1
00:00:03,600 --> 00:00:08,960
तो सभी को जय श्री राम। आज हमारे साथ में हमारे

2
00:00:08,960 --> 00:00:13,200
यहां पर हैं विजय श्री। आपने इनके बारे में कई बार चर्चाएं

3
00:00:13,200 --> 00:00:17,520
सुनी होंगी। कुछ विवादास विवाद भी चले बहुत सारी चीजें हुई।

4
00:00:17,520 --> 00:00:21,680
वो सभी आप जानते ही होंगे। बट आज यहां पर हम लोग बात करने वाले

5
00:00:21,680 --> 00:00:26,240
कुछ जो प्रासंगिक विषय हैं जिनके अंतर्गत

6
00:00:26,240 --> 00:00:30,400
हमारे धर्म की जो जो सनातन धर्म के जो मूलभूत सिद्धांत है उनका खंडन

7
00:00:30,400 --> 00:00:34,480
करने का प्रयास किया जा रहा है जो एक समस्या उन्होंने भी मुझे बताई तो मुझे लगा कि

8
00:00:34,480 --> 00:00:38,480
बल्कि हम दोनों को ही लगा कि इस पर हमें हमारी जो सामान्य चर्चाएं

9
00:00:38,480 --> 00:00:42,800
जो हम लोग करते हैं धर्म अधर्म को लेकर के जो

10
00:00:42,800 --> 00:00:46,800
चीजें डिस्कस होती है हमारे बीच में तो आज उनको हम आपको

11
00:00:46,800 --> 00:00:51,040
भी बताएं कि किस तरह से मतलब कौन-कौन सी चीजें हैं जो एक सामान्य

12
00:00:51,040 --> 00:00:55,040
व्यक्ति के दृष्टिकोण से उसके पर्सपेक्टिव से दिखाई देती है। उसको समाज

13
00:00:55,040 --> 00:00:59,040
में यह चीजें बोली जा रही है। वो बोली जा रही हैं। तो उनको लेकर के

14
00:00:59,040 --> 00:01:03,040
हम आज कुछ डिस्कशन करने वाले हैं जो आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं। विजय

15
00:01:03,040 --> 00:01:07,600
जी सभी को हर हर महादेव। जैसा कि शिवश

16
00:01:07,600 --> 00:01:11,600
जी ने बताया कि आज हम सिर्फ जैसी कॉन्वर्सेशन हम

17
00:01:11,600 --> 00:01:15,600
आपस में एक दूसरे के साथ संवाद करते हैं। बस हम इसको रिकॉर्ड करके

18
00:01:15,600 --> 00:01:18,720
आपके समक्ष पेश कर रहे हैं जिससे

19
00:01:18,720 --> 00:01:23,200
आपको भी पता चले कि हम किन-किन विषयों पर डिस्कशन भी करते हैं और कौन-कौन

20
00:01:23,200 --> 00:01:27,280
से विषय आजकल सोशल मीडिया सोशल मीडिया के बाहर

21
00:01:27,280 --> 00:01:31,360
चल रहे हैं और यह बहुत सारे प्रश्न सिर्फ हमारे ही नहीं आप सभी के

22
00:01:31,360 --> 00:01:35,840
भी हैं जिसके ऊपर हम लोग आज बात करेंगे और शास्त्र

23
00:01:35,840 --> 00:01:40,000
की दृष्टि क्या है और कंफ्यूजनंस क्या-क्या आ जाती है उस पर भी

24
00:01:40,000 --> 00:01:44,720
बात करेंगे। अच्छा विजय जी मैं

25
00:01:44,720 --> 00:01:48,800
मतलब एक चीज मैंने देखी कि आप थोड़ा सा जैसे हम

26
00:01:48,800 --> 00:01:52,880
हमारे हमारा जो वो है क्या कहेंगे कार्य

27
00:01:52,880 --> 00:01:57,120
क्षेत्र तो हमारा कार्य क्षेत्र ज्यादातर घिरा हुआ है वर्णाश्रमियों से

28
00:01:57,120 --> 00:02:01,280
परंपरा व्यक्तियों से और उसमें मतलब

29
00:02:01,280 --> 00:02:05,600
हमारे फॉलोअर्स भी ज्यादातर वही हैं जो कहीं रामानुजाचार्य

30
00:02:05,600 --> 00:02:09,680
से जुड़े हुए हैं या कहीं अन्य वैष्णवाचार्य संप्रदायों से

31
00:02:09,680 --> 00:02:14,080
जुड़े हुए हैं या फिर अपने शंकराचार्य से जुड़े हुए हैं। जी जी

32
00:02:14,080 --> 00:02:18,240
तो मैंने आपकी जो प्रोफाइल है तो वो ऐसी है कि उसमें

33
00:02:18,240 --> 00:02:22,240
आप विदेशियों से भी जुड़ी हैं। जो नहीं

34
00:02:22,240 --> 00:02:26,480
कुछ जानते धर्म के बारे में वो भी आपके फॉलोअर्स हैं। सबसे ज्यादा वही है। हां।

35
00:02:26,480 --> 00:02:30,640
तो सबसे पहले तो मैं कहूंगा कि यह

36
00:02:30,640 --> 00:02:33,760
जो तथाकथित जो यह वाली संस्थाएं हैं

37
00:02:33,760 --> 00:02:37,920
जो कल्ट्स टाइप के बन रहे हैं इस और आर्य समाज

38
00:02:37,920 --> 00:02:42,000
या ब्रह्मा कुमारीज आर्य समाज तो उतना इस वाली में नहीं है जो

39
00:02:42,000 --> 00:02:46,320
विदेशियों में फैल रहा हो हां आर्य समाज आर्य समाज तो खैर सिकुड़

40
00:02:46,320 --> 00:02:50,800
के रह गया अपने आप में स्कॉन हुआ ब्रह्माकुमारीज हुआ और अगर

41
00:02:50,800 --> 00:02:55,280
अनपढ़ लोगों की बात करें पिछड़े हुए वैसे वो आपके फॉलोवर्स नहीं होंगे

42
00:02:55,280 --> 00:02:59,360
मगर अनपढ़ पड़ो की बात करें तो उसमें रामपाल हो गए। रामपाल वाले लोग हो

43
00:02:59,360 --> 00:03:04,080
गए। तो आपके जो फॉलोअर्स हैं इस तरह के कर्स

44
00:03:04,080 --> 00:03:08,400
की क्या इमेज है उनके मन में? जैसे सद्गुरु हो गए ये जग्गी वासुदेव

45
00:03:08,400 --> 00:03:12,480
वाले तो ये किस तरह से देखते हैं आपके जो फॉलोअर्स हैं?

46
00:03:12,480 --> 00:03:16,560
एक्चुअली होता क्या है कि सब लोग जितने हमने अपने

47
00:03:16,560 --> 00:03:20,800
एक्सपीरियंस में देखे कि सबको होता है कि जो अच्छी बात बोल रहे हैं। अरे ये तो अच्छी

48
00:03:20,800 --> 00:03:24,880
बात बोल रहे हैं। अरे इन्होंने तो मंदिर बना दिया। अरे इन्होंने तो ये कर दिया। सब

49
00:03:24,880 --> 00:03:29,200
एक्चुअली उतनी डेप्थ में जा नहीं पाते हैं क्योंकि उतनी डेप्थ वो खोज

50
00:03:29,200 --> 00:03:33,200
भी नहीं रहे हैं। पर अब जो व्यक्ति उतनी डेप्थ खोजेगा तो

51
00:03:33,200 --> 00:03:37,360
वो इन छोटी-छोटी ऑर्गेनाइजेशंस के साथ कभी फॉर एवर जुड़ के

52
00:03:37,360 --> 00:03:41,760
रह नहीं जाएगा। वो जुड़ के रह जाएगा वो इसीलिए क्योंकि अब उसकी

53
00:03:41,760 --> 00:03:45,840
दाल, रोटी और सम्मान सारा उसी उस क्षेत्र से आ रहा है।

54
00:03:45,840 --> 00:03:48,880
और पहले उसने रिसर्च की नहीं थी। क्योंकि अगर वो

55
00:03:48,880 --> 00:03:53,040
उसको समझ लेगा कि ओ मूल पे क्या काम हो रहा है

56
00:03:53,040 --> 00:03:57,200
कि एक तो हुआ ना कि मैंने अपनी एक इमेज बनाई कि मैंने अपनी एक इमेज

57
00:03:57,200 --> 00:04:01,280
बनाई कि मैं ये करती हूं मैं ऐसी हूं मैं वैसी हूं। मैंने ये किया वो किया।

58
00:04:01,280 --> 00:04:06,160
पर वास्तव में उस इमेज के पीछे मैं क्या-क्या करती हूं

59
00:04:06,160 --> 00:04:11,440
उसका ज्ञान होना बहुत जरूरी है। और ऐसा नहीं है कि जो

60
00:04:11,440 --> 00:04:15,760
डिजिटली भी जो ऑडियंस है या यंग है या ओल्ड है सभी

61
00:04:15,760 --> 00:04:19,840
किसी को कुछ पता ही नहीं है। सबको बहुत कुछ पता है। हम इतनी देर में

62
00:04:19,840 --> 00:04:23,840
जो काम करते हैं उसको करके हम यह जाने कि

63
00:04:23,840 --> 00:04:27,920
एक होता है ना एक बल्क कमेंट जो होता है। पर ऐसा

64
00:04:27,920 --> 00:04:32,080
कभी नहीं है कि सिर्फ लोग गुणगान ही कर रहे हैं। बहुत लोग इन सब

65
00:04:32,080 --> 00:04:36,240
लोगों का भी खंडन करते हैं। तो उसको देख के पता चलता है कि

66
00:04:36,240 --> 00:04:40,400
हां लोगों को कहीं ना कहीं अंदर में वो चीजें चलती ही है

67
00:04:40,400 --> 00:04:45,280
क्योंकि वैसी चीजें आती हैं बार-बार हम और कुछ इस तरह के

68
00:04:45,280 --> 00:04:49,280
कांड इस तरह के कर देते हैं ये ऑर्गेनाइजेशनंस। हम कांड

69
00:04:49,280 --> 00:04:53,280
ही बोलेंगे कि नहीं भी किसी के मन में ऐसे प्रश्न आने हो तो वो

70
00:04:53,280 --> 00:04:57,440
प्रश्न अपने आप ही उठ जाते हैं। उठ जाते हैं। तो

71
00:04:57,440 --> 00:05:02,000
हां इस तरह के काफी लोग हैं। ज्यादातर मुझे लगता है कि लोगों को

72
00:05:02,000 --> 00:05:04,240
इनफ्लुएंस इनफ्लुएंस रहते हैं।

73
00:05:04,240 --> 00:05:08,240
हां इनफ्लुएंस तो रहते हैं क्योंकि अच्छा अच्छा बजट है

74
00:05:08,240 --> 00:05:12,320
ना उनके पास। अच्छा उन्हें उन्हें ब्रेक करना उनके जो उनका जो ये फेथ

75
00:05:12,320 --> 00:05:16,400
है इन कल्ट्स पर इन तथाकथित सनातना भाषी हम लोग

76
00:05:16,400 --> 00:05:20,400
थोड़ा सा क्लियर कहते हैं सनातना भाषी संस्थाओं पर उनका

77
00:05:20,400 --> 00:05:24,480
जो फेथ है उसको ब्रेक करने में भी बड़ी दिक्कत लगती है कि

78
00:05:24,480 --> 00:05:28,560
कैसे एकदम से अभी इसका फेथ है उस पे हम चोट कर दे गलत कर रहे हो हां ये भी

79
00:05:28,560 --> 00:05:32,720
दिक्कत आती है वाली बात है कि एक व्यक्ति ने एक इमेज

80
00:05:32,720 --> 00:05:36,720
बना ली उसने कोई दो शब्द भी अच्छे सुने जिससे वो प्रभावित हुआ कुछ

81
00:05:36,720 --> 00:05:41,360
सेकंड के लिए तो अब हम उसको उसको बोल रहे हैं कि इन सब से प्रभावित मत हो

82
00:05:41,360 --> 00:05:45,360
तो वो अपने अच्छे पलों को याद करता है या उसके दिमाग

83
00:05:45,360 --> 00:05:49,520
में जो उसने उसको छोटे-छोटे जो अच्छाइयां की होती है वो उसको याद करता है उसके

84
00:05:49,520 --> 00:05:53,600
कंपैरेटिवली उसको भुला देता है जो वो नहीं हो पाता क्योंकि उसको लगता

85
00:05:53,600 --> 00:05:57,600
है कि मेजरिटी जो वो अच्छा देख रहा है केवल वही है

86
00:05:57,600 --> 00:06:01,680
पर उसे पता ही नहीं है। अच्छा मगर आपने एक चीज और अच्छी कही ये मैं

87
00:06:01,680 --> 00:06:06,000
भी अपने लोगों से कहता हूं वो थोड़ा तरीका हमारा अलग होता है। आपका बात करने का तरीका

88
00:06:06,000 --> 00:06:10,080
थोड़ा लाइटर है और हम मेरा थोड़ा सा बात करने का तरीका

89
00:06:10,080 --> 00:06:16,080
है आक्रामक एक्शन वाला। आप पहले हैं जो ऐसे बोल रहे हैं

90
00:06:16,080 --> 00:06:19,360
हमें और सॉफ्ट होना चाहिए। वो फिर वो हो जाता है ना वो उसको

91
00:06:19,360 --> 00:06:23,360
कहते हैं रिलेटिविटी। हम हम् तो मैं कहां से देख रहा हूं

92
00:06:23,360 --> 00:06:27,360
फिर आपको लोग कहां से देखते हैं उस पे डिपेंड करता है। हां तो मैं क्या है यह

93
00:06:27,360 --> 00:06:31,440
वाली जो बात आती है ना कि आपने जो बात कही जिनकी अपनी इमेज बन गई है और उससे उनका

94
00:06:31,440 --> 00:06:35,520
धंधा चल रहा है या दुकानें चल रही हैं तो फिर वो उसको बचाने के लिए सारा

95
00:06:35,520 --> 00:06:40,560
जीवन लगाएंगे। तो यह ठीक वही है कि जैसे

96
00:06:40,560 --> 00:06:44,800
पूज्य गुरुदेव पुरी के शंकराचार्य जी कहते हैं कई बार जगदगुरु शंकराचार्य

97
00:06:44,800 --> 00:06:49,200
कि पूरे विश्व की जितनी भी

98
00:06:49,200 --> 00:06:54,000
समस्याएं हैं एक डेढ़ घंटे में उसको वो सॉर्ट आउट कर सकते हैं

99
00:06:54,000 --> 00:06:58,160
एक डेढ़ घंटे में बट जितने भी जो समुदाय

100
00:06:58,160 --> 00:07:02,240
हैं समूह हैं तंत्र हैं उनके जो लीडर्स हैं उनके पास आकर

101
00:07:02,240 --> 00:07:06,240
के गोष्ठी कर लें तो लाठी भाले की

102
00:07:06,240 --> 00:07:10,480
नो पर नहीं केवल सिद्धांत के द्वारा बहुत

103
00:07:10,480 --> 00:07:14,480
ही आसानी से पूरे समाज में शांति व्यवस्था और सुखद

104
00:07:14,480 --> 00:07:18,560
वातावरण निर्मित किया जा सकता है। यह गुरुदेव कहते हैं। मगर ऐसा होता क्यों नहीं

105
00:07:18,560 --> 00:07:22,560
है? क्योंकि वो जो लीडर्स हैं ना अपनीपनी जो चीजें करके बैठे

106
00:07:22,560 --> 00:07:26,640
हैं जो लीडर बने बैठे हैं वो शांति वार्ता वो कभी होने ही नहीं

107
00:07:26,640 --> 00:07:30,640
देंगे। वो संगोष्ठी तक पहुंचने ही नहीं देंगे।

108
00:07:30,640 --> 00:07:34,400
इतनी चीजें वो पहले ही क्रिएट कर देंगे। अरे तुम तो ऐसे हो, तुम तो वैसे

109
00:07:34,400 --> 00:07:38,480
हो। तो ये बताओ पहले ये बताओ ये बताओ तो ऐसी स्थितियां

110
00:07:38,480 --> 00:07:42,560
आपके सामने ऐसी असहज स्थितियां उत्पन्न करेंगे

111
00:07:42,560 --> 00:07:46,640
कि वो समय आए ही ना क्यों ना आए क्योंकि किसी की तो किसी का तो

112
00:07:46,640 --> 00:07:50,640
जीवन ही अब ये हो गया है ना कि भ्रम फैलाओ और खाओ किसी का जीवन

113
00:07:50,640 --> 00:07:54,640
ही ये हो गया कि वेदों का खंडन करो और खाओ किसी का जीवन ही हो गया कि भगवान को गाली

114
00:07:54,640 --> 00:07:58,880
दो और खाओ या परंपरा प्राप्त आचार्यों को गाली दो और खाओ

115
00:07:58,880 --> 00:08:03,040
उनकी पावर भी चली गई ना परंपरा प्राप्त आचार्यों के पास ही सारी पावर आ जाएगी

116
00:08:03,040 --> 00:08:07,040
जब उनको पता चलेगा कि ये सब तो मतलब नाटक चल रहा

117
00:08:07,040 --> 00:08:11,120
है। तो जब ये शांति वार्ता होने की बात आती है जो कि नहीं हो पा रही है

118
00:08:11,120 --> 00:08:15,360
इसको रोकने का जो मुख्य कारण होता है दुनिया में वो

119
00:08:15,360 --> 00:08:19,360
यही होता है कि अगर हम इस शांति वार्ता को होने देंगे तो हमारा

120
00:08:19,360 --> 00:08:23,360
क्या होगा? तो भैया हमारे तो शटर डाउन हो जाएंगे। तो इसलिए हम

121
00:08:23,360 --> 00:08:27,680
कभी नहीं होने देंगे। क्योंकि हमारा जीवन तो ऐसे ही कटना है ना। हमने तो चैनल

122
00:08:27,680 --> 00:08:31,680
खोल लिया है शंकराचार्यों की बुराई करने के लिए। हां।

123
00:08:31,680 --> 00:08:35,920
गौतम खट्टर और मीनाक्षी रावत की बात कर रहा हूं। यह लोग क्या करते हैं?

124
00:08:35,920 --> 00:08:40,160
इनके कभी आपने वीडियो वायरल होते हुए देखे कि भगवान का महिमा मंडन कर रहे हो और

125
00:08:40,160 --> 00:08:44,160
इनका इनका वीडियो वायरल हुआ हो। इनके वीडियो कौन से वायरल होते हैं? अरे

126
00:08:44,160 --> 00:08:48,720
उन्होंने ये नहीं करने दिया। उन्होंने वो नहीं करने दिया। भाई सारे

127
00:08:48,720 --> 00:08:50,240
भड़काऊ भाषण।

128
00:08:50,240 --> 00:08:54,320
तो इनका जब उसी से चल रहा है और ये तो

129
00:08:54,320 --> 00:08:58,320
चलो का काफी निम्न लेवल के उनके तो पे आए थे। याद है हमने

130
00:08:58,320 --> 00:09:02,400
आपको एक बार मैं मैं उसी पे आ रहा हूं मैं। तो, इनके तो काफ़ी अ

131
00:09:02,400 --> 00:09:06,480
लो लेवल का स्तर है इनका। अभी मगर इसी में जो पीक पर बैठे हुए जिनका

132
00:09:06,480 --> 00:09:11,040
पूरा साम्राज्य बन चुका है, तो वह कभी नहीं इस शांति वार्ता को होने देते।

133
00:09:11,040 --> 00:09:15,120
अब इसमें मैं ये बात आपसे जो अभी आपने बोली थी मैं ये पूछना

134
00:09:15,120 --> 00:09:19,200
चाहूंगा मतलब ये आर्य समाज तो कहीं का मतलब इस

135
00:09:19,200 --> 00:09:23,280
तरह का रहा नहीं है कि कोई इस पर बहुत ज्यादा ध्यान दिया जाए। वो तो खुद ही सिकुड़

136
00:09:23,280 --> 00:09:27,280
गया निराकार के चक्कर में। मगर जो इस है जिसने

137
00:09:27,280 --> 00:09:31,360
एक बहुत ही व्यवस्थित तरीके से बिजनेस मॉडल एक खड़ा किया है

138
00:09:31,360 --> 00:09:35,520
और वो आपको श्राद्ध भी बेच सकता है। वो आपको दीक्षा भी बेच

139
00:09:35,520 --> 00:09:39,600
सकता है। वो आपको हर धार्मिक चीज बेच सकता है। भगवान का श्रृंगार करने का

140
00:09:39,600 --> 00:09:43,680
पोर्स भी बेच सकता है। कोर्स भी बेच सकता है। दिखाता है उनको वैसे

141
00:09:43,680 --> 00:09:47,920
ही बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल। तो यह संस्थाओं का जो बिजनेस

142
00:09:47,920 --> 00:09:51,920
मॉडल है उसमें मुझे ऐसा पता लगा अभी कुछ दिनों पूर्व कि यह

143
00:09:51,920 --> 00:09:56,720
बिजनेस मॉडल का एक इकाई छोटी सी ऐसी भी है जो होते

144
00:09:56,720 --> 00:10:01,280
हमारी गुरु बहन विजय श्री जी तक आ गई तो ये

145
00:10:01,280 --> 00:10:05,440
थोड़ा सा दर्शकों को बताइए कि कैसे वो लोग कार्य करते कैसे इन्फ्लुएंस

146
00:10:05,440 --> 00:10:09,440
कैसे अपने इन्फ्लुएंसर्स खड़ा करते हैं वो मार्केट में इस के

147
00:10:09,440 --> 00:10:13,440
अलग-अलग सबसे पहले हम ये चीज को जान लेते हैं कि कोई मंदिर

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00:10:13,440 --> 00:10:17,600
है एक तो मंदिर का पैसा सरकारों के पास जाता है। है ना? जो दान दक्षिणा आपकी

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अलग से उनको आप देते हैं वो उन पर ही रह पाते हैं। तो क्या आप कभी

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00:10:21,680 --> 00:10:26,080
सोच सकते हैं कि मंदिर का एक फंड होगा सोशल मीडिया

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00:10:26,080 --> 00:10:30,240
इन्फ्लुएंसर्स के लिए, क्रिएटर्स के लिए और अगर ऐसा

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00:10:30,240 --> 00:10:34,640
फंड किसी का है तो क्या वो एक धार्मिक पारंपरिक जगह

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00:10:34,640 --> 00:10:38,960
है या फिर वो एक ऑर्गेनाइजेशन है तो फिर आपको आंसर मिलता है कि वो एक ऑर्गेनाइजेशन

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00:10:38,960 --> 00:10:43,440
है। उनके पास ऐसी फंडिंग है। तो जब उनके पास ऐसी फंडिंग है

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00:10:43,440 --> 00:10:47,600
तो फिर वो क्रिएटर्स को रीच आउट करते हैं। जैसे कि हमें भी किया है और आप पांच छह

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00:10:47,600 --> 00:10:51,680
और नाम ले लीजिए। सबने ही हमें मैसेज भेजा है और हम हर बार

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00:10:51,680 --> 00:10:55,680
मना ही करते हैं। पर इस बार जैसे उनका जो मंदिर

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00:10:55,680 --> 00:11:00,000
था वो मैं खुल के थोड़ा सा बता दूं थोड़ा सा ये उसमें एक

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00:11:00,000 --> 00:11:04,080
वो है ना कि एक नीतिगत चलने का प्रयास कर रही हैं। मगर नीति ये

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00:11:04,080 --> 00:11:08,080
भी है कि आप सच बोले। नहीं हम सच बोल और और

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00:11:08,080 --> 00:11:12,160
मैं आपको थोड़ा स्पष्टता के साथ प्रकाश डाल दूं कि इस के

162
00:11:12,160 --> 00:11:16,480
द्वारा इनको कई बार अप्रोच किया जाता है कि उनके अमुक इवेंट का ये प्रचार

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00:11:16,480 --> 00:11:20,560
करें अपने सोशल मीडिया अकाउंट से है ना ये यहां

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00:11:20,560 --> 00:11:24,560
का इवेंट का प्रचार करें वहां का प्रचार करें इसका अर्थ क्या है कि जो

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00:11:24,560 --> 00:11:28,800
वहां पर भक्तगण दान देते हैं या जो भी करते हैं उसका एक हिस्सा

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00:11:28,800 --> 00:11:32,880
इस बात के लिए खर्च होता है कि भले ही कोई कैसा भी हो चलिए

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00:11:32,880 --> 00:11:37,120
ठीक है ये तो शंकराचार्य जी से जुड़ी हुई उनसे दीक्षित उनके अनुगत हैं। कम से कम कभी-कभी

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00:11:37,120 --> 00:11:41,120
मुझे लगता इसीलिए भी मानते हैं। नहीं नहीं नहीं वो आपके प्रोफाइल का

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00:11:41,120 --> 00:11:45,120
जो आंकड़ा है क्योंकि मैं अभी बता रहा हूं वो भले ही कुछ भी करता हो अपनी

170
00:11:45,120 --> 00:11:49,600
पर्सनल लाइफ में उससे डजंट मैटर वो आपका प्रचारक बनके घूमेगा।

171
00:11:49,600 --> 00:11:53,840
यह प्रयास करते हैं इस ये प्रयास करती हैं इस जैसी संस्थाएं।

172
00:11:53,840 --> 00:11:57,920
हां। क्यों? कि आप देखिए जानवी कोई जानवी करके

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00:11:57,920 --> 00:12:02,160
है ना कोई अरे वो तो वो जो आर्य समाज का वीडियो जो आजकल

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00:12:02,160 --> 00:12:06,160
नया कहती है कि नहीं भगवान ने कोई लीला नहीं दिखाई थी उस पे हम बात करेंगे

175
00:12:06,160 --> 00:12:10,720
कि जानवी है बोलती है भगवान निराकार है भगवान अवतार नहीं ले सकते मगर जानवी

176
00:12:10,720 --> 00:12:14,880
जानवी सिंह कि एक बार वो जो इसान की भी जानवी जी है जिन्होंने बोल दिया

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00:12:14,880 --> 00:12:18,960
कि गीता हिंदू पुस्तक ही नहीं है हां वो वो वो तो वो तो

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00:12:18,960 --> 00:12:22,960
मामला अलग था मगर ये जो है ये वो वाली है जो जो आपको नरेंद्र

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00:12:22,960 --> 00:12:27,120
मोदी जी के साथ भी दिख गई हैं। है ना मेरे ख्याल से। तो ये

180
00:12:27,120 --> 00:12:31,120
वो हैं। अब ये इनका क्या था कि इनका सिद्धांत ये था कि भैया

181
00:12:31,120 --> 00:12:35,440
भगवान अवतार नहीं ले सकता। भगवान साकार स्वरूप नहीं हो सकता। मगर

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00:12:35,440 --> 00:12:35,940
आज

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00:12:35,760 --> 00:12:40,000
ये भी इस वक्ता बन के दिख रही हैं। हम तो इस

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00:12:40,000 --> 00:12:44,000
क्या इनको इनके इनको जब अप्रोच कर रहा है विजय जी को कि

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00:12:44,000 --> 00:12:48,000
भैया हमारा तुम प्रचार करो हमारे बारे में बोलो। डजंट मैटर कि तुम शंकराचार्य

186
00:12:48,000 --> 00:12:52,080
वाले हो। हम डजंट मैटर कि तुम शंकराचार्य के शिष्य हो।

187
00:12:52,080 --> 00:12:56,560
भाई तुम इस की फिलोसफी के अकॉर्डिंग वो क्या है वो

188
00:12:56,560 --> 00:13:00,880
अभक्त हो आप अभक्त आपने तो भगवान विष्णु की दीक्षा

189
00:13:00,880 --> 00:13:05,200
नहीं ले रखी है कोई और आपके ईस्ट हैं तो ऐसे में

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00:13:05,200 --> 00:13:09,360
इस के अनुसार ये अभक्त है मगर अभक्त को भी वो अपॉइंट

191
00:13:09,360 --> 00:13:13,360
कर रहा है किस लिए कि पैसा हम आपको दे रहे हैं आप हमारा प्रचार करिए

192
00:13:13,360 --> 00:13:17,520
तो ये जो जानवी सिंह जैसे और चेहरे आपको इन्फ्लुएंसर्स दिखाई देते हैं ना ऐसी

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00:13:17,520 --> 00:13:21,520
संस्थाओं का प्रचार करने के रूप में वो आज आप यह सच्चाई जान लीजिए वो

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00:13:21,520 --> 00:13:25,760
वो किस तरीके से जो सोशल मीडिया पर जो सक्सेसफुल अकाउंट्स होते हैं, सक्सेसफुल

195
00:13:25,760 --> 00:13:29,920
जो इन्फ्लुएंसर्स होते हैं उनको पैसा देकर के अपना प्रचार करवाते हैं। पैसा

196
00:13:29,920 --> 00:13:34,000
भी है और कोलैबोरेशन भी है। हम आपको बताते हैं क्या है। सबसे पहले आपको उनकी

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00:13:34,000 --> 00:13:38,000
टीम के या फिर जिस मार्केटिंग एजेंसी को उन्होंने

198
00:13:38,000 --> 00:13:42,160
कॉन्ट्रैक्ट दिया होता है, वो लोग आपको रीच आउट करते हैं। मैसेज

199
00:13:42,160 --> 00:13:46,320
करते हैं। फिर आप उनसे बात करेंगे तो वह आपको बताते हैं कि यह मंदिर है या यह

200
00:13:46,320 --> 00:13:50,400
समिट है। यहां पे आपको आना है। कभी-कभी आपको

201
00:13:50,400 --> 00:13:50,900
पूरा

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00:13:50,800 --> 00:13:54,880
खर्चा वह उठा लेते हैं और कभी-कभी आपको अपना ट्रैवल एक्सपेंस पूरा खुद

203
00:13:54,880 --> 00:13:58,960
उठाना पड़ता है। वहां पर आपका रहना खाना पीना प्रोग्राम्स वो सब वो फ्री

204
00:13:58,960 --> 00:14:03,120
कर देते हैं। बदले में उनको आपकी जो इमेज है वो मिल जाती है। आपका टाइम

205
00:14:03,120 --> 00:14:07,120
स्क्रीन टाइम मिल जाता है। और सोचिए जो व्यक्ति इंटरेस्टेड

206
00:14:07,120 --> 00:14:11,200
है उसको लगता है कि उसके बैनर के अंडर आके उसकी बहुत मतलब फेम

207
00:14:11,200 --> 00:14:15,520
बढ़ रहा है। पर बात यहां पे क्या है? हमें जितनी बार भी

208
00:14:15,520 --> 00:14:19,600
बुलाया गया हमें तो यह भी बोला था मंदिर के लिए सबसे पहले जो मंदिर

209
00:14:19,600 --> 00:14:24,080
था उसके अंदर हमें बोला गया कि आप बताइए

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00:14:24,080 --> 00:14:28,320
कितना आपको चाहिए हम आपको पैसा देंगे आप आके हमारे

211
00:14:28,320 --> 00:14:32,480
साथ वीडियो बनाइए हम हम मना कर दिए फिर दोबारा

212
00:14:32,480 --> 00:14:36,720
एक एक और एक अलग मंदिर के लिए बोला गया तो हम उस व्यक्ति को

213
00:14:36,720 --> 00:14:41,200
ये चारप बार हो चुका है अभी तक क्योंकि हम इस बार एक कोई नई एजेंसी

214
00:14:41,200 --> 00:14:45,360
थी तो हमने उन्हें बोला कि आप मेरी एक बात सुनिए।

215
00:14:45,360 --> 00:14:49,360
आपको कोई भी चीज मिलती है, कुछ भी चीज है इस से

216
00:14:49,360 --> 00:14:53,360
रिलेटेड। आप कृपया मेरा ही नाम ब्लैक लिस्ट में डाल दीजिए कि आपका

217
00:14:53,360 --> 00:14:57,600
भी समय बचेगा। हमारा भी समय बचेगा। अब इसमें देखिए उन

218
00:14:57,600 --> 00:15:01,760
लोगों की रिसर्च कितनी मतलब खराब है। हमने तो अपने

219
00:15:01,760 --> 00:15:06,000
पेज पर उस कौन का जब ये क्या नाम है उसका? जानवी। मुझे

220
00:15:06,000 --> 00:15:10,560
पूरा नाम नहीं पता है। एटरर्नल ट्रुथ करके जो लड़की ने

221
00:15:10,560 --> 00:15:14,640
ये जब हमारा पाकिस्तान और भारत का वॉर चल रहा था तो ये देवी

222
00:15:14,640 --> 00:15:18,880
जी बोल रही थी कि गीता तो हिंदू पुस्तक है ही नहीं। इसलिए

223
00:15:18,880 --> 00:15:22,880
आप लोग जो मुसलमान संप्रदाय है वहां का पाकिस्तान

224
00:15:22,880 --> 00:15:27,280
का उनको बोल रही थी कि आप पढ़ सकते हैं। हम तो इस पर हमने विरोध किया।

225
00:15:27,280 --> 00:15:31,280
उसके अंदर हमने लिखा भी था कि एस्कॉन के जो लोग हैं

226
00:15:31,280 --> 00:15:35,360
उनके द्वारा ये किया जाए। इस का शिष्य बोला जाएगा ना कल हम कुछ करेंगे

227
00:15:35,360 --> 00:15:39,760
तो वो बोलेंगे शंकराचार्य के शिष्य तो वो पोस्ट

228
00:15:39,760 --> 00:15:43,760
के बाद भी हमें ऑफर आए हैं तो हमें कभी-कभी हंसी आती

229
00:15:43,760 --> 00:15:47,760
है कि कि मतलब [हंसी] उनको उनको कोई मतलब

230
00:15:47,760 --> 00:15:52,000
नहीं है। वो तो अपना कोशिश आप देखिए ना सीधी सी बात

231
00:15:52,000 --> 00:15:56,160
है। हां अब जैसे कोई मूवी बन गई हां

232
00:15:56,160 --> 00:16:00,400
वो मूवी में वो मूवी के लिए अब वो मूवी के द्वारा

233
00:16:00,400 --> 00:16:04,480
अपना जो है वो कर प्रमोशन कराना है अब प्रमोशन

234
00:16:04,480 --> 00:16:08,640
कराना है किसका इस्कॉन का अब भले ही वो व्यक्ति संध्या वंदन करता हो कि

235
00:16:08,640 --> 00:16:12,720
नहीं करता हो भले ही वो व्यक्ति इस्कॉन के अनुसार ले लें तो 16

236
00:16:12,720 --> 00:16:16,720
माला जप करता हो कि नहीं करता हो भले ही वह व्यक्ति शाकाहारी हो या मांसाहारी हो

237
00:16:16,720 --> 00:16:21,040
भले ही वह व्यक्ति मिलेच्छ हो भले ही वह व्यक्ति 20 फीटर हो डजंट मैटर

238
00:16:21,040 --> 00:16:25,280
मगर हम उसको को रोकड़ा दे के अपना प्रचार करवा लेंगे।

239
00:16:25,280 --> 00:16:29,360
ये ये पॉलिसी है इस जैसी संस्थाओं की और अगर नहीं देंगे तो क्या

240
00:16:29,360 --> 00:16:33,440
देंगे? हम बताते हैं। आपका रहना खाना पीना और फिर हम आपको गीता

241
00:16:33,440 --> 00:16:37,440
देंगे और वहां पे बड़े इवेंट सेवा करवाएंगे। एक बड़े इवेंट में

242
00:16:37,440 --> 00:16:41,440
आपको इंट्रोड्यूस करेंगे। ये सारी चीजें कोलैब जिसको कहते हैं। अब हम

243
00:16:41,440 --> 00:16:45,680
क्या बताएं कि हमें तो उनकी गीता चाहिए ही नहीं। है ना? और दूसरी

244
00:16:45,680 --> 00:16:49,680
बात एक और है कि मतलब यह भी तो बात है ना कि हम

245
00:16:49,680 --> 00:16:53,680
मिसकॉन से कब उखड़े हम तो ऐसा नहीं था कि किसी ने

246
00:16:53,680 --> 00:16:57,760
हमें ज्ञान का प्रकाश दिया तो हम उखड़े हम उखड़े तो अपने ही कारणों से थे

247
00:16:57,760 --> 00:17:01,760
क्योंकि उसके पीछे भी इस कॉर्न का ही हाथ है। तो एक तरह से हमें इस कौन

248
00:17:01,760 --> 00:17:05,840
का धन्यवाद करना चाहिए क्योंकि इस कॉर्न की वो वीडियो के कारण ही आज हम लोग यहां पर

249
00:17:05,840 --> 00:17:08,080
हैं।

250
00:17:08,080 --> 00:17:12,240
मैं थोड़ा सा रिवाइज कर दूं। लगभग मेरे ख्याल से दो से

251
00:17:12,240 --> 00:17:16,320
ढाई वर्ष हो गए होंगे। कुछ इस के लोग थे

252
00:17:16,320 --> 00:17:20,400
जो इस की जो मैनपुलेटेड भगवत गीता

253
00:17:20,400 --> 00:17:24,560
है वह बेच रहे थे भ्रामक वाली जिसमें उसका भ्रामक अनुवाद

254
00:17:24,560 --> 00:17:28,560
किया गया है तो मैंने उनसे कुछ क्वेश्चंस पुट अप कर दिए थे जो उन्होंने

255
00:17:28,560 --> 00:17:32,720
कहा था भैया आप वहां आकर के बात करिए वो वीडियो वायरल हुआ था वो वीडियो

256
00:17:32,720 --> 00:17:36,240
इन तक पहुंचा इन्होंने भी उस वीडियो को सपोर्ट किया और

257
00:17:36,240 --> 00:17:40,320
फिर इस तरीके से कनेक्शन में आई कनेक्शन में आई तो इनके भी जीवन में

258
00:17:40,320 --> 00:17:44,400
कुछ ऐसी चीजें थी जो पूर्णतया मतलब शास्त्रों की विपरीत जाती हुई दिखती थी।

259
00:17:44,400 --> 00:17:48,400
परंतु मैंने जैसे ही ऐसा नहीं हुआ कि जैसे ही

260
00:17:48,400 --> 00:17:52,560
इनसे बातचीत हुई तो मैंने इनको तुरंत बता दिया भैया आप प्रणव का उच्चारण मत करो। प्रामाणिक

261
00:17:52,560 --> 00:17:56,800
आचार्य गण मना करते हैं कि स्त्रियों को नहीं करना चाहिए। बहुत पेशेंस में

262
00:17:56,800 --> 00:18:00,880
और कभी मुझे ऐसा नहीं बोला कि आप बहुत गलत हैं या ये सारी

263
00:18:00,880 --> 00:18:05,120
चीजें गलत है। ऐसा कभी भी नहीं था। वो तो हम ही आपको बोलते थे।

264
00:18:05,120 --> 00:18:09,200
हम आपको एक बात बताते हैं। यही मुझसे पूछती थी। और पूछने पर

265
00:18:09,200 --> 00:18:13,280
मैं इनको रिप्लाई करता था। जैसे कि ये नास्तिक को क्या जवाब दें? तो मैंने वो

266
00:18:13,280 --> 00:18:17,280
जो गुरुदेव के द्वारा दी गई वो परिभाषा वो ज्यों की त्यों इनको

267
00:18:17,280 --> 00:18:21,360
चिपका दी थी। हां और सबसे इंटरेस्टिंग बात ये थी क्योंकि इस

268
00:18:21,360 --> 00:18:26,000
की इनकी वीडियो थी और हमारा विषय ऐसे था कि उससे ठीक 101

269
00:18:26,000 --> 00:18:30,400
दिन पहले ही हम गए मंदिर में दर्शन करने के लिए। तो हमारा

270
00:18:30,400 --> 00:18:34,400
एक भाई ही है वहां पे। तो उसने बोला कि चलो कृष्ण

271
00:18:34,400 --> 00:18:38,800
जी के दर्शन करके आते हैं। तो नित्यानंद जी का

272
00:18:38,800 --> 00:18:42,800
प्राकट्य महोत्सव वो लोग मना रहे थे। हम तो वहां पर हम लोग

273
00:18:42,800 --> 00:18:46,880
गए और मतलब जैसे प्रवचन चलता है

274
00:18:46,880 --> 00:18:51,040
प्रवचन चल रहा था अब उनके जो वक्ता थे वहां पे हम उनको वक्ता ही बोलेंगे

275
00:18:51,040 --> 00:18:51,540
तो

276
00:18:51,360 --> 00:18:55,360
वो बैठ के बोलते हैं कि दुर्गा तो जेलर है

277
00:18:55,360 --> 00:18:59,360
जेलर दुर्गा की पूजा करने से मोक्ष थोड़ी

278
00:18:59,360 --> 00:19:04,560
मिलेगा क्योंकि मोक्ष तो मिलता है परम आत्मा

279
00:19:04,560 --> 00:19:08,880
श्री कृष्ण की पूजा करके तो और हमारे

280
00:19:08,880 --> 00:19:13,280
इर्दगिर्द ज्यादातर महिलाएं हम महिलाओं को देख रहे हैं

281
00:19:13,280 --> 00:19:17,360
कि महिला है ना तो उसमें दुर्गा का तत्व है और

282
00:19:17,360 --> 00:19:21,360
ये क्या बोल रहा है और महिलाएं बैठी हैं और वहां पे जो फिरंग बैठे हैं फिरंग बोल

283
00:19:21,360 --> 00:19:25,760
रहे हैं हां हरे कृष्णा तो हमें तो बहुत बुरा लगा

284
00:19:25,760 --> 00:19:29,840
तो हमने बात की फिर हमें पता चला कि अच्छा शिव जी के बारे में यह सब बोला जाता

285
00:19:29,840 --> 00:19:34,000
है और फिर जो हिंदू मतलब अब वो हो गए थे

286
00:19:34,000 --> 00:19:38,000
तो वह हमें दिखा रहे हैं कि देखो देखो श्री कृष्ण अपने आप को यहां पे यह बोल रहे

287
00:19:38,000 --> 00:19:42,240
हैं यह है तो फिर जब हमने उनको अपनी तरफ से बोला जो भी हमें

288
00:19:42,240 --> 00:19:46,640
अल्प यू नो अल्प बुद्धि को जो पता था कि भाई

289
00:19:46,640 --> 00:19:50,800
कृष्ण जी ने तो वो या वो तो रुद्र अभिषेक करके जाते थे

290
00:19:50,800 --> 00:19:54,960
पर सामने तो स्वरूप एक ही है। ज्यादा तो मतलब हमें उतना ज्ञान

291
00:19:54,960 --> 00:19:59,360
भी नहीं था ना कि बात को रखना कैसे है पर हमें ये समझ नहीं आ रहा था हम

292
00:19:59,360 --> 00:20:03,600
और ऐसा नहीं है कि हम कृष्ण के भक्त नहीं है। हमें बहुत प्रिय है कृष्ण जी

293
00:20:03,600 --> 00:20:06,400
है ना तो गोवर्धन

294
00:20:06,400 --> 00:20:10,400
मठ के तो हम अनुयाई हैं। तो कृष्ण भगवान हमें प्रिय क्यों नहीं

295
00:20:10,400 --> 00:20:14,400
होंगे? क्यों? बिल्कुल। तो ये सारी बातें चली और

296
00:20:14,400 --> 00:20:18,400
मेरे मन में ऐसे आग लगी और मैं चैन से बैठ

297
00:20:18,400 --> 00:20:22,560
ही ना पाऊं और उन्हीं दिनों में यह वीडियो आई और मुझे

298
00:20:22,560 --> 00:20:26,720
ऐसा लगा कि वाह कोई तो बोल रहा है। कोई तो कर

299
00:20:26,720 --> 00:20:31,120
रहा है। उस समय हमारी वीडियोस में हम अंतिम में थोड़ा

300
00:20:31,120 --> 00:20:35,200
प्रणव शक्ति प्रणव का उच्चारण ये सब कर रहे थे। समझ रहे थे चीजों को।

301
00:20:35,200 --> 00:20:39,280
तो उस समय हमें ये होता था कि हम कैसे बनाएं क्या बोलूं मैं पर पता

302
00:20:39,280 --> 00:20:43,280
नहीं है पर ठीक भी नहीं लग रहा है तो वहां से हम हटे और

303
00:20:43,280 --> 00:20:47,360
फिर जो जो कुतर्क वो हमें देते थे हमने आपसे वही सब

304
00:20:47,360 --> 00:20:51,360
पूछे कितने दिन पूछे जी जी और फिर आपने धीरे-धीरे जो हमने

305
00:20:51,360 --> 00:20:55,360
समझाया तो फिर हमें लगा अरे वाह और

306
00:20:55,360 --> 00:20:59,360
मुझे इस बात की बहुत प्रसन्नता है आज मैंने एक दिन देखा

307
00:20:59,360 --> 00:21:03,600
जब मैं अभी गोवर्धन मठ गया था तो ये वहां पर चातुर्मास में थी और

308
00:21:03,600 --> 00:21:07,760
मैंने देखा कि इनके पास कोई फोन आया था और यह नहीं जानती थी कि मैं भी देख रहा हूं।

309
00:21:07,760 --> 00:21:12,560
तो इनके पास कोई फोन आया था तो वे बड़ी ही कड़क आवाज में कह रही थी कि देखिए

310
00:21:12,560 --> 00:21:16,640
जब भी अगर इस तरह का कोई आमंत्रण कोई अप्रोच इस

311
00:21:16,640 --> 00:21:20,800
की ओर से अगर हो तो मुझे आप फोन मत किया करिए। मेरे

312
00:21:20,800 --> 00:21:21,600
सिद्धांत बड़े

313
00:21:21,600 --> 00:21:25,680
क्लियर हैं। हम इस को प्रमोट नहीं करेंगे। तो मुझे बड़ा अच्छा लगा कि एक

314
00:21:25,680 --> 00:21:29,920
कोई व्यक्ति सिद्धांतवादी जो है अह निर्मित हुआ और

315
00:21:29,920 --> 00:21:34,080
उसमें मैं मैं भी कहीं ना कहीं निमित्त बना। गुरु गोविंद ग्रंथ की कृपा

316
00:21:34,080 --> 00:21:38,400
से हुआ यद्यपि वो उस उस यात्रा में मैं भी कहीं ना कहीं छोटा सा एक निमित्त

317
00:21:38,400 --> 00:21:43,120
बन गया कण का तो मुझे उस दिन बड़ी प्रसन्नता हुई और

318
00:21:43,120 --> 00:21:46,480
इनकी जो चीजें थी जैसे

319
00:21:46,480 --> 00:21:50,640
एक एक दिन की बात है मुझे याद है कि एक दिन इनका फोन आया कि

320
00:21:50,640 --> 00:21:54,720
आपने मुझे यह क्यों नहीं बताया कि प्रणव का उच्चारण नहीं किया जाता [हंसी] तो मैंने

321
00:21:54,720 --> 00:21:59,120
कहा कि भाई कि आज क्योंकि आप कहते हो कि गायत्री

322
00:21:59,120 --> 00:22:03,120
मंत्र नहीं पढ़ना चाहिए स्त्रियों को तो मैंने बंद कर दिया या महा

323
00:22:03,120 --> 00:22:07,360
महामृत्युंजय मंत्र नहीं पढ़ना चाहिए तो होम नहीं मतलब बंद कर दिया

324
00:22:07,360 --> 00:22:11,520
मेरी सहेली ने पूछा प्रणव भी नहीं बोलते हां मगर फिर इनकी किसी सहेली ने इनसे

325
00:22:11,520 --> 00:22:15,520
पूछा कि फिर तू प्रणव क्यों बोलती है तो इनको खटक गया

326
00:22:15,520 --> 00:22:19,920
कि ये क्या बात है मैं तो प्रणव बोल रही हूं हर वीडियो के अंत में बोल रही हूं प्रणव शक्ति प्रणव

327
00:22:19,920 --> 00:22:24,160
और ये बोलती थी और मैं मैं जानता था कि ये गलत है पर मैं उस समय नहीं बोलता

328
00:22:24,160 --> 00:22:28,480
था तो फिर इन्होंने मुझे पूछा कि आपने आज तक क्यों नहीं बताया मुझे प्रणव शक्ति प्रणव

329
00:22:28,480 --> 00:22:32,590
तो मैंने कहा गुरुदेव ने एक दिन कहा था कि सारा घी एक ही दिन में नहीं पिलाया जाता

330
00:22:32,590 --> 00:22:36,880
[हंसी] नहीं तो अपच हो जाती है। तो इस तरह से ये जर्नी

331
00:22:36,880 --> 00:22:40,960
कुछ रही तो मुझे बड़ी प्रसन्नता है कि जो

332
00:22:40,960 --> 00:22:45,440
है इन्हें हम प्राप्त कर पाए वापस वहां से जो उस दुनिया में इन्फ्लुएंस्ड

333
00:22:45,440 --> 00:22:50,000
हो गई थी। हालांकि ये इनका कुछ प्रारब्ध भी था। इनकी

334
00:22:50,000 --> 00:22:54,000
अंदर चीजें थी। जैसे शंकराचार्य इन्होंने जो हमारी जो बातें

335
00:22:54,000 --> 00:22:58,080
हुई है शंकराचार्य आदि आदि शंकराचार्य जी के लिए इनके मन के अंदर एक अलग

336
00:22:58,080 --> 00:23:02,320
से पहले से एक था एक निष्ठा था। हां और कहीं ना कहीं

337
00:23:02,320 --> 00:23:06,480
कुछ अच्छी चीजें जैसे वर्णाश्रम इत्यादि धर्म के प्रति अपनी माता इनकी

338
00:23:06,480 --> 00:23:10,960
माता जी का भी मैं बहुत वो करूंगा इनकी जो माता जी हैं उन्होंने इनको

339
00:23:10,960 --> 00:23:14,960
जो भी दिया हो मगर वर्णाश्रम धर्म जरूर इनको सिखाया था जिसकी वजह से

340
00:23:14,960 --> 00:23:18,960
अपने वर्णाश्रम के लिए बड़ा चिंतित रहती थी ये तो ये सब कुछ अच्छी चीजें जिसके

341
00:23:18,960 --> 00:23:23,120
कारण प्रारब्ध पूर्वक ये जो है ऐसे ऐसे यहां तक पहुंची

342
00:23:23,120 --> 00:23:27,360
खैर अब थोड़े से वो वो वाले टॉपिक पे आ जाते हैं वो

343
00:23:27,360 --> 00:23:31,360
जो मुख्य जो वो विषय थे ना कुछ एलगेशन लगाए जाते हैं

344
00:23:31,360 --> 00:23:35,360
भगवान श्री कृष्ण के विरोध में। तो अच्छा पहले

345
00:23:35,360 --> 00:23:39,760
मैं एक बात बता दूं कि यह जो जानवी सिंह करके है ना जानवी सिंह

346
00:23:39,760 --> 00:23:44,320
जानवी सिंह वही है जो भगवान श्री कृष्ण के विराट स्वरूप

347
00:23:44,320 --> 00:23:48,560
का खंडन करती है अपनी वीडियो में चला देंगे इस वीडियो में कहीं पे हम

348
00:23:48,560 --> 00:23:51,920
वो खंडन करती है और फिर फिर

349
00:23:51,920 --> 00:23:55,920
वो इस के प्रचारक बन के कैसे आ सकती है कम से कम इस जो भी

350
00:23:55,920 --> 00:24:00,160
करता है मगर वो ईश्वर को साकार तो कहता है भगवान के विराट

351
00:24:00,160 --> 00:24:04,240
स्वरूप की तो फोटो लगाता है वो बात अलग है कि उसका मंत्र मंतव्य यह हो सकता है कि

352
00:24:04,240 --> 00:24:08,400
आगे चलकर के वो भगवान श्री कृष्ण की जगह ईसा मसीह को फिट करना चाहता

353
00:24:08,400 --> 00:24:12,400
हो। वो बात अलग है। परंतु अभी तो ऐसा है साकार स्वरूप और

354
00:24:12,400 --> 00:24:16,560
कृष्ण है। तो उसका प्रचार कैसे कर रही है वो जो ये मानती नहीं

355
00:24:16,560 --> 00:24:20,560
है कि भगवान श्री कृष्ण ने कोई विराट स्वरूप लिया था। ये इट्स ऑल अबाउट

356
00:24:20,560 --> 00:24:24,560
मनी एंड बिजनेस। ये साफ है। सबसे इंटरेस्टिंग बात

357
00:24:24,560 --> 00:24:28,560
हम बताते हैं। आप खुद देखिए। एक महिला जो मतलब

358
00:24:28,560 --> 00:24:32,960
ऐसी महिला आपको केवल इसी ऑर्गेनाइजेशन की मिल सकती है जो जनेऊ

359
00:24:32,960 --> 00:24:37,120
भी डालेगी जो हर तरह के प्रपंच को करेगी इसकी सहेली जाके

360
00:24:37,120 --> 00:24:41,280
सिर्फ स्टेज पे चिल्लाएगी कभी [हंसी] ना चिल्लाकर भी अपनी

361
00:24:41,280 --> 00:24:45,280
बात रखो कभी बिना चिल्लाए सिर्फ प्रभु के गुणगान की भी

362
00:24:45,280 --> 00:24:49,280
बात करो निराकार की ही बात कर लो निराकार की अपने ऋषिकेश

363
00:24:49,280 --> 00:24:53,280
ब्रह्मचारी जी जो है मटके निराकार स्वरूप जो भगवान का है

364
00:24:53,280 --> 00:24:57,440
उसका जब उसकी जब महिमा कर रहे थे इस बार चातुर मास में क्या भाव

365
00:24:57,440 --> 00:25:01,760
बनते हैं? लोग समर्पित हो जाते हैं। पर उसके अलावा

366
00:25:01,760 --> 00:25:05,840
इनका जो टारगेट रहता है वो आपकी

367
00:25:05,840 --> 00:25:07,760
पारंपरिक परंपराओं

368
00:25:07,760 --> 00:25:11,760
से जो आचार्य गण आते हैं जहां पे आप बोलोगे ना आई वांट

369
00:25:11,760 --> 00:25:16,000
टू नो द ट्रुथ कि मुझे सच जानना है कि मतलब कैसा

370
00:25:16,000 --> 00:25:20,000
है। है ना? कि 2 2 इज 4। मुझे इस तरह का सच

371
00:25:20,000 --> 00:25:24,080
जानना है तो आपको यह इन्हीं चीजों से दूर करते हैं।

372
00:25:24,080 --> 00:25:28,960
इस ये वीडियो के अंदर हम यह बात को जरूर रखना चाहेंगे।

373
00:25:28,960 --> 00:25:32,960
हम कितना लिखें, कितना बोले फिर हम बोलते हैं छोड़िए हम हमें जो वीडियो

374
00:25:32,960 --> 00:25:37,040
बनाना है जो सही बात है हम वो लिख देंगे। पर फिर बार-बार बात

375
00:25:37,040 --> 00:25:41,440
क्या आ जाती है? पर किसी को कैसे पता चलेगा कि हां ये व्यक्ति गलत

376
00:25:41,440 --> 00:25:45,600
है। और दूसरी बात ये है हमारी कोई पर्सनल दुश्मनी

377
00:25:45,600 --> 00:25:50,000
तो किसी से है नहीं। है ना? हम बात कर रहे हैं तर्क की कि

378
00:25:50,000 --> 00:25:54,240
यहां पे यह बात गलत बोल दी गई है। क्यों? क्योंकि आप एक कंटेंट

379
00:25:54,240 --> 00:25:58,240
क्रिएटर हैं और आप कंटेंट बना रहे हैं जिस विषय पे तो आप अपने आप को

380
00:25:58,240 --> 00:26:02,400
रिस्पांसिबल कर रहे हैं कि हमें बहुत पता है। हम जो शेयर कर रहे हैं वो

381
00:26:02,400 --> 00:26:06,640
सही ही होता है। लिखती भी है ना वो ऐसा। जी। तो जब आप

382
00:26:06,640 --> 00:26:10,640
बोल रहे हैं सही ही है। अब जितने भी आपके फॉलोअर्स हैं मैं

383
00:26:10,640 --> 00:26:14,640
कह रही हूं आपके 100 फॉलोअर्स हैं। वो 100 लोग आपके अनुयाय की तरह

384
00:26:14,640 --> 00:26:18,720
आपको देख रहे हैं। तो आप उनका जीवन क्यों पतित

385
00:26:18,720 --> 00:26:22,880
कर रही हैं? गलत ज्ञान देकर, गलत बातें, गलत विचार उनमें

386
00:26:22,880 --> 00:26:26,960
डालकर एक ऐसी महिला जो बोले कि श्री कृष्ण

387
00:26:26,960 --> 00:26:30,960
की एक लीला है वस्त्र चुराने की। अब उसके

388
00:26:30,960 --> 00:26:35,200
वो लीला के बारे में हम लोग कल भी चर्चा कर रहे तो आप बताइएगा पर आपको

389
00:26:35,200 --> 00:26:39,360
एक भूमिका बताने के लिए कि श्री कृष्ण वस्त्र चुराते थे। श्री

390
00:26:39,360 --> 00:26:43,440
कृष्ण माखनचोर हैं। अब इन लीलाओं का मतलब क्या है? अभी हम

391
00:26:43,440 --> 00:26:47,760
डिस्कस करेंगे। पर वो महिला का बोलने का तरीका क्या है? श्री

392
00:26:47,760 --> 00:26:51,760
कृष्ण ने तो द्रोपदी को वस्त्र दिए। तो लगता है हां हां हां श्री कृष्ण ने

393
00:26:51,760 --> 00:26:55,760
वस्त्र दिए। वो तो बहुत मतलब पूजनीय है। महापुरुष है। है ना?

394
00:26:55,760 --> 00:27:00,560
जी। तो फिर उनके अंदर ऐसे वासना वाले भाव क्यों आएंगे?

395
00:27:00,560 --> 00:27:04,560
अब कोई इस लड़की को बताओ कि 7 साल 5 साल के बच्चे

396
00:27:04,560 --> 00:27:08,800
बहुत सारी शरारतें करते हैं। घर पर भी करते हैं। तो

397
00:27:08,800 --> 00:27:12,880
उन शरारतों को यह बोलना कि श्री कृष्ण की 60 साल की आयु

398
00:27:12,880 --> 00:27:16,960
में वासना के भाव आ रहे थे। और यह बोल देना कि भगवान

399
00:27:16,960 --> 00:27:21,040
के अंदर वासना के भाव नहीं आते हैं। तो वो मतलब अगर

400
00:27:21,040 --> 00:27:25,040
भगवान कपड़े किसी के अगर हटा के चुरा के रख रहे हैं तो

401
00:27:25,040 --> 00:27:29,440
इसका मतलब वासना है। यही सोच लेना पहले तो गलत है।

402
00:27:29,440 --> 00:27:33,520
फिर दूसरी बात यह है कि अब क्या हुआ है? पहले तो

403
00:27:33,520 --> 00:27:37,680
हमने गीता के ऊपर ज्ञान देने की वो बनाई वीडियोस

404
00:27:37,680 --> 00:27:38,240
कि

405
00:27:38,240 --> 00:27:43,680
मेरे साथ आकर भगवत गीता सीखो जिसमें भगवत गीता कम और थिएट्रिकल

406
00:27:43,680 --> 00:27:47,840
हा ही ही हू हू हे है हे है ये सब ज्यादा

407
00:27:47,840 --> 00:27:52,000
था तो अब आप एक बात सोचिए कि ऐसी महिला जिसको पहले तो

408
00:27:52,000 --> 00:27:56,160
यही ज्ञात नहीं है कि जनेयू उसका संस्कार है या पुरुष का संस्कार

409
00:27:56,160 --> 00:28:00,320
है फिर उसको बोलो कि अगर आप इतने कॉन्फिडेंट हो तो आप अपने

410
00:28:00,320 --> 00:28:04,400
साथ एक टेक्निकल व्यक्ति को ले आइए। आइए आप लाइव पे

411
00:28:04,400 --> 00:28:08,480
मतलब बात कर लीजिए अपने प्रूफ दे दीजिए वो वो करेगी नहीं और बोलेगी

412
00:28:08,480 --> 00:28:12,480
कि शास्त्र पढ़ के आओ अरे पढ़ के आ रहे हैं हम तो बोल रहे हैं अपने साथ

413
00:28:12,480 --> 00:28:16,720
एक मतलब विद्वान को ले आओ हम और देख

414
00:28:16,720 --> 00:28:20,880
लेते हैं कि शास्त्रों में क्या लिखा है ऑर्गेनाइजेशंस जब आप पे ऐसे

415
00:28:20,880 --> 00:28:25,040
प्रेशर बना बना के बोले कि अपने पर पारंपरिक जगह जहां पे शास्त्र

416
00:28:25,040 --> 00:28:29,040
क्या है और उनके गढ़ विषयों को पढ़ाया समझाया सिखाया जाता है

417
00:28:29,040 --> 00:28:33,040
उनको बोलेंगे कि शास्त्र पढ़ के आओ तो यह तो बहुत ही फनी बात

418
00:28:33,040 --> 00:28:37,440
हो गई है ना? मतलब बहुत हास्यप्रद बात है कि अपने अधिकार

419
00:28:37,440 --> 00:28:42,080
के सामर्थ्य के ऊपर कभी प्रश्न नहीं उठाना चाहिए। पर यह वही करेंगे।

420
00:28:42,080 --> 00:28:46,160
उसके आगे की बात यह है कि आप बोल रहे हैं श्री कृष्ण के

421
00:28:46,160 --> 00:28:50,400
अंदर वासना के भाव कैसे आ जाएंगे? पहले तो आप यह बताइए कि कौन सा ऐसा सात

422
00:28:50,400 --> 00:28:53,440
साल का बच्चा है जिसमें वासना के भाव आ रहे हैं।

423
00:28:53,440 --> 00:28:57,520
है ना? और दूसरी आपके पास अगर यह लीला चिंतन

424
00:28:57,520 --> 00:29:01,600
यह भाव क्या था यह करने का वो आपको ज्ञान नहीं है तो आप

425
00:29:01,600 --> 00:29:05,760
ज्ञान लें। अब ऐसे लोग जब कंटेंट बना रहे हैं

426
00:29:05,760 --> 00:29:09,920
और उनकी व्यूअरशिप बढ़ रही है और यह आप ऑडियंस के ऊपर

427
00:29:09,920 --> 00:29:13,920
भी बहुत डिपेंडेंट है कि जस्ट बिकॉज़ समबडी हैज़ अ

428
00:29:13,920 --> 00:29:18,160
लॉट ऑफ़ फॉलोअर्स या कमेंट बहुत ज्यादा है। तो हम आंखें मूंद

429
00:29:18,160 --> 00:29:22,640
कर उनको फॉलो मत करें। मुझे भी मत करिए। प्रश्न कीजिए

430
00:29:22,640 --> 00:29:26,960
कि क्या है? है क्या ठीक है नहीं है कोई मंत्र दे रहा है हम तब वो मंत्र कर लेंगे

431
00:29:26,960 --> 00:29:31,520
हमने वीडियो में देखा इन्होंने बोला यह संस्कार करना है कहां वीडियो में देखा

432
00:29:31,520 --> 00:29:36,400
यज्ञ कहां करेंगे गैस पे बलि में यज्ञ करेंगे अपना

433
00:29:36,400 --> 00:29:40,400
श्राद्ध कैसे मनाएंगे चावल के अंदर काले तिल

434
00:29:40,400 --> 00:29:44,640
डालकर बस छोड़ देंगे कोई कौवा आके खा गया तो उनकी मुक्ति हो गई नहीं खाया

435
00:29:44,640 --> 00:29:48,720
तो तो इस तरह की जो चीजें

436
00:29:48,720 --> 00:29:52,960
चल रही है इन सब चीजों इन सब चीजों से निपटने

437
00:29:52,960 --> 00:29:57,040
का बहुत अपना साधारण सा और बड़ा सटीक वो रहता है।

438
00:29:57,040 --> 00:30:01,040
खैर आपने तो अच्छा व्याख्यान दिया है। ही कम लाइट [हंसी]

439
00:30:01,040 --> 00:30:05,200
कम टू लाइट और हम एक बार वापस जरा श्री कृष्ण

440
00:30:05,200 --> 00:30:08,480
की बात पर जाते हैं क्योंकि कल हमारी चर्चा चल रही थी

441
00:30:08,480 --> 00:30:12,800
इस में तो नहीं पर हां हम समझना चाहेंगे कि चलिए

442
00:30:12,800 --> 00:30:16,960
समझते हैं। अब ये माता जी तो देख ही रही होंगी देवी जी

443
00:30:16,960 --> 00:30:21,120
ये वीडियो क्योंकि इसके कट्स तो हम डाल ही देंगे। तो आइए हम

444
00:30:21,120 --> 00:30:25,360
भी आपको समझाते हैं कि श्री कृष्ण के जो वस्त्र चुराने

445
00:30:25,360 --> 00:30:29,680
की लीला है उसके पीछे का रस चिंतन लीला

446
00:30:29,680 --> 00:30:33,920
चिंतन क्या है ताकि है तो वो है तो वो हिंदू

447
00:30:33,920 --> 00:30:37,920
ही थोड़ा बहुत समझना चाहे तो समझ लें तो आप थोड़ा बहुत समझना

448
00:30:37,920 --> 00:30:41,920
चाहे तो समझ लें क्योंकि ना तो हमारी व्यक्तिगत आपसे कोई दुश्मनी है

449
00:30:41,920 --> 00:30:46,000
पर जहां पे आप धर्म का टैग लगा के

450
00:30:46,000 --> 00:30:50,000
सों को इधर-उधर गलत दिशा में लेके जाएंगी तो फिर हम भी

451
00:30:50,000 --> 00:30:54,000
धर्म का टैग लगा के बोल देंगे। यह गलत है। देखिए सबसे

452
00:30:54,000 --> 00:30:58,320
पहले तो सनातन के मूल पांच सिद्धांत है जो हमने अपने कई वीडियोस

453
00:30:58,320 --> 00:31:02,880
में बताए हैं। मैं उस पर अभी यहां पर बात नहीं करने वाला हूं। उन

454
00:31:02,880 --> 00:31:06,960
मूल सिद्धांतों से जो भी कोई व्यक्ति वह पांच सिद्धांतों से

455
00:31:06,960 --> 00:31:11,280
जो भी कोई व्यक्ति संस्था तंत्र विरुद्ध हो जाएगा

456
00:31:11,280 --> 00:31:15,280
तो वह कहीं ना कहीं आपको आपके धर्म से और अगर आपको आपका

457
00:31:15,280 --> 00:31:19,280
धर्म नहीं बोलना है सनातन धर्म नहीं बोलना है तो आपके जीवन के

458
00:31:19,280 --> 00:31:23,280
कल्याण से इतना तो चलेगा आपके जीवन के कल्याण से वो

459
00:31:23,280 --> 00:31:23,780
आपको

460
00:31:23,520 --> 00:31:27,680
दूर ले जाएगा। ठीक है? अब जहां से

461
00:31:27,680 --> 00:31:31,920
यह जानवी जी इन्फ्लुएंस्ड हैं आर्य समाज से आर्य समाज

462
00:31:31,920 --> 00:31:36,560
की जो फिलॉसफी है, जो थ्योरी है उसको मानती है।

463
00:31:36,560 --> 00:31:40,960
यद्यपि वो कई मोड़ पर जाकर के उनके द्वारा ख्यापित

464
00:31:40,960 --> 00:31:44,960
होने वाला जो ईश्वर है वो बाधित हो जाता है और

465
00:31:44,960 --> 00:31:49,360
ईश्वर की सबसे बड़ी एक डिमांड है कि वो अबाध्य

466
00:31:49,360 --> 00:31:53,360
है। वो कहीं भी बाधित नहीं होना चाहिए। तो अवतार

467
00:31:53,360 --> 00:31:57,600
को लेने के ना लेने के चक्कर में उनका ईश्वर कहीं ना कहीं बाधित हो जाता है। जिसका

468
00:31:57,600 --> 00:32:01,760
वो जवाब नहीं देते हैं। फिर वो यह कहने लगते हैं कि ईश्वर को अवतार लेने की आवश्यकता क्या

469
00:32:01,760 --> 00:32:05,920
है? फिर मैं यह पूछता हूं कि दुनिया बनाने की आवश्यकता क्या है? वेद देने

470
00:32:05,920 --> 00:32:09,920
की आवश्यकता क्या है? भाई वो डायरेक्ट मन में ज्ञान दे दे। मंत्र देने की

471
00:32:09,920 --> 00:32:14,160
आवश्यकता क्या है? सबके अंतःकरण में ज्ञान दे दे और दिया है। फिर आवश्यकता

472
00:32:14,160 --> 00:32:18,400
क्या है? आवश्यकता तो उसको किसी चीज की नहीं है। ये तो उसका स्वरूपभूत लक्षण

473
00:32:18,400 --> 00:32:22,640
है। कारण वही है। उसको तो आवश्यकता है ही नहीं किसी चीज की। ये तो उसकी

474
00:32:22,640 --> 00:32:26,640
शक्ति का केवल एक लक्षण है। उसके पास आंख क्यों देखती है? क्योंकि उसके पास

475
00:32:26,640 --> 00:32:30,720
देखने की क्षमता है इसलिए देखती है। हां। तो इसको सरल में हम ये बता

476
00:32:30,720 --> 00:32:34,960
देंगे क्योंकि कुछ ऑडियंस हमारी भी होगी यहां पे। उनका कहने का यह

477
00:32:34,960 --> 00:32:38,640
तात्पर्य है कि आर्य समाज अवतार भगवान अवतार लेते

478
00:32:38,640 --> 00:32:42,720
हैं। श्री कृष्ण भगवान विष्णु के अवतार हैं। इनमें नहीं मानते। वो

479
00:32:42,720 --> 00:32:46,880
कहते हैं वो बस एक महापुरुष थे। तो जो हमारा सिद्धांत सनातन

480
00:32:46,880 --> 00:32:51,040
धर्म का यह है कि ईश्वर वही है जो सब कुछ कर सकता है।

481
00:32:51,040 --> 00:32:55,120
यह वैलिड नहीं रहता है। तो जो जहां पर भी चाहे

482
00:32:55,120 --> 00:32:59,200
अब्राहमिकल मतलब फिलॉसफीस हो या कोई भी

483
00:32:59,200 --> 00:33:04,480
आपकी जो ये ऑर्गेनाइजेशंस है ना सनातन धर्म का चोला वाली ऑर्गेनाइजेशंस

484
00:33:04,480 --> 00:33:08,560
आप उनके सिद्धांतों में सिर्फ एक चीज देखिए कि क्या इनका ईश्वर सब कुछ कर

485
00:33:08,560 --> 00:33:13,120
सकता है। अगर नहीं कर सकता है तो मामला गोलमोल है। सिंपल

486
00:33:13,120 --> 00:33:17,200
किसी भी गलत जो कल्ट है उसको पहचानने का बहुत साधारण सा तरीका

487
00:33:17,200 --> 00:33:21,360
है। जो गलत कल्ट होगा वह सनातन सर्वशक्तिमान

488
00:33:21,360 --> 00:33:25,520
ईश्वर के विरोध में जब बात कर रहा होगा तो उसको एक नया ईश्वर

489
00:33:25,520 --> 00:33:29,760
बनाना पड़ेगा और उस उसका वो जब नया ईश्वर बनेगा तो वो सनातन

490
00:33:29,760 --> 00:33:33,840
नहीं होगा तो वो सर्वशक्तिमान नहीं होगा। कहीं ना कहीं उसमें कटिंग आ जाएगी।

491
00:33:33,840 --> 00:33:38,000
जैसे इस्लाम का ईश्वर अवतार नहीं ले सकता। उसकी मूर्ति पूजा

492
00:33:38,000 --> 00:33:42,080
नहीं हो सकती। आर्य समाज का ईश्वर अवतार नहीं ले सकता। उसकी मूर्ति पूजा नहीं

493
00:33:42,080 --> 00:33:46,320
हो सकती। हां, मूर्ति पूजा में नहीं मानते। इस का ईश्वर जिस प्रकार दूध

494
00:33:46,320 --> 00:33:50,480
से दही बन सकता है, पर दही से दूध नहीं, उसी प्रकार कृष्ण से शिव बन

495
00:33:50,480 --> 00:33:53,920
सकता है। मगर शिव से कृष्ण नहीं तो ये भी बाधित हो गया। वो भी सर्वशक्तिमान

496
00:33:53,920 --> 00:33:58,080
है और भी बहुत सी चीजें हैं। अभी जानवी जी को तो इस में बुलाना ही था। अभी हमारे दिमाग

497
00:33:58,080 --> 00:34:02,080
में ये बात आई पूछिए। क्यों? हम क्योंकि चाहे वो फाउंडिंग

498
00:34:02,080 --> 00:34:06,160
फिलॉसफी उनकी आर्य समाज की है पर गीता के ऊपर जो

499
00:34:06,160 --> 00:34:10,240
प्रचार पे रील्स बनी है वो इस गीता के

500
00:34:10,240 --> 00:34:14,240
साथ बनी है तो ये ये कुछ सिद्धांत विहीनता होती है सिद्धांत

501
00:34:14,240 --> 00:34:18,480
विहीन लोग होते हैं उनके अपने कोई सिद्धांत नहीं होते हैं बस जिधर उनको

502
00:34:18,480 --> 00:34:22,640
वो जो उनका जो भी उनकी चीजें हैं जो भी उनकी

503
00:34:22,640 --> 00:34:26,800
आसक्तियां हैं वो जहां से उनको प्राप्त हो रही हैं वो उसी के अनुसार काम करने लगती

504
00:34:26,800 --> 00:34:30,880
है। जैसा इन्होंने बताया भाई सिद्धांत देती हैं वो आर्य समाज के भगवत

505
00:34:30,880 --> 00:34:34,960
गीता दिखाती है इसको। खैर ये दो ये त्रयाचरित्र क्यों

506
00:34:34,960 --> 00:34:39,040
है ये तो वही जाने है कि नहीं है। चिंतन पर आते हैं। हां तो अब हम

507
00:34:39,040 --> 00:34:43,280
लोग इस पे आ जाते हैं तो पहला पॉइंट क्या आया कि ईश्वर यदि सर्वशक्तिमान है

508
00:34:43,280 --> 00:34:47,360
तो उसका अवतार लेना आवश्यक है। उसका सगुण साकार स्वरूप होना आवश्यक हो जाता

509
00:34:47,360 --> 00:34:51,360
है। दूसरी बात ये आ जाती है कि अगर हम इस बात को ना भी माने

510
00:34:51,360 --> 00:34:55,360
कि उसका जो आर्य समाज का ईश्वर है वो अवतार नहीं ले सकता।

511
00:34:55,360 --> 00:35:00,160
मगर इतना तो मानता है कि वो सर्वव्यापक है। हां। इसमें तो कोई कंट्राडिक्शन

512
00:35:00,160 --> 00:35:04,400
नहीं है। सर्वव्यापक मानता है ना। तो जब कोई स्त्री

513
00:35:04,400 --> 00:35:08,480
दुनिया में कहीं पर भी नहा रही है, स्नान कर रही है, कुछ कुछ

514
00:35:08,480 --> 00:35:09,040
भी कर रही

515
00:35:09,040 --> 00:35:13,440
है तो क्या आर्य समाज का ईश्वर देख रहा है कि नहीं देख रहा है?

516
00:35:13,440 --> 00:35:17,520
सर्व्याप्त है। तो देख रहा है ना? यानी कि उसको

517
00:35:17,520 --> 00:35:21,760
भी यह मानना पड़ेगा कि हमारा भी ईश्वर देखता है। तो जब उसका

518
00:35:21,760 --> 00:35:25,840
ईश्वर देखने पर उसने दोष नहीं माना तो सगुण साकार ईश्वर के द्वारा

519
00:35:25,840 --> 00:35:30,000
देखे जाने पर दोष क्यों मान लिया? हां। दुनिया में ऐसा कुछ

520
00:35:30,000 --> 00:35:34,080
है ही नहीं जहां ईश्वर इनवॉल्व नहीं है। आ जाना बात कर लेना।

521
00:35:34,080 --> 00:35:38,080
संसार में कोई माई का लाल तो ऐसा होगा जो शायद आने की सामर्थ

522
00:35:38,080 --> 00:35:42,320
रखता हो। कि यहां पर ईश्वर नहीं है। [हंसी] जो इन इन इन

523
00:35:42,320 --> 00:35:46,400
विषयों में बात करने का सामर्थ्य रखता हो तो आना भाई। कोई तो होगा आर्य समाज

524
00:35:46,400 --> 00:35:50,480
में ऐसा जो आकर के ये सामना करने का सामर्थ रखेगा। ये

525
00:35:50,480 --> 00:35:54,880
लोग बबका लेते हैं। मैं अभी कुछ दिन पहले एक मातृशक्ति

526
00:35:54,880 --> 00:35:59,120
है आर्य समाज थी। उनके पास गया उनके साथ बहुत देर तक वार्ता हुई।

527
00:35:59,120 --> 00:36:03,120
माता हम और वो शुरू में ही बातें फोर मैनी की करने लगी। बहुत

528
00:36:03,120 --> 00:36:07,200
सारी अच्छी-अच्छी। अरे हम शास्त्रार्थ की चुनौती देते हैं

529
00:36:07,200 --> 00:36:11,200
शंकराचार्यों को ये है वो है तो उनको जब तक मैंने एक

530
00:36:11,200 --> 00:36:15,440
घंटे जब जब तक अपनी चीजें जो उनसे प्रश्न पूछने थे पूछे और वो

531
00:36:15,440 --> 00:36:19,440
चर्चा YouTube पर डली हुई है। अंत में जब वो

532
00:36:19,440 --> 00:36:23,440
उनका ग्लूकोस लेवल बिल्कुल लो हो गया था। जो उनका वो होता

533
00:36:23,440 --> 00:36:24,400
है ना अंदर जो

534
00:36:24,400 --> 00:36:28,400
जहां से एनर्जी जनरेट होती है बॉडी में वो उनका बिल्कुल डिप्लीट हो

535
00:36:28,400 --> 00:36:32,640
चुका था। ग्लूकोस लेवल बिल्कुल उस एक घंटे की चर्चा में वो

536
00:36:32,640 --> 00:36:36,720
हो गई थी। अब उनको अब जल्दी ग्लूकोस चाहिए। चाय के रूप में, मीठा मीठे

537
00:36:36,720 --> 00:36:40,720
के रूप में, चीनी के रूप में या जो भी हो ग्लूकोस उनको अब चाहिए। कार्बोहाइड्रेट्स

538
00:36:40,720 --> 00:36:44,960
उनको चाहिए थे। ऐसा हो गया। हां। लास्ट में

539
00:36:44,960 --> 00:36:48,960
वो मुझसे कहते हैं चर्चा पूरी होने के बाद जब मैंने अपना अच्छे से

540
00:36:48,960 --> 00:36:53,280
करना था जो कर लिया था। उसके बाद वो लोग मुझसे कहते हैं अरे

541
00:36:53,280 --> 00:36:57,280
हमें आपस में ये सब करने की क्या जरूरत है? हमें तो इस्लामियों

542
00:36:57,280 --> 00:37:01,760
से विधर्मियों से टकराना चाहिए। तो फिर आप बंद तो मैंने कहा

543
00:37:01,760 --> 00:37:06,080
कि भाई शुरू में आप कहते हैं कि हम मुसलमानों को शास्त्रार्थ की चुनौती दे देते

544
00:37:06,080 --> 00:37:10,240
हैं। तुमने क्यों कहा शंकराचार्यों को शास्त्रार्थ की चुनौती देते हैं। सही

545
00:37:10,240 --> 00:37:14,560
बात है। तुम लोग कहते हो कि हम विधर्मियों से लड़ते हैं, विधर्मियों से लड़ते हैं। मगर स्मारक

546
00:37:14,560 --> 00:37:18,560
बनाते हो तो वहां लिखते हो कि हमने यहां पे हिंदुओं को हराया था शास्त्रार्थ में।

547
00:37:18,560 --> 00:37:22,560
क्यों नहीं लिखते हो मुसलमानों को हराया था? हां। तुम अपनी पब्लिसिटी करते हो

548
00:37:22,560 --> 00:37:26,640
किस बात पे? कि हमने जो परंपरा प्राप्त आचार्य गण है, ब्राह्मण है उनको

549
00:37:26,640 --> 00:37:30,800
हराया। हां। और फिर चाहते हो कि तुमको हम लोग इसलिए

550
00:37:30,800 --> 00:37:34,800
तुमसे तुम्हारी चीजों पर काउंटर ना करें क्योंकि तुम ये पाखंड करते हो कि हम

551
00:37:34,800 --> 00:37:39,440
जो है विधर्मियों से लड़ते हैं। अरे भाई विधर्मी हम पर हावी होते क्यों हैं?

552
00:37:39,440 --> 00:37:43,760
क्योंकि हम अपने सर्वशक्तिमान ईश्वर को को छोड़ के अलग-अलग

553
00:37:43,760 --> 00:37:47,920
ईश्वर बना करके और उसके नाम पर बट जाते हैं। इसलिए

554
00:37:47,920 --> 00:37:51,920
विधर्मी हम पर हावी होता है। इसका मैंने एक और कारण देखा है।

555
00:37:51,920 --> 00:37:56,400
लोगों को बहुत मोह रहता है कि वो कहीं पे आए जाए तो उनकी मतलब

556
00:37:56,400 --> 00:38:00,560
आचार्य की या गुरु की पूजा या उसके सम्मान से ज्यादा उन्हें यह

557
00:38:00,560 --> 00:38:04,560
होता है कि वो किसी जगह आए तो उनको ये सारी चीजें प्राप्त हो जाए।

558
00:38:04,560 --> 00:38:08,720
अब वो यह भूल जाते हैं कि आप कोई नहीं है। आप वहां जाइए,

559
00:38:08,720 --> 00:38:13,120
दर्शन कीजिए। जो ज्ञान प्राप्त करना है वो कीजिए। पर वो चाहते हैं कि उनके सोशल

560
00:38:13,120 --> 00:38:17,200
स्टेटस उन चीजों से बढ़े। तो अब ये जो ऑर्गेनाइजेशंस होती

561
00:38:17,200 --> 00:38:21,520
हैं ये ऐसे ही कमजोर दिल, व्यक्तित्व और बुद्धि वाले

562
00:38:21,520 --> 00:38:25,760
लोगों को अपना स्टार बना देते हैं। और जब व्यक्ति स्टार

563
00:38:25,760 --> 00:38:29,840
बन जाता है, उसका रस, उसका स्वाद उसको चिपक जाता है,

564
00:38:29,840 --> 00:38:34,080
उसकी वृत्ति वहां से हटती ही नहीं। बिल्कुल। तो यह

565
00:38:34,080 --> 00:38:38,720
संस्थाएं मतलब आपको आपके भोग के साथ अध्यात्म देने वाली चीजें करती हैं।

566
00:38:38,720 --> 00:38:42,800
अध्यात्म का नाटक आध्यात्म दिया। आपको ऐसा लगता है कि हम

567
00:38:42,800 --> 00:38:46,880
आध्यात्मिक हो रहे हैं और होता यह है कि आप ओशो बन रहे हैं। देखने में क्या लगेगा

568
00:38:46,880 --> 00:38:50,880
जिसे कुछ नहीं पता है। भवन चल रहा है। वाह। क्रांति की

569
00:38:50,880 --> 00:38:54,720
बातें चल रही हैं। अरे वाह। और ये हमेशा आपको

570
00:38:54,720 --> 00:38:58,720
दहेज, फीमेल एंपावरमेंट है ना? इन सारे

571
00:38:58,720 --> 00:39:02,880
टॉपिक्स मतलब सिविल टॉपिक्स को आध्यात्मिक टॉपिक्स के साथ मिक्स करके

572
00:39:02,880 --> 00:39:06,880
आपको क्वेश्चन करने पर मजबूर कर देंगे कि आप किस कम्युनिटी

573
00:39:06,880 --> 00:39:10,880
से आए हैं। इंस्टेड ऑफ आपको यह रिमाइंड करवाने के

574
00:39:10,880 --> 00:39:15,040
लिए कि हमारी सिविल जो पूरी सोसाइटी

575
00:39:15,040 --> 00:39:19,360
है वो एक्चुअल में क्या है और इध्म उसका कितना बड़ा पार्ट है और गर्व

576
00:39:19,360 --> 00:39:23,520
से हमें बोलना चाहिए कि हम हिंदू हैं। बिलकुल बिलकुल बिलकुल अब मैं

577
00:39:23,520 --> 00:39:27,520
थोड़ा सा वह जो सैद्धांतिक विषय चल रहा था वह पूरा कर दूं। तो

578
00:39:27,520 --> 00:39:31,600
यह चीज हमने समझ ली कि भाई अह ईश्वर क्योंकि

579
00:39:31,600 --> 00:39:35,760
सर्वव्यापी है सर्वत्र है। दुनिया में सब कुछ जो भी घट

580
00:39:35,760 --> 00:39:39,920
रहा है उसका कारण है। इसलिए ईश्वर किसी किसी रूप में ऐसी

581
00:39:39,920 --> 00:39:44,080
लीलाएं भी करके दिखाते हैं जिससे कि हम ये समझ सके कि सब

582
00:39:44,080 --> 00:39:48,480
चीजों का कारण ईश्वर ही है। इसको हम जो है जड़वत

583
00:39:48,480 --> 00:39:52,480
होकर के मान सके। अब जड़वत होकर के मानने वाली बात क्या है कि चलो ठीक है कुछ लोगों का

584
00:39:52,480 --> 00:39:56,480
ध्यान निराकार में लग भी जाता है। यद्यपि वो एक अलग

585
00:39:56,480 --> 00:40:00,560
व्याख्या है कि ध्यान लगता किसका है? अच्छा ध्यान पर भी एक लॉजिक है।

586
00:40:00,560 --> 00:40:04,640
ध्यान अपन कभी सुनिए ध्यान पे एक लॉजिक है। ध्यान लगने का मतलब

587
00:40:04,640 --> 00:40:08,880
क्या है? ध्यान आप अगर किसी पे लगा रहे हो ये लोग कहते हैं कि वो एक देसी

588
00:40:08,880 --> 00:40:10,000
कैसे हो सकता है?

589
00:40:10,000 --> 00:40:14,160
अगर वो सर्वत्र व्याप है तो वो एक देसी कैसे हो सकता है? वो बात अलग है कि आलू से इंसान

590
00:40:14,160 --> 00:40:18,240
कैसे जन्म ले सकता है? क्योंकि आर्य समाज कहता है कि जो पहला इंसान उत्पन्न हुआ तो

591
00:40:18,240 --> 00:40:22,960
आलू से हुआ है तिब्बत में [हंसी]

592
00:40:22,960 --> 00:40:27,120
तो वो अपने हिसाब से अच्छा मैंने अभी एक आर नहीं मानते हैं ये बात

593
00:40:27,120 --> 00:40:31,600
हम से नहीं आए मैंने अभी एक आर्य समाज के चैनल पर

594
00:40:31,600 --> 00:40:35,600
एक पिक्चर देखी जिसमें स्वामी दयानंद जी की तस्वीर दिखाई गई

595
00:40:35,600 --> 00:40:40,160
थी तो दो सांडों को पकड़ के कंट्रोल कर रहे थे अकेले हम

596
00:40:40,160 --> 00:40:44,720
मुझे नहीं लगता कि वो बहुत बड़े पहलवान थे कि नहीं थे मगर अगर साइंस के उससे देखेंगे

597
00:40:44,720 --> 00:40:48,800
तो दो सांडों सांड को एक जो सामान्य व्यक्ति है पहलवान

598
00:40:48,800 --> 00:40:52,960
भी नहीं है वो वो कंट्रोल नहीं कर सकता तो फिर वहां पे आप चमत्कार को यूज़

599
00:40:52,960 --> 00:40:57,040
कर रहे हो कि नहीं वहां पे आप कह रहे हो ना कि हम पर चमत्कारिक रूप से हमारे

600
00:40:57,040 --> 00:41:01,120
अंदर बल है जिसका कारण हम सांड को कंट्रोल कर रहे हैं वो भी एक नहीं दो एक

601
00:41:01,120 --> 00:41:05,440
साथ तो आप चमत्कार का अपने अपने कन्वीनिएंट के अनुसार आप चमत्कार

602
00:41:05,440 --> 00:41:10,320
को एक्सेप्ट कर रहे हो तो खैर उस पे आ जाते हैं कि वो एक जगह कैसे आ सकता है

603
00:41:10,320 --> 00:41:14,480
तो ये जो सर्वत्र व्याप्त होने वाली बात है ना कि सर्वत्र व्याप्त होते हुए वे एक जगह

604
00:41:14,480 --> 00:41:19,920
कैसे आ सकता है? तो इसमें यह वाली बात आ जाएगी कि

605
00:41:19,920 --> 00:41:24,160
ईश्वर यदि सर्वत्र व्याप्त है तो फिर आप ध्यान लगाओगे किसका? सर्वत्र

606
00:41:24,160 --> 00:41:25,120
पे ही ध्यान लगाओ। फिर ध्यान

607
00:41:25,120 --> 00:41:29,440
लगाने की बात ही नहीं रह जाती। हां। भाई ध्यान तो हम तभी लगा रहे हैं ना हमको इस

608
00:41:29,440 --> 00:41:33,440
चीज पे ही नजर रखनी है। इसके अगल-बगल नहीं रखनी है। यानी कि यहां जब हम

609
00:41:33,440 --> 00:41:37,680
ध्यान लगाने की बात कर रहे हैं तो हम सर्वत्र की बात नहीं कर रहे हैं। तो आप भी तो

610
00:41:37,680 --> 00:41:42,080
एक देसी ये बात कर रहे हो। या तो आप ध्यान लगाने की बात ही मत कहो। सब सब जगह देखो।

611
00:41:42,080 --> 00:41:46,160
दीवार भी देखो, एसी भी देखो, पंखा भी देखो, कूलर भी देखो और वो मूवी आ जाए

612
00:41:46,160 --> 00:41:50,160
कोई हां सब जगह व्याप्त है तो सब जगह देखो ईश्वर को। ध्यान

613
00:41:50,160 --> 00:41:54,240
लगाने का तो मतलब ही है कि वो एक देसी हो रहा है। इसके साथ ही साथ ये एक देसी वाली

614
00:41:54,240 --> 00:41:58,240
बात में एक चीज और है कि जब वो सर्वत्र व्याप्त

615
00:41:58,240 --> 00:42:02,240
है तो उसका एक ही शब्द कैसे हो सकता है? नाम। ये लोग कहते हैं

616
00:42:02,240 --> 00:42:06,560
कि प्रणव जो है वो ईश्वर का नाम है। हां। ठीक है? तो जब वो सर्वत्र व्याप्त

617
00:42:06,560 --> 00:42:10,640
है तो लकड़ी भी उसका नाम है। माइक भी उसका नाम है। सब कुछ

618
00:42:10,640 --> 00:42:15,040
उसका नाम। उसका कोई एक नाम कैसे हो सकता है? एक नाम तो तभी हो सकता है जब वो

619
00:42:15,040 --> 00:42:19,040
जो कुछ चीजों से वो अलग हो जाए। तो जब आपने उसको एक अलग से

620
00:42:19,040 --> 00:42:23,280
नाम दिया है तो ये भी तो उसका अवतार ही हो गया। ईश्वर का शब्द

621
00:42:23,280 --> 00:42:27,440
के रूप में। ये तो चलो हमारी ऑडियंस को ये तो इतनी डीप बात

622
00:42:27,440 --> 00:42:32,080
में अब क्या लेके जा? हां। तो मैं मैं इसको जरा वो हल्का हल्के हल्की वाली बातें करूंगी।

623
00:42:32,080 --> 00:42:36,240
ये ये जो जिसके लिए हम बोल रहे हैं उन्हें समझ आएगा। खैर

624
00:42:36,240 --> 00:42:40,160
साइड समझ आएगा। पर हमारे भोलेभाले फॉलोअर्स जो बस समझने आए

625
00:42:40,160 --> 00:42:44,400
हैं क्या है और क्या नहीं। खैर मैं मैं एक बात करके खत्म कर दूं। तो भगवान

626
00:42:44,400 --> 00:42:48,560
कृष्ण के रूप में ईश्वर ने ऐसे चमत्कार करके दिखाए।

627
00:42:48,560 --> 00:42:52,640
वो चीजें करके बताएं जो वो आपको बताना चाहते हैं कि मैं यह भी कर

628
00:42:52,640 --> 00:42:56,720
सकता हूं। मैं वो भी कर सकता हूं। तो वो आपको वो बता रहे हैं। मैं सर्वत्र

629
00:42:56,720 --> 00:43:00,880
हूं। मैं सब कुछ देख रहा हूं। अब तुम नहीं मान रहे हो मैं देख रहा हूं तो मैं आकर तुम्हारे सामने

630
00:43:00,880 --> 00:43:04,960
सगुण सगुण साकार हो करके तुमको बता रहा हूं कि मैं देख रहा हूं। ये तो रहा

631
00:43:04,960 --> 00:43:09,280
आदि दैविक आध्यात्मिक अर्थ। अब व्यवहारिक अर्थ भी है कि भाई महिलाओं

632
00:43:09,280 --> 00:43:13,280
को ये सिखाना था उनको कुछ स्त्रियों को। एक बार आप सिर्फ इसी

633
00:43:13,280 --> 00:43:17,360
का जो हमने कल बात की थी ना मैं वही बता रहा हूं कि वो व्यवहारिक अर्थ भी है

634
00:43:17,360 --> 00:43:21,440
उसका। इन लीलाओं के तीन अर्थ होते हैं। आदि

635
00:43:21,440 --> 00:43:25,440
दैविक, आदि भौतिक और आध्यात्मिक। तो आध्यात्मिक और आदि

636
00:43:25,440 --> 00:43:29,520
दैविक तो हमने समझ लिए। अब जो आदि भौतिक अर्थ है यानी

637
00:43:29,520 --> 00:43:33,520
व्यवहारिक क्या है? तो व्यवहारिक यही था कि उन्होंने उन्हें

638
00:43:33,520 --> 00:43:37,680
कुछ स्त्रियों को सबक सिखाना था कि वह जो है निर्वस्त्र होकर के स्नान करती

639
00:43:37,680 --> 00:43:41,760
थी तो वो ना करें। मगर इसके पीछे ये भी कारण है कि वो आपको

640
00:43:41,760 --> 00:43:46,080
बताना चाह रहे हैं कि मैं सर्वत्रों में सब कुछ देख रहा हूं। मुझसे कुछ भी छिपा हुआ नहीं है।

641
00:43:46,080 --> 00:43:50,160
वो साधु वाली कहानी आपको याद होगी। दो शिष्य होते हैं, दो मतलब

642
00:43:50,160 --> 00:43:54,160
युवा होते हैं, वो जाते हैं किसी संत के पास और वो जाकर के कहते हैं हमें अपना शिष्य बना

643
00:43:54,160 --> 00:43:55,280
लो। संत का नाम मुझे

644
00:43:55,280 --> 00:43:59,360
याद नहीं आ रहा है। शायद हमारे पुराणों में ही कोई कथा है यह। तो वह कहते

645
00:43:59,360 --> 00:44:03,680
हैं कि ऐसा है मैं तुम्हें दो हंस दे रहा हूं मट्टी के। इनको वहां जाके

646
00:44:03,680 --> 00:44:07,760
इनकी गर्दन तोड़ दो जहां तुम्हें कोई देख ना रहा हो। तो वो

647
00:44:07,760 --> 00:44:11,760
जाते हैं और जाते-जाते जाते जाते घूम के सबसे छिपने की कोशिश करते हैं। मगर कोई

648
00:44:11,760 --> 00:44:16,000
चिड़िया देख रही है। कहीं कुछ शाम को थकार के वापस आ जाते हैं और बाबा

649
00:44:16,000 --> 00:44:20,000
उनसे कहते हैं गुरु जी क्षमा करिए। पर यह तो हम नहीं कर सकते। क्योंकि अगर संसार

650
00:44:20,000 --> 00:44:24,240
में कोई नहीं देख रहा है तो मैं तो देख रहा हूं। उसको तोड़ते हुए

651
00:44:24,240 --> 00:44:28,320
तो ईश्वर कहीं कुछ ना देख रहा हो ऐसी कोई जगह ही नहीं है। यही बात आपको

652
00:44:28,320 --> 00:44:32,320
ईश्वर बता रहा है कृष्ण के रूप में आकर के कह भी रहा है भगवत गीता में कि जो लोग

653
00:44:32,320 --> 00:44:36,320
मुझे मानव देह में देख कर के मेरे ब्रह्मत्व को भूल जाते हैं।

654
00:44:36,320 --> 00:44:40,800
मेरे भगवान मेरे भगवान होने को भूल जाते हैं। वो लोग मूर्ख

655
00:44:40,800 --> 00:44:45,040
हैं। वो आपको शरीर धारण करके कुछ बता रहे हैं।

656
00:44:45,040 --> 00:44:49,200
समझा रहे हैं उसको समझने का प्रयास करिए। इस तरीके से करके

657
00:44:49,200 --> 00:44:55,200
अपना लाइफ का जीवन का पंचर मत करिए। [हंसी]

658
00:44:56,960 --> 00:45:01,120
वही बात है कि आपको शरीर धारण करके कुछ बचा बचा

659
00:45:01,120 --> 00:45:05,600
बचा रहे हैं बता रहे हैं। अब सोचिए अब ये सारी भगवान आध्यात्मिक

660
00:45:05,600 --> 00:45:10,000
और इन सारी लीलाओं में ये जो मैंने तीन आपको बहुत जटिल

661
00:45:10,000 --> 00:45:14,080
वर्ड बताएं इनका चाहे इंग्लिश मीनिंग ये बता सके आदि दैविक आदि भौतिक और

662
00:45:14,080 --> 00:45:18,320
आध्यात्मिक मगर मैं जो है आपको

663
00:45:18,320 --> 00:45:22,320
एक अर्थ बता दे रहा हूं बहुत सरलता से कि ये सारी लीलाओं में ये सब

664
00:45:22,320 --> 00:45:26,400
अर्थ तो छुपे होते हैं मगर एक अर्थ वो है जो हर लीला में छुपा

665
00:45:26,400 --> 00:45:30,400
होता है और वो अर्थ क्या है ईश्वर वही है जो कुछ

666
00:45:30,400 --> 00:45:34,480
भी कर सकता है हमारा सारा ईश्वर अब है। अगर

667
00:45:34,480 --> 00:45:38,560
कोई कहे कि वो जन्म नहीं ले सकता तो वो श्री राम कृष्ण आदि के रूप में

668
00:45:38,560 --> 00:45:42,800
जन्म लेता है। अगर कोई कहे कि वो अपनी देह का नाश नहीं करके दिखा सकता

669
00:45:42,800 --> 00:45:46,880
तो वो इन्हीं रूपों में अन्य रूपों में आकर के अपनी देह का नाश करके

670
00:45:46,880 --> 00:45:51,120
भी दिखा देता है। अगर कोई कहे कि वो मत्स्य नहीं बन सकता।

671
00:45:51,120 --> 00:45:55,360
वो मछली नहीं बन सकता तो मत्स्य अवतार लेता है। कछुआ नहीं बन सकता। खून

672
00:45:55,360 --> 00:45:59,520
अवतार लेता है। कोई कहे कि वो जो है आधा जानवर आधा इंसान नहीं बन

673
00:45:59,520 --> 00:46:03,680
सकता। वो नरसिंह बन जाता है। वराह बन जाता है।

674
00:46:03,680 --> 00:46:07,760
और कोई अगर यह कहे कि वो झूठ नहीं बोल सकता, छल नहीं कर

675
00:46:07,760 --> 00:46:11,920
सकता तो वो कृष्ण बन जाता है। और अगर कोई कहे कि वो भैया केवल

676
00:46:11,920 --> 00:46:12,420
सत्य

677
00:46:12,240 --> 00:46:16,320
नहीं बोल सकता तो वो राम बन जाता है। यह है हमारा ईश्वर

678
00:46:16,320 --> 00:46:20,320
जिसके सामने दुनिया के द्वारा कल्पित जितने

679
00:46:20,320 --> 00:46:24,320
भी ईश्वर खड़े हुए हैं सनातन के विरोध में वो

680
00:46:24,320 --> 00:46:28,400
सारे ईश्वर पानी मांगते नजर आते हैं। हमारे ईश्वर के सामने एक

681
00:46:28,400 --> 00:46:32,560
लाइन है जो नहीं लिखी जा सकती है कि दुनिया में कोई ऐसा कार्य है जिसके कारण

682
00:46:32,560 --> 00:46:37,040
ईश्वर के लिए कहा जाए ही कांट डू इट ये सनातन

683
00:46:37,040 --> 00:46:41,120
ईश्वर के लिए नहीं कहा जा सकता ही कांट डू इट और शी कांट डू इट हमारा

684
00:46:41,120 --> 00:46:45,280
ईश्वर सेम टाइम में पुरुष और स्त्री दोनों अवतारों

685
00:46:45,280 --> 00:46:49,360
में आके भी दोनों अवतारों में पूर्ण भी रहता है।

686
00:46:49,360 --> 00:46:53,600
बिल्कुल बिल्कुल तो कहां पे ऐसा तो कहीं नहीं मिलता है। तो जो

687
00:46:53,600 --> 00:46:57,600
हमने अभी एक लीला को समझा कि निराकार वह हमेशा है

688
00:46:57,600 --> 00:47:01,680
ही पर उस समय में एक लेसन सिखाना कि

689
00:47:01,680 --> 00:47:06,000
महिलाओं को क्या अपनी मर्यादा रखनी चाहिए नहाने के समय

690
00:47:06,000 --> 00:47:10,080
क्योंकि आगे आते हुए कितने पाप हो जाते हैं महिलाओं के साथ। आज

691
00:47:10,080 --> 00:47:14,160
तो वो कान्हा थे। सात आयु के बाल बच्चे थे।

692
00:47:14,160 --> 00:47:18,400
तो वहां से उनको सीख के क्या महिलाओं को ये चिंतन में नहीं आया

693
00:47:18,400 --> 00:47:22,480
होगा कि शायद कोई और भी हम पर दृष्टि डालता होगा। अगर

694
00:47:22,480 --> 00:47:26,480
कोई और पुरुष ही वासना से युक्त

695
00:47:26,480 --> 00:47:27,360
हमारे वस्त्र

696
00:47:27,360 --> 00:47:31,760
उठाकर ले जाता हम क्या करते? अगर उस उस

697
00:47:31,760 --> 00:47:36,160
तालाब में कोई जानवर आ जाता हमें तुरंत भागना पड़ता

698
00:47:36,160 --> 00:47:40,160
तो हम क्या करते? तो ये सारा जो रस

699
00:47:40,160 --> 00:47:44,400
है ना अब इसके अंदर भाव विभोर होने के लिए तो और हमें महात्माओं के पास बैठना

700
00:47:44,400 --> 00:47:48,640
पड़ेगा। मेरी वाणी तो वैसी नहीं है। और हमने आपको

701
00:47:48,640 --> 00:47:52,640
ज्ञान दे भी नहीं पाएंगे क्योंकि हम असमर्थ है इस पर

702
00:47:52,640 --> 00:47:56,880
हम आपको एक मतलब छोटा सोशल चीज बता रहे हैं कि इसके

703
00:47:56,880 --> 00:48:00,880
पीछे का कारण यह है मूर्ख और तू कहां ये बोल रहा

704
00:48:00,880 --> 00:48:05,040
है कि सात आयु के सात साल की आयु के कृष्ण के अंदर वासना

705
00:48:05,040 --> 00:48:09,280
आ गई और यह गलत है क्योंकि उन्होंने तो द्रोपदी को वस्त्र दिए थे और

706
00:48:09,280 --> 00:48:13,440
अगर आप द्रोपदी को वस्त्र देने की बात कर रहे हैं और वहां पे चमत्कार

707
00:48:13,440 --> 00:48:18,000
की बात कर रहे हैं तो फिर आप वहां पे सात आयु के

708
00:48:18,000 --> 00:48:22,160
सेम भगवान कृष्ण की चमत्कारी लीला के बारे

709
00:48:22,160 --> 00:48:26,320
में माइनस क्यों बातें कर रहे हैं? अब एक बात और आ जाती

710
00:48:26,320 --> 00:48:30,320
है लास्ट में मैं अपनी ये जो बात हुई ना कि वो अच्छा फिर

711
00:48:30,320 --> 00:48:34,320
एक और बात थी ना उनकी कि वो माखन चोर नहीं है क्योंकि वो कुछ चुरा

712
00:48:34,320 --> 00:48:38,560
नहीं सकते। अरे वो तो छलियां है। हम कुछ चुरा

713
00:48:38,560 --> 00:48:42,480
नहीं सकते। देखिए क्या हो रहा है ना आपके ईश्वर के साथ क्या-क्या लिमिटेशंस लग रही है।

714
00:48:42,480 --> 00:48:46,720
पहले तो वो आपको पहले तो वो आपके ईश्वर पर अटैक कर रहे हैं कि चोरी गंदी बात है।

715
00:48:46,720 --> 00:48:51,520
आपको हमने एक चीज सुनी थी हम उसको शेयर करना चाहते हैं।

716
00:48:51,520 --> 00:48:55,520
ऐसे बात हो रही थी महात्माओं में तो एक्चुअली

717
00:48:55,520 --> 00:49:00,000
गुरुदेव ने ही बोला था ये तो गुरुदेव ने बोला अरे कृष्ण क्रांतिकारी

718
00:49:00,000 --> 00:49:04,320
थे। सब माखन और दूध कंस के पास चला जाता है। इसीलिए चुरा लेते थे।

719
00:49:04,320 --> 00:49:08,400
अब बोलिए। अब वो चुरा रहे थे। वो गलत जा रहा था या वो

720
00:49:08,400 --> 00:49:12,560
सही था। आप भगवान पर प्रश्न चिन्ह लगाने से पहले

721
00:49:12,560 --> 00:49:16,640
उनकी लीला और उनके अर्थ को समझने की कोशिश करिए। बिल्कुल पहले समझिए

722
00:49:16,640 --> 00:49:20,720
कि ईश्वर है क्या? जीव की चाह का वास्तविक विषय

723
00:49:20,720 --> 00:49:25,200
ईश्वर है। हां और ये लीला को जो पुराणों की कथाएं हैं

724
00:49:25,200 --> 00:49:29,360
यही होता है। जब आप एक सामर्थ्यवान सामर्थ्यवान गुरु से नहीं सीखते।

725
00:49:29,360 --> 00:49:33,440
यही सीखते हैं क्योंकि दूसरे गुरु आपको बताते हैं तो गंदी बात लिखी है तो आप बोलते

726
00:49:33,440 --> 00:49:37,520
हो हां चोरी तो गलत है इसमें पर जो समर्थवान होता है वो आपको इसका

727
00:49:37,520 --> 00:49:41,520
लीला चिंतन इसमें गूढ़ता क्या है रहस्य क्या है इसका रहस्य क्या

728
00:49:41,520 --> 00:49:45,680
है वो बताता है और सनातन धर्म का सारा का सारा ज्ञान रहस्य पर

729
00:49:45,680 --> 00:49:49,760
ही है इसीलिए गुरु गीता में लिखा है कि मनुष्य चाहे

730
00:49:49,760 --> 00:49:54,080
चारों वेद पढ़ ले सारे पुराण पढ़ ले सारे उपनिषद पढ़ ले जप तप व्रत

731
00:49:54,080 --> 00:49:57,680
दान पुण्य यज्ञ सब कुछ व्यर्थ है यदि आपका

732
00:49:57,680 --> 00:50:01,840
कोई प्रामाणिक एक गुरु नहीं है। तो इसमें

733
00:50:01,840 --> 00:50:06,000
अब 100 की सीधी एक बात आ गई जो मैंने अभी बीच में छोड़ी थी कि जब सब कुछ

734
00:50:06,000 --> 00:50:10,080
भगवान है सर्वत्र भगवान है तो उसका कोई एक नाम कैसे हो सकता है? तो कहा भाई वो प्रणव

735
00:50:10,080 --> 00:50:14,320
प्रणव है। ये मानते हैं आर्य समाज तो वो एक नाम कैसे मानते हैं कि प्रमाण

736
00:50:14,320 --> 00:50:18,480
है इसका। ठीक। अब प्रमाण पे आ जाते हैं। तो प्रमाण आपको जो

737
00:50:18,480 --> 00:50:22,480
आप जो आप परम प्रमाण मान रहे हो वेद मिला कैसे?

738
00:50:22,480 --> 00:50:27,360
कहां से मिला भाई? एवं परंपरा प्राप्तिम मुंडकोपनिषद

739
00:50:27,360 --> 00:50:31,600
में एक से लेकर चार तक ऋषि अपनी परंपरा बता रहे हैं।

740
00:50:31,600 --> 00:50:35,680
जो भगवत तुल्य महात्मा गण है वो अपनी ऋषि

741
00:50:35,680 --> 00:50:40,000
गण अपनी परंपरा बता रहे हैं। भगवान बता रहे हैं परंपरा से प्राप्त ज्ञान होता है। पुराणों

742
00:50:40,000 --> 00:50:44,240
में तो भरभर के है परंपरा का बात। तो जब आप पौराणिक

743
00:50:44,240 --> 00:50:48,480
लीलाओं का अर्थ करने चलते तो उसमें ही लिखा है कि परंपरा से करो

744
00:50:48,480 --> 00:50:52,480
इनका अर्थ। तो कम से कम पौराणिक लीलाओं का अर्थ तो परंपरा से कर

745
00:50:52,480 --> 00:50:56,640
लो। तुम्हें अगर जहां पर नहीं मिल रहे कोई ऐसा ग्रंथ मिला जो परंपरा

746
00:50:56,640 --> 00:51:00,720
से नहीं लिखा है उसका अर्थ तुमने अपने मन से कर लिया चलो मान लिया हालांकि वो

747
00:51:00,720 --> 00:51:04,800
भी तर्क संगत नहीं है मगर कम से कम जिस बुक में लिखा है मेरा

748
00:51:04,800 --> 00:51:08,880
अर्थ ऐसे ही करना तो ही समझ पाओगे उस बुक का अर्थ तुम अपने

749
00:51:08,880 --> 00:51:12,720
मन से क्यों कर रहे हो गाइडलाइन है ना कि मेरे बुक के अंदर ये

750
00:51:12,720 --> 00:51:17,120
जो वोकैबलरी है इसको समझने के लिए आपको यहां जाकर

751
00:51:17,120 --> 00:51:21,520
इनसे ये समझना पड़ेगा तो ही आपको समझ आएगा जैसे पीएचडी

752
00:51:21,520 --> 00:51:25,520
का जो सम है वो दूसरी कक्षा का

753
00:51:25,520 --> 00:51:29,520
टीचर आपको नहीं सिखा पाएगा। तो अब जब पुस्तक ही बोल रही है

754
00:51:29,520 --> 00:51:34,000
कि मुझे समझना है तो यहां जाओ पर वो व्यक्ति वहां ना जाकर उसमें अनर्गल

755
00:51:34,000 --> 00:51:38,320
बात उसकी कुछ बातों का दुरुपयोग करके और जो है आपको आपके ही

756
00:51:38,320 --> 00:51:42,400
सनातन सार्वभौम सिद्धांत जो सौंदर्य है सनातन

757
00:51:42,400 --> 00:51:46,560
का उससे आपको दूर कर रहा है। क्यों? अपनी दुकान चलाने का अपना शटर खोले रहने

758
00:51:46,560 --> 00:51:50,800
के लिए। तो कहने का अर्थ यह है सीधी सी बात है अगर आप इसको प्रमाण मानते

759
00:51:50,800 --> 00:51:54,800
हैं कि उसका जो शब्द है वो वो है प्रणव है ईश्वर

760
00:51:54,800 --> 00:51:59,040
का और यह प्रमाण है वेद में तो वो वेद आपके पास आए कहां से हैं

761
00:51:59,040 --> 00:52:03,200
परंपरा प्राप्त गुरुओं से तो यदि आपको उनके द्वारा दिए

762
00:52:03,200 --> 00:52:07,360
गए ग्रंथ पर विश्वास है तो उनके द्वारा उस ग्रंथ के बताए

763
00:52:07,360 --> 00:52:11,360
गए अर्थ पर विश्वास ना होना सिद्ध नहीं होता और यदि आपको

764
00:52:11,360 --> 00:52:15,520
उनके द्वारा बताए गए ग्रंथ के अर्थ पर विश्वास नहीं है तो उनके द्वारा

765
00:52:15,520 --> 00:52:19,680
दिए गए ग्रंथ पर विश्वास होना सिद्ध नहीं होता यह होता है

766
00:52:19,680 --> 00:52:25,680
टू स्टॉप द ट्रेन पुल द चेन

767
00:52:27,520 --> 00:52:31,760
हां। तो और इससे हमें क्या सीखने को मिलता है कि जस्ट बिकॉज़

768
00:52:31,760 --> 00:52:35,760
किसी के सोशल मीडिया पे बहुत सारे फॉलोवर्स हैं। व्यूज

769
00:52:35,760 --> 00:52:40,160
ज्यादा आ रहे हैं कमेंट में। बस प्यारप्यार वाली इमोट

770
00:52:40,160 --> 00:52:44,320
कॉन्स या फिर जो भी चल रहा है वह चल रहा है। तो जरूरी नहीं है कि

771
00:52:44,320 --> 00:52:48,480
आपके सामने कोई रील आ रही है तो उसे हम सत्य ही मान लें। मत

772
00:52:48,480 --> 00:52:52,560
मानिए। समझिए कि व्यक्ति कहां से आ रहा है। कौन से गुरु के

773
00:52:52,560 --> 00:52:56,800
पास बैठ के आ रहा है। क्या गुरु उसका यह बता रहा है। जैसे अभी तो बहुत गुरु है।

774
00:52:56,800 --> 00:53:00,800
एक गुरु है। अभी तो बहुत सारे हैं। तो अब एक गुरु है। वो

775
00:53:00,800 --> 00:53:04,800
क्या बोलते हैं? उनका एक कोर्स हमने किया था स्टार्टिंग स्टार्टिंग में

776
00:53:04,800 --> 00:53:08,800
जब हमारे गुरु से हम थोड़ा दूर थे। है

777
00:53:08,800 --> 00:53:12,880
ना? मतलब परमाचार्य से दूर थे। समझ रहे थे कि यहां क्या है? वहां क्या

778
00:53:12,880 --> 00:53:16,880
है? हमारा मन ही नहीं लगा कहीं। है ना? पर हमने बातें हर एक की

779
00:53:16,880 --> 00:53:21,280
सुनी है पर हम कहीं पे अपने आप को नतमस्तक कहीं नहीं कर पाए।

780
00:53:21,280 --> 00:53:25,280
अंदर से ही नहीं हुआ। मेरा प्रारब्ध है ये भी। है ना? बचा के

781
00:53:25,280 --> 00:53:29,280
रखा मुझे मेरे गुरु की शक्ति ने इस जन्म में कि यहां ही आना

782
00:53:29,280 --> 00:53:33,360
है पर दुनिया देख लो। तो अब

783
00:53:33,360 --> 00:53:37,520
बात ये है कि अब कुछ गुरु हैं उनका एक का कोर्स किया हमने।

784
00:53:37,520 --> 00:53:41,600
उसके अंदर वो शुरू कैसे करते हैं? वेदांत सिद्धांत

785
00:53:41,600 --> 00:53:42,880
है। वेदांत

786
00:53:42,880 --> 00:53:47,040
सिद्धांत ऐसा है कि आप उसमें कभी किसी को कुछ कर ही नहीं पाओगे। कुछ बोल

787
00:53:47,040 --> 00:53:51,360
ही नहीं पाओगे। पर ये सारी बातें हमारे लिए इंपॉर्टेंट नहीं है। इंपॉर्टेंट

788
00:53:51,360 --> 00:53:55,600
है सात्विकता ये सब। अरे तो वेदांत दर्शन

789
00:53:55,600 --> 00:53:59,600
कब आपको सिखा रहा है कि सात्विकता इंपॉर्टेंट नहीं है। पर जिसको

790
00:53:59,600 --> 00:54:03,680
नहीं पता उसके दिमाग में बैक ऑफ द माइंड ये चलेगा। अब वो पैसा तो खर्च ही चुका

791
00:54:03,680 --> 00:54:08,160
है कोर्स करने के। तो कोर्स तो वो करेगा। चलिए अब हमें बहुत

792
00:54:08,160 --> 00:54:12,240
मतलब बाद में पता चला कि कोर्स के अंदर जो आइटम ऑफ मतलब जो

793
00:54:12,240 --> 00:54:16,720
चीजें हो रही थी वह सारी अशास्त्रीय थी क्योंकि प्रणव का उच्चारण था बार-बार बार-बार

794
00:54:16,720 --> 00:54:20,960
का जनेऊ भी था संभवता नहीं जनेऊ नहीं था पर ये दूसरे उनकी

795
00:54:20,960 --> 00:54:24,960
बात कर रही हूं मैं तो वो बार-बार उसका उच्चारण था और महिलाओं

796
00:54:24,960 --> 00:54:29,040
को दंडवत करना था दो तरह के थे ना उनके अरे

797
00:54:29,040 --> 00:54:33,200
थक गई दंडवत करके अगर मुझे ये नहीं भी कोई बताता ना कि महिलाएं दंडवत

798
00:54:33,200 --> 00:54:37,660
नहीं करती वो कोर्स करने के बाद हमें पता चल गया था कि ये

799
00:54:37,660 --> 00:54:41,680
[हंसी] बहुत मुश्किल है। अरे बाप रे।

800
00:54:41,680 --> 00:54:45,760
चलिए आगे बढ़ते हैं। तो अब वो व्यक्ति क्या बोलता

801
00:54:45,760 --> 00:54:50,080
है आपको पता है? हम कि मेरी अगर कोई ऐसी

802
00:54:50,080 --> 00:54:54,160
बात है जो वेद मना कर रहे हैं तो वेदों को बदल

803
00:54:54,160 --> 00:54:58,080
दो। अच्छा। हां। वेदों को बदल दो। वाह। और

804
00:54:58,080 --> 00:55:02,160
मैंने आज तक कभी कोई वेद पढ़। कहां से? कहां से थे वो? सुनिए तो।

805
00:55:02,160 --> 00:55:06,640
सद्गुरु थे क्या? मैंने आज तक कभी कोई वेद पढ़े नहीं।

806
00:55:06,640 --> 00:55:10,800
ठीक है? पर मैं अपनी और हमें और यह बोला

807
00:55:10,800 --> 00:55:14,880
गया वो वीडियो है। मतलब कहीं पे आने जाने के बीच में वो मध्य

808
00:55:14,880 --> 00:55:19,040
में एक वो वीडियो शीट हुआ था। क्या करना है इतने वेद पढ़ के? इतनी पुस्तकें

809
00:55:19,040 --> 00:55:23,120
पढ़ने से क्या होगा? मैंने आज तक कोई वेद नहीं पढ़ा है। ये सब पढ़ने से कोई मतलब

810
00:55:23,120 --> 00:55:27,200
नहीं है। जो अपना जिस चीज पे ध्यान लगाना है वो लगाओ। तो फिर मेरा

811
00:55:27,200 --> 00:55:31,680
प्रश्न ये आता है आप खुद प्रश्न करिए कि

812
00:55:31,680 --> 00:55:35,760
तो फिर आप उतनी पुस्तकें क्यों बेच रहे हैं? हम दूसरी

813
00:55:35,760 --> 00:55:39,840
बात आप आप अपने से यंत्र कैसे बना दे रहे हैं और वो यंत्र

814
00:55:39,840 --> 00:55:44,000
दुर्गा का है। हम है ना? मतलब पीछे में मतलब बहुत सारी और भी

815
00:55:44,000 --> 00:55:48,160
चीजें हैं। या तो बोलो कि कोई पुस्तक मत पढ़ो और अगर

816
00:55:48,160 --> 00:55:52,480
बोल रहे हो कि पुस्तक मत पढ़ो तो फिर अपनी पुस्तक बेचो मत। बिल्कुल।

817
00:55:52,480 --> 00:55:56,480
है ना? तो इस तरह की बहुत सारी चीजें हैं

818
00:55:56,480 --> 00:56:00,560
और बहुत सारे कहां पे सनातन धर्म के नाम पे

819
00:56:00,560 --> 00:56:04,560
रजिस्ट्रेशनंस एक्चुअली अमेरिका की हुई है। मतलब कंपनी वहां

820
00:56:04,560 --> 00:56:08,720
की रजिस्टर्ड है। हम और काम

821
00:56:08,720 --> 00:56:13,360
यहां का हो रहा है। जी। जी अब इसके अंदर हम ये कभी नहीं बोलते हैं

822
00:56:13,360 --> 00:56:17,360
क्योंकि सामने वाले बोल सकते हैं जितना काम आप अच्छा कर

823
00:56:17,360 --> 00:56:21,360
रहे हैं वो सराहनीय है। ये तो हमारी गुरुदेव भी शिक्षा गुरुदेव ने दी

824
00:56:21,360 --> 00:56:25,440
है कि जो जो अच्छा काम करता है उसे उतने अंश में उसकी प्रोत्साहन

825
00:56:25,440 --> 00:56:29,840
होना चाहिए। उसका प्रेशर दीजिए। पर जो गलत करता है

826
00:56:29,840 --> 00:56:33,920
अब वो गलत भी पब्लिकली कर रहा है तो हम पब्लिकली शेयर करेंगे क्योंकि

827
00:56:33,920 --> 00:56:38,000
हम सबके घर पर जा के तो बता नहीं सकते हैं कि अच्छा ये ऐसा नहीं बाय द वे ऐसा

828
00:56:38,000 --> 00:56:42,000
है अब सोचिए अगर वो व्यक्ति जो सब अच्छा कर रहा है जितने भी

829
00:56:42,000 --> 00:56:46,160
व्यक्ति हैं कोई व्यक्ति विशेष की बात में नहीं कर रहे हैं जितने भी ये सब

830
00:56:46,160 --> 00:56:50,160
व्यक्ति हैं ये जो अच्छे कार्य करते हैं वो तो करें ही करें पर साथ में

831
00:56:50,160 --> 00:56:54,400
ये जो विकृति डाल रहे हैं वो ना डालें तो क्या सनातन धर्म का स्वरूप

832
00:56:54,400 --> 00:56:58,720
होगा तो जब प्रश्न उठता कि सनातन धर्म का स्वरूप

833
00:56:58,720 --> 00:57:02,880
ऐसा क्यों होता जा रहा है? वो आप पारंपरिक आचार्यों से पूछते हैं

834
00:57:02,880 --> 00:57:06,880
और तब आप इन लोगों के पास क्यों नहीं जाते हैं जो इस स्वरूप

835
00:57:06,880 --> 00:57:11,120
को टेढ़ामेढ़ा करने में सबसे ज्यादा योग्य दान अपना दे रहे हैं।

836
00:57:11,120 --> 00:57:15,360
बिल्कुल बिल्कुल तो कुल मिलाकर के आज की जो चर्चा है अब

837
00:57:15,360 --> 00:57:19,520
उसको एक समराइज करूं जो मुझे याद रहे शायद बिंदुगत तरीके

838
00:57:19,520 --> 00:57:23,920
से। देखिए पहला तो यह है कि

839
00:57:23,920 --> 00:57:28,320
आप देखिए चीजें कि एक तरफ ऐसे आचार्य गण हैं जिसके

840
00:57:28,320 --> 00:57:28,820
जिनके

841
00:57:28,720 --> 00:57:32,880
पास उपयुक्त संसाधन नहीं है। उपयुक्त लोग नहीं है। वहां

842
00:57:32,880 --> 00:57:36,880
मठ में गोवर्धन मठ में आज भी ऐसे लोगों को कार्य करने के

843
00:57:36,880 --> 00:57:40,880
लिए नहीं रखा जाता जो तीन टाइम संध्या ना करते हो। और ऐसी फंडिंग नहीं

844
00:57:40,880 --> 00:57:45,280
है उनके पास जो केवल उस चीज को पोषण करें। तो

845
00:57:45,280 --> 00:57:49,520
कहने का अर्थ है कि एक तो बिजनेस मॉडल है कि हमें अपना प्रचार

846
00:57:49,520 --> 00:57:53,600
कैसे कराना है कि बीफ खाने वाले से भी प्रचार करा दो। निराकार को मानने से

847
00:57:53,600 --> 00:57:57,840
मानने वाले से भी प्रचार करा दो। स्त्रियों का जनेऊ कराने वाले से भी प्रचार करा दो।

848
00:57:57,840 --> 00:58:01,840
परंपराओं को ना मानने वाले से भी प्रचार करा दो। पुराणों को ना मानने वाले से

849
00:58:01,840 --> 00:58:06,000
भी प्रचार करा दो। एक तरफ है इस तरह का बिजनेस मॉडल जो अपना काम

850
00:58:06,000 --> 00:58:10,880
कर रहा है और दूसरी तरफ है हमारे वास्तविक संत रामानुजाचार्य

851
00:58:10,880 --> 00:58:15,840
शंकराचार्य मधवाचार्य नारकाचार्य रामानंदाचार्य

852
00:58:15,840 --> 00:58:20,080
ये वास्तविक संत हैं जो अपना कार्य करने के लिए किसी

853
00:58:20,080 --> 00:58:24,160
को भी इस बिहाफ पे नहीं रखते कि भैया हम तुम्हें पैसे देंगे प्रायोरिटी

854
00:58:24,160 --> 00:58:28,160
होती है कि वो धर्म कितना है उनके अंदर धर्म या तुम कुछ भी खाने पीने

855
00:58:28,160 --> 00:58:32,400
वाले हो तुम मेरा काम अच्छा कर दो तुम आ जाओ ऐसा कुछ नहीं

856
00:58:32,400 --> 00:58:36,400
और आपको मीडिया में वो दिखता नहीं है। और मैं आपको इसका जीता जागता एक

857
00:58:36,400 --> 00:58:40,400
उदाहरण बता दूं कि हमारे आप गोवर्धन चैनल का आप वीडियो देखिए,

858
00:58:40,400 --> 00:58:43,760
YouTube चैनल देखिए। आपको दिखेगा कि बहुत सारी क्वालिटी की कमी

859
00:58:43,760 --> 00:58:48,000
हो रही है। एडिटिंग में कमी आ रही है। मगर कभी भी उन्होंने

860
00:58:48,000 --> 00:58:52,160
इन चीजों को अपग्रेड करने के लिए वहां सिद्धांत के साथ कमी नहीं। समझौता

861
00:58:52,160 --> 00:58:56,480
नहीं किया। कोई भी नहीं कर। गुरुदेव जो हैं पूरी के शंकराचार्य जी मैंने अक्सर

862
00:58:56,480 --> 00:59:00,720
देखा कि वो चाहे तो कोई व्यक्ति माइक यहां पे लगा सकता है उनके

863
00:59:00,720 --> 00:59:04,800
यहां पास से पास जिससे कि उनकी जो आवाज है वो ज्यादा से

864
00:59:04,800 --> 00:59:08,880
ज्यादा क्लियर जाए मगर नहीं इतनी दूर माइक लगेगा यहां

865
00:59:08,880 --> 00:59:13,520
पे माइक रखेगा और शंकराचार्य से एक निश्चित दूरी जो होनी चाहिए

866
00:59:13,520 --> 00:59:18,400
सामान्य लोगों की वो होती है यद्यपि ऐसा कोई वो नहीं है

867
00:59:18,400 --> 00:59:22,400
बाध्यता कुछ आचार्य ऐसे भी मिलेंगे जिनके पास से पास माइक होगा ऐसा मैं खंडन नहीं

868
00:59:22,400 --> 00:59:26,480
कर रहा हूं मगर मगर यदि उन्होंने इसको प्रेफर किया है तो वो उसी पे

869
00:59:26,480 --> 00:59:30,800
चल रहे हैं। अगर उन्होंने प्रेफर किया कि भले ही आवाज थोड़ी सी डाउन हो जाए क्वालिटी

870
00:59:30,800 --> 00:59:34,960
और माइक मुझसे दूर रहे तो वो उसको पर एक की जो मर्यादा है

871
00:59:34,960 --> 00:59:39,440
जो उन्होंने जो उन्होंने जो अपनी

872
00:59:39,440 --> 00:59:43,440
तैयार की है तो उसको उसके साथ वो समझौता नहीं। अगर वहां पर

873
00:59:43,440 --> 00:59:47,520
त्रिकाल संध्या वाला व्यक्ति नहीं है तो भले ही वो कितना भी अच्छा एडिटर हो कितना

874
00:59:47,520 --> 00:59:51,600
भी अच्छा सिनेमेटोग्राफर हो वो वहां पर वीडियो एडिटिंग करने के लिए नहीं

875
00:59:51,600 --> 00:59:55,680
जाता। वो वहां पर क्या कहते हैं? सिनेमेटोग्राफी करने के लिए नहीं जाता।

876
00:59:55,680 --> 00:59:59,200
तो यह आचार्य हैं। यह अपना प्रचार करवाने के लिए किसी को खरीदते

877
00:59:59,200 --> 01:00:03,520
नहीं है। एक तरफ ऐसे आचार्य इतना होने पर भी, फंडिंग ना होने पर भी, संसाधन

878
01:00:03,520 --> 01:00:07,520
ना होने पर भी आप इनमें से किसी के भी यहां कभी भी चले जाइए।

879
01:00:07,520 --> 01:00:11,600
रामपाल वाले क्या कहते हैं कि हमारे यहां भंडारा चलता है, भंडारा चलता है। भाई

880
01:00:11,600 --> 01:00:15,760
इनमें से किसी के भी यहां कभी भी जाइए, आपको भूखे पेट

881
01:00:15,760 --> 01:00:19,760
कोई नहीं लौटने देगा। आपको भोजन प्रसाद मिलेगा वहां। हां, बस बता दीजिएगा।

882
01:00:19,760 --> 01:00:24,320
यह नहीं कि हम गए थी और हम आ गए हम भूखे थे तो कहने हां

883
01:00:24,320 --> 01:00:28,800
तो एक तो ये है कि बिजनेस मॉडल किस तरीके से खड़े हो रहे हैं हमारे प्रामाणिक

884
01:00:28,800 --> 01:00:33,920
परंपराओं के अगेंस्ट में अच्छा एक बात और हम डालेंगे

885
01:00:33,920 --> 01:00:38,160
आज तक हमें किसी भी जो इन्होंने नाम दिया है ना सूची बना

886
01:00:38,160 --> 01:00:42,240
लीजिए किसी भी परंपरा से आज तक हमें एक मैसेज कॉल

887
01:00:42,240 --> 01:00:46,240
नहीं आई है कि आप हमारे इवेंट में आके हमें प्रमोट कीजिए आप

888
01:00:46,240 --> 01:00:50,400
हमारे गौशाला का प्रमोशन कीजिए आइए हम हम आपको अपनी पुस्तक देंगे।

889
01:00:50,400 --> 01:00:54,560
आइए हम गुरु जी के साथ आपकी फोटो खिंचवा के देंगे। आज तक हमारे गुरु

890
01:00:54,560 --> 01:00:58,720
अपने गुरुदेव के साथ हम स्वयं ही फोटो नहीं लिए है। क्योंकि हमें

891
01:00:58,720 --> 01:01:03,040
होता है कि क्या फोटो ले इनके साथ? तो ये सारे

892
01:01:03,040 --> 01:01:07,120
क्या आपको विद्या भास्कर जी महाराज ने कभी अप्रोच किया? क्या आपको राघवाचार्य

893
01:01:07,120 --> 01:01:11,120
जी महाराज ने कभी अप्रोच किया? क्या आपको कभी निम्बारकाचार्य जी महाराज ने कभी

894
01:01:11,120 --> 01:01:14,240
अप्रोच किया? शंकराचार्य के साथ तो है ही

895
01:01:14,240 --> 01:01:18,400
है। उनकी अनुगति है। उनकी तो शिष्या है। तो वहां तो बात बता ही रही हैं। करने

896
01:01:18,400 --> 01:01:22,640
से तो कहने पर जो है ना आचार्य उन्हें

897
01:01:22,640 --> 01:01:26,720
ये सब प्रमोशन की आवश्यकता नहीं है। क्यों? क्योंकि उनकी

898
01:01:26,720 --> 01:01:30,880
गद्दी को कोई खरीद नहीं सकता है। और क्योंकि वो एक ऑर्गेनाइजेशन नहीं

899
01:01:30,880 --> 01:01:34,880
है कि अगर इतना काम नहीं करेंगे तो लोग हमें भूल जाएंगे।

900
01:01:34,880 --> 01:01:38,880
जो परंपराएं हैं जब आप खोजते खोजते खोजते वो

901
01:01:38,880 --> 01:01:43,040
एंड वाले सच पर जाना चाहेंगे ना तो आपको यही लोग मिलेंगे तब

902
01:01:43,040 --> 01:01:47,200
यह ऑर्गेनाइजेशन चली जाएंगे तो इसीलिए उनको इन सबका ध्यान नहीं

903
01:01:47,200 --> 01:01:51,360
होता उनकी फंडिंग किस में जाती है गौ सेवा उनकी फंडिंग किसमें जाती है ज्यादा

904
01:01:51,360 --> 01:01:55,360
से ज्यादा लोगों के लिए कार्य कर पाए ज्यादा से ज्यादा लोगों को मिल पाए वहां

905
01:01:55,360 --> 01:01:59,360
पे सिद्धांत की रक्षा होती है सिद्धांत इस बात की रक्षा

906
01:01:59,360 --> 01:02:03,520
नहीं होती कि हमारे पोस्टर बड़े-बड़े कौन बना रहा है कौन प्रचार कर रहा है कपड़े

907
01:02:03,520 --> 01:02:08,400
डिसाइड किए हम कौन से रंग की माला और कौन से रंग का वो डालेंगे

908
01:02:08,400 --> 01:02:12,560
कौन सी मूवी में हम आएंगे तो मैं बिंदुगत तरीके से एक बार

909
01:02:12,560 --> 01:02:16,720
रिवाइज कर दूं आपने आज क्या-क्या जाना सबसे पहले बिजनेस मॉडल खड़ा

910
01:02:16,720 --> 01:02:21,360
हो रहा है एक तरफ हमारे पारंपरिक प्रामाणिक आचार्य गण हैं परंपराएं

911
01:02:21,360 --> 01:02:25,360
हैं और एक तरफ ऐसी संस्थाएं हैं जो बाहर से भी बाहर की

912
01:02:25,360 --> 01:02:29,440
विचारधारा को यहां परोस रही हैं। सनातन के नाम पर सनातनाभास

913
01:02:29,440 --> 01:02:33,600
प्रस्तुत कर रही हैं। सनातन से सनातनाभास मतलब आभास

914
01:02:33,600 --> 01:02:37,920
सनातन से मिलता-जुलता देखने में लगेगा है मगर वह सनातन है नहीं।

915
01:02:37,920 --> 01:02:42,480
तो एक बिजनेस मॉडल के रूप में यह सब फल फूल रहे हैं। दूसरा क्या है

916
01:02:42,480 --> 01:02:46,560
कि अपने आप को खड़ा करने के लिए इनका एक

917
01:02:46,560 --> 01:02:50,640
ही सिद्धांत है कि जो हमारी प्रामाणिक परंपराओं से मिलने वाली शिक्षा

918
01:02:50,640 --> 01:02:54,640
है उसका खंडन करो। प्रामाणिक आचार्यों का खंडन करो। तुम फल भूल

919
01:02:54,640 --> 01:02:58,720
जाओगे। मूर्ति पूजा का खंडन करने। अरे भगवान दूध कैसे पी सकता है? भगवान भोग कैसे

920
01:02:58,720 --> 01:03:03,200
खा सकता है? यार ब्राह्मणों को कुछ ना कुछ बोलते तो बिना किसी क्योंकि एक्चुअली

921
01:03:03,200 --> 01:03:07,360
हिस्ट्री थी क्या अच्छा ब्राह्मण को भोजन कराने से मेरी तबीयत ठीक हो जाएगी अरे

922
01:03:07,360 --> 01:03:11,360
ये करने से क्या हो जाएगा वो करने से क्या हो जाएगा ये है वो है मगर केक काटने

923
01:03:11,360 --> 01:03:15,440
से क्या हो जाएगा वो नहीं पता चलता फूंक उसमें मोमबत्ती में फूंक मारने से क्या हो जाएगा

924
01:03:15,440 --> 01:03:19,760
ये कभी नहीं सोचते मगर यहां ब्राह्मणों को दान देने से या आचार्यों के

925
01:03:19,760 --> 01:03:23,760
प्रवचन सुनने से या अमुक अमुक अमुक अमुक यज्ञ करने से क्या हो

926
01:03:23,760 --> 01:03:27,760
जाएगा इस सब पे जरूर बोलते हैं तो क्या है अपने आप को ख्यापित करने के लिए जो बिजनेस

927
01:03:27,760 --> 01:03:32,080
मॉडल्स होते हैं जो हमारे हमारे प्रामाणिक सार्वभौम और जो

928
01:03:32,080 --> 01:03:36,320
सनातन सिद्धांत है उनका खंडन करके अपने आप को ख्यापित

929
01:03:36,320 --> 01:03:40,400
करते हैं। क्योंकि एक ऐसा वातावरण है कि

930
01:03:40,400 --> 01:03:45,520
व्यक्ति तुरंत उधर भागता है सनसनी के चैन से सोना है तो जाग जाओ। शंकराचार्य

931
01:03:45,520 --> 01:03:49,520
शंकराचार्य तुम्हें जनेऊ नहीं पहनने देंगे। इसलिए मेरे पास आओ। जनेऊ

932
01:03:49,520 --> 01:03:53,760
करवा लो। ये बता जनेऊ करवा लो। ठीक है? दूसरी

933
01:03:53,760 --> 01:03:57,840
बात ये हो गई। तीसरी बात ये हो गई। यह जो यह इस तरह के आरोप लगाते हैं

934
01:03:57,840 --> 01:04:01,920
भगवान श्री कृष्ण के बारे में वह हमने आपको बता दिया। इन सबका एक ही

935
01:04:01,920 --> 01:04:05,920
उत्तर है कि भैया ईश्वर वही है जो कुछ भी कर

936
01:04:05,920 --> 01:04:10,080
सकता है और ईश्वर आपको विभिन्न रूपों में आकर यह बताता है कि

937
01:04:10,080 --> 01:04:14,160
मैं क्या कर सकता हूं। साथ ही साथ प्रमाण तो

938
01:04:14,160 --> 01:04:18,160
जिसके द्वारा प्राप्त होने वाले आपको वेद पर विश्वास है उसके द्वारा प्राप्त होने वाले

939
01:04:18,160 --> 01:04:22,480
आपको अर्थ पर विश्वास क्यों नहीं है? यह आपसे सवाल सदैव पूछा जाएगा।

940
01:04:22,480 --> 01:04:26,800
क्योंकि आप भी कहीं ना कहीं यह मानते हैं इन्हीं प्रामाणिक आचार्य परंपराओं

941
01:04:26,800 --> 01:04:30,960
से आपको जो है वेद मिले हैं और बाकी थोड़ा सा आप बता

942
01:04:30,960 --> 01:04:35,200
दीजिए। मैंने कोशिश की है समराइज करने की। बाकी हम आपको इस

943
01:04:35,200 --> 01:04:39,360
इसके बाद हम अपनी वाणी को विराम देंगे कि आज का हमारा समय भी

944
01:04:39,360 --> 01:04:43,440
पूरा होने वाला है। जी तो और आप बताइएगा कैसी

945
01:04:43,440 --> 01:04:47,520
लगी ये चर्चा और आगे देखना चाहते हैं कि नहीं इस तरह। हां ये जरूर बताइएगा। हां

946
01:04:47,520 --> 01:04:51,680
तो हम आपको यही बोलेंगे कि देखिए ना तो यह ना तो हम यह

947
01:04:51,680 --> 01:04:55,840
बोल रहे हैं कि आप हमसे जुड़िए ना तो हम बोल रहे हैं हमें आप कुछ

948
01:04:55,840 --> 01:05:00,080
दीजिए ना तो हम आपको यह बोल रहे हैं कि अरे अरे

949
01:05:00,080 --> 01:05:00,580
तुम

950
01:05:00,560 --> 01:05:04,960
यहां क्यों और हमारे पास आओ आप हमारे पास मत आइए।

951
01:05:04,960 --> 01:05:09,200
आप आप हमारी बातों को अगर सुन रहे हैं तो उस पर थोड़ा ध्यान दीजिए।

952
01:05:09,200 --> 01:05:13,200
सोचिए कि हमने आपको क्या बताया है और क्या नहीं। हम आपसे

953
01:05:13,200 --> 01:05:17,440
सिर्फ एक ही विनती करेंगे कि पारंपरिक आचार्यों की तरफ जाइए

954
01:05:17,440 --> 01:05:21,440
जिसमें भी आपकी श्रद्धा आ रही है। हम तो यह भी नहीं कह रहे हैं कि सिर्फ रामानुजा जी के

955
01:05:21,440 --> 01:05:25,440
पास जाइए या केवल शंकराचार्य जी के पास जाइए। आपको लिस्ट ऑफ आचार्य दे

956
01:05:25,440 --> 01:05:29,600
दिए हैं। और हम लोग कोशिश करेंगे बहुत जल्द कि सभी प्रामाणिक संप्रदायों की

957
01:05:29,600 --> 01:05:33,600
जो सुनिश्चित जानकारी हो वो भी आपको हम उपलब्ध करा पाए।

958
01:05:33,600 --> 01:05:37,760
हां। तो आप वहां जाइए। प्रमाणिक आचार्यों के पास

959
01:05:37,760 --> 01:05:41,760
बैठिए। रस, ज्ञान, भक्ति यह जो

960
01:05:41,760 --> 01:05:45,840
अलग-अलग करके सब अपना बिजनेस करते हैं, यह सब सोचिए।

961
01:05:45,840 --> 01:05:50,080
आपको यूं मिल जाएगा। यूं और आप भाग विभोर हो जाएंगे

962
01:05:50,080 --> 01:05:54,240
और अपना कल्याण कीजिए। एक चीज याद रखिए दीक्षा को कोई बेचा

963
01:05:54,240 --> 01:05:58,640
नहीं जाता। इनिशिएशन को बेचा नहीं जाता। इनिशिएशन ऑनलाइन नहीं होते हैं।

964
01:05:58,640 --> 01:06:02,720
और श्री कृष्ण माखन चोर भी थे। श्री कृष्ण ने वस्त्र भी चुराए

965
01:06:02,720 --> 01:06:07,280
थे। श्री कृष्ण सब कर सकते थे। सब करते हैं क्योंकि ईश्वर सनातन

966
01:06:07,280 --> 01:06:11,360
सर्वशक्तिमान ईश्वर है अबाध्य और सोशल मीडिया

967
01:06:11,360 --> 01:06:15,440
पे अंधा विश्वास किसी पे मत करिए हम पर भी मत

968
01:06:15,440 --> 01:06:16,000
करिए

969
01:06:16,000 --> 01:06:20,080
अगर कुछ देख रहे हैं तो कंफर्म करने के लिए अब जाएंगे

970
01:06:20,080 --> 01:06:24,320
कहां विचार करिए विचार करिए जो हमने बातें कही है वो तर्कसंगत कितनी

971
01:06:24,320 --> 01:06:28,320
लॉजिकली सोचने का प्रयास करिए लॉजिकली और चिंतन करिए इस पे अगर

972
01:06:28,320 --> 01:06:32,560
फिर भी कंफ्यूजन रहे तो आपको जाना कहां पड़ेगा सोर्स के पास सोर्स आपका

973
01:06:32,560 --> 01:06:36,640
कौन है ये ऑर्गेनाइजेशन सोर्स नहीं है। ये तो अपनी खुद की प्रिंटिंग्स करती

974
01:06:36,640 --> 01:06:40,640
हैं। आप पारंपरिक आचार्य जो परंपरा

975
01:06:40,640 --> 01:06:44,800
प्राप्त आचार्य हैं वो उनसे आपको कन्फर्मेशन मिलेगी कि क्या

976
01:06:44,800 --> 01:06:48,880
विजय ने जो ये वीडियो बनाई है जिसमें वो बोल रही है कि महामृत्युंजय

977
01:06:48,880 --> 01:06:52,960
का जप महिलाएं नहीं कर सकती या फिर जो द्विज नहीं है जो दीक्षा में प्राप्त

978
01:06:52,960 --> 01:06:56,960
मंत्र है ये ये नहीं कर सकता जिसको दीक्षा प्राप्त नहीं है। क्या गुरु जी

979
01:06:56,960 --> 01:07:01,040
ये ठीक है या नहीं? ये आपको केवल परंपरा प्राप्त आचार्यों

980
01:07:01,040 --> 01:07:05,440
के पास ऐसा विशेष गढ़ फाइन टेक्निकिटीज़

981
01:07:05,440 --> 01:07:09,760
आपको वहीं मिलेंगी। पीएचडी की इंफॉर्मेशन चाहिए तो क्लास

982
01:07:09,760 --> 01:07:14,400
वन और टू के टीचर के पास जाने का कोई मतलब नहीं है।

983
01:07:14,400 --> 01:07:18,480
और सेम बात आप बाकियों पर भी प्रश्न उठाइए तो कम से कम हमें

984
01:07:18,480 --> 01:07:22,720
इस चीज की खुशी होगी कि हमने आपको परंपरा से जोड़ा।

985
01:07:22,720 --> 01:07:26,800
बिल्कुल। जैसे जैसे मुझे आज खुशी है कि मैंने इनको परंपरा

986
01:07:26,800 --> 01:07:29,120
से जोड़ा।

987
01:07:29,120 --> 01:07:31,040
सुनने के लिए बहुत-बहुत आभार

988
01:07:31,040 --> 01:07:37,040
और जय श्री राम। जय श्री राम।

989
01:07:39,740 --> 01:07:43,740
[संगीत]
