⬜ Not used yet · 00:00:07:08 – 00:35:44:00 (35:37)
00:00:07:08 तो सभी को जय श्री राम। आज हम एक क्या कहते हैं हमारे साथ में हैं संदीप कुमार जी और ये जो ब्रह्मा कुमारीज हैं उनके द्वारा जो दी गई शिक्षाएं हैं उनका मतलब उनको उनका पालन करते हैं और उसी संबंध में कुछ हमारी आज बातचीत होने वाली है। तो सबसे पहले संदीप जी आप थोड़ा सा अपना परिचय दे दें कि ब्रह्मा कुमारीज में कहां से आप जुड़े हुए हैं और जो भी थोड़ा बहुत कुछ आप बताना चाहते हो अपने परिचय से संबंधित ठीक है बहुत संक्षिप्त में थोड़ा सा जय श्री राम मित्रों ओम नमः शिवाय मित्रों हम ब्रह्मा कुमारी ईश्वरी विश्वविद्यालय में सन 2009 में गए थे वहां की शिक्षाओं शिक्षाओं को अपन ने पढ़ा सुना समझा उसके बाद फिर कहां वाले कहां वाले उन्नाव उन्नाव उन्नाव बहुत सारी शाखाएं हैं ना आप कहां से जुड़े हम उन्नाव प्रॉपर उन्नाव से उन्नाव लखनऊ के पास जो उन्नाव जिला लखनऊ कानपुर के बीच में उन्नाव अच्छा ठीक तो हमारी शुरुआत जो स्टार्टिंग आध्यात्मिक लाइन से हुई थी आध्यात्मिक फील्ड में वो यहीं से हुई थी अच्छा अच्छा ठीक है इसके बाद फिर एक आता है शंकर पार्टी ऐसे करके आध्यात्मिक संस्था उसमें
00:01:22:09 भी अपन गए थे आध्यात्मिक विश्वविद्यालय जी जी वहां की भी शिक्षाओं का हमने ने आकलन अवलोकन किया जो वीरेंद्र देव दीक्षित ने चालू किया था। जी जी जी अच्छा उसके बाद फिर अपन ओम मंडली में भी गए। वहां एक ऐसे रायपुर छत्तीसगढ़ में पड़ती है। वहां का वहां की भी शिक्षाओं को हमने सुना समझा। तो अभी आप इनमें से किससे डायरेक्टली हैं कनेक्टेड? अभी अपन शिक्षा वहां की जो शिक्षा है मूलभूत उससे हम कनेक्ट हैं। उसका हम अनुसरण करते हैं। नहीं इनमें से तीनों की थोड़ी-थोड़ी सी डिफर है ना हल्की-हल्की सी। हां वो है तो तो किसकी वाली अब प्रॉपर नहीं हम मतलब डायरेक्ट पर्सनल कहीं से कनेक्ट नहीं है अभी वर्तमान नहीं मैं पर्सनल नहीं कह रहा हूं आप जैसे मान लीजिए इसने कहा a b 5 मान लीजिए ये कहा ब्रह्मा कुमारी ने जी एक ने कहा a b 5.1 जी जी तीसरे ने कहा a b 5.109 इस तरह से जी तो अब तीन चीजें हो गई एक ने 5.1 5.1.09 इस तरह से कुछ मतलब ये कि हमने जो आध्यात्मिक इच्छा हमने गीता से भी श्रीमद् भगवत गीता को भी हमने पढ़ाया है। मतलब इनमें से किसी का भी आप वो नहीं लेते हैं कि वो है क्या? आध्यात्मिक जो ज्ञान
00:02:37:18 है आध्यात्मिक कि आप इसके साथ खड़े हैं। अगर ये दोनों की बात चल रही तो इनमें से आप इसके साथ किसी पक्ष और विपक्ष में ये नहीं है कि हम अरे मैं आप मैं इस बारे में नहीं पूछ रहा हूं कि आप लड़ने किसकी ओर से आए हैं। मैं ये नहीं कह रहा हूं। आपने आत्मसात क्या कर रखा है? अपने कल्याण हेतु आप इनमें से किसको मान रहे हैं? ब्रह्माकुमारी को पूरा का पूरा मान रहे हैं या फिर आध्यात्मिक विश्वविद्यालय एक एक मिनट या फिर आध्यात्मिक विश्वविद्यालय को पूरा का पूरा मान रहे हैं या फिर आप जो है जो आपने एक और कोई मंडली बताई उसको पूरा का पूरा मान रहे हैं। हां। में जो ब्रह्माकुमारी की शिक्षा है उस शिक्षा से ही संबंधित कई सारी संस्थाएं शाखाएं निकली हुई है। भाई साहब आप थोड़ा सा मतलब मैं जो पूछ रहा हूं उसको आप समझ नहीं पा रहे या तो शायद मेरे शब्द बदल रहे हैं। जो आप पूछ रहे हैं मैं उसी को परिभाषित कर रहा हूं। क्यों परिभाषित कर रहे भाई साहब? मैंने समझा रहा हूं। भाई मैं पूछ रहा हूं कि अगर ओम मंडली की थोड़ी सी 0.5% भी ब्रह्मा कुमारी से अलग शिक्षा है तो इस सिचुएशन में आप ब्रह्मा कुमारीज की शिक्षा को मान रहे हैं या इसकी शिक्षा को मान रहे हैं जो 0.5% अलग है मैं ये पूछ रहा हूं तीनों जगह एक ही शिक्षा दे मैंने कहा ना थोड़ा-थोड़ा सा अंतर है आपने माना भी हां माना मतलब शिक्षा उसी शिक्षा से अपना अलग तरह से रहन-सहन
00:03:53:08 नियम कायदा बनाया अपना टैग लगाया अपना यूनिफार्म बनाया थोड़ी सी शिक्षा शिक्षा भी अलग है ना भाई साहब थोड़ी सी शिक्षा अलग है ना रहन-सहन ही नहीं थोड़ी सी वो थोड़ी सी अलग की स्थिति में आप ब्रह्मा कुमारीज की साइड है गए हां तो तीनों जगह गए फिर तीनों जने एक जगह आ गए अभी मैं कहीं नहीं हूं मतलब मैं ये नहीं कह रहा कि आप किसी सेंटर में जाते हैं कि नहीं जाते मैं कह रहा हूं कि अगर किसी ने फाइव किसी ने 5.1 और किसी ने 5.1.09 कहा है तो आप इनमें से किसकी साइड हो? हम साइड मतलब वो तीनों ही अच्छे हैं। अपने-अपने स्थान पे मैं कह रहा हूं आप उनको टैग दोगे तीनों ही अच्छे हैं। आपने अपने कल्याण हेतु क्या साध रखा है? जैसे मान लीजिए किसी ने कहा कि शंकर शिव जी आते हैं लेखराज जी के अंदर। जी। फिर किसी ने कहा कि लेखराज जी के अंदर शिव जी तो आए थे। हम मगर वो समझ नहीं पाए थे। वो समझा नहीं पाए थे कि उनकी मुरलियों का अर्थ क्या है। जी। ठीक है। वीरेंद्र देव दीक्षित। हम ठीक है और फिर किसी ने इसी तरह से और थोड़ी सी डिफरेंट बात कर दी। ठीक है? तो अब इनमें से आप क्या मानते हो कि शिवजी आए थे लेखराज जी के अंदर वो वाला या शिव जी आए थे परंतु वो समझा नहीं पाए थे वो वाला। कौन सी वाला मानते हो? ये जो मेंटालिटी है आध्यात्मिक विश्वविद्यालय
00:05:08:16 परिवार की कि शिव जी आए थे उन्होंने जो ज्ञान दिया था और उसको उन्होंने समझ नहीं पाया था। हम यह विश्वविद्या आध्यात्मिक विश्वविद्यालय जी जिसे थंकर पार्टी भी कहते हैं के नाम से उनकी यह मेंटालिटी पूरे ही आध्यात्मिक विश्वविद्यालय की मानसिकता है तो अपन लक्ष्य में नहीं है ये आप नहीं मानते तो भाई इतनी देर से मैं और क्या कह रहा हूं पूछ रहा हूं आपसे हां मतलब यही तो होता है टू द सुनिए मैं आपको फिर थोड़ा सा बता दूं थोड़ा सा टू द पॉइंट रहने की कोशिश करिए तो हमारी बहुत सुंदर चर्चा और बहुत निष्कर्षपूर्ण चर्चा होगी इसको ये कहने में आपको 10 मिनट लग गए कि भाई जब बीके के विरुद्ध जो चीज जा रही है तो उसको मैं नहीं मान रहा हूं। तो आप बीके की बीके की चीज को पूरा और जो उससे मिलताजुलता है उसको उतना मानते हो जब तक वो बीके के साथ है। मैं ये चीज बताता हूं। हां हम वो जो शिक्षाएं हैं उन शिक्षाओं को ये लोग कहते हैं कि आध्यात्मिक विश्वविद्यालय वाले कि वो जो शिक्षा दी उन्होंने अपने हृदय के उद्गारों को अभिव्यक्त किया। तो उन वो शिक्षा परमात्मा की शिक्षा है। पर वो जो देने वाला है उसको मैं नहीं मानता। इस बात इस बात मतलब इतनी बात में आप बीके के भी विरोध में हैं। नहीं बीके वाले तो मानते हैं कि जिन्होंने शिक्षा दी है और जो शिक्षा दी है शिक्षा देने
00:06:23:22 वाला और शिक्षा दोनों के पक्ष में है वो ब्रह्मा कुमारी है। तो मैं समझ गया ना मैं वही बात को एंड कर रहा हूं क्योंकि ये हमारा मुख्य टॉपिक नहीं है कि आप किसकी साइड हैं। अब जनता को पता लग गया कि आप पूरी तरीके से बीके की साइड है और जो जितने अंश में बीके को मान रहा है उतने अंश में आप उसको भी अच्छा कह रहे हैं। और जितने अंश में वो बीके का के विरुद्ध जा रहा है तो आप उसको नहीं मानते बस उस पे आप टिप्पणी नहीं कर रहे आप बस एक सेंटेंस में अगर इस एक सेंटेंस को लेकर के मतलब पर्टिकुलर पार्टीशन करना ऐसा है हम पार्टीशन होता है ना देखिए क्या कहते हैं जो कुत्ता होता है ना वो भी दांतों से चबा के भोजन करता है मनुष्य भी करता है मगर दांतों से चबाने के कारण उसको एक नहीं मान सकते भैया इतनी सिमिलरिटी है इसलिए कुत्ता और मनुष्य भी एक है तो इसी प्रकार से हमारे बीच में सिमिलरिटीज होते हुए भी किसी एक पॉइंट पर जाकर के कोई मुख्य विषय पर जब हमारा अंतर आता है तो वो दूसरा हो जाता है। हम दूसरे हो जाते हैं। ठीक है ना? वो अंतर की वजह से ही हम हम है और वो वो हैं। है ना? हां। ये चीज देखो ये कान भी है, आंख भी है, नाक भी है। हम आत्मा कान के द्वारा सुनते हैं। आंख के द्वारा देखते हैं। मुख से बात करते हैं। अब कान जो देखने सुनने का काम करता है वो देखने का
00:07:38:26 काम नहीं कर सकता। पर देख करने वाला जो करता है वो तो एक ही है ना ये हम इसमें इस बात से यहां क्या तात्पर्य है अंतर की बात पार्टीशन की बात कि ये ये है ये है लेकिन एड़ी से चोटी तक जो रिलेट करिए जरा हमारा जो टॉपिक चल रहा है उससे रिलेट करिए हां जैसे मान लो हमने कान को ब्रह्मा कुमारी समझ लिया आंख को शंकरपाटी समझ लिया या मुख को अन्य संस्थाएं समझ लिया हम अब ये बाह्य अब आपको मैं ये जो आपने उदाहरण दिया अंतर आप स्पष्ट कर रहे हैं। मैं अभी सही कर रहा हूं। आपको इसको आप मैं बाह्य से नहीं लेकिन अंतर अभी मैं अभी सही मैं अभी सही कर देता हूं। जब आप दृष्टिकोण में लेंगे सेंसर में लेंगे तो आप पाएंगे कि पूरा वृक्ष अगर सूख रहा है तो उसको मूल को पानी दे। ठीक है। अब मैं आपको जो है आपने जो उदाहरण दिया वो उदाहरण गलत है। कैसे गलत है मैं आपको बताता हूं। कान सुनने का काम करता है। कान कभी यह नहीं कहता आत्मा को यह सूचना नहीं देता है। तुम्हारी आंख जो है गलत दे रही है। सुनने के आधार पे जो वो सुनता है वो बताता है। उसके बाद हमारा काम है हमारे मन का बुद्धि का चित्त का कार्य है कि हम क्या निर्णय लेते हैं। मगर कान कभी भी दृष्टि के
00:08:53:27 विषय में हस्तक्षेप नहीं करता है। कि आंख ने अगर ये कहा कि ये लाल है तो कान जो है कहे नहीं नहीं लाल नहीं है। कान से सूचना आए कि भैया जो है लाल नहीं है। ऐसी सूचना नहीं है। कान जो आंख देख रही है उसके देखने के विषय में आंख ही प्रमाण है। सुनने के विषय में कान ही प्रमाण है। तो कान कभी भी यह नहीं करता है कि वो जो है निर्णय देने लगे कि कलर कौन सा है। एक दूसरे को काउंटर नहीं। काउंटर मगर यहां काउंटर हो रहा है। यहां क्या हो रहा है? काउंटर। काउंटर हो रहा है। वो कह रहे हैं कि लेखराज ने सही समझाया। और वो कह रहे हैं क्या कहते हैं? वीरेंद्र देव दीक्षित वाले कि लेखराज ने सही नहीं समझाया। तो एक काउंटर हो रहा है। यानी एक ये बात ही बात है। अभी आपने जो उदाहरण दिया मैं उसकी बात कर रहा हूं। तो आपने जो उदाहरण दिया कि कान कान देख के काम कर रहा है। मगर काम तो एक ही हो रहा है। नहीं हो रहा है। कान काउंटर कर रहा है। अगर यहां कान से आप निकालोगे उदाहरण लोगे तो कान यहां काउंटर कर रहा है कि आंख गलत बता रही है। कान आंख को गलत कह रहा है। और जो वास्तविक उदाहरण है कान और आंख का वो कान कभी भी आंख को गलत नहीं कह रहा। क्योंकि आंख के विषय क्योंकि आंख के विषय में आंख ही प्रमाण है। उसमें कान का कोई हस्तक्षेप नहीं है। पहली बात। अच्छा ये चीज हो गई क्लियर। ब्रह्माकुमारी को आप पूर्णतया मानते हैं और बाकी जो दूसरी चीजें हैं वहां की शिक्षा
00:10:09:13 हम्म। इच्छा जो है उसको हम आत्मसात करते हैं। भैया वो हम लोग यहां पर शिक्षा के विषय में ही बैठे हुए हैं कि ब्रह्मा कुमारी जो कहता है में दो तरह से कहते हैं हंस भी होते हैं, बगुले भी होते हैं। ठीक है ना? हम एक ही स्थान होता है, एक ही चीज होती है। हम हंस क्या करता है? उसी से मोती चुन लेता है। हम और बगुले भी होते हैं, गंद उठा लेता है। हम तो हमारा जो प्रायोरिटी का विषय है। हमारा जो प्राथमिकता का विषय है कि हमारा गोल क्या है? हम हमारा आत्म उन्नति से संबंधित जो शिक्षा है। हमें उसको मैं मैं उसको आपको जवाब देता हूं। हंस मोती चुन लेता है और बगले क्या करते हैं? कचरा। हां गंध खा तो उसमें बात यह है कि हंस के पास वह जो चुनने वाली जगह है ना उससे तृतीय पक्ष के रूप में यह ज्ञान उसको प्राप्त होता है कि मोती क्या है? हम हंस को ये अलग से मालूम होता है कि मोती क्या है तब वो मोती को चुन पाता है। वो उसकी परवरिश वैसी हुई हो उसको संस्कार वैसे मिले हो प्रारब्ध से ऐसा मिला हो या उसको शरीर वैसा मिला हो उसके पास दूसरा प्रमाण होता है कि वो मोती को कैसे पहचाने। परंतु परंतु जिसके लिए वो कचरा ही अंतिम प्रमाण है। वह उसमें यह नहीं कर सकता कि मोती क्या है? कचरा क्या
00:11:24:14 है? कचरा इज इक्वल टू मोती। अगर उसके लिए वही अंतिम प्रमाण है। तो यदि आपके लिए ब्रह्माकुमारी अंतिम प्रमाण है तो आप वहां ये नहीं कह सकते कि भैया मैं ब्रह्माकुमारी की यह वाली चीज तो मानूंगा ये वाली नहीं मानूंगा। अगर आपने कहा तो फिर वो जो ये वाली चीज जो आपने मानी ये वाली सही चीज है। ये कहां से तय हुआ? वो आपका अंतिम प्रमाण हो जाएगा। ठीक है? अच्छा अब थोड़ा सा हम लोग पॉइंट पे आ जाते हैं। ये सब हमने क्लियर कर लिया। अ इसमें सबसे पहली बात तो यह है कि ब्रह्मा कुमारीज के द्वारा जो यह कहा जाता है कि ईश्वर आकर के लेखराज के अंदर से जो है ज्ञान देते हैं। तो ब्रह्मा कुमारीज का क्या पैरामीटर होता है जिससे वह जांच करता है कि यह ईश्वर है। ईश्वर के विषय में मतलब ब्रह्मा कुमारीज का क्या कहना है कि ईश्वर कहते किसे हैं? अभी ऑब्जेक्टिव नहीं कह रहा हूं मैं कि शंकर भगवान आए या शिव भगवान आए ब्रह्मा जी आए ये नहीं ऑब्जेक्टिव नहीं कि ईश्वर कहते किसे कि जो श्रेष्ठतम है जो पुरुषोत्तम है जो सर्वशक्तिमान है जो सर्वज्ञ है इस तरह से फीचर्स क्या मानता है मैं एक मैं फिर से आपको आप दोबारा मतलब उसको रिपीट करेंगे शिक्षा महत्व और महत्ता का विषय है पर्टिकुलर
00:12:39:15 कोई संस्था या ब्रह्मा कुमारी के पक्ष विपक्ष की बात हम नहीं करेंगे इसमें हमारी आपकी जो चर्चा हो रही उस शिक्षा को लेकर के हो रही है। शिक्षा क्या कहती है? फिर मैं आपसे ये पूछूंगा कि आप किस शिक्षा को यहां रिप्रेजेंट कर रहे हैं? बताइए। फिर आप जब ब्रह्मा कुमारीज को रिप्रेजेंट नहीं कर रहे हैं। ब्रह्मा कुमारीज की शिक्षा को रिप्रेजेंट नहीं कर रहे हैं तो किस शिक्षा को रिप्रेजेंट कर रहे हैं? शिक्षा वहां की जो शिक्षा है वो पार्टीशन नहीं करती। पक्ष विपक्ष नहीं आप ये नहीं करती। ये अभी हम सिद्ध करेंगे कि मेरा तेरा करेगी। आप करोगे कि नहीं करोगे। ठीक है? उसको एक यूनिट टेबल वो वो बाद की बात है। अभी मैंने अभी मैंने क्या पूछा आपसे? मैंने यह पूछा कि अगर आप यह कहोगे कि उसको आप नाम नहीं दोगे ब्रह्माकुमारी इसका। टैग टैग लगा हां अगर आप नहीं करोगे नहीं करोगे तो फिर मैं पूछूंगा कि आपकी शिक्षा है कहां से? कहां से आ रही फिर उसमें एक दूसरा विषय खुल जाएगा। फिर आप वहां पे जवाब नहीं दोगे कि वेद मुझे कहां से मिले? कहां से नहीं मिले। ये आत्मा की शिक्षा है। आत्मा की शिक्षा सुनिए आत्मा सुनिए। आत्मा की शिक्षा के नाम पर मुसलमान भी ज्ञान दे रहा है। आत्मा की शिक्षा के नाम पर क्रिश्चियन भी ज्ञान दे रहा है। आत्मा की शिक्षा के नाम पे ओसो भी ज्ञान दे रहा है। आत्मा की शिक्षा के नाम पे तमाम जितनी दार्शनिक दावा करने वाली संस्थाएं सब ज्ञान दे रही है। तो पैरामीटर क्या है उनका? तो वही
00:13:54:16 तो मैं पूछ रहा हूं कि आपका पैरामीटर क्या है? हां तो वही तो हम आत्मा का नाम लेके कोई कुछ भी कह देगा। दे के आप टैग करके मैं टैग दे मैं बता रहा हूं। मैं किसी संस्था को प्रोत्साहित नहीं कर रहे हैं। मैं टैग दे सत्य की मैं टैग दे के मैं बता रहा हूं। क्यों जरूरी है टैग देकर के बात यह है आत्मा की बात सब कर रहे हैं। अब हम बैठे हैं कि भाई किन आत्मा की बात करने वाले किन दो पक्षों के बीच में बात हो रही है जी। समझ गए? तो आत्मा की बात करने वाले एक परंपरा प्राप्त शंकराचार्य रामानुजाचार्य इत्यादि से जुड़े हुए एक व्यक्ति बात कर रहे हैं और दूसरी तरफ आत्मा की बात करने वाले जो ब्रह्माकुमारीज वाले हैं वो बात कर रहे हैं। ये बाह्य सिद्धांत हुआ ये बाह्य सिद्धांत हुआ। आंतरिक सिद्धांत क्या है? लेकिन जो आंतरिक सिद्धांत है वो अंतर्दृष्टि का सिद्धांत नहीं है कि एक शंकराचार्य से बिलोंग करते हैं और एक किसी और संस्था से बिलोंग करते हैं। क्या सिद्धांत है आंतरिक? पहचान कैसे होगी? वो जो आंतरिक सिद्धांत है वो सनातन सिद्धांत है। वो आत्मा का सिद्धांत अरे मेरे भाई वो सनातन सिद्धांत कई लोग कह रहे हैं मेरा भी सनातन है मेरा भी सनातन है। आप समझ क्यों नहीं रहे हो? वो सनातन हम सनातन जो शब्द है जो सनातन तो जो सनातन जिसका प्रूफ होगा वो वो वो वो सनातन कहलाएगा। जो सनातन है
00:15:10:00 वो सार्वभौमिक है। अरे भैया आप आप जो है ना आप जो है ना विषय को समझ नहीं पा रहे हो। जी आप विषय को नहीं समझ पा रहे हो। आपके मन में कुछ ऐसा है कि मुझे यह चीजें बोलनी है तो वो आप बोल रहे हो। मैं विषय विषय पहले निकालना पड़ता है कि किस विषय पे हमें बात करनी है। विषय को आप लाइव आत्मा के तल पर विषय घटित होना चाहिए। वो आत्मा के तल पे ही घटित होगा। अभी सब घटित होता जाएगा। मगर क्योंकि अभी क्या है कि आत्मा के नाम से बात करने वाले कई लोग हैं। ठीक है? अब जैसे आपने कहा कि वो जो है आंतरिक विषय है। बात किससे कर रहे हो? जुबान से। जी। शरीर से कर रहे हो ना? यानी कि हमको व्यवहार भी लेना पड़ेगा। एक मिनट व्यवहार कनेक्ट है लेकिन व्यवहार प्रायोरिटी इसमें आत्मा की है। तो वो प्रायोरिटी तो बाद की बात है। कहां से पहुंचेंगे वहां तक? पहुंचेंगे कहां? अलग-अलग नहीं कर रहे हैं। यात्रा शुरू कहां से होगी? वहां तक पहुंचने की यात्रा शुरू कहां से होगी? व्यवहार से ना शरीर से ना। उसका प्रूफ व्यवहार है। जब हम शरीर से जुड़ गए हैं, फंस गए हैं। माया रूपी संसार में जब फंस गए हैं, प्रपंच रूपी संसार में जब फंस गए हैं तो हम लोग वो जो अंतत गत्वा जो हमारा उद्देश्य है, वहां तक पहुंचेंगे तो इसी के द्वारा जैसे कि धरती पर गिरा हुआ व्यक्ति धरती से ही सहारा लेकर उठ खड़ा होगा। हां। तो फिर आप इस बात को काट शुरुआत तो यहीं से करनी होगी
00:16:25:06 ना। फिर बाद में यह होगा कि भैया ब्रह्मा कुमारीज के द्वारा दिया जाने वाला जो आत्मा का ज्ञान है वो सही था। हैं और वही सनातन ज्ञान है। यह हो जाएगा, यह हो जाएगा अंत में कि भैया वो आत्मा की बात हो रही थी वास्तविकता में और जो उसका विरोध कर रहा था वो आत्मा की बात नहीं थी। वो कहीं ना कहीं ढेर हो गया। ये हो जाएगा। मगर जब शुरुआत करेंगे तब तो उसको पहचान करानी पड़ेगी ना कि किन दो आत्मा के नाम से व्यवहार में क्या बात करने वाले किन दो पक्षों के बीच में बात हो रही है। ठीक है ना? अब ये जो हमारा समय नष्ट हो रहा है ना विषय के लिए भी पहले। पहले इस पे नष्ट हुआ कि आप जो है ब्रह्मा कुमारीज के जो तीन सेक्शन बन गए हैं उसमें से आप किसको पर्टिकुलर सपोर्ट करते हो तो उसमें बहुत देर तक समय खराब हुआ। अभी खाली इस बात पे कि मैं ब्रह्मा कुमारीज की बात कर रहा हूं कि नहीं कर रहा हूं। इसी बात में मुझे 15-20 मिनट लगे। जबकि विषय हमारा क्या है मालूम है? सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म। अब आप इस पे बात करिए। इस पे मुझे बताइए। तो ब्रह्मा कुमारीज के अनुसार ईश्वर के विषय में मान्यता क्या है? मुझे नामकरण वस्तुनिष्ठ जानकारियां नहीं चाहिए। मुझे ईश्वर के फीचर्स क्या-क्या मानता है वो बताइए। परमात्मा जो है हम वो बेहद है। वृहद है। बड़ा है। हां बड़ा है। हां। वो लिमिटेड नहीं
00:17:40:09 है। ठीक है। किसी की अनंत है। हां। किसी की पर्सनल प्रॉपर्टी नहीं है। किसी जैसे कोई टैग देता है कि भगवान मेरा है। ये उसका ये मूल अधिकार है कि भगवान मेरा है। लेकिन सिर्फ मेरा है। ये ये परमात्मा को लिमिटेड करना हुआ बांध देना हुआ है। ठीक है। तो परमात्मा अनंत है ना? अनंत है। अनंत है। ठीक है। जी और किस-किस क्षेत्र में अनंत है? मतलब सर्व मतलब अनंत एड़ी से लेके चोटी तक। अनंत जानने वाला है वो। अनंत जानने सर्वज्ञ है। सर्वज्ञ है। सर्वशक्तिमान है। सर्वशक्तिमान है। मतलब सर्वशक्तिमान मतलब इस मामले में बाधित नहीं है कि वो फलाना काम नहीं कर सकता। जी जी। है ना? ठीक है। इस दृष्टि में सत रजतम तीनों से युक्त जो व्यक्त और अव्यक्त अनंत सामर्थवान है ना वो अनंत ओमनीपोटेंट कहते हैं जिसे ओमनी अच्छा और क्या कहते हैं वो जो सर्वज्ञ है और और किस मामले में अनंत है सर्वशक्ति उसको लिमिटेड नहीं कर सकते बॉन्ड नहीं कर सकते पार्टीशन नहीं कर सकते सर्वव्यापक भी है सर्वव्यापक की सर्व्या सर्वव्यापक जो शब्द है इसको थोड़ा सब परिभाषित करके आप एक दो सेंटेंस में कि जो सर्वव्यापी
00:18:55:15 शब्द है इसको आप किस तरह से परिभाषित करते हैं ओमनी प्रेजेंट हर जगह है वो हर जगह है एज ए फॉर एग्जांपल जैसे कि एक दो सेंटेंस करके बताएं आप फॉर एग्जांपल क्यों बताना वो हर जगह उपस्थित है अपने रूप में हां हर जगह उपस्थित है ठीक है हर जगह उपस्थित है हां तो बात ये है कि जैसे मान लो कोई भी चीज है हां उसकी जो क्वालिटी है हम वो पीस है मतलब शांत शांत है प्रेम का स्वरूप है आनंद का स्वरूप है सुख का स्वरूप है पवित्रता का ऐसे है ना क्वालिटी जो है उसकी तो उसमें अगर हम खुशबू उसकी जैसे बीज अगर नीम का बीज है हम तो पूरे वृक्ष में पत्ते से लेके टहनियों से लेकर के उसकी कड़वाहट उसकी खुशबू रहेगी। हम अगर मान लो बीज की खुशबू पत्तों में वृक्ष में टहनियों में नहीं है तो उसका होना सिद्ध नहीं होता है। हम तो आपको आपका पहले क्लेम क्या है? तब तो मैं कुछ बात आगे बढ़ाऊं। तो मतलब इस सृष्टि में आप मुझे ये बताइए सर्वव्यापक है कि नहीं है आपके अनुसार ईश्वर। पहले ये बताइए फिर उसको खोलिए। हम ये मानते हैं सर्वव्यापक की जो परिभाषा
00:20:10:19 ये मानते हैं एक सेंटेंस में कि जो सर्व्यापक की परिभाषा नहीं पहले आप ये तय करिए सर्व्यापक है कि नहीं है। पहले ये तो तय करिए। हां है लेकिन देखो सर्व्यापक शब्द एक निश्चित परमात्मा सर्वव्यापी है हां की बात को आप किस तरह से समझते हो मैं समझा मैं समझाऊंगा ना वो लेकिन मैं कैसे समझता हूं वो जब मैं कहूंगा अपने तो पहले क्लियर पहले क्लियर तो करिए कि है बोल रहा हूं पर कैसे है उसका आपने अभी तक ये नहीं कहा कि सर्व्यापक है वो सर्वव्यापक का मतलब फिर फिर फिर मतलब बता रहे हो आप पहले ये क्लेम करो कि सर्व्यापक है वो सर्वव्यापक मतलब पहले समझो देखा नहीं करेंगे नहीं नहीं क्यों नहीं मैं क्या कह रहा हूं पहले आप अपना हेडलाइन दो के ईश्वर सर्वव्यापक है अब मैं समझा रहा हूं कि ब्रह्मा कुमारी का ईश्वर सर्वव्यापक किस प्रकार पहले मैं समझाऊंगा परमा ब्रह्मा कुमारी का नहीं वास्तव में ब्रह्मा कुमारी के अनुसार जो ईश्वर की व्याख्या ईश्वर यथार्थ ईश्वर किस तरह से मैं इस बात को मतलब सर्वव्यापी की बात को परिभाषित करूंगा अगर कोई कहता है कि मैं भगवान हूं या मैं कुछ हूं ये थप्पा लगाता है हम तो वो भगवान को सर्वव्यापी कहना है। जैसे हिरण्यकश्यप ने कहा जैसे रावण ने कहा कि मैं ये हूं
00:21:25:20 हम लेकिन जो परमात्मा होता है हम वो जैसे बीज है अपने को राख और खाक करके फिर वृक्ष बनता है। हम्म नष्ट करके अपने आप को छुपा करके अपने आप को परिवर्तित करके तो परमात्मा जो होता है एक पारे की तरह उसको पकड़ोगे तो फिसल मतलब पकड़ में इतनी जल्दी नहीं आता है। पर परमात्मा बहुत सहज है, सरल है। हर एक के हृदय में है। इस तरह से जैसे मीरा ने कहा जित देखूं तित तू। मतलब जित देखो तित तू माने उस मतलब चेतना चेतना के स्तर पर वो सर्व्यापक है। चेतना मतलब उस हृदय के स्तर पर चेतना के स्तर पर। चेतना के स्तर पर सर्व्यापक है। मूल स्तर पर सर्व्यापक है। और वैसे वह जो है सर्वव्यापक नहीं है। साकार में भी है, आकार में भी है। पर वो दृ अगर कोई बॉडी कॉन्शियस वाला है, बॉडी कॉन्शियस वाला है और सोल कॉन्शियस वाला है। शिव की दृष्टि भी है। मतलब वो एक एक मिनट 1 मिनट। मतलब वो जहां पे मेरा दिल है हृदय उसमें तो है। मगर जहां मेरा आत्मा दिल मतलब आत्मा आत्मा। तो इसका मतलब मेरी आत्मा यहां है तो यहां पर है। ठीक। आपकी आत्माएं यहां पर है। इधर बीच में है क्या वो? इधर बीच में है क्या वो? जहां भी वो चैतन्यता
00:22:40:28 है। मैंने कहा इसमें चैतन्यता नहीं है ना। हां है। इसमें भी है। कहां है चैतन्यता? ऊर्जा इसमें भी है। चैतन्यता की बात हो रही है। भाई साहब ये जड़ है। यह जड़ है। हां। यह आकार है ना इसमें? हां। यह पूरा अनुभव शक्ति है। शक्ति से भरा है। भाई साहब यह जड़ है कि नहीं है? जड़ यह जड़ है। हां। लेकिन यह जड़ है। हां। तो इसमें शक्ति है। तो शक्ति है तो क्या करें? यह पूरा यूनिवर्स जो है जड़ जंगम जो दिख रहा है चाहे पत्थर है, पेड़ है, जो भी है सीधी भाई साहब थोड़ा टू द पॉइंट बात करिए। देखिए आपसे मैं कह रहा हूं। आपने कहा आत्मा में ईश्वर है। तो आपके अंदर ईश्वर है। मेरे अंदर ईश्वर है। आप कहते हो एक मिनट। यहां पे है क्या ईश्वर? अगर आप कहते हो परमात्मा सर्वव्यापी है तो आप बात आ जाती है। मैं सिद्ध करूंगा। आप पहले बोलो तो कि नहीं है। आपने बोला अभी तक ना आपने ये बोला कि है। हां अब मैं सिद्ध करूंगा। अब मैं सिद्ध करूंगा। तो यही तो मैं कह रहा हूं। अपनी चीज को क्लियर करो। निडर बनो। तो क्लियर ही तो अरे अब कहा है ना 15 20 मिनट हो गए बात करते। मैं समझा रहा हूं। पहले मुझे बोलने दो कि मैं जूझ हूं जो उसको निकालने दो। मुझे पहले सुनो
00:23:49:15 जिसको अपने सिद्धांत पर भरोसा होता है वो क्लियर बात करने में घबराता नहीं है 10 मिनट 15 मिनट उसको अपनी पहचान बताने में मान्यता बताने में नहीं लगते हैं फट से बताता ये है ठीक तो इसको थोड़ा सा इसको थोड़ा सा विचार करिएगा खामखा हमारा ये टाइम वेस्ट हुआ है यहां तक अभी तक कोई मुद्दे की बात नहीं हुई है अब आपने कहा सर्व्यापक नहीं है मैं सिद्ध करूंगा सर्वव्यापक है पर उससे पहले एक दूसरा क्वेश्चन है मेरा। जी बताइए। कि आपने कहा कि वह अनंत सामर्थ्यवान है। यह तो आप मानते हैं। ठीक है। अनंत सामर्थ्यवान है। क्या वो अवतार ले सकता है? ले सकता है। लेता है। कहां लिया? कहां माना आपने? अभी तक मैं ऑफिशियली ब्रह्माकुमारी वालों से मिला। आप कौन से सेंटर जाते हैं बताइए? उन्नाव? हां। नहीं अभी नहीं जाते। कभी जाते। अच्छा कभी जाते थे। तो जो उन जो ऑफिशियली जो वहां की दीदियां है वो बोल रही नहीं अवतार नहीं लेता वो पर काया प्रवेश करता है अवतार माने दिव्य जन्म हां दिव्य जन्म वो प्रकट होता है सजाम में हम प्रकट होता है हां सृजन करने के लिए अपना सृष्टि का पुनर थान करने के लिए वो बाद की बात है किसके लिए पॉइंट नहीं चेंज करी मैं पूछ रहा हूं वो अपना रूप धारण करता है कि नहीं मूर्ति पूजा कर सकते हैं कि नहीं
00:25:04:16 करता है ये अरे भैया तो अब यहां पे तो आप ब्रह्मा कुमारीज के विरुद्ध जा रहे ब्रह्मा कुमारी कह रहा है कि बोल पर काहे प्रवेश करता है? चराचर जगत नहीं शिक्षा की बात कर रहे हैं। हम यथार्थ की बात कर रहे हैं। यानी कि इतने हिस्से में आप ब्रह्मा कुमारीज को गलत मानते हैं। चराचर जगत मैंने क्या पूछा भाई साहब? जी जी बताइए। इतने हिस्से में ब्रह्मा कुमारीज को गलत मानते हैं। सभी को नहीं मानते हैं। अरे ब्रह्मा कुमारीज का ये क्लेम है कि जो है जो भगवान है अवतार नहीं लेते। परकाया प्रवेश करते हैं। वहां की ठीक है। कहते हैं स्टूडेंट्स हैं। लेकिन वहां की शिक्षा क्या है उसको भी। ठीक है, ठीक है, ठीक है, ठीक है, ठीक है। अब अब आते है बात कि आपका ये कहना है कि ब्रह्मा कुमारीज के द्वारा जो प्रचार किया जा रहा है वो तो गलत है मगर वहां की जो मुरलियां है उसमें सही बात लिखी है जो आपको पता है। यही कहना है आपका। ठीक अब इस पे आते हैं। अब पॉइंट ये आ गया। गलत मतलब सभी को गलत नहीं कहते हैं। हम कुछ नहीं तो उसमें मुझे प्रमाण दिखाइए कौन कहता है कि वो परकाया प्रवेश नहीं वो जन्म लेता है। तो आपको किसने कहा वो मैं तो ऑफिशियल मैं आपको वीडियो दिखा रहा हूं। मेरा वीडियो है उसमें कह रहे हैं परकाया प्रवेश। आप वहां के ऑफिशियल व्यक्ति नहीं वहां का ऑफिशियल व्यक्ति कह रहा है पर प्रवेश करता है वो परमात्मा ये चराचर जगत परमात्मा देखिए मैं मैं अभी आपको आपकी वो मैं आपको परिभाषा नहीं पूछ रहा हूं और ब्रह्मा कुमारी का ये जो क्लेम है कि वो ईश्वर परकाया
00:26:19:20 प्रवेश करता है वो स्वयं अवतरित नहीं होता है। परकाया थोड़ा सा समझा किसी दूसरे के शरीर में घुस जाना ऐसे तो भूत प्रेत करते हैं। तो भैया वो तो यही कह रहे हैं। उसका तो और और वो छोड़िए तो यह दिव्य अवतरण किसने बोला है धर्म ग्लानी मैं क्या कह रहा हूं देखिए दूसरी बातें मत करिए दूसरे टॉपिक मत लाइए सब सारे टॉपिक मैं खोलूंगा अगर आप थोड़ा संयम से बात करेंगे और जो टॉपिक चल रहा है उसको बचाइए ठीक है अब बात आती है कि ब्रह्मा कुमारीज ये क्लेम नहीं करता है कि ईश्वर जो है स्वयं अवतरित होता है सब सजाम में हम वो नहीं करता है मगर आप कर रहे हो अब आपका कहना है कि भाई मुरली में जो लिखा है मैं उसकी बात कर रहा हूं। ठीक? ब्रह्मा कुमारीज वाले क्या कह रहे हैं वो मैं नहीं जानता। मगर मुरली की जो बात है वो मैं साधारणत की बात गीता में भी आई है कि मैं आकर के साधारण भाई साहब देखिए अभी बात ये हो रही है कि ब्रह्मा कुमारीज वाले गलत कह रहे हैं। इतना आपने पहली बात मान लिया कि ब्रह्मा कुमारीज वाले जो अभी के लोग हैं पर काया प्रवेश तो ये चीज हां तो गलत कह रहे हैं। ठीक है। तो यहां पे इतना आपको समझ में आ रहा होगा कि ब्रह्मा कुमारीज के जो समर्थक थे जो अभी पूर्णतया जो है मानते थे ब्रह्मा कुमारीज के पक्ष में थे। इतनी बात में ब्रह्मा कुमारीज के जो प्रचारक और प्रचारिकाएं हैं जी उनके विरुद्ध है।
00:27:34:28 है ना? अब दूसरी बात आती है कि आपका कहना है कि मुरली में यही लिखा है जो आप कह रहे हैं। क्या कि भगवान जो है सजाम में हम अपना सृजन करते हैं। बाकी धर्म लाने के अरे यार फिर तुम कारण पे जा रहे हो। दिक्कत तो यही है। आपको अपनी 50 बातें अलग से बोलनी है। ठीक है बेटा। सजाम में हम ठीक है। पॉइंट ये चल रहा है टू द पॉइंट रहने। वो हम बात करेंगे कि क्यों आते हैं? मैंने पूछा है कि क्यों आते हैं। ठीक है। ठीक है। अरे यार बड़ी दिक्कत है बात करने में। दिक्कत नहीं है। मतलब बहुत सारे ऐसे ऐसा है ना ये पता है क्या होता है कि हम लोग अपनी कुछ इधर से लेके आए हैं। ये जरूर बोलना है मुझे। ये जरूर बोलना है। तो वो जब भी बात आती है वो जरूर बोलेंगे हम। नहीं आए हैं। सुनिए। लेकिन पक्ष और विपक्ष की बात नहीं है। ये अभी अभी वो पॉइंट नहीं चल रहा है भाई साहब। कि वो क्यों आते हैं। अभी पॉइंट ये चल रहा है कि वो आते हैं कि नहीं आते। आते हैं तो ब्रह्मा कुमारीज वाले कह रहे हैं नहीं आते हैं। वो कह रहे हैं परकाया प्रवेश करते हैं। आप कह रहे हैं कि अवतरण करते हैं। छोटी सी बात है। देखो ये छोटी सी बात है। देखिए हम लोग पॉइंट पे आ गए। मैं बहुत अच्छा पॉइंट बोलने जा रहा हूं। अब आपका कहना है कि मुरली में जो लिखा है वो आप बता रहे हैं। मुरली में लिख मुरली के अनुसार भगवान अवतार लेते हैं। ठीक है? और क्या कहते हैं यह ब्रह्मा कुमारीज के अनुसार जो है भगवान अवतार नहीं लेते हैं। भगवान परकाया प्रवेश करते हैं। और जो लोग
00:28:50:00 ये कह रहे हैं परकाया प्रवेश वाली बात ये गलत कह रहे हैं। देखो आपको अगर कोई कहता है वो ठीक है। नहीं देखा नहीं देखो मैं जितनी बार पॉइंट पर आएंगे उतनी बार आप बात को मैं जो पॉइंट की बात करने वाला हूं वो नहीं होने देंगे। कहिए आप कहिए। चलो ठीक है। तो अब सबसे पहली बात इसका मतलब कि भगवान श्री कृष्ण जो थे वो ईश्वर ही थे। उनके अंदर कोई आया था या फिर स्वयं वह ईश्वर होते हुए उन्होंने बात कही थी। पहले तो यह बता दो क्लियर कर दो। ईश्वर होते हुए उन्होंने यह बात कही थी। यानी आप मानते हो भगवान श्री कृष्ण के अंदर कोई घुसा नहीं था दूसरा। श्री कृष्ण उनका नाम उनका स्वरूप था। उनका अवतार था भगवान का। मतलब उनके अंदर कोई घुसा नहीं था ना। घुसेगा कौन? अगर अरे भाई तो सीधी बात क्यों नहीं कर रहे हो? नहीं घुसा था। नहीं घुसा था। हां। ठीक है। ठीक है। तो अब ये ब्रह्मा कुमारी की इतनी बात भी कट गई। अब बात आती है कि आपका मुरली पर विश्वास है और जो है मुरली में यही कहा है जो आप कह रहे हैं। मुरली कहती है कि भगवान सिर्फ ब्रह्मा कुमारी का नहीं है। हर एक का है सभी का। 1 मिनट 1 मिनट। अब ये बताइए कि जो जिन मुरलियों जिन्हें आप मुरलियां कह रहे हैं जिनका आप समर्थन कर रहे हैं। वो मुरलियां आपके पास आई कैसे? आपको कैसे पता चला कि लेखराज जी ने क्या-क्या लिखा है? मुरलियों के नाम से। ब्रह्मा कुमारी के थ्रू ही। हां। ब्रह्मा कुमारीज के थ्रू मुरलियां आपके पास तक आई। जहां-जहां
00:30:05:08 भी गए उनकी शिक्षा को जैसे वो आएगी तो किसी न किसी ब्रह्माकुमारी के द्वारा ही ना। चाहे जहां चले जाओ ब्रह्माकुमारी के द्वारा ही आएगी। हां बताओ कैसे आएगी? मतलब ब्रह्मा कुमारी से निकली हुई जो संस्थाएं हैं वो सिर्फ उनकी बात कर रहा हूं। बाकी चाहे जो हो जाए उसमें अंतिम माध्यम तो मानना पड़ेगा ना मुरली के लिए कि आपको लेखराज जी की लिखा लिखी हुई जो मुरलियां हैं लिखवाई गई जो मुरलियां हैं वो आपको किसी ब्रह्मा कुमारी के सदस्य की मध्यस्थता के बिना आपके पास आ ही नहीं सकती। हां जी। या फिर डायरेक्ट लेखराज जी आपके पास आए और लिखवाएं वो तो हुआ नहीं होगा। 69 में उन्होंने ज्ञान दिया। ज्ञान अभी तक अच्छा मैं क्या मैं क्या कह रहा हूं? लेखराज जी डायरेक्ट तो आपके पास आए नहीं है। लेखराज जी ने जो अपनी मुरलियां लिखवाई हैं वो किसी ना किसी माध्यम से आपके पास तक आई हैं। ठीक है। अब आपका क्लेम ये है कि मुरली में तो लिखा है कि भगवान अवतार लेते हैं। परंतु ये जो ब्रह्मा कुमारीज वाले हैं गलत कह रहे हैं। अभी कितना एक वीडियो वायरल हुआ था कि नहीं? कौन सा? कि आज फलाने ने भी मान लिया कि भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं ने स्वयं नहीं बोली गीता उनके अंदर आकर किसी और ने बोली गीता अभी हुआ था एक वीडियो वायरल अरे ब्रह्मा कुमारीज के ऑफिशियल टॉप जो चैनल है जो मेन ऑफिशियल उस पे ये बात ये बात खूब चलाई थी वीडियो अपन ने देखा था ठीक है देखिए थोड़ा अपने अपनी चीजों के बारे में भी जानिए
00:31:20:19 आप कह रहे हैं कि मैं आत्मचिंतन करता हूं मगर अपने से जुड़ी हुई चीजें पता ही नहीं की बात करते हैं यथार्थ वो अभी यथार्थता भी खुल जाएगी अभी खुल जाएगी अभी उसके भी धागे खुलेंगे ठीक ठीक है। अब ये आप आपने मान लिया कि मुरली आपके पास आई है कहां से? ब्रह्मा कुमारी से। ब्रह्मा कुमारी वाले कह रहे हैं कि भैया वो परकाया प्रवेश करते हैं। वो स्वयं अवतार धारण नहीं करते। आप अच्छी बात है। मैं इस मामले में आपके साथ हूं। अगर आप भगवान के अवतार को स्वीकार कर रहे हैं। आप और मैं एक हैं। जी। है ना? मगर फिर आपका जो ये चैलेंज है ये क्लेम है कि ये जो आप बोल रहे हो ये मुरलियों का ही अर्थ है जो आप बोल रहे हो। जी तो अब बात यह है इसका मतलब कि जो ब्रह्मा कुमारीज वाले कह रहे हैं वो झूठ हो सकता है। हो सकता है। हो सकता है। तो इसका मतलब ये है कि ब्रह्मा कुमारीज वालों पर आपको विश्वास नहीं है। हमें शिक्षा पे विश्वास है। अरे भैया ब्रह्मा कुमारीज वालों पे है कि नहीं? नहीं। नहीं है। आपको मुरली किसने दी? मुरली दादा लेखराज के मुख से निकली। अरे आपके पास कैसे आई भाई साहब? ब्रह्मा कुमारियों के। किसी हां। इसका मतलब एक झूठा व्यक्ति जो झूठ बोल सकता है, वह आपको कागज पे लिख करके कुछ दे रहा है। ठीक। ठीक। आपको कैसे पता यह वही बात है जो लेखराज जी ने लिखी है? देखो अब यहां पे अनुभव
00:32:36:00 घटित होता है। ठीक है? एक जो अंतरात्मा होती है ना अंतरात्मा अंतर्मन नहीं अंतरात्मा। वो अविनाशी है, सत्य है। उसको सनातन रूप माना जाता है। जब बात जहां मन फंस जाता है, भ्रमित हो जाता है, तब अंतरात्मा बोलती है, आवाज देती है। वहां अनुभव घटित होता है और वो आपको गलत नहीं कहता है। गलत राय नहीं। यानी कि ये आपको अपने आप हमने सिर्फ ब्रह्माकुमारी की शिक्षा ही नहीं हमने श्रीमद भगवत गीता भी पढ़ी है। हमने गुरु भाई साहब मैं दूसरी बात कह रहा हूं। मैं दूसरी बात कह रहा हूं। भाई साहब मैं दूसरी बात कह रहा हूं। मिलती मैं दूसरी मैं दूसरी बात कह रहा हूं। मैं दूसरी बात कह रहा हूं। मैं ये कह रहा हूं। कि आपके पास ब्रह्मा कुमारीज की मुरलियां आई। जी। आपने अपना आत्मचिंतन किया पूरी दुनिया का। ठीक। अगर उसमें मिक्स होता है कुछ तो वो भी समझ में आ जाता है कि ये तो मुरलियों में गलत बात कुछ मिली आपको कि नहीं? हां बहुत सारी ऐसी बातें यानी मुरलियों में गलत बात भी मिली। कुछ ऐसी बात यानी कि फिर यानी कि फिर ये भी ये भी मानना पड़ेगा कि जो लेखराज के अंदर शिव जी नहीं आए। शिव जी आते तो सही बात होती। एक छोटी सी बात शिव जी आने ना जाने आने की बात नहीं है। जो
00:33:51:01 आत्म तत्व है ना आत्मा का तत्व। अपने आप को आत्मा समझो या आत्मा जानो। उन्नति से संबंधित जो बात उसमें सारी शिक्षाएं आत्मज्ञान की है। हां अरे मैं यह कह रहा हूं मैं यह कह रहा हूं कि मुरली में गलत बातें भी है ना वह कुछ कुछ है तो कुछ है तो उस उस विषय लेकिन वो समझ में आती है नहीं ठीक है ठीक है समझ में आती अध्ययन किया है ठीक है भाई साहब आप समझ में आती अच्छी बात है मगर फिर हम ये नहीं कह सकते कि वो जो है अ शिव जी के द्वारा नहीं कह सकते ये आप नहीं कह सकते क्योंकि आपने पढ़ा नहीं है आप सुन नहीं रहे मेरी बात मैं क्या कह रहा हूं जी आपने कहा कि उसमें कुछ गलत बातें भी हैं। इसका मतलब वो शिवजी के द्वारा लिखवाई गई बातें नहीं है क्योंकि शिवजी तो परमेश्वर है वो तो सब सही बातें लिखवाएंगे। जो आत्मज्ञान की आत्मा से संबंधित बातें होती है। देखा फिर अब इसमें 10 मिनट लगेगा। तो लगेगा ही। क्यों लगेगा? जब आप ये कह रहे हो कि उसमें गलत बात है तो ये स्वीकार करो कि वो शिवजी के द्वारा मैं नहीं मानता लिखवाई गई हैं। शिवजी के द्वारा लिखवाई गई ये बात नहीं हो रही कि शैतान के द्वारा लिखवाई गई। के द्वारा लिखवाई गई। अरे भैया बात यही हो रही है कि ब्रह्मा कुमारीज के क्लेम सही है कि नहीं सही है मैं यहां पर आप भगवान के विषय में क्या मानते हैं क्या नहीं मानते हैं आप पर्सनली पर्सनली पर्सनली मैं ये इस चर्चा के लिए यहां पर नहीं बैठा हूं मेरे पास समय नहीं कोई व्यक्ति
00:35:06:04 अपने लिए अपने हिसाब से उसने क्या-क्या मान्यताएं धारण कर रखी हैं क्या नहीं मैं इसके लिए यहां नहीं बैठा हूं आप यदि ब्रह्मा कुमारीज के पक्ष से बात कर रहे हैं तो मैं आपके साथ बैठा हूं वरना हर दूसरा हर दूसरा आदमी एक मिनट एक एक मिनट भाई साहब कोई मतलब नहीं है। मैं उसको भी खंडित करूंगा। तो हम कह रहे हैं पर्सनल करने के लिए नहीं आए हैं। अरे भैया पर्सनल हो रहे हैं ना अब जब ब्रह्मा कुमारी का पल्ला छोड़ दिया। अब आपने कहा मूल क्या है? ये है। उसमें आपकी अपनी मान्यताएं आ गई ना।
Plans for this video (0)
No Plans yet. Press "✂️ Open Clip Cutter" to make one.
-
⬜Hindi SRT Required
YouTube Studio → Subtitles → Hindi → upload the SRT file. (Checked automatically once OAuth is connected.)
-
⬜English SRT
YouTube Studio → Subtitles → Add language → English → upload the SRT file.
-
⬜Title (per Rules)
Check the title against the RULES on honorifics, names and terms.
-
⬜Description
YouTube Studio → Details → Description. Write it as per the RULES.
-
⬜End Screen
YouTube Studio → Editor → End screen. The API does not report this, so press Done after adding it.
-
⬜Cards
YouTube Studio → Editor → Cards. The API does not report this, so press Done after adding them.
-
⬜Playlist Automatic
YouTube Studio → Details → add to Playlists. It gets ticked ✓ automatically at the next sync.
-
⬜Thumbnail
YouTube Studio → Details → Thumbnail → upload a custom thumbnail.
"Done" is your confirmation. The YouTube API does not report things like End Screen and Cards.
Playlists
Not in any public playlist (or YouTube sync has not run yet).
सीधी बात - भाग 1 ब्रह्माकुमार ने माना कि #brahmakumaries संस्था भ्रम फैलाती है
Description
(empty)
History
No changes yet.
✂️ Clip Cutter
⌨️ Keyboard shortcuts
Space Play/Pause · I Set start · O Set end · ←→ 1 second (Shift: 5) · ,. 1 frame · P Preview · Enter Add clip · Esc Stop
Start
End
✂ Remove (middle part: bad audio, bad section)
Move the video to that spot (click the SRT or the bar), then press "Start"/"End".
Clips () · Total
Add clips above. They will appear here; drag (⋮⋮) to reorder.
-
⋮⋮