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00:00:00:02 पर गिन के बता रहा हूं। गिन के [संगीत] मेरा सिद्धांत क्लियर है। मेरा सिद्धांत क्लियर है। मेरा टारगेट पौराणिकवाद है। पौराणिकवाद को पौराणिकवाद के सिद्धांतों को जो जो संप्रदाय स्वीकार करता है। जो जो संप्रदाय गायब कर दूंगा सबको। कोई भी नहीं बचेगा। और सबसे पहले शंकर संप्रदाय को उड़ाऊंगा। ये बात ध्यान रखना। शंकर संप्रदाय को सबसे पहले उड़ाऊंगा और एकदम ही समाप्त करूंगा। यह बात ध्यान रखना। [संगीत] ठीक है? नोट कर लेना सब लोग। [संगीत] हुआ ये कि जो मैंने थोड़ा सा विचार किया तो मैंने आपको बताया था ना शंकराचार्य जी के बारे में कि मेरे कैसे जो विचार है। मैंने थोड़ा अपने एक आधार समाजी मित्रों को और बताया दो तीन जनों को बताया हम तो एक मेरे और मित्र हैं जो श्रृंगेरी मठ से पड़े हुए हैं। मेरे साथ गए थे वो। अच्छा वो तो उन्हें तो कोई समस्या नहीं है। वो तो बोले बढ़िया है कोई दिक्कत नहीं है। हम तो लेकिन एक दो जो मेरे मित्र हैं वो वो भड़क गए मेरे ऊपर। [हंसी] वो हो गया गुस्सा कि कैसे तुमने शंकराचार्य जी को मान लिया ये तो तो एकदम उनको ये हो गया कि मतलब मैं एकदम आसमा छोड़ चुका हूं ऐसे उनको थोड़ा वैसा हो गया है अब मैं उनको कब से बैठ के समझा रहा हूं मेरे को दो तीन घंटे से उन लोगों को समझा रहा हूं मैं ये समझ नहीं रहे भड़के हो एकदम मेरे ऊपर कह रहे मीठी मीठी बातों में फंस गए हो

00:01:15:06 अरे हमने तो इस संबंध में तो कोई बात नहीं की वही वही वही चीज तो वही है मैंने कहा कि देखो मैंने उनको वही बताया कि उसमें समस्या नहीं अगर हम एक तो मैंने मैंने जहां तक समझाया मैंने वही अपना विचार लोगों को बताया। मैंने कहा देखो बात यह है कि शंकराचार्य जो एक पद है इसकी स्थापना क्यों हुई है? तो मैंने उनको बताया कि देखो मैंने ये समझाया कि जैसे पहले राजा होते थे तो राजगुरु होते थे। जैसे राज्य को चलाने के लिए राजा जरूरी है वैसे राज्य को चलाने के लिए राजगुरु भी जरूरी है। क्योंकि राजा धर्म के पद पे है कि नहीं कौन निर्णय करेगा? तो गुरु ही निर्णय करेंगे। राजगुरु जो होंगे धार्मिक सत्ता बहुत आवश्यक है ना। बिल्कुल और हमारे शंकराचार्य का जो हमारे देश हमारे देश में हमारे धर्म धार्मिक जो वातावरण है हमारा समाज उसमें जो विप्लव है हमारी समस्या यही तो है बहु नेतृत्ववाद क्योंकि हमारे यहां धर्म का राजा गायब है। हां धर्म का राजा गायब होने की वजह से मैं मैंने अपने एक आध वीडियो में ये भी बोला है कि भाई शंकराचार्य को मत मानो। कोई दूसरा विकल्प ही दे दो। हां। कम से कम एक नेतृत्ववाद तो आ जाए। बिल्कुल। नेतृत्व के बिना धार्मिक नेतृत्व के बिना नहीं हो सकता। तो वही जो शंकराचार्य का जो पद है जैसे चार भागों में बांटा हुआ है। जैसे आदि शंकराचार्य जी ने चार मठ चार क्षेत्रों के हिसाब से बांट

00:02:30:07 दिए। तो उनका जो उद्देश्य मुझे ये समझ में आया कि इन चारों क्षेत्रों में भारत के चार क्षेत्रों में चार दिशाओं में जो भी राजा होंगे उन राजाओं को नेतृत्व करने के लिए कोई धार्मिक गुरु तो होना चाहिए। तो उस नेतृत्व की स्थापना के लिए वो गद्दी तैयार की गई ना कि व्यक्तिगत लाभ इत्यादि के लिए। बिल्कुल बिल्कुल। तो लोग उसी को गलत समझ लेते हैं। लोग सोचते हैं कि नहीं वो गद्दी बनके तो अपना संप्रदाय विकसित कर रहे हैं। बात वो है ही नहीं। भाई मान लो गद्दी छोड़ दी। संप्रदाय छोड़ दिया तो फिर क्या होगा? राजा को कौन टैकल करेगा? तो उसमें और फिर मैंने उनको बोला कि देखो ऐसा है कि जैसे आर्य समाज है वो क्या किया अभी प्रोग्राम में मोदी जी को बुलाए। उन्होंने मोदी जी की आज तक कभी वो बुराई इत्यादि गलत बात नहीं बोली कि इन्होंने ये गलती की वो गलती। शंकराचार्य जी ऐसे विवाह के गलत बात वो तो तुरंत रोकते हैं। हम हमें तो नहीं धार्मिक नेता तो हमें यही चाहिए। हमें धार्मिक चापलूस थोड़ी चाहिए। हम तो नेता जी है धार्मिक नेतृत्व करने वाले जो जहां जहां धर्म देखे वहीं लोहे लताड़े उनको तो बाकी मैंने मैंने वही समझाने का प्रयास किया कि ऐसा नहीं कि अगर मैं शंकराचार्य जी को स्वीकार कर रहा हूं तो ये नहीं होगा कि मैं ऐसा कह रहा हूं कि जो दयानंद जी के जो सिद्धांतिक मतभेद है उसको मैं पूरी तरह से तय दे रहा हूं वो तो एक वो तो एक ही जीवन भर की यात्रा है आदमी क्या है कि जितना सिद्धांत सीखेगा समझेगा उसमें अलग-अलग उसमें निर्णय करता जाएगा वो तो एक अलग बात हो गई लेकिन आपको गुरु तो स्वीकार करना पड़ेगा ना मेरा वो बिना आप और शंकराचार्य का पद केवल गुरु का पद नहीं अपने आप में बहुत बड़ी बात यह वो नहीं किच मैंने अपनी जो बुक लिखी है मैंने अपनी

00:03:45:08 जो बुक एक लिखी है उसमें मैंने यह प्रकाश वो कर किया है जी कि जैसे मुस्लिम है आप तर्क करते चले जाओ मुस्लिम से जी तो एक समय ये आएगा कि तुम कैसे मानते हो कि ये जो है अह कुरान जो रखी है जी जी वो जो है अल्लाह की दी हुई कुरान है। आखिर में आएगा ये जब हम बहुत तर्क कर चुके होंगे। जी जी तो वो ये कहेंगे क्योंकि मोहम्मद ने कहा इसलिए हमने माना फथ बिल्कुल तो हमारे पास मोहम्मद जैसा कौन है फेथ के मामले में जिससे हमने वेद लिए तो वो तो वो हमारे नहीं वो तो बहुत वो हो गया ना प्राचीन समय हो गया तो हमें अभी का वर्तमान युग का कोई ऐसा चाहिए होगा ना प्रैक्टिकली जिसका इतिहास उनका जो नेतृत्व करे जिसका इतिहास मिलता हो जिसका वो हो तो वो हमारे पास शंकराचार्य कि हम हमसे कोई कहेगा कि भाई आपको ये वेद पर विश्वास क्यों? क्योंकि शंकराचार्य पर हमारी आस्था है। मतलब इतने इतने भर में कि वेद वही है जो ईश्वर ने दिए इस अंश में। तो कम से कम वेद को प्राप्त करने के अंश में तो हमें शंकराचार्य को मान ही लेना चाहिए। बिल्कुल बिल्कुल है ना? कि वेद हमें प्राप्त तो शंकराचार्य से ही हो रहे हैं। और ये अनकहे तौर

00:05:00:14 पर सबने मान लिया है। सबने मान लिया। सही बात है। और फिर बौद्धों का तो पर वो किया ही था सब। ये सब तो दूसरी चीजें मतलब ये वो वो वो कारण है जो निर्विवाद रूप से शंकराचार्य हमारे जो है कहीं ना कहीं प्रमाण सिद्ध होते हैं। अब फिर वो वेदार्थ को लेकर के अपना-अपना अच्छा ये भी बात है शंकराचार्य का सिद्धांत ऐसा है कि उसकी सीमा में रहकर आपके मतलब हमारे अन्य सारे सिद्धांत पोषित हो जाते हैं। हम वो सिद्धांत ऐसा है कि उसके अंदर रहो। बस विरोध ना हो। अगर विरोध में जाओगे तो फिर वो तो फिर अलग बात हो गई। मगर उसकी सीमा के यदि अंदर रहे तो द्वैत भी आ जाएगा। विशिष्टाद्वैत भी आ जाएगा। सब आ जाएगा। फिर जिसकी जो मान्यता हो वो हो जाए वो तो क्या अभी ये सब हो रहा है क्या तुम्हारे साथ ये जो विरोध कर रहे हैं जो तुम्हारे दोस्त मित्र वगैरह उनको मैंने यही बताया। मैंने वही बोला कि देखो मैंने उनको यही बात समझाया कि ऐसा है कि महर्षि दयानंद जो थे वो अपने समय में थे बहुत तगड़े। मैंने कहा कि महर्षि दयांद के विषय में एक बार ये आर्य समाज हटा दो। मान लो उन्होंने समाज नहीं बनाया तो कोई नर श्री को कैसे देखेगा वो इसी रूप में देखेगा कि हां बिल्कुल वो यही देखेगा कि शंकर संप्रदाय से सन्यास लिए हुए एक विद्वान थे बाल ब्रह्मचारी थे जैसे हमारे शंकराचार्य बाल ब्रह्मचारी होते हैं वैसे वो भी बाल ब्रह्मचारी थे शंकर

00:06:15:18 संप्रदाय से सन्यास लिए हुए थे और एक नहीं अनेक विद्वानों से पढ़े हुए थे और बात ये है कि जिन विद्वानों से उन्होंने पढ़ा वो कौन थे यही तो यही हमारे संप्रदाय वाले विद्वान थे है ना तो इसमें इसमें यही बात आती है कि अगर हम इस चीज को देखें तो इनमें स्वामी दयानंद जी ने वही कार्य किया जो एक सन्यासी को करना चाहिए था। उन्होंने सामाजिक कार्य किया। जो शंकराचार्य जी को करना चाहिए था वो भी उन्होंने किया। यानी इस दृष्टिकोण से अगर कार्य को देखा जाए तो जितने भी हमारे आचार्य हैं अलग-अलग संप्रदाय वो सारे उनका सम्मान करते हैं। कोई उनका इस कार्य की दृष्टि से कोई विरोध नहीं करता। उन्होंने है ना जो समाज में जैसे उन्होंने अंग्रेजों का विरोध किया था। खुलेआम विरोध किया था डके की चोट पे। तो ये सारी बातें आती हैं। मुसलमानों का विरोध किया था। तो ये बात तो पहली बार किसी कोई ऐसा सन्यासी उठ के आया जिसने कुरान की समीक्षा कर डाली। हम वेदों के आधार पे तो तो वो भी बड़ी गजब की बात थी हम तो ये इस टाइप की चीजें निकल कर के आती है तो ये ये आ जाता है फिर स्वामी दयानंद जी एक बात बोला था शायद वो पत्र व्यवहार में आता है उनके उन्होंने कहा था कि कि मेरे जीवन की एक ही जो है मुझे जो बात खटकती है वो ये खटकती थी कि मुझे कोई योग्य शिष्य नहीं मिल पाया शिष्य तो एक से एक एक से एक तगड़े तगड़े मिले लेकिन कोई ऐसा शिष्य जिसे मैं अपना उत्तराधिकारी के रूप में देखूं प्रतिनिधित्व के रूप में देखूं वैसा शिष्य नहीं मिल पाया उन्होंने ये बात बोली थी तो तो वही समस्या एक आ जाती है कि जब उनका प्रतिनिधित्व

00:07:30:19 करने वाला आज के समय में कोई नहीं है तो फिर मुझे गद्दी खत्म हो गई। फिर अगर मुझे मार्गदर्शन चाहिए तो मैं किसके पास जाऊंगा? तो वो अटक जाता है। तो फिर वही फिर उनके अभाव में स्वामी दयानंद जी के अभाव में अगर मैं देखूं कि चलो ठीक है उनके अभाव में मुझे नेतृत्व के लिए मार्गदर्शन के लिए कौन मिलेगा? तो फिर उनके अलावा अगर कोई मैं किसी और को देखता हूं तो मुझे लगता है कि शंकराचार्य एकमात्र ऐसे हैं जिनको सारे सनातन धर्म के जितने मतमतांतर है सब उनको एक में स्वीकार करते हैं। हम तो उनको हम मान सकते हैं। हां बिल्कुल नेतृत्व के लिए उनके पास जा सकते हैं। कोई समस्या नहीं है। आप अपनी जो जिज्ञासाएं हैं उनको शांत करो आगे पूछो। हां बिल्कुल पढ़ो आप। तो उनका उनका उनका ग्रंथ है

00:08:12:26 सार्वभौम सनातन सिद्धांत। जी जी इसमें उन्होंने जो है जीरो से 100 वाली बात की है सनातन धर्म के बारे में और गर्व से कहो हम हिंदू हैं। जी जी है ना उसमें भी पूरी बात वो जो एक मतलब वो नहीं है एक देववाद जी जी बहुदेववाद में फंस गया था हमारा भारत जी जी एक देववाद पे भी उन्होंने सिद्धि की है हम हां ये वाला मैंने नहीं पढ़ा इसको पढूंगा ये पढ़ो और इसके साथ में इसका एक जोड़ीदार होता है वो होता है प्रश्नोत्तर मालिका जी जी सार्वभौम सनातन सिद्धांत और सनातन धर्म प्रश्नोत्तर मालिका ये दो ले ले

00:08:59:01 और एक जो गढ़ ग्रंथ है बहुत बहुत महत्वपूर्ण गढ़ ग्रंथ है विद्या स्वामी का पंचदशी पढ़ा है नहीं नहीं ये नहीं पढ़ा ये सुना है इसके बारे में मैंने बहुत इसको गुरुदेव बहुत कहते हैं मतलब बहुत जरूरी बताते हैं ये तीन ग्रंथ पंच पंचदशी जी सनातन सिद्धांत प्रश्न उत्तर मालिका जी जी

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 9:43 · 17 Apr 2026

कट्टर आर्य समाजी ने भी माना पुरी शंकराचार्य जैसा अन्य कोई योग्य गुरु नहीं है

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