1
00:00:01,680 --> 00:00:05,760
तो सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं कि आप सभी

2
00:00:05,760 --> 00:00:09,760
कुशल पूर्वक होंगे और जैसा आप

3
00:00:09,760 --> 00:00:14,560
जानते हैं आज हमारे बीच में एक रामपाल

4
00:00:14,560 --> 00:00:19,520
से काफी दिनों तक जो कनेक्टेड रह चुके हैं उनका जो

5
00:00:19,520 --> 00:00:23,840
प्रचलित नाम है लोकाचार में वह भाऊ है और

6
00:00:23,840 --> 00:00:27,840
वो अपनी कुछ यात्रा के बारे में हमें बताना चाहते हैं। काफी प्रेरणादायक

7
00:00:27,840 --> 00:00:32,240
है इनकी बातें। इनकी जो चीजें हैं, इनके पास जो सामग्री है

8
00:00:32,240 --> 00:00:36,320
और यह आपके समक्ष अपने कुछ विचार रखेंगे।

9
00:00:36,320 --> 00:00:41,200
उससे पहले मैं बता दूं कि जिन

10
00:00:41,200 --> 00:00:45,200
लोगों ने नहीं देखी कल की चर्चा वो जरूर जाकर के देख लें। आर्य समाज

11
00:00:45,200 --> 00:00:49,760
के एक प्रसिद्ध आचार्य अग्निव्रत जी के साथ हमारी चर्चा हुई है कल

12
00:00:49,760 --> 00:00:54,560
जिसमें कि सैद्धांतिक विषयों पर बहुत सारी चीजें आपको देखने को मिलेंग

13
00:00:54,560 --> 00:00:59,040
कि हर वो तर्क जो आर्य समाज की ओर से दिया जा सकता है

14
00:00:59,040 --> 00:01:03,200
हर उस तर्क का वहां पर खंडन हुआ है। अब तर्क

15
00:01:03,200 --> 00:01:07,280
के साथसाथ हमने वहां प्रमाण भी दिया। हालांकि प्रमाण वाली बात वही आ जाती

16
00:01:07,280 --> 00:01:12,000
है कि यदि व्यक्ति ने अपनी पहले से एक

17
00:01:12,000 --> 00:01:17,040
पूर्वाग्रह बना रखा है अपनी बुद्धि के अनुसार कि यह धर्म है

18
00:01:17,040 --> 00:01:21,280
ऐसा होना चाहिए तो यदि प्रमाण में स्पष्ट रूप से मिलेगा

19
00:01:21,280 --> 00:01:25,360
भी कि भाई आप जो सोच रहे

20
00:01:25,360 --> 00:01:29,520
हैं आपका जो तर्क है उसके ठीक विपरीत उसमें लिखा है

21
00:01:29,520 --> 00:01:34,240
आपकी बुद्धि जो सोच रही है जैसे कि आज मैंने देखा एक वीडियो इस

22
00:01:34,240 --> 00:01:40,240
समलैंगिक एक विवाह इस से जुड़े हुए लोग एक

23
00:01:40,240 --> 00:01:44,640
वहां पर तो दंपत्ति कहने में भी

24
00:01:44,640 --> 00:01:49,760
लज्जा

25
00:01:49,760 --> 00:01:53,840
वहां पर जो है अब वो अपनी बुद्धि के अनुसार यह

26
00:01:53,840 --> 00:01:58,160
कहेंगे कि भाई तर्क के अनुसार हमारे तर्क के अनुसार जो है धर्म जो है यह

27
00:01:58,160 --> 00:02:02,880
कहना कहना चाहिए धर्म को कि समलैंगिक विवाह अच्छा है

28
00:02:02,880 --> 00:02:07,360
और अब यदि वहां पर कहीं पर समलैंगिकता

29
00:02:07,360 --> 00:02:11,360
का निषेध भी हो रहा होगा तो वहां पर उस निषेध

30
00:02:11,360 --> 00:02:15,440
में भी वह समलैंगिकता का अर्थ निकालने की कोशिश करेंगे और जिसने जो

31
00:02:15,440 --> 00:02:20,320
एज इट इज अर्थ किया होगा तो उसको कहेंगे कि भाई तुम्हारा अर्थ गलत है।

32
00:02:20,320 --> 00:02:24,320
तो जब हम धर्म शास्त्रों से पहले ही यह सुनिश्चित कर लेंगे कि

33
00:02:24,320 --> 00:02:28,320
हमारा धर्म क्या है? तो धर्म शास्त्रों की आवश्यकता क्या रह जाएगी? जब हमें

34
00:02:28,320 --> 00:02:32,240
अपने तर्क के अनुसार ही निर्णय करना है कि

35
00:02:32,240 --> 00:02:36,240
धर्म क्या है? तो फिर धर्म शास्त्रों की आवश्यकता क्या रहेगी निर्णय के

36
00:02:36,240 --> 00:02:40,320
लिए? खैर जो [नाक से की जाने वाली आवाज़] भी है हमने उन्हें तर्क भी दिया, प्रमाण भी दिया और जब

37
00:02:40,320 --> 00:02:44,480
उन्होंने हमारे प्रमाण पर आपत्ति जताई कि भाई आपका अर्थ

38
00:02:44,480 --> 00:02:48,480
गलत है क्योंकि उनका पूर्वाग्रह है कि भाई किसी भी दशा में जो है अमुक

39
00:02:48,480 --> 00:02:52,720
अमुक कार्य नहीं होने चाहिए तो आपके क्योंकि आपके जो आपका

40
00:02:52,720 --> 00:02:56,800
जो भाष्य है जिसको आप प्रामाणिक मानते हैं उसमें क्योंकि ऐसी ऐसी अमुक

41
00:02:56,800 --> 00:03:00,880
अमुक गलतियां है इस कारण से वह प्रामाणिक नहीं है और इस कारण से हम

42
00:03:00,880 --> 00:03:05,440
मानने योग्य हो गए प्रामाणिक तो पहली बात तो यही है कि आपका धर्म

43
00:03:05,440 --> 00:03:09,760
धर्म शास्त्रों से पहले ही निश्चित है। जिसके चश्मा जिसका चश्मा

44
00:03:09,760 --> 00:03:13,760
लगाकर आप धर्म शास्त्रों को देख रहे हैं। फिर दूसरी बात एक ये

45
00:03:13,760 --> 00:03:17,760
आ गई कि अगर दुर्जन तोष न्याय से मान भी लिया

46
00:03:17,760 --> 00:03:22,000
जाए सामने वाला जो है ठीक नहीं है। हालांकि आप ही

47
00:03:22,000 --> 00:03:26,320
अब एक विषय में उसको प्रामाणिक घोषित कर रहे हैं। यह भी बात है।

48
00:03:26,320 --> 00:03:30,560
फिर भी यदि आपको लगता है कि वह ठीक नहीं है किसी कारणवश तो इसका

49
00:03:30,560 --> 00:03:34,640
मतलब यह हो गया कि अब जो है किसी भी राह चलते की चीजों

50
00:03:34,640 --> 00:03:38,640
को प्रमाण मान लिया जाए। उसका कोई आधार नहीं है। फिर प्रामाणिकता

51
00:03:38,640 --> 00:03:42,720
का। प्रामाणिकता का आधार यही है कि हमने यह तय कर लिया है। यह धर्म है। यह

52
00:03:42,720 --> 00:03:46,720
धर्म नहीं है। अब जो अर्थ इसके अनुरूप होगा जो हमने तय किया है

53
00:03:46,720 --> 00:03:47,520
वही

54
00:03:47,520 --> 00:03:51,760
प्रमाण है। वरना प्रमाण नहीं। तो जब हमारी

55
00:03:51,760 --> 00:03:56,080
अपने तर्कों के अनुसार ही निश्चय होना है तो प्रमाण पर जाने की आवश्यकता

56
00:03:56,080 --> 00:04:00,320
क्यों पड़ रही? शुरुआत में तर्क पर ही बात चल रही थी। तो प्रमाण

57
00:04:00,320 --> 00:04:04,560
और तर्क दोनों ही तरीके से उनका जो है खंडित हुआ। फिर परंपरा वो बता नहीं पाए।

58
00:04:04,560 --> 00:04:08,800
फिर वो विषयंतर करके जब उधर ले जाने लगे कि पशु बलि पशु बलि

59
00:04:08,800 --> 00:04:12,880
है कि नहीं है। कहां पर प्रतीकात्मक व्याख्या

60
00:04:12,880 --> 00:04:16,960
कहां पर वास्तविक है। यह सब एक बड़ा विषय है। और यदि उस

61
00:04:16,960 --> 00:04:21,040
पर हम जाएंगे तो अपने आप में वह एक बड़ी चर्चा है। तो अवतार

62
00:04:21,040 --> 00:04:25,120
का जब तक निर्णय हुआ नहीं तो आप वह चर्चा क्यों उसमें मैं जब कुछ बोल दूं

63
00:04:25,120 --> 00:04:29,360
जैसे शुरू में मैंने बोला था कि माया

64
00:04:29,360 --> 00:04:33,520
को लेकर के कुछ बात कही थी तात्विक विवेचना के लिए माया जबकि मेरा अर्थ वहां

65
00:04:33,520 --> 00:04:37,600
पर यह था कि भाई मेरे पास भी कुछ ऐसा है जिसके कारण जो

66
00:04:37,600 --> 00:04:42,400
प्रतीति हो रही है भगवान की दोषों से लिप्त होने की उसमें भी हम उसे निर्दोष

67
00:04:42,400 --> 00:04:46,400
सिद्ध कर लेंगे। तो वहां पर किस तरीके

68
00:04:46,400 --> 00:04:50,560
से विषय पकड़ने की कोशिश कर रहे थे कि माया माया को पकड़ लिया जाए तो अवतार रह

69
00:04:50,560 --> 00:04:54,640
जाए तो ऐसे अगर एक साथ बहुत सारे टॉपिक्स को ले लेते कोई भी एक टॉपिक

70
00:04:54,640 --> 00:04:59,200
क्लियर होगा ही नहीं कभी इसीलिए तो पकड़ के रखा है ना सर्वशक्तिमान

71
00:04:59,200 --> 00:05:02,560
ईश्वर परम स्वतंत्र मुख शाश्वत धर्म दे दो हम ले चलो अपने साथ

72
00:05:02,560 --> 00:05:06,880
मगर वो चीजें समझ में नहीं आती व्यक्ति को खैर उनकी कल अच्छे से

73
00:05:06,880 --> 00:05:12,880
चीजें वास्तविकता सामने आई है और

74
00:05:12,880 --> 00:05:16,880
हर उस बात का हमने जवाब दिया जो उन्होंने कही और जब

75
00:05:16,880 --> 00:05:20,880
वह विषयांतर करके व्यक्तिगत इस पर उतर आए कि आपने तो पाप

76
00:05:20,880 --> 00:05:24,880
लिख रखा है अपने ग्रंथों में यह लिख रखा है वो लिख रखा है। अच्छा जबकि

77
00:05:24,880 --> 00:05:28,960
शर्त यही थी जो पूर्व में जो शर्तें उनकी ओर से आई थी हमारी ओर से गई

78
00:05:28,960 --> 00:05:33,200
थी। उसमें भी शर्तें यही थी कि अगर कोई व्यक्ति व्यक्तिगत टिप्पणी करेगा

79
00:05:33,200 --> 00:05:37,280
तो तुरंत उस चर्चा को निष्फल मान लिया जाएगा। निष्फल का मतलब जब चर्चा

80
00:05:37,280 --> 00:05:41,360
निष्फल हो गई तो वहां रहने का कोई औचित्य नहीं। तो हमने

81
00:05:41,360 --> 00:05:46,160
फिर वहां से हट जाना ही उचित समझा।

82
00:05:46,160 --> 00:05:50,240
उन्होंने सबसे पहली बार तो वही बीच में ही कहना शुरू कर दिया था कि आपको मालूम नहीं

83
00:05:50,240 --> 00:05:54,240
है। आपको ज्ञान नहीं है। यह क्या है? सिद्धांतिक बात करिए ना कि यह हो

84
00:05:54,240 --> 00:05:58,720
सकता है या नहीं हो सकता। यहां ये लिखा है। आपको ज्ञान नहीं है। ये क्या है? व्यक्तिगत

85
00:05:58,720 --> 00:06:02,800
कटाक्ष। फिर इसके आगे उन्होंने और भी कुछ कहने की कोशिश की। बाद में

86
00:06:02,800 --> 00:06:07,040
इस पे आगे आपने पाप लिख रखा है। हां। आप कुतर्की हो। कुतर्क कर रहे हो। ये

87
00:06:07,040 --> 00:06:11,040
सब क्या है? व्यक्तिगत। आप बात को काटिए। जब आपने यह कहा था ना कि

88
00:06:11,040 --> 00:06:15,040
ईश्वर अपनी सीमा अपना अंत बता सकता है कौन से दिन होगा तब मैंने उसको

89
00:06:15,040 --> 00:06:19,120
कुतर्क कह के झटकार नहीं दिया था उसको कुतर्क को कुतर्क के जरिए

90
00:06:19,120 --> 00:06:23,680
ही उसको काटा था हालांकि आपका तो कुतर्क कुतर्क है भी

91
00:06:23,680 --> 00:06:27,680
आप भी कह दोगे कि है मैंने तो ऐसी कोई बात कही नहीं थी

92
00:06:27,680 --> 00:06:32,080
जो कुतर्क है जिस भाषा में आप बात कर रहे हैं उसी भाषा में मैं बात कर रहा हूं

93
00:06:32,080 --> 00:06:34,800
खैर

94
00:06:34,800 --> 00:06:38,800
फिर कुतर्क कहने लगे फिर आपने ग्रंथों में पाप लिख दिया है ईश्वर

95
00:06:38,800 --> 00:06:43,040
को पाप पाप कर दिया है। ये ये है वो है। मतलब जो कार्य करते हुए उनका निराकार ईश्वर

96
00:06:43,040 --> 00:06:47,120
लिप्त नहीं होगा। पापों से उनहीं कार्यों में अगर ईश्वर अवतार

97
00:06:47,120 --> 00:06:51,840
ले लेगा तो पापों से ग्रसित हो जाएगा। ये इनकी मेंटालिटी।

98
00:06:51,840 --> 00:06:55,840
खैर वो सारी चर्चा आप लोगों ने देखी होगी। और अंतत एक

99
00:06:55,840 --> 00:07:00,000
मेरा यह भी कारण रहा वहां से जाने का कि भाई बड़े बूढ़े हैं।

100
00:07:00,000 --> 00:07:04,000
अभी मैंने हॉट टॉक ज्यादा कुछ कर दिया। अच्छा मैं यह सोच के आया था कि

101
00:07:04,000 --> 00:07:08,000
आज मुझे जो है उस जोन में नहीं जाना है। है

102
00:07:08,000 --> 00:07:12,000
ना कि एक होता है ना कि छींटा कैसी जो जैसे हम किसी अपने बराबर के

103
00:07:12,000 --> 00:07:16,000
व्यक्ति से कर लेते हैं। तो मैं सोच के ही आया था। किसी ने मुझसे कहा भी था आने

104
00:07:16,000 --> 00:07:20,320
से पहले कि आप जो है इसमें अपना विवेक मत खोइएगा। अब भाई सामने

105
00:07:20,320 --> 00:07:24,400
वाला मेरी आस्था पर वार कर रहा है। मुझे भी हिट होता है ना। मेरी आस्था पर कोई

106
00:07:24,400 --> 00:07:28,560
वार करता है। तो उसको कब तक टोलरेट करना है? दूसरी बात हम दूसरे के दरवाजे

107
00:07:28,560 --> 00:07:32,560
पर खड़े हुए हैं। जब दूसरे के दरवाजे पर खड़े हैं और

108
00:07:32,560 --> 00:07:36,640
वहां पर गरमा गर्मी हो रही है। इस प्रकार का वातावरण निर्मित हो

109
00:07:36,640 --> 00:07:40,640
रहा है कि सामने दिखाई दे रहा है कि सामने वाला हमारी मान्यता पर हमारी

110
00:07:40,640 --> 00:07:44,880
आस्थाओं पर प्रहार शुरू कर दिया है करना और अगर हमने कुछ धीरे-धीरे इधर

111
00:07:44,880 --> 00:07:49,040
से रेप्लिकेशंस चालू किए तो हो सकता है कि वो इससे आगे भी

112
00:07:49,040 --> 00:07:50,160
बढ़े

113
00:07:50,160 --> 00:07:54,160
तो आगे बढ़ने में क्या होगा कि हम आपके दरवाजे पर खड़े हैं तो आप जो करना हो

114
00:07:54,160 --> 00:07:58,160
वो कर लो हमारे साथ। मतलब वहां पर बेइज्जत होना। इसीलिए दूसरे

115
00:07:58,160 --> 00:08:02,160
के यहां जाने में दिक्कत होती है। कोई न्यूट्रल चैनल होता है ना तो वहां पर

116
00:08:02,160 --> 00:08:06,160
एक होता है कि भाई जैसे इस वाले इस वाले कहां मिले थे? भले ही

117
00:08:06,160 --> 00:08:10,160
वो तादाद में ज्यादा थे मगर वो एक न्यूट्रल जगह थी। पब्लिक प्रॉपर्टी

118
00:08:10,160 --> 00:08:14,160
थी। भिड़ गए वहां पर। मगर जब किसी के और के प्रांगण में बैठे। यह

119
00:08:14,160 --> 00:08:18,320
भी उनका प्रांगण ही तो था कि उनके यहां थे। अब वह बोल रहे हैं चाहे तो

120
00:08:18,320 --> 00:08:22,640
आगे चलकर के म्यूट भी कर सकते हैं। मुझे नहीं लगता करते

121
00:08:22,640 --> 00:08:26,720
कि क्योंकि उनका टेक्निकल हैंड उतना नहीं था सही था। मगर पीछे जो टीम खड़ी थी वो

122
00:08:26,720 --> 00:08:30,800
कर सकती थी। तो आगे चलकर के जब ये गरमागरर्मी होने लगी तुमने पाप लिख

123
00:08:30,800 --> 00:08:34,960
रखा है ये है वो है। तो पहली बात तो यह थी कि वहां बेइज्जत होने के लिए रुकना था

124
00:08:34,960 --> 00:08:39,120
क्या? जब व्यक्तिगत कटाक्ष की मनाई थी तो फिर चालू क्यों

125
00:08:39,120 --> 00:08:43,840
हुए? जब यह घोषणा करनी थी कि तर्क नहीं है हमारे पास

126
00:08:43,840 --> 00:08:47,920
तो बिना यह घोषणा किए हुए प्रमाण पर कूदे क्यों

127
00:08:47,920 --> 00:08:51,920
और इसके साथ ही साथ विषयंतर के लिए मनाही थी शर्त

128
00:08:51,920 --> 00:08:55,920
में फिर भी उन्होंने विषयंतर किया अंतत मुझे यह भी रहा कि

129
00:08:55,920 --> 00:09:00,960
अगर मैं हॉट टॉक करूंगा तो पता नहीं उम्र वाला मामला है कुछ का कुछ

130
00:09:00,960 --> 00:09:05,040
अजीब सा कुछ हो जाए तो इससे अच्छा है कि हमारी चीजें हो गई है। हमने

131
00:09:05,040 --> 00:09:05,540
अपने

132
00:09:05,200 --> 00:09:09,360
अवतार को सिद्ध कर लिया है। उनके पास ना तर्क थे ना प्रमाण अवतार

133
00:09:09,360 --> 00:09:13,840
निषेध करने के लिए है ना उसमें भी फस गए ना प्रकट होता है

134
00:09:13,840 --> 00:09:18,400
प्रमाण में लिखा है प्रकट होता है और आज तक मुझे लगता है

135
00:09:18,400 --> 00:09:22,640
कि आर्य समाजी अवतार को समझ ही नहीं पाए हैं कि हम अवतार कह कैसे रहे हैं उनका मतलब

136
00:09:22,640 --> 00:09:26,640
उनको मतलब लगता है अवतार का मतलब वही है कि जो जो राम कृष्ण आदि

137
00:09:26,640 --> 00:09:30,640
के रूप में दिखाई दे पहले इसको समझ लो अवतार का मतलब है

138
00:09:30,640 --> 00:09:34,720
जो भगवान का जो व्यवहार में ना आ सकने वाला रूप है सच्चिदानंद

139
00:09:34,720 --> 00:09:38,880
स्वरूप वो अगर किसी भी प्रकार से व्यवहार में आने लगेगा तो

140
00:09:38,880 --> 00:09:42,880
यह उसका अवतार ही हमारे यहां मान्य जरूरी नहीं है कि वह

141
00:09:42,880 --> 00:09:46,960
एक मनुष्य की आकृति में ही दिखे तभी उसे अवतार कहा जाए। तो भगवान

142
00:09:46,960 --> 00:09:50,960
तो कहने का मतलब यह है कि भगवान जब अप्रकट हैं

143
00:09:50,960 --> 00:09:55,040
तो वो अगर कहीं भी किसी भी प्रकार से प्रकट हो रहे हैं। उनके या तो यह

144
00:09:55,040 --> 00:09:59,040
मान लो कि उनका स्वरूप शाश्वत नहीं है। यह मानेंगे तो उनकी ईश्वरता

145
00:09:59,040 --> 00:10:03,040
भंग हो जाएगी। और या फिर यह मानना पड़ेगा कि उनका जो स्वरूप है वह वैसा का

146
00:10:03,040 --> 00:10:07,120
वैसा ही है। उन्होंने एक और रूप धारण किया है। वह अवतार उसी को हम अवतार कहते

147
00:10:07,120 --> 00:10:11,280
हैं। तो यह कभी इस अच्छा मैंने एक चीज और सोची थी

148
00:10:11,280 --> 00:10:15,360
कि अ क्या कहते हैं यह

149
00:10:15,360 --> 00:10:19,360
चर्चा थोड़ी अभी वहां तक आएगी। अगर वो इसमें ना जाते ना कि आप कुतर्क कर रहे हो

150
00:10:19,360 --> 00:10:20,240
प्रमाण दो।

151
00:10:20,240 --> 00:10:24,400
भाई वो मुझे लगता था मैं किसी साइंस से जुड़े हुए बंदे के पास गया हूं तो आज जो है धक्के

152
00:10:24,400 --> 00:10:28,400
का उत्तर मिलेगा। कुल मिला के बात यह थी बल और फोर्स वाली बात

153
00:10:28,400 --> 00:10:32,640
क्योंकि यह सब बातों में तो मैंने खूब रगड़ रखा है पहले आर्य समाजियों को बहुत सारे आर्य

154
00:10:32,640 --> 00:10:36,640
समाजी आए हैं और उसमें वो लोग जो है

155
00:10:36,640 --> 00:10:40,640
उधर से छींटा कसी करते तो उसमें खूब कई बार मैंने जो है

156
00:10:40,640 --> 00:10:45,360
इन चीजों को लेकर के उनको निरुत्तर किया है और कई जो सम्मानित

157
00:10:45,360 --> 00:10:49,440
लोग हैं आर्य समाज के उनसे भी चर्चाएं हुई हैं। ठीक अच्छी पर्सनालिटीज हैं।

158
00:10:49,440 --> 00:10:53,680
उनसे भी चर्चा हुई है और इन विषयों में उन वह

159
00:10:53,680 --> 00:10:57,840
भी निरुत्तर ही सिद्ध हुए हैं। वह मौन उनका दिखाई दिया। तो मैं सोच रहा था कि

160
00:10:57,840 --> 00:11:01,520
जब यह यहां पर आएंगे कि भाई जो सब

161
00:11:01,520 --> 00:11:05,120
जगह है वो एक जगह कैसे आ सकता है? अपने स्वरूप विरुद्ध कार्य कैसे कर सकता है?

162
00:11:05,120 --> 00:11:09,440
तो मैंने जो जो ये काउंटर किए थे ना स्वरूप विरुद्ध वाले मामले में व्यवहार वगैरह

163
00:11:09,440 --> 00:11:13,440
वाला तो उसमें वो मौन रहे। तो वो बात आने और उस वो बातें

164
00:11:13,440 --> 00:11:17,440
मैं अपनी ओर से लाना चाह रहा था। तो उससे पहले उन्होंने वो ट्रैक बदल

165
00:11:17,440 --> 00:11:21,440
दिया भाई प्रमाण दो प्रमाण में फिर जो है तुम्हारा शरण का इसलिए नहीं माना जाएगा क्योंकि उसमें

166
00:11:21,440 --> 00:11:25,680
बलि है तो भाई ठीक है नहीं माना जाएगा तो किसी राह चलते

167
00:11:25,680 --> 00:11:29,920
को मान लेंगे जाकिर नायक का मान लेंगे किसी का भी मान लेंगे कुछ आधार

168
00:11:29,920 --> 00:11:34,080
होगा ना योगिक है अर्थ योग बहुत सारे अर्थ निकलते

169
00:11:34,080 --> 00:11:40,080
हैं तो प्रामाणिकता को तो ले चलना पड़ेगा ना

170
00:11:44,160 --> 00:11:48,320
चलिए ठीक खैर कल की चर्चा

171
00:11:48,320 --> 00:11:52,800
बहुत प्रेरणादायक है। आप लोग अवश्य देखें उस चर्चा को और वहां पर देखें कि

172
00:11:52,800 --> 00:11:57,040
आर्य समाज के पास सिवाय विषयंतर के और कुछ नहीं है। वो वही

173
00:11:57,040 --> 00:12:01,040
जाएगा कह रहे तुम्हारे यहां तो ये लिखा है। अब या तो उन्हीं के स्तर पर उतर के उनसे

174
00:12:01,040 --> 00:12:05,360
भिड़ जाओ। उसके लिए भी आपके पास अपॉर्चुनिटीज होनी चाहिए। आपके अनुरूप

175
00:12:05,360 --> 00:12:09,920
वातावरण होना चाहिए। तब आप भिड़ोगे। नहीं तो

176
00:12:09,920 --> 00:12:15,920
आप केवल अपने आप को फिर वहां अपमानित करवाने के लिए पहुंचोगे। यह वाली बात आ जाएगी।

177
00:12:16,880 --> 00:12:21,120
[नाक से की जाने वाली आवाज़][गला साफ़ करने की आवाज़]

178
00:12:21,120 --> 00:12:25,760
तो इसीलिए फिर वहां से छोड़ देना उचित समझा। बाकी मेरा काम तो

179
00:12:25,760 --> 00:12:29,920
मुझे जहां तक मुझे याद है कि जो तर्क और प्रमाण

180
00:12:29,920 --> 00:12:33,920
पर भी काफी बात हुई तो कंप्लीट हो गई थी वो। उनके पास अवतार को काटने की

181
00:12:33,920 --> 00:12:38,320
वो नहीं थी। अगर उसका एक सार देखा जाए जो लोग यह कहे कि भाई

182
00:12:38,320 --> 00:12:42,400
आचार्य जी का पक्ष ले तो एक सार अगर देखा जाए आचार्य जी की

183
00:12:42,400 --> 00:12:46,720
ओर से तो क्या सार निकलेगा? कल की चर्चा का कि आर्य समाज अवतार

184
00:12:46,720 --> 00:12:50,880
को इसलिए नहीं मानता क्योंकि आर्य समाज के अनुसार शायण भाष्य में

185
00:12:50,880 --> 00:12:55,600
विकृति है। आर्य समाज अवतार को इसलिए नहीं मानता

186
00:12:55,600 --> 00:12:59,600
क्योंकि आर्य समाज की जानकारी में शायण भाष्य में विकृति है।

187
00:12:59,600 --> 00:13:03,680
यह निष्कर्ष है। है ना? चलिए भाऊ

188
00:13:03,680 --> 00:13:08,720
जी को ले लेते हैं।

189
00:13:08,720 --> 00:13:12,800
जय श्री राम भाऊ जी। जय श्री

190
00:13:12,800 --> 00:13:16,880
राम भैया आवाज नहीं आ रही आपकी मुझे नहीं आ रही

191
00:13:16,880 --> 00:13:21,280
जय श्री राम अच्छा अच्छा मुझे नहीं आ रही शायद आ

192
00:13:21,280 --> 00:13:27,280
रही है की

193
00:13:28,640 --> 00:13:33,760
एक मिनट

194
00:13:33,760 --> 00:13:37,600
हां बोले

195
00:13:37,600 --> 00:13:40,240
बोले

196
00:13:40,240 --> 00:13:46,240
आ रही है आ रही

197
00:13:46,560 --> 00:13:49,890
जी

198
00:13:49,890 --> 00:13:54,080
[गला साफ़ करने की आवाज़] भाजी जी

199
00:13:54,080 --> 00:13:58,160
बोलिए आवाज आ रही है मेरी हां अब आ रही है पहले

200
00:13:58,160 --> 00:14:02,720
रुक गई थी थोड़ी मुझे नहीं आ रही अब आप बोल रहे हो तो एक तो यार ये

201
00:14:02,720 --> 00:14:06,320
मुझे आता ही नहीं चलाना

202
00:14:06,320 --> 00:14:12,320
पता नहीं क्यों नहीं इसका भी सीख लो भाई

203
00:14:13,360 --> 00:14:19,360
सॉरी एक काम करते हैं वो लगा

204
00:14:36,800 --> 00:14:42,800
कैसे

205
00:14:48,400 --> 00:14:52,000
हम अब बोलिए

206
00:14:52,000 --> 00:14:56,800
जी मैं पहले रामपाल से जुड़ा हुआ था

207
00:14:56,800 --> 00:15:01,280
तो मैं इसके बारे में बताना चाहता हूं कि वो लोगों को कैसे पागल बनाता है।

208
00:15:01,280 --> 00:15:05,360
पहले तो मैं अपना वो परिचय दे देता हूं कि मैं इसका मतलब भक्त था

209
00:15:05,360 --> 00:15:09,360
या नहीं था वो भी बता देता हूं पहले मैं वो नाम दान का जो पत्र

210
00:15:09,360 --> 00:15:15,360
होता है वॉल्यूम बढ़वा एक मिनट इसका वॉल्यूम बढ़वा

211
00:15:15,360 --> 00:15:21,360
इसका वॉल्यूम

212
00:15:57,440 --> 00:16:02,480
आपके पीछे पंखा चल रहा है क्या कोई जी

213
00:16:02,480 --> 00:16:06,560
हां थोड़ा उससे आवाज आ रही है बंद कर क्या

214
00:16:06,560 --> 00:16:10,880
गर्मी लगेगी आपको रहने दीजिए बोलिए

215
00:16:10,880 --> 00:16:15,040
तो मैं पहले वो नाम दान का पत्र बता देता हूं कि उनको विश्वास हो जाएगा

216
00:16:15,040 --> 00:16:20,960
कि पहले इसका भक्त था मैं। जी जी

217
00:16:20,960 --> 00:16:25,680
आप अपने फोन को अगर ऐसे रख लेंगे तो ज्यादा अच्छी पिक्चर क्वालिटी आ जाएगी शायद।

218
00:16:25,680 --> 00:16:31,680
जी

219
00:16:40,850 --> 00:16:43,040
[गला साफ़ करने की आवाज़]

220
00:16:43,040 --> 00:16:47,280
बाकी

221
00:16:47,280 --> 00:16:51,440
कल जो चर्चा हुई है उसमें बहुत सारे नियमों का उल्लंघन तो हुआ ही है जो पूर्व

222
00:16:51,440 --> 00:16:55,520
में सुनिश्चित किए गए थे। उस पर जो है एक

223
00:16:55,520 --> 00:17:00,160
विस्तृत समीक्षात्मक वीडियो एक लाइव के द्वारा हम लोग करेंगे।

224
00:17:00,160 --> 00:17:06,160
इसमें शार्पली हर बात पर बात की जाएगी।

225
00:17:11,120 --> 00:17:17,120
जी

226
00:17:18,480 --> 00:17:24,480
आप ये मुझे भेज दीजिए फोटो लेकर के मैं यहां स्क्रीन पर दिखवा दूंगा इसको।

227
00:17:25,680 --> 00:17:31,680
ठीक है?

228
00:18:18,960 --> 00:18:24,960
पहाड़ी जी आप जुड़ना चाहे तो जुड़ सकते हैं। शायद आप देख रहे हैं।

229
00:18:45,360 --> 00:18:51,360
अच्छा वो

230
00:18:56,080 --> 00:19:00,370
ऊपर वाली नहीं सामने वाली

231
00:19:00,370 --> 00:19:06,370
[गला साफ़ करने की आवाज़][खांसने की आवाज़]

232
00:19:29,280 --> 00:19:34,960
अंबेडकर रिडल्स ऐसा है

233
00:19:34,960 --> 00:19:39,040
देखिए व्यवहारिक और वैचारिक में अंतर है।

234
00:19:39,040 --> 00:19:43,200
ये वाली बात मैंने परसों बताई थी। कुछ लोग कहते हैं उनसे प्रश्न क्यों नहीं करते? उनसे

235
00:19:43,200 --> 00:19:48,000
प्रश्न क्यों नहीं करते? वैचारिक और व्यवहारिक में अंतर है।

236
00:19:48,000 --> 00:19:52,720
जो संघर्ष है कहीं पर वैचारिक है और कहीं पर व्यवहारिक है।

237
00:19:52,720 --> 00:19:56,880
बस इतना ही कहा है। थोड़ा कहा है ज्यादा समझ ले और ऐसा नहीं

238
00:19:56,880 --> 00:20:00,960
है कि सामने से कोई मिल जाएगा और हमारी जानकारी में दिख जाएगा तो छोड़

239
00:20:00,960 --> 00:20:05,040
देंगे। अगर इस अभियान के बारे में जानना हो तो अभी एक दो

240
00:20:05,040 --> 00:20:11,040
दिन पहले जो अग्निव्रत जी पर हमने एक लाइव की थी उनके वीडियो को लेकर के

241
00:20:13,840 --> 00:20:18,400
जी शास्त्रवाद जी जय श्री राम

242
00:20:18,400 --> 00:20:22,880
जय श्री राम भैया जय श्री राम इसमें

243
00:20:22,880 --> 00:20:26,880
ये जो कमेंट आया है इससे मुझे एक बात याद आई

244
00:20:26,880 --> 00:20:31,120
कि हो सकता है वर्तमान में कई सारे आर्य समाजी ये कह रहे होंगे

245
00:20:31,120 --> 00:20:35,200
कि भाई तुम भाग क्यों गए? हालांकि मेरे पास अपने तार्किक बहुत

246
00:20:35,200 --> 00:20:39,520
सारे बिल्कुल परफेक्ट आंसर्स हैं कि

247
00:20:39,520 --> 00:20:43,520
वहां से मैंने वहां से क्यों हटा? पर अगर

248
00:20:43,520 --> 00:20:47,760
दुर्जनोष न्याय से मान भी लिया जाए। मैं दुर्जनंतोष न्याय क्यों रखता हूं? जिससे

249
00:20:47,760 --> 00:20:51,760
कि जो बात चल रही है वो पूरी हो जाए। बार-बार दुर्जंतोष

250
00:20:51,760 --> 00:20:55,760
न्याय रखने की आवश्यकता क्या है? जैसे माया पे हटाया। मैंने कहा अभी आप

251
00:20:55,760 --> 00:20:59,760
माया पे मत लो। नहीं तो ये चैप्टर छूट जाएगा। ऐसे ही बलि

252
00:20:59,760 --> 00:21:03,760
को लाएंगे बलि का उत्तर दूंगा फिर सिंहिनी प्रकरण आएगा फिर चैप्टर छूटते

253
00:21:03,760 --> 00:21:07,920
छूटते बस वो पन्ने पलटते रहेंगे आंसर निष्कर्ष कुछ नहीं आना है और

254
00:21:07,920 --> 00:21:12,160
उसमें एक गरमा गर्मी होगी उस गरमा गर्मी को आप झेलते रहो टोलरेट करते रहो

255
00:21:12,160 --> 00:21:16,160
चले गए तो भाग भाग भाग्य मगर मान लिया

256
00:21:16,160 --> 00:21:20,240
जाए कि मैं वहां से उनके अनुसार जो वो मान रहे हैं वही सही

257
00:21:20,240 --> 00:21:24,480
फिर मैंने प्रश्न छोड़ दिया है तुम्हारे

258
00:21:24,480 --> 00:21:28,560
गुर्दे के अंदर तुम्हारे हृदय के अंदर

259
00:21:28,560 --> 00:21:29,060
जो भी

260
00:21:28,880 --> 00:21:33,040
आर्य समाजी देखें तुम्हारे जितने कुतर्क

261
00:21:33,040 --> 00:21:37,280
हैं अवतार को काटने के संबंध में उन सब पर मैंने

262
00:21:37,280 --> 00:21:41,440
बहुत अकाट उत्तर वहां दिए उसी वीडियो में तुम केवल एक चीज ये

263
00:21:41,440 --> 00:21:45,600
लेकर के हार गया हो सकता है कि तुम्हारी मान्यता में जो तुम सोच

264
00:21:45,600 --> 00:21:49,600
रहे हो शिवा शिवाश नारायण द्विवेदी हार गया पर उन

265
00:21:49,600 --> 00:21:54,400
क्वेश्चंस का जवाब मिला वो जो अकाट

266
00:21:54,400 --> 00:21:58,480
पक्ष प्रस्तुत किए गए थे उनका जवाब मिला संतुष्टि जनक

267
00:21:58,480 --> 00:22:02,880
बात यह है मैं किस स्थिति में वहां से हटा क्यों हटा

268
00:22:02,880 --> 00:22:06,880
वो बहुत सारी रीजनिंग हो सकती है उस एक अपनी चर्चा अलग से हो सकती है और इसमें तुम

269
00:22:06,880 --> 00:22:10,880
जीवन भर बिता देना खुश हो के कि जिसने हमसे सवाल किया था वो वहां

270
00:22:10,880 --> 00:22:15,120
से चला गया और हमारे लोग ये कहेंगे कि कोई नहीं गया हमारे लोगों ने समीक्षा

271
00:22:15,120 --> 00:22:19,120
वो चर्चा देखी है तो तुम ये करते रहना मगर कभी इस पर ध्यान

272
00:22:19,120 --> 00:22:23,120
मत देना कि जो क्वेश्चन शिवश नारायण द्विवेदी उठा रहा है उनका आंसर

273
00:22:23,120 --> 00:22:27,440
क्या है आर्य समाज के पास इस पर भी तो ध्यान

274
00:22:27,440 --> 00:22:31,440
लो कि आचार्य जी इस पर तो उसने पूछा था कि जो ईश्वर

275
00:22:31,440 --> 00:22:35,520
निर्वस्त्र स्त्रियों को देख रहा है निराकार रूप से वही ईश्वर जब प्रकट हो जाएगा तो उस

276
00:22:35,520 --> 00:22:39,840
पाप क्यों लग जाएगा? अच्छा जीव का साधन है।

277
00:22:39,840 --> 00:22:43,840
जीव का साधन है शरीर इसलिए जीव जो है प्रभावित होता है।

278
00:22:43,840 --> 00:22:44,340
यदि

279
00:22:44,240 --> 00:22:48,240
शरीर मैला होगा तो उसके लिए प्रयत्नशील होता है। तो भैया वही तो

280
00:22:48,240 --> 00:22:52,560
हम भी कह रहे हैं कि ईश्वर का साधन नहीं है शरीर तो

281
00:22:52,560 --> 00:22:56,800
फिर क्यों वो प्रयत्नशील होगा उसकी शुद्धि के लिए और क्यों तो उसमें दोष आएगा

282
00:22:56,800 --> 00:23:01,440
ही। ये सारे सवाल है जो मैं तुम्हारे जहन में छोड़ आया हूं।

283
00:23:01,440 --> 00:23:05,440
अपना आत्मवलोकन करो। खुशी मनाओ। खुशी मनाओ जो जो

284
00:23:05,440 --> 00:23:07,920
भी तुम्हें

285
00:23:07,920 --> 00:23:12,080
क्या कहते हैं जो तुम्हें अपनी ढोल की पोल वाली खुशी

286
00:23:12,080 --> 00:23:16,160
बनानी है वह बनाओ पर आत्मवलोकन भी तो करो कि उन सवालों का

287
00:23:16,160 --> 00:23:22,160
उत्तर क्या है? तुम्हें लगता है कि मेरे पास जो वो

288
00:23:22,160 --> 00:23:26,160
परंपरा के विषय में पूछ रहे हैं। आज से दो तीन साल पहले जो तुम्हारा ऋषि

289
00:23:26,160 --> 00:23:30,160
उवा पूछ चुका है वही सवाल कि गड पादाचार्य से लेकर के व्यास के

290
00:23:30,160 --> 00:23:34,880
बीच की वो श्रंखला उसमें क्या है? अकाट उत्तर दे दिया था तब से मौन है आज तक

291
00:23:34,880 --> 00:23:39,040
यहां वहां औरों से पूछते नजर आते हैं कि शायद इसको ना पता हो तो इसको चुप करा

292
00:23:39,040 --> 00:23:43,120
लूंगा ठीक है उसी बात पर जब चर्चा कर लोगे

293
00:23:43,120 --> 00:23:47,760
कि हमारी पर पहले परंपरा मानो तो

294
00:23:47,760 --> 00:23:51,920
भाई तुम हमसे पूछ रहे हो आज से ढाई हजार साल पहले से पहले का हम

295
00:23:51,920 --> 00:23:57,920
तुमसे पूछ रहे हैं कि तुम बस अभी जो है उनसे पहले का बताना शुरू करो

296
00:23:58,160 --> 00:24:02,240
और निर्भर तुम हम पर हो ही ऑलरेडी यह सारी

297
00:24:02,240 --> 00:24:06,400
बातें हैं। भा आ गए हैं। जी भा

298
00:24:06,400 --> 00:24:09,530
जय श्री राम।

299
00:24:09,530 --> 00:24:13,920
[गला साफ़ करने की आवाज़] जय श्री राम। आपने मुझे वो कैमरे में थोड़ी प्रॉब्लम है।

300
00:24:13,920 --> 00:24:16,480
आप कैमरा

301
00:24:16,480 --> 00:24:20,560
मैं आपका वो जो परिचय पत्र है रामपाल गैंग वाला

302
00:24:20,560 --> 00:24:25,680
वो उनको पहुंचा दे रहा हूं। अपने ऑपरेटर को वो शो कर। ऑपरेटर

303
00:24:25,680 --> 00:24:30,080
जी मैं आपको इनका परिचय पत्र आधार कार्ड दे रहा हूं। रामपाल

304
00:24:30,080 --> 00:24:34,240
गैंग के द्वारा जो बनवाया गया है। आप प्लीज उसको जो है

305
00:24:34,240 --> 00:24:40,240
कृपा करके यहां प्रदर्शित कर दीजिए सार्वजनिक रूप से।

306
00:24:51,280 --> 00:24:55,760
जो कुछ खबरें आ रही है वो ये है कि जो

307
00:24:55,760 --> 00:25:00,240
जो वो है ना छोटे प्यादे वो तो खुशी मना रहे हैं दीपावली

308
00:25:00,240 --> 00:25:04,240
मना रहे हैं मगर जो वरिष्ठ लोग हैं वो वो ये

309
00:25:04,240 --> 00:25:10,240
चर्चा कर रहे हैं कि भाई इस आंधी को रोका कैसे जाए

310
00:25:10,640 --> 00:25:14,880
जी भैया बिल्कुल और इस कार्य में वो बिल्कुल ऐसा सफल है

311
00:25:14,880 --> 00:25:18,960
अब तक वो रोक नहीं पाएंगे है

312
00:25:18,960 --> 00:25:23,280
ना और ऐसे ही सच्चाई सबके सामने आते रहेगी

313
00:25:23,280 --> 00:25:29,280
अरे एक कुछ हमारे प्रश्न कितने मांगो

314
00:25:34,080 --> 00:25:38,160
शास्त्र जी आप अभी रिमूव हो गए थे शास्त्र

315
00:25:38,160 --> 00:25:44,160
जी भाजी जी आप म्यूट कर रहे अभी फिलहाल अभी

316
00:25:44,560 --> 00:25:49,920
आपके पीछे से आवाज आ रही है काफी

317
00:25:49,920 --> 00:25:55,920
स्थिर स्थिर हो जाइए थोड़ा सा

318
00:25:58,320 --> 00:26:03,040
जी आप अपनी बात बोले तब तक वो प्रदर्शित होगा

319
00:26:03,040 --> 00:26:07,440
शास्त्र जी आप कुछ कह रहे थे जी आवाज आवाज हां भैया

320
00:26:07,440 --> 00:26:11,440
वो यही कह रहे थे कि वो रोक नहीं पाएंगे और कल हम कल

321
00:26:11,440 --> 00:26:15,600
जो आपके के प्रश्न थे वो बहुत साधारण से थे। उन साधारण प्रश्नों

322
00:26:15,600 --> 00:26:19,760
में भी वो कितनी बार प्रश्नों से भागे हैं। कितनी बार

323
00:26:19,760 --> 00:26:24,000
विषयंतर करने का प्रयास किए हैं और ये सभी देखे होंगे।

324
00:26:24,000 --> 00:26:28,400
सभी दर्शक देखे होंगे पर अंतिम में तो वो पर्सनल अटैक पर आ ही गए थे।

325
00:26:28,400 --> 00:26:32,560
है ना? इसलिए जो भी व्यक्ति ये कह रहे हैं कि शिवश भैया वहां से क्यों

326
00:26:32,560 --> 00:26:36,800
हटे? क्यों भाग गए? इस तरह के जो प्रश्न कर रहे हैं।

327
00:26:36,800 --> 00:26:40,800
तो पहले ही समझ ले भाई नियम क्या था? नियम

328
00:26:40,800 --> 00:26:45,200
जो था उसके अनुरूप भैया ने व्यवहार किया वहां से हट गए। ठीक है?

329
00:26:45,200 --> 00:26:49,440
तो भैया का यहां पर कोई दोष नहीं है। अगर दोष है तो उनका है जो जिन्होंने पर्सनल

330
00:26:49,440 --> 00:26:53,520
अटैक किया। लास्ट में उन्होंने जो परंपरा पर प्रश्न उठाया

331
00:26:53,520 --> 00:26:57,680
था ना कि गॉड पादाचार्य से पहले वो सीधे आप वहां

332
00:26:57,680 --> 00:27:01,760
कैसे पहुंच गए व्यास पे? तो मैं जब उस प्रश्न पर भी आंसर

333
00:27:01,760 --> 00:27:05,760
देने लगा तो वह तुरंत बोले नहीं नहीं आप इसका बताओ परंपरा का अर्थ है इसकी बात मतलब

334
00:27:05,760 --> 00:27:10,320
वह जो कुछ अपना बना के लाए थे कि भाई अगर ये ये परंपरा पूछेगा

335
00:27:10,320 --> 00:27:14,320
तो मैं यह पूछूंगा कि ये अर्थ ये जो ये बलि

336
00:27:14,320 --> 00:27:18,480
वाला अर्थ क्या है तो खुद ही तो पहले प्रश्न पूछ रहे हो कि गॉड पादाचार्य

337
00:27:18,480 --> 00:27:23,120
से लेकर के व्यास के बीच की बात का गैप का क्या है वह मामला सुलझाओ

338
00:27:23,120 --> 00:27:27,200
फिर खुद ही रोक रहे हो क्योंकि आपको ऐसा आभास है कि यह कुछ ऐसा

339
00:27:27,200 --> 00:27:32,080
उत्तर दे देगा कि मेरे पास फिर उत्तर नहीं होगा। इसलिए

340
00:27:32,080 --> 00:27:36,160
केवल आपको विषयंतर करके ही बचना बचने का एक उपाय था। पूरी चर्चा

341
00:27:36,160 --> 00:27:40,240
आप देख लो। उसमें लास्ट में उनके पास वही है एक कि भाई आर्य

342
00:27:40,240 --> 00:27:44,320
समाज के अनुसार ईश्वर अवतार इसलिए नहीं ले सकता कि

343
00:27:44,320 --> 00:27:48,320
परंपरा प्राप्त साय आचार्य ने उनके अनुसार वेद भाष्य

344
00:27:48,320 --> 00:27:52,400
में कुछ गलतियां की हैं। ठीक है? यही सिद्धांत है

345
00:27:52,400 --> 00:27:56,560
आर्य समाज का। बिल्कुल बिल्कुल। गलती का

346
00:27:56,560 --> 00:28:00,720
आधार मतलब गलती कैसे पता है आपको क्या है क्या कारण है

347
00:28:00,720 --> 00:28:04,640
मतलब उसका जब आप प्रश्न करते हैं तो वहां से हट जाते हैं वो

348
00:28:04,640 --> 00:28:08,640
वो भी वो भी जो है वो उसी संबंध में नहीं है कि अवतार के विषय में ही

349
00:28:08,640 --> 00:28:12,800
गलती की उन्होंने ये भी नहीं है किसी और प्रकरण में उन्होंने

350
00:28:12,800 --> 00:28:17,520
गलती कर रखी है इसलिए हम ये मानते हैं कि ईश्वर अवतार नहीं ले सकता

351
00:28:17,520 --> 00:28:22,800
ये है पूरा ताना बाना खैर

352
00:28:22,800 --> 00:28:26,800
मैं देख राम रामपाल एंड

353
00:28:26,800 --> 00:28:30,960
गैंग आ चुका है यहां पर। जी आप अपनी

354
00:28:30,960 --> 00:28:35,040
बात बोले ऑपरेटर जी इनकी वो इनका परिचय पत्र

355
00:28:35,040 --> 00:28:39,200
दिखा दीजिए थोड़ा सा। हां जी हां ये इनका परिचय

356
00:28:39,200 --> 00:28:43,440
पत्र आ गया है। और रामपाल गैंग थोड़ा बड़ा

357
00:28:43,440 --> 00:28:46,880
कर पाएंगे इसको क्या?

358
00:28:46,880 --> 00:28:51,200
इन्होंने अपना जो ओरिजिनल नाम है वह मिटाया हुआ है और

359
00:28:51,200 --> 00:28:55,520
यह कबीर परमेश्वर भक्ति ट्रस्ट सतलोक आश्रम टोहाना

360
00:28:55,520 --> 00:28:59,520
रोड बरवाला जिला हिसार ये इनका परिचय पत्र

361
00:28:59,520 --> 00:29:04,000
है इसमें इनकी वो भी है स्लिप वो कुछ नंबर वंबर होता है कुछ

362
00:29:04,000 --> 00:29:08,880
और परीक्षा लेने वाले के हस्ताक्षर जयबंदी छोड़ दी [हंसी]

363
00:29:08,880 --> 00:29:14,400
इनका एक अलग कॉमेडी चीख चला करता है पूरा खैर

364
00:29:14,400 --> 00:29:18,400
जी अब आप अपनी बात बोले मुख्य विषय जी

365
00:29:18,400 --> 00:29:20,640
भैया

366
00:29:20,640 --> 00:29:24,720
इसमें क्या होता है कि जो छोटे हो या बड़े हो सभी को मतलब

367
00:29:24,720 --> 00:29:28,720
डायरेक्ट जो सामान्य प्रश्न होता है कि आप किसको मानते हो फिर अपन बताते हैं कि

368
00:29:28,720 --> 00:29:32,880
हम जैसे ब्रह्मा विष्णु महेश राम भगवान इनको मानते हैं तो बोलते

369
00:29:32,880 --> 00:29:37,680
हैं कि यह क्या भगवान की परिभाषा क्या है फिर अपन बोलते की वह तो अजर

370
00:29:37,680 --> 00:29:41,680
है तो फिर वह बोलते की यह देखो यहा पर लिखा हुआ है कि तुम्हारे भगवान की तो

371
00:29:41,680 --> 00:29:46,320
जन्म मृत्यु हो रही तो यह भगवान हुए कहां से और

372
00:29:46,320 --> 00:29:50,720
जो ये आविर्भाव और तिरो भाव जो शब्द है तो इसमें क्या है कि यह

373
00:29:50,720 --> 00:29:54,880
मतलब सामान्य बोलचाल में प्रयोग होते भी नहीं है ये शब्द तो किसी को मालूम

374
00:29:54,880 --> 00:29:58,880
कैसे चलेगा कि ये शब्द का ये अर्थ है तो

375
00:29:58,880 --> 00:30:02,960
इस वजह से भी पागल बन जाते हैं और मैं तो मेरा

376
00:30:02,960 --> 00:30:07,120
क्या हुआ था कि जैसे मेरे पिताजी बचपन मतलब मैं जो बचपन से

377
00:30:07,120 --> 00:30:11,200
देख रहा हूं तो मेरे लिए तो मेरे पिताजी श्रेष्ठ है जो वो करेंगे तो वह

378
00:30:11,200 --> 00:30:15,280
भी उचित है मेरे लिए तो फिर मैंने इनसे मतलब ये साधारण

379
00:30:15,280 --> 00:30:19,280
प्रश्न पूछे थे वहां पे जब ढूंढने गया था तो इन्होंने यह जवाब

380
00:30:19,280 --> 00:30:23,440
दे दिए। मुझे लगा यह सही बता रहे। फिर इन्होंने वो जो नाम दीक्षा

381
00:30:23,440 --> 00:30:27,440
का जो मंत्र देते हैं वो भी जपने के लिए बोला था। बोला

382
00:30:27,440 --> 00:30:31,440
ये लाइन से करना। मतलब इसका जो क्रम होता है उसी क्रम से करना है।

383
00:30:31,440 --> 00:30:35,520
बाकी आपको लाभ नहीं होंगे। फिर जो मंत्र का भी

384
00:30:35,520 --> 00:30:36,020
बताता

385
00:30:35,920 --> 00:30:40,000
हूं। उसमें वो ओम जो मंत्र दिया हुआ है फर्स्ट वाले का तो

386
00:30:40,000 --> 00:30:44,160
उसमें जो ओम मंत्र है इनके अनुसार वो ब्रह्मा जी का है लेकिन गीता जी में तो बताया

387
00:30:44,160 --> 00:30:48,240
हुआ है कि ओम काल का मंत्र है तो वो वहां पर ब्रह्मा

388
00:30:48,240 --> 00:30:52,640
जी का हुआ कहां से इनके इनके इनके अनुसार इनके

389
00:30:52,640 --> 00:30:56,960
अनुसार काल का मंत्र इनके अनुसार मतलब वो ब्रह्मा

390
00:30:56,960 --> 00:31:02,960
जी का भी है और काल का भी है दोनों हो रहा है दोनों कैसे होगा

391
00:31:03,520 --> 00:31:07,680
और वहां पे क्या कहते हैं कि ये सबको को अगर किसी

392
00:31:07,680 --> 00:31:11,680
को अपनी ओर बुलाना है तो आकर्षित करना पड़ेगा। तो इनके आश्रम में लेके

393
00:31:11,680 --> 00:31:15,680
जाते हैं। पहले तो अपने किराए देके भी ले चले जाते किसी को और

394
00:31:15,680 --> 00:31:19,920
वहां पे क्या है कि मतलब सुविधा इतनी बारीकी से करते

395
00:31:19,920 --> 00:31:24,000
किसी के भी लिए जैसे नहाने तक की साबुन के पैसे नहीं लेते हैं। तो इससे क्या होता है

396
00:31:24,000 --> 00:31:28,000
कि ये लोगों को बहलाते हैं कि देखो भगवान के यहां पर हर चीज निशुल्क

397
00:31:28,000 --> 00:31:32,240
है। तुम्हारे वहां पर जाओ तो पैसे लेंगे तुमसे। और जो नया

398
00:31:32,240 --> 00:31:36,320
नया होता है उससे तो आप आप करके बात करते हैं और

399
00:31:36,320 --> 00:31:40,800
वहां पर साथ में रखते हैं। मतलब पहले तो लोगों को पूरा वो भ्रमित

400
00:31:40,800 --> 00:31:45,120
कर देते हैं और वहां पे इकट्ठे लोग हो जाते हैं। फिर वो इनका

401
00:31:45,120 --> 00:31:49,200
वो झूठी डिबेट आती है ना उसमें बोलते हैं कि हां हम तो मतलब

402
00:31:49,200 --> 00:31:51,280
जगत है ये भगत है।

403
00:31:51,280 --> 00:31:57,280
तो पूरा घेरा बनाकर बैठ जाते हैं। फिर वो लोगों को पागल करते हैं।

404
00:31:59,170 --> 00:32:03,680
[खांसने की आवाज़][गला साफ़ करने की आवाज़] सुन रहा हूं। सुन रहा हूं। आपकी बात सुन रहा हूं। पानी पी रहा था। जी

405
00:32:03,680 --> 00:32:07,760
तो तो मैंने अभी एक एक दो दिन पहले ही लाइव में बताया था कि

406
00:32:07,760 --> 00:32:12,240
किस तरीके से जो

407
00:32:12,240 --> 00:32:16,560
मूल रूप से जो हिंदू सनातन परंपरा के जो लोग हैं उनसे

408
00:32:16,560 --> 00:32:21,520
उनके भाइयों को छीन छीन करके कैसे ग्रुपिज्म में बांटा जा रहा है।

409
00:32:21,520 --> 00:32:26,560
एक है वह ब्रह्मा कुमारी वाले बताएंगे अपने आप को कि हम

410
00:32:26,560 --> 00:32:31,440
यह कुछ उनका है। फर्स्ट लेवल का ज्ञान

411
00:32:31,440 --> 00:32:35,520
सेकंड लेवल का उनका मतलब ज्ञान में एक उन्होंने वो बना रखा है कई सारे वो

412
00:32:35,520 --> 00:32:39,600
हैं स्टेजेस तो वो ज्ञान के नाम से

413
00:32:39,600 --> 00:32:43,840
अपने ग्रुप बना रखे हैं ब्रह्मा कुमारी वालों ने इस वालों ने तो बना ही रखे हैं

414
00:32:43,840 --> 00:32:48,000
अभक्त और वो भक्त हैं डिवोटीज और

415
00:32:48,000 --> 00:32:52,080
नॉन डिवोटीज आर आर समाजियों ने इस तरह से बनाया है कि

416
00:32:52,080 --> 00:32:56,800
हम वैदिक हैं या हम आर्य है और यह सारे पौराणिक है

417
00:32:56,800 --> 00:32:59,760
और

418
00:32:59,760 --> 00:33:03,840
रामपालियों ने वही भगत और जगत है ना

419
00:33:03,840 --> 00:33:08,000
इस तरह से भाई को भाई से अलग किया गया है जी बोलिए ये एक

420
00:33:08,000 --> 00:33:12,000
लेवल और ऊपर जाते मतलब लोगों को मतलब अपने यहां पे जोड़ने के लिए क्या करते

421
00:33:12,000 --> 00:33:16,000
हैं जैसे अपन जहां पे इनका आश्रम है ठीक

422
00:33:16,000 --> 00:33:20,080
है तो उससे दूर जो रेलवे स्टेशन या बस स्टेशन होता है वहां पे भी

423
00:33:20,080 --> 00:33:24,160
इनकी गाड़ियां लगी हुई होती है मतलब पूरा वो दिखाने की करते हैं कि ये भगवान

424
00:33:24,160 --> 00:33:28,160
और भगवान आपको कभी भी दुख नहीं देगा आपको मतलब यहां से ले जाने तक

425
00:33:28,160 --> 00:33:32,240
की सुविधा दे रहे हो और वापस आते समय भी भोजन देते हैं तो जिससे इनको

426
00:33:32,240 --> 00:33:36,320
वो हो जाता है कि भाई हमें कुछ खर्चा करने ही नहीं है इनके यहां पे जाएंगे तो और

427
00:33:36,320 --> 00:33:40,400
वहां से आराम से रहो लेकिन वहां पर क्या जैसे ये नाम उपदेश देते

428
00:33:40,400 --> 00:33:44,640
हैं इनको तो वो पाठ प्रकाश के नाम से पैसे ले लेते हैं

429
00:33:44,640 --> 00:33:50,640
और बोलते हैं कि हम पैसे नहीं लेते किसी भी चीज का अच्छा

430
00:33:51,440 --> 00:33:56,400
जब प्रश्न पूछ पैसे ले लेते हैं हां

431
00:33:56,400 --> 00:33:58,880
अच्छा

432
00:33:58,880 --> 00:34:03,040
और इसको क्या बोलते हैं? फिर कैसे कुछ उतारचाव

433
00:34:03,040 --> 00:34:07,280
थोड़ा सा वह बताइए। कैसे क्या हुआ आपके जीवन में? आगे

434
00:34:07,280 --> 00:34:11,600
कैसे बढ़े कोई घटना हुई हो तो वो बताइए।

435
00:34:11,600 --> 00:34:14,880
वो मतलब मैं राजीव दीक्षित जी का नाम सुना होगा आपने।

436
00:34:14,880 --> 00:34:18,960
तो हम हम तो मतलब मैं

437
00:34:18,960 --> 00:34:22,960
पहले पिच ज्यादा था तो उन भैया ने मुझे राजीव दीक्षित जी के बारे में बताया

438
00:34:22,960 --> 00:34:27,120
था। तो मैं उनकी वीडियो देखने लगा तो उसमें वो बता रहे थे कि

439
00:34:27,120 --> 00:34:31,120
हमारे जो ऋषि मुनि थे भारत के तो बहुत श्रेष्ठ व्यक्ति

440
00:34:31,120 --> 00:34:35,280
थे उनको मतलब सारा ज्ञान था तो फिर मेरे मन में ये प्रश्न रहने लगा

441
00:34:35,280 --> 00:34:39,360
रामपाल को मानता था उसके ऊपर विश्वास था लेकिन मन में प्रश्न रहने लगा

442
00:34:39,360 --> 00:34:43,600
कि हमारे जो इतनी बड़ी-बड़ी खोज कर रखी है इतना सारा है

443
00:34:43,600 --> 00:34:47,600
तो वो मतलब इस छोटी सी चीज को कैसे नहीं समझ पाए ये बोल रहे

444
00:34:47,600 --> 00:34:51,680
हैं रामपाल वाले मतलब इतना सा मतलब ये शब्द बता

445
00:34:51,680 --> 00:34:55,680
रहे शब्द का ज्ञान तो इनको पहले से ही था तो ये समझ कैसे नहीं पाए मतलब यह

446
00:34:55,680 --> 00:34:59,680
प्रश्न बहुत चुकता था अंदर और सहयोग से मतलब जुलनी एकादशी के

447
00:34:59,680 --> 00:35:05,120
दिन आपकी वीडियो मेरे सामने आ गई थी YouTube पे आज से दो साल पहले

448
00:35:05,120 --> 00:35:09,360
मतलब वो जो राजीव दीक्षित जी के पुराने वीडियोस

449
00:35:09,360 --> 00:35:13,440
आप देख रहे होंगे और उसी क्रम में ये सब आपके मन में सवाल चले और फिर

450
00:35:13,440 --> 00:35:17,440
हमारी कोई वीडियो आपने देखी हां दो साल पहले आपका

451
00:35:17,440 --> 00:35:22,720
वीडियो देखा था मैंने तो आपका वीडियो जैसे ही देखा

452
00:35:22,720 --> 00:35:26,960
तो वापस मैंने सोचा कि अब इसके मतलब इनके प्रश्न

453
00:35:26,960 --> 00:35:30,000
का जवाब देना पड़ेगा। मतलब उस समय आपके

454
00:35:30,000 --> 00:35:34,000
प्रति मेरे मन में द्वेष भाव नहीं थी। लेकिन फिर

455
00:35:34,000 --> 00:35:38,400
वो फैक्ट बाय अभिषेक है ना तो इनका क्या है कि वापस भोलीभाली

456
00:35:38,400 --> 00:35:42,720
जनता को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए वापस झूठी बात बोलते ही है।

457
00:35:42,720 --> 00:35:46,800
वो मतलब एक एक के साथ में वो दिखाने लग जाएंगे जिससे वो उसको

458
00:35:46,800 --> 00:35:50,800
ध्यान नहीं रहेगा कि इन लोगों ने क्या-क्या बताया। तो वापस मैं मुझे

459
00:35:50,800 --> 00:35:54,960
लगा कि नहीं मतलब शिवश नारायण द्विवेदी जी नाम का कोई आदमी है वो तो झूठ

460
00:35:54,960 --> 00:35:59,200
बोलता है। फिर मैंने सोचा कुछ समझ ही नहीं आ रहा है।

461
00:35:59,200 --> 00:36:03,360
मतलब हमारा पहला आपने वीडियो देखा फिर उसका खंडन देखा फैक्ट बाय अभिषेक

462
00:36:03,360 --> 00:36:07,440
के द्वारा और फिर आपके मन में दोबारा से जो हमारे प्रति

463
00:36:07,440 --> 00:36:12,640
जो है वो भावना आ गई कि ये तो झूठा है। जी ऐसा

464
00:36:12,640 --> 00:36:16,640
मतलब चार पांच वीडियो तक ऐसा चलता रहा। हमारा कौन

465
00:36:16,640 --> 00:36:21,200
सा वीडियो देखा था आपने? हमारा सबसे पहले कौन सा वीडियो देखा था आपने?

466
00:36:21,200 --> 00:36:25,680
वो पहले वाले में जो आप बताते हो ना कि ये बोलते हैं ये कवि

467
00:36:25,680 --> 00:36:29,760
कवियों का कवि गणपति है। वेद से बताते हो

468
00:36:29,760 --> 00:36:34,000
आप उसमें वो वाला देखा था। फिर वो धीरे-धीरे

469
00:36:34,000 --> 00:36:38,000
आपका वो चैनल वो पूरा चेक किया तो उसमें ये लाइव वो भी

470
00:36:38,000 --> 00:36:40,160
देखी।

471
00:36:40,160 --> 00:36:44,240
हम फिर मैंने सोचा पूरा पता ही नहीं चल रहा है क्या हो रहा है तो फिर

472
00:36:44,240 --> 00:36:45,040
गीता तो मेरे

473
00:36:45,040 --> 00:36:49,120
घर पर पहले से ही पढ़ी थी गीता प्रेस गोरखपुर वाली तो उसको पढ़ा

474
00:36:49,120 --> 00:36:53,120
पूरा क्रम से फिर थोड़ा बहुत समझ में आया क्योंकि अब तो आपको सबको

475
00:36:53,120 --> 00:36:57,280
मालूम है कि बहुत गहरी चीज है तो पता चलेगा कैसे पहली बार में ही

476
00:36:57,280 --> 00:37:02,240
कितनी भी बार पढ़ेंगे तो भी पता चलेगा नहीं लेकिन धीरे-धीरे थोड़े वो

477
00:37:02,240 --> 00:37:06,320
समझने की कोशिश की और मैं संस्कृत साहित्य का

478
00:37:06,320 --> 00:37:10,640
स्टूडेंट भी हूं तो उस वजह से मालूम है थोड़े व्याकरण के नियम

479
00:37:10,640 --> 00:37:14,800
फिर वह जो ये नियम लागू करते हैं अनुतम वाला ब्रज वाला

480
00:37:14,800 --> 00:37:19,040
वो सारे मैंने वो खोजना शुरू किया फिर आपने बताया और

481
00:37:19,040 --> 00:37:23,120
जो वो सर्वशक्तिमान ईश्वर वाली बात है मेन वो

482
00:37:23,120 --> 00:37:27,360
मतलब रामपाल से छोड़ने में मदद की थी जब आप और गोविंद

483
00:37:27,360 --> 00:37:31,360
गुरुकुल जी इनको वो फोटो फोटो दिखाते थे ना वो कबीर वाली के

484
00:37:31,360 --> 00:37:35,680
यही भगवान है कि आपका तो उस समय मुझे समझ में नहीं आ रहा था लेकिन

485
00:37:35,680 --> 00:37:40,240
आप लोग हंसते थे इनके ऊपर और जब ये

486
00:37:40,240 --> 00:37:44,400
क्या बोलते हैं इसको मतलब आप बार-बार फोटो दिखाते थे लेकिन उस समय

487
00:37:44,400 --> 00:37:48,560
मुझे पता नहीं चल रहा था कि आप हंस क्यों रहे हो आप दोनों फिर धीरे धीरे धीरे

488
00:37:48,560 --> 00:37:52,720
वो समझ में आने लगा लगभग पांच छ महीने लगे भाई ये फोटो क्यों दिखा रहे हैं फिर

489
00:37:52,720 --> 00:37:57,680
पता चला कि वो साकार निराकार वो सर्वशक्तिमान कैसे सिद्ध करेंगे

490
00:37:57,680 --> 00:38:00,160
भाई जो ये चेहरा बन रहा है इसके पास जो जगह

491
00:38:00,160 --> 00:38:04,240
खाली है इस कारण से आपने उसको वो फोटो दिखाया लेकिन अभी

492
00:38:04,240 --> 00:38:09,600
तक भी यह जो लोग हैं वो समझ नहीं पा रहे हैं

493
00:38:09,600 --> 00:38:13,760
चलिए हमारे जो यह सर्वशक्तिमान वाला प्रश्न

494
00:38:13,760 --> 00:38:18,000
है इसके कारण यह कह सकते हैं कि रामपाल के गिरोह से आप

495
00:38:18,000 --> 00:38:22,480
वापस आए सर्वशक्तिमान वाला प्रश्न ऐसा है जो

496
00:38:22,480 --> 00:38:25,600
है ना जी

497
00:38:25,600 --> 00:38:29,760
बाकी तो क्या है कि शास्त्र में जैसे वो दिखाएंगे कुछ लाइन आगे पीछे करेंगे

498
00:38:29,760 --> 00:38:33,920
तो उससे वो वापस वो संभावना रहती है किसी के भी

499
00:38:33,920 --> 00:38:38,480
हम और लेकिन अगर किसी को भी निकलना

500
00:38:38,480 --> 00:38:42,640
ये चीजें ऐसी जो कभी नहीं बदलेंग चाहे कुछ भी कर लो

501
00:38:42,640 --> 00:38:47,840
सर्वशक्तिमान परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत

502
00:38:47,840 --> 00:38:52,480
और पुराण में भी भैया वो ध्यान रखने की बात ये है कि जैसे

503
00:38:52,480 --> 00:38:56,480
वो जन्म मृत्यु वाला दिखाते ब्रह सब पुराण में जो ये

504
00:38:56,480 --> 00:39:00,800
बात चल रही होती है उसमें ज्यादातर ब्रह्मा जी बता रहे होते हैं कि ये ये चीज हुई

505
00:39:00,800 --> 00:39:05,040
ठीक है और जो देवी भागवत में भी बता रहे कि ब्रह्मा विष्णु महेश की

506
00:39:05,040 --> 00:39:09,120
जन्म और मृत्यु होती है वो वो वाली बात भी ब्रह्मा जी बता रहे हैं। तो

507
00:39:09,120 --> 00:39:13,120
मैंने पढ़ी थी वो पहले भागवत पुराण तो उसमें ब्रह्मा जी को पहले से ही मालूम

508
00:39:13,120 --> 00:39:15,200
था कि हमारा जन्म मृत्यु होता है

509
00:39:15,200 --> 00:39:19,920
तो वो भगवान शिव को और विष्णु को क्यों बोल रहे कि आप तो अजर अमर हो सर्वशक्तिमान

510
00:39:19,920 --> 00:39:24,720
हो या तो ब्रह्मा जी झूठ बोल रहे हैं।

511
00:39:24,720 --> 00:39:28,800
तो ब्रह्मा जी की बात को भी माना साथ में। नहीं तो यह

512
00:39:28,800 --> 00:39:32,960
लोग मान लेते कि ब्रह्मा जी झूठ बोल रहे हैं। अब बात यह आती है ब्रह्मा जी अगर झूठ बोल रहे तो फिर

513
00:39:32,960 --> 00:39:36,960
उनकी वाणी के द्वारा आप यह क्यों मान रहे हो कि उनकी जन्म मृत्यु होती

514
00:39:36,960 --> 00:39:41,200
है। अगर ब्रह्मा जी झूठ बोल रहे हैं तो उनकी वाणी

515
00:39:41,200 --> 00:39:45,360
दिखा के क्यों सिद्ध कर रहे हो कि शिव जी की जन्म मृत्यु होती है।

516
00:39:45,360 --> 00:39:49,520
मतलब तुम्हारा जहां पर काम निकलेगा तुम्हारे मन की बात होगी। वही वाली बात

517
00:39:49,520 --> 00:39:53,520
जैसे अभी आर्य समाज उनहीं की तो उपज है। रामपाल पहले

518
00:39:53,520 --> 00:39:56,480
आर्य समाज था।

519
00:39:56,480 --> 00:40:02,400
है ना? तो वही आर समाज वाली बात हो गई ना कि

520
00:40:02,400 --> 00:40:06,480
क्या कहते हैं? जितना हमारे मन का

521
00:40:06,480 --> 00:40:10,960
होगा वो हम वैसा लेंगे। बाकी कह देंगे झूठ है, प्रक्षिप्त है या विकृत

522
00:40:10,960 --> 00:40:14,960
है। तो धर्म शास्त्र के हिसाब से

523
00:40:14,960 --> 00:40:19,200
हम नहीं चलेंगे। हमारे हिसाब से धर्म शास्त्र के अर्थ चलेंगे। ये

524
00:40:19,200 --> 00:40:23,360
है ना? और इसमें और आपने अगर

525
00:40:23,360 --> 00:40:27,440
वो एस न्यूज़ पर सनातन पूजा के पतन की कहानी देखी हो लगभग एक साल

526
00:40:27,440 --> 00:40:30,400
पहले तो रामपाल के लिए भी वो

527
00:40:30,400 --> 00:40:34,640
ये जो हमारे धर्म शास्त्र है वो प्रमाणित नहीं है

528
00:40:34,640 --> 00:40:38,720
क्योंकि उसने भी लगभग 20034 में यह ग्रंथ पढ़े थे तो

529
00:40:38,720 --> 00:40:43,120
उसको यह मिला कि नहीं हिंदू धर्म शास्त्र में भी मेरी वाली बात ही है

530
00:40:43,120 --> 00:40:47,680
तो इसके लिए ये ग्रंथ सत्यापित करने का कोई तरीका नहीं है रामपाल

531
00:40:47,680 --> 00:40:51,760
के पास परंपरा परंपरा हां क्योंकि क्योंकि मैंने वो वीडियो देखा

532
00:40:51,760 --> 00:40:55,760
था उसमें वो बोल रहा था कि मुझे यह ज्ञान हो चुका था लेकिन

533
00:40:55,760 --> 00:40:59,760
लगभग 20034 में मैंने ग्रंथ पढ़े तो उसमें भी ये चीजें मिली तो

534
00:40:59,760 --> 00:41:03,360
फिर मैंने ग्रंथ से दिखाना शुरू किया

535
00:41:03,360 --> 00:41:06,720
वो मिलेगा उसमें

536
00:41:06,720 --> 00:41:10,720
यानी कि तीनों ही सवाल अपने काम आते हैं। एक सर्वशक्तिमान ईश्वर

537
00:41:10,720 --> 00:41:14,880
परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत एक व्यक्ति बहुत ही अभद्रता

538
00:41:14,880 --> 00:41:18,960
के साथ कमेंट कर रहा है।

539
00:41:18,960 --> 00:41:23,040
डिबेट के लिए बोल रहा है। भाई अगर चेहरा लेकर के आ सकते हो तो अभी थोड़ी बहुत देर में लिंक

540
00:41:23,040 --> 00:41:27,520
दिया जाएगा। आप आ जाना चेहरे के साथ आना और बदतमीजी

541
00:41:27,520 --> 00:41:31,520
के उद्देश्य से मत आना। ठीक है? क्योंकि किसी

542
00:41:31,520 --> 00:41:36,160
को कभी हम छेड़ते नहीं और कोई हमें छेड़ दे तो छोड़ते नहीं।

543
00:41:36,160 --> 00:41:39,200
ठीक है?

544
00:41:39,200 --> 00:41:43,600
ये ये व्यक्ति कह रहा है मुझसे ज्ञान चर्चा करेगा। हां भाई कर लेंगे तुझसे। आजा

545
00:41:43,600 --> 00:41:47,600
बाबा को ले आजा तू स्वयं आजा। वैसे तेरे बाबा

546
00:41:47,600 --> 00:41:51,760
को दे रखी है चुनौती तेरे बाबा ने कह तो दिया जो कूलर साथ में ले

547
00:41:51,760 --> 00:41:55,920
चलता है जो उसको कह तो दिया उसने कह तो दिया कि हम चैनल का इंतजाम

548
00:41:55,920 --> 00:41:59,920
करेंगे मुझे लगता नहीं है कि वो जो है कुछ साहस रखता है

549
00:41:59,920 --> 00:42:04,000
जो सामने आएगा वो डरपोक जैसा है डरपोक बन करके एक बिल में

550
00:42:04,000 --> 00:42:08,160
ही बैठा रहेगा वही उसकी सेहत के लिए अच्छा भी है मालूम पड़ा

551
00:42:08,160 --> 00:42:12,160
एक जगह अभी मैं गया था वहां पर जो भीड़ इतना क्रोधित हो रही थी दुर्गा माता के बारे में

552
00:42:12,160 --> 00:42:16,240
देख के मैंने खुद वीडियो देखा इसकी फोटो नीचे नीचे डाल के

553
00:42:16,240 --> 00:42:20,320
इसकी किताबों पर चप्पल, जूते, मालाएं चढ़ाई जा रही है।

554
00:42:20,320 --> 00:42:24,640
अब यह व्यक्ति अगर कहीं सार्वजनिक रूप से इस तरह से आएगा जहां इसका गढ़

555
00:42:24,640 --> 00:42:28,640
है, जहां इसके लोग हैं, जहां इसका वातावरण है, वहां तक तो

556
00:42:28,640 --> 00:42:32,640
ठीक है। मगर ये स्वतंत्र हो के अगर कहीं आने जाने लग जाए, कहीं

557
00:42:32,640 --> 00:42:34,080
पहुंच जाए तो इसकी

558
00:42:34,080 --> 00:42:37,440
कुटाई हो जाएगी।

559
00:42:37,440 --> 00:42:41,440
है ना? जी और जब

560
00:42:41,440 --> 00:42:45,520
जब मेरे मन में जैसे यह प्रश्न आने लगे तो मैंने पूछा भाई शंका

561
00:42:45,520 --> 00:42:49,600
नहीं थी रामपाल के ऊपर मुझे विश्वास था क्योंकि उसको मानता था लेकिन

562
00:42:49,600 --> 00:42:53,840
जैसे प्रश्न किया तो वो बोलते हैं कि आपको सत्संग देखने की जरूरत

563
00:42:53,840 --> 00:42:58,240
है। आप अभी पूर्ण भक्त नहीं हो। आपको देखना पड़ेगा।

564
00:42:58,240 --> 00:43:02,320
फिर मैंने देख लिया सारे सत्संग लगभग लगभग क्योंकि लगभग एक घंटे का होता

565
00:43:02,320 --> 00:43:06,320
है और मेरे पास 10थ क्लास से ही फोन आ गया था तो मैं देखने लग गया था

566
00:43:06,320 --> 00:43:10,480
और अभी मैं सेकंड ईयर में हूं लगभग चार साल हो गए तो इसमें लगभग लगभग

567
00:43:10,480 --> 00:43:14,720
सारे देख लिए तो भी वो उसमें जवाब नहीं मिला फिर पूछा तो बोले

568
00:43:14,720 --> 00:43:18,960
आप शंका कर रहे हो आपका नाम खंडित है

569
00:43:18,960 --> 00:43:23,040
फिर डराया जाने लगा कि आप अभी आपको पुनरु उपदेश लेना

570
00:43:23,040 --> 00:43:26,960
पड़ेगा

571
00:43:26,960 --> 00:43:30,960
तो फिर एक एक जने को मैंने पूछा तो उसने बोला कि मेरे को मालूम नहीं है

572
00:43:30,960 --> 00:43:35,280
आप वाले प्रश्न पूछे तो फिर मैं उदयपुर गया था इनका वो सेंटर है वहां पे

573
00:43:35,280 --> 00:43:39,280
तो वहां से भी मैंने बात की थी वो 2003 से जुड़ा हुआ है पांडी

574
00:43:39,280 --> 00:43:43,600
जी के ऊपर ये पांडी जी के चैनल पे उसकी वो वीडियो पड़ी है रिकॉर्डिंग की

575
00:43:43,600 --> 00:43:47,680
पांडी जी ने तो वो बोल रहा है कि आप सही हो मैंने बोला मैं तो सही

576
00:43:47,680 --> 00:43:51,680
हूं इसीलिए तो आपके पास आया आप सही कैसे हो वो बताओ वो बोल रहा है कि अब कभी

577
00:43:51,680 --> 00:43:55,840
आना वापस बात करेंगे तो लेकिन उसने जवाब ही नहीं दिया और मैं

578
00:43:55,840 --> 00:43:59,840
भी आपको वीडियो भेज रहा हूं इसके आश्रम में भी गया था वापस प्रश्न पूछने के

579
00:43:59,840 --> 00:44:04,480
लिए। वीडियो भेज भेज दीजिए। भेज दीजिए।

580
00:44:04,480 --> 00:44:10,000
एक बड़ा अच्छा कमेंट वो शक्ल तो अभी तो मेरी दिख रही है।

581
00:44:10,000 --> 00:44:15,920
हां हां भेज दो आप भेज दो। ये अच्छा कमेंट

582
00:44:15,920 --> 00:44:20,000
इसमें शक्ल मेरी दिख रही है। एक मिनट ये जो

583
00:44:20,000 --> 00:44:24,720
तीन पॉइंट है किस तरह से किसी भी धर्म प्रेमी की रक्षा करते हैं।

584
00:44:24,720 --> 00:44:28,800
अगर कहीं से भी चूक जाओगे कहीं कुछ लिखा पढ़ा नहीं

585
00:44:28,800 --> 00:44:32,800
पता है क्या है क्या नहीं नहीं पता है मगर यहां तीन चीजें पकड़ लो

586
00:44:32,800 --> 00:44:36,880
बस सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म

587
00:44:36,880 --> 00:44:40,880
तीन चीजें पकड़े रहोगे कहीं कोई भी आपको आपके धर्म

588
00:44:40,880 --> 00:44:45,440
से नहीं कर सकता कहीं कोई आपको बहका नहीं सकता

589
00:44:45,440 --> 00:44:49,600
और देखो यह व्यक्ति क्या है देखो इसकी चीजें ये इसके बाबा ने सिखाया है क्या

590
00:44:49,600 --> 00:44:53,680
सिखाया है कि न्यूज़ चैनल पर क्यों नहीं

591
00:44:53,680 --> 00:44:57,680
गया अबे न्यूज़ न्यूज़ चैनल पे बुला तो सही तब तो जाएंगे। पागल हो

592
00:44:57,680 --> 00:45:01,760
गया है क्या? न्यूज़ चैनल पे उड़ जाऊं घर से हवा

593
00:45:01,760 --> 00:45:05,920
में चला जाऊं। कहीं न्यूज़ चैनल से फोन आए भाई हम ये फलाने न्यूज़

594
00:45:05,920 --> 00:45:09,920
चैनल वाले बोल रहे हैं। आ जाओ यहां तब तो हम जाए भी। अच्छा

595
00:45:09,920 --> 00:45:13,920
दूसरी बात ये अभी कह रहा था पहले कि मुझसे मुझसे करेगा चर्चा

596
00:45:13,920 --> 00:45:17,920
तो चर्चा करने के लिए बोल दिया तो अब कह रहा है कि नहीं तू नहीं

597
00:45:17,920 --> 00:45:23,840
अपने उसको भेज इसको भेज। और ये

598
00:45:23,840 --> 00:45:27,840
यह कबीर कबीर जर्नी वाले अपने बाबा जी

599
00:45:27,840 --> 00:45:32,160
के बारे में बता रहे हैं कि उसके

600
00:45:32,160 --> 00:45:36,560
भेज दिया मैंने आपको वीडियो उसके बाबा जी पांच साल से क्या कर रहे थे

601
00:45:36,560 --> 00:45:42,560
उसका बाबा पांच साल से कुत्ते की तरह क्या लिखा है [हंसी]

602
00:45:43,760 --> 00:45:48,000
देखो अब तक देखो इसको हाइड

603
00:45:48,000 --> 00:45:54,000
कर दीजिए भाई ऑपरेटर जी इसको हाइड कर दीजिए मैं आपको इनका वीडियो भेज रहा हूं

604
00:45:56,880 --> 00:46:00,960
अच्छा स्पैम करोगे तो फिर ब्लॉक मतलब इनको स्पैम मत

605
00:46:00,960 --> 00:46:05,200
करो। इनको विश्वास हो जाएगा कि जी हां बोलिए।

606
00:46:05,200 --> 00:46:09,280
एक ही मैसेज बार-बार भेज रहे हैं।

607
00:46:09,280 --> 00:46:13,600
अबे बेवकूफ वो रिकॉर्डिंग सुना न्यूज़ चैनल पर बुलाने

608
00:46:13,600 --> 00:46:17,600
वाली कि न्यूज़ चैनल पर आ जाओ। और ऐसे न्यूज़ चैनल कौन सा न्यूज़ चैनल

609
00:46:17,600 --> 00:46:22,240
है भाई? तुम्हारा सतलोक आश्रम का चैनल है वो। न्यूज़ चैनल है कोई?

610
00:46:22,240 --> 00:46:27,040
पगले कहीं के तो तुम्हारे बाबा जी बताते रहते हो तुम लोग खुश हो जाते हो

611
00:46:27,040 --> 00:46:31,120
न्यूज़ चैनल है अपना खुद का एक खोल

612
00:46:31,120 --> 00:46:35,280
लो न्यूज़ चैनल नाम से चैनल मैं भी खोल लेता हूं कल न्यूज़

613
00:46:35,280 --> 00:46:38,880
चैनल नाम से उसके ऊपर केस किया हुआ

614
00:46:38,880 --> 00:46:42,960
है ऐसे न्यूज़ पर एफआईआर में नाम है उसका रोहित का जो

615
00:46:42,960 --> 00:46:46,960
भी नाम है उसका रोहित है कि कुछ और नाम हां जी आपने भेज

616
00:46:46,960 --> 00:46:49,200
दिया

617
00:46:49,200 --> 00:46:53,360
हां वो वीडियो बताना इसलिए जरूरी कि यह लोग समझेंगे कि क्योंकि यह

618
00:46:53,360 --> 00:46:57,440
तो नाटक करते हैं कि उसमें कि वो जगत लोग भी अब इनके भगत बन

619
00:46:57,440 --> 00:47:01,520
चुके हैं क्योंकि होते तो इन्हीं के लोग हैं। तो अभी ये देखेंगे कि मैं आपका ही आदमी

620
00:47:01,520 --> 00:47:05,920
हूं। मैंने कभी रामपाल को माना नहीं है। इसलिए वो वीडियो भेजने की जरूरत है।

621
00:47:05,920 --> 00:47:10,000
आप वो दिखा दीजिए इसमें। एक मिनट मैं ऑपरेटर को भेज

622
00:47:10,000 --> 00:47:12,880
दूं।

623
00:47:12,880 --> 00:47:17,280
वो बता रहे तब तक एक वो मतलब बताता हूं। मैंने सोचा था

624
00:47:17,280 --> 00:47:21,360
क्योंकि इसको मानते हैं जब तक क्या है कि विवेक शक्ति

625
00:47:21,360 --> 00:47:26,400
खत्म हो जाती है सोचने विचारने की तो अगर

626
00:47:26,400 --> 00:47:30,640
वो मतलब सबको मतलब अपनी ओर आकर्षित

627
00:47:30,640 --> 00:47:34,880
करने के लिए मेन जो ये उदाहरण देते हैं ना गीता का श्लोक का 18 अध्याय का

628
00:47:34,880 --> 00:47:38,880
62वा श्लोक उस परमेश्वर की शरण में शाश्वत पर

629
00:47:38,880 --> 00:47:44,880
सनातन परमधाम को प्राप्त होगा

630
00:47:45,840 --> 00:47:51,840
आगे तो उसमें क्या है कि जो शाश्वत शब्द दिया हो

631
00:47:54,640 --> 00:47:58,640
वहां पे जो शाश्वत शब्द आया है तो उसका अर्थ मतलब चलो

632
00:47:58,640 --> 00:48:02,800
ये अगर ये आदि और अंत नहीं मानेंगे तो भी वो उसको अविनाशी तो मानेंगे

633
00:48:02,800 --> 00:48:07,360
ना कि सतलोक अविनाशी लोक है

634
00:48:07,360 --> 00:48:12,320
हम तो उसमें ये हो रहा है कि ये जो काल के

635
00:48:12,320 --> 00:48:17,760
हां सतलोक काल जो 21 ब्रह

636
00:48:17,760 --> 00:48:22,880
इनके अनुसार तो अविनाशी है सतलोक

637
00:48:22,880 --> 00:48:26,960
नहीं है तो उसमें होता क्या है कि जो काल के इनके

638
00:48:26,960 --> 00:48:30,880
द्वारा एक लोक और माना गया है

639
00:48:30,880 --> 00:48:34,880
कुछ अमय है पता नहीं एक लोक और है अनामी लोक ऐसे करके

640
00:48:34,880 --> 00:48:39,840
उस लोक से आकर के सत का निर्माण होता

641
00:48:39,840 --> 00:48:44,960
अरे है वो नहीं अविनाशी तो मानते हैं ना सत सतलोक को ही है।

642
00:48:44,960 --> 00:48:49,120
मानते हैं मगर उसमें जब पढ़ते हैं जाकर के तो वो अनामी से आके

643
00:48:49,120 --> 00:48:53,040
सतलोक को निर्माण बताया गया है।

644
00:48:53,040 --> 00:48:57,040
ऐसा है कुछ वो नहीं सतलोक को

645
00:48:57,040 --> 00:49:03,040
लेकर के भी ध्यानलेबाजी है। और ये कह रहे हैं कि

646
00:49:03,200 --> 00:49:07,280
कोई एक पता नहीं क्या है। ठीक है। चलो हां तो धाम

647
00:49:07,280 --> 00:49:11,360
उसका शिष्य भेजो का और एक व्यक्ति कह रहा है कि

648
00:49:11,360 --> 00:49:16,080
आपके शंकराचार्य को हमारे गुरु जी ने वो किया है चैलेंज

649
00:49:16,080 --> 00:49:20,160
कौन है तेरा गुरु जेल से छूटा अपराधी 10 साल से जेल में

650
00:49:20,160 --> 00:49:24,800
था हम क्या काम करके वहां पर रोटी मिलती थी उसको पता भी है

651
00:49:24,800 --> 00:49:28,880
कभी-कभी वहां पर जेल के अंदर लोगों से शौचालय भी

652
00:49:28,880 --> 00:49:32,960
साफ करवाए जाते हैं। किसी को माली बनाया जाता है। किसी से गड्ढा

653
00:49:32,960 --> 00:49:37,520
खुदवाया जाता है। किसी से बैरिक की सफाई करवाई जाती है। काम करना पड़ता है।

654
00:49:37,520 --> 00:49:41,920
वो बाहर निकला होगा तो पता नहीं कितने दिन तक तो उसको नहाना होगा।

655
00:49:41,920 --> 00:49:46,160
तब जाकर के वो जो जेल की जो उसके अंदर भर गई होगी

656
00:49:46,160 --> 00:49:50,160
चीजें वो उससे दूर होंगी। तब शंकराचार्य जैसे पवित्र जो संत होंगे उनके

657
00:49:50,160 --> 00:49:54,800
आसपास वो खड़े होने के योग्य बनेगा। उनकी सभा में जाने के योग्य बनेगा।

658
00:49:54,800 --> 00:49:59,040
और तू कह रहा है चैलेंज। सच [गला साफ़ करने की आवाज़] सच तो यह है कि

659
00:49:59,040 --> 00:50:03,120
पहले मुझे भी मालूम नहीं दूसरी बात कि तो

660
00:50:03,120 --> 00:50:07,120
तेरे तुम्हारे उस छूटे जो आतंकवादी का मुकदमा

661
00:50:07,120 --> 00:50:11,120
चल रहा है उस पर सस्पेक्टेड व्यक्ति उसने शंकराचार्य को चैलेंज किया

662
00:50:11,120 --> 00:50:15,360
हमने भी तो उसे चैलेंज किया है अरे भैया हमने तो उसके खिलाफ मुकदमा कर रखा है कोर्ट

663
00:50:15,360 --> 00:50:18,480
में वो नहीं आया तो एक दिन एक ना एक दिन यहां आना है उसको

664
00:50:18,480 --> 00:50:22,880
लिख के ले लो स्ट पेपर पर मुझे WhatsApp करो भेज दूंगा

665
00:50:22,880 --> 00:50:27,360
वो जो स्ट का खर्चा है वो भेज देना मैं अपना खर्च नहीं करूंगा।

666
00:50:27,360 --> 00:50:31,360
₹1200 स्ट का आएगा लगेगा। उसमें लिख के दे दूंगा कि एक

667
00:50:31,360 --> 00:50:35,440
दिन रामपाल को हाई कोर्ट में आना है। देख लेना वो ऐसे

668
00:50:35,440 --> 00:50:39,440
नहीं आएगा। वो दुबका बैठा रहेगा। हमने दिया है उसको चैलेंज। मगर

669
00:50:39,440 --> 00:50:43,520
वो ऐसे नहीं आएगा ज्ञान चर्चा के लिए। भागेगा। मगर एक दिन यहां कोर्ट में आकर के

670
00:50:43,520 --> 00:50:49,440
उसको जवाब जरूर देना होगा। ये समझ लो। ठीक है?

671
00:50:49,440 --> 00:50:53,520
ठीक है। अब आप अपनी बात बोले। हां। ये वीडियो

672
00:50:53,520 --> 00:50:57,520
आ गया इनका। क्या नाम है? हां

673
00:50:57,520 --> 00:51:01,760
ये वीडियो प्ले सोजत आश्रम का सोजत आश्रम

674
00:51:01,760 --> 00:51:06,240
जी

675
00:51:06,240 --> 00:51:11,120
से सुन रहे हो भगत

676
00:51:11,120 --> 00:51:17,120
जी

677
00:51:33,040 --> 00:51:37,520
जी जी ये सोचा था आश्रम जाकर के आपने जो है

678
00:51:37,520 --> 00:51:40,320
वो बनाया था।

679
00:51:40,320 --> 00:51:44,560
हां तो बात करनी थी उस समय तो मैंने उनको पूछा था

680
00:51:44,560 --> 00:51:48,720
कि वीडियो बना सकते हैं क्या? क्योंकि साथ में कोई था नहीं बाकी वह बना लेता।

681
00:51:48,720 --> 00:51:52,720
लेकिन इन्होंने मना कर दिया। तो फिर वहां पर मैंने पूछा तो वह जवाब नहीं

682
00:51:52,720 --> 00:51:56,720
दिए उन्होंने। यह कह रहा है मेरे गुरु मेहनत

683
00:51:56,720 --> 00:52:01,120
की खाते हैं। क्या मेहनत करते हैं तेरे गुरु? साथ में कूलर

684
00:52:01,120 --> 00:52:04,880
ले डोल रहे हैं।

685
00:52:04,880 --> 00:52:07,840
कूलर

686
00:52:07,840 --> 00:52:11,920
क्या मेहनत कर रहे हैं तेरे गुरु? हां। जेल में जब गए

687
00:52:11,920 --> 00:52:16,320
थे तब जरूर पत्थर तोड़े होंगे। [हंसी] जेल

688
00:52:16,320 --> 00:52:20,880
में जरूर पत्थर तोड़े होंगे। वो मानता हूं। वहां सही है। वहां पर जरूर

689
00:52:20,880 --> 00:52:26,320
वो किया होगा। हां चलिए जी आप बोलिए अब कंटिन्यू

690
00:52:26,320 --> 00:52:30,560
वो ब्लड की कीमत क्या होती है जो रक्तदान जो करते

691
00:52:30,560 --> 00:52:36,240
हैं ना अगर किसी को खरीदना होता है तो उसकी कीमत क्या होगी लगभग

692
00:52:36,240 --> 00:52:40,320
मुझे आईडिया नहीं है इस बारे में। हां तो ये

693
00:52:40,320 --> 00:52:44,880
क्या है कि रक्तदान भी करवाते हैं लोगों से। तो मतलब

694
00:52:44,880 --> 00:52:49,600
मुझे पूरा मालूम नहीं है थोड़ा बहुत दान कर सकते हैं लेकिन

695
00:52:49,600 --> 00:52:53,600
संभावना तो रह सकती है ना कि यह रक्त बेचते हो

696
00:52:53,600 --> 00:52:57,680
लोगों का क्योंकि इनके पास तो फ्री में आ रहा है इनके वहां पर

697
00:52:57,680 --> 00:53:01,680
रक्तदान करवाते हैं और जो यह बोलते हैं कि हमारे आश्रम बन चुके

698
00:53:01,680 --> 00:53:06,000
हैं तो वहां पे केवल जो मटेरियल लगेगा उसी का ही पैसे लगेगा

699
00:53:06,000 --> 00:53:10,400
क्योंकि इनको मजदूर के पैसे देने नहीं है इनके भक्त होते हैं वही

700
00:53:10,400 --> 00:53:14,160
सारा काम करते हैं

701
00:53:14,160 --> 00:53:18,560
और इसमें क्या है कि जब क्या

702
00:53:18,560 --> 00:53:20,080
आप ये वाली मटेरियल

703
00:53:20,080 --> 00:53:24,000
वाली बात दोबारा बता दीजिए।

704
00:53:24,000 --> 00:53:30,000
यह बोलते हैं ना कि हमारे आश्रम बन चुके हैं। इतने

705
00:53:30,240 --> 00:53:33,360
आ रही है आवाज

706
00:53:33,360 --> 00:53:37,440
जी आ रही है। बोलिए आवाज आ रही है? हां ये बोलते हैं

707
00:53:37,440 --> 00:53:41,440
ना हमारे इतने आश्रम बन चुके हैं तो इसमें पैसे पैसे

708
00:53:41,440 --> 00:53:45,520
की इतनी कोई दिक्कत नहीं क्योंकि जो वो जगह होती है वो इनके भक्त

709
00:53:45,520 --> 00:53:49,600
दान कर देते हैं और जो मटेरियल होता है वो भी लगभग लगभग दान में आ जाता

710
00:53:49,600 --> 00:53:53,600
है और जो श्रमदान होता है वो भी इनके भक्त कर देते हैं तो इसमें बड़ी बात

711
00:53:53,600 --> 00:53:57,200
क्या है

712
00:53:57,200 --> 00:54:02,000
वो ये सब बातें कोई मायने ही नहीं है

713
00:54:02,000 --> 00:54:08,000
मतलब इसमें कुछ निष्कर्ष प्राप्त नहीं होना

714
00:54:08,320 --> 00:54:12,880
मतलब मेन यही है कि इससे आश्रम में जाएंगे

715
00:54:12,880 --> 00:54:17,040
तो लोगों से ही मदद लेकर के वहां के कार्य होते हैं। सीधी सी बात है। अब

716
00:54:17,040 --> 00:54:21,040
ये अगर कहते हैं कि आश्रम लेते हैं वो लेते हैं। वो इनकी

717
00:54:21,040 --> 00:54:25,680
इनकी बुद्धि छोटी इसलिए इनका खुद का आश्रम क्या हवा से चल रहा है?

718
00:54:25,680 --> 00:54:29,840
जो भी आश्रम है वहां क्या हवा से हो रहा है। हां वहां पर गोरख धंधे

719
00:54:29,840 --> 00:54:33,920
जरूर कुछ ना कुछ हो सकते हैं। इस बात की संभावना है क्योंकि जिस व्यक्ति के वो

720
00:54:33,920 --> 00:54:37,920
आश्रम है वो व्यक्ति आतंकवादी का उस पर मुकदमा चल रहा है। उसके

721
00:54:37,920 --> 00:54:43,920
पास से अवैध हथियार प्राप्त हुए थे। देशद्रोह का उस पर मुकदमा है। जी

722
00:54:46,640 --> 00:54:50,800
मतलब इसमें क्या है कि मेन तो परिवार में अशांति रहती है। मतलब किसी

723
00:54:50,800 --> 00:54:54,960
के यहां पे जाने से किसी भी कोई भी कार्यक्रम घर में कर भी नहीं सकते। उसके

724
00:54:54,960 --> 00:54:59,040
ऊपर रोग होती है। तो हमारे आसपास के गांव में भी मैंने देखा है जो

725
00:54:59,040 --> 00:55:03,120
मतलब परिवार में झगड़े हो गए। जो मृत्यु होती है उस दिन भी झगड़े हो चुके। मृत्यु

726
00:55:03,120 --> 00:55:07,360
के दिन कोई झगड़ा करता थोड़ी है। किसी के घर में होती है। मतलब भाई

727
00:55:07,360 --> 00:55:11,600
भाई आपस में लड़ गए थे।

728
00:55:11,600 --> 00:55:15,840
लेकिन अभी मैं मतलब आसपास के लोग हैं उनसे बात कर रहा हूं और मैंने

729
00:55:15,840 --> 00:55:20,000
सोचा था कि यह लेकिन अपने हिंदू लोग क्या

730
00:55:20,000 --> 00:55:24,240
है कि बहुत साथ में खड़े होने को तैयार नहीं रहते हैं।

731
00:55:24,240 --> 00:55:28,640
बाकी मैंने बोला था कि इनका जो वो लोग हैं इनका प्रचार करते हैं। उनको

732
00:55:28,640 --> 00:55:32,640
उनके घर पे है सामग्री बुला के रोकते लेकिन तैयार

733
00:55:32,640 --> 00:55:35,680
नहीं हो रहे हैं लोग।

734
00:55:35,680 --> 00:55:41,680
लेकिन मैंने मेरे कुछ दोस्त थे वह भी उनसे बात की।

735
00:55:45,360 --> 00:55:49,440
नहीं वो वो अलग बातें हैं कि करना क्या है धरातल पर क्योंकि

736
00:55:49,440 --> 00:55:55,440
वो स्ट्रेटजी होती है। आप अपनी यात्रा के बारे में बताइए।

737
00:55:58,320 --> 00:56:02,640
सतलोक का डर नहीं है। सतलोक के बादाम, खजूर इत्यादि का जो

738
00:56:02,640 --> 00:56:06,880
निम्न स्तर का लालच होता है। मतलब यह भी है कि एक होता है ना हाई

739
00:56:06,880 --> 00:56:10,880
क्लास का लोभ। तो ये जो सतलोक के नाम पर जो जुड़ते हैं

740
00:56:10,880 --> 00:56:15,360
रामपाल से जो लोग उनकी जो डिमांड्स होती है वो भी बहुत बहुत छिच

741
00:56:15,360 --> 00:56:19,360
स्तर की छचली सी होती है निम्न स्तर की उसके नाम पर जोड़ते हैं वहां

742
00:56:19,360 --> 00:56:23,440
तुम्हें क्या बादाम मिलेगा सेब मिलेगा इस नाम पर इस नाम

743
00:56:23,440 --> 00:56:27,120
पर जोड़ते हैं

744
00:56:27,120 --> 00:56:31,200
और आश्रम पे भी जाना जरूरी है क्योंकि अगर आश्रम पे मतलब

745
00:56:31,200 --> 00:56:36,000
टाइमिंग फिक्स होती है इस टाइमिंग में अगर आप नहीं गए तो आपका नाम खंडित हो जाएगा

746
00:56:36,000 --> 00:56:40,080
क्योंकि आश्रम में जाने से क्या होगा कि लोग हमें मिलेंगे वहां पे तो वापस

747
00:56:40,080 --> 00:56:44,400
वो नहीं बात करेगा झूठ बोलेगा कि मेरे साथ में यह हो चुका था

748
00:56:44,400 --> 00:56:48,480
लेकिन वो हुआ नहीं है और अभी मैं बता दूं आपको कि

749
00:56:48,480 --> 00:56:52,560
मैं भाड़ी जी को भी बोला था लेकिन मेरे पिताजी के

750
00:56:52,560 --> 00:56:56,800
भी वो मतलब पत्री हो चुकी उसका भी कुछ ऑपरेशन कराना पड़ेगा

751
00:56:56,800 --> 00:57:01,280
मेरे पिताजी तो मानते हैं उसको लेकिन अभी मैंने बोला उनको

752
00:57:01,280 --> 00:57:05,280
आपके पत्री है तो फिर वो ऑपरेशन कराने की जरूरत क्यों है क्योंकि ये

753
00:57:05,280 --> 00:57:09,280
तो कैंसर जैसी बीमारी का तो इलाज कर देता है अपने

754
00:57:09,280 --> 00:57:12,960
आप।

755
00:57:12,960 --> 00:57:17,280
मैंने बोला कि चलो इसके मुझे मालूम है कि इसको मारने

756
00:57:17,280 --> 00:57:21,440
से कुछ नहीं होता है। अगर वो ऑपरेशन कराना पड़ेगा इससे बढ़िया

757
00:57:21,440 --> 00:57:25,600
कि मेरी बात झूठी हो जाएगी तो भी चलेगा कि इसकी वजह से वो पत्नी सही हो चुकी है।

758
00:57:25,600 --> 00:57:29,680
लेकिन ऐसा भी कुछ नहीं हुआ अभी। और अब लगभग 10-15

759
00:57:29,680 --> 00:57:33,840
दिन में वह करवाना पड़ेगा। तो पिताजी अभी जुड़े

760
00:57:33,840 --> 00:57:39,040
हुए हैं। जी अच्छा

761
00:57:39,040 --> 00:57:43,040
तो पिताजी को आपत्ति नहीं करेंगे वो इस तरीके से जो विरोध कर रहे हैं

762
00:57:43,040 --> 00:57:46,080
उनके बाबा जी का

763
00:57:46,080 --> 00:57:50,560
नहीं क्यों

764
00:57:50,560 --> 00:57:54,720
हमारे घर में सब स्वतंत्र है जैसे

765
00:57:54,720 --> 00:57:58,720
ये लोग बताते हैं ना उतना वो मतलब कुछ गलत कार्य नहीं करना है

766
00:57:58,720 --> 00:58:04,480
कहने का मतलब स्वतंत्र का मतलब ये

767
00:58:04,480 --> 00:58:08,640
मतलब न्यारे हो जाते हैं ना जो एक राजस्थान में शब्द सुनाया न्यारा हो गया

768
00:58:08,640 --> 00:58:13,520
वो ऐसा नहीं न्यारे हो जाते हैं लड़के बड़े हो जाते हैं तो

769
00:58:13,520 --> 00:58:17,600
भाई वो अपना देख रहा है अपना खर्चावर्चा चला रहा है अपना चूल्हा

770
00:58:17,600 --> 00:58:21,680
उसका अलग हो गया इस तरह से या चूल्हा नहीं भी हुआ तो ज्यादा हस्तक्षेप नहीं

771
00:58:21,680 --> 00:58:25,840
करते एक दूसरे के व्यक्तिगत जीवन ऐसा ही कुछ

772
00:58:25,840 --> 00:58:31,840
है नहीं नहीं

773
00:58:32,560 --> 00:58:36,560
मतलब मैंने उनसे बात की थी हां पढ़ाई कर रहा

774
00:58:36,560 --> 00:58:42,560
हूं मैं। अच्छा मतलब ऐसा नहीं मैंने उनसे आप

775
00:58:42,960 --> 00:58:47,120
मैंने उनसे बात की थी इन सारे प्रश्नों को ले लेकिन उनके पास भी जवाब नहीं

776
00:58:47,120 --> 00:58:51,280
था। तो फिर तो मुझे आना पड़ेगा ना बताने के लिए। उसमें हां

777
00:58:51,280 --> 00:58:55,440
मेन चीज तो बताना भूल गया था कि जो ये काल का डर होता है तो

778
00:58:55,440 --> 00:59:00,480
फिर जब मैं छोड़ रहा था तो मुझे लगा कि ये

779
00:59:00,480 --> 00:59:04,560
क्या बोलते हो इसको? वो काल भटकाता है फिर अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। वैसा तो

780
00:59:04,560 --> 00:59:08,800
नहीं हो रहा मेरे साथ में गई कि भाई ये जो लोग है तो मुझे पागल

781
00:59:08,800 --> 00:59:12,960
बना के वापस अपनी ओर ले जा रहा है काल फिर मतलब मेरा मोक्ष नहीं होगा। मोक्ष

782
00:59:12,960 --> 00:59:17,120
की परिभाषा मालूम ही नहीं है। हालांकि किसी को इन लोगों में अगर मालूम

783
00:59:17,120 --> 00:59:19,840
होती तो जुड़ भी नहीं पाते इनसे।

784
00:59:19,840 --> 00:59:24,080
फिर मतलब मैंने थोड़ा लगभग मुझे साल भर लगा कि इनकी मानसिकता से निकलने

785
00:59:24,080 --> 00:59:28,080
में ये मतलब अलग-अलग बैठाते थे ना मन में कि ये

786
00:59:28,080 --> 00:59:32,320
अलग है भगवान इसकी शक्ति कम है उसकी शक्ति कम है। जब मैं मंदिर

787
00:59:32,320 --> 00:59:36,720
में जाता था अभी इससे छोड़ इसको छोड़ने के बाद में तभी

788
00:59:36,720 --> 00:59:40,880
मेरे मन में आता था कि मैं सही कर रहा हूं या गलत कर रहा हूं। फिर

789
00:59:40,880 --> 00:59:44,960
भाड़ी जी से मैंने बात की तो फिर उन्होंने समझाया उसके बाद में वो धीरे-धीरे एक

790
00:59:44,960 --> 00:59:50,160
ही भाव आने लगा है सभी के प्रति

791
00:59:50,160 --> 00:59:54,240
मतलब डर बहुत बैठाते है कि अगर आप ऐसा करोगे तो ऐसा हो जाएगा। ऐसा होता

792
00:59:54,240 --> 00:59:59,280
है जीवन में जब कभी हम कठिन कार्य करने निकलते हैं ना

793
00:59:59,280 --> 01:00:03,680
तो डर सबके मन में आता है और मेरे

794
01:00:03,680 --> 01:00:07,680
मेरा अपना व्यक्तिगत अनुभव तो ऐसा रहा है कि बहुत सारी ऐसी चीजें आती है कि यह

795
01:00:07,680 --> 01:00:12,160
करना है कि नहीं करना है इससे आगे बढ़ना है कि नहीं करना है बढ़ना है

796
01:00:12,160 --> 01:00:16,320
तो मुझे बस एक ही नाम याद आता है राम हमारे साथ

797
01:00:16,320 --> 01:00:20,320
श्री रघुनाथ तो किस बात की चिंता हमें आ जाओ किसको आना

798
01:00:20,320 --> 01:00:24,400
है ठीक है तो इस तरह ऐसा कुछ चलता

799
01:00:24,400 --> 01:00:29,400
है और

800
01:00:29,400 --> 01:00:35,200
[गला साफ़ करने की आवाज़] जी आगे बोलिए

801
01:00:35,200 --> 01:00:39,360
जी उसके बाद में क्या है कि वापस थोड़ा वापस डर लगने लगा था

802
01:00:39,360 --> 01:00:43,360
इसका वापस वो वीडियो आया था तो वापस मैंने चेक किया लेकिन इसमें

803
01:00:43,360 --> 01:00:47,920
क्या है कि जब हम लोग इसको छोड़ेंगे तो बार-बार मिलाने की जरूरत

804
01:00:47,920 --> 01:00:52,400
क्या कौन सा वीडियो आया था आपने

805
01:00:52,400 --> 01:00:56,560
भाई वो फैक्ट टू फुल डिबेट में आती है ना खुद वीडियो नहीं इसका वीडियो आया

806
01:00:56,560 --> 01:01:00,640
था ना इनका मतलब वो वीडियो आता रहता है तो इसमें क्या है कि मतलब लगभग

807
01:01:00,640 --> 01:01:04,720
साल भर लगा मुझे तो अब किसी को अब कितना समय लगेगा वो

808
01:01:04,720 --> 01:01:08,720
मालूम नहीं लेकिन इसमें क्या है कि बार-बार चेक करना पड़ता रहेगा हमें कि भाई ये

809
01:01:08,720 --> 01:01:12,800
जो बता रहा है वो चीज मिल रही है या नहीं मिल रही है लेकिन उसमें

810
01:01:12,800 --> 01:01:16,880
क्या है कि थोड़ी मेहनत करनी पड़ती है जैसे इसने एक लाइन बताई तो उसका

811
01:01:16,880 --> 01:01:21,600
वो पूरा अध्याय हमें पढ़ना पड़ेगा तो अपने आप उत्तर मिल जाएगा इसमें

812
01:01:21,600 --> 01:01:25,600
यह परेशान हो रहे हैं। थोड़ा सुकून जी थोड़ा

813
01:01:25,600 --> 01:01:29,600
सुकून रखिए। इनकी बात जब पूरी हो जाएगी तो लिंक दिया जाएगा।

814
01:01:29,600 --> 01:01:33,680
तब तक थोड़ा सुकून रखिए। 681 नंबर का सुकून।

815
01:01:33,680 --> 01:01:39,120
ठीक है।

816
01:01:39,120 --> 01:01:43,200
हां जी। बोलिए बोलिए। जी और

817
01:01:43,200 --> 01:01:47,360
वो मतलब मेन ज्यादा मेरे साथ में इतना कुछ हुआ नहीं क्योंकि मैंने

818
01:01:47,360 --> 01:01:51,440
आपको बताया कि अभी वह स्वतंत्र ही है और उम्र भी छोटी है तो ज्यादा

819
01:01:51,440 --> 01:01:55,520
कोई बोल भी नहीं सकता है ना और अगर आप कुछ बोलना चाहते हो

820
01:01:55,520 --> 01:01:59,680
तो पूछिए इससे जुड़ा हुआ नहीं तो ये लोग जो आपकी

821
01:01:59,680 --> 01:02:03,680
शिकायत वगैरह नहीं पहुंचाएंगे आपके पिताजी को अरे आपका लड़का तो ऐसा ऐसा कर रहा

822
01:02:03,680 --> 01:02:07,040
है वो है ये

823
01:02:07,040 --> 01:02:11,360
बोलेंगे तो कुछ नहीं बोलेंगे ना वापस मैं बोलूंगा

824
01:02:11,360 --> 01:02:15,440
अगर जवाब हो तो मैंने तो मैंने तो वह माध्यम चुना कि जिससे मेरी बात

825
01:02:15,440 --> 01:02:20,320
पहुंच सके और मुझे जवाब मिल सके

826
01:02:20,320 --> 01:02:24,480
और सच बोल रहा हूं इनको तो झूठे सपने आते हैं कि हमें वो सतलोक

827
01:02:24,480 --> 01:02:28,640
के पास ले गए थे कबीर जी दिखे हमें लेकिन

828
01:02:28,640 --> 01:02:32,720
मैं इसको मानता था तब तक मुझे कभी स्वप्न नहीं आए लेकिन इसको

829
01:02:32,720 --> 01:02:36,960
छोड़ने के बाद अभी लगभग महीना भर हुआ हां तो मतलब

830
01:02:36,960 --> 01:02:41,040
मुझे किसी ने बोला था मेरा एक दोस्त मतलब बड़े मुझसे हैं आपकी उम्र जितने होंगे होंगे।

831
01:02:41,040 --> 01:02:45,120
वो भी ब्राह्मण ही है। तो उन्होंने मुझे बोला कि आप परमात्मा

832
01:02:45,120 --> 01:02:49,120
से अर्जी लगाना कि आप मेरे प्रश्न के उत्तर दो। मैंने

833
01:02:49,120 --> 01:02:53,120
बोला कोई बात नहीं इनकी वाली बात भी अमल में

834
01:02:53,120 --> 01:02:57,280
लेते हैं। तो मैंने रात को सोया उस समय सोच के सोया

835
01:02:57,280 --> 01:03:01,360
था कि वाह मेरे प्रश्न के जवाब देना आप। लेकिन दो-तीन दिन हुए कुछ हुआ ही

836
01:03:01,360 --> 01:03:05,440
नहीं। लेकिन मतलब उसके बाद एक महीना लगा। इसका वो सपना आया

837
01:03:05,440 --> 01:03:10,720
था मुझे। तो मेरे पापा से बात की क्या?

838
01:03:10,720 --> 01:03:14,880
किसका सपना स्वप्न आया था? कौन? ये रामपाल आया

839
01:03:14,880 --> 01:03:18,960
था। हां वो बता रहा हूं। तो उसमें क्या हुआ

840
01:03:18,960 --> 01:03:23,040
था कि जो ये मेरे पापा के साथ में आ रहा था इसके आश्रम

841
01:03:23,040 --> 01:03:27,760
से इधर जो ये उदयपुर में इसका सेंटर है वहां पे।

842
01:03:27,760 --> 01:03:31,840
तो मेरे पापा ने इसको बोला था कि मेरा लड़का है जो आपको

843
01:03:31,840 --> 01:03:35,520
पहले मतलब भक्त था। तो उसको क्या है कि

844
01:03:35,520 --> 01:03:39,600
वो कुछ प्रश्न है किसी ने भटका दिया है तो उसके प्रश्न के उत्तर

845
01:03:39,600 --> 01:03:43,920
चाहिए तो फिर वो क्या है कि बोला हां

846
01:03:43,920 --> 01:03:48,320
स्वप्न में चल रहा है तो उनको बोला था कि घर पधारो लेकिन

847
01:03:48,320 --> 01:03:52,880
वो आता नहीं है किसी के घर पे लेकिन उस दिन वो मेरे घर पे भी आ गया था स्वप्न में

848
01:03:52,880 --> 01:03:57,040
तो फिर वो आए थे तो मैंने उनसे पूछा वो सर्वशक्तिमान वाली

849
01:03:57,040 --> 01:04:01,120
बात तो फिर वो मतलब वो रोने लग गया था वो अपने आप ही

850
01:04:01,120 --> 01:04:06,080
उसकी गाड़ियां सब चली गई थी वहां से और वो फिर वो भीख मांग रहा था।

851
01:04:06,080 --> 01:04:10,080
अरे [हंसी] ये मतलब मैं झूठ नहीं बोल रहा हूं

852
01:04:10,080 --> 01:04:14,160
इन लोगों की तरह। अगर मैं झूठ नहीं बोल रहा हूं। उन

853
01:04:14,160 --> 01:04:18,240
रामपाल लोगों के अगर सपनों में आ भी गया भगवान ना

854
01:04:18,240 --> 01:04:22,320
करे अगर किसी को सपने में दिखाई दे गया वहां पे भी वो इतने निम्न स्तर के

855
01:04:22,320 --> 01:04:26,400
ही कार्य कर रहा है। सवाल का जवाब नहीं है तो किसी इनके सपने में

856
01:04:26,400 --> 01:04:30,560
जाके वो भीख मांग रहा है। मुझे माफ कर दो। मेरे पास सवाल झूठ

857
01:04:30,560 --> 01:04:34,560
नहीं बोल रहा। सच में आया था और उसके वो अपने कूलर और गाड़ी

858
01:04:34,560 --> 01:04:38,640
वाले जीपी वाले सब भाग गए उसको छोड़ के वहां पे वो कुछ दिखा

859
01:04:38,640 --> 01:04:44,480
ही नहीं स्वप्न में इतना वो थोड़ी प्रश्न रहता है

860
01:04:44,480 --> 01:04:48,720
फिर मैंने सोचा कि आ जाओ भाई शकुंत जी आपको लिंक

861
01:04:48,720 --> 01:04:52,960
दे देते हैं भाई यहां पर लिंक दे दिया जाए लिंक दे दीजिए

862
01:04:52,960 --> 01:04:56,960
ऑपरेटर जी आज खटिया खड़ी कर लेते

863
01:04:56,960 --> 01:05:01,040
हैं किसी रामपाल की बहुत दिनों से रामपाल हंट नहीं

864
01:05:01,040 --> 01:05:05,120
किया है। रामपाली हंट नहीं किया है। बहुत दिनों से आर्य समाज

865
01:05:05,120 --> 01:05:09,280
और इस और ब्रह्मा कुमारी यही सब

866
01:05:09,280 --> 01:05:13,360
चल रहा है। जो सबसे मेरा अच्छा वो

867
01:05:13,360 --> 01:05:17,600
था [हंसी] वो रामपाल ही था। जैसे होता है ना

868
01:05:17,600 --> 01:05:21,920
जो टाइगर होता है ना जंगल में तो उसका जो सबसे सरल शिकार

869
01:05:21,920 --> 01:05:26,080
माना जाता है टाइगर का वो वो होता

870
01:05:26,080 --> 01:05:30,320
है डियर सांभर डियर वो भारी और मोटा होता है थोड़ा

871
01:05:30,320 --> 01:05:34,400
भागने में और उसकी एक फितरत होती है वो भागते भागते पीछे देखता है ऐसा

872
01:05:34,400 --> 01:05:38,560
मुझे किसी जंगल में बताया गया था जब मैं वहां पर भ्रमण के लिए गया था

873
01:05:38,560 --> 01:05:42,960
[हंसी] तो बस वही थोड़ा समझ लो क्या कहना चाहता हूं

874
01:05:42,960 --> 01:05:47,280
है ना तो भाई साम

875
01:05:47,280 --> 01:05:51,280
डियर और चीते वाली कहानी याद आती है रामपालियों को देख के हां जी

876
01:05:51,280 --> 01:05:56,720
आ जाइए भैया शकून जी सुकून से आइएगा चेहरा ले आइएगा

877
01:05:56,720 --> 01:05:59,600
हां आई शपथ आपको बिल्कुल

878
01:05:59,600 --> 01:06:04,400
अच्छे से भेजेंगे वापस

879
01:06:04,400 --> 01:06:08,690
भाग गया क्या अरे सांभर डियर

880
01:06:08,690 --> 01:06:12,960
[हंसी] सियाना निकला सांभर डियर तो वो एक क्रिकेटर

881
01:06:12,960 --> 01:06:17,040
था ना पाकिस्तान का कोई क्रिकेट था जो रन आउट बहुत

882
01:06:17,040 --> 01:06:21,840
होता था। उसका नाम था गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शायद हां

883
01:06:21,840 --> 01:06:26,000
वो क्या करता था? रन लेते समय पीछे देखता था। तो उसी प्रकार

884
01:06:26,000 --> 01:06:30,000
से वो जो बाघ है वो जब शिकार करता है सांभर

885
01:06:30,000 --> 01:06:34,240
डियर का तो सांभर जो है वो पीछे देखता है तो उसकी गति

886
01:06:34,240 --> 01:06:39,440
बाधित होती है। तो उसके लिए आसान होता है पकड़ना उसे। तो

887
01:06:39,440 --> 01:06:41,600
रामपाली

888
01:06:41,600 --> 01:06:44,880
थोड़ा सा कुछ कुछ

889
01:06:44,880 --> 01:06:47,680
है ना

890
01:06:47,680 --> 01:06:51,920
वो पीछे देखता था

891
01:06:51,920 --> 01:06:56,160
[हंसी] जी

892
01:06:56,160 --> 01:07:00,240
तो शकुन जी तो निकल लिए हैं। हां यह देखिए नाम

893
01:07:00,240 --> 01:07:02,800
आ गया

894
01:07:02,800 --> 01:07:07,040
है ना तो यह जो थे भाई साहब यह रन आउट बहुत होते थे और

895
01:07:07,040 --> 01:07:11,120
रन आउट बहुत वजन भी ज्यादा था इनका और रन आउट

896
01:07:11,120 --> 01:07:15,680
होते थे इसलिए क्योंकि ये दौड़ते दौड़ते पीछे देखते थे

897
01:07:15,680 --> 01:07:21,040
शकुन जी अपना चेहरा दिखाएं शकून के साथ

898
01:07:21,040 --> 01:07:25,120
और एक वो बता रहा हूं मैं वो जो वो ब्रज शब्द का तो ये बताते

899
01:07:25,120 --> 01:07:29,200
ना वो ब्रज शब्द का ये बताते हैं कि जाना लेकिन

900
01:07:29,200 --> 01:07:33,200
जब यह वामन शिवराम आपटे डिक्शनरी का जो प्रस्तावना जो

901
01:07:33,200 --> 01:07:37,520
पढ़ते हैं ना भूमिका तो उसमें वो दिया हुआ है कि जो इस शब्द

902
01:07:37,520 --> 01:07:41,680
को उसके में जो अर्थ बताए गए हैं शब्दों के उसका अर्थ वो धर्म

903
01:07:41,680 --> 01:07:45,760
ग्रंथों में नहीं लेना है और जो हमारी भगवत गीता है वो धर्म ग्रंथ

904
01:07:45,760 --> 01:07:49,840
है तो उसमें यह अर्थ कैसे लेंगे ब्रज शब्द का वो भूमिका पढ़ेंगे तो वहां

905
01:07:49,840 --> 01:07:54,160
पे दिया हुआ है हम एक्चुअली ब्रज

906
01:07:54,160 --> 01:07:58,240
शब्द का अर्थ जो है ना ज्ञानार्थक भी होता है और ज्ञार्थक भी होता

907
01:07:58,240 --> 01:08:00,080
दोनों प्रकार से होता है।

908
01:08:00,080 --> 01:08:04,080
ज्ञानार्थक होता है कि जैसे कि जैसे जैसे

909
01:08:04,080 --> 01:08:08,320
कि कल मैं उनकी लाइव स्ट्रीम में गया था। उनके चैनल

910
01:08:08,320 --> 01:08:12,640
पर गया था तो कैसे गया था? मैं तो यही था।

911
01:08:12,640 --> 01:08:16,640
किस प्रकार से गया था? तो ऑनलाइन के माध्यम से मेरा जो वर्चुअल स्वरूप

912
01:08:16,640 --> 01:08:21,040
है वो वहां पहुंचा था। वर्चुअल रूप एक तरीके से वो भी ज्ञानार्थक

913
01:08:21,040 --> 01:08:25,120
दृष्टि से ही मैं वहां पर गया था। इंटरनेट के जरिए मैं तो कहीं नहीं गया था।

914
01:08:25,120 --> 01:08:29,200
तो वो ज्ञानार्थक जाना होता है और वह भी

915
01:08:29,200 --> 01:08:33,200
कहां कि तू उस मेरे उस रूप की शरण में जा।

916
01:08:33,200 --> 01:08:37,280
जैसे हम किसी से बात कर रहे हैं कि भाई जैसे मैं ही कोई

917
01:08:37,280 --> 01:08:41,280
सुपरस्टार हूं या मैं ही कोई ऐसी सेलिब्रिटी हूं या मैं ही

918
01:08:41,280 --> 01:08:45,360
कोई ऐसा व्यक्ति हूं जिससे कि सामने वाले को मिलना है। जैसे

919
01:08:45,360 --> 01:08:49,360
एक बार पूरी के शंकराचार्य जी बताते हैं कि वो शुरुआती दिन

920
01:08:49,360 --> 01:08:53,600
थे जब शंकराचार्य बने ही बने थे पूज्य गुरुदेव तो उस समय जो है

921
01:08:53,600 --> 01:08:58,240
कोई मिलने आया तो उस समय जो है बाहर जो मठ के जो स

922
01:08:58,240 --> 01:09:02,320
मतलब स्वच्छता कार्य होते हैं उसमें लिप्त थे तो उन्होंने पूछा मैं पूरी के

923
01:09:02,320 --> 01:09:07,040
शंकराचार्य जी से मिलने आया हूं तो उन्होंने कहा कि आप बैठिए आते होंगे

924
01:09:07,040 --> 01:09:11,440
अब उन्होंने जो कहा ना कि आते होंगे वो खुद ही थोड़ी देर बाद आए उनसे मिलने

925
01:09:11,440 --> 01:09:15,120
है ना तो यह क्या किया कि पहले उसकी जिस तरीके से निष्ठा हो रही

926
01:09:15,120 --> 01:09:19,200
है। उसी तरीके से बात की सामने वाले से कि अभी वो मुझे वो नहीं समझ

927
01:09:19,200 --> 01:09:23,280
रहा है। अलग समझ रहा है। तो उस तरीके से बात की कि ईश्वर ऐसा होता है, ऐसा होता है और तुझे उस

928
01:09:23,280 --> 01:09:27,280
ईश्वर की शरण में जाना है। और वो बात एक अलग है। अंतत गतवा वो

929
01:09:27,280 --> 01:09:32,320
ईश्वर मैं ही हूं। ठीक है। वहां पे हो गया। वहां पे पधारना

930
01:09:32,320 --> 01:09:36,880
जी। वहां पर पधारना शब्द भी दिया उसका अर्थ।

931
01:09:36,880 --> 01:09:40,880
पधारना। तो पधारना के दोनों अर्थ दोनों अर्थ होते उसका

932
01:09:40,880 --> 01:09:45,200
आना और जाना। हम अरे

933
01:09:45,200 --> 01:09:49,360
वो एक गाना है ना आजा वंदे शरण राम की

934
01:09:49,360 --> 01:09:53,520
ये रामपाल गा रहा है आजा वंदे शरण राम की

935
01:09:53,520 --> 01:09:57,680
अब आजा आने के बाद जाने को कह रहा है

936
01:09:57,680 --> 01:10:01,680
दो दो बातें निकल रही है वास्तविकता में आने के लिए कह रहा है मगर

937
01:10:01,680 --> 01:10:06,000
कौन सा वाला शब्दों में क्या आ रहा है कि जा

938
01:10:06,000 --> 01:10:10,000
कौन सा वाला जा आने के रूप में जाने वाला तो जाने का

939
01:10:10,000 --> 01:10:14,080
मतलब है गति और आ जो उसमें आ शब्द शब्द आया वो है कहां जाना

940
01:10:14,080 --> 01:10:18,080
है आने में जाना है आजा और अगर

941
01:10:18,080 --> 01:10:22,080
ऐसे शाब्दिक अर्थ निकालेंगे तो आने का मतलब आने के बाद यहां से चला जाए ये कह

942
01:10:22,080 --> 01:10:26,080
रहा है आजा बंदे शरण राम की खैर वो उस पर बहुत सारी चीजें हो

943
01:10:26,080 --> 01:10:30,240
चुकी है एक चीज मैंने सोची थी

944
01:10:30,240 --> 01:10:34,240
शकून जी है सुकून चोर जो आए थे अभी वो सुकून जो

945
01:10:34,240 --> 01:10:38,400
है शायद उनको कोई खाज की बीमारी है चेहरे और स्किन इत्यादि

946
01:10:38,400 --> 01:10:43,280
पे तो अपनी चेहरे की जो बेश वो जो है हां

947
01:10:43,280 --> 01:10:47,280
शर्म के कारण वो चेहरा नहीं दिखा पा रहे हैं। जिस कारण से भाग गए हैं।

948
01:10:47,280 --> 01:10:51,000
9 दो 11 हो गए हैं।

949
01:10:51,000 --> 01:10:56,400
[गला साफ़ करने की आवाज़] आपसे जुड़ने के बाद में क्या है? जी

950
01:10:56,400 --> 01:11:00,560
जी बोलिए। आपसे जुड़ने के बाद में क्या है कि थोड़ा वो तर्क

951
01:11:00,560 --> 01:11:04,640
वाली वो शक्ति जग जाती है। तो मैंने क्या सोचा

952
01:11:04,640 --> 01:11:08,800
पहले कि चलो आपने ये जो ये दे रहे ना प्रमाण

953
01:11:08,800 --> 01:11:12,880
ग्रंथ वाले उसको रहने देते हैं। इसी के चीजों से इसका

954
01:11:12,880 --> 01:11:17,040
खंडन करते हैं। तो मैं वापस सृष्टि रचना पढ़ी तो उसमें जो यह बताता

955
01:11:17,040 --> 01:11:21,040
है कि काल ने जो सृष्टि रचना की वो तीन गुण पांच तत्व मांगे

956
01:11:21,040 --> 01:11:26,000
और वो वो ले चला गया। लेकिन उसके ब्रह्मांड में क्या था कि वो खाली था।

957
01:11:26,000 --> 01:11:30,000
वहां पर कोई लोग नहीं था। लेकिन काल को मतलब सब जने को जो सतलोक

958
01:11:30,000 --> 01:11:34,160
के जो निवासी है तो उनको शक्ति दे रखी है कि वो अपने बच्चे उत्पन्न

959
01:11:34,160 --> 01:11:38,320
कर सकते हैं। दोद तो काल के पास भी यह शक्ति थी कि वो दो उत्पन्न

960
01:11:38,320 --> 01:11:42,400
कर दे। जो दो उत्पन्न किए तो मतलब यह कड़ी आगे अनंत तक चल सकती

961
01:11:42,400 --> 01:11:45,360
है तो उसको लोगों की जरूरत क्या पड़ी वो खुद नहीं कर

962
01:11:45,360 --> 01:11:49,200
सकता था

963
01:11:49,200 --> 01:11:54,800
हम सही बात है

964
01:11:54,800 --> 01:11:59,040
और वो वहां पे दे रखा है कि आत्मा को हंस

965
01:11:59,040 --> 01:12:04,640
कहते हैं तो वो जो वहां पे जन्म लेगा वो भी तो आत्मा हुआ इनके अनुसार

966
01:12:04,640 --> 01:12:08,880
आत्मा का कभी जन्म होता ही नहीं है। सबसे बड़ी दिक्कत यही है कि इन्होंने जन्म मान लिया आत्मा

967
01:12:08,880 --> 01:12:11,680
का।

968
01:12:11,680 --> 01:12:16,880
एक मैं वो आपको वो भेजता हूं इनके मंत्र वाला उसमें वो बताना है।

969
01:12:16,880 --> 01:12:22,160
हां अच्छा मैं ये

970
01:12:22,160 --> 01:12:26,320
जिसका गुरु जेल में रहकर आया हो

971
01:12:26,320 --> 01:12:31,120
वह बंदा मुंह कहां से दिखाएगा? बिल्कुल सही बात है। बिल्कुल सही बात है।

972
01:12:31,120 --> 01:12:37,120
बिल्कुल सही कहा आपने।

973
01:12:43,920 --> 01:12:49,920
इनको बुलाओ गोविंद गुरुकुल जी को अगर कुछ पूछना हो तो

974
01:12:50,160 --> 01:12:54,240
एक मिनट अगर रामपाल वाले को भी अगर मेरे से बात करनी

975
01:12:54,240 --> 01:12:58,320
है तो भी आ सकते हैं। हम अब

976
01:12:58,320 --> 01:13:02,560
तो बहुत मैं मतलब इनका शिव जी हां शिवा जी का सहारा नहीं लूंगा

977
01:13:02,560 --> 01:13:06,640
उत्तर देने में। [हंसी] एक आम बोगे

978
01:13:06,640 --> 01:13:10,800
तो लाखों आम पाएंगे। आज देख लीजिए शास्त्रवाद जी लाखों आम उग

979
01:13:10,800 --> 01:13:15,040
रहे हैं। जी भैया जी ऐसे ही और

980
01:13:15,040 --> 01:13:19,440
लोग आएंगे अभी धीरे-धीरे बहुत लोग तो ऐसे बहुतों

981
01:13:19,440 --> 01:13:23,520
में परिवर्तन आया है। अभी और आएंगे। भगत सिंह ने कहा था

982
01:13:23,520 --> 01:13:29,520
अपनी फांसी से पहले हमारे बाद और भी आएंगे और भी

983
01:13:31,760 --> 01:13:35,920
मैं बता रहा था अगर मान लो पूरी के शंकराचार्य जी इससे शास्त्रार्थ करने

984
01:13:35,920 --> 01:13:39,920
पहुंच जाते उसके आश्रम में तो वो हारता वो अलग

985
01:13:39,920 --> 01:13:44,160
चीज है लेकिन जो वो शब्द वो सामान्य भाषा में भी जो शब्द प्रयोग करते

986
01:13:44,160 --> 01:13:48,800
हैं उसका अर्थ लगाना इसके लिए कठिन हो जाता क्योंकि

987
01:13:48,800 --> 01:13:52,880
मैं शुरुआत में आपसे जुड़ने के बाद में मैंने मैंने वो शंकराचार्य जी की वीडियो देखना

988
01:13:52,880 --> 01:13:56,880
शुरू की लेकिन वापस मैंने बंद कर दी क्योंकि क्या है कि वो शब्दों

989
01:13:56,880 --> 01:14:01,280
के प्रयोग ऐसे करते हैं कि समझ में नहीं आते हैं। नहीं

990
01:14:01,280 --> 01:14:05,600
और मैंने वो इनकी इनकी मैंने वो पुस्तकें भी मंगाई

991
01:14:05,600 --> 01:14:11,520
सावित्री अच्छा अच्छा अच्छा लेकिन उसमें क्या है कि

992
01:14:11,520 --> 01:14:15,600
हां कुछ कुछ है लेकिन वो शब्द आपको मालूम है कि वो इतने वो होते

993
01:14:15,600 --> 01:14:21,600
हैं कि समझ में नहीं आता है इतना

994
01:14:22,000 --> 01:14:26,080
उनके शब्दों में बहुत ही पकड़ है तो हर कोई नहीं

995
01:14:26,080 --> 01:14:30,240
समझ पाता। वो संस्कृत संस्कृत निष्ठ हिंदी

996
01:14:30,240 --> 01:14:34,880
बोलते हैं गुरुदेव और

997
01:14:34,880 --> 01:14:38,960
ये कमेंट हटा दीजिए। पहाड़ी जी भी आ गए

998
01:14:38,960 --> 01:14:41,520
हैं।

999
01:14:41,520 --> 01:14:46,800
गुरुदेव को लेकर के एक बात मुझे याद आ रही थी।

1000
01:14:46,800 --> 01:14:51,280
उतर गई।

1001
01:14:51,280 --> 01:14:55,280
हां गुरुदेव ने बताया था जब यह वाली बात आई थी कि

1002
01:14:55,280 --> 01:14:59,360
कई बार हमें संतों की वाणियां समझ में नहीं आ रही होती है कि वो क्या बोल रहे हैं

1003
01:14:59,360 --> 01:15:03,680
एक्सजेक्टली और कभी-कभी मंत्र भी ऐसे होते हैं श्लोक भी ऐसे होते हैं

1004
01:15:03,680 --> 01:15:07,680
परंतु जिस प्रकार से जो बुखार की या हम कोई

1005
01:15:07,680 --> 01:15:11,760
औषधि लेते हैं ना तो हमें भले ही मालूम ना हो कि कैसे काम करती है

1006
01:15:11,760 --> 01:15:16,240
क्या करती है मगर वो अंदर जाती है और अपना काम करती है उसी प्रकार से ये जो मंत्र होते हैं

1007
01:15:16,240 --> 01:15:20,560
श्लोक होते हैं संतों की वाणी होती है। आचार्यों की वाणी

1008
01:15:20,560 --> 01:15:25,120
होती है। यह अपना असर जरूर दिखाती है। अपनी सात्विकता आप में जरूर

1009
01:15:25,120 --> 01:15:29,200
डाल देती है। तो इसलिए इनकी वाणियां ऐसा नहीं है नहीं समझ में आ रहा है तो नहीं

1010
01:15:29,200 --> 01:15:31,360
सुनना।

1011
01:15:31,360 --> 01:15:35,600
मतलब एक अनुशासन के साथ आप अपने जीवन को जोड़िए कि मैं एक वीडियो जरूर

1012
01:15:35,600 --> 01:15:37,360
एक प्रामाणिक संत का सुनू।

1013
01:15:37,360 --> 01:15:41,600
एक एक अपना निकालिए कि कितनी देर का सुनना है। वह एक आपके

1014
01:15:41,600 --> 01:15:46,640
ऊपर है। परंतु अपने जीवन में डालिए कि सुन। भले ही समझ में ना आए परंतु वह

1015
01:15:46,640 --> 01:15:50,720
ऐसा है मैं आपको बता रहा हूं। अब थोड़ी ज्यादा गढ़

1016
01:15:50,720 --> 01:15:55,120
बात हो जाएगी पर आ गई तो मैं बता देता हूं। जब आपने गुलाब जामुन

1017
01:15:55,120 --> 01:15:59,360
खाया तो उस खाने से आपको एक स्वाद

1018
01:15:59,360 --> 01:16:04,880
मिला। मिला ना? जी स्वाद मिला।

1019
01:16:04,880 --> 01:16:09,440
वो स्वाद गुलाब चावल खाने से पहले तक

1020
01:16:09,440 --> 01:16:14,160
रहता कहां था? अधिष्ठान क्या था?

1021
01:16:14,160 --> 01:16:17,360
कहां रहता था वह स्वाद?

1022
01:16:17,360 --> 01:16:22,240
हर दुनिया में जो भी पदार्थ होता है उसका एक अधिष्ठान होता है।

1023
01:16:22,240 --> 01:16:26,240
उस स्वाद का अधिष्ठान क्या था? भाई जो रसगुल्ला है उसके अंदर तो

1024
01:16:26,240 --> 01:16:30,240
वो स्वाद है नहीं क्योंकि वो तो जड़ है। तो वो तो एक विचार लेकर के आप तक आ

1025
01:16:30,240 --> 01:16:36,000
नहीं सकता कि ले भाई मैंने विचार दे दिया। आपने उसको खाया

1026
01:16:36,000 --> 01:16:40,560
और खाया भी अपने जो ये जड़ तत्वों से बना हुआ शरीर है उसके द्वारा।

1027
01:16:40,560 --> 01:16:44,640
अंतत गतवा आपको जो स्वाद मिला है वह उस उसको खाने

1028
01:16:44,640 --> 01:16:48,880
से चबाने से पहले तक कहां था? वह आपके

1029
01:16:48,880 --> 01:16:53,280
ही अंदर था ना वो स्वाद जो है

1030
01:16:53,280 --> 01:16:57,280
गुलाब जामुन का वो आपके ही अंदर था। ठीक

1031
01:16:57,280 --> 01:17:01,280
है? तो अब हुआ क्या कि आपके अंदर

1032
01:17:01,280 --> 01:17:05,440
की कोई चीज थी जो किसी कुछ एक

1033
01:17:05,440 --> 01:17:09,440
स्पेसिफिक एक विशेष व्यवहार करने के कारण वो

1034
01:17:09,440 --> 01:17:13,440
आपके ही अंदर जो चीज थी वो भाषित हो गई। वो अब आपकी पकड़ में आ गई। पहले

1035
01:17:13,440 --> 01:17:18,480
पकड़ में नहीं थी। आपके ही अंदर थी। जैसे कस्तूरी मृग होता है ना।

1036
01:17:18,480 --> 01:17:22,560
कस्तूरी मृग होता है ना बस वैसे ही कहानी है हमारी। तो होता क्या है

1037
01:17:22,560 --> 01:17:26,960
कि यह जो संतों की वाण होती है, वेद मंत्र होते हैं, मंत्रार्थ

1038
01:17:26,960 --> 01:17:31,040
होते हैं, प्रवचन होते हैं, भाष्य होते हैं, ग्रंथ होते हैं। हम

1039
01:17:31,040 --> 01:17:35,360
लोग सोचते हैं कि मन नहीं लग रहा, मन नहीं लग रहा। परंतु ये जब हम श्रवण करते हैं,

1040
01:17:35,360 --> 01:17:39,520
ये अंदर जाते हैं और हमारा जो वो अंदर जो हमारा जो

1041
01:17:39,520 --> 01:17:43,520
चेतना का सर्वोच्च स्वरूप है ना उसको वहां पर

1042
01:17:43,520 --> 01:17:47,680
प्रोत्साहित करते हैं कि वो आपके व्यवहार में आए। आप उसकी अनुभूति ज्यादा से ज्यादा

1043
01:17:47,680 --> 01:17:51,760
कर पाओ। इसलिए ऐसा जब होता है तो आपको भी कई

1044
01:17:51,760 --> 01:17:55,840
बार ऐसा पता नहीं लगता है कि आपके जीवन में परिवर्तन आ रहा है। परंतु ऐसा लगता

1045
01:17:55,840 --> 01:17:59,840
है कई बार कोई दिव्य शक्ति हमारा साथ दे रही है। तो वो सब इसी तरह

1046
01:17:59,840 --> 01:18:03,840
के गतिविधियां होती है। इसलिए सुनना

1047
01:18:03,840 --> 01:18:07,920
अवश्य चाहिए। भले ही समझ में आए या ना आए क्योंकि वह समझ में तो आ ही रहा

1048
01:18:07,920 --> 01:18:08,420
है

1049
01:18:08,320 --> 01:18:12,320
क्योंकि जो भी क्योंकि जो भी जो भी इंफॉर्मेशन आपको मिल रही है

1050
01:18:12,320 --> 01:18:17,120
अंत तो गतवा वो इंफॉर्मेशन आपके आपके अंदर पहले से ही है।

1051
01:18:17,120 --> 01:18:21,200
बाहर से नहीं आ रहा है कुछ अंदर ही अंदर ही है। वो कुछ

1052
01:18:21,200 --> 01:18:25,360
ऐसी क्रिया हो रही है। कुछ क्रियाओं का अभाव है जिनके कारण

1053
01:18:25,360 --> 01:18:29,440
आप उसको देख नहीं पा रहे हो। उससे जुड़ नहीं पा रहे हो और फिर कुछ क्रियाओं क्रियाओं

1054
01:18:29,440 --> 01:18:33,520
के उसमें उपस्थिति में वह आप उससे कनेक्ट कर

1055
01:18:33,520 --> 01:18:37,680
लेते हो। ठीक है जी पहाड़ी जी जय

1056
01:18:37,680 --> 01:18:41,760
श्री राम जय श्री राम सभी लोगों को और भाजी

1057
01:18:41,760 --> 01:18:45,760
जी को बहुत-बहुत साधुवाद और घर वापसी के

1058
01:18:45,760 --> 01:18:50,000
लिए धन्यवाद

1059
01:18:50,000 --> 01:18:54,560
ऐसे थे

1060
01:18:54,560 --> 01:18:58,640
जी एक जरा सिंह की बात सुन ले पहाड़ी जी की एक बात सुन ले फिर

1061
01:18:58,640 --> 01:19:02,960
आपको दोबारा कंटिन्यू नहीं पहाड़ी जी के लिए बताना है क्योंकि पहाड़ी जी पहले बोलेंगे

1062
01:19:02,960 --> 01:19:07,040
तो अच्छा नहीं लगेगा अच्छा अच्छा जी पहले इनको बोलने

1063
01:19:07,040 --> 01:19:11,120
दीजिए जी बोलिए बताइए हुआ क्या है कि मतलब

1064
01:19:11,120 --> 01:19:15,280
जो ये यात्रा आ रही है इससे इसके मतलब घर से निकल के वापस

1065
01:19:15,280 --> 01:19:19,280
यहां पे आने में तो उसमें क्या है कि पहाड़ी जी की मेन भूमिका थी

1066
01:19:19,280 --> 01:19:23,280
क्योंकि ये मतलब नौकरी करते बाहर रहते हैं तो कोई भी व्यक्ति नहीं

1067
01:19:23,280 --> 01:19:27,440
होगा तो अपना समय देगा बात करने में लगभग एक घंटा आधा

1068
01:19:27,440 --> 01:19:31,440
घंटा जब भी इनको मैं फोन करता था तो ये प्रश्न का

1069
01:19:31,440 --> 01:19:35,520
वो निवारण करते थे और समझाते थे अच्छे से तो इसके लिए पार्टी

1070
01:19:35,520 --> 01:19:39,520
जी का बहुत-बत धन्यवाद है। जी बहुत

1071
01:19:39,520 --> 01:19:43,680
अभी भी जब भी होता है तो बताते पूरा मैं उस लायक

1072
01:19:43,680 --> 01:19:47,680
का नहीं हूं। जो भी सीखा हमने शिव जी से सीखा और वही चीज आपको दी जाती

1073
01:19:47,680 --> 01:19:51,680
है औरों को दी जाती है। ठीक है? तो आप

1074
01:19:51,680 --> 01:19:55,680
एक ऐसे जाल से निकले हैं जहां से निकलना बहुत मुश्किल होता है। क्यों

1075
01:19:55,680 --> 01:19:59,840
मुश्किल होता है? क्योंकि संसार में लालच और डर दो

1076
01:19:59,840 --> 01:20:04,160
चीजें ऐसी है कि इससे पार पाना बहुत मुश्किल है।

1077
01:20:04,160 --> 01:20:09,040
और दोनों चीजें आपको परोसी जाती है आश्रमों में।

1078
01:20:09,040 --> 01:20:09,760
आपने बताया

1079
01:20:09,760 --> 01:20:14,080
ना कि जब कहीं सेवा करने का सेवा कहीं

1080
01:20:14,080 --> 01:20:18,320
लेबरी करनी होती है, कुछ बनाना होता है तो वहां यह चीज बोला जाता है कि आज

1081
01:20:18,320 --> 01:20:22,400
आपकी सेवा लगी है और आप इस इतने टाइम तक नहीं

1082
01:20:22,400 --> 01:20:26,640
पहुंचे तो आपका नाम खंड हो जाएगा। आपको काल घसीट के ले जाएगा।

1083
01:20:26,640 --> 01:20:30,640
तरह तरह की बातें करते हैं। तो आप वहां से निकले हैं

1084
01:20:30,640 --> 01:20:34,640
जहां से निकलना बहुत मुश्किल होता है। और देख भी सकते हैं कि सामने

1085
01:20:34,640 --> 01:20:38,720
चीजें दिखाई दे रही है कि एक जो है अभी

1086
01:20:38,720 --> 01:20:42,720
वो जेल से निकला है। 13 साल बाद जेल

1087
01:20:42,720 --> 01:20:47,040
से आया वो भी जमानत पे। फिर भी

1088
01:20:47,040 --> 01:20:51,040
लोगों को यह लगता है कि वो आदमी बिल्कुल शुद्ध है कि

1089
01:20:51,040 --> 01:20:55,360
उसने ऐसा कुछ नहीं किया। ठीक है। खैर ये तो कानूनी बात हो गई।

1090
01:20:55,360 --> 01:20:59,920
आप फोन पर बात कर रहे थे कि आपके कुछ मित्रग भी थे 202 लोग

1091
01:20:59,920 --> 01:21:04,000
जो जो रामपाल को छोड़ चुके हैं अब और

1092
01:21:04,000 --> 01:21:08,000
कुछ लोग अभी छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं आप बता रहे

1093
01:21:08,000 --> 01:21:12,080
थे फोन पे क्योंकि घर में उनके क्लेश रहता था तो मेरे मित्रग

1094
01:21:12,080 --> 01:21:17,440
है मित्र थे तो उनके परिवार के लोग थे 2025 लोग

1095
01:21:17,440 --> 01:21:23,440
तो उनके बारे में बताइए कुछ

1096
01:21:23,920 --> 01:21:28,160
उनके परिवार वाले वाले भी क्या है कि लगभग लगभग एक जुड़ता है तो

1097
01:21:28,160 --> 01:21:32,320
मतलब व्याकरण और धर्म ग्रंथ कोई भी पढ़ता नहीं है तो

1098
01:21:32,320 --> 01:21:36,400
उसके घर वाले वापस वो विरोध करने लगते हैं उनको भी समझा रहा हूं घर पे जाता हूं

1099
01:21:36,400 --> 01:21:39,680
उनके बात करता हूं

1100
01:21:39,680 --> 01:21:44,080
जी जी मतलब इनको एक तो वो भविष्यवाण होती है ना तो उससे

1101
01:21:44,080 --> 01:21:48,240
वो ज्यादा पागल कर देते हैं कि देखो इस भविष्यवाणी में दिया

1102
01:21:48,240 --> 01:21:52,400
हुआ है यह वही संत है आपको मतलब बहलाया जाएगा इस कारण

1103
01:21:52,400 --> 01:21:56,240
से क्या है कि छूटना मुश्किल हो जाता

1104
01:21:56,240 --> 01:22:00,240
जी जी जी तो जो भी जो

1105
01:22:00,240 --> 01:22:04,320
भी अभी तक बहुत सारे निकल चुके हैं मेरे नजर में भी बहुत

1106
01:22:04,320 --> 01:22:08,560
हैं। तो ये सब हमारे शिवश भाई की ही कृपा

1107
01:22:08,560 --> 01:22:12,560
होगी हमारे ऊपर कि YouTube पे तो हम सिर्फ रील

1108
01:22:12,560 --> 01:22:16,640
देखा करते थे। अचानक शिवश भाई की वीडियो आ गई।

1109
01:22:16,640 --> 01:22:20,800
और जब तब से रील देखनी बंद हुई और यह

1110
01:22:20,800 --> 01:22:24,880
हमारा ये शिवश जी का जो आहान चैनल है

1111
01:22:24,880 --> 01:22:28,880
जिसमें धर्म की बातें होती है वो देखना शुरू किया तो वहां से पता चला

1112
01:22:28,880 --> 01:22:32,960
कि हां कि जब कोई सामने

1113
01:22:32,960 --> 01:22:36,960
से कोई तर्क कर रहा है या हमारे ईश्वर के ऊपर कुछ

1114
01:22:36,960 --> 01:22:38,960
लांछन लगा रहा है तो उसका

1115
01:22:38,960 --> 01:22:43,200
उत्तर कैसे देना है तो ये सारी चीजें हमने शिवान जी से भी सीखी

1116
01:22:43,200 --> 01:22:48,160
अब कल एक बात शिवान जी ने लाइव डिबेट में एक बात कही उन्होंने

1117
01:22:48,160 --> 01:22:52,560
कि ईश्वर को दोष नहीं लगता है अब

1118
01:22:52,560 --> 01:22:56,640
रामपाल के गैंग वाले वो दोष लगाते रहते हैं ईश्वर के ऊपर कि

1119
01:22:56,640 --> 01:23:01,120
जो भगवान श्री कृष्ण है उन्होंने उपजा

1120
01:23:01,120 --> 01:23:05,280
के साथ क्या किया या गोपियों के साथ क्या किया तो कल

1121
01:23:05,280 --> 01:23:09,280
एक इसका एक निवारण भी मिला कि ऐसे तो रामपाल का ईश्वर

1122
01:23:09,280 --> 01:23:13,360
भी कर रहा है क्यों कर रहा है कैसे कर रहा है क्योंकि वो सर्वत्र है सब

1123
01:23:13,360 --> 01:23:17,520
कुछ देख रहा है अगर कोई स्त्री नहा रही है तो उसको

1124
01:23:17,520 --> 01:23:21,680
देख रहा है तो उसको दोष क्यों नहीं लगा वो भी तो पाप

1125
01:23:21,680 --> 01:23:24,000
है ना

1126
01:23:24,000 --> 01:23:28,000
तो ऐसे ही जब रामपाल के ईश्वर को दोष

1127
01:23:28,000 --> 01:23:32,000
नहीं लगा तो हमारे ईश्वर जो भगवान श्री कृष्ण है

1128
01:23:32,000 --> 01:23:36,640
और जो ये लीला रूप में जो गोपियों के साथ रास लीला का जो वर्णन

1129
01:23:36,640 --> 01:23:40,720
है वो भी कुछ और विषय है और जो कुब्जा के साथ का जो

1130
01:23:40,720 --> 01:23:44,800
विषय है उसमें भी भगवान को दोष नहीं लगेगा। तो कल

1131
01:23:44,800 --> 01:23:49,280
ये सीखने को मिला हमको वहां कि ऐसा दोष अगर मानते हैं आप

1132
01:23:49,280 --> 01:23:53,440
तो रामपाल के ईश्वर के ऊपर भी लगे। [गला साफ़ करने की आवाज़]

1133
01:23:53,440 --> 01:23:54,320
अगर रामपाल

1134
01:23:54,320 --> 01:23:58,320
बोलता कि ना वो उस स्त्री को नहीं देख रहा है जो वो नहा रही है

1135
01:23:58,320 --> 01:24:04,000
तो वहां पर वो बाधित हो गया। फिर वो सब जगह नहीं देख रहा है।

1136
01:24:04,000 --> 01:24:10,000
जी धन्यवाद।

1137
01:24:10,480 --> 01:24:14,640
आपने ये कहा मैं उसका वो बता देता हूं। ये तो हां ये

1138
01:24:14,640 --> 01:24:18,720
बोलते हैं ना कि तुम्हारे भगवान ने ऐसा किया है। तुम्हें शर्म आनी

1139
01:24:18,720 --> 01:24:22,880
चाहिए। तो इसका मैं बता देता हूं कि मैंने वो वीडियो देखा

1140
01:24:22,880 --> 01:24:26,880
था शंकराचार्य जी का तो उसमें बोल रहे थे कि वो नाम

1141
01:24:26,880 --> 01:24:30,960
क्या है भैया जो वो बोलते हैं ना कि रास लीला हटा देते ये भागवत पुराण

1142
01:24:30,960 --> 01:24:34,640
से

1143
01:24:34,640 --> 01:24:38,640
फिर वो कृपात्री जी महाराज उनको वो समझाते फिर वो

1144
01:24:38,640 --> 01:24:42,880
राधा सुधा लिखी थी उन्होंने। हां बता दी थी वो राधा

1145
01:24:42,880 --> 01:24:47,680
बता दीजिए वो हुआ क्या? नहीं नहीं

1146
01:24:47,680 --> 01:24:51,680
ये गीता प्रेस से जो गीता प्रेस से जो भागवत पुराण

1147
01:24:51,680 --> 01:24:55,840
निकाल रहे थे तो उस समय वो मदद मोहन मालवीय जी शायद

1148
01:24:55,840 --> 01:24:59,920
उन्होंने बोला था ना कि इससे ये रास लीला वाला हटा देते क्योंकि

1149
01:24:59,920 --> 01:25:04,080
ये लोगों को अच्छा नहीं लगेगा। लेकिन उस समय उनको समझाया फिर वो तैयार

1150
01:25:04,080 --> 01:25:08,240
हो गए। तो इसका मतलब ये थोड़ी है कि हमारे जो संत है तो उनको

1151
01:25:08,240 --> 01:25:12,240
इसका कारण नहीं मालूम है। अगर इनको

1152
01:25:12,240 --> 01:25:16,720
डर होता या शर्म होती हां वही बता रहा था।

1153
01:25:16,720 --> 01:25:21,360
जी सही अर्थ जानने की आवश्यकता है।

1154
01:25:21,360 --> 01:25:25,600
ईश्वर समस्त कार्यों में लिप्त होते हुए भी अलिप्त है। कभी

1155
01:25:25,600 --> 01:25:29,680
लिप्त नहीं होता। निर्लिप्त है। [नाक से की जाने वाली आवाज़] और इसका कारण मैंने

1156
01:25:29,680 --> 01:25:33,840
बता दिया ना क्योंकि ईश्वर जानता है कि ये सब कुछ क्या है? प्रपंच

1157
01:25:33,840 --> 01:25:38,080
मात्र है और सभी कार्यों को

1158
01:25:38,080 --> 01:25:42,720
करने वाला दिखते हुए हमने हमें तो दिखेगा ही सब सब कुछ कर रहा है परंतु वास्तविकता

1159
01:25:42,720 --> 01:25:48,720
में वो निर्लिप्त है। जी शास्त्रवाद जी आप कुछ कहेंगे?

1160
01:25:50,800 --> 01:25:54,960
जी भैया बहुत सही है ये वाली बात कि ईश्वर को कोई दोष

1161
01:25:54,960 --> 01:25:59,490
नहीं लगता। कुछ भी हो

1162
01:25:59,490 --> 01:26:04,160
[गला साफ़ करने की आवाज़] और अभी बात भी अच्छा खासा हो चुका है।

1163
01:26:04,160 --> 01:26:08,160
आपका जो कल का चर्चा हुआ है इस पे

1164
01:26:08,160 --> 01:26:12,240
क्या है ना कुछ लोग जो है अलंकारी जो

1165
01:26:12,240 --> 01:26:16,640
है वो लोग आपके खांसी को बहाना बना रहे हैं।

1166
01:26:16,640 --> 01:26:20,880
किसको? आपके खांसी को बहाना

1167
01:26:20,880 --> 01:26:24,880
बना रहे हैं कि यह आपकी घबराहट बता रही

1168
01:26:24,880 --> 01:26:29,680
है। खांसी जब आप कर रहे हैं वहां पर तो वो आपकी घबराहट

1169
01:26:29,680 --> 01:26:33,680
मुझे यहां पे इनफेक्शन है भाई मैं यहां पे वो

1170
01:26:33,680 --> 01:26:37,680
जमा हुआ है। क्या कहते हैं? कफ इनफेक्शन है थ्रोट। तो वो

1171
01:26:37,680 --> 01:26:41,840
वो कह रहा था अभी न्याय शास्त्रों से दिखाए

1172
01:26:41,840 --> 01:26:46,400
कि खांसी से खांसी का मतलब है घबराहट। अरे

1173
01:26:46,400 --> 01:26:51,120
वो कह रहे थे मेरा है नहीं आप ऐसे ही

1174
01:26:51,120 --> 01:26:55,520
कर रहे हैं मतलब जानबूझ के कर रहे हैं वो आपकी मनोस्थिति को दर्शा रही

1175
01:26:55,520 --> 01:26:59,600
अरे अगर अगर आपके खांसने से अगर आपके खांसने से आपके

1176
01:26:59,600 --> 01:27:03,760
घबराहट दिख रही है तो हम ये भी कह सकते हैं ना कि वो तो अपने छाती पर अपने

1177
01:27:03,760 --> 01:27:06,560
हाथ रखे थे तो उन्हें भी तो वो था

1178
01:27:06,560 --> 01:27:10,800
हम उन्हें भी घबराहट था बार-बार हो रहा था

1179
01:27:10,800 --> 01:27:15,120
नहीं ऐसा है कि खास

1180
01:27:15,120 --> 01:27:19,440
का वो लेकर के ऐसा भी होता है कि हमारे अंदर जो आवेग

1181
01:27:19,440 --> 01:27:23,520
आ रहा होता है एक ये सिचुएशन होती है मनुष्य

1182
01:27:23,520 --> 01:27:27,680
की कि आवेग जैसे आ रहा होता है किसी बात को लेकर के तो उस आवेग

1183
01:27:27,680 --> 01:27:31,680
को ओवरकम करने के लिए मनुष्य कभी-कभी ऐसी कुछ हरकतें कर लेता

1184
01:27:31,680 --> 01:27:35,760
है जो बिल्कुल विपरीत होती है जैसे कि मान लीजिए कि रोना आ

1185
01:27:35,760 --> 01:27:39,920
रहा है व्यक्ति हंस लिया या कुछ कुछ भी ऐसी

1186
01:27:39,920 --> 01:27:43,920
एक्टिविटी जिसमें वो जो है एकदम से उसका जो कॉन्शियसनेस

1187
01:27:43,920 --> 01:27:48,160
है वहां भटक लग गई तो जिससे कि वो जो जिससे उसे दूर होना था जिस तरह की एक्टिविटी

1188
01:27:48,160 --> 01:27:52,640
से तो यह जरूरी नहीं है कि खांसी अगर यह मान रहे हैं कि खांसी का मतलब घबराहट

1189
01:27:52,640 --> 01:27:57,280
ही है। खांसी का मतलब उत्तेजना भी तो हो सकता है। अगर

1190
01:27:57,280 --> 01:28:01,760
विपरीत कार्य कर रहा हूं किसी चीज को छुपा यह भी तो हो सकता है। क्रोध आ रहा है।

1191
01:28:01,760 --> 01:28:05,840
यह भी तो हो सकता है कि जल्दबाजी उसको कंट्रोल कर रहा हूं। जल्दबाजी को यह

1192
01:28:05,840 --> 01:28:10,080
भी तो हो सकता है कि भाई मैं मुझे सामने वाले को सम्मान देना है। मुझे उसको इंटरप्ट नहीं करना है। तो

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01:28:10,080 --> 01:28:14,240
कोई बात एकदम से आई तो मैंने ऐसे कर दिया। ये भी तो सोच सकते हो। वो

1194
01:28:14,240 --> 01:28:18,240
देखो उल्टे उल्टे खड़े हो जाओगे

1195
01:28:18,240 --> 01:28:21,680
वो लोग इस ओर ध्यान नहीं देंगे कि भाई क्वेश्चन

1196
01:28:21,680 --> 01:28:25,680
थे रीजन रीजनिंग थी उसमें क्वेश्चंस में

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01:28:25,680 --> 01:28:29,840
रीजनिंग थी वो ये सब नहीं सोचेंगे और आज नहीं छ

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01:28:29,840 --> 01:28:34,080
महीने बाद जाकर के एक बार उनमें से कोई पूछेगा जरूर इन क्वेश्चंस को

1199
01:28:34,080 --> 01:28:38,320
कि भाई इस इसका ये जवाब दिया बात क्या था भैया

1200
01:28:38,320 --> 01:28:42,400
मुख्य बात ये था कि उन्होंने जो है ये सब जो नियम है

1201
01:28:42,400 --> 01:28:46,800
ना नियम क्या तय तय हुआ था आपके चर्चा से पहले कि कोई भी

1202
01:28:46,800 --> 01:28:50,880
दुष्प्रचार नहीं करेगा वो कर रहा है और जहां

1203
01:28:50,880 --> 01:28:54,880
से ये वीडियो आई है वो उसमें ये वैदिक फिजिक्स का जो चैनल

1204
01:28:54,880 --> 01:28:58,960
है वो भी उसमें कोलैब है तो ये बात तो पता है कि भाई उन्हें भी इस

1205
01:28:58,960 --> 01:29:03,040
विषय में पता है कि वो किस प्रकार से दुष्प्रचार किया जा रहा है आपके विरुद्ध में

1206
01:29:03,040 --> 01:29:07,280
खासी को कुछ बता के तो मेन बात ये बताने का था कि उन्होंने नियम

1207
01:29:07,280 --> 01:29:11,360
तोड़ दिया है अच्छा कोई उनकी ओर से नियम तोड़ा जा रहा है और अति

1208
01:29:11,360 --> 01:29:15,360
हो रहा है

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01:29:15,360 --> 01:29:21,200
कोलैब कोलैब हुआ है। कोलैब हुआ है जिसमें एक व्यक्ति है सफेद रंग का जो

1210
01:29:21,200 --> 01:29:25,520
सफेद रंग का एक होता है ना वो बहुत ही हां उसप

1211
01:29:25,520 --> 01:29:29,680
हां उसप अलग कर लेंगे उसने अभी इनके अभी इनके बहुत सारे

1212
01:29:29,680 --> 01:29:33,760
वीडियोस आना बाकी हैं। अभी बहुत सारे वीडियोस आना बाकी है। अभी

1213
01:29:33,760 --> 01:29:38,480
तो एक सुबह एक श निकला है इसमें कि वो

1214
01:29:38,480 --> 01:29:42,560
पहले अनंत सामर्थवान जितने इन्होंने निषेध के लिए तर्क दिए थे

1215
01:29:42,560 --> 01:29:46,560
उन सब पर अलग-अलग वो निकल रहा है। एक तो अनंत सामर्थवान और

1216
01:29:46,560 --> 01:29:51,280
सर्वशक्तिमान वाला अभी निकल के आया है। अब आगे आएगा कि

1217
01:29:51,280 --> 01:29:55,360
ईश्वर जो है वो बुरे कार्य वाला कि वो पाप लगेगा ये है वो है। तीसरा

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01:29:55,360 --> 01:29:59,520
वो है कि उसका कार्य नहीं है अवतार लेना। यह भी है

1219
01:29:59,520 --> 01:30:03,600
और अलग से एक वो वाला छोटा बन जाएगा वो जो

1220
01:30:03,600 --> 01:30:07,600
उन्होंने कहा कि ईश्वर मिथ्या भाषण कर सकता है क्या और एक वो

1221
01:30:07,600 --> 01:30:12,400
बनेगा कि ईश्वर अपना वो अंत बता सकता है क्या

1222
01:30:12,400 --> 01:30:16,560
है ना और भी कुछ बनेंगे फिर अंत में वो वाला बनेगा

1223
01:30:16,560 --> 01:30:20,560
वो सूर्य सूर्य के रूप में प्रकट हुआ है नहीं हुआ है नहीं हुआ है प्रकट हुआ है हुआ है

1224
01:30:20,560 --> 01:30:24,880
नहीं हुआ है ये सब बन जाएगा ये सब है लाइन अप है सब

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01:30:24,880 --> 01:30:30,080
डाल डाल पापा पात चलने दो खैर जी भैया

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01:30:30,080 --> 01:30:30,580
आज की

1227
01:30:30,480 --> 01:30:34,480
बहुत अच्छी चर्चा समक्षात्मक वीडियो बनाएंगे। हां

1228
01:30:34,480 --> 01:30:40,480
हां बिल्कुल बिल्कुल

1229
01:30:41,520 --> 01:30:45,760
हां जी और कुछ पूछना है आपको जी नहीं

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01:30:45,760 --> 01:30:50,640
नहीं मैं आपको पूछ रहा हूं और कोई पूछना हो तो पूछ लीजिए आपको कोई प्रश्न

1231
01:30:50,640 --> 01:30:54,720
नहीं बड़ा अच्छा लगा सबसे अच्छी बात तो ये है कि आज आप जो है पूरी तरीके से

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01:30:54,720 --> 01:30:58,880
वहां से अपना ध्यान जो है आप सनातन धर्म से जुड़ गए

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01:30:58,880 --> 01:31:03,280
अपने विवेक पूर्वक आपने कार्य किया और बहुत अच्छी

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01:31:03,280 --> 01:31:07,440
यात्रा आपकी रही और मुझे लगता है भगवान की कृपा रही। आपकी यात्रा कई

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01:31:07,440 --> 01:31:11,680
अन्यों के लिए प्रेरणा बने और इसी प्रकार से हमारे जो सनातनी

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01:31:11,680 --> 01:31:16,000
भाई हैं जो भटक गए हैं और कहीं किनहीं

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01:31:16,000 --> 01:31:20,000
बातों को लेकर के छिटरे बिखरे हुए पड़े हुए हैं वो सब

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01:31:20,000 --> 01:31:24,080
एकत्रित हो वापस आए और धर्म रक्षा

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01:31:24,080 --> 01:31:29,200
में अपनी भूमिका सुनिश्चित करें।

1240
01:31:29,200 --> 01:31:35,200
ठीक है शास्त्रवाद जी कंप्लीट है। जी

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01:31:35,280 --> 01:31:39,440
चलिए ठीक है वो सुकून चोर था शायद कहीं से वांटेड रहा होगा

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01:31:39,440 --> 01:31:43,680
तो वो चेहरा दिखाने में उसको दिक्कत थी क्योंकि अगर चेहरा दिख जाता वो

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01:31:43,680 --> 01:31:45,520
खुजली वाला तो

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01:31:45,520 --> 01:31:49,600
होगा ही साथ ही साथ कुछ वांटेड भी होगा कि पता नहीं क्या मुंह काला है

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क्या है जिसके कारण वो चेहरा दिखाने के योग्य नहीं था तो आया

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तो था बड़ी तेजी में कि मैं शोएब अख्तर ग्लेन मैगरा तो ब्रेटली

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मिक्स वाली बॉल डालूंगा और फिर जब लास्ट में चेहरे वाली

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बात आती तो उतनी स्पीड से वापस चला जाता है व्यक्ति। ठीक

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है? जी भैया जय श्री राम।

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01:32:12,080 --> 01:32:18,080
जय श्री राम।

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[संगीत]
