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00:00:01:28 [घंटी की आवाज़] जय श्री राम सभी को। एक कहावत है कि जो हारा हुआ पहलवान होता है वो दोबारा भिड़ने की तलाश में रहता है। अभी हाल ही में अग्निवत जी का एक वीडियो आया है जिसमें वो जलबिन मछली की तरह छटपटाते हुए दोबारा से हुंकार भर रहे हैं कि मैं चुनौती देता हूं। यह हो जाए वो हो जाए फला फला। और उस वीडियो में उनकी जो बौखलाहट है, वह जो हार का रोष है, वह जो पीड़ा है, वह साफ दिखाई दे रही है। किस तरह से वो छटपटा रहे हैं। इस वीडियो से यह स्पष्ट होता है कि किस प्रकार से जो अग्निव्रत जी हैं, उनको स्वयं को पता है कि वह किस तरह से पराजित हुए हैं। उनकी धज्जियां उड़ाई गई है उस चर्चा में। वह बात और है कि उस पूरी डेढ़ घंटे की चर्चा में उनके जो चेले चापड़ हैं उनको या फिर आर्य समाज के वह लोग जो अब तक अग्निव्रत जी को आंकते भी नहीं थे, गिनते भी नहीं थे। वह लोग भी आर्य समाज का झंडा ऊंचा रखने के लिए कमेंट इत्यादि के माध्यम से बस एक ही रट्टा लगा रहे हैं। डेढ़ घंटे की चर्चा है। मगर उनके पास केवल एक शब्द है। भगोड़ा या चर्चा से भाग गया। अग्निव्रत जी के पास

00:01:17:01 भी केवल यही है। उस पूरी डेढ़ घंटे की चर्चा में। वह बात और है कि जब किसी से हम यह पूछ लेते हैं कि वहां पर रुकना कब तक था? अगर आप मुझ पर भागने का आरोप लगा रहे हो तो चर्चा में कब तक रुकना था? तो सारे छुमंतर हो जाते हैं। गायब हो जाते हैं। भाई मुझे क्या करना था कि अग्निव्रत जी जब वहां पर अगर उनको संडास भी जाना पड़ जाए तो वहां पर मैं उतनी देर प्रतीक्षा करता रहूं कि भैया जाइए आप संडास हो के आइए। वापस आइए। क्या वहां पर कोई निर्णायक बैठा था कि अब चर्चा संपन्न हो चुकी है। अब आप आप विजय हुए आप जा सकते हैं शिवश नारायण जी या फिर अग्निव्रत जी स्वयं ये कहने वाले थे कि भाई मैं घोषित करता हूं शिवश नारायण द्विवेदी जी विजित हुए या ऐसा होने वाला था। अरे यह सब तो न्यायपूर्ण बातें छोड़ो। वहां पर तो मूल विषयों को बदला जा रहा है। जब पूर्व में शर्त निर्धारित है कि भैया जिसके पास तर्क नहीं होगा प्रमाण नहीं होगा वो घोषित करेगा मेरे पास तर्क नहीं है तो तर्क से आप प्रमाण कैसे आ रहे हो आ भी रहे हो तो उसको तर्क को कुतर्क सिद्ध करो ना कैसे आ रहे हो आप सामने वाले से आपने अपनी उसकी परंपरा पूछी है वो जब बता रहा है तो आप ओवरलैपिंग कर रहे हो आप उसको बोलने नहीं दे रहे हो फिर से विषय कर

00:02:32:02 रहे हो अच्छा क्वेश्चन ना पूछने के लिए मना कर रहे हो कि नहीं नहीं यह मत पूछो। अगर नहीं भी पूछना है तो क्यों नहीं पूछना है यह आपको बताना होगा। अग्निथ जी नहीं बता पा रहे हो। और जब चर्चा पूर्व में यह सारी चीजें सुनिश्चित हो चुकी थी कि भाई विषयांतर नहीं किया जाएगा। अह अगर तर्क और प्रमाण में से कोई भी एक चीज नहीं होगी तो घोषणा की जाएगी। और जब सामने वाला अपना पक्ष रख रहा होगा तो उसको बोलने दिया जाएगा। उसमें बीच में टोका नहीं जाएगा। उसको रोका नहीं जाएगा। हमने कितनी बार रोका उनको बोलने से और वह देखिए

00:03:12:21 और अगर हमारा प्रश्न गलत है तो आप प्रश्न को गलत सिद्ध करिए। उसमें तर्क दीजिए। कैसे प्रश्न गलत है हमारा? आपने चार बार बोला प्रश्न आपका गलत है। यह मत पूछो, ये मत पूछो, ये मत पूछो। एट दी एंड हम कब वहां से निकले? जब निर्णय भी उन्हीं को करना है, विषयंतर भी उन्हीं को करना है, प्रश्न भी उन्हीं को चुनने हैं। और अंतत कतवा जब वह फंस जाएंगे तो वह जिन विषय वस्तुओं में हमारी आस्था है उनके लिए अपमानित तौर पर वक्तव्य निर्गत करेंगे। तो हम वहां अपना अपमान कराने के लिए बैठे रहते। अच्छा एक बात और कि भाई जब लास्ट में बात होते होते आ रही तो वह सैद्धांतिक बात करने की बजाय वस्तुनिष्ठ तौर पर पूछ रहे हैं कि मोहिनी का जवाब दो। मोहिनी मोहिनी प्रकरण का जवाब दो। मोहिनी प्रकरण का जवाब अगर हमारे पास नहीं है यद्यपि है पर नहीं है तो इससे तो यह सिद्ध होता है ना कि आप अवतार लेना तो स्वीकार करते हो कि ईश्वर अवतार ले सकता है हां पर उसके संबंध में जो अमुक अमुक कथाएं हैं पुराण की या स्मृति ग्रंथों की वो आपको स्वीकार नहीं है ये तो एक अलग विषय हो जाएगा बात हो रही है वो ले सकता है कि नहीं बात यह नहीं हो रही है कि जो पौराणिक कथाएं हैं वो प्रामाणिक है कि नहीं वो दूसरा चैप्टर है तो ये सारी चीजें आप एक

00:04:27:25 साथ कर रहे हो कोई भी एक विषय क्लियर नहीं हो पाएगा तो मैं वहां पर कब तक बैठा रहूं क्या अग्निव्रत जी ऐसा कहने वाले थे क्या ऐसा सुनिश्चित हुआ था कि अगर ऐसा होगा तो अग्निवृत जी स्वयं कहेंगे ना तो सुनिश्चित हुआ था और ना ही आर्य समाज के अंदर इतनी न्यायपूर्ण दृष्टि है जो वो स्वयं आर्य समाज ये कह दे कि मैं हारा हुआ हूं अब आप जा सकते तो कब तक रहना था वहां पर उनको दिल का दौरा पड़ जाने तक रहना था तो ये सारी बातें जो है एक पंक्ति में आ जाती है कि वहां पर रुकना कब था। तो जब भी कोई भगोड़ा इत्यादि जैसे शब्दों का उपयोग करता है भाग गए तो मैं केवल यही बात बोलता हूं कि वहां पर रुकना कब था? इसका जवाब कोई नहीं देता है। भाग जाते गायब हो जाते हैं। अच्छा यदि उस चर्चा में अग्निव्रत जी विजय हुए थे। मैं पराजित हुआ था तो जो बौखलाहट अब अग्निव्रत जी के वीडियो में उनके चेहरे पर दिख रही है। वो मेरे चेहरे पर दिखनी चाहिए थी। मैं तो संतुष्ट हूं। मैंने छोड़ाए उनके भाई। धज्जियां उड़ गई उनकी। जगह-जगह पर उनको भागना पड़ा। जगह-जगह पर। कहां कहां नहीं भागे उस डेढ़ घंटे के कंटेंट में उनके पास है क्या सिवाय भगोड़े शब्द का उपयोग करने के क्योंकि उनका मंच है

00:05:36:19 वो मुझे कितना भी अपमानित कर सकते हैं मैं अपमानित करने चलूंगा तो मुझे म्यूट कर दिया जाएगा और वैसे भी मैं वहां अपमानित करने गया नहीं हूं तो मुझे क्या करना है जब आपकी सैद्धांतिक धज्जियां उड़ा दी गई तब आप कुछ भी बकते रहिए हम तो वो बौखलाहट जो है ना इस वीडियो से स्पष्ट होता है कि किसको हार का झटका लगा है। और इस वीडियो से एक बात और स्पष्ट होती है कि इनके जो कुछ प्रसिद्ध प्रचारक हैं जिनकी रातों मैं सपनों में भी मैं आकर के उनको जो है कुटाई करता हूं उनकी जो कहने में थक नहीं रहे थे कि जिनको आलंबन लेना पड़ा। इनकी विजय को सिद्ध करने के लिए जब उन लोगों ने वीडियो बनाया इनके प्रचारकों ने, इनके समर्थकों ने तो उनको व्यक्तिगत कटाक्षों का आलंबन लेना पड़ा। अपनी बात में वजन लाने के लिए सैद्धांतिक वजन नहीं है। वजन कैसे ले रहे हैं कि खांस रहा था। पेट निकला है। या फिर वो आपने अपना परिचय दिया तो यह आपका वाकलन हो गया। यह सब वजन देने। वजन वही देता है अतिरिक्त बातों से अपनी बातों में जिसके पास जो मूल विषय होता है उसके संबंध में पर्याप्त सामग्री नहीं होती है। किसी से झगड़ा हो गया था। मैं गया था एक बार थाने में।

00:06:52:02 वो व्यक्ति मैंने कभी नहीं देखा प्रेस रिपोर्टर का बैच लगाए हुए। मगर जब थाने में मेरे समक्ष प्रस्तुत हुआ। थानेदार के समक्ष प्रस्तुत हुआ तो उसने बैच लटकाया हुआ था। प्रेस का बैच। क्यों? जिससे कि पुलिस वाले इस प्रभाव के नीचे दब जाए कि भाई यह प्रेस वाला व्यक्ति है। मैंने वही पुलिस वालों के सामने पूछ लिया कि मीडिया कब से हो गए भाई तुम कि मैं तो हूं बहुत पुराना हूं। मैंने कभी देखा नहीं तुम्हारा मीडिया का बैच। आज तुम मीडिया का बैच क्यों लगा के आए हो? मीडिया का बैच उसे इसलिए लगाना पड़ा था क्योंकि उसका पक्ष कमजोर था। उसको जरूरत पड़ती है साइड की चीजों की। हमको नहीं अकाट्य सिद्धांत वालों को नहीं। खैर, अब बात करते हैं चुनौती की। तो पहली बात तो यह है कि वह चुनौती मैं अपने लिए नहीं मानता हूं। वह बात और है कि उसमें आपने अप्रत्यक्ष रूप से मेरे लिए ही बात की है। परंतु उसमें आपने यह कहा है ना कि भाई मैं दुनिया के सारे वेद विरोधियों को चुनौती देता हूं। तो मैं इस चुनौती को अपने लिए इसलिए नहीं मानता हूं क्योंकि आपने उसमें जिसको चुनौती दी है उसे वेद विरोधी कहा है। आपका और आपके पूरे तंत्र का यह सोचना है कि आप वेद का प्रचार करने वाले हो और वेद के खेमे से लड़ने वाले हो।

00:08:07:08 वास्तविकता तो यह है कि आपका वेदों से कोई संबंध नहीं है। आपका संबंध अपने मंतव्यों से है। उस मंतव्य से आप वेद को जोड़ देते हो। पहले आप यह तय करते हो कि आपको क्या अच्छा लग रहा है, क्या बुरा लग रहा है और फिर इस अच्छाई बुराई की परिभाषा को आप वेद के किसी भी मंत्र के नीचे डाल सकते हो। वेद के मंत्र के नीचे क्यों? कोई जो प्रतिबंधित फिल्में बनती है ना जिसको पोर्न इंडस्ट्री बोला जाता है। उनके चलचित्रों से भी आप अपने धर्म अधर्म की बुराई को जोड़ सकते हो। वेद के मंत्रों से ही नहीं। दुनिया में किसी भी व्यक्ति के कहे हुए वाक्य से आप अपने उसको जोड़ सकते हो। भाव के नाम पे उसका भाव यह है लो।

00:08:52:02 शनि योनि चली गई संसार से मान लो उसके किसी वक्तव्य में भी आप अपने द्वारा चुना हुआ जो अच्छाई और बुराई का पैरामीटर है उसको आप डाल सकते हो। यह आपका तरीका है। खैर पॉइंट पर आते हैं। तो क्या है कि वेद के नाम पर आपने यह तय कर रखा है कि भैया आर्य समाज का मतलब ही है वेद। तो हम वेद विरोधी नहीं है। हम आर्य समाज से वैचारिक मतभेद रखते हैं। वैचारिक शोधन की दृष्टि से उसके साथ चर्चा करते हैं। कोई आर्य समाज को नष्ट करने के लिए नहीं करते। जिसकी वजह से धरातल पर हमें समस्या आती है समाज को संगठित करने में, हिंदुओं के अस्तित्व और आदर्श की रक्षा करने में। तो क्योंकि आपने जो वो चुनौती दी है वो चुनौती आर्य समाज को ना मानने वालों को नहीं दी है या दयानंद जी को ना मानने वालों को नहीं दी है। आपने वह चुनौती वेद विरोधी को दी है। पहली बात तो पहली बात तो वह चुनौती मेरे लिए है ही नहीं। दूसरी बात यह है कि अगर होगी भी अगर होगी भी मान लो आप कल को फिर भड़भड़ाहट में एक नया वीडियो बना दो [हंसी] तो यदि होगी भी तो मैं आपकी

00:10:07:13 बातों से आपका मुकरना देख चुका हूं इसलिए अब इन बातों पर विश्वास करना मेरे लिए नहीं है स्वीकार्य वैसे भी आर्य समाजियों से ऐसी अपेक्षा नहीं की जा सकती वो आप अपनी बात पर अडिग रहे और इसीलिए जब आपने पहले बुलाया था और आपने कहा था कि भाई यहां आ जाओ अह चालाकियां हो जाती है। आपने कहा था ऑनलाइन तो चालाकियां हो जाती हैं। यहां आ जाओ। मैंने कहा था कि भाई वहां नहीं होगी चालाकी? तो बोली यहां नहीं होगी। क्यों नहीं होगी? क्योंकि अग्निवत जी कह रहे हैं अग्निवत जी ने तो कहा था विषय अंतर नहीं होगा। पर हुआ अग्निवत जी ने तो कहा था कि सामने वाले को रोका नहीं जाएगा। मगर रोका गया। अग्निव्रत जी ने तो कहा था। कि भैया जब तर्क नहीं होगा तो घोषणा की जाएगी। तर्क नहीं है। मगर घोषणा नहीं की गई। अग्निवत जी ने तो कहा था। अपमान पूर्वक तरीके से बात नहीं होगी मगर की गई। तो भाई आप जब खुद एक बार प्रत्यक्ष दिखा चुके हैं कि हम दोहरे चरित्र वाले हैं तो आप पर विश्वास कैसे किया जाए? और 100 की सीधी एक बात इन सब बातों को एक साइड कर देते हैं। हमारे आपकी चीजों की प्रतिक्रिया स्वरूप हमने उस चर्चा को जरूर छोड़ा। मगर इसके अलावा पूरी चर्चा में आप कहीं पर चारित्रिक दोष दिखा सकते हैं या शर्तों का उल्लंघन दिखा

00:11:22:14 सकते हैं। नहीं दिखा सकते। है ही नहीं तो कहां से दिखाएंगे? तो हम आपके मंच पर ऑलरेडी आ चुके हैं। बाकी यदि आपको लगता है कि परंपरा प्राप्त आचार्यों के विरोध में आपके जो दयानंद जी ने जो सिद्धांत आदि आपको पकड़ा के गए हैं वो इतने सशक्त हैं कि उनको आप सिद्ध कर सकते हैं। तो आपका स्वागत है। ससम्मान आपकी व्यवस्था की जाएगी आने जाने की, ठहरने की। आप आइए। आपको यदि किसी प्रकार का भय होगा तो पुलिस को सूचित कर दिया जाएगा कि यहां यहां पर हम लोग यह कार्यक्रम करने वाले हैं। पूरा व्यवस्थित किया जाएगा। आप लखनऊ आ जाइए ना। हम क्यों आपको आप ही के कंफर्ट जोन में ही रहना है हमेशा। भाई मैंने तो अपना कंफर्ट जोन छोड़ के देख लिया ना एक बार। आपके मंच पे गया था। वहां आपके पास बटन था। आप मुझे कह रहे हो अपमानित ये वो मैं कहूंगा आगे। मैं पहले तो मैं बिय्ड द लिमिट्स जाना नहीं चाहता। और मैं जाऊंगा तो मुझे मालूम है वहां पर मेरे अधिकार छीन लिए जाएंगे। फिर क्या होगा कि वहां मूख दर्शक बन करके अपनी बुराइयां सुनूंगा। अपना अपमान अपने आराध्यों का अपमान यह सब सुनू तो यह कहीं का कोई सनातन सिद्धांत नहीं है कि अग्निव्रत जी ही बुलाएंगे तो जाया जाएगा। आपके एक बार संपर्क करने पर हम आपके मंच पर जा चुके हैं। यदि आपको लगता है कि आप आपके सिद्धांतों में बल है

00:12:37:15 कि आप सिद्ध कर सकते हो। सत्य का तो आइए लखनऊ और आकर के सिद्ध करिए। हां और यदि आपको दूसरे प्रकार का भय है कि भाई अगर यह भीमाल आएंगे तो तो हम किसी तरीके से अगर कुछ गलत हो जाएगा हमारी पराजय हो जाएगी तो अब हम रिकॉर्डिंग वगैरह को नष्ट करवा देंगे। मगर अगर हम लखनऊ जाएंगे तो रिकॉर्डिंग नष्ट कैसे करवाएंगे। अगर आपको यह भय है तो इसका मैं कोई मेरे पास कोई निदान नहीं है। हां आप अगर भगवान राम के नाम का जाप करने लगे तो आपका यह भय दूर होगा। मुझे ऐसा लगता है भगवान राम जो हैं आपको ऐसी शक्ति देंगे कि आप शायद अपने भय से सामना करने का साहस जुटा सको। और हां, यह चलते-चलते मैं एक बात बता दूं। यह बात अग्निव्रत जी के नहीं लिए नहीं है। मेरी चप्पलें आजकल माजियों को और विरोधियों को ज्यादा दिखाई देती है। उनका ध्यान मेरी चप्पलों की ओर रहता है। कारण यह है कि यही चप्पलें उनके सर में पड़ती हैं समय आने पर। तो इसलिए उनका ध्यान रहता है कि किस क्वालिटी की चप्पल है। कितने मजबूती से कितनी चोट पहुंचाएगी। अगर मुंह पर पड़ेगी तो या सर पर पड़ेगी तो। तो इसलिए चप्पलों को लेकर के कुछ गलतफहमियां कुछ भ्रामक प्रचार भी करते हैं। जैसे कि अभी प्रचार किया जा रहा है कि चमड़े की चप्पल पहन

00:13:52:21 करके आदि शंकराचार्य जी की जो मूर्ति थी उसको हाथ में ले लिया। तो सबसे पहली बात तो मूर्ख हो। तुमको यह किसने बताया कि चमड़े की चप्पल है? ₹499 की चप्पल है। बिल भेज दूंगा। 499 में चमड़ा आता है। मेरे जीवन में सबसे पहला जो परिवर्तन आया था ना इस पर अलग से वीडियो बना दूंगा। मेरे जीवन में सबसे पहला परिवर्तन आया था। तब मैंने सबसे पहले चमड़े का ही त्याग किया था मेरे जीवन से। मेरे पास पर्स था। भाई वो मेरा पर्स लाना जरा। पर्स लाना।

00:14:32:00 मेरे पास चमड़े का पर्स हुआ करता था। सबसे पहले मैंने चमड़े का पर्स त्याग कर यह खरीदा था। इसको हो चुके आज करीब 5 छ साल यह खरीदा था सबसे पहले और मेरे पास बेल्ट हुआ करती थी चमड़े की घर पे रखी है अब तो वो पट पहनता नहीं हूं कहीं पे अगर जासूसी टाइप का कुछ करना होता है तभी वो पट पहनते हैं तो उसमें जो मैं बेल्ट बांधता हूं वो भी कपड़े की है। और सुनो बॉडी बिल्डिंग में पावर लिफ्टिंग के शूज होते हैं। वह जो पावर लिफ्टिंग शूज होते हैं वह लेदर के थे। पहनना बंद कर दिया और बेल्ट बांधी जाती है लेदर की वेटलिफ्टिंग करते समय वह भी बांधना बंद कर दिया मेरे वीडियोस देखो आसपास के अगर वेटलिफ्टिंग वाले दिख जाए तो तो वह सारी चीजों का त्याग किया है पर्स का त्याग किया है मेरा तो इस साधना मार्ग में प्रवेश ही हुआ है चमड़े के त्याग के बाद और तुम लोग अपनी अटकलें लगा रहे हो अरे कुछ बोलने से पहले कुछ तो करो ऐसी बात बोलना सीखो सोना जो अकाट हो क्या चूचू का मुरब्बा जैसा ले चले आते हो थोड़ा कुछ वजन लाओ अपनी चीजों में और बाकी [गला साफ़ करने की आवाज़] है 499 की मगर मजबूत

00:15:47:06 बहुत है जब पड़ेगी तो अच्छा खासा असर करेगी है ना और अग्नि जी आपके लिए जो पहला जो संदेश था उस पर आप ध्यान दीजिए अपनी चीजों पर अगर आना चाहते हैं तो लखनऊ आपका स्वागत है और जय श्री राम सभी को

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 16:25 · 15 Jul 2026

अग्निव्रत जी की चुनौती या जल बिन मछली की छटपटाहट

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