1
00:00:23,580 --> 00:00:29,580
[संगीत]

2
00:00:36,080 --> 00:00:36,580
शास्त्र

3
00:00:36,480 --> 00:00:40,560
कहां से आए आपके पास? शास्त्र हमारे पास गुरु परंपरा से प्राप्त हुए। आचार्य परंपरा से प्राप्त

4
00:00:40,560 --> 00:00:46,160
हुए। किसी एक गुरु परंपरा को मानना पड़ेगा ना। इससे प्राप्त हुए। किससे प्राप्त हुए?

5
00:00:46,160 --> 00:00:50,240
किसी एक परंपरा को मानना पड़ेगा ना और फिर उसका आप खंडन नहीं कर पाएंगे। तो अब मुझे

6
00:00:50,240 --> 00:00:54,240
आप बताइए कि आपको किस परंपरा से प्राप्त हुआ है कि वो सबरी के झूठे रामायण कहां

7
00:00:54,240 --> 00:00:58,640
से आई आपके पास? कुसुंडी रामायण से प्राप्त हुआ है। कुसुंडी रामायण कहां से आई है आपके पास?

8
00:00:58,640 --> 00:01:02,720
हमको अपने अध्ययन से प्राप्त हुआ है। स्वा अध्ययन वो सभी ग्रंथों को

9
00:01:02,720 --> 00:01:06,800
तो गीता प्रेस वाला जो छाप देगा वो हो जाएगा आपका प्रमाण। आप जावे तो शास्त्र आपके पास आए

10
00:01:06,800 --> 00:01:10,800
कहां से? बिना गुरु परंपरा के। आपकी क्या गुरु परंपरा है? कहां से आए हैं? हमारे शास्त्र

11
00:01:10,800 --> 00:01:14,800
हमारे साथ अतीत धन्मांतर विद्यमान है। और शास्त्र एक शास्त्र पूरा

12
00:01:14,800 --> 00:01:18,000
सुना दीजिए अभी। चलिए कौन सा शास्त्र? तो सब प्राप्त है ना? क्यों सुनाए?

13
00:01:18,000 --> 00:01:22,080
हम आपको क्यों सुनाए? यानी कि इसको कैसे माने हम? तो आप मत मानिए। आपकी निजी धारणा से हमारा संप्रदाय

14
00:01:22,080 --> 00:01:26,160
थोड़ी बिगड़ रहा है। इसका मतलब आपसे ना पूछा जाए कि निग्रह परंपरा कैसे क्या है? नहीं बिल्कुल

15
00:01:26,160 --> 00:01:30,160
पूछा जाएगा। पूछेंगे तो आप ये कहेंगे आपके गुरु ये कह रहे हैं और श्रृंगरी के ये कह रहे हैं। हमने

16
00:01:30,160 --> 00:01:34,240
तो उस पर कई बार कहा है कि भगवान सिद्धानाथ जी से हमारी परंपरा है। जिनको आदि शंकराचार्य ने भी प्रणाम किया

17
00:01:34,240 --> 00:01:38,400
है। गुरु मंत्र और सिद्धांत कहां से मिला है? हमको उन्हीं की कृपा

18
00:01:38,400 --> 00:01:42,400
से प्राप्त हुआ है। अरे स्वप्न में मिला है। कैसे मिला है? हम इस

19
00:01:42,400 --> 00:01:46,720
विषय में आपको इसीलिए नहीं बताएंगे क्योंकि आपकी गुरु परंपरा आपकी अपनी अनता पर आश्रित हो गई।

20
00:01:46,720 --> 00:01:47,680
आपकी शास्त्रीयता

21
00:01:47,680 --> 00:01:51,680
पूछी जा रही है आपकी परंपरा के लिए तो उसमें आप सारी बातें बता रहे हैं। उसकी प्रामाणिकता

22
00:01:51,680 --> 00:01:55,680
के विषय में आप कह रहे हैं कि नहीं बताएंगे हम। हम मार्ग की प्रामाणिकता के बारे में ये कहा जाता

23
00:01:55,680 --> 00:01:59,760
है कि न कुरत संभाषणम जो दीक्षित

24
00:01:59,760 --> 00:02:03,760
ना हो उसको वैयक्तिक स्तर पर संतुष्ट करने के लिए उसका उपदेश ना करें। श्रुति क्या प्राप्त

25
00:02:03,760 --> 00:02:07,920
कहने का अर्थ ये है कि आप सब सवाल उठाएंगे। आप सवाल का उत्तर नहीं देंगे किसी।

26
00:02:07,920 --> 00:02:12,000
कैसे करेंगे आप? उन्हीं शब्द प्रमाणों से सिद्ध करें। शब्द प्रमाण आपके पास आए कैसे? जब उन

27
00:02:12,000 --> 00:02:16,160
शब्द प्रमाण को देने वाले पर आपका भरोसा नहीं है। किसने हमें दिया बताइए और किस पर भरोसा

28
00:02:16,160 --> 00:02:20,320
नहीं? किसी ना किसी परंपरा पे आश्रित होना पड़ेगा। अगर हम गुरु के बिना शास्त्र

29
00:02:20,320 --> 00:02:24,320
को लेंगे तो शास्त्र की प्रमाणिकता कहां से आएगी? गुरु के बिना शास्त्र को लेने की बात हमने अभी

30
00:02:24,320 --> 00:02:28,560
तक नहीं कही है। हमने क्या कहा? आपको कौन सा गुरु है आपका? आपका सिद्धांत कहां से आए?

31
00:02:28,560 --> 00:02:32,720
हमारा सिद्धांत धर्म से चलता है। हमारा सिद्धांत धर्म शास्त्र से चलता है। वो शास्त्र कहां से आए आपके?

32
00:02:32,720 --> 00:02:36,960
बस शास्त्र अनादि परंपरा से हमें प्राप्त है। जो आप कान में आए कान में आए। आपके

33
00:02:36,960 --> 00:02:41,040
सिद्धांत आपको कहां से मिले? वो बताओ। हमको सिद्धांत इन्होंने दिया। कान में दिया। हां।

34
00:02:41,040 --> 00:02:45,600
कान में दिया माथा में दिया शास्त्र में दिए तो एक शास्त्र सुना दीजिए वाल्मीकि रामायण

35
00:02:45,600 --> 00:02:49,920
क्यों शास्त्र इसका मतलब नहीं दिए प्रोपगंडा था क्या

36
00:02:49,920 --> 00:02:54,080
शास्त्र के वचनों आपको कान में भगवती दे रही है सुना दीजिए वाल्मीकि रामायण को

37
00:02:54,080 --> 00:02:58,160
एक आखरी बात आपने कृपा कही है भगवती की भगवती ने आपको वरदान

38
00:02:58,160 --> 00:03:02,400
दिया है कि आपकी कर्मेंद्रियों से गलती नहीं होगी हमारी भगवती ने यह कहा है कि अगर

39
00:03:02,400 --> 00:03:02,900
तुम्हारी

40
00:03:02,720 --> 00:03:06,800
बुद्धि भटकेगी तो क्रिया पर नियंत्रण होगा क्रिया भटकेगी तो विवेक तुम्हारा वहां पर

41
00:03:06,800 --> 00:03:11,360
संभाल लेगा ये रोक लेगा ठीक है तो वाक्य स्कलश क्यों नहीं वाकलन

42
00:03:11,360 --> 00:03:15,440
अधर्म नहीं है ना क्योंकि हम उसका वाकस्लन का मतलब क्या है? क्या है बताइए?

43
00:03:15,440 --> 00:03:19,440
आपकी जीवा से कुछ झूठ निकला ना। क्या असत्य निकला बताइए? कि वो जो आपने लेडी

44
00:03:19,440 --> 00:03:23,600
की पिक्चर दिखाई थी वो लेडी विजयश्री नहीं। तत्काल हमने उसका शोधन किया कि नहीं? अरे तो उस समय

45
00:03:23,600 --> 00:03:27,600
तो अधर्म हुआ ना जीवा से। अधर्म को हम प्रोत्साहित करने के लिए झंडा का गाड़ कर नहीं बैठ

46
00:03:27,600 --> 00:03:31,920
गए कि यह सत्य है। अरे बात ये हो रही है होगा ही नहीं। क्यों? अधर्म

47
00:03:31,920 --> 00:03:36,320
का हम समर्थन नहीं करते हैं। विवेक यहीं पर काम करता है ना।

48
00:03:36,320 --> 00:03:40,400
यानी कि क्रिया तो होगी मगर बाद में उसका शोधन करेंगे आप। बाद में क्या क्रिया

49
00:03:40,400 --> 00:03:45,200
बहुत न्यूनतम गलत होगी और कदाचित न्यूनतम का पैरामीटर क्या है? कितनी गलत होगी

50
00:03:45,200 --> 00:03:48,480
आपको क्यों दें? फिर मतलब कोई भी चार पीठ पर बस यही चीज है कि

51
00:03:48,480 --> 00:03:52,480
कुल मिलाकर के सारे मान लीजिए मान लीजिए कि उन्होंने चार पीठे बनाई

52
00:03:52,480 --> 00:03:56,880
है वो पांचवी पीठ कह भी रहे तो इससे आपकी प्रमाणिकता सिद्ध हो गई।

53
00:03:56,880 --> 00:04:00,880
शास्त्र कहां से मिला आपको बताइए? अब कान में दिया

54
00:04:00,880 --> 00:04:05,280
तो पूछ रहे हैं इसको मतानुज्ञा निग्रह स्थान कहा जाता है।

55
00:04:05,280 --> 00:04:10,720
मतानुज्ञा निग्रह स्थान का क्या अर्थ है? कि हमने आप पर कोई

56
00:04:10,720 --> 00:04:14,880
आपने कहा हां ठीक है हम पर आरोप है लेकिन तुम कौन से दूध के धूल हो तुम पर भी तो आरोप है

57
00:04:14,880 --> 00:04:19,040
तो अगर आप यह कहते हैं तुम पर भी आरोप है इससे यह सिद्ध नहीं होता कि पहला वाला आरोप निरस्त

58
00:04:19,040 --> 00:04:23,200
हो गया जैसे कोई व्यक्ति कहे कि तू लंगड़ा है दूसरा वाला कहे तो तुम्हारे अंदर कौन

59
00:04:23,200 --> 00:04:27,200
सी दिव्यता है भैया तू ही तो आंख से अंधा है मतलब तू तो विकलांग है

60
00:04:27,200 --> 00:04:31,200
अब कहेगा अंधा कैसे देखा लंगड़ा है तो नहीं तो समाज ने बताया कि वो लंगड़ा है तो

61
00:04:31,200 --> 00:04:35,360
तू ही तो अंधा है तो उसके अंधा होने की सिद्धि से उसका लंगड़ा होना

62
00:04:35,360 --> 00:04:41,360
गलत नहीं हो जाता यह मतानुज्ञा नामक गृहस्थ

63
00:04:45,580 --> 00:04:49,580
[संगीत]
