1
00:00:01,600 --> 00:00:05,760
जैसे मैंने पहला बोला ना नेत बहुत स्पेसिफिक है उससे ठीक है इंटेलिजेंट

2
00:00:05,760 --> 00:00:09,920
है मान लिया ठीक है भगवान बहुत इंटेलिजेंट है और अगर भगवान बहुत

3
00:00:09,920 --> 00:00:13,920
इंटेलिजेंट है तो इन्होंने इस पूरे यूनिवर्स को किसी पर्पस से

4
00:00:13,920 --> 00:00:19,360
बनाया ठीक है ठीक है

5
00:00:19,360 --> 00:00:23,360
यानी कि भगवान का कारण है उसको बनाने का संसार को

6
00:00:23,360 --> 00:00:27,600
बनाने का यानी संसार को उनका बनाने का कुछ कारण है

7
00:00:27,600 --> 00:00:31,600
क्यों भगवान को आवश्यकता है संसार बनाने हां भगवान को

8
00:00:31,600 --> 00:00:35,680
आवश्यकता है संसार बनाने की ये सच है और वो आवश्यकता मतलब वो पूर्ण

9
00:00:35,680 --> 00:00:40,000
नहीं है वो पूर्ण नहीं है भगवान पूर्ण होते हुए भी आवश्यक

10
00:00:40,000 --> 00:00:44,160
है क्योंकि जो पूर्ण है इस पूर्ण जो पूर्ण है उसको किसी

11
00:00:44,160 --> 00:00:48,320
चीज का अभाव नहीं होता ना हां लेकिन

12
00:00:48,320 --> 00:00:52,320
जो पूर्ण है वो अपनी पूर्णता के अंदर ही यानी वो अपनी

13
00:00:52,320 --> 00:00:56,480
पूर्णता को अपने अंदर ही पूर्ण कर सकता है ना फॉर एग्जांपल कि अगर भगवान

14
00:00:56,480 --> 00:01:01,360
पूर्ण है ठीक है उनको बाहर से किसी एक्सटर्नल चीज की नहीं जरूरत।

15
00:01:01,360 --> 00:01:05,760
इसका मतलब है पूर्ण होने का मतलब वो अपने अंदर ही वो सेल्फ सेटिस्फाइड

16
00:01:05,760 --> 00:01:09,840
जिसको कहते हैं। बाहर से एक्सटर्नल किसी चीज को नहीं जरूरत। ये पूर्ण का

17
00:01:09,840 --> 00:01:13,920
शब्द का मतलब है। लेकिन खुद के अंदर तो वो सेटिस्फाइड ही है ना।

18
00:01:13,920 --> 00:01:16,800
यानी वो अपनी ही एनर्जी बनाते

19
00:01:16,800 --> 00:01:21,040
हैं। ये जो वर्ड है दुनिया बनाने दुनिया बनाए बिना वो

20
00:01:21,040 --> 00:01:25,200
सेल्फ सेटिस्फाइड है कि नहीं? है

21
00:01:25,200 --> 00:01:29,360
लेकिन दुनिया बनाने में दुनिया बनाने में कोई एक्सटर्नल चीज इन्वॉल्व नहीं

22
00:01:29,360 --> 00:01:33,440
थी। उनके अंदर से ही दुनिया निकली और वो उनके अंदर से दुनिया निकल

23
00:01:33,440 --> 00:01:37,600
के उन्हीं की सेवा कर रही है। ठीक है? इसीलिए

24
00:01:37,600 --> 00:01:41,760
मैं कह रहा हूं आवश्यकता थी कि नहीं। मैं ये पूछ रहा हूं आवश्यकता है कि नहीं?

25
00:01:41,760 --> 00:01:46,480
आप कंधे से वो हाथ डाल लीजिए भाई साहब बगल वाले। हां

26
00:01:46,480 --> 00:01:51,200
दोबारा आप ये बता रहे हैं कि भगवान की आवश्यकता है कि नहीं? हां

27
00:01:51,200 --> 00:01:55,520
हां बिल्कुल है क्योंकि भगवान ने हमें भी किसी कारण से बनाया क्योंकि वो इंटेलिजेंट

28
00:01:55,520 --> 00:01:59,520
है बिना कारण के तो कुछ करते नहीं ठीक है उन्होंने अगर हमें किसी

29
00:01:59,520 --> 00:02:03,920
कारण से पूछ रहा हूं मैंने आपसे पूछा आपने कहा सृष्टि बनाए

30
00:02:03,920 --> 00:02:07,920
बिना उनको सेटिस्फाइड थे तो फिर सृष्टि बनाने का कारण क्या रह

31
00:02:07,920 --> 00:02:12,720
गया या तो वो सेटिस्फाइड नहीं है

32
00:02:12,720 --> 00:02:16,880
अगर हम ये अस्यूम करें कि भगवान सारा

33
00:02:16,880 --> 00:02:17,840
काम करके

34
00:02:17,840 --> 00:02:21,840
अगर हम ये अस्यूम कि भगवान को सृष्टि

35
00:02:21,840 --> 00:02:25,920
बनाने की जरूरत नहीं है सेटिस्फाई होने की तो ये भी भगवान के

36
00:02:25,920 --> 00:02:28,480
अंदर एक कमी हो जाएगी। क्यों?

37
00:02:28,480 --> 00:02:32,640
ये ध्यान से सुनिएगा। क्योंकि हम ये उन पर एक अवरोध लगा रहे हैं

38
00:02:32,640 --> 00:02:36,720
और वो मैंने नहीं कहा। मैंने नहीं कहा कि वो बनाएंगे ही

39
00:02:36,720 --> 00:02:41,120
नहीं। अवरोध नहीं लगा रहा हूं। मैं पूछ रहा हूं सृष्टि के बिना

40
00:02:41,120 --> 00:02:45,200
यदि वो पूर्ण है वो संतुष्ट है तो वो सृष्टि बना क्यों रहे हैं?

41
00:02:45,200 --> 00:02:49,440
मेरे पास इसका उत्तर है। आपके पास है कि नहीं? कभी नहीं बनाते।

42
00:02:49,440 --> 00:02:53,600
मेरे पास भी इसका उत्तर है। वो कभी मैं कहां कह रहा हूं? मैं कह रहा हूं बना क्यों रहे हैं? आवश्यकता

43
00:02:53,600 --> 00:02:57,600
क्यों कह रहे हैं आप? आवश्यकता पे ही तो बुद्ध ने खंडन किया है। आपको पता

44
00:02:57,600 --> 00:03:01,760
है बुद्ध ने किस आधार पर खंडन किया है? सनातन का।

45
00:03:01,760 --> 00:03:05,760
किस आधार पे? जो हमने ये कहा कि आवश्यकता है जो आपने

46
00:03:05,760 --> 00:03:09,840
ये फैलाया आवश्यकता है। ईश्वर को यदि आवश्यकता हो जाएगी तो

47
00:03:09,840 --> 00:03:14,720
ईश्वर सच्चिदानंद कहां से रह जाएगा भाई?

48
00:03:14,720 --> 00:03:18,720
लेकिन ईश्वर को अगर आवश्यकता नहीं रहेगी यहां पर है कि ईश्वर में

49
00:03:18,720 --> 00:03:22,880
कोई कमी नहीं है। ये आप मानते हैं ना ईश्वर में कभी कोई कमी नहीं हो सकती। इसका

50
00:03:22,880 --> 00:03:24,880
तो कोई खंडन नहीं है। अगर मैं ये

51
00:03:24,880 --> 00:03:28,960
मानू कि भगवान ऐसी कोई चीज ही नहीं है पूरी दुनिया में जिसकी भगवान को आवश्यकता

52
00:03:28,960 --> 00:03:33,360
नहीं है। तो भी ये भी तो एक कमी हुई। ध्यान से सुनिएगा। अगर ये मानू

53
00:03:33,360 --> 00:03:37,360
कि ऐसी कोई चीज ही नहीं है पूरी दुनिया में जिसकी भगवान को आवश्यकता

54
00:03:37,360 --> 00:03:39,600
नहीं है। ये भी तो एक कमी हुई।

55
00:03:39,600 --> 00:03:43,680
कमी ये कमी कहां है? ये कमी कहां है भाई? मैं स्वयं ही स्वयं

56
00:03:43,680 --> 00:03:47,920
में वो हूं। स्थित प्रज्ञ हूं। ये कमी कहां है? पहली

57
00:03:47,920 --> 00:03:52,000
बात तो ये है। पहली बात तो ये है कि आपको अगर किसी चीज की जरूरत

58
00:03:52,000 --> 00:03:56,080
है। आप ये मान रहे हैं। आप ये मान रहे तो आप कहो ना कि हां आवश्यकता

59
00:03:56,080 --> 00:04:01,600
है। आप ये मानो ना

60
00:04:01,600 --> 00:04:06,720
आवश्यकता है। यदि आवश्यकता मान रहे हो तो फिर उसको पूर्ण कैसे कह रहे हो?

61
00:04:06,720 --> 00:04:10,880
यानी कि भगवान से डिफरेंट क्वालिटीज वाली कोई चीज एक्सिस्ट करती

62
00:04:10,880 --> 00:04:15,040
है। ओबियसली एक मिनट और भगवान को उसकी आवश्यकता

63
00:04:15,040 --> 00:04:19,040
है वो क्वालिटी भगवान से ही आ रही है ना भगवान से भगवान को

64
00:04:19,040 --> 00:04:23,120
उसकी आवश्यकता है भगवान को उसकी आवश्यकता

65
00:04:23,120 --> 00:04:27,280
है और नहीं भी है दोनों एक साथ ट्रू है अगर आप ये कहते हैं कि

66
00:04:27,280 --> 00:04:31,440
आवश्यकता यानी कि भगवान भगवान यानी कि भगवान है और नहीं भी

67
00:04:31,440 --> 00:04:35,440
है। दोनों ही बातें हैं। नहीं भगवान भगवान है भी

68
00:04:35,440 --> 00:04:38,560
और नहीं भी है। और क्या भगवान सुनिए जब

69
00:04:38,560 --> 00:04:42,640
हम कहेंगे भगवान को आवश्यकता नहीं है तो वह सच्चिदानंद है। जब हम कहेंगे

70
00:04:42,640 --> 00:04:46,720
भगवान को आवश्यकता है तो वह सच्चिदानंद नहीं है। तो यानी कि भगवान भगवान

71
00:04:46,720 --> 00:04:48,240
नहीं भी है और है भी है।

72
00:04:48,240 --> 00:04:52,640
क्या फिलॉसफी है? हां तो बताइए भगवान भगवान

73
00:04:52,640 --> 00:04:56,800
भगवान सच्चिदानंद है कि नहीं? भगवान हर मोमेंट

74
00:04:56,800 --> 00:05:00,880
पर सच्चिदानंद है। ऐसी कोई मोमेंट नहीं है। यानी कि जब उसको

75
00:05:00,880 --> 00:05:05,360
आवश्यकता है, जब उसको आवश्यकता है तो वो सच्चिदानंद है कि नहीं?

76
00:05:05,360 --> 00:05:09,760
ये आपने बोला कि आपने आवश्यकता को सच्चिदानंद से जोड़ा।

77
00:05:09,760 --> 00:05:14,000
मैं यह कह रहा हूं कि भगवान कंप्लीट है। उसमें है और नहीं है। दोनों

78
00:05:14,000 --> 00:05:18,000
है लेकिन मैं मैं यही बात

79
00:05:18,000 --> 00:05:19,440
है। सच्चिदानंद

80
00:05:19,440 --> 00:05:23,440
को आवश्यकता से नहीं जोड़ना है। इसलिए यह नहीं कहना है कि भगवान ने

81
00:05:23,440 --> 00:05:27,760
किसी कारण से दुनिया बनाई है। भगवान ने अकारण ये दुनिया

82
00:05:27,760 --> 00:05:32,000
बनाई है। हमको ये मानना पड़ेगा कि ये जो दुनिया है

83
00:05:32,000 --> 00:05:36,160
वो भगवान की शक्ति का परिणाम मात्र है।

84
00:05:36,160 --> 00:05:36,660
हां

85
00:05:36,400 --> 00:05:40,480
तो गलत क्या है। भगवान को कोई आवश्यकता नहीं है। संसार बनाने की

86
00:05:40,480 --> 00:05:45,680
मगर आप कह रहे हो भगवान को आवश्यकता है कारण है

87
00:05:45,680 --> 00:05:49,760
नहीं नहीं भी है तो जब जब आप कहोगे जब आप कहोगे तो फिर

88
00:05:49,760 --> 00:05:54,160
भगवान सिर्फ जब नहीं भी वाले में जाओगे तभी भगवान सच्चिदानंद

89
00:05:54,160 --> 00:05:57,520
सिद्ध होगा

90
00:05:57,520 --> 00:06:01,680
ऐसा क्यों जब आवश्यकता है तभी अरे जिसको आवश्यकता होती

91
00:06:01,680 --> 00:06:06,000
है वही तो सच्चिदानंद नहीं है। ये ये रूल

92
00:06:06,000 --> 00:06:11,680
ये रूल गलत है। इस रूल को आप लिख लीजिए कि ये रूल गलत है।

93
00:06:11,680 --> 00:06:15,680
तो इसका मतलब आप यह कह रहे हैं कि जिसको आवश्यकता है भी कोई

94
00:06:15,680 --> 00:06:19,840
वो भी सच्चिदानंद है। यानी कि जिसके अंदर किसी चीज का

95
00:06:19,840 --> 00:06:24,720
जिसके पास किसी चीज का अभाव है वो भी सच्चिदानंद है।

96
00:06:24,720 --> 00:06:28,720
जिसके पास किसी चीज का अभाव है वो भी सच्चिदानंद हो सकता है। क्योंकि

97
00:06:28,720 --> 00:06:32,880
क्योंकि उसके पास जिस चीज का अभाव है वो उसी से पूर्ण

98
00:06:32,880 --> 00:06:37,120
हो रही है। अगर मेरे पास पेन का अभाव है

99
00:06:37,120 --> 00:06:41,120
मैं तब भी सच्चिदानंद हो सकता हूं अगर यह पेन मेरे ही शरीर से निकला है और

100
00:06:41,120 --> 00:06:45,280
मैं इसको यूज कर रहा हूं। हालांकि अभी नहीं हुआ बट फॉर एग्जांपल ये हाथ हाथ

101
00:06:45,280 --> 00:06:49,280
तो मेरा ही है ना तो क्योंकि वो मेरे से ही

102
00:06:49,280 --> 00:06:51,600
पूर्ण हो रही है। मगर मगर मगर मगर

103
00:06:51,600 --> 00:06:55,600
वो जो क्रिया हो रही है ना वो जो क्रिया हो रही है

104
00:06:55,600 --> 00:06:59,680
उस क्रिया का अभाव है। वो जो तत्व

105
00:06:59,680 --> 00:07:03,680
निकल रहा है आपके अंदर से वो जो तत्व आपके अंदर से निकल रहा है

106
00:07:03,680 --> 00:07:08,160
वो मान लिया कि वो आपका ही पार्ट है। ठीक है जीव और प्रकृति

107
00:07:08,160 --> 00:07:12,560
मान लिया ठीक है मगर वो जो क्रिया हो रही है

108
00:07:12,560 --> 00:07:16,640
उसका तो अभाव था ना कि वो मैनिफेस्ट हो रही है दुनिया

109
00:07:16,640 --> 00:07:20,800
बन रही है लोग आ रहे हैं जा रहे हैं जीव हो रहा है ये हो रहा है ये ड्रामा

110
00:07:20,800 --> 00:07:24,800
चल रहा है ये जो क्रिया है मैं तत्व की बात नहीं कर रहा जो क्रिया है

111
00:07:24,800 --> 00:07:28,800
उसका तो अभाव मानना पड़ेगा ना हां क्रिया का अभाव जो

112
00:07:28,800 --> 00:07:33,040
है मैं बताता हूं कैसे है और कैसे नहीं है मैं बताता हूं ये भी डायग्राम से एक्सप्लेन करूं तो

113
00:07:33,040 --> 00:07:37,280
समझ आएगा ये है टाइम मैंने टाइम जो है ऐसे

114
00:07:37,280 --> 00:07:40,640
लिख लिया।

115
00:07:40,640 --> 00:07:43,920
ठीक है? ये है टाइम और भगवान जो है

116
00:07:43,920 --> 00:07:48,720
टाइम क्योंकि भगवान ने बनाया भगवान टाइम के अंदर भी है और भगवान टाइम के बाहर भी है।

117
00:07:48,720 --> 00:07:52,880
क्योंकि भगवान भगवान ने टाइम को बनाया इसलिए भगवान

118
00:07:52,880 --> 00:07:57,040
इस आउट ऑफ टाइम। लेकिन भगवान ने टाइम को बनाया तो

119
00:07:57,040 --> 00:08:01,040
भगवान टाइम के अंदर भी है। तो अगर गॉड को

120
00:08:01,040 --> 00:08:05,200
मैं डिफाइन करूं तो गॉड इज आउट ऑफ टाइम्स एंड इन ऑफ

121
00:08:05,200 --> 00:08:09,280
टाइम आल्सो। ठीक है? तो दो चीजें हो गई। एक हो गया

122
00:08:09,280 --> 00:08:13,440
इन टाइम गॉड और एक हो गया आउट ऑफ टाइम गॉड। जब आउट ऑफ टाइम गॉड

123
00:08:13,440 --> 00:08:18,000
को लेते हैं तो उनको क्रिया की आवश्यकता नहीं पड़ती।

124
00:08:18,000 --> 00:08:22,160
लेकिन जब क्यों? क्योंकि टाइम के बाहर में क्रिया होती नहीं है। क्रिया

125
00:08:22,160 --> 00:08:26,720
सारी टाइम के अंदर में होती है। भगवान का जो सबसे परम रूप है

126
00:08:26,720 --> 00:08:30,800
वो इन टाइम वाला है कि आउट ऑफ टाइम वाला है? वो आउट ऑफ

127
00:08:30,800 --> 00:08:34,880
टाइम वाला है। ठीक है? तो जो ये संसार बनता है वो इन टाइम

128
00:08:34,880 --> 00:08:38,880
में बनता है कि आउट ऑफ टाइम में बनता है? ऑबियसली यहां पर तो इन टाइम है।

129
00:08:38,880 --> 00:08:42,880
हम समय के अंदर है। हम अभी समय के बाहर नहीं है। सिंपल तो यानी वो

130
00:08:42,880 --> 00:08:46,880
जो जो संसार बनाने वाले भगवान कृष्ण है वो इन टाइम वाले

131
00:08:46,880 --> 00:08:50,880
हैं। संसार बनाने वाले जो कृष्ण है वो

132
00:08:50,880 --> 00:08:55,040
आउट ऑफ कृष्ण आउट ऑफ टाइम है। कृष्ण से विष्णु आते हैं। गर्भोधक्षा

133
00:08:55,040 --> 00:08:59,680
विष्णु एस पर पूछ रहा हूं उनको आवश्यकता क्या है? क्या आवश्यकता है?

134
00:08:59,680 --> 00:09:03,680
आवश्यकता है रस। यानी रस नहीं था ना

135
00:09:03,680 --> 00:09:04,180
उनके

136
00:09:04,000 --> 00:09:06,720
पास।

137
00:09:06,720 --> 00:09:10,800
रस जो चीज है ना रस चीज को अगर आप समझेंगे ना रस चीज का

138
00:09:10,800 --> 00:09:14,960
मतलब होता है मैं भाई साहब मैं सोच रहा हूं रस था कि नहीं था। भैया देखो दो

139
00:09:14,960 --> 00:09:20,960
घंटे 28 मिनट हो चुके हैं दो मुझे बिना रस नहीं आ सकता

140
00:09:21,440 --> 00:09:25,440
तो नहीं है ना अरे मेरे भाई तो ये मान लो ना कि रस नहीं

141
00:09:25,440 --> 00:09:29,680
था मैं पूछ क्या रहा हूं रस था कि नहीं था आप कह रहे हो कि नहीं था

142
00:09:29,680 --> 00:09:35,680
सब कुछ था मगर रस नहीं था मगर फिर भी वो सच्चिदानंद था आप कहो ना अभाव था

143
00:09:36,720 --> 00:09:40,960
रस का अभाव था था अभाव

144
00:09:40,960 --> 00:09:44,960
हो गया ना भगवान में किसी चीज का अभाव नहीं है। ये भी

145
00:09:44,960 --> 00:09:46,720
तो एक इनकंप्लीटनेस हो गई ना।

146
00:09:46,720 --> 00:09:50,880
भगवान में ऐसी कोई चीज नहीं है दुनिया में जिसका भगवान में अभाव नहीं है। ये भगवान

147
00:09:50,880 --> 00:09:52,160
को इनकंप्लीट बनाता है।

148
00:09:52,160 --> 00:09:56,400
ऐसी एक नहीं बनाता है। नहीं बनाता है। क्योंकि भगवान है ही वही जो

149
00:09:56,400 --> 00:10:00,400
भगवान है ही वही सुनिए भगवान की धारणा ही यही से शुरू होती है कि जो

150
00:10:00,400 --> 00:10:05,280
इनकंप्लीट जिसमें किसी चीज का अभाव ना हो। सच्चिदानंद

151
00:10:05,280 --> 00:10:09,600
अगर उसमें अगर उसमें रस का अभाव मान लेंगे ना तो उसके

152
00:10:09,600 --> 00:10:13,600
आनंद में बाध्यता आ जाएगी। नहीं नहीं आनंद

153
00:10:13,600 --> 00:10:18,000
है रस नहीं है। आनंद जो है वो रस से अलग है। ठीक है? सच्चिदानंद

154
00:10:18,000 --> 00:10:22,080
में जो चीज है ना वो आनंद ये रस शब्द ही अलग है। ठीक है? इन

155
00:10:22,080 --> 00:10:26,320
तीनों को आप मिक्स मत करिएगा। आनंद में अभाव कभी नहीं आता।

156
00:10:26,320 --> 00:10:30,560
रस में अभाव कभी आता है। कभी नहीं आता। रस का अभाव था ना उनके

157
00:10:30,560 --> 00:10:34,640
पास। रस से क्या आता है भाई साहब? रस रस से क्या आता?

158
00:10:34,640 --> 00:10:38,720
रिलेशनशिप के अंदर एक्सचेंजेस। रथ से भी एक आनंद

159
00:10:38,720 --> 00:10:43,120
ही आता है ना? लेकिन यह वाला आनंद है ये ब्रह्मानंद

160
00:10:43,120 --> 00:10:47,680
तो रथ से आने वाले आनंद का आनंद का अभाव था ना

161
00:10:47,680 --> 00:10:51,920
प्लेजर ड्यू टू रिलेशनशिप अभाव था अभाव था तो जब अभाव

162
00:10:51,920 --> 00:10:56,400
था तो उसका आनंद बाधित है ना

163
00:10:56,400 --> 00:11:01,200
उनका आनंद बाधित है हां

164
00:11:01,200 --> 00:11:05,280
लेकिन उनको एक्सटर्नल सोर्स की जरूरत नहीं पड़ी ना बाधित शब्द का मतलब क्या होता है अरे

165
00:11:05,280 --> 00:11:09,360
भाई मैं कह रहा हूं अगर मेरे को खुजली करने

166
00:11:09,360 --> 00:11:13,600
की जरूरत पड़ गई अगर और एक्सटर्नल से वो नहीं मैंने खुद ही खुजली को खुजा

167
00:11:13,600 --> 00:11:17,920
लिया तो इसका मतलब मैं भगवान हूं।

168
00:11:17,920 --> 00:11:22,520
जी क्या भाई मुझे खुजली नहीं होनी चाहिए

169
00:11:22,520 --> 00:11:25,200
[हंसी]

170
00:11:25,200 --> 00:11:30,800
समझ नहीं आया कोई बात नहीं अच्छा था। [हंसी]

171
00:11:30,800 --> 00:11:34,880
देखो गॉड जो है उनको अपनी प्रेजेंस को फिल करने के लिए और

172
00:11:34,880 --> 00:11:39,040
किसी की नीड नहीं है। ठीक है? बाहर से किसी चीज की नीड नहीं है। बात

173
00:11:39,040 --> 00:11:43,200
ये नहीं है। मैं मैं तत्व की बात नहीं कर रहा हूं कि उनको पास तत्व का अभाव

174
00:11:43,200 --> 00:11:47,200
है कि नहीं। मैं जान रहा हूं आप कहां जा रहे हो। मैं सामग्री की बात नहीं कर रहा

175
00:11:47,200 --> 00:11:51,600
हूं। मैं क्रिया की बात कर रहा हूं। किसी क्रिया की आवश्यकता

176
00:11:51,600 --> 00:11:55,680
थी ना उनको। सामग्री की आवश्यकता नहीं थी। क्रिया की आवश्यकता थी

177
00:11:55,680 --> 00:11:57,360
ना? तो

178
00:11:57,360 --> 00:12:01,920
उससे साबित क्या होता है? अगर आवश्यकता थी तो। उससे साबित यह होता है कि आपकी फिलॉसफी

179
00:12:01,920 --> 00:12:06,480
के अनुसार भगवान सच्चिदानंद सिद्ध नहीं हो रहे। आपने कहा था अकाट है हमारी।

180
00:12:06,480 --> 00:12:10,960
हम काट रहे हैं उसको जिसको क्रिया की आवश्यकता है वो सच्चिदानंद नहीं है। इसमें कोई रिलेशनशिप

181
00:12:10,960 --> 00:12:15,120
ही नहीं है। बिल्कुल रिलेशनशिप है। जिस क्रिया का

182
00:12:15,120 --> 00:12:19,120
मेरे अंदर अभाव है, जिस क्रिया के परिणाम का मेरे अंदर अभाव है और मैं मेरे

183
00:12:19,120 --> 00:12:23,200
को उस क्रिया की आवश्यकता है तो उसका अभाव मेरे अंदर मानना पड़ेगा

184
00:12:23,200 --> 00:12:29,200
तो मेरे आनंद की नित्यता सिद्ध नहीं होगी। भले ही मैं अपने से ही खुजा लूं।

185
00:12:29,280 --> 00:12:33,360
मैं ये देखो मैं ऐसे बोल रहा हूं कि भगवान जो है वो

186
00:12:33,360 --> 00:12:37,360
दो पाथ से आनंद ले रहे हैं क्योंकि वो दोनों पाथ से आनंद ले रहे हैं

187
00:12:37,360 --> 00:12:41,360
ना एक एक आनंद वाला है रस वाला आनंद एक

188
00:12:41,360 --> 00:12:45,840
आनंद वाला है रस वाला आनंद भाई साहब मैं कह रहा हूं रस वाले आनंद

189
00:12:45,840 --> 00:12:50,000
की उनको जरूरत है कि नहीं हां तो जरूरत होने

190
00:12:50,000 --> 00:12:54,080
से उनका भगवान साबित होना कैसे हटता है अभाव है ना दुनिया में

191
00:12:54,080 --> 00:12:58,320
कुछ ऐसा तत्व है जो उनके पास नहीं है जो उनके

192
00:12:58,320 --> 00:13:02,320
आनंद में है। भगवान के अंदर अभाव

193
00:13:02,320 --> 00:13:06,560
होना ये उनकी पूर्णता है।

194
00:13:06,560 --> 00:13:10,720
वाह बहुत बढ़िया। भगवान के अंदर अभाव होना

195
00:13:10,720 --> 00:13:11,840
है। भगवान के

196
00:13:11,840 --> 00:13:16,000
अंदर अभाव होना वो उनकी पूर्णता है। वाह बहुत बढ़िया।

197
00:13:16,000 --> 00:13:20,240
बहुत अच्छा। बहुत बढ़िया। बहुत अच्छी बात। ये बिल्कुल सही है।

198
00:13:20,240 --> 00:13:24,240
अब आप ये बता दीजिए कि भगवान के अंदर अभाव होना ये उनकी पूर्ण, एक

199
00:13:24,240 --> 00:13:28,400
मिनट, एक मिनट। अब आप अब आप ये मैं बता रहा हूं मैं पूछ रहा हूं। भगवान के अंदर अभाव

200
00:13:28,400 --> 00:13:33,120
होना ये उनकी पूर्णता है। ये शास्त्र में कहां लिखा है?

201
00:13:33,120 --> 00:13:37,120
भगवान के अंदर ये जो पूर्ण वाला श्लोक था एक बार निकालिएगा।

202
00:13:37,120 --> 00:13:40,480
निकालता हूं। एक मिनट रुकिए। बहुत ज्यादा टाइम हो गया सर। मैं

203
00:13:40,480 --> 00:13:44,640
चल जाता हूं। बहुत कुटाई होगी। सॉरी। हां। ठीक है। कल

204
00:13:44,640 --> 00:13:48,880
आ जाना। और भगवान में अभाव होना ये भी भगवान

205
00:13:48,880 --> 00:13:52,880
की कंप्लीटनेस है। आप इसको समझिए।

206
00:13:52,880 --> 00:13:57,280
भगवान में अभाव होना यानी भगवान का भगवान ना होना यह उसकी कंप्लीटनेस

207
00:13:57,280 --> 00:14:01,360
है। एक्चुअली हां अब बिल्कुल भगवान का भगवान ना

208
00:14:01,360 --> 00:14:05,440
होना भगवान की कंप्लीटनेस है। हां तो पूर्ण वाला श्लोक

209
00:14:05,440 --> 00:14:09,680
एक्चुअली ये प्रूफ कर रहा है कि भगवान कंप्लीट है और कंप्लीट

210
00:14:09,680 --> 00:14:13,760
भगवान कंप्लीट है तो भगवान कंप्लीट है तो वो तब कंप्लीट है जब

211
00:14:13,760 --> 00:14:18,000
वो कंप्लीट है। आप कह रहे हो इनकंप्लीट होंगे तब वो कंप्लीट होंगे।

212
00:14:18,000 --> 00:14:22,080
इनकंप्लीट होना भी उनकी कंप्लीटनेस को एक्चुअली ग्लोरिफाई

213
00:14:22,080 --> 00:14:26,320
करता है। तो भगवान अगर वो भगवान ना होकर भगवान

214
00:14:26,320 --> 00:14:30,560
सुनिए सुनिए सुनिए मैं आपको बता रहा हूं। मान लीजिए मान

215
00:14:30,560 --> 00:14:33,040
लीजिए ये भगवान है। इधर देखिए इधर देखिए ये

216
00:14:33,040 --> 00:14:37,040
मान लीजिए भगवान है। अब इन्होंने अपने इस स्वरूप को

217
00:14:37,040 --> 00:14:41,040
नष्ट कर दिया। ये दिखा दिया मैं नष्ट भी होता हूं। टाइम के बाहर

218
00:14:41,040 --> 00:14:45,840
कुछ नष्ट नहीं होता। मैंने टाइम बताया ना टाइम यानी कि वो रूप शाश्वत है

219
00:14:45,840 --> 00:14:49,920
ऑब्वियसली वो अनित्यता नहीं है उसमें अच्छा चलो ठीक है वो नष्ट नहीं होता एक मिनट

220
00:14:49,920 --> 00:14:54,080
एक मिनट नष्ट ना होने का भाव है एक मिनट फिर नष्ट ना होने का भाव

221
00:14:54,080 --> 00:14:58,160
है आपके लॉजिक को ले ले तो बाहर है इसलिए पर नष्ट यानी

222
00:14:58,160 --> 00:15:02,240
कि भगवान में जो चेंजेस आ रहे हैं वो अंदर आ रहे हैं। उनका जो परम

223
00:15:02,240 --> 00:15:06,240
रूप है वो बना हुआ है लगातार टाइम के बाहर तो

224
00:15:06,240 --> 00:15:10,240
भूख तो वही हो गई उसी को मैं लीला कह रहा हूं उसी को टाइम टाइम के बाहर टाइमिंग कर

225
00:15:10,240 --> 00:15:14,720
रहे हो उसी को तो मैं लीला कह रहा हूं भाई।

226
00:15:14,720 --> 00:15:18,800
हां मैं भी उसी को उसी को आप टाइम के बाहर टाइमिंग कर रहे हो।

227
00:15:18,800 --> 00:15:22,880
कृष्ण का रूप शाश्वत है। क्या दिक्कत है? शाश्वत है। हो

228
00:15:22,880 --> 00:15:27,040
गया। परम रूप शाश्वत है। हो गया। क्लियर है? बदलता नहीं

229
00:15:27,040 --> 00:15:29,600
है। बदलता नहीं है।

230
00:15:29,600 --> 00:15:33,760
किसी चीज की आवश्यकता नहीं है। यहां दो चीजें लेना। टाइम

231
00:15:33,760 --> 00:15:37,840
भाई साहब देखिए। मैं मैं बार-बार आप ना खिचड़ी पका रहे हैं। बहुत टाइम हो चुका है। प्लीज

232
00:15:37,840 --> 00:15:41,840
नहीं पका रहा। आप समझे नहीं मैं इसलिए समझा रहा हूं। मैं समय आप जो है चार

233
00:15:41,840 --> 00:15:45,920
तरह की बातें करते भाई। अभी टाइम के अभी सुनिए

234
00:15:45,920 --> 00:15:49,920
अभी टाइम के बाहर वाला रूप शाश्वत है। टाइम के अंदर

235
00:15:49,920 --> 00:15:54,880
वो चेंज होता है ना? टाइम के बाहर वाला शाश्वत है।

236
00:15:54,880 --> 00:15:59,120
ठीक है? टाइम के बाहर एक्सपेंशन होता है। टाइम के बाहर एक्सपेंशन

237
00:15:59,120 --> 00:16:03,280
होता है। टाइम के अंदर ट्रांसफॉर्मेशन होता है। ये क्यों? क्योंकि टाइम के बाहर में क्रिया

238
00:16:03,280 --> 00:16:07,440
होती नहीं है। क्रिया सारी टाइम के अंदर में होती है। टाइम के बाहर एक्सपेंशन होता

239
00:16:07,440 --> 00:16:11,520
है। टाइम के बाहर एक्सपेंशन होता है। क्यों? क्योंकि टाइम के बाहर में

240
00:16:11,520 --> 00:16:15,520
क्रिया होती नहीं है। टाइम के बाहर एक्सपेंशन होता है। टाइम

241
00:16:15,520 --> 00:16:19,040
के बाहर एक्सपेंशन होता है। शब्द लीजिएगा प्लीज। ये ठीक है? एक्सपेंशन होता

242
00:16:19,040 --> 00:16:23,120
है। एक्सपेंशन होता है। मगर वो एक्सपेंशन होते समय भी

243
00:16:23,120 --> 00:16:27,760
एक्सपेंशन होते समय भी वो अपने आप में पूर्ण शाश्वत है।

244
00:16:27,760 --> 00:16:29,680
है। हां।

245
00:16:29,680 --> 00:16:33,680
उसमें यह वाली कमी नहीं है कि वो उसमें अनितता नहीं है। नहीं तो वह कंप्लीट नहीं

246
00:16:33,680 --> 00:16:37,840
होगा। लेकिन फिर एक्सपेंशन किया ही क्यों? एक्सपेंशन किया। वो मैं

247
00:16:37,840 --> 00:16:41,920
आऊंगा ना। वो मैं आऊंगा। वो मैं आऊंगा। जब वो शाश्वत है उसके

248
00:16:41,920 --> 00:16:46,160
दुख में बाधा नहीं आती है। हां नहीं आती

249
00:16:46,160 --> 00:16:50,560
है। वो स्वरूप से चेंज नहीं होता है। हां।

250
00:16:50,560 --> 00:16:54,640
तो भगवान ना होने वाली स्टेज में नहीं जाता है। वो

251
00:16:54,640 --> 00:16:58,880
हां। ऐसा कोई स्टेज ही नहीं है कि भगवान। ठीक है नहीं जाता है तो अब बात ये आ गई

252
00:16:58,880 --> 00:17:02,960
अगर वो भगवान ना होने वाली स्टेज में नहीं जाता है वो सच्चिदानंद है

253
00:17:02,960 --> 00:17:06,560
तो उसको संसार बनाने की आवश्यकता आप क्यों कह रहे

254
00:17:06,560 --> 00:17:10,720
हैं क्योंकि उनके अंदर आनंद है ना

255
00:17:10,720 --> 00:17:14,720
उस आनंद को वो 100 वो हमेशा वृद्धि करना चाहते हैं देखो

256
00:17:14,720 --> 00:17:19,040
अगर मैं कहूं कि भगवान भगवान बाधित नहीं है ना भगवान सच्चिदानंद

257
00:17:19,040 --> 00:17:23,040
है आप आप एक काम करो पहले तो इस से मुझे दिखा दो जो आप कह रहे हो

258
00:17:23,040 --> 00:17:27,440
देखो कम तो होता नहीं है और आप आप देखिए मैं अपना मगजमारी

259
00:17:27,440 --> 00:17:31,440
बेकार में करूंगा। पहले आप अपनी स्कन से मुझे रेफरेंस दिखा दो जो आप कह रहे

260
00:17:31,440 --> 00:17:35,520
हो। कम से कम ये पता तो चले भगवान में अभाव है शुरू करना।

261
00:17:35,520 --> 00:17:39,680
हां हां ये जो 18 पॉइंट

262
00:17:39,680 --> 00:17:43,920
पहले तो कल शद्र संभवा दिखा रहा था। स्कंद पुराण नहीं वो मत दिखाइए। वो वो

263
00:17:43,920 --> 00:17:48,960
वो मैं देखूंगा। अभी आप अभाव दिखाइए। अभाव भगवान में अभाव होना चाहिए।

264
00:17:48,960 --> 00:17:53,040
भगवान में अभाव होना चाहिए। ये जो

265
00:17:53,040 --> 00:17:57,440
पूर्ण वाला श्लोक है ना मैं पूर्ण वाले भाई साहब इस पूर्ण वाले श्लोक की व्याख्या

266
00:17:57,440 --> 00:18:02,880
आपके इस को ने की है कहीं जहां लिखा हो भाव अभाव

267
00:18:02,880 --> 00:18:07,680
गुस्सा मत नहीं इसलिए आप देर कर रहे है ना

268
00:18:07,680 --> 00:18:11,920
हां जी मैंने पूछा है स्पॉन का आप जो क्लेम कर रहे हैं वो स्पॉन का ही क्लेम

269
00:18:11,920 --> 00:18:15,920
है वो पहले बता दीजिए तब तो मैं उसप टाइम अपना खर्च कर ना उपनिषद

270
00:18:15,920 --> 00:18:20,000
से है ना ये वाला जो है और वृधारणिक उपनिषद से भी है

271
00:18:20,000 --> 00:18:21,680
दो जगह भाई साहब इस

272
00:18:21,680 --> 00:18:27,360
की बुक का नाम बताइए जिसमें अभाव माना हो उसमें भगवान में

273
00:18:27,360 --> 00:18:31,360
पूर्णता मानी है भाई साहब मैं पूछ रहा हूं अभाव कहां

274
00:18:31,360 --> 00:18:36,560
माना है मैं कैसे मान लू आप जो व्याख्या कर रहे हो उस कौन की व्याख्या है

275
00:18:36,560 --> 00:18:40,640
अच्छा हां ये ये वाला रस वाला जो है एक कांसेप्ट

276
00:18:40,640 --> 00:18:44,800
आपका क्वेश्चन एन ओ डी में है एन ओडी में एनओडी में

277
00:18:44,800 --> 00:18:48,880
हां एन ओडी में है और भगवान को रस क्यों चाहिए ये वाला आप जेमिनाई

278
00:18:48,880 --> 00:18:52,880
पे सर्च करिएगा तो उनको वर्ड्स भी बता देंगे कर

279
00:18:52,880 --> 00:18:56,960
दीजिएगा तो भी बता देंगे भगवान को रस क्यों चाहिए आनंद की

280
00:18:56,960 --> 00:19:01,040
वृद्धि के लिए आनंद नहीं है ऐसा कोई स्टेज नहीं है पर आनंद की वृद्धि

281
00:19:01,040 --> 00:19:05,040
होती रहे इस चीज के इसी चीज को रस कहते है

282
00:19:05,040 --> 00:19:09,680
भगवान आनंद कम तो होता नहीं है आनंद की वृद्धि होती रहे कंटीन्यूसली

283
00:19:09,680 --> 00:19:13,680
और कभी कम ना हो लेकिन हमेशा आनंद बढ़ता रहे बढ़ता रहे बढ़ता रहे बढ़ता रहे बढ़ता

284
00:19:13,680 --> 00:19:17,920
रहे मैं कह रहा हूं भगवान के अंदर भी अभाव होना चाहिए

285
00:19:17,920 --> 00:19:22,080
तभी भगवान सिद्ध होगा ये बताइए भगवान में अभाव होना

286
00:19:22,080 --> 00:19:26,080
आवश्यक है। पहले ये बताइए उनके कहने का मतलब है आनंद स्टेबल नहीं

287
00:19:26,080 --> 00:19:30,080
है ना। आनंद भी बढ़ रहा है ना? क्यों बढ़ रहा है? स्टेबल होना चाहिए। आनंद

288
00:19:30,080 --> 00:19:34,240
स्टेबल आनंद बढ़ क्यों रहा है? वो वो मैं बाद में प्रश्न करूंगा। पहले आप

289
00:19:34,240 --> 00:19:40,000
इस का क्लेम बता दीजिए। अभाव है।

290
00:19:40,000 --> 00:19:43,600
भगवान में अभाव है।

291
00:19:43,600 --> 00:19:47,760
भगवान पूर्ण है। भगवान में अभाव होना। ये भगवान की पूर्णता है। ये हां

292
00:19:47,760 --> 00:19:52,560
ये ये दिखाइए। भगवान में अभाव होना भी भगवान की पूर्णता का है।

293
00:19:52,560 --> 00:19:56,720
ये बहुत अच्छी चीज मिल गई। आज इस ने अगर ऐसा कहा है तो मुझे

294
00:19:56,720 --> 00:20:02,720
नहीं पता था। अरे

295
00:20:05,280 --> 00:20:10,160
क्योंकि पूर्णता है और वो ऐसे है कि अभाव

296
00:20:10,160 --> 00:20:15,040
है एक भी अभाव नहीं है। ये भी तो अपूर्णता हुई ना।

297
00:20:15,040 --> 00:20:19,440
मैं भाई साहब मैं आपसे क्या पूछ रहा हूं? रेफरेंस रेफरेंस

298
00:20:19,440 --> 00:20:25,440
आप जो बोल रहे हैं वो स्कॉन मानता है कि नहीं मानता वो बता दीजिए।

299
00:20:27,520 --> 00:20:31,600
मैं अभी शास्त्र का आपसे नहीं मांग रहा हूं। अभी मैं आपका स्कॉन का ही मांग रहा

300
00:20:31,600 --> 00:20:33,760
हूं।

301
00:20:33,760 --> 00:20:37,920
नेक्टर ऑफ डिवोशन में है। ये नेक्टर ऑफ डिवोशन में

302
00:20:37,920 --> 00:20:42,080
एको हम बहुस्याम ये श्लोक पर्टिकुलर आता है। मैं इसको

303
00:20:42,080 --> 00:20:46,080
वर्ड्स भी बता देता हूं। एक को हम रेफरेंस

304
00:20:46,080 --> 00:20:50,160
इसपनिषद में है। ऑल फैसिलिटीज आर गिवन टू स्माल कंप्लीट

305
00:20:50,160 --> 00:20:53,040
यूनिट

306
00:20:53,040 --> 00:20:57,200
ट्रांसलेशन ऑल फैसिलिटीज आर गिवन ऑल फैसिलिटीज

307
00:20:57,200 --> 00:21:01,200
आर मैं ले आया मैं ले आया मैं मेरे पास है। जी

308
00:21:01,200 --> 00:21:05,840
वो जो अगर आप फर्स्ट लाइन ही पढ़े बिकॉज़ ही इस कंप्लीट होल।

309
00:21:05,840 --> 00:21:10,080
मैं इंग्लिश में पढ़ने की आदत की वजह से बोल रहा हूं। आप समझ पाएंगे बहुत ज्यादा मुश्किल

310
00:21:10,080 --> 00:21:14,080
नहीं है। ठीक है? बिकॉज़ ही इज कंप्लीट होल इवन दो

311
00:21:14,080 --> 00:21:18,080
सो मेनी कंप्लीट यूनिट्स एमिनेट फ्रॉम हिम

312
00:21:18,080 --> 00:21:22,320
ही रिमेंस कंप्लीट होल ये लाइन को ज्यादा

313
00:21:22,320 --> 00:21:26,400
ध्यान से पढ़िएगा ठीक है अरे ही रिमलीट ही रिमेंस

314
00:21:26,400 --> 00:21:31,040
कंप्लीट रहा ना वो वो इनकंप्लीट नहीं हुआ ना

315
00:21:31,040 --> 00:21:35,120
हां इनकंप्लीट नहीं हुआ तो जब वो नहीं हुआ तो आप क्यों कह

316
00:21:35,120 --> 00:21:39,200
रहे हो कि वो जो है इनकंप्लीट हो जाता है उसमें इनकंप्लीटनेस

317
00:21:39,200 --> 00:21:42,560
ना होना भी उसका वो आप अभाव

318
00:21:42,560 --> 00:21:46,640
शब्द को एब्सेंस बोलते हैं। अभाव शब्द मतलब एब्सेंस

319
00:21:46,640 --> 00:21:51,360
किसी चीज की एब्सेंस है ना? तो भगवान में

320
00:21:51,360 --> 00:21:55,680
हां जी भगवान में भगवान पूर्ण है। अपने आप में कंप्लीट होल है।

321
00:21:55,680 --> 00:21:59,920
ठीक है? तो वो उनके अंदर से पार्शियल कंप्लीट

322
00:21:59,920 --> 00:22:04,320
यूनिट निकलते हैं। एक्सपंड अरे मेरे भाई पार्शियल कंप्लीट

323
00:22:04,320 --> 00:22:08,480
यूनिट की बात नहीं हो रही है। भगवान आनंदित है कि नहीं? विचार की बात हो

324
00:22:08,480 --> 00:22:12,480
रही है। यहां ज्ञान की बात हो रही है। यहां यहां सामग्री की बात ही नहीं हो रही

325
00:22:12,480 --> 00:22:16,880
है। आप तत्व के आधार पर कहते हैं कि तत्व उनसे निकलता है इनकंप्लीट।

326
00:22:16,880 --> 00:22:21,200
मगर वो फिर भी पूर्ण है। वो नहीं कह रहा हूं। वो अपने आप में

327
00:22:21,200 --> 00:22:25,440
सदा आनंदित है कि नहीं? या उनमें कोई अभाव

328
00:22:25,440 --> 00:22:29,440
है। रस रस का होना चाहिए ना। वो आनंद वृद्धि होने को ही

329
00:22:29,440 --> 00:22:33,600
रस कहते हैं। भाई साहब इसमें अभी आपने एक कोट किया था कि

330
00:22:33,600 --> 00:22:38,320
भगवान में अभाव नहीं होगा तो भगवान नहीं होगा। वो मुझे बताइए कहां लिखा है

331
00:22:38,320 --> 00:22:42,480
अभाव है आनंद की वृद्धि का अभाव हो गया ना तभी तो आनंद

332
00:22:42,480 --> 00:22:46,480
की वृद्धि करनी पड़ी ये इसमें कहां लिखा है

333
00:22:46,480 --> 00:22:50,560
आनंद की वृद्धि का अभाव है भगवान में तभी

334
00:22:50,560 --> 00:22:55,200
वरना अच्छा ये एक मिनट भाई साहब आप समय वेस्ट करते हैं

335
00:22:55,200 --> 00:22:57,760
रेफरेंस मैं मांग रहा हूं भगवान में अभाव होना माना

336
00:22:57,760 --> 00:23:02,640
है कि नहीं इस कौन ने आप मुझे रेफरेंस दे रहे हो कि भगवान से इनकंप्लीट

337
00:23:02,640 --> 00:23:06,800
जो है अभाव युक्त स्मॉल पूर्ण चीजें निकल गलती है। ये क्या

338
00:23:06,800 --> 00:23:11,040
बात है? और फिर कह रहे हो मुझे देर हो रही है।

339
00:23:11,040 --> 00:23:15,040
सॉरी ठीक है। ठीक है। ठीक है। खुद ही तो खुद ही तो घुमा रहे हो। खुद ही

340
00:23:15,040 --> 00:23:19,600
तो खिचड़ी बना रहे हो। फिर कह रहे हो मैं कुछ समझ नहीं रहा हूं। मैंने मांगा आपसे क्या है

341
00:23:19,600 --> 00:23:24,960
कि क्या इस ने माना है भगवान में अभाव नहीं होगा तो भगवान नहीं कहलाएंगे।

342
00:23:24,960 --> 00:23:29,040
इस ने यह माना है कि भगवान का जो प्रेम है या भगवान का जो आनंद

343
00:23:29,040 --> 00:23:33,200
है वो कंटीन्यूस इनक्रीस होता है। यह

344
00:23:33,200 --> 00:23:37,520
भाई साहब सुनिए आपकी जो व्याख्या है वो

345
00:23:37,520 --> 00:23:41,520
इस की ही व्याख्या है या हम कैसे माने हम तब तो आपके

346
00:23:41,520 --> 00:23:45,520
साथ अपना समय वेस्ट करें। जब बात आएगी प्रमाण की

347
00:23:45,520 --> 00:23:49,840
तो आपको प्रमाण देना होगा। अभी मैं इससे सहमत नहीं हूं

348
00:23:49,840 --> 00:23:53,840
कि अभाव होगा तभी भगवान अभाव होगा। फिर तो हम ये कह देंगे भगवान अपने आप को नष्ट नहीं

349
00:23:53,840 --> 00:23:57,920
कर सकता। यह भी अभाव है उसमें। कोई आके कह देगा ये तो उन्होंने ये

350
00:23:57,920 --> 00:24:02,080
तो उन्होंने लीला में कहा है। आप कहोगे कि रियल में कहा है।

351
00:24:02,080 --> 00:24:06,160
अल्टीमेट रियलिटी वाली बात कही है। दूसरा आकर के कह देगा दूसरा आकर

352
00:24:06,160 --> 00:24:10,240
के कह देगा ये तो उन्होंने लीला में कहा है। हम कैसे मान ले? इसलिए वो सिद्धांत जो

353
00:24:10,240 --> 00:24:12,960
है ना कि भगवान में अभाव होना चाहिए। अगर अभाव नहीं होगा तब

354
00:24:12,960 --> 00:24:17,120
भी वो पूर्ण नहीं है। अभी आपने कितना टाइम वेस्ट कराया इसको खोल

355
00:24:17,120 --> 00:24:21,440
के? कितना टाइम वेस्ट कराया? वो जो

356
00:24:21,440 --> 00:24:25,440
क्या निकला मैं पूछ रहा हूं अभाव है कि नहीं आप इसको खुलवा रहे हो फिर आप कह रहे हो याद आ

357
00:24:25,440 --> 00:24:29,920
गया मर्स ऑफ गड की वजह से इसका मतलब आपने ये वेस्ट खुलवाया था

358
00:24:29,920 --> 00:24:34,240
आपको याद नहीं आ रहा इसमें टाइम वेस्ट करा रहे थे इसका जो मीनिंग

359
00:24:34,240 --> 00:24:38,400
है वो मीनिंग आप भाई साहब इसमें कहीं भी प्रभुपाद जी ने ये नहीं माना

360
00:24:38,400 --> 00:24:42,400
है कि भगवान में अभाव नहीं होगा तो हम भगवान को भगवान

361
00:24:42,400 --> 00:24:46,560
कैसे कहेंगे मैं दोबारा दोबारा पढ़वाता हूं

362
00:24:46,560 --> 00:24:50,720
अगर भगवान में कोई कमी हुई तो भगवान को

363
00:24:50,720 --> 00:24:54,960
पूर्ण नहीं कहा जा सकता। भगवान में कुछ

364
00:24:54,960 --> 00:24:58,960
वो कुछ इस शब्द को कुछ ये पहले ही बता दो ये भगवान

365
00:24:58,960 --> 00:25:03,200
में कौन से वाले स्तर की बात कर रहे हो? अंतिम प्रमाण ना अंतिम अंतिम

366
00:25:03,200 --> 00:25:07,520
जो स्वरूप है भगवान का वो ना हां हां अंतिम

367
00:25:07,520 --> 00:25:11,600
स्वरूप में यदि कुछ भी कमी नहीं हुई तो वो भगवान नहीं

368
00:25:11,600 --> 00:25:15,840
है। अंतिम स्वरूप एक कमी होनी चाहिए।

369
00:25:15,840 --> 00:25:20,000
कम से कम होनी चाहिए। कोई कमी नहीं होनी चाहिए। कम से कम

370
00:25:20,000 --> 00:25:24,080
एक ये कौन तय करेगा यार ये कौन तय करेगा मैं बताता

371
00:25:24,080 --> 00:25:28,080
हूं ये कौन तय करेगा मैं बताता हूं और भी हो सकती है पर

372
00:25:28,080 --> 00:25:29,120
मैं बताता हूं क्यों

373
00:25:29,120 --> 00:25:32,640
क्योंकि अगर एक भी कमी नहीं है ये भी तो अपने आप में कमी है ये

374
00:25:32,640 --> 00:25:37,920
ध्यान तो आप परम रूप जो उसका सर पर

375
00:25:37,920 --> 00:25:42,000
जो इनका जो परम रूप है परम उसमें भी आप कमी

376
00:25:42,000 --> 00:25:46,000
मानते हो ना एक कमी है जब आउट ऑफ

377
00:25:46,000 --> 00:25:50,000
टाइम गड को लेते हैं तो उनको क्रिया की आवश्यकता

378
00:25:50,000 --> 00:25:54,080
नहीं पड़ती। एक कमी है क्रिया की आवश्यकता नहीं

379
00:25:54,080 --> 00:25:58,240
पड़ती। एक कमी है क्रिया की आवश्यकता

380
00:25:58,240 --> 00:26:02,640
नहीं पड़ती। एक कमी है क्रिया की आवश्यकता

381
00:26:02,640 --> 00:26:06,640
नहीं पड़ती।
