1
00:00:04,560 --> 00:00:08,720
अभी जो वीडियोस आप लोग देखने वाले हैं, [संगीत] इस प्रकार के वीडियोस बहुत

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00:00:08,720 --> 00:00:13,200
ही हाई लेवल के रिस्क पर हम लोग बनाते

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00:00:13,200 --> 00:00:17,600
हैं और आपको उपलब्ध [संगीत] कराते हैं। केवल और केवल आपको जागरूक

4
00:00:17,600 --> 00:00:21,760
करने के लिए कि जो गंभीर विषय हैं जो आप तक नहीं पहुंच

5
00:00:21,760 --> 00:00:25,840
पा रहे हैं। कोई भी मीडिया आप तक नहीं पहुंचा रहा है, वह हम

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00:00:25,840 --> 00:00:30,000
आपको उपलब्ध करा सकें। [संगीत] इसमें कई प्रकार के रिस्क होते हैं कि सामने

7
00:00:30,000 --> 00:00:34,160
वाले के प्रांगण में हम गए हैं। जैसे हमने [संगीत] एक अधोक्षजानंद

8
00:00:34,160 --> 00:00:38,240
का वीडियो बनाया था जो आंतरिक रूप से हमें बहुत ही असामाजिक

9
00:00:38,240 --> 00:00:42,320
तत्व दिखाई दिया था। और इसी प्रकार से अभी हम

10
00:00:42,320 --> 00:00:46,720
जब गए हैं यहां पर जो वीडियो [संगीत] आप देखने वाले हैं यह व्यक्ति उसी प्रकार का है।

11
00:00:46,720 --> 00:00:50,880
तो जब हम ऐसे किसी प्रांगण में जाते हैं जो [संगीत] पूरी तरीके से आपराधिक

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00:00:50,880 --> 00:00:55,200
प्रवृत्ति का है तो वहां पर सबसे पहले तो हमारे

13
00:00:55,200 --> 00:00:59,520
प्राणों पर भी बात आ सकती है। हम पर कोई [संगीत] झूठा आरोप

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00:00:59,520 --> 00:01:04,480
लगाया जा सकता है। कोई महिला इत्यादि के साथ हमारे

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00:01:04,480 --> 00:01:08,640
साथ में जोड़ते [संगीत] हुए हम पर कोई आरोप लग सकता है। बहुत सारे

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00:01:08,640 --> 00:01:13,600
वहां पर रिस्क होते हैं। सारे चीजों को,

17
00:01:13,600 --> 00:01:17,680
सारी चुनौतियों [संगीत] को ध्यान में रखते हुए हम वहां पहुंचते हैं।

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00:01:17,680 --> 00:01:19,680
और इसीलिए कई बार ऐसा

19
00:01:19,680 --> 00:01:24,080
होता [संगीत] है कि वहां पर सच को सामने लाना भी एक उद्देश्य

20
00:01:24,080 --> 00:01:28,560
है। और फिर जो वहां पर रिकॉर्डिंग हुई है उस रिकॉर्डिंग

21
00:01:28,560 --> 00:01:32,880
को सकुशल लेकर के बाहर आना भी एक टास्क होता है। तो

22
00:01:32,880 --> 00:01:36,960
पहली बात तो यही है कि जब व्यक्ति प्रश्न का [संगीत] जवाब देने से मना ही कर

23
00:01:36,960 --> 00:01:40,960
देता है तो वहां पर चर्चा को आगे बढ़ाने से या फिर बढ़ाएं तो

24
00:01:40,960 --> 00:01:45,280
किस प्रकार से बढ़ाएं यह वाली बात आ जाती है। दूसरी बात यह भी है

25
00:01:45,280 --> 00:01:49,520
कि जब ऐसी [संगीत] चीजें रिकॉर्ड हो जाती हैं और हमें अपने मतलब

26
00:01:49,520 --> 00:01:53,680
की चीजें प्राप्त हो जाती हैं। संतुष्टिजनक चीजें मिल [संगीत] जाती हैं। तो उसके

27
00:01:53,680 --> 00:01:57,680
बाद उन चीजों को बाहर उस प्रांगण से वह जो प्रांगण है जहां पर हम

28
00:01:57,680 --> 00:02:01,840
लोग अभी हैं [संगीत] वहां से बाहर लाने तक की यात्रा अभी हमारी शेष होती है

29
00:02:01,840 --> 00:02:05,840
कि कहीं ऐसा ना हो कि कोई मोबाइल की [संगीत] छीनापटी हो। जबरदस्ती

30
00:02:05,840 --> 00:02:09,840
हमारा वीडियो डिलीट कराया जाए। यह सब कोशिश भी ना हो। तो

31
00:02:09,840 --> 00:02:13,840
इन बातों को ध्यान में रखते हुए जब हम [संगीत] ऐसी किसी जगह जाते हैं तो वहां पर

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00:02:13,840 --> 00:02:17,920
हमें सामंजस्य बिठाना होता है कि सच्चाई भी बाहर आ जाए

33
00:02:17,920 --> 00:02:22,000
और यह [संगीत] जो सच्चाई अभी राइट नाउ जो हम हमने रिकॉर्ड की अपने

34
00:02:22,000 --> 00:02:26,240
कैमरे में [संगीत] वो किस प्रकार से इस प्रांगण से बाहर तक आए। तो इस

35
00:02:26,240 --> 00:02:30,240
कारण से हमें कई बार दो बातें सुननी [संगीत] पड़ती हैं। कई

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00:02:30,240 --> 00:02:34,880
बार खून का घूंट पीना पड़ता है। कई बार प्रतिकार नहीं कर पाते।

37
00:02:34,880 --> 00:02:38,960
हम तो यह सारी चीजें इतने सारे रिस्क लेकर [संगीत] के हम इस प्रकार की

38
00:02:38,960 --> 00:02:43,120
जो जानकारियां हैं, इस प्रकार की जो वीडियोस हैं वो आपको

39
00:02:43,120 --> 00:02:47,440
उपलब्ध कराते [संगीत] हैं। तो इसलिए आप लोगों से निवेदन है कि इस ऐसे

40
00:02:47,440 --> 00:02:51,610
इस प्रकार के हाई लेवल के रिस्क पर बनाए गए ये जो वीडियोस हैं

41
00:02:51,610 --> 00:02:56,080
[संगीत] इनको आप बिल्कुल भी नजरअंदाज ना करें। इग्नोर ना करें और जितना

42
00:02:56,080 --> 00:03:00,640
ज्यादा से ज्यादा हो सकता है इसको [संगीत] स्प्रेड करें। अ

43
00:03:00,640 --> 00:03:05,200
जैसे भी हो सकता है, जिस रूप [संगीत] में भी हो सकता है, प्रार्थना से हो सकता है या

44
00:03:05,200 --> 00:03:09,280
अन्य किसी प्रकार से भी आप अगर सहायता कर सकते हैं तो अवश्य करें। जय

45
00:03:09,280 --> 00:03:12,640
श्री राम। [संगीत]

46
00:03:12,640 --> 00:03:15,760
तो सभी को जय श्री राम। जैसा कि आप सभी

47
00:03:15,760 --> 00:03:20,480
जानते हैं हम विभिन्न जो अध्यात्म को लेकर के विचारधारा है

48
00:03:20,480 --> 00:03:24,160
उनको चर्चा के माध्यम से आपके समक्ष प्रस्तुत

49
00:03:24,160 --> 00:03:28,160
करते हैं और इसी क्रम में आज हम आए हैं क्रिया

50
00:03:28,160 --> 00:03:32,240
योग आश्रम आप जब प्रयागराज में आएंगे

51
00:03:32,240 --> 00:03:36,880
और यदि आप संगम की तरफ आएंगे तो

52
00:03:36,880 --> 00:03:40,880
इस समय माघ मेला भी यहां पर लगा हुआ है। जैसे ही आप संगम को क्रॉस करते

53
00:03:40,880 --> 00:03:44,880
हैं तो आपको एक नाम बहुत अच्छे से दिखाई देने लगेगा संगम को जो

54
00:03:44,880 --> 00:03:48,880
गंगा मां को जैसे ही पार आप करेंगे ब्रिज के द्वारा तो आप दूसरी तरफ

55
00:03:48,880 --> 00:03:52,880
आएंगे इस क्षेत्र को कहते हैं झूसी झूसी कहते हैं

56
00:03:52,880 --> 00:03:56,880
तो जैसे ही आप इस पार आएंगे शास्त्री ब्रिज से तो आपको एक नाम दिखाई

57
00:03:56,880 --> 00:04:00,880
देगा क्रिया योग आश्रम और बहुत ही भव्यता के साथ

58
00:04:00,880 --> 00:04:05,120
यह आश्रम यहां पर बना हुआ है मतलब ऐसा हो नहीं

59
00:04:05,120 --> 00:04:09,200
सकता कि आप यहां पर आए और आपको क्रिया योग आश्रम के बारे में मतलब वो वो दिखाई ना दे।

60
00:04:09,200 --> 00:04:13,360
तो बहुत यह आकर्षित करने वाला एक लैंडमार्क

61
00:04:13,360 --> 00:04:17,520
है इधर गंगा के इस पार का और हो सकता है भविष्य

62
00:04:17,520 --> 00:04:21,920
में पूरे विश्व के लिए भी हो संभवत इस समय भी हो।

63
00:04:21,920 --> 00:04:25,920
तो आज हम उन्हीं के सानिध्य में हैं जो इस आश्रम के संचालक

64
00:04:25,920 --> 00:04:29,920
भी हैं और मार्गदर्शक भी हैं, गुरु भी हैं,

65
00:04:29,920 --> 00:04:34,000
आध्यात्म को जो पढ़ा रहे हैं लोगों को। तो सबसे

66
00:04:34,000 --> 00:04:38,320
पहले महाराज जी को मैं प्रणाम करता हूं और

67
00:04:38,320 --> 00:04:39,280
महाराज जी

68
00:04:39,280 --> 00:04:43,360
थोड़ा सा अपना जो आपकी निजी यात्रा रही है इस जीवन में आने

69
00:04:43,360 --> 00:04:48,240
के लिए थोड़ी सी वो हमारे दर्शकों को आप बताएं।

70
00:04:48,240 --> 00:04:52,800
जैसे प्रत्येक व्यक्ति मांगता है कि हम मनुष्य हैं।

71
00:04:52,800 --> 00:04:56,800
जी निजी यात्रा में इतना समय लीजिए कि हम क्रिया

72
00:04:56,800 --> 00:05:01,120
योग जी क्रिया योग से हर प्रकार के कष्ट

73
00:05:01,120 --> 00:05:05,440
दूर हो जाते हैं। जैसे मनुष्य ये चाहे तो परबह्म

74
00:05:05,440 --> 00:05:09,440
के साथ एकाकार हो जाए। अच्छा भगवान के साथ एकाकार

75
00:05:09,440 --> 00:05:14,000
हो जाए। अच्छा अच्छा एकाकार होने का विज्ञान क्या है? जी

76
00:05:14,000 --> 00:05:18,880
आप मेडिकल डॉक्टर हो जाइए, नोबेल प्राइज पाइए। इंजीनियर हो जाएंगे।

77
00:05:18,880 --> 00:05:23,200
कुछ भी आप पढ़ लीजिए लेकिन उसे प्रभु मिलेंगे ये सुनिश्चित

78
00:05:23,200 --> 00:05:28,400
नहीं है। जी क्रिया ध्यान करने से शत प्रतिशत

79
00:05:28,400 --> 00:05:33,120
बिना किसी शंका के हमारे प्रभु से मिलन हो जाता है।

80
00:05:33,120 --> 00:05:37,520
उस मिलन में क्या होता है? पता चलता है हम अमर है।

81
00:05:37,520 --> 00:05:41,600
अमर ही नहीं है। जहांजहां प्रभु वहां वहां हम हैं। जी वो

82
00:05:41,600 --> 00:05:45,600
सर्वव्यापी हम भी उसी के साथ हैं। जी उसके अस्तित्व में जो

83
00:05:45,600 --> 00:05:49,600
कुछ है पता चलता है हम उसी के साथ हैं। जी ये प्रभु के

84
00:05:49,600 --> 00:05:53,600
साथ ये एकता हो जाती है। जी तो हर प्रकार के दुख कष्ट

85
00:05:53,600 --> 00:05:54,320
हमेशा के

86
00:05:54,320 --> 00:05:58,400
लिए समाप्त हो जाते हैं। जी ये सिद्ध हो चुका है। जी जी और

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00:05:58,400 --> 00:06:02,480
जो भी अभ्यास करते हैं उनको होता ही जी मात्र दो सप्ताह

88
00:06:02,480 --> 00:06:06,880
के विधिवत अभ्यास में आभास हो जाता है।

89
00:06:06,880 --> 00:06:10,960
अब इसके अभ्यास के पूर्णता में आएंगे। सभी प्रकार का अभाव मिट

90
00:06:10,960 --> 00:06:15,040
जाता है। जी अभाव जैसे अंदर में वाइटलिटी

91
00:06:15,040 --> 00:06:19,360
का अभाव है, जीवन शक्ति की कमी है, ज्ञान का अभाव है, शक्ति

92
00:06:19,360 --> 00:06:23,520
का अभाव है, शांति का अभाव है। ये सब अभाव मिट

93
00:06:23,520 --> 00:06:27,600
जाते हैं। और बाहर का भी अभाव मिट जाता है। जैसे घर नहीं है, मकान

94
00:06:27,600 --> 00:06:32,240
नहीं है, संसाधन नहीं है। ये सब आ जाते हैं।

95
00:06:32,240 --> 00:06:36,480
इसको अगर अभ्यास करते हैं तो हर चीजें वैसे ही प्राप्त

96
00:06:36,480 --> 00:06:40,480
हो जाती है। सारे दुख वैसे खत्म हो जाते हैं जैसे गाना

97
00:06:40,480 --> 00:06:44,480
सुने होंगे। सुन सुन सुन इस चम्पी में बड़े-बड़े

98
00:06:44,480 --> 00:06:48,960
लाख दुखों की एक दवाएं क्यों ना आजमाएं। जी

99
00:06:48,960 --> 00:06:53,280
तो आप क्रिया आजमा करके देखिए। हर प्रकार की दिक्कतें हमेशा

100
00:06:53,280 --> 00:06:57,440
के लिए समाप्त होती है। किसी एक के लिए नहीं। इसमें ये

101
00:06:57,440 --> 00:07:01,520
नहीं होता है कि हम अच्छा काम किए हैं। तब अभ्यास करेंगे। ऐसा

102
00:07:01,520 --> 00:07:06,480
नहीं है। जी। हम चाहे जितना भी जघन्य अपराध क्यों ना किए।

103
00:07:06,480 --> 00:07:09,520
अगर इसको अपनाते हैं तो जगन अपराध के बाद जो

104
00:07:09,520 --> 00:07:13,600
एक आउट इफेक्ट होता है अगर मैंने कोई अपराध किया तो

105
00:07:13,600 --> 00:07:17,840
उसका कोई एक जो प्रतिफल मिलता है जो हमें पनिशमेंट मिलता है

106
00:07:17,840 --> 00:07:22,160
जब इसकी आयोग से जुड़ते हैं तो दो चीज होती है सारे अपराध

107
00:07:22,160 --> 00:07:26,160
का जो पनिशमेंट वो गायब हो जाता है और हम ऐसे सक्षम

108
00:07:26,160 --> 00:07:30,240
हो जाते हैं कि दोबारा अपराध करते भी नहीं ये भी होता है

109
00:07:30,240 --> 00:07:34,320
जी किसी प्रकार का अपराध दोबारा होता भी नहीं है और हर

110
00:07:34,320 --> 00:07:38,320
प्रकार के विपत्ति उससे दुख से पूरी तरह से मुक्त हो जाते

111
00:07:38,320 --> 00:07:42,400
हैं। बहुत ही सुंदर व्याख्यान किया

112
00:07:42,400 --> 00:07:46,480
महाराज जी ने। अह क्रिया योग के बारे में बताया और मिलने वाले जो परिणाम है एक तरीके

113
00:07:46,480 --> 00:07:50,560
से संक्षिप्त में गए हो तो महाराज जी हम कह सकते हैं कि भोग और मोक्ष दोनों ही

114
00:07:50,560 --> 00:07:54,640
सुलभ हो जाते हैं। भोग यानी कि जो आपने बताया जो सांसारिक

115
00:07:54,640 --> 00:07:59,040
चीजें हैं वो भी प्राप्त होती है। वो भोग शब्द ही गलत है। वो अच्छा अच्छा जो भोग

116
00:07:59,040 --> 00:08:03,280
लोगों ने शब्द दे रखा है वो लोग दिए हैं। जी जो असत्य को जानते हैं।

117
00:08:03,280 --> 00:08:07,360
अच्छा नहीं आप जिसको सच पता नहीं है। जी जी जी जिसको सच पता

118
00:08:07,360 --> 00:08:11,680
है वहां भोग शब्द नहीं है वहां योग है। नहीं जैसे आपने कहा ना सांसारिक

119
00:08:11,680 --> 00:08:15,840
जो अभाव है वह भी तो सांसारिक नाम ही नहीं लिए। अच्छा जो बाहरी

120
00:08:15,840 --> 00:08:21,040
सामने जो मैंने कहा वो भी आप कह रहे हैं। अच्छा मैं शायद समझ नहीं पाया। जी जी

121
00:08:21,040 --> 00:08:24,720
तो जब आप क्रिया से जुड़ते हैं तो भोग शब्द सांसारिक

122
00:08:24,720 --> 00:08:28,960
शब्द विलुप्त हो जाता है। जी जी क्यों बचता है कि योग की स्थिति

123
00:08:28,960 --> 00:08:33,040
हम जुड़ गए हैं। जुड़ गए हैं। ईश्वर से किससे जुड़ गए? शक्ति से, ज्ञान से,

124
00:08:33,040 --> 00:08:37,200
शांति से, आनंद से, अमृत से सबसे जुड़

125
00:08:37,200 --> 00:08:43,120
जाते हैं। हर प्रकार की झगड़ा झंझट, तनाव दूर हो जाता है। जी

126
00:08:43,120 --> 00:08:47,200
बहुत बढ़िया। मैं थोड़ी सी समझने में मिस्टेक भी कर रहा था। तो महाराज जी ने मुझे

127
00:08:47,200 --> 00:08:51,200
करेक्ट कर दिया। तो महाराज जी जैसे आपने कहा ना कि ईश्वर

128
00:08:51,200 --> 00:08:55,280
के साथ एकत्व प्राप्त कर लेते हैं। तो सर्वव्यापक भी हो जाते हैं। ईश्वर जहां-जहां वहां वहां हो जाते

129
00:08:55,280 --> 00:08:59,280
हैं। तो आपने एक दूसरी बात कही थी ना कि बाहरी अभाव भी मिट जाता

130
00:08:59,280 --> 00:09:03,840
है। वो बाहरी अभाव क्या है? जैसे लोग समझते हैं ना कि हमारे पास कंप्यूटर

131
00:09:03,840 --> 00:09:08,000
नहीं है। अच्छा हमारे पास मकान नहीं है। हम

132
00:09:08,000 --> 00:09:12,160
हमारे पास जितना संसाधन चाहिए वो नहीं है। जी तो सब चीजें अपने

133
00:09:12,160 --> 00:09:16,160
आप आ जाती है। जैसे हम बैठे हैं जी हवा आ रही है। जी

134
00:09:16,160 --> 00:09:20,240
सांस ले रहे हैं। जी आसमान भी है। जी पृथ्वी भी है। जी।

135
00:09:20,240 --> 00:09:24,560
जब क्रियायोग से जुड़ते हैं तो जितने प्रकार की आवश्यकताएं होती हैं

136
00:09:24,560 --> 00:09:28,640
सब स्वता पूरी हो जाती है। बस बस महाराज जी मैं उसी के लिए वो शब्द यूज़

137
00:09:28,640 --> 00:09:32,640
कर रहा था। शायद वो शब्द उचित नहीं है। अच्छा महाराज जी एक चीज देख रहा हूं

138
00:09:32,640 --> 00:09:36,720
मैं कि आपके हाथ में एक ये कुछ एक

139
00:09:36,720 --> 00:09:40,160
ये हां जी इसके बारे में थोड़ा सा बताएं। ये बड़ा

140
00:09:40,160 --> 00:09:44,640
कि हम क्रिया योग क्या है?

141
00:09:44,640 --> 00:09:49,120
जी क्रिया एक वैज्ञानिक आध्यात्मिक अभ्यास है।

142
00:09:49,120 --> 00:09:53,280
अच्छा प्रैक्टिकल है ये। जी इस पर क्या करते हैं? हम प्रभु

143
00:09:53,280 --> 00:09:57,440
को खोजते हैं। कहां खोजे हम मंदिर में? कि

144
00:09:57,440 --> 00:10:01,440
मस्जिद में गुरुद्वारे में कि चर्च में कि अपने

145
00:10:01,440 --> 00:10:05,520
हाथ में पैर में कि यहां के वहां कहां खोजे तो

146
00:10:05,520 --> 00:10:09,520
महतार बाबा ने आविष्कार करके बताया कि महातार बाबा

147
00:10:09,520 --> 00:10:13,920
अभी भी लाखों वर्ष के हैं लेकिन अत्य नए रूप में प्रकट होते हैं।

148
00:10:13,920 --> 00:10:18,080
उनका नाम ही मृत्युंजय महाता बाबा फिर लड़ी महा ज्ञान दिए उनको

149
00:10:18,080 --> 00:10:22,080
क्या ज्ञान दिए कि अगर हम चाहते हो एक ही जन्म में

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00:10:22,080 --> 00:10:26,080
हम पूरी तरीके से उस स्थिति को पा जाए पा

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00:10:26,080 --> 00:10:30,400
जाए अभाव से मुक्त हो जाए हमारे परबह्म में एकता हो जाए

152
00:10:30,400 --> 00:10:34,560
तो शरीर के अंदर जो स्पाइनल कॉर्ड है स्पाइनल कॉर्ड का प्रतीक

153
00:10:34,560 --> 00:10:38,640
है अच्छा हम स्पाइनल कॉर्ड में और

154
00:10:38,640 --> 00:10:44,640
इसके ऊपर जो सिर है ब्रेन है ब्रेन

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00:10:46,800 --> 00:10:51,680
ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड को जोड़ता है। मेडुला

156
00:10:51,680 --> 00:10:55,680
मेडुला हमारे ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड को जोड़ता है। तो जो जोड़ता है

157
00:10:55,680 --> 00:11:00,160
इसी में योग का ज्ञान है। जी जब हम अपने अंदर

158
00:11:00,160 --> 00:11:04,560
उस चीज को खोजते हैं जिसको अनंत कहते हैं। ये जो स्पाइनल

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00:11:04,560 --> 00:11:08,800
कॉर्ड है इसमें ज्ञान और शक्ति से भर जाता है।

160
00:11:08,800 --> 00:11:13,040
शांति से आनंद से अमृत से भर जाता है। इसमें बाढ़

161
00:11:13,040 --> 00:11:19,040
आ जाती है। जैसे नदी में बाढ़ आ जाए। नदी में बाढ़ आने के बाद

162
00:11:19,120 --> 00:11:23,200
वो पानी समुद्र में जाता है। जी इसमें बाढ़ आ जाती है। तो

163
00:11:23,200 --> 00:11:27,360
ये ज्ञान और शक्ति शांति ऊपर की तरफ फूटता है। जहां

164
00:11:27,360 --> 00:11:31,520
जो एक मेडुला लंगेटा है जो है ब्रेन

165
00:11:31,520 --> 00:11:35,680
का भाग है जो ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड को जोड़ता है। इसमें जब

166
00:11:35,680 --> 00:11:39,680
एक थ्रेशहोल्ड पॉइंट से भर जाता है तो जो आप पीला पीला देख रहे हैं ये

167
00:11:39,680 --> 00:11:43,920
रिप्रेजेंट करता है विजिबल यूनिवर्स। अच्छा इसके फोटो ले लेते हैं,

168
00:11:43,920 --> 00:11:48,080
छू लेते हैं आदि आदि उसका ज्ञान होता है। जैसे अपना शरीर

169
00:11:48,080 --> 00:11:52,560
वििबल है ये तो इसका ज्ञान हो जाएगा। फिर अपने को रिपेयर कर लीजिए, हड्डियां

170
00:11:52,560 --> 00:11:56,720
ठीक कर लीजिए, मांसपेशियां ठीक कर लीजिए, आंख, कान ठीक कर लीजिए। इसका

171
00:11:56,720 --> 00:12:01,360
ज्ञान हो जाता है। यह कहां से आया है? जो आप ब्रू देख रहे हैं।

172
00:12:01,360 --> 00:12:01,860
ये ब्रू

173
00:12:01,840 --> 00:12:06,000
है एस्टल वर्ड। यहां पर मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार होता है।

174
00:12:06,000 --> 00:12:10,000
दसों इंद्रियाएं होती हैं। तन मात्रा होता है। इसका ज्ञान हो

175
00:12:10,000 --> 00:12:14,240
जाता है। यही प्रकट होता है भौतिक शरीर के रूप में। यह सूक्ष्म

176
00:12:14,240 --> 00:12:18,240
शरीर कहां से प्रकट होता है? यह कारण शरीर। यह सिर है,

177
00:12:18,240 --> 00:12:22,320
दो हाथ है, यह दो पैर है। यह ज्ञान का शरीर है।

178
00:12:22,320 --> 00:12:26,480
जिसको कहते हैं भाव जगत, कारण जगत, कारण शरीर।

179
00:12:26,480 --> 00:12:30,480
यहां से प्रकट हुआ सूक्ष्म शरीर, यहां से भौतिक। जब पूरी तरह

180
00:12:30,480 --> 00:12:34,800
से यह थेशोल्ड इसमें हम एकाग्रता पा जाते हैं। हमें

181
00:12:34,800 --> 00:12:38,800
तीनों ज्ञान हो जाता है। फिर जब तक चाहे पृथ्वी पर रहे महात्मा

182
00:12:38,800 --> 00:12:42,960
गांधी को ये ज्ञान था बचपन से तो सिर में देखते थे। देख रहे होंगे

183
00:12:42,960 --> 00:12:48,240
सिर में एक शक्ति घूमती है। शरीर के अंदर आती

184
00:12:48,240 --> 00:12:52,400
महात्मा गांधी को फील होता था। सोचे अगर यह सब फील करें तो सभी

185
00:12:52,400 --> 00:12:56,400
सत्य हिंसा के मार्ग पर चले। ये टेक्निकल चीज है।

186
00:12:56,400 --> 00:13:00,640
कोई आसानी से फील कर ले। ऐसा संभव नहीं हो रहा था। तो उन्होंने क्या कहा? छत्रपती

187
00:13:00,640 --> 00:13:05,360
सब चरखा चलाए। यहीं से चरखे का आविष्कार हुआ। जी।

188
00:13:05,360 --> 00:13:09,600
महात्मा गांधी चरखा का आविष्कार यहीं शुरू किए। जी जी और पूरे देश का चरखा

189
00:13:09,600 --> 00:13:13,760
चला दिए। तो बहुत ही सुंदर और बड़ा मतलब मुझे बड़ा

190
00:13:13,760 --> 00:13:16,960
ही रोचक जो इसकी जानकारी मिली। इसको हम नाम क्या

191
00:13:16,960 --> 00:13:20,960
देते हैं? मतलब एक्चुअली इसको सामान्य नाम है दंड।

192
00:13:20,960 --> 00:13:24,960
दंड। जब कोई हम गलती करें तो दंड स्वीकार करें। यानी हम सिर और में

193
00:13:24,960 --> 00:13:29,200
ध्यान लगाए। अच्छा। ध्यान लगाते लगाते पता हमें ब्रह्म ज्ञान हो गया। निर्माण

194
00:13:29,200 --> 00:13:33,280
कैसे करें? ये ब्रह्मदंड हो जाता है। ये अच्छा तो ये महाराज जी

195
00:13:33,280 --> 00:13:38,320
का दंड का हमने व्याख्यान देखा। बड़ा ही इंटरेस्टिंग था और उन्होंने बहुत ही

196
00:13:38,320 --> 00:13:42,640
क्रमानुसार बताया कि किस तरीके से योग के माध्यम से शक्तियां आपकी प्रवाहित

197
00:13:42,640 --> 00:13:47,040
होंगी और सर की तरफ और फिर वो वहां पर ज्ञान उद्भाषित होगा। पहले

198
00:13:47,040 --> 00:13:51,040
स्थूल फिर सूक्ष्म फिर जो है कारण शरीर के रूप में और

199
00:13:51,040 --> 00:13:55,120
महात्मा गांधी जी का भी उन्होंने बताया। अच्छा महाराज जी एक बात आपने

200
00:13:55,120 --> 00:13:59,120
कही कि महात्मा गांधी जी ने भी इसी प्रकार से उनको ज्ञान था। महात्मा गांधी का

201
00:13:59,120 --> 00:14:03,280
ज्ञान था जब जब परमहंस योगानंद जी जी अमेरिका में

202
00:14:03,280 --> 00:14:07,280
15 साल रहे जी फिर गुरुदेव ने कहा कि जल्दी आओ हमें जाने का समय

203
00:14:07,280 --> 00:14:11,760
हो रहा है कहने लगे हमारे से मिलने पहले गांधी दीक्षा दे के आओ

204
00:14:11,760 --> 00:14:15,840
तुम्हारों से कर्म बंधन हमसे नहीं है अच्छा उनको दीक्षा देने गई

205
00:14:15,840 --> 00:14:19,920
दीक्षा देने बाद महसूस किया परम योग ये तो ग्रेट प्रॉफेट

206
00:14:19,920 --> 00:14:24,400
है अच्छा तो ये अपने अंतिम संदेश में कहा ये जो प्रॉफेट

207
00:14:24,400 --> 00:14:29,040
थे महात्मा गांधी जी हां ग्रेट प्रॉफेट देखिए यह

208
00:14:29,040 --> 00:14:32,720
जब परमहंस योगानंद जब शरीर

209
00:14:32,720 --> 00:14:37,200
छोड़ने का समय हुआ तो उस समय महात बाबा ने 50

210
00:14:37,200 --> 00:14:41,360
देशों के फॉरेन डिप्लोमेट्स जितने राजदूत

211
00:14:41,360 --> 00:14:45,440
थे वो सब इकट्ठा हुए लेफ्टिनेंट गवर्नर कैलिफोर्निया के सब थे

212
00:14:45,440 --> 00:14:49,520
ये और उसके बाद इसमें एक की स्पीकर

213
00:14:49,520 --> 00:14:53,520
थे परम सेवन बुलाया गया था उसको मुख्य संदेश देने

214
00:14:53,520 --> 00:14:57,760
के लिए तब खड़े हो रहे हैं बोलने के लिए इंडियन

215
00:14:57,760 --> 00:15:01,760
एंबेसडर की वाइफ अंतिम फोटो है ये जी

216
00:15:01,760 --> 00:15:05,920
अपना संदेश देने के बाद परमहंस योगानंद ऐसे बैठ

217
00:15:05,920 --> 00:15:10,080
जाते हैं और इनकी बॉडी ऐसे पड़ी रही अब तो

218
00:15:10,080 --> 00:15:14,640
इसमें किसी प्रकार सरन दुर्गंध नहीं आई इस

219
00:15:14,640 --> 00:15:18,880
अब इन्होंने जब ये शरीर छोड़ रहे थे तो इन्होंने एक संदेश दिया

220
00:15:18,880 --> 00:15:23,120
उस संदेश में उनकी पहली लाइन यही थी आई रिमेंबर

221
00:15:23,120 --> 00:15:27,200
माय मीटिंग वि महात्मा गांधी द ग्रेट प्रॉफेट ब्रॉट अ प्रैक्टिकल मेथड ऑफ

222
00:15:27,200 --> 00:15:31,200
पीस प्रॉफेट जैसे कि जीसस प्रॉफेट जैसे भगवान राम है भगवान

223
00:15:31,200 --> 00:15:35,520
कृष्ण है जीसस है बुद्धा है ये सब ग्रेट प्रॉफेट कहे जाते हैं ये प्रॉफिट

224
00:15:35,520 --> 00:15:40,160
है मतलब हमारे यहां तो राम जी और कृष्ण जी का मतलब अवतार होता है अच्छा अच्छा अवतार

225
00:15:40,160 --> 00:15:44,240
दूत के रूप में नहीं जो भविष्य बता दे अतीत बता दे वर्तमान बता दे

226
00:15:44,240 --> 00:15:47,840
उसे प्रॉफिट कहते हैं। अच्छा हां अच्छा तो ये उस रूप

227
00:15:47,840 --> 00:15:51,840
में हम उसे अवतार मानते हैं और ये जो ये लोग जो है ये

228
00:15:51,840 --> 00:15:55,840
कहते हैं कि भाई वो किसी मैसेंजर को भेजा गया है। अच्छा अच्छा

229
00:15:55,840 --> 00:15:59,840
अब गांधी जी फॉर द फर्स्ट टाइम अपाइड प्रिंसिपल ऑफ़

230
00:15:59,840 --> 00:16:03,920
ट्रुथ एंड नॉन वायलेंस दैट शुड बी फॉललोड बाय ऑल नेशंस टू सॉल्व देयर

231
00:16:03,920 --> 00:16:08,720
प्रॉब्लम ही इन्होंने संदेश दे के ऐसे शरीर छोड़ दिया

232
00:16:08,720 --> 00:16:12,720
तो वह वही बताने का प्रयास करते हैं कोई गांधी के मार्ग पर चले तो अभाव मिट

233
00:16:12,720 --> 00:16:17,440
जाता है गांधी का मार्ग क्या है प्रतिदिन क्रिया योग करते थे बिना नागा के

234
00:16:17,440 --> 00:16:22,640
उनका और मार्ग क्या है किसी की निंदा ना करिए कोई गाली दिए आप गाली मत दीजिए

235
00:16:22,640 --> 00:16:26,800
कोई कुछ भी करे आप उसकी निंदा करिए ही मत।

236
00:16:26,800 --> 00:16:30,880
जी। आपका काम उसकी सेवा करना। बहुत सुंदर। एक सुंदर सेवक

237
00:16:30,880 --> 00:16:35,120
बनकर के सेवा करिए और सेवा करके उपकृत हो रहे हैं। ये सोचिए

238
00:16:35,120 --> 00:16:39,200
उसे कोई रिटर्न ना चाहिए। इस तरह चलने के बाद जानते हैं भारत की समस्या खत्म हो

239
00:16:39,200 --> 00:16:43,280
जाएगी। बिल्कुल बिल्कुल। गांधी मार्ग चलने के बाद हर नेता इस मार्ग पर चले तो

240
00:16:43,280 --> 00:16:47,520
पैसे जो इधर-उधर हेराफेरी होती है बंद हो जाएगा। ब्यूरोक्रेसी बदल

241
00:16:47,520 --> 00:16:51,680
जाएगी। न्यायपालिका बदल जाएगी। अच्छा महाराज जी जैसे हमने गांधी जी के बारे

242
00:16:51,680 --> 00:16:55,840
में जो बताया है वो गांधी जी ने भी अपनी किसी बुक वगैरह में अपनी लिखा है कि

243
00:16:55,840 --> 00:17:00,160
मुझे यह चीजें थी मैं इस तरीके से सोचता था। भाई गांधी जी जब ऑपरेशन

244
00:17:00,160 --> 00:17:02,880
हुआ पूरी दुनिया जानती है एनिस्ट्रेशन

245
00:17:02,880 --> 00:17:06,880
नहीं लिए थे। खाना पीना बड़ा गलत था जेल में। नहीं मतलब उन्होंने लिखा

246
00:17:06,880 --> 00:17:11,040
है कई सुनिए हमारी बात। अभी तक उत्तर दे रहे हैं। जी जी जब गांधी

247
00:17:11,040 --> 00:17:15,120
जी का जेल में खाना पीना अव्यवस्थित था

248
00:17:15,120 --> 00:17:19,360
तो उनको अपेंडिसाइटिस हो गया। हम तो उनका ऑपरेशन अंग्रेज डॉक्टर से उन्होंने

249
00:17:19,360 --> 00:17:23,360
कराया। जी बिजली नहीं थी। लालटेन में कराया।

250
00:17:23,360 --> 00:17:27,360
नहीं लिया। जी। उस समय सर्जरी बहुत स्थूल थी। पूरा लंबा

251
00:17:27,360 --> 00:17:31,360
काटा जाता था। पेट काटा सब कुछ हुआ। स्ट्रेचेस लगी। उसके बाद ना

252
00:17:31,360 --> 00:17:35,440
दवा खाया ना तो उन्होंने सीए ना तो दर्द हुआ। तो

253
00:17:35,440 --> 00:17:40,000
कौन करेगा ये? ये जग विदित थे ये अनुमान

254
00:17:40,000 --> 00:17:44,080
से हम लोग ऐसा कह सकते हैं कि उनको ऐसा ज्ञान था क्योंकि

255
00:17:44,080 --> 00:17:48,240
वो ऐसा-सा टॉर्चर झेल गए क्योंकि उन्होंने टॉर्चर मुस्कुराते रहे बात करते रहे

256
00:17:48,240 --> 00:17:52,800
झेले कहां वो जी जी हां हां मतलब हां झेले वो झेले टॉर्चर हुआ सब टॉर्चर

257
00:17:52,800 --> 00:17:56,960
वो टॉर्चर को वो जॉय समझते रहे उनको पेन हुआ ही नहीं तो इस हिसाब

258
00:17:56,960 --> 00:18:01,120
से तो महाराज जी मुझे लगता है कि वो जो अनशन पे बैठते थे वो भी वो केवल एक दिखावा

259
00:18:01,120 --> 00:18:05,120
मात्र था अनशन बैठते थे लोगों को कन्विंस करने के लिए अनशन

260
00:18:05,120 --> 00:18:09,360
बैठ के सूक्ष्म शरीर में जाए तो उनके अंदर जाके बदल दे। अच्छा। इतने लोग अनशन

261
00:18:09,360 --> 00:18:13,520
बैठते हैं क्या कर पाते? कुछ भी नहीं। उनके अनशन बैठते पूरा ब्रिटिश गवर्नमेंट हिल

262
00:18:13,520 --> 00:18:17,600
जाती थी। कारण क्या था? अनशन बैठ के जो सूक्ष्म

263
00:18:17,600 --> 00:18:18,100
शरीर में

264
00:18:17,920 --> 00:18:22,160
जाकर के उनके अंदर प्रवेश करके चेंज कर देते थे। इनके अंदर ये पावर

265
00:18:22,160 --> 00:18:26,480
थी। मगर महाराज जी एक बार जो उन्होंने जो असहयोग आंदोलन

266
00:18:26,480 --> 00:18:30,560
चलाया था गांधी जी ने तो उसमें ब्रिटिश गवर्नमेंट मानी नहीं

267
00:18:30,560 --> 00:18:34,640
थी। बाद में गांधी जी ने उसको वापस ले लिया था। क्यों लिया? क्योंकि बलिया

268
00:18:34,640 --> 00:18:38,960
से राम मंगल पांडे ने जी लड़ाई करा दिया

269
00:18:38,960 --> 00:18:42,960
22-22 पुलिस को जला दिया गया वो मना किए थे झगड़ा कोई नहीं करेगा

270
00:18:42,960 --> 00:18:47,280
इसे विड्थ कर लिया उन्होंने अच्छा फिर विड्ड का फिर शुरू किया बूम

271
00:18:47,280 --> 00:18:51,280
कर गया उन्होंने कहा था कोई झगड़ा नहीं करेगा कोई मारपीट

272
00:18:51,280 --> 00:18:55,280
नहीं करेगा कुछ नहीं करेगा आगे बढ़ते रहिए जी जी जी उस मार्ग पर

273
00:18:55,280 --> 00:18:59,360
चलते तो 1926 में ही आजादी मिल जाती

274
00:18:59,360 --> 00:19:03,600
तो ये गांधी जी के बारे में मैं कुछ जानने को थोड़ा सा स्पिरिचुअल उसमें आते

275
00:19:03,600 --> 00:19:07,920
महाराज जी आजकल की जो जनरेशन है वो बहुत ही ज्यादा मतलब

276
00:19:07,920 --> 00:19:12,000
लॉजिक मांगती है। जैसे हमने शुरू में ही कहा कि हम ईश्वर के साथ एकत्व

277
00:19:12,000 --> 00:19:16,080
को प्राप्त करते हैं। तो वो ईश्वर के अस्तित्व पर ही प्रश्न खड़ा करती है कि

278
00:19:16,080 --> 00:19:20,160
भ ईश्वर है ये कैसे मान लें हम? हां सही है तो क्रियाकारी मान लेंगे। भाई

279
00:19:20,160 --> 00:19:24,240
मैटर नहीं है। फिजिक्स सिद्ध किया कि नहीं? मैटर होता ही नहीं है। हम

280
00:19:24,240 --> 00:19:28,560
हम फिजिक्स में है ये। हम हर चीज कंडेंस एनर्जी है। तो कैसे मानेंगे?

281
00:19:28,560 --> 00:19:32,640
उनको प्रयोग करना पड़ेगा। हर जगह इलेक्ट्रिसिटी है। हर जगह

282
00:19:32,640 --> 00:19:33,140
अग्नि

283
00:19:33,040 --> 00:19:37,120
तत्व से बना है। हम आप एक आयरन रड को आप काटिए तो आपको

284
00:19:37,120 --> 00:19:41,200
दिखाई पड़ेगा। उसमें आग ही आग है। लाइट लाइट है। तो कोई

285
00:19:41,200 --> 00:19:45,280
चीज सिद्ध करने के लिए उसका प्रयोग करना पड़ता है ना। जो क्रिया

286
00:19:45,280 --> 00:19:49,440
का प्रयोग किए वो सिद्ध कर ले गए। उनको अगर सिद्ध करना है। क्रिया

287
00:19:49,440 --> 00:19:53,600
का अभ्यास करें सिद्ध हो जाएगा। मगर महाराज जी जैसे सबसे

288
00:19:53,600 --> 00:19:57,760
पहले उनको कन्विंस करना होगा ना कि यहां से आपको ईश्वर मिलेगा। कन्वस नहीं करना होता है।

289
00:19:57,760 --> 00:20:01,760
जी भुगतते भुगतते फिर आ जाते हैं उसी में जब

290
00:20:01,760 --> 00:20:06,400
कहीं रास्ता नहीं मिलता है तब आगे मगर हमारे यहां पे बहुत सारे दर्शन है जैसे विशिष्टाद्वैत

291
00:20:06,400 --> 00:20:10,400
अद्वैत इन सब में कोई दर्शन सब दर्शन नहीं सब वो है माया है ईश्वर की सिद्धि तो

292
00:20:10,400 --> 00:20:14,880
की गई है ना दर्शन कोई कोई सिद्धि नहीं कर पाया से कि पहले कोई सिद्ध नहीं थे

293
00:20:14,880 --> 00:20:19,040
जो थे सिद्ध कबीर थे गुरु नानक देव थे जैसे बौद्धों का खंडन किया था ना शंकराचार्य

294
00:20:19,040 --> 00:20:23,040
जी ने कभी नहीं किया बौद्ध खंडन शंकराचार्य को प्रकृष्ट बुद्धा कहा गया

295
00:20:23,040 --> 00:20:27,680
ये किसने कहा खंडन किया प्रचंड बौद्ध प्रछंद बौद्ध की कह रहे हैं क्या

296
00:20:27,680 --> 00:20:31,680
यानी प्रकृष्ट बौद्ध प्रकृष्ट बौद्ध का मतलब आदि शंकराचार्य

297
00:20:31,680 --> 00:20:35,760
को यह कहा गया प्रकृष्ट बुद्धिज्म का प्रचार कीजिए। ये पूरा बुद्धिज्म ला

298
00:20:35,760 --> 00:20:39,760
रहे हैं। इसलिए उनको मार दिया केदारनाथ ने। नहीं किसने कहा ये

299
00:20:39,760 --> 00:20:43,760
प्रकृष्ट बौद्ध? पूरा पढ़ाया जाता है यूनिवर्सिटी में पढ़िए। फिलहाल

300
00:20:43,760 --> 00:20:47,920
पूरा है नहीं नहीं प्रकृष्ट बौद्ध नहीं। आप नहीं जानते पढ़ो। आप पढ़िए। एक जी

301
00:20:47,920 --> 00:20:48,420
आपको

302
00:20:48,160 --> 00:20:52,400
नहीं पता है। ये जी जी। आदि शंकराचार्य को वो बुद्धिज्म का ही प्रचार

303
00:20:52,400 --> 00:20:56,560
किया। संस्कृत भाषा में तब उनको केदारनाथ नहीं उन्होंने तो बौद्धों का खंडन

304
00:20:56,560 --> 00:21:00,560
किया था ना कहीं नहीं किया खंडन गलत बताते झूठ बोलते हो हम भी बता रहे हैं हिस्ट्री में ही

305
00:21:00,560 --> 00:21:04,640
ये सब लिखा हुआ है महाराज हिस्ट्री गलत लिखा हुआ है हम भी बता रहे हैं तो फिर वहां यूनिवर्सिटी में

306
00:21:04,640 --> 00:21:08,800
पत्र आता है फिलॉसफी में एक प्रश्न आता है कि सिद्ध करिए कि आदि

307
00:21:08,800 --> 00:21:13,200
शंकराचार्य प्रकृष्ट बौद्ध थे बुद्धिज्म प्रचार किए

308
00:21:13,200 --> 00:21:17,440
इसलिए उनको मार दिए ना कि अगर इनका फैल गया बुद्धिज्म फिर से तो हमारे सब

309
00:21:17,440 --> 00:21:21,680
ये खत्म हो जाएगा जो महाराज जी जैसे इन्होंने शून्यवाद दिया था ना बौद्धों

310
00:21:21,680 --> 00:21:26,880
ने बौद्धों उन्होंने दिया था शून्यवाद कुछ नहीं दिया था बुद्धा ने गलत पढ़ाते हैं

311
00:21:26,880 --> 00:21:30,880
तो जब गलत पढ़ाते हैं और एक जगह लिखा है कि ऐसा हुआ था एक जगह लिखा क्या होता

312
00:21:30,880 --> 00:21:34,960
है हम लिख देंगे हम घोड़ा है मान लेंगे आप नहीं तो लिखा हनुमान जी बंदर है मान लेंगे आप

313
00:21:34,960 --> 00:21:39,120
नहीं मैं वो नहीं कह रहा हूं लिखा पुखा सब गलत होता है कोई चीज लिख दे सही

314
00:21:39,120 --> 00:21:43,120
नहीं होता वो नहीं नहीं मैं वो नहीं कह रहा हूं असल में मैं ये कह रहा हूं जैसे

315
00:21:43,120 --> 00:21:47,200
एक जगह में पढ़ाया जा रहा है कि गलत पढ़ाया जा रहा है नोट कर लीजिए

316
00:21:47,200 --> 00:21:51,360
टोटल गलत पढ़ाया जा रहा है यूनिवर्सिटी में झगड़ा है मैं समझ रहा हूं मेरा प्रश्न

317
00:21:51,360 --> 00:21:55,440
कुछ और मैं कह रहा हूं एक जगह हमको पढ़ाया जा रहा है कि जैसे उन्होंने परास्त किया

318
00:21:55,440 --> 00:21:59,440
उन्होंने जो है नास्तिकवाद का हराया मतलब बौद्ध जो है ईश्वरवादी नहीं

319
00:21:59,440 --> 00:22:03,600
थे और दूसरी जगह आपने बताया यूनिवर्सिटी में ये गलत है

320
00:22:03,600 --> 00:22:07,680
गौतम बुद्ध पूरा ईश्वरवादी थे एक मिनट ईश्वर बारे में आप बोल नहीं सकते हैं तो क्या

321
00:22:07,680 --> 00:22:12,080
झूठ बोलेंगे वो एक मिनट सत्य के बारे में बोला नहीं बता तो आपको ये परम

322
00:22:12,080 --> 00:22:16,720
झूठ तो नहीं बोलेंगे इन्होंने लिखा है बुद्धा ईश्वरवादी थे

323
00:22:16,720 --> 00:22:20,720
जिनके शरीर नहीं डिके किया स्वेच्छा शरीर छोड़ के गए ये तो झूठ नहीं बोलेंगे

324
00:22:20,720 --> 00:22:24,880
ना नहीं उनके यहां ईश्वर को कहा माना गया। अरे यार आप ये गलत बताएं कि आप

325
00:22:24,880 --> 00:22:28,960
ज्यादा ज्ञानी हैं। सुरक्षा शरीर छोड़ा ऐसे पढ़िए। इसमें

326
00:22:28,960 --> 00:22:33,120
लिखा हुआ बुद्धिज्म का तो महाराज जी किसी ने तो ये

327
00:22:33,120 --> 00:22:37,200
मतलब सिद्धांतिक तौर पर कुछ थ्योरी सिद्धांतिक नहीं है। गलत बताते हैं।

328
00:22:37,200 --> 00:22:41,200
नहीं नहीं मैं मैं पूछ रहा था किसी ने थ्योरी तो दी होगी कि ईश्वर होता है कैसे

329
00:22:41,200 --> 00:22:46,240
किस प्रकार से सिद्ध होता है। थ्योरी हम दे तो रहे हैं। जैसे थ्योरी मिल तो रही है।

330
00:22:46,240 --> 00:22:50,240
अभ्यास कर आपको पता चले कि ईश्वर को खाना खाएंगे तभी स्वाद मिलेगा।

331
00:22:50,240 --> 00:22:54,240
जी खाएंगे से स्वाद मिलेगा नहीं। नहीं, स्वाद तो मोक्ष हो गया ना? वह तो ईश्वर

332
00:22:54,240 --> 00:22:58,240
का मोक्ष हो गया। मतलब क्या? मोक्ष के बारे में जानते नहीं। फिर क्यों बोल रहे हैं मोक्ष? नहीं। मोक्ष का

333
00:22:58,240 --> 00:23:02,800
मतलब क्या है? हां। जैसे ईश्वर को प्राप्त करेंगे तभी तो मोक्ष मिलेगा। उसका मतलब क्या है?

334
00:23:02,800 --> 00:23:07,040
मोक्ष वो स्टेट है सच्चिदानंद स्वरूप जो होना चाहता है। मतलब है। जो होना चाहता है

335
00:23:07,040 --> 00:23:11,040
सच्चिदानंद क्या है? सत मतलब स्वरूप से सत हो जाए और चित्त

336
00:23:11,040 --> 00:23:15,200
अखंड ज्ञान और आनंद अनंत सुख। मोक्ष मोक्ष मतलब अमर हुआ ना? हां जो आपने

337
00:23:15,200 --> 00:23:18,720
शुरू में बताया था ना। मोक्ष मतलब अमर हुआ ना? हां। अमर। अमर होने की एक क्रिया

338
00:23:18,720 --> 00:23:22,880
है। क्रिया योग अभ्यास कर पता चल नहीं मरते हैं। जो क्रिया

339
00:23:22,880 --> 00:23:27,120
नहीं करते समृद्ध लोग मानते हैं। मतलब जब क्रिया करेंगे तभी ये

340
00:23:27,120 --> 00:23:31,760
हम मान जान सकते हैं। अरे आप यहां बात कर रहे हैं तभी तो सुनाई पड़ रहा है। जी

341
00:23:31,760 --> 00:23:35,760
क्रिया योग करेंगे तभी तो पता चलेगा। नहीं वो तो वो तो

342
00:23:35,760 --> 00:23:40,240
प्राप्तव्य हो गया ना महाराज जी जैसे प्राप्तव्य आप चलेंगे कैसे चलेंगे?

343
00:23:40,240 --> 00:23:44,320
चलेंगे तभी पहुंचेंगे वहां पर। आप कहेंगे चल नहीं करेंगे पहुंच जाए। वही

344
00:23:44,320 --> 00:23:48,320
मैं कह रहा हूं। पहुंचने वाली जगह तो मोक्ष की स्टेट है ना। ईश्वर अरे मोक्ष मतलब

345
00:23:48,320 --> 00:23:52,400
क्या होता है? सत्य को जानना है ना? क्रिक अभ्यास करके सत्य को जान जाएंगे।

346
00:23:52,400 --> 00:23:56,480
जी। पता चल गया इतना। तो ईश्वर की सिद्धि इसमें कहां से आ गई? मोक्ष जानेंगे।

347
00:23:56,480 --> 00:24:00,800
आपको ईश्वर पता है ना सिद्धि पता है। सुन लीजिए कि आप बकवास कर रहे हैं।

348
00:24:00,800 --> 00:24:04,880
कर दीजिए। एयर कर दीजिए। आप गलत कर रहे हैं। आपको कुछ आता नहीं है।

349
00:24:04,880 --> 00:24:09,040
आप आके ध्यान करिए पता चल जाएगा। सिद्धि का मतलब क्या होता है? हमने सिद्ध कर लिए ईश्वर

350
00:24:09,040 --> 00:24:13,120
है। हम्म हम्म। ईश्वर ने सिद्ध कर लिए। गौतम बुद्धा ने किया।

351
00:24:13,120 --> 00:24:17,360
ये तो ये तो गलत नहीं लिखेंगे ना गौतम बुद्ध ने गलत नहीं लिखेंगे

352
00:24:17,360 --> 00:24:21,760
परम योगानंद सुनिए हमारी बात गलत नहीं लिखेंगे ना परमहंस योगानंद

353
00:24:21,760 --> 00:24:25,920
इसमें लिखा है गौतम बुद्धा ने कहा है कि ईश्वर है तो उनके लिटरेचर

354
00:24:25,920 --> 00:24:30,160
कोई मिलता है ऐसा अरे पढ़िए ना इसको सब मिलेगा मैं समझ गया

355
00:24:30,160 --> 00:24:34,720
जो आदमी अपना मृत्यु पर विजय पाए वो लिखेगा बाकी लोग सही लिखेंगे

356
00:24:34,720 --> 00:24:38,880
आप कौन सी लिस्ट से पढ़ना चाहते हैं गलत तो महाराज जी कोई और

357
00:24:38,880 --> 00:24:42,880
व्यक्ति भी तो चमत्कारिक हो सकता है तो आप जाइए उनके पास नहीं नहीं मैं ये नहीं कह

358
00:24:42,880 --> 00:24:47,040
रहा कोई व्यक्ति जो जाइए ना हम क्या जाने कौन है चमत्कारी नहीं जैसे

359
00:24:47,040 --> 00:24:51,120
हम तो जानते हैं कि इनकी शरीर नहीं सड़ी नहीं दुर्गंध आई नहीं कुछ हुआ

360
00:24:51,120 --> 00:24:55,120
ये जो लिखे हैं सही है और ये किसके अंदर में रहे हैं इतेश्वरी के अंदर रहे

361
00:24:55,120 --> 00:24:59,120
हैं ये भी ऐसे शरीर छोड़े और ये ज्ञान कहां है महतार बाबा ज्ञान

362
00:24:59,120 --> 00:25:03,360
इस पे लिखा गया है इसके अलावा बाकी सब पढ़ना अधूरा ज्ञान है

363
00:25:03,360 --> 00:25:07,440
अधूरे ज्ञान की चर्चा करने पर आदमी अधूरा मैं आपको प्रणाम कर रहा हूं महाराज जी मगर बस एक

364
00:25:07,440 --> 00:25:11,440
जिज्ञासा है क्या जिज्ञासा गलत है ना आपकी बिना खाना खाए पेट भर जाएगा मैं

365
00:25:11,440 --> 00:25:15,520
वो वो नहीं नहीं कर रहा कुछ और कह रहा हूं। जैसे इन्होंने बताया है कि गौतम बुद्ध ईश्वरवादी

366
00:25:15,520 --> 00:25:19,680
थे। हम् हमने मान लिया तो इस संबंध में गौतम बुद्ध का कोई लिटरेचर

367
00:25:19,680 --> 00:25:23,840
हमें प्राप्त इसी में है ना इसमें मिलेगा ना गौतम बुद्ध के बारे में पूरा उनका

368
00:25:23,840 --> 00:25:28,160
दर्शन तो पूरा सब मिलेगा इसमें इसमें बाइबल मिलेगा कुरान मिलेगा

369
00:25:28,160 --> 00:25:32,160
वेदा वेद मिलेगा सब चीज मिलेगी इसमें हम्म इसमें कबीर

370
00:25:32,160 --> 00:25:36,240
साहब के बारे में मिलेगा गुरु नानक जी के बारे में मिलेगा ऐसा कोई भी नहीं

371
00:25:36,240 --> 00:25:40,400
पैगंबर जिसके बारे में ना मिले इसमें और इसका जो सूक्ष्म रूप है और

372
00:25:40,400 --> 00:25:44,800
कॉम्पैक्ट मैथमेटिकल रूप ये है होली साइंस अच्छा इसमें

373
00:25:44,800 --> 00:25:48,880
मिलेगा जी जी इन दोनों कोई फॉलो करें कैंसर

374
00:25:48,880 --> 00:25:49,760
ठीक हो जाता है। हमारे यहां

375
00:25:49,760 --> 00:25:53,840
कैंसर ठीक हुआ है। सब डॉक्टर घर के लोग हैं। कैंसर कैंसर

376
00:25:53,840 --> 00:25:58,000
यहां पे ठीक हो जाता है। अरे ठीक हुआ है भाई रिकॉर्ड सबका। अच्छा अच्छा हां तो

377
00:25:58,000 --> 00:26:02,800
तो सब डॉक्टर लोग अपने घर के लोगों को लेके आए हैं। अभी भी क्लास में लोग हैं।

378
00:26:02,800 --> 00:26:06,880
अच्छा ऐसा कोई चीज नहीं जो ना हो जाए। ठीक है। ठीक है महाराज जी।

379
00:26:06,880 --> 00:26:11,040
इससे थोड़ा सा हम आगे बढ़ते हैं। थोड़ा काम वो भी लाइट हो जाए माहौल। महाराज

380
00:26:11,040 --> 00:26:15,200
जी धर्म क्या है? तो माहौल लाइट नहीं है। ये इनलाइट ही तो है। एनलाइटन

381
00:26:15,200 --> 00:26:19,200
ही तो हो रहे हैं आपकी शरण में। धर्म कहते हैं जोड़ना। जी। धींत

382
00:26:19,200 --> 00:26:23,520
से बना है। जी। ध है धारण किए हैं। उसमें ऋ है वोवेल

383
00:26:23,520 --> 00:26:27,520
री मतलब पवित्र तत्व जो धारण किए पवित्र तत्व है। इसको जानना

384
00:26:27,520 --> 00:26:31,600
ही धर्म है। नहीं महाराज जी उपयोग के अनुसार मतलब

385
00:26:31,600 --> 00:26:35,600
उसका एडवांटेज नहीं होगा। आपका हाथ है। धर्म तत्व से जुड़िए और क्या

386
00:26:35,600 --> 00:26:39,680
उपयोग करेंगे आप? मतलब हम धर्म को क्यों माने? अरे भाई धर्म आप

387
00:26:39,680 --> 00:26:43,680
धारण किए इसके अंदर शक्ति उसको पकड़ना नहीं है। वही तो धर्म है। नहीं

388
00:26:43,680 --> 00:26:47,840
जैसे जो ज्ञान विज्ञान है ना कि हमें ईश्वर को ज्ञान क्या है? सही सही चीज जानना ही तो ज्ञान

389
00:26:47,840 --> 00:26:52,000
है। तो आप गलत चीज जानने को ज्ञान कहते हैं। आप मिथ्या चीज को आप ज्ञान

390
00:26:52,000 --> 00:26:56,000
कह रहे हैं। नहीं जो धर्म धिधात से बना है। धात

391
00:26:56,000 --> 00:27:00,240
में ध कंसोनेंट है। उसमें री वोवेल है। ऋ का मतलब पवित्र है।

392
00:27:00,240 --> 00:27:04,720
जो धारण किया पवित्र तत्व है। तो आप इसको धारण करना है तो धर्म हुआ।

393
00:27:04,720 --> 00:27:05,220
इसको

394
00:27:05,040 --> 00:27:09,040
अनुभव करना है तो धर्म हुआ। यह वाली तो परिभाषा बाकी गलत

395
00:27:09,040 --> 00:27:13,040
परिभाषा नहीं बताते। जी नहीं वो गलत नहीं बोल रहा हूं।

396
00:27:13,040 --> 00:27:17,120
मैं पूछ रहा हूं मतलब हम किसी को जैसे बताते हैं कि धर्म तुम्हें पालन माने ना बताइए आप कौन

397
00:27:17,120 --> 00:27:21,200
कह रहा है बताइए आप। नहीं नहीं जिसको जानना होगा सही मतलब उसको हम एडवांटेज

398
00:27:21,200 --> 00:27:25,280
क्या बताया कि धर्म का पालन करोगे तो तुम्हें ये मिलेगा। हां सब चीज मिलेगा।

399
00:27:25,280 --> 00:27:29,360
जी क्रिया का अभ्यास ही धर्म का पालन क्रिया है। जब क्रिया

400
00:27:29,360 --> 00:27:33,600
का अभ्यास करेंगे पूरा धर्म का ही पालन होता है। तो अच्छा अच्छा एक चीज

401
00:27:33,600 --> 00:27:37,680
और आती है महाराज जी क्या ये जो इस्लाम और

402
00:27:37,680 --> 00:27:42,080
जो बाइबल इस्लाम सनातन धर्म एक है। इस्लाम सनातन

403
00:27:42,080 --> 00:27:46,080
धर्म क्रिश्चियनिटी सब मैं मैं बस वही पूछ रहा हूं। एक है। जैनिज्म

404
00:27:46,080 --> 00:27:50,240
एक है। कबीर साहब, गुरु नानक देव जी जब लोगों ने कराया सब एक है। उनके

405
00:27:50,240 --> 00:27:54,240
शिष्य लोग गलत बताते हैं। इससे सब अलग-अलग लगता है। मैं वही पूछ रहा हूं

406
00:27:54,240 --> 00:27:58,320
कि जो कुरान है कुरान या बाइबल

407
00:27:58,320 --> 00:28:02,480
हो गई या कुरान को मान लीजिए। तो कुरान के अनुसार जो प्रतिपादित होने वाला ईश्वर

408
00:28:02,480 --> 00:28:06,560
है। क्या वो सर्वशक्तिमान है? वही वही महात्मा बाबा ने माना है। ईश्वर

409
00:28:06,560 --> 00:28:10,560
जो कुरान मानते हैं। वही वहीश्वर गिरी मानते हैं। वही

410
00:28:10,560 --> 00:28:14,560
योगानंद मानते हैं। मगर कुरान कुरान में कुरान में लिखा हुआ है। तो आप किसी

411
00:28:14,560 --> 00:28:18,560
की हिंसा ना करिए। किसी का आप खून करेंगे तो भगवान नहीं माफ़ करेगा।

412
00:28:18,560 --> 00:28:20,400
उसी से माफी मांगिए। मोहम्मद

413
00:28:20,400 --> 00:28:24,400
साहब शुद्ध शाकाहारी थे। 18800 फॉलोवर शाकाहारी थे।

414
00:28:24,400 --> 00:28:28,400
मक्का से मदीना जब गए तो पत्ता उबाल खाए। कोई जानवर नहीं मारने दिए।

415
00:28:28,400 --> 00:28:32,560
हम ये टोटल बुद्धिज्म है। ये कुरान में सब बुद्धिज्म लिखा

416
00:28:32,560 --> 00:28:36,800
है। कुरान की व्याख्या करने वाले इसकी व्याख्या गलत कर देते हैं। जैसे रामायण की व्याख्या

417
00:28:36,800 --> 00:28:41,040
गलत किया। राम ने रावण को मारा। क्यों मारेंगे रावण को? व्याख्या गलत है। तो

418
00:28:41,040 --> 00:28:45,040
कुरान के अनुसार जो ईश्वर है वो अवतार नहीं ले सकता। वो

419
00:28:45,040 --> 00:28:50,800
कहता है अच्छा 150 में लिखा है कुरान में। ना ईश्वर

420
00:28:50,800 --> 00:28:55,040
ईश्वर जब अंदर प्रवेश करता है तो आदमी ईश्वर की वाणी बोलता है। यही

421
00:28:55,040 --> 00:28:59,120
यही अपना वेद भी गाता है। जब ज्ञान अपने अंदर अवतरित होता है

422
00:28:59,120 --> 00:29:03,200
तो हम जो बोलते हैं वही चीज कहते हैं तो उसे प्रोफेट प्रोफेस कहते

423
00:29:03,200 --> 00:29:07,440
हैं। नहीं वेद तो यजुर्वेद बोलता है कि ईश्वर अवतरित भी होता है। आपको वेद नहीं आता है।

424
00:29:07,440 --> 00:29:11,520
31 19 में लिखा है महाराज जी। अरे आप वेद नहीं आता सूत्र। वेद क्या बताइए?

425
00:29:11,520 --> 00:29:15,680
वेद मतलब क्या है? श्रुति शास्त्र हां। श्रुति शास्त्र मतलब क्या है? जो

426
00:29:15,680 --> 00:29:19,760
ज्ञान है ईश्वरीय ईश्वरी जो दूसरा ज्ञान कैसे पाएंगे आप गुरु

427
00:29:19,760 --> 00:29:23,840
परंपरा से हां गुरु परंपरा बता तो रहे हैं हम आपको जो लीजिए परंपरा हमारी

428
00:29:23,840 --> 00:29:27,920
जी आप आ अभ्यास करिए जो चीज अभ्यास करने से आता है बोलने से

429
00:29:27,920 --> 00:29:32,000
आएगा नहीं मैं वो उधर पूछ रहा हूं अरे क्या वो लोग मूर्ख है आपसे हमसे

430
00:29:32,000 --> 00:29:35,600
नहीं वो नहीं हमसे आपसे मूर्ख नहीं हो जो सुन रहे हैं। उनको पता है

431
00:29:35,600 --> 00:29:39,840
अभ्यास करने से आता है। कृष्ण भगवान ने कहा कि अभ्यास से वैराग मिलता है। हम्

432
00:29:39,840 --> 00:29:43,920
वैराग कहते व कहते एक गोला है ना व में व का हर

433
00:29:43,920 --> 00:29:48,160
बिंदु आदि और अनंत है। सर्व्यापकता है। तो लंबी लाइन अनंत को व्यक्त

434
00:29:48,160 --> 00:29:52,240
करती है। वैराग मतलब अनंत प्रेम होता है। वैराग मतलब घर छोड़ जाना नहीं

435
00:29:52,240 --> 00:29:56,400
होता है। नहीं वो ठीक है। कुरान में छह 150 में लिखा

436
00:29:56,400 --> 00:30:00,400
हुआ है कि ईश्वर की कोई पत्नी ईश्वर की कोई संतान नहीं हो

437
00:30:00,400 --> 00:30:04,400
सकती। तो लिमिटेड ईश्वर हो गया। लिखा हुआ है। गलत कह रहे हैं उसकी। व्याख्या गलत है

438
00:30:04,400 --> 00:30:08,480
आपकी। नहीं कुरान में ही लिखा है महाराज। कुरान आप गलत व्याख्या कर रहे हैं कुरान में। मैं व्याख्या नहीं कर रहा हूं। तभी

439
00:30:08,480 --> 00:30:12,560
तो ईश्वर की गारंटी नहीं है। लाइए कुरान दिखाइए हमको कहां लिखा है? लाइए कुरान कल लेके

440
00:30:12,560 --> 00:30:16,560
आइए। अह कोई मोबाइल में देखेंगे? मोबाइल में कुरान लेके आइए। मेन कुरान

441
00:30:16,560 --> 00:30:20,720
लेके आइए। कुरान पुस्तक लेके आइए मेन। हां। अरबी वाला लेके आइए

442
00:30:20,720 --> 00:30:24,720
और ठीक है। ये चीज हम 6150 महाराज

443
00:30:24,720 --> 00:30:28,960
जी को बताएंगे। 650 में लिखा है कि ईश्वर की कोई

444
00:30:28,960 --> 00:30:33,040
हमारे पास बात करने का टाइम नहीं है गलत चीज। जी जी। हम बताएंगे नहीं लिखा है तो

445
00:30:33,040 --> 00:30:37,040
आप कहते लिखा है। आप भी दे दीजिए स्पीच सब। महाराज जी पढ़ा है इसलिए पूछ रहे हैं। आप

446
00:30:37,040 --> 00:30:41,280
गलत पढ़े हैं ना? आप पढ़ते तो आप नौकरी नहीं करते आप। आप मोहम्मद

447
00:30:41,280 --> 00:30:45,280
शाह की तरह प्रॉफिट होते आप। जो कुरान जानता है वो नौकरी नहीं करता

448
00:30:45,280 --> 00:30:49,280
है। अच्छा तो वो सीधा पैगंबर होता है राम की तरह कृष्ण की तरह

449
00:30:49,280 --> 00:30:50,800
तो आपने पढ़ी है कुरान?

450
00:30:50,800 --> 00:30:54,880
मतलब हम अभ्यास कर रहे हैं कुरान की। पढ़ी नहीं है। ये प्रतिदिन अभ्यास हो रहा है। कुरान

451
00:30:54,880 --> 00:30:58,880
का अभ्यास हो रहा है। वो बुक बुक ने आपने नहीं पढ़ी है। बोलिए। अरे बुक

452
00:30:58,880 --> 00:31:03,040
पढ़ने से पढ़े। आप आम खाएंगे मीठा है। पता चलेगा पढ़ने जब तक खाएंगे

453
00:31:03,040 --> 00:31:07,120
नहीं। तो जब हमने मतलब हमें नहीं पता है कि उसमें क्या लिखा है तो हम कैसे कह सकते हैं? अभ्यास

454
00:31:07,120 --> 00:31:11,440
करिए बताएंगे ना अभ्यास आगे। अभ्यास से ये पता हो जाएगा कि उसमें क्या लिखा है। टोटल अभ्यास

455
00:31:11,440 --> 00:31:15,440
होता है। जो मोहम्मद बोलते थे अभ्यास करते थे तो उनको निकलता था।

456
00:31:15,440 --> 00:31:19,520
एक तरीके से कुरान से डिफ़र भी हो सकता है। ऐसा तो कुरान डिफ़र नहीं है।

457
00:31:19,520 --> 00:31:23,680
तो महाराज जी कुरान और ये अपना सनातन धर्म हम्म

458
00:31:23,680 --> 00:31:27,760
और क्रिश्चियनिटी जैनिज्म बुद्धिज्म और

459
00:31:27,760 --> 00:31:31,760
भगवान राम की शिक्षा के सब एक है। अलग-अलग नहीं है। मगर महाराज

460
00:31:31,760 --> 00:31:35,920
जी कुरान में तो अंतर है। वो प्रभु आप हमसे अब आप बंद

461
00:31:35,920 --> 00:31:39,920
करें आप जाइए। अरे ठीक है। ठीक है। बुलवाते हैं जी फालतू। ठीक है महाराज। माफ़ करो। थोड़ा

462
00:31:39,920 --> 00:31:44,080
सा आगे बढ़। क्या है लिखा हुआ ये? ये पागल है लिखे 21 महाराज

463
00:31:44,080 --> 00:31:48,320
जी। हां। पागल आप बात मैं कुरान साथ में लिए नहीं हूं। चलिए छोड़िए।

464
00:31:48,320 --> 00:31:52,320
कुरान गलत है ना? हम बता रहे हैं। यह महाराज जी उनके मूर्ति पूजा नहीं है ना? हम ये पढ़ा रहे

465
00:31:52,320 --> 00:31:56,320
हैं ना क्रिया योग। हम कुरान क्या जाने हम? कुरान क्या पूछ रहे हैं हमसे। आप

466
00:31:56,320 --> 00:32:00,320
क्रिया पूछिए जो हम पढ़ा रहे हैं। अच्छा ठीक है। ठीक है महाराज जी। आप बात बताइए दिखा रहे

467
00:32:00,320 --> 00:32:05,040
हैं ना देखिए। हम्म।

468
00:32:05,040 --> 00:32:11,040
वेद का पहला सूत्र ही कुरान सूत्र है।

469
00:32:13,280 --> 00:32:17,440
गलत आप शिक्षा दिलवाते हैं। हम गलत बोले हम यहां बैठकर के

470
00:32:17,440 --> 00:32:21,520
जैसे और लोग गलत बोलते ही हैं। प्रॉफेट्स ऑफ ऑल लैंड एंड

471
00:32:21,520 --> 00:32:25,760
एजेस हैव सक्सीडेड देयर गॉड क्विस्ट। जितने प्रॉफेट हैं

472
00:32:25,760 --> 00:32:30,000
ईश्वर अनुभूति में सक्सेस हुए हैं। जितने प्रॉफेट हैं राम है, कृष्ण

473
00:32:30,000 --> 00:32:34,160
है, बुद्धा है, महावीर स्वामी है, कबीर साहब है, गुरु नानक देव जी हैं, मोहम्मद

474
00:32:34,160 --> 00:32:38,400
है, सेंट जॉन, सेंट पाल है। ये सब क्या हुआ है? ईश्वर की अनुभूति

475
00:32:38,400 --> 00:32:42,640
में सक्सेस हुए हैं। कौन लिख रहा है? परमहंस योगानंद हम

476
00:32:42,640 --> 00:32:46,640
हम ये बताएंगे जो आप कहेंगे वो हम बता देंगे। ये तो बिल्कुल सही महाराज जी।

477
00:32:46,640 --> 00:32:50,720
हम जैसे हमने आपने ये लिखा है ना तो हमने मान ये हम कह रहे हैं कि

478
00:32:50,720 --> 00:32:54,800
ये बिल्कुल सही लिखा है। है ना? ये बिल्कुल जो इन्होंने पहली लाइन लिखी है बिल्कुल

479
00:32:54,800 --> 00:32:58,880
सही लिखी है। मगर अ यही चीज उसमें भी लिखी

480
00:32:58,880 --> 00:33:02,880
हुई है। ये हम नहीं वो गलत लिखा है। आप गलत अर्थ हां मैं वही कह रहा हूं। आप गलत अर्थ

481
00:33:02,880 --> 00:33:06,880
जानते हैं आपको पाप लगेगा। भुगत जाएंगे आप। उसका हम गलत अर्थ जानते

482
00:33:06,880 --> 00:33:10,880
हैं। नो यू डोंट ट्राई टू क्रिटिसाइज एनी प्रॉफिट। तारा को नहीं मैं क्रिटिसाइज

483
00:33:10,880 --> 00:33:14,880
नहीं कर रहा हूं। और क्या कह रहे हैं? गलत गलत लिखा है। आप क्रोध गलत व्याख्या कर रहे हैं। नहीं मैं ये पूछ रहा हूं।

484
00:33:14,880 --> 00:33:18,960
राम ने रावण को मारा। बताइए। देखा आपने? अब जो शास्त्र में

485
00:33:18,960 --> 00:33:20,400
प्राप्त हुआ। शास्त्र लिखा है ये?

486
00:33:20,400 --> 00:33:24,480
हां? ये शास्त्र में लिखा राम ने रावण को मारा है। हां। कहां लिखा है? युद्ध कांड में। हां।

487
00:33:24,480 --> 00:33:28,640
युद्ध का मतलब क्या होता है? लड़ाई। हां। ये कहां लिखा है? युद्ध मतलब लड़ाई। वाल्मीकि रामायण

488
00:33:28,640 --> 00:33:32,640
में। कहां लिखा है? युद्ध का मतलब लड़ाई कहां दिया है? अरे तो युद्ध दिया

489
00:33:32,640 --> 00:33:36,720
है। जो शब्दकोश है। युद्ध मतलब शब्दकोष किसने लिखा है? रिलाई मास्टर लिखे

490
00:33:36,720 --> 00:33:40,960
हैं शब्दकोश। तो महाराज जी ऐसे तो हम बात भी नहीं कर पाए। कुछ भी सब सभी सब सभी कुछ।

491
00:33:40,960 --> 00:33:45,120
थोड़ी बात करेंगे आपसे। जी। युद्ध का मतलब लड़ाई नहीं होता है। तो लड़ाई

492
00:33:45,120 --> 00:33:49,120
है दुनिया में कि नहीं है। लड़ाई नहीं है। दुनिया में लड़ाई नहीं है। इंडिया पाकिस्तान में

493
00:33:49,120 --> 00:33:53,120
लड़ाई नहीं है। लड़ाई नहीं है। बांग्लादेश में हिंदू मारे लड़ाई नहीं कुछ और है वो

494
00:33:53,120 --> 00:33:57,200
तो जो भी है वही होता है ना सिरम होता है ना हां उसमें लड़ाई दिखाते होता नहीं

495
00:33:57,200 --> 00:34:01,440
है प्रकाश किरणें रा तो बस वही दिखाई वो दिखावे वाला युद्ध दिखाई गलत

496
00:34:01,440 --> 00:34:06,000
है जो आप समझ रहे हैं गलत है वो वो चीज सही नहीं है

497
00:34:06,000 --> 00:34:10,400
ठीक है महाराज जी वो चीज सही नहीं है ठीक है तो एक

498
00:34:10,400 --> 00:34:14,400
थोड़ा सा चलने से पहले एक चीज और है कि महाराज अगर आपको

499
00:34:14,400 --> 00:34:18,400
चाहते हो जनता ठीक से आए तो उसको भ्रमित मत करिए जी जी हां कुरान में

500
00:34:18,400 --> 00:34:22,560
बाइबल में हर जगह केवल वही लिखा जो होली साइंस में है। जो महात बाबा

501
00:34:22,560 --> 00:34:26,720
ने लिखा है। जो राम और कृष्ण ने कहा, जो बुद्धा ने कहा, वही मोहम्मद

502
00:34:26,720 --> 00:34:30,960
ने कहा है, ईसा नहीं कहा है। आप भेद मत पैदा करके झगड़ा मत लगवाइए समाज

503
00:34:30,960 --> 00:34:35,200
में। नहीं तो आपको दंड मिलेगा, आप बीमार होंगी। फिर हमारे पास आएंगे आप ठीक कराने

504
00:34:35,200 --> 00:34:36,160
के लिए।

505
00:34:36,160 --> 00:34:40,240
अच्छा ठीक है। एक लॉजिकल एक ये भी भेज दीजिएगा।

506
00:34:40,240 --> 00:34:44,240
अगर आपको कुरान और ये सब चीजें मानते अलग-अलग है। तो आपको

507
00:34:44,240 --> 00:34:48,240
परेशानी नहीं हम जिज्ञासा कर रहे हैं। जिज्ञासा गलत जिज्ञासा है यार। फालतू टाइम

508
00:34:48,240 --> 00:34:52,240
वेस्ट करते हैं हमारा। ये सब नहीं देते इंटरव्यू। जी जी हमारा YouTube करोड़ों

509
00:34:52,240 --> 00:34:56,480
में जाता है। जी जी आई डोंट नीड दिस इंटरव्यू। एक दूसरी चीज है महाराज जी

510
00:34:56,480 --> 00:35:01,280
ये जैसे आप बात कर लीजिए

511
00:35:01,280 --> 00:35:05,440
या तो थोड़ा यहां पर है बहुत बढ़िया चल रहा है। अच्छा

512
00:35:05,440 --> 00:35:09,680
लोग जाने नहीं नहीं हम टाइम नहीं। बस पांच मिनट लास्ट है। बस नहीं एक मिनट पूछिए

513
00:35:09,680 --> 00:35:13,760
जो पूछिए। हां 1 मिनट 1 मिनट। टोटल बता दें। आप मोहम्मद की पूजा करिए। वो

514
00:35:13,760 --> 00:35:17,920
हो गया पूजा करिए। हो गया क्लियर हो गया। और मोजेज की करिए। इब्राहिम की करिए।

515
00:35:17,920 --> 00:35:22,080
भगवान राम की करिए, कृष्ण करिए, गुरु नानक देव की करिए,

516
00:35:22,080 --> 00:35:26,240
कबीर साहब की करिए। ये सब की पूजा सब ने एक ही ज्ञान दिया है।

517
00:35:26,240 --> 00:35:30,320
ये सारे मैं वही ठीक है मैं वो हो गया। महाराज जी जैसे एक लॉजिकल क्वेश्चन

518
00:35:30,320 --> 00:35:34,400
आता है कि जैसे हम बात ये लॉजिक लॉजिक मतलब क्या है? लॉजिक मतलब क्या है? अरे महाराज जी

519
00:35:34,400 --> 00:35:38,560
मुझे पूछने लॉजिक मतलब है ना? लॉजिक मतलब है जो सही चीज पर आइए ना। लॉजिक

520
00:35:38,560 --> 00:35:42,640
गलत चीज पर आएंगे आप। मैं दूसरी चीज ये चैप्टर क्लोज हो गया। आपने क्लियर कर दिया। अब

521
00:35:42,640 --> 00:35:46,800
दूसरी चीज पे आ रहा हूं। यह है जैसे कई बार यह आता है जैसे हम कहते

522
00:35:46,800 --> 00:35:50,800
हैं कि परमहंस योगानंद जी ने ये कहा है या महावतार बाबा जी ने

523
00:35:50,800 --> 00:35:51,520
ये कहा है।

524
00:35:51,520 --> 00:35:55,840
तो जैसे हम उनके नाम से एक बुक खोल के दिखा रहे हैं। ये बुक है। है ना?

525
00:35:55,840 --> 00:35:59,920
अब ये हम कैसे मान लें? मतलब इसका इसके पीछे लोगों को क्या जवाब दें? जब

526
00:35:59,920 --> 00:36:04,000
वो ये पूछे सुनिए तो सुनिए तो कि ऐसा तो

527
00:36:04,000 --> 00:36:08,240
नहीं पहले बता दे रहे हैं। सब जवाब प्रैक्टिस मिलता है। सुनिए तो कि

528
00:36:08,240 --> 00:36:12,240
इस बारे में इस क्वेश्चन का क्या आंसर हो सकता है? जब वो ये कहे ये बुक आपने

529
00:36:12,240 --> 00:36:16,480
अपने मन से तो नहीं छपवा दी उनके नाम से। छपवा दी अपने मन से। पढ़िए। इस मैंने छपवा

530
00:36:16,480 --> 00:36:20,480
दिया आप ना पढ़िए और बताइए। चलिए ठीक है महाराज जी आप

531
00:36:20,480 --> 00:36:24,640
नाराज ना हो। नाराज नहीं हो रहे हैं। आप झूठ बोल रहे हैं सफरिंग आपको आएगी।

532
00:36:24,640 --> 00:36:28,720
गौरा गुमराह मत करिए। ये छपाया एसआरएफ ने।

533
00:36:28,720 --> 00:36:32,800
सेल्फ एस एंड फेलोशिप में छपवाए इसको। पूरी दुनिया जानती है। ये उसका

534
00:36:32,800 --> 00:36:36,880
पब्लिकेशन है। जैसे हम क्लेम कर देते हैं ना कि एसआरएफ ही है ये। ये

535
00:36:36,880 --> 00:36:40,960
हमने नहीं इसका मतलब एसआरएफ को हम प्रमाणिक माने। बिल्कुल प्रमाणिक है। मगर जो बुद्ध के विषय

536
00:36:40,960 --> 00:36:45,040
में बता रहे हैं उनको प्रमाणिक माने। एसआरएफ बता रहा है बुद्ध के विषय में। यही बता रहे

537
00:36:45,040 --> 00:36:49,200
हैं तो हमने एक को किसी नहीं केवल एसआरएफ टीचिंग

538
00:36:49,200 --> 00:36:53,360
सही है हम बता देना आपको अच्छा केवल एसआरएफ एसआरएफ का मतलब क्या है महाराज

539
00:36:53,360 --> 00:36:57,360
जी परमहंस योग इंस्टीट्यूशन जो अमेरिका में है जो रांची में है वही

540
00:36:57,360 --> 00:37:01,360
शिक्षा जो यहां दी जा रही है उसके अलावा कोई चीज सच नहीं है उसको सच माने

541
00:37:01,360 --> 00:37:05,520
और बाकी जो भी कुछ कह रहा है वो झूठ उससे उससे कठिनाई दूर होती

542
00:37:05,520 --> 00:37:06,800
है बीमारी दूर

543
00:37:06,800 --> 00:37:10,800
होती है आप सच को पकड़िए तो आप चैनल खुद चलाएं किसी के अधीन नहीं रहेंगे

544
00:37:10,800 --> 00:37:14,880
आप नहीं तो आप किसी के अधीन रहेंगे जी ऐसे तो बागेश्वर वाले भी

545
00:37:14,880 --> 00:37:19,120
कहते हैं हमारे यहां बीमारी दूर होती है। हां। कहां-कहां सिद्ध किया उन्होंने? अब सिद्ध

546
00:37:19,120 --> 00:37:23,120
किया। आपको प्रणाम कर रहे हैं। आप नुकसान अपना उठा रहे हैं। चलिए ठीक है। अब दोबारा आपको कभी चरणों

547
00:37:23,120 --> 00:37:27,360
में नहीं बुलाएंगे। अरे नहीं महाराज जी नहीं माइक टाइम। चलिए ठीक है महाराज जी।

548
00:37:27,360 --> 00:37:31,520
हम कह रहे हैं आप फालतू बातें कर रहे हैं। कुछ आप कुछ कुछ नहीं है। आप आप नहीं फालतू

549
00:37:31,520 --> 00:37:35,760
बातें मत मत करिए। सब मैसेज दीजिए। चलिए ठीक है। हां आप भुगत जाएंगे। बता डोंट रिलीज

550
00:37:35,760 --> 00:37:39,840
माय एनी मैसेज। क्या आप गलत मैसेज कर रहे हैं ना? इसे हम किसी को नहीं देते हम। एक आदमी आए

551
00:37:39,840 --> 00:37:44,480
बढ़िया पूछ के गए थे वो। अच्छा। हां। हां आप तो फालतू चीजें पूछ रहे हैं।

552
00:37:44,480 --> 00:37:48,640
सोच रहे हैं आप व्यूअर बढ़ा रहे हो उल्टा सीधा। अरे नहीं नहीं महाराज जी व्हाट डज इट मीन? महाराज

553
00:37:48,640 --> 00:37:52,800
जी व्हाट डज इट मी? टेल मी। मैं वही बता रहा था। क्या बता रहे हैं जी? गलत बात

554
00:37:52,800 --> 00:37:56,880
करते हैं। आपको आता कुछ नहीं उसके बारे में बता रहे हैं। प्रश्न कौन करता है? जो ज्ञानी

555
00:37:56,880 --> 00:38:02,400
होता है सभी को जय श्री राम।

556
00:38:02,400 --> 00:38:06,400
हम इस समय हंस भगवान की जन्मस्थली के पास खड़े हुए हैं

557
00:38:06,400 --> 00:38:10,640
और आप देख सकते हैं मेरे पीछे जो दीवार और उसके ऊपर फेंसिंग लगी हुई है।

558
00:38:10,640 --> 00:38:14,880
उधर जाने पर प्रतिबंध लगा हुआ है। अ इसके पीछे

559
00:38:14,880 --> 00:38:19,280
ही संध्या वट है। हंस भगवान का मंदिर है। हंसकूप है। जन्म स्थली

560
00:38:19,280 --> 00:38:22,000
जो कि पूरी तरीके से अतिक्रमण कार्यों के कब्जे

561
00:38:22,000 --> 00:38:26,080
में है। और यहां पर जो हर

562
00:38:26,080 --> 00:38:30,800
सामान्य से सामान्य हिंदू के लिए सुलभ होना चाहिए। हंस भगवान

563
00:38:30,800 --> 00:38:35,120
जो संध्या वट है, हंस भगवान का मंदिर है, हंसकूप है इत्यादि का

564
00:38:35,120 --> 00:38:39,200
जो सुलभ होना चाहिए वो इस समय प्रतिबंधित है और एक सामान्य

565
00:38:39,200 --> 00:38:43,440
जन जो अपने जन्मों जन्मों के पापों से मुक्त हो सकता है दर्शन

566
00:38:43,440 --> 00:38:47,520
मात्र से, स्नान मात्र से या फिर यहां पर संध्या करने मात्र से

567
00:38:47,520 --> 00:38:51,920
वो आज उसके लिए सुलभ नहीं है। क्योंकि जो

568
00:38:51,920 --> 00:38:56,080
अह अतिक्रमण करने वाले लोग हैं उन्होंने इसको जो है अपनी सीमा

569
00:38:56,080 --> 00:39:00,160
में डाल करके और इसकी जो वास्तविकता इसकी जो आध्यात्मिक पहचान

570
00:39:00,160 --> 00:39:04,240
है उसको छीनने का प्रयास किया है। तो अब इससे आगे जो आप

571
00:39:04,240 --> 00:39:08,400
वीडियो देखने वाले हैं या जो वीडियो आपने देखा है यह जो वीडियो

572
00:39:08,400 --> 00:39:12,880
आपने देखा है यह वही व्यक्ति है जिसकी ये सारी जो

573
00:39:12,880 --> 00:39:17,040
बाउंड्री आपको दिखाई देगी जब आप गंगा का पुल क्रॉस करेंगे प्रयागराज

574
00:39:17,040 --> 00:39:21,760
आने पर तो जब आप पुल को क्रॉस कर रहे होंगे तभी आपको दिखने लगेगा क्रिया

575
00:39:21,760 --> 00:39:26,160
योग आश्रम यह बड़ा-बड़ा नाम आपको दिखने लगेगा और आप देखिएगा कि कितनी

576
00:39:26,160 --> 00:39:30,240
सारी भूमि में जगह-जगह पर यह सब मतलब ऐसा लगेगा कि पूरा

577
00:39:30,240 --> 00:39:34,240
का पूरा एक एंपायर खड़ा किया जा रहा है। अब अंदरूनी तौर पर जब हमने इनको

578
00:39:34,240 --> 00:39:37,040
देखा तो इन्होंने अपने यहां पर स्वयं

579
00:39:37,040 --> 00:39:41,200
को एक गुरु के रूप में आध्यात्मिक स्पिरिचुअल सो कॉल्ड

580
00:39:41,200 --> 00:39:45,440
स्पिरिचुअल लीडर के रूप में स्थापित किया हुआ है। तो सो कॉल्ड स्पिरिचुअल

581
00:39:45,440 --> 00:39:50,240
लीडर जब बन जाता है तो फिर हमारे पास आधार आ जाता है कि हम उससे उसका

582
00:39:50,240 --> 00:39:54,480
जो वो आध्यात्मिक गुरु बन रहा है उसके बारे में कुछ प्रश्न कर सकें। इसने अपने

583
00:39:54,480 --> 00:39:58,720
यहां पर श्री राम, कृष्ण इत्यादि को मोहम्मद और जीसस जैसे

584
00:39:58,720 --> 00:40:03,120
व्यक्तित्व के साथ भी खड़ा किया और स्वयं को भी उसी रूप में वहां पर विराजमान

585
00:40:03,120 --> 00:40:07,200
कर रखा है फोटोज में और योगानंद

586
00:40:07,200 --> 00:40:11,360
जी करके कोई हैं उनको भी। तो जो वीडियो है उसमें मोटे-मोटे

587
00:40:11,360 --> 00:40:15,360
कुछ तीन प्रश्न हैं। पहला प्रश्न यह है कि अगर

588
00:40:15,360 --> 00:40:19,360
आप महात्मा गांधी की तरफ से कुछ क्लेम कर रहे हैं तो महात्मा

589
00:40:19,360 --> 00:40:23,360
गांधी ने ऐसा कब कहा? प्रामाणिक तौर पर हम यह कैसे स्वीकार कर

590
00:40:23,360 --> 00:40:27,360
सकते हैं? उस बारे में इस व्यक्ति का कोई जवाब नहीं था। दूसरा

591
00:40:27,360 --> 00:40:31,360
प्रश्न था कि भाई ईश्वर है यह सिद्ध कैसे हो सकता है?

592
00:40:31,360 --> 00:40:35,520
कैसे होता है ईश्वर सिद्ध? तो इसने कहा यहां क्रिया योग में आइए और सिद्ध हो जाएगा।

593
00:40:35,520 --> 00:40:39,600
अंत में तो इसने कई बातों के प्रश्न में मतलब अंत में तो इसका एक ही था कि आप क्रिया

594
00:40:39,600 --> 00:40:43,680
योग करिए सब सब हो जाएगा। तो फिर हम लोग चर्चा करने बैठे क्यों थे? जब क्रिया

595
00:40:43,680 --> 00:40:47,760
योग करने से ही सब कुछ मालूम पड़ना है तो आप क्यों बैठकर के प्रवचन दे रहे हो?

596
00:40:47,760 --> 00:40:51,840
तो कहने का मतलब है इनके पास कुछ भी ज्ञान नहीं है। एक स्पिरिचुअल लीडर वाला

597
00:40:51,840 --> 00:40:52,340
जो

598
00:40:52,080 --> 00:40:56,160
कि आगे हमने देखा जब हमने कहा कि ईश्वर है यह कैसे सिद्ध होता है तो इन्होंने

599
00:40:56,160 --> 00:41:00,240
कहा भाई ईश्वर को क्रिया योग करने से ही सिद्ध कर पाओगे उसमें तरह-तरह के वो आप

600
00:41:00,240 --> 00:41:04,320
देख सकते हैं तर्क करने लगे तो ईश्वर है ये सिद्ध होता है कैसे सिद्ध

601
00:41:04,320 --> 00:41:08,480
होता है बृहधारणक उपनिषद एक तीन 28 असतो मा सद्गमया तमसो

602
00:41:08,480 --> 00:41:12,560
मा ज्योतिर्गमया मृत्युमा मृतमगमया एक नास्तिक के अंदर भी

603
00:41:12,560 --> 00:41:16,720
कभी ना मरने की प्यास विद्यमान है एक नास्तिक के अंदर भी सब कुछ

604
00:41:16,720 --> 00:41:20,800
जान लेने की चाह विद्यमान है एक नास्तिक के अंदर भी सदा सुखी

605
00:41:20,800 --> 00:41:25,040
रहने की चाह विद्यमान है। तो इसी चाह को कहते हैं सतच्चितानंद।

606
00:41:25,040 --> 00:41:29,280
तो अब एक नियम है कि हमारे अंदर जो जो इनबिल्ट इच्छाएं

607
00:41:29,280 --> 00:41:33,280
हैं उनका सब्जेक्ट उनका निवारण करने वाला जो सब्जेक्ट है वह इस दुनिया में

608
00:41:33,280 --> 00:41:37,440
मौजूद है। जैसे हमारे अंदर प्यास है तो दुनिया में पानी है। हमारे अंदर भूख है तो दुनिया

609
00:41:37,440 --> 00:41:42,400
में भोजन है। तो जिस प्रकार एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी व्याप्त

610
00:41:42,400 --> 00:41:46,560
अह पानी की प्यास होने से ही पानी का अस्तित्व सिद्ध होता है। उसी

611
00:41:46,560 --> 00:41:50,960
प्रकार से एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी व्याप्त सच्चित

612
00:41:50,960 --> 00:41:55,120
आनंद की चाह मात्र से सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर का अस्तित्व सिद्ध

613
00:41:55,120 --> 00:41:59,120
होता है। अब अगला प्रश्न आता है कि धर्म क्या है? तो मैंने उपयोगिता

614
00:41:59,120 --> 00:42:03,280
के अनुसार जब धर्म की व्याख्या पूछी तो जहां धारण करता है वो धर्म है। तो धारण तो

615
00:42:03,280 --> 00:42:07,120
उसने मालाएं भी कर रखी हैं। धारण तो उसने एक डंडा भी कर रखा है जिसको वो दंड

616
00:42:07,120 --> 00:42:11,120
कह रहा है। उसमें स्टार बना हुआ है। हां। तो वो धर्म है क्या? तो

617
00:42:11,120 --> 00:42:15,200
ठीक है। धारण कर रहा है वो धर्म है। हम पूछ रहे हैं उसकी उपयोगिता क्या है? एडवांटेज क्या है?

618
00:42:15,200 --> 00:42:19,440
यदि हम धर्म को फॉलो करते हैं तो हमें क्या मिलेगा? तो वह हमें यह नहीं बता पाया

619
00:42:19,440 --> 00:42:23,520
कि जीव की चाह का वास्तविक विषय सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को

620
00:42:23,520 --> 00:42:27,600
परिभाषित कर सकने वाले शास्त्रों द्वारा जीव की चाह के वास्तविक

621
00:42:27,600 --> 00:42:31,680
विषय सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त करने के निमित्त बताई गई विधि का नाम

622
00:42:31,680 --> 00:42:35,760
धर्म है। यानी कि धर्म का जब आप पालन करते हैं तो आपका जो

623
00:42:35,760 --> 00:42:39,920
चाह का वास्तविक विषय है सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर वो आपको प्राप्त होता है।

624
00:42:39,920 --> 00:42:44,000
इसके अलावा इस व्यक्ति ने और भी बहुत सारी चीजें बोली। जैसे कि

625
00:42:44,000 --> 00:42:48,000
बुद्ध जो थे वह आस्तिकवादी थे। उनके यहां पर नास्तिकता नहीं थी। जबकि वह ईश्वर

626
00:42:48,000 --> 00:42:52,160
का अस्तित्व ना मानने वाली कम्युनिटी है। हमने इसने जब यह कहा कि बुद्ध

627
00:42:52,160 --> 00:42:56,240
के बारे में योगानंद जी ने लिखा है तो योगानंद जी की एक बुक में उन्होंने बहुत सारी चीजें लिखी

628
00:42:56,240 --> 00:43:00,320
हैं। तो क्या बुद्ध का पूरा का पूरा दर्शन आ गया उसमें? तो हमने जब कहा कि बुद्ध ने

629
00:43:00,320 --> 00:43:04,320
कहां पर क्या लिखा है कि योगानंद जी ने कहा है इसलिए मान रहे। तो इसने हर बात में यही कहा

630
00:43:04,320 --> 00:43:08,320
कि योगानंद जी ने क्योंकि कहा है तो इसलिए वो ऐसा था। योगानंद जी ने जो कहा है तो इसलिए

631
00:43:08,320 --> 00:43:12,320
वो ऐसा था। ठीक है? आगे हमने पूछा कि भाई इस्लाम का ईश्वर

632
00:43:12,320 --> 00:43:16,480
तो सर्वशक्तिमान नहीं है क्योंकि वो कहता है मैं अवतार नहीं ले सकता तो फिर तुम उसके साथ

633
00:43:16,480 --> 00:43:21,280
हमारे रामकृष्ण आदि को सनातन को क्यों खड़ा कर रहे हो तो फिर वो भड़क उठा है ना

634
00:43:21,280 --> 00:43:22,880
और भड़क करके

635
00:43:22,880 --> 00:43:27,200
बार-बार मुझे क्वेश्चनिंग करने से रोक रहा था एक फेक गुरु की यही पहचान

636
00:43:27,200 --> 00:43:31,200
है वो क्वेश्चनिंग करने से रोकता है या कुछ ऐसे कारण बताता

637
00:43:31,200 --> 00:43:35,280
है कि भैया मैं तुम्हारी सवाल का जवाब नहीं दे सकता तुम गलत सवाल कर रहे हो ये

638
00:43:35,280 --> 00:43:40,240
सब तो वो क्वेश्चन का आंसर नहीं दे रहा था तो फिर फिर मैंने

639
00:43:40,240 --> 00:43:44,480
लास्ट में जब ये कहा कि कुरान में लिखा है कि वो लिमिटेड है। ऐसा ऐसा

640
00:43:44,480 --> 00:43:48,560
नहीं हो सकता। हमारे ईश्वर के लिए ये नहीं कहा जा सकता कि दुनिया में कोई ऐसा

641
00:43:48,560 --> 00:43:52,560
कार्य है जो वो नहीं कर सकता। मगर कुरान के ईश्वर के लिए ये कहा जाता है कि भैया

642
00:43:52,560 --> 00:43:56,640
वो अवतार नहीं ले सकता। इसीलिए उसके यहां मूर्ति पूजा नहीं है। तो उसका कहना

643
00:43:56,640 --> 00:44:00,800
था कि कुरान वाले गलत है। मैं सही हूं क्योंकि योगानंद ने कहा है। तो अब जब

644
00:44:00,800 --> 00:44:05,040
वो पूरी दुनिया को नकार रहा है तो फिर बुद्ध का अस्तित्व कैसे सिद्ध होगा?

645
00:44:05,040 --> 00:44:09,040
मोहम्मद का अस्तित्व कहां से सिद्ध होगा? क्योंकि योगानंद की किताब में सब कुछ तो आ नहीं जाएगा।

646
00:44:09,040 --> 00:44:13,120
अब फिर भी उसने सब कुछ नकार दिया। तो लास्ट में मैंने उससे कहा कि

647
00:44:13,120 --> 00:44:17,200
जैसे तुम पूरी दुनिया को झूठा कह रहे हो जो भी कुछ बताया जा रहा है उसको तुम झूठा

648
00:44:17,200 --> 00:44:21,200
कह रहे हो। अपने योगानंद जी को सही कह रहे हो। मैं मान भी लूं कि योगानंद जी सही है। मगर

649
00:44:21,200 --> 00:44:25,280
मैं यह कैसे मानूं कि योगानंद जी के रेफरेंस से तुम जो बता रहे हो वो सही है।

650
00:44:25,280 --> 00:44:29,360
इतने में वो आदमी भड़क उठा। जब उसका ही तर्क उसी को लौटा करके

651
00:44:29,360 --> 00:44:33,440
दिया गया तो वह कॉलर निकाल के उसने डाल दिया। मुझे तरह-तरह की धमकियां देने लगा।

652
00:44:33,440 --> 00:44:38,160
इसके बीच में आपने उसका व्यवहार भी देखा होगा कि किस तरीके से वो

653
00:44:38,160 --> 00:44:42,160
कहेंगे कि बदतमीजी कर रहा था। कह रहा था कि तुम ऐसी नौकरी

654
00:44:42,160 --> 00:44:46,480
कर रहे हो इसीलिए यहां हो वहां हो। वो बहुत बड़ा भाई हम मनुवादी

655
00:44:46,480 --> 00:44:50,640
हैं। शंकर की सेना है हम। और जो है ना उसके साथ

656
00:44:50,640 --> 00:44:54,640
हम शांति से सोते हैं। तुम्हारी तरह बाल खड़े नहीं हो गए हमारे। है ना?

657
00:44:54,640 --> 00:44:58,800
जो वो कुछ कॉमेडी फिल्में देखी होंगी ना उसमें वो कड़वी चाय पी लेती

658
00:44:58,800 --> 00:45:02,800
तो वो बाल खड़े हो जाते। वैसे बाल नहीं खड़े हो गए हमारे। ठीक है? तो

659
00:45:02,800 --> 00:45:06,800
यह सब अंत था उसका। तो आप देख सकते हैं किस-किस लेवल का स्पिरिचुअल लीडर है

660
00:45:06,800 --> 00:45:10,800
और ये टकरा किनसे रहा है मनुवादियों से। जय श्री राम।
