1
00:00:01,960 --> 00:00:06,960
[घंटी की आवाज़] कि अवतार का लक्षण क्या है?

2
00:00:06,960 --> 00:00:11,280
जैसे जैसे समझिएगा कि मेरे सामने राम जी खड़े हैं। मेरे सामने रामपाल

3
00:00:11,280 --> 00:00:15,600
खड़ा है। ठीक है? दोनों में से ईश्वर का अवतार

4
00:00:15,600 --> 00:00:19,680
क्योंकि जीव और ईश्वर को तो मैं देख नहीं सकता। वो तो निराकार है। ठीक है? जो मुझे दिख

5
00:00:19,680 --> 00:00:24,000
रहा है वो शरीर है। तो इसमें लक्षण क्या है कि राम जी

6
00:00:24,000 --> 00:00:28,560
या रामपाल दोनों में से ईश्वर का अवतार है कौन? ये मैं कैसे पता करूं? इसमें इसमें

7
00:00:28,560 --> 00:00:32,960
इसमें शब्द ही प्रमाण है। अच्छा इसमें जैसे मुझे समझना

8
00:00:32,960 --> 00:00:37,200
है कि जैसे किसी जैसे

9
00:00:37,200 --> 00:00:41,840
किसी ने कॉपी में लिख के दिया मुझे। ठीक है? आपने मेरे को WhatsApp पे मान लो मैसेज भेजा

10
00:00:41,840 --> 00:00:46,000
कि दिल्ली में आप यहां हो। यहां पे एक व्यक्ति है। वो खड़ा

11
00:00:46,000 --> 00:00:50,160
है। आप उससे ये डॉक्यूमेंट ले लो। ठीक है? आपने मुझे बता दिया। उसका डिस्क्रिप्शन दे दिया कि फलाना

12
00:00:50,160 --> 00:00:54,240
फलाना ऐसा व्यक्ति है। पुलिस की वर्दी में खड़ा है। ऐसा ऐसा है। ठीक? अब मैं

13
00:00:54,240 --> 00:00:58,240
जब जाऊंगा उसके पास में तो मैं वेरीफाई तो करूंगा ना कि जिसका आपने लिखा है यह वही है या

14
00:00:58,240 --> 00:01:02,560
कोई और है। करूंगा। तो जिन पैरामीटर से मैं वेरीफाई

15
00:01:02,560 --> 00:01:06,640
करूंगा वही पैरामीटर उसके लक्षण है। किताब में ठीक है। किताब में किसी व्यक्ति की

16
00:01:06,640 --> 00:01:10,880
बात की गई है। किताब में उसी व्यक्ति की बात की जा रही है। वो जिन मा जिन पैरामीटर

17
00:01:10,880 --> 00:01:14,880
से चेक होगा। ठीक है? उदाहरण के लिए मैं आपको समझाता हूं। किताब में

18
00:01:14,880 --> 00:01:17,200
तो यह भी लिखा है कि ईश्वर है।

19
00:01:17,200 --> 00:01:21,200
है ना? किताब में यह भी लिखा है कि ईश्वर सृष्टि करता है। नास्तिक को सिद्ध करने के लिए लक्षण

20
00:01:21,200 --> 00:01:25,200
बताते हैं ना? नास्तिक को सिद्ध करने के लिए तर्क देते हैं ना प्रमाण देते हैं। क्यों देते

21
00:01:25,200 --> 00:01:29,200
हैं? क्योंकि पॉइंट है उसी प्रकार से क्योंकि सामने वाला व्यक्ति ईश्वर को

22
00:01:29,200 --> 00:01:33,280
मान नहीं रहा है। तो जैसे ही सामने वाला व्यक्ति जब अवतार को नहीं मान रहा तो उसको बता समझने

23
00:01:33,280 --> 00:01:37,360
के लिए। ठीक है? इन ऑर्डर टू अंडरस्टैंड दोज़ थिंग्स। तो हमें क्या करना है? हमें बताना है कि

24
00:01:37,360 --> 00:01:41,360
लक्षण क्या है कि भैया मेरे सामने अगर अवतार खड़े हो कि ये वही है। जैसे कृष्ण जी के

25
00:01:41,360 --> 00:01:45,360
समय में भी उनका एक डुप्लीकेट आया था। कुछ पंड्रिक पुंड्रिक कुछ नाम था

26
00:01:45,360 --> 00:01:49,440
उसका बोल रहा हूं मैं। तो वो भी आया था। था वो भी वासुदेव पुत्र और बनके

27
00:01:49,440 --> 00:01:53,440
और वो मोर पंख लगा के चार हाथ ला के घूमता था। उसने भी अपने [गला साफ़ करने की आवाज़]

28
00:01:53,440 --> 00:01:57,520
नकली भाई बलराम सब तो उसमें भी पहचान को लेकर के उसमें उसके

29
00:01:57,520 --> 00:02:01,760
भी बहुत चेले क्योंकि बहुत लोग भ्रमित हुए थे। उसके भी बहुत भक्त बने थे। युद्ध हुआ था उसमें वो मारा

30
00:02:01,760 --> 00:02:05,760
गया था। शायद भागवत में आता नहीं था। तो बात

31
00:02:05,760 --> 00:02:09,840
वही है कि जो यहां शब्द में लिखा हुआ है शास्त्र में लिखा हुआ है तो वहां

32
00:02:09,840 --> 00:02:13,840
मैं वेरीफाई तो करूंगा ना तो मैं किन पैरामीटर से वेरीफाई करूंगा। वो जो लक्षण है

33
00:02:13,840 --> 00:02:18,210
वो है क्या? वो स्पष्ट कर। देखिए इसमें मैं बता दूं एक

34
00:02:18,210 --> 00:02:22,240
[गला साफ़ करने की आवाज़] कुछ पैराटर्स ऐसे हो सकते हैं कि भाई वो जैसे हमने मान

35
00:02:22,240 --> 00:02:26,320
लिया कि भाई तुम ये कर सकते हो पहाड़ उठा सकते हो या तुम यहां पे खड़े हो तुम

36
00:02:26,320 --> 00:02:30,400
दिल्ली में प्रकट हो सकते हो क्योंकि सर्वशक्तिमान है तो ऐसे हम

37
00:02:30,400 --> 00:02:32,320
लोग कह सकते हैं मगर अगर हम ये कहे

38
00:02:32,320 --> 00:02:36,800
कि भाई तुम सर्वव्यापक हो ये सिद्ध करो हम तुम सर्वव्यापक

39
00:02:36,800 --> 00:02:40,880
हो ये सिद्ध करो हमें दिखाओ सर्व्यापक तो उसमें वो जो पैरामीटर

40
00:02:40,880 --> 00:02:45,280
है ना वो हमारे व्यवहार का विषय नहीं है पूरा का पूरा हम उसे जांच नहीं सकते

41
00:02:45,280 --> 00:02:49,440
इसलिए वहां पर हमें शब्द प्रमाण ही रुकना पड़ेगा।

42
00:02:49,440 --> 00:02:53,920
अपनी किसी को ईश्वर मानने का एक किसी को ईश्वर मान लेने का

43
00:02:53,920 --> 00:02:58,880
एक ही पैरामीटर है अगर लक्षण की बात करें कि वो सर्वशक्तिमान हो।

44
00:02:58,880 --> 00:03:03,360
मैं आपकी बात समझ गया। मैं हूं उत्तर इसका। अब देखो पॉइंट इसके अंदर क्या है?

45
00:03:03,360 --> 00:03:07,520
कि जहां तक आपने बोला कि कुछ चीजें जैसे पहाड़ उठा सकता है इत्यादि

46
00:03:07,520 --> 00:03:11,520
इत्यादि कुछ ऐसे पॉइंट है जिसको हम उसके लक्षणों में घटा सकते हैं। ठीक है?

47
00:03:11,520 --> 00:03:15,600
उदाहरण के रूप में कोई बद्ध जीव है। ठीक जीव तो व ही होता है।

48
00:03:15,600 --> 00:03:19,600
है ना? लेकिन कोई ऐसा जीव है जो बहुत कई जन्मों से तपस्या कर

49
00:03:19,600 --> 00:03:24,320
रहा है। तपश्चर्या कर रहा है और वो मुक्ति के कगार पे है। ठीक है?

50
00:03:24,320 --> 00:03:28,320
उसमें और जो एक डाकू चोर लुटेरा उनकी मनस्थिति

51
00:03:28,320 --> 00:03:32,320
में ठीक है कुछ तो अंतर होगा। कुछ तो गुणों में अंतर उनके व्यवहार में

52
00:03:32,320 --> 00:03:36,320
उनके ज्ञान में कुछ तो अंतर होगा। है ना? तो हमें तो जब हम

53
00:03:36,320 --> 00:03:40,400
किसी व्यक्ति से सिद्ध कोटि के व्यक्ति से बात करते हैं तो हमें एक अच्छा अनुभव

54
00:03:40,400 --> 00:03:44,480
होता है। हमें समझ में आता है कि यार ये व्यक्ति वो उसके लफंगे जैसा नहीं है। हमें समझ में आता है।

55
00:03:44,480 --> 00:03:47,360
ठीक है? तो उसी प्रकार से जैसे आपने

56
00:03:47,360 --> 00:03:51,360
बोला कि अवतार के विषय में सारी चीजें तो नहीं जैसे सर्वव्यापकता को नहीं किया जा सकता।

57
00:03:51,360 --> 00:03:55,360
लेकिन कुछ-कुछ चीजें लक्षण बताए जा सकते हैं। वो दो चार लक्षण जो भी आपको समझ में आए

58
00:03:55,360 --> 00:03:59,440
आप वो मुझे बता दो। ठीक है? एक पॉइंट। दूसरा पॉइंट आपने एक और लाइन

59
00:03:59,440 --> 00:04:03,520
बोला था कि आपको क्या समझ में आ रहा है? आप बता दो। मुझे क्या समझ में आ रहा है मैं बता देता हूं।

60
00:04:03,520 --> 00:04:07,520
मेरे दृष्टिकोण से मेरे दृष्टिकोण से मेरे सामने

61
00:04:07,520 --> 00:04:11,520
कोई मनुष्यधारी है। ठीक है? मेरे

62
00:04:11,520 --> 00:04:15,600
को मैं सोच ही नहीं पा रहा कोई ऐसा पॉइंट कि जिससे मैं डिफरेंशिएट कर दूं कि

63
00:04:15,600 --> 00:04:21,120
फलाना व्यक्ति इंसान नहीं है। ईश्वर है। मेरे दिमाग में कोई आ ही नहीं रहा पॉइंट।

64
00:04:21,120 --> 00:04:25,120
मेरे इसीलिए मैंने आपसे पूछा। हां तो मैंने वो लक्षण बता दिया।

65
00:04:25,120 --> 00:04:29,120
सर्वशक्तिमान अभी हम अंडरस्टैंडिंग की तरफ ही है। वी आर अभी हम अंडरस्टैंडिंग हम

66
00:04:29,120 --> 00:04:33,120
अवतार को समझ रहे हैं। अवतार की तरफ शरीर धारण मैंने वो लक्षण बता दिया

67
00:04:33,120 --> 00:04:37,200
सर्वशक्तिमान यानी वो कुछ भी कर सकता है तो ही

68
00:04:37,200 --> 00:04:41,360
माना जाएगा कि वो है ना यानी अगर मेरे सामने कोई ऐसा व्यक्ति है जो

69
00:04:41,360 --> 00:04:45,440
कुछ भी कर दे तो हम मान लूंगा कि वो ईश्वर है। अगर कुछ भी नहीं कर पा रहा

70
00:04:45,440 --> 00:04:49,520
कहीं अटक जा रहा है तो ठीक है। जो कुछ

71
00:04:49,520 --> 00:04:53,840
भी कर सकने की बात जिसकी शब्द प्रमाण से मानी जा रही हो। बात दिक्कत ये है

72
00:04:53,840 --> 00:04:58,480
कि कई चीजें करने के लिए वो मनुष्य उसका गवा साक्षी नहीं हो सकता।

73
00:04:58,480 --> 00:05:02,480
कई चीजें ऐसी है वो करने को कह दिया जाए तो मनुष्य उसका साक्षी नहीं हो

74
00:05:02,480 --> 00:05:06,480
सकता। तो जब उसका साक्षी नहीं हो सकता तो इसीलिए फंस रहे हैं ना यही तो फंस रहे

75
00:05:06,480 --> 00:05:10,560
हैं। इसमें बात ये आती है कि अब हमें लक्षण जो है वो स्पष्ट हो चुके हैं

76
00:05:10,560 --> 00:05:14,960
कि यानी कहीं पर भी ईश्वर की अल्पता नहीं दिखनी चाहिए। कहीं पर भी उसके सर्वशक्तिवत्ता

77
00:05:14,960 --> 00:05:19,040
में बाधा नहीं आनी चाहिए। ठीक है? उसकी अपनी मर्यादा दिखनी चाहिए नहीं। दिखनी

78
00:05:19,040 --> 00:05:24,000
चाहिए नहीं। दिखनी चाहिए वो अलग बात है। होना नहीं चाहिए।

79
00:05:24,000 --> 00:05:28,240
होता है कि नहीं? हुआ दिखने को तो कुछ भी दिख सकता है।

80
00:05:28,240 --> 00:05:32,320
अच्छा कुछ भी दिख सकता है। तो वो चीज हुई या नहीं हुई कैसे पता चलेगा?

81
00:05:32,320 --> 00:05:36,320
शब्द प्रमाण। शब्द प्रमाण से नहीं। जैसे मैं ये अच्छा

82
00:05:36,320 --> 00:05:40,320
शब्द प्रमाण से जैसे राम जी ने जीवन में क्या-क्या किया वो तो हमें शब्द प्रमाण से पता चलेगा। ठीक है।

83
00:05:40,320 --> 00:05:44,640
मैं ये कह रहा हूं जैसे राम जी जैसे राम जी नित्य शुद्ध बुद्ध मुक्ति

84
00:05:44,640 --> 00:05:48,800
थोड़ी सी हां बताइए थोड़ी सी बात बताइए बताइए। जैसे राम राम जी ने

85
00:05:48,800 --> 00:05:52,880
राम जी के जीवन में क्या-क्या घटा वो हमें उनके शब्द प्रमाण रामायण से पता है। ठीक है? तो

86
00:05:52,880 --> 00:05:56,880
पॉइंट इसके अंदर यह है कि अगर उसी में वहीं पे लिखा हुआ है कि राम जी को नहीं पता था कि

87
00:05:56,880 --> 00:06:01,120
सीता जी कहां है? राम जी असहाय हो गए इत्यादि इत्यादि बातें राम जी पहचान नहीं पाए कि सुग्रीव

88
00:06:01,120 --> 00:06:05,200
और बाली कौन इत्यादि इत्यादि बातें जो हमें सर्वजता में बाधा नजर आती है। तो क्या

89
00:06:05,200 --> 00:06:09,280
हम एट दैट केस पॉइंट ये है कि आप तो कह रहे हो कि ये वही राम

90
00:06:09,280 --> 00:06:13,360
जी और ईश्वर के अवतार हैं। लेकिन जो लक्षण बताए हैं वो मैच नहीं कर रहे हैं।

91
00:06:13,360 --> 00:06:17,360
उस केस में क्या होगा? हम उन्हें अवतार मानेंगे या नहीं मानेंगे? इसका थोड़ा सा स्पष्टीकरण

92
00:06:17,360 --> 00:06:17,860
दे

93
00:06:17,520 --> 00:06:21,600
दीजिए। मैं यही कारण है ना जिस जिसके

94
00:06:21,600 --> 00:06:25,680
कारण रावण नहीं समझ पाया कि वो अवतार हैं। जिसके कारण कंस नहीं

95
00:06:25,680 --> 00:06:29,760
समझ पाया कि भगवान ही है। जिसके कारण उस समय के जो लोग थे उनकी ही

96
00:06:29,760 --> 00:06:34,000
समय धारा में वो तुरंत उनको देखते ही मुक्त नहीं हो पाए। क्योंकि

97
00:06:34,000 --> 00:06:38,160
उन्होंने उनको भगवान माना ही नहीं। भगवत गीता में भी भगवान ने कहा कि जो लोग मनुष्य

98
00:06:38,160 --> 00:06:42,560
देह में देख के मनुष्य देह में देख के मेरे ब्रह्म भाव को नहीं ध्यान

99
00:06:42,560 --> 00:06:46,960
नहीं जान पा रहे हैं वो मूर्ख लोग हैं। मगर जब

100
00:06:46,960 --> 00:06:51,040
उनके बारे में हमको दिव्य दृष्टि से बातें पता चली दिव्य

101
00:06:51,040 --> 00:06:55,200
दृष्टि के द्वारा फिर गुरु परंपरा के द्वारा हमको पता चली तो हमें पता चला कि हां

102
00:06:55,200 --> 00:06:59,200
ये अवतार हैं। ये अवतार ही थे जो भगवान के आए थे। और उस समय

103
00:06:59,200 --> 00:07:03,280
भी जो दिव्य दृष्टि रखते थे उनकी समय धारा में उन्होंने

104
00:07:03,280 --> 00:07:07,440
उनको अवतार माना। वो जानते हैं वहां पर ये जानते हैं कि ये सर्वज्ञ है।

105
00:07:07,440 --> 00:07:11,680
उनको सब वो शब्द प्रमाण से नहीं अपनी दिव्य दृष्टि से जानते हैं। ये शब्द प्रमाण

106
00:07:11,680 --> 00:07:15,680
से ही हमें पता चलता है कि वो है तो नित्य शुद्ध बुद्ध

107
00:07:15,680 --> 00:07:19,760
मुक्त मगर वो ये जो है रोल कर रहे हैं लीला कर रहे हैं। वो उनहीं शब्द

108
00:07:19,760 --> 00:07:23,840
प्रमाण बात को क्लियर करते हैं। उसको क्लियर करते हैं। यानी कि

109
00:07:23,840 --> 00:07:28,160
वो मुक्त होते हुए भी ऐसा दिखाते हैं कि मैं मुक्त नहीं हूं। जिससे

110
00:07:28,160 --> 00:07:32,240
कि आप उनके साथ ज्यादा कनेक्ट हो पाऊं। हम इसमें एक पॉइंट है। इसमें छोटा

111
00:07:32,240 --> 00:07:32,740
सा पॉइंट

112
00:07:32,640 --> 00:07:36,720
यह है कि इसमें अगर लक्षण वाली बात कट गई ना कैसे कट गई मैं समझा

113
00:07:36,720 --> 00:07:40,880
देता हूं थोड़ा सा। जैसे समझिए जैसे आपने बोला कि अवतार का

114
00:07:40,880 --> 00:07:44,960
लक्षण है कि वो सर्वज्य है। सर्वशक्तिमान है। लेकिन जब हम

115
00:07:44,960 --> 00:07:48,960
अवतार की जीवनी देख रहे हैं। उसकी जीवनी में हमें सर्वजता नजर

116
00:07:48,960 --> 00:07:53,200
नहीं आती। सर्वशक्तिमत्ता नजर नहीं आती। ठीक है? यानी उसका लक्षण घट

117
00:07:53,200 --> 00:07:57,200
नहीं रहा है। नजर आती है। नजर आती है। पूरा बोल देता

118
00:07:57,200 --> 00:08:01,360
हूं। पूरा बोल। पूरा बोल देता हूं। पूरा बोलता हूं। अब उसमें पॉइंट ये आ जाता है कि

119
00:08:01,360 --> 00:08:06,000
जब हम जिस पॉइंट पे पकड़ लेते हैं कि नहीं यहां पे तो देखिए यहां पे तो सर्वजिता नजर नहीं आई।

120
00:08:06,000 --> 00:08:10,240
यहां पे तो अल्पज्जता आई तो उस केस में आप कहते हो कि नहीं यहां पर ये

121
00:08:10,240 --> 00:08:14,320
जानबूझ के अपनी अल्पज्जता प्रकट कर रहे हैं। यानी ठीक है उस

122
00:08:14,320 --> 00:08:18,320
उस [गला साफ़ करने की आवाज़] केस में तो यानी उसी केस में कह रहा हूं कि उस एक पॉइंट पे

123
00:08:18,320 --> 00:08:22,560
उनका जो लक्षण है जिससे वो वो उनका अवतार होना सिद्ध हो रहा है। ठीक है? क्योंकि

124
00:08:22,560 --> 00:08:26,720
फिलहाल हम जो मैंने ये किया है ना वो हम इस पे नहीं कह रहे। हम शब्द प्रमाण पे बात

125
00:08:26,720 --> 00:08:30,880
नहीं कर रहे हैं कि रामायण में या रामचरितमानस में लिखा है राम जी अवतार है। अभी हम उसको मान नहीं रहे हैं। शब्द

126
00:08:30,880 --> 00:08:34,960
प्रमाण पे नहीं है हम। ठीक है? अभी वो साध्य कोटि का बात है। सिद्ध कोटि की बात नहीं है।

127
00:08:34,960 --> 00:08:38,960
पॉइंट इसके अंदर ये है कि अगर वहां पे एक पॉइंट में उनकी जीवनी में

128
00:08:38,960 --> 00:08:43,040
कहीं ना कहीं पे ये आ गया कि फलाना चीज के बारे में ना नॉलेज उन्हें नहीं पता था कि सुग्रीव और बाली में

129
00:08:43,040 --> 00:08:47,280
से कौन है? इन दोनों में से दो आपस में लड़ रहे हैं। इनमें से बाली कौन है? उनको नहीं पता।

130
00:08:47,280 --> 00:08:47,780
तो वहां

131
00:08:47,760 --> 00:08:51,840
पे जो उनको उनकी जो अल्पजिता वहां पे प्रकट हो रही है। ठीक है? उस

132
00:08:51,840 --> 00:08:55,840
केस में आप कह रहे हो कि नहीं ये जानबूझ के वहां पर अल्पता प्रकट कर रहे हैं। यानी अगर आप

133
00:08:55,840 --> 00:08:59,840
जानबूझ के भी बोलो ठीक है उस केस में ये होगा कि

134
00:08:59,840 --> 00:09:03,920
वहां पे उस केस में ये हो रहा है कि उनका लक्षण तो प्रकट हो नहीं रहा अवतार

135
00:09:03,920 --> 00:09:08,480
का तो वहां पे तो वो अवतार नहीं है ये सिद्ध हो रहा है ना लक्षणों से

136
00:09:08,480 --> 00:09:12,480
शब्द प्रमाण से नहीं शब्द प्रमाण में तो चलो लिखा है वो हम मान नहीं रहे नहीं मान रहे

137
00:09:12,480 --> 00:09:16,480
अलग विषय है उसप मैं नहीं जा रहा हूं लेकिन जब हम लक्षणों की बात लक्षणों से ये सिद्ध हो रहा है

138
00:09:16,480 --> 00:09:20,480
कि वो नहीं है ये है मेरा पॉइंट इसको थोड़ा सा इबोरेट कर दीजिए जरा

139
00:09:20,480 --> 00:09:24,800
जैसे कि जैसे कि अगर ईश्वर सर्वव्यापक है

140
00:09:24,800 --> 00:09:28,800
तो सब जगह ईश्वर है और दुनिया में सारी दुनिया सारे स्वर ईश्वर के ही

141
00:09:28,800 --> 00:09:32,960
है। ईश्वर कहीं से भी कहीं किसी से अलग नहीं

142
00:09:32,960 --> 00:09:37,040
है। तो ऐसे में हमने केवल एक प्रणव को ही उसका दतक

143
00:09:37,040 --> 00:09:41,120
क्यों माना? प्रणव को ही उसका वो क्यों माना?

144
00:09:41,120 --> 00:09:45,200
प्रतीकात्मक तो इसका निर्णय आएगा गूंगा भी बोल सकता

145
00:09:45,200 --> 00:09:49,520
है। उस वो तो एक अलग चीज हो गई। मगर यह कोई सिद्धांत

146
00:09:49,520 --> 00:09:53,920
थोड़ी नासी

147
00:09:53,920 --> 00:09:58,000
अगर कोई अगर कोई अगर कोई अगर कोई

148
00:09:58,000 --> 00:10:02,000
और ऐसा शब्द हुआ जो बोल सकता हो तो बोल सकते हैं

149
00:10:02,000 --> 00:10:06,080
अथो इति शब्द भी तो ईश्वर का है अथ भी तो इसी का है ईश्वर का ही है ना

150
00:10:06,080 --> 00:10:10,240
वेदों में आया क्यों नहीं उपनिषद में अगर और अगर और अगर और कोई

151
00:10:10,240 --> 00:10:14,400
शब्द होगा जो गूंगा भी बोल सकता होगा तो उसको भी ईश्वर ईश्वर का वो मान

152
00:10:14,400 --> 00:10:18,400
लोगे क्या उसको प्रणव की जगह अरे शंकर भाष में मानो क्या क्या बात कर रहे

153
00:10:18,400 --> 00:10:22,640
हो आप? मैं वो नहीं कह रहा हूं। मैं कह रहा हूं अगर केवल इस तर्क से हम मानेंगे

154
00:10:22,640 --> 00:10:27,200
कि भैया वो गूंगा भी बोल सकता है। इसलिए वो ईश्वर का देवता है। उससे ईश्वर को वो

155
00:10:27,200 --> 00:10:31,280
वो लीजिए तो फिर हमें वहां पर ये जो भी शब्द गूंगा बोल सकता होगा

156
00:10:31,280 --> 00:10:35,360
जो भी ध्वनियां वो कर सकता होगा उसको भी अपनी पूजा में लेना पड़ेगा। मगर वहां

157
00:10:35,360 --> 00:10:39,360
पर शब्द प्रमाण वहां पर हमारा शब्द प्रमाण। मैं

158
00:10:39,360 --> 00:10:43,440
बात पूरी कर जोगी शब्द की बात नहीं है। आपने ये बोला कि ओम को इतनाेंस

159
00:10:43,440 --> 00:10:47,680
क्यों दिया? तो वो बात जोगी शब्द की बात नहीं है। आपने प्रणव

160
00:10:47,680 --> 00:10:51,920
के पक्ष में एक तर्क दिया है क्योंकि उसको गूंगा भी बोल सकता है। तो मैंने

161
00:10:51,920 --> 00:10:56,640
उसको बताया कि गूंगा और भी धनिया निकाल सकता है। फिर प्रणव ही क्यों

162
00:10:56,640 --> 00:11:00,720
तो उसके बारे में यही है कि उसमें शब्द प्रमाण है। तो फिर रामपाल

163
00:11:00,720 --> 00:11:04,800
के बगल में श्री राम जी खड़े हैं। इसमें से कौन सा ईश्वर का अवतार है? कौन

164
00:11:04,800 --> 00:11:10,800
सा नहीं है? तो इसके लिए शब्द प्रमाणित

165
00:11:12,400 --> 00:11:17,440
आप भी कर दोगे वेद मंत्र चार ऋषियों के उसमें आए थे तो वो जो है भगवान नहीं दिए।

166
00:11:17,440 --> 00:11:21,760
कैसे प्रमाणित करें? उस दिन लक्षण आप पूछ रहे थे मुझसे। वहां लक्षण क्या था?

167
00:11:21,760 --> 00:11:25,760
वहां लक्षण क्या था? कि ईश्वर ने वो दिया मंत्र। क्या लक्षण

168
00:11:25,760 --> 00:11:29,760
था वहां? ईश्वर का लक्षण क्या था वहां? पहचानने के लिए। ईश्वर

169
00:11:29,760 --> 00:11:33,760
का लक्षण था कि जो वेद का ज्ञान दे तो कोई सा भी ज्ञान दे रखा। बिना ज्ञान दिए गुरु के

170
00:11:33,760 --> 00:11:38,240
ज्ञान दिए हो नहीं सकता। तो बस वही लक्षण हमारे जो अवतार हैं वो दे रहे हैं।

171
00:11:38,240 --> 00:11:42,480
क्या दे रहे हैं? वेद का ज्ञान, वैदिक ज्ञान, धर्म का ज्ञान, ब्रह्म का ज्ञान

172
00:11:42,480 --> 00:11:46,560
दे तो रहे है? ये अवतार दे रहे हैं। अरे आपने

173
00:11:46,560 --> 00:11:50,720
ही तो कहा कि भैया उसका लक्षण है कि वेद का ज्ञान देता है।

174
00:11:50,720 --> 00:11:54,960
हां। हां तो वेद का ज्ञान दिया भगवान ने। नहीं भगवान

175
00:11:54,960 --> 00:11:59,360
अवतार ने क्या दिया? वेद का ज्ञान? अवतार ने वेद का ज्ञान दिया।

176
00:11:59,360 --> 00:12:04,080
और क्या? कौन से अवतार ने दिया? श्री कृष्ण ने गीता में दिया।

177
00:12:04,080 --> 00:12:08,320
गीता में वेद दिए उन्होंने कौन से वेद मंत्र दिए? अरे वेद मंत्र बिल्कुल उसी फॉर्म

178
00:12:08,320 --> 00:12:12,400
में नहीं ज्ञान की बात हो रही है। ज्ञान दिया कि नहीं दिया? तो मैं जो बोल रहा हूं फिर अगर

179
00:12:12,400 --> 00:12:16,480
अगर आप मंत्र की बात कर रहे हो अगर आप मैंने कहा मैंने कहा वेद का ज्ञान मैंने तो

180
00:12:16,480 --> 00:12:20,480
वेद नहीं बोला। अगर आप कह रहे हो वेद का ज्ञान सुनो तो वेद ज्ञान है

181
00:12:20,480 --> 00:12:24,480
क्या? तो इसका मतलब आपके पास पहले से ये होना चाहिए कि वेद का

182
00:12:24,480 --> 00:12:27,520
ज्ञान यह है जो वेद का ज्ञान देगा वो ईश्वर है। नहीं मैं आपसे

183
00:12:27,520 --> 00:12:31,760
पूछ रहा हूं कि फिर वेद ज्ञान है क्या? मैं बता रहा हूं। आपने ऋषियों के ये कहा कि

184
00:12:31,760 --> 00:12:35,760
ऋषियों ने उनको वेद के ज्ञान से पहचाना। यही कहा ना आपने?

185
00:12:35,760 --> 00:12:40,000
मैंने देखिए मैंने ये बोला कि जैसे मान लीजिए कि आधी सृष्टि में लोग हैं।

186
00:12:40,000 --> 00:12:44,080
ठीक है? अभी हम अभी हम फिलहाल ये ऑब्जर्व कर रहे हैं कि बिना सिखाए कोई सीखता नहीं है।

187
00:12:44,080 --> 00:12:48,160
ठीक है? मां-बाप बच्चे को बोलना नहीं सीख। मैं वो नहीं बात पलट जाएगी। मैं ये कह

188
00:12:48,160 --> 00:12:52,320
रहा हूं ऋषियों ने उनको वेद के ज्ञान से पहचाना ना कि जो वेद का ज्ञान दे रहा है वो ईश्वर

189
00:12:52,320 --> 00:12:56,320
है। वेद का ज्ञान हटा दिए। वेद मतलब ये होता है जो ईश्वर द्वारा उसी

190
00:12:56,320 --> 00:13:00,320
को हमने वेद बोला है। ठीक है? तो वो वो ईश्वर की पहचान कैसे

191
00:13:00,320 --> 00:13:04,480
की थी आपने? जिसने ज्ञान दिया वो ईश्वर है। तो बस ऐसे ही

192
00:13:04,480 --> 00:13:08,560
आपका एक विश्वास है वहां पर। अनुभव आपके अनुभव अनुमान प्रमाण है

193
00:13:08,560 --> 00:13:12,640
केवल विश्वास थोड़ी है। वहाँ पे वहां पर अनुमान नहीं है। वहां पे शब्द प्रमाण

194
00:13:12,640 --> 00:13:16,720
है। सुनो तो सुनो सुनो सुनो। वहां पर अनुमान नहीं है। वहां शब्द

195
00:13:16,720 --> 00:13:20,720
प्रमाण है। इसमें हमने ये निश्चित नहीं किया है। ये सिद्ध नहीं हुआ है कि वो

196
00:13:20,720 --> 00:13:24,800
जो ज्ञान मिला है वो मोक्ष का ही है जबकि वहां पर वो मोक्ष का कहा जा रहा है। कल्याण

197
00:13:24,800 --> 00:13:28,960
का हेतु कहा जा रहा है। जैसे कि हमें उससे मोक्ष प्राप्त होगा

198
00:13:28,960 --> 00:13:33,360
ये सिद्ध कैसे हुआ? उसका लक्षण क्या है ज्ञान का? प्रयोग से।

199
00:13:33,360 --> 00:13:37,360
क्या प्रयोग है बताओ? अगर कोई उसको टेस्ट करना चाहता है कि नहीं जिस ज्ञान से मोक्ष

200
00:13:37,360 --> 00:13:42,000
होगा नहीं होगा उसको टेस्ट कर ले। प्रत्यक्ष कर ले उसका। तो तुमने किया है।

201
00:13:42,000 --> 00:13:42,560
नहीं मैंने तो

202
00:13:42,560 --> 00:13:46,560
नहीं किया। तो इसका मतलब लक्षण सिद्ध नहीं हो रहा। नहीं लक्षण बात यह

203
00:13:46,560 --> 00:13:50,640
नहीं लक्षण सिद्ध नहीं हो रहा। बात लक्षण को चेक नहीं। ऐसे तो ऐसे तो मैं भी कह सकता

204
00:13:50,640 --> 00:13:54,800
हूं ना कि राम जी को देख के मोक्ष प्राप्त हो जाएगा। टेस्ट कर ले। जैसे

205
00:13:54,800 --> 00:13:58,960
आपने कहा आपको लक्षण नहीं दिख रहे। तो ऐसा भी

206
00:13:58,960 --> 00:14:03,280
हो सकता है कि आप अंधे हो। अगर हम कहे कि ईश्वर चिल्ला

207
00:14:03,280 --> 00:14:07,680
के दिखाया। ऐसा भी हो सकता है कि हम बह रहे हो। तो हमें वहां पर शब्द प्रमाण

208
00:14:07,680 --> 00:14:11,680
से यह पता चल रहा है ना कि वो रोल कर रहे थे।

209
00:14:11,680 --> 00:14:15,680
अगर हमको विश्वास नहीं शब्द प्रमाण में तो बात अलग है। मगर जब हमको शब्द प्रमाण

210
00:14:15,680 --> 00:14:20,000
से पता चल रहा है कि वो वहां पर रोल कर रहे थे। वास्तविकता में सर्वज्ञ

211
00:14:20,000 --> 00:14:24,240
ही थे। वो वहां पर दुखी होने का रोल कर रहे थे। वास्तविकता में वो आनंदित

212
00:14:24,240 --> 00:14:28,320
ही थे। वास्तविकता में वो सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रह्म का व्यवहारिक रूप

213
00:14:28,320 --> 00:14:32,320
ही थे। तो हम हम उस पर विश्वास कर लेते हैं। आप मत करो।

214
00:14:32,320 --> 00:14:36,480
आप ये मत मानो कि ये वाला ही अवतार है। ये वाला नहीं है। आप ये कहना तो शुरू करो कि अवतार

215
00:14:36,480 --> 00:14:40,880
ले सकता है ईश्वर। कुल मिलाकर के मैं एक एंडिंग

216
00:14:40,880 --> 00:14:45,040
स्टेटमेंट इस बारे में दे दूं कि भाई कौन कौन अवतार

217
00:14:45,040 --> 00:14:49,040
है कौन नहीं इस विषय में शब्द ही प्रमाण हो सकता है क्योंकि हम उसको काउंटर नहीं कर सकते

218
00:14:49,040 --> 00:14:53,200
क्योंकि कई विषयों में हम शब्द को ही प्रमाण मान रहे हैं उनके होने के विषय में भी हम

219
00:14:53,200 --> 00:14:57,440
इतिहास को ले रहे हैं वो इतिहास भी एक शब्द प्रमाण है उनका होना एक्सिस्टेंस

220
00:14:57,440 --> 00:14:57,940
उनका

221
00:14:57,680 --> 00:15:01,680
अस्तित्व वो भी शब्द प्रमाण से ले रहे हैं तो फिर हम वहां जाके काउंटर नहीं कर सकते जिन

222
00:15:01,680 --> 00:15:05,760
शब्द प्रमाणों से हमको ये मिल रहा है कि वो थे उनहीं शब्द प्रमाणों से जब हमें ये मिल रहा है कि

223
00:15:05,760 --> 00:15:09,920
वो एक्टिंग कर रहे थे तो हम कह नहीं वो एक्टिंग नहीं कर रहे थे वो तो उनका वहां पर ये हो रहा था हम

224
00:15:09,920 --> 00:15:14,720
आपकी बात हमें दो बातों की क्लेरिटी मिल चुकी है। पहला ठीक है।

225
00:15:14,720 --> 00:15:18,880
फ्लोकी जी आप भी है तो थोड़ा ध्यान दीजिएगा इन विषयों पर। है ना? तो पहली बात तो

226
00:15:18,880 --> 00:15:23,200
हमारी इस विषय पे आया था कि अवतार की धारणा क्या है? तो हमें जो क्लेरिटी

227
00:15:23,200 --> 00:15:27,200
वहां से मिली थी वो ये मिली थी कि जैसे जीव शरीर धारण करता है वैसे ईश्वर भी शहीद धारण

228
00:15:27,200 --> 00:15:31,440
करता है। लेकिन अंतर ये होता है कि जीव जो होता है वो बद्ध होता है और जो

229
00:15:31,440 --> 00:15:35,600
ईश्वर जो जिस शरीर को धारण करता है जिसे हम अवतार कहते हैं वो मुक्त होता है। ठीक है? स्वभाव से वो मुक्त

230
00:15:35,600 --> 00:15:40,080
होता है। ये एक पॉइंट आया था। तो हमें पता चला कि अवतारवाद की धारणा क्या अच्छा इसका स्पष्टीकरण

231
00:15:40,080 --> 00:15:44,080
हो गया। उसके बाद पॉइंट ये था कि अवतार का लक्षण क्या है कि अगर मेरे सामने राम जी या रामपाल खड़े

232
00:15:44,080 --> 00:15:48,080
हो जाए तो दोनों में से ईश्वर का अवतार कौन है? कैसे पता चलेगा? तो उसमें पॉइंट ये था कि

233
00:15:48,080 --> 00:15:52,400
उसमें सामान्य लोग नहीं जान सकते कि ये ईश्वर के अवतार हैं। उसमें जो विशेष

234
00:15:52,400 --> 00:15:56,480
दिव्य दृष्टि रखने वाले गुरुजन हैं सिद्ध लोग हैं वही पहचान सकते हैं कि ये

235
00:15:56,480 --> 00:16:00,480
ईश्वर हैं। क्योंकि व्यवहारिक जो लक्षण है वो उसमें उस टाइप से नहीं

236
00:16:00,480 --> 00:16:04,560
होते। है ना? पता नहीं चलते। तो जो जो उस

237
00:16:04,560 --> 00:16:08,640
टाइप का ज्ञानी जो उस टाइप का व्यक्ति है सिद्ध व्यक्ति वो पहचान करके फिर

238
00:16:08,640 --> 00:16:12,720
वो अपने शिष्यों को बताएगा तब शिष्य जान पाएंगे कि हां ये जो है ये राजा जो

239
00:16:12,720 --> 00:16:18,720
है ये अवतार है वास्तव में है ना इत्यादि बातें निकल कर के आती है

240
00:16:35,610 --> 00:16:39,610
[संगीत]
