1
00:00:00,160 --> 00:00:04,240
में भी आपका उन्नत उदाहरण देखकर आप सभी को गर्व ठहरे होने का अनुमान किसी सज्जन को शादी हो सकता है। मैं आपको

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00:00:04,240 --> 00:00:08,480
अपना परंपरागत अभिवादन प्रस्तुत करता हूं। [घंटी की आवाज़] कुल

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00:00:08,480 --> 00:00:12,480
परंपरा आपने अपनी कुल परंपरा बताई है कि आप फला हैं।

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00:00:12,480 --> 00:00:16,480
वो भारद्वाज जो हमने कहा वो भारद्वाज है। है ना? पहली

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00:00:16,480 --> 00:00:20,720
बात तो हमने इस बात पर बहुत ज्यादा गौर किया ही नहीं कि आप भारद्वाज हैं कि भारद्वाज

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00:00:20,720 --> 00:00:24,960
हैं। और ना ही हमें कोई आवश्यकता है। इतना महत्व नहीं रखता है आपका यह भारद्वाज टाइटल

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00:00:24,960 --> 00:00:29,040
हमारे लिए। हां अगर आप परंपरा प्राप्त सिद्धांतों को मानने वाले

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00:00:29,040 --> 00:00:33,040
होते तब हम अवश्य यह चीज देखते। अरे क्या रखा है आप लोगों के भारद्वाज

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00:00:33,040 --> 00:00:38,880
इत्यादि चीजों में? सब तो आपने सप्रेटा दही बना रखा है।

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00:00:38,880 --> 00:00:43,120
क्या कुल परंपरा बता रहे हो? सबसे पहले तो बेसिक ये बता दो कि नियोग

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00:00:43,120 --> 00:00:47,120
वाले हो कि नॉर्मल वाले हो। फिर नियोग वाले हो तो कौन से वर्ण से आया

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00:00:47,120 --> 00:00:51,280
था? वो जो नियोग का पिता था तो वो कहां से आया था? ये सब चीजें

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00:00:51,280 --> 00:00:55,280
आ जाएंगी ना। तो क्या करें आपका यह भारद्वाज और भारद्वाज जान

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00:00:55,280 --> 00:00:59,200
के

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00:00:59,200 --> 00:01:04,320
भाई कौन से वाले पिता से आया है ये जो आप बता रहे हैं कि मैं फलाना हूं

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00:01:04,320 --> 00:01:08,400
भाई नियोग आपके यहां पर माना गया है कि नियोग है 11 पति हो सकते हैं आगे

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00:01:08,400 --> 00:01:12,720
बात होगी तो आपके यहां उसको एक सामान्य रूप से लिया गया है नियोग

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00:01:12,720 --> 00:01:16,880
को तो आपका जन्म सामान्य रूप से हुआ है या फिर नियोग

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00:01:16,880 --> 00:01:20,880
के प्रक्रिया से हुआ है यह पहली बात तो आ जाएगी इतनी सारी चीजें

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00:01:20,880 --> 00:01:23,680
आपने डाल रखी

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00:01:23,680 --> 00:01:28,000
क्या करना आपके भारद्वाज और भारद्वाज से

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00:01:28,000 --> 00:01:32,000
जिनके साथ माता जी का विवाह हुआ था वहां से संतान

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00:01:32,000 --> 00:01:36,080
की प्राप्ति हुई है उन्हें वो हैं आप या फिर नियोग वाले तरीके से हुए हैं वो

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00:01:36,080 --> 00:01:40,320
हैं आप कौन से तरीके से होने पर आपका वो जो कुल वंश परंपरा

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00:01:40,320 --> 00:01:44,400
आप प्रवर इत्यादि बता रहे हैं क्या करूंगा ये

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00:01:44,400 --> 00:01:49,200
भारद्वाज है भारद्वाज जान दूसरी बात करणा वर्ण व्यवस्था है

27
00:01:49,200 --> 00:01:54,960
जो व्यक्ति जिस समय जो कार्य कर रहा हो वो वही है।

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00:01:54,960 --> 00:01:59,840
अगर एक सिक्योरिटी गार्ड कहीं पर खड़ा हुआ है

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00:01:59,840 --> 00:02:04,000
और उसने भय देख के कि भैया

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00:02:04,000 --> 00:02:08,560
यहां पे इस समय अब ड्यूटी करना ठीक नहीं है। यहां पे जान के लाले पड़ जाएंगे।

31
00:02:08,560 --> 00:02:13,600
जान को खतरा है। टमाटर बेचना शुरू कर दिया। वैश्य बन गया।

32
00:02:13,600 --> 00:02:18,160
तो ड्यूटी से भागना आपने उसकी ड्यूटी बना दी है।

33
00:02:18,160 --> 00:02:22,160
कर्तव्य से पलायन भी आपने उसको कर्तव्य बना दिया तो

34
00:02:22,160 --> 00:02:26,560
उसको दोष कैसे लगेगा? कर्तव्य से भागना भी जब कर्तव्य

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00:02:26,560 --> 00:02:29,520
हो जाएगा तो दोष कैसा

36
00:02:29,520 --> 00:02:32,880
भाग गया?

37
00:02:32,880 --> 00:02:35,120
हम

38
00:02:35,120 --> 00:02:39,120
फिर तो कौन सी भैया किसकी बेटी कहां बाई क्या

39
00:02:39,120 --> 00:02:43,120
है? कैसे आपकी कुल परंपरा चली है? यह वाली बात एक आ गई।

40
00:02:43,120 --> 00:02:47,200
तो जो आप कुल परंपरा पर बता रहे हैं इतनी अच्छी स्पीच पहले तो

41
00:02:47,200 --> 00:02:51,280
इसमें यह बेसिक से प्रश्न है कि कुल परंपरा किस ओर से बताई है?

42
00:02:51,280 --> 00:02:55,600
सामान्य विवाह से बताई है या नियोग वाले विवाह से बताई है।

43
00:02:55,600 --> 00:02:59,680
नियोग वाला विवाह नहीं सॉरी नियोग वाली प्रक्रिया से बताई है। फिर उसमें नियोग

44
00:02:59,680 --> 00:03:03,840
वाले में भी कौन से वाले वही उसमें 11 तक होते हैं। तो पांच

45
00:03:03,840 --> 00:03:08,880
छ सात आठ नौ 10 कौन से नंबर का वो था मामला?

46
00:03:08,880 --> 00:03:12,880
ये भी आ जाएगा। अगर है तो नहीं है तो फिर वो बात अलग है। पहले तो

47
00:03:12,880 --> 00:03:18,240
यही क्लियर हो सामान्य विवाह के नियोग है। अच्छा

48
00:03:18,240 --> 00:03:22,400
उसके बाद फिर वर्ण परंपरा का आपके अनुशासन पालन किया

49
00:03:22,400 --> 00:03:26,640
गया कि नहीं किया गया? किसके यहां कैसे हालांकि सत्यार्थ प्रकाश

50
00:03:26,640 --> 00:03:30,720
में दयानंद जी स्वयं लिखते हैं कि भैया अच्छे कुल में जहां पर वेद

51
00:03:30,720 --> 00:03:36,240
का वो हो रहा हो पाठ वहां पर विवाह करें।

52
00:03:36,240 --> 00:03:40,400
यानी कि यहां पर यह जन्म से थोड़ी थोड़ी सी चीजें आ रही है कि भाई वेद

53
00:03:40,400 --> 00:03:44,480
का पाठ जहां पर हो रहा है इसका अर्थ यह थोड़ी ना है कि वहां पर उत्पन्न होने वाली जो संतान होगी वो

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00:03:44,480 --> 00:03:48,000
भी गुणी होगी वो तो कर्म से होगी जन्म से नहीं होती है

55
00:03:48,000 --> 00:03:53,120
मगर यहां पे उन्होंने कह दिया कि ऐसे घर में विवाह करें जहां वेद का पाठ हो रहा है।

56
00:03:53,120 --> 00:03:55,680
हां।

57
00:03:55,680 --> 00:03:59,680
तो अब आपके यहां कुल परंपरा का इसका ध्यान रखा गया है कि नहीं

58
00:03:59,680 --> 00:04:03,840
रखा गया विवाह होते समय और फिर उस तरीके से आप

59
00:04:03,840 --> 00:04:08,000
परिपूर्ण है कि नहीं तब तो हम ये सोचे कि भारद्वाज है कि भारद्वाज

60
00:04:08,000 --> 00:04:11,360
है।

61
00:04:11,360 --> 00:04:15,360
अच्छा इसके बाद फिर एक चीज और आ जाती है कि

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00:04:15,360 --> 00:04:19,520
आपके माता-पिता जो थे वह मूर्ति पूजक थे या

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00:04:19,520 --> 00:04:24,800
नास्तिक थे या हर समाजी थे।

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00:04:24,800 --> 00:04:29,600
अग्निव्रत जी ने कहा है कि आर्य समाज था ही नहीं।

65
00:04:29,600 --> 00:04:34,400
दयानंद से पहले दयानंद जी से पहले तक। ठीक है?

66
00:04:34,400 --> 00:04:38,480
था ही नहीं। इसका अर्थ क्या हुआ कि आज

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00:04:38,480 --> 00:04:42,960
अगर आपने दयानंद जी के सिद्धांतों को विधि विधानों को

68
00:04:42,960 --> 00:04:46,960
आपने कहा कि यह ठीक है यह धर्म है। और दयानंद जी ने

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00:04:46,960 --> 00:04:51,040
कहा है कि वो अधर्म है मूर्ति पूजा। और आपके घर में जो विवाह हुआ है

70
00:04:51,040 --> 00:04:55,280
वह मूर्ति पूजा के अनुसार हुआ है। मूर्ति पूजा को करने वाले लोगों के द्वारा हुआ है।

71
00:04:55,280 --> 00:04:59,520
तो वह विवाह तो वैध है ही नहीं। आर्य समाज के अनुसार

72
00:04:59,520 --> 00:05:04,400
क्योंकि आर्य समाज के लॉ वहां पर लागू नहीं है। धर्म क्या होता है?

73
00:05:04,400 --> 00:05:08,480
धर्म का पर्यावसान मोक्ष में है। और मूर्ति पूजकों

74
00:05:08,480 --> 00:05:14,480
का मोक्ष तो आर्य समाज के अनुसार है ही नहीं। तो जहां मोक्ष नहीं है वहां धर्म कैसे?

75
00:05:15,120 --> 00:05:19,120
तो जो आपने कहा कि आज अगर आप अपनी पीढ़ी में आर्य

76
00:05:19,120 --> 00:05:23,600
समाजी बने हैं क्योंकि आपसे पहले तो आर्य समाज था नहीं या आपके शायद माता-पिता

77
00:05:23,600 --> 00:05:27,600
बने हैं तो फिर उनकी बात आ जाएगी कि भाई उन्होंने तो वैध तरीके

78
00:05:27,600 --> 00:05:32,000
से आर्य समाज के ही अनुसार विवाह हुआ नहीं तो फिर वो संतान क्या कहलाएगी

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00:05:32,000 --> 00:05:36,000
साथ में रहने वाली मातृशक्ति क्या कहलाएंगी ये सारी चीजें आ

80
00:05:36,000 --> 00:05:40,240
जाएंगी ना तो क्या करें आपका भारद्वाज और भारद्वाज जान के आचार

81
00:05:40,240 --> 00:05:44,320
डालेंगे क्या इसका इतनी सारे प्रश्न तो पहले ही खड़े हुए हैं।

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00:05:44,320 --> 00:05:48,400
पहले तो उनको सॉर्ट आउट करें। तब जो आप जब उससे आश्वस्त हो जाए

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00:05:48,400 --> 00:05:52,400
तब हम पूछे कि भैया आप तब हम यह विचार करें कि भैया आपका नाम

84
00:05:52,400 --> 00:05:56,880
भारद्वाज है। हमसे त्रुटि हो गई बोलने की। कुल

85
00:05:56,880 --> 00:06:01,280
परंपरा बता रहे हो। आपको ध्यान देना चाहिए था। परंपरा

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00:06:01,280 --> 00:06:05,440
की बातें हमसे नहीं करनी चाहिए थी। है ना? उसमें आपने

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00:06:05,440 --> 00:06:09,440
शटर घोट कर रखा है अपने यहां। सटर घोट सप्रेटा

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00:06:09,440 --> 00:06:13,520
दही बना रखा है। इसलिए और या फिर

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00:06:13,520 --> 00:06:17,760
कहने को आप बन गए हैं। दयानंदी आर्य

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00:06:17,760 --> 00:06:21,760
समाजी आप बन गए हैं। पर आपके हृदय में कहीं ना कहीं अभी

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00:06:21,760 --> 00:06:26,000
भी वो बीज बाकी है। शुद्ध कुल परंपरा वाला जिसकी

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00:06:26,000 --> 00:06:30,080
वजह से आपने उसको बड़े ही गर्व के साथ बताया। अगर ऐसा है तो बहुत अच्छी

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00:06:30,080 --> 00:06:30,580
बात

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00:06:30,240 --> 00:06:35,440
है भाई। आपके हृदय में अभी भी वो बाकी है। बीज कुल परंपरा का

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00:06:35,440 --> 00:06:40,400
बीज की रक्षा भगवान को अभीष्ट है। करते रहना।

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00:06:40,400 --> 00:06:44,640
अगर ऐसा है तो स्वागत है आपका। तो पहले आपको

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00:06:44,640 --> 00:06:48,800
कुल परंपरा से पहले अपने यह वाले जो मामले हैं तीन प्रकार

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00:06:48,800 --> 00:06:52,960
से आपकी जो कुल परंपरा की शुद्धता है उससे संबंधित आर्य समाज

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00:06:52,960 --> 00:06:58,960
को लेकर के मामले उस पर बात करनी चाहिए।

100
00:07:01,820 --> 00:07:05,820
[संगीत]
