1
00:00:01,520 --> 00:00:05,760
केवल ब्रह्म द्वैत कल्पना का निरसन

2
00:00:05,760 --> 00:00:10,800
मुक्ति के लक्षण साधन का निश्चय

3
00:00:10,800 --> 00:00:15,440
श्रवण महिमा श्रवण का निरूपण देहांत

4
00:00:15,440 --> 00:00:20,560
निरूपण तो ये सारी चीजें जो हमारी चल रही हैं

5
00:00:20,560 --> 00:00:24,880
ये अलंकार समाजी जो बात किया करते हैं

6
00:00:24,880 --> 00:00:29,360
हमने बहुत सारे क्रांतिकारी खड़े किए हैं। अरे भैया

7
00:00:29,360 --> 00:00:34,160
संसार में ईश्वर का अस्तित्व हमने सिद्ध किया है।

8
00:00:34,160 --> 00:00:38,160
तो संसार में जितनी भी मानवता है उसके

9
00:00:38,160 --> 00:00:42,160
मूल में अगर जाओगे तो शंकर का सिद्धांत मिलेगा। उस सिद्धांत

10
00:00:42,160 --> 00:00:46,320
के बिना उस मानवता को माता को माता मानने

11
00:00:46,320 --> 00:00:50,560
वाले नियमों को आप स्थापित ही नहीं कर पाओगे संसार में।

12
00:00:50,560 --> 00:00:54,960
और यदि सतही स्तर की बात कर ले मूर्ति

13
00:00:54,960 --> 00:00:59,680
पूजक होने के नाते पुराण को मानने वाले होने के नाते की बात कर ले

14
00:00:59,680 --> 00:01:04,000
तो हमने ऐसे लोगों को खड़ा किया है और कहीं

15
00:01:04,000 --> 00:01:08,000
ज्यादा वृहद संख्या में जिनको आप भी

16
00:01:08,000 --> 00:01:12,000
प्रणम्य मानते हैं शिवाजी छत्रपति शिवाजी

17
00:01:12,000 --> 00:01:16,000
को कौन नहीं मानता प्रणम क्या ये लोग नहीं मानते आज एक

18
00:01:16,000 --> 00:01:16,560
हर्ष

19
00:01:16,560 --> 00:01:22,560
मैंने थोड़ा सा विनोद की बात मैंने देखी

20
00:01:23,040 --> 00:01:28,560
आर्य समाज का जो सम्मेलन चल रहा है दिल्ली में उसमें

21
00:01:28,560 --> 00:01:32,320
कोई आए हुए थे

22
00:01:32,320 --> 00:01:36,320
ऐसे जो नाम चिन्ह व्यक्ति थे वो आए हुए थे उनसे कोई इंटरव्यू हो रहा

23
00:01:36,320 --> 00:01:40,560
था तो उनसे जब पूछा गया माइक लेकर के कि

24
00:01:40,560 --> 00:01:44,640
भाई अ आप क्या कहना चाहते

25
00:01:44,640 --> 00:01:48,880
हैं कार्यक्रम के बारे में तो वहां पर जो ऐसे लोग थे जो मुख्य

26
00:01:48,880 --> 00:01:53,040
अतिथि के रूप में वक्ता के रूप में आए थे। जिनका डायरेक्ट मतलब कोई कनेक्शन

27
00:01:53,040 --> 00:01:57,120
नहीं पर वो वहां एक अतिथि के रूप में आए। तो उनका सारा जो

28
00:01:57,120 --> 00:02:01,120
वक्तव्य था आर्य समाज को लेकर के वह इस

29
00:02:01,120 --> 00:02:05,200
बारे में था कि आर्य समाज बहुत बढ़िया क्रांतिकारी है। इस बारे

30
00:02:05,200 --> 00:02:09,600
में नहीं था कि आर्य समाज के जो दर्शन इत्यादि के सिद्धांत है वो बहुत बढ़िया

31
00:02:09,600 --> 00:02:14,160
है या उन्होंने जो दर्शन का सिद्धांत दिया है वो

32
00:02:14,160 --> 00:02:18,400
या अन्य जो उन्होंने धर्म और ब्रह्म की परिभाषाएं दी है उस संबंध में

33
00:02:18,400 --> 00:02:22,400
गढ़ता या तात्विक विवेचना बहुत महान है। यह

34
00:02:22,400 --> 00:02:26,560
सब कोई नहीं बात करता है। वहां पर क्या बात होती है कि वो भैया देश

35
00:02:26,560 --> 00:02:30,800
के लिए लड़ने मरने वाले हैं। बहुत अच्छे हैं और इस तरीके की उनके संबंध

36
00:02:30,800 --> 00:02:32,160
में बातें

37
00:02:32,160 --> 00:02:36,640
तो अच्छी बात है हमारा उन हमारे और उनके बीच

38
00:02:36,640 --> 00:02:40,640
इन बातों को लेकर के कोई मतभेद थोड़ी ना है। मतभेद

39
00:02:40,640 --> 00:02:44,800
है कि जब आप गढ़ में जब आप मूल में ही

40
00:02:44,800 --> 00:02:48,880
व्यक्ति को खोखला कर दोगे तो ऊपर से उसको कितना भी ड्रेस अप कर दो। मगर

41
00:02:48,880 --> 00:02:53,040
क्योंकि वह अंदर से खोखला है। वह ड्रेसअप करने के बाद भी व्यक्ति वह

42
00:02:53,040 --> 00:02:57,040
आपके काम नहीं आ पाएगा। अंततवा तो मूल में भी काम करने की आवश्यकता है

43
00:02:57,040 --> 00:03:01,520
ना ड्रेसअप के साथसाथ। आपने तो कह दिया कि मूर्ति पूजा

44
00:03:01,520 --> 00:03:05,520
व्यर्थ है। तो जब व्यक्ति की मूर्ति पूजा के प्रति निष्ठा ही तुम

45
00:03:05,520 --> 00:03:09,600
भंग कर दोगे तो कितना भी उसको ड्रेस अप करके बना दो कि हमने देखो योद्धा खड़ा

46
00:03:09,600 --> 00:03:13,840
किया है। सनातन धर्म को बचाने के लिए हिंदू धर्म को बचाने के लिए। उस

47
00:03:13,840 --> 00:03:17,840
योद्धा के अंदर आत्मा से निकलने वाली आवाज नहीं

48
00:03:17,840 --> 00:03:22,160
होगी कि मुझे मूर्ति की रक्षा करनी है। ठीक है?

49
00:03:22,160 --> 00:03:26,160
यूं ही कर दे अंतरात्मा से उसके नहीं

50
00:03:26,160 --> 00:03:30,240
आएगा कि मुझे मूर्ति की रक्षा करनी है। और वो भावना उसके अंदर

51
00:03:30,240 --> 00:03:34,240
आपने भरी है। तो उन पर भी बात होगी ना। अब रामपाल वाले आजकल कह रहे

52
00:03:34,240 --> 00:03:38,480
हैं कि हमने पाइप दिए हैं। पाइप दिए हैं। पाइप दिए हैं। अनाकोंडा के बराबर लंबे

53
00:03:38,480 --> 00:03:43,200
पाइप यही तो कह रहे हैं फराने हजार फुट यह फट यह फुट

54
00:03:43,200 --> 00:03:47,680
तो अनाकोंडा के बराबर लंबाई में पाइप दिए होंगे चार पांच अनाकोंडा

55
00:03:47,680 --> 00:03:51,680
को मिलाकर के तो अनाकोंडा के बराबर पाइप दिए

56
00:03:51,680 --> 00:03:55,760
तो उस बात को लेकर के कोई थोड़ी ना विवाद है। विवाद

57
00:03:55,760 --> 00:04:00,000
इस बात को लेकर है कि तुमने हमारे भगवान के बारे में उल्टा सीधा

58
00:04:00,000 --> 00:04:04,240
क्यों बोला? विवाद इस बात को लेकर है कि तुम

59
00:04:04,240 --> 00:04:08,400
जो परंपरा से प्राप्त ज्ञान है वह अपने उनका उनका अपने

60
00:04:08,400 --> 00:04:12,560
मन मुताबिक अर्थ क्यों करते हो? इन बातों को लेकर विवाद है।

61
00:04:12,560 --> 00:04:16,880
अब किसी व्यक्ति ने मंदिर में चंदा दे दिया। भूखों को खाना खिला दिया

62
00:04:16,880 --> 00:04:21,120
या और कोई कार्य अच्छा कर दिया और बाहर जाकर के किसी छोटी बच्ची

63
00:04:21,120 --> 00:04:25,440
के साथ कोई दुष्कर्म कर दिया। तो इसलिए क्योंकि उसने मंदिर में चंदा दिया है

64
00:04:25,440 --> 00:04:29,520
या उसने भूखों को भोजन कराया है। इसलिए उसके

65
00:04:29,520 --> 00:04:33,600
उस अमानवीय व्यवहार के लिए उसको सजा

66
00:04:33,600 --> 00:04:37,600
ना दी जाए। ये कहां का न्याय है? और ये अगर न्याय है

67
00:04:37,600 --> 00:04:42,000
तो तुम्हारा न्याय होगा। यह हमारा सनातन सिद्धांत नहीं है।

68
00:04:42,000 --> 00:04:46,320
ठीक है? कई अंशों में रावण भी अच्छा था। कई अंशों में

69
00:04:46,320 --> 00:04:49,840
दुर्योधन भी अच्छा था।

70
00:04:49,840 --> 00:04:54,160
हां। नहीं था क्या अच्छा? कई अंशों में अच्छा था। परंतु

71
00:04:54,160 --> 00:04:58,880
उस अच्छे होने के कारण क्या उसने जो पाप किया उसको भूल जाए?

72
00:04:58,880 --> 00:05:02,800
ये कौन सी बात है भाई? तो तुमने अगर क्रांतिकारी खड़े

73
00:05:02,800 --> 00:05:07,040
भी किए हैं। यद्यपि बात क्या हो रही है? क्रांतिकारी हमने

74
00:05:07,040 --> 00:05:11,280
तुमसे कहीं ज्यादा और बहुत बड़ी

75
00:05:11,280 --> 00:05:15,520
वृहत संख्या में खड़े किए हैं। और उसके बावजूद एक जो मूल तात्विक विषय

76
00:05:15,520 --> 00:05:19,520
है यदि कोई व्यक्ति आज मानवता को मानवता को

77
00:05:19,520 --> 00:05:23,600
मान रहा है माता को माता की दृष्टि से देख रहा है तो उसके मूल

78
00:05:23,600 --> 00:05:27,680
में सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष

79
00:05:27,680 --> 00:05:31,680
है और वो मिलता है अद्वैत से

80
00:05:31,680 --> 00:05:35,680
शंकर सिद्धांत से उसको नकार के आप अपनी बिल्डिंग नहीं खड़ी

81
00:05:35,680 --> 00:05:39,840
कर पाओगे। उसको पहले नीचे बिल्डिंग जमा लो। उसके बाद उसके अंदर हमने

82
00:05:39,840 --> 00:05:44,160
एक कमरा बनाया है। इस कमरे के अंदर हमारे कोई नहीं आ सकता।

83
00:05:44,160 --> 00:05:48,320
ये आप कर सकते हो। परंतु आप ये कहो कि हम जो है उस बड़ी

84
00:05:48,320 --> 00:05:52,560
बिल्डिंग के बाहर हमने फ्लैट ले लिया है। तो बाहर जैसे ही जाओगे

85
00:05:52,560 --> 00:05:56,640
तो तुम्हारा वो जो कमरा है सब नष्ट भ्रष्ट हो जाएगा। आपको उस अपार्टमेंट के

86
00:05:56,640 --> 00:06:01,040
अंदर अपना एक फ्लैट लेना है तो ले लो। ठीक है?

87
00:06:01,040 --> 00:06:05,280
खूब रस रसगद भक्ति कर लो। खूब भेद कर लो कि हम तो केवल

88
00:06:05,280 --> 00:06:09,360
कृष्ण को मानेंगे। राम को भी नहीं मानेंगे। उसके अंदर रहते हुए खूब कर लो ये सब

89
00:06:09,360 --> 00:06:13,760
बात कि हमारे कमरे के अंदर तो केवल कृष्ण मगर फिर

90
00:06:13,760 --> 00:06:18,880
आप जो है विरोध करने मत आओ। लोहा मत लो फिर

91
00:06:18,880 --> 00:06:23,760
है ना पूरे पूरे अपार्टमेंट्स हम तो

92
00:06:23,760 --> 00:06:28,880
यह बात है कि हमने हरिहर बुक्का शिवाजी

93
00:06:28,880 --> 00:06:33,280
और ऐसे सभी क्रांतिकारी देशभक्त

94
00:06:33,280 --> 00:06:37,280
हमने खड़े किए हैं जो आर्य समाजी नहीं थे

95
00:06:37,280 --> 00:06:41,520
और हिंदू थे संख्या लगा लो कितनी है वो सब हमने खड़े किए

96
00:06:41,520 --> 00:06:45,680
परंपरा प्राप्त आचार्यों ने खड़े किए मूर्ति पूजक थे जो आर्य

97
00:06:45,680 --> 00:06:50,000
समाज नहीं था। मूर्ति पूजक था। वर्ण व्यवस्था को मानने वाला था।

98
00:06:50,000 --> 00:06:54,800
मंगल पांडे नहीं थे क्या? वर्ण व्यवस्था को मानने वाले क्रांति की शुरुआत किसने की?

99
00:06:54,800 --> 00:06:58,800
किसने की क्रांति की शुरुआत? मंगल पांडे ने की। नहीं

100
00:06:58,800 --> 00:07:02,880
थे क्या मूर्ति को मानने वाले? वर्ण व्यवस्था को मानने वाले

101
00:07:02,880 --> 00:07:08,800
थे। ठीक है। ये सब

102
00:07:08,800 --> 00:07:13,120
मुझे फिर वही कहा जाता है कि फिल्मों का उदाहरण देता है। एक मैंने फिल्म देखी

103
00:07:13,120 --> 00:07:18,640
थी। कॉमेडी मूवी थी। उसमें क्या होता है

104
00:07:18,640 --> 00:07:22,640
कि कुछ करतूत कर

105
00:07:22,640 --> 00:07:26,880
रहे हैं। नवयुवक हैं वो मिलकर के कुछ करतूत कर रहे हैं। ऐसे

106
00:07:26,880 --> 00:07:30,880
में जो घर के अभिभावक हैं

107
00:07:30,880 --> 00:07:34,960
मामा इत्यादि वो आने लगते हैं। तो नवयुवक जो करतूत कर

108
00:07:34,960 --> 00:07:39,200
रहे थे वो अक्षय कुमार था उसमें। तो यह

109
00:07:39,200 --> 00:07:43,200
लोग जो मिलकर के करतूत कर रहे थे तो मामा आने लगते तो डर जाते हैं मामा आ रहे हैं मामा

110
00:07:43,200 --> 00:07:47,360
आ रहे हैं तो मामा जब आते हैं तो मामा को मामा बनाने

111
00:07:47,360 --> 00:07:51,680
के लिए अरे मामा आ गए अरे मामा आ गए अरे मामा आ गए इतना

112
00:07:51,680 --> 00:07:55,760
चिल्लाने लगते हैं मामा आ गए मामा आ गए मामा परेशान होकर पूछता है क्या हो

113
00:07:55,760 --> 00:08:00,000
गया भाई इतना क्यों चिल्ला रहे हो अरे मामा आ गए इतना चिल्लाओ

114
00:08:00,000 --> 00:08:06,000
पहले से कि जो मूल विषयों पर ध्यान देना व्यक्ति भूल ही जाए

115
00:08:09,520 --> 00:08:14,080
है ना? तो इतना जो है चिल्लाने

116
00:08:14,080 --> 00:08:18,240
लगते हैं कि मामा आ गए, मामा आ गए। मूल विषयों पर व्यक्ति ध्यान देना

117
00:08:18,240 --> 00:08:22,320
भूल ही जाए। वाह मामा आ गए साहब। मामा आ

118
00:08:22,320 --> 00:08:27,200
गए। [हंसी] तो इसी तरीके से हट क्रांतिकारी हट क्रांतिकारी।

119
00:08:27,200 --> 00:08:31,280
अरे भैया है क्रांतिकारी तो ईश्वर सर्वशक्तिमान हो गया

120
00:08:31,280 --> 00:08:35,680
क्या? मोक्ष तुम्हारा परम स्वतंत्र हो गया क्या? और मैं वहां

121
00:08:35,680 --> 00:08:40,000
नाटक क्या देख रहा हूं? वहां पर आर्य समाज

122
00:08:40,000 --> 00:08:44,240
की ओर से आर्य समाज के पक्षधर के रूप में

123
00:08:44,240 --> 00:08:48,240
खड़ा होकर के कौन बात कर रहा है? जो ये आचार्य प्रशांत जी हैं

124
00:08:48,240 --> 00:08:52,880
ये वाले मुरैना रहते हैं जो शायद एमपी में

125
00:08:52,880 --> 00:08:57,040
जिन्होंने खुद ये कहा है कि मोक्ष को लेकर के मैं दयानंद सरस्वती

126
00:08:57,040 --> 00:09:01,040
जी से संतुष्ट नहीं हूं। लो हो गया सिद्धांत

127
00:09:01,040 --> 00:09:05,280
ये सिद्धांत है जो खुद को प्रामाणिक आर्य समाजी

128
00:09:05,280 --> 00:09:09,680
कह रहा है गुरुकुल चला रहा है

129
00:09:09,680 --> 00:09:13,680
वो कह रहा है कि मैं अपने मोक्ष से संतुष्ट नहीं हूं और धर्म

130
00:09:13,680 --> 00:09:17,840
का परवसान किस में है महाभारत में लिखा है धर्म

131
00:09:17,840 --> 00:09:22,000
का पर्यावसान है मोक्ष में जहां मोक्ष नहीं

132
00:09:22,000 --> 00:09:24,720
है वहां धर्म कैसे सिद्ध कर दे रहे हो तुम काहे

133
00:09:24,720 --> 00:09:29,040
का धर्म जब तुम मोक्ष के लिए किसी और के पास जा रहे हो

134
00:09:29,040 --> 00:09:33,120
तो तुम्हारा धर्म कहां बचा भाई? और फिर जब तुम मोक्ष

135
00:09:33,120 --> 00:09:37,120
से तुम संतुष्ट नहीं हो, तुम्हारा धर्म सिद्ध नहीं हो रहा तो तुम

136
00:09:37,120 --> 00:09:41,280
वहां क्या पक्ष लेने के लिए खड़े हुए हो आर्य समाज का?

137
00:09:41,280 --> 00:09:45,600
क्या ये नाटक चल रहा है? और बस

138
00:09:45,600 --> 00:09:49,600
मूल विषयों पर ध्यान ना दें। और कोई आया तो वाह क्रांतिकारी मामा

139
00:09:49,600 --> 00:09:53,840
आ गए। मामा आ गए। मामा आ गए। मामा आ गए। ये चिल्लाते

140
00:09:53,840 --> 00:09:57,840
रहो। मूल विषयों पे बात ही नहीं करनी। मामा आ गए सब। मामा आ गए

141
00:09:57,840 --> 00:10:02,080
वो करतूत पे या वो जो जो गुड

142
00:10:02,080 --> 00:10:06,240
उसमें छुपी हुई चीजें हैं उस पे मामा का ध्यान ना जाए तो पहले इतना चलो

143
00:10:06,240 --> 00:10:11,200
मामा आ गए [हंसी] खैर चलिए

144
00:10:11,200 --> 00:10:17,200
विनोद हो गया मूल विषय पे वापस आते हैं

145
00:10:24,880 --> 00:10:28,880
[संगीत]
