1
00:00:01,960 --> 00:00:02,800
[घंटी की आवाज़][संगीत]

2
00:00:02,800 --> 00:00:07,200
इस विषय में तुम्हारा क्या पक्ष है कि यह जो है ईश्वर सृष्टि बनाता

3
00:00:07,200 --> 00:00:11,440
कैसे है? जो बल लगा जी जी जी 10 नंबर और दो

4
00:00:11,440 --> 00:00:15,520
नंबर ये दोनों अलग-अलग बल है क्वांटिटी में तो ये बल के रूप

5
00:00:15,520 --> 00:00:19,760
में ईश्वर में भेद है। तो यहीं पे अवतार मानना पड़ेगा कि वो

6
00:00:19,760 --> 00:00:23,760
एक और अवतार लेता है अपने उस रूप को सुरक्षित रखते हुए और अब वो जो है

7
00:00:23,760 --> 00:00:27,760
क्रियाशील होता है। इसको मानते नहीं है अभी हम लोग। तो क्यों नहीं मानते? तो

8
00:00:27,760 --> 00:00:32,800
क्यों है पता है यहां पे यहां पे वो अद्वैत की बात आती है हां

9
00:00:32,800 --> 00:00:36,960
वैसे उसके अंदर चेतन तो है नहीं मटेरियल में हां मटेरियल थोड़ी

10
00:00:36,960 --> 00:00:40,960
चेतन है अब उसने केवल इच्छा की और घूमने लगा उसकी क्या सूचना गई

11
00:00:40,960 --> 00:00:45,120
क्या नहीं गई इसके इसको थोड़ा सा डिफाइन करोगे कैसे अब उसकी व्याख्या उसमें

12
00:00:45,120 --> 00:00:50,080
हमें थोड़ी और गहराई से मुझे शास्त्रों में थोड़ी और गहराई में पढ़नी पड़ेगी

13
00:00:50,080 --> 00:00:54,240
कि तुम मुझे बस इतना बताओ अभी कि पृथ्वी को प्राप्त क्या हो रहा है कुछ फोर सोर्स

14
00:00:54,240 --> 00:00:58,240
प्राप्त हो रही है उसे कि नहीं हो रही है बस वो एक उसके अंदर अंदर कोई ऐसा भैया

15
00:00:58,240 --> 00:01:02,480
यह सारा विषय मैंने आपको पिछली बार भी इच्छा वाला पूरा कांसेप्ट अच्छे से बताया था।

16
00:01:02,480 --> 00:01:06,560
नहीं नहीं बताया था अच्छे से। तुम उसमें खिचड़ी पगा रहे हो। वहीं पे अवतार

17
00:01:06,560 --> 00:01:10,560
की सिद्धि होती है। क्योंकि अगर वो शक्ति शक्ति के उससे

18
00:01:10,560 --> 00:01:14,880
सर्व वो है सर्वव्यापक एक रस है तो जब वो

19
00:01:14,880 --> 00:01:19,040
पृथ्वी इत्यादि के लिए व्यवहारिक होगा तो वहां पर वो कहीं पे कम कहीं

20
00:01:19,040 --> 00:01:23,120
पे ज्यादा होगा। सिंपल। तो ऐसी स्थिति में या तो यह मानना

21
00:01:23,120 --> 00:01:27,200
पड़ेगा कि निर्गुण ने अपने स्वरूप को बदला जो कि वह बदल नहीं सकता। बदला

22
00:01:27,200 --> 00:01:29,840
तो उसकी शाश्वतता भंग हो जाएगी। तो यहीं पर

23
00:01:29,840 --> 00:01:34,000
अवतार मानना पड़ेगा कि वो एक और अवतार लेता है। अपने उस रूप को सुरक्षित

24
00:01:34,000 --> 00:01:34,500
रखते

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00:01:34,320 --> 00:01:38,480
हुए नित्यता को सुरक्षित रखते हुए सगुण अवतार लेता है और अब

26
00:01:38,480 --> 00:01:43,120
वो जो है क्रियाशील होता है। मैं एक बड़े भाई होने के नाते तुम्हें कह रहा हूं।

27
00:01:43,120 --> 00:01:47,280
तुम सगुण निर्गुण पे और वो करो क्योंकि यहां पे तुम जो है क्लियर

28
00:01:47,280 --> 00:01:53,280
नहीं हो। मेरा क्लियर है वो इच्छा वाला पॉइंट आप खंडन करिए ना

29
00:01:53,280 --> 00:01:57,440
कर तो दिया खंडन कि भैया यहां पर हमें प्राप्त क्या हो रहा है जैसे हमें

30
00:01:57,440 --> 00:02:01,840
व्यवहार में क्या प्राप्त हो रहा है इच्छा इच्छा मतलब इच्छा मतलब एक मानसिक

31
00:02:01,840 --> 00:02:05,840
सूचना जैसे चेतन जीव है। ठीक है जीव

32
00:02:05,840 --> 00:02:09,840
इच्छा करता है और मन में विचार आता है। इच्छा करता है और हाथ उठता है।

33
00:02:09,840 --> 00:02:13,840
है ना? तो चाहने मात्र से ऐसा तो नहीं कि जीव अलग से हाथ के नीचे

34
00:02:13,840 --> 00:02:18,080
आकर के धक्का मार रहा है। ये तो हो नहीं रहा। हमारी जो वो होती है माइटोकांड्रिया

35
00:02:18,080 --> 00:02:22,160
है जहां से एनर्जी प्रोड्यूस होती है। हां हमारे चाहने मात्र से वो

36
00:02:22,160 --> 00:02:26,320
एनर्जी काम करती है। लेकिन चाहने मात्र से हुआ ना ये। चाहने मात्र से

37
00:02:26,320 --> 00:02:30,320
एनर्जी का यूज़ किया। तुम ये बताओ एनर्जी का अस्तित्व तुम मान रहे

38
00:02:30,320 --> 00:02:35,440
हो कि नहीं मान रहे हो? मैं उस तरीके से नहीं समझ पा रहा ना भैया। इसीलिए तो मैं ऐसे बोल रहा हूं।

39
00:02:35,440 --> 00:02:39,920
अब मुझे ये बता दो कि मेरी मसल्स चिपाक को सिकुड़ने

40
00:02:39,920 --> 00:02:44,640
अथवा इलास्टिसिटी होने के लिए एक तुमने एटीपी नामक वो मानी शक्ति

41
00:02:44,640 --> 00:02:48,880
जो शक्ति का उपयोग हो रहा है पृथ्वी को खिसकाने इत्यादि

42
00:02:48,880 --> 00:02:49,380
में

43
00:02:49,360 --> 00:02:53,440
वो और ईश्वर अलग-अलग है क्या? जिस शक्ति

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00:02:53,440 --> 00:02:57,920
का प्रयोग हो रहा है नहीं वो इच्छा तो उसका गुण है ना। देखा

45
00:02:57,920 --> 00:03:02,080
बस क्या? अब तो अब बस अभी अब फिर बात करेंगे। हां। क्यों?

46
00:03:02,080 --> 00:03:06,400
क्या हुआ? अब फिर बात करेंगे। मुझे निकलना भी है और यहां पे तुम

47
00:03:06,400 --> 00:03:10,480
थोड़ा वैसा दे रहे हो। धुंधला आंसर क्लियर नहीं कर रहे हो। नहीं धुंधला मतलब कैसे मैं

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00:03:10,480 --> 00:03:14,720
समझ यहां तुम इच्छा पे क्यों ले आए? तुमने माना ना मेरी मसल्स को हिलाने के लिए एक एनर्जी

49
00:03:14,720 --> 00:03:18,800
नामक तत्व है जिसको तुमने एटीपी नाम दिया। अब अब जैसे मैंने मैंने जो उदाहरण

50
00:03:18,800 --> 00:03:23,040
दिया था मैंने वो क्या दिया था? मैंने उदाहरण ये दिया था कि जिस प्रकार इसीलिए

51
00:03:23,040 --> 00:03:27,120
मैंने उसमें दो तीन पॉइंट इसीलिए रखे हुए थे। अब इसमें मैंने उसमें बोला था विचार का भी बोला

52
00:03:27,120 --> 00:03:31,120
था। है ना? विचार। अब इसमें ये होता है कि जैसे हाथ हिलाने पर तो जीव का डायरेक्ट कंट्रोल नहीं

53
00:03:31,120 --> 00:03:35,280
होता है। वो जैसा चाहता है उसके अकॉर्डिंग वो ईश्वर ही उसके सहायक होता है हाथ हिलाने में। ठीक है? खैर

54
00:03:35,280 --> 00:03:39,280
वो मैंने मोटे मोटे भाषा में बोला था। लेकिन मैंने इसलिए मैंने जानबूझ के करके उसके साथ में ये शब्द भी बोला

55
00:03:39,280 --> 00:03:43,280
था कि इच्छा मतलब चाहता है विचार करता है। तो जीव के चाहने मात्र से मन

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00:03:43,280 --> 00:03:47,280
में मतलब वो जो विचार होते हैं। ठीक है? और वो उसके खुद के सामर्थ्य से होते हैं। उसमें कोई

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00:03:47,280 --> 00:03:51,280
ऐसे आप ये नहीं दिखा सकते कि अलग से कोई एनर्जी कुछ ऐसा हो गया। ये गलत बात है। फिर तो

58
00:03:51,280 --> 00:03:55,280
खाना खाने की जरूरत ही नहीं है। चाहने मात्र से हो जाना चाहिए। इसीलिए तो कह रहा हूं। सुनते ही नहीं

59
00:03:55,280 --> 00:03:59,520
हो आप मेरी बात। आधा तुम कितना भी घुमाओ उसमें अंत में आएगा कि एक तत्व मानना

60
00:03:59,520 --> 00:04:04,000
पड़ेगा एनर्जी के रूप में जो कि एक देसी हो रहा है। घुमा लीजिए कभी कि सिद्ध नहीं कर पाएंगे।

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00:04:04,000 --> 00:04:04,560
इतना

62
00:04:04,560 --> 00:04:08,560
जलेबी बना लिया इतनी अच्छा ठीक है ठीक है तुम गुस्सा मत हो गुस्सा मत दो हो चलो चलो आगे

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00:04:08,560 --> 00:04:13,040
बढ़ो बताओ मैं ये शब्द मैं भी बोल दूंगा ना क्या बताओ चलो बताओ

64
00:04:13,040 --> 00:04:17,200
है ना ऐसे नहीं बोलना चाहिए खैर बताओ बताओ क्या है सुन

65
00:04:17,200 --> 00:04:21,200
तो लिया एक बार में चलो ठीक है निर्भय हां

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00:04:21,200 --> 00:04:25,360
निर्भय मुझे थोड़ा पंप मारने दो फिर बात करेंगे हां चलिए ठीक है भैया फिर बात करते

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00:04:25,360 --> 00:04:29,860
हैं जय श्री राम सुन लो घर वालों की भी सुन लो दिन भर इसी में ना रहो

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00:04:29,860 --> 00:04:33,860
[हंसी] हां चलो ठीक ठीक जय श्री राम ठीक भैया नमस्ते पे
