1
00:00:01,960 --> 00:00:06,960
[घंटी की आवाज़] मेरा नाम सरिता शर्मा है और मैं एक टीचर हूं।

2
00:00:06,960 --> 00:00:10,960
मेरी इकलौती बेटी है। सिंगल पेरेंट हूं मैं। बेटी

3
00:00:10,960 --> 00:00:14,960
मुझसे बहुत ज्यादा जुड़ी हुई थी बचपन से ही। मगर मुझे छोड़ के वो एक दिन भी नहीं

4
00:00:14,960 --> 00:00:19,280
रह सकती थी। एक दिन क्या एक टाइम भी नहीं रह सकती थी। लेकिन उसका

5
00:00:19,280 --> 00:00:23,680
आध्यात्मिकता में थोड़ा सा उसकी रुचि थी और बचपन

6
00:00:23,680 --> 00:00:28,240
से ही उसके सवाल ऐसे थे कि कैसे मतलब हम कहां से आए हैं? मरने

7
00:00:28,240 --> 00:00:32,320
के बाद कहां जाएंगे? मरना क्या होता है? ये सारी चीजें वो पूछते रहते थे बचपन से

8
00:00:32,320 --> 00:00:36,480
ही। कुछ सवालों के जवाब मेरे पास भी नहीं थे क्योंकि हमने

9
00:00:36,480 --> 00:00:40,640
भी इतना ज्यादा आध्यात्मिकता में इतना डीप इन्वॉल्व हुए नहीं। बस इतना

10
00:00:40,640 --> 00:00:44,640
जानते थे कि भगवान है और हम अच्छा काम करेंगे तो सब कुछ सही होगा।

11
00:00:44,640 --> 00:00:48,960
बस इतना ज्यादा हम डीपली कभी गए नहीं। तो उसके सवाल

12
00:00:48,960 --> 00:00:52,960
सवालों के जवाब मैं दे नहीं पाती थी। बाकी अच्छी खासी लाइफ

13
00:00:52,960 --> 00:00:57,360
हमारी चल रही थी। मैं जब से सिंगल पेरेंट हुई हूं। वो जब 5 साल की थी 2013

14
00:00:57,360 --> 00:01:01,520
में तब मेरा डिवोर्स हो गया था। उसके बाद से मेरा स्ट्रगल चालू हुआ अपनी

15
00:01:01,520 --> 00:01:05,600
जॉब को लेके एक अच्छी लाइफ जीने को लेके तो बेटी को

16
00:01:05,600 --> 00:01:09,760
साथ में लेके ही मैंने जॉब की तैयारी की और मेरा गवर्नमेंट जॉब लगा।

17
00:01:09,760 --> 00:01:13,840
फिर उसके बाद से हमारी लाइफ थोड़ी सी सुधरने लगी कि हम

18
00:01:13,840 --> 00:01:17,040
अच्छी जिंदगी जिएंगे। अब इसी बीच में हमारे

19
00:01:17,040 --> 00:01:22,400
परिवार में जो मेरे ताऊ जी की लड़कियां हैं वो ब्रह्मकुमारी को फॉलो करती थी पहले।

20
00:01:22,400 --> 00:01:26,480
अच्छा ब्रह्म कुमारी को फॉलो करते करते उनको कहीं ना कहीं थोड़ी सी संतुष्टि

21
00:01:26,480 --> 00:01:30,800
हुई कि वो एक भगवान का नशा उनको होने लगा कि दुखों

22
00:01:30,800 --> 00:01:34,880
से वो बाहर आ रहे हैं या फिर चीजें सुधर रही है उनकी लाइफ में

23
00:01:34,880 --> 00:01:38,960
वो उतना डीप जानकारी तो मुझे है नहीं लेकिन धीरे-धीरे पता नहीं वो कब

24
00:01:38,960 --> 00:01:42,960
लोग वो लोग कब आध्यात्मिक विश्वविद्यालय से जुड़ गए फिर वहां

25
00:01:42,960 --> 00:01:47,280
वीरेंद्र देव दीक्षित की आध्यात्मिक विश्वविद्यालय से जुड़े या ब्रह्माकुमारी

26
00:01:47,280 --> 00:01:51,920
से जुड़े पहले ब्रह्मकुमारी से जुड़े थे वो फिर उसके बाद

27
00:01:51,920 --> 00:01:55,920
कब उनका डायवर्शन हुआ इस तरफ आध्यात्मिक विश्वविद्यालय की तरफ यह मुझे

28
00:01:55,920 --> 00:01:59,920
उसकी जानकारी नहीं है। मैंने कभी उनकी तरफ इतना ध्यान दिया नहीं। बाकी

29
00:01:59,920 --> 00:02:04,080
वो हमारे घर आना जाना उनका तो लगा ही रहता था। हम एक ही घर में पले बड़े हैं।

30
00:02:04,080 --> 00:02:08,400
तो कोई भी त्यौहार पर वगैरह मिलते थे। तो बस वह इसी

31
00:02:08,400 --> 00:02:12,800
के बारे में बताते रहते थे कि यह दुनिया खत्म होने वाली है। आपको आध्यात्मिकता

32
00:02:12,800 --> 00:02:17,680
में आना है। इसका अगर आप ज्ञान लेंगे तो आप सतयुग

33
00:02:17,680 --> 00:02:21,680
में जाएंगे और जो लोग इसका ज्ञान लेंगे वही बस सतयुग

34
00:02:21,680 --> 00:02:25,760
में जाएंगे। बाकी सारे लोग बर्फ में दब के मर जाएंगे। कलयुग

35
00:02:25,760 --> 00:02:29,840
का अंत होने वाला है। अब ज्यादा समय नहीं बचा है हमारे पास। तो

36
00:02:29,840 --> 00:02:32,080
ऐसे करते-करते वो सुनाते रहते थे। बस

37
00:02:32,080 --> 00:02:36,240
अब घर वाले हैं करके हम उनकी बात का मान रखने के लिए उनके पास बैठ जाते थे

38
00:02:36,240 --> 00:02:40,400
सुन लेते थे कभी-कभी और बेटी को भी वो सुनाना

39
00:02:40,400 --> 00:02:44,400
चालू किए तो मुझे लगा कि चलो ठीक है कहीं ना कहीं उसको सवालों के जवाब

40
00:02:44,400 --> 00:02:48,480
मिल रहे हैं कुछ भी वो सवाल कर रही है तो ये कुछ ना कुछ एक्सप्लेनेशन उसका देती थी अब सही

41
00:02:48,480 --> 00:02:52,560
है नहीं है मैंने इतना ध्यान दिया नहीं और इसको कभी लिया

42
00:02:52,560 --> 00:02:56,880
भी नहीं कि ऐसा कुछ इतना इतनी दूर तक बात जा सकती है तो

43
00:02:56,880 --> 00:03:01,200
धीरे-धीरे मेरी बेटी उनके साथ इनवॉल्व होने लग गई और उसको समझ में आ रहा था कि

44
00:03:01,200 --> 00:03:05,200
अह मतलब ज्ञान उनका सही है ऐसे समझ में आ रहा

45
00:03:05,200 --> 00:03:09,200
था और ज्यादा टाइम उनके साथ बिताने लग गई और

46
00:03:09,200 --> 00:03:13,280
मिलते तब तो ठीक था उसके बाद फोन में भी वो उसके साथ उनके साथ ही बात

47
00:03:13,280 --> 00:03:17,440
करती थी और फिर ऑनलाइन क्लासेस अटेंड करना ये सारी चीजें करने लगी और

48
00:03:17,440 --> 00:03:21,680
सेंटर पर जाने की कोशिश करना बार-बार मुझसे रिक्वेस्ट करना कि वहां जाना

49
00:03:21,680 --> 00:03:25,840
है चलते हैं ऐसे वैसे तो मतलब ये जो आपके

50
00:03:25,840 --> 00:03:30,000
जो आपके रिलेशन में जो जो थी पहले से बड़ी

51
00:03:30,000 --> 00:03:34,720
मातृशक्ति थी मतलब वो मैच्योर है ना तो

52
00:03:34,720 --> 00:03:38,800
उनके साथ उनके उनके साथ के कारण यह आध्यात्मिक विश्वविद्यालय से

53
00:03:38,800 --> 00:03:42,800
जुड़ी और आध्यात्मिक विश्वविद्यालय को उस समय ऑपरेट कौन कर रहा

54
00:03:42,800 --> 00:03:46,800
था उस समय तो वीरेंद्र देव दीक्षित की ही संस्था चलती

55
00:03:46,800 --> 00:03:47,440
थी और

56
00:03:47,440 --> 00:03:51,520
ये लोग उन्हीं से जुड़े थे उन्हीं की क्लासेस अटेंड करते थे उन्हीं के सेंटर्स पर जाते

57
00:03:51,520 --> 00:03:55,520
थे आपकी बिटिया मतलब वीरेंद्र देव दीक्षित से वीरेंद्र देव दीक्षित से आपकी

58
00:03:55,520 --> 00:03:59,760
बिटिया मिल चुकी है नहीं नहीं नहीं वो तब तक जब

59
00:03:59,760 --> 00:04:04,000
तक मेरी मेरी बिटियां इस इन लोगों से जुड़ी थी तब तक उन

60
00:04:04,000 --> 00:04:08,080
वो मतलब छोड़ के जा चुके थे मतलब भाग चुके थे वो उन पर केसेस

61
00:04:08,080 --> 00:04:12,080
भी हो चुके थे और मेरी दीदी लोग वो बोलती थी कि इन पर सारे झूठे

62
00:04:12,080 --> 00:04:16,480
केसेस हुए हैं। ब्रह्मकुमारी वालों ने केस किया है इन पर मीडिया

63
00:04:16,480 --> 00:04:20,480
वालों को पैसे देके तो मैंने कभी उस पर इतना गंभीरता से उसको लिया नहीं और ध्यान भी

64
00:04:20,480 --> 00:04:24,480
नहीं दिया क्या चल रहा है। चलो ठीक है इनकी आस्था है या फॉलो कर रहे हैं।

65
00:04:24,480 --> 00:04:28,720
इससे हमको कुछ नुकसान नहीं होना है। तो मैंने उनके बातों का विरोध भी नहीं किया। कोई उस उनसे

66
00:04:28,720 --> 00:04:32,720
आर्ग्यू भी नहीं किया। छोड़ दिया था उस बात को। फिर

67
00:04:32,720 --> 00:04:36,960
बेटी उनके साथ जाती थी कभी सेंटर पर तो मैं उतना मन

68
00:04:36,960 --> 00:04:41,760
से तो नहीं भेजती थी लेकिन चलो कोई गलत काम नहीं कर रही है।

69
00:04:41,760 --> 00:04:45,840
धार्मिक काम ही है। भगवत गीता के श्लोक ही ये पढ़ते हैं और उसी का

70
00:04:45,840 --> 00:04:50,000
विश्लेषण करते हैं। ये सारी चीजें मुझे पता थी। तो थोड़ा

71
00:04:50,000 --> 00:04:54,000
सा जिद करके मुझे भी चलने पर मजबूर करती थी। तो मैंने कहा चलो मतलब अकेले को

72
00:04:54,000 --> 00:04:58,480
ना भेजूं। क्या है मैं भी देख लेती हूं। मेरी बहन जब आपकी

73
00:04:58,480 --> 00:05:02,720
जब आपकी बिटिया गई है मतलब आध्यात्मिक विश्वविद्यालय

74
00:05:02,720 --> 00:05:06,720
तब तक वीरेंद्र देव दीक्षित भाग चुके हैं। जी है ना उनप

75
00:05:06,720 --> 00:05:10,800
केसेस हो चुके हैं तो वो अपना छोड़ के भाग चुके हैं। तो तब वहां लीडिंग

76
00:05:10,800 --> 00:05:14,880
में कौन था जब वो भाग चुके हैं तब जब आपकी बिटिया उनके ही अनुयाई

77
00:05:14,880 --> 00:05:18,960
थे जो फॉलो कर रहे थे। उनकी संस्था तो चल ही रही थी। उस पर कोई रोक नहीं

78
00:05:18,960 --> 00:05:23,280
हुआ था। स्पेसिफिक स्पेसिफिक नाम वगैरह कुछ नहीं है। उतनी

79
00:05:23,280 --> 00:05:27,360
जानकारी मुझे नहीं थी उसके बारे में। लेकिन वहां पर

80
00:05:27,360 --> 00:05:32,320
जो हमारे लोकल एरिया में जो सेंटर चलता था वहां पर दीदी

81
00:05:32,320 --> 00:05:36,400
लोगों ने कहा था कि आप जाओ वहां पर तो मैं बेटी को ले मेरी भी

82
00:05:36,400 --> 00:05:40,400
स्कूल की छुट्टियां ही चल रही थी तो मैं लेके गई थी बेटी को कि क्या है समझे

83
00:05:40,400 --> 00:05:44,560
तो सही करके अब वो लोग इतना ज्यादा जोर दे रहे हैं कि ज्ञान सुनो तो आपको

84
00:05:44,560 --> 00:05:48,560
चीजें समझ में आएगी तो देख लेते हैं इसमें कोई नुकसान नहीं है तो मैं गई थी उनका

85
00:05:48,560 --> 00:05:52,560
कोर्स सुनने चारप दिन तक तो उसमें उन्होंने मेरा भी नाम जोड़ दिया कि मैं

86
00:05:52,560 --> 00:05:56,800
भी जाती थी जबकि उनके जोर देने पर मैं जाती जाती थी और मेरी मां को भी उन्होंने

87
00:05:56,800 --> 00:06:01,120
ही जोर दिया कि आप यह फॉलो करो आप सुबह मतलब अमृतवेला योग लगाओ

88
00:06:01,120 --> 00:06:05,600
ऐसे यह सारी चीजें उनके जोर देने पर ही कभी मेरी मां भी कर लेती थी या फिर

89
00:06:05,600 --> 00:06:09,600
ये सारी चीजें तो नहीं की हूं मैं बस हफ्ता भर वो वहां पर बेटी के साथ गई

90
00:06:09,600 --> 00:06:14,400
थी और बहुत सारी उनके उनकी बातें ऐसी थी जो समझ में नहीं आ रही थी मुझे

91
00:06:14,400 --> 00:06:17,760
और मैं सवाल करती थी तो वो ऐसे जवाब देते थे जिसका

92
00:06:17,760 --> 00:06:21,920
कोई कोई लॉजिक ही नहीं बनता है तो मैंने उतना ध्यान

93
00:06:21,920 --> 00:06:26,240
दिया नहीं उसके बाद फिर मेरी भांजी भी मेरे पीछे पड़ी कि आप और सुनो

94
00:06:26,240 --> 00:06:30,880
डीप ज्ञान सुनो दुनिया खत्म होने वाली है टाइम नहीं है आपके पास तो जबरदस्ती

95
00:06:30,880 --> 00:06:35,040
ऑनलाइन क्लास लेना सुनाना सारी चीजें वो भी कर रही थी अब मेरी

96
00:06:35,040 --> 00:06:39,200
बेटी बहुत ज्यादा उसमें इन्वॉल्व हो रही थी ये मुझे समझ में आ रहा था लेकिन मुझे कोई

97
00:06:39,200 --> 00:06:43,280
कारण नहीं मिल रहा था कि मैं उस पर मतलब उसको रोक-टोक करूं टाइम है कोरोना का

98
00:06:43,280 --> 00:06:47,440
टाइम चल रहा है पढ़ाईवढ़ाई भी उतनी ज्यादा नहीं हो रही है तो ठीक है कुछ तो अच्छा ही ज्ञान

99
00:06:47,440 --> 00:06:53,440
सीख रही है भगवत गीता के श्लोकों की बात करते हैं ये यही मैं सोच सकती

100
00:06:54,080 --> 00:06:58,080
धीरे-धीरे इनवॉल्व होते होते इन्होंने अमोल

101
00:06:58,080 --> 00:07:02,800
कोकने से परिचय करवाया। जी जी जी

102
00:07:02,800 --> 00:07:06,960
भाई जी आपकी अमोल कोखने जो इनका गुरु है

103
00:07:06,960 --> 00:07:11,040
उनसे परिचय करवाया था इन्होंने और मेरी बेटी से कहा गया

104
00:07:11,040 --> 00:07:15,040
है कि यह सुप्रीम कोर्ट के वकील हैं। चीजें तो बहुत सारी उसको बताई

105
00:07:15,040 --> 00:07:19,200
गई लेकिन मेरी जानकारी में बस इतनी बातें आई है कि सुप्रीम कोर्ट के वकील हैं और बहुत

106
00:07:19,200 --> 00:07:23,280
जानकार हैं और उनसे अगर हम टच में रहेंगे तो बहुत सारा

107
00:07:23,280 --> 00:07:27,440
मतलब नया कुछ सीखने को मिलेगा। बहुत सारी बातें वो सिखाते हैं। ऑनलाइन

108
00:07:27,440 --> 00:07:31,520
काम भी वो करते हैं या फिर टेक्निकल स्किल्स भी सीखूंगी। इन इनके पूरे ग्रुप

109
00:07:31,520 --> 00:07:35,600
की तरफ से बता रही थी कि इन सब से मुझे टच में रहना है। आपकी शिकायत

110
00:07:35,600 --> 00:07:39,680
रहती है कि मैं किसी फ्रेंड से बात नहीं करती हूं। अगल-बगल वालों से बात नहीं करती हूं। तो मैं इस

111
00:07:39,680 --> 00:07:43,840
ग्रुप से जुड़ी हूं तो अच्छा काम कर रही हूं। करके मुझे प्रूफ भी दिखाती थी कि देखो ऑनलाइन

112
00:07:43,840 --> 00:07:47,920
क्लासेस चल रही है। इसमें भगवत गीता के श्लोक चल रहे हैं और वहां पर उसका

113
00:07:47,920 --> 00:07:52,320
विश्लेषण। अब मैं विश्लेषण के डीप में मतलब क्या चल रहा है विश्लेषण

114
00:07:52,320 --> 00:07:56,320
में यह तो मैंने ध्यान दिया नहीं। लेकिन भगवत गीता के श्लोक चल रहे हैं। इतना मुझे

115
00:07:56,320 --> 00:08:00,640
समझ में आया तो वह रटना उनको फिर उनका टेस्ट देना ऑनलाइन यह चीजें वो करती

116
00:08:00,640 --> 00:08:04,640
थी। मैंने कहा चलो अच्छी चीज कर रही है। मैंने कभी किया नहीं।

117
00:08:04,640 --> 00:08:08,880
यहां पर मैं यहां पर मैं एक चीज याद दिला दूं कि एक

118
00:08:08,880 --> 00:08:09,520
पैटर्न

119
00:08:09,520 --> 00:08:14,720
है इन लोगों का काम करने का। सभी के लिए आवश्यक है ये जानना।

120
00:08:14,720 --> 00:08:18,800
अक्सर लोग यह दावा करते हैं। अरे भाई हम तो भगवत गीता

121
00:08:18,800 --> 00:08:22,800
की बातें कर रहे हैं। क्या दिक्कत है? हम तो वेद की बात कर रहे हैं। उसमें क्या प्रॉब्लम है? हम

122
00:08:22,800 --> 00:08:26,880
तो उपनिषद की बात कर रहे हैं। उसमें क्या प्रॉब्लम है? तो पैटर्न

123
00:08:26,880 --> 00:08:30,160
क्या है कि आपकी

124
00:08:30,160 --> 00:08:34,240
जो जिस द्वेष भावना के साथ कोई बुरी शक्ति कोई बुरा

125
00:08:34,240 --> 00:08:39,120
तंत्र आपके आसपास आकर के बैठ गया है नजरें जमा करके

126
00:08:39,120 --> 00:08:43,200
और जो भी उसका गलत उद्देश्य उसकी पूर्ति करने के लिए वो वो यह

127
00:08:43,200 --> 00:08:47,200
जानता है कि आपकी भावनाएं जुड़ी हुई है गीता से।

128
00:08:47,200 --> 00:08:51,600
आपकी भावनाएं जुड़ी हुई है वेद से। तो आपकी आपकी

129
00:08:51,600 --> 00:08:55,680
भावनाएं जुड़ी हुई है उपनिषद से तो उसको जो जहर भरना होता

130
00:08:55,680 --> 00:08:59,840
है आपके इर्दगिर्द जो भी उसको अपना द्वेष पूर्ण कार्य करना होता

131
00:08:59,840 --> 00:09:03,840
है वो गीता वेद पुराण उपनिषद

132
00:09:03,840 --> 00:09:08,080
ऐसे शास्त्र जिनसे जिनमें आपकी आस्था है जिनमें

133
00:09:08,080 --> 00:09:12,080
आपकी श्रद्धा है उनका नाम लेकर के ताना-बाना बुनता है

134
00:09:12,080 --> 00:09:16,240
उनके नाम की आड़ में अपनी वो गलत चीजें आपको देता है क्योंकि अगर डायरेक्ट

135
00:09:16,240 --> 00:09:20,640
अपनी चीजें आपको देगा तो आप उसको सुनोगे ही नहीं आप उसको उसको देखोगे ही नहीं।

136
00:09:20,640 --> 00:09:24,560
आप उसकी ओर आकर्षित ही नहीं होगे। या फिर आप अपने बच्चों को

137
00:09:24,560 --> 00:09:28,880
वहां उस बारे में सुनने की अनुमति नहीं दोगे।

138
00:09:28,880 --> 00:09:33,200
बल्कि उसका प्रचार ही रुक जाएगा ना। तो जब गीता का प्रवचन

139
00:09:33,200 --> 00:09:37,280
हो रहा है, गीता के नाम पर बात हो रही है तब आप यह सोचते हो कि अच्छी बात

140
00:09:37,280 --> 00:09:41,360
है भाई सुन रहा है सुनने दो। नहीं तो वहां पर अगर कोई कहे कि एक नया भगवान

141
00:09:41,360 --> 00:09:45,680
आया है। वो अपने भगवान होने के बारे में बता रहा है तो कौन से मां-बाप

142
00:09:45,680 --> 00:09:50,000
वहां भेज देंगे? वहां माता-पिता वहां भेजते हैं गीता

143
00:09:50,000 --> 00:09:54,160
सुनने के लिए, वेद सुनने के लिए, पुराण सुनने के लिए या जो भी धर्म शास्त्र

144
00:09:54,160 --> 00:09:58,160
उनको सुनने के लिए और वहां पर टैग यह लगाया

145
00:09:58,160 --> 00:10:02,240
जाता है उसकी आड़ में उनके बातों को तोड़ मरोड़ करके

146
00:10:02,240 --> 00:10:06,400
कुछ इस तरह से प्रस्तुत किया जाता है कि वहां अर्थ जब होता है तो गीता होती

147
00:10:06,400 --> 00:10:10,480
नहीं है। वहां पर उनका अपना जो मंतव्य होता है वो होता है। तो यह बहुत

148
00:10:10,480 --> 00:10:14,880
बड़ा एक पैटर्न है। इस चीज से सभी को बचना चाहिए।

149
00:10:14,880 --> 00:10:19,200
जो लोग यह सोचते हैं अरे गीता की बात हो रही है क्या दिक्कत है आचार्य प्रशांत

150
00:10:19,200 --> 00:10:24,160
ने तो उपनिषद की बात की है क्या दिक्कत है दिक्कत है

151
00:10:24,160 --> 00:10:28,320
वो जानते हैं कि हमारी पहले से आस्था किस में है वो पहले उसको

152
00:10:28,320 --> 00:10:32,320
उसका उस नाम को पकड़ते हैं और फिर उनकी जिन चीजों से

153
00:10:32,320 --> 00:10:36,400
अपनी बातों को जोड़ सकते हैं नई बातों को अपनी बातों को उन चीजों से जोड़ के आपको

154
00:10:36,400 --> 00:10:39,600
प्रस्तुत कर देते हैं। फिर आप यह सोचते हो अरे इनसे क्यों

155
00:10:39,600 --> 00:10:43,680
कुछ कहे ये तो वेद की बात कर रहे तो गीता की बात कर रहे हैं। वो बात वही कर रहे हैं जिससे

156
00:10:43,680 --> 00:10:47,840
आपको प्रॉब्लम थी। यह सदैव ध्यान रखिए। यह बातें वही

157
00:10:47,840 --> 00:10:52,080
है जिनसे आपको प्रॉब्लम है। सनातन को जिनसे प्रॉब्लम

158
00:10:52,080 --> 00:10:56,160
है वही बातें हैं। बस वो सिर्फ वेद और गीता के नाम पर आपको

159
00:10:56,160 --> 00:11:01,520
परोसी जा रही हैं। जी बिल्कुल वही

160
00:11:01,520 --> 00:11:05,520
हां जी। जी तो वही

161
00:11:05,520 --> 00:11:09,760
चीजें ये करते थे। उसमें जो भगवान की व्याख्या है वो

162
00:11:09,760 --> 00:11:13,840
इन्हीं के बारे में बोला गया है। वीरेंद्र देव दीक्षित के बारे में ही बोला गया है कि

163
00:11:13,840 --> 00:11:18,000
जो मूढ़मती लोग होते हैं वो साधारण शरीर में आए हुए भगवान को नहीं

164
00:11:18,000 --> 00:11:22,240
पहचान पाते। तो वह वीरेंद्र देव दीक्षित के बारे में बोला गया है। यह उनका

165
00:11:22,240 --> 00:11:26,240
कहना है। तो अगर उससे कनेक्ट करके जोड़ा जाए तो मेरी बेटी मानती थी कि यह

166
00:11:26,240 --> 00:11:30,240
सारी चीजें सच में यहीं पर अप्लाई होती है और कोई लोग बाकी

167
00:11:30,240 --> 00:11:34,240
के लोग यह समझ नहीं रहे हैं। तो शुरू से मेरी बेटी

168
00:11:34,240 --> 00:11:38,240
मुझे समझाने की कोशिश करती कि मां यह सही ज्ञान है। हमको इसी ज्ञान

169
00:11:38,240 --> 00:11:42,480
में जाना है। सबको यहीं आना है। क्योंकि जब दुनिया खत्म होने वाली रहेगी

170
00:11:42,480 --> 00:11:46,640
सबको इन्हीं के पास आना पड़ेगा और जो ज्ञान में रहेंगे वो तो सेफ

171
00:11:46,640 --> 00:11:50,640
रहेंगे। बाकी जैसे कि अगर मैं उनका ज्ञान नहीं सुन रही हूं

172
00:11:50,640 --> 00:11:54,880
तो बाकी जितने भी लोग हैं जितने मर गए हैं इस बीच में उन सब की आत्माएं

173
00:11:54,880 --> 00:11:58,880
ज्ञान सुनने के लिए मेरे शरीर में प्रवेश करेगी तो हर हर एक शरीर में

174
00:11:58,880 --> 00:12:02,880
810 आत्माएं प्रवेश करेगी तो उस शरीर को कितनी तकलीफ होगी तो

175
00:12:02,880 --> 00:12:07,440
हमको इस तकलीफ से नहीं गुजरना है हम पहले ही सेफ हो जाए इसके लिए

176
00:12:07,440 --> 00:12:11,840
पहले से सुन लेते हैं ज्ञान तो वो मुझे बहुत समझाने की कोशिश करती थी और मैं बोलती

177
00:12:11,840 --> 00:12:15,920
थी कि इनका लॉजिक मुझे समझ में नहीं आता है इन इनका कहना है कि 5000

178
00:12:15,920 --> 00:12:20,240
साल का चक्र है मतलब मतलब जो जो

179
00:12:20,240 --> 00:12:24,320
आत्माएं यदि हमने अभी ज्ञान नहीं सुना तो बाद

180
00:12:24,320 --> 00:12:28,320
में ज्ञान सुनने के लिए बाद में ज्ञान सुनने के लिए

181
00:12:28,320 --> 00:12:32,640
हम जो है अ तरसेंगे और

182
00:12:32,640 --> 00:12:36,800
तरसेंगे और फिर किसी और के शरीर में प्रवेश करेंगे। ऐसा है। हम

183
00:12:36,800 --> 00:12:40,800
नहीं प्रवेश करेंगे। जैसे अभी मैं लास्ट समय में मैं अगर जिंदा हूं तो

184
00:12:40,800 --> 00:12:44,960
जो मर गए हैं उनकी आत्मा भटकती रहेगी। तो उन सबकी आत्माएं

185
00:12:44,960 --> 00:12:49,040
जो जिंदा शरीर है उस शरीर के अंदर आकर ज्ञान सुनने की

186
00:12:49,040 --> 00:12:53,200
कोशिश करेंग। तो मेरे शरीर में मान लीजिए जो मर गए हैं मेरे आसपास

187
00:12:53,200 --> 00:12:57,200
810 लोग मेरे शरीर में घुसेंगे और फिर मेरे शरीर के थ्रू वो ज्ञान

188
00:12:57,200 --> 00:13:01,200
सुनने की कोशिश करेंगे क्योंकि सिर्फ आत्मा से वो सुन नहीं सकते। तो जब

189
00:13:01,200 --> 00:13:05,280
किसी के शरीर में कोई दूसरी आत्मा प्रवेश करती है तो बहुत तकलीफ होती है शरीर को।

190
00:13:05,280 --> 00:13:09,360
तो अंत समय में 810 आत्माएं अगर मेरे शरीर में घुसती है तो मुझे कितनी

191
00:13:09,360 --> 00:13:10,480
तकलीफ होगी?

192
00:13:10,480 --> 00:13:14,720
उस तकलीफ से बचने के लिए मुझे अभी ज्ञान में आ जाना चाहिए। तो मेरा शरीर सेफ हो जाएगा।

193
00:13:14,720 --> 00:13:18,960
फिर कोई दूसरी आत्मा मेरे शरीर में प्रवेश करने की कोशिश नहीं कर पाएगी। अप्रोच

194
00:13:18,960 --> 00:13:23,040
नहीं करेगी। जी जी वाह बहुत बढ़िया।

195
00:13:23,040 --> 00:13:27,040
तो ये चीजें तो इसका अर्थ तो ये

196
00:13:27,040 --> 00:13:31,600
हुआ कि आत्मा जो है ज्ञान ग्रहण नहीं कर सकती।

197
00:13:31,600 --> 00:13:35,680
जी ये एक नोट करने वाली बात है। आत्मा ज्ञान ग्रहण नहीं कर सकती।

198
00:13:35,680 --> 00:13:39,680
इसका अर्थ तो यह हो गया कि आत्मा को सुख होगा तभी

199
00:13:39,680 --> 00:13:43,760
जब वो जो है देह धारण करे जी तभी

200
00:13:43,760 --> 00:13:47,840
वो तभी वो मुक्त हो सकती है। इनके हिसाब से मुक्ति तभी है

201
00:13:47,840 --> 00:13:51,920
जब वो शरीर धारण करे। शरीर धारण के बिना मुक्ति नहीं

202
00:13:51,920 --> 00:13:55,920
है। जी यही हो गया ना क्योंकि वो ग्रहण तो कर नहीं

203
00:13:55,920 --> 00:14:01,920
सकती है ज्ञान बिना देह के।

204
00:14:18,060 --> 00:14:22,060
[संगीत]
