1
00:00:02,800 --> 00:00:06,880
जय श्री राम सभी लोगों को। आशा करते हैं कि आप

2
00:00:06,880 --> 00:00:12,000
सभी कुशल पूर्वक होंगे और

3
00:00:12,000 --> 00:00:16,560
जैसा कि आज जानते हैं जो हमारा शेड्यूल था बुधवार

4
00:00:16,560 --> 00:00:21,120
की रात 9:00 बजे के आसपास हमारा

5
00:00:21,120 --> 00:00:25,280
सेशन है डे टू जो हमारी नीलिमा जी है

6
00:00:25,280 --> 00:00:29,360
वो हमें बीके का वो अलौकिक ज्ञान बता

7
00:00:29,360 --> 00:00:33,360
रही हैं जिसको प्राप्त करके बहुत सारे

8
00:00:33,360 --> 00:00:37,440
लोग वहां पर जाकर के बीके में फंस जाते हैं

9
00:00:37,440 --> 00:00:41,520
और

10
00:00:41,520 --> 00:00:45,760
एक तरीके से उनके मन में एक जहर आ जाता है। मैंने अभी एक दो दिन पूर्व

11
00:00:45,760 --> 00:00:50,080
ही एक मातृ शक्ति से बात की है। संभवत हम उसको डालेंगे

12
00:00:50,080 --> 00:00:52,320
यहां पर।

13
00:00:52,320 --> 00:00:56,480
वो जो मातृ शक्ति है उनसे बात

14
00:00:56,480 --> 00:01:02,480
कराई थी। उनके जो भरता है पतिदेव

15
00:01:03,120 --> 00:01:07,360
उन्होंने बात कराई थी कि आप एक बार मेरी पत्नी से बात करिए

16
00:01:07,360 --> 00:01:11,520
क्योंकि मेरी पत्नी जो है ब्रह्मा कुमारी के उसमें फस गई है।

17
00:01:11,520 --> 00:01:15,520
तो मैंने उन्हें एक बात बताई कि देखिए इट्स बेटर टू केयर

18
00:01:15,520 --> 00:01:19,520
देन क्योर। फिर भी मैं आप कह रहे हैं तो इसलिए

19
00:01:19,520 --> 00:01:23,190
मैं बात कर लेता हूं।

20
00:01:23,190 --> 00:01:27,680
[गला साफ़ करने की आवाज़]

21
00:01:27,680 --> 00:01:31,760
तो मैंने उनसे जब बात की तो वह पढ़ी लिखी

22
00:01:31,760 --> 00:01:36,640
लग रही थी बात करने से और समझदार भी लग रही थी जो

23
00:01:36,640 --> 00:01:40,720
पर जब जब टेक्निकली यानी कि लॉजिकली जब मैं ब्रह्मा

24
00:01:40,720 --> 00:01:45,440
कुमारी की बातों का खंडन कर देता था तो

25
00:01:45,440 --> 00:01:49,440
वो उस चीज को एक्सेप्ट करने को तैयार नहीं हो पा रही थी।

26
00:01:49,440 --> 00:01:54,320
उनको बार-बार इधर उधर की बात करनी पड़ रही थी या फिर वही मतानुज्ञान

27
00:01:54,320 --> 00:01:58,560
गृह स्थान कि भाई तुम्हारा यह है वो कुछ ऐसी कोशिशें वो लगी हुई

28
00:01:58,560 --> 00:02:02,560
थी कुल मिलाकर के उनको मानना नहीं था और करीब 38

29
00:02:02,560 --> 00:02:06,640
मिनट के आसपास उनसे बातचीत हुई है और बहुत अच्छी चीजें

30
00:02:06,640 --> 00:02:11,200
हैं उसमें जानने को तो मैं डालूंगा उस रिकॉर्डिंग को

31
00:02:11,200 --> 00:02:15,280
पर बात यह है कि अगर

32
00:02:15,280 --> 00:02:19,280
बात यह है कि अगर एक बार व्यक्ति फस जाता है तो उसका वापस आना

33
00:02:19,280 --> 00:02:23,440
बड़ा मुश्किल हो जाता है। तो हम यह जो कोर्स यहां पर रख रहे हैं वो

34
00:02:23,440 --> 00:02:27,440
इसलिए नहीं रख रहे कि हमें ब्रह्मा कुमारी का प्रचार करना है। कुछ लोग जो

35
00:02:27,440 --> 00:02:31,760
पहली बार देख रहे हैं तो उनको यह भी एक

36
00:02:31,760 --> 00:02:34,240
शायद

37
00:02:34,240 --> 00:02:38,240
भ्रांति हो रही है कि हम ब्रह्मा कुमारी

38
00:02:38,240 --> 00:02:42,800
का प्रचार कर रहे हैं। ब्रह्मा कुमारी का प्रचार नहीं है।

39
00:02:42,800 --> 00:02:46,960
ब्रह्मा कुमारी का ये वो सात दिन का कोर्स है। जब भी आप ब्रह्मा कुमारी से

40
00:02:46,960 --> 00:02:51,120
प्रश्न करेंगे तो उनको रटा दिया गया है कि

41
00:02:51,120 --> 00:02:55,280
भाई सात दिन का कोर्स करो उसके बाद कोई सवाल कर सकते हो। सात दिन का कोर्स

42
00:02:55,280 --> 00:02:59,440
नहीं किया तो आपको किसी भी सवाल का उत्तर समझ में नहीं आएगा। हालांकि वह

43
00:02:59,440 --> 00:03:03,680
बोगस है एक नंबर का जो कोर्स है कुछ नहीं है उसमें धुआ

44
00:03:03,680 --> 00:03:07,680
है फिर भी और उस बिना सात दिन का कोर्स

45
00:03:07,680 --> 00:03:12,560
किए भी हमारे पास बहुत सारे उत्तर है इस कुतर्क के पर फिर भी

46
00:03:12,560 --> 00:03:16,720
कि वो से डेज का कोर्स क्या होता है जिसके बाद जो है वहां व्यक्ति

47
00:03:16,720 --> 00:03:21,200
जो है पागल हो जाता है और फिर वो कुछ भी अपनी समझदारी

48
00:03:21,200 --> 00:03:25,360
को छोड़ के अंदर घुसता है और वो कुछ भी सुनना

49
00:03:25,360 --> 00:03:29,520
सोचना समझना ब्रह्मा कुमारी के बारे में रियलिटी बंद कर देता

50
00:03:29,520 --> 00:03:30,560
है। ताला लगा

51
00:03:30,560 --> 00:03:35,040
लेता है बुद्धि पर। एक बार मैंने एक वीडियो डाला था हमारे चैनल पर पढ़ा होगा

52
00:03:35,040 --> 00:03:39,120
कि बुद्धि बंद ताला बंद बुद्धि का

53
00:03:39,120 --> 00:03:44,640
ताला बंद चाबी गायब। यह ब्रह्मा कुमारी का हाल है।

54
00:03:44,640 --> 00:03:48,720
कुछ [गला साफ़ करने की आवाज़] लोग कहेंगे कि ब्रह्मा कुमारी और रामपाली एक जैसे हैं। तो व्यवहार में

55
00:03:48,720 --> 00:03:52,720
तो एक जैसा है मगर दोनों की जो उत्पत्ति हो रही है वो अलग-अलग है। इनके बुद्धि है

56
00:03:52,720 --> 00:03:57,200
ब्रह्मा कुमारी के मगर ताला बंद करके चाबी गायब कर दी है। और

57
00:03:57,200 --> 00:04:02,240
रामपालियों के बुद्धि है ही नहीं। इन दोनों में अंतर होता है।

58
00:04:02,240 --> 00:04:04,800
है ना?

59
00:04:04,800 --> 00:04:09,360
और किसी को भी अगर

60
00:04:09,360 --> 00:04:13,600
कोई वैचारिक मतभेद है हमसे तो और उसने माता जी के दूधों

61
00:04:13,600 --> 00:04:17,680
का पान किया है अपनी तो वो हमसे वैचारिक मतभेद के निमित्त

62
00:04:17,680 --> 00:04:21,680
चर्चा करे केवल कमेंट करके स्ान के भांति आचरण ना

63
00:04:21,680 --> 00:04:25,760
करे स्ान का भी अर्थ नहीं पता होगा रामपाली है लग रहा है ये

64
00:04:25,760 --> 00:04:29,760
व्यक्ति स्वान का अर्थ डिक्शनरी में ले देख लेना वही शिवराम आपटे वाली

65
00:04:29,760 --> 00:04:34,080
में जिसको आधार बना के तुम ब्रज का अर्थ बताते हो उल्टा उल्टा सीधा

66
00:04:34,080 --> 00:04:38,800
लोगों को ठीक है तो यह

67
00:04:38,800 --> 00:04:42,800
हो गया तो वो से डेज कोर्स है जो

68
00:04:42,800 --> 00:04:46,880
करने के बाद लोग वापस नहीं आते वहां जाते तो अपनी मर्जी से मगर

69
00:04:46,880 --> 00:04:51,040
वापस वहां की मर्जी वो वाला जो हिसाब किताब है वो से डेज का कोर्स

70
00:04:51,040 --> 00:04:55,040
यहां पर हमें नीलमा जी बता रही है कि उस सात दिनों में क्या पढ़ाया जाता है

71
00:04:55,040 --> 00:05:00,000
अब वो यहां पर आपको नई चीज क्या मिलने वाली है से डेज के कोर्स में

72
00:05:00,000 --> 00:05:06,000
से डेज के कोर्स में हमें नई चीज मिलने वाली है कि

73
00:05:08,000 --> 00:05:12,240
इसको डिलीट इसको बैन कर दो भाई इस व्यक्ति को इसको कोई तर्क

74
00:05:12,240 --> 00:05:16,370
पूर्ण या तथ्यात्मक बात नहीं करनी केवल कमेंट करना है एक इसको

75
00:05:16,370 --> 00:05:22,370
[गला साफ़ करने की आवाज़] शिवराज नाम का है इसको बैन कर दो तो

76
00:05:25,440 --> 00:05:29,440
यहां पे विशेष क्या है यह कोर्स आपको अन्य चैनल्स पर भी मिल जाएगा

77
00:05:29,440 --> 00:05:33,440
पर यहां पर विशेष यह है कि यहां पर

78
00:05:33,440 --> 00:05:37,840
हम आपको वह प्रश्न बताएंगे कि वह कौन-कौन से प्रश्न थे

79
00:05:37,840 --> 00:05:41,920
सतही स्तर पर जो जिस दिन आपको ये

80
00:05:41,920 --> 00:05:46,000
कोर्स कराया जा रहा था उस समय आप उनसे पूछ सकते थे जो आपने नहीं

81
00:05:46,000 --> 00:05:50,000
पूछे और अब आपकी यह मजबूरी हो गई है कि वो वाली बात है ना दिल लगा गधी

82
00:05:50,000 --> 00:05:54,000
से तो परी क्या चीज है तो अब हमने तो भैया इसको अपना मान लिया

83
00:05:54,000 --> 00:05:58,000
है तो अब हम यह कैसे मान ले कि यह गलत है ये वो वाली बात

84
00:05:58,000 --> 00:06:02,480
में अपना फंसते उसी दिन अगर ये प्रश्न पूछते आप तो जो लोग बुद्धि बुद्धिजीवी

85
00:06:02,480 --> 00:06:06,560
है वो प्रश्न पूछ सके तो इसलिए यह

86
00:06:06,560 --> 00:06:10,720
सीरीज है से डेज कोर्स वाली नीलमा जी आ चुकी है हमारे साथ जुड़ चुकी

87
00:06:10,720 --> 00:06:16,720
है मैं उन्हें स्टेज पर ले रहा हूं

88
00:06:16,960 --> 00:06:19,920
जय श्री राम

89
00:06:19,920 --> 00:06:24,000
श्री राम जय श्री राम जी जय श्री

90
00:06:24,000 --> 00:06:28,000
राम जी नीलमा जी आप कुशल मंगल है आप जय

91
00:06:28,000 --> 00:06:31,760
श्री राम नहीं बोल सकते ओम शांति

92
00:06:31,760 --> 00:06:37,760
हां अब शुरू करिए आप भगवान का आशीर्वाद है

93
00:06:38,080 --> 00:06:42,080
एक बार वहां से चालू कर दीजिए जो स्लोगन है ना ब्रह्मा कुमारी का वहां से एक बार चालू

94
00:06:42,080 --> 00:06:46,160
कर दीजिए आप कम बोलो मीठा बोलो

95
00:06:46,160 --> 00:06:50,080
धीरे बोलो

96
00:06:50,080 --> 00:06:54,400
यही उनका मेन स्लोगन है जी जी जी तो

97
00:06:54,400 --> 00:06:58,400
मतलब जितनी परमिशन है उसका एक स्लोगन है कम

98
00:06:58,400 --> 00:07:03,200
बोलो मीठा बोलो धीरे बोलो बोलो।

99
00:07:03,200 --> 00:07:07,360
ठीक है। तो आज डे टू है हमारा और शायद तीन लोक

100
00:07:07,360 --> 00:07:11,520
कौन से हैं और शिव का धाम कौन सा है? ये बताया जाएगा शायद।

101
00:07:11,520 --> 00:07:17,200
ऐसा है क्या? क्या बोल रहे हैं?

102
00:07:17,200 --> 00:07:21,360
तीन लोक तीन लोक कौन से हैं? और शिव

103
00:07:21,360 --> 00:07:25,680
का धाम कौन सा है? यही है क्या आज का चैप्टर? शायद या तो मेरा नेटवर्क

104
00:07:25,680 --> 00:07:29,760
खराब है या आपका मुझे थोड़ा रुक रुक के आवाज आई है।

105
00:07:29,760 --> 00:07:33,920
तीन लोग कौन से हैं? हां यही चैप्टर है। आप उसको लगाएंगे तब

106
00:07:33,920 --> 00:07:39,120
मैं समझाऊंगी। आप हां हां मैं लगा देता हूं। ऑपरेटर जी

107
00:07:39,120 --> 00:07:43,280
ऑपरेटर जी जरा वो इनका पीडीएफ ओपन करके

108
00:07:43,280 --> 00:07:47,520
यहां लगा दीजिए। जो पिछली बार हमने पढ़ा था।

109
00:07:47,520 --> 00:07:53,520
ब्रह्मा कुमारियों की तरह ही बैठे हो।

110
00:07:56,480 --> 00:08:02,480
और ऊपर

111
00:08:03,760 --> 00:08:08,080
मुझे चित्र दिखा दीजिए आप ये वाला नहीं है जो

112
00:08:08,080 --> 00:08:12,480
दो पीडीएफ है उनमें से एक है एक नहीं है हां आप वो

113
00:08:12,480 --> 00:08:16,480
एक मिनट हां यही यही यही है तीन लोग यही है यही

114
00:08:16,480 --> 00:08:19,360
है निकल गया

115
00:08:19,360 --> 00:08:25,040
नीचे जाइए आप सिर्फ सिर्फ इस पे चित्र रखिए पढ़ने में फिर

116
00:08:25,040 --> 00:08:30,480
इसको जूम कर दीजिए चित्र को आप जी

117
00:08:30,480 --> 00:08:34,560
हां सिर्फ स्क्रीन पे ये चित्र रखिए हां जी अब इसमें

118
00:08:34,560 --> 00:08:39,520
आप देख रहे हैं तीन लोक लिखा हुआ है

119
00:08:39,520 --> 00:08:43,680
जैसा कि नीचे देख रहे हैं आप तो यह है मूल वचन

120
00:08:43,680 --> 00:08:49,680
जहां आप रहते हैं एक मिनट एक मिनट जरा अपना

121
00:09:03,520 --> 00:09:06,320
जी

122
00:09:06,320 --> 00:09:10,320
आपको इसमें सब लिखा हुआ मिल जाएगा लेकिन आप अपने प्रश्न लिखते रहिएगा

123
00:09:10,320 --> 00:09:14,400
बीचबीच में जो भी आपके प्रश्न और प्रश्न आप बाद में करेंगे तो

124
00:09:14,400 --> 00:09:18,720
मुझे सुविधा रहेगी उत्तर देंगे जी जो

125
00:09:18,720 --> 00:09:24,000
नीचे है सबसे नीचे पृथ्वी लोक है मूल वतन

126
00:09:24,000 --> 00:09:28,160
जहां पर हम लोग रहते हैं हम और आप सब पूरी सृष्टि नीचे जो

127
00:09:28,160 --> 00:09:32,400
है मनुष्य सृष्टि रूपी रंग मंच को मूल मूल

128
00:09:32,400 --> 00:09:36,640
वतन कहते हैं अच्छा जहां पृथ्वी है और जहां आकाश

129
00:09:36,640 --> 00:09:41,040
तक आप देख सकते हो वो है मूल वतन और सूक्ष्म

130
00:09:41,040 --> 00:09:45,360
वतन जहां पे ब्रह्मा विष्णु शंकर तीनों निवास करते हैं उसे सूक्ष्म

131
00:09:45,360 --> 00:09:49,360
वतन कहते हैं जो यह रेड रेड कलर का पूरा ओरा

132
00:09:49,360 --> 00:09:53,600
देख रहे हैं आप। यह परमधाम है और परमधाम

133
00:09:53,600 --> 00:09:58,160
भगवान शिव का धाम है जिसे शांति धाम,

134
00:09:58,160 --> 00:10:02,160
परमधाम अनेकानेक नाम से जाना जाता

135
00:10:02,160 --> 00:10:06,160
है। अनेक धर्मों में इसे अनेक नामों से पुकारा जाता है जिसे

136
00:10:06,160 --> 00:10:09,680
मुक्ति धाम भी कहते हैं।

137
00:10:09,680 --> 00:10:13,920
हम अभी इन तीन लोकों की यात्रा अगर आप देखेंगे

138
00:10:13,920 --> 00:10:18,160
तो यह ब्रह्मा कुमारी के मेडिटेशन द्वारा हम

139
00:10:18,160 --> 00:10:18,960
इसका अनुभव

140
00:10:18,960 --> 00:10:23,280
आपको दिन प्रतिदिन रोज ही कराते हैं। यह मेडिटेशन

141
00:10:23,280 --> 00:10:27,440
मैं सेवन डेज कोर्स के बाद आपको कराऊंगी। जहां पर नीचे

142
00:10:27,440 --> 00:10:31,840
पृथ्वी लोक पर बैठकर व्यक्ति अपने कर्म करता है।

143
00:10:31,840 --> 00:10:35,920
अपने स्थूल कर्मों के लिए अपने जन्म को भोगने

144
00:10:35,920 --> 00:10:40,000
के लिए पृथ्वी पर परमधाम से आत्मा आती है।

145
00:10:40,000 --> 00:10:44,000
परमधाम में कैसे रहती है आत्मा? परमधाम से आती है। परमधाम

146
00:10:44,000 --> 00:10:48,000
यानी कि जो सबसे ऊपर ब्रह्म लोक है। ब्रह्म कोई ब्रह्म

147
00:10:48,000 --> 00:10:52,160
लोक कहते हैं। कोई परमधाम कहते हैं, कोई शांति धाम कहते हैं। कोई

148
00:10:52,160 --> 00:10:56,320
मुक्ति धाम कहते हैं इनको। तो वहां से जब आत्मा नीचे आती

149
00:10:56,320 --> 00:11:00,320
है तो नीचे की यात्रा में वह फिर पृथ्वी पर आकर मूल वतन

150
00:11:00,320 --> 00:11:04,560
में यहां पृथ्वी लोक में अपना कर्म करती है। इस शरीर

151
00:11:04,560 --> 00:11:08,960
के द्वारा इस शरीर में आत्मा निवास करती है।

152
00:11:08,960 --> 00:11:12,960
मां के गर्भ में आत्मा निवास करती है। तो वो नीचे इस पृथ्वी

153
00:11:12,960 --> 00:11:17,520
लोक में पूरा भ्रमण करती है। कर्म करती है।

154
00:11:17,520 --> 00:11:22,160
यहां से जैसे आप ये इंद्रधनुष जैसा देख रहे हैं। यह तीन लोक

155
00:11:22,160 --> 00:11:26,320
के बीच के लोक है। सूक्ष्म वतन जिसमें ब्रह्मा

156
00:11:26,320 --> 00:11:30,560
जी, विष्णु और शंकर तीनों अपने सूक्ष्म शरीर में विराजित

157
00:11:30,560 --> 00:11:34,160
है। सबसे ऊपर आप जाएंगे तो ये जो परमधाम

158
00:11:34,160 --> 00:11:38,320
में आप सिजरा देख रहे हैं। सिजरा कहते हैं शिव भगवान

159
00:11:38,320 --> 00:11:42,640
के साथ आत्माओं का सिजरा। सिजरा मतलब झाड़। झाड़

160
00:11:42,640 --> 00:11:46,640
मतलब वृक्ष। वृक्ष मतलब जिसमें कल्प वृक्ष दिखाया है। जैसे

161
00:11:46,640 --> 00:11:50,800
हमारे बैज में भी वह कल्प वृक्ष दिखाते हैं। कल्प वृक्ष का मतलब

162
00:11:50,800 --> 00:11:55,040
है यह दुनिया का उल्टा वट वृक्ष जैसे वृक्ष

163
00:11:55,040 --> 00:11:59,120
का बीज जो होता है वो हमेशा ही पृथ्वी के

164
00:11:59,120 --> 00:12:03,120
तले में होता है। नीचे होता है। लेकिन इस सृष्टि रूपी

165
00:12:03,120 --> 00:12:07,120
रंगमंच का जो बीज है परमात्मा वो

166
00:12:07,120 --> 00:12:11,520
ऊपर की तरफ है। और पूरा झाड़ नीचे की तरफ है। झाड़

167
00:12:11,520 --> 00:12:16,080
माना वृक्ष मतलब हम मनुष्य आत्माओं का वृक्ष उल्टा

168
00:12:16,080 --> 00:12:20,320
मतलब हम उल्टे लटके हुए हैं वहां पे तो वह आत्मा नीचे आती

169
00:12:20,320 --> 00:12:24,320
है और फिर आकर के हम इस पृथ्वी लोक में जन्म बाय जन्म

170
00:12:24,320 --> 00:12:28,320
अपने जन्म बदलते रहते हैं और मनुष्य अपना कर्म करता

171
00:12:28,320 --> 00:12:32,880
रहता है। मेडिटेशन जब आप करते हैं ब्रह्मा कुमारी के मेडिटेशन

172
00:12:32,880 --> 00:12:37,120
में हम आत्मा का वही स्वधर्म याद दिला के

173
00:12:37,120 --> 00:12:41,120
नीचे से ऊपर तक की यात्रा उसे सूक्ष्म स्वरूप में कराते हैं।

174
00:12:41,120 --> 00:12:45,360
कमेंट्री के द्वारा अनुभव के द्वारा हम यहीं पर अनुभव

175
00:12:45,360 --> 00:12:49,440
करते हैं कि भगवान शिव परमधाम में रहते हैं। परमधाम

176
00:12:49,440 --> 00:12:53,600
के निवासी हैं। तो जब मैं मेडिटेशन कराती हूं आपको या

177
00:12:53,600 --> 00:12:58,000
मैं आपको स्वधर्म याद दिलाती हूं आत्मा का तो आत्मा का स्वधर्म

178
00:12:58,000 --> 00:13:02,640
सबसे पहले है शांति। तो आप परमधाम में जो देख रहे हैं वो

179
00:13:02,640 --> 00:13:06,720
जो लाल रंग का परमधाम नजर आ रहा है आपको वहां पर भगवान

180
00:13:06,720 --> 00:13:10,960
शिव के साथ सभी आत्माएं शांति में निवास करती हैं। इसीलिए

181
00:13:10,960 --> 00:13:14,960
हम कहते हैं कि आत्मा का स्वधर्म शांत है। तो

182
00:13:14,960 --> 00:13:19,040
वो शांति में रहती है। उसका सब चीजों का टाइम लिमिट है।

183
00:13:19,040 --> 00:13:23,040
कितने टाइम वो शांति में रहती है, कितने टाइम वो सूक्ष्म वतन में रहती है और

184
00:13:23,040 --> 00:13:27,200
कितने टाइम वो नीचे आती है। तो मेडिटेशन के द्वारा हम आपको इसका

185
00:13:27,200 --> 00:13:31,200
अनुभव कराते हैं तीन लोकों का। जब हम कहते

186
00:13:31,200 --> 00:13:35,280
हैं ब्रह्मा कुमार कुमारियां कहते हैं या ब्रह्मा कुमारी संस्था कहती

187
00:13:35,280 --> 00:13:39,440
है कि परमात्मा है और परमात्मा के अस्तित्व को

188
00:13:39,440 --> 00:13:43,680
हम अनुभव की बात करते हैं जब आपसे कि हम अनुभव करते

189
00:13:43,680 --> 00:13:47,680
हैं तो यह अनुभव इन तीन लोकों की यात्रा के थ्रू ही किया जाता

190
00:13:47,680 --> 00:13:51,760
है। जैसे नीचे बैठ के जब हम ध्यान करते हैं परमात्मा का

191
00:13:51,760 --> 00:13:56,560
तो सबसे पहले आत्मा का स्वधर्म याद दिलाते हैं। मैं आत्मा हूं।

192
00:13:56,560 --> 00:14:00,560
परमधाम निवासी हूं। जैसे मैं दो मिनट आपको मेडिटेशन

193
00:14:00,560 --> 00:14:04,480
कराना चाहूंगी। आप करेंगे शिव जी जी जी तो ब्रह्मा

194
00:14:04,480 --> 00:14:08,480
कुमार इसका मेडिटेशन करते हैं हम। तो ये जो दोनों हाथ है

195
00:14:08,480 --> 00:14:12,640
दोनों हाथों की उंगलियों को आप आपस में ऐसे जोड़ ले बंद कर

196
00:14:12,640 --> 00:14:16,640
ले और इन्हें ऐसे करके आप ऐसे गोद में रख के इसे

197
00:14:16,640 --> 00:14:20,800
हाथ को बैठ जाए और खुली आंखों से ही आप

198
00:14:20,800 --> 00:14:24,880
जो मैं चिंतन कराती हूं उस चिंतन को आप करिएगा और इसी

199
00:14:24,880 --> 00:14:28,960
अनुभव को हम रोज रोज जब करते हैं तो हम रोज उस

200
00:14:28,960 --> 00:14:33,280
अनुभव को परमात्मा तक जोड़ने के लिए एक साधन

201
00:14:33,280 --> 00:14:37,280
मात्र एक सीढ़ी मात्र बनाते हैं। जैसे मैं

202
00:14:37,280 --> 00:14:41,600
अब आपको कमेंट्री देती हूं तो वो चिंतन आप करिएगा

203
00:14:41,600 --> 00:14:45,920
और ये चिंतन रोज रोज के करने से आप अभ्यस्त हो जाएंगे और इस अभ्यास

204
00:14:45,920 --> 00:14:51,920
को करने से परमात्मा का आवरण आपको मिलेगा।

205
00:14:53,520 --> 00:14:58,080
तो विचार करिएगा आप इस चित्र को देखते हुए। ओम

206
00:14:58,080 --> 00:15:01,040
शांति।

207
00:15:01,040 --> 00:15:05,680
इसको आपको रिपीट नहीं करना चिंतन करना है। मैं

208
00:15:05,680 --> 00:15:08,160
आत्मा

209
00:15:08,160 --> 00:15:12,320
परमधाम निवासी शांति धाम में

210
00:15:12,320 --> 00:15:17,520
रहने वाली परमपिता शिव की संतान

211
00:15:17,520 --> 00:15:22,480
सर्वशक्तिमान परमात्मा की मीठी

212
00:15:22,480 --> 00:15:24,640
मीठी

213
00:15:24,640 --> 00:15:29,200
इतनी सारी शक्तियों से परिपूर्ण परमात्मा

214
00:15:29,200 --> 00:15:31,600
की

215
00:15:31,600 --> 00:15:35,600
हर प्रकार की लाइफ से

216
00:15:35,600 --> 00:15:39,840
सुसज्जित जैसे मैं सर्वशक्तिमान हूं। मैं

217
00:15:39,840 --> 00:15:44,960
आत्मा शांति के सागर की संतान हूं।

218
00:15:44,960 --> 00:15:49,440
मैं आत्मा पावन पवित्र हूं।

219
00:15:49,440 --> 00:15:53,840
मैं आत्मा ज्योति बिंदु हूं। मैं आत्मा ज्योति

220
00:15:53,840 --> 00:15:58,400
बिंदु स्वरूप परमात्मा का अंश परमधाम

221
00:15:58,400 --> 00:16:02,800
से नीचे की तरफ यहां इस पृथ्वी पर इस रंगमंच पर

222
00:16:02,800 --> 00:16:07,280
इस शरीर में विराजित हूं। इस शरीर की भी भकुटी

223
00:16:07,280 --> 00:16:09,520
के अंदर

224
00:16:09,520 --> 00:16:13,600
इस मस्तक के बीचो बीच मैं आत्मा

225
00:16:13,600 --> 00:16:17,840
सुसज्जित हूं। अपने माथे में, अपनी भकुटी में

226
00:16:17,840 --> 00:16:22,000
और इस भकुटी से सूक्ष्म वतन की तरफ

227
00:16:22,000 --> 00:16:26,720
अपने इस शरीर से निकलते हुए जा रही हूं।

228
00:16:26,720 --> 00:16:31,200
सूक्ष्म वतन में जहां ब्रह्मा विष्णु शंकर निवास

229
00:16:31,200 --> 00:16:35,200
करते हैं। इस शरीर के भान को

230
00:16:35,200 --> 00:16:39,280
तोड़ते हुए शरीर की सभी कर्मेंद्रियों

231
00:16:39,280 --> 00:16:43,680
का चिंतन छोड़ते हुए सभी कर्मेंद्रियों

232
00:16:43,680 --> 00:16:47,840
को भूलते हुए अशरीरी आत्मा मैं

233
00:16:47,840 --> 00:16:52,880
परमधाम की तरफ जा रही हूं।

234
00:16:52,880 --> 00:16:56,880
धीरे धीरे मैं आत्मा अपने ज्योति

235
00:16:56,880 --> 00:17:01,440
बिंदु परमात्मा शिव जो सभी आत्माओं के

236
00:17:01,440 --> 00:17:04,800
परम पिता हैं।

237
00:17:04,800 --> 00:17:09,520
उस यात्रा की तरफ अग्रसर हो रही हूं। मैं

238
00:17:09,520 --> 00:17:13,840
आत्मा परमधाम में पहुंचती

239
00:17:13,840 --> 00:17:18,160
हूं। और ज्योति बिंदु का स्वरूप धारण

240
00:17:18,160 --> 00:17:22,240
करती हूं। अपने सूक्ष्म शरीर को

241
00:17:22,240 --> 00:17:24,880
भी इस सूक्ष्म वतन

242
00:17:24,880 --> 00:17:29,520
में ही भूल जाती हूं। अब मैं आत्मा

243
00:17:29,520 --> 00:17:33,280
बिंदु स्वरूप होते हुए

244
00:17:33,280 --> 00:17:37,520
इस लाल लाल रोशनी में परमात्मा शिव

245
00:17:37,520 --> 00:17:42,720
के सामने विराजित हो जाती हूं।

246
00:17:42,720 --> 00:17:46,960
यहां इतनी सुंदर शांति है। इस

247
00:17:46,960 --> 00:17:51,040
परमधाम में इस ब्रह्म तत्व में इस परमात्मा के

248
00:17:51,040 --> 00:17:55,200
चारों तरफ फैली हुई रोशनी में मैं शांति

249
00:17:55,200 --> 00:17:58,800
का अनुभव करती हूं।

250
00:17:58,800 --> 00:18:03,120
मैं मुक्ति का अनुभव करती हूं। मैं परमात्मा

251
00:18:03,120 --> 00:18:08,080
से सर्व शक्तियां समेट रही हूं।

252
00:18:08,080 --> 00:18:13,200
अपने अंतःकरण को पवित्र बना रही हूं।

253
00:18:13,200 --> 00:18:17,680
इस पवित्रता की किरणों से भरते हुए

254
00:18:17,680 --> 00:18:22,320
शक्ति का स्वरूप धारण करते हुए

255
00:18:22,320 --> 00:18:26,800
मैं आत्मा नीचे की तरफ फिर से वही

256
00:18:26,800 --> 00:18:28,960
पुन

257
00:18:28,960 --> 00:18:33,280
दो रही हूं। फिर वही सूक्ष्म शरीर धारण

258
00:18:33,280 --> 00:18:37,280
करती हूं। और फिर से नीचे की तरफ बैठे

259
00:18:37,280 --> 00:18:41,520
इस शरीर में प्रवेश करती हूं।

260
00:18:41,520 --> 00:18:46,000
मेरा यह अभ्यास,

261
00:18:46,000 --> 00:18:50,160
मेरा यह चिंतन

262
00:18:50,160 --> 00:18:54,400
लेकर मैं परमात्मा की सर्व शक्तियां महसूस करते

263
00:18:54,400 --> 00:18:59,040
हुए इस शरीर को वाइब्रेशन दे रही हूं।

264
00:18:59,040 --> 00:19:04,080
और शरीर में उस शक्ति को फील कर रही हूं। ओम

265
00:19:04,080 --> 00:19:06,640
शांति

266
00:19:06,640 --> 00:19:12,640
ओम शांति ओम शांति

267
00:19:13,600 --> 00:19:17,760
तो शिवश जी जी ये अनुभव तीन लोक

268
00:19:17,760 --> 00:19:22,240
का है जो हम मेडिटेशन के द्वारा बताते हैं।

269
00:19:22,240 --> 00:19:26,400
और इसी से हम विश्व शांति की बात करते हैं। यहां

270
00:19:26,400 --> 00:19:30,960
हम से परमात्मा के चिंतन की बात करते हैं

271
00:19:30,960 --> 00:19:34,960
और हम रोज ही यह मेडिटेशन सभी सेंटर्स पर

272
00:19:34,960 --> 00:19:39,040
कराते हैं। तो और मैं आपको कोर्स की बुक

273
00:19:39,040 --> 00:19:43,520
दूंगी। रोज आपको इस कोर्स की बुक में से इसको पढ़ना है।

274
00:19:43,520 --> 00:19:47,680
जो इसके चारों तरफ लिखा हुआ है। हमने डिटेलिंग दी है उसको आप पढ़

275
00:19:47,680 --> 00:19:51,840
सकते हैं। यही आज का चैप्टर है आज क्योंकि मैंने आपको

276
00:19:51,840 --> 00:19:56,000
राजयोग कराया है। तो इसके बाद में आप शांति

277
00:19:56,000 --> 00:20:02,000
में हूं तो ज्यादा बात नहीं कर। ओम शांति।

278
00:20:02,000 --> 00:20:06,240
अरे तो मैं सवाल नहीं करूंगा। अब आप बात करिए। सवाल

279
00:20:06,240 --> 00:20:10,400
करिए तो मैं आंसर। अच्छा अच्छा अच्छा अच्छा अच्छा। नहीं मैंने

280
00:20:10,400 --> 00:20:14,560
कहा कि मेरा चैप्टर क्लोज हो रहा है क्या? हो गया

281
00:20:14,560 --> 00:20:19,120
मेरा चैप्टर क्लोज। [हंसी]

282
00:20:19,120 --> 00:20:25,120
मेरे को तो परमिशन हंसने की भी नहीं है ना इस समय। आप तो हस

283
00:20:25,200 --> 00:20:29,280
मैं समझ बताइए सबसे पहली बात है कि

284
00:20:29,280 --> 00:20:32,880
ये

285
00:20:32,880 --> 00:20:36,640
ब्रह्मा विष्णु महेश को किसने बनाया?

286
00:20:36,640 --> 00:20:42,640
देखिए ब्रह्मा विष्णु महेश भी परमात्मा शिव की ही रचना है।

287
00:20:43,920 --> 00:20:47,920
परमात्मा शिव ने ब्रह्मा विष्णु महेश को बनाया

288
00:20:47,920 --> 00:20:52,560
है। हां जी। यानी ब्रह्मा विष्णु महेश भी नष्ट होते हैं।

289
00:20:52,560 --> 00:20:57,200
ब्रह्मा विष्णु महेश अलग है। शिव परमात्मा निराकार अलग है।

290
00:20:57,200 --> 00:21:03,040
नहीं नहीं मैं कह रहा हूं ब्रह्मा विष्णु महेश नष्ट होते हैं या नहीं?

291
00:21:03,040 --> 00:21:07,120
ब्रह्मा विष्णु महेश नष्ट होते हैं नहीं ये इस तरह से तो

292
00:21:07,120 --> 00:21:11,200
प्रश्न अलग ही हो गया कि नष्ट होने में मैं क्या

293
00:21:11,200 --> 00:21:15,600
जवाब दूं। मेरे पास इसका तो कोई जवाब नहीं है। लेकिन हां सभी

294
00:21:15,600 --> 00:21:19,760
आते और जाते हैं। शरीर छोड़ते और लेते हैं। नहीं ब्रह्मा

295
00:21:19,760 --> 00:21:24,000
विष्णु महेश तो शरीर धारण नहीं वो तो वो यहां पर परकाया प्रवेश इत्यादि

296
00:21:24,000 --> 00:21:28,960
करते हैं मगर जो सूक्ष्म संसार है जो आपका सूक्ष्म लोक

297
00:21:28,960 --> 00:21:33,680
वहां तो ब्रह्मा विष्णु महेश सदैव एक्सिस्ट कर रहे हैं ना हां जी

298
00:21:33,680 --> 00:21:39,680
तो उनको कोई समय ऐसा था जब ब्रह्मा विष्णु महेश नहीं थे

299
00:21:41,200 --> 00:21:46,080
नहीं ऐसा नहीं है हर बार ही आते हैं वो रूप बदल के आते हैं बार-बार

300
00:21:46,080 --> 00:21:50,080
नहीं नहीं मतलब कभी ऐसा था कि वो नहीं थे। ऐसा नहीं

301
00:21:50,080 --> 00:21:54,160
था। वो हर बार थे। यानी कि वो यानी कि वो

302
00:21:54,160 --> 00:21:58,800
सदा सर्वदा रहने वाले ब्रह्मा विष्णु महेश हां जी। हां जी। अच्छा।

303
00:21:58,800 --> 00:22:02,800
और विष्णु जी है वो सर्वव्यापक भी है। वो पालन

304
00:22:02,800 --> 00:22:06,800
करता है। सर्वव्यापक नहीं है। वो पालन करता है। पालते हैं।

305
00:22:06,800 --> 00:22:11,040
इस सृष्टि को प्रकृति को पालते हैं। पालन करता है। नहीं विष्णु

306
00:22:11,040 --> 00:22:16,400
का मतलब विष्णु का मतलब तो सर्वव्यापक हो गया ना। व्यापक विष्णु

307
00:22:16,400 --> 00:22:20,480
आप इससे अगले वाला चित्र दिखाइए तो मैं आप उसमें ब्रह्मा विष्णु शंकर

308
00:22:20,480 --> 00:22:23,360
का हम क्लियर करेंगे

309
00:22:23,360 --> 00:22:27,440
त्रिदेवों का त्रिदेवों का चित्र निकाल लीजिए उसप जाने की आवश्यकता नहीं

310
00:22:27,440 --> 00:22:33,200
है ये ज्यादा क्लियरली मैं बता पाऊंगी

311
00:22:33,200 --> 00:22:37,760
आप ब्रह्मा विष्णु शंकर का इसमें तीसरा ही चित्र है यही तीसरा चित्र है

312
00:22:37,760 --> 00:22:42,480
थोड़ा ऑपरेटर्स को बोल के करा लीजिए इसमें तो

313
00:22:42,480 --> 00:22:47,440
देखिए अगला पेज क्या ब्रह्मा विष्णु शंकर का ही है

314
00:22:47,440 --> 00:22:52,800
कर्तव्य परमात्मा के कर्तव्य वाला निकालिए

315
00:22:52,800 --> 00:22:57,040
समझ गए तो इस पर आप आगे आगे

316
00:22:57,040 --> 00:23:01,280
चलिए इस पर ज्यादा पूछेंगे तो ज्यादा अच्छा रहेगा आगे परमात्मा के दिव्य

317
00:23:01,280 --> 00:23:05,440
कर्तव्य लिखा होगा चित्र के पास थोड़ा देख लीजिए ये नहीं

318
00:23:05,440 --> 00:23:10,160
आप चित्र को देखिए लिखावट को नहीं आगे चलिए और आगे चलिए

319
00:23:10,160 --> 00:23:14,240
ब्रह्मा विष्णु शंकर परमात्मा के दिव्य कर्तव्य लिखिए

320
00:23:14,240 --> 00:23:19,120
ऐसा फोटो आएगा ऐसा हां जी ये जी

321
00:23:19,120 --> 00:23:23,040
आप पूछिए आप

322
00:23:23,040 --> 00:23:27,200
अ जो परमात्मा है वो

323
00:23:27,200 --> 00:23:31,200
थोड़ा ऊपर कर लीजिए चित्र को ऊपर कर लीजिए चित्र को थोड़ा और थोड़ा और

324
00:23:31,200 --> 00:23:35,280
बस बस बस बस जो परमात्मा का लोक है वो सबसे ऊपर वाला

325
00:23:35,280 --> 00:23:39,600
लोक है हां जी वो शिव बाबा है शिव धाम

326
00:23:39,600 --> 00:23:44,160
शिव बाबा का लोक हां जी तो शिव शिव बाबा बाबा स्वयं सर्वव्यापक

327
00:23:44,160 --> 00:23:48,400
नहीं है। नहीं सर्वव्यापक नहीं है वो।

328
00:23:48,400 --> 00:23:52,400
अच्छा वो कार्य क्या-क्या करते हैं? मतलब उनका ब्रह्मा

329
00:23:52,400 --> 00:23:56,480
द्वारा सृष्टि की स्थापना करते हैं। दिव्य

330
00:23:56,480 --> 00:24:00,560
कर्तव्य दिखाए। ब्रह्मा ब्रह्मा द्वारा करते हैं। वो या ब्रह्मा ही

331
00:24:00,560 --> 00:24:04,720
करते हैं। वो कह देते हैं। द्वारा शिव इस सृष्टि की स्थापना करते

332
00:24:04,720 --> 00:24:08,000
हैं। करवाते हैं या करते हैं?

333
00:24:08,000 --> 00:24:12,000
करते हैं करवाते नहीं है करते हैं तो क्या वो खुद

334
00:24:12,000 --> 00:24:16,320
घुसते हैं क्या ब्रह्मा जी के अंदर हां जी खुद घुसते हैं

335
00:24:16,320 --> 00:24:20,480
भगवान शिव परमात्मा के अंदर मतलब परमात्मा शिव

336
00:24:20,480 --> 00:24:25,520
ब्रह्मा के अंदर आकर परताया प्रवेश करके कार्य कराते हैं

337
00:24:25,520 --> 00:24:29,520
सृष्टि की रचना यानी कि

338
00:24:29,520 --> 00:24:33,520
स्थापना इत्यादि अच्छा वैसे अलग से परमपिता का चैप्टर आगे

339
00:24:33,520 --> 00:24:37,680
आएगा ना वो नहीं आप इस पर चिंतन करिए क्योंकि आपने

340
00:24:37,680 --> 00:24:41,920
मुझसे ब्रह्मा विष्णु शंकर पूछा तो एक एक करके कर लेते हैं। हां हां हां

341
00:24:41,920 --> 00:24:45,920
तो अभी मैं यह पूछ रहा हूं कि ईश्वर

342
00:24:45,920 --> 00:24:51,120
जो आप बता रहे हो जो सबसे ऊपर वाले लोक में बैठा है वो

343
00:24:51,120 --> 00:24:55,280
सर्वव्यापक तो है नहीं जी तो उसका कंट्रोल कैसे होता

344
00:24:55,280 --> 00:24:59,440
है सब जगह सब जगह उसका कंट्रोल है या नहीं तो मैं इसका

345
00:24:59,440 --> 00:25:03,440
आंसर दे दूं कंट्रोल है कंट्रोल है

346
00:25:03,440 --> 00:25:07,680
सब जगह जैसे ये चित्र देख रहे हैं आप जो निकलवाया मैंने

347
00:25:07,680 --> 00:25:11,760
तो इसमें ब्रह्मा द्वारा स्थापना है विष्णु द्वारा पालना है

348
00:25:11,760 --> 00:25:15,760
और शंकर द्वारा महाविनाश है। तो यह हमने चित्र दिखाया। आप

349
00:25:15,760 --> 00:25:19,840
चित्र को ध्यान से देखिए श्रीमान जी और समझिए मैं क्या कहना चाह

350
00:25:19,840 --> 00:25:23,120
रही हूं। आप उसमें से क्वेश्चन करिए जो

351
00:25:23,120 --> 00:25:27,440
भी करना है। ये ब्रह्मा जी बैठे हैं। इनके अंदर भगवान श्रीमान

352
00:25:27,440 --> 00:25:32,160
मैं मैं क्वेश्चन इसलिए कर रहा हूं कि ना तो ब्रह्मा जी सर्वव्यापक हैं

353
00:25:32,160 --> 00:25:36,560
ना विष्णु जी सर्वव्यापक हैं ना महेश जी सर्वव्यापक हैं।

354
00:25:36,560 --> 00:25:40,720
तो फिर ईश्वर का कंट्रोल हो कैसे रहा? ईश्वर भी परमात्मा

355
00:25:40,720 --> 00:25:45,360
भी सर्व्यापक नहीं है। तो परमात्मा का कंट्रोल लेखराज

356
00:25:45,360 --> 00:25:49,520
दादा लेखराज के अंदर प्रवेश किया और पूरी

357
00:25:49,520 --> 00:25:53,520
सृष्टि को ज्ञान दिया। नहीं नहीं वो ठीक है वो अच्छी बात

358
00:25:53,520 --> 00:25:57,760
है वो आप बता रही मैं कह रहा हूं पूरी सृष्टि में उसका होल्ड

359
00:25:57,760 --> 00:26:02,320
है कि नहीं? होल्ड है तो कैसे है? क्योंकि वो तो एक जगह पे है। होल्ड है

360
00:26:02,320 --> 00:26:06,320
कर्तव्य करवाते हैं भगवान। नहीं कर्तव्य

361
00:26:06,320 --> 00:26:10,800
करवाते अच्छी बात है। वो हर जगह पर उनकी उनका वो है पहुंच

362
00:26:10,800 --> 00:26:14,960
रीच है कि नहीं हर जगह पर हां क्यों नहीं है रीच है

363
00:26:14,960 --> 00:26:18,960
तो वो कैसे है क्योंकि वो तो एक ही जगह है वो तो

364
00:26:18,960 --> 00:26:23,040
जहां चाहे वहां कहीं भी किसी के भी पास आकर के कर सकता है ना

365
00:26:23,040 --> 00:26:27,040
करा सकता है ना नहीं करवा सकता है वो मैं अलग बात

366
00:26:27,040 --> 00:26:31,040
है जैसे मान लीजिए कि कहीं

367
00:26:31,040 --> 00:26:36,240
पर कुछ ऐसा हो रहा है जो नहीं होना चाहिए

368
00:26:36,240 --> 00:26:38,400
ठीक है तो उसको

369
00:26:38,400 --> 00:26:42,560
रोकना है, नियंत्रण करना है। उसे नियंत्रित करना है। तो परमात्मा

370
00:26:42,560 --> 00:26:46,960
जो है अपने किसी एक लोक में बैठा हुआ है।

371
00:26:46,960 --> 00:26:51,040
तो उसको वो वहां उड़ के जाएगा या जैसे भी ट्रांसमिट हो के

372
00:26:51,040 --> 00:26:55,040
जाएगा मगर वो टेलीपोट होगा। सबसे पहली बात

373
00:26:55,040 --> 00:26:59,040
तो है कि वहां जो अनिष्ट होने वाला है वो उसको ज्ञात कैसे

374
00:26:59,040 --> 00:27:03,360
हुआ? उसको पता कैसे चलेगा कि वहां अनिष्ट होने वाला है।

375
00:27:03,360 --> 00:27:07,840
हां। सर्वज्ञ है ना? सर्वज्ञ है ना भगवान तो सर्वज्ञ

376
00:27:07,840 --> 00:27:12,000
के लिए भी उसको सब जगह होना पड़ेगा ना सर्वज्ञ वो इसीलिए

377
00:27:12,000 --> 00:27:16,800
है कि वह सर्व्यापक है जैसे सर्वज्ञ है जैसे मान लीजिए

378
00:27:16,800 --> 00:27:20,880
मैं अगर सर्वज्ञ है सर्व्यापक और सर्वज्ञ में फर्क है मैं

379
00:27:20,880 --> 00:27:25,200
बता रहा हूं ना फर्क है मालूम है मगर सर्वज्ञ होने के लिए सर्व्यापक

380
00:27:25,200 --> 00:27:29,520
आवश्यक है। जैसे कि मेरा मन अमेरिका तक सोच

381
00:27:29,520 --> 00:27:33,920
सकता है कि अमेरिका में इस समय कुछ हो रहा होगा

382
00:27:33,920 --> 00:27:38,480
वह फ्री है। मगर मैं यह जान नहीं सकता ऑब्जेक्टिवली

383
00:27:38,480 --> 00:27:42,480
कि वहां एक्चुअल में इस समय कहां कौन से शहर में क्या हो रहा है क्योंकि

384
00:27:42,480 --> 00:27:46,560
मैं वहां पर नहीं हूं। मगर सर्वज्ञ यदि मुझे होना है कि मुझे

385
00:27:46,560 --> 00:27:50,720
अमेरिका में होने वाली घटनाओं का भी बिल्कुल प्रॉपर

386
00:27:50,720 --> 00:27:53,520
ज्ञात हो तो मेरा वहां पास

387
00:27:53,520 --> 00:27:57,600
होना भी जरूरी है। यानी कि अगर मेरे को अगर वहां की

388
00:27:57,600 --> 00:28:03,600
नॉलेज मिल रही है तो मुझे वहां पर होना जरूरी है वो नॉलेज प्राप्त करने के लिए।

389
00:28:05,200 --> 00:28:09,200
परमात्मा सर्वव्यापक ही सर्वज्ञ हो सकता है। परमात्मा को वहां होने की जरूरत

390
00:28:09,200 --> 00:28:13,280
नहीं है। परमा ठीक है। तो ये तो एक क्वेश्चन छूट

391
00:28:13,280 --> 00:28:17,440
रहा है कि परमात्मा वहां पर होने की जरूरत नहीं। फिर उसको इंस

392
00:28:17,440 --> 00:28:21,520
रही है वो आप नहीं बता रहे। मुझे कोई इंफॉर्मेशन तब आती है जब मैं

393
00:28:21,520 --> 00:28:25,920
वहां जो चीजें हो रही होती है उनके कनेक्शन में होता हूं। तो परमात्मा

394
00:28:25,920 --> 00:28:29,920
को इंफॉर्मेशन कैसे आती तभी कह रहे हैं ना कि उसको ज्ञान है।

395
00:28:29,920 --> 00:28:34,240
स्वतः परमात्मा को ज्ञान है सब चीजों का तो उसको कोई आके

396
00:28:34,240 --> 00:28:38,400
बताने की जरूरत नहीं होती है। वो सर्वज्ञ है। उसे मालूम ही है कहां क्या

397
00:28:38,400 --> 00:28:40,960
हो रहा है।

398
00:28:40,960 --> 00:28:45,120
तो ये फिर क्वेश्चन रेज हो रहा है ना कि कैसे मालूम है उसको। वो

399
00:28:45,120 --> 00:28:49,520
अगर आप एक आप शक्तिमान है तभी तो सर्वशक्तिमान है।

400
00:28:49,520 --> 00:28:53,760
तो आप उसमें रोड़ा लगा रहे हो ना कि वो वहां पर नहीं है। अमेरिका

401
00:28:53,760 --> 00:28:58,160
में नहीं है वो। अमेरिका में भी अगर वह है एक ही समय पर वह सर्वत्र

402
00:28:58,160 --> 00:29:02,400
व्याप्त है तब तो यह बात मानी जा सकती है कि वह सब जगह जानता है सब कुछ जानता

403
00:29:02,400 --> 00:29:07,120
है मगर आप कह रहे हो वो वहां पर नहीं है तो फिर जान कैसे रहा है

404
00:29:07,120 --> 00:29:08,720
दूसरी दूसरी बात नहीं

405
00:29:08,720 --> 00:29:13,280
होते हुए भी जानना ही तो परमात्मा की शक्ति है

406
00:29:13,280 --> 00:29:17,280
नहीं होते हुए भी जानना सब जगह नहीं होते

407
00:29:17,280 --> 00:29:21,440
हुए भी जानना ये परमात्मा की शक्ति है। ये सब जगह नहीं है मगर वो

408
00:29:21,440 --> 00:29:25,920
जानता सब कुछ है। ये परमात्मा की तब हमने चलो फिलहाल

409
00:29:25,920 --> 00:29:30,720
फिलहाल मैं इसको लिख लेता हूं कि ना होते हुए भी जानना

410
00:29:30,720 --> 00:29:35,040
हम उसे कहते हैं जानी जाननहार नहीं नहीं ठीक है

411
00:29:35,040 --> 00:29:39,200
अभी मैं जो मूल क्वेश्चन है ना तो अब परमात्मा का होल्ड कैसे

412
00:29:39,200 --> 00:29:44,080
होगा कि वहां पर वो नहीं गिरे जिस समय वो गिर रही होगी

413
00:29:44,080 --> 00:29:48,160
कुछ मान लीजिए कुछ कुछ अनिष्ट हो रहा है जिसको नहीं होना चाहिए

414
00:29:48,160 --> 00:29:52,560
तो परमात्मा का होल्ड कैसे होगा नहीं अनिष्ट होना

415
00:29:52,560 --> 00:29:56,560
या ना होना जितने भी होनी अनहोनी हो

416
00:29:56,560 --> 00:30:00,560
रही है वो तो सर्व ही अपने कर्म के भोगना भोग रहे हैं।

417
00:30:00,560 --> 00:30:04,560
हो रहा है जो भी वो कर्म के सिद्धांत अनुसार चल रहा है। वो

418
00:30:04,560 --> 00:30:09,360
कर्म की गति को रोकने का कर्ता भी परमात्मा का नहीं है।

419
00:30:09,360 --> 00:30:13,760
परमात्मा कर्म बंधन से परे है। कर्म के बंधनों में जो कोई

420
00:30:13,760 --> 00:30:17,840
आप यहां पर मुझे ये क्लियर कर दीजिए कि परमात्मा काम क्या-क्या करता है? तब मैं उसी से

421
00:30:17,840 --> 00:30:21,840
पूछूंगा। परमात्मा के कार्य क्या-क्या है? अगर शिवा जी

422
00:30:21,840 --> 00:30:23,840
फिर वो वाली ब्रह्मा कुमारी नीलिमा से

423
00:30:23,840 --> 00:30:27,920
बात कर रहे हो आप तो मैं वो टूटी हुई ब्रह्मा कुमारी नहीं हूं। मैं वो वाली ब्रह्मा

424
00:30:27,920 --> 00:30:32,000
कुमारी नहीं हूं जो पल्ला छुड़ा के उठ के चली जाएगी। मैं फिर वो सारी चीजों

425
00:30:32,000 --> 00:30:36,080
का जवाब दूंगी आपको। फिर आपको लगेगा कि

426
00:30:36,080 --> 00:30:40,080
हां क्या बोल रहे थे आप? मैं पूछ रहा हूं कि परमात्मा के

427
00:30:40,080 --> 00:30:44,240
आप कार्य बता दीजिए। क्या है? परमात्मा के कार्य हैं।

428
00:30:44,240 --> 00:30:48,240
वही मैं उसी पे आ रही थी कि मेन क्वेश्चन ये कर लीजिए। इसका मैं

429
00:30:48,240 --> 00:30:52,480
आंसर दे देती हूं। ब्रह्मा द्वारा स्थापना जो इस चित्र

430
00:30:52,480 --> 00:30:56,640
में दिखाई है। नीचे लिखा है। चित्र के नीचे पढ़िए आप

431
00:30:56,640 --> 00:31:02,080
और विष्णु द्वारा पालना और शंकर द्वारा महाविनाश

432
00:31:02,080 --> 00:31:06,560
ये परमात्मा शिव का कर्तव्य है। ब्रह्मा

433
00:31:06,560 --> 00:31:10,880
द्वारा उत्पत्ति और स्थापना उत्पत्ति

434
00:31:10,880 --> 00:31:14,880
नहीं स्थापना उत्पत्ति वही हो गई। स्थापना ही तो हो गई। हां

435
00:31:14,880 --> 00:31:19,200
हां वही उत्पत्ति उत्पत्ति स्थिति समार उत्पत्ति थी।

436
00:31:19,200 --> 00:31:23,360
उत्पत्ति स्थिति संहार हां जो भी कह लीजिए आप स्थापना

437
00:31:23,360 --> 00:31:27,600
पालन और क्या है संहार यानी इसमें से कोई

438
00:31:27,600 --> 00:31:31,680
काम डायरेक्ट शिव जी नहीं कर रहे हैं जी

439
00:31:31,680 --> 00:31:35,840
करा रहे हैं करा रहे हैं नहीं वो आप कह रही थी ना ब्रह्मा

440
00:31:35,840 --> 00:31:38,960
जी के अंदर आके करते हैं हां हां परमात्मा

441
00:31:38,960 --> 00:31:43,760
का ही काम है सारा लेकिन ये कराते हैं इनके द्वारा

442
00:31:43,760 --> 00:31:48,320
नहीं इनके द्वारा कराते हैं कि इनके अंदर घुस के करवाते हैं नहीं

443
00:31:48,320 --> 00:31:52,320
शिव पर भगवान शिव ब्रह्मा द्वारा

444
00:31:52,320 --> 00:31:56,400
अंदर मतलब अवतरित होकर आकर के कराते

445
00:31:56,400 --> 00:32:00,960
हैं। हम केवल ब्रह्मा

446
00:32:00,960 --> 00:32:05,120
ब्रह्मा में परकाया प्रवेश करके वो स्थापना कर देते हैं। जी वो कार्य

447
00:32:05,120 --> 00:32:09,200
और विष्णु यानी कि जब ब्रह्मा जब

448
00:32:09,200 --> 00:32:13,280
वो ब्रह्मा जी के अंदर आते हैं काम कराने के लिए स्थापना

449
00:32:13,280 --> 00:32:19,200
कराने के लिए तो जब वो चले जाते हैं तब ब्रह्मा का काम क्या होता है? कुछ नहीं।

450
00:32:19,200 --> 00:32:23,280
तब ब्रह्मा नॉर्मल जैसे हम और आप इंसान

451
00:32:23,280 --> 00:32:27,440
अपने अपने कर्तव्य कर रहे हैं। ऐसे वो कर्तव्य करते थे। अब वो शरीर

452
00:32:27,440 --> 00:32:31,520
में नहीं है। अब वो शरीर छोड़ चुके हैं दादा लेखराज जो ब्रह्मा

453
00:32:31,520 --> 00:32:35,600
है जो दिखाए हुए हैं यहां और उस समय वो अपनी स्टडी करते थे।

454
00:32:35,600 --> 00:32:40,240
अपनी स्वर्णति करते ब्रह्मा तो ब्रह्मा शाश्वत नहीं है।

455
00:32:40,240 --> 00:32:44,960
आप अभी कह रहे थे ना ब्रह्मा विष्णु महेश शाश्वत है।

456
00:32:44,960 --> 00:32:49,280
आते हैं अलग-अलग रूप धारण करके। कभी ब्रह्मा ही विष्णु

457
00:32:49,280 --> 00:32:53,440
बनते हैं। विष्णु ही कृष्ण बनते हैं। कृष्ण ही राम बनते हैं। फिर

458
00:32:53,440 --> 00:32:54,560
राम ही

459
00:32:54,560 --> 00:32:58,720
राम के ही जीवन बदलते रहते हैं। फिर लास्ट तक जब वो गिर

460
00:32:58,720 --> 00:33:02,800
जाता है। बिल्कुल वो अपने स्वधर्म को भूल जाता है। अपने

461
00:33:02,800 --> 00:33:06,880
वो आत्मा एकदम से पापी हो जाती है। काली हो जाती है। तभी

462
00:33:06,880 --> 00:33:10,880
तो गोरा कृष्ण और काला कृष्ण दिखाया है। उसके भी आगे

463
00:33:10,880 --> 00:33:14,880
चैप्टर आएंगे। जब वो काली आत्मा हो जाती है। बिल्कुल काला हो जाता है

464
00:33:14,880 --> 00:33:18,880
कृष्ण। फिर उसके बाद वो दादा लेखराज बनते

465
00:33:18,880 --> 00:33:22,960
हैं संगम पे। तब परमात्मा उनके अंदर फिर से आते हैं और फिर

466
00:33:22,960 --> 00:33:26,960
उसे याद दिलाते हैं कि तुम्हारे कौन से जन्म है? तुम कौन हो?

467
00:33:26,960 --> 00:33:31,360
तुम तुम ही देवता थे और फिर से तुम्हें देवी देवता धर्म स्थापन

468
00:33:31,360 --> 00:33:35,520
करना है। ये कर्तव्य कराते हैं परमात्मा। ब्रह्मा

469
00:33:35,520 --> 00:33:39,680
से ब्रह्मा से या तीनों से तीनों से नहीं तीनों से नहीं

470
00:33:39,680 --> 00:33:43,680
ब्रह्मा से। देखिए अभी मैं थोड़ा सा कंफ्यूज हो रहा हूं यहां

471
00:33:43,680 --> 00:33:47,920
पे। पहले तो ब्रह्मा विष्णु महेश सूक्ष्म लोक वाले हैं।

472
00:33:47,920 --> 00:33:52,080
उसके बाद ब्रह्मा जी यहां मनुष्य के रूप में जन्म लेते हैं।

473
00:33:52,080 --> 00:33:56,560
जी ऐसा ही है। स्थापना करने के लिए जी।

474
00:33:56,560 --> 00:34:01,280
स्थापना यानी कि धर्म की स्थापना करने के लिए। जी धर्म की स्थापना करनी।

475
00:34:01,280 --> 00:34:05,520
अच्छा यहां से दो बातें निकल के आती है। पहली बात तो ये आ जाती है

476
00:34:05,520 --> 00:34:09,600
कि यानी कि संसार बनाने का काम नहीं है ब्रह्मा का। ये

477
00:34:09,600 --> 00:34:13,680
धर्म स्थापना काम है ब्रह्मा का। हां जी। तो संसार कौन

478
00:34:13,680 --> 00:34:17,680
बनाता है? फिर संसार बनाने वाले क्वेश्चन

479
00:34:17,680 --> 00:34:21,840
पर आप वो सांसारिक लोगों के ज्ञान से अगर पूछोगे तो वो

480
00:34:21,840 --> 00:34:26,080
एक अलग थोरी है और जैसे स्थापना हुई धर्म

481
00:34:26,080 --> 00:34:30,240
की फिर वो अलग थ्योरी है। हम लोग कहते हैं कि ऐसा कुछ हुआ ही नहीं

482
00:34:30,240 --> 00:34:34,320
जैसा बताया जाता है। नहीं मैं वो छोड़ दीजिए। आप जो बताना

483
00:34:34,320 --> 00:34:39,680
चाहते हैं वो बताइए। हम यह बताना चाहते हैं कि परमात्मा

484
00:34:39,680 --> 00:34:43,840
ब्रह्मा द्वारा इस सृष्टि की पुन स्थापना करते

485
00:34:43,840 --> 00:34:47,840
हैं। कैसे? आत्मा का धर्म याद दिला के आत्मा को

486
00:34:47,840 --> 00:34:52,160
याद दिला के तुम्हारे स्वधर्म शांति है। वो धर्म स्थापना करते हैं।

487
00:34:52,160 --> 00:34:56,160
यानी कभी ऐसा था कि यह सृष्टि नहीं थी कि सृष्टि भी हमेशा

488
00:34:56,160 --> 00:35:00,480
से है। नहीं सृष्टि है। शुरू से सृष्टि

489
00:35:00,480 --> 00:35:04,640
है और सृष्टि सृष्टि यानी पृथ्वी जो गोल पृथ्वी

490
00:35:04,640 --> 00:35:09,200
है सूर्य चंद्रमा इत्यादि सब है। हां जी। यानी कि जो

491
00:35:09,200 --> 00:35:13,200
ब्रह्मा कुमारी का जो ईश्वर है वो रचयिता नहीं है इनका।

492
00:35:13,200 --> 00:35:17,680
क्यों नहीं है? तीनों का रचयता होने के कारण ही तो वो रचनाकार

493
00:35:17,680 --> 00:35:22,480
है। तो आप तो कह रहे हमेशा से है।

494
00:35:22,480 --> 00:35:26,160
पर परमात्मा तो इनसे भी पहले से है।

495
00:35:26,160 --> 00:35:31,120
यानी कि कभी रचा ना इनको हां कभी तो रचा इनको

496
00:35:31,120 --> 00:35:35,280
और सृष्टि को परमात्मा ने नहीं रचा। ब्रह्मा विष्णु

497
00:35:35,280 --> 00:35:40,880
महेश को रचा। परमात्मा ने रचा। ब्रह्मा विष्णु शंकर के द्वारा

498
00:35:40,880 --> 00:35:45,040
सृष्टि ने सृष्टि को रचा है ना ब्रह्मा विष्णु के द्वारा यानी कि ब्रह्मा

499
00:35:45,040 --> 00:35:49,840
जी धर्म संस्थापना ही नहीं करते सृष्टि भी बनाते हैं।

500
00:35:49,840 --> 00:35:53,840
हां जी ब्रह्मा ब्रह्मा जी जो है वो सृष्टि

501
00:35:53,840 --> 00:35:58,000
भी बनाते हैं। है ना? ऐसा कह सकते हैं।

502
00:35:58,000 --> 00:36:02,240
हां ऐसा कह सकते हैं। क्लियर नहीं है ये।

503
00:36:02,240 --> 00:36:06,480
नहीं क्लियर है लेकिन वो मेरे आंसर में कुछ और है। आपके

504
00:36:06,480 --> 00:36:10,880
समझने में कुछ और है। मैं भी धर्म स्थापना की बात कर रही हूं बार-बार

505
00:36:10,880 --> 00:36:15,360
कि नहीं जैसे मैं मैं याद दिलाते हैं ना

506
00:36:15,360 --> 00:36:19,360
मैं ये कह रहा हूं क्या ब्रह्मा कुमारी के अनुसार ऐसा कभी था जब

507
00:36:19,360 --> 00:36:23,360
ये पृथ्वी थी ही नहीं। ऐसा नहीं था। पृथ्वी सदा

508
00:36:23,360 --> 00:36:27,760
से थी। पृथ्वी सदा से थी। वही मैं कह रहा हूं। इसका मतलब ये नदियां, पहाड़,

509
00:36:27,760 --> 00:36:32,080
झरने इत्यादि ये सब सदैव से है। और सदैव रहेंगे

510
00:36:32,080 --> 00:36:37,760
एज इट इज रहेंगे। हां जी। अच्छा। तो जैसे

511
00:36:37,760 --> 00:36:41,280
जो कई नदियां सूख रही हैं और

512
00:36:41,280 --> 00:36:45,920
विनाश हो रहा है। जैसे आपने बताया इनके द्वारा विनाश हो जाता है।

513
00:36:45,920 --> 00:36:50,000
तो विनाश होता है तो किस चीज का विनाश होता है? सृष्टि

514
00:36:50,000 --> 00:36:54,080
का ही विनाश होता है। यानी कि जो पृथ्वी इत्यादि

515
00:36:54,080 --> 00:36:58,480
यह सब नहीं होती है। फिर विनाश के बाद किस चीज का विनाश होता है?

516
00:36:58,480 --> 00:37:02,240
रिफॉर्म होता है।

517
00:37:02,240 --> 00:37:06,240
नहीं विनाश ये जो ब्रह्मा विष्णु महेश शंकर

518
00:37:06,240 --> 00:37:10,240
जी का काम क्या है विनाश का मतलब परिवर्तन होना

519
00:37:10,240 --> 00:37:15,360
शंकर जी का कार्य क्या है ये बताइए शंकर जी का कार्य है विनाश

520
00:37:15,360 --> 00:37:19,440
की लीला करना मतलब जब प्रलय आती है

521
00:37:19,440 --> 00:37:23,440
भूकंप आते हैं बाढ़ आते हैं या कोई ऐसे काम होते हैं

522
00:37:23,440 --> 00:37:27,520
तो हम बोलते हैं ना बम बम भोले तो बम बम का मतलब वही

523
00:37:27,520 --> 00:37:31,520
है कि वैज्ञानिक जितने भी चीजें बना रहे हैं वो सब

524
00:37:31,520 --> 00:37:35,840
इनहीं के थ्रू होता है। बम बम विस्फोट [हंसी]

525
00:37:35,840 --> 00:37:39,840
ये सब सब यही करते हैं। अच्छा

526
00:37:39,840 --> 00:37:43,920
ठीक है। तो ये तो ठीक है।

527
00:37:43,920 --> 00:37:47,920
मगर मैं ये कह रहा हूं कि इसका मतलब

528
00:37:47,920 --> 00:37:52,000
कि ये कुछ ऐसा करते हैं कि जो निर्मित दिख

529
00:37:52,000 --> 00:37:56,160
रहा है। है ना? वो नष्ट हो जाता है। जो निर्माण कार्य है वो

530
00:37:56,160 --> 00:37:56,660
नष्ट

531
00:37:56,400 --> 00:38:00,880
हो जाता है। हां जी। यह कुछ ऐसा करते हैं ना जैसे मान लीजिए कि कोई बिल्डिंग

532
00:38:00,880 --> 00:38:04,960
थी तो इन्होंने बिल्डिंग तोड़ दी। जी ठीक है? यानी

533
00:38:04,960 --> 00:38:09,200
कि बिल्डिंग एक ऐसा स्टेज आई कि बिल्डिंग अब नई है।

534
00:38:09,200 --> 00:38:13,360
तो जो क्या जो शंकर जी

535
00:38:13,360 --> 00:38:17,520
हैं वो केवल कुछ नदियां पहाड़ झरने इत्यादि

536
00:38:17,520 --> 00:38:21,840
की प्रलय करते हैं या फिर वो पूरी पृथ्वी इत्यादि सब समाप्त

537
00:38:21,840 --> 00:38:25,840
सफाई करते हैं। सारी सृष्टि का विनाश करते हैं। विनाश मतलब कि

538
00:38:25,840 --> 00:38:30,720
एक समय ऐसा होता है जब पृथ्वी इत्यादि नहीं होती है।

539
00:38:30,720 --> 00:38:34,880
पृथ्वी पे चेंज होता है। पृथ्वी नहीं सृष्टि का सृष्टि

540
00:38:34,880 --> 00:38:39,040
का विनाश कह रही ना विनाश किस रूप में विनाश क्या होता है ऐसा

541
00:38:39,040 --> 00:38:43,520
वो विनाश में विनाश परिवर्तन होना मतलब एक युग से दूसरे युग में परिवर्तन

542
00:38:43,520 --> 00:38:47,760
होना एक अरे एक युग में एक

543
00:38:47,760 --> 00:38:52,400
दूसरे युग में प्रवेश करना अरे नीलिमा

544
00:38:52,400 --> 00:38:56,560
जी एक युग से दूसरे युग में प्रवेश तो युग में ब्रह्मा कुमारी नीलिमा

545
00:38:56,560 --> 00:39:00,800
बहन नीलिमा बहन नीलिमा बहन हां

546
00:39:00,800 --> 00:39:04,960
दीदी नीलिमा दीदी हां हां बोलिए दीदी

547
00:39:04,960 --> 00:39:09,200
ये बता जो आप प्रवेश करने वाली बात कह रही है ना ये प्रवेश तो मनुष्य करेगा

548
00:39:09,200 --> 00:39:11,520
या फिर जीवात्मा करेगी एक युग से दूसरे

549
00:39:11,520 --> 00:39:16,400
युग में तो अगर वो सृष्टि का विनाश कर रहे हैं

550
00:39:16,400 --> 00:39:20,560
ठीक है पहली बात तो ये है कि विनाश का अर्थ परिवर्तन होता है ये कहीं पर किसी

551
00:39:20,560 --> 00:39:24,640
भी प्रकार से सिद्ध नहीं मगर बोल रहे हैं उसको हम बिल्कुल विनाश

552
00:39:24,640 --> 00:39:29,040
नहीं बोल रहे हैं हां तो ठीक है तो अब यानी कि

553
00:39:29,040 --> 00:39:34,640
जो शंकर जी का काम है वो परिवर्तन है विनाश नहीं हां हां जी

554
00:39:34,640 --> 00:39:38,800
तो उनका काम है जैसे और फिर वो आप

555
00:39:38,800 --> 00:39:43,840
ये बता रही हैं कि जो पृथ्वी इत्यादि है उसमें वो

556
00:39:43,840 --> 00:39:48,560
कुछ थोड़ी बहुत तोड़फोड़ करते हैं। पूरा बिल्कुल समूल नाश नहीं करते। परिवर्तन

557
00:39:48,560 --> 00:39:52,640
होता है। गंदगी का सफाई में परिवर्तन होता

558
00:39:52,640 --> 00:39:56,800
है। अच्छे गुणों का आचरण आता है। बुरे

559
00:39:56,800 --> 00:40:01,280
गुण चले जाते हैं। आत्मा पवित्र होती है। सृष्टि का महाविनाश

560
00:40:01,280 --> 00:40:05,280
कहलाता है। वो परिवर्तन यानी कि अच्छे से

561
00:40:05,280 --> 00:40:09,440
बुरा वो बुरे से अच्छा हो जाता है। अच्छे में प्रवेश करना। अच्छे

562
00:40:09,440 --> 00:40:13,840
से बुरे से अच्छा। बुरे से अच्छा

563
00:40:13,840 --> 00:40:17,840
एक अच्छे से बुरा दोनों ही है। अच्छे से बुरा भी होता है। नहीं नहीं शंकर

564
00:40:17,840 --> 00:40:21,840
जी का काम अच्छे से बुरा नहीं होगा ना? हां शंकर जी का काम

565
00:40:21,840 --> 00:40:25,840
अच्छे से बुरा नहीं है। मैं शंकर जी का बुरे से अच्छा है। मैं

566
00:40:25,840 --> 00:40:26,720
शंकर जी का बुरे

567
00:40:26,720 --> 00:40:30,720
से अच्छा है। हां शंकर जी का बुरे से अच्छा है। तो

568
00:40:30,720 --> 00:40:34,960
अब जब शंकर जी का बुरे से अच्छा है नीलमा जी नीलमा

569
00:40:34,960 --> 00:40:39,200
बहन तो उसमें ये दिक्कत आ रही है

570
00:40:39,200 --> 00:40:43,200
कि जैसे बुरे से अच्छा मनुष्यों के लिए तो कर दिया कि उसको अच्छे गुण

571
00:40:43,200 --> 00:40:47,280
दे दिए। वो अच्छे आचरण वाला हो गया। ठीक है? वह भी उसमें बहुत

572
00:40:47,280 --> 00:40:51,760
सारे प्रश्न मगर मैं यह कह रहा हूं जो भौतिक पदार्थ हैं जड़ पदार्थ

573
00:40:51,760 --> 00:40:55,280
जैसे झरने पर्वत

574
00:40:55,280 --> 00:40:59,440
जंगल पृथ्वी इत्यादि इनमें कुछ चेंजेस

575
00:40:59,440 --> 00:41:02,960
आते हैं या नहीं आते हैं

576
00:41:02,960 --> 00:41:07,120
क्यों नहीं आते ये जो कलयुगी कलयुगी चीजें

577
00:41:07,120 --> 00:41:11,360
होती है वो सतयुगी होती है वहां सत यानी कि

578
00:41:11,360 --> 00:41:15,360
ये समझ गया यानी कि ये अपडेट हो जाती है

579
00:41:15,360 --> 00:41:19,600
जो डाउन डाउनफॉल हो गया था वो अपग्रेड करते हैं अपग्रेड

580
00:41:19,600 --> 00:41:23,600
अपग्रेड करते हैं शंकर जी जैसे नदियां सूख रही है तो

581
00:41:23,600 --> 00:41:28,000
उनमें दोबारा जल आ जाता है और जो जो चीजें

582
00:41:28,000 --> 00:41:32,080
दृश्य में जो अच्छे नहीं लग रहे हैं वो सुंदर हो जाते हैं ये सब करते

583
00:41:32,080 --> 00:41:36,480
हैं तो फिर ब्रह्मा जी क्या कर रहे हैं ब्रह्मा

584
00:41:36,480 --> 00:41:40,480
जी तो फिर अंत में ब्रह्मा का पाठ होता है जब

585
00:41:40,480 --> 00:41:41,920
कलयुग

586
00:41:41,920 --> 00:41:46,560
अंत होता है और संगम का सॉरी

587
00:41:46,560 --> 00:41:50,640
सतयुग का आदि होता है। सतयुग भी तो वही कर

588
00:41:50,640 --> 00:41:54,640
रहे हैं। सुनिए ना सतयुग के आदि और कलयुग

589
00:41:54,640 --> 00:41:59,280
के अंत के बीच का एक समय होता है संगम युग जिसमें मैं और आप यहां बैठे हैं।

590
00:41:59,280 --> 00:42:03,280
इस संगम युग में दादा लेखराज के स्वरूप में ब्रह्मा आते

591
00:42:03,280 --> 00:42:07,600
हैं और उनके तन में भगवान शिव प्रवेश करते हैं

592
00:42:07,600 --> 00:42:11,760
और वो प्रवेश करके आत्मा को याद दिलाते हैं कि हे

593
00:42:11,760 --> 00:42:15,840
आत्मा तेरा स्वधर्भ शांति है। तो अभी जो मैंने आपको

594
00:42:15,840 --> 00:42:19,840
मेडिटेशन कराया वह सारा याद दिला के फिर से

595
00:42:19,840 --> 00:42:24,320
पवित्र करते हैं इस पूरी सृष्टि को और जो पवित्र आत्माएं

596
00:42:24,320 --> 00:42:28,320
ब्रह्मचर्य को धारण करती हैं ब्रह्मा कुमार कुमारियां

597
00:42:28,320 --> 00:42:32,480
जो बनते हैं वो इस सृष्टि रूपी वट वृक्ष के तने के

598
00:42:32,480 --> 00:42:36,640
अंदर जो थड़ होता है वृक्ष का वो एक्चुअली

599
00:42:36,640 --> 00:42:40,640
हम ब्रह्मा कुमार कुमारी उस धर्म को धारण करते हैं और जब यह

600
00:42:40,640 --> 00:42:44,640
धर्म धारण करते हैं तो उसी से हम पूरी सृष्टि को मैं

601
00:42:44,640 --> 00:42:48,800
समझ गया एक तरीके से मैं समझ गया एक तरीके से ब्रह्मा जी है

602
00:42:48,800 --> 00:42:52,880
जड़ में ब्राह्मण है मतलब ब्रह्मा कुमार कुमारी उसके

603
00:42:52,880 --> 00:42:56,880
बाद हम आते हैं सतयुग में देवी देवता बनते हैं फिर

604
00:42:56,880 --> 00:42:57,380
हम

605
00:42:57,120 --> 00:43:01,280
आते हैं त्रेता युग में फिर हम अपने स्वधर्म को थोड़ा भूलते

606
00:43:01,280 --> 00:43:05,280
हैं तो वो आत्मा थोड़ी और विकारों में लिप्त होती

607
00:43:05,280 --> 00:43:09,520
है फिर उसके बाद हम आते हैं

608
00:43:09,520 --> 00:43:13,600
द्वापर में फिर कलयुग में फिर से संगम पे तो तो ये

609
00:43:13,600 --> 00:43:17,760
फिर से हम संगम पे इस तरह स्थापन करते हैं भगवान मैं वो

610
00:43:17,760 --> 00:43:21,840
चीज मैं समझ गया कि एक तरीके से मैं अभी तक जो समझ पाया

611
00:43:21,840 --> 00:43:26,000
हूं ब्रह्मा जी केवल ज्ञान देते हैं जिसके कारण

612
00:43:26,000 --> 00:43:30,080
वो अपना जो स्पिरिचुअल लाइफ है उसमें आगे

613
00:43:30,080 --> 00:43:34,320
बढ़ सकते शिव ज्ञान देते हैं ब्रह्मा के तन में आके शिव

614
00:43:34,320 --> 00:43:38,320
जी ज्ञान देते हैं ब्रह्मा के तन में आके तो ब्रह्मा जी केवल

615
00:43:38,320 --> 00:43:42,400
और केवल ज्ञान देने के लिए है वो उत्पत्ति जो

616
00:43:42,400 --> 00:43:46,480
एक सृष्टि रचना हम लोग मान रहे हैं वो शिव जी रचना ही

617
00:43:46,480 --> 00:43:50,720
हुई ना वो शिव जी रचना ही हो गई ना ज्ञान मैं भौतिक पदार्थों की रचना

618
00:43:50,720 --> 00:43:54,720
की बात कर रहा हूं जैसे पृथ्वी पदार्थ की रचना नहीं करते वो तो मात पिता

619
00:43:54,720 --> 00:43:58,880
से शरीर मिला ही है हमें नहीं नहीं शरीर मनुष्यों की बात नहीं कर रहा

620
00:43:58,880 --> 00:44:02,960
जो नदियां है वो बना दी झरने बना दिए जंगल बना

621
00:44:02,960 --> 00:44:08,160
दिए परमात्मा ने शिव ने बनाया अभी तो शंकर कहा आपने

622
00:44:08,160 --> 00:44:12,160
शिव और शंकर में भेद है आप शंकर कह रहे हैं मैं शंकर नहीं कह रही हूं

623
00:44:12,160 --> 00:44:16,400
नहीं नहीं अभी हम लोग जब शंकर के कर्म डिसाइड कर रहे थे ना प्रलय के टाइम पे

624
00:44:16,400 --> 00:44:20,560
आप गलत समझ रहे हैं मैंने शंकर का विनाश के लिए बात करी है शिव

625
00:44:20,560 --> 00:44:24,960
की विनाश के लिए बात नहीं करी शिव और शंकर अलग-अलग

626
00:44:24,960 --> 00:44:29,040
है मैं ये कह रहा हूं समझ गया शंकर का काम

627
00:44:29,040 --> 00:44:33,040
क्या है विनाश दोबारा पूछ रहा हूं विनाश अब जब

628
00:44:33,040 --> 00:44:37,120
मैंने पूछा आपसे कि शंकर का काम क्या है तो विनाश कहा आपने फिर मैंने उस

629
00:44:37,120 --> 00:44:41,120
विनाश को खोला जब एक्सप्लोर किया तो उसमें आपने कहा कि

630
00:44:41,120 --> 00:44:45,120
विनाश का मतलब है परिवर्तन ठीक है? हां।

631
00:44:45,120 --> 00:44:49,600
तो जब आपने परिवर्तन कहा तो मैंने पूछा किस प्रकार का परिवर्तन? तो आपने कहा अपग्रेड

632
00:44:49,600 --> 00:44:53,600
करना यानी कि जो करना वो परिवर्तन करना वो सुख देना वो

633
00:44:53,600 --> 00:44:57,680
सारा शिव का काम है। शंकर का नहीं। तो बस शंकर का काम क्या

634
00:44:57,680 --> 00:45:02,160
है? विनाश करना। मतलब चीजों को नष्ट

635
00:45:02,160 --> 00:45:06,560
खत्म कर देना या गायब कर देना। जैसे जैसे आप सुनो सुनो

636
00:45:06,560 --> 00:45:10,560
मैं इस तरह समझाती हूं। आपको एक एग्जांपल देती हूं। हम जी ओ डी

637
00:45:10,560 --> 00:45:14,640
गॉड जी माना जनरेटर जो जनरेट

638
00:45:14,640 --> 00:45:19,040
अरे भाई ओ माना ऑपरेटर मतलब विष्णु ऑपरेट

639
00:45:19,040 --> 00:45:23,040
करते हैं और डी माना डिस्ट्रयड मतलब विनाश करते

640
00:45:23,040 --> 00:45:27,200
हैं। शंकर विनाश करते हैं। तो अरे भाई विनाश करते हैं तो

641
00:45:27,200 --> 00:45:31,200
किस चीज का करते हैं? आप तो कह रही हो कि वो विनाश का मतलब

642
00:45:31,200 --> 00:45:35,760
चीज को नष्ट कर देना। हां पूरी को नष्ट करने का।

643
00:45:35,760 --> 00:45:40,560
यानी कि एक समय ऐसा आता है जब यह धरती इत्यादि नहीं होती है।

644
00:45:40,560 --> 00:45:44,640
धरती होती है वह युग नहीं होते हैं। विनाश किस चीज का

645
00:45:44,640 --> 00:45:48,880
होता है? सृष्टि का प्रलय आ के तो

646
00:45:48,880 --> 00:45:53,120
सृष्टि में गलत हो जाती है। खराब हो जाती है। सृष्टि में वही

647
00:45:53,120 --> 00:45:57,840
पहाड़ खराब तो इन्होंने इंसानों ने कर दिया ना कर्मों से अपने।

648
00:45:57,840 --> 00:46:02,080
हाँ तो ये जब सब कुछ खराब हो जाता है। जैसे अभी नेपाल में भूकंप आया

649
00:46:02,080 --> 00:46:06,240
देखा आपने सब खत्म हो गया। इस प्रकार का काम शंकर

650
00:46:06,240 --> 00:46:09,280
जी का है।

651
00:46:09,280 --> 00:46:13,760
यानी कि एक तरीके से जो शंकर जी हैं

652
00:46:13,760 --> 00:46:16,720
वो

653
00:46:16,720 --> 00:46:21,280
बस ये जो अर्थ पैक लाना सब कुछ खत्म करने के लिए

654
00:46:21,280 --> 00:46:25,440
मगर आप सब कुछ कहने के बाद भी आप उसको सीमित कर रही है ना। सब कुछ

655
00:46:25,440 --> 00:46:29,680
खत्म का मतलब सब कुछ खत्म। प्रलय आई तो पृथ्वी तो रही ना। चीजें

656
00:46:29,680 --> 00:46:34,080
खत्म हो गई। पर पृथ्वी तो है आज मतलब लेकिन पृथ्वी

657
00:46:34,080 --> 00:46:38,240
समझ गया मतलब उस नदी नहीं होगी पहाड़ नहीं होंगे झरने

658
00:46:38,240 --> 00:46:42,400
नहीं होंगे केवल एक फ्लैट सरफेस होगा पृथ्वी हां

659
00:46:42,400 --> 00:46:47,360
जी ऐसा है हां जी

660
00:46:47,360 --> 00:46:51,520
गड्ढे भी नहीं होंगे बिल्कुल सब जगह एक जैसी प्रलय

661
00:46:51,520 --> 00:46:55,920
होगी तो सब कुछ होगा गड्ढे भी होते हैं सब कुछ होता है वो

662
00:46:55,920 --> 00:47:00,240
प्रलय में क्या नहीं होता है जो जो प्रलय में होता है वो सब होगा पर पृथ्वी तो प्रलय

663
00:47:00,240 --> 00:47:04,320
में मुझे बता दीजिए ना क्या-क्या है। पृथ्वी के ऊपर से सब चीजों

664
00:47:04,320 --> 00:47:08,480
का नष्ट हो जाना। पर ये प्रलय ये प्रलय

665
00:47:08,480 --> 00:47:12,560
है। अच्छा ठीक है। बड़ी

666
00:47:12,560 --> 00:47:16,800
देर लगी यह फिक्स होने में कि शंकर जी का काम यह है।

667
00:47:16,800 --> 00:47:20,880
तो अब जब पृथ्वी के ऊपर पेड़ उगे पेड़ नहीं है ना ही

668
00:47:20,880 --> 00:47:25,120
पृथ्वी के गर्भ में बीज है पेड़ के कुछ नहीं है। केवल एक मान

669
00:47:25,120 --> 00:47:29,360
लीजिए एक जड़ मट्टी का गोला है। गर्भ में तो देखो शिवा

670
00:47:29,360 --> 00:47:31,840
जी गर्भ में तो सब कुछ होता है।

671
00:47:31,840 --> 00:47:36,400
आज अगर नेपाल में बाढ़ आई है तो क्या वहां पर हजारों

672
00:47:36,400 --> 00:47:40,480
लाशें हजारों बीज पौधे वो ऐसे नहीं हुआ होगा

673
00:47:40,480 --> 00:47:44,960
ऊपर का नीचे नहीं हुआ होगा जैसे आप एग्जांपल ले लीजिए द्वारिका

674
00:47:44,960 --> 00:47:49,040
समंदर में चली गई समंदर में चली गई द्वारिका फिर वो ऊपर आएगी फिर

675
00:47:49,040 --> 00:47:55,040
वो नीचे जाएगी इस तरीके का परिवर्तन मैं प्रलय बोल रही हूं

676
00:47:55,200 --> 00:47:59,360
नीचे तो होगा ना सब कुछ यानी कि जिन चीजों

677
00:47:59,360 --> 00:48:03,440
से वह वापस आ सकते हैं जिन चीजों से पुनः प्रकट हो

678
00:48:03,440 --> 00:48:07,600
सकते हैं। यह सब जितने भी भौतिक जगत हम देखते हैं वह सब

679
00:48:07,600 --> 00:48:11,680
चीजें पृथ्वी में समाहित हो जाती है। लय हो जाता है उनका। हां जी।

680
00:48:11,680 --> 00:48:15,920
जिनसे वो वापस वापस बनाई जा सकती है उससे निकल के।

681
00:48:15,920 --> 00:48:20,000
ठीक है? शंकर जी का ये कार्य है। तो अब

682
00:48:20,000 --> 00:48:24,080
वापस आ जाते हैं कि अभी हमने डिसाइड शंकर जी का यहां कार्य खत्म हो गया। अब

683
00:48:24,080 --> 00:48:29,680
वापस आ जाते हैं कि ब्रह्मा जी के रूप ब्रह्मा जी के शरीर में प्रवेश करके

684
00:48:29,680 --> 00:48:34,000
ईश्वर जो चीजों का वो हो गया ना लय पृथ्वी के अंदर

685
00:48:34,000 --> 00:48:38,160
सब सारी चीजें पृथ्वी में समा गई है शिव जी के द्वारा तो

686
00:48:38,160 --> 00:48:42,400
ब्रह्मा जी आकर के दोबारा वहां बीजारोपण या पानी देना या

687
00:48:42,400 --> 00:48:46,720
झरने बनाना ये सब चालू करते होंगे ना कि नहीं करते जी

688
00:48:46,720 --> 00:48:47,280
ब्रह्मा

689
00:48:47,280 --> 00:48:51,440
जी जो है वो ज्ञान रूपी सृष्टि

690
00:48:51,440 --> 00:48:55,840
बनाने का कार्य करते लेखराज एक साधारण मनुष्य

691
00:48:55,840 --> 00:49:01,840
थे। लेखराज एक साधारण मनुष्य थे और

692
00:49:02,240 --> 00:49:07,040
तो लेखराज सृष्टि के सुनिए लेखराज जी सृष्टि का

693
00:49:07,040 --> 00:49:11,520
झरने बनाना ये बनाना थोड़ी ना करेंगे तो ये कैसे बना

694
00:49:11,520 --> 00:49:17,520
वो कैसे बना? सुनिए वो कैसे बना उस पर बात मैं करूंगी।

695
00:49:17,520 --> 00:49:22,240
लेखराज जी को शिव भगवान ने नाम दिया ब्रह्मा

696
00:49:22,240 --> 00:49:26,240
और उनके अंदर वह आए परकाया प्रवेश हुआ फिर उन्होंने हमें

697
00:49:26,240 --> 00:49:30,480
अपने स्वधर्म को याद दिलाया तब हम जाकर के इस ज्ञान

698
00:49:30,480 --> 00:49:34,480
रूपी सृष्टि को बना रहे हैं अच्छा मतलब

699
00:49:34,480 --> 00:49:39,040
अपने ब्रह्मचर्य से अपने गुणों से इसको अच्छा बना रहे हैं

700
00:49:39,040 --> 00:49:43,200
वो है सृष्टि की स्थापना जो आप बात कर रहे हैं कि

701
00:49:43,200 --> 00:49:47,680
ये मनुष्य का बनाना या जो भी आप बोल रहे हो

702
00:49:47,680 --> 00:49:51,680
यह लेखराज को जिनको ब्रह्मा नाम दिया भगवान

703
00:49:51,680 --> 00:49:56,320
शिव ने उनका काम नहीं है। ये कर्म अनुसार

704
00:49:56,320 --> 00:50:00,320
अपने आप आत्माएं पैदा होती है और अपने आप जाती है यहां से। नहीं नहीं

705
00:50:00,320 --> 00:50:02,320
आत्मा के पैदा होने की बात नहीं कर रहा हूं। जैसे

706
00:50:02,320 --> 00:50:06,640
शिव जी ने झरनों को पृथ्वी में समाहित कर दिया। पेड़ों को समाहित

707
00:50:06,640 --> 00:50:11,040
कर दिया। शंकर जी ने शंकर जी ने सॉरी सॉरी गलती हो गई। गलती

708
00:50:11,040 --> 00:50:15,040
शंकर जी ने जितनी भी व्यवहार जगत में

709
00:50:15,040 --> 00:50:19,040
उपयोग में आने वाली जो संसाधन है प्राकृतिक उन सबको शंकर

710
00:50:19,040 --> 00:50:23,520
जी ने पृथ्वी में समाहित कर दिया लय हो गया उन सबका

711
00:50:23,520 --> 00:50:27,600
तो अब जब दोबारा से इधर जब ब्रह्मा जी आएंगे और इनको उधर

712
00:50:27,600 --> 00:50:31,840
ले जाएंगे सतयुग में तो वहां पे सतयुग वाली वो मिलेगी ना वातावरण के हरे

713
00:50:31,840 --> 00:50:36,000
हरे पेड़ हैं नदियां हैं पहाड़ हैं तो ये किसने किया

714
00:50:36,000 --> 00:50:40,080
दोबारा शिव ने भगवान शिव ने ये शिव ने किया

715
00:50:40,080 --> 00:50:44,240
है निराकार रहते हुए निराकार रहते

716
00:50:44,240 --> 00:50:47,440
हुए

717
00:50:47,440 --> 00:50:51,440
यानी यानी कि ब्रह्मा विष्णु महेश का

718
00:50:51,440 --> 00:50:55,440
जो कार्य है ब्रह्मा जी का कार्य है एक तरीके

719
00:50:55,440 --> 00:51:00,560
से ज्ञान देना और विष्णु जी का कार्य है

720
00:51:00,560 --> 00:51:04,800
क्या कहते हैं पालन करना विष्णु जी का कार्य भी समझते हैं अभी पालन

721
00:51:04,800 --> 00:51:09,520
वाला है ना वह भी समझते हैं और

722
00:51:09,520 --> 00:51:13,600
इनका कार्य है शंकर जी का लय कर देना। लय करने के

723
00:51:13,600 --> 00:51:17,600
बाद जो नई सृष्टि मिलेगी सतयुग में सतयुग

724
00:51:17,600 --> 00:51:21,840
बनेगा जो तो वो शिवजी बना के देते हैं। वो जो गायब हो गया था। विष्णु

725
00:51:21,840 --> 00:51:26,880
द्वारा विष्णु द्वारा बनाते हैं।

726
00:51:26,880 --> 00:51:30,960
तो अभी तो आपने कहा था शिवजी बनाते हैं। नहीं शिवजी

727
00:51:30,960 --> 00:51:35,200
ही ब्रह्मा द्वारा बना रहे हैं। शिवजी विष्णु द्वारा कर रहे हैं और शिवजी

728
00:51:35,200 --> 00:51:39,280
ही शंकर द्वारा करेंगे। मैंने तो यह बोला तीनों का रचयिता होने

729
00:51:39,280 --> 00:51:43,600
के कारण वो भगवान शिव परमात्मा है। इसकी हेडिंग पढ़िए

730
00:51:43,600 --> 00:51:47,760
आप चित्र के ऊपर लिखी हुई है। ठीक है? तो

731
00:51:47,760 --> 00:51:52,080
विष्णु के द्वारा वो जो है पुनः चीजों को प्रोवाइड

732
00:51:52,080 --> 00:51:56,240
करा देते हैं। भगवान विष्णु के

733
00:51:56,240 --> 00:52:00,320
द्वारा सब होता है। अच्छा तो जैसे कि मान

734
00:52:00,320 --> 00:52:04,400
लीजिए जैसे शिव जी हैं हम तो

735
00:52:04,400 --> 00:52:08,640
शंकर जी सॉरी उनका काम है प्रलय करना है ना जी जी

736
00:52:08,640 --> 00:52:12,720
प्रलय करना तो क्या हम ये मान सकते हैं यदि किसी ने परमाणु बम

737
00:52:12,720 --> 00:52:16,880
वगैरह बहुत तगड़ा बना दिया और जो है पृथ्वी बहुत ज्यादा भीषण

738
00:52:16,880 --> 00:52:20,960
वो आ गया तो वो परमाणु बम बनाने वाला शंकर है ये मानेंगे

739
00:52:20,960 --> 00:52:25,200
हम जी तो फिर शंकर का सूक्ष्म वैज्ञानिकों को प्रेरणा

740
00:52:25,200 --> 00:52:29,520
दे रहे हैं मतलब कि शंकर स्वयं प्रलय

741
00:52:29,520 --> 00:52:33,680
इत्यादि नहीं ला रहे हैं। वह प्रेरणा दे रहे हैं वैज्ञानिकों को। हां जी। तो

742
00:52:33,680 --> 00:52:37,680
इसी प्रकार से जो शंकर और इसी

743
00:52:37,680 --> 00:52:41,920
प्रकार से जब उत्पत्ति करनी है तो शिव जी प्रेरणा

744
00:52:41,920 --> 00:52:46,080
दे रहे हैं विष्णु को। देखिए शिव

745
00:52:46,080 --> 00:52:50,080
और शंकर को एक कर रहे हैं। नहीं नहीं उत्पत्ति के लिए बोल

746
00:52:50,080 --> 00:52:54,160
रहा हूं मैं। उत्पत्ति शिवजी प्रेरणा देते हैं ना विष्णु को। शिव जी शिव जी

747
00:52:54,160 --> 00:52:58,160
ने जो किया वो इन तीनों देवताओं के थ्रू

748
00:52:58,160 --> 00:53:02,880
किया है। ये तीनों देवता है। ये परमात्मा नहीं है। ये भगवान नहीं है।

749
00:53:02,880 --> 00:53:07,360
भगवान शिव भगवान है और ब्रह्मा विष्णु शंकर देवता है।

750
00:53:07,360 --> 00:53:11,760
इन तीनों के रचयिता शिव है। फिर समझा रही हूं मैं आपको। भगवान

751
00:53:11,760 --> 00:53:15,760
शिव ने ब्रह्मा द्वारा मतलब लेखराज के द्वारा तन में

752
00:53:15,760 --> 00:53:19,760
आकर के उनके परकाया प्रवेश करके ज्ञान दिया। उस

753
00:53:19,760 --> 00:53:24,000
ज्ञान रूपी सृष्टि से हम ब्रह्मचर्य से इस सृष्टि में देवी

754
00:53:24,000 --> 00:53:28,000
देवता धर्म की स्थापना करते हैं। फिर वो देवी देवता

755
00:53:28,000 --> 00:53:30,160
धर्म

756
00:53:30,160 --> 00:53:34,480
सतयुग में जाते हैं हम लोग। फिर सतयुग में जाकर के हम

757
00:53:34,480 --> 00:53:38,720
कुछ कुछ लाख लोग वहां होते हैं। फिर ये सृष्टि

758
00:53:38,720 --> 00:53:42,800
धीरेधीरे करोड़ों में बदलती है। एकदम से वो लाख लोगों ये तो ठीक

759
00:53:42,800 --> 00:53:46,800
ये ठीक है नीलिमा बहन। मैं यह पूछ रहा हूं कि जैसे शिव

760
00:53:46,800 --> 00:53:50,960
जी ने शंकर भगवान ने शंकर भगवान ने जब लय

761
00:53:50,960 --> 00:53:55,040
कर दिया झरने पहाड़ इत्यादि का तो वह दोबारा उत्पन्न

762
00:53:55,040 --> 00:53:56,960
कौन कर रहा है? आपने अभी कहा था

763
00:53:56,960 --> 00:54:01,440
विष्णु जी विष्णु जी के शिव जी ब्रह्मा

764
00:54:01,440 --> 00:54:06,560
विष्णु जी द्वारा अच्छा

765
00:54:06,560 --> 00:54:10,720
तो वहां पर किसी मीडिएटर की जरूरत नहीं है झरने इत्यादि

766
00:54:10,720 --> 00:54:14,720
को मीडिएटर हुए ना विष्णु जी नहीं नहीं

767
00:54:14,720 --> 00:54:18,720
विष्णु जी के बाद मीडिएटर की जरूरत नहीं है वहां पे वहां

768
00:54:18,720 --> 00:54:23,040
तो पृथ्वी विष्णु की है वहां तो लक्ष्मी नारायण का राज

769
00:54:23,040 --> 00:54:27,040
है वहां तो सतयुग है थोड़ा थोड़ा थोड़ा सा थोड़ा संक्षिप्त में

770
00:54:27,040 --> 00:54:31,120
चलिए ना जिससे थोड़ा हम लोग आगे बढ़ पाएंगे वो तो सृष्टि

771
00:54:31,120 --> 00:54:35,200
सतयुग हो गई ना जो आपने बात करी मीडिएटर

772
00:54:35,200 --> 00:54:39,280
की जरूरत क्या है जैसे मीडिएटर यहां पे है कि शिव

773
00:54:39,280 --> 00:54:43,440
जी को जब शंकर भगवान को जब लय करना है तो आपने कहा कि वो प्रेरणा

774
00:54:43,440 --> 00:54:47,680
देते हैं वैज्ञानिकों को यहां मीडिएटर है ना

775
00:54:47,680 --> 00:54:51,920
काम करने में यानी शिव जी की प्रेरणा से तो शंकर काम कर रहे हैं मगर

776
00:54:51,920 --> 00:54:55,920
शंकर भी प्रेरणा आगे दे रहे हैं वैज्ञानिकों को हां जी

777
00:54:55,920 --> 00:54:59,920
प्रेरणा दे रहे हैं ना तो वहां पर मीडिएटर नहीं है वहां

778
00:54:59,920 --> 00:55:04,240
पर शिव जी प्रेरणा दे रहे हैं विष्णु को विष्णु आगे मीडिएटर नहीं है खुद ही पहाड़

779
00:55:04,240 --> 00:55:08,320
झरने इत्यादि बना रहे हैं उसी का राज है वही कर रहे हैं लक्ष्मी

780
00:55:08,320 --> 00:55:12,160
नारायण का राज है समझ रहे हो अच्छा और लक्ष्मी नारायण ही अपनी

781
00:55:12,160 --> 00:55:16,800
राजधानी चला रहे हैं ठीक है तो

782
00:55:16,800 --> 00:55:20,880
ब्रह्मा विष्णु महेश है ब्रह्मा जी के अंदर शिव जी आते हैं

783
00:55:20,880 --> 00:55:24,960
स्वयं और वो ज्ञान देते हैं जिससे कि व्यक्ति अपना धर्म को

784
00:55:24,960 --> 00:55:29,120
जान सके और अपनी स्पिरिचुअल सर्किल में वह आगे

785
00:55:29,120 --> 00:55:33,600
बढ़ सके और विष्णु जो हैं

786
00:55:33,600 --> 00:55:37,280
उस शरीर में आते हैं वो

787
00:55:37,280 --> 00:55:41,280
शिव जी फिर से आते हैं वो आते नहीं है सॉरी सॉरी गलत

788
00:55:41,280 --> 00:55:45,440
हो जाएगा। विष्णु जी को प्रेरित करते हैं और प्रेरित करने

789
00:55:45,440 --> 00:55:49,760
के बाद विष्णु जी यह संसार दोबारा से सतयुग वाला संसार

790
00:55:49,760 --> 00:55:54,240
तैयार कर देते हैं जो नष्ट हो चुका था। और फिर

791
00:55:54,240 --> 00:55:58,320
जो शंकर जी हैं उनको वह जो शिव परमात्मा है

792
00:55:58,320 --> 00:56:02,560
शिव बाबा वह जो है

793
00:56:02,560 --> 00:56:06,640
प्रेरणा देते हैं। शंकर फिर वैज्ञानिक टाइप के लोगों को गलत लोगों को

794
00:56:06,640 --> 00:56:10,880
प्रेरणा देते हैं और फिर उनके द्वारा सृष्टि का विनाश हो जाता है। शंकर स्वयं

795
00:56:10,880 --> 00:56:15,120
भी तो करते होंगे विनाश कि प्रेरणा से ही करते हैं। नहीं मनुष्य के द्वारा

796
00:56:15,120 --> 00:56:19,440
प्रेरणा के द्वारा करते हैं। प्रेरणा के द्वारा ही करते हैं। यानी विष्णु जी डायरेक्ट

797
00:56:19,440 --> 00:56:23,520
काम कर रहे हैं। विष्णु जी डायरेक्ट जो भौतिक

798
00:56:23,520 --> 00:56:28,160
पदार्थ है उनके संपर्क में आ रहे हैं। विष्णु जी

799
00:56:28,160 --> 00:56:32,560
डायरेक्ट भौतिक पदार्थ है उनके संपर्क में आ रहे हैं। सतयुग में सतयुग

800
00:56:32,560 --> 00:56:38,160
में सतयुग में प्रधान सतो प्रधान धर्म में हां

801
00:56:38,160 --> 00:56:42,160
बहुत बढ़िया बहुत बढ़िया तो अब यहां पर एक बात आती है कि ब्रह्मा विष्णु

802
00:56:42,160 --> 00:56:46,480
महेश की अपनी सेल्फ कॉन्शियसनेस है

803
00:56:46,480 --> 00:56:51,760
खुद की या वह पुतले हैं केवल

804
00:56:51,760 --> 00:56:56,080
अब आप इसे किसी भी तरह ले सकते हैं। मैंने सिर्फ यह कहा है कि भगवान

805
00:56:56,080 --> 00:57:00,080
शिव ही भगवान है। यह देवता है। नहीं मगर अपने को

806
00:57:00,080 --> 00:57:04,160
भूल चुके होते हैं। नहीं वो वाले वो

807
00:57:04,160 --> 00:57:08,240
नहीं जो ये मनुष्य के रूप में जन्म लेना इनका जो सूक्ष्म रूप है। अभी

808
00:57:08,240 --> 00:57:12,240
मैं उसकी बात कर रहा हूं। सूक्ष्म रूप जो है इनका सूक्ष्म में ही रहते

809
00:57:12,240 --> 00:57:16,240
हैं। सूक्ष्म वतन में बैठे तो इनकी अपनी कॉनशसनेस

810
00:57:16,240 --> 00:57:20,240
है इन तीनों की इन तीनों की कोई अपनी

811
00:57:20,240 --> 00:57:24,960
कॉनशनेस नहीं है। ये भगवान के थ्रू ही करते हैं सब काम।

812
00:57:24,960 --> 00:57:29,120
यानी कि इनमें अपनी कोई फीलिंग कुछ भी नहीं है अनुभव।

813
00:57:29,120 --> 00:57:34,240
यानी ये जड़ है। भगवान शिव के द्वारा किया जाता है। यानी ये जड़ है।

814
00:57:34,240 --> 00:57:38,320
ऐसा कह सकते हैं आप। तो जड़ है तो इसका

815
00:57:38,320 --> 00:57:42,960
मतलब जैसे एक आत्मा शरीर धारण करती है

816
00:57:42,960 --> 00:57:43,520
मनुष्य

817
00:57:43,520 --> 00:57:47,760
का जड़ पदार्थों के जो उससे

818
00:57:47,760 --> 00:57:52,080
बनता है जड़ पदार्थों से तो ऐसे ही ब्रह्मा विष्णु महेश

819
00:57:52,080 --> 00:57:56,480
के रूप का का जो शरीर है वह परमात्मा धारण करता है

820
00:57:56,480 --> 00:58:00,560
हां परमात्मा धारण नहीं करते परमात्मा सिर्फ ब्रह्मा

821
00:58:00,560 --> 00:58:04,720
के अंदर धारण करते हैं ये स्वयं कार्य करते हैं ये दोनों में

822
00:58:04,720 --> 00:58:08,880
खुद की कौन कॉनशसनेस है अभी तो आपने मना किया कॉनशसनेस

823
00:58:08,880 --> 00:58:12,960
नहीं है नहीं कॉनशसनेस इसलिए देखिए आप कह रहे युगों की बात

824
00:58:12,960 --> 00:58:17,360
मत करिए वो वाली बात मत करिए सूक्ष्म की बात करिए तो सूक्ष्म

825
00:58:17,360 --> 00:58:21,440
में तो परमात्मा शिव के द्वारा ही प्रेरित होते हैं ये लेकिन जब ये

826
00:58:21,440 --> 00:58:25,600
सृष्टि में आते हैं तो सतयुग में स्वयं लक्ष्मी

827
00:58:25,600 --> 00:58:29,680
नारायण का राज होता है तो उस समय तो कश में ही काम कर रहे

828
00:58:29,680 --> 00:58:35,680
हैं ना देवता

829
00:58:36,560 --> 00:58:40,720
जो शरीर शरीर में आते हैं जैसे ब्रह्मा जी शरीर में आए ना

830
00:58:40,720 --> 00:58:44,880
लेखराज जी के लेखराज जी के रूप में प्रकट हुए ब्रह्मा जी शरीर

831
00:58:44,880 --> 00:58:49,200
में नहीं आए लेखराज ब्रह्मा जी लेखराज

832
00:58:49,200 --> 00:58:53,680
जी के रूप में प्रकट हुए जन्म लिया माता के गर्भ से जन्म लिया

833
00:58:53,680 --> 00:58:57,680
जी ठीक है तो ब्रह्मा जी जो सूक्ष्म रूप

834
00:58:57,680 --> 00:59:02,800
से वहां पर थे सूक्ष्म लोक में उन्होंने

835
00:59:02,800 --> 00:59:06,880
लेखराज के रूप में जन्म लिया। यह क्लियर है।

836
00:59:06,880 --> 00:59:11,120
ठीक है? जिससे कि उस वो जो जन्म लिया उन्होंने जिससे

837
00:59:11,120 --> 00:59:15,200
कि उस शरीर में परमात्मा आकर के फिर वो ज्ञान दे सके। ठीक है?

838
00:59:15,200 --> 00:59:19,440
ये क्लियर है। यानी कि परमात्मा आकर

839
00:59:19,440 --> 00:59:23,520
के ज्ञान दे सके उनके शरीर में। यानी कि परमात्मा नहीं

840
00:59:23,520 --> 00:59:27,600
है तब भी वो एक्सिस्ट कर रहे हैं ना ब्रह्मा जी? हां तब भी कर रहे हैं।

841
00:59:27,600 --> 00:59:31,760
अपने साथ ब्रह्मा जी एक्सिस्ट कर रहे हैं। अगर वह

842
00:59:31,760 --> 00:59:35,760
मनुष्य लोक में है तो लेखराज के रूप में जो ये शरीर है वो धारण करके

843
00:59:35,760 --> 00:59:39,760
एक्सिस्ट कर रहे हैं। जी और अगर वो सूक्ष्म लोक में है तो ब्रह्मा

844
00:59:39,760 --> 00:59:44,160
जी वहां पर भी एक्सिस्ट कर रहे हैं। जी तो कॉन्शियसनेस

845
00:59:44,160 --> 00:59:48,720
माननी पड़ेगी ना कि वहां पर उनके कॉन्शियस है। कौन है?

846
00:59:48,720 --> 00:59:51,760
एक मिनट एक मिनट एक मिनट एक मिनट इसके

847
00:59:51,760 --> 00:59:56,240
साथ ही साथ आपने विष्णु और शंकर को भी माना है कि सूक्ष्म लोक में वो भी होते हैं।

848
00:59:56,240 --> 01:00:00,320
तो उन दोनों और वहां पे तो आप कह रही हो वो प्रेरणा से करवाते हैं। वहां तो उनके

849
01:00:00,320 --> 01:00:04,320
अंदर नहीं आते वो। है ना? यानी कि प्रेरणा लेने के लिए

850
01:00:04,320 --> 01:00:08,640
मुझे कॉन्शियस होना पड़ेगा। तभी तो मैं किसी से प्रेरित होऊंगा। यानी कि इन दोनों

851
01:00:08,640 --> 01:00:12,960
की भी कॉन्शियसनेस एक्सिस्ट करती है। ब्रह्मा विष्णु महेश की अपनी-अपनी

852
01:00:12,960 --> 01:00:17,520
कॉन्शियसनेस है। हां जी। ठीक है? तो कॉन्शियसनेस

853
01:00:17,520 --> 01:00:21,520
तीन तरह की हो गई। एक तो ये जो जीवात्मा जो फंसती हैं, फिर आगे

854
01:00:21,520 --> 01:00:26,000
चलती है, फिर वो मुक्त होती है, फिर फंसती है, फिर आगे चलती है, फिर मुक्त होती है।

855
01:00:26,000 --> 01:00:30,480
एक हो गई परमात्मा की कॉन्शियसनेस। जी। ठीक है?

856
01:00:30,480 --> 01:00:34,480
एक परमात्मा की कॉन्शियसनेस हो गई। जी। और एक

857
01:00:34,480 --> 01:00:38,960
ये कॉन्शियसनेस है ब्रह्मा, विष्णु, महेश की। जी। तीन।

858
01:00:38,960 --> 01:00:43,040
यानी कि जो चेतन सत्ता है

859
01:00:43,040 --> 01:00:47,200
पांच तरह की हो गई। जिसमें कि जो कर्म का फल

860
01:00:47,200 --> 01:00:51,680
भोग रहा है जी जो कर्म का फल भोग रहा है वह है जीव

861
01:00:51,680 --> 01:00:56,080
और जिसको कोई फल नहीं भोगना है वो है परमात्मा इसीलिए परमात्मा

862
01:00:56,080 --> 01:01:00,400
सदा मुक्त है मगर अब यहां प्रॉब्लम ये आ रही है कि जीव तो कर्मों

863
01:01:00,400 --> 01:01:04,480
का फल भोग रहा है इसलिए मुक्त नहीं है और परमात्मा हम कहते हैं जो

864
01:01:04,480 --> 01:01:06,960
सदा के लिए मुक्त है तो सदा के लिए मुक्त

865
01:01:06,960 --> 01:01:11,200
तो ये भी सिद्ध हो रहे हैं ना ब्रह्मा विष्णु महेश नहीं देखिए

866
01:01:11,200 --> 01:01:15,280
अब मैं बताऊं आपको सूक्ष्म बता में इन तीनों का

867
01:01:15,280 --> 01:01:19,360
सूक्ष्म शरीर है और वो सदा ही होता है। वो

868
01:01:19,360 --> 01:01:23,360
चाहे जन्म में आए तब भी होता है और ये जन्म में ना

869
01:01:23,360 --> 01:01:27,600
आए तब भी होता है। तीनों ही सूक्ष्म शरीर

870
01:01:27,600 --> 01:01:32,160
में ऐसे ही विराजित है जैसे शिव परमात्मा परमधाम में।

871
01:01:32,160 --> 01:01:36,320
फिर वो जब नीचे प्रवेश करते हैं तो

872
01:01:36,320 --> 01:01:40,320
ब्रह्मा का जन्म ये अंत का है और विष्णु

873
01:01:40,320 --> 01:01:44,640
का जन्म सबसे पहले सतयुग में विष्णु आते हैं। जब विष्णु

874
01:01:44,640 --> 01:01:48,640
जन्म लेते हैं पहले श्री कृष्ण बनते हैं और फिर वह लक्ष्मी नारायण बनते

875
01:01:48,640 --> 01:01:53,040
हैं। तब भी सूक्ष्म शरीर में विष्णु ऊपर भी होते हैं

876
01:01:53,040 --> 01:01:57,280
और नीचे भी जन्म लेते हैं। ठीक है? फिर वही

877
01:01:57,280 --> 01:02:01,520
आत्मा वही विष्णु अब समझिएगा। वही

878
01:02:01,520 --> 01:02:05,840
विष्णु त्रेता में राम बने। वही विष्णु फिर द्वापर में

879
01:02:05,840 --> 01:02:09,840
उसी विष्णु ने स्वयं के अलग पर जा रहे हैं।

880
01:02:09,840 --> 01:02:14,320
नहीं यहां ब्रह्मा और विष्णु एक हो गए हैं। सुनो ना

881
01:02:14,320 --> 01:02:18,560
यहां ब्रह्मा और विष्णु एक हो गए हैं। दो बात ये हो रही है परमात्मा के अलावा

882
01:02:18,560 --> 01:02:22,240
कोई कॉनशसनेस फ्री है कि नहीं है? परमात्मा

883
01:02:22,240 --> 01:02:26,240
के अलावा सूक्ष्म वतन में इन तीनों की कॉनशसनेस है। है

884
01:02:26,240 --> 01:02:30,240
तो इनको कोई दुख तो है नहीं। नहीं। ठीक है

885
01:02:30,240 --> 01:02:34,240
तो ये मुक्त हुए ना कलयुग में तो होता है सतयुग के बाद तो दुख होता है

886
01:02:34,240 --> 01:02:38,240
मैं वही समझाने की कोशिश कर रही हूं इनको इनको इनको ब्रह्मा विष्णु महेश

887
01:02:38,240 --> 01:02:42,320
को इनको भी दुख होता है अच्छा वो वो अब आप

888
01:02:42,320 --> 01:02:46,480
बताइए कैसे हो रहा है बताने जा बताने जा रही हूं उसी सुख दुख

889
01:02:46,480 --> 01:02:50,480
के खेल को बता रही हूं तो वो सतयुग में लक्ष्मी नारायण

890
01:02:50,480 --> 01:02:54,480
होते हैं फिर वो त्रेता में राम होते हैं तो राम को जो दुख दिखाया

891
01:02:54,480 --> 01:02:58,800
है फिर उसके बाद वो भक्ति करते हैं स्वयं के चित्रों

892
01:02:58,800 --> 01:03:02,800
की क्योंकि वह स्वयं के जन्मों को भूल गए हैं तो खुद के ही चित्रों

893
01:03:02,800 --> 01:03:06,960
की पूजा करने लगते हैं और फिर यही विष्णु राजा

894
01:03:06,960 --> 01:03:11,440
विक्रमादित्य के रूप में जन्म लेते हैं। सोमनाथ का मंदिर बनाते हैं

895
01:03:11,440 --> 01:03:15,680
और फिर वो लास्ट में बनते हैं लेखराज। यह

896
01:03:15,680 --> 01:03:19,760
लेखराज ही विष्णु है और लेखराज ही ब्रह्मा है। लेखराज का ही

897
01:03:19,760 --> 01:03:24,160
जन्म विष्णु जन्म है और लेखराज का ही जन्म लेखराज है और वही लेखराज

898
01:03:24,160 --> 01:03:28,480
को फिर शिव भगवान आकर ब्रह्मा नाम देते हैं। शिव होम कहते

899
01:03:28,480 --> 01:03:32,720
हैं उनके अंदर आके और फिर वो कलयुग में उनके

900
01:03:32,720 --> 01:03:36,720
अंदर आकर पुनः याद दिलाते हैं कि तुम वही विष्णु हो। तुम वही

901
01:03:36,720 --> 01:03:37,440
श्री कृष्ण

902
01:03:37,440 --> 01:03:41,760
हो। तो बहिष् का फोटो दिखाते हैं। हाथ पर बहिष्

903
01:03:41,760 --> 01:03:46,160
लिए हुए श्री कृष्ण का दर्शन होता है इनको।

904
01:03:46,160 --> 01:03:50,480
वहां विनाश की लीला का दर्शन होता है। फिर यह अपना सारा जीवन छोड़

905
01:03:50,480 --> 01:03:54,640
देते हैं। यह हीरो के जोरी थे, व्यापारी थे, वह सब छोड़ देते हैं।

906
01:03:54,640 --> 01:03:59,600
और यह भगवान शिव का ज्ञान सुनाने लगते हैं।

907
01:03:59,600 --> 01:04:03,600
यानी कि लेखराज जी के रूप में केवल ब्रह्मा नहीं आए

908
01:04:03,600 --> 01:04:08,000
हैं। ब्रह्मा तो नाम मिला है। तब जब शिव जी आए उनके तन में

909
01:04:08,000 --> 01:04:12,320
आए तो विष्णु जी हैं। विष्णु जी तो मनुष्य

910
01:04:12,320 --> 01:04:16,960
हो गए ना। विष्णु जी क्यों आए? विष्णु जी शिव के रूप में थोड़ी आए।

911
01:04:16,960 --> 01:04:21,120
विष्णु जी तो स्वयं के रूप में आए ना। यह तो लेखराज का ही जन्म

912
01:04:21,120 --> 01:04:25,360
हुआ ना। मतलब हम सब भी देवी देवता थे।

913
01:04:25,360 --> 01:04:29,520
जैसे लेखराज थे। जैसे लेखराज

914
01:04:29,520 --> 01:04:33,680
लक्ष्मी नारायण थे तो हम यानी कि अब मैं समझ गया। यानी कि मैं समझ गया। अब

915
01:04:33,680 --> 01:04:38,000
मैं थोड़ा सा कनेक्ट कर पा रहा हूं। यानी कि शंकर जी ने

916
01:04:38,000 --> 01:04:42,160
किसी मनुष्य के रूप में ये सृष्टि को नष्ट किया। हां। फिर

917
01:04:42,160 --> 01:04:46,800
विष्णु जी ने किसी मनुष्य के रूप में

918
01:04:46,800 --> 01:04:50,880
इस सृष्टि में वो झरने वगैरह जो खो गए थे संसाधन उनको दोबारा

919
01:04:50,880 --> 01:04:53,520
प्रकट किया और फिर

920
01:04:53,520 --> 01:04:58,400
ब्रह्मा जी ने लेखराज नामक मनुष्य के रूप में

921
01:04:58,400 --> 01:05:02,640
लोगों को ज्ञान दिया जी ठीक है स्वयं लक्ष्मी नारायण

922
01:05:02,640 --> 01:05:06,640
बने और हम सबको भी देवी देवता बनाया ब्रह्मा जी

923
01:05:06,640 --> 01:05:11,600
लक्ष्मी नारायण बन जाते हैं हां जी ब्रह्मा जी बनते

924
01:05:11,600 --> 01:05:15,600
हां जी तो विष्णु जी कौन है फिर? ब्रह्मा का ही

925
01:05:15,600 --> 01:05:20,480
जन्म विष्णु का जन्म है। यानी ब्रह्मा विष्णु एक है।

926
01:05:20,480 --> 01:05:25,120
हां जी। जी ब्रह्मा विष्णु एक है। अलग-अलग जन्मों की कहानी है।

927
01:05:25,120 --> 01:05:30,960
शंकर अलग है। शंकर अलग है। यानी जो लेख

928
01:05:30,960 --> 01:05:35,120
लेखराज के शरीर से जब जिस जन्म में

929
01:05:35,120 --> 01:05:39,280
लेखराज रूपी शरीर है और शिव जी आकर के

930
01:05:39,280 --> 01:05:43,440
उनके शरीर से वो ज्ञान दे रहे हैं तो वो ब्रह्मा है। ठीक

931
01:05:43,440 --> 01:05:47,440
है? और जब वह लक्ष्मी नारायण के रूप

932
01:05:47,440 --> 01:05:51,920
में वह सृष्टि को पुन स्थापित कर रहे हैं तो वह विष्णु

933
01:05:51,920 --> 01:05:56,240
है। ठीक है जी। और जब वही

934
01:05:56,240 --> 01:06:00,320
ब्रह्मा जी वो वो ठीक है वो ठीक है वही

935
01:06:00,320 --> 01:06:04,800
ब्रह्मा जी जब शंकर के रूप से शंकर के रूप से शंकर के

936
01:06:04,800 --> 01:06:08,640
जब किसी मनुष्य के रूप में सृष्टि का वो कर रहे हैं नाश

937
01:06:08,640 --> 01:06:12,640
तो वो शंकर है वही ब्रह्मा जी शंकर ब्रह्मा नहीं है कभी

938
01:06:12,640 --> 01:06:16,640
भी लेखराज से शंकर का कनेक्शन नहीं है शिव है यानी कि यानी

939
01:06:16,640 --> 01:06:19,280
कि सिर्फ दो

940
01:06:19,280 --> 01:06:23,440
शिव शिव जी शंकर है

941
01:06:23,440 --> 01:06:27,840
शिव शिव जी लेखराज के अंदर आते हैं शंकर जी नहीं आते शिव और शंकर अलग-अलग

942
01:06:27,840 --> 01:06:32,160
है शिवा जी मैं कह रहा हूं कि जो

943
01:06:32,160 --> 01:06:36,320
जैसे ब्रह्मा जी का एकत्व स्थापित हुआ विष्णु जी के साथ तो क्या

944
01:06:36,320 --> 01:06:40,320
ब्रह्मा जी का के साथ हुआ ऐसे शिव के साथ नहीं शंकर पूछ रहा

945
01:06:40,320 --> 01:06:44,800
हूं ये ब्रह्मा विष्णु महेश की बात पूछ रहा हूं शंकर नहीं शंकर डिफरेंट पर्सनालिटी है

946
01:06:44,800 --> 01:06:48,800
अच्छा तो यानी दो पर्सनालिटी है यानी

947
01:06:48,800 --> 01:06:53,040
कि सूक्ष्म लोक में दो कॉन्शियसनेस है एक है तीनो

948
01:06:53,040 --> 01:06:57,280
है लेकिन तीनों में ब्रह्मा और विष्णु के अलग-अलग

949
01:06:57,280 --> 01:07:01,360
जन्म है। ब्रह्मा विष्णु एक ही आत्मा है। शंकर अलग आत्मा

950
01:07:01,360 --> 01:07:05,680
है। नहीं जन्म में अलग-अलग हो जाना बात अलग है। सूक्ष्म लोक में कितने

951
01:07:05,680 --> 01:07:10,400
सूक्ष्म में तीनों एक्सिस्ट करते हैं। तीनों ही अलग तो फिर तीनों अलग-अलग हो गया ना।

952
01:07:10,400 --> 01:07:14,400
हां तो फिर यह कैसे हो गया कि वो ब्रह्मा

953
01:07:14,400 --> 01:07:18,720
ही विष्णु है। फिर जब तीनों अलग-अलग है जो सृष्टि

954
01:07:18,720 --> 01:07:22,800
है ऊपर तीनों अलग-अलग है। लेकिन जो सृष्टि है

955
01:07:22,800 --> 01:07:23,680
वो सतयुग

956
01:07:23,680 --> 01:07:27,840
से जिस तरह शुरू होती है वो ब्रह्मा की ही आत्मा है। ऐसा

957
01:07:27,840 --> 01:07:33,840
भगवान शिव ने बताया है अपनी ज्ञान मुरलियों में।

958
01:07:36,000 --> 01:07:41,280
ब्रह्मा की ही आत्मा है तो विष्णु का काम क्या है फिर?

959
01:07:41,280 --> 01:07:45,440
अगर ब्रह्मा अगर ब्रह्मा की ही आत्मा लक्ष्मी नारायण है

960
01:07:45,440 --> 01:07:49,680
तो फिर वो जो जो सूक्ष्म लोक में जो विष्णु बैठे हैं उनका क्या काम है फिर

961
01:07:49,680 --> 01:07:53,840
मैंने आपको बताया ना वहां भी तीनों के शरीर होते हैं और अपने पार्ट में भी तीनों

962
01:07:53,840 --> 01:07:57,920
अलग-अलग आते हैं सृष्टि में क्या ऐसा नहीं हुआ है कि श्री

963
01:07:57,920 --> 01:08:02,880
कृष्ण का जन्म हुआ तो विष्णु अलग पर्सनालिटी है और कृष्ण अलग है

964
01:08:02,880 --> 01:08:06,880
ऐसा नहीं हुआ ना हुआ बस वही मैं बता रही हूं आपको तो मैं

965
01:08:06,880 --> 01:08:11,440
मैं ये पूछ रहा हूं उनका काम क्या है विष्णु जी का क्योंकि यहां जो काम

966
01:08:11,440 --> 01:08:15,840
है बताना राजा को राजधानी

967
01:08:15,840 --> 01:08:19,920
स्थापन करना अपना पाठ तो वो काम तो वो काम तो आप कह रही हो कि ब्रह्मा जी

968
01:08:19,920 --> 01:08:24,640
ही वो पालना का राजा बनके पालना का एक मिनट

969
01:08:24,640 --> 01:08:28,880
नीलमा नीलमा बहन हां बोलो आप आप

970
01:08:28,880 --> 01:08:33,040
बहुत अच्छा डिफेंड कर पा रही मुझे लग रहा है कि शायद ही कोई ब्रह्मा कुमारी

971
01:08:33,040 --> 01:08:37,600
ऐसी मिले जो हम डिफेंड कर पाए मगर फिर भी

972
01:08:37,600 --> 01:08:38,800
मुझे थोड़ा सा इस बात

973
01:08:38,800 --> 01:08:43,200
का ध्यान रखना पड़ रहा है कि मेरी और आपकी एक इस स्ट्रीम

974
01:08:43,200 --> 01:08:47,200
के अलावा एक वो है मैत्री। ठीक है? तो मैं

975
01:08:47,200 --> 01:08:51,760
ये पूछ रहा हूं। इस बात का ध्यान मत रखिए। आपको जो बोलना है आप बोलिए।

976
01:08:51,760 --> 01:08:55,840
तो सबका आंसर दूंगी। तो समस्या ये आ रही है

977
01:08:55,840 --> 01:09:01,600
कि सतयुग में जो झरने पहाड़ जो

978
01:09:01,600 --> 01:09:05,680
प्राकृतिक संसाधन है जिसकी आवश्यकता मनुष्य को होती है जीवन

979
01:09:05,680 --> 01:09:09,760
जीने के लिए। पेट ब्रह्मा कुमारी से बात कर रहे हैं। प्रॉब्लम वहां आ रही है।

980
01:09:09,760 --> 01:09:13,920
ठीक है। ठीक है। आपने मुझे दी पिछली बार कि आप डिफेंस करिएगा अपने

981
01:09:13,920 --> 01:09:17,920
आपको। इसलिए मैं जरा खुल के बोल रही हूं आज। हां हां। तो अब मैं

982
01:09:17,920 --> 01:09:22,240
वही कह रहा हूं। कैसे निकलेंगे? ठीक है। ठीक है। तो अभी मैं ये कह रहा हूं।

983
01:09:22,240 --> 01:09:26,720
अभी आपने कहा कि ब्रह्मा जी ही लक्ष्मी

984
01:09:26,720 --> 01:09:30,720
नारायण के रूप में जो शंकर जी ने जो लय

985
01:09:30,720 --> 01:09:35,120
कर दिया था इस सृष्टि का ब्रह्मा जी ही उसमें जो प्राकृतिक

986
01:09:35,120 --> 01:09:39,280
संसाधन लुप्त हो गए थे पृथ्वी में समाहित हो गए थे ब्रह्मा जी ही लक्ष्मी

987
01:09:39,280 --> 01:09:43,600
नारायण के रूप में पुन स्थापित करते हैं। क्लियर है?

988
01:09:43,600 --> 01:09:47,920
क्लियर है। पक्का है? लॉक कर दे। पक्का है। हां। ठीक है।

989
01:09:47,920 --> 01:09:52,000
ब्रह्मा जी लक्ष्मी नारायण कैसे है वो जानना पड़ेगा आपको ना? मैं बैठी

990
01:09:52,000 --> 01:09:54,160
हूं आपके सामने। वो हमें

991
01:09:54,160 --> 01:09:58,240
ज्ञान देकर हमारे द्वारा गुणों गुणों के द्वारा

992
01:09:58,240 --> 01:10:04,240
वाइब्रेशन के द्वारा इस समय कर रहे हैं वो।

993
01:10:04,400 --> 01:10:09,200
फिर भगवान फिर लक्ष्मी नारायण के रूप में हम लोग ही जन्म लेंगे।

994
01:10:09,200 --> 01:10:13,520
ब्रह्मा और जो मम्मा है ओम राधे वो बनेंगे लक्ष्मी नारायण

995
01:10:13,520 --> 01:10:17,680
और हम सब बनेंगे देवी देवता।

996
01:10:17,680 --> 01:10:21,920
अभी सृष्टि को साफ करना है। अभी सृष्टि को पावन करना है। तभी

997
01:10:21,920 --> 01:10:25,920
तो हम लोगों ने ब्रह्मचर्य व्रत धारण करके यह सब रूप

998
01:10:25,920 --> 01:10:31,920
धारण किया है। इसीलिए तो हम ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं।

999
01:10:32,960 --> 01:10:36,960
अभी हो रही है सृष्टि की स्थापना तो अभी अभी परिवर्तन

1000
01:10:36,960 --> 01:10:41,040
हो रहा है। एक तरफ प्लेय हो रही है। देख रहे हैं आप नेपाल जैसी त्रासदी आ

1001
01:10:41,040 --> 01:10:45,280
रही है। दूसरी तरफ आप मुझे प्लीज क्वेश्चन करने दीजिए। प्लीज मुझे क्वेश्चन

1002
01:10:45,280 --> 01:10:49,920
करने दीजिए। बोलिए थोड़ा लंबे एक्सप्लेनेशन में चली जाती है थोड़ा-थोड़ा

1003
01:10:49,920 --> 01:10:54,240
तो बात ऐसी है कि आपने कहा ब्रह्मा जी लक्ष्मीारायण

1004
01:10:54,240 --> 01:10:58,240
के रूप में सतयुग रूपी जो

1005
01:10:58,240 --> 01:11:02,320
सृष्टि की स्थापना करनी होती है वो करती करते हैं ब्रह्मा

1006
01:11:02,320 --> 01:11:06,320
जी और लक्ष्मी नारायण कहलाते हैं। ठीक है? तो

1007
01:11:06,320 --> 01:11:10,400
जो सूक्ष्म लोक में विष्णु जी हैं उनका कार्य क्या

1008
01:11:10,400 --> 01:11:14,640
है? देखिए आप जहां मुझे रोक रहे हैं

1009
01:11:14,640 --> 01:11:18,640
मेरी उसी बात में सार है। अगर आप तोड़त के क्वेश्चन करोगे तो

1010
01:11:18,640 --> 01:11:22,800
इसका आंसर कभी नहीं मिलेगा और इसमें मैं उलझने वाली नहीं हूं जिसमें

1011
01:11:22,800 --> 01:11:26,880
आप मुझे उलझाने वाले हैं। आप समझिए मैं आपको स्थापना

1012
01:11:26,880 --> 01:11:31,600
भी बता रही हूं। पालना भी बता रही हूं और विनाश भी बता रही हूं।

1013
01:11:31,600 --> 01:11:36,160
तीनों चीजों को समझने का प्रयास करिए। स्थापना

1014
01:11:36,160 --> 01:11:40,800
यह है कि ब्रह्मा लेखराज दादा लेखराज के

1015
01:11:40,800 --> 01:11:45,120
रूप में जब ब्रह्मा होते हैं शिव उनके अंदर आते हैं और आकर

1016
01:11:45,120 --> 01:11:48,320
के पुरानी विकारी दुनिया को निर्विकारी

1017
01:11:48,320 --> 01:11:52,640
बनाके ब्रह्मचर्य व्रत धारण करके हम जैसे बच्चों को जन्म

1018
01:11:52,640 --> 01:11:56,720
देते हैं। जन्म माना जैसे कर्ण सुना है आपने

1019
01:11:56,720 --> 01:12:00,800
कर्ण कर्ण का जन्म कैसे बताते हैं कि कान में ज्ञान

1020
01:12:00,800 --> 01:12:04,880
दिया कर्ण हो गया और वो जैसे कुंती का पुत्र हुआ

1021
01:12:04,880 --> 01:12:09,120
जैसे बिना मतलब मैं जिसको ज्ञान दूं वो

1022
01:12:09,120 --> 01:12:13,120
मेरा बालक कहलाएगा मैं उसकी माता कहलाऊंगी भले जन्म से मैं उसकी माता नहीं

1023
01:12:13,120 --> 01:12:17,440
हूं ज्ञान सुना के मतलब जो स्टूडेंट होते हैं हमारे

1024
01:12:17,440 --> 01:12:21,520
समझ रहे हैं शिवा जी समझ रहे ऐसे ऐसे कुंती और कर्ण

1025
01:12:21,520 --> 01:12:25,680
के पवित्र रिश्ते को दिखाते सूर्य पुत्र कर्ण मतलब ज्ञान

1026
01:12:25,680 --> 01:12:29,760
सूर्य परमात्मा का पुत्र मतलब मैं जो ज्ञान सुना रही हूं

1027
01:12:29,760 --> 01:12:33,840
वो ज्ञान सूर्य का ज्ञान सुना रही हूं और जो सुन रहा है वो कर्ण

1028
01:12:33,840 --> 01:12:38,720
है। यहां पर मैं कुंती हूं जिस समय ज्ञान सूर्य का पुत्र उसे मिला।

1029
01:12:38,720 --> 01:12:42,800
ये हमारे पास व्याख्या है। पहली बात वो सारे ही हम

1030
01:12:42,800 --> 01:12:47,120
ज्ञान सूर्य स्थापन करते हैं और ऐसे बच्चों को जन्म देते हैं और ब्रह्मा

1031
01:12:47,120 --> 01:12:51,280
द्वारा ये हो रहा है। ये हो गया स्थापना का कार्य। उसके

1032
01:12:51,280 --> 01:12:55,440
बाद होता है यह यही से प्रलय का काम शुरू होते हैं शंकर जी

1033
01:12:55,440 --> 01:12:59,280
का कि जब इस सृष्टि में

1034
01:12:59,280 --> 01:13:03,520
नारी जो है वो अपने धर्म को भूल जाए। चोर

1035
01:13:03,520 --> 01:13:07,520
चोर चोरी ऐसे करने लगे कि अपना घर भी ना छोड़े।

1036
01:13:07,520 --> 01:13:11,920
नारियां बाल कटवाने लगे। मां-बाप बच्चियों

1037
01:13:11,920 --> 01:13:16,400
की नौकरी के पैसे खाने लगे। ऐसे कलयुग के जो निशान आते हैं

1038
01:13:16,400 --> 01:13:20,720
कलयुग के अंत के इसमें शंकर जी प्रलय करते हैं।

1039
01:13:20,720 --> 01:13:24,720
वो जब प्रलय का कार्य साथसा चलता है तो स्थापना का कार्य भी साथ साथ

1040
01:13:24,720 --> 01:13:28,720
चलता है। ज्ञान मुरली द्वारा जो ब्रह्मा कुमार कुमारी कर

1041
01:13:28,720 --> 01:13:33,040
रहे हैं। तुरंत ही इस प्रलय के बाद धीरे-धीरे सृष्टि साफ

1042
01:13:33,040 --> 01:13:37,200
होती है और सतयुग आता है और यह ब्रह्मा जैसे लेखराज अभी

1043
01:13:37,200 --> 01:13:41,280
शरीर छोड़ चुके हैं। दादा लेखराज के शरीर छोड़ने के बाद ये आत्मा

1044
01:13:41,280 --> 01:13:45,520
आती है सतयुग में। फिर श्री कृष्ण के रूप में जन्म लेती है।

1045
01:13:45,520 --> 01:13:49,840
श्री कृष्ण राधे होकर के ओम राधे श्री कृष्ण बाबा मम्मा आते हैं

1046
01:13:49,840 --> 01:13:54,000
और हम सब भी धीरेधी उनके साथ सतयुग में जाएंगे। यह है विष्णु का कार्य।

1047
01:13:54,000 --> 01:13:58,320
तो विष्णु किसी के द्वारा नहीं करा रहे हैं। यहां शंकर का कार्य समाप्त

1048
01:13:58,320 --> 01:14:03,680
हो गया। अब सृष्टि पुनः नए रूप में शुरू हो गई।

1049
01:14:03,680 --> 01:14:08,320
तो यहां दादा लेखराज जी विष्णु हो गए। लक्ष्मी नारायण हो गए।

1050
01:14:08,320 --> 01:14:12,400
नर से नर तो ऐसी करनी करके नारायण बने। नारी तो

1051
01:14:12,400 --> 01:14:17,280
ऐसी करने लक्ष्मी पूरा हो गया आपका। हां जी।

1052
01:14:17,280 --> 01:14:18,640
मेरा क्वेश्चन ये नहीं

1053
01:14:18,640 --> 01:14:22,720
है कि आप मेरी शायद थिंकिंग समझ नहीं पा रही हैं। मैं पूछ

1054
01:14:22,720 --> 01:14:26,720
रहा हूं सूक्ष्म लोक में तीन लोग हैं या दो लोग हैं? तीनों लोग

1055
01:14:26,720 --> 01:14:30,800
हैं। तीन है। यानी कि आप ये कह रही है

1056
01:14:30,800 --> 01:14:34,880
सूक्ष्म कहीं आप ऐसा तो नहीं कह रही सूक्ष्म लोक में भी ब्रह्मा जी ही

1057
01:14:34,880 --> 01:14:39,120
विष्णु रूप से भी है और ब्रह्मा रूप से भी है। ऐसा कह रही है क्या?

1058
01:14:39,120 --> 01:14:43,120
जी हां वह तीनों अलग वहां बैठे हैं। उसके बाद भी नीचे सारा

1059
01:14:43,120 --> 01:14:47,520
कार्य मनुष्य रूप में चल रहा है। सूक्ष्म लोक में तीन

1060
01:14:47,520 --> 01:14:51,760
लोग हैं या फिर दो लोग हैं? तीन लोग हैं। तीन

1061
01:14:51,760 --> 01:14:56,080
लोग हैं। अब क्या हुआ कि नीचे ब्रह्मा जी आते हैं,

1062
01:14:56,080 --> 01:15:00,240
ज्ञान देते हैं और शंकर जी प्रलय कर देते हैं।

1063
01:15:00,240 --> 01:15:04,640
वो प्रेरित करके करें या खुद आगे करें वो अलग पार्ट हो जाएगा।

1064
01:15:04,640 --> 01:15:08,720
मगर वह प्रलय कर देते हैं। अब सतयुग आता है तो ब्रह्मा जी जो

1065
01:15:08,720 --> 01:15:12,720
है वहां पर दोबारा पुन निर्माण कर देते हैं। यह नदियां,

1066
01:15:12,720 --> 01:15:17,040
पहाड़, झील और झरने, बादल और वादी इन सब का पुनर्निर्वाह

1067
01:15:17,040 --> 01:15:21,040
कर देते हैं। तो मैं यह कह रहा हूं जो सूक्ष्म लोक में

1068
01:15:21,040 --> 01:15:25,040
जो तीन एंटिटीज हैं ब्रह्मा, विष्णु, महेश

1069
01:15:25,040 --> 01:15:29,600
दो काम स्थापना और

1070
01:15:29,600 --> 01:15:33,600
क्या कहते हैं? ज्ञान देना और जो है पुन स्थापना वह ब्रह्मा

1071
01:15:33,600 --> 01:15:34,100
जी

1072
01:15:33,760 --> 01:15:37,840
ने कर दिए। ठीक है? और शंकर जी ने अपना काम कर दिया। लय

1073
01:15:37,840 --> 01:15:41,840
कर दिया। तो विष्णु जी जो वहां बैठे हैं सूक्ष्म लोक में

1074
01:15:41,840 --> 01:15:45,920
उनका कार्य क्या है? यह पूछ रहा हूं मैं। क्योंकि तब भी वहां रहेंगे।

1075
01:15:45,920 --> 01:15:50,000
वो तीनों तब भी वहां एक्सिस्ट करेंगे और वह कभी भी निवास से हटते हैं और

1076
01:15:50,000 --> 01:15:54,160
उनका कार्य है जन्म लेकर के अपने

1077
01:15:54,160 --> 01:15:58,320
जन्मों में आना और फिर से दादा लेखराज के थ्रू ब्रह्मा

1078
01:15:58,320 --> 01:16:02,320
हो के फिर ज्ञान देना फिर वही सृष्टि चक्र

1079
01:16:02,320 --> 01:16:05,280
में आना

1080
01:16:05,280 --> 01:16:09,520
लेखराज के रूप में तो ब्रह्मा जी आ रहे हैं ना वहां तीन

1081
01:16:09,520 --> 01:16:13,520
चीजें है ना कलयुग में ना आप क्यों क्यों कलयुग में चले

1082
01:16:13,520 --> 01:16:17,840
जाते हैं बार-बार ठीक है तो आप कलयुग की बात करते सतयुग में सतयुग

1083
01:16:17,840 --> 01:16:21,920
में विष्णु रूप में आ रहे है ना ब्रह्मा जी तो मैं कह रहा हूं मैं कह रहा हूं

1084
01:16:21,920 --> 01:16:25,920
सूक्ष्म लोक में तो विष्णु जी है ना वहां पर ब्रह्मा जी के बगल में वो

1085
01:16:25,920 --> 01:16:30,000
शाश्वत है सनातन क्या तो वो वो उन विष्णु का कोई

1086
01:16:30,000 --> 01:16:34,080
काम है क्या कि नहीं है मैं ये पूछ रहा हूं पालना क्यों नहीं

1087
01:16:34,080 --> 01:16:38,160
है वो राजा होके पालना करते हैं राजा

1088
01:16:38,160 --> 01:16:42,320
होके तो ये लक्ष्मी नारायण बनके ब्रह्मा जी पालना करते हैं ना वही तो लक्ष्मी

1089
01:16:42,320 --> 01:16:46,400
नारायण विष्णु है सूक्ष्म लोक की बात कर रहा हूं मैं।

1090
01:16:46,400 --> 01:16:50,480
सूक्ष्म लोक में कार्य कर रहे हैं ना। सूक्ष्म लोक से नीचे

1091
01:16:50,480 --> 01:16:54,480
आए दो शरीर जैसे सूक्ष्म लोक में उनके शरीर है

1092
01:16:54,480 --> 01:16:58,800
ऐसे मेरे और आपके भी शरीर है। ऐसा नहीं है कि सूक्ष्म

1093
01:16:58,800 --> 01:17:03,120
शरीर नहीं है। सूक्ष्म शरीर तो साइंस भी मानता है। शिव जी

1094
01:17:03,120 --> 01:17:07,120
आप मैं ये नहीं कह रहा हूं। मैं ये नहीं कह रहा हूं कि

1095
01:17:07,120 --> 01:17:11,200
सूक्ष्म लोक में नहीं मान रहा हूं। मैं ये कह रहा हूं कि वहां जो जैसे

1096
01:17:11,200 --> 01:17:15,200
ब्रह्मा विष्णु महेश के अपने-अपने काम है तो ब्रह्मा जी विष्णु

1097
01:17:15,200 --> 01:17:19,280
वाले काम भी कर रहे हैं तो फिर विष्णु का काम क्या बचा? विष्णु

1098
01:17:19,280 --> 01:17:20,400
या तो ये कहिए कि वहां

1099
01:17:20,400 --> 01:17:24,560
पे दो या तो एक मिनट या एक मिनट एक मिनट

1100
01:17:24,560 --> 01:17:28,560
या तो ये कह दीजिए कि वहां पर सूक्ष्म लोक में तीन चीजें नहीं है। दो ही

1101
01:17:28,560 --> 01:17:32,960
है। एक ब्रह्मा है एक शंकर है। ब्रह्मा जी नीचे

1102
01:17:32,960 --> 01:17:37,200
अपने मन से बातें मत बनाइए। देखिए ब्रह्मा जी

1103
01:17:37,200 --> 01:17:41,360
भी ऊपर है। वो कलयुग में ब्रह्मा का पाठ बजाते हैं

1104
01:17:41,360 --> 01:17:45,360
और ऊपर जब होते हैं वो मेडिटेशन के थ्रू जब हम उन्हें

1105
01:17:45,360 --> 01:17:49,600
अनुभव करते हैं तो वो शाश्वती सदा ही मिलते हैं वही रहते

1106
01:17:49,600 --> 01:17:53,600
हैं। विष्णु जो है वो भी ऊपर है लेकिन अपना पाठ

1107
01:17:53,600 --> 01:17:57,600
नीचे भी बजाते हैं। ऐसा श्री कृष्ण लीलाओं में या श्री कृष्ण के भागवत

1108
01:17:57,600 --> 01:18:01,680
में भी पढ़ा होगा आपने कि विष्णु वहां भी है और विष्णु यहां भी है।

1109
01:18:01,680 --> 01:18:05,840
ऐसा तो नहीं है कि विष्णु वहां रह के नीचे मैं ये नहीं

1110
01:18:05,840 --> 01:18:10,000
कह रहा। मैं मना नहीं कर रहा हूं। मैं आपसे पूछ रहा हूं नहीं देने देते ना

1111
01:18:10,000 --> 01:18:14,000
प्रॉब्लम ये हो रही है बताइए बताइए विष्णु जी ऊपर भी

1112
01:18:14,000 --> 01:18:18,000
है और यहां भी पार्ट बता रहे हैं वो अपने जन्म में आते हैं

1113
01:18:18,000 --> 01:18:22,240
तो वो पार्ट क्या है उनका पालना करना पालना

1114
01:18:22,240 --> 01:18:26,320
तो लक्ष्मी नारायण से ब्रह्मा जी कर रहे हैं ना वो सतयुग में कर रहे हैं से ब्रह्मा

1115
01:18:26,320 --> 01:18:31,120
जी यहां ब्रह्मा जी क्यों जोड़ रहे हैं आप मैंने

1116
01:18:31,120 --> 01:18:35,920
जन्म बताए हैं वो मैंने आपको ब्रह्मा के जन्म बताए हैं

1117
01:18:35,920 --> 01:18:41,280
आप ब्रह्मा जी और विष्णु जी को सतयुग त्रेता द्वापर से क्यों जोड़ रहे हैं?

1118
01:18:41,280 --> 01:18:45,440
आप सूक्ष्म लोक के ब्रह्मा को यहां क्यों जोड़ रहे हैं? मत जोड़िए ना।

1119
01:18:45,440 --> 01:18:49,520
मैं आपको क्या कह रही हूं? तीनों के शरीर ऊपर है। तीनों ऊपर

1120
01:18:49,520 --> 01:18:55,360
से कार्य कर रहे हैं। लेकिन जिसका जहां पार्ट है वो बजा रहे हैं।

1121
01:18:55,360 --> 01:18:59,680
विष्णु जी सतयुग में आते हैं। लक्ष्मी नारायण का रूप धारण करते हैं। कैसे?

1122
01:18:59,680 --> 01:19:03,840
पहले श्री कृष्ण और राधे के रूप में सतयुग में पहला जन्म

1123
01:19:03,840 --> 01:19:08,560
हुआ और वही बालक फिर बड़े होते हैं तो लक्ष्मी नारायण बनते हैं।

1124
01:19:08,560 --> 01:19:12,560
फिर वही बालक और बड़े होते हैं। युग परिवर्तन होता है तो राम सीता

1125
01:19:12,560 --> 01:19:16,640
बनते हैं। फिर वही धीरेधीरे कलयुग तक ब्रह्मा के

1126
01:19:16,640 --> 01:19:21,280
रूप में जन्म लेते हैं। मैं ये बोल रही हूं आपको।

1127
01:19:21,280 --> 01:19:25,760
विष्णु जी ब्रह्मा के रूप में जन्म लेते हैं कलयुग में।

1128
01:19:25,760 --> 01:19:28,560
हां

1129
01:19:28,560 --> 01:19:32,640
जो आत्मा [हंसी] विष्णु होती है जो आत्मा विष्णु होती है वही आत्मा

1130
01:19:32,640 --> 01:19:36,800
फिर दादा लेखराज होती है जिसको ब्रह्मा नाम मिलता है ऐसे ही

1131
01:19:36,800 --> 01:19:41,840
जैसे ब्रह्मा के जन्म बदलते हैं ऐसे मेरे और आपके भी जन्म बदलते हैं

1132
01:19:41,840 --> 01:19:45,920
पूरी सृष्टि तो मतलब ये चीज एक बात है आपने

1133
01:19:45,920 --> 01:19:49,920
जो क्रम बताया कि जैसे विष्णु जी जो है श्री कृष्ण के रूप

1134
01:19:49,920 --> 01:19:54,080
में होते हैं लक्ष्मी नारायण के रूप में होते हैं राम जी के रूप में होते हैं अंत में ब्रह्मा जी के रूप में होते

1135
01:19:54,080 --> 01:19:58,160
हैं फिर वो जो ब्रह्मा जी के रूप में होते हैं वह लेखराज जी के रूप में और उसी

1136
01:19:58,160 --> 01:20:02,320
शरीर में आकर शिव जी ज्ञान देते हैं। ऐसा है। जी जी तो फिर जो

1137
01:20:02,320 --> 01:20:07,520
सूक्ष्म लोक में ब्रह्मा जी बचे अब उनका काम क्या बचा?

1138
01:20:07,520 --> 01:20:11,680
ब्रह्मा जी बचे हैं उनका काम है पूरी सृष्टि को प्रकाश

1139
01:20:11,680 --> 01:20:15,680
देना, शक्ति देना। पूरी सृष्टि को

1140
01:20:15,680 --> 01:20:20,080
देखना। दुख सुख में परमात्मा जो उन्हें प्रेरणा

1141
01:20:20,080 --> 01:20:24,240
देते हैं उनका संपर्क साधना जैसा कि आपने शुरू में कहा

1142
01:20:24,240 --> 01:20:28,240
था कि पता कैसे चलता है जब भी कोई बालक

1143
01:20:28,240 --> 01:20:32,320
जब भी कोई आत्मा परमात्मा को याद करती है तो उनहीं के थ्रू परमात्मा शिव

1144
01:20:32,320 --> 01:20:36,320
तक जाया जा सकता है। सदा ही वो परमात्मा सृष्टि की

1145
01:20:36,320 --> 01:20:40,320
रक्षा उन तीनों के द्वारा करता है। शिव तो सदा ही

1146
01:20:40,320 --> 01:20:44,000
कल्याणकारी है। यानी कि जो लेखराज

1147
01:20:44,000 --> 01:20:48,640
के रूप में प्रकट हो रहे हैं वो विष्णु हैं। हां जी

1148
01:20:48,640 --> 01:20:52,640
और उनको ब्रह्मा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि शिव जी आकर के उनके अंदर बैठकर के

1149
01:20:52,640 --> 01:20:56,720
ज्ञान दे रहे हैं। जी जी ब्रह्मा इसलिए कहा

1150
01:20:56,720 --> 01:21:00,960
जा रहा है। जी बाकी वास्तविक ब्रह्मा जो है वो केवल

1151
01:21:00,960 --> 01:21:05,120
साक्षी मात्र है जो इधर-उधर इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मतलब

1152
01:21:05,120 --> 01:21:09,520
एक मीडिएटर की भूमिका निभाते हैं। में है वो आप जोड़ लीजिए जो भी जोड़ रहे हैं वो

1153
01:21:09,520 --> 01:21:13,760
आपकी बात से मैं यस नहीं करूंगी लेकिन वो सूक्ष्म वतन में ब्रह्मा है

1154
01:21:13,760 --> 01:21:18,000
जैसे सभी सूक्ष्म शरीर में ऊपर है ऐसे मैं और आप भी सूक्ष्म शरीर

1155
01:21:18,000 --> 01:21:22,400
में ऊपर है अरे नीलमा नीलिमा बहन

1156
01:21:22,400 --> 01:21:27,200
जो सूक्ष्म शरीर के तीन एंटिटीज है ब्रह्मा विष्णु महेश

1157
01:21:27,200 --> 01:21:31,360
उसमें से विष्णु को आपने बता दिया लक्ष्मी नारायण श्री कृष्ण लक्ष्मी

1158
01:21:31,360 --> 01:21:35,680
नारायण राम फिर जो है अंत में ब्रह्मा ये वो काम कर रहे हैं

1159
01:21:35,680 --> 01:21:39,840
शंकर काम कर रहे हैं कि वो किसी को प्रेरणा देकर के पृथ्वी

1160
01:21:39,840 --> 01:21:44,160
पृथ्वी का लय कर रहे हैं। पृथ्वी में सभी भौतिक संसाधनों का

1161
01:21:44,160 --> 01:21:48,240
अब जो सूक्ष्म लोक में ब्रह्मा जी बचे हैं सूक्ष्म लोक में

1162
01:21:48,240 --> 01:21:52,240
उनका काम क्या बचा? ब्रह्मा उनका कोई काम है कि नहीं?

1163
01:21:52,240 --> 01:21:56,400
ब्रह्मा जी का काम है शक्ति देना दादा लेखराज

1164
01:21:56,400 --> 01:21:59,040
को भी और हमें भी और आज दादा लेखराज

1165
01:21:59,040 --> 01:22:03,360
नहीं है तब भी ब्रह्मा के रूप में वो वहां काम कर रहे हैं

1166
01:22:03,360 --> 01:22:07,760
तो इसका मतलब यही है ना कि यह वाला जो कार्य कहा जाता है

1167
01:22:07,760 --> 01:22:11,840
कि लेखराज जो है ब्रह्मा है और उनके शरीर में शिवजी आकर के जो

1168
01:22:11,840 --> 01:22:15,920
वो देते हैं यह उस ब्रह्मा से अलग है जिसका काम केवल शक्ति देना है

1169
01:22:15,920 --> 01:22:20,000
या अह इंफॉर्मेशन जो इधर की इंफॉर्मेशन मीडिएटर

1170
01:22:20,000 --> 01:22:24,080
की भूमिका निभाना सारे कार्य परमात्मा शिव के हैं और वो इन तीनों

1171
01:22:24,080 --> 01:22:28,240
के द्वारा कराते हैं। नीचे मूल वतन में शरीरों के द्वारा कराते हैं

1172
01:22:28,240 --> 01:22:32,240
और सूक्ष्म वतन मैंने प्रश्न मैंने प्रश्न तो कुछ और पूछा है। खैर चलिए

1173
01:22:32,240 --> 01:22:36,400
ठीक है हमने काफी देर इसमें कर लिया। कुछ भी मैंने गलत नहीं बताया आपको। शिव

1174
01:22:36,400 --> 01:22:40,720
जी द्वारा ऊपर से काम कर रहे हैं। ठीक है। अब

1175
01:22:40,720 --> 01:22:44,720
मनुष्य रूपी अब जो यह थोड़ा सा देख रहे थोड़ा सा दूसरे

1176
01:22:44,720 --> 01:22:49,280
प्रश्न पे आते हैं। एक आपने ये बताया है हां

1177
01:22:49,280 --> 01:22:53,360
यानी कि ब्रह्मा विष्णु महेश सूक्ष्म लोक में है। ये तो पक्का

1178
01:22:53,360 --> 01:22:57,520
है। अच्छा पक्का है। तो ब्रह्मा विष्णु महेश जब सूक्ष्म लोक

1179
01:22:57,520 --> 01:23:01,600
में है और इनकी अपनीप कॉन्शियसनेस है। शिव जी के जो

1180
01:23:01,600 --> 01:23:05,920
शिव परमात्मा है वह इनके द्वारा इनको प्रेरित करके अपने कार्य कराते

1181
01:23:05,920 --> 01:23:09,920
हैं और विष्णु जी हैं वो डायरेक्ट

1182
01:23:09,920 --> 01:23:13,920
भौतिक संसार के उसमें आ रहे हैं संपर्क में

1183
01:23:13,920 --> 01:23:14,420
क्योंकि

1184
01:23:14,400 --> 01:23:18,640
वो पृथ्वी इत्यादि के झरने इत्यादि का निर्माण कर रहे हैं ना तो यानी

1185
01:23:18,640 --> 01:23:22,640
छू रहे हैं स्पर्श कर रहे हैं वो है ना सब

1186
01:23:22,640 --> 01:23:26,640
कुछ या शब्द शक्ति हां ठीक है तो वो किसी ना किसी

1187
01:23:26,640 --> 01:23:31,040
प्रकार से आ रहे हैं संसार में तो अब

1188
01:23:31,040 --> 01:23:35,680
यहां पर यह बात आती है कि यह अपने आप में कॉन्शियसनेस

1189
01:23:35,680 --> 01:23:39,680
हैं। तीनों एंटिटीज ब्रह्मा, विष्णु, महेश। अब क्योंकि

1190
01:23:39,680 --> 01:23:44,080
इनको इनको विष्णु जी को तो दुख हो रहा है क्योंकि

1191
01:23:44,080 --> 01:23:48,400
वह कृष्ण बन रहे हैं आपके अनुसार लक्ष्मी नारायण बन रहे हैं

1192
01:23:48,400 --> 01:23:52,400
और वो बन रहे हैं तो ये तो दुख दुख हो रहे हैं तो यानी कि ये भी जो

1193
01:23:52,400 --> 01:23:56,480
है इनको भी मुक्त होना है यानी ये भी मुक्त

1194
01:23:56,480 --> 01:24:00,480
होते हैं सूक्ष्म संसार वाले जो विष्णु है मुक्ति मुक्ति

1195
01:24:00,480 --> 01:24:04,800
पाते हैं ना जो देवत्व को प्राप्त करते हैं दोबारा से

1196
01:24:04,800 --> 01:24:09,040
लेकिन परमात्मा ही मुक्ति जीवन मुक्ति दाता है शिव भगवान हां

1197
01:24:09,040 --> 01:24:13,040
ठीक ठीक और शंकर जी को कैसे दुख हो रहा है वह बता

1198
01:24:13,040 --> 01:24:18,000
दीजिए। शंकर जी का तो जन्म ही नहीं दिखाया हमने।

1199
01:24:18,000 --> 01:24:22,240
यानी दुख नहीं हो रहा है। नहीं ठीक है। ब्रह्मा

1200
01:24:22,240 --> 01:24:26,240
जी का भी केवल विनाश है। उसके बाद तपस्या करते हैं। वो सूक्ष्म वतन

1201
01:24:26,240 --> 01:24:29,520
में बैठ के उनका कोई और कार्य नहीं।

1202
01:24:29,520 --> 01:24:33,520
और जो ब्रह्मा जी हैं उनका जन्म उनका तो जन्म हो नहीं रहा

1203
01:24:33,520 --> 01:24:37,520
है। वो तो केवल वो शक्ति प्रदाता है। हां सूक्ष्मतन

1204
01:24:37,520 --> 01:24:42,160
में है वो वो कलयुग के अंत में कलयुग के

1205
01:24:42,160 --> 01:24:46,240
उसमें आते हैं। जिस पीरियड में लेखराज जी आए अरे तो वो

1206
01:24:46,240 --> 01:24:50,240
तो विष्णु जी बन रहे हैं ना राम के बाद तो वही तो है

1207
01:24:50,240 --> 01:24:54,480
सब वो कहां है तीन है ना शरीर है वो वो

1208
01:24:54,480 --> 01:24:58,560
ब्रह्मा के ही दो शरीर है अलग अलग एक विष्णु रूप में एक ब्रह्मा रूप में और वो

1209
01:24:58,560 --> 01:25:02,560
शंकर अलग डिफरेंट पर्सनालिटी है शंकर वही तो मैं आपसे एक घंटे

1210
01:25:02,560 --> 01:25:06,640
पहले कहा था विष्णु और ब्रह्मा एक ही है विष्णु और ब्रह्मा दोनों में

1211
01:25:06,640 --> 01:25:11,040
अलग-अलग सूक्ष्म वतन में है पर वो दो अलग-अलग

1212
01:25:11,040 --> 01:25:14,480
वो है

1213
01:25:14,480 --> 01:25:19,760
दो रूप दो रूप एक ही

1214
01:25:19,760 --> 01:25:23,840
यानी कि एक तरीके से देखा जाए तो वहां पर सूक्ष्म लोक में

1215
01:25:23,840 --> 01:25:28,320
देखा जाए वास्तविक तौर पर दो एंटिटीज हैं। एक एंटिटी

1216
01:25:28,320 --> 01:25:32,560
दो रूपों में विराजमान है ब्रह्मा और विष्णु के रूप में और एक एंटिटी

1217
01:25:32,560 --> 01:25:36,800
एक रूप में विराजमान है शंकर के रूप में। हां जी। हां बहुत बहुत

1218
01:25:36,800 --> 01:25:40,880
बहुत हेडक थोड़ा कम हो गया मेरा। दो एंटिटीज है वास्तविकता में।

1219
01:25:40,880 --> 01:25:44,880
उनमें से एक एंटिटी दो रूपों में प्रकट है और एक एंटिटी अपने खुद के रूप में।

1220
01:25:44,880 --> 01:25:50,880
अब बात यह आती है कि जो

1221
01:25:50,960 --> 01:25:54,960
एक जो ब्रह्मा जी वाली अभी इस एंटिटी को छोड़ देते हैं। शंकर जी को ले लेते हैं।

1222
01:25:54,960 --> 01:25:59,680
उसमें सरल हो जाएगा। शंकर जी को कभी दुख हो रहा है क्या?

1223
01:25:59,680 --> 01:26:03,920
नहीं। नहीं। तो इसका मतलब शंकर जी सदैव सदा सर्वदा

1224
01:26:03,920 --> 01:26:09,440
मुक्त हैं। हां जी। और उनको कोई मार सकता नहीं है।

1225
01:26:09,440 --> 01:26:14,000
नहीं। ठीक है। उनको कोई मार भी नहीं सकता है।

1226
01:26:14,000 --> 01:26:18,160
नहीं उनको हां तो वो एक आपको नहीं लगता कि शंकर

1227
01:26:18,160 --> 01:26:21,920
जी के रूप में एक दूसरा ईश्वर भी है।

1228
01:26:21,920 --> 01:26:26,000
मतलब क्योंकि वो उनको किसी की जरूरत नहीं है। वो स्वयं में

1229
01:26:26,000 --> 01:26:30,560
सुखी है। सच्चिदानंद है वो। ऐसा कह सकते हैं।

1230
01:26:30,560 --> 01:26:34,960
तो दो ईश्वर हो गए। एक शिव परमात्मा, एक शंकर। देखो हम शंकर

1231
01:26:34,960 --> 01:26:39,040
को देवता बोलते हैं और वो केवल सूक्ष्म में रहते हैं। वो भगवान

1232
01:26:39,040 --> 01:26:43,040
शिव ने ही हमें बताया। शंकर जी परमात्मा नहीं कह सकते

1233
01:26:43,040 --> 01:26:47,440
शंकर को। शंकर परमात्मा नहीं है। शिव परमात्मा है।

1234
01:26:47,440 --> 01:26:51,520
शंकर है। शंकर जी भी तो सदा सर्वदा मुक्त है। उनको किसी की

1235
01:26:51,520 --> 01:26:56,320
आवश्यकता नहीं है। शिव शंकर एक नहीं है ना। वो जिसके लिए कह रहे हो वो शिव है।

1236
01:26:56,320 --> 01:27:00,320
मैं एक नहीं कह रहा। मैं एक नहीं कह रहा। मैं कह रहा हूं। आपने कहा शंकर को कभी दुख नहीं

1237
01:27:00,320 --> 01:27:04,400
होता। यानी वो सदा मुक्त है। जैसे ही कोई भी

1238
01:27:04,400 --> 01:27:06,640
चेतना अपने

1239
01:27:06,640 --> 01:27:10,720
स्वतंत्र परमात्मा से स्वतंत्र होकर सर्वदा मुक्त मानी जाएगी तो वो ईश्वर

1240
01:27:10,720 --> 01:27:14,720
सिद्ध हो जाएगी। परमात्मा शिव ने ब्रह्मा द्वारा जो मुरलियां

1241
01:27:14,720 --> 01:27:18,720
हमें सुनाई उस मुरलियों में केवल हमें शंकर

1242
01:27:18,720 --> 01:27:22,720
के लिए एक ही बात बताई कि वो विनाशकारी है और विनाश के

1243
01:27:22,720 --> 01:27:27,200
समय उनका पार्ट होता है और और समय वो सूक्ष्म वतन में विराजित है।

1244
01:27:27,200 --> 01:27:31,520
इसके अलावा शंकर जी के विषय में कुछ बताया नहीं गया।

1245
01:27:31,520 --> 01:27:36,400
बस यह है कि शिव परमात्मा है और शंकर देवता है।

1246
01:27:36,400 --> 01:27:40,480
चलिए अब पब्लिक देखेगी यह वाले क्वेश्चन उन्हें करने चाहिए। एक चीज और

1247
01:27:40,480 --> 01:27:44,960
है कि आपने जो बताया ना सबसे ऊपर वाला लोक ब्रह्मलोक है

1248
01:27:44,960 --> 01:27:49,120
तो वो क्या एरोप्लेन से जा सकते हैं क्या वहां पे कोई ऐसा स्पेसशिपिप वगैरह बनाया

1249
01:27:49,120 --> 01:27:53,120
जाए। आपको मैंने मेडिटेशन कराया और आप फिर भी ऐसी बात कर रहे हैं।

1250
01:27:53,120 --> 01:27:57,280
एरोप्लेन से जा सकते हैं। वो मैंने सूक्ष्म एरोप्लेन ही तो दिया

1251
01:27:57,280 --> 01:28:01,440
आपको कि हां इस तरह से हम परमात्मा के भौतिक मैं भौतिक

1252
01:28:01,440 --> 01:28:05,440
जगत के एरोप्लेन की बात कर रहा हूं। कोई वो स्पेसशिप वगैरह

1253
01:28:05,440 --> 01:28:09,440
नहीं जा सकते। क्यों? अगर हमारे पास ऐसा स्पेसशिपिप आए

1254
01:28:09,440 --> 01:28:15,440
जो अनंत दूरी तक तय कर ले तो नहीं जा सकते। नहीं जा सकते।

1255
01:28:15,760 --> 01:28:20,000
क्यों? वो ऊपर की दिशा में है ना। सनातन में ब्रह्म कहते

1256
01:28:20,000 --> 01:28:21,920
हैं आप तो ब्रह्म

1257
01:28:21,920 --> 01:28:26,640
में आप ब्रह्म में लीन होने की बात करते हैं तो क्या आप

1258
01:28:26,640 --> 01:28:30,960
एरोप्लेन से जा सकते हैं वहां पे? तो वहां पर तो केवल कॉनशसनेस

1259
01:28:30,960 --> 01:28:35,440
की बात है ना कॉनशसनेस बंधन से मैंने आपको मेडिटेशन कराया

1260
01:28:35,440 --> 01:28:37,760
मेरा

1261
01:28:37,760 --> 01:28:41,920
ऊपर नीचे वाली कोई बात नहीं है यानी ऊपर नीचे वाली कोई बात नहीं है सब कुछ

1262
01:28:41,920 --> 01:28:46,160
यही है जो भी है ऊपर नीचे वाली बात ऊपर नीचे वाली बात समझा के ही मैंने मेडिटेशन

1263
01:28:46,160 --> 01:28:49,440
कराया आपको

1264
01:28:49,440 --> 01:28:53,520
नहीं जो हम जो हमारी जो आपने फिलॉसफी से तुलना

1265
01:28:53,520 --> 01:28:57,600
की कि ब्रह्म में लीन हो जाना तो उसमें तो केवल यह है कि

1266
01:28:57,600 --> 01:29:01,760
भाई माया माया से कनेक्ट हो के हम कुछ ऐसा देख रहे हैं जिसके

1267
01:29:01,760 --> 01:29:05,840
कारण हम यह मान रहे हैं कि जगत है संसार है वो है और जब

1268
01:29:05,840 --> 01:29:09,840
हमें आत्म स्वरूप का बोध हो रहा है तो हम भगवत भगवत स्वरूप हो जा रहे हैं भगवान में लीन

1269
01:29:09,840 --> 01:29:14,240
हो जा रहे हैं जो मैंने आपको शुरू में कराई वही सेम चीज है जो आप अभी बोल रहे हो

1270
01:29:14,240 --> 01:29:18,880
यानी कि वास्तविकता में कोई ट्रेवल नहीं है केवल माइंड का

1271
01:29:18,880 --> 01:29:22,880
आए सुनिए हम यहां बौद्धिक चीजों में आए हमें ये सब पता

1272
01:29:22,880 --> 01:29:27,120
चल गया हमने ये त्यागा और आत्म कॉन्शसनेस

1273
01:29:27,120 --> 01:29:31,440
में आए दे अभिमान को छोड़ दिया। दे अभिमानी बने, विदेही बने

1274
01:29:31,440 --> 01:29:35,520
और परमात्मा तक जाने की यात्रा की। यानी

1275
01:29:35,520 --> 01:29:36,960
कि भौतिक रूप से

1276
01:29:36,960 --> 01:29:41,200
कोई ऐसी एक दिशा वाली यात्रा नहीं है। वो केवल बताया जा रहा है। ब्रह्म

1277
01:29:41,200 --> 01:29:45,680
तक जाने का कोई भौतिक संसाधन नहीं है। इसी प्रकार से परमात्मा

1278
01:29:45,680 --> 01:29:49,840
पिता परमधाम में रहने वाले पिता तक जाने का कोई भौतिक साधन

1279
01:29:49,840 --> 01:29:53,840
नहीं होता। नहीं नहीं वह ठीक है मतलब यह एक केवल प्रपंच

1280
01:29:53,840 --> 01:29:58,000
रूपी दृष्टिकोण से बात बताई जा रही है वास्तविकता में वहां कॉन्शियसनेस की बात है

1281
01:29:58,000 --> 01:30:02,480
ऊपर नीचे कुछ नहीं है वास्तविकता में वो केवल व्यवहार जगत की बात

1282
01:30:02,480 --> 01:30:06,800
जैसे ही आप दिशा मैं बता रहा हूं मैं बता रहा हूं मैं बता रहा हूं मैं मैं

1283
01:30:06,800 --> 01:30:10,800
बता रहा हूं ऊपर नीचे की बात बता रहा हूं मैं बता रहा हूं जैसे ही हम ऊपर

1284
01:30:10,800 --> 01:30:14,960
नीचे कहते हैं तो दिशा आ गई जो दिशा तत्व है ये भौतिक जगत का तत्व

1285
01:30:14,960 --> 01:30:19,360
है या आध्यात्मिक तत्व है सुनिए दिशा केवल पृथ्वी तक सीमित

1286
01:30:19,360 --> 01:30:23,520
है मैंने पृथ्वी को छोड़ते हुए कॉनशसनेस से परमात्मा

1287
01:30:23,520 --> 01:30:27,760
का ध्यान करने का चिंतन करने का साधन आपको बताया।

1288
01:30:27,760 --> 01:30:32,080
तो परमात्मा को आप ऊपर बता रही है खत्म हो जाते हैं। साधन यहां खत्म

1289
01:30:32,080 --> 01:30:36,240
हो जाते हैं। दिशा, दशा, पानी, झरने,

1290
01:30:36,240 --> 01:30:40,240
बादल ये सब इस पृथ्वी लोक में खत्म हो जाते हैं। यानी कि जो

1291
01:30:40,240 --> 01:30:44,560
आप दिशा बता रही है लोक और सूक्ष्म लोक से परमधाम तक की यात्रा

1292
01:30:44,560 --> 01:30:48,560
कराइए। यानी कि जो दिशा आप बता रही हैं कि

1293
01:30:48,560 --> 01:30:52,000
जो ब्रह्मलोक है वह ऊपर की दिशा में है। वह कोई

1294
01:30:52,000 --> 01:30:56,080
दिशा नहीं है। वह तो खत्म हो गई। पृथ्वी में ही दिशा नहीं है वो। हां। तो ऊपर

1295
01:30:56,080 --> 01:31:00,080
की दिशा नहीं है। कोई भी नहीं। नहीं है। तो वही तो मैं कह

1296
01:31:00,080 --> 01:31:04,640
रहा हूं कि वास्तविकता में कोई दिशा नहीं है ऊपर की ओर। हां।

1297
01:31:04,640 --> 01:31:08,800
हां। ठीक है। यही यही पूछ रहा है। जी जी। अच्छा ये

1298
01:31:08,800 --> 01:31:12,800
हो गया। काफी लंबा टाइम हो गया वो षष्ठी रचना

1299
01:31:12,800 --> 01:31:16,880
बात करते। इतना लंबा समय ब्रह्मा कुमारी को होता नहीं है वैसे मैं

1300
01:31:16,880 --> 01:31:21,120
क्योंकि आपसे बहुत कोई ब्रह्मा

1301
01:31:21,120 --> 01:31:25,920
कुमारी आपको इतना लंबा कैसे समझाएंगी बताइए

1302
01:31:25,920 --> 01:31:31,520
अच्छा वो स्वधर्म वाली बात फिर से आ गई कि जैसे

1303
01:31:31,520 --> 01:31:35,680
आत्मा का स्वधर्म शांति है तो वो अशांति भी हो रहा है क्योंकि

1304
01:31:35,680 --> 01:31:39,760
आत्मा को बुरे कर्म भी करना ही करना है। देखिए शिव जी

1305
01:31:39,760 --> 01:31:44,240
मैं आपको एक बात यहां रोक के कह रही हूं। कुछ मुझे डर लग रहा है आपसे।

1306
01:31:44,240 --> 01:31:48,320
मेरी बात सुन लीजिए। वो ब्रह्मा कुमारियां अलग थी जो

1307
01:31:48,320 --> 01:31:52,560
आपके अलग-अलग इंटरव्यूज में घूमती है। आपके बहुत सारी वीडियोस मैंने देखी

1308
01:31:52,560 --> 01:31:56,800
है। आपने काफी जगह ब्रह्मा कुमारियों को पकड़ा है। लेकिन

1309
01:31:56,800 --> 01:32:00,880
मैं वो ब्रह्मा कुमारी हूं इनके लिए। अगर मेरे पास कोई

1310
01:32:00,880 --> 01:32:05,120
भी आया है तो वो ब्रह्मा कुमारीज को मान के गया है।

1311
01:32:05,120 --> 01:32:07,280
अब आपका क्या इरादा है मुझे नहीं पता।

1312
01:32:07,280 --> 01:32:11,440
अगर आप मेरे से ज्यादा उलझेंगे, ज्यादा बातें करेंगे तो मैं तो अपनी

1313
01:32:11,440 --> 01:32:15,680
बात नहीं छोडूंगी। मैं तो देखो ब्रह्मा कुमारी की ड्रेस में बैठी हूं और मैं

1314
01:32:15,680 --> 01:32:19,680
मैं बात छुड़वा नहीं रहा हूं। मैं ये मैं समझती हूं धर्म धर्म की रक्षा

1315
01:32:19,680 --> 01:32:23,680
करना मेरा धर्म है। तो जिस धर्म में जिस भष में

1316
01:32:23,680 --> 01:32:27,760
मैं हूं उस धर्म की इस समय पूरी वफादारी से रक्षा करूंगी मैं। मैं

1317
01:32:27,760 --> 01:32:31,920
बिल्कुल नहीं समझती कि मैं नीलिमा बन के बात करूं। मैं तो ये जो बैज लगाया

1318
01:32:31,920 --> 01:32:35,920
है इस धर्म की रक्षा करूंगी। जो भी धर्म ब्रह्मा कुमारियों का मेरा मेरा

1319
01:32:35,920 --> 01:32:39,920
उदेश्य आप जो भी क्वेश्चन करेंगे आपके क्वेश्चन पूरे नहीं होने वाले

1320
01:32:39,920 --> 01:32:44,240
11:00 बज गए हैं अब 12 भी बज सकते हैं लेकिन मैं क्विट नहीं करूंगी

1321
01:32:44,240 --> 01:32:48,400
पूछिए सुनिए मेरा उद्देश्य आपको

1322
01:32:48,400 --> 01:32:53,600
आपकी चीजों को छुड़वाना नहीं है एस ए ब्रह्मा कुमारी मेरा उद्देश्य

1323
01:32:53,600 --> 01:32:57,680
ये दिखाना कि ब्रह्मा कुमारी कहां-कहां पर उत्तर नहीं दे रही है और वो

1324
01:32:57,680 --> 01:33:01,680
मैंने जो जो मेरा उद्देश्य है वो मुझे मिल रहा है प्राप्ति हो रही है

1325
01:33:01,680 --> 01:33:06,720
अभी सर बोलिए तो अह

1326
01:33:06,720 --> 01:33:10,880
दिशा वाली बात हो गई और बीच में सूक्ष्म लोक हमने देख लिया। ब्रह्मा विष्णु महेश

1327
01:33:10,880 --> 01:33:15,040
के बारे में जान लिया। अह पहले

1328
01:33:15,040 --> 01:33:19,360
आज जो आपने पढ़ाया उसके बारे में उल्टा पैर भी हो गया और

1329
01:33:19,360 --> 01:33:22,480
कर्म भोगने आती ये शांति में आ जाएगा। मेडिटेशन द्वारा

1330
01:33:22,480 --> 01:33:26,560
अनुभव। अच्छा यह बताइए एक जो बार-बार यह बात

1331
01:33:26,560 --> 01:33:30,560
की जाती है

1332
01:33:30,560 --> 01:33:34,640
कि हम लोग ईश्वर को अनुभव करते हैं अनुभव

1333
01:33:34,640 --> 01:33:39,040
से सिद्ध होता है कि ईश्वर है। तो वो

1334
01:33:39,040 --> 01:33:43,120
ऐसी क्या चीज होती है जिससे कि हम यह माने कि हां यह ईश्वर का फील हो

1335
01:33:43,120 --> 01:33:47,520
रहा है हमें। मैंने इसीलिए आज का चैप्टर उठाते

1336
01:33:47,520 --> 01:33:51,520
ही यह बात निकाली कि आपको अनुभव वाली

1337
01:33:51,520 --> 01:33:55,600
बात से शुरू कराऊ। तब जाके मैं इस बात को पकड़ पाऊंगी। आप कहीं ना कहीं

1338
01:33:55,600 --> 01:33:59,760
यह बात कहेंगे। तो जो मेडिटेशन मैंने

1339
01:33:59,760 --> 01:34:03,760
आपको कराया उसके पहले वाले चैप्टर में मैंने कहा था

1340
01:34:03,760 --> 01:34:08,080
आपसे कि आत्मा तीन गुणों से सुसज्जित

1341
01:34:08,080 --> 01:34:12,080
है। याद हो आपके मैं आत्मा हूं में आप देख

1342
01:34:12,080 --> 01:34:16,160
लेना फिर से एक बार मन, बुद्धि और संस्कार

1343
01:34:16,160 --> 01:34:20,640
तीन शक्तियों से आत्मा चलती है। ठीक है? अनुभव की बात कर रही हूं।

1344
01:34:20,640 --> 01:34:25,200
आत्मा की तीन शक्तियां है। जैसे शरीर की सब कर्मेंद्रियां है।

1345
01:34:25,200 --> 01:34:29,360
शरीर कर्मेंद्रियों से चलता है ना। आंखें, मुख,

1346
01:34:29,360 --> 01:34:33,360
कान, नाक ये सब स्वाद इंद्रियां ये सब है। इन

1347
01:34:33,360 --> 01:34:37,440
इंद्रियों से शरीर चल रहा है। इसी प्रकार आत्मा की तीन इंद्रियां

1348
01:34:37,440 --> 01:34:38,240
है।

1349
01:34:38,240 --> 01:34:42,480
मन, बुद्धि और संस्कार। मन जिसमें विचार

1350
01:34:42,480 --> 01:34:46,800
आते हैं। बुद्धि जिससे आत्मा निर्णय लेती है

1351
01:34:46,800 --> 01:34:50,800
और संस्कार मतलब रिपीटेशन में जो कर्म होता

1352
01:34:50,800 --> 01:34:56,000
है उसकी उसे आदत पड़ती है। सॉरी

1353
01:34:56,000 --> 01:35:00,000
जब अच्छे और बुरे किसी भी चिंतन

1354
01:35:00,000 --> 01:35:04,400
की आदत पड़ती है उसके संस्कार बनते हैं। और जब वो संस्कार

1355
01:35:04,400 --> 01:35:08,400
बनते हैं ना तो व्यक्ति उसे अनुभव करने लगता है।

1356
01:35:08,400 --> 01:35:12,480
अब अनुभव में अगर आपको मैं बताऊं कि अनुभव

1357
01:35:12,480 --> 01:35:16,560
वह चीज होता है कि आप किसी भी चीज को बार-बार करेंगे ना तो

1358
01:35:16,560 --> 01:35:20,800
वो संस्कार में आकर आपको अनुभव देने लगेगी। अगर छोटा बच्चा

1359
01:35:20,800 --> 01:35:25,280
भी सुबह ब्रश करता है ना तो धीरे-धीरे उसे ब्रश करना सिखाया

1360
01:35:25,280 --> 01:35:29,280
जाता है। उसे गोद में ले पहले ब्रश करेगी मां फिर वो

1361
01:35:29,280 --> 01:35:33,360
धीरे-धीरे सीखेगा। रोज देखेगा खुद करने लगेगा। और जब वो

1362
01:35:33,360 --> 01:35:37,440
खुद करने लगेगा अभी तो हो नहीं रहा था। कॉनशस में नहीं था

1363
01:35:37,440 --> 01:35:41,680
वो कि भाई मेरे दांत साफ हो रहे हैं या मेरे मुख का क्या स्वाद है क्या नहीं है जब

1364
01:35:41,680 --> 01:35:45,760
धीरे-धीरे उसको उसकी हैबिट पड़ती है

1365
01:35:45,760 --> 01:35:50,000
तो धीरेधी वो उसका स्वाद लेने लगता है धीरेधी वो उसको अनुभव

1366
01:35:50,000 --> 01:35:53,280
करने लगता है कि इसका अनुभव क्या है समझ रहे हैं

1367
01:35:53,280 --> 01:35:57,840
मेरी बात अब ऐसे मन बुद्धि संस्कार के द्वारा जब हम परमात्मा

1368
01:35:57,840 --> 01:36:01,920
को याद करते हैं संक्षिप्त में समझ गया नहीं पूरा होने दीजिए मेरी

1369
01:36:01,920 --> 01:36:06,320
बात ये अनुभव होने लगता है [हंसी] जब हम जाते

1370
01:36:06,320 --> 01:36:10,560
परमात्मा को याद करते हैं। जब परमात्मा का चिंतन करते हैं।

1371
01:36:10,560 --> 01:36:14,640
जब अपनी शक्तियों का चिंतन करते हैं। जब हम अपनी सब

1372
01:36:14,640 --> 01:36:19,040
शक्तियों को बार-बार याद आती है। मैं आत्मा शांत स्वरूप हूं।

1373
01:36:19,040 --> 01:36:23,040
मैं आत्मा ज्योति बिंदु हूं। मैं आत्मा निराकार हूं। मैं

1374
01:36:23,040 --> 01:36:27,200
आत्मा लाइट स्वरूप हूं। मैं आत्मा ये सब जितने भी गुण है।

1375
01:36:27,200 --> 01:36:31,200
जब मैं बार-बार मन में चिंतन करती हूं। अपनी बुद्धि

1376
01:36:31,200 --> 01:36:35,920
चलाती हूं। निर्णय लेती हूं कि मुझे कर्मेंद्रियों से न्यारा होकर जितेंद्रिय

1377
01:36:35,920 --> 01:36:40,320
बनना है। जितेंद्र मतलब इंद्रियों से परे होना है। इंद्रियों

1378
01:36:40,320 --> 01:36:44,320
के भोग को छोड़ना है। विलास को छोड़ना है। तब मैं परमात्मा

1379
01:36:44,320 --> 01:36:48,720
को याद करता हूं या करती हूं। और जब मैं उसका हैबचुअल

1380
01:36:48,720 --> 01:36:52,880
होती हूं तो मुझे वो अनुभव मेरे शरीर को मेरी बुद्धि को मेरे

1381
01:36:52,880 --> 01:36:57,120
तन को होने लगता है। और परमात्मा अपने आप उसमें शक्ति

1382
01:36:57,120 --> 01:37:02,160
भर के मुझे परमात्मा अपना फील कराता है। यह होता है अनुभव।

1383
01:37:02,160 --> 01:37:06,160
अब बताइए आप देखिए इसमें आपने लास्ट में एक लाइन

1384
01:37:06,160 --> 01:37:08,400
ऐसी बोल दी ना जिसने वह सारी

1385
01:37:08,400 --> 01:37:12,560
जो चार पांच जो चीजें थी जो अपने आप को काउंटर

1386
01:37:12,560 --> 01:37:16,640
कर रही थी वो फंसेगी। खैर मैं अब आपसे पूछता हूं। इसका मतलब

1387
01:37:16,640 --> 01:37:20,880
कि ब्रह्मा कुमारी में रहकर के जो लोग ईश्वर को अनुभव कर रहे हैं। वास्तविकता

1388
01:37:20,880 --> 01:37:25,360
में बार-बार रेपिटेशन के द्वारा निर्मित वो संस्कार मात्र हैं।

1389
01:37:25,360 --> 01:37:29,520
वह अलग से कोई ईश्वर नहीं है। नहीं आपने मेरी

1390
01:37:29,520 --> 01:37:33,680
लाइन तोड़ दी। लास्ट वाली आपने मन से मेरी लास्ट वाली

1391
01:37:33,680 --> 01:37:37,840
लाइन को तोड़ अरे आप आप गुस्सा मत हो नहीं से डेज जी

1392
01:37:37,840 --> 01:37:41,840
आपने अपने मन से एक बात बना ली लास्ट वाली लाइन

1393
01:37:41,840 --> 01:37:46,400
को तोड़ दिया अरे आप ठीक कर दो ना आपने कहा

1394
01:37:46,400 --> 01:37:50,400
वो संस्कार मात्र है जबकि मैंने इसे पूरा इस तरह नहीं किया

1395
01:37:50,400 --> 01:37:54,640
मैंने किया कि संस्कार होते हुए

1396
01:37:54,640 --> 01:37:58,640
जब मुझे वो अनुभव होने लगता है मैंने बच्चे का उदाहरण

1397
01:37:58,640 --> 01:38:02,720
दिया कि बच्चे को संस्कार पड़ता है ब्रश करने का। फिर उसे अनुभव होने

1398
01:38:02,720 --> 01:38:06,880
लगता है कि मेरे मुंह की बदबू चली गई। मेरे मुंह के बैक्टीरिया चले गए। मेरा

1399
01:38:06,880 --> 01:38:11,200
मुंह साफ होने लगा। वो अनुभव करने लगा। इसी प्रकार

1400
01:38:11,200 --> 01:38:15,200
परमात्मा को याद करते हुए चिंतन करते हुए परमात्मा की

1401
01:38:15,200 --> 01:38:19,840
शक्ति का अनुभव होता है। परमात्मा का अनुभव होता है। मैंने

1402
01:38:19,840 --> 01:38:23,440
यानी कि यानी कि वो संस्कार मात्र

1403
01:38:23,440 --> 01:38:27,600
नहीं है। एक अलग से कुछ विशेष अनुभव होता है। जैसे

1404
01:38:27,600 --> 01:38:31,760
कि ब्रश करने से उसको यह तो संस्कार बन जाता है कि मुझे बार-बार

1405
01:38:31,760 --> 01:38:36,080
ब्रश करना है। ठीक है? मगर उसको ब्रश करने पर एक विशेष

1406
01:38:36,080 --> 01:38:40,080
अनुभव भी होता है कि फ्रेशनेस आती है। अगर उसके उसमें मिंट

1407
01:38:40,080 --> 01:38:44,160
डला होगा तो उसको वो ठंडाठंडा लगेगा या उसमें बबूल का

1408
01:38:44,160 --> 01:38:48,160
दंत मंजन होगा तो उसमें वो स्वाद होगा उससे आएगा। तो उस

1409
01:38:48,160 --> 01:38:52,240
एक विशेष चीज आती है जो उसके पास नहीं थी। एक विशेष

1410
01:38:52,240 --> 01:38:56,560
अनुभव होता है। तो अब मैं पूछ रहा हूं कि परमात्मा का अनुभव

1411
01:38:56,560 --> 01:39:00,560
जो कह रहा है ब्रह्मा कुमारी बार-बार मेडिटेशन से संस्कार बन

1412
01:39:00,560 --> 01:39:04,800
रहा है कि मुझे बार-बार करना है। यह संस्कार तो बन गया। मगर जो विशेष

1413
01:39:04,800 --> 01:39:09,040
अनुभव बताया जा रहा है कि परमात्मा का अनुभव है वो कैसा होता है?

1414
01:39:09,040 --> 01:39:13,760
परमात्मा का अनुभव जिसके कारण जिसके कारण

1415
01:39:13,760 --> 01:39:17,840
जिसके कारण हम यह मान सके कि ईश्वर है इस

1416
01:39:17,840 --> 01:39:21,920
दुनिया में। यह तो जब आप पूरा से डेज कोर्स कर लेंगे मैं

1417
01:39:21,920 --> 01:39:26,000
लास्ट में तीन दिन आपको वही अनुभव कराऊंगी। बस बस नहीं अनुभव नहीं

1418
01:39:26,000 --> 01:39:30,080
करना मुझे। ये पहले जानना है मैं किस अनुभव को किस कारण

1419
01:39:30,080 --> 01:39:34,400
से यह मान लूं कि ये में जान जाएंगे 7 मैं आपको

1420
01:39:34,400 --> 01:39:38,560
समझा दूंगी। ठीक ठीक ठीक। तो ये हो गया आगे के लिए। बना

1421
01:39:38,560 --> 01:39:42,880
दीजिए सुनने का पहले तो फिर आप सुनेंगे। हां सुनने का संस्कार जरूरी

1422
01:39:42,880 --> 01:39:45,600
है पहले।

1423
01:39:45,600 --> 01:39:49,920
अच्छा मेडिटेशन ठीक है आज का हो गया काफी अच्छा रहा

1424
01:39:49,920 --> 01:39:53,920
और अच्छा एक एक चीज है बहुत अच्छी

1425
01:39:53,920 --> 01:39:57,840
है चाहे तो अगले में ले लीजिएगा

1426
01:39:57,840 --> 01:40:02,000
ये जो है ना कि

1427
01:40:02,000 --> 01:40:06,000
जो पाप कर्म है यानी बुरे विचार पाप कर्म

1428
01:40:06,000 --> 01:40:10,240
होते हैं बुरे विचारों से तो ये बुरे विचार एग्जिस्ट कहां

1429
01:40:10,240 --> 01:40:14,240
पर करते हैं क्योंकि आत्मा इनको इनसे

1430
01:40:14,240 --> 01:40:17,920
अलग भी स्वयं को कर सकती है।

1431
01:40:17,920 --> 01:40:22,000
कर सकती है ना? आत्मा बुरे और अच्छे संस्कारों से अपने

1432
01:40:22,000 --> 01:40:26,160
आप को अलग तब कर सकती है जब वो स्वयं चाहे

1433
01:40:26,160 --> 01:40:30,800
तो वो चाह भी पैदा होनी चाहिए। वो वायुमंडल मिलना चाहिए।

1434
01:40:30,800 --> 01:40:34,800
उसे वो चीज प्रश्न दूसरा है। प्रश्न दूसरा है।

1435
01:40:34,800 --> 01:40:39,280
अलग किसी भी तरह से कर सके पर कर सकती है।

1436
01:40:39,280 --> 01:40:43,920
क्लियर है ना? हां। तो इसका मतलब यह है कि

1437
01:40:43,920 --> 01:40:47,920
जो अ जो

1438
01:40:47,920 --> 01:40:52,240
बुरे विचार हैं बुरे विचार यानी बुराई पाप

1439
01:40:52,240 --> 01:40:54,000
कर्म इत्यादि जिसके कारण

1440
01:40:54,000 --> 01:40:58,320
व्यक्ति दुख में फंसता है और जिसके कारण उसे वो कर्म भोगने

1441
01:40:58,320 --> 01:41:02,400
आना पड़ता है। हालांकि कर्म भोगने से रिलेटेड भी एक प्रश्न है

1442
01:41:02,400 --> 01:41:06,640
कि वो कर्म भोगने आ रहा है वो भी एक प्रश्न हो वो अलग हो जाएगा।

1443
01:41:06,640 --> 01:41:11,120
मगर अभी फिलहाल इस पर ही रहते हैं कि इसका मतलब है

1444
01:41:11,120 --> 01:41:15,200
यह जो बुरे विचार हैं यह एकिस्ट कहां पे कर रहे हैं जो

1445
01:41:15,200 --> 01:41:19,200
आ जाते हैं मन में लोगों के मनुष्यों के मन

1446
01:41:19,200 --> 01:41:24,720
में आ जाते जन्म जन्म बाएं जन्म संस्कारों रहित आत्मा

1447
01:41:24,720 --> 01:41:28,880
उनको भोगती है और वो बुरे और अच्छे संस्कारों

1448
01:41:28,880 --> 01:41:32,960
के साथसाथ इन जन्मों को युगों युगों झेलती है

1449
01:41:32,960 --> 01:41:36,960
और हर बार इन कर्मों से अलग होती है और हर बार पवित्र होती

1450
01:41:36,960 --> 01:41:40,960
है तो ये पवित्र से अपवित्रता का खेल ये मैं ये

1451
01:41:40,960 --> 01:41:44,960
मैं समझ गया प्रश्न मेरा कुछ और है जैसे जो बुरे विचार

1452
01:41:44,960 --> 01:41:50,400
हैं उनके बिना आत्मा एक्सिस्ट कर सकती है यह तो निश्चित हो

1453
01:41:50,400 --> 01:41:54,400
तो अब ये जो बुरे विचार हैं इनका धारक तत्व क्या है? कहां

1454
01:41:54,400 --> 01:41:58,640
पर रहेंगे ये? क्योंकि आत्मा तो जिसमें ये आ भी सकते हैं, जा भी सकते हैं।

1455
01:41:58,640 --> 01:42:02,640
मन में तो ये रहेंगे कहां? किसके मन में? किसके?

1456
01:42:02,640 --> 01:42:06,640
आत्मा के मन में। आत्मा के मन में। मैं आत्मा

1457
01:42:06,640 --> 01:42:09,440
तो उससे अलग हो सकती है। इसका वो स्थाई इसका मतलब

1458
01:42:09,440 --> 01:42:13,600
मैंने आपको अभी कि मन, बुद्धि, संस्कार उसकी तीन शक्तियां है। फिर

1459
01:42:13,600 --> 01:42:17,600
आप मन को आत्मा में जोड़ रहे हैं। जबकि मैं बार-बार वही जोर दे रही हूं।

1460
01:42:17,600 --> 01:42:21,680
आत्मा की तीन शक्तियां है। जैसे शरीर की कर्मेंद्रियां है।

1461
01:42:21,680 --> 01:42:26,240
आत्मा की तीन इंद्रियां है। मन, बुद्धि, संस्कार।

1462
01:42:26,240 --> 01:42:30,320
मन में रहता है बुरा विचार। बुद्धि निर्णय लेती है बुरा करूं कि

1463
01:42:30,320 --> 01:42:34,320
अच्छा करूं या कहां जाऊं? किस मार्ग पे जाऊं? और मगर

1464
01:42:34,320 --> 01:42:38,400
आप ये भी मगर आप ये भी तो कह रही हैं कि

1465
01:42:38,400 --> 01:42:42,480
जो आत्मा है वो बुरे विचारों से अलग हो सकती है।

1466
01:42:42,480 --> 01:42:46,640
हां हो सकती है। तो बुरा विचार एक्सिस्ट कहां पे करेगा? बुद्धि

1467
01:42:46,640 --> 01:42:50,720
लेगी निर्णय मन में मेरे बुरा विचार आया मेरे मन

1468
01:42:50,720 --> 01:42:55,120
में बुरा विचार मैं पूछ क्या रहा हूं नीलिमा जी मैं पूछ ये रहा हूं

1469
01:42:55,120 --> 01:42:59,200
कि जो यह विचार होता है इसको रहने के लिए विचार

1470
01:42:59,200 --> 01:43:03,360
को रहने के लिए एक चेतन तत्व चाहिए

1471
01:43:03,360 --> 01:43:08,480
अब जीव तो विचारों से अलग हो सकता है इसका मतलब

1472
01:43:08,480 --> 01:43:12,880
सुनिए नीलिमा जी कह के मुझे पूरा मुझे पूरा पूरा पूरा तो करने दीजिए

1473
01:43:12,880 --> 01:43:17,200
संस्कार आत्मा की तीन शक्तियां मन में विचार आता

1474
01:43:17,200 --> 01:43:21,280
है। बुद्धि आता है। कहां से आता है? कहां से आता है? उससे

1475
01:43:21,280 --> 01:43:24,480
पहले वो विचार कहां था? मन में मन में कहां से

1476
01:43:24,480 --> 01:43:28,640
आएगा? मन में विचार आता है। मन स्वयं कहां से आता है? स्वयं

1477
01:43:28,640 --> 01:43:32,880
में चेतन है मन। यानी उसमें विचार वो पहले से ही था।

1478
01:43:32,880 --> 01:43:37,120
हां वो भूल चुकी होती है और वो याद आता है। यानी कि बुरे विचार,

1479
01:43:37,120 --> 01:43:41,920
बुरे विचार जीव के अंदर सदैव रहते हैं। सदैव

1480
01:43:41,920 --> 01:43:46,000
नहीं रहते। निकलते ही जाते हैं। आते हैं

1481
01:43:46,000 --> 01:43:50,080
तो वो कहां रहते हैं? आते कहां से आते हैं? बुद्धि में रहते

1482
01:43:50,080 --> 01:43:54,160
हैं। मन मन पैदा करता है। बुद्धि निर्णय लेती है। संस्कार हैबिट

1483
01:43:54,160 --> 01:43:58,400
बनता है। अगर वो अच्छा विचार करेगी और वो लगातार करेगी

1484
01:43:58,400 --> 01:44:02,480
तो वो अच्छे विचारों का उत्पन्न करेगी अपने अंदर। आगे बढ़ रही है। मैं कह

1485
01:44:02,480 --> 01:44:06,560
रहा हूं कि मन मन से जब वो जाते हैं मन से चले जाते हैं

1486
01:44:06,560 --> 01:44:10,800
तो वो बुराई जो मैं कह रहा हूं बुराई एक्सिस्ट कहां पे कर रही है?

1487
01:44:10,800 --> 01:44:14,960
क्योंकि यहां पे तो यह तो उसका टेंपरेरी वो है।

1488
01:44:14,960 --> 01:44:19,200
आत्मा चेतन स्वरूप है, चेतन शक्ति है और मन भी चेतन

1489
01:44:19,200 --> 01:44:23,200
है। यहां बुद्धि भी चेतन है और संस्कार भी चेतन ही

1490
01:44:23,200 --> 01:44:27,280
है। मैं आपको क्योंकि मैं सनातन का ज्ञान भी रखती हूं इसलिए उस

1491
01:44:27,280 --> 01:44:31,360
तरीके से बता रही हूं। चेतना मन में भी है और चेतना बुद्धि में भी

1492
01:44:31,360 --> 01:44:35,680
है और चेतना संस्कारों में भी है। तो वो जो चेतना है वो मन

1493
01:44:35,680 --> 01:44:39,680
में पैदा होता है। गलत विचार गलत पॉइंट या गलत सही

1494
01:44:39,680 --> 01:44:44,160
विचार सही पॉइंट और बुद्धि रूपी तराजू में तोलती

1495
01:44:44,160 --> 01:44:48,640
है वो कि सही है या गलत है। और फिर यानी कि

1496
01:44:48,640 --> 01:44:52,720
यानी कि जो यानी कि जो बुराई है वो

1497
01:44:52,720 --> 01:44:57,360
विशेष देश काल परिस्थिति में उत्पन्न होती है। वह सदा से है नहीं।

1498
01:44:57,360 --> 01:44:59,920
नहीं

1499
01:44:59,920 --> 01:45:03,920
जो इविल है सदा से नहीं है शाश्वत नहीं है नहीं

1500
01:45:03,920 --> 01:45:08,320
है वो परिस्थिति अनुसार नहीं आत्मा के संकल्पों अनुसार

1501
01:45:08,320 --> 01:45:12,640
आती है हां यानी कि आत्मा जब संकल्प

1502
01:45:12,640 --> 01:45:16,880
करती है तो बुराई उसमें वो उत्पन्न होने वाला पदार्थ है। बिल्कुल

1503
01:45:16,880 --> 01:45:21,120
बुराई उत्पन्न होने वाला पदार्थ है। मतलब बुराई के बिना भी आत्मा एक्सिस्ट

1504
01:45:21,120 --> 01:45:25,120
करती है। हां ठीक है। तो यह

1505
01:45:25,120 --> 01:45:29,680
निश्चित तो यह निश्चित क्यों हो रहा है कि नहीं एक बार दोबारा बुराई आएगी आएगी

1506
01:45:29,680 --> 01:45:33,680
यह निश्चित क्यों हो रहा है युगों की वजह से समय की वजह

1507
01:45:33,680 --> 01:45:39,200
से काल की वजह से कालखंड की वजह से क्या कालखंड

1508
01:45:39,200 --> 01:45:43,440
सतयुग द्वापर त्रेता कलयुग सतयुग त्रेता द्वापर कलयुग का जो चक्र

1509
01:45:43,440 --> 01:45:47,600
है उस अनुसार जैसे जो

1510
01:45:47,600 --> 01:45:51,840
आत्मा है वह पाप से बिल्कुल फ्री हो गई ठीक है सतयुग

1511
01:45:51,840 --> 01:45:54,720
में अब उसके पास पाप नहीं

1512
01:45:54,720 --> 01:45:59,280
हां तो अब वो जो है दोबारा से

1513
01:45:59,280 --> 01:46:03,520
वो जो बुरा करने का विचार है उसको कौन डालेगा? स्वयं को भूल गई

1514
01:46:03,520 --> 01:46:07,680
ना स्वयं को भूल गई ना भूल गई मगर वो विचार कहां

1515
01:46:07,680 --> 01:46:11,840
से आ गया? युग अनुसार समय अनुसार जैसा समय हुआ

1516
01:46:11,840 --> 01:46:15,920
जैसी परिस्थिति यानी किसी और ने वो विचार डाला उसके अंदर

1517
01:46:15,920 --> 01:46:20,080
यानी किसी और ने डाला आत्मा के मन ने डाला आत्मा मन के

1518
01:46:20,080 --> 01:46:24,080
द्वारा अरे आप तो जब मैं ये कह रहा हूं जिस समय वो निकल गया उसके मन

1519
01:46:24,080 --> 01:46:28,320
से भी बाहर हो गया मैं तब की बात कर रहा हूं क्या बाहर हो गया

1520
01:46:28,320 --> 01:46:32,320
बुराई बुरा विचार है ही नहीं एक्सिस्ट ही नहीं कर रहा हो गई सतयुग के

1521
01:46:32,320 --> 01:46:36,720
अनुसार समय के अनुसार भक्ति आई भक्ति

1522
01:46:36,720 --> 01:46:40,800
आई समय के अनुसार ऐसा ऐसा तो नहीं है आत्मा हमेशा ही बुरा कर रही है।

1523
01:46:40,800 --> 01:46:45,120
अगर वो सतयुग में देवी देवता है आपने को

1524
01:46:45,120 --> 01:46:49,120
आप युगों को सुनना नहीं चाहते। सुनो आप युगों को सुनना नहीं चाहते।

1525
01:46:49,120 --> 01:46:53,200
अच्छाई और बुराई पे बात कर रहे हैं। जब आप आत्मा की अच्छाई बुराई पर बात

1526
01:46:53,200 --> 01:46:57,360
करोगे तो युगों की बात भी होगी। समझो आप

1527
01:46:57,360 --> 01:47:01,600
आप सतयुग में आई आत्मा पावन पवित्र सतो प्रधान

1528
01:47:01,600 --> 01:47:05,600
हुई। उसके बाद रजो प्रधान हुई। रजो प्रधान हुई तो

1529
01:47:05,600 --> 01:47:09,840
उसने भक्ति करी। वो पेड़ पौधे जल थल सबको पूजने लगी।

1530
01:47:09,840 --> 01:47:14,000
अपने स्वयं के चित्रों को भी पूजने लगी। फिर वो कलयुग में आई।

1531
01:47:14,000 --> 01:47:18,560
कलयुग में जैसी परिस्थिति तमोगुणी हुई। तमो प्रधानता

1532
01:47:18,560 --> 01:47:22,640
की अति को पाई। जैसा जैसा समय हुआ आत्मा के विचार बदलते

1533
01:47:22,640 --> 01:47:26,640
गए। स्वयं को भूलती गई। इसी को याद दिलाने के लिए ब्रह्मा

1534
01:47:26,640 --> 01:47:30,880
तन्मय शिव परमात्मा ने आके ये सृष्टि का पुनः

1535
01:47:30,880 --> 01:47:35,200
स्थापना किया कि मैं आप कौन है? आप कहां से आए हैं? आपका

1536
01:47:35,200 --> 01:47:40,640
धर्म क्या है? आप कैसे भूल गए? तो यह होता है।

1537
01:47:40,640 --> 01:47:44,720
ठीक है? अब मैं पूछूं कुछ? मैं पूछ ये रहा हूं कि जो

1538
01:47:44,720 --> 01:47:48,800
आत्मा है एक समय ऐसा आता है तब उसके

1539
01:47:48,800 --> 01:47:53,040
अंदर जो इविल है यानी कि बुराई यानी कि पाप कर्म

1540
01:47:53,040 --> 01:47:57,280
के विचार। पाप कर्म नहीं कह रहा हूं। पाप कर्म के विचार

1541
01:47:57,280 --> 01:48:01,440
वह विचार भी नहीं होते हैं। एक समय ऐसा होता है वह विचार भी

1542
01:48:01,440 --> 01:48:06,240
उसके अंदर नहीं होते हैं। वह बिल्कुल फ्री होता है। ठीक है?

1543
01:48:06,240 --> 01:48:10,640
अब ऐसा क्या हुआ जो उसके अंदर वो चीज उत्पन्न हुई आई।

1544
01:48:10,640 --> 01:48:14,800
क्या हुआ? परिवर्तन हुआ। यानी कि यानी आत्मा का स्टेज

1545
01:48:14,800 --> 01:48:18,240
बदला। आत्मा

1546
01:48:18,240 --> 01:48:22,720
यानी कि समय का जब परिवर्तन होता है तो आत्मा

1547
01:48:22,720 --> 01:48:25,040
के अंदर अपने आप वो चीज उत्पन्न

1548
01:48:25,040 --> 01:48:29,040
हो जाती है जो पहले नहीं थी। जी बिल्कुल समय

1549
01:48:29,040 --> 01:48:33,120
का परिवर्तन होने के कारण जी बिल्कुल आत्मा के अंदर एक नया

1550
01:48:33,120 --> 01:48:37,760
परिवर्तन हो जाता है। एक मिनट एक मिनट शिव जी ऐसे समझेंगे आपके

1551
01:48:37,760 --> 01:48:41,840
पीछे मैं ये वायुमंडल देख रही हूं जिस तरह से आप ज्ञान की

1552
01:48:41,840 --> 01:48:46,080
बातें कर रहे हैं। आपके पीछे कुछ बुक्स लगी है। ऐसे समझेंगे

1553
01:48:46,080 --> 01:48:50,320
आप आपने एक वेशभूषा धारण करी है। आपके कुछ

1554
01:48:50,320 --> 01:48:54,320
नियम भी होंगे। आपके कुछ कर्तव्य भी होंगे जो आपके याद

1555
01:48:54,320 --> 01:48:58,320
है। आपको उन नियमों में रहना है। जिस भी धर्म को आप मानते हैं मैं मानती

1556
01:48:58,320 --> 01:49:02,560
हूं। मैंने एक वेशभूषा धारण करी है। तो यह जो वायुमंडल

1557
01:49:02,560 --> 01:49:07,200
है उस वायुमंडल में आपके विचार वैसे रहेंगे। अगर इस वायुमंडल

1558
01:49:07,200 --> 01:49:11,440
को आप परिवर्तन कर दो। बदल दो और आप

1559
01:49:11,440 --> 01:49:15,520
किसी गलत वायुमंडल में चले जाओ। कोई ऐसी जगह चले जाओ

1560
01:49:15,520 --> 01:49:19,600
कि जो वायुमंडल ठीक नहीं है। तो कुछ एक आत्माएं हैं।

1561
01:49:19,600 --> 01:49:23,680
कुछ एक आत्माएं हैं जो अपने आप पर कंट्रोल रख सकती हैं कि नहीं

1562
01:49:23,680 --> 01:49:27,680
यहां अगर शराब बेची जा रही है तो मुझे शराब नहीं पीनी है क्योंकि मेरा धर्म वो

1563
01:49:27,680 --> 01:49:31,920
नहीं है। अगर यहां पर मांस खाया जा रहा है तो मुझे मांस नहीं खाना है क्योंकि

1564
01:49:31,920 --> 01:49:35,920
मेरा धर्म वो नहीं है। यहां कुछ गंदगी हो रही है तो मुझे गंदगी में नहीं

1565
01:49:35,920 --> 01:49:40,400
जाना है क्योंकि मेरा धर्म वो नहीं है। लेकिन वो तब होगा जब मुझे याद है।

1566
01:49:40,400 --> 01:49:44,800
लेकिन जब मुझे कुछ याद ही नहीं है जहां बताया जा रहा है कि आत्मा

1567
01:49:44,800 --> 01:49:48,800
को लग रहा है कि यही मेरा धर्म है यही सब कुछ है तो तो भूल जा रहा है

1568
01:49:48,800 --> 01:49:52,960
तो वो कुछ भी कर रहा है लेकिन ये याद तो परमात्मा आकर के

1569
01:49:52,960 --> 01:49:57,120
अब संगम पे दिलाते हैं ना तब आत्मा अच्छा होता

1570
01:49:57,120 --> 01:50:01,360
ठीक है पूछूं मैं पूछू अब देखिए

1571
01:50:01,360 --> 01:50:05,360
आपने कहा कि हमारे वातावरण के अनुसार हमारे

1572
01:50:05,360 --> 01:50:09,360
जो मन है उसमें बुरे विचारों का आना जाना हो सकता

1573
01:50:09,360 --> 01:50:13,840
है। ठीक है? अब जैसे मैं यहां बैठा हूं तो मेरे

1574
01:50:13,840 --> 01:50:17,840
जो मेरे पीछे वातावरण है उसके कारण मेरे मन में उस तरह के विचार

1575
01:50:17,840 --> 01:50:21,840
हैं। ठीक है? यह जो मेरे पीछे चीजें हैं यह कुछ

1576
01:50:21,840 --> 01:50:25,840
दूसरे कॉन्शियस लोग हैं। कुछ दूसरे चेतन

1577
01:50:25,840 --> 01:50:30,080
तत्व हैं जिनके यहां विचार हैं। यह कपड़े के रूप में भी

1578
01:50:30,080 --> 01:50:34,400
किसी दूसरे चेतन तत्व का विचार है जिसके कारण मेरे पास वो विचार

1579
01:50:34,400 --> 01:50:39,120
आया। ठीक है? तो क्या आप यह कहना चाहती हैं कि

1580
01:50:39,120 --> 01:50:43,360
वहां पर भी किसी दूसरे चेतन तत्व के विचार होते हैं जो वहां

1581
01:50:43,360 --> 01:50:47,360
मनुष्य में प्रवेश करते हैं। देखिए जो बात

1582
01:50:47,360 --> 01:50:51,920
आप कर रहे हैं जो बात अभी आपने करी वो बात आपकी और यह वाली बात बिल्कुल

1583
01:50:51,920 --> 01:50:55,440
मिसमैच है। ये मैच ही नहीं होती है। आपका

1584
01:50:55,440 --> 01:50:59,760
किसी और का विचार है। ये किसी और का विचार है। लेकिन अगर आपने धारण

1585
01:50:59,760 --> 01:51:04,160
किया है तो धर्म धारण किया ये आपका हो गया। कहने

1586
01:51:04,160 --> 01:51:08,240
का मतलब आप मेरा प्रश्न आप मैं जो पूछना चाह रहा हूं वो आप समझ

1587
01:51:08,240 --> 01:51:12,320
नहीं रही आप मैं जो पूछना चाह रहा हूं आप समझ

1588
01:51:12,320 --> 01:51:16,960
नहीं रही है क्यों नहीं समझ रही हूं आप एक्सेप्ट नहीं करना चाहते

1589
01:51:16,960 --> 01:51:21,120
सुनिए मैं तो समझ रही हूं आप एक्सेप्ट नहीं करना चाहते ये किसी और का

1590
01:51:21,120 --> 01:51:25,200
नहीं है जब आपने धारण कर लिया आपका धारण धारण

1591
01:51:25,200 --> 01:51:30,080
करने से पहले क्या स्टेज है मैडम मैं वो पूछ रहा हूं धारण

1592
01:51:30,080 --> 01:51:34,080
करने से पहले का स्टेज मतलब धारण करने से पहले मैं किसी

1593
01:51:34,080 --> 01:51:38,080
और कॉनशसनेस से प्रभावित हो रहा हूं ना। पहले की बात कर कैसे

1594
01:51:38,080 --> 01:51:42,160
सकते हैं आप? जब आपने धारण कर लिया ये क्यों नहीं कर सकते? यही तो बात

1595
01:51:42,160 --> 01:51:46,320
है। लेती है। जब आत्मा समय को धारण कर लेती है। समय की

1596
01:51:46,320 --> 01:51:50,560
वायुमंडल को धारण कर लेती है तो वो तो उसका हो गया ना। वो किसी दूसरे

1597
01:51:50,560 --> 01:51:54,800
पे कैसे मैं अरे बहन मेरा सवाल

1598
01:51:54,800 --> 01:51:59,040
तो समझिए मैं क्या कह रहा हूं। नहीं अब आपकी बात का आंसर लीजिए ना।

1599
01:51:59,040 --> 01:52:03,200
किसी की चोरी देखकर संग का रंग समझते हैं आप

1600
01:52:03,200 --> 01:52:07,200
संग का रंग किसी का संग का रंग लगा और वो

1601
01:52:07,200 --> 01:52:10,560
दूसरे का भी संग बदल गया छोटे बच्चे और बड़े बच्चे में

1602
01:52:10,560 --> 01:52:14,720
फर्क होता है यानी कि वो जो पूरी होने दीजिए

1603
01:52:14,720 --> 01:52:18,960
बात छोटे बच्चे और बड़े बच्चे में फर्क होता है मैच्योर बच्चे को कोई

1604
01:52:18,960 --> 01:52:23,920
बहका करके अपने साथ ले जाके चोर नहीं बना सकता

1605
01:52:23,920 --> 01:52:28,000
चोर अगर किसी को ले जाए पाले उसे पो से बड़ा करे और उसे कहे

1606
01:52:28,000 --> 01:52:32,000
ये तेरा कर्तव्य है क्योंकि मैं तेरा मालिक हूं। तू मेरा धर्म धारण कर। तो

1607
01:52:32,000 --> 01:52:36,000
उसने तो धर्म धारण इसलिए किया क्योंकि वो उसका बाप बनके उससे करा रहा है। उसे

1608
01:52:36,000 --> 01:52:40,080
क्या पता ये अधर्म है चोरी करा रहा है। दूसरे का करा लिया। लेकिन

1609
01:52:40,080 --> 01:52:44,160
वो जब कर रहा है जिस समय चोरी की रिपोर्ट होगी। उस समय वो

1610
01:52:44,160 --> 01:52:48,160
उसकी होगी। उस समय वो उसका पाप होगा। वो कोई किसी का

1611
01:52:48,160 --> 01:52:52,160
नाम लेके बच नहीं सकता। चोरी तुमने की है तो पाप तुम्हारा

1612
01:52:52,160 --> 01:52:56,400
है। यह धर्म तुम्हारा है। फिर जो तुमने किया है। इसी तरह से आत्मा

1613
01:52:56,400 --> 01:53:00,480
जब किसी भी वायुमंडल से गंदगी को धारण करती है वो उसका खुद

1614
01:53:00,480 --> 01:53:04,480
का पाप है। वो उसकी खुद के कर्म है। ऐसा नहीं कर सकते कि

1615
01:53:04,480 --> 01:53:10,000
मुझे तो इसने प्रेरणा दी थी। जी मैं इसलिए ऐसा हो गया। ऐसा नहीं ये धर्म के

1616
01:53:10,000 --> 01:53:14,000
गुरु शिष्य परंपरा में हो सकता है। अधर्म में नहीं हो सकता।

1617
01:53:14,000 --> 01:53:18,320
समझ गया आप? हां बताइए। एक लास्ट लास्ट

1618
01:53:18,320 --> 01:53:22,400
में फिर से एक बार पूछूंगा। आपने जैसे कहा कि कहीं से

1619
01:53:22,400 --> 01:53:25,680
अगर मैंने गंदगी को लेके धारण कर लिया तो ऐसा

1620
01:53:25,680 --> 01:53:30,000
नहीं होगा कि सजा तुमको नहीं जिससे तुमने लिया है उसको उसको मिले।

1621
01:53:30,000 --> 01:53:34,080
ठीक है? इसका मतलब मैं यह नहीं पूछ रहा हूं आपसे कि

1622
01:53:34,080 --> 01:53:38,240
मुझे सजा क्यों मिल रही? जिससे मैंने लिया उसको मिलनी चाहिए। मैं ये नहीं पूछ रहा हूं। मैं

1623
01:53:38,240 --> 01:53:42,240
ये पूछ रहा हूं कि जैसे जैसे मैं किसी से

1624
01:53:42,240 --> 01:53:46,240
गंदगी ले रहा हूं। जैसे आपने उदाहरण लिया किसी से ले रहा हूं। तो

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01:53:46,240 --> 01:53:50,720
आत्मा जब गंदगी से फ्री होती है वहां दिव्य लोक में

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01:53:50,720 --> 01:53:54,800
तो फिर वह बुराई किससे लेती है? यहां पे

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01:53:54,800 --> 01:53:59,120
दूसरे चेतन तत्व एक एक मिनट पूछो पूरा यहां पे दूसरे चेतन तत्व

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01:53:59,120 --> 01:54:03,200
हैं। जिनकी मैं गंदगी ले रहा हूं। यहां पर है अवेलेबल। जिनकी

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01:54:03,200 --> 01:54:07,280
मैं गंदगी या अच्छाई भी ले रहा हूं। इस भौतिक जगत में है दूसरे।

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01:54:07,280 --> 01:54:11,280
तो वहां पे कौन सा होता है? दूसरा चेतन तत्व जिससे कि

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01:54:11,280 --> 01:54:15,520
आत्मा में गंदगी आती है। मैं यही सवाल है। आप चाहते हैं वो आंसर

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01:54:15,520 --> 01:54:19,600
तो आप समझिए बनावटी तो बनेगा नहीं जो आप ये सोच

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01:54:19,600 --> 01:54:23,760
रहे हैं मेरे मुंह से निकलेगा हां जी दूसरा है। ऐसा नहीं है। दूसरा कोई

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01:54:23,760 --> 01:54:27,760
नहीं है। आत्मा का स्वयं का स्वधर्म है। स्वयं स्वधर्म

1635
01:54:27,760 --> 01:54:32,000
को वो याद रखती है और स्वयं स्वधर्म को भूलती है। सतयुग

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01:54:32,000 --> 01:54:36,080
में जब आती है तब स्वधर्मी होती है। आत्मा स्वयं के धर्म को याद रखती है

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01:54:36,080 --> 01:54:40,160
कि मैं शांति स्वरूप हूं। मैं पवित्र स्वरूप हूं। मेरा क्या

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01:54:40,160 --> 01:54:40,800
काम है?

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01:54:40,800 --> 01:54:45,280
तो सतयुग में कोई बुराई धारण नहीं करती। अच्छाई धारण करती है। वो भी स्वयं की होती है। इनबिल्ट

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01:54:45,280 --> 01:54:49,360
होती है। आत्मा में इनबिल्ट होती है बुराई और अच्छाई जिसका जवाब मैं पहले

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01:54:49,360 --> 01:54:53,360
दे चुकी हूं आपको। वाह फिर [प्रशंसा] वो बहुत

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01:54:53,360 --> 01:54:57,360
अच्छी बात है। इनबिल्ट होती है ना। हां। तो फिर आपने

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01:54:57,360 --> 01:55:01,440
बीच में कहा था नहीं वो तो उत्पन्न होती है। कहां कहा मैंने

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01:55:01,440 --> 01:55:05,680
उत्पन्न होती है। मैंने कहा अरे नीलमा बहन चक्कर आ गया मुझे।

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01:55:05,680 --> 01:55:09,920
ठीक है। आज का ये डे टू का बहुत अच्छा रहा। डे वो कुछ नहीं कहा आपको ऐसा

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01:55:09,920 --> 01:55:14,240
मैंने कहा अच्छाई बुराई समय वो अंदर से निकलती

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01:55:14,240 --> 01:55:18,560
है उसकी। इनबिल्ट है। बुराई इनबिल्ट है आत्मा में कभी अलग नहीं होती।

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01:55:18,560 --> 01:55:22,560
इनबिल्ट वो बुराई से आत्मा कभी अलग नहीं होती। बहुत बढ़िया। बहुत बढ़िया।

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01:55:22,560 --> 01:55:26,640
आशा करता हूं आप सब लोगों को ये सेशन अच्छा लगा हो। से अलग नहीं

1650
01:55:26,640 --> 01:55:31,200
होती आत्मा। ठीक है। बहुत बढ़िया। आज का सेशन रहा

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01:55:31,200 --> 01:55:35,280
और जो लोग भी देख रहे हैं वो मनन चिंतन करें

1652
01:55:35,280 --> 01:55:39,360
बहुत अच्छा लगा और नीलिमा जी आज आपने भी मुझे खूब छकाया है

1653
01:55:39,360 --> 01:55:44,160
अच्छे से छकाया है और मैं क्षमा चाहूंगा अगर मैंने आपको कहीं परेशान

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01:55:44,160 --> 01:55:48,160
किया हो हां मगर आपने बिल्कुल

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01:55:48,160 --> 01:55:52,160
ओरिजिनल जो ब्रह्मा कुमारी होनी है वो भी टॉप लेवल की वो

1656
01:55:52,160 --> 01:55:55,840
आपने आज हमको यहां उपलब्ध कराया है

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01:55:55,840 --> 01:56:00,110
कौन आपके जैसा कोर्स में कौन आता है कोई नहीं आता

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01:56:00,110 --> 01:56:02,320
[हंसी]

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01:56:02,320 --> 01:56:06,720
आएगा भी नहीं वो जुदाई फिल्म याद है आपको

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01:56:06,720 --> 01:56:11,120
जो परेश रावल था एक आध मोटरसाइकिल वाला उसको देख के

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01:56:11,120 --> 01:56:15,440
रिवर्स गियर लगा लेता था तो इसी तरीके से रिवर्स

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01:56:15,440 --> 01:56:19,840
गियर लगाते हैं ठीक है अच्छा आज

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01:56:19,840 --> 01:56:23,840
के लिए बहुत है शांति जय श्री राम जय

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01:56:23,840 --> 01:56:29,600
श्री राम

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01:56:29,600 --> 01:56:33,840
तो आप लोगों को कैसा लगा आज का सेशन? आप लोग जरूर बताइएगा और सीरीज

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01:56:33,840 --> 01:56:38,320
अभी बाकी है। आज केवल डे टू हुआ है और हमने बहुत सारी चीजें

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01:56:38,320 --> 01:56:42,560
देखी हैं। हालांकि अभी तक जो जिस कार्य के लिए बोला जाता है सेवन

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01:56:42,560 --> 01:56:46,720
डेज कोर्स कर लो। आपको सारे सवालों के जवाब मिल जाएंगे। मुझे

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01:56:46,720 --> 01:56:50,800
नहीं लगता इस पूरे सेवन डेज कोर्स में जो मेरे जो क्वेश्चंस होते हैं

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01:56:50,800 --> 01:56:54,880
वहां पर ब्रह्मा कुमारियों के पास उसमें से कोई भी क्वेश्चन ये सेवन डेज

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01:56:54,880 --> 01:56:58,880
कोर्स छू पाएगा। हालांकि वो उनका बचने का एक तकिया कलाम होता है।

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01:56:58,880 --> 01:57:03,120
इसलिए सेवन डेज कोर्स मैं कर लेता हूं। आप लोगों को कैसा लग रहा है बताइएगा

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और जुड़े रहिए भैया।

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और एक खुशखबरी है शुभ समाचार हैं

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कुछ रामपाल वाले विषय में जो हमने एक दो दिन पहले जो

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01:57:15,360 --> 01:57:19,360
किया था शेर का बच्चा एक ही अच्छा वाला कार्य था वो

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01:57:19,360 --> 01:57:23,360
तो 100 सुनार की एक लोहार की नहीं होता है। वो उस तरह से कुछ किया था। तो

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01:57:23,360 --> 01:57:27,440
हमने वो उसमें कुछ शुभ सूचनाएं मिली है हमें बहुत जल्द

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01:57:27,440 --> 01:57:31,760
उसको रिवील किया जाएगा पब्लिक कर दिया जाएगा जय श्री राम सभी को

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01:57:31,760 --> 01:57:37,760
हर हर महादेव

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[संगीत]
