1
00:00:07,440 --> 00:00:11,760
जी जय श्री राम। जय श्री राम। पवन

2
00:00:11,760 --> 00:00:15,760
जी से बात हो रही है। हां जी हां जी पवन जी मैं शिवश

3
00:00:15,760 --> 00:00:20,480
नारायण द्विवेदी बात कर रहा हूं। जी बोलिए।

4
00:00:20,480 --> 00:00:24,800
एक तो पहले तो जो सच्चाई के लिए आपने जो

5
00:00:24,800 --> 00:00:28,880
बात उठाई है और जहां पर जो सच का साथ देना चाहिए जो दिया

6
00:00:28,880 --> 00:00:34,880
है उसके लिए आपका आभार हम और

7
00:00:35,680 --> 00:00:39,760
ये सतलोक आश्रम मैनेजमेंट के नाम से जो धांधलेबाजी हो रही है इस पे आप

8
00:00:39,760 --> 00:00:45,120
भी बोलते हैं जी इसके लिए आपका आभार

9
00:00:45,120 --> 00:00:49,200
इसके अलावा आपने एक बात कही है कि रामपाल जी का जो ज्ञान है वो

10
00:00:49,200 --> 00:00:53,680
आप सिद्ध करना कर सकते हैं। उनका

11
00:00:53,680 --> 00:00:57,680
ज्ञान तो ऑलरेडी परिवर्तित है लेकिन लोग उनके

12
00:00:57,680 --> 00:01:02,400
ज्ञान को समझ नहीं पा रहे। [गला साफ़ करने की आवाज़] तो क्या

13
00:01:02,400 --> 00:01:06,640
वैसे मुझे लगता नहीं है क्योंकि हम इस समय आप भी अपने

14
00:01:06,640 --> 00:01:10,880
स्तर से और हम भी अपने स्तर से फिलहाल जो सतलोक मैनेजमेंट

15
00:01:10,880 --> 00:01:14,880
है वो सतलोक मैनेजमेंट से दोनों ही लोग इस समय मतलब

16
00:01:14,880 --> 00:01:19,040
प्रतिकार कर रहे हैं। तो ये नहीं नहीं देखो नहीं नहीं नहीं

17
00:01:19,040 --> 00:01:22,480
जी आपकी और हमारी सोच में रात दिन का अंतर है।

18
00:01:22,480 --> 00:01:26,640
मैंने आपके वीडियो देखे हैं कुछ एक हम हम जो आप जो आप ज्ञान चर्चा

19
00:01:26,640 --> 00:01:30,640
वगैरह जो करते हो ना हमारे भगत भाई बहनों के साथ में हम हम

20
00:01:30,640 --> 00:01:34,720
तो देखे मैंने आपके कुछ एक वीडियो हम आपके प्रतिकार करने में और

21
00:01:34,720 --> 00:01:38,720
मेरे प्रतिकार करने में रात दिन का अंतर है क्योंकि मैं ज्ञान आधार से

22
00:01:38,720 --> 00:01:42,720
सतलोक आश्रम मैनेजमेंट हरियाणा का प्रतिकार करता हूं और आप

23
00:01:42,720 --> 00:01:46,720
जी जो है अज्ञान आधार से राग द्वेष ईर्ष्या

24
00:01:46,720 --> 00:01:50,880
में आके आप उनका प्रतिकार कर आप और हमारे करने में राधे ये

25
00:01:50,880 --> 00:01:54,960
तो आपकी सोचना मेरे हिसाब से वही सोच मेरी है कि आप

26
00:01:54,960 --> 00:01:58,960
अज्ञानता के कारण कर रहे हैं। खैर यह बात तब क्लियर हो सकती है

27
00:01:58,960 --> 00:02:03,440
जब हम आमने-सामने बात करें और देखिए आपके विचारों

28
00:02:03,440 --> 00:02:07,680
से मैं भली-भांति सहमत हूं। आप सतगुरु रामपाल जी के ज्ञान को फिलहाल समझने

29
00:02:07,680 --> 00:02:11,920
में असमर्थ हैं। अगर आपके साथ में डिबेट भी करूंगा तो मैं तो वही

30
00:02:11,920 --> 00:02:15,920
जो बातें हैं जो वह तथ्य मैं सामने रखूंगा जो सतगुरु रामपाल जी ने

31
00:02:15,920 --> 00:02:20,000
ऑलरेडी अपने सत्संगों में रखे हुए हैं। आप उनके सत्संग सुनकर उनकी पुस्तक

32
00:02:20,000 --> 00:02:24,080
सुनकर भी नहीं समझ पा रहे हैं तो भला मेरे से आप जी क्या समझेंगे? तो आपसे डिबेट

33
00:02:24,080 --> 00:02:28,400
कर लेना मेरा क्या उचित है? इसमें मैं बताता हूं। जैसे मान लीजिए कि

34
00:02:28,400 --> 00:02:32,800
रामपाल जी महाराज ने कुछ कह दिया। ठीक है? हम हम

35
00:02:32,800 --> 00:02:36,960
अब उस कहने से कुछ चीजें कुछ संशय कुछ प्रश्न

36
00:02:36,960 --> 00:02:38,400
उत्पन्न हुए

37
00:02:38,400 --> 00:02:42,480
हम है ना जैसे मान लीजिए रामपाल जी ने कहा

38
00:02:42,480 --> 00:02:46,800
कि काल शैतान है और काल घुस गया था श्री कृष्ण के अंदर

39
00:02:46,800 --> 00:02:51,360
और फिर उसने उन्होंने गीता बोली अब एक जगह पर रामपाल

40
00:02:51,360 --> 00:02:55,520
ने ये भी कहा है कि काल जो है रामपाल जी ने रामपाल जी ने

41
00:02:55,520 --> 00:02:59,840
रामपाल जी ने सुनिए तो सुनिए मैं अपनी बात पूरी कर लूं संत कैसे उत्पन्न

42
00:02:59,840 --> 00:03:03,920
होता है मैं आप ही की बात आगे सुनूंगा। पूरी सुनूंगा। मैं बीच में

43
00:03:03,920 --> 00:03:08,080
फोन काट के भागने वालों में से नहीं हूं। जी जी लेकिन आपसे मेरी

44
00:03:08,080 --> 00:03:12,160
प्रार्थना है। अगर आपने मुझसे बात करनी है तो मेरे पूज्य गुरुदेव जी का नाम

45
00:03:12,160 --> 00:03:16,240
आपने सम्मान पूर्वक लेना पड़ेगा। खाली रामपाल से काम मैंने रामपाल

46
00:03:16,240 --> 00:03:20,240
जी बोला ना फिर उसको बदल के। बोला ना? हां। रामपाल जी या फिर संत

47
00:03:20,240 --> 00:03:24,560
रामपाल जी। सीधा रामपाल बोलोगे मैं आपसे बात नहीं करूंगा। सुनिए। रामपाल

48
00:03:24,560 --> 00:03:28,720
जी ने जी। जी एक जगह पर ये भी कहा है कि काल जो है वो मन

49
00:03:28,720 --> 00:03:32,720
है। जी ठीक है। कई जगह कहा है।

50
00:03:32,720 --> 00:03:36,800
अब काल यदि मन है हम तो मन क्या

51
00:03:36,800 --> 00:03:41,680
श्री कृष्ण भगवान में पहले से नहीं था जो वो प्रेत व प्रेत वश घुसा

52
00:03:41,680 --> 00:03:45,920
है ना था ना उसके अंदर था पहले से भी था तो काल तो सभी के अंदर पहले

53
00:03:45,920 --> 00:03:50,320
से है तो उसको फिर अलग से एक शैतान बना करके क्यों प्रस्तुत

54
00:03:50,320 --> 00:03:53,520
किया जा रहा है मन तो वो इसलिए किया

55
00:03:53,520 --> 00:03:57,520
गया है सुनिए तो ये मैं अभी आपसे उत्तर नहीं मांग रहा हूं उत्तर

56
00:03:57,520 --> 00:04:01,520
नहीं मांग रहा हूं मैं अभी आपको बता रहा हूं कि रामपाल जी ने अगर यह

57
00:04:01,520 --> 00:04:05,520
कह दिया है यह अपने वो जब मैं उनसे संतुष्ट तो ऐसे

58
00:04:05,520 --> 00:04:09,600
करके उनके कहे हुए जो वचन है या जो उनके

59
00:04:09,600 --> 00:04:13,840
कहे हुए जो सिद्धांत हैं उनसे रिलेटेड प्रश्न खड़े हो जाते हैं।

60
00:04:13,840 --> 00:04:18,240
तो जब उनकी तरफ से उनका प्रतिनिधित्व या उनको मानने

61
00:04:18,240 --> 00:04:22,320
वाला कोई बंदा सामने से बात करेगा तो उस पर हम लोग

62
00:04:22,320 --> 00:04:26,320
जब जो ये क्वेश्चंस उत्पन्न हो रहे हैं उन पर बात होती है कि भाई उन

63
00:04:26,320 --> 00:04:30,480
वो तो कह के चले गए वो तो वहां पर हैं वो तो आ नहीं सकते। तो अब जो

64
00:04:30,480 --> 00:04:34,560
उससे रिलेटेड प्रश्न खड़े हो रहे हैं तो उनका जवाब देना देना

65
00:04:34,560 --> 00:04:38,880
होगा। जैसे आपने कहा ना जब आप उनसे संतुष्ट नहीं हो रहे तो मुझसे क्या होगे? उनके कहे

66
00:04:38,880 --> 00:04:43,040
हुए को सुनने के बाद जो प्रश्न खड़े हो रहे हैं उनके जवाब तो रामपाल

67
00:04:43,040 --> 00:04:47,120
जी ने नहीं दिए ना। वो तो अब उनसे कोई जवाब दिए हैं।

68
00:04:47,120 --> 00:04:51,120
जवाब दिए हैं भाई साहब। जवाब क्यों नहीं दिए? अगर दिए हैं तो उन जवाबों

69
00:04:51,120 --> 00:04:55,200
को लेकर के आप आ जाइएगा। हां तो मैं आपसे यही तो कह रहा हूं ना कि सारे के

70
00:04:55,200 --> 00:04:59,200
सारे जवाब यह तो है नहीं कि सतगुरु रामपाल जी अपने एक ही तीन घंटे के सत्संग में दे

71
00:04:59,200 --> 00:05:03,280
देंगे। आपने सारे सत्संग सुनने पड़ेंगे जैसे हम लोगों ने सुने हैं। अच्छा

72
00:05:03,280 --> 00:05:07,600
भाई साहब एक बात बताइए एक बात बताइए। एक बात बताइए

73
00:05:07,600 --> 00:05:08,640
मैं आपको यह

74
00:05:08,640 --> 00:05:12,720
कह रहा हूं कि जैसे आपके महाराज जी ने चैलेंज

75
00:05:12,720 --> 00:05:16,960
किया कि शंकराचार्यों को ज्ञान नहीं है या ये चैलेंज किया कि जो पुराण लिखने

76
00:05:16,960 --> 00:05:21,120
वाले ऋषि गण हैं उनको भी उतना वो ज्ञान नहीं था। ठीक है? बिल्कुल

77
00:05:21,120 --> 00:05:25,280
बिल्कुल तो आपने क्या सारे पुराण एक-एक शब्द

78
00:05:25,280 --> 00:05:29,440
पढ़ लिया है? आपने चारों वेद पढ़ लिए हैं। आपने 52 जो

79
00:05:29,440 --> 00:05:33,760
हमारे जितने भी स्मृति ग्रंथ है सब पढ़ लिए हैं। और अगर नहीं पढ़े तो

80
00:05:33,760 --> 00:05:37,760
आप तो आप फिर ये कैसे उनके विरोध में चले गए रामपाल जी के साथ

81
00:05:37,760 --> 00:05:41,920
बताइए? जैसे आप मुझसे जैसे जैसे आप मुझसे कह रहे हैं कि

82
00:05:41,920 --> 00:05:46,080
आपने सारे वीडियो नहीं देखे तो एक तीन घंटे की वीडियो से तो होगा नहीं। मैं

83
00:05:46,080 --> 00:05:50,560
आपसे कह रहा हूं क्या आपने सारे ग्रंथ पढ़ लिए हैं?

84
00:05:50,560 --> 00:05:54,640
गुरुदेव सर्वज्ञ है। मैं गुरुदेव नहीं गुरुदेव नहीं

85
00:05:54,640 --> 00:05:58,720
सुनिए सुनिए गुरुदेव नहीं आपने मैं उसी बात पे

86
00:05:58,720 --> 00:06:02,720
आ रहा हूं। मैं उसी बात पे आ रहा हूं। देखो आपने बात करनी है या फिर आपने कोई मतलब कि वाद

87
00:06:02,720 --> 00:06:06,960
विवाद करना है। नहीं नहीं विवाद नहीं करना। अगर बात करनी है तो साथ-साथ मेरा भी सुनिएगा।

88
00:06:06,960 --> 00:06:10,960
जी बोलिए। मैं ये कह रहा हूं हम पहले तो आप मुझे ये बताओ आप

89
00:06:10,960 --> 00:06:15,040
गुरु को भगवान मानते हो या नहीं मानते हो? आप लोगों की थ्योरी क्या है? मुझे भी तो पता

90
00:06:15,040 --> 00:06:19,280
चले। गुरु का महत्व भगवान के बराबर होता है।

91
00:06:19,280 --> 00:06:23,280
अच्छा यह कौन से शास्त्र में लिखा हुआ है कि भाई गुरु का गुरु का महत्व जो है

92
00:06:23,280 --> 00:06:23,780
भगवान के

93
00:06:23,760 --> 00:06:27,920
बराबर होता है। श्वेता शत्रोपनिषद अच्छा किसने

94
00:06:27,920 --> 00:06:32,160
लिखा था वो? 6 23 6 23 में लिखा है श्वेता

95
00:06:32,160 --> 00:06:36,160
शत्रोपनिषद उपनिषद को जानते हैं आप कि नहीं? वो लिखा किसने

96
00:06:36,160 --> 00:06:40,320
अरे दुनिया भर के शास्त्र है भाई साहब। अब आप एक बात बताइए

97
00:06:40,320 --> 00:06:44,400
भाई जिस बच्चे को डॉक्टर बनना है सुनिए सुनिए। जिस बच्चे को

98
00:06:44,400 --> 00:06:48,560
जिस बच्चे को डॉक्टर बनना है तो भैया वो बच्चा जो है वो दूसरे

99
00:06:48,560 --> 00:06:52,640
विषय की पुस्तकें पढ़ के वो क्या करेगा? भाई जिसको मोक्ष प्राप्त करना है वो

100
00:06:52,640 --> 00:06:56,640
केवल मोक्ष संबंध में चले ये आपको कैसे पता चला कि

101
00:06:56,640 --> 00:07:00,880
श्वेता सत्रपनिषद में मोक्ष की बात नहीं हुई है। मैं ये कह रहा हूं दुनिया

102
00:07:00,880 --> 00:07:05,120
भर के शास्त्र है। कोई एक थोड़ी है। पूरे विश्व में ना जाने कितने प्रकार के धर्म ग्रंथ

103
00:07:05,120 --> 00:07:09,120
है। शास्त्र है। क्या हर व्यक्ति अपने जीवन में सभी शास्त्रों का अध्ययन वो

104
00:07:09,120 --> 00:07:13,360
कर सकता है क्या? तो आप मैं वही तो कह रहा हूं कि मैंने आपके रामपाल

105
00:07:13,360 --> 00:07:17,360
जी के अगर आपको लगता है कि सारे वीडियोस नहीं देखे हैं और फैसला कर लिया

106
00:07:17,360 --> 00:07:21,520
है तो आप चाह रहे हो कि पहले जाकर के मैं सारे वीडियोस देखूं और तब

107
00:07:21,520 --> 00:07:25,600
फैसला करूं कि रामपाल जी गलत है कि नहीं। ठीक है? उसी प्रकार से मैं भी तो

108
00:07:25,600 --> 00:07:29,760
यह कह सकता हूं क्या आपने शंकराचार्य के द्वारा रचित सारे ग्रंथ पढ़ लिए हैं

109
00:07:29,760 --> 00:07:33,760
और अगर नहीं पढ़े हैं तो सुनिए सुनिए तो नहीं

110
00:07:33,760 --> 00:07:37,920
पढ़ सकता। जीव कोई शास्त्र भी पूरे नहीं पढ़ सकता। नहीं नहीं

111
00:07:37,920 --> 00:07:38,960
यह आप गलत कह रहे

112
00:07:38,960 --> 00:07:43,040
जो जब जीव के रूप में आप शंकराचार्य को मान रहे हो वो ग्रंथ लिख सकता है तो

113
00:07:43,040 --> 00:07:47,120
जीव पढ़ क्यों नहीं सकता लेकिन परमात्मा ने आके बताया ना सतगुरु

114
00:07:47,120 --> 00:07:51,360
रामपाल जी ने बता दिया उनको पढ़ने की जरूरत नहीं है तो आंखों के सामने सारी चीजें

115
00:07:51,360 --> 00:07:55,520
सुनिए वो परमात्मा है यही तो हमें सिद्ध करना है कि वह परमात्मा है कि नहीं

116
00:07:55,520 --> 00:07:59,520
तो उसके लिए तो दूसरी चीजों का आलोकन लेना पड़ेगा ना तो भैया उसी के

117
00:07:59,520 --> 00:08:03,520
लिए तो मैंने आपसे सवाल किया कि भैया गुरु भगवान होता है या नहीं होता है

118
00:08:03,520 --> 00:08:07,760
गुरु भगवान के तुल्य होता है भगवान मुझे आप एक बात बताइए। सुनिए

119
00:08:07,760 --> 00:08:11,840
मैं आपको यहीं पे आपको रोंग सिद्ध कर देता हूं। यहीं पे आपको सुनिए सुनिए तो

120
00:08:11,840 --> 00:08:16,000
सुनिए सुनिए मेरी बात सुन लीजिए। भगवान को प्राप्त

121
00:08:16,000 --> 00:08:20,720
करना कठिन है संसार प्रपंच में आने के बाद। ठीक है? हम

122
00:08:20,720 --> 00:08:24,880
उसको प्राप्त कराने के लिए हमें प्राप्त होता है गुरु। यानी

123
00:08:24,880 --> 00:08:29,040
कि भगवान को प्राप्त कराने का जो रास्ता है वह कठिन है। उस रास्ते

124
00:08:29,040 --> 00:08:33,040
को सरल बनाने के लिए गुरु प्राप्त होता है। अगर गुरु को भी वहां

125
00:08:33,040 --> 00:08:37,120
भगवान की जगह पहुंचा देंगे तो फिर गुरु को प्राप्त करना भी कठिन

126
00:08:37,120 --> 00:08:41,120
हो गया। अच्छा सुनो फिर वो वो गुरु कौन होता

127
00:08:41,120 --> 00:08:45,120
है? अरे गुरु भगवान को प्राप्त कराने का

128
00:08:45,120 --> 00:08:49,200
साधन है। सुनो सुनो। देखिए ठीक है। देखिए आप अभी

129
00:08:49,200 --> 00:08:54,000
अभी आप डिबेट ही तो कर रहे हैं। यही डिबेट मैं कह रहा हूं। हम लोग कहीं सामने बैठे

130
00:08:54,000 --> 00:08:58,240
मैं मैंने आपसे एक ही तो सवाल किया है। आप मेरा उसका तो जवाब दे दो थोड़ा प्यार

131
00:08:58,240 --> 00:09:02,480
से बोलिए। देखो मैं तो मैं ना तो किसी और व्यक्ति की तरह हूं। मेरे विचार

132
00:09:02,480 --> 00:09:06,480
जो है संत रामपाल जी के बाकी भक्तों से बहुत ज्यादा मेरे वो भिन्न है। मैं

133
00:09:06,480 --> 00:09:10,800
इस वाद-विवाद के चक्कर में नहीं पड़ता। तू भाई जो है मतलब आप ज्ञानी

134
00:09:10,800 --> 00:09:14,880
मैं अज्ञानी मैं मैं इन चीजों के चक्कर में नहीं पड़ता हूं। मेरा क्या टारगेट है? मेरा

135
00:09:14,880 --> 00:09:19,200
मेरा क्या मिशन है? मेरे थोड़े बहुत वीडियो देख के आप जी भली-भांति समझ चुके होंगे। हम्म

136
00:09:19,200 --> 00:09:23,200
बोलिए। मैं आपसे प्यार मैं आपसे प्यार से ये पूछ रहा हूं। आप कह

137
00:09:23,200 --> 00:09:27,360
रहे हो कि जो गुरु है वो भगवान को प्राप्त कर करवाने वाला वो मीडिया है।

138
00:09:27,360 --> 00:09:31,440
हम ठीक है। तो गुरु आपकी नजर में जो है मतलब भगवान तो

139
00:09:31,440 --> 00:09:35,520
नहीं हुआ ना? देखिए ऐसा है गुरु और भगवान

140
00:09:35,520 --> 00:09:39,520
मैं बता तो रहा हूं। आप मेरी बात का सीधा-सीधा जवाब दीजिए। मैं सीधा-सीधा ही जवाब दे रहा हूं। आप

141
00:09:39,520 --> 00:09:43,520
भी तो यस और नो में जवाब देते हैं ना भगवान। मैं सीधा-सीधा जवाब दे रहा हूं। सीधा-सीधा दे

142
00:09:43,520 --> 00:09:47,760
रहा हूं। आप बताइए। गुरु और भगवान में कोई अंतर नहीं है। ये शास्त्र

143
00:09:47,760 --> 00:09:52,000
कहते हैं। पहली बात। दूसरी बात यह है कि अगर

144
00:09:52,000 --> 00:09:56,080
मैंने अभी आपसे मैंने मैंने आपसे अभी यही तो सवाल किया था। आप कह

145
00:09:56,080 --> 00:10:01,040
रहे हो कि नहीं नहीं गुरु तो भगवान को प्राप्त करवाने वाला मीडिया है। देखिए

146
00:10:01,040 --> 00:10:05,280
आप जब तक सामने वाले का आप जब तक सामने वाले का पूरी बात सुनेंगे

147
00:10:05,280 --> 00:10:09,520
नहीं तो आप पहले से ही पूर्वाग्रह से घसित मैंने

148
00:10:09,520 --> 00:10:13,520
क्या कहा अभी आपने कहा कि गुरु में और भगवान में कोई अंतर

149
00:10:13,520 --> 00:10:17,600
नहीं है। मैंने बोल रहे हैं तो फिर आपको फिर ऑब्जेक्शन कहां

150
00:10:17,600 --> 00:10:21,680
हो गया? ये ये ऑब्जेक्शन थोड़ी ना है। गुरु

151
00:10:21,680 --> 00:10:25,680
गुरु कौन होता है? यह बताइए। चलिए गुरु देखो वैसे

152
00:10:25,680 --> 00:10:29,840
तो गुरु परमात्मा नहीं होता है। तीन लोक की भक्ति में गुरु परमात्मा नहीं होता। मैं

153
00:10:29,840 --> 00:10:35,360
मैं पूछ रहा हूं मैं पूछ रहा हूं आपसे गुरु की परिभाषा क्या है?

154
00:10:35,360 --> 00:10:39,440
गुरु की परिभाषा यही है भैया जो अंधकार से जो प्रकाश की ओर लेके जाए

155
00:10:39,440 --> 00:10:43,680
वो जो इस जीव को 84 लाख योनियों के दलदल से बाहर निकाल के जो उसको मोक्ष प्राप्त

156
00:10:43,680 --> 00:10:47,920
करवाए। ठीक है? यानी कि जो और वैसे तो गुरु हर प्रकार के हैं। अगर कोई ड्राइविंग

157
00:10:47,920 --> 00:10:52,400
सिखा देता है वो भी उसका गुरु है। यदि कोई बाल काटना सिखाते वो भी वो शिक्षक है।

158
00:10:52,400 --> 00:10:56,480
वो शिक्षक हो सकता है। वो गुरु नहीं है। गुरु तो वही है जो

159
00:10:56,480 --> 00:11:00,560
आपको मोक्ष के मार्ग पर मोक्ष दिलवाने में सहायता करे। वो गुरु है। तो मैंने

160
00:11:00,560 --> 00:11:04,640
आपसे यही तो छोटा सा सवाल किया है। आप जी क्यों अटक रहे हैं? मैं ये कह रहा हूं। आप

161
00:11:04,640 --> 00:11:09,040
ये बताओ कि गुरु परमात्मा होता है क्या? गुरु परमात्मा

162
00:11:09,040 --> 00:11:13,200
में कोई अंतर नहीं है। अगर आप गुरु में ही अपने भगवान को देख रहे हैं।

163
00:11:13,200 --> 00:11:17,200
अंतर नहीं है तो फिर गुरु को परमात्मा बोलने में आपको दिक्कत कहां आ रही है? अरे तो मैं बोल

164
00:11:17,200 --> 00:11:21,200
तो रहा हूं। पूरी बात तो सुनो। बीच में ही काट देते हो। मैं बोल रहा हूं। पूरी

165
00:11:21,200 --> 00:11:24,560
बात सुन लो। गुरु परमात्मा को प्राप्त कराने का साधन

166
00:11:24,560 --> 00:11:28,560
है। अगर आप अपने गुरु में ही परमात्मा को देख रहे हैं तो उससे मुझे

167
00:11:28,560 --> 00:11:32,720
कोई आपत्ति नहीं है। देखिए आप अपने गुरु में

168
00:11:32,720 --> 00:11:36,720
ही भगवान को देख रहे हैं तो बहुत अच्छी बात है। गुरु की पूजा करिए। कोई

169
00:11:36,720 --> 00:11:40,800
बात नहीं। इससे कोई आपत्ति नहीं है। मगर जिसको गुरु कह रहे हैं वह

170
00:11:40,800 --> 00:11:45,600
गुरु है कि नहीं इस पर बात है। अच्छा हां

171
00:11:45,600 --> 00:11:49,920
भाई आपने मान लीजिए मेरे आसपास घर में मैंने किसी को

172
00:11:49,920 --> 00:11:54,080
किसी बच्चे को कह दिया ये मेरा गुरु है और मैं उस पर परमात्मा की पूजा करने लगा उसकी

173
00:11:54,080 --> 00:11:58,160
मान करके। अब वो गुरु है कि नहीं है? बात इस पे है ना। उसने

174
00:11:58,160 --> 00:12:02,320
मुझे वो मोक्ष वाला ज्ञान दिया कि नहीं दिया? बात इस पे है

175
00:12:02,320 --> 00:12:07,040
असतो मा तंदगमया तमसो माग मृत्यु मृतमया

176
00:12:07,040 --> 00:12:11,200
तो उनके ज्ञान में आपको कहां से कमजोरी नजर आ गई वही तो कुल

177
00:12:11,200 --> 00:12:15,600
मिला के बात आ गई उनकी सारी बातें जितने उन्होंने क्लेम्स किए लगभग लगभग 99%

178
00:12:15,600 --> 00:12:19,920
मोटे-मोटे जो क्लेम्स है सब उनके वैसे हैं शास्त्र

179
00:12:19,920 --> 00:12:22,400
विरुद्ध

180
00:12:22,400 --> 00:12:26,640
शास्त्र सुनिए शास्त्र विरुद्ध शास्त्र विरुद्ध भी है

181
00:12:26,640 --> 00:12:31,200
दर्शन विरुद्ध भी है तर्क विरुद्ध भी है केवल शास्त्र

182
00:12:31,200 --> 00:12:35,280
नहीं लेकिन है नहीं वैसे वह है नहीं लेकिन वो आज ही को लग रहा है तो

183
00:12:35,280 --> 00:12:39,360
आप इस बारे में इसीलिए तो मैंने फ़ोन किया था मैंने यहां पे तर्क वितर्क के लिए फ़ोन नहीं

184
00:12:39,360 --> 00:12:39,860
किया था

185
00:12:39,760 --> 00:12:43,840
मैंने कहा था आपने जब यह कहा है कि मैं तैयार हूं तो मैं कहां से सिद्ध कर दूंगा मैं

186
00:12:43,840 --> 00:12:48,000
कोई मेरे गुरु आपने ही कहा है ना आपने वीडियो में कहा है ना कि

187
00:12:48,000 --> 00:12:52,240
आप आप तैयार हैं उनके ज्ञान को सिद्ध करने के लिए मैं तैयार

188
00:12:52,240 --> 00:12:56,400
हूं लेकिन मैंने वीडियो में यह भी तो कहा है कि मैं किसी मोबाइल चैनल के लिए नहीं कहा मैंने

189
00:12:56,400 --> 00:13:00,560
तो टीवी चैनल के लिए कहा भाई साहब नहीं [गला साफ़ करने की आवाज़] मोबाइल मोबाइल मोबाइल चार पांच

190
00:13:00,560 --> 00:13:04,640
10 आदमियों के बीच में ज्ञान चर्चा का क्या फायदा क्यों मोबाइल चैनल पे मैं भी नहीं

191
00:13:04,640 --> 00:13:08,800
चाहता हूं अगर तो आप टीवी चैनल आप बुक कर लो मैं पवन दास आने

192
00:13:08,800 --> 00:13:12,960
को तैयार हूं टीवी चैनल बुक आपको करना ही नहीं है बात ये

193
00:13:12,960 --> 00:13:17,280
हो गई अब तो फिर अब टीवी चैनल का इंतजाम मैं कहां से करूं भाई

194
00:13:17,280 --> 00:13:21,280
तो फिर मैं भी नहीं कर सकता मेरी भी हालत आप जैसी है भाई तो आपको जब आप कर नहीं

195
00:13:21,280 --> 00:13:25,280
सकते तो आप उस बात के लिए कह क्यों रहे हैं कि भाई मैं कहां नहीं यदि

196
00:13:25,280 --> 00:13:29,280
कोई मेरी बात को यदि कोई उठाता है मेरी बात पे यदि किसी को ऑब्जेक्शन है और

197
00:13:29,280 --> 00:13:33,360
यदि वो सक्षम है हम तो वह सामने आके मेरे से डिबेट तो वो वो पहले

198
00:13:33,360 --> 00:13:37,440
लाखों रुपए खर्च करके पहले टीवी चैनल बुक करें फिर पवन दास जी आएंगे वहां

199
00:13:37,440 --> 00:13:41,520
पे देखो हो सकता है कोई टीवी चैनल वाला इस बात को सीरियस ले ले हो सकता

200
00:13:41,520 --> 00:13:45,600
है भाई उसको तो कोई पैसे लगाने की जरूरत नहीं है आपने केवल तो आपने केवल

201
00:13:45,600 --> 00:13:51,360
टीवी चैनल वालों के लिए यह बात कही है आम जनता के लिए देखो बातें तो मैं अपने

202
00:13:51,360 --> 00:13:54,880
अब देखो शिवम जी बाकी बातें तो मैं अपने इस पे Facebook पेज पे मैं डालता

203
00:13:54,880 --> 00:13:59,040
ही रहता हूं आप और हम तो उसको सुनते ही रहते हैं आप और हम बार-बार उन बातों को सुने

204
00:13:59,040 --> 00:14:03,280
फिर उन बातों का मतलब औचित्य क्या है? नहीं औचित्य है। आपकी जो बातें

205
00:14:03,280 --> 00:14:07,760
हैं जो रामपाल जी की बातें हैं वो बहुत सारी सिरे से गलत है।

206
00:14:07,760 --> 00:14:12,080
जैसे उन्होंने ये कह दिया कि वेद के द्वारा भग वो नहीं

207
00:14:12,080 --> 00:14:16,080
प्राप्त होगा। मुक्ति का मार्ग नहीं है वेद में। वेद

208
00:14:16,080 --> 00:14:20,160
जो वेद जो है वेद जो है वह परमात्मा के जो है प्राप्ति में

209
00:14:20,160 --> 00:14:24,160
सहयोगी है लेकिन वेदों में उस परमात्मा की जो प्राप्ति का है वो पूर्ण मार्ग

210
00:14:24,160 --> 00:14:28,160
नहीं है पूर्ण रास्ता नहीं है तो वो पूर्ण रास्ता के अब यहां पे

211
00:14:28,160 --> 00:14:32,880
क्या है ना अब यहां पे क्या हुआ ना कि वेदों का खंडन हो गया यहां

212
00:14:32,880 --> 00:14:37,120
एक बात बताओ क्योंकि सुनिए सुनिए तो सुनिए सुनिए सुनिए तो

213
00:14:37,120 --> 00:14:41,200
अब वेद में ही लिखा है कि और कोई रास्ता नहीं है केवल वेद का ही रास्ता है

214
00:14:41,200 --> 00:14:45,200
यही लिखा है वेद में और ना जाने कितने और शास्त्रों में दिखा दिखा दूंगा मैं

215
00:14:45,200 --> 00:14:49,200
आपको। सुनो सुनो मेरी बात सुन लो आप एक जी

216
00:14:49,200 --> 00:14:53,440
गीता जी के अध्याय 15 में हम और

217
00:14:53,440 --> 00:14:57,440
साफ-साफ आप जी ने भी देखा होगा लिखा इतनी संस्कृत तो आप जानते हैं हम लोग तो खैर संस्कृत

218
00:14:57,440 --> 00:15:01,600
वगैरह का ज्यादा हम लोग नहीं जानते भाई साहब देखिए वैसे गीता के भी मैं आपके उत्तर दे सकता हूं

219
00:15:01,600 --> 00:15:05,760
मगर मैं आपकी इस बात को तो उत्तर नहीं चाह रहा सुनिए मैं आपसे उत्तर नहीं चाह

220
00:15:05,760 --> 00:15:09,760
रहा भाई साहब मुझे तो उत्तर सारे मिले हुए हैं मेरे गुरुदेव ने मुझे दिए हुए हैं जानने की आवश्यकता

221
00:15:09,760 --> 00:15:10,260
है

222
00:15:10,000 --> 00:15:14,320
उत्तर की बात ये है जो आप जो काउंटर कर रहे हैं ना गीता

223
00:15:14,320 --> 00:15:18,320
में आपके रामपाल जी ने यह लिखा है कि जो बात गीता की वेद से मैच नहीं

224
00:15:18,320 --> 00:15:22,560
खाएगी वह बात मान्य नहीं है। अगर आप गीता

225
00:15:22,560 --> 00:15:26,800
के आधार पर यह बता रहे हैं कि भाई गीता बोलने वाले को नहीं पता है कि वहां

226
00:15:26,800 --> 00:15:31,040
मोक्ष कैसे प्राप्त होगा तो हम वेद से उस बात को पता होता अगर उसको

227
00:15:31,040 --> 00:15:35,120
पता मैं वेद से मैं वेद से गीता की बात काट रहा हूं ना।

228
00:15:35,120 --> 00:15:39,600
मैं वेद में बता रहा हूं। आपको वेद में लिखा है कि वेद के अलावा और कोई नहीं है रास्ता।

229
00:15:39,600 --> 00:15:43,600
यही एक रास्ता है तो मैं आपको वही तो बात समझाना चाह

230
00:15:43,600 --> 00:15:47,760
रहा हूं कि वेदों में भी पूर्ण मोक्ष मार्ग नहीं है। जो नहीं है वेद तो यह

231
00:15:47,760 --> 00:15:51,840
आप तो आप वेद विरोधी हो गए ना यहां पर वेद कह रहा है

232
00:15:51,840 --> 00:15:55,920
आप कह रहे हो वेद परमात्मा की प्राप्ति में सहयोगी है लेकिन मैं क्या कह रहा हूं

233
00:15:55,920 --> 00:16:00,160
वो कह रहा है कोई और मार्ग नहीं है वेद ही है केवल वो यह कह रहा है केवल

234
00:16:00,160 --> 00:16:04,320
वही है और कोई मार्ग नहीं है वेदों में यह भी तो लिखा है नेति

235
00:16:04,320 --> 00:16:08,320
नेति न इति न इति केवल इतना ही नहीं है जो वेदों में लिख दिया गया

236
00:16:08,320 --> 00:16:12,560
परमात्मा जी क्योंकि एक समय क्योंकि एक समय आएगा जब

237
00:16:12,560 --> 00:16:16,560
आपको जो है व्यवहार में ना आ सकने वाली बात भी कहनी नहीं होगी। जैसे

238
00:16:16,560 --> 00:16:20,960
कि गुड़ कितना मीठा है। गुड़ की मिठास

239
00:16:20,960 --> 00:16:24,960
इसकी व्याख्या कर देगा कोई। हम तो उस स्तर पर ले

240
00:16:24,960 --> 00:16:25,460
जाने

241
00:16:25,280 --> 00:16:29,600
के बाद वेद ये कहता है कि इस चीज की व्याख्या नहीं हो सकती। मगर

242
00:16:29,600 --> 00:16:33,840
उस स्तर तक पहुंचाने वाला केवल वेद है। ये वेद कहता है।

243
00:16:33,840 --> 00:16:37,840
हम हम जैसे कि अब मैं आपसे पूछूं अभी तो ये कह रहा हूं

244
00:16:37,840 --> 00:16:41,920
ना वेद आपको केवल केवल आपको उस स्तर तक पहुंचा सकता है। लेकिन

245
00:16:41,920 --> 00:16:45,920
आपको उसकी तो उस स्तर से उस स्तर से आगे वेद के अलावा कोई

246
00:16:45,920 --> 00:16:49,920
मार्ग नहीं है। अगर कोई यह कह रहा है कि मैं वेद वेद से आगे की बात आपको बता रहा

247
00:16:49,920 --> 00:16:54,640
हूं तो आप बता दो मुझे। बताइए क्यों नहीं है? बताइए। क्यों नहीं है?

248
00:16:54,640 --> 00:16:58,880
यजुर्वेद अध्याय नंबर 40 मंत्र नंबर 10 को ध्यान से पढ़ लीजिए। उसमें वेद

249
00:16:58,880 --> 00:17:03,040
बोलने वाला भगवान कह रहा है कि यदि पूर्ण प्राप्ति करनी है उस परमात्मा की

250
00:17:03,040 --> 00:17:07,520
तो आपको धीरणाम संतों की जो है खोज करनी पड़ेगी। ऐसा कुछ नहीं है।

251
00:17:07,520 --> 00:17:11,600
वहां आपके रामपाल जी ने ही उस मंत्र के दो-दो अर्थ निकाल रखे हैं।

252
00:17:11,600 --> 00:17:15,600
एक में कहा है कि केवल एक में कहा है कि केवल वो भाषा की बात नहीं है वहां

253
00:17:15,600 --> 00:17:19,920
पर। वो उसमें बहुत सारी त्रिकम है। मैं आपको बता दूंगा जब आप सामने से होंगे।

254
00:17:19,920 --> 00:17:24,080
फिलहाल मैं आपको कह रहा हूं कि कबीर दास जी तो भगवान थे ना। परमात्मा

255
00:17:24,080 --> 00:17:28,080
थे ना? वो तो आज भी वो तो परमात्मा ही है। हां है। ठीक।

256
00:17:28,080 --> 00:17:32,400
अब कबीर दास जी की बारे में भी यही लिखा है। कबीर दास की वाणी यानी परमात्मा

257
00:17:32,400 --> 00:17:36,640
की वाणी। बिल्कुल बिल्कुल। ठीक है। तो अब परमात्मा की वाणी

258
00:17:36,640 --> 00:17:40,320
के लिए लिखा हुआ है ज्ञान गंगा में कि कबीर दास की वाणी से भी मोक्ष नहीं

259
00:17:40,320 --> 00:17:44,560
मिलेगा। नहीं ये कौन सी उसमें लिखा हुआ है? ये आपके ज्ञान

260
00:17:44,560 --> 00:17:48,560
गंगा में वगैरह में लिखा है रामपाल जी ने। इसका मतलब वो ये कह रहे हैं।

261
00:17:48,560 --> 00:17:52,640
नहीं नहीं इसका सुनिए सुनिए। मैं मैं समझा रहा हूं। मैं जानता हूं। मैं समझ गया

262
00:17:52,640 --> 00:17:56,720
हूं वो क्या कह रहे हैं। मैं समझ गया हूं वो क्या कह रहे हैं। आप सुनिए तो

263
00:17:56,720 --> 00:18:00,880
आप सुनिए आप सुनिए तो परमात्मा की वाणी लेते चलो

264
00:18:00,880 --> 00:18:04,880
यार मैं मैं जो आप मुझे बताने जो आप मुझे

265
00:18:04,880 --> 00:18:09,120
बताने जा रहे हैं मैं वही बता रहा हूं आपको परमात्मा की वाणी

266
00:18:09,120 --> 00:18:13,120
होते हुए भी डायरेक्ट परमात्मा जब साक्षात सामने नहीं

267
00:18:13,120 --> 00:18:17,200
है तो उस वाणी को समझने के लिए आपको किसी के पास जाना होगा।

268
00:18:17,200 --> 00:18:21,280
ये कहा है वहां पे रामपाल जी महाराज ने। जी जी जी तो

269
00:18:21,280 --> 00:18:26,160
इसी प्रकार से वेद को समझने के लिए आपको संतों के पास जाना होगा।

270
00:18:26,160 --> 00:18:30,480
उसमें क्या दिक्कत है? जाना होगा। मगर वेद वेद मगर मगर वेद

271
00:18:30,480 --> 00:18:34,480
से इत कोई दूसरा रास्ता नहीं है मोक्ष का। ये भी वेद में

272
00:18:34,480 --> 00:18:38,800
लिखा बिल्कुल आपकी बात सही है क्योंकि वो जो संत है वो जो भी कुछ साबित करेगा

273
00:18:38,800 --> 00:18:43,360
भैया वो मतलब वेदों से गीता से जो जो ग्रंथ ऑलरेडी हमारे सनातन

274
00:18:43,360 --> 00:18:47,440
साबित नहीं होगा। विनायक जी वही साबित करने के लिए तो आपको मैंने फोन

275
00:18:47,440 --> 00:18:51,680
लगाया कि आपने हमें कहा कि भाई जो है मैं

276
00:18:51,680 --> 00:18:55,360
हूं कहां से साबित कर दूं बताओ मैं तो यदि किसी टीवी चैनल

277
00:18:55,360 --> 00:18:59,360
पे भी आऊंगा मान लीजिए अगर मैं किसी टीवी चैनल पे भी आता हूं हम

278
00:18:59,360 --> 00:19:03,440
तो मैं भी केवल वही साक्ष्य रखूंगा जो साक्ष्य हमारे गुरुदेव ने ऑलरेडी

279
00:19:03,440 --> 00:19:07,600
भाई साहब उन साक्ष्यों पर उन साक्ष्यों को रखने के बाद जो सवाल

280
00:19:07,600 --> 00:19:11,680
खड़े होंगे उनका आप जवाब दोगे ना वहां पर उनका जवाब फिर

281
00:19:11,680 --> 00:19:15,680
मैंने दूसरा तरीका बताया ना फिर विश्वास कहे कबीर सुनो भाई

282
00:19:15,680 --> 00:19:19,760
साधु मैं तो हूं विश्वास में जो व्यक्ति राम कृष्ण को अपना

283
00:19:19,760 --> 00:19:24,320
भगवान कहता है जो ब्रह्मा विष्णु महेश को अपना भगवान कहता है अपना जो है वो

284
00:19:24,320 --> 00:19:28,480
इष्ट कहता है कि भाई इनसे बढ़के कोई भगवान नहीं कोई परमात्मा नहीं फिर भैया विश्वास

285
00:19:28,480 --> 00:19:32,480
की परीक्षा होगी फिर अंत में मैं आपको यह कह रहा हूं

286
00:19:32,480 --> 00:19:36,560
जिसका भगवान सच्चा होगा और जिसकी भक्ति सच्ची होगी फिर उसका

287
00:19:36,560 --> 00:19:40,640
भगवान आके उसकी रक्षा करेगा नहीं करेगा यदि वो भगवान है तो जैसे

288
00:19:40,640 --> 00:19:44,800
मीरा की रक्षा अगर उसकी जो अगर उसकी की जो भक्ति है

289
00:19:44,800 --> 00:19:49,360
अगर उसके जो कर्म है वो सही वास्तविकता में होंगे तो करेगा ना

290
00:19:49,360 --> 00:19:53,840
उसकी भक्ति कर्म उस समय सही होंगे जब उसका ज्ञान सही होगा अरे

291
00:19:53,840 --> 00:19:58,000
भाई ज्ञान सही होगा और ज्ञान पे चलने वाला भी तो चाहिए अभी 135

292
00:19:58,000 --> 00:20:02,000
लोग क्यों हो रहे हैं गुरुद्रोही कर रहे हैं मगर सामने वाले को चलने में

293
00:20:02,000 --> 00:20:06,080
दिक्कत क्या हो रही है जब हम सही चल रहे हैं जब हम अपने गुरु को परमात्मा मान के भक्ति कर

294
00:20:06,080 --> 00:20:10,160
रहे हैं हम यदि विश्वास के आधार से अगली परीक्षा देखिए

295
00:20:10,160 --> 00:20:10,800
ये विश्वास

296
00:20:10,800 --> 00:20:15,200
जो भी बात है आप चलो विश्वास के आधार पे भी कर लेते ना बात कर लेना

297
00:20:15,200 --> 00:20:19,200
जी हां आप उस पे कर लेना आप आओ ठीक है

298
00:20:19,200 --> 00:20:24,000
बताइए कब आ रहे हैं भाई मुझे आना कहां है मुझे क्या करना है

299
00:20:24,000 --> 00:20:28,000
आप आप जैसा बताएं आप कहां पे निवासी हैं कहां के हैं राजस्थान के

300
00:20:28,000 --> 00:20:32,000
हैं मैं तो राजस्थान के जयपुर का निवासी हूं आप आगरा आ जाइए

301
00:20:32,000 --> 00:20:36,880
आगरा में मिल लेते हैं आप जयपुर से आगरा आ जाइए हम लखनऊ से आगरा आ जाएंगे

302
00:20:36,880 --> 00:20:41,280
नहीं फिर मिलके फिर अपन क्या करेंगे बैठकर चर्चा होगी वीडियो रिकॉर्डिंग

303
00:20:41,280 --> 00:20:45,520
होगी आप अपने चैनल पर डालना अपने चैनल साहब ऑलरेडी आप जी वैसे भी ऑनलाइन कर रहे हैं। वैसे

304
00:20:45,520 --> 00:20:49,600
लाइव में जुड़ जाते हैं आजकल। हां तो लाइव में जुड़ जाइए। भाई हर

305
00:20:49,600 --> 00:20:53,680
चीज के लिए जाना थोड़ी पड़ता है। लाइव में जुड़ जाइए। आजकल वैसे भी सोशल मीडिया के सहारे से

306
00:20:53,680 --> 00:20:57,760
बहुत सारे काम हो जाते हैं। लोग आपस में जुड़ जाते हैं। मैंने तो आप लाइव में

307
00:20:57,760 --> 00:21:01,760
जुड़ जाइए। लाइव में आ जाइए आप। लाइव में तो मैं जुड़ जाऊंगा। लेकिन आप मेरी बातों

308
00:21:01,760 --> 00:21:05,760
को तो मानने वाले हैं नहीं। अरे भाई भी सतगुरु रामपाल जी के

309
00:21:05,760 --> 00:21:09,920
भगत भी आपको वही रेफरेंस देते हैं। वही बात जब कुछ मानना ही नहीं

310
00:21:09,920 --> 00:21:14,000
अगर यही बात है तो फिर तो हमें कुछ करना ही नहीं चाहिए क्योंकि सामने वाला तो

311
00:21:14,000 --> 00:21:18,480
मना कर देगा भाई पहले भक्ति कर ही रहे हमें तो विश्वास है पूरा हम तो

312
00:21:18,480 --> 00:21:22,560
हम ये बात सुनिए इस बात को मैं आपकी गीता से काट देता हूं कर्मण्यवादी

313
00:21:22,560 --> 00:21:26,080
कारस मा फलेशु कदाचना तू अपने कर्म में विश्वास रख

314
00:21:26,080 --> 00:21:30,160
परिणाम में विश्वास मत ध्यान मत दे आपको इससे क्या मतलब मैं मानूंगा

315
00:21:30,160 --> 00:21:34,960
कि नहीं मानूंगा आप यथा सामर्थ मुझे कोशिश करिए बस

316
00:21:34,960 --> 00:21:38,960
अगर अपने कर्म में विश्वास करने से भगवान मिलेगा तो फिर जो कसाई जो बकरे

317
00:21:38,960 --> 00:21:43,200
काटता है वो भी तो कर्म में नहीं अरे कर्म में विश्वास रखने का मतलब

318
00:21:43,200 --> 00:21:47,360
है कि तू बेटा जो काम करने जा रहा है जो ज्ञान पूर्वक जो

319
00:21:47,360 --> 00:21:51,360
कार्य करने जा रहा है तू उसमें [गला साफ़ करने की आवाज़] ध्यान दे तू इस बात का ध्यान मत दे

320
00:21:51,360 --> 00:21:55,360
कि उस कर्म से तुझे फायदा होगा कि नुकसान होगा कर्तव्य

321
00:21:55,360 --> 00:21:59,920
कर्म और अकर्तव्य कर्म क्या है वो भी तो गीता जी में बताया फिर वो कौन बताएगा

322
00:21:59,920 --> 00:22:03,920
अरे भाई अगर इंसान को ही पता होता अगर आप पता नहीं क्यों

323
00:22:03,920 --> 00:22:08,080
विषय कर रहे हैं। आप जब यह कह रहे हैं कि मेरे मानने से आप

324
00:22:08,080 --> 00:22:12,080
मानोगे नहीं तो आ यह भगवान ने स्वयं कहा है कि भाई

325
00:22:12,080 --> 00:22:16,080
आपको क्या करना है क्या नहीं करना है यह तो शास्त्र बताएंगे

326
00:22:16,080 --> 00:22:20,160
मगर जब तुम कर रहे होगे शास्त्रों को समझने के लिए और शास्त्रों को समझने

327
00:22:20,160 --> 00:22:24,160
के लिए अध्याय चार श्लोक 34 में तत्वदर्शी संत की जो है शरण में जाने के लिए कहा

328
00:22:24,160 --> 00:22:28,960
है तत्वदर्शी कौन है तत्वदर्शी कौन है क्या पहचान है उसकी बताइए

329
00:22:28,960 --> 00:22:32,960
तत्वदर्शी वही है जो संसार रूपी वृक्ष के सारे भाग बता दे कि भैया

330
00:22:32,960 --> 00:22:37,360
ये ये ब्रह्म कौन है या परबह्म कौन कौन है? पारबह्म कौन है?

331
00:22:37,360 --> 00:22:41,120
क्या क्या तत्वदर्शी आपको मोक्ष दिलाएगा? क्यों नहीं

332
00:22:41,120 --> 00:22:45,200
दिलाएगा? 10001% यानी कि यानी कि आपके अनुसार तत्वदर्शी

333
00:22:45,200 --> 00:22:49,200
वो है जो मोक्ष दिलाएगा। तत्वदर्शी स्वयं परमात्मा ही होता है।

334
00:22:49,200 --> 00:22:54,560
ठीक है। अब सुनिए अब सुनिए। अब सुनिए।

335
00:22:54,560 --> 00:22:58,880
अब सुनिए सुनिए। तो जी चार 34 में जिसे

336
00:22:58,880 --> 00:23:03,280
तत्वदर्शी कहा गया है वह यज्ञों की यज्ञों

337
00:23:03,280 --> 00:23:07,520
का ज्ञान बताने वाला है। यज्ञों का पांच यज्ञ होते

338
00:23:07,520 --> 00:23:11,760
सुन लीजिए सुन लीजिए और पांच यज्ञ होते हैं उनमें से एक ज्ञान यज्ञ ज्ञान

339
00:23:11,760 --> 00:23:16,000
यज्ञ का ज्ञान देने वाले को 434 में तत्वदर्शी कहा गया है। ठीक है?

340
00:23:16,000 --> 00:23:20,080
बिल्कुल ठीक है। आपके रामपाल जी महाराज ने लिखा है कि

341
00:23:20,080 --> 00:23:25,040
यज्ञ से ज्ञान यज्ञ से भी पांचों यज्ञों से मुक्ति नहीं होगी।

342
00:23:25,040 --> 00:23:29,120
साथ में आपको उसका नाम का स्मरण करना पड़ेगा। मर्यादा में जो है रहना

343
00:23:29,120 --> 00:23:33,360
पड़ेगा। यानी कि यानी नहीं सुनिए तत्वदर्शी नाम का स्मरण

344
00:23:33,360 --> 00:23:37,360
करने वाला नहीं है। तत्वदर्शी कौन है? ज्ञान यज्ञ का ज्ञान

345
00:23:37,360 --> 00:23:41,360
देने वाला। तत्वदर्शी नाम बताने वाला नहीं

346
00:23:41,360 --> 00:23:45,600
है। तत्वदर्शी नाम देने वाला नहीं है। तत्वदर्शी की

347
00:23:45,600 --> 00:23:50,080
ज्ञान कौन देगा? जीव थोड़ी दे सकता है। नहीं ये आपने जैसे कहा कि तत्वदर्शी

348
00:23:50,080 --> 00:23:54,080
के पास जाने लिखा है। तत्वदर्शी वो है जो ज्ञान युक्त का ज्ञान देगा। की बात कर

349
00:23:54,080 --> 00:23:56,320
रहा हूं मैं। तत्वदर्शी

350
00:23:56,320 --> 00:24:00,480
तो संत कोई जानवर तो होता है। सुनिए यानी कि नाम लेने आपको और

351
00:24:00,480 --> 00:24:04,560
किसी के पास जाना है। तत्वदर्शी के पास नहीं जाना है। सिर्फ तत्वदर्शी

352
00:24:04,560 --> 00:24:08,560
के पास नहीं। वही बताएगा वही। नहीं उसमें देखिए भगवत

353
00:24:08,560 --> 00:24:13,120
गीता के आधार पर तत्वदर्शी वो है जो ज्ञान यज्ञ का ज्ञान देगा।

354
00:24:13,120 --> 00:24:17,280
अरे तो जो जो ज्ञान देगा फिर नाम उसमें नहीं ये नाम वाली बात कहां

355
00:24:17,280 --> 00:24:21,280
लिखी है उसमें? तत्वदर्शी ये थोड़ी कि शादी आपसे करनी और जो भाई साहब

356
00:24:21,280 --> 00:24:25,360
मैं पूछ रहा हूं उसमें नाम वाली बात कहां लिखी है 434 में

357
00:24:25,360 --> 00:24:29,520
अरे जब उसकी शरण में जाएंगे जो ज्ञान देगा तो फिर नाम भी तो देगा ये ये तो हम कह

358
00:24:29,520 --> 00:24:33,680
रहे हैं ना कि तत्वदर्शी वही होगा जो नाम भी देगा शास्त्र में तो लिखा

359
00:24:33,680 --> 00:24:37,760
दिखाओ शास्त्र में तो यह कह रहे हैं कि ज्ञान यज्ञ का ज्ञान तत्वदर्शी

360
00:24:37,760 --> 00:24:41,760
देगा चार चौथे और आपके और रामपाल

361
00:24:41,760 --> 00:24:45,760
जी के अनुसार ज्ञान यज्ञ से मुक्ति है नहीं यानी कि गीता का जो तत्वदर्शी है

362
00:24:45,760 --> 00:24:49,840
मुक्ति नहीं दे सकता क्योंकि वो तब कहा ना ना ये तो आप अपनी तरफ

363
00:24:49,840 --> 00:24:53,840
से बोल रहे हो कि भाई ज्ञान से मुक्ति ज्ञान से आपको रास्ता मिलेगा आपको

364
00:24:53,840 --> 00:24:57,920
जानकारी होगी उसके बाद ही तो फिर आप उसके बाद वो नाम देने वाला तत्वदर्शी

365
00:24:57,920 --> 00:25:01,920
है ना ज्ञान यज्ञ का ज्ञान देने वाला है संति देगा नाम और ज्ञान और

366
00:25:01,920 --> 00:25:06,000
कौन देगा जो ज्ञान देगा वो इनाम देगा ये कहां लिखा है

367
00:25:06,000 --> 00:25:10,240
ये गीता में कहां लिखा है वो इनाम देगा में लिखा हुआ है ना कि उसकी शरण में जाओ

368
00:25:10,240 --> 00:25:12,560
उसको सरलता पूर्वक

369
00:25:12,560 --> 00:25:16,800
वो तत्वदर्शी वो तत्वदर्शी कहा गया है ज्ञान यज्ञ का ज्ञान

370
00:25:16,800 --> 00:25:21,040
देने वाला अब यही तो बातें हैं नारायण जी जो आप जी स्वीकार

371
00:25:21,040 --> 00:25:25,280
नहीं कर रहे हैं। यह स्वीकार क्या आप जब शास्त्र सम्मत

372
00:25:25,280 --> 00:25:29,680
भक्ति बताते हैं तो फिर अब शास्त्र से क्यों नहीं बता रहे कि तत्वदर्शी से नाम मिलेगा।

373
00:25:29,680 --> 00:25:33,680
ही तो बताया जा रहा है। कहां बता रहे हैं? देखिए आप जिसको तत्वदर्शी कह रहे हैं

374
00:25:33,680 --> 00:25:37,920
वो नाम भी देगा और गीता में जो तत्वदर्शी है वो ज्ञान यज्ञ का ज्ञान

375
00:25:37,920 --> 00:25:42,160
देगा। नाम नहीं देगा वो। अरे भैया जिससे फेरा भैया

376
00:25:42,160 --> 00:25:46,240
जिससे फेरे होते हैं पति भी तो वही कहलाता है थोड़ी देखिए अब ये

377
00:25:46,240 --> 00:25:50,240
ये जो बात आप बोल रहे हो ये शास्त्र शास्त्र में लिखी हुई बात नहीं है ये

378
00:25:50,240 --> 00:25:54,400
ये आप अपने मन से बोल रहे हो दिए जाएंगे ना हां तो वो दीजिएगा अच्छा फिर

379
00:25:54,400 --> 00:25:58,480
नाम कौन देगा फिर अगर ज्ञान अगर तत्वदर्शी देगा तो फिर नाम कौन देगा ये कौन से

380
00:25:58,480 --> 00:26:02,560
शास्त्र में लिखा हुआ है यह जब आप तत्वदर्शी की सीमा खींच रहे

381
00:26:02,560 --> 00:26:07,360
हैं कि भाई 434 में तत्वदर्शी के बारे में लिखा हुआ है तो

382
00:26:07,360 --> 00:26:11,520
आपके अनुसार जो ज्ञान यज्ञ का ज्ञान है वह क्या कहते

383
00:26:11,520 --> 00:26:15,680
मुक्ति का मार्ग नहीं है। जबकि हमारे अनुसार ज्ञान यज्ञ का मार्ग

384
00:26:15,680 --> 00:26:19,680
मुक्ति का मार्ग है। आपकी बात यहां गलत होती है। रामपाल जी भी तो यही कह रहे

385
00:26:19,680 --> 00:26:23,680
हैं कि ज्ञान मार्ग ही मुक्ति का मार्ग है। तो वो तो वो तो वो तो लिख रहे हैं ना

386
00:26:23,680 --> 00:26:27,600
ज्ञान यज्ञ से मुक्ति नहीं होगी। वो वो यह कह रहे हैं कि

387
00:26:27,600 --> 00:26:31,600
खाली अकेले ज्ञान ज्ञान से मुक्ति नहीं होगी। जी भाई ज्ञान यज्ञ में

388
00:26:31,600 --> 00:26:35,760
सब कुछ है। ज्ञान यज्ञ में नाम भी ज्ञान यज्ञ में है। में केवल

389
00:26:35,760 --> 00:26:40,960
जानकारी है कि भाई द्रव्य में यज्ञ की अपेक्षा ज्ञान यज्ञ जो है सर्वश्रेष्ठ है।

390
00:26:40,960 --> 00:26:45,200
भंडारे करने से कंबल बांटने से अच्छा है। पहले आप किसी तत्वदर्शी संत की शरण में जाके

391
00:26:45,200 --> 00:26:49,360
ज्ञान ग्रहण करो। उसके बाद में जब आप दान धर्म

392
00:26:49,360 --> 00:26:53,520
करोगे तब आपकी होगी मुक्ति। जो नाम है अकेले ज्ञान से मैं

393
00:26:53,520 --> 00:26:57,680
बताऊं दिक्कत क्या है? ज्ञान यज्ञ से मुक्ति नहीं होगी। यह कहकर

394
00:26:57,680 --> 00:27:01,840
उन्होंने नाम लेने को ज्ञान यज्ञ से अलग कर दिया। ना गलत

395
00:27:01,840 --> 00:27:05,840
बात है। गलत बात है। आप जो कह रहे हो आप सामने आप सामने आकर बात करिए

396
00:27:05,840 --> 00:27:10,160
कहीं पे। आप लाइव आ गए। आपके सामने तो बात कर रहा हूं। ये आपके मेरे आमने

397
00:27:10,160 --> 00:27:14,320
सामने तो बात हो रही है। उसमें दिक्कत क्या है? नहीं आप लाइव आकर के आप ही तो कह रहे थे अभी

398
00:27:14,320 --> 00:27:18,720
शुरू में। लाइव में तो लाइव में भी तो मैं यही बात करूंगा जो आपको जो है

399
00:27:18,720 --> 00:27:22,880
भाई साहब अभी शुरू में आप यह कह रहे थे कि भाई दो चार लोगों में बात करने का क्या

400
00:27:22,880 --> 00:27:27,360
फायदा? ज्यादा लोगों तक पहुंचे तब बात है। तो अभी हम दो लोग कर रहे हैं।

401
00:27:27,360 --> 00:27:31,440
मैं अभी हम दो लोग कर रहे हैं और लाइव में हमें हजारों

402
00:27:31,440 --> 00:27:35,760
लोग देखेंगे तो इससे तो बहुत ज्यादा लोग हो गए। आप अपनी बात का

403
00:27:35,760 --> 00:27:40,000
जी शिवश भैया जी ठीक है आप भी एक अच्छी आत्मा

404
00:27:40,000 --> 00:27:42,720
है। मैं ये नहीं कह रहा देखो परमात्मा चाहने वाली आत्मा पहले

405
00:27:42,720 --> 00:27:46,880
इसी प्रकार से विरोध में आती है। और हमारे गुरुदेव कहते हैं कि जो भगवान का ज्यादा विरोध

406
00:27:46,880 --> 00:27:51,520
करता है अंत में जाके उसका पक्का भगत भी वही बनता है। ठीक है मैं

407
00:27:51,520 --> 00:27:55,520
अगर आप चाहते हैं वैसे तो मुझे पता है कि आप जी क्या सवाल करेंगे लाइव में

408
00:27:55,520 --> 00:27:59,600
और मैं आपको क्या जवाब दूंगा वह भी आपको पता है। खाली एक वाद-विवाद का विषय होगा।

409
00:27:59,600 --> 00:28:03,680
फिर भी यदि आप चाहते हैं तो आपकी इच्छा पूरी करने के लिए मैं आपके साथ में लाइव में डिबेट

410
00:28:03,680 --> 00:28:07,840
करने के लिए तैयार हूं। आप मुझे बता दीजिए कब लाइव आना है क्या करना है। मैं आपको बताता हूं

411
00:28:07,840 --> 00:28:11,840
मैं। ठीक है? समय वगैरह एक ध्यान रखना। एक दो दिन

412
00:28:11,840 --> 00:28:16,080
ध्यान रखना। मैं आपको पहले ही बता रहा हूं और ये ऑडियो भी मैं संगत

413
00:28:16,080 --> 00:28:20,400
में वायरल करूंगा ताकि औरों को भी मालूम पड़े। वो भी लाइव जुड़े। जी। मैं

414
00:28:20,400 --> 00:28:24,480
लाइव आऊंगा सिर्फ आपसे केवल अकेले में मेरे साथ में दूसरा व्यक्ति लाइव में नहीं

415
00:28:24,480 --> 00:28:28,880
आना चाहिए कोई भी आपके चैनल पे कोई नहीं होगा कोई नहीं होगा जैसे दूसरे व्यक्ति

416
00:28:28,880 --> 00:28:32,960
लाइव आए तुरंत मैं लाइव से मैं डिस्कनेक्ट हो जाऊंगा दूसरी बात

417
00:28:32,960 --> 00:28:36,960
मेरे मेरे पूज्य गुरुदेव क्यों आएगा ऐसा क्यों लग रहा है पूर्वक

418
00:28:36,960 --> 00:28:41,120
लेना पड़ेगा नहीं नहीं कोई और दूसरी बात जी हां दूसरी बात मेरे

419
00:28:41,120 --> 00:28:45,920
पूज्य गुरुदेव जी का नाम आपको सम्मान पूर्वक लेना पड़ेगा बिल्कुल

420
00:28:45,920 --> 00:28:50,080
ठीक है आप अगर शास्त्र सम्मत बात करेंगे मैं चार घंटे डिबेट करूंगा।

421
00:28:50,080 --> 00:28:54,240
यदि आपने उआ भाई बकनी शुरू कर दी उसी समय मैं उसको जो है डिस्कनेक्ट कर दूंगा। बाकी

422
00:28:54,240 --> 00:28:57,920
आप फिर से वो तो बोलिए कि अगर वो हो गया

423
00:28:57,920 --> 00:29:02,560
हारजीत से हमें कोई लेना देना। ठीक है। आपने मुझे तीन बातें बताई। पहली बात कोई और आएगा नहीं।

424
00:29:02,560 --> 00:29:06,640
दूसरी बात यह है कि आपने कहा कि शास्त्र सम्मत वो बात करेंगे। अगर नहीं करेंगे तो मैं

425
00:29:06,640 --> 00:29:10,640
चला जाऊंगा। यह वाली बात तो यह भी हो सकती है कि हो सकता है मैं शास्त्र सम्मत ही कर रहा हूं।

426
00:29:10,640 --> 00:29:14,720
मगर आपको पसंद ना आए तो आप चले जाए। तो यह जनता डिसाइड कर लेगी। अगर आप

427
00:29:14,720 --> 00:29:18,880
गए तो गए तो सही गए या जनता तो कभी डिसाइड ना कर पाई

428
00:29:18,880 --> 00:29:23,120
ना कर पाएगी जनता आप और हम भी कभी आप सुनिए

429
00:29:23,120 --> 00:29:27,200
अगर आप ये मानते हैं अगर सुनिए आप अगर यह मानते हैं कि आज आप

430
00:29:27,200 --> 00:29:31,360
सही जगह जुड़ गए हैं तो आप भी किसी समय पे जनता थे यानी

431
00:29:31,360 --> 00:29:35,520
कि जनता ने डिसाइड किया हम आपके रूप में जनता

432
00:29:35,520 --> 00:29:39,520
ने डिसाइड किया ना जनता ने डिसाइड किया लेकिन वो तत्वदर्शी संत

433
00:29:39,520 --> 00:29:43,600
के मुख कमल से सुन के डिसाइड किया अरे भाई साहब वो तो आप कह

434
00:29:43,600 --> 00:29:47,680
रहे हो पहले से आप जिसको आप जिस पर हम वो है जिस पर विवाद

435
00:29:47,680 --> 00:29:51,760
है जिस पर हम हम लोगों का एक दूसरे के प्रति प्रश्न है आप उसको

436
00:29:51,760 --> 00:29:55,920
प्रमाण के रूप में थोड़ी ना प्रस्तुत कर सकते हैं। जब हम यही डिसाइड करने

437
00:29:55,920 --> 00:30:00,000
जा रहे हैं कि तब वो तत्वदर्शी हैं कि नहीं है। वो सही बोल रहे हैं गलत बोल रहे हैं। तो

438
00:30:00,000 --> 00:30:04,160
आप उनको प्रमाण के रूप में थोड़ी ना रख सकते हो। अपनी बातें सिद्ध करने के लिए उस वो

439
00:30:04,160 --> 00:30:08,240
तत्वदर्शी हैं कि नहीं। इसी बात का तो हमारे बीच में मतभेद है।

440
00:30:08,240 --> 00:30:12,320
तो आप अपनी बात को सिद्ध करने के लिए कि वह तत्वदर्शी है। इसलिए वो जो कह रहे हैं सही है। यह

441
00:30:12,320 --> 00:30:13,120
नहीं बोल सकते।

442
00:30:13,120 --> 00:30:17,520
पहले यह तो सिद्ध करो कि वो तत्वदर्शी है कि नहीं। तब यह कहना कि तत्वदर्शी

443
00:30:17,520 --> 00:30:21,920
ने कहा सिद्ध किया हुआ है और हमने तो देखो मान भी रखा है। अपने संस्कारों

444
00:30:21,920 --> 00:30:26,000
की बात है। मैं आपको एक दो दिन जो है कमजोर होते मैं आपको

445
00:30:26,000 --> 00:30:30,320
एक दो दिन में देखिए ये फिजूल की बातें करने से कोई फायदा नहीं है। पवन

446
00:30:30,320 --> 00:30:34,320
दास जी ये फिजूल की बातें करने से कोई फायदा नहीं है। मैं आपको एकद दिन में

447
00:30:34,320 --> 00:30:38,480
टाइम दे रहा हूं। आप जो है बातें फिर लाइव में होंगी। अगर आपको ये फिजूल की बातें

448
00:30:38,480 --> 00:30:42,480
लग रही है तो लाइव में भी फिर मेरी तो यही बातें होंगी। क्या बात है?

449
00:30:42,480 --> 00:30:46,640
मतलब जो हम जो प्रश्न चल रहा है उस पर बात ना करके आप यह बोलने लग जाएंगे पूर्व

450
00:30:46,640 --> 00:30:51,040
जन्म के संस्कार होते हैं इसलिए तुम नहीं मान रहे हो यह सब बोलने लग जाओगे बात भी तो सत्य है

451
00:30:51,040 --> 00:30:55,440
अरे सत्य है तो मैं भी तो यह कह सकता हूं कि आपके पूर्व जन्म के विषय

452
00:30:55,440 --> 00:30:59,600
सुनिए यदि आपको लगता है कि शंकराचार्यों का ज्ञान श्रेष्ठ है तो फिर हर व्यक्ति

453
00:30:59,600 --> 00:31:03,760
फिर उनकी शरण में क्यों नहीं है? यदि आपको लगता है कि रामपाल जी का ज्ञान

454
00:31:03,760 --> 00:31:08,160
सर्वश्रेष्ठ है तो हर व्यक्ति उनकी शरण में क्यों नहीं है? रामपाल जी तो अभी 1994

455
00:31:08,160 --> 00:31:12,160
से खड़े हुए हैं शंकर जी यह कहां लिखा है कि यह कहां लिखा है?

456
00:31:12,160 --> 00:31:16,400
यह यह कहां लिखा है कि 3000 साल में अगर हर व्यक्ति

457
00:31:16,400 --> 00:31:20,560
उनकी शरण में नहीं जाएगा तो वो गलत और 200 या 100 साल में अगर हर व्यक्ति उनकी शरण

458
00:31:20,560 --> 00:31:24,640
में नहीं जाएगा तो वो सही। बोलो कहां लिखा है? ये ये बात तो

459
00:31:24,640 --> 00:31:28,320
ये बात तो जो है मतलब आप जी कह रहे हैं। मैं तो ये नहीं ये ये कहां लिखा

460
00:31:28,320 --> 00:31:32,480
है कि 3000 साल में अगर संसार का एक-एक प्राणी उनकी शरण में नहीं

461
00:31:32,480 --> 00:31:36,640
गया तो इसका मतलब है कि वो अज्ञान है। बताओ की शरण

462
00:31:36,640 --> 00:31:40,960
में आएंगे। मैं पूछ रहा हूं भाई साहब आप जो आप जो आप शास्त्र

463
00:31:40,960 --> 00:31:45,200
सम्मत बात करते हैं कि नहीं करते हैं? शास्त्र सम्मति तो यह किसी शास्त्र

464
00:31:45,200 --> 00:31:49,360
में लिखा है यह इनहीं की शरण में यह किसी शास्त्र में लिखा

465
00:31:49,360 --> 00:31:53,520
है कि 3000 साल में कबीर सागर है जब आवे 5500 तब

466
00:31:53,520 --> 00:31:57,760
ये मेरा वचन होगा साचा सकल सृष्टि परवानी कोई भाई साहब

467
00:31:57,760 --> 00:32:01,760
मैं ये कह रहा मैं आपके कबीर सागर में आपके कबीर

468
00:32:01,760 --> 00:32:06,080
सागर में सब बातें सच्ची नहीं है ये आपके रामपाल जी ने ही लिखा है

469
00:32:06,080 --> 00:32:10,240
तो हम उसे प्रमाण नहीं मान सकते जिसमें वो कह रहे हैं कि मिलावट हो गई है सागर कोई संत

470
00:32:10,240 --> 00:32:14,240
रामपाल जी ने थोड़ी लिखा वो तो कबीर जी लिख के गए अरे तो रामपाल जी तो कह रहे हैं

471
00:32:14,240 --> 00:32:18,320
कि उसमें मिलावट हो गई है। तो मिलावट को ठीक कर दिया ना गरीब दास जी के

472
00:32:18,320 --> 00:32:22,320
ग्रंथ के माध्यम से वह बिल्कुल प्योर है। तो कहां मिलावट है कहां मिलावट नहीं

473
00:32:22,320 --> 00:32:26,480
है। किस आधार पे तय किया? वो उन्होंने अपने सत्संगों में दिखा दिया बता दिया। तो ये जो

474
00:32:26,480 --> 00:32:30,720
3000 साल वाली बात है ना कबीर सागर वाली बात आप ये मुझे दिखाइएगा।

475
00:32:30,720 --> 00:32:34,800
ठीक है? 3000 साल में अगर कोई पूरी जनता, पूरी

476
00:32:34,800 --> 00:32:39,200
जनता हिमालय तीर्थ नामक पुस्तक है शंकराचार्य की उसमें लिखा हुआ है कि भाई आदि शंकराचार्य

477
00:32:39,200 --> 00:32:43,200
का जन्म कब हुआ? अरे भाई साहब मैं आपसे जो कह रहा हूं आपने एक

478
00:32:43,200 --> 00:32:43,700
बात

479
00:32:43,360 --> 00:32:47,520
कही कि शंकराचार्य की शरण में हर व्यक्ति क्यों नहीं है

480
00:32:47,520 --> 00:32:51,840
और मुझे का ज्ञान अगर सत्य होता तो उनकी शरण में आज हर प्राणी

481
00:32:51,840 --> 00:32:55,840
का भाई साहब मुझे आप मुझे टारगेट प्राप्त

482
00:32:55,840 --> 00:33:00,240
करना होगा भाई साहब मुझे आप ये लिखा दिखाइए कि जिसका ज्ञान सच्चा

483
00:33:00,240 --> 00:33:04,720
होगा उसकी शरण में संसार का प्रत्येक जीव आ जाएगा

484
00:33:04,720 --> 00:33:08,800
अब आएगा 2028 के बाद आएगा ये आप ये आप मुझे ये आप मुझे शास्त्र

485
00:33:08,800 --> 00:33:12,880
में लिखा दिखा दिखा देंगे ना आपको हर चीज आपको शास्त्रों में थोड़ी

486
00:33:12,880 --> 00:33:17,040
मिलेगी परमात्मा धरती पे आता है यानी कि कुछ बातें ऐसी है जो शास्त्र के बाहर

487
00:33:17,040 --> 00:33:19,760
है आपकी

488
00:33:19,760 --> 00:33:23,840
ये आपको 2028 की बात दिखा देंगे पूरी दुनिया उनकी शरण में यानी कि फिलहाल आप जो

489
00:33:23,840 --> 00:33:28,080
बात कह रहे हो वो शास्त्र में नहीं लिखी है ना अब देखो

490
00:33:28,080 --> 00:33:32,080
शास्त्र की बात आप जी मानते कहां हो संत राम अरे भाई अभी आपसे पूछ रहा हूं

491
00:33:32,080 --> 00:33:36,080
आप अपना एक वो दे रहे हो तर्क कि अगर शंकराचार्य जी का ज्ञान

492
00:33:36,080 --> 00:33:40,320
सत्य होता तो दुनिया का अगर कोई शास्त्र नहीं है क्या गरीब दास जी का ग्रंथ कोई शास्त्र

493
00:33:40,320 --> 00:33:44,320
में नहीं है क्या मैं कह तो रहा हूं आप उसको रामायण

494
00:33:44,320 --> 00:33:48,400
का आप उसको शास्त्र के रूप में सिद्ध करिएगा ना आ के

495
00:33:48,400 --> 00:33:52,400
जब आप लाइव में आएंगे देखिए पवन दास जी मैं आपको फिर कह

496
00:33:52,400 --> 00:33:57,200
रहा हूं कि आप उन चीजों को अभी प्रमाण नहीं बना सकते जिन चीजों की विश्वसनीयता

497
00:33:57,200 --> 00:33:58,400
पर हमारे और आपके बीच

498
00:33:58,400 --> 00:34:02,880
में मतभेद है। समय का इंतजार करो फिर बन जाएंगे 2028 के बाद फिर आप

499
00:34:02,880 --> 00:34:06,880
तो फिर आप क्यों कह रहे हो कि मैं सिद्ध कर दूंगा अभी। क्यों वीडियो बना रहे हो? समय का इंतजार

500
00:34:06,880 --> 00:34:11,040
करो। के आधार पे कर दूंगा ना। फिर मैं विश्वास के आधार पे सिद्ध करूंगा। तो

501
00:34:11,040 --> 00:34:15,360
आप आइए आप उस विश्वास के आप यानी

502
00:34:15,360 --> 00:34:19,440
कि वर्तमान में आपके पास शास्त्र नहीं है। आपके पास केवल विश्वास है शास्त्र तो आप

503
00:34:19,440 --> 00:34:23,440
लोग मान नहीं रहे ना अरे भाई साहब तो वो शास्त्र मुझे तो वो शास्त्र

504
00:34:23,440 --> 00:34:28,400
मुझे बताइए ना कहां लिखा है कबीर सागर आपका प्रमाण?

505
00:34:28,400 --> 00:34:32,880
आप यदि उनको नहीं मान रहे हैं तो जबरदस्ती तो है ही नहीं। मैं भाई साहब मैं जबरदस्ती

506
00:34:32,880 --> 00:34:37,040
नहीं कह रहा हूं। मुझे आप कबीर सागर का प्रमाण दीजिए ना वेदों में, पुराणों

507
00:34:37,040 --> 00:34:41,920
में, उपनिषदों में, गीता में हम

508
00:34:41,920 --> 00:34:46,080
प्रमाण दीजिए बाद में लिखा गया है ना तो इसमें

509
00:34:46,080 --> 00:34:50,160
मैं क्या करूं? मुझे तो प्रमाण चाहिए ना। शास्त्र सम्मत प्रमाण देंगे ना

510
00:34:50,160 --> 00:34:54,240
का प्रमाण है। कबीर जी का प्रमाण है कि वो कबीर ही भगवान है। वही परमात्मा

511
00:34:54,240 --> 00:34:58,240
है। वो कबीर सागर भी हमारा एक शास्त्र है।

512
00:34:58,240 --> 00:35:02,640
आप इसके बारे में हमें प्रमाण दीजिए। अरे शास्त्र

513
00:35:02,640 --> 00:35:06,960
भाई जब लिखा हुआ है दुनिया पढ़ रही है सारे काम और तो और गरीब दास

514
00:35:06,960 --> 00:35:11,200
गरीब दास जी की वाणी जिससे आपने कबीर सागर को चेक किया उसका प्रमाण

515
00:35:11,200 --> 00:35:13,600
दीजिए क्योंकि मेन तो वो हो गया जब उसके आधार

516
00:35:13,600 --> 00:35:18,640
पे हम चेक कर रहे हैं तो गरीब दास जी की वाणी प्रमाण है ये हमें वो दीजिए

517
00:35:18,640 --> 00:35:22,800
प्रमाण आप देख रहे होंगे आप आजकल देख रहे होंगे ये जो भीम आर्मी वाले

518
00:35:22,800 --> 00:35:26,800
हैं जी जानते हो ना नाम सुना होगा ना जानते हैं वेदों

519
00:35:26,800 --> 00:35:31,040
को तो ये लोग भी नहीं मानते ना ये देवी देवताओं को मानते तो क्या ये गलत हो गए क्या फिर

520
00:35:31,040 --> 00:35:35,120
जो व्यक्ति वेद को नहीं मानता वो नास्तिक है। तो जो

521
00:35:35,120 --> 00:35:39,280
व्यक्ति कबीर सागर को नहीं मानता वो महानास्तिक है। अरे तो ये आप कह

522
00:35:39,280 --> 00:35:43,280
रहे हो ना आप फिर अपने आप को वैदिक मत कहो। हमें तो वेदों से दिखाओ ना

523
00:35:43,280 --> 00:35:47,600
चीजें। हम आपको जो बोल रहे हैं वो वैदिक वैदिक चीजें बोल रहे हैं। हम लोग वैदिक

524
00:35:47,600 --> 00:35:51,760
ही हैं और वेदों तो वैदिक है वैदिक वैदिक आप खूब मानो कबीर सागर

525
00:35:51,760 --> 00:35:55,760
को कोई दिक्कत नहीं है। खूब मानो गरीब ग्रंथ को कोई दिक्कत नहीं है। मगर जब हमको

526
00:35:55,760 --> 00:36:00,000
आपको प्रमाण देना होगा तो आप वेदों से दोगे वरना अपने आप को वैदिक कहना। शंकराचार्य

527
00:36:00,000 --> 00:36:04,000
वेदों के अनुसार ज्ञान दे रहे हैं क्या? बिल्कुल बिल्कुल आप आप मैं कह रहा

528
00:36:04,000 --> 00:36:08,320
हूं देखिए वेदों में तो खाली ब्रह्म प्राप्ति का खाली एक ओम मंत्र है। आपका कौन सा शंकराचार्य

529
00:36:08,320 --> 00:36:12,400
ओम मंत्र दे रहा है? सारे शंकराचार्य दे रहे हैं। पवन दास जी

530
00:36:12,400 --> 00:36:16,400
आप सामने आ जाइए। क्या है? उनका गुरु वाक्य क्या है? उनके में लिखा

531
00:36:16,400 --> 00:36:20,400
हुआ है। रामपाल जी ने खोल खोल के बता दिया। मैं तो आपको यह कह रहा हूं। मैं

532
00:36:20,400 --> 00:36:24,400
तो आपको इतना तक कह रहा हूं कि वेदों में जो आपके

533
00:36:24,400 --> 00:36:28,400
रामपाल दास जी ने यह कहा है कि जो ज्ञान वेदों से मैच नहीं खाएगा

534
00:36:28,400 --> 00:36:28,900
वो

535
00:36:28,640 --> 00:36:32,720
ज्ञान जो है गलत है। ठीक है? बिल्कुल गलत है। अब गीता में गीता

536
00:36:32,720 --> 00:36:36,880
में ब्रह्म अलग है और परम ब्रह्म अलग है। ठीक है? और पारबह्म

537
00:36:36,880 --> 00:36:41,040
अलग है। हां पूर्ण भी अलग है। पूर्ण ब्रह्म अलग है। ठीक है?

538
00:36:41,040 --> 00:36:45,040
उत्तम पुरुष त्वने परमात्मा। अब गीता सुनिए गीता के अनुसार

539
00:36:45,040 --> 00:36:49,440
पूर्ण ब्रह्म अलग है। ठीक है? अब जो वेद है ना

540
00:36:49,440 --> 00:36:53,440
सबके अनुसार सुनिए जो वेद है ना वह ब्रह्म के पास जाने को कहते

541
00:36:53,440 --> 00:36:57,600
हैं क्योंकि वेदों के अनुसार पूर्ण परमात्मा जो मोक्ष देगा वह ब्रह्म है वेदों

542
00:36:57,600 --> 00:37:01,840
में कहीं भी पूर्ण ब्रह्मचारी नहीं कहा गया किसी को वेदों में ब्रह्मचारी

543
00:37:01,840 --> 00:37:05,840
कहा गया पूर्ण ब्रह्मचारी परम ब्रह्मचारी नहीं कहा गया सुनिए

544
00:37:05,840 --> 00:37:10,000
तो सही बात है सुनिए तो सुनिए तो सुनिए तो वेदों में

545
00:37:10,000 --> 00:37:14,080
मैं आपकी बात का समर्थन कर रहा हूं समर्थन मैं ये सुनिए सुनिए मैं ये कह

546
00:37:14,080 --> 00:37:18,400
रहा हूं कि वेदों में कहीं भी पूर्ण ब्रह परम ब्रह्मचारी के पास

547
00:37:18,400 --> 00:37:22,640
ब्रह्मचारी बनने को नहीं कहा गया। ब्रह्मचारी बनने को कहा गया। सुनिए

548
00:37:22,640 --> 00:37:26,720
तो अरे भाई मैं जो प्रश्न ला रहा हूं वो सुनिए। तो गीता की

549
00:37:26,720 --> 00:37:30,960
वो सारी बातें जो आप मान रहे हो अगर वो ब्रह्म और परम ब्रह्म को अलग

550
00:37:30,960 --> 00:37:35,360
कर रहे हो आप तो फिर वो वेदों के विरोध हो गई। छोड़ दो इन बातों को। वेदों

551
00:37:35,360 --> 00:37:39,680
के अनुसार नहीं कर रहे अलग वो ध्यान रखना। मैं आपको यही तो जवाब देना चाह रहा हूं। आप

552
00:37:39,680 --> 00:37:43,680
आप ही तो आपके रामपाल जी लिख रहे हैं गीता का जो ज्ञान वेदों से

553
00:37:43,680 --> 00:37:47,680
मैच नहीं खाएगा वो गलत है। क्यों लिख रहे हैं वहां? पहले मैं

554
00:37:47,680 --> 00:37:51,840
आपके एक सवाल का जवाब दे दूं। हम बोलिए आप कह रहे हो कि वेदों

555
00:37:51,840 --> 00:37:56,000
में कहीं भी पूर्ण ब्रह्म या फिर ऊपर पर ब्रह्म नहीं लिखा हुआ। हम बिल्कुल नहीं लिखा

556
00:37:56,000 --> 00:38:00,080
हुआ क्योंकि वेदों का ज्ञान किसने दिया? परमात्मा उसका निर्देव ने दिया।

557
00:38:00,080 --> 00:38:04,240
[गला साफ़ करने की आवाज़] अब यहां पे भी आप गलत हो गए क्योंकि रामपाल तो अलग

558
00:38:04,240 --> 00:38:08,240
चीज है। आपको बता देंगे कि वह अग्नि ऋषि कौन था? उसने किसको ज्ञान

559
00:38:08,240 --> 00:38:12,240
दिया? आप सुनिए। आप यहां पे भी गलत हो गए। वेदों

560
00:38:12,240 --> 00:38:17,840
में आपके रामपाल जी के अनुसार ही परम ब्रह्म की बात भी हुई है।

561
00:38:17,840 --> 00:38:22,000
अरे तो सुनिए तो क्यों हुई है? क्यों उन्होंने मना किया है बीच-बीच में? आप सुनोगे

562
00:38:22,000 --> 00:38:26,080
तो मालूम पड़ेगा ना। वेद दिए हैं जो है ब्रह्म

563
00:38:26,080 --> 00:38:30,560
ने यानी जो है परमात्मा ने। ब्रह्म का मतलब होता है जो है परमात्मा। ठीक है?

564
00:38:30,560 --> 00:38:34,720
वेद आप एक बात बताइए। वेद वेद किसने दिए? आप ये बताइए। वेद

565
00:38:34,720 --> 00:38:38,800
किसका ज्ञान है? वेद तो पूर्ण परमात्मा का ज्ञान है और तो कोई दे ही नहीं सकता।

566
00:38:38,800 --> 00:38:42,960
सृष्टि का ज्ञान। पूर्ण परमात्मा का ज्ञान है। जी पूर्ण

567
00:38:42,960 --> 00:38:47,040
परमात्मा का ज्ञान है। पूर्ण परमात्मा ने इस ब्रह्म के अंतःकरण में चारों वेद उतार दिए

568
00:38:47,040 --> 00:38:51,120
थे अपनी शब्द शक्ति से। ब्रह्म ने समुद्र मंथन के माध्यम से जो है जब

569
00:38:51,120 --> 00:38:55,200
वो जो है प्रकट हुए तो जो ब्रह्मा जी को दे दिया। अच्छा तो पर ब्रह्मा जी ने

570
00:38:55,200 --> 00:38:58,880
आगे अपने ऋषियों को दे दिए जो इनके वंशज थे मनुवादी थे। ठीक ठीक है।

571
00:38:58,880 --> 00:39:03,200
ठीक है। चलिए फिर इनसे आगे फिर ये आपकी परंपरा में आ गए। शंकराचार्यों की परंपरा

572
00:39:03,200 --> 00:39:07,200
में आ गए। शंकराचार्यों से फिर यहां समाज में उतार दिए गए। तो यानी कि यह जो

573
00:39:07,200 --> 00:39:11,200
ज्ञान आ रहा है ये बिल्कुल शुद्ध ज्ञान है। पूर्णमत्मा से आ रहा है। पूर्ण

574
00:39:11,200 --> 00:39:15,200
परमात्मा का ज्ञान है। तो फिर ज्ञान उस परमात्मा का

575
00:39:15,200 --> 00:39:19,280
है। वेदों का ज्ञान जो है उस परमात्मा का है। लेकिन परमात्मा ने ये भी कहा है

576
00:39:19,280 --> 00:39:23,280
कि भैया वेद पढ़े पर वेद न जाने ये बांचे पुरा। ये

577
00:39:23,280 --> 00:39:27,280
तो ये तो तब है ना जब परमात्मा हम उसे मान ले जिसकी आप वाणी बोल रहे

578
00:39:27,280 --> 00:39:31,680
हो। हम पहले परमात्मा तो माने उसे। अब देखो ये जबरदस्ती

579
00:39:31,680 --> 00:39:35,760
मनवाने का मार्ग तो है नहीं कि मैं जबरदस्ती देके मनवा दू। आप कबीर की

580
00:39:35,760 --> 00:39:39,920
वाणी को अगर प्रमाण बनाना चाहते हो, गरीब दास जी के ग्रंथ को प्रमाण बनाना

581
00:39:39,920 --> 00:39:44,400
चाहते हो, तो गरीब दास जी का ग्रंथ हमारे लिए प्रमाण तो बनाना होगा ना आपको?

582
00:39:44,400 --> 00:39:48,480
प्रमाण तो उसको पढ़ो, उसको देखो अपने साथ अरे भाई साहब आपने कहा कि

583
00:39:48,480 --> 00:39:52,720
कबीर ही भगवान है। वेदों में लिखा है तो वेदों के अनुसार कबीर को भगवान तो सिद्ध करोगे

584
00:39:52,720 --> 00:39:56,960
कि नहीं? कर तो दिया पूरी दुनिया के सामने। आप ऐसा करिए,

585
00:39:56,960 --> 00:40:01,120
आप लाइव में आकर बात करिए। है ना? ठीक है। अब मैं तो लाइव में भी आपसे

586
00:40:01,120 --> 00:40:05,440
ये बात करूंगा। जी वो थोड़ा सा वो जवाब तो ले लो वेदों वाला। हां

587
00:40:05,440 --> 00:40:10,160
क्या देखो वेदों में जो है ब्रह्म को ही परमात्मा जो है कहा हुआ है बाकी

588
00:40:10,160 --> 00:40:14,000
जो है क्योंकि ब्रह्म ही परमात्मा पूर्ण ब्रह्म को कहा गया

589
00:40:14,000 --> 00:40:18,000
है और ये निरुक यही बात मैं मानता हूं कह रहा हूं ना

590
00:40:18,000 --> 00:40:22,080
हमारे गुरुदेव ने भी यही कहा है लेकिन फिर गीता जी में फिर ये तीन

591
00:40:22,080 --> 00:40:26,160
भगवान क्यों बता दिए गए आप गीता जी को छोड़ दो ना जो ज्ञान वेद से मैच

592
00:40:26,160 --> 00:40:30,320
नहीं कहा छोड़ दो उसको नहीं समझ में आ रहा हटा दो उसको अरे मेल खाता मेरे

593
00:40:30,320 --> 00:40:34,320
भाई जो मेल खा रहा है मैं आपको वही तो बता रहा हूं नहीं मेल खाता वो तो

594
00:40:34,320 --> 00:40:38,320
बता दिया हमारे गुरुदेव ने वो तो बिल्कुल जो है क्लियर कर दिया गीता जी

595
00:40:38,320 --> 00:40:42,320
में व्यक्ति को समझाने के लिए तीन स्तरों में

596
00:40:42,320 --> 00:40:46,400
भगवान के रूप की व्याख्या की गई है वो छर अक्षर और परम अक्षर

597
00:40:46,400 --> 00:40:50,480
भगवान है मगर वो तीनों के रूप में वही एक है वो

598
00:40:50,480 --> 00:40:54,480
तीनों के रूप में वही एक है ना ना बाप और बेटे के रूप में खाली

599
00:40:54,480 --> 00:40:58,640
एक थोड़ी हो सकता है मैं इसी पे आऊंगा ना मैं इसी इन्हीं सब बातों

600
00:40:58,640 --> 00:41:02,640
के बारे में हम लोग बात करेंगे वहां लाइव में ठीक है हम आपको एक-दो

601
00:41:02,640 --> 00:41:07,040
दिन में टाइम बताता हूं क्योंकि क्योंकि इससे

602
00:41:07,040 --> 00:41:11,120
देखिए इससे एक एक चीज़ अच्छी हो जाएगी कि भाई लोगों को यह पता

603
00:41:11,120 --> 00:41:15,440
चलेगा कि सतलोक आश्रम वालों में तो इतना वो है नहीं। आपकी

604
00:41:15,440 --> 00:41:19,520
ओर से बात कर रहा हूं मैं एक बात सतलोक लोगों को यह समझ में आएगा कि

605
00:41:19,520 --> 00:41:23,520
देखिए सतलोक आश्रम वाले तो आगे नहीं आए मगर पवन दास अपने गुरु के

606
00:41:23,520 --> 00:41:27,520
लिए आज भी खड़ा है। यह आपकी ओर से हो जाएगी। मैं तो 24 घंटे में तो 24

607
00:41:27,520 --> 00:41:29,280
घंटे आगे और हमारे

608
00:41:29,280 --> 00:41:33,280
लिए यह हो जाएगी कि किसी तार्किक और किसी बुद्धिमान व्यक्ति

609
00:41:33,280 --> 00:41:37,360
से हमारी बात हो जाएगी जो रामपाल को फॉलो करते हैं। रामपाल जी को जो

610
00:41:37,360 --> 00:41:41,360
रामपाल नहीं वो तो वो तो आपने वो तो आपने देखो मेरे से अभी जो भी जो

611
00:41:41,360 --> 00:41:45,680
20-25 मिनट बातें की हैं और आपको पता हो ही गया कि भाई आपने

612
00:41:45,680 --> 00:41:49,920
मानना है या मुझे मनवाना है वो तो आप अच्छी तरीके से जान ही गए। देखिए अब ठीक है

613
00:41:49,920 --> 00:41:53,920
यदि आपकी अगर हार्दिक इच्छा है तो मैं सामने आ जाता हूं। बाकी जबरदस्ती का

614
00:41:53,920 --> 00:41:58,160
मार्ग नहीं है। आप नहीं मानेंगे तो मैं आपको नहीं समझा सकता। अरे भाई आप मैं नहीं मानूंगा

615
00:41:58,160 --> 00:42:02,400
ना। हजारों जो जनता देख रही होगी वह तो जानेगी समझेगी।

616
00:42:02,400 --> 00:42:06,400
अरे हमारी जनता जब सतगुरु रामपाल जी के सत्संग सुन के नहीं समझ रही है तो मेरी डिबेट से

617
00:42:06,400 --> 00:42:10,480
क्या खाक समझ जाएगी जनता। अगर ऐसा है तो फिर जनता को शंका समाधान नहीं होना

618
00:42:10,480 --> 00:42:14,720
चाहिए। फिर आपके वो शंका समाधान क्यों है? शंका समाधान होना चाहिए।

619
00:42:14,720 --> 00:42:18,720
लेकिन पहले वो ज्ञान तो सुने सतगुरु रामपाल जी का। फिर ऐसे तो मैं भी कह सकता हूं

620
00:42:18,720 --> 00:42:22,720
आप शंकराचार्यों का आपके आपका शंका है तो शंकराचार्य के सारे शास्त्र तो

621
00:42:22,720 --> 00:42:25,600
पढ़ो

622
00:42:25,600 --> 00:42:29,600
शंकराचार्य का शंकराचार्य काचारियों का जो आचरण है जो भक्ति

623
00:42:29,600 --> 00:42:33,600
कर्म है वो गीता के बिल्कुल विपरीत है भाई साहब आपने जाकर के

624
00:42:33,600 --> 00:42:37,600
उनका वो मैं भी तो कह रहा हूं कि रामपाल जी का सब विपरीत है क्यों

625
00:42:37,600 --> 00:42:42,080
भाई मैं आपको प्रमाणित कर सकता हूं तो मैं भी तो वही तो कर रहा हूं वही कह रहा हूं मैं प्रमाणित

626
00:42:42,080 --> 00:42:46,160
करने के लिए ही तो आना है तो आप जी वही आपके

627
00:42:46,160 --> 00:42:50,320
शंकराचार्य जी मंत्र क्या देते हैं दीक्षा में? भाई साहब यही सब

628
00:42:50,320 --> 00:42:54,640
बातें आप वहां पर आकर के करिएगा ना आमने सामने से। चलो चलो

629
00:42:54,640 --> 00:42:58,640
ठीक है। मैं आपके लिए आ जाता हूं। अगर आपके फॉलोअ अगर बढ़ते हैं अगर मेरे आने से

630
00:42:58,640 --> 00:43:02,720
तो कोई दिक्कत नहीं। नहीं नहीं फॉलोअ की बात नहीं है। फॉलोअ अगर आपके मन

631
00:43:02,720 --> 00:43:06,880
को शांति मिली पाल जी के ज्ञान को पवन दास के साथ ज्ञान चर्चा करके झूठा

632
00:43:06,880 --> 00:43:11,040
साबित कर दिया तो कोई बात नहीं। आपकी यही इच्छा भी परमात्मा पूरी करेंगे। हां

633
00:43:11,040 --> 00:43:15,040
देखिए आप फॉलोअ की अब यह बात आपने गलत कर दी। देखिए अभी तक सम्मान सम्मान

634
00:43:15,040 --> 00:43:19,120
के साथ बात हो रही अब आप इस पे आ गए कि फॉलोअ बढ़ेंगे। तो

635
00:43:19,120 --> 00:43:23,200
मैं भी अब यह आरोप आपके ऊपर लगा सकता हूं कि जैसे सतलोक मैनेजमेंट अपना वो

636
00:43:23,200 --> 00:43:27,200
चलाना चाह रहा है ऐसे ही आप भी चलाना चाह रहे हो रामपाल जी के नाम पर। मैंने तो

637
00:43:27,200 --> 00:43:31,280
नहीं लगाया। कहा ही नहीं पहले कि आप मेरे से डिबेट करो। आप मेरे चैनल पे आओ। भाई साहब

638
00:43:31,280 --> 00:43:35,280
आपने आपने जो ये वीडियो बनाई थी जिसमें आप मेरे बारे में बात कर

639
00:43:35,280 --> 00:43:39,280
रहे थे। उसमें मैं भी था। आपने कर लेंगे। हम कर लेंगे। तो कर

640
00:43:39,280 --> 00:43:40,640
लोगे तो फिर ये वाली बात नहीं

641
00:43:40,640 --> 00:43:44,720
कहनी चाहिए थी आपको कि आप मेरे आने से आपके फॉलोअ बढ़ेंगे। ये गलत बात है। ये नहीं

642
00:43:44,720 --> 00:43:48,800
कहना उन बातों का हमें पता है फिर ऐसे मैं भी मैं भी ये आरोप लगा सकता

643
00:43:48,800 --> 00:43:52,960
हूं। हमें पता है ये बातों का कि आप मैनेजमेंट की तरह अपना एक नया वो चलाना चाहते हो रामपाल

644
00:43:52,960 --> 00:43:57,200
जी के नाम पे। फिर वो तो देखो मेरे विचारों से आपको जो है उजाना पड़ेगा।

645
00:43:57,200 --> 00:44:01,280
तो फिर इसका मतलब ये है कि आपको जो पता है वो आप कह सकते हो। मैं

646
00:44:01,280 --> 00:44:05,360
मेरे को जो पता है मैं नहीं कह सकता। मैं तो आपकी वीडियो देख लेता हूं

647
00:44:05,360 --> 00:44:09,360
इसलिए मुझे पता है ना विचारों का। आज वाणी से पहचाना जाता है ना साधु

648
00:44:09,360 --> 00:44:13,440
शब्द पर किए। फिर वही बात यह आपकी

649
00:44:13,440 --> 00:44:17,440
आपका वो है अभी मैंने आपसे शास्त्रों से कई प्रमाण मांगे जो आपने नहीं

650
00:44:17,440 --> 00:44:21,520
दिए। आपने कहा यह तो शास्त्रों में नहीं मिलेगा यह तक कहा आपने हर

651
00:44:21,520 --> 00:44:25,520
चीज शास्त्रों में नहीं मिलेगी। हां यदि वह परमात्मा यदि तत्वदर्शी संत

652
00:44:25,520 --> 00:44:29,600
की भूमिका निभाने स्वयं धरती पर आता है तो वह शास्त्रों से ऊपर का भी ज्ञान लेकर आता

653
00:44:29,600 --> 00:44:33,600
है। तो आप मुझे उसको जो परमात्मा है उसको या

654
00:44:33,600 --> 00:44:37,680
तत्वदर्शी है उसको वो तो सिद्ध करिए कि वो तत्वदर्शी है। तब तो हम

655
00:44:37,680 --> 00:44:42,000
कहेंगे आपकी तो मैं आपको फिर कहता हूं। मेरे

656
00:44:42,000 --> 00:44:46,000
मेरे लाइव में डिबेट करने से आप यह नहीं मान पाओगे। भाई साहब नहीं मान

657
00:44:46,000 --> 00:44:50,160
पाओगे। अरे मैं नहीं मानूंगा उससे क्या है आप अपना कर्म करिए ना। सुनने पड़ेंगे।

658
00:44:50,160 --> 00:44:54,160
आपने खुद उनके ज्ञान पे करना पड़ेगा। मैं कह रहा हूं फिर मैं कह रहा हूं कि

659
00:44:54,160 --> 00:44:55,920
आपको शंकराचार्य के ज्ञान

660
00:44:55,920 --> 00:45:00,480
को समझने के लिए उनका भाष्य पढ़ना होगा सारा पढ़िए

661
00:45:00,480 --> 00:45:04,480
पढ़ लिया आपने जब सारे शास्त्रों का आपने शंकराचार्य

662
00:45:04,480 --> 00:45:08,560
का सारा ज्ञान पढ़ लिया है ये बताइए आप मुझे एक बात

663
00:45:08,560 --> 00:45:12,560
बताओ जिस आदमी को हॉस्पिटल में जाके अपना रोग कटवाना है तो क्या वो पूरी मेडिकल साइंस की

664
00:45:12,560 --> 00:45:16,720
वो पुस्तक पढ़ेगा क्या फिर तो ऐसे ही मेरा मेरा तो जब मेरा रोग

665
00:45:16,720 --> 00:45:20,800
कट रहा है शंकराचार्य से तो मैं क्यों पढूं रामपाल जी क्यों सुनूं रामपाल जी के सारे के

666
00:45:20,800 --> 00:45:24,800
सारे वो वीडियो तो मेरा भी जब रोग जब मेरा भी रोग मेरे गुरुदेव

667
00:45:24,800 --> 00:45:28,960
के ज्ञान और भक्ति से हो रहा है तो फिर आपके साथ फिर डिबेट करके फिर मैं क्यों अपना समय क्योंकि

668
00:45:28,960 --> 00:45:33,280
आपने ये कहा है कि मैं रामपाल जी के ज्ञान को सही सिद्ध कर दूंगा

669
00:45:33,280 --> 00:45:38,240
आपने टीवी चैनल पे आ जाओ आ जाओ जो मैंने बोला

670
00:45:38,240 --> 00:45:42,240
घूम फिर के बात उतनी वहीं आ गई जहां से शुरू हुई थी और दो बातें कही है मैंने या तो

671
00:45:42,240 --> 00:45:46,320
ज्ञान से या फिर विश्वास के आधार पे कि आपके भगवान पूरे हैं या फिर हमारा चीजें

672
00:45:46,320 --> 00:45:50,320
वेद सम्मत है वहां तक हमारे बीच बात होगी जहां वेद से बाहर

673
00:45:50,320 --> 00:45:54,400
जाएंगे हमारी बातें खत्म खत्म आप अपना ज्ञान दुनिया ज्ञान से दूसरी बात एक बात

674
00:45:54,400 --> 00:45:58,720
और कह रहा हूं एक बात दुनिया ज्ञान से नहीं समझने वाली दुनिया अगर ज्ञान से समझने

675
00:45:58,720 --> 00:46:02,720
वाली होती तो शंकराचार्य 3000 साल भाई साहब ये कहां लिखा

676
00:46:02,720 --> 00:46:07,040
है 3000 साल में अगर नहीं होगा तो ऐसा हो जाएगा बताइए कहां लिखा है ये

677
00:46:07,040 --> 00:46:11,040
जब 3000 साल में मैं आप ये कह रहा हूं 3000 साल में अगर

678
00:46:11,040 --> 00:46:15,040
सारी दुनिया सारी सृष्टि शंकराचार्य की शरण में नहीं आई इसका

679
00:46:15,040 --> 00:46:19,600
मतलब शंकराचार्य का ज्ञान गलत है या जो संत ऐसा ज्ञान देगा होता तो आ जाती

680
00:46:19,600 --> 00:46:23,680
मैं आपसे कह रहा हूं यह ज्ञान यह जो बात आप बोल रहे हो यह कहां

681
00:46:23,680 --> 00:46:27,920
लिखी है? मैं आपकी इस बात को क्यों मानूं? मनुष्य का जन्म

682
00:46:27,920 --> 00:46:32,000
ही मोक्ष प्राप्ति के लिए हुआ। अगर शंकराचार्यों के द्वारा यदि उनके मैं आपसे

683
00:46:32,000 --> 00:46:36,080
पूछ रहा हूं। मनुष्य का जन्म मनुष्य का जन्म मोक्ष के लिए हुआ है।

684
00:46:36,080 --> 00:46:40,640
फिर भी क्योंकि माया से प्रभावित है मनुष्य तो मनुष्य जो वास्तविकता

685
00:46:40,640 --> 00:46:44,880
है मोक्ष है उससे दूर भागता है। प्रपंच में भागता है। मुझको तो टीवी चाहिए।

686
00:46:44,880 --> 00:46:49,040
प्रभाव को कौन हटाएगा? अरे भाई साहब मुझे आप मुझे आप ये बता

687
00:46:49,040 --> 00:46:53,280
मुझे आप ये बता दीजिए 3000 साल में अगर सारी सृष्टि

688
00:46:53,280 --> 00:46:57,440
शंकराचार्य की शरण में नहीं आई तो इसका मतलब है उस संत

689
00:46:57,440 --> 00:47:01,440
का ज्ञान गलत है 3000 साल में जिसकी शरण में सारी सृष्टि नहीं आई गलत है

690
00:47:01,440 --> 00:47:05,440
उनका ज्ञान तो आप देखो अब ये शास्त्र की बात बोलो ना पवन दास

691
00:47:05,440 --> 00:47:09,440
जी शास्त्र में कार्य कौन था भाई साहब मैं पूछ रहा

692
00:47:09,440 --> 00:47:13,520
हूं शास्त्र की बात बोलिए आप पहले इस बात को सही करिए की तो बात बोल रहा हूं

693
00:47:13,520 --> 00:47:17,600
मैं मैं पूछ रहा हूं आपसे ये बात कहां लिखी है? मैं पूछ रहा हूं आपसे। ये

694
00:47:17,600 --> 00:47:21,680
बात कहां लिखी है? जिस संत के शरण में 3000 साल के

695
00:47:21,680 --> 00:47:25,760
अंदर पूरी दुनिया नहीं आएगी वो संत का ज्ञान गलत माना

696
00:47:25,760 --> 00:47:26,260
जाएगा।

697
00:47:26,080 --> 00:47:30,400
कहां लिखी है? देख लो ना। अरे फिर आप

698
00:47:30,400 --> 00:47:34,640
शास्त्र की बात देखिए भाई साहब। शास्त्र की बात करिए। शास्त्र की मन मुखी

699
00:47:34,640 --> 00:47:39,040
बातें मत करिए। बात आपको शास्त्र में नहीं मिलेगी।

700
00:47:39,040 --> 00:47:43,040
अरे तो ये जो आप प्रमाण के रूप में मुझे कोई तर्क दे रहे हैं इसको तो आपको सिद्ध

701
00:47:43,040 --> 00:47:47,200
करना पड़ेगा ना। आप कह रहे हो तीन आंखों के सामने है। आप जी देख रहे हैं। 3000 साल

702
00:47:47,200 --> 00:47:51,360
से दुनिया नहीं संभली नहीं सुधरी है। यह कहां लिखा है कि अगर अगर

703
00:47:51,360 --> 00:47:55,600
3000 साल में शंकराचार्य की शरण में संत की शरण में सब लोग नहीं आते।

704
00:47:55,600 --> 00:47:59,600
मैं तो कह दूं अगर अगर क्यों नहीं सुनिए क्यों नहीं आएंगे?

705
00:47:59,600 --> 00:48:03,680
सुनिए मैं आपसे पूरी दुनिया। अरे मैं मैं आपसे कह रहा हूं भाई मैं

706
00:48:03,680 --> 00:48:07,920
तो यह मानता हूं अगर 5 साल में सब लोग शरण में नहीं आए तो वो संत बेकार

707
00:48:07,920 --> 00:48:12,080
है। तो हो गए आपके रामपाल जी गलत बताइए। नहीं उन्होंने टाइम फिक्स

708
00:48:12,080 --> 00:48:16,240
कर रखा है। मैं वो टाइम फिक्स उन्होंने वो टाइम फिक्स

709
00:48:16,240 --> 00:48:20,640
उन्होंने अपने मन से किया है ना मैं तो ये कह रहा हूं नहीं नहीं

710
00:48:20,640 --> 00:48:24,720
भविष्यवाणी के अनुसार भाई साहब नास्त्रेमस हमारा भगवान नहीं

711
00:48:24,720 --> 00:48:28,880
है जो हम उसकी बात को प्रमाण में उसकी भविष्यवाण सहयोगी है

712
00:48:28,880 --> 00:48:32,880
भाई साहब वो हमारे लिए प्रमाण वहां तक है जहां तक वो वेदों से मैच खाएंगी

713
00:48:32,880 --> 00:48:36,880
चीजें हां तो वेदों से मैच खाएंगे ना हां तो कोई भी चीज

714
00:48:36,880 --> 00:48:40,880
हमारे लिए प्रमाण तभी तक है आप अगर अपने आप को वैदिक कहते

715
00:48:40,880 --> 00:48:41,380
हो तो

716
00:48:41,200 --> 00:48:45,360
वेद परम प्रमाण होना चाहिए चाहिए प्रमाण परम प्रमाण होनी

717
00:48:45,360 --> 00:48:49,360
चाहिए तो आप वैदिक हो हम लोग वेदों से ऊपर है भाई

718
00:48:49,360 --> 00:48:54,240
वेदों से ऊपर का ज्ञान दिया गुरुदेव ने वेदों से ऊपर का ज्ञान आप मुझे बता

719
00:48:54,240 --> 00:48:58,320
आपको वेदों से ऊपर का ज्ञान मिल गया मुझे आप एक बात बता

720
00:48:58,320 --> 00:49:02,320
दो ये सृष्टि जब बन रही थी तो

721
00:49:02,320 --> 00:49:06,320
जहां पर बैठकर के कबीर दास जी सृष्टि बना रहे थे

722
00:49:06,320 --> 00:49:10,480
वो जगह उन्होंने बनाई थी या क्या था परमात्मा

723
00:49:10,480 --> 00:49:14,720
है उसकी अपनी मौज उसकी अपनी मर्जी उसके बारे अगर हम इतना जान जाएंगे तो फिर हम

724
00:49:14,720 --> 00:49:18,800
यानी कि यानी कि यही जो आप कह रहे हो ना इससे आगे की चीजें

725
00:49:18,800 --> 00:49:22,880
शंकराचार्य ने बताई है। यह आप जो नहीं बता पा रहे हो कि उसके बारे में अब

726
00:49:22,880 --> 00:49:26,880
हम अब आप आ गए उस बात पे उसके बारे में अगर हम सब जान जाएंगे। आ गए

727
00:49:26,880 --> 00:49:30,880
ना? तो शंकराचार्य यानी कि आपके आपके तत्वदर्शी भी इतना नहीं बता

728
00:49:30,880 --> 00:49:35,040
पाए कि जहां पे कबीर खड़े होकर के सृष्टि बना रहे थे वो जगह किसने

729
00:49:35,040 --> 00:49:39,200
बनाई थी? वो है बनाने वाले और कौन बनाएगा?

730
00:49:39,200 --> 00:49:43,200
तो जब अगर कबीर खड़े हैं अगर कहीं पर कबीर का कोई

731
00:49:43,200 --> 00:49:47,200
रूप है तो उसके बाहर का जो संसार है वह कबीर कैसे बना रहा

732
00:49:47,200 --> 00:49:51,200
है बना दिया क्यों नहीं बना सकता परमात्मा जो चाहे सो कर दे

733
00:49:51,200 --> 00:49:55,280
अरे भाई आप वहां पर कुछ बना सकते हो आप पहले स्वयं

734
00:49:55,280 --> 00:49:56,480
खड़े हो ना

735
00:49:56,480 --> 00:50:00,640
स्वयं खड़े हो आप खड़े कहां पर हो सूरज कहां खड़ा

736
00:50:00,640 --> 00:50:04,640
हुआ है संसार में खड़ा है क्या संसार में कहां है

737
00:50:04,640 --> 00:50:08,800
संसार में कोई उसने अपने को मतलब पैर टिका रखे हैं क्या जमीन पे सूरज ने चांद आप

738
00:50:08,800 --> 00:50:12,880
फिर फिर आप अलग भाग रहे हो। मैं कह रहा हूं कबीर दास जी

739
00:50:12,880 --> 00:50:16,960
बातें आती है तो फिर अलग हो जाता है मामला। सूरज भाई सूरज किस पे टिका हुआ है? जो पूरी

740
00:50:16,960 --> 00:50:20,960
दुनिया को रोशनी हवा हवा में अंतरिक्ष में टिका हुआ है। हवा

741
00:50:20,960 --> 00:50:25,040
किस पे टिकी हुई है? ईश्वर पर टिका है सब कुछ।

742
00:50:25,040 --> 00:50:29,040
और ईश्वर किस पे टिका है? ईश्वर स्वयं पर निर्भर है। ईश्वर को किसी पर

743
00:50:29,040 --> 00:50:33,280
टिकने की जरूरत हो जाएगी तो वो ईश्वर कहां रह जाएगा? तो ऐसे वो कबीर परमात्मा

744
00:50:33,280 --> 00:50:37,360
स्वयं पे टिका हुआ था जब उसने ये पूरी सृष्टि रखी। अरे भाई मैं ये मैं आप

745
00:50:37,360 --> 00:50:41,440
समझ नहीं रहे हैं ये जो मेरे हाथ समझ नहीं रहा अब मैं समझ नहीं

746
00:50:41,440 --> 00:50:45,680
रहा मेरे हाथ मेरा प्रश्न नहीं समझ रहे आप या तो समझ के भी अनदेखा

747
00:50:45,680 --> 00:50:49,760
कर रहे हैं कबीर दास जी जहां पर खड़े थे सृष्टि

748
00:50:49,760 --> 00:50:53,840
बनाने के लिए वो कहां पर खड़े थे अगर उनके

749
00:50:53,840 --> 00:50:58,080
पहले से सृष्टि है यानी कि वो जहां पर खड़े थे वो जगह उन्होंने नहीं बनाई

750
00:50:58,080 --> 00:51:02,240
और अगर वो जगह और अगर वो नहीं खड़े थे तो फिर सृष्टि तो

751
00:51:02,240 --> 00:51:06,320
फिर वो साकार नहीं हुए साकार होने का मतलब है कि

752
00:51:06,320 --> 00:51:10,400
उनसे पहले भी कोई दुनिया थी जहां पे वो खड़े थे तो

753
00:51:10,400 --> 00:51:11,680
आपको पता है क्या इसका मतलब

754
00:51:11,680 --> 00:51:15,760
जवाब का मेरे को पता है मैं आपको लाइव में दूंगा तो बताओ फिर अंडा

755
00:51:15,760 --> 00:51:20,000
पहले आए या फिर मैं आपको मैं आपको लाइव में दूंगा बताओ फिर

756
00:51:20,000 --> 00:51:24,080
आपको भगवान के बारे में पता है तो फिर अंडा और आप ये आप ये कहते हो ना

757
00:51:24,080 --> 00:51:28,320
कि मुझे हमारी भक्ति वेदों से ऊपर की है। मैं आपको आपके

758
00:51:28,320 --> 00:51:32,320
वेदों के ऊपर की चीजें पूछूंगा। मैं आपको मत घुमाओ।

759
00:51:32,320 --> 00:51:36,320
अंडा पहले आया या फिर मुर्गी पहले आई मुझे ये बताओ। पहले मुर्गी

760
00:51:36,320 --> 00:51:40,560
आई। हैं? पहले मुर्गी आई।

761
00:51:40,560 --> 00:51:46,560
पहले मुर्गी मुर्गी किससे पैदा हुई? डायरेक्ट भगवान से।

762
00:51:47,360 --> 00:51:51,440
[हंसी] यही तो बातें नाराज। इसमें इसमें तर्क सुन लो। तर्क क्या

763
00:51:51,440 --> 00:51:55,520
है? अंडा अगर पहले आएगा तो उसको पालपस के बड़ा करने के लिए मुर्गी

764
00:51:55,520 --> 00:51:59,600
की आवश्यकता होगी। मगर मुर्गी अगर पहले आएगी तो वह स्वयं पे निर्भर

765
00:51:59,600 --> 00:52:03,680
हो सकती है। जैसे अंडे के बिना फिर मुर्गी कैसे आ गई? तो डायरेक्ट भगवान

766
00:52:03,680 --> 00:52:08,000
ने बनाई जो कुछ जो कोई नहीं कर सकता उसको करने वाला ही तो भगवान

767
00:52:08,000 --> 00:52:12,000
है। जब भगवान इतना समर्थ है, शक्तिशाली है तो कबीर परमात्मा

768
00:52:12,000 --> 00:52:16,160
को अपने पैर टिकाने के लिए धरती की जरूरत। अरे मैं पैर टिकाने की धरती की बात

769
00:52:16,160 --> 00:52:20,240
नहीं कर रहा हूं। मैं अगर कबीर का कोई शरीर था शुरुआत

770
00:52:20,240 --> 00:52:24,240
से तो वो शरीर का शरीर है। शब्द ही उनका

771
00:52:24,240 --> 00:52:28,240
शरीर है। शब्द से वो कुछ भी कर सकते हैं। मैं कह रहा हूं अगर कबीर दास जी

772
00:52:28,240 --> 00:52:32,480
सशरीर थे शुरुआत से ही तो उनके आसपास धरती

773
00:52:32,480 --> 00:52:36,800
की बात नहीं कर रहा हूं। आप यही मैं कह रहा हूं ना आप समझ नहीं पाए मेरा प्रश्न। उनके

774
00:52:36,800 --> 00:52:40,800
अगल-बगल जो खाली जगह थी खाली जगह भाई

775
00:52:40,800 --> 00:52:44,800
किसी का शरीर तभी हो सकता है ना जब उसके अगल-बगल उसका शरीर ना

776
00:52:44,800 --> 00:52:49,040
हो। हम समझ रहे हो? जैसे मेरा शरीर लेफ्ट

777
00:52:49,040 --> 00:52:53,040
से लेके राइट तक बनता है। तो लेफ्ट जहां से जहां से मेरा

778
00:52:53,040 --> 00:52:57,760
कंधा शुरू हो रहा है लेफ्ट वाला और राइट तक जा रहा है मेरा कंधा उसके

779
00:52:57,760 --> 00:53:02,240
उसके बाहर जो चीज है वो खाली जगह है। तब तो मेरा शरीर शरीर है।

780
00:53:02,240 --> 00:53:02,740
हम

781
00:53:02,560 --> 00:53:06,880
तो इसी तरीके से यदि शुरुआत से ही कबीर दास जी का एक शरीर

782
00:53:06,880 --> 00:53:10,880
है तो जहां जहां पर उनका शरीर है उनके आसपास का जो

783
00:53:10,880 --> 00:53:14,880
स्पेस है खाली जगह हम वो उनके द्वारा बनाया

784
00:53:14,880 --> 00:53:19,120
जाना सिद्ध नहीं होता अच्छा हां तो

785
00:53:19,120 --> 00:53:23,120
फिर तो फिर कौन बना के चला गया था तो यही तो मेरा प्रश्न है ना ये तो आप

786
00:53:23,120 --> 00:53:27,360
बताओगे ना आप कबीर को भगवान कह रहे हो ससुरी जाता है ससुरी जाता है

787
00:53:27,360 --> 00:53:31,360
जवाब का मुझे पता है आप लाइव आइए मैं दूंगा जवाब सारा तो जब

788
00:53:31,360 --> 00:53:35,520
पता है तो फिर आपने मुझसे पूछने की जरूरत क्या है? इसका मतलब फिर आप जीत भाई साहब आप

789
00:53:35,520 --> 00:53:40,080
रामपाल जी के ज्ञान को सही सिद्ध करने आ रहे हैं। शंकराचार्य

790
00:53:40,080 --> 00:53:44,080
के विरोध में आप भूल जाते हैं। मैं आप भूल जाते

791
00:53:44,080 --> 00:53:48,320
हैं कि मैं कोई जिज्ञासु नहीं हूं। मैं रामपाल जी के ज्ञान को गलत

792
00:53:48,320 --> 00:53:52,320
साबित करने वाला व्यक्ति हूं। आप जिज्ञासु नहीं है। मुझे पता है जिज्ञासु

793
00:53:52,320 --> 00:53:56,480
तो आप ये क्यों कह रहे हैं कि आप फिर जब आपको पता है तो आप मुझसे क्यों पूछ रहे हैं?

794
00:53:56,480 --> 00:54:00,560
वक्ता हैं आप। जिज्ञासु नहीं है। वह जो अपनी महिला के लिए यह सारा काम करता

795
00:54:00,560 --> 00:54:04,640
है ना। आप एक बात बताइए आप यह बात मुझसे क्यों कह रहे हैं कि जब आपको पता है तो

796
00:54:04,640 --> 00:54:08,960
मुझसे क्यों पूछ रहे हो? यहां तो आपने मुझे जिज्ञासु बना दिया। जिज्ञासु

797
00:54:08,960 --> 00:54:12,960
नहीं वक्ता। नहीं आपने कहा जब आपको पता है यानी मैं कुछ

798
00:54:12,960 --> 00:54:17,120
पता करने जो जानने का प्रयास करता है और जिसको पहले से पता है भाई साहब

799
00:54:17,120 --> 00:54:17,680
अभी आपने

800
00:54:17,680 --> 00:54:21,680
एक लाइन कही मुझसे कि जब आपको पता है तो मुझसे क्यों पूछ रहे हो? तो यानी

801
00:54:21,680 --> 00:54:25,680
कि आपकी नजरों में मैं कुछ आपसे जानने आया हूं क्या? कुछ

802
00:54:25,680 --> 00:54:30,640
पूछने आया हूं क्या? जो मुझे नहीं पता किसने किया है सर आपने

803
00:54:30,640 --> 00:54:34,640
आपने शुरू में कहा ना कि हम यही जानना चाहते हैं कि आपके गुरु जो है परमात्मा है या

804
00:54:34,640 --> 00:54:38,720
नहीं है आपको जानना ही तो चाह रहे हैं तो आपको

805
00:54:38,720 --> 00:54:42,800
नहीं फोन इस बारे में था ये कि आपने यह कहा था कि मैं रामपाल जी के ज्ञान

806
00:54:42,800 --> 00:54:46,800
को सही सिद्ध करने के लिए तैयार हूं तो हमने आपको फोन मिलाया तो

807
00:54:46,800 --> 00:54:50,800
फिर मेरे शर्म और कंडीशन को मैं कोई बात चाहिए

808
00:54:50,800 --> 00:54:54,800
था कोई ज्ञान वगैरह पूछने नहीं आया हूं आपसे जो आप मुझसे ये कह

809
00:54:54,800 --> 00:54:58,880
रहे हो कि जब आपको पता है तो मुझसे क्यों पूछ रहे भाई आपका टीवी चैनल है क्या?

810
00:54:58,880 --> 00:55:02,960
फिर वही बात टीवी चैनल है। तो फिर आपने वीडियो नहीं देखा। उसमें मेरी

811
00:55:02,960 --> 00:55:06,960
क्या आपको अगर अगर नहीं आना है तो मत आइए। अगर

812
00:55:06,960 --> 00:55:11,040
मुझे लगा कि आप इस बात का तो मुझे भी पता है नारायण जी इस बात का तो

813
00:55:11,040 --> 00:55:15,120
मुझे भी पता है कि ना तो ज्ञान से आप मानने वाले ना आपके शंकराचार्य जी

814
00:55:15,120 --> 00:55:19,200
मानने वाले। ऐसे तो मैं भी सोच सकता हूं ना तो ज्ञान से आप मानने वाले ना आपके

815
00:55:19,200 --> 00:55:23,760
वो तत्वदर्शी मानने वाले। लेकिन फिर विश्वा यदि

816
00:55:23,760 --> 00:55:27,760
आपके धर्म गुरु सामने आते हैं तो फिर यह बात यह

817
00:55:27,760 --> 00:55:32,640
बातें देखिए यह बातें करने से बेकार की बातें करने से कुछ नहीं होगा

818
00:55:32,640 --> 00:55:33,140
आप

819
00:55:32,800 --> 00:55:36,800
जो है आपने बनाना है दो दिन के बाद दो दिन में मैं

820
00:55:36,800 --> 00:55:40,800
आपको शेड्यूल कर दूंगा आप लाइव आ जाइए वहां पर बात मीरा के जहर को अमृत नहीं

821
00:55:40,800 --> 00:55:44,800
बनाया आपने आपने भाई साहब देखिए मैं आपको फिर कह रहा हूं आप

822
00:55:44,800 --> 00:55:48,960
लाइव आ जाइए आपको जो है हम वहां पर आपसे बात कर लेंगे ठीक है मैं

823
00:55:48,960 --> 00:55:54,000
लाइव तो आ जाऊंगा लेकिन लाइव वाक्य मैं तो यही चर्चा करूंगा फिर फायदा क्या लाइव आने का

824
00:55:54,000 --> 00:55:58,080
आप देख लो आपको फायदा नहीं लग रहा है तो मत आओ मत आओ लाइव हां तो

825
00:55:58,080 --> 00:56:02,080
मैं तो मैं आपने कहा था मैं सिद्ध करने के लिए तैयार हूं अब

826
00:56:02,080 --> 00:56:06,080
जब सिद्ध करने के लिए लाइव आ रहे हैं तो आप कह रहे हो फायदा क्या है देखो

827
00:56:06,080 --> 00:56:10,160
ये तो सर्वसिद्ध है यदि आपने ज्ञान से ही मानना होता तो संत रामपाल जी से बढ़ के

828
00:56:10,160 --> 00:56:14,320
मेरे को ज्ञान लाख जन्मों में भी नहीं हो सकता तो जितना आपसे हो सके

829
00:56:14,320 --> 00:56:18,400
आपने मानना नहीं है आप कह रहा हूं आप तो

830
00:56:18,400 --> 00:56:22,400
भाई बंधु लोग जी को बता ही रहे हैं। जितना आपके पास है वो दे दीजिए।

831
00:56:22,400 --> 00:56:26,400
बाकी आप छोड़ दीजिए परमात्मा पे मैं मानता हूं कि नहीं मानता हूं। लेकिन

832
00:56:26,400 --> 00:56:30,640
फिर भी जो है मतलब पूरा ज्ञान तो नहीं होगा ना मेरा। तो नहीं है तो फिर मत आइए भाई। मत

833
00:56:30,640 --> 00:56:34,640
दावा करिए कि हम सिद्ध करेंगे। शिष्य को कभी भी सतगुरु का पूरा

834
00:56:34,640 --> 00:56:38,720
ज्ञान नहीं हो सकता। तो भाई साहब फिर आप यह मत छाती ठोकिए कि मैं आकर के

835
00:56:38,720 --> 00:56:42,880
सिद्ध सही सिद्ध कर दूंगा। आप मत आइए। आपको लगता है कि आप सिद्ध नहीं कर पाएंगे।

836
00:56:42,880 --> 00:56:47,200
नहीं मैंने जो बातें जिस प्रकार से कही ना आप उन बातों को ध्यान से सुनिएगा।

837
00:56:47,200 --> 00:56:48,000
रामपाल

838
00:56:48,000 --> 00:56:52,160
जी ये भी सत्य साबित कर दूंगा देखिए सबसे पहली

839
00:56:52,160 --> 00:56:56,240
बात तो ये है फ़ स्विच ऑफ हो गया था कोई बात

840
00:56:56,240 --> 00:57:02,000
नहीं तो फिर दो दिन में बनाऊं मैं इंतजाम आने का आपका

841
00:57:02,000 --> 00:57:06,240
अब देख लो आप जी मानने वाले तो हो नहीं मैं तो वही बातें करूंगा

842
00:57:06,240 --> 00:57:10,960
कर रहा हूं वो देखिए देखिए पवन दास जी पवन दास जी देखिए

843
00:57:10,960 --> 00:57:15,040
यह हम दोनों जानते हैं कि आपके वहां आने से और मेरे वहां आने से ना तो आप

844
00:57:15,040 --> 00:57:19,360
मानने वाले हो ना अब मैं मानने वाला हमें अपना कर्म करना चाहिए। भाई

845
00:57:19,360 --> 00:57:24,080
अगर आपको इच्छा है तो आप आइए नहीं तो एक घंटे की

846
00:57:24,080 --> 00:57:28,320
एक घंटे की बातचीत हो गई। ये कर्म थोड़ा है क्या? तो ठीक है।

847
00:57:28,320 --> 00:57:32,400
सुनो बाकी देख लीजिए। जी देखो देखो ऐसा है। हम्म फिलहाल

848
00:57:32,400 --> 00:57:36,400
जो आप कर रहे हैं आप अपने बुद्धि स्तर से बिल्कुल ठीक कर रहे हैं। मैं जो कर रहा

849
00:57:36,400 --> 00:57:40,400
हूं मेरे बुद्धि स्तर से बिल्कुल ठीक कर रहा हूं। हम्म आपको भी इस बात का

850
00:57:40,400 --> 00:57:44,400
पता है। मुझे भी पता है कि ना आप मानने वाले ना आपकी बातें मैं मानने

851
00:57:44,400 --> 00:57:48,640
वाला। हम्म हम्म। ठीक है। मगर जनता में जो देखती है उसमें जागरूकता

852
00:57:48,640 --> 00:57:52,720
आती है। देखो जनता आपकी भी वीडियो देख रही है। इधर मेरी भी देख

853
00:57:52,720 --> 00:57:56,880
रही है। जिसने जागरूक होना होगा वो तो वैसे भी देख लेगा। आना [गला साफ़ करने की आवाज़] नहीं

854
00:57:56,880 --> 00:58:01,120
आना चाहते तो बात अलग है। हमें कोई आने नहीं आने का प्रश्न नहीं है। नारायण

855
00:58:01,120 --> 00:58:03,040
जी आने नहीं आने का प्रश्न है।

856
00:58:03,040 --> 00:58:07,040
देखो मैं मैं सतगुरु रामपाल जी के उन भक्तों में से नहीं हूं जो दो मिनट में गाली

857
00:58:07,040 --> 00:58:11,040
गलौज करके या गुस्सा नहीं ये हमें भी आप देखिए आपने

858
00:58:11,040 --> 00:58:15,200
मैंने व्यक्ति के नहीं होते हैं। हमने भी आज तक

859
00:58:15,200 --> 00:58:19,280
आपके ऊपर सबसे पहले सबसे पहले जब मैंने आपका वो जो अमित

860
00:58:19,280 --> 00:58:23,360
नाम का जो हमारा भगत था कहां का था? आगरा का था। हम जब मैंने वो

861
00:58:23,360 --> 00:58:27,360
वीडियो देखा मेरे किसी भगत भाई ने मुझे आपका भेजा तो मैंने फिर एक

862
00:58:27,360 --> 00:58:31,680
आपको पता होगा मैंने गाड़ी में चलते हुए मैं मतलब लाइव आया था और मैंने

863
00:58:31,680 --> 00:58:35,760
मैंने आपके बारे में यही कहा था कि यह लड़का वास्तव में ज्ञान को जानना चाहता

864
00:58:35,760 --> 00:58:40,080
है समझना चाहता है और संत रामपाल जी के भक्तों से तो हजारों गुना ज्यादा ये बुद्धिमान

865
00:58:40,080 --> 00:58:44,080
है सही मार्ग नहीं मिल रहा वो बात अलग है वो एक वो एक मतलब

866
00:58:44,080 --> 00:58:48,320
दूसरा विषय है हम्म हम्म मैंने ये नहीं कहा कि लो जी ऐसे

867
00:58:48,320 --> 00:58:52,400
ऐसे नालाक आ गए फलाना दिखना जैसे हमारे जो बाकी भाई बहन जो जो

868
00:58:52,400 --> 00:58:56,400
मतलब कि भौकते रहते हैं ना कि ऐसे वो काल का दूत है ये है गधा बनेगा कुत्ता

869
00:58:56,400 --> 00:59:00,400
बनेगा ये भगत जी ये तो एक आम व्यक्ति की भाषा भी नहीं होनी चाहिए इसीलिए

870
00:59:00,400 --> 00:59:04,640
मैं चाहता हूं कि आप अगर आएंगे ना तो उससे फायदा ये होगा कि एक

871
00:59:04,640 --> 00:59:08,880
अगर ठीक है वो रामपाल जी के ज्ञान से हम सहमत नहीं है हमारे ज्ञान मतलब

872
00:59:08,880 --> 00:59:13,760
गुरुदेव शंकराचार्यों के ज्ञान से वो सहमत नहीं है। मगर कम से कम

873
00:59:13,760 --> 00:59:17,840
लोग उसको तो जानने लगेंगे कि उनका वास्तविक सही बुद्धिमान

874
00:59:17,840 --> 00:59:18,340
या

875
00:59:18,080 --> 00:59:22,080
जो भी है, ठीक-ठाक शिष्य कौन है। ये तो समझिए। देखो

876
00:59:22,080 --> 00:59:26,080
देखो मेरी नजर में तो लोग केवल अपना मनोरंजन करते हैं अपना टाइम पास करते

877
00:59:26,080 --> 00:59:30,080
हैं। ऐसा नहीं है देखिए हर चट्टान पे जब सर मारते हैं तो कहीं ना कहीं से पानी निकलता

878
00:59:30,080 --> 00:59:34,080
है। देखिए जब आप जी दिन रात जो है सतगुरु रामपाल जी के बारे में

879
00:59:34,080 --> 00:59:38,640
जानकारी दे रहे हैं हम्म और आप सतगुरु रामपाल जी के ज्ञान को अप्रमाणित

880
00:59:38,640 --> 00:59:42,880
सिद्ध करने में लगे हुए हैं तो फिर प्रमाणित ज्ञान भी तो फिर आप ही के पास मिलेगा। तो जिसने

881
00:59:42,880 --> 00:59:47,040
भगवान चाहिएगा वो फिर आप जी से जुड़ वो वो वो भाई फिर आप जी से जुड़कर अपना मोक्ष

882
00:59:47,040 --> 00:59:51,200
करवा लेगा। फिर आप और हमारी डिबेट का फिर भाई मतलब जो मतलब फायदा रहा

883
00:59:51,200 --> 00:59:55,280
ना देखिए ना तो मोक्ष मार्ग कोई आपके पास में ना मोक्ष मार्ग कोई मेरे पास में

884
00:59:55,280 --> 00:59:59,280
अगर आपके पास में तो आपके जो मतलब गुरु के पास में होगा और मेरे पास में है तो फिर

885
00:59:59,280 --> 01:00:03,360
मेरे गुरु के पास में होगा तो हम दोनों की बातों के बजाय यदि हमारे गुरुओं का ज्ञान

886
01:00:03,360 --> 01:00:07,600
सुना जाए तो कितना अच्छा होगा बात आप सही कह रहे हैं फिलहाल

887
01:00:07,600 --> 01:00:11,680
मैं आपको विषय दोबारा याद दिला दूं आपने एक वीडियो बनाया उसमें हमारे

888
01:00:11,680 --> 01:00:15,760
बारे में भी बात की मैंने शुरू में ही आपको आभार प्रकट किया उसका और जो भी आप सच्ची

889
01:00:15,760 --> 01:00:21,120
बात कहेंगे मैं सदैव आपका आभार प्रकट प्रकट करूंगा। उसकी प्रशंसा भी करूंगा। मगर

890
01:00:21,120 --> 01:00:25,200
उस वीडियो में आपने यह कहा कि रामपाल जी महाराज का ज्ञान मैं सिद्ध करना चाहता हूं।

891
01:00:25,200 --> 01:00:29,200
मैं सिद्ध कर सकता हूं। अब अब प्रॉब्लम यह है कि आज तक हमें जितने भी

892
01:00:29,200 --> 01:00:33,120
मिले हैं जो आए हैं मैनेजमेंट के द्वारा तैयार किए हुए।

893
01:00:33,120 --> 01:00:37,280
इनका तो लॉजिक लेवल जो बुद्धि का स्तर है बहुत ज्यादा

894
01:00:37,280 --> 01:00:41,280
निम्न है। मतलब ऐसा ऐसा लगता है

895
01:00:41,280 --> 01:00:45,360
ऐसा लगता है कि वहां में किसी वहां पे ऐसा लगने लगता है कि वहां किसी

896
01:00:45,360 --> 01:00:49,360
दीवार में सर मार रहे हैं। तो इसलिए आप जब आपने जब ये

897
01:00:49,360 --> 01:00:53,360
कहा तो मैंने कहा एक अच्छी कोई लड़ाई झगड़े वाली नहीं। एक

898
01:00:53,360 --> 01:00:57,360
सामान्य भाषा में दो लोगों के बीच में बातचीत होगी। भाई जनता

899
01:00:57,360 --> 01:01:01,440
देखेगी क्या सही है क्या गलत है वो दो लोगों की मतलब क्या

900
01:01:01,440 --> 01:01:05,600
आप देखो अमित दास वगैरह जो आते हैं वो जो हेमंत दास जी हैं वो जो अपना बनाते हैं

901
01:01:05,600 --> 01:01:11,600
उनका लेवल देखिए देखिए क्या उनके कुतर्क क्या होते हैं जैसे

902
01:01:11,600 --> 01:01:15,680
एक बार कहेंगे एक बार कहेंगे कि भाई रामचरितमानस

903
01:01:15,680 --> 01:01:19,840
में तो यह लिखा है फिर रामचरितमानस से प्रमाण दे देंगे तो खुद ही कहेंगे हमारे

904
01:01:19,840 --> 01:01:23,840
लिए रामचरितमानस प्रमाण नहीं है फिर कहेंगे वाल्मीकि रामायण प्रमाण

905
01:01:23,840 --> 01:01:28,160
है उसका एक कारण उसका एक कारण है। मैं आपको बताता

906
01:01:28,160 --> 01:01:32,320
हूं। हम उसका उसका उसका रीजन क्या है?

907
01:01:32,320 --> 01:01:35,440
हम

908
01:01:35,440 --> 01:01:39,920
आप मुझे बताओ कि मुख्यमंत्री कौन आदमी बनता है? मतलब वो किस कैटेगरी

909
01:01:39,920 --> 01:01:44,720
का उसके अंदर क्या दिमाग होना चाहिए? क्या उसका लेवल होना चाहिए?

910
01:01:44,720 --> 01:01:48,800
अब मुख्यमंत्री है तो भाई वह जो वहां की जो प्रजा है

911
01:01:48,800 --> 01:01:54,080
उन पर शासन कर सके निर्णय ले सके उसकी निर्णायक क्षमता हो

912
01:01:54,080 --> 01:01:58,560
और अगर वास्तविक बनेगा तो तो फिर अनुशासित जीवन होना चाहिए संयमी

913
01:01:58,560 --> 01:02:02,640
जीवन होना चाहिए उसको शासन मिलना चाहिए करने का मतलब आपके

914
01:02:02,640 --> 01:02:06,640
आपके कहने के अनुसार यदि वो आम जीवों पर यदि वो राज्य करेगा तो

915
01:02:06,640 --> 01:02:11,680
उनसे तो जो मतलब कि मतलब उत्तम होना चाहिए बिल्कुल शासक

916
01:02:11,680 --> 01:02:16,240
एक बात बताओ फिर फिर आप एक एक बात बताओ हम लालू

917
01:02:16,240 --> 01:02:20,880
प्रसाद के बाद में बिहार की मुख्यमंत्री कौन बनी थी?

918
01:02:20,880 --> 01:02:25,200
बनी होंगी कोई राबड़ी देवी राबड़ी देवी उसकी पत्नी

919
01:02:25,200 --> 01:02:29,280
हम उसका बौद्धिक स्तर क्या था? आम बिहारियों से भी नीचा गिरा हुआ

920
01:02:29,280 --> 01:02:33,280
था। हम्म। फिर वो कैसे सीएम बन गई? यही तो अलौकिक सिद्धांत है।

921
01:02:33,280 --> 01:02:37,280
तो ठीक इसी प्रकार ठीक इसी प्रकार सतगुरु रामपाल जी भक्तों के पास

922
01:02:37,280 --> 01:02:41,440
वर्तमान में मान लिया कि शास्त्रों के अनुसार कोई लॉजिक नहीं बता पाते वो।

923
01:02:41,440 --> 01:02:45,920
हां। लेकिन उनके पिछले जन्म जन्मांतरों के भक्ति संस्कार इतने

924
01:02:45,920 --> 01:02:49,920
जो है मजबूत है कि उनको परमात्मा मिल चुका है और परमात्मा मिलने

925
01:02:49,920 --> 01:02:50,560
के बाद में

926
01:02:50,560 --> 01:02:54,640
इंसान को ये लॉजिक मिले ना मिले अगर उसको मार्ग यदि

927
01:02:54,640 --> 01:02:58,720
उसको सही सही मिल गया है तो फिर उनको इन चीजों से फिर कोई मतलब नहीं

928
01:02:58,720 --> 01:03:02,720
होता जिस कारण से वो लोग आपके हर एक जो है ऐसा नहीं है आपकी इस

929
01:03:02,720 --> 01:03:06,960
बात को मैं अभी के अभी गीता से ही काट सकता हूं संशयात्मा

930
01:03:06,960 --> 01:03:10,960
विनश्यति जिसके मन में संशय है लेकिन उन

931
01:03:10,960 --> 01:03:14,960
लोगों उनको संस नहीं है ना अपने गुरु के लोगों को संशय है उनको संशय

932
01:03:14,960 --> 01:03:19,040
है गुरु के ज्ञान पे नहीं है गुरु के ज्ञान पे नहीं है मैं दिखा दूंगा

933
01:03:19,040 --> 01:03:23,040
संशय आपको मैं दिखा दूंगा उन लोगों को संशय भी है वो बेचारे

934
01:03:23,040 --> 01:03:27,200
जवाब नहीं दे पाते वो बात अलग है बाकी उनको अपने गुरु के ज्ञान पे कोई संशय

935
01:03:27,200 --> 01:03:31,200
नहीं होगा तो फिर आदमी फिर उनका शिष्य क्यों कहलाएगा फिर संशय गुरु के ज्ञान

936
01:03:31,200 --> 01:03:35,280
पे नहीं गुरु ने जो ज्ञान दिया है उसके अलावा कुछ ऐसे प्रश्न है

937
01:03:35,280 --> 01:03:39,360
जो वो ढूंढ रहे है वो संशय हां वो उनको नहीं मिलेंगे उनको आजीवन नहीं मिलेंगे वो

938
01:03:39,360 --> 01:03:43,360
लेकिन उनको भक्ति और भगवान मिल गए तो उनके कारण उन संशयों के कारण जब तक उसके

939
01:03:43,360 --> 01:03:47,440
मन में संशय है तो जिसके मन में संशय है वहां पर गीता में लिखा हुआ है

940
01:03:47,440 --> 01:03:51,520
4:40 में जिसके मन में संशय है वो ना तो इस लोक में

941
01:03:51,520 --> 01:03:55,920
सुखी रह सकता है ना ही परलोक में दूस नहीं नहीं

942
01:03:55,920 --> 01:03:59,920
दूसरी बात आप मुझे बताओ आप मोबाइल यूज करते हैं आप मोबाइल

943
01:03:59,920 --> 01:04:04,080
यूज़ कर रहे है ना अभी काफी लंबी हमारी बातें हो गई है आप मोबाइल यूज़ कर रहे है ना

944
01:04:04,080 --> 01:04:05,840
हां कर रहे है क्या

945
01:04:05,840 --> 01:04:10,000
आपको इस मोबाइल की बनावट के विषय में पूरा ज्ञान है नहीं है तो

946
01:04:10,000 --> 01:04:14,240
फिर कि क्या मोबाइल से आप जी लाभ नहीं उठा पा रहे क्या? अगर ज्ञान नहीं होगा मोबाइल का तो क्या आप जी मोबाइल

947
01:04:14,240 --> 01:04:18,240
का लाभ नहीं उठा सकते क्या? बिल्कुल आप बिल्कुल सही कह रहे हैं मगर

948
01:04:18,240 --> 01:04:22,560
मोबाइल वो विषय नहीं है। जिस चीज के लिए मोबाइल मिला है

949
01:04:22,560 --> 01:04:26,560
चाहे मोबाइल की हमें जानकारी हो ना हो बेसिक नॉलेज विधि है चलाने की तो

950
01:04:26,560 --> 01:04:30,640
हमारा काम हो रहा है ना। मगर सतगुरु रामपाल जी के भक्तों को जो मोक्ष का ज्ञान है

951
01:04:30,640 --> 01:04:35,120
वो इसका उत्तर सुन लीजिए। मोबाइल का यूज करना

952
01:04:35,120 --> 01:04:39,120
और यूज करने के द्वारा प्राप्त करने के लिए हम कहा क्या जा रहे हैं कि हम किसी

953
01:04:39,120 --> 01:04:43,200
से बात कर सकें। यानी कि मोबाइल का जो एक्सिस्टेंस है उसके

954
01:04:43,200 --> 01:04:47,200
अनुसार उसकी उसकी हमारे जीवन में ये उद्देश्य है कि हम किसी

955
01:04:47,200 --> 01:04:51,200
से बात कर सके या वक्त आने पर हम फोटो खींच सके या किसी को मैसेज भेज सकें।

956
01:04:51,200 --> 01:04:55,200
सूचना का आदानप्रदान उसके लिए है। मोबाइल के द्वारा

957
01:04:55,200 --> 01:04:59,200
हमें मोबाइल को नहीं जानना है। ठीक है? तो

958
01:04:59,200 --> 01:05:03,280
क्योंकि मोबाइल का हमारे जीवन में आने का उद्देश्य यह नहीं है कि हमें मोबाइल

959
01:05:03,280 --> 01:05:07,520
को जानना है तो इसलिए मोबाइल को ना जाने बिना भी मोबाइल से प्राप्त

960
01:05:07,520 --> 01:05:11,600
होने वाले उद्देश्यों की हमें पूर्ति हो जाती है। मगर भगवान का सद भक्ति

961
01:05:11,600 --> 01:05:16,000
का हमारे जीवन में आने का उद्देश्य यही है कि हमें उसे जानना है। जैसे कि बुक

962
01:05:16,000 --> 01:05:20,160
जब हम किसी बुक को अपने पास लाते हैं तो ऐसा नहीं है बुक को

963
01:05:20,160 --> 01:05:21,280
लाने से काम हो गया।

964
01:05:21,280 --> 01:05:25,280
बुक को हमें जानना [गला साफ़ करने की आवाज़] होगा। इसमें क्या-क्या लिखा है तब काम होगा। तो

965
01:05:25,280 --> 01:05:29,360
इसी प्रकार से गुरु और परमात्मा है जो यह वो विषय है जिसको हमें जानना

966
01:05:29,360 --> 01:05:33,360
है तभी वह प्राप्त होगा। तो वो लोग जान चुके हैं। मैं यही तो कह रहा हूं।

967
01:05:33,360 --> 01:05:37,440
वो लोग जान चुके हैं। जितना उनको जानना था उतना वो लोग देखिए वो देखिए वो एक अलग

968
01:05:37,440 --> 01:05:41,840
विषय वो हम उसमें कर लेंगे। बात ऐसी है कि मुझे एक कोई ठीक-ठाक

969
01:05:41,840 --> 01:05:45,840
बुद्धि वाला व्यक्ति नहीं मिला अभी तक। तो मैं मैं उस स्तर का

970
01:05:45,840 --> 01:05:50,160
आदमी नहीं हूं। भाई साहब मैं भी आपको फिर वैसा ही लगूंगा वैसा ही दिखाई दूंगा।

971
01:05:50,160 --> 01:05:54,240
तो वो तो वो देखिए वो देखिए परिणाम की चिंता

972
01:05:54,240 --> 01:05:58,320
हम नहीं करते ना भगवान ने परिणाम की चिंता ना करने का

973
01:05:58,320 --> 01:06:02,320
तो कोई सवाल ही नहीं है भक्ति मार्ग में जो व्यक्ति हर चीज को लेके चलेगा वो फिर भगत

974
01:06:02,320 --> 01:06:06,400
काहे का फिर वो हारजीत के लिए सोचो ही मत आप अपने गुरु की बातें बताओ आ कर के सही

975
01:06:06,400 --> 01:06:10,480
सिद्ध करने का प्रयास करो मैं आपसे यही तो कह रहा हूं एक घंटे से कि गुरु की बातें

976
01:06:10,480 --> 01:06:14,720
जो मुझे समझ में आनी थी आ गई और अगर दुनिया को समझनी है तो गुरु का ज्ञान समझना

977
01:06:14,720 --> 01:06:18,720
पड़ेगा जैसे मैंने समझने के लिए उनके ज्ञान को सुना तो नहीं आना है आपको और फिर

978
01:06:18,720 --> 01:06:22,720
भी यदि आपके समझ समझ में नहीं आ रहा है तो फिर हमारे संस्कार कमजोर हैं। हर चीज हर किसी के

979
01:06:22,720 --> 01:06:26,720
समझ में आ जाएगी। यह यह कोई जरूरी थोड़ी है। भाई साहब फिर आप व

980
01:06:26,720 --> 01:06:30,720
आ गए घूम फिर के आप आना है कि नहीं आना है ये बताइए आप मुझे। बाप

981
01:06:30,720 --> 01:06:34,800
अगर मैथ का टीचर है तो जरूरी थोड़ी कि उसका बेटा भी मैथ का ही टीचर बनेगा। मैं

982
01:06:34,800 --> 01:06:36,400
आपसे पूछ रहा हूं आना है कि नहीं

983
01:06:36,400 --> 01:06:40,400
आना है आपको? वो तो आप जी स्वयं डिसाइड कर लीजिए। तो मैं तो कह ही रहा हूं

984
01:06:40,400 --> 01:06:44,560
कि मैं एक-दो दिन में प्लान बनाता हूं। आप आ जाओ। मैं आ तो

985
01:06:44,560 --> 01:06:48,960
जाऊंगा। लेकिन आप जी ज्ञान से तो मानने वाले हैं ही नहीं बिल्कुल भी चाहे आपको।

986
01:06:48,960 --> 01:06:52,960
भाई साहब आप दो तरह की बातें कर रहे हो। अगर आना है तो स्पष्ट

987
01:06:52,960 --> 01:06:57,040
कहो के आना है। नहीं आना है तो स्पष्ट कहो मैं नहीं आना है। मैं आपकी मैं

988
01:06:57,040 --> 01:07:01,440
आपकी लाइव टिकेट वगैरह देखता रहता हूं तो वही बातें आप जी वही तो सवाल करोगे।

989
01:07:01,440 --> 01:07:05,440
वही मैंने जवाब देने हैं। नहीं वही क्यों देने हैं? आपके जवाब तो काफी

990
01:07:05,440 --> 01:07:10,080
अलग होंगे। आप कह रहे हो कि उनका स्तर नहीं होता है। जैसे आपने बताया

991
01:07:10,080 --> 01:07:14,080
आपने बताया कि वह जो अमित दास वगैरह टाइप के हैं, उनको ज्ञान नहीं है।

992
01:07:14,080 --> 01:07:20,080
मगर आप तो उनसे अलग हो। आपको तो है तो आपके जवाब अलग होंगे।

993
01:07:21,200 --> 01:07:25,360
अब कोई मतलब तो निकलेगा नहीं शिवांश जी बाकी अगर आप अगर अपनी अगर

994
01:07:25,360 --> 01:07:29,440
अगर आप आप यदि अपनी चाहत के अनुसार यदि इनवाइट करना चाहते हैं तो

995
01:07:29,440 --> 01:07:33,840
मैं तो आ जाऊंगा। मुझे तो यही बातें बतानी है। अब आप

996
01:07:33,840 --> 01:07:37,920
मुझे ठोस तरीके से बताइए। आपकी इच्छा है कि नहीं? मैं बिना इच्छा के आपको लाना

997
01:07:37,920 --> 01:07:42,000
भी नहीं चाहता। मन है देखो सुनो देखो मान बढ़ाई का मार्ग नहीं

998
01:07:42,000 --> 01:07:46,080
है ये। मान किसी ने जाना होगा ना अगर मेरे विचारों के

999
01:07:46,080 --> 01:07:50,400
बारे में जानना है आपके विचारों के बारे में जानना है तो आपके पास तकरीबन

1000
01:07:50,400 --> 01:07:54,400
ये एक घंटे की ये ऑडियो हो चुकी है आप इसको अपने उस उसप चैनल पे आप जी इसको

1001
01:07:54,400 --> 01:07:58,480
चला दीजिएगा ठीक है ठीक है मतलब मैं ये मानूं कि आपके और हमारे विचारों को तो जानना है

1002
01:07:58,480 --> 01:08:02,480
लोगों ने तो एक घंटे में अगर कोई हमारे विचारों को नहीं जान पाएगा फिर वो क्या फिर वो

1003
01:08:02,480 --> 01:08:06,560
है ठीक है ठीक है मैं एक काम करता हूं मैं इसी इसी को डाल

1004
01:08:06,560 --> 01:08:10,640
देता हूं मैं यही मानता हूं कि अब हमारे बीच में चर्चा होनी थी वो हो गई हां नो

1005
01:08:10,640 --> 01:08:14,640
ऑब्जेक्शन बाकी मेरा जो फाइनल डिसीजन था वो के टीवी चैनल पर है। यदि कोई धर्म

1006
01:08:14,640 --> 01:08:18,720
गुरु आता है तो फिर मैं सामने आने को तैयार हूं। क्योंकि वहां तो फिर

1007
01:08:18,720 --> 01:08:22,880
मुझे विश्वास के आधार पर साबित करने का मौका मिलेगा ना। मतलब आप अब ये कह रहे हैं कि

1008
01:08:22,880 --> 01:08:26,960
कोई सामान्य व्यक्ति आएगा तो मैं नहीं जाऊंगा। कोई मतलब नहीं है ना

1009
01:08:26,960 --> 01:08:31,040
सामान्य व्यक्ति। मतलब अच्छा एक बात बताइए मतलब धर्मगुरु में पक्का है कि धर्मगुरु

1010
01:08:31,040 --> 01:08:35,040
आपकी बात मान जाएंगे? अगर नहीं मानेगा तो धर्मगुरु के

1011
01:08:35,040 --> 01:08:36,320
फॉलोवर कितने होते हैं?

1012
01:08:36,320 --> 01:08:40,400
लाखों में होते हैं, करोड़ों में होते हैं। जब विश्वास के भगवान को यानी

1013
01:08:40,400 --> 01:08:44,640
कि आप यानी कि आप सोचने पे फिर होंगे मजबूर। यानी कि आप इसलिए आओगे

1014
01:08:44,640 --> 01:08:48,880
क्योंकि उनके ज्यादा फॉलोअर्स होंगे देख के वो सही होंगे।

1015
01:08:48,880 --> 01:08:52,880
ना ना मैं ये नहीं कह रहा। ये नहीं कह रहा मैं। हां। वो फॉलोअर

1016
01:08:52,880 --> 01:08:56,880
फिर जब विश्वास की बात आएगी जब अग्नि परीक्षा देने की बात आएगी। मीरा की तरह जब

1017
01:08:56,880 --> 01:09:00,880
जहर पीने की बात आएगी अपने भगवान को सत्य साबित करने के लिए। तो वो

1018
01:09:00,880 --> 01:09:04,960
फॉलोवर फिर अपने गुरु के ज्ञान से परिचित हो जाएंगे। अरे भाई साहब

1019
01:09:04,960 --> 01:09:09,040
गुरु के ज्ञान से प्रचलित वो हो जाएंगे तो आप भगवान भाई साहब सतयुग में

1020
01:09:09,040 --> 01:09:13,280
प्रकट होता था त्रेता में होता था क्या वर्तमान में नहीं हो सकता क्या भगवान प्रकट अपने भगत के लिए

1021
01:09:13,280 --> 01:09:17,440
क्यों नहीं हो सकता बिल्कुल हो सकता तो वो मैं विश्वास की परीक्षा होगी फिर वहां पर

1022
01:09:17,440 --> 01:09:21,920
दोनों के बीच में यानी कि मेन मेन आपका आधार विश्वास है

1023
01:09:21,920 --> 01:09:25,920
जो आपने जो आपने जो विश्वास का आधार बनाया है मेन तो विश्वास

1024
01:09:25,920 --> 01:09:30,080
ही है कहे कबीर सुनो भाई साधु मैं तो हूं विश्वास जाना कितने

1025
01:09:30,080 --> 01:09:34,160
सही है मतलब शास्त्र के द्वारा आप अपनी बातों को सिद्ध नहीं कर शास्त्र भी ज़रूरी है

1026
01:09:34,160 --> 01:09:38,240
लेकिन शास्त्र से बढ़कर विश्वास अगर विश्वास नहीं हो और यदि आप नहीं कह रहा मैं

1027
01:09:38,240 --> 01:09:42,320
ये नहीं कह रहा मैं ये नहीं कह रहा तो शास्त्र से जो आप जो आप कर सकते हैं वो

1028
01:09:42,320 --> 01:09:46,640
तो करिए नहीं फिर उसका फायदा क्या है फिर फिर वही बात

1029
01:09:46,640 --> 01:09:50,800
शास्त्र से तो आपकी रोजाना चर्चा कर ये बताइए आप जब धर्म गुरु से वो करेंगे

1030
01:09:50,800 --> 01:09:51,520
तो फायदा क्या

1031
01:09:51,520 --> 01:09:55,520
है धर्मगुरु भाई उसके करोड़ों में फॉलोवर होते हैं लोग उसको फॉलो करते

1032
01:09:55,520 --> 01:09:59,840
हैं उसको देखते हैं जब वो लोग देखते चलिए मैंने मैं समझ गया आप किसी ऐसे

1033
01:09:59,840 --> 01:10:03,840
के सामने सिद्ध करेंगे जिसके करोड़ों फॉलोअ मेरे से इस

1034
01:10:03,840 --> 01:10:08,000
बात करने का कोई फायदा इसलिए नहीं क्योंकि मेरे मैं आपके चैनल नहीं नहीं फायदे वाली

1035
01:10:08,000 --> 01:10:12,080
बात नहीं कह रहा मैं आपके चैनल का कोई फायदा नहीं है आप मैं आपके चैनल

1036
01:10:12,080 --> 01:10:16,160
पे लाइव भी आ गया तो 10000 2000 5000 आदमी देखेंगे और टीवी चैनल पे आऊंगा

1037
01:10:16,160 --> 01:10:20,320
तो पूरा देश देखेगा ना तो कम से कम कोई तो निर्णय निकलेगा तो ऐसे

1038
01:10:20,320 --> 01:10:24,560
ही धीरे जैसे वही मैं कह रहा हूं ना मेरा गुरु नीचे गिरेगा या फिर उनका गुरु

1039
01:10:24,560 --> 01:10:28,640
नीचे गिरेगा तो फायदा होगा मैं यही तो आपसे कह रहा हूं कि आप किसी ऐसे

1040
01:10:28,640 --> 01:10:32,720
व्यक्ति के पास जाएंगे जहां पर आपके अनुसार जो आपने निश्चित किया

1041
01:10:32,720 --> 01:10:37,200
है कम से कम वो उतने लोग देखें। ठीक है? अभी जो

1042
01:10:37,200 --> 01:10:41,200
नहीं जाऊंगा नहीं मैं जाऊंगा नहीं। यदि कोई मुझे यदि मुझे

1043
01:10:41,200 --> 01:10:45,280
कोई बुलाना चाहेगा तो मैं मैं अपनी तरफ से नहीं जाऊंगा। मैं

1044
01:10:45,280 --> 01:10:49,360
समझ गया। मैं समझ गया कि आप किसी ऐसे व्यक्ति

1045
01:10:49,360 --> 01:10:53,440
के बुलाने पर वहां जाएंगे जहां पर आपके

1046
01:10:53,440 --> 01:10:57,440
हिसाब से जो आंकड़े आपने सेट किए हैं कम से कम उतने लोग उन उस चर्चा

1047
01:10:57,440 --> 01:11:02,240
को देखें, सुने, जाने, समझे। ठीक है? और मेरे मेरे

1048
01:11:02,240 --> 01:11:06,400
मेरे बुलाने मेरे बुलाने उतने या नहीं है हम जिस टीवी चैनल

1049
01:11:06,400 --> 01:11:06,900
पर

1050
01:11:06,560 --> 01:11:10,560
आएंगे कम से कम उसको तो दुनिया देखती है टीवी को ठीक है मैं अपनी बात को दोबारा सही

1051
01:11:10,560 --> 01:11:15,040
कर देता हूं आप ऐसे टीवी चैनल वगैरह पर जा करके बात करना चाहेंगे

1052
01:11:15,040 --> 01:11:19,120
जहां पर जा वो उन आंकड़ों के अनुसार लोग देखे सुने समझे

1053
01:11:19,120 --> 01:11:23,280
जाने जिन आंकड़ों को आपने डिसाइड किया है कि कम से कम इतने तो जाने

1054
01:11:23,280 --> 01:11:27,360
और मेरे पास मेरे चैनल पर आप इसलिए नहीं आना चाहते हैं कि भाई मेरे फॉलोअर्स अभी

1055
01:11:27,360 --> 01:11:31,840
उतने नहीं है जो आंकड़े आपने सेट किए हैं अपने मन में ठीक है बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल

1056
01:11:31,840 --> 01:11:35,840
ठीक है तो वही बात थी कि आपने अपने वीडियो में क्लेरिफिकेशन नहीं दिया था

1057
01:11:35,840 --> 01:11:40,000
तो मुझे गलतफहमी हो गई थी इसलिए मैंने आपको फोन मिलाया बाकी आपसे काफी लंबी चर्चा

1058
01:11:40,000 --> 01:11:44,000
हो भी गई है हम अपने चैनल पर डालेंगे डाल देंगे आप अपनी कोई फोटो आप

1059
01:11:44,000 --> 01:11:48,000
अपनी कोई फोटो हमें भेजना चाहे तो वो भेज दीजिए कोई बात नहीं मैं डाल दूंगा

1060
01:11:48,000 --> 01:11:52,400
आप इसमें डाल सकते हैं हां ये क्या कहते हैं आप क्या ये WhatsApp

1061
01:11:52,400 --> 01:11:56,400
नंबर है मेरा ये आप इस पर जो है मुझे अपनी फोटो भेज सकते हैं तो आपकी

1062
01:11:56,400 --> 01:12:00,400
वो फोटो मैं डाल दूंगा थंबनेल में लगा दूंगा मैं आपको एक एक काम करता

1063
01:12:00,400 --> 01:12:04,400
हूं। वहां पे मैसेज कर देता हूं WhatsApp पे। तो आपको मेरा नंबर भी सेव नहीं करना पड़ेगा।

1064
01:12:04,400 --> 01:12:10,400
डायरेक्ट WhatsApp पे ही आ जाएगा मेरा नाम। ठीक है? डाल दीजिए। डाल दीजिए।

1065
01:12:18,110 --> 01:12:22,110
[संगीत]
