1
00:00:02,160 --> 00:00:06,400
तो सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक

2
00:00:06,400 --> 00:00:10,400
होंगे और जैसा कि आप जानते हैं आज की लाइव ब्रह्मा

3
00:00:10,400 --> 00:00:15,520
कुमारी के एक फॉलोअर हैं उनके साथ है। और

4
00:00:15,520 --> 00:00:19,760
रामपाल के विषय में भी बहुत सारी बातें हैं आपको करने को। पर फिलहाल

5
00:00:19,760 --> 00:00:23,760
क्योंकि विलंब हो गया है आज की लाइव में। पहले 9 का टाइम था फिर

6
00:00:23,760 --> 00:00:28,720
10:30 का और अभी हम लोग 10:30 से भी ऊपर निकल चुका है। तो हम

7
00:00:28,720 --> 00:00:33,040
को सबसे पहले स्टेज पर ले लेते हैं। आज के जो हमारे वक्ता हैं ब्रह्मा

8
00:00:33,040 --> 00:00:36,640
कुमारी की ओर से उपस्थित

9
00:00:36,640 --> 00:00:42,640
जय श्री राम संजय जी जय श्री राम।

10
00:00:42,960 --> 00:00:47,120
जी संजय जी अपना एक संक्षिप्त कनेक्शन ब्रह्मा

11
00:00:47,120 --> 00:00:52,960
कुमारी से और मतलब इस रूप में आप अपना एक परिचय बता दीजिए।

12
00:00:52,960 --> 00:00:58,960
मेरा नाम संजय चावड़ा है और

13
00:00:59,120 --> 00:01:05,120
अबाउट 12 साल से ब्रह्मा कुमारी से जुड़ा हुआ हूं।

14
00:01:05,360 --> 00:01:10,480
आप कुछ हेडफोन से बात कर रहे हैं क्या? कैसे बात कर रहे हैं? नहीं

15
00:01:10,480 --> 00:01:16,240
हेडफोन नहीं कुछ कुछ साइड की आवाजें आ रही है

16
00:01:16,240 --> 00:01:20,880
ना वो तो कोई साइड में आवाज नहीं आ रही है पंखे की आवाज

17
00:01:20,880 --> 00:01:24,880
अच्छा ठीक तो जी आप 12 साल से

18
00:01:24,880 --> 00:01:29,600
लगभग जुड़े हुए हैं ब्रह्मा कुमारी से

19
00:01:29,600 --> 00:01:33,010
तो

20
00:01:33,010 --> 00:01:37,280
[गला साफ़ करने की आवाज़] और कहां किस ब्रह्मा कुमारी से जुड़े

21
00:01:37,280 --> 00:01:40,160
हुए हैं

22
00:01:40,160 --> 00:01:44,160
भावनगर सर भावनगर गुजरात

23
00:01:44,160 --> 00:01:48,160
हां जी तो मतलब आपके कोई मेंटोर रहे होंगे

24
00:01:48,160 --> 00:01:53,920
ना ब्रह्मा कुमारी की ओर से जो आपको गाइड करते रहे होंगे

25
00:01:53,920 --> 00:01:58,400
वैसे तो वो कोई खास टीचर फेशियल नहीं है

26
00:01:58,400 --> 00:02:04,400
अबाउट जो था गुरु ऐसा

27
00:02:04,720 --> 00:02:09,200
हो सके तो पंखे की आवाज बंद हो सकती है क्या

28
00:02:09,200 --> 00:02:13,280
कर डिस्टर्ब ओके नहीं फिर आपको वहां गर्मी

29
00:02:13,280 --> 00:02:17,440
लगेगी ना कोई बात नहीं कोई बात नहीं नहीं नहीं नहीं

30
00:02:17,440 --> 00:02:21,840
सुनिए सुनिए

31
00:02:21,840 --> 00:02:27,360
कोई बात नहीं चला गया हां अब साफ आ रही है आपकी आवाज

32
00:02:27,360 --> 00:02:30,240
जी

33
00:02:30,240 --> 00:02:34,720
अब साफ आ रही है हम अब बोलिए

34
00:02:34,720 --> 00:02:38,880
तो वो दीदी बहुत बोलती थी तब

35
00:02:38,880 --> 00:02:43,520
मैंने कमेंट किया था चार पांच दिन पहले

36
00:02:43,520 --> 00:02:47,600
ठीक मैं समझ रहा हूं आपकी भावना समझ रहा हूं मैं मैं आपकी भावनाएं समझ रहा हूं

37
00:02:47,600 --> 00:02:51,840
तो आपके इस समय भावनगर के जो ब्रह्मा कुमारी के वो हैं

38
00:02:51,840 --> 00:02:56,240
शिक्षक प्रशिक्षक जो भी हैं उनका नाम क्या है

39
00:02:56,240 --> 00:03:01,360
वर्तमान में नम्रता दीदी है

40
00:03:01,360 --> 00:03:06,800
अच्छा उषा दीदी अच्छा नम्रता दीदी

41
00:03:06,800 --> 00:03:12,640
वो भावनगर में है नम्रता उषा दीदी भावनगर में है हां भावनगर

42
00:03:12,640 --> 00:03:16,720
अच्छा अच्छा ठीक है तो आप मुझे थोड़ा

43
00:03:16,720 --> 00:03:21,840
सा बताएंगे कि ब्रह्मा कुमारी से क्यों जुड़े हैं

44
00:03:21,840 --> 00:03:26,000
बस मुझे अपनी ओर आकर्षित करता था वो

45
00:03:26,000 --> 00:03:29,280
जो ध्यान का है ना

46
00:03:29,280 --> 00:03:32,640
ध्यान का सब्जेक्ट था ना

47
00:03:32,640 --> 00:03:38,640
तो ध्यान में मैं अपनी ओर खींचता था ब्रह्म कुमारी

48
00:03:39,520 --> 00:03:44,640
तो देखने गया था कभी क्या है क्या नहीं ध्यान के बारे में

49
00:03:44,640 --> 00:03:49,040
ध्यान सीखने आज तो परमात्मा है नहीं है कैसा

50
00:03:49,040 --> 00:03:53,040
है वो तो सब बाद की बात है लेकिन

51
00:03:53,040 --> 00:03:57,280
जो मैं नहीं मानता हूं उसके बारे में तो बोलूंगा ही नहीं मैं

52
00:03:57,280 --> 00:04:02,080
जो मैं मानता हूं उसके बारे में ही बोलूंगा

53
00:04:02,080 --> 00:04:06,560
जो आप नहीं मानते मतलब

54
00:04:06,560 --> 00:04:10,560
जो मैंने देखा नहीं है मुझे कहा गया है ब्रह्मा

55
00:04:10,560 --> 00:04:14,800
कुमारी से ऐसा ऐसा है मतलब ब्रह्मा

56
00:04:14,800 --> 00:04:18,880
कुमारी कुछ ऐसा ब्रह्मा ब्रह्मा कुमारी की कुछ बातें ऐसी है जो आप नहीं

57
00:04:18,880 --> 00:04:22,000
मानते

58
00:04:22,000 --> 00:04:26,240
कोई बातें है मैं पर्सनली नहीं मानता हूं वो लोग

59
00:04:26,240 --> 00:04:30,320
मालूम नहीं मानते पर्सनली पर्सनली नहीं

60
00:04:30,320 --> 00:04:34,320
जो जो जिसको हम सत्य नहीं मानते वो सब तरीके से असक्ति होता है

61
00:04:34,320 --> 00:04:38,320
ना हमारे लिए। जैसे मान लीजिए किसी ने कहा कि चांद निकला हुआ है और मैं

62
00:04:38,320 --> 00:04:42,480
कहूं कि पर्सनली मैं मानता हूं कि चांद निकला हुआ नहीं है तो क्या सार्वजनिक

63
00:04:42,480 --> 00:04:47,680
रूप से चांद निकला हुआ है क्या हमारे लिए? नहीं है ना?

64
00:04:47,680 --> 00:04:51,840
ऐसा नहीं कुछ बातें ऐसी है कि जो एक

65
00:04:51,840 --> 00:04:57,200
ओर से ऐसा कहते हैं कि परमात्मा निराकार है। ठीक है?

66
00:04:57,200 --> 00:05:01,200
और दूसरी ओर ऐसा बोलते हैं कि परमात्मा लाइट स्वरूप

67
00:05:01,200 --> 00:05:05,440
बिंदु स्वरूप है तो तो आकार हो गया।

68
00:05:05,440 --> 00:05:09,440
तो निराकार कैसे हुआ? सही आपने पूछा नहीं उषा

69
00:05:09,440 --> 00:05:13,520
दीदी से उषा दीदी से पूछा नहीं तर्क का

70
00:05:13,520 --> 00:05:18,080
मेरा विषय नहीं है। जो मैं मानता हूं वही लेता हूं मैं

71
00:05:18,080 --> 00:05:21,600
जो नहीं मानता नहीं लेता और वो जो परमात्मा की

72
00:05:21,600 --> 00:05:25,840
बात है तो लेखराज दादा केतन में जो अवतरित

73
00:05:25,840 --> 00:05:29,920
हुए थे तो वो भी ब्रह्म कुमारी से हां वो

74
00:05:29,920 --> 00:05:34,160
भी ब्रह्म कुमारी सब बोला गया है मुझे मैंने

75
00:05:34,160 --> 00:05:38,400
तो देखा नहीं क्या आप वो मानते हैं कि लेखराज के तन में ब्रह्मा जी आए

76
00:05:38,400 --> 00:05:43,040
थे वो मैं देखा ही नहीं लाइव देखा ही नहीं क्या

77
00:05:43,040 --> 00:05:47,120
मैं पर्सनली नहीं मानता हूं वो लोग तो सारे ब्रह्म कुमारी वाले मानते हैं

78
00:05:47,120 --> 00:05:51,200
अरे पर्सनली ना मानना ना मानना ही है चाहे जैसे कह लो उसको पर्सनली ना

79
00:05:51,200 --> 00:05:55,520
मानना ना मानना ही है यानी कि आपकी आपके आपकी आपके

80
00:05:55,520 --> 00:05:59,760
हिसाब से ब्रह्मा कुमारी का यह जो क्लेम है कि लेखराज

81
00:05:59,760 --> 00:06:04,960
जी के अंदर जो है ब्रह्मा जी आते हैं यह क्लेम झूठा क्लेम है।

82
00:06:04,960 --> 00:06:09,200
नहीं ऐसा तो नहीं कह सकता लेकिन पर्सनली मैं नहीं मानता

83
00:06:09,200 --> 00:06:13,360
हूं। मानने वाले नहीं मानने वाले मानते

84
00:06:13,360 --> 00:06:17,360
हैं। आपके जहां आपके अनुसार क्या है? मैं वो पूछ रहा हूं ना। आप ही के अनुसार तो

85
00:06:17,360 --> 00:06:21,520
पूछा मैंने। देखिए थोड़ा सा क्लियरिटी आपने

86
00:06:21,520 --> 00:06:26,320
नहीं देखा तो नहीं मानते ना। नहीं मेरी बात सुनो।

87
00:06:26,320 --> 00:06:30,480
मैं खास तो यह बोलने के लिए आया हूं जो आपको ब्रह्मकुमारी

88
00:06:30,480 --> 00:06:34,560
से नहीं जानने को मिला है उसको बोलने का मौका ही

89
00:06:34,560 --> 00:06:37,520
नहीं दिया आपने

90
00:06:37,520 --> 00:06:38,020
ऐसा

91
00:06:38,000 --> 00:06:42,080
है तो मैं वो बोलूंगा जो आपने आप बोलिए आप

92
00:06:42,080 --> 00:06:46,240
बोलिए कुछ आप बोल लीजिए कुछ चीजें क्लियर होनी चाहिए कुछ

93
00:06:46,240 --> 00:06:50,400
चीजें क्लियर कर ले फिर बोलिए क्लियर करने वाली बात यह है

94
00:06:50,400 --> 00:06:55,360
कि आपको लगता है कि ब्रह्मा कुमारी की सारी बातें सत्य नहीं है

95
00:06:55,360 --> 00:06:59,440
ना सत्य नहीं ऐसा नहीं बोल रहा हूं वो सत्य

96
00:06:59,440 --> 00:07:04,000
है मैं नहीं मानता कुछ कुछ ऐसी बातें

97
00:07:04,000 --> 00:07:08,400
आपने उस उन बातों को जब वो मैंने मैंने कहा

98
00:07:08,400 --> 00:07:12,400
मैंने कहा कि ब्रह्मा कुमारी ये कह रही है

99
00:07:12,400 --> 00:07:16,480
कि बाहर चांद निकला हुआ है। आप कह रहे हो मैंने नहीं देखा मैं नहीं मानता

100
00:07:16,480 --> 00:07:20,480
कि चांद निकला हुआ है। तो इसका मतलब आपकी जानकारी में चांद नहीं निकला हुआ

101
00:07:20,480 --> 00:07:23,680
है ना

102
00:07:23,680 --> 00:07:27,920
वो तो दिख रहा है दिखता है वो बोलूंगा तो

103
00:07:27,920 --> 00:07:31,920
फिर तो फिर आप ये बोलोगे ना कि इस मैं मैं जो

104
00:07:31,920 --> 00:07:36,000
जो बोलूंगा वो प्रश्न भी मैं करूंगा उसका

105
00:07:36,000 --> 00:07:40,240
प्रमाण भी मैं दूंगा जवाब भी मैं दूंगा सब में इतना

106
00:07:40,240 --> 00:07:44,480
बड़ा लिस्ट मुझे क्या क्या पॉइंट आपसे बोलना है जो ब्रह्मा

107
00:07:44,480 --> 00:07:49,040
कुमारी साहब आपको नहीं मिला है देखिए

108
00:07:49,040 --> 00:07:53,040
ऐसा है ऐसा है एक एक चीज को आपको समझना

109
00:07:53,040 --> 00:07:57,200
होगा कि यह जो हमारा चैनल है यह

110
00:07:57,200 --> 00:08:01,200
चैनल इसलिए नहीं है कि ब्रह्मा कुमारी कुछ कहना चाहता है तो

111
00:08:01,200 --> 00:08:05,360
वह हमारे चैनल पर आकर के कहे। यह चैनल इसलिए है कि

112
00:08:05,360 --> 00:08:09,360
ब्रह्मा कुमारी को लेकर हमें जो जो आपत्तियां हैं जो आपत्ति मैं

113
00:08:09,360 --> 00:08:13,840
आपसे पूछ रहा हूं उस संबंध में आपका स्पष्टीकरण यदि है तो वो स्पष्टीकरण

114
00:08:13,840 --> 00:08:17,920
आप दे दें और आपको हमारी चीजों पर जो आपत्ति है यदि

115
00:08:17,920 --> 00:08:22,000
आपको हमारी चीजों पर जो आपत्ति है उस चीज का स्पष्टीकरण मेरे पास यदि

116
00:08:22,000 --> 00:08:26,000
हो तो मैं दे इसलिए इसलिए नहीं है कि आपने अपनी एक कुछ

117
00:08:26,000 --> 00:08:30,080
थ्योरिकल तैयारी की है और उसको आप मेरे मंच पर आकर के

118
00:08:30,080 --> 00:08:34,080
बोलो आप उषा दीदी के मंच पर जाओ आराम से

119
00:08:34,080 --> 00:08:38,240
मेरी बात सुनो ये जो लिखा है ना

120
00:08:38,240 --> 00:08:38,740
वो

121
00:08:38,720 --> 00:08:42,800
पूरा ब्रह्मकुमारी का भी नहीं लिखा है वैसे

122
00:08:42,800 --> 00:08:46,800
मैं मानता हूं वो बुध गौतम

123
00:08:46,800 --> 00:08:51,280
बुद्ध और अष्टावक्र

124
00:08:51,280 --> 00:08:55,360
ये तीनों को मानता हूं ज्यादातर बातें

125
00:08:55,360 --> 00:08:59,440
तो इसकी होगी चलिए अब

126
00:08:59,440 --> 00:09:03,600
हम ऐसा करते अब हम अब हम थोड़ा बहुत आपको समझ अब हम थोड़ा बहुत

127
00:09:03,600 --> 00:09:07,760
आपको समझ चुके हैं। मेरी बात सुनो अब हम

128
00:09:07,760 --> 00:09:12,320
एक एक मिनट एक मिनट एक मिनट एक मिनट अच्छा

129
00:09:12,320 --> 00:09:16,480
पहले एक चीज क्लियर कर लीजिए। कुछ बातें आपको ब्रह्मा कुमारी की छूट

130
00:09:16,480 --> 00:09:22,480
लगती है। विश्वास नहीं है आपको उनकी बात पे।

131
00:09:23,360 --> 00:09:27,600
हां जी। हां। ठीक। ये क्लियर हो गया। अब

132
00:09:27,600 --> 00:09:31,920
बात आती है इसी से कनेक्टिंग बात है कि आप जैसे वहां पर ध्यान लगाते

133
00:09:31,920 --> 00:09:36,160
हैं। है ना? हां जी। ध्यान लगाते

134
00:09:36,160 --> 00:09:38,400
हैं ना?

135
00:09:38,400 --> 00:09:42,400
तो वो जो ध्यान लगाने के लिए ब्रह्मा कुमारी का जो क्या क्लेम है वहां पर ध्यान

136
00:09:42,400 --> 00:09:46,720
लगाओ तो क्या होगा इससे?

137
00:09:46,720 --> 00:09:51,440
ऐसा है राजयोग ऐसा बताया जाता है वहां

138
00:09:51,440 --> 00:09:55,600
कि लाइट प्रकाश जो ईश्वर है वो लाइट

139
00:09:55,600 --> 00:09:59,760
स्वरूप है बिंदु स्वरूप है तो उसको मन में लाने

140
00:09:59,760 --> 00:10:03,840
का है वो बिंदु स्वरूप जो लाइट स्वरूप है ना ये आंखें

141
00:10:03,840 --> 00:10:08,160
बंद करके और लाइट उसको देखना है अंदर

142
00:10:08,160 --> 00:10:12,480
मन में तो उसमें मुझे क्या होता था कि मेरा मन शांत

143
00:10:12,480 --> 00:10:16,720
होने के बजाय और ज्यादा भारी हो जाता था क्योंकि खींचना

144
00:10:16,720 --> 00:10:20,720
पड़ता है ना और प्रकाश चला जाता है फिर

145
00:10:20,720 --> 00:10:24,880
से खींच के लाता हूं इधर प्रकाश को फिर चला

146
00:10:24,880 --> 00:10:29,280
जाता है फिर पकड़ के लाता हूं तो इतने में माइंड

147
00:10:29,280 --> 00:10:33,280
मेरा कंट्रोल होने के बावजूद वो

148
00:10:33,280 --> 00:10:36,080
मेरा मीनिंग

149
00:10:36,080 --> 00:10:40,240
और हो जाता था भारीभारी हो मैंने मैंने आपसे ये पूछा

150
00:10:40,240 --> 00:10:44,240
मैंने आपसे ये पूछा है कि ब्रह्मा कुमारी

151
00:10:44,240 --> 00:10:48,480
जब आप मेडिटेशन करते हैं ब्रह्मा कुमारी में तो वो क्या

152
00:10:48,480 --> 00:10:52,800
क्लेम करता है कि इस मेडिटेशन से आपको यह मिलेगा। क्या क्लेम

153
00:10:52,800 --> 00:10:55,920
करता है?

154
00:10:55,920 --> 00:11:00,160
पहली बात तो ये जो बोलने का सही ऐसा बोलूंगा

155
00:11:00,160 --> 00:11:04,240
वहां कुछ प्राप्त नहीं होता। छूटता है आप आप मेरे

156
00:11:04,240 --> 00:11:08,880
छूट जाता है जो कुछ कुछ बात है जो धारण करेंगे

157
00:11:08,880 --> 00:11:12,960
ध्यान में ध्यान लगाएंगे कुछ छोड़ना

158
00:11:12,960 --> 00:11:15,600
नहीं है वो ऑटोमेटिकली छूट जाएगा

159
00:11:15,600 --> 00:11:21,600
क्रोध है आपका पिक्चर अटक आपका पिक्चर अटक अटक के क्यों आ रहा है

160
00:11:25,920 --> 00:11:29,760
ठीक है

161
00:11:29,760 --> 00:11:33,760
ठीक है ना हां ठीक ठीक। तो

162
00:11:33,760 --> 00:11:35,840
क्या क्लेम है ब्रह्मा कुमारी का?

163
00:11:35,840 --> 00:11:39,920
मैंने कहा आप अपनी डेफिनेशन मत दीजिए। अभी आप हमें

164
00:11:39,920 --> 00:11:44,000
मुझे ब्रह्मा कुमारी का क्लेम बताइए कि वो मेडिटेशन करने से आपको क्या मिलता

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00:11:44,000 --> 00:11:49,200
है। एक तो परम शांति

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00:11:49,200 --> 00:11:53,520
ये उनका क्लेम है। ये उनका क्लेम है।

167
00:11:53,520 --> 00:11:57,600
उनका भी है मेरा भी है। उनका उनका उनका क्लेम

168
00:11:57,600 --> 00:12:01,600
क्या है? वो बताइए अभी आप क्योंकि आपके थोड़े बहुत उसमें अंतर है ना कुछ ओष भी

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00:12:01,600 --> 00:12:05,760
है कुछ बुद्ध भी है बौद्ध भी है ऐसा है ना तो आप अभी केवल ब्रह्मा

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00:12:05,760 --> 00:12:10,000
कुमारी का बता दीजिए क्या क्लेम है

171
00:12:10,000 --> 00:12:14,160
यही मन की शांति और आत्मा का जो गुण है प्रेम

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00:12:14,160 --> 00:12:18,400
शांति आनंद पवित्रता वो सब गुण

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00:12:18,400 --> 00:12:23,760
आत्मा का ओरिजिनल गुण है जो बाहर दिखाई देगा ध्यान करने से

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00:12:23,760 --> 00:12:29,200
आत्मा का ओरिजिनल गुण है आत्मा का ओरिजिनल गुण है शांति शांति

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00:12:29,200 --> 00:12:34,080
शांति प्रेम आनंद ये आत्मा ये

176
00:12:34,080 --> 00:12:38,240
सब आत्मा के ओरिजिनल गुण है। ठीक है।

177
00:12:38,240 --> 00:12:42,240
अच्छा तो ये बताइए कि जैसे वहां

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00:12:42,240 --> 00:12:46,400
पर आपको मेडिटेशन करने से परम शांति मिलती है। आपके घर

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00:12:46,400 --> 00:12:51,120
में कौन-कौन है?

180
00:12:51,120 --> 00:12:55,200
तीन लोग, दो बच्चे, पांच लोग। बच्चे कितने बड़े

181
00:12:55,200 --> 00:12:58,720
हैं?

182
00:12:58,720 --> 00:13:02,880
एक 11वीं पढ़ता है और एक छठी

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00:13:02,880 --> 00:13:08,240
चौरण पढ़ता है। अच्छा दोनों

184
00:13:08,240 --> 00:13:12,240
दोनों बच्चे बॉयज हैं।

185
00:13:12,240 --> 00:13:16,320
बालक हैं। बड़ी लड़की है। छोटा

186
00:13:16,320 --> 00:13:20,800
बेटा है। बड़ी लड़की है। हां जी। अच्छा। तो

187
00:13:20,800 --> 00:13:24,800
जो जैसे बिटिया है जब बिटिया आपकी हुई होगी तो आपने उसको कभी

188
00:13:24,800 --> 00:13:28,800
गोद में लिया है? बिटिया को जैसे गोद में ले खिलाते हैं ना उसको कंधे पर रखा उसका

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00:13:28,800 --> 00:13:33,600
सर रखते हैं ऐसे कभी तो

190
00:13:33,600 --> 00:13:37,280
लिया है आपने कभी

191
00:13:37,280 --> 00:13:41,520
मेरी समझ में नहीं आता है ये बात और ये बात कंपेयर

192
00:13:41,520 --> 00:13:45,760
करना एक पिता अपनी बटिया को गोद में ले खिलाता

193
00:13:45,760 --> 00:13:50,160
है ना उस तरह से आपने लिया है कभी तो

194
00:13:50,160 --> 00:13:54,400
जैसे वो उसने तो जब आपने लिया होगा

195
00:13:54,400 --> 00:13:58,560
तो आपको शांति शांति मिली थोड़ी सुख मिला था आनंद आया था उसका

196
00:13:58,560 --> 00:14:02,880
सर जब कंधे पर रखा था आएगा

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00:14:02,880 --> 00:14:07,200
कौन बाप है जो नहीं आएगा ना गुड

198
00:14:07,200 --> 00:14:11,280
गुड अब ये अब ये बताइए कि इस शांति में और

199
00:14:11,280 --> 00:14:17,280
वो जो ब्रह्मा कुमारी वाली शांति है उसमें अंतर क्या है

200
00:14:20,080 --> 00:14:25,200
जमीन आसमान का वो बताइए क्या अंतर है

201
00:14:25,200 --> 00:14:29,280
जमीन आसमान का अंतर है। अरे तो मुझे समझाइए तो कि

202
00:14:29,280 --> 00:14:33,280
वहां पर ऐसा है इसलिए वो जमीन आसमान का अंतर है।

203
00:14:33,280 --> 00:14:37,520
नहीं तो फिर तो मुझे ये मानना पड़ेगा कि वहां पे वहां पर मुझे यह मानना पड़ेगा

204
00:14:37,520 --> 00:14:41,600
कि वहां से जो शांति आ रही होती है वो नीचे से आ रही होती

205
00:14:41,600 --> 00:14:45,680
है या वहां की शांति ऊपर से आ रही होती है। यहां की शांति नीचे से आ रही होती है। फिर

206
00:14:45,680 --> 00:14:49,040
तो ये मानना पड़ेगा। आप मुझे बताइए जमीन आसमान का अंतर क्या है

207
00:14:49,040 --> 00:14:54,000
मामला?

208
00:14:54,000 --> 00:14:58,960
जी आत्मा परमा आत्मा परमात्मा की बात आती है तो

209
00:14:58,960 --> 00:15:01,680
खोलनी पड़ेगी

210
00:15:01,680 --> 00:15:06,080
आपकी आपकी आवाज वॉइस वगैरह कट रही है भाई साहब आपके यहां नेटवर्क

211
00:15:06,080 --> 00:15:09,520
ठीक नहीं है क्या

212
00:15:09,520 --> 00:15:15,520
एक मिनट

213
00:15:23,360 --> 00:15:27,360
अरे भाई थोड़ा बस भी किया करो। लगे रहते हो लगातार अपनी चीजें

214
00:15:27,360 --> 00:15:32,320
रटी रटाई बोलने में। हद होती है।

215
00:15:32,320 --> 00:15:36,480
कोई पूछ रहा है तुमसे? आना है नहीं सामने। बकवास

216
00:15:36,480 --> 00:15:42,480
किए रहते हो बस कमेंट सेक्शन में।

217
00:15:44,000 --> 00:15:48,000
बस रटी रटाई चीजें बोलते रहना है। बोलते रहना है। जोंबीज हो जाओ ब्रह्मा

218
00:15:48,000 --> 00:15:54,000
कुमारी की।

219
00:15:55,200 --> 00:15:59,520
हां जी अब तो ठीक आ रहा है मुझे लग रहा है।

220
00:15:59,520 --> 00:16:02,480
हां जी। हां। अब

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00:16:02,480 --> 00:16:06,560
मुझे बताइए कि ब्रह्मा कुमारी का जो मेडिटेशन से

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00:16:06,560 --> 00:16:10,640
जो आपको सुख मिल रहा है वो उसमें और

223
00:16:10,640 --> 00:16:14,640
आपकी बिटिया जब आपके कंधे पर सर रखी थी छोटी सी या कभी भी

224
00:16:14,640 --> 00:16:18,640
जब आप ऐसे आलिंगन करते होंगे अपने प्रियजन का तो उससे मिलने वाले

225
00:16:18,640 --> 00:16:22,640
सुख में और उसमें जो मेडिटेशन आप कर रहे हैं उससे मिलने वाले सुख में अंतर क्या

226
00:16:22,640 --> 00:16:28,640
है?

227
00:16:28,880 --> 00:16:33,040
मेडिटेशन करने पर जो शरीर का भाव है ना

228
00:16:33,040 --> 00:16:37,040
शरीर का भाव वो छूट जाएगा। धीरे-धीरे

229
00:16:37,040 --> 00:16:41,200
छूटता जाएगा और आत्म स्वरूप में स्थित

230
00:16:41,200 --> 00:16:43,840
होते जाएगा।

231
00:16:43,840 --> 00:16:47,840
वो आनंद अलग ही है। जैसा आनंद नहीं है। इससे पर

232
00:16:47,840 --> 00:16:52,800
है। आत्म स्वरूप में स्थित होता जाएगा।

233
00:16:52,800 --> 00:16:57,200
हां वो आनंद से भी पर है। अच्छा तो

234
00:16:57,200 --> 00:17:00,080
आप जैसे

235
00:17:00,080 --> 00:17:05,280
आप इससे पहले आत्म स्वरूप में स्थित थे क्या कभी?

236
00:17:05,280 --> 00:17:08,880
इससे पहले

237
00:17:08,880 --> 00:17:12,880
सर जी मैं शायद दसवीं पढ़ता

238
00:17:12,880 --> 00:17:17,040
होगा। दसवीं तो दसवीं कक्षा में

239
00:17:17,040 --> 00:17:21,440
तब से इस ज्ञान मार्ग में आया हूं।

240
00:17:21,440 --> 00:17:25,440
नहीं नहीं नहीं मैं कह रहा हूं अभी जब ब्रह्मा कुमारी से जुड़कर आप

241
00:17:25,440 --> 00:17:29,600
आत्म स्वरूप में स्थित हुए हैं तो इससे पहले आप क्या

242
00:17:29,600 --> 00:17:32,640
थे?

243
00:17:32,640 --> 00:17:38,000
भक्ति मार्ग में था। उससे पहले

244
00:17:38,000 --> 00:17:42,000
भक्ति मार्ग में था। अरे उससे भी पहले भक्ति मार्ग से

245
00:17:42,000 --> 00:17:46,320
पहले बच्चा था। पहले कुत्ते

246
00:17:46,320 --> 00:17:51,280
की उम्र थी उससे पहले

247
00:17:51,280 --> 00:17:55,440
उससे पहले तो जन्म ही हुआ होगा। जन्म से

248
00:17:55,440 --> 00:17:57,920
पहले

249
00:17:57,920 --> 00:18:02,000
नहीं था। जन्म से पहले आप एक्सिस्ट नहीं करते

250
00:18:02,000 --> 00:18:04,400
थे।

251
00:18:04,400 --> 00:18:07,120
हां

252
00:18:07,120 --> 00:18:12,480
क्या मान्यता है उस बारे में? क्या मान्यता है उसकी?

253
00:18:12,480 --> 00:18:17,440
क्या मान्यता है? सर जी दूध दूध में

254
00:18:17,440 --> 00:18:21,440
घी है वो दिखाई देता है दूध में घी है

255
00:18:21,440 --> 00:18:27,440
उसमें क्या मंज मैं ये कह रहा हूं मतलब आपका ये पहला जन्म है

256
00:18:27,440 --> 00:18:32,000
ये पहला जन्म है आपका अनेकों हां ना

257
00:18:32,000 --> 00:18:36,960
इससे पहले मतलब आप अपने आत्म स्वरूप में थे ना

258
00:18:36,960 --> 00:18:42,400
हां ना थे तो फिर यहां कैसे आए

259
00:18:42,400 --> 00:18:44,960
यहां कैसे आए

260
00:18:44,960 --> 00:18:48,960
मतलब आत्म स्वरूप में तो आप पहले भी थे

261
00:18:48,960 --> 00:18:51,840
ना

262
00:18:51,840 --> 00:18:55,920
पहले भी रह चुके हो ना आत्म स्वरूप में आप हां

263
00:18:55,920 --> 00:19:00,080
ये सुनो मेरी बात सुनो हां मेरी बात सुनो आप समझ

264
00:19:00,080 --> 00:19:05,440
गए अब आप समझ गए

265
00:19:05,440 --> 00:19:09,760
एक ये बात है जो मैं नहीं मानता जो

266
00:19:09,760 --> 00:19:14,240
आत्मा है भगवत गीता हमें शायद कहा है

267
00:19:14,240 --> 00:19:18,240
कि ऐसा भी नहीं है। अर्जुन को समझाता है ना कृष्ण ऐसा भी नहीं

268
00:19:18,240 --> 00:19:22,400
है कि पहले हम नहीं थे। मैं या तू नहीं

269
00:19:22,400 --> 00:19:26,400
था। ऐसा अर्जुन को बोलता है ना। आप इस बात

270
00:19:26,400 --> 00:19:28,640
को

271
00:19:28,640 --> 00:19:32,800
नहीं नहीं नहीं अरे मैं ये पूछ रहा हूं आप किसी समय पे

272
00:19:32,800 --> 00:19:38,800
उस जगह पर थे जिस जगह पे आज आप जा रहे हो। ये पूछ रहा हूं।

273
00:19:39,440 --> 00:19:43,680
ब्रह्मा कुमारी की जो थ्योरी है ब्रह्मा कुमारी की जो थ्योरी है

274
00:19:43,680 --> 00:19:48,640
उसके अनुसार आप किसी समय पर देवता थे

275
00:19:48,640 --> 00:19:52,880
ठीक है देवता से फॉल देवता से फॉल डाउन होकर के आप बने

276
00:19:52,880 --> 00:19:57,600
वो त्रेता वो द्वापर पहले आता है उनके द्वापर फिर

277
00:19:57,600 --> 00:20:01,600
सतयु त्रेता जो भी है फिर आज कलयुग में हुआ यानी कि किसी

278
00:20:01,600 --> 00:20:05,680
समय पर आप जो है उस स्टेज पर थे जिस स्टेज पर आज जाने का प्रयास कर

279
00:20:05,680 --> 00:20:10,480
रहे हो है है ना? अ

280
00:20:10,480 --> 00:20:14,560
ये तो सब आपने जान लिया ब्रह्मा कुमारी से क्या था क्या

281
00:20:14,560 --> 00:20:18,880
नहीं। मैं जो मानता हूं वही बोलूंगा मैं।

282
00:20:18,880 --> 00:20:22,960
देखिए आप जो मानते हैं वही बताइए मुझे। अभी मतलब

283
00:20:22,960 --> 00:20:26,960
यह कुल मिलाकर के ब्रह्मा कुमारी की लेखराज वाली जो थ्योरी है

284
00:20:26,960 --> 00:20:32,160
वह आपको नहीं स्वीकार है और ब्रह्मा कुमारी का जो

285
00:20:32,160 --> 00:20:36,400
ये कहने का मतलब है जो वो जो देवता थे देवता से ये बने

286
00:20:36,400 --> 00:20:40,880
ये भी आपको स्वीकार नहीं है नहीं है ना

287
00:20:40,880 --> 00:20:44,960
तो वो बताइए फिर खुल के खुल के बताइए थोड़ा थोड़ा क्लियर

288
00:20:44,960 --> 00:20:49,440
फटाफट चलिए ना स्ट्रेट रहिए थोड़ा बातों में जी क्या

289
00:20:49,440 --> 00:20:53,440
क्या जानना चाहते हो देवताओं के बारे ब्रह्मा

290
00:20:53,440 --> 00:20:54,800
ब्रह्मा कुमारी

291
00:20:54,800 --> 00:21:00,800
ब्रह्मा कुमारी के अनुसार आज आप देवत्व को प्राप्त

292
00:21:02,640 --> 00:21:07,120
करने पहले देवता रह चुके हैं ना आप

293
00:21:07,120 --> 00:21:11,200
अरे भाई ब्रह्मा कुमारी के हां तो वो जो फॉल डाउन

294
00:21:11,200 --> 00:21:14,000
होता है

295
00:21:14,000 --> 00:21:18,400
कि आज आप कलयुग में है और निकृष्ट जीव की जीवन को जी रहे हैं देवताओं के कंपैरेटिवली

296
00:21:18,400 --> 00:21:23,600
वो फॉल डाउन कैसे हुआ कारण क्या है उसका

297
00:21:23,600 --> 00:21:26,880
अभी जो

298
00:21:26,880 --> 00:21:32,880
देवता पद से नीचे उतरे उसकी बात कर रहे हो ना? हां

299
00:21:33,280 --> 00:21:37,440
हां तो हर युग अपना काम करती है।

300
00:21:37,440 --> 00:21:41,600
सतयुग उसका काम करता है। आत्मा प्योर होती है। इसके बाद

301
00:21:41,600 --> 00:21:45,600
त्रेता युग आता है। थोड़ी कला कम होती है।

302
00:21:45,600 --> 00:21:49,840
इधर द्वापर युग आता है। कम होती है। कला कम होती है। कला

303
00:21:49,840 --> 00:21:54,000
कम होती है और थोड़े अवगुण भी बढ़ते हैं कि पाप कर्म इत्यादि। हां

304
00:21:54,000 --> 00:21:58,080
जी। बढ़ते हैं ना। द्वापर से बढ़ते हैं। ठीक। गुड।

305
00:21:58,080 --> 00:22:02,400
द्वापर से भक्त है। इसका मतलब ये कहा जा सकता है हमारे हमारे

306
00:22:02,400 --> 00:22:06,640
शास्त्र ऐसा बोलता है कि द्वापर युग में भगवान कृष्ण का

307
00:22:06,640 --> 00:22:10,960
जन्म बोलता है ना मैं मैं शास्त्र की बात अभी कर ही नहीं रहा। अभी मैं शास्त्र

308
00:22:10,960 --> 00:22:15,040
की बात कर ही नहीं रहा हूं। मैं तो आपकी केवल थ्योरी समझने का प्रयास कर रहा हूं। शास्त्र की बात

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00:22:15,040 --> 00:22:19,120
जब मैं पूछूं आपसे प्रमाण तो दे दीजिएगा। अभी तो

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00:22:19,120 --> 00:22:23,200
मैं केवल आपकी मान्यता समझने का प्रयास कर रहा हूं। कि आपकी जो मान्यता

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00:22:23,200 --> 00:22:27,280
है कहने का अर्थ यह है कि आपका जो फॉल डाउन हुआ है वह पाप की वजह

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00:22:27,280 --> 00:22:31,680
से हुआ है।

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00:22:31,680 --> 00:22:35,920
है ना? ठीक है। अभी आप अभी आपने

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00:22:35,920 --> 00:22:40,320
कहा था कि जो आत्मा का मूल स्वरूप है

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00:22:40,320 --> 00:22:46,320
ना? मूल जो गुण है मौलिक गुण आत्मा के वह है

316
00:22:47,120 --> 00:22:51,120
प्रेम शांति और जितनी भी अच्छी-अच्छी चीजें हो सकती है वो सब

317
00:22:51,120 --> 00:22:55,200
ना ये मूल हैस ठीक है इसका

318
00:22:55,200 --> 00:22:59,920
मतलब किसी समय पर ये गुण आत्मा में नहीं थे

319
00:22:59,920 --> 00:23:04,960
कुछ समय ऐसा कोई ना कोई समय ऐसा होता है अच्छा

320
00:23:04,960 --> 00:23:08,960
तो जब जब आप वही मेरी बात सुनो वही

321
00:23:08,960 --> 00:23:12,960
समझाना चाह रहा हूं लेकिन एक एक मिनट मैं क्लियर

322
00:23:12,960 --> 00:23:17,280
कर लूं। यानी कि जब आप जो देवत्व को प्राप्त वाला है

323
00:23:17,280 --> 00:23:23,200
तब भी आप में ये सब बुराइयां थी।

324
00:23:23,200 --> 00:23:26,800
तब नहीं थी।

325
00:23:26,800 --> 00:23:30,960
पर यानी कि एक यानी कि एक समय ऐसा यानी

326
00:23:30,960 --> 00:23:36,800
कि एक समय ऐसा होता है जब ये सब बुराइयां आत्मा में नहीं होती।

327
00:23:36,800 --> 00:23:41,120
हां प्योर होती है। गुड बहुत बढ़िया। बहुत अच्छे। उसका

328
00:23:41,120 --> 00:23:45,440
अब ये बताइए वातावरणी पॉजिटिव होता है ना? हां।

329
00:23:45,440 --> 00:23:49,520
ठीक है। ठीक है। तो एक समय ऐसा होता है जब

330
00:23:49,520 --> 00:23:53,520
ये बुरे विचार पाप कर्म के विचार इत्यादि नहीं होते हैं

331
00:23:53,520 --> 00:23:56,960
आत्मा में। ये क्लियर है।

332
00:23:56,960 --> 00:24:01,040
नहीं होते। ये क्लियर है ना?

333
00:24:01,040 --> 00:24:05,360
ये ये क्लियर है। हां। ठीक। अब यह बात है कि यह जो विचार

334
00:24:05,360 --> 00:24:07,840
है विचार

335
00:24:07,840 --> 00:24:13,440
को धारण कौन विचार को धारण कौन तक कर सकता है

336
00:24:13,440 --> 00:24:17,920
कोई चेतन तक एक मिनट जो विचार है

337
00:24:17,920 --> 00:24:22,080
एक एक मिनट भाई साहब मैं ये पूछ रहा हूं जो विचार है विचार चाहे

338
00:24:22,080 --> 00:24:26,400
अच्छे हो चाहे बुरे हो कुछ भी विचार जो विचार करने की प्रवृत्त

339
00:24:26,400 --> 00:24:32,400
या कुछ भी यह इसको धारण कोई चेतन तत्व ही कर सकता है ना

340
00:24:32,880 --> 00:24:38,880
नहीं कर सकता तो कौन कौन करता है धारण

341
00:24:39,600 --> 00:24:44,480
फोन में कौन सब संग्रह करता है फोन हमारा होता है

342
00:24:44,480 --> 00:24:48,480
उसमें संग्रह करने की चीज क्या होती है सर मेमोरी कार्ड

343
00:24:48,480 --> 00:24:52,480
होता है मोबाइल के अंदर मेमोरी कार्ड होता है मेमोरी कार्ड होता है तो इसमें

344
00:24:52,480 --> 00:24:57,360
सूक्ष्म शरीर शरीर को कैसे भूल गई आप सूक्ष्म

345
00:24:57,360 --> 00:25:01,520
अरे भैया तो मेमोरी कार्ड मैं ये कह कह रहा हूं

346
00:25:01,520 --> 00:25:05,520
ये जो बुराई है बुराई ठीक है बुराई या

347
00:25:05,520 --> 00:25:11,520
अच्छाई इसको सूक्ष्म शरीर को धारण कौन करता है

348
00:25:14,480 --> 00:25:18,560
आत्मा तो है ही उसका कटका नहीं हो सकता कट नहीं

349
00:25:18,560 --> 00:25:22,720
हो सकता बिंदु स्वरूप नहीं हो सकता भाई साहब आप आप मेरी

350
00:25:22,720 --> 00:25:26,880
बात सुनिए संजय जी हम लोग थोड़ा सा स्ट्रेट और जो टू द

351
00:25:26,880 --> 00:25:31,200
पॉइंट मैटर चल रहा है उस पर थोड़ा सा बात करें आपने कहा आत्मा

352
00:25:31,200 --> 00:25:35,840
जो है उसका जो मौलिक स्वरूप है वह शांति इत्यादि है।

353
00:25:35,840 --> 00:25:40,000
ठीक है? यह सब भी शांति और ये प्रेम करुणा ये

354
00:25:40,000 --> 00:25:44,800
सब भी विचार ही है ना विचार है ना ये सब भी

355
00:25:44,800 --> 00:25:48,880
आत्मा सबसे पहले अच्छे विचार धारण कर रही है तो आपका ये स्टेटमेंट तो गलत

356
00:25:48,880 --> 00:25:53,040
हो रहा है कि विचार धारण नहीं करती आत्मा। आत्मा नहीं

357
00:25:53,040 --> 00:25:57,280
करती। सूक्ष्म शरीर है। आत्मा तो

358
00:25:57,280 --> 00:26:01,280
बॉडी छूट जाने आत्मा शुद्ध है। आत्मा

359
00:26:01,280 --> 00:26:06,080
तो शुद्ध है। उसमें कोई विचार है ही नहीं। सूक्ष्म

360
00:26:06,080 --> 00:26:10,640
है ही नहीं। विचार है ही नहीं। अरे विचार है ही नहीं।

361
00:26:10,640 --> 00:26:14,800
विचार है ही नहीं। विचार है ही नहीं ना। हां गुड।

362
00:26:14,800 --> 00:26:18,880
ही नहीं। वो तो कोई विचार कोई विचार नहीं है। इस

363
00:26:18,880 --> 00:26:22,960
थोड़ा सा मैं कंफ्यूज अरे भाई आप मेरी बात भी तो सुनो।

364
00:26:22,960 --> 00:26:27,040
मैंने मांगा आपसे प्रमाण। मैं कुछ और पूछना चाह रहा हूं। आप कहीं

365
00:26:27,040 --> 00:26:29,760
और ले जाना चाह रहे हैं। बात ये है मैं

366
00:26:29,760 --> 00:26:34,080
ये पूछ रहा हूं। आपने अभी थोड़ी देर पहले ये कह दिया था ना कि आत्मा

367
00:26:34,080 --> 00:26:38,160
का मूल जो गुण है वो शांति इत्यादि है। यह आपने थोड़ी देर

368
00:26:38,160 --> 00:26:42,560
पहले कहा था। अब आप कह रहे हो नहीं आत्मा तो इससे भी फ्री है।

369
00:26:42,560 --> 00:26:47,200
यह सब तो सूक्ष्म शरीर धारण करता है।

370
00:26:47,200 --> 00:26:51,440
नहीं वो विचार की बात कर रहे हो ना विचार नहीं है। ये ये विचार

371
00:26:51,440 --> 00:26:55,520
नहीं बोल सकते। क्या है? उसका ओरिजिनल गुण है।

372
00:26:55,520 --> 00:27:00,240
आत्मा मतलब एक ऐसी ऊर्जा जो

373
00:27:00,240 --> 00:27:04,480
मात्र अस्तित्व को दिखाता है। उसमें कोई दाग नहीं लगता। विचार

374
00:27:04,480 --> 00:27:08,800
नहीं रहता। अरे भाई अरे भाई किस जब हम किसी को प्रेम

375
00:27:08,800 --> 00:27:12,880
कह रहे हैं प्रेम कर रहे हैं तो प्रेम की भावना आ गई ना मन में विचार हो गया ना

376
00:27:12,880 --> 00:27:18,080
ये प्रेम किसको करोगे आप

377
00:27:18,080 --> 00:27:22,160
प्रेम करोगे ना प्रेम की भावना हो गई ना मन में विचार ही तो है क्या है

378
00:27:22,160 --> 00:27:26,320
ये जो आप समझ लो वही है गुण है गुण है पर

379
00:27:26,320 --> 00:27:29,520
गुण है ना

380
00:27:29,520 --> 00:27:33,600
आत्मा का ओरिजिनल सनातन है वो तो अरे भाई

381
00:27:33,600 --> 00:27:37,600
मैं कहा मैं वो तो वो तो मैंने आपसे

382
00:27:37,600 --> 00:27:41,760
पूछा है आत्मा मिटती है कि नहीं मिटती? बात ये चल रही है कि

383
00:27:41,760 --> 00:27:45,840
आत्मा ये जो विचार वैचारिक जो चीजें हैं विचार वैचारिक

384
00:27:45,840 --> 00:27:49,840
सामग्री इनके बिना आत्मा का अस्तित्व हो सकता है। सीधी बात

385
00:27:49,840 --> 00:27:53,840
यह है तो इनका इनका अस्तित्व ये एक्सिस्ट कहां

386
00:27:53,840 --> 00:27:58,160
पर करते हैं? जो किसी समय पे आत्मा के साथ कनेक्ट हो जाते हैं।

387
00:27:58,160 --> 00:28:02,160
जैसे आपने कहा कि एक समय पे आपके पास ये सब चीजें नहीं थी।

388
00:28:02,160 --> 00:28:06,240
आप फ्री थे, शुद्ध थे। फिर फिर समय के साथ यह चीजें आपके

389
00:28:06,240 --> 00:28:10,480
साथ कनेक्ट हो गई। चाहे अच्छे विचार हो, चाहे बुरे विचार। तो बुरे विचार

390
00:28:10,480 --> 00:28:14,560
की मैं बात कर रहा हूं। यह कहां पर स्थित थे जो समय आने पर आपके पास

391
00:28:14,560 --> 00:28:18,720
आ गए? उनका अधिष्ठान क्या है बुरे विचारों

392
00:28:18,720 --> 00:28:22,800
का? सर वही तो बताने की कोशिश कर

393
00:28:22,800 --> 00:28:28,800
रहा हूं। आप सुनोगे तब ना। ठीक है। सुनोगे?

394
00:28:28,800 --> 00:28:33,280
ठीक है।

395
00:28:33,280 --> 00:28:37,360
गीता में कहा है आप मुझसे शास्त्र का

396
00:28:37,360 --> 00:28:41,520
नाम मत लीजिए अभी आप केवल अपनी मान्यता बताते जाइए मैं आपसे पूछ लूंगा

397
00:28:41,520 --> 00:28:47,520
बाद में शास्त्र का नाम

398
00:28:47,600 --> 00:28:53,600
आप सबूत वहां तो ढूंढ रहे हो शास्त्र

399
00:28:55,280 --> 00:29:00,240
सबूत वही था मैंने कहा मैंने कहा कि

400
00:29:00,240 --> 00:29:04,480
अगर आप आप यह मानते हैं कि आत्मा कभी इन चीजों से मुक्त रह सकती

401
00:29:04,480 --> 00:29:08,640
है। जो आपने बुराइयां बुराइयां

402
00:29:08,640 --> 00:29:12,640
बताई है इन चीजों से आत्मा किसी ना कभी मुक्त रह सकती है। शुद्ध

403
00:29:12,640 --> 00:29:17,280
स्वरूप उस समय उसके पास प्रेम शांति इत्यादि होता है गुण। ठीक है?

404
00:29:17,280 --> 00:29:21,280
तो यह जो विचार वैचारिक सामग्री है पाप करने की

405
00:29:21,280 --> 00:29:25,280
प्रवृत्ति बुराई किसी के बारे में घृणा यह सब

406
00:29:25,280 --> 00:29:29,280
यह एक्सिस्ट कहां पर करता है? जो समय आने पर आ जाता है

407
00:29:29,280 --> 00:29:32,480
आत्मा के अंदर।

408
00:29:32,480 --> 00:29:36,560
इसका धारक तत्व क्या है? अरे भैया मैं पूछ

409
00:29:36,560 --> 00:29:40,560
रहा हूं क्या आपसे? अचल वचल क्यों बोल रहे हो? आप सीधे बात करो ना ये वाला

410
00:29:40,560 --> 00:29:46,320
तत्व यहां पे रहता है वो और समय आने पे आत्मा के साथ आ जाता है।

411
00:29:46,320 --> 00:29:49,120
अब बोलने ही नहीं देता। क्या बोलूं? ब्रह्मकुमारी

412
00:29:49,120 --> 00:29:53,200
वाला तर्क नहीं करता है। इतना बहुत कम बोलता है।

413
00:29:53,200 --> 00:29:56,030
आप बताइए।

414
00:29:56,030 --> 00:30:00,080
[गला साफ़ करने की आवाज़] बोलने दोगे तो बोलूंगा वरना लेफ्ट हो जाएगा। आप अगर आप अगर

415
00:30:00,080 --> 00:30:04,240
आप अगर बेकार की चीजें बोलेंगे तो आपका स्वागत है। आप लेफ्ट हो सकते हैं। आप

416
00:30:04,240 --> 00:30:08,320
मैंने आपने अभी बोला आत्मा अचल है। मैंने पूछा है कि आपसे कि

417
00:30:08,320 --> 00:30:12,480
वो चलती है कि नहीं चलती है। मूवमेंट करती है कि नहीं करती है?

418
00:30:12,480 --> 00:30:16,560
बताइए। क्यों बोल रहा अचल? हां। जी

419
00:30:16,560 --> 00:30:20,640
बोल रहा हूं। आप सुनोगे तब ना। देखा मैंने अभी

420
00:30:20,640 --> 00:30:24,720
अभी प्रश्न। अब मैं एक एक मैं एक क्लियर प्रश्न एक मिनट आपने अभी

421
00:30:24,720 --> 00:30:28,880
एक मैं एक क्लियर प्रश्न आपसे कर रहा हूं। ध्यान से सुनिए। मैंने आपसे पूछा

422
00:30:28,880 --> 00:30:34,880
था कि आत्मा मूवमेंट करती है कि नहीं करती? पूछा था

423
00:30:35,840 --> 00:30:40,000
तो मेरा जवाब में पहले आत्मा ही आना चाहिए। शब्द

424
00:30:40,000 --> 00:30:44,400
ऐसा जरूरी तो नहीं है। आत्मा को समझाने के लिए मुझे मुझे

425
00:30:44,400 --> 00:30:48,480
आप मुझे अचल है क्यों बता रहे हैं? आप जो

426
00:30:48,480 --> 00:30:52,480
विषय से संबंधित जो बात चल रही है वो बताइए। अचल है से क्या मतलब है? और

427
00:30:52,480 --> 00:30:58,480
अगर आप बताएंगे तो मैं टोकूंगा। चलिए बताइए।

428
00:31:00,880 --> 00:31:06,240
वो अचल अडोल है आत्मा और जो हिलता है

429
00:31:06,240 --> 00:31:10,480
आता है वो सूक्ष्म शरीर आता है और उसमें ही विकारों से भरे

430
00:31:10,480 --> 00:31:14,880
होता है। हमारे [गला साफ़ करने की आवाज़] पूर्व जन्मों का जो भी आप मानते हैं सूक्ष्म

431
00:31:14,880 --> 00:31:19,520
शरीर में वो एक मुख से दूसरी योनि में जाता है।

432
00:31:19,520 --> 00:31:23,680
एक योनि से दूसरी योनि दूसरी से तीसरी ये

433
00:31:23,680 --> 00:31:28,000
आवागमन करती है। आत्मा तो स्थिर है उसका कटका

434
00:31:28,000 --> 00:31:30,960
नहीं हो सकता।

435
00:31:30,960 --> 00:31:34,960
ठीक है। समझ रहे हो आप? समझ गया।

436
00:31:34,960 --> 00:31:38,960
आपने जो कहा आप जो कहना आप जो कहना चाह रहे हो वो मैं सुन

437
00:31:38,960 --> 00:31:43,040
लिया समझ गया। अब मैं उसमें और क्लिटी चाहता हूं। यह सूक्ष्म शरीर

438
00:31:43,040 --> 00:31:47,120
किस तत्व से बना होता है? प्रकृति से बना होता है या अपने

439
00:31:47,120 --> 00:31:51,200
आप में एक स्वतंत्र रूप से एक तत्व है सूक्ष्म शरीर

440
00:31:51,200 --> 00:31:56,000
नहीं नहीं यह बोल सकते हैं हम

441
00:31:56,000 --> 00:32:01,280
वो कॉस्मिक एनर्जी वाला

442
00:32:01,280 --> 00:32:05,680
कॉस्मिक एनर्जी बना हां जी इसको समझाइए

443
00:32:05,680 --> 00:32:09,520
थोड़ा सा

444
00:32:09,520 --> 00:32:14,240
लाइट की बिजली को कैसे समझाओगे

445
00:32:14,240 --> 00:32:18,400
लाइट की बिजली है। नहीं नहीं उसकी व्याख्या

446
00:32:18,400 --> 00:32:23,040
करनी है तो कैसे समझाओगे?

447
00:32:23,040 --> 00:32:27,440
लाइट की बिजली की व्याख्या करनी है। लाइट की बिजली

448
00:32:27,440 --> 00:32:31,440
कैसे दिखाओगे? नहीं नहीं बिजली बोल रहा हूं। मैंने

449
00:32:31,440 --> 00:32:37,440
मैंने दिखाने की बात कही है। [हंसी] मैंने कहने की बात कही है।

450
00:32:37,520 --> 00:32:41,520
देखिए आप तो पता चलेगा। मेरी बात सुनिए। मेरी

451
00:32:41,520 --> 00:32:45,520
बात सुनिए। मैंने आपसे पूछा है कि यह जो यह

452
00:32:45,520 --> 00:32:49,600
जो सूक्ष्म शरीर है यह बना किस चीज से

453
00:32:49,600 --> 00:32:53,760
होता है? तो इसमें जड़ प्रकृति का मटेरियल

454
00:32:53,760 --> 00:32:57,760
यूज किया जाता है। या फिर हम यह मान ले कि पर

455
00:32:57,760 --> 00:33:03,040
एक मिनट एक मिनट एक मिनट या फिर हम यह मान लें कि परमात्मा

456
00:33:03,040 --> 00:33:06,800
और आत्मा और

457
00:33:06,800 --> 00:33:10,960
प्रकृति इसके अलावा एक तत्व और है जिससे कि सूक्ष्म शरीर बना है।

458
00:33:10,960 --> 00:33:16,960
सीधी बात एक तत्व और एक्सिस्ट करता है।

459
00:33:17,840 --> 00:33:22,160
सर पहली बात तो यह है कि मन बुद्धि से पर है।

460
00:33:22,160 --> 00:33:26,560
मनुष्य बुद्धि नहीं कह सकती इसकी व्याख्या। मतलब

461
00:33:26,560 --> 00:33:29,200
आपको नहीं पता।

462
00:33:29,200 --> 00:33:33,200
आपको नहीं पता। किसी को पता नहीं रहेगा। इसका किसी को भी मतलब ब्रह्मा

463
00:33:33,200 --> 00:33:37,200
कुमारी के पास यह ज्ञान नहीं है। नहीं नहीं

464
00:33:37,200 --> 00:33:41,440
किसी के पास। ठीक है। कोई बात आप ये मुझे

465
00:33:41,440 --> 00:33:47,040
वो किसी किसी के पास होगा कि नहीं होगा? मैं ये पूछ रहा हूं

466
00:33:47,040 --> 00:33:51,200
भाई साहब मैं ये पूछ रहा हूं ब्रह्मा कुमारी का ये क्लेम गलत हो गया ना कि तीन ही तत्व है जीव

467
00:33:51,200 --> 00:33:55,200
प्रकृति और आत्मा परमात्मा जीव और प्रकृति ये तीन

468
00:33:55,200 --> 00:33:59,200
तत्व मानती है आप एक चौथा और बता रहे हो सूक्ष्म शरीर और

469
00:33:59,200 --> 00:34:03,200
उसका उपादान आप बता नहीं रहे हो वो तो अपने आप में ही मान लेता हूं सूक्ष्म शरीर अपने

470
00:34:03,200 --> 00:34:07,520
आप में एक शाश्वत तत्व है और दुनिया भर में जितनी आत्माएं

471
00:34:07,520 --> 00:34:13,520
उन सबका सूक्ष्म शरीर एक्सिस्ट करता है शाश्वत

472
00:34:14,800 --> 00:34:19,040
हां जी और एक और एक बात इससे जुड़ी है बोल देता

473
00:34:19,040 --> 00:34:23,040
हूं कि मनुष्य शरीर का जो सूक्ष्म

474
00:34:23,040 --> 00:34:27,520
शरीर होता है ना वो मनुष्य योनि में ही जाते हैं। हां

475
00:34:27,520 --> 00:34:31,520
स्त्री पुरुष हो सकते हैं दूसरे जन्म लेकिन वो बिल्ली

476
00:34:31,520 --> 00:34:35,600
कुत्ता कोई पशु पक्षी उसमें एडजस्ट

477
00:34:35,600 --> 00:34:40,400
नहीं करते हैं। मतलब सूक्ष्म शरीर एक ऐसा तत्व है

478
00:34:40,400 --> 00:34:44,800
जिसकी अपनी चेतना होती है जिस कारण से वह बुराई और अच्छाई के विचारों

479
00:34:44,800 --> 00:34:49,200
को अपने पास स्टोर कर सकता है। सूक्ष्म शरीर

480
00:34:49,200 --> 00:34:53,920
वो वही वही मेमोरी कार्ड है। वही आती जाती है।

481
00:34:53,920 --> 00:34:58,560
यानी वो चेतन सत्ता है।

482
00:34:58,560 --> 00:35:02,960
चेतन सत्ता तो वो आत्मा को बोलेगा। चेतन सत्ता

483
00:35:02,960 --> 00:35:07,120
इससे एक्सेस करती है आत्मा से आत्मा है तो वह काम कर सकती

484
00:35:07,120 --> 00:35:11,280
है वरना तो मैंने इसीलिए पूछा ये जो बुराई

485
00:35:11,280 --> 00:35:15,440
और अच्छाई है ये विचार है इसको धारण वो कर सकता है जो चेतन हो इसको

486
00:35:15,440 --> 00:35:19,600
जड़ तो धारण कर नहीं सकता जो चेतन नहीं वो जड़ हुआ आप कह रहे हो वो जड़ नहीं

487
00:35:19,600 --> 00:35:23,680
है जड़ नहीं तो चेतन है नहीं तो क्या है आप बता दो

488
00:35:23,680 --> 00:35:27,760
नहीं नहीं आत्मा की व्याख्या नहीं हो सकती इसकी व्याख्या सिर्फ इतनी हो सकती है

489
00:35:27,760 --> 00:35:31,920
कि वो हां हां हां वो वो वो पूर्ण ज्ञान भी

490
00:35:31,920 --> 00:35:36,640
नहीं कहेंगे उसको उसको पूर्ण अज्ञानी भी नहीं कहेंगे उसको

491
00:35:36,640 --> 00:35:42,640
पूर्ण प्रकाश भी मैं समझ गया मैं समझ गया इसको इसको पूर्ण भी नहीं

492
00:35:42,800 --> 00:35:47,040
इसको दूसरी तरीके से समझ लेते हैं तो अभी जब आपने कहा कि आत्मा अपने मौलिक स्वरूप

493
00:35:47,040 --> 00:35:51,200
में जा रही होती है तो आपने यह माना कि आपका कभी

494
00:35:51,200 --> 00:35:55,200
ऐसा होगा जब आप सूक्ष्म शरीर से भी अलग हो जाओगे और या

495
00:35:55,200 --> 00:36:00,080
फिर आपका जो एंडिंग पॉइंट है वो यही है कि सूक्ष्म शरीर के साथ तो हमेशा रहोगे

496
00:36:00,080 --> 00:36:06,080
ऐसा है क्या? सूक्ष्म शरीर से भी अलग हो जाओगे। ऐसा होता है

497
00:36:08,640 --> 00:36:12,800
आत्मा तो हिलेगी नहीं। सूक्ष्म शरीर ही अर्ज करता है। आत्मा उसमें

498
00:36:12,800 --> 00:36:16,880
भी है लेकिन उसका नहीं हो सकता। भाई साहब मैंने

499
00:36:16,880 --> 00:36:20,880
क्या पूछा नहीं समझा नहीं। मैंने कहा कि अभी आपने

500
00:36:20,880 --> 00:36:25,280
ये बात कही थी कि भाई जो आत्मा का मौलिक स्वरूप है ना उसमें

501
00:36:25,280 --> 00:36:29,360
शांति इत्यादि है। है ना? और जब हम मेडिटेशन करते हैं तो जो मौलिक

502
00:36:29,360 --> 00:36:33,680
स्वरूप है वो हम प्राप्त करने लगते हैं अपना। ठीक है? हां जी।

503
00:36:33,680 --> 00:36:37,680
यही गाना आपने। इसके बाद हम इस पे आ जाते हैं। इसके बाद हम इस

504
00:36:37,680 --> 00:36:42,320
पे आ जाते हैं कि अ

505
00:36:42,320 --> 00:36:46,560
इसके बाद हम इस पे आ जाते हैं कि आपने यह माना कि ये जो वैचारिक

506
00:36:46,560 --> 00:36:50,880
सामग्री है इसको धारण करता है सूक्ष्म शरीर। अब वो सूक्ष्म शरीर चेतन

507
00:36:50,880 --> 00:36:54,880
है। जड़ है ये मैं नहीं कह सकता। हां चेतन आप उसे मानते नहीं। जड़ उसे आप

508
00:36:54,880 --> 00:36:59,280
मानते नहीं। आप क्या मानते हो वह तो आप बता नहीं पा रहे हो बात एक अलग है मगर

509
00:36:59,280 --> 00:37:03,280
फिर भी यह वैचारिक जो चीजें हैं वैचारिक सामग्री

510
00:37:03,280 --> 00:37:08,080
यह धारण करता है सूक्ष्म शरीर तो अब मैं यह पूछ रहा हूं कि

511
00:37:08,080 --> 00:37:12,080
आपने जो कहा कि ध्यान करने से आत्मा मौलिक स्वरूप में स्थापित

512
00:37:12,080 --> 00:37:16,080
होने लगती है स्थित होने लगती है तो मौलिक स्वरूप सूक्ष्म शरीर के बिना वाला

513
00:37:16,080 --> 00:37:22,080
मौलिक स्वरूप या मौलिक स्वरूप सूक्ष्म शरीर के साथ वाला मौलिक स्वरूप

514
00:37:22,640 --> 00:37:26,560
किसको कह रहे हैं मौलिक स्वरूप

515
00:37:26,560 --> 00:37:31,040
आप मौलिक किसे कह रहे हो? ओरिजिनल

516
00:37:31,040 --> 00:37:37,040
जो उसका वास्तविक स्वरूप है।

517
00:37:38,800 --> 00:37:44,160
मतलब सूक्ष्म शरीर के बिना भी उस आत्मा एक्सिस्ट करती है ना।

518
00:37:44,160 --> 00:37:48,480
हां जी। ये हो गया। यानी कि यह जो सारी गंदगी

519
00:37:48,480 --> 00:37:53,120
है यह शरीर में होती है सूक्ष्म शरीर में और

520
00:37:53,120 --> 00:37:57,440
आत्मा जो है आप जब ध्यान लगाते हैं तो आप जो है अपने सारे शरीरों

521
00:37:57,440 --> 00:38:01,760
से मुक्त हो के सूक्ष्म शरीर के वो आपने मौलिक स्वरूप में जाकर

522
00:38:01,760 --> 00:38:06,560
के वो भोगते हैं। क्या कहते हैं?

523
00:38:06,560 --> 00:38:11,360
ठीक है। ठीक है ना? हां। तो

524
00:38:11,360 --> 00:38:15,440
अब इसमें बहुत सारे प्रश्न हो जाते हैं। मगर मैं जो मेरा जो मुख्य विषय चल रहा है

525
00:38:15,440 --> 00:38:19,600
कि बुराई उसके अंदर आई कहां से मैं उस पर ही रहता हूं। तो अब आप

526
00:38:19,600 --> 00:38:23,600
यह बताइए कि आत्मा सूक्ष्म शरीर जब सूक्ष्म शरीर में आने से ही पाप आना

527
00:38:23,600 --> 00:38:28,000
है तो सूक्ष्म शरीर से आत्मा कनेक्ट क्यों हो रही है?

528
00:38:28,000 --> 00:38:32,080
कौन कर रहा है कनेक्ट उसे? एक तरीके से मान लीजिए कि

529
00:38:32,080 --> 00:38:36,480
ये जो बुराई है वो सूक्ष्म शरीर में रहती है और सूक्ष्म शरीर सूक्ष्म

530
00:38:36,480 --> 00:38:37,840
शरीर से आत्मा को जोड़

531
00:38:37,840 --> 00:38:41,920
के आत्मा को पापी जो बुराई करने की वो है

532
00:38:41,920 --> 00:38:46,160
दे दी जाती है तो कौन कर रहा है ये अरे वो

533
00:38:46,160 --> 00:38:51,360
खुद पे ही करता है सूक्ष्म उसका संस्कार

534
00:38:51,360 --> 00:38:55,440
उसका संस्कार खुद से ही करता है कि मुझे कहां समझ गया मैं समझ गया मैं

535
00:38:55,440 --> 00:38:59,680
थोड़े से से समझ जाता हूं भाई साहब इतना सा बोलते मैं समझ जाता हूं खुद से करता

536
00:38:59,680 --> 00:39:03,840
है बस समझ गया हां अब इसमें आगे चलते हैं इसका

537
00:39:03,840 --> 00:39:06,880
मतलब

538
00:39:06,880 --> 00:39:11,520
यानी कि उसको मालूम है कि उसमें उसमें जाकर के मैं पापी बन जाऊंगा

539
00:39:11,520 --> 00:39:16,080
और फिर भी वह उससे जुड़ता है खुद से। अरे

540
00:39:16,080 --> 00:39:20,080
उसका संस्कार ही ऐसा है ना वो पवित्र पवित्र

541
00:39:20,080 --> 00:39:22,320
शरीर

542
00:39:22,320 --> 00:39:26,560
उसका संस्कार ऐसा है कि उसको मालूम है कि वो पाप से जुड़कर के सूक्ष्म

543
00:39:26,560 --> 00:39:32,560
शरीर से जुड़कर के पापी बन जाएगा। मगर फिर भी वो उससे जुड़ता है।

544
00:39:32,640 --> 00:39:36,960
नहीं नहीं पापी तो है ऑलरेडी। वो पाप को लेकर ही जाता है दूसरे शरीर

545
00:39:36,960 --> 00:39:41,040
में। यानी आत्मा जब सूक्ष्म जब

546
00:39:41,040 --> 00:39:47,040
सूक्ष्म शरीर से अलग है तब भी आत्मा पापी होती है। पाप होते हैं उसके पास।

547
00:39:47,440 --> 00:39:52,240
सूक्ष्म शरीर में रहता है। अरे भाई साहब मैंने कहा

548
00:39:52,240 --> 00:39:56,240
मैंने कहा सूक्ष्म शरीर से जब आत्मा अलग हो गई है तब

549
00:39:56,240 --> 00:40:00,560
उसके पास पाप है कि नहीं है?

550
00:40:00,560 --> 00:40:05,840
आत्मा में बोल रहे हो। आत्मा में हां हां

551
00:40:05,840 --> 00:40:10,000
आत्मा में कहां पाप रहेगा? आत्मा नहीं रहेगा वो तो शुद्ध है। तो

552
00:40:10,000 --> 00:40:14,240
अब अब आप ये अब आप ये मुझे बताइए सुनिए सुनिए मैं मैं बताऊं

553
00:40:14,240 --> 00:40:18,400
मान लीजिए ये हो गई आत्मा इसको मानिए आत्मा

554
00:40:18,400 --> 00:40:22,400
है और ये उसका सूक्ष्म शरीर है। सूक्ष्म शरीर में पाप

555
00:40:22,400 --> 00:40:26,800
है। ठीक है? इससे जुड़कर के पापी हो जाएगी आत्मा। तो आत्मा

556
00:40:26,800 --> 00:40:32,800
को पाप इस सूक्ष्म शरीर से कौन जोड़ रहा है? क्यों जोड़ रही है वो?

557
00:40:32,800 --> 00:40:36,400
जब वो इधर पापी हो रही तो

558
00:40:36,400 --> 00:40:40,560
नहीं नहीं पापी हो जाएगी ऐसा नहीं वह पाप लेकर जाती है उसका

559
00:40:40,560 --> 00:40:44,720
मन है ना वो मन ही मान लो सूक्ष्म शरीर जो है उसका संस्कार भर

560
00:40:44,720 --> 00:40:49,360
के दूसरे शरीर में जाती है अभी वो सूक्ष्म शरीर से अलग है

561
00:40:49,360 --> 00:40:53,360
मैं क्या पूछ रहा हूं अभी वो सूक्ष्म शरीर से अलग है ना आत्मा मैं तब की बात कर

562
00:40:53,360 --> 00:40:58,160
रहा हूं

563
00:40:58,160 --> 00:41:04,160
सूक्ष्म शरीर से कनेक्ट क्यों हो रही है आत्मा

564
00:41:05,840 --> 00:41:10,800
भैया आपको एक तो पूर्ण मूर्ख मिले या तो पूर्ण ज्ञानी मिले।

565
00:41:10,800 --> 00:41:16,800
मेरे जैसा बच्चे का नहीं मिला आपको। आप जा सकते हैं।

566
00:41:17,360 --> 00:41:23,280
यह सवाल मैं क्यों पूछ रहा हूं? वो आप लोग समझ लीजिए।

567
00:41:23,280 --> 00:41:29,280
आप जा सकते हैं। भाई साहब मैं समझ गया आपका आंसर क्या है।

568
00:41:31,680 --> 00:41:37,200
यह सवाल मैं इसलिए पूछ रहा हूं कि

569
00:41:37,200 --> 00:41:41,440
यह लोग यह कहते हैं कि आत्मा का जो मूल

570
00:41:41,440 --> 00:41:45,520
स्वरूप है वो शांति, करुणा, प्यार इत्यादि पाप रहित है।

571
00:41:45,520 --> 00:41:49,600
दूसरी ओर यह भी कहते हैं कि भैया जो आत्मा है वो सदा सुखी नहीं हो सकती।

572
00:41:49,600 --> 00:41:53,600
हर 5000 साल में वो उसका इनका एक साइकिल है। उनको मोक्ष पूरी थ्योरी

573
00:41:53,600 --> 00:41:57,840
आप समझ लीजिए। शुरू से अंत तक मैंने क्या और क्यों पूछा है? उसको आप लोग भी जान लीजिए।

574
00:41:57,840 --> 00:42:02,000
देखिए जब मैंने उससे यह पूछा इनसे भाई साहब

575
00:42:02,000 --> 00:42:06,240
से कि जब आपने बिटिया का सर कंधे पर रखा था तो आपको कुछ

576
00:42:06,240 --> 00:42:10,240
सुख की अनुभूति हुई होगी तो उसमें और इसमें

577
00:42:10,240 --> 00:42:13,200
अंतर क्या है? तो इन्होंने बताया परम सुख है जमीन आसमान

578
00:42:13,200 --> 00:42:17,280
का अंतर है और इसमें हम अपने मौलिक स्वरूप में आते हैं। ठीक है?

579
00:42:17,280 --> 00:42:21,360
तो सीधी सी बात है इसमें अंतर यह होता है आध्यात्मिक सुख में और इस

580
00:42:21,360 --> 00:42:25,440
सुख में यह सुख अनंत होता है। आध्यात्मिक सुख

581
00:42:25,440 --> 00:42:29,440
इसको समझना है। अगर यह अनंत नहीं है तो इस सुख में भौतिक

582
00:42:29,440 --> 00:42:33,440
भौतिक चीजों से मिलने वाले सुख में और अध्यात्म से मिलने वाले सुख में कोई

583
00:42:33,440 --> 00:42:37,760
अंतर नहीं है। अगर यह सुख अनंत नहीं है तो अनंत है

584
00:42:37,760 --> 00:42:42,320
तो ही वो परम सुख है। वो अनंत सुख है और वही सच्चिदानंद

585
00:42:42,320 --> 00:42:46,400
वाला मामला है। मोक्ष वाला। तो अब पहली बात इनके यहां की थ्योरी यह है

586
00:42:46,400 --> 00:42:50,400
ब्रह्मा कुमारी के यहां की कि अनंत सुख तो है नहीं। तो पहली बात

587
00:42:50,400 --> 00:42:54,400
इस सुख में इस सुख में अंतर क्या आया? अब यह तो एक

588
00:42:54,400 --> 00:42:58,560
बात हो गई कि इस सुख में उस सुख में कोई अंतर नहीं है। जो भौतिक दुनिया से जो सुख

589
00:42:58,560 --> 00:43:02,640
प्राप्त कर रहे हैं वही सुख वहां से भी मिल रहा है क्योंकि वहां वो खुद क्लेम कर रहे हैं कि वहां पर भी

590
00:43:02,640 --> 00:43:06,960
आपका इतनी देर का ही सुख है और

591
00:43:06,960 --> 00:43:11,040
तमाम सारी दुनिया की दुनियादारी की चीजों को छोड़ के व्यक्ति से कहा जाए

592
00:43:11,040 --> 00:43:15,520
कि हम तुम्हें इतनी देर के लिए जैसे जेल पर जेल से बाहर छोड़ते हैं ना पेरोल

593
00:43:15,520 --> 00:43:19,600
पे पैरोल कहते हैं क्या कहते हैं जेल से थोड़ी देर के लिए बाहर तो उस समय

594
00:43:19,600 --> 00:43:24,480
उस व्यक्ति को कैसी अनुभूति होगी जब वो पैरोल पे बाहर होगा

595
00:43:24,480 --> 00:43:28,320
है ना और दूसरी बात यह होती है कि पैरोल पे जो मुक्ति होती

596
00:43:28,320 --> 00:43:32,640
है ना पैरोल वाली वो मुक्ति भी पूरी तरीके से मुक्ति नहीं होती। यही हो कि पैरोल

597
00:43:32,640 --> 00:43:36,800
वाली जो मुक्ति है वो पूरी मान ली जाए क्योंकि उसमें उसके एक कष्ट होता है

598
00:43:36,800 --> 00:43:41,280
कि बस 15 दिन में वापस जाना है। एक महीने में वापस जाना है। जैसे राम रहीम

599
00:43:41,280 --> 00:43:45,280
पैरोल पर बाहर आता जाता है। तो जितनी देर वो बाहर आता है और

600
00:43:45,280 --> 00:43:49,280
वापस जाता है उतनी देर उसके अंदर सारे दुख भले ही खत्म हो जाए जेल से संबंधित।

601
00:43:49,280 --> 00:43:54,000
एक दुख दोबारा उसके मन में होता है कि मुझे दोबारा जाना है।

602
00:43:54,000 --> 00:43:58,000
ठीक है? तो एक तो यह हो गया कि

603
00:43:58,000 --> 00:44:02,160
यह वह जो जिस ब्रह्मा कुमारी में जा रहे हैं लोग

604
00:44:02,160 --> 00:44:06,240
वहां पर अंतर क्या है यह कोई नहीं बता पाएगा। वही भौतिक सुख यहां का भी बाधित

605
00:44:06,240 --> 00:44:10,480
है और ब्रह्मा कुमारी के द्वारा आध्यात्मिक दुनिया का जो सुख है वह भी बाधित

606
00:44:10,480 --> 00:44:14,560
है। वह खुद यह क्लेम कर रही है। दूसरी बात अब इसमें ये

607
00:44:14,560 --> 00:44:18,720
लोग जब बातें करते हैं मीठी-मीठी बातें करने के चक्कर में तो इनको यह कहना पड़ता

608
00:44:18,720 --> 00:44:22,720
है कि आत्मा का जो मौलिक स्वरूप होता है वो शांति होता

609
00:44:22,720 --> 00:44:26,800
है। शांति और यह जैसे अभी आपने हमारी पिछली कुछ

610
00:44:26,800 --> 00:44:30,800
चर्चाएं हुई है उसमें देखा होगा। तो जो शांति है शांति और ये

611
00:44:30,800 --> 00:44:35,120
अच्छी-अच्छी मीठी मीठी बातें प्यार प्रेम करुणा दया है यह सब यह उसका मौलिक

612
00:44:35,120 --> 00:44:39,200
होता है तो वह मौलिक भी होने लगती है। अब दिक्कत यह आती है

613
00:44:39,200 --> 00:44:43,280
कि इन्होंने जब यह माना कि यहां से छूट करके वहां जाना

614
00:44:43,280 --> 00:44:43,780
है

615
00:44:43,360 --> 00:44:47,360
इसके लिए हमें अच्छे काम चाहिए। तो वहां से छूट वहां से इनको

616
00:44:47,360 --> 00:44:51,520
यहां आना है जो ये माने बैठे हैं कि वहां से आना है। उसके लिए बुरे काम चाहिए। तो

617
00:44:51,520 --> 00:44:55,680
अगर यहां से वहां जाने के लिए अच्छे काम आत्मा का वास्तविक धर्म

618
00:44:55,680 --> 00:44:59,680
है तो वहां से यहां आने के लिए बुरे काम आत्मा का वास्तविक धर्म मानना

619
00:44:59,680 --> 00:45:03,680
पड़ेगा। इसका अर्थ क्या हुआ कि अधर्म

620
00:45:03,680 --> 00:45:07,680
करना, पाप करना, व्यभचार करना, ब्रह्मा कुमारी के अनुसार झूठ

621
00:45:07,680 --> 00:45:12,320
बोलना यह सब उसका मौलिक धर्म होगा।

622
00:45:12,320 --> 00:45:16,640
यह सब भी उसी प्रकार से जैसे जितना सच बोलना, जितना

623
00:45:16,640 --> 00:45:20,720
शांति प्राप्त करना, शांति की ओर जाना, जितना यह सब उसका

624
00:45:20,720 --> 00:45:24,800
धर्म है आत्मा का उतना ही दूसरी चीजें भी धर्म है। तो क्या ब्रह्मा

625
00:45:24,800 --> 00:45:28,880
कुमारी के अनुसार कभी धर्म स्थापना हो पाएगी? धर्म संस्थापना हो

626
00:45:28,880 --> 00:45:33,280
पाएगी ब्रह्मा कुमारी के अनुसार क्योंकि

627
00:45:33,280 --> 00:45:37,360
बुराई से अच्छाई की ओर जाना भी धर्म है और अच्छाई से बुराई की ओर

628
00:45:37,360 --> 00:45:41,600
आना भी धर्म है। ये इसलिए क्वेश्चन था।

629
00:45:41,600 --> 00:45:45,760
ठीक है? और अगर हम यह कहते हैं कि नहीं नहीं आत्मा जो है पाप

630
00:45:45,760 --> 00:45:50,000
कर्मों के बिना रह सकती है आत्मा। अब यह तीसरा पॉइंट आ गया

631
00:45:50,000 --> 00:45:54,480
बचने के लिए कि आत्मा पाप कर्मों के बिना उसका मौलिक स्वरूप है।

632
00:45:54,480 --> 00:45:58,640
तो पाप कर्मों के बिना जब मौलिक स्वरूप है तो मौलिक स्वरूप जब वो पहुंच रही है तो वहां से इधर

633
00:45:58,640 --> 00:46:02,640
आ रही कैसे है? पाप कर्मों से कौन डाल रहा है? अच्छा माया ये मानते नहीं

634
00:46:02,640 --> 00:46:06,720
है। प्रपंच रूपी संसार ये मानते नहीं है। नहीं तो सब कुछ उसमें आ जाए। समस्त

635
00:46:06,720 --> 00:46:11,040
कर्मों को करते हुए भी तू मुझे अकर्ता मान। यह सनातन फिलॉसफी

636
00:46:11,040 --> 00:46:15,120
है भाई अकाट्य सिद्धांत कहीं से भी आ जाओ गिरा दिए

637
00:46:15,120 --> 00:46:19,280
जाओगे इसको कहते हैं सिद्धांत खैर तो वो तो ये मानते नहीं

638
00:46:19,280 --> 00:46:23,440
है तो अब ये मानना पड़ेगा कि वो जो बुराई इसमें नहीं थी वो आई

639
00:46:23,440 --> 00:46:27,680
कहां से किसने डाली परमात्मा बुराई डाल डालेगा नहीं इनके यहां

640
00:46:27,680 --> 00:46:31,680
क्योंकि वो वो नहीं है सर्वशक्तिमान परमात्मा तो ये वाली चीजें करता

641
00:46:31,680 --> 00:46:35,760
ही नहीं है तो परमात्मा बुराई डालेगा नहीं तो क्या

642
00:46:35,760 --> 00:46:39,760
होगा जब परमात्मा बुराई डालेगा नहीं तो बुराई से कने अच्छा पहले इन्होंने

643
00:46:39,760 --> 00:46:43,760
काफी देर तक बचने के लिए जो सूक्ष्म शरीर में डाल दिया

644
00:46:43,760 --> 00:46:48,080
बुराई मतलब विचारों को जबकि विचार जो है यहां पर भी ये फंसे विचार

645
00:46:48,080 --> 00:46:48,580
जो

646
00:46:48,320 --> 00:46:52,880
है धारण कर सकता है कोई चेतन तत्व चेतन तत्व केवल दो हैं

647
00:46:52,880 --> 00:46:57,040
परमात्मा और जीव तो परमात्मा तो बुराई धारण नहीं कर सकता इनके

648
00:46:57,040 --> 00:47:01,120
अनुसार क्योंकि माया इत्यादि ये मानेंगे नहीं प्रपंच मानेंगे नहीं

649
00:47:01,120 --> 00:47:05,120
तो वो धारण नहीं कर सकता तो क्या होगा फिर तो जीव या तो

650
00:47:05,120 --> 00:47:09,200
जीव में मानना पड़ेगा कि हां उसके अंदर बुराई पाप कर्म वगैरह भी सदा

651
00:47:09,200 --> 00:47:13,520
से थे हैं और रहेंगे। इसका मतलब जब कोई हत्या भी कर रहा है तो वह अपना मौलिक

652
00:47:13,520 --> 00:47:17,600
धर्म निभा रहा है। जब कोई रक्षा कर रहा है तो वह भी धर्म कार्य कर रहा है

653
00:47:17,600 --> 00:47:22,080
और जब कोई भक्षण कर रहा है वो भी धर्म कार्य कर रहा है। यह है

654
00:47:22,080 --> 00:47:26,400
इस पॉइंट में मैं लाना चाह रहा हूं। इस सच्चाई को आप समझिए।

655
00:47:26,400 --> 00:47:30,400
ब्रह्मा कुमारी के सिद्धांतों के अनुसार या जैसे जो दूसरे सेक्ट हैं

656
00:47:30,400 --> 00:47:34,480
इनके अनुसार जितना धर्म आचरण जिसे हम कहते

657
00:47:34,480 --> 00:47:38,480
हैं सदा सदाचरण जिसे हम कहते हैं वो धर्म है उतना ही जो

658
00:47:38,480 --> 00:47:42,640
दुराचरण है वो भी धर्म सिद्ध हो जाएगा क्योंकि

659
00:47:42,640 --> 00:47:46,800
हमें यह मानना पड़ेगा कि बुराई उसमें इनबिल्ट है

660
00:47:46,800 --> 00:47:50,960
आत्मा में इनबिल्ट है बुराई और बुराई सच

661
00:47:50,960 --> 00:47:55,120
है माया तो है नहीं प्रपंच तो है नहीं

662
00:47:55,120 --> 00:47:59,200
सच है तो बुराई अगर सच है तो वह आत्मा में इनबिल्ट है तो

663
00:47:59,200 --> 00:48:03,360
इनबिल्ट है तो जब कोई हत्या करता है बलात्कार करता है चोरी

664
00:48:03,360 --> 00:48:07,360
करता है पाप करता है तो ब्रह्मा कुमारी जैसे तंत्रों के अनुसार वो

665
00:48:07,360 --> 00:48:11,840
भी धर्म है क्योंकि जिस जिस प्रकार से अशांति

666
00:48:11,840 --> 00:48:15,840
से शांति और शांति की यात्रा इनके यहां निश्चित है उसी तरीके

667
00:48:15,840 --> 00:48:19,920
से शांति से अशांति की यात्रा भी इनके यहां निश्चित है। तो

668
00:48:19,920 --> 00:48:24,080
जिस तरीके से सच्चाई का आलंबन लेकर के शांति

669
00:48:24,080 --> 00:48:28,160
की यात्रा करते हैं तो उसी तरीके से झूठ

670
00:48:28,160 --> 00:48:32,560
का आलंबन लेकर के अशांति तक की यात्रा भी इनके यहां सुनिश्चित

671
00:48:32,560 --> 00:48:36,640
है। ठीक है? तो अब क्या हुआ

672
00:48:36,640 --> 00:48:40,640
कि धारक तत्व इन्होंने सूक्ष्म शरीर मान लिया। तो सूक्ष्म शरीर से कनेक्ट कौन कर रहा

673
00:48:40,640 --> 00:48:44,800
है? मानना पड़ेगा। या तो वह खुद कर रही है। अगर खुद हो रही है तो फिर

674
00:48:44,800 --> 00:48:49,040
यह बुराई आ गई। सूक्ष्म शरीर से कनेक्ट होने का विचार ही बुराई

675
00:48:49,040 --> 00:48:53,040
है। भाई जब मालूम है कि यह पाप है तो इससे कनेक्ट क्यों हो रहे हो?

676
00:48:53,040 --> 00:48:57,200
तो यह विचार भी बुराई है। लो तो ये बुराई कहां

677
00:48:57,200 --> 00:49:01,920
रहती थी? आत्मा में ही रहती थी। इसका मतलब पाप कर्म भी आत्मा का

678
00:49:01,920 --> 00:49:05,680
शाश्वत धर्म है।

679
00:49:05,680 --> 00:49:10,640
ठीक है? इस तरीके से इनकी सारी बातें खंडित होती हैं।

680
00:49:10,640 --> 00:49:13,360
आशा करते हैं आपको चीजें समझ में आ रही हो।

681
00:49:13,360 --> 00:49:17,440
अच्छा।

682
00:49:17,440 --> 00:49:21,600
यही बात हमने बहुत अच्छे से समझने का प्रयास किया है

683
00:49:21,600 --> 00:49:25,760
जो ब्रह्मा कुमारी का लाइव जो वो है नीलमा जी उनके साथ

684
00:49:25,760 --> 00:49:30,080
का काफी हॉट टॉक सा हो गया था उस सब और यह हो कि दोनों में धैर्य

685
00:49:30,080 --> 00:49:34,080
था तो एक झगड़ा जैसा नहीं हुआ मगर आप देखेंगे तो उसमें बहुत

686
00:49:34,080 --> 00:49:38,160
मधुर संबंध होने के बाद भी जिस

687
00:49:38,160 --> 00:49:42,160
समय वैचारिक चीजें चल रही थी उस समय हॉट टॉक का दृश्य बन गया था आप लोग वो

688
00:49:42,160 --> 00:49:46,160
जरूर देखना कल आह्वान पर मेन चैनल पर हमारे कल सुबह 10:00

689
00:49:46,160 --> 00:49:51,200
बजे वो डाल दिया जाएगा तो उसे आप अवश्य देख लीजिएगा।

690
00:49:51,200 --> 00:49:54,080
और दूसरी बात वो

691
00:49:54,080 --> 00:49:58,480
एक राघव दास नाम का व्यक्ति रामपाल की ओर से उससे मेरी बात हुई। हालांकि

692
00:49:58,480 --> 00:50:02,560
जब मैंने उसे दिन भर में चार बार फोन मिलाया था और लाइव मिलाया था तो उसने

693
00:50:02,560 --> 00:50:06,800
फोन नहीं उठाया था। दिन में उसने पूरे पूरे पूरे दिन उसको फोन

694
00:50:06,800 --> 00:50:10,880
उठाने का नहीं आया। अब वो अपना कहीं पर मुझे

695
00:50:10,880 --> 00:50:15,040
फोन लगा रहा है। मैंने उसे ब्लॉक पर डाला है। क्यों डाला है? इनके पास

696
00:50:15,040 --> 00:50:19,120
इस तरह के लोगों के पास रामपाल और उसकी कंपनी है जो इनके

697
00:50:19,120 --> 00:50:23,440
पास चर्चा से भागने के कई तरीके हैं।

698
00:50:23,440 --> 00:50:27,760
उसमें पहला तरीका है सबसे पहली बात तो ताल तो खुप टोको

699
00:50:27,760 --> 00:50:31,760
कि मैं चैलेंज करता हूं मैं चैलेंज करता हूं। पर उसको उस

700
00:50:31,760 --> 00:50:36,560
चैलेंज के क्रियान्वयन हेतु कोई भी इंतजाम ही मत करो। जैसे रामपाल

701
00:50:36,560 --> 00:50:40,640
रामपाल ताल ताल तो खूब ठोकता है मगर क्या उसने ऐसा कहा कि

702
00:50:40,640 --> 00:50:44,720
भैया चर्चा सुनिश्चित करने के लिए यह मेरा नंबर है इससे मेरी बात

703
00:50:44,720 --> 00:50:48,800
होगी नहीं ऐसा कोई उसने नंबर नहीं किया जहां

704
00:50:48,800 --> 00:50:53,120
पर चर्चा सुनिश्चित करने के लिए कोई उसने नंबर सार्वजनिक किया हो दूसरी

705
00:50:53,120 --> 00:50:57,360
बात इसी प्रकार से उसके जो चेले चापड़ है वो ताल ठोका करते हैं धनाना चला जा धनाना

706
00:50:57,360 --> 00:51:01,600
चला जा धनाना जाने के लिए भी कोई समय सारणी इत्यादि उन्होंने ऐसी

707
00:51:01,600 --> 00:51:05,840
कोई जारी नहीं की है कि आप अगर इस समय आएंगे यहां प्रश्नोत्तरी

708
00:51:05,840 --> 00:51:09,200
होगी। जैसे हमारे गुरु गुरुजन

709
00:51:09,200 --> 00:51:13,280
होते हैं तो आप देखो वह कहीं पर ट्रैवल करते हैं। कहीं उनका शिविर लगता है तो उसमें

710
00:51:13,280 --> 00:51:17,360
लिखा होता है कि इतने से इतने बजे तक प्रश्नोत्तरी होगी। दर्शन दीक्षा होगी। यह सब

711
00:51:17,360 --> 00:51:21,760
ऐसा कोई टाइम टेबल कोई शेड्यूल रामपाल के सेक्ट के द्वारा कोई

712
00:51:21,760 --> 00:51:25,760
सार्वजनिक नहीं किया जाता। दूसरी बात जब रामपाल स्वयं

713
00:51:25,760 --> 00:51:29,920
एक विवादास्पद व्यक्ति है। आपराधिक मामलों से जुड़ा हुआ व्यक्ति है तो

714
00:51:29,920 --> 00:51:34,000
क्यों अपने बिल में छुप करके बैठा रहता है? भाई आगरा पहुंच, हैदराबाद

715
00:51:34,000 --> 00:51:38,400
पहुंच, ग्वालियर पहुंच, झांसी पहुंच, एमपी में जबलपुर

716
00:51:38,400 --> 00:51:43,120
पहुंच, इंदौर पहुंच, जहां-जहां तूने अपने सेंटर्स बनाए सब जगह जा। और

717
00:51:43,120 --> 00:51:47,200
तुझे अगर शंकराचार्य जी का ज्ञान बुरा लग रहा था तो सबसे पहले तू ही उनके यहां चला जा। वो थोड़ी

718
00:51:47,200 --> 00:51:51,200
ना जेल काट के आया। तू आया है काट के। तो तू ऐसा कैसे सोच रहा है कि कोई तेरे दरवाजे

719
00:51:51,200 --> 00:51:55,360
पे आ जाए। वो मूर्ख होगा जो तेरे दरवाजे पे जाएगा। हालांकि बीच में मैंने

720
00:51:55,360 --> 00:51:59,520
देखा कई आर्य समाजियों ने बोला भैया तेरे ही यहां पे चर्चा कर ले। चल।

721
00:51:59,520 --> 00:52:03,600
तो इनकी ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया इन बातों के लिए रामपाल

722
00:52:03,600 --> 00:52:08,400
के यहां पर चर्चा करने के लिए। यह हो गया।

723
00:52:08,400 --> 00:52:10,560
अच्छा

724
00:52:10,560 --> 00:52:14,720
अब इनके पास एक तो यह आ गया कि यह सोचते हैं कि यह इनका जो बदनाम

725
00:52:14,720 --> 00:52:18,960
अड्डा है जहां पर खीर की चीजें हैं या वो सामग्री या कैमरों

726
00:52:18,960 --> 00:52:23,120
की चीजें हैं, गोलियों की गोलियां चलाई गई है, हत्या के मुकदमे हैं, देशद्रोह के मुकदमे

727
00:52:23,120 --> 00:52:24,320
हैं वहां पे कोई

728
00:52:24,320 --> 00:52:28,640
व्यक्ति जो है चला जाए और तो और इनकी आपराधिक स्पष्ट रूप से गतिविधियां

729
00:52:28,640 --> 00:52:32,640
जो सिद्ध हैं। जैसे कि किताबों पर झूठ झूठा पता डालना यह सब

730
00:52:32,640 --> 00:52:36,720
सिद्ध प्रत्यक्ष प्रमाण है। इसके बाद भी कोई व्यक्ति इनके

731
00:52:36,720 --> 00:52:40,720
यहां पर जाएगा रामपाल से प्रश्न पूछने के लिए। ठीक है? पहली

732
00:52:40,720 --> 00:52:44,880
बात। यह ऐसा एक्सपेक्ट करते हैं और नहीं आ रहा है तो वह जो है चर्चा करने

733
00:52:44,880 --> 00:52:48,880
का उसमें सामर्थ्य नहीं है। फिर दूसरा इनका बहाना क्या है कि चर्चा के

734
00:52:48,880 --> 00:52:53,120
लिए कोई स्पष्टीकरण, कोई स्पष्ट जो विवरण

735
00:52:53,120 --> 00:52:57,360
है वह उपलब्धि ना कराना। केवल ताल टोकते रहो। विवरण उपलब्ध मत कराओ।

736
00:52:57,360 --> 00:53:01,520
ऐसा ही कुछ इन्होंने किया था। फैक्ट भाई अभिषेक और राघव दास इत्यादि ने। ताल

737
00:53:01,520 --> 00:53:05,520
तो कुपटों की उसमें यह नहीं कहा। यह मेरा नंबर है जिसको भी वैचारिक मतभेद के निमित्त

738
00:53:05,520 --> 00:53:10,880
चर्चा करनी हो चर्चा कर लेना। फिर तीसरा इनका है कि

739
00:53:10,880 --> 00:53:15,040
दो हो गए विवरण ना उपलब्ध कराना और अपने बिल में घुसे रहना। फिर

740
00:53:15,040 --> 00:53:19,040
तीसरा है कि अगर चर्चा होने

741
00:53:19,040 --> 00:53:23,040
के लिए चर्चा करने के लिए बात हो रही हो तो उसमें ऐसे शब्दों का

742
00:53:23,040 --> 00:53:27,360
उपयोग अपनी ओर से करने लगो कि मामला चर्चा से हटकर के वाद विवाद

743
00:53:27,360 --> 00:53:31,360
तू तड़ाक और गंभीर धारण कर ले। वो जो तर्क वितर्क युक्ति प्रमाण

744
00:53:31,360 --> 00:53:35,440
इत्यादि है वो सब गायब हो जाए। जैसे राघव दास को मुझसे

745
00:53:35,440 --> 00:53:39,840
चर्चा करनी है। चर्चा सुनिश्चित करनी है भाई। तो राघव दास का फोन आया

746
00:53:39,840 --> 00:53:44,000
तो मैंने उससे क्या कहा? और मैंने पहले ही कह रखा था तूने तो फोन भी मूर्ख

747
00:53:44,000 --> 00:53:48,240
पने में किया है। बेवकूफ व्यक्ति मैंने तो अपनी जिस लाइव में तेरे को तेरी औकात

748
00:53:48,240 --> 00:53:52,320
याद दिलाई थी। तुझे सब सिद्ध किया था ना कि तू कैसे रामपाल की पत्नी है।

749
00:53:52,320 --> 00:53:56,320
रामपाल कैसे कबीर की पत्नी है। फिर कैसे तुम्हारे वो जो स्त्री अंग होता

750
00:53:56,320 --> 00:54:00,320
है चिपकाया जाता है फेविकॉल से नाखूनों के द्वारा। ये सब सिद्ध किया था

751
00:54:00,320 --> 00:54:04,560
तेरी किताबों से। इसीलिए तेरी जो है बुद्धि भ्रष्ट हो गई होगी।

752
00:54:04,560 --> 00:54:08,800
पादुर्भाव पादुर्भाव यह सब सिद्ध किया था अपनी लाइफ में। तो इसका दिमाग

753
00:54:08,800 --> 00:54:13,760
खराब हुआ। यह मेरी तात्यात्मक चीजें थी कि चर्चा जो होगी वो

754
00:54:13,760 --> 00:54:18,160
बीच के चैनल पर होगी। बीच के स्थान पर होगी। तुम्हारे चैनल पर नहीं होगी। तुम लोग कुख्यात

755
00:54:18,160 --> 00:54:22,160
लोग हो। एक होता है विख्यात। एक होता है साधारण। एक होता

756
00:54:22,160 --> 00:54:26,160
है कुख्यात। तो तुम साधारण भी नहीं हो। तुम लोग

757
00:54:26,160 --> 00:54:30,320
कुख्यात हो। निचली स्तर के व्यक्ति हो। तब भी तुम्हें मौका दे रहे हैं कि तुम्हारे

758
00:54:30,320 --> 00:54:34,560
साथ बीच के स्थान पर चर्चा कर सकें समाज सुधार के लिए, लोगों की जागरूकता

759
00:54:34,560 --> 00:54:38,960
के लिए। तो खैर मैंने यह सब बातें उसमें अपने उसमें कही थी। अब इसका फोन आता है

760
00:54:38,960 --> 00:54:42,960
तो जब मैं कहता हूं कि भाई फैक्ट भाई अभिषेक के चैनल पर चर्चा

761
00:54:42,960 --> 00:54:47,040
क्यों होगी? तो ये व्यक्ति क्या कहता है कि क्यों हवा निकल गई। अब यह

762
00:54:47,040 --> 00:54:51,280
देखो हवा निकल गई। बात ठीक शब्दों से हो रही है। हवा निकल

763
00:54:51,280 --> 00:54:55,120
गई वाला शब्द क्यों आया? पहले भाई तुमने अपने चैनल पर खूब गरमा

764
00:54:55,120 --> 00:54:59,120
गर्मी दिखाई। मैंने भी दिखाई। अब बात करनी है, अगर चर्चा करनी है तो हमें

765
00:54:59,120 --> 00:55:03,280
ऐसे शब्दों का उपयोग करना पड़ेगा एक दूसरे की मर्यादा की सीमा में रहते

766
00:55:03,280 --> 00:55:07,280
हुए कि वह चर्चा हो सके। अब अगर तुम वहां पर गाली देने लगो चलो

767
00:55:07,280 --> 00:55:11,760
अभी तो तुमने कहा कि हवा निकल गई। तुम गाली देने लगो आगे उसने भौकनावकना

768
00:55:11,760 --> 00:55:15,760
भी ये सब भी कहा। तुम गाली देने लगो उसके बाद भी मैं कहूं हां हां मैं तुम्हारे

769
00:55:15,760 --> 00:55:19,760
चैनल पे आऊंगा चर्चा। ये कहां का सिद्धांत है भाई? ये कोई तार्किक

770
00:55:19,760 --> 00:55:23,760
बात है क्या? यह मूर्खों की बातें हैं। मूर्ख जिन्होंने

771
00:55:23,760 --> 00:55:27,920
जहां मल के द्वार से बह के दूध आता है ना और फिर उस दूध की खीर

772
00:55:27,920 --> 00:55:32,080
बनती है समाचार पत्रों के अनुसार वो खीर

773
00:55:32,080 --> 00:55:36,240
ग्रहण की हुई हो ऐसा बर्ताव इस तरह के दिमाग वाले करते

774
00:55:36,240 --> 00:55:40,480
हैं जो तुम इस समय कर रहे हो। है ना? तो इससे क्या सिद्ध होता है? वो खीर

775
00:55:40,480 --> 00:55:44,560
की बातें सही सिद्ध होती है कि नहीं? ये निर्णय स्वयं करो और अपने लोगों को कहो तुम

776
00:55:44,560 --> 00:55:48,720
भी करो भाई। तो पहली बात जब चर्चा सुनिश्चित

777
00:55:48,720 --> 00:55:49,440
करने के लिए बात

778
00:55:49,440 --> 00:55:53,520
हो रही है तो उसमें यह अपशब्द हवा निकल गई इत्यादि कौन ला रहा है?

779
00:55:53,520 --> 00:55:57,520
तू ला रहा है। अब क्या हुआ? मैंने बताया ना

780
00:55:57,520 --> 00:56:02,160
इनके इनके तरीके हैं चर्चा से बचने के। तो तीसरा तरीका है कि भैया

781
00:56:02,160 --> 00:56:06,240
चर्चा से बचने के लिए चर्चा की बात तो करो। मगर ऐसे शब्दों

782
00:56:06,240 --> 00:56:10,560
में बात करो। गालियां बकने लग जाओ। जैसे सुबह मैंने एक वीडियो डाला। उसमें एक व्यक्ति बौखलाया

783
00:56:10,560 --> 00:56:14,800
हुआ है एटा का। वह फोन करता है शिवम दास नाम है उसका पहले आ चुका है चैनल

784
00:56:14,800 --> 00:56:18,800
पर कुछ कर नहीं पाया था बेचारा तड़प तड़पता रह गया था भटकती

785
00:56:18,800 --> 00:56:22,400
हाथ में उसका फोन आया तो उसने चर्चा के लिए फोन तो किया फिर वो गाली नहीं दे

786
00:56:22,400 --> 00:56:26,880
रहा है अबे मूर्ख व्यक्ति गाली के पीछे गोलियां चलती है

787
00:56:26,880 --> 00:56:31,040
चर्चा नहीं होती गाली के बाद और तू गाली दे रहा है तो गाली दे रहा है फिर चर्चा कहां

788
00:56:31,040 --> 00:56:35,280
से होगी तो ये हवा निकल जाना भोकना ये सब क्या है अपशब्द है अब

789
00:56:35,280 --> 00:56:39,600
तू अपशब्द कहेगा तेरे ही द्वारे पे आकर के हम तुझसे चर्चा करें खैर ये सब

790
00:56:39,600 --> 00:56:43,840
जो फूहड़ बातें हैं। यह सब तुम्हारे जो टट्टू

791
00:56:43,840 --> 00:56:48,080
भगत है ना जो खीर इत्यादि के स्वाद में डूबे रहते हैं वह सब

792
00:56:48,080 --> 00:56:52,160
लोग पचा सकते हैं। जो बुद्धिजीवी है वो सब इस तरह के पुतर्कों को नहीं

793
00:56:52,160 --> 00:56:56,640
पचा पाते। अब दूसरी बात क्या है कि

794
00:56:56,640 --> 00:57:00,640
फिर कहता है कि भाई कि जब हमारे लोग तेरे चैनल पर आते तब तू

795
00:57:00,640 --> 00:57:04,800
बीच की बात क्यों नहीं करता? इसका मतलब यह है कि रामपाल के यहां से

796
00:57:04,800 --> 00:57:08,880
भले ही 500 लोग आए। उनके कहने पर मैं किसी भी नए चैनल पर जाने

797
00:57:08,880 --> 00:57:12,880
लगूं। हैं। यही करूं ना? अरे यह तो मेरा बड़प्पन

798
00:57:12,880 --> 00:57:17,520
है भाई कि मैंने तुम्हारे यहां के हर छोटे से छोटे और बड़े से बड़े व्यक्ति को

799
00:57:17,520 --> 00:57:21,760
यहां पर आकर अपनी बात रखने का अवसर प्रदान किया। तूने कितनों

800
00:57:21,760 --> 00:57:25,760
को कर दिया? फैक्ट बाय अभिषेक ने कितनी लाइव चर्चाएं कर ली है। किसके

801
00:57:25,760 --> 00:57:29,920
साथ कर ली? बता मैं करवाऊं भाई तुझे 50 कॉल नए-नए लोगों से।

802
00:57:29,920 --> 00:57:34,000
सबको सबके साथ अपने तेरे ही चैनल पे तू नहीं करेगा। तेरे ही

803
00:57:34,000 --> 00:57:37,440
चैनल पे तू नहीं करेगा। ये औकात है तुम लोगों

804
00:57:37,440 --> 00:57:42,080
की। मैंने तो 13 लोगों को मौका दिया कि रख लो भाई।

805
00:57:42,080 --> 00:57:46,160
अब बात यह है कि भाई मैं यह मेरा निर्णय होगा ना कि

806
00:57:46,160 --> 00:57:50,320
मैं किसी के चैनल पर जाऊं कि ना जाऊं। भाई तुम लोगों की औकात ऐसी है

807
00:57:50,320 --> 00:57:54,320
ही नहीं। चाहे तुम्हारा जो चरित्र प्रमाण पत्र है वह गिरा हुआ है

808
00:57:54,320 --> 00:57:58,560
निकृष्ट कोटि का नीच लोगों के टाइप का है नीच हरकतें करने वाले

809
00:57:58,560 --> 00:58:02,560
झूठा झूठा पता डालने वाले अपने वीडियोस में

810
00:58:02,560 --> 00:58:06,720
झूठ बोलने वाले बात बातबात में झूठ ऐसे नीच

811
00:58:06,720 --> 00:58:10,800
लोगों का जो प्रमाण पत्र तुम्हारा है चरित्र प्रमाण पत्र उसके चैनल

812
00:58:10,800 --> 00:58:14,800
पर मैं क्यों जाऊं भाई और अगर मैं भी वैसा ही था तो तू अपने

813
00:58:14,800 --> 00:58:19,280
लोगों को मना कर कि मत जाओ उसके चैनल पे ये मैंने कमाया ये मेरी अचीवमेंट

814
00:58:19,280 --> 00:58:24,320
है कि तेरे लोग मेरे पास मेरे मेरे चैनल पर आते थे और आते हैं और आएंगे

815
00:58:24,320 --> 00:58:27,200
तू नहीं रोक पाएगा उन्हें

816
00:58:27,200 --> 00:58:30,160
समझ रहा है

817
00:58:30,160 --> 00:58:34,240
तो तेरा ऐसा चारित्रिक चरित्र का सर्ट तेरा चरित्र ही ऐसा

818
00:58:34,240 --> 00:58:38,240
खराब है तुम लोगों का कि भाई मैं नहीं ये निर्णय कर रहा हूं कि मैं तुम्हारे चैनल

819
00:58:38,240 --> 00:58:42,320
पे जाऊं अगर चर्चा करनी है तो बीच के स्थान पे अच्छा

820
00:58:42,320 --> 00:58:42,880
मैंने ये भी

821
00:58:42,880 --> 00:58:47,040
नहीं कहा कि तू मेरे स्थान पे आ ये भी बात देखो मैंने तो ये नहीं कहा क्योंकि

822
00:58:47,040 --> 00:58:51,280
जब मैं किसी से ये कह रहा हूं कि मुझे तुम पर भरोसा नहीं है तो तो मैं उससे

823
00:58:51,280 --> 00:58:55,280
उससे उससे एक्सपेक्ट कभी नहीं करूंगा कि वो मुझ पर भरोसा कर

824
00:58:55,280 --> 00:58:59,840
ले। मगर ये बेवकूफ देखो ये बेवकूफ क्या है? महाभारत में क्या लिखा है

825
00:58:59,840 --> 00:59:04,160
कि अन्यों के साथ वही व्यवहार करें जो स्वयं के लिए स्वीकार हो।

826
00:59:04,160 --> 00:59:08,160
तो जब तू यह दिखा रहा है कि तुझे मुझ पर भरोसा नहीं है। तेरे कितने

827
00:59:08,160 --> 00:59:12,320
ही भगत आ गए हो। मगर तुझे तो भरोसा नहीं है ना। तो भरोसा नहीं है तो तू यह क्यों सोच

828
00:59:12,320 --> 00:59:16,480
रहा है कि मैं तुझ पर भरोसा कर लूं। ये कहां का न्याय है? यह

829
00:59:16,480 --> 00:59:20,880
न्याय नहीं है। यह फड़ बाबा के फड़ चेलों की खीर वाली

830
00:59:20,880 --> 00:59:25,440
टोली है। जेल कट्टू बाबा की

831
00:59:25,440 --> 00:59:29,600
तो यह हो गया। तो कहने का तात्पर्य यह है

832
00:59:29,600 --> 00:59:33,680
कि भाई मैंने किसी को पकड़ पकड़ के बुलाने नहीं गया था कि

833
00:59:33,680 --> 00:59:37,760
आ जाओ आ जाओ मेरे यहां चर्चा कर लो। मैंने मौका दिया था किसी को। अगर किसी को

834
00:59:37,760 --> 00:59:41,840
आपत्ति है और वो यहां आने में अगर उसको सहज लगता है तो

835
00:59:41,840 --> 00:59:46,000
वो आकर के कर सकता है चर्चा। ठीक है? मुझे सहज नहीं लगता तेरे

836
00:59:46,000 --> 00:59:50,000
चैनल पर तुम लोग अपराधी टाइप के लोग हो जिसकी तुम पूजा कर

837
00:59:50,000 --> 00:59:54,320
रहे हो अपराधी है मुकदमे चल रहे हैं उसके ऊपर हथियार पकड़े गए थे

838
00:59:54,320 --> 00:59:58,000
देशद्रोह का मुकदमा चल रहा है ऐसे घृणित

839
00:59:58,000 --> 01:00:02,400
ऐसे घृणित लोगों के ऊपर मैं विश्वास कैसे कर लूं कि मैं उनके चैनल पर जाऊंगा

840
01:00:02,400 --> 01:00:06,800
तब वो मुझे बोलने का बराबरी का मौका देंगे

841
01:00:06,800 --> 01:00:10,800
अगर तेरे लोगों को नहीं है भरोसा तो ना भरे ना फॉर्म मैं फॉर्म भरवाता हूं

842
01:00:10,800 --> 01:00:14,880
उसको इस बात की तकलीफ है तो भाई अपने लोगों को कहना कि मत भरो फॉर्म

843
01:00:14,880 --> 01:00:18,880
मत जाओ। यह तुम्हारी ड्यूटी है। फिर उनको मना करो। मेरी

844
01:00:18,880 --> 01:00:23,200
नजरों में तू ऐसा व्यक्ति नहीं है जिसके यहां पर जाया जा सके।

845
01:00:23,200 --> 01:00:27,280
अगर तेरे ये मैंने कमाया है कि तेरे लोग मेरे आ सकते हैं। तू

846
01:00:27,280 --> 01:00:31,360
कमा ले कि शिवश नरेंद्र द्विवेदी तेरे यहां आ जाए। और जिस समय ऐसे

847
01:00:31,360 --> 01:00:35,840
न्यूज़ पर पिछले दो साल पहले डेढ़ दो साल पहले इन लोगों ने मेरे ऊपर वीडियो बनाया था।

848
01:00:35,840 --> 01:00:39,920
उस समय की बात ये थी कि इनके चैनल पर मैं जा नहीं सकता था। मगर उसके

849
01:00:39,920 --> 01:00:40,420
बाद तो

850
01:00:40,240 --> 01:00:44,400
इतनी सारी चीजें हो रही। इतने फ्रॉड टाइप के चीजें तुम्हारी खुलती परते जा रही हैं।

851
01:00:44,400 --> 01:00:48,480
ना तुम्हारा मुनि धर्म धर्म ट्रस्ट सच्चा है। तुम कहते हो कि

852
01:00:48,480 --> 01:00:52,480
बाबा मेरे उड़ के करंट के तारों से बचा लेते। युवराज सिंह पीटा जाता है।

853
01:00:52,480 --> 01:00:56,560
घर में ही पीटा जाता है। फिर तुम अफवाएं फैलाते हो कि उनके खिलाफ एफआईआर हो

854
01:00:56,560 --> 01:01:00,720
गई। वो लोग नंगे थाने में बंद है कच्छा पहन करके। पता चलता है कि वो तो छूट

855
01:01:00,720 --> 01:01:04,800
गए। अरे कितने झूठ बोलते हो तुम पसेरी भर के। और फिर तुम यह सोचते हो

856
01:01:04,800 --> 01:01:08,880
कि तुम्हारी ये थोबड़े थूथुन से जिससे झूठ टपक रहा

857
01:01:08,880 --> 01:01:13,040
है उस पर कोई व्यक्ति विश्वास कर ले।

858
01:01:13,040 --> 01:01:17,200
तो अपने आप को पहले ऐसा बना तो सही अपनी औकात अपनी योग्यता ऐसी

859
01:01:17,200 --> 01:01:21,280
प्रस्तुत कर जिससे कि शिवश नारायण द्विवेदी तेरे चैनल पर आ सके

860
01:01:21,280 --> 01:01:25,440
और वरना 100 की सीधी एक बात है जिसके हो

861
01:01:25,440 --> 01:01:29,520
जिसके है दम तो बीच में आके बात कर ले ना तेरा ना मेरा मैं

862
01:01:29,520 --> 01:01:33,600
तो नहीं कह रहा तू मेरे ऊपर भरोसा कर तू क्यों कह रहा है मैं तेरे

863
01:01:33,600 --> 01:01:37,680
ऊपर भरोसा कर लूं भाई तेरे लोगों ने मेरे ऊपर भरोसा किया है मेरी गलती

864
01:01:37,680 --> 01:01:41,680
थोड़ी ना है और भी कर रहे हैं करेंगे आगे हो सकता है मेरी साइड का कोई

865
01:01:41,680 --> 01:01:45,680
तेरे ऊपर मुझे नहीं है तेरे ऊपर भरोसा मैं निर्णय करूंगा कि मैं किसके यहां जा

866
01:01:45,680 --> 01:01:49,920
सकता हूं किसके यहां नहीं जा सकता हूं नहीं तो बीच के चैनल पे तेरी मां ने तुझे निष्ठा

867
01:01:49,920 --> 01:01:54,080
पूर्वक दूध पिलाया तो आजा हां तेरे जेल कट्टू

868
01:01:54,080 --> 01:01:55,280
के द्वारा खीर के

869
01:01:55,280 --> 01:01:59,440
माध्यम से मल के द्वार से बहकर आए दूध के माध्यम से जो चीजें

870
01:01:59,440 --> 01:02:03,840
तुझे प्राप्त हुई है जो इसमें तू अश्लील बातें बोलता है

871
01:02:03,840 --> 01:02:07,840
अश्लील गालियां बकता है वो सब बातें मैं

872
01:02:07,840 --> 01:02:09,440
तुझे रिपीट नहीं करूंगा

873
01:02:09,440 --> 01:02:13,760
महाभारत का सिद्धांत है। यह सब जो बोलता है गाली गलौज इत्यादि

874
01:02:13,760 --> 01:02:17,840
वह व्यक्ति खुद ही वह जो गाली इत्यादि और मेरा जो मौन है इन

875
01:02:17,840 --> 01:02:21,920
सब चीजों पे वही तुझे सत्यानाश तुझे भस्म कर देगा। मुझे कोई दिक्कत

876
01:02:21,920 --> 01:02:26,240
नहीं। मुझे मेरी लड़ाई है वैचारिक क्रांति की। तू तुझ जैसे कीड़े मकोड़े

877
01:02:26,240 --> 01:02:30,400
तो कहां डले फिरेंगे? अभी देख एक जगह पुतला जला है। पूरे भारत में

878
01:02:30,400 --> 01:02:34,640
पुतले जलेंगे तेरे। उन सब का कारण होगा शिवश नारायण द्विवेदी। लिख ले

879
01:02:34,640 --> 01:02:38,640
लिख ले जहां पे लिखना है। पूरे भारत में आग लगेगी रामपाल के पुतलों

880
01:02:38,640 --> 01:02:43,600
में। और ऐसे ही गजब बेइज्जतियां होंगी। गजब बेेज्जती गजब बेेज्जती करते रहना।

881
01:02:43,600 --> 01:02:47,760
पोस्टर चिपकेंगे तेरे जैसे लोगों के घर के बाहर यह व्यक्ति दुर्गा

882
01:02:47,760 --> 01:02:52,000
माता के बलात्कार का समर्थक है। क्योंकि यह उसी रामपाल

883
01:02:52,000 --> 01:02:56,080
का समर्थक है जो रामपाल फूहड़ रामपाल पाखंडी रामपाल जेल

884
01:02:56,080 --> 01:03:00,160
कट्टू रामपाल दुर्गा माता के बलात्कार

885
01:03:00,160 --> 01:03:02,400
की

886
01:03:02,400 --> 01:03:07,600
का भ्रामक निराधार दुष्प्रचार करता है। समझ में आया खोपड़ी?

887
01:03:07,600 --> 01:03:11,680
ब्रह्मा विष्णु महेश के पिता कौन है? पिता कौन है? यह तुम नहीं बता पाए। अरे कोई है

888
01:03:11,680 --> 01:03:16,160
ही नहीं उनका पिता। कोई नहीं है। ब्रह्मा विष्णु महेश का पिता।

889
01:03:16,160 --> 01:03:20,240
परम सत्य जो है परम तत्व वही स्वयं ब्रह्मा विष्णु महेश के रूप में

890
01:03:20,240 --> 01:03:24,320
उत्पन्न होता है। और लीला भेद से कभी वो माता के द्वारा उत्पन्न

891
01:03:24,320 --> 01:03:24,820
हो रहे

892
01:03:24,480 --> 01:03:29,680
हैं। कभी ब्रह्मा जी के द्वारा सृष्टि बनती है। कल्प भेद से एक ही कल्प नहीं है।

893
01:03:29,680 --> 01:03:33,760
तुम्हारे यहां तो इतने क्वेश्चंस हो जाएंगे ना कल्प नहीं मानोगे तो। काल मर के

894
01:03:33,760 --> 01:03:38,000
फिर बन रहा है। ये क्या है? काल जब मरा तो आत्माएं

895
01:03:38,000 --> 01:03:42,160
मुक्त हो जानी चाहिए ना। काल नहीं तो आत्माओं

896
01:03:42,160 --> 01:03:46,240
को पकड़ के रखा है। काल तो मरता है। पता

897
01:03:46,240 --> 01:03:50,320
नहीं कितने 70 बार उनके मरने के बाद काल मरता है एक बार। और तुमने

898
01:03:50,320 --> 01:03:55,200
माना भी है कि काल खुद कह रहा है कि मेरा मरण है। गीता के अनुसार मानते हो।

899
01:03:55,200 --> 01:03:56,160
मूर्ख कहीं के

900
01:03:56,160 --> 01:04:00,400
जिस दिन बात होगी थूथनी उतनी सब निकल जाएगी। अपने लोगों को बेवकूफ बनाते

901
01:04:00,400 --> 01:04:04,480
रहो। बंद कमरे में फोटोग्राफी करके बीच

902
01:04:04,480 --> 01:04:08,640
बीच के स्थान में आने में पकी ढीली हो गई ना नपुंसकता का प्रमाण

903
01:04:08,640 --> 01:04:12,720
दे दिया वहां पर मैंने कैसे बात की भाई फैक्ट

904
01:04:12,720 --> 01:04:16,800
भाई अभिषेक पे क्यों आएंगे बीच के चैनल पे आओ क्यों हवा निकल गई

905
01:04:16,800 --> 01:04:20,960
ये हवा निकल गई वाली बात क्यों आई जब सभ्रांत तरीके से चर्चा हो

906
01:04:20,960 --> 01:04:25,200
चर्चा कब हो सकती है जब दोनों लोग सभ्य रहे सीधी बात अगर तुम सभ्य

907
01:04:25,200 --> 01:04:29,200
नहीं रहोगे तो चर्चा नहीं लड़ाई होगी तो लड़ाई करनी तो लड़ाई तो हो

908
01:04:29,200 --> 01:04:33,360
ही रही है पुतले जल ही रहे जहांजहां जलेंगे वहां पर कहीं पे आ जाना देख

909
01:04:33,360 --> 01:04:37,520
लेंगे किस में कितना है दम उठा के पटक नहीं दिया ना चार पांच बार

910
01:04:37,520 --> 01:04:41,600
तुझ जैसे को दो ले आना तू एक नहीं दो आना अपने जैसे बन

911
01:04:41,600 --> 01:04:45,680
रहा है ना तू बहुत चौधरी दो ले आना जहां पुतला जला रहा होगा वहां और

912
01:04:45,680 --> 01:04:50,320
तुझे पटक दूंगा उठा के चार बार पटकूंगा गिन करके गिन लियो

913
01:04:50,320 --> 01:04:54,400
और ये सब बातें मेरी जो है साफ सुथरी होती है। इसमें मुझे गाली गलौज

914
01:04:54,400 --> 01:04:58,400
मिलाने की जरूरत नहीं है। मैं तेरे जैसों की पट गीली करने के लिए इतना ही काफी

915
01:04:58,400 --> 01:05:02,560
होता है। उठा उठा के पटकूंगा हमारी दुर्गा

916
01:05:02,560 --> 01:05:06,720
मां को गाली दी है ना तुम लोगों ने आ जाना पुतला जलाऊंगा

917
01:05:06,720 --> 01:05:10,400
और कह के जलाऊंगा आ जाना रोकने

918
01:05:10,400 --> 01:05:14,720
समझा पुतला जलेगा पूरे भारत में पुतला जलेगा

919
01:05:14,720 --> 01:05:18,800
एक एक सुन लो और जो जो इसके समर्थक हैं जहां जहां पर भी

920
01:05:18,800 --> 01:05:23,280
हैं उन सबकी भी आली रे आली आली रे आली

921
01:05:23,280 --> 01:05:27,440
अ तुजी बारी आली समझा सब

922
01:05:27,440 --> 01:05:32,400
समझ लो रामपाल का नहीं

923
01:05:32,400 --> 01:05:36,480
रामपालियों को पकड़ो तुम्हारे घर के आसपास जहां भी रामपाली रह रहा है

924
01:05:36,480 --> 01:05:40,480
पोस्टर चिपकाओ वहां उसकी हकीकत सबको बताओ पुलिस प्रशासन

925
01:05:40,480 --> 01:05:44,640
जनरल स्टोर हर व्यक्ति जाने उसको वो कौन है

926
01:05:44,640 --> 01:05:48,720
अपने आप उनकी बुद्धि ठिकाने आती जाएगी जितने इसके सपोर्टर्स

927
01:05:48,720 --> 01:05:52,720
घूम रहे हैं वीडियो बना रहे हैं अभी

928
01:05:52,720 --> 01:05:57,120
जैसे उसका बहिष्कार हुआ है ना तुम्हारे युवराज का सतलोकी

929
01:05:57,120 --> 01:06:02,560
युवराज [हंसी] कूटा गया घर में

930
01:06:02,560 --> 01:06:06,880
समझे बाबा पहुंच नहीं पाए बचाने के लिए तो खैर

931
01:06:06,880 --> 01:06:12,880
पूरे भारत में विरोध होगा अभी देखते जाओ

932
01:06:12,960 --> 01:06:17,280
और कह रहा है कि भाई वो भाग गया ये है वो है अबे मैं भागा

933
01:06:17,280 --> 01:06:21,440
मैं तो तुझसे खुला निमंत्रण दे दिया तो कि भाई बीच की जगह पे आजा तू

934
01:06:21,440 --> 01:06:25,520
ना तेरा ना मेरा ना मुझे तुझ पर विश्वास है ना तुझे मुझ पर विश्वास है जो

935
01:06:25,520 --> 01:06:29,520
भगत तेरे आए थे उन्हें मुझ पर विश्वास था और वो ना आते तो मैं उनसे थोड़ी ना

936
01:06:29,520 --> 01:06:33,760
कहता नहीं नहीं तू बीच की जगह पे आ वो तो मेरे लिए मायने नहीं रखते थे तू मायने रखता

937
01:06:33,760 --> 01:06:37,760
है थोड़ा बहुत इसलिए मायने रखता है क्योंकि भैया तू जुड़ा हुआ है वहां पे सीधे

938
01:06:37,760 --> 01:06:41,920
ये तेरे भगत जो आते थे उनके मत्थे पे लिखा भी नहीं रहता है ना कि

939
01:06:41,920 --> 01:06:46,000
वो कहां से जुड़े हुए हैं तू तो रामपाल से जुड़ा भी हुआ है दिखता है इसलिए मैं तेरे

940
01:06:46,000 --> 01:06:50,240
लिए इतना सोचा कि चल इसके लिए बीच के चैनल पर चले जाएंगे इसके मुंह पर टेप लगाने

941
01:06:50,240 --> 01:06:54,320
के लिए समझ में आया वो मुझसे कहते हैं ना कि बीच

942
01:06:54,320 --> 01:06:58,560
के चैनल पे आ जाओ तो उनके लिए तो मैं बीच के चैनल पे अभी ना जाओ जाऊं।

943
01:06:58,560 --> 01:07:03,040
यह तो मेरा बड़प्पन है जो मैंने उनको अवसर दिया और आगे भी दूंगा

944
01:07:03,040 --> 01:07:08,080
जिससे उनके बुद्धि का शोधन हो सके। उनको देख के औरों का शोधन हो सके।

945
01:07:08,080 --> 01:07:12,080
समझ में आया? और या तो तू अपने आप को भी उन्हीं छुआरों जैसा समझता है तो

946
01:07:12,080 --> 01:07:16,400
बात अलग है कि भाई मेरे मेरे साथ भी वैसा ही व्यवहार करना जैसा उनके

947
01:07:16,400 --> 01:07:20,480
साथ किया। तो इसका मतलब तू अपने आप को उनके जैसा ही समझता है। वो सूखे सूखे चेहरे

948
01:07:20,480 --> 01:07:24,800
वाले आते हैं। हालांकि बुद्धि के स्तर पर तो तुझ में उनमें कोई अंतर नहीं है।

949
01:07:24,800 --> 01:07:28,800
हां जो व्यवहारिक भौतिकता है तेरी रामपाल के साथ ज्यादा

950
01:07:28,800 --> 01:07:32,800
है। इसलिए मैंने तुझे ये प्रिविलेज दिया कि भाई मैं तेरे लिए बीच के चैनल

951
01:07:32,800 --> 01:07:36,960
पे आ जाऊंगा। नहीं तो वास्तविकता यही थी कि तेरे साथ भी वही व्यवहार होना चाहिए कि

952
01:07:36,960 --> 01:07:40,640
आना है मेरे चैनल पे आ वरना मत आओ। और बना फन्नेखा घूम

953
01:07:40,640 --> 01:07:44,640
रहा है। ठीक है? तो ये सारी बातें थी। बाकी

954
01:07:44,640 --> 01:07:48,960
और दो रिकॉर्डिंग अब एक रिकॉर्डिंग आपने सुन ली है कि जैसे

955
01:07:48,960 --> 01:07:53,120
किसी भगत ने इसको जब फोन किया होगा और अपनी तकलीफ बताई होगी वो

956
01:07:53,120 --> 01:07:57,680
मेरे पास वायरल होते होते आई और उसमें तकलीफ बताई होगी कि

957
01:07:57,680 --> 01:08:01,840
भाई यहां पर सुभाष द्विवेदी ने हमारा जीना दुश्ववार कर रखा है तो फोन

958
01:08:01,840 --> 01:08:06,960
कट करके भाग गए ये है तुम्हारे गुरु भाई ये करेंगे तुम्हारी रक्षा

959
01:08:06,960 --> 01:08:11,040
अब भी समय है जितने सनातनी है और ये भटक गए हैं इस पर विचार

960
01:08:11,040 --> 01:08:15,040
करो और इस पर आहान कॉल धर्मा पे YouTube उस

961
01:08:15,040 --> 01:08:19,120
पर श डला हुआ है। व्यक्ति रो रहा है। कह रहा है कि भाई मैं चैन से

962
01:08:19,120 --> 01:08:23,280
नहीं रह पा रहा हूं। कुछ उपाय बताओ। वो यह पूछता है किताबें कहां छपती है। फोन

963
01:08:23,280 --> 01:08:27,280
काट के भाग गए। फोन काट करके भाग

964
01:08:27,280 --> 01:08:31,360
गए। अब देखो यह एक व्यक्ति है। यह कह

965
01:08:31,360 --> 01:08:35,440
रहा है तुमको कोई जानता भी नहीं है। भाई अरे तू मुझको यह आकर के

966
01:08:35,440 --> 01:08:39,600
बता रहा है। इससे ही सिद्ध हो गया कि तू मुझे जानता है। और

967
01:08:39,600 --> 01:08:44,160
तू तेरा नाम ही समझ ले। मोबाइल कंपनी वाला है। तेरी आइडेंटिटी

968
01:08:44,160 --> 01:08:48,720
क्या है? कुछ है सीधी बात है ना?

969
01:08:48,720 --> 01:08:53,200
जिसमें है दम तो फक्त बाजीराम सिंघम। समझ

970
01:08:53,200 --> 01:08:54,800
गए?

971
01:08:54,800 --> 01:08:58,880
तो लाइफ में कुछ भी करने का जयकांत सिगरे के ईगो को हर्ट नहीं करने का। अपना

972
01:08:58,880 --> 01:09:03,520
उसी बिल में घुसे रहो। अपना वो वीडियो वगैरह बनाते रहो। ये

973
01:09:03,520 --> 01:09:08,720
कच्चा पापड़ पक्का पापड़ कच्चा पापड़ पक्का पापड़ दोनों एक दूसरे से करते रहो।

974
01:09:08,720 --> 01:09:12,720
मीठे हो जाओ करतेकरते एक दूसरे से। वह

975
01:09:12,720 --> 01:09:16,800
तो सिद्ध कर ही दिया मैंने तुम्हारी किताबों से तुम्हारी थ्योरी से कि तुम

976
01:09:16,800 --> 01:09:21,120
सब रामपाल की पत्नी हो रामपाल कबीर की पत्नी है और फिर पत्नी

977
01:09:21,120 --> 01:09:25,840
भी तब बनते हो जब वो स्त्री इंद्री जो है तुम्हारे चिपकाई जाती है फेविकॉल फेविक्विक

978
01:09:25,840 --> 01:09:30,880
से तब तुम स्त्री वो बनते हो पत्नी नाखूनों से

979
01:09:30,880 --> 01:09:35,120
ठीक है तो ये सारी बातें हैं राघव

980
01:09:35,120 --> 01:09:39,120
दास के द्वारा फैलाई जा रही भ्रांति के लिए और आप सब लोग जितने भी सनातनी

981
01:09:39,120 --> 01:09:43,280
हैं अपने अपने यहां पर अगर अगर आपके आसपास

982
01:09:43,280 --> 01:09:47,360
कोई रामपाली रह रहा है तो उस रामपाली के बारे

983
01:09:47,360 --> 01:09:51,520
में लोगों को बताइए। हमें किसी से कोई झगड़ा नहीं करना है। किसी से

984
01:09:51,520 --> 01:09:55,520
कोई मारपीट, गाली गलौज कुछ नहीं। केवल उसके बारे में वहां के

985
01:09:55,520 --> 01:09:59,600
लोगों को बताना शुरू करिए। अपने आप वो व्यक्ति सुधर जाएगा। रामपाल को

986
01:09:59,600 --> 01:10:03,760
आप ऐसे ही मार देंगे। रामपाल का जो बुरा तंत्र है जो

987
01:10:03,760 --> 01:10:07,920
जो उसने वैचारिकता फैला रखी है, ऐसे ही वो नष्ट हो जाएगा। उसको

988
01:10:07,920 --> 01:10:12,160
शारीरिक रूप से मारने की कोई आवश्यकता नहीं है कभी भी। आप अपनी

989
01:10:12,160 --> 01:10:16,160
लड़ाईयां लड़िए सैद्धांतिक लड़ाईयां वैचारिक लड़ाई

990
01:10:16,160 --> 01:10:18,800
उससे जीतिए ज्ञान की लड़ाई

991
01:10:18,800 --> 01:10:22,880
लड़िए ये लोग कहते हैं ज्ञान का जवाब ज्ञान से दो अबे कहां दे दे

992
01:10:22,880 --> 01:10:27,040
तेरा गुरु है क्या कहीं दरबार लगा रहा हो अपने बिल से बाहर निकल कर के कि भैया

993
01:10:27,040 --> 01:10:31,200
प्रश्न पूछो कहां दे दे ज्ञान का जवाब ज्ञान से नंबर जारी किया

994
01:10:31,200 --> 01:10:35,280
उसने कोई अपना कि पूछो प्रश्न ज्ञान का

995
01:10:35,280 --> 01:10:39,360
जवाब ज्ञान से दे दे अपने द्वारा खरीदे हुए चिरपोटन प्रेस रिपोर्टर को खड़े

996
01:10:39,360 --> 01:10:43,440
कर लेंगे कपड़े कपड़े कपड़े की दुकान पर कपड़ा बेचता हुआ व्यापारी जैसा बाबा

997
01:10:43,440 --> 01:10:47,520
आ जाएगा। आइए क्या दिखाएं आपको? सिल्क दिखाएं कि बनारसी दिखाएं। कौन सा दिखाएं?

998
01:10:47,520 --> 01:10:52,160
कांजीवरम दिखाएं। ये सब तो चला करता है तुम्हारे यहां।

999
01:10:52,160 --> 01:10:56,240
और ज्ञान का जवाब ज्ञान से दे दें। कहां पे दे दे भाई? जब

1000
01:10:56,240 --> 01:11:00,400
तुम उपलब्ध ही नहीं हो और ज्ञान का जवाब खूब ज्ञान से दे दिया गया है। और तुम्हारे

1001
01:11:00,400 --> 01:11:04,560
बाबा को मालूम है ज्ञान का जवाब ज्ञान से मिल जाएगा। इसीलिए बाबा अन

1002
01:11:04,560 --> 01:11:08,720
अवेलेबल है। समझो अनवेलेबल

1003
01:11:08,720 --> 01:11:12,720
और तुम्हारे लोग भी जितने भी शीर्षिक हैं जो बाबा से जुड़े हुए हैं वो भी इसी

1004
01:11:12,720 --> 01:11:16,880
तरीके से अनवेलेबल है पब्लिक के लिए क्योंकि ज्ञान का जवाब

1005
01:11:16,880 --> 01:11:20,960
ज्ञान से उन्हें मालूम है मुंह तोड़ दे दिया मुंह तोड़ जवाब दे दिया जाएगा। इसीलिए

1006
01:11:20,960 --> 01:11:25,200
अनवेलेबल है और इसीलिए इस तरह से क्रांति लानी पड़ती है।

1007
01:11:25,200 --> 01:11:29,440
नहीं तो वो समोसे वाले के यहां पर वोट टांगा गया है और अभी

1008
01:11:29,440 --> 01:11:33,680
और भी लखनऊ में और पूरे भारत में होने वाले हैं। कहीं पर आ जाओ ज्ञान से ज्ञान

1009
01:11:33,680 --> 01:11:34,180
जवाब

1010
01:11:34,080 --> 01:11:38,240
दे दो वहां पर जहां पोस्टर लग रहा हो व पहुंचो और जवाब

1011
01:11:38,240 --> 01:11:42,240
दे दो। मैं देता हूं जवाब। यहां यह लिखा है। यहां लिखा है। देखो अभी दूध का

1012
01:11:42,240 --> 01:11:47,360
दूध और पानी का पानी हो जाएगा। समझ में आया?

1013
01:11:47,360 --> 01:11:50,400
तो

1014
01:11:50,400 --> 01:11:54,560
राघव दास की यह बात है। वह जो यह कह रहा है कि भाई वह मेरे चैनल पर नहीं आएगा

1015
01:11:54,560 --> 01:11:58,560
तो मुझे तेरे पर विश्वास नहीं है। तेरे भगत लोग मेरे चैनल पर

1016
01:11:58,560 --> 01:12:02,800
आए तो उनसे पूछ तूने शिवश पर विश्वास क्यों किया? ठीक है।

1017
01:12:02,800 --> 01:12:07,520
और फिर भी अगर नपुंसकता

1018
01:12:07,520 --> 01:12:11,760
ना आई हो पूरी तरीके से थोड़ा बहुत पुरुषत्व शेष हो तेरे पास

1019
01:12:11,760 --> 01:12:15,840
और बचपन में माता जी ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया हो। यह सब बातें तो तेरे को

1020
01:12:15,840 --> 01:12:20,240
बोलना भी नहीं आएंगी। मूर्ख व्यक्ति अनपढ़ गवार

1021
01:12:20,240 --> 01:12:24,960
अशिक्षित तेरे बाबा ने ही लिख दिया है तुम लोगों को गरिमा

1022
01:12:24,960 --> 01:12:29,200
गीता की पढ़ हमारी किताबें दिखाता घूमता है ना यहां ये लिखा है वहां वो लिखा है तेरी किताबों

1023
01:12:29,200 --> 01:12:33,360
में लिखा है तू गवार है तू पिछड़ा हुआ है पिछड़ा

1024
01:12:33,360 --> 01:12:37,440
हुआ मतलब निम्न निम्न को अगर दूसरी तरीके से कहेंगे तो नीच ये सब तेरे

1025
01:12:37,440 --> 01:12:41,680
बाबा ने लिखा है है ना पढ़ाई के मामले में नीच

1026
01:12:41,680 --> 01:12:45,680
ज्ञान के मामले में नीच ये सब तुमने तुम्हारे बाबा ने गरिमा गीता में लिखा

1027
01:12:45,680 --> 01:12:49,120
हुआ है तेरे बारे में तो जान अपने आप को अपने बाबा की नजरों

1028
01:12:49,120 --> 01:12:53,200
से जान मैं नहीं जानवा रहा हूं। तेरे बाबा की नजरों से जान ले कि तू कौन है

1029
01:12:53,200 --> 01:12:57,280
और दम हो माताजी ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया हो तो बीच में

1030
01:12:57,280 --> 01:13:01,520
आ बीच बीच मैदान में आ ना तेरी जगह ना मेरी जगह बीच

1031
01:13:01,520 --> 01:13:05,680
मैदान ठीक है वैसे तू आएगा नहीं

1032
01:13:05,680 --> 01:13:08,400
कायर है बहुत

1033
01:13:08,400 --> 01:13:13,200
पीढ़ी दर पीढ़ी वो एक कुछ आई होगी नपुंसकता

1034
01:13:13,200 --> 01:13:17,360
या फिर वो जो विशेष प्रकार की खीर चलती है तुम्हारे यहां पर उससे आई

1035
01:13:17,360 --> 01:13:21,440
होगी चलिए जय श्री राम कुछ लोग कह रहे हैं साइंस

1036
01:13:21,440 --> 01:13:26,080
जर्नी से डिबेट करो। साइंस जर्नी कौन है? यह बता दो मुझे। क्या नाम है उसका?

1037
01:13:26,080 --> 01:13:30,080
क्या परिचय है उसका? अगर पता हो तो भेज देना। फोन

1038
01:13:30,080 --> 01:13:34,080
नंबर वगैरह मेरा फोन नंबर है। सार्वजनिक है उसको दे सकते हो जिससे भी

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आपको हमारी चर्चा करानी है। और यह जो अर्पित द्विवेदी से करने को कह रहे हैं

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वो भी।

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01:13:40,960 --> 01:13:45,280
ठीक है। बाकी रामपाल का नहीं रामपालियों

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को पकड़ो। ठीक है? और जहां पर भी जो लोग भी यह रामपाल

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के समर्थक रह रहे हैं उनको मैं बता देता हूं। अभी आने वाले टाइम

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01:13:53,520 --> 01:13:59,040
में उत्तराखंड का मामला सामने आया। हिमाचल का मामला सामने आया है। अ

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हिमाचल का जहां पे नैनी माता का मंदिर है।

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01:14:03,920 --> 01:14:04,420
है

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ना? जिला लगता है बिलासपुर। वहां पर भी एक प्रदर्शन होने

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वाला है। एक फैमिली है जो एक परिवार है जो अपने बेटे पर

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दबाव डाल रहा है। वह विवाह ऐसी कन्या से करना चाहता

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है बेटा जो कन्या सनातन सिद्धांतों को मानती रामपाल

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को नहीं मानती फुअर को तो उस पर दबाव डाला जा रहा है कि नहीं नहीं अगर यह कन्या

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जो है रामपाल को मानेगी तो ही जो है इसका विवाह

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जो है हमारे बेटे से हम होने देंगे। तो इस तरह का वहां पर एक

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01:14:32,880 --> 01:14:37,280
तरीके से दहेज मांगा जा रहा है। दहेज रूप दहेज में क्या मांगा जा रहा है कि रामपाल

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को मानो बाबा की खीर खाओ है ना यह सब मांगा जा रहा है। नाम

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दान दीक्षा लो तो वहां पर प्रदर्शन की तैयारी है निकट में और

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दिल्ली में है पटना वाराणसी और

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और जहां पर होगी तो आपको बताया जाएगा। आप लोग भी अगर कर रहे हैं स्वतंत्र रूप

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से आप करें और हमको अपनी वो जो वीडियोस फोटो हैं वो दीजिए

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अपने चैनल पर डालेंगे। अगर आपके आसपास व्यक्ति नहीं रहता है तो

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कोई नहीं विरोध करिए कैसे पुतला जला करके और अगर रहता है

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तो उसके आसपास अगर उसके घर पर तो हम चिपका चिपकाने जाएंगे नहीं

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उसके आसपास के पेड़ पे उसके आसपास की दीवारों पे उसकी प्रॉपर्टी

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पर ना चिपका के उसके आसपास जो है प्रचार करिए कि वो कौन है

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बताइए लोगों अपने आप उसकी शर्म शर्म से आंखें

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नीची होंगी ठीक है

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चलिए

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जय श्री राम सभी को

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और किसी भी प्रकार का मतभेद है यदि वैचारिक

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तो वीडियो के अंत में दिया गया जो नंबर है WhatsApp उस पर WhatsApp करिए

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और चर्चा सुनिश्चित करिए और चर्चा के

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माध्यम से आपको यह अवसर दिया जाएगा कि आप अपनी बात को रख सके।

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देखिए वो व्यक्ति कब गया जब वो ये सब बातें करने लगा कि आपको तो फलाना समझा

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सकता है फलाना समझा सकता है मतलब वो नहीं समझा सकता उसने हैंड्स

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अप कर दिया विड्र कर दिया उसने अब उसके बाद

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व्यर्थ में उसको रखने की कोई आवश्यकता नहीं है ना ठीक है

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अब होता क्या है कि कुछ अनाप शनाप बके कुछ गरमा गर्मी

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हो मेरे पास इतना समय नहीं है कि मैं एक एक व्यक्ति से केस लडू ये करूं वो करो

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हालांकि वो तो जो आए थे वो ना बकते मगर एक बात कह रहा हूं इसलिए ऐसा कुछ

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वो स्थिति कि मुझे कुछ कारवाई करना करने के लिए विवश होना पड़े उससे पहले

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ही मैं हटा देता हूं। जय श्री राम सभी को।
