1
00:00:06,560 --> 00:00:10,640
है। जैसे हम देखते हैं कि जन्म से लेकर मृत्यु तक हमको पहचान

2
00:00:10,640 --> 00:00:14,640
मिलती है। सबसे पहचान पहली पहचान मिली आप मेल है या फीमेल हैं। फिर

3
00:00:14,640 --> 00:00:18,640
इस आप किस परिवार से जुड़े हुए हैं? क्या पढ़ाई करते हैं? क्या प्रोफेशन करते

4
00:00:18,640 --> 00:00:22,800
हैं? फिर आप कौन से धर्म के हैं? कौन से देश के हैं? माना हम देखते हैं हमारी

5
00:00:22,800 --> 00:00:26,880
आइडेंटिटी चेंज होती रहती है। जैसे फॉर एग्जांपल यदि आप डॉक्टर हैं तो

6
00:00:26,880 --> 00:00:30,960
जब तक आप अपने फील्ड में हैं तब तक डॉक्टर कहलाएंगे हॉस्पिटल में।

7
00:00:30,960 --> 00:00:35,120
घर पे आने के बाद तो डॉक्टर नहीं कहलाएंगे। तभी आपका मदरफादर है। आप माना

8
00:00:35,120 --> 00:00:39,360
रिलेशन वाइज आपकी पहचान है। तो आपकी सही पहचान क्या है जो कभी

9
00:00:39,360 --> 00:00:43,440
भी चेंज ना हो। तो यह आंसर हमें साइंस नहीं दे सकता

10
00:00:43,440 --> 00:00:47,520
है। लेकिन स्पिरिचुअलिटी बताता है कि आप सिर्फ शरीर नहीं है

11
00:00:47,520 --> 00:00:51,520
लेकिन शरीर को चलाने वाली शक्ति आप एक आत्मा है। दीदी एक

12
00:00:51,520 --> 00:00:55,520
आपका एक क्वेश्चन आ रहा है आप कहें तो मैं पुट अप कर लूं। आप अगर आज्ञा दे तो

13
00:00:55,520 --> 00:00:59,520
जी जी चलेगा। ये हमने कहा कि किस धर्म को मानता

14
00:00:59,520 --> 00:01:03,600
है? तो क्या सनातन के अलावा दूसरे भी धर्म है? उनको धर्म कहा जाता है क्योंकि

15
00:01:03,600 --> 00:01:08,800
वो लोग अपने आप को धर्म नहीं कहते हैं। मतलब धर्म क्या है फिर?

16
00:01:08,800 --> 00:01:12,880
ये तो बाद की टॉपिक है लेकिन जैसे अभी हमने कहा

17
00:01:12,880 --> 00:01:17,360
इस पर्टिकुलर धर्म से हम अपनी-अपनी पहचान बताते हैं ना लेकिन हमारी

18
00:01:17,360 --> 00:01:21,600
विचारधारा कह सकते हैं विचारधारा विचारधारा आध्यात्मिक विचारधारा जी हां

19
00:01:21,600 --> 00:01:26,320
लेकिन ये सब हमारी चेंजिंग है हां है ना जैसे आप अभी

20
00:01:26,320 --> 00:01:30,640
भारत में है भारत भारतवासी व्यक्ति विदेश में जाएगा तो

21
00:01:30,640 --> 00:01:34,800
उसको क्या पुकारेंगे जरूर कहेंगे ये इंडियन है हां भारत से आए

22
00:01:34,800 --> 00:01:38,880
भारतीय है तो ये थोड़े समय की पहचान है ना बदल बाकी उसका

23
00:01:38,880 --> 00:01:43,040
नाम है तो हमारे इनको जो है ऐसे मान ले कि आध्यात्मिक विचारधारा

24
00:01:43,040 --> 00:01:47,280
अलग-अलग हां सबकी आध्यात्मिक विचारधारा अलग-अलग जो आपको जो है

25
00:01:47,280 --> 00:01:51,440
मोक्ष करा दे जैसे यहां पर ये गेम हम करते हैं।

26
00:01:51,440 --> 00:01:55,440
यहां पर ये 16 वैल्यूस बताई गई है। तो इन 16 वैल्यूस में से

27
00:01:55,440 --> 00:02:00,160
आपको कोई भी एक वैल्यू सेलेक्ट करनी है। अपने मन में रखना है। हमें नहीं बताना है।

28
00:02:00,160 --> 00:02:06,160
आप सेलेक्ट कर लीजिए कोई भी एक वैल्यू।

29
00:02:13,600 --> 00:02:17,920
सेलेक्ट कर लिया। अभी उसका जो इमेज है वो आपको इन चार बॉक्सेस

30
00:02:17,920 --> 00:02:22,080
है इस पोस्टर में। उन चार बॉक्सेस में आपको ढूंढना है। वो वाली इमेज

31
00:02:22,080 --> 00:02:27,200
वरना वो वैल्यू फर्स्ट नंबर बॉक्स में है क्या? देखिए

32
00:02:27,200 --> 00:02:31,280
है। है। ओके। सेकंड नंबर में है।

33
00:02:31,280 --> 00:02:35,280
ओके। थर्ड में है। फोर्थ में नहीं है। अच्छा फिर से

34
00:02:35,280 --> 00:02:39,440
एक बार रिचेक कीजिए। वन टू थ्री में है। फोर में नहीं है। तो अभी

35
00:02:39,440 --> 00:02:43,600
हम आपको रिजल्ट बताएंगे कि आपने कौन सी वैल्यू सेलेक्ट की

36
00:02:43,600 --> 00:02:47,600
है। तो आपने सेलेक्ट किया है ब्लिस। आनंद

37
00:02:47,600 --> 00:02:51,600
ब्लिस मतलब मतलब कृपा। कृपा है ना? तो

38
00:02:51,600 --> 00:02:55,680
आपके अंदर ये वैल्यू है। अभी मेरा ये प्रश्न है कि इतनी सारी

39
00:02:55,680 --> 00:03:00,560
वैल्यूस है ना उसमें से वही वाली क्यों सेलेक्ट किया आपने? सब आ जाएगा।

40
00:03:00,560 --> 00:03:04,720
क्योंकि ये सारी ही वैल्यूस एक दूसरे से जुड़ी हुई है। तो अगर हम किसी

41
00:03:04,720 --> 00:03:08,720
एक वैल्यू को भी अपनी लाइफ में लाएं तो बाकी की वैल्यूस भी हमारी लाइफ में

42
00:03:08,720 --> 00:03:13,040
ऑटोमेटिकली आ जाएंगी। तो ऐसे धीरे-धीरे हमारी लाइफ वैल्यू बेस्ड बनेगी।

43
00:03:13,040 --> 00:03:17,200
नहीं मगर नहीं नॉलेज जैसे है ना नॉलेज नॉलेज

44
00:03:17,200 --> 00:03:21,200
तो उस रावण को भी थी। पर उसके पास शांति नहीं है।

45
00:03:21,200 --> 00:03:25,200
शांति नहीं। अहंकार था उसके पास। जिसके ऊपर कृपा हो गई उसके पास सब कुछ हो

46
00:03:25,200 --> 00:03:28,640
गया। हम मगर दूसरी चीजें है ना वो सब चीजें कृपा

47
00:03:28,640 --> 00:03:32,640
अगर नहीं है तो वो सब चीजें आपकींगी कहीं नहीं क्योंकि कृपा के बिना कृपा

48
00:03:32,640 --> 00:03:36,640
के बिना ये सब चीजें अहंकार होती है मतलब ये ये मैंने

49
00:03:36,640 --> 00:03:40,640
प्राप्त किया ये मैं करता हूं मगर कृपा कृपा कब होती है जब आपका

50
00:03:40,640 --> 00:03:44,720
अहम भाव चला जाए सब भगवान ने किया सब भगवान ने किया कराने वाला

51
00:03:44,720 --> 00:03:48,800
वो है करने वाले आप तो जब ये भाव हम रखते हैं तो

52
00:03:48,800 --> 00:03:52,880
हमारे अंदर वो शक्ति आती है और उसकी खुशी भी हमें सच में जो मिलती है वो

53
00:03:52,880 --> 00:03:56,960
स्थाई रह सकती है अच्छा इसमें इसमें दीदी ये पूरा मैंने देखा तो इसमें

54
00:03:56,960 --> 00:04:01,280
एक एक क्वेश्चन बस लास्ट मेरी तरफ से कि जैसे

55
00:04:01,280 --> 00:04:05,360
हम ऐसा नहीं लग रहा है कि हम व्यक्ति को ये तो बता रहे हैं कि

56
00:04:05,360 --> 00:04:10,560
तुम्हारे अंदर क्या-क्या कमियां हैं मगर एक एक परफेक्ट उसको

57
00:04:10,560 --> 00:04:14,560
चीज नहीं दे रहे सॉल्यूशन होता क्या है मैं आजकल देखता हूं आजकल दुनिया में युद्ध

58
00:04:14,560 --> 00:04:18,880
बहुत हो रहा है मैं नाम नहीं लूंगा पर्टिकुलर किसी कम्युनिटी का मगर मेरे फोन पे मैसेजेस

59
00:04:18,880 --> 00:04:22,880
खूब आते हैं कि अरे उन्होंने हमारे साथ ऐसा किया वैसा किया

60
00:04:22,880 --> 00:04:27,040
और मेरे जो मेरी कम्युनिटी के लोग हैं वही मुझे वो मैसेज भेजते

61
00:04:27,040 --> 00:04:31,200
हैं कि ऐसा हुआ वैसा हुआ। बहुत दिन भर आता रहता है। मेरा खून खलता

62
00:04:31,200 --> 00:04:35,280
है उन चीजों को देख के। बहुत बुरा लगता है कि मगर वो ये नहीं बताते तुझे ये करना

63
00:04:35,280 --> 00:04:39,760
है। वो ये नहीं बताते। मतलब मैं क्या करूं? अगर मेरे

64
00:04:39,760 --> 00:04:43,680
साथ ऐसा हुआ वैसा हुआ तो मैं कहां जाकर के कुल्हाड़ी लेके निकलूं कि क्या करूं?

65
00:04:43,680 --> 00:04:47,760
मैं किसको क्या कर दूं। वो नहीं बताते। ये तो ये ऐसा नहीं लग रहा कि हम

66
00:04:47,760 --> 00:04:51,760
व्यक्ति को उसकी कमियां तो गिना रहे हैं। मगर एक परफेक्ट उसको मॉडल सलूशन

67
00:04:51,760 --> 00:04:56,000
दे रहे हैं ना। जी तो सभी को जय श्री राम। हम इस समय आए हुए हैं

68
00:04:56,000 --> 00:05:00,320
माघ मेले में प्रयागराज और यहां पर हमें एक बड़ा ही भव्य

69
00:05:00,320 --> 00:05:04,640
सा इनका केंद्र मिला शिविर मिला ब्रह्मा कुमारीज

70
00:05:04,640 --> 00:05:08,960
का और यहां पर हम एक दीदी के साथ यहां पर बैठे हुए हैं। इनसे

71
00:05:08,960 --> 00:05:13,120
हम कुछ जानकारियां लेंगे ब्रह्मा कुमारीज के बारे में। तो सबसे पहले

72
00:05:13,120 --> 00:05:17,600
दीदी आपको जय श्री राम। जय श्री राम। नमस्ते। थोड़ा सा

73
00:05:17,600 --> 00:05:22,080
आप अपने बारे में थोड़ा सा एक कनेक्टिंग एक परिचय यहां का एक संक्षिप्त छोटा सा।

74
00:05:22,080 --> 00:05:26,560
कुछ जो परिचय आप देना चाहे ओम शांति जी

75
00:05:26,560 --> 00:05:30,640
तो ये यहां पर माग बेले में ब्रह्मा कुमारीज की तरफ

76
00:05:30,640 --> 00:05:34,720
से बहुत अच्छा ये यहां पर कैंप लगा हुआ है तो इसमें

77
00:05:34,720 --> 00:05:38,880
हम इस कैंप के माध्यम से सबको स्पिरिचुअलिटी की

78
00:05:38,880 --> 00:05:42,960
ओर लेकर जा रहे हैं। क्योंकि आज हम आज

79
00:05:42,960 --> 00:05:47,120
के समय में देख रहे हैं कि कहीं ना कहीं लोग अपने मार्ग से या

80
00:05:47,120 --> 00:05:51,200
अपने मन में बहुत विचलित सा अनुभव कर रहे हैं। तो उसके लिए मन में हम

81
00:05:51,200 --> 00:05:55,680
शांति की अनुभूति कैसे करें? तो इसके लिए हमारे पास अलग-अलग

82
00:05:55,680 --> 00:05:58,720
माना अलग-अलग हमने स्टॉल्स लगाए हुए

83
00:05:58,720 --> 00:06:02,720
हैं। जैसे एक माइंड स्पा है। जैसे बॉडी स्पा होता है। तो उसी

84
00:06:02,720 --> 00:06:06,800
प्रकार से जैसे बॉडी स्पा में हम जाते हैं तो बॉडी को रिलैक्स करने के

85
00:06:06,800 --> 00:06:11,280
लिए चीजें कराई जाती है। तो ऐसे यहां पर माइंड को हम कैसे रिलैक्स करें?

86
00:06:11,280 --> 00:06:15,840
क्योंकि आज के समय में हम देख रहे हैं कि हमारा स्ट्रेस बहुत बढ़ता जा रहा है। ए्जायटी

87
00:06:15,840 --> 00:06:20,000
बढ़ रही है। छोटी-छोटी बातों में हम ओवरथिंक कर लेते हैं। तो माइंड

88
00:06:20,000 --> 00:06:24,000
को कैसे रिलैक्स करना है? पॉजिटिव थिंकिंग कैसे करनी है? तो उसके ऊपर

89
00:06:24,000 --> 00:06:28,000
हम गाइड कर रहे हैं सभी को। फिर एक दूसरा स्टॉल हमारा बहुत अच्छा है

90
00:06:28,000 --> 00:06:32,240
जिसमें जिसका थीम यह है स्पिरिचुअल साइंस कि

91
00:06:32,240 --> 00:06:36,400
साइंस और स्पिरिचुअलिटी का बैलेंस हम अपनी लाइफ में कैसे क्रिएट कर सकते

92
00:06:36,400 --> 00:06:40,560
हैं क्योंकि आजकल ज्यादा से ज्यादा लोग साइंस की ओर चल रहे

93
00:06:40,560 --> 00:06:44,720
हैं [हंसी] और स्पिरिचुअलिटी को कहीं ना कहीं हम पीछे छोड़ रहे हैं या फिर

94
00:06:44,720 --> 00:06:48,800
सोचते हैं स्पिरिचुअलिटी ओल्ड एजड लोगों के लिए है।

95
00:06:48,800 --> 00:06:53,520
लेकिन यहां पर हम यह बता रहे हैं कि स्पिरिचुअल लाइफस्टाइल आप जितना जल्दी अपनाएंगे

96
00:06:53,520 --> 00:06:57,680
उतनी अच्छी स्टेबल और हैप्पी लाइफ आप लीड कर सकते

97
00:06:57,680 --> 00:07:02,160
हैं। तो ऐसे ये बहुत अच्छा एक्सिबिशन यहां पर लगाया हुआ है। बहुत सुंदर

98
00:07:02,160 --> 00:07:06,560
बहुत सुंदर आपने परिचय दिया। अच्छा एक आजकल की जनरेशन

99
00:07:06,560 --> 00:07:10,880
में एक क्वेश्चन बहुत मेजर देखा गया है। स्पिरिचुअलिटी से वो दूर

100
00:07:10,880 --> 00:07:14,080
भागती है वो नई जनरेशन। तो हम

101
00:07:14,080 --> 00:07:18,640
मतलब उसको अंतर क्या बताएं किसी को भी कि

102
00:07:18,640 --> 00:07:22,640
स्पिरिचुअलिटी में आने पर आपको यह मिलेगा। मतलब क्या डिफरेंस है

103
00:07:22,640 --> 00:07:26,640
कि मतलब वो अगर भौतिकवाद में ही जीवन जिए स्पिरिचुअलिटी को ना आए।

104
00:07:26,640 --> 00:07:30,720
स्पिरिचुअलिटी से उसे मिल क्या रहा है? मतलब धर्म अध्यात्म इन सब चीजों से क्या मिल

105
00:07:30,720 --> 00:07:34,960
रहा है? जैसे देखिए जैसे मैंने कहा यहां पर ये स्पिरिचुअल साइंस एक्सिबिशन

106
00:07:34,960 --> 00:07:39,360
है तो उसमें हमारा इंट्रोडक्शन में ही फर्स्ट पिक्चर में ये सारा

107
00:07:39,360 --> 00:07:43,440
बहुत अच्छे से एक्सप्लेन किया गया है। तो उस पिक्चर में आप देखेंगे तो

108
00:07:43,440 --> 00:07:47,520
वहां पर दिखा है एक रोबोट और एक व्यक्ति है। तो हम सभी से यह

109
00:07:47,520 --> 00:07:51,600
पूछते हैं रोबोट और उस व्यक्ति का अगर ये दोनों परफॉर्म करें तो दोनों में

110
00:07:51,600 --> 00:07:55,680
से किसका परफॉर्मेंस आपको अच्छा लगेगा? रोबोट का या व्यक्ति का?

111
00:07:55,680 --> 00:08:00,000
क्या बताएंगे आप? व्यक्ति का। व्यक्ति का अच्छा लगा। सही है। सबको

112
00:08:00,000 --> 00:08:04,000
सभी को व्यक्ति का ही अच्छा लगेगा। लेकिन क्या रीजन हो सकता है कि रोबोट का

113
00:08:04,000 --> 00:08:08,000
नहीं अच्छा लगा और व्यक्ति का ही अच्छा लगा। क्या डिफरेंस है? क्योंकि उसके

114
00:08:08,000 --> 00:08:13,120
पास वो चेतन है। चेतन है। और

115
00:08:13,120 --> 00:08:17,440
चेतन होने के कारण उसके पास अपने निर्णय लेने की क्षमता है। क्षमता है। स्वतंत्र

116
00:08:17,440 --> 00:08:21,520
है। स्वतंत्र है। उसको जो कमांड दी गई है किसी चेतन के द्वारा वो वही कमांड को फॉलो

117
00:08:21,520 --> 00:08:26,000
करे। बिल्कुल सही कहा आपने कि रोबोट को हम जो इंस्ट्रक्शन जो प्रोग्रामिंग

118
00:08:26,000 --> 00:08:30,080
की जाएगी वो उतना ही करेगा। और व्यक्ति में जो है भावनाएं हैं,

119
00:08:30,080 --> 00:08:34,160
फीलिंग्स है, एक्सप्रेशन है जो रोबोट में नहीं हो

120
00:08:34,160 --> 00:08:38,240
सकती। आजकल कोई कहेंगे भी रोबोट में भी एक्सप्रेशनंस आ रहे हैं लेकिन हम

121
00:08:38,240 --> 00:08:42,240
जितना फीड करेंगे जितना प्रोग्राम करेंगे उतना ही होगा।

122
00:08:42,240 --> 00:08:46,400
तो ये डिफरेंस हो गया। फिर उसके नीचे एक बहुत अच्छा इमेज दिखाया है। एक

123
00:08:46,400 --> 00:08:50,640
व्यक्ति अंधा है और एक लंगड़ा है। दोनों भी अगर आगे बढ़ना चाहते

124
00:08:50,640 --> 00:08:54,800
हैं तो दोनों को क्या करना होगा? एक दूसरे का साथ देना होगा। तो वो जो अंधा

125
00:08:54,800 --> 00:08:58,800
और जो लंगड़ा व्यक्ति है ना वो और कोई नहीं। एक साइंस है और एक स्पिरिचुअलिटी

126
00:08:58,800 --> 00:09:02,800
है। क्योंकि आज हमारे लाइफ में हम सोचते हैं

127
00:09:02,800 --> 00:09:06,800
सिर्फ साइंस को लेकर हम आगे बढ़े। सारी मटेरियलिस्टिक अचीवमेंट्स हमने कर

128
00:09:06,800 --> 00:09:10,960
ली। बहुत सारा धन भी कमा लिया। बहुत सारी मतलब दुनिया की

129
00:09:10,960 --> 00:09:15,040
सारी अनेक बातों की खोज भी हमने कर ली। लेकिन जो सच में

130
00:09:15,040 --> 00:09:19,120
इनर पीस हमको चाहिए जो हैप्पीनेस हमको चाहिए। वो तो

131
00:09:19,120 --> 00:09:24,080
नहीं मिल पाई है हमको। हम आज लोग सोचते बहुत पैसा कमा लेंगे तो

132
00:09:24,080 --> 00:09:29,440
खुशी मिलेगी आनंद मिलेगा लेकिन हो क्या रहा है

133
00:09:29,440 --> 00:09:33,840
हां वो दुखी हो जाता है मैंने मिल नहीं रहा है बिल्कुल मैंने देखा महंगीमहंगी

134
00:09:33,840 --> 00:09:37,840
गाड़ियों में भी लोग घूमते हैं उनको छोटी सी एसिडिटी की

135
00:09:37,840 --> 00:09:41,920
प्रॉब्लम है इसका मतलब वो महंगी गाड़ी में होते हुए भी दुखी हैं। दुखी है।

136
00:09:41,920 --> 00:09:45,920
2020 तो की सोने की चैन पहने हुए हैं। फिर भी उनका पैर में

137
00:09:45,920 --> 00:09:49,920
दर्द है या घुटने में दर्द है। यानी कि उनका वो जो सुख है वो सस्टेंड नहीं

138
00:09:49,920 --> 00:09:54,080
है। वो बाधित हो रहा है बार-बार। क्योंकि सुख जो है किसी भी भौतिक

139
00:09:54,080 --> 00:09:58,080
चीजों से हमें नहीं मिल पाता है। सुख को हमें अपने ही अंदर

140
00:09:58,080 --> 00:10:02,160
खोजना है सुख शांति को और यह मार्ग हमें स्पिरिचुअलिटी बताता

141
00:10:02,160 --> 00:10:06,160
है। स्पिरिचुअलिटी का मीनिंग ही होता है स्टडी ऑफ़ स्पिरिट

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माना स्टडी ऑफ़ सेल्फ। जिसको हम अध्यात्म कहते हैं। अर्थात आत्मा

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का अध्ययन। स्वयं का अध्ययन करना। जी तो स्पिरिचुअलिटी

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से हमें जो इनर हैप्पीनेस है, इनर ब्यूटी है उसके

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बारे में हमें जानने को मिलेगा। जो हमें आज हम

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कितना भी धन कमा लें या कुछ भी कर ले जिससे नहीं मिल पाता

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है वो हमें स्पिरिचुअल लाइफ स्टाइल को अपनाने से मिल सकता है। तो एक जनरल

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सा क्वेश्चन आजकल की जनरेशन ये करती है कि भ मैं जब हिल स्टेशन पे घूमने जा

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रहा हूं तब भी तो मुझे सुख मिल रहा है। मूवी देख रहा हूं तो खुशी मिल रही है।

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या फिर मैं कुछ खा रहा हूं तो मुझे सुख मिल रहा है। तो हम समझ रहे हैं कि वहां

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पर जो है जो उसका

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सुख है थोड़ी देर का है। उसके बाद फिर से उसको दुखी होना है। फिर से उसके लिए नई चीजें

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उसको करनी है। तो वही मैं पूछ रहा था कि ब्रह्मा कुमारीज का शांति देने

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वाला जो है वो क्या कांसेप्ट है? तो ब्रह्मा

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कुमारीज में मेनली जब आप आते हैं तो आपको सेल्फ अवेयरनेस

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कराई जाती है कि आप कौन हैं? तो जब आप रियलिटी

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आपकी जो रियल रियलिटी है उसको जब आप जान जाते हैं तो आप आपकी

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रियलिटी क्या है? मैं आपसे पूछूंगी आप कौन हैं? क्या जवाब

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देंगे? हां तो मैं नैन छिंदती शस्त्राण नैन दहति पावका

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तो जब हम यह सच में जान लेते हैं कि मैं आत्मा हूं तो जब मैंने

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यह जान लिया कि आई एम अ सोल और आप यह जानते

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होंगे कि शास्त्रों में भी हमारे लिखा हुआ है आत्मा को सतोगुणी कहा

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जाता है। माना हर आत्मा में सात प्रकार के गुण होते हैं। सात गुण होते

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हैं। तो जैसे सुख, शांति, आनंद, प्रेम, पवित्रता, शक्ति

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और ज्ञान। तो इन सातों गुणों की अनुभूति जब हम करना शुरू कर

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देते हैं तो बाहर की चीजों से फिर हमको सुख और शांति आनंद

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लेने की आवश्यकता नहीं रहती। फिर क्योंकि बाहर की चीजें हमें हमें

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टेंपरेरी जैसे आपने अपने स्वरूप में स्थित हो जाते हैं। स्थित हो जाते हैं। वास्तविकता वास्तविकता।

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तो ये वाला जो कांसेप्ट है ना कि हम लोग कलयुग के कगार पर

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हैं और फिर नया युग शुरू होगा। ये क्या कांसेप्ट है फिर? मतलब कि अगले जन्म

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में आप मतलब अगले उसमें जो जो इस पे चलेंगे तो वो देवी देवता बनेंगे

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अगले उसमें। ये थोड़ा सा मतलब यही है ना जो

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आपको मिलेगा एट द एंड देखिए वो बाद की बात बाद

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में है लेकिन अभी हम सबको मिलकर के अभी की जो प्रेजेंट हमारी

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सोसाइटी है वो कैसी लग रही है कलयुग की कह रहे हैं ना आप भी तो ये कलयुग रहने

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जैसा स्थान तो नहीं है तो हम सबको मिलकर के एक अच्छा स्थान बनाना

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है। अच्छा स्थान बना करके एक अच्छी सोसाइटी बनानी है।

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सतयुग में पहुंचना है। एक अच्छी सोसाइटी हमको क्रिएट करनी है। सतयुग

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कहते हैं। भले आप जो भी कहे एक अच्छी सोसाइटी हमको क्रिएट करनी

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है। जहां पर हम सभी इन अपने रियल अवेयरनेस में ओरिजिनलिटी

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में हम रह सके। फिर जैसे हमारा ये जो फर्स्ट चित्र है इसमें हम हमने

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बताया है कि जब आप साइंस और स्पिरिचुअलिटी दोनों का बैलेंस करेंगे

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लाइफ में तो एक हम अच्छी जिसको स्वर्ग

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आपने कहा सतयुग कहा एक ऐसी दुनिया की निर्मिती हम कर सकते हैं। कब

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और ऐसी दुनिया को क्या कहेंगे उसकी डेफिनेशन जहां पर सुख शांति

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और जो हम बना रहे हैं वो जो है वो आपका वो है

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जो स्पिरिचुअलिटी से प्राप्त होगा। मगर उसमें भी क्योंकि हमें पानी पीना

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है तो कुछ ना कुछ करना है तो थोड़ा सा तो वहां पर लगेगा ना कि मोक्ष नहीं

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हुआ अभी जैसे पानी ही पीना है। दुनिया है अच्छी दुनिया है। अच्छे लोग हैं।

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मगर हमको पानी पीने के लिए हाथ चलाना ही है। इतना तो करना ही है। कर्म तो करना

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ही है। हमें कर्म का सन्यास तो कोई नहीं कर सकता। तो फिर उतनी देर का तो सुख वहां पे

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भी टूट रहा है। जैसे हमको अगर पानी अपने स्वरूप में स्थित होने पानी पीने में

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तो सुख है ना पानी पीने के लिए प्रयत्न करने में दिक्कत है ना देर

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लगेगी टाइम लगेगा यहां से उठाया मतलब जैसे पानी पीने में सुख है तो

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हम जब पानी के लिए हाथ चला रहे हैं यहां से वहां तक की जैसे देखिए

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जो चीज जो चीज मुझे दुख की अनुभव हो रही है वो चीज दूसरे के लिए खुशी

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जैसे फॉर एग्जांपल एक मां है मेरा कहने का मतलब ये है कि अगर

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हम व्यक्ति को ये कह के ला रहे हैं ना कि यहां पे आपको जो है शाश्वत सुख

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नहीं मिल रहा है तो हमें यहां वहां पे उसको शाश्वत सुख देना होगा। मगर शाश्वत

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तो यहां अगर हम ये सतयुग ये जो एनवायरमेंट क्रिएट कर रहे हैं अगर वहां पर

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भी व्यक्ति को प्रयत्न करना पड़ रहा है या तपस्या करनी पड़ रही है। लेकिन सब कुछ इजीली

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अवेलेबल है। वो दुनिया ऐसी है यहां अगर सस्टेन नहीं है। हां वहां पर सब कुछ

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इजीली आपको अवेलेबल होता है। जिस कारण वहां दुख का नाम नहीं दुख की

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अनुभूति नहीं हो पाती है आपको। नहीं जैसे यहां पे थोड़ी सी

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समझ नहीं पा रहा हूं। आप थोड़ा या तो मैं समझ नहीं पा रहा हूं। हम एक

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मिनट आप ये

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कट करवाएंगे तो हां कट कीजिए कराइए आप उसप आ

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जाते हैं आप कट कर आप ये कट कीजिए पहले जी
