1
00:00:01,600 --> 00:00:06,000
नहीं है। एक अब तुम अपना वो क्लेम बताओ

2
00:00:06,000 --> 00:00:10,800
गीता से। हां हां गीता

3
00:00:10,800 --> 00:00:14,880
अध्याय दो और नौ में यह स्पष्ट

4
00:00:14,880 --> 00:00:19,040
लिखा हुआ है कि जितने भी भूत

5
00:00:19,040 --> 00:00:23,040
प्राणी हैं वो प्रकृति में लीन होते

6
00:00:23,040 --> 00:00:27,200
हैं और प्रकृति और परब्रह्म दोनों एक ही है।

7
00:00:27,200 --> 00:00:31,200
दोनों अलग नहीं है। इसे अलग समझने का प्रयास करेंगे

8
00:00:31,200 --> 00:00:35,280
तो फिर मुझे और भी प्रमाण देने पड़ेंगे पुराणों से।

9
00:00:35,280 --> 00:00:39,360
गीता अध्याय दो श्लोक नंबर 27 में लिखा हुआ है क्योंकि

10
00:00:39,360 --> 00:00:43,440
इस मान्यता के अनुसार जन्मयोग की मृत्यु और मरे हुए का जन्म निश्चित

11
00:00:43,440 --> 00:00:47,520
है और नौ में लिखा हुआ है कि प्रकृति जितने भी भूत प्राणी है जितने

12
00:00:47,520 --> 00:00:51,520
भी टोटली एक्स व जेड जितने भी भूत प्राणी है

13
00:00:51,520 --> 00:00:55,600
प्रकृति में लीन होते हैं और लीन होने के बाद में जब सृष्टि का जो

14
00:00:55,600 --> 00:01:00,960
कार्यभार है वह समेटने के बाद में फिर दोबारा से मैं उनको रच देता हूं।

15
00:01:00,960 --> 00:01:06,560
तो इस इस हिसाब से जन्म मृत्यु किसी की कटती नहीं है।

16
00:01:06,560 --> 00:01:10,880
कहां लिखा है?

17
00:01:10,880 --> 00:01:15,360
गीता अध्याय दो श्लोक नंबर 27 पढ़िए। उसके बाद में

18
00:01:15,360 --> 00:01:21,360
नौ पे आ जाइए।

19
00:01:22,880 --> 00:01:28,880
नौ का सात और आठ पढ़ लीजिए।

20
00:01:30,960 --> 00:01:34,640
नौ का सात और आठ

21
00:01:34,640 --> 00:01:40,640
पहले दो का 27 पढ़ लीजिए उसके बाद नौ का सात आठ पढ़ना

22
00:01:43,600 --> 00:01:49,600
जन्मे हुई की मृत्यु और मरे हुए का जन्म निश्चित है।

23
00:02:00,400 --> 00:02:06,400
दो का 27

24
00:02:07,840 --> 00:02:12,080
ये हां दो का एक मिनट एक मिनट

25
00:02:12,080 --> 00:02:18,080
देख रहा हूं देख रहा हूं हां

26
00:02:20,160 --> 00:02:24,160
दो के 27 में लिखा है संपूर्ण प्राणी जन्म से पहले

27
00:02:24,160 --> 00:02:28,240
अप्रकट थे और मरने के बाद भी अप्रकट होने वाले हैं। केवल बीच

28
00:02:28,240 --> 00:02:32,240
में ही प्रकट है। ऐसी स्थिति में शोक क्यों? 27

29
00:02:32,240 --> 00:02:36,240
में लिखा है कि इस मान्यता के अनुसार जन्मे हुए की मृत्यु निश्चित

30
00:02:36,240 --> 00:02:40,400
है और मरे हुए का जन्म निश्चित है। इससे भी इस बिना उपाय वाले

31
00:02:40,400 --> 00:02:45,840
विषय में तू शोक करने योग्य नहीं है।

32
00:02:45,840 --> 00:02:50,160
तो इसमें तो एक मान्यता बताई जा रही है। यदि आपको मोक्ष

33
00:02:50,160 --> 00:02:54,320
प्राप्त नहीं हो रहा है तो उस स्थिति में जिसकी मृत्यु हो रही है उसका जन्म

34
00:02:54,320 --> 00:02:58,560
निश्चित है। जिसका जन्म हो रहा है उसमें मृत्यु निश्चित है। इसमें यह कहा कि उसको मोक्ष मिलेगा

35
00:02:58,560 --> 00:03:03,120
ही नहीं। मोक्ष मिल ही नहीं सकता। हां अब

36
00:03:03,120 --> 00:03:09,120
अब आप नौ का सात और आठ पढ़ लीजिए।

37
00:03:28,560 --> 00:03:32,960
कल्पों के अंत में सब भूत मेरी प्रकृति को प्राप्त होते हैं। अर्थात

38
00:03:32,960 --> 00:03:38,160
प्रकृति में लीन होते हैं और कल्पों के आदि में उनको मैं फिर रचता हूं।

39
00:03:38,160 --> 00:03:40,800
तो

40
00:03:40,800 --> 00:03:44,800
इसका अर्थ क्या हुआ? यह तो महाप्रलय की बात हो रही है।

41
00:03:44,800 --> 00:03:48,800
महाप्रलय के समय की बात हो रही है। यह मोक्ष की बात थोड़ी

42
00:03:48,800 --> 00:03:51,840
ना हो रही है।

43
00:03:51,840 --> 00:03:57,840
जिसके जो जन्मा जन्म जन्मांतर

44
00:03:57,920 --> 00:04:02,080
एक सेकंड एक सेकंड सुनिए। अरे पूरा पढ़ा

45
00:04:02,080 --> 00:04:07,200
नहीं आपको। पढ़ लेता हूं। अपनी प्रकृति को अंगीकार करके

46
00:04:07,200 --> 00:04:11,600
स्वभाव के बल से परतंत्र हुए संपूर्ण भूत समुदाय को बार-बार

47
00:04:11,600 --> 00:04:17,280
उनके कर्मों के अनुसार रचता हूं। ठीक है? इसमें क्या दिक्कत है?

48
00:04:17,280 --> 00:04:21,360
इसमें क्या दिक्कत है? हां। अब अब सवाल हां मैं

49
00:04:21,360 --> 00:04:25,440
आगे आगे बढ़ता हूं। आगे बढ़ता हूं। अब आते हैं गीता अध्याय आठ

50
00:04:25,440 --> 00:04:29,680
के श्लोक नंबर 16 में। 16 में कहा है कि हे अर्जुन ब्रह्मलोक

51
00:04:29,680 --> 00:04:34,320
पर्यंत सब लोग पुनरावृति में लेकिन मुझे प्राप्त करके पुनर्जन्म

52
00:04:34,320 --> 00:04:38,320
नहीं होता यानी कि प्रकृति और परब्रह्म दोनों एक ही

53
00:04:38,320 --> 00:04:44,080
है अलग नहीं है।

54
00:04:44,080 --> 00:04:50,080
एक मिनट मुझे आठ 16 देख लेने दो।

55
00:05:05,440 --> 00:05:09,680
ब्रह्मलोक पर्यंत सब लोक पुनरावर्ती है। परंतु हे कुंती पुत्र

56
00:05:09,680 --> 00:05:13,920
मुझको प्राप्त होकर पुनर्जन्म नहीं होता क्योंकि मैं कालातीत हूं और

57
00:05:13,920 --> 00:05:18,000
ये सब ब्रह्मा आदि लोक काल के द्वारा सीमित होने से अनित्य है। तो

58
00:05:18,000 --> 00:05:21,600
इसमें क्या दिक्कत क्या है?

59
00:05:21,600 --> 00:05:27,600
प्रकृति में प्रकृति में प्रकृति में

60
00:05:30,240 --> 00:05:32,800
आपका

61
00:05:32,800 --> 00:05:37,040
समझने का प्रयास कर रहा हूं। तो मुझे करेक्ट मुझे करेक्ट करिएगा।

62
00:05:37,040 --> 00:05:41,120
एक मिनट एक मिनट आप वहां कह रहे हैं कि वो प्रकृति में लीन होते

63
00:05:41,120 --> 00:05:45,200
हैं कल्प के समय और यदि मुक्ति यही

64
00:05:45,200 --> 00:05:49,440
है कि वो जो है ईश्वर में लीन हो जाए तो क्योंकि प्रकृति और ईश्वर

65
00:05:49,440 --> 00:05:53,440
एक ही है तो इसलिए यदि प्रकृति में लीन होने से व्यक्ति मुक्त

66
00:05:53,440 --> 00:05:57,680
नहीं होता है तो फिर इसका मतलब ईश्वर में भी लीन होने से व्यक्ति मुक्त

67
00:05:57,680 --> 00:06:01,040
नहीं होगा।

68
00:06:01,040 --> 00:06:05,280
मतलब आप यह समझते हैं कि प्रकृति और नहीं

69
00:06:05,280 --> 00:06:09,360
प्रकृति और ब्रह्म दोनों एक ही है। आपको शिव पुराण

70
00:06:09,360 --> 00:06:13,360
में प्रमाण दे सकता हूं। व्यवहार में व्यवहार

71
00:06:13,360 --> 00:06:17,440
की दृष्टि से नहीं सुनो सुनो मैं मैं प्रमाण

72
00:06:17,440 --> 00:06:22,480
में जानता हूं 120

73
00:06:22,480 --> 00:06:27,760
सुन लो सुन लो सुन लो सुन लो हां

74
00:06:27,760 --> 00:06:32,000
तत्व की दृष्टि से दोनों एक है। व्यवहार में दोनों अलग-अलग

75
00:06:32,000 --> 00:06:36,080
है। तो जहां पर यह कहा जा रहा है कि प्रकृति में लीन होकर

76
00:06:36,080 --> 00:06:40,080
के वो लोग वापस आते हैं तो वहां पर व्यवहारिक भेद के अनुसार

77
00:06:40,080 --> 00:06:44,240
कहा जा रहा है और जहां पर यह कहा जा रहा है कि परम ब्रह्म

78
00:06:44,240 --> 00:06:48,240
और प्रकृति एक है तो उस परम ब्रह्म को प्राप्त करने वाले जो है वहां

79
00:06:48,240 --> 00:06:52,560
मोक्ष को प्राप्त कर रहे हैं। जैसे कि जैसे कि इधर

80
00:06:52,560 --> 00:06:57,760
देखो भैया इधर देखो वीडियो की ओर देखो

81
00:06:57,760 --> 00:07:01,200
मुझे

82
00:07:01,200 --> 00:07:05,200
किया है। एक वो मैंने एक्सेप्ट किया है। मैं आपको

83
00:07:05,200 --> 00:07:11,200
यह बता रहा हूं कि आपका नाम है अमित दास।

84
00:07:12,400 --> 00:07:16,480
आप उदाहरण मत दीजिए। सुनिए श्रीस भाई आपने

85
00:07:16,480 --> 00:07:21,360
आप जहां ब्रह्मा विष्णु महेश उदाहरण

86
00:07:21,360 --> 00:07:25,760
उदाहरण क्यों नहीं दूं? तुम किसी के भाई हो, किसी के बेटे हो, किसी के

87
00:07:25,760 --> 00:07:29,760
किसी के पुत्र हो, किसी के पति हो, किसी के पिता हो कि

88
00:07:29,760 --> 00:07:33,760
नहीं हो? तत्व की से हो जहां

89
00:07:33,760 --> 00:07:37,840
से ब्रह्मा विष्णु वहां से वहां से आगे जाएंगे

90
00:07:37,840 --> 00:07:43,360
क्या आत्मा किससे आगे

91
00:07:43,360 --> 00:07:47,600
ब्रह्मा जहां से ब्रह्मा विष्णु महेश प्रकट होते हैं सुनिए जहां से ब्रह्मा विष्णु

92
00:07:47,600 --> 00:07:51,680
महेश प्रकट होते हैं आत्मा उससे आप

93
00:07:51,680 --> 00:07:55,920
बताइए उसका प्रमाण दीजिए प्रकट होने से आगे जाएंगे प्रकट होने से आगे जाएंगे

94
00:07:55,920 --> 00:08:00,720
उसका प्रमाण मैं उसका प्रमाण दूंगा ना अपने भाई मैं आपको

95
00:08:00,720 --> 00:08:05,760
प्रमाण दे तो रहा हूं। एक मिनट मैं मैं आपको प्रमाण दे तो रहा हूं।

96
00:08:05,760 --> 00:08:10,080
मैंने आपसे कहा कि आप किसी के पिता पुत्र और भाई हैं। पति

97
00:08:10,080 --> 00:08:16,080
हैं। क्या आप तत्व की दृष्टि से भी पिता पुत्र पति हैं सबके?

98
00:08:18,080 --> 00:08:21,840
एक ही हूं

99
00:08:21,840 --> 00:08:25,840
लेकिन व्यवहारिक रूप तत्व की दृष्टि से भी आप

100
00:08:25,840 --> 00:08:30,960
पिता पुत्र पति और भाई ये सब हैं।

101
00:08:30,960 --> 00:08:35,040
व्यवहारिक रूप से अलग हूं मैं। लेकिन व्यवहारिक रूप से

102
00:08:35,040 --> 00:08:39,280
आप वही मैं कह रहा हूं। जहां पर प्रकृति में लीन होकर के वापस

103
00:08:39,280 --> 00:08:43,760
आने की बात हो रही है वहां व्यवहार की बात हो रही है। जहां पर प्रकृति

104
00:08:43,760 --> 00:08:47,840
और ब्रह्म अलग-अलग है। और जहां पर ब्रह्म को प्राप्त करके जो है

105
00:08:47,840 --> 00:08:52,080
मुक्ति पाने की बात हो रही है। वहां पर जब आप कहेंगे प्रकृति एक ही है तो वहां व्यवहार

106
00:08:52,080 --> 00:08:56,240
नहीं है वहां मोक्ष है। वहां परमार्थ है। तत्व की दृष्टि की बात हो रही है वहां। समझ

107
00:08:56,240 --> 00:09:00,320
में आया? हां। उसी के लिए उसी के लिए

108
00:09:00,320 --> 00:09:04,480
गीता ज्ञान दाता प्रभु ने कहा है कि मुझ ब्रह्म का एक ओम मंत्र है और ओम

109
00:09:04,480 --> 00:09:09,040
मंत्र से ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है। पलट रहे ब्रह्मलोक में प्राणी

110
00:09:09,040 --> 00:09:14,240
मंत्र अरे भाई नहीं अब सुनिए

111
00:09:14,240 --> 00:09:18,960
अब मेरी बात सुनिए जवाब सुनिए हां आप जवाब सुनिए

112
00:09:18,960 --> 00:09:22,960
सुनिए एक एक मिनट अब आप जवाब सुनिए हां सातवा

113
00:09:22,960 --> 00:09:27,200
अध्याय बोलिए सातवा अध्याय बोलिए

114
00:09:27,200 --> 00:09:29,520
पांच

115
00:09:29,520 --> 00:09:33,360
सातवा अध्याय कौन सा खोलू बताइए? सातवां

116
00:09:33,360 --> 00:09:39,360
अध्याय खोल लिया मैंने।

117
00:09:47,920 --> 00:09:53,920
कौन सा है? बता रहा हूं। कौन सा?

118
00:10:03,120 --> 00:10:08,000
इसमें लिखा हुआ है दव श्लोक में जाइए।

119
00:10:08,000 --> 00:10:10,320
हेलो

120
00:10:10,320 --> 00:10:14,880
हेलो हां मैं सुन रहा हूं।

121
00:10:14,880 --> 00:10:19,280
10व श्लोक में लिखा हुआ है कि

122
00:10:19,280 --> 00:10:20,400
इसमें लिखा हुआ है कि

123
00:10:20,400 --> 00:10:25,200
हे अर्जुन तू संपूर्ण भूतों का सनातन बीज और मुझको ही जान

124
00:10:25,200 --> 00:10:27,360
मैं बुद्धिमानों की बुद्धि और

125
00:10:27,360 --> 00:10:31,440
तेजस्वी बलवानों का हो गया काफी है सनातन हो गया बस काफी है उतना काफी

126
00:10:31,440 --> 00:10:37,120
है सनातन का मतलब क्या है

127
00:10:37,120 --> 00:10:41,120
सनातन का सदा रहने वाला जिसका ना

128
00:10:41,120 --> 00:10:47,120
कभी जन्म होता है ना कभी मृत्यु होती है

129
00:10:47,120 --> 00:10:51,120
सनातन आप ठीक से पढ़ पा रहे हैं ना हां

130
00:10:51,120 --> 00:10:55,120
पढ़ रहा हूं पा रहे हैं ना दोबारा आप खुद पढ़िए आप पढ़िए ना

131
00:10:55,120 --> 00:11:01,120
पढ़ के तू संपूर्ण भूतों का सनातन बीज मुझको जान

132
00:11:02,000 --> 00:11:06,160
हां सनातन बीज मुझको जान बोल रहा है ना सनातन यानी कि

133
00:11:06,160 --> 00:11:11,040
जो के लिए मुझसे ही उत्पन्न होना जान

134
00:11:11,040 --> 00:11:15,840
सनातन है वो जो बीज है वो सन सनातन है। वो

135
00:11:15,840 --> 00:11:19,920
जो बीज है सनातन है। जिससे भूत उत्पन्न हो रहे

136
00:11:19,920 --> 00:11:24,800
हैं वो भूत सन वो जो बीज है वो सनातन है।

137
00:11:24,800 --> 00:11:28,960
तो इससे ये प्रमाणित नहीं हो गया तो मोक्ष हो जाएगा। अरे

138
00:11:28,960 --> 00:11:34,160
मैं मैं सिद्ध करूंगा ना। मैं सिद्ध करूंगा। चार नौ पे जाओ।

139
00:11:34,160 --> 00:11:39,360
चार नौ पे जाओ।

140
00:11:39,360 --> 00:11:45,280
बताइए चार नौ में क्या है?

141
00:11:45,280 --> 00:11:51,280
क्या लिखा है? पढ़ो।

142
00:12:00,560 --> 00:12:05,360
नो हे अर्जुन मेरे जन्म और कर्म द दिव्य अर्थात

143
00:12:05,360 --> 00:12:09,760
निर्मल अलौकिक है। इस प्रकार जो मनुष्य तत्व

144
00:12:09,760 --> 00:12:14,000
से जान लेता है वह शरीर को त्याग कर फिर जन्म

145
00:12:14,000 --> 00:12:18,000
को प्राप्त नहीं होता। ठीक है? ये ये बिल्कुल सही बात है। आगे पढ़ो

146
00:12:18,000 --> 00:12:22,640
आगे आगे पढ़ो। आगे उसमें एक पंक्त

147
00:12:22,640 --> 00:12:28,240
आगे एक पंक्ति और है। किंतु मुझको ही प्राप्त होता है। ये तो पढ़ो।

148
00:12:28,240 --> 00:12:32,800
हां किंतु मुझको प्राप्त होता है। कहां लिखा है? ये कोष्क में लिखा हुआ है आपने। गीता

149
00:12:32,800 --> 00:12:36,160
वाली में चेक कीजिए।

150
00:12:36,160 --> 00:12:40,960
एक मिनट। यह संस्कृत में मामेती

151
00:12:40,960 --> 00:12:44,960
लिखा हुआ है। मामेती आपके यहां कोष्टक में

152
00:12:44,960 --> 00:12:48,960
लिखा है। यहां पे कोष्क में नहीं लिखा है। ये देखो बिना

153
00:12:48,960 --> 00:12:53,120
कोष्क के लिखा है। आप गीता प्रेस कौन

154
00:12:53,120 --> 00:12:54,480
सी है पुस्तक आपके पास?

155
00:12:54,480 --> 00:12:58,480
गीता प्रेस गीता प्रेस कोक में

156
00:12:58,480 --> 00:13:00,800
नहीं लिखा।

157
00:13:00,800 --> 00:13:05,040
दिखा दिया ना ये देखो।

158
00:13:05,040 --> 00:13:09,200
हां मैं पढ़ के सुना रहा हूं। एक सेकंड सुनो मेरी बात मेरी

159
00:13:09,200 --> 00:13:13,280
बात सुनो वहां पे अरे अरे

160
00:13:13,280 --> 00:13:17,600
रुक जाओ रुक जाओ एक मिनट एक मिनट

161
00:13:17,600 --> 00:13:22,640
एक मिनट वहां पे संस्कृत भी दी गई है मा मेती

162
00:13:22,640 --> 00:13:26,000
मुझे ही

163
00:13:26,000 --> 00:13:30,160
ठीक है संस्कृत है वहां पे अवेलेबल तो पहली बात तो ये

164
00:13:30,160 --> 00:13:36,160
है कि

165
00:13:37,520 --> 00:13:41,680
और भी मैं और भी श्लोक दे दूंगा

166
00:13:41,680 --> 00:13:45,840
मैं और भी श्लोक दे दूंगा इस बात एक मिनट

167
00:13:45,840 --> 00:13:50,000
मैं और भी श्लोक दे दूंगा कि और भी पहले जो आपने बोला है

168
00:13:50,000 --> 00:13:54,080
उसको तो क्लियर कर लो मैं करूंगा क्लियर उसको क्लियर करूंगा

169
00:13:54,080 --> 00:13:58,640
मुझे बोलने तो दो लेट मी फिनिश मुझे बोलने दो मैं क्लियर कर रहा हूं

170
00:13:58,640 --> 00:14:02,720
मां जब ये कह रहे हैं कि भैया वो जन्म और मृत्यु को प्राप्त नहीं होता

171
00:14:02,720 --> 00:14:06,720
तो लास्ट में एक शब्द आ रहा है मामेती तो वहां से निकल रहा है कि नहीं वो

172
00:14:06,720 --> 00:14:10,720
जन्म मृत्यु को प्राप्त नहीं होता किंतु मुझे ही प्राप्त होता है। ये अर्थ

173
00:14:10,720 --> 00:14:14,880
निकल रहा है वहां से। अब दूसरी बात ये आती है

174
00:14:14,880 --> 00:14:18,000
कि

175
00:14:18,000 --> 00:14:24,000
शायद नौव अध्याय का 34वा श्लोक

176
00:14:37,600 --> 00:14:41,600
मुझ में मन वाला हो मेरा भक्त बन मेरा

177
00:14:41,600 --> 00:14:46,160
पूजन करने वाला हो मुझको प्रणाम कर

178
00:14:46,160 --> 00:14:50,400
इस प्रकार आत्मा को मुझ में नियुक्त

179
00:14:50,400 --> 00:14:55,680
करके मेरा पराय होकर तू मुझको ही प्राप्त होता है बस

180
00:14:55,680 --> 00:15:00,000
हो गया यहां भी प्राप्त होने

181
00:15:00,000 --> 00:15:04,080
एक मिनट मैं अपने पूरे प्रमाण बोल रहा एक मिनट और

182
00:15:04,080 --> 00:15:08,400
भी प्रमाण है एक मिनट ठीक है लीजिए फिर मैं

183
00:15:08,400 --> 00:15:12,800
बोलूंगा आठ पांचो

184
00:15:12,800 --> 00:15:17,280
आठ पांच आठ 13 आठ पांच निकालो पहले

185
00:15:17,280 --> 00:15:22,960
आठ पांच

186
00:15:22,960 --> 00:15:26,640
ठीक है

187
00:15:26,640 --> 00:15:30,160
8 5

188
00:15:30,160 --> 00:15:36,160
13

189
00:15:37,200 --> 00:15:41,280
इसमें लिखा हुआ है कि सब इंद्रियों

190
00:15:41,280 --> 00:15:46,000
के द्वारा द्वारों को रोक कर तथा मन को

191
00:15:46,000 --> 00:15:50,320
हृदय में स्थिर स्थिर करके आठ

192
00:15:50,320 --> 00:15:52,960
पांच

193
00:15:52,960 --> 00:15:58,960
अच्छा आठ पांच हम

194
00:16:00,960 --> 00:16:05,200
जो पुरुष अंतकारल में मुझको ही स्मरण करता हुआ शरीर

195
00:16:05,200 --> 00:16:09,200
को त्याग कर जाता है वह मेरे साक्षात

196
00:16:09,200 --> 00:16:13,440
स्वरूप को प्राप्त होता है। इसमें कुछ भी संदेह नहीं।

197
00:16:13,440 --> 00:16:18,160
हम ठीक है। तो अभी हमने जानी दो बातें

198
00:16:18,160 --> 00:16:22,640
कि जो गीता को कहने वाला है वह सनातन

199
00:16:22,640 --> 00:16:26,720
है। और जो भी व्यक्ति

200
00:16:26,720 --> 00:16:31,040
उसका भजन करता हुआ अंत काल में शरीर छोड़ता है वह उसको

201
00:16:31,040 --> 00:16:35,040
ही प्राप्त होता है। किसको? जो सनातन है उसके साक्षात स्वरूप को प्राप्त

202
00:16:35,040 --> 00:16:37,440
होता है।

203
00:16:37,440 --> 00:16:42,080
तो इसका मतलब वो कौन से स्वरूप को प्राप्त होता है? सनातन

204
00:16:42,080 --> 00:16:44,880
स्वरूप को।

205
00:16:44,880 --> 00:16:50,480
कहां गए? हम हां

206
00:16:50,480 --> 00:16:56,480
सुन रहा हूं। आप बोलिए। अरे भाई शक्ल दिखाओ ना अपनी।

207
00:16:56,560 --> 00:17:00,640
चेहरा दिखाओ। अरे और भी कोई प्रमाण है बाकी

208
00:17:00,640 --> 00:17:04,960
फिर नहीं तो फिर मैं मैं बोलू फिर अब इसको

209
00:17:04,960 --> 00:17:10,640
काट सकते हो तो काटो।

210
00:17:10,640 --> 00:17:16,640
काटो इसे।

211
00:17:20,000 --> 00:17:24,080
और भी कोई प्रमाण है आपके या फिर मैं बोल भाई और भी बहुत सी

212
00:17:24,080 --> 00:17:30,080
चीजें पहले इसको काट सकते हो तो काटो

213
00:17:30,320 --> 00:17:34,320
हां तो इसी को हां अब अब आई ना बात और प्रमाण देखना है

214
00:17:34,320 --> 00:17:40,320
तो देख लो 932 9 33

215
00:17:40,480 --> 00:17:44,480
हम बोल लीजिए आप है ना इकट्ठा बोल लीजिए फिर

216
00:17:44,480 --> 00:17:48,480
मेरे बोलने के टाइम आपने कहा प्रमाण है तो दिखा देता

217
00:17:48,480 --> 00:17:52,640
हूं और देख लो 932 933

218
00:17:52,640 --> 00:17:57,120
हां जब मैं प्रमाण दिखाऊंगा तो आप बीच में नहीं बोलना फिर

219
00:17:57,120 --> 00:18:02,320
आपने गीता है हमारी चर्चा तो फिर

220
00:18:02,320 --> 00:18:06,400
932 में लिखा है वो मेरी शरण में होकर परम गति को

221
00:18:06,400 --> 00:18:11,920
प्राप्त करता है परम गति

222
00:18:11,920 --> 00:18:17,120
ठीक है ठीक है अब काटो इसे

223
00:18:17,120 --> 00:18:21,280
हां तो पहला तो मैंने आपको प्रमाण दिया था कि

224
00:18:21,280 --> 00:18:25,760
प्रकृति को प्राप्त होकर प्राणी फिर उसका पुनर्जन्म

225
00:18:25,760 --> 00:18:30,240
सृष्टि रचना होती रहती है उसके कर्म के आधार से। ठीक है? अब हम

226
00:18:30,240 --> 00:18:34,080
आपको प्रमाण दिखाते हैं कि

227
00:18:34,080 --> 00:18:38,160
वहां पर व्यवहार की बात हो ही नहीं रही। आप

228
00:18:38,160 --> 00:18:42,160
ये कहो ना कि वो वहां पे मुझे प्राप्त हो जाता है। जहां पर मुझको प्राप्त होने

229
00:18:42,160 --> 00:18:46,240
की बात हो रही है वो परमार्थ है। या तो सुनिए आप आप

230
00:18:46,240 --> 00:18:50,400
बोल लीजिए नहीं तो फिर मुझे प्रमाण दिखाने दीजिए। भाई ऐसा है ना आप

231
00:18:50,400 --> 00:18:54,400
आप क्या करोगे यहां से जितने टाइम आपने अपनी बात को रखा और मैंने

232
00:18:54,400 --> 00:19:00,000
काउंटर नहीं किया उतने टाइम की क्लिप निकाल कर के वीडियो बनाओगे इसलिए आए हो

233
00:19:00,000 --> 00:19:04,320
मैं जहां आप बोलोगे वहां आपको पता चलूंगा ना

234
00:19:04,320 --> 00:19:07,920
ठीक है कोई बात नहीं अच्छी बात है लेकिन पहला

235
00:19:07,920 --> 00:19:13,920
मेरा प्रमाण जो मैं दिखाता हूं उससे क्लियर हो जाए

236
00:19:16,080 --> 00:19:19,840
कैमरा कट कहां गया

237
00:19:19,840 --> 00:19:25,840
एक सेकंड

238
00:19:28,160 --> 00:19:32,480
इतनी सारी चर्चा करने की आप लोगों को जरूरत भी नहीं होती

239
00:19:32,480 --> 00:19:34,640
है।

240
00:19:34,640 --> 00:19:40,240
यदि आपके पास परंपरा है।

241
00:19:40,240 --> 00:19:45,680
ठीक है? यह सारे श्लोक आपको रटे हो। कहां क्या लिखा है यह भी रटा हो।

242
00:19:45,680 --> 00:19:49,920
कोई एक व्यक्ति नहीं है। सनातन का दुश्मन बहुत

243
00:19:49,920 --> 00:19:54,320
है। दिन और रात यही चल रहा है। कैसे सनातन को नष्ट करें?

244
00:19:54,320 --> 00:19:58,720
कैसे कृष्ण भगवान का खंडन करें? कैसे राम भगवान का खंडन करें?

245
00:19:58,720 --> 00:20:02,960
सारे शास्त्रों को या तो आप हर व्यक्ति रटा हो और नहीं तो वो किसी

246
00:20:02,960 --> 00:20:07,040
चौक चौराहे पर कोई व्यक्ति मिल गया कि देखो यहां पर तो उसने प्रकृति से

247
00:20:07,040 --> 00:20:11,120
लीन होने की बात कही है और प्रकृति और वो तो एक ही है। यानी प्रकृति से व्यक्ति

248
00:20:11,120 --> 00:20:15,840
वापस आता है तो लो हो गया। इसलिए आपको यह जानना आवश्यक है

249
00:20:15,840 --> 00:20:20,080
कि आपको सारे शास्त्रों को रटा होना आवश्यक नहीं है। आपको

250
00:20:20,080 --> 00:20:23,120
परंपरा प्राप्त आचार्य पर आश्रित होना आवश्यक है।

251
00:20:23,120 --> 00:20:27,280
अपने धर्म को यदि बचाना है तो नहीं तो हर

252
00:20:27,280 --> 00:20:31,600
दूसरा व्यक्ति आपके बच्चों को आपके भाइयों को कब आपसे छीन लेगा। अभक्त

253
00:20:31,600 --> 00:20:37,600
के नाम पर काफिर बना देगा। आपके बच्चों को आपको पता नहीं चलेगा।

254
00:20:43,920 --> 00:20:49,600
अमित जी फिलहाल गायब हो चुके हैं।

255
00:20:49,600 --> 00:20:53,680
इसीलिए कहते हैं इसीलिए कहते हैं मत पड़ो चक्कर में

256
00:20:53,680 --> 00:20:57,760
कोई नहीं है टक्कर में। इसीलिए कहते हैं। पहले

257
00:20:57,760 --> 00:21:01,920
तो तुम्हारा वो बाहर निकाली आत्मा। शास्त्र कहां

258
00:21:01,920 --> 00:21:06,000
से आए? पहले तो वो वो आवश्यक है जनता को

259
00:21:06,000 --> 00:21:10,160
सिद्ध करना। परंपरा की आवश्यकता कितनी है? हर व्यक्ति हर बच्चा

260
00:21:10,160 --> 00:21:14,320
के रटे हुए घूमेगा कि कृष्ण भगवान ने कहां-कहां अपने आप को कहा

261
00:21:14,320 --> 00:21:17,600
है।

262
00:21:17,600 --> 00:21:21,680
रट के घूमे हर व्यक्ति तब वो अपने आपको माइंड वाश से बचा सकता

263
00:21:21,680 --> 00:21:25,760
है। ब्रेन वाश से बचा सकता है। वरना ये अमित जैसे

264
00:21:25,760 --> 00:21:30,400
लोग रामपाल जैसे लोग हर दूसरे दिन आपके भाइयों को आपसे अलग कर देंगे।

265
00:21:30,400 --> 00:21:35,040
आपको रटना यह है एवं परंपरा प्राप्तिम

266
00:21:35,040 --> 00:21:39,840
मुंडकोपनिषद एक एक से लेकर चार तक यह रटना है आपको

267
00:21:39,840 --> 00:21:43,840
कि तुमको शास्त्र कहां से मिले यदि तुम्हें भगवत कृपा से मिले हैं

268
00:21:43,840 --> 00:21:48,880
तो शास्त्र रटे होने चाहिए फिर मोबाइल में देख के मत बताओ

269
00:21:48,880 --> 00:21:51,200
हम

270
00:21:51,200 --> 00:21:57,200
तुम्हें किताब लेने क्यों जाना पड़ रहा है भाई गीता प्रेस तक

271
00:21:57,600 --> 00:22:02,080
हमें शास्त्र परंपरा से मिलते

272
00:22:02,080 --> 00:22:05,120
और

273
00:22:05,120 --> 00:22:09,440
यदि कोई नहीं भी आ रहा है हमें शास्त्र परंपरा

274
00:22:09,440 --> 00:22:13,040
से मिलते हैं और

275
00:22:13,040 --> 00:22:17,040
परंपरा से जब हमने अपने गुरु मुख से वो चीजें सुनी है तो जब

276
00:22:17,040 --> 00:22:21,120
हम गीता प्रेस में कोई भी उसको छाप रहा हो तो हम वहां पर सत्यापित कर सकते हैं

277
00:22:21,120 --> 00:22:25,200
कि भैया हमसे हमारे परंपरा प्राप्त गुरुओं ने अपने गुरुओं से सुनी थी कि

278
00:22:25,200 --> 00:22:30,240
नहीं। जिन गुरुओं में पीछे वो लोग आ जाएंगे जिन्होंने उन शास्त्रों को लिखा था।

279
00:22:30,240 --> 00:22:34,160
कहां गए अमित? भाग गए।

280
00:22:34,160 --> 00:22:38,560
अब आ भी जाओ भाई। इतनी देर मत लगाओ।

281
00:22:38,560 --> 00:22:43,200
ऊपर लीजिए ना। आप जानबूझ के ऊपर नहीं ले रहे हो।

282
00:22:43,200 --> 00:22:49,200
ऊपर ही तो ले गया है। और कितना ऊपर भेज दे तुमको?

283
00:22:51,590 --> 00:22:55,760
[हंसी] ऐसा नहीं है। ऐसा नहीं है। कितनी कितनी

284
00:22:55,760 --> 00:23:00,240
देर हो गई है तुम्हारे यहां नेट खराब चल रहा है क्या कुछ

285
00:23:00,240 --> 00:23:06,240
नेट की प्रॉब्लम है तुम्हारे यहां

286
00:23:08,400 --> 00:23:12,400
अभी वो थोड़ा सा छटपटाहट में है कि ऊपर लो ऊपर लो अभी

287
00:23:12,400 --> 00:23:16,560
बताता हूं बताता हूं वो पूरा पढ़ के नहीं आए थे वो उनको

288
00:23:16,560 --> 00:23:20,720
जितना रटा दिया कि यहां पर देखो यहां जाके इससे लड़ो उससे लड़ो वो उतने रटा

289
00:23:20,720 --> 00:23:26,000
रटाए पे आए थे अभी तो मैं वीडियो आपका

290
00:23:26,000 --> 00:23:30,240
हां आपका और वीडियो नहीं देखते हैं क्या ये लोग जब फॉर्म भरते

291
00:23:30,240 --> 00:23:35,600
तो और वीडियो नहीं देखे क्या

292
00:23:35,600 --> 00:23:39,200
ये सब चीज तो आपने

293
00:23:39,200 --> 00:23:43,440
चेहरा दिखाकर चर्चा होती है अमित को तो ऊपर लो ना

294
00:23:43,440 --> 00:23:47,680
हां अमित बताओ

295
00:23:47,680 --> 00:23:51,760
अरे अरे भाई सुभाष भाई आप डर क्यों रहे हो मेरे से चर्चा करने

296
00:23:51,760 --> 00:23:55,920
में इतना फालतू बात बोलोगे अमित हम तुमको भगा

297
00:23:55,920 --> 00:24:00,160
टू द पॉइंट बात करो उसी पे आ गए टू द पॉइंट बात करो

298
00:24:00,160 --> 00:24:04,240
उसी उसी पे आ गए कल जिस पर चर्चा किए थे उसी पे

299
00:24:04,240 --> 00:24:09,680
आ गए ये डर गए भाग गया ये हो गया वो हो गया

300
00:24:09,680 --> 00:24:13,680
करने लगते हैं जब इनका इनका पारा हल्का होने लगता है

301
00:24:13,680 --> 00:24:18,000
तो व्यक्तिगत कटाक्ष जैसे उजेश पांडे जाहिलियत

302
00:24:18,000 --> 00:24:22,160
मूर्खता बदतमीजी ये क्या है जब हमारा

303
00:24:22,160 --> 00:24:26,160
पला हल्का होने लगे तो व्यक्तिगत कटाक्ष करने लग
