1
00:00:02,560 --> 00:00:03,840
मेरा प्रश्न यह

2
00:00:03,840 --> 00:00:08,080
रहेगा। पहला तो मैं यह प्रमाणित करूंगा। उसमें

3
00:00:08,080 --> 00:00:13,440
प्रश्न नहीं है। प्रमाणित करूंगा कि गीता ज्ञान देने वाला जो ईश्वर है

4
00:00:13,440 --> 00:00:17,840
वो मोक्ष नहीं देता। यह गीता में ही प्रमाण है। दूसरा प्रश्न

5
00:00:17,840 --> 00:00:22,000
आपसे यह है कि गीता ज्ञान देने वाला प्रभु वो

6
00:00:22,000 --> 00:00:26,080
राक्षस स्वरूप क्यों है? जीवों का भक्षण क्यों करता है?

7
00:00:26,080 --> 00:00:29,840
और वह क्रूर क्यों है?

8
00:00:29,840 --> 00:00:34,080
उसका जो स्वभाव है वह क्रूरता वाला क्यों है? यह आपसे

9
00:00:34,080 --> 00:00:38,320
प्रश्न है मेरा। पहले आप अपनी बात वो जो पहली

10
00:00:38,320 --> 00:00:41,920
वाली है वो साबित करो।

11
00:00:41,920 --> 00:00:46,000
पहली वाली कौन सी साबित करूं? जो आपने ये कहा कि मैं ये साबित

12
00:00:46,000 --> 00:00:52,000
करूंगा कि गीता ज्ञान देने वाला जो है वो मोक्ष नहीं देगा।

13
00:00:52,640 --> 00:00:56,640
आपने प्रश्न पूछा था। मैं प्रश्न कहिए तो मेरा प्रश्न पहला यही है

14
00:00:56,640 --> 00:01:00,800
कि वो क्रूर क्यों है? दूसरा प्रश्न अरे भैया मोक्ष नहीं देता है

15
00:01:00,800 --> 00:01:05,440
आप कैसे सिद्ध करेंगे मोक्ष नहीं देता है ये आप कैसे सिद्ध करेंगे

16
00:01:05,440 --> 00:01:09,440
मोक्ष नहीं है कैसे सिद्ध करेंगे गीता

17
00:01:09,440 --> 00:01:14,000
से गीता से गीता से इसके लिए

18
00:01:14,000 --> 00:01:18,400
इसके लिए हम जाएंगे गीता अध्याय

19
00:01:18,400 --> 00:01:23,120
दो में और गीता अध्याय नौ में

20
00:01:23,120 --> 00:01:27,120
गीता अध्याय दो का कौन सी कौन सी

21
00:01:27,120 --> 00:01:31,280
प्रश्न की छपी गीता है आपके पास? मेरे पास

22
00:01:31,280 --> 00:01:35,600
गीता गोरखपुर वाली है। ये छोटी जो गुटखा आती है ₹2

23
00:01:35,600 --> 00:01:40,160
वाली। अच्छा तो ये

24
00:01:40,160 --> 00:01:46,160
कैसे आई आपके पास भगवत गीता?

25
00:01:49,440 --> 00:01:55,440
आपकी आवाज कट रही है।

26
00:01:56,000 --> 00:02:00,480
कहने का तात्पर्य यह है कि आप गीता से गीता

27
00:02:00,480 --> 00:02:04,720
अरे मैं गीता प्रेस गोरखपुर वालों ने दी है मुझे। मैं

28
00:02:04,720 --> 00:02:08,720
मैं बता प्राप्त हुई है। मुझे मैं मैं अपनी

29
00:02:08,720 --> 00:02:13,440
बात पूरी कर लूं। कि कहने का तात्पर्य यह है कि आप

30
00:02:13,440 --> 00:02:17,440
गीता नामक शास्त्र से सिद्ध करेंगे कि गीता

31
00:02:17,440 --> 00:02:22,080
का ज्ञान देने वाला मुक्ति दाता नहीं है। ठीक है?

32
00:02:22,080 --> 00:02:26,480
आप आपकी आवाज कट कट के आ रही है।

33
00:02:26,480 --> 00:02:30,720
आपके इंटरनेट में प्रॉब्लम है। इंटरनेट में प्रॉब्लम है आपके।

34
00:02:30,720 --> 00:02:36,720
मेरे में नहीं है।

35
00:02:37,440 --> 00:02:43,440
एक सेकंड नेटवर्क स्लो है आपका लगता है।

36
00:02:47,360 --> 00:02:52,720
आ रही है आवाज? हम

37
00:02:52,720 --> 00:02:56,720
हां तो मेरा यही कहना है गीता प्रेस गोरखपुर वालों ने दी है मुझे और

38
00:02:56,720 --> 00:03:01,600
दुकान से खरीद के लाया हूं मैं। हम

39
00:03:01,600 --> 00:03:06,480
गीता प्रेस के पास कहां से आई है वो?

40
00:03:06,480 --> 00:03:10,800
गीता प्रेस के पास कहां से आई? अब ये मुझे नहीं पता

41
00:03:10,800 --> 00:03:14,640
उनके पास कहां से आई।

42
00:03:14,640 --> 00:03:18,960
वो तो वहीं जाके तहकीकात करनी पड़ेगी। तो आपको

43
00:03:18,960 --> 00:03:23,040
यह नहीं पता है कि गीता ब्रश के पास कहां से आई है तो

44
00:03:23,040 --> 00:03:29,040
आप अंदाजा लगा सकते हैं कहां से आई है।

45
00:03:29,600 --> 00:03:33,920
हां आप है ना थोड़ा सा प्रश्न गलत पूछ रहे हो

46
00:03:33,920 --> 00:03:39,040
कि गीता का ज्ञान किसने दिया ये ये पूछोगे तो तो मैं बता सकता हूं

47
00:03:39,040 --> 00:03:43,040
और इसके रचयिता कौन है ये बता सकता हूं मैं ये कह रहा हूं कि लेकिन आई

48
00:03:43,040 --> 00:03:46,800
कहां से ये ये नहीं बता सकता मैं

49
00:03:46,800 --> 00:03:50,880
ये नहीं बता सकता इसका मतलब ये कहां से इसका मतलब ये तो सिद्ध हो गया

50
00:03:50,880 --> 00:03:55,040
कि रामपाल यानी कि आपके पास जो गीता का ज्ञान आ रहा है

51
00:03:55,040 --> 00:03:59,520
गीता के श्लोक और उसका अर्थ आ है वो रामपाल

52
00:03:59,520 --> 00:04:03,840
गीत है ये आपको नहीं पता है गीता प्रेस गोरखपुर

53
00:04:03,840 --> 00:04:08,000
वाले जो अनुवाद है उनको मानते हो ना आप मैं मैं अपनी

54
00:04:08,000 --> 00:04:12,160
मैं बात करूंगा मैं बात करूंगा मगर फिलहाल तो बात

55
00:04:12,160 --> 00:04:16,240
ये हो रही है कि रामपाल रामपाल जी कह रहा हूं मैं

56
00:04:16,240 --> 00:04:20,400
फिलहाल क्योंकि भाई आपकी रामपाल के प्रति श्रद्धा है तो मैं फिलहाल रामपाल

57
00:04:20,400 --> 00:04:24,480
जी कह रहा हूं रामपाल जी के पास गीता का ज्ञान कहां

58
00:04:24,480 --> 00:04:30,480
से आया गीता के श्लोक कहां से आए आए आपको नहीं पता है कहां से आए

59
00:04:32,400 --> 00:04:36,560
कहां से आए मतलब उन्होंने गीता प्रेस गोरखपुर से दुकान गोरखपुर

60
00:04:36,560 --> 00:04:40,560
वाली दुकान से खरीदी होगी अच्छा गीता

61
00:04:40,560 --> 00:04:44,640
प्रेस गोरखपुर की दुकान से खरीदी मतलब गीता में क्या लिखा है और क्या नहीं लिखा

62
00:04:44,640 --> 00:04:48,800
है इस विषय में रामपाल जी के लिए गीता प्रेस

63
00:04:48,800 --> 00:04:54,160
प्रमाण है। गीता प्रेस प्रमाण हो गई ना?

64
00:04:54,160 --> 00:04:58,240
गीता प्रस प्रमाण मतलब कि इसमें यह श्लोक लिखा है

65
00:04:58,240 --> 00:05:02,560
तो मैं मानता हूं कि गीता प्रेस ने सही लिखा है वो श्लोक जरूरी नहीं है

66
00:05:02,560 --> 00:05:06,640
अगर प्रमाण नहीं मानेंगे तो हो सकता है कि वहां

67
00:05:06,640 --> 00:05:10,800
पर भगवान ने कुछ और कहा हो अर्जुन ने कुछ और कहा हो गीता प्रेस वाले कुछ और छाप

68
00:05:10,800 --> 00:05:14,800
रहे हो तो गीता प्रस से जब वो मान रहे हैं कि ये गीता प्रस से जो गीता है ये वही

69
00:05:14,800 --> 00:05:19,200
गीता है जो कृष्ण भगवान ने अर्जुन को कही थी तो इसका मतलब रामपाल

70
00:05:19,200 --> 00:05:21,840
के लिए

71
00:05:21,840 --> 00:05:26,080
ये बता लीजिए आप प्रमाण किसको मानते हैं? तर्क वितर्क

72
00:05:26,080 --> 00:05:30,240
कर रहे हो। बेकार की बहस नहीं है।

73
00:05:30,240 --> 00:05:34,240
बहुत आवश्यक बहस है। और इसमें मैं आपके पॉइंट पर जल्दी आ रहा

74
00:05:34,240 --> 00:05:38,320
हूं। एक हमारा कार्य केवल आपको निरुत्तर करना

75
00:05:38,320 --> 00:05:42,560
नहीं है। हमारा कार्य जनता के समक्ष तथ्यात्मक

76
00:05:42,560 --> 00:05:46,640
तार्किक दृष्टिकोण प्रस्तुत करना है। अपने सनातन को जानने

77
00:05:46,640 --> 00:05:47,520
के लिए कि वो कौन

78
00:05:47,520 --> 00:05:51,920
सा दृष्टिकोण उन्हें रखना चाहिए। तो आपने कहा कि रामपाल

79
00:05:51,920 --> 00:05:56,480
जी जो है वह भगवत गीता ले आते हैं गीता प्रेस से तो इसका मतलब रामपाल

80
00:05:56,480 --> 00:06:00,480
जी के लिए गीता के विषय में गीता प्रेस गोरखपुर प्रमाण

81
00:06:00,480 --> 00:06:02,880
है।

82
00:06:02,880 --> 00:06:07,280
मैं यानी वो मानते हैं यानी यानी

83
00:06:07,280 --> 00:06:11,760
मैं बता दे रहा हूं जो आपके प्रश्न का उत्तर दे रहा हूं। मैं

84
00:06:11,760 --> 00:06:16,000
अथवा मेरे गुरु जी जो मानते हैं वही मैं मानता हूं। मेरे गुरु

85
00:06:16,000 --> 00:06:20,240
जी का यह कहना है कि ये गीता का जो ज्ञान है वह काल ब्रह्म ने बोला

86
00:06:20,240 --> 00:06:24,320
है। जो गीता में सीधे स्पष्ट लिखा हुआ है वह अपने आप

87
00:06:24,320 --> 00:06:28,480
को ब्रह्म बता रहे हैं और अपना मंत्र ओम बता रहे हैं। दूसरी बात

88
00:06:28,480 --> 00:06:32,960
इसकी जो रचनाकार लिखने वाले हैं वो वेदव्यास जी हैं।

89
00:06:32,960 --> 00:06:36,960
यानी कि जो गीता का ज्ञान

90
00:06:36,960 --> 00:06:41,280
देने वाला ब्रह्म और लिखने वाला वेदव्यास जी

91
00:06:41,280 --> 00:06:45,360
और जिस चीज को प्रमाण मानकर हमारे गुरु जी ने

92
00:06:45,360 --> 00:06:50,320
अपनी स्वयं की पुस्तक लिखी है गीता मैं

93
00:06:50,320 --> 00:06:55,200
थोड़ा सा इंटरप्ट करूंगा इंटरप्ट करूंगा देखिए बहुत अच्छे से बात हो जाएगी

94
00:06:55,200 --> 00:06:59,280
मुझे बहुत लंबा महिमा मंडन या प्रवचन इत्यादि नहीं चुनना है

95
00:06:59,280 --> 00:07:02,640
यहां पे बात ये है कि रामपाल जी मैंने

96
00:07:02,640 --> 00:07:06,880
पूछा मैंने आपने काफी लंबा बोला

97
00:07:06,880 --> 00:07:10,960
है और आपने व्यर्थ का बोला है वो मैं सिद्ध कर रहा हूं

98
00:07:10,960 --> 00:07:14,960
कैसे व्यर्थ का बोला है रामपाल जी

99
00:07:14,960 --> 00:07:19,040
क्या मानते हैं गीता को गीता ज्ञान देने वाला कौन है या उसको किसने

100
00:07:19,040 --> 00:07:23,200
लिखा था मैं मेरा प्रश्न ये नहीं है वो भले ही काल ने बोली

101
00:07:23,200 --> 00:07:27,200
मगर वो जो श्लोक वहां पर बोले गए हैं महाभारत काल

102
00:07:27,200 --> 00:07:31,360
में वो रामपाल जी को कैसे प्राप्त हुए तो आपने कहा वो गीता प्रेस

103
00:07:31,360 --> 00:07:35,040
गोरखपुर से प्राप्त हुए।

104
00:07:35,040 --> 00:07:39,040
उनको कैसे पता कि काल ने यह बोला था या नहीं बोला था?

105
00:07:39,040 --> 00:07:43,120
अगर वह इस विषय में गीता प्रेस पर आश्रित है तो गीता प्रस

106
00:07:43,120 --> 00:07:47,440
उनके लिए प्रमाण हुआ कि गीता प्रेस सच बोलती

107
00:07:47,440 --> 00:07:51,520
है। जो काल ने वहां पर बोला था आपके अनुसार वो काल ने बोला

108
00:07:51,520 --> 00:07:55,840
था। तो काल ने जो बोला है एज इट इज वो संस्कृत के श्लोक गीता

109
00:07:55,840 --> 00:07:59,920
प्रस ने आपको छाप कर दिए हैं। इस विषय में रामपाल जी के

110
00:07:59,920 --> 00:08:05,200
लिए गीता प्रेस प्रमाण हो गई ना आप

111
00:08:05,200 --> 00:08:11,200
नेटवर्क इशू आ रहा है थोड़ा सा हम

112
00:08:20,430 --> 00:08:26,430
[हंसी]

113
00:08:39,040 --> 00:08:43,600
हम नेटवर्क इशू नहीं है। मुझे लग रहा है कि आपका फोन जो है ना

114
00:08:43,600 --> 00:08:47,680
उसमें मेमोरी ज्यादा उभर गई है जिसके कारण

115
00:08:47,680 --> 00:08:52,080
वो ये वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग वो

116
00:08:52,080 --> 00:08:56,960
सहन नहीं कर पा रहे हैं।

117
00:08:56,960 --> 00:09:01,200
ऐसा होता है

118
00:09:01,200 --> 00:09:04,960
नेटवर्क इशू आ रहा है। आपको

119
00:09:04,960 --> 00:09:09,280
तो आपको नेटवर्क नेटवर्क वाले एरिया में जाता हूं। हां जाइए

120
00:09:09,280 --> 00:09:15,280
जाइए।

121
00:09:22,400 --> 00:09:28,400
नेटवर्क वाले एरिया में जाकर एक बार

122
00:09:33,280 --> 00:09:37,280
आप लोग समझ रहे होंगे मैं किस तथ्य पर प्रकाश डालना

123
00:09:37,280 --> 00:09:42,880
चाहता हूं। आप लोगों को समझाना चाहता हूं कि

124
00:09:42,880 --> 00:09:47,040
हर व्यक्ति को शास्त्रज्ञ या शास्त्रों को जानने वाला

125
00:09:47,040 --> 00:09:51,360
होने की आवश्यकता नहीं है। यदि वो अपने परंपरा विषयक सिद्धांत

126
00:09:51,360 --> 00:09:55,760
को समझ जाए। आपको लोगों को केवल ये समझाना है ना कि परंपरा

127
00:09:55,760 --> 00:10:00,080
क्या होती है और किस लिए आवश्यक है। कहां तक उनको सारे शास्त्रों

128
00:10:00,080 --> 00:10:04,080
की नॉलेज आप देंगे। कोई भी आकर के विधर्मी आपके

129
00:10:04,080 --> 00:10:08,400
शास्त्रों का खंडन करने लगेगा। आपके सिद्धांतों का खंडन करने लगेगा।

130
00:10:08,400 --> 00:10:12,480
आपके धर्म का खंडन करने लगेगा और वहां

131
00:10:12,480 --> 00:10:16,560
पर वह कुछ ना कर पाए। एक साधारण व्यक्ति तो वहां पर आपको

132
00:10:16,560 --> 00:10:22,560
कौन बचा सकता है? बहुत लंबी लड़ाई लड़ने की जरूरत कहां है?

133
00:10:35,440 --> 00:10:39,440
हां बताइए आप हां तो

134
00:10:39,440 --> 00:10:43,440
काल ने आपके हिसाब से महाभारत काल महाभारत का जो समय

135
00:10:43,440 --> 00:10:48,000
था उसमें काल नामक कोई एंटिटी है जो राक्षस जैसी है और उसने

136
00:10:48,000 --> 00:10:52,000
भगवत गीता का ज्ञान दिया वो ठीक है अभी फिलहाल के लिए दुर्जन तोष

137
00:10:52,000 --> 00:10:56,080
मान लेते हैं कि उसी ने दिया है जो रामपाल का मानना है वो सही है मैं ये

138
00:10:56,080 --> 00:11:00,240
कह रहा हूं कि वो जो श्लोक है उसने क्या कहा था संस्कृत

139
00:11:00,240 --> 00:11:04,320
में क्या नहीं कहा था वो श्लोक आपको आपके रामपाल

140
00:11:04,320 --> 00:11:08,320
जी को कहां से प्राप्त हुए? आपको प्राप्त हुए मान लो

141
00:11:08,320 --> 00:11:12,480
गीता प्रस से। आपके रामपाल जी को भी प्राप्त हुए गीता प्रेस से। इसका मतलब

142
00:11:12,480 --> 00:11:16,640
काल ने क्या कहा और क्या नहीं कहा? इस विषय में गीता प्रेस

143
00:11:16,640 --> 00:11:22,640
रामपाल दास के लिए प्रमाण है। गीता प्रेस गोरखपुर

144
00:11:23,920 --> 00:11:27,200
मेरे लिए भी प्रमाण है।

145
00:11:27,200 --> 00:11:31,200
नहीं। तो जब हम किसी को प्रमाण कहते हैं

146
00:11:31,200 --> 00:11:35,200
तो इसका मतलब यह होता है कि हम यह कह रहे हैं कि नहीं यह झूठ नहीं बोलता

147
00:11:35,200 --> 00:11:39,200
अगर मेरे लिए प्रमाण है तो

148
00:11:39,200 --> 00:11:43,200
हम मेरे लिए सनातन धर्म के जितने भी शास्त्र है

149
00:11:43,200 --> 00:11:47,280
क्योंकि मैं रामपाल जी महाराज से जुड़ने से पहले

150
00:11:47,280 --> 00:11:51,280
एक हो जाने दीजिए एक मिनट एक

151
00:11:51,280 --> 00:11:55,600
मिनट एक मिनट अरे एक मिनट सुन तो लीजिए

152
00:11:55,600 --> 00:11:59,600
अब इससे पहले संत रामपाल जी महाराज से जुड़ने से पहले मैं

153
00:11:59,600 --> 00:12:03,680
हिंदू ही था और मैं सारे शास्त्रों को मानता था। अरे मेरे भाई उन्होंने

154
00:12:03,680 --> 00:12:09,120
मेरे शास्त्रों में

155
00:12:09,120 --> 00:12:12,640
आप

156
00:12:12,640 --> 00:12:16,800
मैं आपने जो क्लेम कर दिया कि मैं मैं उसको प्रमाण मानता हूं। मैं उस क्लेम

157
00:12:16,800 --> 00:12:20,800
को काउंटर कर रहा हूं ना। सुनिए ना मैं उस क्लेम को मैं उसको

158
00:12:20,800 --> 00:12:25,120
प्रमाण अरे सुनिए मैं मैं भी इनको प्रमाण मानता हूं।

159
00:12:25,120 --> 00:12:29,200
इसकी हर को प्रमाण मानता हूं। कर दिया। अब आपको और ज्यादा बताने की

160
00:12:29,200 --> 00:12:33,360
आवश्यकता कहां रह गई? कर तो दिया आपने। आप मानते हैं प्रमाण।

161
00:12:33,360 --> 00:12:37,440
ठीक है। बस बस एक बात शुरू होती है।

162
00:12:37,440 --> 00:12:41,680
बात यहां पे शुरू होती है। एक मिनट एक मिनट एक मिनट।

163
00:12:41,680 --> 00:12:47,440
बात यहां पे शुरू होती है। बात ये शुरू होती है कि

164
00:12:47,440 --> 00:12:49,760
अ

165
00:12:49,760 --> 00:12:54,000
रामपाल दास प्रमाण मानते हैं गीता प्रेस को। यानी कि गीता प्रेस

166
00:12:54,000 --> 00:13:00,000
झूठ नहीं बोलती। काल ने जो जो कहा एज इट इज छाप के दिया है गीता प्रश्न

167
00:13:01,040 --> 00:13:05,040
यही तो मानना पड़ेगा में लिखा हुआ है हां हां हां

168
00:13:05,040 --> 00:13:09,120
मैं उसके लिए थोड़ा सा बोलूंगा कि गीता मैथ वालों ने

169
00:13:09,120 --> 00:13:13,120
जो चीज कोष्टक में लिखी है वो उन्होंने अपनी तरफ से

170
00:13:13,120 --> 00:13:17,600
लिखी है बाकी के जो संस्कृत के अनुसार है वो ठीक है

171
00:13:17,600 --> 00:13:21,840
अच्छा ठीक है जो चीज कोष्टक में यानी कि गीता प्रेस अज्ञानता वश

172
00:13:21,840 --> 00:13:27,440
कुछ कर सकती है बता सकती है आपको धर्म का

173
00:13:27,440 --> 00:13:31,680
जो आपके लिए प्रमाण है वोक

174
00:13:31,680 --> 00:13:34,000
में

175
00:13:34,000 --> 00:13:38,240
जो आपके लिए प्रमाण

176
00:13:38,240 --> 00:13:42,240
मैं कह रहा हूं मैं कह रहा हूं जो आपके लिए प्रमाण है

177
00:13:42,240 --> 00:13:48,240
वो कोष्क में झूठ बोल सकता है ना

178
00:13:48,640 --> 00:13:52,800
हां बिल्कुल हां यानी कि कोष्क में वो

179
00:13:52,800 --> 00:13:56,960
झूठ बोल सकता है। फिलहाल मैं आपको बता दूं विष्णु पुराण का अर्थ

180
00:13:56,960 --> 00:14:01,120
करते समय रामपाल ने बिना कोष्क के माना है कि

181
00:14:01,120 --> 00:14:05,680
जो गीता प्रेस है उसने यहां पर अनुवाद गलत कर रखा है।

182
00:14:05,680 --> 00:14:09,680
यानी कि बिना कोष्क के भी गीता प्रेस वाले रामपाल

183
00:14:09,680 --> 00:14:15,680
दास के अनुसार झूठ बोल सकते हैं। अज्ञानता कर सकते हैं।

184
00:14:17,120 --> 00:14:21,200
मेरे सुनिए मेरे अनुसार गुरु जी के अनुसार

185
00:14:21,200 --> 00:14:25,360
मेरे अनुसार मतलब आप जो है रामपाल को नहीं मानते इतने अंश में जितने

186
00:14:25,360 --> 00:14:29,760
अंश में वो गीता प्रेस को बिना कोष्क के झूठ बोलने वाला या अज्ञानी

187
00:14:29,760 --> 00:14:33,760
कहते हैं कहते हैं फिलहाल में आपकी अरे

188
00:14:33,760 --> 00:14:38,080
फिलहाल में आपकी मेरे से ज्ञान चर्चा हो रही है अरे भाई तुमने

189
00:14:38,080 --> 00:14:42,720
अभी क्लेम किया कि रामपाल दास जो जो मानते हैं मेरे से चर्चा

190
00:14:42,720 --> 00:14:45,920
हम

191
00:14:45,920 --> 00:14:50,000
हां तो उनकी उनकी उनसे चर्चा नहीं हो रही ना आपकी उनसे जब चर्चा

192
00:14:50,000 --> 00:14:54,160
होगी तब आप उनसे बात करना फिलहाल मेरे से चर्चा की है पर्सनली

193
00:14:54,160 --> 00:14:58,240
मैं जो मानता हूं उसे मैंने आपको बता दिया एक मिनट

194
00:14:58,240 --> 00:15:02,400
अमित दास मैं तुमसे चर्चा कर रहा हूं रामपाल

195
00:15:02,400 --> 00:15:07,440
को मैं इस समय उस समय उस

196
00:15:07,440 --> 00:15:11,680
फिलहाल मैं चर्चा ये कर रहा हूं ज्ञान देने वाला जो प्रभु

197
00:15:11,680 --> 00:15:17,120
है इंटरनेट अटक रहा है मोक्ष नहीं रहा है उसका प्रमाण

198
00:15:17,120 --> 00:15:21,520
इंटरनेट अटक रहा है आपका? मैं इंटरनेट

199
00:15:21,520 --> 00:15:25,680
अटक रहा है। गीता का इंटरनेट

200
00:15:25,680 --> 00:15:29,760
चिपक चिपक के आ रहा है। अरे जो बता रहे हो वो बिगड़

201
00:15:29,760 --> 00:15:34,960
रहा है ना मामला बताते हुए?

202
00:15:34,960 --> 00:15:39,200
मैं मैं ये मैं ये कह रहा हूं कि गीता का फिलहाल मेरी चर्चा

203
00:15:39,200 --> 00:15:45,200
इस पर नहीं है कि उसको सही साबित करना है कि किसको गलत करना है।

204
00:15:45,360 --> 00:15:49,520
ले

205
00:15:49,520 --> 00:15:54,000
जिस

206
00:15:54,000 --> 00:15:58,160
को लेकर के क्लेम करने वाले हो जिस जिस

207
00:15:58,160 --> 00:16:02,160
शास्त्र को लेकर के तुम क्लेम करने वाले हो उसी शास्त्र को लेकर

208
00:16:02,160 --> 00:16:08,160
के मैं उसकी प्रमाणिकता के विषय में तुमसे बात कर रहा हूं ना

209
00:16:09,280 --> 00:16:13,760
ठीक है तो उसकी प्रमाणिकता के विषय में आपके जो रामपाल

210
00:16:13,760 --> 00:16:17,920
है वो वो यह नहीं मानते कि गीता प्रेस अपनी किताबों

211
00:16:17,920 --> 00:16:23,120
में सच सच लिखती है। वो यह मानते हैं कि गीता प्रेस झूठ भी लिखती है।

212
00:16:23,120 --> 00:16:27,600
हम गीता प्रेस पर आश्रित नहीं है। उनकी मैं अपनी बात उनकी मान्यता

213
00:16:27,600 --> 00:16:31,680
में उनकी मान्यता में अभी ये क्लियर हुआ ही नहीं। मैंने उनको मुख से सुना ही

214
00:16:31,680 --> 00:16:35,760
नहीं कि क्या गलत है क्या सही है। अच्छा मतलब अभी

215
00:16:35,760 --> 00:16:41,120
आपको अभी आपको पता नहीं है रामपाल दास सही है कि गलत है।

216
00:16:41,120 --> 00:16:45,280
आपने ये कहा कि गीता प्रेस वालों गलत लिखते हैं। मैंने उनके

217
00:16:45,280 --> 00:16:48,880
मुंह से सुना नहीं ना।

218
00:16:48,880 --> 00:16:53,200
तो विष्णु पुराण का जो वो क्या कहते हैं? वीडियो दिखाते

219
00:16:53,200 --> 00:16:57,200
हैं कि भैया इतने अंश में वह गलत है। जहां पर विष्णु पुराण में वह

220
00:16:57,200 --> 00:17:01,760
महादेव को काल बोला गया है। हम

221
00:17:01,760 --> 00:17:06,640
विष्णु पुराण के शिव पुराण में विष्णु पुराण

222
00:17:06,640 --> 00:17:09,760
विष्णु पुराण का

223
00:17:09,760 --> 00:17:14,400
अच्छा विष्णु पुराण में लिखा है ना वो विष्णु पुराण

224
00:17:14,400 --> 00:17:18,880
है समय विष्णु पुराण का अर्थ करते समय

225
00:17:18,880 --> 00:17:22,880
रामपाल दास ने यह माना है कि यहाँ पर जो है उन्होंने गलत अर्थ कर

226
00:17:22,880 --> 00:17:25,840
दिया है

227
00:17:25,840 --> 00:17:29,920
हां तो उनका मानना है ठीक है सही बात है तो

228
00:17:29,920 --> 00:17:34,000
सही मानना है तो इसका मतलब गीता परस्पर विश्वास नहीं किया जा

229
00:17:34,000 --> 00:17:38,080
सकता कि वह आपको सही सही श्लोक देगी क्योंकि वह अमुक अमुक जगह कहीं-कहीं

230
00:17:38,080 --> 00:17:43,920
पर झूठ भी बोल रही है अज्ञानता वश या फिर किसी और के कारण

231
00:17:43,920 --> 00:17:48,080
अभी अभी आपको अभी आपको चर्चा डिवाइड करनी है

232
00:17:48,080 --> 00:17:52,240
या टॉपिक पे करनी है? अरे भाई इसको

233
00:17:52,240 --> 00:17:56,800
बताओ तो गीता प्रेस पर विश्वास है कि नहीं है?

234
00:17:56,800 --> 00:18:02,160
अरे गीता प्रेस गोरखपुर वाली जो गीता भगवत गीता है मैं

235
00:18:02,160 --> 00:18:06,480
ले जा रहे हो जगह भी झूठ बोल सकता है आप

236
00:18:06,480 --> 00:18:10,960
विश्वास मानते हो गीता गीता प्रेस विष्णु पुराण

237
00:18:10,960 --> 00:18:15,360
में और कोष्क में झूठ बोल सकती है तो वो

238
00:18:15,360 --> 00:18:20,480
अन्य जगह श्लोकों को भी बदल सकती है श्लोक भी दूसरे लिख सकती है

239
00:18:20,480 --> 00:18:24,480
हाँ तो ये ऐसा ऐसा बोलो ना कोष्टक में जब उन्होंने इशारा कर दिया

240
00:18:24,480 --> 00:18:30,480
है ये अपनी तरफ से लिखा हुआ है ऐड करके। बाकी उन्होंने

241
00:18:30,720 --> 00:18:34,800
एक मिनट एक एक मिनट उन्होंने ये कहां लिखा है कि कोष्क में मैं अपनी

242
00:18:34,800 --> 00:18:38,320
तरफ से लिख रहा हूं।

243
00:18:38,320 --> 00:18:42,480
बुद्धिमान व्यक्ति समझ जाता है। कोष्टक में जो लिखा हुआ होता है वो उसका अपनी

244
00:18:42,480 --> 00:18:46,560
तरफ से लिखा रहता है। कोष्टक में लिखने का मतलब

245
00:18:46,560 --> 00:18:51,680
होता है कि वहां पे लिखे गए भाव को और अच्छे से समझाना।

246
00:18:51,680 --> 00:18:55,840
हम्म हम्म बिल्कुल। उसमें ये नहीं होता है कि मैं अपनी ओर से लिख रहा हूं। ये

247
00:18:55,840 --> 00:18:59,840
ये आवश्यक नहीं है। वहां पे जो चीज समझ

248
00:18:59,840 --> 00:19:04,720
में आ रही है। वहां पे जो चीज कठिनता से समझ में आ रही है उसका एक सरलार्थ

249
00:19:04,720 --> 00:19:08,720
कोष्क में लिख दिया। हां वो वो सरलार्थ अपनी तरफ से ऐड

250
00:19:08,720 --> 00:19:13,040
किया है ना। अपनी ओर से कहां किया? उसी का अर्थ लिखा ना उन्होंने

251
00:19:13,040 --> 00:19:17,440
तो। उन्होंने अपनी जानकारी में हम उसी का अर्थ लिख रहे हैं।

252
00:19:17,440 --> 00:19:21,440
अब सुन अब सुनिए। अब जैसे कोई कार्य है उस कार्य

253
00:19:21,440 --> 00:19:25,360
करने में

254
00:19:25,360 --> 00:19:29,520
कर दिया। मैं इसको और क्लियर कर देता हूं। जो

255
00:19:29,520 --> 00:19:33,600
वो श्लोक छाप रहे हैं वो अपनी बुद्धि विवेक से छाप रहे हैं कि नहीं

256
00:19:33,600 --> 00:19:36,400
छाप रहे हैं?

257
00:19:36,400 --> 00:19:40,560
अब मैं आपको एक एक मैं श्लोक दिखा देता हूं। इस

258
00:19:40,560 --> 00:19:44,640
श्लोक में क्लियर हो जाएगा। आपने कहा है कि सरलता है

259
00:19:44,640 --> 00:19:48,720
क्या? नहीं नहीं। आपको श्लोक दिखा देता

260
00:19:48,720 --> 00:19:52,800
हूं। इस श्लोक में क्लियर हो जाएगा। श्लोक क्यों दिखा रहा हूं

261
00:19:52,800 --> 00:19:58,800
मैं फिलहाल बात ये चल रही है बता रहा हूं मैं

262
00:19:58,880 --> 00:20:02,960
आपको मैं आपको ये कह रहा हूं कि जो वो अपने

263
00:20:02,960 --> 00:20:07,360
बुद्धि और विवेक से आप कह रहे हो कोष्क में लिखते हैं तो क्या वो जो श्लोक छापते

264
00:20:07,360 --> 00:20:12,800
हैं वो अपने बुद्धि और विवेक से नहीं छापते उसमें बुद्धि विवेक को साइड में रखते हैं

265
00:20:12,800 --> 00:20:16,960
अब साइड में रखे है या घर पे रखे वो तो मुझे पता नहीं लेकिन गीता

266
00:20:16,960 --> 00:20:21,440
अध्याय श्लोक 14 15 में आपको विश्वास नहीं

267
00:20:21,440 --> 00:20:25,440
जिस आपको विश्वास नहीं है उसकी छापी हुई किताब को

268
00:20:25,440 --> 00:20:30,480
आधार बना के आप दावे कैसे कर रहे हो यह

269
00:20:30,480 --> 00:20:34,800
सुनिए चर्चा खत्म कीजिए फिर जब विश्वास है नहीं है चर्चा खत्म नहीं है

270
00:20:34,800 --> 00:20:38,880
कि नहीं है खत्म कीजिए बेकार की बात कुछ

271
00:20:38,880 --> 00:20:40,400
नहीं होती

272
00:20:40,400 --> 00:20:44,400
सुनो मेरे आप जैसे मुझे गुमराह करने का

273
00:20:44,400 --> 00:20:48,480
प्रयास कर रहे हो तो मैं गुमराह नहीं होऊंगा और [हंसी] आप

274
00:20:48,480 --> 00:20:52,560
फालतू बातें करेंगे आपको वाकई में निकाल दूंगा। आप यह स्वीकार

275
00:20:52,560 --> 00:20:56,800
करो नहीं है। आप चर्चा पे आओ। इस बात का

276
00:20:56,800 --> 00:20:59,840
नहीं है।

277
00:20:59,840 --> 00:21:03,920
अब आपको भ्रमित करने का नहीं है। आप चर्चा

278
00:21:03,920 --> 00:21:08,080
में आओ। नहीं आप भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हो। सीधा

279
00:21:08,080 --> 00:21:12,160
मेरा भ्रमित करना कहां पर सिद्ध होता है? कौन से शास्त्र के सिद्धांत से सिद्ध

280
00:21:12,160 --> 00:21:16,240
होता है? वो बताओ। चलो। तुम्हारे तुम्हारे तर्कों से

281
00:21:16,240 --> 00:21:20,240
सिद्ध होता है कि आप आप हमारा टॉपिक ये था कि गीता ज्ञान देने

282
00:21:20,240 --> 00:21:24,640
वाला जो प्रभु है वो मोक्ष नहीं तुम्हारा ये

283
00:21:24,640 --> 00:21:30,240
लिखा है तुम्हारे मन से मानी जाए

284
00:21:30,240 --> 00:21:34,640
आपके मन से मानी जाए बातें अरे हमारे मन से कुछ मत मानो

285
00:21:34,640 --> 00:21:38,640
तो फिर एक ये क्लेम जो किया है कि आप भ्रमित करने का प्रयास कर रहे

286
00:21:38,640 --> 00:21:43,680
हो इसके संबंध में शास्त्रीय सिद्धांत दो चलो तुम

287
00:21:43,680 --> 00:21:47,680
रामपाल दास की किताब से ही बता दो। [हंसी] सुनो आप

288
00:21:47,680 --> 00:21:52,800
आप है ना मैं आपको दे रहा हूं।

289
00:21:52,800 --> 00:21:57,040
मैं आपको सत्य की बात कर रहा हूं। आप इस संबंध

290
00:21:57,040 --> 00:22:01,040
में इस रामपाल दास की किताब से

291
00:22:01,040 --> 00:22:05,280
प्रमाण दे दो मान लूंगा। चलो इतनी छूट आप नहीं

292
00:22:05,280 --> 00:22:09,360
आप आप टॉपिक को छोड़कर दूसरे को जहां पे फसने लगो वहां पे

293
00:22:09,360 --> 00:22:13,920
अपने मनगढ़ंत बातें बोलने लगो। तो फसने वाली बातें कहां है?

294
00:22:13,920 --> 00:22:18,080
तो भ्रम भ्रमित कर रहे हैं आप मुझे। तो

295
00:22:18,080 --> 00:22:22,240
टॉपिक पे बातों का क्यों लग रहे हो?

296
00:22:22,240 --> 00:22:26,480
अरे तो आप ना सुनो

297
00:22:26,480 --> 00:22:30,480
जब मैं प्रमाण जब मैं प्रमाण दे रहा

298
00:22:30,480 --> 00:22:34,480
हूं। गीता ज्ञान दाता प्रभु स्वयं कह रहा है कि मैं मोक्ष नहीं देता

299
00:22:34,480 --> 00:22:39,040
तो आप मैंने क्या कहा है भाई साहब? उस

300
00:22:39,040 --> 00:22:43,200
सुनने की बजाय आप जिसको प्रमाण कह रहे हैं वो प्रमाण

301
00:22:43,200 --> 00:22:45,680
सिद्ध नहीं हो रहा ना?

302
00:22:45,680 --> 00:22:49,840
आप जिसको प्रमाण कह रहे हो वो प्रमाण सिद्ध नहीं हो रहा। शुरुआत में आपने पूछा था कि

303
00:22:49,840 --> 00:22:53,920
पहले वाला जो प्रश्न है उसे सिद्ध कीजिए। आप जिसको प्रमाण कह रहे हैं वो प्रमाण

304
00:22:53,920 --> 00:22:58,240
सिद्ध शुरुआत में अपनी बातों से मत भागिए। शुरुआत

305
00:22:58,240 --> 00:23:02,320
में आपने कहा था कि पहले ये सिद्ध कीजिए कि गीता ज्ञान दाता

306
00:23:02,320 --> 00:23:06,320
प्रभु मोक्ष नहीं देता है। ये सिद्ध कीजिए। जब मैं सिद्ध करने लगा तो आप

307
00:23:06,320 --> 00:23:10,480
तर्क वितर्क पे आ गए कि गीता प्रेस नहीं है या नहीं आ रहा हूं।

308
00:23:10,480 --> 00:23:15,120
जब आप ये सिद्ध करने लगे तो आपने गीता प्रेस की गीता उठाई है।

309
00:23:15,120 --> 00:23:20,320
मैंने कहा क्यों उठाई? गीता प्रेस पे क्यों आश्रित हो?

310
00:23:20,320 --> 00:23:24,480
तो मैं अपनी दिखा रहा हूं। अपने गुरु जी की दिखाऊं। उसको मानोगे

311
00:23:24,480 --> 00:23:28,560
तो आपने मैं बताऊं मैं बता रहा हूं। गुरु जी

312
00:23:28,560 --> 00:23:32,880
के पास जो आई है वह भी गीता से आई आपने खुद कह दिया

313
00:23:32,880 --> 00:23:36,960
या तो आप कहते हैं कि गुरुजी के पास उनके गुरु से आई उनके पास उनके

314
00:23:36,960 --> 00:23:41,840
गुरु से आई गुरु परंपरा बताते तब हम सुनते सुनिए

315
00:23:41,840 --> 00:23:45,840
गीता का बहुत से गुरुओं ने बहुत से संतों

316
00:23:45,840 --> 00:23:50,320
ने अपने अलग-अलग अनुवाद किए हैं। ऐसी बात नहीं लेकिन जो ज्यादातर

317
00:23:50,320 --> 00:23:54,320
है ज्यादातर संख्या में लोग गीता प्रेस गोरखपुर की प्रमाण

318
00:23:54,320 --> 00:23:58,400
मानते हैं क्योंकि ये सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है।

319
00:23:58,400 --> 00:24:02,560
[हंसी]

320
00:24:02,560 --> 00:24:06,640
अरे सोच तो लिया करो क्या बोल रहे हो कहां मान्यता प्राप्त

321
00:24:06,640 --> 00:24:10,640
है सरकार मान्यता देगी कौन सी चीज प्रमाणिक है कौन सी

322
00:24:10,640 --> 00:24:13,360
नहीं है बिल्कुल

323
00:24:13,360 --> 00:24:17,840
भाई अब सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है आपको इसकी नॉलेज नहीं है

324
00:24:17,840 --> 00:24:22,080
अच्छा ठीक है रामपाल की रामपाल दास की किताबों

325
00:24:22,080 --> 00:24:27,840
की मान्यता कहां से प्राप्त है

326
00:24:27,840 --> 00:24:32,080
हम जब आप सरकार की मानते हो तो फिर सरकार

327
00:24:32,080 --> 00:24:36,640
द्वारा मान्यता प्राप्त है क्या रामपाल की किताबें?

328
00:24:36,640 --> 00:24:40,720
अरे हम रामपाल जी महाराज को ही प्रमाण मानते हैं। अरे

329
00:24:40,720 --> 00:24:45,120
तो जब सरकार नहीं मान रही है उनको प्रमाण तो तुम क्यों मान रहे हो?

330
00:24:45,120 --> 00:24:49,280
यानी कि सरकार माने या ना माने उनकी मान्यता में सुनो

331
00:24:49,280 --> 00:24:53,440
उनकी मान्यता को लेकर मैं मानूंगा क्या? यानी सरकार

332
00:24:53,440 --> 00:24:57,520
उनकी मान्यता को मैं मानूंगा। नहीं मेरी मान्यता मेरे पर निर्भर

333
00:24:57,520 --> 00:25:01,760
करती है। इसलिए मानते हैं क्योंकि सरकार प्रमाण मानती है। मैं

334
00:25:01,760 --> 00:25:05,760
क्या मानता हूं क्या नहीं मानता ये मेरे ऊपर निर्भर है। मैं गीता

335
00:25:05,760 --> 00:25:09,840
प्रेस को मानता हूं। ये मेरे ऊपर निर्भर है। मैं रामपाल जी को मानता हूं।

336
00:25:09,840 --> 00:25:13,920
ये मेरे ऊपर निर्भर है। ये किसीको कोई और तय नहीं करेगा। इसका

337
00:25:13,920 --> 00:25:17,680
कोई इन बातों का कोई उत्तर नहीं है। बस आपने माना है यहां से शुरू

338
00:25:17,680 --> 00:25:21,680
करो कि भैया वो किताब में ये छपा है। बाकी मेरे पास इसका उत्तर नहीं

339
00:25:21,680 --> 00:25:25,680
है। प्रमाण ये बताइए

340
00:25:25,680 --> 00:25:30,720
भाड़ में आप आप ये बताइए आप गीता प्रेस को मानते हो?

341
00:25:30,720 --> 00:25:34,720
अरे मैं मैं तो मानता ही हूं ना मैं तुमसे पूछ रहा हूं तुम क्यों

342
00:25:34,720 --> 00:25:38,880
मानते हो? मैं तो इसलिए मानता हूं क्योंकि मेरे जो परंपरा प्राप्त आचार्य है उन्होंने कहा गीता प्रेस

343
00:25:38,880 --> 00:25:43,040
की गीता में सही सही श्लोक चल रहे हैं। सुनो हम जिसको

344
00:25:43,040 --> 00:25:47,440
मानते हो मैं उसी से प्रमाण दे रहा हूं। अरे मेरे भाई तो तुम

345
00:25:47,440 --> 00:25:51,440
तुम्हारे जो क्लेम है वो तो झूठे है ना। पहले ये तो स्वीकार

346
00:25:51,440 --> 00:25:55,440
मेरा सुन लो। मेरा छोड़ लो। मेरा छोड़ दो। आप जिसको

347
00:25:55,440 --> 00:25:59,520
मानते हैं मैं उसी से प्रमाण दे रहा हूं। ठीक है। अब बात

348
00:25:59,520 --> 00:26:04,400
ये आएगी कि मैंने जो लिखा है

349
00:26:04,400 --> 00:26:08,400
जो मैंने लिखा है उसके बारे में कोई और बताएगा कि मैं ही

350
00:26:08,400 --> 00:26:12,400
बताऊंगा कि मैंने क्या लिखा है। इसका अर्थ। तुमने

351
00:26:12,400 --> 00:26:16,640
जो लिखा है वो तुम ही बताओगे। कोई और क्यों बताएगा? तो

352
00:26:16,640 --> 00:26:20,720
मेरे गुरुओं ने जो व्यास जी से लेकर के यहां तक जो गीता लेकर के

353
00:26:20,720 --> 00:26:24,800
आए हैं उसका अर्थ बताया है कि गीता ज्ञान देने वाला जो है वो

354
00:26:24,800 --> 00:26:29,040
भगवान श्री कृष्ण जो है वो मोक्ष दायक है वो ले

355
00:26:29,040 --> 00:26:33,760
आ रहे हैं वो लिख रहे हैं वो गीता प्रेस को दे रहे हैं गीता छापो

356
00:26:33,760 --> 00:26:37,840
अब तुम आकर के कह रहे हो कि तुमने जो लिखा है वो गलत उसका सही अर्थ मैं

357
00:26:37,840 --> 00:26:42,080
बता रहा हूं हम्म मतलब

358
00:26:42,080 --> 00:26:46,080
आपका ये कहना है कि जिन्होंने लिखा है। उन्होंने कह दिया

359
00:26:46,080 --> 00:26:50,160
श्री कृष्ण भगवान मोक्ष देते हैं। बस इतना काफी है। पढ़ने की आवश्यकता नहीं

360
00:26:50,160 --> 00:26:55,120
है। है मगर यदि उसका अर्थ

361
00:26:55,120 --> 00:26:59,200
यदि उसका अर्थ उन गुरुओं के विपरीत जा रहा है जिन्होंने लिखा है

362
00:26:59,200 --> 00:27:03,200
जिन्होंने परंपरा से आपको गीता दी है। यदि उसका अर्थ उन गुरुओं

363
00:27:03,200 --> 00:27:08,080
के विपरीत जा रहा है। एक

364
00:27:08,080 --> 00:27:12,160
मिनट एक एक मिनट भाई साहब एक मिनट यदि

365
00:27:12,160 --> 00:27:16,240
उसका अर्थ आपके हिसाब से उन गुरुओं के विपरीत जा रहा है जो

366
00:27:16,240 --> 00:27:20,320
जो गीता को लेकर के आ रहे हैं। तो आपको यह मानना पड़ेगा कि

367
00:27:20,320 --> 00:27:24,400
मैं गीता को प्रमाण नहीं मानता। मैं गीता

368
00:27:24,400 --> 00:27:29,920
को प्रमाण नहीं मानता। ये आपको कहना पड़ेगा। अगर

369
00:27:29,920 --> 00:27:33,920
अनुवाद को आप नहीं मानते तो आप भी प्रमाणित नहीं

370
00:27:33,920 --> 00:27:36,080
हुए।

371
00:27:36,080 --> 00:27:40,080
अरे मैं तो मानता हूं ना। मैं तुमसे पूछ रहा हूं। तो तुम

372
00:27:40,080 --> 00:27:44,320
अपने क्लेम को साफ करो कि गीता के आधार

373
00:27:44,320 --> 00:27:48,400
पर आप कुछ नहीं मानते हो। आपका आधार दूसरा होना चाहिए। ये कहना बंद

374
00:27:48,400 --> 00:27:48,900
करो कि मैं

375
00:27:48,880 --> 00:27:53,120
गीता के कारण किसी को तत्वदर्शी मानता हूं। ये कहना बंद करो कि मैं गीता

376
00:27:53,120 --> 00:27:57,120
के कारण किसी को काल मानता हूं। ये कहना बंद करो कि मैं किसी को

377
00:27:57,120 --> 00:28:01,280
गीता के कारण कबीर मानता हूं। मैं ये कहना चाह रहा हूं। आप स्वतंत्र होकर

378
00:28:01,280 --> 00:28:05,360
के कहिए कि भैया कबीर भगवान है बिना गीता के। गीता को

379
00:28:05,360 --> 00:28:09,360
मानने का दावा करना झूठा है। ये

380
00:28:09,360 --> 00:28:13,520
बात है। तो मैं मैं इसी इसी बात

381
00:28:13,520 --> 00:28:17,680
के प्रति उत्तर में मैं यह जवाब दूंगा आपको। जैसे किसी भी

382
00:28:17,680 --> 00:28:21,840
अन्य धर्म के व्यक्तियों से जब चर्चा होती है तो मैं उनको स्पष्ट कह देता हूं कि

383
00:28:21,840 --> 00:28:25,840
भाई मैं इस चीज को मानता हूं। इसमें इसमें जो चीजें

384
00:28:25,840 --> 00:28:31,040
लिखी हैं उन बातों को मैं प्रमाणित मानता हूं। और

385
00:28:31,040 --> 00:28:35,280
जो अनुवाद किया है मैं अपने से खड़े हुए हो जिसकी सहाय

386
00:28:35,280 --> 00:28:39,840
से तुम यहां खड़े हुए हो वो तो नहीं मान

387
00:28:39,840 --> 00:28:43,920
पर्सनली अपनी साइड से तो ये मानो कि अभी मुझे नहीं पता रामपाल सही

388
00:28:43,920 --> 00:28:47,920
बोलते हैं कि गलत बोलते हैं ये मानो मैं रामपाल जी महाराज की बात ही

389
00:28:47,920 --> 00:28:52,000
नहीं कर रहा अरे भाई तुम तो तुमसे हम बात क्यों कर रहे

390
00:28:52,000 --> 00:28:56,160
हैं फिर क्यों बात करेंगे फिर तुमसे हम हम

391
00:28:56,160 --> 00:29:00,240
गीता ज्ञान देने वाला जो प्रभु है का दावा कर रहे

392
00:29:00,240 --> 00:29:04,240
हो रामपाल के पक्ष को यहां पुष्ट करने नहीं आए हो तो हम क्यों तुमसे बात

393
00:29:04,240 --> 00:29:09,120
करें बहुत सारे लोग हैं जो हमारा विरोध करते हैं तुमसे हम क्यों बात करेंगे भाई

394
00:29:09,120 --> 00:29:14,320
एक सेकंड तुम्हारी क्या बात हुई थी

395
00:29:14,320 --> 00:29:18,400
कि हम ज्ञान चर्चा करेंगे और अपने ज्ञान चर्चा में ये सिद्ध करेंगे कि गीता ज्ञान

396
00:29:18,400 --> 00:29:22,480
देने वाला प्रभु है वो मोक्ष नहीं आगे बढ़ो के इस विषय में मेरे मेरे पास

397
00:29:22,480 --> 00:29:26,800
उत्तर नहीं है मैं आगे बढ़ना चाहता हूं ये बोल दो आगे बढ़ो नहीं

398
00:29:26,800 --> 00:29:30,800
इस विषय में मैं बात नहीं करना चाहता। मुझे सिर्फ यह बात करनी

399
00:29:30,800 --> 00:29:35,040
है कि गीता ज्ञान देने वाला नहीं देता। बात ना करने का कारण बताओ

400
00:29:35,040 --> 00:29:39,200
कि मेरे पास उत्तर नहीं है। कारण बताओ। कारण नहीं

401
00:29:39,200 --> 00:29:43,200
नहीं क्या क्या उत्तर मैं जरूरी मैं उत्तर देना ही नहीं

402
00:29:43,200 --> 00:29:49,200
चाहता उसका।

403
00:30:04,550 --> 00:30:08,550
[संगीत]
