1
00:00:03,920 --> 00:00:08,000
तो सभी को जय श्री राम। आशा करता

2
00:00:08,000 --> 00:00:13,840
हूं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे और

3
00:00:13,840 --> 00:00:18,080
जो लाइव है काफी दिनों से पोस्टपोंड हो रहा था।

4
00:00:18,080 --> 00:00:22,800
बार-बार स्थगित होता जा रहा था और

5
00:00:22,800 --> 00:00:26,800
बहुत ही महत्वपूर्ण घोषणा है। सबसे पहले

6
00:00:26,800 --> 00:00:31,200
तो मैं यह बता दूं कि जो

7
00:00:31,200 --> 00:00:36,000
रामपाल के लोगों ने हम पर एक मुकदमा दर्ज कराने का प्रयास किया था।

8
00:00:36,000 --> 00:00:40,800
जिसमें कि उसने आरोप लगाया था रामपाल की एक

9
00:00:40,800 --> 00:00:44,960
चेली ने जिसका नाम नीतू दासी है। उसने एक आरोप लगाया

10
00:00:44,960 --> 00:00:48,080
था कि

11
00:00:48,080 --> 00:00:52,080
ये इन्होंने मेरे साथ छेड़खानी की है। वो कैमरे पर भी है वो

12
00:00:52,080 --> 00:00:56,080
वीडियो में है और वो प्रचार करती है रामपाल की

13
00:00:56,080 --> 00:01:00,240
उन विवादित पुस्तकों का जो अवैध

14
00:01:00,240 --> 00:01:04,960
रूप से छपती हैं और साथ ही साथ जिसमें हमारे

15
00:01:04,960 --> 00:01:09,040
आराध्यों के लिए बहुत सारी भ्रामक और अपमानजनक

16
00:01:09,040 --> 00:01:13,920
बातें लिखी हुई है। तो उस मुकदमे का निर्णय

17
00:01:13,920 --> 00:01:18,080
जब इन्होंने एफआईआर दर्ज कराने का प्रयास किया था तो उसका निर्णय अभी हमारे

18
00:01:18,080 --> 00:01:22,240
पक्ष में आ गया था। इस पर हमने एक विस्तृत वीडियो भी बनाया है कि उन्होंने क्या आरोप

19
00:01:22,240 --> 00:01:26,400
लगाए थे और हमारा पक्ष क्या था और किस क्या निर्णय दिया

20
00:01:26,400 --> 00:01:30,480
है न्यायालय ने और किसके पक्ष को वहां

21
00:01:30,480 --> 00:01:34,720
किसके पक्ष की वहां पुष्टि हुई है वो

22
00:01:34,720 --> 00:01:38,800
निर्णय ऑपरेटर महोदय से कहूंगा आप थोड़ा सा दिखा

23
00:01:38,800 --> 00:01:42,800
दीजिए [गला साफ़ करने की आवाज़] इसके बाद हम जो मुख्य घोषणा है

24
00:01:42,800 --> 00:01:47,600
उस पर आएंगे आज की जो सबसे पहली और

25
00:01:47,600 --> 00:01:52,000
सबसे जरूरी आवश्यक बात है वो यह है कि हमने जो एक सीरीज

26
00:01:52,000 --> 00:01:54,880
स्टार्ट की थी

27
00:01:54,880 --> 00:01:59,200
जो रामपाल ने गीता में अपनी मिलावट की है गंदगी की है जो फवड़ता

28
00:01:59,200 --> 00:02:03,280
के साथ अनपढ़ अपने जो गमवरपन को प्रस्तुत किया है वहां

29
00:02:03,280 --> 00:02:07,440
गीता का अर्थ करते समय और बहुत सारी उलजलूल

30
00:02:07,440 --> 00:02:11,440
बकवास बातें वहां लिखी हैं तो इस पर एक सीरीज हम चला रहे

31
00:02:11,440 --> 00:02:15,360
थे जिसमें कि हम एक एक

32
00:02:15,360 --> 00:02:19,520
ये आपके सामने न्यायालय का आर्डर आ चुका है और इस

33
00:02:19,520 --> 00:02:23,600
वीडियो के डिस्क्रिप्शन में भी यह आर्डर आपको मिल जाएगा। लिंक ड्राइव से आप

34
00:02:23,600 --> 00:02:27,520
डाउनलोड कर लेंगे और

35
00:02:27,520 --> 00:02:31,600
जो मेन वीडियो जिसमें इसका आर्डर की पूरी विवेचना की

36
00:02:31,600 --> 00:02:35,600
गई है वो भी आपको मिल जाएगा। वहां पर भी डिस्क्रिप्शन में

37
00:02:35,600 --> 00:02:39,760
आपको इसका लिंक मिल जाएगा। अभी तक क्या था? हमें हार्ड कॉपी में आर्डर मिला था।

38
00:02:39,760 --> 00:02:43,840
मगर इस तरीके से अपलोडेड कॉपी नहीं मिली थी। अभी यह जो कॉपी

39
00:02:43,840 --> 00:02:47,840
है यह जो ऑफिशियल वेबसाइट होती है वहां पर अपलोडेड है।

40
00:02:47,840 --> 00:02:52,640
आप वहां से भी इसको डाउनलोड कर सकते हैं। केस नंबर आपके पास होना चाहिए बस।

41
00:02:52,640 --> 00:02:56,960
इसमें एक जरूरी चीज मैं आपको दिखाना चाहता हूं। थोड़ा नीचे जाइए ऑपरेटर

42
00:02:56,960 --> 00:03:00,480
महोदय

43
00:03:00,480 --> 00:03:06,480
और नीचे

44
00:03:06,560 --> 00:03:10,320
और नीचे

45
00:03:10,320 --> 00:03:14,320
हम देखिए देखिए ऊपर ऊपर ऊपर जाइए

46
00:03:14,320 --> 00:03:18,320
देखिए ये और और ऊपर जाइए एक हेडिंग है हेडिंग पर

47
00:03:18,320 --> 00:03:22,480
जाइए ना ना नीचे जाइए नीचे जाइए जो

48
00:03:22,480 --> 00:03:26,960
तीन नंबर पैराग्राफ खत्म होगा इसके बाद हां मामले के संक्षिप्त

49
00:03:26,960 --> 00:03:31,200
तथ्य और पृष्ठभूमि तो कोर्ट ने यह कोट किया है अपने

50
00:03:31,200 --> 00:03:35,360
निर्णय में क्या कोट किया है वो आप लोगों के लिए बहुत आवश्यक है। ये आप देख सकते

51
00:03:35,360 --> 00:03:39,360
हैं क्योंकि ये लोग एक फर्जी अफवाह फैलाते

52
00:03:39,360 --> 00:03:43,440
हैं कि हमारी किताबों को 11 बार क्लीन चिट मिली हुई है

53
00:03:43,440 --> 00:03:48,000
और जब पूछ लेते हैं कि वो क्लीन चिट कहां है? तो आज तक प्रस्तुत नहीं हुई। कहीं

54
00:03:48,000 --> 00:03:52,160
एक दो कोई मुकदमा हुआ वहां पर जो जिसने मुकदमा लिखवाया वह पहुंच

55
00:03:52,160 --> 00:03:56,400
नहीं पाया तारीखों पर तो ऐसे मुकदमों

56
00:03:56,400 --> 00:04:00,480
में क्या होता है कि अगर वादी जिसने मुकदमा लिखवाया है वह

57
00:04:00,480 --> 00:04:04,560
आएगा ही नहीं कोर्ट में साक्ष्य देने के लिए गवाही देने के

58
00:04:04,560 --> 00:04:08,560
लिए तो उसको फिर डिसबर्स कर दिया जाता है। मुकदमे को खत्म कर दिया जाता है। ऐसे

59
00:04:08,560 --> 00:04:13,120
कुछ मुकदमों ऐसे कोई मुकदमे अगर कहीं पे

60
00:04:13,120 --> 00:04:15,920
कहीं पर दर्ज हुआ था और ऐसा कोई मुकदमा अगर डिसबर्स

61
00:04:15,920 --> 00:04:20,000
हो गया तो उसको ये लोग दिखाते हैं। देखो देखो हमारी किताबों के विरुद्ध मामला दर्ज कराया

62
00:04:20,000 --> 00:04:24,000
था और देखो हमारे पक्ष में फैसला आ गया। तो यह लोग क्लीन चिट क्लीन चिट चिल्लाते

63
00:04:24,000 --> 00:04:28,640
हैं। तो यहां पर देखिए इसमें कोर्ट ने

64
00:04:28,640 --> 00:04:32,720
एफआईआर दर्ज करने को मना कर मतलब मना किया है।

65
00:04:32,720 --> 00:04:36,960
निर्णय ये दिया है एफआईआर दर्ज नहीं होगी। आप जो ये वहां पर अपील

66
00:04:36,960 --> 00:04:41,280
करने गए थे नहीं नहीं इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। तो कोर्ट ने मना कर दिया एफआईआर

67
00:04:41,280 --> 00:04:45,360
दर्ज नहीं होगी। निरस्त कर दी इनकी अपील। उस वो

68
00:04:45,360 --> 00:04:49,440
जो निर्णय है उसमें न्यायालय ने कोर्ट क्या किया है? मामले के संक्षिप्त

69
00:04:49,440 --> 00:04:53,440
तथ्य और पृष्ठभूमि। इसमें इन्होंने माना है कि निगरानी करता

70
00:04:53,440 --> 00:04:57,920
नीतू दासी सीधे या परोक्ष रूप से सतलोक आश्रम नामद सेंटर नाम से

71
00:04:57,920 --> 00:05:02,000
चल रहे एक समूह से जुड़ी है। यह समूह रामपाल से जुड़ा है जो

72
00:05:02,000 --> 00:05:06,080
खुद को भगवान बताने वाला एक व्यक्ति है और हत्या जैसे गंभीर आपराधिक मामलों में

73
00:05:06,080 --> 00:05:10,720
दोषी ठहराए जाने के बाद अभी उम्र कैद की सजा काट रहा है। ठीक है?

74
00:05:10,720 --> 00:05:14,720
यह उसके ऊपर आधारित है जो रामपाल जेल में है तब

75
00:05:14,720 --> 00:05:18,960
तक के ऊपर आधारित यह जानकारी। इसके बाद आगे चलता है।

76
00:05:18,960 --> 00:05:24,720
नीचे जाइए।

77
00:05:24,720 --> 00:05:27,040
हां।

78
00:05:27,040 --> 00:05:31,280
रामपाल को अन्य मामलों के अलावा निम्नलिखित मामलों में डोसी ठहराया

79
00:05:31,280 --> 00:05:37,280
गया। तो ये कुछ विवरण यहां आ गया। ठीक है। और नीचे जाइए।

80
00:05:39,760 --> 00:05:44,320
अच्छा यह समूह हिंदू सनातनी आस्था को ये मेन चीज देखिए।

81
00:05:44,320 --> 00:05:48,480
यहां कोर्ट ने अपने निर्णय में कोर्ट किया है। यह बहुत

82
00:05:48,480 --> 00:05:53,120
प्रभावशाली आपके पास सबूत है कि न्यायालय

83
00:05:53,120 --> 00:05:57,360
ने अपने निर्णय में यह कोट किया है। यह समूह हिंदू

84
00:05:57,360 --> 00:06:01,840
सनातनी आस्था को नीचा दिखाने के मकसद से संगठित

85
00:06:01,840 --> 00:06:06,000
और व्यवस्थित गतिविधियों में शामिल है। जिसमें हिंदू देवी

86
00:06:06,000 --> 00:06:10,000
देवताओं, धर्म ग्रंथों, संतों और धार्मिक प्रतीकों के

87
00:06:10,000 --> 00:06:14,080
विरुद्ध अश्लील विकृत और अपमानजनक सामग्री का प्रचार प्रस

88
00:06:14,080 --> 00:06:18,080
प्रचार प्रसार करना शामिल है। और देखिए क्या हेडलाइन है? झूठा

89
00:06:18,080 --> 00:06:22,320
केस दर्ज करने के पीछे का मकसद झूठा केस। तो

90
00:06:22,320 --> 00:06:27,200
यहां इसको भी कोट किया न्यायालय ने अपने निर्णय में कि प्रत्यार्थियों

91
00:06:27,200 --> 00:06:31,280
ने आपत्तिजनक किताबों के गैर कानानूनी प्रकाशन बिक्री और वितरण

92
00:06:31,280 --> 00:06:35,440
को बिना इजाजत चल रहे नामदान केंद्रों के खिलाफ कानूनी आपत्तियां

93
00:06:35,440 --> 00:06:41,440
और शिकायतें दर्ज नीचे जाइए

94
00:06:46,640 --> 00:06:51,040
हां क्या आया दर्ज कराई यह केंद्र समाज के कमजोर

95
00:06:51,040 --> 00:06:55,680
वर्ग लोगों का ब्रेन वाश करते हैं और जबरदस्ती या बहला फुसलाकर

96
00:06:55,680 --> 00:06:59,760
धर्म परिवर्तन करवाते हैं। जो कानून की नजर में एक अपराध है।

97
00:06:59,760 --> 00:07:04,480
बाकी बहुत विस्तृत रूप से हमने उसमें पढ़ा है। ठीक है?

98
00:07:04,480 --> 00:07:08,560
तो [गला साफ़ करने की आवाज़] तो इन्होंने कोर्ट ने कोट किया

99
00:07:08,560 --> 00:07:12,560
है अपने निर्णय में कि बदले की भावना से प्रतिशोध

100
00:07:12,560 --> 00:07:16,640
की भावना से प्रार्थी ने यह जो अपील

101
00:07:16,640 --> 00:07:21,120
है दायर की है जिसका एकमात्र उद्देश्य प्रत्यार्थियों को चुप कराना

102
00:07:21,120 --> 00:07:25,360
और उन्होंने उन्हें कानूनी उपाय करने से रोकना। ठीक है?

103
00:07:25,360 --> 00:07:29,520
यह हार है रामपाल गैंग की बहुत बड़ी। और देखिए नीचे क्या

104
00:07:29,520 --> 00:07:33,600
माना है कि यह जो नीतू दासी है

105
00:07:33,600 --> 00:07:38,960
इसने जिस जो जो हम कह रही है कि मेरे साथ जो है

106
00:07:38,960 --> 00:07:43,120
प्रयास किया इन्होंने छेड़खानी इत्यादि जो भी है तो

107
00:07:43,120 --> 00:07:47,120
ये नीतू दासी के लिए जो ये बात है कोर्ट की गई है इस

108
00:07:47,120 --> 00:07:51,360
निर्णय में कि अपीलकर्ता नीतू दासी द्वारा

109
00:07:51,360 --> 00:07:55,360
आपराधिक धमकी और झूठी धमकियां तो यहां वो विवरण इसके

110
00:07:55,360 --> 00:07:59,360
बाद संगठित समूह और षड्यंत्र इस

111
00:07:59,360 --> 00:08:01,840
पर आइए नीचे आइए हां

112
00:08:01,840 --> 00:08:05,840
तो रवि कुमार नीतू दासी और दूसरे साथियों के साथ

113
00:08:05,840 --> 00:08:09,920
मिलकर एक ऑर्गेनाइज्ड ग्रुप के तौर पर काम करती है और उनके गैर कानानूनी काम

114
00:08:09,920 --> 00:08:13,920
आपस में जुड़े हुए हैं। जब सरोजनी नगर में एक गैर कानानूनी नामदान सेंटर

115
00:08:13,920 --> 00:08:18,240
के बारे में कुछ लोगों के खिलाफ शिकायत की गई तब भी पूरे ग्रुप ने मिलकर काम

116
00:08:18,240 --> 00:08:22,800
काम करने का दावा किया जिससे एक जैसा इरादा और साजिश साबित होती है।

117
00:08:22,800 --> 00:08:28,800
और नीचे आइए धार्मिक मान्यताओं का जानबूझकर अपमान

118
00:08:29,600 --> 00:08:33,600
[गला साफ़ करने की आवाज़] उस ग्रुप द्वारा शेयर किए

119
00:08:33,600 --> 00:08:38,560
गए मटेरियल में हिंदू देवी देवताओं जैसे मां दुर्गा, भगवान श्री राम,

120
00:08:38,560 --> 00:08:42,640
भगवान हनुमान, भगवान शिव के साथ-साथ वेद और भगवत गीता जैसे

121
00:08:42,640 --> 00:08:46,720
पवित्र ग्रंथों के बारे में गंदी भद्दी और ई निंदा वाली बातें हैं।

122
00:08:46,720 --> 00:08:50,800
यह सब कोट किया। यह न्यायालय का निर्णय है।

123
00:08:50,800 --> 00:08:55,040
फर्जी पब्लिशिंग और अवैध वितरण। उस ग्रुप द्वारा बांटी

124
00:08:55,040 --> 00:08:59,040
गई किताबों में पब्लिशर की सही जानकारी जीएसटी नंबर

125
00:08:59,040 --> 00:09:03,200
या एड्रेस भी नहीं है। वहां पर कुछ और ही होता है। यह सब चीजें

126
00:09:03,200 --> 00:09:07,520
कोर्ट की है न्यायालय ने। ठीक है? तो यह बहुत अच्छा एक

127
00:09:07,520 --> 00:09:11,600
आपके पास प्रमाण है जिसको आप कभी भी कोई कानूनी

128
00:09:11,600 --> 00:09:15,840
प्रक्रिया से होकर गुजर गुजर रहे हैं यदि रामपाल के गैंग

129
00:09:15,840 --> 00:09:16,960
के विरुद्ध तो आप

130
00:09:16,960 --> 00:09:20,960
इस निर्णय को वहां प्रस्तुत कर सकते हैं कि यह देखिए यहां पर इस कोर्ट ने यह

131
00:09:20,960 --> 00:09:25,360
फैसला दिया है तो वहां पर इसको प्रस्तुत कर सकते हैं। इसके साथसाथ

132
00:09:25,360 --> 00:09:29,680
यह तो हो गई यह जो हमारे ऊपर झूठा एलगेशन लगा

133
00:09:29,680 --> 00:09:33,680
के और प्रयास किया जा रहा था। अब आगे एक जानकारी और दे

134
00:09:33,680 --> 00:09:37,840
दूं। कि हरियाणा का एक युवा है।

135
00:09:37,840 --> 00:09:41,920
हरियाणा के एक युवा है। अब वह बाहर रह रहे हैं कि हरियाणा में ही है। मैं

136
00:09:41,920 --> 00:09:46,160
बहुत ज्यादा डिटेल्स नहीं पता। उनका नाम है धर्मेंद्र हुड्डा।

137
00:09:46,160 --> 00:09:50,560
तो वह भी इस समय बहुत प्रतिकार कर रहे हैं पुरजोर

138
00:09:50,560 --> 00:09:54,640
तरीके से और मैंने कुछ दिनों पहले एक

139
00:09:54,640 --> 00:09:58,640
संभावना व्यक्त की थी कि रामपाल ने जिस प्रकार

140
00:09:58,640 --> 00:10:03,280
से हमारे देवी देवताओं के लिए अश्लील बातें की अपनी किताबों में अपने वक्तव्यों

141
00:10:03,280 --> 00:10:08,160
में और अपमान किया हिंदू धर्म का और जिसके कारण उसके

142
00:10:08,160 --> 00:10:12,160
जो नुमाइंदे हैं वो कालका मेल बन

143
00:10:12,160 --> 00:10:16,160
के और सुपरफास्ट एक्सप्रेस बन के और काम कर रहे

144
00:10:16,160 --> 00:10:19,280
हैं तो

145
00:10:19,280 --> 00:10:23,360
बहुत जल्द ऐसा होगा जब इस गैंग के द्वारा रामपाल का जो ये

146
00:10:23,360 --> 00:10:27,520
प्रचार किया जा रहा है ना देखो देखो हमारे रामपाल कितनी सुंदर बातें बताते हैं

147
00:10:27,520 --> 00:10:31,840
वो प्रचार ऐसा है कि कुछ दिनों में रामपाल की

148
00:10:31,840 --> 00:10:32,340
पूजा

149
00:10:32,240 --> 00:10:36,320
होने वाली है जूतों से ये मैंने संभावना व्यक्त की थी

150
00:10:36,320 --> 00:10:40,560
जो इस तरीके के कुकृत है भाई पहले से उस उस पर रामपाल

151
00:10:40,560 --> 00:10:44,640
पर जो है आरोप लगे हुए हैं। इतनी हत्याएं हुई हैं या फिर

152
00:10:44,640 --> 00:10:48,720
पास में जो है वह पकड़े गए हथियार बरामद हुए। यह वह बहुत सी चीजें हैं।

153
00:10:48,720 --> 00:10:52,880
तो जैसे तैसे करके वह भी बाहर है। परंतु उसका जो रामपाल

154
00:10:52,880 --> 00:10:57,280
का जो गैंग है वो कुछ इस तरह से कार्य करता है। मैंने

155
00:10:57,280 --> 00:11:02,160
कल ये बताया भी था कि वास्तविकता में जब वो इतने घनघोर आपराधिक

156
00:11:02,160 --> 00:11:06,400
रूप से चलने वाले गैंग से जुड़े हुए हैं ये लोग तो इनको

157
00:11:06,400 --> 00:11:10,400
थोड़ा दब के रहना चाहिए। यदि कोई मिल भी जाता है, टोकाटाकी करता है तो उनको वहां

158
00:11:10,400 --> 00:11:14,640
पर हाथ जोड़ के आगे बढ़ जाना चाहिए। मगर ये लोग क्या करते हैं कि उस पर

159
00:11:14,640 --> 00:11:18,640
हावी होने का प्रयास करते हैं। जो भी व्यक्ति कुछ कह देता है प्रतिकार करता है उस पर हावी

160
00:11:18,640 --> 00:11:22,640
होने का प्रयास करते हैं। और जब हावी होने का प्रयास करते हैं तो वो व्यक्ति जब प्रतिकार

161
00:11:22,640 --> 00:11:26,720
करता है तो किसका करता है? इनका नहीं करता। चिलों का चूजों का नहीं करता। वो

162
00:11:26,720 --> 00:11:30,800
फिर सीधे इनके जो आका बैठे हुए हैं जिन्होंने अपनी बकवास लिखी है

163
00:11:30,800 --> 00:11:34,800
अपनी चीजों में वो प्रतिकार उनका करता है। तो इस तरीके

164
00:11:34,800 --> 00:11:40,560
से ये जो गैंग है यह सबसे बड़ा शत्रु सिद्ध होता है किसका?

165
00:11:40,560 --> 00:11:44,720
रामपाल का। क्योंकि रामपाल के लिए परेशानी खड़ी कौन कर रहा है?

166
00:11:44,720 --> 00:11:47,360
ये गैंग लखनऊ में जब हमने

167
00:11:47,360 --> 00:11:51,520
इनके स्टॉल का विरोध किया था। लोगों ने चौराहे पर इनके इनकी जो

168
00:11:51,520 --> 00:11:55,600
किताबें वगैरह है वो जला दी थी। उसके बाद कानूनी प्रक्रिया का

169
00:11:55,600 --> 00:11:59,600
आलंबन लेने इनका गैंग पहुंचा था पहले थाने। थाने का रास्ता

170
00:11:59,600 --> 00:12:04,480
इन्होंने दिखाया था। ठीक है? तो ये जो छींटाकसी

171
00:12:04,480 --> 00:12:08,640
जैसे अगर किसी ने कुछ Facebook पर बोल दिया या YouTube पर बोल दिया तो

172
00:12:08,640 --> 00:12:12,880
ये लगते हैं उसको और दो की तीन और हर तरह से व्यक्तिगत रूप से आघात

173
00:12:12,880 --> 00:12:16,960
पहुंचाने। तो वास्तविकता में इनका कर्तव्य यह

174
00:12:16,960 --> 00:12:21,120
है कि जब तुम्हारे आका ने इतनी मिलावट, इतनी झूठ, इतनी

175
00:12:21,120 --> 00:12:25,280
झूठ बाजी और इतना असत्य भाषण और इतनी

176
00:12:25,280 --> 00:12:29,920
अश्लीलता परोसी है। धर्म के नाम पर अधर्म परोस रखा है।

177
00:12:29,920 --> 00:12:34,320
झूठ झूठ झूठ हर जगह झूठ लिख रखा है। षड्यंत्र है, मिलावट

178
00:12:34,320 --> 00:12:38,560
है तुम्हारे बाबा की किताबों में तो ठीक है भाई। कम से कम तुम्हें मैं

179
00:12:38,560 --> 00:12:42,640
यह नहीं कह रहा हूं कि उसको हम छोड़ देंगे। मगर तुम्हारा कर्तव्य तो यह है कि

180
00:12:42,640 --> 00:12:46,880
अगर तुमको हम जैसा कोई मिल जाए तुमको पकड़ ले तुम्हारा टुआ तो

181
00:12:46,880 --> 00:12:50,960
तुम्हें प्रतिकार नहीं करना चाहिए। तुमको वहां पर शांत रहना चाहिए क्योंकि तुम्हें मालूम

182
00:12:50,960 --> 00:12:55,120
है हम बहुत बड़े चोरी के अड्डे से जुड़े हुए हैं। अगर हम हल्ला मचाएंगे तो अंत में

183
00:12:55,120 --> 00:12:59,440
पकड़े हम ही जाएंगे। हमारा भेद खुल जाएगा। मगर ये सब चीजें

184
00:12:59,440 --> 00:13:02,400
इनको समझ में नहीं आती है और ये कर बैठते हैं मूर्खता।

185
00:13:02,400 --> 00:13:06,800
ये उसका विरोध करने लगते हैं। पुरजोर विरोध करने लगते हैं। नहीं नहीं रामपाल

186
00:13:06,800 --> 00:13:11,040
रामपाल और बन जाते हैं बवंडर। बवंडर करने के चक्कर में गाज

187
00:13:11,040 --> 00:13:15,120
किसके ऊपर गिरती है? रामपाल के ऊपर। कुछ ऐसा ही 2014 में भी हुआ था

188
00:13:15,120 --> 00:13:19,200
कि नहीं नहीं हमारे रामपाल नहीं जाएंगे। कोर्ट में पेशी नहीं होगी। उनकी नारायण नेता है

189
00:13:19,200 --> 00:13:23,440
सबसे बड़े। फोर्स लगा दी गई। धक्के मार मार के ले

190
00:13:23,440 --> 00:13:27,760
ले गए उसे। फिर रो रहे हैं रामपाल। मुझे जमानत दे दो। जमानत दे दो। 10

191
00:13:27,760 --> 00:13:31,760
12 साल लग गए जमानत मिलने में। तो सबसे बड़ा शत्रु कौन

192
00:13:31,760 --> 00:13:35,760
सिद्ध हुआ? इनका खुद का गैंग जो ये कर रहा है। अब रामपाल ने

193
00:13:35,760 --> 00:13:39,920
तो जरा सा कुछ कहा। उसके बाद इनके सारे नुमाइंदे लग गए राधा ये

194
00:13:39,920 --> 00:13:43,920
है शिवजी ये हैं वो है तो क्या होगा किसी ना किसी

195
00:13:43,920 --> 00:13:48,480
का खून खोल लेगा वो कोई कारवाई करेगा वो कारवाई कहां जाके चोट पहुंचेगी रामपाल

196
00:13:48,480 --> 00:13:52,000
पर खैर

197
00:13:52,000 --> 00:13:56,320
ये सारी चीजें हैं तो जो ये धर्मेंद्र

198
00:13:56,320 --> 00:14:00,400
हुड्डा हैं ये इस समय बहुत प्रखर विरोध कर रहे हैं रामपाल का

199
00:14:00,400 --> 00:14:05,600
और खबर ये देनी थी मुझे कि

200
00:14:05,600 --> 00:14:09,760
इन इस गैंग ने वही चालू किया जब धर्मेंद्र हुड्डा ने कोई बात

201
00:14:09,760 --> 00:14:14,000
चालू कर दी उन्होंने कहना तो इन्होंने लगा ये फलाने

202
00:14:14,000 --> 00:14:18,160
फैक्ट भाई सचिन फैक्टफुल सचिन और ये युवराज टॉक सब सब बनाने

203
00:14:18,160 --> 00:14:22,320
लगे वीडियो और एक बाढ़ ले आए भाई इनका पूरा गैंग कहां पे है

204
00:14:22,320 --> 00:14:26,720
इनका पूरा गैंग आपको धरातल पे नहीं दिखेगा एक्टिव इनका पूरा गैंग दिखेगा

205
00:14:26,720 --> 00:14:31,440
ऑनलाइन ऑनलाइन शेयर है ये यानी कि वर्चुअल शेयर है ये

206
00:14:31,440 --> 00:14:35,680
डिजिटल क्या कहेंगे इसे वर्चुअल या डिजिटल शेयर कहेंगे तो ऑनलाइन ये

207
00:14:35,680 --> 00:14:39,840
लोग दिखते तो इन्होंने पूरी ऑनलाइन उस पर्सनल वो

208
00:14:39,840 --> 00:14:43,840
करना कमेंट बाजी करना और व्यक्तिगत चीजें और उसका ऐतिहासिक वर्णन यह

209
00:14:43,840 --> 00:14:47,840
सब ले आए। अब आज देखिए उसने उन्होंने क्या किया है हुड्डा

210
00:14:47,840 --> 00:14:52,160
जी ने एक फोटो डाली है उनका

211
00:14:52,160 --> 00:14:56,160
Instagram आईडी है आई एम आई धर्मेंद्र हुड्डा

212
00:14:56,160 --> 00:15:00,320
नाम से है ना फोटो डाली है उसमें वो कुत्ता टहला रहे हैं इन

213
00:15:00,320 --> 00:15:04,480
लोगों ने यह बताया कि उन पर कोई केस है धर्मेंद्र हुड्डा

214
00:15:04,480 --> 00:15:07,840
जी पर जो क्या कहते हैं ये

215
00:15:07,840 --> 00:15:11,920
कुत्ता चोरी करने का तो वो कुत्ता ही टहलाते हुए फोटो डाल रहे और कुत्ते में जो

216
00:15:11,920 --> 00:15:15,920
चेहरा उसने उन्होंने लगाया है रामपाल का चेहरा है।

217
00:15:15,920 --> 00:15:19,920
कुत्ता टहलाने निकले हैं और उसमें रामपाल के

218
00:15:19,920 --> 00:15:24,080
चेहरे को लगाया है। तो मैंने जो कहा था कि भाई जो

219
00:15:24,080 --> 00:15:28,160
रामपाल ने किया है और फिर उसके कारण जो

220
00:15:28,160 --> 00:15:32,240
रामपाल के चेले चपाटी कर रहे हैं। चेले चेलिया कर रहे हैं। हिंदू धर्म का

221
00:15:32,240 --> 00:15:36,240
अपमान कर रहे हैं। साधु संतों का अपमान कर रहे हैं। तो बहुत बड़ी बात नहीं

222
00:15:36,240 --> 00:15:40,320
है। जो बहुत जल्द ऐसी पूरी संभावना है कि इसका अपमान गली-गली में होने

223
00:15:40,320 --> 00:15:44,560
लगेगा और बहुत बुरी तरीके से होगा। अब क्या हो रहा है

224
00:15:44,560 --> 00:15:49,200
कि एक व्यक्ति वो तरुण सैनी कोई आया

225
00:15:49,200 --> 00:15:53,920
और उसने अपमान किया रामपाल का। भाई किस-किस को आप रोक लोगे?

226
00:15:53,920 --> 00:15:57,920
इन्होंने तरुण सैनी के साथ इन लोगों ने क्या किया बाद में वो

227
00:15:57,920 --> 00:16:02,320
तो मैं बताऊंगा। अभी फिलहाल धर्मेंद्र हुड्डा की बात कर रहे हैं। तो

228
00:16:02,320 --> 00:16:06,320
अब धर्मेंद्र हुड्डा आए हैं तो कुत्ता बना के टहला रहे हैं रामपाल को।

229
00:16:06,320 --> 00:16:10,640
अभी आने वाले दिनों में पुतला जलने वाला है रामपाल का कहीं पर।

230
00:16:10,640 --> 00:16:14,640
तो यह सब चीजें हो रही है जिसकी मैंने संभावना

231
00:16:14,640 --> 00:16:19,280
व्यक्त की थी और अ

232
00:16:19,280 --> 00:16:23,040
वो हो रही है। संभावना मैंने व्यक्त की थी।

233
00:16:23,040 --> 00:16:27,360
इसके साथ ही साथ अ एक तरुण सैनी की

234
00:16:27,360 --> 00:16:31,360
बात से मुझे याद आया कि रामपाल अभी अपने कुछ वीडियोस में

235
00:16:31,360 --> 00:16:35,520
कह रहा था कि हमारा जो सतलोक आश्रम है ना वो क्या

236
00:16:35,520 --> 00:16:40,240
कहते हैं? उसकी फैक्ट्री है। धर्म की फैक्ट्री है हमारा सतलोक आश्रम।

237
00:16:40,240 --> 00:16:44,880
तो कोई व्यक्ति यह दिखाए रामपाल

238
00:16:44,880 --> 00:16:49,280
को रामपाल एक तरफ कह रहा है कि हमारा जो आश्रम है सतलोक

239
00:16:49,280 --> 00:16:53,680
आश्रम वो धर्म की फैक्ट्री है वहां से धर्म का निर्माण होता है और वहां से कैसे

240
00:16:53,680 --> 00:16:57,680
लोग निकल रहे हैं कि किसी ने कुछ कह दिया ये कुत्ता चोर है ये ये है

241
00:16:57,680 --> 00:17:02,160
ये है ये सब उनकी लैंग्वेज है ये इंसान

242
00:17:02,160 --> 00:17:06,400
हां वो कह रहे इंसान मानव हम पशु को मानव बनाते हैं हम मानवता

243
00:17:06,400 --> 00:17:10,800
की फैक्ट्री है हमारा सतलोक आश्रम वहां से मानव कैसे निकल रहे हैं बन बन करके

244
00:17:10,800 --> 00:17:15,120
रामपाल के सतलोक आश्रम से जो जो गालियां बकते हैं

245
00:17:15,120 --> 00:17:19,200
जो पर्सनल अटैक करते हैं यदि सैद्धांतिक बात हो रही तो सैद्धांतिक जवाब

246
00:17:19,200 --> 00:17:23,280
नहीं आएगा हमेशा पर्सनल अटैक आएगा तू ये तू वो तू वो तू बड़वा

247
00:17:23,280 --> 00:17:28,080
ये सब आएगा ये नहीं आएगा कि ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं

248
00:17:28,080 --> 00:17:31,600
सर्वव्यापक है कि नहीं

249
00:17:31,600 --> 00:17:35,920
ये सब चीजें नहीं आएंगी या शास्त्र किस परंपरा

250
00:17:35,920 --> 00:17:38,160
से तुम्हारे पास आए जो तुम उसका अपने मन मुताबिक

251
00:17:38,160 --> 00:17:42,400
भाष्य कर रहे हो इन सब तार्किक चीजें पर बात करना तो इनसे दीवार में सर

252
00:17:42,400 --> 00:17:46,480
सर मारना है। पर यह सब बातें कभी नहीं आएगी। क्या आएगा? तू तू यह था तू

253
00:17:46,480 --> 00:17:50,720
कुत्ता चोर था। तेरे पास ये अटैक था मतलब अगर किसी ने रामपाल से पूछ लिया कि तुम तत्वदर्शी

254
00:17:50,720 --> 00:17:54,800
कैसे हो? तो वो बताएंगे भैया इसके ऊपर तो कुत्ता चोरी

255
00:17:54,800 --> 00:17:59,200
का केस चल रहा है। कुत्ता चोरी का केस होने से रामपाल तत्वदर्शी सिद्ध होगा।

256
00:17:59,200 --> 00:18:03,200
यह इनका काम है। और अब

257
00:18:03,200 --> 00:18:07,520
यह जो काम इन्होंने किया इन्होंने नीचता की हद तब हो गई जो रामपाल

258
00:18:07,520 --> 00:18:12,160
की सतलोक सतलोक आश्रम नामक फैक्ट्री है जहां से मानव बनते हैं

259
00:18:12,160 --> 00:18:16,240
तो वहां से कैसे मानव बन के निकले जो राक्षसों से भी नीच है।

260
00:18:16,240 --> 00:18:20,240
क्यों नीचे है राक्षसों उससे भी नीचे है वह वाले इसलिए नीचे है कि

261
00:18:20,240 --> 00:18:24,480
तरुण सैनी ने धार्मिक भावनाएं आहत होने के कारण रामपाल

262
00:18:24,480 --> 00:18:28,480
की फोटो का अपमान किया और इन लोगों ने कहीं से उसकी

263
00:18:28,480 --> 00:18:32,560
पत्नी की फोटो प्राप्त कर ली और इन नीच लोगों

264
00:18:32,560 --> 00:18:36,560
ने उसकी पत्नी के साथ पत्नी की पत्नी का चित्र लगा के

265
00:18:36,560 --> 00:18:40,880
उस लड़के की उसकी पत्नी की फोटो लेकर के उसको नग्न

266
00:18:40,880 --> 00:18:45,200
चित्रों से जोड़ के इतना अपमान किया मतलब

267
00:18:45,200 --> 00:18:49,280
कहने नीचता की हद नहीं है। ऐसे नीच तैयार होते हैं सतलोक

268
00:18:49,280 --> 00:18:53,440
आश्रम में जिसे रामपाल मानव कहता है। मनुष्य उसकी नजरों में मनुष्य वो

269
00:18:53,440 --> 00:18:57,520
है जो ये नीच तैयार हो रहे हैं। अच्छा पत्नी का क्या

270
00:18:57,520 --> 00:19:01,520
दोष था? भाई किया रामपाल के लिए तरुण सैनी ने तो तुम तरुण

271
00:19:01,520 --> 00:19:05,520
सैनिक हो ही। मगर भाई जो राक्षस है जो

272
00:19:05,520 --> 00:19:09,600
नीच है अधर्मी है वो तो यही करेंगे। तरुण सैनी का क्या हुआ कि

273
00:19:09,600 --> 00:19:13,600
उसकी पत्नी कह रही है मुझे डवोर्स चाहिए। उसके घर वाले उसका साथ नहीं दे रहे। उसको

274
00:19:13,600 --> 00:19:18,000
जो है बेचारे को आत्महत्या करने के वो आने लगी भावनाएं

275
00:19:18,000 --> 00:19:22,080
है ना तो ये सारी चीजें हुई है तरुण सैनी के साथ और

276
00:19:22,080 --> 00:19:26,800
अगर हो सका तो किसी दिन मैं तरुण सैनी को लाऊंगा चैनल पर वो अपनी चीजें बताएं आपको

277
00:19:26,800 --> 00:19:31,200
ये सब चीजें तो ये तो था प्री फेस

278
00:19:31,200 --> 00:19:35,200
एक तरीके से आज के वीडियो का यह मुख्य चर्चाएं नहीं थी ये सब अभी तक

279
00:19:35,200 --> 00:19:39,440
का वो था और आप लोग जाकर के देख सकते हैं धर्मेंद्र हुड्डा ने

280
00:19:39,440 --> 00:19:43,440
किस तरीके से रामपाल की उसको कुत्ते के साथ लगाकर करके

281
00:19:43,440 --> 00:19:47,520
और वो फोटो डाली हुई है Instagram पे है ना अब

282
00:19:47,520 --> 00:19:52,960
धर्मेंद्र हुड्डा का भी यह कुछ करेंगे भाई कहीं से पर्सनल अटैक करके और यह वो

283
00:19:52,960 --> 00:19:56,960
हम तो तथ्यात्मक बातें करते हैं वो भी इनको समझ में नहीं आती है हमारे ऊपर तो सबसे

284
00:19:56,960 --> 00:20:01,040
बड़ी फोर्स लगा रखी है कि कोई बस मौका मिल जाए तो

285
00:20:01,040 --> 00:20:05,200
यह केस करवा दे वो केस करवा दे कुछ दिनों पहले हमें चुप कराने के लिए वहां

286
00:20:05,200 --> 00:20:08,560
कोई ज्ञापन देने पहुंच गया कलेक्टेट उसको पता ही नहीं

287
00:20:08,560 --> 00:20:12,560
है मेरे बाबा ने क्या लिख रखा है मैं उसको पूछ रहा हूं कि क्यों तुम्हें मालूम

288
00:20:12,560 --> 00:20:16,720
मालूम है तुम्हारे बाबा की किताब में क्या लिखा है क्या लिखा है तो मैं बता रहा हूं तो उसको मालूम ही नहीं है

289
00:20:16,720 --> 00:20:20,720
तो भेजना ये सारी है तो यह तो था अभी तक

290
00:20:20,720 --> 00:20:24,880
का प्रीफेस अब घोषणा ये है जो मैं शुरू में बता रहा था

291
00:20:24,880 --> 00:20:28,960
जो बताते बताते बात दूसरी ओर चली आई थी मैं घोषणा

292
00:20:28,960 --> 00:20:33,040
करता हूं पर थोड़ा सा पहले शास्त्रवाद जी को चुन सुन ले जी शास्त्रवाद

293
00:20:33,040 --> 00:20:37,680
जी जय श्री राम जी भैया जय श्री राम

294
00:20:37,680 --> 00:20:41,840
जी जय श्री राम आजकल हम लोग भी अपना लाइव

295
00:20:41,840 --> 00:20:45,840
करते हैं जोश में अच्छे-अच्छे इन लोगों को धो रहे हैं। आज

296
00:20:45,840 --> 00:20:49,920
प्रमाणों के साथ आज बहुत दिनों बाद आप लाइव आए हैं रामपाल के

297
00:20:49,920 --> 00:20:54,160
विषय पर। सभी इस इसके लिए बहुत ही एकदम बेसब्री

298
00:20:54,160 --> 00:20:58,800
से इंतजार कर रहे थे क्योंकि तीन दिन से आपका ये लाइव आगे हो रहा था।

299
00:20:58,800 --> 00:21:02,880
जी जी जी नहीं बहुत बढ़िया और मैं

300
00:21:02,880 --> 00:21:06,880
फिर से सबको बता देना चाहता हूं और जितने लोग वीडियोस बना रहे हैं ना

301
00:21:06,880 --> 00:21:10,960
सब लोग ये जो मैंने आज ये आर्डर यहां दिया है इसका डिस्क्रिप्शन है सब लोग इस

302
00:21:10,960 --> 00:21:14,960
आर्डर को ले ले के पढ़िए अपने अपने लाइव में ठीक है

303
00:21:14,960 --> 00:21:18,960
सुनाइए सबको क्लीन चिट बताइए कितनी क्लीन चिट मिली

304
00:21:18,960 --> 00:21:23,040
है रामपाल को कल के लाइव में ये सब भविष्य दिखाएंगे

305
00:21:23,040 --> 00:21:23,680
हां अभी

306
00:21:23,680 --> 00:21:27,760
तो ये लोग तैयारी कर रहे हैं वापस वापस भेजने की अपने आका को

307
00:21:27,760 --> 00:21:32,160
पूरे आसार लग रहे हैं। बहुत जल्द वापस जाने वाला है। नहीं जाएगा।

308
00:21:32,160 --> 00:21:36,720
तो यहां हाई कोर्ट में तो उसका इंतजार है ही। है ना? खैर

309
00:21:36,720 --> 00:21:41,040
अब आते हैं मुख्य घोषणा पर। तो हमारी जो सीरीज चल रही थी जिसमें हम रामपाल

310
00:21:41,040 --> 00:21:45,040
की वो जो गीता का उसने बकवास कर की है गीता के

311
00:21:45,040 --> 00:21:49,120
अर्थ के नाम पर। तो उसको हम लेकर के चल रहे थे। उसमें हम चौथे अध्याय तक

312
00:21:49,120 --> 00:21:53,200
पहुंच गए चौथे अध्याय में शायद 32 वे या 34 वे श्लोक

313
00:21:53,200 --> 00:21:57,280
तक हमने व्याख्या रामपाल की कंपेरेटिवली तुलनात्मक रूप से प्रस्तुत

314
00:21:57,280 --> 00:22:01,920
कर दी थी कि इसने क्या-क्या चुटकुले फेंटसी और

315
00:22:01,920 --> 00:22:06,000
गवरपन की बातें की है वहां पर क्योंकि व्याख्या शब्द व्याख्या जैसे

316
00:22:06,000 --> 00:22:10,240
सम्मानित शब्दों के साथ रामपाल की सामग्री के बारे में बात करना भी

317
00:22:10,240 --> 00:22:14,240
व्याख्या शब्द का ही अपमान है। तो इसलिए वो रामपाल की

318
00:22:14,240 --> 00:22:18,480
जो फेंटसी है और रामपाल का अपना जो वह एक

319
00:22:18,480 --> 00:22:22,720
कपोल कल्पित संसार है जिसमें उसने

320
00:22:22,720 --> 00:22:26,720
कुछ कहानियां गढ़ रखी है वो कहानियां भी ऐसी

321
00:22:26,720 --> 00:22:31,120
नहीं है कि कोई मैच्योर इंटेलेक्चुअल प्रबुद्ध वर्ग देखे वो बच्चे बच्चों

322
00:22:31,120 --> 00:22:35,680
की चटरमटर वाली कहानियां है या फिर फुहड़ अनपढ़ गवार

323
00:22:35,680 --> 00:22:39,120
लोगों की बुद्धि में घुसने वाली वो कहानियां है और ये रामपाल

324
00:22:39,120 --> 00:22:43,440
के चेले चापड़ जो होते हैं वो फुहड़ गवार अनपढ़ ही होते यह रामपाल ने स्वयं

325
00:22:43,440 --> 00:22:47,600
कोट किया है गरमा गीता की में। तो

326
00:22:47,600 --> 00:22:51,680
क्योंकि हम लोग यह सीरीज वहां से कंटिन्यू करने वाले हैं। प्रत्येक मंगलवार की

327
00:22:51,680 --> 00:22:56,160
शाम को आपको यह हमारा जो मेन चैनल है आहान

328
00:22:56,160 --> 00:22:58,800
वहां पर

329
00:22:58,800 --> 00:23:02,880
आपको हर सप्ताह प्रत्येक सप्ताह मंगलवार

330
00:23:02,880 --> 00:23:07,120
की शाम 9:00 बजे से आपको यह व्याख्या मिलेगी। चैप्टर

331
00:23:07,120 --> 00:23:11,440
वाइज हम पूरे 18 चैप्टर तक जाएंगे। कभी कभी ऐसा हो सकता है क्योंकि

332
00:23:11,440 --> 00:23:15,440
युद्ध के मोर्चे पर होते हैं तो ऐसा हो कि स्किप हो जाए। परंतु कोशिश

333
00:23:15,440 --> 00:23:19,680
यही रहेगी कि आपको प्रत्येक मंगलवार की रात को 9:00 बजे यह व्याख्या

334
00:23:19,680 --> 00:23:23,920
मिलती रहे। यह सीरीज भी बहुत आप लोगों के लिए लाभदायक

335
00:23:23,920 --> 00:23:28,000
है क्योंकि उसमें रामपाल ने क्या गुणगोबर किया अपनी किताब में।

336
00:23:28,000 --> 00:23:32,160
रामपाल की बातों बातों की तार्किकता से जांच और

337
00:23:32,160 --> 00:23:36,160
प्रामाणिकता से जांच उसमें है। आप अगर केवल वो कान

338
00:23:36,160 --> 00:23:40,640
में लगा के सुनते जाएंगे आपको बहुत सारा मटेरियल मिलने लगेगा।

339
00:23:40,640 --> 00:23:44,720
जैसे कि हमारे बहुत से योद्धा उस सीरीज को देखकर ही तैयार

340
00:23:44,720 --> 00:23:48,960
हुए हैं। क्यों शास्त्रवाद जी? बिल्कुल बिल्कुल सभी बहुत बहुत

341
00:23:48,960 --> 00:23:53,280
हो चुके हैं। अभी आपको पता है अभी कल ही के लाइव में एक व्यक्ति

342
00:23:53,280 --> 00:23:54,240
हैं प्रेम

343
00:23:54,240 --> 00:23:58,400
प्रेम करके प्रेम भाटी करके ठीक है। वो कल

344
00:23:58,400 --> 00:24:02,640
उनके चैनल पे जाके उनके सभी बड़े-बड़े आकाओं को एकदम धूल चटा

345
00:24:02,640 --> 00:24:06,960
दिया। इतना बढ़िया अब जो भी देखेंगे वो बिल्कुल

346
00:24:06,960 --> 00:24:10,960
जानेंगे सच्चाई क्या है उसमें। वो लोग खो नहीं सका। उनका

347
00:24:10,960 --> 00:24:14,960
जो चेतन भगत भगत है चेतन नाम का है ना और कौन-कौन है? ये लोग सब वहां

348
00:24:14,960 --> 00:24:20,000
से निकल लिए सामने से रास्ता नाप लिए। जी

349
00:24:20,000 --> 00:24:24,320
ऐसेसे लोग अभी तैयार हो मेन चैनल पे मंगलवार

350
00:24:24,320 --> 00:24:26,640
की

351
00:24:26,640 --> 00:24:30,880
साय काल मतलब रात्रि का ही हो जाएगा वो 9:00 बजे से ये चलेगी

352
00:24:30,880 --> 00:24:34,880
4.32 तक हम हो गए हैं। वहां से आगे होगा और जो इस

353
00:24:34,880 --> 00:24:38,960
सीरीज के हर एपिसोड के जो बुलेट पॉइंट्स होते हैं कि उसमें मेनमेन

354
00:24:38,960 --> 00:24:43,040
बातें क्या हुई वो आपको मिलेगी कहां पर? सर्वशक्तिमान ये जो चैनल जिस

355
00:24:43,040 --> 00:24:47,200
पर आप ये लाइव देख रहे हैं यहां पर मिलेगी। तो यह घोषणा बहुत जरूरी थी। इसके

356
00:24:47,200 --> 00:24:51,280
साथ ही साथ यह जो लाइव चलेगी हमारे मेन चैनल पर वहां पर

357
00:24:51,280 --> 00:24:55,360
सदैव ये जो रमलू लोग हैं रामपाल कहेंगे इनके लिए

358
00:24:55,360 --> 00:25:00,240
ओपन रहेगा कि जब मैं अपनी व्याख्या वहां पर पूरी कर लूंगा इस

359
00:25:00,240 --> 00:25:04,560
क्या कहेंगे चूर्ण चूर्ण ज्ञान की जब

360
00:25:04,560 --> 00:25:08,720
विवेचना हो जाएगी तो उसके बाद में अंत में एक दो लोगों से हम लोग जरूर

361
00:25:08,720 --> 00:25:09,680
बात किया करेंगे।

362
00:25:09,680 --> 00:25:13,680
यदि कोई आएगा जिसकी मां ने उसको दूध पिलाया होगा बचपन में निष्ठा पूर्वक

363
00:25:13,680 --> 00:25:17,920
वो आता है यदि रामपाल के ज्ञान की ओर से तो हम उसको

364
00:25:17,920 --> 00:25:22,880
लिया करेंगे वहां पर ओपन ये चर्चा रहेगी उनके लिए

365
00:25:22,880 --> 00:25:26,880
और बुलेट पॉइंट्स आपको सर्वशक्तिमान धर्म पर मिल जाएंगे

366
00:25:26,880 --> 00:25:31,120
अब क्या है कि अभी तक हमने मोटा मोटा क्या जाना

367
00:25:31,120 --> 00:25:35,200
है दूसरे अध्याय से पहले अध्याय पे तो उसने ज्यादा

368
00:25:35,200 --> 00:25:39,280
बात ही नहीं की है वो पहला अध्याय तो उस बाउंस मार गया होगा उसमें क्या वो वो

369
00:25:39,280 --> 00:25:43,440
करेगा व्याख्या। खैर दूसरे अध्याय से उसने व्याख्या

370
00:25:43,440 --> 00:25:47,440
करना चालू किया है। तो हमारा जो पहला एपिसोड आपको मिलेगा उसमें दूसरे अध्याय से

371
00:25:47,440 --> 00:25:51,600
ही व्याख्या शुरू होगी। तो पहला एपिसोड से लेकर

372
00:25:51,600 --> 00:25:55,600
के और जो सात एपिसोड उसमें हुए हैं और

373
00:25:55,600 --> 00:25:59,760
उसमें मोटी मोटी क्या-क्या हास्यास्पद चीजें आई हैं वो हम लोग आज

374
00:25:59,760 --> 00:26:04,080
आपको शेयर करने वाले हैं इस लाइव में। तो बहुत मजेदार चीजें आपको मिलने

375
00:26:04,080 --> 00:26:09,680
वाली हैं। आप लोग बने रहें और कुर्सी की पेटियां बांध लें।

376
00:26:09,680 --> 00:26:11,920
तो

377
00:26:11,920 --> 00:26:15,920
सबसे पहले

378
00:26:15,920 --> 00:26:19,920
सबसे पहले तो मैं ऑपरेटर महोदय को कहूंगा कि

379
00:26:19,920 --> 00:26:24,640
जो इनका गीता तेरा ज्ञान अमृत है उसको जरा यहां पर डिस्प्ले

380
00:26:24,640 --> 00:26:30,080
कर दें।

381
00:26:30,080 --> 00:26:34,160
एक रिकैप आज हम लोग कर रहे हैं। वह जो सीरीज वहां पर चल चुकी है छ

382
00:26:34,160 --> 00:26:38,800
सात एपिसोड की और अंत में एक दो लोगों के लिए

383
00:26:38,800 --> 00:26:42,880
ये लिंक भी दिया जाएगा। यदि कोई आता है जिसकी मां ने उसको दूध पिलाया

384
00:26:42,880 --> 00:26:47,120
होगा निष्ठा पूर्वक और वो यहां आकर के चीजें प्रस्तुत कर सकता है।

385
00:26:47,120 --> 00:26:51,120
रामपाल की ओर से तो उसका स्वागत करेंगे हम लोग।

386
00:26:51,120 --> 00:26:53,760
है ना?

387
00:26:53,760 --> 00:26:57,760
तो भाई ऑपरेटर जी जरा वो गीता 13 ज्ञान अमृत

388
00:26:57,760 --> 00:27:02,000
का पष्ठ क्रमांक 17

389
00:27:02,000 --> 00:27:06,640
वो आप खोल लीजिए सबसे पहले तो मैं

390
00:27:06,640 --> 00:27:10,720
17व पष्ठ से तब तक आप कुछ कहना चाहे तो बताइए तब तक खोलेंगे मेरे ख्याल

391
00:27:10,720 --> 00:27:14,800
से वो जी शास्त्रवाद जी आप कुछ कहना चाहे तो आप बता

392
00:27:14,800 --> 00:27:18,800
सकते जी जी आप वो सीरीज जो

393
00:27:18,800 --> 00:27:23,040
है वो कंटिन्यू हो रही है सभी एकदम अच्छे से देखें इस पूरे

394
00:27:23,040 --> 00:27:27,440
सीरीज में किस प्रकार से धज्जियां उड़ जाएगी। अब उसकी अब सच्चाई

395
00:27:27,440 --> 00:27:33,440
सामने आने वाली है एक-एक करके। जी

396
00:27:36,160 --> 00:27:40,320
आ गई है स्क्रीन पे आपकी। ये हां जी। तो इसका 17वा ये

397
00:27:40,320 --> 00:27:46,320
जैसे 10 दवा प्रश्न है ना इसका 17वा प्रश्न लाइए आप।

398
00:27:57,040 --> 00:27:59,920
वैसे तो इसने

399
00:27:59,920 --> 00:28:05,200
हर प्रत्येक पष्ठ पर कुछ ना कुछ गुण गोबर कर रखा है। पर मैं

400
00:28:05,200 --> 00:28:09,280
जैसे हीरा चुनते हैं ना ऐसे करके कोशिश करूंगा कि आपको हीरा चुन चुन के दूं।

401
00:28:09,280 --> 00:28:13,520
प्रत्येक पृष्ठ शेष का कि यहां से आपको क्या लेना है। तो 17व पृष्ठ

402
00:28:13,520 --> 00:28:17,520
पर जो हीरा मुझे प्राप्त हुआ है वह आप जाइए सबसे लास्ट

403
00:28:17,520 --> 00:28:23,520
पैराग्राफ सेकंड लास्ट पैराग्राफ विशेष विवेचन

404
00:28:25,120 --> 00:28:29,760
ये 17वा प्रश्न है क्या?

405
00:28:29,760 --> 00:28:33,840
ये तो शंका समाधान चल रहा है। शंका समाधान कैसे

406
00:28:33,840 --> 00:28:38,080
चलेगा? गीता तेरा ज्ञान अमृत खोला है या

407
00:28:38,080 --> 00:28:43,200
गरिमा गीता की खोलना है गलती हो गई गरिमा गीता की

408
00:28:43,200 --> 00:28:47,920
जी शास्त्र जी तब तक आप बोले जी जी

409
00:28:47,920 --> 00:28:51,920
अभी सभी देखने को बहुत उत्सुक है हम भी बहुत उत्सुक है कि आखिर अब

410
00:28:51,920 --> 00:28:56,000
क्या निकलने वाला है विस्फोटक [हंसी] इसने तो ऐसा

411
00:28:56,000 --> 00:29:00,480
कर रखा है ना रामपाल के संबंध

412
00:29:00,480 --> 00:29:04,640
में कोई खंडनार्थ कुछ लिखना या

413
00:29:04,640 --> 00:29:09,120
कुछ छपवाना बुक हालांकि छपवाएंगे मगर

414
00:29:09,120 --> 00:29:13,200
उसमें एक समस्या यह है कि इसने इतना कचरा किया है कि शुरू करें

415
00:29:13,200 --> 00:29:17,280
तो कहां से करें? [हंसी] कौन सी बात को पकड़ के चालू

416
00:29:17,280 --> 00:29:21,600
करें? तो ये बड़ी दिक्कत होती है। है ना?

417
00:29:21,600 --> 00:29:25,840
जैसे वो एक डायलॉग था ना एक फिल्म में एक डायलॉग था

418
00:29:25,840 --> 00:29:30,000
कि मैं तुझे वो मार मारूंगा। मैं तुझे वो मार मारूंगा कि

419
00:29:30,000 --> 00:29:34,880
दर्द भी परेशान हो जाएगा कि उठे तो कहां से उठे।

420
00:29:34,880 --> 00:29:39,040
इसने ऐसा रायता फैलाया है, ऐसा झूठ

421
00:29:39,040 --> 00:29:40,480
बोला है, इतनी गप्पे

422
00:29:40,480 --> 00:29:44,560
मारी है कि यह तय करना बड़ा कठिन

423
00:29:44,560 --> 00:29:48,720
हो जाता है कि इसके कौन से झूठ को लेकर के आगे बढ़ा जाए। किसको

424
00:29:48,720 --> 00:29:53,600
बेस बनाया जाए? जिसको बेस बना लेते हो उसके उसके

425
00:29:53,600 --> 00:29:58,400
उसके कंपैरिजन में कोई और नया झूठ तगड़ा आ जाता है। क्या करोगे?

426
00:29:58,400 --> 00:30:02,560
हां। इसका 17वा प्रश्न निकालिए। गरिमा गीता

427
00:30:02,560 --> 00:30:06,800
की

428
00:30:06,800 --> 00:30:10,960
तो गरिमा गीता की वह किताब है जिसमें इसने चैप्टर वाइज

429
00:30:10,960 --> 00:30:15,040
गीता पर बात की है श्लोक के साथसाथ अच्छा कुछ बड़े

430
00:30:15,040 --> 00:30:19,280
प्रश्न आपको सदैव ध्यान देने चाहिए जो आान ने ल्च किए

431
00:30:19,280 --> 00:30:25,280
हैं। अगर

432
00:30:25,840 --> 00:30:30,320
क्या कहते हैं? व्यापक रूप से देखा जाए तो तीन प्रश्न क्या रामपाल

433
00:30:30,320 --> 00:30:34,560
का ईश्वर सर्वशक्तिमान है? क्या उसके द्वारा बताया जाने वाला धर्म शाश्वत है?

434
00:30:34,560 --> 00:30:39,040
मिलने वाला जो मोक्ष है वो परम स्वतंत्र है? ये तो व्यापक प्रश्न हो गए।

435
00:30:39,040 --> 00:30:43,360
और रामपाल विशेष को लेकर के कुछ प्रश्न ल्च किए हैं। जैसे रामपाल तत्वदर्शी

436
00:30:43,360 --> 00:30:48,160
कैसे? है ना? और

437
00:30:48,160 --> 00:30:50,720
यह

438
00:30:50,720 --> 00:30:54,880
रामपाल कहता है कि जो कबीर है वो

439
00:30:54,880 --> 00:30:58,880
भगवान है और कबीर को कबीर बताता है तो पहली बात तो

440
00:30:58,880 --> 00:31:03,200
कबीर का कहां पर ये उल्लेख है कि कबीर जो है कबीर होता है।

441
00:31:03,200 --> 00:31:07,520
दूसरी बात ये है कि कबीर अगर कबीर कबीर कबीर कवि

442
00:31:07,520 --> 00:31:11,600
कबीर होता है भगवान है जो कि तो उसका भी कबीरों का कबीर कौन

443
00:31:11,600 --> 00:31:16,000
है? वो गणपति महाराज है। यह भी हमने वेद से प्रमाण दिया है।

444
00:31:16,000 --> 00:31:20,800
शायद दो 23 एक है ऋग्वेद का। तो ये हो गया

445
00:31:20,800 --> 00:31:25,200
और इसके बाद रामपाल के ऊपर

446
00:31:25,200 --> 00:31:29,280
बहुत मोटे मोटे प्रश्न है कि जैसे उसने कहा कि जो काल है वो

447
00:31:29,280 --> 00:31:33,600
मन है। तो काल यदि मन है तो

448
00:31:33,600 --> 00:31:37,920
काल निराकार हो गया। जबकि वो आकार वाला है काल। वो अपना वो दिखाता

449
00:31:37,920 --> 00:31:40,960
नहीं है किसी को। अच्छा एक बात और है ये लोग कहते

450
00:31:40,960 --> 00:31:45,200
हैं कि काल का एक वो है नियम कि वो किसी को दिखाएगा

451
00:31:45,200 --> 00:31:49,440
नहीं और ये उसका घटिया नियम है। है ना काल का इसमें

452
00:31:49,440 --> 00:31:54,400
घटियापन क्या है ये मैं समझ नहीं पाया आज तक क्या घटियापन है इसमें

453
00:31:54,400 --> 00:31:57,680
भाई

454
00:31:57,680 --> 00:32:01,680
और वो लोग आज तक अनुत्तम को भी नहीं अनुत्तम को वो

455
00:32:01,680 --> 00:32:05,920
लोग बोलते हैं ना घटिया घटिया बोलते हैं ना बार बार आज तक ये सिद्ध नहीं कर पाए कि भाई वो घटिया

456
00:32:05,920 --> 00:32:10,080
कैसे है हां वो घटिया कैसे है क्या चीज है उसमें ऐसी

457
00:32:10,080 --> 00:32:14,080
घटिया जिससे घृणा हो जाए घटिया अरे छी छ ऐसी वो भावना

458
00:32:14,080 --> 00:32:18,480
कैसे आ रही विस्मयाद बोधक पढ़ा है क्या ग्रामर पढ़ी है थोड़ी बहुत

459
00:32:18,480 --> 00:32:22,960
विस्मयादि बोधक शब्द है ना घटिया तो ये विस्मय

460
00:32:22,960 --> 00:32:27,120
क्या आ रहा है इसमें कि उसने जो तपत ले ली अरे छी छ जी वो घटियापन कहां

461
00:32:27,120 --> 00:32:31,120
से आ रहा है कि घृणा हो जाए ये है इसके

462
00:32:31,120 --> 00:32:35,120
बाद एक मोटा सवाल है कि जब काल के द्वारा कही

463
00:32:35,120 --> 00:32:39,200
हुई काल जो है विश्वास के पात्र विश्वास का पात्र पात्र नहीं है तो

464
00:32:39,200 --> 00:32:43,280
फिर काल के द्वारा कहे हुए किसी भी वचन को हम प्रमाण कैसे मान रहे हैं? फिर

465
00:32:43,280 --> 00:32:47,920
हम यह क्यों कह रहे हैं? जो यह कह रहा है कि गीता काल ने बोली है

466
00:32:47,920 --> 00:32:52,560
और काल जो है फर्जी व्यक्ति है तो फर्जी व्यक्ति है तो उसके द्वारा

467
00:32:52,560 --> 00:32:56,000
माना जो उसके उसने कुछ कहा है उनके आधार पर हम ये कैसे

468
00:32:56,000 --> 00:33:00,000
कह सकते हैं ये भगवान नहीं है भगवान? समझ रहे हो? यह भी एक प्रश्न

469
00:33:00,000 --> 00:33:04,000
है जो और एक मोटा प्रश्न बहुत लोगों से पूछ चुका हूं

470
00:33:04,000 --> 00:33:08,080
कि भाई तुमने कहा है कि भैया गीता में

471
00:33:08,080 --> 00:33:12,160
5% ज्ञान जो है वो काल ने अपना दे दिया है हालांकि तुम सब जगह यही कहते हो

472
00:33:12,160 --> 00:33:16,560
कहीं पर अगर ऋषियों का वो होगा यहां ऋषियों ने अपना मंतव्य दे दिया

473
00:33:16,560 --> 00:33:20,640
तो वो 5% श्लोक कौन-कौन से हैं आज तक किसी ने बताया

474
00:33:20,640 --> 00:33:24,640
नहीं 35 श्लोक होने चाहिए है ना अगर 700 श्लोकों

475
00:33:24,640 --> 00:33:28,800
की भगवत गीता है तो 35 श्लोक होने चाहिए तुम 35 35

476
00:33:28,800 --> 00:33:32,800
नहीं तुमने आज तक डिक्लेअ ही नहीं किया कि 35 श्लोक कौन से हैं

477
00:33:32,800 --> 00:33:37,120
जो जो काल ने अपने लिए कहे हैं और बाकी के कौन से हैं ये तुमने नहीं बताया

478
00:33:37,120 --> 00:33:41,280
तो ये कुछ मोटी मोटी चीजें हैं और भी आपको मिल जाएंगी तो अब मैं पृष्ठ वाइज

479
00:33:41,280 --> 00:33:45,600
चल रहा हूं इसमें आप नीचे आ जाइए हां विशेष

480
00:33:45,600 --> 00:33:49,600
विवेचन तो इसमें इसने क्या लिखा है

481
00:33:49,600 --> 00:33:53,840
भांग पी के लिखा है कि कैसे लिखा है मैं नहीं बता सकता भांग पीता है रामपाल

482
00:33:53,840 --> 00:33:58,080
कि नहीं पीता ये भी मैं नहीं बता सकता मगर यह

483
00:33:58,080 --> 00:34:02,320
उसने लिखा है कि

484
00:34:02,320 --> 00:34:06,800
गीता अध्याय दो के श्लोक 16 में वर्णन है कि असत यानी नाशवान

485
00:34:06,800 --> 00:34:10,880
का अस्तित्व चिर काल तक नहीं रहता है। देखिए दो 16 में एक सिद्धांत

486
00:34:10,880 --> 00:34:15,600
स्पष्ट किया गया है। वो सिद्धांत है कि

487
00:34:15,600 --> 00:34:19,680
असत का कभी भाव नहीं होता और सत का कभी अभाव नहीं

488
00:34:19,680 --> 00:34:24,160
होता। ठीक है? तो यानी कि अनंत

489
00:34:24,160 --> 00:34:28,720
रूप से जो शेष रह जाए अनंत जीवन वाला

490
00:34:28,720 --> 00:34:32,720
हो जाए वो वही [गला साफ़ करने की आवाज़] हो सकता है जो कभी जन्मा ना हो। इस

491
00:34:32,720 --> 00:34:37,040
बात को समझ गए आप? जिसका कभी जन्म नहीं हुआ है

492
00:34:37,040 --> 00:34:41,440
वही ऐसे मोक्ष को प्राप्त कर सकता है। ऐसी गति को प्राप्त कर सकता है

493
00:34:41,440 --> 00:34:45,440
जो अनंत काल तक रहे। ठीक है? अब हमें मोक्ष कौन

494
00:34:45,440 --> 00:34:49,440
सा चाहिए? अनंत। जीव को मोक्ष कौन सा चाहिए? अनंत। उसको अनंत

495
00:34:49,440 --> 00:34:54,480
काल तक जीवित रहना यह मोक्ष है। तो अब यह क्या कह रहा है

496
00:34:54,480 --> 00:34:58,480
कि एक समय ऐसा था तब केवल परमात्मा था। आत्मा

497
00:34:58,480 --> 00:35:02,800
थी ही नहीं। यानी कि आत्मा को उत्पन्न किया है परमात्मा ने।

498
00:35:02,800 --> 00:35:07,040
जीव को। देखिए यहां चौथी लाइन पे आइए। उस

499
00:35:07,040 --> 00:35:12,560
अविनाशी परमात्मा का अभाव किसी समय नहीं होता।

500
00:35:12,560 --> 00:35:17,520
ठीक है?

501
00:35:17,520 --> 00:35:22,080
अ चिर काल तक नहीं रहता। उस अविनाशी

502
00:35:22,080 --> 00:35:26,320
परमात्मा का अभाव किसी समय नहीं होता। गीता अध्याय दो श्लोक

503
00:35:26,320 --> 00:35:30,560
17 में उसी अविनाशी परमात्मा की महिमा बताई गई है। परमात्मा के अतिरिक्त

504
00:35:30,560 --> 00:35:34,880
कोई भी नित्य नहीं है। लो क्या बोला? परमात्मा

505
00:35:34,880 --> 00:35:38,880
के अतिरिक्त कोई भी नित्य नहीं है। क्योंकि आत्मा की उत्पत्ति

506
00:35:38,880 --> 00:35:43,200
परमात्मा ने ही की है। इसका मतलब यह है कि आत्मा

507
00:35:43,200 --> 00:35:48,480
नित्य नहीं है। तो जो नित्य नहीं है यानी कि जो

508
00:35:48,480 --> 00:35:52,560
उत्पन्न हो रही है। उसका नाश निश्चित है। इसी श्लोक

509
00:35:52,560 --> 00:35:56,640
के आधार पर क्योंकि जो उत्पन्न हो रही है यानी कि एक

510
00:35:56,640 --> 00:36:00,880
समय ऐसा था जब उसका अभाव था। यानी वो असत है। तो असत का कभी

511
00:36:00,880 --> 00:36:05,040
भाव नहीं होता। यही पे कहा ना दो 16 में असत का कभी भाव नहीं होता

512
00:36:05,040 --> 00:36:09,280
और सत का कभी अभाव नहीं होता। तो परमात्मा तो हमेशा से था। ये बात ठीक है।

513
00:36:09,280 --> 00:36:13,360
मगर आत्मा के लिए इन्होंने क्या कह दिया? आत्मा को उसने उत्पन्न किया है। तो तुम्हें मोक्ष

514
00:36:13,360 --> 00:36:17,520
कभी मिल ही नहीं सकता। जिस मोक्ष के लिए भूखे होकर

515
00:36:17,520 --> 00:36:21,680
के तुम जो है दुनिया को नोच रहे हो, दुनिया के

516
00:36:21,680 --> 00:36:25,760
भावनाओं से खेल रहे हो, मोक्ष के नाम पर वो मोक्ष यहां पर आपका खत्म

517
00:36:25,760 --> 00:36:29,760
हो गया। क्योंकि आपने मान लिया आत्मा को उत्पन्न किया है परमात्मा

518
00:36:29,760 --> 00:36:32,640
ने। और जब उत्पन्न किया है तो इसका मतलब

519
00:36:32,640 --> 00:36:36,640
है उसका कभी भाव नहीं हो सकता क्योंकि अभाव था उसका एक समय पर तो असत हो

520
00:36:36,640 --> 00:36:40,640
गई। असत हो गई तो अनंत काल तक उसका भाव नहीं हो सकता। और यहां मान ही

521
00:36:40,640 --> 00:36:44,720
लिया उसने कि वो नित्य नहीं है। मतलब थी है और रहेगी ऐसा नहीं। एक समय

522
00:36:44,720 --> 00:36:49,520
था जब वो नहीं थी तो इसका मतलब एक समय फिर आएगा जब वो फिर से नहीं होगी।

523
00:36:49,520 --> 00:36:53,840
ठीक है? ये 17व पृष्ठ का एक मोटा उदाहरण है।

524
00:36:53,840 --> 00:36:57,840
और आगे हां आगे अगले पन्ने पर 18 वे

525
00:36:57,840 --> 00:37:03,750
पष्ठ पे आ जाते हैं। एक मोटी चीज दिखा दिखाता चलूं।

526
00:37:03,750 --> 00:37:09,750
[गला साफ़ करने की आवाज़]

527
00:37:11,120 --> 00:37:15,280
भगवत गीता दो6 में कहा गया है कि सत्य का कभी अभाव नहीं होता।

528
00:37:15,280 --> 00:37:19,440
असत का कभी भाव नहीं होता। ठीक है? और

529
00:37:19,440 --> 00:37:24,000
ये जो रहस्य जानता है उसको तत्वदर्शी कहते हैं। ठीक है?

530
00:37:24,000 --> 00:37:28,080
जो जो इस रहस्य को जानता है उसको तत्वदर्शी कहते हैं। यानी

531
00:37:28,080 --> 00:37:32,640
कि जो गीता को बोल रहा है जिसने

532
00:37:32,640 --> 00:37:36,640
दूसरे अध्याय का 16वा श्लोक बोला है वो ये जानता है तभी तो

533
00:37:36,640 --> 00:37:40,640
बोल रहा है कि सत्य का कभी अभाव नहीं होता। असत का कभी भाव नहीं होता। जानता

534
00:37:40,640 --> 00:37:44,720
है तभी तो बोल रहा है। तो जानता है तो इस श्लोक के आधार पर वो भी तत्वदर्शी

535
00:37:44,720 --> 00:37:48,880
सिद्ध होता है। कौन? जो गीता को बोल रहा है। तो

536
00:37:48,880 --> 00:37:53,040
यहां पर वो तत्वदर्शी सिद्ध हो गया। देखिए गीता अध्याय दो श्लोक 16 में कहा है कि सत

537
00:37:53,040 --> 00:37:57,360
का सत तथा असत को ततशी संत ही ठीक-ठाक बताते हैं।

538
00:37:57,360 --> 00:38:02,000
उन्होंने दोनों को देखा है। देखिए नीचे आइए जरा

539
00:38:02,000 --> 00:38:06,240
सेकंड पैराग्राफ है ना बड़ा सा दोनों अनुवाद सबसे पहला अक्षर है। हां इसमें

540
00:38:06,240 --> 00:38:10,240
नीचे आइए लास्ट की दो लाइन है। इस पैराग्राफ की लास्ट की दो लाइन है। ये दिखा

541
00:38:10,240 --> 00:38:14,400
दीजिए इन्हें। यह देखिए गीता अध्याय दो श्लोक

542
00:38:14,400 --> 00:38:18,640
16 में कहा है कि सत तथा असत को तत्वदर्शी

543
00:38:18,640 --> 00:38:22,800
संत ही ठीकठाक बताते हैं और उनके बारे में क्या ठीक-ठाक बताना है कि सत

544
00:38:22,800 --> 00:38:26,320
का कभी अभाव नहीं होता और असत का कभी भाव नहीं होता। इस तरीके

545
00:38:26,320 --> 00:38:31,440
से गीता कहने वाला यहां पे तत्वदशी सिद्ध है। ठीक है?

546
00:38:31,440 --> 00:38:37,440
अम् अब आगे चलते हैं।

547
00:38:39,680 --> 00:38:45,680
कोई मोटी चीज मुझे दिखाई देगी तो मैं आपको बताता हूं।

548
00:38:46,480 --> 00:38:50,640
अच्छा देखिए हां एक बहुत अच्छी चीज हाथ लगी है। 20 वे प्रश्न

549
00:38:50,640 --> 00:38:54,640
पर आप देखिए ये दूसरा अध्याय चल रहा है। गरिमा गीता

550
00:38:54,640 --> 00:39:00,640
का प्रश्न संख्या 20

551
00:39:03,120 --> 00:39:08,320
प्रश्न संख्या 20 में कहा जा रहा है दूसरे पैराग्राफ में

552
00:39:08,320 --> 00:39:12,640
सर्वव्यापक पूर्ण परमात्मा आत्मा के साथ ऐसे रहता

553
00:39:12,640 --> 00:39:15,760
है जैसे

554
00:39:15,760 --> 00:39:20,080
जैसे वायु में गंध रहती है मतलब परमात्मा के साथ रहता

555
00:39:20,080 --> 00:39:24,160
है और आगे भी इसने कई जगह कहा है कि परमात्मा

556
00:39:24,160 --> 00:39:28,160
आत्मा के साथ रहता है हमेशा ठीक है तो आत्मा

557
00:39:28,160 --> 00:39:32,720
त्मा के साथ जब परमात्मा रहता है और ये लोग क्या कहते हैं 1866 में

558
00:39:32,720 --> 00:39:36,720
कि भैया उसने परमात्मा के पास जाने को कहा है परमात्मा के पास

559
00:39:36,720 --> 00:39:40,880
जाने को कहा है अपने से भिन्न किसी तो भाई आत्मा तो परमात्मा के साथ

560
00:39:40,880 --> 00:39:45,520
ही थी सदैव थी है ना

561
00:39:45,520 --> 00:39:49,680
आत्मा और इसने यहां पे माना भी है कि परमात्मा के साथ रहने

562
00:39:49,680 --> 00:39:53,760
के कारण आत्मा नित्य है। परमात्मा के साथ रहने के

563
00:39:53,760 --> 00:39:58,000
जितनी देर परमात्मा के साथ है तो उसके कारण परमात्मा भी अविनाशी

564
00:39:58,000 --> 00:40:02,080
है और परमात्मा अविनाशी है सदैव तो इसका मतलब सदैव परमात्मा

565
00:40:02,080 --> 00:40:06,080
उसके साथ है तो परमात्मा जब उसके साथ है तो फिर अब कौन सा

566
00:40:06,080 --> 00:40:10,160
परमात्मा था जिसके पास वो जा रहा है भाई हमारी व्याख्या तो तुमने मानी नहीं

567
00:40:10,160 --> 00:40:14,160
है जैसे हम लोग बात करते हैं कोई आकर के बोला कि मुझे जो है ईश्वर

568
00:40:14,160 --> 00:40:18,400
को जानना है अब मान लीजिए मुझे जो है शिवश नारायण द्विवेदी से मिलना है किसी

569
00:40:18,400 --> 00:40:22,560
ने कहा और मैं ही शिवश नारायण द्विवेदी हूं मैंने कि वो

570
00:40:22,560 --> 00:40:27,040
वो ऐसा है। उसके दो हैं। वो ऐसे कपड़े पहनता है। वो ऐसा करता है। मैंने शिवश

571
00:40:27,040 --> 00:40:31,120
नारायण द्विवेदी के बारे में वो और क्या-क्या जानता है या नहीं

572
00:40:31,120 --> 00:40:35,200
जानता है तो मैं उसे और क्या-क्या बता सकता हूं। ये सब बातें की। तो जब मैं ये सब

573
00:40:35,200 --> 00:40:39,200
बातें करूंगा तो उस समय शिवश नारायण द्विवेदी के बारे में मैं जो

574
00:40:39,200 --> 00:40:43,600
बातें बोलूंगा वो थर्ड पर्सन के रूप में उसे रखते हुए बोलूंगा।

575
00:40:43,600 --> 00:40:47,600
अब ये लोग ऐसे तो मानेंगे नहीं। इनको चाहिए सबूत। तो सबूत

576
00:40:47,600 --> 00:40:52,240
में हमारे पास क्या है? रामपाल खुद जाकर के ढोक लगा रहा है

577
00:40:52,240 --> 00:40:56,560
कबीर की जब वो खुद कबीर का अवतार है तो ढोक किसकी लगा रहा है दंडवत किसको हो रहा है

578
00:40:56,560 --> 00:41:00,560
क्यों कह रहा है अच्छा कह रहा है मैं तो कुत्ता हूं कुत्ते की तरीके से हूं ये

579
00:41:00,560 --> 00:41:04,560
रामपाल कह रहा है तो ये क्यों कह रहा है भाई वो तो कबीर ही

580
00:41:04,560 --> 00:41:08,800
है तो अपने आप को कुत्ता क्यों कह रहा है अच्छा और बता दूं कबीर

581
00:41:08,800 --> 00:41:12,800
ने भी एक जगह कहा है कि मैं मैं तो कुत्ता राम का चलो ठीक है वो भी

582
00:41:12,800 --> 00:41:16,800
छोड़ दो तुम उसमें अप्रमाण घुसेड़ दो मगर जो रामपाल की ज्ञान गंगा

583
00:41:16,800 --> 00:41:21,280
है उसी में कबीर खुद कह रहे हैं

584
00:41:21,280 --> 00:41:25,440
कि विष्णु के अवतार श्री कृष्ण भगवान हैं। पष्ठ

585
00:41:25,440 --> 00:41:29,840
संख्या 30 पे शायद ये बात रामपाल की किताब

586
00:41:29,840 --> 00:41:33,600
कबीर का उसमें वचन और उसमें लिखा हुआ है कि भगवान

587
00:41:33,600 --> 00:41:38,080
श्री कृष्ण ही अवतार है। ये इसमें नहीं है वो ज्ञान गंगा में।

588
00:41:38,080 --> 00:41:42,320
ठीक है? तो [गला साफ़ करने की आवाज़] परमात्मा यदि आत्मा

589
00:41:42,320 --> 00:41:46,480
के साथ सदैव है और आत्मा परमात्मा के साथ रहती

590
00:41:46,480 --> 00:41:51,040
इसलिए अविनाशी है और क्योंकि आत्मा अविनाशी है तो ये मानना पड़ेगा कि उसके साथ

591
00:41:51,040 --> 00:41:55,280
परमात्मा सदैव है तो परमात्मा जब सदैव है आत्मा

592
00:41:55,280 --> 00:41:59,760
के साथ तो फिर कहां जाने को कह रहा था तुम्हारा बाबा जी

593
00:41:59,760 --> 00:42:03,840
हां ठीक है तो ये बात हो गई 20

594
00:42:03,840 --> 00:42:07,760
वे प्रश्न से

595
00:42:07,760 --> 00:42:11,760
देखिए देखिए इसी में आ गया परमात्मा सदा आत्मा के

596
00:42:11,760 --> 00:42:16,080
साथ अभेद रूप से रहता है। नीचे सबसे लास्ट पैराग्राफ

597
00:42:16,080 --> 00:42:20,880
लाइए

598
00:42:20,880 --> 00:42:25,200
इसी प्रश्न में। हां ये देखिए इस परमात्मा

599
00:42:25,200 --> 00:42:29,200
को लास्ट पैराग्राफ का अ

600
00:42:29,200 --> 00:42:33,760
सेकंड लाइन है अंत की ओर से इस परमात्मा को

601
00:42:33,760 --> 00:42:37,760
जो आत्मा के साथ अभेद रूप से रहता है बस हो

602
00:42:37,760 --> 00:42:41,920
गया आत्मा के साथ अभेद रूप से रहता

603
00:42:41,920 --> 00:42:46,080
है जिससे आत्मा विनाश रहित है प्रमाण हो गया तो परमात्मा

604
00:42:46,080 --> 00:42:50,400
सदैव आत्मा के साथ ही था यानी कि अर्जुन के साथ ही था तो फिर कौन से परमात्मा

605
00:42:50,400 --> 00:42:54,400
के पास जाने को कह रहा था इनका परमात्मा तो वो कह रहा था हमारे गणपति

606
00:42:54,400 --> 00:42:58,720
महाराज के लिए ऋग्वेद में जिनका वर्णन है दो 23 एक में जो कबीरों

607
00:42:58,720 --> 00:43:02,880
का कबीर है इनके हिसाब से कबीर का मतलब कबीर है तो कबीर का

608
00:43:02,880 --> 00:43:07,120
कबीरों का कबीर यानी कबीरों का भी परमात्मा कौन है वो है गणेश जी

609
00:43:07,120 --> 00:43:11,120
तो यहां पर इनका जो परमात्मा है रमलुओं का वो परमात्मा गणेश

610
00:43:11,120 --> 00:43:15,200
जी के पास जाने को कह रहा है इनकी ही इन्होंने जो रायता

611
00:43:15,200 --> 00:43:19,440
फैलाया है उसी में भिगो करके इनका जूता इनहीं के मुंह पर ठीक है

612
00:43:19,440 --> 00:43:21,920
इसको कहते हैं मार

613
00:43:21,920 --> 00:43:25,920
इसको कहते हैं मार कि दर्द भी परेशान हो जाए कि उठे तो कहां

614
00:43:25,920 --> 00:43:27,120
से उठे क्यों

615
00:43:27,120 --> 00:43:30,240
शास्त्र जी

616
00:43:30,240 --> 00:43:33,440
जी बिल्कुल

617
00:43:33,440 --> 00:43:37,600
बिल्कुल यहां तो अभेद भी बता दिया तो इससे तो

618
00:43:37,600 --> 00:43:42,080
एकत्व भी तो मान लिया भाई एकत्व भी तो है यहां पर अद्वैत

619
00:43:42,080 --> 00:43:46,320
की बात आ गई ये ऐसी खिचड़ी है ना रामपाल

620
00:43:46,320 --> 00:43:50,880
की वो देखा था पवन दास से मैंने पूछा था कंधा खत्म हो रहा है उसके बाद स्पेस किसने बनाया

621
00:43:50,880 --> 00:43:54,880
भाग गया। मैं तो आग में कूदूंगा।

622
00:43:54,880 --> 00:43:58,960
मैंने उससे कहा था जब सृष्टि रचना की कबीर ने

623
00:43:58,960 --> 00:44:03,040
तो जहां वो खड़ा है क्योंकि कबीर शरीर ही है इनके हिसाब

624
00:44:03,040 --> 00:44:08,400
से सशरीर है। तो जहां वो खड़ा है वो स्पेस किसने बनाया?

625
00:44:08,400 --> 00:44:12,400
अब अब जो है पवन दास ढीले पड़े। अब पवन दास

626
00:44:12,400 --> 00:44:16,480
ने कहा मैं तो आग में कूदूंगा। मेरा परमात्मा सच्चा होगा

627
00:44:16,480 --> 00:44:20,640
तो मुझे बचाने आ जाए। तो भाई तुम यह बोलो ना फिर तुम ये

628
00:44:20,640 --> 00:44:24,640
बोलो ना कि मेरा परमात्मा सच्चा इसलिए क्योंकि मैं आग में कूदता हूं तो

629
00:44:24,640 --> 00:44:28,640
आ जाता है। ये क्यों बोलते हो वेदों में प्रमाण है फलाना ढिंका ये क्यों

630
00:44:28,640 --> 00:44:32,960
बोलते हो ये बंद करो सिंपल हमारी लड़ाई तो यही पे है ना

631
00:44:32,960 --> 00:44:38,960
अच्छा

632
00:44:43,760 --> 00:44:48,400
अब आगे हम चलते हैं।

633
00:44:48,400 --> 00:44:52,400
देखो श्लोक 28 में इसने मान लिया है कि जो

634
00:44:52,400 --> 00:44:56,560
प्राणी है जन्म के पहले भी थे मरने के बाद भी रहेंगे। ये क्या

635
00:44:56,560 --> 00:45:00,720
पागल है कि नहीं? मैंने कहा था ना इसने इतना पागलपन किया

636
00:45:00,720 --> 00:45:04,880
है कि हर बात को पढ़ के मन करता है कहीं मिल जाए तो इसके पहले तो

637
00:45:04,880 --> 00:45:09,120
चार पांच ये किताब इसके मुंह पे मारे। क्या

638
00:45:09,120 --> 00:45:13,440
लिखा है इसने? अभी कह रहा है कि एक समय था जब उसका अभाव

639
00:45:13,440 --> 00:45:17,520
था। अब क्या कह रहा है कि वह थी और आगे भी रहेगी।

640
00:45:17,520 --> 00:45:23,120
इसी प्रश्न में देख लो श्लोक 28 ऊपर जाइए।

641
00:45:23,120 --> 00:45:29,040
22वा प्रश्न हां ऊपर जाइए

642
00:45:29,040 --> 00:45:32,480
और ऊपर जाइए।

643
00:45:32,480 --> 00:45:38,480
22वा 22वा 20 पे आप

644
00:45:38,880 --> 00:45:43,040
ये ये 28वा ये सर्व प्राणी जन्म से पहले भी

645
00:45:43,040 --> 00:45:48,080
थे मरने के बाद भी होंगे बीच में भी है

646
00:45:48,080 --> 00:45:52,240
ये खुद हिंदी कर रहा है इसकी हालांकि ये क्या हिंदी करेगा इसको हिंदी

647
00:45:52,240 --> 00:45:56,320
पढ़ना नहीं आता है ये इसने वहां से डिट्टो ए लाइन उतार ली जिसमें

648
00:45:56,320 --> 00:46:00,860
मिलावट करनी होती है उसमें अपनी बातें डाल देता है

649
00:46:00,860 --> 00:46:04,880
[गला साफ़ करने की आवाज़] अब देखो [हंसी]

650
00:46:04,880 --> 00:46:09,200
अगले प तो बम गिरने वाला है बम ठीक है

651
00:46:09,200 --> 00:46:13,840
ये लोग ऐसे ही उठाते हैं ना बातों को आगे देखो

652
00:46:13,840 --> 00:46:18,400
23 पष्ठ संख्या 23 पे

653
00:46:18,400 --> 00:46:23,600
यहां पे क्या हो रहा है 23 23 में देखो सब खत्म हो जाएगा यहां पे

654
00:46:23,600 --> 00:46:29,200
यही से दिखाया करो आप अपने प्रमाण खोलने की जरूरत नहीं होती है आप यही से दिखाओ प्रमाण

655
00:46:29,200 --> 00:46:33,200
में देखो पहले पैराग्राफ की लास्ट लाइन देखो क्या है

656
00:46:33,200 --> 00:46:37,520
जी लास्ट लाइन पढ़िए शास्त्रवाद जी

657
00:46:37,520 --> 00:46:43,040
जी किसका यहां पे पहला पैराग्राफ यही हां ये पढ़िए

658
00:46:43,040 --> 00:46:44,080
यही ज्ञान भगवान

659
00:46:44,080 --> 00:46:48,080
श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता के माध्यम से

660
00:46:48,080 --> 00:46:52,160
दिया अरे भाई [हंसी]

661
00:46:52,160 --> 00:46:57,120
अब यहां पे क्या हुआ अर्जुन को ज्ञान किसने दिया गीता के माध्यम से भाई

662
00:46:57,120 --> 00:47:01,760
किसने दिया कृष्ण ने दिया है कृष्ण ने दिया है है पागलपन

663
00:47:01,760 --> 00:47:05,840
अरे रामपाल रामपालियों चुल्लू भर पानी में डूब के मर जाओ तुम्हारे

664
00:47:05,840 --> 00:47:09,920
आका ने ऐसे व्यवस्था कर रखी है आपकी

665
00:47:09,920 --> 00:47:15,920
शर्म शर्म करो थोड़ी ये क्या करके रखा है तुम्हारे आका ने

666
00:47:16,840 --> 00:47:20,960
[हंसी] अब इनके ना तो कृष्ण भगवान है कृष्ण तो भगवान है

667
00:47:20,960 --> 00:47:24,960
नहीं भगवान तो रामपाल और कबीर है यहां लिखा है यही ज्ञान

668
00:47:24,960 --> 00:47:29,040
भगवान श्री कृष्ण ने और चलो ठीक है तुम कह दोगे नहीं नहीं हम तो

669
00:47:29,040 --> 00:47:33,120
कृष्ण को भगवान मानते परम भगवान वो है। ठीक है। मगर तुम्हारी जो सबसे

670
00:47:33,120 --> 00:47:37,280
बड़ी फिलोसफी है कि गीता का ज्ञान अर्जुन को काल ने दिया है। कृष्ण

671
00:47:37,280 --> 00:47:41,360
ने नहीं दिया। यहां तो तुम्हारे बाबा जी क्या करते हैं? क्या करना है? अब

672
00:47:41,360 --> 00:47:45,360
कर दो। इतना सा है। अब बस कमेंट पर्सनल कमेंट्स

673
00:47:45,360 --> 00:47:49,600
पे आ जाना। ये ये है वो है। इसका जवाब

674
00:47:49,600 --> 00:47:53,840
नहीं देते बनेगा। और इसका जो अगर तुम जवाब दोगे तो तुम्हें वही भाषाएं

675
00:47:53,840 --> 00:47:57,920
बोलनी पड़ेगी जो भाषाएं हम तुम्हें बोलते हैं

676
00:47:57,920 --> 00:48:02,000
जब तुम अपना अनर्गल बातें करते हो गीता को लेकर के।

677
00:48:02,000 --> 00:48:06,160
ठीक है? अगर तुम्हारे अंदर थोड़ा बहुत भी बुद्धि होगी तो तुम वो जवाब

678
00:48:06,160 --> 00:48:10,240
हमको दोगे जो जवाब तुम्हारे प्रश्नों का उत्तर होगा।

679
00:48:10,240 --> 00:48:14,240
समझ रहे हो? मेरी बात को रिपीट कर करके सुनना। ऐसे

680
00:48:14,240 --> 00:48:18,320
समझ में नहीं आती है जल्दी। बहुत बड़े-बड़े इंटेलेक्चुअल परेशान हो जाते हैं। तो

681
00:48:18,320 --> 00:48:24,300
तुम तो किस खेत की मूली हो। खैर

682
00:48:24,300 --> 00:48:30,300
[गला साफ़ करने की आवाज़] ये हो गया तो ऐसे करके इसने तो

683
00:48:37,760 --> 00:48:43,760
इसने तो ऐसा रायता किया भाई कि

684
00:48:46,320 --> 00:48:52,240
कहां से शुरू करें?

685
00:48:52,240 --> 00:48:56,720
कुछ और जरूरी मिलता है तो मैं आपको बताता हूं। यह समरी

686
00:48:56,720 --> 00:49:00,980
है।

687
00:49:00,980 --> 00:49:06,980
[गला साफ़ करने की आवाज़] ये एक अच्छी चीज आई है। हां।

688
00:49:07,280 --> 00:49:11,760
तत्व ज्ञान ये देखिए प्रश्न संख्या 31 पे आइए।

689
00:49:11,760 --> 00:49:14,400
सेकंड पैराग्राफ

690
00:49:14,400 --> 00:49:18,720
यहां पर गीता अध्याय दो श्लोक 53 का अर्थ बता रहे हैं बाबा जी

691
00:49:18,720 --> 00:49:22,800
और उसमें कहा जा रहा है उसमें बता रहे हैं तत्व ज्ञान प्राप्त

692
00:49:22,800 --> 00:49:27,040
होने के पश्चात भांति भांति के वचनों यानी

693
00:49:27,040 --> 00:49:31,040
अज्ञान से विचलित हुई तेरी बुद्धि जब परमात्मा के

694
00:49:31,040 --> 00:49:35,600
ध्यान में पूर्ण रूप से निश्चल रूप से स्थाई स्थिर हो जाएगी

695
00:49:35,600 --> 00:49:39,120
तब तू योग को यानी यथार्थ भक्ति को प्राप्त हो जाएगा

696
00:49:39,120 --> 00:49:43,120
यानी तब तू भक्त बनेगा ठीक है। अब यह लोग क्या कहते हैं?

697
00:49:43,120 --> 00:49:47,120
मैं भगत हूं। भगत हूं। भगत जी, भगत जी करते रहते हैं दिन भर। अब

698
00:49:47,120 --> 00:49:51,280
यह बताओ अगर यह भगत है तो ये तत्व ज्ञान हो गया इनको। तत्व

699
00:49:51,280 --> 00:49:55,440
ज्ञान हो गया तो तत्व ज्ञानी हो गए। तो क्या ये तत्वदर्शी मानते हैं खुद

700
00:49:55,440 --> 00:50:01,440
को? और अगर ये तत्वदर्शी नहीं है तो ये भगत नहीं है।

701
00:50:02,080 --> 00:50:06,240
दिख रहा है ये श्लोक? अंडरलाइन करिए। तत्व ज्ञान प्राप्त होने के पश्चात क्या

702
00:50:06,240 --> 00:50:10,320
होगा? दिखाइए इनको जरा। यह है ठस बुद्धि

703
00:50:10,320 --> 00:50:14,560
के परिणाम नीचे आइए नीचे वाला दो

704
00:50:14,560 --> 00:50:18,640
53 हां ये दो 53 दो

705
00:50:18,640 --> 00:50:22,720
श्लोक 53 है ना गीता अध्याय हां पहली लाइन से लाइए

706
00:50:22,720 --> 00:50:26,880
इसको पहली लाइन से ये हां यहां से तत्व

707
00:50:26,880 --> 00:50:29,440
ज्ञान प्राप्त होने के पश्चात भांति भांति

708
00:50:29,440 --> 00:50:33,440
के वचनों से यानी अज्ञान से विचलित हुई तेरी बुद्धि

709
00:50:33,440 --> 00:50:37,680
जब परमात्मा के ध्यान में पूर्ण रूप से निश्चल रूप से स्थाई स्थिर हो जाएगी

710
00:50:37,680 --> 00:50:41,760
तत्व ज्ञान ज्ञान प्राप्त होने के पश्चात तत्व ज्ञान

711
00:50:41,760 --> 00:50:45,920
मिल गया तत्वज्ञानी हो गया तत्वदर्शी हो गया तब तू भक्त

712
00:50:45,920 --> 00:50:50,000
बनेगा तो एक भी भक्त नहीं है आ मत जाना कोई

713
00:50:50,000 --> 00:50:54,160
कोर्ट में या मैं फलानी भक्त हूं इसी किताब से दिखाना ये कोई

714
00:50:54,160 --> 00:51:00,160
भक्त नहीं है तेरा बाबा तो ये कह के जेल गया था

715
00:51:04,120 --> 00:51:08,560
[हंसी] बताइए कैसे कैसे यहां पे सब बातें बोलता

716
00:51:08,560 --> 00:51:12,560
कुछ है वहां पे वहां पे क्या बोलता है यहां

717
00:51:12,560 --> 00:51:17,360
लिखता क्या है बोली और लिखनी में दोनों अंतर है रामपाल

718
00:51:17,360 --> 00:51:21,360
का जो ज्ञान है ना वो एक बच्चा जो मेले में पहुंच जाता

719
00:51:21,360 --> 00:51:25,600
है ना मेले में उसको बहुत सारी दुकानें दिखती है पहले कहता है नहीं नहीं मैं ये लूंगा

720
00:51:25,600 --> 00:51:29,680
मैं एक गुब्बारा लूंगा मैं गुब्बारा गुब्बारा जब उसको गुब्बारा देने लगते हैं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं

721
00:51:29,680 --> 00:51:33,680
नहीं मैं मैं ये नहीं लूंगा मैं मैं वो लूंगा बंदूक लूंगा बंदूक बंदूक

722
00:51:33,680 --> 00:51:37,760
फिर बंदूक करने लगता है मतलब बंदूक से गुब्बारे का खंडन फिर कोई टमाटर

723
00:51:37,760 --> 00:51:42,000
टमाटर ये टमाटर फोडूंगा मैं ये करूंगा वो पागल हो जाता है वहां मेले में जा के

724
00:51:42,000 --> 00:51:46,080
वैसे ही रामपाल का जो ज्ञान है ऐसे ही है जब मन जो आ रहा है

725
00:51:46,080 --> 00:51:50,240
वो उसको चाहिए वो उसने कर दिया जो मन हो रहा है वो लिख

726
00:51:50,240 --> 00:51:52,800
दे रहा है बिना कोई सिद्धांत कोई सिद्धांत नहीं है कहीं

727
00:51:52,800 --> 00:51:56,880
पे अद्वैत जो मन हो रहा है वो लिख रहा है जो मन हो रहा है वो बोल

728
00:51:56,880 --> 00:52:00,880
रहा है पक रहा है पकने दो मैंने अपने एक बचपन के मित्र के बारे में

729
00:52:00,880 --> 00:52:05,520
बताया था उसकी परचून की दुकान थी

730
00:52:05,520 --> 00:52:09,520
और वो बड़ा बेमन से वहां पर मतलब उसके पिताजी की दुकान थी वो। वो बड़ा

731
00:52:09,520 --> 00:52:13,520
बेमन से अपनी पिताजी की दुकान पर बैठता था हाथ बटाने के लिए। जब

732
00:52:13,520 --> 00:52:17,760
पिताजी कहीं उसके किसी कार्य में संलग्न होते थे। कभी-कभी वो

733
00:52:17,760 --> 00:52:22,080
उसको बैठना पड़ता था और मैं भी उसके पास जो है उससे वार्ता

734
00:52:22,080 --> 00:52:26,240
करने के लिए समय व्यतीत करने के लिए कभी पहुंच जाता था। उस समय जब वो दुकान पर

735
00:52:26,240 --> 00:52:31,200
बैठा हुआ था तो मैंने सीन देखा था।

736
00:52:31,200 --> 00:52:35,360
उस समय उसके अंदर बूबासी भरी हुई होती थी कि वो बैठना नहीं चाहता पर बैठना

737
00:52:35,360 --> 00:52:39,600
पड़ रहा है। व्यवस्था है। तो उसके पास कोई बच्चा

738
00:52:39,600 --> 00:52:43,840
आता था छोटा सा बिल्कुल मान लीजिए कि उसकी आयु होगी तीन वर्ष

739
00:52:43,840 --> 00:52:49,280
जो जैसे तैसे करके उसकी दुकान के काउंटर तक पहुंच रहा है

740
00:52:49,280 --> 00:52:53,440
तो बच्चे ने आकर के उसके काउंटर पे एक का सिक्का रखा चट से आवाज आई

741
00:52:53,440 --> 00:52:57,600
चट है ना ये लो भाई पहले पैसे पकड़ो तो उससे वो

742
00:52:57,600 --> 00:53:01,680
मेरा मित्र पूछता है बता क्या चाहिए बता उसको

743
00:53:01,680 --> 00:53:06,560
गुस्सा आ रहा है अंदर से अच्छा वो बच्चा क्या कह रहा है मालूम है

744
00:53:06,560 --> 00:53:09,120
वो चाहिए वो

745
00:53:09,120 --> 00:53:13,200
बो हवा में हाथ करके वो बच्चा कह रहा है वो

746
00:53:13,200 --> 00:53:17,520
चाहिए अब वहां पर तमाम सारी चीजें हवा की ओर जहां वो इशारा कर रहा है कोई

747
00:53:17,520 --> 00:53:21,520
वो जो बुढ़िया के बाल होते हैं ना वो चीनी से बनता है जो गुलाबी

748
00:53:21,520 --> 00:53:25,520
गुलाबी वो है कहीं चुर्री है वो जो चावल के पापड़

749
00:53:25,520 --> 00:53:29,600
चिप्स वगैरह होते हैं कहीं टॉफी रखी हुई है कंपट रखी हुई है ये सब रखी

750
00:53:29,600 --> 00:53:33,760
हुई बच्चा ऐसे हाथ करके बो यूं कर रहा है तो वो

751
00:53:33,760 --> 00:53:38,240
परेशान होता था वो यह चाहिए नहीं वो चाहिए वो

752
00:53:38,240 --> 00:53:42,240
तो दो तीन बार हो गया ये चाहिए नहीं वो चाहिए वो चार पांच

753
00:53:42,240 --> 00:53:46,240
बार के बाद ले अपने पैसे भाग जा यहां से ऐसे बोलता

754
00:53:46,240 --> 00:53:51,040
था ग्रामीण भाषा में ले अपने पैसे भाग जा यहां से

755
00:53:51,040 --> 00:53:56,080
तो वो कुछ हाल है रामपाल का ये जब अपना ज्ञान देने चलेगा

756
00:53:56,080 --> 00:54:00,240
किसी को तो ये भो वो कर रहा है भो वो भो

757
00:54:00,240 --> 00:54:04,400
जब जो मन आ रहा है उसकी ओर इशारा कर दिया इसका कोई सुनिश्चित नहीं मुझे वही

758
00:54:04,400 --> 00:54:08,400
चाहिए ना जब जो मन आ रहा है पहले वाले से दूसरे वाले को

759
00:54:08,400 --> 00:54:12,640
काट दिया। यह है इसका

760
00:54:12,640 --> 00:54:18,640
तो [गला साफ़ करने की आवाज़]

761
00:54:31,200 --> 00:54:35,680
अब ये लोग आ जाए ना सामने इनहीं के ग्रंथ खोल के इनहीं के सामने रखा

762
00:54:35,680 --> 00:54:40,400
बस बस इनके ही ग्रंथ खोला करिए और कुछ खोलने की जरूरत नहीं

763
00:54:40,400 --> 00:54:44,400
कभी जो कृष्ण जी है वो भगवान है कहां से रामपाल की गीता

764
00:54:44,400 --> 00:54:49,360
से ठीक है काल जो है वो तत्वदर्शी है रामपाल की गीता से

765
00:54:49,360 --> 00:54:53,360
ठीक और जब कृष्ण भगवान हो गए तत्वदर्शी हो गए तो फिर वो ज्ञान जो है

766
00:54:53,360 --> 00:54:57,520
उसका नहीं कबीर का और भगवान श्री कृष्ण भगवान

767
00:54:57,520 --> 00:55:02,000
है किससे कबीर के वचनों से और रामपाल के उससे ज्ञान

768
00:55:02,000 --> 00:55:06,160
गीता तेरा ज्ञान अमृत से ज्ञान गंगा में भी है और

769
00:55:06,160 --> 00:55:10,880
कोई कहे कि भाई जो है

770
00:55:10,880 --> 00:55:15,120
बहुत सी चीजें हैं कहां तक गीता का ज्ञान किसने दिया

771
00:55:15,120 --> 00:55:19,120
भगवान कृष्ण ने दिया अर्जुन को कहां से है भाई तेरा ये गीता से

772
00:55:19,120 --> 00:55:24,400
तेरा जो ये लिखा हुआ है गीता का ज्ञान किसने दिया कि भैया गरिमा गीता की

773
00:55:24,400 --> 00:55:28,640
ठीक है? और रामपाल की भक्ति से मोक्ष नहीं होगा। यह भी कहां से सिद्ध हुआ?

774
00:55:28,640 --> 00:55:32,640
रामपाल की गीता से। रामपाल की ज्ञान से मोक्ष नहीं

775
00:55:32,640 --> 00:55:36,800
होगा। ये भी सिद्ध हुआ रामपाल की गीता के बकवास

776
00:55:36,800 --> 00:55:42,800
से। अच्छा और आगे देखते हैं कुछ।

777
00:56:02,810 --> 00:56:08,160
[गला साफ़ करने की आवाज़]

778
00:56:08,160 --> 00:56:14,160
आ जाओ इस आ जाओ 35 प्रश्न पर 35

779
00:56:32,800 --> 00:56:37,040
किशन परिहार जी बोल रहे हैं कि लाइव आना चाहता हूं। लिंक

780
00:56:37,040 --> 00:56:41,280
भेजो। आप लोगों को लिंक दिया जाएगा जब इनका दिया जाएगा।

781
00:56:41,280 --> 00:56:47,280
जरा मैं समरी पूरी कर लू क्योंकि अभी तो दूसरा ही अध्याय हुआ है।

782
00:56:48,320 --> 00:56:52,560
ठीक है? तीसरा अध्याय तीसरे अध्याय पे आते हैं। देखते हैं कुछ मिल जाए। तीसरे

783
00:56:52,560 --> 00:56:58,560
में जरूरी चीज

784
00:57:30,480 --> 00:57:35,360
अच्छा एक बात और है ये बार-बार कहता है मेरी वाली परम गति

785
00:57:35,360 --> 00:57:39,520
मतलब काल की गति को प्राप्त होता है तो काल वाली परम गति

786
00:57:39,520 --> 00:57:43,680
को कहता है काल ये कहता है कि जो मेरी भक्ति करेगा तो

787
00:57:43,680 --> 00:57:47,920
मेरी गति को प्राप्त होगा उस वो गति परम गति है मेरे हिसाब से मेरी सीमा

788
00:57:47,920 --> 00:57:52,160
में काल ये कहता है अब बात दिक्कत ये आती है कि अच्छा

789
00:57:52,160 --> 00:57:56,160
वो गति हालांकि वो नरक है वो जो काल को प्राप्त होगा वो नरक है

790
00:57:56,160 --> 00:58:00,720
मगर उसको काल के हिसाब से परम गति कह रहा है मगर दिक्कत ये है

791
00:58:00,720 --> 00:58:04,640
कि काल की कोई निम्न गति भी है क्या

792
00:58:04,640 --> 00:58:08,640
भाई? काल वाली परम गति क्या है? जब काल की निम्न गति होगी तब तो काल की

793
00:58:08,640 --> 00:58:12,640
परम गति होगी। तो काल वाली गति प्राप्त होती है तो ठीक है। मगर

794
00:58:12,640 --> 00:58:16,880
काल वाली परम गति क्या है? परम गति तो तब कहोगे ना जब निम्न

795
00:58:16,880 --> 00:58:21,040
गति हो कोई मगर काल के काल की भक्ति करने वाली की तो एक ही गति है।

796
00:58:21,040 --> 00:58:25,120
तो फिर उसमें परम लगाने की जरूरत क्या है? ये एक बात है।

797
00:58:25,120 --> 00:58:31,120
परम गति कहता रहता है। अच्छा 40 10 का कुछ मैंने लिखा था।

798
00:58:33,200 --> 00:58:37,520
एक बात और है कि

799
00:58:37,520 --> 00:58:43,520
यहां पर इन्होंने आठ सात का उदाहरण दिया है कि

800
00:58:58,320 --> 00:59:03,200
इन्होंने इस प्रश्न प्रश्न में सबसे नीचे आइए।

801
00:59:03,200 --> 00:59:07,200
सबसे नीचे आ जाइए। इस प्रश्न में यज्ञों का

802
00:59:07,200 --> 00:59:10,000
लाभ

803
00:59:10,000 --> 00:59:16,000
39वा प्रश्न है 39वा

804
00:59:26,640 --> 00:59:30,640
यज्ञों का लाभ सांसारिक सुविधाएं है मुक्ति नहीं

805
00:59:30,640 --> 00:59:34,960
है अब जो यज्ञ पांच प्रकार के हैं उनमें से एक ज्ञान ज्ञान यज्ञ भी है।

806
00:59:34,960 --> 00:59:39,280
तो चार 34 में एक जो कहा जा रहा है कि आप जो है

807
00:59:39,280 --> 00:59:43,280
ज्ञान यज्ञ के ज्ञान को लेने के लिए तत्वदर्शी के पास जाइए। तो यानी

808
00:59:43,280 --> 00:59:47,280
तत्वदर्शी कौन है जो ज्ञान यज्ञ का ज्ञान देगा। तो यानी अगर यह कहते

809
00:59:47,280 --> 00:59:51,280
हैं कि यज्ञ ज्ञान यज्ञों से मुक्ति नहीं है और

810
00:59:51,280 --> 00:59:55,440
यज्ञ में ज्ञान यज्ञ भी है। यानी ज्ञान यज्ञ से भी मुक्ति नहीं है। तो इसका अर्थ

811
00:59:55,440 --> 00:59:59,440
यह मानना पड़ेगा कि तत्वदर्शी से मुक्ति नहीं मिलेगी। यहां से भी सिद्ध हो गया। मुक्ति नहीं

812
00:59:59,440 --> 01:00:05,360
है। इसी की बात से ठीक है।

813
01:00:05,360 --> 01:00:11,360
और इन्होंने कुछ समय तक अमर होने की बात भी कही है यहां पर।

814
01:00:16,160 --> 01:00:20,320
ये देखिए अगले प्रश्न पर इसके बाद अगले प्रश्न पर दिया गया ज्ञान

815
01:00:20,320 --> 01:00:26,320
यज्ञ भी पांच यज्ञ में से एक है। देखिए अगला प्रश्न लाइए।

816
01:00:32,720 --> 01:00:36,720
यह देखिए इसने पांच यज्ञ बताए हैं। धर्म यज्ञ, हवन यज्ञ,

817
01:00:36,720 --> 01:00:41,600
ध्यान यज्ञ, प्रणाम यज्ञ, प्रणाम यज्ञ

818
01:00:41,600 --> 01:00:45,920
ये कौन सा यज्ञ? ज्ञान यज्ञ। [हंसी]

819
01:00:45,920 --> 01:00:50,080
खैर ज्ञान यज्ञ। ठीक है? तो ज्ञान यज्ञ अब जो

820
01:00:50,080 --> 01:00:54,240
चार 34 का तत्वदर्शी है जिसके बल पर उछलते हैं वो ज्ञान

821
01:00:54,240 --> 01:00:58,560
यज्ञ का ज्ञान लेने के लिए वहां भेजा जा रहा है और ज्ञान यज्ञ शुद्ध मुक्ति है नहीं

822
01:00:58,560 --> 01:01:02,800
तो अगर चार 34 का तत्वदर्शी रामपाल है तो उसकी ही किताब

823
01:01:02,800 --> 01:01:06,800
के अनुसार उसके द्वारा उसके ज्ञान के द्वारा मुक्ति नहीं होगी।

824
01:01:06,800 --> 01:01:09,280
ठीक है?

825
01:01:09,280 --> 01:01:13,360
आगे चलते हैं।

826
01:01:13,360 --> 01:01:17,600
अच्छा ये लोग एक दावा करते हैं

827
01:01:17,600 --> 01:01:21,920
कि जो ब्रह्मा विष्णु महेश है वो

828
01:01:21,920 --> 01:01:26,480
सांसारिक चीजें नहीं देते हैं। जबकि यहां पर किताबों में एक है कि सांसारिक

829
01:01:26,480 --> 01:01:30,560
चीजें तो ब्रह्मा विष्णु महेश ही देते हैं। सांसारिक चीजें ब्रह्मा

830
01:01:30,560 --> 01:01:34,560
विष्णु महेश ही देते हैं। ऐसा कई बार कहा है। और देखिए यहां पर इस मूर्ख

831
01:01:34,560 --> 01:01:38,560
ने यह भी कहा है ब्रह्मा विष्णु महेश बिना मांगे देते रहते

832
01:01:38,560 --> 01:01:44,560
हैं बिना मांगे

833
01:01:57,440 --> 01:02:03,440
हो गया की भाई 44 में पष् पे आइए 44

834
01:02:06,400 --> 01:02:10,400
ऐसी बहुत सारी बातें हैं जो आपको वह सीरीज मिल जाएगी हमारे चैनल पर है।

835
01:02:10,400 --> 01:02:14,480
वहां पर आप उसको पूरा देख सकते हैं। संक्षिप्त में देखनी है तो आप

836
01:02:14,480 --> 01:02:18,480
यहां पर देख सकते हैं उसके बुलेट पॉइंट्स हैं। उसमें बहुत कट कर

837
01:02:18,480 --> 01:02:22,560
करके है। जैसे बीचबीच में एक गैप आता है ना कुछ ढूंढ रहे हैं तो गैप आ जाता

838
01:02:22,560 --> 01:02:27,680
है। तो वह गैप नहीं आएगा। बुलेट पॉइंट्स में तो आप वहां पर इसको

839
01:02:27,680 --> 01:02:32,640
देख सकते हैं। ठीक है?

840
01:02:32,640 --> 01:02:36,800
गीता ज्ञान दाता से परे यानी दूसरा यहां तो

841
01:02:36,800 --> 01:02:41,200
शाब्दिक बातें हैं। इसको छोड़ देते हैं।

842
01:02:41,200 --> 01:02:45,760
देखिए चलिए एक मोटी बात बताता हूं।

843
01:02:45,760 --> 01:02:51,760
अब आइए 49 वे प्रश्न पर।

844
01:03:02,240 --> 01:03:06,320
48 व पष्ठ पर ऊपर जाइए 48 में ऊपर जाइए पीछे निकल

845
01:03:06,320 --> 01:03:12,320
गया हां इससे जस्ट पीछे वाला पेज दिखाइए

846
01:03:12,320 --> 01:03:16,560
हां एंड में एंड में एंड में यह देखिए तीसरे अध्याय

847
01:03:16,560 --> 01:03:20,720
के 17 से 18 तक का भावार्थ बाबा जी ने किया अब आगे

848
01:03:20,720 --> 01:03:25,040
चलिए ये

849
01:03:25,040 --> 01:03:29,360
ये देखो अब यहां पर भावार्थ कहां से शुरू किया है बाबा जी ने

850
01:03:29,360 --> 01:03:33,520
तीन 20 पे कहां शुरू किया तीन 20 तो तीन 19

851
01:03:33,520 --> 01:03:37,680
क्यों नहीं किया बाबा जी बाबा जी ने इसलिए नहीं किया क्योंकि तीन 19

852
01:03:37,680 --> 01:03:42,960
में लिखा है कि जनक जी को मोक्ष प्राप्त हुआ था ये बाबा जी का ठुल्लू

853
01:03:42,960 --> 01:03:47,680
बाबा जी के द्वारा बनाए गए उल्लू

854
01:03:47,680 --> 01:03:51,680
तो बाबा जी ने तीन 18 तक अर्थ किया उसके

855
01:03:51,680 --> 01:03:56,160
बाद सीधे सीधे तीन 20 पर आ गए। तो जब

856
01:03:56,160 --> 01:04:00,320
तीन 20 पर आ गए बाबा जी तो भाई तीन 19 कहां है? क्यों नहीं किया?

857
01:04:00,320 --> 01:04:04,400
इसलिए नहीं किया तीन 19 क्योंकि तीन 19 में जनक जी का मोक्ष बताया गया है।

858
01:04:04,400 --> 01:04:08,560
क्या करते बाबा जी उसका? जनक जी को मोक्ष कैसे हो गया?

859
01:04:08,560 --> 01:04:14,560
तो तत्वदर्शी मानना पड़ जाता।

860
01:04:15,200 --> 01:04:19,360
ठीक है? तो एक यह बड़ी चीज आपको हाथ लग गई कि बाबा

861
01:04:19,360 --> 01:04:23,360
जी इस तरह की चोरी भी करते हैं कि कुछ श्लोकों को छोड़ देते हैं। मुझे लगता है वही श्लोक

862
01:04:23,360 --> 01:04:29,280
होंगे जो काल ने अपने मन से बोल दिए होंगे।

863
01:04:29,280 --> 01:04:33,360
एक और बात है नीचे में लिखी हुई कथनी और करनी में अंतर जो कि खुद

864
01:04:33,360 --> 01:04:37,360
उन्हीं पर सेट हो रही है। अच्छा अब एक काल की

865
01:04:37,360 --> 01:04:42,480
ओर से बड़ी चीज बताता हूं। देखिए काल को एक श्राप लगा हुआ है रामपाल के अनुसार

866
01:04:42,480 --> 01:04:46,960
कि रामपाल के अनुसार जो रामपाल का ये कररेक्टर है काल्पनिक

867
01:04:46,960 --> 01:04:51,040
काल इसको एक श्राप लगा हुआ है कि इसको एक लाख मनुष्यों को रोज खाना

868
01:04:51,040 --> 01:04:55,040
है हालांकि जब उसकी जड़ में जाते हैं तो आत्मा को तो कोई खा ही नहीं सकता तो क्या होना है

869
01:04:55,040 --> 01:04:59,120
कि उनको तपती उस तला जाएगा कुछ किया जाएगा गरम गरम वो होगी सुगंध

870
01:04:59,120 --> 01:05:03,280
वो तो सुगंध लेगा यानी खाएगा नहीं यानी सुगंध लेगा तो सुगंध लेना लिखो ना

871
01:05:03,280 --> 01:05:07,520
बात जब कांटे की करनी है तो कांटे की नोक की बात करो ना भाई है ना

872
01:05:07,520 --> 01:05:11,600
खैर कुल मिलाकर के काल को डेली सवा लाख

873
01:05:11,600 --> 01:05:17,600
जीव चाहिए, प्राणी चाहिए। अच्छा दूसरी बात यह भी है कि

874
01:05:18,880 --> 01:05:23,040
फिर इसमें क्या आता है देखिए भगवत गीता में

875
01:05:23,040 --> 01:05:27,440
गीता का अर्थ करते हुए लिख रहा है मेरे लिए

876
01:05:27,440 --> 01:05:31,680
तीनों लोकों में ना तो कुछ कर्तव्य ना कोई प्राप्त करने योग्य

877
01:05:31,680 --> 01:05:35,760
वस्तु अप्राप्त है। फिर भी मैं गीता ज्ञान दाता

878
01:05:35,760 --> 01:05:39,920
कर्मों में ही बरता हूं। लो ये मान लिया रामपाल ने। इसका

879
01:05:39,920 --> 01:05:44,160
मतलब गीता कहने वाले को कुछ नहीं

880
01:05:44,160 --> 01:05:48,160
चाहिए। दूसरी ओर क्या कह रहे हैं? सवा लाख प्राणी रोज चाहिए।

881
01:05:48,160 --> 01:05:52,320
क्या करें इसका? क्या करूं मैं इसका? इस

882
01:05:52,320 --> 01:05:56,880
मूर्ख व्यक्ति का क्या किया जाए? ये करेगा शास्त्रार्थ शंकराचार्यों से।

883
01:05:56,880 --> 01:05:59,680
बैल बुद्धि

884
01:05:59,680 --> 01:06:03,920
बताइए।

885
01:06:03,920 --> 01:06:08,320
ऐसा व्यक्ति शास्त्रार्थ करेगा शंकराचार्य से बताइए

886
01:06:08,320 --> 01:06:12,320
अरे भाई तुम बिल्कुल भी नहीं तुम ना तुम पता है किस लेवल

887
01:06:12,320 --> 01:06:15,200
के हो

888
01:06:15,200 --> 01:06:21,200
अब मैं क्या बताऊं उनकी बढ़ाई हो जाएगी गामा

889
01:06:22,800 --> 01:06:26,960
तुम इस और आर्य समाज वालों से ही निपट लो पहले शंकराचार्यों

890
01:06:26,960 --> 01:06:31,520
की बात करने से पहले यही तुम्हारे लिए पर्याप्त है समझे

891
01:06:31,520 --> 01:06:35,600
बात करते हैं शंकराचार्य की। यह लोग भी इन्हें फूंक मार के उड़ा

892
01:06:35,600 --> 01:06:39,600
देंगे। बताइए [हंसी] मार के फूंक फूंक मार

893
01:06:39,600 --> 01:06:43,760
के उड़ा देंगे। हमारे आर्य समाजियों से मिल लो। हमारे स्कॉन

894
01:06:43,760 --> 01:06:47,920
वालों से मिल लो। फूंक मार के उड़ा देंगे वो

895
01:06:47,920 --> 01:06:53,440
लोग तुम्हें। आए बड़े शंकराचार्यों से वो करोगे।

896
01:06:53,440 --> 01:06:57,600
तो ये यहां पर गीता कहने वाला खुद

897
01:06:57,600 --> 01:07:01,920
कह रहा है मुझे कुछ नहीं चाहिए। मगर इनकी फिलोसफी क्या है?

898
01:07:01,920 --> 01:07:06,000
चाहिए। सवा लाख मनुष्य रोज चाहिए। यह करना है,

899
01:07:06,000 --> 01:07:10,240
वो करना है। झूठ सच झूठ का सहारा लेता है। ठीक है? अच्छा

900
01:07:10,240 --> 01:07:14,240
एक बात और है कि उसने 5% ज्ञान अपने मन का दे दिया है।

901
01:07:14,240 --> 01:07:18,480
वो बात अलग है। मगर यहां पर रामपाल ने माना है कि जो काल

902
01:07:18,480 --> 01:07:19,120
है वो सच

903
01:07:19,120 --> 01:07:23,200
झूठ का सहारा लेता है अपना काम निकालने के लिए। उसका काम क्या है? सवा लाख

904
01:07:23,200 --> 01:07:27,200
प्राणी रोज चाहिए। इसका अर्थ क्या हुआ? वो झूठ बोलता है। झूठ बोलता है तो कहीं

905
01:07:27,200 --> 01:07:31,200
भी बोल सकता है। इसका मतलब अपनी बात को सिद्ध करने के लिए

906
01:07:31,200 --> 01:07:35,200
तुम वेद और गीता का प्रमाण नहीं ले सकते क्योंकि वेद गीता को कहने

907
01:07:35,200 --> 01:07:39,440
वाला व्यक्ति सच और झूठ बोलता है। तो बात हो गई खत्म।

908
01:07:39,440 --> 01:07:43,600
अब ना शास्त्र हमारे पास तुम्हारे हिसाब से और ना

909
01:07:43,600 --> 01:07:47,680
तुम्हारे पास हमारे हिसाब से हमारे हिसाब से कबीर सागर प्रमाण नहीं है

910
01:07:47,680 --> 01:07:52,080
और तुम्हारे हिसाब से गीता और वेद पुराण प्रमाण नहीं है। अब सीधी

911
01:07:52,080 --> 01:07:56,080
बात है जिसके गुर्दे में दम होगा

912
01:07:56,080 --> 01:08:01,040
वही जिंदा रहेगा। क्यों भाई

913
01:08:01,040 --> 01:08:05,520
गुरुदाचार अब आ जाओ सर्वशक्तिमान ईश्वर

914
01:08:05,520 --> 01:08:10,400
परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म

915
01:08:10,400 --> 01:08:14,720
टू स्टॉप द ट्रेन पुल द चैन खत्म लड़ाई

916
01:08:14,720 --> 01:08:18,880
होने से पहले ही समाप्त हो जाएगी है ना चलो लिंक दे दिया

917
01:08:18,880 --> 01:08:22,960
गया है जो भी आना चाहे वो आ सकता है लिंक दे दिया है आ

918
01:08:22,960 --> 01:08:27,200
सकते हैं मैं तब तक थोड़ा थोड़ा जो मुझे इसमें झोल दिखेगा श में बताता चलूं

919
01:08:27,200 --> 01:08:33,200
अभी तक हम

920
01:08:35,520 --> 01:08:39,520
किशन परिहार जी बोल रहे हैं कि रामपाल का ज्ञान जो है 101%

921
01:08:39,520 --> 01:08:43,840
सही है तो भाई आ जाओ ऊपर आ जाओ ऊपर आ जाओ अभी तुमको

922
01:08:43,840 --> 01:08:48,240
देखते हैं कितना वो सही है कितना तुम सही हो

923
01:08:48,240 --> 01:08:54,240
101% जो सही बात है बता रहे हो ना आ जाओ

924
01:09:04,160 --> 01:09:08,320
अभी लिंक दे दिया गया। अब देखते हैं वो आते भी है कि नहीं। भाई देखो

925
01:09:08,320 --> 01:09:12,480
ये लोग क्या कह रहे हैं। ये लोग क्या कह रहे हैं कि ज्ञानी और

926
01:09:12,480 --> 01:09:16,560
विद्वान पुरुष ये पष्ठ संख्या इस पर आ जाइए।

927
01:09:16,560 --> 01:09:21,120
यह 53 पे

928
01:09:21,120 --> 01:09:27,120
संख्या आपने वो वाला दिखा दिया था जो मैंने इससे पहले कहा कि काल को कुछ नहीं चाहिए

929
01:09:29,360 --> 01:09:35,360
दिखाया था दिखा दो 49 पे है वो

930
01:09:37,760 --> 01:09:43,760
किशन परिहार बोल रहे हैं लिंक नहीं आया भाई लिंक दे दिया गया है

931
01:09:46,240 --> 01:09:52,240
यह 49 पृष्ठ पर है। तीसरा पैराग्राफ

932
01:09:54,160 --> 01:09:58,160
हे पार्थ यानी हे अर्जुन मेरे लिए

933
01:09:58,160 --> 01:10:02,640
तीनों लोकों में ना तो कुछ कर्तव्य है और ना कोई प्राप्त करने योग्य वस्तु

934
01:10:02,640 --> 01:10:06,880
अप्राप्त है। फिर भी मैं गीता ज्ञान दाता कर्मों में ही बरतता

935
01:10:06,880 --> 01:10:10,960
हूं। और इस इस बेवकूफ व्यक्ति ने यहां पर कुछ नहीं लिखा है कि मन

936
01:10:10,960 --> 01:10:15,280
का ज्ञान है, झूठा है, क्या है? अब बताओ कैसी खिचड़ी पकाई

937
01:10:15,280 --> 01:10:21,280
है इसने? कहां से शुरू करें इसको पीटना?

938
01:10:21,680 --> 01:10:25,760
जहां से पकड़ेंगे वहीं पर इनका ये जो ताश का जो महल बना

939
01:10:25,760 --> 01:10:29,760
हुआ है ना गिर जाएगा। ताश के पत्ते का जो महल होता है ना

940
01:10:29,760 --> 01:10:35,760
जहां उठाओ वहीं गिर जाना है। [हंसी]

941
01:10:46,240 --> 01:10:50,960
अच्छा देखो इसने अपने लोगों को तो वो कहा है

942
01:10:50,960 --> 01:10:55,040
कि भाई जो

943
01:10:55,040 --> 01:10:59,040
देखो इसने क्या कहा है 49 पे ही लास्ट में आ जाइए कि

944
01:10:59,040 --> 01:11:03,120
रामपाल के जो अनुयाई है वो अनपढ़ गवार टाइप के लोग हैं

945
01:11:03,120 --> 01:11:07,280
वो ये लिखा हुआ है नीचे और नीचे से तीसरी दूसरी लाइन

946
01:11:07,280 --> 01:11:12,080
से चालू करिए।

947
01:11:12,080 --> 01:11:16,720
इसमें ब्रैकेट में देखिए क्या लिखा है। जैसे अविद्वान अर्थात भोलेभाले

948
01:11:16,720 --> 01:11:20,960
अशिक्षित शास्त्रानुकूल साधना तत्वदर्शी

949
01:11:20,960 --> 01:11:25,120
संत से प्राप्त करके करते हैं। इस प्रकार पाप को प्राप्त नहीं

950
01:11:25,120 --> 01:11:30,000
होगा। यानी अविद्वान भोलेभाले अशिक्षित

951
01:11:30,000 --> 01:11:34,320
लोग ही तत्वदर्शी जिसको शास्त्रानुकूल साधना कहता है उसको

952
01:11:34,320 --> 01:11:38,640
प्राप्त करते हैं और पाप को प्राप्त नहीं होते यानी कि तत्वदर्शी

953
01:11:38,640 --> 01:11:42,880
से साधना लेने वाले लोग कौन है? अविद्वान भोले

954
01:11:42,880 --> 01:11:46,960
भाले अशिक्षित गवार अनपढ़ देख लो

955
01:11:46,960 --> 01:11:50,600
तुम्हारे बाबा जी कह रहे हैं

956
01:11:50,600 --> 01:11:54,720
[हंसी] अपने आप को अब कैसे बोलेंगे ये लोग और सुनो तुम

957
01:11:54,720 --> 01:11:58,880
लोग कहते हो ना मैं मूर्ख हूं या हम जैसे लोग जो रामपाल का विरोध कर रहे हैं वो मूर्ख

958
01:11:58,880 --> 01:12:03,280
है इसका भी तोड़ ले लो इसका भी तुम्हारी किताब से ही तोड़ ले लो

959
01:12:03,280 --> 01:12:07,360
तुम लोग कहते हो कि हम मैं हम जैसे लोग जो कुछ कर रहे हैं मान बढ़ाई के लिए कर

960
01:12:07,360 --> 01:12:11,840
रहे हैं तो इसमें देखिए क्या लिखा हुआ है

961
01:12:11,840 --> 01:12:16,560
53 वे पष्ठ पर क्या लिखा है देखो

962
01:12:16,560 --> 01:12:21,680
53वा पृष्ठ आइए 53वा

963
01:12:21,680 --> 01:12:26,240
और नीचे से सेकंड लास्ट पैराग्राफ और

964
01:12:26,240 --> 01:12:30,800
नीचे आइए हां थोड़ा ऊपर

965
01:12:30,800 --> 01:12:34,960
हां ये देखिए ज्ञानी विद्वान पुरुष

966
01:12:34,960 --> 01:12:40,720
थोड़ा ऊपर

967
01:12:40,720 --> 01:12:45,040
ये देखिए इसमें यह जो सार लिखा है सार इसमें

968
01:12:45,040 --> 01:12:49,360
सार में सेकंड लाइन में लिखा हुआ है

969
01:12:49,360 --> 01:12:53,520
ज्ञानी इसी प्रकार ज्ञानी विद्वान पुरुष मानव

970
01:12:53,520 --> 01:12:58,160
वश पैसा प्राप्ति व अधिक शिष्य बनाने की इच्छा के कारण

971
01:12:58,160 --> 01:13:02,320
गलत त्याग कर सच्चाई का अनुसरण नहीं करते। यानी कि

972
01:13:02,320 --> 01:13:06,480
रामपाल के हिसाब से जो सच्चाई का सच्चाई है और उसका

973
01:13:06,480 --> 01:13:10,800
अनुसरण जो लोग नहीं कर रहे हैं वो कौन है? ज्ञानी और विद्वान

974
01:13:10,800 --> 01:13:15,120
लो तुम्हारे बाबा जी कह रहे हैं मैं ज्ञानी तुम

975
01:13:15,120 --> 01:13:19,200
तय कर लो मूर्ख दुनिया का

976
01:13:19,200 --> 01:13:23,440
सबसे बड़ा मूर्ख व्यक्ति होगा जिसने किताब लिखी होगी। मुझे लगता है ये किताब

977
01:13:23,440 --> 01:13:27,120
रामपाल ने भी नहीं लिखी है क्योंकि मुझे लगता है इतना तो दिमाग

978
01:13:27,120 --> 01:13:31,200
होगा उसमें कि इतना सब कैप्चर किया लोगों को खड़ा किया

979
01:13:31,200 --> 01:13:35,280
अपना कुछ तो उसने षड्यंत्र किया कुछ भी किया मगर दिमाग तो यूज़ किया ना

980
01:13:35,280 --> 01:13:39,360
उसने ये तो मानना पड़ेगा मगर ये तो लिखने वाला पता नहीं कौन

981
01:13:39,360 --> 01:13:43,520
से नशे में था इसमें कोई सूखा नशा किया था क्या

982
01:13:43,520 --> 01:13:45,920
किया था

983
01:13:45,920 --> 01:13:50,000
वही बताएगा भैया कुछ भी लिख दे रहे

984
01:13:50,000 --> 01:13:53,360
हैं ये लोग [हंसी]

985
01:13:53,360 --> 01:13:57,360
हां तो भाई लिंक दे दिया गया है। जो भी रामपाल का चेला यहां पे आकर के

986
01:13:57,360 --> 01:14:03,360
अपनी बात को सिद्ध कर सकता है वह आ जाए।

987
01:14:04,480 --> 01:14:08,480
वह परमात्मा जिसका काल ये देखो वह बात कर रहा है

988
01:14:08,480 --> 01:14:11,520
देखो

989
01:14:11,520 --> 01:14:15,680
ठीक है यहां पे कबीर जी की वाणी है

990
01:14:15,680 --> 01:14:20,080
और कबीर जी की वाणी में कबीर जी

991
01:14:20,080 --> 01:14:24,080
वो परमात्मा जिसका काल ना हो यानी अविनाशी सत्पुरुष वह सच्चा

992
01:14:24,080 --> 01:14:30,080
परमात्मा जिसका नाश ना हो ये 63वा पेज है 63वा

993
01:14:30,560 --> 01:14:35,120
नाश ना वह परमात्मा जिसका वास्तविक रूप शब्द है। लो

994
01:14:35,120 --> 01:14:39,120
वास्तविक रूप क्या है? शब्द वास्तविक

995
01:14:39,120 --> 01:14:45,120
रूप है। कबीर वास्तविक रूप नहीं है। 63वा पेज

996
01:14:45,200 --> 01:14:48,960
ये लो भाई ऑल

997
01:14:48,960 --> 01:14:54,960
वास्तविक रूप शब्द है।

998
01:15:01,280 --> 01:15:05,280
अब तो यहां पता चल गया भाई तुम्हारा कबीर जो है ना वो भी वास्तविक रूप में नहीं

999
01:15:05,280 --> 01:15:09,360
है शब्द है वास्तविक रूप अब क्या करेंगे ये ये मान

1000
01:15:09,360 --> 01:15:15,120
लो जो बड़ा पैराग्राफ है इसके बीच की लाइन है मैं देखता हूं

1001
01:15:15,120 --> 01:15:19,200
ये है हां वह सच्चा परमात्मा जिसका

1002
01:15:19,200 --> 01:15:23,280
नाश ना हो यानी पहली बात तो ये ये नहीं कह रहा मैं सच्चा परमात्मा

1003
01:15:23,280 --> 01:15:27,440
हूं वह सच्चा परमात्मा अपने से भिन्न किसी को बता रहा है। वह सच्चा

1004
01:15:27,440 --> 01:15:32,400
परमात्मा जिसका नाश ना हो यानी अविनाशी शब्द स्वरूपी

1005
01:15:32,400 --> 01:15:36,400
और ऊपर से लो थोड़ा नहीं ठीक है। ठीक

1006
01:15:36,400 --> 01:15:40,560
है यहीं से ठीक है। अकाल मूरत लिखा है ना अकाल

1007
01:15:40,560 --> 01:15:43,280
मूरत

1008
01:15:43,280 --> 01:15:47,360
राम के लिए लिखा है भैया वहां पे वहां पे राम के लिए लिखा था उसमें नहीं ठीक है

1009
01:15:47,360 --> 01:15:52,160
मैं पूरा पढूंगा

1010
01:15:52,160 --> 01:15:56,320
हां ये बिल्कुल इस समय जो सेकंड लास्ट लाइन दिख रही है उसमें अकाल मूरत लिखा

1011
01:15:56,320 --> 01:16:00,320
हुआ है सेकंड लास्ट लाइन हां अब यहां से पढ़ना

1012
01:16:00,320 --> 01:16:04,480
है हमें अकाल मूरत शब्द स्वरूपी राम सत्पुरुष यह

1013
01:16:04,480 --> 01:16:10,480
नाम मुक्ति प्राप्त फिर बदल गया

1014
01:16:10,560 --> 01:16:15,440
ठीक है। ठीक है। ठीक है। चलते हैं। इसी को चलते हैं।

1015
01:16:15,440 --> 01:16:19,840
नहीं है। मुक्ति प्राप्त करने के नहीं है। क्योंकि ये तो पूर्ण ब्रह्म परमात्मा

1016
01:16:19,840 --> 01:16:24,000
के पर्यायवाची शब्द है। ठीक है? कोई बात नहीं। अब आगे देखिए जैसे

1017
01:16:24,000 --> 01:16:28,320
अकाल मूरत वह परमात्मा जिसका काल ना हो यानी अविनाशी।

1018
01:16:28,320 --> 01:16:32,320
सत्पुरुष वह सच्चा परमात्मा जिसका नाश ना हो यानी अविनाशी।

1019
01:16:32,320 --> 01:16:36,320
शब्द स्वरूपी राम या वह परमात्मा जिसका वास्तविक रूप

1020
01:16:36,320 --> 01:16:40,400
शब्द है और शब्द खंड नहीं होता वह नाश में नहीं आता यानी अविनाशी उस

1021
01:16:40,400 --> 01:16:41,760
परमात्मा को जो अविनाशी

1022
01:16:41,760 --> 01:16:46,160
जिसको शब्द स्वरूपी यहां पे इसने वह करके बात की है और जो

1023
01:16:46,160 --> 01:16:50,160
वास्तविक स्वरूप माना है जिसका वास्तविक स्वरूप क्या है? शब्द

1024
01:16:50,160 --> 01:16:54,240
है। तो परमात्मा का वास्तविक स्वरूप क्या है? रामपाल की

1025
01:16:54,240 --> 01:16:59,040
किताब पढ़ रहे हैं। शब्द कबीर नहीं है। परमात्मा

1026
01:16:59,040 --> 01:17:03,440
का वास्तविक स्वरूप कबीर नहीं है। टू बी नोटेड।

1027
01:17:03,440 --> 01:17:09,440
ठीक है? ये हो गया।

1028
01:17:09,760 --> 01:17:15,760
थोड़ा सा जंप करके जल्दी आगे चलते हैं। कुछ अच्छा मिलेगा।

1029
01:17:17,200 --> 01:17:22,560
देखिए किशन परिहार जी आ चुके हैं। हां

1030
01:17:22,560 --> 01:17:28,080
किशन परिहार जी को लेते हैं। बस अपना ये पूरा होने वाला है।

1031
01:17:28,080 --> 01:17:32,160
अब देखिए यहां पे इसने कहा है ना 93 वे प्रश्न पर 93 पर

1032
01:17:32,160 --> 01:17:37,200
आइए। 93

1033
01:17:37,200 --> 01:17:41,280
93 पर इसने कहा है रामपाल ने कि मन

1034
01:17:41,280 --> 01:17:44,800
स्वयं काल ब्रह्म है।

1035
01:17:44,800 --> 01:17:48,880
यानी कि पहली बात तो काल सदैव सबके साथ में मन के रूप में

1036
01:17:48,880 --> 01:17:53,120
है। अब या तो यह तय कर ले कि काल मन है

1037
01:17:53,120 --> 01:17:57,200
या फिर काल वो साकार है। कोई

1038
01:17:57,200 --> 01:18:01,280
जीव है जो इधर-उधर और जो मन है वो खाता कैसे है जीवों को ये

1039
01:18:01,280 --> 01:18:05,280
भी बात है। बहुत सी बातें आ जाती है तो काल भ्रम में मन है और जब मन

1040
01:18:05,280 --> 01:18:09,520
है तो वो वाला सवाल आता है कि जब जो रामपाल को मानने वाले लोग हैं और स्वयं

1041
01:18:09,520 --> 01:18:13,680
रामपाल है तो उनकी माताएं जब गर्भ धारण कर रही थी

1042
01:18:13,680 --> 01:18:17,760
तो वहां पर काल भी था इस हिसाब से जो

1043
01:18:17,760 --> 01:18:22,640
अभी अभी हमने पढ़ा तो वहां पर तीन लोग हो गए काल हो गया

1044
01:18:22,640 --> 01:18:26,800
और वो माता हो गई जो गर्भधारण कर रही हैं और

1045
01:18:26,800 --> 01:18:30,800
वो पिता हो गए जो बीज डालने के लिए वहां पर हैं। अब बात ये है

1046
01:18:30,800 --> 01:18:32,240
कि जब वहां पर काल भी है तो

1047
01:18:32,240 --> 01:18:37,520
काल वीडियोग्राफी करने के लिए वहां पर है। वहां कर क्या रहा है वो?

1048
01:18:37,520 --> 01:18:41,760
है ना। दूसरी बात कि वहां पर वो है पर दिक्कत नहीं हो रही है। चलो

1049
01:18:41,760 --> 01:18:45,760
ठीक है। पर मेन बात ये है जब वहां पर काल भी है तो गर्भधारण

1050
01:18:45,760 --> 01:18:49,840
हुआ किसके द्वारा? उसी पिता के द्वारा इसका नाम लेते हैं ये

1051
01:18:49,840 --> 01:18:54,240
लोग या फिर काल के द्वारा तो ये सोचने वाली बात है क्योंकि काल इनका स्वयं

1052
01:18:54,240 --> 01:18:58,240
मन है। ठीक है? अब आ गया चौथा अध्याय।

1053
01:18:58,240 --> 01:19:02,400
यहां तक हम लोग पढ़ चुके थे। वैसे हमने यहां तक बहुत सारी विवेचना की है विस्तृत

1054
01:19:02,400 --> 01:19:06,480
रूप से। तो आप लोग अगर लंबे-लंबे वीडियो नहीं भी देखने हो तो आप बुलेट पॉइंट्स

1055
01:19:06,480 --> 01:19:10,560
जरूर देखना जो सर्वशक्तिमान पे बुलेट पॉइंट सात एपिसोड के डले हुए

1056
01:19:10,560 --> 01:19:15,680
हैं। यहां तक के बुलेट पॉइंट्स आपको बहुत मजा आएगा। है ना?

1057
01:19:15,680 --> 01:19:18,400
तो इसमें

1058
01:19:18,400 --> 01:19:22,640
अच्छा देखिए इसमें 95 वे

1059
01:19:22,640 --> 01:19:26,800
पेज पर आ जाइए। 95 पर क्या लिखा है रामपाल ने?

1060
01:19:26,800 --> 01:19:32,800
मूर्खता की पराकाष्ठा।

1061
01:19:36,080 --> 01:19:40,080
देखो कहां कहां से मार सकते हो आप? इस किताब को पढ़ लोगे ना

1062
01:19:40,080 --> 01:19:44,080
ये जो मैंने इसमें निशान लगाता चल रहा हूं इनकी किताब में मेरी ये

1063
01:19:44,080 --> 01:19:48,640
किताब को ही ये निशान के साथ हम लोग इसको छपवा देंगे। इसी को आप पढ़ लोगे।

1064
01:19:48,640 --> 01:19:52,960
अलग से कुछ लिखने की जरूरत नहीं है। अब पीछे ये कह रहा है कि आत्माओं

1065
01:19:52,960 --> 01:19:56,960
को किसने उत्पन्न किया? कबीर परमात्मा

1066
01:19:56,960 --> 01:20:02,720
ने। और यहां पर 95 नंबर पेज पर यह कह रहा है

1067
01:20:02,720 --> 01:20:05,520
कि

1068
01:20:05,520 --> 01:20:09,680
काल ब्रह्म अच्छी आत्माओं को रचता है अर्थात पैदा

1069
01:20:09,680 --> 01:20:13,840
करता है। आत्माओं को पैदा कौन कर रहा है? काल ब्रह्म। तो काल और कबीर एक

1070
01:20:13,840 --> 01:20:17,920
हो गए। इस प्रकार से वहां कबीर कर रहा है। यहां पे काल कर रहा है।

1071
01:20:17,920 --> 01:20:22,000
ठीक है? काल और कबीर एक हो गए। बहुत

1072
01:20:22,000 --> 01:20:26,000
बढ़िया। अब बोलना। अब बोलना कहां

1073
01:20:26,000 --> 01:20:30,080
पे लिखा है? एक एक मिनट में हां ये देखिए ये बस बस बस ज्यादा ऊपर

1074
01:20:30,080 --> 01:20:36,080
नीचे आइए विशेष में आइए विशेष में हां

1075
01:20:36,080 --> 01:20:39,120
विशेष में देखिए

1076
01:20:39,120 --> 01:20:43,120
बीच में आ जाइए फिर कल्प के प्रारंभ में मैं रचूंगा अर्थात

1077
01:20:43,120 --> 01:20:47,280
अस्थाई जन्म मरण समाप्त हुआ है स्थाई नहीं ठीक है अब

1078
01:20:47,280 --> 01:20:51,200
और नीचे आ जाइए काल ब्रह्म अच्छी आत्माओं को रचता

1079
01:20:51,200 --> 01:20:55,360
है अर्थात पैदा करता है किसको पैदा कर रहा है आत्माओं को रच रहा

1080
01:20:55,360 --> 01:20:59,600
है तो यहां यहां पे भी आत्माओं को आत्माओं का नित्य होना सिद्ध नहीं हुआ। हालांकि

1081
01:20:59,600 --> 01:21:03,840
वो पहले भी मान चुका है। मगर यहां पर एक बात स्पष्ट है। आत्माओं को रच

1082
01:21:03,840 --> 01:21:07,920
रचता है परमात्मा रामपाल के अनुसार दो6 में और यहां

1083
01:21:07,920 --> 01:21:11,920
पर वो कह रहा है आत्माओं को रचता है काल ब्रह्म रामपाल

1084
01:21:11,920 --> 01:21:17,920
के अनुसार पष्ठ संख्या 95 ठीक है

1085
01:21:21,600 --> 01:21:27,120
और

1086
01:21:27,120 --> 01:21:33,120
हां एक बहुत अच्छी बात आई है यहां पे कि

1087
01:21:36,240 --> 01:21:40,720
इसमें वेदों में लिखा है कहा गया है

1088
01:21:40,720 --> 01:21:44,800
97 पेज है जो ये कहते हैं ना कि वेद में पांच वेद

1089
01:21:44,800 --> 01:21:49,840
कहते हैं मगर यहां पर रामपाल ने माना कि वेद चार है

1090
01:21:49,840 --> 01:21:54,320
और उसमें गरीब दास जी की वाणी भी साथ में प्रमाण है वेद पांच नहीं वेद

1091
01:21:54,320 --> 01:21:58,720
चार है। वेद चार कैसे हैं? गरीब दास जी की वाणी है। 97

1092
01:21:58,720 --> 01:22:04,720
पेज है।

1093
01:22:17,760 --> 01:22:23,760
पेज नंबर 97 97 में आप आ जाइए

1094
01:22:25,760 --> 01:22:29,760
जो बड़ा बड़ा ये जैसी जिसकी साधना वाला मामला

1095
01:22:29,760 --> 01:22:33,920
है इसके बाद दो पैराग्राफ छोड़ दीजिए फिर देखिए संत गरीब दास दिख

1096
01:22:33,920 --> 01:22:37,920
रहा है हां नीचे हां संत

1097
01:22:37,920 --> 01:22:42,080
गरीब दास जी ने परम परमेश्वर कबीर जी से प्राप्त तत्व ज्ञान

1098
01:22:42,080 --> 01:22:46,880
में बताया है कि गरीब ऋग यजु साम अथर्वण

1099
01:22:46,880 --> 01:22:51,120
चारों वेद चितभंगी रे ठीक है। इसके बाद वेदों

1100
01:22:51,120 --> 01:22:55,200
में लिखा है कि नेति यानी ना इति अर्थात जो ज्ञान चारों वेदों में

1101
01:22:55,200 --> 01:22:58,880
है यह संपूर्ण नहीं है।

1102
01:22:58,880 --> 01:23:02,960
वेद चार कहे गए हैं। आगे क्या है? ऋग्वेद, यजुर्वेद,

1103
01:23:02,960 --> 01:23:07,200
सामवेद, अथर्ववेद का ज्ञान अधूरा है। चित है।

1104
01:23:07,200 --> 01:23:12,480
चार वेद इन्होंने चारों वेद ही कहा।

1105
01:23:12,480 --> 01:23:17,600
आगे चलते हैं।

1106
01:23:17,600 --> 01:23:22,400
अ आगे और कोई

1107
01:23:22,400 --> 01:23:28,400
जरूरी बात

1108
01:23:28,560 --> 01:23:32,560
अगर दिखती है तो मैं बता बता देता हूं। ठीक है। इसके आगे

1109
01:23:32,560 --> 01:23:37,280
वो 32 तक हम लोग कर चुके। 32 के बाद अब जो एपिसोड आएगा उसमें करेंगे।

1110
01:23:37,280 --> 01:23:41,440
हां अब जो है प्रेम सिंह भाटी जी आए थे पहले।

1111
01:23:41,440 --> 01:23:45,440
एक बहुत अच्छी चीज रह गई है वो टीआर पहाड़ी जी

1112
01:23:45,440 --> 01:23:49,440
ने निकाली थी जिसमें एक ही श्लोक का एक समय पे अर्थ अलग

1113
01:23:49,440 --> 01:23:53,520
हो रहा है दूसरे समय पे अर्थ अलग हो रहा है जब वो

1114
01:23:53,520 --> 01:23:58,880
कह रहा है कि भाई मेरे को जो है जो जन्मा हुआ मानता है वो गलत है

1115
01:23:58,880 --> 01:24:03,200
साधारण मनुष्य मानता है वो वो गलत है और फिर वो तो

1116
01:24:03,200 --> 01:24:07,200
साधारण मनुष्य नहीं मानता है वो भी गलत है ऐसा कुछ आया था उसमें

1117
01:24:07,200 --> 01:24:12,320
वो अगर पहाड़ी जी को याद हो तो जरा वो बता दे वो भी दिखा दे वो बहुत अच्छी चीज है वो

1118
01:24:12,320 --> 01:24:18,320
हम पहाड़ी जी अगर देख रहे हो तो बता दे

1119
01:24:25,200 --> 01:24:29,280
जो मुझे जो है मनुष्य देह में देखकर जो है सामान्य समझता है वो

1120
01:24:29,280 --> 01:24:33,360
उसको वो गलत कह रहा है और फिर बाद में कह रहा है जो उसको जो है परमेश्वर समझता

1121
01:24:33,360 --> 01:24:37,600
है वो गलत है। पहले कह रहा है कि जो मुझे तुच्छ समझता

1122
01:24:37,600 --> 01:24:41,920
है वो गलत है। फिर कह रहा है जो मुझे तुच्छ नहीं समझता है बड़ा समझता

1123
01:24:41,920 --> 01:24:47,920
है वह गलत एक ही ऊपर नीचे

1124
01:24:49,840 --> 01:24:54,080
पहाड़ी जी अगर देख रहे होंगे तो वो बताएंगे नहीं तो फिर हम लोग अभी फिलहाल आगे बढ़ते

1125
01:24:54,080 --> 01:24:58,160
हैं और ये वाली बात अगर आगे मैं फिर कहीं पे बता

1126
01:24:58,160 --> 01:25:02,320
दूंगा तो मुझे मिल जाएगी जी भाटी जी

1127
01:25:02,320 --> 01:25:06,320
जय श्री राम सुना है आप बड़ा बवाल का जय श्री राम

1128
01:25:06,320 --> 01:25:10,960
सादर प्रणाम जय जय हो

1129
01:25:10,960 --> 01:25:15,280
इनके तो चार चार पेज पढ़ो तो इनके

1130
01:25:15,280 --> 01:25:19,360
10 पॉइंट मिल जाते हैं। कोई है ही नहीं। कोई ज्ञान का कोई डिलेबर का

1131
01:25:19,360 --> 01:25:23,360
ज्ञान नहीं है श्री रामपाल को कुछ नहीं

1132
01:25:23,360 --> 01:25:27,520
खड़ा कर रखा है। एक बात पूरी कर लूं तो ये हमने लगभग चौथे अध्याय

1133
01:25:27,520 --> 01:25:31,760
तक जो रीकैप है मोटा मोटा आपको बताने का प्रयास किया है कि इनकी इसकी

1134
01:25:31,760 --> 01:25:36,080
ही किताब में इसने कितनी बड़ी गड्ढे खोद रखे हैं अपने मुंह के बल गिरने

1135
01:25:36,080 --> 01:25:40,640
के लिए। तो आप उन गड्ढों को ही बाहर निकालें और यहां से आगे 4:32

1136
01:25:40,640 --> 01:25:44,880
से आगे की विवेचना अब हमारे मेन चैनल पर प्रत्येक मंगलवार शाम

1137
01:25:44,880 --> 01:25:49,040
को 9:00 बजे से आया करेगी जिसमें हम पूरे 18 अध्याय तक जाएंगे कि

1138
01:25:49,040 --> 01:25:53,040
इसने कैसा रायता फैलाया हुआ है। कैसा कीचड़ फैलाया हुआ है ज्ञान

1139
01:25:53,040 --> 01:25:57,360
का। ज्ञान के नाम पर ज्ञान का कीचड़ नहीं ज्ञान के नाम पर।

1140
01:25:57,360 --> 01:26:01,440
तो आप लोग उसमें कंटिन्यू करें और जो

1141
01:26:01,440 --> 01:26:05,520
उसका समराइज वीडियो होगा वो हर जैसे वो मंगलवार को

1142
01:26:05,520 --> 01:26:09,600
लाइव हो गई तो उसका एक समराइज्ड वीडियो एपिसोड वाइज यहां भी आता रहेगा

1143
01:26:09,600 --> 01:26:13,760
सर्वशक्तिमान पे वो संक्षिप्त होगा वो पूरा विस्तृत होगा और संक्षिप्त

1144
01:26:13,760 --> 01:26:18,320
होगा तो आप अपनी सहजता के अनुसार आपको जो ठीक लगे अगर आंतर

1145
01:26:18,320 --> 01:26:22,400
फुल विस्तृत विवेचना देखनी है तो वहां देखिएगा और संक्षिप्त में देखना

1146
01:26:22,400 --> 01:26:27,680
है तो यहां देखिएगा बुलेट पॉइंट्स के नाम पे जी अब बोले

1147
01:26:27,680 --> 01:26:31,760
हां जी पिछले कई महीनों से आप गए काफी

1148
01:26:31,760 --> 01:26:35,760
वीडियो चैनल पे देखे हैं पुरानी आपकी सारी डिबेट्स देखी है

1149
01:26:35,760 --> 01:26:39,760
उससे काफी जानकारियां मिली निश्चित रूप

1150
01:26:39,760 --> 01:26:44,880
से तो अभी इनसे थोड़ा भिड़ने का प्रयास किया

1151
01:26:44,880 --> 01:26:49,920
कल एक तीन चार दिन से एक चैनल पे चर्चा चल रही थी इनके

1152
01:26:49,920 --> 01:26:54,000
कल इनके जो मेन विद्वान है जो अक्सर इनके चैनलों

1153
01:26:54,000 --> 01:26:55,840
पे चर्चा करते रहते हैं उनमें से

1154
01:26:55,840 --> 01:26:59,920
थे चेतन दास एक बार अमित के साथ आपके कई बार डिबेट

1155
01:26:59,920 --> 01:27:04,320
हो चुकी है जानते होंगे आप तो उनका ही चैनल

1156
01:27:04,320 --> 01:27:08,400
था और मैंने प्रश्न पहले तो परसों मेरी डिबेट

1157
01:27:08,400 --> 01:27:12,560
थी तब मैंने सिद्ध कर दिया भाई भगवान विष्णु या कृष्ण जो भी कह दो वो पूर्ण

1158
01:27:12,560 --> 01:27:17,040
परमात्मा है गरुड़ पुराण से और देवी भागवत से सिद्ध कर दिया

1159
01:27:17,040 --> 01:27:21,200
कल मैंने प्रश्न रखा अब आप कबीर साहब को हमारे किसी भी सनातन शास्त्र से सिद्ध

1160
01:27:21,200 --> 01:27:25,520
करके बताओ पूर्ण परमात्मा है पहले तो वो वेदों वाली

1161
01:27:25,520 --> 01:27:29,520
वो बताई सारे पे उनको वो आपटे के शब्दकोश

1162
01:27:29,520 --> 01:27:33,600
से वगैरह से हिलने विषयांतरित होने का खूब प्रयास किया। मैंने कहा मैं

1163
01:27:33,600 --> 01:27:37,680
इसी पे बात हो गई तो कल ये हालत हो गई इनकी लास्ट में ये

1164
01:27:37,680 --> 01:27:41,680
जो अभी आपने चितपंगी वाणी जो पढ़ा ना वो वाणी कबीर जी की कि ये तो

1165
01:27:41,680 --> 01:27:45,840
वेदों का ज्ञान सही है तो मैंने कहा भैया आज से आप क्लेम करना बंद कर दोगे आपकी

1166
01:27:45,840 --> 01:27:50,160
शास्त्रानुकूल भक्ति नहीं है। आप क्लेम मत करो। हम आपको कुछ नहीं कहेंगे।

1167
01:27:50,160 --> 01:27:54,320
अब आप चितंगी वेदों को मान रहे हो। क्यों कह रहे हो भाई? वेदों में प्रमाण है कबीर साहब

1168
01:27:54,320 --> 01:27:58,400
भगवान है। यह बात आज आज आपके आज से आज

1169
01:27:58,400 --> 01:28:02,400
के बाद नहीं निकलनी चाहिए। तो यानी इनके पास प्रमाण कुछ

1170
01:28:02,400 --> 01:28:06,400
नहीं बचता है। ले दे के ये अपनी वाणियों पर आ जाते हैं जो 19

1171
01:28:06,400 --> 01:28:11,040
शताब्दी के बाद की है और आधी से ज्यादा इनकी मिलावटी

1172
01:28:11,040 --> 01:28:15,280
है तो अच्छी तरह से डिबेट हुई थी और काफी

1173
01:28:15,280 --> 01:28:19,600
लोगों के कॉल भी आए मैसेज भी आए उसकी खूब सराहना हुई है और

1174
01:28:19,600 --> 01:28:23,600
लेकिन ये जो भी सीखा है वो आपसे ही सीखा है। हम तो बस निमित्त मात्र

1175
01:28:23,600 --> 01:28:28,800
हैं। बढ़िया मैंने कुछ नहीं सिखाया है। सब गुरु गोविंद ग्रंथ की कृपा है।

1176
01:28:28,800 --> 01:28:33,680
एक मैंने आपको भेजा है। अगर यदि उचित समझे तो आप लगा दीजिए।

1177
01:28:33,680 --> 01:28:37,760
गीता किसने कही है? गीता किसने कही उसके मैंने दो प्रमाण भेजे। एक तो

1178
01:28:37,760 --> 01:28:41,760
महाभारत से, भीष्म ब्रह्म से और एक कुर पुराण से। वो

1179
01:28:41,760 --> 01:28:45,840
हम लोग काफी चर्चाओं में बता चुके हैं। दे आगे भी देते रहेंगे।

1180
01:28:45,840 --> 01:28:50,240
अभी बस अभी तो आप बस यहां थोड़ा माहौल में जो वातावरण

1181
01:28:50,240 --> 01:28:54,400
है उसको आप कंटिन्यू करिए। अभी बहुत प्रमाण देने की आवश्यकता नहीं है। उनको

1182
01:28:54,400 --> 01:28:58,640
एक दिखाना था बस गीता का। जी एक

1183
01:28:58,640 --> 01:29:03,280
और मैं ये कह रहा था ये जो ये इनका सतलोक है ना

1184
01:29:03,280 --> 01:29:07,440
है भी नहीं हालांकि लेकिन ये मानता ये रामपाल की किताब में मैंने पढ़ा रहे

1185
01:29:07,440 --> 01:29:11,680
एक न्यूज़ और नहीं है एक मिनट एक

1186
01:29:11,680 --> 01:29:15,680
न्यूज़ और मैं आपको देना चाहता हूं कि एक गांव है जिसमें कि आज

1187
01:29:15,680 --> 01:29:19,680
ही हमें सूचना प्राप्त हुई है। जैसे अभी भाटी

1188
01:29:19,680 --> 01:29:24,160
जी कह रहे हैं ना कि हमें जो है देखदेख कर इतना प्रेरणा

1189
01:29:24,160 --> 01:29:26,160
मिली और वो जो है अब इनको निरुत्तर

1190
01:29:26,160 --> 01:29:30,560
करने लगे हैं। एक गांव है जहां पर 700 लोग रामपाल की

1191
01:29:30,560 --> 01:29:34,560
रामपाल के चेला चीली बन गए थे। भगत बन गए थे। वहां से एक संत का

1192
01:29:34,560 --> 01:29:38,560
मुझे फोन आया रामानंदी संप्रदाय के हैं। वो मेरे वीडियोस को काफी दिन

1193
01:29:38,560 --> 01:29:43,280
से फॉलो कर रहे थे हमारे वीडियोस को और देख रहे थे, दिखा रहे थे। उन्होंने 700

1194
01:29:43,280 --> 01:29:47,360
लोगों को घर वापसी करा ली है। सिर्फ पांच लोग रह गए हैं अब जो रामपाल

1195
01:29:47,360 --> 01:29:51,360
को मानते हैं। पूरा गांव सही कर दिया उन्होंने। है ना? बहुत बड़ा

1196
01:29:51,360 --> 01:29:55,440
अचीवमेंट है। बहुत बड़ा बहुत बड़ा। पूरा गांव वो

1197
01:29:55,440 --> 01:29:59,600
पूरा गांव जो हो गया था ना रामपाली 700 लोग उसमें से पांच लोग बचे हैं। अभी

1198
01:29:59,600 --> 01:30:03,840
मुझे सूचना मिली है। बहुत जल्द वो हमारे चैनल पर भी आएंगे

1199
01:30:03,840 --> 01:30:08,640
तथ्यों के साथ तब हम जो है चीजें आपको और आगे बताएंगे।

1200
01:30:08,640 --> 01:30:12,800
ये हम जो जितनी डिबेट करें ना यह नहीं मानने वाले

1201
01:30:12,800 --> 01:30:16,800
जो ये मूर्ख बन गए लेकिन जो आने वाले लोग हैं वो इन सब चीजों

1202
01:30:16,800 --> 01:30:21,040
को देखेंगे तो उनकी बुद्धि पे बहुत ज्यादा फर्क पड़ता है। इसलिए ये चीजें कंटिन्यू

1203
01:30:21,040 --> 01:30:25,280
करनी बहुत जरूरी है। नहीं जो जो बहुत महान

1204
01:30:25,280 --> 01:30:29,680
कार्य कर रहे हैं और इसको और द्रुत गति से हमें करना है। जो जो रामपाली

1205
01:30:29,680 --> 01:30:33,840
बन चुके हैं अगर उनमें थोड़ी भी बौद्धिकता होगी बुद्धि अगर थोड़ी भी रहेगी ना तो वह

1206
01:30:33,840 --> 01:30:38,400
वीडियोस देख देख करके अपने परिवर्तन कर लेंगे। जैसे कईों में परिवर्तन आ चुक

1207
01:30:38,400 --> 01:30:41,280
एक वो अपने साथ जुड़ा था ना वो शंकर लाल जी

1208
01:30:41,280 --> 01:30:45,760
उनके आश्रम जाके आए थे लेकिन हमें देख के वो वो भी हृदय

1209
01:30:45,760 --> 01:30:49,840
परिवर्तित हो गए जी जी अच्छा अच्छा यही परिहार जी

1210
01:30:49,840 --> 01:30:55,840
है क्या जो यहां पर है हां इनसे बात करें

1211
01:30:56,880 --> 01:31:01,040
कौन है परिहार जी ये जो आए हैं ये ये

1212
01:31:01,040 --> 01:31:05,040
कौन है ये ये तो अपने पक्ष के लग रहे हैं मुझे ये

1213
01:31:05,040 --> 01:31:09,600
जो सामने स्क्रीन पे इस समय हां स्क्रीन पर ये कौन है इनका

1214
01:31:09,600 --> 01:31:13,600
ये तो अपने पक्ष के व्यक्ति है अच्छा अच्छा

1215
01:31:13,600 --> 01:31:18,960
जी परिहार जी बोले

1216
01:31:18,960 --> 01:31:22,160
आवाज नहीं आ रही आपकी

1217
01:31:22,160 --> 01:31:26,160
ऑपरेटर जी बोलिए अब आ रही है अब

1218
01:31:26,160 --> 01:31:30,320
आ रही है अच्छा अच्छा

1219
01:31:30,320 --> 01:31:34,560
आप हमारे पक्ष के नहीं है नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं समझ गया आप पक्ष के

1220
01:31:34,560 --> 01:31:38,640
आप आप जो है ना आप आप किशन जी हैं और जो है वो

1221
01:31:38,640 --> 01:31:43,120
रामपाल के वो वाले शिष्य हैं जो

1222
01:31:43,120 --> 01:31:47,360
इस गैंग से दूर है पर रामपाल के प्रति जो है आस्था

1223
01:31:47,360 --> 01:31:52,640
रखते हैं ना किशन दास गैंग किसको कह रहे हैं आप

1224
01:31:52,640 --> 01:31:57,120
आपको पूछ रहा हूं आप अपना परिचय दे

1225
01:31:57,120 --> 01:32:02,080
मेरा नाम किशन दास है किशन दास ना हां

1226
01:32:02,080 --> 01:32:06,240
हां बताइए किशन बताइए बताइए आप गैंग आप गैंग किसको

1227
01:32:06,240 --> 01:32:10,480
कह रहे हैं? पहले ये बताइए। किसको? क्या कह रहा हूं? आप गैंग

1228
01:32:10,480 --> 01:32:14,480
किसको कह रहे हैं? रामपाल की जो गैंग चलती है ना जो उल्टे

1229
01:32:14,480 --> 01:32:18,080
सीधे काम करती है।

1230
01:32:18,080 --> 01:32:22,160
क्या उल्टे सीधे काम करती है? जो जो लोगों की भलाई

1231
01:32:22,160 --> 01:32:26,160
करने का काम है वह उल्टा सीधा काम है। उल्टा सीधा काम यह है

1232
01:32:26,160 --> 01:32:30,160
कि किसी को कहना, किसी को कुछ कहना इस तरीके के असली

1233
01:32:30,160 --> 01:32:34,240
शब्दों का उपयोग करना वो सेक्स करती है, वो ये करती है। ये सब

1234
01:32:34,240 --> 01:32:38,240
वीडियोस बनाना ये गैंग और गैंग सुनो। गैंग गैंग पूरी

1235
01:32:38,240 --> 01:32:42,320
बात सुनो। पूरी बात सुनो। मुकदमा करना, छेड़खानी का

1236
01:32:42,320 --> 01:32:46,480
झूठा मुकदमा लगाना, व्यक्ति को फंसाने की कोशिश करना यह

1237
01:32:46,480 --> 01:32:50,800
गैंग का काम है। नाम दान के नहीं

1238
01:32:50,800 --> 01:32:55,280
आपकी आपकी भाषा मरदित है। मेरी भाषा मरदित है और क्या

1239
01:32:55,280 --> 01:32:59,520
मेरी भाषा मर्यादित आप कैसे बोलते हैं? बोला ये बताइए। किसको गाली

1240
01:32:59,520 --> 01:33:04,000
दी बताइए? किसको गाली दी? बताइए।

1241
01:33:04,000 --> 01:33:08,080
आपने कितनी बार दी है? चीफ निकल आई। मैंने नाम आप किसी का अगर

1242
01:33:08,080 --> 01:33:12,320
नाम नहीं लेते हो ना? चीफ निकल आई। चीफ निकल आई।

1243
01:33:12,320 --> 01:33:17,600
मैंने गाली किसको दी है बताइए अब आप? आपने कितनी बार

1244
01:33:17,600 --> 01:33:21,680
गाली किसको दी बताइए आपने काफी बार गाली गलौज से बात की

1245
01:33:21,680 --> 01:33:25,680
है बात बताइए ना कौन सी गाली दी इसी

1246
01:33:25,680 --> 01:33:31,680
को कहते हैं दर्शन विज्ञान और व्यवहार जो प्रामाणिक आचार्य की शिक्षा से मिलता है

1247
01:33:33,040 --> 01:33:38,160
जब तकलीफ है

1248
01:33:38,160 --> 01:33:42,400
ऐसी बात बोलते हैं जिसमें आपका जो है ना अंतरात्मा बिल्कुल रोने लगे

1249
01:33:42,400 --> 01:33:46,880
मगर गाली नहीं होगी वो इसको इसको कहते हैं दर्शक समझ

1250
01:33:46,880 --> 01:33:49,680
गए

1251
01:33:49,680 --> 01:33:55,680
बस यही बात हुई बस

1252
01:33:55,680 --> 01:33:59,760
[हंसी] सिद्ध नहीं कर पाएंगे भाई कौन कहां है कौन सा गाली

1253
01:33:59,760 --> 01:34:03,760
दिया भाई हमने बताओ एक जगह भी दिखा दो प्रेमानंद जी महाराज ने

1254
01:34:03,760 --> 01:34:08,080
कौन सी गाली दी है उनके ऊपर कितनी बकवास कर रहे हो तुम लोग प्रेमानंद

1255
01:34:08,080 --> 01:34:12,080
जी महाराज ने किसको गाली दी है वो तो फिर भी संत है उनका

1256
01:34:12,080 --> 01:34:16,320
बात अलग है यहां पर जो इसको अब मत लेना है।

1257
01:34:16,320 --> 01:34:20,560
भूल गया था। इसके जैसे चेहरे के हमारे एक व्यक्ति हैं जो कभी कभी

1258
01:34:20,560 --> 01:34:24,640
आते हैं। मुझे वो याद आ रहे थे। शायद वो है।

1259
01:34:24,640 --> 01:34:28,720
अरे या तो उनका नाम वो है ना जो मंदिर

1260
01:34:28,720 --> 01:34:32,880
के महंत है ना वहां पर गुजरात में गोस्वामी जी

1261
01:34:32,880 --> 01:34:38,480
है जो लिखते हैं आप जानते होंगे शास्त्र जी

1262
01:34:38,480 --> 01:34:42,880
मुझे ध्यान नहीं है अभी अगर जो

1263
01:34:42,880 --> 01:34:47,440
उनसे काफी चेहरा मिलता है इनका अच्छा अच्छा

1264
01:34:47,440 --> 01:34:48,240
नहीं है ये

1265
01:34:48,240 --> 01:34:52,400
लोग आते ही इसी तरह से सभी दर्शक देख लिए होंगे ये लोग आते हैं क्या पर्सनल अटैक

1266
01:34:52,400 --> 01:34:56,800
करने के लिए और जब उसका जब मैंने पूछा किसको गाली दी?

1267
01:34:56,800 --> 01:35:00,880
जब मैंने पूछा किसको गाली दी? तो इन्होंने साइड

1268
01:35:00,880 --> 01:35:05,120
में देखा जीव इनकी बाहर निकली। वो वो एक्सप्रेशन नोट करिएगा। जब व्यक्ति फंसता

1269
01:35:05,120 --> 01:35:09,280
है ना तो अपने आप को सामान्य दिखाने के लिए अपनी घबराहट को छुपाने

1270
01:35:09,280 --> 01:35:13,840
के लिए इस तरह की चीजें करने लगता है। ऐसे कर रहे एक एक

1271
01:35:13,840 --> 01:35:18,240
चीज बड़ी जोरदार मिली है। इसमें रामपाल ने एक

1272
01:35:18,240 --> 01:35:22,240
कबीर सागर का सरलार्थ किया है। उसमें

1273
01:35:22,240 --> 01:35:26,240
75 नंबर पर कोई गुप्त मुनि है जिसको सतलोक

1274
01:35:26,240 --> 01:35:30,240
ले जाते हैं और सतलोक से फिर वो उसका पतन भी होता है और वो वापस आता

1275
01:35:30,240 --> 01:35:34,240
है। यानी सतलोक भी नित्य नहीं है इसका। सतलोक

1276
01:35:34,240 --> 01:35:40,240
नित्य नित्य नहीं है। हां वो बड़ा घपड़ा है। इसमें

1277
01:35:40,640 --> 01:35:44,800
कोई टी गोस्वामी जी है वो आते हैं अपने साथ में रहते

1278
01:35:44,800 --> 01:35:49,680
हैं तो उनसे काफी इनका फेस मिल रहा था तो वही मैं धोखा खा गया। खैर

1279
01:35:49,680 --> 01:35:53,760
व्यक्ति पता नहीं क्या गैंग किसको बोल रहा है ये वो है भाई गैंग है

1280
01:35:53,760 --> 01:35:57,760
तुम्हारे लोगों की झूठे मुकदमे तुम लोग कराते हो उल्टी

1281
01:35:57,760 --> 01:36:03,760
सीधी भाषा बोल रहे हो तुम तथ्य का जवाब तथ्य से दे नहीं पा रहे हो रामपाल

1282
01:36:04,160 --> 01:36:04,660
हमारे

1283
01:36:04,640 --> 01:36:09,680
हमारे इधर राजस्थान में राजस्थान से हूं जोधपुर से एक राम

1284
01:36:09,680 --> 01:36:13,760
राम देखो अगर मां ने मां

1285
01:36:13,760 --> 01:36:17,840
का दूध पिया है किसी भी रामपाली ने तो आकर सिद्धांतिक बात

1286
01:36:17,840 --> 01:36:22,080
करे कि सिद्धांत क्या है? रामपाल ने जो ज्ञान दिया है वो कचरा

1287
01:36:22,080 --> 01:36:26,880
है। हमारी ओर से वो कचरा है और तुम सिद्ध कर दो कि वो ज्ञान है।

1288
01:36:26,880 --> 01:36:30,880
इस बात को करो आकर के ज्यादा इधर उधर की बातें मत करो नहीं तो परेशान

1289
01:36:30,880 --> 01:36:34,240
हो जाओगे।

1290
01:36:34,240 --> 01:36:38,320
हां बोलिए भाटी जी। हां मैं यह कह रहा था आपने जो अभी

1291
01:36:38,320 --> 01:36:42,640
शुरू से कहा ना वापस जहर जाने की तैयारी कर रहा था निश्चित रूप से कर रहा है हमारे

1292
01:36:42,640 --> 01:36:46,960
यहां राजस्थान में एक राम स्नेही संप्रदाय है जो बड़ा ही पावन मतलब पावन

1293
01:36:46,960 --> 01:36:51,120
एक पथ है उनका भगवान राम के प्रति समर्पण का भक्ति का बहुत

1294
01:36:51,120 --> 01:36:55,280
भाविक जुड़े हुए हैं उन उनको अभी हाल ही में इसने नकली बोल

1295
01:36:55,280 --> 01:36:59,360
दिया ये तो क्या नकली है राम से नहीं तो उनके वो संत

1296
01:36:59,360 --> 01:37:03,440
लोग बहुत वो रुष्ट है और वो भी कारवाई करने का सोच रहे हैं बड़ा जोरदार

1297
01:37:03,440 --> 01:37:08,000
उसमें एक दो दिन में उनका भी संत का सम्मेलन हो रहा है जिसके विरुद्ध है वो

1298
01:37:08,000 --> 01:37:12,000
ये देखो ये क्या कह रहा है ये आजाद शर्मा का एक कमेंट है जरा

1299
01:37:12,000 --> 01:37:16,320
दिखाना कि मैं उनसे चर्चा नहीं करता

1300
01:37:16,320 --> 01:37:22,320
वो कमेंट दिखाओ जरा

1301
01:37:22,720 --> 01:37:27,280
ये आजाद शर्मा करके कोई लिख रहा है

1302
01:37:27,280 --> 01:37:31,840
ऊपर जाकर के इसका कमेंट है उसमें वह लिख रहा है कि मैं जो है

1303
01:37:31,840 --> 01:37:36,880
पाखंडियों से चर्चा नहीं करता

1304
01:37:36,880 --> 01:37:41,120
आकर पहले पाखंडी सिद्ध करो फिर बोलना कि पाखंडी

1305
01:37:41,120 --> 01:37:45,280
से चर्चा नहीं करते है ना अभी यहां आओगे तो तुम खुद ही पाखंडी

1306
01:37:45,280 --> 01:37:51,280
सिद्ध हो जाओगे और नीचे आइए बस अभी-अभी बोला है बस थोड़ा सा ऊपर गया

1307
01:37:51,600 --> 01:37:55,840
तो यह व्यक्ति कह रहा है मैं पाखंडियों से चर्चा नहीं करता अब ये बता तू

1308
01:37:55,840 --> 01:38:00,480
ये बात कह किससे रहा है ये देखो

1309
01:38:00,480 --> 01:38:04,480
देखो ऐसे पकड़ते हैं इनको इनके बिल्कुल उसको जी्हा

1310
01:38:04,480 --> 01:38:08,560
को पकड़ लेना वही काम है पंडित शिवश नारायण द्विवेदी का। तुम

1311
01:38:08,560 --> 01:38:12,720
जहां बोलोगे जो बोलोगे उसी पर पकड़ लिया जाएगा तुम्हें। मरना मुंह मत

1312
01:38:12,720 --> 01:38:17,040
वो खोलो। मैंने कल बताया था चार जूते पड़ रहे हैं खा लो। मुंह खोलोगे

1313
01:38:17,040 --> 01:38:21,120
तो फसोगे। तो क्या है अभी वो फंसे कि तुम नहीं गाली देते।

1314
01:38:21,120 --> 01:38:25,280
मजाल है कोई माई का लाल सिद्ध कर दे। हमने कभी गाली दी अपने मंच से और चीजें

1315
01:38:25,280 --> 01:38:29,360
ऐसी ऐसी कर रखी है कि पूरा भूकंप आया हुआ है इनके खेमे में। है

1316
01:38:29,360 --> 01:38:33,440
ना? इसको कहते हैं दर्शन विज्ञान। इसको कहते हैं दर्शन विज्ञान

1317
01:38:33,440 --> 01:38:37,440
व्यवहार। अब ये व्यक्ति कह रहा है कि कि पाखंडियों से चर्चा नहीं

1318
01:38:37,440 --> 01:38:37,940
करते

1319
01:38:37,760 --> 01:38:41,920
और बहुत सी कमेंट करता जा रहा है और जिसमें वो कमेंट हमको जो है हमसे

1320
01:38:41,920 --> 01:38:46,480
बात कर रहा है इस भाव से ही कमेंट कर रहा है। तो बेवकूफ व्यक्ति

1321
01:38:46,480 --> 01:38:50,960
ये चर्चा नहीं कर रहा तू लिख लिख के। भाई भाई रामपाल

1322
01:38:50,960 --> 01:38:54,960
अगर आप में दम है तो ऊपर आओ ना। चर्चा करो ना। गालियां क्यों दे रहे हो? बात

1323
01:38:54,960 --> 01:38:59,040
करो हम आपकी सुनेंगे। ऊपर आइए

1324
01:38:59,040 --> 01:39:03,200
गाली देना कोई समाधान के ऊपर आ

1325
01:39:03,200 --> 01:39:08,080
के सिद्ध कर दो अपनी अपने अपने बाबा को सिद्ध कर दो भाई अपने बाबा को सिद्ध कर दो

1326
01:39:08,080 --> 01:39:13,200
बस अपने आकाओं को सिद्ध करो यहां ओपन आपके लिए है

1327
01:39:13,200 --> 01:39:17,280
ओपन चैलेंज है भाई ओपन चैलेंज इसके बाद तुम्हें ज्ञान चर्चा करनी है कि

1328
01:39:17,280 --> 01:39:21,840
गैंग कौन है गैंग नहीं है ये कोर्ट के मामलों को यहां सुलटाना है

1329
01:39:21,840 --> 01:39:25,840
ज्ञान चर्चा करनी है तुम्हें अगर अपने बाबा के सिद्धांतों पर तुम्हें गर्व

1330
01:39:25,840 --> 01:39:31,760
है विश्वास है तो उसके लिए आओ तुम ऊपर

1331
01:39:31,760 --> 01:39:35,840
कमेंट कर दो समझ जाएंगे

1332
01:39:35,840 --> 01:39:39,840
ठीक है बाकी ये आजाद शर्मा को देखो स्टेज पर

1333
01:39:39,840 --> 01:39:44,480
है क्या बैक स्टेज आजाद शर्मा आजाद शर्मा देखो बेवकूफ

1334
01:39:44,480 --> 01:39:48,560
बेवकूफी की हद है कि खुद कह रहा है कि मैं चर्चा नहीं

1335
01:39:48,560 --> 01:39:52,880
करता और फिर खुद जो है चर्चा करता चला जा रहा है

1336
01:39:52,880 --> 01:39:57,900
इसको कहते दोगलेपन के नमूने

1337
01:39:57,900 --> 01:40:02,000
[हंसी] ये लोग यही होता है। दोगलापन

1338
01:40:02,000 --> 01:40:06,480
यही होता है। पहले बोलता है चर्चा नहीं करेंगे। बाद में चर्चा करने का बहाना देखो।

1339
01:40:06,480 --> 01:40:10,080
कमेंट है इनका।

1340
01:40:10,080 --> 01:40:14,240
गाली देना आसान काम है ना। अरे नहीं कमेंट

1341
01:40:14,240 --> 01:40:18,880
आसान है ना। बहुत आसान काम है। ये इनका ग्रुप सिखाता है।

1342
01:40:18,880 --> 01:40:23,680
ग्रुप ही यही लहजा है। कोई वही कोई ज्यादा अच्छा थोड़ी है कोई।

1343
01:40:23,680 --> 01:40:27,840
रामपालियों के लिए यह मंच सदैव ओपन रहेगा। मंगलवार

1344
01:40:27,840 --> 01:40:32,080
की शाम को वो आ सकते हैं। यहां पर अपने बाबा के सड़े हुए ज्ञान

1345
01:40:32,080 --> 01:40:36,400
को यदि वो सिद्ध कर सकते हैं तो सिद्ध करें कि वो ज्ञान है। वो कचरा

1346
01:40:36,400 --> 01:40:40,400
है। कचरा पेटी का कचरा तुम्हारे बाबा का ज्ञान। और

1347
01:40:40,400 --> 01:40:44,560
अगर तुम्हारी माताजी ने तुमको निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया है तो आओ

1348
01:40:44,560 --> 01:40:48,640
आकर के उसको सिद्ध करो। अब वो आए आ के

1349
01:40:48,640 --> 01:40:52,720
क्या कह रहे हैं कि गैंग किसको कह रहे हो? अब तुम्हें हम पूरा कोर्ट कोर्ट की विवेचना दोबारा से

1350
01:40:52,720 --> 01:40:56,720
सुनाएं। उस ये व्यक्ति को मैं एक बार पहले

1351
01:40:56,720 --> 01:41:00,880
समय दे चुका हूं। बहुत समय पहले मुद्दे की बात करनी नहीं

1352
01:41:00,880 --> 01:41:04,880
है। इसी तरह की बातें करनी है। तुमने ये कैसे कहा? तुमने वो

1353
01:41:04,880 --> 01:41:08,960
कैसे कहा? अब हम जो बातें कोर्ट कचहरी की बातें हैं भाई कि

1354
01:41:08,960 --> 01:41:13,040
इसने ये किया। इसने वो किया। तुम तो सीधे-सीधे जो

1355
01:41:13,040 --> 01:41:17,120
हमारे ग्रंथों की बात है और तुमने जो किताबें छाप रखी है, उनको आधार लेकर के अपने ज्ञान को

1356
01:41:17,120 --> 01:41:21,520
सही सिद्ध करना है तुम्हारा काम। कौन आया था अभी? कोई

1357
01:41:21,520 --> 01:41:25,520
जुड़ा था ना अभी?

1358
01:41:25,520 --> 01:41:29,840
कौन जुड़ा था अगर? अभी कोई आया था।

1359
01:41:29,840 --> 01:41:33,840
अगर ये अगर ये आता है फिर से क्या नाम है इनका? अभी

1360
01:41:33,840 --> 01:41:38,400
जो आया था किशनगढ़। किशन दास हां अगर वो आए तो

1361
01:41:38,400 --> 01:41:42,480
बस भाई अगर तुम सिद्धांतिक बात करना चाह कर पाओगे तो कर लो आ

1362
01:41:42,480 --> 01:41:46,560
के नहीं तो फिर ये सब बात के लिए कोट है भैया के

1363
01:41:46,560 --> 01:41:50,800
भैया वहीं वहीं पे बता देंगे। मैं अभी पांच मिनट और वेट

1364
01:41:50,800 --> 01:41:56,800
करूंगा। 41 हो रहा है। 141 तक हम

1365
01:41:59,520 --> 01:42:03,600
एक 41 एक घंटा 41 मिनट हो चुका है हमारी लाइव को। 1

1366
01:42:03,600 --> 01:42:07,680
घंटे 45 42 हो चुका है। एक घंटे 45 मिनट तक मैं वेट करूंगा।

1367
01:42:07,680 --> 01:42:11,680
अगर कोई रामपाली हो रामपाल का सच्चा

1368
01:42:11,680 --> 01:42:15,680
भक्त अपने आप को मानता हो और यदि उसकी मां ने उसको

1369
01:42:15,680 --> 01:42:19,840
निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया हो तो रामपाल के दिए दिए हुए

1370
01:42:19,840 --> 01:42:24,320
भ्रांति रूपी अज्ञान को वो आकर के ज्ञान सिद्ध करें।

1371
01:42:24,320 --> 01:42:28,320
ठीक है? और बाकी जो इधर उधर की चीजें हैं कि तुमने

1372
01:42:28,320 --> 01:42:32,480
क्या कहा, उसने क्या कहा वो सब मुझे ना बताएं।

1373
01:42:32,480 --> 01:42:36,560
आ जाओ भाई आ जाओ। पूरा ओपन चैलेंज है किसी की मां ने

1374
01:42:36,560 --> 01:42:40,800
दूध पिलाया है? निष्ठा पूर्वक है

1375
01:42:40,800 --> 01:42:45,520
तो आ जाना। ठीक है।

1376
01:42:45,520 --> 01:42:49,520
अच्छा हड़कंप तो मचा दिए हैं आप। [हंसी] कोई आया है

1377
01:42:49,520 --> 01:42:51,840
क्या?

1378
01:42:51,840 --> 01:42:55,840
ये कह रहे हैं एक भी संत रामपाल का पक्ष नहीं लेता

1379
01:42:55,840 --> 01:43:01,840
है शिवश जी ना ही कोई संत रामपाल की किसी प्रोग्राम में जाता है।

1380
01:43:03,680 --> 01:43:07,920
तो बहुत बढ़िया बात है। कोई भी संत नहीं जाए ऐसा। संत

1381
01:43:07,920 --> 01:43:12,080
की है। संत की है ही नहीं। संत ऐसा थोड़ी

1382
01:43:12,080 --> 01:43:16,320
होता है। इसके देखते हो आप ये महिलाएं इसके चरणों

1383
01:43:16,320 --> 01:43:20,560
में बैठी रहती है। ठठ घुटने से ऊपर तक इसके पांव दबाती है। ये कोई संत के लक्षण

1384
01:43:20,560 --> 01:43:24,640
थोड़ी है। ये सब बातें हम नहीं करते। नहीं रेणी

1385
01:43:24,640 --> 01:43:28,880
भी देखी जाएगी ना संत की। नहीं नहीं ये सब बातें देखिए ये मंच

1386
01:43:28,880 --> 01:43:33,440
वो नहीं है। जहां किसी का जो पर्सनल

1387
01:43:33,440 --> 01:43:38,640
वो क्या करता है क्या नहीं करता है इस पर ध्यान दें। सीधी बात है आपने

1388
01:43:38,640 --> 01:43:42,720
ज्ञान के नाम पर एक टोकरी प्रस्तुत की है जिसमें कि कचरे

1389
01:43:42,720 --> 01:43:46,880
के अलावा कुछ नहीं है और हमारे पास है अकाट्य सिद्धांत उसको

1390
01:43:46,880 --> 01:43:52,480
हम चूरचूर करने में समर्थवान है। ठीक है?

1391
01:43:52,480 --> 01:43:55,840
बाकी उस पर क्या आरोप लग रहे हैं और वह कौन से

1392
01:43:55,840 --> 01:44:01,760
आरोप सिद्ध हो रहे हैं? यह सभी बातें फिर वो विषय अलग हो जाता है।

1393
01:44:01,760 --> 01:44:05,840
हम बिल्कुल कोई आ रहा है क्या? कोई आए भाई

1394
01:44:05,840 --> 01:44:09,920
कोई नहीं आ रहा है। कायर है सब के सब

1395
01:44:09,920 --> 01:44:13,920
कायर है। कायर अब वो समझ चुके हैं ना कि शिवश नारायण द्विवेदी और

1396
01:44:13,920 --> 01:44:18,240
ये किशन दास भी जो व्यक्ति है ना ये ये इसीलिए आ जाता है इसको

1397
01:44:18,240 --> 01:44:22,240
इधर-उधर की बातें करनी रहती है। नहीं तो ये भी ना आए। यह सब के सब

1398
01:44:22,240 --> 01:44:26,960
कायर टाइप के हो चुके हैं। अच्छा अब क्या है बचे खुचे कौन लोग

1399
01:44:26,960 --> 01:44:30,960
जो मुझसे जैसे पुरानी फिल्में आती थी

1400
01:44:30,960 --> 01:44:35,440
तो उसमें क्या होता था? धर्मेंद्र और फिर बाद में अमिताभ

1401
01:44:35,440 --> 01:44:39,600
ये दोनों अपनी फिल्म में एक सेठी नाम का टकला होता था।

1402
01:44:39,600 --> 01:44:43,600
उसकी चांद जरूर फोड़ते थे। किसी ना किसी सीन में। अगर आप

1403
01:44:43,600 --> 01:44:47,680
में से कोई पुराने जमाने का दर्शक रहा हो फिल्मों का

1404
01:44:47,680 --> 01:44:51,840
तो देखा होगा उसमें एक सेठी नाम का विलन जरूर आता था। वो मेन विलेन कभी

1405
01:44:51,840 --> 01:44:56,000
नहीं होता था। विलन के द्वारा भेजे गए गुंडों की टीम में होता था वो। तो

1406
01:44:56,000 --> 01:45:00,000
उसका एक सीन जरूर आता था जब जिसमें उसकी चांद जो है फूटती

1407
01:45:00,000 --> 01:45:04,400
थी। मतलब वो इनसे जो उस समय के फेमस नायक

1408
01:45:04,400 --> 01:45:08,480
होते थे अभिनेता इनसे परमानेंट पिटाई खाने

1409
01:45:08,480 --> 01:45:11,600
वाला व्यक्ति होता था फिल्म में। ठीक है?

1410
01:45:11,600 --> 01:45:15,680
ऐसे ही मुझसे परमानेंट पिटाई खाने वाले लोग हैं बाबूलाल और अमित

1411
01:45:15,680 --> 01:45:19,760
दास परमानेंट ऐसे रेगुलर पिटने वाले

1412
01:45:19,760 --> 01:45:25,760
मेरे लोग मेरे द्वारा है ना तो

1413
01:45:28,880 --> 01:45:32,960
वो लोग ऐसे हैं ये क्या करते हैं कि पिट के चले गए उसके

1414
01:45:32,960 --> 01:45:37,440
बाद फिर बेशर्मों की तरह फोन करते हैं कि मुझे आपसे चर्चा करनी है दोबारा चर्चा करनी है

1415
01:45:37,440 --> 01:45:43,440
अरे भाई जब तुम चार बार निरुत्तर हो चुके तुमसे क्या बार-बार चर्चा चर्चा करें।

1416
01:45:46,080 --> 01:45:50,560
कह रहा है बात करने की तमीज नहीं है। हां तो बात तो तमीज

1417
01:45:50,560 --> 01:45:54,560
पहली बात तो यह है कि जब वो किशन दास व्यक्ति आया था उससे क्या बदतमीजी की

1418
01:45:54,560 --> 01:45:58,640
गई? दूसरी बात ये है कि जब तुम सामने जब

1419
01:45:58,640 --> 01:46:02,640
तुम्हारे साथ चर्चा करने के लिए नहीं बैठे हुए हैं। तब की अगर तुम

1420
01:46:02,640 --> 01:46:07,520
बात कर रहे हो तो तुम्हारे रामपाल की तमीज देखी है क्या? ब्रह्मा विष्णु

1421
01:46:07,520 --> 01:46:11,840
ये ऐसे करता था वो वैसे करता था। तमीजदार

1422
01:46:11,840 --> 01:46:16,000
बन रहे हैं यहां पर। पहले जाकर उसको सिखाओ। अग्न्या का मतलब

1423
01:46:16,000 --> 01:46:20,400
क्या होता है? वह धन्या करे बैठा है। कुमारी गाय है। उसको थोड़ी तमीज सिखाओ।

1424
01:46:20,400 --> 01:46:24,560
थोड़ा पढ़ना लिखना भी सिखाओ। फिर आकर के हमसे ये सब बातें करना।

1425
01:46:24,560 --> 01:46:28,560
ठीक है। जितना तुम्हें दे रहे हैं सम्मान उतना तुम्हारे लिए

1426
01:46:28,560 --> 01:46:34,560
ज्यादा है। तुम्हारी जो योग्यता है उससे बहुत ज्यादा है। जो सम्मान तुम्हें मिल रहा है।

1427
01:46:34,800 --> 01:46:38,880
बिल्कुल बागूलाल अगर इतना ही तुम तुम में साहस है तो आ

1428
01:46:38,880 --> 01:46:43,200
जाओ ऊपर। यह बात बिल्कुल सही कही है। यह लोग सिर्फ छिपकर

1429
01:46:43,200 --> 01:46:47,760
वीडियो बनाने का काम करते हैं। सामने आने की हिम्मत इनमें नहीं होती है।

1430
01:46:47,760 --> 01:46:51,760
अब वो आया भी तो क्या कर रहा है? गैंग किसको कह रहे हो? तुझे नहीं

1431
01:46:51,760 --> 01:46:57,760
पता है गैंग किसको कह रहे हैं? फिर वीडियो देख क्यों रहा था शुरू से?

1432
01:47:02,160 --> 01:47:06,240
खैर मुझे तो मालूम ही था रामपालियों में कोई ऐसा

1433
01:47:06,240 --> 01:47:10,240
नहीं है जो ऐसा साहस दिखा सके क्योंकि जहां तक है

1434
01:47:10,240 --> 01:47:14,400
ज्यादातर रामपालियों ने खीर पी हुई है। माता जी का निष्ठा पूर्वक

1435
01:47:14,400 --> 01:47:18,640
दूध तो बहुत दूर की बात है। इसलिए अ ये

1436
01:47:18,640 --> 01:47:24,640
जो रामपाल का फूहड़ ज्ञान है ना अनपढ़ता से भरा हुआ उसको

1437
01:47:24,640 --> 01:47:28,640
ज्ञान वो जो अज्ञान है उसको ज्ञान के रूप में सिद्ध करने का साहस

1438
01:47:28,640 --> 01:47:32,880
किसी में नहीं है और सब लोग जान चुके हैं कि मत पड़ो चक्कर में

1439
01:47:32,880 --> 01:47:38,160
कोई है नहीं टक्कर में टक्कर में बिल्कुल

1440
01:47:38,160 --> 01:47:42,080
बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल

1441
01:47:42,080 --> 01:47:46,720
ये बहुत बढ़िया भाई जी आपको प्रणाम है मैं संत

1442
01:47:46,720 --> 01:47:50,880
रामपाल से जुड़ा हुआ था 10 12 साल से बट प्रेजेंट की

1443
01:47:50,880 --> 01:47:55,040
सिचुएशन में मैं बीच में अटक गया हूं क्योंकि इतने

1444
01:47:55,040 --> 01:47:59,200
साल बाद अब परिणाम देखकर नास्तिक होता

1445
01:47:59,200 --> 01:48:03,440
जा रहा हूं क्या करूं इसका ये अच्छा प्रश्न जवाब दीजिए

1446
01:48:03,440 --> 01:48:07,440
आप भाई देखिए ऐसा है उनकी

1447
01:48:07,440 --> 01:48:12,160
श्रद्धा जुड़ गई रामपाल से और 10 12 साल हो गए हैं आपके

1448
01:48:12,160 --> 01:48:16,240
तो अब दिक्कत ये आ रही है कि उस अब तार्किक एक प्रामाणिक

1449
01:48:16,240 --> 01:48:20,480
बातें यहां पर आपको दिख रही है। अब दिक्कत यह आ रही है कि रामपाल

1450
01:48:20,480 --> 01:48:25,440
को छोड़े कैसे? तो अद्वतारका उपनिषद में लिखा हुआ है

1451
01:48:25,440 --> 01:48:29,920
कि गुरु वही जो अपने शिष्य को अज्ञानता

1452
01:48:29,920 --> 01:48:34,080
रूपी अंधकार से बाहर निकाले। तो वो गुरु है ही नहीं जो सवालों

1453
01:48:34,080 --> 01:48:38,160
का उत्तर दे ही नहीं रहा है। भाई आप तो आत्मा को जो है

1454
01:48:38,160 --> 01:48:43,360
अनित्य कह रहे हो। फिर तो उसको कभी मोक्ष मिल ही नहीं सकता है।

1455
01:48:43,360 --> 01:48:47,680
तो इस तरह के जो सवाल है उनका आप जवाब दे ही नहीं रहे हो। केवल

1456
01:48:47,680 --> 01:48:51,680
नाम दे देंगे हम। और नाम कहां से देंगे? क्योंकि हम तत्वदर्शी

1457
01:48:51,680 --> 01:48:55,680
है। तत्वदर्शी क्यों है? क्योंकि गीता ने कहा है गीता ने क्या कहा है कि उल्टा

1458
01:48:55,680 --> 01:48:57,200
उल्टे उल्टे वृक्ष

1459
01:48:57,200 --> 01:49:01,200
के रूप में जो व्याख्या कर देगा वो तत्वदर्शी है। तो वो तो कोई भी कर

1460
01:49:01,200 --> 01:49:05,520
देगा। फिर आप ही को क्यों माना जाए? कि नहीं जो ठीक ठीक कर देगा

1461
01:49:05,520 --> 01:49:10,080
कि वो ठीक ठीक है ये कैसे पता चलेगा? ये मैं बताऊंगा। क्यों बताओगे? मैं तत्वदर्शी

1462
01:49:10,080 --> 01:49:14,800
हूं। अरे भैया जब तक ठीक ठीक नहीं पता तो तुम तत्वदर्शी कैसे हो गए?

1463
01:49:14,800 --> 01:49:19,360
पहले रामपाल को तत्वदर्शी मानो। ये लूप होल में फस जाते हैं बेचारे।

1464
01:49:19,360 --> 01:49:23,520
लूप है पूरा लूप है। [हंसी] आप

1465
01:49:23,520 --> 01:49:27,520
है ना वो तत्वदर्शी मत बोला करिए। वो हमेशा बोलते है ना तिरछादर्शी वो

1466
01:49:27,520 --> 01:49:30,380
अच्छा लगता है।

1467
01:49:30,380 --> 01:49:34,960
[हंसी] तिरछादर्शी तो उसका नाम है। मगर सिद्धांत की बात करेंगे कि तत्वदर्शी

1468
01:49:34,960 --> 01:49:38,960
क्यों कैसे है? तब तो बोलना पड़ेगा। अब यह जो 15 के

1469
01:49:38,960 --> 01:49:43,200
एक में वेद वित्त को तत्वदर्शी बताते हैं। जबकि गीता में तत्वदर्शी के लिए तत्वदर्शी

1470
01:49:43,200 --> 01:49:47,280
शब्द आया हुआ है संस्कृत में पहले के दूसरे या तीसरे अध्याय में दो तीन

1471
01:49:47,280 --> 01:49:51,360
जगह और वहां लक्षण भी है ये

1472
01:49:51,360 --> 01:49:55,520
इनका सवाल है तनिष्क जी का क्योंकि उन्होंने ब्रह्मा जी विष्णु जी शिव

1473
01:49:55,520 --> 01:49:59,520
जी के बारे में कुछ टिप्पणी करी है जो पुराणों में लिखा है जैसी

1474
01:49:59,520 --> 01:50:03,680
की काम वासना मुझे उसका आंसर नहीं मिल पाया है प्लीज हेल्प करो तो

1475
01:50:03,680 --> 01:50:09,680
आंसर ले लो सभी पुराणों में जो

1476
01:50:09,840 --> 01:50:12,400
ब्रह्मा विष्णु महेश बताए गए हैं

1477
01:50:12,400 --> 01:50:16,800
वो ब्रह्मा विष्णु महेश अमैथुनी सृष्टि से उत्पन्न है। अमैथुनी

1478
01:50:16,800 --> 01:50:21,040
सृष्टि से मतलब नहीं अमैथुनी सृष्टि

1479
01:50:21,040 --> 01:50:25,120
से उत्पन्न नहीं है बल्कि मैथुनी सृष्टि

1480
01:50:25,120 --> 01:50:29,280
को भी मैथुनी सृष्टि से पहले भी अमैथुनी सृष्टि उत्पन्न करने वाले

1481
01:50:29,280 --> 01:50:33,360
कौन है? ब्रह्मा विष्णु महेश है। मतलब ब्रह्मा विष्णु महेश

1482
01:50:33,360 --> 01:50:37,360
अमैथुनी सृष्टि उत्पन्न करते हैं। उसके बाद मैथुनी सृष्टि उत्पन्न होती है।

1483
01:50:37,360 --> 01:50:41,760
तो जब ब्रह्मा विष्णु महेश वहां पर एक्सिस्ट कर रहे हैं जहां मैथुन

1484
01:50:41,760 --> 01:50:45,840
है ही नहीं। तो मैथुन का आरोप उन पर कैसे लग सकता है कि उन्होंने मैथुन

1485
01:50:45,840 --> 01:50:50,240
किया। समझ रहे हैं? तो ब्रह्मा विष्णु महेश

1486
01:50:50,240 --> 01:50:54,320
के लिए लीला पूर्वक ऐसे शब्द आते हैं कि उन्होंने रमण किया इत्यादि यह सब

1487
01:50:54,320 --> 01:50:58,400
बातें लीला पूर्वक आती है। तत्वत उन्होंने रमण इत्यादि नहीं किया

1488
01:50:58,400 --> 01:51:03,040
होता है। जैसे कि दो प्रकार की अलग-अलग ऊर्जाएं

1489
01:51:03,040 --> 01:51:07,200
साथ में मिलकर के काम करें और हम ये कह दे कि ये एक ऊर्जा दूसरी ऊर्जा

1490
01:51:07,200 --> 01:51:11,280
से रमण कर रही है। अब इसको कोई ये रामपाल का ये

1491
01:51:11,280 --> 01:51:15,600
अनपढ़ गवार चेला कहने लगे कि नहीं नहीं यहां पे तो सेक्स होने की बात कही गई है।

1492
01:51:15,600 --> 01:51:20,400
भाई सेक्स तो वहां एक्सिस्ट ही नहीं कर रहा है ना। रामपाल ने भी माना है कि

1493
01:51:20,400 --> 01:51:24,400
यह जब ब्रह्मा विष्णु महेश उत्पन्न होते हैं। रामपाल ने क्या

1494
01:51:24,400 --> 01:51:27,760
कहा ये गुण है। पहली बात तो जब गुण है रामपाल

1495
01:51:27,760 --> 01:51:31,920
ये रामपाल के अनुसार ब्रह्मा विष्णु महेश गुण है तो गुण

1496
01:51:31,920 --> 01:51:36,080
है तो वो सेक्स ये काम वासना इत्यादि की जो गतिविधियां है इसमें लिप्त कैसे

1497
01:51:36,080 --> 01:51:40,880
होंगे? जब वो गुण मात्र है क्वालिटी है वो। दूसरी बात यह है

1498
01:51:40,880 --> 01:51:44,960
कि ब्रह्मा विष्णु महेश ने इनको

1499
01:51:44,960 --> 01:51:48,960
उत्पन्न किया है काम वासना को रामपाल की किताबों में भी लिखा हुआ है तो

1500
01:51:48,960 --> 01:51:53,040
फिर जब जिस चीज को ब्रह्मा विष्णु महेश

1501
01:51:53,040 --> 01:51:57,040
उत्पन्न कर रहे हैं वो चीज ये जो काल नामक ब्रह्म है इनका

1502
01:51:57,040 --> 01:52:01,040
वहां कैसे पहुंच गई जो वो कहता है कि उसकी नजर

1503
01:52:01,040 --> 01:52:05,040
बुरी हो गई नियत बुरी हो गई दृष्टि बुरी हो गई ये सब इनके वो है

1504
01:52:05,040 --> 01:52:09,680
गपले जो करके बैठे हुए हैं जो कभी सुधर नहीं पाएंगे

1505
01:52:09,680 --> 01:52:12,240
है ना?

1506
01:52:12,240 --> 01:52:16,560
तो यह सब इनके घपले हैं। तो कहने का तात्पर्य यह है कि ब्रह्मा

1507
01:52:16,560 --> 01:52:20,640
विष्णु महेश हमारे और आपकी तरह हाड़ मास के मनुष्य नहीं है।

1508
01:52:20,640 --> 01:52:24,800
जिनको जिनके लिए यदि रमण शब्द आ जाए या और कोई मिलन

1509
01:52:24,800 --> 01:52:29,280
शब्द आ जाए तो हम लोग सोचे नहीं ये हमारा जो मनुष्यों का जो बायोलॉजिकल

1510
01:52:29,280 --> 01:52:33,280
फिजिकल जो सेक्स होता है ये सब जो

1511
01:52:33,280 --> 01:52:37,280
आचरण होते हैं काम वासना से जुड़े हुए ये सारी चीजें वहां

1512
01:52:37,280 --> 01:52:41,440
पर गतिविधियां हैं। वहां पर ऊर्जाओं के काम करने का तरीका बताया

1513
01:52:41,440 --> 01:52:42,800
जा रहा है। शक्तियों के काम

1514
01:52:42,800 --> 01:52:46,880
करने का तरीका बताया जा रहा है। जिसकी लीलात्मक विवेचना ये है कि उन्होंने आपस

1515
01:52:46,880 --> 01:52:50,960
में रमण किया। सिर्फ इतना नहीं तो वहां पर ये चीजें एक्सिस्ट

1516
01:52:50,960 --> 01:52:55,040
ही नहीं करती है। रामपाल के अनुसार भी हमारे शास्त्रों में तो भर भर के ये

1517
01:52:55,040 --> 01:52:59,360
चीजें की गई। दूसरी बात जैसे कि अब आपको एक बात बताऊं तीसरे स्कंध

1518
01:52:59,360 --> 01:53:03,600
के छठवे अध्याय में शायद ये बात लिखी हुई है। मैं अभी नंबर नहीं बता रहा।

1519
01:53:03,600 --> 01:53:07,840
हमारी वो सीरीज है वो देख लेना आप तत्वदर्शी वाली। एक सीरीज बनाई जिसमें

1520
01:53:07,840 --> 01:53:12,400
इनकी बातों का सब दिया हुआ है विवरण

1521
01:53:12,400 --> 01:53:16,800
मेन चैनल पर पड़ी हुई है तो उसमें देवी

1522
01:53:16,800 --> 01:53:20,800
भागवत में तीसरे स्कंध में देवी देवी कह रही है

1523
01:53:20,800 --> 01:53:24,880
ना तो मैं स्त्री हूं ना मैं पुरुष हूं तत्व से

1524
01:53:24,880 --> 01:53:28,880
मैं ना स्त्री हूं ना पुरुष हूं तो क्या हुआ कि जब वो

1525
01:53:28,880 --> 01:53:33,040
स्त्री पुरुष में से कोई है ही नहीं तो स्त्री पुरुष के

1526
01:53:33,040 --> 01:53:37,120
रूप में की जाने वाली जो आचरण है वो उन पर कैसे आरोपित होंगे होंगे।

1527
01:53:37,120 --> 01:53:41,120
ठीक है? तो उनका लीलात्मक वर्णन होता है जिसमें कि

1528
01:53:41,120 --> 01:53:47,120
रमण इत्यादि ऐसे शब्द आते हैं जिनका अर्थ आप अनर्थ कर लेते हो।

1529
01:53:47,800 --> 01:53:50,240
[खांसने की आवाज़][गला साफ़ करने की आवाज़]

1530
01:53:50,240 --> 01:53:54,320
इसका जवाब एक लाइन में यह है भाई कि आप किसी भी पुराण को

1531
01:53:54,320 --> 01:53:58,400
लेके उसको सांगोपांग पढ़ लीजिए। यह जो पेज दिखा रहे हैं उससे भ्रमित

1532
01:53:58,400 --> 01:54:02,400
ना होइए। उसको पूरा पढ़ लीजिए। चाहे देवी भागवती आप पूरा पढ़ लोगे तो

1533
01:54:02,400 --> 01:54:06,640
उसमें सारे आपके प्रश्नों के जवाब मिल जाएंगे। ये

1534
01:54:06,640 --> 01:54:10,880
सात्विक को ब्लॉक करो ना। पता नहीं क्या अजीब सी कमेंट कर रहा है।

1535
01:54:10,880 --> 01:54:15,960
ब्लॉक कर दीजिए। पता नहीं क्या कर रहा है।

1536
01:54:15,960 --> 01:54:18,400
[गला साफ़ करने की आवाज़]

1537
01:54:18,400 --> 01:54:22,480
एक व्यक्ति किसी भी रामपाली में साहस हो। किसी

1538
01:54:22,480 --> 01:54:26,800
भी रामपाली में साहस हो और अपने गुरु पे निष्ठा हो विश्वास हो

1539
01:54:26,800 --> 01:54:31,440
और ज्ञान पर विश्वास हो तो आओ भाई ऊपर चर्चा तो कर लो।

1540
01:54:31,440 --> 01:54:35,680
तुम कितने पानी में हो और कितने पानी में नहीं हो। उनमें साहस नहीं है।

1541
01:54:35,680 --> 01:54:41,680
उनमें साहस नहीं बचा है। अब अ

1542
01:54:42,320 --> 01:54:46,400
कम से कम शिवश नारायण द्विवेदी का सामना करने का साहस तो

1543
01:54:46,400 --> 01:54:50,400
नहीं बचा है। चलो कहीं कोई कोई तो ऐसी मां होगी

1544
01:54:50,400 --> 01:54:54,480
जिसने कोई जना होगा। ऐसा दूध पिलाया होगा अपने

1545
01:54:54,480 --> 01:54:58,560
बच्चे को जो रामपाल के शिष्यों की फौज में कोई तो ऐसा योद्धा

1546
01:54:58,560 --> 01:55:02,880
होगा जो आएगा कहेगा कि मैं करूंगा अपने गुरु का ज्ञान सच्चा

1547
01:55:02,880 --> 01:55:07,040
सिद्ध देखेंगे कोई मिला किसी मुझे नहीं लगता कि

1548
01:55:07,040 --> 01:55:11,040
कोई आएगा सामने इस तरह से प्रूफ करने के लिए

1549
01:55:11,040 --> 01:55:14,800
मुश्किल है।

1550
01:55:14,800 --> 01:55:18,880
शिवश जी आप बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। हमको आपसे बहुत प्रेरणा

1551
01:55:18,880 --> 01:55:23,200
मिलती है। बहुत-बहुत धन्यवाद और जो भी

1552
01:55:23,200 --> 01:55:27,280
समर्थक हैं जो भी उनसे मैं कहूंगा गुरुदेव बार-बार

1553
01:55:27,280 --> 01:55:31,600
एक बार की ओर इशारा करते हैं भजन का बल बढ़ाएं सवा

1554
01:55:31,600 --> 01:55:35,760
घंटे नाम जप भगवान का और अगर मंत्र मिला

1555
01:55:35,760 --> 01:55:40,880
हुआ है अधिकार की सीमा में तो उसका जाप करें

1556
01:55:40,880 --> 01:55:46,000
रामपालियों में खौफ है कोई नहीं है टक्कर में

1557
01:55:46,000 --> 01:55:50,000
मत पड़ो चक्कर में कोई नहीं है टक्कर में तो ठीक है

1558
01:55:50,000 --> 01:55:54,080
फिर आज का लाइव कंप्लीट हुआ सीरीज अगले हफ्ते से प्रत्येक

1559
01:55:54,080 --> 01:55:58,880
मंगलवार की रात्रि को 9:00 बजे चालू हो जाएगी। 4.32

1560
01:55:58,880 --> 01:56:02,960
के बाद से हम लोग इसकी जो बकवास है

1561
01:56:02,960 --> 01:56:07,040
उस पर बात करेंगे। बकवास पर भी बात करना पड़ता है। इतना तो योग्य उसने अपने आप को

1562
01:56:07,040 --> 01:56:11,120
बनाया है कि उसकी बकवास पर हम लोग बात करें। खैर इतना

1563
01:56:11,120 --> 01:56:15,120
उसको समय हम लोग देंगे और फिर तार खोलेंगे।

1564
01:56:15,120 --> 01:56:19,200
दूसरी बात यह है कि जो भी आए उस विवेचना को सुनने

1565
01:56:19,200 --> 01:56:23,200
भले ही संक्षिप्त में सुनने आए बुलेट पॉइंट्स जो सर्वशक्तिमान धर्म चैनल पर

1566
01:56:23,200 --> 01:56:27,440
चलेगा सीरीज जो उसका संक्षिप्त विवरण होगा और

1567
01:56:27,440 --> 01:56:30,000
पूरी पूरी व्याख्या वो चलेगी मेन चैनल

1568
01:56:30,000 --> 01:56:34,000
पर आहान पर मगर दोनों में से कहीं पर भी वो अगर आ रहा है

1569
01:56:34,000 --> 01:56:38,560
देखने के लिए मेरी उसको व्यक्तिगत ये परामर्श है मेरा उसको

1570
01:56:38,560 --> 01:56:42,640
कि वो सर दर्द की तैयारी करके आए कुछ दवाई

1571
01:56:42,640 --> 01:56:46,960
वगैरह कुछ ऐसा आप आप लोग लेकर आइएगा क्योंकि

1572
01:56:46,960 --> 01:56:51,360
दिमाग को पंचर कर देने वाली बातें रामपाल ने की हुई है

1573
01:56:51,360 --> 01:56:55,840
गीता के अर्थ के नाम पर गीता तेरा ज्ञान वो गरिमा

1574
01:56:55,840 --> 01:57:00,160
गीता की नामक पुस्तक में तो आप अपने दिमाग अपने मस्तिष्क

1575
01:57:00,160 --> 01:57:04,400
को थोड़ा संभाल के आइएगा ऐसेसे कि संभाल लेना मतलब

1576
01:57:04,400 --> 01:57:08,480
थोड़ा सा देते हुए क्योंकि बहुत बड़ा टॉर्चर

1577
01:57:08,480 --> 01:57:12,480
होता है जब हम लोग क्रमबद्धता से व्यवस्थित रूप से इसकी

1578
01:57:12,480 --> 01:57:18,480
चीजों को पढ़ते हैं तो बहुत बड़ा टॉर्चर होता है।

1579
01:57:18,720 --> 01:57:22,720
ठीक है ना? चलिए फिर बहुत-बहुत आभार आप लोगों का भी। आपको

1580
01:57:22,720 --> 01:57:28,320
कुछ कहना हो तो कह लीजिए नहीं समाप्त करते हैं। जी शास्त्र जी

1581
01:57:28,320 --> 01:57:32,480
जी यही कि अब तो सिद्ध हो गया। जैसे अभी हम लोग भी लाइव कर रहे हैं

1582
01:57:32,480 --> 01:57:36,720
जो दो-तीन दिन से तो ये सिद्ध हो रहा है कि भाई ये लोग बहुत डरपोक

1583
01:57:36,720 --> 01:57:41,120
टाइप के व्यक्ति होते हैं। किसी में इतना साहस नहीं कि भाई आ जाए चर्चा करने के लिए।

1584
01:57:41,120 --> 01:57:45,200
ठीक है? तो और आप जब हमसे चर्चा करना नहीं आता

1585
01:57:45,200 --> 01:57:50,400
तब आपकी तो बात ही अलग है भैया आपके पास कहां से आ

1586
01:57:50,400 --> 01:57:55,200
फिलहाल तो हम भी इनसे टक्कर ले रहे हैं हमसे हमसे ये नहीं भिड़ पा रहे हैं।

1587
01:57:55,200 --> 01:57:59,200
अच्छा लोग ये कहते हैं ना मैं हटा हटा इसलिए देता

1588
01:57:59,200 --> 01:58:03,280
हूं क्योंकि मैं अपने चैनल पर न्यू सेंस नहीं चाहता हूं। न्यू

1589
01:58:03,280 --> 01:58:07,360
सेंस का मतलब जैसे यहां पे जब वो आया किशन दास तो

1590
01:58:07,360 --> 01:58:11,600
उसने ये सब बातें तो की नहीं कि भाई

1591
01:58:11,600 --> 01:58:15,680
रामपाल को आप तत्वदर्शी क्यों नहीं मान रहे हैं? कबीर को आप भगवान क्यों

1592
01:58:15,680 --> 01:58:19,840
नहीं मान रहे हैं? ये सब बातें नहीं की। गैंग किसको बोल रहे हो?

1593
01:58:19,840 --> 01:58:23,920
अब मुझे इस बात का प्रतीक्षा करनी

1594
01:58:23,920 --> 01:58:28,080
पड़ेगी कि तुम यहां कुछ उल्टी करके चले जाओ और फिर हम तुम्हें हटाए। इसलिए इससे

1595
01:58:28,080 --> 01:58:32,080
पहले कि तुम कोई ऐसी उल्टी करो जिससे हमारा विषय का कोई सरोकार नहीं

1596
01:58:32,080 --> 01:58:36,160
है। इसलिए उससे पहले आपको हटा दिया जाता है। ठीक है?

1597
01:58:36,160 --> 01:58:40,000
तो रामपाल

1598
01:58:40,000 --> 01:58:44,560
रामपालियों में खीर का वो है साहस

1599
01:58:44,560 --> 01:58:48,560
जो वो वाली खीर है ना एक प्रसिद्ध खीर है जो इनके यहां बटती है

1600
01:58:48,560 --> 01:58:52,640
तो वही पी है इन लोगों ने निष्ठा पूर्वक इनको दूध नहीं मिला बचपन में

1601
01:58:52,640 --> 01:58:56,800
इससे कि पोषण है जिससे कि रामपाल के अज्ञान

1602
01:58:56,800 --> 01:59:01,600
को ज्ञान सिद्ध नहीं कर पा रहे हैं आकर के खैर

1603
01:59:01,600 --> 01:59:05,600
नहीं कर पाएंगे नहीं कर पाएंगे एक कोई दीपक नाम के आए हैं।

1604
01:59:05,600 --> 01:59:10,160
अगर चेहरा दिखाएं तो उनको ऊपर ले लीजिए।

1605
01:59:10,160 --> 01:59:14,160
बहुत देर से आए हैं दीपक जी। जी दीपक जी

1606
01:59:14,160 --> 01:59:18,880
आप अपना चेहरा दिखाइए और फिर जुड़िए लाइव में देखते हैं।

1607
01:59:18,880 --> 01:59:24,880
दिखा रहे हैं क्या चेहरा ऑपरेटर जी आप बता दीजिए।

1608
01:59:25,120 --> 01:59:29,200
इसीलिए कहता हूं मत पड़ो चक्कर में। कोई नहीं है टक्कर में।

1609
01:59:29,200 --> 01:59:33,360
चले गए क्या? चले गए होंगे। चेहरा नहीं लाए होंगे

1610
01:59:33,360 --> 01:59:37,440
तो। भाई अगर चेहरा चेहरे के साथ आते

1611
01:59:37,440 --> 01:59:42,480
तो भाई चर्चा हो जाती। आए आए आ गए जी दीपक जी जय श्री राम

1612
01:59:42,480 --> 01:59:46,480
जय श्री राम जी बताइए दीपक ये

1613
01:59:46,480 --> 01:59:51,600
संत रामपाल महाराज जी जो बता रहे हैं वो सही है क्या सिस्टम सारा आप

1614
01:59:51,600 --> 01:59:55,760
आप सही मानते हैं क्या उसे नहीं कुछ एक बातें गलत

1615
01:59:55,760 --> 02:00:00,080
है उनकी कौन सी जैसे

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02:00:00,080 --> 02:00:04,080
माता माता पिता के अलावा दूसरे पैरों में नहीं रखने किसी के माता पिता के पैर नहीं

1617
02:00:04,080 --> 02:00:08,320
रखने गुरु के पैर लगो खाली ये ये सब तो बहुत निचले पिछले

1618
02:00:08,320 --> 02:00:12,320
लेवल की बातें हो गई। बात ये है कि वो अपने आप को तत्वदर्शी कहते हैं। वो

1619
02:00:12,320 --> 02:00:16,480
तत्वदर्शी नहीं है। वो कबीर को भगवान कहते हैं। कबीर भगवान नहीं है।

1620
02:00:16,480 --> 02:00:20,480
वो कहते हैं गीता का ज्ञान कृष्ण ने नहीं काल

1621
02:00:20,480 --> 02:00:24,480
ने दिया है। अलग से काल कोई वो काल ऐसा कुछ नहीं है। वो

1622
02:00:24,480 --> 02:00:28,560
कहते हैं कि कृष्ण जी भगवान नहीं है पर वो भगवान है। ये मोटी मोटी

1623
02:00:28,560 --> 02:00:32,880
बातें हो गई। ठीक है? ये सब

1624
02:00:32,880 --> 02:00:36,880
उन्होंने के वो लड़की को जीवित कर दिया था। पर

1625
02:00:36,880 --> 02:00:41,360
अपना भांजा अभिमन्यु जीवित नहीं हुआ उनसे क्या

1626
02:00:41,360 --> 02:00:46,080
उनका भांजा जीवित नहीं हुआ क्या वो तो ध्वज के मोरध्वज के लड़के वो

1627
02:00:46,080 --> 02:00:50,320
ध्वज को जीवित कर दिया उन्होंने किसने कृष्ण

1628
02:00:50,320 --> 02:00:56,320
जी ने इससे क्या मतलब है

1629
02:00:56,720 --> 02:01:00,800
ये क्या बोल रहा है

1630
02:01:00,800 --> 02:01:04,880
अरे ये मुझे लग रहा है कि हमारे ही पक्ष से है शायद कि ये उनके

1631
02:01:04,880 --> 02:01:09,280
कुछ बातों को नहीं मान रहे हैं और कृष्ण भगवान

1632
02:01:09,280 --> 02:01:14,240
नहीं हमें कुछ कुछ वाले कुछ कुछ वाले हमें नहीं चाहिए भाई

1633
02:01:14,240 --> 02:01:18,320
कुछ कुछ वालों का क्या मतलब है

1634
02:01:18,320 --> 02:01:22,480
ठीक है बता और एक बात भैया कि मेरा चैनल

1635
02:01:22,480 --> 02:01:26,960
मेरा चैनल एक बार वो सबको बता दीजिए शास्त्रवाद

1636
02:01:26,960 --> 02:01:31,040
जी का चैनल है आप लोग उसको सब्सक्राइब कर लीजिए वहां पर आहान

1637
02:01:31,040 --> 02:01:35,200
से जुड़ी हुई चीजें आपको बहुत सारी प्राप्त होती रहती है क्योंकि मैं बहुत रेगुलर

1638
02:01:35,200 --> 02:01:39,280
उपलब्ध नहीं हो पा रहा हूं। पिछले कई दिनों से आज भी मुझे एक विशेष कार्य

1639
02:01:39,280 --> 02:01:43,280
से जाना पड़ा। वो विशेष कार्य क्या था? कुछ दिनों में आपको सूचना

1640
02:01:43,280 --> 02:01:48,400
मिल जाएगी। पर जो भी है बहुत अच्छा है। आपको आनंद आएगा सुनकर के।

1641
02:01:48,400 --> 02:01:50,720
अ

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02:01:50,720 --> 02:01:55,040
बाकी व्यक्तिगत परामर्श यही है रामपालियों को

1643
02:01:55,040 --> 02:01:57,680
कि मत पड़ो चक्कर में

1644
02:01:57,680 --> 02:02:03,680
और कोई नहीं है टक्कर में। ठीक है?

1645
02:02:03,840 --> 02:02:07,840
देखो सवाल अगर करना है, यह कह रहे हैं सवाल करना

1646
02:02:07,840 --> 02:02:11,840
है, सवाल करना है तो क्लासेस में आया करो। यहां पर वैचारिक मतभेद के

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02:02:11,840 --> 02:02:17,840
निमित चर्चा के लिए आते हैं। ठीक है?

1648
02:02:18,800 --> 02:02:21,760
सब स्वस्थ है।

1649
02:02:21,760 --> 02:02:25,760
सब स्वस्थ है। आप लोगों की प्रार्थनाएं सदैव हमारे साथ है। हमारे साथ श्री

1650
02:02:25,760 --> 02:02:30,160
रघुनाथ तो किस बात की चिंता में तो ठीक है। फिर आप सभी को

1651
02:02:30,160 --> 02:02:34,640
सभी का आभार समय देने के लिए। और

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02:02:34,640 --> 02:02:38,880
फिलहाल इस चर्चा को विराम देते हैं। जी प्रेम सिंह जी जय श्री राम

1653
02:02:38,880 --> 02:02:43,120
जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम शास्त्री जी

1654
02:02:43,120 --> 02:02:49,120
जय श्री राम

1655
02:03:12,410 --> 02:03:16,410
[संगीत]
