1
00:00:03,360 --> 00:00:07,120
हां जी बताइए

2
00:00:07,120 --> 00:00:11,280
तो क्या बोलते हैं इसमें मैं एक साल से मतलब इस से जुड़ा हुआ था

3
00:00:11,280 --> 00:00:15,440
दिल्ली में हम हम तो क्या बोलते

4
00:00:15,440 --> 00:00:19,520
हैं मुझे जो मतलब वो बता रहे थे मतलब

5
00:00:19,520 --> 00:00:23,600
जो उनका YouTube पे जैसे लेक्चर वगैरह आता है हम प्रभुपाद जी

6
00:00:23,600 --> 00:00:27,680
का तो वो बिल्कुल क्लियर कट होता है कांसेप्ट वगैरह सब समझ में आते हैं मतलब क्या बोल

7
00:00:27,680 --> 00:00:31,840
रहे क्या कहना चाहते हम पर मैंने मतलब शंकराचार्य वगैरह इनका

8
00:00:31,840 --> 00:00:35,840
समझ में नहीं आता मतलब क्या कहते हैं ये मतलब संस्कृत में बोलते हैं हिंदी में

9
00:00:35,840 --> 00:00:40,080
बोलते हैं हम तो मतलब कहां से मतलब जोड़ा जाए कि हमें

10
00:00:40,080 --> 00:00:44,800
मतलब मतलब पता चले क्या मसला असली हमारा कोर्स होता है

11
00:00:44,800 --> 00:00:49,040
उसका फॉर्म भर दीजिए इसी नंबर पर WhatsApp करके तो आपको प्रारंभिक

12
00:00:49,040 --> 00:00:53,520
बुनियादी चीजें पता चल जाएंगी और सही

13
00:00:53,520 --> 00:00:57,680
अथवा गलत का निर्णय समझ में आने के ऊपर नहीं किया जा सकता है

14
00:00:57,680 --> 00:01:01,840
क्योंकि कि आफ्टर ऑल जब आप अपने आरती

15
00:01:01,840 --> 00:01:07,440
भजन इत्यादि गाएंगे जहां से आप जुड़े हुए हैं वहां के

16
00:01:07,440 --> 00:01:11,520
तो वहां के आरती भजन इत्यादि जो प्रार्थनाएं हैं वो आपकी उतनी समझ

17
00:01:11,520 --> 00:01:15,680
में नहीं आएंगी जितना आजकल जो जो क्रिश्चियन मिशनरीज वाले जो

18
00:01:15,680 --> 00:01:18,560
प्रार्थना करवा रहे हैं धर्म परिवर्तन कराने के लिए उनकी

19
00:01:18,560 --> 00:01:22,560
जो आपको समझ में आएगी। अच्छा तुलसीदास

20
00:01:22,560 --> 00:01:26,640
जी ने जो हनुमान चालीसा लिखी है वह आपको उतनी समझ में नहीं आएगी जल्दी अगर आप

21
00:01:26,640 --> 00:01:30,720
सामान्य हिंदी भाषी व्यक्ति हैं। हां जबकि वहीं पर जो

22
00:01:30,720 --> 00:01:35,120
मिशनरीज हैं जो कन्वर्जन करा रही हैं बहुत ही सरलतम प्रार्थनाएं करवाते

23
00:01:35,120 --> 00:01:39,200
हैं। हे ईश्वर हमको अपनी शरण में ले ले। हे

24
00:01:39,200 --> 00:01:43,520
ईश्वर आप जैसा कोई नहीं है। इसमें समझने में कोई दिक्कत नहीं है। मगर

25
00:01:43,520 --> 00:01:47,600
जुग सहस्त्र जोजन पर भानु ली ताही मधुर फल जानू यह सब समझने में तब

26
00:01:47,600 --> 00:01:51,840
भी आपको कठिनाई हो जाएगी। तो इसका अर्थ क्या हुआ? कि यदि किसी ने सरलतम

27
00:01:51,840 --> 00:01:55,840
रूप में अथवा अनाधिकृत रूप से प्रस्तुत भी कर दिया है

28
00:01:55,840 --> 00:02:00,160
तो इससे ये निर्णय नहीं लिया जा सकता कि वो चीज सही होगी क्योंकि वह सरल और सुलभ

29
00:02:00,160 --> 00:02:04,960
है। हां हमें प्रयासरत इसके लिए होना चाहिए

30
00:02:04,960 --> 00:02:09,440
कि जो सही चीज हो वही हमारे लिए सुलभ हो जाए।

31
00:02:09,440 --> 00:02:13,840
इसका एक दूसरा उदाहरण और भी है कि यदि

32
00:02:13,840 --> 00:02:17,840
हमको दूध पीना है और दूध नहीं मिल रहा है तो इसका मतलब यह

33
00:02:17,840 --> 00:02:21,920
नहीं है कि हम मदिरा पी लेंगे। अच्छा हम दूध के लिए

34
00:02:21,920 --> 00:02:26,000
ही ढूंढेंगे ना। दूध का काम तो दूध ही करेगा। मदिरा पी

35
00:02:26,000 --> 00:02:30,560
के दूध की दूध की चीजों को हम फुलफिल थोड़ी ना कर पाएंगे।

36
00:02:30,560 --> 00:02:33,600
तो क्योंकि मदिरा की दुकान हमें मिल गई और दूध नहीं मिल पा रहा है

37
00:02:33,600 --> 00:02:37,760
तो इसलिए मदिरा पी लेंगे तो ये तो कोई लॉजिक नहीं हुआ। ठीक? बाकी

38
00:02:37,760 --> 00:02:41,760
आप इसी नंबर पर फोन वो कर दीजिए। नहीं वो तो मैंने

39
00:02:41,760 --> 00:02:45,920
कर दिया अभी थोड़ी देर पहले। हम ये मतलब यह चीज बताई जाती

40
00:02:45,920 --> 00:02:49,920
थी कि ये मतलब शंकराचार्य वगैरह भगवत गीता में भी लिखा हुआ है कि

41
00:02:49,920 --> 00:02:54,800
ये मतलब वो बनना चाहते हैं। ये भगवान बनना चाहते हैं।

42
00:02:54,800 --> 00:02:59,040
भगवान बनना चाहते हैं। ऐसा शंकराचार्य ने कहा हैं।

43
00:02:59,040 --> 00:03:03,040
मतलब ऐसे भगवत गीता में मतलब आता हैं। इसमें भगवान

44
00:03:03,040 --> 00:03:08,800
बनना चाहते वह झूठ बोलते हैं।

45
00:03:08,800 --> 00:03:12,960
उन्होंने अपनी भगवत गीता में बहुत सी बातें झूठी लिखी हैं।

46
00:03:12,960 --> 00:03:15,200
मनगढ़ंत

47
00:03:15,200 --> 00:03:19,280
अच्छा वो कहते हैं कि मतलब अगर हम भगवान मैंने बताया तो

48
00:03:19,280 --> 00:03:23,280
वो गलत कहते हैं। अब आप तर्क वितर्क करना चाहते हैं तो

49
00:03:23,280 --> 00:03:27,520
वैसा बताएं। मैंने तो आपको बता दिया वो झूठ कहते हैं।

50
00:03:27,520 --> 00:03:31,680
नहीं अगर वह झूठ कहते हैं तो मतलब मैंने मतलब उनकी बातें मान लो

51
00:03:31,680 --> 00:03:35,840
झूठ मान ली तो प्रभुपाद जी जो बोलते हैं वो भी गलत है। मुझे नहीं पता

52
00:03:35,840 --> 00:03:39,840
प्रभुपाद जी सही बोलते हैं गलत बोलते हैं। मैंने मैं बता रहा हूं आपको इस कौन जो इस

53
00:03:39,840 --> 00:03:43,920
समय प्रचारित कर रहा है वो गलत है। अच्छा

54
00:03:43,920 --> 00:03:48,160
तो इसका मतलब कैसे पता चले कौन सही बोल रहा है? कौन गलत बोल रहा है?

55
00:03:48,160 --> 00:03:54,160
सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष और शाश्वत धर्म

56
00:03:54,480 --> 00:03:58,640
कभी ना बदलने वाला धर्म हो। मुक्ति ऐसी

57
00:03:58,640 --> 00:04:02,880
हो जो परम स्वतंत्र हो और ईश्वर ऐसा हो

58
00:04:02,880 --> 00:04:07,040
जो सर्वशक्तिमान हो। ये तीन चीजें जो आपको दे रहा है वो सही बोल रहा

59
00:04:07,040 --> 00:04:11,120
है। इन तीनों में से कोई भी एक चीज भी अगर वो अलग हटा रहा है तो वो

60
00:04:11,120 --> 00:04:15,200
गलत बोल रहा है। जैसे कि

61
00:04:15,200 --> 00:04:19,520
जिस प्रकार दूध से दही बन सकता है पर दही से दूध नहीं उसी प्रकार

62
00:04:19,520 --> 00:04:23,600
कृष्ण तो शिव बन सकते हैं मगर शिव से कृष्ण पुनः नहीं बन सकते। इसका

63
00:04:23,600 --> 00:04:27,920
अर्थ क्या हुआ? कि शिव के रूप में आकर के कृष्ण बाधित हो गए।

64
00:04:27,920 --> 00:04:32,000
सर्वशक्तिमान नहीं रहे। हाँ इस चीज पे मैं एक क्वेश्चन

65
00:04:32,000 --> 00:04:37,280
करना चाहता हूं आपसे। एक मिनट एक मिनट एक मिनट इसी के साथ-साथ

66
00:04:37,280 --> 00:04:42,160
कृष्ण और अल्लाह में कोई अंतर नहीं है। अल्लाह कौन है?

67
00:04:42,160 --> 00:04:46,320
जो अवतार नहीं ले सकता

68
00:04:46,320 --> 00:04:51,200
जिसकी मूर्ति नहीं बन सकती। तो इसका अर्थ क्या हुआ?

69
00:04:51,200 --> 00:04:55,280
इसने आपका में देख लिया था। आपका मतलब क्या कहना चाहते हो? इसका अर्थ क्या हुआ

70
00:04:55,280 --> 00:04:59,520
कि इस के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं है।

71
00:04:59,520 --> 00:05:03,600
हम मिलने वाले मोक्ष की बात कर लेते हैं। क्या इस के

72
00:05:03,600 --> 00:05:07,600
द्वारा बताई जाने वाली जो मुक्ति है वह

73
00:05:07,600 --> 00:05:12,640
परम स्वतंत्र है नहीं है क्योंकि

74
00:05:12,640 --> 00:05:16,800
उसके अनुसार इस के अनुसार जीव जो था वो भगवान की शरण में ही

75
00:05:16,800 --> 00:05:21,520
था जैसे रामपाल रामपाल भी यही कहता है जीवात्माएं

76
00:05:21,520 --> 00:05:26,400
थी वो सतलोक में कबीर की शरण में थी ठीक है

77
00:05:26,400 --> 00:05:30,720
रामपाल का प्रचार हो रहा है यहां पे हरियाणा में रामपाल

78
00:05:30,720 --> 00:05:35,200
की ही भाषा को बदल करके इस वाले भी बोल रहे हैं कि जीव जो जीवात्माएं

79
00:05:35,200 --> 00:05:39,600
थी भगवान के साथ थी वहां सुख भोग रही थी फिर जीवात्माओं

80
00:05:39,600 --> 00:05:43,840
का मन हुआ भोग करने का अलग से भोग करने का वो आकर फंस गई मगर

81
00:05:43,840 --> 00:05:48,000
बात यह आती है कि जब आपको सच्चिदानंद प्राप्त है तो आपको और

82
00:05:48,000 --> 00:05:52,000
कौन सा भोग करने का मन आ गया मन में आप तो सच्चिदानंद

83
00:05:52,000 --> 00:05:55,520
में थे ना स्टेट ऑफ सच्चिदानंद

84
00:05:55,520 --> 00:06:00,720
आप तो प्राप्त कर प्राप्त किए हुए थे ना भगवत भक्ति

85
00:06:00,720 --> 00:06:01,600
हम

86
00:06:01,600 --> 00:06:05,600
तो आप तो ऑलरेडी मुक्त थे तो फिर आप बाधित क्यों हो रहे हैं और अगर बाधित हो रहे

87
00:06:05,600 --> 00:06:09,760
हैं तो वहां पर जहां पर जहां से आप अपने नए आनंद को खोजने के लिए

88
00:06:09,760 --> 00:06:13,760
नीचे आए हैं वहां पहुंचकर के आप मुक्त कैसे माने जाएंगे? इसके

89
00:06:13,760 --> 00:06:18,000
अलावा और भी थ्योरीज है कि वहां पर सेवा करना ही मोक्ष है। तो ये सारी थ्योरीज

90
00:06:18,000 --> 00:06:22,560
भी फिर वो काल्पनिक हो जाती हैं। अब आ जाता है शाश्वत धर्म।

91
00:06:22,560 --> 00:06:26,560
सर्वशक्तिमान ईश्वर और परम स्वतंत्र मोक्ष हमने देख लिया। अब आ जाता है

92
00:06:26,560 --> 00:06:30,800
शाश्वत धर्म। शाश्वत धर्म क्या है? मधवाचार्य की परंपरा

93
00:06:30,800 --> 00:06:35,440
से हैं। मधवाचार्य ने द्वैत और अद्वैत में अचिंत नहीं माना है।

94
00:06:35,440 --> 00:06:41,120
उन्होंने उन्होंने स्पष्ट द्वैत माना है। तो तुम अचिंत कैसे हो गए?

95
00:06:41,120 --> 00:06:45,360
और जो क्या कहते हैं यह आपके

96
00:06:45,360 --> 00:06:49,520
ये हैं जो चैतन्य महाप्रभु इनके गुरु हैं

97
00:06:49,520 --> 00:06:53,520
श्रीधर स्वामी शंकराचार्य अपने समय के तो फिर आप

98
00:06:53,520 --> 00:06:58,800
शंकराचार्य के विरोधी कैसे हो गए?

99
00:06:58,800 --> 00:07:02,880
अब इसमें बात आती है कि आपके अंदर यदि कुछ

100
00:07:02,880 --> 00:07:06,880
अपना पक्ष रखने वाली बात भी है। यदि जिज्ञासु है

101
00:07:06,880 --> 00:07:11,440
तो क्लासेस में आइए और अगर विरोधी हैं तो आप लाइव

102
00:07:11,440 --> 00:07:15,520
डिस्कशन में आ जाइए। मैं एक बाधित वाला पूछना चाहता

103
00:07:15,520 --> 00:07:19,680
हूं। बाधित में प्रश्न ये सारी बातें आप मैंने कहा ना जिज्ञासु है तो क्लास

104
00:07:19,680 --> 00:07:23,840
में आइए और विरोधी हैं जैसे आपको लगता

105
00:07:23,840 --> 00:07:28,160
है कि मेरा अपना पक्ष है यदि आपका कोई पक्ष नहीं है आपको जिज्ञासा

106
00:07:28,160 --> 00:07:32,240
ही है तो आप क्लास में आइए यदि आपका कोई पक्ष है

107
00:07:32,240 --> 00:07:36,240
विरोधी हैं तो आप डिस्कशन में आ जाइए ठीक है तो

108
00:07:36,240 --> 00:07:40,240
क्लास तो फिर मैंने इसमें ही किया ना ये इसमें एनरोल कर लिया इस साइट

109
00:07:40,240 --> 00:07:44,800
पे हां कर लिया है तो आपसे संपर्क किया जाएगा

110
00:07:44,800 --> 00:07:49,120
पर एक छोटी चीज का बता दो मेरे को एक। मेरी अभी एक मीटिंग है। मैंने आपको 10-15

111
00:07:49,120 --> 00:07:55,040
मिनट ऑलरेडी दे दिए हैं। चलो ठीक है। जय श्री

112
00:07:55,040 --> 00:07:59,280
हां जी मेरा ही है। हां आप ही वो लेक्चर मतलब वो

113
00:07:59,280 --> 00:08:03,600
डिस्कशन वगैरह करते हैं। हम हम हां वेरी गुड। मेरे को आपके क्वेश्चंस

114
00:08:03,600 --> 00:08:07,840
बहुत अच्छे लगते हैं। एंड आई एम आल्सो ऑफ कोर्स मेरे को थोड़ा भगवत

115
00:08:07,840 --> 00:08:11,840
गीता वगैरह का इंटरेस्ट है। तो यू आस्क क्वेश्चंस

116
00:08:11,840 --> 00:08:13,840
डिफरेंट क्वेश्चन। अच्छा मेरे को आपसे ये

117
00:08:13,840 --> 00:08:18,240
कहना बोलना है कि आपने जो शंकराचार्य ऑफ कोर्स शंकराचार्य

118
00:08:18,240 --> 00:08:22,560
इस द पायर ऑफ हिंदू रिलीजियस लेकिन जब

119
00:08:22,560 --> 00:08:26,640
आपका डिस्कशन मैंने देखा कुछ श्री संप्रदाय आप ही

120
00:08:26,640 --> 00:08:30,640
है ना वो YouTube वगैरह सब बनाते वो डिस्कशन इस

121
00:08:30,640 --> 00:08:35,200
या अलग-अलग संप्रदाय के लोगों से मतलब

122
00:08:35,200 --> 00:08:39,760
श्री संप्रदाय के या अलग इनको

123
00:08:39,760 --> 00:08:43,840
भी आपने एक्सपोज किया था ब्रह्माकुमारीज मैंने देखी सब

124
00:08:43,840 --> 00:08:48,560
अच्छे बहुत अच्छे क्वेश्चन रहते हैं आपको और बहुत रैशन क्वेश्चंस रहते हैं मतलब प्रैक्टिकल

125
00:08:48,560 --> 00:08:53,280
तो मुझे बहुत अच्छा लगता है वो आपका डिस्कशन पहले मैं आपको कॉम्प्लीमेंट देना चाहता हूं

126
00:08:53,280 --> 00:08:57,280
अच्छा सेकंडली मैं आपको एक बात आपके डिस्कशन में मैंने

127
00:08:57,280 --> 00:09:01,280
देखा राम श्री राम के भक्ति के ऊपर मतलब शिव जी के भक्ति के

128
00:09:01,280 --> 00:09:05,360
ऊपर तो मेरा ये कहना है मैं खुद मेरे

129
00:09:05,360 --> 00:09:10,080
भी कुछ सेंटीमेंट्स है मेरा थोड़ा सा ये है

130
00:09:10,080 --> 00:09:14,640
क्योंकि हमारे कुल देवता जो है वो श्री कृष्ण है और हमारी

131
00:09:14,640 --> 00:09:19,040
कुलदेवी है जो आर्या दुर्गा है तो मेरा कृष्ण के प्रति थोड़ा सा

132
00:09:19,040 --> 00:09:23,520
थोड़ा सा ये है क्या बोलते हैं ज्यादा ये है आनंद

133
00:09:23,520 --> 00:09:27,600
तो मैं हां तो मैं ये कहना पूछना चाहता हूं आपको

134
00:09:27,600 --> 00:09:28,960
कि भगवत गीता में जो

135
00:09:28,960 --> 00:09:33,040
लिखा है आपने बोला ना राम ने इनकी पूजा की शिव जी की वो वो सब

136
00:09:33,040 --> 00:09:37,520
सही बात है आपकी वो है ऐसा रामायण में क्योंकि मैंने रामायण भी पढ़े हैं और

137
00:09:37,520 --> 00:09:41,760
भागवत महाभारत में भी श्री कृष्ण जी कभी-कभी भी शिव

138
00:09:41,760 --> 00:09:45,840
जी का पूजन करते हैं कुछ इसके लिए जैसे जामवती ने शिव

139
00:09:45,840 --> 00:09:50,160
जी का पूजन किया था कार्तिकेय को पाने के लिए ऐसे सब वर्ण है कृष्ण

140
00:09:50,160 --> 00:09:54,240
भगवान ने भी किया था हां कृष्ण भगवान ने भी किया थे तो ये

141
00:09:54,240 --> 00:09:58,320
सब बातें सही है तो लेकिन मेरा एक कहना है इसमें कि भगवत गीता में जो

142
00:09:58,320 --> 00:10:02,720
कहते हैं भगवान कि जब मैं मनुष्य रूप में आता हूं

143
00:10:02,720 --> 00:10:07,600
तो मैं उनके जैसा ही बर्ताव करता हूं यद्य आचर श्रेष्ठ देव

144
00:10:07,600 --> 00:10:11,760
प्रमाण लोकत अनुवर्तते तो उनको को आने के बाद एक

145
00:10:11,760 --> 00:10:16,080
धर्म का विस्थापन करना होता है। किन के लिए? नॉट ओनली

146
00:10:16,080 --> 00:10:20,160
हायर लेवल के लोग हैं। डिस्कशन में जो आया ना कोई कोई बोल रहा था हायर

147
00:10:20,160 --> 00:10:24,400
लेवल के लिए वो इसके लेवल के लिए ऐसा नहीं है। वो सबके लिए करना पड़ता है। जैसे

148
00:10:24,400 --> 00:10:28,400
सपोज नॉर्मल लोग भी हो या बड़े हो मतलब पढ़े लिखे भी हो या कोई

149
00:10:28,400 --> 00:10:32,720
भी हो हायर लेवल पे हो उनके सबके लिए उनको एक आदर्श सामने रखना

150
00:10:32,720 --> 00:10:36,720
पड़ता है। तो अभी देखो आप बोलते हैं राम जी ने शिव जी का पूजन किया। ये तो सही है। लेकिन

151
00:10:36,720 --> 00:10:40,720
उन्होंने समुद्र का भी पूजन किया। तीन दिन किया। समुद्र का पूजन

152
00:10:40,720 --> 00:10:44,080
ब्रह्म के रूप में नहीं किया। किया कि

153
00:10:44,080 --> 00:10:48,240
तीन दिन उपवास किया ना ब्रह्म के रूप में ब्रह्म के रूप में नहीं किया

154
00:10:48,240 --> 00:10:52,240
देवता के रूप में किया। हां देवता के रूप में तो मैं ये कहना

155
00:10:52,240 --> 00:10:56,240
उन्होंने स्पष्ट कहा है कि शिव जी और मुझ में कोई भेद नहीं है और

156
00:10:56,240 --> 00:11:00,400
ब्रह्म माना है भगवान हां तो ये तो बात है वो तो बहुत बार कही

157
00:11:00,400 --> 00:11:04,640
दूसरी एक बात ये कह रहे हैं आप कि वो जो जब आते हैं तो आदर्श

158
00:11:04,640 --> 00:11:08,800
स्थापित करने के लिए उन्हें मनुष्यों की तरह व्यवहार की स्थापना करते हैं। मनुष्यों

159
00:11:08,800 --> 00:11:12,880
की तरह व्यवहार करना पड़ता है। तो इसका मतलब ये जो आप बोले ना

160
00:11:12,880 --> 00:11:16,880
गायत्री मंत्र जप करते हैं वो सब उसमें आता है। संध्या वंदन करते हैं। एक मिनट

161
00:11:16,880 --> 00:11:21,120
एक मिनट एक मिनट इसका मतलब ये है कि वो ये चाहते हैं कि वो जो व्यवहार

162
00:11:21,120 --> 00:11:25,280
कर रहे हैं उसे हम भी करें उसे हम भी करें डेफिनेटली इसका मतलब ये

163
00:11:25,280 --> 00:11:29,360
एक मिनट एक मिनट इसका मतलब वो ये चाहते हैं कि यदि वो शिव को भगवान

164
00:11:29,360 --> 00:11:33,520
मान रहे हैं तो हम भी माने यस डेफिनेटली लेकिन

165
00:11:33,520 --> 00:11:37,600
लेकिन मैं आपको एक इसके आगे का बात कहता हूं लेकिन वो आप जो कह रहे कि ये वो जो

166
00:11:37,600 --> 00:11:41,680
कह रहा था सामने वाला कि वो अलग लेवल ऐसा नहीं है। उनको जिस लेवल पे आप

167
00:11:41,680 --> 00:11:45,680
है सपोज अभी-अभी आपकी कैटेगरीज होती है जैसे 84 लक्ष योनियां है

168
00:11:45,680 --> 00:11:49,680
उसमें भी कैटेगरी है अलग-अलग जलजा नव लक्षण स्थावरम लक्षविषदी

169
00:11:49,680 --> 00:11:54,080
वो अलग-अलग कॉन्शसनेस जैसा डेवलप हो जाता है वैसा मनुष्यों में भी कॉन्शसनेस डेवलपमेंट

170
00:11:54,080 --> 00:11:58,080
का अलग-अलग स्टेजेस है इसलिए शूद्र है मेंटालिटी मेंटालिटी बोल रहा हूं मैं

171
00:11:58,080 --> 00:11:59,120
जाति नहीं बोल रहा हूं

172
00:11:59,120 --> 00:12:03,200
और आपने वो भी एक क्वेश्चन उठाया था शूद्र है मेंटालिटी मेंटालिटी बोल रहा हूं मैं मैं

173
00:12:03,200 --> 00:12:07,360
ये व्यक्ति नहीं बोल रहा हूं क्षत्रिय मेंटालिटी होते है तो उनके लिए अलग-अलग

174
00:12:07,360 --> 00:12:11,360
उन्होंने कुछ ऐसे ये रखे जैसे

175
00:12:11,360 --> 00:12:15,360
भी चराते थे। मूल पॉइंट आप पहले बता दीजिए क्योंकि मुझे पता नहीं चल रहा

176
00:12:15,360 --> 00:12:19,520
हम लोग किस दिशा में बात कर रहे हैं। हां तो मेरे को मूल पॉइंट ये कहना है कि अगर वो

177
00:12:19,520 --> 00:12:23,760
भगवान है एक भगवान है। अब हम लोग सब कहते हैं कि भगवान एक है।

178
00:12:23,760 --> 00:12:27,840
तो मेरी मेरे मतलब मुझे ऐसा लगता है कि वो एक ही होना चाहिए। ऐसा नहीं

179
00:12:27,840 --> 00:12:31,920
कि ये भी भगवान है वो भी भगवान है। क्योंकि फर्क ये है कि

180
00:12:31,920 --> 00:12:36,080
भगवान एक ही है। उसके रूप का ही है। हां रूप रूप का ही है। तो वही

181
00:12:36,080 --> 00:12:40,160
एक बात मैं आपको बोलता हूं कि आपका एक डिसीजन मैंने सुना

182
00:12:40,160 --> 00:12:44,400
था बीच में कि आपने शिवजी और वो इस के साथ कोई थे कोई

183
00:12:44,400 --> 00:12:48,480
थे तो उसमें आपने डिस्कशन किया था कि शिवजी इस लाइक अ मिल्क और ये ऐसा कुछ

184
00:12:48,480 --> 00:12:52,480
था। मेरे को अभी याद नहीं आ रहा वो दही और मिल्क ऐसा कुछ तो आपने क्वेश्चन पूछा

185
00:12:52,480 --> 00:12:57,120
था। वो बहुत मतलब बहुत ऐसा बहुत से लोगों को वो प्रश्न आता है। तो

186
00:12:57,120 --> 00:13:01,200
मेरा ये कहना क्या है कि भगवान के जो मैंने जो इंफॉर्मेशन पढ़ी है जो मेरे हिसाब

187
00:13:01,200 --> 00:13:05,360
से जो गर्ग संहिता में तो उन्होंने क्या कहा है गर्ग संहिता में

188
00:13:05,360 --> 00:13:09,760
कि अलग-अलग अवतार जो होते हैं वो स्वामंस उसमें फर्क रहता है। स्वा

189
00:13:09,760 --> 00:13:14,080
विभिन्न आवश्यकता देखिए यह जो व्याख्याएं

190
00:13:14,080 --> 00:13:15,040
हैं

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00:13:15,040 --> 00:13:19,600
ये आपकी एक जो शिक्षा प्रणाली है पर्टिकुलर

192
00:13:19,600 --> 00:13:23,840
वो तो सब चीजें जिधर जिधर अच्छी मिलते है उधर मैं रहता हूं वो उससे

193
00:13:23,840 --> 00:13:29,200
प्रभावित है हां लेकिन शिक्षा प्रणाली आपके शास्त्रों में है ना

194
00:13:29,200 --> 00:13:33,680
शास्त्रों में ये है कि पूर्ण से जब कुछ निकलेगा तो पूर्ण ही होगा

195
00:13:33,680 --> 00:13:37,680
बराबर है तो वो उसमें कोई वो उसमें कुछ कमी आ ही नहीं सकती

196
00:13:37,680 --> 00:13:41,680
ना लेकिन आप ये मानते हो कि नहीं कि भगवान एक ही है और उनके रूप अनेक

197
00:13:41,680 --> 00:13:45,920
है। तो जो रूप है लेकिन वो रूप जो है

198
00:13:45,920 --> 00:13:50,480
उसमें उसको आप भगवान कभी-कभी नहीं कह सकते क्योंकि वो अलग थोड़ा सा

199
00:13:50,480 --> 00:13:54,720
ऐसा नहीं है। अगर शास्त्रों में आपने अगर शास्त्रों में ये पढ़ा है स्वांश

200
00:13:54,720 --> 00:13:58,720
वगैरह तो शास्त्रों में ये भी तो लिखा है कि मैं ब्रह्म हूं। शिव जी कह

201
00:13:58,720 --> 00:14:02,720
रहे हैं। मैं ही परम ब्रह्म हूं। देखो आप आपको मैं

202
00:14:02,720 --> 00:14:06,800
बताता हूं मैं कि मेरा कहने का मतलब क्या है? अरे भाई यजुर्वेद के 16व अध्याय के

203
00:14:06,800 --> 00:14:11,760
दूसरे मंत्र में कह दिया शिव की भक्ति मोक्षदायक है।

204
00:14:11,760 --> 00:14:16,000
लेकिन मोक्ष जो पुराण पढ़ा है क्या? ब्रह्म पुराण

205
00:14:16,000 --> 00:14:20,800
सुनिए जो मोक्षदायक है वही क्या कहते हैं भगवान है।

206
00:14:20,800 --> 00:14:25,440
हां लेकिन तीन तीन नहीं हो सकते ना अलग-अलग। कहां अलग-अलग है?

207
00:14:25,440 --> 00:14:29,440
ईश्वर मैं कहां कह रहा हूं होना चाहिए ना? मैं कहां कह रहा हूं? अलग है।

208
00:14:29,440 --> 00:14:30,080
कृष्ण ही शिव

209
00:14:30,080 --> 00:14:34,160
है। शिव ही कृष्ण है। शिव कृष्ण है। हां। लेकिन उनका फंक्शनिंग अलग है। तो मैं

210
00:14:34,160 --> 00:14:38,480
ये कहना चाहता हूं। फंक्शनिंग अलग वो वो फिर देखिए

211
00:14:38,480 --> 00:14:42,640
आपकी बात बार-बार बदल रहे हो। जब वो दोनों जब वो दोनों

212
00:14:42,640 --> 00:14:46,720
एक है तो दोनों भगवान है। फंक्शनिंग अलग है तो फंक्शनिंग अलग होने से

213
00:14:46,720 --> 00:14:51,760
कोई व्यक्ति अलग थोड़ी ना हो जाता है। कोई है ना? जैसे कोई

214
00:14:51,760 --> 00:14:55,840
ठीक है। आप ऐसा करिए। आप एक लाइव डिस्कशन में आ जाइए। ठीक है? नहीं नहीं आप सपोज सपोज

215
00:14:55,840 --> 00:14:59,920
सपोज मैं अभी घर पे हूं। तो मैं एक अलग हूं ना मेरे पास समय नहीं मेरे पास समय

216
00:14:59,920 --> 00:15:04,000
नहीं है। मैं ऊपर करके भी बैठ सकता हूं लेकिन बाहर जाऊंगा ऑफिस में तो वैसा

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00:15:04,000 --> 00:15:08,000
नहीं बैठ सकता। आप लाइव लाइव डिस्कशन में आ जाइए। ठीक है? लेकिन कैसा आने का मेरे

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00:15:08,000 --> 00:15:12,160
को पता नहीं है। लेकिन मैं तो इतना क्वालीफाई नहीं समझता अभी मेरे को आप आप फोटो

219
00:15:12,160 --> 00:15:16,320
दीजिए अपनी। हम आपको एक टाइम देंगे। उस टाइम पर हम आपको एक लिंक देंगे।

220
00:15:16,320 --> 00:15:20,480
उस लिंक को टच करके आप आ जाना। ठीक है? फोटो देना पड़ेगा। अच्छा कहां देना

221
00:15:20,480 --> 00:15:24,640
है फोटो? यहीं पे WhatsApp WhatsApp करिए। ये WhatsApp है।

222
00:15:24,640 --> 00:15:28,640
अच्छा फोटो लेकिन एक मैं आपको मानता हूं कि जो प्रश्न

223
00:15:28,640 --> 00:15:32,720
पहले किसी ने उठाए नहीं थे ओपन में वो आपने उठाया वो मेरे

224
00:15:32,720 --> 00:15:36,960
को बहुत अच्छा लगा क्योंकि आप सच्ची में मतलब आप बोलते हैं ना जिसको जानने

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00:15:36,960 --> 00:15:41,200
के लिए उत्सुक लगते हैं आप मतलब सच क्या है? ठीक है।

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00:15:41,200 --> 00:15:45,280
मैं भी एक बात आपको बोलता हूं। मैं भी समान ही मानता हूं शिव जी। आप आप जो है आप

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00:15:45,280 --> 00:15:49,280
क्वेश्चंस जो मैंने रेज किए हैं उनको आप आंसर करिए। हां लेकिन मैं भी एक बात को

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00:15:49,280 --> 00:15:53,440
पूछ रहा हूं ना कि दोनों समान है। मैं भी मानता हूं लेकिन वो उनका फंक्शनिंग

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00:15:53,440 --> 00:15:57,680
अलग है। आप आप फिर शास्त्र में ये दिखाइए

230
00:15:57,680 --> 00:16:01,680
ना कि एक ही तत्व की अगर फंक्शनिंग अलग-अलग होगी तो इस

231
00:16:01,680 --> 00:16:05,840
फंक्शनिंग के आधार पर उसे भगवान माना जाएगा और दूसरी फंक्शनिंग के आधार

232
00:16:05,840 --> 00:16:11,840
पे उसको भगवान नहीं माना जाएगा। फिर शास्त्र में दिखाइए।

233
00:16:11,840 --> 00:16:15,920
आप फंक्शनिंग अलग मान रहे हैं ना। हां तो आप आप

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00:16:15,920 --> 00:16:20,000
वो ले आप आप वो लेके आप लाइव में आइए मैं अभी मैं

235
00:16:20,000 --> 00:16:24,000
अभी कहीं पे व्यस्त हूं जय श्री राम
