1
00:00:02,240 --> 00:00:06,240
जो ईश्वर का अवतार है वो माया से मुक्त है। जी ठीक है

2
00:00:06,240 --> 00:00:10,480
ये एक नोटिस यानी अभी हमारे पास में ये बहुत ही चलिए इतनी

3
00:00:10,480 --> 00:00:14,560
बातचीत होते इतनी क्लेरिटी स्पष्ट हो चुकी है अवतारवाद में कि अवतारवाद की धारणा

4
00:00:14,560 --> 00:00:18,640
क्या धारणा ये है कि भैया जैसे जीव कर रहा है वो कर्मों के बंधन से कर

5
00:00:18,640 --> 00:00:22,640
रहा है ठीक है और वो अविद्या ग्रस्त है जीव अविद्या ग्रस्त है जो जीव है वो

6
00:00:22,640 --> 00:00:26,640
अविद्या गग्र ग्रस्त जीव जो है जीव अपने मन से नहीं कर रहा है जीव जो है

7
00:00:26,640 --> 00:00:30,880
बद्ध है इसलिए हो रहा है उसका और उसका कंट्रोलर कोई और है और जो

8
00:00:30,880 --> 00:00:34,960
ईश्वर है वो स्वयं से कर रहा है स्वयं से कर रहा है ठीक बहुत बढ़िया बढ़िया बात

9
00:00:34,960 --> 00:00:39,040
है। तो यानी इतना स्पष्ट है कि वो भी शरीर धारण करता है। चलिए ठीक है। अब अवतारवाद की धारणा पे

10
00:00:39,040 --> 00:00:43,440
हम आ चुके हैं। इतना क्लेरिटी आ चुका है। बढ़ते हैं

11
00:00:43,440 --> 00:00:44,080
कि

12
00:00:44,080 --> 00:00:48,240
अवतार का लक्षण क्या है? जैसे जैसे

13
00:00:48,240 --> 00:00:52,400
समझिएगा कि मेरे सामने राम जी खड़े हैं। मेरे सामने रामपाल खड़ा है।

14
00:00:52,400 --> 00:00:56,560
ठीक है? दोनों में से ईश्वर का अवतार क्योंकि जीव और

15
00:00:56,560 --> 00:01:00,720
ईश्वर को तो मैं देख नहीं सकता। वो तो निराकार है। ठीक है? जो मुझे दिख रहा है वो शरीर है।

16
00:01:00,720 --> 00:01:04,720
तो इसमें लक्षण क्या है कि राम जी या रामपाल

17
00:01:04,720 --> 00:01:05,220
दोनों में से

18
00:01:05,200 --> 00:01:09,200
ईश्वर का अवतार है कौन? यह मैं कैसे पता करूं? इसमें इसमें इसमें शब्द

19
00:01:09,200 --> 00:01:13,920
ही प्रमाण है। इसमें क्या लिखा है?

20
00:01:13,920 --> 00:01:18,160
इसमें मां सद्गमया का जवाब दिया। जिसने हमारे

21
00:01:18,160 --> 00:01:22,720
जो अंदर की जो क्या कहते हैं जो वास्तविक उत्कंठाएं जिज्ञासाएं

22
00:01:22,720 --> 00:01:26,800
अपने को जानने की उसने जो ज्ञान दिया उसके बारे में

23
00:01:26,800 --> 00:01:30,960
सही सही डेफिनेशन बनाई उसके द्वारा निर्धारित किया जाएगा कि

24
00:01:30,960 --> 00:01:34,960
इसमें से कौन ईश्वर का स्वरूप है ईश्वर का अवतार है और कौन नहीं

25
00:01:34,960 --> 00:01:36,320
इसमें शब्द प्रमाण है। जैसे

26
00:01:36,320 --> 00:01:40,480
कि जैसे कि अगर ईश्वर सर्वव्यापक है तो

27
00:01:40,480 --> 00:01:45,920
सब जगह ईश्वर है और दुनिया में सारी दुनिया सारे स्वर ईश्वर के ही है।

28
00:01:45,920 --> 00:01:50,240
ईश्वर कहीं से भी कहीं किसी से अलग नहीं है। तो ऐसे में हमने

29
00:01:50,240 --> 00:01:54,960
केवल एक प्रणव को ही उसका दतक क्यों माना? प्रणव

30
00:01:54,960 --> 00:01:59,840
को ही उसका वो क्यों माना? प्रतीकात्मक तो इसका निर्णय आएगा

31
00:01:59,840 --> 00:02:03,920
गूंगा भी बोल सकता है। वो तो एक अलग चीज हो गई।

32
00:02:03,920 --> 00:02:09,280
मगर ये कोई सिद्धांत थोड़ी ना गूंगा।

33
00:02:09,280 --> 00:02:13,920
अगर कोई अगर कोई और ऐसा शब्द हुआ जो बोल सकता हो तो

34
00:02:13,920 --> 00:02:18,000
बोल सकते है अथो इति शब्द भी तो ईश्वर का है अथ भी तो इसी का है ईश्वर

35
00:02:18,000 --> 00:02:22,160
का ही है ना वेदों में आया क्यों नहीं उपनिषदों में अगर और अगर और कोई शब्द

36
00:02:22,160 --> 00:02:26,160
होगा जो गूंगा भी बोल सकता होगा तो उसको भी ईश्वर ईश्वर का वो मान लोगे

37
00:02:26,160 --> 00:02:30,400
क्या उसको प्रणव की जगह अरे शंकर भाष में मानो क्या बात कर रहे हो आप

38
00:02:30,400 --> 00:02:34,480
मैं वो नहीं कह रहा हूं मैं कह रहा हूं अगर केवल इस तर्क से हम मानेंगे कि

39
00:02:34,480 --> 00:02:38,800
भैया वो गूंगा भी बोल सकता है इसलिए वो ईश्वर का देवता है उससे ईश्वर को वो

40
00:02:38,800 --> 00:02:42,880
वो लीजिए तो फिर हमें वहां पर ये जो भी शब्द गूंगा बोल सकता होगा

41
00:02:42,880 --> 00:02:46,960
जो भी ध्वनिया वो कर सकता होगा उसको भी अपनी पूजा में लेना पड़ेगा मगर वहां

42
00:02:46,960 --> 00:02:50,960
पर शब्द प्रमाण वहां पर हमारा शब्द प्रमाण मैं

43
00:02:50,960 --> 00:02:55,040
बात पूरी कर शब्द की बात नहीं है आपने ये बोला कि ओम को इतनाेंस

44
00:02:55,040 --> 00:02:59,040
क्यों दिया तो वो बात जो भी शब्द की बात नहीं है नहीं बात मैं

45
00:02:59,040 --> 00:03:03,040
बता रहा हूं आपने उसको तर्क दिया ना उसके पक्ष में उदाहरण के रूप

46
00:03:03,040 --> 00:03:07,440
में आपने प्रणव के पक्ष में

47
00:03:07,440 --> 00:03:11,520
अरे भाई मेरी बात पूरी हुई नहीं। आपने प्रणव के पक्ष में एक

48
00:03:11,520 --> 00:03:15,760
तर्क दिया है क्योंकि उसको गूंगा भी बोल सकता है। तो मैंने उसको बताया

49
00:03:15,760 --> 00:03:19,840
कि गूंगा और भी धनिया निकाल सकता है। फिर प्रणव ही क्यों

50
00:03:19,840 --> 00:03:23,920
तो उसके बारे में यही है कि उसमें शब्द प्रमाण है। तो फिर रामपाल

51
00:03:23,920 --> 00:03:24,420
के बगल

52
00:03:24,320 --> 00:03:28,320
में श्री राम जी खड़े हैं। इसमें से कौन सा ईश्वर का अवतार है? कौन सा नहीं

53
00:03:28,320 --> 00:03:32,320
है? तो इसके लिए शब्द प्रमाण अच्छा इसमें जैसे

54
00:03:32,320 --> 00:03:37,280
मुझे समझना है कि जैसे किसी जैसे

55
00:03:37,280 --> 00:03:41,920
किसी ने कॉपी में लिख के दिया मुझे ठीक है आपने मेरे को WhatsApp पे मान लो मैसेज भेजा

56
00:03:41,920 --> 00:03:46,160
कि दिल्ली में आप यहां हो यहां पे एक व्यक्ति है वो खड़ा

57
00:03:46,160 --> 00:03:50,320
है आप उसे ये डॉक्यूमेंट ले लो ठीक है आपने मुझे बता दिया उसका डिस्क्रिप्शन दे दिया कि फलाना

58
00:03:50,320 --> 00:03:54,320
फलाना ऐसा व्यक्ति है पुलिस की वर्दी में खड़ा है ऐसा ऐसा है ठीक अब मैं

59
00:03:54,320 --> 00:03:58,480
जब जाऊंगा उसके पास में तो मैं वेरीफाई तो करूंगा ना कि जिसका आपने लिखा है ये वही है या कोई

60
00:03:58,480 --> 00:04:02,640
और है करूंगा। तो जिन पैरामीटर से मैं वेरीफाई

61
00:04:02,640 --> 00:04:06,640
करूंगा वही पैरामीटर उसके लक्षण है। किताब में ठीक है। किताब में किसी व्यक्ति

62
00:04:06,640 --> 00:04:11,040
की बात की गई है। किताब में उसी व्यक्ति की बात की जा रही है। वो जिन मा जिन पैरामीटर

63
00:04:11,040 --> 00:04:15,120
से चेक होगा। ठीक है? उदाहरण के लिए मैं आपको समझाता हूं। किताब में तो

64
00:04:15,120 --> 00:04:19,120
ये भी लिखा है कि ईश्वर है। है ना? किताब में ये भी लिखा है कि ईश्वर

65
00:04:19,120 --> 00:04:23,120
सृष्टि करता है। नास्तिक को सिद्ध करने के लिए लक्षण बताते हैं ना। नास्तिक को सिद्ध करने के लिए

66
00:04:23,120 --> 00:04:27,200
तर्क देते हैं ना। प्रमाण देते हैं। क्यों देते हैं? क्योंकि पॉइंट है। उसी

67
00:04:27,200 --> 00:04:31,200
प्रकार से क्योंकि सामने वाला व्यक्ति ईश्वर को मान नहीं रहा है। तो जैसे ही सामने वाला व्यक्ति

68
00:04:31,200 --> 00:04:35,360
जब अवतार को नहीं मान रहा तो उसको बता समझने के लिए। ठीक है? इन ऑर्डर टू अंडरस्टैंड

69
00:04:35,360 --> 00:04:39,440
दोज़ थिंग्स। तो हमें क्या करना है? हमें बताना है कि लक्षण क्या है कि भैया मेरे सामने अगर अवतार

70
00:04:39,440 --> 00:04:43,840
खड़े हो कि ये वही है। जैसे कृष्ण जी के समय में भी उनका एक डुप्लीकेट आया था।

71
00:04:43,840 --> 00:04:47,840
कुछ पंड्रिक कुंड्रिक कुछ नाम था उसका। बोल रहा हूं मैं। तो वो भी

72
00:04:47,840 --> 00:04:51,840
आया था। वो भी वासुदेव पुत्र और बनके और वो मोर पंख लगा के चार हाथ लगा के

73
00:04:51,840 --> 00:04:55,840
घूमता था। उसने भी अपने नकली भाई बलराम सब तो उसमें

74
00:04:55,840 --> 00:05:00,000
भी पहचान को लेकर के उसमें उसके भी बहुत चेले क्योंकि बहुत लोग भ्रमित हुए थे। उसके

75
00:05:00,000 --> 00:05:04,800
बहुत भक्त बने थे। युद्ध हुआ था उसमें वो मारा गया था। शायद भागवत में आता नहीं था।

76
00:05:04,800 --> 00:05:08,880
तो बात वही है कि जो यहां शब्द में लिखा हुआ है शास्त्र

77
00:05:08,880 --> 00:05:13,040
में लिखा हुआ है तो मैं वेरीफाई तो करूंगा ना तो मैं किन पैरामीटर से वेरीफाई करूंगा?

78
00:05:13,040 --> 00:05:17,200
वो जो लक्षण है वो है क्या? वो स्पष्ट कर। देखिए इसमें मैं बता

79
00:05:17,200 --> 00:05:21,200
दूं एक कुछ पैराटर्स ऐसे हो सकते हैं कि भाई

80
00:05:21,200 --> 00:05:25,280
वो जैसे हमने मान लिया कि भाई तुम ये कर सकते हो पहाड़ उठा सकते हो या

81
00:05:25,280 --> 00:05:30,160
तुम यहां पे खड़े हो तुम दिल्ली में प्रकट हो सकते हो क्योंकि सर्वशक्तिमान है तो ऐसे

82
00:05:30,160 --> 00:05:34,320
हम लोग कह सकते हैं मगर अगर हम ये कहे कि भाई तुम सर्वव्यापक हो ये सिद्ध

83
00:05:34,320 --> 00:05:38,560
करो हम तुम सर्व्यापक हो ये सिद्ध करो हमें

84
00:05:38,560 --> 00:05:42,560
दिखाओ सर्व्यापक तो उसमें वो जो पैरामीटर है ना वो हमारे व्यवहार का विषय

85
00:05:42,560 --> 00:05:46,960
नहीं है पूरा का पूरा हम उसे जांच नहीं सकते इसलिए वहां पर हमें शब्द प्रमाण

86
00:05:46,960 --> 00:05:48,080
ही रुकना पड़ेगा।

87
00:05:48,080 --> 00:05:52,240
तो आप आप जैसे पैरामीटर बता दोगे

88
00:05:52,240 --> 00:05:56,240
दो चार क्या है? ऐसा ऐसा है वो बता दो किन पैरामीटर से वो अवतार सिद्ध होगा तुम्हें

89
00:05:56,240 --> 00:06:00,400
फिर उसमें जवाब दूं। नहीं मैं तो मानता ही नहीं ना। नहीं नहीं

90
00:06:00,400 --> 00:06:04,480
आप बताओ क्या वो ये क्या आप ये आप अपनी वो बताओ ना। क्या

91
00:06:04,480 --> 00:06:09,120
ऐसा हो सकता है? क्या ऐसा हो सकता है? तो मैं जवाब दूं उसका। देखो मैं

92
00:06:09,120 --> 00:06:09,840
अपनी धारणा।

93
00:06:09,840 --> 00:06:13,840
किसी को ईश्वर मानने का एक किसी को ईश्वर मान लेने का एक

94
00:06:13,840 --> 00:06:18,560
ही पैरामीटर है। अगर लक्षण की बात करें कि वो सर्वशक्तिमान हो।

95
00:06:18,560 --> 00:06:23,040
मैं आपकी बात समझ गया। मैं हूं उत्तर इसका। अब देखो पॉइंट इसके अंदर क्या है?

96
00:06:23,040 --> 00:06:27,200
कि जहां तक आपने बोला कि कुछ चीजें जैसे पहाड़ उठा सकता है इत्यादि

97
00:06:27,200 --> 00:06:31,200
इत्यादि कुछ ऐसे पॉइंट है जिसको हम उसके लक्षणों में घटा सकते हैं। ठीक है?

98
00:06:31,200 --> 00:06:35,200
उदाहरण के रूप में कोई बद्ध जीव है। जीव तो बद्ध ही होता है।

99
00:06:35,200 --> 00:06:39,280
है ना? लेकिन कोई ऐसा जीव है जो बहुत कई जन्मों से तपस्या कर

100
00:06:39,280 --> 00:06:44,000
रहा है, तपश्चर्या कर रहा है और वो मुक्ति के कगार पे है। ठीक है?

101
00:06:44,000 --> 00:06:48,000
उसमें और जो एक डाकू चोर लुटेरा उनकी मनोस्थिति

102
00:06:48,000 --> 00:06:52,000
में ठीक है कुछ तो अंतर होगा। कुछ तो गुणों में अंतर उनके व्यवहार में

103
00:06:52,000 --> 00:06:56,000
उनके ज्ञान में कुछ तो अंतर होगा। है ना? तो हमें तो जब हम

104
00:06:56,000 --> 00:07:00,080
किसी व्यक्ति से सिद्ध कोटि के व्यक्ति से बात करते हैं तो हमें अच्छा अनुभव

105
00:07:00,080 --> 00:07:04,160
होता है। हमें समझ में आता है कि यार ये व्यक्ति वो उसके लफंगे जैसा नहीं है। हमें समझ में आता है।

106
00:07:04,160 --> 00:07:08,160
ठीक है? तो उसी प्रकार से जैसे आपने बोला कि अवतार

107
00:07:08,160 --> 00:07:12,480
के विषय में सारी चीजें तो नहीं जैसे सर्व्यापकता को नहीं किया जा सकता लेकिन कुछ कुछ चीजें लक्षण

108
00:07:12,480 --> 00:07:16,800
बताए जा सकते हैं। वो दो चार लक्षण जो भी आपको समझ में आया आप वो मुझे बता दो।

109
00:07:16,800 --> 00:07:20,800
ठीक है? एक पॉइंट दूसरा पॉइंट आपने एक और लाइन बोला था कि आपको क्या समझ में आ

110
00:07:20,800 --> 00:07:24,880
रहा है? आप बता दो। मुझे क्या समझ में आ रहा है? मैं बता देता हूं। मेरे दृष्टिकोण से मेरे

111
00:07:24,880 --> 00:07:29,120
दृष्टिकोण से मेरे सामने कोई मनुष्यधारी है।

112
00:07:29,120 --> 00:07:33,280
ठीक है? हम मेरे को मैं सोच ही नहीं पा रहा कोई ऐसा पॉइंट

113
00:07:33,280 --> 00:07:37,440
कि जिससे मैं डिफरेंशिएट कर दूं कि फलाना व्यक्ति इंसान नहीं है ईश्वर है।

114
00:07:37,440 --> 00:07:41,680
मेरे दिमाग में कोई आ ही नहीं रहा पॉइंट। मेरे इसीलिए

115
00:07:41,680 --> 00:07:45,680
मैंने आपसे पूछा था। हां तो मैंने वो लक्षण बता दिया सर्वशक्तिमान। अभी

116
00:07:45,680 --> 00:07:49,760
हम अंडरस्टैंडिंग की तरफ ही है। वी आर अभी हम अंडरस्टैंडिंग हम अवतार को समझ रहे हैं।

117
00:07:49,760 --> 00:07:54,640
अवतार की धारा शरीर धारण। मैंने वो लक्षण बता दिया सर्वशक्तिमान।

118
00:07:54,640 --> 00:07:58,640
यानी वो कुछ भी कर सकता है तो ही माना जाएगा कि वो है

119
00:07:58,640 --> 00:08:02,880
ना? यानी अगर मेरे सामने कोई ऐसा व्यक्ति है जो कुछ भी कर दे तो हम

120
00:08:02,880 --> 00:08:07,840
मान लूंगा कि वो ईश्वर है। अगर कुछ भी नहीं कर पा रहा कहीं अटक जा रहा है तो

121
00:08:07,840 --> 00:08:11,840
ठीक है। तो कुछ भी कर सकने की बात जिसकी शब्द प्रमाण से मानी

122
00:08:11,840 --> 00:08:16,400
जा रही हो। बात दिक्कत ये है कि कई चीजें करने के लिए वो मनुष्य उसका

123
00:08:16,400 --> 00:08:20,400
साक्षी नहीं हो सकता। कई चीजें ऐसी है वो करने को कह

124
00:08:20,400 --> 00:08:23,920
दिया जाए तो मनुष्य उसका साक्षी नहीं हो सकता। तो जब उसका साक्षी नहीं हो

125
00:08:23,920 --> 00:08:27,920
सकता तो फस रहे हैं ना। यही तो फस रहे। हां। पॉइंट

126
00:08:27,920 --> 00:08:32,000
क्या है? जब हम लक्षण की बात कर रहे हैं तो अभी जैसे आपने बोल दिया सर्वशक्तिमान

127
00:08:32,000 --> 00:08:36,000
ठीक है कुछ भी कर सकता है। उदाहरण के रूप में मैं बोल दूं अच्छा आप

128
00:08:36,000 --> 00:08:40,000
ये मानते हैं मैं आपसे एक नॉर्मल सा प्रश्न बोल रहा हूं। ये कोई बहुत इंपॉर्टेंट प्रश्न नहीं है। नॉर्मल है

129
00:08:40,000 --> 00:08:44,080
कि क्या राम जी जो है ईश्वर जो है जिसे आप जिन्हें आप ईश्वर आप

130
00:08:44,080 --> 00:08:48,160
अवतार मानते हैं तो मैं आपको उसी हिसाब में बात कर रहा हूं कि क्या ईश्वर राम के रूप

131
00:08:48,160 --> 00:08:52,160
में अधर्म कर सकता है? आप मानते हैं इस चीज को? हां

132
00:08:52,160 --> 00:08:56,240
कर सकता है। क्यों नहीं कर सकता? ठीक है। क्या ईश्वर बिना श्री

133
00:08:56,240 --> 00:09:01,120
राम का शरीर धारण किए हुए सीता माता से शादी कर सकता है?

134
00:09:01,120 --> 00:09:05,680
बिना सीता माता से शादी शादी कहते किसे हैं? इस पे जाइए पहले।

135
00:09:05,680 --> 00:09:09,760
वही पॉइंट है ना? नहीं कर सकता। अटक रहा है वहां पे। शादी तो शरीर नहीं नहीं

136
00:09:09,760 --> 00:09:13,840
आप आप उसको सिद्ध करिए ना कि बिना शरीर के वो शादी होती है कि नहीं। तब

137
00:09:13,840 --> 00:09:18,800
तो मैं उस पे जाऊं। वही तो यहां कर सकता है। हो ही नहीं सकती। आर्यन अटक रहा है ना काम।

138
00:09:18,800 --> 00:09:22,880
कि बिना शरीर के जैसे समझो इस चीज को। जैसे मैंने एक ऐसा काम दे दिया जिसको बिना

139
00:09:22,880 --> 00:09:26,880
शरीर के द्वारा नहीं किया जा सकता। तो मैं यह अगर वह सर्वशक्तिमान है तो क्या बिना शरीर

140
00:09:26,880 --> 00:09:31,040
के कर सकता है? मैंने यही काम ही मैंने जानबूझ के काम दिया है। तो मैं पूछ रहा हूं नार्मल

141
00:09:31,040 --> 00:09:35,040
इसमें इसमें एक लॉजिक आ जाता है। मैं बता देता हूं आपको। ठीक है? जिसमें

142
00:09:35,040 --> 00:09:39,200
शरीर की आवश्यकता है। क्या इसको लॉजिकल फैलेसी कहते हैं शायद अंग्रेजी वाले

143
00:09:39,200 --> 00:09:43,360
लोग इस तरह की चीजों को क्या वो दो और दो पांच कर सकता है। लॉजिकल फैलेसी थोड़ा मुझे समझाइए।

144
00:09:43,360 --> 00:09:47,840
इसमें इसमें एक वो आ जाता है कि अंतत गत्वा

145
00:09:47,840 --> 00:09:52,080
अगर हम अविद्या के उसको स्वीकार करते हैं अस्तित्व को माया के अस्तित्व

146
00:09:52,080 --> 00:09:56,160
को स्वीकार करते हैं तो हमें ये मानना पड़ेगा कि ईश्वर हमें

147
00:09:56,160 --> 00:10:00,320
वही इंफॉर्मेशन प्राप्त करवा रहा है जो इंफॉर्मेशन सत्य

148
00:10:00,320 --> 00:10:04,560
नहीं है। है ना बोलिए

149
00:10:04,560 --> 00:10:10,320
पूरा वही इंफॉर्मेशन दे रहा है ना जो सत्य नहीं है।

150
00:10:10,320 --> 00:10:14,320
आप पूरा बोलिए। मैं मतभेद रखता हूं इसलिए मैं हामी नहीं भर रहा हूं। पूरा बोलिए। हां

151
00:10:14,320 --> 00:10:18,480
अंतत गतवा अविद्या को तो कहीं ना कहीं आपने भी माना है।

152
00:10:18,480 --> 00:10:22,640
तो अंतत गत्वा जो है हमें ऐसी इंफॉर्मेशन प्राप्त हो रही है

153
00:10:22,640 --> 00:10:23,920
जो रियल नहीं है।

154
00:10:23,920 --> 00:10:28,000
तो अगर ऐसी कोई चीज अटक जाएगी ना जो इसमें आ जाएगी जो हो ही नहीं

155
00:10:28,000 --> 00:10:32,080
सकता है। तो उसके पास अविद्या शक्ति है। वो आपको इंफॉर्मेशन देगा केवल कि हो

156
00:10:32,080 --> 00:10:33,280
गया।

157
00:10:33,280 --> 00:10:37,600
हो गया सर। हमारी रियल में नहीं हुआ। हमारी जो हां रियल में नहीं हुआ। परमार्थ

158
00:10:37,600 --> 00:10:41,920
में नहीं हुआ। मैं रियल की कह रहा हूं। हां रियल में नहीं हूं। बिल्कुल।

159
00:10:41,920 --> 00:10:46,160
मगर वो रियल में आप पहुंचे कैसे? एक मिनट। रियल में आप पहुंचे

160
00:10:46,160 --> 00:10:50,560
कैसे? उसका साक्षी कौन है? रियल में वो व्यक्ति पहुंचा कैसे?

161
00:10:50,560 --> 00:10:54,880
कैसे पहुंचा रियलिटी में? तब उसको पहले यहां किसी को तब

162
00:10:54,880 --> 00:10:58,960
उसको पहले यहां पे किसी ईश्वर की सत्ता को मानना पड़ेगा। और ईश्वर

163
00:10:58,960 --> 00:11:03,360
की सत्ता को सिद्ध करने के लिए फिर वहां पर उसका जो है अवतार ले सकने वाला

164
00:11:03,360 --> 00:11:07,360
शक्तिमान इत्यादि। हां। सिद्धांतिक रूप से

165
00:11:07,360 --> 00:11:11,440
कहने का मतलब यह है ईश्वर जो अवतार लेता है

166
00:11:11,440 --> 00:11:16,560
तो क्या ईश्वर सैद्धांतिक रूप से कार्य कर सकता है बिना शरीर के तो नहीं कर सकता

167
00:11:16,560 --> 00:11:21,120
मैंने कहा ना कि ईश्वर हमको ऐसी इंफॉर्मेशन दे सकता है

168
00:11:21,120 --> 00:11:25,760
जो इंफॉर्मेशन रियल नहीं है और जो पूरा स्ट्रक्चर है

169
00:11:25,760 --> 00:11:29,840
एक एक मिनट जो जो अद्वैत का स्ट्रक्चर है उसमें तो एक ही

170
00:11:29,840 --> 00:11:34,000
तत्व है दूसरा तो तत्व ही नहीं है मगर हमको बहुत सारे तत्व

171
00:11:34,000 --> 00:11:38,240
दिख रहे हैं अविद्या के कारण तो एक एक अविद्या और दे देगा

172
00:11:38,240 --> 00:11:42,400
एक अवध एक अविद्या वो और दे देगा कि भैया बिना शरीर के उसने

173
00:11:42,400 --> 00:11:46,560
वो कर लिया विवाह कर लिया मगर बात यह है कि

174
00:11:46,560 --> 00:11:48,400
अगर हम ये कहने लगेंगे कि रियल

175
00:11:48,400 --> 00:11:52,640
में ऐसा नहीं हुआ है और यहां पर हुआ है मगर रियल में नहीं हुआ है तो हमें मानना पड़ेगा

176
00:11:52,640 --> 00:11:56,720
कि भाई वो रियल की दुनिया आपको प्राप्त कैसे उसका साक्षी कौन है हमने जो

177
00:11:56,720 --> 00:12:00,800
कहा है कि ईश्वर अवतार लेता है हमने जो कहा है कि ईश्वर अवतार

178
00:12:00,800 --> 00:12:05,040
लेता है वो मनुष्यों का ईश्वर है प्राणियों का ईश्वर है देहधारी प्राणियों

179
00:12:05,040 --> 00:12:09,040
का हमने कभी नहीं कहा कि जो व्यक्ति मुक्त है जो रियल की दुनिया में उसका

180
00:12:09,040 --> 00:12:13,200
ईश्वर अवतार लेता है। हमने कहा कि जो यहां पे जो फंसा हुआ बद्ध

181
00:12:13,200 --> 00:12:17,280
जीव है अविद्या ग्रस्त है उसका उसके लिए ईश्वर उसका जो

182
00:12:17,280 --> 00:12:21,440
ईश्वर है वो अवतार लेता है। ठीक है। अब मैं आपको बताता हूं इसमें पॉइंट क्या

183
00:12:21,440 --> 00:12:24,080
है। देखिए आपने कहा कि कौन से स्तर पर

184
00:12:24,080 --> 00:12:28,160
जैसे मैं बोलूं क्या ईश्वर दो और दो को पांच कर सकता है? तो आप बोलोगे हां कर सकता है। मैं पूछूंगा कैसे कर

185
00:12:28,160 --> 00:12:29,840
सकता है? तो हमें बेवकूफ बना देगा।

186
00:12:29,840 --> 00:12:33,840
दिमाग भ्रम डाल देगा कि नहीं दो और दो पांच हो गया। मैं ये नहीं कह रहा। मैं मैं ईश्वर

187
00:12:33,840 --> 00:12:37,840
को ये नहीं कह रहा कि आ ईश्वर मेरे को बेवकूफ बना कि दो और दो पांच हो गए। मैं ये नहीं

188
00:12:37,840 --> 00:12:41,840
कह रहा। मैं कह रहा हूं उसको ऐसे कर दो। मैथमेटिकली कर दो। पूछेगा तो ईश्वर

189
00:12:41,840 --> 00:12:45,920
पूछेगा भाई तू ही बता दे कैसे करूं। तो मैं ईश्वर को बोलूंगा कि आप मैथमेटिकली कर दो।

190
00:12:45,920 --> 00:12:50,160
ठीक है? उसी प्रकार से उसी प्रकार से अब मैं ईश्वर को मैंने ईश्वर को यह बोला

191
00:12:50,160 --> 00:12:54,240
कि जब मैंने बोला ना कि बिना शरीर के तुम सीता जी से शादी करो तो ईश्वर बोलेगा

192
00:12:54,240 --> 00:12:58,320
भाई बिना शरीर के तो हो नहीं सकता तो बोलो कैसे करूं उन्होंने सिद्धांत बात मैंने आपको पहले ही बता

193
00:12:58,320 --> 00:12:59,280
दिया कि आपको

194
00:12:59,280 --> 00:13:03,520
उसने बेवकूफ बनाया है इसका साक्षी कौन होगा ये बताइए

195
00:13:03,520 --> 00:13:06,000
वो सिद्ध कैसे करोगे कि उसने बेवकूफ बनाया वही

196
00:13:06,000 --> 00:13:10,000
तो मैं कह रहा हूं अगर वो हां मैं उसका उत्तर दे दे रहा हूं अगर वो मैथमेटिकली होगा

197
00:13:10,000 --> 00:13:14,080
तो मैथमेटिकल कैलकुलेशन रूल्स के अकॉर्डिंग होगा ना अगर वो उसके अकॉर्डिंग नहीं है वैसा

198
00:13:14,080 --> 00:13:18,720
कुछ रूल नहीं दिख रहा डायरेक्ट हमें भास उसके माइंड में उसके माइंड में वो मैथमेटिकल

199
00:13:18,720 --> 00:13:21,600
रूल्स डाले किसने?

200
00:13:21,600 --> 00:13:25,680
बिना मैथमेटिक्स के डाले ना अगर मैथमेटिकल के अकॉर्डिंग हो सकता जो रूल्स

201
00:13:25,680 --> 00:13:30,880
है जिनके अकॉर्डिंग सिद्ध होगा। जो रूल्स है वो रूल्स कहां से आए?

202
00:13:30,880 --> 00:13:34,960
रूल्स है ही तो नहीं। यही तो पॉइंट है। अरे मैथ के जो रूल्स है कि दो

203
00:13:34,960 --> 00:13:39,040
और दो पांच नहीं हो सकता है। वो कहां से आए? न्यूमरोलॉजी से

204
00:13:39,040 --> 00:13:44,560
आए हैं। और न्यूमरोलॉजी ईश्वर से आई है कि नहीं आई? पढ़े हैं आपने?

205
00:13:44,560 --> 00:13:48,560
होते हैं। देखिए अब आप जो है खामखा भटका रहे हैं

206
00:13:48,560 --> 00:13:52,720
मामले को मैं पॉइंट पे आ गया हूं तो भटका रहे हो आप। मैं बता रहा हूं वो जो

207
00:13:52,720 --> 00:13:56,800
मैं भी आपसे बोल सकता हूं ना वो आपके पास वो जो वो जो

208
00:13:56,800 --> 00:14:00,720
रूल्स भाई साहब वो जो रूल्स है वो जो रूल्स है वो जो

209
00:14:00,720 --> 00:14:04,720
रूल्स है वो ईश्वर से ही आए हैं ना। अरे ईश्वर से कैसे आ

210
00:14:04,720 --> 00:14:08,800
जाएंगे? ईश्वर ने अरे भाई आपको ये कहां से पता लगा है कि दो और दो पांच

211
00:14:08,800 --> 00:14:10,480
और चार होते हैं।

212
00:14:10,480 --> 00:14:14,720
अच्छा मैं आपको बता देता हूं ना इसी का उत्तर सुन लीजिए। हां प्रिंस एपिया

213
00:14:14,720 --> 00:14:18,800
और मैथमेटिका नाम सुना है कभी? मुझे पता है आप क्या कर रहे हो?

214
00:14:18,800 --> 00:14:23,200
आप जहां पे फंस रहे हो आप खामखा एक वो अपनी मैं

215
00:14:23,200 --> 00:14:27,200
बता रहा हूं अपना प्रभाव उत्पन्न करने के लिए जिन क्षेत्रों में आप विशेषज्ञ

216
00:14:27,200 --> 00:14:31,280
हो उसको यहां प्रकट कर रहे हो। और क्या है? इंग्लिश बोल लो

217
00:14:31,280 --> 00:14:35,280
और आपने मैथमेटिक्स पढ़ी है तो उसको या बहुत ज्यादा विवेचना

218
00:14:35,280 --> 00:14:39,920
कर दो उससे पॉइंट नहीं बदलेगा आपके पास आपके पास

219
00:14:39,920 --> 00:14:44,080
देखिए आप देखिए जो जो मेरे

220
00:14:44,080 --> 00:14:48,160
पास उत्तर है मैं बता तो रहा हूं जो अंतत गत अंतत गतवा

221
00:14:48,160 --> 00:14:52,400
जो आपके पास जो ज्ञान है वो ईश्वर से आया है कि नहीं आया है

222
00:14:52,400 --> 00:14:56,400
ईश्वर के बाहर की बात हो रही है कि अभी की बात हो रही है तो अभी मैं अंतत

223
00:14:56,400 --> 00:15:00,720
गतवा की बात बता रहा हूं ना अंतत की मैं

224
00:15:00,720 --> 00:15:02,880
आपको

225
00:15:02,880 --> 00:15:07,840
मैं आपको मैं आपको अंततवा की बात बता रहा हूं। भाई साहब मैं आपको अंत

226
00:15:07,840 --> 00:15:12,240
अंततवा की बात बता रहा हूं। सुनिए तो लीजिए आप सुन लीजिए। नहीं

227
00:15:12,240 --> 00:15:16,240
देखिए जो मूर्ख की बात है वो मैं आपको

228
00:15:16,240 --> 00:15:22,240
बता रहा हूं। अंतत गत्वा की बात कि जो दो और दो

229
00:15:22,720 --> 00:15:26,720
चार कैसे हुआ आपको मालूम है आप यहां फसोगे तो आपको

230
00:15:26,720 --> 00:15:30,720
बात होने ही नहीं दोगे। आपको मालूम है बीच में आए हो मैं बोल रहा था तो

231
00:15:30,720 --> 00:15:36,720
आप फसोगे नहीं मैं मेरे बीच में आप आए हो

232
00:15:37,440 --> 00:15:41,440
वो बाधित नहीं है और और जो कुछ ऐसी लॉजिकल फैलेसी अगर

233
00:15:41,440 --> 00:15:45,600
आप लाएंगे कि भैया क्या वो बिना शरीर के विवाह कर सकते हैं दो और दो पांच कर सकते हैं

234
00:15:45,600 --> 00:15:49,600
तो उसमें मेरी जो ईश्वर की अविद्या शक्ति होगी वो काम करेगी आपको जो है

235
00:15:49,600 --> 00:15:53,760
इंफॉर्मेशन डालेगी जैसे अच्छा वो आप कह रहे हो कि मैथमेटिकली होना

236
00:15:53,760 --> 00:15:55,120
चाहिए मैं इसको बता दूं

237
00:15:55,120 --> 00:15:59,120
मैथमेटिकल के जो रूल्स है ना वो भी ईश्वर नियंत्रित कर सकता है कि आपके मन

238
00:15:59,120 --> 00:15:59,680
से कब हटाया

239
00:15:59,680 --> 00:16:03,680
जाए, कब ना हटाया जाए तो हटा देगा। वो ऐसे रूल्स डालेगा जिससे कि वो आपको लॉजिकल

240
00:16:03,680 --> 00:16:08,240
लगने लगेगा। बस देखो अभी मैं उस पे जाऊंगा ना मैथमेटिक्स पे तो

241
00:16:08,240 --> 00:16:12,240
बोलोगे कि ऐसे वैसे तो मैं अगर मैं इसको और पूरा कर दूं और अगर आप ये कहते हो

242
00:16:12,240 --> 00:16:16,240
कि भैया प्रूव कैसे होगा तो मैं प्रूफ की बात बता दूं। हमारे लिए जो प्रूव होता है इसी

243
00:16:16,240 --> 00:16:20,240
पे रहो। मैं आपसे रिक्वेस्ट कर रहा हूं। आप इसी पे रहो। मैं आपसे रिक्वेस्ट कर रहा हूं। आप इसी पे

244
00:16:20,240 --> 00:16:24,320
रहो। किस पे? जो अभी जो लक्षण पर बात चल रही है

245
00:16:24,320 --> 00:16:28,960
ना फिलहाल इस जो आप मैथमेटिक्स वग उधर जा रहे हो उससे आ चुके

246
00:16:28,960 --> 00:16:33,280
मैं उस बात को पूरी कर रहा हूं मैं उस बात को मैं उस बात को पूरी मैं उस बात को

247
00:16:33,280 --> 00:16:37,520
मैं उस बात को पूरी कर रहा हूं वो मैथमेटिक्स ही छोड़ दो कोई भी ऐसी लॉजिकल

248
00:16:37,520 --> 00:16:41,600
फैलेसी कि बंदा के पुत्र हो सकता है ये जो इस तरह

249
00:16:41,600 --> 00:16:46,800
की जो चीजें हैं जो घटित नहीं हो सकती व्यवहार

250
00:16:46,800 --> 00:16:51,120
कौन सी लॉजिकल फैलेसी है ये कह रहा हूं कौन अरे भाई जो जो

251
00:16:51,120 --> 00:16:55,120
कार्य जो कार्य हो ही नहीं सकता। कुल मिलाकर के कहने का मतलब

252
00:16:55,120 --> 00:16:59,280
यह है। अब बात यह है कि वो क्यों नाम है पूरी लिस्ट है। तो उनमें से

253
00:16:59,280 --> 00:17:03,360
अब वो कार्य थोड़ा सा मुझे बता दीजिए। अब वो कार्य क्यों नहीं हो सकता? मैं वो बता रहा हूं।

254
00:17:03,360 --> 00:17:07,440
वो कार्य कैसे हो सकता है? क्यों नहीं हो सकता है कि संबंध

255
00:17:07,440 --> 00:17:11,360
में बात ये है कि हमको किसी ने बताया है कि वध्या कौन

256
00:17:11,360 --> 00:17:15,440
छोड़ दीजिए। मैं चाहता हूं टॉपिक पे रहे ताकि हमारी बात थोड़ी जल्दी हो। वही टॉपिक को ही तो पूरा

257
00:17:15,440 --> 00:17:19,520
कर रहा हूं क्योंकि आप उसमें फंस रहे हो तो आप दूसरी बात करोगे। देखो

258
00:17:19,520 --> 00:17:23,600
मैं फंस रहा हूं ना। चलो कोई बात नहीं मैं मैं स्वीकार कर लूंगा मैं फंस रहा हूं ना चलो कोई बात नहीं मैं मैं स्वीकार कर लूंगा

259
00:17:23,600 --> 00:17:27,600
मैं फंस रहा हूं ना चलो कोई बात नहीं मैं मैं स्वीकार कर लूंगा मैं फंस रहा हूं ना चलो कोई बात नहीं मैं मैं स्वीकार कर लूंगा मैं

260
00:17:27,600 --> 00:17:31,680
फंस रहा हूं लेकिन मैं ये चाहता हूं आप विषय पे रहो ठीक है तो विषय तो है आपने पूछा

261
00:17:31,680 --> 00:17:35,360
आपने पूछा कि मुझे तो मैथमेटिकली प्रूफ करके दिखाओ तो मैं उस बात का जवाब

262
00:17:35,360 --> 00:17:39,360
दे रहा हूं अभी मैंने आपसे ये पूछा अभी नहीं पूछा पहले

263
00:17:39,360 --> 00:17:43,360
तो पूछा था ना तो पहले वहां पे क्लियर बढ़ चुके है ना वहां पे आगे

264
00:17:43,360 --> 00:17:47,440
कैसे बढ़ गए वहां बीच में कूदने कूदने की बात आ गई आगे क्यों बढ़ गए आपने पूछा था मुझे

265
00:17:47,440 --> 00:17:51,600
तो मैथमेटिकली बताओ मैं उसका जवाब दे रहा हूं सुनिए सुनिए मेरी

266
00:17:51,600 --> 00:17:55,600
बात सुनिए वो विषय से बहुत संबंधित नहीं है। ठीक है सुनिए मेरी बात सुनिए वो

267
00:17:55,600 --> 00:17:59,760
विषय से बहुत संबंधित नहीं है। सुनिए मेरी बात सुनिए वो विषय से कल बहुत

268
00:17:59,760 --> 00:18:03,840
संबंधित नहीं है। ठीक है हमारी बात काफी बढ़ चुकी है। अब आप मुख्य विषय आना नहीं चाहते हो तो आप

269
00:18:03,840 --> 00:18:07,920
इधर उधर आपको जो है यहां पे क्योंकि आपको ऐसा लग रहा है कि यहां जो

270
00:18:07,920 --> 00:18:12,160
है इनका सिद्धांत सिद्ध हो जाएगा। इसलिए उस बात को मुझे बोलने नहीं देना चाहते हो। भैया विषय

271
00:18:12,160 --> 00:18:16,640
पर आ जाओ। विषय पर लक्षण पे बात कर रहे थे। लक्षण पे आ जाओ।

272
00:18:16,640 --> 00:18:20,640
इधर उधर का क्या बात ये हो रही थी कि मैथमेटिकली बात ये हो रही थी कि

273
00:18:20,640 --> 00:18:24,960
मुझे तो मैथमेटिकली प्रूव करके दिखाओ। मैं आपको बता रहा हूं वो बात उसको सुनो।

274
00:18:24,960 --> 00:18:27,920
टाइम ले लो। सुनो आप टाइम ले लो। जितना आपको टाइम लेना है एक

275
00:18:27,920 --> 00:18:32,400
बार आप बोल दो। उसके बाद जहां से मैंने बात शुरू किया था ना मैं वापस लक्षण पे आ जाऊंगा। ठीक है? क्यों भाई

276
00:18:32,400 --> 00:18:34,480
आपको जो मैं दूंगा इसको काटना पड़ेगा

277
00:18:34,480 --> 00:18:38,480
ना आपको जो मैं दूंगा। आप वहां क्यों जाओगे पीछे? क्योंकि

278
00:18:38,480 --> 00:18:42,720
बात क्लियर होने वाली है निर्भय। मेरी बात समझिए। यहां पे बात क्लियर होने वाली है। इसलिए

279
00:18:42,720 --> 00:18:46,720
मैं कह रहा हूं इसको मत छोड़ो। आप सही जगह आ गए हो। क्यों जा रहे हो तुम दोबारा पीछे

280
00:18:46,720 --> 00:18:50,720
मैं बता देता हूं क्यों जाऊंगा मैं बता देता हूं क्योंकि अभी हमारा पहला क्लियर

281
00:18:50,720 --> 00:18:54,720
हुआ धारणा का दूसरा हमारा अर्थ था इसमें अवतार के लक्षण पे अब

282
00:18:54,720 --> 00:18:58,880
मैं आपसे मैथमेटिकल वाला जो बोला गलत बोला मैं बोल

283
00:18:58,880 --> 00:19:03,200
दूं पूरा बोल दूं या बीच में फिर आप बीच में इंटरप्ट करोगे ठीक है

284
00:19:03,200 --> 00:19:07,200
बात ये है कि अब अब मैंने ये पूछा कि भैया इसका लक्षण क्या

285
00:19:07,200 --> 00:19:11,200
है तो आपने बोल दिया कि सर्वशक्तिमान अब मैं सर्वशक्तिमान पे आपसे जा रहा हूं कि

286
00:19:11,200 --> 00:19:15,360
ठीक है इसको समझना कि अच्छा सर्वशक्तिमान है यानी अगर राम जी अवतार हैं

287
00:19:15,360 --> 00:19:19,360
तो उनमें सर्वशक्तिमत्ता दिखनी चाहिए। कोई भी कार्य करते हुए बाधित नहीं

288
00:19:19,360 --> 00:19:23,360
होने चाहिए वो। ठीक है? अब हम उस विषय पर हैं। अब

289
00:19:23,360 --> 00:19:27,440
इसके बाद हम डायरेक्ट जाएंगे हेतु की ओर कि आप जो ईश्वर का अवतार ले रहे हो शरीर

290
00:19:27,440 --> 00:19:31,600
धारण करना उसका हेतु क्या है? हम उसकी तरफ जाएंगे डायरेक्ट सिद्धि की ओर। ठीक है? अब इसके अंदर

291
00:19:31,600 --> 00:19:36,240
हम ये तो सीक्वेंस बहुत सही चल रहा है। इसमें कोई इशू नहीं है। अब आप बीच में मैथमेटिक्स

292
00:19:36,240 --> 00:19:40,480
में ऐसे परिवर्तन कर सकता है। दिमाग में भ्रम डाल सकता है इत्यादि इत्यादि बात है। ठीक है? उसमें कोई इशू

293
00:19:40,480 --> 00:19:44,560
नहीं है। तो बात ये है कि उधर उधर वो कब आएगा? वो इशू कब आएगा? वो

294
00:19:44,560 --> 00:19:48,720
पॉइंट कब आएगा? समझो चीज़। जब हम बात करेंगे एक्सैक्ट सिद्धि पर। ठीक है? जब

295
00:19:48,720 --> 00:19:49,520
हम बात करेंगे जब मैं

296
00:19:49,520 --> 00:19:53,680
आपको बोलूंगा ना आप सिद्धि करो। उस सिद्धि में अगर आप वो पॉइंट रखोगे तो ज्यादा बेटर है। वो उसका टेली

297
00:19:53,680 --> 00:19:57,680
करेगा। अभी हम बात कर रहे हैं। आपने बोल लिया। मैं बोल रहा हूं। मैं

298
00:19:57,680 --> 00:20:01,680
बोल रहा हूं। ठीक है। अब इसमें स्पष्ट इतना ही है कि अगर आपने ये

299
00:20:01,680 --> 00:20:05,760
मान लिया कि एक मात्र आपने ये मान लिया कि सर्वसक्तिमान है। ठीक है? इसमें मेरे को एक और बता

300
00:20:05,760 --> 00:20:09,840
दो कि अगर वो सर्वशक्तिमान है तो यानी राम जी या कृष्ण जी कोई भी कार्य

301
00:20:09,840 --> 00:20:13,840
करते हुए उनको बाधा नहीं आनी चाहिए। ठीक है? एक पॉइंट सही हो गया। दूसरा पॉइंट

302
00:20:13,840 --> 00:20:17,840
ये है कि अच्छा मैं आपसे सामने से ये पूछ रहा हूं कि क्या जो अवतार होता है ईश्वर

303
00:20:17,840 --> 00:20:22,320
का वो सर्वज्य भी होता है या नहीं होता? बिल्कुल होता है।

304
00:20:22,320 --> 00:20:26,400
ठीक है। यानी उसकी सर्व अल्पज्जता कहीं भी प्रकट नहीं होनी चाहिए। यानी ऐसा कुछ भाई वो

305
00:20:26,400 --> 00:20:30,400
सर्वशक्तिमान तभी हो पाएगा जब वो सर्वज्ञ भी हो। ठीक है? ये

306
00:20:30,400 --> 00:20:34,560
सब चीजें आपस में अलग-अलग नहीं हो सकती ना। और जैसे एक बात हुई थी जैसे

307
00:20:34,560 --> 00:20:38,640
एक बात हुई थी कि जो श्री राम है श्री राम के रूप में ईश्वर

308
00:20:38,640 --> 00:20:42,720
ऐसा कर सकता है पूरा धर्म कर सकता है तो उसका जवाब यही है कि श्री राम के रूप

309
00:20:42,720 --> 00:20:46,800
में जब ईश्वर ऐसा कुछ करता है तो वो श्री राम के रूप में ही कर रहा है

310
00:20:46,800 --> 00:20:50,880
मगर उसको हम श्री राम स्वीकार नहीं करेंगे क्योंकि शब्द प्रमाण उसमें साथ में

311
00:20:50,880 --> 00:20:55,040
नहीं है शब्द प्रमाण ने कहा है अगर ऐसा ऐसा हो तो वो राम है ऐसा वैसा

312
00:20:55,040 --> 00:20:59,200
हो तो वो कृष्ण है शब्द प्रमाण उसमें साथ में सपोर्ट नहीं करेगा जैसे कि फॉर

313
00:20:59,200 --> 00:21:04,000
एग्जांपल बता दूं दर्शकों के लिए आवश्यक है ये बात दर्शकों के लिए आवश्यक है

314
00:21:04,000 --> 00:21:04,960
जैसे

315
00:21:04,960 --> 00:21:08,960
काम कर सकते हो कि जैसे ना उसमें आप बोल सकते हो वाला

316
00:21:08,960 --> 00:21:14,000
पॉइंट वो बात रह जाएगी ना एक मिनट लगेगा हनुमान जी

317
00:21:14,000 --> 00:21:18,160
ब्रह्मचारी है शब्द प्रमाण के अनुसार अब भैया क्या ईश्वर

318
00:21:18,160 --> 00:21:22,480
क्या हनुमान जी के रूप में ईश्वर विवाह कर सकता है तो हमारा जो

319
00:21:22,480 --> 00:21:26,480
हमारा जो कांसेप्ट है उसमें भगवान ने जब विराट स्वरूप लिया तो उन्होंने

320
00:21:26,480 --> 00:21:30,720
उसका जो विराट स्वरूप था तो उन्होंने अपने कई रूप दिखाए तो उसमें से एक रूप हनुमान जी का भी था

321
00:21:30,720 --> 00:21:35,040
यानी कि हनुमान जी ने कृष्ण के रूप में विवाह भी किए। ठीक है? मगर हमने

322
00:21:35,040 --> 00:21:39,120
उस रूप को हनुमान जी नहीं माना क्योंकि शब्द प्रमाण वहां सपोर्ट में नहीं है। तो ये

323
00:21:39,120 --> 00:21:43,120
बात मैं क्लियर करना था। अब आप बताइए अपनी बात। ठीक है।

324
00:21:43,120 --> 00:21:45,120
ठीक है। अब इसमें बात ये आती है

325
00:21:45,120 --> 00:21:49,600
कि अब हमें लक्षण जो है वो स्पष्ट हो चुके हैं कि यानी कहीं पर भी ईश्वर की अल्पता

326
00:21:49,600 --> 00:21:53,760
नहीं दिखनी चाहिए। कहीं पर भी उसके सर्वशक्तिता में बाधा नहीं आनी चाहिए। ठीक है? उसकी अपनी

327
00:21:53,760 --> 00:21:57,840
मर्यादा दिखनी चाहिए। नहीं दिखनी चाहिए। नहीं दिखनी चाहिए वो

328
00:21:57,840 --> 00:22:02,560
अलग बात है। होना नहीं चाहिए। होता है कि नहीं

329
00:22:02,560 --> 00:22:06,560
हुआ दिखने को तो कुछ भी दिख सकता है वो अच्छा कुछ भी दिख सकता है तो

330
00:22:06,560 --> 00:22:11,040
वो चीज हुई या नहीं हुई कैसे पता चलेगा शब्द प्रमाण

331
00:22:11,040 --> 00:22:15,040
शब्द प्रमाण से नहीं जैसे मैं ये अच्छा शब्द प्रमाण जैसे राम जी ने जीवन में क्या-क्या किया

332
00:22:15,040 --> 00:22:19,040
वो तो हमें शब्द प्रमाण से पता चलेगा ठीक है मैं ये कह रहा हूं जैसे राम

333
00:22:19,040 --> 00:22:23,040
जी जैसे राम जी नित बात थोड़ी सी हां बताइए

334
00:22:23,040 --> 00:22:27,120
थोड़ी सी बात बताइए बताइए जैसे राम राम जी ने राम जी के जीवन में क्या-क्या घटा वो

335
00:22:27,120 --> 00:22:31,120
हमें उनके शब्द प्रमाण रामायण से पता है ठीक है तो पॉइंट इसके अंदर यह है कि अगर

336
00:22:31,120 --> 00:22:35,200
उसी में वहीं पर लिखा हुआ है कि राम जी को नहीं पता था कि सीता जी कहां है। राम जी

337
00:22:35,200 --> 00:22:39,280
असहाय हो गए इत्यादि इत्यादि बातें राम जी पहचान नहीं पाएंगे कि सुग्रीव और बाली कौन इत्यादि इत्यादि बातें

338
00:22:39,280 --> 00:22:43,600
जो हमें सर्वजता में बाधा नजर आती है। तो क्या हम एट दैट केस

339
00:22:43,600 --> 00:22:47,680
पॉइंट ये है कि आप तो कह रहे हो कि ये वही राम जी और ईश्वर के अवतार हैं। लेकिन

340
00:22:47,680 --> 00:22:51,680
जो लक्षण बताएं वो मैच नहीं कर रहे हैं। उस केस में क्या होगा? हम उन्हें

341
00:22:51,680 --> 00:22:56,000
अवतार मानेंगे या नहीं मानेंगे? इसका थोड़ा सा स्पष्टीकरण दे दीजिए। मैं स्पष्टीकरण

342
00:22:56,000 --> 00:23:00,640
देता हूं। मगर मैं बात अपनी पीछे से शुरू करूंगा। जहां पर मैथमेटिकल

343
00:23:00,640 --> 00:23:04,880
वाली बात आ रही थी तो मैथमेटिक वाली बात ऐसी है

344
00:23:04,880 --> 00:23:09,200
कि दो और दो पांच नहीं होते हैं। ये हमने जाना है।

345
00:23:09,200 --> 00:23:13,200
किसी ने हमको इंफॉर्मेशन दी है। और अगर एट दी एंड चले जाए तो वो

346
00:23:13,200 --> 00:23:17,200
इंफॉर्मेशन हमको ईश्वर से ही आ रही है। अगर कोई हमारा व्यवहार में

347
00:23:17,200 --> 00:23:21,520
कोई टीचर है, कोई हमारे परिजन है, हमारे जो है अभिभावक

348
00:23:21,520 --> 00:23:25,520
है वो हमको इंफॉर्मेशन देते हैं। दो और दो चार होते हैं। उसको चार कहा जाता है

349
00:23:25,520 --> 00:23:29,760
या इतना इतना ऐसेसे गिना जाता है। कुछ भी कांसेप्ट हो वो कांसेप्ट हमको हमारा

350
00:23:29,760 --> 00:23:33,920
कोई ना कोई गुरु देता है जो शिक्षा गुरु जिसे हम कह सकते हैं। अगर गुरु ना

351
00:23:33,920 --> 00:23:38,000
भी दे तो भाई वो जो कांसेप्ट है हो सकता है अंदर से ही उद्भाषित हो जाए।

352
00:23:38,000 --> 00:23:42,080
कई लोग भाई सिद्ध जन्म ले सकते हैं तो अंदर से हो जाए। तो उसमें कुल

353
00:23:42,080 --> 00:23:46,160
मिलाकर के बात है कि वो इंफॉर्मेशन आ रही होती है ईश्वर से। तो

354
00:23:46,160 --> 00:23:50,240
ईश्वर अगर चाहे तो हमारी उस इंफॉर्मेशन को बदल सकता

355
00:23:50,240 --> 00:23:54,240
है कि भैया ऐसे से ऐसे चार होते नहीं अब उसने इंफॉर्मेशन

356
00:23:54,240 --> 00:23:58,560
बदल दी और अब वो ऐसे से ऐसे पांच होते अब दिक्कत ये आती है

357
00:23:58,560 --> 00:24:02,720
कि रियल में तो ऐसा हुआ नहीं है रियल में तो ईश्वर ने कासेप्ट

358
00:24:02,720 --> 00:24:06,880
जो कासेप्ट के अनुसार तो ये सब किया नहीं है उसने तो अपना जो अविद्या के अविद्या

359
00:24:06,880 --> 00:24:10,960
शक्ति के कारण हमको मगर बात ये है कि उसको सिद्ध कैसे करोगे क्योंकि हमें

360
00:24:10,960 --> 00:24:11,460
कोई

361
00:24:11,120 --> 00:24:15,200
ना गवाह मिलेगा ना शब्द प्रमाण मिलेगा अच्छा अब बात आती है रियल वो वो

362
00:24:15,200 --> 00:24:19,280
रियल दुनिया हमने जानी कैसे? वो रियल दुनिया है या एक्सिस्ट

363
00:24:19,280 --> 00:24:23,280
करती है ये कैसे पता चलेगा? हमने तो तुम्हारे मुंह से कहलवा दिया कि दो और दो

364
00:24:23,280 --> 00:24:27,360
पांच होते हैं। हमने तो सबके मुंह से दुनिया के एक एक व्यक्ति के मुंह से कहलवा

365
00:24:27,360 --> 00:24:31,680
दिया कि दो और दो पांच होते हैं। अब भैया ये बेवकूफ बनाया गया है।

366
00:24:31,680 --> 00:24:35,840
ये सिद्ध कैसे होगा? तो सिद्ध करने के लिए पहले

367
00:24:35,840 --> 00:24:40,000
हमको किसी को ईश्वर मानना पड़ेगा। परमार्थ तब पहुंचेंगे। वो वाला बात

368
00:24:40,000 --> 00:24:44,400
है। और दूसरी बात यह है कि उसका साक्षी कौन हुआ? अगर किसी ने बेवकूफ बनाया

369
00:24:44,400 --> 00:24:48,400
तो बात यही है कि ईश्वर हमको ऐसी ही चीजें दिखा रहा है

370
00:24:48,400 --> 00:24:52,560
ऑलरेडी जो रियल नहीं है तो वो एक चीज और दिखा देगा। अगर सर्व

371
00:24:52,560 --> 00:24:56,560
व्यक्ति मत्ता की बात में ऐसी चीजों से बाधा आ रही है। अब दूसरी बात

372
00:24:56,560 --> 00:25:00,560
आपने कहा कि जो शब्द प्रमाण है वो अब कुल

373
00:25:00,560 --> 00:25:04,800
मिलाकर के अब बात आ गई शब्द प्रमाण में कि भाई वो जो उसमें सर्वजता

374
00:25:04,800 --> 00:25:09,120
भी लिखा हुआ है और ये भी लिखा हुआ है। लक्षण पे बात है। हां वो

375
00:25:09,120 --> 00:25:13,200
लक्षण जो है शब्द प्रमाण से कट रहे हैं ना। उस पर आ गई ये बात मतलब उसमें

376
00:25:13,200 --> 00:25:17,200
उसमें विरोध हो रहा है। हां शब्द उसमें आप ही ने

377
00:25:17,200 --> 00:25:21,200
तो कहा आप ही ने तो कहा कि भाई वही वहीं पे लिखा है कि वो

378
00:25:21,200 --> 00:25:25,360
रो रहे थे या वो सर्वजता में बाधा आ रही है ये सब आपने

379
00:25:25,360 --> 00:25:26,400
कहा ना तो शब्द प्रमाण

380
00:25:26,400 --> 00:25:30,560
से दिक्कत आ रही है ना कि जिन शब्द प्रमाणों से हमको

381
00:25:30,560 --> 00:25:34,800
जिन शब्द प्रमाणों से जिन शब्द प्रमाणों से

382
00:25:34,800 --> 00:25:38,800
हमें ये पता चल रहा है कि भैया राम जी सर्वशक्तिमान है उन्हीं शब्द प्रमाणों

383
00:25:38,800 --> 00:25:43,440
से हमें राम जी के सर्वशक्तिमान होने में बाधा दिखाई दे रही है। यही बात है ना

384
00:25:43,440 --> 00:25:44,720
हम

385
00:25:44,720 --> 00:25:48,800
यही कारण है ना जिस जिसके कारण रावण नहीं समझ

386
00:25:48,800 --> 00:25:52,800
पाया कि वह अवतार हैं। जिसके कारण कंस नहीं समझ पाया कि वह भगवान

387
00:25:52,800 --> 00:25:57,040
ही है। जिसके कारण उस समय के जो लोग थे उनकी ही समय धारा में वो

388
00:25:57,040 --> 00:26:01,200
तुरंत उनको देखते ही मुक्त नहीं हो पाए। क्योंकि उन्होंने उनको भगवान माना

389
00:26:01,200 --> 00:26:05,600
ही नहीं। भगवत गीता में भी भगवान ने कहा कि जो लोग मनुष्य देह में देख के

390
00:26:05,600 --> 00:26:09,600
मनुष्य देह में देख के मेरे ब्रह्म भाव को नहीं ध्यान नहीं जान पा रहे

391
00:26:09,600 --> 00:26:13,760
हैं वो मूर्ख लोग हैं। मगर जब उनके बारे

392
00:26:13,760 --> 00:26:17,840
में हमको दिव्य दृष्टि से बातें पता चली दिव्य दृष्टि के द्वारा

393
00:26:17,840 --> 00:26:21,840
फिर गुरु परंपरा के द्वारा हमको पता चली तो हमें पता चला कि हां ये अवतार

394
00:26:21,840 --> 00:26:25,920
हैं। ये अवतार ही थे जो भगवान के आए थे। और उस समय भी

395
00:26:25,920 --> 00:26:30,000
जो दिव्य दृष्टि रखते थे उनकी समय धारा में उन्होंने उनको अवतार

396
00:26:30,000 --> 00:26:34,000
माना। वो जानते हैं वहां पर ये जानते हैं कि यह सर्वज्ञ हैं। उनको सब

397
00:26:34,000 --> 00:26:38,000
वो शब्द प्रमाण से नहीं अपनी दिव्य दृष्टि से जानते हैं। ये शब्द प्रमाण से ही

398
00:26:38,000 --> 00:26:42,000
हमें पता चलता है कि वो है तो नित्य शुद्ध बुद्ध मुक्त

399
00:26:42,000 --> 00:26:46,240
मगर वो ये जो है रोल कर रहे हैं लीला कर रहे हैं। वो उनहीं शब्द प्रमाण

400
00:26:46,240 --> 00:26:50,480
बात को क्लियर करते हैं। उसको वो क्लियर करते हैं। यानी कि वो मुक्त

401
00:26:50,480 --> 00:26:54,560
होते हुए भी ऐसा दिखाते हैं कि मैं मुक्त नहीं हूं। जिससे कि आप

402
00:26:54,560 --> 00:26:58,720
उनके साथ ज्यादा कनेक्ट हो पाओ। इसमें एक पॉइंट है। इसमें छोटा सा पॉइंट

403
00:26:58,720 --> 00:27:00,000
यह है कि इसमें

404
00:27:00,000 --> 00:27:04,560
लक्षण वाली बात कट गई ना कैसे कट गई मैं समझा देता हूं थोड़ा सा। जैसे समझिए

405
00:27:04,560 --> 00:27:09,040
जैसे आपने बोला कि अवतार का लक्षण है कि वो सर्वज्य है।

406
00:27:09,040 --> 00:27:13,040
सर्वशक्तिमान है। लेकिन जब हम अवतार की जीवनी देख रहे

407
00:27:13,040 --> 00:27:17,040
हैं। उसकी जीवनी में हमें सर्वजता नजर नहीं आती। सर्वशक्तिमत्ता नजर

408
00:27:17,040 --> 00:27:21,840
नहीं आती। ठीक है? यानी उसका लक्षण घट नहीं रहा है। नजर आती है।

409
00:27:21,840 --> 00:27:26,000
आती है। पूरा पूरा बोल देता हूं। पूरा बोल दो। पूरा बोल देता हूं। पूरा बोलता हूं। अब उसमें

410
00:27:26,000 --> 00:27:30,160
पॉइंट ये आ जाता है कि जब हम जिस पॉइंट पे पकड़ लेते हैं कि नहीं यहां पे तो देखिए

411
00:27:30,160 --> 00:27:34,240
यहां पे तो सर्वजिता नजर नहीं आई। यहां पे तो अल्पजता आई तो उस केस में

412
00:27:34,240 --> 00:27:38,240
आप कहते हो कि नहीं यहां पर ये जानबूझ के अपनी अल्पजिता प्रकट

413
00:27:38,240 --> 00:27:42,240
कर रहे हैं। यानी ठीक है उस उस केस में तो यानी उसी केस

414
00:27:42,240 --> 00:27:46,320
में कह रहा हूं कि उस एक पॉइंट पे उनका जो लक्षण है जिससे वो वो

415
00:27:46,320 --> 00:27:50,400
उनका अवतार होना सिद्ध हो रहा है। ठीक है? क्योंकि फिलहाल हम जो मैंने ये किया

416
00:27:50,400 --> 00:27:54,800
ना वो हम इस पे नहीं कह रहे। हम शब्द प्रमाण पे बात नहीं कर रहे हैं कि रामायण में या रामचरितमानस

417
00:27:54,800 --> 00:27:58,880
में लिखा है कि राम जी अवतार है। अभी हम उसको मान नहीं रहे हैं। शब्द प्रमाण पे नहीं है हम। ठीक है? अभी वो साध्य

418
00:27:58,880 --> 00:28:02,880
कोटि का बात है। सिद्ध कोटि की बात नहीं है। पॉइंट इसके अंदर ये है कि

419
00:28:02,880 --> 00:28:06,960
अगर वहां पे एक पॉइंट में उनकी जीवनी में कहीं ना कहीं पे ये आ गया कि फलाना चीज के

420
00:28:06,960 --> 00:28:11,040
बारे में ना नॉलेज उन्हें नहीं पता था कि सुग्रीव और बाली में से कौन है? इन दोनों में से दो आपस

421
00:28:11,040 --> 00:28:15,200
में लड़ रहे हैं। इनमें से बाली कौन है? उनको नहीं पता। तो वहां पे जो उनको उनकी

422
00:28:15,200 --> 00:28:19,280
जो अल्पजिता वहां पे प्रकट हो रही है। ठीक है? उस केस में आप कह रहे हो कि नहीं ये

423
00:28:19,280 --> 00:28:23,440
जानबूझ करके वहां पर अल्पजता प्रकट कर रहे हैं। यानी अगर आप जानबूझ के भी बोलो

424
00:28:23,440 --> 00:28:27,520
ठीक है उस केस में ये होगा कि वहां पे उस केस में ये हो रहा है कि

425
00:28:27,520 --> 00:28:31,760
उनका लक्षण तो प्रकट हो नहीं रहा अवतार का तो वहां पे तो वो अवतार

426
00:28:31,760 --> 00:28:36,000
नहीं है ये सिद्ध हो रहा है ना लक्षणों से शब्द प्रमाण से नहीं शब्द

427
00:28:36,000 --> 00:28:40,320
प्रमाण में तो चलो लिखा है वो हम मान नहीं रहे नहीं मान रहे अलग विषय है उसप मैं नहीं जा रहा हूं

428
00:28:40,320 --> 00:28:44,320
लेकिन जब हम लक्षणों की बात लक्षणों से ये सिद्ध हो रहा है कि वो नहीं है ये है मेरा पॉइंट

429
00:28:44,320 --> 00:28:48,560
इसको थोड़ा सा इबोरेट कर दीजिए जरा जैसे कि जैसे कि

430
00:28:48,560 --> 00:28:52,560
अगर ईश्वर सर्व व्यापक है तो सब जगह ईश्वर है और दुनिया

431
00:28:52,560 --> 00:28:56,800
में सारी दुनिया सारे स्वर ईश्वर के ही है। ईश्वर

432
00:28:56,800 --> 00:29:00,880
कहीं से भी कहीं किसी से अलग नहीं है। तो ऐसे में हमने

433
00:29:00,880 --> 00:29:05,520
केवल एक प्रणव को ही उसका दतक क्यों माना? प्रणव

434
00:29:05,520 --> 00:29:10,240
को ही उसका वो क्यों माना? प्रतीकात्मक तो इसका निर्णय आएगा

435
00:29:10,240 --> 00:29:14,480
कि गूंगा भी बोल सकता है। वो तो एक अलग चीज हो गई।

436
00:29:14,480 --> 00:29:20,080
मगर यह कोई सिद्धांत थोड़ी ना

437
00:29:20,080 --> 00:29:24,080
कोई अगर कोई अगर कोई अगर कोई

438
00:29:24,080 --> 00:29:28,080
और ऐसा शब्द हुआ जो बोल सकता हो तो बोल सकते हैं

439
00:29:28,080 --> 00:29:32,160
अथो इति शब्द भी तो ईश्वर का है अथ भी तो इसी का है ईश्वर का ही है ना

440
00:29:32,160 --> 00:29:36,240
वेदों में आया क्यों नहीं आया उपनिषदों में अगर और वेदों में आया क्यों नहीं आया उपनिषदों

441
00:29:36,240 --> 00:29:40,400
में अगर और वेदों में आया क्यों नहीं आया उपनिषदों में अगर और अगर और

442
00:29:40,400 --> 00:29:44,480
कोई शब्द होगा जो गूंगा भी बोल सकता होगा तो उसको भी ईश्वर ईश्वर का वो

443
00:29:44,480 --> 00:29:48,560
मान लोगे क्या उसको प्रणव की जगह अरे शंकर भाष में मानो क्या बात

444
00:29:48,560 --> 00:29:53,040
कर रहे हो आप मैं वो नहीं कह रहा हूं मैं कह रहा हूं अगर केवल इस तर्क से हम मानेंगे

445
00:29:53,040 --> 00:29:57,600
कि भैया वो गूंगा भी बोल सकता है इसलिए वो ईश्वर का देवता है उससे ईश्वर को वो

446
00:29:57,600 --> 00:30:01,680
वो लीजिए तो फिर हमें वहां पर ये जो भी शब्द गूंगा बोल सकता होगा

447
00:30:01,680 --> 00:30:05,760
जो भी ध्वनिया वो कर सकता होगा उसको भी अपनी पूजा में लेना पड़ेगा मगर वहां

448
00:30:05,760 --> 00:30:09,760
पर शब्द प्रमाण वहां पर हमारा शब्द प्रमाण मैं

449
00:30:09,760 --> 00:30:13,920
बात पूरी कर शब्द की बात नहीं है आपने ये बोला कि ओम को इतना ेंस

450
00:30:13,920 --> 00:30:18,080
क्यों दिया तो वो बात है वहां जोगी शब्द की बात नहीं है नहीं बात मैं बता

451
00:30:18,080 --> 00:30:22,240
रहा हूं आपने उसको तर्क दिया ना उसके पक्ष में उदाहरण के रूप में

452
00:30:22,240 --> 00:30:26,240
आपने आपने प्रणव के पक्ष आपने प्रणव के

453
00:30:26,240 --> 00:30:30,320
अरे भाई मेरी बात तो पूरी हुई नहीं आपने प्रणव के पक्ष में एक

454
00:30:30,320 --> 00:30:34,640
तर्क दिया है क्योंकि उसको गूंगा भी बोल सकता है तो मैंने उसको बताया

455
00:30:34,640 --> 00:30:35,200
कि गूंगा

456
00:30:35,200 --> 00:30:39,280
और भी ध्वनिया निकाल सकता है फिर प्रणव ही क्यों तो उसके

457
00:30:39,280 --> 00:30:43,360
बारे में यही है कि उसमें शब्द प्रमाण है तो फिर रामपाल के बगल में

458
00:30:43,360 --> 00:30:47,440
श्री राम जी खड़े हैं। इसमें से कौन सा ईश्वर का अवतार है? कौन सा नहीं है।

459
00:30:47,440 --> 00:30:51,680
तो इसके लिए शब्द प्रमाण जैसे आपने कहा आपको लक्षण नहीं दिख रहे

460
00:30:51,680 --> 00:30:55,760
तो ऐसा भी हो सकता है कि आप अंधे हो।

461
00:30:55,760 --> 00:30:59,840
अगर हम कहे कि ईश्वर चिल्ला के दिखाया। ऐसा भी हो सकता है कि हम बह रहे

462
00:30:59,840 --> 00:31:03,920
हो। तो हमें वहां पर शब्द प्रमाण से यह पता चल रहा है ना कि

463
00:31:03,920 --> 00:31:07,920
वो रोल कर रहे थे। अगर हमको विश्वास नहीं शब्द प्रमाण में

464
00:31:07,920 --> 00:31:11,920
तो बात अलग है। मगर जब हमको शब्द प्रमाण से पता चल रहा है कि वो वहां पर रोल कर

465
00:31:11,920 --> 00:31:16,080
रहे थे। वास्तविकता में सर्वज्ञ ही थे। वो वहां पर दुखी होने

466
00:31:16,080 --> 00:31:20,080
का रोल कर रहे थे। वास्तविकता में वो आनंदित ही थे। वास्तविकता में

467
00:31:20,080 --> 00:31:24,240
वो सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रह्म का व्यवहारिक रूप ही थे। तो हम

468
00:31:24,240 --> 00:31:28,480
हम उस पर विश्वास कर लेते हैं। आप मत करो। आप ये मत मानो कि ये वाला ही अवतार

469
00:31:28,480 --> 00:31:31,040
है। ये वाला नहीं है। आप ये कहना तो शुरू करो कि अवतार ले सकता

470
00:31:31,040 --> 00:31:35,760
है ईश्वर। आप यह तो कहो अब आप यह बताइए

471
00:31:35,760 --> 00:31:40,960
ईश्वर को एक रस मानते हैं कि नहीं? एक रस

472
00:31:40,960 --> 00:31:45,120
मानते कहीं भी ना ज्यादा है ना कम है। ठीक

473
00:31:45,120 --> 00:31:48,240
है?

474
00:31:48,240 --> 00:31:52,320
ना पूरा बोलिए। तो अब बात ये है कि जो

475
00:31:52,320 --> 00:31:56,320
एक रस ईश्वर है जैसे मान लीजिए मेरे सामने यहां

476
00:31:56,320 --> 00:32:00,720
टेबल है जिसप रख के इस ट्राईपॉड को मैं आपसे बात कर रहा हूं। ठीक है?

477
00:32:00,720 --> 00:32:05,040
इस पर कई सारे डब्बे रखे हुए हैं। कई

478
00:32:05,040 --> 00:32:09,040
सारे डब्बे इस पर रखे हुए हैं। कोई बड़े हैं, कोई छोटे हैं और कहीं-कहीं पर है ही

479
00:32:09,040 --> 00:32:13,040
नहीं। अगर मैं एक रस हूं सब जगह तो जब मैं हरकत

480
00:32:13,040 --> 00:32:17,280
करूंगा तो सारे डब्बे एक साथ नीचे गिरेंगे। इवन

481
00:32:17,280 --> 00:32:21,840
जो खाली जगह है जहां पर डब्बा नहीं भी होगा वहां पे मेरी वो फोर्स लगेगी।

482
00:32:21,840 --> 00:32:26,080
मगर यदि मेरे पास रेगुलेट कर सकने की स्वयं

483
00:32:26,080 --> 00:32:30,240
को शक्ति है कि मैं जहां चाहूं वहां के डब्बे में मेरा धक्का लगे और जहां

484
00:32:30,240 --> 00:32:34,960
चाहूं वहां ना लगे। यदि मेरे पास ये शक्ति है तो

485
00:32:34,960 --> 00:32:38,960
क्या कहते हैं? मैं ऐसा कर सकता हूं कि जिस डब्बे को

486
00:32:38,960 --> 00:32:43,040
मैं गिराना चाहूं वो गिरेगा और जिस डब्बे को गिराना ना चाहूं वो नहीं गिरेगा और

487
00:32:43,040 --> 00:32:46,240
जो खाली जगह है वहां मेरी शक्ति काम ही नहीं करेगी। यह

488
00:32:46,240 --> 00:32:51,520
मेरे पास शक्ति है। मगर प्रॉब्लम क्या है कि शक्ति के रूप में भी मैं ही हूं।

489
00:32:51,520 --> 00:32:55,600
शक्ति के रूप में शक्ति कोई अलग से तो है नहीं भाई। तीन आपने तीन

490
00:32:55,600 --> 00:33:00,240
तत्व माने हैं एक तरीके से जीव, प्रकृति और ब्रह्म।

491
00:33:00,240 --> 00:33:04,240
तीन तत्व माने ना आपने तो शक्ति कोई ब्रह्म की शक्ति तो अलग

492
00:33:04,240 --> 00:33:08,240
से कोई ब्रह्म ही शक्ति के रूप में है। तो जब वो शक्ति के रूप में

493
00:33:08,240 --> 00:33:12,240
अपने आप को कम ज्यादा कर रहा है तो वहां पर उसकी एक रास्ता भंग हो रही है।

494
00:33:12,240 --> 00:33:16,320
तो फिर उसको ईश्वर क्यों कह रहे हैं? कहने का मतलब है अगर आपका ये

495
00:33:16,320 --> 00:33:20,640
सिद्धांत मान लेंगे कि वहां शब्द प्रमाण से हम नहीं पा रहे। तो आप हमको

496
00:33:20,640 --> 00:33:24,640
यह कहना पड़ेगा कि इस ईश्वर की जो जो

497
00:33:24,640 --> 00:33:29,280
सृष्टि रचना है वह ईश्वर ने नहीं की है क्योंकि ईश्वर तो एक रस है

498
00:33:29,280 --> 00:33:33,760
और ईश्वर तो यहां पे कम ज्यादा हो रहा है। पहली बात तो वो सगुण निराकार

499
00:33:33,760 --> 00:33:37,920
जो है वो भी एक अवतार ही है। अगर आप जो है सगुण साकार का अवतार

500
00:33:37,920 --> 00:33:43,920
नहीं मानोगे तो मैं सिद्ध कर दूंगा कि सगुण निराकार का भी अवतार नहीं होता। बताइए

501
00:33:44,400 --> 00:33:49,040
ये अगर जरूरी नहीं तो इसको स्किप करते हैं। मूल विषय पर रहते हैं।

502
00:33:49,040 --> 00:33:53,280
नहीं आपने ये लास्ट में जो बातें बोली है मेरे

503
00:33:53,280 --> 00:33:56,720
अब आपको नहीं करना है उसको तो काउंटर मत करिए।

504
00:33:56,720 --> 00:34:00,720
कुल मिलाकर के मैं एक एंडिंग स्टेटमेंट इस बारे में दे

505
00:34:00,720 --> 00:34:04,720
दूं कि भाई कौन कौन अवतार है कौन नहीं इस विषय

506
00:34:04,720 --> 00:34:08,880
में शब्द ही प्रमाण हो सकता है क्योंकि हम उसको काउंटर नहीं कर सकते क्योंकि कई विषयों में हम

507
00:34:08,880 --> 00:34:12,880
शब्द को ही प्रमाण मान रहे हैं उनके होने के विषय में भी हम इतिहास को ले रहे हैं वो

508
00:34:12,880 --> 00:34:16,880
इतिहास भी एक शब्द प्रमाण है उनका होना एक्सिस्टेंस उनका अस्तित्व

509
00:34:16,880 --> 00:34:21,040
वो भी शब्द प्रमाण से ले रहे हैं तो फिर हम वहां जाके काउंटर नहीं कर सकते जिन शब्द प्रमाणों

510
00:34:21,040 --> 00:34:25,040
से हमको ये मिल रहा है कि वो थे उन्हीं शब्द प्रमाणों से जब हमें ये मिल रहा है कि वो एक्टिंग कर

511
00:34:25,040 --> 00:34:29,120
रहे थे तो हम कह नहीं वो एक्टिंग नहीं कर रहे थे वो तो उनका वहां पे ये हो रहा था। हम आपकी बात नहीं

512
00:34:29,120 --> 00:34:33,200
मान सकते। इसमें पॉइंट यहां पे ये आ जाता है कि हमें दो बातों की क्लेरिटी मिल चुकी है।

513
00:34:33,200 --> 00:34:37,280
पहला ठीक है फ्लोकी जी आप भी है तो थोड़ा ध्यान दीजिएगा इन

514
00:34:37,280 --> 00:34:41,360
विषयों पर। है ना? तो पहली बात तो हमारी इस विषय पे आया था कि अवतार

515
00:34:41,360 --> 00:34:45,360
की धारणा क्या है? तो हमें जो क्लेरिटी वहां से मिली थी वो ये मिली थी कि जैसे

516
00:34:45,360 --> 00:34:49,360
जीव शरीर धारण करता है वैसे ही ईश्वर भी शरीर धारण करता है। लेकिन अंतर

517
00:34:49,360 --> 00:34:53,360
ये होता है कि जीव जो होता है वो बद्ध होता है और जो ईश्वर जो जिस शरीर को धारण करता

518
00:34:53,360 --> 00:34:57,360
है जिसे हम अवतार कहते हैं वो मुक्त होता है। ठीक है? के स्वभाव से वो मुक्त होता है। ये एक पॉइंट आया

519
00:34:57,360 --> 00:35:01,440
था। तो हमें पता चला कि अवतारवाद की धारणा क्या है? अच्छा इसका स्पष्टीकरण हो गया। उसके बाद

520
00:35:01,440 --> 00:35:05,520
पॉइंट ये था कि अवतार का लक्षण क्या है कि अगर मेरे सामने राम जी या रामपाल खड़े हो जाए तो दोनों में से ईश्वर

521
00:35:05,520 --> 00:35:09,520
का अवतार कौन है? कैसे पता चलेगा? तो उसमें पॉइंट ये था कि उसमें सामान्य लोग

522
00:35:09,520 --> 00:35:11,920
नहीं जान सकते कि ये ईश्वर के अवतार हैं।

523
00:35:11,920 --> 00:35:16,160
उसमें जो विशेष दिव्य दृष्टि रखने वाले गुरुजन हैं सिद्ध लोग हैं वही पहचान

524
00:35:16,160 --> 00:35:20,160
सकते हैं कि ये ईश्वर हैं। क्योंकि व्यवहारिक जो लक्षण है वो उसमें

525
00:35:20,160 --> 00:35:24,480
उस टाइप से नहीं होते। है ना? पता नहीं चलते हैं। तो जो

526
00:35:24,480 --> 00:35:28,720
जो उस टाइप का ज्ञानी जो उस टाइप का व्यक्ति है सिद्ध व्यक्ति वो पहचान

527
00:35:28,720 --> 00:35:33,040
करके फिर वो अपने शिष्यों को बताएगा तब शिष्य जान पाएंगे कि हां ये जो है ये राजा

528
00:35:33,040 --> 00:35:37,040
जो है ये अवतार है वास्तव में। है ना? इत्यादि बातें निकल कर के आती है।

529
00:35:37,040 --> 00:35:37,540
तो

530
00:35:37,280 --> 00:35:41,440
हमें ये दो चीजों की क्लेरिटी हो चुकी है कि अवतारवाद की धारणा क्या है? अवतारवाद का लक्षण

531
00:35:41,440 --> 00:35:45,440
तो खैर चलिए हमें नहीं पता चला। वो तो शब्द प्रमाण के ही है। लेकिन उसको हम स्वीकार करते हैं। आगे बढ़ते हैं।

532
00:35:45,440 --> 00:35:50,000
क्योंकि अच्छी तीसरी बात आपने छोड़ दी है वो मैं ध्यान दिला रहा हूं। जी जी बता दीजिए।

533
00:35:50,000 --> 00:35:54,000
ऐसा कैसे कर सकता है? तो अविद्या शक्ति से वो सब कुछ कर सकता है। एक ये पॉइंट

534
00:35:54,000 --> 00:35:58,000
आया था ना कि ऐसा कैसे कर सकता है? तो अविद्या शक्ति का आलंबन लेकर के वो

535
00:35:58,000 --> 00:36:02,000
सब कुछ कर सकता है क्योंकि वो हमको वही चीजें एट द एंड दिखा रहा है

536
00:36:02,000 --> 00:36:08,000
जो है नहीं जो अनरियल है। ठीक है?

537
00:36:17,900 --> 00:36:21,900
[संगीत]
