1
00:00:02,000 --> 00:00:06,240
तो सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे

2
00:00:06,240 --> 00:00:11,680
और भगवान का भजन अवश्य कर रहे होंगे।

3
00:00:11,680 --> 00:00:15,840
आज की जो लाइव है हमारी उसका शीर्षक तो आपने देख ही लिया

4
00:00:15,840 --> 00:00:20,160
है। जेल कट्टू बाबा किस प्रकार से चर्चा

5
00:00:20,160 --> 00:00:25,360
से फरार हैं और

6
00:00:25,360 --> 00:00:30,080
उन्होंने अपने चेलों के बारे में क्या कहा है जो इंटरनेट पर विष्ठा

7
00:00:30,080 --> 00:00:35,120
अपने मुख से निकाल रहे हैं प्रकार भांति भांति की विष्ठा

8
00:00:35,120 --> 00:00:39,520
सबसे पहले तो यह समझ ले कि जेल कट्टू बाबा क्यों कह रहा हूं मैं

9
00:00:39,520 --> 00:00:43,520
आप देखिए यह मेरे पास एक बुक है भाई ऑपरेटर जी से

10
00:00:43,520 --> 00:00:47,520
कहूंगा कि आप जो है गरिमा गीता की अवश्य निकाल लें उसी से एक दो

11
00:00:47,520 --> 00:00:51,600
पेजेस मुझे दिखाने हैं तो वो जरूर निकाल ये

12
00:00:51,600 --> 00:00:55,680
ये बाबा है जेल कट्टू देखिए आपको

13
00:00:55,680 --> 00:00:59,840
शायद दिख रहा हो बुक में है ना इसने ड्रेस भी जेल वाली

14
00:00:59,840 --> 00:01:04,160
पहनी हुई है। इससे स्पष्ट हो रहा है जेलकट्टू बाबा है। वहीं से जो है

15
00:01:04,160 --> 00:01:08,880
इसकी प्रवचन वाली जो फोटो है वो दिखाई दे रही है।

16
00:01:08,880 --> 00:01:13,120
तो इसलिए जेल कट्टू कहना इसके लिए कोई वो अतिशयोक्ति

17
00:01:13,120 --> 00:01:17,280
नहीं होगा और

18
00:01:17,280 --> 00:01:21,440
हमने हाई कोर्ट में इसके खिलाफ याचिका लगाई हुई है और

19
00:01:21,440 --> 00:01:26,400
उसमें जो प्रारंभिक स्तर पर जो

20
00:01:26,400 --> 00:01:30,640
चीजें प्राप्त हुई है कोर्ट की ओर से तो उसमें हमारे पक्ष में ही चीजें गई हैं। लखनऊ

21
00:01:30,640 --> 00:01:34,640
में इसका सेंटर बंद है। भाग गए यहां से। हां, यहां से

22
00:01:34,640 --> 00:01:38,720
100 200 किलोमीटर दूर यह लोग एक्टिव होंगे। पर

23
00:01:38,720 --> 00:01:43,440
लखनऊ में यह लोग निष्क्रिय हो चुके हैं। तो

24
00:01:43,440 --> 00:01:47,440
जो प्रारंभिक स्तर पर हमारी विजय हो चुकी है। अब धीरे-धीरे कोर्ट

25
00:01:47,440 --> 00:01:51,920
का प्रोसेस होता है। बहुत सारे मुकदमे होते हैं और

26
00:01:51,920 --> 00:01:55,920
लड़ने वाला जो हमारा पक्ष है उसके बारे में बात करूंगा मैं। मैं

27
00:01:55,920 --> 00:02:00,520
लिख लेता हूं इस बात को। इस बारे में भी बात करनी है।

28
00:02:00,520 --> 00:02:03,840
[गला साफ़ करने की आवाज़]

29
00:02:03,840 --> 00:02:06,160
तो

30
00:02:06,160 --> 00:02:10,160
कई सारी चीजें जिनके कारण कोर्ट की प्रोसेसिंग होती है वो

31
00:02:10,160 --> 00:02:14,160
लंबी होती है। पर प्रारंभिक जो रुझान

32
00:02:14,160 --> 00:02:18,160
है वो हमारे पक्ष में आए हैं। अब रामपाल

33
00:02:18,160 --> 00:02:22,160
फरार कैसे है? रामपाल फरार इस प्रकार से है कि

34
00:02:22,160 --> 00:02:26,400
हमने जो याचिका लगाई है हाई कोर्ट में उसमें

35
00:02:26,400 --> 00:02:28,640
सीधे-सीधे

36
00:02:28,640 --> 00:02:32,960
रामपाल की जितनी भी तथाकथित ये जो किताबें

37
00:02:32,960 --> 00:02:38,240
हैं उसकी जितनी भी सामग्री है उन सबको चैलेंज किया गया है और रजिस्टर्ड

38
00:02:38,240 --> 00:02:42,240
केस मतलब लिखित रूप से ऐसे नहीं केवल मुंह की बातों से

39
00:02:42,240 --> 00:02:46,400
चैलेंज किया गया है। तो भाई जो व्यक्ति सच्चा होता

40
00:02:46,400 --> 00:02:50,400
है उसकी चीजों को कोर्ट में कोई ले जा रहा है उच्च न्यायालय में ले जा रहा

41
00:02:50,400 --> 00:02:54,800
है और वो सच्चा व्यक्ति है जाहिर

42
00:02:54,800 --> 00:02:59,120
सी बात है कि उस पर व्यर्थ ही आरोप लग रहे हैं ये उसकी उसके अनुसार

43
00:02:59,120 --> 00:03:03,120
तो जो व्यक्ति सच्चा होता है वह अपीयर होता है और आकर के कहता है भाई ये

44
00:03:03,120 --> 00:03:08,080
आप गलत कर रहे हो मैं तो खरा सोना हूं बताइए क्या करना है

45
00:03:08,080 --> 00:03:12,480
ना तो ना तो वो कोर्ट में अभी तक अपीयर हुआ है उसकी ओर से कोई

46
00:03:12,480 --> 00:03:17,040
या कोई उसकी ओर से काउंटर ही आ गया हो। उस जब रामपाल

47
00:03:17,040 --> 00:03:18,960
जेल में था तो उसके जेलर

48
00:03:18,960 --> 00:03:22,960
तक को बुलवा लिया गया था। जेलर की ओर से काउंटर नहीं आया है।

49
00:03:22,960 --> 00:03:26,960
यह आया कि भाई मेरा पक्ष ये है। मतलब मुझे इसलिए मेरा

50
00:03:26,960 --> 00:03:32,400
इसमें कोई दोष नहीं है। इस प्रकार से जेलर की ओर से वहां पर पक्षप्र

51
00:03:32,400 --> 00:03:36,880
ऐसा नहीं है कि जेलर ने कह दिया हो कि ये सब चीजें जो रामपाल ने लिखी है वो बिल्कुल सही है।

52
00:03:36,880 --> 00:03:40,960
या जेलर ने कोई पक्ष ले लिया। यानी कि रामपाल गैंग की ओर से

53
00:03:40,960 --> 00:03:45,040
उस केस में अभी तक एक फूटी चिरैया आकर के नहीं बैठी कि भैया किसी ने

54
00:03:45,040 --> 00:03:50,480
उसका पक्ष ले लिया हो कि उन तथाकथित बातों का

55
00:03:50,480 --> 00:03:54,480
जिन बातों के ऊपर जिन बातों का प्रचार प्रसार बड़े ही जोर जोर शोर से किया

56
00:03:54,480 --> 00:03:58,480
जाता है। अच्छा लड़ाई मुख्य क्या है? लड़ाई है

57
00:03:58,480 --> 00:04:02,560
भगवान का अपमान। लड़ाई मुख्य नहीं है कि कबीर भगवान क्यों कह

58
00:04:02,560 --> 00:04:06,640
रहे हो? कबीर को भगवान आप कहो। कोई दिक्कत नहीं

59
00:04:06,640 --> 00:04:10,960
है। आप अपने कबीर सागर के आधार पर कहो। यह झूठ मत फैलाओ कि वेदों

60
00:04:10,960 --> 00:04:14,960
के आधार पर कबीर भगवान है जो आज तक तुम दिखा नहीं पाए। वैदिक वांगमय के

61
00:04:14,960 --> 00:04:18,960
अनुसार जो कबीर है वह भगवान नहीं है। वो आज तक तुम

62
00:04:18,960 --> 00:04:23,280
दिखा नहीं पाए। तुम आज तक वो कबीर कबीर कबीर को ही कबीर

63
00:04:23,280 --> 00:04:27,280
करते रहे। वहां कबीर कबीर जो शब्द आया है वो आया है। सर्वज्ञता का दतक

64
00:04:27,280 --> 00:04:31,360
है वो। तो ये सब बातें तुम कर नहीं पाए। तो लड़ाई मुख्य ये है। ऐसी नहीं है

65
00:04:31,360 --> 00:04:34,240
कि आप कबीर की पूजा नहीं कर सकते। कबीर

66
00:04:34,240 --> 00:04:38,720
की पूजा जिसको करनी है करो। किसी को मुर्दे की पूजा करनी है वह करे जाकर के।

67
00:04:38,720 --> 00:04:42,880
किसी को स्वान की पूजा करनी है वह कर सकता है। शान की पूजा किसी को किसी की भी पूजा

68
00:04:42,880 --> 00:04:46,880
करनी है। उसमें कोई रोक-टोक नहीं है। वेद का नाम लेकर के आप

69
00:04:46,880 --> 00:04:51,040
अपनी चीजों को पुष्ट करने की कोशिश कर रहे हो। एक तो यह लड़ाई साथ ही

70
00:04:51,040 --> 00:04:55,040
साथ जो हमारी मान्यताएं हैं उनको आप गाली दे

71
00:04:55,040 --> 00:04:59,040
रहे हो। उनके बारे में अभद्रता बोल रहे हो। माता

72
00:04:59,040 --> 00:05:03,440
दुर्गा के बारे में अभद्र बातें बोल रहे हो। अब माता दुर्गा

73
00:05:03,440 --> 00:05:07,440
की बात है तो माता दुर्गा के बारे में वहां लिखा हुआ है

74
00:05:07,440 --> 00:05:11,840
कि उनके साथ जो है काल नामक जो इन्होंने जो एंटिटी बनाई है एक तथाकथित

75
00:05:11,840 --> 00:05:15,840
कपोल कल्पित जो कि राक्षस के रूप में इन्होंने प्रस्तुत

76
00:05:15,840 --> 00:05:20,000
करते हैं। समय-समय पर उसको भगवान भी कहते हैं। वो सब बातें हमने

77
00:05:20,000 --> 00:05:24,080
कई बार बता चुके हैं कि काल किस तरह से होता है।

78
00:05:24,080 --> 00:05:28,720
तो अब आपने क्या किया कि

79
00:05:28,720 --> 00:05:32,800
दुर्गा माता से जोड़ते हुए काल जो संज्ञा है वह दी

80
00:05:32,800 --> 00:05:36,960
एक नेगेटिव कैरेक्टर को फिर उस नेगेटिव कैरेक्टर से जोड़ा दुर्गा

81
00:05:36,960 --> 00:05:41,200
माता को और वो भी वहां पर दुराचार दुष्कर्म दिखाया दुर्गा माता के साथ

82
00:05:41,200 --> 00:05:45,200
इतनी बद्दी बात लिख दी कि भैया वहां पर जो है इंग्लिश में वो टाइटल

83
00:05:45,200 --> 00:05:49,600
अभी मैं बताऊंगा वो टाइटल आपकी किताबों में भी कहा है रुक जाइए

84
00:05:49,600 --> 00:05:54,000
तो [गला साफ़ करने की आवाज़] यह जो मुख्य लड़ाई है एक अपमान और एक वेद की आड़ वेद

85
00:05:54,000 --> 00:05:58,000
की आड़ लेकर के करोगे तो वैचारिक एक वो चलेगा।

86
00:05:58,000 --> 00:06:02,160
वेद की आड़ लेकर के तुम अपनी चीजों को पुष्ट करना चाहोगे और उसमें कहीं

87
00:06:02,160 --> 00:06:06,320
पर भी अभद्रता नहीं होगी तो फिर एक वैचारिक युद्ध चलेगा।

88
00:06:06,320 --> 00:06:10,320
शोधन की दृष्टि से भाई क्या वेद के आधार पर कैसे बोल रहे हो? जो

89
00:06:10,320 --> 00:06:14,400
हमारे धर्म ग्रंथ है उनके आधार पर कैसे बोल रहे हो? पर

90
00:06:14,400 --> 00:06:18,720
जब वहां पर यह अपमान आ गया और वह भी इस तरीके से

91
00:06:18,720 --> 00:06:22,720
चैनल चैनल्स बना चैनल्स पर बोल रहे हो उल्टा सीधा कुछ मालूम है नहीं

92
00:06:22,720 --> 00:06:26,880
अकल दो कौड़ी की है वो दो कौड़ी की है यह भी लिखित रूप से सिद्ध

93
00:06:26,880 --> 00:06:30,960
करूंगा है ना अकल तुम लोगों की है दो कौड़ी की

94
00:06:30,960 --> 00:06:35,200
फिर आप अपमान कर रहे हो तो लड़ाई मुख्य यह है अब मैंने

95
00:06:35,200 --> 00:06:37,360
पूछा

96
00:06:37,360 --> 00:06:41,440
मैंने जब पूछा अनकेत जी मैं लेता हूं आपको थोड़ी देर में मैंने

97
00:06:41,440 --> 00:06:45,840
जब पूछा कि

98
00:06:45,840 --> 00:06:49,920
भाई जो तुमने क्लेम किए हैं कि दुर्गा माता के साथ ऐसा ऐसासा हुआ है। आप

99
00:06:49,920 --> 00:06:54,080
वो क्लेम हमारे शास्त्रों से दे दो। मजाल है इतने दिन हो गए केस

100
00:06:54,080 --> 00:06:58,080
किए हुए। आज तक इनके यहां का कोई माई का लाल ऐसा जना

101
00:06:58,080 --> 00:07:02,080
नहीं। किसी माता ने अपने गर्भ से ऐसा पूत नहीं पूत

102
00:07:02,080 --> 00:07:04,640
को जन्म नहीं दिया। जो आकर

103
00:07:04,640 --> 00:07:08,640
के यह बता दे कि दुर्गा माता के लिए जो तुमने कहानी गढ़ी है वह हमारे

104
00:07:08,640 --> 00:07:13,200
शास्त्रों में कहां लिखी है। अच्छा अब

105
00:07:13,200 --> 00:07:17,440
तुमने क्या किया कि हां यह भी तो लिखा है वो भी तो लिखा है पर जो लाइन तुमने लिखी

106
00:07:17,440 --> 00:07:21,440
वो नहीं लिखी ना। उससे मिलती जुलती लाइनें

107
00:07:21,440 --> 00:07:25,440
दूसरी दूसरी कहानियां या तुम अपने हिसाब से जो भी जिस बात का

108
00:07:25,440 --> 00:07:29,680
भी अर्थ निकालना चाहो वो सब लिखा है। तो ये लड़ाई समझ लो। लड़ाई

109
00:07:29,680 --> 00:07:33,920
किस बात की है? यदि तुम केवल वेद की आड़ लेकर के अपना प्रपंच

110
00:07:33,920 --> 00:07:37,920
कर रहे होते तो यह जो व्यवहारिक युद्ध दिखाई दे रहा है तुम्हारे

111
00:07:37,920 --> 00:07:42,240
और मेरे बीच वो युद्ध ना दिखता वो फिर वैचारिक युद्ध तक सीमित

112
00:07:42,240 --> 00:07:46,640
रहता है ना पर व्यवहारिक युद्ध कब बना

113
00:07:46,640 --> 00:07:51,040
जब तुमने साथ में डंके की चोट पर ऑनलाइन इंटरनेट

114
00:07:51,040 --> 00:07:55,120
की दुनिया में अपमान करना शुरू किया तो वह व्यवहारिक

115
00:07:55,120 --> 00:07:59,440
युद्ध का कारण और वह होता रहेगा अपमान जब तक बंद नहीं होगा

116
00:07:59,440 --> 00:08:03,440
तब तक कोई ना कोई तुम लोगों को ऐसे ही खदेड़ता रहेगा। ऐसे ही

117
00:08:03,440 --> 00:08:07,600
भगाए जाओगे। स्वान की भांति कुत्तों की भांति जगह-जगह से खदेड़े जाओगे।

118
00:08:07,600 --> 00:08:11,600
जहांजहां पर अपने धर्म को मानने वाला अपने धर्म से

119
00:08:11,600 --> 00:08:15,680
प्यार करने वाला जहांजहां पर कोई एक पुरुष जन्म ले

120
00:08:15,680 --> 00:08:20,000
लेगा। है ना? वहां वहां से ऐसे ही कुत्तों की भांति भगाए जाओ। जैसे लखनऊ

121
00:08:20,000 --> 00:08:24,160
से भगाए गए। जैसे लखनऊ से ताला लगा के गायब होना ना कि यहां कुछ नहीं चलता

122
00:08:24,160 --> 00:08:28,240
है। यहां सतलोक आश्रम का कोई सेंटर नहीं है। है ना? तो

123
00:08:28,240 --> 00:08:32,960
वैसे ही भगाया जाओ। देखा था ना क्या हुआ था?

124
00:08:32,960 --> 00:08:36,960
यहां हम नहीं जानते किसने बोर्ड लगाया। हम बोर्ड वाले को भी नहीं जानते। यह तक

125
00:08:36,960 --> 00:08:41,040
कहने की नौबत आ गई थी तुमको। तो जिस तरीके से यहां से खदेड़े गए हो।

126
00:08:41,040 --> 00:08:45,360
अभी तो एक शिवश नारायण द्विवेदी है। ऐसे

127
00:08:45,360 --> 00:08:49,360
ही जगह-जगह पर जब और लोग खड़े हो जाएंगे तो तुम्हारा क्या होगा?

128
00:08:49,360 --> 00:08:53,680
और हो रहा है। जगह-जगह पर ऐसे खदेड़े जा रहे हो।

129
00:08:53,680 --> 00:08:57,680
बुक बेच रहे हो। बुक बुक बेचते बेचते भगा दिया गया तुम्हें। यह क्या है? अच्छा

130
00:08:57,680 --> 00:09:01,680
तुम कहते हो हमसे तुम बराबरी करते हो। हमसे बराबरी

131
00:09:01,680 --> 00:09:05,760
भी करते हो कि भाई तुम्हारी बुक्स में भी तो यह लिखा है। तो तुम करो ना कहीं पर

132
00:09:05,760 --> 00:09:09,840
ऐसे प्रतिकार जैसे हमने किया है। एफआईआर कराओ।

133
00:09:09,840 --> 00:09:15,280
कोई सेंटर मठ मंदिर बंद करवा दो ताला लगवा दो। यह औकात है।

134
00:09:15,280 --> 00:09:19,440
इस औकात का अंतर समझो। तुम केवल इंटरनेट की दुनिया

135
00:09:19,440 --> 00:09:23,760
पे हो। और वही तुम्हारी सबसे बड़ी ताकत है क्योंकि

136
00:09:23,760 --> 00:09:27,920
हम सब लोग धरातल पर हैं। इंटरनेट को उतना भाव नहीं देते। तो

137
00:09:27,920 --> 00:09:31,920
तुम वहां पर अपना ड्रामा करके यह अपने आप

138
00:09:31,920 --> 00:09:35,040
को बताने में बताने का प्रयास करते रहते हो कि

139
00:09:35,040 --> 00:09:39,600
हम कितने सक्सेस हैं। अरे भाई तुम्हारा एक चलता हुआ केंद्र

140
00:09:39,600 --> 00:09:44,080
छाती ठोक कर डंके की चोट पर बंद करा दिया। तुम करा दो जाकर के।

141
00:09:44,080 --> 00:09:48,160
एक मंदिर बंद करा दो जाओ। जहां ब्रह्मा विष्णु महेश

142
00:09:48,160 --> 00:09:52,240
की पूजा हो रही हो। यही तो है। ब्रह्मा विष्णु विष्णु महेश की पूजा तुम्हारे हिसाब से गलत है।

143
00:09:52,240 --> 00:09:56,400
उनको भगवान मानना गलत है। पूर्ण भगवान मानना गलत है। चलो इसमें भी तुम

144
00:09:56,400 --> 00:10:00,800
निकालते जाओगे। नहीं नहीं पूजा तो हम भी करते दिखाने के लिए।

145
00:10:00,800 --> 00:10:04,800
तो एक मंदिर जाकर के बंद करा दो। उसका वीडियो बनाओ।

146
00:10:04,800 --> 00:10:08,800
ये देखो हमने मंदिर मंदिर बंद करा दिया। और उसमें यह बात होनी

147
00:10:08,800 --> 00:10:12,800
चाहिए। इसी आधार पर बंद कराया। तुम्हारा देखो वहां हलवानी में सेंटर बंद करवा

148
00:10:12,800 --> 00:10:16,960
दिया था। खुल गया थोड़े दिन बाद। ठीक है? बंद कराया

149
00:10:16,960 --> 00:10:21,520
ना। तुम कराओ ना बंद जाकर के कराया तुमने बंद कहां तुम

150
00:10:21,520 --> 00:10:25,520
मतलब कहां राजा भोज कहां गंगू तेली फिर करते

151
00:10:25,520 --> 00:10:28,080
हो बराबरी

152
00:10:28,080 --> 00:10:31,520
जाओ कोर्ट केस कर दो

153
00:10:31,520 --> 00:10:35,520
श्री संप्रदाय पे शंकराचार्य संप्रदाय पे या जितने

154
00:10:35,520 --> 00:10:40,000
तुम्हारे हिसाब से सब जो गलत ज्ञान दे रहे हैं

155
00:10:40,000 --> 00:10:44,320
वेदों का सही अर्थ नहीं बता रहे कोर्ट केस कर दो ना

156
00:10:44,320 --> 00:10:48,400
रजिस्टर्ड लड़ाई लड़ो ना भाई क्यों नहीं लड़ते हो

157
00:10:48,400 --> 00:10:50,240
पता है? क्योंकि तुम्हें मालूम

158
00:10:50,240 --> 00:10:54,240
है कि तुम्हारे पास विष्ठा के अलावा उगलने के लिए और कुछ है नहीं। कोर्ट में क्या

159
00:10:54,240 --> 00:10:58,240
क्या उग सच्चाई तो है नहीं। विष्ठा है। केवल

160
00:10:58,240 --> 00:11:02,320
एकतरफा गेम खेल सकते हो। कार्बो टारगेट कैमरा

161
00:11:02,320 --> 00:11:06,400
ऑन किया और चालू हो जाओ। इतनी तथा तो है नहीं कि अपनी

162
00:11:06,400 --> 00:11:10,400
चीजों को कोर्ट में जाकर के कहीं पर खुले मैदान में स्वतंत्र रूप से

163
00:11:10,400 --> 00:11:15,040
स्थापित कर पाओ। तो अब जानते हो शंकराचार्य

164
00:11:15,040 --> 00:11:19,680
जैसे वरिष्ठ आचार्य गण तुम लोगों के कहने पर कहां आएंगे भैया

165
00:11:19,680 --> 00:11:24,000
तुम लोग तोता चोर स्मैक चोर एक वो बंदी छोड़

166
00:11:24,000 --> 00:11:28,000
छूट करके आया है इस तरीके की क्वालिटी वाले निम्न स्तर के

167
00:11:28,000 --> 00:11:32,000
लोग हो बबिता कांड ये कांड ये पकड़ा गया वो स्विमिंग पूल

168
00:11:32,000 --> 00:11:36,240
ऐसे लोगों से बात करने के लिए शंकराचार्य आएंगे तुम लोग ये जानते हो

169
00:11:36,240 --> 00:11:40,240
तो अपना धीमे-धीमे बोल देते हो भैया शंकराचार्य आ जाए

170
00:11:40,240 --> 00:11:44,320
यह आ जाए वो आ भाई किसी गली के कुत्ते से कोई

171
00:11:44,320 --> 00:11:48,400
किसी गली के कुत्ते से भी कोई अगर उसने ललकार दे दी तो वह भिड़ने

172
00:11:48,400 --> 00:11:52,480
चला जाएगा क्या? तो स्तर भी तो देखना पड़ता है कि कौन

173
00:11:52,480 --> 00:11:56,640
है ललकार करने वाला? अब तुम लोग तो ना उसको

174
00:11:56,640 --> 00:12:01,200
संस्कृत आती है जो ये बोल रहा है।

175
00:12:01,200 --> 00:12:05,360
ना उस व्यक्ति को का ख ग अंगा आता है ना दर्शन का ज्ञान है ना किसी

176
00:12:05,360 --> 00:12:10,160
चीज का ज्ञान है। और लगा शंकराचार्य के लिए ताल ठोकने।

177
00:12:10,160 --> 00:12:14,160
अच्छा यही हो कि हिंदी में अच्छे से तत्व का विश्लेषण आता

178
00:12:14,160 --> 00:12:18,480
हो कुछ मर्म आता हो तत्व का वह भी नहीं आता है।

179
00:12:18,480 --> 00:12:22,560
तो तुमने जो है यह सोच लिया कि ऐसी बात

180
00:12:22,560 --> 00:12:26,560
करो जिससे कि वो जो खुले मैदान की चर्चा है वो हो ही ना पाए और हम

181
00:12:26,560 --> 00:12:30,720
जो अपनी जनता को एक तरफा गेम खेल के बेवकूफ बना रहे हैं। बनाते

182
00:12:30,720 --> 00:12:35,680
रहेंगे। उस बेवकूफी में बेवकूफ बनता कौन है? कोई पढ़ा लिखा

183
00:12:35,680 --> 00:12:39,840
इंटेलेक्चुअल प्रबुद्ध जो वर्ग

184
00:12:39,840 --> 00:12:44,640
है। उसका व्यक्ति बहुत कम फंसता है। ज्यादातर पिछड़े

185
00:12:44,640 --> 00:12:48,720
परेशान दीन दुखी है ना इस तरह के लोग तुम्हारी बातों

186
00:12:48,720 --> 00:12:53,200
में फंसते रहेंगे और तुम अपना नेटवर्क होंगे 10 दिखाओगे

187
00:12:53,200 --> 00:12:57,280
एक करोड़ वीडियोग्राफी करके सिनेमेट तुम क्या सोचते

188
00:12:57,280 --> 00:13:01,680
हो जो तुम ड्रामा करते हो ये किताब का स्टॉल लगा करके

189
00:13:01,680 --> 00:13:05,840
क्या हम लोग नहीं कर सकते समय नहीं ना भाई केवल

190
00:13:05,840 --> 00:13:10,480
इंटरनेट पर ही काम नहीं कर रहे ना धरातल पर भी काम कर रहे हैं

191
00:13:10,480 --> 00:13:14,640
जाकर के छाती ठोक के तुम्हारा केंद्र बंद करवाया था पुलिस के साथ तुम करा दो

192
00:13:14,640 --> 00:13:19,040
ना जाकर के जाओ तुम्हारा वो होता था हर महीने

193
00:13:19,040 --> 00:13:20,400
प्रथम रविवार को यहां

194
00:13:20,400 --> 00:13:24,560
कार्यक्रम होता था हिंद लखनऊ में बंद हो गया शटर

195
00:13:24,560 --> 00:13:28,720
डाउन करवा दो तुम हमारा कार्यक्रम बंद कौन

196
00:13:28,720 --> 00:13:33,840
सा कार्यक्रम बंद करवाओगे बताओ एक अदनासा लड़का

197
00:13:33,840 --> 00:13:38,160
ना तो वो कोई बहुत बड़ा आचार्य है ना कोई बहुत बड़ा धर्म

198
00:13:38,160 --> 00:13:42,240
गुरु है ना उसकी कोई तुम्हारे जैसी फौज फौज है

199
00:13:42,240 --> 00:13:46,480
जिसके पास जो है AK-47 जैसे हथियार बरामद हो रहे हो

200
00:13:46,480 --> 00:13:50,480
कुछ नहीं है उसने बंद करवा दिया तुम्हारा और तुम तब भी जो है

201
00:13:50,480 --> 00:13:55,520
विठा किया करते हो वीडियो बना करके मतलब

202
00:13:55,520 --> 00:14:00,080
कहना चाहिए कि

203
00:14:00,080 --> 00:14:04,160
तुम लोग उन लोगों में से हो कि तुम्हारे अगर क्या

204
00:14:04,160 --> 00:14:08,160
कहते हैं बवासीर भी हो जाएगा ना तब भी तुम कहोगे वाह वाह वाह वाह

205
00:14:08,160 --> 00:14:13,280
फूल निकल आया फूल निकल आया बवासीर को तुम फूल कहोगे हो गए मिरेकल मिरेकल

206
00:14:13,280 --> 00:14:17,520
है ना वो वाले लोग वाह

207
00:14:17,520 --> 00:14:22,400
चमत्कार हो गया कबीर भगवान ने मिरेकल कर दिया

208
00:14:22,400 --> 00:14:25,440
फूल निकल आया

209
00:14:25,440 --> 00:14:29,520
ठीक है तो उन लोगों में से तो रामपाल फरार

210
00:14:29,520 --> 00:14:33,520
कैसे हुआ कि भाई उसको कोर्ट में चुनौती तो दी गई है

211
00:14:33,520 --> 00:14:35,680
रजिस्टर्ड के आप अपनी बातों को आकर के

212
00:14:35,680 --> 00:14:39,680
आज नहीं तो कल आना तो पड़ेगा ही उसको कोर्ट की मार की

213
00:14:39,680 --> 00:14:44,320
बात ही है निराली गूंगा भी गाय कब वाली आना तो पड़ेगा ही

214
00:14:44,320 --> 00:14:49,120
है ना तो [गला साफ़ करने की आवाज़] यह तो एक अलग बात रही

215
00:14:49,120 --> 00:14:53,360
अब क्या हुआ कि भैया रामपाल ने ये कहा कि फलाने हैं

216
00:14:53,360 --> 00:14:57,440
शंकराचार्य हैं ये हैं वो हैं तो रामपाल ने कहा

217
00:14:57,440 --> 00:15:00,720
कि कोई भी धर्म गुरु

218
00:15:00,720 --> 00:15:04,720
तो रामपाल से पहली बात तो चुनौती मैं दे

219
00:15:04,720 --> 00:15:09,200
ही चुका था कि रामपाल इन इन चीजों पर मुझसे जो है चर्चा कर ले दिल्ली में

220
00:15:09,200 --> 00:15:13,360
ठीक है तो ना तो वह इस चर्चा में उपस्थित

221
00:15:13,360 --> 00:15:17,680
हो रहा है जेल कट्टू बाबा

222
00:15:17,680 --> 00:15:21,920
क्या कहेंगे वो ड्रेस पहने हुए जेल की दुकान उसको क्या कहेंगे

223
00:15:21,920 --> 00:15:27,120
जमानत पे है ना बाहर कैसे आया जमानत पे

224
00:15:27,120 --> 00:15:31,280
जमानत के लिए गिड़गिड़ाया रोया अपनी गलतियों

225
00:15:31,280 --> 00:15:34,160
की माफी मांगी

226
00:15:34,160 --> 00:15:38,560
तब आया वो बाहर और अभी कोई वो नहीं है कि वो

227
00:15:38,560 --> 00:15:42,800
बाहर आ गया तो आए गया कुछ भरोसा नहीं है। हो सकता है दोबारा जेल

228
00:15:42,800 --> 00:15:47,360
भी जाना पड़ जाए। तारीख पर तो जा ही रहा होगा। है

229
00:15:47,360 --> 00:15:51,200
ना? तो पहली बात तो यह हो गई [गला साफ़ करने की आवाज़]

230
00:15:51,200 --> 00:15:56,000
कि रामपाल फरार कैसे है? ना तो वो जो

231
00:15:56,000 --> 00:16:00,320
एक न्यायिक हमारी भिड़ंत हो रही है। ना तो वो उसमें

232
00:16:00,320 --> 00:16:04,320
उपस्थित हो रहा है और ना ही वह सीधे तौर पर ज्ञान चर्चा के लिए उपस्थित

233
00:16:04,320 --> 00:16:08,400
हो पा रहा है। उसको पता हम सब तरीके से पहुंच ही गया। हमने लेटर तक

234
00:16:08,400 --> 00:16:12,480
निकाल दिया, निर्गत कर दिया तब भी वह उपस्थित नहीं हो पा

235
00:16:12,480 --> 00:16:17,200
रहा है। उसकी हर बात की धज्जियां उड़ाई है हमने।

236
00:16:17,200 --> 00:16:21,360
जो भी हमारा चैनल देख लेता है उसको पता लग जाता है कि रामपाल का स्तर

237
00:16:21,360 --> 00:16:25,680
क्या है? धार्मिक विषयों हर बात की जितने क्लेम्स

238
00:16:25,680 --> 00:16:30,080
उसने किए हैं धर्म को लेकर के उसमें हर बात की उसकी धज्जियां उड़ा दी गई है।

239
00:16:30,080 --> 00:16:34,480
तब भी वह सामना नहीं कर रहा है। अब क्या है कि इसके जो फूहड़

240
00:16:34,480 --> 00:16:38,640
चेले हैं वो हमारे लिए वीडियो बनाकर यहां वहां तू गधा

241
00:16:38,640 --> 00:16:42,720
है, गधे का चेला है। ये सब विष्ठा कर रहे हैं। विष्ठा का अर्थ भी

242
00:16:42,720 --> 00:16:47,760
इनको डिक्शनरी खोलनी पड़ेगी तब समझ में आएगा कि विष्ठा कहते किसे हैं।

243
00:16:47,760 --> 00:16:52,640
तो देख लेना खोल करके जो विष्ठा तुम लोग कर रहे हो जगह-जगह

244
00:16:52,640 --> 00:16:56,880
यह अंधा गधा है यह है वह है यह सब चीजें बोल रहे हो ना तो यह इसके फुअर

245
00:16:56,880 --> 00:17:00,960
चेले अब फुअर चेलों के कुतर्क क्या-क्या है उस पर पहले

246
00:17:00,960 --> 00:17:05,280
बात करेंगे अच्छा उससे पहले मैं एक बात बता दूं मध्य

247
00:17:05,280 --> 00:17:06,880
प्रदेश में

248
00:17:06,880 --> 00:17:10,880
एक जंगल है बांधवगढ़ नेशनल पार्क

249
00:17:10,880 --> 00:17:15,120
वो इस मामले में जाना जाता है प्रसिद्ध है

250
00:17:15,120 --> 00:17:19,280
कि उसका जो एरिया है ना क्षेत्रफल वह बहुत कम है

251
00:17:19,280 --> 00:17:23,280
और कंपैरेटिवली टू एरिया वहां पर जो बाघ

252
00:17:23,280 --> 00:17:27,360
की संख्या है वह ज्यादा है। इसलिए बांधवगढ़ नेशनल पार्क

253
00:17:27,360 --> 00:17:31,440
में अगर आप बाघ को जंगल में स्वतंत्र रूप

254
00:17:31,440 --> 00:17:35,520
से घूमते विचरता हुआ देखना चाहते हैं तो वहां पर ज्यादा संभावना होती

255
00:17:35,520 --> 00:17:39,760
है कि आपको बाघ दिख जाएगा। जिस प्रकार से आप बड़े

256
00:17:39,760 --> 00:17:43,840
जंगलों में जाएंगे जैसे जिम कॉर्बेट हो गया और या

257
00:17:43,840 --> 00:17:48,320
फिर ये नेशनल ये गिर फॉरेस्ट हो गया। आप इनमें जाएंगे

258
00:17:48,320 --> 00:17:52,480
तो वहां पर संभावना कम होती है क्योंकि एरिया बहुत बड़ा है और उस

259
00:17:52,480 --> 00:17:56,880
अनुपात उस रेशियो के हिसाब से बाघों की संख्या बहुत

260
00:17:56,880 --> 00:18:01,120
कम है मगर बांधवगढ़ में उल्टा है। एरिया के हिसाब से रेशियो

261
00:18:01,120 --> 00:18:05,280
कंपैरेटिवली जो दूसरे जंगल हैं देश में उनके

262
00:18:05,280 --> 00:18:09,680
हिसाब से वहां की जो रेश्यो है ज्यादा है। तो वहां पर बाघ दिखना आसान

263
00:18:09,680 --> 00:18:13,840
होता है। तो एक बार मैं वहां पर गया था भ्रमण

264
00:18:13,840 --> 00:18:17,840
के लिए। तो जब मैं वहां गया था तो वहां पर जो गाइड होता

265
00:18:17,840 --> 00:18:22,320
है ना जो आपको जीप में बिठाकर के ले जाता है तो एक गाइड होता है एक ड्राइवर होता है बाकी आप पर्यटक

266
00:18:22,320 --> 00:18:26,480
होते हैं तो वहां पर जो गाइड होता है वो मुझे बोला था कि बाघ का

267
00:18:26,480 --> 00:18:31,600
सबसे जो आसान शिकार होता है वो होता है सांभर डियर

268
00:18:31,600 --> 00:18:35,680
है ना सांभर डियर बाघ का सबसे आसान

269
00:18:35,680 --> 00:18:39,760
शिकार होता है क्यों क्योंकि वह पाकिस्तानी क्रिकेटर जो होता है

270
00:18:39,760 --> 00:18:45,600
निमामुल हक की तरह रन लेते लेते पीछे देखता

271
00:18:45,600 --> 00:18:49,680
उसका रिकॉर्ड है। वो जो पाकिस्तानी क्रिकेटर था उसका रिकॉर्ड

272
00:18:49,680 --> 00:18:54,000
है कि वह सबसे ज्यादा बार रन आउट हुआ है। इसी

273
00:18:54,000 --> 00:18:58,080
प्रकार से जो सांभर डियर होता है वो भागते भागते पीछे देखता

274
00:18:58,080 --> 00:19:02,080
है। मूर्खता करता है। कहने का मतलब मूर्खता अव्वल दर्जे का मूर्ख होता

275
00:19:02,080 --> 00:19:06,160
है बाघ के हिसाब से। इसी प्रकार से वैसे तो यूं

276
00:19:06,160 --> 00:19:10,560
तो बहुत सारे मोर्चे खुले हुए हैं आहान के द्वारा

277
00:19:10,560 --> 00:19:14,960
और सभी मोर्चों पर विजय प्राप्त है। पर रामपाल

278
00:19:14,960 --> 00:19:20,080
एंड सनंस या रामपाल गैंग को लेकर के जो

279
00:19:20,080 --> 00:19:24,320
मामला है वो वही सांभर डियर और बाघ वाला है। बाघ का सबसे सरल

280
00:19:24,320 --> 00:19:28,880
शिकार कौन सा है? सांभर डियर। तो यहां पर जो रामपाल

281
00:19:28,880 --> 00:19:33,120
एंड गैंग है रामपाल और उसके फड़ चेले

282
00:19:33,120 --> 00:19:37,280
कैमरे के पीछे बैठकर के कुछ भी बात कर ले वस्त विष्ठा कर ले सामने आने पर हवा

283
00:19:37,280 --> 00:19:37,780
पतली

284
00:19:37,680 --> 00:19:41,840
हो जाएगी जितना ये ततप फतप बोला करते हैं ये

285
00:19:41,840 --> 00:19:45,840
लोग ततप ज्ञान है ना ये सब निकल जाएगा दो चार

286
00:19:45,840 --> 00:19:50,160
मिनट की बात तो सांभर डियर हो तुम लोग मेरे लिए समझ

287
00:19:50,160 --> 00:19:54,240
रहे हो बाघ मैं हूं तो तुम लोग सांभर डियर हो बाघ

288
00:19:54,240 --> 00:19:58,240
का सबसे सरलतम शिकार वो बांधवगढ़ जंगल के जो गाइड

289
00:19:58,240 --> 00:20:02,960
थे उनके अनुसार वो लोग हैं तुम लोग तुम्हारे ऊपर मुझे वीडियो बनाना

290
00:20:02,960 --> 00:20:06,960
चलते फिरते बात करना तुम्हारे बारे में हालांकि चलते फिरते

291
00:20:06,960 --> 00:20:11,120
हम सब जगह हर तरह के व्यक्ति से प्रतिकार करने

292
00:20:11,120 --> 00:20:15,360
के लिए तैयार रहते हैं पर तुम्हारे को लेकर के एक अलग ही मजा आता है और

293
00:20:15,360 --> 00:20:19,520
तुमसे प्राप्त होती है कॉमेडी भी जब वीडियो बनता

294
00:20:19,520 --> 00:20:23,680
है तो उसमें कॉमेडी भी खूब होती है तुम लोगों के द्वारा तुम लोग इतने

295
00:20:23,680 --> 00:20:27,680
बड़े घोंंचू हो इतने बड़े घंचू कि तुम लोग

296
00:20:27,680 --> 00:20:31,840
अपने ही द्वारा अपनी हंसी उड़वाते हो। अपने को हंसी का पात्र बनाते

297
00:20:31,840 --> 00:20:36,560
हो। तुम लोगों को खुद नहीं पता होता कि मैंने कहां-कहां घोंंचूपना अपना दिखाया।

298
00:20:36,560 --> 00:20:40,560
ठीक है? तो ये एक अंतर है तुम में और मुझ

299
00:20:40,560 --> 00:20:44,640
में बाघ का सबसे सरलतम शिकार। सांभर

300
00:20:44,640 --> 00:20:49,360
डियर रामपाल एंड गैंग शिवश का सबसे सरलतम

301
00:20:49,360 --> 00:20:53,680
प्रतिकार करने का विषय। ठीक है। अच्छा।

302
00:20:53,680 --> 00:20:57,120
[गला साफ़ करने की आवाज़]

303
00:20:57,120 --> 00:21:01,360
बढ़ते हैं। तो अब रामपाल तो हुआ फरार।

304
00:21:01,360 --> 00:21:05,680
पता चल गया भाई कि शिवश नारायण द्विवेदी तो

305
00:21:05,680 --> 00:21:09,760
ततप फतप सारा ज्ञान निकाल देगा। तो

306
00:21:09,760 --> 00:21:13,920
वो तो हो गया फरार। वो तो क्या ही बोलेगा इस पर। अब

307
00:21:13,920 --> 00:21:17,920
आया इनके फुअर चेलों का गैंग और उन्होंने निष्ठा करना

308
00:21:17,920 --> 00:21:22,480
चालू किया। तरह तरह के वीडियोस बना के मेरे वीडियो को कट लगा करके दिखा करके

309
00:21:22,480 --> 00:21:26,720
और यहां ये बना एक मेरी हिम्मत नहीं है जो मुझे फोन करे कि

310
00:21:26,720 --> 00:21:30,880
भाई इस बीच की जगह पर आकर के मैं तेरे साथ बैठूंगा चर्चा एक

311
00:21:30,880 --> 00:21:35,120
में एक की औकात नहीं है और इतनी

312
00:21:35,120 --> 00:21:41,120
निष्ठा गधे के चेले ये चेले वो चेले

313
00:21:41,440 --> 00:21:44,960
इतना साहस नहीं है 7408301869

314
00:21:44,960 --> 00:21:50,080
अरे मां का दूध पिया तो फोन करो ना भाई

315
00:21:50,080 --> 00:21:54,320
और उसमें भी देखो उसमें भी देखो ताल क्या ठोकते हैं मेरे यहां आ जाओ

316
00:21:54,320 --> 00:21:58,320
मैं तुझे चैलेंज करता हूं यहां आ जाओ मालूम है शिवास नारायण द्विवेदी तुम

317
00:21:58,320 --> 00:22:02,560
जैसों के यहां नहीं आएगा बबीता कांड हुआ रखा है छह आदमी

318
00:22:02,560 --> 00:22:06,560
मारे गए क्यों आऊं भाई तुम्हारे यहां मैं ये भी नहीं कह

319
00:22:06,560 --> 00:22:10,560
रहा तू मेरे यहां हालांकि यहां तो बेराग है मामला मैं तो नहीं कह रहा

320
00:22:10,560 --> 00:22:14,560
तू मेरे यहां बीच में आ पर उतनी हिम्मत कहां

321
00:22:14,560 --> 00:22:19,200
है चल बीच में मत आ ऑनलाइन भिड़ ले उतनी हिम्मत कहां है?

322
00:22:19,200 --> 00:22:23,280
केवल बातों का झुनझुना बचाना है। केवल बातों का

323
00:22:23,280 --> 00:22:27,760
मैं तुझे चैलेंज दे रहा हूं। यह कर ले, वो कर ले। अपराधी हो। देशद्रोह

324
00:22:27,760 --> 00:22:31,920
का मुकदमा चल रहा है। तुम्हारे यहां आ जाए। क्यों

325
00:22:31,920 --> 00:22:36,720
आ जाए भाई?

326
00:22:36,720 --> 00:22:38,960
अच्छा।

327
00:22:38,960 --> 00:22:44,000
तो फुअर चेले कैसे हैं? अब इनका सबसे पहला कुतर्क सुनिए।

328
00:22:44,000 --> 00:22:48,800
सबसे पहला इनका कुतर्क था कि भैया

329
00:22:48,800 --> 00:22:53,440
गुरु से फिर जब मैंने जब मैंने जब तक नहीं बोला था

330
00:22:53,440 --> 00:22:57,520
उसके पहले ही बहुत से लोग बोल रहे थे बहुत से इनके एंटी पार्टी है लगभग लगभग

331
00:22:57,520 --> 00:23:01,760
इन जैसी विचारधारा वाले और भी कई लोग हैं और कुछ ऐसे भी हैं

332
00:23:01,760 --> 00:23:05,920
जो गुरु हैं और अब उनके कई सारे शिष्य हैं तो मुझसे पहले

333
00:23:05,920 --> 00:23:10,080
कई गुरु गुरु रूप में ख्यापित लोग जो थे

334
00:23:10,080 --> 00:23:14,080
रामपाल की ही भांति जो गुरु बने बैठे वो रामपाल

335
00:23:14,080 --> 00:23:18,080
को बुला रहे थे। तब इन तोतों का क्या बोलना था?

336
00:23:18,080 --> 00:23:22,400
गुरु से पहले चेलों से भिड़ ले। गुरु से पहले चेलों से तो भ ले। ये तोता

337
00:23:22,400 --> 00:23:26,400
बोलना था। कितने बड़े कुतर्की हो यार। तुम अपनी शक्ल

338
00:23:26,400 --> 00:23:32,400
तो देखा करो शीशे में। बोलने से पहले

339
00:23:35,360 --> 00:23:39,440
गुरु से पहले चेले से भले। सबको एक तरफ से नकार दिया। रामपाल वहां

340
00:23:39,440 --> 00:23:43,760
भी नहीं गया। भगोड़ा भाई वो लोग तो गुरु हैं।

341
00:23:43,760 --> 00:23:47,760
पता नहीं कितनों ने कहा कि रामपाल आ जाए भाई

342
00:23:47,760 --> 00:23:51,440
मैं करूंगा ज्ञान चर्चा

343
00:23:51,440 --> 00:23:55,440
एक व्यक्ति नहीं आया और रामपाल के लोग भी क्या गुरु से

344
00:23:55,440 --> 00:23:59,520
पहले चेले से भिड़ ले चेले से भड़ ले तब तुम्हारा ये कुतर्क था

345
00:23:59,520 --> 00:24:04,160
अच्छा उसके बाद क्या हुआ कि मेरे

346
00:24:04,160 --> 00:24:08,160
संज्ञान में आया रामपाल बाहर आ चुका मैंने भी समय निकाल करके भाई बनाया वीडियो भाई

347
00:24:08,160 --> 00:24:12,160
ये चीजें इन पर बैठकर हो जाएगी। कोई रिस्पांस

348
00:24:12,160 --> 00:24:16,320
नहीं आया। उसके बाद रामपाल का फिर आया कि भैया मैं बैठना चाहता हूं। फिर मैंने

349
00:24:16,320 --> 00:24:20,320
दिया भैया कि चलो भाई दिल्ली में बैठ लो चल के। उसने

350
00:24:20,320 --> 00:24:24,400
मेरा नाम लेकर के नहीं कहा था। मगर मैं एक ओपोनेंट

351
00:24:24,400 --> 00:24:28,400
उसका रजिस्टर्ड भी हूं। ठीक है? और जो तुम कह रहे

352
00:24:28,400 --> 00:24:32,880
हो कि गुरु से पहले चेले से भ ले। तो यह बात मैं नहीं कह सकता

353
00:24:32,880 --> 00:24:37,200
कि भाई तू शंकराचार्य का नाम ले रहा है। गुरु से पहले चेले से भ ले। तुम

354
00:24:37,200 --> 00:24:41,600
लोग किस क्या मिट्टी खाते हो क्या खाते हो विष्ठा

355
00:24:41,600 --> 00:24:45,680
खाते हो क्या करते हो करते क्या हो खुद ही तो

356
00:24:45,680 --> 00:24:49,760
जो बोलोगे उसका ही अगले ही मिनट खंडन स्वयं

357
00:24:49,760 --> 00:24:50,480
ही कर दोगे

358
00:24:50,480 --> 00:24:56,000
विरोध स्वयं ही कर दोगे

359
00:24:56,000 --> 00:25:01,040
रात में एक बार सोने से पहले

360
00:25:01,040 --> 00:25:05,200
अच्छे से मुंह धोया करो और मुंह धो के शीशे में देखा करो अपने

361
00:25:05,200 --> 00:25:09,360
आप को कैसा जीवन जी रहे हो क्या कर रहे हो? अपनी

362
00:25:09,360 --> 00:25:13,600
आत्मा से बात करने का प्रयास किया करो। ऐसे ही चला जाएगा यह मनुष्य

363
00:25:13,600 --> 00:25:17,680
जीवन इसी फोकस बाजी में कि इंटरनेट पर हम

364
00:25:17,680 --> 00:25:21,680
किसी तरीके किस तरीके से ट्रेंड चलाएं किसी के लिए कैसे

365
00:25:21,680 --> 00:25:26,960
हैरेस करें किसी को और सुनो यहां हरेसमेंट का कुछ नहीं फर्क पड़ता है

366
00:25:26,960 --> 00:25:31,040
तुम लोग तत तत किया करते हो ना इस समय जो

367
00:25:31,040 --> 00:25:35,280
पराकाष्ठा हो सकती है ना जो तुम नीचे तत तत किया करते हो

368
00:25:35,280 --> 00:25:39,280
तत के जो श्रेष्ठतम उच्चतम स्तर होता है वहां पर

369
00:25:39,280 --> 00:25:45,040
जो बैठा हुआ उसके सानिध्य में बैठे तथा तता

370
00:25:45,040 --> 00:25:49,120
ठीक है फताक जो खुद

371
00:25:49,120 --> 00:25:53,280
कह रहे हो अगले ही मिनट खुद ही उसका खंडन कर रहे हो ये

372
00:25:53,280 --> 00:25:57,280
क्या दोगलापन है ये धर्म है कभी तो सवाल कर लो

373
00:25:57,280 --> 00:26:03,280
अपने आप अपने आप से मुझको गधा कह रहे हो नीच व्यक्ति

374
00:26:04,560 --> 00:26:08,640
मूर्ख कहेंगे पहले कह रहे हैं गुरु से पहले

375
00:26:08,640 --> 00:26:13,520
चेले से जब तुम तुम किसी का गुरु कहो और

376
00:26:13,520 --> 00:26:17,680
ऐसा गुरु तुम्हारी क्या जो तुम बोल

377
00:26:17,680 --> 00:26:21,920
रहे हो शंकराचार्य हो वो हो अब जेल कट्टू हो तुम्हारी क्या औकात

378
00:26:21,920 --> 00:26:25,920
है उसके उनके सामने उसको तुम ललकार रहे हो तो वहां

379
00:26:25,920 --> 00:26:30,160
ये बात लागू नहीं होगी गुरु से पहले चेले से बिल्ड तुम जाओ कराओ

380
00:26:30,160 --> 00:26:34,160
केस जो गुरु तुमको जो

381
00:26:34,160 --> 00:26:38,320
गुरु तुम्हारे गुरु को चैलेंज दे रहे हो तुम कह रहे हो गुरु से पहले चेले से ले तुम कराओ उसके

382
00:26:38,320 --> 00:26:42,320
ऊपर केस मैंने तो केस करा ना तुम पर

383
00:26:42,320 --> 00:26:46,320
आज नहीं तो कल आमना सामना होना ही है स्वतंत्र रूप से नहीं

384
00:26:46,320 --> 00:26:51,040
होगा न्यायालय में होगा

385
00:26:51,040 --> 00:26:56,080
तुम्हारा अंत प्रारंभ हो चुका है बस दिन गिनो अपने

386
00:26:56,080 --> 00:26:59,440
समझे

387
00:26:59,440 --> 00:27:04,080
अब आगे ये तो हो गई मुंहजोरी

388
00:27:04,080 --> 00:27:08,960
सांभर डियर ये हो गई मुंहजोरी अब सुनो क्या है

389
00:27:08,960 --> 00:27:13,040
परसों एक दो दिन पहले मेरे पास जो है फोन आया

390
00:27:13,040 --> 00:27:17,360
रात में क्या दिक्कत है भाई आप चैलेंज दे रहे हो यह है वो है

391
00:27:17,360 --> 00:27:21,360
पता नहीं क्या बात थी के गुरु से होगी चर्चा आपसे आपको थोड़ी

392
00:27:21,360 --> 00:27:25,600
ना फोन मिला मैंने कहा गुरु का अर्थ क्या होता है ये जितने

393
00:27:25,600 --> 00:27:29,600
मुंह बना रहे हैं ना इसी इसी एक शब्द को जो तुमने पकड़ा है

394
00:27:29,600 --> 00:27:33,840
कि गुरु से होगी चेलों से नहीं होगी अर्थ

395
00:27:33,840 --> 00:27:38,080
भी नहीं मालूम होगा गुरु का गुरु कहते किसे हैं उसी

396
00:27:38,080 --> 00:27:42,240
में पन्ने पलटते रहते जाओगे अभी यहां सामने अगर होते तो उसी में बस हो

397
00:27:42,240 --> 00:27:48,240
गया खत्म टू स्टॉप द ट्रेन पुल द चेन ये है तुम लोगों की हालत

398
00:27:49,040 --> 00:27:53,120
गुरु से पहले चेलों से कर लो पहले ये कह रहे हो

399
00:27:53,120 --> 00:27:57,280
फिर कह रहे हो कि नहीं नहीं गुरु से गुरु की गुरु से बात होगी अबे भैया गुरु

400
00:27:57,280 --> 00:28:01,920
का अर्थ क्या है अपने तत्व वाले से पूछ के तो आओ तत्व

401
00:28:01,920 --> 00:28:06,480
तत ज्ञानी से पूछ के तो आओ गुरु का अर्थ क्या है

402
00:28:06,480 --> 00:28:10,880
गुरु वही जो शिष्य का संशय दूर दूर कर दे अज्ञानता

403
00:28:10,880 --> 00:28:15,280
रूपी अंधकार दूर कर दे

404
00:28:15,280 --> 00:28:19,360
तुम्हारा तत्व वाला दूर करेगा तुम्हारा

405
00:28:19,360 --> 00:28:23,360
जो अभी तक मैंने तुम्हारे लोगों की ओर से जो सर्वश्रेष्ठ वक्ता

406
00:28:23,360 --> 00:28:27,360
देखा है तुम्हारे रामपाल से भी दो कदम आगे सर्वश्रेष्ठ वक्ता

407
00:28:27,360 --> 00:28:31,360
वो देखा है मैंने पवन दास

408
00:28:31,360 --> 00:28:35,520
जिस दिन उससे मेरी बात हो रही थी मैंने एक सवाल कर लिया था हो गया तत सब

409
00:28:35,520 --> 00:28:39,840
एक तरफ फिर वो आ गया भैया मैं छलांग लगाऊंगा मैं तो आग में

410
00:28:39,840 --> 00:28:43,840
मेरे पास नहीं तत ज्ञान ये तुम लोगों की हालत

411
00:28:43,840 --> 00:28:47,920
है। एक राघव दास पता नहीं फलाने दास

412
00:28:47,920 --> 00:28:52,560
कितने सारे रामपाल की खीर पीने वाले दास बैठे हुए

413
00:28:52,560 --> 00:28:56,800
रामपाल की नहाई हुई खीर खाते हैं और फिर वही खीर जो है कन्वर्ट

414
00:28:56,800 --> 00:29:02,800
हो के विष्ठा के रूप में मुख से निकालते हैं।

415
00:29:02,880 --> 00:29:05,680
तो क्या है

416
00:29:05,680 --> 00:29:10,240
कि गुरु का अर्थ होता है जो अज्ञानता

417
00:29:10,240 --> 00:29:14,400
रूपी अंधकार को दूर कर दे

418
00:29:14,400 --> 00:29:19,040
वो करेगा रामपाल एक सवाल का जवाब नहीं है

419
00:29:19,040 --> 00:29:24,800
तत तत करवा लो तत ज्ञान तत ज्ञान

420
00:29:24,800 --> 00:29:29,040
अच्छा अब गुरु की बात गुरु से होगी

421
00:29:29,040 --> 00:29:33,120
तो भाई कम से कम 100 लोग ऐसे मैं आपके सामने खड़ा कर दूंगा दूंगा खड़े

422
00:29:33,120 --> 00:29:37,280
कर दूंगा जो मुझे गुरु कह रहे हैं। कहते हैं कई लोग गुरु मैं

423
00:29:37,280 --> 00:29:41,440
स्वयं मना कर देता हूं। ले हो गया जो तुमने अपनी

424
00:29:41,440 --> 00:29:45,440
मनमुखी एलिजिबिलिटी तय की है वो भी आ गई। अब बता कब आ रहा है

425
00:29:45,440 --> 00:29:49,600
रामपाल? कब आ रहा है तुम्हारा जेल कट्टटू बाबा? मैं नाम

426
00:29:49,600 --> 00:29:53,680
लिख के फोन नंबर्स के साथ एक लिस्ट जारी कर दूंगा।

427
00:29:53,680 --> 00:29:57,760
जो लोग मुझे गुरु कहते हैं। अभी यहां पर आएंगे एक

428
00:29:57,760 --> 00:30:01,840
दो लोग वो गुरु कह देंगे मुझे। ठीक? गुरु होना चाहिए हूं ना मैं किसी

429
00:30:01,840 --> 00:30:06,080
ना किसी का एक दो लोग अभी बोल देंगे आ जाओ भैया एक दो

430
00:30:06,080 --> 00:30:10,720
लोग बता दो मैं गुरु हूं हो गया

431
00:30:10,720 --> 00:30:16,080
अब बुला लो रामपाल को कब आएगा जेल कट्टटू हैं

432
00:30:16,080 --> 00:30:18,000
कोई सिर ना पैर

433
00:30:18,000 --> 00:30:22,160
धज्जियां उड़ जाएंगी जिस दिन सामने आए जब तक कैमरे के पीछे बैठे

434
00:30:22,160 --> 00:30:26,240
हो बैठे रहो सुरक्षित हो और वो तुम्हारा रामपाल भी तभी

435
00:30:26,240 --> 00:30:32,240
तक सुरक्षित है पांच मिनट के अंदर खत्म

436
00:30:33,600 --> 00:30:35,760
अच्छा

437
00:30:35,760 --> 00:30:39,920
फिर तुम लोग क्या करते हो अंत में निमंत्रण देते हो मैं

438
00:30:39,920 --> 00:30:44,480
तुझे चैलेंज कर रहा हूं मुंड का आश्रम आ जाना भैया

439
00:30:44,480 --> 00:30:48,480
वही सारे आश्रम तो तुम्हारे कटघरे में खड़े हुए हैं भाई जो सबसे

440
00:30:48,480 --> 00:30:52,560
मेन व्यक्ति है जिसका जिसके नाम से

441
00:30:52,560 --> 00:30:56,560
सारे आश्रम है वो सारे आश्रम तो

442
00:30:56,560 --> 00:31:01,200
कटघरे में खड़े हुए हैं सील था तुम्हारा कौन

443
00:31:01,200 --> 00:31:05,520
सा आश्रम है वो जो मेन वो सील था तुम्हारा 10 सालों

444
00:31:05,520 --> 00:31:09,600
से और तुम कह रहे हो वहां आ जाओ क्यों आ जाए भाई तुम्हारी कोई

445
00:31:09,600 --> 00:31:13,680
औकात है ऐसी कि कोई सभ्य व्यक्ति कोई ठीक

446
00:31:13,680 --> 00:31:17,840
समाज से आने वाला व्यक्ति तुम्हारे यहां आए

447
00:31:17,840 --> 00:31:21,920
हां मुंडका आश्रम आ जाओ यहां आ जाओ वहां आ जाओ

448
00:31:21,920 --> 00:31:26,160
ताल ठोको और अपने वो चिलांटू है उनको मूर्ख बनाते रहो देखो देखो हमने बुलाया

449
00:31:26,160 --> 00:31:30,320
वो आया नहीं क्यों भाई तू ही क्यों बुलाएगा दूसरा क्यों

450
00:31:30,320 --> 00:31:33,360
नहीं बुलाएगा? बीच की जगह पर क्यों नहीं आएगा?

451
00:31:33,360 --> 00:31:37,360
डर लगता है ना? यह डर अच्छा है। सांभर

452
00:31:37,360 --> 00:31:41,440
डियर ये डर अच्छा है। बाघ का

453
00:31:41,440 --> 00:31:45,760
डर सा डियर में तो रहता ही है। तभी तो पीछे मुड़मु के देखता है भागते टाइम।

454
00:31:45,760 --> 00:31:51,760
भाई तुम लोग कर रहे हो। भागो कितना भागोगे? खैर

455
00:31:52,480 --> 00:31:56,640
व्यभचार के आरोप से याद आया

456
00:31:56,640 --> 00:32:00,800
कि मैंने अपने एक वीडियो में कह दिया था कि भाई तुम्हारे जो अड्डे हैं वहां पर व्यभचार होता

457
00:32:00,800 --> 00:32:04,880
है। ऐसे बोला तो अब व्यभचार के लिए मेरे

458
00:32:04,880 --> 00:32:09,040
पास कोर्ट दो अभी मेरे ख्याल से तीन अटेमप्ट

459
00:32:09,040 --> 00:32:13,280
हो चुके हैं। कोर्ट केस में फसाने के इन्होंने हमारी अड्डे

460
00:32:13,280 --> 00:32:19,120
को विचार बोला। अरे मूर्खों

461
00:32:19,120 --> 00:32:23,120
तुमको व्यभचार का अर्थ पता है? पहली बात तो यह

462
00:32:23,120 --> 00:32:27,120
है कि गीता में तुम ही यह अर्थ करके बैठे हुए हो। ये व्यभचार का अर्थ होता

463
00:32:27,120 --> 00:32:31,600
है जिसकी भक्ति करनी चाहिए उसकी भक्ति ना करके दूसरी भक्ति करना। लो

464
00:32:31,600 --> 00:32:35,840
तो इसमें कौन सा व्यभचार का केवल एक ही अर्थ होता है क्या?

465
00:32:35,840 --> 00:32:40,000
तो मैंने व्यभचार शब्द का उपयोग किस अर्थ में किया? यह तक मूर्खों

466
00:32:40,000 --> 00:32:44,080
को नहीं पता है। ये तक वो सिद्ध नहीं कर पा रहे। व्यभचार के आधार

467
00:32:44,080 --> 00:32:48,240
पर मुझे कोर्ट केस भेज रहे। एक कश्मीर से आया था। एक बोर से आया था। एक

468
00:32:48,240 --> 00:32:53,280
एक दो महीने पहले मुझे वो साइबर सेल में आया था

469
00:32:53,280 --> 00:32:57,440
कि भैया आपके खिलाफ जो है इस तरह की शिकायत आई है। मैंने जो है वो हाई कोर्ट के केस

470
00:32:57,440 --> 00:33:01,520
के कागज भेजे व की व निरस्त हो गई चीजें। व्यभचार

471
00:33:01,520 --> 00:33:05,680
का अर्थ केवल यही होता है क्या? शारीरिक संबंध।

472
00:33:05,680 --> 00:33:09,680
हां। व्यभचार का मुख्य अर्थ जो है

473
00:33:09,680 --> 00:33:13,840
वो है ऐसा आचरण जिसमें असत हो। झूठा

474
00:33:13,840 --> 00:33:17,760
आचरण।

475
00:33:17,760 --> 00:33:22,640
जो ठीक ना हो, उचित ना हो

476
00:33:22,640 --> 00:33:26,720
वो सब विचार है। तो तुम्हारे यहां अड्डे

477
00:33:26,720 --> 00:33:30,960
से तुम्हारा जब व्यक्ति पकड़ा जा रहा है। वहां से देशद्रोह

478
00:33:30,960 --> 00:33:34,960
उस पर देशद्रोह का मुकदमा चल रहा है। हत्याएं हो रही हैं। हथियार पकड़े जा

479
00:33:34,960 --> 00:33:39,520
रहे हैं। इसको व्यभचार नहीं कहेंगे क्या? तुम लोगों ने इतनी विष्ठा

480
00:33:39,520 --> 00:33:43,600
लिख रखी है धर्म ग्रंथों के नाम पर अपने यहां की सामग्री

481
00:33:43,600 --> 00:33:47,680
में। उसको व्यभचार नहीं कहेंगे क्या? अच्छा और

482
00:33:47,680 --> 00:33:51,840
सुनो तुमने अच्छा शारीरिक व्यभचार की बात भी आ जाए

483
00:33:51,840 --> 00:33:57,840
वो भी कैसे उसको भी सिद्ध कर देंगे। शारीरिक

484
00:33:57,840 --> 00:34:00,640
तुम लोगों ने

485
00:34:00,640 --> 00:34:06,000
दुर्गा माता के ऊपर जो आरोप लगाया है हम

486
00:34:06,000 --> 00:34:11,200
वास्तविकता में वो आरोप तो कहीं किसी धर्म ग्रंथ में लिखा नहीं है

487
00:34:11,200 --> 00:34:15,280
जो तुमने आरोप लगाया है दुष्कर्म हो रहा था होते हुए उनके अंदर

488
00:34:15,280 --> 00:34:20,160
भी भावना जाग गई नीच लोगों यही लिखा है ना तुमने

489
00:34:20,160 --> 00:34:24,720
दुर्गा माता के बारे में तुम्हारा अंत निश्चित

490
00:34:24,720 --> 00:34:28,800
देखते जाओ। तुमने जो ताना वाना खड़ा किया

491
00:34:28,800 --> 00:34:34,160
ना दुर्गा का अपमान करके तो दुर्गा मैया ही तुम्हारा

492
00:34:34,160 --> 00:34:38,720
कर रही है धीरे-धीरे मामला सेट।

493
00:34:38,720 --> 00:34:42,720
तो नीचों यह जो दुर्गा मैया के बारे में

494
00:34:42,720 --> 00:34:46,880
तुमने लिखा है उनके ऊपर व्यभचार का आरोप तुमने लगाया है

495
00:34:46,880 --> 00:34:52,160
नीच लोगों ये हमारे किसी धर्म ग्रंथ में नहीं लिखा है

496
00:34:52,160 --> 00:34:55,920
हम फिर

497
00:34:55,920 --> 00:35:00,240
ये जो व्यभचार है ये किसके मन में है

498
00:35:00,240 --> 00:35:04,240
कहां लिखा है तुम्हारे अड्डो में लिखा है तुम्हारे अड्डो में रखी

499
00:35:04,240 --> 00:35:08,480
हुई किताबों में लिखा है वही वाला चार जिसका

500
00:35:08,480 --> 00:35:12,560
तुम आरोप लगा रहे हो तो तुम्हारे यहां जो किताबें रखी हुई है उसमें वह व्यभचार

501
00:35:12,560 --> 00:35:13,280
है

502
00:35:13,280 --> 00:35:17,440
और वह व्यभचार के लिए और कोई जिम्मेदार नहीं है। तुम और वो अड्डा

503
00:35:17,440 --> 00:35:21,760
चलाने वाले उन किताबों को अपने अड्डे में रखने वाले वो लोग जिम्मेदार हैं।

504
00:35:21,760 --> 00:35:26,560
तो जिस व्यभचार का तुम आरोप लगा रहे हो वो व्यभचार भी तुम्हारे अड्डों में सिद्ध हो गया।

505
00:35:26,560 --> 00:35:30,880
क्योंकि तुमने निराधार रूप से उन किताबों में क्या लिखा?

506
00:35:30,880 --> 00:35:35,200
दुर्गा मैया पर दुराचार का आरोप लगाया हुआ है। किसके मन में वह

507
00:35:35,200 --> 00:35:39,280
विचार पल रहा है? तुम्हारे मन में ना तुम्हारे अड्डो अड्डों

508
00:35:39,280 --> 00:35:44,080
में रहने वालों के मन में ना अपने आप स्वतंत्र रूप से

509
00:35:44,080 --> 00:35:48,080
तो यह भी सिद्ध हो गया। हर प्रकार का व्यभचार सिद्ध हो रहा

510
00:35:48,080 --> 00:35:52,080
है तुम्हारे अड्डों में और फिर तुम हमको केस भेज रहे

511
00:35:52,080 --> 00:35:56,160
हो। किसी तरीके से शिवश नारायण द्विवेदी किसी एक केस

512
00:35:56,160 --> 00:36:00,160
की चप चपेट में आ जाए तो हाई कोर्ट का मुकदमा रुक जाए नहीं

513
00:36:00,160 --> 00:36:04,160
तो हमारी जो विष्ठा है वहां दिखाई दे जाएगी लोगों को जो

514
00:36:04,160 --> 00:36:10,160
हमने लिख रखी है। यही तो प्रयास है तुम लोगों का

515
00:36:10,400 --> 00:36:14,640
नीच कहीं के बात करने की तमीज नहीं है। पढ़े लिखे हो नहीं अनपढ़

516
00:36:14,640 --> 00:36:18,720
कहीं के गवार

517
00:36:18,720 --> 00:36:22,720
केवल ये जो वीडियो जो लोग ये देख रहे हैं ना इसमें बहुत

518
00:36:22,720 --> 00:36:27,040
ज्यादा आपको इन इंफॉर्मेशन नहीं मिलने वाली है। इंफॉर्मेशन

519
00:36:27,040 --> 00:36:31,680
तो मैं पहले ही दे चुका हूं तमाम सारे वीडियोस के माध्यम से।

520
00:36:31,680 --> 00:36:35,920
यहां तो केवल मुंह जोरी की बात है। मुंह जोरी कौन कितना

521
00:36:35,920 --> 00:36:41,040
बढ़िया कटाक्ष कर लेगा। तो भाई मेरे पास तो एक सीमा है।

522
00:36:41,040 --> 00:36:45,120
एक हद तक मैं मर्यादा को टच कर पाऊंगा। उसके बाहर तो मैं जा नहीं

523
00:36:45,120 --> 00:36:49,360
पाऊंगा तुम लोगों की तरह। तुम लोग ठहरे नीच। निचले

524
00:36:49,360 --> 00:36:53,440
स्तर के लोग अनपढ़ गवार। तुम लोग किसी भी हद तक जा

525
00:36:53,440 --> 00:36:57,600
सकते हो। जाओ। जाओ कभी मत झांकना अपनी

526
00:36:57,600 --> 00:37:02,000
अंतरात्मा में कि क्या कर रहे हो। खैर तुम्हारा

527
00:37:02,000 --> 00:37:06,400
जो इंतजाम है वो मैया कर रही है अच्छे से।

528
00:37:06,400 --> 00:37:11,840
ठीक है? भागना पड़ा ना लखनऊ से।

529
00:37:11,840 --> 00:37:15,920
ऐसे ही भागोगे जगह-जगह से। जहां जहां कोई

530
00:37:15,920 --> 00:37:19,920
माता का भक्त जन्म ले लेगा खड़ा हो जाएगा।

531
00:37:19,920 --> 00:37:25,920
वहीं वहीं से तुम बोरिया बिस्तर बांध बांध के भागो। जगह जगह से

532
00:37:26,800 --> 00:37:31,280
अच्छा यह हो गया विचार के अड्डे

533
00:37:31,280 --> 00:37:35,840
अच्छा कह रहे थे घुड़सवार से घुड़सवार भेगा तो घुड़सवार

534
00:37:35,840 --> 00:37:39,840
से घुड़सवार भेड़ेगा तो भाई संस्कृतज्ञ से

535
00:37:39,840 --> 00:37:43,600
संस्कृतज्ञ नहीं भिड़ेगा

536
00:37:43,600 --> 00:37:47,680
दर्शन विज्ञान व्यवहार तमाम सारी नॉलेज रखने वाले

537
00:37:47,680 --> 00:37:52,640
उनसे दर्शन विज्ञान व्यवहार की नॉलेज रखने वाला नहीं भेगा

538
00:37:52,640 --> 00:37:56,960
अपने अपने आप ही कुतर्क कर निकालते हो मन मुखी और खुद ही उसका खंडन

539
00:37:56,960 --> 00:38:01,040
कर लेते हो। यही होता है अधर्म की पहचान। जो अधर्म

540
00:38:01,040 --> 00:38:05,120
होता है वो बदलता है। तुम जो बात बोलोगे उसको तुम्हें खुद ही

541
00:38:05,120 --> 00:38:08,160
छोड़ना पड़ेगा।

542
00:38:08,160 --> 00:38:14,160
जब तक तुम शाश्वत धर्म को नहीं अपनाओगे तब तक।

543
00:38:16,560 --> 00:38:21,280
अब यह सारी बातें हो गई। रामपाल

544
00:38:21,280 --> 00:38:25,520
ने स्वयं इन नीच लोगों को फूहड़ यानी कि अनपढ़ गवार

545
00:38:25,520 --> 00:38:30,080
घोषित कर रखा है। स्वयं

546
00:38:30,080 --> 00:38:34,320
रामपाल ने स्वयं इन लोगों को घोषित कर रखा है कि अनपढ़ गवार है। तो पहले उससे लिखवाओ

547
00:38:34,320 --> 00:38:38,480
जाकर के कि भाई हम अनपढ़ गवार नहीं है। तुमने गलती कर दी है। तुमको

548
00:38:38,480 --> 00:38:42,480
तत्व ज्ञान नहीं है। तत्व ज्ञान तुमने गीता लिखते समय गलती कर दी

549
00:38:42,480 --> 00:38:47,200
है। उसमें हमको तुमने अनपढ़ कह दिया। सब के सब अनपढ़ हो।

550
00:38:47,200 --> 00:38:51,440
और तुम पढ़ के दिखाते हो ग्रंथ। अनपढ़ हो तुम बेवकूफ

551
00:38:51,440 --> 00:38:55,760
कहीं के दिखा रहा हूं कहां लिखा है इनकी गरिमा

552
00:38:55,760 --> 00:38:59,760
गीता की का पेज नंबर वो खोलिए जरा

553
00:38:59,760 --> 00:39:05,760
49

554
00:39:06,160 --> 00:39:10,400
देखो तुम्हारे बाबा ने तुम्ही को अनपढ़ कहा है। कहां पर कहा है वह दिखाता

555
00:39:10,400 --> 00:39:16,060
हूं। तब तक

556
00:39:16,060 --> 00:39:22,060
[गला साफ़ करने की आवाज़]

557
00:39:24,880 --> 00:39:30,880
हां 49 दिखाओ जरा

558
00:39:32,880 --> 00:39:36,960
ये देखो तुम्हारे ततज्ञ ज्ञानी ने क्या बताया तुम्हारे बारे में नोट

559
00:39:36,960 --> 00:39:40,960
कर लो और जो इनमें से निष्ठा

560
00:39:40,960 --> 00:39:45,200
निकाले ना मुख से उसी को बताओ भाई तू अनपढ़ है पहले जाके

561
00:39:45,200 --> 00:39:49,280
बता बता पहले जाके लिखवा के ला कि मैं अनपढ़ नहीं

562
00:39:49,280 --> 00:39:53,920
हूं तब तो बोल तू किताब पढ़ता है अनपढ़ कहीं का

563
00:39:53,920 --> 00:39:59,120
देख क्या लिखा है तेरे बाबा ने तेरे बारे में जेल कट्टू बाबा ने

564
00:39:59,120 --> 00:40:03,440
और तू यह सब जो मैं करता हूं ना डंके की चोट पे तू ये सब कर ही नहीं पाएगा

565
00:40:03,440 --> 00:40:07,440
क्यों नहीं कर पाएगा तेरे पास सत्य की ताकत नहीं है तुम लोगों

566
00:40:07,440 --> 00:40:11,440
के पास सत्य की ताकत नहीं है तुम लोग घुमा फिरा करके अप्रत्यक्ष

567
00:40:11,440 --> 00:40:16,560
रूप से चोरी छुपे ड्रामा करके ऐसी बात बोलोगे

568
00:40:16,560 --> 00:40:20,560
जो हमारी बात भी हो जाए और जो है कहीं मैं फंस ना जाऊं। मैं तो

569
00:40:20,560 --> 00:40:21,280
डंके की चोट पे

570
00:40:21,280 --> 00:40:25,280
बोल रहा हूं। जेल कट्टू है तेरा बाबा। ले ये फोटो लगी है भाई। यह

571
00:40:25,280 --> 00:40:29,520
फोटो देख तेरी किताब में लगी हुई है। जेल कट्टू जेल

572
00:40:29,520 --> 00:40:35,520
की ड्रेस पे बैठा हुआ है।

573
00:40:36,480 --> 00:40:42,480
जेब में नहीं है टल्ला टिल्ला। मांग रहा है लाल किला।

574
00:40:43,280 --> 00:40:49,280
पेज नंबर 49

575
00:40:57,920 --> 00:41:02,320
अच्छा एक बात और है जब मैंने वह वीडियो निकाला है

576
00:41:02,320 --> 00:41:06,400
उसके बाद अगर किसी को चर्चा करनी थी तो चर्चा ही कर लेते

577
00:41:06,400 --> 00:41:10,400
बस वीडियो बनाएंगे कोई चर्चा नहीं करना है कर उनको

578
00:41:10,400 --> 00:41:14,000
मालूम है

579
00:41:14,000 --> 00:41:18,480
पांच 10 मिनट में चीखें निकलंगी चीखें और

580
00:41:18,480 --> 00:41:22,640
आ जाना जिसने भी मां का दूध पिया हो सिद्ध कर देना रामपाल

581
00:41:22,640 --> 00:41:27,120
के ज्ञान को कि वह सही ज्ञान बेवकूफ कहीं के लीचड़

582
00:41:27,120 --> 00:41:31,120
फूहड़ लोग अनपढ़ लोग ये मैं नहीं कह रहा हूं तुम्हारा व्यक्ति कह रहा

583
00:41:31,120 --> 00:41:36,640
है दिखाओ इनको

584
00:41:36,640 --> 00:41:41,200
जितने लोग विष्ठा कर रहे हैं उन सबको बताना तू तो अनपढ़ है

585
00:41:41,200 --> 00:41:47,200
तेरा पढ़ा हुआ कहां से मान ले भाई

586
00:41:47,840 --> 00:41:52,480
हां 49 में सबसे नीचे

587
00:41:52,480 --> 00:41:58,480
पीडीएफ के अनुसार नहीं किताब के अनुसार बोला है।

588
00:42:11,280 --> 00:42:15,360
इसी आधार पर वो वही था ना वो पेज पहले आया था जो इसी आधार पर लिखा था

589
00:42:15,360 --> 00:42:21,360
सबसे लास्ट पैराग्राफ जो पहले आपने खोला था सही था वो वो खोलिए

590
00:42:24,960 --> 00:42:29,120
आज तक इतनी बार मेरे पास केस भेज रहे हैं ये कर रहे हैं

591
00:42:29,120 --> 00:42:33,760
भाई कोई भेज दो ना चर्चा कर ले बीच में आकर के

592
00:42:33,760 --> 00:42:37,760
वो नहीं होगा सिर्फ कर दो। तुम जो बोल रहे हो सही

593
00:42:37,760 --> 00:42:43,760
है।

594
00:42:48,800 --> 00:42:53,120
हां देखो क्या लिखा है? इसी आधार से लास्ट पैराग्राफ

595
00:42:53,120 --> 00:42:57,200
पढ़िए। इसी आधार से गीता अध्याय यह तक के

596
00:42:57,200 --> 00:43:01,360
ज्ञान को जानना है। श्लोक 25 में कहा है कि शास्त्र अनुकूल साधना रूपी कर्तव्य

597
00:43:01,360 --> 00:43:06,080
कर्म में आसक्त अविद्वान अर्थात अशिक्षित जिस प्रकार भक्ति

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00:43:06,080 --> 00:43:10,560
कर्तव्य कर्म करते हैं। विद्वान शिक्षित भी लोक संग्रह

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00:43:10,560 --> 00:43:14,560
अर्थात अधिक अनुयाई इकट्ठा करने चाहता हुआ उसी

600
00:43:14,560 --> 00:43:17,120
प्रकार करें।

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00:43:17,120 --> 00:43:21,120
जैसे अविद्वान अर्थात भोलेभाले अशिक्षित

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00:43:21,120 --> 00:43:25,200
शास्त्रानुकूल साधना तत्वदर्शी संत से

603
00:43:25,200 --> 00:43:30,080
प्राप्त करते हैं। कौन होते हैं? अविद्वान भोलेभाले

604
00:43:30,080 --> 00:43:34,080
अशिक्षित। ये तुम्हारा बाबा लिख रहा है। किससे

605
00:43:34,080 --> 00:43:38,960
प्राप्त करते हैं? तत्वदर्शी से। और

606
00:43:38,960 --> 00:43:40,480
यह कह रहा है कि विद्वान

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00:43:40,480 --> 00:43:45,360
शिक्षित लोगों को उनकी कॉपी करना करनी चाहिए।

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00:43:45,360 --> 00:43:49,520
तुम लोग कौन हो? फुअ हो। अशिक्षित लोग हो तुम। ये

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00:43:49,520 --> 00:43:53,680
मैं नहीं कह रहा। तुम्हारा बाबा कह रहा है क्योंकि तुम्हारे हिसाब से जो तत्वदर्शी संत

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00:43:53,680 --> 00:43:57,840
है तुम उसके अनुयाई हो। तुमने उससे साधना प्राप्त

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00:43:57,840 --> 00:44:01,840
की है। तो रामपाल से साधना प्राप्त करने

612
00:44:01,840 --> 00:44:06,000
वाले लोग रजिस्टर्ड अनपढ़ हैं। ये जान लो जाकर

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00:44:06,000 --> 00:44:12,000
के तुम्हारी किताब के अनुसार बेवकूफ।

614
00:44:12,400 --> 00:44:16,400
पता नहीं कौन से नशे में होगा जिसने किताबें लिखी है। रामपाल ने भी

615
00:44:16,400 --> 00:44:20,480
नहीं लिखी है किताबें। समझे? रामपाल का तो नाम

616
00:44:20,480 --> 00:44:24,560
है। उसने तो अपना वो दे रखा है। सानिध्य फोटो दे रखी है। उसका तो

617
00:44:24,560 --> 00:44:28,560
इतना भी बस नहीं चलेगा कि वह यह सब लिख दे। मगर जिसने भी लिखी बहुत बड़ा

618
00:44:28,560 --> 00:44:32,720
नशेड़ी रहा होगा। हर पन्ने पर उसने

619
00:44:32,720 --> 00:44:38,720
कम से कम पांच बेवकूफियां कर रखी है हर पष्ठ पर।

620
00:44:41,520 --> 00:44:46,320
तो रामपाल के अकॉर्डिंग यह जितना गिरोह है उसका

621
00:44:46,320 --> 00:44:50,320
जो बोल रहा है वो सारा का सारा गिरोह अनपढ़

622
00:44:50,320 --> 00:44:54,960
है जो इंटरनेट पर बोला करता है।

623
00:44:54,960 --> 00:44:58,960
अच्छा तो भैया रामपाल का फरार

624
00:44:58,960 --> 00:45:02,960
होना सिद्ध हो गया। रामपाल के फूहड़ चेलों का अनपढ़ होना सिद्ध हो

625
00:45:02,960 --> 00:45:07,440
गया। उनके द्वारा दिए गए जो गुरु से गुरु की भिड़ंत होगी

626
00:45:07,440 --> 00:45:11,520
कुतर्क और गुरु से पहले पहले चेलों से भले कुतर्क और

627
00:45:11,520 --> 00:45:16,080
गुरु का अर्थ ना जानने के विषय में अज्ञानता

628
00:45:16,080 --> 00:45:20,080
और शंकराचार्य को चैलेंज देने का इन सभी बातों

629
00:45:20,080 --> 00:45:23,680
का समाधान मैंने प्रस्तुत कर दिया।

630
00:45:23,680 --> 00:45:28,000
ठीक है? और एक समाधान और प्रस्तुत किया कि ये जो व्यभचार

631
00:45:28,000 --> 00:45:32,240
का मैंने यह कह दिया कि भैया इनके अड्डों में व्यभचार होता है उसका

632
00:45:32,240 --> 00:45:36,480
आरोप लगा रहे हैं मेरे ऊपर। पर जगह-जगह से केस भेज रहे हैं। तो मैंने इनका वो भी इनकी इनको

633
00:45:36,480 --> 00:45:40,480
जो है शिक्षा दे दी कि व्यभचार का अर्थ क्या-क्या होता है। पढ़ लो थोड़ा

634
00:45:40,480 --> 00:45:44,240
सा निशुल्क क्लासेस चलती है।

635
00:45:44,240 --> 00:45:48,320
एक वो आपके चहेते वो हैं योगेश भारद्वाज जी वो भी मेरी क्लासेस में

636
00:45:48,320 --> 00:45:52,320
आना चाहते हैं। उनको भी बुलाया है। आपके बहुत बड़े चहेते

637
00:45:52,320 --> 00:45:55,840
हैं वो। खैर

638
00:45:55,840 --> 00:45:57,200
अच्छा

639
00:45:57,200 --> 00:46:01,280
अब मैं कुछ की पॉइंट्स दे रहा हूं और एक

640
00:46:01,280 --> 00:46:05,440
घोषणा और कर रहा हूं कि गरिमा गीता की जो वो एक सीरीज चल रही थी ना

641
00:46:05,440 --> 00:46:09,520
जो साप्ताहिक रूप से उसकी गीता का एक एक श्लोक के

642
00:46:09,520 --> 00:46:13,680
साथ हम आगे बढ़ रहे थे और उसमें हमने करीब छह सात एपिसोड

643
00:46:13,680 --> 00:46:17,840
कर रखे उसको अब हम कंटिन्यू करेंगे ठीक है यह घोषणा कर रहा हूं मगर अभी

644
00:46:17,840 --> 00:46:21,920
मैं अपने धर्म से प्यार करने वाले हर व्यक्ति के

645
00:46:21,920 --> 00:46:25,920
लिए कुछ की पॉइंट्स बता दे रहा हूं। की पॉइंट्स पहली बात

646
00:46:25,920 --> 00:46:30,000
तो यह है पहले सबसे बड़ा की पॉइंट क्या है

647
00:46:30,000 --> 00:46:34,000
कि यह दावा करता है कि कबीर भगवान

648
00:46:34,000 --> 00:46:38,080
है और वेद आदि शास्त्रों में जितने भगवान के स्वरूप

649
00:46:38,080 --> 00:46:42,240
दिखाए गए उनके नाम रूप इत्यादि वो सब भगवान नहीं है। उनहीं शास्त्रों

650
00:46:42,240 --> 00:46:46,640
के हिसाब से वह सब गलत है। तो पहली बात तो यह शास्त्रों

651
00:46:46,640 --> 00:46:50,640
पर दोहरी बातें करने वाला होने का आरोप लगाता है। शास्त्र जो है

652
00:46:50,640 --> 00:46:56,080
दोहरी बात कर रहे हैं। और उन दोहरी बातों में से केवल जहां जहां पर

653
00:46:56,080 --> 00:47:00,080
ऐसे निंदा परक वचन जो अपने हिसाब से अर्थ करके निकाल सकता

654
00:47:00,080 --> 00:47:04,080
है उनका आधार लेकर के यह कहता है कि जिनको तुम भगवान समझ रहे हो भगवान नहीं

655
00:47:04,080 --> 00:47:08,080
है। क्यों? क्योंकि तुम्हारे शास्त्रों में लिखा है। अगर यह बात थोड़ी देर

656
00:47:08,080 --> 00:47:12,400
के लिए मान भी ली जाए तो उससे कबीर का भगवान होना तो सिद्ध नहीं हुआ।

657
00:47:12,400 --> 00:47:16,400
उस विषय में तुझे जाना पड़ेगा अपनी वाणी पे। उस विषय में तुझे

658
00:47:16,400 --> 00:47:20,720
जाना पड़ेगा अपनी किताबों पर जिस पर हिंदुओं की आस्था नहीं है। तो कबीर

659
00:47:20,720 --> 00:47:24,720
भगवान कहां से सिद्ध हुआ? उसमें फिर तुम जलेबियां बनाओगे। कबीर

660
00:47:24,720 --> 00:47:28,800
से कबीर बना, ये हुआ, वो हुआ। उसमें तुम्हारे पास जलेबियां

661
00:47:28,800 --> 00:47:33,440
है। अग्न्या को अगन्या कर दो। अग्न्या

662
00:47:33,440 --> 00:47:38,080
को अगन्या कर दो और फिर कह दो बिन बाई गाय।

663
00:47:38,080 --> 00:47:42,160
ये तो तुम्हारी तुम्हारा स्तर है संस्कृत का। और फिर

664
00:47:42,160 --> 00:47:46,880
तुम दावे करोगे बड़े-बड़े कि हमने अर्थ किया है वेदों का। अच्छा

665
00:47:46,880 --> 00:47:51,040
तो यह पहला की पॉइंट है कि यह दावे करता है ब्रह्मा विष्णु महेश भगवान नहीं मगर

666
00:47:51,040 --> 00:47:55,520
भगवान ब्रह्मा विष्णु महेश के भगवान ना होने से अगर मान भी लिया जाए

667
00:47:55,520 --> 00:47:59,840
वहां से कबीर का भगवान होना सिद्ध नहीं होता। पहला सबसे बड़ा कहीं

668
00:47:59,840 --> 00:48:04,160
नहीं लिखा है कि कबीर भगवान है। और तो और अगर

669
00:48:04,160 --> 00:48:08,240
मान लो कि कबीर नाम आया ही है तो वो कबीर वही कबीर है जिसको

670
00:48:08,240 --> 00:48:12,480
ये कबीर बता रहे हैं। इस विषय के लिए हमें एक शब्द प्रमाण चाहिए

671
00:48:12,480 --> 00:48:16,960
होगा। वो शब्द प्रमाण रामपाल तो है नहीं। रामपाल

672
00:48:16,960 --> 00:48:21,280
जैसे जेल कट्टू पर कौन भरोसा करेगा? जो कहता है

673
00:48:21,280 --> 00:48:25,440
जिसके लिए लिखा हुआ है कि वह जब आएगा कबीर का अवतार होगा तो उसकी परछाई

674
00:48:25,440 --> 00:48:27,680
होगी। यह सब बातें करता है।

675
00:48:27,680 --> 00:48:31,840
परछाई नहीं होगी और फिर इसकी परछाई दिख रही है। ऐसा कई

676
00:48:31,840 --> 00:48:36,320
लोग बताते हैं। खैर यह बहुत बड़ा महत्वपूर्ण विषय नहीं है। महत्वपूर्ण

677
00:48:36,320 --> 00:48:40,400
विषय यह है कि ब्रह्मा विष्णु महेश के भगवान ना होने से कबीर का भगवान होना

678
00:48:40,400 --> 00:48:44,560
सिद्ध नहीं होता। ठीक स्पष्ट रूप से कहीं भी कबीर को भगवान कहा

679
00:48:44,560 --> 00:48:48,800
नहीं गया। पहला की पॉइंट। हालांकि इससे ज्यादा जो ऊपर

680
00:48:48,800 --> 00:48:52,800
लेवल की बातें हैं वो सब इनके लिए है नहीं। मगर मैं हिंदुओं

681
00:48:52,800 --> 00:48:56,880
को बता दूं की पॉइंट्स जरूरी की पॉइंट्स। नहीं तो आप इसी में खेलते

682
00:48:56,880 --> 00:49:00,960
रहोगे कि हां इन्होंने यह आरोप लगा दिया। अच्छा अब यह दूसरा आरोप एक

683
00:49:00,960 --> 00:49:05,120
लगाते हैं भगवान पर जो है दुराचरण करने का दुराचारी

684
00:49:05,120 --> 00:49:09,200
होने का आरोप लगाते हैं। तो जो भी आरोप ये लगाते

685
00:49:09,200 --> 00:49:13,200
हैं भगवान के जिस स्वरूप पर लगा रहे हैं वो आप चेक

686
00:49:13,200 --> 00:49:17,200
करिए। क्या भगवान का कोई स्वरूप ऐसा है जो मैथुनी सृष्टि

687
00:49:17,200 --> 00:49:21,200
से उत्पन्न हुआ है। यानी कि मनुष्य के ऊपर

688
00:49:21,200 --> 00:49:25,520
जो लॉ लागू हो रहे हैं उसके बायोलॉजिकली उत्पन्न होने के मैथुरी

689
00:49:25,520 --> 00:49:29,600
सृष्टि के कारण उत्पन्न होने से उसका जो शरीर है और उस शरीर के द्वारा

690
00:49:29,600 --> 00:49:33,600
होने वाली जो क्रियाएं जिनके कारण वह पापी कहा जाएगा। क्या उसी तरह से

691
00:49:33,600 --> 00:49:39,280
भगवान उत्पन्न हुए हैं? भगवान तो स्वयंभू है।

692
00:49:39,280 --> 00:49:42,800
भगवान जन्म नहीं लेते हैं। केवल प्रकट और अप्रकट

693
00:49:42,800 --> 00:49:46,880
होते हैं। आविभाव तिरो भाव होता है। जिसको ये लोग जन्म और

694
00:49:46,880 --> 00:49:51,040
मरण से दिखाते हैं। मगर फिर भी कह दिया जाए कि भैया कहां पर वो क्रिया

695
00:49:51,040 --> 00:49:55,600
हो रही है जिससे कि इनका बायोलॉजिकली मनुष्यों की तरह जन्म लेना सिद्ध हो।

696
00:49:55,600 --> 00:49:59,840
हम सृष्टि से उत्पन्न है। उनका शरीर तो दिव्य है। तो

697
00:49:59,840 --> 00:50:03,840
उनके द्वारा होने वाली जो जो लीलाएं हैं जिनके कुछ

698
00:50:03,840 --> 00:50:07,840
अर्थ है उनके आधार पर तुम उनके ऊपर दुष्कर्म

699
00:50:07,840 --> 00:50:11,920
का दुराचरण का आरोप कैसे लगाओगे? दूसरी बात

700
00:50:11,920 --> 00:50:16,000
अभी आर्य समाज के साथ जो चर्चा हुई उसके आधार पर आपको एक

701
00:50:16,000 --> 00:50:21,600
बात क्या जानने को मिली कि भगवान दिखाई

702
00:50:21,600 --> 00:50:25,600
मतलब समस्त कर्मों से दिखाई देने के रूप में जुड़ा

703
00:50:25,600 --> 00:50:29,600
ना होते हुए भी अप्रत्यक्ष रूप से सभी कर्मों से जुड़ा हुआ है। अगर कबीर

704
00:50:29,600 --> 00:50:34,640
को भगवान मानोगे तो कबीर नहीं जुड़ा है क्या हर अच्छे बुरे कर्म से

705
00:50:34,640 --> 00:50:38,800
सारे भगवान वही हो सकता है जो पूर्ण हो आप

706
00:50:38,800 --> 00:50:43,200
भगवान को ये सीमित नहीं कर सकते नहीं तो भगवान की उसकी सिद्धि नहीं होगी

707
00:50:43,200 --> 00:50:47,200
कबीर की सत्ता सब जगह है कबीर सब कुछ

708
00:50:47,200 --> 00:50:51,280
जानता है कबीर भी को भी यह मानना पड़ेगा कि वह भी सबको

709
00:50:51,280 --> 00:50:55,280
देख रहा है तो वो उन चीजों को

710
00:50:55,280 --> 00:50:58,000
भी देख रहा है जिनको देखना हमारे लिए पाप

711
00:50:58,000 --> 00:51:02,240
है। अगर कबीर भगवान है तो तो वो भी पापी

712
00:51:02,240 --> 00:51:06,400
हो गया। इसका अर्थ यह है कि जिन बातों से मनुष्य पर पाप लगता

713
00:51:06,400 --> 00:51:10,480
है उन्हीं बातों से ईश्वर पर पाप नहीं लगता है। क्यों

714
00:51:10,480 --> 00:51:14,480
नहीं लगता है? कि ईश्वर समस्त कर्मों को करते हुए भी अकरता

715
00:51:14,480 --> 00:51:18,640
है। क्यों अकता है? क्योंकि जिन कर्मों को करते हुए वह दिखाई

716
00:51:18,640 --> 00:51:22,640
दे रहा है, जिन कर्मों से लिप्त वह दिखाई दे रहा है, उन कर्मों से मिलने

717
00:51:22,640 --> 00:51:26,720
वाले भोग में उसकी आसक्ति नहीं है, आसक्ति रहित है।

718
00:51:26,720 --> 00:51:31,600
इसको दूसरे तरीके से समझ लो। ईश्वर को छोड़ दो।

719
00:51:31,600 --> 00:51:35,840
मुक्त व्यक्ति को समझो। जो मुक्त हो गया, सतलोक पहुंच गया।

720
00:51:35,840 --> 00:51:40,640
जो व्यक्ति सतलोक पहुंच गया। अभी थोड़ी देर पहले जब वो बंधन में था,

721
00:51:40,640 --> 00:51:44,640
उसकी माता थी, बहन थी, पत्नी थी, पिता थे। जब वह

722
00:51:44,640 --> 00:51:48,640
मुक्त हो गया तो क्या उसको यहां पर

723
00:51:48,640 --> 00:51:53,040
जब उसके परिवार के साथ कुछ अनहोनी अप्रिय घटनाएं घटेंग तो क्या

724
00:51:53,040 --> 00:51:57,200
जो मुक्त व्यक्ति है उसको बुरा लगेगा वो प्रभावित

725
00:51:57,200 --> 00:52:01,360
होगा अगर होगा तो मुक्त नहीं बंधन में है और

726
00:52:01,360 --> 00:52:05,520
अगर नहीं होगा तो क्यों नहीं होगा क्योंकि उसको समझ

727
00:52:05,520 --> 00:52:09,360
में आ गया कि ये मिथ्यात्व है।

728
00:52:09,360 --> 00:52:13,280
यह सभी चीजों को जो मैं देख रहा हूं यह सभी चीजें वैसी

729
00:52:13,280 --> 00:52:17,280
नहीं है जिनके कारण मैं पहले इसको जो है समझ रहा था कि अरे यह तो प्रभावित

730
00:52:17,280 --> 00:52:21,360
होने वाली चीज उसके लिए वो एक प्रपंच मात्र होगा तभी वो

731
00:52:21,360 --> 00:52:25,680
मुक्त हो सकता है और अगर वो उससे प्रभावित हुआ यदि वो सारी चीजें सत्य समझेगा

732
00:52:25,680 --> 00:52:29,680
तो प्रभावित होगा प्रभावित होगा तो मुक्त नहीं कहलाएगा तो

733
00:52:29,680 --> 00:52:33,840
जिस प्रकार जब एक मुक्त आत्मा प्रभावित नहीं हो

734
00:52:33,840 --> 00:52:37,920
रही यहां होने वाली घटनाओं से तो ईश्वर को क्यों प्रभावित मान रहे हो

735
00:52:37,920 --> 00:52:42,080
ईश्वर कैसे हो जाएगा उसको को भी तो मालूम है ये संसार माया मात्र प्रपंच

736
00:52:42,080 --> 00:52:46,480
मात्र है और नहीं मालूम है तो जिस रूप में भी उसको मानोगे

737
00:52:46,480 --> 00:52:50,720
आपको यह तो मानना पड़ेगा ना कि इससे प्रभाव नहीं पड़ रहा है

738
00:52:50,720 --> 00:52:54,880
मुक्त आत्मा को तो जब मुक्त आत्मा को प्रभाव नहीं पड़ रहा तो ईश्वर को प्रभाव कैसे पड़

739
00:52:54,880 --> 00:52:58,960
जाएगा यह दूसरा की पॉइंट्स दुष्कर्मों से जोड़ने का जो

740
00:52:58,960 --> 00:53:02,800
प्रयास करते हैं ईश्वर को ठीक है

741
00:53:02,800 --> 00:53:06,960
समस्त कर्मों से ईश्वर वैसे ही लिप्त है इनके अनुसार

742
00:53:06,960 --> 00:53:11,280
काल ने झूठ बोला काल ने कई बातें मनगढ़ंत बता दी।

743
00:53:11,280 --> 00:53:15,280
काल ने कुछ बातें गलत बता दी। 5% ज्ञान जो गीता का दिया है वो गलत

744
00:53:15,280 --> 00:53:19,600
है। ठीक है? तो इसका अर्थ क्या हुआ? वो काल

745
00:53:19,600 --> 00:53:24,480
ने बिना कबीर कबीर की सत्ता के बाहर जाकर के कर दिया क्या वो कार्य?

746
00:53:24,480 --> 00:53:28,560
उसमें कबीर लिप्त नहीं है। तो काल के माध्यम

747
00:53:28,560 --> 00:53:32,800
से जितने दुष्कर्म हो रहे हैं सब में कबीर बैठा है ना।

748
00:53:32,800 --> 00:53:36,800
नहीं तो वह सर्वज्ञ नहीं है। सर्वज्ञाता नहीं है। सर्वशक्तिमान नहीं है। खैर

749
00:53:36,800 --> 00:53:41,040
सर्वशक्तिमान तो नहीं है। आगे भी चलो। दो की पॉइंट्स हो गए। तीसरा की पॉइंट

750
00:53:41,040 --> 00:53:45,120
ले लो। कबीर सर्वशक्तिमान नहीं

751
00:53:45,120 --> 00:53:49,760
है। पहली बात बूढ़ा दिखता है।

752
00:53:49,760 --> 00:53:54,000
जो अजर कहा गया है ना अजर वो लॉ लागू नहीं होता है उसके

753
00:53:54,000 --> 00:53:58,160
ऊपर भगवान का। सर्वशक्तिमान नहीं है। माता के गर्भ से जन्म नहीं ले सकता।

754
00:53:58,160 --> 00:54:02,240
कहता है मैं नहीं ले सकता। बाधित है और भी ना जाने क्या-क्या कार्य है जो वो नहीं

755
00:54:02,240 --> 00:54:04,800
कर सकता है।

756
00:54:04,800 --> 00:54:09,600
ठीक है? तो बाधित है। बाधित है तो वो सर्वशक्तिमान नहीं है। सर्वशक्तिमान

757
00:54:09,600 --> 00:54:13,680
अनंत सामर्थ्यवान का अर्थ होता है अनंत। अगर किसी

758
00:54:13,680 --> 00:54:17,920
भी कारण से आप कह रहे हो कि वो जो है यहां पर यह कार्य नहीं कर सकता तो हो

759
00:54:17,920 --> 00:54:22,000
सकता है कि वो लॉजिकली आपका ठीक बैठ जाए। दुर्जन हालांकि बैठेगा

760
00:54:22,000 --> 00:54:26,240
नहीं। दुर्जन तोष न्याय से मान लिया जाए। लॉजिकली आपका ठीक भी बैठ जाए।

761
00:54:26,240 --> 00:54:30,320
मगर उसको अनंत मत कहो ना। फिर आप ये मान लो कि दुनिया का कोई तत्व

762
00:54:30,320 --> 00:54:34,400
ऐसा हो ही नहीं सकता जो अनंत सामर्थवान हो। ये संज्ञा

763
00:54:34,400 --> 00:54:38,400
घटा लो। पहले ये कहना चालू है कि नहीं दुनिया में कोई भी

764
00:54:38,400 --> 00:54:42,480
तत्व नहीं हो सकता जो सर्वशक्तिमान जो अनंत सामर्थवान तो ईश्वर

765
00:54:42,480 --> 00:54:43,680
इनका बाधित है।

766
00:54:43,680 --> 00:54:47,840
अच्छा परम स्वतंत्र मोक्ष नहीं है। जीव की चाह का वास्तविक विषय

767
00:54:47,840 --> 00:54:52,000
है क्या? सच्चिदानंद स्वरूप होकर शेष रहना। इनका मोक्ष क्या है?

768
00:54:52,000 --> 00:54:56,000
सतलोक जाएंगे, बादाम खाएंगे, यह होंगे, यह करेंगे, वह करेंगे। और

769
00:54:56,000 --> 00:54:58,240
सुनो

770
00:54:58,240 --> 00:55:02,240
इनका मोक्ष है। दो6 में लिखा हुआ है आत्मा

771
00:55:02,240 --> 00:55:06,240
नित्य नहीं है। और दो 16 में ही

772
00:55:06,240 --> 00:55:10,480
लिखा हुआ है गीता में भी लिखा है इन्होंने भी माना है

773
00:55:10,480 --> 00:55:14,480
कि जिसका असत का कभी भाव नहीं होता और सत

774
00:55:14,480 --> 00:55:19,120
का कभी अभाव नहीं होता। ठीक है? तो जो

775
00:55:19,120 --> 00:55:23,920
आत्मा है जो कभी ना कभी उत्पन्न हुई है जिसका कभी अभाव था।

776
00:55:23,920 --> 00:55:28,080
तो वह कभी भी सत नहीं हो सकती।

777
00:55:28,080 --> 00:55:32,080
नित्य नहीं हो सकती क्योंकि उसका कभी अभाव था। इनकी ही

778
00:55:32,080 --> 00:55:36,080
किताब में लिखा है दो 16 आत्मा का कभी

779
00:55:36,080 --> 00:55:40,240
किसी समय पर अभाव था तो वो कभी भी सत नहीं हो सकती।

780
00:55:40,240 --> 00:55:44,560
मतलब वो सत स्वरूप नहीं हो सकती कि अब मैं हमेशा रहूंगी। जो अभाव अभाव

781
00:55:44,560 --> 00:55:48,640
था जिस चीज का वह नष्ट होनी है सत नहीं है यानी कि

782
00:55:48,640 --> 00:55:52,800
मुक्ति नहीं है ना तो ईश्वर है घटिया टाइप का ईश्वर की व्याख्या

783
00:55:52,800 --> 00:55:57,040
है घटिया टाइप की मोक्ष की व्याख्या है आगे शाश्वत धर्म नहीं

784
00:55:57,040 --> 00:55:58,720
है अब ये लोग बात

785
00:55:58,720 --> 00:56:04,560
करते हैं कि मैं जो है बता रहा हूं

786
00:56:04,560 --> 00:56:08,720
तुम्हारे शास्त्रों के अर्थ को मैं बता रहा हूं ठीक है वो शास्त्र इनके

787
00:56:08,720 --> 00:56:12,880
हाथ में आए कहां से किसी दुकान से खरीद रहे हैं अरे भैया गुरु गुरु

788
00:56:12,880 --> 00:56:17,040
शिष्य परंपरा से उसका ज्ञान प्राप्त किया है कि नहीं तुमने? हम दुकान से भले

789
00:56:17,040 --> 00:56:21,040
ही खरीदे मगर हमारे पास अपनी गुरु शिष्य परंपरा है जिससे हम जाकर

790
00:56:21,040 --> 00:56:25,520
के सत्यापित कर सकते हैं। अगर उस ग्रंथ में कोई भी मिलावट होगी तो

791
00:56:25,520 --> 00:56:29,680
तुम्हें कैसे पता कबीर ने जो ग्रंथ दिए थे वो यही है? कबीर ने वेद भाष्य किया था क्या?

792
00:56:29,680 --> 00:56:33,600
जो तुम वेदों का अर्थ बता रहे हो।

793
00:56:33,600 --> 00:56:37,760
कैसे पता? और जिस जिसने वेद भाष्य किया, जिसने

794
00:56:37,760 --> 00:56:41,920
ब्रह्म सूत्र पर भाष्य किया, जिसने दर्शन पर भाष्य किया, उसको तुम गुरु मान

795
00:56:41,920 --> 00:56:46,240
नहीं रहे हो। उसको तो लीला मान रहे हो। तो तुम्हारे पास शाश्वत

796
00:56:46,240 --> 00:56:50,400
धर्म भी नहीं है। मतलब जो परंपरा प्राप्त वेदा आद शास्त्र है। इनका ज्ञान विज्ञान

797
00:56:50,400 --> 00:56:54,640
तुम्हारे पास प्रामाणिक रीति से उपलब्ध नहीं है। धज्जियां उड़ जाएंगी। इनहीं

798
00:56:54,640 --> 00:56:58,800
तीन चार पॉइंट्स में। आगे चलते हैं।

799
00:56:58,800 --> 00:57:03,760
ये तो हो गए दार्शनिक विषय। तीन दार्शनिक। पहले मैंने शब्द वस्तु

800
00:57:03,760 --> 00:57:07,840
जो शाब्दिक खेल है इनका वह बताया कबीर कबीर में अंतर ठीक है

801
00:57:07,840 --> 00:57:11,920
और ब्रह्मा विष्णु महेश भगवान नहीं है उससे कबीर का भगवान होना सिद्ध नहीं होता ये

802
00:57:11,920 --> 00:57:13,920
तो शब्द का खेल आ गया

803
00:57:13,920 --> 00:57:18,480
है ना जो ये शब्द पर खेलते हैं इसके बाद अब मैंने बताया दार्शनिक

804
00:57:18,480 --> 00:57:22,640
दार्शनिक इनकी इनके यहां जो अभाव है बहुत बड़ा ये की पॉइंट्स है ना ही

805
00:57:22,640 --> 00:57:26,720
कबीर सर्वशक्तिमान है इन्हीं के अनुसार और

806
00:57:26,720 --> 00:57:30,800
ना ही इनके यहां पर सत स्वरूप होने

807
00:57:30,800 --> 00:57:35,040
वाला मोक्ष मोक्ष है नित्य मुक्ति नहीं है इनके यहां ठीक है

808
00:57:35,040 --> 00:57:39,120
क्योंकि इन्होंने खुद कह दिया कि जो आत्मा है उसका एक समय पर अभाव था कहां

809
00:57:39,120 --> 00:57:43,760
पर कहा है इनकी जो गरमा गीता की है उसमें दो 16 की कमेंट्री देखना

810
00:57:43,760 --> 00:57:47,760
और यह जो वीडियो है इसमें मैं जितनी बातें बोल रहा हूं जैसे मैंने कहा कि गुरु का

811
00:57:47,760 --> 00:57:52,400
मतलब है गु का मतलब अंधकार रू का मतलब निकालने वाला अद्वतार का उपनिषद

812
00:57:52,400 --> 00:57:56,560
स्कंद पुराणोक्त गुरु गीता उसमें लिखा हुआ है अज्ञानता रूपी

813
00:57:56,560 --> 00:58:00,560
अंधकार से निकालने वाला गुरु कहलाता है एक तत्व ज्ञान है नहीं तुम लोगों

814
00:58:00,560 --> 00:58:05,840
के पास तुम्हारे जेल कट्टू बाबा के पास तो क्या है इसका अर्थ?

815
00:58:05,840 --> 00:58:10,160
यह जितनी चीजें मैं बोल रहा हूं अलग से यह वीडियो यह साक्ष्य प्रमाण

816
00:58:10,160 --> 00:58:14,320
लगा के मेन चैनल पर भी डाल दिया जाएगा। जिससे कि अभी आपको वो डिस्प्ले

817
00:58:14,320 --> 00:58:18,480
नहीं हो रहा है। अभी मैं धारा प्रवाह बोल रहा हूं। बाद में वहां पर लिख लिख करके कौन सा प्रमाण

818
00:58:18,480 --> 00:58:22,480
कहां पर है वो भी डाल दिया जाएगा। ठीक है? तो

819
00:58:22,480 --> 00:58:26,480
ये हो गया इनका इनकी दार्शनिक अभाव। ठीक है? अच्छा एक

820
00:58:26,480 --> 00:58:29,280
चीज और ऐसी से याद आया कि इनके

821
00:58:29,280 --> 00:58:33,360
यहां पर यह जो कह रहे हैं कि गीता का

822
00:58:33,360 --> 00:58:37,840
ज्ञान किसने दिया? काल ने दिया। इनकी गरिमा गीता की दिखाओ।

823
00:58:37,840 --> 00:58:41,840
गरिमा गीता की पृष्ठ संख्या 23 उसमें ये खुद कह

824
00:58:41,840 --> 00:58:45,920
रहे हैं कि गीता का ज्ञान भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को

825
00:58:45,920 --> 00:58:51,840
दिया था। तुम्हारे डंडे से ही तुम्हारी पिटाई करूंगा मैं।

826
00:58:51,840 --> 00:58:56,000
ठीक है? तो जो पहला वाला पॉइंट है ना कबीर कबीर में अंतर

827
00:58:56,000 --> 00:59:00,000
ब्रह्मा विष्णु महेश के भगवान ना होने से कबीर का भगवान होना सिद्ध

828
00:59:00,000 --> 00:59:04,240
नहीं होता और तुम खुद लिख रहे हो कि गीता का ज्ञान भगवान कृष्ण ने ही दिया

829
00:59:04,240 --> 00:59:08,320
है। तुम खुद लिख रहे हो अर्जुन पृष्ठ संख्या 23 पहला

830
00:59:08,320 --> 00:59:13,520
पैराग्राफ

831
00:59:13,520 --> 00:59:18,480
देखिए पहले पैराग्राफ की आखरी लाइन पढ़िए।

832
00:59:18,480 --> 00:59:22,640
लिखी है ना किसी नशेड़ी ने यही ज्ञान भगवान श्री

833
00:59:22,640 --> 00:59:26,640
कृष्ण ने अर्जुन को दिया था और यही बात इनकी ज्ञान गंगा में भी लिखी

834
00:59:26,640 --> 00:59:30,640
हुई है जहां पर 30 या 32 नंबर का प्रश्न है वहां पर

835
00:59:30,640 --> 00:59:35,120
जो है कबीर स्वयं कह रहे हैं रामपाल के अनुसार कबीर कह रहे हैं कि

836
00:59:35,120 --> 00:59:39,840
विष्णु भगवान श्री कृष्ण के रूप में प्रकट होते उन्होंने ही गीता का ज्ञान दिया

837
00:59:39,840 --> 00:59:44,000
अभी होगी अगर आसपास ज्ञान गंगा तो दिखा दूंगा

838
00:59:44,000 --> 00:59:48,640
चलो नहीं है ठीक है

839
00:59:48,640 --> 00:59:52,640
तो यह हो गया दार्शनिक अभाव बता ही दिया। अब आगे जो है

840
00:59:52,640 --> 00:59:57,120
इनकी प्रामाणिकता के विषय में भी बता देते हैं। जो तत्वदर्शी

841
00:59:57,120 --> 01:00:02,160
है यह अपने आप को तत्वदर्शी कहता है। भागवत में तत्व का अर्थ बताया गया है।

842
01:00:02,160 --> 01:00:06,160
तत्व का अर्थ यह नहीं है कि इसका नाम यह है। इसका नाम वो है। वेदों में जो

843
01:00:06,160 --> 01:00:10,240
उसकी ओर इशारा गया तत्व नहीं है। ये तो उसके नाम

844
01:00:10,240 --> 01:00:14,480
रूप का वर्णन चल रहा है। तत्व से जो फाइनल

845
01:00:14,480 --> 01:00:18,800
स्टेट तत्व का ज्ञान है उसके बारे में भागवत में बताया गया है। तत्व भी कहेंगे

846
01:00:18,800 --> 01:00:23,120
किसे?

847
01:00:23,120 --> 01:00:27,360
उस उस तत्व को जाना जानना उस स्टेज पर पहुंच जाना

848
01:00:27,360 --> 01:00:31,920
जहां ज्ञाता और गे पदार्थ का अंतर शेष नहीं रह जाता

849
01:00:31,920 --> 01:00:35,920
पढ़ लेना भागवत में लिखा है ये भी प्रमाण के साथ डाल देंगे आप

850
01:00:35,920 --> 01:00:40,080
ठीक है तो ये जो ज्ञान है ना ये तुम्हारा कि उसका

851
01:00:40,080 --> 01:00:44,160
नाम ये है भगवान ब्रह्मा विष्णु महेश ने ऐसा किया वैसा किया उन्होंने इसकी

852
01:00:44,160 --> 01:00:48,160
ओर इशारा किया इशारा इशारा इशारा इशारा करके वो जो है उधर वो

853
01:00:48,160 --> 01:00:52,000
कबीर सागर से निकल आए भगवान

854
01:00:52,000 --> 01:00:58,000
मेरा फ्रेम थोड़ा सा बदल गया है।

855
01:01:01,360 --> 01:01:06,320
खैर यह तत्व ज्ञान नहीं है। तत्व

856
01:01:06,320 --> 01:01:10,480
ज्ञान है जिसे जान लेने के बाद और कोई ज्ञान और कुछ जानना शेष

857
01:01:10,480 --> 01:01:15,200
ना रह जाए। कुछ शंका ना रह जाए। असतो माग तस माग

858
01:01:15,200 --> 01:01:19,680
मृत्य तत्व ज्ञान वो नहीं है जो तुम कह रहे हो

859
01:01:19,680 --> 01:01:23,680
उसका नाम जान लेना उसका ये जान लेना ये तत्व ज्ञान नहीं है तत्व से

860
01:01:23,680 --> 01:01:28,960
उसको जान लेना तत्व से ठीक है

861
01:01:28,960 --> 01:01:34,160
तो ये भागवत में तुम्हारा खंडन है बहुत बड़ा दूसरी बात

862
01:01:34,160 --> 01:01:38,720
दूसरी बात जब तुम ये कहते हो कि तत्वदर्शी हूं मैं इसलिए मैं बताऊंगा तो तत्वदर्शी

863
01:01:38,720 --> 01:01:42,720
तुम सिद्ध कहां से होते हो गीता से गीता से सिद्ध कैसे

864
01:01:42,720 --> 01:01:46,880
हो जाओगे जब गीता अभी खुद इस बात पर निर्भर है कि उसमें कहां पर उसने झूठ

865
01:01:46,880 --> 01:01:51,200
बोला है और कहां पर सच बोला है तय करना है तुम्हारे हिसाब से काल ने कहीं

866
01:01:51,200 --> 01:01:55,360
पर झूठ बोला है तो कहां पर झूठ बोला है कहां पे झूठ नहीं बोला तय करना है तो फिर गीता

867
01:01:55,360 --> 01:01:59,440
के वचन के आधार पर तुम तत्वदर्शी सिद्ध नहीं होगे पहली बात

868
01:01:59,440 --> 01:02:03,440
दूसरी बात गीता में ही लिखा हुआ है कि ज्ञान यज्ञ

869
01:02:03,440 --> 01:02:07,520
के ज्ञान को लेने के लिए तत्वदर्शी के पास जाओ मगर रामपाल का

870
01:02:07,520 --> 01:02:12,560
यह कहना है कि ज्ञान यज्ञ से भी मुक्ति नहीं होगी

871
01:02:12,560 --> 01:02:16,720
है ना? जबकि वहां पर तत्वदर्शी के पास जाने के लिए कहा जा रहा है।

872
01:02:16,720 --> 01:02:20,800
और तत्वदर्शी कौन होगा जो ज्ञान यज्ञ का ज्ञान देगा। तो या तो ये मान

873
01:02:20,800 --> 01:02:24,800
लो कि ज्ञान यज्ञ से भी मुक्ति होगी और या ये मान लो कि तुम वो गीता

874
01:02:24,800 --> 01:02:28,800
वाले तत्वदर्शी नहीं हो। ऐसे भी तुम सिद्ध नहीं हुए। अच्छा तीसरी

875
01:02:28,800 --> 01:02:32,880
बात और है तत्वदर्शी पे ही। तुम तत्वदर्शी

876
01:02:32,880 --> 01:02:37,120
को सिद्ध करने के लिए जाते हो। 15 अध्याय में कि जो उल्टे वृक्ष

877
01:02:37,120 --> 01:02:41,440
का ज्ञान ठीक ठीक दे देगा। पहली बात तो इसमें भी शटर घोट है।

878
01:02:41,440 --> 01:02:45,520
इसमें भी शटर गोट है। भाई कोई भी व्यक्ति उल्टा वृक्ष बना करके

879
01:02:45,520 --> 01:02:49,760
उसके बारे में चार बातें बोल दे। जो उल्टे वृक्ष

880
01:02:49,760 --> 01:02:53,840
का ज्ञान ठीक ठीक दे देगा। ये हम पता कैसे करेंगे इसने ठीक दिया है कि नहीं दिया।

881
01:02:53,840 --> 01:02:57,920
इसका मतलब तत्वदर्शी से पहले मुझे उस पेड़ का ज्ञान ठीक ठीक मालूम

882
01:02:57,920 --> 01:03:02,000
होना चाहिए। तो यानी कि इस वाक्य से सिद्धि नहीं होती कि जो उल्टे

883
01:03:02,000 --> 01:03:06,000
पेड़ के बारे में बात करेगा वो तत्वदर्शी होगा। दूसरी बात अगर ऐसी

884
01:03:06,000 --> 01:03:10,080
ही बात है तो जय दयाल गोविंदका जी और ना जाने कितने हमारे आचार्य गण है जिन्होंने

885
01:03:10,080 --> 01:03:14,320
उल्टे पेड़ की बात की है तो वो सब तत्वदर्शी हो गए। अगर

886
01:03:14,320 --> 01:03:18,560
बात है ठीक ठीक व्याख्या की तो ठीक ठीक व्याख्या कौन जानता है

887
01:03:18,560 --> 01:03:22,560
क्या होनी चाहिए इसका मतलब कि उस वाक्य से यह

888
01:03:22,560 --> 01:03:26,800
बताया जा रहा है कि वो उल्टे वृक्ष का ज्ञान आपको देगा

889
01:03:26,800 --> 01:03:28,160
मगर उससे तत्वदर्शी

890
01:03:28,160 --> 01:03:32,800
की पहचान नहीं होनी है वो तो आपको बता रहा है कि तत्वदर्शी

891
01:03:32,800 --> 01:03:37,040
ऐसा ऐसा कार्य करेगा आपकी मदद करेगा सहायता करेगा वो

892
01:03:37,040 --> 01:03:41,520
उसके लिए प्रमाण रूप में वो पंक्ति नहीं है तीसरी बात

893
01:03:41,520 --> 01:03:45,680
वहां पर उसको जो उल्टे की वृक्ष की व्याख्या करने वाले

894
01:03:45,680 --> 01:03:49,680
को तत्वदर्शी नहीं कहा गया है। वेदों को जानने वाला कहा गया

895
01:03:49,680 --> 01:03:53,680
है। अब आ जाओ देवी भागवत में। वेदों को जानने वाला देवी

896
01:03:53,680 --> 01:03:57,680
मां को ध्यान में रखते हुए गायत्री मंत्र का जाप करने वाला होता है। तो यहां भी

897
01:03:57,680 --> 01:04:01,760
तुम्हारा तत्वदर्शी का तत्व निकल गया। निकल गया तत्व। ये

898
01:04:01,760 --> 01:04:05,840
की पॉइंट्स है। ये सब आप याद रख लोगे। जीवन में कोई रामपाली आपके

899
01:04:05,840 --> 01:04:10,240
सामने टिक नहीं सकता। भाई वो अगर आपके शास्त्रों

900
01:04:10,240 --> 01:04:14,320
का अर्थ कर रहा है, ईश्वर के दुराचार की बात कर रहा है तो

901
01:04:14,320 --> 01:04:19,440
उससे पूछो क्या तुम्हारा ईश्वर नहीं देख रहा है क्या स्त्रियों को स्नान करते हुए

902
01:04:19,440 --> 01:04:24,160
सब कुछ जानने वाला नहीं है क्या सब कुछ देखने वाला नहीं है क्या

903
01:04:24,160 --> 01:04:28,640
जहां हत्या हो रही है वहां उसकी सत्ता नहीं है क्या तो

904
01:04:28,640 --> 01:04:32,720
यह हत्या होना यह सब कुछ प्रपंच रूपी संसार में हमें प्रभावित

905
01:04:32,720 --> 01:04:38,480
करता है क्योंकि हमें हमारे लिए सत्य है ईश्वर के लिए नहीं

906
01:04:38,480 --> 01:04:42,640
ईश्वर और मुक्त आत्मा की दृष्टि से यह प्रपंच मात्र है। इसीलिए तो

907
01:04:42,640 --> 01:04:44,080
मुक्त है।

908
01:04:44,080 --> 01:04:48,320
अगर उनको भी प्रभावित होने लग जाए, वो भी प्रभावित होने लगेंगे

909
01:04:48,320 --> 01:04:54,320
तो फिर उनमें उनमें फर्क क्या रह गया? कैसी मुक्ति?

910
01:04:54,880 --> 01:04:58,960
ठीक है? तो ये कुछ की पॉइंट्स आप पकड़ के रखो। दूसरी बात

911
01:04:58,960 --> 01:05:04,720
कि इनके पास जिन ग्रंथों का ये अर्थ कर रहे हैं वो आए कहां से?

912
01:05:04,720 --> 01:05:09,520
जिससे आए हैं गुरु शिष्य परंपरा से शंकराचार्य

913
01:05:09,520 --> 01:05:13,760
रामानुजाचार्य मधवाचार्य गुरु शिष्य परंपरा से ग्रंथ

914
01:05:13,760 --> 01:05:18,000
आए हैं उनप तो इनको भरोसा नहीं है तो उनके ग्रंथों पे इनको भरोसा

915
01:05:18,000 --> 01:05:22,080
कैसे है कि इसमें जो लिखा है वो कबीर का ही बताया हुआ है इनके

916
01:05:22,080 --> 01:05:26,240
हिसाब से ये प्रश्न पूछो उनसे अगर

917
01:05:26,240 --> 01:05:30,480
वो ज्ञान दे स्कंद पुराण में गुरु स्कंद पुराण

918
01:05:30,480 --> 01:05:34,560
गुरु गीता में लिखा हुआ है कि प्रामाणिक आचार्य से ही शास्त्रों

919
01:05:34,560 --> 01:05:38,640
का अध्ययन करोगे तभी उनका मर्म समझ में आएगा नहीं तो आपको आप भटक जाओगे

920
01:05:38,640 --> 01:05:42,800
शास्त्रों का अध्ययन करने तो इनकी प्रमाणिकता क्या है जिससे

921
01:05:42,800 --> 01:05:48,000
शास्त्र ले रहे उस पर इन्हें विश्वास नहीं है मुंडकोपनिषद

922
01:05:48,000 --> 01:05:52,160
में परंपरा बता रहे हैं ऋषि महर्षि अपनी भगवत गीता में भगवान

923
01:05:52,160 --> 01:05:57,840
कह रहे हैं ज्ञान परंपरा से प्राप्त हुआ है और

924
01:05:57,840 --> 01:05:59,760
और क्या प्रामाणिकता है

925
01:05:59,760 --> 01:06:02,320
अथर्ववेद 11 सात 16

926
01:06:02,320 --> 01:06:07,280
ब्रह्मचारी ही आचार्य बनता है। मनुस्मति 12वा अध्याय 112 से 114

927
01:06:07,280 --> 01:06:08,160
धर्म में संशय

928
01:06:08,160 --> 01:06:12,160
होने पर ब्रह्मचारी के पास जाओ। अब ये लोग कहते हैं फलाने जो ऋषि थे वो

929
01:06:12,160 --> 01:06:16,160
तो ब्रह्मचारी थे नहीं। भाई ब्रह्मचर्य का अर्थ पढ़ लो पहले जाकर के क्या

930
01:06:16,160 --> 01:06:20,160
होता है? जो द्वापर तक के युग युग थे

931
01:06:20,160 --> 01:06:24,240
वहां पर गृहस्थ होते हुए भी व्यक्ति ब्रह्मचर्य अगर धारण करता

932
01:06:24,240 --> 01:06:30,160
था तो उसका ब्रह्मचर्य सिद्ध होता था क्योंकि दय युग था।

933
01:06:30,160 --> 01:06:34,160
कलयुग में कैसे सिद्ध करोगे? कोई ग्रस्त होते हुए ब्रह्मचारी है। वहां तो

934
01:06:34,160 --> 01:06:39,120
देवलोक से नारद जी का आवागमन हो जाता था सीधे सीधे

935
01:06:39,120 --> 01:06:42,320
उन युगों में।

936
01:06:42,320 --> 01:06:46,800
तो वर्तमान में गस्थ रहते हुए यदि कोई ब्रह्मचारी है तो उसका ब्रह्मचर्य

937
01:06:46,800 --> 01:06:50,960
उसके अपने लिए स्वता सुखाय के लिए ठीक है। गस्थ होते हुए भी

938
01:06:50,960 --> 01:06:55,200
यदि कोई ब्रह्मचर्य का पालन कर रहा है। उसके नियम होते हैं।

939
01:06:55,200 --> 01:06:59,200
अमुक अमुक अवधि में ही अमुक अमुक ऋतु काल में ही और

940
01:06:59,200 --> 01:07:03,200
अमुक प्रयोजन से ही गस्थ धर्म का पालन

941
01:07:03,200 --> 01:07:07,200
करना है। अन्यथा ब्रह्मचर्य का पालन करो। यह होता है

942
01:07:07,200 --> 01:07:11,360
गस्थ रहते हुए ब्रह्मचर्य का धारण। और एक आरोप

943
01:07:11,360 --> 01:07:15,600
लगाते हैं कि भगवान जो शंकराचार्य थे उन्होंने पर आया प्रवेश किया था। अरे

944
01:07:15,600 --> 01:07:19,760
मूर्ख ब्रह्मचर्य इत्यादि मानव देह के लिए बताया गया

945
01:07:19,760 --> 01:07:23,360
धर्म है कि जीव आत्मा के लिए और उन्होंने अपने शरीर

946
01:07:23,360 --> 01:07:27,360
शरीर को साथ ले परकाया प्रवेश किया था या आत्मा

947
01:07:27,360 --> 01:07:32,800
होते हुए परकाया प्रवेश किया था। मूर्ख कहीं के

948
01:07:32,800 --> 01:07:36,800
घचू सा डियर कहीं के जिस दिन पकड़ में आ जाओ जलन मछली की

949
01:07:36,800 --> 01:07:39,200
तरह फड़फड़ाओगे

950
01:07:39,200 --> 01:07:43,200
तो ब्रह्मचारी ही आचार्य बनता है आचार परंपरा से होना चाहिए

951
01:07:43,200 --> 01:07:47,520
अगर कोई व्यक्ति अपनी परंपरा नहीं बता पा रहा है आप पूछो उससे शास्त्र कैसे है बस

952
01:07:47,520 --> 01:07:52,880
ग होने लगेगा पूछते ही नहीं हो आप लोग

953
01:07:52,880 --> 01:07:56,960
तो की पॉइंट्स नोट करो दर्शन वाला बता दिया अब

954
01:07:56,960 --> 01:08:02,320
प्रमाणिकता वाला बता रहा हूं दूसरी बात अब बात आ जाती है

955
01:08:02,320 --> 01:08:06,800
कि इनके कबीर ने जो भी बताया है

956
01:08:06,800 --> 01:08:10,960
सोच समझ के बताया है क्योंकि अंतिम जो सत्य है इनका

957
01:08:10,960 --> 01:08:15,120
वो है इनका सूक्ष्म वेद सूक्ष्म वेद नहीं सूक्ष्म

958
01:08:15,120 --> 01:08:19,200
वेद वो इनका अंतिम सत्य है तो सूक्ष्म वेद जो है

959
01:08:19,200 --> 01:08:23,200
वो कबीर ने सोच समझ के बोला और हमारे लिए वेद इसलिए मान्य

960
01:08:23,200 --> 01:08:27,280
होते हैं क्योंकि वो अपाय ग्रंथ है स्वास रूप में

961
01:08:27,280 --> 01:08:31,280
थे अकर्ता है उनका उनका भगवान ने भी

962
01:08:31,280 --> 01:08:35,600
उनको जो है सोच समझ के नहीं बोला है स्वास रूप में स्वास भूत

963
01:08:35,600 --> 01:08:38,560
थे वेद स्वास रूप में कब से

964
01:08:38,560 --> 01:08:42,800
थे वेद को नित्य क्यों कहा जाता है वेद जब से तब से ईश्वर है

965
01:08:42,800 --> 01:08:46,800
सो ऐसे नहीं है कि प्रयास पूर्वक वेद दिए भगवान ने

966
01:08:46,800 --> 01:08:50,960
क्योंकि प्रयास पूर्वक देंगे तो जैसे ये बोलते हैं रामपाल

967
01:08:50,960 --> 01:08:55,040
जो है अगर उसको शब्द प्रमाण मान लिया जाए या कबीर जो है उसको शब्द

968
01:08:55,040 --> 01:08:59,600
प्रमाण मान लिया जाए अंतिम तो वो तो लीला भी कर रहा है। इनहीं के अनुसार

969
01:08:59,600 --> 01:09:03,600
जैसे कबीर ने रामानंदाचार्य जी को गुरु बनाया। अब

970
01:09:03,600 --> 01:09:07,680
ये लोग कहते हैं वो तो लीला की यानी झूठ बोला ना। दिखाने के

971
01:09:07,680 --> 01:09:11,680
लिए बनाया। वास्तविकता में गुरु नहीं बनाया था। यानी झूठ बोला। तो जो व्यक्ति

972
01:09:11,680 --> 01:09:16,000
लीला में भी लिप्त हो रहा है। ठीक है? वो दय हो सकता है। दय

973
01:09:16,000 --> 01:09:20,160
शक्तियों वाला उसका शब्द अंतिम प्रमाण नहीं हो सकता। अगर वो आपको प्रयास

974
01:09:20,160 --> 01:09:24,400
पूर्वक कुछ कह रहा है। क्यों नहीं हो सकता? क्योंकि

975
01:09:24,400 --> 01:09:28,480
वह तो लीला भी कर रहा है। जो एक जगह लीला कर सकता है। हो सकता है आपको भी कुछ कह रहा हो। यही

976
01:09:28,480 --> 01:09:31,440
पर आती है अपुरुषयता

977
01:09:31,440 --> 01:09:35,680
वेद की। बहारण उपनिषद के अनुसार वेद

978
01:09:35,680 --> 01:09:39,680
अपुरुषय है। भगवान ने उनको प्रयास पूर्वक नहीं दिया है।

979
01:09:39,680 --> 01:09:43,920
प्रयास पूर्वक मतलब हम दो तरह के कार्य करते हैं।

980
01:09:43,920 --> 01:09:48,640
एक चाहकर और एक बिना चाह के स्वाभाविक कार्य।

981
01:09:48,640 --> 01:09:52,880
तो जब हम चाहकर करते हैं तो उसमें बुद्धि का बुद्धि उसमें

982
01:09:52,880 --> 01:09:53,680
उपयोग में आती

983
01:09:53,680 --> 01:09:58,160
है। मेरे सामने दो चीजें हैं। मैं मोबाइल उठाऊं या फिर अपना

984
01:09:58,160 --> 01:10:02,400
कोई जो है गैजेट उठाऊं। मेरी मर्जी

985
01:10:02,400 --> 01:10:06,720
क्योंकि बुद्धि का उपयोग है, प्रयास है। मगर कुछ कार्य ऐसे हैं जो हम

986
01:10:06,720 --> 01:10:10,720
बिना किसी बुद्धि के ही करते हैं। जो हमारे स्वाभाविक कार्य होते

987
01:10:10,720 --> 01:10:14,720
हैं। जैसे कि सांस लेना सांस ले रहे। माता बच्चा की

988
01:10:14,720 --> 01:10:18,960
एक बच्चा माता के गर्भ से जन्म ले रहा है। सांस ले रहा है। ये है स्वाभाविकता।

989
01:10:18,960 --> 01:10:23,120
इसी रूप में भगवान से वेद प्रकट होते हैं। ऋषियों

990
01:10:23,120 --> 01:10:27,280
को प्राप्त होते हैं। इसलिए वेद अंतिम प्रमाण। तुम्हारे कचरा पट्टी

991
01:10:27,280 --> 01:10:31,520
जेल कट्टू बाबा ने कुछ कह दिया लिख दिया वह प्रमाण नहीं है और फिर तुम कहोगे गीता

992
01:10:31,520 --> 01:10:35,680
क्यों प्रमाण है गीता इसलिए प्रमाण है कि वेदों को जानने

993
01:10:35,680 --> 01:10:39,680
वाले जो हमारे आचार्य परंपरा के आचार्य हैं उन्होंने कहा कि

994
01:10:39,680 --> 01:10:43,840
गीता में भगवान ने तत्व का ज्ञान दिया है इसलिए भगवान

995
01:10:43,840 --> 01:10:49,040
की गीता में कही हुई बातें प्रमाण है नहीं तो कर तो वो भी लीला देते

996
01:10:49,040 --> 01:10:53,280
इसी प्रकार से राम भगवान के रूप में उन्होंने रामो विग्रह धर्मा राम

997
01:10:53,280 --> 01:10:57,280
सत्य प्रतिज्ञा इसलिए राम जी की बोली हुई एक एक बात हमारे हमारे लिए सत्य

998
01:10:57,280 --> 01:11:01,280
है। समझ में आ रहा है घचुओं इस स्तर तक कभी सोच

999
01:11:01,280 --> 01:11:06,320
ही नहीं पाओगे। खैर जो हिंदू हैं

1000
01:11:06,320 --> 01:11:08,800
उनको मैं ये बता रहा हूं। ठीक है?

1001
01:11:08,800 --> 01:11:13,120
की पॉइंट्स तो तत्वदर्शी है नहीं। अपशय

1002
01:11:13,120 --> 01:11:17,120
ग्रंथ है नहीं और लीला करने वाला जो इनका व्यक्ति उसकी वाणी

1003
01:11:17,120 --> 01:11:21,200
अंतिम प्रमाण नहीं हो सकती। क्योंकि वह आपको प्रयास पूर्वक कुछ बता

1004
01:11:21,200 --> 01:11:25,840
रहा है। वो तो फिर वह भी लीला कह सकते हो। बोल दिया ऐसे ही।

1005
01:11:25,840 --> 01:11:30,080
समझ गए? आगे चलते हैं। अब इनकी कुछ वस्तुनिष्ठ

1006
01:11:30,080 --> 01:11:34,400
चोरियां है जो मैंने बता ही दिया है। वही वाला के जैसे

1007
01:11:34,400 --> 01:11:38,480
ये लोग कहते हैं ना कि उसके पास जाने को कहा है। उसके पास जाने को कहा है। इन्होंने

1008
01:11:38,480 --> 01:11:42,560
भी इनकी ही किताबों में इस इस व्यक्ति ने ही और

1009
01:11:42,560 --> 01:11:46,720
सुनो तत्वदर्शी की बात से याद आया। वशिष्ठ जी को

1010
01:11:46,720 --> 01:11:50,800
रामपाल ने ही कबीर के माध्यम से तत्वदर्शी भी कहा है।

1011
01:11:50,800 --> 01:11:55,040
तत्ववेता भी कहा है। लो तत्व से जानने वाला और भागवत

1012
01:11:55,040 --> 01:11:59,200
में तत्व से जानने वाला इन लोगों को हमारे जो आचार्य गण उनको कहा

1013
01:11:59,200 --> 01:12:03,360
गया है। हमारे ग्रंथों में धर्म ग्रंथों में रामपाल को तत्वदर्शी

1014
01:12:03,360 --> 01:12:07,360
कबीर को तत्वदर्शी कहीं नहीं कहा गया। समझ गए? शास्त्रार्थ में

1015
01:12:07,360 --> 01:12:10,720
कबीर को हरा दिया था।

1016
01:12:10,720 --> 01:12:14,720
रैदास ने और रैदास को शास्त्रार्थ

1017
01:12:14,720 --> 01:12:18,880
में हराया था अपने समय के शंकराचार्य ने नोट कर लो भविष्य पुराण

1018
01:12:18,880 --> 01:12:22,960
में लिखा हुआ है इसीलिए कहता हूं जितने भी

1019
01:12:22,960 --> 01:12:24,000
लोग धर्म रक्षक बनना

1020
01:12:24,000 --> 01:12:28,080
चाहते हैं उनके लिए परंपरा का जो सिद्धांत है वो आवश्यक

1021
01:12:28,080 --> 01:12:32,400
है। मगर वो लोग ये सोचते हैं कि इसमें तो हमारी काट है भाई।

1022
01:12:32,400 --> 01:12:36,400
धर्म की रक्षा करने के लिए परंपरा का सिद्धांत पकड़ना पड़ेगा। तब

1023
01:12:36,400 --> 01:12:40,400
इन जैसे जो राक्षस है ना उनका तुम वध कर पाओगे। यह बात मैं आर्य समाजियों को

1024
01:12:40,400 --> 01:12:44,400
भी कह रहा हूं। नहीं तो ऐसे ही कुकुर मुत्तों की तरह पैदा

1025
01:12:44,400 --> 01:12:50,320
होते रहेंगे यह लोग।

1026
01:12:50,320 --> 01:12:54,560
करते रहो अनंत काल तक लड़ाई। सीधी बात पूछो

1027
01:12:54,560 --> 01:12:58,640
ना ग्रंथ कहां से आया? मगर नहीं पूछोगे क्योंकि

1028
01:12:58,640 --> 01:13:02,800
खुद का ताना-बाना भी उसी पर खड़ा हुआ है। हम पूछेंगे जाकिर

1029
01:13:02,800 --> 01:13:07,120
नायक से पूछेंगे। रामपाल से पूछेंगे। जो व्यक्ति हमारे शास्त्र

1030
01:13:07,120 --> 01:13:13,120
का गलत अर्थ करने जाएगा उससे पूछेंगे।

1031
01:13:14,240 --> 01:13:18,320
तो इसने रामपाल ने भी जगह जगह कहा है कि मैं कुत्ता हूं।

1032
01:13:18,320 --> 01:13:22,320
है ना? मैं तो कुत्ता हूं। और कहीं और जाने की

1033
01:13:22,320 --> 01:13:26,560
बात कही है। कबीर ने स्वयं किसी और के पास। कबीर ने रामपाल

1034
01:13:26,560 --> 01:13:30,640
ने स्वयं लिखा है भगवान कृष्ण थे। तो जिस तरीके से यह अर्थ

1035
01:13:30,640 --> 01:13:34,720
निकालता है गीता का अपने पक्ष में ऐसे इसके ग्रंथों से इसकी बातों के

1036
01:13:34,720 --> 01:13:40,720
विरुद्ध हमारे पक्ष में अर्थ निकल आते हैं क्योंकि घचू है ना एक नंबर का

1037
01:13:44,160 --> 01:13:48,320
अब एक बात आती है कि जो लोग इनकी बातों से प्रभावित होते हैं

1038
01:13:48,320 --> 01:13:52,400
उनके लिए कड़ा संदेश मुझे आए दिन फोन किया करते

1039
01:13:52,400 --> 01:13:57,360
हैं रामपाल का क्या हो रहा है भाई मैं बहुत सुखी हूं मैंने अपने घर के आसपास माता का अपमान

1040
01:13:57,360 --> 01:14:03,040
रोक भैया तुम में दम हो तो तुम भी रोको ना अपने यहां।

1041
01:14:03,040 --> 01:14:08,480
जगह-जगह जाकर के मैं ही रिपोर्ट लिखवाऊं थानों में।

1042
01:14:08,480 --> 01:14:13,200
मैं तो चैन की नींद सोता हूं।

1043
01:14:13,200 --> 01:14:17,280
तुम लोगों ने अपनी मां का दूध नहीं पिया क्या? जो मुझे फोन

1044
01:14:17,280 --> 01:14:21,520
किया करते हो। रुकवा दो, रुकवा दो। अरे जाओ जाकर के सारी सामग्री दे रहा हूं।

1045
01:14:21,520 --> 01:14:26,080
अपने घर के बगल वाले सेंटर पर रिपोर्ट लिखवाओ थाने में।

1046
01:14:26,080 --> 01:14:32,080
10 चक्कर काटो वहां मूर्ख कह के मुझे फोन किया करते हो।

1047
01:14:33,600 --> 01:14:39,200
एक ढेले भर की कोई सहायता नहीं है तुम लोगों से। फोन क्यों करते हो मुझे?

1048
01:14:39,200 --> 01:14:43,360
मेरी मां का अपमान मेरे सामने कोई नहीं कर सकता। तुम्हारी मां का अपमान तुम्हारे

1049
01:14:43,360 --> 01:14:47,920
सामने करेगा। तुम सोते रहो ऐसे ही। नपुंसकों की तरह।

1050
01:14:47,920 --> 01:14:51,920
तुम्हारे घर के आसपास रामपाल रहता है। रामपाल की बातें मोटे मोटे अक्षरों

1051
01:14:51,920 --> 01:14:56,720
में लिख के पोस्टर बनवाओ। लगवाओ बीच चौराहे पर।

1052
01:14:56,720 --> 01:15:00,960
और जो व्यक्ति वहां पर उसका पोषण कर रहा है, उसका प्रचार कर रहा है, उसका नाम लिखवाओ

1053
01:15:00,960 --> 01:15:05,280
नीचे सौजन्य से दुर्गा माता के साथ ऐसा ऐसा हुआ। रामपाल

1054
01:15:05,280 --> 01:15:09,280
ने लिखा है किताब में और नीचे लिखवाओ सौजन्य से उस आदमी

1055
01:15:09,280 --> 01:15:14,000
का नाम जो उसका प्रचार कर रहा है। देखो कैसे भागेगा वहां से वो।

1056
01:15:14,000 --> 01:15:20,000
दुबर हो जाएगा उसका जीना।

1057
01:15:21,200 --> 01:15:25,200
इन लोगों का अपने अस्तित्व में रहना हम लोगों

1058
01:15:25,200 --> 01:15:29,920
का प्रमाद है।

1059
01:15:29,920 --> 01:15:33,920
फोन किया करते हैं।

1060
01:15:33,920 --> 01:15:38,000
जितने लोग फोन करते हो तुम लोगों की तुम लोगों

1061
01:15:38,000 --> 01:15:42,000
को बड़ी तकलीफ है। दुर्गा माता का अपमान हो रहा है। अपमान हो रहा है। हमारे भगवान

1062
01:15:42,000 --> 01:15:46,240
का अपमान हो रहा है। मुझे WhatsApp किया करोगे। एक व्यक्ति सवा घंटे की भक्ति

1063
01:15:46,240 --> 01:15:49,840
नहीं करता होगा। एक व्यक्ति

1064
01:15:49,840 --> 01:15:53,840
पूरे दिन में सवा घंटे कौन-कौन है जो जाप कर रहा है मुझे जो मैसेज

1065
01:15:53,840 --> 01:15:57,840
किया करते हो यह हो गया वो हो गया हाय हाय ये हो गया अरे होगा

1066
01:15:57,840 --> 01:16:01,600
ही

1067
01:16:01,600 --> 01:16:05,760
केवल दिखावा है तुम लोगों के अंदर जमीर मर चुका है

1068
01:16:05,760 --> 01:16:11,760
आत्मा सो चुकी है

1069
01:16:12,000 --> 01:16:16,240
किसी प्रकार की कोई सहायता भेजनी नहीं है कुछ करना नहीं है यहां तक कि भगवान

1070
01:16:16,240 --> 01:16:20,240
की भक्ति तक नहीं करनी है। कोई दूसरा आकर के तुम्हारी लड़ाईया

1071
01:16:20,240 --> 01:16:26,240
लड़ेगा सारा।

1072
01:16:26,480 --> 01:16:30,560
हमारा ये अपमान हो गया। हमारी मां का ये अपमान हो गया। अरे जाओ रिपोर्ट लिखा

1073
01:16:30,560 --> 01:16:34,640
दो ना अपने थाने में जाकर के। वो नहीं सुनेगा

1074
01:16:34,640 --> 01:16:38,880
तो एसीपी सुनेगा। एसीपी नहीं सुनेगा तो एसपी सुनेगा। घर

1075
01:16:38,880 --> 01:16:43,520
से बाहर तो निकलो।

1076
01:16:43,520 --> 01:16:49,520
यह भी नहीं हो रहा है तो कम से कम सवा घंटे का तप तो करो।

1077
01:16:51,760 --> 01:16:56,960
मुझे वही व्यक्ति फोन करना आज के बाद ये हो गया वो हो गया।

1078
01:16:56,960 --> 01:17:00,960
बस रामपाल के चेलों ने फड़ों ने कुछ बना दिया। अनपढ़ों ने कुछ लिख कर दिया और

1079
01:17:00,960 --> 01:17:04,960
मुझे लगे भेजने। वही व्यक्ति मुझे मैसेज करे।

1080
01:17:04,960 --> 01:17:09,040
वही व्यक्ति मुझसे फोन पर बात करे इन चीजों के विषय में जो सवा घंटे

1081
01:17:09,040 --> 01:17:13,600
की भक्ति पहले कर ले। स्वयं जब अपनी चीजों का सम्मान नहीं करोगे

1082
01:17:13,600 --> 01:17:17,360
दूसरा क्यों करेगा?

1083
01:17:17,360 --> 01:17:21,440
बड़ी चिंता है इनको धर्म की। बड़ी चिंता है माता के अपमान

1084
01:17:21,440 --> 01:17:27,440
की। अरे पहले खुद को जलाओ तप की अग्नि में।

1085
01:17:28,320 --> 01:17:32,720
तब रक्षा कर पाओगे। जैसे ही जिस दिन से चालू किया ना तब तुम्हारे आसपास

1086
01:17:32,720 --> 01:17:37,840
ऐसी विकर्ण फैलने लगेंग। उनहीं से इनका सत्यानाश हो जाएगा।

1087
01:17:37,840 --> 01:17:41,120
चैन से सोता हूं।

1088
01:17:41,120 --> 01:17:45,120
गुरुदेव का दिया हुआ मंत्र पढ़ता हूं। गायत्री

1089
01:17:45,120 --> 01:17:48,320
मंत्र पढ़ता हूं।

1090
01:17:48,320 --> 01:17:52,320
चैन की नींद सोता हूं। मेरे आसपास कोई इतनी

1091
01:17:52,320 --> 01:17:58,320
सी भी मुझे चिंता नहीं होती कि ये हो रहा है वो हो रहा है।

1092
01:17:58,400 --> 01:18:02,560
क्यों नहीं होती? क्योंकि वह मंत्र के मंत्र का बल है। तप का बल

1093
01:18:02,560 --> 01:18:07,200
है। नाम जप का बल है।

1094
01:18:07,200 --> 01:18:12,800
किस भाषा में समझाऊं तुम लोगों को?

1095
01:18:12,800 --> 01:18:16,800
किसी प्रकार की कोई सहायता नहीं करनी है। कुछ नहीं करना है। केस लड़ रहा

1096
01:18:16,800 --> 01:18:20,480
है। व्यक्ति लड़ता रहे।

1097
01:18:20,480 --> 01:18:24,800
ये हो कि तबका ही बल एकत्रित करे तो उसमें भी पीछे हो। पांच

1098
01:18:24,800 --> 01:18:29,120
10 मिनट आसन पर बिठा दिया जाए कि करो भैया। नाम जप

1099
01:18:29,120 --> 01:18:33,200
करो तुरंत कपकपी आने लगेगी। नहीं नहीं नहीं यह नहीं हो पाएगा। हमसे क्या

1100
01:18:33,200 --> 01:18:38,560
हो पाएगा? रामपाल के फुअर चेले जेल कट्टू के फुअर चेले

1101
01:18:38,560 --> 01:18:42,640
जब कोई अंटसंट वीडियो बना देंगे तो उसको हमसे हम ये कर पाएंगे उसको जो

1102
01:18:42,640 --> 01:18:47,840
है शिवश भैया को भेज दे। शिवश नारायण द्विवेदी को भेज दो।

1103
01:18:47,840 --> 01:18:51,920
मुझे जरूरत नहीं है तुम जैसे लोगों की। बिल्कुल नहीं जरूरत

1104
01:18:51,920 --> 01:18:56,400
है। जो खुद कुछ नहीं करना चाहते हैं।

1105
01:18:56,400 --> 01:19:01,040
जिनकी आत्मा मर चुकी है, कायर हो चुके हैं।

1106
01:19:01,040 --> 01:19:05,280
अकेले लडूंगा मैं अपनी मां के लिए। सोते रहो तुम लोग

1107
01:19:05,280 --> 01:19:11,280
और मुझे मैसेज मत करना।

1108
01:19:17,120 --> 01:19:21,680
अगर कुछ करना है तो प्रण लो

1109
01:19:21,680 --> 01:19:25,680
सबसे पहले सवा घंटे की भक्ति करो कुछ नहीं फिर देखो कितना

1110
01:19:25,680 --> 01:19:29,760
बल आएगा तुम्हारे अंदर हर शहर में एक शिवश नारायण द्विवेदी जन्म

1111
01:19:29,760 --> 01:19:34,080
ले लेगा अपने आप आसपास क्षेत्र तुम्हारा सुधर

1112
01:19:34,080 --> 01:19:38,960
जाएगा

1113
01:19:38,960 --> 01:19:44,960
लिंक दे दीजिए किसी को आना हो तो आ सकता है

1114
01:19:53,200 --> 01:19:57,680
वैचारिक मतभेद के निमित्त आना है तो फॉर्म भर के आए।

1115
01:19:57,680 --> 01:20:03,680
अनिकेत जी और आए थे उनको भी उनको भी कह दीजिए जुड़।

1116
01:20:34,610 --> 01:20:40,610
[गला साफ़ करने की आवाज़]

1117
01:20:42,800 --> 01:20:47,360
कलयुग में केवल दो तरह के बल तुम्हें काम आएंगे। बस

1118
01:20:47,360 --> 01:20:52,080
ये जितनी राक्षसी शक्तियां है ना वो बढ़ इसीलिए रही है

1119
01:20:52,080 --> 01:20:56,400
क्योंकि दैवीय शक्तियों को तुमने दबा रखा है। बात करोगे

1120
01:20:56,400 --> 01:21:01,920
दुर्गा मैया शिव जी, ब्रह्मा जी, हनुमान जी

1121
01:21:01,920 --> 01:21:05,920
उनका जाप नहीं कर पाओगे। क्यों नहीं कर पाओगे? क्योंकि वास्तविकता यह है

1122
01:21:05,920 --> 01:21:10,960
कि तुम्हें विश्वास ही नहीं है कि जाप करने से भी कुछ होगा।

1123
01:21:10,960 --> 01:21:15,440
मंत्र में भी कोई शक्ति है। तुम्हें खुद विश्वास नहीं है। इसीलिए

1124
01:21:15,440 --> 01:21:19,520
यह लोग इतना बढ़ चढ़ रहे हैं तुम्हारे आसपास। मेरे आसपास नहीं बढ़ चढ़ रहे।

1125
01:21:19,520 --> 01:21:24,400
खत्म कर दिया यहां पे इनका ताना-बाना और कुछ दिनों में पूरे देश से मिटाऊंगा।

1126
01:21:24,400 --> 01:21:30,400
लिख लो आज ही।

1127
01:21:35,440 --> 01:21:39,840
लो भाई ऐड क्यों स्टेज पर?

1128
01:21:39,840 --> 01:21:44,080
पहाड़ी जी आप ऐड टू स्टेज हो गए मगर मुझे दिख नहीं रहे हैं आप

1129
01:21:44,080 --> 01:21:47,440
लोग

1130
01:21:47,440 --> 01:21:52,560
हां दिख चलिए ठीक है जी

1131
01:21:52,560 --> 01:21:57,120
जय श्री राम पहाड़ी जी जय श्री राम शिवशु भाई

1132
01:21:57,120 --> 01:22:03,120
कैसे हो बस कृपा है राम की

1133
01:22:04,880 --> 01:22:09,200
ओके ठीक है जो आज आपने जो यह लाइव रखी

1134
01:22:09,200 --> 01:22:13,200
ना बहुत बढ़िया रखी। इससे अभी देखो बिल से बाहर निकलेंगे

1135
01:22:13,200 --> 01:22:17,200
फिर और ये लोग अभी आपने एक लास्ट में जो एक बात कही

1136
01:22:17,200 --> 01:22:21,200
कि मैं ही अकेला क्यों लडू तुम लोग मतलब कहां सोए

1137
01:22:21,200 --> 01:22:25,440
हो? देखो रामपाल के जोज

1138
01:22:25,440 --> 01:22:30,960
है रामपाल के जो चेले हैं वह अधर्म का काम भी बड़ी निष्ठा से कर रहे हैं।

1139
01:22:30,960 --> 01:22:35,040
आपने देखा होगा कि अगर वो एक मैसेज भेजते हैं उनके ग्रुप में

1140
01:22:35,040 --> 01:22:39,040
अगर उनको 10 लोग चाहिए इस जगह तो वहां

1141
01:22:39,040 --> 01:22:43,040
20 लोग पहुंचते हैं उनके। क्यों पहुंचते हैं? बड़े ईमानदारी से काम कर रहे हैं

1142
01:22:43,040 --> 01:22:47,360
वो। अधर्म का काम भी बड़े ईमानदारी से। और

1143
01:22:47,360 --> 01:22:50,560
हम जब धर्म का काम करते हैं, अगर हम 10 लोगों को बुलाते हैं,

1144
01:22:50,560 --> 01:22:54,560
तो दो लोग निकल के आते हैं। क्यों? सोए हुए हैं ना? कोई मतलब

1145
01:22:54,560 --> 01:22:58,800
नहीं। हां, उधर शिवश जी लड़ रहे हैं। उधर टीआर पहाड़ी

1146
01:22:58,800 --> 01:23:02,880
लड़ रहे हैं। उधर कोई और लड़ रहा है। हमें क्या? बस पीठ पीछे

1147
01:23:02,880 --> 01:23:07,760
वो बस तालियां बजाने से मतलब है।

1148
01:23:07,760 --> 01:23:12,320
तो आपने जो इस लास्ट में जो एक बात कही बहुत सही बात कही है कि रामपाल

1149
01:23:12,320 --> 01:23:17,120
का अस्तित्व तब तक है जब तक हम सोए हुए हैं।

1150
01:23:17,120 --> 01:23:21,760
और इसीलिए अभी तक टिका है वो कितना आसान है

1151
01:23:21,760 --> 01:23:26,080
मेरे मैंने वह तक दे रखा है सारा एक ड्राइव

1152
01:23:26,080 --> 01:23:30,800
बना दिया उसप रामपाल के सारे काले कारनामे हैं पर्याप्त है

1153
01:23:30,800 --> 01:23:34,960
भाई तुम पूरी दुनिया में बंद मत करवाओ ना अपने घर के पास वाला सेंटर बंद करवाओ

1154
01:23:34,960 --> 01:23:39,200
अपने यहां जाओ रिपोर्ट लिखाओ पर नहीं करेंगे

1155
01:23:39,200 --> 01:23:43,520
चलो ठीक है मत करो तुम्हारा भैया गृहस्थ व्यक्ति हो कोई एक अकेला ही सैनिक

1156
01:23:43,520 --> 01:23:47,520
बने तुम मत बनो अरे भाई तो सवा घंटे का तप तो करो जिससे

1157
01:23:47,520 --> 01:23:52,000
तुम्हारे तप के बल से उसको भी सहायता मिले।

1158
01:23:52,000 --> 01:23:56,080
वो भी नहीं करोगे। तुमको खेल लगता है नाम जप में

1159
01:23:56,080 --> 01:24:00,240
खेल है तो जब तुम खुद खेल मानते हो अपने देवी देवताओं को अपने भगवान

1160
01:24:00,240 --> 01:24:04,320
को उनके मंत्र को उनके जाप को तो फिर कोई दूसरा उनका मजाक

1161
01:24:04,320 --> 01:24:06,800
क्यों नहीं उड़ाएगा?

1162
01:24:06,800 --> 01:24:11,120
जिस दिन तुम लोगों को वैल्यू हो जाएगी ना मंत्र की मंत्र की शक्ति में बिलीव

1163
01:24:11,120 --> 01:24:15,120
हो जाएगा। आस्था हो जाएगी जिस दिन उस दिन से इन लोगों का सही तरीके

1164
01:24:15,120 --> 01:24:19,200
से पतन जिस जिसके जिसके हृदय में मंत्र शक्ति

1165
01:24:19,200 --> 01:24:23,440
भगवान के प्रति आस्था अटूट विश्वास ये सब वास्तविकता

1166
01:24:23,440 --> 01:24:27,520
में हृदय में बैठ जाएगा ना जिस दिन केवल अपनी अपने वर्चस्व

1167
01:24:27,520 --> 01:24:31,760
के लिए तुम लड़ना बंद कर दोगे वास्तविकता में तुम्हारे अंदर अपने भगवान के प्रति निष्ठा

1168
01:24:31,760 --> 01:24:35,920
होगी तुम्हारे आसपास इस जैसे राक्षसों का अंत होना तुरंत

1169
01:24:35,920 --> 01:24:41,680
शुरू हो जाएगा तुरंत तुम्हें कुछ भी नहीं करना पड़ेगा

1170
01:24:41,680 --> 01:24:47,680
केवल अपने धर्म और राष्ट्र के हित के लिए तप करना शुरू करो। जी पाड़ी

1171
01:24:48,480 --> 01:24:53,600
सही कहा कि आवाज उठानी ही पड़ेगी क्योंकि

1172
01:24:53,600 --> 01:24:59,200
एक के एक के बोलने से नहीं होगा। जैसे वो लोग एक

1173
01:24:59,200 --> 01:25:03,360
जो शक्ति प्रदर्शन प्रदर्शन बोलते हैं जिसको कि

1174
01:25:03,360 --> 01:25:07,360
वो कहीं भी अगर कुछ ऐसा कार्य होता है तो वो लोग

1175
01:25:07,360 --> 01:25:11,680
तुरंत पहुंचते हैं उस जगह। और हमारे व्यक्ति

1176
01:25:11,680 --> 01:25:15,840
हमारे लोग क्या हैं कि उनके सामने यह चीजें बट

1177
01:25:15,840 --> 01:25:19,840
रही होगी। यही चीजें वितरित की जा रही है पुस्तकें पर उनको एक

1178
01:25:19,840 --> 01:25:25,840
वीडियो बनाकर वहां पर जाके उनका विरोध करने की हिम्मत नहीं है।

1179
01:25:27,360 --> 01:25:31,440
अरे जाओ सामने सवाल पूछो उनसे पुलिस स्टेशन में जाओ।

1180
01:25:31,440 --> 01:25:35,360
अरे रिपोर्ट लिखाओ

1181
01:25:35,360 --> 01:25:38,480
ये चीजें नहीं होगी।

1182
01:25:38,480 --> 01:25:42,480
रामपाल के बोलने की हिम्मत आई कहां से इतनी हम ही लोगों ने तो

1183
01:25:42,480 --> 01:25:46,720
दी उसको वो जानते हैं ना सब नपुंसक हो गए हैं दुर्गा माता

1184
01:25:46,720 --> 01:25:51,600
के जो अपने आप को पुत्र कहते हैं नपुंसक हो गए हैं वो सब

1185
01:25:51,600 --> 01:25:56,240
वो जानते हैं चीज इसीलिए ऐसा करते हैं

1186
01:25:56,240 --> 01:26:00,320
ज्ञान चर्चा की चुनौती दे रहे हैं ज्ञान चर्चा की चुनौती जब ज्ञान चर्चा के लिए बोला

1187
01:26:00,320 --> 01:26:06,000
जाए तो मुंह छुपा के भाग जाते हैं यह है भगोड़े

1188
01:26:06,000 --> 01:26:09,040
ये करेंगे ज्ञान चर्चा

1189
01:26:09,040 --> 01:26:14,320
गाली देने के अलावा दूसरी चीज इनको आती नहीं है।

1190
01:26:14,320 --> 01:26:19,520
बस खुद को बस कैसे भी बड़ा सिद्ध करना है इन लोगों ने।

1191
01:26:19,520 --> 01:26:23,760
साबर डियर है ये लोग। जिस दिन सामने आएंगे तो जल

1192
01:26:23,760 --> 01:26:28,160
बिन मछली की तरह फड़फड़ाएंगे।

1193
01:26:28,160 --> 01:26:32,560
हां हां नीचे मैं देख रहा हूं रामपाल के चेले। आज [नाक से की जाने वाली आवाज़] उनको

1194
01:26:32,560 --> 01:26:35,920
रात में नींद नहीं आएगी

1195
01:26:35,920 --> 01:26:39,920
और कल देखना है रामपाल के जो ये व्यक्ति देखो क्या

1196
01:26:39,920 --> 01:26:45,920
पूछ रहा है दुर्गा माता का पति कौन है तुम्हारा बाप कौन है

1197
01:26:46,000 --> 01:26:50,080
[हंसी] तुम्हारा पिता कौन है अच्छा जो हम चर्चा

1198
01:26:50,080 --> 01:26:54,240
अच्छा और सुनो सुनो सुनो सुनो जिस जिस जज ने रामपाल

1199
01:26:54,240 --> 01:26:58,480
को जमानत दी है वो कौन है उसका क्या नाम है किससे रहम

1200
01:26:58,480 --> 01:27:03,120
की भीख मांगी है रामपाल

1201
01:27:03,120 --> 01:27:07,200
अच्छा अच्छा जो ये पूछ रहा है जो हमारे हमारे बीच जो

1202
01:27:07,200 --> 01:27:11,280
चर्चा चल रही है उस इस सवाल का इस चर्चा से संबंध क्या

1203
01:27:11,280 --> 01:27:15,360
है अच्छा ये इससे अच्छी एक बात याद आ गई बहुत

1204
01:27:15,360 --> 01:27:19,440
बढ़िया इन्होंने अच्छा किया ये बहुत अच्छा हुआ कुछ

1205
01:27:19,440 --> 01:27:23,680
रह गया था वही मैं कहूं कि क्या रह गया था इन जैसे लोगों का भी इंतजाम

1206
01:27:23,680 --> 01:27:28,240
था मेरे पास वो बता [नाक से की जाने वाली आवाज़] दूं बिल्कुल बिल्कुल

1207
01:27:28,240 --> 01:27:29,890
तो भाई

1208
01:27:29,890 --> 01:27:34,080
[गला साफ़ करने की आवाज़] दो पहले ये बात मैं पहले बता चुका हूं। दोबारा

1209
01:27:34,080 --> 01:27:37,120
से बता रहा हूं।

1210
01:27:37,120 --> 01:27:41,200
इन्होंने रामपाल ने कहा है कि काल जो है सबसे

1211
01:27:41,200 --> 01:27:45,920
वही है एंटिटी जो फंसा रही है। और काल जो है

1212
01:27:45,920 --> 01:27:50,320
इसमें लिखा हुआ है गरिमा गीता की पृष्ठ संख्या 143

1213
01:27:50,320 --> 01:27:55,600
पेज दिखाने की जरूरत नहीं देख लेंगे ये लोग। उसमें इन्होंने लिखा है कि

1214
01:27:55,600 --> 01:27:59,680
मैं सब प्राणियों में व्यवस्थित काम हूं। सेक्स हूं। इंग्लिश

1215
01:27:59,680 --> 01:28:03,680
में लिखा हुआ है। दिखा दो। दिखा थोड़ा इनको तसल्ली हो जाएगी। इसमें

1216
01:28:03,680 --> 01:28:09,280
जो इनका काल है वह सब प्राणियों में व्यवस्थित

1217
01:28:09,280 --> 01:28:13,280
एस इ एक्स सेक्स है। यह वो कह रहा है और

1218
01:28:13,280 --> 01:28:17,280
वही मन भी है। यही इसमें इसमें ये भी लिखा है

1219
01:28:17,280 --> 01:28:21,680
वो मन है। तो अब प्रश्न ये उठता है कि जो जो रामपाल की इस फिलॉसफी

1220
01:28:21,680 --> 01:28:25,680
को मानते हैं उन उनके जन्म के क्योंकि मन तो

1221
01:28:25,680 --> 01:28:29,840
सब में है। है ना? तो यहां पर कहा कि मन भी है।

1222
01:28:29,840 --> 01:28:33,920
काल जो है वह मन है। काल जो है वह सेक्स है।

1223
01:28:33,920 --> 01:28:38,160
और यह पेज नंबर है 143। तो जितने रामपाल

1224
01:28:38,160 --> 01:28:42,480
के चेले हैं जो विष्ठा उगल रहे हैं वो ये राघव दास

1225
01:28:42,480 --> 01:28:45,040
रोहित इत्याद जितने भी है जो

1226
01:28:45,040 --> 01:28:50,240
विष्ठा उगल रहे हैं। प्रश्न इन सब से है और जितने भी यहां पर विठा उगल रहे हैं।

1227
01:28:50,240 --> 01:28:54,720
तो जितने भी यह लोग हैं इनसे सवाल यह है कि जब तुम्हारा

1228
01:28:54,720 --> 01:29:00,160
तुम्हारे जन्म का बीज धारण कर रही थी माताएं

1229
01:29:00,160 --> 01:29:04,560
जब माता ने जहां जहां पर इन लोगों की माताओं ने बीज

1230
01:29:04,560 --> 01:29:08,720
धारण किया था गर्भ धारण किया था तो वो इनके

1231
01:29:08,720 --> 01:29:13,360
पिता से किया था या काल से किया था किससे किया था

1232
01:29:13,360 --> 01:29:17,520
ये एक सवाल बनता है ये लोग पूछ रहे हैं ना दुर्गा माता का पति

1233
01:29:17,520 --> 01:29:21,600
कौन है तो इनके जन्म की जो प्रक्रियाएं

1234
01:29:21,600 --> 01:29:25,680
प्रक्रिया है जहां पर संतान के लिए गर्भधारण होता है तो

1235
01:29:25,680 --> 01:29:29,760
वहां पर काल था काल नामक वो राक्षस काल

1236
01:29:29,760 --> 01:29:34,640
नामक राक्षस से वह धारण हुआ है या फिर

1237
01:29:34,640 --> 01:29:38,640
जिनको ये अपने पिता के रूप में ख्यापित करते हैं उनसे गर्भधारण हुआ है

1238
01:29:38,640 --> 01:29:43,120
ये जरा ये लोग बताएं जो लोग पूछते हैं कि दुर्गा माता का पति कौन है

1239
01:29:43,120 --> 01:29:47,600
जय श्री राम जी हां ये दिखा दो इनको दिखा दो

1240
01:29:47,600 --> 01:29:52,480
पेज खोला है ना ये देखिए सेकंड पैराग्राफ जो दिख रहा है

1241
01:29:52,480 --> 01:29:55,200
उसमें देखिए

1242
01:29:55,200 --> 01:30:00,640
यह लिखा हुआ है सेकंड पैराग्राफ में

1243
01:30:00,640 --> 01:30:01,680
हां

1244
01:30:01,680 --> 01:30:05,760
व्यवस्थित काम हूं और ब्रैकेट में सेक्स लिखा है

1245
01:30:05,760 --> 01:30:09,840
ऐसा नहीं है तो देखो जहां पर तुम्हारा जो ये गर्भधारण का

1246
01:30:09,840 --> 01:30:14,000
विषय है वहां पर सेक्स भी है और दोनों ही लोगों का मन

1247
01:30:14,000 --> 01:30:18,400
भी है तो वो जो शब्द यूज़ हो रहा है बार-बार मुझे बोलने में असहजता

1248
01:30:18,400 --> 01:30:22,480
हो रही इसने पता नहीं कैसे लिखा है खैर कुछ नहीं

1249
01:30:22,480 --> 01:30:25,440
तो जो जो

1250
01:30:25,440 --> 01:30:29,520
जहां जहांजहां पर भी गर्भ धारण हो रहा है वहां पर ये भी है सेक्स भी

1251
01:30:29,520 --> 01:30:33,600
है और ऊपर देखो मन

1252
01:30:33,600 --> 01:30:37,760
मन भी और इस ग्रंथ में अन्य कई जगह लिखा हुआ है मन भी काल है ये भी

1253
01:30:37,760 --> 01:30:42,080
लिखा हुआ है इनके ग्रंथ में जब वीडियो कट करके लगाएंगे तो अन्य जगह से रेफरेंस

1254
01:30:42,080 --> 01:30:46,320
दे देंगे काल मन भी है तो वहां पर काल भी था ये इनकी

1255
01:30:46,320 --> 01:30:50,960
किताबों से सिद्ध हो रहा है इनके पिता भी थे और काल भी था

1256
01:30:50,960 --> 01:30:55,200
ठीक है तो गर्भ धारण कैसे हुआ है वो उसमें थोड़ा स्पष्ट करना चाहिए जो ये पूछ

1257
01:30:55,200 --> 01:30:59,920
रहे दुर्गा माता के पति कौन [नाक से की जाने वाली आवाज़]

1258
01:30:59,920 --> 01:31:03,440
है ना

1259
01:31:03,440 --> 01:31:07,440
अच्छा इस किताब को ये लोग बोलते हैं कि आज के बाद जब

1260
01:31:07,440 --> 01:31:11,520
भी कोई रामपाल वाला आज के बाद जब भी कोई रामपाल ही आपसे

1261
01:31:11,520 --> 01:31:15,840
पूछे दुर्गा माता का पति कौन है तुम उसको यह वाला प्रश्न दिखाओ और पूछो

1262
01:31:15,840 --> 01:31:19,920
कि तुम काल से जन्मे हो या उस अपने उस पिता से जिसको तुम अपने पिता

1263
01:31:19,920 --> 01:31:24,400
के रूप में बताते हो। तुम्हारा बाप कौन है? तुम्हारे पिता कौन है?

1264
01:31:24,400 --> 01:31:29,920
ठीक है जब भी कोई रामपाली पूछे

1265
01:31:29,920 --> 01:31:35,120
अरे यह बहुत बड़े दोगले हैं ये कुछ भी कह सकते हैं

1266
01:31:35,120 --> 01:31:39,120
नीच है नीच नीच है ततक ज्ञान वाले हैं जी

1267
01:31:39,120 --> 01:31:43,200
अनिकेत जी जय श्री राम

1268
01:31:43,200 --> 01:31:48,160
जी जय श्री राम भैया जय श्री राम प्रणाम भैया जय हो

1269
01:31:48,160 --> 01:31:52,160
हां वो मैं कह रहा था गुरु वाली बात थी ना एक गुरु वाली बात

1270
01:31:52,160 --> 01:31:56,320
थी ना आप दोनों ही लोगों मुझे कभी ना कभी गुरु कहा है यहां बता दीजिए

1271
01:31:56,320 --> 01:32:02,320
थोड़ा सा वो इनको आसानी हो जाएगी मेरे साथ साथ

1272
01:32:02,480 --> 01:32:06,640
जी जी जी हम नाम नहीं लेते हैं हम केवल भैया कहते हैं शिवश भैया फिर भी आप

1273
01:32:06,640 --> 01:32:10,880
लोग के लिए नाम लेकर के कह रहे हैं जो आपके सामने बैठे हैं शिवश नारायण द्विवेदी जी

1274
01:32:10,880 --> 01:32:15,120
वो हमारे गुरु है स्पष्ट रूप से कह रहे हैं

1275
01:32:15,120 --> 01:32:18,560
और जब पूछेंगे तब हम कहेंगे

1276
01:32:18,560 --> 01:32:23,440
ठीक है भाई रामपाल गुरु की बात गुरु से होगी ना अगले

1277
01:32:23,440 --> 01:32:27,440
गुरु और और लोगों से मिलवा दूंगा अगर तू कहेगा भैया 50 लोगों से

1278
01:32:27,440 --> 01:32:31,440
मिलवाओ 100 लोगों से मिलवाओ ऐसे ही किसी दिन लाइव सेशन में बता दूंगा ऐसे ही

1279
01:32:31,440 --> 01:32:35,680
सिद्ध होगा ना कौन किसका गुरु जी पाणी जी

1280
01:32:35,680 --> 01:32:40,240
हां कुछ कह रहे थे आप अंकित जी जय श्री राम

1281
01:32:40,240 --> 01:32:44,640
जी जी वही कह रहा था कि एक बहुत ही जबरदस्त चीज आपने लास्ट में कही

1282
01:32:44,640 --> 01:32:48,800
कि कुछ नहीं कर सकते हो तो कम से कम सवा घंटे का नाम जप तो करो। यह

1283
01:32:48,800 --> 01:32:53,040
मैं सबको बताना चाहता हूं कि जब मैं जुड़ा था तो भैया ने सबसे

1284
01:32:53,040 --> 01:32:57,120
पहला मेरे को उपदेश यही दिया था कि तुम जप करो

1285
01:32:57,120 --> 01:32:58,240
अपने आप तुमको

1286
01:32:58,240 --> 01:33:02,400
तुम्हारा गुस्सा भी कंट्रोल हो जाएगा। तुमको जवाब देने की शक्ति भी मिलेगी।

1287
01:33:02,400 --> 01:33:06,480
तो यह मैं एक समझ लो कि मैं अपना अनुभव शेयर कर रहा हूं। तो सबको यही

1288
01:33:06,480 --> 01:33:10,480
रिक्वेस्ट करूंगा जो भैया ने लास्ट में बोला है कि आप सहयोग कर सकते हो तो करो।

1289
01:33:10,480 --> 01:33:14,480
नहीं कुछ कर सकते हो तो सवा घंटा का नाम जप करो। भैया

1290
01:33:14,480 --> 01:33:18,560
का तो नाम जप करो। चलता ही है सेशन पांच वक्त

1291
01:33:18,560 --> 01:33:22,640
तो सब ये बहुत अच्छी चीज बोली आपने भैया कि मैसेज बहुत लोग करते हैं मेरे को भी बहुत

1292
01:33:22,640 --> 01:33:26,640
लोग मैसेज करते हैं कि शिवश भैया से बोलिए ऐसे शिवश भैया से बोलिए

1293
01:33:26,640 --> 01:33:30,880
वैसे मैं भी सबको वही बोलता हूं कि पहले नाम जप कीजिए

1294
01:33:30,880 --> 01:33:34,960
क्लास के लिए कितने लोग मुझसे पूछते हैं तो मैं बोलता हूं जुड़ जाइए तो बोलते हैं अभी नहीं

1295
01:33:34,960 --> 01:33:38,960
बाद में जुड़ेंगे मतलब ये केवल मजा लेने के लिए आते हैं

1296
01:33:38,960 --> 01:33:43,600
ये एंटरटेनमेंट चल रहा है क्या दो जन का केवल ये क्या कोई पॉलिटिकल

1297
01:33:43,600 --> 01:33:47,680
डिबेट नहीं चल रही है धर्म धर्म और अधर्म की लड़ाई चल रही है और

1298
01:33:47,680 --> 01:33:51,760
तुम धर्म के तरफ हो या अधर्म की तरफ हो तुमको खुद को नहीं पता है। केवल आनंद ले रहे हो।

1299
01:33:51,760 --> 01:33:56,080
अरे अधर्म ने क्या बोला? ऐसा बोला। अरे धर्म ने क्या बोला? ऐसा बोला। बहुत जबरदस्त

1300
01:33:56,080 --> 01:34:01,120
बात बोली भैया आपने। जी भैया।

1301
01:34:01,120 --> 01:34:06,160
ठीक है। आज की चर्चा हो गई पूरी। पहाड़ी जी चले गए हैं।

1302
01:34:06,160 --> 01:34:11,200
[गला साफ़ करने की आवाज़]

1303
01:34:11,200 --> 01:34:15,280
जी भैया। मनप्रीत जी को ले लेते हैं। हां मनप्रीत

1304
01:34:15,280 --> 01:34:21,280
जी जय श्री राम जय श्री राम सत श्री अकाल

1305
01:34:21,520 --> 01:34:25,760
जी बहुत अच्छी चर्चा सुनी आपकी

1306
01:34:25,760 --> 01:34:29,760
पूरी चर्चा सुनी बहुत मजा आया और कुछ सीखने को मिलता है इस चर्चा में भले

1307
01:34:29,760 --> 01:34:33,840
ही कुछ हम जुड़े रहे और इसी चर्चा में बहुत कुछ

1308
01:34:33,840 --> 01:34:37,920
सीखने को मिल मिल जाता है हम लोगों को भी तो देखने अगर

1309
01:34:37,920 --> 01:34:42,400
आप सिर्फ देखते भी हैं इस चर्चा को पूरी तरह देखेंगे भी और

1310
01:34:42,400 --> 01:34:46,480
साथ में जाप करेंगे जैसे जैसे आपने बताया तो तो

1311
01:34:46,480 --> 01:34:50,560
जो सोने पर सुहागा हो जाता है जैसे वो चीज हो जाएगी पूरी

1312
01:34:50,560 --> 01:34:56,480
तरह वीडियो अगर हम देखते भी है

1313
01:34:56,480 --> 01:35:00,560
ठीक है तो किसी को भी जिसकी भी मां ने निष्ठा पूर्वक

1314
01:35:00,560 --> 01:35:04,800
दूध पिलाया है और वो हमारे विरोध में रामपाल

1315
01:35:04,800 --> 01:35:09,680
की किसी बात को सही कर सकता है सिद्ध तो

1316
01:35:09,680 --> 01:35:13,680
वो हमसे संपर्क कर सकता है किसी भी प्रकार के वैचारिक मतभेद के निमित्त

1317
01:35:13,680 --> 01:35:19,280
यदि रामपाल के पूरे गैंग में किसी की भी माता ने

1318
01:35:19,280 --> 01:35:23,440
किसी भी मां की कोख ने ऐसा कोई लाल जन्मा

1319
01:35:23,440 --> 01:35:27,600
हो और उसको निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया हो जो

1320
01:35:27,600 --> 01:35:31,920
रामपाल की हमारे विरोध में कही गई कोई बात उसके

1321
01:35:31,920 --> 01:35:36,080
द्वारा धर्म के विषय में ब्रह्म के विषय में वो सही सिद्ध कर सकने

1322
01:35:36,080 --> 01:35:42,080
का क्षमता रखता हो तो वो जो है हमारा नंबर है 7408301869

1323
01:35:42,800 --> 01:35:47,200
और यह सब ढकोसलेबाजी करना तुम लोग बंद करो कि मुंड मुंडका

1324
01:35:47,200 --> 01:35:51,680
आश्रम आ जाओ यहां आ जाओ वहां आ जाओ ठीक है चर्चा अगर

1325
01:35:51,680 --> 01:35:55,920
ऑफलाइन होनी है तो किसी बीच के स्थान पर होगी ऑनलाइन होनी

1326
01:35:55,920 --> 01:36:00,240
है तो यह देखा जाएगा कि तुम्हारी औकात क्या है अगर

1327
01:36:00,240 --> 01:36:04,240
औकात गई बीती है तो चर्चा हमारे चैनल पर होगी नहीं तो किसी

1328
01:36:04,240 --> 01:36:08,400
मध्यस्थ चैनल पर होगी तुम्हारे पर नहीं हमने बुलाया हमने बुलाया

1329
01:36:08,400 --> 01:36:13,440
ये नहीं आया कौन होते हो तुम बुलाने वाले भाई बीच की जगह पर चर्चा करना

1330
01:36:13,440 --> 01:36:17,440
क्यों क्यों बुला रहा है मुंड को मुंडका आश्रम आ जाओ यहां

1331
01:36:17,440 --> 01:36:21,440
आ जाओ चैलेंज कर रहा हूं तुझे दो

1332
01:36:21,440 --> 01:36:25,440
कौड़ी की औकात है तुम्हारी और

1333
01:36:25,440 --> 01:36:29,440
तुम लोग मुझे बुला रहे हो और मैं तुम्हें अपने यहां नहीं बुला रहा हूं।

1334
01:36:29,440 --> 01:36:33,440
मुझे अपना अपने आसपास का जो वातावरण दूषित नहीं करना है तुम लोगों की

1335
01:36:33,440 --> 01:36:37,520
विष्ठा रूपी शरीर से। ठीक है?

1336
01:36:37,520 --> 01:36:41,680
तुम्हें अपने यहां नहीं बुला रहा हूं मैं। बीच की जगह पर आओ ना

1337
01:36:41,680 --> 01:36:45,680
भाई बीच में मिलो ना तुम्हारा ना हमारा

1338
01:36:45,680 --> 01:36:50,560
है साहस पिया है मां का दूध तो बता देना

1339
01:36:50,560 --> 01:36:55,810
बनाना वीडियो इस पे

1340
01:36:55,810 --> 01:37:00,320
[गला साफ़ करने की आवाज़] हां जी मनप्रीत जी

1341
01:37:00,320 --> 01:37:05,760
जी जी सही है भैया आपने सब कवर कर ही लिया है बहुत बढ़िया

1342
01:37:05,760 --> 01:37:10,720
ठीक है फिर समय देने के लिए आभार और सभी

1343
01:37:10,720 --> 01:37:16,160
धर्मनिष्ठ लोगों से मैं कहना चाहूंगा कि

1344
01:37:16,160 --> 01:37:20,240
केवल समीक्षा ना करें। केवल मूक दर्शक बनके

1345
01:37:20,240 --> 01:37:24,320
ना बैठे। आज अगर आप यह सोच रहे हैं कि फलानी जगह आग

1346
01:37:24,320 --> 01:37:28,480
लगी हुई है कोई दिक्कत नहीं। मेरे घर पर तो लगी नहीं हुई है। तो

1347
01:37:28,480 --> 01:37:32,880
आप जो है उस आग का आग की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

1348
01:37:32,880 --> 01:37:37,120
तो मूकदर्शक होकर मत देखें। अगर कुछ कर सकते तो अवश्य

1349
01:37:37,120 --> 01:37:41,120
करें और कुछ नहीं कर सकते हैं तो तप का बल

1350
01:37:41,120 --> 01:37:45,200
एकत्र करिए। यही आपको बचाएगा। नीचे संग का

1351
01:37:45,200 --> 01:37:49,360
बल और ऊपर ईश्वर का बल। उस ईश्वर पर विश्वास

1352
01:37:49,360 --> 01:37:53,360
लाइए। जिस ईश्वर के लिए आप लड़ना चाहते हैं। जिस

1353
01:37:53,360 --> 01:37:57,520
ईश्वर के अपमान के लिए आपको दुख होता है। उस पर विश्वास

1354
01:37:57,520 --> 01:38:01,680
लाइए, श्रद्धा लाइए, निष्ठा लाइए। उसके मंत्र

1355
01:38:01,680 --> 01:38:05,920
पर विश्वास लाइए। उसके नाम जप पर विश्वास लाइए। वो नहीं है तभी

1356
01:38:05,920 --> 01:38:09,920
नहीं कर रहे हैं। यदि होता विश्वास तो सुबह उठकर के सबसे पहले उसी के पीछे

1357
01:38:09,920 --> 01:38:11,200
ना पड़ते। इसमें

1358
01:38:11,200 --> 01:38:15,360
बहुत शक्ति बहुत शक्ति है और उसके बाद उससे क्या

1359
01:38:15,360 --> 01:38:19,440
होता है कि आपके आसपास का वातावरण जो आपके

1360
01:38:19,440 --> 01:38:23,440
पहले प्रतिकूल था वो अनुकूल होना शुरू होता है। वहां के परमाणु सुधरना शुरू

1361
01:38:23,440 --> 01:38:27,600
हो जाते हैं। बहुत सी चीजें होती है।

1362
01:38:27,600 --> 01:38:31,760
प्रकृति आपके साथ हो जाती है। जहां जाओगे वही कार्य

1363
01:38:31,760 --> 01:38:35,840
पूरा होगा। जिस काम में हाथ डालोगे उसी काम को वही कार्य

1364
01:38:35,840 --> 01:38:40,320
आपके पक्ष में होने लगेगा। यह सब चीजें हैं।

1365
01:38:40,320 --> 01:38:44,480
विश्वास करिए भगवान पर दो मिनट एक मिनट जी

1366
01:38:44,480 --> 01:38:48,560
जी बोलिए ऐसे ही जो हमारे सिख धर्म में

1367
01:38:48,560 --> 01:38:52,640
भी इन लोगों को मैं वहां जाता रहा था मैं एक्स था थोड़ा मेरा

1368
01:38:52,640 --> 01:38:56,720
भाई जाता था वहां पर तो इस वजह से मुझे जानकारी

1369
01:38:56,720 --> 01:39:01,120
भी है वहां की तो थोड़ा सा इन लोगों ने सिख धर्म को भी अपना

1370
01:39:01,120 --> 01:39:05,120
चंगुल में फंसा रखा है तो आपके माध्यम से थोड़ा सा ये बताएंगे

1371
01:39:05,120 --> 01:39:09,600
कि ऐसा सिख धर्म वाले भी वहां जाते हैं और इन लोगों ने

1372
01:39:09,600 --> 01:39:13,920
एक दो चीज एक दो भक्तों को एक दो सिख धर्मों की जैसे

1373
01:39:13,920 --> 01:39:18,640
वहां पर पगड़ियां उतरवाने को भी बोला हुआ है। एक बहुत बड़ी बात है जो

1374
01:39:18,640 --> 01:39:23,120
आपके चैनल पे ही कह सकते हैं। कहीं छोटी मोटी जगह पर कह भी नहीं सकते

1375
01:39:23,120 --> 01:39:26,480
ताकि सब लोगों को मैसेज जाए कि आप

1376
01:39:26,480 --> 01:39:30,480
आपकी ही बात सुन लें। सिख धर्म के जो हमारे जो साथी हमारे भाई

1377
01:39:30,480 --> 01:39:34,800
हैं और उनके चंगुल से निकल जाए और

1378
01:39:34,800 --> 01:39:38,880
जो है अपनी मान मर्यादा में रहे और कम से कम इनकी एकद

1379
01:39:38,880 --> 01:39:43,360
घंटे की वीडियो शिवान जी की कि भी देख लेंगे तभी उनको पता चल जाएगा

1380
01:39:43,360 --> 01:39:47,600
कि कैसे फसाया जाता है और दुनिया में क्या-क्या

1381
01:39:47,600 --> 01:39:52,160
चल रहा है और हम लोगों को कैसे बचना है और

1382
01:39:52,160 --> 01:39:56,320
एक ही जगह पे तीनों चीजें हमें मिल जाती है। बचना कैसे है और

1383
01:39:56,320 --> 01:40:00,640
अवेयरनेस और उनकी जानकारी सारी जानकारी

1384
01:40:00,640 --> 01:40:04,720
भी तो इन इस चैनल को भी

1385
01:40:04,720 --> 01:40:08,800
शिवा जी के देखिए ज्यादा से ज्यादा मेरे भाई सिख धर्म के भी

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01:40:08,800 --> 01:40:12,880
क्योंकि उन लोगों ने इस तरफ से भी काफी ज्यादा ज्यादा लोगों को

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01:40:12,880 --> 01:40:17,600
अपनी ओर खींच रखा है। जी

1388
01:40:17,600 --> 01:40:21,840
चलिए ठीक है। [गला साफ़ करने की आवाज़] तो

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01:40:21,840 --> 01:40:26,000
समय देने के लिए सबका आभार और मू द

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01:40:26,000 --> 01:40:30,160
मू दर्शक बनकर ना बैठे बीड़ा उठाएं आपके सामने जो चीजें

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01:40:30,160 --> 01:40:34,240
हो रही है उसे बदलने का और सबसे पहले जो ईश्वर के तप

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01:40:34,240 --> 01:40:38,240
का बल है नाम जप का बल है सवा घंटे की मिनिमम भक्ति करना स्टार्ट

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01:40:38,240 --> 01:40:42,240
करें जिससे कि आपके आसपास का वातावरण

1394
01:40:42,240 --> 01:40:46,640
आपके जो युद्ध है संघर्ष है उसके प्रतिकूल उसके प्रतिकूल

1395
01:40:46,640 --> 01:40:51,760
ना रहे अनुकूल जय श्री राम

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01:40:51,760 --> 01:40:57,760
जय श्री राम।

1397
01:41:19,120 --> 01:41:23,120
[संगीत]
