1
00:00:01,760 --> 00:00:05,920
जो हमारे आर्य समाज की गुरु परंपरा है वह कहां से स्टार्ट होती है?

2
00:00:05,920 --> 00:00:09,920
इसमें आर्य समाज में गुरु परंपरा नहीं है। शास्त्र कहां

3
00:00:09,920 --> 00:00:14,080
से आए आपके पास? शास्त्र हमारे पास गुरु परंपरा से प्राप्त हुए। आचार्य परंपरा से प्राप्त हुए।

4
00:00:14,080 --> 00:00:20,080
किसी एक गुरु परंपरा को मानना पड़ेगा ना। इससे प्राप्त हुए। किससे प्राप्त हुए?

5
00:00:20,160 --> 00:00:24,320
नहीं कहीं से तो आपके गुरु ने ज्ञान दिया होगा। आर्य समाज की स्थापना

6
00:00:24,320 --> 00:00:28,480
स्वामी दयानंद सरस्वती जी ने किया। उनके गुरु? उनके गुरु स्वामी

7
00:00:28,480 --> 00:00:32,880
विरजानंद जी और उनके गुरु उनके गुरु के बारे में जानकारी नहीं है।

8
00:00:32,880 --> 00:00:37,600
जैसे मान लीजिए अष्टाध्याय सूत्र हैं जो उसमें मान लीजिए लिखा है पांच।

9
00:00:37,600 --> 00:00:42,240
एक एग्जांपल के तौर पे ले रहा हूं। उसमें लिखा है पांच। उसके बाद

10
00:00:42,240 --> 00:00:46,240
आपके किसी ने समझा पांच का मतलब पांच। किसी ने समझा नहीं पांच

11
00:00:46,240 --> 00:00:50,240
का मतलब छह। किसी ने समझा पांच का मतलब सात। किसी ने समझा पांच का

12
00:00:50,240 --> 00:00:54,240
मतलब आठ। अब ये सारे लोग आर्य समाज के नाम से बोल रहे हैं। भाई हमने वो

13
00:00:54,240 --> 00:00:58,320
जो उन्होंने पांच दिया है अष्टाध्याय सूत्र में पांच। मैं उसका अर्थ

14
00:00:58,320 --> 00:01:02,400
बता रहा हूं। तो यह पांच का पांच ही बता रहा है। एक पांच का छह बता रहा है। एक पांच का सात बता रहा है।

15
00:01:02,400 --> 00:01:06,720
तो इसमें आगे चलके आर्य समाज में ही हम कैसे पता लगाएंगे कौन सा व्यक्ति सही

16
00:01:06,720 --> 00:01:11,360
बोल रहा है? ठीक बोल रहे हैं। ठीक बोल रहे हैं।

17
00:01:11,360 --> 00:01:15,520
ठीक बोल रहे हैं। ठीक बोल रहे हैं। देखिए

18
00:01:15,520 --> 00:01:17,120
इस जगत में जगत

19
00:01:17,120 --> 00:01:21,760
की जो सबसे प्राचीनतम ग्रंथ है वो वेद है। और

20
00:01:21,760 --> 00:01:25,840
वेद को पढ़ेंगे। वेद को पढ़ना कैसे है? वेद हमें प्राप्त कैसे हो

21
00:01:25,840 --> 00:01:29,920
रहे हैं? प्राचीनतम ग्रंथ हम तक आए कैसे? हमको अपने अध्ययन

22
00:01:29,920 --> 00:01:33,920
से प्राप्त हुआ है। आर्ष साहित्य के माध्यम से आपको जरूर मिलेंगे। स्वामी दयानंद सरस्वती

23
00:01:33,920 --> 00:01:38,000
जी तो गीता प्रेस वाला जो छाप देगा वो हो जाएगा आपका प्रमाण। मैं आपसे

24
00:01:38,000 --> 00:01:42,800
पूछ रहा हूं जो सदियों पहले वेद प्रकट होते हैं वो आप तक कैसे आए?

25
00:01:42,800 --> 00:01:46,800
ये स्वामी दयानंद सरस्वती जी स्वामी गुरु गुरु विजानंद सरस्वती

26
00:01:46,800 --> 00:01:50,880
जी से और मैं पूछ रहा हूं जैसे जो विजानंद सरस्वती जी हैं उन

27
00:01:50,880 --> 00:01:54,880
तक वेद कैसे आए? यह वो उनके गुरु

28
00:01:54,880 --> 00:01:58,960
से उनको मिले होंगे और उनके गुरु के पास कैसे आए? उनके गुरु

29
00:01:58,960 --> 00:02:03,520
से मिले होंगे। तो यहां पे तो आपने गुरु परंपरा को मान लिया। नहीं नहीं देखिए

30
00:02:03,520 --> 00:02:07,680
उससे पहले गुरु परंपरा का मतलब यह नहीं है कि आप गुरु

31
00:02:07,680 --> 00:02:12,000
गुरु परंपरा का अर्थ समझ लीजिए। मैं मैं जो आपको बता रहा हूं शायद आप समझ नहीं पाए।

32
00:02:12,000 --> 00:02:16,080
कि जैसे वेद प्रकट हुए। गुरु ने अपने शिष्य को वेद दिए। फिर

33
00:02:16,080 --> 00:02:20,160
उसने अपने शिष्य को वेद दिए। फिर उसने अपने शिष्य को वेद दिए। वेदों के साथ उन्होंने

34
00:02:20,160 --> 00:02:24,320
अर्थ भी दिया वेदों का ऐसा नहीं कि सिर्फ मंत्र दे दिए बोलो बस

35
00:02:24,320 --> 00:02:28,480
उसका अर्थ भी दिया विस्तार भी दिया समय-समय पर आकर के लोगों ने वेद पर भाष्य भी किया

36
00:02:28,480 --> 00:02:32,560
जैसे कि सायन भाष्य सबसे पुराना भाष्य जो हमें मिल रहा है वो सायन

37
00:02:32,560 --> 00:02:36,640
भाष्य तो वो हमारा गुरु परंपरा से आया प्रश्न

38
00:02:36,640 --> 00:02:40,400
दिक्कत वाला ये है कि जिससे तुमको वेद मंत्र मिला उसके

39
00:02:40,400 --> 00:02:44,640
अर्थ पर यदि तुम्हें विश्वास नहीं है तो उसके मंत्र पर तुम्हें विश्वास कैसे

40
00:02:44,640 --> 00:02:45,600
और यदि उसके मंत्र

41
00:02:45,600 --> 00:02:49,680
पर विश्वास है तो उसके वेद मंत्र पर विश्वास क्यों तो जिसका हम जिसका

42
00:02:49,680 --> 00:02:53,760
हम अर्थ नहीं मान रहे अर्थ पे विश्वास नहीं है कि अर्थ गलत होगा उसके हम श्लोक

43
00:02:53,760 --> 00:02:57,760
पे विश्वास कैसे करें और जिसका हम श्लोक पे विश्वास कर रहे हैं उसके हम अर्थ पे विश्वास

44
00:02:57,760 --> 00:03:02,240
क्यों ना करें तो गुरु परंपरा पे या तो विश्वास होना चाहिए या विश्वास होना चाहिए

45
00:03:02,240 --> 00:03:06,400
वेद मंत्रों के लिए हम गुरु गुरु परंपरा पर विश्वास कर रहे हैं तो फिर अर्थ

46
00:03:06,400 --> 00:03:10,480
के लिए वेद मंत्रों पर अर्थ के लिए गुरु परंपरा पर विश्वास क्यों ना करें हम

47
00:03:10,480 --> 00:03:13,680
इस विषय में आपको इसीलिए नहीं बताएंगे क्योंकि यहां अच्छा

48
00:03:13,680 --> 00:03:17,760
अब बात आ जाती है कि जो एक बहुत कई बार हम लोगों

49
00:03:17,760 --> 00:03:21,840
की इस पूरी बातचीत में बात आई कि अ

50
00:03:21,840 --> 00:03:26,080
गलत प्रक्षिप्त हो गया या मिलावट हो गई

51
00:03:26,080 --> 00:03:30,160
या भाष्य उसमें गलत कर दिया शास्त्र कहां से आए आपके पास

52
00:03:30,160 --> 00:03:34,160
शास्त्र हमारे पास गुरु परंपरा से प्राप्त हुए आचार्य परंपरा से प्राप्त हुए किसी एक गुरु परंपरा

53
00:03:34,160 --> 00:03:38,720
को मानना पड़ेगा ना इससे प्राप्त हुए किससे प्राप्त हुए

54
00:03:38,720 --> 00:03:44,080
जो आर्य समाज है इसकी गुरु परंपरा क्या है

55
00:03:44,080 --> 00:03:48,400
वह तो परमपिता परमात्मा सबका गुरु है एक तो यह वो

56
00:03:48,400 --> 00:03:52,400
अलौकिक गुरु है वही है जो

57
00:03:52,400 --> 00:03:56,320
ईश्वर्य का ज्ञान है वेद

58
00:03:56,320 --> 00:04:00,560
हमारे सोच का और हमारा आधार वही

59
00:04:00,560 --> 00:04:04,880
है कोई व्यक्ति विशेष हमारा गुरु तो नहीं नहीं नहीं

60
00:04:04,880 --> 00:04:09,280
वेदादि शास्त्र आज से कई अनेकानेक

61
00:04:09,280 --> 00:04:13,760
वर्ष पूर्व मंत्र दृष्टा बनते हैं हमारे ऋषि गण

62
00:04:13,760 --> 00:04:17,920
वहां से ले स्वामी दयानंद जी तक वह वेद मंत्र कैसे

63
00:04:17,920 --> 00:04:22,080
आए जिन्हें उन्होंने प्रमाण माना सनातन का श्रुति नाम सुना है

64
00:04:22,080 --> 00:04:26,240
ठीक है श्रुति का अर्थ क्या हुआ श्रुति जो सुना जाता है इस प्रकार

65
00:04:26,240 --> 00:04:29,280
से आज भी आप चले जाइए दक्षिण भारत में

66
00:04:29,280 --> 00:04:33,440
चारों सुन सुन के याद है उनको नहीं नहीं मैं वही कह रहा हूं तो दयानंद जी ने किससे

67
00:04:33,440 --> 00:04:37,600
सुने स्वामी जब दयानंद जी ने जब सुने

68
00:04:37,600 --> 00:04:41,840
नहीं दयानंद जी ने जब पढ़े जब तक तो वो उनको लिपिबद्ध कर दिया गया था हमको

69
00:04:41,840 --> 00:04:46,240
अपने अध्ययन से प्राप्त हुआ है स्वा अध्ययन वो सभी ग्रंथों को तो गीता

70
00:04:46,240 --> 00:04:50,400
महाराज हिसाब देगा वो हो जाएगा आपका प्रमाण। तो मंत्र और सिद्धांत कहां से मिला है? हमको

71
00:04:50,400 --> 00:04:54,400
उन्हीं की कृपा से प्राप्त हुआ है। किसी से वेरीफाई तो करवाएंगे। वो थे ना फिर हाथ थे ना

72
00:04:54,400 --> 00:04:58,640
अपने क्या नाम गुरु विजानंद जी। विजानंद जी के गुरु पूर्णानंद जी

73
00:04:58,640 --> 00:05:02,640
पूर्णानंद जी के गुरु। अब ये इतने लंबी परंपरा नहीं वो बात है। कहने का मतलब

74
00:05:02,640 --> 00:05:06,640
है हम ये कैसे माने कि ये जो वेद मंत्र हैं ये वही मेन मंत्र है जो परमेश्वर ने

75
00:05:06,640 --> 00:05:10,800
दिए। क्योंकि हमें पूर्णानंद जी से पहले का गुरु मालूम ही नहीं है। जैसे वेद

76
00:05:10,800 --> 00:05:14,800
मार्केट से हम लेकर के आए तो गीता प्रेस वाला जो छाप देगा वो हो जाएगा आपका

77
00:05:14,800 --> 00:05:18,800
प्रमाण। उन्होंने भी किसी से सीखे ही होंगे तो वो किससे सीखे कैसे प्रमाणित ये

78
00:05:18,800 --> 00:05:22,880
तो एक विषय अलग है इसको देखना पड़ेगा ये हमें इसको होगा इसकी जानकारी ऐसा

79
00:05:22,880 --> 00:05:26,960
नहीं है कि नहीं है जो मत में दीक्षित ना हो उसको वैयक्तिक स्तर पर संतुष्ट करने

80
00:05:26,960 --> 00:05:30,960
के लिए उसका उपदेश ना करें श्रुति क्या हमें प्राप्त उसी पे आ रहा हूं बात ऐसी है

81
00:05:30,960 --> 00:05:35,040
कि जो गुरु शिष्य परंपरा जिसके बारे में हमें सामग्री प्राप्त है

82
00:05:35,040 --> 00:05:39,200
वो इनकी है शंकराचार्य निंबारकाचार्य इन सब की गुरु परंपराओं की सामग्री हमें

83
00:05:39,200 --> 00:05:43,200
प्राप्त है। कौन से सन में कौन गुरु हुए? प्रॉब्लम यह है कि

84
00:05:43,200 --> 00:05:44,320
जिनकी सामग्री हमें

85
00:05:44,320 --> 00:05:48,480
प्राप्त है कि शंकराचार्य के कौन शिष्य हुए, उनके शिष्य कौन हुए, उनके शिष्य

86
00:05:48,480 --> 00:05:52,720
कौन हुए? आज तक के वह पूरी वंशावली हमें प्राप्त है। अब हमें अगर पूर्णानंद

87
00:05:52,720 --> 00:05:56,960
जी अगर मैं यह नहीं कह रहा कि नहीं है वो आप देंगे तो मिल जाएगी। अगर

88
00:05:56,960 --> 00:06:01,280
पूर्णानंद जी के गुरु के बारे में हमें नहीं पता और हम यह कह रहे हैं कि

89
00:06:01,280 --> 00:06:05,360
यह जो वेद मंत्र हैं जो वेद मंत्र शंकराचार्य जी की गुरु परंपरा के द्वारा

90
00:06:05,360 --> 00:06:09,360
यहां तक आ रहे हैं तो वेद मंत्रों का अर्थ तो हम मान रहे हैं अर्थ अपना

91
00:06:09,360 --> 00:06:13,600
दे रहे हैं और वेद मंत्र उनके मान ले रहे हैं उनके द्वारा दिए हुए अब बात ऐसी

92
00:06:13,600 --> 00:06:17,760
है यदि शंकराचार्य परंपरा या निंबारकाचार्य परंपरा या रामानुजाचार्य परंपरा गुरु

93
00:06:17,760 --> 00:06:21,760
शिष्य परंपरा जिसकी वंशावली हमें प्राप्त है वो आपको गलत अर्थ

94
00:06:21,760 --> 00:06:26,000
दे रही है क्योंकि उनके अर्थों को हमने नहीं माना शायन के अर्थ को आर्य समाज ने नहीं माना

95
00:06:26,000 --> 00:06:30,000
तो शायनाचार्य के अर्थ को जब हम नहीं मान रहे हैं तो उनकी ही परंपरा के द्वारा

96
00:06:30,000 --> 00:06:34,160
आने वाले वेद मंत्रों को हम कैसे विश्वास कर ले रहे हैं कि वही वेद मंत्र

97
00:06:34,160 --> 00:06:38,240
हैं जो ईश्वर के हैं। कैसे करेंगे आप? उन्हीं शब्द प्रमाणों से सिद्ध करें। वो

98
00:06:38,240 --> 00:06:42,640
शब्द प्रमाण आपके पास आए कैसे जब उन शब्द प्रमाण को देने वाले पर आपका भरोसा नहीं है।

99
00:06:42,640 --> 00:06:47,360
ये पहला प्रश्न आप कर रहे हैं। मेरे ख्याल से आज तक दुनिया में किसी ने किया नहीं था।

100
00:06:47,360 --> 00:06:51,360
अगर हम गुरु के बिना शास्त्र को लेंगे तो शास्त्र की प्रमाणिकता कहां से आएगी?

101
00:06:51,360 --> 00:06:55,360
अब लास्ट है कि जैसे मैंने कुछ आपको कोट किए कि वेदों

102
00:06:55,360 --> 00:06:59,440
में यह दिया है या उपनिषदों में यह दिया है। तो आपने कहा कि आपने

103
00:06:59,440 --> 00:07:03,520
गलत वो किसी और का भाष्य पढ़ लिया। गलत भाष्य पढ़ लिया है। तो इसमें

104
00:07:03,520 --> 00:07:06,480
बात ये आती है कि आर्य समाज की गुरु परंपरा क्या

105
00:07:06,480 --> 00:07:10,640
है?

106
00:07:10,640 --> 00:07:14,800
शास्त्र कहां से आए आपके पास? शास्त्र हमारे पास गुरु परंपरा से प्राप्त हुए। आचार्य परंपरा

107
00:07:14,800 --> 00:07:20,800
से प्राप्त हुए। किसी एक गुरु परंपरा को मानना पड़ेगा ना। इससे प्राप्त हुए। किससे प्राप्त हुए?

108
00:07:20,960 --> 00:07:25,280
गुरु तो सबसे आदि गुरु तो हमारा वही

109
00:07:25,280 --> 00:07:27,840
परमात्मा ही है और

110
00:07:27,840 --> 00:07:32,240
उसके बाद जो हमें सैद्धांतिक रूप से जो

111
00:07:32,240 --> 00:07:36,880
ज्ञान दिया वो हमारे गुरु महर्षि दयानंद सरस्वती

112
00:07:36,880 --> 00:07:40,960
नहीं इधर से गुरु परंपरा थोड़ी सी बताइए कि परंपरा वहां तक कैसे जाती

113
00:07:40,960 --> 00:07:45,120
ऋषियों तक जैसे दयानंद सरस्वती जी फिर उनके गुरु विजानंद फिर उनके गुरु

114
00:07:45,120 --> 00:07:49,600
कौन फिर उनके थोड़ा थोड़ा पीछे ऐसे हम

115
00:07:49,600 --> 00:07:54,000
तो ऋषि दयानंद के गुरु थे विजयानंद जी

116
00:07:54,000 --> 00:07:58,000
और फिर ऋषि दयानंद जी तो हैं वो हम सबके

117
00:07:58,000 --> 00:08:02,160
गुरु हैं नहीं जी के पीछे भाई परंपरा परमेश्वर

118
00:08:02,160 --> 00:08:06,240
तक है ना तो परमेश्वर से यहां तक जो आई है मध्यकाल के गुरु होंगे

119
00:08:06,240 --> 00:08:10,320
एक बहुत एक लंबा सिस्टम नहीं थोड़े

120
00:08:10,320 --> 00:08:14,400
से दो चार कुछ पीछे के कुछ पीढ़ियों पहले के गुरु के नाम जैसे विजानंद के

121
00:08:14,400 --> 00:08:18,480
ये थे इनके ये थे ऐसे कुछ थोड़ा दो चार पीढ़ियों ये सब जो ये वेद

122
00:08:18,480 --> 00:08:22,480
शास्त्र है ये जो ऋषियों के ग्रंथ है यह सब हमारे गुरु

123
00:08:22,480 --> 00:08:26,480
ही है ऐसे नाम बद्ध की भाई विजानंद को इन्होंने पढ़ाया इन्होंने वेद मंत्र

124
00:08:26,480 --> 00:08:31,040
सिखाए फिर उनको इन्होंने वेद मंत्र सिखाया ऐसे पांच छह पीढ़ी तो हमें

125
00:08:31,040 --> 00:08:35,200
तो ऋषि दयानंद ऋषि दयानंद से तो बहुत

126
00:08:35,200 --> 00:08:39,200
दो धाराएं फूटी दो तरह के इनके शिष्य तैयार हुए एक

127
00:08:39,200 --> 00:08:43,200
नहीं ऋषि दयानंद जी नहीं ऋषि दयानंद जी के पीछे इधर का नहीं ऋषि दयानंद

128
00:08:43,200 --> 00:08:47,200
जी के पास वेद मंत्र कहां से आए कैसे आए ऋषि दयानंद जी

129
00:08:47,200 --> 00:08:51,600
ने तो गुरु विजानंद जी से ज्ञान ग्रहण किया बिरजानंद जी के

130
00:08:51,600 --> 00:08:55,680
वो गुरु थे

131
00:08:55,680 --> 00:08:59,760
पूर्णानंद जी पूर्णानंद जी के गुरु पूर्णानंद जी के गुरु का नहीं

132
00:08:59,760 --> 00:09:03,840
इतनी लंबी परंपरा का स्मरण नहीं है सब नहीं लंबी नहीं कुछ पांच छी

133
00:09:03,840 --> 00:09:07,920
जैसे हमें मध्यकालीन पूर्णानंद जी तक टीपू सुल्तान का इतिहास स्वामी विजानंद

134
00:09:07,920 --> 00:09:12,160
जी के गुरु गुरु पूर्णांद जी सबसे पहले कि गुरुओं का नाम नहीं है

135
00:09:12,160 --> 00:09:16,160
स्मरण नहीं है पढ़ा तो है स्मरण नहीं है मतलब

136
00:09:16,160 --> 00:09:20,160
किसी शास्त्र में दिया गया है ऐसा हां हां तो गुरु परंपरा

137
00:09:20,160 --> 00:09:24,160
जब चली आ रही है तो सबके होंगे ही नहीं नहीं कुछ पांच छह पीढ़ी पहले

138
00:09:24,160 --> 00:09:28,160
के गुरुओं के नाम जितना था वो मैंने बता दिया कुछ और पूछिए अच्छा तो

139
00:09:28,160 --> 00:09:32,160
इसमें ये बात आती है कि पूर्णानंद जी को वेद मंत्र किससे मिले

140
00:09:32,160 --> 00:09:36,160
ये हमें ये नहीं पता है तो हम ये कैसे माने कि जो वेद मंत्र हैं जो पूर्णानंद जी ने

141
00:09:36,160 --> 00:09:40,240
इनको दिए वो वही वेद मंत्र हैं जो परमात्मा दे रहा है ऋषियों को उनहीं

142
00:09:40,240 --> 00:09:44,320
शब्द प्रमाणों से सिद्ध करें शब्द प्रमाण आपके पास आए कैसे जब उन शब्द प्रमाण को देने वाले

143
00:09:44,320 --> 00:09:48,560
पर आपका भरोसा नहीं है

144
00:09:48,560 --> 00:09:52,720
वही है। नहीं नहीं वही है वो सही है। मगर पूर्णानंद जी ने वही वेद

145
00:09:52,720 --> 00:09:57,120
मंत्र दिए हैं जो परमात्मा ने निष्कासित किए वही पूर्णानंद जी ने विजानंद

146
00:09:57,120 --> 00:10:01,600
जी को दिए। तो यह किस आधार पर? कहने का अर्थ यह है कि जो अन्य परंपराएं

147
00:10:01,600 --> 00:10:05,760
हैं गुरुओं की जैसे नबार्क परंपरा या आगे कर

148
00:10:05,760 --> 00:10:10,000
लीजिए या रामानुजाचार्य परंपरा या शंकराचार्य परंपरा

149
00:10:10,000 --> 00:10:14,000
इनकी परंपरा में लिपिबद्ध बिल्कुल गुरुओं का नाम एक एक पता है। अब बात

150
00:10:14,000 --> 00:10:18,000
ये आती है कि अगर हमें इन गुरु परंपराओं से वेद प्राप्त होना हम

151
00:10:18,000 --> 00:10:22,400
स्वीकार करते हैं तो इन गुरु परंपराओं के अर्थ को हम स्वीकार क्यों नहीं करते?

152
00:10:22,400 --> 00:10:26,480
और अगर इनके अर्थ को स्वीकार नहीं करते तो इनके वेद मंत्र पर हमें हम

153
00:10:26,480 --> 00:10:30,560
क्यों स्वीकार करते हैं? इस तरह से रहे क्योंकि जो जैसे जो हमको गलत अर्थ दे

154
00:10:30,560 --> 00:10:34,640
सकता है वह हमको गलत मंत्र भी तो दे सकता है कि हमें अगर

155
00:10:34,640 --> 00:10:38,640
उसके अर्थ पर विश्वास नहीं है तो उन मंत्रों पर विश्वास क्यों है कि ये वही

156
00:10:38,640 --> 00:10:42,960
मंत्र है जो परमात्मा ने दिए हैं परमात्मा की जो

157
00:10:42,960 --> 00:10:47,040
चीज अनादि काल से चली आ रही है मगर उसमें बीच में वो है ना पाखंडी

158
00:10:47,040 --> 00:10:50,720
आपके अनुसार शंकराचार्य पाखंडी है ना

159
00:10:50,720 --> 00:10:54,720
हम इस विषय में आपको इसीलिए नहीं बताएंगे जो मैं आपको प्रमाण दिखाऊंगा शब्द प्रमाण वो

160
00:10:54,720 --> 00:10:58,720
मैं आप ही के आचार्य को दिखाऊंगा तो कोई मतलब भेद भी नहीं होगा। जैसे परंपरा

161
00:10:58,720 --> 00:11:02,720
की बात कब आएगी? जब मैं बोलूंगा कि भाई आग नहीं यहां पे आग का मतलब पानी है। इंद्र का मतलब

162
00:11:02,720 --> 00:11:06,720
ईश्वर नहीं। इंद्र का मतलब बिजली है। तो आप बोलेंगे नहीं मेरे आचार्य तो कुछ और कह रहे हैं। तो मैं आप ही के आचार्य

163
00:11:06,720 --> 00:11:10,800
का दिखाऊंगा। कोई समस्या नहीं है इसमें। ठीक है? सरे जी को भेलने तो अप दीक्षित

164
00:11:10,800 --> 00:11:15,120
जी ने भी माना था। देखो ऐसा है जैसे कि बैरन बांस की बांसुरिया

165
00:11:15,120 --> 00:11:19,280
गिरजा मुख चूमत बनवारी। आप मान लो कि ये मेरे आचार्य है जिन्होंने ये लिखा

166
00:11:19,280 --> 00:11:23,360
बैरन बांस की बांसुरिया गिरजा मुख चूमत बनवारी। ठीक है? आपने कहा ये आपके

167
00:11:23,360 --> 00:11:27,360
आचार्य ने लिखा है। अब इसमें गिरजा मुख चूमत बनवारी

168
00:11:27,360 --> 00:11:31,440
मतलब गिरजा यानी पार्वती मुख चूम रही है बनवारी का।

169
00:11:31,440 --> 00:11:35,440
पार्वती इसका अर्थ निकल रहा है कि मुख चूम रही है पार्वती। अब आप

170
00:11:35,440 --> 00:11:39,520
कहोगे देखिए आपके आचार्य ने लिखा है कि पार्वती माता ने भगवान

171
00:11:39,520 --> 00:11:43,600
श्री कृष्ण का मुख चूमा। ठीक है? तो मैं बताऊंगा कि

172
00:11:43,600 --> 00:11:48,080
भाई मेरे आचार्य ने तो यहां पर ये कहा था कि जो गोपियां है वो कह रही है बैरन

173
00:11:48,080 --> 00:11:52,080
बांस की बांसुरिया यानी जो बांसुरी है बांस की ये

174
00:11:52,080 --> 00:11:56,240
बैरी है मेरी और ये गिर जा ये पार्वती नहीं है गिरजा

175
00:11:56,240 --> 00:12:00,400
ये गिर जाए जो बनवारी का मुख चूम रही है बनवारी का जो मुख

176
00:12:00,400 --> 00:12:01,360
चूम रही है

177
00:12:01,360 --> 00:12:05,520
उन्होंने क्या कहा आपको कैसे पता चला क्योंकि उनके ग्रंथों में ये बात लिखी हुई अरे भाई उनके ग्रंथों का अर्थ

178
00:12:05,520 --> 00:12:10,000
आपको कौन देगा ग्रंथ कौन देगा आपको उनकी परंपरा ना तो इसलिए

179
00:12:10,000 --> 00:12:14,160
इसलिए वहां पे मेरी बात को मानना पड़ेगा उनकी क्योंकि मैं उनका शिष्य हूं।

180
00:12:14,160 --> 00:12:18,240
मैंने उनकी बात को उनसे समझा है। कोई इशू नहीं है।

181
00:12:18,240 --> 00:12:22,560
जी। मुझे कोई इशू नहीं। अब ये बताइए मुझे कि जिन

182
00:12:22,560 --> 00:12:26,560
श्लोकों का अर्थ आप लेते हैं कि हमारे वेदों

183
00:12:26,560 --> 00:12:30,880
से मेल खा रहे हैं। यानी वेद आपके लिए प्रमाण है। अच्छा ये वेद

184
00:12:30,880 --> 00:12:32,000
आपको मिले कैसे?

185
00:12:32,000 --> 00:12:36,080
शास्त्र कहां से आए आपके पास? शास्त्र हमारे पास गुरु परंपरा से प्राप्त हुए। आचार्य परंपरा

186
00:12:36,080 --> 00:12:42,080
से प्राप्त हुए। किसी एक गुरु परंपरा को मानना पड़ेगा ना। इससे प्राप्त हुए। किससे प्राप्त हुए?

187
00:12:42,320 --> 00:12:44,640
मिलेगा

188
00:12:44,640 --> 00:12:47,840
यह तो मोबाइल में अभी आपके में उनके

189
00:12:47,840 --> 00:12:51,840
पास वो जो खोद के दिखा रहे हैं जो किताबें वो कहां से आई हैं?

190
00:12:51,840 --> 00:12:56,000
मार्केट से आई हैं और कहां से आई? तो गीता प्रेस वाला जो हिसाब देगा वो हो जाएगा आपका प्रमाण।

191
00:12:56,000 --> 00:13:00,480
तो इसका मतलब है आप मार्केट को प्रमाण मानते हैं। अगर

192
00:13:00,480 --> 00:13:04,720
हम गुरु के बिना शास्त्र को लेंगे तो शास्त्र की प्रमाणिकता कहां से आएगी?

193
00:13:04,720 --> 00:13:09,760
अरे मोबाइल में कहां से आए? मार्केट में कहां से आए?

194
00:13:09,760 --> 00:13:14,160
गोरखपुर से प्रकट कहां से हुए? तो आप तक कैसे आए?

195
00:13:14,160 --> 00:13:16,080
आपको सपने में आके दिए।

196
00:13:16,080 --> 00:13:20,240
हमारे शास्त्र हमारे साथ अतीत जन्मांतर विद्यमान है। और एक

197
00:13:20,240 --> 00:13:24,480
शास्त्र पूरा सुना दीजिए अभी। चलिए कौन सा शास्त्र सब प्राप्त है ना? क्यों सुना रहे हैं? आपके

198
00:13:24,480 --> 00:13:28,480
सिद्धांत आपको कहां से मिले वो बताओ। हमको सिद्धांत इन्होंने दिया। कान में दिया? हां।

199
00:13:28,480 --> 00:13:32,880
कान में दिया, माथा में दिया। शास्त्र में दिए। हां। तो एक शास्त्र सुना दिया वाल्मीकि रामायण।

200
00:13:32,880 --> 00:13:36,880
आपको हम क्यों शास्त्र? इसका मतलब नहीं दिए। आपसे यह ना पूछा

201
00:13:36,880 --> 00:13:38,800
जाए कि निग्रह परंपरा कैसे क्या है?

202
00:13:38,800 --> 00:13:43,040
इसका मतलब अभी जो मार्केट में जो किताबें जो बिक रही है, जो वेद है, कुरान शरीफ है, गीता

203
00:13:43,040 --> 00:13:47,280
है, ये सब बेकार है। बेकार नहीं है। मुझे मालूम है।

204
00:13:47,280 --> 00:13:51,680
मुझे मालूम है वो कहां से आया? मैं आपसे सुनना चाह रहा हूं। क्या आपको पता है वो कहां से आया?

205
00:13:51,680 --> 00:13:56,080
कहां से आया? क्या आपको पता है वो कहां से आया? वेद।

206
00:13:56,080 --> 00:14:00,160
हां। मुझे पता है कि मार्केट में वो जो किताबें छप

207
00:14:00,160 --> 00:14:04,880
रही है, किस आधार पे छप रही है। क्या आपको पता है किस आधार पे छप रही है? नहीं पता। हां।

208
00:14:04,880 --> 00:14:09,040
वह छप रही हैं गुरु शिष्य परंपरा के आधार पर। जब वेद

209
00:14:09,040 --> 00:14:13,040
प्रकट होते हैं तो उसके बाद गुरु अपने शिष्य को वेद

210
00:14:13,040 --> 00:14:17,200
रटाते हैं और उसका अर्थ भी रटाते हैं। फिर वह अपने शिष्य

211
00:14:17,200 --> 00:14:21,360
को रटाता है। तो ऐसे शिष्य के शिष्य के शिष्य के शिष्य के शिष्य के द्वारा आज

212
00:14:21,360 --> 00:14:25,600
तक वो वेद व्याप्त है। तो अब ये समझ में आया कि गुरु परंपरा

213
00:14:25,600 --> 00:14:29,760
के द्वारा अब तक वेद आया। मेरा कहने का मतलब यह है। सुनिए मैं

214
00:14:29,760 --> 00:14:33,760
जो कहना चाह रहा हूं। मैं वही वही मैं कह रहा हूं। देखिए

215
00:14:33,760 --> 00:14:37,920
वह जो खोल के दिखा रहे हैं वो जहां से श्लोक

216
00:14:37,920 --> 00:14:41,920
आए हैं वहीं से अर्थ भी आया है। अगर आपको

217
00:14:41,920 --> 00:14:45,920
किसी व्यक्ति के ऊपर विश्वास नहीं है कि यह भूु है मान लो ये बुद्धि

218
00:14:45,920 --> 00:14:50,320
बुद्धू है ये तो उसके श्लोक पर भी विश्वास नहीं होना चाहिए।

219
00:14:50,320 --> 00:14:53,920
बुद्धू है गलत श्लोक बता सकता है ना और अगर उसके श्लोक पर विश्वास है

220
00:14:53,920 --> 00:14:57,920
तो उसके अर्थ पर भी विश्वास होना चाहिए। मगर आप श्लोक

221
00:14:57,920 --> 00:15:02,080
उससे ले रहे हो। अर्थ अपना दे रहे हो। अब सुनिए मैं यह कह रहा था

222
00:15:02,080 --> 00:15:07,520
कि आपके रामपाल जी को वेदों के सारे मंत्र याद हैं क्या?

223
00:15:07,520 --> 00:15:11,760
विद्यमान है और शास्त्र एक शास्त्र पूरा सुना दीजिए अभी। चलिए कौन सा

224
00:15:11,760 --> 00:15:16,160
आपको सब प्राप्त है ना? वो सुना हम आपको क्यों तो वही मैं कह रहा हूं।

225
00:15:16,160 --> 00:15:20,160
जो गीता और वेद है वो हमारे पास तक कैसे आए? क्योंकि वो आज से

226
00:15:20,160 --> 00:15:24,160
दो अरब वर्ष पूर्व या आपके अनुसार 5000 5000 5000 वर्ष पूर्व

227
00:15:24,160 --> 00:15:28,240
सृष्टि है और 5000 साल में वो क्वेश्चन दूसरा है कि

228
00:15:28,240 --> 00:15:32,320
जो वेद है वो आज से 5000 साल पहले

229
00:15:32,320 --> 00:15:36,560
आए आपके अनुसार और हमारे अनुसार 2 अरब वर्ष हुआ है।

230
00:15:36,560 --> 00:15:40,560
ठीक है? तो जो 5000 वर्ष पूर्व जो वेद आते हैं प्रकट होते

231
00:15:40,560 --> 00:15:44,640
हैं जो भी है हम कह रहे हैं कि आज के समय में जो उसका अर्थ कर रहे हैं

232
00:15:44,640 --> 00:15:48,640
उसको अनर्थ कर दिया है। गलत कर दिया है। तो वो जो वेद के मंत्र

233
00:15:48,640 --> 00:15:52,800
हैं और वो जो वेद गीता के श्लोक हैं वो हमारे पास

234
00:15:52,800 --> 00:15:57,520
तक आपके पास तक कैसे आए हैं? 5000 वर्ष से यहां तक कैसे आए?

235
00:15:57,520 --> 00:16:01,520
वो कैसे आए? हां जब हमारे ज्ञान के

236
00:16:01,520 --> 00:16:05,840
अनुसार जैसे अभी मैंने वीरेंद्र देवी दीक्षित जी का नाम लिया उन्होंने पूरा उसको

237
00:16:05,840 --> 00:16:09,840
वह कौन व्यक्ति था जिसने लिया वहां पे 5000 साल पहले वेदव्यास

238
00:16:09,840 --> 00:16:13,840
वेदव्यास जी फिर उनसे फिर उन फिर गद्दियां चल जाती है ना

239
00:16:13,840 --> 00:16:18,000
फिर वो गद्दी कौन सी थी क्या नाम था इतना मेरे को नहीं आप उसकी शास्त्रीयता

240
00:16:18,000 --> 00:16:22,000
पूछी जा रही है आपकी परंपरा के लिए तो उसमें आप सारी बातें बता रहे हैं उसकी प्रामाणिकता

241
00:16:22,000 --> 00:16:22,640
के विषय में आप कह

242
00:16:22,640 --> 00:16:26,640
रहे हैं कि नहीं बताएंगे हम समझ नहीं मैंने ये प्रश्न क्यों किया मैं इसको क्लियर करूं बात ये

243
00:16:26,640 --> 00:16:31,120
है कि हमको गीता गीता वेद पुराण प्राप्त होते हैं परंपरा से

244
00:16:31,120 --> 00:16:35,120
गुरु शिष्य परंपरा चलती थी मुंडकोपनिषद में एक से ले

245
00:16:35,120 --> 00:16:39,120
चार तक बताया गया है वो तो हर चीज की परंपरा मुंडकोपनिषद में एक

246
00:16:39,120 --> 00:16:43,120
से ले चार तक ये बताया गया है कि मेरे ये गुरु थे मेरे ये गुरु

247
00:16:43,120 --> 00:16:47,120
थे ऐसे करके विद्या मुझ तक आई है। भगवत गीता में भी चार दो तीन 16 में

248
00:16:47,120 --> 00:16:51,280
परंपरा की बात कही है भगवान ने कि ज्ञान जो है परंपरा से प्राप्त हो रहा है। अच्छा वेद

249
00:16:51,280 --> 00:16:55,600
के जो मंत्र होते हैं ना उसका अर्थ करने के लिए हमको नॉर्मल

250
00:16:55,600 --> 00:16:59,680
डिक्शनरी नहीं चाहिए होती है। एक डिक्शनरी है निरुक्त नाम सुना है

251
00:16:59,680 --> 00:17:03,760
नहीं मैंने सुना क्योंकि उतना अब है मैं बता रहा हूं निरुक्त जो

252
00:17:03,760 --> 00:17:08,000
है उसको निरुक्त को रचने वाले उसके रचनाकार हैं यासकाचार्य आचार्य

253
00:17:08,000 --> 00:17:12,160
यास जी तो वो भी उसमें कहते हैं कि श्रुति परंपरा से ही ज्ञान

254
00:17:12,160 --> 00:17:16,560
प्राप्त होता है। यानी कि हमारे पास जो वेद के मंत्र आ रहे हैं

255
00:17:16,560 --> 00:17:20,720
वो श्रुति परंपरा से आ रहे हैं। अगर परंपरा नहीं है तो वेद

256
00:17:20,720 --> 00:17:24,720
के मंत्र भी नहीं है। अगर परंपरा है तो वेद के मंत्र हैं। गीता

257
00:17:24,720 --> 00:17:29,280
के गीता के श्लोक हैं। तो कहने का तात्पर्य यह है

258
00:17:29,280 --> 00:17:33,760
कि जैसे मान लीजिए कि हमको परंपरा से अब वो परंपरा शंकराचार्य,

259
00:17:33,760 --> 00:17:37,760
रामानुजाचार्य, मधवाचार्य इत्यादि के रूप में आज भी है

260
00:17:37,760 --> 00:17:42,000
आपको गीता का अर्थ बताने के लिए वेद का अर्थ बताने के लिए। अब दिक्कत

261
00:17:42,000 --> 00:17:46,320
क्या है कि अगर हम यह कह देते हैं कि उन्होंने अर्थ को बदल दिया है।

262
00:17:46,320 --> 00:17:50,400
ठीक है? तो हमें वेद के मंत्र किससे मिल रहे हैं? उन्हीं से

263
00:17:50,400 --> 00:17:54,480
मिल रहे हैं। गीता के श्लोक किससे मिल रहे हैं? उन्हीं से मिल रहे

264
00:17:54,480 --> 00:17:58,560
हैं। तो अगर हम यह कहते हैं कि उन्होंने अर्थ को बदल दिया है तो

265
00:17:58,560 --> 00:18:02,720
अगर हमें उन पर विश्वास नहीं है तो फिर हम यह कैसे विश्वास

266
00:18:02,720 --> 00:18:06,720
करें कि ये जो वेद के मंत्र हैं ये वही मंत्र हैं जो भगवान ने दिए थे 5 साल

267
00:18:06,720 --> 00:18:11,040
5000 साल पहले या तो विश्वास करना पड़ेगा तो पूरा करना पड़ेगा।

268
00:18:11,040 --> 00:18:15,280
सिद्ध कैसे करेंगे आप? उन्हें शब्द प्रमाणों से सिद्ध करें। शब्द प्रमाण आपके पास आए कैसे? जब

269
00:18:15,280 --> 00:18:19,440
उन शब्द प्रमाण को देने वाले पर आपका भरोसा नहीं है। किसने? कि भैया परंपरा से

270
00:18:19,440 --> 00:18:23,600
गीता प्रेस तो हमारी कोई धर्म धर्माचार्य है नहीं। गीता प्रेस या फिर

271
00:18:23,600 --> 00:18:27,600
चौखंबा ये सब कोई हमारे धर्माचार नहीं है। हमारे जो धर्माचार्य

272
00:18:27,600 --> 00:18:31,680
होते हैं वो गुरु शिष्य परंपरा से मंत्रों को लेके आए हैं।

273
00:18:31,680 --> 00:18:35,840
तो अगर हम ये कह देंगे कि हमें इन पर भरोसा नहीं है। हम तो अपना अर्थ करेंगे। हम अपना

274
00:18:35,840 --> 00:18:40,000
अर्थ करेंगे या या फिर हमारे पास कोई दिव्य एक मिनट या फिर

275
00:18:40,000 --> 00:18:44,480
या फिर हमारे पास कोई दिव्य शक्ति आ रही है। हम उसका अर्थ मानेंगे

276
00:18:44,480 --> 00:18:48,640
और श्लोक लेंगे इनसे मंत्र लेंगे इनसे और अर्थ लेंगे

277
00:18:48,640 --> 00:18:52,640
इनसे। तो अगर इस पे हमें भरोसा नहीं जिससे हम मंत्र ले रहे हैं या अर्थ

278
00:18:52,640 --> 00:18:53,140
ले रहे

279
00:18:52,800 --> 00:18:57,200
हैं तो उनके मंत्रों पर भी हमें भरोसा उसके अर्थ पर हमें अगर भरोसा

280
00:18:57,200 --> 00:19:01,360
नहीं है तो उनके मंत्रों पर भी हमारा भरोसा करना सिद्ध नहीं होता। जैसे हिस्ट्री नहीं है। आपने कहा

281
00:19:01,360 --> 00:19:05,360
2500 की है। मैं तो वो वेद वेदों को तो मान रहा हूं मगर

282
00:19:05,360 --> 00:19:09,360
उसका जो अर्थ है ना तो शुरुआत में आपका मानना सिद्ध नहीं होता ना। जैसे

283
00:19:09,360 --> 00:19:13,360
मैंने कहा कि मैं जो है क्या कहते हैं ये ये आपने लिखा

284
00:19:13,360 --> 00:19:17,440
है आध्यात्मिक विश्वविद्यालय। मैं आध्यात्मिक विश्वविद्यालय को तो मान रहा हूं।

285
00:19:17,440 --> 00:19:21,440
आपने लिखा है अच्छा लिखा है। मगर इसका मतलब है आध्यात्मिक विश्वविद्यालय

286
00:19:21,440 --> 00:19:25,440
का पागलखाना। तो फिर सही बात होगी क्या यह? तो ये थोड़ी

287
00:19:25,440 --> 00:19:29,600
सी दिक्कत आएगी। ये पोस्टर अगर आपने लगवाया है ये पोस्टर अगर आपने हमें दिया है

288
00:19:29,600 --> 00:19:33,680
और इसके थ्रू हम इस लाइन को जान रहे हैं कि आध्यात्मिक विश्वविद्यालय तो

289
00:19:33,680 --> 00:19:37,680
हमें आपके अर्थ पर भी विश्वास करना होगा और नहीं करेंगे तो हमारा इस

290
00:19:37,680 --> 00:19:42,640
पोस्टर पर भी विश्वास सिद्ध नहीं होगा। अब मैं सवाल कर आपसे।

291
00:19:42,640 --> 00:19:45,440
हां बोलिए।

292
00:19:45,440 --> 00:19:49,440
नात प्रतिमा अस्ति ये जो श्लोक है ऋग्वेद

293
00:19:49,440 --> 00:19:51,680
का

294
00:19:51,680 --> 00:19:55,760
क्या ये ऋग्वेद का श्लोक जो है ये सही है

295
00:19:55,760 --> 00:19:59,920
शबरी जी को भेलने तो अप दीक्षित जी ने भी माना था आप ही के पूराचार्य हो

296
00:19:59,920 --> 00:20:02,640
गया सवाल

297
00:20:02,640 --> 00:20:06,960
पहले पूछ रहा हूं सही है क्या ये सही है

298
00:20:06,960 --> 00:20:07,840
सही है तो इस

299
00:20:07,840 --> 00:20:12,080
श्लोक के अनुसार जो है उसका कोई रूप नहीं है उसकी कोई प्रतिमा

300
00:20:12,080 --> 00:20:16,320
नहीं है अब जो कोई भी उसकी प्रति

301
00:20:16,320 --> 00:20:20,320
बोलने देंगे कि नहीं नात प्रतिमा अस्ति का अर्थ मैं आपको बता रहा हूं

302
00:20:20,320 --> 00:20:24,400
मैं आपको बता रहा हूं आपको जवाब देना है जवाब

303
00:20:24,400 --> 00:20:29,360
आपको मैं नहीं टोकूंगा आपको मैं आपको नहीं टोकूंगा मैं सिर्फ अपनी

304
00:20:29,360 --> 00:20:34,400
पूरा डिटेल बता रहा हूं जब कुछ बच जाए तो आप काउंटर करिएगा मैं डिटेल बता रहा हूं

305
00:20:34,400 --> 00:20:38,400
पूरा सवाल और ऑब्जेक्शन होने दो ताकि आप आसानी से जवाब दे सके ठीक है

306
00:20:38,400 --> 00:20:43,360
सवाल क्योंकि आप सवाल में आप अर्थ बता रहे हैं अर्थ मत बताइए सवाल करिए

307
00:20:43,360 --> 00:20:48,080
हां तो सवाल तो कर दिया

308
00:20:48,080 --> 00:20:52,160
वो अर्थ जो आपने जो अर्थ बताया वो जो आपने

309
00:20:52,160 --> 00:20:56,400
अर्थ बताया वो अर्थ गलत है। जो आपने अर्थ बताया

310
00:20:56,400 --> 00:21:00,400
वो अर्थ गलत है। तो बस मैं वही कह रहा हूं ना मुझे अर्थ

311
00:21:00,400 --> 00:21:04,800
बताने दीजिए। जब शैतान की बात आई थी आपने शैतान का अर्थ बताया।

312
00:21:04,800 --> 00:21:08,880
जब मलाइका की बात आई थी तो आपने मलाइका का अर्थ बताया। जब आदम की

313
00:21:08,880 --> 00:21:13,040
बात आई थी आपने आदम का अर्थ बताया। तो जब आप मेरे ऊपर क्लेम कर रहे हैं मेरे

314
00:21:13,040 --> 00:21:17,040
ग्रंथों पर जब आप मेरे ऊपर क्लेम कर रहे हैं मेरे ग्रंथों पर

315
00:21:17,040 --> 00:21:21,200
तो आप मुझे उसका अर्थ बताने देंगे ना

316
00:21:21,200 --> 00:21:24,560
बताइए हां बताइए

317
00:21:24,560 --> 00:21:28,560
अब फिर वही बात है उन्होंने क्या कहा आपको कैसे पता चला क्योंकि उनके ग्रंथों में ये बात लिखी

318
00:21:28,560 --> 00:21:32,720
अरे भाई उनके ग्रंथों का अर्थ आपको कौन देगा ग्रंथ कौन देगा आपको परंपरा

319
00:21:32,720 --> 00:21:33,220
ना

320
00:21:33,040 --> 00:21:37,120
अब पहले तो मैं अर्थ बताऊंगा उसके बाद मेरी एक और दलील है

321
00:21:37,120 --> 00:21:40,480
उसको भी आप सुनिएगा

322
00:21:40,480 --> 00:21:45,040
अर्थ सुनिए पहले आप अर्थ बताइए। हां अर्थ बता नातस

323
00:21:45,040 --> 00:21:49,280
प्रतिमा अस्ति का जो अर्थ है प्रतिमान से बना है प्रतिमा किससे

324
00:21:49,280 --> 00:21:53,360
बना है प्रतिमान मान मतलब वैल्यू मान

325
00:21:53,360 --> 00:21:57,680
मतलब वैल्यू तो यहां पर उसने ये नहीं कहा मेरे जैसी प्रतिमा

326
00:21:57,680 --> 00:22:01,680
यानी मेरी मूर्ति नहीं है कोई यानी मेरी मूर्ति नहीं है कोई

327
00:22:01,680 --> 00:22:06,240
ये बात नहीं हो रही यहां कह रहे मेरे जैसा मान मेरे जैसी वैल्यू

328
00:22:06,240 --> 00:22:10,400
किसी की नहीं है संसार में मेरे जैसी वैल्यू ठीक है

329
00:22:10,400 --> 00:22:14,400
अब क्योंकि मूर्ति दिखने के मामले में किसी के जैसी

330
00:22:14,400 --> 00:22:18,400
होती है। जैसे मान लीजिए मेरी किसी ने मूर्ति बनाई तो दिखने के

331
00:22:18,400 --> 00:22:22,640
मामले में वो मेरी जैसी है। तो इसलिए मूर्ति को भी प्रतिमा

332
00:22:22,640 --> 00:22:26,720
कहा जाने लगा। मगर प्रतिमा शब्द का वास्तविक अर्थ

333
00:22:26,720 --> 00:22:30,720
है प्रतिमान। मेरे समान कोई नहीं है। वहां ये कहा जा रहा है।

334
00:22:30,720 --> 00:22:34,720
पहली बात। दूसरी बात ये है कि मेरे ग्रंथों

335
00:22:34,720 --> 00:22:38,800
के विषय में मैं आपको बताऊंगा और आपके

336
00:22:38,800 --> 00:22:44,320
ग्रंथों के विषय में आप मुझे आप मुझे बताएंगे। क्यों? क्योंकि

337
00:22:44,320 --> 00:22:48,560
यहां पर ये क्लेम नहीं हो रहा है कि वो क्यों? क्यों?

338
00:22:48,560 --> 00:22:53,680
उसका कारण ये है एक शब्द होता है परंपरा। भगवत

339
00:22:53,680 --> 00:22:58,720
गीता चार दो में तीन 16 में और मांडकोपनिषद

340
00:22:58,720 --> 00:23:02,960
में मुंडकोपनिषद में सॉरी एक से ले चार तक पहले

341
00:23:02,960 --> 00:23:07,200
ही अध्याय में शायद परंपरा बताई जा रही है कि भैया

342
00:23:07,200 --> 00:23:11,360
ऋषियों ने वेद दिए उसको फिर उसने दिए इस ऋषि को

343
00:23:11,360 --> 00:23:15,520
फिर उसने दिए इस ऋषि को ऐसे करके करके

344
00:23:15,520 --> 00:23:19,600
ऋषियों से लेकर आज तक के जो हमारे आचार्य वहां तक की हमें परंपरा

345
00:23:19,600 --> 00:23:23,760
प्राप्त है तो हमारे ग्र ग्रंथ का अर्थ कौन बताएगा

346
00:23:23,760 --> 00:23:28,000
जिसको अपनी परंपरा से वेद प्राप्त हुआ होगा। हां

347
00:23:28,000 --> 00:23:32,080
मैं कुरान को लेकर के ये नहीं कह सकता हूं। नहीं आपकी कुरान

348
00:23:32,080 --> 00:23:36,320
में ये लिखा है। मैं सही बता रहा हूं। दूसरी बात ये है कि मैंने

349
00:23:36,320 --> 00:23:40,320
अभी तक आपकी किताब को लेकर के क्लेम ये नहीं किया कि आपकी किताब में

350
00:23:40,320 --> 00:23:44,400
ये लिखा है। आप ये कैसे बोल रहे हो? मैंने उसको एज इट इज माना जो आपने

351
00:23:44,400 --> 00:23:48,880
अपनी किताब के अनुसार बोला। क्योंकि मैं क्लेम नहीं कर सकता हूं। आपकी किताब में क्या लिखा है मैं बताऊंगा।

352
00:23:48,880 --> 00:23:52,960
क्यों? क्योंकि परंपरा से वो किताब आपको पाठ आई है। मेरे पास नहीं आई

353
00:23:52,960 --> 00:23:57,040
है। मैंने उस चैन ऑफ नरेशन से उसका अध्ययन नहीं किया है

354
00:23:57,040 --> 00:24:01,120
जिस जिससे आपने किया है। तो आपकी किताबों में क्या लिखा है? क्या नहीं लिखा है?

355
00:24:01,120 --> 00:24:07,120
इस बात को लेकर

356
00:24:10,190 --> 00:24:14,190
[संगीत]
