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00:00:15:21 [संगीत] ओम [संगीत]
00:01:25:22 जय श्री राम जो राम को लाए हैं हम उनको लाएंगे हर घर भगवान हराएंगे जय श्री [चीखने की आवाज़] राम जय राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय जय श्री राम। जय श्री राम। जय श्री राम। प्रणाम भैया जी। आपके नेतृत्व में संगठन ने बड़ा ही भव्य जीर्णोद्धार किया है इस मंदिर का। यह मंदिर अब आपके ही संरक्षण में है। धन्यवाद। मान्यवर अंदर चलकर जल्दी से फीता काट लीजिए ताकि मंदिर की प्रतिष्ठा पूर्ण हो सके।
00:02:05:13 जय श्री राम। जय श्री राम। हो गई मंदिर की प्रतिष्ठा पूरी। [चीखने की आवाज़] महादेव जी आप देख रहे हैं जिस युग आचार्य का पद आपके पास है उस युग में मेरे मंदिर की अशास्त्रीय विधि से प्रतिष्ठा हो रही है। हां राम देख रहा हूं। आपके बातों का गलत अर्थ करने वाले बहुत घूम रहे हैं पृथ्वी पर। आपके एक बात का यह लोग गलत अर्थ निकालते हैं। भगवान तो बस भाव के ही भूखे हैं। प्रणाम पुजारी जी। यशस्वी भव भगवान श्री राम आपका कल्याण करें। पुजारी जी बड़ी ही भक्ति भाव से यह तलवार राजस्थान से श्री राम जी के लिए लाया हूं। आप कृपया श्री राम जी को यह धारण करवा दीजिए।
00:02:54:04 अति उत्तम लाइए अभी इसे अर्पित कर देते हैं। [संगीत] रुकिए पुजारी जी। मैंने आपको धारण करवाने कहा है। अर्पण करने नहीं। नहीं नहीं ऐसा करना शास्त्र विरुद्ध होगा मान्यवर। अरे पुजारी जी क्या तकलीफ है? भगवान तो भाव के भूखे हैं। पकड़ा दो पकड़ा दो। हरे कृष्णा [संगीत] हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा राम रामा हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा राम राम [संगीत] हरे हरे
00:03:48:04 पुजारी जी हरे कृष्णा हम बड़े ही भक्ति भाव से प्रभु श्री राम जी के लिए सा क्लॉस के वस्त्र लाए हैं। आप कृपया इन्हें पहना दीजिए। ये कैसे संभव है मान्यवर? यह शास्त्रीय परिधान नहीं है प्रभु श्री राम जी के लिए। इसे कैसे पहना दें? क्या हुआ पुजारी जी? भगवान तो भाव के भूखे होते हैं। पहना दो पहना दो। धन्यवाद पुजारी जी। धन्यवाद पुजारी जी। क्षमा करिएगा भगवान। प्रभु जी क्या हुआ? पुजारी जी क्यों नाराज हो रहे थे अंदर? अरे इन लोगों का हर जगह शास्त्र बस ऐसे ही पुजारियों से सावधान रहना पड़ता है। इसका एक ही सशन है। हमें अपने लोगों को यहां बैठाना पड़ेगा। एक काम और करो पूरे क्षेत्र में अमेरिकन गीता फ्री में बांटना आरंभ कर दो। ओके प्रभु जी।
00:04:50:12 पुजारी जी नमस्ते। बड़े ही भक्ति भाव से यह बाघ स्वरूप आसन राम जी के लिए लाया हूं। आप कृपया श्री राम जी को इस बाघ पर विराजमान कर दीजिए। यह कैसे संभव है मान्यवर? शास्त्र इसकी अनुमति नहीं देते। अरे अब क्या परेशानी है पुजारी जी? भगवान भाव के भूखे होते हैं। बैठा दो बैठा दो। धन्यवाद पुजारी जी। क्षमा करना भगवन
00:05:26:02 प्रभु आपका यह अपमान मुझसे नहीं देखा जा रहा। मैं इसी मुहूर्त पृथ्वी पर इन कालनेमियों को सबक सिखाता हूं। भगवन [संगीत] आपका तृण मात्र क्रोध भी मनुष्यों के लिए असहनीय है। मैं ही [संगीत] कुछ करता हूं। [संगीत] पकड़ो पकड़ो पकड़ो [हांफने की आवाज़][गहरी सांस लेने की आवाज़]
00:06:05:22 पकड़ो पकड़ो इन्हीं से आरंभ करना उचित होगा। वो देखो वहां छुपते हैं जल्दी से। ले लो अमेरिकन गीता ले लो। ऐसे ही ले लो ले लो ले लो। अमेरिकन गीता ले लो। ले लो अमेरिकन गीता ले लो। भैया प्लीज हम दोनों को छुपा लो। कुछ लोग हम दोनों का पीछा कर रहे हैं। बिल्कुल क्यों नहीं? पर तुमको 1000 किताब खरीद के फ्री में बांटना पड़ेगा। हां हां आप जैसे कहो ठीक है जल्दी से वैन के अंदर छुप जाओ। ले लो ले लो। ऐसे ही ले लो। अमेरिकन गीता ले लो।
00:07:02:24 ले लो ले लो। वो शादी के जोड़ में भाग रहे थे। किस ओर भागे आपने देखा क्या? हां वो आगे भाग गए जल्दी करो पकड़ लोगे। अरे रुको फ्री में लेते जाओ। अमेरिकन गीता ले लो ले लो। ले लो ले लो। थैंक यू भैया। हम दोनों कलाकार आपसे वो हजार बुक्स ले जाएंगे। अभी के लिए तो ले लो। ले लो ले लो। अरे रुको फ्री में लेते जाओ। अमेरिकन गीता ले लो लेलो। बाल-बाल बच गए। बचे नहीं। पकड़े गए। डरो नहीं। मैं उनमें से नहीं हूं। कौन थे वो लोग और क्यों तुम्हारा पीछा कर रहे थे? अरे भैया हम दोनों अपने मर्जी से शादी करना चाहते हैं ना इसलिए [संगीत] तुम्हारे माता-पिता सहमत नहीं है क्या? और शास्त्रों में लिखा है माता-पिता की सहमति के बिना विवाह नहीं करनी चाहिए। अरे भैया शास्त्र में कुछ भी लिखा है। भगवान तो भाव के भूखे होते हैं। तुम दोनों के माता-पिता का क्या नाम है? भैया जी बात ऐसी है कि हम दोनों के माता-पिता एक ही हैं। क्या? अर्थात तुम दोनों
00:08:17:27 भाई-बहन हो? [नाक से की जाने वाली आवाज़] हां। इसीलिए तो हमारे पीछे पड़े हैं ये लोग। [संगीत] भाई-बहन को ये लोग विवाह करने देते ही नहीं। भाई-बहन के प्रेम को स्वीकार ही नहीं करते। और क्या गलत है? अगर दो लोग सच [संगीत] में एक दूसरे से प्रेम करते हो, प्रेम तो भगवान का ही रूप होता है। है ना? तुम बिल्कुल भी अपने शास्त्रों को नहीं [संगीत] मानते। तुम राम जी को नहीं मानते। अरे भैया भगवान तो भाव के भूखे हैं। शायद वो लोग आ रहे हैं। हमें चलना चाहिए। इनका पीछा करना चाहिए। पहुंच गए हम मंजिल तक। चलो अंदर चलते हैं।
00:09:08:27 [संगीत] [गाना गाने की आवाज़][संगीत]
00:09:44:08 [गाना गाने की आवाज़] [संगीत] है [गाना गाने की आवाज़][संगीत] सेवा [संगीत] है हमको दर्शका [संगीत][गाना गाने की आवाज़] [संगीत] [संगीत][गाना गाने की आवाज़]
00:10:18:29 [संगीत] रुकिए। अरे कहां सीधे अंदर चले जा रहे हैं? अंदर अशास्त्रीय विधि से विवाह करने युवक युवती आए हैं। मैं उन्हें रोकने आया हूं। ओ हेलो मिस्टर तुम होते कौन हो? इस विवाह को अशास्त्रीय घोषित करने वाले भाई सर्वोत्तम [संगीत] विवाह वही होता है जो माता-पिता के सहमति से [संगीत] होता है। अरे हटो आजकल सब चलता है और यह शादी भी शास्त्रीय है। हां मेरे भाई उन्हीं शास्त्रों द्वारा ही ऐसे विवाह को सर्वाधिक निम्न एवं हीन स्तर का विवाह माना गया है। और आप [संगीत] हीन दृष्टि से विशेष अथवा आपात समय की चीजों को सामान्य धर्म जैसा प्रचार क्यों कर रहे हैं? और तो और आप तो सीधे-सीधे [संगीत] अब बहन भाई का ही विवाह करने लग गए। यह कौन से शास्त्र में लिखा है?
00:11:33:27 सुनिए महोदय जी ऐसा है देश काल परिस्थिति के अनुसार रीति रिवाज बदलते रहते हैं। जैसे आज के टाइम में महिलाओं का जने हो। हां उस प्रकार से भले ही नहीं हो रहा जिस प्रकार से हमारे शास्त्रों [संगीत] में वर्णित है। परंतु थोड़े बहुत बदलाव के साथ हम महिलाओं का जनेऊ भी कर देते हैं। मेरे भाई समझो हमारे यहां देश काल परिस्थिति के लिए [संगीत] जो धर्म है वह पहले से ही सनातन है। शास्त्रों ने पहले ही सतयुग, त्रेता, द्वापर एवं कलयुग के धर्म निश्चित किए हुए हैं। ऐसा [संगीत] नहीं है। कि जब जिसका जैसा मन आया बदल दिया। अरे तुम कुछ भी बोले जा रहे हो। तुम होते कौन हो ये सब ज्ञान बांटने वाले? राम हूं मैं। मैं ही त्रेता में आया था। मैं ही द्वापर में आया था। मैंने ही [संगीत] इस सृष्टि की रचना की है। बोल तो ऐसे रहे हो जैसे भगवान हो। [हंसी]
00:12:43:02 [हंसी] त्रेता में आया था, द्वापर में आया था। अरे नहीं मानते हम अवतार को। नहीं होता है कोई अवतार है। अवतार लेने की आवश्यकता ही क्यों है ईश्वर को? जो ईश्वर अपनी इच्छा मात्र से रावण, कंस इत्यादि का अंत कर सकते हैं। उन्हें अवतार लेने की आवश्यकता ही क्यों है? मेरा उद्देश्य मात्र किसी को मारना नहीं है। मेरा उद्देश्य ऐसी लीला करना होता है जिससे मनुष्यों का मन मुझ में [गाना गाने की आवाज़] आसक्त हो सके। वह जो इस प्रपंच रूपी संसार से बंधे हैं। माया से बद्ध हैं। वह मुझ सत का ध्यान कर सके। हर प्रकार के चित्त का आकर्षण बन सकूं। इसलिए अवतार लेता हूं। और इसीलिए मैंने ही कहा है परित्राणाय साधु नाम तुम्हारा चित्त मुझ में व्याप्त हो सके जिससे तुम्हारा उद्धार हो सके इसलिए मैं राम अवतार लेता हूं
00:13:51:22 और रही बातता की तो भाई मुझे वेद प्रदान करने की आवश्यकता भी क्यों है? मेरी इच्छा मात्र से मैं तुम्हें ज्ञानी ना बना दूं अविद्या से मुक्त ना कर दूं। आदाब मियां क्या चल रहा है? अरे कुछ नहीं मौलाना। ये खुद को ईश्वर बता रहा है। इससे पूछो जब ईश्वर अजन्मा है तो वो जन्म कैसे ले सकता है? गुड पॉइंट। अरे ईश्वर अजन्मा है। फिर जन्म कैसे ले सकता है? आत्मा भी अजन्मा है। वह अभी तो देह धारण कर इस संसार में आ रही है। अच्छा मतलब तुम भी आत्मा की तरह बद्ध हो। यही अंतर है। उन अजन्मी आत्माओं में [संगीत] और मुझ में वही इस संसार से बद्ध हैं और मैं मुक्त ईश्वर सर्वशक्तिमान है। सब कुछ करने में समर्थ है। फिर आप उस पर यह बाधा कैसे लगा रहे हो? कि वो अवतार नहीं ले सकता। अच्छा तो तुम्हारे अनुसार ईश्वर मर भी सकता है। मेरे भाई लीला में व्यस्त ईश्वर स्वयं के अविर्भाव और तिरोभाव के माध्यम से ही
00:15:06:24 मरना जीना सिखाते हैं। और इसीलिए मेरे भाई कई शास्त्रों में मुझ राम को ही मरते अवतार भी कहा गया है। और एक तरफ आप मुझ स्वयं को सर्वशक्तिमान ईश्वर सिद्ध करने को भी कह रहे हो। फिर दूसरी तरफ मरना अर्थात शक्तिहीन हो जाने के रूप में सर्वशक्तिमान होना असिद्ध [संगीत] करने को भी कह रहे हो। अर्थात जो करने को आप कह रहे हैं वही ना करने को भी आप कह रहे हैं। अर्थात आप यह कह रहे हो कि मैं ईश्वर क्या कुछ ऐसा करके दिखा सकता हूं जिसमें मैंने कुछ ना किया हो। तो यह मैं तो क्या कोई साधारण मनुष्य भी करके दिखा सकता है मेरे भाई। अरे कुछ भी बोले जा रहे हो ईश्वर सर्वव्यापी है। वो एक जगह कैसे हो सकता है? अच्छा तो तुम्हारे अनुसार ईश्वर सर्वव्यापी है। इसलिए एक जगह नहीं हो सकता। फिर उसका ईश्वरीय ज्ञान मात्र चार ऋषियों के अंतकरण का विषय कैसे बन गया? ईश्वर का सर्वव्यापी शाश्वत ज्ञान ईश्वर की इच्छा से ही विशेष देश काल परिस्थिति में वहां के लोगों के अंतकरण का विषय बन गया। बस वैसे ही मैं अपनी इच्छा अनुसार
00:16:22:28 जहांजैसा चाहूं वहां अवतरित हो सकता हूं। तो क्या अब अवतार को मानना पड़ेगा? अवतार मान लोगे तो पूरा धंधा [संगीत] चौपट याद रखना। तुम्हारी अवतार वाली बात मान भी लें तो तो तुम ही अवतार हो यह कैसे सिद्ध करोगे? आपके इस [संगीत] प्रश्न का उत्तर देने के पूर्व मैं यहां किसी की उपस्थिति चाहता हूं। [संगीत]
00:17:03:18 प्रणाम आचार्य। अब भाई आप पुनः वही प्रश्न कीजिए जो आपने कुछ देर पूर्व पूछा था। अवतार की बात तुम्हारी यदि मान भी लें तो यह बताओ अवतार को पहचानेंगे कैसे? मेरे भाई आप बताओ पहले कि उन चार ऋषियों ने जिनसे वेद प्राप्त किए उन्होंने ईश्वर को कैसे पहचाना था ईश्वर जिनको योग्य समझता है उनको अपनी प्रतीति करवाता है उनको अपनी अनुभूति करवाता है हां मेरे भाई इसका अर्थ है शब्द प्रमाण ईश्वर को पहचानने के [संगीत] विषय में जो हमारे शब्द प्रमाण है जैसे प्रामाणिक भक्त, सिद्ध, संत इन पर इनकी योग्यता के कारण ही ईश्वर इन पर कृपा करते हैं और वही सिद्ध प्रामाणिक संतजन ईश्वर को पहचानने में समर्थ हो पाते हैं।
00:18:14:21 हां, बात तो तुम बिल्कुल ठीक [संगीत] कह रहे हो। हां मेरे भाई और आज वर्तमान के जो हमारे वैदिक प्रामाणिक आचार्य हैं, वह हमारे समक्ष [संगीत] यहां खड़े हैं। आचार्य जी जिस प्रकार त्रेता में मैंने ब्रह्मा [संगीत] जी से यह पूछा था मैं कौन हूं? आज कलयुग में पुनः आपसे पूछता हूं बताएं मैं कौन हूं? प्रभु मैं आप में सच्चिदानंद स्वरूप भ्रम के दर्शन कर पा रहा हूं। जो हमारे नेत्र हैं जिनके द्वारा
00:18:52:16 केवल इस माया रूप जगत को देखा जा सकता है। उन्हीं आंखों से मैं आपको देखकर इस जगत के ठीक विपरीत सच्चिदानंद [संगीत] स्वरूप की अनुभूति कर पा रहा हूं। मेरे भगवन जिन परंपरा से मुझे वैदिक ज्ञान विज्ञान प्राप्त है उसके आधार पर मैं शत प्रतिशत कह सकता हूं [संगीत] कि आप स्वयं सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर ही हैं। आप साक्षात राम ही हैं प्रभु आप मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र हैं। ये ये हैं तुम्हारे प्रामाणिक आचार्य। नहीं मानते हम इन्हें। मेरे भाई यदि आप इन्हें प्रामाणिक नहीं मानेंगे तो इनके द्वारा प्राप्त वेदों को प्रामाणिक कैसे मानेंगे? और फिर या तो आप स्वयं को वैदिक मत कहो या तो इन्हें प्रामाणिक स्वीकार करो। क्योंकि वेद इन्हीं से तो प्राप्त हुए हैं आपको। तो क्या अब यह भी मानना पड़ेगा कि ईश्वर अपने
00:20:07:25 स्वरूप के विरुद्ध कार्य भी कर सकता है। मेरे भाई यदि आप अवतार को ईश्वर के स्वरूप विरुद्ध कार्य मानते हैं तो आपको एक देश क्रिया करने वाला होने वाले के रूप में ईश्वर के द्वारा सृष्टि रचना [संगीत] को भी अस्वीकार करना पड़ेगा और यह मानना पड़ेगा कि सृष्टि को ईश्वर ने नहीं बनाया। नमो बुद्धाय नमो बुद्धाय क्या चल रहा है समाजी भाई अब आप ही बताओ भते जी ईश्वर यदि अपने स्वरूप के विरुद्ध कार्य करेगा फिर तो उसके स्वरूप शाश्वत नहीं रह जाएगा फिर तो उसका अस्तित्व सिद्धि ही नहीं होगा [संगीत] यही तो मैं कह रहा हूं समाजी भाई कि दुनिया में कोई सनातन सत्ता नहीं है। कुछ शाश्वत सत्य नहीं है। कोई ईश्वर नहीं है इस दुनिया में। जब ना कोई ईश्वर है ना कोई सनातन सत्ता है तो हमारे ऊपर यह धर्म थोप ही क्यों रहे हो? क्यों बांध रखा है हमें इन रिश्तों के बंधनों में? जिसकी जैसी मर्जी वैसे करने दो। क्यों माने भला हम इन नियमों को? रुको। यह संसार मेरा ही रचा हुआ प्रपंच मात्र है। यहां [संगीत] घटने वाली समस्त घटनाएं प्रतीति
00:21:23:01 मात्र है। फिर प्रपंच रूपी संसार में घटने वाली कोई भी घटना से भगवान के स्वरूप के विरुद्ध कार्य करना कैसे सिद्ध होता है? और इसीलिए ईश्वर अवतार भी ले सकता है। और अपने स्वरूप [संगीत] के विरुद्ध मैं कोई कार्य नहीं करता। सुनो मुझे लग रहा है यहां कुछ नहीं हो पाएगा। दूसरे किसी और जगह चलते हैं।
00:22:11:06 वो देखो। उनके पास चलते हैं। दीदी प्लीज हमारी मदद कर दीजिए। हां दीदी जी हम दोनों को शादी करनी है। हां क्यों नहीं आप दोनों को बस हमारी बांसुरी और डफली लेकर मेडिटेशन करना पड़ेगा। तो ही हां दीदी हम दोनों को सब कुछ मंजूर है। हां दीदी जी बस हमारी शादी करवा दीजिए। टेंशन मत लो वैन में बैठ जाओ। आज तो पूरे महीने का टारगेट पूरा हो गया दीदी।
00:22:51:27 बॉस वो दोनों भाग गए क्या? चलो भाई हम सब मिलकर उन्हें रोकते हैं। मित्रों यह तुम्हारा आपसी मामला है। खुद ही देख लो। हमें इससे कोई मतलब नहीं। ठीक कह रहे हो बंते मियां। हमसे भूल हो गई भगवन आप ही इन्हें अमानवीयकृत करने से रोक सकते हैं। मैं नहीं मेरे भाई अब आप हां आप आप ही रोकेंगे। यह समस्त अवैदिक प्रकल्प [संगीत] अब आप ही रोकेंगे। हां, मैं रोकूंगा प्रभु। पुजारी जी
00:23:40:28 आपको ही रोकना होगा। हां भगवान रोकूंगा मैं। हां मैं रोकूंगा प्रभु। हां रोकूंगा मैं भगवन। हो सपना था। मैं समझ गया भगवन मैं ही रोकूंगा। [संगीत] मैं आपका संदेश समझ गया भगवान यदि हमने आज इन शास्त्र विरुद्ध कृत्यों को नहीं रोका [संगीत] तो भविष्य में यह सपना अवश्य ही सच हो जाएगा बहन भाई माता पुत्र पिता पुत्री सभी प्रकार के संबंध कलंकित होने लगेंगे धर्म का नाश हो जाएगा इसलिए हमें इसे रोकना ही होगा प्रभु मैं इसे रोकूंगा
00:24:37:10 पुजारी जी नमस्ते। नमस्ते पुजारी [संगीत] जी। जुगजुग जियो आप दोनों। बताएं कैसे [संगीत] आना हुआ? पुजारी जी हम दोनों शादी करने के लिए यहां आए हैं। हां क्यों नहीं? आप दोनों के माता-पिता जी का नाम बताएं। पुजारी जी एक्चुअली हम दोनों के माता-पिता एक ही हैं। तो क्या हो गया? अभी करवाते हैं आपका विवाह। रुकिए पुजारी जी। यह विवाह आप नहीं करवाएंगे।
00:25:16:02 पुजारी जी ये दोनों भाई बहन हैं। इनका विवाह शास्त्रीय है। यह सनातन धर्म के विरुद्ध कार्य है। भैया सुनो भगवान तो भाव के भूखे होते हैं। आपके शास्त्रों के भूखे भूखे नहीं है भगवान। महोदय जी जब यह अशास्त्रीय है तो वह अशास्त्रीय कैसे नहीं [संगीत] है? और महोदय जी जब भगवान इनके इस भाव के भूखे नहीं तो वहां भगवान राम किसके भाव के भूख में विराजित हैं?
00:25:49:20 भगवान तो भाव के भूखे हैं। भगवान की इस पंक्ति का अर्थ केवल इतना है कि यथासमर्थ धर्म का पालन करना चाहिए। परंतु आपने इस पंक्ति की आड़ में ना करने योग्य कर्मों को भी धर्म बना दिया। ध्यान रहे महोदय जी धर्म का पालन ना कर पाने में और ना करने में अंतर होता है। और धर्म का पालन ना कर पाना हमारी विवशता होनी चाहिए। चुनाव नहीं।
00:26:21:25 [संगीत] पुजारी जी मुझे क्षमा कर दीजिए। यह मेरी अज्ञानता ही है जिसके कारणवश मैं शास्त्रों [संगीत] को समझ नहीं पाया। पुजारी जी आपने मेरी और मेरे जैसे कईयों की आंखें खोल दी हैं। आज के बाद यहां परंपरा प्राप्त आचार्यों द्वारा निर्देशित शास्त्र विधि के अनुसार ही सारे कार्य होंगे। और मैं आज आपको आश्वासन देता हूं कि आज के पश्चात इस मंदिर में अशास्त्रीय भाव का कोई महत्व नहीं होगा। पुजारी जी मैं इसी मुहूर्त श्री राम जी के विग्रह को फिर से ठीक करवा देता हूं। परंतु आप इन दोनों की शादी नहीं करवाएंगे।
00:27:13:27 यह दोनों मेरे ही परिचित जन हैं। महोदय जी आपकी आंखें खोलने के लिए ही मैंने इन्हें बुलाया था। देखा आपने महादेव जी कैसे मेरे एक स्वप्न ने धर्म की [संगीत] स्थापना कर दी। हां श्री राम देख रहा हूं। [संगीत] परंतु मेरा अपमान करने वाली वह कालनेमी संस्था अभी भी शेष ही है। भगवन मुझ में और [संगीत] आप में भेद करके ही इनका व्यापार फैला है। इन काल नेमियों का भी समय शीघ्र आएगा। महादेव जी मैं अपने एक भक्त को इस कार्य में लगाने वाला हूं।
00:28:11:06 [संगीत]
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भगवान तो भाव के भूखे हैं | A Film By Ahvaan
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