1
00:00:01,960 --> 00:00:06,320
[घंटी की आवाज़] तो सभी को जय श्री राम। चोर

2
00:00:06,320 --> 00:00:10,480
चोर मौसेरे भाई आपने टाइटल देख ही लिया होगा।

3
00:00:10,480 --> 00:00:14,720
इस मुहावरे को चरितार्थ करते हुए दो लोग आपको

4
00:00:14,720 --> 00:00:19,120
इस समय दिख रहे हैं। जो हमारा बंदी छोड़ 2.0

5
00:00:19,120 --> 00:00:23,200
है उसको सही घोषित करने के लिए पुराना

6
00:00:23,200 --> 00:00:27,360
अनऑफिशियल आर्य समाजी गालीबाज गुंडा भी आ चुका है।

7
00:00:27,360 --> 00:00:31,600
मैं बात कर रहा हूं ऋषिवाच की जो पूर्व में हमारे आचार्यों

8
00:00:31,600 --> 00:00:35,760
के लिए हमारे देवी देवताओं के लिए हमारे आराध्यों के लिए बहुत सारी ऐसी

9
00:00:35,760 --> 00:00:40,080
अश्लील बातों से युक्त पंक्तियां निर्गत कर चुका है सोशल मीडिया

10
00:00:40,080 --> 00:00:44,080
पर जो बहुत अत्यंत निंदनीय चीजें हैं

11
00:00:44,080 --> 00:00:48,080
वह सब कर चुका है और समय आने पर जब आर्य समाज से

12
00:00:48,080 --> 00:00:52,240
प्रामाणिक रूप से इस बात की पुष्टि की गई थी तो आर्य समाज ने इस व्यक्ति

13
00:00:52,240 --> 00:00:56,960
को पहचानने से भी मना कर दिया था तो अब यह पुराना जो

14
00:00:56,960 --> 00:01:01,440
अनऑफिशियल आर समाजी गालीबाज गुंडा है वो

15
00:01:01,440 --> 00:01:05,840
इस वर्तमान के बंदी छोड़ 2.0 गालीबाज

16
00:01:05,840 --> 00:01:09,840
की सहायता करने के लिए आ गया है और इसने घोषित

17
00:01:09,840 --> 00:01:13,840
कर दिया है कि भैया यह बहुत बड़ा शास्त्रार्थी है और जो

18
00:01:13,840 --> 00:01:17,200
है अमुक अमुक इस तरीके से ऐसेसे फौतियां कस

19
00:01:17,200 --> 00:01:21,360
रहा है जैसे कि यही सबसे बड़े दोनों

20
00:01:21,360 --> 00:01:25,440
आर्य समाज के प्रामाणिक धुरंधर हैं। तो इन लोगों का कुल मिलाकर के

21
00:01:25,440 --> 00:01:29,600
जो क्लेम है वह यही है कि पूरी के शंकराचार्य जी जो है उत्तर नहीं

22
00:01:29,600 --> 00:01:33,840
दे पाए। उन्होंने विषयांतर करने की कोशिश की और

23
00:01:33,840 --> 00:01:38,160
अह कुल मिलाकर के वहां पर जो है आर्य समाज का मत जो है वह पुष्ट

24
00:01:38,160 --> 00:01:42,480
हुआ। अब वह बात एक अलग है कि वहां

25
00:01:42,480 --> 00:01:46,640
पर इस व्यक्ति ने अवतार विषय में अपना प्रश्न कितना

26
00:01:46,640 --> 00:01:50,720
स्पष्ट रखा था कि नहीं रखा था वह भी चर्चा का एक अलग विषय है।

27
00:01:50,720 --> 00:01:54,960
यद्यपि महाराज जी ने भी पूरी के शंकराचार्य जी ने भी इसके सवालों

28
00:01:54,960 --> 00:01:59,360
का पर्याप्त उत्तर दिया था कि नहीं दिया था? और क्या

29
00:01:59,360 --> 00:02:03,760
गोष्ठी होने के कारण उस चर्चा को आगे नहीं बढ़ाया गया था? अथवा किन कारणों

30
00:02:03,760 --> 00:02:07,760
से नहीं बढ़ाया गया था आगे उस बात को यह भी चर्चा का एक

31
00:02:07,760 --> 00:02:12,000
अलग विषय है। क्योंकि यदि कोई अगर यह कहता है कि उसको तब तक उत्तर

32
00:02:12,000 --> 00:02:16,080
क्यों नहीं दिया गया जब तक वह मौन नहीं हो गया तो यह अपने आप में

33
00:02:16,080 --> 00:02:20,080
ही कितनी कुतर्क से भरी हुई बात है वह

34
00:02:20,080 --> 00:02:24,320
आप लोगों को समझना चाहिए। सामने खड़ा हुआ व्यक्ति मौन

35
00:02:24,320 --> 00:02:28,800
होने वाला व्यक्ति नहीं है। वह व्यक्ति किसी भी प्रकार से दिखाना

36
00:02:28,800 --> 00:02:32,400
चाहता है कि भाई मैं चुप नहीं हुआ।

37
00:02:32,400 --> 00:02:36,480
तो उसको चुप कराने का प्रयास कब तक करते रहे? वह व्यक्ति

38
00:02:36,480 --> 00:02:41,200
तो पागलपन भी करने लगेगा। वह व्यक्ति तो वितंडा भी करने लगेगा।

39
00:02:41,200 --> 00:02:45,360
वो व्यक्ति तो कुतर्कों की भरमार लेकर के खड़ा हुआ है। जरा यह ऑडियो

40
00:02:45,360 --> 00:02:47,760
सुनिए। तो मैं तो यह कह रहा

41
00:02:47,760 --> 00:02:51,920
हूं कि किसी कारण से अगर हमें हमारे गुरुजनों का झूठ

42
00:02:51,920 --> 00:02:56,000
बोलना हमारा लग रहा है। यह लग रहा है कि द्वेष वश या लालच वश

43
00:02:56,000 --> 00:03:00,240
या भयवश झूठ बोल रहे हैं। सुनो उनके सामने हमने

44
00:03:00,240 --> 00:03:04,640
सिद्ध कर दिया। सुनो तो उनके सामने हमने सिद्ध कर दिया। ये देखो अष्टाध्यायी

45
00:03:04,640 --> 00:03:08,640
से आपका मैच नहीं खा रहा है। फिर वो वो कह रहा है कि नहीं अष्टाध्यायी से मैच हमारा खा

46
00:03:08,640 --> 00:03:12,640
रहा है। तो इसका मतलब [गला साफ़ करने की आवाज़] वो लोग झूठे लोग हैं। उन पर विश्वास नहीं किया जा

47
00:03:12,640 --> 00:03:16,800
सकता। एक सूत भी नहीं किया जा सकता। और जब एक सूत गलत है। क्यों गलत

48
00:03:16,800 --> 00:03:20,880
है? अर्ध कुकुट न्याय नहीं अर्ध कुकुट न्याय करोगे यहां? हां। तो क्या दिक्कत

49
00:03:20,880 --> 00:03:24,880
है? अर्ध कुकुट न्याय कर दोगे? किसी व्यक्ति की कोई एक बात

50
00:03:24,880 --> 00:03:28,960
गलत हो तो सारी बात गलत हो जाती है। क्या? [गला साफ़ करने की आवाज़] अब बस बस अब इस पे

51
00:03:28,960 --> 00:03:30,560
मनन करो अब तुम। तो

52
00:03:30,560 --> 00:03:34,560
जब व्यक्ति निराधार साबित हो रहा है, जब व्यक्ति स्वयं

53
00:03:34,560 --> 00:03:38,800
के द्वारा स्वीकार किए गए सिद्धांतों को ही अस्वीकार कर देने

54
00:03:38,800 --> 00:03:42,960
वाला व्यक्ति है तो उसको चुप कराने के लिए प्रयास करते

55
00:03:42,960 --> 00:03:47,040
रहना कहां तक उचित है? दुर्जनोष न्याय से यदि मान भी

56
00:03:47,040 --> 00:03:51,280
लिया जाए कि बंदी छोड़ 2.0 को पूरी के शंकराचार्य जी ने यथोचित उत्तर

57
00:03:51,280 --> 00:03:55,680
प्रदान नहीं किया। परंतु उसे शास्त्रार्थ का नाम देकर

58
00:03:55,680 --> 00:03:59,760
और शास्त्रार्थ में विजय घोषित करके यह दोनों ही

59
00:03:59,760 --> 00:04:04,320
अलंकारी अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार बैठे हैं। कैसे?

60
00:04:04,320 --> 00:04:08,320
इस बंदी छोड़ 2.0 ने स्वयं अपने एक वक्तव्य में कहा है

61
00:04:08,320 --> 00:04:12,480
कि शंका समाधान के नाम पर यदि कोई शास्त्रार्थ करने का प्रयास करता

62
00:04:12,480 --> 00:04:16,560
है तो उसे वितंडा कहते हैं। स्वामी

63
00:04:16,560 --> 00:04:20,640
विवेकानंद क्या नाम? परिवराज हां परिवराज

64
00:04:20,640 --> 00:04:24,720
वो तो दर्शनाचार्य हैं। वो तो बड़े हाई लेवल के आचार्य हमारे। उनसे मेरी बात होती है।

65
00:04:24,720 --> 00:04:28,720
उनसे ना मेरी बातचीत मुझे डाउट होता है ना कुछ दर्शनों के संबंधी। उनके यहां मैंने

66
00:04:28,720 --> 00:04:32,960
फोन किया था। अच्छा मुझे चर्चा के लिए आप समय दें।

67
00:04:32,960 --> 00:04:36,880
हम तो कहा कि

68
00:04:36,880 --> 00:04:40,880
हां गुजरात कभी आइएगा तो इधर हो लीजिएगा। ऐसा कुछ

69
00:04:40,880 --> 00:04:44,960
बोला उन्होंने मतलब मतलब बहुत ज्यादा ठोस जवाब नहीं

70
00:04:44,960 --> 00:04:45,600
आया।

71
00:04:45,600 --> 00:04:49,840
क्योंकि वो क्या करते हैं? वो ऐसे डिबेट इत्यादि नहीं करते हैं। डिबेट नहीं डिबेट

72
00:04:49,840 --> 00:04:53,840
के तौर पर शंका समाधान। और शंका समाधान के

73
00:04:53,840 --> 00:04:58,080
लिए उनके यहां हर कोई आता है। शंका समाधान देखिए उसमें ये होता है ना जैसे न्याय

74
00:04:58,080 --> 00:05:02,080
में सब बता रखा है कि विदंडा क्या है? वाद क्या है? जल क्या है? शंका समाधान। शंका समाधान में क्या होता

75
00:05:02,080 --> 00:05:06,160
है कि व्यक्ति का अपना खुद का कोई मत नहीं होता। ये चीज है। तो अगर आप शंका

76
00:05:06,160 --> 00:05:10,240
समाधान के नाम पे अपना फिर मत भी वहां पे स्थापित करने का प्रयास करेंगे तो फिर शंका समाधान

77
00:05:10,240 --> 00:05:14,480
वो भी तंडा बन जाएगा। तो स्वामी जी ऐसे हैं क्योंकि वो परिवराजक

78
00:05:14,480 --> 00:05:18,640
सन्यासी हैं। तो वो क्या करते हैं? उनकी वो आध्यात्मिक थोड़ा एक उन्नति अच्छी है कि

79
00:05:18,640 --> 00:05:22,720
वह ऐसी चीजों में पढ़ते ही नहीं जहां पर हल्का सा भी विरोध भाव हो। तो

80
00:05:22,720 --> 00:05:26,800
वह उनकी एक ऐसी प्रवृत्ति है तो वह कहते हैं कि अगर आपको मुझसे कोई बात कहनी है ठीक है तो

81
00:05:26,800 --> 00:05:30,800
या तो यह चीज हो कि आप नहीं मानोगे तो मैं कह दूंगा ठीक है जी आपकी मर्जी कोई इशू नहीं है और अगर

82
00:05:30,800 --> 00:05:34,960
आप आपको शंका समाधान करना है तो मुझे जितना ज्ञान है उस अकॉर्डिंग आपको बता दूंगा बाकी

83
00:05:34,960 --> 00:05:39,360
आपकी मर्जी मानना ना मान तो शंका समाधान करते हैं वो भी और स्वामी वो मुनि सत्यजीत जी

84
00:05:39,360 --> 00:05:43,840
अब अगर यह व्यक्ति यह कहता है कि वह शंका समाधान नहीं बल्कि शास्त्रार्थ

85
00:05:43,840 --> 00:05:47,920
ही था क्योंकि मैंने अपना पूर्व पक्ष बताया था कि मैं आर्य समाजी

86
00:05:47,920 --> 00:05:52,240
हूं या फिर मैं अवतार को नहीं मानता हूं तो क्या अपना

87
00:05:52,240 --> 00:05:56,240
केवल पूर्व पक्ष बता देने मात्र से या अपना परिचय बता देने

88
00:05:56,240 --> 00:06:00,400
मात्र से यह सुनिश्चित हो जाता है कि सामने वाला

89
00:06:00,400 --> 00:06:00,900
आपके

90
00:06:00,880 --> 00:06:04,960
साथ शास्त्रार्थ करने में रुचि रखता है या नहीं रखता है।

91
00:06:04,960 --> 00:06:09,120
क्या उसके पास कारण नहीं हो सकते हैं कि चलती हुई सभा

92
00:06:09,120 --> 00:06:13,360
में विघ्न ना डालते हुए जो है एक अलग से एक नया

93
00:06:13,360 --> 00:06:17,680
दृश्य शास्त्रार्थ के रूप में बनाना है अथवा नहीं बनाना है। अथवा

94
00:06:17,680 --> 00:06:21,840
मुझे शास्त्रार्थ करना है तो किसके साथ करना है? अगर मैं किसी आर्य

95
00:06:21,840 --> 00:06:25,920
समाजी के साथ शास्त्रार्थ करूंगा भी उसके

96
00:06:25,920 --> 00:06:30,080
विरोधी पक्ष का खंडन करूंगा भी तो सामने आर्य समाज की

97
00:06:30,080 --> 00:06:34,160
ओर से कौन सा व्यक्ति होना चाहिए क्या इस प्रकार के सभी निर्णय

98
00:06:34,160 --> 00:06:38,320
पूरी के शंकराचार्य जी ने किए हैं नहीं किए हैं आपके प्रस्ताव

99
00:06:38,320 --> 00:06:42,480
को स्वीकार किया है शास्त्रार्थ के रूप में बात करना जारी

100
00:06:42,480 --> 00:06:46,800
रखना उन्होंने स्वीकार किया है या नहीं किया है यह आपने सुनिश्चित

101
00:06:46,800 --> 00:06:50,880
किया था यदि आप कहें कि मैंने वहां पर बताया था कि

102
00:06:50,880 --> 00:06:55,280
मैं चर्चा करने आया हूं। तो सबसे पहली बात तो तुम्हारी धूर्तता

103
00:06:55,280 --> 00:06:59,840
यहीं पर सिद्ध हो जाती है। जब तुम वहां चर्चा करने गए थे तो अपने

104
00:06:59,840 --> 00:07:03,920
थंबनेल में अपने वक्तव्यों में यह क्यों कह रहे हो कि भाई मैंने शास्त्रार्थ में

105
00:07:03,920 --> 00:07:08,000
पराजित किया है। चर्चा को शास्त्रार्थ कब से कहा

106
00:07:08,000 --> 00:07:12,080
जाने लगा? अगर तुमने वहां पर शास्त्रार्थ शब्द का उपयोग नहीं किया था।

107
00:07:12,080 --> 00:07:15,920
चर्चा शब्द का उपयोग किया था तो तुम अपने वक्तव्यों

108
00:07:15,920 --> 00:07:20,320
में वहां से भली-भांति वहां से बाहर आ जाने के बाद उस

109
00:07:20,320 --> 00:07:24,400
वार्ता को उस चर्चा को शास्त्रार्थ क्यों कह रहे हो?

110
00:07:24,400 --> 00:07:28,560
ठीक है? मान भी लिया जाए कि तुम्हारी चर्चा का अर्थ यही था कि

111
00:07:28,560 --> 00:07:32,640
भाई तुम शास्त्रार्थ करने आए हो। तो क्या तुमने सुनिश्चित किया था

112
00:07:32,640 --> 00:07:36,720
कि सामने बैठे हुए 84 वर्ष की आयु वाले वृद्ध ने

113
00:07:36,720 --> 00:07:40,720
जो तुम्हारा प्रश्न भी ठीक से नहीं सुन पाए थे। उन्होंने

114
00:07:40,720 --> 00:07:44,720
तुम्हारी जो चर्चा का प्रस्ताव था वह सुन लिया है। क्या

115
00:07:44,720 --> 00:07:48,800
तुमने यह सुनिश्चित किया था कि उनके जो परिकर उन्हें

116
00:07:48,800 --> 00:07:52,960
तुम्हारा प्रश्न दोहराकर सुना रहे हैं। उन्होंने तुम्हारी तुम्हारा

117
00:07:52,960 --> 00:07:57,120
जो चर्चा शब्द का उपयोग करते हुए जो शास्त्रार्थ

118
00:07:57,120 --> 00:08:01,200
का प्रस्ताव है वो भली-भांति पूरी के शंकराचार्य जी को बताया

119
00:08:01,200 --> 00:08:05,200
था। उसके बाद तुमने क्या सुनिश्चित कर लिया था कि पूरी के

120
00:08:05,200 --> 00:08:09,600
शंकराचार्य तुम जैसे गालीबाज भाई उसको जानता कौन है?

121
00:08:09,600 --> 00:08:13,840
वह किस प्रकार से प्रामाणिक रूप से जुड़ा हुआ है? आर्य समाज से जो व्यक्ति

122
00:08:13,840 --> 00:08:18,160
खुद कहता है कि मैं प्रामाणिक रूप से आर्य समाज से नहीं जुड़ा हुआ हूं। मैं प्रामाणिक

123
00:08:18,160 --> 00:08:22,240
रूप से उसका प्रतिनिधित्व नहीं कर रहा हूं या प्रामाणिक रूप से उसका अनुयाई

124
00:08:22,240 --> 00:08:26,560
भी नहीं हूं। मैं तो बस दयानंद जी में विश्वास रखने वाला व्यक्ति हूं।

125
00:08:26,560 --> 00:08:30,800
ऐसे व्यक्ति को आर्य समाज की ओर से अपने सामने खड़ा करके पूरी

126
00:08:30,800 --> 00:08:31,300
के

127
00:08:30,960 --> 00:08:35,040
शंकराचार्य जी इतने निम्न स्तर के व्यक्ति के साथ क्यों

128
00:08:35,040 --> 00:08:39,360
करेंगे चर्चा? क्यों करेंगे शास्त्रार्थ? यदि उन्हें करना भी होगा

129
00:08:39,360 --> 00:08:43,360
तो तुम्हारे यहां के जो गणमान्य लोग हैं, प्रतिष्ठित लोग हैं, वह उनके

130
00:08:43,360 --> 00:08:47,360
साथ चर्चा करेंगे। तुम हो कौन? जो तुम्हें समय दिया

131
00:08:47,360 --> 00:08:51,360
जाए शास्त्रार्थ के लिए तो क्या आपने ये सब चीजें सुनिश्चित की थी

132
00:08:51,360 --> 00:08:55,520
कि नहीं कि आपके चर्चा के प्रस्ताव को उन्होंने स्वीकार किया है या नहीं

133
00:08:55,520 --> 00:08:59,600
किया है। उनको आपका चर्चा का प्रस्ताव पहुंच गया है या नहीं पहुंचा

134
00:08:59,600 --> 00:09:03,760
है। यह सब चीजें आपने सुनिश्चित की थी। और अंतत गत्वा

135
00:09:03,760 --> 00:09:07,760
जो रिकॉर्डिंग मैंने अभी सुनाई है। इसमें इस व्यक्ति ने खुद यह

136
00:09:07,760 --> 00:09:11,760
माना है कि भाई जो स्वामी विवेकानंद परिवराजक जी

137
00:09:11,760 --> 00:09:15,840
हैं वो किसी भी प्रकार की विरोध की स्थिति देखते ही उससे दूर रहना

138
00:09:15,840 --> 00:09:20,000
उचित समझते हैं। उनका साधना भजन इत्यादि को सुरक्षित रखने के लिए। तो

139
00:09:20,000 --> 00:09:24,080
यानी कि आपके पक्ष के व्यक्ति के पास कारण हो सकते हैं।

140
00:09:24,080 --> 00:09:28,240
किसी भी प्रकार की विरोधी स्थिति से दूर रहने के लिए। परंतु शंकराचार्य

141
00:09:28,240 --> 00:09:32,720
के पास नहीं हो सकते। उनके पास यह कारण नहीं हो सकता है कि भाई मैं यहां पर प्रश्नोत्तरी

142
00:09:32,720 --> 00:09:36,800
सभा के लिए बैठा हूं। कई लोगों की शंका का समाधान करना है। मुझे

143
00:09:36,800 --> 00:09:41,040
शास्त्रार्थ का दृश्य नहीं बनाना है। बनाना भी है तो किस व्यक्ति के साथ बनाना

144
00:09:41,040 --> 00:09:45,360
है यह भी मैं सोचूंगा। इत्यादि इत्यादि उनके पास कारण नहीं हो सकते। परंतु

145
00:09:45,360 --> 00:09:46,080
तुम्हारे पास

146
00:09:46,080 --> 00:09:50,400
हो सकते हैं। यही है तुम्हारा न्याय दर्शन। यही है तुम्हारा

147
00:09:50,400 --> 00:09:54,560
न्याय। अच्छा एक बात और है। यह व्यक्ति यह भी कह सकता है

148
00:09:54,560 --> 00:09:58,720
कि भाई मैंने चर्चा का प्रस्ताव दिया था। पूरी के शंकराचार्य जी मान लो नहीं सुन

149
00:09:58,720 --> 00:10:02,880
पाए थे तो किसी ने मुझे रोका क्यों नहीं भाई तुझे रोकने उनका एक शिष्य

150
00:10:02,880 --> 00:10:07,360
आया था ना जो तुझे तूने कहा हो या ना कहा हो पर वो तुझे जानता था

151
00:10:07,360 --> 00:10:11,520
कि तू किस लिए वहां पर आया है तो मैंने तो तुझको आकर के प्रश्न करने

152
00:10:11,520 --> 00:10:15,680
से पहले ही प्रस्ताव दिया था कि भाई चर्चा कर व्यवस्थित रूप से बैठकर के क्योंकि इस

153
00:10:15,680 --> 00:10:19,760
प्रकार से प्रश्नोत्तरी की सभा में जहां पर एक सीमित अवधि

154
00:10:19,760 --> 00:10:24,080
में समय दिया जाता है किसी भी श्रोता को प्रश्न करने का

155
00:10:24,080 --> 00:10:28,160
वहां पे तेरा समाधान नहीं होने वाला है यह मुझे पता था क्योंकि तू वहां पर प्रश्नोत्तरी के

156
00:10:28,160 --> 00:10:32,240
लिए नहीं शंका समाधान के लिए नहीं वहां तू चर्चा के नाम पर

157
00:10:32,240 --> 00:10:36,320
शास्त्रार्थ करने के उद्देश्य से ही आया था कोई बात नहीं तुझे प्रस्ताव

158
00:10:36,320 --> 00:10:40,640
दिया गया था ना यानी कि तू यह भी नहीं कह सकता कि किसी ने तुझे रोका

159
00:10:40,640 --> 00:10:45,200
नहीं अच्छा अब बात आती है

160
00:10:45,200 --> 00:10:49,360
कि अंततो गत्वा जब तुझे तेरे प्रश्न का सटीक उत्तर

161
00:10:49,360 --> 00:10:53,520
नहीं मिला था तो तेरे पास व्यवस्थित रूप से बैठकर चर्चा

162
00:10:53,520 --> 00:10:57,520
करने का विकल्प तो था ना तो तूने तूने क्यों नहीं की? अगर

163
00:10:57,520 --> 00:11:01,440
तू कहे कि तूने षड्यंत्र को भांप लिया था कि भाई अकेले

164
00:11:01,440 --> 00:11:05,440
कमरे में ले जाकर के तेरे साथ मार कुटाई हो सकती है। तेरा सामूहिक

165
00:11:05,440 --> 00:11:09,440
रूप से बलात्कार इत्यादि हो सकता है। तो षड्यंत्र के लक्षण क्या

166
00:11:09,440 --> 00:11:13,440
थे? कैसे सिद्ध होता है कि वो षड्यंत्र ही था। तेरी ही गतिविधियों से

167
00:11:13,440 --> 00:11:17,680
सिद्ध होता है कि तुझे सार्वजनिक रूप से चर्चा करने में कोई आपत्ति नहीं थी। कोई भय

168
00:11:17,680 --> 00:11:21,680
नहीं था। तुझे भय था। एकांतिक रूप से जो व्यवस्थित व्यवस्थित

169
00:11:21,680 --> 00:11:25,840
वार्तालाप जो कहा जा रहा था कि भाई कक्ष में चलकर के करते

170
00:11:25,840 --> 00:11:30,080
हैं उससे तुझे भय था क्यों हमने इसलिए हमने इसलिए कहा था

171
00:11:30,080 --> 00:11:34,560
कि भाई वहां पर किसी का भीड़भाड़ का बार-बार आना जाना नहीं होगा शोरशराबा

172
00:11:34,560 --> 00:11:38,720
कम होगा इसलिए हमें हमने वो सुझाव दिया था परंतु यदि तेरे

173
00:11:38,720 --> 00:11:42,720
हिसाब से वो एक षड्यंत्र था बिना लक्षण के बिना न्याय सिद्धांत के वो एक

174
00:11:42,720 --> 00:11:46,880
षड्यंत्र था तो तो फिर तूने कक्ष में ना जाकर सार्वजनिक

175
00:11:46,880 --> 00:11:51,280
रूप से चर्चा करने का प्रस्ताव क्यों नहीं रखा। अच्छा दूसरी बात यह है कि साहसी

176
00:11:51,280 --> 00:11:55,280
कहते किसे हैं? क्या अनुकूल परिस्थितियों में ही

177
00:11:55,280 --> 00:11:59,520
कोई धर्मार्थ कार्य करने को ही साहस कहा जाता है? नहीं।

178
00:11:59,520 --> 00:12:03,680
वीर वो होता है जो प्रतिकूल परिस्थितियों में भय होने पर

179
00:12:03,680 --> 00:12:07,680
भी आगे जाता है। रिस्क लेता है। वो होता है वीर। वो

180
00:12:07,680 --> 00:12:11,920
होता है साहसी। हम गए हैं। भागवतानंद के यहां जब हम गए थे

181
00:12:11,920 --> 00:12:15,920
तब हमने जब उसे सार्वजनिक रूप से बुलाया था और उसने हमें एक कक्ष में बुलाया था तो हमें

182
00:12:15,920 --> 00:12:16,560
नहीं पता था कि

183
00:12:16,560 --> 00:12:20,640
उसके कक्ष में कितने लोग हैं, क्या है, कौन किसकी साइड है पर हम गए थे।

184
00:12:20,640 --> 00:12:24,640
वास्तविक रूप से निर्भीक होकर हम पहुंचे थे उसके कक्ष में। जब ईस्ट

185
00:12:24,640 --> 00:12:29,040
ऑफ कैलाश दिल्ली से हमें बुलाया गया था कि भाई आकर के चर्चा करो

186
00:12:29,040 --> 00:12:33,120
और वहां मंदिर में पहुंचने के बाद भी हमको कहा गया कि एक कक्ष में चलकर

187
00:12:33,120 --> 00:12:37,200
के कक्ष चर्चा करो। तो हमने वहां यह नहीं सोचा था कि नहीं नहीं हमारे

188
00:12:37,200 --> 00:12:41,360
साथ कुछ हो जाएगा। हम वहां पर आगे बढ़े थे।

189
00:12:41,360 --> 00:12:45,360
रिस्क लिया था। तो साहसी इसे कहते हैं। पर इस व्यक्ति

190
00:12:45,360 --> 00:12:49,760
ने तो किसी भी प्रकार का साहस दिखाने की बजाय यहां तक कि कक्ष

191
00:12:49,760 --> 00:12:54,080
से बचने के लिए सार्वजनिक रूप से चर्चा करने की बात ना कहकर

192
00:12:54,080 --> 00:12:58,240
चर्चा की संभावना को ही नष्ट कर दिया। यह कहकर कि भैया तुमने हमारे आचार्यों

193
00:12:58,240 --> 00:13:02,240
का अपमान किया है। हम आपसे चर्चा क्यों करें? अरे भैया जब ऐसा

194
00:13:02,240 --> 00:13:06,320
ही था अगर आचार्यों के अपमान के कारण चर्चा नहीं हो रही है

195
00:13:06,320 --> 00:13:10,880
तो तुमने पहले चर्चा सुनिश्चित क्यों की अपने चैनल पर क्यों बुलाया

196
00:13:10,880 --> 00:13:14,880
और यदि भय के कारण तुम चर्चा का परित्याग करना चाहते हो तो चर्चा की

197
00:13:14,880 --> 00:13:18,960
संभावना को नष्ट ना करते हुए ऐसा बीच का

198
00:13:18,960 --> 00:13:23,120
तुम्हें स्थान ढूंढना मात्र है जहां पर चर्चा संभव

199
00:13:23,120 --> 00:13:27,440
हो सके। परंतु तुम्हें तो चर्चा से भागना ही है। यह कैसे सिद्ध होता है?

200
00:13:27,440 --> 00:13:31,440
सबसे बड़ा प्रमाण, सबसे बड़ा कैची पॉइंट इस

201
00:13:31,440 --> 00:13:31,940
पूरे

202
00:13:31,680 --> 00:13:35,760
प्रकरण का। इस व्यक्ति को यह मालूम नहीं था

203
00:13:35,760 --> 00:13:40,160
कि हमारे पास कहां-कहां के कौन-कौन से वीडियोस हैं।

204
00:13:40,160 --> 00:13:44,160
हमने सबसे पहले जो वीडियो जारी किया था, इस व्यक्ति को यह लगा

205
00:13:44,160 --> 00:13:48,240
कि उसमें जितना मटेरियल जितनी सामग्री हमने प्रस्तुत कर दी है, बस

206
00:13:48,240 --> 00:13:52,560
इनके पास इतना ही है। नहीं तो और होता तो यह दिखाते अवश्य और

207
00:13:52,560 --> 00:13:56,640
यही हमारी स्ट्रेटजी थी। जब हमने कम मात्रा में सामग्री

208
00:13:56,640 --> 00:14:00,640
प्रस्तुत की। इस व्यक्ति ने उस घटना को लेकर के ढेर सारे झूठ बोल दिए।

209
00:14:00,640 --> 00:14:04,640
जैसे कि मैं बहुत बड़ा फाइटर प्लेन हूं। मैंने चार व्यक्तियों

210
00:14:04,640 --> 00:14:08,880
को पहले निपटा दिया। उसके बाद 25 लोगों ने आकर के मुझे मारा। यह

211
00:14:08,880 --> 00:14:12,880
झूठ इसने क्यों बोला? क्योंकि इसको ऐसा लगा कि अब हमारे पास और

212
00:14:12,880 --> 00:14:16,880
सामग्री है ही नहीं। इसी प्रकार से इसने जो यह झूठ बोला है

213
00:14:16,880 --> 00:14:21,040
कि इसने जो है कक्ष में ले जाकर जो है वो जो

214
00:14:21,040 --> 00:14:25,360
दबाव बनाने वाला जो मानसिक और शारीरिक दबाव बनाने वाला जो

215
00:14:25,360 --> 00:14:29,360
षड्यंत्र है वो भांप लिया था। इसलिए इसने चर्चा से

216
00:14:29,360 --> 00:14:33,520
जो है दूरी बनाने का निर्णय लिया। तो अब इसको मैं क्लियर कर दूं। हमारे

217
00:14:33,520 --> 00:14:37,680
पास सबसे पहले इसने जब प्रश्न नहीं भी किया है तब का भी वीडियो

218
00:14:37,680 --> 00:14:43,680
है।

219
00:14:59,360 --> 00:15:03,360
जब इसने चर्चा को सहर्ष स्वीकार किया है। चर्चा स्वीकार

220
00:15:03,360 --> 00:15:07,440
हो गई है। उसके बाद इसने प्रश्न किया है। प्रश्न में प्रश्न

221
00:15:07,440 --> 00:15:11,520
करने पर एक सीमा तक इसको समय दिया गया। उसके बाद इसको बिठा दिया

222
00:15:11,520 --> 00:15:15,840
गया। अब उसको ये जो भी नाम दे वो शंका

223
00:15:15,840 --> 00:15:20,320
समाधान है भले ही मगर ये उसको नाम दे कि भाई शास्त्रार्थ है। ठीक है। परंतु

224
00:15:20,320 --> 00:15:24,480
इसके पास चर्चा का विकल्प था ना। यह व्यक्ति मेरे

225
00:15:24,480 --> 00:15:30,480
सामने से होकर के मुझे बिना देखे हुए क्यों निकल रहा है वहां से?

226
00:15:31,920 --> 00:15:36,000
क्यों नहीं बोल रहा है कि कहां करनी है चर्चा? चलो करो चल के। क्यों

227
00:15:36,000 --> 00:15:40,000
नहीं बोल रहा है? अगर इसको आर्य समाज ले ले जाकर के

228
00:15:40,000 --> 00:15:44,240
भी चर्चा करनी है तो यह मेरे सामने से बिना मुझसे कोई बात किए

229
00:15:44,240 --> 00:15:48,240
क्यों भाग रहा है? मैं इसको पीछे से आवाज दे रहा हूं कि क्या हुआ भाई?

230
00:15:48,240 --> 00:15:52,320
हमारी तो चर्चा होनी है ना। क्योंकि ये वहां पर

231
00:15:52,320 --> 00:15:56,320
इसलिए नहीं आया था कि इसको सत्य का सत्य की स्थापना करनी थी।

232
00:15:56,320 --> 00:16:00,480
यह वहां पर इस उद्देश्य से ही आया था कि मुझे जो है अपना प्रश्न करने

233
00:16:00,480 --> 00:16:04,720
वाला वीडियो प्राप्त करना है और जाहिर सी बात है कि इतने सारे लोग होंगे

234
00:16:04,720 --> 00:16:08,880
तो मुझे एक हद तक ही समय दे पाएंगे और मैं यही प्रचारित कर पाऊंगा अपने वीडियो

235
00:16:08,880 --> 00:16:13,520
के माध्यम से कि देखो देखो मेरे प्रश्न का उत्तर नहीं दिया गया मुझे बिठा दिया गया

236
00:16:13,520 --> 00:16:14,800
पर संयोग

237
00:16:14,800 --> 00:16:18,960
से इसकी वो कहते हैं ना कि खेल अच्छा

238
00:16:18,960 --> 00:16:23,200
खेला था तूने आदमी गलत चुन लिया तो यहां पर क्या है खेल

239
00:16:23,200 --> 00:16:27,200
अच्छा खेला था तूने समय गलत चुन लिया संयोग से उस दिन

240
00:16:27,200 --> 00:16:31,280
वहां पर पूरी के शंकराचार्य जी का सैनिक शिवश नारायण

241
00:16:31,280 --> 00:16:35,680
द्विवेदी भी उपस्थित था जो तुझे भलीभांति जानता था। खैर

242
00:16:35,680 --> 00:16:40,000
कुल मिलाकर क्या है कि अगर यह कहता है कि कक्ष में ले जाने वाले षड्यंत्र

243
00:16:40,000 --> 00:16:44,080
को ये भांप गया था तो भाई उससे पहले तू चर्चा से

244
00:16:44,080 --> 00:16:47,520
भागता हुआ दिख रहा है। भगोड़े

245
00:16:47,520 --> 00:16:51,520
कायर कहीं के तू तो भाग रहा है ना मैं खड़ा हुआ हूं। मैंने

246
00:16:51,520 --> 00:16:55,840
तुझे चर्चा का प्रस्ताव दिया है। हमारी चर्चा बहुत दिनों से जो है

247
00:16:55,840 --> 00:16:59,840
टल रही है आमने सामने की अनेक कारणों से। तू

248
00:16:59,840 --> 00:17:04,880
वही व्यक्ति है जो मुझे बुला चुका है अपनी ऑनलाइन स्ट्रीम में।

249
00:17:04,880 --> 00:17:08,880
हां। और तू मेरे सामने से नजरें चुरा करके भाग

250
00:17:08,880 --> 00:17:13,040
रहा है। इसी को कहते हैं मां-बाप के नाम पे कलंक। यह जो

251
00:17:13,040 --> 00:17:17,120
विपरीत परिस्थितियों में यह जो प्रतिकूल परिस्थितियों में भी

252
00:17:17,120 --> 00:17:21,280
धर्म की स्थापना के लिए आगे बढ़ने का जो जज्बा है ना यह

253
00:17:21,280 --> 00:17:26,080
हर व्यक्ति के पास नहीं होता है गुर्दा यह माता के गर्भ से एक वीर

254
00:17:26,080 --> 00:17:30,160
जन्म लेता है इसके साथ तो ऐसी

255
00:17:30,160 --> 00:17:34,240
हरकतें करके तू तो अपने मां-बापों के नाम पे कलंक सिद्ध होता

256
00:17:34,240 --> 00:17:38,320
है। कलंक हो तुम कलंक। अच्छा अब आते हैं वह

257
00:17:38,320 --> 00:17:42,640
गालीबाज अनऑफिशियल गुंडा जो अब प्रामाणिक आर्य समाज हो गया जिसको

258
00:17:42,640 --> 00:17:47,040
एक समय था जब आर्य समाज पहचानता नहीं था तो भाई

259
00:17:47,040 --> 00:17:51,040
आप यह देखो कि इस कायर टाइप के व्यक्ति का

260
00:17:51,040 --> 00:17:55,040
साथ देने आया भी कौन है कौन निर्णय दे रहा है कि जीत गया

261
00:17:55,040 --> 00:17:59,760
जो उस विदुषी को उस महिला को

262
00:17:59,760 --> 00:18:03,760
शास्त्रार्थ में विजेता घोषित करता है गार्गी और मैत्रई घोषित करता

263
00:18:03,760 --> 00:18:08,000
है आधुनिक गार्गी कहता है जो खुद हमसे कह रही है कि दूसरा प्रश्न

264
00:18:08,000 --> 00:18:12,160
करो जो खुद हमसे कह रही है कि नहीं नहीं आप जो है बाल की खाल निकाल

265
00:18:12,160 --> 00:18:16,480
रहे हो बाल की खाल होती नहीं है और आज डॉक्टर निष्ठा

266
00:18:16,480 --> 00:18:20,800
विद्यालंकार जी हमारे साथ चर्चा में जुड़ी है और उनकी

267
00:18:20,800 --> 00:18:25,680
विद्वता का पता आज आपने उनके वीडियो से पता ही

268
00:18:25,680 --> 00:18:29,680
चल गया होगा कि वो कितनी विदुषी है। एक भाई साहब ने कमेंट की

269
00:18:29,680 --> 00:18:34,720
कि निष्ठा जी साक्षात गार्गी का रूप है। ईश्वर

270
00:18:34,720 --> 00:18:38,720
सच्चिदानंद स्वरूप निराकार सर्वशक्तिमान

271
00:18:38,720 --> 00:18:43,120
जैसे उसको कहा गया अनंत अबाध्य अनंत सामर्थ्यवान तो अनंत

272
00:18:43,120 --> 00:18:45,440
सामर्थ्यवान जब है तो वो फिर प्रकट

273
00:18:45,440 --> 00:18:49,440
क्यों नहीं हो सकता फिर ये बाधा उस पर लग जाएगी हम लोगों को किसी ना किसी

274
00:18:49,440 --> 00:18:53,840
की सहायता लेने की जरूरत पड़ती है और उसको किसी की सहायता की आवश्यकता

275
00:18:53,840 --> 00:18:58,080
नहीं है वो अपना काम स्वयं कर नहीं बाधा उसकी जो शक्ति सामर्थ्य पर उंगली

276
00:18:58,080 --> 00:19:02,160
उठ गई ना कि वो ले ही नहीं सकता ये क्वेश्चन है उंगली उठा रहे

277
00:19:02,160 --> 00:19:06,320
हैं ये तो ऐसा है ना ये इसका उत्तर नहीं है। नहीं नहीं उत्तर

278
00:19:06,320 --> 00:19:10,960
नहीं है। यह एक बाल की खाल है और बाल की खाल होती नहीं है।

279
00:19:10,960 --> 00:19:15,680
ये ये आपका कोई तर्क ही नहीं है। ये जो नहीं ये आपका

280
00:19:15,680 --> 00:19:20,000
वो सही दिशा में आपका ये प्रश्न नहीं है। प्रश्न

281
00:19:20,000 --> 00:19:24,080
कुछ आप ऐसे करिए कि वास्तव में जिनका कुछ तर्क हो।

282
00:19:24,080 --> 00:19:28,400
उतने ही आपने वेद ठीक से पढ़े नहीं है। हां उतना आपने वेद

283
00:19:28,400 --> 00:19:32,400
नहीं पढ़ा है इसलिए आप इस तरह प्रश्न नहीं कर सकते। नहीं नहीं

284
00:19:32,400 --> 00:19:36,480
वह आपने विशुद्ध नहीं बताए वह वहां पर व्याख्या

285
00:19:36,480 --> 00:19:40,640
कोई मिलावटी किसी और ने की होगी अब आगे प्रश्न कर

286
00:19:40,640 --> 00:19:45,040
रहे हो आप तो ये शंकराचार्य नहीं कह सकते शंकराचार्य ने तुम्हारे

287
00:19:45,040 --> 00:19:49,040
प्रश्नों का यथावत उत्तर दिया है और उनके शिष्यगण वहां

288
00:19:49,040 --> 00:19:53,120
तुम जैसे तुच्छ व्यक्ति को समय देने के लिए खड़े भी है कि आया है कुतर्की

289
00:19:53,120 --> 00:19:57,200
तो ले जा अपना उत्तर तब भी तुम्हारा व्यक्ति वहां से भाग रहा

290
00:19:57,200 --> 00:20:00,560
है और तुम उसको शास्त्रार्थ शंका समाधान के नाम पर वह

291
00:20:00,560 --> 00:20:05,120
शास्त्रार्थ का प्रचार कर रहा है और तुम उसे शास्त्रान मानते हुए

292
00:20:05,120 --> 00:20:09,120
जो है विजेता घोषित कर रहे हो और वहीं पर दूसरी ओर

293
00:20:09,120 --> 00:20:13,280
तुम्हारी जो मातृशक्ति है तुम्हारे यहां की वो व्यवस्थित रूप से चर्चा

294
00:20:13,280 --> 00:20:17,360
कर रही है जिन्होंने मुझे समय दिया हुआ है चर्चा का और वहां पर चर्चा हो

295
00:20:17,360 --> 00:20:21,360
रही है और चर्चा के बीच में प्रश्नों से परेशान होने पर वो यह कह

296
00:20:21,360 --> 00:20:25,520
रही हैं कि भैया दूसरा प्रश्न करो बाल की खाल होती नहीं

297
00:20:25,520 --> 00:20:29,760
है और उसको भी तुम शास्त्रात्मक विजेता घोषित कर रहे हो तो मूर्ख

298
00:20:29,760 --> 00:20:34,720
व्यक्ति ऐसे व्यक्ति के द्वारा दिए गए निर्णय को कौन मानेगा?

299
00:20:34,720 --> 00:20:39,440
शायद तुम्हारे यहां के स्वामी विवेकानंद परिवराजक जी इत्यादि मानेंगे। भाई

300
00:20:39,440 --> 00:20:43,440
कोई प्रबुद्ध व्यक्ति तो नहीं मान सकता। हां जो अंधे

301
00:20:43,440 --> 00:20:48,240
हो गए होंगे जो यह न्याय [गला साफ़ करने की आवाज़] या नैतिकता

302
00:20:48,240 --> 00:20:52,400
भूल चुके होंगे, तिलांजलि दे चुके होंगे। वही तुम जैसे जो

303
00:20:52,400 --> 00:20:56,480
धूर्त लोग हैं उनके इस प्रकार के अपनी ही बातों का खंडन

304
00:20:56,480 --> 00:21:00,560
करने वाले वक्तव्यों पर ध्यान देंगे। अच्छा इसी के साथ-साथ मैं

305
00:21:00,560 --> 00:21:04,720
एक भरत मिलाप वाली बात और बता दूं कि जब इस व्यक्ति से मेरी

306
00:21:04,720 --> 00:21:08,800
चर्चा हो रही थी यह जो बंदी छोड़ 2.0 है जो

307
00:21:08,800 --> 00:21:14,000
एक व्यवहारिक चर्चा हो रही थी फोन पर तब मैंने इसको

308
00:21:14,000 --> 00:21:15,680
इसके बारे में भी बताया था ये

309
00:21:15,680 --> 00:21:19,680
जो अनऑफिशियल अप्रामाणिक गुंडा है और तब इसने मेरी

310
00:21:19,680 --> 00:21:23,920
बातों को स्वीकार किया था कि हां हां हम ऐसे लोगों से आर्य समाज के इस प्रकार के

311
00:21:23,920 --> 00:21:27,920
लोगों से दूर रहते हैं। फिर जो है हुआ क्या? मैं

312
00:21:27,920 --> 00:21:32,720
पास में था तो मैं चला गया और जब गया तो उन्होंने

313
00:21:32,720 --> 00:21:37,120
ईश्वर सर्वशक्तिमान पर भी बात हुई थी उस मंदिर में मगर वो मेरा माइक खराब था।

314
00:21:37,120 --> 00:21:41,120
जी तो वो रिकॉर्ड नहीं हो पाई। फिर वहां से हो गई

315
00:21:41,120 --> 00:21:45,280
जहां से आपकी परंपरा क्या है। जी जी। अब मैंने उसमें कोई ना बदतमीजी

316
00:21:45,280 --> 00:21:49,360
की ना कुछ किया। जी। एक स्पष्ट चर्चा डाल दी मैंने।

317
00:21:49,360 --> 00:21:53,760
जी जी। ठीक है। जी। अब ये लोग चालू किए ऋषि उवाच वगैरह।

318
00:21:53,760 --> 00:21:57,840
तो ऋषिवाज ने क्या किया वो पूर्वाग्रह जो

319
00:21:57,840 --> 00:22:02,160
वेदाटेल से चोट खाए बैठा था जी जी है ना तो उसने

320
00:22:02,160 --> 00:22:06,480
ऋषिवाज क्या नाम है कृपेरेश पटेल जी जी तो उसने क्या किया

321
00:22:06,480 --> 00:22:10,800
उसके लोग आए और जो है उसने वीडियो बनाया ही था शंगेरी के शंकराचार्य

322
00:22:10,800 --> 00:22:15,360
ने मदद की टीपू सुल्तान की ये है वो है हम जी

323
00:22:15,360 --> 00:22:19,440
तो वो वो वीडियो मैं देख ही चुका था तब तक उसके वो जो

324
00:22:19,440 --> 00:22:23,600
लोग आए वो बोलने लगे मतलब उल्टे सीधी बातें करने लगे Instagram

325
00:22:23,600 --> 00:22:27,600
पर लघु शंका इत्यादि को ले बोलने लगे ये हो जाएगा तुम्हारी वो निकल

326
00:22:27,600 --> 00:22:30,720
जाएगी ये सब बात जी फिर मैंने कहा कि भैया

327
00:22:30,720 --> 00:22:34,800
आके सामना कर लो तो सामना कर लो तो फिर ये आए तो इन्होंने

328
00:22:34,800 --> 00:22:38,960
जो है कोई एक बात अटकी कि इतनी देर मैं बोलूंगा

329
00:22:38,960 --> 00:22:42,960
इतनी देर वो बोलेगा तो मैं इस तरीके से

330
00:22:42,960 --> 00:22:47,040
इसलिए तैयार नहीं हुआ कि भाई यह सब बड़े विषय है इस पर आप ऐसे लगाम नहीं

331
00:22:47,040 --> 00:22:51,360
लगा सकते कि यह बोलेगा वो बोलेगा और जब हम चर्चा कह रहे हैं शास्त्रार्थ नहीं कह रहे हैं तो फिर

332
00:22:51,360 --> 00:22:55,520
ऐसे क्यों करना है ना? जी जी सही बात भाई वो जनता डिसाइड कर

333
00:22:55,520 --> 00:22:59,520
लेगी कौन व्यक्ति फालतू बोल रहा है उसके समक्ष हो रही है ना चर्चा तो जी

334
00:22:59,520 --> 00:23:03,920
जी तो हमें वहां पर जीत हार का फैसला निर्णायक क्यों बने हम

335
00:23:03,920 --> 00:23:08,000
सही बात उस वीडियो को देख के जिसको जो समझना होगा समझ लेगा और समझते हैं लोग

336
00:23:08,000 --> 00:23:12,320
चर्चाओं से लोग समझते हैं जी तो

337
00:23:12,320 --> 00:23:16,400
वो कहानी से ये फैला है हमारे बारे में कि हम जो है

338
00:23:16,400 --> 00:23:20,880
कट्टर अद्वैती हैं हमको जो है मतलब हम हमारा मिशन है

339
00:23:20,880 --> 00:23:24,880
अपने मत को सिद्ध करते हुए दूसरे मत को दबाना नहीं जी

340
00:23:24,880 --> 00:23:29,680
जी मैंने अपनी कई वीडियोस में कहा है कि जो भी व्यक्ति

341
00:23:29,680 --> 00:23:33,760
मुझे यह चीजें देगा सामने अब तुम ही बताओ कितनी

342
00:23:33,760 --> 00:23:37,840
देर तक उनसे हम शास्त्रार्थ करेंगे इन बातों को लेके या तुम्हारे यहां लाला

343
00:23:37,840 --> 00:23:42,160
है सही बात तुम्हारे यहां जो है ये है वो है ऐसा कुछ नहीं दुनिया भर के टॉपिक्स

344
00:23:42,160 --> 00:23:45,760
हैं नहीं आपका जो पैटर्न है ना बहुत सही है कि सामने वाले का अगर ईश्वर

345
00:23:45,760 --> 00:23:49,760
गलत सिद्ध हो गया तो ईश्वर प्रदत्त ज्ञान भी गलत सिद्ध हो गया तो जब उनके पास कुछ

346
00:23:49,760 --> 00:23:53,840
नहीं तो हमारे पास आओ बस बस तुम्हारा सब गलत सिद्ध कर देंगे तो उस

347
00:23:53,840 --> 00:23:57,840
पे जड़ पे बात करो जी जो और मैंने कभी भी तुम बताओ अपने चैनल

348
00:23:57,840 --> 00:24:01,920
पे कभी भी मैंने किसी का अपमान किया हो नहीं नहीं बिल्कुल नहीं दयानंद जी का किया हो या

349
00:24:01,920 --> 00:24:05,920
प्रभुपाद जी का ही किया हो किसी का नहीं किया ये लोग करते हैं बिल्कुल बिल्कुल ये

350
00:24:05,920 --> 00:24:10,080
लोग करते हैं मगर मैंने नहीं किया वो बीम वगैरह बनाना चाह रहे ये सब कुछ करते हैं हां

351
00:24:10,080 --> 00:24:14,560
तो मैं तो मैं तो कह रहा हूं भैया मैं आपको तो देखो मैं ये आर्य समाज से संस्थागत

352
00:24:14,560 --> 00:24:19,600
रूप से नहीं जुड़ा हूं क्योंकि क्योंकि मुझे बहुत दोष नजर आते हैं आइडियोलॉजी

353
00:24:19,600 --> 00:24:23,680
को सपोर्ट करते हो जी मतलब मेरा ये रहता है जैसे जैसे शादी वाला आपने पॉइंट

354
00:24:23,680 --> 00:24:27,760
उठाया। ठीक है? हां। अब जैसे एक एक बात आती है कि सामने वाला व्यक्ति डिफेंड

355
00:24:27,760 --> 00:24:32,000
करने के लिए जलेबी बना दे। क्योंकि हम हम एक से एक जैसे

356
00:24:32,000 --> 00:24:36,160
मुसलमान वगैरह आप जानते हो कि कितनी जलेबी बनाते हैं। देखो इसमें निर्भय निर्भय एक चीज समझो।

357
00:24:36,160 --> 00:24:40,400
तुम जो पॉइंट बोल रहे हो ना वो सही है। मगर उसमें उसकी जड़ को टटोलो।

358
00:24:40,400 --> 00:24:44,480
जड़ क्या है? जड़ यही है कि वहां पे गुरु गद्दी नहीं है मेरे भाई।

359
00:24:44,480 --> 00:24:48,480
जी ये कमी मुझे भी खल की। अगर गुरु गद्दी होती तो भले ही हम

360
00:24:48,480 --> 00:24:52,720
उसको रोक नहीं पाते मगर ऑफिशियली हम क्लेम तो कर सकते थे। यह आर्य समाज नहीं है।

361
00:24:52,720 --> 00:24:56,720
तुम सिद्धि नहीं कर पाओगे कि आर्य समाज का है, क्या नहीं है। क्योंकि तुम्हारे यहां एक

362
00:24:56,720 --> 00:25:00,880
गद्दी नहीं है गुरु। जी जी जब तक उसको सुरक्षित

363
00:25:00,880 --> 00:25:04,960
नहीं करोगे अपने यहां और गुरु गद्दी का मतलब वही परंपरा। अगर परंपरा को

364
00:25:04,960 --> 00:25:09,360
तो आप तोड़ के बैठे हो ना खुद ही। ये मैं आपको बताऊं ये उस टाइम मैंने प्रतिनिधि

365
00:25:09,360 --> 00:25:13,600
वालों से बात किया था। वहां के जो क्षेत्र वाले थे तो मुझे वो सारा मैटर समझ में आया। लेकिन मैंने जानबूझ

366
00:25:13,600 --> 00:25:17,760
बूझ के कॉल रिकॉर्डिंग वगैरह कुछ भी नहीं डाला। मैंने इसलिए नहीं डाला। मैंने सोचा कि यार

367
00:25:17,760 --> 00:25:21,760
ये चीज को मैनेज करना कि तुम्हारे नाम से कहां क्या धांधली हो रही है, क्या नहीं हो रही। तुम्हारा काम

368
00:25:21,760 --> 00:25:26,000
है। है ना? तुम तुम उस काम को कर नहीं रहे हो। अब हम स्टूडेंट्स आ के

369
00:25:26,000 --> 00:25:30,000
तुम्हारे तुम बैठ के फ्री के पैसे फूंको और तुम्हारे बदले आकर के हम जो है वो

370
00:25:30,000 --> 00:25:34,080
बातचीत करें और हैंडल करें और कोई और व्यक्ति जो है वो जाके एक्सपोज करे कि नहीं देखो

371
00:25:34,080 --> 00:25:38,320
मंदिर में ये चीजें तो मैंने कहा कि फिर करना ही नहीं। तुम अपनी जिम्मेदारी तुम देखो तुम ही झेलो। मैं नहीं कर रहा।

372
00:25:38,320 --> 00:25:42,560
तो नौज में कुछ बातें निकल कर के आई। तो बात ये निकल कर के आई। जैसे तुम्हारे

373
00:25:42,560 --> 00:25:46,640
ऊपर प्रेशर पड़ रहा होगा ना। हां मेरे ऊपर प्रेशर प्रेशर बढ़

374
00:25:46,640 --> 00:25:50,640
रहा होगा। मैं अभी बहुत कंफ्यूज कर रहा हूं लोगों को।

375
00:25:50,640 --> 00:25:54,880
इसीलिए तुम्हारे मैसेज में थोड़ा सा मुझे वो भाव दिखाई दिया कि तुम पर प्रेशर

376
00:25:54,880 --> 00:25:58,880
है कोई। अब जैसे मैंने मैं अपने आर्य समाजी लोगों को मैं मित्रों को मैंने

377
00:25:58,880 --> 00:26:03,200
बोला मैंने कहा एक बात बताओ अगर श्रीमान जी जो है वो आर्य समाज से खंडन नहीं करते

378
00:26:03,200 --> 00:26:07,440
मान के चलो। तो ये बताओ क्या तुम लोग उनका साथ देते कि नहीं देते? क्या रामपाल ही तुम्हारे शत्रु

379
00:26:07,440 --> 00:26:11,440
हैं कि नहीं है? तो बोला तो सब ने माना कि हां अगर आर्य समाज खंडन नहीं करते हम उनके साथ होते।

380
00:26:11,440 --> 00:26:15,440
तो मैंने बोला कि यानी यानी इस दृष्टिकोण से तुमने माना कि वो गलत व्यक्ति नहीं सही व्यक्ति है। मान

381
00:26:15,440 --> 00:26:16,000
लिया तुमने

382
00:26:16,000 --> 00:26:20,000
तो उन्होंने बोला हां तो मैंने कहा कि केवल वो तुम्हारा सिद्धांतिक और वो ये तो नहीं कर रहे

383
00:26:20,000 --> 00:26:24,080
गला पकड़ के तुम्हारा खंडन कर रहे हैं। तुम्हारी फोटो भी काट रहे तो कर नहीं रहे। सिद्धांतिक प्रश्न ही तो पूछ रहे हैं। उत्तर

384
00:26:24,080 --> 00:26:30,080
दे तो बात खत्म सिंपल और क्या है? इसमें कोई जंग थोड़ी लड़नी है। तो मैंने बहुत

385
00:26:30,560 --> 00:26:34,560
उसमें कोई मान तो रहा नहीं इतनी समझ में नहीं आया। समझ में नहीं आता है। हां

386
00:26:34,560 --> 00:26:38,640
तो मतलब हालांकि मैंने अभद्रता की नहीं कभी। पता नहीं क्यों इतना बड़ा दुश्मन

387
00:26:38,640 --> 00:26:42,640
बन गया मैं इन लोगों का। उसमें मैं आपको बताऊं उसमें बीच में

388
00:26:42,640 --> 00:26:46,640
क्या हुआ था बीच में जब आपका ऋषुवा जी से जब वो चला था ना तो

389
00:26:46,640 --> 00:26:50,880
उसमें यह था कि जो आप वीडियो से लाइव इत्यादि करते थे उसमें भाषा आपकी थोड़ी सी वो कटु वाली होती

390
00:26:50,880 --> 00:26:55,040
थी कटाक्ष ये चीज था कटाक्ष कटाक्ष उस समय बहुत ज्यादा होते थे

391
00:26:55,040 --> 00:26:59,120
उसमें सैद्धांतिक ललकार और वो कटाक्ष तो फिर हमें हमें थोड़ा सा ये होता था कि

392
00:26:59,120 --> 00:27:03,440
यार ललकार यार देखो बात ये है ना कि आप फिर जिसने वो ललकार

393
00:27:03,440 --> 00:27:07,440
सुनी उसने वो पक्ष नहीं देखा सामने वाला कह रहा है तुम्हारी परंपरा के

394
00:27:07,440 --> 00:27:11,520
चीथड़े उड़ा देंगे मूत निकल जाएगा ये सब

395
00:27:11,520 --> 00:27:15,520
शब्द ये सब शब्द मैंने नहीं यूज़ किए थे। मैंने मर्यादा में

396
00:27:15,520 --> 00:27:19,760
रहते हुए हां कटाक्ष ऐसे किए थे जो तर्क के निकट होते

397
00:27:19,760 --> 00:27:23,920
तो वो प्रभाव ज्यादा छोड़ते हैं। जैसे जैसे मैंने कहा कि

398
00:27:23,920 --> 00:27:28,160
भाई जैमिनी से आई तो क्या कैच कराया था क्या? जी तो अब ये

399
00:27:28,160 --> 00:27:31,440
वो जो जंप है जो कैच कराना वो कटाक्ष है और कटाक्ष

400
00:27:31,440 --> 00:27:35,440
में तर्क भी है। है ना? अब इसी पे वो लोग मतलब सामने वाला भी जो पक्ष है

401
00:27:35,440 --> 00:27:39,440
अमन वाला नहीं वो उनके पास कोई निराकरण हो उस बात

402
00:27:39,440 --> 00:27:43,520
का वो बात बाद की है। मगर जब कटाक्ष जो है बुद्धि पूर्वक

403
00:27:43,520 --> 00:27:47,760
किया जाता है ना एक व्यक्ति कहे कि तुम पागल हो तो उसका इतना

404
00:27:47,760 --> 00:27:51,840
प्रभाव नहीं आएगा कोई तर्क तर्क पूर्ण कटाक्ष कर देगा ना विनोद हां

405
00:27:51,840 --> 00:27:56,000
तो वो ज्यादा वो ज्यादा चुभता है भले ही सामने वाले ने गाली दी हो तुम्हें

406
00:27:56,000 --> 00:28:00,080
उसकी गाली छोटी पड़ जाएगी बिल्कुल सही बात है यही तो है दर्शन विज्ञान

407
00:28:00,080 --> 00:28:04,160
और व्यवहार तुमने सामने वाले को सुना भी दिया और जो है तुमने गाली

408
00:28:04,160 --> 00:28:08,240
भी नहीं दी, मर्यादा भी नहीं लांगी तुमने। ये चीजें मुझे आपसे सीखने को मिलती है ना मुझे

409
00:28:08,240 --> 00:28:12,640
बहुत अच्छा लगता है। तो वो उस पर चिढ़ गए। हालांकि

410
00:28:12,640 --> 00:28:16,720
गंदगी उसने बहुत मचाई थी। भाई मैंने क्या किया था? मैंने तुम्हें बताया

411
00:28:16,720 --> 00:28:20,800
ना कहानी क्या थी। जी। एक सिंपल एक आर्य समाज मंदिर में गया और मैंने

412
00:28:20,800 --> 00:28:24,960
पूछ लिया आपकी परंपरा क्या है। जी जी और वो उसने नहीं बताया तो मैंने

413
00:28:24,960 --> 00:28:29,040
उस वीडियो को एज इट इज ज्यों की त्यों डाल दिया। जी। अब वो

414
00:28:29,040 --> 00:28:33,040
जब उसके रील व्हील बने तो Facebook Instagram पर आकर के ये लोग

415
00:28:33,040 --> 00:28:37,120
उल्टे सीधे कमेंट करने लगे तू तड़ाक वाले तो मैंने फिर

416
00:28:37,120 --> 00:28:41,200
ये कह दिया कि भैया जिसने अपनी माता जी का अच्छा ये भी देखो माता जी

417
00:28:41,200 --> 00:28:45,520
का निष्ठा पूर्वक दूध पीना ये कितना मतलब इसमें कहीं बुरा

418
00:28:45,520 --> 00:28:46,720
नहीं लग रहा है

419
00:28:46,720 --> 00:28:50,720
शब्द अच्छे हैं बात बहुत बड़ी है जिसकी माताजी ने

420
00:28:50,720 --> 00:28:54,800
उसको निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया वो फिर सामने आ जाए ऐसा बोला मैंने जब

421
00:28:54,800 --> 00:28:58,880
उन्होंने गंदे वर्ड बोले तब बोला नहीं तो मैं पहले

422
00:28:58,880 --> 00:29:03,040
यह कहता हूं जब कोई साधारण भाषा में विरोध करता है और तो मैं यह

423
00:29:03,040 --> 00:29:07,680
कहता हूं कि भैया यदि आपको लगता है कि आप सत्य के पक्षधर हैं

424
00:29:07,680 --> 00:29:11,920
तो आप प्रत्यक्ष सामना करने का साहस प्रकट करें। अब इसमें क्या गंदगी है बताओ?

425
00:29:11,920 --> 00:29:16,160
नहीं ये तो बिल्कुल सही है। बिल्कुल सही है। फिर जब वो गंदी बात करने लगता है तू मूर्ख

426
00:29:16,160 --> 00:29:20,160
है तू गधा है तू तू करना बनता है। तो फिर मैं कहता हूं कि

427
00:29:20,160 --> 00:29:24,480
माता जी ने निष्ठा पूर्वक पिलाया तो सामने आ जाओ। ठीक।

428
00:29:24,480 --> 00:29:28,640
अब इसप भी वो जब इस पे भी वो जब लघु शंका मूत ये

429
00:29:28,640 --> 00:29:32,800
सब इसप चले जाते तो फिर मेरे पास कुछ है नहीं फिर मैं स्टॉप इधर

430
00:29:32,800 --> 00:29:36,800
से मैं थोड़ी ना उसके बराबरी में ये सब कर सकता हूं बिल्कुल सही बात है भाई

431
00:29:36,800 --> 00:29:40,880
मैं एक हद तक उसको जवाब दूंगा उसकी भाषा में अगर वो अगर मां बहन की गाली

432
00:29:40,880 --> 00:29:45,040
देने लगेगा या ऐसी अश्लील बातें करने लगेगा तो फिर मैं स्टॉप

433
00:29:45,040 --> 00:29:49,280
हो जाता हूं इधर जी जी बिल्कुल अब वो कॉमेडी बना रहे हैं वो मेरा मुंह बिगाड़

434
00:29:49,280 --> 00:29:53,440
रहे हैं ये कर रहे हैं वो कर रहे हैं मैं नहीं कर सकता बिल्कुल तो वो

435
00:29:53,440 --> 00:29:57,600
एक मर्यादा होती तो मैं रुक गया तो इसलिए शायद उनको लगा होगा उन्होंने ऋषिवाच

436
00:29:57,600 --> 00:30:01,680
का पक्ष देखा ना जी ये आपकी बात समझ गया मैं बिल्कुल समझ

437
00:30:01,680 --> 00:30:02,180
गया

438
00:30:01,920 --> 00:30:06,160
सही बात है आपका भरत मिलाप हो भी किन लोगों में रहा है जो खुद एक दूसरे

439
00:30:06,160 --> 00:30:10,800
के विपरीत चलने वाले लोग हैं और खुद एक दूसरे को

440
00:30:10,800 --> 00:30:14,960
खुद एक दूसरे की बुराई करते हैं खुद एक दूसरे को स्वीकार नहीं करते हैं वो

441
00:30:14,960 --> 00:30:19,280
आज आकर के एक दूसरे का समर्थन कर रहे हैं कि जीत गया भाई जीत गया जीत गया भाई जीत गया इसीलिए

442
00:30:19,280 --> 00:30:23,360
हमने इस वीडियो का टाइटल रखा है चोर चोर मौसेरे भाई और

443
00:30:23,360 --> 00:30:27,520
शायद इसीलिए करपात्री जी ने अपने ग्रंथ में यह बताया था कि

444
00:30:27,520 --> 00:30:31,760
कलयुग के किस प्रकार के लोग दयानंद जी को महर्षि

445
00:30:31,760 --> 00:30:35,920
कहते हैं। खैर यह जो अनऑफिशियल गुंडा है वर्तमान का प्रामाणिक आर्य

446
00:30:35,920 --> 00:30:40,000
समाजी इसको हम पहले भी बता चुके हैं। इससे काफी बार इस तरह की बातें हुई है कि

447
00:30:40,000 --> 00:30:44,080
भाई सामने आकर के चर्चा कर लो। तो सामने आकर के चर्चा करने का आधार यही हो

448
00:30:44,080 --> 00:30:48,320
सकता है कि तुम पहले अपनी वह जो विवादित आपत्तिजनक

449
00:30:48,320 --> 00:30:52,880
सामग्री है, उसको अपने चैनल से हटाओ। जो तुमने अनर्गल आरोप

450
00:30:52,880 --> 00:30:57,680
और गलत तरीके की टिप्पणियां कर रखी हैं उनको अपने चैनल से हटाओ।

451
00:30:57,680 --> 00:31:02,160
यथोचित रूप से क्षमा याचना करो। तब जाकर के

452
00:31:02,160 --> 00:31:06,240
यह विचार किया जाएगा कि कब कहां कैसे तुम्हारे साथ चर्चा

453
00:31:06,240 --> 00:31:10,480
करनी है। अच्छा एक बात और बता दूं इस धूर्त की। यह

454
00:31:10,480 --> 00:31:14,480
इतना उतावला हो रहा था। किसी प्रकार से हमारे

455
00:31:14,480 --> 00:31:17,200
साथ चर्चा करके और जो हमारे पक्ष को

456
00:31:17,200 --> 00:31:21,200
जो धूमिल करने के लिए इसने क्षमा मांगने का एक दिखावा

457
00:31:21,200 --> 00:31:26,080
भी किया। यह हमको जो है शीशे में उतारने के लिए हमारे

458
00:31:26,080 --> 00:31:30,400
जो मठ है द्वारिका मठ

459
00:31:30,400 --> 00:31:34,480
वहां पर भी ये गया था। वहां पर इसने लिखित रूप से यह कहा

460
00:31:34,480 --> 00:31:38,720
कि भाई मैंने पूर्व में बहुत सारी टिप्पणियां की है। अनुचित टिप्पणियां उनके लिए मुझे खेद है

461
00:31:38,720 --> 00:31:42,880
और मैं जो है उस खेद को यहां प्रकट करने आया हूं। पश्चाताप है मेरे

462
00:31:42,880 --> 00:31:47,280
अंदर। आप मुझे क्षमा दें। अब वहां पे जहां यह गया है

463
00:31:47,280 --> 00:31:51,360
वहां पर तो पता ज्ञात नहीं है उन लोगों के भाई इसने क्या टिप्पणियां की है? क्या नहीं

464
00:31:51,360 --> 00:31:55,440
की है? जो चीजें इसने कही हैं विवादित चीजें

465
00:31:55,440 --> 00:31:59,440
क्या वो इसके चैनल पर अभी भी है। क्या ये उनका अभी भी समर्थन कर रहा है। उन्होंने

466
00:31:59,440 --> 00:32:03,840
इसको कहा कि ठीक है शरण में आया हुआ व्यक्ति है तो उसको क्षमादान दे देना चाहिए।

467
00:32:03,840 --> 00:32:08,000
अब ऐसे क्षमा मतलब धूर्तता की पराकाष्ठा देखिए

468
00:32:08,000 --> 00:32:12,000
कि क्षमा मांगने का भी दिखावा कर रहा है व्यक्ति कि भैया किसी

469
00:32:12,000 --> 00:32:16,240
तरीके से शीशे पर उतर आए तो क्या है कि अगर तुम्हें उस

470
00:32:16,240 --> 00:32:20,480
सामग्री पर पश्चाताप है तो उससे खुद को अलग करो ना भाई पश्चाताप

471
00:32:20,480 --> 00:32:24,560
से खुद को अपने चैनल पर प्रस्तुत करते हुए

472
00:32:24,560 --> 00:32:28,720
चित्रों को बिगाड़ करके लगाते हुए अनर्गल जो है टिप्पणियां करते हुए

473
00:32:28,720 --> 00:32:32,320
शीर्षक देते हुए तुम वीडियोस बना रहे हो वो आज भी चल आज भी तुम्हारे

474
00:32:32,320 --> 00:32:36,720
प्लेटफार्म पर अवेलेबल है और तुम क्षमा मांग रहे हो। उसके बाद विधिवत

475
00:32:36,720 --> 00:32:40,720
क्षमा मांगो। यह कहते हुए क्षमा मत मांगो कि मुझे मालूम नहीं है मैंने क्या किया। फिर भी तुम कहते हो

476
00:32:40,720 --> 00:32:44,880
तो मैं क्षमा मांगना। क्लियर कट क्षमा मांग।

477
00:32:44,880 --> 00:32:48,880
उसके बाद बात होगी सामने से। और इसी क्रम में मैं बताता चलूं

478
00:32:48,880 --> 00:32:52,880
कि अभी जब इनकी वो इनका कुछ हुआ था पंचरंगी ड्रामा वो 150 भी

479
00:32:52,880 --> 00:32:57,120
वर्षगांठ वाला। तो इन्होंने मुझे पत्र भेजा

480
00:32:57,120 --> 00:33:01,280
था जिसमें कि इन्होंने जिसमें कि पत्र भेजने वालों में जो आयोजक

481
00:33:01,280 --> 00:33:05,440
थे कार्यक्रम के उसमें इसका भी नाम था कृतेश पटेल के

482
00:33:05,440 --> 00:33:09,600
रूप में तो उस समय उस पत्र का उत्तर देते हुए मैंने बता

483
00:33:09,600 --> 00:33:14,320
दिया था कि कुछ लोगों को मैंने प्रतिबंधित किया था। जिसमें से एक यह था

484
00:33:14,320 --> 00:33:18,320
ऋषि उवाच एक आर्यवीरा थी जिसको मैंने प्रतिबंधित किया था।

485
00:33:18,320 --> 00:33:22,560
वो आज भी प्रतिबंधित है क्योंकि उसने मेरे घर की

486
00:33:22,560 --> 00:33:26,560
मातृशक्तियों के फोटो कहीं से प्राप्त करके फिर पुराने Facebook

487
00:33:26,560 --> 00:33:30,640
वगैरह जो वहां से प्राप्त करके और उनको जो है

488
00:33:30,640 --> 00:33:34,960
एक पब्लिक प्लेटफार्म पे लाके और चार पांच लोगों को बिठा

489
00:33:34,960 --> 00:33:40,960
करके गप्प सड़ा के हंसी ठट्टा ये सब करके जो है अनैतिकता

490
00:33:41,520 --> 00:33:46,400
अनैतिकता भरे अनैतिक आचरण को प्रस्तुत किया था। खैर

491
00:33:46,400 --> 00:33:50,480
उस चर्चा से एक व्यक्ति और जुड़ा हुआ था मोहित गौर जिससे कि

492
00:33:50,480 --> 00:33:54,560
मेरी चर्चा हो सकती थी संभावना हो सकती थी अभी भी है

493
00:33:54,560 --> 00:33:58,720
तो उस व्यक्ति को भी हमने प्रतिबंधित किया था क्योंकि वह इस चर्चा में शामिल

494
00:33:58,720 --> 00:34:02,720
हुआ था मगर अब वो जो वीडियो

495
00:34:02,720 --> 00:34:06,800
है जिसमें मोहित गड शामिल हुआ था वह वीडियो वहां पर नहीं है

496
00:34:06,800 --> 00:34:10,880
और मोहित गड की तरफ से हमें यह संदेश भी प्राप्त हुआ था कि जब

497
00:34:10,880 --> 00:34:15,040
चर्चा हो रही होगी तो उस वो जो व्यक्तिगत गत कटाक्ष किए गए

498
00:34:15,040 --> 00:34:19,040
थे जिस चर्चा में उसमें शामिल होने के लिए यह जब

499
00:34:19,040 --> 00:34:23,040
मेरी और मोहित गड की चर्चा हो रही होगी तब यह क्षमा मांग लेगा तो हमने

500
00:34:23,040 --> 00:34:27,120
इन सारे बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए मोहित गड के लिए यह चीज उसी

501
00:34:27,120 --> 00:34:31,200
पत्र में लिख दी थी कि भाई मोहित गड से हम चर्चा कर सकते हैं उससे हमें कोई आपत्ति

502
00:34:31,200 --> 00:34:35,520
नहीं है। ऋषि उवाच से चर्चा कब कर सकते हैं? जब

503
00:34:35,520 --> 00:34:40,320
ऋषि उवाच अपनी विवादित सामग्री को अलग हटाए और

504
00:34:40,320 --> 00:34:44,480
क्षमा मांगे। उसके बाद चर्चा कहां कैसे कब होनी है यह सुनिश्चित किया

505
00:34:44,480 --> 00:34:48,960
जाएगा। तो यह सारी बातें थी। बाकी मेरा एक पर्सनल

506
00:34:48,960 --> 00:34:52,960
सुझाव जो हमेशा से रहता है। है ना आप लोगों के लिए वो मैं

507
00:34:52,960 --> 00:34:56,720
आपको बता दूं कि मत पड़ो चक्कर में कोई है नहीं

508
00:34:56,720 --> 00:35:00,720
टक्कर में। ठीक है? जय श्री राम।
