1
00:00:03,680 --> 00:00:07,840
जय श्री राम संजय जी जय श्री राम

2
00:00:07,840 --> 00:00:11,840
शंशु जी बहुत-बहुत नमस्कार भाई को जय

3
00:00:11,840 --> 00:00:16,000
श्री राम और संजय

4
00:00:16,000 --> 00:00:20,400
जी थोड़ा सा आप अपना परिचय मतलब जो आध्यात्मिक बैकग्राउंड

5
00:00:20,400 --> 00:00:24,480
है ना आपका जो जो भी कुछ है जो चीजें हैं छोटा सा

6
00:00:24,480 --> 00:00:30,080
एक श में थोड़ा संक्षिप्त सा वह दर्शकों को थोड़ा सा दे दीजिए

7
00:00:30,080 --> 00:00:36,080
सर बेसिकली मैं आध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय

8
00:00:36,160 --> 00:00:40,240
और आम दुनिया जिसको ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय

9
00:00:40,240 --> 00:00:44,320
के नाम से जानती है। अच्छा जो आपने मेरे

10
00:00:44,320 --> 00:00:48,880
बारे में सुना या जो पहचान आपको मिली ये पहचान मुझे

11
00:00:48,880 --> 00:00:52,960
ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय और आध्यात्मिक ईश्वरीय

12
00:00:52,960 --> 00:00:57,200
विश्वविद्यालय के आधार पर मिली। अच्छा बेसिकली

13
00:00:57,200 --> 00:01:02,080
ये लोग 12 साल तकरीबन मैंने इनका अध्ययन किया।

14
00:01:02,080 --> 00:01:06,160
हम 12 साल के बाद जब निष्कर्ष निकला कि

15
00:01:06,160 --> 00:01:10,400
भगवान तो ऐसे ही आते हैं। भगवान भगवान के बारे में

16
00:01:10,400 --> 00:01:15,680
भगवान ऐसे ही आते हैं जैसे ये लोग बता रहे हैं। अच्छा

17
00:01:15,680 --> 00:01:20,320
भगवान से मिलने की बड़ी तमन्ना थी बचपन से। तो

18
00:01:20,320 --> 00:01:24,320
आध्यात्मिकता का शौक था और आध्यात्मिकता का शौक वहां तक लेकर के पहुंचा और

19
00:01:24,320 --> 00:01:29,840
12 साल तकरीबन अध्ययन करने के बाद आज दुनिया के सामने

20
00:01:29,840 --> 00:01:33,840
गीता ज्ञान के आधार पर यह बात प्रमाणित सिद्ध हो जाती है कि भगवान

21
00:01:33,840 --> 00:01:38,000
कब आते कैसे आते उसका नाम रूप देश काल सब क्लियर हो जाता

22
00:01:38,000 --> 00:01:40,880
है

23
00:01:40,880 --> 00:01:44,880
छोटा सा हमारा तो संक्षिप्त परिचय है कि परमा परमपिता परमात्मा आकर

24
00:01:44,880 --> 00:01:48,960
के जो ज्ञान देते हैं उसकी उस ज्ञान को ही तीसरा नेत्र कहते हैं और वो प्राप्त

25
00:01:48,960 --> 00:01:53,040
हुआ हमें उसके आधार पे अब ये भी जान गए

26
00:01:53,040 --> 00:01:57,120
कि राम कौन है जिनको जय जय श्री राम

27
00:01:57,120 --> 00:02:01,120
बोलते हैं महादेव देव बोलते हैं। तो अपना सनातन धर्म के लिए तो बहुत खुशी की

28
00:02:01,120 --> 00:02:05,200
बात है आज कि तकरीबन 12 साल अध्ययन मैंने इनका

29
00:02:05,200 --> 00:02:09,360
किया। गीता का अध्ययन किया और उसके बाद आप बहुत अच्छा मिलन है आप

30
00:02:09,360 --> 00:02:13,440
चिदंशु जी आपके साथ कि पूरी दुनिया जितने भी भाई आपको जानते

31
00:02:13,440 --> 00:02:18,000
हैं पहचानते हैं उन सबको भी समझने को मिलेगा।

32
00:02:18,000 --> 00:02:22,000
जी तो इसमें थोड़ा सा

33
00:02:22,000 --> 00:02:26,400
आपने हमें ये भी बताया था कि आपका अभी वर्तमान में ब्रह्मा कुमारी

34
00:02:26,400 --> 00:02:30,560
संस्था से और जो आध्यात्मिक विश्वविद्यालय नाम से संस्था

35
00:02:30,560 --> 00:02:34,560
चल रही उससे थोड़ा सा कुछ विरोध भी है।

36
00:02:34,560 --> 00:02:38,720
वो कैसा विरोध है? क्या है? वो मामला सारा

37
00:02:38,720 --> 00:02:43,520
सा इतना सा है कि भगवान

38
00:02:43,520 --> 00:02:47,680
गीता में लिखते हैं प्रविष्ट

39
00:02:47,680 --> 00:02:51,920
और ये प्रवेशम शब्द को जो है गलत तरीके से आइडेंटिफाई

40
00:02:51,920 --> 00:02:56,560
कर रहे थे जिस बात पर डिस्प्यूट हुआ और मतलब

41
00:02:56,560 --> 00:03:00,800
देखिए बात मुझे थोड़ा सा थोड़ा सा बात

42
00:03:00,800 --> 00:03:05,280
बिल्कुल क्लियर समझाऊंगा मैं एक्चुअली एक चीज है ब्रह्मा

43
00:03:05,280 --> 00:03:09,760
कुमारी और आध्यात्मिक विश्वविद्यालय में भी एक डिस्प्यूट है

44
00:03:09,760 --> 00:03:13,760
और फिर इन दोनों से आपका डिस्प्यूट है तो इसलिए वो डिस्प्यूट समझाते

45
00:03:13,760 --> 00:03:18,800
हुए अपना डिस्प्यूट समझाएं जी जी देखो

46
00:03:18,800 --> 00:03:23,120
ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय शुरू हुआ 1947 से

47
00:03:23,120 --> 00:03:27,360
हां जी और आध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय

48
00:03:27,360 --> 00:03:31,840
शुरू हुआ 1976 से अच्छा

49
00:03:31,840 --> 00:03:35,840
वो भी यह दावा करते हैं कि भगवान आया है। वो

50
00:03:35,840 --> 00:03:40,560
कहते हैं दादा लेखराज में भगवान आया है। आध्यात्मिक

51
00:03:40,560 --> 00:03:44,880
ईश्वरीय विश्वविद्यालय कहता है कि जो बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित है उसमें

52
00:03:44,880 --> 00:03:49,520
शिव आया है। भगवान मतलब शिव को भगवान अलग से कहते हैं।

53
00:03:49,520 --> 00:03:53,520
मेरा डिस्प्यूट इनके साथ यह है कि तुम कहते हो वो प्रवेश करता है। मैं

54
00:03:53,520 --> 00:03:58,080
कहता हूं वो प्रवेश नहीं करता। वो शाश्वत सत्य है।

55
00:03:58,080 --> 00:04:02,480
गीता में लिखा है कि सत्य का कभी नाश्ते विद्यते

56
00:04:02,480 --> 00:04:02,980
भावो

57
00:04:02,720 --> 00:04:06,720
ना भाव विद्यते सत। सत्ता का कभी विनाश नहीं होता है।

58
00:04:06,720 --> 00:04:10,800
सत्य इस दुनिया में सदा कायम है। लेकिन यहां से उनकी और

59
00:04:10,800 --> 00:04:14,880
मेरी दोनों की आपस में खटकती है। आपकी ब्रह्मा

60
00:04:14,880 --> 00:04:18,880
कुमारी से आपकी वीरेंद्र दीक्षित जी से दोनों से ही

61
00:04:18,880 --> 00:04:23,200
खटकती है। अब तो बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित से नहीं खटकती है। अच्छा मतलब

62
00:04:23,200 --> 00:04:27,200
वहां जो वहां बैठे जो वहां बैठे जो वहां

63
00:04:27,200 --> 00:04:31,680
बैठकर के ज्ञान को अज्ञान बना रहे हैं ना उनसे

64
00:04:31,680 --> 00:04:35,840
खटकती है। बाबा ने तो जो सुनाया बहुत एग्जैक्ट सुनाया ब्रह्मा बाबा ने सुनाया फिर बाबा वीरेंद्र

65
00:04:35,840 --> 00:04:39,840
देव दीक्षित ने सुनाया 40 साल बहुत अच्छा समझाया मतलब दादा जो लेखराज

66
00:04:39,840 --> 00:04:44,240
जी है उनसे भी नहीं खटकता है और जो वीरेंद्र

67
00:04:44,240 --> 00:04:48,240
देव दीक्षित जी से भी नहीं खटकता है जी बिल्कुल भी नहीं वो तो

68
00:04:48,240 --> 00:04:53,280
मेरे बाप और दादा ये जो शब्द यूज़ करते हैं ना बाप और दादा

69
00:04:53,280 --> 00:04:57,600
तो राम बाप को कहते हैं कृष्ण बच्चे को कहते हैं ऐसा पढ़ाई जब हमने पढ़ी

70
00:04:57,600 --> 00:05:00,400
तो उस पढ़ाई में आया

71
00:05:00,400 --> 00:05:04,480
तो राम बाप जिसको को दुनिया राम श्री राम जय जय श्री राम बोलते

72
00:05:04,480 --> 00:05:09,040
हैं। इस पढ़ाई के अनुसार तो बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित ही श्री राम है।

73
00:05:09,040 --> 00:05:13,120
अच्छा वीरेंद्र दीक्षित जी श्री राम जो पढ़ाई यहां

74
00:05:13,120 --> 00:05:18,000
पढ़ाई गई है वो पढ़ाई स्पष्ट बोलती है। वो वो एक अलग चीज है।

75
00:05:18,000 --> 00:05:22,640
मैं ये पूछ रहा था कि जो वीरेंद्र दीक्षित जी हैं जैसे उन्होंने कहा कि

76
00:05:22,640 --> 00:05:26,800
ईश्वर प्रवेश नहीं करता है। ईश्वर तो सदा से है।

77
00:05:26,800 --> 00:05:31,600
है ना? यह बात मैं वो नहीं कह रहे। मैं कह रहा हूं। वो तो कहते प्रवेश तुम

78
00:05:31,600 --> 00:05:35,840
वो कहते हैं मैं नहीं कह रहा मैं मैं तो इस बात का पक्षधर

79
00:05:35,840 --> 00:05:40,480
हूं कि ईश्वर सदा सत्य है वो बीज रूप है रचयता है

80
00:05:40,480 --> 00:05:44,560
इतने अंश में आपका विरोध है विदेव दीक्षित जी से

81
00:05:44,560 --> 00:05:48,960
बिल्कुल जैसे जैसे सिद्धांशु जी जो सत्य सनातन

82
00:05:48,960 --> 00:05:53,520
धर्म है मेरा नाम शिव मेरा नाम शिवश

83
00:05:53,520 --> 00:05:57,760
शिवशु जी जी शिवशु जी हमारा

84
00:05:57,760 --> 00:06:02,320
टोटल नौ धर्म है हमारी सृष्टि में आज इस दुनिया

85
00:06:02,320 --> 00:06:06,400
उसमें से अगर देखा जाए तो एक सनातन धर्म मूर्ति पूजा को मानता है। बाकी सब

86
00:06:06,400 --> 00:06:10,560
धर्म मूर्ति पूजा का खंडन करते हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़]

87
00:06:10,560 --> 00:06:14,640
और एक मैं दूसरी बात मैं दूसरी बात पूछ रहा हूं

88
00:06:14,640 --> 00:06:18,640
कि वीरेंद्र दीक्षित जी जो है वो जो यह बात कह रहे हैं कि प्रवेश करता

89
00:06:18,640 --> 00:06:22,800
है इतनी जो चीज है वो क्या कहते

90
00:06:22,800 --> 00:06:28,320
हैं आप नहीं मानते हैं कि है जी बिल्कुल भी नहीं बिल्कुल नहीं

91
00:06:28,320 --> 00:06:32,320
भगवान को प्रवेश करने की क्या परिज वो शाश्वत है सदा सत्य है तो वो प्रवेश क्यों

92
00:06:32,320 --> 00:06:33,120
करेगा वो दूसरों

93
00:06:33,120 --> 00:06:38,000
में प्रवेश करेगा या कोई उसमें प्रवेश करेगा अच्छा

94
00:06:38,000 --> 00:06:42,240
एक बात बताओ इनके जो चित्र हैं इनके चार चित्र हैं।

95
00:06:42,240 --> 00:06:46,480
नहीं मैं प्रॉब्लम यह है कि जैसे आपके

96
00:06:46,480 --> 00:06:51,200
यहां पर मुरली आती है कोई दिव्य वाणी आती है मुरली के रूप में

97
00:06:51,200 --> 00:06:55,520
तो वो ऐसा माना जाता है कि लेखराज जी के पास भी आती थी पहले

98
00:06:55,520 --> 00:06:59,680
और फिर बाद में वीरेंद्र दीक्षित जी के पास भी आई है ना अब

99
00:06:59,680 --> 00:07:03,840
मुझे ये बताओ अब मुझे ये बताओ हां हां जब

100
00:07:03,840 --> 00:07:07,920
जब वेदव्यास जी सृष्टि रचने लगे तो वेदव्यास जी

101
00:07:07,920 --> 00:07:12,640
बोलते थे और गणेश जी लिखते थे मेरा प्रश्न अलग है मेरा प्रश्न अलग

102
00:07:12,640 --> 00:07:16,640
सुनिए सुनिए तो हालांकि ब्रह्मा कुमारीज

103
00:07:16,640 --> 00:07:20,960
वाले जो है वो यह बात नहीं मानते कि वीरेंद्र देव दीक्षित के पास भी मुरली

104
00:07:20,960 --> 00:07:25,280
आई। ये थोड़ा सा कांसेप्ट मुरली वाला ठीक कर दीजिए कि

105
00:07:25,280 --> 00:07:29,360
अ वो क्या कैसे लिखवाते हैं क्या करते हैं वो थोड़ा सा

106
00:07:29,360 --> 00:07:33,680
क्लियर कर दीजिए। जी हां वो मैं आपको क्लियर करता हूं।

107
00:07:33,680 --> 00:07:37,840
हमारे हमारे भारतीय इतिहास में जब

108
00:07:37,840 --> 00:07:43,520
वेदव्यास जी बोलते गए और गणेश जी लिखते आप

109
00:07:43,520 --> 00:07:47,760
सुनिएम असल में क्या है हमारा मेन

110
00:07:47,760 --> 00:07:48,260
डिस्कशन

111
00:07:48,160 --> 00:07:52,320
कुछ और है तो अभी आप फैक्ट बता दीजिए कि ये फैक्ट है

112
00:07:52,320 --> 00:07:56,640
उसके सपोर्ट में जो उसके सपोर्ट में उदाहरण

113
00:07:56,640 --> 00:08:00,960
सुनिए तो उसके सपोर्ट में उदाहरण या फिर दृष्टांत वगैरह

114
00:08:00,960 --> 00:08:04,960
वो तब दीजिए जब मैं समझ समझ ना पाऊं क्योंकि हमारा मेन टॉपिक है नहीं। मेन टॉपिक

115
00:08:04,960 --> 00:08:09,120
आगे बढ़ रहा है। इसलिए कह रहा हूं केवल फैक्ट बता दीजिए कि ऐसे होता है।

116
00:08:09,120 --> 00:08:13,200
यह दादा लेखराज जी के पास आती थी दिव्य वाणी वो लिखवाते थे। वो कहते

117
00:08:13,200 --> 00:08:17,200
थे वो बोलते थे। ऐसे कुछ फैक्ट बता दीजिए। उसके सपोर्टिव जो

118
00:08:17,200 --> 00:08:21,360
दृष्टांत है वो या तो तब बताइए जब मैं आपसे समझ ना पाऊं आपकी बात को

119
00:08:21,360 --> 00:08:25,600
और या फिर मेन टॉपिक क्योंकि आगे है। अभी इसको बहुत ज्यादा विस्तार में करने का कोई

120
00:08:25,600 --> 00:08:29,680
औचित्य नहीं रह जाएगा। तो थोड़ा सा ये बता दीजिए फैक्ट क्या है?

121
00:08:29,680 --> 00:08:34,000
जी फैक्ट यह है कि यह जो ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय

122
00:08:34,000 --> 00:08:38,000
विश्वविद्यालय इससे पहले 1936 में ये विद्यालय शुरू हुए हैं। ओरिजिनली जो ओम

123
00:08:38,000 --> 00:08:42,720
मंडली के नाम से जाना जाता है। अच्छा तो 1936

124
00:08:42,720 --> 00:08:46,960
में जो आज बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित है

125
00:08:46,960 --> 00:08:52,960
इनको उस समय सेवक राम के नाम से जाना जा रहा है जो हमें पढ़ाया गया है वहां पर।

126
00:08:53,120 --> 00:08:57,440
असली जो शुरुआत है इन संस्थानों की दोनों ओम मंडली

127
00:08:57,440 --> 00:09:01,440
से चले हैं 1936 से 1936 में

128
00:09:01,440 --> 00:09:03,200
सेवक राम जी गीता सुनाते

129
00:09:03,200 --> 00:09:06,080
थे पढ़ के

130
00:09:06,080 --> 00:09:10,240
आपको इस बात का ना पता हो तो ये बात बता दें कि ओरिजिनली जो ओरिजिनल है

131
00:09:10,240 --> 00:09:14,240
ओरिजिन जो हुआ इन संस्थाओं का वो ओम मंडली से हुआ 1936 से

132
00:09:14,240 --> 00:09:18,240
आप फिर थोड़ा सा ट्रैक बदल रहा है हमें मुरली को

133
00:09:18,240 --> 00:09:22,320
जानना है मुरली का क्या होता था कि आता मुरली

134
00:09:22,320 --> 00:09:26,400
क्या है? मुरली वही तो है कि जो गीता ज्ञान दिया गया है उसके बाद

135
00:09:26,400 --> 00:09:30,640
मुरली दादा लेखराज ब्रह्मा वाली आत्मा है। ब्रह्मा के हाथ में वेद शास्त्र दिखाए

136
00:09:30,640 --> 00:09:34,880
जाते हैं। तो उसमें शास्त्र

137
00:09:34,880 --> 00:09:38,960
ब्रह्मा जी ब्रह्मा वाली जो आत्मा है आपके अनुसार वो लेखराज जी

138
00:09:38,960 --> 00:09:43,520
के शरीर में प्रवेश करती थी। वो बोलते थे लिखते थे।

139
00:09:43,520 --> 00:09:47,680
वो कुछ नहीं करते थे। वो सुबह 2 बजे उठकर के अमृतवेले लिखते थे। फिर उसी

140
00:09:47,680 --> 00:09:51,680
को पढ़ाते थे। मतलब जो जो ब्रह्मा वाली आत्मा है वो उनको

141
00:09:51,680 --> 00:09:55,840
सुनाती थी वो लिखते थे ऐसा था कौन कौन किसको सुनाता था

142
00:09:55,840 --> 00:10:00,000
कोई किसी को नहीं सुनाता था बाबा बैठ के खुद लिखते थे अच्छा वो स्वयं

143
00:10:00,000 --> 00:10:04,000
ब्रह्मा ही थे इसलिए बिल्कुल वेद शास्त्र

144
00:10:04,000 --> 00:10:08,080
किसने लिखा नाम क्या दिया वेद वाणी बोला है मैं मैं वही कह रहा हूं मैं

145
00:10:08,080 --> 00:10:12,080
सपोर्टिव नहीं पूछ रहा हूं अभी मैं आपकी बात सिद्ध कैसे होती है ये नहीं पूछ रहा

146
00:10:12,080 --> 00:10:16,560
मैं आपकी मान्यता पूछ रहा हूं आपका जो आप मानते हो है

147
00:10:16,560 --> 00:10:18,400
मान्यता ये है कि ब्रह्मा बाबा

148
00:10:18,400 --> 00:10:22,480
सुबह 2 बजे उठकर के लिखते थे। ये प्रविष्ट शब्द ही गलत। हां जी।

149
00:10:22,480 --> 00:10:26,560
वो लिखते थे फिर बच्चों को पढ़ाते थे दिन में। अच्छा तो जो प्रविष्टम शब्द

150
00:10:26,560 --> 00:10:30,560
है वो भी उन्होंने लिखा था। प्रविष्टुम शब्द उन्होंने

151
00:10:30,560 --> 00:10:34,560
इसलिए लिखा कि मेरे अंदर शिव भगवान प्रवेश करते हैं क्योंकि मगर

152
00:10:34,560 --> 00:10:39,840
करते नहीं है। नहीं लेकिन है कुछ नहीं है ऐसा।

153
00:10:39,840 --> 00:10:44,080
अच्छा एक चीज इसमें और नहीं समझ में आ रही। अच्छा शिव जी प्रवेश कर रहे हैं मतलब

154
00:10:44,080 --> 00:10:48,160
उनका कहना था कि शिव जी प्रवेश कर रहे हैं ब्रह्मा के अंदर और ब्रह्मा वो स्वयं

155
00:10:48,160 --> 00:10:52,880
थे है ना वो स्वयं वाली आत्मा है जी

156
00:10:52,880 --> 00:10:57,360
और ब्रह्मा वाली ब्रह्मा वाली आत्मा है शरीर नहीं है

157
00:10:57,360 --> 00:11:01,600
शरीर तो शरीर तो भौतिक है शरीर

158
00:11:01,600 --> 00:11:05,600
तो भौतिक है शरीर देखो जो शरीर है ब्रह्मा बाबा है जो

159
00:11:05,600 --> 00:11:09,920
मुरली है उस मुरली का नाम है वेदवाणी मुरली तो हम कह रहे हैं ओरिजिनल

160
00:11:09,920 --> 00:11:14,080
नाम है वेदवाणी नहीं वो ठीक है वो वो अभी हम आगे आएंगे वेद

161
00:11:14,080 --> 00:11:18,480
वेद पर आएंगे वेदव्यास पर भी आएंगे और राम जी पर भी आएंगे कृष्ण जी पर भी आएंगे

162
00:11:18,480 --> 00:11:22,640
मतलब अभी ये तथ्यात्मक बात ये है कि सुबह 2 बजे उठकर के जो

163
00:11:22,640 --> 00:11:26,640
लेखराज जी हैं वो ब्रह्मा वाली आत्मा का

164
00:11:26,640 --> 00:11:30,720
शरीर था लेखराज जी के नाम से जाने जाना जाने वाला है

165
00:11:30,720 --> 00:11:34,000
ना तो वो जो है वो

166
00:11:34,000 --> 00:11:38,000
मुरली लिखता था और जो शिवजी उनका

167
00:11:38,000 --> 00:11:42,320
कहना था कि शिव परमात्मा जो है वो उनके अंदर प्रवेश

168
00:11:42,320 --> 00:11:46,560
करके लिखवा रहे हैं। है ना? ये उनका कहना था।

169
00:11:46,560 --> 00:11:50,720
अब ये उनका अब इसके बाद वीरेंद्र देव दीक्षित जी का क्या

170
00:11:50,720 --> 00:11:55,120
कहना है? वीरेंद्र देव दीक्षित जी का कहना ये है कि ब्रह्मा

171
00:11:55,120 --> 00:11:59,120
जो लिखते थे जो उन्होंने पढ़ाया 1947 से लेकर

172
00:11:59,120 --> 00:12:03,840
के 1969 तक वो जीवित रहे।

173
00:12:03,840 --> 00:12:08,000
1969 में शरीर छोड़ा ना ब्रह्मा बाबा ने। ठीक है?

174
00:12:08,000 --> 00:12:12,400
तो उस समय तक उन्होंने जो लिखा उस लिखे हुए का

175
00:12:12,400 --> 00:12:16,560
बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित जी जो है सरलार्थ उसका अर्थ करके

176
00:12:16,560 --> 00:12:20,560
समझाते हैं जिसके कारण वो गीता में आया ना जो कि

177
00:12:20,560 --> 00:12:24,640
सह आख्या परिपन यानी कि उस व्याख्या सहित उस वेद वाणी की

178
00:12:24,640 --> 00:12:28,880
व्याख्या करते हैं वो उनको आप बाबा ने अलग से कोई मुरली

179
00:12:28,880 --> 00:12:32,960
नहीं चलाई है वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने जो गणना के मुख से निकला

180
00:12:32,960 --> 00:12:37,040
उस वेद वाणी का क्लेरिफिकेशन किया उन्होंने उन्होंने क्लेरिफिकेशन अब

181
00:12:37,040 --> 00:12:41,200
इस क्लेरिफिकेशन को जहां तक है ब्रह्मा कुमारी वाले मानते नहीं होंगे।

182
00:12:41,200 --> 00:12:45,520
जी वो बिल्कुल नहीं मानते। अच्छा ये इस बारे में इनका क्लेम

183
00:12:45,520 --> 00:12:49,200
क्या था वीरेंद्र देव दीक्षित जी का कि वो उनका भी क्लेम

184
00:12:49,200 --> 00:12:53,200
कुछ ऐसा ही था कि मेरे अंदर जो है शिव आते हैं या वो

185
00:12:53,200 --> 00:12:57,360
बस ब्रह्मा ही थे। ब्रह्मा क्या दूसरी बॉडी थी। जैसे पहली बॉडी देख

186
00:12:57,360 --> 00:13:01,680
रहा है दूसरी बॉडी ये लेकिन मुरली कहती

187
00:13:01,680 --> 00:13:05,840
है कि वो आया नहीं आया यह कोई विषय नहीं है। नहीं नहीं मैं

188
00:13:05,840 --> 00:13:10,000
यह नहीं कह रहा मैं कह रहा हूं उनका क्लेम क्या था वो क्या कहते जैसे जैसे

189
00:13:10,000 --> 00:13:14,960
लेखराज जी के बारे में हमने समझ लिया कि वो ब्रह्मा

190
00:13:14,960 --> 00:13:18,960
वाली आत्मा की बॉडी थी लेखराज जी की है ना तो वो

191
00:13:18,960 --> 00:13:22,960
स्वयं ब्रह्मा ही हो गए जी और उन्होंने क्लेम किया कि शिव जी

192
00:13:22,960 --> 00:13:28,800
मेरे अंदर आते हैं और मैं लिखता हूं ये क्लेम था उनका उसके बाद

193
00:13:28,800 --> 00:13:33,280
ये क्लेम करते हैं कि उसके अंदर शिव भगवान आते हैं और वो लिखवा

194
00:13:33,280 --> 00:13:37,520
वो बोलते हैं अंदर अंदर यानी उसके बुद्धि में आता है और वो लिखते रहते हैं। यानी वो वो

195
00:13:37,520 --> 00:13:41,600
नहीं यानी कि वो नहीं लिखते थे। मतलब उन्होंने ऐसा नहीं कहा था

196
00:13:41,600 --> 00:13:45,840
कि मेरे अंदर शिव आते हैं बल्कि उनको मानने वाले ऐसा कहते हैं।

197
00:13:45,840 --> 00:13:49,840
उसको मानने वाले ऐसा कहते हैं कि शिव उसमें प्रवेश करते हैं और वो लिखवाते हैं

198
00:13:49,840 --> 00:13:54,160
और वो लिख लिखता जाता है। अब अब इसमें जो वीरेंद्र

199
00:13:54,160 --> 00:13:58,160
देव दीक्षित जी है इनका क्या कहना था। वीरेंद्र

200
00:13:58,160 --> 00:14:02,320
देव दीक्षित जी कहते हैं कि मतलब शिव क्या

201
00:14:02,320 --> 00:14:05,120
है? शिव के बारे में समझाते हैं।

202
00:14:05,120 --> 00:14:10,160
नहीं नहीं नहीं इस बारे में क्या क्या कहना था कि मेरे अंदर आते हैं

203
00:14:10,160 --> 00:14:14,400
उनका कहना यह था कि जो ब्रह्मा बाबा के मुख से जितनी

204
00:14:14,400 --> 00:14:18,560
मुरलियां चली है ना तो ब्रह्मा ज्ञान को समझ पाया ना ब्रह्मा कुमारी ज्ञान को समझ

205
00:14:18,560 --> 00:14:22,800
पाई तो मैं समझाऊंगा अब इस ज्ञान को तो उनके हिसाब से

206
00:14:22,800 --> 00:14:27,040
उनके हिसाब से लेखराज जी है जो वो ज्ञान को समझ नहीं पाए

207
00:14:27,040 --> 00:14:31,040
समझ नहीं पाए तो जैसे कृष्ण के हाथ में मुरली दिखाते हैं वो काट की मुरली है

208
00:14:31,040 --> 00:14:35,200
तो कठ बुद्धि बता दिया उनको अच्छा तो अब

209
00:14:35,200 --> 00:14:39,280
इनका क्या क्लेम है कि मैं कौन हूं? इनका क्या क्लेम था? वीरेंद्र दीक्षित

210
00:14:39,280 --> 00:14:43,360
जी का? वीरेंद्र देव दीक्षित जी का क्लेम है कि जैसे ब्रह्मा

211
00:14:43,360 --> 00:14:47,680
के चार पुत्र दिखाए जाते हैं। हां। तो

212
00:14:47,680 --> 00:14:51,680
यहां ब्रह्मा कुमारी में ये चार कुमार इकट्ठे गए थे। दशरथ पटेल और चार थे

213
00:14:51,680 --> 00:14:55,840
ये लोग इकट्ठे भठी करके आए थे। अच्छा तो चारों

214
00:14:55,840 --> 00:15:00,000
ने भठी की तो बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित उनमें सबसे छोटे थे। भठी

215
00:15:00,000 --> 00:15:04,240
क्या होती है? भठी होती है जैसे सात दिन का कोर्स करवाते

216
00:15:04,240 --> 00:15:08,800
हैं पहले हम हम सात दिन का कोर्स करने के बाद

217
00:15:08,800 --> 00:15:13,600
फिर भठी के लिए जाते हैं यानी कि भ्ठी जैसे भट्ठे में ईंट पकाते हैं

218
00:15:13,600 --> 00:15:17,760
हम माना जैसे 10 20 लोग इकट्ठे हो गए जो पहले कोर्स

219
00:15:17,760 --> 00:15:20,160
करवाते हैं हफ्ता 10 दिन तक आए कोर्स किया फिर उसके बाद

220
00:15:20,160 --> 00:15:25,600
भठी भी भेजा जाता है पक्का करने के लिए कि हां हमें ज्ञान समझ में आ गया अच्छा

221
00:15:25,600 --> 00:15:29,680
तो जैसे अपना उनका नाम पड़ा सनत कुमार जो इतिहास

222
00:15:29,680 --> 00:15:34,080
बनता है हमारा तो जो ज्ञान और योग में तीखे चले गए।

223
00:15:34,080 --> 00:15:38,160
तो ये जो मुरली हमें पढ़ाई गई इस मुरली के आधार पर बाबा वीरेंद्र देव

224
00:15:38,160 --> 00:15:42,720
दीक्षित जो है सनत कुमार साबित हो जाते हैं कि ये ब्रह्मा का चौथा पुत्र साबित हो गया।

225
00:15:42,720 --> 00:15:46,720
जो योग में से आगे निकल गया। ठीक है। ठीक है। समझ

226
00:15:46,720 --> 00:15:50,880
गया। तो ये सनत कुमार है वीरेंद्र देव दीक्षित जो है वो

227
00:15:50,880 --> 00:15:54,880
सनत कुमार है वो ना तो ब्रह्मा है ना ही वो शंकर है ना शिव

228
00:15:54,880 --> 00:15:59,040
है वो सनत कुमार इस समय वो ब्रह्मा का चौथा पुत्र

229
00:15:59,040 --> 00:16:03,040
सनत कुमार है अच्छा इस समय मतलब पहले कुछ और

230
00:16:03,040 --> 00:16:07,360
थे पहले तो आम आदमी था 40 साल तक तो अपने घर पे ही थी पीएचडी

231
00:16:07,360 --> 00:16:11,760
कर रखी है संस्कृत में उन्होंने अच्छा ये बात और

232
00:16:11,760 --> 00:16:15,760
वो वो टॉपिक लेके आए एक सुनो एक सुनो हां

233
00:16:15,760 --> 00:16:19,760
एक बात और बताएं आपको तो वो पीएचडी के दौरान उनका

234
00:16:19,760 --> 00:16:23,920
टॉपिक था इस सृष्टि का आदि पुरुष कौन? बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित जी जब पीएचडी

235
00:16:23,920 --> 00:16:28,000
कर रहे हैं उस समय उनका टॉपिक है इस सृष्टि का आदि

236
00:16:28,000 --> 00:16:34,000
पुरुष कौन? तो उस सर्च में वो यहां पहुंचे हैं।

237
00:16:34,160 --> 00:16:35,760
ठीक है?

238
00:16:35,760 --> 00:16:39,920
इसमें एक चीज समझ में नहीं आई कि जैसे

239
00:16:39,920 --> 00:16:44,000
जो वीरेंद्र दीक्षित है उनका यह कहना है कि जो लेखराज है वह ज्ञान को समझ

240
00:16:44,000 --> 00:16:48,080
नहीं पाए। जी और अच्छा उनका

241
00:16:48,080 --> 00:16:52,400
यह कहना तो नहीं था कि शिव जी से ज्ञान लिया है उन्होंने। मतलब वीरेंद्र

242
00:16:52,400 --> 00:16:56,400
दीक्षित जी का इस बारे में क्या कहना था? उनका तो सीधा सा एक ही

243
00:16:56,400 --> 00:17:00,480
कहना है कि जो शिव जिसको ये मानते हैं देखो पहली

244
00:17:00,480 --> 00:17:05,360
बात तो प्रविष्टुम जो है वो हमारा शब्द नहीं है सनातन धर्म का।

245
00:17:05,360 --> 00:17:09,760
देखिए अभी आप कह रहे वो भी मानते हैं तो मुझे अभी उनका

246
00:17:09,760 --> 00:17:14,000
उनका कहना क्या था वो जानना है वो तो इस बात को मानते

247
00:17:14,000 --> 00:17:18,160
थे कि ब्रह्मा के मुख से जो भगवान ने बोला है ब्रह्मा ने जो ज्ञान दिया है ब्रह्मा

248
00:17:18,160 --> 00:17:22,400
के मुख से जो वेद वाणी निकली है उस वेद वाणी को कोई नहीं समझ पाया तो

249
00:17:22,400 --> 00:17:28,080
वो वेद शास्त्रों का सार बैठकर के स्वयं वो समझाते हैं

250
00:17:28,080 --> 00:17:32,320
बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित जी जो मुरली मतलब

251
00:17:32,320 --> 00:17:36,640
वीरेंद्र देव दीक्षित जी ये नहीं मानते थे शिव जी उनके अंदर आए।

252
00:17:36,640 --> 00:17:40,800
उनका तो सीधा सा मानना है कि जो यह ज्ञान है इस ज्ञान को नहीं समझ

253
00:17:40,800 --> 00:17:44,880
पा रहे। इस ज्ञान के द्वारा भगवान की पहचान समझने की बात नहीं कर रहा हूं। मैं ये पूछ

254
00:17:44,880 --> 00:17:49,200
रहा हूं कि वीरेंद्र देव दीक्षित जी इस बारे में क्या मानते थे कि शिवजी अंदर

255
00:17:49,200 --> 00:17:50,960
आके बोल रहे हैं या बता

256
00:17:50,960 --> 00:17:55,040
रहे हैं और फिर वो लिख रहे हैं। वो जितने भी मान्यताएं सारी

257
00:17:55,040 --> 00:17:59,200
गलत है। ऐसा मानते थे। मतलब वो आते नहीं है। अंदर नहीं आते हैं।

258
00:17:59,200 --> 00:18:03,200
ये मानते थे। कोई कोई नहीं आता है। कोई नहीं जाता है। भाई साहब ये

259
00:18:03,200 --> 00:18:07,520
तो आपका क्लेम है ना। मैं वीरेंद्र देव दीक्षित जी का स्पष्ट करना चाह रहा हूं।

260
00:18:07,520 --> 00:18:11,600
की तरफ से मैं बोल रहा हूं। हां ठीक। अभी तो अभी थोड़ी देर

261
00:18:11,600 --> 00:18:16,080
पहले तो आप कह रहे थे ना कि प्रविष्ट ये भी मानते थे। प्रविष्ट ये

262
00:18:16,080 --> 00:18:20,320
लोग ब्रह्मा कुमारी मानते हैं। अच्छा ये वीरेंद्र दीक्षित जी ने नहीं माना

263
00:18:20,320 --> 00:18:24,320
प्रविष्टम। प्रविष्ट वो तो इस बात का क्लेम

264
00:18:24,320 --> 00:18:28,400
नहीं करते। वो तो एक सीधा सा करते हैं। भगवान ने जो ज्ञान दिया जैसे भी ब्रह्मा ने जो ज्ञान

265
00:18:28,400 --> 00:18:32,640
दिया है इस ब्रह्मा के मुख से जो ज्ञान निकला है इसका तंत्र नहीं समझ पा रहे तुम लोग सब

266
00:18:32,640 --> 00:18:36,640
ठीक है ठीक है अब अब्मा के मुख से ज्ञान निकला है ठीक है ठीक है

267
00:18:36,640 --> 00:18:41,280
जो के मुख से जो ज्ञान निकला है इस ज्ञान के अंदर भगवान की पहचान

268
00:18:41,280 --> 00:18:45,520
भगवान को कोई नहीं पहचान रहा ठीक है अब ये जो वीरेंद्र

269
00:18:45,520 --> 00:18:49,600
दीक्षित से आपका तो कोई विरोध नहीं है फिर इस हिसाब से क्योंकि उन्होंने भी प्रविष्टम

270
00:18:49,600 --> 00:18:53,600
को नहीं माना कि है मेरा विरोध मेरा विरोध नहीं है मेरा

271
00:18:53,600 --> 00:18:57,680
सिर्फ एक आकलन है जो निष्कर्ष निकला है इस सब को पढ़ने के बाद मैं नहीं

272
00:18:57,680 --> 00:19:03,120
हूं। मेरे साथ और भी 1400 लोग और भी है जिनका सब ये निष्कर्ष है।

273
00:19:03,120 --> 00:19:06,960
सबका ये निर्णय निकला हुआ है। वो क्या निर्णय है?

274
00:19:06,960 --> 00:19:10,960
वो निर्णय ये निकला हुआ है कि किसी ने 10 साल, किसी ने 15 साल, किसी

275
00:19:10,960 --> 00:19:14,800
ने 20 साल इस ज्ञान को सुना, समझा।

276
00:19:14,800 --> 00:19:19,200
और फिर उसको गीता ज्ञान से टेली किया और टेली करने के बाद निष्कर्ष निकला

277
00:19:19,200 --> 00:19:23,520
कि बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित श्री राम है सनत कुमार है शिवलिंग

278
00:19:23,520 --> 00:19:27,680
है महादेव है नहीं नहीं भाई साहब भाई साहब आप गलत गलत जा रहे हैं मैं पूछ

279
00:19:27,680 --> 00:19:31,680
रहा हूं विरोध क्या है वो क्या है विरोध इस बात का है

280
00:19:31,680 --> 00:19:35,680
कि इस परिवेश को और शिव को न समझने के कारण सारे ज्ञान का अज्ञान

281
00:19:35,680 --> 00:19:39,680
बनाया जा रहा है। नहीं नहीं वीरेंद्र देव दीक्षित भी तो यही कह रहे

282
00:19:39,680 --> 00:19:43,840
हैं। उनसे कोई विरोध है क्या आप लोगों का? नहीं किसी से विरोध इस

283
00:19:43,840 --> 00:19:48,080
बात का नहीं है। सिद्धांशु जी आप समझिए इस बात को। हां

284
00:19:48,080 --> 00:19:52,720
हां ये विरोध नहीं है बल्कि इस ज्ञान के अंदर 100%

285
00:19:52,720 --> 00:19:55,840
सच्चाई है। बाबा वीरेंद्र

286
00:19:55,840 --> 00:19:59,840
बात समझे नहीं। मैं कुछ और पूछ रहा हूं। वीरेंद्र देव दीक्षित जी के द्वारा कही

287
00:19:59,840 --> 00:20:03,840
गई कोई बात कोई भी बात ऐसी है जो आप स्वीकार ना करते

288
00:20:03,840 --> 00:20:08,080
हो। बिल्कुल उनकी तो एक-एक बात स्वीकार्य है।

289
00:20:08,080 --> 00:20:12,160
अच्छा वो थोड़ी देर पहले शायद मैं कुछ समझ नहीं पाया। मुझे लगा कि आप वीरेंद्र

290
00:20:12,160 --> 00:20:16,160
देव दीक्षित के भी किसी आंशिक रूप से विरोध में हैं। आपने

291
00:20:16,160 --> 00:20:20,480
बिल्कुल एक एक सेकंड का भी विरोध नहीं है। बल्कि

292
00:20:20,480 --> 00:20:22,080
उनके कुल मिलाकर के आप

293
00:20:22,080 --> 00:20:26,160
वीरेंद्र देव दीक्षित में फेथ रखते हैं पूरी तरीके से वो आपके लिए प्रमाण

294
00:20:26,160 --> 00:20:30,240
है। जी दिलौर जैन से अच्छा अब एक

295
00:20:30,240 --> 00:20:34,320
सवाल यह आता है कि वीरेंद्र दीक्षित जी ने कहा

296
00:20:34,320 --> 00:20:38,560
कि जो लेखराज जी थे उन्होंने

297
00:20:38,560 --> 00:20:42,960
शिव का ज्ञान लिखा समझ नहीं पाए। इसका मतलब वीरेंद्र

298
00:20:42,960 --> 00:20:47,840
देव दीक्षित को जो उनकी योग्यता है

299
00:20:47,840 --> 00:20:52,000
लेखराज जी की योग्यता उस पर कहीं ना कहीं डाउट

300
00:20:52,000 --> 00:20:56,400
है। हां जी हां जी बिल्कुल डाउट था।

301
00:20:56,400 --> 00:21:00,640
हां जी तो इनकी जो मुरली है मुरली में आया राम बाप को कहते हैं कृष्ण

302
00:21:00,640 --> 00:21:04,960
बच्चे को कहते हैं तो वो कृष्ण बच्चा था।

303
00:21:04,960 --> 00:21:09,120
अ मैं ये कह रहा हूं अभी हम राम और कृष्ण की बातों

304
00:21:09,120 --> 00:21:13,120
पे अभी जाएंगे। है ना? अगला पार्ट वही है राम और कृष्ण

305
00:21:13,120 --> 00:21:17,280
वाला उस पर हम जाएंगे क्योंकि हमारी कुछ मान्यताएं अलग है ना

306
00:21:17,280 --> 00:21:21,440
तो आप अगर राम बाप को कहते हैं, राम कृष्ण को कहते हैं तो वो थोड़ा

307
00:21:21,440 --> 00:21:25,600
सा अभी ना करें क्योंकि हमारी मान्यताएं कुछ और है। फिर वो आपस में एक

308
00:21:25,600 --> 00:21:29,840
वैचारिक टकराव होने लगेगा। अभी हम दूसरी चीजें देख रहे हैं।

309
00:21:29,840 --> 00:21:34,800
आगे अगले चैप्टर में हम लोग बातें करेंगे इन विषयों में। है ना? जी। तो

310
00:21:34,800 --> 00:21:37,840
क्या कहते हैं? ये

311
00:21:37,840 --> 00:21:41,920
ये उनको उनकी योग्यता पर डाउट था कि वो अर्थ

312
00:21:41,920 --> 00:21:46,160
सही से बता नहीं पाए मुरली का। लेखराज सही बात है। जी

313
00:21:46,160 --> 00:21:50,240
हां तो जैसे फिर दो चीजें हो

314
00:21:50,240 --> 00:21:54,960
गई कि लेखराज जी ने अर्थ भी बताया है और मुरली भी लिखवाई है।

315
00:21:54,960 --> 00:21:59,040
या सिर्फ मुरली लिखवाई है। दादा लेखराज ने

316
00:21:59,040 --> 00:22:04,400
जो लिखा सुबह उठ के 2:00 बजे जो लिखा वही बच्चों को पढ़ा दिया।

317
00:22:04,400 --> 00:22:08,560
एज इट क्लास में हां एज इट इज लेकिन उसका अर्थ नहीं समझा

318
00:22:08,560 --> 00:22:12,720
पाए। अच्छा तो अब यहां पर एक प्रॉब्लम आती है कि यदि हमें दादा

319
00:22:12,720 --> 00:22:16,800
लेखराज पर आपके जो दादा हैं उन पर यदि हमें भरोसा है

320
00:22:16,800 --> 00:22:20,080
कि वो जो है शिव का ज्ञान हमें लिखवा रहे

321
00:22:20,080 --> 00:22:24,560
हैं। शिव जो बोल रहे हैं वो हमें लिखवा रहे हैं तो यदि आपको भरोसा

322
00:22:24,560 --> 00:22:28,560
है तो फिर जब उनसे गलती हो सकती है

323
00:22:28,560 --> 00:22:32,960
जब आप मान रहे हैं कि अर्थ को लिखवाने में उनसे गलती हुई अर्थ को बताने में गलती हुई

324
00:22:32,960 --> 00:22:37,520
तो मुरली सुनने और लिख लिखने में भी तो गलती हो सकती है।

325
00:22:37,520 --> 00:22:41,520
मुरली सुनने और लिखने में गलती हो सकती है कहीं ना कहीं

326
00:22:41,520 --> 00:22:46,160
हम तो फिर हमें उसकी उनकी मुरलियों पर विश्वास कैसे

327
00:22:46,160 --> 00:22:50,640
उनकी मुरली पर विश्वास ऐसे कि जब उनके मुख से मुरली निकली

328
00:22:50,640 --> 00:22:55,120
तो उससे पहले तो ये ज्ञान 1936 से था जो ज्ञान दिया गया था 1936

329
00:22:55,120 --> 00:22:59,280
का तो किसी को याद नहीं है कि 1936 में क्या ज्ञान दिया

330
00:22:59,280 --> 00:23:04,560
तो 1947 से जब वो ब्रह्मा बाबा के मुख से मुरली निकली तो

331
00:23:04,560 --> 00:23:08,960
जो नया ज्ञान था ना दुनिया के लिए तो एकदम से वो

332
00:23:08,960 --> 00:23:13,280
उसमें एक सीधा सा सेंटेंस आता था कि रूहानी बाप बैठकर के रूहानी बच्चों को पढ़ाते

333
00:23:13,280 --> 00:23:17,360
हैं। तो एक अट्रैक्शन क्योंकि वो ऐसा

334
00:23:17,360 --> 00:23:21,920
नया ज्ञान एकदम से दुनिया के सामने आना तो दुनिया खींची ना उनकी तरफ

335
00:23:21,920 --> 00:23:25,920
और ब्रह्मा बाबा जो है नष्टों को वहां होकर के

336
00:23:25,920 --> 00:23:29,920
बड़े अच्छे से दुनियादारी छोड़ के एकदम नए तरीके से

337
00:23:29,920 --> 00:23:34,880
लेकर के आए और वो मां का ब्रह्मा माने मां होती है। वो मां का स्वरूप था।

338
00:23:34,880 --> 00:23:35,760
नहीं नहीं

339
00:23:35,760 --> 00:23:40,240
यह वो मैं पूछ रहा हूं कि जब हमें मालूम पड़ गया कि

340
00:23:40,240 --> 00:23:44,240
जो लेखराज जी हैं उनसे किसी किसी पॉइंट पर गलती हुई

341
00:23:44,240 --> 00:23:48,400
है। गलती हुई है इसका मतलब कहीं ना कहीं उनका मस्तिष्क वो प्रज्ञा

342
00:23:48,400 --> 00:23:52,400
शक्ति नहीं है कि ईश्वर के ज्ञान को समझ पाए। तो जब वो प्रज्ञा शक्ति

343
00:23:52,400 --> 00:23:56,480
नहीं है तो मुरली को जो सुन रहे हैं और उसको लिखवा रहे हैं। उसमें भी तो वो कमी आ

344
00:23:56,480 --> 00:24:00,480
सकती है। हो सकता है दो चार शब्द मुरली में भी गलत लिखवा दिए हो जो उन्होंने

345
00:24:00,480 --> 00:24:05,040
कुछ और कहा हो शिव जी ने उन्होंने गलत लिखवा दिया हो। कहने का मतलब यह है।

346
00:24:05,040 --> 00:24:09,040
कहने का मतलब यह है कि जैसे लेख जैसे कि आपके

347
00:24:09,040 --> 00:24:13,040
लिए जो वीरेंद्र देव दीक्षित जी प्रमाण है। प्रमाण का

348
00:24:13,040 --> 00:24:17,040
मतलब इन्होंने जो कहा बिल्कुल सही कहा है। अगर मैंने एक भी बात इसकी गलत

349
00:24:17,040 --> 00:24:21,200
कह दी कि ये बात गलत कही है। तो फिर इनकी किसी भी इनकी

350
00:24:21,200 --> 00:24:25,200
किसी भी इनकी किसी भी बात पर मेरा भरोसा होना सिद्ध नहीं होता। एक

351
00:24:25,200 --> 00:24:29,520
न्याय न्याय है। एक अर्ध कुकुट न्याय कहते हैं। अर्ध कुकुट

352
00:24:29,520 --> 00:24:33,680
न्याय का मतलब कि मान रहे हो तो पूरा मानो। नहीं मान रहे हो तो बिल्कुल मत

353
00:24:33,680 --> 00:24:38,000
मानो। मानना है तो पूरा मानो क्योंकि क्योंकि जब हम किसी को प्रमाण

354
00:24:38,000 --> 00:24:42,080
कहते हो प्रमाण का मतलब होता है कि उसको मानने के पीछे हमारे पास

355
00:24:42,080 --> 00:24:46,080
और कोई आधार नहीं है। वो आधार है सबका और यदि हम

356
00:24:46,080 --> 00:24:50,400
उसमें खोजबीन कर रहे हैं कि इसमें ये हो सकता है, ये हो सकता है। इसका मतलब हमारा प्रमाण

357
00:24:50,400 --> 00:24:50,960
कोई और

358
00:24:50,960 --> 00:24:55,120
है। उसके आधार पर हम इसको जांच रहे हैं कि इसने क्या सही कहा है, क्या गलत कहा है।

359
00:24:55,120 --> 00:24:59,360
मगर यहां पर मुरलियों के लिए यहां पर मुरलियों के लिए वीरेंद्र

360
00:24:59,360 --> 00:25:04,000
देव दीक्षित जी के पास केवल एक ही आधार था लेखराज

361
00:25:04,000 --> 00:25:08,080
और लेखराज पर ये डाउट कर रहे हैं कि वो गलत लिखवा रहे हैं। वो गलत ज्ञान दे

362
00:25:08,080 --> 00:25:12,240
रहे हैं। तो जब लेखराज पर डाउट है तो लेख

363
00:25:12,240 --> 00:25:16,400
मेरे कहने का मतलब लेख जब लेखराज के अर्थ पर डाउट है तो लेखराज

364
00:25:16,400 --> 00:25:20,480
की मुरली पर डाउट क्यों नहीं और यदि लेखराज की मुरली पर डाउट नहीं

365
00:25:20,480 --> 00:25:24,480
है तो लेखराज के अर्थ पर डाउट कैसे इसमें

366
00:25:24,480 --> 00:25:28,640
एक सीधी सी बात है कि जो ब्रह्मा के मुख से जितनी

367
00:25:28,640 --> 00:25:33,680
मुरली निकली है ब्रह्मम वाक्यमति जनार्दनम

368
00:25:33,680 --> 00:25:37,760
ब्रह्मा के जो मुख से जो बात निकली है उस बात

369
00:25:37,760 --> 00:25:43,760
का अर्थ इस दुनिया में कोई नहीं समझ पाया और वह बाबा देव दीक्षित

370
00:25:43,840 --> 00:25:48,160
भी हमें तो मौका दो जी हमें तो दो

371
00:25:48,160 --> 00:25:52,240
बोलिए बोलिए आप इतना लंबा क्वेश्चन दे रहे हैं अभी बोलने का मौका दो हां

372
00:25:52,240 --> 00:25:56,320
पहली बात यहां बात डिस्प्यूट की नहीं है। यहां बात भगवान

373
00:25:56,320 --> 00:26:01,360
को समझने की चल रही है। पहली बात तो मुख्य पॉइंट के अंदर नोट करिए आप बात का

374
00:26:01,360 --> 00:26:05,760
इस ज्ञान से ब्रह्मा कुमारी हो चाहे आध्यात्मिक स्तरीय विश्वविद्यालय

375
00:26:05,760 --> 00:26:06,260
हो

376
00:26:06,000 --> 00:26:10,050
डिस्प्यूट इस बात का है कि इन्होंने भगवान को अभी तक पहचाना क्यों नहीं

377
00:26:10,050 --> 00:26:14,560
[गला साफ़ करने की आवाज़] ये सारांश चला वापस इस बात का और

378
00:26:14,560 --> 00:26:18,640
ब्रह्मा के मुख से अगर बात इधर से उधर हुई है तो बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित

379
00:26:18,640 --> 00:26:22,640
ने उस बात को टोटली क्लेरिफाई कर दिया क्योंकि ओरिजिनल ज्ञान दाता तो

380
00:26:22,640 --> 00:26:26,720
ये बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित ही है इस ज्ञान का जो ब्रह्मा के मुख से आया वो

381
00:26:26,720 --> 00:26:30,960
ज्ञान भी उसी की देन है।

382
00:26:30,960 --> 00:26:34,960
जो ब्रह्मा के मुख से जो ज्ञान निकल रहा है वो ज्ञान बाबा वीरेंद्र देव

383
00:26:34,960 --> 00:26:39,120
दीक्षित द्वारा ही दिया गया है। इससे पहले जन्म में ये मुरली

384
00:26:39,120 --> 00:26:43,600
बता रही है।

385
00:26:43,600 --> 00:26:47,600
आपने जवाब दे दिया। जी मैं पूछ सकता

386
00:26:47,600 --> 00:26:51,920
हूं। जी हां

387
00:26:51,920 --> 00:26:56,880
इन्होंने ही पिछले जन्म में इनको ज्ञान दिया था।

388
00:26:56,880 --> 00:27:01,440
जी है ना और यही जो है बिल्कुल

389
00:27:01,440 --> 00:27:05,520
यानी कि शिव ने ज्ञान नहीं दिया है लेखराज को लेखराज

390
00:27:05,520 --> 00:27:09,760
को ज्ञान इन्होंने दिया था शिव को समझ ही नहीं पा रहे ना ब्रह्मा कुमारी

391
00:27:09,760 --> 00:27:13,760
समझ पा रही ना आध्यात्मिक समझ मैं समझने की बात नहीं कर रहा हूं

392
00:27:13,760 --> 00:27:18,320
भाई साहब मैं आपकी चीजों को समझना चाह रहा हूं कि

393
00:27:18,320 --> 00:27:22,640
मुरली जो मुरली जो लिखवा रहे हैं लेखराज जी मुरली

394
00:27:22,640 --> 00:27:26,880
लिखवा रहे हैं जो वो शिव ने दी है लेखराज जी को या इन्होंने पिछले

395
00:27:26,880 --> 00:27:31,200
जन्म में दी है लेखराज जी को किसने किसको दी पिछले जन्म में 1936

396
00:27:31,200 --> 00:27:35,360
से ज्ञान शुरू हुआ है तो 1936 में शिव कहो शिव बाबा बोलते हैं हम

397
00:27:35,360 --> 00:27:39,760
उसको शिव बाबा ने 1936 से दी ब्रह्मा बाबा को सुनाई समझाया ज्ञान

398
00:27:39,760 --> 00:27:44,960
तो फिर लेखराज क्यों कह रहे हैं कि मैं पिछले जन्म में मैंने ही दिया था

399
00:27:44,960 --> 00:27:48,960
कौन बोल रहे हैं लेखराज ये वो वीरेंद्र देव दीक्षित जी

400
00:27:48,960 --> 00:27:53,120
ये क्यों बोल रहे हैं मैंने ही पिछले जन्म में दिया था क्योंकि ये

401
00:27:53,120 --> 00:27:57,360
यज्ञ 1936 से शुरू हुआ है और जो बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित

402
00:27:57,360 --> 00:27:58,720
है 1942 में शरीर

403
00:27:58,720 --> 00:28:04,000
छोड़ के गए थे और इनका भी मर्डर हुआ था।

404
00:28:04,000 --> 00:28:10,000
वीरेंद्र देव दीक्षित जी 1942 में शरीर छोड़कर

405
00:28:11,680 --> 00:28:16,000
में थे उस समय तब हां मतलब लेखराज

406
00:28:16,000 --> 00:28:20,160
जी के सेवादार नहीं है। ब्रह्मा जी के पुत्र नहीं है। ये सनत कुमार नहीं है।

407
00:28:20,160 --> 00:28:24,240
ये कोई और सनत ये सनत कुमार तो सन से बात

408
00:28:24,240 --> 00:28:29,120
को समझो आप। हां सनत कुमार कह रहे हैं 1969 के बाद में

409
00:28:29,120 --> 00:28:33,360
हम बात अब जो बात चल रही है वो 1942

410
00:28:33,360 --> 00:28:37,360
की चल रही है जो ये तो आप बोल रहे हैं कि वो

411
00:28:37,360 --> 00:28:41,360
मर गए उनका मर्डर हुआ था तो अभी दोबारा जन्म ले

412
00:28:41,360 --> 00:28:45,520
आए तो बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित उससे पहले सेवक राम के नाम से था

413
00:28:45,520 --> 00:28:50,000
अच्छा वो सेवक राम के नाम से वो थे तब 1942

414
00:28:50,000 --> 00:28:54,720
में उनका मर्डर हुआ और फिर वह आए वीरेंद्र देव दीक्षित जी के रूप में

415
00:28:54,720 --> 00:28:59,040
मगर है तो वह सनत कुमार ही जी 19 सनत

416
00:28:59,040 --> 00:29:03,040
कुमार कहेंगे 40 साल का होने के बाद जब ब्रह्मा कुमारी आश्रम में आए

417
00:29:03,040 --> 00:29:07,120
ज्ञान लिया ज्ञान समझा और ज्ञान को दूसरों को समझाने लगे मतलब दूसरे

418
00:29:07,120 --> 00:29:11,280
वाले जन्म में दूसरे वाले जन्म में पहले वाले

419
00:29:11,280 --> 00:29:14,080
जन्म में ये लेखराज के पास

420
00:29:14,080 --> 00:29:18,160
थे और सेवक राम के

421
00:29:18,160 --> 00:29:22,560
दादा लेखराज के जीजा थे बहनोई थे अच्छा लेखराज

422
00:29:22,560 --> 00:29:26,800
के जीजा थे बहनोई और इन्होंने लेखराज जी को मुरली

423
00:29:26,800 --> 00:29:30,880
सुनाई थी। इन्होंने दादा लेखराज को दादा लेखराज

424
00:29:30,880 --> 00:29:35,040
को साक्षात्कार हुए थे विनाश के और नई दुनिया की स्थापना के।

425
00:29:35,040 --> 00:29:40,080
नहीं नहीं भाई साहब देखिए मैं पूछ रहा हूं कि मुरली उन्हें

426
00:29:40,080 --> 00:29:44,080
आप सही सुनिए तो अभी मैंने 10 मिनट पहले

427
00:29:44,080 --> 00:29:48,240
आपसे एक प्रश्न पूछा कि मुरली उन्हें इन्होंने सुनाई है। पिछले जन्म में

428
00:29:48,240 --> 00:29:52,640
सेवक राम नाम से जो जिनका जन्म था इन्होंने सुनाई।

429
00:29:52,640 --> 00:29:56,720
देखो अब यहां से तथ्य क्लियर करो आप। दादा लेखराज को 1936

430
00:29:56,720 --> 00:30:01,120
में साक्षात्कार हुए। ठीक है? किसके? सेवक

431
00:30:01,120 --> 00:30:05,120
सेवक राम ने उनको उनके साक्षात्कारों का अर्थ समझाया और

432
00:30:05,120 --> 00:30:09,200
गीता बैठकर के 1936 से 1942 तक सेवक राम ने यज्ञ चलाया

433
00:30:09,200 --> 00:30:13,360
है पहले। और उस समय ये लेखराज क्या

434
00:30:13,360 --> 00:30:17,600
करते थे? लेखराज सुनते थे, शिष्य थे। उनको साक्षात्कार हुए

435
00:30:17,600 --> 00:30:21,600
थे तो वो ज्ञान सुनते थे। गीता ज्ञान दिया जाता था 1936 से 1942 यानी कि

436
00:30:21,600 --> 00:30:25,760
सेवक राम जी से वो ज्ञान सुनते थे लेखराज जी

437
00:30:25,760 --> 00:30:29,200
अपने जीजा से जी अपने अपने जीजा

438
00:30:29,200 --> 00:30:33,200
से सुनते थे ओके ओके ओके यानी कि तो

439
00:30:33,200 --> 00:30:37,840
फिर ये वाली बात कैसे आ रही कि मुरली जो है इनको आती थी ये

440
00:30:37,840 --> 00:30:42,880
अब भाई वो तो वो तो सेवक राम जी से सुनते थे ना सज्ञान

441
00:30:42,880 --> 00:30:47,520
अब पॉइंट पे आ गए अब देखो अब आपको बात समझाते हैं 1936 में

442
00:30:47,520 --> 00:30:51,520
1936 3 में दादा लेखराज को जो हीरों का व्यापारी था कोलकाता

443
00:30:51,520 --> 00:30:55,680
में हम इनको साक्षात्कार हुए भगत भगत

444
00:30:55,680 --> 00:30:59,920
प्रकार की जो आत्मा होती है ना शुद्ध भक्ति करते हैं जो लोग तो

445
00:30:59,920 --> 00:31:04,080
उनको चतुर्भुजी विष्णु के साक्षात्कार हुए फिर नई दुनिया के हुए विनाश

446
00:31:04,080 --> 00:31:08,240
के हुए तो वो जो है ना पूछते घूम रहे थे दुनिया में कि ये है क्या मुझे कैसा

447
00:31:08,240 --> 00:31:12,480
दिखाई दे रहा है ये सब ठीक है तो जो उन्होंने जो भक्ति

448
00:31:12,480 --> 00:31:16,560
मार्ग के गुरु किए हुए थे उन सब के पीछे इधर उधर गए पूछा समझा

449
00:31:16,560 --> 00:31:20,960
लेकिन नहीं समझ पाए हम तत सेवक राम के पास पहुंचे।

450
00:31:20,960 --> 00:31:25,280
दादा लेखराज की तो बड़ी हीरो की दुकान थी। लेकिन

451
00:31:25,280 --> 00:31:29,840
सेवक राम की जो इसका बहनोई था उसकी भी एक छोटी सी दुकान थी उसी बाजार में।

452
00:31:29,840 --> 00:31:33,920
अच्छा तो सेवक राम जी के पास आया। वो सेवक

453
00:31:33,920 --> 00:31:39,440
राम की जो पत्नी हुई वो दादा लेखराज की बहन है। बिल्कुल।

454
00:31:39,440 --> 00:31:43,520
आप ज्ञान के अनुसार यहां पर एक नई बात बताऊं आपके लिए भी बड़ी जानकारी की बात है।

455
00:31:43,520 --> 00:31:44,320
वो जो दादा

456
00:31:44,320 --> 00:31:48,320
जो सेवक राम की पत्नी है वही लक्ष्मी और भारत माता है और ये सेवक राम ही भारत

457
00:31:48,320 --> 00:31:52,320
है। ये ज्ञान से बाद में पता चल रहा है 90 साल के बाद। चलो ये तो बाद की

458
00:31:52,320 --> 00:31:56,480
बातें हैं कौन क्या है। चलो वहां सेवक राम

459
00:31:56,480 --> 00:32:00,480
जो है सेवक राम ने गीता के आधार पर उस समय नाम रखा गया। ओम

460
00:32:00,480 --> 00:32:04,800
मंडली और सत्संग होता था। ये ओम मंडली। ठीक है।

461
00:32:04,800 --> 00:32:09,760
सेवक राम की शरण में आ गए। लेखराज जिनको अभी चतुर्भुजी

462
00:32:09,760 --> 00:32:13,840
भगवान के दर्शन विष्णु के दर्शन हुए हैं और सृष्टि का नाश और वो सब

463
00:32:13,840 --> 00:32:18,320
देखा है उन्होंने है ना ऐसा जी जी बिल्कुल सेवक

464
00:32:18,320 --> 00:32:22,640
अब एक तरीके सेक राम गुरु है इस समय जी बिल्कुल

465
00:32:22,640 --> 00:32:26,640
सेवक राम की असली और उनका उनके उनके द्वारा जो ये जो ये

466
00:32:26,640 --> 00:32:30,880
अभियान चल रहा है इसका नाम है मंडली प्रणवक्षर

467
00:32:30,880 --> 00:32:34,880
जो है मंडली ठीक है बोलिए तो ओम

468
00:32:34,880 --> 00:32:40,000
मंडली 1936 से 1942 तक चलती रही। जी।

469
00:32:40,000 --> 00:32:44,240
वहां पे कुछ पवित्रता के नाम पर झगड़ा हुआ जिसके कारण ब्रह्मा बाबा

470
00:32:44,240 --> 00:32:48,640
यज्ञ छोड़ के भाग लिए। हम यज्ञ

471
00:32:48,640 --> 00:32:52,880
छोड़ के भागे तो कराची होते हुए धीरे-धीरे ये माउंट आबू पहुंचे

472
00:32:52,880 --> 00:32:57,360
बाद में। और जब उस समय सेवक राम को वहां जो सिंधी

473
00:32:57,360 --> 00:32:59,680
थे कराची में उधर

474
00:32:59,680 --> 00:33:03,920
पाकिस्तान में रह रहे उस समय जो आज पाकिस्तान का भाग है तो वहां

475
00:33:03,920 --> 00:33:07,920
सेवक राम जी को तो मार दिया गया था। ठीक

476
00:33:07,920 --> 00:33:13,920
है? और 1942 में ही भारत पाकिस्तान का बंटवारा हुआ।

477
00:33:13,920 --> 00:33:17,920
हम तो जब वो मारकाट हुई तो मारकाट

478
00:33:17,920 --> 00:33:21,920
के समय ब्रह्मा बाबा कुछ कन्याओं माताओं के साथ वहां से दौड़

479
00:33:21,920 --> 00:33:25,920
गए थे। चले गए हम और दादा

480
00:33:25,920 --> 00:33:30,080
जो सेवक राम जी थे उनको मार मूर के कहीं दीवार में जैसे आप ये सारे मिले हैं

481
00:33:30,080 --> 00:33:34,080
सारे इनके यहां से कि दीवार में दिया उनका उनकी हत्या कर दी गई ठीक है

482
00:33:34,080 --> 00:33:38,640
सेवक राम जी तो दो माताएं यज्ञ में बताई जाती है

483
00:33:38,640 --> 00:33:42,640
नहीं नहीं माताएं छोड़िए मैं मुझे वो बताइए कि इनकी मुरली आना कहां से

484
00:33:42,640 --> 00:33:47,200
शुरू हुई है इनकी 1947 हां तो उसी तो बता रहा है 1942

485
00:33:47,200 --> 00:33:52,320
के बाद मुरली कहां चली 1942 से 1947 का पांच साल का नहीं जानोगे

486
00:33:52,320 --> 00:33:56,560
क्या करना मुरली पे ध्यान है ना हमारा तो वो उनकी हिस्ट्री थोड़ी ना जाननी है कि चीज

487
00:33:56,560 --> 00:34:00,800
अरे सेवक राम ने पहले गीता ज्ञान सुनाया पूरी मुरली चलाई उसके बाद

488
00:34:00,800 --> 00:34:04,800
दो माताएं हैं वो मुरली चलाती है फिर 1947 से लेख दादा लेकरा

489
00:34:04,800 --> 00:34:08,880
चलाता है अच्छा दो माताएं जो जो उन्हीं की शिष्या थी सेवक

490
00:34:08,880 --> 00:34:12,880
राम जी की जो सेवक तो सेवक राम की पत्नी हो गई खुद

491
00:34:12,880 --> 00:34:14,960
में हम

492
00:34:14,960 --> 00:34:19,040
और एक एक और थी जो अपनी पत्नी के एब्सेंस में लेके आया

493
00:34:19,040 --> 00:34:23,040
था जो 18 20 साल की लड़की की थी। एक और शादी की थी सेवक राम

494
00:34:23,040 --> 00:34:27,120
ने बाद में। दो शादियां थी। दो शादियां थी तो

495
00:34:27,120 --> 00:34:31,120
दो माताएं थी। अच्छा अच्छा सेवक राम जी की उस

496
00:34:31,120 --> 00:34:35,280
समय आयु क्या थी जब लेखराज जी उनसे ज्ञान ले रहे थे। 60 साल

497
00:34:35,280 --> 00:34:39,600
और लेखराज जी की बहन से विवाह भी था। मतलब इनका सेवक

498
00:34:39,600 --> 00:34:43,600
बहुत वो तो पहले से ही था। घर गृहस्थ चल रहा था पहले से ही। तो क्या आयु

499
00:34:43,600 --> 00:34:47,760
रही होगी वो? अब उनका लगा लो चार पांच साल तो छोटी

500
00:34:47,760 --> 00:34:51,760
होती ही है अपने यहां धना अपने धर्म में तो उसकी 60 होगी तो उनकी

501
00:34:51,760 --> 00:34:55,760
55 के करीब लगा 52 55 तो जब लेखराज जी उनसे

502
00:34:55,760 --> 00:35:00,720
ज्ञान ले रहे हैं उस समय सेवक राम जी की आयु थी लगभग 60 साल

503
00:35:00,720 --> 00:35:04,880
जी उस समय वो उन्होंने एक और विवाह भी किया था

504
00:35:04,880 --> 00:35:08,960
20 साल की युवती से उसका कारण क्या था कि जो दादा

505
00:35:08,960 --> 00:35:12,720
लेखराज है वो सत्संग करते थे

506
00:35:12,720 --> 00:35:16,720
ठीक है ठीक है छोड़िए उसका कारण नहीं जानना। आगे चलते हैं। तो

507
00:35:16,720 --> 00:35:21,360
जब 1942 में इनकी हत्या कर दी गई अ

508
00:35:21,360 --> 00:35:25,520
क्या कहते हैं ये जो सेवक राम जी की इसके

509
00:35:25,520 --> 00:35:29,520
बाद अ जो लेखराज जी हैं वो जो दो उनकी बहन

510
00:35:29,520 --> 00:35:30,160
स्वरूपी हुई।

511
00:35:30,160 --> 00:35:34,560
एक बहन है तो दूसरी भी बहन ही हुई। बिल्कुल दोनों बहने हो गई। दोनों

512
00:35:34,560 --> 00:35:38,800
हो गई। तो वो दोनों बहने इनके साथ आई। फिर वो प्रवचन करती

513
00:35:38,800 --> 00:35:43,120
रहीं। 5 साल फिर 1947 से इन्होंने मुरली देना

514
00:35:43,120 --> 00:35:47,280
शुरू किया है। जी कराची में थे उस समय कराची से मुरली 1947

515
00:35:47,280 --> 00:35:51,360
में ब्रह्मा बाबा के मुख से निकलने लगी। अच्छा तो अब यहां पर

516
00:35:51,360 --> 00:35:55,600
पॉइंट यह आता है कि जो मुरली उनके मुख से निकल रही है उनको

517
00:35:55,600 --> 00:35:59,840
शिव जी दे रहे हैं या फिर जो उन्होंने सेवक राम जी से ज्ञान लिया हुआ था वही

518
00:35:59,840 --> 00:36:03,920
उसको मुरली के रूप में दे रहे हैं। जो सेवक राम से उन्होंने सुना

519
00:36:03,920 --> 00:36:07,920
वही ज्ञान उनकी बुद्धि में उपज रहा है और वही सुना रहे हैं। अच्छा

520
00:36:07,920 --> 00:36:11,920
तो उन्होंने ये क्लेम गलत किया है कि हमें शिव बाबा आकर के ज्ञान देते हैं। ये क्लेम

521
00:36:11,920 --> 00:36:16,080
उनका गलत है। भगवान जो है वो दूसरों में प्रवेश करेगा

522
00:36:16,080 --> 00:36:20,240
या भगवान में कोई और प्रवेश करेगा। भगवान कौन है? यही तो सबसे बड़ा विषय चल रहा है इस ज्ञान

523
00:36:20,240 --> 00:36:24,400
में भगवान को मैं ये नहीं कह रहा मैं ये नहीं कह रहा भगवान

524
00:36:24,400 --> 00:36:28,480
वो मैं मैं अभी क्लेम पूछ रहा हूं उन्होंने ये क्लेम एक तरीके से झूठा किया था

525
00:36:28,480 --> 00:36:32,640
कि मुझे जो है शिव जी मेरे अंदर आके लिखवाते ये टोटल गलत क्लेम

526
00:36:32,640 --> 00:36:36,720
है कि शिव जी प्रवेश करते हैं एक चीज यहां पे एक छोटी सी चीज और

527
00:36:36,720 --> 00:36:40,880
रह जाती है कि इस जन्म में तो वीरेंद्र देव दीक्षित जी का जो बाद वाला

528
00:36:40,880 --> 00:36:45,760
जन्म है उसमें तो उनकी दिव्यता आपने बता दी कि वो सनत कुमार है।

529
00:36:45,760 --> 00:36:49,760
है ना? अब इस समय 1966 की जब आप सनत कुमार कह रहे

530
00:36:49,760 --> 00:36:53,760
हैं तो उस समय 1969 में आ जाइए आप। हां हां मैं समझ गया जो

531
00:36:53,760 --> 00:36:58,240
पहले वाला जन्म है उसकी दिव्यता क्या थी? उसकी दिव्यता

532
00:36:58,240 --> 00:37:02,240
यह थी उसकी दिव्यता सुनो। जो 1936

533
00:37:02,240 --> 00:37:06,240
में [गला साफ़ करने की आवाज़] जिसको भगवान हम कहते हैं जो सृष्टि पर

534
00:37:06,240 --> 00:37:10,240
सदा कायम है उसकी दिव्यता वो पहचान हो गई कि उसने ज्ञान देकर के ये सिद्ध कर

535
00:37:10,240 --> 00:37:14,240
दिया कि वो ज्ञान का अकूट भंडार गीता ज्ञान दाता वो सेवक राम है

536
00:37:14,240 --> 00:37:18,320
अच्छा नहीं मतलब वो शिव थे वो शिव शिव

537
00:37:18,320 --> 00:37:22,880
है जी तो ये तो जब शिवजी

538
00:37:22,880 --> 00:37:27,200
यानी शिवजी जो है स्वयं इनके रूप में है

539
00:37:27,200 --> 00:37:31,280
सेवक राम जी के रूप के रूप में सेवक राम जी के रूप शिव जी स्वयं सेवक

540
00:37:31,280 --> 00:37:35,920
राम जी के रूप में जिन्होंने शिष्यत्व प्रदान किया इनको

541
00:37:35,920 --> 00:37:40,080
अपना अब आप ये बताइए आप शिव किसको शिव

542
00:37:40,080 --> 00:37:44,160
मानते हैं नहीं वो बाद की बात है भाई साहब वो बाद की बात है अभी

543
00:37:44,160 --> 00:37:48,320
मैं आपकी केवल मान्यता मान्यता क्लियर कर रहा हूं 1936

544
00:37:48,320 --> 00:37:50,480
में

545
00:37:50,480 --> 00:37:54,560
हां तो वो क्या कहते हैं लेखराज जी को स्वयं शिव

546
00:37:54,560 --> 00:37:58,800
जी जो है जो ये जो ये जो शरीर है सेवक

547
00:37:58,800 --> 00:38:00,800
राम जी वाला इसके द्वारा वो ज्ञान

548
00:38:00,800 --> 00:38:04,800
देते हैं। उसके बाद उनकी हत्या कर दी। उस शरीर को नाश कर दिया जाता है।

549
00:38:04,800 --> 00:38:08,800
और उसके बाद जो उनकी जो दो पत्नियां थी एक युवती थी 20 साल

550
00:38:08,800 --> 00:38:12,800
की और एक जो है वृद्धा थी 55 साल की। ये दोनों पांच साल तक वही ज्ञान

551
00:38:12,800 --> 00:38:16,880
आगे बढ़ाती हैं। उसके बाद 1947 से जो

552
00:38:16,880 --> 00:38:21,680
है ये जो क्या कहते हैं? लेखराज जी हैं 1947

553
00:38:21,680 --> 00:38:25,840
से यह ज्ञान देना शुरू करते हैं और यह कहते हैं कि यह ज्ञान मुझे शिव

554
00:38:25,840 --> 00:38:29,920
जी स्वयं दे रहे हैं। ये ये नहीं बताते कि सेवक राम जी से जो ज्ञान लिया है

555
00:38:29,920 --> 00:38:34,000
उनकी पत्नियों से जो ज्ञान लिया है ये वो ज्ञान है। वो ये नहीं बताते।

556
00:38:34,000 --> 00:38:38,080
अगर शिव देखो बिल्कुल सही बात है। अगर शिव जी ज्ञान देते तो

557
00:38:38,080 --> 00:38:42,160
मैं आपके किसी भी मान्यता को अभी चैलेंज नहीं कर रहा हूं। आप

558
00:38:42,160 --> 00:38:46,160
चिंता मत करिए। जब आप अभी उसको आप अभी उसको

559
00:38:46,160 --> 00:38:50,400
सिद्ध करने में व्यर्थ वो ना करें। मतलब मैं अभी क्लेम चैलेंज

560
00:38:50,400 --> 00:38:54,560
नहीं कर रहा हूं। समझ रहे हैं? मैं तो अभी आगे कहानी वहां पे आना चाह रहा हूं जो

561
00:38:54,560 --> 00:38:58,960
कुछ मुख्य पॉइंट है। तो आप अपनी जिज्ञासा पूरी करो।

562
00:38:58,960 --> 00:39:03,360
हां वो जो तथ्य जब जान ले तब तो हम आपके किसी को काउंटर

563
00:39:03,360 --> 00:39:07,440
कर पाएंगे। है ना? वो काउंटर करना भी है कि नहीं करना है वो जरूरी नहीं

564
00:39:07,440 --> 00:39:11,760
है। वो बाद की बात है। तो अब यहां पे दिक्कत ये

565
00:39:11,760 --> 00:39:15,760
है कि इन्होंने जबकि ज्ञान लिया था सेवक

566
00:39:15,760 --> 00:39:16,260
राम

567
00:39:16,000 --> 00:39:20,080
जी से। मूल ज्ञान सेवक राम जी से लिया था जो स्वयं शिव जी ही थे। है

568
00:39:20,080 --> 00:39:24,400
ना? इन्होंने ज्ञान लिया था उनसे और ये अपने नाम से बताने लगे कि

569
00:39:24,400 --> 00:39:28,720
शिवजी जो है मुझे प्रकट हो के या मेरे अंदर आकर के लिखवा रहे हैं जो कि गलत बात है।

570
00:39:28,720 --> 00:39:32,800
ठीक है। अब बात गलत बात है। हां टोटली गलत बात।

571
00:39:32,800 --> 00:39:38,800
अब आगे की बात ये आती है कि जो

572
00:39:38,960 --> 00:39:43,040
हां जब ये स्वयं शिव जी थे सेवक राम जी तो इस जन्म में

573
00:39:43,040 --> 00:39:47,120
सनत कुमार क्यों है? क्योंकि कोई

574
00:39:47,120 --> 00:39:51,120
भी जब [गला साफ़ करने की आवाज़] आता है आत्मा एक शरीर छोड़ के दूसरा जन्म तो लेगी ही लेगी

575
00:39:51,120 --> 00:39:55,840
प्रकृति का नियम तो नहीं टूटेगा तो वो आत्मा थोड़ी ना थी वो तो

576
00:39:55,840 --> 00:40:00,160
ये बात ये बात एक्सप्लेन करनी पड़ेगी इस बात का डायरेक्ट अंतर नहीं होता ये एक्सप्लेन

577
00:40:00,160 --> 00:40:04,800
करनी पड़ेगी ये बात ठीक ठीक करिए करिए करिए जब पहले

578
00:40:04,800 --> 00:40:08,960
पहले ज्ञान आता है फिर ज्ञान दाता आता है कोई भी नियम है नौ धर्म

579
00:40:08,960 --> 00:40:13,280
है कोई पहले ज्ञान आता है फिर ज्ञान दाता की पहचान होती है

580
00:40:13,280 --> 00:40:17,280
तो 1936 36 में पहले ज्ञान आया। ज्ञान से ही तो जानते हैं कि

581
00:40:17,280 --> 00:40:21,280
इस सृष्टि का मालिक कौन है? उस ज्ञान माना जानकारी किसकी? सत्य

582
00:40:21,280 --> 00:40:25,280
की। कि इस दुनिया में सत्य कौन है? जिस सत्यनारायण

583
00:40:25,280 --> 00:40:29,440
की घर-घर में कथा सुनाई जाती है। तो पहले वो सत्य आकर के ज्ञान

584
00:40:29,440 --> 00:40:31,280
देता है। उस ज्ञान से हमें जानकारी

585
00:40:31,280 --> 00:40:35,280
मिलनी है कि वो सत्य कौन है। तो सेवक राम के

586
00:40:35,280 --> 00:40:39,280
रूप में हम पहचान नहीं पाए कि यही वो ओरिजिनल इस सृष्टि का

587
00:40:39,280 --> 00:40:43,280
सत्यनारायण है। तो 1976 से फिर वही आकर के अपनी जानकारी स्वयं

588
00:40:43,280 --> 00:40:46,320
देता है।

589
00:40:46,320 --> 00:40:50,480
1976 से बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित ब्रह्मा का चौथा पुत्र

590
00:40:50,480 --> 00:40:54,480
बन के वह ज्ञान को क्लेरिफाई कर देता है। इसके सारे ज्ञान को जो ब्रह्मा के मुख

591
00:40:54,480 --> 00:40:58,560
से निकला है। इसका पूरा टुकड़ा करके शुरू किया।

592
00:40:58,560 --> 00:41:02,640
यहां प्रॉब्लम यह हो रही है कि अगर

593
00:41:02,640 --> 00:41:06,800
पुत्र पुत्र बनने की बात की जाए तो वो तो वीरेंद्र

594
00:41:06,800 --> 00:41:10,880
देव दीक्षित किसी के पुत्र के रूप में पहले से ही एक उपाधि को प्राप्त

595
00:41:10,880 --> 00:41:15,280
है। तो फिर पहले आप समझो रियल

596
00:41:15,280 --> 00:41:19,360
रियल उपाधि रियल उपाधि यदि एक मिनट रियल उपाधि यदि

597
00:41:19,360 --> 00:41:23,520
उनकी सनत कुमार की है तो फिर वो शिवजी कैसे हुए? अगर

598
00:41:23,520 --> 00:41:27,760
सनत कुमार की रियल उपाधि है या तो ये कहेंगे कि शिवजी और सनत कुमार एक ही तत्व

599
00:41:27,760 --> 00:41:31,760
है। हां पॉइंट पे आ गए आप सही पकड़ रहे हो। बिल्कुल

600
00:41:31,760 --> 00:41:35,920
सही पकड़ रहे हो। बिल्कुल सही पकड़े आप। आपको प्रणाम करता हूं भाई जी।

601
00:41:35,920 --> 00:41:40,080
आप एक सेकंड में बात को पकड़ गए। प्रणाम आप जैसी शुद्ध आत्मा

602
00:41:40,080 --> 00:41:44,240
को। बहुत शुद्ध प्योर आत्मा है आप। एक सेकंड में ज्ञान पकड़ गए

603
00:41:44,240 --> 00:41:46,400
आप। बिल्कुल। तो शिव जी

604
00:41:46,400 --> 00:41:50,560
और सनत कुमार एक ही तत्व है। बस यहां पर वो जो है ऐसा रोल निभाते हैं सनत कुमार

605
00:41:50,560 --> 00:41:54,560
वाला कि हम ब्रह्मा जी से ज्ञान ले रहे हैं। चौथे पुत्र के रूप में है।

606
00:41:54,560 --> 00:41:58,880
जी है ना? वो अहंकार ब्रह्मा का अहंकार तोड़ने के लिए क्योंकि ब्रह्मा को अहंकार

607
00:41:58,880 --> 00:42:02,880
हो गया था। ये गीता का भगवान प्रैक्टिकल में इस

608
00:42:02,880 --> 00:42:07,040
दुनिया का मालिक मैं हूं। इसलिए ब्रह्मा बाबा को ब्रह्मा बाबा हार्ट अटैक

609
00:42:07,040 --> 00:42:11,040
हो के मरे। अहंकार तोड़ने के लिए तो अहंकार तोड़ने के

610
00:42:11,040 --> 00:42:15,600
लिए उनका शिष्य क्यों बने? उनको उनके गुरु बन के दिखाते। लेकिन

611
00:42:15,600 --> 00:42:19,760
देखो यहां ज्ञान के जन्म की बात है। एक तो जैसे मेरा जन्म मेरे माता

612
00:42:19,760 --> 00:42:23,760
पिता से हुआ उस जन्म की वो एक अलग जन्म की बात है। ज्ञान के जन्म की बात

613
00:42:23,760 --> 00:42:27,840
चल रही है। यहां पर ज्ञान के अनुसार जो जन्म होता है ना उस जन्म की बात चल

614
00:42:27,840 --> 00:42:31,920
रही है। अब दूसरा शरीर लेकर के आवेगा तो आवेगा तो ज्ञान

615
00:42:31,920 --> 00:42:35,920
में ही ना। ज्ञान में आवेगा तो किसी के तो अंडर में आना पड़ेगा ना एक बार। तो

616
00:42:35,920 --> 00:42:39,920
ये दोनों राम और ये दोनों आपस में दोनों आत्मा एक दूसरे के सहयोगी है।

617
00:42:39,920 --> 00:42:43,920
नहीं नहीं वो ठीक है सहयोगी है। तो फिर दिक्कत ये आ रही है

618
00:42:43,920 --> 00:42:48,000
कि अ फिर ये जो वाली बात है ना

619
00:42:48,000 --> 00:42:52,000
घमंड तोड़ने घमंड कैसे टूट रहा है वो बताइए। घमंड इस प्रकार

620
00:42:52,000 --> 00:42:56,160
से टूट रहा है कि ब्रह्मा इस बात को भूल गया कि तुझे ज्ञान देने वाला सेवक राम

621
00:42:56,160 --> 00:43:00,400
था। उसको तो भूल गया। ठीक है? तो इन्होंने जब ये शिष्य

622
00:43:00,400 --> 00:43:01,440
बन के गए हैं। जब ये

623
00:43:01,440 --> 00:43:05,600
शिष्य बन के गए हैं लेखनाथ जी के पास तो उससे

624
00:43:05,600 --> 00:43:09,840
तो और वो पुष्टि हो जाएगी। मतलब शिष्य बन के गए तो उससे घमंड कैसे

625
00:43:09,840 --> 00:43:13,840
टूटेगा? वो कह रहा हूं मैं। उससे घमंड इस प्रकार से टूटा कि उसके ज्ञान को

626
00:43:13,840 --> 00:43:18,160
सारे को समझा के उसका मंथन करके सार निकाल के दे दिया कि इसके इस मनुष्य

627
00:43:18,160 --> 00:43:22,640
सृष्टि का बाप कौन है? ये बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित ने ही हमें समझाया

628
00:43:22,640 --> 00:43:26,800
कि इस ज्ञान जो ब्रह्मा के मुख से इतना ज्ञान है। जी इस बार जब

629
00:43:26,800 --> 00:43:31,280
लेखराज जी के पास शिष्य के रूप में गए हैं तब भी वो ज्ञान ही दे रहे हैं। उन्हें

630
00:43:31,280 --> 00:43:35,680
तो वो गुरु के रूप में ही गए। हां तो था तो देखो

631
00:43:35,680 --> 00:43:39,760
था तो सनत कुमार लेकिन बाद में ज्ञान ज्ञानेश्वर और योग योगेश्वर

632
00:43:39,760 --> 00:43:44,240
कहा जाता है सनत कुमारी फिर

633
00:43:44,240 --> 00:43:48,400
मतलब वो सनत कुमार के रूप में गए हैं मगर उसके

634
00:43:48,400 --> 00:43:52,400
बाद जो है वो और भी एक नया रूप लेते हैं जो

635
00:43:52,400 --> 00:43:56,480
योगी योगेश्वर और फिर वो गुरु बन जाते हैं लेखराज जी के लेखराज जी

636
00:43:56,480 --> 00:44:00,640
उनको एज गुरु स्वीकार करते हैं दादा लेखराज

637
00:44:00,640 --> 00:44:04,880
जी को स्वीकार करते हैं लेकिन ज्ञान और योग के कारण उनसे

638
00:44:04,880 --> 00:44:08,960
आगे निकल गए। नहीं नहीं नहीं मैं ये नहीं कह रहा। मैं कह

639
00:44:08,960 --> 00:44:14,240
रहा हूं जो लेखराज जी है उन्होंने ये कहा कि मेरा गुरु है ये

640
00:44:14,240 --> 00:44:18,320
दादा लेखराज जी ने उस समय नहीं स्वीकार किया। जीवित रहते उन्होंने स्वीकार

641
00:44:18,320 --> 00:44:22,480
नहीं किया। तो घमंड कैसे टूटा? फिर शरीर छूटने के बाद

642
00:44:22,480 --> 00:44:26,880
अकाले मौत जैसे वेद शास्त्रों में गणेश जैसे

643
00:44:26,880 --> 00:44:31,760
अपने सनातन धर्म में गणेश जी का सिर नहीं काट दिया था।

644
00:44:31,760 --> 00:44:35,840
वो आपको वेद शास्त्रों से सारा ज्ञान जोड़कर समझाऊंगा धीरेधी आपको। आप

645
00:44:35,840 --> 00:44:40,240
तो बहुत अच्छे इंसान है। बहुत अच्छी आत्मा है भाई जी। आप बहुत अच्छे से ज्ञान को समझ रहे हो।

646
00:44:40,240 --> 00:44:44,560
जो है ना हमारी मुरली कह रही है। हमारी मुरली कह रही है। क्योंकि क्योंकि

647
00:44:44,560 --> 00:44:48,640
उनका मैं एक क्योंकि उनका अकाल मृत्यु हुई। इससे उनका घमंड टूटा।

648
00:44:48,640 --> 00:44:53,360
घमंड तो जीते जी टूटना चाहिए था ना। मृत्यु के बाद क्या

649
00:44:53,360 --> 00:44:57,440
जीते जी आपको इस चीज की यादगार शिवलिंग के मंदिर में रखी

650
00:44:57,440 --> 00:44:59,360
हुई है। बैल और सामने शिवलिंग।

651
00:44:59,360 --> 00:45:03,760
आपको ज्ञान बहुत अच्छे से समझोगे आप एक दिन बहुत अच्छा समझोगे आप

652
00:45:03,760 --> 00:45:07,920
और निष्कर्ष पर निकलोगे दो चार इंटरव्यू निकलवा दो मेरे साथ आप आपके आप समझ

653
00:45:07,920 --> 00:45:12,720
जाओगे उनको समझाना मुश्किल हो रहा है लेकिन आप समझ जाओगे उनसे जल्दी तो

654
00:45:12,720 --> 00:45:16,960
तो इस सृष्टि रूपी रंग मंच पर ये दोनों शेर है एक जावेगा

655
00:45:16,960 --> 00:45:21,120
दूसरा आवेगा ये नियम है इनका खाली

656
00:45:21,120 --> 00:45:25,200
नहीं रहेगी सृष्टि वो शरीर छोड़ेगा तो वो मैदान में आ जावेगा वो

657
00:45:25,200 --> 00:45:29,280
शरीर छोड़ेगा तो वो मैदान में आ जावेगा दादा लेखराज

658
00:45:29,280 --> 00:45:34,000
कोई छोटी चीज नहीं है। सतयुग का पहला राजकुमार है और दलाल से जो

659
00:45:34,000 --> 00:45:39,200
था वो है ये। ठीक है। तो ब्रह्मा जो ये जो लेखराज जी हैं

660
00:45:39,200 --> 00:45:43,200
घमंड टूटने वाली बात मुझे क्लेरिफाई नहीं हो पाई। खैर छोड़िए वो ठीक

661
00:45:43,200 --> 00:45:47,200
है। आपकी मान्यता है कि वो क्योंकि करेंगे करेंगे भाई जी। करेंगे बिल्कुल

662
00:45:47,200 --> 00:45:51,280
करेंगे आपको। बहुत अच्छे से हो जाएगी। चलते जाओ। बहुत बड़ा पॉइंट नहीं है। वो बहुत बड़ा पॉइंट

663
00:45:51,280 --> 00:45:56,480
भी नहीं है। तो हम लोग आगे चलते हैं। तो अब कुल मिलाकर के

664
00:45:56,480 --> 00:46:01,200
कि 1936 में सेवक राम जी से शिष्य

665
00:46:01,200 --> 00:46:06,000
बनते हैं। ज्ञान लेते हैं लेखराज जी। उसके बाद 1942 में

666
00:46:06,000 --> 00:46:10,320
दंगों में मारे जाते हैं सेवक राम जी। उसके बाद पांच साल उनकी जो दो पत्नियां

667
00:46:10,320 --> 00:46:14,480
थी जो बहन स्वरूप थी लेखराज जी की वो प्रवचन देती है मुरलियों का ज्ञान

668
00:46:14,480 --> 00:46:18,640
देती है उसके बाद उनके भी जाने के बाद जो लेखराज जी हैं वो स्वयं

669
00:46:18,640 --> 00:46:22,880
मुरली सुनाने लगते हैं 1947 से मगर यह कहते हुए कि ये मुरली

670
00:46:22,880 --> 00:46:26,880
जो मैं सुना रहा हूं ये स्वयं शिव जी मुझको सुनवा मेरे शरीर में आकर के सुना रहे

671
00:46:26,880 --> 00:46:31,120
हैं ये जो है मैंने किसी से ज्ञान नहीं लिया है उसके बाद उसके

672
00:46:31,120 --> 00:46:35,600
बाद फिर फिर यह दोबारा कब आते हैं

673
00:46:35,600 --> 00:46:40,240
वीरेंद्र दीक्षित जी के रूप में कब आते हैं 1969 में

674
00:46:40,240 --> 00:46:44,240
69 में ये मतलब कहीं पर जन्म हो चुका होगा मगर वो व्यस्क हो के आए

675
00:46:44,240 --> 00:46:48,320
होंगे लेखराज जी के पास वो जन्म वो जन्म बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित

676
00:46:48,320 --> 00:46:52,320
जी का वो जन्म हुआ अहमदगंज जो है जो यूपी

677
00:46:52,320 --> 00:46:57,200
में पड़ता है फर्रुखाबाद जिले में अहमदगंज में जन्म हुआ

678
00:46:57,200 --> 00:47:01,200
अच्छा तो वो वो जब जन्म ले 40 साल के हो गए तब यहां

679
00:47:01,200 --> 00:47:05,200
आए होंगे लेखराज जी के पास हां जी हां जी तो उसकी जीवन कहानी है

680
00:47:05,200 --> 00:47:11,200
पूरी बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित जी की जब 40 साल के करीब है

681
00:47:11,600 --> 00:47:15,760
उसके बाद आदि पुरुष को टॉपिक ले आए उसके बाद उसके

682
00:47:15,760 --> 00:47:19,760
बाद वो इनकी शरण में आ गए मतलब एक घमंड तोड़ने के लिए एक

683
00:47:19,760 --> 00:47:23,840
लीला के रूप में आ गए इनकी शरण में उस समय उस समय के लिए नहीं कहेंगे

684
00:47:23,840 --> 00:47:26,960
उस समय के लिए नहीं कहेंगे

685
00:47:26,960 --> 00:47:31,040
1969 में जब आए हैं तो उस समय 76

686
00:47:31,040 --> 00:47:35,920
तक तो 76 तक तो शिष्य के रूप में ही रहे सनत कुमार के रूप में ही रहे

687
00:47:35,920 --> 00:47:40,080
1969 में आए आए। अब यहां समझो एक सेकंड की बात है समझने

688
00:47:40,080 --> 00:47:44,240
का। 1969 में आ गए। हां। आकर के

689
00:47:44,240 --> 00:47:48,240
वहां सात दिन का कोर्स ले लिया। ठीक है।

690
00:47:48,240 --> 00:47:52,400
जिस माता से कोर्स लिया ये वही माता कोर्स करवा रही है जो

691
00:47:52,400 --> 00:47:56,480
सेवक राम की पत्नी थी। अभी भी

692
00:47:56,480 --> 00:48:00,560
जी। वो भी तो दोबारा जन्म ले आ गई ना। कुछ सालों के बाद उसने भी शरीर छोड़ दिया। वो

693
00:48:00,560 --> 00:48:05,040
दोनों पत्नियां जो एक चीज करिएगा जब किसी का शरीर जन्म

694
00:48:05,040 --> 00:48:09,120
जब किसी का शरीर छोड़ना हो दूसरा शरीर धारण करना

695
00:48:09,120 --> 00:48:13,200
हो तो आप इसको कहते चलिएगा क्योंकि आपकी जब आप बिना ये बताए

696
00:48:13,200 --> 00:48:17,440
कि जन्मांतर हो चुका है ये बताए आगे बढ़ते हैं तो समझ नहीं पाता हूं समझ रहे हैं

697
00:48:17,440 --> 00:48:21,520
ये चीज बताते चलिएगा कि अब जो वो स्त्री थी वो दूसरा जन्म ले आ चुकी

698
00:48:21,520 --> 00:48:25,680
थी जी अब जो बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित जब ब्रह्मा

699
00:48:25,680 --> 00:48:28,880
कुमारी में पहुंचा

700
00:48:28,880 --> 00:48:33,040
हां ज्ञान लेने के लिए जब ज्ञान लेने के लिए पहुंचा तो यज्ञ के आदि

701
00:48:33,040 --> 00:48:36,960
में जो दो माताएं थी

702
00:48:36,960 --> 00:48:41,600
जो आपने देखा ना पांच साल तो उन्होंने मुरलियां चलाई दो पत्नियां थी ना सेवक राम की

703
00:48:41,600 --> 00:48:45,760
समझ गया वो पत्नियां वो पत्नियों में से कोई एक ही जन्मांतर

704
00:48:45,760 --> 00:48:49,840
भेद से दोबारा आ चुकी है अब वो जो है इनको सेवक राम का

705
00:48:49,840 --> 00:48:54,000
जो दूसरा जन्म है जिसमें वो सनद कुमार की भूमिका निभा रहे हैं अब वो

706
00:48:54,000 --> 00:48:58,400
उनको ज्ञान दे रही है अब वो ज्ञान दे रही है बहुत अच्छे

707
00:48:58,400 --> 00:49:03,840
बहुत अच्छी आत्मा है आप एक सेकंड में बात को पकड़ते हैं और उनका नाम है वेदांती।

708
00:49:03,840 --> 00:49:07,920
हम अच्छा समझ गए आप? उनका नाम है वेदांती

709
00:49:07,920 --> 00:49:11,920
जो माता जी थी। जी। अब उनका नाम है वेदती। वो

710
00:49:11,920 --> 00:49:16,000
बहन कहते हैं। हमको वेदती माता कहते हैं। और हमारी मान्यता है यही भारत माता

711
00:49:16,000 --> 00:49:20,400
है। यही लक्ष्मी। ठीक है। अब इससे आगे चलते हैं। फिर 1976

712
00:49:20,400 --> 00:49:22,560
से

713
00:49:22,560 --> 00:49:26,960
यहां से यहां से समझो बात को। ज्ञान ले लिया बाबा ने।

714
00:49:26,960 --> 00:49:31,040
ज्ञान नहीं ज्ञान लेने का ड्रामा किया। ज्ञान तो था ही ना नहीं

715
00:49:31,040 --> 00:49:36,000
नहीं लेकिन सब गुप्त रहता है ना प्रत्यक्ष नहीं करते भगवान अपने

716
00:49:36,000 --> 00:49:40,480
लीला की वो तो स्वयं शिव थे ना लेकिन यहां

717
00:49:40,480 --> 00:49:46,480
1969 से 76 तक का पांच साल का नहीं थोड़ा सा जानोगे

718
00:49:47,600 --> 00:49:52,000
1976 में अलग आध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय शुरू हुआ 1976

719
00:49:52,000 --> 00:49:56,320
में अलग से हां नहीं तो उन्होंने माताजी से ज्ञान

720
00:49:56,320 --> 00:50:00,480
लेने का ड्रामा किया कि रियल रियल में अभी उसको

721
00:50:00,480 --> 00:50:04,880
प्रैक्टिकल में समझो जो कुछ हुआ प्रैक्टिकल में हुआ उस बात को अलग छोड़ दो अभी आप भी

722
00:50:04,880 --> 00:50:08,880
तो ड्रामा ही तो है वो लीला है एक तरीके से ईश्वर की हां वो लीला है वो लीला है

723
00:50:08,880 --> 00:50:12,880
उस प्रभु की लीला है वो तो ज्ञानी थे ही स्वयं से है

724
00:50:12,880 --> 00:50:17,040
ना वो तो इस वो तो जानन जानन ही हार है अब

725
00:50:17,040 --> 00:50:21,200
1976 वाला जो मामला आ जाता है वहां से उन्होंने अपना विश्वविद्यालय शुरू कर लिया

726
00:50:21,200 --> 00:50:25,280
क्यों शुरू किया क्योंकि उन्होंने ये बताया कि भाई ये लेखराज जी जो है

727
00:50:25,280 --> 00:50:29,360
इनके अंदर नहीं आते थे कोई इनके के पास जो ज्ञान था मैंने दिया था

728
00:50:29,360 --> 00:50:33,520
इनको सेवक राम जी के रूप में सेवक राम जी के रूप में वो ज्ञान दिया था

729
00:50:33,520 --> 00:50:37,760
अब अब यहां से पांच साल की स्टोरी थोड़ा सा बता दूं एक थोड़ी सी अब

730
00:50:37,760 --> 00:50:43,440
अगर आप इजाजत दें तो 1969 से 76 तक का थोड़ा सा बता दे आपको

731
00:50:43,440 --> 00:50:47,600
कोई आवश्यकता नहीं हो वो तो फिर आगे चले हम लोग लेकिन आपके आपके

732
00:50:47,600 --> 00:50:51,680
नॉलेज के लिए जरूरी है आप एक बड़े बड़े शुद्ध आत्मा है आप बताइए बताइए

733
00:50:51,680 --> 00:50:55,760
1969 में जब सात दिन का कोर्स कर लिया भठी कर ली तो

734
00:50:55,760 --> 00:50:59,840
बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित इनकी मुरली ियों को काटने लगे कि तुम कुछ और कह रहे हो। मुरली कुछ

735
00:50:59,840 --> 00:51:03,040
और कह रही है। अच्छा

736
00:51:03,040 --> 00:51:07,200
यहां से झगड़ा शुरू हुआ। झगड़े का कारण नहीं जानोगे? हां ये बताइए।

737
00:51:07,200 --> 00:51:11,200
ये बताइए। हां तो झगड़े का कारण तो यहां से शुरू हुआ ना? 73

738
00:51:11,200 --> 00:51:16,720
से। 1969 से। अच्छा 69

739
00:51:16,720 --> 00:51:21,440
कोर्स तो सात दिन का कोर्स है। कोर्स हो गया। बात को समझ गए। ज्यादा

740
00:51:21,440 --> 00:51:25,920
दिन तक उन्होंने वो शरण नहीं ली है। बस दो हफ्ते दो हफ्ते में ही

741
00:51:25,920 --> 00:51:30,000
बगावत कर बगावत कर दी कि मुरली का मुरली

742
00:51:30,000 --> 00:51:34,320
कुछ और कह रही है तुम कुछ और कह रहे हो अच्छा तो

743
00:51:34,320 --> 00:51:37,840
यहां से झगड़ा शुरू हो गया

744
00:51:37,840 --> 00:51:41,840
तो फिर बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित के साथ इन्होंने जो किया उसका सेंटर आना

745
00:51:41,840 --> 00:51:47,600
बंद कर दिया धक्के मारे वो बेइज्जती की

746
00:51:47,600 --> 00:51:51,680
अच्छा इसमें एक एक ट्विस्ट और है एक छोटा सा प्रश्न और है कि

747
00:51:51,680 --> 00:51:55,680
जब स्वयं परमात्मा ही है जो शिव बाबा स्वयं

748
00:51:55,680 --> 00:51:59,680
मतलब सर्वशक्तिमान ईश्वर तो वह धक्के मारे हैं

749
00:51:59,680 --> 00:52:03,840
और ये बेबस कैसे हो रहा है? वहां हत्या हो गई। उसकी दीवार में चुन दिया गया। यह क्या है?

750
00:52:03,840 --> 00:52:08,000
इसलिए इसलिए हो रहा है कि जो विधि

751
00:52:08,000 --> 00:52:12,400
विधान के अनुसार जो नियम कानून कायदा इस सृष्टि का बना है ईश्वरीय कानून कायदा

752
00:52:12,400 --> 00:52:16,560
है इस सृष्टि का। हां। सृष्टि चल रही है। ये

753
00:52:16,560 --> 00:52:20,640
ईश्वरीय कानून कायदे से चल रही है। और

754
00:52:20,640 --> 00:52:25,280
ईश्वरीय यानी यानी सृष्टि में जो नियम है वो ईश्वर ने बनाए हैं।

755
00:52:25,280 --> 00:52:29,280
ईश्वर ने बनाए और ईश माना शासनकर्ता वर माना श्रेष्ठ श्रेष्ठ जो इस

756
00:52:29,280 --> 00:52:33,600
दुनिया का शासन करता है उसने कानून कायदा बनाया सारा का सारा तो यानी

757
00:52:33,600 --> 00:52:37,680
कि वो जो अपने जो शासन कायदा कानून

758
00:52:37,680 --> 00:52:41,920
बनाया उसको फॉलो कर रहा है। उसको तोड़ता नहीं है। मैं भी वो कहता

759
00:52:41,920 --> 00:52:46,000
है गीता में भी कहता है ना कि मैं भी इसलिए कानून कायदे में बंधा हुआ हूं। मैं प्रकृति के नियम

760
00:52:46,000 --> 00:52:50,320
या कोई कानून कायदा नहीं तोड़ता हूं। मैं भी कानून कायदे में बंधा हुआ हूं। नहीं गीता

761
00:52:50,320 --> 00:52:55,120
में तो उन्होंने ये भी कहा है ना करतुम अकर्तुम अन्यथा करतुम

762
00:52:55,120 --> 00:52:59,280
मतलब करतुम अकर्तुम का मतलब क्या है? मतलब उन्होंने यह

763
00:52:59,280 --> 00:53:02,640
कहा है कि मैं यह भी कर सकता हूं। वो भी जो

764
00:53:02,640 --> 00:53:06,640
नहीं करने वाली चीजें वो भी कर सकता हूं और और भी बहुत कुछ कर सब कुछ कर

765
00:53:06,640 --> 00:53:11,120
सकता हूं। लेकिन लेकिन

766
00:53:11,120 --> 00:53:15,360
वह किसी की कार्य में किसी के किसी

767
00:53:15,360 --> 00:53:19,440
भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करते हैं। सब अपना जो कर्म करता है जो जैसा कर्म

768
00:53:19,440 --> 00:53:23,600
कर रहा है वैसा फल पाता है। नहीं करते नहीं है वो बात

769
00:53:23,600 --> 00:53:28,000
अलग है। वाली बात अलग है। यहां से यहां से नया एपिसोड

770
00:53:28,000 --> 00:53:32,400
ये शुरू होता है। सनत कुमार के रूप में वो सनातन धर्म की स्थापना करने के लिए दर-दर

771
00:53:32,400 --> 00:53:36,480
घूमता है। कोई ज्ञान समझ लो, कोई ज्ञान समझ लो। बीके के यहां भी गया। लोगों

772
00:53:36,480 --> 00:53:40,640
के पास गया गलीगली में कि भाई मेरे पास ज्ञान है। मैं ज्ञान समझा

773
00:53:40,640 --> 00:53:44,640
सकता हूं। तो जैसे एक धर्म की स्थापना करनी

774
00:53:44,640 --> 00:53:48,800
चाहिए। धर्म स्थापना के लिए जो है वो दरदर जाते हैं। जैसे एक धर्म पिता

775
00:53:48,800 --> 00:53:52,800
धर्म की स्थापना करती तो सनत कुमार के रूप में वो सनातन सनातन सत्य सनातन

776
00:53:52,800 --> 00:53:56,880
धर्म की स्थापना करते हैं। और यहां से आपको एक सिर्फ

777
00:53:56,880 --> 00:54:01,040
एक मिनट आप मुझे सुनेंगे। सत्य सनातन धर्म कहा जाता है।

778
00:54:01,040 --> 00:54:05,120
अनादि अनादि सत्य सनातन देवी देवता स्क्रीन है ना शायद

779
00:54:05,120 --> 00:54:09,280
आपका फोन गरम हो गया है। आपकी स्क्रीन शायद जो है ना चिपक

780
00:54:09,280 --> 00:54:13,280
रही है। अब मतलब आपके वीडियो

781
00:54:13,280 --> 00:54:17,280
आपका रुक गया है। फ्रीज हो गया है। ठीक है। फोन आपका

782
00:54:17,280 --> 00:54:17,780
गरम तो

783
00:54:17,760 --> 00:54:21,760
नहीं हो गया? नहीं फोन गरम नहीं हुआ है। मे बी नेटवर्क प्रॉब्लम हो सकती है

784
00:54:21,760 --> 00:54:27,760
और बाकी कुछ भी। नहीं देखिए वाईफाई वगैरह कनेक्ट कर लीजिए।

785
00:54:35,760 --> 00:54:39,840
ये है पूरी कहानी वीरेंद्र देव दीक्षित जी की और जो है लेखराज जी

786
00:54:39,840 --> 00:54:44,080
की। ओके। आवाज आ रही है अभी भी? हां आवाज

787
00:54:44,080 --> 00:54:48,240
आ रही है। मगर आपका जो वो है ना क्या कहते हैं?

788
00:54:48,240 --> 00:54:52,400
अ स्पेस मूवमेंट वगैरह वो हां अब

789
00:54:52,400 --> 00:54:57,280
ठीक है। ठीक है। चलिए। अब चल रहा है। हां अब चल रहा है।

790
00:54:57,280 --> 00:55:01,680
अब जैसे सनत कुमार हो गया ना ये सनत कुमार के रूप में सत्य सनातन

791
00:55:01,680 --> 00:55:05,840
धर्म की स्थापना के लिए निकलता है। इन्होंने तो धक्के मार के निकाल दिया बाबा को वहां से। हां

792
00:55:05,840 --> 00:55:10,000
हां उसके बाद ये सत्य सनातन धर्म की स्थापना के लिए चलता

793
00:55:10,000 --> 00:55:14,000
है। तो हम सनातनियों को ये समझना चाहिए कि हमारा धर्म अनादि है तो हमारा धर्म

794
00:55:14,000 --> 00:55:18,080
पिता भी अनादि है। हम हम ये बात मुझे दुनिया

795
00:55:18,080 --> 00:55:22,080
को समझानी है। अब आप निमित्त बनो। कौन सहयोग करेगा? कोई ना कोई तो अच्छे

796
00:55:22,080 --> 00:55:26,240
लोग आवेंगे सामने। अब मतलब वो 76 से फिर चालू कर देते हैं अपना

797
00:55:26,240 --> 00:55:30,560
आध्यात्मिक विश्वविद्यालय। जी आध्यात्म पहले नाम रखा

798
00:55:30,560 --> 00:55:32,960
प्रजापिता ईश्वरीय विश्वविद्यालय नाम रखा

799
00:55:32,960 --> 00:55:36,960
पहले उन्होंने। अच्छा ये तो बाद का नाम

800
00:55:36,960 --> 00:55:41,120
आध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय बाद का नाम है। पहले नाम था प्रजापिता ईश्वरीय

801
00:55:41,120 --> 00:55:45,360
विश्वविद्यालय। अच्छा जी।

802
00:55:45,360 --> 00:55:49,760
और फिर बाद में उन्होंने क्या रखा है नाम? आध्यात्मिक

803
00:55:49,760 --> 00:55:53,840
ईश्वरीय विश्वविद्यालय। आध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय

804
00:55:53,840 --> 00:55:58,640
तो अभी जो ये आध्यात्मिक विश्वविद्यालय नाम से चल रहे हैं वो अलग है।

805
00:55:58,640 --> 00:56:03,200
जी वो बिल्कुल वो अपने आप को सूर्यवंशी कहो या रुद्राक्ष कहो

806
00:56:03,200 --> 00:56:07,200
क्योंकि सत्य सनातन धर्म देवी देवता धर्म है ना

807
00:56:07,200 --> 00:56:11,600
एक जगह यानी कि बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित तो जो आध्यात्मिक ईश्वर विश्वविद्यालय

808
00:56:11,600 --> 00:56:15,680
वो अपन को कहता है सूर्यवंशी और ब्रह्मा कुमारियों को समझते

809
00:56:15,680 --> 00:56:19,680
हैं चंद्रवंशी और चंद्रवंशी और सूर्यवंशी मिलकर के नर

810
00:56:19,680 --> 00:56:23,760
से नारायण नारी से लक्ष्मी बनने का ज्ञान दिया जाता है। यानी अभी

811
00:56:23,760 --> 00:56:27,760
आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के रूप में ख्यापित हो रहा है। जैसे

812
00:56:27,760 --> 00:56:31,760
अभी दिल्ली में भी हम गए वहां पे कोई अमोल कोकने है

813
00:56:31,760 --> 00:56:36,720
जी उसके उसके अंडर में जो है आध्यात्मिक विश्वविद्यालय चल रहा है

814
00:56:36,720 --> 00:56:40,800
किसने कहा ये किसने कहा आपको कि आध्यात्मिक विश्वविद्यालय

815
00:56:40,800 --> 00:56:45,440
चल रहा है नहीं वहां बोर्ड लगा हुआ है और वो अपने आप को वीरेंद्र

816
00:56:45,440 --> 00:56:48,560
से का अनुयाय मानते हैं।

817
00:56:48,560 --> 00:56:52,560
क्या अनुयाय मानते हैं वो एक अलग बात है लेकिन ये तो नहीं कह सकते ना कि आध्यात्मिक ईश्वरी

818
00:56:52,560 --> 00:56:56,640
विश्वविद्यालय चला रहे हैं। नहीं वो यह कह रहे हैं कि हम जो है उनहीं का

819
00:56:56,640 --> 00:57:01,280
सेंटर चला रहे हैं। आध्यात्मिक

820
00:57:01,280 --> 00:57:05,360
नहीं अब मैं कहने लगू मैं उनका मैं उनकी गद्दी पे बैठा हूं। ऐसा नहीं होता

821
00:57:05,360 --> 00:57:09,440
है। भगवान भगवान होता है। सब भगवान नहीं हो सकते। मतलब अमोल

822
00:57:09,440 --> 00:57:13,680
कोकने जी का यह दावा गलत है। ये सब साहब गलत है। सब अपनी मनमत

823
00:57:13,680 --> 00:57:17,760
कर रहे हैं। अच्छा ठीक है। अब वापस आ जाते हैं। अब यहां पे एक

824
00:57:17,760 --> 00:57:22,240
दिक्कत ये आती है कि जैसे इन्होंने कहा कि भाई मुरली जो है मैंने ही दी थी

825
00:57:22,240 --> 00:57:26,400
और जो मुरली का सही अर्थ है वो मैं बता रहा हूं। तो यहां पे एक दिक्कत

826
00:57:26,400 --> 00:57:30,480
है कि अगर वो मुरली का सही अर्थ बता रहे हैं। यहां पे मैं आपको एक

827
00:57:30,480 --> 00:57:36,000
बात और बता दूं। भगवान अपने को कभी भगवान नहीं कहता है।

828
00:57:36,000 --> 00:57:40,640
जो सत्य है वह अपने को सत्य नहीं कहता है। सत्य स्वयं स्वयं

829
00:57:40,640 --> 00:57:45,360
प्रकाशित होता है। यानी कि बाद में ये 40 50 साल ज्ञान लेने के बाद

830
00:57:45,360 --> 00:57:49,520
वो अपने को भगवान भगवान कह रहे हैं ना वो मैं ही हूं सनातन बीज। गीता

831
00:57:49,520 --> 00:57:53,920
में कहता हूं मैं ही हूं सनातन बीज। एक बात बताइए

832
00:57:53,920 --> 00:57:58,320
अब नाम क्या अकेला सनत कुमार है? क्या अकेला महादेव है?

833
00:57:58,320 --> 00:58:02,320
राम कहो, हनुमान कहो, महादेव कहो, शिव कहो, शंकर कहो, नाम तो उसके

834
00:58:02,320 --> 00:58:03,600
हजारों हैं। नहीं

835
00:58:03,600 --> 00:58:07,680
नहीं मेरा जो प्रश्न है वह अलग है। मैं यह कह रहा

836
00:58:07,680 --> 00:58:12,640
हूं कि क्या कहते हैं ये जो

837
00:58:12,640 --> 00:58:16,640
उन्होंने जो मुरली के नाम से यह बताना चालू किया कि

838
00:58:16,640 --> 00:58:20,800
भाई जो मुरली के नाम मुरली जो आ रही है वो सही है। लेखराज जी अच्छा

839
00:58:20,800 --> 00:58:24,800
लेखराज जी की मृत्यु हो चुकी है क्या? अभी 76 से पहले मतलब 76 में

840
00:58:24,800 --> 00:58:28,960
1969 में 1969 में हो गई ना? 18 जनवरी 1969 को तो इन्होंने

841
00:58:28,960 --> 00:58:32,960
जो ज्ञान लिया था लेखराज से डायरेक्ट नहीं लिया था। उनकी वो जो वहां पर सेविका थी

842
00:58:32,960 --> 00:58:36,960
जो उनका जन्मांतर थी। हां तो यहां डायरेक्ट ज्ञान कोई नहीं

843
00:58:36,960 --> 00:58:41,040
लेता है। मधुबन में जो बहने बैठी है उन्हीं से लिया जाता है। नियमित बहनों से लिया जाता है। समझ गए

844
00:58:41,040 --> 00:58:45,360
समझ गए समझ गए समझ गए। तो कुल मिलाकर के इन्होंने ये कहा

845
00:58:45,360 --> 00:58:49,600
76 में कि जो लेखराज जी ने जो मुरली दी है

846
00:58:49,600 --> 00:58:54,000
शिव बाबा के द्वारा उसका देखो उन्होंने

847
00:58:54,000 --> 00:58:58,080
मैं बता रहा हूं। भाई साहब मैं बता रहा हूं। सुन लीजिए। दो बातें उन्होंने कही दो क्लेम

848
00:58:58,080 --> 00:59:02,080
किए। एक तो शिव बाबा ने मुरली नहीं सुनाई। वह मुरली जो है जो

849
00:59:02,080 --> 00:59:06,240
है वह सेवक राम के रूप में मैंने ही सुनाई थी या भेद ये वाला बाद में खुला

850
00:59:06,240 --> 00:59:10,400
होगा कि इन्होंने ही सुनाई थी। हो सकता है। उन्होंने कहा ना हो। ये ये बात हम

851
00:59:10,400 --> 00:59:14,400
कह रहे हैं अपनी तरफ से। ये बात आपने अपनी खोज की है। उससे कह रहे हैं

852
00:59:14,400 --> 00:59:18,640
आप। जी जी। अच्छा ये ये उन्होंने नहीं कहा। बाबा

853
00:59:18,640 --> 00:59:22,720
वीरेंद्र देव दीक्षित ने अपने को भगवान कभी नहीं कहा। ये तो हम कह रहे हैं कि वो भगवान है।

854
00:59:22,720 --> 00:59:26,720
वो सनद कुमार है। हमारे वीरेंद्र देव दीक्षित जी

855
00:59:26,720 --> 00:59:30,720
ने अपने आप को भगवान कभी क्लेम नहीं किया। बिल्कुल कभी नहीं किया। ये

856
00:59:30,720 --> 00:59:34,720
तो हम अपनी रिसर्च से कह रहे हैं। आपकी रिसर्च है। तो वीरेंद्र देव दीक्षित

857
00:59:34,720 --> 00:59:39,120
जी ने अपनी पहचान स्वयं के द्वारा क्या बताई थी? कि

858
00:59:39,120 --> 00:59:43,520
स्वम की पहचान यह बताई कि जो यह मुरली

859
00:59:43,520 --> 00:59:47,600
है इस मुरली का सही अर्थ नहीं निकला है। वो मंथन करके उस

860
00:59:47,600 --> 00:59:52,880
मंथन करके उसमें से भगवान की पहचान बता देते हैं। तो उन्होंने

861
00:59:52,880 --> 00:59:57,120
उन्होंने अपनी कुछ किसी प्रकार की कोई दिव्यता नहीं बताई थी। वो

862
00:59:57,120 --> 01:00:02,320
कुछ नहीं बताया। बिल्कुल एक साधारण पूर्ण जैसे गीता में बताया ना कि जड़मति

863
01:00:02,320 --> 01:00:06,640
शरद कुमार भी नहीं कहा था। कुछ नहीं कहा। ये तो हम अपनी रिसर्च

864
01:00:06,640 --> 01:00:10,720
बता रहे हैं। वो तो एक जस्ट मतलब आपने तीन चीजें

865
01:00:10,720 --> 01:00:14,720
बताई है। एक लेखराज जी की मान्यता क्या है और

866
01:00:14,720 --> 01:00:18,880
फिर उसके बाद वी देव दीक्षित जी की मान्यता क्या है और उसके बाद थोड़ी सी

867
01:00:18,880 --> 01:00:22,880
इत आपकी क्या मान्यता है? ये आप आप बता रहे हैं। जो कुछ

868
01:00:22,880 --> 01:00:27,120
मैं बता रहा हूं वो अपने अपना अपना आधार बता रहा हूं। जो मैंने अभी 12 साल

869
01:00:27,120 --> 01:00:31,120
उनको पढ़ा है समझा है। गीता ज्ञान भी लिया। यहां पे एक चीज और है

870
01:00:31,120 --> 01:00:33,760
कि उन्होंने अपनी पहचान कुछ और बताई है

871
01:00:33,760 --> 01:00:37,760
और आप मानते कुछ और हो। इतने अंश में आप वीरेंद्र दीक्षित जी की

872
01:00:37,760 --> 01:00:42,000
बात के इत जाते हो। बिल्कुल एक एक बात मैंने उनकी

873
01:00:42,000 --> 01:00:47,040
समझी सुनी पूरा ज्ञान को समझा।

874
01:00:47,040 --> 01:00:51,840
बहुत बढ़िया। अब आता है एक पहला पॉइंट जो थोड़ा सा

875
01:00:51,840 --> 01:00:55,920
एक एक प्रश्न है क्योंकि वो क्या कहते हैं? विरुद्ध विरुद्ध में

876
01:00:55,920 --> 01:01:00,160
समझ लीजिए। पहला पॉइंट पहला प्रश्न है कि लेखराज जी की मुरली

877
01:01:00,160 --> 01:01:04,160
का ज्ञान सही से दे रहे हैं वीरेंद्र देव दीक्षित

878
01:01:04,160 --> 01:01:08,640
जी ठीक है तो अब देखो एक मिनट

879
01:01:08,640 --> 01:01:12,640
प्रश्न तो किया ही नहीं प्रश्न तो किया ही नहीं भाई साहब प्रश्न तो करने दीजिए

880
01:01:12,640 --> 01:01:16,720
तो प्रश्न ये है कि लेखराज जी की मुरली का सही अर्थ

881
01:01:16,720 --> 01:01:20,720
बता रहे हैं ये और उनका कहना है कि

882
01:01:20,720 --> 01:01:24,880
वो मुरली तो सही बता रहे हैं जो ईश्वर से ली गई है मतलब जो ईश्वर की बात

883
01:01:24,880 --> 01:01:28,960
है ईश्वर की बात क्या अच्छा इस एक मिनट यहां पे एक

884
01:01:28,960 --> 01:01:33,040
पॉइंट है आपका मानना है कि सेवक राम जी के रूप में उन्होंने ही ज्ञान दिया था लेखराज

885
01:01:33,040 --> 01:01:37,200
जी को ये आपका मानना है मगर लेखराज जी ने इस बारे में क्या कहा कि वो जो मुरली

886
01:01:37,200 --> 01:01:42,000
लिखवाते हैं वो कौन लिखवा रहा है इस बारे में क्या कहा वीरेंद्र

887
01:01:42,000 --> 01:01:46,160
जी वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने ये बताया कि शिव

888
01:01:46,160 --> 01:01:48,800
है शिव भगवान है मैं भगवान नहीं हूं शिव भगवान है

889
01:01:48,800 --> 01:01:52,880
वो उसमें मेरे में भी मतलब वो राम और कृष्ण वाली आत्माओं में उन्होंने

890
01:01:52,880 --> 01:01:57,200
कैसे क्लेरिफाई किया बड़े चतुराई से क्लेरिफाई किया इस बात को

891
01:01:57,200 --> 01:02:01,280
बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित ने बड़ी चतुराई से क्लियर किया दो बार बोल

892
01:02:01,280 --> 01:02:05,440
रहे आप मेन बात बोलिए ना कि वो क्या मानते थे शिव जी ने ज्ञान

893
01:02:05,440 --> 01:02:09,600
दिया था लेखराज जी को कि नहीं दिया था वो ये मानते थे

894
01:02:09,600 --> 01:02:13,600
कि इसमें जो प्रवेश करके वो लिखवाते हैं ये लिखता है लेकिन समझ नहीं

895
01:02:13,600 --> 01:02:17,920
पा रहा है। अच्छा तो यह वीरेंद्र देव दीक्षित

896
01:02:17,920 --> 01:02:22,160
जी ने क्लेम किया था कि क्या कहते हैं मतलब यह वो मानते

897
01:02:22,160 --> 01:02:26,240
थे कि शिव जी ने ही उनके अंदर घुस के ज्ञान दिया है तो अभी तो आप कह रहे थे कि वो

898
01:02:26,240 --> 01:02:30,320
नहीं मानते थे प्रवेश तुम अब आप कह रहे मानते थे प्रवेश तुम अरे भाई जी

899
01:02:30,320 --> 01:02:34,800
ये कह रहे हैं कि मानना एक अलग बात है लेकिन जो प्रैक्टिकल

900
01:02:34,800 --> 01:02:39,040
बात है यह कोई प्रवेश नहीं हम वो जो मैं पूछ रहा हूं उन्होंने

901
01:02:39,040 --> 01:02:43,040
कहा क्या था वो तो उन्होंने सीधी सी बात कही उन्होंने

902
01:02:43,040 --> 01:02:47,040
एक सीधी सी बात कही कि इसको मुरली का ना तो अर्थ समझ में आया

903
01:02:47,040 --> 01:02:51,360
लेकिन जो बच्चा बुद्धि है लिखता है और सुना देता है।

904
01:02:51,360 --> 01:02:55,440
मैं इस बारे में क्या कहा था कि शिवजी ने ज्ञान दिया है कि नहीं दिया है?

905
01:02:55,440 --> 01:02:59,840
घुस के दिया है कि बाहर से दिया है? शिवजी का अर्थ आप भी समझिए।

906
01:02:59,840 --> 01:03:04,320
पहले शिवजी को ही समझना पड़ेगा। बाबा जी

907
01:03:04,320 --> 01:03:08,560
उन्होंने सेंटेंस कहा है। भाई साहब ऐसा है ना कि अभी अगर मैं अर्थ

908
01:03:08,560 --> 01:03:12,640
समझने लगूंगा तो जो हमारा मेन टॉपिक है वो रह जाएगा। उन्होंने कहा क्या

909
01:03:12,640 --> 01:03:16,720
था बस ये बता दीजिए। वह यह मान उन्होंने यह कहा उन्होंने एक

910
01:03:16,720 --> 01:03:20,720
मिनट भाई साहब एक मिनट उन्होंने उन्होंने उन्होंने यह कहा था

911
01:03:20,720 --> 01:03:24,880
कि शिवजी ने उनके अंदर प्रवेश करके ज्ञान दिया है या

912
01:03:24,880 --> 01:03:29,280
उन्होंने यह कहा था कि शिवजी वहां पर आते हैं और लिखवाते हैं। उन्होंने

913
01:03:29,280 --> 01:03:33,280
कहा था उन्होंने उन्होंने [गला साफ़ करने की आवाज़] ये कहा था कि

914
01:03:33,280 --> 01:03:37,280
शिव उसमें प्रवेश करता है। ज्ञान देता है। लेकिन ये समझ नहीं पा रहा है कि शिव

915
01:03:37,280 --> 01:03:41,680
प्रवेश करके ज्ञान दे रहा है। ये शिव है कौन? वो समझ नहीं पाया।

916
01:03:41,680 --> 01:03:45,760
मतलब उन्होंने यह कहा था ना कि शिवजी प्रवेश करते हैं लेखराज जी के

917
01:03:45,760 --> 01:03:50,320
अंदर। आप यह बात उनकी डिकोड आपने उनकी बात की है।

918
01:03:50,320 --> 01:03:54,480
आपने उनकी ये बात डिकोड कर ली है। कहा तो लेकिन

919
01:03:54,480 --> 01:03:57,200
उस बात का

920
01:03:57,200 --> 01:04:01,200
अर्थ दूसरा है। मैं मान रहा हूं। आपने उनकी

921
01:04:01,200 --> 01:04:05,280
बात को डिकोड कर लिया है। उनके इशारों को समझ लिया है। क्यों? मैंने

922
01:04:05,280 --> 01:04:09,280
बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित के इशारे को समझ लिया कि बाबा क्या बात समझना चाहता

923
01:04:09,280 --> 01:04:13,360
है। मैं उस बात मैं मैं आपकी चीजों को क्लेम नहीं कर रहा हूं। मैं अभी उन्होंने

924
01:04:13,360 --> 01:04:17,760
कहा क्या था वो पूछ रहा हूं। तो उन्होंने छोटी सी बात कही।

925
01:04:17,760 --> 01:04:19,600
उन्होंने सीधा सा क्लेम किया

926
01:04:19,600 --> 01:04:24,800
कि यह जो ज्ञान कहां से आ रहा है यह समझ ही नहीं पा रहा है।

927
01:04:24,800 --> 01:04:28,880
अरे भाई उन्होंने ये माना उन्होंने ये कहा ना अपनी वाणी के द्वारा ये

928
01:04:28,880 --> 01:04:33,120
कहा ना कि शिव जी प्रवेश करते हैं और मुरली लिखता है। मगर वो मुरली

929
01:04:33,120 --> 01:04:37,200
को समझ नहीं पा रहा है। यही ना? जी। हां। हां।

930
01:04:37,200 --> 01:04:41,360
ठीक है। अब अब आगे चलते हैं। अब आ जाते हैं वहां पर जब ये मुरली

931
01:04:41,360 --> 01:04:45,360
का सही अर्थ बता रहे हैं। वीरेंद्र देव दीक्षित जी। अब ये नहीं कह

932
01:04:45,360 --> 01:04:49,520
रहे कि मैं जो है भगवान हूं। यह नहीं कह रहे ना ही यह कह रहे हैं कि भगवान

933
01:04:49,520 --> 01:04:54,080
मेरे पास आते हैं। मेरे अंदर प्रवेश करते हैं और मैं लिखवाता हूं। है ना? जी

934
01:04:54,080 --> 01:04:58,400
जी। अच्छा अच्छा ये शुरू करने से पहले एक छोटा सा

935
01:04:58,400 --> 01:05:02,720
उत्तर और मतलब एक जानकारी और दे दीजिए। इस समय वीरेंद्र देव दीक्षित

936
01:05:02,720 --> 01:05:06,880
जी मतलब है शिव जी आपके हिसाब से और

937
01:05:06,880 --> 01:05:10,880
आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के हिसाब से दोनों में से क्या बात है? मतलब

938
01:05:10,880 --> 01:05:14,880
अभी है राइट नाउ पृथ्वी पर। इस समय

939
01:05:14,880 --> 01:05:19,120
आध्यात्मिक ईश्वरी विश्वविद्यालय कह रहा है शरीर छोड़ गए। शरीर

940
01:05:19,120 --> 01:05:23,360
छोड़ गए। अच्छा तो वो जो वीरेंद्र वो

941
01:05:23,360 --> 01:05:27,360
शरीर का अंत कैसे हुआ ये भी तो बता रहा होगा। अब पूरी

942
01:05:27,360 --> 01:05:31,920
तो बात सुनो। हां। अब आध्यात्मिक हिशोरी विश्वविद्यालय

943
01:05:31,920 --> 01:05:35,440
कह रहा है कि वो शरीर छोड़ गए। हां। हां

944
01:05:35,440 --> 01:05:39,520
लेकिन इस बात को मैं और मेरे पास कम से कम 100 150

945
01:05:39,520 --> 01:05:43,520
ऐसे ₹1 के मानते बात अलग है ईश्वरीय

946
01:05:43,520 --> 01:05:48,080
विश्वविद्यालय क्या कह रहा है वो बता दो आप अभी उनकी भी दो मत है

947
01:05:48,080 --> 01:05:52,080
कोई दोनों मत एक मत नहीं है एक मत नहीं

948
01:05:52,080 --> 01:05:56,080
है आध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय अच्छा दो मत है कोई प्रमाण प्रूफ नहीं कोई

949
01:05:56,080 --> 01:06:00,080
प्रमाण प्रूफ नहीं है कोई डेथ सर्टिफिकेट नहीं है मत क्या

950
01:06:00,080 --> 01:06:04,320
है भाई साहब मत क्या है कैसे मृत्यु हुई वो तो पता पता नहीं क्या-क्या

951
01:06:04,320 --> 01:06:09,360
कह रहे हैं लेकिन अभी फाइनल नहीं डेथ सर्टिफिकेट तो आवे पहले

952
01:06:09,360 --> 01:06:13,440
जो दो मत है वो दोनों मान रहे हैं मृत्यु हो गई हां नहीं

953
01:06:13,440 --> 01:06:17,840
एक मान रहा है एक मना कर रहा है एक मना कर रहा है आप क्या कर रहे हो

954
01:06:17,840 --> 01:06:22,080
आपका आप 200 लोगों का क्या कहना है हमारे लिए हमारे लिए तो वो

955
01:06:22,080 --> 01:06:26,080
महाकाल है वो कभी नहीं मर सकता अब जब तक युग परिवर्तन नहीं शरीर

956
01:06:26,080 --> 01:06:30,240
नहीं मर सकता या फिर वो परमात्मा जो शरीर शरीर मतलब शरीर धारण

957
01:06:30,240 --> 01:06:34,480
करता है महाकाल का मतलब क्या होता है महाकाल का मतलब होता है

958
01:06:34,480 --> 01:06:38,720
काल तो शरीर को ही खाता है ना हर जन्म में तो एक तरीके से वीरेंद्र देव दीक्षित

959
01:06:38,720 --> 01:06:42,720
जी कहीं पर है मगर अभी वो समाज के समक्ष नहीं है ऐसा

960
01:06:42,720 --> 01:06:46,880
है हां कहीं ना कहीं जहां भी है कहीं ना कहीं है वो शरीर नहीं छोड़ सकते

961
01:06:46,880 --> 01:06:50,640
अभी अच्छा ये आपकी मान्यता है वो शरीर में ही है और अभी शरीर

962
01:06:50,640 --> 01:06:55,520
छोड़ नहीं सकते जैसे सेवक तो नहीं तो

963
01:06:55,520 --> 01:06:59,600
आप एक तरफ कह रहे हैं कि वो कभी वो नहीं हो सकता है मगर वहां पर सेवक राम

964
01:06:59,600 --> 01:07:03,680
जी का शरीर छोड़ना तो मान रहे हैं आप वहां छोड़ है लेकिन

965
01:07:03,680 --> 01:07:07,680
अब जो कल्प का अंत सामने खड़ा हुआ है। कल्प महाकाल वाली बात

966
01:07:07,680 --> 01:07:11,920
नहीं है। बात ये है कि कल्प का अंत है इसलिए शरीर नहीं छोड़ सकता। महाकाल वाली बात नहीं है। महाकाल

967
01:07:11,920 --> 01:07:16,240
तो शरीर छोड़ रहा है ना सेवक राम का। सेवक राम का शरीर तो छोड़ ही रहा है।

968
01:07:16,240 --> 01:07:20,240
उस चीज पे आपको समझना पड़ेगा। अभी उस चीज के लिए आप ज्ञान जाके समझिए प्रॉपर्ली।

969
01:07:20,240 --> 01:07:24,640
पहले आप कोर्स करिए आप भी अच्छे से पहले जाके समझिए पूरा का पूरा।

970
01:07:24,640 --> 01:07:28,720
अच्छा ठीक है। ठीक। अब यहां पे अब आपको तो आता है ना कोर्स। आपने

971
01:07:28,720 --> 01:07:32,720
तो किया है ना? बिल्कुल बहुत अच्छे से किया समझा जाना तभी

972
01:07:32,720 --> 01:07:36,720
आपके सामने बैठा हूं। पूरी दुनिया के सामने भी बैठूंगा। तो आप मुझे इसका जवाब नहीं

973
01:07:36,720 --> 01:07:40,800
देंगे जब आप यहां पे उनका शरीर छोड़ना स्वीकार नहीं कर रही ये कह के कि वो महाकाल

974
01:07:40,800 --> 01:07:44,800
है। तो वहां पे सेवक राम के रूप में शरीर छोड़ना स्वीकार क्यों

975
01:07:44,800 --> 01:07:48,960
कर रहे हैं? वहां भी तो वो महाकाल ही है। हां। तो महाकाल का मतलब आप हर

976
01:07:48,960 --> 01:07:52,960
जन्म में लगाओगे या अंतिम समय जब एटम मिाइलें फटेंग पूरा

977
01:07:52,960 --> 01:07:57,200
दुनिया का विनाश थाने। उस समय की बात है वो। कुल मिला के बात ये है कि

978
01:07:57,200 --> 01:08:01,280
क्योंकि यहां कल्प का अंत है इसलिए यहां पर महाकाल शरीर छोड़ के नहीं जाएगा

979
01:08:01,280 --> 01:08:05,440
वरना महाकाल अन्य जन्मों में अन्य शरीरों में जन्म शरीर छोड़ के जा

980
01:08:05,440 --> 01:08:05,940
सकता है।

981
01:08:05,760 --> 01:08:09,920
है ना? जी ये बात पहले भी क्लियर हो गई है कि प्रकृति

982
01:08:09,920 --> 01:08:14,080
के नियम कानून कायदे नहीं छोड़ता। जो गायन है वो अब कल के अंत के समय का है। इस अंतिम समय

983
01:08:14,080 --> 01:08:18,320
का है। ठीक है भाई साहब मैं क्लियर हो गया। अब दूसरा प्रश्न आता है। अच्छा

984
01:08:18,320 --> 01:08:22,320
आपके हिसाब से वो कहीं पे हैं जो समाज के समक्ष प्रकट नहीं है।

985
01:08:22,320 --> 01:08:26,400
अभी समय आने पे वो आ जाएंगे। एक क्लेम ये कह रहे हैं कि वो शरीर छोड़

986
01:08:26,400 --> 01:08:30,480
गए हैं तो जाहिर सी बात है वो ये कह रहे होंगे कि अब दूसरा शरीर आने वाला है या आ चुका

987
01:08:30,480 --> 01:08:34,480
होगा वो बता नहीं रहे होंगे ये क्या कहना है जो लोग जो लोग ये कह

988
01:08:34,480 --> 01:08:38,480
रहे हैं कि शरीर छोड़ गए उन लोगों का इस बारे में क्या कहना है कि वो जन्म ले चुका

989
01:08:38,480 --> 01:08:43,040
है दूसरा शरीर आ चुका है या नहीं आया है क्या है उनके अनुसार

990
01:08:43,040 --> 01:08:48,080
2022 में शरीर छोड़ गया और तकरीबन तीन साल का हो गया होगा फिर

991
01:08:48,080 --> 01:08:52,080
अच्छा तो उन्होंने मान लिया ना कि आ चुका है वो हां तो

992
01:08:52,080 --> 01:08:56,880
कुछ लोग मान रहे हैं कुछ लोग मान रहे हैं कुछ मना कर रहे हैं। अच्छा

993
01:08:56,880 --> 01:09:01,040
तो और मैं भी मना करने वाला हूं। मैं भी से हूं कि नहीं छोड़ जो लोग

994
01:09:01,040 --> 01:09:05,840
जो लोग ये मान रहे हैं कि आ चुका है तो उन लोगों ने ये बताया कि कहां पे आ चुका है।

995
01:09:05,840 --> 01:09:09,920
नहीं कोई प्रूफ नहीं है। मृत्यु का सबूत उनके पास नहीं जन्म का नहीं कुछ भी

996
01:09:09,920 --> 01:09:13,920
नहीं है। साहब अफवाह हैं। ओके ओके ओके ठीक है। अब क्लियर हो गया।

997
01:09:13,920 --> 01:09:17,760
अब अब आते हैं वो जो

998
01:09:17,760 --> 01:09:21,200
एक तार्किक प्रश्न था वो ये था

999
01:09:21,200 --> 01:09:25,360
कि जब लेखराज की दी गई लेखराज जी के द्वारा

1000
01:09:25,360 --> 01:09:29,520
दी गई जो मुरलियां हैं वो उनका सही

1001
01:09:29,520 --> 01:09:33,520
अर्थ बता रहे हैं कौन वीरेंद्र देव दीक्षित जी दीक्षित

1002
01:09:33,520 --> 01:09:39,520
जिसके कारण उनको कपिल मुनि कहा जाता है जिसके कारण सांख्य

1003
01:09:39,680 --> 01:09:44,240
कर रहा हूं आप मुझे बीच में काट देते मैं प्रश्न पूछ रहा हूं अभी पूरा तो होने दो लेकिन

1004
01:09:44,240 --> 01:09:48,400
प्रश्न का उत्तर तो जो ज्ञान लिया उसके अनुसार देना पड़ेगा। तो

1005
01:09:48,400 --> 01:09:52,480
आप जब मेरा प्रश्न सुन लो तब देना ना। हम प्रश्न बताओ

1006
01:09:52,480 --> 01:09:56,960
पूरा। हां लेखराज जी के द्वारा दी गई जो मुरलियां

1007
01:09:56,960 --> 01:10:01,040
हैं उनको डिकोड कर रहे हैं ये और इनका कहना

1008
01:10:01,040 --> 01:10:05,520
है कि लेखराज जी ने मुरलियां तो ईश्वर से ली हुई दी है मगर

1009
01:10:05,520 --> 01:10:09,840
जी। उनका अर्थ सही से नहीं किया। वो मैं कर रहा हूं। ठीक है?

1010
01:10:09,840 --> 01:10:14,080
जी। और उनका यह भी कहना है कि मैं कोई दिव्य आत्मा नहीं हूं।

1011
01:10:14,080 --> 01:10:18,400
जी साधारण पुरुष हूं मगर मैं सही ज्ञान दे रहा हूं। ठीक है? अब

1012
01:10:18,400 --> 01:10:23,200
यहां ये दिक्कत आती है दीक्षित जी के द्वारा कहे गए कथन में

1013
01:10:23,200 --> 01:10:29,040
कि क्या उन्हें सारी मुरलियां रटी हुई थी?

1014
01:10:29,040 --> 01:10:33,760
मुरलियों के लिए मुरलियों के लिए उनके पास

1015
01:10:33,760 --> 01:10:37,920
स्त्रोत क्या है? स्त्रोत तो ले रहे हैं उन्हीं को किनको? लेखराज

1016
01:10:37,920 --> 01:10:41,280
जी बिल्कुल।

1017
01:10:41,280 --> 01:10:45,680
आधार यानी कि मुरली में मिलावट नहीं है। ये वो मानते थे।

1018
01:10:45,680 --> 01:10:49,760
जी वेदव्यास वेद वाणी जो ब्रह्मा के मुख से निकली उसी का क्लेरिफिकेशन

1019
01:10:49,760 --> 01:10:53,760
करते थे और कोई मिलावट नहीं करते थे उस बात की। नहीं नहीं मैं वो नहीं कह रहा। मैं ये कह रहा

1020
01:10:53,760 --> 01:10:58,080
हूं कि अगर उनको ये वीरेंद्र दीक्षित

1021
01:10:58,080 --> 01:11:02,160
जी को ब्रह ये लेखराज जी की मुरली पर विश्वास है

1022
01:11:02,160 --> 01:11:06,560
तो उसके अर्थ पर विश्वास ना होना सिद्ध नहीं होता। और अगर

1023
01:11:06,560 --> 01:11:10,720
विश्वास नहीं है अर्थ पर तो उनकी मुरली पर विश्वास होना सिद्ध

1024
01:11:10,720 --> 01:11:14,720
नहीं होता। समझ रहे? जैसे मैं अगर एक बात भी गलत बोल सकता हूं

1025
01:11:14,720 --> 01:11:18,800
तो मेरी किसी भी बात पर डाउट किया जा सकता है। फिर हम ये नहीं कह सकते ये

1026
01:11:18,800 --> 01:11:22,880
जो है ईश्वर के द्वारा कहा गया वचन है। समझ रहे हैं? जैसे मैं कह रहा हूं कि

1027
01:11:22,880 --> 01:11:27,120
मेरे पास ईश्वर आते हैं और वो लिखवाते हैं और आप मान रहे हो। मगर

1028
01:11:27,120 --> 01:11:31,120
फिर आप कह रहे हो कि मैं दूसरी बात जो बोल रहा हूं। मैं दूसरी बात जो बोल रहा हूं वो मैं गलत

1029
01:11:31,120 --> 01:11:35,360
बोल रहा हूं। अगर मैं गलत बोल सकता हूं तो मैं ये भी गलत बोल सकता हूं कि जो मुरली

1030
01:11:35,360 --> 01:11:39,520
आ रही है वो ईश्वर ने दी है या फिर ये भी कर सकता हूं कि उसमें कुछ मुरलियां ईश्वर

1031
01:11:39,520 --> 01:11:43,520
की दे दूं कुछ अपने मन की दे दूं तो या तो हमें मानना पड़ेगा

1032
01:11:43,520 --> 01:11:44,160
लेखराज जी को

1033
01:11:44,160 --> 01:11:48,560
तो पूरा अन्यथा अधूरा तो इस संबंध में फिर कैसे माने क्या करें

1034
01:11:48,560 --> 01:11:52,560
इस संबंध में इतना सा सार निकालो अब इस बात का कि ब्रह्मा के

1035
01:11:52,560 --> 01:11:56,720
मुख से जो मुरली निकली है उस मुरली में भगवान का

1036
01:11:56,720 --> 01:12:00,800
नाम रूप देश काल लिखा हुआ उस मुरली के अंदर जो कोई नहीं समझ पाया जो बाबा

1037
01:12:00,800 --> 01:12:04,960
वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने निकाल के दे दिया। आप समझे नहीं मेरा प्रश्न क्या है? अगर

1038
01:12:04,960 --> 01:12:09,120
उनको उनकी योग्यता पे या फिर मंसूबों पर डाउट है

1039
01:12:09,120 --> 01:12:13,440
तो वो मुरली भी तो झूठी दे सकते हैं। अगर वो

1040
01:12:13,440 --> 01:12:17,520
अर्थ अगर वो अर्थ गलत दे सकते हैं तो मुरली भी तो झूठी दे सकते हैं।

1041
01:12:17,520 --> 01:12:22,560
झूठ लिख दो इसमें। एक बात एक बात पहले आप सुनो।

1042
01:12:22,560 --> 01:12:26,880
तो मुरली झूठी है ना उसका क्लेरिफिकेशन झूठा है। दोनों चीजें सत्य है।

1043
01:12:26,880 --> 01:12:31,760
लेखराज जी ने जो क्लेरिफिकेशन किया वो झूठा था ना। गलत था ना

1044
01:12:31,760 --> 01:12:36,160
जो दादा लेखरा ने उन्होंने क्लेरिफिकेशन तो किया ही नहीं उन्होंने तो

1045
01:12:36,160 --> 01:12:40,320
जो पढ़ी जो पढ़ के पढ़ के सुना दी उन बच्चों को तो बच्चे

1046
01:12:40,320 --> 01:12:44,640
जो क्लेरिफिकेशन कर रहे हैं वो गलत है लेखराज गलत नहीं कर रहे बच्चे

1047
01:12:44,640 --> 01:12:48,880
भी गलत नहीं कर रहे ना वो गलत कर रहे लेकिन उस मुरली का जो तंत्र निकलना

1048
01:12:48,880 --> 01:12:52,880
चाहिए भगवान की पहचान वो नहीं हो पा रही जो आपकी जो स्क्रीन है

1049
01:12:52,880 --> 01:12:57,680
वो फिर से पॉज हो गई है नेट खत्म हो गया शायद

1050
01:12:57,680 --> 01:12:59,360
डलवा लीजिए नेट नेट पैक

1051
01:12:59,360 --> 01:13:03,600
डलवा दीजिए हम डलवा दे इधर से अभी क्या करें

1052
01:13:03,600 --> 01:13:08,480
अभी एक मिनट दूसरे दोनों फोन का खत्म हो गया शायद ना

1053
01:13:08,480 --> 01:13:14,480
हां तो आप नंबर बता दीजिए तो

1054
01:13:16,000 --> 01:13:20,000
आशा करते हैं आप लोग सुन रहे होंगे क्योंकि यह जो हिस्ट्री है ना यह समझना बहुत

1055
01:13:20,000 --> 01:13:24,160
आवश्यक है आगे यह जो संस्थाएं हैं इनसे बात करने

1056
01:13:24,160 --> 01:13:28,160
के लिए और यह सब चीजें समझना आवश्यक था आप लोग भी देखें किस

1057
01:13:28,160 --> 01:13:32,320
तरीके से क्या-क्या दावे किए जा रहे हैं। क्या-क्या कहा जा रहा है।

1058
01:13:32,320 --> 01:13:36,960
और अगर 5 मिनट में भाई साहब वापस आ जाते हैं तो हम फिर आज ही

1059
01:13:36,960 --> 01:13:41,360
कंटिन्यू करेंगे। नहीं तो फिर हम दोबारा कंटिन्यू कर लेंगे।

1060
01:13:41,360 --> 01:13:46,240
जब अगली बार ये भाई साहब आएंगे।

1061
01:13:46,240 --> 01:13:50,320
जी जय श्री राम। संजय जी। जय श्री राम। शिवांशु

1062
01:13:50,320 --> 01:13:54,480
जी। मैं आपको सुन रहा था अभी। आप तो

1063
01:13:54,480 --> 01:13:58,560
हमारे लिए धर्म आप तो हमारे लिए धर्मराज का काम कर रहे हैं कि दूध का

1064
01:13:58,560 --> 01:14:03,120
दूध और पानी का पानी दुनिया के सामने करने में बड़ा सहयोग करेंगे। अब तो

1065
01:14:03,120 --> 01:14:07,200
बहुत अच्छा थोड़ा सा मुझे लगता है कि मेरी हां थोड़ा

1066
01:14:07,200 --> 01:14:11,360
सा मुझे ऐसा लगता है कि मुझे विचारों को यथावत रखने

1067
01:14:11,360 --> 01:14:15,600
में मतलब निपुणता शायद बहुत अच्छा रखा।

1068
01:14:15,600 --> 01:14:19,840
नहीं धन्यवाद है। बहुत प्यारे से रखा। बहुत प्यारे से रखा। आप बात को समझ रहे हैं।

1069
01:14:19,840 --> 01:14:23,920
हां एक संक्षिपकरण मैंने दे दिया। जी जी बहुत

1070
01:14:23,920 --> 01:14:27,920
बहुत अच्छा दिया है और सबसे पहले तो आपके चैनल के जितने भी दर्शक हैं

1071
01:14:27,920 --> 01:14:32,000
उन सभी को जय श्री राम हर हर महादेव जी और

1072
01:14:32,000 --> 01:14:36,240
पहले एक छोटा सा संदेश दे दूं आपके चैनल के माध्यम से पूरी दुनिया को

1073
01:14:36,240 --> 01:14:40,480
जो भी आपके दर्शक हैं आम भारतीय खास भारतीय एक एक शब्द

1074
01:14:40,480 --> 01:14:44,560
की वैल्यू है जो हम बच्चों के मुख से निकलेगा क्योंकि

1075
01:14:44,560 --> 01:14:48,560
सत्य सनातन धर्म की पुनरत्थान होता है। सत्य सनातन धर्म

1076
01:14:48,560 --> 01:14:52,560
कभी खत्म नहीं होता है। तो पूरे भारतवासियों के लिए खुशी की बात

1077
01:14:52,560 --> 01:14:56,640
बता रहा हूं कि हमारे धर्म का पुनरुत्थान करने के लिए

1078
01:14:56,640 --> 01:15:00,640
यदा यदा ही धर्मस ग्लानि भवती भारत जब धर्म और कर्म

1079
01:15:00,640 --> 01:15:01,360
की ग्लानी होती

1080
01:15:01,360 --> 01:15:05,440
है तो भगवान स्वयं अपना परिचय देते हैं आना एक अलग बात आना

1081
01:15:05,440 --> 01:15:09,760
नहीं होता है परिचय देते हैं अपना मैं कौन हूं कैसा हूं किस स्वरूप

1082
01:15:09,760 --> 01:15:13,760
में पार्ट बजा रहा हूं तो मेरे पूरे भारतवासियों को शिवशियों के चैनल के

1083
01:15:13,760 --> 01:15:18,320
माध्यम से बहुत अच्छा ये कार्य कर रहे हैं इन भाई को भी प्रणाम करता हूं

1084
01:15:18,320 --> 01:15:22,560
कि भगवान के प्रति इनकी की आस्था और विश्वास श्रद्धा वानम लभते

1085
01:15:22,560 --> 01:15:26,720
ज्ञानम इनका श्रद्धा और विश्वास प्यार से देखो और

1086
01:15:26,720 --> 01:15:30,960
हमारा उनका मिलन देखो कहां के बिछड़े कहां आ के मिले हैं इनका नाम ही है शिवान

1087
01:15:30,960 --> 01:15:35,680
शिव शिव का अंश है इनके अंदर और ज्ञान की

1088
01:15:35,680 --> 01:15:39,760
भगवान की जो जानकारी है वो भगवान के सिवाय कोई नहीं

1089
01:15:39,760 --> 01:15:44,160
दे सकता क्योंकि भगवान कौन है कैसा है

1090
01:15:44,160 --> 01:15:48,240
घरघर सत्यनारायण की कथा तो गाते हैं लेकिन जानते नहीं है मंदिर जाते हैं लेकिन

1091
01:15:48,240 --> 01:15:52,240
उसकी जीवन कहानी नहीं जानते तो पूरी दुनिया को आपके चैनल के

1092
01:15:52,240 --> 01:15:56,640
माध्यम से फिर एक बार बता दूं कि ब्रह्मा कुमारी और आध्यात्मिक

1093
01:15:56,640 --> 01:16:00,880
ईश्वरीय विश्वविद्यालय में चार वर्ण और नौ कुड़ी के ब्राह्मण तैयार

1094
01:16:00,880 --> 01:16:05,200
हो रहे हैं। यानी कि सृष्टि का नवनीकरण हो रहा है यहां। लेकिन

1095
01:16:05,200 --> 01:16:09,840
जिसको जितना ज्ञान समझ में आता है वो उतनी कुड़ी का ब्राह्मण बनता है।

1096
01:16:09,840 --> 01:16:14,240
बड़ी खुशी की बात है। नवनीकरण हो रहा है। जो इस दुनिया की मुख्य आत्माएं

1097
01:16:14,240 --> 01:16:16,640
है यह पुरुषोत्तम संगम युग चल रहा है। यहां की ज्ञान

1098
01:16:16,640 --> 01:16:20,960
के अनुसार और मैं इस बात से सहमत हूं। और दोनों परिवारों

1099
01:16:20,960 --> 01:16:25,120
का आपसी जो मतभेद नहीं है यह मतभेद यह है कि

1100
01:16:25,120 --> 01:16:29,440
कम कुड़ी के ब्राह्मण ज्ञान की कमी है। ज्ञान तो पूरा भगवान ने दे दिया

1101
01:16:29,440 --> 01:16:33,600
लेकिन समझने का फर्क पड़ता है। उस समझ के आधार पर सूर्य वंश, चंद्र

1102
01:16:33,600 --> 01:16:37,600
वंश, इस्लामी बौद्ध ये सब यहीं से तैयार होता है।

1103
01:16:37,600 --> 01:16:41,600
और वो सब आत्मा दुनिया में प्रत्यक्ष। अब हम थोड़ा सा मुख्य विषय की

1104
01:16:41,600 --> 01:16:45,680
ओर आएंगे। तो हमने सब कुछ कर लिया था। एक जिज्ञासा

1105
01:16:45,680 --> 01:16:49,920
वहां पर जागृत हुई थी। एक प्रश्न खड़ा हुआ था। जी जैसे

1106
01:16:49,920 --> 01:16:54,560
आपका कहना है आप यह मानते हैं कि वीरेंद्र

1107
01:16:54,560 --> 01:16:58,560
देव दीक्षित जी ने यह माना था कि ब्रह्मा जी

1108
01:16:58,560 --> 01:17:02,640
को मतलब ब्रह्मा लेखराज जी को

1109
01:17:02,640 --> 01:17:06,880
है ना लेखराज जी को शिव जी ने आकर के मुरली

1110
01:17:06,880 --> 01:17:11,600
दी और उन्होंने मुरली लिखी परंतु मुरली

1111
01:17:11,600 --> 01:17:15,680
का अर्थ किसी को बताया नहीं बताया वह नहीं पता मगर अब जो मुरली का अर्थ

1112
01:17:15,680 --> 01:17:20,240
बताया जा रहा है वह गलत बताया जा रहा है ना मुरली वीरेंद्र

1113
01:17:20,240 --> 01:17:24,240
जी का कहना जी शिवांशु जी आज एक तो मैं

1114
01:17:24,240 --> 01:17:28,720
आपसे प्रार्थना करूंगा कि जो क्वेश्चन पूछे हैं उसका जवाब हमें क्लेरिफाई

1115
01:17:28,720 --> 01:17:31,840
करने दे क्योंकि भगवान का विषय है और

1116
01:17:31,840 --> 01:17:36,160
आप आप हमारे आप हमारे लिए आप हमारे लिए वो प्रदर्शक

1117
01:17:36,160 --> 01:17:40,160
बन रहे हैं दुनिया के लिए अपने भारत के लिए सनातन धर्म के लिए आप बहुत अच्छा कार्य कर रहे

1118
01:17:40,160 --> 01:17:44,400
हो जो आम दर्शक है हम इतने आसानी से बतावेंगे

1119
01:17:44,400 --> 01:17:48,560
शिवशु भाई इतना प्यार से समझावेंगे कि आम आदमी को समझ में आवे

1120
01:17:48,560 --> 01:17:52,880
तब तो फायदा है। इसलिए जो भी आप क्वेश्चन पूछे मुझे

1121
01:17:52,880 --> 01:17:56,960
थोड़ा सा उसको थोड़ा सा उसको यूं बताने दे कि आम आदमी

1122
01:17:56,960 --> 01:18:01,120
मगर मगर धारा में क्या होता है हम लोग कभी-कभी जब बोलना चालू करते

1123
01:18:01,120 --> 01:18:05,120
हैं ना तो अपनी धारा में ऐसे बहते हैं कि जो

1124
01:18:05,120 --> 01:18:09,280
मुख्य जिसका जवाब देना है वो तो आ नहीं पाया और हमने काफी देर

1125
01:18:09,280 --> 01:18:13,520
तक कुछ कह दिया तो इस बात का आप थोड़ा ध्यान रखिएगा कि आप समझ लीजिए परंतु

1126
01:18:13,520 --> 01:18:17,680
जो प्रश्न किया गया है उसका उत्तर उसमें आना अवश्य चाहिए है

1127
01:18:17,680 --> 01:18:22,080
ना में आएगा। जी। सबसे पहला प्रश्न

1128
01:18:22,080 --> 01:18:26,080
यही है कि वीरेंद्र दीक्षित जी जब यह दावा कर रहे हैं कि लेख

1129
01:18:26,080 --> 01:18:30,080
जो मुरली है उनको जिनसे मिल रही है यानी कि

1130
01:18:30,080 --> 01:18:34,080
पहले शिवजी से मिली लेखराज जी को फिर लेखराज

1131
01:18:34,080 --> 01:18:38,160
जी से मिली। उनकी शिष्याओं को और उनकी

1132
01:18:38,160 --> 01:18:44,160
शिष्याओं से मिली इनको क्या कहते हैं?

1133
01:18:45,440 --> 01:18:49,760
एक मिनट आप समझ शिव जी कौन? आप जो शिवजी

1134
01:18:49,760 --> 01:18:53,920
शिवजी करते हैं पहले शिव जी को समझना चाहिए। मैं वो नहीं कह रहा हूं। मैं कह रहा हूं

1135
01:18:53,920 --> 01:18:58,240
उनका जो क्लेम मैं [गला साफ़ करने की आवाज़] जो कह रहा हूं उनका क्लेम क्या है? मैं अभी इस तरफ

1136
01:18:58,240 --> 01:19:02,560
अभी हम शिवजी को समझने पे आएंगे। वो एक अलग चैप्टर है। अभी हम इसमें

1137
01:19:02,560 --> 01:19:06,880
है कि वीरेंद्र देव दीक्षित जी जिससे मुरली ले रहे हैं। वीरेंद्र देव दीक्षित

1138
01:19:06,880 --> 01:19:10,880
जी जिससे मुरली ले रहे हैं तो उसके अर्थ पर विश्वास क्यों

1139
01:19:10,880 --> 01:19:15,120
नहीं है? और जिसका अर्थ नहीं ले रहे हैं। उसकी मुरली क्यों ले रहे हैं? ये बात ये

1140
01:19:15,120 --> 01:19:19,360
मुझे थोड़ा सा क्लियर सीधा सा सीधा सा इसका जवाब सुनो आप इसका सीधा सा जवाब

1141
01:19:19,360 --> 01:19:23,520
है कि वीरेंद्र देव दीक्षित जी ही इस सृष्टि का आदि

1142
01:19:23,520 --> 01:19:27,680
पुरुष है और वो उन मुरलियों का जो अर्थ ब्रह्मा बाबा

1143
01:19:27,680 --> 01:19:31,680
नहीं समझ पाए दादा लेखराज जिसको हम कह रहे हैं वो नहीं समझा पाए कि इस

1144
01:19:31,680 --> 01:19:35,840
सृष्टि का जो मालिक है जिसको आप शिवजी कह रहे हो वो कौन है तो वो बात वीरेंद्र

1145
01:19:35,840 --> 01:19:39,920
देव दीक्षित जी ने समझा दी इसलिए वो एग्री

1146
01:19:39,920 --> 01:19:43,920
नहीं हो रहे हैं उसको काटते नहीं है मुरली को काटते नहीं है उसका अर्थ समझाते

1147
01:19:43,920 --> 01:19:48,080
हैं। मैं वही मैं वही कह रहा हूं। उनके हिसाब से उनको

1148
01:19:48,080 --> 01:19:52,080
जो मुरली मिली थी प्रैक्टिकली वो मिली थी लेखराज जी

1149
01:19:52,080 --> 01:19:56,080
की जो शिष्याएं थी जिन जो उनको कोर्स करा रही थी। जी

1150
01:19:56,080 --> 01:20:00,080
बिल्कुल जो लेखराज जी की लेखराज जी के द्वारा लिखी गई जो

1151
01:20:00,080 --> 01:20:00,720
मुरलियां

1152
01:20:00,720 --> 01:20:04,800
थी वो मुरलियां वीरेंद्र देव दीक्षित जी को मिली

1153
01:20:04,800 --> 01:20:09,120
थी। किससे? कि जो बीच की जो शिष्यां

1154
01:20:09,120 --> 01:20:13,440
थी उन्होंने कहा ये मुरलियां है उनकी लेखराज

1155
01:20:13,440 --> 01:20:17,440
जी ने जो लिखी है अब बात ये है कि अगर हम इनके द्वारा मिलने वाली मुरली

1156
01:20:17,440 --> 01:20:20,800
पर विश्वास कर रहे हैं

1157
01:20:20,800 --> 01:20:25,200
शिष्याओं के द्वारा शिष्याओं के द्वारा शिष्याओं

1158
01:20:25,200 --> 01:20:29,200
शिष्याओं के द्वारा दिए गए अर्थ पर विश्वास नहीं है। अब अगर हमें उनके

1159
01:20:29,200 --> 01:20:33,280
अर्थ पर विश्वास नहीं है उसके दो कारण हो सकते हैं। अर्थ पर विश्वास ना

1160
01:20:33,280 --> 01:20:37,360
होने के दो कारण हो सकते हैं। एक कारण हो सकता है कि भाई हमें लग रहा हो

1161
01:20:37,360 --> 01:20:42,000
कि ये जो है जानबूझ के किसी कारणवश लालच वश द्वेष वश भयवश

1162
01:20:42,000 --> 01:20:46,400
ये जानबूझ के गलत अर्थ बता रही है या तो ये कारण हम मान सकते हैं हम

1163
01:20:46,400 --> 01:20:50,400
या फिर अज्ञानता या फिर अज्ञानता या फिर अज्ञानता

1164
01:20:50,400 --> 01:20:54,560
के इनको समझ में नहीं आ रहा है दोनों ही सूरतों में एक

1165
01:20:54,560 --> 01:20:58,720
मिनट दोनों ही एक मिनट दोनों ही सूरतों में

1166
01:20:58,720 --> 01:21:02,800
हम सामने वाले की द्वारा दी गई जो चीजें हैं

1167
01:21:02,800 --> 01:21:07,040
उसमें डाउट कर रहे हैं। तो जब जब हमें अर्थ पर डाउट हो रहा है तो मुरली

1168
01:21:07,040 --> 01:21:11,120
पर डाउट क्यों नहीं मुरली पर डाउट नहीं हो रहा है तो अर्थ पर डाउट

1169
01:21:11,120 --> 01:21:15,200
क्यों यह बात आती है जैसे अगर हम किसी पर विश्वास करेंगे तो

1170
01:21:15,200 --> 01:21:16,000
पूरा करेंगे

1171
01:21:16,000 --> 01:21:20,640
नहीं तो बिल्कुल नहीं करेंगे जी जी देखिए

1172
01:21:20,640 --> 01:21:24,960
अब अर्थ जो समझाया गया वो अज्ञानता वश

1173
01:21:24,960 --> 01:21:29,120
है और अज्ञानता होने के कारण

1174
01:21:29,120 --> 01:21:33,360
यह नहीं समझ पाए कि ये ज्ञान कहां से आ रहा है ये ज्ञान दाता कौन है ये सबसे

1175
01:21:33,360 --> 01:21:37,680
बड़ी अज्ञान इस ज्ञान की वो बात बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित

1176
01:21:37,680 --> 01:21:41,680
ने उनहीं मुरलियों को क्लेरिफाई करके निकाल के बंद कर

1177
01:21:41,680 --> 01:21:45,680
दिया। भाई साहब वो आगे की बात है कि उन्होंने फिर उनको डिकोड करके क्या बताया वो

1178
01:21:45,680 --> 01:21:49,840
आगे की बात है। अगर वो अज्ञानी है।

1179
01:21:49,840 --> 01:21:54,400
अगर वो अज्ञानी है तो वो मुरली को आप तक एज इट इज कैसे पहुंचा रहे हैं?

1180
01:21:54,400 --> 01:21:58,480
और वो अज्ञानी है। जब वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने ये बताया कि तुमसे

1181
01:21:58,480 --> 01:22:02,480
ये गलतियां हुई तो क्या उन्होंने माना कि वो अज्ञानी है? अगर नहीं माना

1182
01:22:02,480 --> 01:22:06,960
तो उनकी नियत में भी खोट आ जाएगा। खोट मानना पड़ेगा।

1183
01:22:06,960 --> 01:22:11,280
वो नियत अगर नहीं अगर मैं जैसे मैं सच मैं सच बता रहा हूं आपको।

1184
01:22:11,280 --> 01:22:15,360
आपको खोल के दिखा दिया। प्रूफ के साथ बता दिया। फिर भी आप कह रहे हो

1185
01:22:15,360 --> 01:22:19,680
नहीं मैं मैं सही बोल रहा हूं। तो वहां पे उनकी नियत में भी खोट आ गया। तो जिसकी

1186
01:22:19,680 --> 01:22:23,840
नियत में खोट है। जिसकी नियत में खोट है वो आपको

1187
01:22:23,840 --> 01:22:28,640
गलत मुरलियां क्यों नहीं दे सकता? बात ये देखिए

1188
01:22:28,640 --> 01:22:31,200
अब नियत में खोट स्पष्ट नजर

1189
01:22:31,200 --> 01:22:35,280
आ रहा है। कैसे कि आज भी भगवान

1190
01:22:35,280 --> 01:22:39,680
को न समझने के कारण आराम से मधुबन खुल रहे हैं। जोनल इंचार्ज

1191
01:22:39,680 --> 01:22:43,840
बन रहे बैठे हैं। लेकिन दुनिया के सामने 90 साल में ये क्लियर

1192
01:22:43,840 --> 01:22:49,840
नहीं हुआ कि वास्तविकता क्या है इस ज्ञान की। सच्चाई में वो भगवान

1193
01:22:50,640 --> 01:22:54,880
मैं समझ गया। उनकी नियत में हमें खोट है। अब नियत में यदि खोट

1194
01:22:54,880 --> 01:22:57,680
है तो आपको

1195
01:22:57,680 --> 01:23:01,680
नियत में यदि खोट है। हां नियत में यदि खोट है तो वो

1196
01:23:01,680 --> 01:23:05,680
आपको मुरली सही क्यों देंगी? मुरली भी तो बदल सकती हैं।

1197
01:23:05,680 --> 01:23:09,760
ये बात मुरलियां बदल मुरलियां बदल तो दी। 12 पेज की मुरली थी

1198
01:23:09,760 --> 01:23:14,240
वो दो पेज की मुरली रह गई। 10 पेज गायब हो गए उससे। तो

1199
01:23:14,240 --> 01:23:18,480
यानी नहीं जो दी भी है जो दो मुरलियां ये तो गायब

1200
01:23:18,480 --> 01:23:22,480
की है मगर जो दी है जो मुरली दी है वो हो सकता है अपने मन

1201
01:23:22,480 --> 01:23:26,560
से कुछ लिख दिया हो उसमें हां बिल्कुल सब कुछ सब कुछ बदल दिया

1202
01:23:26,560 --> 01:23:30,560
उसमें से जैसे जैसे मैं आपको बताऊंगा किसी धर्म में लिखा है

1203
01:23:30,560 --> 01:23:34,560
कि आप जीव हत्या करो बकरा काटो मुर्गा काटो जीव हत्या किसी धर्म में लिखा है उसी प्रकार

1204
01:23:34,560 --> 01:23:39,840
से इन्होंने जो काम की बातें उसमें से हटा दी और मनमत मिक्स कर दिया इसमें अब

1205
01:23:39,840 --> 01:23:43,840
तो फिर हम यह कैसे कह सकते हैं कि मुरली मुरली को ही अर्थ मुरली का ही अर्थ कर

1206
01:23:43,840 --> 01:23:46,240
रहे हैं। हम ये कहेंगे कि हम तो अपने ज्ञान को दे

1207
01:23:46,240 --> 01:23:50,400
रहे हैं। हम ये क्यों कहेंगे लेखराज जी ने जो मुरली दी थी हम उसी का अर्थ कर

1208
01:23:50,400 --> 01:23:55,040
रहे हैं। लेखराज जी ने जो मुरली दी थी उसी का

1209
01:23:55,040 --> 01:23:59,040
मतलब हम ये नहीं कह सकते शिवशु जी आप सही कह रहे

1210
01:23:59,040 --> 01:24:03,120
हैं। सही कह रहे हैं। एक बात जवाब देने दो। जो दादा लेखराज के मुख से जो

1211
01:24:03,120 --> 01:24:07,440
ज्ञान निकला था उस ज्ञान का तो इन्होंने खत्म कर दिया। बिल्कुल

1212
01:24:07,440 --> 01:24:11,920
अब तो मात्र दिखावा रह गया। पत्थर के शिवलिंग के साथ सात फेरे ले रहे हैं।

1213
01:24:11,920 --> 01:24:15,920
डीजे बजा रहे हैं। अरे भगवान आया भगवान आया। मेरा मेरा

1214
01:24:15,920 --> 01:24:20,080
कहने का मतलब मैं दूसरा विषय पूछ रहा हूं। वो सही कह रहे हैं आप। उन्होंने

1215
01:24:20,080 --> 01:24:24,480
बदल दिया। तो फिर इसका मतलब हम यह माने कि वीरेंद्र देव दीक्षित

1216
01:24:24,480 --> 01:24:29,440
जी ने जो ज्ञान दिया वो मुरली का अर्थ नहीं बताया। अपने से बताया जो बताया

1217
01:24:29,440 --> 01:24:33,600
लेकिन उस समय जो वीरेंद्र देव दीक्षित जी के पास मुरली थी वो ओरिजिनल

1218
01:24:33,600 --> 01:24:37,920
थी। जो ब्रह्मा के मुख से निकली थी। वो बात 1966 है। 2025

1219
01:24:37,920 --> 01:24:41,920
चल रहा है। वो कहां से आई थी? ब्रह्मा कुमारी से आई। ब्रह्मा कुमारी से

1220
01:24:41,920 --> 01:24:46,160
आई। लेकिन उस समय फिर भी 101 पेज थे। आठ 10 पेज फिर भी बचे थे।

1221
01:24:46,160 --> 01:24:50,480
मतलब थे ना वो ब्रह्मा कुमारी से जो आई थी वो लेखराज

1222
01:24:50,480 --> 01:24:54,560
जी की शिष्याओं ने दी थी उन्हें। हां जी बिल्कुल चोरी चोरी करके

1223
01:24:54,560 --> 01:24:59,040
दे दी। और उनकी नियत में खोट था। जी

1224
01:24:59,040 --> 01:25:02,160
इस खोट को कैसे साबित करें?

1225
01:25:02,160 --> 01:25:06,160
मैं बता तो रहा हूं। खोट ऐसे ही साबित है कि जब वो अज्ञानी सिद्ध हो रहे हैं फिर भी नहीं

1226
01:25:06,160 --> 01:25:10,800
मान रहे कि अज्ञानी है तो खोट है। जी है ना और

1227
01:25:10,800 --> 01:25:14,800
जब उनकी नियत में मेरा मेरा कहने का अर्थ है जिसकी नियत

1228
01:25:14,800 --> 01:25:18,960
में खोट है वो आपको लेखराज जी की मुरली

1229
01:25:18,960 --> 01:25:22,960
जो भी दे रहा है वो 10 पेज दे रहा है 12 पेज दे रहा है जो भी दे रहा है वो ज्यों

1230
01:25:22,960 --> 01:25:27,120
की त्यों क्यों देगा जी बिल्कुल लेकिन

1231
01:25:27,120 --> 01:25:31,200
लेकिन जिस समय दी गई ना बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित को वो वेदांती माता ने

1232
01:25:31,200 --> 01:25:35,280
दी जिसके कारण वेदांती माता उस समय अहमदाबाद में थी आज वो

1233
01:25:35,280 --> 01:25:39,360
साउथ अफ्रीका उनको बैठा दिया गया है यानी कि वो भारत माता है। यह

1234
01:25:39,360 --> 01:25:44,640
हम बता रहे हैं अपनी तरफ से। वो ठीक है।

1235
01:25:44,640 --> 01:25:48,800
पूरा जी वही तो लक्ष्मी है। अरे वही तो लक्ष्मी

1236
01:25:48,800 --> 01:25:52,880
है। शिवांशु वही लक्ष्मी है हमारी भारत माता है। मेरा मेरा

1237
01:25:52,880 --> 01:25:57,120
आप नाम शिवश लीजिए। शिवशु नहीं शिवश जी

1238
01:25:57,120 --> 01:26:01,120
शिवशु के सामने रखना पड़ेगा। मेरी बुद्धि बाबा की तरफ चली जाती है। बोलते हैं

1239
01:26:01,120 --> 01:26:05,200
ना बाबा है कि जो माता जी थी उन

1240
01:26:05,200 --> 01:26:09,600
पर वीरेंद्र देव दीक्षित जी को पूरा विश्वास था। अरे

1241
01:26:09,600 --> 01:26:13,920
बिल्कुल 100% वो लक्ष्मी है वर तो वर शंभू वर वर

1242
01:26:13,920 --> 01:26:18,080
कुंवारी तो तो जब उनप उन्हें पूरा विश्वास था फिर उनके द्वारा

1243
01:26:18,080 --> 01:26:24,080
दिए गए अर्थ पर विश्वास क्यों नहीं हुआ? माताजी को हो गया।

1244
01:26:24,800 --> 01:26:29,200
उन माताजी को विश्वास हो गया था। क्या?

1245
01:26:29,200 --> 01:26:33,200
जो वेदांती माता है बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित जो सुना

1246
01:26:33,200 --> 01:26:37,280
रहे थे उसके ऊपर वेदांती माता को

1247
01:26:37,280 --> 01:26:41,280
विश्वास हो गया था कि हां ये सही कह रहे हैं और उसी विश्वास के

1248
01:26:41,280 --> 01:26:46,240
कारण हम सब ब्रह्मा कुमारी से ही तो आध्यात्मिक ईश्वर विश्वविद्यालय में आए हैं।

1249
01:26:46,240 --> 01:26:50,800
हमने हम सब ने ब्रह्मा कुमारी माता दीक्षित

1250
01:26:50,800 --> 01:26:54,960
वो भी मतलब वो भी जानते हैं हम मतलब जो वेदांती

1251
01:26:54,960 --> 01:26:59,200
माता थी उन्होंने ही लेखराज जी की मुरली इनको दी

1252
01:26:59,200 --> 01:27:03,440
वीरेंद्र देव दीक्षित जी को अरे महाराज आप कहीं

1253
01:27:03,440 --> 01:27:07,760
आप क्या बात है आप में बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित जी प्रवेश कर गए क्या एक एक सच्चाई

1254
01:27:07,760 --> 01:27:11,760
को जानते हो आप थोड़ा सा थोड़ा सा इधरउधर

1255
01:27:11,760 --> 01:27:15,840
की ओर सरकाज्म या फिर विनोद इससे बचे जिससे कि हमारा जो गंभीरता

1256
01:27:15,840 --> 01:27:20,000
है ना विषय की वो बनी रहे है ना बार-बार

1257
01:27:20,000 --> 01:27:24,240
आपने एक बार मेरी तारीफ कर दी मैं आपका स्वागत करता हूं मगर बार-बार हमारी

1258
01:27:24,240 --> 01:27:28,560
जो गंभीरता है ना वो धारा प्रवाह वो टूटेगा अगर हम दूसरी चीजें करेंगे

1259
01:27:28,560 --> 01:27:32,720
तो तो वेदांत माता ने वेदांती

1260
01:27:32,720 --> 01:27:36,720
माता ने ओरिजिनल स्ट्रोक रखा हुआ था माता जी ने वो मुरलियों का स्ट्रोक बाबा

1261
01:27:36,720 --> 01:27:39,840
वीरेंद्र देव दीक्षित को दे दिया जिसकी उनको सजा मिली

1262
01:27:39,840 --> 01:27:44,160
उनको अहमदाबाद से निकाल दिया गया वेदती माता [गला साफ़ करने की आवाज़] अब वो आध्यात्मिक

1263
01:27:44,160 --> 01:27:48,240
विश्वविद्यालय के साथ है या बीके के ही साथ है? बिल्कुल नहीं

1264
01:27:48,240 --> 01:27:52,480
अभी भी साथ है और बड़ी बिल्कुल बहुत आज भी किसके साथ

1265
01:27:52,480 --> 01:27:56,720
ब्रह्मा कुमारी के साथ ब्रह्मा कुमारी के साथ तो इसका मतलब उन्होंने ये

1266
01:27:56,720 --> 01:28:00,960
इनका वीरेंद्र देव दीक्षित जी का ज्ञान नहीं माना ना ज्ञान

1267
01:28:00,960 --> 01:28:04,960
माना लेकिन बाहर नहीं आए वही बैठे रहे वही तो राजा

1268
01:28:04,960 --> 01:28:09,280
दक्ष की पुत्री है तो बात ये है ज्ञान यदि माना

1269
01:28:09,280 --> 01:28:13,360
भाई साहब देखिए ये आप ये आप कह रहे हो ये आपका क्लेम है उन्होंने तो

1270
01:28:13,360 --> 01:28:18,000
नहीं कहा ना कि मैंने ज्ञान मान लिया शिव शिव शिवशं

1271
01:28:18,000 --> 01:28:22,960
ठीक है ना एक बार नाम शिवशी बोलो ना आपको शिवश

1272
01:28:22,960 --> 01:28:27,200
जी शिवश जी इतिहास गवाह है

1273
01:28:27,200 --> 01:28:31,360
हम मेरो जान सदा शिव जोगी अज अनद अकाम

1274
01:28:31,360 --> 01:28:35,520
अभोगी ये किसने कहा है किसने कहा है ये डायलॉग किसका

1275
01:28:35,520 --> 01:28:39,920
है किसने कहा भक्ति मार्ग आप भी जानते हैं मैं भी जानता हूं किसने कहा है ये डायलॉग

1276
01:28:39,920 --> 01:28:44,000
आप बताइए ना आप बताइए ये डायलॉग लक्ष्मी माता वरू तो

1277
01:28:44,000 --> 01:28:48,080
वरु शू वरू लक्ष्मी माता ने कहा है ये अब ये गुप्त ज्ञान

1278
01:28:48,080 --> 01:28:52,240
है। गुप्त रहस्य जो सामने आकर के खुलेगा। तो अभी इस बात

1279
01:28:52,240 --> 01:28:55,040
को आप मैं अपनी तरफ से खोल रहा हूं कि मैं दुनिया

1280
01:28:55,040 --> 01:28:59,520
के सामने छाती ठोक के कह रहा हूं कि वो भारत माता है और बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित

1281
01:28:59,520 --> 01:29:03,520
है। देखिए भाई साहब अभी हम मैं आपकी क्लेम पे भी आऊंगा। जो जो

1282
01:29:03,520 --> 01:29:07,600
आप क्लेम कर रहे हैं ना मैं आऊंगा उन पे। अभी थोड़ी सी तार्किक रूप से

1283
01:29:07,600 --> 01:29:11,600
हम लोग यह समझने का प्रयास कर रहे हैं। आपका कहना है कि वो वहां पर

1284
01:29:11,600 --> 01:29:17,040
बीके के साथ अभी भी है। मगर वो झूठ बोल रही हैं। मन से वो आध्यात्मिक

1285
01:29:17,040 --> 01:29:21,120
आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के ज्ञान को ही मानती है। बंदर

1286
01:29:21,120 --> 01:29:25,280
से बिल्कुल मानती है और वहां से 16,000 और भी उसके

1287
01:29:25,280 --> 01:29:29,600
साथ इस बात का प्रमाण क्या माने?

1288
01:29:29,600 --> 01:29:33,600
मुरलियां अब जो दादा लेखराज ने गुलजार दादी के तन में

1289
01:29:33,600 --> 01:29:38,320
जो अव्यक्त वाणी बोली वो सबूत है उसमें बहुत

1290
01:29:38,320 --> 01:29:42,400
देखिए हां जी मैं बताऊं जो माता जी हैं वो

1291
01:29:42,400 --> 01:29:46,400
कह रही है कि नहीं बी के सही है आप कह रहे हो कि वो ये

1292
01:29:46,400 --> 01:29:50,640
मानती है कि आध्यात्मिक विश्वविद्यालय सही है। ठीक है? इसका मतलब

1293
01:29:50,640 --> 01:29:55,120
माता जी इसका मतलब माताजी किसी कारणवश

1294
01:29:55,120 --> 01:29:59,120
झूठ बोल रही हैं। बोल रही है ना? झूठ नहीं बोल रही है। हां बिल्कुल कुछ

1295
01:29:59,120 --> 01:30:03,120
समय के लिए बोल रही है। कुछ समय के लिए किसी कारणवश झूठ बोल रही है। जो

1296
01:30:03,120 --> 01:30:07,120
व्यक्ति जरा सा भी झूठ बोल सकता है उसको हम अपने धर्म का

1297
01:30:07,120 --> 01:30:10,320
प्रमाण कैसे मान सकते हैं? जो व्यक्ति जरा

1298
01:30:10,320 --> 01:30:14,320
सा भी झूठ मैं बता रहा हूं। मैं बता रहा हूं इसलिए कि हम

1299
01:30:14,320 --> 01:30:18,480
मुरलियां लेखराज जी की किससे ले रहे हैं? माता जी से और माता

1300
01:30:18,480 --> 01:30:22,560
जी तो झूठी है। तो जब वो यहां झूठ बोल सकती हैं एक

1301
01:30:22,560 --> 01:30:26,880
मिनट। माता जी जब एक बार भी झूठ बोल सकती है तो

1302
01:30:26,880 --> 01:30:30,880
मुनियों में भी मिलावट कर सकती है। जी एक मिनट अब आप सुनो

1303
01:30:30,880 --> 01:30:35,040
अब आपको सुनना चाहिए। देखिए हम उनको झूठा नहीं कह सकते

1304
01:30:35,040 --> 01:30:39,280
और आप आपसे मैं कल भी रिक्वेस्ट किया था आज भी करता हूं।

1305
01:30:39,280 --> 01:30:43,520
एक बार हमारा चाहे बीके का सुनो चाहे पीके का ज्ञान एक ही है।

1306
01:30:43,520 --> 01:30:47,760
बात है उसके लेवल को उठाने की गहराई से समझने की। दूसरी बात

1307
01:30:47,760 --> 01:30:51,760
माता जी है जो नर से नारी नर से नारायण नारी से

1308
01:30:51,760 --> 01:30:55,840
लक्ष्मी वह अपना रोल अदा कर रही है नारियों को लक्ष्मी बनाने की शिक्षा

1309
01:30:55,840 --> 01:31:00,000
दे रही है चुपचाप इधर से बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित जी नर से नारायण बनाने

1310
01:31:00,000 --> 01:31:04,160
का ज्ञान दे रहे हैं सत्य सनातन धर्म की प्रवृत्ति मार्ग की स्थापना हो रही है

1311
01:31:04,160 --> 01:31:09,840
तो इसलिए उनको झूठा मत कहो आप ये अंदर की बात है

1312
01:31:09,840 --> 01:31:13,920
आप ही कह रहे हो अब आप ये कह सकते हो अभी आप ये कहो कि हम उस

1313
01:31:13,920 --> 01:31:18,080
बात को जैसे वो जस्टिफाई करनी चाहिए ऐसे तो नहीं करेंगे। कोर्ट कचहरी तक का बहुत लंबा

1314
01:31:18,080 --> 01:31:22,080
मैटर है। अभी नहीं नहीं आप ही तो कह

1315
01:31:22,080 --> 01:31:25,360
रहे हो कि वह मन से आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के साथ है मगर

1316
01:31:25,360 --> 01:31:29,360
तन से बीके के साथ है। अरे इसका मतलब झूठ बोल रही है ना

1317
01:31:29,360 --> 01:31:33,360
वो तो इतिहास गवाह है। वो जन्म जन्मांतर उसी के साथ है।

1318
01:31:33,360 --> 01:31:37,440
नहीं तो मिथ्याचारी सिद्ध हो रही है ना उसी के साथ रहती है। अरे

1319
01:31:37,440 --> 01:31:42,880
भाई शरीर आप शरीर का मिलन देख रहे हैं। आत्म ज्ञान दिया जाता है। आत्मा का ज्ञान है।

1320
01:31:42,880 --> 01:31:46,880
वो हमारे लिए आप कह रहे हो ना वो तो नहीं कह रही ना कि उनका आत्मज्ञान क्या

1321
01:31:46,880 --> 01:31:52,000
है? नहीं ना आप शरीर को देख रहे हो ना

1322
01:31:52,000 --> 01:31:56,000
मुझे सुनिए तो मुझे जैसे प्यास लग रही है मैं कहूं भाई मुझे प्यास लग रही

1323
01:31:56,000 --> 01:32:01,200
है आप कहोगे नहीं नहीं इसको तो भूख लग रही है तो किसकी बात मानी जाएगी

1324
01:32:01,200 --> 01:32:05,360
बात अब हाल आत्म ज्ञान दिया जाता है या आत्मज्ञान की बात करिए आप शरीरों

1325
01:32:05,360 --> 01:32:09,440
को मत देखिए आत्मा को देखिए मैं शरीर की बात नहीं कर रहा हूं वहां पर वो अपना आत्मज्ञान

1326
01:32:09,440 --> 01:32:14,160
यही कह रही मेरा आत्मज्ञान बीके के साथ है आप कह रहे हो

1327
01:32:14,160 --> 01:32:18,160
आपके साथ है। एक आप यहां बैठे हो यहां बैठ के किसी

1328
01:32:18,160 --> 01:32:22,400
को याद कर सकते हो कि नहीं जिसको जानते हो कर सकते हैं। कर सकते हैं। कर

1329
01:32:22,400 --> 01:32:26,640
सकते हैं। तो वो वहां बैठकर के याद नहीं कर सकते मन बुद्धि से क्या तो उन्होंने ऐसा

1330
01:32:26,640 --> 01:32:30,800
कहा है कि मैं आध्यात्मिक विश्वविद्यालय को याद करती हूं। मैं उसी की

1331
01:32:30,800 --> 01:32:34,960
हूं। ऐसा कहा है उन्होंने? एक बात बताइए। कहना

1332
01:32:34,960 --> 01:32:39,200
जरूरी है क्या? सारी बात दुनिया को दिखाना जरूरी है। जब आपने मुझसे पूछा था

1333
01:32:39,200 --> 01:32:40,560
जब आपने मुझसे पूछा

1334
01:32:40,560 --> 01:32:44,640
था कि आप याद कर सकते हो क्या उसमें मेरा कहना या इशारा करना

1335
01:32:44,640 --> 01:32:48,640
जरूरी था ना? आपको कैसे पता चलता मैं याद कर सकता हूं?

1336
01:32:48,640 --> 01:32:52,720
एक मिनट आपको कैसे पता चलता है कि मैं याद कर सकता हूं कि नहीं? आपको

1337
01:32:52,720 --> 01:32:57,040
मेरा इशारा मेरा कहना जरूरी था ना। आपको

1338
01:32:57,040 --> 01:33:01,120
कैसे पता चलेगा मैं याद कर रहा हूं कि नहीं कर रहा हूं। इसलिए कहेंगे

1339
01:33:01,120 --> 01:33:05,840
कि ब्रह्मा बाबा शरीर छोड़ने के बाद गुलजार दादी में प्रवेश करता है।

1340
01:33:05,840 --> 01:33:09,840
ठीक है और प्रवेश करके कहता है प्रवेश

1341
01:33:09,840 --> 01:33:14,640
करके कहता है कि के क्या करो

1342
01:33:14,640 --> 01:33:18,640
वैजंती माला विजय माला का आह्वान करो एक डायलॉग दिया गया था

1343
01:33:18,640 --> 01:33:22,720
ब्रह्मा बाबा के द्वारा विजय माला का मतलब जो तुम्हें विजय पहनाएगी इस ज्ञान

1344
01:33:22,720 --> 01:33:27,120
का पूरा तंत्र निकाल देगी भारत माता शिव शक्ति अवतारा अंत का यही नारा है

1345
01:33:27,120 --> 01:33:31,280
तो ये वाक्य दादा लेखराज के द्वारा बोला गया गुलजार

1346
01:33:31,280 --> 01:33:35,360
दादी के तन से ठीक है तो तो वहां यहां से हमें फिर

1347
01:33:35,360 --> 01:33:39,680
इशारा मिल गया कि उसका आह्वान करो वो आवेगी तो प्रवृत्ति मार्ग का धर्म स्थापन

1348
01:33:39,680 --> 01:33:43,760
हो रहा है तो सूर्यवंश और चंद्र वंश दोनों मिलकर के एक हो

1349
01:33:43,760 --> 01:33:48,000
तो राजधानी स्थापन इशारों पे इशारों पे सुनिश्चितता नहीं

1350
01:33:48,000 --> 01:33:52,400
होती है कांटे की नोक पे होती है देखिए सुनिए धर्म धर्म

1351
01:33:52,400 --> 01:33:55,600
सुनिए जो सुनिए तो धर्म का जो बात होती

1352
01:33:55,600 --> 01:33:59,600
है धर्म की बात होती है वो ऐसे इशारों पे नहीं होती इशारों पे हमने

1353
01:33:59,600 --> 01:34:03,680
तय कर लिया इशारा है बस इशारा उसमें प्रमाण भी होता है अब जब हम किसी को

1354
01:34:03,680 --> 01:34:07,680
ये कह रहे कि इसने हमको मुरली दी ज्यों की त्यों। फिर

1355
01:34:07,680 --> 01:34:12,080
हम यह कह रहे हैं कि यह अपने मन की बात नहीं बता रही है ज की त्यों।

1356
01:34:12,080 --> 01:34:16,080
तो इसका मतलब फिर उस पर हम विश्वास नहीं कर सकते। उसने मिलावट कर दी

1357
01:34:16,080 --> 01:34:20,160
हो मुरली में या फिर आपको चीजें प्रोवाइड कराने में मिलावट कर दी हो।

1358
01:34:20,160 --> 01:34:24,240
ये एक चीज बची रह रही है। बस इसमें अंत में थोड़ा सा बात

1359
01:34:24,240 --> 01:34:28,320
करेंगे। फिर हम आगे बढ़ते हैं। इसके लिए मैं आपके चैनल के

1360
01:34:28,320 --> 01:34:32,560
माध्यम से आपको भी और पूरे भारतवासियों को और जो भी सुन रहे हैं

1361
01:34:32,560 --> 01:34:37,120
जो धर्म प्रेमी हैं उनको कहूंगा कि जाकर के एक बार हमारे विश्वविद्यालय

1362
01:34:37,120 --> 01:34:41,120
में जावे चाहे कोई से भी चले जाए दोनों हमारे जाकर के एक बार कोर्स करें

1363
01:34:41,120 --> 01:34:45,200
अच्छे से समझे एक एक बात समझ में आ जाएगी। आत्मज्ञान दिया जाएगा।

1364
01:34:45,200 --> 01:34:49,200
आपको मैं कहूं कि आपकी पूरी धारणा झूठी है और मैं

1365
01:34:49,200 --> 01:34:53,600
कहूं कि आप जो है हमारे क्या कहते हैं बहुत सारे आचार्य

1366
01:34:53,600 --> 01:34:57,760
हैं वैष्णवाचार्य हैं शंकराचार्य हैं इनके आचार्यों के मठ हैं। आप एक

1367
01:34:57,760 --> 01:35:01,760
काम करिए आपकी पूरी जो चीजें हैं वो सब झूठी है। पाखंड है और

1368
01:35:01,760 --> 01:35:06,000
आप जाइए इनमें जाकर के और जाके आप जो है एक एक घंटे के प्रवचन सुन

1369
01:35:06,000 --> 01:35:10,000
लीजिए बस तो चलेगा। हां बिल्कुल जाना पड़ेगा।

1370
01:35:10,000 --> 01:35:10,880
कोई चीज की गहराई

1371
01:35:10,880 --> 01:35:14,960
में तो जाना पड़ेगा। जानना चाहते तो फिर अभी कोई बात करने का मतलब ही नहीं है। दोनों जाएंगे

1372
01:35:14,960 --> 01:35:19,120
अब हां तो जाना चाहिए सबको तो फिर तो फिर हमें

1373
01:35:19,120 --> 01:35:23,600
चर्चा ही नहीं करनी चाहिए उस हिसाब से ओपन चैलेंज भी नहीं करना चाहिए

1374
01:35:23,600 --> 01:35:27,680
जब तक आप वहां जाकर के ज्ञान नहीं लेंगे तो आप भी जो

1375
01:35:27,680 --> 01:35:31,760
क्वेश्चन पूछोगे उसका आंसर आपको कैसे पता चलेगा कि आप सही ले रहे हैं अरे आपने लिया

1376
01:35:31,760 --> 01:35:37,760
है ना जहां आप मुझे भेज रहे हो वहां का ज्ञान आपने लिया है सुनिए

1377
01:35:38,240 --> 01:35:42,320
विश्वास देखिए जो चर्चा होती है वो चर्चा इसलिए होती

1378
01:35:42,320 --> 01:35:46,320
है आपने आप मुझे जहां भेज रहे हो वहां का ज्ञान

1379
01:35:46,320 --> 01:35:50,320
आपने लिया है। मैं आपको जहां भेज रहा हूं वहां का ज्ञान मैंने लिया है। तो

1380
01:35:50,320 --> 01:35:54,400
सुनिए मेरी चीजों के लिए जो क्वेश्चन आपके मन में आएंगे उनका जवाब मैं

1381
01:35:54,400 --> 01:35:58,400
दूंगा। आपकी चीजों के लिए जो जो क्वेश्चन मेरे मन

1382
01:35:58,400 --> 01:36:02,640
में आएंगे उनका जवाब आप देंगे। अब जब मैं क्वेश्चन पूछूंगा तो आप ये कह देंगे

1383
01:36:02,640 --> 01:36:06,960
जाओ मेरा कोर्स करके आओ। ये ठीक नहीं है। ये तार्किक नहीं है यहां पे।

1384
01:36:06,960 --> 01:36:11,680
हम तार्किक आपके ज्ञान में और हमारे ज्ञान में अंतर है।

1385
01:36:11,680 --> 01:36:15,760
हम ये भी ज्ञान है सुनिए ये भी

1386
01:36:15,760 --> 01:36:19,840
एक तर्क है। ये भी एक तर्क है। ये भी एक तर्क है। तो जब आप तर्क मानना ही नहीं है तो फिर

1387
01:36:19,840 --> 01:36:23,840
कोई भी तर्क नहीं मानेंगे। फिर बिल्कुल भी नहीं। इस दुनिया का तर्क जो

1388
01:36:23,840 --> 01:36:25,920
है इस दुनिया में जो ढाई हजार साल से आप

1389
01:36:25,920 --> 01:36:30,160
वेस्ट ही तर्क बोल रहे हैं।

1390
01:36:30,160 --> 01:36:34,160
चलिए कह रहा हूं। आगे चलते हैं। अब कहने का मतलब यह है

1391
01:36:34,160 --> 01:36:38,560
यहां पे इस बात से बात काम नहीं चलेगा कि आप हमारा कोर्स कर लीजिए। जहां पे भी

1392
01:36:38,560 --> 01:36:42,640
प्रश्न का उत्तर ना हो उसका यह जवाब नहीं चलेगा कि आप कोर्स कर

1393
01:36:42,640 --> 01:36:48,480
लीजिए। आप कह दीजिए भाई इस पर हम इतना ही बता सकते हैं। फिर हम आगे चलते हैं।

1394
01:36:48,480 --> 01:36:52,480
चौथी बात है ना कोर्स अगर करना ही है फिर हम आपसे बात ही क्या कर रहे हैं।

1395
01:36:52,480 --> 01:36:56,640
हमें तो कोर्स ही करना है क्योंकि हर सवाल के जवाब में यही मिलेगा। दूसरी बात

1396
01:36:56,640 --> 01:37:00,960
आपने दूसरी दूसरी बात आपने तो कोर्स किया है। सुनिए

1397
01:37:00,960 --> 01:37:04,960
तो भगवान के ज्ञान सवाल का जवाब दिया गया

1398
01:37:04,960 --> 01:37:09,360
आपने तो कोर्स किया है तो फिर आप जवाब 12 साल लगाए

1399
01:37:09,360 --> 01:37:13,840
मेरे तो 12 कोर्स करने भेज रहे हो ना

1400
01:37:13,840 --> 01:37:17,840
हां तो 12 साल मैंने लगाए तो आप भी मेरे पे विश्वास करो ना मैं जो कह रहा हूं अपने अनुभव के

1401
01:37:17,840 --> 01:37:21,920
आधार पर विश्वास की नहीं बात पूछ रहा हूं मेरे मन में जो जिज्ञासा आ रही है वो पूछ रहा हूं

1402
01:37:21,920 --> 01:37:25,920
मैं ऐसे तो मैं आपको बता दूं ढाई हजार साल की परंपरा है आपने 12 साल

1403
01:37:25,920 --> 01:37:30,080
लगाए हैं सुनिए जो आचार्य है ढाई ढाई हजार साल परंपरा

1404
01:37:30,080 --> 01:37:34,080
है और एज इट इज वही ज्ञान चल रहा है। आप फिर उन पर विश्वास कर

1405
01:37:34,080 --> 01:37:38,320
लो। कहने का मतलब है

1406
01:37:38,320 --> 01:37:41,200
मेरा कहने का मतलब है ऐसे काम नहीं चलेगा

1407
01:37:41,200 --> 01:37:45,200
कि आप कोर्स करके आइए। आपके पास जवाब नहीं है तो आप कह दो

1408
01:37:45,200 --> 01:37:49,440
भैया मैं इतना ही बोल सकता हूं। अगला विषय चलाइए। ना ना ना

1409
01:37:49,440 --> 01:37:53,520
बिल्कुल गलत बात। गलत बात है। गलत बात नहीं। आपके पास जवाब है तो आप मुझे

1410
01:37:53,520 --> 01:37:57,520
कोर्स करने क्यों भेज रहे जवाब जवाब पिछले ढाई हजार साल

1411
01:37:57,520 --> 01:38:01,520
से जो आप बता रहे हो साल जवाब है तो कोर्स

1412
01:38:01,520 --> 01:38:05,680
की बात क्यों करते हैं आप मुझसे के कोर्स करने चले जाओ कोर्स तो करना पड़ेगा अगर

1413
01:38:05,680 --> 01:38:09,760
आपको भगवान से जवाब है करना चाहते हैं

1414
01:38:09,760 --> 01:38:13,840
भाई साहब जवाब है कि नहीं आपके पास हर चीज का जवाब ऐसी कोई बात ही

1415
01:38:13,840 --> 01:38:18,000
नहीं है सृष्टि की जो भगवान जवाब ना फिर आप क्यों कह रहे हैं कि आप कोर्स करो इसका जवाब आपको

1416
01:38:18,000 --> 01:38:23,120
वहां मिलेगा करना जरूरी है क्योंकि आपके पास जो ज्ञान है

1417
01:38:23,120 --> 01:38:27,120
मैं पूछ रहा हूं अगर मेरे मेरे प्रश्न का जवाब आपके पास है तो मुझे दूसरी जगह क्यों

1418
01:38:27,120 --> 01:38:31,200
भेज रहे हो? हर प्रश्न का जवाब है लेकिन आपका क्वेश्चन ठीक

1419
01:38:31,200 --> 01:38:35,200
नहीं है। अच्छा और ये कहां लिखा है? कौन

1420
01:38:35,200 --> 01:38:39,280
सा क्वेश्चन ठीक है? कौन सा क्वेश्चन ठीक नहीं है? ये मुरली में है। ये

1421
01:38:39,280 --> 01:38:43,280
मुरली में लिखा हुआ है। कहां लिखा है? बताइए। कौन सी

1422
01:38:43,280 --> 01:38:47,520
एक मिनट सुनो। भगवान आते हैं तो आत्मा का ज्ञान देते हैं। परमात्मा

1423
01:38:47,520 --> 01:38:51,600
की जानकारी देते हैं। भाई साहब कोई भी जो

1424
01:38:51,600 --> 01:38:55,600
कोई भी जो चीज है कोई भी जो चीज है ज्ञान जो शुरू होगा वो व्यवहार

1425
01:38:55,600 --> 01:38:56,240
से ही तो शुरू

1426
01:38:56,240 --> 01:39:00,560
होगा। आत्मा तक हम पहुंचेंगे जीभ से प्रश्न पूछेंगे कि नहीं?

1427
01:39:00,560 --> 01:39:04,560
एक प्रश्न पूछेंगे। जब पूछेंगे जब किसी चीज के बारे में

1428
01:39:04,560 --> 01:39:08,720
आपको बेसिक नॉलेज हो। आपको हमारे ज्ञान के बारे में बेसिक नॉलेज भी नहीं है। नहीं

1429
01:39:08,720 --> 01:39:13,120
आप आप नहीं तो बेसिक नॉलेज दोगे ना। आपने दी तो है बेसिक नॉलेज।

1430
01:39:13,120 --> 01:39:17,120
लेकिन प्रश्न उत्तर ऐसे थोड़ी ना होगा। हमारे चार चित्र हैं। कोर्स

1431
01:39:17,120 --> 01:39:21,280
है वो आपको लेना पड़ेगा। फिर आप फिर आप क्या जवाब दोगे?

1432
01:39:21,280 --> 01:39:26,240
बात वही आ रही है कि साप्ताहिक कोर्स करो। तो अगर

1433
01:39:26,240 --> 01:39:30,240
बात सुनिए अगर सा्ताहिक कोर्स से उत्तर मिलना है तो यह मानना पड़ेगा

1434
01:39:30,240 --> 01:39:35,440
ना कि आपके पास उत्तर नहीं है। हां तो

1435
01:39:35,440 --> 01:39:38,800
आगे चलते हैं। छोड़िए।

1436
01:39:38,800 --> 01:39:42,800
मैंने डॉक्टर के बारे में आगे चलते हैं।

1437
01:39:42,800 --> 01:39:47,200
हां क्या क्या नहीं क्या पढ़ाई क्या कह रहे हैं

1438
01:39:47,200 --> 01:39:51,440
मैं कह रहा हूं कि आपने वकील की पढ़ाई पढ़ी मैंने डॉक्टर की पढ़ाई पढ़ी तो दोनों पढ़ाई

1439
01:39:51,440 --> 01:39:55,520
में अंतर है ना तो आप आप मुझे मैं आपसे

1440
01:39:55,520 --> 01:40:00,880
डॉक्टरी का प्रश्न पूछ रहा हूं ना कि वकील का पूछ रहा हूं तो अब

1441
01:40:00,880 --> 01:40:04,960
प्रश्न पूछ रहा हूं ना दोनों का सेम दोनों का प्रोफेशन सेम होना चाहिए देखिए

1442
01:40:04,960 --> 01:40:09,280
आपने जो अभी उदाहरण दिया है इससे दो बातें निकलती है अगर मैं वकील

1443
01:40:09,280 --> 01:40:11,520
वकील की पढ़ाई पढ़ी आपने डॉक्टरी की

1444
01:40:11,520 --> 01:40:15,680
या तो यह निकलती है कि मैं वकालत का सवाल पूछ रहा हूं तो मेरे सवाल का जवाब आपके

1445
01:40:15,680 --> 01:40:19,840
पास इसलिए नहीं क्योंकि आप डॉक्टर हैं। तो घुमा फिरा के बात यही हुई कि मेरे सवाल

1446
01:40:19,840 --> 01:40:24,000
का जवाब आपके पास नहीं है। और अगर यह बात है कि मैं अगर आपसे

1447
01:40:24,000 --> 01:40:28,240
डॉक्टरी का ही सवाल पूछ रहा हूं तो फिर आपको जवाब देना चाहिए। ये तो आपने मेरी

1448
01:40:28,240 --> 01:40:32,560
बात कह दी। या तो ये बात मानी जाए कि मैं क्योंकि वकालत

1449
01:40:32,560 --> 01:40:36,640
के प्रश्न पूछ रहा हूं और उसका उत्तर आपके पास नहीं है क्योंकि आप डॉक्टर हैं।

1450
01:40:36,640 --> 01:40:40,880
तो इसका मतलब आपके पास जवाब नहीं है। फिर ये कहना गलत है मेरे पास जवाब है।

1451
01:40:40,880 --> 01:40:44,960
अब मैं आपसे आपसे एक बात मैं पूछना चाहता हूं। हां

1452
01:40:44,960 --> 01:40:49,600
आपको आप जो क्वेश्चन पूछ रहे हैं बहुत अच्छी बात कर रहे हैं। जी

1453
01:40:49,600 --> 01:40:53,680
लेकिन मैं आपका भी एजेंडा क्लियर करना चाहता हूं कि दूसरों को चैनल पे

1454
01:40:53,680 --> 01:40:57,920
बुला के अपने को सुप्रीम दिखाना है या भगवान को भी चैलेंज करना है। आपका एजेंडा

1455
01:40:57,920 --> 01:41:02,000
क्या है? मेरा एजेंडा है वास्तविकता की खोज।

1456
01:41:02,000 --> 01:41:06,320
सत्य क्या है? क्या ब्रह्मा कुमारी सत्य बोल रही है? क्या ब्रह्मा

1457
01:41:06,320 --> 01:41:10,320
कुमारी सत्य बोल रही है? या आध्यात्मिक विश्वविद्यालय वाले सत्य

1458
01:41:10,320 --> 01:41:14,540
बोल रहे हैं या आप सत्य बोल रहे हैं। यह एजेंडा है इनका। ठीक है। लेकिन जो

1459
01:41:14,540 --> 01:41:18,640
[गला साफ़ करने की आवाज़] एक एक शिवश बहुत अच्छी बात आपने कही। जो वास्तविक

1460
01:41:18,640 --> 01:41:24,400
सत्य है उस सत्य को जानने के लिए ज्ञान का तीसरा नेत्र चाहिए।

1461
01:41:24,400 --> 01:41:26,560
आपके पास है

1462
01:41:26,560 --> 01:41:30,640
तो मैं जो बोल रहा हूं तो ज्ञान उस ज्ञान के नेत्र के आधार पर बोल रहा हूं जो आपकी

1463
01:41:30,640 --> 01:41:34,720
समझ से बाहर है तो भाई साहब फिर फिर वही बात फिर तो

1464
01:41:34,720 --> 01:41:38,800
ऐसे कोई है ही नहीं जिसके पास तीसरा नेत्र नहीं होगा वो समझेगा नहीं तो फिर समझाने का

1465
01:41:38,800 --> 01:41:42,960
फायदा नहीं है कोई इसलिए उसको वहां जाकर के कोर्स करना तो अनिवार्य

1466
01:41:42,960 --> 01:41:48,000
है कोर्स कोर्स से तीसरा नेत्र आएगा

1467
01:41:48,000 --> 01:41:52,240
बिल्कुल आएगा आप एक विभाग को

1468
01:41:52,240 --> 01:41:54,800
आज नहीं

1469
01:41:54,800 --> 01:41:58,800
पूरे विश्व को यह कोर्स तो करना पड़ेगा क्योंकि इसमें सृष्टि

1470
01:41:58,800 --> 01:42:02,960
पूछ रहा हूं ये ये कहां लिखा है कि वहां कोर्स करने से तीसरा नेत्र

1471
01:42:02,960 --> 01:42:07,520
आ जाएगा और आपके तीसरे नेत्र के विषय में प्रमाण क्या है

1472
01:42:07,520 --> 01:42:11,680
ये प्रमाण ये है कि हमारा खुला हुआ हमने भगवान को पहचान लिया सत्यनारायण को पहचान

1473
01:42:11,680 --> 01:42:15,760
लिया को पहचान लिया आपने पहचान आपने पहचान लिया है

1474
01:42:15,760 --> 01:42:19,760
ये कहां लिखा है कि जिसने पहचान लिया उसका पास तीसरा नेत्र है और

1475
01:42:19,760 --> 01:42:24,000
आपने पहचान लिया इसका प्रमाण क्या है यह प्रमाण आपकी

1476
01:42:24,000 --> 01:42:28,480
आंखों के समान सामने धीरेधी आ जाएगा। पूरी दुनिया के सामने आ जाएगा।

1477
01:42:28,480 --> 01:42:32,480
मिला के अभी जवाब नहीं है। आ जाएगा कोर्स कर लेना तब आ जाएगा।

1478
01:42:32,480 --> 01:42:36,480
अभी जवाब नहीं है। चलिए ठीक है। किसी चीज किसी चीज के

1479
01:42:36,480 --> 01:42:40,800
बारे में अगले अब हम अगले चैप्टर में बढ़ते हैं भाई साहब।

1480
01:42:40,800 --> 01:42:41,760
नहीं नहीं। एक

1481
01:42:41,760 --> 01:42:45,760
जब तक आप वहां जाकर के बैठोगे वह ईश्वरीय पढ़ाई है।

1482
01:42:45,760 --> 01:42:50,000
पढ़ाई पढ़ाई जा रही है। कुल मिला के मैं समझ रहा हूं कि मेरे इस प्रश्न का जवाब

1483
01:42:50,000 --> 01:42:54,480
आपके पास नहीं है। वो मुझे कोर्स करने पर ही मिलेगा। आपका

1484
01:42:54,480 --> 01:43:00,080
दुनिया का कोई ऐसा प्रश्न नहीं है जो भगवान आ के उसका उत्तर ना देते हो। वो कप

1485
01:43:00,080 --> 01:43:06,080
पास तो नहीं है ना भाई साहब? हेलो

1486
01:43:13,920 --> 01:43:19,920
कहां चले गए?

1487
01:43:28,240 --> 01:43:32,240
मैं जरा देखता हूं कहां गए।

1488
01:43:32,240 --> 01:43:37,040
जैसे तो अब हम उस प्रश्न से आगे बढ़ जाते हैं।

1489
01:43:37,040 --> 01:43:41,280
अगर आपकी संतुष्टि हो गई है तो आगे बढ़ो। मुख्य

1490
01:43:41,280 --> 01:43:45,440
नहीं संतुष्टि तो नहीं हुई इसमें। आपने ये कहा ना कि कोर्ट आपने कहा कोर्स

1491
01:43:45,440 --> 01:43:49,600
वो कोर्स ले लीजिए। कोर्स तो लेना पड़ेगा। वो सबको

1492
01:43:49,600 --> 01:43:53,600
लेना पड़ेगा क्योंकि देखो देखिए कोर्स कोर्स की दो चीज को

1493
01:43:53,600 --> 01:43:57,680
जब जानते हो ना देखो एक मेरी भी सलाह सुनो। मैं भी पढ़ा लिखा हूं। दो रोटी में भी

1494
01:43:57,680 --> 01:44:01,680
खाता हूं। जी जब तक जब तक हम दोनों

1495
01:44:01,680 --> 01:44:05,680
एक चीज को ना पढ़े हो, एक चैप्टर पढ़े और उसके बारे में डिस्कस करें तो

1496
01:44:05,680 --> 01:44:10,240
अच्छा रहता है। उसका निर्णय निकलता है। ठीक है? जब तक

1497
01:44:10,240 --> 01:44:14,480
आप भी एक चीज को पढ़े, मैं भी एक चीज को पढूं और फिर उसके बाद डिस्कस करें तो उसका आंसर

1498
01:44:14,480 --> 01:44:18,560
निकलेगा। सागर मंथन इसी को सागर मंथन कहते हैं कि पहले ज्ञान सागर को

1499
01:44:18,560 --> 01:44:22,560
पढ़ा जाए, समझा जाए। ठीक है? मैं मैं इसमें अपनी बात कह दूं। देखिए भाई

1500
01:44:22,560 --> 01:44:26,720
साहब कि जैसे आपने कहा कि सात दिन का कोर्स कोई बात नहीं। जैसे

1501
01:44:26,720 --> 01:44:31,040
अभी मुझे कोई व्यक्ति मिलता है और वो यह कहता है मैं ईश्वर हूं।

1502
01:44:31,040 --> 01:44:35,040
मैं कहूंगा क्यों? वो कहेगा कोर्स कर ले। वो सात दिन का नहीं वो 50

1503
01:44:35,040 --> 01:44:39,120
दिन का कहेगा। फिर तीसरा व्यक्ति कहेगा तीसरा व्यक्ति कहेगा

1504
01:44:39,120 --> 01:44:43,120
कि मैं ईश्वर हूं। और फिर मैं उससे पूछूं क्यों? कि नहीं मेरा

1505
01:44:43,120 --> 01:44:43,620
150

1506
01:44:43,520 --> 01:44:47,520
दिन का कोर्स कर ले। अगर भाई तुम जो कोर्स मुझे दे रहे

1507
01:44:47,520 --> 01:44:51,520
हो और उसमें वो ज्ञान मेरे क्वेश्चन का आंसर है उस उस कोर्स

1508
01:44:51,520 --> 01:44:55,920
में तो वो आंसर मुझे अभी दो जिससे मैं उस कोर्स के लिए अट्रैक्ट हो जाऊं।

1509
01:44:55,920 --> 01:45:01,760
दूसरी बात आपने शायद ये चैलेंज भी

1510
01:45:01,760 --> 01:45:06,240
मेरे दो मेरे दो उत्तर है ना मेरे दो उत्तर है

1511
01:45:06,240 --> 01:45:10,400
दूसरा उत्तर ये है कि आपने जैसे चैलेंज किया हुआ है ना ओपन चैलेंज

1512
01:45:10,400 --> 01:45:14,720
के कोर्ट में आके भी सिद्ध कर दो कोई बिल्कुल सिद्ध होगा

1513
01:45:14,720 --> 01:45:18,800
तो ये जो आपने चैलेंज किया है जब कोर्ट कहेगी आप अपनी बातों को सिद्ध करिए

1514
01:45:18,800 --> 01:45:22,880
यहां ये बातें समझ में नहीं आ रही तो आप कहोगे कोर्ट कोर्ट वालों से कि कोर्स करो हमारा

1515
01:45:22,880 --> 01:45:26,880
जाके बिल्कुल बिल्कुल कहेंगे एसआईटी की गठित करो और एक

1516
01:45:26,880 --> 01:45:30,880
बार इस सारे ज्ञान का पूरा आकलन करवाया जाए। बिल्कुल कहेंगे। क्यों नहीं

1517
01:45:30,880 --> 01:45:35,040
कहेंगे? अगर उस कोर्स को अगर उस ज्ञान को समझे तो टाइम भी

1518
01:45:35,040 --> 01:45:39,120
आपसे जब पूछताछ होगी तो कोर्स करने की थोड़ी ना कहोगे आप। आप तो उस

1519
01:45:39,120 --> 01:45:43,200
कोर्स में बिल्कुल। ठीक है। तो कुल मिला के कुल

1520
01:45:43,200 --> 01:45:47,360
मिला के इस प्रश्न का अभी आपके पास जवाब नहीं है। फिलहाल नहीं बिल्कुल हर

1521
01:45:47,360 --> 01:45:51,440
बात का जवाब है। अब आपको समझ नहीं आ रहा उसमें मैं कुछ नहीं कर सकता। चलिए

1522
01:45:51,440 --> 01:45:56,320
आगे बढ़ते हैं। अब मुझे ये बताइए कि आप

1523
01:45:56,320 --> 01:45:58,560
ईश्वर को मानते हैं। है ना?

1524
01:45:58,560 --> 01:46:02,560
जी बिल्कुल। तो ईश्वर है। यह सिद्ध कैसे होता है?

1525
01:46:02,560 --> 01:46:08,000
मतलब कैसे विश्वास हुआ? कैसे विश्वास करें कि इस दुनिया में कोई ईश्वर है?

1526
01:46:08,000 --> 01:46:12,080
इस दुनिया में कोई ईश्वर है तो ये गीता ने फाइनल बताया। इन मुरलियों

1527
01:46:12,080 --> 01:46:16,160
ने फाइनल बताया। गीता क्या कहते हैं? नास्त भावो

1528
01:46:16,160 --> 01:46:20,320
ना भाव विधते सत। कि ईश्वर इस मुरली ने बताया। शिव बाबा

1529
01:46:20,320 --> 01:46:26,320
ही सृष्टि पर सदा कायम है और फिर गीता ने बताया

1530
01:46:27,040 --> 01:46:31,120
ये बात तो उसके लिए है जो गीता पर विश्वास करता हो अभी वो जो

1531
01:46:31,120 --> 01:46:35,120
व्यक्ति जीरो पे खड़ा है पहले आप बताओ आप अपनी बताओ आप गीता पर विश्वास

1532
01:46:35,120 --> 01:46:39,120
करते हो कि नहीं मैं न्यूट्रल व्यक्ति की ओर से आपसे प्रश्न

1533
01:46:39,120 --> 01:46:43,120
कर रहा हूं कि क्या आपके यहां जो ज्ञान दिया गया आप

1534
01:46:43,120 --> 01:46:47,120
पहले आप अपना पक्ष क्लियर करो आप जय श्री राम बोल रहे हैं तो आप गीता पाठी हो कि

1535
01:46:47,120 --> 01:46:51,200
नहीं हो गीता पाठी हूं बिल्कुल हूं मतलब गीता हो

1536
01:46:51,200 --> 01:46:57,200
तो गीता में गीता में आया कि नहीं आया

1537
01:46:58,960 --> 01:47:03,360
कि [गला साफ़ करने की आवाज़] नास्ते विद्यते भावो ना भावो विद्यते सत गीता में आया कि नहीं आया

1538
01:47:03,360 --> 01:47:07,440
आया सत्य का इस दुनिया में कभी विनाश नहीं होता सत्य सदाकाल होता है

1539
01:47:07,440 --> 01:47:11,520
उसी सत्यनारायण की कथा घरघर गाई जाती है इस बात को मानते हो अरे

1540
01:47:11,520 --> 01:47:15,600
भाई साहब मैं मानता हूं मैं जो मेरा जो प्रश्न है वो क्या है कि

1541
01:47:15,600 --> 01:47:19,600
कोई नास्तिक व्यक्ति कोई नास्तिक व्यक्ति जो अभी

1542
01:47:19,600 --> 01:47:24,160
तक भगवान है ना अभी तक वो रामायण को मानता है

1543
01:47:24,160 --> 01:47:28,160
उसके समक्ष ये कैसे सिद्ध करें उसको कैसे

1544
01:47:28,160 --> 01:47:32,320
विश्वास दिलाएं कि इस दुनिया में कोई ईश्वर है क्या इस बारे

1545
01:47:32,320 --> 01:47:37,280
में कोई विवेचना है अपने आत्म विज्ञान में

1546
01:47:37,280 --> 01:47:41,360
जैसे हम कह रहे हैं जैसे मैं और क्लियर कर जैसे हम कह रहे हैं ये

1547
01:47:41,360 --> 01:47:45,520
ईश्वर है ये ईश्वर है इसकी पूजा वो कहेगा कि भाई ईश्वर होता कौन है

1548
01:47:45,520 --> 01:47:50,080
मैं क्यों मानू कोई ईश्वर है मैं क्यों पूजा

1549
01:47:50,080 --> 01:47:54,320
तो वहां से पूछ रहा हूं क्या आपके यहां पर क्या आपके

1550
01:47:54,320 --> 01:47:58,720
यहां पर आध्यात्मिक विश्वविद्यालय में वीरेंद्र देव वीरेंद्र देव दीक्षित

1551
01:47:58,720 --> 01:48:02,720
जी द्वारा या फिर ब्रह्मा कुमारी लेखराज जी से आई हुई मुरलियों

1552
01:48:02,720 --> 01:48:06,880
के द्वारा क्या इस बात पर विवेचना है कि हम किसी व्यक्ति

1553
01:48:06,880 --> 01:48:10,880
को जो कि अभी ना तो वैदिक है ना अभी मुरलियों में विश्वास रखने

1554
01:48:10,880 --> 01:48:14,080
वाला है ना गीता में विश्वास रखने वाला न्यूट्रल खड़ा हुआ है

1555
01:48:14,080 --> 01:48:18,240
वो समझना चाहता है कि मैं कैसे मानू इस दुनिया में कोई ईश्वर तो हमारे हमारे

1556
01:48:18,240 --> 01:48:22,400
पास क्या थ्योरी है उसके लिए? उसके लिए एक थ्योरी

1557
01:48:22,400 --> 01:48:27,680
सीधी सी है। जिसको आप नास्तिक समझ रहे हैं ना वो सबसे बड़ा आस्तिक होता है।

1558
01:48:27,680 --> 01:48:31,680
जिसको आप बोल रहे हो कि नास्तिक है, न्यूट्रल है। वो सब वो प्रैक्टिकल में

1559
01:48:31,680 --> 01:48:35,840
चीज को जानना चाहता है। आप उसको नास्तिक कह रहे हैं। हमारी परिभाषा के अंदर वो

1560
01:48:35,840 --> 01:48:40,160
सबसे बड़ा आस्तिक है। वो प्रैक्टिकल बात को जानना चाहता है। तो फिर

1561
01:48:40,160 --> 01:48:44,320
नास्तिक कौन? भगवान और नास्तिक वो हुआ जो

1562
01:48:44,320 --> 01:48:50,000
सच्चाई को जानते हुए भी पीछे हट जाता है कि नहीं? आत्मा और परमात्मा का ज्ञान हमें नहीं चाहिए।

1563
01:48:50,000 --> 01:48:54,320
या तो आत्मा को मानता हो या परमात्मा को मानता हो। देखिए

1564
01:48:54,320 --> 01:48:58,800
नास्तिक शब्द की अगर विवेचना करेंगे तो ये आएगी कि जिसमें जो आस्तिक

1565
01:48:58,800 --> 01:49:02,800
नहीं है नास्तिक यानी कि जो भगवान के अस्तित्व पर

1566
01:49:02,800 --> 01:49:06,800
विश्वास वो भगवान के अस्तित्व पर विश्वास नहीं करता। मगर जो

1567
01:49:06,800 --> 01:49:10,800
जानते हुए मुकरता है तो उसको तो कुछ और कहेंगे। उसको कुछ झूठ

1568
01:49:10,800 --> 01:49:15,360
बोलने वाला कहेंगे क्योंकि वो मन में तो विश्वास कर रहा है मगर वो

1569
01:49:15,360 --> 01:49:19,760
हां ऊपर से मना कर रहा है कोई बात नहीं तो जब

1570
01:49:19,760 --> 01:49:23,840
देखो कर्म अकर्म विकर्म जब उसके कर्मों का पाप कर्म बढ़ेगा तो

1571
01:49:23,840 --> 01:49:27,920
क्या उस भोजा नहीं होगा भोजा होगा तो उसको परेशानी आएगी फिजिकली

1572
01:49:27,920 --> 01:49:29,280
बीमारी आएगी या कोई दिक्कत

1573
01:49:29,280 --> 01:49:33,280
आएगी तो दुख में तो याद करता है ना फिर सब प्यार से नहीं करते तो दुख में करते

1574
01:49:33,280 --> 01:49:37,520
हैं तब भगवान से याद आ जाता है नहीं नहीं बात

1575
01:49:37,520 --> 01:49:41,520
ये है कि अभी आपसे एक सामान्य व्यक्ति पूछ एक नवयुवक पूछ रहा

1576
01:49:41,520 --> 01:49:46,000
है मान लो मैं मुझे समझ लो कि भगवान है यह मैं कैसे मानूं

1577
01:49:46,000 --> 01:49:50,080
इस बारे में क्या ज्ञान विज्ञान दिया गया है आध्यात्मिक विश्वविद्यालय

1578
01:49:50,080 --> 01:49:54,560
में वो दुख आएगा तब मैं मानूंगा उसमें वही बात हो गई मैं उस समय

1579
01:49:54,560 --> 01:49:58,880
क्या मानूंगा क्या नहीं मानूंगा ये मैं अभी मान लूं ये वाली बात है ना

1580
01:49:58,880 --> 01:50:02,960
तो तो मैं ईश्वर है ये विश्वास कैसे करूं मतलब मैं

1581
01:50:02,960 --> 01:50:07,040
आपके पीछे पीछे चलना शुरू करूं कि भाई वीरेंद्र दीक्षित जी भगवान है

1582
01:50:07,040 --> 01:50:11,360
या बीके के पीछे चलना शुरू करूं कि लेखराज जी भगवान

1583
01:50:11,360 --> 01:50:15,520
है या उनके द्वारा बताया गया कि शिव बाबा भगवान है तो मैं इनके के पीछे

1584
01:50:15,520 --> 01:50:20,000
चलूं तो मैं पहले ये तो सेटिस्फाइड हूं कि हां भगवान है

1585
01:50:20,000 --> 01:50:24,000
या तो ये पृथ्वी अपने आप मतलब जो प्रकृति वगैरह अपने आप काम कर

1586
01:50:24,000 --> 01:50:27,600
रही दुनिया में कोई भगवान नहीं है। जी

1587
01:50:27,600 --> 01:50:32,000
आप ही बोलते रहेंगे या बोलने का मौका भी मिलेगा। असल

1588
01:50:32,000 --> 01:50:36,080
में बोलने का मौका जब मिलता है तो आप मेरे प्रश्न का जवाब ना दे के

1589
01:50:36,080 --> 01:50:40,080
सीधे अपने फेथ को लाते हो कि मान लो दुख

1590
01:50:40,080 --> 01:50:44,080
में तो याद करते रुको शिवम अब नहीं ऐसा नहीं

1591
01:50:44,080 --> 01:50:44,580
होता

1592
01:50:44,320 --> 01:50:48,400
है। यह चर्चा नहीं होती। आप आप बोलते जाएंगे चर्चा थोड़ी ना होती है। और चर्चा चर्च घर

1593
01:50:48,400 --> 01:50:52,400
में होती है। आप सनातनी हो कि चर्च घर में रहने वाले हो। आप

1594
01:50:52,400 --> 01:50:57,200
आप जो है मैं अब चुप हो रहा हूं। अब आप बोले जी

1595
01:50:57,200 --> 01:51:01,280
बोलने तो देते ही नहीं हूं। आप कोई आंसर तो आप ले ही नहीं रहे हो। भाई साहब मैं फिर से अपनी

1596
01:51:01,280 --> 01:51:05,280
बात बता रहा हूं। मैं फिर से मैं

1597
01:51:05,280 --> 01:51:09,280
चुप हो रहा हूं। आप क्वेश्चन जितना छोटा करोगे क्वेश्चन जितना छोटा करोगे

1598
01:51:09,280 --> 01:51:13,440
तो आंसर भी स्पष्ट मिले। आंसर तो ले ही नहीं रहे ना।

1599
01:51:13,440 --> 01:51:17,440
इसका मतलब कहीं आप मुझे डिमोरलाइज तो नहीं करना चाहते हो? नहीं नहीं नहीं देखिए

1600
01:51:17,440 --> 01:51:21,760
मैं मैं अपने क्वेश्चन को इसलिए एक्सप्लेन करता हूं

1601
01:51:21,760 --> 01:51:26,080
क्योंकि जब मैंने छोटा पूछा था तो आंसर भी तो

1602
01:51:26,080 --> 01:51:30,160
आंसर भी तो देने का मौका दो ना। आपने ये कह दिया ना कि दुख

1603
01:51:30,160 --> 01:51:35,200
में तो याद करता है ना। किसको करता है? वेद शास्त्र में

1604
01:51:35,200 --> 01:51:39,360
वेद शास्त्र ये बातें वेद शास्त्र में नहीं आई क्या? दुख में सब याद

1605
01:51:39,360 --> 01:51:43,440
करते हैं। सुख में कोई नहीं याद करता। भैया जो उसके लिए है ना जो वेद

1606
01:51:43,440 --> 01:51:47,680
शास्त्र में विश्वास करता हो। अभी मैं आपसे पूछ रहा हूं जो व्यक्ति

1607
01:51:47,680 --> 01:51:51,840
खड़ा है। न्यूट्रल जो खड़ा है जब दुख तो उसके

1608
01:51:51,840 --> 01:51:55,920
ऊपर भी आते होंगे। प्रकृति उसको भी प्रभावित करती होगी। दुख सुख उसमें भी आते हैं कि नहीं

1609
01:51:55,920 --> 01:52:00,880
आते हैं? तो आते हैं तो बड़े

1610
01:52:00,880 --> 01:52:04,880
इससे भगवान का होना यह सिद्ध हुआ कि एक दिन उसको भी अकल आ जाती है।

1611
01:52:04,880 --> 01:52:08,960
विश्व पिता कहा जाता है। विश्व पिता तभी कहा जाता है जब इस पूरी दुनिया उसको

1612
01:52:08,960 --> 01:52:12,960
अपना बाप मान तभी वो विश्व पिता या जगन्नाथ कहा जाता है। नहीं

1613
01:52:12,960 --> 01:52:17,680
नहीं कईयों को अकल नहीं आई है। कई मना करते हैं। बेशक

1614
01:52:17,680 --> 01:52:21,760
उसका भी बात नहीं। देखो शिवशंश अगर नहीं

1615
01:52:21,760 --> 01:52:26,080
मानते तो उसका वो अनाड़ी पना लेकिन वो भी टूट जाता है एक दिन।

1616
01:52:26,080 --> 01:52:31,120
मतलब हमें उसको समझाने के लिए कुछ नहीं है। समझाने

1617
01:52:31,120 --> 01:52:35,120
के लिए आप जब एक बात बताइए आपको मैं कहने लग हूं कि हां वहां भगवान

1618
01:52:35,120 --> 01:52:39,440
आया। भगवान की पढ़ाई पढ़ाई जा रही है। आप मान गए क्या एकदम से? नहीं माने।

1619
01:52:39,440 --> 01:52:43,440
आप अपने तर्क वितर्क में फस गए। अर्जुन क्या एक दिन में मान गया था भगवान के कहने से

1620
01:52:43,440 --> 01:52:47,520
कि मैं भगवान हूं। 18 दिन की पूजा सुनानी पड़ी

1621
01:52:47,520 --> 01:52:51,840
मैं रुका हुआ हूं क्योंकि आप अपनी ओर से बोल लीजिए। मैं रुका हुआ हूं। फिर मैं आपका

1622
01:52:51,840 --> 01:52:56,000
आपकी बातों का उत्तर दूंगा। जी बोलिए। जी। तो फिर जैसे

1623
01:52:56,000 --> 01:53:00,000
आप पूछ रहे हो कि मैं कैसे मानूं? जब आप पैदा हुए जब समझदार हुए तो आपकी मां ने ही

1624
01:53:00,000 --> 01:53:04,160
तो बताया होगा कि तू कौन है? मैं तेरी मां हूं। ये तेरा पिता है

1625
01:53:04,160 --> 01:53:08,160
तो ठीक और गलत का फैसला हमें भगवान ने बुद्धि दी है हर बात को जानने

1626
01:53:08,160 --> 01:53:12,320
की पहचानने की और रही बात ज्ञान की सागर

1627
01:53:12,320 --> 01:53:16,000
मंथन सागर ज्ञान का सागर है तो ज्ञान का सागर कौन है पहले तो

1628
01:53:16,000 --> 01:53:20,160
उसको जानो फिर मंथन करो तो मंथन देवता

1629
01:53:20,160 --> 01:53:24,160
भी करते हैं दानव भी करते हैं तो यह ब्रह्मा कुमारी और आध्यात्मिक ईश्वरी

1630
01:53:24,160 --> 01:53:28,320
विश्वविद्यालय इतना छोटी चीज ना लगाओ आप देवी और देवता तैयार हो रहे हैं सत्य

1631
01:53:28,320 --> 01:53:32,320
सनातन धर्म की स्थापना हो रही है यहां

1632
01:53:32,320 --> 01:53:36,480
तो आप जो क्वेश्चन जितना कर रहे हैं आप पता किस थ्योरी

1633
01:53:36,480 --> 01:53:40,480
पर ले चल रहे हैं। सत्य सनातन धर्म को अच्छे से जानते हैं कि नहीं जानते हैं मुझे नहीं समझ में

1634
01:53:40,480 --> 01:53:44,480
आती ये बातें। और किसी चीज को जब तक आप चख के नहीं

1635
01:53:44,480 --> 01:53:49,110
देखोगे बगैर चखे आप खट्टा मीठा कैसे बताओगे? क्या चीज है ये?

1636
01:53:49,110 --> 01:53:53,200
[गला साफ़ करने की आवाज़] सत्य सनातन धर्म कब स्थापन हुआ? कब भगवान आते हैं?

1637
01:53:53,200 --> 01:53:57,440
ईश्वर का मतलब क्या है? भगवान का मतलब क्या है? हरि का मतलब क्या है? हर

1638
01:53:57,440 --> 01:54:01,680
शब्द का अर्थ है लेकिन उलझा के खड़ा कर रही है दुनिया ना सुलझने तो देती

1639
01:54:01,680 --> 01:54:05,760
नहीं है भगवान तो सीधा साधा सहज ज्ञान सहज राजयोग सिखाता है आ

1640
01:54:05,760 --> 01:54:10,000
के बड़ी सहजता से ज्ञान सुनाता है लेकिन ये उलझाया किसने ये दुनिया ये दुनिया

1641
01:54:10,000 --> 01:54:14,000
उलझाने वाली तो बैठी है इतने चारों तरफ बैठे हैं धर्म के मामले में और ये

1642
01:54:14,000 --> 01:54:18,480
भारत भाई साहब आप मेरी बात का जवाब नहीं दे रहे अगर मुझे कोई नास्तिक मिले

1643
01:54:18,480 --> 01:54:22,560
तो आध्यात्मिक विश्वविद्यालय की ओर से मैं उसको क्या उत्तर दूं कि जब

1644
01:54:22,560 --> 01:54:27,280
तू दुखी होगा तब देख लियो जा मुझसे हाथ जोड़ लो ये उत्तर दूंगा

1645
01:54:27,280 --> 01:54:31,280
हां बिल्कुल है और क्या करोगे और क्या करोगे इसके सिवा क्या यही उत्तर

1646
01:54:31,280 --> 01:54:35,360
है मेरे पास तो है उत्तर मैं जानना चाहता हूं कि वीरेंद्र देव

1647
01:54:35,360 --> 01:54:39,600
दीक्षित जी के पास है कि नहीं आज से लगभग ढाई तीन हजार

1648
01:54:39,600 --> 01:54:43,600
वर्ष सुनिए अब अब देखिए आपको मैंने सुना ना आपने

1649
01:54:43,600 --> 01:54:47,680
उत्तर नहीं दिया अब मैं आपसे बता रहा हूं आज से ढाई

1650
01:54:47,680 --> 01:54:53,280
3000 के बारे में जानते ही कुछ नहीं ब्रह्मा बाबा के बारे में कुछ नहीं जानते

1651
01:54:53,280 --> 01:54:57,760
बताओ ना मैं आपसे पूछ तो रहा हूं गीता जो कहती है श्रद्धावानंम

1652
01:54:57,760 --> 01:55:02,400
अगर श्रद्धा और विश्वास ही नहीं है तो उसे बातें ही क्या करनी है? श्रद्धा

1653
01:55:02,400 --> 01:55:06,560
और विश्वास उसे बात ही नहीं करनी है। ये बताइए आपके अंदर बचपन

1654
01:55:06,560 --> 01:55:10,720
से बचपन से श्रद्धा थी। हां जी बिल्कुल थी।

1655
01:55:10,720 --> 01:55:14,720
पैदा होते ही श्रद्धा है आपके अंदर। तो जब से होश संभाला

1656
01:55:14,720 --> 01:55:19,040
तब से श्रद्धा थी। भगवान को जानना पहचानना। कोई एक पॉइंट है ना जहां आपको

1657
01:55:19,040 --> 01:55:23,040
जहां आपको बताया गया जहां पर श्रद्धा नहीं थी। कोई एक पॉइंट

1658
01:55:23,040 --> 01:55:27,120
है ना जहां श्रद्धा नहीं फिर भी बताया गया ये सब की

1659
01:55:27,120 --> 01:55:31,440
अपनी अंदर की ये अंदर का ज्ञान है। आप पर चिंतन करते हो मैं स्वचिंतन करता हूं।

1660
01:55:31,440 --> 01:55:36,080
चिंतन से मैं कैसे फील करूं कि इस दुनिया में ईश्वर है

1661
01:55:36,080 --> 01:55:40,160
बताइए। तो बगैर ईश्वर के आप ये दुनिया वैसे

1662
01:55:40,160 --> 01:55:44,640
ही बन गई क्या? यानी कि चलो अब एक मिनट रुको।

1663
01:55:44,640 --> 01:55:46,320
एक बात बोली है ये दुनिया बनाने

1664
01:55:46,320 --> 01:55:52,320
वाला ईश्वर है। अब आपने एक बात बोली है तो

1665
01:55:55,280 --> 01:56:01,280
इतनी दिक्कतों के बाद आपने बिल्कुल भी आप गीता

1666
01:56:02,160 --> 01:56:06,480
हम किसी नास्तिक को क्या जवाब देंगे? क्या वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने बताया

1667
01:56:06,480 --> 01:56:10,560
है? अब आपने एक बात है क्या सृष्टि ऐसे ही बन गई।

1668
01:56:10,560 --> 01:56:14,560
यह है जवाब। सृष्टि बनाने वाला ईश्वर है। यही

1669
01:56:14,560 --> 01:56:18,560
तो है। सृष्टि बनाने वाला ईश्वर है। बिल्कुल। मनुष्य

1670
01:56:18,560 --> 01:56:22,560
सृष्टि का भी बीज रूप बाप है। जिसने पूरी सृष्टि को रचा हुआ है। बाप बगैर बच्चे

1671
01:56:22,560 --> 01:56:26,640
पैदा होते हैं क्या? ईश्वर। ठीक है। क्योंकि ईश्वर

1672
01:56:26,640 --> 01:56:30,720
का मतलब क्या होता है? ईश्वर का मतलब क्या होता है? ईश

1673
01:56:30,720 --> 01:56:34,720
माने शासन करता। वर माने श्रेष्ठ श्रेष्ठ। जो इस दुनिया पे प्यार से शासन

1674
01:56:34,720 --> 01:56:38,320
करता है उसको ईश्वर कहते हैं।

1675
01:56:38,320 --> 01:56:42,960
मतलब आपका कहना है कि जिसने सृष्टि बनाई है वो ईश्वर है।

1676
01:56:42,960 --> 01:56:47,120
जी जो बहुत प्यार से ईश्वर का ईश माना शासन करता है। श्रेष्ठ से श्रेष्ठ

1677
01:56:47,120 --> 01:56:51,360
शासन करता है। इसलिए उसी ने गीता लिखी है। श्रीमद् भगवत

1678
01:56:51,360 --> 01:56:55,840
गीता सर्वस्त्र शिरोमणि शासन बहुत मैं

1679
01:56:55,840 --> 01:56:59,840
इस बात से मैं सहमत हूं। आपने अब एक मैंने जो क्वेश्चन किया है

1680
01:56:59,840 --> 01:57:01,360
नास्तिक को क्या जवाब

1681
01:57:01,360 --> 01:57:05,760
दें? उससे रिलेटेबल बात आपने ये बोली है कि जिसने सृष्टि

1682
01:57:05,760 --> 01:57:09,840
बनाई है वो ईश्वर है। सृष्टि बनाई है मतलब ये सूर्य चंद्रमा इत्यादि सब उसी

1683
01:57:09,840 --> 01:57:13,840
ने बनाया है। बिल्कुल बिल्कुल देखो इस बारे में तो क्या कहते है अल्लाह

1684
01:57:13,840 --> 01:57:19,840
ताला ने जन्नत बनाई आसमा बनाया पर वो अल्लाह ताला को कोई नहीं जानता नहीं वो

1685
01:57:20,640 --> 01:57:24,880
जानने वाली बात आगे की है आप अभी यहां पे है ना कि उसने सृष्टि बनाई है

1686
01:57:24,880 --> 01:57:28,960
यहीं पे है ना जी उसको उस रचयता को जानना है उसको

1687
01:57:28,960 --> 01:57:33,040
जानना है उस नास्तिक का नास्तिक का नास्तिक

1688
01:57:33,040 --> 01:57:37,200
का जो अगला अगला प्रश्न होता है वो ये होता है कि मैं कैसे

1689
01:57:37,200 --> 01:57:41,440
मान लूं कि कोई एक शक्ति है जिसने इसको बनाया है

1690
01:57:41,440 --> 01:57:46,160
वो मानना अब एक बात बताइए समय होता है हर चीज का

1691
01:57:46,160 --> 01:57:50,240
अभी आप किसी चीज को नहीं समझ पा रहे हैं एक दवाई काम नहीं करेगी

1692
01:57:50,240 --> 01:57:54,480
दूसरी करेगी तीसरी करेगी इस दुनिया में जब पतित पावन कहते

1693
01:57:54,480 --> 01:57:58,480
हो दुख हर्ता सुखकर्ता कहते हो तो क्यों कहते हो दुखों का पहाड़ टूटेगा इसका

1694
01:57:58,480 --> 01:58:02,560
मतलब तभी तो दुख हर्ता सुख्ता कहा यानी कि अगर समय का नाम

1695
01:58:02,560 --> 01:58:06,640
लेकर के यानी कि भाई साहब कुल मिला के एक ही बात हो रही है कि समय या कोर्स का

1696
01:58:06,640 --> 01:58:10,640
नाम लेकर के हम कोई बात बोल सकते हैं। यानी कि कोई

1697
01:58:10,640 --> 01:58:14,880
आप ही आप ही मेरे सामने खड़े हो। मैंने कहा मैंने कह दिया

1698
01:58:14,880 --> 01:58:16,400
मान लो मान लो मैंने

1699
01:58:16,400 --> 01:58:20,560
कह दिया कि आपकी सारी बातें झूठी है। आप कहोगे कैसे? मैं कहूंगा समय आने पता लग जाएगा।

1700
01:58:20,560 --> 01:58:24,960
ये कोई बात है क्या? हां। तो और एक बात बताइए

1701
01:58:24,960 --> 01:58:29,200
क्या आप समय सृष्टि का कौन सा समय चल रहा है? कल्पांत

1702
01:58:29,200 --> 01:58:33,280
चल रहा है? कल्पांत का जो आप वेद शास्त्र जो पढ़ रहे हैं वो कल्पांत के समय के

1703
01:58:33,280 --> 01:58:37,520
हैं सारे के सारे आपको यह भी नहीं पता क्या मतलब भाई साहब मैं कह रहा हूं नास्तिक ये बोलेगा

1704
01:58:37,520 --> 01:58:42,800
मैं कैसे मान लूं ये सृष्टि किसी ने बनाई है प्रकृति है थी

1705
01:58:42,800 --> 01:58:46,880
धीरज धर वनवा जब समय पड़ता है बड़े-बड़े मान जाते हैं प्यार से कौन मानता है इसका

1706
01:58:46,880 --> 01:58:50,880
मतलब मैं फिलहाल आपसे ये कह सकता हूं कि आपकी सारी बातें झूठी है धीरज

1707
01:58:50,880 --> 01:58:54,960
धरो आपको समय आने पता चल जाएगा जी जी मैं कह

1708
01:58:54,960 --> 01:58:58,960
सकता हूं हां तो सत्य को ही दबाया जाता है इस दुनिया में झूठा ही

1709
01:58:58,960 --> 01:59:01,360
साबित

1710
01:59:01,360 --> 01:59:05,440
मेरा कहना अनुचित मान रहे हैं। जिस तर्क के आधार पे आप अपना कहना उचित

1711
01:59:05,440 --> 01:59:09,520
बता रहे हैं उसी तर्क के आधार पे मेरा कहना अनुचित बता रहे हैं। आपको

1712
01:59:09,520 --> 01:59:13,760
मेरा विरोध नहीं करना चाहिए। मैं भी वही बात बोल रहा हूं जो आप बोल रहे हैं। आप

1713
01:59:13,760 --> 01:59:17,760
कह रहा हूं मैं समझ जाऊंगा। मैं कह रहा हूं आप समझ जाओगे। धर्म की बात कर रहे

1714
01:59:17,760 --> 01:59:22,000
हो ना कर्म की बात कर रहे हो। पता नहीं कहां धर्म की बात ऐसे होती

1715
01:59:22,000 --> 01:59:26,000
है। सुनिए मैं बता रहा हूं। धर्म की बात क्या कर रहा हूं। सुनिए। धर्म की बात

1716
01:59:26,000 --> 01:59:30,240
ऐसी होती है जब तक हम ईश्वर का अस्तित्व ही सिद्ध नहीं करेंगे

1717
01:59:30,240 --> 01:59:31,840
जब तक हम ईश्वर को

1718
01:59:31,840 --> 01:59:35,840
ईश्वर का अस्तित्व ही सिद्ध नहीं करेंगे तब तक कोई क्यों ईश्वर

1719
01:59:35,840 --> 01:59:39,840
के नाम से बताई गई बातों को धर्म मानेगा जब धर्म की बात करनी

1720
01:59:39,840 --> 01:59:43,840
हो गीता हाथ में लेकर के आया करो गीता के एक एक श्लोक में भगवान के अस्तित्व को बताया

1721
01:59:43,840 --> 01:59:48,000
गया गीता पढ़ो आप एक बार आराम से भाई साहब मैं गीता पे भी आऊंगा अभी मैं

1722
01:59:48,000 --> 01:59:52,080
पूछ रहा हूं मैं गीता से ही बोलूंगा अभी मैं अस्तित्व को सिद्ध करूंगा ना मैं उपनिषद से

1723
01:59:52,080 --> 01:59:56,160
बोलूंगा मैं उपनिषद से बोलूंगा जब मैं भगवान का

1724
01:59:56,160 --> 02:00:00,160
अस्तित्व सिद्ध करूंगा जब मैं भगवान का अस्तित्व सिद्ध करूंगा मैं उपनिषद

1725
02:00:00,160 --> 02:00:04,160
से बोलूंगा आपके पास है वीरेंद्र जी के द्वारा

1726
02:00:04,160 --> 02:00:08,160
दिया गया ऐसा कुछ नास्तिक का मुंह बंद करने का है चुनौती

1727
02:00:08,160 --> 02:00:12,960
दे रहे हो आप चैलेंज दे रहे हो दुनिया को नास्तिक को चुप करा पाओगे

1728
02:00:12,960 --> 02:00:17,040
सब चुप हो जाएंगे बड़े-बड़े चुप हो जाएंगे तो कैसे होंगे ऐसे

1729
02:00:17,040 --> 02:00:21,040
ही चुप होंगे कोर्स कर लेना समय आने पे चुप हो जाओगे ऐसे होंगे चुप भाई एक

1730
02:00:21,040 --> 02:00:25,440
तो सीधी सी बात है या तो ज्ञान से समझेगा या फिर हालात खराब होंगे तब समझेगा

1731
02:00:25,440 --> 02:00:29,520
ज्ञान दो ना मुझे ये क्यों कह रहे हो गीता लेके आओ तब बात करना ज्ञान दो मुझे हां

1732
02:00:29,520 --> 02:00:33,520
तो फिर जाओ ना हमारे मधुबनों के दरवाजे खुले हुए दिन रात जाके लो ना

1733
02:00:33,520 --> 02:00:37,520
जा आपके पास नहीं है बताने को कुछ अरे जो बता रहे

1734
02:00:37,520 --> 02:00:41,520
हो वो तुम्हें सहज नहीं हो रहा तुम कौन सा ज्ञान लेना चाहते हो एक लाइन बताई है

1735
02:00:41,520 --> 02:00:45,760
कि सृष्टि उसने बनाई तो मैं मैं पूछ रहा हूं ये कैसे सिद्ध होता है कि सृष्टि

1736
02:00:45,760 --> 02:00:46,880
उसने बताई बनाई

1737
02:00:46,880 --> 02:00:52,080
है इस बारे में आप बोलिए क्या ब्रह्मा ने सृष्टि नहीं रची

1738
02:00:52,080 --> 02:00:56,080
फिर वही बात आप वो बात बोल रहे हो कि मेरा फट किसी किताब पे है

1739
02:00:56,080 --> 02:01:00,480
तो मैं उस किताब के आधार पर मान लूं। मैं कह रहा हूं एक न्यूट्रल व्यक्ति नास्तिकता

1740
02:01:00,480 --> 02:01:04,560
का जवाब क्या है? हमारे शास्त्रों में दिया है। उपनिषद में दिया गया है।

1741
02:01:04,560 --> 02:01:08,560
वो मैं पूछ रहा हूं क्या आप जिसे भगवान कह रहे हो उसने आपको बताया कि नहीं

1742
02:01:08,560 --> 02:01:12,640
बताया? ईश्वर का अस्तित्व सिद्ध किए बिना आत्म

1743
02:01:12,640 --> 02:01:17,040
ज्ञान क्या हो सकता? क्या

1744
02:01:17,040 --> 02:01:21,120
आपको खुद समझ में आ रहा है? ईश्वर की परिभाषा आप खुद जानते हो। बिलकुल भाई साहब

1745
02:01:21,120 --> 02:01:25,920
मैं जब बोलूंगा तब आपको समझ में आ जाएगा आप उसको काट नहीं पाएंगे 1 इंच मात्र

1746
02:01:25,920 --> 02:01:29,920
जब मैं बोलूंगा तब आप उसको 1 इंच मात्र काट नहीं पाएंगे हां

1747
02:01:29,920 --> 02:01:34,000
तो आप तो भगवान से भी बड़े हो गए इससे क्या मतलब है से

1748
02:01:34,000 --> 02:01:38,000
बड़े हो गए भाई साहब जो पॉइंट ये है क्या आपके आप जिसे

1749
02:01:38,000 --> 02:01:42,080
भगवान कह रहे हो उसने आपको नास्तिकता का खंडन बताया है कि

1750
02:01:42,080 --> 02:01:46,160
नहीं नास्तिक आपके सामने खड़ा है वो मैं

1751
02:01:46,160 --> 02:01:50,240
क्यों तुम्हारे धर्म को मैं क्यों तुम्हारे ज्ञान को तुम मुझे पहले सिद्ध

1752
02:01:50,240 --> 02:01:54,640
करोगे ईश्वर है। मैं कर सकता हूं। आप कर सकते हो क्या? आप

1753
02:01:54,640 --> 02:01:58,800
कर रहे हो। आप करो सिद्धेश्वर को। पहले आप करो। हां ठीक। ठीक है। पर

1754
02:01:58,800 --> 02:02:01,920
फिलहाल अभी तो ये मान ले किता मैं कर देता हूं।

1755
02:02:01,920 --> 02:02:06,080
मैं कर देता हूं। मैं कर रहा हूं। मैं कर रहा हूं। मैं कर रहा हूं। फिलहाल अभी ये मान

1756
02:02:06,080 --> 02:02:10,080
ले आप सिद्ध नहीं कर सकते। हां आप ये मानिए हम सिद्ध नहीं कर सकते।

1757
02:02:10,080 --> 02:02:14,080
आप सिद्ध करिए ईश्वर को। हां चलिए अब ये बात है। मैं कर

1758
02:02:14,080 --> 02:02:18,480
रहा हूं। हां से दुनिया देख रही।

1759
02:02:18,480 --> 02:02:23,920
चलो आप चुप हो जाओ तो मैं कर आप थोड़ा मौन रहिए तो मैं करदार

1760
02:02:23,920 --> 02:02:27,920
उपनिषद बहारण्य उपनिषद एक तीन 28

1761
02:02:27,920 --> 02:02:32,160
असतो मा सद्गमय तमसो मा ज्योतिरमय

1762
02:02:32,160 --> 02:02:36,240
मृत्यु मांगमया इसी को क्लियर कर दो बस अरे भैया इसी को

1763
02:02:36,240 --> 02:02:40,480
क्लियर करता हूं आप प्लीज थोड़ी देर शांत रहिए मैं अगर सिद्ध ना कर पाऊं

1764
02:02:40,480 --> 02:02:44,640
तो आप बताना और मेरी बात को काट के दिखाना आप चुप रहिए

1765
02:02:44,640 --> 02:02:49,200
थोड़ी देर प्लीज हां उपनिषद वाक्य

1766
02:02:49,200 --> 02:02:53,360
है प्राणी के भाई साहब प्लीज प्लीज इंटरप्ट

1767
02:02:53,360 --> 02:02:57,760
मत करिए अब मैं आपको बता रहा हूं नास्तिकता का खंडन ठीक है उपनिषद

1768
02:02:57,760 --> 02:03:02,400
का यह वाक्य हमें बताता है प्राणी मात्र के विषय में

1769
02:03:02,400 --> 02:03:06,640
कभी ना मरने की और अनंत ज्ञान को प्राप्त

1770
02:03:06,640 --> 02:03:11,120
कर लेने की और सदा आनंदित रहने की प्यास

1771
02:03:11,120 --> 02:03:15,280
विद्यमान है। इसको कहते हैं सत

1772
02:03:15,280 --> 02:03:17,280
प्राणी मात्र में

1773
02:03:17,280 --> 02:03:21,440
प्राणी मात्र में एक नास्तिक के अंदर भी यह तीन तरह

1774
02:03:21,440 --> 02:03:25,440
की प्यास सदा विद्यमान है। कौन-कौन सी प्यास है? पहली प्यास है

1775
02:03:25,440 --> 02:03:30,080
सत की प्यास। मैं सत हो जाऊं। अमरता की प्यास।

1776
02:03:30,080 --> 02:03:34,320
दूसरी प्यास है ज्ञान की प्यास। मैं मूर्खता रहित

1777
02:03:34,320 --> 02:03:38,800
हो जाऊं। ऐसा कुछ ना हो जो मुझे ना पता हो। एक मिनट। बीचबीच

1778
02:03:38,800 --> 02:03:43,680
में आप बीच-बीच में बोलिए मत। प्लीज मैं पूरा खाना भरू।

1779
02:03:43,680 --> 02:03:47,680
अच्छा ठीक है। ठीक ठीक है। आप आप करिए। हम ही भरिए। तीसरी प्यास

1780
02:03:47,680 --> 02:03:51,840
है सदा आनंदित रहने की प्यास। मैं कभी भी दुखी ना हूं।

1781
02:03:51,840 --> 02:03:55,840
ये तीन तरह की जो प्यास है ये तीन तरह की जो प्यास है

1782
02:03:55,840 --> 02:03:59,840
सतित आनंद। ये तीन तरह की प्यास नास्तिक के अंदर

1783
02:03:59,840 --> 02:04:04,000
भी है। एक नास्तिक भी कई बार सोचता है बारिश ज्यादा

1784
02:04:04,000 --> 02:04:08,160
पड़ रही है तो कम हो जाए। धूप ज्यादा पड़ रही है तो कम हो जाए। यानी

1785
02:04:08,160 --> 02:04:12,160
कि वो मौसम को भी कंट्रोल कर लेने की भावना उसके मन में

1786
02:04:12,160 --> 02:04:16,800
कई बार आती है। कल इंडिया पाकिस्तान में कौन जीतेगा?

1787
02:04:16,800 --> 02:04:20,960
तो काश हमारा भारत जीत जाए। इसका मतलब उसके मन

1788
02:04:20,960 --> 02:04:24,960
में भी भविष्य को देख लेने की और भविष्य को कंट्रोल

1789
02:04:24,960 --> 02:04:29,280
कर लेने की चाह मन में आती है। ठीक है? एक नियम है

1790
02:04:29,280 --> 02:04:33,120
कि हमारे मन में जिस जिस चाह

1791
02:04:33,120 --> 02:04:37,440
का जो जो चाह विद्यमान है उस चाह का विषय

1792
02:04:37,440 --> 02:04:41,600
इस दुनिया में मौजूद है। जैसे कि हमारे अंदर प्यास है

1793
02:04:41,600 --> 02:04:45,680
तो हमारे अंदर प्यास होने से सिद्ध हो जाता है कि इस दुनिया में

1794
02:04:45,680 --> 02:04:49,680
पानी है। हमारे अंदर भूख है तो हमारे

1795
02:04:49,680 --> 02:04:54,000
अंदर भूख होने से यह सिद्ध हो जाता है कि इस दुनिया में भोजन

1796
02:04:54,000 --> 02:04:58,000
है। हमारे पास देखने की क्षमता है। तो उससे सिद्ध होता है कि दुनिया

1797
02:04:58,000 --> 02:05:02,000
में दृश्य है। हमारे पास सुनने की क्षमता है। तो उससे सिद्ध होता

1798
02:05:02,000 --> 02:05:06,080
है कि दुनिया में आवाज है। तो जिस प्रकार एक नास्तिक

1799
02:05:06,080 --> 02:05:10,160
व्यक्ति के अंदर भी व्याप्त है ना देखने की विषय

1800
02:05:10,160 --> 02:05:14,240
से दृश्य सिद्ध होता है। देखने की चाह से दृश्य सिद्ध होता है। भूख

1801
02:05:14,240 --> 02:05:18,400
से भोजन सिद्ध होता है। प्यास से पानी सिद्ध होता है। उसी प्रकार

1802
02:05:18,400 --> 02:05:22,800
एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी व्याप्त सतित आनंद

1803
02:05:22,800 --> 02:05:26,960
की चाह से सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर का अस्तित्व

1804
02:05:26,960 --> 02:05:32,160
सिद्ध होता है। अच्छा अन्यथा

1805
02:05:32,160 --> 02:05:36,560
नहीं मानेगा नास्तिक तो वो बोल दे कि वो

1806
02:05:36,560 --> 02:05:41,440
जो है वो मरना चाहता है। मैं क्वेश्चन पूछूं

1807
02:05:41,440 --> 02:05:46,080
एक मिनट मैं पूरा कर लूं। मैं पूरा कर लूं। फिर क्वेश्चन पूछिए। पूरा

1808
02:05:46,080 --> 02:05:50,080
भी नास्तिक व्यक्ति भी कभी दुखी नहीं होना चाहता। वह भी

1809
02:05:50,080 --> 02:05:54,080
यह सोचता है मेरे पिता कभी ना मरे। मैं बूढ़ा कभी

1810
02:05:54,080 --> 02:05:58,160
ना हूं। मैं यह सब ना करूं। तो यह सब उसके अंदर भी घटित होता है।

1811
02:05:58,160 --> 02:06:02,160
अगर वो मुंह से कह भी दे वो मुंह से कह भी दे कि भैया मैं तो मरना चाहता

1812
02:06:02,160 --> 02:06:06,720
हूं। उसके और जब घुमाएंगे ना घूसा या लपाड़ा

1813
02:06:06,720 --> 02:06:10,880
तो उसकी पलक झपक जाएगी। इसका मतलब वो भले

1814
02:06:10,880 --> 02:06:15,360
ही मुंह से कह रहा है। मगर जो उसकी जो आंख है वो बता रही है मरना नहीं चाहता है। सर्वाइवल

1815
02:06:15,360 --> 02:06:19,600
है उसके अंदर। वो सर्वाइव करना चाहते कितना लंबा छोटा सा

1816
02:06:19,600 --> 02:06:23,760
जो बात पूछने की थी वो क्लियर करो भाषण नहीं चाहिए सार में टिका

1817
02:06:23,760 --> 02:06:28,160
हुआ अब आप प्रश्न पूछिए प्रश्न ये है परमेश्वर

1818
02:06:28,160 --> 02:06:31,280
किसे कहते हैं

1819
02:06:31,280 --> 02:06:35,600
भाई साहब अभी बात ये हो रही है आप विषयांतर ना करें अगर आप एस ए नास्तिक

1820
02:06:35,600 --> 02:06:39,600
काउंटर करना चाहते हैं मुझे तो काउंटर करिए आपका जो आपके पास

1821
02:06:39,600 --> 02:06:43,840
नास्तिकता का खंडन नहीं था मैंने अभी नास्तिकता का खंडन किया है

1822
02:06:43,840 --> 02:06:47,760
आपके पास है नास्तिकता के खंडन अरे भाई शिवशु

1823
02:06:47,760 --> 02:06:52,480
सारा दिन मैं कोई बच्चा थोड़ा ना हूं। मैंने दुनिया देखी है यार

1824
02:06:52,480 --> 02:06:56,880
ऐसे ना करिए भाई साहब ये सब बातें ना करिए

1825
02:06:56,880 --> 02:07:00,960
जो विषय चल रहा है बात करनी है तो ये बताइए वो

1826
02:07:00,960 --> 02:07:05,280
सत्य चित्त आनंद स्वरूप कौन है परमात्मा कौन है ये बताइए परमेश्वर

1827
02:07:05,280 --> 02:07:09,280
कौन है ये बताइए की बताइए आएंगे अभी विषय ये चल रहा है

1828
02:07:09,280 --> 02:07:13,360
कि ईश्वर है कि नहीं पहले इसी बात पे आइए अस्तो

1829
02:07:13,360 --> 02:07:17,760
सद्गम तम भाई साहब सत्यम सुनिए सत्यम

1830
02:07:17,760 --> 02:07:21,920
ज्ञानम अनंतम ब्रह ये परिभाषा है तैतनिषद दो एक

1831
02:07:21,920 --> 02:07:26,800
सत्यम ज्ञानम अनंतम जो है

1832
02:07:26,800 --> 02:07:31,200
जो ज्ञान है जो अनंत है वही ईश्वर है जो सर्वशक्तिमान

1833
02:07:31,200 --> 02:07:35,280
है वही ईश्वर है ये हमने उसकी उसके बारे में आपको बता

1834
02:07:35,280 --> 02:07:39,440
दिया थोड़ा थोड़ा ब्रेक भी ले लिया कर थोड़ा ब्रेक भी ले लिया

1835
02:07:39,440 --> 02:07:43,760
सर्वशक्तिमान का मतलब क्या होता है मैं बताऊंगा

1836
02:07:43,760 --> 02:07:48,720
अभी आप पहले नास्तिकता पे आइए।

1837
02:07:48,720 --> 02:07:52,800
अरे आप मुझे तोड़िए ना पहले नास्तिकता पे तोड़िए आप मुझे।

1838
02:07:52,800 --> 02:07:56,880
आपको मेरी परिभाषा स्वीकार है कि नहीं नास्तिकता की? कुछ भी नहीं आ रहा

1839
02:07:56,880 --> 02:08:00,880
आपको। एक भी बात नहीं डिस्क्राइब कर पा रहे हो। नास्तिक नास्तिक को लेकर बैठ गए हो। और दुनिया

1840
02:08:00,880 --> 02:08:04,960
इतनी नास्तिकों की भरी पड़ी हुई है। उनके लिए कुछ बोलोगे? एज ए नास्तिक क्वेश्चन

1841
02:08:04,960 --> 02:08:09,040
करो। एज ए नास्तिक क्वेश्चन करो आप। नहीं सिवान साहब गलत ट्रैक

1842
02:08:09,040 --> 02:08:13,280
जा रहे हैं। आप पहले यह बताइए सत्य की परिभाषा बताइए। सत्य किसे कहते हैं? जो

1843
02:08:13,280 --> 02:08:17,440
शाश्वत हो जो उसको कैसे सिद्ध अरे

1844
02:08:17,440 --> 02:08:21,600
रुको भाई उसको सिद्ध कैसे करोगे कैसे ऐसे करेंगे

1845
02:08:21,600 --> 02:08:25,680
कि भैया नास्तिक के मन में भी नास्तिक के मन में भी चाहेंगे

1846
02:08:25,680 --> 02:08:29,920
सत्य हो जाने वो भावना की बात है बात में ट्रैक से मत जाओ शाश्वत

1847
02:08:29,920 --> 02:08:34,160
का मतलब होता है प्रैक्टिकल में हमारे सामने हो शाश्वत का मतलब जो आंखों

1848
02:08:34,160 --> 02:08:38,240
से देखूं और पहचानू जानू कि हां ये सत्य है चलो ये

1849
02:08:38,240 --> 02:08:42,320
कहां लिखा है कहां लिखा है सामने वही

1850
02:08:42,320 --> 02:08:46,560
हो इसका मतलब इसका मतलब हवा को नहीं मानेगा आदमी

1851
02:08:46,560 --> 02:08:50,720
जो जो चीज नहीं दिख रही है उसको नहीं मानेगा एक मिनट रुक जा

1852
02:08:50,720 --> 02:08:54,720
भाई रुक जा इस भाषण को कहीं और दे दियो पागल भाई देख भाई तू

1853
02:08:54,720 --> 02:08:58,800
सड़ा पे बात करनी है तो बात नहीं हो पाएगी भाई बहुत देर हो गई मैंने सुन लिया

1854
02:08:58,800 --> 02:09:02,800
लेकिन बात से भागो भाई तू बात करनी है तो निकल जा भाई तू जा

1855
02:09:02,800 --> 02:09:04,080
सकता है भाई तेरे

1856
02:09:04,080 --> 02:09:08,080
पास ना ज्ञान है ना कुछ है तू जा सकता है भाई कुछ नहीं है कुछ भी नहीं है

1857
02:09:08,080 --> 02:09:14,080
आपके पास चल निकल चल निकल ये कोई

1858
02:09:18,480 --> 02:09:22,800
कुछ नहीं है बस केवल पाखंड

1859
02:09:22,800 --> 02:09:26,880
कुछ नहीं है इन लोगों के पास नाटक कंपनी खोल रखी है ये आ

1860
02:09:26,880 --> 02:09:30,000
रहा है वो आ रहा है

1861
02:09:30,000 --> 02:09:36,000
ये जाएंगे वहां धर्म की स्थापना करने के लिए

1862
02:09:38,240 --> 02:09:42,240
तू तड़ाक पर आ गए रुक जा भाई

1863
02:09:42,240 --> 02:09:47,120
यह भाई वो भाई आ गए

1864
02:09:47,120 --> 02:09:52,320
यह है असलियत इनकी विश्वविद्यालय वालों की और

1865
02:09:52,320 --> 02:09:56,640
बीके वालों के विरुद्ध है हालांकि उनकी भी यही पोल पट्टी है

1866
02:09:56,640 --> 02:10:01,200
जब हम इस तरह से सिद्ध करेंगे ना तो इनका ईश्वर ईश्वर ही सिद्ध नहीं होगा

1867
02:10:01,200 --> 02:10:05,280
क्यों नहीं सिद्ध होगा कि जिसने सृष्टि बनाई

1868
02:10:05,280 --> 02:10:09,360
उसने पूरी सृष्टि बनाई ना पहली बात तो इनके यहां माना ही नहीं जाता सृष्टि बनाई

1869
02:10:09,360 --> 02:10:13,360
है ईश्वर ने जब ये पूरा नाटक है तो बनी बनाई है सृष्टि

1870
02:10:13,360 --> 02:10:17,440
काहे की काहे की सृष्टि बनाई फिर झूठ बोल रहे

1871
02:10:17,440 --> 02:10:21,520
हैं खुद ही अगर सृष्टि बनाना मान लो बनाने की बात

1872
02:10:21,520 --> 02:10:25,680
मान लो तो वो पूरी सृष्टि बनाई कि नहीं बनाई पूरी सृष्टि

1873
02:10:25,680 --> 02:10:30,960
का कंट्रोल है कि नहीं है सबका शासन करने वाला है हम

1874
02:10:30,960 --> 02:10:34,960
सबका शासन इनके हाथ में है कि नहीं है

1875
02:10:34,960 --> 02:10:38,960
इनके ईश्वर के हाथ में तो ईश्वर के हाथ में सबका शासन है तो कैसे है

1876
02:10:38,960 --> 02:10:43,280
वो तो एक जगह वो तो सर्व्यापी है ही नहीं।

1877
02:10:43,280 --> 02:10:47,280
वो तो एक जगह है ना। तो भाई उसकी शक्ति सर्व्यापी है। यानी

1878
02:10:47,280 --> 02:10:51,360
कि वो यहां पे है। उसकी शक्ति पूरे में है। अब उसमें और

1879
02:10:51,360 --> 02:10:53,440
उसकी शक्ति में अंतर है। क्योंकि

1880
02:10:53,440 --> 02:10:57,440
वो तो यहां पे है ना। वो पूरे में नहीं है। अब उसमें और उसकी शक्ति में

1881
02:10:57,440 --> 02:11:01,600
अंतर है। तो अंतर है तो कहीं ना कहीं जो शक्ति है वह कम है।

1882
02:11:01,600 --> 02:11:05,600
तो जब कम है शक्ति जब शक्ति

1883
02:11:05,600 --> 02:11:09,680
कम है तो क्या मतलब है उसका? कि

1884
02:11:09,680 --> 02:11:14,080
ईश्वर का कंट्रोल सब जगह शाश्वत रूप से नहीं है। यहां ज्यादा

1885
02:11:14,080 --> 02:11:18,000
यहां कम है। शाश्वतता भंग हो गई।

1886
02:11:18,000 --> 02:11:22,080
ये ईश्वर नहीं है। कंट्रोल पूरी जगह

1887
02:11:22,080 --> 02:11:24,880
होना चाहिए बराबर।

1888
02:11:24,880 --> 02:11:29,040
तो क्या मानना पड़ेगा? शक्ति भी वही है। मगर ये तो मानते नहीं।

1889
02:11:29,040 --> 02:11:33,520
इनका ईश्वर ईश्वर ही सिद्ध नहीं होगा। दूसरी बात अगर उसने सृष्टि बनाई है

1890
02:11:33,520 --> 02:11:38,640
तो कोई 5 किलोमीटर के एरिया की सृष्टि तो बनाई नहीं है।

1891
02:11:38,640 --> 02:11:42,640
पूरी लंबी चौड़ी सृष्टि बनाई है। उसमें कहीं पर कुछ हो रहा है, कहीं पर कुछ हो

1892
02:11:42,640 --> 02:11:46,720
रहा है। अगर उसने सृष्टि बनाई है मान लीजिए कि पांच अगर ऐसा

1893
02:11:46,720 --> 02:11:50,800
मान ले कि उसने 5 किलोमीटर की सृष्टि बनाई है। तो 5 किलोमीटर

1894
02:11:50,800 --> 02:11:55,440
की सृष्टि बनाई है और बगल के 5 किलोमीटर की सृष्टि नहीं बनाई है। लीजिए सपोज करिए

1895
02:11:55,440 --> 02:11:59,520
तो क्या दिक्कत आएगी कि बगल वाले में ज्वालामुखी फट रहा है

1896
02:11:59,520 --> 02:12:03,920
और मैंने जो सृष्टि बनाई है उसमें मुझे गड्ढा नहीं होने देना है अभी हम

1897
02:12:03,920 --> 02:12:08,000
तो बगल में ज्वालामुखी अगर फट गया उसका यहां पर आया प्रभाव तो

1898
02:12:08,000 --> 02:12:08,640
गड्ढा हो

1899
02:12:08,640 --> 02:12:12,640
जाएगा तो ये जरूरी है कि जिसने ये 5 किलोमीटर बनाया हो उसी ने

1900
02:12:12,640 --> 02:12:16,960
ये भी 5 किलोमीटर बनाया हो अब ये भी जरूरी है कि हर 5 किलोमीटर

1901
02:12:16,960 --> 02:12:20,960
के एरिया में क्या-क्या घटित होने वाला है मुझे पता हो तो इस तरीके से मैं सर्वज्ञ

1902
02:12:20,960 --> 02:12:25,360
हो गया सृष्टि का निर्माता अगर बनूंगा तो मैं सर्वज्ञ

1903
02:12:25,360 --> 02:12:29,520
होना पड़ेगा। उसके बाद क्या जरूरी है कि जो पूरी

1904
02:12:29,520 --> 02:12:33,680
दुनिया में जो भी कुछ घटित हो रहा है उसको मैं रोक सकूं। अगर मेरे अनुसार मुझे चलाना

1905
02:12:33,680 --> 02:12:38,960
है सृष्टि को तो फिर मुझे सर्वशक्तिमान होना पड़ेगा।

1906
02:12:38,960 --> 02:12:43,120
अब सर्वशक्तिमान होने का मतलब क्या हो गया? देश कृत काल कृत परिस्थिति

1907
02:12:43,120 --> 02:12:47,120
कृत किसी भी प्रकार की बाधा से मुक्त हो तो ये तो अवतार मानते नहीं

1908
02:12:47,120 --> 02:12:51,200
है हम तो

1909
02:12:51,200 --> 02:12:55,280
इनका ईश्वर ईश्वर ही सिद्ध नहीं होगा नास्तिकता का खंडन कौन

1910
02:12:55,280 --> 02:12:59,280
सा ईश्वर करता है जो सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रह्म वो

1911
02:12:59,280 --> 02:13:03,600
ईश्वर जो अबाध्य है हमारी व्यवहारिक भूख क्या है कहां

1912
02:13:03,600 --> 02:13:07,600
से पता चलता है कि हमारे मूल में जो है सच्चिदानंद की प्यास है व्यवहार

1913
02:13:07,600 --> 02:13:11,680
से व्यवहारिक भूख भी है ना व्यवहारिक भूख भूख क्या है? बारिश

1914
02:13:11,680 --> 02:13:16,000
ज्यादा हो रही है तो कम हो जाए। यहां से हम इसके अंदर जाते हैं। मूल में पहुंचते हैं।

1915
02:13:16,000 --> 02:13:20,080
तो जब व्यवहारिक भूख है तो व्यवहारिक भूख का विषय भी है जो सब

1916
02:13:20,080 --> 02:13:23,680
कुछ कर सकता है। सर्वशक्तिमान ईश्वर और जब

1917
02:13:23,680 --> 02:13:28,160
इसके मूल में जाएंगे तो सच्चिदानंद है तो उसके भी मूल में जाएंगे तो सच्चिदानंद है। कनेक्शन

1918
02:13:28,160 --> 02:13:32,880
हो गया। हम तो ये तो है ईश्वर।

1919
02:13:32,880 --> 02:13:36,880
अब इनसे हमने पूछा भैया ईश्वर की प्राप्त ईश्वर की सिद्धि कैसे होती है? तो ये

1920
02:13:36,880 --> 02:13:41,280
बोल रहे हैं गीता हाथ में ले बात करो। फिर बोल रहे हैं तुम तुम बता दो

1921
02:13:41,280 --> 02:13:45,680
तो इनको कुछ आता जाता नहीं जो इन्होंने रट्टा मार लिया है केवल

1922
02:13:45,680 --> 02:13:50,880
इनके पास वही है और ये चुनौती देते फिर रहे हैं कोई व्यक्ति आ जाता है मनुवादी

1923
02:13:50,880 --> 02:13:55,040
हैं तो इनके ये हाल होते हैं ना इनको ये पता है उस पर विश्वास कैसे किया

1924
02:13:55,040 --> 02:13:59,360
जाए पीछे से और उल्टा ये तो और दो कदम आगे है

1925
02:13:59,360 --> 02:14:03,440
वे वीरेंद्र देव दीक्षित जी के द्वारा कही गई बातों पर भी अविश्वास

1926
02:14:03,440 --> 02:14:07,600
है इसका मतलब कि वीरेंद्र देव दीक्षित जी का ज्ञान नहीं दे रहे हैं क्यों

1927
02:14:07,600 --> 02:14:11,600
क्योंकि वीरेंद्र देव दीक्षित जी तो झूठ बोल सकते हैं। क्यों बोल सकते हैं?

1928
02:14:11,600 --> 02:14:15,760
क्योंकि उनके मन में मालूम था मैं भगवान हूं। मगर वो कहे कुछ और रहे

1929
02:14:15,760 --> 02:14:19,760
थे। मैं भगवान नहीं वो भगवान है। हम तो वो तो झूठ बोल रहे

1930
02:14:19,760 --> 02:14:23,200
थे इनके अनुसार।

1931
02:14:23,200 --> 02:14:27,360
नहीं तो इनकी वाणी प्रमाण मानी जाए माननी पड़ेगी। ये हमारे ऋषि

1932
02:14:27,360 --> 02:14:32,080
मुनि हो गए। इनकी वाणी को प्रमाण मान लो भाई।

1933
02:14:32,080 --> 02:14:36,800
है कि नहीं? क्यों माना जाए? क्योंकि इन्होंने

1934
02:14:36,800 --> 02:14:40,880
एमए कर रखा है इंग्लिश से और ये कोर्ट में जाने की चुनौती देते

1935
02:14:40,880 --> 02:14:44,880
हैं लोगों को और चुनौती देकर कोर्ट में क्या कहेंगे हाई कोर्ट में

1936
02:14:44,880 --> 02:14:48,960
कोर्स कर लो मेरा सात दिन का समय आने पता लग जाएगा ये कहेंगे वहां

1937
02:14:48,960 --> 02:14:53,040
ये चुनौती है इनकी हम देख

1938
02:14:53,040 --> 02:14:57,120
रहे हो ये थी इनकी मुरली की कहानी जो मैं सुन सुन

1939
02:14:57,120 --> 02:15:01,120
के यहां तक लाया हूं ये चुनौती दे रहे हैं कोर्ट में जाके

1940
02:15:01,120 --> 02:15:05,120
जब कोर्ट पूछे हां भाई आपकी चीज एक कैसे सिद्ध होती है कोर्स कर लो समय

1941
02:15:05,120 --> 02:15:09,120
आने पता लग जाएगा जज साहब इसलिए मेरा फैसला अभी कर दो। अच्छा छ साल

1942
02:15:09,120 --> 02:15:13,200
में पता नहीं लगा जज साहब को फिर सुनवाई हुई भैया अभी तक तो पता नहीं लगा क्या करें?

1943
02:15:13,200 --> 02:15:18,160
अरे समय आने पता लग जाएगा ज साहब

1944
02:15:18,160 --> 02:15:20,640
[गला साफ़ करने की आवाज़]

1945
02:15:20,640 --> 02:15:24,560
कौन है भाई?

1946
02:15:24,560 --> 02:15:29,680
कौन है? जी टी एफ बी एन एन कौन है यह?

1947
02:15:29,680 --> 02:15:34,880
अपना चेहरा दिखाएं।

1948
02:15:34,880 --> 02:15:39,120
एक कोई है वह कह रहे हैं कि तुम्हें कितना पता है भगवान के बारे में जितना

1949
02:15:39,120 --> 02:15:43,120
पता है तुम जैसों के लिए पर्याप्त है हमें जितना पता है

1950
02:15:43,120 --> 02:15:47,440
वो तुम जैसों के लिए पर्याप्त है पाखंडियों के लिए और जो

1951
02:15:47,440 --> 02:15:51,760
विधर्मी लोग हैं उनके लिए पर्याप्त है ना

1952
02:15:51,760 --> 02:15:55,920
कभी आ जाना कभी ये जो भाई हम चुनौती देते थोड़ी ना फिर रहे हैं तुमने

1953
02:15:55,920 --> 02:16:00,000
चुनौती दी है ना आ जाओ सिद्ध कर दो कोर्ट में आ जाओ ये कर दो वो कर

1954
02:16:00,000 --> 02:16:04,160
दो अपनी फेंटसी की दुनिया से बाहर आ जाओ जाओ जिस दिन मनवादी

1955
02:16:04,160 --> 02:16:10,080
से पाला पड़ गया सामना हो गया गिग्गी बंध जाएगी

1956
02:16:10,080 --> 02:16:14,400
हाय बड़े तुम्हें कितना पता है नास्तिकता का तोड़

1957
02:16:14,400 --> 02:16:18,400
नहीं है चले हैं धर्म की चीजें बताने धर्म की शुरुआत

1958
02:16:18,400 --> 02:16:22,480
होती है नास्तिकता के अंत से बिना नास्तिकता के अंत से कहां से धर्म

1959
02:16:22,480 --> 02:16:26,640
काहे का धर्म

1960
02:16:26,640 --> 02:16:32,640
इसीलिए कहते हैं

1961
02:16:37,200 --> 02:16:41,280
बता दी परिभाषा तो तू ततक पे आ गया व्यक्ति देखो

1962
02:16:41,280 --> 02:16:47,280
ये है सच रुक जा ये ये नहीं है वो नहीं है

1963
02:16:47,920 --> 02:16:52,000
खुद ज्ञान ज्ञानी बनके कौन बैठा है ये बैठा है प्रश्न मैं पूछ रहा

1964
02:16:52,000 --> 02:16:56,320
हूं सवाल का उत्तर नहीं है फिर क्या पूछा परमेश्वर कौन है

1965
02:16:56,320 --> 02:17:00,480
परमेश्वर कौन है ये रामपाल हो गया यहां पे कबीर को परम नहीं कहा

1966
02:17:00,480 --> 02:17:04,560
जाएगा तो मैं जो है मना कर दूंगा।

1967
02:17:04,560 --> 02:17:08,720
इस पर आ गया एक ही परम तत्व जो सत्यम ज्ञान

1968
02:17:08,720 --> 02:17:12,720
अनंतम ब्रह वाला जो परम तत्व है जो अध्य है जो सृष्टि

1969
02:17:12,720 --> 02:17:16,800
का रचयिता है वो पांच रूपों में प्रकट होता है ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और

1970
02:17:16,800 --> 02:17:20,960
गणेश कालांतर से कल्प वेद से यही पांच रूपों

1971
02:17:20,960 --> 02:17:25,360
में से कभी विष्णु भगवान भगवान की प्रधानता के साथ महिमा गाई जाती है

1972
02:17:25,360 --> 02:17:29,360
और कभी शिव जी की प्रधानता के साथ और कभी दुर्गा माता

1973
02:17:29,360 --> 02:17:33,760
कभी गणेश जी कभी ब्रह्मा जी इस कारण से

1974
02:17:33,760 --> 02:17:37,840
अलग-अलग जब भगवान के अलग-अलग रूपों में उनकी महिमा का गान हुआ तो उस

1975
02:17:37,840 --> 02:17:41,920
रूप में पुराण रचे गए हैं। इसमें इनमें पांचों में कोई भेद नहीं

1976
02:17:41,920 --> 02:17:45,440
है। तात्विक

1977
02:17:45,440 --> 02:17:51,440
लीला भेद है। लीला

1978
02:17:53,400 --> 02:17:58,240
[खांसने की आवाज़][गला साफ़ करने की आवाज़] हम ये है परमेश्वर की पहचान।

1979
02:17:58,240 --> 02:18:02,320
और जब आप खुद कह रहे हो कि परमेश्वर झूठ बोल सकता है

1980
02:18:02,320 --> 02:18:06,400
तो उसने तुम्हें जो ज्ञान दिया है कि मैं यह था, मैं वह था, वह वो था, सब झूठा हो

1981
02:18:06,400 --> 02:18:11,920
सकता है। इसलिए अपुरुष ग्रंथ अपौरुषय

1982
02:18:11,920 --> 02:18:15,920
जो भगवान ने भी नहीं रचे। ऐसे ग्रंथ क्योंकि भगवान की सत्ता

1983
02:18:15,920 --> 02:18:20,000
के अंदर ही दुनिया में सब कुछ है। है ना? विद्याद

1984
02:18:20,000 --> 02:18:24,080
सब कुछ भगवान के उसमें है। यह भी गीता में लिखा है। सबका स्त्रोत

1985
02:18:24,080 --> 02:18:28,080
भगवान ही है। यह भी गीता में लिखा है। हम

1986
02:18:28,080 --> 02:18:32,160
तो जब सबका स्त्रोत झूठ और सच दोनों का स्त्रोत भगवान ही

1987
02:18:32,160 --> 02:18:37,440
है तो फिर उनके द्वारा कही गई बात पर विश्वास कैसे

1988
02:18:37,440 --> 02:18:42,320
अपौरुषय ग्रंथों पर विश्वास है और फिर उसके बाद जो ग्रंथ

1989
02:18:42,320 --> 02:18:46,320
उनके अनुसार चलेंगे

1990
02:18:46,320 --> 02:18:50,400
उसके बाद उनके उस अपौरुषय ग्रंथ यानी वेदा आदि शास्त्रों

1991
02:18:50,400 --> 02:18:54,480
के अनुसार जो ग्रंथ आगे चलेंगे वो ग्रंथ हमारे लिए स्वीकार्य होंगे

1992
02:18:54,480 --> 02:18:58,800
जैसे कि गीता पुराण स्मृति ग्रंथ

1993
02:18:58,800 --> 02:19:03,200
महाभारत रामायण ये सब हमारे लिए प्रमाण इसलिए है क्योंकि

1994
02:19:03,200 --> 02:19:09,200
वेदों के अनुसार चले

1995
02:19:18,160 --> 02:19:22,160
आ [संगीत]
