1
00:00:01,960 --> 00:00:04,160
[संगीत]

2
00:00:04,160 --> 00:00:08,320
हुई भारत वालों की बात भारत से बाहर चलते हैं इस्लाम

3
00:00:08,320 --> 00:00:12,800
धर्म में जहां मूर्ति पूजा नहीं है

4
00:00:12,800 --> 00:00:16,880
मक्का में काबा का पवित्र पत्थर है जिसको कहते

5
00:00:16,880 --> 00:00:22,640
हैं काबा का पवित्र पत्थर संग अस्वद

6
00:00:22,640 --> 00:00:26,720
ये पवित्र पत्थर के पीछे कहानी है कहानी ये है कि

7
00:00:26,720 --> 00:00:30,720
पहले आगे थोड़ा आगे बढ़ा दीजिए इतना ज्यादा मैं सुन नहीं

8
00:00:30,720 --> 00:00:35,280
परंतु जब मोहम्मद पैगंबर साहब आए तब उन्होंने कहा अल्लाह एक है।

9
00:00:35,280 --> 00:00:39,280
हां अल्लाह एक है। काफी मतभेद हुआ।

10
00:00:39,280 --> 00:00:43,840
मोहम्मद पैगंबर साहब को मदीना भेज दिया गया कि वहां जाकर ये प्रचार कीजिए।

11
00:00:43,840 --> 00:00:47,920
वहां प्रचार करते रहा अल्लाह एक है। अल्लाह है। धीरे-धीरे लोग उस विचारधारा

12
00:00:47,920 --> 00:00:51,920
से जुड़ते गए। जब काफी मात्रा में लोग इकट्ठे हो गए। पुनः

13
00:00:51,920 --> 00:00:56,000
मक्का आए। अल्लाह एक है। काफी मतभेद लड़ाई झगड़ा

14
00:00:56,000 --> 00:01:00,240
हुआ। उस समय कहा जाता है एक आकाशवाणी हुई कि आप लड़ाई झगड़ा मत करो

15
00:01:00,240 --> 00:01:05,600
मुझे इसी स्वरूप में याद करो और ऊपर से यह पवित्र पत्थर गिरा था

16
00:01:05,600 --> 00:01:10,000
और उसकी स्थापना की गई और तब से लेकर के ये मान्यता

17
00:01:10,000 --> 00:01:13,920
है कि जीवन में एक बार ये पवित्र

18
00:01:13,920 --> 00:01:16,880
हम जी

19
00:01:16,880 --> 00:01:18,000
हेलो

20
00:01:18,000 --> 00:01:21,120
जी जी बोलिए बोलिए

21
00:01:21,120 --> 00:01:25,680
आपने जो अभी डी के उषा का पूरा वीडियो सुना है अभी

22
00:01:25,680 --> 00:01:31,280
मैं आपकी इसके ऊपर पत्री के क्या बोला रिएक्शन चाहूंगा आपका

23
00:01:31,280 --> 00:01:35,360
क्या बोल रहे हैं जो आपने बी के उषा का वीडियो सुना

24
00:01:35,360 --> 00:01:39,440
है अभी आपने एक बार एक शब्द सुना पूरा सर आपका

25
00:01:39,440 --> 00:01:43,520
रिएक्शन उसके ऊपर टिप्पणी दीजिए अपनी मैं अपनी

26
00:01:43,520 --> 00:01:47,840
टिप्पणी कई बार दे चुका हूं। मैंने तो अभी-अभी कहा ना कि यह जिस तरीके से इस्लाम

27
00:01:47,840 --> 00:01:52,240
को ग्लोरिफाई कर रहे हैं और सनातन के साथ मिक्स करने की कोशिश कर रहे हैं।

28
00:01:52,240 --> 00:01:56,240
हम लोग जो कार्य कर रहे हैं ना हम लोगों का कार्य यह है

29
00:01:56,240 --> 00:02:00,560
कि सनातन के जो वास्तविक सिद्धांत है वो लोगों को पता चल जाए जिससे

30
00:02:00,560 --> 00:02:04,560
कि उन सिद्धांतों के कारण हम लोग अपने अस्तित्व और आदर्श

31
00:02:04,560 --> 00:02:08,720
की रक्षा कर सके। अब लोग कहते हैं कि आप जो है बीके के बारे में बोलते हो,

32
00:02:08,720 --> 00:02:12,800
इस के बारे में बोलते हो, आर्य समाज के बारे में बोलते हो। हम इसलिए बोलते हैं

33
00:02:12,800 --> 00:02:16,880
कि अगर सनातन के वास्तविक और मजबूत सिद्धांत लोगों को

34
00:02:16,880 --> 00:02:20,960
ज्ञात नहीं होंगे तो हम लोग बिखरे रहेंगे। अब जैसे ये

35
00:02:20,960 --> 00:02:25,200
सनातन के साथ इस्लाम को मिला रही हैं। इनको लगता है इन्होंने कुछ नहीं किया।

36
00:02:25,200 --> 00:02:29,920
मैं कहूंगा ये बहुत बड़ा ऑफेंस है। यह बहुत बड़ा

37
00:02:29,920 --> 00:02:33,120
ये बहुत बड़ा अपराध है। और अभी कुछ दिन पहले

38
00:02:33,120 --> 00:02:37,440
एक बाबा जी आए थे मेरे चैनल पर। उन्होंने मुझसे कहा था

39
00:02:37,440 --> 00:02:41,520
कि ये अरे भाई इतना ज्यादा क्यों किसी

40
00:02:41,520 --> 00:02:45,920
के बारे में बात बताना और वो लोग कोई मारधा मारकाट

41
00:02:45,920 --> 00:02:50,080
थोड़ी ना कर रहे हैं। मैंने कहा भाई वो मारकाट नहीं कर रहे हैं। वो

42
00:02:50,080 --> 00:02:54,720
लोगों की वैचारिक हत्या कर रहे हैं। वैचारिक हत्या का एक मैं आपको

43
00:02:54,720 --> 00:02:58,800
क्या कहते हैं? एक एग्जांपल बताता हूं मैं अभी। जैसे कि हमारे यहां

44
00:02:58,800 --> 00:03:02,880
पर हम लोग बहुत लड़ते मरते हैं। हमारे कई हिंदुत्ववादी

45
00:03:02,880 --> 00:03:07,680
ऐसे लोग हैं जो लव जिहाद से लड़ रहे हैं या

46
00:03:07,680 --> 00:03:11,920
कई सारे दल बने हुए हैं जो लव जिहाद का विरोध कर रहे हैं और बहुत युद्ध स्तर

47
00:03:11,920 --> 00:03:16,000
पर लगे हुए अपने जान माल के लिए जान माल को हाथ में लेकर के लड़ रहे हैं।

48
00:03:16,000 --> 00:03:20,080
इस इस क्रम में उन्हें कई बार जेल की सलाखों का मूवी देखना पड़

49
00:03:20,080 --> 00:03:24,080
जाता है। कहीं पर मारपीट हो जाती है। कहीं भागदौड़ अपनी जिंदगी को

50
00:03:24,080 --> 00:03:28,400
दाव पर लगा के अपने जो अपनी मातृशक्तियां है सनातन

51
00:03:28,400 --> 00:03:32,560
धर्म की जो सनातन धर्म का जो स्त्री धन है उसको बचाने

52
00:03:32,560 --> 00:03:36,720
के लिए प्रयासरत हैं लगातार ठीक है मगर इस

53
00:03:36,720 --> 00:03:40,880
एक स्टेटमेंट ने इस्लाम को सनातन के साथ मिलाने वाले स्टेटमेंट

54
00:03:40,880 --> 00:03:44,960
ने कितना बड़ा अपराध किया है कितनी बड़ी वैचारिक हत्या की है वो मैं आपको

55
00:03:44,960 --> 00:03:48,240
बताता हूं हमारे यहां कहा गया है कि रघुकुल

56
00:03:48,240 --> 00:03:52,560
रीत सदा चली आई प्राण जाई पर वचन ना जाई है है ना?

57
00:03:52,560 --> 00:03:56,800
और अगर यह तो कहा गया रामचरितमानस में

58
00:03:56,800 --> 00:04:00,880
और अगर वाल्मीकि रामायण के आधार पर देख ले तो इसका जो संदर्भ

59
00:04:00,880 --> 00:04:05,280
आएगा वो आएगा रामो दुरनाभि भाषेते जब माता

60
00:04:05,280 --> 00:04:09,440
कैकई के पास श्री रामचंद्र जी पहुंचते हैं जिस समय कैकई

61
00:04:09,440 --> 00:04:13,520
ने कैकई माता ने अपना वर मांगा था कि राम को आप 14

62
00:04:13,520 --> 00:04:18,000
साल के लिए वनवास भेज दो और दशरथ जी वहां रो रहे थे तो वहां श्री रामचंद्र

63
00:04:18,000 --> 00:04:22,000
पहुंचते हैं और वह कहते हैं कि पिताजी क्यों रो रहे हैं? मुझे बताइए तो वह

64
00:04:22,000 --> 00:04:26,000
कहती हैं कि पिताजी ने मुझे एक वरदान वो वर दिया था वचन

65
00:04:26,000 --> 00:04:30,000
दिया था और आज मैंने वह वचन इनसे मांग लिया है

66
00:04:30,000 --> 00:04:34,640
तो उसकी पूर्ति ना कर पाने की स्थिति में अपनी जो

67
00:04:34,640 --> 00:04:38,800
क्या कहते हैं उसको जो वो हेल्पलेस हो रहे हैं इस समय है ना

68
00:04:38,800 --> 00:04:43,040
असहाय असहाय होने के कारण वो उसको इस तरह से रो करके दुख

69
00:04:43,040 --> 00:04:47,120
प्रकट कर रहे हैं तो श्री रामचंद्र जी ने कहा आप मुझे बताइए मैं आपके मैं

70
00:04:47,120 --> 00:04:51,120
आपका वो वचन पूरा करूंगा पिताजी का आप मुझे बताइए तो उन्होंने ने कहा रहने दो

71
00:04:51,120 --> 00:04:55,600
राम तुमसे नहीं होगा। वो दोतीन बार बोला राम जी ने कि भाई मुझे बताइए

72
00:04:55,600 --> 00:05:00,000
माता जी मुझे बताइए मैं करूंगा पिताजी ने कौन सा वचन दिया था आपको? तो वो कहती है

73
00:05:00,000 --> 00:05:03,360
तब रामचंद्र जी कहते हैं स्ट्रांग शब्दों

74
00:05:03,360 --> 00:05:07,840
में मैं रघुकुल का वंशज हूं। रघुकुल वाला हूं मैं।

75
00:05:07,840 --> 00:05:12,160
रामो दुरनाभि भाषेते। राम दो प्रकार की बातें नहीं करता। इसका

76
00:05:12,160 --> 00:05:16,400
अर्थ बहुत बड़ा है, विशाल है। इसका अर्थ है जिसको हमने बहन

77
00:05:16,400 --> 00:05:20,480
कह दिया वह हमारी बहन है। जिसको हमने मां कह दिया वह हमारी मां

78
00:05:20,480 --> 00:05:24,720
है। जिसको हमने बेटा कह दिया वो हमारा बेटा है। हो

79
00:05:24,720 --> 00:05:28,720
सकता है कि हम उसके साथ पूरा का पूरा यथासामर्थ्य

80
00:05:28,720 --> 00:05:32,960
जो व्यवहार है वो ना कर पाए। मगर हमारी जो उसकी

81
00:05:32,960 --> 00:05:37,040
हम अवेलना भी कभी नहीं करेंगे। जैसे होता है ना कि जैसे हमने किसी बेटे को

82
00:05:37,040 --> 00:05:41,120
गोद ले लिया या फिर किसी के प्रति बेटे की दृष्टि रख ली या फिर किसी

83
00:05:41,120 --> 00:05:45,200
कन्या के प्रति बहन की या मातृत्व की या बेटी की दृष्टि

84
00:05:45,200 --> 00:05:49,280
रख ली। हो सकता है हम उसका कन्यादान ना करा पाए। हमारे पास धन नहीं है। हम अपनी

85
00:05:49,280 --> 00:05:53,440
बेटी का जो हमारी सगी बेटी है उसका ही कन्यादान हम करा पाए और हमारे पास

86
00:05:53,440 --> 00:05:57,600
इतना सामर्थ्य ना हो कि हम उसकी शादी में वह जो धन इत्यादि है वह

87
00:05:57,600 --> 00:06:01,760
खर्च ना कर पाए। तो यह होती है विधि। हो सकता है हम विधि का आलंबन

88
00:06:01,760 --> 00:06:05,840
ना ले पाए। मगर जो निषेध है उसका

89
00:06:05,840 --> 00:06:09,920
उल्लंघन तो हम नहीं करेंगे ना कि बहन के साथ यह वाला व्यवहार नहीं

90
00:06:09,920 --> 00:06:13,920
करना है और अगर हमने किसी को बहन कहा है तो हम इस बहन के

91
00:06:13,920 --> 00:06:18,000
रिश्ते में जो मर्यादा बताई गई है निषेध यह नहीं करना है उसका

92
00:06:18,000 --> 00:06:18,560
उल्लंघन

93
00:06:18,560 --> 00:06:22,720
नहीं करेंगे एक सिद्धांत है विधि निषेध में कि विधि

94
00:06:22,720 --> 00:06:26,800
का आलंबन हो ना हो आपके पास सामर्थ्य नहीं है विधि का आलंबन नहीं ले पा रहे

95
00:06:26,800 --> 00:06:30,960
कोई बात नहीं चल जाएगा निषेध का उल्लंघन नहीं होना चाहिए जो मना किया

96
00:06:30,960 --> 00:06:35,200
गया उसका उल्लंघन नहीं होना चाहिए क्यों क्योंकि निष निषेध के उल्लंघन के लिए प्रयास

97
00:06:35,200 --> 00:06:39,200
चाहिए होता है। अगर प्रया निषेध का जब आप उल्लंघन

98
00:06:39,200 --> 00:06:43,280
कर रहे हैं तो आप प्रयास पूर्वक वो अपराध कर रहे हैं। विधि का आलंबन ना लेने

99
00:06:43,280 --> 00:06:47,360
में प्रयास नहीं चाहिए। आपने कुछ नहीं किया। विधि का विधि का आलंबन नहीं ले पाए कोई बात

100
00:06:47,360 --> 00:06:51,520
नहीं। मगर निषेध का उल्लंघन का मतलब है आपने प्रयास पूर्वक धर्म

101
00:06:51,520 --> 00:06:55,760
विरुद्ध जाने का प्रयास किया है। जानबूझकर तो निषेध का उल्लंघन

102
00:06:55,760 --> 00:06:59,840
नहीं होना चाहिए। तो अब हमारे यहां बता दिया गया

103
00:06:59,840 --> 00:07:03,920
कि रघुकुल ही सदा चली आई। प्राण जाए पर वचन ना जाए। बहन का मतलब बहन,

104
00:07:03,920 --> 00:07:08,080
माता का मतलब माता और पुत्र का मतलब पुत्र, पिता का मतलब पिता।

105
00:07:08,080 --> 00:07:12,160
अगर हमने किसी से कह दिया तो हम भले ही उसके जो जितने कर्तव्य

106
00:07:12,160 --> 00:07:16,320
बताए गए हैं उस अमुक अमुक संबंध के लिए वो सारे कर्तव्यों का हम निर्वाह

107
00:07:16,320 --> 00:07:20,320
ना कर पाएं। कोई बात नहीं। मगर उस उस अमुक अमुक संबंध

108
00:07:20,320 --> 00:07:24,720
में जो निषेध बताया गया है कि यह काम तुम्हें नहीं करना है। तो उस निषेध

109
00:07:24,720 --> 00:07:28,880
का हम उल्लंघन कभी नहीं करेंगे। मगर वहां क्या बताया गया है? कुरान

110
00:07:28,880 --> 00:07:33,040
में कि आपने किसी को मुख से कह भी दिया कि

111
00:07:33,040 --> 00:07:33,600
तुम हमारी

112
00:07:33,600 --> 00:07:37,840
माता हो, तुम हमारी बहन हो, तुम हमारे बेटे हो। है ना?

113
00:07:37,840 --> 00:07:42,240
फिर भी उसके उलट जाकर के आप व्यवहार वहां पर कुरान के अनुसार

114
00:07:42,240 --> 00:07:47,120
करने की वहां पर अलऊ किया गया है। तो अब क्या होगा? जब एक

115
00:07:47,120 --> 00:07:51,280
सामान्य बालिका है हमारे यहां की किशोरी है युवा

116
00:07:51,280 --> 00:07:55,280
है और उसको हम जब इस तरह के स्टेटमेंट आते हैं कि जो

117
00:07:55,280 --> 00:07:59,440
है ईश्वर अल्लाह एक है और इस्लाम में भी सनातन है इस्लाम और सनातन

118
00:07:59,440 --> 00:08:03,840
एक है। जब इस तरह के स्टेटमेंट आते हैं तो यह किस तरह से कितना बड़ा अपराध

119
00:08:03,840 --> 00:08:07,840
है वो मैं आपको बता रहा हूं कि एक सामान्य जो

120
00:08:07,840 --> 00:08:11,920
लड़की होती है जो जो बी के उषा को धर्म को जानने वाली के रूप

121
00:08:11,920 --> 00:08:16,000
में देखती है जो बी के उषा को एक स्पिरिचुअल लीडर के रूप में देखती

122
00:08:16,000 --> 00:08:20,480
है सनातन का मर्म बताने वाली के रूप में देखती है

123
00:08:20,480 --> 00:08:24,560
तो वो जब यह सुनती है कि ईश्वर अल्लाह एक है कुरान और

124
00:08:24,560 --> 00:08:28,640
सनात वो कुरान और गीता एक है और जो है सनातन और इस्लाम एक है

125
00:08:28,640 --> 00:08:32,880
तो उसके मन में एक पर्सेक्टिव तैयार होता है कि हमारे यहां पर रकुल

126
00:08:32,880 --> 00:08:36,960
रीत सदा चलियाई सिखाया गया हमारे भाई को है ना रामो

127
00:08:36,960 --> 00:08:41,280
विग्रहान धर्म हमारे यहां पर धर्म है कि जो बात बोल दी सो बोल दी उसके

128
00:08:41,280 --> 00:08:45,600
उससे हम उलट नहीं जाएंगे और वो इसी पर्सेक्टिव

129
00:08:45,600 --> 00:08:48,640
से इसी ऑब्जरर्वेशन से इसी दृष्टि से

130
00:08:48,640 --> 00:08:52,800
वो इस्लाम को मानने वालों को भी देखने लगती है कि

131
00:08:52,800 --> 00:08:56,800
अगर अगर इस्लाम और हिंदूइज़्म एक है इस्लाम और सनातन

132
00:08:56,800 --> 00:09:00,880
एक है तो इसका मतलब इनके यहां पर भी वही वाला मामला होगा कि रघुकुल री सदा

133
00:09:00,880 --> 00:09:05,200
चली जाई प्राण जाई पर वचन ना जाई ऐसे में वहां वाला व्यक्ति यदि द्वेष

134
00:09:05,200 --> 00:09:09,280
वश अगर वहां वाला व्यक्ति द्वेषवश हमारे यहां की

135
00:09:09,280 --> 00:09:13,360
कन्या को यह कह देगा कि तुम हमारी बहन हो मैं तो तुम्हें बहन मानता हूं जबकि वहां पर

136
00:09:13,360 --> 00:09:17,360
कहा गया अगर तुमने किसी को बहन कह दिया जरूरी नहीं है उसके साथ बहन का निर्वाह ही करो

137
00:09:17,360 --> 00:09:21,680
वो वहां वो अपना धर्म निभा रहा है वो अपने धर्म पर उसको जो बताया गया है

138
00:09:21,680 --> 00:09:25,680
उसके यहां के नियमों पर वो उसके यहां वो नियम है हमारी लड़की

139
00:09:25,680 --> 00:09:30,160
समझती है पलटेगा नहीं हमारी बिटिया समझती है। यह अपनी जुबान से नहीं पलटेगा

140
00:09:30,160 --> 00:09:34,320
क्योंकि इस्लाम और सनातन एक है। ईश्वर अल्लाह एक है। कुरान और गीता

141
00:09:34,320 --> 00:09:38,400
एक है। तो क्या होता है इसका नतीजा? एक दिन वो बिटिया

142
00:09:38,400 --> 00:09:42,480
जो है हमें 35 टुकड़ों में प्राप्त होती है। तो इस 35

143
00:09:42,480 --> 00:09:46,640
टुकड़े का मूल में वास्तविक जिम्मेदार कौन

144
00:09:46,640 --> 00:09:51,200
हुआ? वैचारिक हत्यारा जिसने वैचारिक

145
00:09:51,200 --> 00:09:55,280
हत्या की। जिसने उस बिटिया को ये सोचने पर मजबूर कर

146
00:09:55,280 --> 00:09:59,360
दिया। उस बिटिया के मन में ये डाल दिया कि इस्लाम की फिलॉसफी इस्लाम

147
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के नियम सिद्धांत और हमारे सनातन की फिलॉसफी सनातन के नियम सिद्धांत

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एक

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है। तो मैं कहूंगा कि वो 35 टुकड़े व्यवहारिक रूप से जिसने किए वो

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तो है ही है गुनहगार मगर उसमें असली गुनहगार वो व्यक्ति है जो

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इस तरीके से विचारों की हत्या कर रहा है। गलत विचार प्रस्तुत

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कर रहा है। सनातन के नाम से राम के नाम से मोहम्मद के जो

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आइडियोलॉजीस है राम के नाम से जो मोहम्मद की शिक्षा का प्रचार प्रसार कर रहा है

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वो इसके मूल में है वैचारिक हत्या करने वाला

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[संगीत]
