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00:00:01:22 तो यह इस बात से कि कोई अच्छी बात बतलावे तो बुरा ना मानना चाहिए। तो अच्छी बात बतला यहां पर जो अच्छी बात बतलाने का जो पर्यावसान है इसमें लेना चाहिए कि आपको पूर्व में पूर्व से वह बात याद है किसी व्यक्ति ने आपके हित के लिए वो बात आपको याद दिला दी बस है ना तो ठीक है क्योंकि अच्छी बात वो है कि नहीं फिर आपको निर्णय करना हां या फिर वहां पर अगर स्वतंत्र रूप से अच्छी बात बतलाई जा रही है आपको तो फिर वहां पर कोई निर्णायक हो यह अच्छी बात बतलाइए भाई इसको जो है आप जो है इनको अभिनंदन करिए इनका जैसे कि मान लीजिए मैं अभी मार्ग में था तब मैंने रात को देखा। कई बार ऐसा होता है कि कई लोगों का जो वास्तविक स्वरूप है वो बाहर नहीं आ पाता है। वास्तविक स्वभाव बाहर नहीं आ पाता है। मैंने उस दिन देखा रात के संभवत 12:00 बज रहे थे। शिविर में मैं उस दिन पहुंचा ही था माग में जो गुरुदेव का शिविर लगा हुआ था और काफी लेट पहुंचा था। तो व्यवस्थाएं इत्यादि वो जो वहां पर जो बिस्तर वगैरह मिलते हैं वहां अपना व्यवस्था करने के लिए उस समय काफी लेट हो गया था। तो 12:00 बजे की बात है। मैं किसी कार्य

00:01:17:01 से शिविर के गेट पर पहुंचा। तो वहां पर मैंने देखा जो गुरुदेव के मुख्य परिकर हैं जो सचिव जी हैं स्वामी जी तो वो वहां पर बड़े चिंतित बड़े परेशान से घूम रहे थे। तो मैंने मैं वहां पर उनके चरण स्पर्श किए और उन्होंने मुझे आशीर्वचन प्रदान किए और वह उनका अपना एक कहीं पर ध्यान था कि भाई वो परेशान है किसी चीज को लेकर और मेरे साथ में कुछ मेरे साथ में कुछ सहयोगी भी थे वहां पर तो वो भी देखे कि स्वामी जी परेशान क्यों है? तो कुछ देर बाद स्वामी जी ने वहां के जो और कार्य करने वाले बटुक थे उनमें से किसी को बुलाया और आवाज लगाकर कहा अरे सुनो अरे वो एक यादव जी आए हैं बहुत दूर से आए हैं वो आप देखो उन्होंने भोजन किया है कि नहीं किया है आप देखो उनको उनकी जो रहने की ठहरने की उचित व्यवस्था प्रॉपर हो गई है कि नहीं हो गई है तो मुझे बड़ा मतलब आश्चर्य हुआ कि स्वामी जी को इतनी रात को 12:00 बजे परेशान हो रहे हैं तो कितना इतना उनके अंदर जो है एक तो आश्चर्य भी हुआ और एक वो भी लगा कि इनका ये वाला जो पार्ट है ना वो कितने करुणा भाव है उनके अंदर। कई बार ऐसा होता है कि हम लोग विलंब से पहुंचे। कई लोग विलंब से

00:02:32:02 पहुंचे। वो भोजन के लिए पूछते हैं। अगर केन प्रकार किसी प्रकार से भोजन यदि खत्म ही हो गया होगा तो वहां पर पहुंचे हुए उनकी शरण में पहुंचे हुए गुरुदेव की शरण में पहुंचे हुए किसी व्यक्ति को भूखा नहीं सोने देते। एनी हाउ उनको भोजन कराना ही है। तो वह इतना परेशान थे 12:00 बजे रात को माघ में। और फिर हमसे काफी सारी बातें हमको कुछ मार्गदर्शन दे रहे हैं। दे रहे हैं दे रहे हैं। बीच-बीच में वह आवाजें लगा रहे हैं। वहां के भटकों को बार-बार बता रहे हैं कि वो देखो यादव जी ने भोजन किया कि नहीं किया। ये सब हो रहा है। और मैं भी थोड़ा सा मेरे अंदर भी कौतहल आ गया कि यादव जी हैं कौन? स्वामी जी इतना ज्यादा उनकोेंस दे रहे हैं तो एक ज्वेलसी भी होती है भाई अंदर से एक हल्का सा कंपटीशन की भावना आ जाती है कि स्वामी जी जो हमारे गुरुदेव के मुख्य परिकर हैं या मतलब ज्वेलसी ना भी कहे मगर एक भावना आ जाती है एक उत्सुकता जानने वो हिट करने लगी वो भावना कि भाई यादव जी होंगे बहुत कुछ महत्वपूर्ण व्यक्ति और बहुत ज्यादा मतलब उस समय तक यह भी नहीं मालूम था कि यादव जी का बौद्धिक स्तर क्या है या फिर अगर भौतिक वादिता से देखा जाए तो उनकी संपन्नता क्या है? कुछ नहीं मालूम था। ब्लैक होल था और

00:03:47:06 मुझे तो यही लग रहा था कि बहुत मतलब कोई बड़े विद्वान और इत्यादि इत्यादि या फिर कोई होंगे यादव जी। तो काफी देर हो गई। उन्होंने हमें मार्गदर्शन भी दिया और बीच-बीच में यादव जी की खबर भी लेते रहे और यह भी कहा कि यादव जी ने भोजन कर लिया। उनको उचित व्यवस्था हो गई हो तो यादव जी को मेरे पास आप बुला ले। करीब 15 मिनट के बाद जब हमारा कोतवाहल बहुत बढ़ चुका था। तो यहां पे भी कुछ लोग होंगे जो उस समय साथ में थे। तो जब बढ़ चुका था उसके बाद यादव जी सामने से आए। बहुत सामान्य सा उनका व्यक्तित्व था। सांवले कलर के सांवला रंग था उनका और वो भागते हुए आए और मैं कहूंगा कि बहुत ही सामान्य से उनके वस्त्र भी थे। ऐसा कोई वहां पर चिन्ह नहीं था जिसकी वजह से यह कहा जाए कि भाई इस कारण से स्वामी जी जो है इतना परेशान बहुत सामान और वो जैसे ही आए भागते हुए कि उनको स्वामी जी ने बुलाया वो जैसे ही आए तो आते ही उन्होंने स्वामी जी को ना चरण स्पर्श करके और मेरे चरण स्पर्श करने लगे। अब मैं वहां पर आश्चर्यचकित भी हो गया। अरे भाई यादव जी को मैं जानना चाहता था इतनी देर से। है कौन जो हमारे स्वामी जी परेशान

00:05:02:09 है उनके लिए और वो आए तो आए और सीधे मेरे पैरों में गिर पड़े। ऊपर से आश्चर्यचकित होने के साथ साथ एक डर भी लगा क्योंकि सामने स्वामी जी खड़े हुए थे। डर इस बात का लगा कि स्वामी जी कहीं ये ना समझे कि ये जो है यहां से बाहर जो है फोरमैनी बकैती हैं दादागिरी करता फिरता है। इसलिए लोग आकर के इनके पैरों में गिर रहे हैं। तो मैंने जैसे ही वो मेरे पैरों की तरफ आ रहे थे आशीर्वाद लेने के लिए मैंने कहा अरे नहीं भैया पहले स्वामी जी खड़े हैं आप उनके आशीर्वाद लो। तो मैं समझ नहीं पाया यादव जी मेरे पैर क्यों छू रहे हैं। मैं तो उनको जानता भी नहीं था। यादव जी ने स्वामी जी के चरण स्पर्श किए। मैंने कहा तो तो जब वो चरण स्पर्श कर रहे हैं। अच्छा सोचिए स्वामी जी इतनी देर से परेशान थे। मैं नहीं परेशान था उनके लिए और चरण स्पर्श वो मुझे कर रहे हैं। प्राथमिकता मुझे दे रहे हैं। वो उतना स्वामी जी को नहीं जानते। ठीक है यादव जी उस समय तक। अब स्वामी जी के उन्होंने चरण स्पष्ट तो स्वामी जी ने वहां पर क्या कहा कि आप इनको जानते हो शिवा जी को पहले से तो बोले हां प्रभु जी मैं जानता हूं महाराज जी मैं भी जानना चाहता भाई कैसे अच्छा वो मुझसे बोले आप इनको जानते मैं उस डर में था कि भैया अब व्हाट अब मार पड़ने वाली है [हंसी]

00:06:18:02 ना मैं उस डर में था तो स्वामी जी महाराज ने मुझसे पूछा क्या आप इनको जानते हो यादव जी को पहले से मैंने कहा मैं नहीं जानता महाराज जी [हंसी] तो तो यादव जी बोले कि मैं स्कॉन में फंस गया था और प्रभु जी के वीडियोस देख देख के ही मैं वहां से बच पाया। सही जगह आ पाया। तो ये बात स्वामी जी ने प्रशंसा की। अब जब देखिए मेरा अच्छी बात बताना हालांकि यादव जी के लिए स्वतंत्र रूप से जब यादव जी को ये बात मालूम ही नहीं है कि वहां पर क्या कहते हैं? आना अच्छी बात है कि नहीं। जब वो स्वतंत्र मतलब उसमें शून्य है अभी ज्ञान विज्ञान में मान लीजिए और मैंने उनको वहां से यहां पहुंचाया तो वहां पर उनको एक शब्द प्रमाण चाहिए कि मैंने अच्छा कार्य किया उनके लिए कि नहीं किया तो वहां पर स्वामी जी ने कहा कि नहीं ब्राह्मण है आपके ये भी गुरु हैं यहां तक इन्होंने ही पहुंचाया है पैर छुओ उनके तब उन्होंने कहा तब वो आकर के जो है दोबारा से मेरे पैर छुए और आगे बात बढ़ी तो क्या हुआ वहां पर उन्होंने अच्छी बात मैंने उनको बताई है कि नहीं बताई है इस बारे ने प्रमाण दिया तो कोई अच्छी बात बता रहा है तो या तो उसका पर्यावसान इसमें हो सकता है कि उसने मुझे कोई बात पहले से पता है तो उसने स्मरण करा दी या फिर अच्छी बात बता रहा है कब हो

00:07:33:03 सकता है कि जब कोई वहां पर निर्णायक हो तीसरा पक्ष कि हां ये अच्छी बात है मुझे अगर नहीं पता है कि वो अच्छी बात है कि नहीं है तो जिसमें मेरी प्रमाण्य बुद्धि है वो वहां पर खड़ा हो के है बता रहा है हां ये अच्छी बात है जैसे वहां पर स्वामी जी ने जिसके जिनके प्रति उसकी उस समय तक प्रमाण गुप्ति थी यादव जी की उनकी तो उन्होंने जब कहा कि हां इन्होंने आपको यहां तक पहुंचाया यह भी आपके गुरु हुए ब्राह्मण है आप इनके पैर छू लीजिए तो वहां उन्होंने निर्णय दिया कि हां ये अच्छी बात है तो ये अच्छी बात वाला सीन भी है और स्वामी जी का जो व्यवहार है आप लोग समझ सकते हैं कितना वात्सल्य भाव है उनके उनके पास मैंने जो यह चीजें देखी हैं ज्यादातर उनको ज्यादातर वहां जाने वाले लोगों को दिखाई कम पड़ पाती क्यों क्योंकि स्वामी जी का जो डिपार्टमेंट है वो है तीसरा वाला निग्रह है ना उत्पत्ति स्थिति संहार वाला संहार वाला डिपार्टमेंट है तो [गला साफ़ करने की आवाज़][खांसने की आवाज़] तो क्यों डिपार्टमेंट है क्योंकि उनको सब कुछ संभालना रहता है तो उन्हें अपना एक कड़क नेचर बना के रखना पड़ता है कि उस नेचर के अंदर उस उसके अंदर वो जो नरमियत वाले नेचर के कारण कोई अंदर प्रवेश ना कर जाए सहज वो सुलभता

00:08:48:14 ना हो जाए और वो जो है अनुशासन हीन ना हो जाए। अनुशासन यहां का जो है भंग ना कर दे। इसको आप ऐसे देख सकते हैं कि आप देखिए जो ज्योतिष पीठ वाले महाराज जी हैं कई बार आप लोगों को लगता होगा कि उनके जो साक्षात्कार हो रहे हैं तो वो साक्षात्कार बहुत ज्यादा हो रहे हैं। टू मीडिया ट्रायल बहुत ज्यादा हो रहा है। इतना नहीं होना चाहिए। और उसमें वही सारी बातें रिपीट रिपीट रिपीट रिपीट क्यों हो रहे हैं? क्योंकि कहीं ना कहीं कुछ ना कुछ इस तरह का घेरा जैसा घेरा यहां पर है इनका स्वामी जी का वैसा घेरा वहां पर शायद उनकी एक कार्यप्रणाली अलग होगी पर यह वाला जो घेरा है कि हर व्यक्ति ना पहुंच पाए। आप देखो लल्लन टॉप का जो वीडियो हुआ था उसमें लल्लन टॉप मैंने वहां देखा था लल्लन टॉप वालों को कई दिन चक्कर काटने पड़े थे। तब एक इंटरव्यू मिला था। और आप देखो ज्योतिष पीठ वाले महाराज जी के दनाद दिन बहुत सारे वीडियोस आते ही रहते हैं। तो उसके कारण क्या होता है कि देखिए वो पक्ष हमारा मजबूत है। निर्दोष है। वो सब बातें अलग है। मगर एक जो ये मीडिया ट्रायल में होता है। अब सामने वाला मीडिया वाले को बात करने की संस्कार नहीं है। हम कैसे बात की जाती है?

00:10:04:02 किसी दंडी सन्यासी का जिसने वेश ही धारण कर रखा है। उससे आप कैसे बात कर रहे हो? आप ऐसे बात कर रहे हो जैसे आप राजा हो कहीं के और वह जो है आपके यहां का कोई सेवक हो आपके आप उसका जो है आप उसके भ्र्ता हो या जो भी आप समझ ले तो वो बात करने का प्रेशर अच्छा यहां तो यह जो एक घेरा है सुरक्षा का घेरा यह स्वामी जी बना के रखते हैं वहां इतनी किसी इतना किसी का साहस ना हो पाए कि वो वो जो एक होता है ना टेकन ग्रांटेड वाली स्थिति में पहुंच जाए वो नहीं होने देते स्वामी। तो इसलिए वो पहले से ही अपना एक जो वो जो शिवजी वाला डिपार्टमेंट है उसको बना के रखते हैं कि हर व्यक्ति जो है टेकन ग्रांटेड ना होने लगे ऐसी चीजों से सरल व्यवहार से। परंतु जब आप एक बार अंदर पहुंचते हैं जब उन्होंने आपको जांच परख लिया और जब आप उनके अंदर पहुंचते हैं तो तब वहां पर मिलता है वात्सल्य भाव। तो वो वात्सल्य भाव आप देखिए। यादव जी से उस दिन वह पहली बार मिले थे और रात में यादव जी वहां पहुंचे थे। यादव जी के लिए कितना परेशान यहां तक कि हम लोग पहले से वहां पर जा रहे हैं। स्वामी जी की नजरों में है। काफी समय हो चुका है। पर

00:11:19:06 उतना ध्यान हमारी ओर नहीं है। यादव जी के लिए परेशान थे। है ना? तो यह बात है। आगे चलते

⬜ Not used yet · 00:11:28:07 – 00:11:31:00 (0:03)

00:11:28:07 हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़]

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 11:35 · 06 May 2026

कौन थे वो यादव जी? पूज्यपाद जगद्गुरु शंकराचार्य जी के कृपापात्र शिष्य से जुड़ी प्रेरणादायी घटना

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