1
00:00:03,120 --> 00:00:07,120
आवाज आपकी बहुत कम आ रही है। मैं

2
00:00:07,120 --> 00:00:11,440
आ रही है बात कर रहा था। आप दूर से बात कर रहे हैं क्या? मतलब नहीं नहीं

3
00:00:11,440 --> 00:00:16,480
अब आ रही है आवाज? ठीक है मतलब उतनी क्लियर नहीं है। बताइए।

4
00:00:16,480 --> 00:00:20,720
मैं तोताराम आर्य बात कर रहा था। टीकाराम

5
00:00:20,720 --> 00:00:24,720
आर्य तोताराम आर्य तोताराम आर्य

6
00:00:24,720 --> 00:00:28,720
जी अच्छा बताइए। मैं यह कह रहा था आपने पंडित

7
00:00:28,720 --> 00:00:34,480
महेंद्रपाल आर्य जी का नाम सुना है?

8
00:00:34,480 --> 00:00:38,800
कुछ खास नहीं जानते बताइए। नहीं जानते। पंडित महेंद्रपाल

9
00:00:38,800 --> 00:00:42,800
आर्य हैं पूर्व मौलाना। महबूब अली धर्मुरु थे

10
00:00:42,800 --> 00:00:46,800
पहले वो 1983 में। पंडित महेंद्रपाल आर्य

11
00:00:46,800 --> 00:00:50,880
क्या थे? हां। पूर्व मौलाना थे वो। 1983 में उन्होंने इस्लाम को

12
00:00:50,880 --> 00:00:55,120
छोड़ दिया। अच्छा। हां और वो सत्य सनातन वैदिक

13
00:00:55,120 --> 00:00:59,200
धर्म का प्रचार करते हैं और वो 36 36

14
00:00:59,200 --> 00:01:03,280
हजार मतलब मौलानाओं मौलानाओं को मतलब वैदिक धर्मी

15
00:01:03,280 --> 00:01:07,440
बना चुके हैं वो अब तक हम हम तो एक बार उनसे

16
00:01:07,440 --> 00:01:13,040
आपका मतलब शास्त्रार्थ कराया जाए

17
00:01:13,040 --> 00:01:17,200
या और मतलब हर संडे को हर संडे को मतलब लाइव भी आते

18
00:01:17,200 --> 00:01:21,360
हैं। मैं गुरु जी से रिक्वेस्ट करूंगा कि आप आपके जो तर्क हैं जो

19
00:01:21,360 --> 00:01:26,000
भी चीजें हैं आप उनसे पूछ सकते हैं। हम करा दीजिए

20
00:01:26,000 --> 00:01:30,320
पर पर मेरा एक सिद्धांत है एक वो

21
00:01:30,320 --> 00:01:33,760
है कि हम

22
00:01:33,760 --> 00:01:38,080
समाज में आर्य समाजी और हमें लेकर के

23
00:01:38,080 --> 00:01:42,080
आपस में तनातनी देख के विप्लव की स्थितियां उत्पन्न ना

24
00:01:42,080 --> 00:01:46,480
हो अथवा अथवा सुन लीजिए सुन लीजिए अथवा विरोधियों

25
00:01:46,480 --> 00:01:50,480
को उससे बल ना मिले इसलिए हम इस तरह की

26
00:01:50,480 --> 00:01:55,200
चीजों को शास्त्रार्थ नाम ना देकर करके चर्चा का नाम दें तो वह अधिक

27
00:01:55,200 --> 00:01:59,360
अच्छा रहेगा। बाकी आप करा सकते हैं नहीं

28
00:01:59,360 --> 00:02:03,520
नहीं चर्चा का नाम ऐसा है आप मैं

29
00:02:03,520 --> 00:02:08,480
बात कर लूंगा उनसे ठीक है आप एक विषय चुन लीजिए

30
00:02:08,480 --> 00:02:12,640
कि किस विषय पर मतलब आप बात करना चाहते सर्वशक्तिमान ईश्वर अच्छा

31
00:02:12,640 --> 00:02:17,200
सर्वशक्तिमान ईश्वर अच्छा अच्छा हां तो ये तो ये तो सर्वशक्तिमान

32
00:02:17,200 --> 00:02:21,360
ईश्वर ईश्वर सर्व शक्तिमान ये तो आर्य समाज लोग भी बोलते हैं ईश्वर सर्वशक्तिमान

33
00:02:21,360 --> 00:02:27,360
है वो सिद्ध नहीं होता ना। अच्छा।

34
00:02:27,520 --> 00:02:28,240
अच्छा इसको

35
00:02:28,240 --> 00:02:32,320
सिद्ध करवाना है कि ईश्वर सर्वशक्तिमान है या नहीं है। आर्य समाज का ही आर्य

36
00:02:32,320 --> 00:02:36,320
समाज की जो परिभाषा है, उसके अनुसार सर्व ईश्वर जो है, सर्वशक्तिमान

37
00:02:36,320 --> 00:02:40,400
सिद्ध नहीं होता। जैसे कि हमने किसी के लिए यह कह दिया कि भाई,

38
00:02:40,400 --> 00:02:44,880
यह व्यक्ति सत्य प्रतिज्ञ है। नहीं व्यक्ति और ईश्वर

39
00:02:44,880 --> 00:02:48,960
नहीं नहीं हमने एक एग्जांपल दे रहा हूं। जैसे हमने किसी के लिए कहा कि यह सत्य

40
00:02:48,960 --> 00:02:52,960
प्रतिज्ञ है और आगे चलकर के उसका झूठ बोलना भी स्वीकार कर

41
00:02:52,960 --> 00:02:57,120
लिया तो हमारी बात कट गई। या तो वह सत्य

42
00:02:57,120 --> 00:03:01,360
प्रतिज्ञ नहीं है या तो आगे चलकर के उसका झूठ बोलना स्वीकार ना करें हम। हमें

43
00:03:01,360 --> 00:03:05,520
ही कह रहे हैं कि सत्य प्रतिज्ञ है आगे चलकर के हम उसका झूठ बोलना स्वीकार कर रहे हैं।

44
00:03:05,520 --> 00:03:09,680
तो ऐसी ही चीजें दिखाई देती हैं आर्य समाज के द्वारा जो

45
00:03:09,680 --> 00:03:14,400
प्रचार किया जाता है ईश्वर के संबंध में तो उसको लेकर के चर्चा हो जाएगी।

46
00:03:14,400 --> 00:03:18,560
अच्छा अच्छा नहीं ऐसा मैं बता रहा हूं आपको ये

47
00:03:18,560 --> 00:03:22,880
जो महेंद्रपाल आर्य है ना हम इनसे इनसे सारे मतलब

48
00:03:22,880 --> 00:03:27,280
जो आर्य समाजी जो लोग हैं वो भी चिढ़ते हैं।

49
00:03:27,280 --> 00:03:31,280
ईसाई ईसाई और इस्लाम के जगत के जो लोग हैं वो तो चिरते ही चिढ़ते हैं।

50
00:03:31,280 --> 00:03:35,280
बौद्धिस्ट जगत के जो लोग हैं उन्हें ₹00 करोड़ का ऑफर मिल चुका

51
00:03:35,280 --> 00:03:39,760
है बौद्धिस्टों से और ईसाइयों से। हम

52
00:03:39,760 --> 00:03:43,360
उनका लाइव लाइव आता है और मतलब लाइव सुनवाते हैं लोगों को। देखिए

53
00:03:43,360 --> 00:03:47,360
किस तरीके से मुझे कितने हजार करोड़ का ऑफर दे रहा है। इस तरीके से

54
00:03:47,360 --> 00:03:51,440
मतलब उनके बहुत ₹00 करोड़ वाले का ऑफर वाले का

55
00:03:51,440 --> 00:03:55,440
है क्या वीडियो आपका? हां बिल्कुल बिल्कुल मेरे पास वो आप मुझे भेजिएगा।

56
00:03:55,440 --> 00:03:59,600
आप मुझे अपना WhatsApp नंबर दीजिए। यही हमारा WhatsApp नंबर है। अच्छा

57
00:03:59,600 --> 00:04:03,600
इसी तो WhatsApp नंबर है ना आपका? हां अच्छा इनके पता है मैं भी मैं

58
00:04:03,600 --> 00:04:07,600
भी आर्य हूं लेकिन मैं जो चीज इतनी मुझे नॉलेज नहीं है। लेकिन

59
00:04:07,600 --> 00:04:11,760
मैं जो सुनता हूं आर्यों को भी सुनता हूं। पौराणिक लोगों को भी सुनता हूं।

60
00:04:11,760 --> 00:04:15,760
ठीक है और पंडित महेंद्रपाल आर्य जी के लिए भी सुनता हूं। रियलिटी में अगर

61
00:04:15,760 --> 00:04:20,160
इनके पास जो तर्क है वो किसी के पास नहीं है। सच में पौराणिक

62
00:04:20,160 --> 00:04:24,320
लोग कौन? पौराणिक जगत जैसे कि जो कहते हैं कि

63
00:04:24,320 --> 00:04:28,320
सूर्य को मुंह में दे लिया था। मुंह में दे लिया था। सूर्य को तो

64
00:04:28,320 --> 00:04:32,800
वो तो वैदिक भी है। वो वेदों में आस्था नहीं रखते क्या?

65
00:04:32,800 --> 00:04:36,880
और हनुमान जी की पूछ थी। इस तरीके की जो बातें वो ठीक है। मगर

66
00:04:36,880 --> 00:04:41,040
यह कहां लिखा है कि हनुमान जी की पूछ थी तो उसको पौराणिक कहा जाए। वैदिक

67
00:04:41,040 --> 00:04:45,040
क्यों ना कहा जाए? नहीं वैदिक वेदों को भी तो मानते हैं नहीं

68
00:04:45,040 --> 00:04:49,040
तो अवैदिक बातें हैं ना ये वैदिक कैसे वो तो वो तो शास्त्र वो तो चर्चा के

69
00:04:49,040 --> 00:04:53,040
बाद तय होगा ना कि उनकी बातें अवैदिक है कि नहीं हां मैं वही

70
00:04:53,040 --> 00:04:57,040
कह रहा हूं क्योंकि अवैदिक बातें है ना ये कभी व्यक्ति एक ये अवैदिक बात

71
00:04:57,040 --> 00:04:58,480
है कि हनुमान जी के पूछ मतलब

72
00:04:58,480 --> 00:05:02,480
एक में ये तो आपका मत है कि वो हनुमान जी के पूछ होना

73
00:05:02,480 --> 00:05:06,640
अवैदिक बात है। अब वो कह दे कि आलू से इंसान की उत्पत्ति होना

74
00:05:06,640 --> 00:05:10,960
अवैदिक बात है। तो फिर आपको उस पर ऐतराज होगा ना।

75
00:05:10,960 --> 00:05:14,960
फिर वह इस आधार पर इस आधार पर वह यह कहे कि आप वैदिक नहीं हो वैदिक

76
00:05:14,960 --> 00:05:19,360
हो तो आपको यह पसंद आएगा। आलू से तिब्बत

77
00:05:19,360 --> 00:05:23,440
में इंसान की उत्पत्ति होना हां अवैदिक बात है ये

78
00:05:23,440 --> 00:05:27,600
वो लोग कहते हैं। अवैदिक आलू से व्यक्ति कैसे

79
00:05:27,600 --> 00:05:31,760
पैदा हो सकता है? ये बताओ आप। ये आपके सत्यार्थ प्रकाश से पूछिए जाकर के। हर समाज

80
00:05:31,760 --> 00:05:35,920
में लिखा हुआ है। अच्छा सत्यार्थ प्रकाश में मैंने

81
00:05:35,920 --> 00:05:40,240
तो मैंने तो आज तक नहीं पता। आप पता करिए कि पहले प्रथम आप

82
00:05:40,240 --> 00:05:44,400
प्रथम इंसान की उत्पत्ति का पता करिए। कहां से हुई? आर्य समाज

83
00:05:44,400 --> 00:05:48,640
के अनुसार। मनुष्य से मनुष्य से हुई है। नहीं मनुष्य

84
00:05:48,640 --> 00:05:52,800
पहला मनुष्य जिस मनुष्य से उत्पत्ति हुई वो आपने सत्यार्थ प्रकाश को पढ़ा

85
00:05:52,800 --> 00:05:57,120
है? मैंने इतना जाना है कि उसने उत्पत्ति मानी है आलू से तिब्बत

86
00:05:57,120 --> 00:06:01,200
में। नहीं एक मिनट। आपने सत्यार्थ प्रकाश को पढ़ा है तो मुझे आप पेज नंबर

87
00:06:01,200 --> 00:06:05,280
बताइए। मेरे पास सत्यार्थ प्रकाश रखा है। पेज नंबर अभी नहीं मालूम

88
00:06:05,280 --> 00:06:09,360
मगर मैं थोड़ी बहुत देर में आपको WhatsApp कर दूंगा। आप मुझे वह वीडियो WhatsApp करिए 500

89
00:06:09,360 --> 00:06:13,440
करोड़ वाला और मैं आपको जो है सत्यार्थ प्रकाश का वो तिब्बत

90
00:06:13,440 --> 00:06:13,940
वाला

91
00:06:13,680 --> 00:06:18,000
सत्यार्थ प्रकाश नहीं मगर दयानंद जी के द्वारा लिखी गई किताबों में वर्णन

92
00:06:18,000 --> 00:06:22,000
है तिब्बत मैं क्या कह रहा हूं आप ये देखो दयानंद की नाम से तो

93
00:06:22,000 --> 00:06:26,000
मतलब ऐसे अरे भाई तो आप ये कह देना ना कि दयानंद जी की ये

94
00:06:26,000 --> 00:06:30,080
किताब नहीं है मैं मान लूंगा वो दयानंद की प्रमाणिक किताब वो है वो जिसमें

95
00:06:30,080 --> 00:06:34,400
ये लिखा हुआ आप अभी सत्यार्थ प्रकाश की बात कर रहे हैं मेरे पास सत्यार्थ

96
00:06:34,400 --> 00:06:38,480
प्रकाश सत्यार्थ सत्यार्थ प्रकाश अपने आप में एक

97
00:06:38,480 --> 00:06:42,480
सिंबॉलिक नाम भी है दयानंद जी को रिप्रेजेंट करने वाला।

98
00:06:42,480 --> 00:06:46,480
मगर दयानंद जी ने केवल सत्यार्थ प्रकाश नहीं लिखी है। उन्होंने ऋग्वदा आदि भाष्य

99
00:06:46,480 --> 00:06:51,040
भूमिका भी लिखी है। उन्होंने जो है वो भी लिखा है। क्या कहते संस्कार

100
00:06:51,040 --> 00:06:55,120
संस्कारों के लिए कौन सी किताब है? संस्कार विधि संस्कार विधि तो

101
00:06:55,120 --> 00:06:59,200
उन्होंने केवल एक बुक नहीं लिखी है मगर सत्यार्थ प्रकाश से

102
00:06:59,200 --> 00:07:03,840
हम यह रिप्रेजेंट कर देते हैं प्रतिनिधित्व कर देते हैं कि भाई सत्यार्थ प्रकाश

103
00:07:03,840 --> 00:07:08,000
मतलब कि दयानंद जी की ग्रंथावली नहीं मुझे ये

104
00:07:08,000 --> 00:07:12,160
बता दीजिए मुझे बस मैं देखो मेरे पास संस्कार विधि भी है अभी मैं आपको

105
00:07:12,160 --> 00:07:16,800
आपको 10 मिनट के अंदर फोन कर रहा हूं और आपको जो है आलू वाला विवरण दे रहा हूं

106
00:07:16,800 --> 00:07:20,960
ठीक संस्कार विधि से और क्या बोलते हैं दयानंद जी

107
00:07:20,960 --> 00:07:26,080
की प्रामाणिक किताब से जिसको आप मानेंगे कि हां यह दयानंद जी की है।

108
00:07:26,080 --> 00:07:28,800
देखो सत्यार्थ प्रकाश दयानंद जी का है। ठीक है?

109
00:07:28,800 --> 00:07:32,800
तो मैं आपको दयानंद जी की किताब से दूंगा ना। मुझे आप समय तो दीजिए।

110
00:07:32,800 --> 00:07:36,880
भाई मेरे तो मैं कोई रटे थोड़ी ना बैठा हूं कि उनकी कौन सी किताब में कहां

111
00:07:36,880 --> 00:07:40,960
पर लिखा हुआ है। मैं अभी देखकर अपनी चीजें वो तो वो तो किताब तो प्रकाशन के

112
00:07:40,960 --> 00:07:45,120
द्वारा किसी दूसरे मतलब अरे तो भाई पहले देख तो लो। आप पहले

113
00:07:45,120 --> 00:07:49,120
देख तो लो कि मैं कौन सी किताब की बात कर रहा हूं। आप बोल देना यहां प्रामाणिक किताब

114
00:07:49,120 --> 00:07:53,120
है। हां तो बिल्कुल आप भेजिए। मेरे पास उसका मुझे

115
00:07:53,120 --> 00:07:57,200
नाम बता देना। आप यह बताओ, आप यह बताओ कि अभी अभी मैं

116
00:07:57,200 --> 00:08:01,680
किताब आपको भेज रहा हूं। अभी राइट नाउ आपको मनुष्य की उत्पत्ति

117
00:08:01,680 --> 00:08:05,760
कहां से हुई है? यह पता है दयानंद जी ने इस विषय में क्या माना

118
00:08:05,760 --> 00:08:09,760
यह पता है? कि नहीं पता? आप ये मुझे हां बिल्कुल ये

119
00:08:09,760 --> 00:08:13,920
मनुष्य से उत्पत्ति हुई है। मनुष्य वो मनुष्य कहां से आया था?

120
00:08:13,920 --> 00:08:19,920
कौन मनुष्य? पहला मनुष्य कैसे बना?

121
00:08:21,200 --> 00:08:25,360
पहला मनुष्य कैसे बना? हां दयानंद

122
00:08:25,360 --> 00:08:30,160
जी के अनुसार पहला मनुष्य कैसे बना? अच्छा

123
00:08:30,160 --> 00:08:34,240
आपके अनुसार आपके अनुसार आप भी तो बताइए कैसे पहला मनुष्य तो मैं तो आपको दे ही रहा हूं।

124
00:08:34,240 --> 00:08:38,400
अब आप तो सत्यार्थ प्रकाश को पढ़ने वाले हैं ना। तो दयानंद जी के अनुसार बताइए पहला

125
00:08:38,400 --> 00:08:42,400
मनुष्य कैसे बना? नहीं तो आपको पता होगा। नहीं

126
00:08:42,400 --> 00:08:46,480
तो आप आप यह वाली बात भेजिए कि मतलब मैं भेज रहा हूं मेरे भाई। मैं

127
00:08:46,480 --> 00:08:50,640
अभी आप मैं अभी आपसे पूछ रहा हूं कि मेरा आलू से उत्पन्न

128
00:08:50,640 --> 00:08:54,640
होने वाली बात पर आपको संशय है। क्यों संशय है? क्योंकि आपको अपना

129
00:08:54,640 --> 00:08:58,720
भी तो कुछ पता होगा इसलिए संशय होगा ना। या आपने

130
00:08:58,720 --> 00:09:02,720
अपने मन से ही मान रखा है कि वो जो है मनुष्य से मनुष्य की

131
00:09:02,720 --> 00:09:06,880
उत्पत्ति हुई। जी मैं पूछ रहा हूं

132
00:09:06,880 --> 00:09:10,880
आपसे दयानंद जी ने कहीं आपने पढ़ा होगा ना दयानंद जी को कि पहला

133
00:09:10,880 --> 00:09:15,840
मनुष्य उन्होंने कैसे माना?

134
00:09:15,840 --> 00:09:19,920
चलो मैं यह आपको बताऊंगा। ठीक है। हां। तो आप यह बताइए कि उन्होंने यहां यह

135
00:09:19,920 --> 00:09:23,920
लिखा है कि भैया यह आलू से उत्पन्न से विपरीत कोई बात लिखी है और मैं आपको

136
00:09:23,920 --> 00:09:28,560
आलू वाला भेज रहा हूं। ठीक है? जी जी जय श्री राम।

137
00:09:28,560 --> 00:09:32,640
ठीक है। जय श्री राम। जी। ये

138
00:09:32,640 --> 00:09:36,720
मैंने आपसे भेजा है। हां। आपने

139
00:09:36,720 --> 00:09:40,960
कौन सा पेज नंबर भेजा है? 100

140
00:09:40,960 --> 00:09:45,120
84 हम्म आपने कौन सा भेजा है? मैंने

141
00:09:45,120 --> 00:09:49,360
185 भेजा है। हां तो वहीं पे संदर्भ है कि आलू की तरह इंसान

142
00:09:49,360 --> 00:09:53,600
पैदा हो रहे हैं जमीन से। देखो मेरा आप पढ़ो कहां है इसमें बताओ

143
00:09:53,600 --> 00:09:57,760
185 में। नहीं तो आप आप पढ़ के बता दो ना। कैसे जन्म

144
00:09:57,760 --> 00:10:01,920
ले रहा है पहला इंसान? नहीं तो आप आप पढ़िए ना। अरे

145
00:10:01,920 --> 00:10:05,920
भाई आप आपने उसको अभी-अभी देखा है ना तो मैंने अभी-अभी नहीं देखा है।

146
00:10:05,920 --> 00:10:10,080
आप उसको एग्जैक्ट वो लाइन पे जल्दी चले जाओगे। बस इसलिए कह रहा हूं। आप वो लाइन

147
00:10:10,080 --> 00:10:14,320
बता दो। मनुष्यों की आधी सृष्टि हां। मनुष्यों

148
00:10:14,320 --> 00:10:18,960
की प्रश्न दिया है। मनुष्यों की आधी सृष्टि किस स्थल में हुई? हां।

149
00:10:18,960 --> 00:10:23,840
वो बोल रहे हैं त्रिविष्टम

150
00:10:23,840 --> 00:10:28,080
त्रिविस्टम अर्थात जिसको तिब्बत कहते हैं। हां। हां वहां पर

151
00:10:28,080 --> 00:10:32,560
तो तिब्बत वाली इतनी बात तिब्बत वाली बात तो मेरी सही हो गई आगे बढ़िए।

152
00:10:32,560 --> 00:10:36,560
अरे हम हम गलत नहीं बोलेंगे। आप आप पहले देखो आदि सृष्टि

153
00:10:36,560 --> 00:10:41,200
में एक जाति थी व अनेक देखिए

154
00:10:41,200 --> 00:10:45,200
भैया आप सीधे पॉइंट की बात करिए ना कैसे उत्पन्न हुआ

155
00:10:45,200 --> 00:10:49,280
पहला आदमी सत्यार्थ प्रकाश के अनुसार वो बोल दीजिए क्यों समय नष्ट कर रहे

156
00:10:49,280 --> 00:10:53,360
वैसे भी मेरी और आपकी चर्चा तो अपेक्षित है नहीं वो तो आप उनसे कराएंगे महेंद्र पाल

157
00:10:53,360 --> 00:10:57,360
आर्य जी से वो तो आप सुनिए ना मेरी आप मुझसे तो बात करें

158
00:10:57,360 --> 00:11:01,360
महेंद्रपाल आर्य जी से तो मैं कराऊंगा ही कराऊंगा आपसे हां मतलब मेरा कहने का है

159
00:11:01,360 --> 00:11:05,520
समय नष्ट ना करते हुए टू द पॉइंट बात करें। सीधे वो बात

160
00:11:05,520 --> 00:11:09,600
बोले कि आपकी सत्यार्थ प्रकाश में क्या लिखा है? कहां से जन्म होना

161
00:11:09,600 --> 00:11:13,760
माना गया है? पहला इंसान सृष्टि आदि सृष्टि में एक जाति

162
00:11:13,760 --> 00:11:18,240
थी व अनेक तो ये बोल रहे हैं एक मनुष्य जाति थी।

163
00:11:18,240 --> 00:11:23,040
एक मनुष्य जाति थी। जी बिल्कुल और उसके बाद में कह रहा है विजानीहार

164
00:11:23,040 --> 00:11:27,280
में चार दवा यानी ऋग्वेद का वचन है कि

165
00:11:27,280 --> 00:11:31,360
अरे मेरे भाई कैसे जन्म हुआ? पहले इंसान का ये लिखा

166
00:11:31,360 --> 00:11:35,440
है कि नहीं? जी जी बिल्कुल इंसान थे इंसान थे मनुष्य

167
00:11:35,440 --> 00:11:38,880
जाति थी तिब्बत में मनुष्य जाति का उत्पन्न हुआ

168
00:11:38,880 --> 00:11:43,680
मनुष्य जाति वो मनुष्य जाति कैसे उत्पन्न हुई थी वो भगवान थी क्या

169
00:11:43,680 --> 00:11:47,760
क्या चीज अरे वो मनुष्य जाति जिससे आप मनुष्य जाति को उत्पन्न होना

170
00:11:47,760 --> 00:11:52,000
मान रहे हैं वो वो कहां से जन्म हुई थी भगवान इस तरीके से किस तरीके

171
00:11:52,000 --> 00:11:56,160
से पैदा कर रहा है मुझे ये बताओ भगवान पूर्ण है या अपूर्ण ये बताओ मैं वही

172
00:11:56,160 --> 00:12:00,320
तो आपसे पूछ रहा हूं कि आपने पहला इंसान जन्म लेना

173
00:12:00,320 --> 00:12:04,320
कैसे माना है किस किससे माना है? मैं क्या कह रहा हूं ईश्वर

174
00:12:04,320 --> 00:12:08,320
पूर्ण है या अपूर्ण ये बताओ पहले तो आप पहले क्यों बताऊं जब बात ये

175
00:12:08,320 --> 00:12:12,640
चल रही है जब बात ये चल रही है कि हमें आपसे ये जानना है

176
00:12:12,640 --> 00:12:16,960
कि कैसे पैदा हुआ पहला इंसान तो वो बताइए ना आप

177
00:12:16,960 --> 00:12:21,920
मैं बता रहा हूं मनुष्य जाति हुई नहीं पहली पहली मेरी पहली

178
00:12:21,920 --> 00:12:26,400
पहले मेरी बात सुनो ईश्वर पूर्ण है या अपूर्ण है ये इसका जवाब दो इसका एक एक

179
00:12:26,400 --> 00:12:30,400
ऐसा है आप मेरी परीक्षा मत लीजिए आप अपना पक्ष रख दीजिए फिर मैं

180
00:12:30,400 --> 00:12:34,400
आपको बोलूंगा उत्तर मैं कह रहा हूं ईश्वर पूर्ण है। आप आपको जो

181
00:12:34,400 --> 00:12:38,880
पता है वो वो मानते हुए आप अपना पक्ष रखिए। आप मेरी परीक्षा मत लीजिए।

182
00:12:38,880 --> 00:12:43,280
मैं कह रहा हूं। आलू से पैदा हुआ मनुष्य। चलो मैं आपकी बात आलू आलू

183
00:12:43,280 --> 00:12:47,680
से पैदा हुए का मतलब धरती से पैदा होता है आलू। आलू

184
00:12:47,680 --> 00:12:51,920
की तरह मनुष्य वहां पैदा हो रहा है। ऐसा होता है क्या?

185
00:12:51,920 --> 00:12:54,320
ये बात मैंने क्यों उठाई? पहले इसको समझो।

186
00:12:54,320 --> 00:12:58,400
जब आपने कहा कि क्या किसी उसके पूछ होती

187
00:12:58,400 --> 00:13:02,400
है क्या? आपने बताया पूछ पर आपत्ति थी ना आपको

188
00:13:02,400 --> 00:13:06,560
जी तो फिर मैंने कहा क्या धरती से आलू जैसे आलू आलू

189
00:13:06,560 --> 00:13:10,560
की भांति इंसान पैदा होता है क्या आलू की भांति के इंसान कैसे

190
00:13:10,560 --> 00:13:14,560
पैदा हो जाएगा तो वह धरती तिब्बत की धरती से क्या हो रहा है वहां पर

191
00:13:14,560 --> 00:13:19,840
तिब्बत की धरती से मनुष्य की उत्पत्ति हुई थी तो धरती से ही तो हो रही है

192
00:13:19,840 --> 00:13:23,840
धरती से कैसे हुई कैसे हुई मनुष्य की भाई आज भी

193
00:13:23,840 --> 00:13:27,840
तो मनुष्य की मनुष्य की उत्पत्ति धरती से ही होती है ना माता के

194
00:13:27,840 --> 00:13:32,000
गर्भ से होती है तो माता के माता कहां रहती है? माता भी तो घर

195
00:13:32,000 --> 00:13:36,080
पृथ्वी पे रहती है। अरे ऐसे तो फिर अंतरिक्ष में हुई। पृथ्वी कहां

196
00:13:36,080 --> 00:13:40,080
रहती है? अंतरिक्ष में होती है। क्या चीज? तो अंतरिक्ष अंतरिक्ष से हुई।

197
00:13:40,080 --> 00:13:44,080
भाई जैसे जिस तरीके तो इसका मतलब इसका मतलब ये लिखना ज्यादा अच्छा है कि अंतरिक्ष में

198
00:13:44,080 --> 00:13:48,560
हुई। पहले मनुष्य की सृष्टि ये क्या बात है भाई?

199
00:13:48,560 --> 00:13:52,640
क्या इसको ग्रह अच्छा अंतरिक्ष, अंतरिक्ष तो सारी पृथ्वी, सारे नक्षत्रों

200
00:13:52,640 --> 00:13:56,720
को, ग्रहों को मिलाकर अंतरिक्ष बनता है ना? हां। भाई ये भी

201
00:13:56,720 --> 00:14:00,880
तो ये भी तो मानेंगे कि सिर्फ तो अंतरिक्ष में कौन से अंतरिक्ष में हुई तो कौन से टुकड़े

202
00:14:00,880 --> 00:14:04,960
में हुई? पृथ्वी के टुकड़े में हुई तो पृथ्वी पृथ्वी के टुकड़े में हुई तो फिर तिब्बत क्यों

203
00:14:04,960 --> 00:14:09,120
ले रहे हो? फिर भारत कह दो क्या चीज? हां और तिब्बत

204
00:14:09,120 --> 00:14:09,620
में भी

205
00:14:09,360 --> 00:14:13,440
अगर अगर इतना ही विभाजन करना है तो तिब्बत में भी किस किन किन दो

206
00:14:13,440 --> 00:14:17,520
फुट की रेंज में तीन फुट की रेंज में वो कौन सी धरती थी फिर वो भी

207
00:14:17,520 --> 00:14:21,600
दे दो। जब आपको जब आपको स्पेसिफिकेशन देना

208
00:14:21,600 --> 00:14:25,600
है। आपको जब स्पेसिफिकेशन देना है कि अंतरिक्ष में किस टुकड़े

209
00:14:25,600 --> 00:14:29,680
में हुई? तो पृथ्वी में हुई तो पृथ्वी में कहां हुई? भारत में हुई,

210
00:14:29,680 --> 00:14:33,680
भारत में कहां हुई? तिब्बत में हुई। तो तिब्बत में कहां हुई? वो भी दे दो। वो तीन फुट की जगह कौन

211
00:14:33,680 --> 00:14:38,720
सी है? चार फुट की। इसमें पूरा तो सुने कह रहा है।

212
00:14:38,720 --> 00:14:42,720
का वचन है। अरे भैया ऋग्वेद के वचन पे हम लोग आएंगे।

213
00:14:42,720 --> 00:14:46,800
आप मेरी बात समझिए हमारी बात अटकी कहां है? आपने प्रथम

214
00:14:46,800 --> 00:14:51,520
मनुष्य की सृष्टि चमत्कारिक रूप से मानी मानी है या वैज्ञानिक

215
00:14:51,520 --> 00:14:55,520
ढंग से मानी है? वैज्ञानिक ढंग से हां तो वो वैज्ञानिक ढंग क्या

216
00:14:55,520 --> 00:14:59,680
है आपका बता दीजिए आज देखिए आप आज मनुष्य कैसे पैदा

217
00:14:59,680 --> 00:15:03,680
हो रहा है माता के गर्भ से इसी प्रकार की तो वहां माता

218
00:15:03,680 --> 00:15:07,840
कौन थी तिब्बत में बताइए चलिए आप ये मान

219
00:15:07,840 --> 00:15:11,920
रहे हैं ना कि वहां माता माता के गर्भ से ही वहां मनुष्य उत्पन्न हुआ तो वहां माता कौन

220
00:15:11,920 --> 00:15:16,080
थी वो मनुष्य नहीं थी क्या और थी तो फिर वो कहां से उत्पन्न

221
00:15:16,080 --> 00:15:20,560
हुई थी मनु मनु थे महाराज मनु थे और उनकी

222
00:15:20,560 --> 00:15:24,400
तो वो कहां से उत्पन्न हुए थे। चलिए जी हां

223
00:15:24,400 --> 00:15:28,480
वो कहां से उत्पन्न हुए थे? जिस माता के गर्भ से पहला

224
00:15:28,480 --> 00:15:32,800
मनुष्य उत्पन्न हुआ वो माता कहां से उत्पन्न हुई थी?

225
00:15:32,800 --> 00:15:36,960
हां तो ये ये आप भी बताइए ना आप बताइए। मेरा मैं तो यह बता रहा हूं भगवान

226
00:15:36,960 --> 00:15:41,200
चमत्कार कर सकते हैं। उन्होंने चमत्कार से उत्पन्न कर दिया। अब आप बताइए।

227
00:15:41,200 --> 00:15:45,280
तो यही चमत्कार है। उन्होंने चमत्कार से उत्पन्न कर दिया। यही तो यानी आप मानते हो ना

228
00:15:45,280 --> 00:15:49,440
चमत्कार को। जहां पर विज्ञान जहां विज्ञान से उसको नहीं

229
00:15:49,440 --> 00:15:53,520
वो किया जा सकता है। समझा नहीं जा सकता है। क्या चमत्कार है जब

230
00:15:53,520 --> 00:15:57,840
ईश्वर सृष्टि को रचेगा तो जब जब भगवान बिना माता

231
00:15:57,840 --> 00:16:02,000
के गर्भ से पहला मनुष्य उत्पन्न कर सकता है तो भगवान पूछ भी दे

232
00:16:02,000 --> 00:16:06,080
सकता है। तो पूछ तो पूछ

233
00:16:06,080 --> 00:16:10,240
अब अब देखिए अब आप जो है महेंद्र पाल आर्य जी से मेरी बात

234
00:16:10,240 --> 00:16:14,240
कराइएगा। आप जो है आपने बिल्कुल ठीक कहा कि पूछ हो

235
00:16:14,240 --> 00:16:18,640
सकती है तो पूछ इस समय क्या फिर अब पूछ कहां गई ये बताओ ना फिर तो ईश्वर

236
00:16:18,640 --> 00:16:22,720
ऐसा नहीं है जाके पढ़िए ऐसी प्रजाति पाई जा रही है जो धीरे-धीरे लुप्त

237
00:16:22,720 --> 00:16:26,720
हो रही जिसके पूछ बाकी रह गई थी क्या प्रजाति का नाम

238
00:16:26,720 --> 00:16:30,960
है उसको होमोसेपियंस पता ऐसे करके कुछ नाम है प्रजाति

239
00:16:30,960 --> 00:16:35,120
पाई जाती है और ये बताइए जब बिना माता के गर्भ के

240
00:16:35,120 --> 00:16:39,680
आपने माना है कि मनुष्य जो है पैदा हो सकता है तो अब क्यों नहीं हो रहा है

241
00:16:39,680 --> 00:16:43,840
अब अब क्यों नहीं हो क्योंकि ईश्वर का तो बस ईश्वर का विधान तो

242
00:16:43,840 --> 00:16:47,920
ईश्वर का विधान वहां पूछ पे भी लागू हो गया। लो अपनी चीजों के लिए तो

243
00:16:47,920 --> 00:16:52,080
आप अपनी चीजों के लिए तो आप ईश्वर का चमत्कार मानोगे मगर दूसरे की चीजों

244
00:16:52,080 --> 00:16:56,240
के लिए आप जो है तर्क करोगे। वहां साइंस लाओगे। अपने में क्यों मान लिया

245
00:16:56,240 --> 00:17:00,640
आपने? अब कहां गायब हो गया? ईश्वर एक बार रचता है।

246
00:17:00,640 --> 00:17:04,880
सिद्धांत को उसमें कोई बदलाव नहीं करता। बदलाव बदलाव जो करता है ये सिद्धांत

247
00:17:04,880 --> 00:17:08,880
नहीं है ये सिद्धांत सिद्धांत तो यह है कि माता जो है जो है

248
00:17:08,880 --> 00:17:13,520
मनुष्य उत्पन्न हुआ अगर सिद्धांत ही मानोगे तो ये मानना पड़ेगा तो फिर सदैव

249
00:17:13,520 --> 00:17:17,920
अगर सिद्धांत मानोगे अगर सिद्धांत मानोगे मनुष्य का उत्पन्न होना

250
00:17:17,920 --> 00:17:22,160
तो फिर आपको उसी सिद्धांत को लेकर चलना पड़ेगा कि हमेशा मानव वैसे

251
00:17:22,160 --> 00:17:26,560
ही उत्पन्न हो जैसे पहली बार हुआ। आप खुद काट रहे हो अपनी बात को।

252
00:17:26,560 --> 00:17:30,720
अगर मनुष्य का उत्पन्न होना सिद्धांत है तो आप जो है

253
00:17:30,720 --> 00:17:34,720
फिर हर मनुष्य सदैव वैसे ही उत्पन्न होगा जैसे पहला हुआ फिर

254
00:17:34,720 --> 00:17:38,720
तो उसने बदल दिया उसने पहला मनुष्य उत्पन्न करने के बाद दूसरा मनुष्य जो उसके

255
00:17:38,720 --> 00:17:43,440
गर्भ से उत्पन्न किया तो इसका मतलब ये सिद्धांत नहीं है।

256
00:17:43,440 --> 00:17:47,440
सृष्टि के सृष्टि को रचने के लिए ऐसी बहुत सी चीजें हैं जो लुप्त हो

257
00:17:47,440 --> 00:17:51,760
गई है। डायनासोर लुप्त हो गया है। तो अब आप यह कहोगे डायनासोर

258
00:17:51,760 --> 00:17:54,880
था ही नहीं। मेरे भाई आप समझोगे ना समझोगे?

259
00:17:54,880 --> 00:17:58,880
नहीं आप आपने एक बात कही है ना कि अब कहां चला गया तो डायनासोर कहां चला

260
00:17:58,880 --> 00:18:02,880
गया? कहां चला गया? मिल जाएगा

261
00:18:02,880 --> 00:18:06,880
डायनासोर है क्यों नहीं? डायनासोर है। अच्छा डायनासोर है

262
00:18:06,880 --> 00:18:11,040
कहां पे है? बताओ चलो। दूसरे कंट्री में कंट्री में मिल जाएगा।

263
00:18:11,040 --> 00:18:15,040
हमारे भारत में नहीं मिलेगा। डायनासोर है इस समय। बिल्कुल।

264
00:18:15,040 --> 00:18:19,120
मतलब आप यह मान रहे हैं कि जो सृष्टि के प्रारंभ से जो चीजें थी

265
00:18:19,120 --> 00:18:23,600
वह आज तक एज इट इज है। कोई भी चीज लुप्त नहीं हुई है।

266
00:18:23,600 --> 00:18:27,680
बिल्कुल नहीं हुई है। अब आप कुतर्क कर रहे हैं और आप मुझे WhatsApp करिए

267
00:18:27,680 --> 00:18:32,640
डायनासोर कहां पर है जीवित? ठीक है। करिए WhatsApp।

268
00:18:32,640 --> 00:18:36,640
और वो महेंद्र पाल आर्य जी से मेरी वो चर्चा फिक्स कराइए। ठीक

269
00:18:36,640 --> 00:18:42,640
है। ठीक है। ठीक। जय श्री राम। जय श्री राम।

270
00:18:42,960 --> 00:18:47,600
जय श्री राम। जय श्री राम भाई साहब इस

271
00:18:47,600 --> 00:18:51,680
पर चर्चा करें हम लोग यह जो आपने लिखा है कि आलू की तरह इंसान पैदा

272
00:18:51,680 --> 00:18:55,680
हो रहा है हां ठीक है इसमें कहां लिखा है आलू की तरह इंसान पैदा हो

273
00:18:55,680 --> 00:18:59,840
रहा है धरती से उत्पन्न हो रहा है ना धरती से आलू उत्पन्न होता है

274
00:18:59,840 --> 00:19:04,080
भाई मेरा वहां पर कहना यह है आप उस शब्द को मत पकड़ो आप उस मेरा कहना

275
00:19:04,080 --> 00:19:08,240
यह है वहां चमत्कार हो रहा है और आप हमारे

276
00:19:08,240 --> 00:19:12,320
चमत्कार को नकार रहे हो ऐसा कहां होता है यह कहां हो गया वो कहां

277
00:19:12,320 --> 00:19:16,400
हो गया तुम्हारा क्या चमत्कार चमत्कार है ये तो ईश्वरीय चमत्कार है ना ईश्वर

278
00:19:16,400 --> 00:19:20,720
ने अरे भाई जिस जिसको हम चमत्कार रूप में स्वीकार कर रहे हैं उसको आप नकार

279
00:19:20,720 --> 00:19:24,960
रहे हो और जिसको आप चमत्कार के रूप में स्वीकार कर रहे हो उसको आप स्वीकार

280
00:19:24,960 --> 00:19:28,960
रहे हो अरे तो ये ईश्वर ईश्वर का चमत्कार है तो हम

281
00:19:28,960 --> 00:19:33,120
यहां पे भी ईश्वर का ही चमत्कार कह रहे हैं ना कि हनुमान जी के पूछ थी। अरे

282
00:19:33,120 --> 00:19:37,280
तो भाई मेरी मेरी बात सुनेंगे इसपे चर्चा करो ना मैं आपको इस पर चर्चा करिए आप।

283
00:19:37,280 --> 00:19:41,360
आप अभी मेरे पास समय नहीं है। आप चर्चा निर्धारित कर लीजिए और आप जो है

284
00:19:41,360 --> 00:19:45,360
लाइव आ जाइए। वहां पर फेस टू फेस चर्चा होगी। ठीक है? मैं आप इस

285
00:19:45,360 --> 00:19:49,520
पर चर्चा करिए। इसमें कह रहा है मैं अभी चर्चा नहीं करूंगा। आप अपनी फोटो

286
00:19:49,520 --> 00:19:53,760
भेज दीजिए। मैं थंबनेल लगा लेता हूं। फेस टू फेस बात करेंगे। 2

287
00:19:53,760 --> 00:19:58,080
घंटे बाद बात कर लेते हैं। दो बजे ठीक है। अच्छा 2:00 बजे।

288
00:19:58,080 --> 00:20:02,160
हां। आप अपना फेस फेस भेजिए। मैं आपको लिंक भेज दूंगा। लाइव चर्चा कर

289
00:20:02,160 --> 00:20:06,320
लीजिए। सर्वशक्तिमान पे भी करेंगे ना। नहीं नहीं इस

290
00:20:06,320 --> 00:20:10,480
पे ही चर्चा करेंगे इस पे ही हां ठीक है ठीक है इस पे कर लेंगे ओनली

291
00:20:10,480 --> 00:20:15,920
सिर्फ मनुष्य पर ठीक है मनुष्य पे कर लेंगे चलो आ जाओ

292
00:20:15,920 --> 00:20:18,400
भेजो

293
00:20:18,400 --> 00:20:23,120
आपने फोटो नहीं भेजा किस चीज का

294
00:20:23,120 --> 00:20:26,000
हेलो

295
00:20:26,000 --> 00:20:30,240
आपने फोटो नहीं भेजा किस चीज का

296
00:20:30,240 --> 00:20:34,480
अरे आप लाइव चर्चा में आने वाले हैं ना अच्छा

297
00:20:34,480 --> 00:20:39,200
अच्छा अच्छा

298
00:20:39,200 --> 00:20:43,440
तो आप लिंक भेज दीजिए मैं लिंक से जुड़ जाऊंगा। अरे भैया हमें थंबनेल बनाना

299
00:20:43,440 --> 00:20:48,640
है ना कि अब आप आने वाले हैं।

300
00:20:48,640 --> 00:20:52,800
उस समय आपने कहा भी था मैं फोटो भेजता हूं। ठीक है कहा था। मैंने जब आपसे कहा था

301
00:20:52,800 --> 00:20:57,040
फोटो भेजिए।

302
00:20:57,040 --> 00:21:01,280
हेलो कहा ऐसे काम नहीं चल पाएगा ना। इतनी देर

303
00:21:01,280 --> 00:21:04,960
देर में आप जवाब देंगे।

304
00:21:04,960 --> 00:21:09,040
कैसे काम चलेगा बताओ? तो आप मैं बोल रहा हूं कि आपने फोटो नहीं भेजा।

305
00:21:09,040 --> 00:21:13,680
अब आप पहले आप बोल रहे थे। ठीक है अब आप कह रहे हो कि आप लिंक भेज दो मैं आ जाऊंगा।

306
00:21:13,680 --> 00:21:17,680
फोटो क्यों नहीं भेज रहे हैं आप? आप मुझे लिंक भेज दीजिए। मैं लिंक से जुड़

307
00:21:17,680 --> 00:21:21,920
जाऊंगा ना। मेरा फोटो आएगा उसमें। नहीं। आप पहले फोटो भेजेंगे

308
00:21:21,920 --> 00:21:26,160
तो हम लोगों को बताएंगे। यह चर्चा होने वाली है।

309
00:21:26,160 --> 00:21:31,440
जिससे लोग वहां पहुंचे उसे देखने के लिए।

310
00:21:31,440 --> 00:21:35,600
अच्छा, अच्छा। हां ठीक है। ठीक है। तो क्या

311
00:21:35,600 --> 00:21:41,600
ठीक है? मैं भेज रहा हूं। फोटो भेज रहा हूं। भेजिए फोटो।

312
00:21:41,680 --> 00:21:45,760
और अब मुझे एक घंटा बढ़ाना। हेलो बोलिए बोलिए आवाज नहीं

313
00:21:45,760 --> 00:21:49,920
आ रही। आप लखनऊ में रहते हैं क्या? हां जी। लखनऊ में रहते

314
00:21:49,920 --> 00:21:53,920
हैं। नहीं नहीं संभल में। तो लखनऊ का फोटो लगा आपके

315
00:21:53,920 --> 00:21:58,000
लिए। आपने फोटो भेजा है जो अरे फोटो तो मेरे

316
00:21:58,000 --> 00:22:03,280
पास पड़ा है ना। मैं संभल का रहने वाला हूं। आप आए थे क्या लखनऊ?

317
00:22:03,280 --> 00:22:07,840
हां जी आप आए होंगे ना लखनऊ कभी? जी।

318
00:22:07,840 --> 00:22:12,080
अच्छा तो कोई रिशेदारी वगैरह नहीं नहीं संभल उत्तर प्रदेश नहीं

319
00:22:12,080 --> 00:22:16,160
है। उत्तर प्रदेश में ही तो है लखनऊ। संभल भी तो उत्तर प्रदेश में है। अरे तो वो ठीक

320
00:22:16,160 --> 00:22:21,280
है। मैं पूछ रहा हूं यहां लखनऊ में किस कारण से आना जाना होता है आपका?

321
00:22:21,280 --> 00:22:25,280
लखनऊ हम आते रहते हैं आर्य समाज के लिए या

322
00:22:25,280 --> 00:22:29,440
फिर अपना कोई पर्सनल बिजनेस या कोई जॉब या फिर कोई रिशेदारी

323
00:22:29,440 --> 00:22:33,680
इसलिए पूछ रहा हूं कि अगर ऐसा कार्य रहता है हमारा मतलब

324
00:22:33,680 --> 00:22:37,760
कोई काम पड़ता है तो लखनऊ जाते रहते हैं तो आप लखनऊ आ जाइए सामने

325
00:22:37,760 --> 00:22:41,920
सामने बैठकर के हो जाएगी चर्चा नहीं तो लाइव भी आप लाइव आओ लाइव में भी क्या दिक्कत

326
00:22:41,920 --> 00:22:45,920
है ठीक है तो अभी अब लाइव 3:00 बजे आएंगे ठीक है जी

327
00:22:45,920 --> 00:22:46,720
जी बिल्कुल

328
00:22:46,720 --> 00:22:50,720
3:00 बजे आते हैं लाइव ठीक ठीक ठीक है क्योंकि वो फोटो थोड़ा देर से

329
00:22:50,720 --> 00:22:54,880
मिली ना तो अब हम बनाए रहेंगे उसको लगाएंगे तब तक 2:00 बजे ही जाएगा तो एक घंटे

330
00:22:54,880 --> 00:22:58,960
का टाइम मिल जाएगा 3 बजे ठीक है 3 बजे आती है विज्ञान

331
00:22:58,960 --> 00:23:03,040
ही ईश्वर का जो सिद्धांत है वो वो सब बातें वही करेंगे

332
00:23:03,040 --> 00:23:08,560
भैया जय श्री राम ठीक है जय जय श्री राम

333
00:23:08,560 --> 00:23:11,280
जय श्री राम

334
00:23:11,280 --> 00:23:15,440
जी आप पूरी चर्चा हुए बिना ही चले गए

335
00:23:15,440 --> 00:23:19,440
मेरा डाटा खत्म हो गया था तो दोबारा डाटा डलवा के

336
00:23:19,440 --> 00:23:23,760
रिचार्ज करवा करवा के आना आपने उचित नहीं समझा।

337
00:23:23,760 --> 00:23:28,000
हां दोबारा डाटा डलवा करके पुनः आना चर्चा

338
00:23:28,000 --> 00:23:33,120
में आपने उचित नहीं समझा। आपने ठीक से कुछ बताया नहीं।

339
00:23:33,120 --> 00:23:37,120
इस बारे में कोई सूचना नहीं दी कि डाटा खत्म हो गया है। कुछ भी नहीं

340
00:23:37,120 --> 00:23:41,840
बस चले गए तो चले ही गए। यहां तक कि उसके बाद भी फोन नहीं किया।

341
00:23:41,840 --> 00:23:46,320
मैंने मैसेज डाल दिया था आपको और मैसेज भेज भी दिया था।

342
00:23:46,320 --> 00:23:50,480
मैसेज डाला था आपने। क्या मैसेज डाला था? WhatsApp पर उसका

343
00:23:50,480 --> 00:23:54,480
जो डाटा खत्म हुआ था उसका भी मैसेज स्क्रीनशॉट ले डाला था। एक

344
00:23:54,480 --> 00:24:00,480
मिनट रुकिए।

345
00:24:05,360 --> 00:24:09,360
आपने दोबारा मेरे मुझे फोन नहीं किया ना। मैं भाई आपने मैसेज

346
00:24:09,360 --> 00:24:13,440
डाला तो अगर मैं उसका रिप्लाई नहीं कर रहा हूं

347
00:24:13,440 --> 00:24:17,920
मैसेज का तो आपने दोबारा मुझे कॉल क्यों नहीं किया? क्या

348
00:24:17,920 --> 00:24:22,000
चीज? अगर आपने मैसेज डाला था और मैं उसका रिप्लाई नहीं कर रहा

349
00:24:22,000 --> 00:24:27,120
हूं। आपने ब्लू टिक देख लिए थे।

350
00:24:27,120 --> 00:24:31,200
आपने इसको जानना चाहा कि आपने मैसेज डाला है तो मैंने आपका मैसेज कम से कम

351
00:24:31,200 --> 00:24:35,440
देखा है कि नहीं देखा है? नहीं तो मैंने

352
00:24:35,440 --> 00:24:39,600
आपने इसमें कोई रुचि नहीं दिखाई कि जिस चर्चा का आह्वान आपने ही किया था

353
00:24:39,600 --> 00:24:44,720
वो चर्चा पूरी हो पाए या ना हो पाए। जी।

354
00:24:44,720 --> 00:24:48,880
दूसरी बात यह है कि यह बात तो आपने बताई नहीं कि वह क्या

355
00:24:48,880 --> 00:24:53,040
कहते हैं जो महेंद्र पाल जी नाम का कोई आप बता रहे थे तो

356
00:24:53,040 --> 00:24:57,680
उनके साथ चर्चा क्या होनी है कब होनी है होनी है कि नहीं होनी है

357
00:24:57,680 --> 00:25:02,480
क्या है वो मैं आपको कॉल करूंगा ठीक है अच्छा

358
00:25:02,480 --> 00:25:07,760
जी और ठीक है अब ऐसे मतलब कम से कम आपको

359
00:25:07,760 --> 00:25:11,920
चलो आपने मैसेज डाल दिया है मगर मैसेज डाल दिया तो आप जो है

360
00:25:11,920 --> 00:25:15,920
हमको बताते अगर इनफॉर्म करते कॉल कर लेते अगर हम आपका

361
00:25:15,920 --> 00:25:20,080
डाटा डलवाते भाई ऐसा है इतना मतलब

362
00:25:20,080 --> 00:25:20,800
जो हिंदू

363
00:25:20,800 --> 00:25:25,440
की गतिविधियां जो चल रही है ना हां हां उसमें

364
00:25:25,440 --> 00:25:29,760
दिमाग लगाने से बढ़िया है कि इस्लाम और ईसाई को खत्म

365
00:25:29,760 --> 00:25:34,320
करने में दिमाग लगाया जाए तो अच्छा रहेगा तो ये कहां लिखा है

366
00:25:34,320 --> 00:25:38,560
हैं जी ये कहां लिखा है कहां लिखा है भाई

367
00:25:38,560 --> 00:25:42,640
आप चाहते हैं कि आपके द्वारा बताया गया कोई बात है जो उसको

368
00:25:42,640 --> 00:25:46,720
को हम लोग मान ले तो उसके पीछे कोई प्रमाण होना चाहिए

369
00:25:46,720 --> 00:25:50,960
ना? नहीं प्रमाण है ना कुरान कुरान हदीस है बाइबल है

370
00:25:50,960 --> 00:25:55,040
उसको पढ़ो नहीं पढ़ो ये प्रमाण कैसे है कि वो

371
00:25:55,040 --> 00:25:59,280
ज्यादा इंपॉर्टेंट है उससे उससे ज्यादा उससे जानकारी लो फिर आपको पता

372
00:25:59,280 --> 00:26:03,280
अरे वो हमने पढ़ा है भैया आपसे ज्यादा पढ़ा है आप

373
00:26:03,280 --> 00:26:07,520
आप मुसलमान को जितनी देर में चुप नहीं करा पाएंगे उससे आधे

374
00:26:07,520 --> 00:26:12,000
टाइम में हम चुप कराएंगे उसको आपसे आपके

375
00:26:12,000 --> 00:26:16,080
पास जितना टाइम लगेगा ना उसको चुप कराने में उससे आधे से आधे

376
00:26:16,080 --> 00:26:20,240
समय में हम चुप करा देंगे। हो सकता है आधे का आधा लगे। भेजूंगा आपको

377
00:26:20,240 --> 00:26:24,480
मैं अपना क्या कहते हैं वीडियो। देखिए अगर कितनी जल्दी आदमी

378
00:26:24,480 --> 00:26:28,560
हथियार डालेगा। तो वो वो तो खैर अलग बात है। मगर

379
00:26:28,560 --> 00:26:33,120
आप एक बात समझिए कि आपको ऐसा लगता है कि ऐसा करने की बजाय

380
00:26:33,120 --> 00:26:36,080
ऐसा करना ज्यादा आवश्यक है। अच्छी बात है। सबसे

381
00:26:36,080 --> 00:26:40,240
पहले ये बात अपने ऊपर लागू क्यों नहीं करते? जब मैं आपसे कह रहा था कि महेंद्र पाल आर्य

382
00:26:40,240 --> 00:26:44,320
जी से ही बात कर ली जाएगी जो है आप ही पीछे पड़े। सुनिए तो आप ही

383
00:26:44,320 --> 00:26:48,560
पीछे पड़े थे कि भैया नहीं अभी इस बात पे अभी के अभी चर्चा कर लो और जब

384
00:26:48,560 --> 00:26:52,560
चर्चा हुई तो उसके बाद बिना ठीक से इनफॉर्म किए आपने एक

385
00:26:52,560 --> 00:26:56,720
मैसेज डाल दिया वो सामने वाला देखे या ना देखे तब तो आप फोन पर फोन

386
00:26:56,720 --> 00:27:01,040
कर रहे थे कि इस बात पे अभी के अभी चर्चा कर लो और जब आप चर्चा

387
00:27:01,040 --> 00:27:05,040
हुई या उसमें आपका पक्ष प्रस्तुत हो पाया कि नहीं हो पाया वो ठीक है अलग

388
00:27:05,040 --> 00:27:09,040
बात है मगर जब चर्चा हुई उसके बाद आपसे जब यह पूछा जा

389
00:27:09,040 --> 00:27:13,040
रहा है कि आप बिना इनफॉर्म किए बिना रुचि दिखाए आप गायब क्यों हो गए तो अब

390
00:27:13,040 --> 00:27:17,040
आप कह रहे हो ये करने से अच्छा इस्लाम पे ध्यान दो। फोन आपका मेरे पास आया था

391
00:27:17,040 --> 00:27:21,120
सुबह जी। और इस्लाम पे ध्यान देने की बात है तो

392
00:27:21,120 --> 00:27:25,200
ये शुरुआत आप अपने से करो। आप ये सब बोलना बंद करो कि

393
00:27:25,200 --> 00:27:29,200
हनुमान जी हनुमान जी के पूछ नहीं होती है या पौराणिक हैं।

394
00:27:29,200 --> 00:27:33,440
ये सब बोलना बंद करो। फिर आलू से इंसान पैदा कर दिया। बताइए।

395
00:27:33,440 --> 00:27:37,680
अरे भैया धरती से इंसान पैदा कर रहे हो तुम बिना मां के तो हम तुमसे पूछेंगे

396
00:27:37,680 --> 00:27:41,840
ना। अगर आपको हमारे हमारे हनुमान जी की पूछ होने पर आपको आपत्ति

397
00:27:41,840 --> 00:27:45,920
है तो हम आपसे पूछेंगे ना भैया बिना गर्व के कहां पे कौन सी सत्तान

398
00:27:45,920 --> 00:27:49,920
उत्पन्न हो रही है बता दो हमें तुम्हें प्रमाण चाहिए ना भाई ये

399
00:27:49,920 --> 00:27:51,280
बात तो आप बोल रहे हैं ना जमीन

400
00:27:51,280 --> 00:27:55,280
से पैदा कर दिया हम कहां बोल रहे हैं आप आपकी किताब में लिखा है जमीन से

401
00:27:55,280 --> 00:27:59,600
जमीन जमीन से उत्पन्न हुए क्या लिखा है वहां

402
00:27:59,600 --> 00:28:03,680
क्या चीज आपकी वहां किताब में लिखा है ना जी

403
00:28:03,680 --> 00:28:07,760
ईश्वर ने किया ना ईश्वर ने किया अरे तो ईश्वर ने किया चलो चलो

404
00:28:07,760 --> 00:28:11,840
चमत्कारिक रूप से ही उत्पन्न होना मान रहे हो ना? जी जी

405
00:28:11,840 --> 00:28:16,240
बिल्कुल तो बस तो बस तो बस चमत्कारिक रूप से

406
00:28:16,240 --> 00:28:20,400
उनके पूछो ना हम मान रहे हैं। आप आप भी आप भी तो बताइए आपके

407
00:28:20,400 --> 00:28:25,120
अनुसार कैसे मनुष्य पैदा हुआ ये भी तो बताइए मुझे। ईश्वर के ईश्वर के द्वारा

408
00:28:25,120 --> 00:28:29,440
ईश्वर ईश्वर ने कैसे किया? चमत्कार से। तो

409
00:28:29,440 --> 00:28:33,760
यही बात तो हम मान रहे हैं। अरे भाई हम आपको यह बता रहे हैं कि आप हमारी

410
00:28:33,760 --> 00:28:37,760
आधी आधी जो बातें चमत्कार की है वो तो आप भी मान लेते हैं।

411
00:28:37,760 --> 00:28:41,840
फिर जहां मन करता है वहां आप चमत्कार पे लगाम लगाते हैं। ये क्या बात है?

412
00:28:41,840 --> 00:28:45,920
समाज के लोग ईश्वर को नहीं मानते हैं क्या? फिर वही बात। मैं आपको क्या

413
00:28:45,920 --> 00:28:50,080
बता रहा हूं। आप चम आप जो है जहां मन कर रहा है वहां

414
00:28:50,080 --> 00:28:54,160
पे चमत्कार को स्वीकार कर रहे हो। जहां आपका काम नहीं चल रहा है

415
00:28:54,160 --> 00:28:59,120
और फिर अपने मनमर्जी से चमत्कार को ठुकरा दे रहे हो। मैं ये आपको बता रहा हूं।

416
00:28:59,120 --> 00:29:03,120
ठीक है। अब मुझे वो बहस नहीं करनी है। आपको आना नहीं है। आप जो है बिना बताए रघु

417
00:29:03,120 --> 00:29:06,400
चक्कर हो गए। बात अलग है। आप जो है महेंद्र पाल आर जी से बात

418
00:29:06,400 --> 00:29:10,560
करके मुझे बता दीजिएगा। ठीक है। और कोई बात करनी है आप जो है वहां आइए।

419
00:29:10,560 --> 00:29:14,800
लाइव में आइए। लाइव में आकर बात करिए। अपनी चीजों में ना फसाए व्यक्ति

420
00:29:14,800 --> 00:29:18,800
को। बोलने क्या बोल रहे हो? समाज के लोग ईश्वर को नहीं मानते हैं क्या?

421
00:29:18,800 --> 00:29:22,800
फिर वही बात मैं कह रहा हूं हम ईश्वर को मानते हैं।

422
00:29:22,800 --> 00:29:26,880
मगर हम यह नहीं करते कि भैया जहां हमारा मन किया वहां चमत्कार को हमने मान

423
00:29:26,880 --> 00:29:30,880
लिया। जहां हमारा मन किया वहां चमत्कार को ठुकराने लगे। जहां गुरु वचनों

424
00:29:30,880 --> 00:29:34,880
में शास्त्र वचनों में चमत्कार के रूप में भी बात कही गई है तो हम एज इट

425
00:29:34,880 --> 00:29:38,880
इज स्वीकारते हैं। मैं आपसे ये पूछना चाहता हूं क्या आर्य समाज

426
00:29:38,880 --> 00:29:43,120
महर्षि दयानंद ने बनाया? अरे ये हां महर्षि

427
00:29:43,120 --> 00:29:47,280
दयानंद महर्षि नहीं है। पहली बात तो वो वो वो जो है आर्य

428
00:29:47,280 --> 00:29:51,600
समाज दयानंद जी ने ही बता बनाया है। किसने बनाया कौन दयानंद?

429
00:29:51,600 --> 00:29:55,680
अरे भैया तुम लाइव आ जाओ दोबारा कल लाइव आ जाना तुम दोबारा। ठीक

430
00:29:55,680 --> 00:30:00,400
है और अबकी बार डाटा पैक हमें बता देना। तुम डाटा पैक हम डलवा देंगे आपका।

431
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तो सृष्टि के आ रहे हो क्या लाइव? कल भाई राम को आ रही है।

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लाइव आ रहे हो क्या? कल कल लाइव आ रहे हो क्या?

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कल लाइव आ रहे हो क्या? क्या लाइव लाइव

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कैसे काट रहे हो? अरे भाई तुम जो बात विषय चल रहा है तुम बार बार विषय

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को बदलना चाहते हो। टू द पॉइंट रहो तुम बार बार हर

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बार विषय बदल रहे हो। क्या राम को आर्य कहा गया कि नहीं कहा गया? क्या

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आर्य समाज आर्य समाज दयानंद ने बनाया। ये विषय होता है।

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बात ये चल रही है कि तुम चमत्कार को मानते हो कि नहीं मानते हो? अरे

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तो ईश्वर को मानते हैं तो ईश्वर के चमत्कार को क्यों नहीं मानेंगे? तो फिर ईश्वर का

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चमत्कार है कि हनुमान जी के पूछ थी। फिर उसमें ये क्यों पूछ रहे हो दुनिया में कहां

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पे किसके पास पूछ है? चमत्कार है तो सामने

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आओ।

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[संगीत]
