1
00:00:02,080 --> 00:00:06,560
तो जय श्री राम सभी को। जैसा कि आप सबको पता है हम विभिन्न जो

2
00:00:06,560 --> 00:00:10,720
धार्मिक विचारधाराएं हैं उनको आपके समक्ष प्रस्तुत करने

3
00:00:10,720 --> 00:00:15,120
का प्रयास करते हैं। और आज हम यहां पर आध्यात्मिक

4
00:00:15,120 --> 00:00:19,600
विश्वविद्यालय ये केंद्र है यहां पर दिल्ली में पालम

5
00:00:19,600 --> 00:00:23,680
में और ये ऐसा बताया जा रहा है कि मतलब

6
00:00:23,680 --> 00:00:27,680
ब्रह्म जो ब्रह्मा कुमारीज हैं उन्हीं से ही स्फुटित है

7
00:00:27,680 --> 00:00:31,920
इनका भी। तो इनके साथ थोड़ा सा आज हम इसको देखेंगे कि

8
00:00:31,920 --> 00:00:36,080
यहां क्या बताया जा रहा है। सनातन धर्म के मतलब

9
00:00:36,080 --> 00:00:40,160
हिसाब से सनातन धर्म का आलंबन लेते हुए क्या शिक्षा दी जा रही है?

10
00:00:40,160 --> 00:00:44,320
तो थोड़ा सा बताइए हमें क्या है मामला आपका? देखो जी पहले

11
00:00:44,320 --> 00:00:48,560
सबसे पहले मेरा ये संदेश है। जी अभी जो हमारा ये जो चल

12
00:00:48,560 --> 00:00:52,880
रहा है जी। इसमें सबसे पहले यही संदेश है कि अभी ये जो है सृष्टि का

13
00:00:52,880 --> 00:00:57,040
लास्ट टाइम चल रहा है और इस समय जो है परमपिता परमात्मा शिव इस

14
00:00:57,040 --> 00:01:01,120
सृष्टि पे आए हुए हैं आकर नई दुनिया का स्थापना कर

15
00:01:01,120 --> 00:01:05,360
रहे हैं और पुरानी दुनिया का विनाश होने वाला है तो वो है

16
00:01:05,360 --> 00:01:09,440
अभी हमारे बीच में कहीं क्या चीज है परमात्मा शिव ये कार्य चल

17
00:01:09,440 --> 00:01:13,600
रहा है इसके लिए फिर कोर्स करना पड़ेगा ना ये चीज जो अगर इसको नहीं वो सृष्टि

18
00:01:13,600 --> 00:01:17,200
में आए हुए हैं परमात्मा तो वो मतलब कहीं पे हैं आसपास यही

19
00:01:17,200 --> 00:01:22,000
चीज मैं आपको बताऊंगा जी जी जी जी कि जो परमपिता परमात्मा 1936

20
00:01:22,000 --> 00:01:26,080
से ये कार्य चल रहा है। अच्छा अच्छा तो यह जो दादा लेखराज आपने

21
00:01:26,080 --> 00:01:30,400
सुना ही होगा हां हां इनके दादा लेखराज को जब साक्षात्कार

22
00:01:30,400 --> 00:01:34,480
हुए थे तो साक्षात्कार होने से उनको ये पता

23
00:01:34,480 --> 00:01:38,480
लगा कि अभी उनको तीन चार साक्षात्कार हुए एक तो

24
00:01:38,480 --> 00:01:42,640
पुरानी दुनिया जाने वाली है नई दुनिया आने वाली है साक्षात्कार

25
00:01:42,640 --> 00:01:46,960
अच्छा जी जी जी हां हां और उसके बाद जब साक्षात्कारों

26
00:01:46,960 --> 00:01:51,760
का रहस्य उनको नहीं मिला तो उसके लिए फिर वो अपना

27
00:01:51,760 --> 00:01:56,000
उसका रहस्य जानने के लिए वो अपने जहां उनका

28
00:01:56,000 --> 00:02:00,720
जो स्थान था सिंध हैदराबाद वहां से फिर वो इधर

29
00:02:00,720 --> 00:02:04,880
बनारस गई और अपने गुरु किए थे उनसे भी पूछा मगर उसका कहीं पर

30
00:02:04,880 --> 00:02:09,200
उनको वो मिला नहीं उसका आंसर 1936 में जो जन्मे थे

31
00:02:09,200 --> 00:02:13,600
अच्छा क्या नाम था उनका नहीं नहीं जन्मे नहीं थे 1936 में उनको साक्ष्यतार

32
00:02:13,600 --> 00:02:17,680
हुआ दादा लेखराज दादा लेखराज उनके अंदर से मुरलियां चली अच्छा अच्छा अच्छा

33
00:02:17,680 --> 00:02:22,160
ठीक जी जी तो मुरलियां जो चली ये चली उनके अंदर

34
00:02:22,160 --> 00:02:24,320
1947

35
00:02:24,320 --> 00:02:28,320
1947 क्योंकि उस समय 60 साल की अवस्था थी। हां तो कहते हैं

36
00:02:28,320 --> 00:02:32,480
कि जब तक 60 साल मतलब एक बुजुर्ग अवस्था नहीं होती है तब तक

37
00:02:32,480 --> 00:02:36,560
शिव जो है प्रवेश नहीं करते हैं तब तो उनको साक्षात्कार उस समय की बात

38
00:02:36,560 --> 00:02:40,720
है। मगर यहां पे उनके अंदर शिव ने प्रवेश किया।

39
00:02:40,720 --> 00:02:44,880
जी तो प्रवेश किया तो फिर ये मूल्यां चली। जो मूल्य अभी ब्रह्मा कुमारी

40
00:02:44,880 --> 00:02:48,960
में चलती है तो उनहीं मूल्यों के अनुसार जो भी हमारा यह

41
00:02:48,960 --> 00:02:53,120
चल रहा है उसी के अनुसार सारे ये तो कार्य तो मतलब

42
00:02:53,120 --> 00:02:57,280
कौन है जो मतलब इसमें आपके जो वहां से मुरलियों को

43
00:02:57,280 --> 00:03:01,360
लेकर के और थोड़ा सा मुझे लगता है ब्रह्मा कुमारी से थोड़ा सा डिफरेंट भी है।

44
00:03:01,360 --> 00:03:05,760
जी तो कौन है जो थोड़ा सा डिफरेंट आपको बताते हैं?

45
00:03:05,760 --> 00:03:09,760
वहां से जो मूलियां चली दादा लेखराज के द्वारा

46
00:03:09,760 --> 00:03:14,080
वो मूलियां का सारा मनन चिंतन मंथन हुआ। हां। उसके बाद फिर उसका

47
00:03:14,080 --> 00:03:18,240
विस्तार हुआ। किसने किया? मतलब मनन चिंतन विस्तार

48
00:03:18,240 --> 00:03:22,720
किसने किया? मनन चिंतन मंथन हमारे जो

49
00:03:22,720 --> 00:03:24,880
माध्यात्मिक

50
00:03:24,880 --> 00:03:29,040
शिक्षा केंद्र के जो हमारे जो शंकर पारधारी हैं

51
00:03:29,040 --> 00:03:33,040
हां हां शंकर पारधारी हां जैसे ब्रह्मा विष्णु शंकर हां

52
00:03:33,040 --> 00:03:37,120
हां तो इसीलिए मैं कह रहा हूं ना इसके लिए नहीं नहीं कुछ नहीं कुछ आप सतई

53
00:03:37,120 --> 00:03:41,200
लेवल पे तो मैं तो एक मोटा मोटा बता हां मोटा मोटा ही चाहिए तो वो उनका कुछ

54
00:03:41,200 --> 00:03:45,280
नाम है जो व्यक्ति हैं आध्यात्मिक विश्वविद्यालय में जो वीरेंद्र

55
00:03:45,280 --> 00:03:47,600
देव दीक्षित थे अभी उन्होंने भी शरीर

56
00:03:47,600 --> 00:03:52,160
ही छोड़ दिया अच्छा अच्छा हां 2012 तो अभी कौन मतलब

57
00:03:52,160 --> 00:03:56,400
इसको कौन ऑपरेट कर रहे हैं ऑपरेट में यही कन्याएं माताएं इसको

58
00:03:56,400 --> 00:04:00,480
आगे बढ़ा रही है नहीं कोई एक होता है ना कैप्टन होता है जो नहीं ऐसा कैप्टन

59
00:04:00,480 --> 00:04:04,480
तो कोई है नहीं वही कन्याएं माताएं ही इसको अभी आगे चला रही है कैप्टन नहीं

60
00:04:04,480 --> 00:04:08,720
उनमें भी कन्याओं माताओं में भी तो कोई कैप्टन होगा ना कि जो जिसकी बात सब मानते हो

61
00:04:08,720 --> 00:04:12,800
नहीं नहीं ऐसा कुछ नहीं है क्योंकि ये जो है ना गृहस्ती है तो इसमें क्या

62
00:04:12,800 --> 00:04:17,200
होता है कि गृहस्ती में एक मुखिया तो होता है ना कि जिसकी बात अंतिम हो

63
00:04:17,200 --> 00:04:21,440
ये होगा ये नहीं होगा। नहीं नहीं ऐसा कुछ नहीं बनाया। मुखिया हमने कोई नहीं बनाया।

64
00:04:21,440 --> 00:04:25,440
जिसका जो मन आए वो करें। नहीं नहीं करें नहीं। मूल्य के हिसाब से ही

65
00:04:25,440 --> 00:04:29,520
चलते हैं हम लोग। मगर मुखिया कोई एक ऐसा नियमित कुछ नहीं है।

66
00:04:29,520 --> 00:04:33,600
अच्छा जी जी। अच्छा जैसे ये जो आपने बताया परमात्मा जो

67
00:04:33,600 --> 00:04:37,680
शिव हैं। ये वही वाले शिव हैं जो क्या

68
00:04:37,680 --> 00:04:42,880
कहते निराकार पार्वती माता के जो पति हैं वो नहीं है ये

69
00:04:42,880 --> 00:04:46,960
पार्वती माता निराकार है निराकार मतलब इसमें देखो दो चीजें हैं

70
00:04:46,960 --> 00:04:50,960
एक शिव शंकर भोलेनाथ बोलते हैं ना जब हम शिव शंकर भोलेनाथ

71
00:04:50,960 --> 00:04:55,280
बोलते हैं तो प्रवृत्ति मार्ग हो जाता है तो उसमें शंकर पार्वती वो पार्वती

72
00:04:55,280 --> 00:04:59,360
के पति होगी जो शंकर को बोलते हैं तो वो वही निराकार वो बनते हैं या

73
00:04:59,360 --> 00:05:02,640
कोई और निराकार जैसे निराकार मतलब सोल

74
00:05:02,640 --> 00:05:06,720
जैसे सोल होगी हमारी अच्छा वो होगी सोल जब वो सृष्टि पे आते

75
00:05:06,720 --> 00:05:10,720
हैं तो वो साकार कार तन में आते हैं तो उनको चाहिए पांच तत्वों का

76
00:05:10,720 --> 00:05:14,720
पुतला। नहीं वो तो एक अलग बात हो गई। वो सृष्टि में आते हैं वो पांच तन का

77
00:05:14,720 --> 00:05:18,720
पुतला जो अभी जैसे आपके बताया जाता है कि दादा लेखराज के यहां है। हां जैसे

78
00:05:18,720 --> 00:05:23,120
ये आत्मा और परमात्मा नहीं मैं वो पूछ रहा हूं कि वो जो शिव जो पार्वती

79
00:05:23,120 --> 00:05:27,120
माता के जो पति हैं वही शिव को आप परमात्मा कह रहे हैं कि और

80
00:05:27,120 --> 00:05:31,520
किसी कोई और शिव है उनसे अलग है? वो शंकर को बोलते हैं। शंकर पार्वती

81
00:05:31,520 --> 00:05:35,680
जब वो साकार में आएंगे तो वो वही साकार बनते हैं ना। हां जब साकार

82
00:05:35,680 --> 00:05:39,840
बनेंगे मतलब मतलब शिव भगवान ही साकार

83
00:05:39,840 --> 00:05:43,920
पार्वती माता के साथ जो है शंकर हो जाते हैं जी जी तो अलग नहीं है

84
00:05:43,920 --> 00:05:48,400
दोनों शिव शंकर जब हम दोनों शरीर और आत्मा को मिलाएंगे

85
00:05:48,400 --> 00:05:52,480
तब वो प्रवृत्ति में होंगे अगर शिव बोलेंगे तो निर्वती मतलब

86
00:05:52,480 --> 00:05:56,960
अकेला उनका रूप का नाम अलग है नाम अलग है कि अगर

87
00:05:56,960 --> 00:06:01,280
जैसे शिवलिंग के द्वारा जो है निराकार का ध्यान और उनका ही

88
00:06:01,280 --> 00:06:05,520
अवतार एक तरीके से शंकर का वो दिखाते हैं शंकर की मूर्तियां दिखाते

89
00:06:05,520 --> 00:06:09,680
हैं वो साकार हो गया तो उसको पुरुषार्थी स्टेज पुरुषार्थी

90
00:06:09,680 --> 00:06:13,680
मतलब जब उन्होंने इस इस अच्छा अब

91
00:06:13,680 --> 00:06:17,840
ये बताइए थोड़ा सा कि इसमें हमारे गीता वेद पुराण

92
00:06:17,840 --> 00:06:22,160
इत्यादि का क्या महत्व है मतलब क्योंकि हम यहां खड़े इसीलिए

93
00:06:22,160 --> 00:06:26,240
आप आए हो आप गीता के लिए आए हो ना तो जो वो

94
00:06:26,240 --> 00:06:30,240
मुरलियां निकली हम जो अभी हम मुरलियां कहते हैं अभी

95
00:06:30,240 --> 00:06:34,400
इस ज्ञान में जी वही द्वापर युग से उसको

96
00:06:34,400 --> 00:06:38,480
वेद बोलते हैं। अच्छा द्वापर कलयुग में वो वेद जिसको आज वेद

97
00:06:38,480 --> 00:06:42,640
बोलते हैं ना हम भक्ति मार्ग में अभी हम जैसे हम अपने आप को ज्ञान मार्ग बोलते हैं

98
00:06:42,640 --> 00:06:46,640
जो ये ज्ञान में चलते हैं वो ज्ञान मार्ग हो गया। भक्ति मार्ग में उसको

99
00:06:46,640 --> 00:06:50,880
बोलते हैं वेद। वेद और ज्ञान मार्ग

100
00:06:50,880 --> 00:06:54,880
में ये होगी मूल्यां। हम्म। तो ये वेद जो है

101
00:06:54,880 --> 00:06:58,880
जैसे वेद वो किसी के समझ में नहीं आते क्योंकि बहुत टफ है पढ़ने में

102
00:06:58,880 --> 00:07:03,120
भी और उनका उसको वेद को मतलब बहुत कम

103
00:07:03,120 --> 00:07:07,360
लोग वो करते हैं और गीता जो है सहज है मतलब सरल है उसको

104
00:07:07,360 --> 00:07:11,360
हर कोई पढ़ भी लेता है समझ भी जाता है तो वेद जो हो गया

105
00:07:11,360 --> 00:07:15,440
वो मुरलियां होगी और उसके बाद जब उसका मनन चिंतन मंथन किसने

106
00:07:15,440 --> 00:07:19,760
किया वही जो मैंने बोला ना शंकर पाठधारी यानी राम वाली आत्मा

107
00:07:19,760 --> 00:07:24,080
बिरंद दीक्षित उन्होंने जब इसका मन मन चिंतन मंथन किया विस्तार

108
00:07:24,080 --> 00:07:28,080
किया तो वो बन गई गीता गीता ज्ञान नहीं तो गीता

109
00:07:28,080 --> 00:07:32,160
तो भगवान श्री कृष्ण वाली है ना जो उन्होंने बोली हां तो वो भगवान श्री

110
00:07:32,160 --> 00:07:32,880
कृष्ण वाली ने

111
00:07:32,880 --> 00:07:37,280
बोली वो तो ठीक है मगर मतलब आपकी गीता अलग है नहीं नहीं

112
00:07:37,280 --> 00:07:41,440
गीता तो सब वही है मगर यही चीज है ना अब इसको मैं अगर

113
00:07:41,440 --> 00:07:45,440
बताऊंगा तो बहुत विस्तार में जाना पड़ेगा क्योंकि नहीं नहीं इसमें ये बात जैसे बोलते हैं ना

114
00:07:45,440 --> 00:07:49,840
अचुतम केशवम राम नारायणं कृष्ण दामोदरम तो इसमें सभी

115
00:07:49,840 --> 00:07:54,160
जितने भी देवी देवता एक ही में आ जाते तो यहां पर भी हम सारा

116
00:07:54,160 --> 00:07:58,160
जो एक पर्सनालिटी है हम उसी को नहीं नहीं जैसे वीरेंद्र देव

117
00:07:58,160 --> 00:08:02,240
दीक्षित आपने नाम लिया तो उन्होंने एक मनन चिंतन करके अपनी एक एक तरीके

118
00:08:02,240 --> 00:08:06,400
से एक ग्रंथ तैयार किया मुरलियों को मनन चिंतन मुरली से नॉट

119
00:08:06,400 --> 00:08:10,560
फ्रॉम गीता ना ना तो फिर गीता का महत्व यहां क्या है फिर तो वेद

120
00:08:10,560 --> 00:08:14,720
का भी कोई महत्व नहीं क्योंकि मुरली उन्होंने मुरली से किया है वेद का मतलब

121
00:08:14,720 --> 00:08:18,800
ये हुआ जब तक हम उसको समझ ना पाए ठीक है नहीं मुरलियां वेद

122
00:08:18,800 --> 00:08:23,120
हो गई ठीक है जो अभी मुरलियां है वो वेद हो मगर उसका फिर

123
00:08:23,120 --> 00:08:27,120
जब मतलब आप यह कह रहे हो कि जो जो हमारा जो हमारे वेद है

124
00:08:27,120 --> 00:08:31,120
ऋग्वेद यजुर्वेद सामवेद अथर्ववेद यही वेद जो है

125
00:08:31,120 --> 00:08:35,120
मुरली के रूप में आपको प्राप्त है। हां जी हां जी फॉर एग्जांपल एक आध कोई मुरली

126
00:08:35,120 --> 00:08:39,200
एक कोई मुरली आप बताइए जो वेद का मंत्र हो जैसे मुरलियां अभी

127
00:08:39,200 --> 00:08:43,360
हम जो हम नहीं जैसे कोई एक एक मुरली जो वेद का मंत्र हो

128
00:08:43,360 --> 00:08:47,360
जिस जो मुरली है उसका संबंध हो वेद के मंत्र से देखो

129
00:08:47,360 --> 00:08:48,160
इतना तो

130
00:08:48,160 --> 00:08:52,160
हमने वेद तो मैंने पढ़े नहीं है मैंने उतने वेद पढ़े नहीं नहीं जैसे हम हम

131
00:08:52,160 --> 00:08:56,400
जब ये कह रहे हैं ना लोगों को कि जो हमारी मुरलियां हैं वो वेद

132
00:08:56,400 --> 00:09:00,560
ही हैं। तो कोई एक मुरली कोई भी एक मुरली जो वेद के किसी

133
00:09:00,560 --> 00:09:04,800
एक मंत्र का अर्थ हो क्योंकि हम कह रहे हैं वेद कठिन है और मुरली आसान

134
00:09:04,800 --> 00:09:08,800
है। नहीं नहीं मुरली और वेद मैंने बोला एक ही है एक ही है। मगर

135
00:09:08,800 --> 00:09:12,960
उसका जब विस्तार हुआ मुरलियों को मुरली का विस्तार विस्तार हुआ। विस्तार

136
00:09:12,960 --> 00:09:16,960
मतलब जब उसका तो मुरली भी संस्कृत में आती है क्या? नहीं नहीं हिंदी में ही आती है।

137
00:09:16,960 --> 00:09:20,960
तो मुरली उसका अर्थ है ना वेद का वेद का अर्थ हो गया। एक का जैसे तो वही मैं कह

138
00:09:20,960 --> 00:09:25,120
रहा हूं कि एक कोई मुरली ऐसी जो वेद के किसी एक मंत्र का अर्थ हो। ऐसा

139
00:09:25,120 --> 00:09:29,440
कोई अब ऐसे तो मैं कुछ बता नहीं सकता। अच्छा वर्बल ही नहीं आ रहा। कोई बात नहीं।

140
00:09:29,440 --> 00:09:34,480
अब एक बात और आती है कि जैसे एक चीज आती है हमारे पास कि

141
00:09:34,480 --> 00:09:38,560
जो ये आपके पास जैसे आपने कहा वेद ही मुरली है।

142
00:09:38,560 --> 00:09:42,720
आपने उसमें वो नहीं किया रिसर्च कि वो वेद से मैच कर रही है कि नहीं कर रही। इसमें

143
00:09:42,720 --> 00:09:46,720
ये चीज आती है कि आपको जैसे मान लीजिए किसी ने रिसर्च कर भी लिया

144
00:09:46,720 --> 00:09:50,720
है जैसे कोई मंत्र बता दे देखो ये मंत्र ये वाली मुरली से मैच कर रहा है तो

145
00:09:50,720 --> 00:09:54,880
इसमें दिक्कत और गीता का भी कुछ ऐसा है जैसे आपने यहां पे हमें

146
00:09:54,880 --> 00:09:58,880
बताया कि गॉड इज नॉट ओमनी प्रेजेंट सर्वव्यापी परमात्मा सर्वव्यापी

147
00:09:58,880 --> 00:10:03,120
नहीं है। तो इसमें कई जगह भगवान

148
00:10:03,120 --> 00:10:03,620
को

149
00:10:03,440 --> 00:10:07,520
भगवत गीता में और वेद में भी सर्वव्यापी कहा गया जैसे विष्णु कहा गया है।

150
00:10:07,520 --> 00:10:11,680
तो विष्णु का अर्थ होता है व्यापक। तो फिर हम यहां पर उसका एक

151
00:10:11,680 --> 00:10:16,000
दूसरा अर्थ नहीं निकाल रहे। मतलब ऐसा नहीं लग रहा आपको। देखो हमारा

152
00:10:16,000 --> 00:10:20,000
ये है कि नहीं नहीं मैं बस आपका आपका जो भी

153
00:10:20,000 --> 00:10:24,080
है मैं ये कह रहा हूं गीता का अगर हम अर्थ ले रहे हैं तो गीता में भगवान को कहा गया है कि

154
00:10:24,080 --> 00:10:28,160
सर्वव्यापी है और वेदों में भी कहा गया है। भरभर के पुराणों में भी कहा गया है। है

155
00:10:28,160 --> 00:10:32,160
ना? सर्वव्यापी मतलब ओमनी प्रेजेंट। हम कह रहे हैं कि हम कह रहे हैं कि

156
00:10:32,160 --> 00:10:36,160
नहीं है। तो हम किस मतलब शास्त्र के किस संदर्भ से

157
00:10:36,160 --> 00:10:40,320
ऐसा कह रहे हैं? उसमें शास्त्र है या मुरली है आपकी? हम मुरलियों

158
00:10:40,320 --> 00:10:44,960
के अनुसार जो हमें यानी कि मुरली कहीं-कहीं पर वेद के डिफर भी है।

159
00:10:44,960 --> 00:10:49,200
नहीं नहीं वेद के डिफर नहीं है। हम तो मुरली जो

160
00:10:49,200 --> 00:10:53,360
है वेद है। नहीं वेद कह

161
00:10:53,360 --> 00:10:57,680
रहा है कि भगवान सर्वव्यापी हैं।

162
00:10:57,680 --> 00:11:01,680
गीता भी कह रही है सर्वव्यापी है। हां। उसमें तो आप कह रहे हो कि नहीं

163
00:11:01,680 --> 00:11:05,760
है तो शास्त्र से डिफर हुआ ना थोड़ा सा

164
00:11:05,760 --> 00:11:10,080
डिफर हां डि हो गया विपरीत हो गया ना विपरीत ये हो गया है जैसे

165
00:11:10,080 --> 00:11:14,320
कोई भी चीज हम जब पहली पहली बार आती है उसमें

166
00:11:14,320 --> 00:11:18,400
सच्चाई होती है जैसे-जैसे उसका वो बढ़ता जाता है ना यानी कि एक

167
00:11:18,400 --> 00:11:18,900
तरीके

168
00:11:18,640 --> 00:11:22,640
से शुरुआत में आप मैं ये मैं समझ गया मैं समझ गया कि उसमें मिलावट

169
00:11:22,640 --> 00:11:26,960
हो गई गीता में आपके अनुसार जो प्रेजेंट टाइम में जो गीता है

170
00:11:26,960 --> 00:11:30,960
उसमें मिलावट है मिलावट हो गई तो अब बात ये यह है कि जैसे अभी जो गीता

171
00:11:30,960 --> 00:11:35,200
है हम कह रहे हैं उसमें मिलावट है तो जो शुरू की गीता है क्या वो है हमारे

172
00:11:35,200 --> 00:11:39,200
पास शुरू की गीता का जो मतलब देखो श्लोक तो

173
00:11:39,200 --> 00:11:43,200
सेम है हम गीता के जो 700 श्लोक है ना तो विष्णु

174
00:11:43,200 --> 00:11:47,360
का अर्थ तो ओमनी प्रेजेंट ही है ना श्लोक जो है वो सेम है

175
00:11:47,360 --> 00:11:51,440
श्लोक में मिलावट नहीं हुई अर्थ में मिलावट हुई हां अर्थ का अनर्थ कर दिया तो

176
00:11:51,440 --> 00:11:55,520
अब बात ये है कि वो जो गीता है जिसका आप कह रहे हैं कि अर्थ बदल दिया है लोगों ने

177
00:11:55,520 --> 00:11:58,720
असली गीता है वो कहां है तो वही मैं कह रहा हूं हां जी हां

178
00:11:58,720 --> 00:12:02,720
जो गीता और वेद हैं वो हमारे पास तक कैसे आए? क्योंकि वो आज से

179
00:12:02,720 --> 00:12:06,800
2 अरब वर्ष पूर्व या आपके अनुसार 5000 5000 साल 5000 वर्ष पूर्व

180
00:12:06,800 --> 00:12:10,800
सृष्टि है और 5000 साल में वो क्वेश्चन दूसरा है कि

181
00:12:10,800 --> 00:12:14,880
जो वेद हैं वो आज से 5000 साल पहले

182
00:12:14,880 --> 00:12:19,200
आए आपके अनुसार और हमारे अनुसार 2 अरब वर्ष हुआ है।

183
00:12:19,200 --> 00:12:23,200
ठीक है? तो जो 5000 वर्ष पूर्व जो वेद आते हैं प्रकट होते

184
00:12:23,200 --> 00:12:27,200
हैं जो भी है हम कह रहे हैं कि आज के समय में जो उसका अर्थ कर रहे हैं

185
00:12:27,200 --> 00:12:31,200
उसको अनर्थ कर दिया है गलत कर दिया है तो वो जो वेद के मंत्र

186
00:12:31,200 --> 00:12:35,200
हैं और वो जो वेद गीता के श्लोक हैं वो हमारे

187
00:12:35,200 --> 00:12:39,200
पास तक आपके पास तक कैसे आए हैं 5000 वर्ष से यहां तक कैसे

188
00:12:39,200 --> 00:12:40,720
आएगी

189
00:12:40,720 --> 00:12:44,800
हां ठीक है हमारे अनुसार जो 5000

190
00:12:44,800 --> 00:12:49,120
का जो ड्रामा है मतलब जो सृष्टि है जिसमें चार उसके

191
00:12:49,120 --> 00:12:53,120
चार भाग हो गए। चार भाग का मतलब सतयुग 12 नहीं नहीं आप

192
00:12:53,120 --> 00:12:57,360
समझे। नहीं देखो फिर मैं बताऊं। नहीं नहीं वो थोड़ा क्या है कि

193
00:12:57,360 --> 00:13:02,000
5000 वर्ष पूर्व कोई छपाई केंद्र था जहां से वो छपा

194
00:13:02,000 --> 00:13:06,160
फिर फिर दूसरी कंपनी ने छापा फिर उसके बाद दूसरी कैसे आए? सिस्टम

195
00:13:06,160 --> 00:13:10,400
क्या था? वो मैं पूछ रहा हूं। मैं वो अर्थवर्थ नहीं पूछ रहा। हां। वह जो

196
00:13:10,400 --> 00:13:14,400
श्लोक हैं, आप कह रहे हो गीता में 700 श्लोक है, वह शुद्ध है। वेद में

197
00:13:14,400 --> 00:13:18,640
जो 18,000 के लगभग श्लोक है, वह शुद्ध है। वह मंत्र है, वह शुद्ध हैं। तो, वह मंत्र

198
00:13:18,640 --> 00:13:22,800
कैसे आए? वो गीता के श्लोक कैसे आए? अच्छा। वहां से यहां तक

199
00:13:22,800 --> 00:13:26,880
प्रैक्टिकली क्या था? उनका साधन क्या था? क्योंकि छपाई की मशीन मेरे ख्याल

200
00:13:26,880 --> 00:13:31,120
से अभी बिल्कुल चालू हुई है। पहले तो थी नहीं। तो कैसे आए वो?

201
00:13:31,120 --> 00:13:35,520
कैसे आए? हां देखो जब हमारे ज्ञान के अनुसार

202
00:13:35,520 --> 00:13:39,600
जो यह अपना जो ज्ञान है जो ढाई हजार साल के बाद जब द्वापर

203
00:13:39,600 --> 00:13:43,840
युग शुरू हुआ ना उससे पहले ढाई हजार साल के पहले की कोई हिस्ट्री ज्योग्राफी

204
00:13:43,840 --> 00:13:48,160
नहीं है नहीं है अभी हमारे पास जैसे बोलते हैं आज से 2000 साल पहले क्राइस्ट आए

205
00:13:48,160 --> 00:13:52,720
ना 2000 साल पहले की तो बोलते हैं क्राइस्ट आया फिर

206
00:13:52,720 --> 00:13:56,160
उससे पहले की तो बुद्ध की है ना हां हां 2250 मतलब 2200

207
00:13:56,160 --> 00:14:00,720
और जो है महाभारत की हिस्ट्री है हमारी हां मतलब जो भी है शंकराचार्य जी की

208
00:14:00,720 --> 00:14:04,800
वो हिस्ट्री मतलब टोटल 25ज़ साल का हिसाब है। नहीं 2500 साल से भी

209
00:14:04,800 --> 00:14:08,800
पहले का। अच्छा आप बात बताइए। आप अपनी मान्यता बताइए। हमारे हिसाब से 25ज़

210
00:14:08,800 --> 00:14:12,960
साल से द्वापर युग शुरू हुआ। हमारे जो ज्ञान के हिसाब

211
00:14:12,960 --> 00:14:16,960
से ढाई हजार से पहले हां त्रेता युग था।

212
00:14:16,960 --> 00:14:21,200
उससे पहले सतयुग था। ठीक है? तो जो 25 हजार साल

213
00:14:21,200 --> 00:14:25,280
में जो द्वापर शुरू हुआ तो उस समय जो वेद है

214
00:14:25,280 --> 00:14:29,600
जैसे अभी आप कह रहे हो ना कैसे आए? तो वो जब इस संगम

215
00:14:29,600 --> 00:14:33,760
युग में जब भगवान आते हैं इस सृष्टि पे अभी जो मैं बोल रहा हूं अभी आए हुए हैं तो

216
00:14:33,760 --> 00:14:37,760
उस समय भी आज से 5000 साल पहले जो सेम टू सेम ये सृष्टि जब

217
00:14:37,760 --> 00:14:41,920
रिपीट होती है ना उस समय भी जब आए थे तो उन्होंने जो ज्ञान

218
00:14:41,920 --> 00:14:46,400
दिया उसको जिसने सुना सुना

219
00:14:46,400 --> 00:14:50,400
या समझा जैसे वो वेद जिसको बोलते हैं वेदव्यास वेदव्यास

220
00:14:50,400 --> 00:14:54,400
भी हम किसको बोलते हैं राम वाली आत्मा राम मतलब जो नहीं किसी एक

221
00:14:54,400 --> 00:14:57,120
व्यक्ति ने बोल दिया उसने पूरा ले लिया जैसे

222
00:14:57,120 --> 00:15:01,200
अभी मैंने वीरेंद्र देव दीक्षित जी का नाम लिया उन्होंने पूरा उसको तो वो कौन

223
00:15:01,200 --> 00:15:05,200
व्यक्ति था जिसने लिया वहां पे 5000 साल पहले वेदव्यास वेदव्यास

224
00:15:05,200 --> 00:15:09,200
जी फिर उनसे फिर उन फिर गद्दीियां चल जाती है ना फिर वो

225
00:15:09,200 --> 00:15:13,360
गद्दी कौन सी थी क्या नाम था इतना मेरे को नहीं आप समझे नहीं मैंने ये प्रश्न क्यों

226
00:15:13,360 --> 00:15:17,440
किया मैं इसको क्लियर करूं बात ये है कि हमको गीता वेद पुराण

227
00:15:17,440 --> 00:15:21,520
प्राप्त होते हैं परंपरा से गुरु शिष्य परंपरा चलती थी वो तो चलती है

228
00:15:21,520 --> 00:15:25,680
मुंडकोपनिषद में एक से ले चार तक बताया गया है वो तो हर

229
00:15:25,680 --> 00:15:29,680
चीज की परंपरा मुंडकोपनिषद में एक से ले चार तक यह बताया गया है कि

230
00:15:29,680 --> 00:15:33,840
मेरे ये गुरु थे, मेरे ये गुरु थे। ऐसे करके विद्या मुझ तक आई है। भगवत

231
00:15:33,840 --> 00:15:37,920
गीता में भी चार दो तीन 16 में परंपरा की बात कही है भगवान ने कि ज्ञान जो है परंपरा

232
00:15:37,920 --> 00:15:42,000
से प्राप्त हो रहा है। अच्छा वेद के जो मंत्र होते हैं ना उसका

233
00:15:42,000 --> 00:15:46,400
अर्थ करने के लिए हमको नॉर्मल डिक्शनरी नहीं चाहिए होती है। एक डिक्शनरी

234
00:15:46,400 --> 00:15:50,480
है निरुक्त नाम सुना है? नहीं मैंने उतना ग्रस्त है।

235
00:15:50,480 --> 00:15:54,480
मैं बता रहा हूं। निरुक्त जो है उसको निरुक्त को रचने वाले उसके

236
00:15:54,480 --> 00:15:58,560
रचनाकार हैं यासकाचार आचार्य यास तो वो भी उसमें कहते

237
00:15:58,560 --> 00:16:02,640
हैं कि श्रुति परंपरा से ही ज्ञान प्राप्त होता है। यानी कि हमारे

238
00:16:02,640 --> 00:16:06,640
पास जो वेद के मंत्र आ रहे हैं वो श्रुति परंपरा से आ रहे हैं।

239
00:16:06,640 --> 00:16:10,800
अगर परंपरा नहीं है तो वेद के मंत्र भी नहीं है। अगर

240
00:16:10,800 --> 00:16:12,240
परंपरा है तो वेद के मंत्र

241
00:16:12,240 --> 00:16:16,400
हैं। गीता के मंत्र गीता के श्लोक हैं। तो कहने का तात्पर्य

242
00:16:16,400 --> 00:16:20,480
यह है कि जैसे मान लीजिए कि हमको परंपरा से

243
00:16:20,480 --> 00:16:24,640
अब वो परंपरा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मधवाचार्य इत्यादि के रूप में आज

244
00:16:24,640 --> 00:16:28,720
भी है आपको गीता का अर्थ बताने के लिए वेद का अर्थ

245
00:16:28,720 --> 00:16:32,960
बताने के लिए। अब दिक्कत क्या है कि अगर हम यह कह देते हैं कि उन्होंने

246
00:16:32,960 --> 00:16:37,120
अर्थ को बदल दिया है। ठीक है? तो हमें वेद के मंत्र किससे

247
00:16:37,120 --> 00:16:41,360
मिल रहे हैं? उन्हीं से मिल रहे हैं। गीता के श्लोक किससे

248
00:16:41,360 --> 00:16:45,360
मिल रहे हैं? उन्हीं से मिल रहे हैं। तो अगर हम यह कहते हैं कि उन्होंने अर्थ को

249
00:16:45,360 --> 00:16:49,360
बदल दिया है तो अगर हमें उन पर विश्वास नहीं है।

250
00:16:49,360 --> 00:16:53,360
है ना? उनके उन्होंने अर्थ को बदल दिया तो इसका मतलब हमें उन पर विश्वास नहीं है।

251
00:16:53,360 --> 00:16:57,520
तो फिर हम ये कैसे विश्वास करें कि ये जो वेद के मंत्र हैं ये वही मंत्र हैं

252
00:16:57,520 --> 00:17:01,680
जो भगवान ने दिए थे 5000 साल पहले। या तो विश्वास करना पड़ेगा

253
00:17:01,680 --> 00:17:05,760
तो पूरा करना पड़ेगा कि भैया परंपरा से गीता प्रेस तो हमारी कोई धर्म

254
00:17:05,760 --> 00:17:09,840
धर्माचार है नहीं। गीता प्रेस या फिर चौखंबा ये

255
00:17:09,840 --> 00:17:13,840
सब कोई हमारे धर्माचार्य नहीं है। हमारे जो धर्माचार्य होते हैं वो गुरु

256
00:17:13,840 --> 00:17:18,000
शिष्य परंपरा से मंत्रों को लेके आए हैं। अब आप उनको झूठा

257
00:17:18,000 --> 00:17:22,000
समझे या सच्चा समझे वो बात अलग है। मगर मंत्रों को तो वही लाए हैं। श्लोकों को

258
00:17:22,000 --> 00:17:26,160
वही लाए हैं। गीता उन्होंने ही आपको दी। तो अगर हम ये कह देंगे कि हमें इन पर भरोसा

259
00:17:26,160 --> 00:17:27,680
नहीं है। हम तो अपना अर्थ करेंगे।

260
00:17:27,680 --> 00:17:31,920
हम अपना अर्थ करेंगे या या फिर हमारे पास कोई दिव्य एक मिनट

261
00:17:31,920 --> 00:17:36,080
या फिर या फिर हमारे पास कोई दिव्य शक्ति आ रही है हम उसका अर्थ

262
00:17:36,080 --> 00:17:40,080
मानेंगे और श्लोक लेंगे इनसे मंत्र लेंगे इनसे

263
00:17:40,080 --> 00:17:44,240
और अर्थ लेंगे इनसे तो अगर इस पे हमें भरोसा नहीं जिससे हम मंत्र

264
00:17:44,240 --> 00:17:48,240
ले रहे हैं या अर्थ ले रहे हैं तो उनके मंत्रों पर भी हमें भरोसा उसके अर्थ

265
00:17:48,240 --> 00:17:52,240
पर हमें अगर भरोसा नहीं है तो उनके मंत्रों पर भी हमारा भरोसा करना सिद्ध

266
00:17:52,240 --> 00:17:52,740
नहीं

267
00:17:52,560 --> 00:17:56,800
जैसे एक आदमी हमें झूठ बोल रहा है मान लीजिए मैंने आपको एक किताब दी ठीक है आपको

268
00:17:56,800 --> 00:18:00,800
यह विश्वा विश्वास है कि किताब जो है मेरे से पहले जिसने मुझे दी है। मान लीजिए

269
00:18:00,800 --> 00:18:04,960
कि श्याम नाम के व्यक्ति ने मुझे एक किताब दी। ठीक है? अब मैं कह रहा हूं आपको

270
00:18:04,960 --> 00:18:09,040
यह श्याम की किताब है। ठीक है? आप उसको कह रहे हो ये किताब तो सही

271
00:18:09,040 --> 00:18:13,120
है। मगर मैं कह रहा हूं कि इसमें श्याम ने कहा है कि घर जल्दी आ जाना। वो कह रहा है ये

272
00:18:13,120 --> 00:18:17,120
झूठ है। घर जल्दी आ जाना झूठ है। तो अगर मुझे आपको झूठ ही बोलना होगा

273
00:18:17,120 --> 00:18:21,120
तो मैं आपको पूरी किताब नहीं बदल दूंगा जो श्याम ने दी थी। कहने का

274
00:18:21,120 --> 00:18:25,200
अर्थ यह है कि अगर हम यह कहेंगे कि हम आज अर्थ को बदल दिया

275
00:18:25,200 --> 00:18:29,360
गया है तो ये सबसे बड़ी प्रॉब्लम आ जाएगी कि भाई वेद के मंत्रों पर विश्वास

276
00:18:29,360 --> 00:18:33,520
कैसे? गीता के श्लोकों पर विश्वास कैसे? और आप अपनी

277
00:18:33,520 --> 00:18:37,760
जो हम ये दावा कर रहे हैं हमारी कोई अलग से परंपरा है नहीं। उनकी परंपरा

278
00:18:37,760 --> 00:18:41,920
तो नारायण तक है। शंकराचार्य रामानुजाचार्य जी की परंपरा सृष्टि

279
00:18:41,920 --> 00:18:46,400
के प्रारंभ तक है। उनसे आप नाम पूछते जाइए, पन्ने पलटते जाइए। उनके गुरुओं के नाम

280
00:18:46,400 --> 00:18:51,040
आज 100 आज 100 मिलेंगे। आज 145वें

281
00:18:51,040 --> 00:18:55,440
शंकराचार्य की गद्दी पर पूज्यपाद जो बैठे हुए हैं भगवान जो शंकराचार्य

282
00:18:55,440 --> 00:18:59,520
वर्तमान के हैं पूरी पीठाधीश्वर वो 145वें शंकराचार्य हैं

283
00:18:59,520 --> 00:19:03,600
और अगर भगवान से उनको गिना जाए तो वो 155वें गुरु हैं उस परंपरा में

284
00:19:03,600 --> 00:19:07,920
सृष्टि के प्रारंभ से तो इसमें आपका क्या कहना है? देखो

285
00:19:07,920 --> 00:19:12,240
इसमें हमारा यही कहना है कि हम जो हमें

286
00:19:12,240 --> 00:19:16,240
जो हमने जो यह ज्ञान लिया जो भी ये मूल्यों के द्वारा जो भी

287
00:19:16,240 --> 00:19:20,480
हमें ज्ञान मिला है उस ज्ञान के हिसाब से हमारा यही मानना

288
00:19:20,480 --> 00:19:24,640
है कि 5000 साल के बाद भगवान वो वो

289
00:19:24,640 --> 00:19:28,640
ठीक है 5000 साल से भी अगर माने तो यहां तक कौन आदमी आया

290
00:19:28,640 --> 00:19:32,640
ट्रांसफर किससे हुआ तो वही चीज आपने जैसे बताया ना या मान

291
00:19:32,640 --> 00:19:33,440
लीजिए 5000 की

292
00:19:33,440 --> 00:19:37,520
हिस्ट्री नहीं है आपने कहा ₹200 की है मैं तो वो वेद वेदों को तो मान रहा

293
00:19:37,520 --> 00:19:41,520
हूं मगर उसका जो अर्थ है ना शुरुआत आपका मानना सिद्ध नहीं

294
00:19:41,520 --> 00:19:45,600
होता ना जैसे मैंने कहा कि मैं जो है क्या कहते हैं ये

295
00:19:45,600 --> 00:19:49,600
ये आपने लिखा है आध्यात्मिक विश्वविद्यालय मैं आध्यात्मिक विश्वविद्यालय को

296
00:19:49,600 --> 00:19:53,760
तो मान रहा हूं आपने लिखा है अच्छा लिखा है मगर इसका मतलब है आध्यात्मिक

297
00:19:53,760 --> 00:19:56,960
विश्वविद्यालय का पागलखाना तो फिर सही बात होगी क्या

298
00:19:56,960 --> 00:20:01,040
ये या तो क्योंकि ये आपने लिखवाया तो मैं आपसे पूछूंगा ये

299
00:20:01,040 --> 00:20:05,040
पोस्टर आपने लगवाया तो मैं आपसे पूछूंगा कि आध्यात्मिक विश्वविद्यालय का क्या मतलब है आप

300
00:20:05,040 --> 00:20:09,120
बताओगे हम माता माता जी रहती हैं, बहनें रहती हैं जो आध्यात्मिक पढ़ाई करती हैं और

301
00:20:09,120 --> 00:20:13,200
करवाती हैं। है ना? मगर मैं कहूंगा नहीं इसका मतलब है पागलखाना और मैं आपका अर्थ

302
00:20:13,200 --> 00:20:16,000
क्यों मानूं? मैं इसको तो मान रहा हूं पर मैं इसका अर्थ नहीं मान रहा।

303
00:20:16,000 --> 00:20:20,000
तो ये थोड़ी सी दिक्कत आएगी। ये पोस्टर अगर आपने लगवाया है। ये पोस्टर अगर

304
00:20:20,000 --> 00:20:24,080
आपने हमें दिया है और इसके थ्रू हम इस लाइन को जान रहे हैं कि आध्यात्मिक

305
00:20:24,080 --> 00:20:28,400
विश्वविद्यालय तो हमें आपके अर्थ पर भी विश्वास करना होगा और नहीं करेंगे

306
00:20:28,400 --> 00:20:30,960
तो हमारा इस पोस्टर पर भी विश्वास सिद्ध नहीं होगा।

307
00:20:30,960 --> 00:20:35,280
तो वो तो हम यह कह रहे हैं कि जो भी वेद और गीता

308
00:20:35,280 --> 00:20:39,520
जो आ रखी है ना जो आज के हिसाब से जो चल रहा है उसका

309
00:20:39,520 --> 00:20:43,520
नहीं वो जो अर्थ दे रहे हैं ना वो वही परंपरा प्राप्त आचार्य है जो व्यास

310
00:20:43,520 --> 00:20:47,600
जी से डायरेक्ट कनेक्टेड है और व्यास जी वही है जो डायरेक्ट नारायण जी से कनेक्टेड

311
00:20:47,600 --> 00:20:51,600
है। हां, ठीक है। पर फिर भी देखो। यह विश्वास की बात है। नहीं नहीं देखो एक चीज़

312
00:20:51,600 --> 00:20:56,000
ऐसा होता है। वह आपकी बात ठीक है। चलो आप ठीक है। मगर

313
00:20:56,000 --> 00:21:00,240
कोई भी चीज़ अगर जैसे यहां से अगर शुरू होगी ना कुछ ना कुछ

314
00:21:00,240 --> 00:21:04,880
थोड़ा बहुत उसमें चेंज तो हम अंदाजे को प्रमाण नहीं मान सकते ना। कुछ ना कुछ

315
00:21:04,880 --> 00:21:09,040
चेंजिंग तो होती है। जरूर अंदाजे को हम प्रमाण नहीं मान सकते। अंदाजा लगा

316
00:21:09,040 --> 00:21:13,040
करके कि चेंजिंग हुई होगी तो मैंने कहा आपने पोस्टर लगाया कुछ ना कुछ चेंजिंग

317
00:21:13,040 --> 00:21:17,360
हुई होगी। तो इन्होंने जो है पागलखाने को विश्वविद्यालय लिख रखा है। फिर

318
00:21:17,360 --> 00:21:21,600
अंदाजे पर बात नहीं। अच्छा एक चीज और है जैसे आपने कहा ना जैसे कि भगवान

319
00:21:21,600 --> 00:21:26,080
को आप सर्वव्यापी नहीं मानते तो भगवान

320
00:21:26,080 --> 00:21:30,320
सर्वशक्तिमान है। ये तो मानते हैं आप। सर्वशक्तिमान तो है। हां।

321
00:21:30,320 --> 00:21:34,480
तो जैसे जो सर्वव्यापी वाली जो बात आई है वो

322
00:21:34,480 --> 00:21:38,640
ये बात आई है कि जब भगवान इस सृष्टि पर आते हैं। यानी जैसे अभी आए

323
00:21:38,640 --> 00:21:42,640
हैं जब हम उनको याद करते हैं। ठीक है? उनकी याद जो

324
00:21:42,640 --> 00:21:46,080
है हर मनुष्य आत्मा के अंदर छप जाती है।

325
00:21:46,080 --> 00:21:50,880
तो वो याद की वजह से वो योग की वजह से वो सर्वशक्तिमान

326
00:21:50,880 --> 00:21:54,880
कहे जाएंगे। नहीं नहीं मेरा जो मेरा एक्चुअली क्वेश्चन दूसरा

327
00:21:54,880 --> 00:21:58,960
था। मैं ये कह रहा था वो जैसे जैसे वो सर्वशक्तिमान है। मतलब

328
00:21:58,960 --> 00:22:03,040
जैसे कण-कण में है, मिट्टी में है, पत्थर में है। ये चीज गलत है। तो हमारा

329
00:22:03,040 --> 00:22:07,120
कहने का मतलब है कि वो निर्जीव चीज है। उसमें भगवान नहीं है। भगवान

330
00:22:07,120 --> 00:22:11,120
केवल एक है। वो है निराकार शिव। हां जब वो सृष्टि पर आते हैं

331
00:22:11,120 --> 00:22:15,520
आकर जब वो पाठ बजाते हैं पाठ मतलब जब वो ज्ञान देते हैं

332
00:22:15,520 --> 00:22:19,600
तो वो किसी साकार के द्वारा देते हैं तब वो साकार और निराकार के

333
00:22:19,600 --> 00:22:23,760
मील को ही भगवान कहते हैं। शिव शंकर भोलेनाथ बोलते हैं। अच्छा ठीक है।

334
00:22:23,760 --> 00:22:27,840
तो अब मैं इसमें दो चीजें आती हैं। एक ये आती है

335
00:22:27,840 --> 00:22:32,080
कि अ जैसे भगवान सब जगह नहीं है

336
00:22:32,080 --> 00:22:36,320
और निराकार है। तो उसका कोई तो स्ट्रक्चर बनेगा ना। मतलब

337
00:22:36,320 --> 00:22:40,400
जैसे हवा भी है मान लीजिए हवा दिख नहीं रही है आंखों का विषय

338
00:22:40,400 --> 00:22:44,560
नहीं है मगर यदि वो सब जगह नहीं है तो कुछ एक घेरा बन जाएगा ना उसका कि इतने एरिया

339
00:22:44,560 --> 00:22:49,120
में वो है तो वो स्ट्रक्चर कहां पर लिखा हुआ है कैसा है उसका स्ट्रक्चर

340
00:22:49,120 --> 00:22:53,280
स्ट्रक्चर जो हमें ये दिखाई देता है ना शिवलिंग जो मंदिरों

341
00:22:53,280 --> 00:22:57,360
में हम पूजा करते हैं वो उसका ये कहीं पे मेंशन है कि

342
00:22:57,360 --> 00:23:01,280
यही स्ट्रक्चर है उसका मेंशन नहीं है और साकार में जो शंकर

343
00:23:01,280 --> 00:23:05,520
मतलब ये हमारे जैसे ये सामने शंकर की मूर्ति है नहीं ये तो मूर्ति है जैसे हमारे हमारे शास्त्रों

344
00:23:05,520 --> 00:23:09,520
पे कहीं पे ये नहीं लिखा है कि ये उसका आकार है। ये तो उसका सिंबल है।

345
00:23:09,520 --> 00:23:13,760
हां सिंबल है। प्रतीक के रूप में तो है मगर ये उसका आकार है। ये नहीं लिखा है। तो कहीं

346
00:23:13,760 --> 00:23:17,760
अपने शास्त्रों में आपके अनुसार लिखा है? नहीं नहीं हमारे अनुसार नहीं है। हम तो यही

347
00:23:17,760 --> 00:23:21,760
जो भी चल रहा है तो इन्होंने इन्होंने बताया है कि उसका आकार

348
00:23:21,760 --> 00:23:26,160
ऐसा है। शिवलिंग के जैसा हां शिवलिंग का ही है ना शिवलिंग।

349
00:23:26,160 --> 00:23:30,160
उसका डायमेंशंस वगैरह भी दिया है कि कितने इंच है क्योंकि शिवलिंग

350
00:23:30,160 --> 00:23:34,480
भी बड़ी छोटी होती है। नहीं नहीं वो तो है देखो वो तो फिर मतलब डिजाइन डिजाइन बताया

351
00:23:34,480 --> 00:23:38,800
है अनुपात नहीं बताया जैसे हम बोलते हैं ना देखो मैं एक एग्जांपल देता हूं

352
00:23:38,800 --> 00:23:43,120
जैसे हवा है महसूस होता है ना तो ऐसी ही ये

353
00:23:43,120 --> 00:23:47,360
चीजें हैं। नहीं नहीं। मैं वह हवा का लेकर मैंने पूछा ना कि हवा सब जगह नहीं है अगर

354
00:23:47,360 --> 00:23:51,600
तो जितनी जगह पर वह होगी उसका एक स्ट्रक्चर बनेगा क्योंकि अगर कोई चीज़

355
00:23:51,600 --> 00:23:55,760
यहां तक है यहां के बाद नहीं है तो ये उसकी सीमा हो गई एक तरीके से। है ना?

356
00:23:55,760 --> 00:23:59,840
तो ऐसे करके उसकी चारों तरफ सीमा होगी। तभी तो वो दूसरी जगह नहीं है। नहीं

357
00:23:59,840 --> 00:24:03,840
तो पूरे फैला होगा। तो जब उसकी चारों तरफ सीमा होगी तो ये सीमा कहीं पे

358
00:24:03,840 --> 00:24:07,920
वर्णित है कि उसकी डायमीटर इतना है। ऐसा कुछ नहीं है। अच्छा ये नहीं है।

359
00:24:07,920 --> 00:24:11,920
अच्छा एक इसमें दूसरा क्वेश्चन ये आता है कि जैसे आपने

360
00:24:11,920 --> 00:24:16,400
हमने कहा कि वो ओमनी प्रेजेंट नहीं है। मगर कंट्रोलर तो है। हां कंट्रोलर

361
00:24:16,400 --> 00:24:20,960
कंट्रोलर है। जैसे वो चाहे तो ये सीढ़ी हिला सकता है। नहीं नहीं ऐसा क्यों बताएगा?

362
00:24:20,960 --> 00:24:25,200
नहीं नहीं। चाहे तो वो चाहे तो वो कुछ हिला सकता है। डब्बा

363
00:24:25,200 --> 00:24:29,680
कुछ ऐसा नहीं ऐसा नहीं है। सर्वशक्तिमान नहीं है वो। सर्वशक्तिमान

364
00:24:29,680 --> 00:24:33,680
है तो यह थोड़ी कि वो हम बोलेंगे कि हम नहीं मैं मैं बोलने को कहां

365
00:24:33,680 --> 00:24:37,840
कह रहा हूं मैं ऐसे नहीं हो सकता मैं गलत मैं वो तो जब मतलब जैसे

366
00:24:37,840 --> 00:24:42,320
आंधी आ रही है इस यहां पर आंधी आ रही है या कोई

367
00:24:42,320 --> 00:24:46,400
कुछ और करना है तो ईश्वर अगर सर्वशक्तिमान है तो

368
00:24:46,400 --> 00:24:50,480
वो मन में सोचेगा और वहां पर वो चीज हो जाएगी ना नहीं जैसे मान लीजिए

369
00:24:50,480 --> 00:24:54,560
वो चाहे कि टेबल खिसक जाए नहीं तो फिर सर्वशक्तिमान का अर्थ क्या है

370
00:24:54,560 --> 00:24:58,800
सर्वशक्तिमान का अर्थ ये है हमारी ये जो ज्ञान के हिसाब से

371
00:24:58,800 --> 00:25:02,800
उसकी जो याद है जो जो हम इस अभी जो

372
00:25:02,800 --> 00:25:07,040
भगवान इस सृष्टि पर आए हुए हैं उसको जो हम याद करते हैं उसकी

373
00:25:07,040 --> 00:25:11,600
जो याद हमारे अंदर जो छप जाती है ना वो सर्वशक्तिमान

374
00:25:11,600 --> 00:25:15,600
क्योंकि हर आत्मा के अंदर सृष्टि भाई साहब याद को अगर शुद्ध हिंदी में कहेंगे

375
00:25:15,600 --> 00:25:19,600
तो स्मरण कहेंगे स्मरण सर्वस्मरण मगर सर्वशक्तिमान

376
00:25:19,600 --> 00:25:23,840
का क्या मतलब है शक्ति सर्वशक्ति इसका क्या मतलब है

377
00:25:23,840 --> 00:25:28,400
शक्ति ये है कि जितना हम उससे पावर लेंगे उतना ही हमारे हमारे अंदर

378
00:25:28,400 --> 00:25:31,760
नहीं सर्व का मतलब होता है सब कुछ और शक्ति

379
00:25:31,760 --> 00:25:35,760
का मतलब शक्ति यानी सारे कार्य करने की शक्ति जितना पावर

380
00:25:35,760 --> 00:25:39,840
में तो सर्व नहीं आएगा ना सर्व विशेषण का अर्थ ही है कि सब

381
00:25:39,840 --> 00:25:44,080
कुछ सर्वशक्तिमान का अच्छा वो सर्वज्ञ है कि नहीं सर्वज्ञ

382
00:25:44,080 --> 00:25:48,240
मतलब ऑल नोइंग वो सब जानता है वो तो है ही ज्ञान ही तो है सर्वज्ञ है तो

383
00:25:48,240 --> 00:25:52,720
सर्व का मतलब वहां क्या हुआ कहां पे सर्वज्ञ में सर्वज्ञ

384
00:25:52,720 --> 00:25:56,800
मतलब सब कुछ क्योंकि देखो ज्ञान के हिसाब से

385
00:25:56,800 --> 00:26:00,880
नहीं समझे आप मेरा क्वेश्चन क्वेश्चन यह है अब आप दूसरे वे में ले जा रहे हो मैं ज्ञान के

386
00:26:00,880 --> 00:26:04,880
हिसाब से जा रहा हूं नहीं नहीं दूसरे वे से नहीं ले जा रहा मैं कह रहा हूं कि अगर हमने

387
00:26:04,880 --> 00:26:08,880
कहा कि सर्वज्ञ या सर्वज्ञाता ठीक

388
00:26:08,880 --> 00:26:13,280
है इसका मतलब हुआ ऑल नोइंग फिर उसमें ये नहीं है कि फलानी जगह पे

389
00:26:13,280 --> 00:26:17,440
कोई कीड़ा है उसको वो नहीं जानता वो जानता है हर चीज जानता है ना वो तो है ही हां

390
00:26:17,440 --> 00:26:21,440
तो सर्व का मतलब हमने क्या लिया सब कुछ तो जब हम यहां पे सर्व का मतलब सब

391
00:26:21,440 --> 00:26:25,680
कुछ ले रहे हैं तो जब हम कहेंगे सर्वशक्तिमान तो वहां पर भी हमको यही

392
00:26:25,680 --> 00:26:30,640
लेना पड़ेगा कि सब कुछ कर सकने की शक्ति जिसके अंदर है वो है सर्वशक्तिमान

393
00:26:30,640 --> 00:26:35,200
तो उनके अंदर सब कुछ कर सकने की सब शक्ति नहीं है। क्यों नहीं है सर्वशक्ति

394
00:26:35,200 --> 00:26:39,280
आप ही जो 5000 का जो ड्रामा बना हुआ है ना उस हिसाब से

395
00:26:39,280 --> 00:26:43,360
जो कुछ चल रहा है वो तो होना ही है वो तो घटित होना ही नहीं

396
00:26:43,360 --> 00:26:46,960
वो है ठीक है मगर मैं जैसे पूछ रहा हूं जैसे सीढ़ी रखी है

397
00:26:46,960 --> 00:26:51,280
तो इसको वो हिलाने की क्षमता रखते हैं कि नहीं अब ऐसा तो नहीं है ऐसा

398
00:26:51,280 --> 00:26:55,600
वो तो फिर एक वो हो जाएगा आप बोलोगे कि मैं नहीं बोलूंगा मैं नहीं बोलूंगा मैं कोई नास्तिक

399
00:26:55,600 --> 00:27:00,080
थोड़ी ना हूं जो बोलूं मेरा प्रश्न दूसरा है हां तो आप दूसरी वे में कह रहे हो मैं दूसरी

400
00:27:00,080 --> 00:27:04,240
नहीं नहीं अगर हम कह रहे हैं सर्वशक्तिमान भाई साहब तो हमें मानना पड़ेगा।

401
00:27:04,240 --> 00:27:08,320
वो सब कुछ कर सकता है। अगर वो चाहे तो यहां हवा चला सकता है। मैं ये थोड़ी ना करूंगा। चला के देखो। उसका

402
00:27:08,320 --> 00:27:12,560
मन नहीं चला रहा। भाई मैं अगर यह कह दूंगा कि ये अभी खिसकवा

403
00:27:12,560 --> 00:27:16,560
के दिखवाओ तो आप ये कह दोगे ना उसका मन है नहीं खिसक कर रहा। मगर हमें ये तो मानना

404
00:27:16,560 --> 00:27:20,640
पड़ेगा कि उसके अंदर कैपेबिलिटी है। चीजों

405
00:27:20,640 --> 00:27:24,640
को हिला सकने की या कुछ भी कर सकने की कैपेबिलिटी है। तभी तो

406
00:27:24,640 --> 00:27:28,640
उसको सर्वशक्तिमान कहेंगे। क्षमता है। क्षमता वो तो आप देखो आप किसी

407
00:27:28,640 --> 00:27:33,040
वे में ले जाओ। हमारे ज्ञान के हिसाब से हम हम ये मानेंगे कि

408
00:27:33,040 --> 00:27:37,040
वो जब इस सृष्टि पर आते हैं आके

409
00:27:37,040 --> 00:27:41,040
जो वो ज्ञान देते हैं ना तो वो तो सर्वज्ञ ज्ञाता हो गया ना भाई साहब ज्ञान

410
00:27:41,040 --> 00:27:45,360
देके जो हम ज्ञान लेते हैं योग पावर लेते हैं

411
00:27:45,360 --> 00:27:50,000
वो पावर हमारे अंदर आ जाती है हर आत्मा के अंदर आ जाती है तो वो

412
00:27:50,000 --> 00:27:54,240
उसको सर्व तो इसको शाब्दिक अंतर करके दिखाइए

413
00:27:54,240 --> 00:27:58,480
फिर मुझे कैसे इसका अर्थ कैसे आ रहा है सर्वशक्तिमान वो तो सर्व

414
00:27:58,480 --> 00:28:02,000
अध्यापक हो गया। अगर वो पढ़ा रहे हैं हम लेते हैं

415
00:28:02,000 --> 00:28:06,240
या सर्व योग अध्यापक हो गया। उसमें सर्वशक्तिमान तो आ ही नहीं रहा कहीं भी।

416
00:28:06,240 --> 00:28:10,320
सर्वशक्तिमान का अर्थ तो यही है ना कि वो सब कुछ कर सकता है। और

417
00:28:10,320 --> 00:28:15,200
अगर नहीं कर सकता तो वो ईश्वर कैसा दिक्कत ये है

418
00:28:15,200 --> 00:28:19,200
वो तो फिर लंबा हिसाब हो ही जाएगा। तो इसका मतलब वो सुप्रीम कंट्रोलर

419
00:28:19,200 --> 00:28:23,200
नहीं है। नहीं है। सुप्रीम तो है। सुप्रीम पावर है वो। भाई साहब जब आप कह रहे हो वो इसको

420
00:28:23,200 --> 00:28:27,200
नहीं हिला सकता तो काहे काहे का सुप्रीम? फिर ये ये बात हम

421
00:28:27,200 --> 00:28:31,360
कह नहीं सकते ना कि अभी आप बोलोगे भी हिला दे। अरे भाई मैंने आपको बताया

422
00:28:31,360 --> 00:28:35,600
तो है कि मैं नहीं बोलूंगा। अब आप सच बोलिए। हम तो ये कह रहे हैं कि

423
00:28:35,600 --> 00:28:39,760
मैंने क्या कहा? अगर अगर मैं कहूंगा कि हिला दे तो आप कहना आप

424
00:28:39,760 --> 00:28:43,840
ये कहोगे कि उसका मन है नहीं हिला रहा। हमारे आर्डर पे थोड़ी ना चलता

425
00:28:43,840 --> 00:28:47,840
है वो। कि हम तो अपने ज्ञान के हिसाब से चलेंगे। हां। ज्ञान

426
00:28:47,840 --> 00:28:53,280
के हिसाब से तो मतलब उसके हिसाब ज्ञान के हिसाब से अभी मैं आपको

427
00:28:53,280 --> 00:28:57,280
ऐसे नहीं कि जैसे आप कह रहे हो कि वैसे आपके हिसाब से वो

428
00:28:57,280 --> 00:29:01,600
कर दूं मगर ज्ञान के हिसाब से हमारा क्या होता है ना कि हमारा भी एक

429
00:29:01,600 --> 00:29:05,600
सब्जेक्ट होता है इसका कोर्स होता है इसको जानना पड़ेगा

430
00:29:05,600 --> 00:29:10,000
फिर उसके हिसाब से आप समझ पाओगे इसको अच्छा हां जी अच्छा चलिए दूसरा

431
00:29:10,000 --> 00:29:14,080
कुछ पूछ लेता हूं ये बताइए कि हमारे आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के

432
00:29:14,080 --> 00:29:18,080
अनुसार ईश्वर है यह सिद्ध कैसे होता है

433
00:29:18,080 --> 00:29:22,320
ईश्वर है। कैसे सिद्ध होता है? कैसे सिद्ध होता है?

434
00:29:22,320 --> 00:29:26,320
हां भाई ये हम लोग यह दुनिया देख रहे हैं तो इसमें ईश्वर है। ये

435
00:29:26,320 --> 00:29:30,400
सिद्ध कैसे हुआ? हम कैसे मान लें कि कोई ईश्वर नाम की सत्ता भी है।

436
00:29:30,400 --> 00:29:34,560
परमेश्वर भी है कोई इस बारे में विवेचन है कुछ चिंतन? हां

437
00:29:34,560 --> 00:29:38,800
बताइए। देखो आध्यात्मिक जो शब्द बना हुआ है। हम अधि वाला अंदर

438
00:29:38,800 --> 00:29:43,280
हम आत्मिक वाला आत्मा। हम आत्मा के अंदर

439
00:29:43,280 --> 00:29:47,520
जो ज्ञान भरा हुआ है। ठीक है? अभी जो हमारे आत्मा

440
00:29:47,520 --> 00:29:51,600
है उसके अंदर जो भी नॉलेज भरा हुआ है उसी को बोलते हैं आध्यात्मिक।

441
00:29:51,600 --> 00:29:55,920
अच्छा तो वो आत्मा के अंदर ज्ञान किसने भरा है? उसी परमात्मा

442
00:29:55,920 --> 00:30:00,080
ने। नहीं ये तो आप कह रहे हो कि उसने भरा है। मगर हम माने कैसे कि कोई है भरने

443
00:30:00,080 --> 00:30:04,080
वाला। अगर वही चीज है जैसे मैंने अभी बोला हवा है। हम ठीक

444
00:30:04,080 --> 00:30:08,240
है? तो यानी अगर मैं यह कह दूं कि यहां पे अभी एक अम्मा खड़ी हुई है नरि

445
00:30:08,240 --> 00:30:13,280
पिशाचिनी तो आप मान लोगे क्योंकि मैं आपको उदाहरण दे रहा हूं। हवा है तो आप मान लोगे क्या?

446
00:30:13,280 --> 00:30:17,280
देखो वही चीज है। जैसे समझे नहीं आपके बगल में मैं कहूं कि भैया यहां पे

447
00:30:17,280 --> 00:30:21,360
एक अम्मा खड़ी हुई है। नर पिशाचिनी वो मर गई थी और जो है वो आपका खून पीना चाहती

448
00:30:21,360 --> 00:30:25,360
है। तो आप मान लोगे। अब आप कहोगे कि भाई कैसे मान लूं? तो मैं

449
00:30:25,360 --> 00:30:29,440
आपको तर्क दूंगा क्योंकि हवा है। हवा को आपने बिना देखे माना कि नहीं माना? तो आपने

450
00:30:29,440 --> 00:30:33,520
अम्मा को बिना देखे मान लो। देखो ये लंबी बहस हो जाएगी।

451
00:30:33,520 --> 00:30:37,920
वो हो जाएगा। जी कहने का अर्थ ये है मैं बताऊं आपको। मैंने ये प्रश्न क्यों पूछा?

452
00:30:37,920 --> 00:30:42,160
मैं बताता हूं। इसलिए पूछा कि जब तक हम इस

453
00:30:42,160 --> 00:30:46,160
रूट में नहीं जाएंगे रूट ऑफ गड। रूट में नहीं जाएंगे तब तक हम ये नहीं समझ पाएंगे

454
00:30:46,160 --> 00:30:50,160
ईश्वर को सर्वशक्तिमान कहना है कि नहीं कहना। तो अब मैं बता रहा हूं। ईश्वर सिद्ध

455
00:30:50,160 --> 00:30:54,160
हमारी पढ़ाई को जब तक ये पूरा कोर्स

456
00:30:54,160 --> 00:30:58,320
को जैसे हमारा पांच दिन का कोर्स है ना इसको अच्छे से नहीं करेंगे। इसका

457
00:30:58,320 --> 00:31:03,280
डिटेल में नहीं जाएंगे तब तक नहीं। वो चीज आप समझ नहीं पाए। ठीक है। आप

458
00:31:03,280 --> 00:31:07,520
जो अपने जिस लक्ष्य से आए हैं वो आप उस हिसाब से कर रहे हैं।

459
00:31:07,520 --> 00:31:11,760
मगर ठीक है मैं आपको उस हिसाब से सेटिस्फाई नहीं कर पा रहा हूं। मगर

460
00:31:11,760 --> 00:31:15,760
है उसका है। नहीं वो है। मैं आपको ये क्वेश्चन क्यों किया वो

461
00:31:15,760 --> 00:31:19,920
है वो क्वेश्चन क्यों किया मैं बता दूं आपको। होता क्या है कि हमने कह दिया कि

462
00:31:19,920 --> 00:31:24,080
ईश्वर जो है ये नहीं सरका सकता है। या ईश्वर ये नहीं कर सकता या ईश्वर जन्म नहीं

463
00:31:24,080 --> 00:31:28,160
ले सकता। ईश्वर अवतार नहीं ले सकता। ऐसे कई लोग कह देते हैं। जैसे कुरान कुरान

464
00:31:28,160 --> 00:31:32,320
में भी कह दिया मेरी कोई संतान नहीं हो सकती। तो जब हम यह कह देते हैं ना कि ईश्वर

465
00:31:32,320 --> 00:31:36,480
फलाने फलाने काम नहीं कर सकता है तो हम ईश्वर को बाउंड करते

466
00:31:36,480 --> 00:31:40,640
हैं और जब बाउंड करते हैं तो ईश्वर लिमिटेड सिद्ध हो जाता है

467
00:31:40,640 --> 00:31:44,640
लिमिटेड कि भाई ईश्वर की ये सीमा है इसके बाहर वो नहीं जा सकता

468
00:31:44,640 --> 00:31:49,440
जब वो लिमिटेड सिद्ध होता है तो अब बात आती है कि ईश्वर की अवधारणा

469
00:31:49,440 --> 00:31:54,000
आती कहां से है तो ईश्वर की अवधारणा कहां से आती है वो मैं आपको बता रहा हूं एक ब्रहधारण

470
00:31:54,000 --> 00:31:58,080
उपनिषद का एक मंत्र है असतो मा सद्गमया तमसो मा

471
00:31:58,080 --> 00:32:02,080
ज्योतिर्गमया मृत्युमा मृतम गमाया इस मंत्र में बताया

472
00:32:02,080 --> 00:32:06,800
गया है कि एक जीव मात्र के अंदर कभी ना मरने की

473
00:32:06,800 --> 00:32:10,800
सदा सुखी रहने की और अखंड ज्ञानी बन जाने की चाह विद्यमान है।

474
00:32:10,800 --> 00:32:14,880
इसी चाह को शुद्ध हिंदी में कहते हैं सतचितानंद की चाह।

475
00:32:14,880 --> 00:32:18,960
है ना? सच्चिदानंद की हमारे अंदर चाह है। तो होता क्या

476
00:32:18,960 --> 00:32:23,120
है कि हमारे अंदर जितनी भी चाह है ना उस चाह के होने

477
00:32:23,120 --> 00:32:27,600
से ही उनके विषय का अस्तित्व सिद्ध होता है। जैसे कि हमारे अंदर सुनने की चाह है

478
00:32:27,600 --> 00:32:28,100
तो इसका

479
00:32:28,080 --> 00:32:32,240
मतलब दुनिया में आवाज है। हमारे अंदर देखने की चाह है तो इसका

480
00:32:32,240 --> 00:32:34,480
मतलब दुनिया में दृश्य है। तो जिस

481
00:32:34,480 --> 00:32:39,040
प्रकार सुनने से श्रवण सुनने से ध्वनि और

482
00:32:39,040 --> 00:32:43,280
क्या कहते हैं? देखने की चाह से दृश्य का अस्तित्व सिद्ध होता है। उसी

483
00:32:43,280 --> 00:32:47,920
प्रकार एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी प्राणी मात्र के अंदर ये जो सच्चिदानंद

484
00:32:47,920 --> 00:32:51,920
की चाह है ना जिससे वो अपने आप को हटा नहीं पा रहा। इसी से सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर का

485
00:32:51,920 --> 00:32:54,800
अस्तित्व सिद्ध होता है। एक नास्तिक व्यक्ति भी ये चाहता

486
00:32:54,800 --> 00:32:57,600
है कि धूप ज्यादा पड़ रही है तो कम हो जाए। बारिश ज्यादा पड़

487
00:32:57,600 --> 00:33:01,600
रही है तो कम हो जाए। चाहता है ना? ऑफिस जा रहा है लेट हो रहा है। नास्तिक है भगवान को नहीं मानता।

488
00:33:01,600 --> 00:33:05,600
मगर थोड़ी बारिश कम हो जाए। यानी मौसम को कंट्रोल करने की चाह। क्यों आ

489
00:33:05,600 --> 00:33:09,840
रही है? क्योंकि इस दुनिया में कोई है जो मौसम को कंट्रोल कर सकता है। तो अब

490
00:33:09,840 --> 00:33:13,840
यहां से हमने जाना कि इस तरीके से ईश्वर को और कोई दुनिया में तरीका ही

491
00:33:13,840 --> 00:33:18,320
नहीं है कि हम ईश्वर को सिद्ध कर सकें। अब बात ये है कि ईश्वर सिद्ध कैसे हुआ?

492
00:33:18,320 --> 00:33:22,480
कि मनुष्य के अंदर अबाध्य यानी सर्वशक्तिमान

493
00:33:22,480 --> 00:33:26,640
यानी मुक्त हो जाने की चाह विद्यमान है। तब ईश्वर का अस्तित्व सिद्ध हुआ। तो

494
00:33:26,640 --> 00:33:30,880
ईश्वर कौन होगा? अबाध्य। ईश्वर कौन होगा? मुक्त।

495
00:33:30,880 --> 00:33:34,880
किसी भी बाधा से मुक्त। इसलिए जब हम कहते हैं कि ईश्वर यह नहीं

496
00:33:34,880 --> 00:33:39,040
कर सकता तो बाधा है। मुक्त नहीं है। जब हम कहते हैं कि यह नहीं कर सकता

497
00:33:39,040 --> 00:33:43,280
तो सर्वशक्तिमान नहीं है। जबकि अस्तित्व ही सिद्ध होता है कहां से? जब

498
00:33:43,280 --> 00:33:47,440
मनुष्य सब कुछ कर सकने वाला बनना चाहता है। इसका मतलब इस दुनिया में कोई है

499
00:33:47,440 --> 00:33:51,520
जो सब कुछ कर सकता है। तो हम कह दे कि वो सब कुछ नहीं कर सकता। तो फिर वो ये वो

500
00:33:51,520 --> 00:33:55,600
ईश्वर नहीं है जिसकी वजह से ईश्वर सिद्ध होता है। और जब ईश्वर सिद्ध नहीं होगा तो

501
00:33:55,600 --> 00:33:59,760
धर्म सिद्ध नहीं होगा। धर्म सिद्ध नहीं होगा तो कौन माता है, कौन बहन है, कौन

502
00:33:59,760 --> 00:34:04,240
पत्नी है? यह अंतर हम नहीं कर पाएंगे क्योंकि जानवरों और हम में केवल

503
00:34:04,240 --> 00:34:08,480
एक ही अंतर है। हमारे पास, हमारे पास धर्म है। धर्म और बुद्धि। बुद्धि

504
00:34:08,480 --> 00:34:12,480
का है? हमारे पास धर्म है। हमारे पास धर्म है। ऐसी बुद्धि है कि

505
00:34:12,480 --> 00:34:12,980
हम

506
00:34:12,640 --> 00:34:16,720
धर्म को समझ पाए और उनके पास नहीं है। जिस कारण से वो धर्म धर्म को नहीं

507
00:34:16,720 --> 00:34:20,720
समझ सकते। उसको प्रज्ञा कहते हैं प्रज्ञा शक्ति। तो ये तो हुई ये वाली बात।

508
00:34:20,720 --> 00:34:26,720
अच्छा अब एक बात आ जाती है आफ्टर ऑल अह कि हम लोग एक

509
00:34:26,880 --> 00:34:31,440
डेली जो है एक मुरली के रूप में एक कोई दिव्य

510
00:34:31,440 --> 00:34:35,440
प्रकाश होता है, आवाज होती है जो आपको कोई संदेश देती है। तो इसमें

511
00:34:35,440 --> 00:34:39,760
एक बात यह है कि जैसे दुनिया में जो कुछ

512
00:34:39,760 --> 00:34:43,840
गलत चीजें हो रही है वो ईश्वर की मर्जी के बिना हो रही हैं या उसकी मर्जी से

513
00:34:43,840 --> 00:34:48,320
हो रही है। मतलब इस दुनिया में जो भी कुछ है उसका कारण ईश्वर है या

514
00:34:48,320 --> 00:34:53,920
अपने ईश्वर की मर्जी के बिना भी कुछ बन जाता है। दुनिया में अपने कर्मों का हिसाब है।

515
00:34:53,920 --> 00:34:57,920
नहीं तो कभी सृष्टि बनी ना जैसे देखो पहाड़ बना कर्म कर्म तो

516
00:34:57,920 --> 00:35:02,160
तब जब इंसान है। देखो हमारे ज्ञान के हिसाब से जब भगवान

517
00:35:02,160 --> 00:35:06,480
इस सृष्टि पे आते हैं आके जब वो नॉलेज देते हैं नॉलेज

518
00:35:06,480 --> 00:35:10,720
देने मतलब भगवान नॉलेज के लिए बाकी वो कुछ करते नहीं है करते करते भी हैं

519
00:35:10,720 --> 00:35:15,040
तो तो इस दुनिया में जैसे कोई बना इंसान तो उसका कारण भगवान

520
00:35:15,040 --> 00:35:19,200
है भगवान से ज्ञान लेगा तभी तो बनेगा नहीं ज्ञान

521
00:35:19,200 --> 00:35:23,280
देते हैं वो इंसान बना कैसे बिना भगवान की मर्जी से बना या अपने आप बन गया

522
00:35:23,280 --> 00:35:28,000
कैसे बना बना उसका पार्ट बना हुआ है

523
00:35:28,000 --> 00:35:32,160
नहीं उसको बनाया भगवान ने कि नहीं बनाया? अब

524
00:35:32,160 --> 00:35:36,160
आप बोलोगे कि ये चांद तारे ये सूर्य ये सब भगवान

525
00:35:36,160 --> 00:35:40,320
ने बनाए। देखो ये जो है ये सृष्टि जो है बना बनाया ड्रामा है। मतलब

526
00:35:40,320 --> 00:35:44,320
भगवान ने ये सब नहीं बनाया है। भगवान ने बनाया नहीं बनाया

527
00:35:44,320 --> 00:35:48,320
ये तो फिर एक लंबा क्वेश्चन हो जाएगा। ठीक है? तो ज्ञान के

528
00:35:48,320 --> 00:35:52,400
हिसाब से ये क्या है? 5000 साल का ड्रामा है। 5000 साल के बाद भगवान

529
00:35:52,400 --> 00:35:57,280
इस सृष्टि पर आते हैं। आकर नॉलेज देते हैं। नहीं नहीं मैं एक बात कह रहा हूं कि

530
00:35:57,280 --> 00:36:01,520
प्रॉब्लम क्या है कि आपने कहा हमारा भगवान सुप्रीम कंट्रोलर

531
00:36:01,520 --> 00:36:05,600
है। सुप्रीम सोल है। सुप्रीम सोल है। कंट्रोलर नहीं है। सुप्रीम

532
00:36:05,600 --> 00:36:09,600
सोल कंट्रोलर माना मतलब उसका कुछ है ही नहीं। यहां ना तो वो सीढ़ी हिला सकता है

533
00:36:09,600 --> 00:36:13,680
ना वो कंट्रोल कर सकता है। किसी के किसी दुनिया में

534
00:36:13,680 --> 00:36:17,680
कुछ हो रहा है। उसके हाथ में कुछ है कि वो सिर्फ इसीलिए मैं ज्ञान

535
00:36:17,680 --> 00:36:21,920
दूंगा। तुमको इधर से उधर ले जाऊंगा कुछ है क्यों नहीं है जो तो सुप्रीम

536
00:36:21,920 --> 00:36:26,000
पावर कहते हैं ना भगवान को तो है वो क्या कहते हैं ऑलमाइटी क्या कहते हैं

537
00:36:26,000 --> 00:36:30,240
ऑलमाइटी ओमनीपोटेंस मतलब हर चीज कर सकने की क्षमता होती

538
00:36:30,240 --> 00:36:34,320
है तो वो केवल ज्ञान देगा और आपको इधर से उधर ले जाएगा बाकी अगर कोई मान

539
00:36:34,320 --> 00:36:38,560
लो उधर से इधर ले जाने के बीच में कोई राक्षसी आ गया तो उस राक्षस से आपको लड़ना

540
00:36:38,560 --> 00:36:43,040
होगा भगवान नहीं लड़ेगा ऐसा है देखो आप इस

541
00:36:43,040 --> 00:36:47,120
ये चीजें जो है ना ये तो फिर लंबी चली जाएगी अब इसके लिए मैंने बोला

542
00:36:47,120 --> 00:36:51,120
ना कि हमारे ज्ञान के हिसाब से इसका पूरा कोर्स होता है। तो

543
00:36:51,120 --> 00:36:55,200
उसको फिर समझेंगे। फिर यह जो अभी जो बहस है यह फिर लंबी

544
00:36:55,200 --> 00:36:59,200
छिड़ जाती है। मैं इसमें ज्यादा नहीं नहीं बहस बहस की बात नहीं।

545
00:36:59,200 --> 00:37:03,200
मैं आपको कोई बहस करने थोड़ी ना आया हूं। मैं तो एक ये प्रश्न पूछ रहा था

546
00:37:03,200 --> 00:37:07,360
बस कि बात ये है कि अगर हम ये कहते

547
00:37:07,360 --> 00:37:11,520
हैं कि भगवान ही सबका कारण है। भगवान को सर्व कारण कहा

548
00:37:11,520 --> 00:37:15,520
गया है। सबका आधार मैं ही हूं। सनातन बीज मैं ही हूं। उसमें

549
00:37:15,520 --> 00:37:19,680
कहा गया गीता में। गीता में बोला मैं सनातन बीज हूं हर चीज का तो

550
00:37:19,680 --> 00:37:23,840
उसमें और गीता में बोला गया समस्त कर्मों को करते हुए भी तू मुझे करता

551
00:37:23,840 --> 00:37:28,160
जा मतलब कि इस दुनिया में जो भी कुछ है अच्छा है या चाहे बुरा है

552
00:37:28,160 --> 00:37:32,320
उसका कारण मूलभूत कारण एकमात्र भगवान ही है बीज

553
00:37:32,320 --> 00:37:36,480
रूप बस ये है क्योंकि जैसे एक पेंटर ने पेंटिंग बनाई

554
00:37:36,480 --> 00:37:40,640
महिला की मान लीजिए तो जब पेंटर पेंटिंग बनाता

555
00:37:40,640 --> 00:37:44,640
है महिला की तो उसमें उसका ऊपर का हिस्सा होता है आंख फिर ऐसा हिस्सा

556
00:37:44,640 --> 00:37:48,640
भी आता है जो आपत्तिजनक मगर वो पेंटर के लिए केवल एक चित्र

557
00:37:48,640 --> 00:37:52,880
होता है। वो उसमें कहीं भी रंग भर सकता है। इसी तरीके से भगवान के ऊपर अच्छाई

558
00:37:52,880 --> 00:37:57,200
बुराई का फर्क नहीं पड़ता क्योंकि वो उस दुनिया का हिस्सा नहीं है। समझ रहे हैं उसको?

559
00:37:57,200 --> 00:37:58,240
यही तो हम भी कह रहे हैं।

560
00:37:58,240 --> 00:38:02,320
निराकार है वो इस दुनिया का हिस्सा नहीं है। मगर वो जब साकार में

561
00:38:02,320 --> 00:38:06,400
आता है ना कर्मों कर्मों को करने वाले के रूप में की बात कर रहा हूं। तो अभी

562
00:38:06,400 --> 00:38:10,720
बात आती है कि इस दुनिया में अगर झूठ बोलने वाले का भी अस्तित्व

563
00:38:10,720 --> 00:38:15,120
है तो उसका कारण भी भगवान है। अगर इस दुनिया में कुरान का अस्तित्व

564
00:38:15,120 --> 00:38:19,120
है जो गलत बता रही है तो उसका कारण भी भगवान है। है ना?

565
00:38:19,120 --> 00:38:23,120
जिसको हम लोग शायद कहते हैं कि कुरान और बाइबल में गीता में एक ही बात लिखी है। हालांकि

566
00:38:23,120 --> 00:38:27,200
हम लोग वो बात नहीं मानते। हां वो जैसे खुदा के तख्त

567
00:38:27,200 --> 00:38:31,360
जब विनाश होगा जब आठ फरिश्ते उठाते हैं बोलते हैं ना वो

568
00:38:31,360 --> 00:38:35,680
लोग भी बोलते हैं अच्छा एक बात नहीं समझ में आती जब आप इसको कुरान के साथ ऐड

569
00:38:35,680 --> 00:38:39,680
कर देते हो गीता को तो फिर इसको सनातन क्यों कहते हो नहीं नहीं गीता को हमने

570
00:38:39,680 --> 00:38:43,840
ऐड नहीं किया हम जैसे कुछ बातें जो आपने बोला ना कि कुछ बातें

571
00:38:43,840 --> 00:38:48,880
आई ये जो जैसे बोलते हैं ना कि जब खुद

572
00:38:48,880 --> 00:38:52,880
खुदा के बंदे उठाएंगे जी जी जी ना और यहां बोला है

573
00:38:52,880 --> 00:38:57,120
कि जब विनाश होगा तो जो भगवान के जो आठ

574
00:38:57,120 --> 00:39:01,360
अष्ट देव हैं वो उसके उसको उठाएंगे

575
00:39:01,360 --> 00:39:05,760
हम तो वहां पे वो वाली बात आई है अच्छा तो जैसे

576
00:39:05,760 --> 00:39:10,080
बाकी आप कुरान को भी मानते हो क्या चीज कुरान को वो तो हर

577
00:39:10,080 --> 00:39:13,280
चीज जब इस सृष्टि में जो कुछ है वो तो अपने

578
00:39:13,280 --> 00:39:17,440
हिसाब से चल रहा है मगर हमारा तो मेन तो मुरली है मुरली है यानी

579
00:39:17,440 --> 00:39:21,680
कि हम हमारा जो मुरली आपका अंतिम प्रमाण मुरली है मुरली है हम मुरली आपका अंतिम

580
00:39:21,680 --> 00:39:25,760
प्रमाण वेद नहीं है वेद नहीं तो फिर आप सनातनी वैदिक कैसे हुए?

581
00:39:25,760 --> 00:39:30,320
हिंदू कैसे हुए? मतलब फिर आपको यह कहना पड़ेगा हमारा एक अलग सेट है।

582
00:39:30,320 --> 00:39:34,720
सेट देखो यह तो फिर वही मैं बोल रहा हूं ना। देखो ये वही

583
00:39:34,720 --> 00:39:38,800
चीज है कि जब तक हम आप इस चीज का

584
00:39:38,800 --> 00:39:42,880
पूरा कोर्स नहीं करेंगे। माना इसको अच्छे से जानेंगे नहीं तब तक हम

585
00:39:42,880 --> 00:39:47,120
आपको समझा भी नहीं सकते। अच्छा वो जो कोर्स आप कराते हो उसकी रिकॉर्डिंग

586
00:39:47,120 --> 00:39:51,360
करने देते हो। जैसे हमारे भी जैसे हम कोर्स कर रहे हैं

587
00:39:51,360 --> 00:39:55,360
उसमें हम आए हम जॉइ हो जाएंगे कोर्स में ज्वाइन हो जाएंगे तो क्या

588
00:39:55,360 --> 00:39:59,520
हम उसकी रिकॉर्डिंग कर पाएंगे आप बात कर सकते हैं

589
00:39:59,520 --> 00:40:03,680
मैं पूरी रिकॉर्डिंग क्योंकि हम वहां पे क्वेश्चंस भी करेंगे ना अपने क्योंकि कोर्स कोर्स

590
00:40:03,680 --> 00:40:07,680
के नाम पे चलिए हम आ गए पांच दिन कोई बड़ी बात नहीं है। ठीक है? मगर जो क्वेश्चन रेज

591
00:40:07,680 --> 00:40:11,760
होंगे उनको हम करेंगे। फिर वहां उसकी रिकॉर्डिंग कि भाई हमारे सवालों के सही जवाब दिए जा

592
00:40:11,760 --> 00:40:15,760
रहे हैं कि नहीं दिए जा रहे या सनातन के नाम से सनातन ही बताया जा रहा है या कुछ और

593
00:40:15,760 --> 00:40:19,920
बताया जा रहा है। तो ये तो इतनी तो छूट होगी ना आपके कोर्स में। नहीं होगा। वो

594
00:40:19,920 --> 00:40:24,160
तो जब कोर्स करेंगे पूरा पहले आप पूरा कोर्स करोगे ना

595
00:40:24,160 --> 00:40:28,320
फिर कोर्स के हिसाब से ही फिर समझाया जाएगा। कोर्स में समझाया जाएगा ना?

596
00:40:28,320 --> 00:40:32,560
हां। कोर्स में समझाते चलेंगे वो। हां। तो ठीक है। तो वो कोर्स कैसे ज्वाइन

597
00:40:32,560 --> 00:40:36,640
करने को मिलेगा हमें? ऑनलाइन भी हो जाता है, ऑफलाइन भी होता है। ऑनलाइन मतलब

598
00:40:36,640 --> 00:40:40,720
कोई नंबर वगैरह पे हमें कॉल करना है, क्या करना है? वही देवी जी हैं जो आपकी उनके

599
00:40:40,720 --> 00:40:44,720
नंबर पे कॉल कर लें। कॉल कर लें। उनसे बोल दीजिए कि हमें कोर्स करना है। अच्छा तो

600
00:40:44,720 --> 00:40:48,800
कोर्स करने के बाद फिर वो आपको टाइमिंग दे देंगे क्या-क्या टाइमिंग है। अच्छा तो

601
00:40:48,800 --> 00:40:52,800
ऑनलाइन कर सकते हैं आप। ठीक है। मैं एक बस एक लास्ट बात बोल के अपना

602
00:40:52,800 --> 00:40:57,120
आज के यह पूरा करते हैं। बात यह है कि भगवान सभी

603
00:40:57,120 --> 00:41:01,440
कारणों का भी कारण है। मूल कारण है। तो हमें ये मानना

604
00:41:01,440 --> 00:41:05,600
पड़ेगा कि दुनिया में अगर कोई झूठ बोल रहा है उसका भी कारण भगवान है।

605
00:41:05,600 --> 00:41:09,840
कुछ भी हो रहा है उसका भी कारण भगवान है। बस ये है कि व्यवहारिक

606
00:41:09,840 --> 00:41:13,920
रूप से भगवान उससे जुड़ा हुआ नहीं दिख रहा है। मगर जब मूल में जाएंगे तो उसका भी

607
00:41:13,920 --> 00:41:17,920
कारण भगवान दिखाई देगा। मैं पूरी में भी लिखा हुआ है। मैं मैं पूरी कर लूं बात

608
00:41:17,920 --> 00:41:22,240
अपनी। तो अब बात यह है कि अगर भगवान बुराई का भी मूल कारण

609
00:41:22,240 --> 00:41:26,560
है तो अगर भगवान हमसे कुछ कह रहे हैं जैसे कि आपने कहा मुरली

610
00:41:26,560 --> 00:41:30,640
आती है तो हम यह कैसे मान लें कि ये जो है भगवान हमको

611
00:41:30,640 --> 00:41:34,960
भटकाने के लिए नहीं कह रहे क्योंकि भगवान के ही कारण दूसरी और किताबें भी छपी है।

612
00:41:34,960 --> 00:41:38,960
आपके ही हिसाब से ऐसा अर्थ किया जा रहा है जो गलत है। वो भी भगवान की मर्जी के बिना

613
00:41:38,960 --> 00:41:43,200
थोड़ी ना हो रहा है। इसका मतलब जब भगवान की मर्जी से ही अच्छाई बुराई दोनों हैं

614
00:41:43,200 --> 00:41:43,700
तो

615
00:41:43,440 --> 00:41:47,440
भगवान आपसे आकर डायरेक्ट अगर कुछ कह रहे हैं तो हम विश्वास कैसे कर लें कि भगवान

616
00:41:47,440 --> 00:41:51,440
हमें भटकाने के लिए नहीं कह रहे हैं। में सही रास्ते पर ले जाने के लिए कह रहे हैं। इसका क्या

617
00:41:51,440 --> 00:41:55,520
है? हमारे पास तो है इसका बृहधारण उपनिषद में लिखा हुआ

618
00:41:55,520 --> 00:41:59,600
है कि जो वेद है वो ईश्वर की स्वास के रूप में विद्यमान

619
00:41:59,600 --> 00:42:03,680
है। स्वास स्वास क्या होती है? जैसे हम दो प्रकार के कार्य कर सकते

620
00:42:03,680 --> 00:42:07,760
हैं। एक चाहकर और एक बिना चाहकर। अगर हम चाह के कुछ करते

621
00:42:07,760 --> 00:42:11,760
जैसे मान लीजिए मेरे सामने दो बटन है बोर्ड में। है ना? तो मैं

622
00:42:11,760 --> 00:42:15,840
चाहूं तो लेफ्ट वाला दबाऊ। मैं चाहूं तो राइट वाला दबाऊं। क्योंकि मैं चाहता हूं कुछ करना।

623
00:42:15,840 --> 00:42:20,080
मगर कुछ काम हम ऐसे होते हैं जो बिना चाह के करते हैं। ऐसा ही एक कार्य है

624
00:42:20,080 --> 00:42:24,160
सांस। बच्चा माता के गर्भ से जन्म ले रहा है और सांस ले रहा

625
00:42:24,160 --> 00:42:28,160
है। तो जो वेद हैं उनको कभी नहीं कहा गया कि उनको किसी

626
00:42:28,160 --> 00:42:32,160
ने रचा है। वो भगवान की सांस के रूप में विद्यमान है। इसलिए

627
00:42:32,160 --> 00:42:36,400
हमारे लिए प्रमाण है। इसीलिए विष्णु भगवान जब बुद्ध के रूप में आते हैं और वेदों

628
00:42:36,400 --> 00:42:40,480
का खंडन करते हैं। है ना? तो हम बुद्ध को सम्मान तो

629
00:42:40,480 --> 00:42:44,720
देते हैं मगर वेदों का विरोध नहीं करते क्योंकि हमारे लिए परम प्रमाण सनातनी

630
00:42:44,720 --> 00:42:48,720
वो है। वैदिक वो है हिंदू वो है जिसके लिए परम प्रमाण वेद

631
00:42:48,720 --> 00:42:53,040
है। तो अगर हम कह रहे हैं कि वेदों के विरुद्ध जाकर के हमको मुरली

632
00:42:53,040 --> 00:42:57,040
के रूप में कोई दिव्य शक्ति आ रही है और वो ये बता रही है कि

633
00:42:57,040 --> 00:42:58,480
ऐसा करो वैसा करो वेद की मत

634
00:42:58,480 --> 00:43:02,560
मानो तो हमारे लिए वो प्रमाण नहीं हो सकता। क्यों नहीं हो सकता? क्योंकि वही दिव्य शक्ति दूसरी

635
00:43:02,560 --> 00:43:06,640
लीलाएं भी कर रही है। वही दिव्य शक्ति किसी झूठ बोलने वाले को झूठ

636
00:43:06,640 --> 00:43:10,640
बोलने की शक्ति भी प्रदान कर रही है। आपने कहा सबके मन में होता है

637
00:43:10,640 --> 00:43:14,640
ना स्मरण याद भगवान की याद होता है। यानी कि वो दिव्य शक्ति

638
00:43:14,640 --> 00:43:18,640
वहां होती है जहां झूठ बोला जा रहा है। शराब पी जा रही है। फिर भी वहां नहीं रोकती। वह

639
00:43:18,640 --> 00:43:22,720
तो फिर देखो जब पुरुषार्थ करता है ना जब भगवान इस

640
00:43:22,720 --> 00:43:26,960
सृष्टि पर आते हैं कि हर आत्मा अपना अपना जो पुरुषार्थ करती है तो

641
00:43:26,960 --> 00:43:31,040
कोई अच्छा भी करती है कोई बुरा भी नहीं वो ठीक है मगर भगवान का कंट्रोल है

642
00:43:31,040 --> 00:43:35,120
ना वो चाहे तो फट से रोक सके मगर वो नहीं रोकती क्योंकि वो एक लीला

643
00:43:35,120 --> 00:43:39,120
रूप में उस कार्य को होने देती है इसका मतलब कि हमको जो वो कह रहे हैं

644
00:43:39,120 --> 00:43:43,200
हम विश्वास इसलिए नहीं कर सकते क्योंकि झूठ बोलने वालों का अस्तित्व भी उन्हीं के कारण

645
00:43:43,200 --> 00:43:47,200
है। इसीलिए हम लोग वेद पे विश्वास करते हैं। परम प्रमाण वेद को मानते हैं।

646
00:43:47,200 --> 00:43:51,600
मुरली को नहीं मानते हम लोग क्योंकि वेद अपौरुषय हैं। इनको अपौरुषय

647
00:43:51,600 --> 00:43:55,680
ग्रंथ कहा गया है। मुरली पौरुषय है। वो कह रही है आपसे आकर के

648
00:43:55,680 --> 00:43:59,840
वो अपौरुषय ग्रंथ नहीं है। ये थोड़ा सा आ जाता है। चलिए अब आपने कहा

649
00:43:59,840 --> 00:44:04,080
है कि आपका जो है कोर्स करने पे हमको सारे क्वेश्चंस के आंसर्स मिल जाएंगे।

650
00:44:04,080 --> 00:44:08,160
क्वेश्चनों के आंसर आप कोर्स करेंगे जानेंगे तब उसका पूरा

651
00:44:08,160 --> 00:44:12,560
आपको मिल जाएगा। क्योंकि अगर अगर भगवान सब कुछ नहीं कर सकते।

652
00:44:12,560 --> 00:44:13,600
सर्वव्यापक नहीं

653
00:44:13,600 --> 00:44:17,760
है तो फिर वो मनुष्य की चाह का विषय सिद्ध नहीं होंगे। फिर उसका अस्तित्व ही नहीं सिद्ध

654
00:44:17,760 --> 00:44:21,920
कर पाएंगे हम लोग। नास्तिकों का खंडन ही नहीं हो पाएगा और दुनिया नास्तिक

655
00:44:21,920 --> 00:44:26,000
हो जाएगी। ऐसा ईश्वर देंगे कि वो ये नहीं कर सकता वो नहीं कर सकता। वो बाध्य

656
00:44:26,000 --> 00:44:30,240
है वो लिमिटेड है। अगर ऐसा ईश्वर देंगे तो नास्तिक लोग जीत जाएंगे। हम

657
00:44:30,240 --> 00:44:34,240
लोग हरा ही नहीं पाएंगे नास्तिक को। क्यों नहीं हरा पाएंगे? क्योंकि ईश्वर तो वहीं से

658
00:44:34,240 --> 00:44:38,480
सिद्ध होगा कि ईश्वर सर्वशक्तिमान है। और जब हम यही कह देंगे नहीं सर्वशक्तिमान

659
00:44:38,480 --> 00:44:42,800
सब कुछ नहीं कर सकता। बाधित है तो वो नास्तिकों का पक्ष मजबूत हो जाएगा।

660
00:44:42,800 --> 00:44:46,960
नहीं शक्तिमान और सर्वव्यापी मैंने बोला कि सर्व्यापी

661
00:44:46,960 --> 00:44:51,040
जैसे आपने शक्तिमान भी नहीं माना ना उनको शक्तिमान सर्वक्तिमान शक्तिमान

662
00:44:51,040 --> 00:44:55,280
तो है गीता मैंने आपसे बार-बार पूछा सीढ़ी हिला सकता है कि नहीं आपने कहा नहीं हिला सकता वो सीढ़ी

663
00:44:55,280 --> 00:44:59,520
हिला सकता है वो वाली बात कैसे मैं आपसे ये आप गलत करते होगे

664
00:44:59,520 --> 00:45:03,680
अभी आप ये बोलोगे आप ये क्यों सोच रहे हो मैं ऐसा बोलूंगा भाई मैंने तो मैंने

665
00:45:03,680 --> 00:45:07,680
आपको 10 मैंने आपको 10 बार कहा मैं नहीं बोलूंगा मेरे भाई क्योंकि आप

666
00:45:07,680 --> 00:45:11,760
उसका उत्तर ये दे पाओगे कि भगवान की मर्जी वो नहीं हिला रहा हिला सकता है

667
00:45:11,760 --> 00:45:15,840
कि बात है हां हिला सकता है भगवान की मर्जी नहीं हिला सकता सर्वशक्तिमान तो है ही वो तो सब कुछ

668
00:45:15,840 --> 00:45:19,920
कर सकता है हां तो क्या वो अवतार ले सकता है मां के पेट से जन्म ले सकता

669
00:45:19,920 --> 00:45:25,040
है नहीं तो बाधित हो गया वो केवल गर्भ में

670
00:45:25,040 --> 00:45:28,640
किसी के शरीर में आता है हां तो मैं तो मैं अभी कह रहा हूं

671
00:45:28,640 --> 00:45:32,640
किसी माता के कोख से जन्म ले सकता है ले सकता नहीं ले सकता अच्छा

672
00:45:32,640 --> 00:45:36,640
झूठ बोलने वाले को बना सकता है झूठ बोलने वाले को बना सकता

673
00:45:36,640 --> 00:45:40,640
है ये तो मैंने बोला फिर वही कोर्स वाली बात वही वही मैं कह रहा हूं ना आप

674
00:45:40,640 --> 00:45:44,800
कहीं ना कहीं उसको लिमिटेड कर रहे हो फिर वही चीज आ जाएगी ना हमारा जो सनातन ईश्वर

675
00:45:44,800 --> 00:45:49,040
है उसके बारे में कोई एक बात नहीं लिखी जा सकती कि ही कांट

676
00:45:49,040 --> 00:45:53,280
डू इट यह नहीं कहा जा सकता अगर कोई कहे वो मत्स्य नहीं बन सकता मत्स्य

677
00:45:53,280 --> 00:45:57,360
अवतार लेता है अगर वो अवतार है नहीं अगर कोई कहे कि वो पूर्व

678
00:45:57,360 --> 00:46:01,440
नहीं बन सकता पूर्व लेता है अगर कोई कहे कि आधा जानवर आधा इंसान नहीं

679
00:46:01,440 --> 00:46:05,600
बन सकता वो नरसिंह बनता है अगर कोई कहे कि वामन नहीं हो सकता वामन अवतार

680
00:46:05,600 --> 00:46:10,000
लेता है अगर कोई कहे कि वो छल नहीं कर सकता मोहिनी

681
00:46:10,000 --> 00:46:14,000
बनता है कृष्ण बन बनता है और कोई कहे वह सत्य प्रतिज्ञ नहीं हो सकता वो

682
00:46:14,000 --> 00:46:18,000
राम बनता है। मतलब दुनिया सनातन की

683
00:46:18,000 --> 00:46:22,640
क्वालिटी क्या है? सनातन ईश्वर वो ईश्वर है कि पूरी दुनिया में

684
00:46:22,640 --> 00:46:26,720
जितने भी सनातन के विरोध में खड़े हुए ईश्वर हैं उनमें सब में

685
00:46:26,720 --> 00:46:30,800
कहीं ना कहीं लिमिट लगी हुई है। और एकमात्र सनातन ईश्वर ऐसा है।

686
00:46:30,800 --> 00:46:34,960
हम सनातनियों का ईश्वर हम ऐसा है जो जिसके लिए एक पंक्ति

687
00:46:34,960 --> 00:46:39,360
नहीं लिखी जा सकती कि ही कांट डू इट। और अगर हम यह कह दें

688
00:46:39,360 --> 00:46:43,520
कि भैया वो झूठ बोलने वालों जैसे झूठ बोलने वाला अगर हमने यह मान लिया

689
00:46:43,520 --> 00:46:44,020
कि

690
00:46:43,840 --> 00:46:47,840
झूठ बोलने वालों का भी कारण वही है तो हमें ये मानना पड़ेगा कि मुरली पे हमें

691
00:46:47,840 --> 00:46:52,240
भरोसा कैसे और अगर नहीं मानेंगे झूठ बोलने वालों का कारण

692
00:46:52,240 --> 00:46:56,320
भगवान को तो वो सर्वशक्तिमान सिद्ध नहीं होगा। दिक्कत है। या तो

693
00:46:56,320 --> 00:47:00,480
सर्वशक्तिमान सिद्ध कर लो या फिर उसको झूठ बोलने वालों को बनाने वाले कारण

694
00:47:00,480 --> 00:47:04,800
सिद्ध मान लो। अगर मान लेंगे तो मुरली पर भरोसा सिद्ध नहीं हो। फिर वेद अपसाय

695
00:47:04,800 --> 00:47:09,120
ग्रंथों के पास जाना पड़ेगा। वही अंतिम प्रमाण। फिर मुरली अंतिम प्रमाण नहीं रह जाएगी। खैर

696
00:47:09,120 --> 00:47:13,200
आप लोगों को समझ में आया होगा। हम लोग आए थे आध्यात्मिक विश्वविद्यालय। आपने इतना सारा

697
00:47:13,200 --> 00:47:17,280
समय भी हमको दिया और हमारा आपसे यही रिक्वेस्ट है। जी जी

698
00:47:17,280 --> 00:47:21,280
और हम हम जो है आपका कोर्स करने के लिए विचार कर रहे हैं। भाई साहब का

699
00:47:21,280 --> 00:47:25,520
हम कोर्स भी करेंगे। ये हमको जो है प्रोवाइड करेंगे और हमको जो है उसको रिकॉर्ड

700
00:47:25,520 --> 00:47:29,520
करने की अनुमति भी प्रदान करेंगे। हम इनके कोर्स में आएंगे और वहां पर

701
00:47:29,520 --> 00:47:33,600
जो क्वेश्चंस रेज हो रहे होंगे। मेरे ख्याल से अमोल कोकने जी है ना

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जो कोर्स कोर्स कौन कराता है? माताएं करा अगर माताएं उत्तर नहीं दे

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पाई तो तो अमोल कोकने जी आएंगे। नहीं वो तो देखो वो तो वकील

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साहब है। वह तो अपना उस पर बिजी रहते हैं। वो अपना सेमिनार

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नहीं मैं उनको देखा है ना प्रश्नोत्तरी वगैरह गीता का वो देते हैं। ज्ञान व्यान

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देते हैं वो गीता के जैसे सेमिनार करते हैं। तो वही हेड

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तो वही है ना इसके हेड हेड ऐसा नहीं है वो नहीं है। हमारे वहां पर जो

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इसको अच्छा

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ठीक वो ठीक है। मतलब माताएं माता जी उत्तर नहीं दे पाएंगी तो कोई और

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देगा उत्तर या खत्म व नहीं देंगे आपका उत्तर जरूर मिलेगा। जी जी जी

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चलिए ठीक है तो मैं अब अब आप लोगों कोर्स के लिए इंतजार

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करिए कि इनसे हमें जो है कोर्स का एक्सेस मिले और हम उसमें ज्वाइन करें और जो थोड़ी

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सी ये अंतर आ रहे हैं हो क्या रहा है ना कि छोटी-छोटी सी अवधारणाओं के कारण

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हम सनातनी बट रहे हैं और इसका फायदा जो है दूसरे लोग उठाते हैं क्योंकि

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छोटी-छोटी सी अब जैसे हमने कह दिया ओमनी प्रेजेंट नहीं है तो हमारा जिसजिस

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बुक में ओमनी प्रजेंट कहा गया उसके प्रति अनास्था आ गई अरे गलत इंटरप्रिटेशन है

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अनास्था आ गई या हमने कह दिया वो तार नहीं लेता मूर्ति के लिए अनास्था आ मंदिरों

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के लिए अनास्था आ गई। अब कोई आक्रमण कर रहा है मंदिरों पे और जो

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अनास्था वाले लोग बैठे हैं चलो भैया बचा लो मंदिर को चल के। नहीं नहीं हम तो

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विश्वविद्यालय वाले लोग हैं। हम नहीं मानते कि भगवान का कोई अवतार होता है, मूर्ति थोड़ा

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सा इससे अंतर आ रहा है। हो सकता है कि आपका कोर्स करने से हम लोग एक

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मत हो जाए। ठीक है। जी। आपने बहुत सारा समय दिया। आपको आभार

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ढेर सारा। जय श्री राम।
