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00:00:01:28 [संगीत] तो सभी को जय श्री राम। मेरा नाम शिवश नारायण द्विवेदी। पुरी शंकराचार्य जी का एक अल्पज्ञ शिष्य। हमारे वीडियोस जो धर्म के प्रचार के संबंध में आपको हमारे अलग-अलग चैनल से प्राप्त होते हैं। आह्वान कॉल ऑफ धर्मा सर्वशक्तिमान धर्म। तो जो हमारा एक अभियान है कि अध्यात्म के विषय में लोगों को जागरूक करना, अध्यात्म से जोड़ना, धर्म से जोड़ना, ईश्वर से जोड़ना उसी क्रम में हम विभिन्न जो विचारधाराएं हैं ईश्वर के संबंध में उनको आपके समक्ष प्रस्तुत करते हैं। इसी क्रम में आज हम आए हैं ब्रह्मा कुमारी के वाराणसी के सेंटर में और हमारे साथ ब्रह्मा कुमारी के जो भाई जी होते हैं, वह हमारे साथ में इस समय विराजमान हैं। थोड़ा सा भाई जी आप अपना एक एक संक्षिप्त विवरण आप थोड़ा सा दे दीजिए। ओम शांति। मेरा नाम यश है और मैं पिछले 15 वर्षों से ब्रह्माकुमारी संस्था से जुड़ा हुआ हूं और साथ ही साथ हम लोग यहां बनारस में महमूरगंज में सबको राजयोग मेडिटेशन की शिक्षा देते हैं और अपने जीवन में कैसे सकारात्मक परिवर्तन लाएं और ध्यान की विधि कैसे सीखी जा सकती है सहज
00:01:17:01 रूप से यह हम लोग यहां पे निशुल्क सिखाते हैं। बहुत ही सुंदर एक बात है कि आप लोग एक प्रयास कर रहे हैं धर्म से जोड़ने का समाज को और धर्म से जोड़ने का मतलब नैतिकता से जोड़ना, अपनी संस्कृति से जोड़ना तो अ ब्रह्माकुमारी के अनुसार ईश्वर को लेके क्या अवधारणा है वो थोड़ा सा हमें बताइए। ब्रह्मा कुमारी संस्था जो है वह एक परमपिता परमात्मा जो कि निराकार स्वरूप में है उनको मानती है। जी तो यहां बताया जाता है कि हम सब एक आत्मा है जो इस शरीर को चला रही है। तो जैसे एक शरीर का पिता शरीर के जैसा दिखता है। पशु पक्षियों का पिता उनके जैसा दिखता है। तो जब हम आत्मा बिंदी स्वरूप है तो हमारा पिता भी बिंदु स्वरूप है। तो उसी बिंदु स्वरूप को हम लोग यहां पे परमात्मा शिव कहते हैं। अच्छा और प्यार से उनको बाबा बुलाते हैं। मतलब जो ईश्वर है वह निराकार है। इसके अलावा और कुछ ईश्वर के बारे में? ईश्वर के बारे में यहां ये मान्यता है कि ईश्वर उसको माना जाए जो सर्वोपरि है। जिसका खुद का कोई माता-पिता ना हो। खुद का कोई गुरु ना हो। हम ऐसा शास्त्रों में भी माना गया है कि शिव परमात्मा का ना तो कोई मात-पिता
00:02:32:02 है ना कोई गुरु है। वो स्वयंभू है। वो स्वयं प्रकट होते हैं। प्रकट होना तो वो साकार हो जाएगा। मतलब स्वयं से ही है वो स्वयं से ही है। स्वयं से अपनी स्थिति में जी तो एक एक ये हो गया कि वो अजन्मे है एक तरीके से मतलब वो स्वयं से है। तो जैसे और होता है ना जो हम कि ईश्वर यह कर सकता है। ईश्वर सर्वव्यापक है। उसको कहते हैं स्वरूप भूत लक्षण मतलब जो खुद में है जैसे सच्चिदानंद है। ज्ञान स्वरूप है। तो इस तरह से ब्रह्मा कुमारी की कुछ मान्यता जो ईश्वर के संबंध में हो। देखो निराकार है और सर्वोपरि है और कुछ जो आप मानते हैं उसके संबंध में उसके संबंध में यह मानते हैं कि वो जैसे आपने कहा कि वो निराकार के साथ-साथ सच्चिदानंद स्वरूप है तो यहां माना जाता है कि जैसे आत्मा हमारी सात गुणों से बनी है। वो सात गुण है ज्ञान, पवित्रता, प्रेम, सुख, शांति, आनंद और शक्ति। तो परमात्मा इन सातों गुणों के सागर हैं। अच्छा। जैसे शरीर की कोई भी आवश्यकता हमारा शरीर का पिता पूरा करता है। या हमें धन चाहिए उसके लिए हमको लक्ष्मी जी के ध्यान बताया गया है। विद्या चाहिए तो हमें सरस्वती जी का ध्यान बताया गया है। एक तरीके से कहना चाहिए कि सच्चिदानंद सच्चिदानंद वही बात हो गई। आत्मा की जो सारी क्वालिटीज अगर
00:03:47:06 आपको चाहिए तो उसके लिए आपको परमात्मा शिव का ही ध्यान करना होगा। अच्छा जितने भी ऋषि मुनि तपस्वी हुए जी सब ने ये बताया कि उस निराकार ज्योति रूप को याद करो। सारे धर्मों में भी यही बताया गया। हिंदू धर्म में ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजते हैं। मक्का में संग अस्वद जो कि नूर इलाही भी वो लोग मानते हैं उसको पूजते हैं। क्रिश्चियन धर्म में गॉड इज लाइट कह के पूजते हैं। गुरु नानक ने एक ओमकार निराकार कह के पूजा। हम सबको इनलाइटमेंट हुआ। बुद्ध हो, महावीर हो तो वो इनलाइटमेंट किसका हुआ? कौन दिखा? तो ये माना जाता है कि वो निराकार स्वरूप परमात्मा शिव का ही। इसमें एक ये बात आती है जैसे आपने कहा सभी धर्मों में तो ये क्या ब्रह्माकुमारी के अनुसार ये जो कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला धर्म है या बाइबल के द्वारा प्रतिपादित होने वाली नियमावली तो इसको भी ब्रह्माकुमारी धर्म कहता है। ब्रह्मा कुमार इसका यह कहना है कि जो भी लोग आए इस धरा पे जो पवित्र आत्माएं थी उन्होंने कुछ ज्ञान बताया कुछ अच्छी-अच्छी बातें बताई और उनके चले जाने के बाद लोगों ने उसको धर्म का रूप दे दिया। जैसे कि अगर हम बात करें किसी मतलब धर्म नहीं है। मतलब यह एक
00:05:02:14 वृक्ष की शाखाएं हैं। जैसे सनातन धर्म इसको ऐसे क्लियर करते हैं। धर्म क्या है? ब्रह्माकुमारी के अनुसार धर्म क्या है? आत्मा का धर्म तो शांति है। तो जो भी धर्म या जो भी पद्धति एक मिनट आत्मा को जो चाहिए वो शांति है। वो शांति है। धर्म का मतलब है कि व्हाट टू डू धारणा। नहीं नहीं धारणा तो है ही है। मतलब कहने का मतलब है डूस एंड डोंट्स। हम क्या करना चाहिए क्या नहीं हां अब अब अब क्या है कि जैसे आत्मा का आपने बताया धर्म वो आत्मा का लक्ष्य है शांति प्राप्त करना मुक्ति प्राप्त करना तो वो लक्ष्य को प्राप्त कराने के लिए डूज एंड डोंट्स हैं तो वही मैं पूछ रहा हूं कि आपके यहां पर क्या कांसेप्ट है धर्म को किस रूप में देखा जाता है जी वास्तव में यहां धर्म उसको माना जाता है जो हम अपने जीवन में धारण कर रहे हैं और जो शिक्षा हमें मिलती है कि हमें जीवन में क्या करना करना चाहिए। किस पद्धति से करना चाहिए? हां। तो वो क्यों करना चाहिए? उसका लक्ष्य क्या है? उसका लक्ष्य यही कि हम अपने जीवन को भी खुशहाल जी सके और साथ-साथ उस परम सत्ता को पा सके। और उसके द्वारा हम मुक्त हो सके। तो ये हर धर्म का लक्ष्य यही होता है। अब कौन कितना पाप मगर दिक्कत ये है ना कि जैसे हमने कहा कि जिस काम को
00:06:17:15 करके हमें मुक्ति मिले। महाभारत में भी लिखा है कि धर्म का पर्यावसान मोक्ष में है। मुक्ति अब वह मुक्ति का स्वरूप है वह अलग-अलग है। वह थोड़ा सा आपका शायद अलग है। वह एक अलग विषय है। मगर अगर बात करें कि कुरान की तो जो ब्रह्मा कुमारी के अनुसार मिलने वाली मुक्ति है वो कुरान की मुक्ति नहीं है। बाइबल की मुक्ति भी नहीं है। तो यदि उन कार्यों को हम धर्म कह रहे हैं जो ब्रह्मा कुमारीज की ही मान लें जो भी आपका मुक्ति का कांसेप्ट है। तो यदि वह धर्म है जो ब्रह्मा कुमारीज के अनुसार मुक्ति दिलाएगा तो फिर कुरान के अनुसार जो मुक्ति है वो अलग है। बाइबल के अनुसार जो मुक्ति है वो अलग है। फिर हम उसे धर्म कैसे कह सकते? ये एक थोड़ा सा कंफ्यूजिंग हो जाता है व्यक्ति के लिए। जी जैसे कि हर धर्म में जैसे कि अगर उनको रिलीजन मान ले या एक बिलीफ सिस्टम मान लें। जीवन जीने की एक कला मान ले। हां बिलीफ सिस्टम। उन्होंने एक अपनी जीवन जीने की एक कला बनाई है। उसको उन्होंने नाम दे दिया क्रिश्चियनिटी या इस्लामिज्म। जो किसी ने मजहब कहा, दीन कहा। कुछ भी कह दिया। तो आप मतलब इसका मतलब जो आप धर्म कह रहे हो आपका मतलब वो बिलीफ सिस्टम है। सिस्टम है। वो धर्म नहीं है। हां। क्योंकि धर्म तो वही है ना जो अभी आपके सच्चाई
00:07:32:24 का जो आपके हिसाब से अगर माना जाए तो धर्म तो वो है जो कम से कम आपकी वाली मुक्ति दिलाए। हम जो आपका मुक्ति को कासेप्ट है तो ये एक बात क्लियर हमारी हुई कि वो आप उसको लोकाचार में धर्म कहते हैं बट वो धर्म है नहीं इस्लाम वगैरह ये धर्म नहीं है थोड़ा क्लियर करेंगे इस बात को हम ऐसा नहीं कह सकते कि वो धर्म नहीं है क्योंकि जैसे कि आज लोग स्पिरिचुअलिटी को भी पूरा सही तरीके से नहीं जान पाते। जैसे कोई व्यक्ति है जो बहुत भक्ति कर रहा है। वो मान रहा है कि मैं आध्यात्मिक हूं। मगर धर्म और आध्यात्म में जैसे थोड़ा सा डिफरेंस है। हल्की सी एक रेखा है। वैसे हम यह कह सकते हैं कि आज एक व्यक्ति का धर्म क्या है? तो यूनिवर्सल धर्म सबका एक ही है। मानवता शांति फैलाना। अब कोई व्यक्ति अपने धर्म को कहे कि हमारे धर्म में तो ऐसा कहा गया कि ऐसा करने से ही मुक्ति मिलेगी। वैसा करने से ही मुक्ति मिलेगी। मगर क्या या मुक्ति ही यही है। जो वो बता रहे हैं। तो उसको सही से उस धर्म के बारे में बताया ही नहीं गया। तो फिर इसमें एक दिक्कत ये आती है कि हमको इस्लाम के बारे में मालूम पड़ा है कुरान से। हम क्रिश्चियनिटी के बारे में मालूम पड़ा है बाइबल से। उसके इत तो हमको कुछ मालूम नहीं है। अब कुरान में लिखा हुआ
00:08:48:00 है कि 334 में लिखा है कि आप ने किसी को बहन बोल दिया। उसके बाद भी आप उसके उलट उसके साथ विवाह कर सकते हो। उसके साथ मतलब जो शारीरिक संबंध बना सकते हो इत्यादि। इस तरह की बातें क्योंकि वो मुंह की बातें हैं। आपका बाकायदा जो है विवाह नहीं हुआ है और हमारे यहां क्या है कि जो भी बोलो उस पे अडिग हो जाओ। वचनबद्धता की बात कही गई है। प्राण जाए पर हां रघुल रीत सदा चली आई। प्राण जाए पर वचन ना जाए। तो अच्छा धर्म का पर्यावसान मोक्ष में इसलिए होता है जैसे कि हमने अगर झूठ बोला तो हमारे चित्त में दोष आया। वो संस्कार हमारे चित्त में बैठ गया। झूठ बोलने वाला और जितनी बार हम छिपाते हैं तो उससे हमारी कॉन्शियसनेस जिसको हमें फ्री कराना है मुक्ति वह कॉन्शियसनेस वीक पड़ती है तो हमने छिपाया अपनी बात से मुकरे कहे हुए वचन से मुकरे तो हमारी तो यह धर्म ही आत्मा कमजोर हो जाती आत्मा की कॉन्शियसनेस कमजोर हुई इसलिए कहा गया कि झूठ मत बोलो ठीक है तो यानी कि झूठ ना बोलना अपनी बात से ना पलटना धर्म में आ गया कौन सा धर्म जो हम अध्यात्म और उसको अलग कर रहे हैं ना जैसे यह तो धर्म की बात है ऐसा कह देते हैं लोग मगर है नहीं क्योंकि लोक धर्म
00:10:03:03 में भी हर वो चीज जो बताई गई है वो उसका परेसान उसी में हो रहा है अध्यात्म में कैसे हो रहा है जैसे हमको बोला गया कि हैंड वाश करो हम या हमको बोला गया कि शौचाचार इतने कुल्ले इतना ये सब तो उसमें क्या है कि आपका शरीर पवित्र हो जिससे कि आपका चित्त शुद्ध रहे आपको फील हो कि आप शुद्ध हो और जितना शुद्ध होगे जितना आप विकृतियों से बचोगे उतना ही ज्यादा आपकी कॉन्शियसनेस परमात्मा की तरफ परमात्मा की तरफ जाएगी मुक्ति की तरफ तो अब यह कांसेप्ट हो गया कि वहां पर इसके ठीक विपरीत कह दिया गया। जबकि वह मुक्ति में नहीं मुक्ति का विरोध हो रहा है वहां पर छिपाने वाली बात और भी ऐसी कई सारी बातें हैं। अब हमने कहा कि वो लोगों की मान्यताएं अलग है। उनके धर्म में तो अच्छा है। तो यानी कि हमको उस ये जो चीज है जो अलग से जो उस कुरान में नहीं है। तो फिर हम लोग क्लेम कैसे कर सकते हैं कि वो कुरान में हमें पता है और वो जो कुरान में लिखा है वो नहीं है। वो थोड़ा सा कंफ्यूजन। जी जैसे कई बार आपने देखा होगा कि हर व्यक्ति का देखने का नजरिया अलग-अलग होता है। जैसे वही भागवत वही रामायण अगर अलग-अलग कथावाचक सुनाते हैं तो उनका अलग-अलग स्पष्टीकरण होता है। कुछ-कुछ विषयों के ऊपर कई बार वो चीजें भी हमें एग्जैक्ट सब लोग एक जैसी नहीं बताते। किसी की जैसे कि आपने वो
00:11:18:07 कहानी सुनी होगी इस मामले में जो मैंने आपको बताया 33 चार इस मामले में जो इस्लामिक समाज है वो एक मत है हम कि गोद लिया ऐसा था जो स्टोरी वो कुछ ऐसी है कि उनके हिसाब से ईश्वर को यह बताना था शिक्षा देनी थी हम कि गोद लिए हुए बच्चे सगे नहीं होते हम ये शिक्षा ईश्वर को देनी थी हिंदुओं का आरोपी यह है कि उनकी नजर खराब हो गई थी। वह अपने गोद लिए हुए बेटे के यहां पर गए तो उनकी पत्नी वहां पर ऐसी मतलब भीगी हुई वस्त्रों में थी तो उनकी जो है दृष्टि वो खराब हो गई और जब उन्होंने उनको उस हालत में देखा तो उनका मन बदल गया वहां से और वह फिर उनके हिसाब से एक आयत आ गई। ईश्वर का फरमान आ गया कि आप जो है अपने गोद लिए हुए बेटे की पत्नी से भी विवाह कर सकते हो यदि वह उसको तलाक दे दे तो। ठीक है? अब इस मामले में वह आयत आई कि मुंह के बोले हुए रिश्तों का कोई मतलब नहीं है। इस मामले में हिंदुओं का यह आरोप है और इस्लामिस्ट का यह कहना है। मगर इसमें एक मत है कि मुंह बोले रिश्तों का मायना नहीं है। वो तो गोद गोद लिए हुए का सिस्टम वहां से बंद हो गया। गोद लेना देना। और इस इस चीज के सहारे
00:12:33:13 से उनका ब्याह भी हुआ। उस अपने गोद ली हुई बेटी की बदनी से। तो मोहम्मद जी की यह जो जीवनी से रिलेटेड यह जो आयत है इस आयत के इस अर्थ को लेकर के इस्लाम के सभी लोग एक मत हैं। उसमें ऐसा नहीं है कि कोई अलग-अलग बता रहा है। और ये जो चीज है ये हमारे यहां के बिल्कुल विपरीत जा रही है। और दूसरी बात जैसे कई कथावाचक अगर करते भी हैं तो उसमें एक सिस्टम है परंपरा का। तो उसके हिसाब से देख लिया जाता है कोई परंपरा से बात कर रहा है तो वो मान्य है। परंपरा से बात नहीं कर रहा है तो नहीं मान्य। तो फिर हम लोग फिर उस चीज को धर्म माने कि नहीं माने कुरान को जी जैसे हम लोग देखते हैं कि जैसे अलग-अलग देश हैं तो सबके देश का जो कॉन्स्टिट्यूशन है जो वहां के नियम कायदे हैं वो अलग-अलग है तो हम तो अपने देश का मानते हैं ना उनके देश का तो हमें मतलब भी नहीं कि वो क्या कर रहे हैं उनके देश में क्या नियम कायदे हैं तो अगर हम धर्म की बात करें तो हम जिस धर्म के हैं और हमें जो चीजें बताई गई हम उसे पालन करें कोई धर्म में क्या बताया गया नहीं नहीं बात ये नहीं हो रही है कि उस धर्म में क्या बताया बात ये हो रही है क्या हमें उसे धर्म मानना चाहिए कि नहीं तो हम आप क्या मानेंगे अगर धर्म नहीं बिलीफ सिस्टम जैसे आपने शुरू में कहा एक बिलीफ सिस्टम या फिर एक रिलीजन ये सब या उन्होंने अपना वर्ड जो दिया है मजहब तीन मगर यदि हम उसको धर्म कहेंगे तो धर्म
00:13:48:19 का परवसान तो मोक्ष है और वहां ऐसी चीजें बताई जा रही है जो मोक्ष के विरुद्ध है मोक्ष का स्वरूप भी इसके विरुद्ध है इवन ईश्वर भी जो हमारा ईश्वर है उसके विरुद्ध है अब जैसे मान लीजिए कितने धर्मों में पुनर्जन्म नहीं माना जाता बिल्कुल हमारे धर्म में माना जाता है और कुछ चीजें यूनिवर्सल नहीं माना जाता नहीं है वो हम हम उसको रियल हमारी जो चीजें हैं हम उसको ऐसे नहीं कहते कि वो हमारी मान्यता है हमारी जो चीजें हैं हमारी हमारी ये मान्यता है वो यूनिवर्सल है उनकी चीजें भी वो ये कहते हैं कि यूनिवर्सल है मगर बात ये क्लियर तब हो जाएगी जब उनसे आमनासामना हो जाए मान लीजिए कि वो सामने आ जाए तो क्लियर हो जाएगी कि भाई अगर हम पुनर्जन्म का सिस्टम नहीं मानेंगे तो क्या ईश्वर ने तब से कोई लॉटरी निकालिएगा कोई लंगड़ा पैदा हो रहा है कोई अंधा पैदा हो रहा है लॉटरी निकालनी माननी पड़ जाएगी ना तो इसलिए मानना पड़ेगा मानना पड़ेगा कि उसके कर्म ऐसे रहे होंगे जो उसको ऐसा जन्म मिला नहीं तो ईश्वर को लॉटरी वाला मानना पड़ जाएगा और यदि ईश्वर को मालूम है कि मुझे किसको क्या बनाना है तो उसके पास कारण होना चाहिए कि किसी को वो दुख दे रहा है किसी को वो सुख दे रहा है मान लीजिए ब्रह्माकुमारी में सुख है अब कोई एक अफ्रीका में ऐसा नीग्रो कहीं पैदा हो गया जो कभी जान ही नहीं पाया कि ब्रह्मा कुमारी क्या है ब्रह्माकुमारी का ज्ञान क्या है उसका जीवन समाप्त हो गया वो चला गया तो उसको तो भगवान ने उसके कर्म
00:15:03:22 ऐसे रहे होंगे ना जो उसको वहां जन्म दिया गया नहीं तो आपके सेंटर के बगल में जन्म दे देता है ना तो [नाक से की जाने वाली आवाज़] ये तब होगा जब उनसे बात करें तो अब दोबारा से आते हैं कि जब वहां पर ये जो बात है कि जब वहां पर हमारे जो यूनिवर्सल थॉट्स हैं एक तरीके से हिंदी में कहा जाए तो अकाट्य हमारे सिद्धांत अकाट्य हैं तो फिर हम जो घुली मिली बातें कर रहे हैं या इसके के विरुद्ध बातें कर रहे हैं। सीधी सी बात है कि जो भी ऐसा कार्य है जिसका पर्यावसान मोक्ष में नहीं है वो धर्म नहीं है। जिसका पर्यावसान मोक्ष में है चाहे वो लौकिक दृष्टि से हो चाहे दैय दृष्टि से हो। मगर जिसका पर्यावसान मोक्ष में है सुख शांति परम सुख परम शांति में है। वही धर्म धर्म है। वही नियमावली धर्म है। वही नैतिकता धर्म है। अब वहां पे ठीक इसके विपरीत जब कह दिया गया तो हम उसको धर्म कहें या जैसा कि आपने शुरू में एक वर्ड यूज़ किया बिलीफ सिस्टम या रिलीजन ये कहना चाहिए। देखिए अब इसमें क्या है कि हम बिलीफ सिस्टम कह सकते हैं। हम हम कह सकते हैं रिलीजन मगर हम किसी पे थोप नहीं सकते कि आप भी उसको बिलीफ सिस्टम ही कहो और आप उसको रिलीजन ही कहो। ये हमारी मान्यता है ना कि हम उसको धर्म ना मान के हम उसको बिलीफ सिस्टम कह रहे हैं। नहीं नहीं इसमें ये वाली बात आ जाती है। जैसे सबसे पहली बात है कि
00:16:19:03 हम कौन हैं? हम हम राजनीतिज्ञ तो हैं नहीं। हम ना ही हम अभिनेता हैं। अब जैसे ईश्वर निराकार है तो है। हम हम जब भी कहेंगे तो ईश्वर को निराकार ही कहेंगे। हम ब्रह्मा कुमारीज की ओर से बोल रहा हूं। तो अच्छा या कुछ 5000 साल वाली जो एक राउंड सर्किट वो वही है वही बोलोगे। ऐसा तो नहीं है कि उसमें आप मान लो कि उनका ये है कि एक ही बार दुनिया बनी खत्म। वहां तो नहीं मानेंगे। तो यानी कि हम जो सच है वही बोलेंगे। तो फिर इसमें हम यह क्यों सोच रहे हैं कि भाई हम नहीं थोप नहीं सकते। हम थोप थोड़ी ना रहे हैं। हम तो अपनी बात कह रहे हैं कि हमारे हिसाब से वह धर्म नहीं है। है ना? तो अभी मैं पूछ रहा हूं कि ब्रह्मा कुमारीज के हिसाब से वो धर्म है कि नहीं? ब्रह्मा कुमारीज में एक चैप्टर पढ़ाया जाता है हमको कल्प वृक्ष का। हम हम तो कल्प वृक्ष को बताया जाता है कि ये जो कल्प वृक्ष है ये 5000 वर्ष का एक वृक्ष है। तो जिसका तना जो है वो आदि सनातन देवी देवता धर्म। अच्छा। और उसके बाद द्वापर से द्वापर के लास्ट से कहे या जो भी तो फिर उसमें से अनेक शाखाएं निकली। तो ये जो शाखाएं हैं इस इसको जैसे कि एक शाखा निकली इब्राहिम। नहीं नहीं ये देखिए थोड़ा सा मैटर बदल जाता है। जैसे एक पिता है वो अच्छा है। हम
00:17:34:12 और वो बहुत धर्म धर्मज्ञ है। उसकी शाखाएं निकली। यानी उसके बेटे हुए। हम अब वो एक चोर बन गया। हम और एक उसी के रास्ते पे चलता रहा। हम और एक जो है कुछ और बन गया। डाकू बन गया। हम और एक जो है वह भौतिकवादी बन गया, इंजीनियर बन गया। मैं तो भगवान भगवान को मानता ही नास्तिक बन गया। तो हम यह कहते हुए क्योंकि यह उससे निकले हैं इसलिए यह भी धर्म है। चोरी करना भी धर्म है या नास्तिक बन जाना भी धर्म है। हम यह तो नहीं कह सकते ना। अगर उससे निकले भी हैं। है तो विरोधी ना। हैं कह तो ये रहे हैं ना कि भाई आप अपने मुंह की बात को बदल सकते हो। जबकि हमारे यहां सच पर अड़े रहना सिखाया जा रहा है। या तो फिर सच पर अड़े रहना धर्म नहीं है। जबकि हमारे यहां तो सच्चा ही धर्म है। अभी यहां क्या बताया जाता है? इस्लाम और मुस्लिम दो धर्म है। हम तो कुछ चीजें मुस्लिम तो इस्लाम को मानने वाले को कहते हैं। उस पे ईमान लाने वाले को जो आयतें आई हैं कुरान में उनको उनप जो बिलीव करता है उसका प्रचार प्रसार करता है। रक्षा करता है उन सिद्धांतों की वो मुस्लिम मुसलमान माना जाता है। मुसलम में ईमान यहां बताया जाता है कि द्वापर युग में के [गला साफ़ करने की आवाज़] लास्ट में इब्राहिम आए तो उन्होंने इस्लाम धर्म की स्थापना की। फिर मोहम्मद साहब आए। उन्होंने इस धर्म का प्रचार प्रसार किया और इसको
00:18:49:15 आगे तक ले गए। नहीं वह ठीक है। निकला उसी से है। वह सही कह रहे हैं आप कि निकला है। ऐसा हो सकता है कि मैं शिक्षा आप ही यहां पे हैं। हम आप मैंने देखा है कि शायद ब्रह्मा कुमारी से एक ब्रांच निकल गई है वो आध्यात्मिक विश्वविद्यालय ऐसे करके है ना? कोई शंकर पार्टी ऐसे करके पता नहीं कितने ग्रुप बन रहे हैं। वो यहां का विरोध कर रहे हैं कुछ चीजों में। हम तो जितनी जो जो चीजें वह विरोध कर रहे हैं फिर हम यह नहीं कहते कि वो ब्रह्माकुमारी ही है। हम जबकि वो यहीं की यहीं की ब्रांच है। मगर वह ब्रांच विरोधी हैं। हम और केवल ये नहीं है कि वो जाके दूर रह रहे हैं। वो जो हमारा हमारा स्वरूपभूत अस्तित्व क्या है? हम स्पिरिचुअल बातें बता रहे हैं। हम तो अगर वह हमारी स्पिरिचुअल बातें बताने का विरोध कर रहे हैं तो वो हम नहीं हैं। हम या तो वो हमारी और किसी चीज का विरोध करते कि देखो ब्रह्मा कुमारीज में ये फलाना घटना हो गई ये गलत हुआ। स्पिरिचुअल ज्ञान तो वही है मगर कुछ घटना हो गई तो हम वहां नहीं रहते। हम अलग हो गए। ऐसा कुछ मगर वो जब हमारी उसी जो मूल बात है ब्रह्माकुमारीज क्या है? ईश्वरीय ज्ञान और वो उसी का विरोध कर रहे हैं। फिर हम ये नहीं कहते वो भी ब्रह्मा कुमारीज नहीं मानते ना। तो फिर सनातन धर्म से निकलने वाले ही मान लिए जाए इब्राहिम
00:20:04:28 इत्यादि। फिर उनको क्यों कहा जा रहा है कि वो भी धर्म है? जी वो इसलिए कहा जा रहा है कि जैसे मान लीजिए कि किसी ने कोई उस धर्म मतलब कि देखा जाए कि कोई भी व्यक्ति कोई अच्छा काम करता है। हम ये नहीं कह सकते ना कि कुरान जिसने लिखी वो व्यक्ति ही गलत था। हो सकता है कि जिस जो उसका स्पष्टीकरण कर रहा है वो उस प्रॉपर वे में स्पष्टीकरण नहीं कर रहा। जैसे कुछ चीजें होती हैं। समय अनुसार संस्करण नए-नए निकलते रहते हैं। जैसे हमारे महाभारत की बातें हैं। मतलब जैसे कुरान जो लिखी गई वो ठीक थी। उसको आपको बताने वाले गलत हैं। हां। मतलब ये कह सकते हैं कि आपको किस रूप से कौन सी चीज दिखाई जा रही है। फिर कहा तो फिर कुरान की आयतों में छेड़छाड़ हुई है आपके हिसाब से या कुरान की आयतों के अर्थ में। हम यह नहीं कह सकते कि छेड़छाड़ हुई है। मगर हम यह कह सकते जैसे कि जो हमारा असली शास्त्र था जो कहते हैं कि जो महाभारत है आपने संदिग्ध दृष्टि बताई है ना कुरान पे नहीं कुरान पे नहीं हमने ये कहा है जैसे हमारा जो महाभारत जो शास्त्र सुनते हैं ये नहीं कह रहा मैं ये कह रहा हूं कि आपने कहा कि भाई वो शुरुआत अच्छी हुई हो हम और बाद में समय के अनुसार कुछ चेंज उसमें चेंजेस हो गए हो जैसे हमारा कॉन्स्टिट्यूशन तो उसमें चेंजेस जो आप मान रहे हो
00:21:20:00 वो एग्जैक्ट उसकी आयतों में मान रहे हो या उसके अर्थ में मान रहे हो अर्थ अर्थ में मान रहे हो तो अब इसमें ये दिक्कत द्कत आती है कि जो कुरान है वो हमें स्वतंत्र रूप से तो मिली नहीं है। हम हमें मिली है कुरान उन्हीं लोगों से जो उसका ये अर्थ बता रहे हैं कि मुंह बोले रिश्तों के कोई मायने नहीं होते। मुंह की बातों का कोई मायना नहीं होता। हम अब यदि हमें उन पे भरोसा नहीं है। हम है ना? तो फिर उनके द्वारा मिलने वाली कुरान पे भी भरोसा नहीं होना चाहिए। पता नहीं वो मोहम्मद ने लिखी भी कि नहीं लिखी। क्या उसमें कल्पना है और क्या वो है। तो हम तो फिर उसके बारे में कुछ भी नहीं कह सकते। हम हमें तो फिर यह कहना पड़ेगा हमें पता ही नहीं है भैया उसके बारे में क्योंकि वो लोग झूठे हैं। जो लोग किताब दे रहे हैं वह गलत अर्थ बता रहे हैं। तो वो लोग तो झूठ झूठ बोल रहे हैं। तो जब वो झूठ झूठ बात बोल सकते हैं अर्थ झूठा दे सकते हैं तो वो आयत भी झूठी दे सकते हैं। वो किताब भी झूठी दे सकते हैं। किसी भी धर्म के लिए हम भी ऐसा नहीं कह सकते कि ऐसा मुस्लिम धर्म के लिए ऐसा क्रिश्चियन धर्म के लिए हो सकता है हमारे जैसे बचपन में बच्चा छोटा होता है। उसके घर में ही कुछ-कुछ उसके बिलीफ सिस्टम उसके अंदर नेगेटिव बैठा दिए जाते हैं। नहीं नहीं अभी देखिए थोड़ा सा विषयंतर हो रहा है। विषय यह है कि अगर इस्लाम की जो किताब है उसके अर्थ में आयात में किसी भी चीज में छेड़छाड़ हो रही
00:22:35:03 है तो फिर हम उसको लेकर के कोई भी क्लेम नहीं कर सकते क्योंकि वो जिससे हमें मिली है हमें [गला साफ़ करने की आवाज़] डायरेक्ट तो ऊपर वाले ने दी नहीं है उनके हिसाब से जो अल्लाह है उसने तो हमारे पास फरिश्ता भेजा नहीं है और आयतें हमको तो रटी हुई नहीं है हमको आयतों के लिए उन्हीं के पास जाना पड़ेगा इंटरनेट से लेंगे तो इंटरनेट पे उन्होंने ही डाली है उनकी एक चेन ऑफ नरेशन होगी कि मोहम्मद ने इसको दिया और फिर उन्होंने इसको दिया। फिर उन्होंने इसको दिया। फिर उन्होंने इसको दिया। इस तरह से आज वो जो है छप रही है बुक्स के फॉर्म में और फिर वो उसको इंटरनेट पे भी डाल रहे हैं। वहां से हमको मिली। अब हम कहीं से कोई भी किताब खरीदें। मगर वो किताब कुरान ही है। अगर यह बात आ जाएगी तो हमें कहीं ना कहीं उनके किसी स्कॉलर से जाकर के वेरीफाई कराना पड़ेगा। यह कुरान ठीक है ना? है ना? तो जब हम उसकी वेरिफिकेशन के लिए उस पर डिपेंड करते हैं। इसका मतलब कुरान हमें उसी से मिल रही है। कहीं से भी लें जैसे थॉमस अलवा एडिसन हम उसने बल बना दिया। अब हम बल्ब तो ले रहे हैं परचून की दुकान से। हम कह रहे हैं हम थॉमस अलवा एडिसन को जानते ही नहीं है। तो ये गलत है। इनडायरेक्ट वे में हम थॉमस अलवा एडिसन से ही बल्ब ले रहे हैं। उसके द्वारा एक परंपरा से वो बल्ब हम तक पहुंचा। तो उसी प्रकार से जो कुरान है उनकी परंपरा के द्वारा हम तक पहुंची। अगर हम में देने
00:23:50:16 वाले पर बिलीव नहीं है जो बता रहा है नहीं मुंह बोले रिश्तों का मायना नहीं हम कह रहे हैं नहीं है तुम गलत बता रहे हो मोहम्मद जी ने तो अच्छा बताया था तो मोहम्मद जी ने हमको तो बताया नहीं डायरेक्ट मोहम्मद जी ने तो अपने उन लोगों को बताया जिन्होंने तो यदि हमें उन पे बिलीव नहीं है तो हम मोहम्मद पे क्लेम कैसे कर सकते हैं और अगर बिलीव है तो फिर उनके अर्थ को मना कैसे कर सकते हैं ये वाली बात जी तो कई बार क्या होता है ना कि जैसे हम उनकी कोई चीजों को नहीं सत्य मान रहे हैं और कह रहे हैं ये गलत चीज है हम् तो वह भी तो हमारी कई चीजों को गलत मानेंगे। तो यह यूनिवर्सल कौन बताएगा कि क्या सही है? देखिए मानने की बात तो ये है कि वो क्या मानते हैं आईएस आईएस वाला मानता है कि भाई गोली मारो। हम तो हम ये सोच कर कि वो हमारी चीज को गलत मानेंगे। गोली ना मारो। हम हम लोग तो ये कहते हैं ना गोली ना मारो। तो हम वो आईएस आईएस हमारी चीज। जैसे हमारे धर्म में क्या शाकाहार सर्वोपरि है? बिल्कुल हमारे धर्म के लोग इन्होंने तो हम लोग ये सोच करके कि वो लोग हमारी बातों को माने इस वजह से ये कह रहे हैं क्या कि तुम्हारा भी धर्म धर्म है। थोड़ा सा इसको अभी तक तीन चार बातें क्लियर हुई हैं कि ब्रह्मा कुमारीज के अनुसार इस्लाम भी धर्म है। बट ब्रह्मा कुमारीज के अनुसार जो इस्लाम की का वास्तविक स्वरूप था वो बदल दिया गया है। ऐसा
00:25:05:25 ही है ना? वास्तविक स्वरूप जिन्होंने स्पष्टीकरण किया उन्होंने बदल दिया। उन्होंने जैसे मान लीजिए हमारे धर्म में एक बच्चा है। अब उसको क्या बता? नहीं नहीं मैं अभी एक टैगलाइन फिट कर रहा हूं कि ब्रह्मा कुमारीज के अनुसार इस्लाम भी धर्म है और इस्लाम का वास्तविक स्वरूप बदल दिया गया है। ये टैगलाइन नहीं दे सकते क्योंकि ये कंट्रोवर्सी हो सकती है क्योंकि कोई व्यक्ति कहेगा क्या आपने कुरान पढ़ी है जो कि मैंने पढ़ी भी नहीं है। और कुरान में क्या आयतें हैं? ने क्या-क्या लिखा है वो तो जब ये तो तब हो सकता है जब मैंने उसको पूरा स्टडी किया हो पूरा रीड किया हो पूरा उसप रिसर्च किया हो तब हम कोई स्टेटमेंट दे सकते हैं नहीं तो आपने अपना तो पढ़ा है ना ब्रह्मा कुमारीज के अनुसार कुरान क्या है ब्रह्मा कुमारीज में कुरान की बात नहीं होती है ब्रह्मा कुमारीज में ये बात होती है कि जैसे विभिन्न धर्मों के जो धर्मपिता थे सबने इशारा उसे निराकार की नहीं वही तो बात है क्वेश्चन यहीं से शुरू हुआ था कि हम किसी चीज किसी नियमावली को धर्म कहते किस स्थिति में हैं अगर अगर वहां पर मोक्ष है तो धर्म है। अगर मोक्ष नहीं है नहीं है तो हम कैसे प्रूफ कर सकते हैं? अब जहां पे ये नहीं कहा जा रहा है जो आपकी जो बिलीफ है आपकी चीज यूनिवर्सल है कि केवल आपका सेल्फ का मान्यता है यूनिवर्सल है ना ट्रुथ यूनिवर्सल तो ठीक है तो जब वो यूनिवर्सल ट्रुथ है तो वो ट्रुथ वहां नहीं
00:26:20:28 बताया जाना जैसे हमारा हमने अब जान लिया कि हमें पानी चाहिए और कोई दूसरा कह रहा है कि यह करोगे तो तुमको शराब मिल जाएगी हमने यह ढूंढ लिया। हमें क्या चाहिए? हमें शांति मिलेगी पानी से। हमारी प्यास पानी से बुझेगी। और कोई यह बता रहा है कि आप यह कार्य करोगे तो आपको शराब मिल जाएगी। तो फिर हम अपनी चीज अपनी जो नियमावली है पानी को प्राप्त कराने वाली उसको जो नाम दे रहे हैं धर्म वही नाम हम शराब को प्राप्त कराने वाली नियमावली को कैसे दे रहे हैं? हमें तो पता चल गया ना कि वहां शराब है। पानी है ही नहीं। हम यह चीज अच्छा ठीक है। इसको टॉपिक को हम लोग थोड़ा सा चेंज करते हैं। लाइट करते हैं। तो यह थोड़ी सी क्लेरिटी हमने की इस पे थोड़ा सा बातें हुई। अच्छा एक चीज और है।
00:27:24:02 [संगीत]
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इस्लाम को धर्म कहना —ब्रह्माकुमारी कीमार्केटिंग स्ट्रैटेजी है या सनातन विरोध?
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