1
00:00:02,080 --> 00:00:07,200
तो सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे

2
00:00:07,200 --> 00:00:11,360
और जैसा कि सभी को जानकारी है 12 जुलाई

3
00:00:11,360 --> 00:00:15,360
को दिल्ली यूनिवर्सिटी कैंपस में दिल्ली

4
00:00:15,360 --> 00:00:19,520
में पूज्य जगतगुरु शंकराचार्य पुरी पीठाधीश्वर

5
00:00:19,520 --> 00:00:23,440
जी गुरुदेव महाराज का प्राकट उत्सव

6
00:00:23,440 --> 00:00:28,480
मनाया जा रहा है। आप सभी वहां पर आमंत्रित है। वहां आए और

7
00:00:28,480 --> 00:00:30,640
उनसे

8
00:00:30,640 --> 00:00:34,640
अपने जीवन के लिए, राष्ट्र के लिए, धर्म के लिए मार्गदर्शन प्राप्त करें। उनकी

9
00:00:34,640 --> 00:00:39,120
दिव्य वाणी से स्वयं को अनुित करें।

10
00:00:39,120 --> 00:00:45,120
अभी हमारी चर्चा है इस के एक फॉलोअर हैं जो आए हैं।

11
00:00:45,440 --> 00:00:51,440
मैं उनको ले लेता हूं सबसे पहले।

12
00:00:51,440 --> 00:00:55,840
जय श्री राम नीरज जी। जय श्री राम। जय श्री राम।

13
00:00:55,840 --> 00:00:59,920
जी नीरज जी आप सबसे पहले मैं

14
00:00:59,920 --> 00:01:03,920
अपना परिचय जी बिल्कुल परिचय से पहले

15
00:01:03,920 --> 00:01:07,920
मैं दो शब्द आपके लिए भी कहूंगा मैंने आपके काफी वीडियो देखे

16
00:01:07,920 --> 00:01:11,920
और मुझे बहुत अच्छा लगा कि आपने इस चर्चा पर अपनी सहमति जताई

17
00:01:11,920 --> 00:01:16,080
मैं आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करना चाहता हूं और अब मैं अपना थोड़ा सा संक्षिप्त

18
00:01:16,080 --> 00:01:20,320
परिचय दे देता हूं। मेरा नाम नीरज कुमार नागर है और मैं जयपुर से बिलोंग करता हूं

19
00:01:20,320 --> 00:01:24,400
और ग वैष्णव परंपरा को से मैं काफी प्रभावित हूं और अभी

20
00:01:24,400 --> 00:01:28,720
ऑफिशली ऐसा तो नहीं है कि मैंने किसी से दीक्षा ले रखी है लेकिन मैं

21
00:01:28,720 --> 00:01:32,800
अपने शास्त्रों में थोड़ा सा मेरी रुचि है तो मैंने जब आपके वीडियो देखे तो मुझे

22
00:01:32,800 --> 00:01:36,960
लगा कि आपने सनातन के लिए आप काफी अच्छा कर रहे हो तो एक

23
00:01:36,960 --> 00:01:40,960
बार कुछ चीजें ऐसी थी जिन पर चर्चा कर सके। मेरा उद्देश्य यहां

24
00:01:40,960 --> 00:01:45,040
ऐसा भी नहीं है कि मैं अपने आप को विद्वान दिखाना या किसी को नीचा दिखाना बिल्कुल

25
00:01:45,040 --> 00:01:49,200
भी नहीं है। बस खाली एक चर्चा जो करनी है उसके लिए आपने जो सहमति जताई

26
00:01:49,200 --> 00:01:53,200
उसके लिए धन्यवाद। जी बहुत बढ़िया

27
00:01:53,200 --> 00:01:57,600
तो अभी आप दीक्षित नहीं है और केवल इसको जी बिल्कुल

28
00:01:57,600 --> 00:02:01,600
इसको हम फॉलो कर मतलब ग हां उसके जो कुछ चीजें

29
00:02:01,600 --> 00:02:06,080
हैं वो मेरे को अच्छी लगती है और

30
00:02:06,080 --> 00:02:06,640
थोड़ा सा उनको

31
00:02:06,640 --> 00:02:11,520
पसंद कर

32
00:02:11,520 --> 00:02:15,680
आप जो बार-बार गड या वैष्णव कह रहे हैं तो आप यह

33
00:02:15,680 --> 00:02:19,920
मानते हैं कि आपकी जो स्क की जिस को आप जो समझ रहे हैं वो गौ वैष्णव

34
00:02:19,920 --> 00:02:24,160
परंपरा से जुड़ा हुआ है। जी बिल्कुल ऐसा मेरा

35
00:02:24,160 --> 00:02:28,560
मानना है और इसमें मैंने थोड़ा सा अध्ययन भी किया था। तो इसमें

36
00:02:28,560 --> 00:02:32,720
एक चीज तो निकल के आती है कि स्कॉन पूरी तरह से गॉन में

37
00:02:32,720 --> 00:02:36,880
भी एक्चुअली एक तो जो स्कॉन बोर है और एक मुंबई

38
00:02:36,880 --> 00:02:41,440
है वो एक दो चीजें है लेकिन फिर भी मैं ये कहूंगा कि इस ग वैष्णव परंपरा

39
00:02:41,440 --> 00:02:46,080
से हम मेरे को लगता है कि हां है उससे जुड़ा हुआ है। अच्छा

40
00:02:46,080 --> 00:02:50,160
तो इस जब गड़िया वैष्णव परंपरा से जुड़ा हुआ है तो इसका अर्थ यह है

41
00:02:50,160 --> 00:02:55,040
कि इस का निर्णय करने वाला कोई गौडिया वैष्णवाचार्य

42
00:02:55,040 --> 00:02:59,600
है।

43
00:02:59,600 --> 00:03:05,600
जी बिल्कुल कौन है?

44
00:03:08,160 --> 00:03:12,720
आप एक बार दोबारा बोल पाएंगे मैं सुन नहीं पाया। देखिए

45
00:03:12,720 --> 00:03:17,440
परम जैसे हम कह रहे हैं कि हम शंकराचार्य से शंकराचार्य परंपरा से जुड़े हुए हैं।

46
00:03:17,440 --> 00:03:21,520
ठीक है। आपको आवाज आ रही है मेरी? जी जी बिल्कुल आप कह रहे हैं

47
00:03:21,520 --> 00:03:25,680
कि मैं कह रहा हूं जैसे मैं कह रहा हूं जैसे मैं कह

48
00:03:25,680 --> 00:03:29,920
रहा हूं कि मैं शंकराचार्य परंपरा से जुड़ा हुआ हूं। ठीक है?

49
00:03:29,920 --> 00:03:34,000
तो मेरे धर्म का निर्णय करने वाला शंकराचार्य गद्दी पर

50
00:03:34,000 --> 00:03:38,720
बैठने वाले जो शंकराचार्य होते हैं वो हैं। ठीक है। जी बिल्कुल

51
00:03:38,720 --> 00:03:42,800
जी। तो कौन कौन सा गौ वैष्णव परिवार

52
00:03:42,800 --> 00:03:46,800
का जो आचार्य है गौ वैष्णव परंपरा से

53
00:03:46,800 --> 00:03:52,640
जुड़ा हुआ जो इस का निर्णय कर रहा है

54
00:03:52,640 --> 00:03:56,720
जी हम एक्चुअली जो चैतन्य महाप्रभु थे वो गौर वैष्णव

55
00:03:56,720 --> 00:04:00,720
परंपरा से ही थे और उन्हीं से और सबसे पहले जो परंपरा भाई साहब भाई

56
00:04:00,720 --> 00:04:05,600
साहब भाई साहब भाई साहब भाई साहब मैंने पहले आप नाम तो बताइए

57
00:04:05,600 --> 00:04:09,680
आप पीछे चैतन्य महाप्रभु का नाम बताया ना मैंने अभी अभी अभी अभी जो

58
00:04:09,680 --> 00:04:13,760
है प्रभुपाद जी हमारे जो एक एक मिनट

59
00:04:13,760 --> 00:04:18,720
भाई साहब एक मिनट एक बात थोड़ी सी घूम जाती है फिर थोड़ा सा चीजें

60
00:04:18,720 --> 00:04:22,880
आपने कहा था व्यवस्थित रूप से चर्चा करने आए आए हैं आप तो आप चैतन

61
00:04:22,880 --> 00:04:26,960
महाप्रभु के बाद तो बहुत सारी चीजें हैं ना बीच में मैं कह रहा हूं अभी

62
00:04:26,960 --> 00:04:30,960
इस का निर्णय अभी इस का निर्णय कौन सा गौ

63
00:04:30,960 --> 00:04:34,960
वैष्णव आचार्य कर रहा है इस का निर्णय प्रभुपाद

64
00:04:34,960 --> 00:04:39,200
श्रील प्रभुपाद श्रील प्रभुपाद श्रील प्रभुपाद जी

65
00:04:39,200 --> 00:04:45,040
तो ऐसे अगर कोई यह कहे कि मेरा निर्णय स्वयं कृष्ण कर रहे हैं तो चलेगा आपको

66
00:04:45,040 --> 00:04:49,040
किसका मेरा खुद का मेरा निर्णय कोई ये कहे

67
00:04:49,040 --> 00:04:53,120
मैं जो है एक प्रामाणिक परंपरा से हूं और मेरा निर्णय कृष्ण भगवान कर

68
00:04:53,120 --> 00:04:57,120
रहे हैं और मैं ये बता रहा हूं कि फुटबॉल खेलने से मुक्ति

69
00:04:57,120 --> 00:05:01,280
मिलेगी मानेंगे आप जी अगर कृष्ण

70
00:05:01,280 --> 00:05:05,280
कह रहे हैं तो बिल्कुल मानेंगे क्यों नहीं मानेंगे तो मुझे तो कह मुझे कृष्ण अगर ऐसा

71
00:05:05,280 --> 00:05:08,400
कह रहे हैं मुझे कह रहे हैं तो बिल्कुल मानिए

72
00:05:08,400 --> 00:05:12,480
तो आप माला आज से माला आज से मालाजाप छोड़ के आप

73
00:05:12,480 --> 00:05:16,480
जो है फुटबॉल खेलेंगे। जी नहीं बिल्कुल मेरे से तो नहीं कहा ना मेरे से

74
00:05:16,480 --> 00:05:20,560
तो कहा ही नहीं उन्होंने आपसे आप कह रहे हैं कि मेरे से कहा है तो आप ऐसा कीजिए

75
00:05:20,560 --> 00:05:24,640
मेरे से अगर कृष्ण ऐसा कहेंगे मैं समझ गया तो फिर प्रभुपाद जी का

76
00:05:24,640 --> 00:05:28,640
वो बताइए आप प्रभुपाद जी आपके आज के टाइम के निर्णायक है इसका

77
00:05:28,640 --> 00:05:31,520
सबूत दीजिए

78
00:05:31,520 --> 00:05:35,520
हमारे गुरु परंपरा के इसमें सबूत क्या दूं मैं

79
00:05:35,520 --> 00:05:39,600
बताइए अरे तो इसमें क्या सबूत दूं कि श्री कृष्ण मुझे कह रहे हैं कि नहीं कह

80
00:05:39,600 --> 00:05:43,840
रहे हैं इसमें क्या सबूत दूं तो मैंने तो मांगा ही नहीं आपसे सबूत ही नहीं मांगा मैंने तो आपसे

81
00:05:43,840 --> 00:05:48,000
आप मैंने तो आपसे सबूत ही नहीं मांगा। इसका इसका मतलब है आप कोई ऐसी

82
00:05:48,000 --> 00:05:54,000
बात यहां पर कह रहे हैं जो आप यह नहीं चाहते कि वो प्रामाणिक रूप से मानी जाए।

83
00:05:54,240 --> 00:05:58,320
नहीं ऐसी बात क्यों नहीं कहा? हमारे गुरु श्री प्रभुपाद जी है। इसमें ये तो

84
00:05:58,320 --> 00:06:02,800
सभी जानते हैं। इसमें मेरे पास कोई लेटर मैं बता रहा हूं। आपके

85
00:06:02,800 --> 00:06:06,800
और मैंने ये भी ये भी मैंने अरे भाई ये भी मैंने स्टार्टिंग में क्लियर कर

86
00:06:06,800 --> 00:06:11,040
बोलने देंगे कि नहीं? बोलने देंगे कि नहीं? आपके आपने ऐसी

87
00:06:11,040 --> 00:06:15,200
बात नहीं है। आपने आप बोलिए बोलिए

88
00:06:15,200 --> 00:06:19,280
आपके गुरु श्री प्रभुपाद जी थे। वर्तमान में

89
00:06:19,280 --> 00:06:23,120
उनकी बात आपको प्रमाणिक

90
00:06:23,120 --> 00:06:23,680
एक मिनट

91
00:06:23,680 --> 00:06:28,160
मेरी बात पूरी नहीं हुई है। आप फिर में कूद पड़ रहे हैं। इसीलिए

92
00:06:28,160 --> 00:06:32,320
चीजें बिगड़ बस। आप लोग रट करके आते हो कि मुझे कैसे करना है वहां पर

93
00:06:32,320 --> 00:06:36,320
जिससे कि यह मामला सुलझने की वजह बिलकुल भी बिल्कुल भी

94
00:06:36,320 --> 00:06:40,320
बिलकुल भी है। ऐसी बात भी नहीं है। मेरी लाइन आप मेरी लाइन

95
00:06:40,320 --> 00:06:44,480
पूरी क्यों नहीं होने दे रहे? फिर बार-बार भी ठीक है आप बोलिए बोलिए आप

96
00:06:44,480 --> 00:06:48,560
आप जब कहोगे तब मैं बोलूंगा। ठीक है आप बोलिए। ठीक

97
00:06:48,560 --> 00:06:52,800
है। तो श्रील प्रभुपाद जी इस समय

98
00:06:52,800 --> 00:06:57,360
वर्तमान में हमारे बीच में नहीं है।

99
00:06:57,360 --> 00:07:01,440
ठीक है। जी। शरीर हमारे बीच में नहीं है। जिस तरह से कृष्ण

100
00:07:01,440 --> 00:07:05,600
नहीं है। अब मैंने कहा कि मुझे मेरे मेरे जो निर्णय करने

101
00:07:05,600 --> 00:07:09,600
वाला है वो करने वाले हैं कृष्ण। तो क्या आप मुझे प्रमाणिक मानेंगे? तो आप

102
00:07:09,600 --> 00:07:13,680
आप कह रहे हो कि क्योंकि मेरे से तो कृष्ण ने नहीं कहा है तो मैं आपकी बात पर

103
00:07:13,680 --> 00:07:17,760
बिलीव नहीं कर सकता। इसका मतलब मेरी बात आपके लिए प्रमाणिक नहीं है और

104
00:07:17,760 --> 00:07:21,920
सही बात है नहीं होनी चाहिए। मगर वहीं पर आप क्या कह रहे हो जो

105
00:07:21,920 --> 00:07:25,920
सशरीर प्रत्यक्ष रूप से हमारे बीच में नहीं है। उनका नाम आप ले रहे

106
00:07:25,920 --> 00:07:30,240
हो कि इस का निर्णायक प्रभुपाद जी है। प्रभुपाद जी हमारे बीच में नहीं है।

107
00:07:30,240 --> 00:07:34,560
वर्तमान में प्रत्यक्ष रूप से जैसे आप मुझसे चाहते हो कि आपको प्रमाण

108
00:07:34,560 --> 00:07:38,800
प्राप्त हो कृष्ण का ऐसे ही जिस व्यक्ति का मुझे प्रमाण प्राप्त

109
00:07:38,800 --> 00:07:42,800
आप करा सको वो व्यक्ति कौन है इस का निर्णायक वो पूछा है

110
00:07:42,800 --> 00:07:46,880
मैंने आपने कह दिया शील प्रभुपाद जी निर्णायक है शील प्रभुपाद जी हमारे बीच में

111
00:07:46,880 --> 00:07:51,040
प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित नहीं है तो जिस व्यक्ति का

112
00:07:51,040 --> 00:07:55,200
आप मेरे समक्ष प्रत्यक्ष एक एक मिनट जिस व्यक्ति का आप

113
00:07:55,200 --> 00:07:59,200
मेरे समक्ष प्रामाणिक रूप से प्रत्यक्ष रूप से यह

114
00:07:59,200 --> 00:08:05,120
दिखा सको कि यह है हमारे निर्णायक उस व्यक्ति का नाम बताइए ना

115
00:08:05,120 --> 00:08:09,200
जी अभी मैं जो हूं वो हरे कृष्णा मूवमेंट है। उसको

116
00:08:09,200 --> 00:08:14,160
मैं फॉलो करता हूं। है ना? और अभी मेरा जो दीक्षा तो हुआ

117
00:08:14,160 --> 00:08:19,200
मैंने आपसे क्या पूछा? मैंने आपसे क्या पूछा? वर्तमान का

118
00:08:19,200 --> 00:08:23,520
श्रील प्रभुपाद जी के बाद उनके जाने के बाद देह त्याग के बाद

119
00:08:23,520 --> 00:08:28,240
या परलोक गमन के बाद या जिस लोक में भी वो गए हो उसके बाद

120
00:08:28,240 --> 00:08:32,320
आज वर्तमान में आपका प्रत्यक्ष निर्णायक निर्णय करता

121
00:08:32,320 --> 00:08:36,400
कौन है? जिसका कि प्रत्यक्षता के साथ नाम

122
00:08:36,400 --> 00:08:40,640
बता सके। जी जी मैं इसमें जवाब दे देता हूं। आज

123
00:08:40,640 --> 00:08:44,720
के समय में जो निर्णायक है और प्रभुपाद जी ने जो जो ऋित्विक

124
00:08:44,720 --> 00:08:48,800
सिस्टम अपॉइंट किया था ऋत्विक आचार्य तो उसमें उन्होंने ऐसा

125
00:08:48,800 --> 00:08:52,960
नहीं कहा कि आज अब मेरे बाद में ये गुरु रहेंगे। ऐसा नहीं कहा। उन्होंने

126
00:08:52,960 --> 00:08:54,000
एक लेटर दिया था

127
00:08:54,000 --> 00:08:58,320
जुलाई 9 जुलाई 1977 का एक लेटर है जिसमें उन्होंने

128
00:08:58,320 --> 00:09:02,640
यह बोला था कि आज के बाद जो परंपरा होगी वो ऋत्विक परंपरा से चलेगी

129
00:09:02,640 --> 00:09:06,640
दीक्षा जो भी होगी वो ऋतुिक परंपरा से होगी गुरु मैं ही रहूंगा यानी कि मेरे

130
00:09:06,640 --> 00:09:11,040
बिहाफ पर ऋत्विक आचार्य इसमें गुरु दीक्षा देंगे और गुरु मैं ही रहूंगा

131
00:09:11,040 --> 00:09:15,120
इसमें आगे अभी कोई गुरु नहीं है हमारी में तो हमारी जो एचकेएम

132
00:09:15,120 --> 00:09:19,280
है उसमें कोई गुरु नहीं है हम श्री प्रभुपाद जी को ही गुरु मानते हैं और वो जो लेटर है वो

133
00:09:19,280 --> 00:09:23,600
जो समझ गया इसमें लिखित भी है आपकी बात समझ गए आपकी बात

134
00:09:23,600 --> 00:09:28,240
आपकी बात समझ गई इसका मतलब यह है कि पहली बात तो क्लियर कर ले कि आप

135
00:09:28,240 --> 00:09:32,720
जो प्रभुपाद जी की जो ब्रांचेस निकली है उनमें से आप रतिक रतिक

136
00:09:32,720 --> 00:09:37,200
वाले हो आप है ना जी बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल ठीक है

137
00:09:37,200 --> 00:09:41,840
ठीक है तो अब आप मुझे ये बता दीजिए कि परंपरा का महत्व क्या है

138
00:09:41,840 --> 00:09:46,080
क्यों होती है परंपरा परंपरा परंपरा

139
00:09:46,080 --> 00:09:50,240
इसलिए बनाई जाती है कि जो एक्चुअल ज्ञान है उसको पीढ़ी दर पीढ़ी सही

140
00:09:50,240 --> 00:09:54,640
तरीके से आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना। इसी इसीलिए परंपरा

141
00:09:54,640 --> 00:09:58,880
में थोड़ा सा थोड़ा सा थोड़ा सा उदाहरण डाल के इसको प्रैक्टिकली

142
00:09:58,880 --> 00:10:03,840
रूप से मुझे बताइए। परंपरा क्या उपयोग है परंपरा? जैसे कि

143
00:10:03,840 --> 00:10:08,080
जैसे कि मान लीजिए कोई गुरु जैसे चैतन्य महाप्रभु

144
00:10:08,080 --> 00:10:09,200
थे। एक जैसे अभी आपने

145
00:10:09,200 --> 00:10:13,280
उदाहरण के लिए कहा तो मैं आपको उदाहरण देकर बताता हूं। जैसे चैतन्य महाप्रभु थे। अब

146
00:10:13,280 --> 00:10:17,440
चैतन्य महाप्रभु ने कृष्ण के बारे में जो बताया तत्व से जो बताया

147
00:10:17,440 --> 00:10:21,600
है ना फिर उनके उन्होंने अपने अपने शिष्य जो भी उनके जो शिष्य

148
00:10:21,600 --> 00:10:25,760
रहे आगे की परंपरा में जो दूसरे अगले गुरु रहे उनको बताया फिर उन गुरु

149
00:10:25,760 --> 00:10:29,760
ने अगले गुरु को बताया तो इस तरीके से क्या है कि ज्ञान जो परंपरा से चलता

150
00:10:29,760 --> 00:10:34,080
है ना वो वही सही मायने में लास्ट तक पहुंच पाता

151
00:10:34,080 --> 00:10:38,320
है और अगर परंपरा से ज्ञान नहीं चलता है हां हां

152
00:10:38,320 --> 00:10:42,960
बताइए बताइए बताइए बताइए परंपरा से अगर ज्ञान नहीं चलता है तो उसमें मिला

153
00:10:42,960 --> 00:10:47,040
मिलावट होने की या उसमें कुछ चीजें ऐसी मिलावट हो जाती

154
00:10:47,040 --> 00:10:51,280
है जिससे कि वो ज्ञान अलग डायरेक्शन में चला जाता है। इसलिए परंपरा होना बहुत जरूरी

155
00:10:51,280 --> 00:10:55,760
है क्योंकि परंपरा से जो ज्ञान मैं समझ गया समझ गया समझ गया उसको रिपीिटेटिव

156
00:10:55,760 --> 00:11:00,560
बोल के क्या करेंगे आप बोल तो दिया आपने ठीक है ठीक आगे पूछिए फिर

157
00:11:00,560 --> 00:11:04,960
अब अब अब प्रश्न ये आता है कि परंपरा का मतलब ये हुआ

158
00:11:04,960 --> 00:11:09,360
कि हमारे जो पूर्वाचार्य थे या उनसे पहले जो भगवान थे उन्होंने

159
00:11:09,360 --> 00:11:13,360
क्या कहा है एज इट इज उनकी बात का मतलब क्या था

160
00:11:13,360 --> 00:11:17,520
क्योंकि एक ही शब्द के कई अर्थ निकल सकते हैं। उनकी बात का

161
00:11:17,520 --> 00:11:22,080
सही वास्तविक अर्थ क्या था? यह उनसे जुड़ा हुआ प्रामाणिक

162
00:11:22,080 --> 00:11:24,800
रूप से जो उनका शिष्य है वह बताएगा।

163
00:11:24,800 --> 00:11:29,120
इसीलिए होती है ना परंपरा। फिर उन्होंने क्या कहा? उन्होंने

164
00:11:29,120 --> 00:11:33,680
क्या कहा? ये उनसे जुड़ा हुआ प्रामाणिक रूप से जो शिष्य है वो बताएगा।

165
00:11:33,680 --> 00:11:37,680
है ना? और फिर उन्होंने क्या कहा ये वो बताएगा। ठीक

166
00:11:37,680 --> 00:11:41,920
है? तो अब बात आप ये कह रहे हैं कि आपके यहां पर प्रभुपाद

167
00:11:41,920 --> 00:11:46,000
जी ने क्या कहा है? यह सीधे प्रभुपाद जी से जानो। आज वर्तमान में उनका

168
00:11:46,000 --> 00:11:52,000
कोई उत्तराधिकारी है ही नहीं और ना आगे होगा।

169
00:11:52,720 --> 00:11:57,360
यह परंपरा है।

170
00:11:57,360 --> 00:12:01,440
जी मैं इसमें आपको एक बात बता हां जी बिल्कुल मैं बताता हूं

171
00:12:01,440 --> 00:12:05,600
कि होता क्या है कि जो गुरु का आदेश होता है ना वो हमारे लिए सर्वोपरि

172
00:12:05,600 --> 00:12:09,600
होता है। गुरु ने जब आदेश दिया कि ऋतु परंपरा से इसको चलाया जाएगा।

173
00:12:09,600 --> 00:12:14,080
तो आप आप नहीं आप मेरी बात सुन लीजिए। आप मेरी भी बात सुन लीजिए। मैं

174
00:12:14,080 --> 00:12:18,320
बात आपकी मैं बात आपकी सुनूंगा। देखिए मैं बात आपकी सुनूंगा।

175
00:12:18,320 --> 00:12:22,640
देखिए होता क्या है? जैसे मैंने पूछा मैंने पूछा कि क्या

176
00:12:22,640 --> 00:12:26,880
इस कृष्ण और अल्लाह को एक मानता है? तो व्यक्ति ये कहने लगता

177
00:12:26,880 --> 00:12:31,040
है कि वहां देश में ऐसी प्रचार करना था ऐसा करना

178
00:12:31,040 --> 00:12:35,040
था। इसलिए उन्होंने ऐसा कहा। मैंने ये नहीं पूछा है। मैंने ये पूछा है कि

179
00:12:35,040 --> 00:12:39,120
क्या पहले मान्यता आप स्थापित करिए। तो कहने का मतलब है कि जो

180
00:12:39,120 --> 00:12:43,280
आपने अभी परंपरा की डेफिनेशन दी थी वही आप

181
00:12:43,280 --> 00:12:47,440
फॉलो कर रहे हो या उस डेफिनेशन के इत जाकर के अपने

182
00:12:47,440 --> 00:12:51,440
गुरु द्वारा कुछ नया सिस्टम दिया गया है वो आप फॉलो कर रहे हो

183
00:12:51,440 --> 00:12:55,840
यदि वो फॉलो कर रहे हो तो वो बाद की बात है कि वो गुरु की आज्ञा माननी है कि नहीं माननी

184
00:12:55,840 --> 00:12:59,840
एक मिनट भाई साहब एक मिनट पहले अपना क्लेम क्लियर करिए कि मैं

185
00:12:59,840 --> 00:13:04,080
कर क्या रहा हूं मैं अभी मैंने मेरे से जब परंपरा के बारे में पूछा गया

186
00:13:04,080 --> 00:13:08,240
तो मैंने बहुत अच्छे से परंपरा बताया कि परंपरा का महत्व यह

187
00:13:08,240 --> 00:13:12,480
है कि पूर्वाचार्यों ने जो कहा यानी कि जो ज्ञान

188
00:13:12,480 --> 00:13:16,560
है जो भगवान से प्रारंभ होते हुए पूर्वाचार्यों के माध्यम से हम

189
00:13:16,560 --> 00:13:20,560
तक आया है तो परंपरा का महत्व ये होता है कि पिछले पूर्वाचार्य ने

190
00:13:20,560 --> 00:13:24,640
क्या कहा है ये उनका प्रमाणिक शिष्य हमें बताएगा

191
00:13:24,640 --> 00:13:28,880
है ना ये आपने परंपरा का महत्व बताया परंतु जब परंतु

192
00:13:28,880 --> 00:13:32,960
जब आप ऋत्विक में आते हैं तो आप यह कहते हैं कि पूर्वाचार्य ने

193
00:13:32,960 --> 00:13:36,960
यह कहा है यह पूर्वाचार्य ही बताएंगे जो कि हमारे बीच में नहीं इस समय

194
00:13:36,960 --> 00:13:41,280
वर्तमान में कोई उनकी ओर से प्रामाणिक रूप से कुछ बताने वाला कोई नहीं है।

195
00:13:41,280 --> 00:13:45,600
यह आपने कहा। अब अगर अगर आप ऐसा मान रहे हैं और इसके

196
00:13:45,600 --> 00:13:49,840
मानने के लिए आपके पास एक कारण है। एक लॉजिकल

197
00:13:49,840 --> 00:13:53,920
कारण है। वो बात एक अलग है। पर पहले अपने ये क्लेम को क्लियर

198
00:13:53,920 --> 00:13:57,920
करो कि अब हम उस परंपरा वो जो परंपरा जो

199
00:13:57,920 --> 00:14:02,080
क्या कहते हैं? वो जो परंपरा की प्रक्रिया

200
00:14:02,080 --> 00:14:06,640
है आपके पास शोर हो रहा है। परंपरा

201
00:14:06,640 --> 00:14:10,720
की जो वो विधि है जो पहले से चली आ रही है जिसका मैंने अभी विवरण

202
00:14:10,720 --> 00:14:14,960
दिया था। मैं उसको नहीं मान रहा हूं। अब मैं अपने गुरु द्वारा दी गई एक नई परंपरा

203
00:14:14,960 --> 00:14:19,120
प्रणाली को मान रहा हूं। जो वो परंपरा प्रणाली ऐसा

204
00:14:19,120 --> 00:14:23,600
नहीं हां मैं अब मैं बोलूं।

205
00:14:23,600 --> 00:14:27,680
हां अब बोलिए। अपने क्लेम को पहले क्लियर करिए आप कि

206
00:14:27,680 --> 00:14:31,680
आप वही परंपरा प्रणाली को फॉलो कर रहे हैं या गुरु के द्वारा इजात

207
00:14:31,680 --> 00:14:35,840
की हुई कोई नए सिस्टम को फॉलो कर रहे हैं। एक्चुअली

208
00:14:35,840 --> 00:14:40,160
इसमें ऐसा होता है कि जब जब किसी आगे चलकर कोई परिस्थिति

209
00:14:40,160 --> 00:14:44,400
कुछ कुछ चीजें ऐसी आज इस जो है वो वर्ल्ड वाइड संस्था है

210
00:14:44,400 --> 00:14:48,560
वो कोई पर्टिकुलर एरिया में सिमटी हुई नहीं है तो उसके लिए क्या है कि ये

211
00:14:48,560 --> 00:14:52,720
सारी चीजों को ध्यान में रखते हुए ऋत्व परंपरा का सिस्टम अपनाया

212
00:14:52,720 --> 00:14:56,960
है ताकि जैसे दूसरे देशों के लोग भी होते थे सब देखो एक गुरु जाके दीक्षा

213
00:14:56,960 --> 00:15:01,040
देने में प्रॉब्लम तो इनहीं सारी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ही ऋत्व परंपरा

214
00:15:01,040 --> 00:15:06,000
का प्रभुपाद जी ने भाई साहब भाई साहब आप फिर से जो है

215
00:15:06,000 --> 00:15:10,400
अलग जा रहे हैं। मैंने कहा पहले आप अपना क्लेम वो करिए। आपने कहा

216
00:15:10,400 --> 00:15:14,400
कि परंपरा वो होती है जिसमें जो शिष्य होता है वो अपने पूर्वाचार्य

217
00:15:14,400 --> 00:15:18,400
की बात को बताने के लिए अधिकृत होता है। ठीक है? अब प्रभुपाद जी

218
00:15:18,400 --> 00:15:22,480
ने क्या कहा है इस बात को बताने के लिए कोई अधिकृत नहीं है। और आपको सीधे

219
00:15:22,480 --> 00:15:26,560
प्रभुपाद से ही जानना है। प्रभुपाद जी बीच में है नहीं। उनकी किताबें हैं। उनकी

220
00:15:26,560 --> 00:15:30,640
किताबों की उनकी किताबों की उनकी किताबों की एक एक लाइन के कई

221
00:15:30,640 --> 00:15:34,880
अर्थ निकाल सकते हैं। मैं निकाल सकता हूं। मैं अभी आपकी किताब से भगवत गीता

222
00:15:34,880 --> 00:15:38,960
से ही आपको जो है अद्वैत को मानने वाला बना दूंगा। जबकि अद्वैत तो आपके

223
00:15:38,960 --> 00:15:43,440
यहां माना नहीं गया है। कहने का मतलब निर्णय

224
00:15:43,440 --> 00:15:47,520
प्रभुपाद जी जब प्रेजेंट नहीं है तो उनकी किताब में क्या लिखा है इस बात का

225
00:15:47,520 --> 00:15:52,000
निर्णय करने के लिए वर्तमान में जो आपने जो परंपरा

226
00:15:52,000 --> 00:15:56,000
परंपरा प्रणाली बताई थी परंपरा प्राप्त ज्ञान को प्राप्त करने की

227
00:15:56,000 --> 00:16:00,000
वर्तमान में वो विधा आपके यहां लागू है कि हम निर्णय कर सके।

228
00:16:00,000 --> 00:16:04,320
प्रभुपाद जी ने यहां पे कहा क्या है? 525 में जी जी बिल्कुल बिल्कुल

229
00:16:04,320 --> 00:16:08,800
है बिल्कुल है क्योंकि प्रभुपाद जी के बाद प्रभुपाद जी के जो शिष्य थे प्रभुपाद

230
00:16:08,800 --> 00:16:13,200
जी के जो शिष्य थे तो जो जो हमारे वैष्णव सीनियर डिवोटी

231
00:16:13,200 --> 00:16:17,040
है वो इस सारी चीजों को

232
00:16:17,040 --> 00:16:21,120
मैंने आपसे प्रश्न क्या किया मैंने शुरू में प्रश्न क्या किया

233
00:16:21,120 --> 00:16:25,760
कि गौडिया वैष्णव संप्रदाय का गौडिया वैष्णव संप्रदाय का

234
00:16:25,760 --> 00:16:29,840
गौडिया वैष्णव संप्रदाय का कौन सा आचार्य है

235
00:16:29,840 --> 00:16:34,000
आपने कहा था हम गौडिया वैष्णव तो गडिया वैष्णव संप्रदाय का कौन सा

236
00:16:34,000 --> 00:16:38,080
आचार्य है जो आपका निर्णय कर रहा है? ठीक है?

237
00:16:38,080 --> 00:16:44,000
तो आपने कहा जी कर रहे हैं। अब आप आए हैं कोई सीनियर

238
00:16:44,000 --> 00:16:48,080
अब आप आए हैं कोई सीनियर डिवोटीजेंट है। [हंसी] वो रिप्रेजेंटेटिव है।

239
00:16:48,080 --> 00:16:52,240
वो प्रभुपाद जी के रिप्रेजेंटेटिव हो। वो सारे उनका कोई परिकुलर एक नाम

240
00:16:52,240 --> 00:16:56,240
नहीं है। एक नाम नहीं है। एक नाम नहीं है कि एक किसी

241
00:16:56,240 --> 00:16:58,480
एक पर्टिकुलर का वो सारे मिलके बता रहे हैं

242
00:16:58,480 --> 00:17:02,640
और वो सब अपने आप को प्रभुपाद जी का शिष्य कहते हैं और वो प्रभुपाद जी की शिक्षाओं

243
00:17:02,640 --> 00:17:06,720
को ही बताते हैं और हमें जब भी कोई चीज समझनी होती है हम उनसे ही

244
00:17:06,720 --> 00:17:10,880
समझते हैं। उन्हीं के पास जाते हैं कि प्रभुपाद जी ने इस पर क्या कहा। आपकी आवाज आपकी आवाज

245
00:17:10,880 --> 00:17:15,040
भी हां ठीक है यानी कि कुछ सीनियर डिवोटीज है एक नहीं

246
00:17:15,040 --> 00:17:19,280
है बहुत सारे हैं वो प्रपाद जी के वो प्रभुपाद जी के सीनियर

247
00:17:19,280 --> 00:17:23,360
डिवोटी है और वो जो है ये बता रहे हैं कि प्रभुपाद

248
00:17:23,360 --> 00:17:28,320
जी ने क्या कहा था ठीक है जी बिल्कुल जी

249
00:17:28,320 --> 00:17:33,440
तो यानी कि इस का निर्णयकर्ता एक नहीं है कई है

250
00:17:33,440 --> 00:17:37,440
बहुत सारे हैं नहीं ऐसा नहीं हो सकता ना क्योंकि वो

251
00:17:37,440 --> 00:17:41,440
तो सारे के सारे प्रभुपाद जी की शिक्षाओं को फॉलो कर रहे हैं। वो निर्णय करता थोड़ी है।

252
00:17:41,440 --> 00:17:46,000
वो तो उनकी शिक्षाओं को फॉलो कर रहे हैं और फॉलो करने वाला अपने अपनी विचारधारा

253
00:17:46,000 --> 00:17:50,080
थोड़ी लगाएगा। वो तो जैसा शिव प्रभुपाद जी ने कहा उनकी जो पुस्तकें

254
00:17:50,080 --> 00:17:54,320
है उनकी पुस्तकों के माध्यम से उनकी जो शिक्षा है उनको आगे बता रहे हैं। उनकी शिक्षाएं

255
00:17:54,320 --> 00:17:58,480
तो निर्णय की बात ही नहीं है ना। निर्णय की बात ही नहीं है। मैं बता रहा हूं। निर्णायक

256
00:17:58,480 --> 00:18:02,560
की बात है। निर्णायक की बात है। ऐसा नहीं है। ऐसा दूसरे

257
00:18:02,560 --> 00:18:06,640
अरे भाई वो सुनोगे कि नहीं सुनोगे? सुनोगे कि नहीं? मैं सुन रहा हूं।

258
00:18:06,640 --> 00:18:11,040
मैं बिल्कुल सुन रहा हूं। आपको हाइपर होने की जरूरत नहीं है। मैं भी शालीनता से

259
00:18:11,040 --> 00:18:13,520
नहीं नहीं नहीं मैं बिलकुल शालीनता

260
00:18:13,520 --> 00:18:17,520
से जवाब दे रहा हूं। मैं बीच में नहीं बोल रहा। आप जब कह रहे हैं मैं तभी बोल रहा हूं और आप

261
00:18:17,520 --> 00:18:21,760
जब कहोगे मैं तभी बोलूंगा और अभी आप म्यूट

262
00:18:21,760 --> 00:18:25,840
हो अब मुझे सुन लो। और म्यूट इसलिए किया कि आप बीच

263
00:18:25,840 --> 00:18:30,640
में इंटरप्ट कर देते हैं। हां तो

264
00:18:30,640 --> 00:18:34,880
आप यह कह रहे हो निर्णय करता कोई नहीं है। जबकि आपसे

265
00:18:34,880 --> 00:18:38,960
जब मैंने पूछा कि जब हमें यह जानना होगा कि इस बात के कई

266
00:18:38,960 --> 00:18:42,960
मतलब निकल रहे हैं तो हम किससे जाने? तो आपने

267
00:18:42,960 --> 00:18:47,040
कहा कि भाई कई सीनियर डिवोटीज हैं उनसे जानेंगे। वही होता है

268
00:18:47,040 --> 00:18:51,120
निर्णय। वही निर्णय करता है। एक मिनट अभी

269
00:18:51,120 --> 00:18:55,120
आप म्यूट हो। अभी आपकी आवाज नहीं आएगी। अभी आप म्यूट हो। तो

270
00:18:55,120 --> 00:18:59,280
निर्णय करने का मतलब कि एग्जैक्ट प्रभुपाद जी ने क्या कहा

271
00:18:59,280 --> 00:19:03,840
है? इस विषय में आपके कई लोग हैं जो यह

272
00:19:03,840 --> 00:19:08,080
निर्णय करते हैं कि प्रभुपाद जी ने क्या कहा है। दूसरी बात यह आती

273
00:19:08,080 --> 00:19:12,160
है कि अगर आपके हिसाब से कोई निर्णयकर्ता होना ही नहीं चाहिए

274
00:19:12,160 --> 00:19:16,480
था। तो यह जो गुरु शिष्य परंपरा की प्रणाली में

275
00:19:16,480 --> 00:19:20,720
जो करते चले आ रहे थे आचार्य गण अपना उत्तराधिकारी

276
00:19:20,720 --> 00:19:24,720
नियुक्त करते थे फिर वो उनका बताते थे अर्थ अगर मधवाचार्य परंपरा की

277
00:19:24,720 --> 00:19:28,480
बात करें तो उसमें जो

278
00:19:28,480 --> 00:19:29,280
मधवाचार्य

279
00:19:29,280 --> 00:19:33,440
जी के स्थान पर बैठते चले आ रहे हैं जो गुरुजन है हां

280
00:19:33,440 --> 00:19:37,440
तो वह सब व्यर्थ था कि कोई एक व्यक्ति निर्णय करता

281
00:19:37,440 --> 00:19:41,440
हो यह बताने के लिए कि माधवा माधवाचार्य जी ने एक्सजेक्टली कहा

282
00:19:41,440 --> 00:19:45,440
क्या है पहली बात दूसरी बात यह आती है कि

283
00:19:45,440 --> 00:19:49,520
कुल मिलाकर के बात यही आ गई घूम फिर के कि आपको आज की

284
00:19:49,520 --> 00:19:53,840
डेट में क्या मालूम है कि कौन सा गौडिया वैष्णव आचार्य

285
00:19:53,840 --> 00:19:57,920
है जो प्रभुपाद जी की बात को ज्यों की त्यों आपको बता

286
00:19:57,920 --> 00:20:02,240
रहा है। तीसरी बात यह आती है कि

287
00:20:02,240 --> 00:20:06,560
प्रभुपाद जी के आ जाने के बाद क्या इस अलग हो गया है

288
00:20:06,560 --> 00:20:10,640
गड या वैष्णव संप्रदाय से?

289
00:20:10,640 --> 00:20:13,360
बोलिए।

290
00:20:13,360 --> 00:20:17,360
प्रभुपाद जी के आने के बाद इस प्रभुपाद जी का ही रहा है। लेकिन

291
00:20:17,360 --> 00:20:22,000
कुछ विचारधाराओं को लेकर इस में दो दो भाग हो गए हैं।

292
00:20:22,000 --> 00:20:26,320
जैसे एक बोर में आता है और एक है मैंने ये पूछा है।

293
00:20:26,320 --> 00:20:30,480
मैंने पूछा है कि जो प्रभुपाद

294
00:20:30,480 --> 00:20:34,480
जी के आने के बाद इस या प्रभुपाद जी की आगे की जो

295
00:20:34,480 --> 00:20:38,720
मान्यता है वो गौडिया वैष्णव परंपरा से अलग हो चुकी है

296
00:20:38,720 --> 00:20:42,960
या गौडिया वैष्णव से जुड़ी हुई है अभी भी अगर जुड़ी हुई है

297
00:20:42,960 --> 00:20:46,960
तो इस का जो निर्णय करता है जो भी आप बता रहे हो जो

298
00:20:46,960 --> 00:20:51,520
सीनियर डिवोटीज क्या वो सलाह मशवरा लेने निर्देश लेने

299
00:20:51,520 --> 00:20:55,600
अपने से पूर्व की जो गद्दी है जिससे प्रभुपाद जी जुड़े हुए

300
00:20:55,600 --> 00:20:59,600
थे। क्या उनके पास जा रहे हैं। उनके कंट्रोल में है?

301
00:20:59,600 --> 00:21:03,600
अगर नहीं है तो फिर कैसे माना जाए कि वह गिया वैष्णव संप्रदाय से जुड़ा

302
00:21:03,600 --> 00:21:08,080
हुआ है। अगर जुड़ा हुआ है तो किससे जुड़ा हुआ है? बताइए।

303
00:21:08,080 --> 00:21:12,080
कौन सी कथा? मैं बताता हूं। जी ग

304
00:21:12,080 --> 00:21:16,320
वैष्णव परंपरा में जो श्री प्रभुपाद जी हमारे लास्ट गुरु थे। उसमें जैसे

305
00:21:16,320 --> 00:21:20,320
आज के समय में अगर हमको कोई चीज सलाह लेनी होती है जैसे सीनियर डिवोटी

306
00:21:20,320 --> 00:21:24,560
को तो जो प्रभुपाद जी के जो शिष्य रहे उस समय प्रभुपाद

307
00:21:24,560 --> 00:21:28,560
जी ने जिनको अपने हाथों से दीक्षा दी थी प्रभुपाद जी ने जिनके साथ

308
00:21:28,560 --> 00:21:32,800
उनका बैठना उठना सारी चीजें उन्होंने पर्सनली जिनको बताई थी तो

309
00:21:32,800 --> 00:21:37,040
उन उनसे कुछ सीनियर जो हमारे डिवोटी है इस समय उन्होंने

310
00:21:37,040 --> 00:21:41,120
दीक्षा ली उनसे सीखे और जो चीज वो बताते हैं वही एक्चुअल चीज

311
00:21:41,120 --> 00:21:45,280
हमको बताते हैं और वही वहीं से हमारी जो सलाह की जो

312
00:21:45,280 --> 00:21:49,600
होती है वही से होती है। हो गया

313
00:21:49,600 --> 00:21:53,760
अब मैं बोलूं? जी बिल्कुल हो गया। जी बिल्कुल बोलिए। प्रभुपाद

314
00:21:53,760 --> 00:21:59,120
जी गडिया वैष्णव संप्रदाय के किस परिवार से जुड़े हुए थे?

315
00:21:59,120 --> 00:22:03,200
ग वैष्णव किस परिवार से? ग वैष्णव का तो एक ही परिवार था। पूरा

316
00:22:03,200 --> 00:22:07,840
एक ही परिवार था। वर्तमान

317
00:22:07,840 --> 00:22:11,920
वर्तमान में गड़िया वैष्णव संप्रदाय के आचार्य हैं कि नहीं है। वर्तमान में

318
00:22:11,920 --> 00:22:15,600
जीवित?

319
00:22:15,600 --> 00:22:19,600
जी अभी जो ग वैष्णव के जो लास्ट आचार्य थे वो चल प्रभुपाद

320
00:22:19,600 --> 00:22:23,760
जी है और उन्होंने अभी वो शारीरिक रूप से आध्यात्मिक रूप से तो

321
00:22:23,760 --> 00:22:28,240
अवेलेबल है लेकिन शारीरिक रूप से वो अभी है नहीं उनके अलावा उनके अलावा

322
00:22:28,240 --> 00:22:34,080
कोई है गड या वैष्णव संप्रदाय का जो वर्तमान में आचार्य हो

323
00:22:34,080 --> 00:22:38,640
हमारी उसमें तो हमने ग वैष्णव

324
00:22:38,640 --> 00:22:42,720
ग वैष्णव परंपरा की भी कई शाखाएं निकल चुकी है तो मैं उसके बारे में कोई दावा नहीं करूंगा कुछ

325
00:22:42,720 --> 00:22:46,720
नहीं बोलूंगा उसके बारे में मुझे कुछ बताना। इसका मतलब ये है

326
00:22:46,720 --> 00:22:50,880
इसका इसका इसका मतलब यह है इसका अर्थ

327
00:22:50,880 --> 00:22:55,120
यह है कि गौडिया वैष्णव संप्रदाय से ज्ञान विज्ञान प्राप्त

328
00:22:55,120 --> 00:22:59,120
करते हैं श्रील प्रभुपाद जी फिर वो अपना एक कैंप बनाते हैं जिसको

329
00:22:59,120 --> 00:23:03,280
नाम देते हैं इसके बाद उस में सारी चीजें वो चलती

330
00:23:03,280 --> 00:23:07,280
है जो यह तय करेंगे प्रभुपाद जी और वो भी अब चले गए तो अब उसके बाद जो

331
00:23:07,280 --> 00:23:11,520
उनके नाम से बताने वाले हैं जिनका आपने नाम लिया 20 21 लोग वो या

332
00:23:11,520 --> 00:23:15,920
और ज्यादा हो संख्या में वो तय करेंगे उनका अब गड वैष्णव संप्रदाय

333
00:23:15,920 --> 00:23:20,160
के लोगों से कोई मतलब नहीं है कि उनका कोई हस्तक्षेप हो। इस

334
00:23:20,160 --> 00:23:26,160
में क्या होगा, क्या नहीं होगा या है हस्तक्षेप?

335
00:23:26,160 --> 00:23:30,320
आप बात को थोड़ा समझे नहीं। मैं इसमें बता देता हूं। क्लियर कर देता

336
00:23:30,320 --> 00:23:34,400
हूं। शील प्रभुपाद वही चीजें लागू बात बात क्या

337
00:23:34,400 --> 00:23:38,480
है? मैं बता दूं आपको क्लियर। गडिया वैष्णव संप्रदाय के कई

338
00:23:38,480 --> 00:23:42,480
प्रामाणिक आचार्य आज भी अवेलेबल हैं। ठीक

339
00:23:42,480 --> 00:23:46,480
है? आपके प्रभुपाद जी अगर अपना उत्तराधिकारी घोषित नहीं

340
00:23:46,480 --> 00:23:50,480
करके गए तो कोई बात नहीं। गौडिया वैष्णव संप्रदाय के आचार्य गण

341
00:23:50,480 --> 00:23:54,560
बैठे हुए हैं। तो उनका हस्तक्षेप है कि नहीं? इस

342
00:23:54,560 --> 00:23:59,360
में ऋत्विक में और नहीं है तो फिर काहे कि गौडिया वैष्णव संप्रदाय

343
00:23:59,360 --> 00:24:03,680
नहीं है तो फिर कैसे हुआ? या तो कह दो वो ग वैष्णव नहीं है।

344
00:24:03,680 --> 00:24:07,760
जो लोग बैठे हुए हैं वह अप्रामाणिक है। पुंडरीिक जी इत्यादि ये सब लोग

345
00:24:07,760 --> 00:24:10,640
हां

346
00:24:10,640 --> 00:24:14,720
जी बिल्कुल नहीं मैं ऐसा किसी के लिए नहीं कहता। मैं पहले ही मैंने आपको क्लियर कर दिया

347
00:24:14,720 --> 00:24:19,040
था कि वो क्या उनके बारे में मेरे को जानकारी नहीं है तो मैं उनके बारे में कोई कमेंट नहीं करूंगा।

348
00:24:19,040 --> 00:24:23,120
मैं एक बात बताता हूं कि सरस्वती ठाकुर ने प्रभुपाद जी को अपना ऑथेंटिक

349
00:24:23,120 --> 00:24:27,200
शिस्से बनाया है और उनको उनको विश्व में प्रचार करने का

350
00:24:27,200 --> 00:24:31,200
अधिकार दिया था। आदेश दिया था कि आप जाओ विश्व में भागवतम

351
00:24:31,200 --> 00:24:35,680
और भगवत गीता का प्रचार करो और उसी आदेश का प्रभुपाद जी ने पालन

352
00:24:35,680 --> 00:24:39,840
तो थोड़ा सा क्या है बहुत सारी बातें एक साथ बोल देने

353
00:24:39,840 --> 00:24:45,360
से क्या होता है कि कोई भी चीज क्लियर ही नहीं हो पाती है

354
00:24:45,360 --> 00:24:49,360
उन्होंने प्रचार किया क्यों किया वो एक अलग बात है। हम नमन करते हैं

355
00:24:49,360 --> 00:24:53,600
उनकी भक्ति को वो जो प्रचार करते हैं उस चीज को उतने अंश में उनका सम्मान

356
00:24:53,600 --> 00:24:58,480
है। सब कुछ है। उन्होंने हरे कृष्ण का जाप किया करा करवाया बहुत अच्छी बात है।

357
00:24:58,480 --> 00:25:02,560
मगर बात यहां पर यह हो रही है कि आपने जिस प्रकार से शुरुआत

358
00:25:02,560 --> 00:25:06,720
की है कि गड या वैष्णव संप्रदाय से हम अब आप कह रहे हो इस विषय

359
00:25:06,720 --> 00:25:10,800
में मुझे जानकारी नहीं बस यही बात थी जो शुरू से रखनी

360
00:25:10,800 --> 00:25:14,880
थी आपने ही शुरू में कहा था ना अब आप यह कह रहे हो कि गौडिया वैष्णव

361
00:25:14,880 --> 00:25:19,040
से उन्होंने उनको अधिकार किया जब जो फाइनल अथॉरिटी है

362
00:25:19,040 --> 00:25:23,200
जैसे शंकराचार्य जी है मान लीजिए शंकराचार्य जी

363
00:25:23,200 --> 00:25:25,680
के कई शिष्य होते हैं शंकराचार्य जी के

364
00:25:25,680 --> 00:25:29,760
या मधवाचार्य जी के कई शिष्य होते हैं। उन्होंने उनमें

365
00:25:29,760 --> 00:25:33,920
से किसी एक शिष्य ने अपनी एक संस्था बना ली। इस इत्यादि उनको कहा कि

366
00:25:33,920 --> 00:25:38,000
भाई यह संस्था विशेष रूप से जो कार्य करेगी अपने

367
00:25:38,000 --> 00:25:42,320
धर्म का प्रचार प्रसार करेगी अच्छी बात है। पर जो

368
00:25:42,320 --> 00:25:46,800
जिस अथॉरिटी से वो ऑथेंटिक हुए थे, वेरीिफाइड

369
00:25:46,800 --> 00:25:50,960
हुए थे, सत्यापित हुए थे, वो अथॉरिटी खत्म नहीं हो गई। वो

370
00:25:50,960 --> 00:25:55,200
अथॉरिटी पीढ़ी दर पीढ़ी आज भी चली आ रही है। ठीक है? तो

371
00:25:55,200 --> 00:25:59,520
अगर उन्होंने कोई एक अलग से संस्था बना ली है और

372
00:25:59,520 --> 00:26:03,600
उसमें कुछ ऐसा हो रहा है जो गौ वैष्णव पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही तो यह जो

373
00:26:03,600 --> 00:26:07,920
पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है यह परंपरा से प्राप्त जो गद्दी

374
00:26:07,920 --> 00:26:12,080
है यह उसमें हस्तक्षेप करने के लिए ऑथराइज्ड है क्योंकि यह पीढ़ी

375
00:26:12,080 --> 00:26:16,160
दर पीढ़ी अवेलेबल ऐसा नहीं है गायब हो गई अब जिसका जो मना है वो करे ऐसा तो

376
00:26:16,160 --> 00:26:20,160
है नहीं वो तो अवेलेबल है तो गड़िया वैष्णव संप्रदाय के

377
00:26:20,160 --> 00:26:24,400
जब प्रामाणिक आचार्य अवेलेबल है तो आपके यहां पर उनका हस्तक्षेप

378
00:26:24,400 --> 00:26:28,640
होना चाहिए जो कि नहीं है। प्रभुपाद जी के नाम पर आप अपनी मनमर्जी

379
00:26:28,640 --> 00:26:32,720
की कर रहे हैं। जबकि यहां पर निर्णय करने के लिए गड या वैष्णव संप्रदाय के आचार्य गण

380
00:26:32,720 --> 00:26:36,800
अवेलेबल है। अब वो वो प्रचार क्यों किया?

381
00:26:36,800 --> 00:26:40,720
उसके लिए कोई क्वेश्चन नहीं है। क्वेश्चन यह है कि यदि आप अपने आप को गड़िया

382
00:26:40,720 --> 00:26:44,960
वैष्णव संप्रदाय का से कनेक्टेड कह रहे हैं प्रामाणिक।

383
00:26:44,960 --> 00:26:48,960
तो क्या गड़िया वैष्णव आचार्यों का अधिकार है आपके यहां की चीजों

384
00:26:48,960 --> 00:26:54,960
में दखलंदाजी करने का? यह बात बोलिए।

385
00:26:56,400 --> 00:27:00,400
जी उनको नहीं है। लेकिन मैं इस संबंध में आपसे एक चीज पूछना चाहता

386
00:27:00,400 --> 00:27:05,120
हूं। अगर आप मेरे को आज्ञा दे तो मैं पूछूं। हां पूछ आपने कहा कि

387
00:27:05,120 --> 00:27:09,120
उनको अधिकार है हस्तक्षेप करने का तो मैं भी ना कर रहा हूं कि नहीं है। है ना?

388
00:27:09,120 --> 00:27:13,360
अब मैं इस चीज में आपको एक बात पूछ रहा हूं। अभी आपने एक चीज बोली कि ग

389
00:27:13,360 --> 00:27:17,840
वैष्णव परंपरा में बहुत सारे प्रमाणिक गुरु अभी बैठे हैं। है ना? तो वो

390
00:27:17,840 --> 00:27:21,920
किस सेंस में आप यह बात बोल रहे हो कि वो बड़ी संस्था है या पुरानी है या

391
00:27:21,920 --> 00:27:26,560
लोकप्रियता है या

392
00:27:26,560 --> 00:27:31,120
आपकी आवाज रुक रही है

393
00:27:31,120 --> 00:27:33,840
अब आ रही है

394
00:27:33,840 --> 00:27:38,240
मेरी वॉइस आ रही है वॉइस आ रही है मेरी पिक्चर फ्रीज हो गई है आपकी

395
00:27:38,240 --> 00:27:42,240
थोड़ा सा अच्छा अच्छा एक्चुअली यहां थोड़ा नेटवर्क का इशू है

396
00:27:42,240 --> 00:27:46,480
हां नेटवर्क का इशू रहता है इस वजह से तो मैं एक चीज पूछ रहा

397
00:27:46,480 --> 00:27:50,800
आपसे कि आपने जो कहा कि गुरु बहुत सारे प्रमाणिक आचार्य

398
00:27:50,800 --> 00:27:55,040
बैठे हुए हैं तो वो किस सेंस में मैं जानना चाहता हूं कि

399
00:27:55,040 --> 00:27:59,120
क्या वो बड़ी गद्दी पे बैठे हैं इसलिए बड़ी

400
00:27:59,120 --> 00:28:03,280
गद्दी पे नहीं प्रामाणिक रूप से उत्तराधिकारी नियुक्त है प्रामाणिक रूप से

401
00:28:03,280 --> 00:28:07,280
जैसे कोई आचार्य जाता है तो अपना उत्तराधिकारी फिक्स करके जाता है ना

402
00:28:07,280 --> 00:28:12,000
ऐसे बहुत सारे आचार्य गौ वैष्णव संप्रदाय के अभी भी हैं।

403
00:28:12,000 --> 00:28:16,000
आपके यहां पर कोई नियुक्त नहीं करके गए प्रभुपाद जी किसी

404
00:28:16,000 --> 00:28:20,320
को तो आपके यहां पर इनका हस्तक्षेप क्यों नहीं है प्रामाणिक वैष्णवाचार्यों

405
00:28:20,320 --> 00:28:22,960
का

406
00:28:22,960 --> 00:28:27,040
मुझे मैं एक बात जानना चाहता हूं एक बात बोलूं अब जब

407
00:28:27,040 --> 00:28:31,440
सरस्वती ठाकुर हमारे गुरु जी के जो गुरु थे है ना

408
00:28:31,440 --> 00:28:35,440
तो उस समय उस समय से ही यह चीज हुई कि

409
00:28:35,440 --> 00:28:39,600
बहुत सारे जो शिष्य थे वो अलग से ही ग वैष्णव परंपरा से अलग निकल के उन्होंने

410
00:28:39,600 --> 00:28:41,600
अपने मत शुरू कर दिए थे अब कौन

411
00:28:41,600 --> 00:28:46,160
प्रमाणिक है क्या उस अभी मैं बात नहीं करूंगा लेकिन प्रभुपाद को

412
00:28:46,160 --> 00:28:50,320
सरस्वती ठाकुर नहीं करेंगे करिए ना आप ये मुझे आप एक बात

413
00:28:50,320 --> 00:28:54,480
बताइए मुझे मुझे एक बात बताइए चलो मुझे एक बात बताइए क्या क्या

414
00:28:54,480 --> 00:28:58,720
प्रभुपाद जी सरस्वती ठाकुर के शिष्य नहीं है क्या

415
00:28:58,720 --> 00:29:02,880
उन्होंने उनको आदेश नहीं दिया है ये सारी चीजें प्रभुपाद जी ने

416
00:29:02,880 --> 00:29:07,280
क्या कहा है इस बारे में निर्णायक कौन होगा नहीं

417
00:29:07,280 --> 00:29:11,440
नहीं मैं ये कह रहा हूं मेरा सवाल नहीं मेरा सवाल यह है कि क्या प्रभुपाद भी

418
00:29:11,440 --> 00:29:15,600
सरस्वती ठाकुर के शिष्य नहीं है तो प्रभुपाद जी वही धर्म देंगे

419
00:29:15,600 --> 00:29:19,680
ना जो पीछे से चला आ रहा है कि नया धर्म तो क्या उन्होंने

420
00:29:19,680 --> 00:29:23,680
उन्होंने तो नया धर्म कहां दिया उन्होंने आदेश दिया ना उन्होंने जो आदेश दिया उसी की तो

421
00:29:23,680 --> 00:29:28,000
पालना की जा रही है इनमें से जो अभी आचार्य बैठे हैं मेरी बात एक बार मैं कंप्लीट कर

422
00:29:28,000 --> 00:29:32,240
एक मिनट एक मिनट मैं कंप्लीट कर अभी जो आचार्य बैठे हैं जिनका

423
00:29:32,240 --> 00:29:36,640
आपने आपने मुझसे प्रश्न पूछा है कि क्या वो उनके शिष्य नहीं है

424
00:29:36,640 --> 00:29:40,800
उनके शिष्य होने से वर्तमान में जो इस के आप निर्णायकर्ता बोल बोल

425
00:29:40,800 --> 00:29:44,800
रहे हो उनका प्रामाणिक होना और प्रामाणिक रूप से गड वैष्णव

426
00:29:44,800 --> 00:29:48,960
संप्रदाय को फॉलो करने वाला होना और प्रामाणिक रूप से प्रभुपाद

427
00:29:48,960 --> 00:29:53,120
जी की बातों को एज इट इज बताना सिद्ध नहीं होता है और इसीलिए निर्णय करने

428
00:29:53,120 --> 00:29:56,880
के लिए गुरु शिष्य परंपरा होती है कि भाई मेरा उत्तराधिकारी

429
00:29:56,880 --> 00:30:01,120
जो होगा मेरा जो प्रामाणिक शिष्य होगा वो तुम्हें वो बताएगा जो मैंने कहा है। उसके

430
00:30:01,120 --> 00:30:05,120
बाद वो जब जाएगा तो वो उसका प्रामाणिक उत्तराधिकारी होगा वो तुम्हें वो बताएगा

431
00:30:05,120 --> 00:30:09,120
जो उसने कहा है। इसलिए गुरु शिष्य परंपरा होती है। अब आपने

432
00:30:09,120 --> 00:30:13,200
कहा कि प्रभुपाद जी ने प्रामाणिक रूप से उनसे सरस्वती जी से शिक्षा

433
00:30:13,200 --> 00:30:17,440
ली। ठीक है। उसमें कोई दिक्कत नहीं। ली है। मगर अब उनकी बातों को प्रभुपाद

434
00:30:17,440 --> 00:30:21,600
जी की बातों को बताने वाला एज इट इज प्रभुपाद जी नियुक्त करके गए

435
00:30:21,600 --> 00:30:26,320
नहीं है। दूसरी बात जो प्रामाणिक वैष्णवाचार्य हैं अवेलेबल

436
00:30:26,320 --> 00:30:30,320
जो आपने थोड़ा सा अप्रत्यक्ष रूप से आरोप लगाया कि बहुत सारे लोग थे अपने अपने

437
00:30:30,320 --> 00:30:34,400
मत चालू करने लग गए थे। तो आप यह कहिए ना कि गड़ वैष्णव संप्रदाय का

438
00:30:34,400 --> 00:30:38,480
प्रामाणिक रूप से कोई भी आज वर्तमान में प्रामाणिक नहीं है। इसलिए कोई हम

439
00:30:38,480 --> 00:30:42,960
किसी का हस्तक्षेप नहीं करने यह घोषित करिए

440
00:30:42,960 --> 00:30:47,120
और और प्रभुपाद सीधे

441
00:30:47,120 --> 00:30:51,280
क्वेश्चन पे आए। प्रभुपाद जी के प्रामाणिक रूप से ज्ञान विज्ञान प्राप्त करने

442
00:30:51,280 --> 00:30:55,360
से प्रभुपाद जी के नाम पर जो आज जो ऋतिक में दे रहे हैं निर्णय दे

443
00:30:55,360 --> 00:30:59,440
रहे हैं। हालांकि आप यह भी कह रहे हो वो निर्णय नहीं दे वो तो शिक्षा दे रहे हैं। ऐसे तो फिर

444
00:30:59,440 --> 00:31:03,680
बिना गुरु परंपरा के कोई भी कह सकता है मैं तो शिक्षा दे रहा हूं। मैं निर्णय दे ही नहीं रहा हूं। यह तो सीधे

445
00:31:03,680 --> 00:31:08,960
आपके गुरु कृष्ण है। मैं बोलूं

446
00:31:08,960 --> 00:31:12,080
कोई भी शिष्य होता है वो अपना निर्णय नहीं देता। वो जो

447
00:31:12,080 --> 00:31:16,160
अपने गुरु की जो शिक्षाएं होती है उन्हीं को आगे बढ़ाता है। उन्हीं को अच्छे से समझाते

448
00:31:16,160 --> 00:31:21,200
हैं। इसलिए यह कहना है कि वो उनका अपना निर्णय मैं इस बात को नहीं।

449
00:31:21,200 --> 00:31:25,200
फिर गुरु शिष्य परंपरा की आवश्यकता क्या रह जाएगी? अगर कोई

450
00:31:25,200 --> 00:31:30,320
भी वह नहीं करता है तो फिर गुरु शिष्य परंपरा की आवश्यकता क्या है?

451
00:31:30,320 --> 00:31:34,320
कोई भी ऐसा करता ही नहीं जब कोई मिलावट कर ही नहीं सकता है अपने गुरु की

452
00:31:34,320 --> 00:31:38,400
बातों में तो कोई भी कर सकता है। फिर तो कोई भी बात बता सकता है। मैं कह दूं मेरे गुरु श्री

453
00:31:38,400 --> 00:31:44,400
कृष्ण है। उनकी बात मैं बता रहा हूं आपको। हम

454
00:31:48,640 --> 00:31:52,960
एक एक मिनट एक मिनट मानेंगे।

455
00:31:52,960 --> 00:31:56,960
मालूम है उनको लेकिन मेरी आपसे एक रिक्वेस्ट है कि आप मेरे को पूरा बोलने दिया

456
00:31:56,960 --> 00:32:01,040
करो। आप माइक को म्यूट मत किया करो। इससे क्या है कि मेरे को मैं अपनी पूरी बात

457
00:32:01,040 --> 00:32:05,040
अच्छे से रख नहीं पाता हूं। मेरी पूरी बात खत्म हो जाए। आप मेरे को म्यूट कर देते

458
00:32:05,040 --> 00:32:09,120
हो। आपके बीच में अगर मैं थोड़ा सा भी एक शब्द भी बोल जाऊं तो आप मेरे को मेरे को चुप करा

459
00:32:09,120 --> 00:32:13,200
देते हो। तो मैं जब अपनी बात रख रहा हूं तो मैं भी करता

460
00:32:13,200 --> 00:32:18,240
हूं कि मेरे को आप पूरी मेरी अपनी पूरी बात रखने दो। बोलो।

461
00:32:18,240 --> 00:32:22,240
आप जब आप जब व्यर्थ में बोलते हैं, एक्स्ट्रा बोलते हैं,

462
00:32:22,240 --> 00:32:26,240
अनावश्यक बोलते हैं तो मुझे आपको याद दिलाना पड़ता है कि आप

463
00:32:26,240 --> 00:32:30,480
जो है अनावश्यक ना बोले, उससे हम लोग भटक जाएंगे मामले से। दूसरी बात

464
00:32:30,480 --> 00:32:34,480
आपने शुरू में कई बार मेरे बीच में बोलते समय आपने प्रश्न कर लिया और मैं

465
00:32:34,480 --> 00:32:38,480
बोल रहा हूं और बोलते समय आपने बीच में ये सब चालू किया तब मुझे आपको म्यूट

466
00:32:38,480 --> 00:32:42,720
करना पड़ा। अब मैं दोबारा से एक काम करता हूं। अब मैं थोड़ी देर तक म्यूट नहीं करूंगा।

467
00:32:42,720 --> 00:32:46,960
मगर मैं देखूंगा कि आप ऐसा ना करें कि आप मुझे काटे जब मैं बोल रहा हूं। जी

468
00:32:46,960 --> 00:32:50,640
बोलिए

469
00:32:50,640 --> 00:32:52,800
बोलिए

470
00:32:52,800 --> 00:32:56,800
हां आपने एक चीज कही कि अभी इस में कोई भी निर्णायक करता नहीं

471
00:32:56,800 --> 00:33:00,960
है यानी कि प्रभुपाद जी की जो शिक्षा है वो एज इट इज है कि नहीं है उसको बताने

472
00:33:00,960 --> 00:33:05,120
वाला कौन है और अपना मैं यहां पर एक चीज क्लियर करना चाहता

473
00:33:05,120 --> 00:33:09,120
हूं कि जो भी जो भी अपने गुरु के शिष्य होते हैं वो अपनी तरफ से कोई निर्णय को किसी

474
00:33:09,120 --> 00:33:13,360
के ऊपर थोपते नहीं है। वह अपने गुरु की शिक्षाओं को ही आगे अपने जो

475
00:33:13,360 --> 00:33:17,440
जो जूनियर डिवोटी है उनको बताते हैं और उन्हीं की शिक्षाओं का प्रचार प्रसार करते

476
00:33:17,440 --> 00:33:21,600
हैं। इसलिए मेरा यह मानना बिल्कुल भी नहीं है कि वो अपने निर्णय को थोप रहे हैं। बिल्कुल

477
00:33:21,600 --> 00:33:25,760
भी नहीं है। हां इस विषय में आपकी क्या विचारधारा वो अलग बात हो सकती है। ठीक है।

478
00:33:25,760 --> 00:33:29,760
ठीक है। ठीक है। अब इतनी बात पे ही बात करेंगे। अब इससे आगे मत बढ़िए। इतनी ही बात की है मैंने।

479
00:33:29,760 --> 00:33:34,000
मैं इतनी रुक गया। इतनी बात बोल के मैं रुक गया। मैं आगे नहीं बढ़ रहा।

480
00:33:34,000 --> 00:33:38,080
ठीक है। ठीक है। तो जो भी शिष्य होते हैं वो

481
00:33:38,080 --> 00:33:42,160
अपनी गुरु की चीजों को एज इट इज आगे बढ़ाते हैं। ऐसा नहीं करते

482
00:33:42,160 --> 00:33:47,520
हैं कि वह उसमें मिलावट करें। जी बिल्कुल।

483
00:33:47,520 --> 00:33:51,760
तो फिर मिलावट की किसने शास्त्रों में? कौन करता है? शास्त्रों

484
00:33:51,760 --> 00:33:55,840
में मिलावट? हां। शास्त्रों में मिलावट कौन करता है? कौन से

485
00:33:55,840 --> 00:33:59,920
शास्त्रों में आपने आपने परंपरा की आवश्यकता बताई ना कि परंपरा की

486
00:33:59,920 --> 00:34:04,400
आवश्यकता इसलिए है क्योंकि शास्त्रों में मिलावट हो जाती है। इसलिए जो प्रामाणिक

487
00:34:04,400 --> 00:34:06,080
मैंने मैंने मैंने

488
00:34:06,080 --> 00:34:10,240
नहीं मैंने कभी ये नहीं कहा कि शास्त्रों में मिलावट हो जाती है। समझने के पपस से मैंने कभी

489
00:34:10,240 --> 00:34:14,240
ये नहीं कहा कि शास्त्रों में मिलावट हो जाती है। आपने एक चीज कही ना कि एक ही शब्द के कई

490
00:34:14,240 --> 00:34:18,240
अर्थ निकल सकते हैं। तो उस सेंस में क्या है कि उस शब्द का एक्चुअल अर्थ क्या

491
00:34:18,240 --> 00:34:22,320
है? इसको समझने के लिए हमें गुरु शिष्य परंपरा चाहिए होती है। मैंने यह कभी नहीं

492
00:34:22,320 --> 00:34:26,720
कहा कि शास्त्रों में मिलावट हो जाती है। ये तो आप बोल रहे हो। हो गया

493
00:34:26,720 --> 00:34:31,040
हो गया। समझने के समझने के पपस में मान लेते हैं।

494
00:34:31,040 --> 00:34:35,200
समझने के पपस में ऐसा हो सकता है कि गुरु ने जो कहा वो शिष्य

495
00:34:35,200 --> 00:34:39,440
कुछ और बता रहा हो। ऐसा हो सकता है? नहीं शिष्य

496
00:34:39,440 --> 00:34:43,520
नहीं बताएगा लेकिन शिष्य परंपरा से हटकर अगर कोई और से अगर इस बात में पूछेंगे

497
00:34:43,520 --> 00:34:47,680
तो वो बता सकते हैं। ये ये अंडेशा रहता है। इस वजह से हमें गुरु शिष्य

498
00:34:47,680 --> 00:34:51,680
परंपरा की आवश्यकता है क्योंकि गुरु से जो शिष्य तो एक एक मिनट शिष्य

499
00:34:51,680 --> 00:34:56,080
से हटकर और कोई अगर बताएगा तो वो अगर जो बताएगा उसमें मिलावट

500
00:34:56,080 --> 00:35:00,160
हो सकती है। मगर जो ये गुरु से जो शिष्य जुड़ा होगा उसमें मिलावट नहीं

501
00:35:00,160 --> 00:35:04,240
हो सकती है। देखो पहली बात तो ये कि मिलावट शब्द का मैंने कभी प्रयोग नहीं

502
00:35:04,240 --> 00:35:08,400
किया। मिलावट शब्द आप प्रयोग कर रहे हैं। मैं बात कर रहा हूं समझने की क्योंकि मैं

503
00:35:08,400 --> 00:35:12,880
मैं समझने में मिलावट की ही बात कर रहा हूं। आप क्यों घुमा रहे हैं बात को?

504
00:35:12,880 --> 00:35:16,880
मैं समझ में मिलावट की बात नहीं मिलावट आप मिलावट क्यों तो आप यही बोल दो

505
00:35:16,880 --> 00:35:20,880
ना फिर कि समझने में फिर समझने में भेद हो सकता है। आप यही बोल दो फिर

506
00:35:20,880 --> 00:35:21,380
मिलावट

507
00:35:21,280 --> 00:35:25,280
क्यों बोल रहे हो फिर? किसी का हो सकता है उसको समझने में ऐसा लग रहा हो।

508
00:35:25,280 --> 00:35:28,320
मिलावट तो

509
00:35:28,320 --> 00:35:32,640
मैं वह बोलूं जो आप कह रहे हैं। समझने में मिलावट

510
00:35:32,640 --> 00:35:36,880
भी वही है जो समझने में मिलावट का अर्थ भी वही है जो समझने

511
00:35:36,880 --> 00:35:41,200
में भेद का अर्थ है। आप शब्द को पकड़ के परेशान मत होइए।

512
00:35:41,200 --> 00:35:45,280
समझने में मिलावट का अर्थ भी मेरा वही है जो समझने में भेद का अर्थ है। मिलावट

513
00:35:45,280 --> 00:35:50,080
मतलब जो गुरु ने कहा वह आपको नहीं मिला। दूसरी चीज मिली। यह हो गई मिलावट।

514
00:35:50,080 --> 00:35:54,080
बात खत्म। तो ऐसा हो सकता है कि जो गुरु ने

515
00:35:54,080 --> 00:35:58,160
कहा हो जो ऐसा हो सकता है कि जो गुरु ने कहा हो

516
00:35:58,160 --> 00:36:02,240
वह शिष्य ना बताए बल्कि उसमें कुछ समझ में कुछ उलट पुलट करके

517
00:36:02,240 --> 00:36:08,240
कुछ और बता दे ऐसा हो सकता है कि नहीं

518
00:36:08,640 --> 00:36:14,640
बताइए

519
00:36:15,120 --> 00:36:19,200
हां अगर गुरु शिष्य गुरु शिष्य परंपरा से बाहर से अगर हम ज्ञान लेंगे

520
00:36:19,200 --> 00:36:23,440
किसी और से तो ऐसा बिल्कुल हो सकता अच्छा ये डिसाइड कैसे

521
00:36:23,440 --> 00:36:27,600
होगा कि कौन अगर हम गुरु शिष्य परंपरा से बाहर से ज्ञान लेने की कोशिश करेंगे तो जी बिल्कुल

522
00:36:27,600 --> 00:36:31,840
ऐसा हो सकता है। ये डिसाइड ये डिसाइड कैसे होगा कि कौन गुरु शिष्य परंपरा

523
00:36:31,840 --> 00:36:35,920
के बाहर है कौन अंदर है? जब दोनों ये कहे कि मैं भी जुड़ा हुआ हूं उनसे। जब दोनों

524
00:36:35,920 --> 00:36:41,920
ये कहे कि मैं भी उनका ही शिष्य हूं। आपकी वॉइस

525
00:36:42,000 --> 00:36:46,080
आपकी वॉइस थोड़ी कट रही है। मुझे आप एक बार दोबारा बताएंगे आप। मैं कह

526
00:36:46,080 --> 00:36:49,360
रहा हूं आपका वीडियो

527
00:36:49,360 --> 00:36:53,440
यानी कि सबसे पहली बात तो यह है कि गुरु की बात का अर्थ क्या है? इस बात का

528
00:36:53,440 --> 00:36:57,600
निर्णय करने के लिए गुरु के प्रामाणिक शिष्य ही अधिकृत

529
00:36:57,600 --> 00:37:02,160
हैं। पहली बात तो ये क्लियर हो गई। जी बिल्कुल बिल्कुल

530
00:37:02,160 --> 00:37:06,240
यानी कि ऋत्विक में इस समय यानी कि ऋत्विक में इस समय

531
00:37:06,240 --> 00:37:10,720
कुछ लोग निर्णायक हैं प्रभुपाद जी की बात का अर्थ बताने वाले के रूप में

532
00:37:10,720 --> 00:37:15,600
सब लोग नहीं जी वो प्रभुपाद जी के शिष्य ही है

533
00:37:15,600 --> 00:37:19,680
हां दूसरी बात ये है कि जब सब लोग ये कह रहे होंगे जब

534
00:37:19,680 --> 00:37:23,680
सब लोग ये कह रहे होंगे कि मैं भी प्रभुपाद जी का शिष्य हूं तो फिर हम कैसे

535
00:37:23,680 --> 00:37:27,760
माने किस कैसे पता करेंगे कि कौन कौन सा शिष्य है जो प्रभुपाद जी की बात एज

536
00:37:27,760 --> 00:37:31,760
इट इज बता रहा है जी हमारे पास ऐसी तो कोई

537
00:37:31,760 --> 00:37:35,920
समस्या आई नहीं और ऐसे कोई भी उठ के थोड़ी बोल देगा कि पेपर में बात क्यों

538
00:37:35,920 --> 00:37:40,240
उसके पास गुरु मैं समझ गया आपके पास समस्या

539
00:37:40,240 --> 00:37:46,240
नहीं आई तो फिर ये इस और हरे कृष्णा मूवमेंट में अंतर क्यों आ गया

540
00:37:46,720 --> 00:37:51,040
जी बिल्कुल ये ये थोड़ा अलग है नहीं इनमें

541
00:37:51,040 --> 00:37:55,280
ये ये अलग भेद कभी नहीं आया कि कोई ये कह रहा है कि तुम प्रभुपाद

542
00:37:55,280 --> 00:38:00,960
जी के शिष्य हो तुम प्रभुपाद जी के शिष्य नहीं हो ऐसा भेद कभी नहीं है वहां परे

543
00:38:00,960 --> 00:38:05,120
उनकी बात को एज इट इज बताने के संबंध में भेद है कि नहीं? यह भेद नहीं

544
00:38:05,120 --> 00:38:09,360
है कि तुम प्रपा जी के शिष्य नहीं हो। उनकी बात को एज इट इज बताने के संबंध

545
00:38:09,360 --> 00:38:13,600
में भेद आया कि नहीं आया? जी बिल्कुल नहीं आया।

546
00:38:13,600 --> 00:38:17,600
कुछ नहीं अब आपको मैं एक चीज बता देता हूं। जी बिल्कुल नहीं आया।

547
00:38:17,600 --> 00:38:21,840
तो किस कारण से क्या कारण है कि अंतर है? अंतर है दोनों में हरे कृष्णा

548
00:38:21,840 --> 00:38:26,080
मूवमेंट में और उसमें इस में। क्या हरे कृष्णा वाला यह मानता है कि

549
00:38:26,080 --> 00:38:30,080
क्या हरे कृष्ण मूवमेंट वाले यह मानते हैं कि इस प्रभुपाद जी की बात

550
00:38:30,080 --> 00:38:34,080
को एज इट इज रख रहा है। एज इट इज बता रहा है। एज इट इज उसका प्रचार

551
00:38:34,080 --> 00:38:38,000
कर रहा है। क्या ये मानते हैं हरे कृष्ण वाले?

552
00:38:38,000 --> 00:38:42,080
थोड़ी बहुत कुछ जगह पर है। है ना? तो भेद आया

553
00:38:42,080 --> 00:38:46,240
है। यानी भेद आया है। उसमें उसमें हो सकता है।

554
00:38:46,240 --> 00:38:50,480
लेकिन हमारे पास ऐसा भेद है। जी बिल्कुल। मैं कह रहा हूं भेद आया है ना।

555
00:38:50,480 --> 00:38:54,560
गुरु आपने क्लेम किया कि कोई भी शिष्य कोई भी शिष्य अपने

556
00:38:54,560 --> 00:38:59,280
गुरु के विपरीत जाकर के शिक्षा नहीं देगा। मगर आप कह रहे हो कि

557
00:38:59,280 --> 00:39:02,160
में ऐसे इस में ऐसे प्रीचर्स हैं

558
00:39:02,160 --> 00:39:06,240
जो अपनी जो वही प्रभुपाद जी की शिक्षा के विरुद्ध जाकर के शिक्षा

559
00:39:06,240 --> 00:39:10,480
दे रहे हैं। जी बिल्कुल ऐसा ऐसा मैंने नहीं कहा।

560
00:39:10,480 --> 00:39:14,480
आप चीजों को गलत उसमें ले जा रहे हो। मेरी पूरी बात सुन लीजिए। डिफरेंस कहां

561
00:39:14,480 --> 00:39:18,480
आया मैं वो आपको बता देता हूं। डिफरेंस यहां आया कि एक ऋत्विक परंपरा हो गई

562
00:39:18,480 --> 00:39:22,560
और एक गुरु परंपरा हो गई। इस में आज एक ऋत्विक परंपरा चल रही है। गुरु

563
00:39:22,560 --> 00:39:25,840
उसी को भेद की बात कर रहा हूं।

564
00:39:25,840 --> 00:39:30,320
एक्स्ट्रा बातें मत करिए प्लीज। आप एक्स्ट्रा बातें करके

565
00:39:30,320 --> 00:39:34,560
जो है जो विषय है बहुत सारे बदल जाते हैं। आप एक्स्ट्रा

566
00:39:34,560 --> 00:39:38,640
बातें मत करिए। मैं आपसे निवेदन कर रहा हूं। अंतर आपने

567
00:39:38,640 --> 00:39:42,880
माना है ना दोनों में अंतर है तो या तो यह कहिए कि इस

568
00:39:42,880 --> 00:39:46,880
भी एज इट इज प्रभुपाद जी ने जो कहा है वह मान रहा है और या फिर यह

569
00:39:46,880 --> 00:39:51,120
कहिए कि नहीं थोड़ा बहुत अंतर है। हां यह बात सही है कि गुरु के विपरीत शिक्षा देते

570
00:39:51,120 --> 00:39:57,120
हैं कभी-कभी कुछ लोग।

571
00:39:59,920 --> 00:40:04,560
मेरी आवाज आ रही है आपको? आ रही है।

572
00:40:04,560 --> 00:40:08,560
हां, मैं एक बात क्लियर करना चाहता हूं कि मैं जो जवाब दे रहा हूं मैं मैं

573
00:40:08,560 --> 00:40:12,640
पूरा जवाब अपने मैं हां या ना मैं जवाब नहीं दूंगा कि हां ऐसा है हां ना हां या ना

574
00:40:12,640 --> 00:40:16,800
मैं जवाब नहीं दूंगा। मैं अपनी पूरी बात रुकूंगा। मैंने यह बात कभी नहीं कही कि इस

575
00:40:16,800 --> 00:40:21,040
के जो प्रीचर है वो प्रभुपाद जी के अगेंस्ट जाकर प्रीचिंग कर रहे हैं। ऐसा मैंने बिल्कुल

576
00:40:21,040 --> 00:40:25,040
भी नहीं कहा। मैंने जो डिफरेंस बताया केवल उसी जगह डिफरेंस है। बाकी और कोई डिफरेंस मुझे

577
00:40:25,040 --> 00:40:28,320
लग नहीं रहा। अब आपको कोई

578
00:40:28,320 --> 00:40:32,640
भाई साहब मेरी बात मैं आपसे हाथ जोड़ के निवेदन कर रहा हूं। देखिए बात होती है क्या

579
00:40:32,640 --> 00:40:36,720
कि जैसे मैंने कहा कि वो अगेंस्ट जाकर के कर रहे हैं। आपने इसको मना कर दिया। फिर

580
00:40:36,720 --> 00:40:40,800
आपने कहा डिफरेंस है। डिफरेंस का अर्थ भी अगेंस्ट ही निकल

581
00:40:40,800 --> 00:40:45,360
रहा है मेरे भाई। आप केवल शब्द को बदल करके वही बात मेरी बोल रहे हैं।

582
00:40:45,360 --> 00:40:49,360
डिफरेंस का मतलब क्या है? आपका मानना है मान लीजिए कि प्रभुपाद जी

583
00:40:49,360 --> 00:40:53,360
ने ए बी ए से लेकर जेड तक बोली। ए बी सी ई एफ जी एच आई जे के एल एम एन ओ पी

584
00:40:53,360 --> 00:40:57,760
क्यू आर एस टी डब्लू एक्स वाई जेड मान लीजिए प्रभुपाद जी ने यह बोला ठीक है

585
00:40:57,760 --> 00:41:01,840
आपका यह मानना है कि ऋत्विक जो सिस्टम है वो ए से

586
00:41:01,840 --> 00:41:06,160
जेड तक प्रभुपाद जी को एज इट इज फॉलो कर रहा है मगर इस

587
00:41:06,160 --> 00:41:10,320
जो है वो ए से ले जेड तक के बीच में कुछ व जेड या एक्स

588
00:41:10,320 --> 00:41:14,720
व जेड करके कुछ चीजों में अलग हो गया है

589
00:41:14,720 --> 00:41:15,360
इस

590
00:41:15,360 --> 00:41:19,440
तो उस एक्स व जेड में वो अपने प्रभुपाद जी के अगेंस्ट हो

591
00:41:19,440 --> 00:41:23,520
गया है क्योंकि वहां पर वो एक्स व जेड वाले विषय में प्रपाद

592
00:41:23,520 --> 00:41:29,520
जी को फॉलो नहीं कर रहा है। तो यह अंतर आ गया ना।

593
00:41:29,680 --> 00:41:34,080
मैंने कौन सा कहा कि प्रभुपाद जी का एक एक वर्ड बदल दिया। मैंने भी यही कहा

594
00:41:34,080 --> 00:41:38,240
कि कुछ अंशों में ही सही तो ये चीज तो मैंने पहले ही चीज तो मैंने पहले

595
00:41:38,240 --> 00:41:42,400
ही पहले ही बोल दी थी ना कि इस जगह पे अंतर है। एक ऋत्व की तरफ

596
00:41:42,400 --> 00:41:46,400
चले गए और एक गुरु की तरफ चले गए। बस यही अंतर है। ये चीज तो मैं बोल

597
00:41:46,400 --> 00:41:50,480
ही रहा हूं ना। इसमें से तो मैं भी मान रहा हूं। मैं भी बता रहा हूं ना

598
00:41:50,480 --> 00:41:54,560
इसमें से इसमें से प्रभुपाद जीतिक वाली ऋत्विक

599
00:41:54,560 --> 00:41:59,200
वाली मतलब वो अगेंस्ट चले गए ना प्रभुपाद जी के

600
00:41:59,200 --> 00:42:03,200
तो मैंने कब मना किया मैं बोल रहा हूं ना आप भी उसी बात को बार-बार रिपीट

601
00:42:03,200 --> 00:42:07,920
करोगे उससे क्या होगा मैं इस चीज को शुरू में क्लियर कर दिया ना कहने

602
00:42:07,920 --> 00:42:12,480
नहीं किया आपने आप बार-बार बच रहे थे अब आपने मैंने किया

603
00:42:12,480 --> 00:42:16,560
नहीं मैं नहीं बच रहा था आप देख लीजिए पहले का रिकॉर्डिंग ठीक है मुझे

604
00:42:16,560 --> 00:42:20,720
अब मुझे अब अपना सवाल प्लेस करने दीजिए मुझे अपना सवाल सवाल प्लेस करने दीजिए। मुझे

605
00:42:20,720 --> 00:42:24,720
अपना सवाल प्लेस करने दीजिए। आपने कहा कि

606
00:42:24,720 --> 00:42:28,080
इस जो है वह

607
00:42:28,080 --> 00:42:30,400
थोड़ा सा कुछ मामलों में जो है

608
00:42:30,400 --> 00:42:34,480
प्रभुपाद जी के अगेंस्ट जा गया और इस को मानने वाले जो

609
00:42:34,480 --> 00:42:38,480
लोग हैं इस समय संचालन करता वो वही लोग हैं जो शिष्य हैं। प्रभुपाद

610
00:42:38,480 --> 00:42:43,200
जी के जैसे ऋित्विक वाले शिष्य हैं। है ना? शिष्य है ना? हां।

611
00:42:43,200 --> 00:42:47,520
तो अभी आपका एक दूसरा क्लेम है कि कोई भी शिष्य अपने

612
00:42:47,520 --> 00:42:51,520
गुरु की चीजों को बदल करके नहीं बताता। मगर आप यहां

613
00:42:51,520 --> 00:42:55,760
पर कह रहे हैं कि हां कुछ शिष्य ऐसे होते हैं हो सकते

614
00:42:55,760 --> 00:43:01,760
हैं जो अपने गुरु की कुछ चीजों को बदल करके बताएं।

615
00:43:04,640 --> 00:43:07,200
कि

616
00:43:07,200 --> 00:43:11,280
ऐसा भी शिष्य नहीं होना चाहिए। ऐसा शिष्य नहीं होना चाहिए

617
00:43:11,280 --> 00:43:15,280
जो अपने गुरु की बताई हुई बातों को बदल के आगे बताए। नहीं ऐसा बिल्कुल नहीं होना

618
00:43:15,280 --> 00:43:19,440
चाहिए। मैं यह नहीं कह रहा भाई साहब मैं कह रहा हूं ऐसी संभावना

619
00:43:19,440 --> 00:43:23,440
है कि नहीं। मैं ये नहीं कह रहा अच्छा क्या है? गलत क्या है? मैं ये नहीं कह रहा अच्छा क्या

620
00:43:23,440 --> 00:43:27,920
है? गलत क्या है। मैं ये कह रहा हूं ऐसा ऐसी संभावना हो सकती है कि कोई शिष्य

621
00:43:27,920 --> 00:43:32,160
अपने गुरु की बातों को बदल करके बता दे। चाहे थोड़ी सी सही

622
00:43:32,160 --> 00:43:35,600
पर बता दे।

623
00:43:35,600 --> 00:43:39,600
हो सकता है ना? हां इसीलिए मैंने

624
00:43:39,600 --> 00:43:43,840
इसीलिए मैंने पूछा था कि आज के टाइम में प्रभुपाद

625
00:43:43,840 --> 00:43:47,840
जी का निर्णय निर्णय करता कौन कौन है? तो आपने कहा था नहीं कोई

626
00:43:47,840 --> 00:43:51,840
भी शिष्य अपने गुरु की बातों को बदल के नहीं बताता तो मैंने कहा

627
00:43:51,840 --> 00:43:56,160
और फिर मैंने कहा था तो फिर आपके आप ये गुरु शिष्य परंपरा की

628
00:43:56,160 --> 00:44:00,160
जरूरत क्या है? फिर तो कोई भी अपने आप को कहेगा कि मैं उनका शिष्य हूं और मैं बता

629
00:44:00,160 --> 00:44:04,400
रहा हूं। उन्होंने जो कहा था तो ऐसे तो सब लोगों के मन की बातें माननी पड़गी।

630
00:44:04,400 --> 00:44:08,560
तो आपने कहा था मुझे तो इस चीज का सामना नहीं करना पड़ा। मगर आपको तो करना

631
00:44:08,560 --> 00:44:12,560
पड़ रहा है। आपके ही संस्था के लोग हैं जो यह

632
00:44:12,560 --> 00:44:16,640
कह रहे हैं कि प्रभुपाद जी के कुछ शिष्य हैं जो प्रभुपाद जी के अगेंस्ट बोल रहे हैं।

633
00:44:16,640 --> 00:44:19,600
आपने खुद बोला

634
00:44:19,600 --> 00:44:20,100
जी

635
00:44:19,920 --> 00:44:23,920
बिल्कुल अब आपको एक चीज बता दूं मैं। जी आपको एक चीज बता देता

636
00:44:23,920 --> 00:44:27,920
हूं। इस आप मेरा थोड़ा सा सुनना मैं इसमें भी इस कुछ चीज

637
00:44:27,920 --> 00:44:32,320
क्लियर हो। सुनिए सुनिए सुनिए। मैं इस मैं अपनी बात तो रख दूं। सुनिए

638
00:44:32,320 --> 00:44:36,400
बात मैं फिर अपनी बात रखने में जो आप रख लीजिए रख

639
00:44:36,400 --> 00:44:40,560
लीजिएगा। मैं एक बात बोल रही हूं आप बोल लीजिए उसके बाद हम लोग मुख्य विषय पर वापस आएंगे

640
00:44:40,560 --> 00:44:44,560
जहां से भटक गए हैं और वो मुख्य विषय यह है कि

641
00:44:44,560 --> 00:44:49,200
वर्तमान में कौन सा गड़िया वैष्णवाचार्य

642
00:44:49,200 --> 00:44:53,360
इस का या ऋत्विक का इस को तो छोड़ दो ऋत्विक का निर्णय कर

643
00:44:53,360 --> 00:44:57,440
रहा है क्योंकि आपने मान लिया है कि जो शिष्य

644
00:44:57,440 --> 00:45:01,680
होते हैं वह भी मिलावट कर सकते हैं। तो ऐसे में हमको एक निर्णायक अधिकृत

645
00:45:01,680 --> 00:45:05,680
व्यक्ति चाहिए होगा। यही होती है गुरु शिष्य परंपरा जिसमें

646
00:45:05,680 --> 00:45:09,680
अधिकृत होता है कोई शिष्य अपने गुरु की बात बताने के लिए ठीक है

647
00:45:09,680 --> 00:45:13,920
तो हमें कोई अधिकृत व्यक्ति चाहिए होगा जो यह निर्णय करे कि इस में क्या होना चाहिए

648
00:45:13,920 --> 00:45:18,400
ऋत्विक में क्या होना चाहिए अब आपके यहां पर यह है कि कोई भी बाहर का

649
00:45:18,400 --> 00:45:22,800
गड़िया वैष्णव संप्रदाय का प्रामाणिक रूप से नियुक्त गद्दी पर बैठने

650
00:45:22,800 --> 00:45:26,880
वाला आपके यहां हस्तक्षेप नहीं कर रहा है तो फिर

651
00:45:26,880 --> 00:45:31,040
आप किस हिसाब से कह रहे हैं कि हम तो गौडिया वैष्णव को मानने वाले हैं वो

652
00:45:31,040 --> 00:45:35,040
लोग वो लोग अभी भी ऋत्विक सिस्टम को नहीं मान रहे आप मान रहे हो तो

653
00:45:35,040 --> 00:45:41,040
गडिया वैष्णव संप्रदाय कहां पे एक्सिस्ट कर रहा है आपके यहां जी

654
00:45:41,280 --> 00:45:45,440
जी पहले तो मैं आपको बता दूं कि पहले का जो सवाल था उसका जवाब पहले हो जाना चाहिए

655
00:45:45,440 --> 00:45:49,520
मेरे हिसाब से है ना जो आपने पूछा था कि कोई भी शिष्य अपने गुरु की बातें चेंज

656
00:45:49,520 --> 00:45:53,600
कर सकता है तो फिर गुरु शिष्य परंपरा का क्या महत्व रहा है संभावना है तो फिर गुरु शिष्य परंपरा

657
00:45:53,600 --> 00:45:57,840
में एज इट इज ज्ञान कैसे पहुंचेगा नहीं नहीं नहीं नहीं पहली चीज ये नहीं कहा है मैंने

658
00:45:57,840 --> 00:46:01,920
ये नहीं कहा है सुन लीजिए मैंने क्या कहा है गुरु शिष्य परंपरा में

659
00:46:01,920 --> 00:46:06,000
एक एक ही गुरु के कई शिष्य होते हैं। सुन लीजिए मैंने क्या कहा है वो सुन लीजिए। आप गलत

660
00:46:06,000 --> 00:46:10,320
समझ रहे हैं। गुरु शिष्य परंपरा में एक ही गुरु के कई शिष्य होते हैं।

661
00:46:10,320 --> 00:46:14,640
तो वो सारे शिष्य गुरु की बात को एज इट इज बताने के लिए ऑथेंटिक

662
00:46:14,640 --> 00:46:18,640
नहीं हो जाते हैं। जिसको गुरु कहता है यह होगा मेरी बात

663
00:46:18,640 --> 00:46:24,000
बताने वाला वो होता है निर्णायक अधिकृत।

664
00:46:24,000 --> 00:46:28,000
ठीक है? जिसको गुरु कह के जाता है यह होगा। अब गुरु नहीं कह के जा रहा

665
00:46:28,000 --> 00:46:32,000
है तो फिर गुरु इतने अंश में गुरु शिष्य परंपरा को खत्म कर रहा है। पहली

666
00:46:32,000 --> 00:46:36,080
बात और दूसरी बात कि आप कह रहे हो कि आपने जो

667
00:46:36,080 --> 00:46:40,880
मेरा सवाल बदल करके बता दिया ना ये चीज कह दी कि

668
00:46:40,880 --> 00:46:44,880
आप कह रहे हो कि फिर गुरु शिष्य परंपरा में ज्ञान आया कैसे? जब बदल सकते

669
00:46:44,880 --> 00:46:49,040
हैं। मैं नहीं कह रहा। गुरु ने क्या कहा? यह गुरु अपनी सूझबूझ से, अपनी बुद्धि

670
00:46:49,040 --> 00:46:50,080
से, अपनी विवेक से तय

671
00:46:50,080 --> 00:46:54,560
करेगा कि मेरा निर्णायक कौन होगा? मेरे जाने के बाद मेरा उत्तराधिकारी

672
00:46:54,560 --> 00:46:58,640
कौन होगा? वो गुरु तय करता है तो वह आपके

673
00:46:58,640 --> 00:47:04,640
यहां पर नहीं है। वह मैं पूछ रहा हूं।

674
00:47:07,120 --> 00:47:11,200
मैं समझ नहीं पाया। आपके वॉइस थोड़ा आई आई नहीं थी। एक बार अगर दोबारा रिपीट कर दोगे तो

675
00:47:11,200 --> 00:47:15,200
सही रहेगा। मैं यह कह रहा हूं कि मैंने

676
00:47:15,200 --> 00:47:20,720
यह नहीं कहा है कि मेरा सवाल यह है कि

677
00:47:20,720 --> 00:47:24,800
अगर शिष्य अपने गुरु की बातों में मिलावट कर सकता है तो फिर गुरु परंपरा का ज्ञान हम

678
00:47:24,800 --> 00:47:28,880
तक आएगा कैसे? नहीं। मेरा यह है कि एक ही गुरु के कई शिष्य

679
00:47:28,880 --> 00:47:33,120
होते हैं। तो वो सारे शिष्य गुरु का अर्थ बताने के लिए ऑथेंटिक

680
00:47:33,120 --> 00:47:37,680
नहीं किए जा सकते। जिसको गुरु ऑथेंटिक करेगा

681
00:47:37,680 --> 00:47:41,920
वो गुरु की बात को एज इट इज बताने के लिए प्रमाणिक माना जाएगा। सारे

682
00:47:41,920 --> 00:47:46,080
शिष्यों को नहीं अगर उसने अगर उसने सारे शिष्यों को ऑथेंटिक

683
00:47:46,080 --> 00:47:50,160
किया है तो वो सारे शिष्य माने जाएंगे। अगर नहीं किया

684
00:47:50,160 --> 00:47:54,400
है कि यह सब मेरे उत्तराधिकारी नहीं मेरा उत्तराधिकारी कोई नहीं है तो उतने

685
00:47:54,400 --> 00:47:58,400
अंश में वह गुरु परंपरा को खत्म कर रहा है गुरु वो नष्ट कर

686
00:47:58,400 --> 00:48:03,120
रहा है गुरु गुरु परंपरा के सिस्टम को क्योंकि

687
00:48:03,120 --> 00:48:05,520
उसकी बात बताने वाला कोई उत्तराधिकारी

688
00:48:05,520 --> 00:48:09,760
वो छोड़ के नहीं जा रहा है और हर कोई व्यक्ति यह कहेगा कि मैं उनका उत्तराधिकारी

689
00:48:09,760 --> 00:48:14,240
हूं मैं बताऊंगा उन्होंने क्या है और सबके बीच में मतभेद आ जाएगा

690
00:48:14,240 --> 00:48:17,760
तो इसीलिए मैंने

691
00:48:17,760 --> 00:48:22,320
इसीलिए मैंने मैंने पूछा था कि आपके यहां पर प्रामाणिक निर्णायकर्ता

692
00:48:22,320 --> 00:48:26,880
कौन है जो गौड वैष्णव परंपरा के अधीन हो।

693
00:48:26,880 --> 00:48:31,120
मान लीजिए कि मधवाचार्य या शंकराचार्य परंपरा से कोई

694
00:48:31,120 --> 00:48:35,200
शिष्य निकला और उनके मधवाचार्य परंपरा के कई शिष्य

695
00:48:35,200 --> 00:48:39,600
हो गए। मैं भी शंकराचार्य शंकराचार्य परंपरा में अध्ययनरत हूं।

696
00:48:39,600 --> 00:48:43,680
मगर ऐसा नहीं है कि मैं शंकराचार्य की बोल ओर से बोलने के लिए एक ऑथेंटिक व्यक्ति हूं।

697
00:48:43,680 --> 00:48:47,920
जितने अंश में मेरी बात उनके साथ है बस वो बैठे हैं निर्णय करने के लिए। मेरे

698
00:48:47,920 --> 00:48:52,000
पास मधवाचार्य परंपरा में, शंकराचार्य परंपरा में, रामानुज परंपरा

699
00:48:52,000 --> 00:48:56,000
में निर्णय करने वाले लोग बैठे हैं। तो

700
00:48:56,000 --> 00:49:00,160
आपके यहां पर निर्णय करने वाले लोग हैं ही नहीं। और वैष्णव

701
00:49:00,160 --> 00:49:04,640
गौडिया वैष्णव संप्रदाय से तो कदापि नहीं है। तो आप कहां से हो गए गौडिया वैष्णव?

702
00:49:04,640 --> 00:49:10,640
ये बात है। हम बोलिए।

703
00:49:11,520 --> 00:49:15,520
जी। अब मैं आपको इस बता देता हूं। अभी जैसे आपने

704
00:49:15,520 --> 00:49:19,840
कहा कि एक गुरु के बहुत सारे शिष्य होते हैं। है ना? तो सभी शिष्य अलग-अलग

705
00:49:19,840 --> 00:49:23,840
जाके अलग-अलग ब्रांच जाके बना ले तो उसमें उसमें प्रभुपाद जी का कोई दोष

706
00:49:23,840 --> 00:49:27,840
नहीं है। प्रभुपाद जी उसी परंपरा का हिस्सा है। और प्रभुपाद जी ने जो लेटर

707
00:49:27,840 --> 00:49:31,920
लिख के दिया है बात समझ नहीं पा रहे हो। आप मेरी बात

708
00:49:31,920 --> 00:49:36,000
समझ नहीं पा रहे हो। प्रभुपाद जी ने लेटर लिख के दिया है तो क्या हम ये मान ले कि

709
00:49:36,000 --> 00:49:40,480
गुरु परंपरा व्यर्थ है। ये मान ले हम निर्णय

710
00:49:40,480 --> 00:49:44,720
करता कौन है? 10 लोग 10 बातें कर रहे प्रभुपाद जी के नाम पे। निर्णय

711
00:49:44,720 --> 00:49:48,720
करता कौन है? मैं यह पूछ रहा हूं। प्रभुपाद जी के ना होने की स्थिति में

712
00:49:48,720 --> 00:49:52,800
10 लोग 10 प्रकार की बातें कर रहे हैं प्रभुपाद जी के नाम पे।

713
00:49:52,800 --> 00:49:56,960
तो हम निर्णय कैसे करेंगे? प्रभुपाद जी ने नियुक्त नहीं किया। अब आप कह रहे हो उन्होंने

714
00:49:56,960 --> 00:50:01,200
लेटर दिया। तो भाई ये कहो ना कि यहां पे वो परंपरा की प्रणाली को खत्म

715
00:50:01,200 --> 00:50:05,200
कर रहे हैं और यह कह रहे हैं कि आप जो मैं लेटर लेकर जा रहा हूं इन

716
00:50:05,200 --> 00:50:09,840
लोगों को समझो और उनमें भी कोई निर्णायक नहीं है। घूमते रहो।

717
00:50:09,840 --> 00:50:14,160
अभी मैं बता रहा हूं ना आपको अभी निर्णायक कौन है? अभी जो मधु पंडित

718
00:50:14,160 --> 00:50:18,400
दास है श्रीमान जो हमारे वरिष्ठ वैष्णव है मधु पंडित दास

719
00:50:18,400 --> 00:50:22,960
वो हमारे निर्णायक है और उन्हीं के आधार पर जो हमारे एचकेएम

720
00:50:22,960 --> 00:50:26,560
के प्रेसिडेंट है तो ये हमारे अभी निर्णायक है और ये

721
00:50:26,560 --> 00:50:30,720
उसी उसी प्रभुपाद जी के हमारे जो गुरु प्रभुपाद जी रहे उन्हीं के शिष्य रहे

722
00:50:30,720 --> 00:50:34,720
हमारे सीनियर वैष्णव भी है तो इनहीं के इनहीं के कितनी

723
00:50:34,720 --> 00:50:38,880
देर तक एक ही आदमी का परिचय देते रहोगे आप कितनी एक ही बार दिया मैंने

724
00:50:38,880 --> 00:50:44,320
एक ही बार दिया है एक ही बार इतना सा तो सुनना ही पड़ेगा आपने

725
00:50:44,320 --> 00:50:48,400
एक व्यक्ति के बारे में बताया कि हमारे उनका नाम यह है। अब वहां जब

726
00:50:48,400 --> 00:50:52,720
आपने यह बता दिया कि वह निर्णायक है। ये भी उससे प्रकट हो गया। प्रभुपाद

727
00:50:52,720 --> 00:50:56,800
जी के शिष्य है। फिर आप चार बार उन्हीं की चीजों को बता रहे हो। प्रभुपाद जी के शिष्य हैं। वो उन्हीं

728
00:50:56,800 --> 00:51:01,120
की शिक्षा बताते हैं। वो वही निर्णायक है। आपको रिपीट करके दिखाऊं आप कितने रिपीटेटिव

729
00:51:01,120 --> 00:51:05,120
बोले। नहीं नहीं रहने दीजिए। रहने दीजिए कोई बात

730
00:51:05,120 --> 00:51:09,200
नहीं। और चर्चा में इतना सा तो होता ही है। मुझे नहीं पता था कि आपको इतना

731
00:51:09,200 --> 00:51:13,280
सा भी बिल्कुल वो नहीं लगता। कोई बात नहीं आगे चलिए अपन आगे बढ़ते

732
00:51:13,280 --> 00:51:17,440
हैं। तो [गला साफ़ करने की आवाज़] मतलब

733
00:51:17,440 --> 00:51:21,600
कि आपके यहां पर निर्णायक है कोई। ठीक है? जी

734
00:51:21,600 --> 00:51:26,000
बिल्कुल है। मतलब निर्णायक तो मैं उनको नहीं कहूंगा

735
00:51:26,000 --> 00:51:30,880
लेकिन ये कि हमारे गुरु प्रभुपाद जी की उनकी शिक्षा

736
00:51:30,880 --> 00:51:35,040
हम जी आप बोलिए बोलिए आप बोलिए।

737
00:51:35,040 --> 00:51:39,040
आप पहले तय कर लीजिए निर्णायक है कि नहीं है। फिर बोल लीजिए। लास्ट बार पूछ

738
00:51:39,040 --> 00:51:41,760
रहा हूं। चलो प्रभुपाद जी के शिष्य

739
00:51:41,760 --> 00:51:46,160
के तौर पर वो उनकी शिक्षाओं को फैला हमारे मार्गदर्शक है।

740
00:51:46,160 --> 00:51:49,200
मैं इतना कहूंगा

741
00:51:49,200 --> 00:51:52,960
यानी कि निर्णायक कोई नहीं है।

742
00:51:52,960 --> 00:51:56,960
अब मार्गद निर्णायक निर्णायक का जब मार्गदर्शक है और उन्हीं की

743
00:51:56,960 --> 00:52:00,960
शिक्षाओं को तो निर्णायक और उससे क्या मतलब रह जाता है? उसका कोई वैल्यू ही नहीं रह

744
00:52:00,960 --> 00:52:04,960
जाती। आप एक ही चीज को निर्णायक निर्णायक एक ही चीज को बार-बार रिपीट कर रहे हो। आप भी तो रिपीट

745
00:52:04,960 --> 00:52:08,960
कर रहे हो ना। तो मैं कह रहा हूं मार्गदर्शक आप शब्द से

746
00:52:08,960 --> 00:52:13,200
बचने का प्रयास कर रहे हैं। मैं पूछ रहा हूं कि कोई

747
00:52:13,200 --> 00:52:17,360
है जो प्रभुपाद जी की बात के अर्थ में निर्णय करेगा कि

748
00:52:17,360 --> 00:52:21,360
उनकी बात का यह मतलब है तो आप कहते है उसके बाद कहते मैं यह भी

749
00:52:21,360 --> 00:52:25,360
नहीं कहूंगा कि है वो मार्गदर्शक है। भाई मार्गदर्शक कई सारे हैं

750
00:52:25,360 --> 00:52:29,440
जो कह रहे हैं प्रभुपाद जी ने यह कहा है। उसमें से निर्णायक कौन है?

751
00:52:29,440 --> 00:52:33,440
जिसको हम कहें कि प्रभुपाद जी की प्रभुपाद जी ने क्या कहा है? यह यह

752
00:52:33,440 --> 00:52:37,600
बताएंगे तो आप कह रहे हैं मैं रिपीिटेटिव हो रहा हूं। आप अपनी बातों को कह

753
00:52:37,600 --> 00:52:41,680
कह कह कह करके बदल रहे हैं बार-बार। आपने पहले कहा कि शिष्य

754
00:52:41,680 --> 00:52:45,920
जो है बदलाव नहीं कर सकता। फिर बाद में माना बदलाव कर सकता है। पहले शुरू

755
00:52:45,920 --> 00:52:51,920
में आपने कहा कोई निर्णायक नहीं है। फिर कहा निर्णायक है। फिर आप कह रहे हैं निर्णायक नहीं है।

756
00:52:53,680 --> 00:52:58,400
सुनी आप मेरी पूरी बात नहीं सुनते। मेरी थोड़ी सी बात सुनकर फिर

757
00:52:58,400 --> 00:53:03,040
भाई साहब मेरे पास बहुत ज्यादा मैंने घी नहीं पिया है जो मैं

758
00:53:03,040 --> 00:53:09,040
जो अब मैं फिर क्या कहूं फिर व्यक्तिगत उसमें आ जाना पड़ेगा

759
00:53:09,760 --> 00:53:13,920
आप पहले शांत हो जाइए मैं आपको अनम्यूट कर रहा हूं शांत हो जाइए अभी आप म्यूट है शांत

760
00:53:13,920 --> 00:53:18,080
हो जाइए थोड़ा शांत हो जाइए देखिए आप

761
00:53:18,080 --> 00:53:22,240
उसको मा आप कान को कैसे भी पकड़ लीजिए सुनिए कान

762
00:53:22,240 --> 00:53:26,320
को कैसे भी पकड़ लीजिए प्रभुपाद जी की शिक्षा को मानने वाले के

763
00:53:26,320 --> 00:53:30,480
रूप में प्रभुपाद जी की शिक्षा को एज इट इज बताने वाले के रूप में

764
00:53:30,480 --> 00:53:34,560
या तो आप यह मान लो कि वर्तमान में कोई नहीं है जो यह निर्णय करेगा। प्रभुपाद

765
00:53:34,560 --> 00:53:38,640
जी ने क्या कहा है, क्या नहीं कहा है। या फिर आप यह मान लो कि हां कोई निर्णायक

766
00:53:38,640 --> 00:53:42,720
है। हां मगर हम उसको निर्णायक कहने से बच रहे हैं। यह वाली एक चीज

767
00:53:42,720 --> 00:53:46,720
आपकी सामने आ रही है कि आप उसको निर्णायक कहने से बच रहे हैं।

768
00:53:46,720 --> 00:53:51,040
उसको निर्णायक ही मानना पड़ेगा ना। निर्णायक नहीं मानेंगे। सुनिए अगर उसको निर्णायक

769
00:53:51,040 --> 00:53:55,040
नहीं मानेंगे मार्गदर्शक मानेंगे तो मार्गदर्शक तो कल को मैं ज्वाइन

770
00:53:55,040 --> 00:53:59,200
कर लूंगा ऋत्विक को और दो-तीन दिन इस जाऊंगा उसके बाद भी मैं यह कह सकता

771
00:53:59,200 --> 00:54:03,280
हूं कि भाई प्रभुपाद जी ने क्या कहा है मैं मार्गदर्शन कर दूंगा लो

772
00:54:03,280 --> 00:54:09,280
एक और एक और ओपोनेंट खड़ा हो जाएगा ठीक है

773
00:54:11,200 --> 00:54:15,440
मैं अन म्यूट कर रहा हूं आप थोड़ा आप थोड़ा धैर्य रखो मैं अन म्यूट कर रहा हूं आपको

774
00:54:15,440 --> 00:54:21,440
थोड़ा काम डाउन काम डाउन

775
00:54:24,640 --> 00:54:28,720
जी बोलिए। जी मैंने जो बात आपसे कही कि

776
00:54:28,720 --> 00:54:32,720
मार्गदर्शन और निर्णय की जो बात कही वो इस सेंस में कही कि

777
00:54:32,720 --> 00:54:36,720
जब भगवान श्री कृष्ण जब द्वारिकाधीश थे द्वारिका के राजा

778
00:54:36,720 --> 00:54:41,120
थे तो अपने आप को कभी द्वारिका भाई साहब मैं

779
00:54:41,120 --> 00:54:45,280
आपसे एक स्ट्रक्चरल वे में बात करना चाह रहा हूं। आप जब

780
00:54:45,280 --> 00:54:49,360
भी कोई विवरण बताएं, एक्सप्लेनेशन बताएं तो पहले अपना क्लेम

781
00:54:49,360 --> 00:54:53,360
स्थापित करें। आप अपना क्लेम पहले बताएं। किस ओर जा रही

782
00:54:53,360 --> 00:54:57,840
है। हो सकता है कि मुझे उसके उसका एक्सप्लेनेशन जानने की जरूरत ही ना पड़े।

783
00:54:57,840 --> 00:55:02,240
आप अपना एक्सप्लेनेशन पहले दे रहे हैं। अपना क्लेम बाद में कर रहे हैं। पहले क्लेम तो करिए

784
00:55:02,240 --> 00:55:06,800
कि निर्णायक है कि नहीं है। तब

785
00:55:06,800 --> 00:55:10,880
एक्सप्लेनेशन दीजिए। आप पहले क्लियर करिए। निर्णायक नहीं

786
00:55:10,880 --> 00:55:15,040
है हमारे यहां। कोई यह क्लियर कर दीजिए। फिर एक्सप्लेनेशन दीजिए। समझ रहे हैं? आप पहले उसको

787
00:55:15,040 --> 00:55:19,120
जस्टिफाई करने में मत लग जाइए। हो सकता है मैं मुझे जरूरत ही ना पड़े आपको एक्सप्लेनेशन

788
00:55:19,120 --> 00:55:23,360
देने की। क्योंकि वैसे भी यह मुख्य टॉपिक नहीं था। आपने शुरू में बहुत जोर देकर के कहा

789
00:55:23,360 --> 00:55:26,240
कि मैं गौडिया वैष्णव हूं, गौ वैष्णव हूं तो मैंने आपको पकड़ा

790
00:55:26,240 --> 00:55:29,120
वहां पर। ठीक है?

791
00:55:29,120 --> 00:55:33,200
है ना? और बात देखो मैं एक चीज आपको क्लियर बता देता हूं। आप आप अगर

792
00:55:33,200 --> 00:55:37,280
यह बताने में अपना समय निकालेंगे कि आप मुझे सुन नहीं रहे हैं। मुझे बोलने

793
00:55:37,280 --> 00:55:42,160
ही नहीं दे रहे हैं तो मैं क्षमा चाहता हूं। मैं आपसे बात नहीं कर पाऊ। मैंने बहुत देर तक आपको

794
00:55:42,160 --> 00:55:47,360
मैं क्या कहूं अब वो फिर व्यक्तिगत कटाक्ष हो जाएगा।

795
00:55:47,360 --> 00:55:51,440
आप यह बताने में अपना समय मत लगाइए कि मैं आप मैं आपको बोलने दे रहा हूं

796
00:55:51,440 --> 00:55:55,520
कि नहीं बोलने दे रहा हूं। आप विषय को बार-बार भटका रहे हैं इसलिए मुझे ऐसा करने पड़ रहा

797
00:55:55,520 --> 00:55:59,680
है। मगर ऐसा नहीं है कि मैं आपको सुनूंगा नहीं। मैं आपको सुनने के लिए अनम्यूट भी कर रहा हूं।

798
00:55:59,680 --> 00:56:05,680
ठीक है? अब मैं आपको अनम्यूट करूं।

799
00:56:07,680 --> 00:56:13,520
हां जी। अब अपनी बात बोलिए। मेरे को

800
00:56:13,520 --> 00:56:17,840
आपसे एक रिक्वेस्ट करना चाहता हूं कि आप मैं थोड़ा सा कुछ बोलने लगता हूं। आप मेरे को बार-बार

801
00:56:17,840 --> 00:56:21,840
हो आप निर्णायक की जो बात कर रहे हो ना

802
00:56:21,840 --> 00:56:25,680
हां

803
00:56:25,680 --> 00:56:30,480
एक एक मिनट एक कि निर्णायक कोई है कि नहीं है ना तो

804
00:56:30,480 --> 00:56:34,880
हमारे जो मधु पंडित दास प्रभु है वो अपने आप को निर्णायक नहीं ये उनकी विनम्रता

805
00:56:34,880 --> 00:56:39,840
है उनका शिष्टाचार है कि वो अपने आप को निर्णायक नहीं कहते वो अपने आप को कहते हैं कि मैं प्रभु

806
00:56:39,840 --> 00:56:45,280
आ जाओ

807
00:56:45,280 --> 00:56:49,440
मेरे भाई मैं आपसे ये नहीं पूछ रहा हूं कि कौन किसको क्या

808
00:56:49,440 --> 00:56:54,880
कहता है मैंने ये पूछा है क्या मैं पूछ रहा हूं है क्या

809
00:56:54,880 --> 00:56:59,120
मैंने ये नहीं पूछा कौन आप अपने यहां सब एक दूसरे को प्रभु जी कहते हैं प्रभु

810
00:56:59,120 --> 00:57:03,120
जी का मतलब तो सीधे भगवान भी होता है तो मैं ये थोड़ी ना

811
00:57:03,120 --> 00:57:07,840
कह रहा हूं आप लोग एक दूसरे को भगवान क्यों कहते हो या कहते हो कि नहीं कहते हो

812
00:57:07,840 --> 00:57:11,920
मैं पूछ रहा हूं है क्या आपके यहां लोकाचार में क्या चलता है वो आप जानो मैं पूछ

813
00:57:11,920 --> 00:57:17,040
रहा हूं है क्या सिद्धांत क्या है वो पूछा मैंने

814
00:57:17,040 --> 00:57:23,040
जी

815
00:57:29,200 --> 00:57:33,360
पर बता रहा हूं मैं निर्णायक है वही है निर्णायक और उन्हीं के माध्यम से हम

816
00:57:33,360 --> 00:57:37,360
आगे शिक्षाओं पर चलते हैं और ये चीज़ मैं आपको सबसे कह

817
00:57:37,360 --> 00:57:41,600
रहा मैं इसको [हंसी] मैं इसको मैं इस क्षण

818
00:57:41,600 --> 00:57:45,760
को थोड़ा सेलिब्रेट करना चाहता हूं। आप प्लीज थोड़ा सा मुझे समय दीजिए। एक बार

819
00:57:45,760 --> 00:57:50,560
बोल दीजिए निर्णायक है। एक मिनट एक मिनट हां निर्णायक है

820
00:57:50,560 --> 00:57:55,120
और वो प्रभुपाद की ही शिक्षाओं को आगे बढ़ाते हैं।

821
00:57:55,120 --> 00:57:59,760
मैं बोल रहा हूं कि जो जो हमारे सीनियर

822
00:57:59,760 --> 00:58:03,440
में निर्णायक है।

823
00:58:03,440 --> 00:58:07,520
ऋत्विक में निर्णायक है। जी बिल्कुल वो ऐसे दीक्षा नहीं देते लेकिन आप मेरी पूरी बात सुनना

824
00:58:07,520 --> 00:58:11,760
लेकिन ऐसे नहीं है कि आप मेरी इतनी सी बात ले अलग डायरेक्शन में साहब

825
00:58:11,760 --> 00:58:15,920
भाई साहब भाई साहब मैंने ये नहीं पूछा है वो दीक्षा देते हैं कि नहीं देते

826
00:58:15,920 --> 00:58:18,400
हैं

827
00:58:18,400 --> 00:58:22,480
मैंने नहीं पूछा है वो दीक्षा देते हैं कि नहीं देते हैं मैंने पूछा है क्या दीक्षा

828
00:58:22,480 --> 00:58:26,480
देते हैं कि नहीं देते हैं अभी अभी

829
00:58:26,480 --> 00:58:30,720
आप अभी आप लास्ट बार मुझे फिर से बताइएगा निर्णायक है कि नहीं है ऋत्विक

830
00:58:30,720 --> 00:58:34,960
में कोई जी एक मिनट एक बात बताओ

831
00:58:34,960 --> 00:58:39,040
इस चीज को आपने कितनी बार रिपीट कर दिया? फिर जब मैं कोई चीज को रिपीट कर

832
00:58:39,040 --> 00:58:44,160
क्योंकि हर क्योंकि हर बार आप अपनी बात को बोल के उससे बदलते हैं।

833
00:58:44,160 --> 00:58:49,280
उसको बदलते हैं। उस चीज को उस चीज पे टिके नहीं रहते।

834
00:58:49,280 --> 00:58:52,880
भाई साहब

835
00:58:52,880 --> 00:58:56,960
अभी आप सामने वालों को बोलने का मौका नहीं दे। आप चीजों को गोलगोल घुमाते

836
00:58:56,960 --> 00:59:01,040
हैं। आप चीजों को गोलगोल घुमाते हैं। इसलिए एक्सप्लेनेशन देनी पड़ती है। कल को

837
00:59:01,040 --> 00:59:05,680
बाद में आपको किसी हाई ऐसा नहीं होता है।

838
00:59:05,680 --> 00:59:10,640
चीजों को इसलिए एक्सप्लेन करना पड़ता है।

839
00:59:10,640 --> 00:59:14,800
मैंने आपको एक्सप्लेन करने से रोका नहीं है। मैं यह कह रहा हूं। जैसे मैंने

840
00:59:14,800 --> 00:59:19,520
आपसे पूछा एक मिनट मैं मैं बता रहा हूं।

841
00:59:19,520 --> 00:59:23,520
जैसे मैंने आपसे पूछा कि निर्णायक है कि नहीं? ठीक है?

842
00:59:23,520 --> 00:59:27,760
तो मेरा यह प्रश्न आपसे इसलिए है कि अगर निर्णायक है तो क्यों है? उसको

843
00:59:27,760 --> 00:59:31,840
किसने बताया बनाया? और कौन सा सिस्टम है शास्त्रों का जिसके आधार

844
00:59:31,840 --> 00:59:36,320
पर वो निर्णायक है। ठीक है? दूसरी बात आपका कहना है कि अगर एक्सप्लेनेशन

845
00:59:36,320 --> 00:59:40,880
नहीं देंगे तो उसके कई मतलब निकल सकते हैं। तो बिल्कुल आप अपनी बात को रखिए।

846
00:59:40,880 --> 00:59:44,880
आप किसी आपकी जिस बात के गलत मतलब निकल सकते हैं उस बात को

847
00:59:44,880 --> 00:59:49,120
आप बताइए। मगर पहले अपना क्लेम क्लियर कर दीजिए। यदि मेरा सवाल

848
00:59:49,120 --> 00:59:53,200
यह है कि आपके यहां कोई निर्णायक है कि नहीं है? तो आप पहले बताइए

849
00:59:53,200 --> 00:59:57,200
निर्णायक तो है पर हमारे यहां पर क्या है? एक लोकाचार है कि

850
00:59:57,200 --> 01:00:01,600
उनको निर्णायक ना कह करके उनको मार्गदर्शक कहा जाता है। है तो वह असल में निर्णायक

851
01:00:01,600 --> 01:00:05,600
ही। यह दूसरी बात यह है कि वो दीक्षा इत्यादि नहीं देते हैं।

852
01:00:05,600 --> 01:00:07,920
तो निर्णायक होने का दीक्षा देने

853
01:00:07,920 --> 01:00:12,000
से कोई संबंध नहीं है। दीक्षा वो देता है जो

854
01:00:12,000 --> 01:00:16,160
किसी शिष्य का गुरु हो। निर्णायक वह होता है जो यह

855
01:00:16,160 --> 01:00:20,160
तय करता है कि प्रभुपाद जी ने क्या कहा है, क्या

856
01:00:20,160 --> 01:00:24,160
नहीं कहा है। दीक्षा तो वह भी दे सकता है जिसको निर्णय करने वाला

857
01:00:24,160 --> 01:00:28,560
कह दे कि तुम जाकर दीक्षा दे दो। दीक्षा वो दीक्षा और किसी

858
01:00:28,560 --> 01:00:32,640
आपके यहां पर है ही है कि वो फोटो दिखा के दीक्षा होती है। है

859
01:00:32,640 --> 01:00:37,520
ना? तो यहां पर दीक्षा का मैटर ही नहीं है।

860
01:00:37,520 --> 01:00:41,600
यहां पर मैटर है कि ऋित्विक का निर्णायक कौन है? तो वो आपने बताया

861
01:00:41,600 --> 01:00:46,080
कि है। अब एक बार आप लास्ट बार बता दीजिए तो मैं सेलिब्रेट करूंगा थोड़ा सार्वजनिक

862
01:00:46,080 --> 01:00:50,160
रूप से इस बात। जी

863
01:00:50,160 --> 01:00:54,160
हमारे जो अभी जो आप जिस निर्णायक जिस शब्द के लिए सुनना

864
01:00:54,160 --> 01:00:58,480
चाह रहे हो वो मधु पंडित प्रभु दास है और उन्हीं के गाइडेंस में हम

865
01:00:58,480 --> 01:01:02,640
जो हमारा मूवमेंट है वो चल रहा है। बहुत बढ़िया मैं

866
01:01:02,640 --> 01:01:06,720
धन्य हो गया आपके इस निर्णय को सुनकर के क्योंकि हमारी बहुत देर तक

867
01:01:06,720 --> 01:01:10,800
इस विशेष विषय पर चर्चा हुई कि निर्णायक है कि नहीं। मैंने तो पहले ही बोल दिया था।

868
01:01:10,800 --> 01:01:14,880
मैंने तो पहले ही बोल दिया था। मैंने आप बार बदल रहे

869
01:01:14,880 --> 01:01:20,880
हो ना आप कह रहे हो निर्णायक नहीं मार्गदर्शक है आपको

870
01:01:21,040 --> 01:01:25,280
आप आपको आपका वीडियो दिखाऊं मैं आपको आपका वीडियो

871
01:01:25,280 --> 01:01:29,520
दिखाऊं जिसमें आप बोल रहे हैं निर्णायक नहीं मार्गदर्शक है वो आपका वीडियो

872
01:01:29,520 --> 01:01:33,680
दिखाऊं आपका वीडियो दिखाऊं मैं पूछ रहा हूं वीडियो दिखाऊं

873
01:01:33,680 --> 01:01:37,840
आपका आपने बोला है उसमें वह निर्णायक नहीं मार्गदर्शक है

874
01:01:37,840 --> 01:01:43,840
निर्णायक है फिर निर्णायक नहीं मार्गदर्शक है

875
01:01:48,960 --> 01:01:54,720
वीडियो दिखाऊं भाई साहब आपको वीडियो दिखाऊं

876
01:01:54,720 --> 01:01:58,720
एक काम करते हैं। यह बात यहां पे खत्म एक काम करते हैं। यह बात

877
01:01:58,720 --> 01:02:03,680
यहां खत्म कर देते हैं। नहीं तो आप कहो तो मैं वीडियो दिखाऊं।

878
01:02:03,680 --> 01:02:07,920
हम यह चीज तो मैंने पहले भी कह दी थी। वीडियो

879
01:02:07,920 --> 01:02:12,560
दिखाने की क्या जरूरत है? मैंने पहले भी कह दी थी। लेकिन आप जितनी

880
01:02:12,560 --> 01:02:16,960
बार आप मेरे ऊपर ये ब्लेम करेंगे कि आप जो है बार-बार घुमा रहे हैं।

881
01:02:16,960 --> 01:02:21,120
यह चीज तो मैंने पहले भी कह दी थी। मैंने पहले कह दिया था मैं इस को मानने वाला

882
01:02:21,120 --> 01:02:25,200
हूं और फिर मैं बाद में कहूं कि मैं इस को मानने वाला नहीं हूं। तो ये चीज

883
01:02:25,200 --> 01:02:31,200
तो मैंने पहले भी कह दी थी। मैं इस को मानने वाला हूं। क्या बात है?

884
01:02:31,680 --> 01:02:35,680
जितनी बार अनम्यूट होने के बाद आप यहां से कहानी शुरू करेंगे

885
01:02:35,680 --> 01:02:39,920
कि आप मुझे बोलने नहीं दे रहे हैं या आप रिपीट क्वेश्चन कर रहे हैं उतनी

886
01:02:39,920 --> 01:02:44,000
बार मैं आपको वो म्यूट करके फिर मैं आपको बताऊंगा कि

887
01:02:44,000 --> 01:02:48,560
भाई साहब आपने जितनी बार क्लेम किया उतनी बार उस क्लेम से आप हट गए।

888
01:02:48,560 --> 01:02:52,320
अब आप उस पर टिके हुए हैं।

889
01:02:52,320 --> 01:02:56,480
अब या तो आप आगे बढ़ाने की इच्छा प्रकट करें या फिर आप बता

890
01:02:56,480 --> 01:03:00,560
दे तो यही रिपीट करना है तो आप बता दें। आगे बढ़ना है या आप

891
01:03:00,560 --> 01:03:04,240
दोबारा वही रिपीट करेंगे? ब्लेम

892
01:03:04,240 --> 01:03:10,160
आगे बढ़ना है।

893
01:03:10,160 --> 01:03:16,160
जी शिवांग जी ऐसे अगर आप लूट करोगे तो डिबेट नहीं हो पाएगी। इस डिबेट को आप

894
01:03:16,480 --> 01:03:22,480
आप जा सकते हैं। आप जा सकते हैं। जाइए।

895
01:03:28,960 --> 01:03:32,400
क्या है कि

896
01:03:32,400 --> 01:03:38,400
व्यक्ति को लगता है कि वो अ

897
01:03:42,240 --> 01:03:46,240
बिल्कुल स्पष्ट है अपनी चीजों में। पर कई बार होता यह है कि

898
01:03:46,240 --> 01:03:50,720
वह स्वयं ही स्पष्ट नहीं होता है। तो वह किसी को स्पष्टता

899
01:03:50,720 --> 01:03:55,040
के साथ अपने सिद्धांत को कह कैसे पाएगा? प्रश्न

900
01:03:55,040 --> 01:03:59,360
शुरू यह हुआ था कि आप यह क्लेम कर रहे हो कि आप गड़िया वैष्णव

901
01:03:59,360 --> 01:04:03,520
संप्रदाय से हो। गिया वैष्णव संप्रदाय की जो प्रामाणिक गद्दियां

902
01:04:03,520 --> 01:04:07,600
हैं बल्कि ऐसी कई गद्दियां जो अभी भी इस

903
01:04:07,600 --> 01:04:11,680
के साथ कई जगह पर संबंधित है जैसे पुंडरिक जी

904
01:04:11,680 --> 01:04:15,840
इत्यादि तो कई ऐसी गुरु गदियां है जो अभी भी

905
01:04:15,840 --> 01:04:20,080
हैं। पर इस के अंदर या अभी बात करें अगर ऋत्विक

906
01:04:20,080 --> 01:04:24,240
वालों से बात हो रही है तो ऋत्विक वालों के पास ऋित्विक वालों के सिस्टम या

907
01:04:24,240 --> 01:04:25,360
इस में कहीं

908
01:04:25,360 --> 01:04:30,000
पर भी गॉड या वैष्णवाचार्यों का हस्तक्षेप नहीं है।

909
01:04:30,000 --> 01:04:34,560
अब मान लीजिए कि शंकर परंपरा से कोई महानुभाव

910
01:04:34,560 --> 01:04:38,720
दीक्ष दीक्षा प्राप्त करते हैं और आगे जाकर के वह अपने शिष्य बना देते

911
01:04:38,720 --> 01:04:42,960
हैं और और किसी को घोषित करके नहीं जाते हैं कि मेरे जाने के बाद

912
01:04:42,960 --> 01:04:46,960
मेरे देह त्याग के बाद कौन होगा जो मेरे द्वारा दी

913
01:04:46,960 --> 01:04:51,040
जाने वाली जो शिक्षा दीक्षा है उसको

914
01:04:51,040 --> 01:04:55,280
प्रामाणिक रूप से प्रस्तुत करेगा वो नहीं करके गए और उनके नाम से जो उनके शिष्यग

915
01:04:55,280 --> 01:04:59,840
है वह लेटर दिखाते हैं कि भाई वह किसी को नियुक्त करके नहीं गए तो नियुक्त कोई हो नहीं

916
01:04:59,840 --> 01:05:03,920
ठीक है? तो ऐसे में जो जिस परंपरा से आप प्रामाणिक रूप से

917
01:05:03,920 --> 01:05:08,080
जुड़े होने का दावा कर रहे हो, अगर आप कह रहे हो कि मैं शंकराचार्य परंपरा से हूं

918
01:05:08,080 --> 01:05:12,320
या आप कह रहे हो मधवाचार्य परंपरा से हूं तो उनको सीधे-सीधे आपकी चीजों

919
01:05:12,320 --> 01:05:16,320
में हस्तक्षेप करने का अधिकार प्राप्त है। क्योंकि आप खुद कह रहे हो हम गौड या

920
01:05:16,320 --> 01:05:20,560
वैष्णव है। अगर आपके गुरु यह चीज स्पष्ट करके

921
01:05:20,560 --> 01:05:24,560
नहीं गए हैं कि मेरे जाने के बाद कौन निर्णय करेगा कि मैंने क्या धर्म कहा है,

922
01:05:24,560 --> 01:05:28,560
क्या ब्रह्म कहा है? तो वह जो गौ वैष्णवाचार्य बैठे हैं विलुप्त तो

923
01:05:28,560 --> 01:05:32,640
हो नहीं गए। चलो विलुप्त हो गए होते तब आपकी बात को इस खिचड़ी को स्वीकार भी

924
01:05:32,640 --> 01:05:36,800
कर लिया जाता। वो विलुप्त तो हो नहीं गए हैं। तो वो

925
01:05:36,800 --> 01:05:40,880
आज के टाइम में अधिकृत है क्या इस में बोलने के लिए? नहीं। पुंडरीिक

926
01:05:40,880 --> 01:05:44,880
जी ने खुद कहा है अपने एक उसमें कि इस वाले बहुत अच्छा कर रहे हैं मगर

927
01:05:44,880 --> 01:05:48,880
किसी को बोलने नहीं देते अपने यहां। क्यों भाई? जब आप गौड या वैष्णव

928
01:05:48,880 --> 01:05:53,040
संप्रदाय से हो। आपकी आपको मालूम है कौन-कौन प्रामाणिक गौड या वैष्णव है।

929
01:05:53,040 --> 01:05:57,680
तो उनको अपने यहां हस्तक्षेप करने दो ना। आप तो हो नहीं अधिकृत

930
01:05:57,680 --> 01:06:01,680
तो जो प्रामाणिक रूप से आपके गुरु के भी ऊपर बैठे हुए हैं

931
01:06:01,680 --> 01:06:06,000
प्रामाणिक गद्दी से जुड़े हुए हैं उनको हस्तक्षेप करने दो आपके यहां के सिस्टम

932
01:06:06,000 --> 01:06:10,880
को उनको बदलने दो बदलाव लाने दो आपके यहां पर पर नहीं

933
01:06:10,880 --> 01:06:15,280
वो विदेशी मान्यताओं के अनुसार चीजों को आगे प्रवाह को बढ़ाना है ना तो कैसे हस्तक्षेप

934
01:06:15,280 --> 01:06:19,360
करने दें कहने को डंका खूब बजाएंगे हम गौडिया वैष्णव से जुड़े हुए हैं फिर

935
01:06:19,360 --> 01:06:23,440
ढूंढने जाएंगे टॉर्च लेकर के कि गौडिया वैष्णव आचार्य कहां है इस में कहां

936
01:06:23,440 --> 01:06:27,600
कौन सी गद्दी बैठा तो एक बताएगा जीबीसी करती है निर्णय एक

937
01:06:27,600 --> 01:06:31,680
बताएगा जो ऋत्विक की फौज है हमारे पास वो निर्णय करती है

938
01:06:31,680 --> 01:06:36,080
और फिर यह भी कह देगा कि निर्णायक है ही नहीं कोई इसी गुथमग्थी

939
01:06:36,080 --> 01:06:41,520
में व्यक्ति जूझता रहे यदि कोई प्रश्न करने आया है तो

940
01:06:41,520 --> 01:06:47,520
वरना वो जो कह दे वो मान लो

941
01:06:53,040 --> 01:06:57,280
ये है कोई धीरज जी करके बोल रहे हैं आपने ऐसा सीख लिया

942
01:06:57,280 --> 01:07:01,920
वैसा सीख लिया तो आपसे निवेदन है अगर आप अभी आ सकते हैं तो आ जाइए

943
01:07:01,920 --> 01:07:07,920
चेहरा लेकर आइएगा लिंक दे दीजिए भाई यहां पर

944
01:07:08,400 --> 01:07:12,480
किसी भी गौडिया वैष्णवाचार्य को आप बोलने नहीं देते हो अपने यहां कौन से रूप से

945
01:07:12,480 --> 01:07:16,480
माना जाए कि आप गौडिया वैष्णव संप्रदाय से जुड़े हुए हो। आप यह कहो कि हमारे

946
01:07:16,480 --> 01:07:20,960
गुरु तो जुड़े हुए थे पर वह अब कट चुके हैं।

947
01:07:20,960 --> 01:07:25,120
गौ वैष्णव से काट के गए क्योंकि सिस्टम ही बदल दिया आपने।

948
01:07:25,120 --> 01:07:29,280
भाई सिस्टम ये था कि आचार्य गद्दी पर जो बैठेगा

949
01:07:29,280 --> 01:07:33,440
वो निर्णय करेगा। आपने आचार्य गद्दी खत्म कर दी। चलो मान लिया

950
01:07:33,440 --> 01:07:37,680
प्रभुपाद जी तक आचार्य गद्दी थी आपके यहां। अब तो आप जा रहे हो तो अब आप जो

951
01:07:37,680 --> 01:07:41,680
है तो नियुक्त करके जा ही नहीं रहे हो किसी को। कोई भी

952
01:07:41,680 --> 01:07:45,680
व्यक्ति अपने इस मामले में तो ऋत्विक से अच्छा कौन है? कम से

953
01:07:45,680 --> 01:07:49,840
कम वह अपने आप पर उस प्रणाली को ले तो चल रहा है। हालांकि वहां भी खिचड़ी पकी

954
01:07:49,840 --> 01:07:54,000
हुई है कि निर्णय कर निर्णय निर्णय करने वाला है कौन? वो भी खिचड़ी का विषय

955
01:07:54,000 --> 01:07:58,000
है। पर कम से कम इससे तो अच्छा है कि निर्णय

956
01:07:58,000 --> 01:08:02,080
करता है भी और नहीं भी। वो अपने आप को कहते नहीं

957
01:08:02,080 --> 01:08:07,200
है। और फोटो से दीक्षा दिलाते हैं।

958
01:08:07,200 --> 01:08:08,400
आ जाए भैया।

959
01:08:08,400 --> 01:08:14,400
कौन है?

960
01:08:23,920 --> 01:08:28,860
कोई बात नहीं आगे चलिए अपन आगे बढ़ते हैं तो

961
01:08:28,860 --> 01:08:33,680
[गला साफ़ करने की आवाज़] मतलब कि आपके यहां पर निर्णायक है कोई

962
01:08:33,680 --> 01:08:37,760
ठीक है जी बिल्कुल है मतलब निर्णायक तो

963
01:08:37,760 --> 01:08:42,000
मैं उनको नहीं कहूंगा लेकिन हमारे गुरु प्रभुपाद

964
01:08:42,000 --> 01:08:48,000
जी की

965
01:08:52,000 --> 01:08:56,640
उनकी ठीक है जी बिलकुल है

966
01:08:56,640 --> 01:09:02,640
मतलब तो मैं उनको नहीं कहूंगा

967
01:09:08,800 --> 01:09:13,400
हां फॉलो ये कह रहा है कि तू पहले मेरा फॉर्म भर।

968
01:09:13,400 --> 01:09:15,840
[हंसी]

969
01:09:15,840 --> 01:09:21,840
एक दो मिनट बात करते हैं। शास्त्रवाद जी आप जुड़ जाइए।

970
01:09:23,520 --> 01:09:28,160
तू पहले मेरा फॉर्म भर तो अपने आप को फॉर्म भरने लायक बना तो लो।

971
01:09:28,160 --> 01:09:32,640
आप कुछ ऐसा करो कि हम भी आपके यहां पर आए। हां जाओ

972
01:09:32,640 --> 01:09:37,680
कुछ करो। ऐसा योग्यता प्राप्त करो। हम आपके यहां आएंगे। गए थे ना अभी अग्निवत जी के यहां।

973
01:09:37,680 --> 01:09:41,200
जाते तो हैं ना हम

974
01:09:41,200 --> 01:09:45,680
घर में घुस के मार के आते हैं घर में घुस के

975
01:09:45,680 --> 01:09:49,760
जाते हैं तो यह कहना बंद करो अपने आप को ऐसा बनाओ

976
01:09:49,760 --> 01:09:54,800
कि हमें सोचना पड़े कि आपके यहां अटैक कैसे करना है सर्जिकल

977
01:09:54,800 --> 01:09:58,880
स्ट्राइक कैसे करनी है सर्जिकल स्ट्राइक के उदाहरण हमारे पास बहुत

978
01:09:58,880 --> 01:10:02,960
है ठीक है तो अपने आप को ऐसा

979
01:10:02,960 --> 01:10:07,040
बनाओ आएंगे बाकी फिलहाल आपके यहां पर आपके यहां जो

980
01:10:07,040 --> 01:10:11,120
अभी जो फिलहाल इचिंग हो रही है अगर वो मिटानी है

981
01:10:11,120 --> 01:10:15,840
तो आ जाइए ऊपर खुजली मिटानी है फिलहाल बस

982
01:10:15,840 --> 01:10:20,000
12 जुलाई को दीक्षा कार्यक्रम नहीं होगा उसके पहले

983
01:10:20,000 --> 01:10:26,000
11 को होगा और 13 को होगा

984
01:10:44,000 --> 01:10:48,000
हां तो आप एक काम करिए आप जाइए आप जाइए

985
01:10:48,000 --> 01:10:52,080
अपने आप को ऐसा योग्य बनाइए कि हम आपके यहां आए आपका फॉर्म भरे।

986
01:10:52,080 --> 01:10:56,160
ठीक है? तो आपने देखा भाई बात ऐसी है कि कोई व्यक्ति

987
01:10:56,160 --> 01:11:00,800
जब यह ताल ठोकता है कि हम गौडिया वैष्णव संप्रदाय से हैं

988
01:11:00,800 --> 01:11:03,440
तो

989
01:11:03,440 --> 01:11:07,680
[नाक से की जाने वाली आवाज़] [गला साफ़ करने की आवाज़] और ऐसा है कि जो म्यूट वाली बात है म्यूट

990
01:11:07,680 --> 01:11:11,760
वाली बात ऐसी है कि व्यक्ति अगर एक स्ट्रक्चरल वे में

991
01:11:11,760 --> 01:11:16,320
बात करता है तो हमें बहुत अच्छा लगता है कि हम उसका स्वागत करें।

992
01:11:16,320 --> 01:11:20,400
अ मगर

993
01:11:20,400 --> 01:11:24,560
जब व्यक्ति अनावश्यक व्यर्थ में बातें बोलता है

994
01:11:24,560 --> 01:11:28,720
और आप जो है मुझे बोल नहीं बार उन्होंने करीबन मैंने

995
01:11:28,720 --> 01:11:32,880
जब छह बार उन्हें अनम्यूट किया तो उन्होंने पहले ब्लेम चालू किया कि आप जो है ब्लेम

996
01:11:32,880 --> 01:11:36,960
कर रहे हो आप जो है म्यूट कर रहे हो म्यूट कैसे ना करें पूछा कुछ जा रहा है आप

997
01:11:36,960 --> 01:11:42,960
बोल कुछ रहे हो बार-बार विषयांतर विषयांतर होता रहेगा

998
01:11:45,680 --> 01:11:51,680
आपका चैट क्या है?

999
01:11:52,080 --> 01:11:56,160
ठीक है। तो म्यूट करने

1000
01:11:56,160 --> 01:12:00,240
की आवश्यकता तब पड़ती जब व्यक्ति या तो सामने वाले को बार-बार इंटरप्ट करे जब जब वो

1001
01:12:00,240 --> 01:12:04,400
बोलना चाहे और ऐसा शुरू में उन्होंने किया। उसके बाद

1002
01:12:04,400 --> 01:12:08,640
विषय कुछ चल रहा है और वह कुछ कुछ और विषय पर निर्णय देने की बात करें। जैसे

1003
01:12:08,640 --> 01:12:12,800
मैंने पूछा कि आपके यहां पर निर्णायक है कि नहीं? तो पहले बोले नहीं

1004
01:12:12,800 --> 01:12:17,040
है। फिर बहुत देर की मगजबारी के बाद बोले है। उसमें

1005
01:12:17,040 --> 01:12:21,440
भी मुझे बहुत सारे उदाहरण देने पड़े। फिर उसके बाद बोलते

1006
01:12:21,440 --> 01:12:25,440
बोलते फिर बोले कि नहीं नहीं मैं उन्हें निर्णायक नहीं कहूंगा। यहां पर

1007
01:12:25,440 --> 01:12:29,520
सिद्धांत की बात हो रही है। वहां आपका अपना जो व्यक्तिगत

1008
01:12:29,520 --> 01:12:33,520
आप लोग क्या करते हैं? वो एक बात अलग है। एक दूसरे के लिए संबोधन क्या करते हैं?

1009
01:12:33,520 --> 01:12:35,440
मगर यहां सिद्धांत पूछा जा रहा है। निर्णायक है

1010
01:12:35,440 --> 01:12:39,600
कि नहीं? तो आप यह कह रहे हो कि निर्णायक नहीं है। नहीं कहूंगा। फिर निर्णायक है। फिर निर्णायक

1011
01:12:39,600 --> 01:12:43,600
नहीं है। फिर निर्णायक है। मार्गदर्शक है। शिक्षा का प्रचार प्रसार करने वाले हैं। फिर

1012
01:12:43,600 --> 01:12:47,600
बाद में कह तो मैं कह ही चुका हूं। कह चुके हो तो उस पर सस्टेन आप कहां रहे? टिके कहां रहे?

1013
01:12:47,600 --> 01:12:51,920
बार-बार बदला। इसलिए फिक्स करने के लिए आपसे इतनी जद्दोजहद करनी पड़ी।

1014
01:12:51,920 --> 01:12:55,920
अब इस बीच में आप बार-बार कुछ और ऐसी चीजें खोलते हैं जिसकी

1015
01:12:55,920 --> 01:13:00,080
वहां पर आवश्यकता नहीं है। और जिसकी वजह से खामखा जो टाइम है

1016
01:13:00,080 --> 01:13:04,240
हमारी कन्वर्सेशन का वो बढ़ता जाएगा। मुख्य विषय छूटता जाएगा। का मुख्य विषय तो छूटा

1017
01:13:04,240 --> 01:13:07,040
ही है। अंतगत

1018
01:13:07,040 --> 01:13:11,280
मुख्य विषय ये था कि कौन सा वैष्णवाचार्य है प्रभुपाद जी किसी को नियुक्त

1019
01:13:11,280 --> 01:13:15,520
करके गए नहीं है तो कौन सा वैष्णवाचार्य है जो हस्तक्षेप कर रहा है।

1020
01:13:15,520 --> 01:13:19,600
अब यदि प्रभुपाद जी यह कह के गए हैं कि कोई

1021
01:13:19,600 --> 01:13:23,600
नहीं होगा। आप ही लोग डिसाइड करोगे तो यह प्रभुपाद जी को आपको मानना पड़ेगा कि

1022
01:13:23,600 --> 01:13:27,760
इतने अंशों में वो परंपरा प्राप्त सिद्धांतों को लेकर आगे नहीं बढ़े। ये

1023
01:13:27,760 --> 01:13:32,960
ये क्लेम करिए कुछ तो एक जगह तो टिकी है ना।

1024
01:13:32,960 --> 01:13:36,960
आप यह मान लो कि प्रभुपाद जी ने इतनी इतनी चीजों में परंपरा को नहीं माना अपने से कुछ कर

1025
01:13:36,960 --> 01:13:41,120
दिया तब आप तब फिर मैं पूछूंगा एस इट इज आपका हां

1026
01:13:41,120 --> 01:13:45,600
भाई शास्त्र जी जय श्री राम

1027
01:13:45,600 --> 01:13:51,600
अन म्यूट करिए माइक अपना जय श्री राम भैया

1028
01:13:54,880 --> 01:14:00,880
आवाज आ रही है हां आ रही है आ रही है

1029
01:14:02,640 --> 01:14:08,640
जी भैया ये तो बात घुमाए जा रहा है। घुमाए जा रहा है।

1030
01:14:08,960 --> 01:14:13,120
इतना इतना टाइम सच्चाई बताई नहीं। इतना

1031
01:14:13,120 --> 01:14:17,200
इतना टाइम और इतना घी थोड़ी ना पिया है भाई हमने कि आप बार-बार अपनी

1032
01:14:17,200 --> 01:14:21,280
कही हुई बातों से मुकररोगे फिर आओगे फिर मुकररोगे। हम उसी में जद्दोजहद

1033
01:14:21,280 --> 01:14:27,280
में आपको बार-बार मनवाते रहे।

1034
01:14:28,080 --> 01:14:32,080
यही बात है। ये लोग मरने वाले नहीं है। इन लोग के पास कुछ

1035
01:14:32,080 --> 01:14:36,160
है नहीं तो वही कोई निर्णायक तो है नहीं इनके पास तो

1036
01:14:36,160 --> 01:14:41,200
क्या बताएंगे?

1037
01:14:41,200 --> 01:14:45,200
ये देखो ये अभी तक कह रहे थे तू मुझे लाइव पे ले ले। अब मैं बता दूंगा क्या हो गया। जब लाइव

1038
01:14:45,200 --> 01:14:49,600
पे लेने की बात हुई तो बहाने बनाने लगे। वो वो दिखाइए इनका पुराना वाला।

1039
01:14:49,600 --> 01:14:55,600
तू मुझे लाइव पर ले ले।

1040
01:14:56,880 --> 01:15:01,120
धीरज जी आ जाइए। आपको सुनते हैं हम बस थोड़ा सा बात को फाल खामखा

1041
01:15:01,120 --> 01:15:05,440
अपने स्टेटमेंट से मुकरिएगा नहीं और जो विषय चल रहा है उससे विषयंतर

1042
01:15:05,440 --> 01:15:10,000
ना करिएगा प्लीज

1043
01:15:10,000 --> 01:15:15,680
ये देखिए बिल्कुल बिल्कुल अभी थोड़ी देर पहले आ जाओ भाई

1044
01:15:15,680 --> 01:15:20,080
आ जाओ लिंक दिया हुआ है

1045
01:15:20,080 --> 01:15:25,520
आप आ सकते है लिंक दिया हुआ है अब कह रहा सर

1046
01:15:25,520 --> 01:15:29,840
अब कह रहे है आई एम अनेबल टू जॉइ आई एम अनेबल

1047
01:15:29,840 --> 01:15:33,120
टू जॉइ विद दिस लिंक

1048
01:15:33,120 --> 01:15:37,120
तो क्या नए प्रकार का ऋित्विक लिंक दिया जाए

1049
01:15:37,120 --> 01:15:41,520
क्या आपको [हंसी]

1050
01:15:41,520 --> 01:15:44,720
अनेबल टू जॉइ

1051
01:15:44,720 --> 01:15:50,560
अच्छा है अच्छा है ऐसे ही भागो तुम लोग

1052
01:15:50,560 --> 01:15:54,560
चलिए ठीक है मुझे आशा है आप लोगों को काफी कुछ समझ में

1053
01:15:54,560 --> 01:15:58,560
आया होगा तो इस का ये जो क्लेम होता है इस ऋत्विक का यह

1054
01:15:58,560 --> 01:16:02,720
बंडलबाजी है कि वो गड वैष्णव संप्रदाय से हैं। किसी का भी

1055
01:16:02,720 --> 01:16:06,960
यही आर्य समाजी भी करते हैं। आर्य समाजी क्या कहते हैं? मैं आपको वही बता रहा हूं जो ऋषियों

1056
01:16:06,960 --> 01:16:12,960
ने कहा है। इस तरीके से परंपरा नहीं होती है।

1057
01:16:13,040 --> 01:16:18,560
कोई भी व्यक्ति आएगा कह देगा। मैं आपको वो बता रहा हूं जो प्रभुपाद जी ने कहा है।

1058
01:16:18,560 --> 01:16:21,360
है ना?

1059
01:16:21,360 --> 01:16:26,560
सही बात है भैया। ये लोग अपने हिसाब से जो मन सौदा दावा ठोक लेंगे।

1060
01:16:26,560 --> 01:16:32,480
हम तो क्या है अब ये क्या कह रहा है? आई हैव गिवन

1061
01:16:32,480 --> 01:16:36,720
के वाई का मतलब क्या होता है? आई हैव गिवन यू माय नंबर

1062
01:16:36,720 --> 01:16:41,200
लिख रहे होंगे तो के वाई हो गया होगा। आई हैव गिवन यू माय नंबर एंड

1063
01:16:41,200 --> 01:16:45,200
मैं भागने वालों में से नहीं। मैं भागने देखिए एक

1064
01:16:45,200 --> 01:16:49,200
स्ट्रक्चरल वे में बात करते हैं तो उसमें कुछ समझ में आती चीजें। बार-बार अपनी कही हुई

1065
01:16:49,200 --> 01:16:53,280
बातों से कोई पलटता है। बार-बार जो पूछा जा रहा है उसको उसकी बजाय

1066
01:16:53,280 --> 01:16:57,280
कुछ और बोलता है तो दिक्कत आती है। एक स्ट्रक्चरल वे रखिए। पूछा

1067
01:16:57,280 --> 01:17:01,520
जा रहा है उस बताइए। जैसे आप जब मुझसे कुछ पूछते हो तो मैं उसमें अपनी चीजें

1068
01:17:01,520 --> 01:17:05,520
सीधे बताता हूं। बिना उसमें मिलावट के जो है वही बताऊंगा ना। और अगर मैं

1069
01:17:05,520 --> 01:17:06,020
उसमें

1070
01:17:05,680 --> 01:17:09,680
मिलावट करके बता रहा हूं तो इसका मतलब मुझे अपनी चीजों पर ना बिलीव है ना उनसे

1071
01:17:09,680 --> 01:17:13,680
प्रेम है ना उनमें श्रद्धा है। क्यों कर रहे हो मिलावट? भाई आप कह दो ना

1072
01:17:13,680 --> 01:17:17,920
कि निर्णायक नहीं है या मान लो निर्णायक है पर कहते नहीं है। सीधी

1073
01:17:17,920 --> 01:17:21,200
बात

1074
01:17:21,200 --> 01:17:25,360
और अगर मैंने पूछा निर्णायक है कि नहीं है अगर निर्णायक

1075
01:17:25,360 --> 01:17:29,360
मैंने पूछा है कि नहीं है तो भाई महाभारत द्वारिका अरे

1076
01:17:29,360 --> 01:17:33,440
भाई पहले क्लेम तो कर दो कि निर्णायक है। अगर मान लो आपने कहा

1077
01:17:33,440 --> 01:17:37,840
निर्णायक है तो उसको आपको जस्टिफाई करने की जरूरत ही नहीं। जब आप कहोगे निर्णायक

1078
01:17:37,840 --> 01:17:42,000
नहीं है तब आप उसको जस्टिफाई करने की जरूरत पड़ेगी क्योंकि मेरा क्वेश्चन है निर्णायक के बिना

1079
01:17:42,000 --> 01:17:46,000
आप निर्णय कैसे करोगे प्रभुपाद जी ने क्या कहा तो पहले मुझे बता तो दो

1080
01:17:46,000 --> 01:17:50,400
कि आपका किशोर निर्णय है जिससे कि मुझे आपको एक्सप्लेनेशन

1081
01:17:50,400 --> 01:17:54,400
देने की जरूरत है कि नहीं है अगर नहीं है तो एक्सप्लेनेशन चाहिए है तो

1082
01:17:54,400 --> 01:17:58,560
क्यों चाहिए फिर तो आप उसी साइड हो जिस साइड में हूं फिर तो बात को आगे बढ़ाते हैं कि कौन

1083
01:17:58,560 --> 01:18:02,560
है वो गौ वैष्णव संप्रदाय के अधीन है कि नहीं भाई किसी एक

1084
01:18:02,560 --> 01:18:06,640
प्रामाणिक गुरु गद्दी के अधीन होना पड़ेगा ना आपको और

1085
01:18:06,640 --> 01:18:11,840
प्रामाणिक गुरु गदियां है अभी भी अवेलेबल है जो तो क्यों नहीं है उनके अधीन

1086
01:18:11,840 --> 01:18:16,000
हो जाओ उनके अधीन सारा सारी लड़ाई खत्म हो जाएगी हो

1087
01:18:16,000 --> 01:18:21,280
जाओ अधीन हो जाओ उनकी चीजों को मान लो आप

1088
01:18:21,280 --> 01:18:25,520
हां जी शास्त्रवादी जी

1089
01:18:25,520 --> 01:18:29,520
जी भैया बिल्कुल ये लोग के पास सच्चाई है नहीं ये

1090
01:18:29,520 --> 01:18:33,680
लोग तभी बताएंगे कि इनके पास प्रमाणिक कौन है इसलिए ये लोग भागेंगे

1091
01:18:33,680 --> 01:18:37,840
पहले तो अपना अपनी इज्जत बचाने के लिए चैलेंज दे देंगे कि आओ

1092
01:18:37,840 --> 01:18:42,160
मेरे को लो लाइव में। मैं तुम्हें बताता हूं और बाद में जब लिंक दिया जाएगा तो भागते

1093
01:18:42,160 --> 01:18:47,520
फिरेंगे और बोलेंगे भागने वालों ऐसा नहीं हूं। [हंसी]

1094
01:18:47,520 --> 01:18:52,640
भाषा देखिए भाषा क्या है इस व्यक्ति की

1095
01:18:52,640 --> 01:18:56,880
कि तू मुझे लाइव पे ले। फिर मैं बताता हूं तुझे।

1096
01:18:56,880 --> 01:19:00,960
फिर लाइव पर गए। उसके बाद लाइव पर लेने के बाद तू यह

1097
01:19:00,960 --> 01:19:06,320
तू वो। तो भाई तू कह क्यों रहा है लाइव पे लेने को? पहले सोच दामोदर नाभि भाषे

1098
01:19:06,320 --> 01:19:10,400
पहले बोल क्या सोच सोच के बोलना राम जो भी बोलते हैं दो

1099
01:19:10,400 --> 01:19:14,480
सोच समझ के बोलते हैं दो प्रकार की बातें नहीं बोलते अब तुम्हारे यहां राम

1100
01:19:14,480 --> 01:19:18,560
को माना ही नहीं जाता है एक अलग ही काल्पनिक कृष्ण बना करके आप लोग पूज

1101
01:19:18,560 --> 01:19:22,640
रहे हो तो क्या किया जाएगा चलिए खैर आप लोगों को आनंद आया होगा

1102
01:19:22,640 --> 01:19:26,720
आज की चर्चा में मुझे लगता है और समय

1103
01:19:26,720 --> 01:19:32,720
देने के लिए सबका आभार शास्त्र जी आपका आभार जय श्री राम सभी को

1104
01:19:33,680 --> 01:19:39,680
अभी अभी आप अभी आप बताइएगा

1105
01:19:46,240 --> 01:19:50,480
ये सब बातें आप लाइव आ के करिए क्योंकि मैं आपको यहां भी म्यूट कर सकता हूं।

1106
01:19:50,480 --> 01:19:54,480
हेलो आप जो यहां बोल रहे हैं ना ये भी आप लाइव

1107
01:19:54,480 --> 01:19:58,800
आ के करिए। आपको मैं यहां भी म्यूट कर सकता हूं। आपको बैन

1108
01:19:58,800 --> 01:20:03,040
कर सकता हूं। फिर आप पूछिएगा अधिकार तुझे किसने दिया बैन

1109
01:20:03,040 --> 01:20:07,520
करने का? जैसे आप यहां पर बात कर पा रहे हो मुझसे।

1110
01:20:07,520 --> 01:20:11,920
मैं चाह रहा हूं आपको बोलने दे रहा हूं तब आप बोल पा रहे हो।

1111
01:20:11,920 --> 01:20:16,480
तो आकर के आप जब मैं देख रहा हूं सामने वाला अपनी

1112
01:20:16,480 --> 01:20:20,480
उसकी जो फितरत है उसके कारण से वो बार-बार बातों को बदल रहा है, घुमा

1113
01:20:20,480 --> 01:20:24,480
रहा है। तो मैं जब वो मेरी बात में इंटरप्ट कर रहा है तब

1114
01:20:24,480 --> 01:20:28,640
उसे म्यूट कर रहा हूं। अगर ऐसा ही है कि म्यूट करने का अधिकार किसने

1115
01:20:28,640 --> 01:20:32,880
दिया तो उससे पूछो कि उसको इंटरप्ट करने का अधिकार किसने दिया। ठीक है?

1116
01:20:32,880 --> 01:20:36,960
और फिलहाल जो आप यहां पर लिख रहे हैं मैं आपको भी म्यूट कर सकता हूं। तो आपको यहां पर भी लिखना नहीं

1117
01:20:36,960 --> 01:20:40,960
चाहिए। क्योंकि अगर मेरे आप मेरे द्वारा आपके अधिकार छीनने के

1118
01:20:40,960 --> 01:20:45,120
कारण आप नहीं आ रहे हैं ऊपर तो वो जो अधिकार छीनने का आधार

1119
01:20:45,120 --> 01:20:48,800
है वो यहां भी लागू होता है। ठीक है? जय

1120
01:20:48,800 --> 01:20:53,280
श्री राम सभी को।

1121
01:20:53,280 --> 01:20:57,280
जय श्री राम भैया।
