⬜ Not used yet · 00:00:01:20 – 00:20:52:00 (20:50)
00:00:01:20 जी आचार्य जी से बात हो रही है। जी हां मेरी बोल रही हूं। आचार्य जी आपने अपने ये Facebook पर एक Instagram पे एक सूचना डाली है कि शंकराचार्य जी को शास्त्रार्थ में हरा दिया निर्भय ने। जी तो ये कहां तक उचित है सूचना? वो तो आप लोग जानते होंगे। शायद आप शिवांश द्विवेदी जी बात कर रहे हैं। हां जी। हां जी। हां तो वो तो आप लोगों को अच्छे से पता ही होगा। तो आप मुझसे क्यों जानकारी ले रहे हैं। हमें तो यह पता है ना कि नहीं हराया। मगर आप कह रहे हैं कि हराया। नहीं मैंने ये तो बोला ही नहीं है कि शिवा उसमें क्या नाम है? निर्भय जी ने शास्त्रार्थ में हराया है। मैंने तो उसमें ये बोला है कि निर्भय ने जो प्रश्न पूछे उन प्रश्नों [गला साफ़ करने की आवाज़] का उत्तर नहीं दिया गया। तो इसके क्या प्रश्न था उसका जिसका उत्तर नहीं दिया? ना कर दी गई। क्या प्रश्न था जो उसका उत्तर नहीं दिया? वो चर्चा आप उनहीं से कर लीजिए ना। नहीं तो कहा तो आपने भी है ना तो आप कुछ ऐसा ऐसी बात बोलती जिसकी जिम्मेदारी नहीं लेती आप
00:01:06:26 हां जी ऐसी बात नहीं है तो आपको पता होना चाहिए ना कि आप जो बोल रही हैं उसका आधार क्या है क्योंकि वो हमारी टीम के मेंबर हैं क्योंकि वो हमारी टीम के मेंबर हैं देखो वेदव्यास की भी मां की शंकराचार्य की मां का रामानुज की मां और माधवाचार्य की मां और राधा भी राधा भी कुतिया की पैदाइश 100 जनों से थी मेरे से भी इनकी मम्मी भी जाके इनके आचार्यों की चरण सेवा करती थी इनका लेती थी क्योंकि वो हमारी टीम के मेंबर है तो मतलब आपको पता नहीं है कि उसका प्रश्न क्या था और शंकराचार्य जी ने क्या उत्तर दिया क्या नहीं दिया मगर आप आप बताइए आप बताइए आप उनका प्रश्न क्या था उसका प्रश्न ये था कि स्वरूप के विरुद्ध ईश्वर कार्य कर सक ना कर ना करने पर उसे उसकी सर्वशक्तिमत्ता बाधा मानी जाएगी कि नहीं मानी जाएगी और शंकर एक मिनट अगर ईश्वर अगर ईश्वर स्वरूप के विरुद्ध कार्य नहीं कर रहा है तो ऐसे में उसकी सर्वशक्तिमत्ता में बाधा नहीं आएगी आएगी कि नहीं आएगी ये उसका प्रश्न था ठीक है ठीक है इसके लिए उसने उदाहरण भी दिया कि करपात्री जी ने अपने किसी ग्रंथ में लिखा है कि अग्नि अग्नि जो है स्वयं को नहीं
00:02:22:07 अग्नि जो है अपने स्वरूप के विरुद्ध कार्य नहीं कर सकती हम हम तो [गला साफ़ करने की आवाज़] ऐसे में ईश्वर की सर्वशक्तिमत्ता में बाधा आएगी कि नहीं आएगी? यह उसका प्रश्न था। ठीक है। ठीक है। तो गुरुदेव ने शंकराचार्य जी ने तो इसका प्रश्न का उत्तर दे दिया कि हां स्वरूप के विरुद्ध कार्य नहीं करता ईश्वर। तो इसमें हां इसमें क्या उन्होंने उत्तर दिया [गला साफ़ करने की आवाज़] कि बाधा आएगी कि नहीं आएगी? हां। तो ये तो आप ये उसका प्रश्न होना चाहिए था अगला कि तो फिर अवतार ना लेने पर ईश्वर की ईश्वर को बाधित क्यों कहा जा रहा है? मगर उसने तो ये प्रश्न किया नहीं। फिर आप ये आप यहां यहां एक मिनट बात बताइए। हां हां यहां जो जब इन्होंने प्रश्न पूछा तो वहां पर शंकराचार्य जी ने क्या उत्तर दिया? उन्होंने उत्तर दिया कि हां ना करने की वो आ जाएगी। नहीं उन्होंने कहा कि नहीं ईश्वर स्वरूप के विरुद्ध कार्य नहीं करता और उनका और उन्होंने यही उनका अभिप्राय जो उन्होंने कहा वहां पर जो है वंद्या पुत्र इत्यादि का उदाहरण देकर खरगोश का उदाहरण देकर कि ऐसे में उसकी उसकी सर्वशक्तिमत्ता में बाधा नहीं आएगी। ठीक है। ठीक है। ठीक है। अब उसका जो प्रश्न अगला होना चाहिए था इसका निर्भय का वो ये होना चाहिए था कि भाई तो फिर अवतार क्योंकि स्वरूप के विरुद्ध है तो अवतार ना लेने पर ईश्वर को बाधित क्यों कहा जा रहा है? तब वो बताते कि अवतार स्वरूप के विरुद्ध
00:03:37:08 है कि नहीं है। मगर वो चर्चा तो वहां पर हुई नहीं। वो चर्चा धीरे से चली गई आगे ब्रह्मा विष्णु महेश पर और उसके बाद चली गई मोक्ष पर। अब आप एक बात बताइए कि प्रश्नोत्तरी जहां पर हो रही है वहां पर कहीं लिखा नहीं है कि वहां शास्त्रार्थ हुआ है या वहां पर वन जी हां कुछ नहीं ऐसा है अभी अभी मैं थोड़ा पढ़ा रही हूं तो या तो आप मेरे से बाद में बात करें शाम को हां हां हां तो तभी सही रहेगा ठीक है अभी मैं कक्षा ले रही हूं यहां बच्चों की ठीक है तो कितने बजे के आसपास कॉल करूंगी मैं कॉल 5:00 बजे ठीक [गला साफ़ करने की आवाज़] है मैं 5:00 बजे आपको 5:00 बजे ठीक है ठीक है जी नमस्ते जी
00:04:24:26 तो अभी हम मान्य आचार्य जी को पुनः कॉल कर रहे हैं। लगभग 5:12 हो चुका है और मैंने इससे पहले दो-तीन प्रयास कर लिए हैं उनको कॉल लगाने के। तो वह जो कॉल है वह बिजी जा रहा था। मेरे ख्याल से अंडर ट्रेनिंग होंगी इस समय आचार्य जी सीख रही होंगी कि शिवश नारायण द्विवेदी से किस प्रकार से सामना करना है। तो अंडर ट्रायल चल रही होंगी। हालांकि कोई भी ट्रायल कर लो। है ना? कुछ काम नहीं आने वाला है। तो इसलिए उनका बिजी गया था। अभी एक बार और लगाया तो हल्का सा गया तो काट दिया गया। अभी देखते हैं क्या होता है।
00:05:30:16 अभी भी व्यस्त ही जा रहा है। हम यह मेरा शायद चौथा पांचवा प्रयास होगा। इससे पहले आप देख सकते हैं। यह मैंने 311 पे इनसे पहली बार बात हुई थी। 31 पे 311 पे कॉल लगाया था। फिर 12 पे 3:12 पे इनका कॉल आ गया था। उसके बाद फिर मैंने पहला कॉल लगाया है। जब इनसे बात हो गई है। उसके बाद 5:08 पर पहला कॉल लगाया है। और फिर दूसरा कॉल मेरा जो दो नंबर है दूसरे नंबर से भी कॉल लगाया है। 5:09 फिर 5:09 पे मेन नंबर से कॉल लगाया और 5:11 पे लगाया 5:11 पे जो लगाया था वो कट हो गया था। और सबसे बड़ी बात है कि इनको जब कॉल करते हैं तो जो इन्होंने कॉलर ट्यून लगा रखी है वह लगा रखी है जगत जाल पालम हम कचत कंथ मालम मूर्ति पूजा को समर्पित जो गीत है वो इन्होंने अपनी कॉलर ट्यून लगा रखी है। तो ये त्रया चरित्र आप समझ सकते हैं समाजियों का मूर्ति पूजा के भगवान के अवतार के विग्रह के कट्टर विरोधी परंतु जो
00:06:46:02 स्वभाव सिद्ध भावनाएं हैं उनको कैसे नकारोगे तुम स्वभाव से तुम ईश्वर के अवतार के प्रति आकर्षित हो स्वभाव से स्वभाव से मनुष्य के व्यवहार में आने वाले ईश्वर के रूप के प्रति आकर्षण है मनुष्य में उसको आपने नकार नहीं सकते इनकेन प्रकारन आप आकर्षित हो रहे हो या फिर अपने शायद व्यापार के लिए कॉलर ट्यून लगा रखी होगी कोई आपके चरित्र को समझ ना जाए कि हम कितने बड़े मूर्ति पूजा के विरोधी हैं। इस्लामिक संगठनों की भांति मूर्ति पूजा को हम हराम मानते हैं। हराम मतलब इस्लाम वालों के यहां पर हराम कहा गया है और उनके यहां पर अधर्म कहा गया है मूर्ति पूजा को। तो वह जो आपका वास्तविक चेहरा है व्यक्ति समझ ना पाए आपके झांसे में आने से पूर्व इसलिए शायद लोगों को आकर्षित करने के लिए ये धुन लगा रखी हो। हम लोग एक बार फिर से ट्राई करने जा रहे हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़]
00:08:21:01 एक बार फिर से ट्राई करते हैं। और यह मेरा अंतिम ट्राई है। कोई मरभुकाएं नहीं है इनसे बात करने के लिए। हमें तो वास्तविकता आपके जनता जनार्दन के समक्ष प्रस्तुत करनी है कि कैसे ताल ठोकने वाले जो समाजी होते हैं सिद्धांतवादी व्यक्ति का सामना होते ही कैसे कुलांचियां मारते हैं। कैसे निर्भय कुलांचियां मारने लगा था। जब उसने व्यवस्थित चर्चा देखी होती हुई वो तो मार ही रहा है। जब से हमने उससे कहा कि भाई तुम चर्चा कर लो दोबारा से। तो पहली कुलांची उसने मानी कि मैं बनारस में नहीं हूं। मैं बनारस से दूर हूं या मैं बनारस आना पड़ता है। अब औरों के लिए बनारस आ रहा है। चलो शंकराचार्य जी के लिए बनारस आने वाली बात तो समझ में भी आती है। मगर अब वो किसी के लिए भी बनारस आ रहा है। परंतु वो मेरे लिए बनारस में चर्चा करने से उसने मना कर दिया था। और तो और जब वो मेरे सामने खड़ा हुआ है तब भी उसने चर्चा करने से पलायन कर लिया। लोग कहते हैं कि भैया वो क्या कहते हैं? कक्ष में ले जाने वाली बात से वह भांप गया था कि वहां षड्यंत्र था। तो भाई उससे पहले उसने पलायन अपना सुनिश्चित कर लिया था ना चर्चा से भागने का। जब मैं चर्चा का प्रस्ताव उसको पहले ही दे चुका हूं। प्रश्न करने से पहले
00:09:36:09 उसने जो पूरी के शंकराचार्य जी से प्रश्न किया उससे पहले उसके पास मेरा चर्चा का प्रस्ताव है। मैं पीछे खड़ा हुआ हूं। वह चर्चा कर रहा है। उसके बाद वो क्यों भाग रहा है? बिना मुझसे बात किए जब चर्चा तय हो चुकी है तब तक तो मैंने कक्ष में ले जाने वाला षड्यंत्र भी नहीं किया है ना तो चर्चा से भागना तो उसे मालूम है शिवश बैंड बजाएगा परखच्चे उड़ाएगा और सबसे बड़ी बात कि इनका कहना है कि गुरुदेव ने जो है प्रश्नों का उत्तर नहीं दिया। गुरुदेव ने तो पहले प्रश्न का उत्तर वही दे दिया। उन्होंने खरगोश और वंद्या पुत्र का उदाहरण देते हुए बता दिया कि ईश्वर स्वभाव के विरुद्ध कार्य नहीं करता और ना करने पर उसको उसकी सर्वशक्तिमत्ता में बाधा नहीं आएगी। ठीक है? मगर यह कहां के लिए है? पहली बात अगला प्रश्न क्या होना चाहिए? अगला प्रश्न होना चाहिए कि भैया फिर अवतार ना लेने पर उसकी सर्वशक्तिमत्ता को बाधित क्यों माना जा रहा है? जब आप ऐसा मानते हैं तो तो आपको बताया जाता है कि भैया यह व्यवहार है। और व्यवहार में कुछ भी करने पर ईश्वर की ईश्वर के पारमार्थिक स्वरूप में कोई बदलाव नहीं होता है। ठीक है? और हमने कब अपने वीडियोस में कह दिया कि भैया ईश्वर जो वास्तविकता
00:10:51:20 में जो है अपने स्वरूप के विरुद्ध कार्य करता है। जितना ये व्यवहार सत्य है जितना प्रपंच रूपी संसार सत्य है उतने ही जो हमने जो उसमें होने वाली जो मान्यताएं ईश्वर के संबंध में हमारी वो सत्य हैं। व्यवहारिक रूप से और दूसरी बात लौकिक और अलौकिक का अंतर तो तुम भी कर रहे हो। ईश्वर वास्तविकता में कोई धक्का नहीं लगा रहा है। जड़ पदार्थों को पुश और पुल नहीं कर रहा है। कोई ऐसी फोर्स नहीं अस्तित्व में रखती है। रहती है। ठीक है? मगर लौकिक दृष्टि से कह भी रहे हो कि बल बल है वहां पर। यानी बल की प्रतीति हो रही है। इतने अंश में तो तुम भी माया का सिद्धांत मान रहे हो कि जो नहीं है उसको मान रहे हो। दूसरी बात व्यवहार में तुमने बल इत्यादि के अस्तित्व को स्वीकार कर लिया है। तो कुल मिलाकर के तुम जो कुछ मान लो वह सब कुछ है। वह सब कुछ सही है। मगर सामने वाला अगर अवतार को स्वीकार कर ले उससे तुम्हें आपत्ति है। है ना? खैर बैक टू द पॉइंट। अभी इनको हम आचार्य जी को माननीय को दोबारा से कॉल कर रहे हैं। इन्होंने जो घोषणा की है अपने इन्होंने चार चीजें कही है फॉल्स। इन्होंने कहा कि शंकराचार्य जी निरुत्तर हुए। तो निरुत्तर हुए ही नहीं। उसने ऐसा प्रश्न ही नहीं किया था जो जिसमें निरुत्तर होने वाली बात हो।
00:12:06:28 भाई वहां पर जाकर के जो ये निर्भय नामक बंदी छोड़ है। यह कंफ्यूज था कि मुझे शंकराचार्य जी को चलो ठीक है। वैसे इसके इसके इसके सामने उनको खड़ा करना भी गलत है। मगर ठीक है। शंकराचार्य जी को नुत्तर करने गया था। मगर इसके मन में यह कौतवल भी था कि मैं शिवश नारायण द्विवेदी को भी गलत सिद्ध करूं। एट द सेम टाइम। उसमें ऐसा यह फंसा है कि इसको सही क्वेश्चन करना ही नहीं आया कि क्या क्वेश्चन करना चाहिए। इसको यह कहना था कि अवतार स्वरूप विरुद्ध कार्य है कि नहीं। बस मैं अवतार को नहीं मानता। जब अवतार स्वरूप विरुद्ध कार्य है मैं सिद्ध कर रहा हूं। तब गुरुदेव इसको सीधी बात करते बताते। अब इसने क्या किया? मुझे गलत साबित करने के चक्कर में वहां यह प्रश्न रख दिया कि आपका पक्ष क्या है? जिससे कि मैं गलत साबित हो जाऊं। और उसका उत्तर गुरुदेव ने दे दिया कि भैया ईश्वर स्वरूप विरुद्ध कार्य नहीं करता है। वो बात अलग है कि उसका आगे का मामला यह व्यवहार में करता है। ऐसे कई कार्य करता है जो उसके स्वरूप के विरुद्ध दिखाई दे सकते हैं। वास्तविकता में वो कार्य ही अस्तित्व में नहीं है। जब कार्य ही अस्तित्व में नहीं है। प्रपंच रूपी संसार अस्तित्व में नहीं है। उस कार्य का साक्षी
00:13:22:07 अस्तित्व में नहीं है। तो फिर ईश्वर के स्वरूप में ईश्वर के स्वरूप विरुद्ध कार्य होगा कैसे? तो वो अपने क्वेश्चन को प्लेस ही नहीं कर पाया। अब जो बात आगे होती है जैसे गुरुदेव ने उत्तर देने के बाद जो कुछ भी कहा तो वह तो हर एक से एक प्रश्न करने के बाद उसमें बहुत बहुत व्याख्या देते हैं। वह तो इसने वहां अनुशासन हीनता से उसमें आधी रोटी पे दाल लेने लगा। उनके बीच-बीच में बोलने भी लगा तब भी उन्होंने थोड़ा इसको उत्तर नहीं तो उत्तर देने का प्रयास मगर इसका तो मामला वहीं खत्म हो गया जहां इसने उनका पक्ष पूछ लिया। इसकी बारी वहीं खत्म हो गई। उसके बाद गुरुदेव का इससे साथ बात करना इसकी जो हैसियत थी या इसका जो अधिकार था वहां पर एक सामान्य व्यक्ति की तरह प्रश्न करने वाला होने के रूप में उसकी सीमा के बाहर आकर के उसको वहां पर वो उपलब्धियां दी गई जिसमें दो चार बार उत्तर देने के बाद अच्छा बात आ गई फिर होते होते मोक्ष पर है ना जब मोक्ष पर बात आ गई तो अब ये वहां प्रश्न करने लगा कि भैया वो जो है कि फिर वो क्यों आ रहा है बाहर? किसको वो हो रहा है? अज्ञानता किसको हो रही है? अब यह चाहता है कि प्रश्नोत्तरी सभा में इसको पूरा अद्वैत वेदांत समझा दें। गुरुदेव खड़े-खड़े वहां इसके वही बैठे-बैठे पूरा अद्वैत
00:14:37:18 वेदांत समझा दे। पूरी ब्रह्म सूत्र की व्याख्या समझा दें। पूरी उपनिषदों की व्याख्या समझा दे। पूरा वेद का भाष्य समझा दें। ये ये चाहता है। ये करने गया और कहीं अगर स्टॉप हो गया तो ये लोग चौवा क्या उड़ाने उड़ाने आए हैं। अरे अरे देखो देखो उसके प्रश्न का उत्तर नहीं दे पाए। उसको बैठा दिया। ठीक है? तो अब देखते हैं कि ये कितना सामर्थ्य रखते हैं। ये आचार्य बनी घूमती है। निरुक्ताचार्या व्याकरणाचार्या लिखती हैं अपने को। हैं तो ये कितना उत्तर रखती हैं जो इन्होंने फॉल्स क्लेम जो अपने वीडियो में किए हैं। क्या-क्या किए हैं कि एक शंकराचार्य जी उत्तर नहीं दे पाए। दूसरा कि भैया उत्तर ना देने की स्थिति में इसके और इसकी बड़ी बहन के साथ मारपीट की गई। तीसरा बड़ी बहन ये भी एक संदिग्ध बात है। ठीक है? चौथा कि क्या कहते हैं ये पुलिस ने आकर के बीच बचाव किया और इसकी इसकी जो है मार उठाई। इससे इसको बचाया। ये चार इन्होंने क्लेम अपनी उसमें कर रखे हैं। रील बनाई है इन्होंने Instagram पे। ठीक है? अब फिर से एक बार ट्राई करते हैं।
00:16:05:27 मैसेज भी कर देते हैं। क्या आर्यों की यही परिभाषा है? यही लक्षण है।
00:16:40:26 दोगलापन, दोहरी बातें करना। अपने साथ लाई हुई घर की स्त्री को उन विरोधियों के बीच में छोड़ जाना जो आपके अनुसार ही गुंडे हैं झूठ बोलना और क्या हो सकता है और इनके स्वरूप भूत लक्षण है बहुत सारे
00:17:16:24 पक्षपाती होना, अपने ही सिद्धांत के विरुद्ध जाना। यह सब आर्यों के नहीं अधर्मियों के स्वरूप भूत लक्षण है। जीवन में जब कभी सामर्थ्य हो तब बता दीजिएगा।
00:17:51:10 बंदा हाजिर हो जाएगा। आपको आपके स्वरूप भूत लक्षणों से परिचय करवाने हेतु ये मैं वॉइस टाइपिंग से ज्यादातर लिखता हूं। कई बार वॉइस टाइपिंग में मिस्टेक भी हो जाती है। तो
00:19:15:12 [गला साफ़ करने की आवाज़] ये थी वो तथाकथित आचार्य जिन्होंने हमें समय दिया था 5:00 बजे कॉल करने के लिए। वैसे होना तो यह चाहिए था कि जब इन्होंने समय दिया है तो 5:00 बजे या 5:05 के आसपास या कम से कम मेरा 58 पे जो पहला कॉल इनके पास गया है वो करने से पहले इनको मुझे खुद कॉल लगा लेना चाहिए था मगर ठीक है ये बहुत तगड़ी आचार्य हैं। बहुत बड़ी हैं। तो इसलिए इनका मुझे कॉल लगाना उचित नहीं है। मैंने ही इनको कॉल लगाया। आप देख सकते हैं कितना ये कट कर रही हैं और किस तरह से अंडर ट्रेनिंग में है इस समय बिजी भी गया इनका मतलब आप समझ सकते हैं कि किस तरह से सीख रही होंगी शिवश नारायण द्विवेदी से कैसे बात करनी है तैयारी कर रही होंगी जैसे इनके तथाकथित निर्भय ने की थी निर्भय ने मुझे बताया था कि मैं आपकी एक-ए वीडियोस को देखता था शार्पली देखता था कि आप क्या बोलते हैं क्या-क्या तर्क रखते हैं। इस तरह मतलब सोचिए कि एक अल्पज्ञ शिष्य शंकराचार्य का कितना भारी पड़ रहा है जो उसके वीडियोस को देख कर आना पड़ रहा है आपको। हं? तैयारी करनी पड़ रही है। हम तो नियत घूमते हैं भाई। नियत सीधे कहीं
00:20:30:19 भी चलते फिरते कोई मिल जाए। तीन सिद्धांत सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म। तीन सिद्धांत केवल तीन सिद्धांत कहीं भी कोई मिलेगा धर्मी पटक देंगे तुरंत। ठीक है? तो यह इनकी सच्चाई आपने देख ली तथाकथित आचार्य की। जय श्री राम सभी को।
Plans for this video (0)
No Plans yet. Press "✂️ Open Clip Cutter" to make one.
-
⬜Hindi SRT Required
YouTube Studio → Subtitles → Hindi → upload the SRT file. (Checked automatically once OAuth is connected.)
-
⬜English SRT
YouTube Studio → Subtitles → Add language → English → upload the SRT file.
-
⬜Title (per Rules)
Check the title against the RULES on honorifics, names and terms.
-
⬜Description
YouTube Studio → Details → Description. Write it as per the RULES.
-
⬜End Screen
YouTube Studio → Editor → End screen. The API does not report this, so press Done after adding it.
-
⬜Cards
YouTube Studio → Editor → Cards. The API does not report this, so press Done after adding them.
-
⬜Playlist Automatic
YouTube Studio → Details → add to Playlists. It gets ticked ✓ automatically at the next sync.
-
⬜Thumbnail
YouTube Studio → Details → Thumbnail → upload a custom thumbnail.
"Done" is your confirmation. The YouTube API does not report things like End Screen and Cards.
Playlists
Not in any public playlist (or YouTube sync has not run yet).
टीम मेंबर होने के नाते फेक न्यूज़ बनाते हैं। तितली की तरह उड़ भागीं तथाकथित आचार्या।
Description
(empty)
History
No changes yet.
✂️ Clip Cutter
⌨️ Keyboard shortcuts
Space Play/Pause · I Set start · O Set end · ←→ 1 second (Shift: 5) · ,. 1 frame · P Preview · Enter Add clip · Esc Stop
Start
End
✂ Remove (middle part: bad audio, bad section)
Move the video to that spot (click the SRT or the bar), then press "Start"/"End".
Clips () · Total
Add clips above. They will appear here; drag (⋮⋮) to reorder.
-
⋮⋮