए आप

299
00:21:12,480 --> 00:21:16,720
चेतना नहीं जैसे आप श्री कृष्ण के लिए कह रहे हो तो वहां मैंने

300
00:21:16,720 --> 00:21:21,040
अभी अभी आपने पूछा ना कि आपने पूछा ना सबके

301
00:21:21,040 --> 00:21:25,280
अंदर से परमात्मा ही बोल रहा है अद्वैत के अनुसार मगर श्री कृष्ण

302
00:21:25,280 --> 00:21:29,280
के अंदर से विशेष रूप से परमात्मा बोल रहा है अन्यों के अन्यों के रूप

303
00:21:29,280 --> 00:21:33,440
में वो जो है सामान्य जीव भाव से परमात्मा बोल रहा है। जीव दृष्टि से आत्मा दृष्टि

304
00:21:33,440 --> 00:21:37,440
से परमात्मा बोल रहा है। और यहां पर सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर की

305
00:21:37,440 --> 00:21:41,680
दृष्टि से परमात्मा बोल रहा है श्री कृष्ण के अंदर से तो यह आप किस

306
00:21:41,680 --> 00:21:46,320
आधार पर मानते हैं यह बताइए मतलब कि

307
00:21:46,320 --> 00:21:50,400
सबके अंदर परमात्मा ही है बोलने वाला ठीक है मगर यहां मेरे

308
00:21:50,400 --> 00:21:54,640
अंदर से वो जीव भाव से बोल रहा है जीव भाव और आपका

309
00:21:54,640 --> 00:21:58,640
कहना है कि जब श्री कृष्ण के अंदर से परमात्मा ने बोला

310
00:21:58,640 --> 00:22:02,960
तो वो जीव भाव से नहीं बोला ईश्वरीय भाव से बोला तो यानी

311
00:22:02,960 --> 00:22:07,040
कि वहां पर वो जो आपका ये मानना है कि वो भी एक जीव

312
00:22:07,040 --> 00:22:07,600
जैसे ही

313
00:22:07,600 --> 00:22:11,600
थे श्री कृष्ण भगवान और उसके अंदर जब परमात्मा ने बोला तो वो

314
00:22:11,600 --> 00:22:15,840
जो है जीव भाव से अ ईश्वर

315
00:22:15,840 --> 00:22:19,760
भाव से बोला इसका आधार क्या है

316
00:22:19,760 --> 00:22:23,840
ये समझाने के लिए समझने के लिए दो तीन चार

317
00:22:23,840 --> 00:22:28,160
कर दिया जाता है फिर बाद में जब आदमी चलता है पूछ रहा हूं

318
00:22:28,160 --> 00:22:32,880
मैं पूछ रहा हूं मैं पूछ रहा हूं द्वैत में आ गए द्वैत में आ गए

319
00:22:32,880 --> 00:22:36,960
द्वैत में आ गए अब अब ईश्वर अलग है और हम

320
00:22:36,960 --> 00:22:41,120
लोग अलग हैं। आ गए हो गए। अब जो ईश्वर अलग

321
00:22:41,120 --> 00:22:45,600
है आपका कहना है कि वो श्री कृष्ण भगवान के अंदर घुसा ईश्वर

322
00:22:45,600 --> 00:22:50,640
और बोला श्री कृष्ण के अंदर घुस के अच्छा

323
00:22:50,640 --> 00:22:55,440
आपकी पिक्चर भाई साहब चिपक रही है। मैंने कहा

324
00:22:55,440 --> 00:22:59,520
कि ईश्वर ईश्वर अलग है और जीव अलग है। द्वैत में आ गए हम लोग।

325
00:22:59,520 --> 00:23:03,520
जीव अलग है, ईश्वर अलग है। ठीक है? अब श्री कृष्ण भगवान के

326
00:23:03,520 --> 00:23:07,520
श्री कृष्ण जो आपके अनुसार देवता हैं, उनके अंदर

327
00:23:07,520 --> 00:23:11,520
भगवान ईश्वर जो है वो घुसे। द्वैत में ही कह रहा हूं। द्वैत की

328
00:23:11,520 --> 00:23:17,440
बात कर रहा हूं अभी। उनके अंदर भगवान घुसे और उन्होंने बोला

329
00:23:17,440 --> 00:23:21,600
बल्कि ऐसा नहीं था कि स्वयं ईश्वर ने ही श्री कृष्ण का अवतार रूप लिया

330
00:23:21,600 --> 00:23:25,680
हो। ऐसा नहीं था। ठीक है? ले सकता है। पर ऐसा

331
00:23:25,680 --> 00:23:29,680
किया नहीं उसने। वो ईश्वर अलग था और ईश्वर उनके अंदर

332
00:23:29,680 --> 00:23:33,760
घुसा और उसने जो है बोला तो

333
00:23:33,760 --> 00:23:38,000
इसका आधार क्या है आपके पास क्यों मानते हैं ऐसा कि श्री

334
00:23:38,000 --> 00:23:42,720
कृष्ण भगवान स्वयं भगवान नहीं थे भगवान ने अपना एक रूप नहीं बनाया था बल्कि

335
00:23:42,720 --> 00:23:46,800
भगवान ने श्री कृष्ण भगवान के अंदर घुस के बोला था ये क्यों मानते हैं

336
00:23:46,800 --> 00:23:52,800
अब द्वैत द्वैत के अनुसार बात कर रहा हूं

337
00:23:55,840 --> 00:24:00,000
क्यों मानते हैं क्योंकि देखिए कहानी रिपीट होती है। हर ड्रामा

338
00:24:00,000 --> 00:24:04,160
रिपीट होता है। तो रिपीट यानी

339
00:24:04,160 --> 00:24:08,160
यानी कि यानी कि शब्द प्रमाण जो आपको शब्द

340
00:24:08,160 --> 00:24:13,520
मिल रहा है वो प्रमाण है। शब्द प्रमाण अच्छा

341
00:24:13,520 --> 00:24:18,560
हो रहा है ना ये वही चीज अब चल रही है। ये आपका शब्द

342
00:24:18,560 --> 00:24:22,560
भाई साहब मैं समझ गया आपकी बात। पता नहीं क्यों आप लोगों को एक वो रहता

343
00:24:22,560 --> 00:24:28,560
है कि मैं एक लेक्चर दे दूं साथ में।

344
00:24:32,000 --> 00:24:36,000
मैं समझ गया हूं भाई साहब आपकी बात मैं समझ गया हूं आपको एक लेक्चर

345
00:24:36,000 --> 00:24:41,280
लेके साथ में चलने की क्या आवश्यकता है हां मैं जहां पे मैं

346
00:24:41,280 --> 00:24:45,360
आपकी बात को नहीं समझ पा रहा होगा तार्किक नहीं लग रही होगी फिर मैं आपको पूछूंगा कि ये

347
00:24:45,360 --> 00:24:50,080
कैसे फिर आप बोलिए

348
00:24:50,080 --> 00:24:56,080
हां मैं ये कह रहा हूं मैं यह कह रहा हूं कि

349
00:24:56,960 --> 00:25:01,200
आपका कहना है क्योंकि हमें शब्द प्रमाण ने बताया कि

350
00:25:01,200 --> 00:25:05,120
श्री कृष्ण

351
00:25:05,120 --> 00:25:09,200
के रूप के शरीर में परमात्मा ने प्रवेश किया था। इसलिए हम मानते

352
00:25:09,200 --> 00:25:14,080
हैं कि परमात्मा ने परमात्मा ने प्रवेश किया था। ठीक है?

353
00:25:14,080 --> 00:25:16,640
हां।

354
00:25:16,640 --> 00:25:20,000
एक मिनट।

355
00:25:20,000 --> 00:25:24,160
तो इसमें आपकी मुरलियां ही प्रमाण

356
00:25:24,160 --> 00:25:26,560
है।

357
00:25:26,560 --> 00:25:32,000
जी कि गीता भी प्रमाण है।

358
00:25:32,000 --> 00:25:36,160
नहीं मुरली ही बाबा की मुरली ही प्रमाण है। गीता प्रमाण

359
00:25:36,160 --> 00:25:40,720
नहीं है। नहीं अच्छा

360
00:25:40,720 --> 00:25:44,960
ठीक है। तो इसका मतलब ये हुआ कि हां

361
00:25:44,960 --> 00:25:48,960
हां बताइए बताइए। हां सही इसका मतलब ये हुआ

362
00:25:48,960 --> 00:25:53,040
कि आपका लेते रहते हैं। नहीं

363
00:25:53,040 --> 00:25:57,120
उदाहरण लेना प्रमाण मानना नहीं होता है। उदाहरण तो आप जो है आई एस आई एस का

364
00:25:57,120 --> 00:26:01,280
ले सकते हो। निठारी का ले सकते हो उदाहरण तो प्रमाण वो

365
00:26:01,280 --> 00:26:05,600
होता है जिसके जिसके एक अक्षर को भी हम मना ना करें वो प्रमाण

366
00:26:05,600 --> 00:26:09,680
है हमारे लिए। समझ गए? और यदि

367
00:26:09,680 --> 00:26:14,080
हम किसी और के आधार पर उसके अक्षरों में हम वो कर रहे हैं

368
00:26:14,080 --> 00:26:18,240
वो काउंटर दोष देख रहे हैं तो इसका मतलब वो हमारे

369
00:26:18,240 --> 00:26:22,240
लिए प्रमाण नहीं है। प्रमाण हमारा वो है पीछे वाला। ठीक

370
00:26:22,240 --> 00:26:26,480
है। जी तो इसका मतलब भगवत गीता वेद आदि

371
00:26:26,480 --> 00:26:32,480
शास्त्र ब्रह्मा कुमारी के लिए प्रमाण नहीं है।

372
00:26:35,680 --> 00:26:40,080
मतलब अपमान या अस्वीकार जैसी कोई बात नहीं। चीजें तो

373
00:26:40,080 --> 00:26:44,240
वहां भी दिखती है वो चीजें। अरे भैया मैं कह रहा हूं

374
00:26:44,240 --> 00:26:48,240
आप मैं कह रहा हूं मैं कह रहा हूं एक मनुष्य और कुत्ते में भी समानता

375
00:26:48,240 --> 00:26:52,320
होती है। जी जी बिलकुल मगर इसका मतलब ये नहीं है कि हम कुत्ते

376
00:26:52,320 --> 00:26:58,320
को अपना प्रमाण मानते हैं।

377
00:26:58,720 --> 00:27:02,720
तो प्रमाण मान आप देखिए देखिए सनातनी कौन है? इसको

378
00:27:02,720 --> 00:27:06,800
समझ लीजिए। सनातनी कौन है? जो सनातन धर्म शास्त्रों में निष्ठा

379
00:27:06,800 --> 00:27:11,280
रखता है। सनातन धर्म शास्त्र सनातन वैदिक आर्य हिंदू वैदिक

380
00:27:11,280 --> 00:27:15,520
तो आपके लिए वेद प्रमाण नहीं है। आपके लिए गीता प्रमाण नहीं है।

381
00:27:15,520 --> 00:27:19,520
सनातन धर्म शास्त्र आपके लिए प्रमाण नहीं है। मैं ये पूछ रहा हूं अभी आपसे

382
00:27:19,520 --> 00:27:24,160
है क्या? नहीं प्रमाण नहीं है। अभी तो अभी तो मेरे लिए पर्सनली

383
00:27:24,160 --> 00:27:28,720
ब्रह्मा कुमारी भाई साहब आप मुझे ब्रह्मा

384
00:27:28,720 --> 00:27:32,960
ब्रह्मा ब्रह्मा कुमारी की बात करिए। आप पर्सनली वाली बात मत बोलिए।

385
00:27:32,960 --> 00:27:36,960
ब्रह्मा कुमारी का क्या है मानना अपना अनुभव अपना अनुभव

386
00:27:36,960 --> 00:27:41,040
अपना अनुभव से जब मैं जब मैं जब मैं जब मैं आपसे

387
00:27:41,040 --> 00:27:45,040
पूछूं कि आपका अनुभव बताइए पर्सनल तब बताइए अभी हम ब्रह्मा कुमारी का

388
00:27:45,040 --> 00:27:49,280
पक्ष जानना चाह रहे हैं ब्रह्मा कुमारी का पक्ष क्या है और ब्रह्मा

389
00:27:49,280 --> 00:27:50,880
कुमारी को साथ में

390
00:27:50,880 --> 00:27:55,600
लेकर के यदि आपका अनुभव है तो वो बताइए अलग से नहीं ब्रह्मा कुमारी

391
00:27:55,600 --> 00:27:59,040
ब्रह्मा कुमारी का बताइए आप

392
00:27:59,040 --> 00:28:03,280
हां तो वो वो प्रमाण क्या मैं तो उतना आपको कहे

393
00:28:03,280 --> 00:28:07,360
पढ़ा जाना समझा ही नहीं था। मैं तो श्रीमद् भगवत गीता को एक दो

394
00:28:07,360 --> 00:28:11,440
बार पढ़ा था। आपने पढ़ाई मैंने प्रश्न ये मैंने प्रश्न

395
00:28:11,440 --> 00:28:15,680
ये पूछा है वेद धर्म सनातन धर्म के अन्य शास्त्र

396
00:28:15,680 --> 00:28:20,000
स्मृति ग्रंथ इत्यादि और गीता रामायण ये सब ब्रह्मा

397
00:28:20,000 --> 00:28:26,000
कुमारी वालों के लिए प्रमाण है या नहीं?

398
00:28:26,000 --> 00:28:30,000
आखिर तक जाते जाते नहीं। अगर शुरू में कोई मान भी रहा

399
00:28:30,000 --> 00:28:34,320
होगा तो आखरी तक जाते नहीं और बाबा तो भाई साहब

400
00:28:34,320 --> 00:28:38,560
शुरू में मानी जा सकती है कोई भी चीज शुरू में मानी जा सकती है

401
00:28:38,560 --> 00:28:44,080
कुत्ते के भी कुछ आचरण है जो माने जा सकते हैं कि हां ये हमारे जैसे ही है

402
00:28:44,080 --> 00:28:48,240
मगर आखरी तक जातेजाते हम उससे पृथक हो जाते हैं तो वो जो

403
00:28:48,240 --> 00:28:52,240
आखरी वाली बात है उसके जो आखरी वाली बात है उसके आधार पे तय

404
00:28:52,240 --> 00:28:56,320
होता है कि हम उससे अलग है या नहीं है हम उसको मानते हैं कि नहीं मानते हैं तो

405
00:28:56,320 --> 00:29:00,560
वो कंक्लूजन बताइए गीता वेद रामायण सनातन धर्म शास्त्र स्मृति

406
00:29:00,560 --> 00:29:05,840
ग्रंथ इत्यादि ब्रह्मा कुमारी वालों के लिए प्रमाण है या नहीं

407
00:29:05,840 --> 00:29:10,000
नहीं है नहीं है हां नहीं

408
00:29:10,000 --> 00:29:14,080
अच्छा ठीक है ठीक है अब एक बात हो गई आप अद्वैत को मानते हैं दूसरी बात

409
00:29:14,080 --> 00:29:18,720
हो गई कि ईश्वर अवतरित हो सकता है परंतु श्री कृष्ण के रूप में जो है

410
00:29:18,720 --> 00:29:22,720
ईश्वर ने घुस करके बोला था उनके शरीर में और तीसरी

411
00:29:22,720 --> 00:29:26,720
चौथी बात आ गई कि जो ब्रह्मा कुमारी है उसके लिए

412
00:29:26,720 --> 00:29:31,200
यह सारे हिंदू कान खोल के सुन ले जो कहते हैं ना

413
00:29:31,200 --> 00:29:35,280
हिंदू हिंदू हिंदू हिंदू सनातन वैदिक आर

414
00:29:35,280 --> 00:29:39,520
हिंदू है ये ब्रह्मा कुमारी वाले क्लेम करते हैं ना तो वेद को मानते हैं ना गीता

415
00:29:39,520 --> 00:29:41,120
को मानते हैं ना रामायण को मानते हैं ना

416
00:29:41,120 --> 00:29:46,560
अन्य स्मृति ग्रंथों को मानते हैं ये मैं हिंदुओं से कह रहा हूं चलिए

417
00:29:46,560 --> 00:29:52,560
ठीक है जय श्री राम सभी को

418
00:29:54,080 --> 00:29:58,080
ठीक है।
