1
00:00:03,280 --> 00:00:07,440
हां इस विषय पर बात करनी चाहिए। नहीं आपका कहना है आप

2
00:00:07,440 --> 00:00:11,760
प्रत्यारोप करते हुए ग्रो कर गए। हम कहेंगे कि सत्य बोलते बोलते ग्रो कर गए।

3
00:00:11,760 --> 00:00:15,840
वो आपकी इच्छा है। मुझे कोई दिक्कत नहीं है। मैं तो मेरे को जो सही लगेगा मैं तो वही बोलूंगा। आपको जो सही लगा वो

4
00:00:15,840 --> 00:00:20,720
बोलो। आप अगले संडे को आइए। आप अपना एक फोटो जो है हमें WhatsApp कर दीजिए।

5
00:00:20,720 --> 00:00:24,720
बिल्कुल बिल्कुल कोई दिक्कत नहीं है। और आपको अगले संडे को आकर के चर्चा कर

6
00:00:24,720 --> 00:00:28,960
उसमें आर्य समाझी आर्य समाज आर्य समाज जी पुकारो। पारिश पुकारो

7
00:00:28,960 --> 00:00:33,200
निर्भय आर्य जी जी जी अगर आपको ध्यान हो

8
00:00:33,200 --> 00:00:37,200
तो एक बार मैंने टेलीग्राम के ऊपर खंडन में आपके सरस्वती ईश्वर

9
00:00:37,200 --> 00:00:41,360
वाले संबंध में मैंने पोस्ट भी बनाए थे पैशनल आर है

10
00:00:41,360 --> 00:00:45,600
जी जी जी जी बिल्कुल बिल्कुल बताइए जी कैसे हैं भ्राता जी आप

11
00:00:45,600 --> 00:00:49,600
कृपा है राम की जी तो भ्राता जी मेरे को थोड़ी सी अगर

12
00:00:49,600 --> 00:00:53,840
आपके पास 10 मिनट का समय होता है तो मुझे आपसे बात करना था आपने जोकर इत्यादि

13
00:00:53,840 --> 00:00:57,920
जैसे शब्दों का प्रयोग किया था नहीं तो आपसे चर्चा आपकी बात

14
00:00:57,920 --> 00:01:02,000
ठीक है। आपकी बात ठीक है। तो देखिए पहली बात तो इसके अंदर ये हो जाती है

15
00:01:02,000 --> 00:01:06,000
कि देखिए अगर मान लिया मैं अपनी साइड से अभी अगर मैंने कुछ गलत शब्द प्रयोग

16
00:01:06,000 --> 00:01:10,480
किए। ठीक है? और उसको मैं स्वीकार करके चलता हूं कि मैंने किया है। तो उसमें एक चीज ये होता है

17
00:01:10,480 --> 00:01:14,640
कि अगर जो सामने वाले व्यक्ति हैं उन्होंने रिप्लाई में कुछ उल्टा ना बोला हो

18
00:01:14,640 --> 00:01:18,400
तब तो वो इसलिए मैंने रिप्लाई में आपके लिए जोकर

19
00:01:18,400 --> 00:01:22,480
के रिप्लाई में मैंने आपके लिए क्या उल्टा बोला बताइए? नहीं नहीं मैं एक बार पूरी बात

20
00:01:22,480 --> 00:01:26,560
रख देता हूं। हम जी अब जैसे हुआ यह कि जिस

21
00:01:26,560 --> 00:01:30,560
दिन ध्यान होगा जैसे जिस दिन मैं सबसे पहले बात जो जिसमें मैंने अपने घर का नाम

22
00:01:30,560 --> 00:01:34,640
जो है रितिक या गौरव इत्यादि जो मैंने रखे हुए थे ठीक है हम उसमें आपसे मैंने

23
00:01:34,640 --> 00:01:38,640
आपसे भैया करके बात किया था तरीके से बात किया था ठीक है हम उसमें भी

24
00:01:38,640 --> 00:01:42,720
कोई हमारी कोई दिक्कत नहीं थी क्योंकि उसमें ये होता है कि जब तक व्यवहार ठीक है तो थोड़ा बहुत विचार और मंत्र हो

25
00:01:42,720 --> 00:01:46,880
तो भी कोई बहुत फर्क नहीं पड़ता व्यक्ति ठीक से ही बात करता है हम्म उसके बाद फिर

26
00:01:46,880 --> 00:01:51,120
हुआ ये कि जिस दिन जिस दिन हुआ है कि जिस दिन वो मैं आया था फिर एक बार वो चैलेंज

27
00:01:51,120 --> 00:01:55,200
वाला प्रकरण हुआ था फिर उसमें आपको मेरे बातचीत करने का तरीका ठीक नहीं लगा तो फिर आपने हटा दिया

28
00:01:55,200 --> 00:01:59,440
था। ऐसा है उस दिन आप यह गर्व के साथ कह रहे थे कि हम आपके चैनल

29
00:01:59,440 --> 00:02:03,520
पर आ चुके हैं। आपको मूर्ख बना के जा चुके हैं। नहीं नहीं ये बात मैंने नहीं कही कि मूर्ख

30
00:02:03,520 --> 00:02:07,520
बना के जा चुके हैं। आप भी मतलब जब मैंने कहा था कि आप उस दिन अपनी पहचान छिपाई थी तो

31
00:02:07,520 --> 00:02:11,520
आपने कहा था कि हां कि हां भाई हनुमान जी भी तो गए थे।

32
00:02:11,520 --> 00:02:15,600
नहीं वो तो मैंने अपनी लाइफ में कहा था ना। वो तो मैंने अपनी लाइफ में कहा था ना। यह मैंने आपको थोड़ी

33
00:02:15,600 --> 00:02:20,160
कहा था। वहां पर भी वही भाव प्रकट किया था आपने जिससे कि मैंने कहा था अच्छा।

34
00:02:20,160 --> 00:02:24,400
ऐसे मैंने वहां पर हुआ था। नहीं नहीं पहले मैं उससे

35
00:02:24,400 --> 00:02:28,400
बात कर रहा हूं। मतलब मेरा कहने का मैं मैं देखिए शिवांगी जी शिवा जी देखिए

36
00:02:28,400 --> 00:02:32,400
मैं हाईलाइट ये करना चाहता हूं कि जिस समय आपने मुझे निकाला था उस समय आपने एक लड़का

37
00:02:32,400 --> 00:02:33,520
और एक कोई व्यक्ति थे पंकज

38
00:02:33,520 --> 00:02:37,680
नाम से उन दोनों को आपने बिठाया और आपने मेरे को निकालने जो लाइव हुई

39
00:02:37,680 --> 00:02:41,680
थी ना हां जिस तो उसके बाद आप जैसे जिस शैली से मेरे को

40
00:02:41,680 --> 00:02:45,760
जैसे निकालने के बाद आप मेरे को तू तू तू तू ऐसे करके आप बात कर रहे थे हम्म

41
00:02:45,760 --> 00:02:49,920
तो शैली तो आपकी तरफ से भी गड़बड़ हुई थी उस कारण के आप दो चीजों को आपने

42
00:02:49,920 --> 00:02:54,080
सहज स्वीकार किया कि हमारे यहां तो खा मुंह मुंह चढ़ाते चढ़ाते खाना खाते

43
00:02:54,080 --> 00:02:58,160
हैं और ठीक है। यदि अनुसंधान किया जाएगा तो आपके यहां

44
00:02:58,160 --> 00:03:02,400
ये मर्यादा निकल आएगी कि खाते समय मुंह नहीं चलाना है। आपके

45
00:03:02,400 --> 00:03:07,040
यहां भोजन को दिया गया होगा। ठीक है, सही बात। दूसरी बात

46
00:03:07,040 --> 00:03:11,440
हम आप वहां पर आकर के उस मंच का भी अपमान कर रहे हो। ये कुछ चबाते

47
00:03:11,440 --> 00:03:15,440
हुए खा रहे हो। आप मैं उसको अपनी गलती स्वीकार करता हूं। देखो मैं उसको डिफाइन नहीं करूंगा। तो मेरी

48
00:03:15,440 --> 00:03:19,680
गलती है। उसको तुम स्वीकार करूंगा। वहां पर जो आप कह रहे हो ना तू तड़ाक। वो तू तड़ाक

49
00:03:19,680 --> 00:03:23,840
उस यही दो-तीन कारण से थी। एक तो मंच का अपमान कर रहे हो। हां।

50
00:03:23,840 --> 00:03:27,840
फिर वहां पर हमने कभी भी आर्य समाज

51
00:03:27,840 --> 00:03:32,480
को मानने वालों के लिए कोई गलत शब्द नहीं बोला है।

52
00:03:32,480 --> 00:03:36,640
जी गलत शब्द हमने नहीं बोला है। हां कटाक्ष होते हैं जो तर्काज्म

53
00:03:36,640 --> 00:03:40,800
वो सब हुआ है। गलत शब्द कभी नहीं बोला है।

54
00:03:40,800 --> 00:03:44,800
मगर हां तो मैं भी उसी सेंस में कह रहा हूं। जैसे मैं भी यही कह रहा हूं। जैसे आप जैसे मैं मेरी

55
00:03:44,800 --> 00:03:48,720
तरफ से अभद्र व्यवहार हुआ। ठीक है। मैं इसको एक बार तो एक बार मेरी पूरी जान लीजिए।

56
00:03:48,720 --> 00:03:53,040
फिर आप वहां पर जब आए थे तो आप बहुत अच्छे से बता रहे हो।

57
00:03:53,040 --> 00:03:57,040
यह बता रहे हो कि भाई जो है मैं आप पहले भी आ चुका हूं। झूठ बोल के जा चुका

58
00:03:57,040 --> 00:04:01,760
हूं। अब आपका झूठ बोलना वहां पर सिद्ध हो रहा है। आपका वहां पर

59
00:04:01,760 --> 00:04:05,840
क्या कहते हैं? मंच का अपमान करना सिद्ध हो रहा है। फिर आपका आपका वहां

60
00:04:05,840 --> 00:04:10,160
पर जो है ये जो अपना उसके उसके

61
00:04:10,160 --> 00:04:14,240
उसके समर्थन में उसके समर्थन में वहां ये तर्क देना भी सिद्ध हो रहा है

62
00:04:14,240 --> 00:04:18,320
कि भैया हमारे यहां तो ऐसे ही होता है। आर्य समाज में ऐसे नहीं होता है। मुझे नहीं लगता। आर्य

63
00:04:18,320 --> 00:04:22,400
समाज में नहीं होता है। मैंने आर्य समाज का नाम नहीं लेकिन आर्य समाज में ऐसा होता है और ना मैंने यह बोला कि

64
00:04:22,400 --> 00:04:26,480
मैं आर्य समाज से हूं। नहीं आर्य समाज से समाज से नहीं है मगर कम से कम आर्य

65
00:04:26,480 --> 00:04:30,720
समाज के सिद्धांतों से समर्थन तो करते हैं। नहीं तो आर्य समाज के सिद्धांत

66
00:04:30,720 --> 00:04:34,720
में ये नहीं है पहली बात तो आप मेरे को व्यक्तिगत व्यवहार से जोड़ सकते हैं उसमें। हां ये मेरे व्यक्तिगत व्यवहार

67
00:04:34,720 --> 00:04:38,800
में दोष होता है। आप ऐसा बोल सकते हैं। हां, तो ठीक मैं आर्य समाज को नहीं जोड़ रहा हूं ना उससे।

68
00:04:38,800 --> 00:04:42,960
मैंने तो समझा ना। मुझे मालूम है ना आर्य समाज से हमारा किस स्तर पर जाकर के

69
00:04:42,960 --> 00:04:47,120
मतभेद है। कौन से स्तर पर नहीं है ये भी तो हमें पता है।

70
00:04:47,120 --> 00:04:51,120
बिल्कुल बिल्कुल तो तो मेरा इसमें यही प्रकरण था कि जैसे मेरी तरफ से गलती

71
00:04:51,120 --> 00:04:55,360
हुई तो आपने भी वहां पर जो हमारी शैली में बदलाव

72
00:04:55,360 --> 00:04:59,680
आया था वो इसी कारण से आया था कि आप जो है ये जो गुप्तचर्य

73
00:04:59,680 --> 00:05:03,760
आपने प्रकट की और उसको बड़े गर्व के साथ बिना किसी निर्विवाद

74
00:05:03,760 --> 00:05:08,160
रूप से आप स्वीकार कर रहे हो जैसे बहुत अच्छा हुआ। अच्छा बाद में

75
00:05:08,160 --> 00:05:12,640
आपने उस समय तो हमने वह भाषा यूज कर ली बाद में आपने आगे

76
00:05:12,640 --> 00:05:16,720
वो तर्क भी दे दिया कि हनुमान जी गए थे हनुमान जी गए थे वो वैचारिक

77
00:05:16,720 --> 00:05:21,280
युद्ध में नहीं गए थे वो क्षत्रियोचित कर्म नहीं था वो

78
00:05:21,280 --> 00:05:25,520
वो वो गए थे व्यवहारिक युद्ध में हनुमान जी दूसरी बात

79
00:05:25,520 --> 00:05:29,600
झूठ तो उन्होंने कतई नहीं बोला फिर भी ऐसा तो नहीं

80
00:05:29,600 --> 00:05:33,600
बोला उन्होंने कि मैं कोई और हूं जब रावण के दरबार में गए

81
00:05:33,600 --> 00:05:37,680
तो पहली बात तो वो क्षत्रियोचित युद्ध वैचारिक युद्ध ब्राह्मणों

82
00:05:37,680 --> 00:05:42,160
में होता है। वाले युद्ध में झूठ की कोई जगह ही नहीं है। वो तो रणनीति

83
00:05:42,160 --> 00:05:46,160
होती है जब क्षत्रयोचित युद्ध होता है। नहीं ऐसा इतिहास में वर्णन मिलता है ना कि बौद्धों

84
00:05:46,160 --> 00:05:50,720
के यहां जाकर के बौद्धों के यहां ट्रेनिंग लेकर के बाद में उनका खंडन कर दिया। मिलते हैं ना ऐसे उदाहरण तो।

85
00:05:50,720 --> 00:05:55,600
हां बिल्कुल मिलता है। मगर उतने अंश में हम अगर उसमें ये चीज है शिव

86
00:05:55,600 --> 00:05:59,840
एक मिनट एक मिनट। कुमार भक्त को जब ये पता लगा कि उन्होंने अपने गुरु जिनको उसने

87
00:05:59,840 --> 00:06:04,080
कभी ना कभी किसी अंश में गुरु माना है। उसका खंडन किया तो उन्होंने अपने आग

88
00:06:04,080 --> 00:06:08,400
लगा ठीक है। तो यानी कि उसको दोष युक्त माना ही गया।

89
00:06:08,400 --> 00:06:12,640
कम से कम उन्होंने ना ये गलत कह रहे हैं। हम गलत कह रहे हैं। उन्होंने इस

90
00:06:12,640 --> 00:06:16,880
इस भावना में कि मैं मेरी वजह से मेरे गुरु का अपमान हो गया। इस इस भावना के

91
00:06:16,880 --> 00:06:18,880
से उन्होंने ग्रसित हो के अपना दाह

92
00:06:18,880 --> 00:06:22,960
किया था। ये नहीं कि मैंने जो गुप्तचर की वो गलत किया। इस भावना नहीं किया। ये नहीं लिखा हुआ

93
00:06:22,960 --> 00:06:27,120
अपनी तरफ से। उसमें उसमें दोष इसलिए आ रहा है कि आप अगर गुप्तचरी के माध्यम

94
00:06:27,120 --> 00:06:31,520
से मुझे आपने गुरु बनाया। नहीं गुरु नहीं बनाया मैंने। हां आपने पूछताछ

95
00:06:31,520 --> 00:06:35,520
की ना आपने पूछताछ में और गुरु स्वीकार करने में दोनों में बहुत अंतर होता है। गुरु के

96
00:06:35,520 --> 00:06:39,760
तो लक्षण भी दे रखे हैं। गुरु गुरु उन्होंने स्वीकार कहां किया था? गुरु का मतलब

97
00:06:39,760 --> 00:06:43,920
तो होता है कि वो जो है क्या कहते हैं अंधकार को मिटाने वाला। बौद्ध दर्शन अंधकार

98
00:06:43,920 --> 00:06:48,000
को मिटाने वाला है ही नहीं। हां मगर कुछ अंशों में उनसे गुरु

99
00:06:48,000 --> 00:06:52,000
वो होता है जो ज्ञान देता है। गुरु ज्ञान देता है ना। गुरु के

100
00:06:52,000 --> 00:06:56,080
लक्षण में आता है कि नहीं आता ये? गुरु का आचार्य के लक्षण में भी आता है ये तो। आचार्य के लक्षण में तो

101
00:06:56,080 --> 00:07:00,080
आता ही है। गुरु का अर्थ होता है गुरु का हां तो ज्ञान देता है तो उस दिन

102
00:07:00,080 --> 00:07:04,320
मैंने आपको ज्ञान दिया ना ज्ञान आपने नहीं दिया देखिए दो प्रकार से वाद

103
00:07:04,320 --> 00:07:08,640
होता है ठीक है वाद होता है जल होता है वितंडा होता है शंका समाधान

104
00:07:08,640 --> 00:07:12,800
होता है ठीक है प्रश्नोत्तरी होती है तो ये जो था अब जैसे गुरु

105
00:07:12,800 --> 00:07:16,880
क्या करता है गुरु आपको शरण में देता है जो सारी बातें वो बताता है वो आप एज इट इज उसको मानते

106
00:07:16,880 --> 00:07:21,040
हो ठीक है उसमें आप संशय नहीं करते हो तो कुमारी भट्ट ने एज इट

107
00:07:21,040 --> 00:07:25,440
इज मानी की बातें मैंने तो यह किया मैंने तो वहां मैंने तो आपसे प्रश्नोत्तरी

108
00:07:25,440 --> 00:07:29,920
किया था प्रश्नोत्तरी किसी भी व्यक्ति से कर आप नहीं करते हो आप समाज के

109
00:07:29,920 --> 00:07:34,240
अगर आप समाज के लोगों के पास में जाते हो उनसे प्रश्नोत्तरी करते हो तो क्या आप उन्हें गुरु मान लेते हो नहीं मानते

110
00:07:34,240 --> 00:07:38,320
नहीं नहीं मान लेते फिर फिर आप फिर मेरे पक्ष में क्यों कह रहे हो कुमारल भट्ट भी

111
00:07:38,320 --> 00:07:42,320
इसी रूप में गए थे ना वहां बौद्धों के फिर उनको आप गुरु गुरु के रूप में सिद्ध करके और जो

112
00:07:42,320 --> 00:07:46,480
कुमार भट्ट द्वारा वो लिया जाना आत्मदाह किया जाना उसको स्टूडेंट

113
00:07:46,480 --> 00:07:50,480
नहीं वो तो उन्होंने आत्मदाह करने के रूप में उन्होंने क्या बोला था उन्होंने बोला था कि मैं तो अपने गुरु का

114
00:07:50,480 --> 00:07:54,880
अपमान हो गया इस चक्कर में तो वहां तो उन्हें तो उन्होंने वहां पर

115
00:07:54,880 --> 00:07:59,440
उन्होंने वहां वहां पर प्रश्नोत्तरी या राज जानने वाले जिससे हमने राज्य जाने

116
00:07:59,440 --> 00:08:03,520
उसको वहां उन्होंने गुरु स्वीकार किया था ना इसको गुरु स्वीकार नहीं किया उन्होंने उन्होंने

117
00:08:03,520 --> 00:08:07,680
वस्तुत रूप से गुरु स्वीकार करके सारी शिक्षाएं ली नहीं वस्तुत रूप से कैसे

118
00:08:07,680 --> 00:08:11,680
हो जाएगा जब सनातन तो फिर तो फिर उन्होंने तो फिर उन्होंने आत्म अपने स्वयं को मारने से

119
00:08:11,680 --> 00:08:15,680
पूर्व ये बात उन्होंने क्यों कही कि गुरु इसलिए कही इसलिए कही कि चलो

120
00:08:15,680 --> 00:08:19,840
इतने भाव थे इसीलिए कहा ना उन्होंने हां तो उनके अंदर वो भाव

121
00:08:19,840 --> 00:08:24,160
थे ना पथ प्रदर्शक होने के नाते बाकी राज बताने

122
00:08:24,160 --> 00:08:28,160
वाले पथ प्रदशन प्रदर्शन पथ प्रदर्शक होने के नाते उनके अंदर वह

123
00:08:28,160 --> 00:08:32,320
भाव थे कि वह मेरे गुरु हैं। अब यदि उनसे कॉपी करना है तो

124
00:08:32,320 --> 00:08:36,400
आपको आपके अंदर भी पथ प्रदर्शक होने के नाते मेरे प्रति गुरु भाव आना चाहिए।

125
00:08:36,400 --> 00:08:40,480
नहीं तो कॉपी नहीं करना। ये नेसेसरी नहीं है। नेसेसरी क्यों नहीं है मैं आपको बताता हूं। क्यों नहीं है मैं आपको बताता

126
00:08:40,480 --> 00:08:44,560
हूं। देखिए इसलिए नहीं है क्योंकि मैंने जिस बात को उठाया है। मैंने ये उठाया है

127
00:08:44,560 --> 00:08:48,560
कि इस प्रकार से किसी की विद्या को जानना। ठीक है? इस प्रकार

128
00:08:48,560 --> 00:08:49,360
से किसी की

129
00:08:49,360 --> 00:08:53,440
सामने वाले का पक्ष क्या है? उसको समझना ठीक प्रकार से समझना। इसके समझने

130
00:08:53,440 --> 00:08:57,680
के लिए अगर मैं व्यक्ति से सामान्य तरीके से वार्तालाप कर रहा हूं। ठीक है?

131
00:08:57,680 --> 00:09:01,760
मैं ये कह रहा हूं तो इसमें आपके लिए झूठा एक बार मैं पूरा बोल दूं। एक बार मैं

132
00:09:01,760 --> 00:09:05,760
पूरा बोल दूं। इसके लिए मुझे आवश्यकता नहीं है कि मैं मेरे सामने वाले को गुरु स्वीकार क्योंकि देखिए

133
00:09:05,760 --> 00:09:09,920
ऐसा तो है नहीं कि आपने मेरे प्रश्नों का तभी उत्तर दिया जब मैं आपको आपको गुरु स्वीकार करूं।

134
00:09:09,920 --> 00:09:13,920
आपने सामान्य हिंदू के रूप में भी आपने मेरे प्रश्न का उत्तर दिया ना? हां। है ना?

135
00:09:13,920 --> 00:09:18,960
तो बस वही चीज को मैं कह रहा हूं कि सामान्य हिंदू वक्ता बन करके अगर आप

136
00:09:18,960 --> 00:09:22,960
ही नहीं रहती मेरी बात तो समझिए। वहां पर आपने अपना परिचय छूटा

137
00:09:22,960 --> 00:09:26,960
दिया था। छोटा परिचय दिया था। पहली बात। दूसरी बात यह है

138
00:09:26,960 --> 00:09:30,960
कि अगर हम यह कह रहे हैं कि हर पथ प्रदर्शक को आवश्यक

139
00:09:30,960 --> 00:09:35,120
नहीं कि हम गुरु के रूप में स्वीकार करें। तो फिर हम वहां पर उनकी वो जो

140
00:09:35,120 --> 00:09:39,280
उन्होंने जो कुमारी भट्ट जी ने ऐसा किया था। उनकी चीज को हम अनुकरणीय सिद्धांत

141
00:09:39,280 --> 00:09:43,280
के रूप में नहीं मान सकते। क्योंकि उन्होंने उदाहरण दे रहा हूं इतिहास से। तो मैं वही

142
00:09:43,280 --> 00:09:47,280
तो कह रहा हूं। फिर वो अनुकरणीय उदाहरण नहीं है ना। क्योंकि उन्होंने पथ

143
00:09:47,280 --> 00:09:51,280
प्रदर्शक को गुरु के रूप में स्वीकार करके उसकी दोष दृष्टि से अपना आत्मदाह

144
00:09:51,280 --> 00:09:55,440
किया था। वास्तविकता में तो सनातन सिद्धांतों से प्रभावित थे।

145
00:09:55,440 --> 00:09:59,440
चलिए अब आप अपना उद्देश्य बताइए। सात सिद्धांत से प्रभावित होने के बावजूद

146
00:09:59,440 --> 00:10:03,440
भी उन्होंने किया। खैर हम मोक्ष विषय पे आते हैं। तो सुभाष जी मूल बात इसके अंदर यही थी

147
00:10:03,440 --> 00:10:04,480
कि जैसे अगर मेरी तरफ से

148
00:10:04,480 --> 00:10:08,480
फिर भी मैं उस चीज को डिफेंड नहीं कर रहा। ठीक है। मैं अपने व्यवहार को लेकर के डिफेंड नहीं करूंगा कि जो गलत है

149
00:10:08,480 --> 00:10:12,480
वो गलत है। मेरा कहने का सिर्फ इतना तात्पर्य था। उस दिन जो मेरी भाषा

150
00:10:12,480 --> 00:10:16,880
शैली थोड़ी सी उकड़ी हुई हुई थी। उसका कारण था मुझे तीन चीज़

151
00:10:16,880 --> 00:10:20,880
मैं आपको गलत नहीं कह रहा हूं। मैं आपको गलत नहीं कह रहा हूं। सीमा जी मैं आपको गलत नहीं कह रहा हूं। आपको उसमें डिफेंड देने

152
00:10:20,880 --> 00:10:25,040
में भी कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि मैं गलत कह ही नहीं रहा हूं आपको। बस मैं बस मैं ये चेता रहा हूं कि आपने

153
00:10:25,040 --> 00:10:29,040
भी बोला था मैंने भी बोला था। बस मैं ये इस चीज को चेता हूं। नहीं मैंने जोकर मैंने उपमा

154
00:10:29,040 --> 00:10:33,120
इत्यादि देकर के जोकर का कोई जवाब नहीं दिया। कभी नहीं दिया। आपने अलंकारी

155
00:10:33,120 --> 00:10:37,120
इत्यादि सब बोला था ना? अलंकारी शब्द में कौन सा दोष है बताइए? क्यों नहीं

156
00:10:37,120 --> 00:10:41,120
है? जब आपने अपने को अलंकारी रूप से चिन्हित किया। अलंकारी

157
00:10:41,120 --> 00:10:45,360
का मतलब क्या है? नहीं मैंने अपने को अलंकारिकारी रूप से चिन्हित किया। मैंने अपने आप को पौराणिक

158
00:10:45,360 --> 00:10:49,600
रूप से चिन्हित किया है। मैंने आपको कब पौराणिक बोला? हां भाई सारे वो

159
00:10:49,600 --> 00:10:53,600
देखिए अलंकारी आप हो उसके लिए मैं व्यक्तिगत रूप से आपको

160
00:10:53,600 --> 00:10:57,600
अलंकारी नहीं कहूंगा। आप यदि अलंकार आर्य समाज की तरफ से आओगे तो इसलिए

161
00:10:57,600 --> 00:11:01,920
मैं आपको अलंकारी कह रहा हूं क्योंकि आर्य समाज को मैंने अलंकार कहा है। क्योंकि आर्य समाज

162
00:11:01,920 --> 00:11:05,920
आर्य समाज ना कि मैं आर्य समाज से नहीं जुड़ा हूं। फिर भी आप बोल रहे तो आपकी गलती है। समाज का

163
00:11:05,920 --> 00:11:09,920
पक्ष तो ले रहे हो ना आप? नहीं नहीं मैं आर्य समाज का पक्ष नहीं ले रहा। मैं ऋषि

164
00:11:09,920 --> 00:11:14,560
दयानंद का पक्ष ले रहा हूं। हां तो दयानंद का ही तो आर्य समाज है।

165
00:11:14,560 --> 00:11:18,560
देखिए दोनों में अंतर है। हां बताइए। दोनों में अंतर यह है। दोनों में अंतर ये

166
00:11:18,560 --> 00:11:19,760
है कि जैसे महर्षि दयानंद

167
00:11:19,760 --> 00:11:24,560
ने तो आर्य प्रतिनिधि सभा ही बनाई। हम आर्य समाज भी विस्थापित किया। हम

168
00:11:24,560 --> 00:11:28,640
ठीक है। और महर्षि दयानंद के ऐसे भी कई सारे शिष्य हैं जो इन दोनों संस्थाओं में

169
00:11:28,640 --> 00:11:32,800
से नहीं जुड़े। तो इसमें कर क्या सकते हैं? जो आर्य समाज की मूल

170
00:11:32,800 --> 00:11:36,800
विचारधाराएं हैं वो तो पोषित हो रही ना आर्य समाज में। अब आप उस व्यक्ति को बोलिए।

171
00:11:36,800 --> 00:11:40,800
अब उस व्यक्ति को अलंकारी अगर आपने उनके लिए अलग से नाम रखा हुआ है जैसे उन्होंने आपके लिए कुछ

172
00:11:40,800 --> 00:11:44,880
नाम रखा तो उन्होंने अगर आर्य समाज में परंपरा का सिद्धांत

173
00:11:44,880 --> 00:11:49,040
होता दयानंद जी ने सुनिए तो जीते मैं आऊंगा

174
00:11:49,040 --> 00:11:53,040
मैं डिबेट पे ही आना चाहता हूं मैं कह रहा हूं

175
00:11:53,040 --> 00:11:57,200
दयानंद जी ने अगर परंपरा का सिद्धांत अपनाया अपनाया होता

176
00:11:57,200 --> 00:12:01,360
तो उनके द्वारा उनके नाम से कोई भी बात कहते

177
00:12:01,360 --> 00:12:05,600
समय हम ये जांच कर सकते थे कि भैया ये उनकी परंपरा से है कि नहीं

178
00:12:05,600 --> 00:12:09,600
ठीक है जब उन्होंने ने खुद ही परंपरा के सिद्धांत को तोड़ा है तो तो कोई भी व्यक्ति

179
00:12:09,600 --> 00:12:14,240
जो आर्य समाज का नाम ले करके कुछ भी कहेगा तो हम ये कह सकते हैं हां भाई आर्य समाज ही कह रहा है।

180
00:12:14,240 --> 00:12:18,240
लेकिन मैं आयुष समाज का नाम ले नहीं कह रहा ना शिवास जी यही तो अंतर है मैं तो महर्षि ध्यान से नाम ले कह रहा

181
00:12:18,240 --> 00:12:23,040
हूं ना तो महर्षि दयानंद ने ही तो आर्य समाज बनाया है और

182
00:12:23,040 --> 00:12:27,440
के सिद्धांत का अभी आपने खुद अभी आपने खुद बोला कि आर्य समाज का नाम लेके

183
00:12:27,440 --> 00:12:31,520
अभी आपने खुद बोला ना इस बात को क्या आर्य समाज का नाम ले कि आर्य समाज का नाम लेके जो बोलेगा

184
00:12:31,520 --> 00:12:35,920
तो हम उसको आर्य समाज की दृष्टि से देखेंगे। मैं वो आर्य समाज का नाम लेके नहीं

185
00:12:35,920 --> 00:12:40,000
मैं वो नहीं कह रहा हूं। मैं ये कह रहा हूं कि आर्य समाज आपने कहा

186
00:12:40,000 --> 00:12:44,160
ना कि कई शिष्य ऐसे हैं जो आर्य समाज से जुड़े हुए नहीं है। जी जी आर्य

187
00:12:44,160 --> 00:12:48,320
समाज से जुड़ा हुआ होना आप कब मानते हैं? किसी को सनातन से जुड़ा हुआ होना आप कब

188
00:12:48,320 --> 00:12:52,480
मानते हैं? किन स्थितियों में मानते हैं? नहीं दोनों में अंतर है। सनातन में और आर्य समाज

189
00:12:52,480 --> 00:12:56,560
में अंतर है क्या अंतर में मैं आपको एक बार स्पष्ट कर देता हूं। तो दो एक मिनट का समय दीजिएगा मुझे। देखिए

190
00:12:56,560 --> 00:13:00,880
ऐसा है कि जैसे आरएसएस एक संस्था है। बीजेपी एक संस्था है। वैसे

191
00:13:00,880 --> 00:13:05,040
सामाजिक संस्था है। हम् ठीक है? अब बात यह है कि वह जो संस्था वाले हैं

192
00:13:05,040 --> 00:13:09,200
उसके स्थापक रहे हैं महर्षि दयानंद। ठीक है? महर्षि दयानंद अपने आप में संस्था नहीं है।

193
00:13:09,200 --> 00:13:13,360
वो एक व्यक्ति थे। ठीक है? वो वेदों वो वेदों को मानते थे। अब

194
00:13:13,360 --> 00:13:17,520
ये विचारधारा तो है। अब हां अब बात ये है कि जो आर्य समाज

195
00:13:17,520 --> 00:13:21,520
से जो व्यक्ति संबंधित होगा। ठीक है? उसको संस्था के प्रोटोकॉल फॉलो करने

196
00:13:21,520 --> 00:13:25,680
पड़ेंगे। उसकी नियमा नियमावली जो है उसको फॉलो करना पड़ेगा। मैं वो नहीं कह रहा हूं। आर्य समाज अपने आप

197
00:13:25,680 --> 00:13:31,200
में एक संस्था भी है। आर्य समाज अपने आप में दयानंद जी की विचारधारा भी है।

198
00:13:31,200 --> 00:13:35,680
विचार दयानंद जी की एक वैचारिक एक वैचारिक

199
00:13:35,680 --> 00:13:40,240
दृष्टि में भी उसकी अपनी एक अस्तित्व है कि दयानंद जी की विचारधारा क्या है? आर्य समाज।

200
00:13:40,240 --> 00:13:44,240
अच्छा दूसरी बात ना, एक मिनट अब

201
00:13:44,240 --> 00:13:48,400
दूसरी बात यह है जैसे आप कह रहे हो कि आपने मुझे पौराणिक नहीं कहा और मैं कह रहा हूं कि आर्य

202
00:13:48,400 --> 00:13:51,040
समाज से जुड़े हुए कई प्रामाणिक लोगों ने मुझे

203
00:13:51,040 --> 00:13:55,040
पौराणिक कहा। ठीक है। अब बात यह आ जाती है कि आपको

204
00:13:55,040 --> 00:13:59,440
दयानंद जी की ओर से प्रामाणिक क्यों मान लिया जाए? उनको क्यों ना माना जाए?

205
00:13:59,440 --> 00:14:03,440
आप यह कह रहे हो आपका कहना है कि दयानंद जी मेरे को दयानंद की तरफ से प्रमाणिक मानो।

206
00:14:03,440 --> 00:14:07,520
मैंने क्या बोला? तो जब दयानंद जी ने ही हमें पौराणिक वो पंडित इत्यादि कहा

207
00:14:07,520 --> 00:14:11,680
है तो हम रिटन में दयानंद जी को मानने वाले को भले ही वो आर्य समाज से जुड़ा हुआ ना

208
00:14:11,680 --> 00:14:15,760
हो। हम उसको रिटन में अलंकार तो कह सकते हैं ना। अलंकार ही कोई गाली

209
00:14:15,760 --> 00:14:20,000
तो है नहीं। भाई जब कोई हमें पौराणिक कहता है

210
00:14:20,000 --> 00:14:24,000
तो इसलिए कहता है क्योंकि हम पुराणों को मानने वाले हैं। अब आपने अपना हेतु बदलाया

211
00:14:24,000 --> 00:14:28,240
तो अब इसका उत्तर भी लीजिए। आपने अपना अब जो पहले जो आपने पौराणिक इत्यादि

212
00:14:28,240 --> 00:14:32,400
वाला आपने दूसरी बात बोली थी। अब आप ठीक है अब आप संस्था से हट करके अब आप महर्षि दया दानंद पर डायरेक्ट

213
00:14:32,400 --> 00:14:36,480
आ रहे तो इसका उत्तर लीजिए। बात यह है कि अगर महर्षि दयानंद ने

214
00:14:36,480 --> 00:14:40,480
किसी पर्टिकुलर विचारधारा धारा को मानने वाले लोगों को पौराणिक पंडा कहा है पोप कहा

215
00:14:40,480 --> 00:14:44,640
है कुछ कहा है हम ठीक है आप उस पर चोट कीजिए कि हां ये मान्यता

216
00:14:44,640 --> 00:14:48,720
गलत है अगर आप कोई व्यक्ति हमें ऐसा कहे मैं पूरा आप अगर मैं

217
00:14:48,720 --> 00:14:52,800
पूरा मैं पूरा बोल दूं मैं पूरा बोल दूं कि अगर कोई अगर

218
00:14:52,800 --> 00:14:56,880
कोई व्यक्ति इसी महसंत की इस बात को स्वीकार करके कोई व्यक्ति आपको ऐसा

219
00:14:56,880 --> 00:15:01,120
बोल रहा है तो आप उसके आपको जो ठीक लग रहा है आप उसके साथ व्यवहार करो ठीक है लेकिन कोई व्यक्ति

220
00:15:01,120 --> 00:15:06,000
अगर आपको ऐसा नहीं बोल रहा है ठीक ठीक है तो भी आप अगर उसको अहंकारी इत्याद

221
00:15:06,000 --> 00:15:07,280
कोई

222
00:15:07,280 --> 00:15:11,280
आप एक बात बताओ कोई किसी को पहली बात पहली बात तो एक बात है कि

223
00:15:11,280 --> 00:15:15,280
पौराणिक शब्द आपने बोला है कि नहीं बोला है ये तो बात एक बात रही कि देखना

224
00:15:15,280 --> 00:15:19,600
पड़ेगा आपने बोला है कि नहीं बोला है ठीक है दूसरी बात ये रही कि पौराणिक

225
00:15:19,600 --> 00:15:23,920
शब्द अगर वो कह रहे हैं पौराणिक और आप उनके समर्थक हैं जी

226
00:15:23,920 --> 00:15:28,080
ठीक है तो आप पर भी वो चीज लागू होगी ना होता है पौराणिक

227
00:15:28,080 --> 00:15:32,720
आपके आप लोग जो जहां संगोष्ठी वगैरह लगाते हो ना जो बैनर पोस्टर होते हैं पूरी

228
00:15:32,720 --> 00:15:36,880
आपके यहां भी अलंकार लिखा होता है। आपके यहां भी लिखा होता है अलंकार। लिखा होता है आप दिखाओ।

229
00:15:36,880 --> 00:15:40,880
अलंकारिक समाज एज इट इज़ हम तो एज इट इज़ पौराणिक एज इट इज़

230
00:15:40,880 --> 00:15:45,360
दिखा दूंगा। आप तो एज इट इज़ पूछ रहे हैं एज इट इट इट इट इट इट इट इट इट इट इज़ दिखा दूंगा। पौराणिक लिखा हुआ

231
00:15:45,360 --> 00:15:49,360
ये तय- आपके यहां पर अलंकार शब्द आ रहा है कि नहीं आ रहा है? यह बताइए।

232
00:15:49,360 --> 00:15:53,440
अलंकारी समाज कैसे सिद्ध होता है? तो पौराणिक से केवल पौराणिक कैसे सिद्ध होता

233
00:15:53,440 --> 00:15:57,520
है? वहां पे संसार तो हम तो वैदिक भी है ना। हम तो वैदिक

234
00:15:57,520 --> 00:16:01,760
भी है वो क्यों नहीं आपने पकड़ा? अगर हम अपने आप को सुनिए। अगर हम अपने आप को सनातन

235
00:16:01,760 --> 00:16:05,840
वैदिक सुनिए अगर हमने अपने आप को सनातन वैदिक

236
00:16:05,840 --> 00:16:09,840
आर्य हिंदू कहा है सनातन वैदिक आर्य पौराणिक हिंदू कहा है तो

237
00:16:09,840 --> 00:16:14,320
आप पूरे को पकड़ो आप केवल पौराणिक क्यों पकड़ रहे हो पूरा बोलो अगर

238
00:16:14,320 --> 00:16:18,400
अगर आप अगर आप इसका निषेध कैसे हुआ अगर पौराणिक

239
00:16:18,400 --> 00:16:22,400
पकड़ा तो इस सबका निषेध कैसे हुआ यह बताओ आप इसमें बुरा मानने वाली कौन सी तो ऐसे ही हमने

240
00:16:22,400 --> 00:16:26,800
अगर आपका अगर हमने आपका अलंकार ही पकड़ लिया तो उसमें निषेध कैसे हुआ

241
00:16:26,800 --> 00:16:30,800
सर हमने अपने नाम नहीं अरे भैया आपके नामों में होता विद्या विष्ठा वो

242
00:16:30,800 --> 00:16:34,800
निष्ठा विद्या अलंकार लो कितने लोगों का अलंकार ही लगा होगा नाम में

243
00:16:34,800 --> 00:16:38,800
ही विद्या अलंकार में अंतर हो जाएगा अविद्या अलंकार बोल दो ना अविद्या अलंकार बोलो नहीं

244
00:16:38,800 --> 00:16:42,960
नहीं तो आप सनातन वैदिक आर्य हिंदू पौराणिक बोलो ना नहीं सुनो

245
00:16:42,960 --> 00:16:47,520
हां इसी का उत्तर लो अगर अगर मान लो आप पूरा नाम लिख रहे हो सनातन हिंदू आर्य वैदिक ठीक है

246
00:16:47,520 --> 00:16:53,520
ठीक है अगर किसी ने अगर किसी ने आपको डायरेक्टली बता

247
00:16:53,680 --> 00:16:57,680
मैं पूरा जो कहना चाह रहा हूं मैं आने की वजह

248
00:16:57,680 --> 00:17:01,760
से लेकिन आप अलंकारिक बोल रहे हम अपने आप को अलंकारिक रूप से ऐसे घोषित नहीं करते हम

249
00:17:01,760 --> 00:17:06,400
तो आर्य समाज तो हम भी अपने को केवल हम भी अपने सुनिए

250
00:17:06,400 --> 00:17:10,640
मैं बता रहा हूं चलिए मैं चलिए इसका उत्तर ले लीजिए ऐसा है कि जब आप

251
00:17:10,640 --> 00:17:14,800
लोगों के द्वारा पौराणिक शब्द का उपयोग किया जाता है पौराणिक तो वहां पर

252
00:17:14,800 --> 00:17:18,960
यह अप्रत्यक्ष रूप से छिपी हुई भावना होती है कि वेद के विरोधी वाले

253
00:17:18,960 --> 00:17:22,960
पौराणिक हैं। वेद को ना मानकर पुराण को जो है यह मान्यता ज्यादा देते

254
00:17:22,960 --> 00:17:27,200
हैं। वो तो बाद का विषय है। अपेक्षागत तो तो वहां पर वहां

255
00:17:27,200 --> 00:17:31,360
पर जो है इस तरह से प्रस्तुत करना पौराणिक तो वहां पर हमारे को वेद

256
00:17:31,360 --> 00:17:35,360
विरोधी रूप से सिद्ध करने का प्रयास वो दिखाई देता है। अब

257
00:17:35,360 --> 00:17:37,440
दूसरी बात यह है मूल विषय

258
00:17:37,440 --> 00:17:41,520
ये आ जाता है कि अलंकार की अलंकार की जो बात है

259
00:17:41,520 --> 00:17:45,600
अलंकार शब्द कहीं छिपा हुआ नहीं है। अलंकार शब्द का उपयोग आपके यहां भी

260
00:17:45,600 --> 00:17:50,080
खूब किया गया है और अलंकार शब्द का उपयोग

261
00:17:50,080 --> 00:17:54,080
एक मिनट 1 मिनट अलंकार शब्द हम आपको क्यों दे रहे हैं? क्योंकि आपने कई जगह

262
00:17:54,080 --> 00:17:58,080
भगवान की जहां चमत्कारों की बात आती है वहां अलंकार कह दिया है। शणाचार्य जी

263
00:17:58,080 --> 00:18:02,160
ने वेदों में अलंकार के ऊपर पूरी पुस्तक लिखी हुई है। अरे मैं बोलिए नहीं मैं ये कह

264
00:18:02,160 --> 00:18:06,400
वो मुझे पता है कि अलंकार में पुस्तक लिखी है। मगर मैं यह कह रहा हूं कि आपकी

265
00:18:06,400 --> 00:18:10,560
वो जो चीज यानी आप स्वीकार कर रहे हैं ना। आप मेरा

266
00:18:10,560 --> 00:18:14,560
भाई अलंकार अलंकार का उपयोग करना आप दोष दृष्टि से नहीं देख रहे

267
00:18:14,560 --> 00:18:18,560
ना। तो जब दोष दृष्टि से नहीं देख रहे हैं तो अलंकारी समाज से दिक्कत

268
00:18:18,560 --> 00:18:22,720
क्या है? मैं उसका उत्तर दे रहा हूं। अब देखिए अभी आप बोल रहे थे मैं चुप था। अभी आप सुनिएगा।

269
00:18:22,720 --> 00:18:27,040
देखिए पॉइंट यह है। आप चुप नहीं थे। आपने बीच में दो बार बोला साचार साहणाचार।

270
00:18:27,040 --> 00:18:31,040
आप नहीं मैं अभी हां तो दो बार आप भी टोक लेना कोई दिक्कत नहीं। वस्तु तो मैं चुप ही था ना। मतलब जो

271
00:18:31,040 --> 00:18:35,200
आप जो पैरामीटर्स आप तय करोगे कितनी बार अगर टोकना है तो वो भी

272
00:18:35,200 --> 00:18:39,280
आप ही तय करोगे। चलो आप चार बार टोक लेना। आप चार बार टोक लेना। मैं अपनी बातें क्लियर

273
00:18:39,280 --> 00:18:44,160
कर दूं कि आप जब हमें पौराणिक देता हूं ना। नहीं वो वो मैं

274
00:18:44,160 --> 00:18:48,480
प्रश्न क्लियर कर दूं जिससे आप क्लियर उत्तर दूं। आप जो हमें पौराणिक

275
00:18:48,480 --> 00:18:52,480
कहते हो वह वेद की अपेक्षाकृत पुराण को मानने वाले के रूप

276
00:18:52,480 --> 00:18:56,640
में हमें प्रस्तुत करते हो। दोष दृष्टि से देखते हो। जबकि पौराणिक होना हमने भी स्वीकार

277
00:18:56,640 --> 00:19:00,880
किया है। मगर दोष युक्त रूप में नहीं स्वीकार किया है। उसी तरीके से आपके

278
00:19:00,880 --> 00:19:05,120
यहां पर भी अलंकार को स्वीकार किया गया है। मगर दोष दोष युक्त तरीके से स्वीकार

279
00:19:05,120 --> 00:19:09,200
नहीं किया गया आपके यहां। मगर हम आपको उसी रूप में कटाक्ष प्रस्तुत करते

280
00:19:09,200 --> 00:19:13,200
हैं कि जिस तरीके से हमारे यहां पुराण शब्द होने के कारण आप हमें पौराणिक रूप से

281
00:19:13,200 --> 00:19:17,280
दोष युक्त बता रहे हो। उसी उसी तरीके से आपके अलंकार शब्द

282
00:19:17,280 --> 00:19:21,520
होने के कारण हम आपको अलंकारी होने के रूप में दोष युक्त बता रहे हैं। अब आप अपना उत्तर

283
00:19:21,520 --> 00:19:25,600
प्रदर्शन ठीक है देखिए अब बात ये है कि जब आप अपने आप की पहचान बनाते

284
00:19:25,600 --> 00:19:29,680
हैं बताते हैं इनकी पहचान बताते हैं। ठीक है? तो आप पोस्टर में ये लिखते हैं

285
00:19:29,680 --> 00:19:34,000
सनातन आर्य वैदिक पौराणिक हिंदू ऐसे करके आप लिखते हैं इस टाइप

286
00:19:34,000 --> 00:19:38,000
ऐसा नहीं है। नहीं है हर जगह ऐसा नहीं है। आपने अगर लिया होगा तो

287
00:19:38,000 --> 00:19:42,320
उसको मैं मना नहीं कर रहा हूं। देखिए खुद ही नियम बना के खुद ही भंग कर दे रहे हैं। ऐसे थोड़ी है। नहीं

288
00:19:42,320 --> 00:19:46,480
नहीं खुद ही नियम नहीं हर जगह ऐसा नहीं है कि सनातन वैदिक कार्य पौराणिक

289
00:19:46,480 --> 00:19:50,480
हिंदू आप अपनी बारी में उत्तर दे सकते हैं ना शिवश क्या है यह ऐसे थोड़ी होती

290
00:19:50,480 --> 00:19:54,560
है आप गलत तथ्य के ऊपर जब बात कर रहे हैं तो उस तथ्य को आपको ऐसे लेना होगा

291
00:19:54,560 --> 00:19:58,560
जैसे मैंने अभी शुरू अभी मैंने दो मिनट पहले एक बात कही थी जी जब मैं चुप हो जाऊंगा तो आप

292
00:19:58,560 --> 00:20:02,560
इसका उत्तर दे दीजिएगा ना क्या हल बढ़ा है इसमें इतनी अच्छा चलिए बोलिए

293
00:20:02,560 --> 00:20:06,560
हां अब बात ये है कि आप अपनी पहचान के रूप में सनातनी

294
00:20:06,560 --> 00:20:07,520
आर्य हिंदू

295
00:20:07,520 --> 00:20:12,640
वैदिक पौराणिक ये शब्दों का प्रयोग करते अपनी पहचान के रूप में ठीक हम

296
00:20:12,640 --> 00:20:16,880
जो केवल ऋषि दयानंद के शिष्य हैं वो अपने आप को ठीक है वैदिक धर्मी

297
00:20:16,880 --> 00:20:20,880
बोल देते हैं या ऋषि दयानंद के शिष्य बोल देते हैं या जो आर्य समाज संस्था से जुड़े हुए लोग

298
00:20:20,880 --> 00:20:25,120
हैं ठीक है वो अपने आप की पहचान आर्य बोलते हैं ठीक है और सत्य सनातन

299
00:20:25,120 --> 00:20:29,120
वैदिक धर्मी बोलते हैं और आर्य समाज ही बोलते हैं अपने आप को ठीक है तो

300
00:20:29,120 --> 00:20:33,200
बात ये है कि एक पक्ष आपका है जो अपने आपको इस फलाना नाम से कह रहा है एक पक्ष

301
00:20:33,200 --> 00:20:37,280
दूसरा है जो फलाना नाम से अपने आप को कह रहा है ठीक है अब बात ये है कि आर्य समाजियों ने

302
00:20:37,280 --> 00:20:41,600
जो नाम आपने उठाया उसी नाम में से ही पकड़ करके आपको सम्मान संबोधित किया

303
00:20:41,600 --> 00:20:45,680
तो बात तो ये होनी चाहिए कि आप भी आर्य समाज जी या महस के शिष्य जो

304
00:20:45,680 --> 00:20:49,920
अपने नाम से अपने को संबोधित कर रहे उसी में से भी कोई पॉइंट पॉइंट उठा के करते तो वो संगति

305
00:20:49,920 --> 00:20:54,080
बैठती। ठीक है? अब आपने क्या किया? इन्होंने तो आपको आपके नाम से बोला जो आप पोस्टर

306
00:20:54,080 --> 00:20:58,320
में लिख रहे हो। आपने क्या किया? आपने उठाई किताबें। आपने देखा अच्छा किताबों के अंदर अलंकार

307
00:20:58,320 --> 00:21:02,320
मान रखा है। अलंकारी बोल दो। अलंकारी समाधि बोल दो। ठीक है? फिर यही काम अगर

308
00:21:02,320 --> 00:21:06,480
कल को ये करेंगे कि आपके आपके उसमें से उठा के पुराणों में से कुछ

309
00:21:06,480 --> 00:21:10,560
शब्द है इतना लीला इत्यादि वो सब उठा करके लीला समाधि ये कुछ भी तो वो ठीक नहीं बैठेगा ना

310
00:21:10,560 --> 00:21:15,760
आपने आप जो पोस्टर में नाम लिख के घूम रहे हो वही नाम से बोला गया है तो ये जो पोस्टर

311
00:21:15,760 --> 00:21:19,760
अब आपने बोल रहा है अब आपने बोल लिया जी जी बिल्कुल बिल्कुल बोलिए

312
00:21:19,760 --> 00:21:22,640
पोस्टर में पहली बात केवल पौराणिक कहां पर लिखा

313
00:21:22,640 --> 00:21:26,800
हुआ है इस बात से मुझे कोई बहुत ज्यादा ही नहीं चाहिए केवल पौराणिक है नहीं तो

314
00:21:26,800 --> 00:21:31,680
सनातन वैदिक आर्य हिंदू लिखा होगा ना पोस्टर में केवल पौराणिक

315
00:21:31,680 --> 00:21:36,240
होगा

316
00:21:36,240 --> 00:21:40,240
अब देखिए अब आपके अंदर हड़बड़ाहट आ रही है अब मुझे पूरा बोलने दीजिए फिर

317
00:21:40,240 --> 00:21:44,240
आप अपनी बारी आने पे जवाब दीजिएगा ना जैसे अभी आपने मैं किसी

318
00:21:44,240 --> 00:21:48,320
तथ्य को सही करना चाह रहा था तो आपने मुझे रोक दिया अब आप जाइए हां

319
00:21:48,320 --> 00:21:52,320
हां बिल्कुल बिल्कुल बोलिए तो पोस्टर में पहली बात तो किसी ने

320
00:21:52,320 --> 00:21:56,400
अगर पौराणिक हिंदू लिखा है तो वो कोई ऐसा सिद्धांत नहीं जिसको

321
00:21:56,400 --> 00:22:01,120
सार्वभौम दृष्टि से स्वीकारा जा सके दूसरी बात आपका ये कहना है कि भैया

322
00:22:01,120 --> 00:22:05,440
किसी ने हमने अपने आप को अलंकारी घोषित नहीं किया इसलिए या फिर अपने नाम पहचान

323
00:22:05,440 --> 00:22:09,520
के रूप में अलंकार स्वीकार नहीं किया है। मगर ऐसा नहीं है। किया है

324
00:22:09,520 --> 00:22:13,600
निष्ठा विद्या अलंकार बहुत सारे अलंकार वाले लोग आपके यहां

325
00:22:13,600 --> 00:22:17,920
मिल जाएंगे जो अलंकार लगाते हैं। पहली बात। दूसरी बात यह है कि कुल मिलाकर

326
00:22:17,920 --> 00:22:21,920
के आपका कहना यह है अब अलंकार नाम वाले

327
00:22:21,920 --> 00:22:25,920
अगर मिल जाएंगे तो आप अगर कहोगे कि पूरा नाम लो तो फिर हम भी कहेंगे कि भैया

328
00:22:25,920 --> 00:22:30,000
पौराणिक सनातन वैदिक आर्य पौराणिक हिंदू लो पूरा। यह तो

329
00:22:30,000 --> 00:22:34,080
रही यह बात। चौथी बात यह है कुल मिलाकर आपने यह कहा है कि हमने

330
00:22:34,080 --> 00:22:37,920
अपनी पहचान के रूप में अह क्या कहते हैं? जो शब्द उपयोग

331
00:22:37,920 --> 00:22:41,920
में नहीं लिया है वह शब्द आप हमसे ना जोड़िए। ठीक। तो फिर हमने अपनी

332
00:22:41,920 --> 00:22:46,160
पहचान के रूप में क्या पोप पांडे ये सब लिया है क्या? वो शब्द हमसे क्यों जोड़े

333
00:22:46,160 --> 00:22:50,240
गए हैं? हो गया। हां बोलिए।

334
00:22:50,240 --> 00:22:54,320
ठीक है। अब देखिए पहले आपने आपने इसके काउंटर में की जो आप पहचान के

335
00:22:54,320 --> 00:22:58,320
रूप में अगर पौराणिक लिखते हो। ठीक है? तो आपने बोला कि हम केवल पौराणिक लिखते दिखाओ।

336
00:22:58,320 --> 00:23:02,320
तो मेरा क्लेम नहीं केवल पौराणिक लिखते हैं। ठीक है? अगर आप आर्य समाजी में

337
00:23:02,320 --> 00:23:06,400
से केवल हमें समाजी समाज हमें नहीं मतलब जो समाजी होते हैं, आर्य समाजी होते हैं, केवल समाजी

338
00:23:06,400 --> 00:23:10,400
समाजी बोलते तो भी उसमें दोष नहीं आता। ठीक है? हां वस्तु तो वो अधूरा था। अस्तुत्व अधूरा है

339
00:23:10,400 --> 00:23:14,400
क्योंकि आप समाजी वर्ड भी बहुत बार यूज करते हो। उसमें बहुत कोई दिक्कत नहीं क्योंकि वो अधूरा है लेकिन

340
00:23:14,400 --> 00:23:18,480
उसे पता नहीं चल रहा कौन से समाज की बात हो रही है। ठीक है? लेकिन फिर भी वो गलत वे में

341
00:23:18,480 --> 00:23:22,480
नहीं है। अब उसके अंदर विषय है कि आपने काउंटर में बोला कि बहुत सारे जो लोग

342
00:23:22,480 --> 00:23:26,480
हैं वो क्या कहते हैं अलंकार अपने सरनेम इत्यादि

343
00:23:26,480 --> 00:23:30,720
इस टाइप के जो शब्द है विद्या अलंकारी इस टाइप के शब्द प्रयोग करते हैं। ठीक है? पहली बात सारे

344
00:23:30,720 --> 00:23:34,800
लोग नहीं करते। कोई विद्या वाचस्पति लिखता है। कोई तर्क रत्न लिखता है।

345
00:23:34,800 --> 00:23:38,960
ठीक है? कोई इस टाइप के नाम लिखता है तो जो इस टाइप के नाम पर्सनल बेसिस

346
00:23:38,960 --> 00:23:42,960
पर रख रहा है संस्थानुगत या ऋषि दयानंद अपने अनुयायियों

347
00:23:42,960 --> 00:23:46,960
को इस नाम से संबोधित नहीं कर रहे हैं या संस्थानुगत या कलेक्टिवली वो अपने नाम को

348
00:23:46,960 --> 00:23:51,200
इस तरह से घोषित नहीं कर रहे हैं। जैसे किसी एक व्यक्ति का नाम विद्या वाचस्पति मिश्र

349
00:23:51,200 --> 00:23:53,200
है इत्यादि है। ठीक है? तो सारे

350
00:23:53,200 --> 00:23:57,360
सारे लोगों को कम्युनिटी बेस को विद्या वाचस्पति बोलना तर्कसंगत नहीं है। युक्ति संगत

351
00:23:57,360 --> 00:24:01,360
नहीं है। उसी प्रकार से अगर अगर कोई अलंकार संबंधी किसी ने नाम रखा तो

352
00:24:01,360 --> 00:24:05,360
उसको बोलना ठीक है क्योंकि उसकी कुछ विशेषता होगी। उसमें कुछ दक्षता होगी। इस कारण से उसका

353
00:24:05,360 --> 00:24:09,760
ये नाम है। ठीक है? तो कम्युनिटी बेसिस पे आप अपने आप को एज अ पौराणिक रिकॉग्नाइज

354
00:24:09,760 --> 00:24:13,920
कर रहे हो। तो कम्युनिटी बेसिस पे अगर ये अपने को आर्य समाज इत्यादि इत्यादि नामों से रिकॉग्नाइज

355
00:24:13,920 --> 00:24:17,920
कर रहे हैं तो युक्ति संगत तो यही है कि आप उनको उसी नाम से बोलो। बात तो नाम

356
00:24:17,920 --> 00:24:21,920
की ही है। बोलिए। हो गया। जी जी। अच्छा पहली

357
00:24:21,920 --> 00:24:26,080
बात तो यह है कि जैसे आपने कहा कि वो पर्टिकुलर कुछ लोगों ने अपना नाम लिखा होता

358
00:24:26,080 --> 00:24:30,320
है। ठीक है? तो मैं भी यही कहूंगा कि अगर कहीं पर केवल पौराणिक

359
00:24:30,320 --> 00:24:34,480
लिखा हुआ है तो पर्टिकुलर कुछ लोगों ने लिखा हुआ है। उसको आप पूरे

360
00:24:34,480 --> 00:24:38,560
समुदाय से नहीं देख सकते हो, जोड़ सकते हो। दूसरी बात यह है कि आपका

361
00:24:38,560 --> 00:24:43,200
यह कहना है कि क्या कहते हैं आपके

362
00:24:43,200 --> 00:24:47,600
ये दूसरी बात यह है कि आवश्यक

363
00:24:47,600 --> 00:24:51,680
नहीं होता है कि जो व्यक्ति अपने नाम से अपने आप को

364
00:24:51,680 --> 00:24:55,680
जनवाना चाहता है। उसी नाम से उसको दुनिया देखे। कई

365
00:24:55,680 --> 00:24:59,760
बार ऐसे होता है। यहां तक कि ये जो दयानंद जी हैं

366
00:24:59,760 --> 00:25:04,160
उन्होंने अपना जो आर्य समाज नाम लिखा है समाज है ना। यह समाज

367
00:25:04,160 --> 00:25:08,960
शब्द बहुत ज्यादा शास्त्रों में महत्वपूर्ण तरीके से तो नहीं आया है।

368
00:25:08,960 --> 00:25:13,040
ठीक है? मगर फिर भी उन्होंने अपनी विचारधारा को एक पुष्टि देने के

369
00:25:13,040 --> 00:25:17,040
लिए वहां पर अपने अपने आप को जोड़ा है कि भैया आर्य समाजी

370
00:25:17,040 --> 00:25:21,600
हैं हम। ठीक है? हम्म उसी तरीके से अगर आपकी विचारधारा में अलंकार

371
00:25:21,600 --> 00:25:25,920
आया हुआ है और हमें लगता है हमारी दृष्टि से कि वो आपकी मूल एक और रीड की हड्डी

372
00:25:25,920 --> 00:25:30,080
अलंकार हमारी दृष्टि वो फिर शास्त्रार्थ का विषय हो जाएगा कि अलंकार सही

373
00:25:30,080 --> 00:25:34,480
है कि गलत है वो बाद की बात है। मगर यदि हम ऐसा मानते हैं कि आपकी विचारधारा

374
00:25:34,480 --> 00:25:38,560
में अलंकार एक बहुत महत्वपूर्ण वर्ड है तो उस नाम से भी आपकी

375
00:25:38,560 --> 00:25:42,880
पहचान हो सकती है। आवश्यक नहीं कि आपने जिस नाम को अपने लिए नियुक्त

376
00:25:42,880 --> 00:25:47,120
किया है वही आपकी पहचान हो। दुनिया आपको उस नाम से भी जान सकती है

377
00:25:47,120 --> 00:25:51,120
जो आपकी अदर चीजें दुनिया को दिखाई देती है कि भैया ये इससे

378
00:25:51,120 --> 00:25:55,280
संबंधित है तो इसका ये नाम है। अब दूसरी दूसरी बात

379
00:25:55,280 --> 00:25:59,280
यह है दूसरी बात यह है कि आपने कहा अह वो

380
00:25:59,280 --> 00:26:03,360
वाला उत्तर मैं दे ही चुका हूं कि भैया ये एक व्यक्ति के कर

381
00:26:03,360 --> 00:26:07,440
देने से या एक व्यक्ति द्वारा अपना नाम लिखे जाने की वजह से वहां पर आप उसको

382
00:26:07,440 --> 00:26:11,440
सब पर नहीं थोप सकते। तो किसी एक व्यक्ति ने अपने आप को केवल पौराणिक

383
00:26:11,440 --> 00:26:15,760
माने मुझे जानकारी नहीं है किसने लिखा होगा। मगर किसी ने अपने केवल पौराणिक

384
00:26:15,760 --> 00:26:19,920
हिंदू लिखा होगा तो वो पौराणिक हिंदू किसी एक व्यक्ति के द्वारा कहा गया

385
00:26:19,920 --> 00:26:23,920
है। हम तो अपने को सनातन वैदिक आर्य हिंदू लिखते हैं और हम लोग

386
00:26:23,920 --> 00:26:24,480
वैदिक

387
00:26:24,480 --> 00:26:28,480
में ही वेदों के अर्थ में ही पुराण को लेते हैं तो हमें अलग से पौराणिक हिंदू कहने

388
00:26:28,480 --> 00:26:32,880
की आवश्यकता नहीं है। मगर क्योंकि हम पुराण को मान रहे हैं तो आप अगर हमें वैदिक पौराणिक

389
00:26:32,880 --> 00:26:36,880
आर्य हिंदू कहेंगे तो भी हमें कोई आपत्ति नहीं होगी। मगर आप पौराणिक कहते

390
00:26:36,880 --> 00:26:40,960
हुए वेद के विरोध में खड़ा करते हुए हमारी पहचान को प्रस्तुत करते

391
00:26:40,960 --> 00:26:44,960
हो तो हमें उस पर आपत्ति होती है और 100 की सीधी अंत में एक बात आ गई कि

392
00:26:44,960 --> 00:26:49,040
जब आपने यह कहा कि क्या हम अपने आप को उस रूप में प्रस्तुत करते हैं? तो हम

393
00:26:49,040 --> 00:26:53,120
अपने आप को वेद विरोधी पौराणिक के रूप में प्रस्तुत नहीं करते तो

394
00:26:53,120 --> 00:26:57,120
फिर आप अपनी बात का ही खंडन करते हुए हमें वेद विरोधी पौराणिक के रूप में क्यों

395
00:26:57,120 --> 00:27:01,200
प्रस्तुत करते हैं? और यदि करते हैं तो यदि करते हैं तो फिर हमारे

396
00:27:01,200 --> 00:27:05,200
अलंकार समाज को आपको लेना होगा। ठीक है मैं उत्तर देता हूं। अब देखिए पहली बात

397
00:27:05,200 --> 00:27:09,280
ये है कि आपने बोला कि कोई कोई व्यक्ति अपने आप को पौराणिक बोलता है इसीलिए हम आपको

398
00:27:09,280 --> 00:27:13,360
ये तो आपकी बात दुर्जन तोष न्याय से स्वीकार की है। मैंने तो कई पोस्ट में अभी

399
00:27:13,360 --> 00:27:17,520
तक उसी न्याय से उत्तर दे रहा हूं। उसी न्याय से उत्तर दे रहा हूं। ठीक है? सुनिए

400
00:27:17,520 --> 00:27:21,520
धैर्यपूर्वक। अब बात ये है कि अगर आप ये कहते कोई कोई व्यक्ति क्योंकि उसमें देखना

401
00:27:21,520 --> 00:27:25,680
पड़ेगा ना कि आप सही बोल रहे हो या गलत बोल रहे हो। ठीक है? आपको मैं पोस्टर की फोटो भेजूंगा।

402
00:27:25,680 --> 00:27:29,680
आपके WhatsApp पे इसी वाले नंबर पे WhatsApp भेजूंगा। पूरी शंकराचार्य जी की फोटो

403
00:27:29,680 --> 00:27:34,080
लगी हुई है। उसमें वो अपने उसमें वो सनातनी आर्य पौराणिक

404
00:27:34,080 --> 00:27:38,080
हिंदू ऐसे लिखते हैं। वो पूरा टाइटल उन्होंने लिखा हुआ है। तो पूरा लिखा है ना यही तो

405
00:27:38,080 --> 00:27:39,920
बात है। मैं पूरा बोल दूं

406
00:27:39,920 --> 00:27:43,920
मैं चुप था। पूरा बोलिए। ठीक है। मैंने लंबा सुना था आपका। ठीक है। अब वो पूरा

407
00:27:43,920 --> 00:27:48,000
लिखते हैं। पूरे शंकराचार्य जी की फोटो लगी है। एक नहीं दो पोस्टर एक में फोटो लगी हुई है। दूसरे में नहीं लगी

408
00:27:48,000 --> 00:27:52,240
हुई है। लेकिन उनका नाम गाम वो सारा कुछ उधर वो दूसरे वाले पोस्टर में भी आ जाता है। ठीक है? शंकराचार्य

409
00:27:52,240 --> 00:27:56,560
इत्यादि इन सब मतलब जो है नाम आता है। ठीक है? तो

410
00:27:56,560 --> 00:28:00,560
यहां से आप ये बच के नहीं निकल सकती नहीं किसी एक व्यक्ति ने यूज़ कर लिया। किसी एक

411
00:28:00,560 --> 00:28:04,640
व्यक्ति ने यूज़ कर लिया तो तो वही वही तर्क आता है जो मैंने अपने लिए दिया था। ठीक है?

412
00:28:04,640 --> 00:28:08,640
तो लेकिन क्योंकि आपने अपने लिए जो मैंने बोला जो मैंने बोला था ना कि एक

413
00:28:08,640 --> 00:28:12,640
व्यक्ति अगर अपना नाम से वाचस्पति इत्यादि या कुछ तर्क रत्न इत्यादि लिख रहा

414
00:28:12,640 --> 00:28:16,720
है तो ये तो मेरे कम्युनिटी की बात कर रहे हैं ना अब ये तो फिर नहीं वो सिद्ध नहीं हो रहा ना।

415
00:28:16,720 --> 00:28:20,720
आप अपनी कम्युनिटी के लिए यूज़ कर रहे हैं इसीलिए सिद्ध नहीं हो रहा। अब मैं पूरा कर देता हूं अपनी

416
00:28:20,720 --> 00:28:24,720
बात ठीक है। क्योंकि आप कंप्लीट कम्युनिटी के लिए पौराणिक शब्द का प्रयोग कर

417
00:28:24,720 --> 00:28:28,880
रहे हैं। बहुत सारे शब्द प्रयोग कर रहे हैं। उनमें से जो एक है वो पौराणिक भी आपका शब्द आया हुआ

418
00:28:28,880 --> 00:28:32,960
है। ठीक है। एक एक इधर से यहां पर बात उठाई। आप ये गलत कह रहे हैं कि नहीं किसी एक व्यक्ति

419
00:28:32,960 --> 00:28:37,040
ने बोला नहीं हमारे पास में प्रमाण है कि आपका कंप्लीट कम्युनिटी के लिए बोल रहे हैं। एक बात ठीक है।

420
00:28:37,040 --> 00:28:41,040
दूसरी बात ये आती है। दूसरी बात ये आती है। की जो आप कह रहे

421
00:28:41,040 --> 00:28:45,120
थे कि आर्य समाज मतलब थोड़ा समय पॉइंट स्लिप भी हो गया मेरे दिमाग से

422
00:28:45,120 --> 00:28:49,280
क्योंकि दो-तीन बातें निकल करके आ गई थी साथ-साथ में आपके मन से। तो उसमें

423
00:28:49,280 --> 00:28:53,280
मतलब मुख्य विषय यही है और बाकी अगर हम अपने आप को हां

424
00:28:53,280 --> 00:28:55,200
हां आपने बोला था कि

425
00:28:55,200 --> 00:28:59,280
कई बार क्या होता है कि व्यक्ति क्या करता है कि अपने आप से जिस नाम को जानता है जरूरी नहीं व्यक्ति

426
00:28:59,280 --> 00:29:03,440
उसी से बोले सामने वाला व्यक्ति अपने हिसाब से करता है। ठीक है यानी

427
00:29:03,440 --> 00:29:07,600
आप इस चीज को स्वीकार कर रहे हो आप इस चीज को स्वीकार कर रहे हो यहां पर आपने स्वीकार

428
00:29:07,600 --> 00:29:11,600
कर लिया क्लियर कट कि आप अपने आप को पौराणिक इत्यादि इत्यादि नामों से

429
00:29:11,600 --> 00:29:15,920
संबोधित करते हो आप जो आर्य समाजी लोग हैं वो अपने को आर्य समाजी नाम संबोधित करते हैं लेकिन

430
00:29:15,920 --> 00:29:20,080
आपने उन्हें जानबूझकर के उस नाम से ना बोल करके जिससे वो अपने को संबोधित

431
00:29:20,080 --> 00:29:24,160
करते हैं अपने मन से ये शब्द गढ़ा ठीक है विरोध

432
00:29:24,160 --> 00:29:28,240
इसी पे ही था जी विरोध इसी पे था कि आपने अपने मन से पूरा बोल दूं

433
00:29:28,240 --> 00:29:32,320
मैं पूरा बोल दूं आपने अपने मन से एक शब्द गढ़ा अपने मन से एक शब्द गढ़ा और शब्द गढ़

434
00:29:32,320 --> 00:29:36,320
के आपने आक्षेपित किया कि नहीं तुम तो यह हो तुम तो यह हो आपने ये

435
00:29:36,320 --> 00:29:40,320
आक्षेपित किया इसी इसी हिसाब से हमने जो है वो इसीलिए मैंने बोला था

436
00:29:40,320 --> 00:29:44,560
कि अगर आप मुझे अलंकारी बार-बार बोलते हो आक्षेपित करके बोलते हो ठीक है

437
00:29:44,560 --> 00:29:48,640
तो मैं उसे ठीक मैं उसे उसी प्रकार ठीक नहीं मानता जिस प्रकार से मैंने

438
00:29:48,640 --> 00:29:52,720
आपको कुछ बोल दिया कुछ ठीक है या लिख दिया तो जिस तरह से आप उसे गलत मानते

439
00:29:52,720 --> 00:29:57,040
हो उसी प्रकार से मैं भी गलत मानता हूं क्योंकि मैं अपने को रिकॉग्नाइज नहीं कर रहा है

440
00:29:57,040 --> 00:30:01,200
इत्यादि में जोकर कहां से जुड़ा हुआ है प्रत्यक्ष रूप जोकर

441
00:30:01,200 --> 00:30:05,200
किसे बोलते प्रत्यक्ष रूप से कहां से जुड़ा हुआ है? शब्द है हमारे

442
00:30:05,200 --> 00:30:09,200
यहां जोकर आप बताइए हमारे ग्रंथों में शब्द है जोकर? नहीं आप बताइए

443
00:30:09,200 --> 00:30:10,560
जोकर किसे बोलते हैं? जो जोक

444
00:30:10,560 --> 00:30:14,560
करता है उसे जोकर बोलते हैं। नहीं शब्द है कि नहीं जोकर? बात ये है ऐसे तो फिर

445
00:30:14,560 --> 00:30:18,560
जो गलत करता है। कब क्लेम किया कि शब्द है। ऐसे तो जो पाप करता है वो पापी होता है। तो

446
00:30:18,560 --> 00:30:22,560
मैं आपको फिर पापी नाम से स्वीकार बोलने लगूं। मैं तय करूंगा कि आपने गलत किया

447
00:30:22,560 --> 00:30:27,120
कि सही किया। आप

448
00:30:27,120 --> 00:30:31,360
मेरी चीजों को जो मेरी चीजों को आप जो करार देते

449
00:30:31,360 --> 00:30:35,360
हुए मुझे जोकर कहना उचित ठहरा करते हो 10 फिल्मों के नाम लेते हो मैं

450
00:30:35,360 --> 00:30:39,360
कह रहा हूं मैं मैं मेरे हिसाब से आप बात करते हैं

451
00:30:39,360 --> 00:30:43,360
मेरे हिसाब से आप बात करते हैं कौन से देखिए अब अब मैं अब

452
00:30:43,360 --> 00:30:47,360
मैं बोलना शुरू करूं हां आप बोल ही रहे हैं अब तो मैं मेरे पीछे कूद गया था आप

453
00:30:47,360 --> 00:30:51,520
बोलिए नहीं आपने पूरा पूरा बोल लिया था ना मैंने अपनी बात शुरू की थी जोकर कहां लिखा

454
00:30:51,520 --> 00:30:55,520
हुआ है अब आपका कहना अब आपका कहना है कि आप जो करते हो इसलिए

455
00:30:55,520 --> 00:30:59,760
आपको जोकर कहा पहली बात हमने अपने कहीं पर भी जोक इत्यादि

456
00:30:59,760 --> 00:31:03,840
का कोई नहीं लिया है। क्या कहते हैं संदर्भ दूसरी बात यह है

457
00:31:03,840 --> 00:31:07,920
कि अगर इस तरीके से आपको निर्णय करना है कि हम क्या करते हैं उसके आधार पे

458
00:31:07,920 --> 00:31:11,920
हमारा नाम तय करना है तो मैं यह तय करता हूं कि आपके यहां पर जो

459
00:31:11,920 --> 00:31:15,920
होने वाले विवाह इत्यादि हैं वो सब अवैध हैं या फिर आप आप जो

460
00:31:15,920 --> 00:31:20,000
है पाप करते हैं। कई कारणों से यदि हमारे अनुसार

461
00:31:20,000 --> 00:31:24,080
आप पाप करते हैं तो कोई नहीं पड़ता 1 मिनट 1 मिनट

462
00:31:24,080 --> 00:31:25,600
1 मिनट 1 मिनट 1 मिनट तो

463
00:31:25,600 --> 00:31:29,680
क्या आपके यहां की जो संताने होंगी उनके लिए मुझे अवैध संतान उपयोग में

464
00:31:29,680 --> 00:31:34,000
लेना या फिर आप जैसे आपके लिए पापी इत्यादि

465
00:31:34,000 --> 00:31:38,000
शब्द शब्दों को यूज़ में लेना क्या वो मान लिया जाए। दूसरी बात

466
00:31:38,000 --> 00:31:42,320
आपने एक कही थी कि वह पूरी कम्युनिटी के लिए नहीं किया है। ठीक है?

467
00:31:42,320 --> 00:31:46,560
आपने कहा था कि भाई वह किसी व्यक्ति ने अपने लिए यूज़ किया है। पहली बात

468
00:31:46,560 --> 00:31:50,720
कि आर्य समाजियों द्वारा अपने लिए अलंकार नाम में फिट

469
00:31:50,720 --> 00:31:54,880
कर लेना। क्या इस बात से आर्य समाज को आपत्ति हुई है? क्या आर्य समाज

470
00:31:54,880 --> 00:31:59,120
ने उसका विरोध किया है? अगर विरोध नहीं किया है तो उसका मौन समर्थन प्राप्त

471
00:31:59,120 --> 00:32:03,200
है। यानी कि आर्य समाजी लोग अपने आप को अलंकार कहते

472
00:32:03,200 --> 00:32:07,280
हैं। अपने नाम में अलंकार लगाते हैं। तो वो फिर कम्युनिटी से जुड़ गया।

473
00:32:07,280 --> 00:32:11,280
क्योंकि कम्युनिटी ने उस बात पर कोई आपत्ति नहीं जताई कि भाई तुम अपने आप को अलंकारी क्यों कह रहे

474
00:32:11,280 --> 00:32:15,360
हो? अलंकार क्यों लगा रहे हो? दूसरी बात यह है कि किसी

475
00:32:15,360 --> 00:32:19,520
एक व्यक्ति के द्वारा अगर यह कह दिया जाएगा कि हम

476
00:32:19,520 --> 00:32:23,520
यह लिख दिया जाएगा पौराणिक तो आपने मान लिया कि वो पूरी कम्युनिटी

477
00:32:23,520 --> 00:32:27,840
के लिए उसने किया उसको उस व्यक्ति की गलती नहीं माना जाएगा कि उसने वैदिक वैदिक पौराणिक

478
00:32:27,840 --> 00:32:31,840
क्यों नहीं लिखा। मगर उस क्योंकि उसने कहीं पूरी कम्युनिटी के लिए

479
00:32:31,840 --> 00:32:36,080
पौराणिक लिख दिया है तो इसलिए उसके द्वारा पूरी कम्युनिटी को यह मान लिया जाएगा

480
00:32:36,080 --> 00:32:40,080
कि भाई तुम्हारी कम्युनिटी वाले तुम तुम्हारी कम्युनिटी के लिए पौराणिक शब्द का उपयोग

481
00:32:40,080 --> 00:32:40,880
करते हैं

482
00:32:40,880 --> 00:32:44,880
इसलिए हमने आपको पौराणिक कहा। दूसरी बात ये है

483
00:32:44,880 --> 00:32:48,960
कम से कम पॉइंट रखे उत्तर देने में समस्या होगी। नहीं तो भाई अब

484
00:32:48,960 --> 00:32:54,640
पॉइंट्स बढ़ते जाते हैं। उसमें कोई दिक्कत नहीं। तीन पॉइंट हो चुके है वैसे तो

485
00:32:54,640 --> 00:32:58,800
नहीं उसमें बात ये आ जाती है ना कि अगर किसी व्यक्ति ने

486
00:32:58,800 --> 00:33:02,880
केवल पौराणिक के रूप में प्रस्तुत कर भी दिया है तो केवल पौराणिक

487
00:33:02,880 --> 00:33:06,880
के रूप में प्रस्तुत करते हुए उस व्यक्ति उस व्यक्ति की गलती ना मानते हुए उसको

488
00:33:06,880 --> 00:33:10,880
प्रमाण के रूप में उपयोग में लेना ये तो उचित नहीं है उसको आप मानिए जब हम बता

489
00:33:10,880 --> 00:33:15,120
रहे हैं आपको हम सनातन वैदिक आर्य हिंदू लिखते हैं वैदिक के रूप में पौराणिक

490
00:33:15,120 --> 00:33:19,200
भी होता है पर्यवसान पुराणों का भी तो अगर उसको आप अलग से इंगित

491
00:33:19,200 --> 00:33:23,360
कर भी देंगे तो भी कोई आपत्ति नहीं है और नहीं भी करेंगे तो भी कोई आपत्ति नहीं है। अंत

492
00:33:23,360 --> 00:33:27,680
की अंत की 100 की सीधी एक बात है क्या जो व्यक्ति लिखता है

493
00:33:27,680 --> 00:33:31,680
जिसके आपने पोस्टर देखे हैं क्या वह अपने आप को वेद विरोधी

494
00:33:31,680 --> 00:33:35,760
पौराणिक के रूप में प्रस्तुत करते हुए लिखता है नहीं लिखता है मगर आप

495
00:33:35,760 --> 00:33:39,760
पौराणिक जो लिखते हो वह वेद विरोधी के रूप में लिखते हो तो यहां

496
00:33:39,760 --> 00:33:43,760
पर भी जिस पहचान से व्यक्ति अपने आप को जनवाना नहीं चाहता है

497
00:33:43,760 --> 00:33:48,240
आप वही पहचान उपयोग में लेते हुए उसके लिए संबोधन कर रहे हो

498
00:33:48,240 --> 00:33:52,240
ठीक है सुनिए देखिए पहली बात पहली बात आपने इसमें कई सारी बातें बोली आपने बोला कि अगर मैं

499
00:33:52,240 --> 00:33:56,160
देखता मैं मैं चाहूंगा मैं जरा पुलिस स्टेशन पहुंच रहा हूं। अब आप

500
00:33:56,160 --> 00:34:00,320
एक लाइन सुन लीजिए ऐसा कर लीजिए आप मुख्य विषय मुझे बता

501
00:34:00,320 --> 00:34:04,400
दीजिए क्योंकि यह तो हमारा मुख्य विषय है हां बस मैं एक मिनट लेकर के फिर मैं मुख्य विषय

502
00:34:04,400 --> 00:34:08,400
पे आ जाऊंगा हम ठीक है आपने यहां पे बोला कि एक व्यक्ति ऐसा कुछ

503
00:34:08,400 --> 00:34:12,400
करता है ठीक है हमारे पास में प्रमाण है अगर वो एक व्यक्ति आप शंकराचार्य जी को मानते हैं तो कोई इशू नहीं क्योंकि शंकराचार्य की

504
00:34:12,400 --> 00:34:16,400
फोटो लगी थी अगली बात आपने बोला कि अगर मैं आपको पाप करता हुआ देखता हूं तो आपको मैं पापी मान

505
00:34:16,400 --> 00:34:20,480
सकता हूं। मैं ये कहता हूं कि उसी आधार पे आप अक्षय कुमार की फिल्मों के उदाहरण देते हैं।

506
00:34:20,480 --> 00:34:24,480
हर वीडियो के अंदर हंसी मजाक करते हैं। हंसी मजाक वाले उदाहरण देखो उस फिल्म में जैसा उसने ऐसा किया था ना

507
00:34:24,480 --> 00:34:28,560
इसीलिए ऐसा किया था। उसी आधार पे बोला फिर भी मैं उस चीज को सही नहीं मानते हुए उस चीज को सही

508
00:34:28,560 --> 00:34:32,560
नहीं मानते हुए मैं ये नहीं कहता कि मैंने सही कर दिया और आपने गलत कर दिया। इस बात को नहीं कहता। मैं यह

509
00:34:32,560 --> 00:34:36,720
कहता हूं कि जिस प्रकार आपने गलत किया उसी प्रकार मैंने गलत किया तो दोनों का

510
00:34:36,720 --> 00:34:40,960
दोष होने से मैं यह बात कहता हूं कि दोनों का दोष है। मैं यह नहीं कहता कि व्यवहारिक

511
00:34:40,960 --> 00:34:44,960
मर्यादा का उल्लंघन किया है। आपके पास समय आपके पास आपने बोला

512
00:34:44,960 --> 00:34:48,960
आपके पास समय कम है। मैं पूरा बोल देता हूं। श्रीमान जी आपने बोला समय कम है। मैं पूरा बोल देता हूं।

513
00:34:48,960 --> 00:34:53,120
बोलिए ठीक है। तो इसी इसी आधार पर मैं अपने आप को डिफेंड नहीं करता हूं। आपने बोला अगर आर्य समाज

514
00:34:53,120 --> 00:34:57,120
के अंदर आर्य समाज अगर आपको अपने आप को इसमें निषेध नहीं करते कि हम अलंकारिक

515
00:34:57,120 --> 00:35:01,120
नहीं है। पहली बात तो मैंने आपत्ति इस पे नहीं उठाई थी कि आप आर्य समाज को बोल तो मैंने आपत्ति उस

516
00:35:01,120 --> 00:35:05,120
पढ़े कि आप मेरे को बोल रहे हो। ठीक है? तो मैं तो आपत्ति उठा रहा हूं। मैं आपत्ति उठा रहा हूं। फिर

517
00:35:05,120 --> 00:35:09,280
आप कैसे बोल रहे हो? फिर भी मैं आपको कहता हूं कि चलो ठीक है मैंने आपको उल्टा बोला। आपने मेरे को उल्टा बोला। वहां

518
00:35:09,280 --> 00:35:11,360
पे दोनों की दोनों लोगों की बातें आ जाती है।

519
00:35:11,360 --> 00:35:15,440
ठीक है? आप अपने पक्ष में सफाई दोगे। मैं अपने पक्ष में सफाई देता रहूंगा। वो चीजें चलती रहेंगी। लेकिन

520
00:35:15,440 --> 00:35:19,520
इसी श्रृंखला में आगे बढ़ते हुए मैं ये कहता हूं कि इसको एक पॉजिटिव डायरेक्शन

521
00:35:19,520 --> 00:35:23,600
में लेके जाना ही समझदारी होगी। ठीक है? आपकी अच्छी बात मैं आपको बताता हूं।

522
00:35:23,600 --> 00:35:27,680
शिवश जी, आपकी अच्छी बात मैं आपको बता देता हूं। बहुत लोग विरोध करते हो लेकिन मैं देखता

523
00:35:27,680 --> 00:35:31,760
हूं कि आप तर्क वितर्क करके चर्चा करने में विश्वास रखते हो जो कि मेरे

524
00:35:31,760 --> 00:35:35,760
को ये अच्छी बात समझ में आई। ठीक है और इसी चीज में तर्क वितर्क और

525
00:35:35,760 --> 00:35:39,840
मैं आपसे क्यों बात कर रहा हूं क्योंकि खंडन मंडन करने वाले बहुत लोग हैं लेकिन हम मैं हर किसी से

526
00:35:39,840 --> 00:35:43,840
बात नहीं करता। मेरे को बात करने में रुचि आपसे केवल इसीलिए हुई क्योंकि तर्क

527
00:35:43,840 --> 00:35:47,920
वितर्क करने में आप रुचि रखते हो और तर्क वितर्क करने में मुझे भी बहुत गहरी रुचि है। बस इसीलिए

528
00:35:47,920 --> 00:35:52,240
मैं आपसे बातचीत कर रहा हूं। ठीक है और इसमें मैं शिव जी आपको यह बात कहना चाहता हूं

529
00:35:52,240 --> 00:35:56,240
कि अगर मेरा पक्ष सही है मेरा यानी जो मैं ऋषि को मानता हूं

530
00:35:56,240 --> 00:36:00,240
ठीक है और मैं उनकी बातों को रख रहा हूं सामने तो अगर मेरा पक्ष सही है तो आप

531
00:36:00,240 --> 00:36:04,400
मेरे मत को स्वीकार करो अगर आपका पक्ष सही है तो मैं आपके मत को स्वीकार करूं सहर्ष से स्वीकार

532
00:36:04,400 --> 00:36:08,400
करूं बताइए हम देखिए पहली बात

533
00:36:08,400 --> 00:36:12,400
तो ये है कि ऐसा मुझे आभास हो रहा है कि हमारी बहुत जल्द

534
00:36:12,400 --> 00:36:16,560
जो दार्शनिक चीजें हमारे बीच में मतभेद हैं उनके

535
00:36:16,560 --> 00:36:21,280
निमित्त हमारे और आपके बीच में एक चर्चा सुनिश्चित हो सकती है। बिल्कुल। जिस

536
00:36:21,280 --> 00:36:25,440
ओर आप पॉजिटिव डायरेक्शन में ले जाना चाहते हो उस ओर तो मैं जा रहा हूं। अगर आपने यह

537
00:36:25,440 --> 00:36:26,400
कहा कि आपने

538
00:36:26,400 --> 00:36:30,400
मेरे लिए शब्द गलत उपयोग में लिया। मैंने आपके लिए शब्द गलत उपयोग में लिया।

539
00:36:30,400 --> 00:36:34,480
मैं आपसे क्षमा मांगने के लिए तैयार हूं। शिवा जी मुझे कोई दिक्कत नहीं है। नहीं तो फिर कोई बात

540
00:36:34,480 --> 00:36:38,480
ही नहीं है। अगर आप अपनी गलती मानते हुए क्षमा मांग रहे हो। मगर पहले मैं एक बात

541
00:36:38,480 --> 00:36:42,560
लेकिन मैं साथ में यह भी कहता हूं कि मगर मैं एक बात बराबर नहीं है। मैं ये नहीं कहता हूं साथ में। बस ये

542
00:36:42,560 --> 00:36:46,800
बराबर वाली बात मैं बता रहा हूं। देखिए व्यवहारिक मर्यादा का उल्लंघन

543
00:36:46,800 --> 00:36:50,880
आपने किया था। प्रथम ठीक है। हमारी जो भी थी हमने जो आप कह

544
00:36:50,880 --> 00:36:54,960
रहे हैं कि तू तड़ाक में आपने बात की वह प्रतिक्रिया स्वरूप था। हमने

545
00:36:54,960 --> 00:36:59,120
था ना? हैं? लेकिन था तो? अरे तो था तो वो तो मर्यादा

546
00:36:59,120 --> 00:37:03,280
के अंदर आएगा ना। कोई आपको कोई आप पर हाथ उठा रहा होगा

547
00:37:03,280 --> 00:37:07,600
तो हाथ उठा रहा होगा तो हमें वहां पर अपनी रक्षा के स्वरूप में हाथ उठाना पड़ेगा ना।

548
00:37:07,600 --> 00:37:11,840
वो तो व्यवहारिक मर्यादा है। यहां पे ये बात आ गई ना कि किसी ने पहले गाली दी। रिटर्न

549
00:37:11,840 --> 00:37:15,840
आपने भी गाली दे दी। गाली तो शास्त्रीय है। गाली तो अशास्त्री है।

550
00:37:15,840 --> 00:37:20,720
गाली कोई मैं आपको बता रहा हूं। मंदोदरी रावण यदि मंदोदरी

551
00:37:20,720 --> 00:37:24,960
नहीं सुनिए तो गाली को मैं किसी रूप में स्वीकार नहीं करूंगा।

552
00:37:24,960 --> 00:37:28,960
मैंने उदाहरण दिया है। मैंने शिवश जी मैंने गाली की बात नहीं की एक्सक्ट्ली। मैंने उदाहरण

553
00:37:28,960 --> 00:37:33,040
देखी। जैसे अगर कोई व्यक्ति गाली देता है टर्नर में सामने वाला व्यक्ति भी गाली देता है। दोनों बराबर पे

554
00:37:33,040 --> 00:37:37,120
आ गए ना। नहीं नहीं नहीं सामने वाला व्यक्ति यदि विवेकी है तो

555
00:37:37,120 --> 00:37:41,360
उसके द्वारा गाली दिया जाना भी स्वीकार नहीं होगा। मगर यहां बात गाली

556
00:37:41,360 --> 00:37:41,860
की

557
00:37:41,520 --> 00:37:46,160
नहीं हो रही है। यहां पर ऐसी बात हो रही है जो निषेध नहीं है पूर्ण रूप से।

558
00:37:46,160 --> 00:37:50,400
जैसे जैसे अब मुझे बोलने दीजिए मुझे एक एक बात बोलने दीजिए।

559
00:37:50,400 --> 00:37:54,720
जैसे रावण मंदोदरी का हरण करेगा। तो श्री रामचंद्र मंदोद

560
00:37:54,720 --> 00:37:59,200
वो रावण सीता माता का हरण करेगा। तो श्री रामचंद्र मंदोदरी

561
00:37:59,200 --> 00:38:03,200
का हरण नहीं करेंगे बदले में। अगर करते हैं तो गलत है ना? गलत करते हैं तो

562
00:38:03,200 --> 00:38:07,200
गलत है। क्योंकि वो शास्त्री है। मैं कह रहा हूं। वही तो मेरा पक्ष है। नहीं

563
00:38:07,200 --> 00:38:11,360
नहीं यह पक्ष नहीं है। मगर रावण रावण यदि मैंने उल्टा बोला अरे

564
00:38:11,360 --> 00:38:15,520
भाई सुनो तो मैं जो कहना चाह रहा हूं वो तो सुनो क्योंकि गाली उस मर्यादा

565
00:38:15,520 --> 00:38:19,680
से बाहर निकल जाती है। आप मुझे अगर गाली दोगे तो मैं गाली नहीं दूंगा आपको।

566
00:38:19,680 --> 00:38:24,000
मगर यदि आप मेरी गाली दी सुनो तो अरे सुनो तो

567
00:38:24,000 --> 00:38:28,160
भाई मैं जो कह रहा हूं वो तो सुनो। मगर यदि आप मुझ पर कटाक्ष करोगे

568
00:38:28,160 --> 00:38:32,240
तो मैं आप पर कटाक्ष करूंगा। मरदित शब्दों में ठीक है

569
00:38:32,240 --> 00:38:36,560
तो आपने कटाक्ष शुरू किया ना उस दिन आपने व्यक्तिगत रूप से भाई मैं तो

570
00:38:36,560 --> 00:38:40,720
कर दिया ना रिटर्न में शिव जी मैं वही तो कह रहा हूं तो आपने बाद बाद में जाकर के

571
00:38:40,720 --> 00:38:45,040
जो प्रारंभ आपने किया था और अपने उसके समर्थन में शाम को उसने

572
00:38:45,040 --> 00:38:49,040
उसमें आपने ये भी कहा था कि क्या कहते हैं ये हनुमान जी बन के

573
00:38:49,040 --> 00:38:53,040
गए समर्थन में कहा और आगे आपने मुझे जोकर अलग से कहा देना

574
00:38:53,040 --> 00:38:56,720
आपको उल्टा बोलना थोड़ी हुआ नहीं नहीं आपने शाम जो पोस्ट

575
00:38:56,720 --> 00:39:00,800
डाली थी ना पोस्ट डाली थी जैसे जैसे आपने मर्यादा का उल्लंघन

576
00:39:00,800 --> 00:39:04,960
किया व्यवहारिक मर्यादा का मैंने वहां पर आपको रिटर्न दे दिया ठीक है हो गया बराबर

577
00:39:04,960 --> 00:39:08,960
आपने शाम को जब पोस्ट डाली तो उसमें जोकर लिखा वहां मामला कैंसिल

578
00:39:08,960 --> 00:39:13,120
हुआ और मैं सच बता रहा हूं मैं आपके लिए तैयार था कि आपसे बात होगी

579
00:39:13,120 --> 00:39:17,200
होगी होगी मगर आपने जोकर कह कर के काम खराब किया जोकर अलंकारी

580
00:39:17,200 --> 00:39:21,520
इत्यादि शब्दों का प्रयोग किया ना तो आपने भी तो किया भाई साहब अलंकारी और जोकर

581
00:39:21,520 --> 00:39:25,680
में अंतर है अलंकार शब्द ऐसे हैं जो आपको आपके ग्रंथों में मिल

582
00:39:25,680 --> 00:39:29,680
जाएंगे जोकर शब्द हमारे ग्रंथों में आपको नहीं मिलेगा हंसी मजाक

583
00:39:29,680 --> 00:39:33,680
करके जो आपकी बात मिल जाएगा शिवश जी हमारे विशेषण रूप में प्रयोग हुए

584
00:39:33,680 --> 00:39:37,680
ना देखिए विशेषण रूप में प्रयोग हुए कि नहीं हुए आप ये बताइए विशेषण के

585
00:39:37,680 --> 00:39:41,840
रूप रूप में बोल रहे थे मतलब आपने जोकर की उपमा दी है हमने

586
00:39:41,840 --> 00:39:46,000
विशेषण रूप में बोला है जी आपने किस प्रकार विशेषण विशेषण आपने व्यक्तिगत

587
00:39:46,000 --> 00:39:50,400
रूप से मुझे जोकर कहते हुए आपने व्यक्तिगत रूप से मुझे जोकर

588
00:39:50,400 --> 00:39:54,720
कहते हुए आपने मुझे उपमा दी है जोकर की और अगर वो विशेषण

589
00:39:54,720 --> 00:39:58,960
है तो हां विशेषण के रूप में मैं अभी भी कहता हूं। अच्छा अच्छा सोच के देखिए

590
00:39:58,960 --> 00:40:03,200
अगर आप ये कहेंगे कि मैं आपको अभी से अस्वीकार कर रहे हैं तो मैं भी तो अपने आपको अलंकारिक

591
00:40:03,200 --> 00:40:07,200
कहना अस्वीकार कर रहा हूं। तो मैं भी तो अपने आप को पौराणिक अस्वीकार कर रहा हूं।

592
00:40:07,200 --> 00:40:11,840
वेद विरोधी पौराणिक क्या करोगे? पौराणिक

593
00:40:11,840 --> 00:40:12,340
मैं

594
00:40:12,080 --> 00:40:16,080
भी तो अपने आप को वेद विरोधी पौराणिक स्वीकार अस्वीकार कर रहा हूं। मैंने

595
00:40:16,080 --> 00:40:20,080
कब बोला आपको वेद विरोधी पौराणिक? अरे भैया जिन्होंने बोला उनके समर्थन में खड़े हो

596
00:40:20,080 --> 00:40:24,240
ना आप। आप उनसे ही बोलिए ना शिवाजी आप उनको आतलंकारी बोलिए। मुझे क्यों बोलेंगे? भाई

597
00:40:24,240 --> 00:40:28,320
आप उनका इस मामले में समर्थन करते हो कि नहीं? मैंने किसी का समर्थन नहीं किया। मैं अपने लिए जिंदा

598
00:40:28,320 --> 00:40:32,320
हूं। मैंने मैं कह रहा हूं दयानंद जी का दयानंद जी ने पौराणिक अगर

599
00:40:32,320 --> 00:40:36,480
कहा पौराणिक पोप पांडे कहा तो आप उसका समर्थन करते हो इस मामले

600
00:40:36,480 --> 00:40:40,720
में कि गलत बात समर्थन अगर मैं उस उस चीज में होता तो मैं अभी उनकी उनका पक्ष

601
00:40:40,720 --> 00:40:44,880
लेकर के बोलता ना कि हां आप हो पौराणिक पोप आप हो पंडित मैंने तो मैं आपसे मैं आपसे पूछ

602
00:40:44,880 --> 00:40:49,120
रहा हूं इतने अंश में इतने अंश में आप उनको दयानंद जी को गलत मानते हो।

603
00:40:49,120 --> 00:40:53,200
नहीं गलत तो मैं नहीं मानता लेकिन बात है आपको बोलने की। नहीं आपको यह

604
00:40:53,200 --> 00:40:57,280
क्लियर जवाब देना पड़ेगा ना जब आप बात यह है आप बचने की कोशिश कर रहे हो इसलिए क्लियर

605
00:40:57,280 --> 00:41:01,520
जवाब आपको देना पड़ेगा क्योंकि आप उनके समर्थक हो आप उनके

606
00:41:01,520 --> 00:41:05,600
समर्थक हो आप आपकी पहचान उनके समर्थक के रूप में अब आप एक

607
00:41:05,600 --> 00:41:10,000
जगह आकर के कहते हो कि यह तो उन्होंने बोला है यह मैंने नहीं बोला है तो इसलिए अब मुझे जानना

608
00:41:10,000 --> 00:41:14,400
पड़ेगा कि आप यह वाली बात उनकी गलत समझते हो हूं कि मैं भी एक्सेप्ट करता हूं कि कालूराम

609
00:41:14,400 --> 00:41:18,640
शास्त्री अखिलानंद ने महर्षि को मां की गाली दी है। मैं भी बोल सकता हूं उनकी गलत है। गलत

610
00:41:18,640 --> 00:41:22,640
है कालूराम शास्त्री अगर मां की गाली दी है तो लोग ठीक है उनकी माता जी को साथ में

611
00:41:22,640 --> 00:41:26,720
उल्टा उल्टा बोल मैंने क्या कहा आपको मैंने क्या कहा मां की गाली दी है तो इतने अंत

612
00:41:26,720 --> 00:41:27,680
में कालूराम

613
00:41:27,680 --> 00:41:31,760
शास्त्री जी कालूराम शास्त्री जी का मैं समर्थन नहीं करता अगर उन्होंने

614
00:41:31,760 --> 00:41:35,920
मां की गाली दी है शिवा जी आपने वीडियो के अंदर पुस्तक बोल बोल करके भाई साहब

615
00:41:35,920 --> 00:41:39,920
मैंने क्या कहा इतने अंश में जितने अंश में उन्होंने मां की गाली दी मैं उनका समर्थन

616
00:41:39,920 --> 00:41:44,560
नहीं करता आप ही कह दो इतने अंश में मैं दयानंद जी का समर्थन नहीं करता बात खत्म हो जाएगी

617
00:41:44,560 --> 00:41:48,960
जिन जिन वेद विरोधी लोगों को उन्होंने पंडा कहा है तो अगर वेद विरोधी

618
00:41:48,960 --> 00:41:51,120
लो

619
00:41:51,120 --> 00:41:55,280
जी उत्तर तो सुनिए उत्तर तो सुनिए मैं कह रहा हूं अगर आपकी दृष्टि में कोई व्यक्ति

620
00:41:55,280 --> 00:41:59,280
वेद विरोधी है हां ठीक है जैसे आप अपनी वेद की व्याख्या मान

621
00:41:59,280 --> 00:42:03,760
रहे हैं हम अपनी वेद की व्याख्या मान रहे हैं ठीक है आपकी दृष्टि में अगर कोई वेद विरोधी है ठीक है

622
00:42:03,760 --> 00:42:07,760
उसे वेद विरोधी सम्मत टाइटल से बोलने में आप क्या उसे

623
00:42:07,760 --> 00:42:11,760
दोष मानते हैं? तो बस उसी तरीके से मेरी दृष्टि में यदि कोई व्यक्ति अलंकारी है

624
00:42:11,760 --> 00:42:16,000
तो उसको फिर दोष युक्त नहीं मानना चाहिए। हां अब आप ये कह सकते हैं कि मेरी भी दृष्टि

625
00:42:16,000 --> 00:42:20,080
में आप जोकर हैं। आप ये कह सकते हैं मेरी भी दृष्टि में आप जोकर हैं तो बस फिर

626
00:42:20,080 --> 00:42:24,400
चर्चा नहीं हो पाएगी। सीमा जी देखिए ऐसा है देखिए ऐसा है। आपने मैंने आपको जोकर

627
00:42:24,400 --> 00:42:28,640
बोला ठीक है। अब मेरी दृष्टि में आप जोकर थे तो मैंने आपको बोल दिया। तो आपकी दृष्टि

628
00:42:28,640 --> 00:42:32,640
कैसे होगी? अलंकारी था। आपकी दृष्टि में अलंकारी था। आपने मेरे को अलंकारी बोल दिया। लेकिन मैं अपने आप

629
00:42:32,640 --> 00:42:36,880
को सही जस्टिफाई नहीं कर रहा हूं। जैसे आप अभी तुरंत सोच कर रहे हैं ना देखिए जो अलंकारी

630
00:42:36,880 --> 00:42:41,200
नाम दिया गया है हर उस व्यक्ति के लिए जो दयानंद जी का समर्थन करता है

631
00:42:41,200 --> 00:42:42,720
और वो नाम कहां से आया है

632
00:42:42,720 --> 00:42:46,800
कि अलंकार शब्द उन्होंने अलंकार शब्द से जितनी ऐसी चीजें हैं

633
00:42:46,800 --> 00:42:50,800
जो हमारी अवतारवाद जिन बातों को लेकर के वैचारिक मतभेद है मुख्य उन

634
00:42:50,800 --> 00:42:54,800
सबके लिए उन्होंने अलंकार का उपयोग कर दिया है कि वहां अलंकार कर रहे हैं भगवान

635
00:42:54,800 --> 00:42:58,960
जो है ये अलंकारिक रूप से विराट पुरुष की व्याख्या है जो है ठीक है तो उस

636
00:42:58,960 --> 00:43:03,120
बात को लेते हुए हमने जैसे आपने हमें वेद विरोधी पौराणिक के रूप में जो हम नहीं चाहते

637
00:43:03,120 --> 00:43:07,600
वो यूज़ किया वैसे ही हमने आपकी कम्युनिटी को देखा था क्या वेद विरोधी इत्यादि

638
00:43:07,600 --> 00:43:11,680
एक मिनटता होती है पौराणिक बोलने में अंतर होता है ठीक है तो अलंकार भी कोई

639
00:43:11,680 --> 00:43:15,760
ऐसा गलत शब्द नहीं अर्थ ये होता है जो पुराणों को मानता है तो अलंकार

640
00:43:15,760 --> 00:43:20,000
भी अलंकार का अर्थ ये होता है जो अलंकार को मानता है हां तो और जो

641
00:43:20,000 --> 00:43:24,080
जो फिर आपको बुरा क्यों मन लग रहा है क्योंकि जब आपको बुरा क्यों लगा

642
00:43:24,080 --> 00:43:28,400
था मैं बता तो रहा हूं आपके उसमें जैसे आपको

643
00:43:28,400 --> 00:43:32,480
नहीं जैसे आपके उसमें अलंकार के उसमें वह छुपा हुआ

644
00:43:32,480 --> 00:43:36,720
है कि भैया आपको बुरा लगने वाली कोई बात छुपी हुई है। ऐसे ही आपके

645
00:43:36,720 --> 00:43:40,960
द्वारा पौराणिक कहे जाने में भी ऐसी कोई बात छुपी हुई है जो हमें बुरी लग रही है। इसीलिए

646
00:43:40,960 --> 00:43:45,120
हमने आपको अलंकारिक कहा अब आपने कहा मैंने नहीं कहा। अगर आपकी

647
00:43:45,120 --> 00:43:49,120
बातों में जोक इत्यादि हो तो आपको कोई इस विशेषण से नवाजे तो आपको बुरा नहीं लगना चाहिए क्योंकि आप

648
00:43:49,120 --> 00:43:53,360
इसका समर्थन कर रहे हो। नहीं समर्थन नहीं कर रहा हूं। मैं आपको मैं आपको याद दिलाने

649
00:43:53,360 --> 00:43:57,760
के लिए कह रहा हूं। मैं आपको याद दिलाने के लिए कह रहा हूं कि जैसे आप जिस तरीके

650
00:43:57,760 --> 00:44:01,760
से आप हमें पौराणिक जिस जिन आधार जिन चीजों को आधार बना कर

651
00:44:01,760 --> 00:44:05,760
कह सकते हैं उसी उन्हीं चीजों को आधार बना करके हम आपको अलंकारिक कह सकते

652
00:44:05,760 --> 00:44:09,920
हैं। बात को अगर आपने प्रक्षेप कर दिया तो आप समर्थन में लेकर कर रहे हो। सीधी बात

653
00:44:09,920 --> 00:44:14,000
नहीं समर्थन में नहीं हम आपको याद दिला रहे हैं। हम उसको अगर आप समर्थन में नहीं रहोगे

654
00:44:14,000 --> 00:44:18,000
तो हक्षेप कैसे बनेगा उसका? हम उसके आपको दोष बताने के लिए ऐसा कर रहे

655
00:44:18,000 --> 00:44:22,160
हैं जिससे आप पूछो कि भैया हम हमको जो है आपने अलंकार क्यों कहा? दोष बताने के लिए

656
00:44:22,160 --> 00:44:26,240
आपको याद दिला रहे हैं। प्रयोग नहीं करते। अगर आप शब्द का प्रयोग कर रहे हो यानी आप उसको उसको किसी

657
00:44:26,240 --> 00:44:30,320
ना किसी से स्वीकार कर रहे हो। नहीं हम अस्वीकार कर रहे हैं। मगर हम

658
00:44:30,320 --> 00:44:34,400
आपकी गलती याद दिलाने के लिए आपको बता रहे हैं कि हम भी ऐसा कर सकते हैं। हम

659
00:44:34,400 --> 00:44:38,560
भी आपको यह कह सकते हैं। आपने शिवा जी आपने किया ना ऐसा तो किया ना

660
00:44:38,560 --> 00:44:42,720
इसलिए किया कि हम आपको याद दिलाएं। वही तो मैं कह रहा हूं कि जैसे मेरी तरफ से गलती

661
00:44:42,720 --> 00:44:46,720
हुई वैसे आपने भी किया। तो आप आपकी तरफ से गलती हुई वैसे

662
00:44:46,720 --> 00:44:50,960
मैंने भी किया तो वो तो हमने पौराणिक के उसमें अलंकारिक का मगर मेरे अलंकारिक

663
00:44:50,960 --> 00:44:54,960
कहने में आप एक प्लस कर रहे हो ना की जोकर कह रहे हो। आप एक एक्स्ट्रा

664
00:44:54,960 --> 00:44:58,960
कर रहे हो ना तो फिर उसका निदान होना। अब जोकर कह रहे अब जोकर के

665
00:44:58,960 --> 00:45:03,200
लिए मैंने जोकर तो नहीं कहा मैं चुप हो गया तो फिर वो खाली रह गया ना वो जोकर

666
00:45:03,200 --> 00:45:08,000
वाला पौराणिक के देखिए हमारी बात इस पे ठनी थी हमारी बात पौराणिक कहने पे

667
00:45:08,000 --> 00:45:12,400
आपने शिवा जी एक बार मैं बोल दूं हमारी पौराणिक कहने पे नहीं ठनी थी हमारी बात ये थी कि

668
00:45:12,400 --> 00:45:12,900
मैंने ऐसा

669
00:45:12,880 --> 00:45:16,960
जोकर लिखा इस फिर इसके आक्षेप में मैंने आपसे बोला था कि आपने भी तो अलंकारी बोला

670
00:45:16,960 --> 00:45:21,040
मैंने ये नहीं बोला कि आप मैंने आपको पौराणिक लिखा तब आप कह रहे हो तब आप कहने आक्षेप में अलंकारी

671
00:45:21,040 --> 00:45:25,200
लिखा मैंने इस पे आपने भी मुझे अलंकारी

672
00:45:25,200 --> 00:45:29,200
मैंने पौराणिक बोला आपने यह कहा था कि मुझे मुझे भी आपने अलंकारी कहा है तो इसलिए मैं

673
00:45:29,200 --> 00:45:33,280
जोकर इत्यादि कह रहा हूं। ठीक है? जिसको मैं बहुत ठीक नहीं मानता। पहली बात

674
00:45:33,280 --> 00:45:37,280
तो यह है स्वीकार कर रहा हूं। मैं इसको स्वीकार कर रहा हूं कि मैं इसे ठीक नहीं मान रहा। पहली बात तो ये है कि

675
00:45:37,280 --> 00:45:41,360
अलंकारी जो मैंने आपको कहा था व्यक्तिगत रूप से नहीं कहा था। आपकी पूरी कम्युनिटी से जुड़ा हुआ

676
00:45:41,360 --> 00:45:45,440
नाम है वो और उसमें आप तो आप कैसे बोल दे रहे हो? आप दयानंद से जुड़े हुए हो ना?

677
00:45:45,440 --> 00:45:49,440
दयानंद जी से जुड़े हुए उनको मानते हो आप। उनके समर्थक हो आप और उनकी इस बात

678
00:45:49,440 --> 00:45:53,440
से आपको कोई ऐतराज नहीं है कि उन्होंने हमको जो है पौराणिक कोप पांडे इत्यादि

679
00:45:53,440 --> 00:45:57,600
कहा है। आप चुप हो। आप कह रहे हो मैंने नहीं कहा। मगर आपको ऐतराज भी नहीं है।

680
00:45:57,600 --> 00:46:01,600
आप उसे दोष युक्त भी नहीं मानते हो। तो इसलिए फिर आप उनसे जुड़े हुए मेरी दृष्टि में

681
00:46:01,600 --> 00:46:05,600
हो और जुड़े होने की दृष्टि में उनको बोला हुआ है। ठीक बोले जो मेरे विरुद्ध उनको तो बोलना ही

682
00:46:05,600 --> 00:46:09,680
चाहिए ना। जुड़े हुए होने की दृष्टि में मेरे लिए भी आप उनसे जुड़े हुए हो।

683
00:46:09,680 --> 00:46:13,840
तो उस दृष्टि में मेरे लिए आप अलंकारी हो। दूसरी बात कि मैंने जो

684
00:46:13,840 --> 00:46:18,000
अक्षय कुमार की एक्टिंग की या कुछ किया वो सब जोकर के रूप में नहीं

685
00:46:18,000 --> 00:46:22,160
किया। मैंने एक मस्कुरा बनने हैं। विशेषण रूप में प्रयोग

686
00:46:22,160 --> 00:46:26,160
किया। जैसे आपने जो बोला आपने अलंकारी बोली थी तो उसकी व्याख्या कर रहे हो मेरी एक बात

687
00:46:26,160 --> 00:46:28,160
मेरी एक बात है एक छोटी सी बात

688
00:46:28,160 --> 00:46:32,160
की अलंकारिक व्याख्या खुद कर रहे हो जैसे कि मैंने जोकर बोला उसकी व्याख्या मैं

689
00:46:32,160 --> 00:46:36,320
खुद करूंगा ना तो मैं मैं वही तो कह रहा हूं जो आपने व्याख्या

690
00:46:36,320 --> 00:46:40,480
की है मैं उसी व्याख्या में कह रहा हूं जैसे कि दयानंद जी को मानने के दयानंद

691
00:46:40,480 --> 00:46:44,640
जी को मानने के बावजूद भी दयानंद जी को मानने के बावजूद भी अमुक अमुक चीजों

692
00:46:44,640 --> 00:46:48,640
से अपने आप को अलग कर रहे हो बात अलग है कि आप उनका उन पर ऐतराज आप नहीं प्रकट कर रहे

693
00:46:48,640 --> 00:46:52,640
हो ठीक है मगर उनकी करता हूं हां जानू जो पुस्तक में एक-एक चीज़

694
00:46:52,640 --> 00:46:56,880
लिखी है। उसे सदस्य स्वीकार करता हूं मैं। तो मतलब आपको ऐतराज नहीं है। दूसरी बात ऐसी

695
00:46:56,880 --> 00:47:00,880
स्थिति होते हुए भी आप अपने आप को उस पहचान से अलग कर रहे हो कि भाई

696
00:47:00,880 --> 00:47:04,960
मैंने आपको पौराणिक नहीं कहा। आप मुझे अलंकारी मत कहिए। ठीक है? अब दूसरी

697
00:47:04,960 --> 00:47:09,200
बात क्या आ जाती है कि मैं भी वहां पर

698
00:47:09,200 --> 00:47:14,160
जोक करने वाले होने के रूप में भी अपने आप को उस जोकर से अलग कर रहा हूं।

699
00:47:14,160 --> 00:47:18,160
कि भैया मैंने हंसी मज़ाक कर दिया तो मैं जोकर नहीं हूं। वहां से अपने आप को अलग

700
00:47:18,160 --> 00:47:22,400
कर रहा हूं। क्योंकि मैंने वो इसी मजाक ये इस रूप में नहीं किया है कि मैं लोगों को हंसाने

701
00:47:22,400 --> 00:47:26,800
आया हूं। इस रूप में किया है। फिर इसी आधार पे तो मैं कह रहा हूं कि बराबरी है।

702
00:47:26,800 --> 00:47:30,960
सुनिए तो सुनिए तो जैसे आप तो फिर जब मैंने जब मैंने अलग कर जब

703
00:47:30,960 --> 00:47:35,200
आपने अलग किया जब आपने अपने आप को अलग किया फिर भी मैंने आपको अलंकारी

704
00:47:35,200 --> 00:47:39,280
कहा और जबकि मेरा उसमें वो है कि भैया आप पौराणिक आप उसके समर्थन में खड़े

705
00:47:39,280 --> 00:47:43,200
हो तो मैंने तब आपको अलंकारी कहां जोकर वाले का ले लीजिए आप जोकर वाले का ले लीजिए उत्तर। इसमें पॉइंट

706
00:47:43,200 --> 00:47:47,280
ये है कि जैसे आपने आपने अलंकारी कहने की अपनी पर्सनल व्याख्या की। ठीक है? मेरी

707
00:47:47,280 --> 00:47:51,360
दृष्टि से अब मैं जरा थाने पहुंच गया हूं। मैं मुझे मुझे सुनिए

708
00:47:51,360 --> 00:47:56,160
सुनिए मैं आपसे फिर बात करूंगा। आप जो है वो चर्चा सुनिश्चित कर लीजिए।

709
00:47:56,160 --> 00:48:00,240
अवतारवाद पे करनी है ना आपको? मुझे सर्वशक्तिमान पे पहले करनी है। हां तो वही

710
00:48:00,240 --> 00:48:04,560
सर्वशक्तिमान पे करनी है। आ जाइए। अच्छा दो मिनट का समय और दीजिए कि चर्चा से संबंधित

711
00:48:04,560 --> 00:48:08,560
मैं पुलिस स्टेशन में पहुंच गया हूं। बताइए। अच्छा मैं ये कह रहा था शिवा जी

712
00:48:08,560 --> 00:48:12,960
कि जैसे आपके मुख्य-मुख्य विषय एक बार मुझे नाम ना बता। नहीं तो सर्वशक्तिमान ईश्वर हो गया।

713
00:48:12,960 --> 00:48:17,120
तो पहले सर्वशक्तिमान से ही कर लेते हैं। सर्वशक्तिमान से

714
00:48:17,120 --> 00:48:21,120
सर्वशक्तिमान से अवतारवाद है। और क्या-क्या है? सर्वशक्तिमान में ही तो अवतारवाद निहित

715
00:48:21,120 --> 00:48:25,600
है। ठीक है। और इसके अलावा और क्या-क्या विषय है? सर्वशक्तिमान

716
00:48:25,600 --> 00:48:29,600
हो गया। हम वर्णाश्रम हो गया। ठीक है। परंपरा हो

717
00:48:29,600 --> 00:48:33,680
गई। परंपरा हो गई। हां। और एक मोक्ष का विषय हो गया। मोक्ष

718
00:48:33,680 --> 00:48:37,840
हो गया। ठीक है। तो हम इन विषयों पे करेंगे। तो, सबसे पहले मैं चाहता

719
00:48:37,840 --> 00:48:41,840
हूं क्योंकि अभी मैंने क्या है कि बाकी जो वर्णाश्रम वाले और जो मोक्ष वाले वह मैंने आपके

720
00:48:41,840 --> 00:48:46,880
वीडियो नहीं देखे हैं। हम् ठीक है? शक्तिमान पे कर लीजिए ना।

721
00:48:46,880 --> 00:48:50,960
बहुत सारी चीजें वो हो जाएंगी। अलग से नहीं करना पड़ेगा। हां सही

722
00:48:50,960 --> 00:48:54,960
है। तो जो सर्वशक्तिमान वाला विषय क्योंकि वह आधार है। आपकी बातों का वो आधार है। एक बार वो वाला

723
00:48:54,960 --> 00:48:58,320
हो जाता है। उसके बाद से फिर बाकी चीजों का खुद ही समाधान हो जाता है। हम्म हम्म। है

724
00:48:58,320 --> 00:49:02,400
ना? तो फिर मैं एक काम करता हूं। मैं थोड़ा अपना आपकी जो वीडियोस

725
00:49:02,400 --> 00:49:06,400
वगैरह मैं इन दिनों देख ही रहा था। मैंने कल से देखना चालू किया था। मैं वो देख लेता हूं। मैं नोट डाउन

726
00:49:06,400 --> 00:49:10,400
कर लेता हूं। उसका खंडन वंडन मैं अपनी तरफ से तैयार कर लेता हूं। फिर हम डेट सिक्स कर लेते हैं। फिर अब

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00:49:10,400 --> 00:49:14,400
लाइव चर्चा कर लेते हैं। ठीक है। ठीक। ठीक है। ठीक है। बाकी बाकी

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00:49:14,400 --> 00:49:18,400
जी मैं आपको अपनी तरफ से अभी भी बोल दे रहा हूं। अगर मेरी कोई बात बुरी लगी हो। ठीक है? नहीं आपने क्षमा

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00:49:18,400 --> 00:49:22,400
मांग तो लिया उसी के लिए वही है। बाकी मेरी कोई व्यक्तिगत

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00:49:22,400 --> 00:49:26,560
दुश्मनी आपसे है नहीं। है ना? वो हमारी भी नहीं है। वो क्या होता है मान

731
00:49:26,560 --> 00:49:31,360
लीजिए अगर मेरी गलती से कोई व्यवहारिक दोष ऐसा है मैं बताऊं आपको। मैं बताऊं आपको

732
00:49:31,360 --> 00:49:35,440
कि मैं जब पहली बार आर्य समाज मंदिर में गया था और परंपरा पर बात की थी।

733
00:49:35,440 --> 00:49:39,520
ठीक है जी जी जी उस समय मेरा कोई ऐसा भाव नहीं था कि मुझे

734
00:49:39,520 --> 00:49:43,840
यह पता ही नहीं था कि ये छीटाकसी भी होती है YouTube पर ठीक है

735
00:49:43,840 --> 00:49:47,920
मैंने वहां एक सामान्य भाषा में मर्यादा में रह के एक सामने

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00:49:47,920 --> 00:49:52,000
वाले का बातचीत वार्ता की और उसको मैंने अपलोड किया उसके बाद

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00:49:52,000 --> 00:49:56,160
आपके अब वो आप उनसे सहमत नहीं होंगे मुझे पता है मगर आपके लोगों ने

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00:49:56,160 --> 00:50:00,240
के मूत निकल जाएगा ये हो जाएगा वो हो जाएगा ये सब करना चालू

739
00:50:00,240 --> 00:50:04,400
किया उसके परिपेक्ष में कि मैंने उसका शॉट बना के भी डाला कि

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00:50:04,400 --> 00:50:08,720
भाई वो जवाब नहीं दे पा रहे हैं। मैंने उसमें कहीं अभद्रता नहीं की थी। मगर

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00:50:08,720 --> 00:50:12,880
गंदी गंदी बातें अश्लीलता इस तरीके का फिर वो वो आपका

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00:50:12,880 --> 00:50:13,380
वो आ गया

743
00:50:13,360 --> 00:50:17,440
रिसीव हुआ आज ठीक है। वो आ के जो है ये

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00:50:17,440 --> 00:50:21,600
हुआ कि चर्चा होनी है। चर्चा होनी है तो उसके हिसाब से होनी है। वो

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00:50:21,600 --> 00:50:25,760
तय करेगा कि क्या है क्या नहीं है। अभी आपसे भी बात अलग है। उनकी बात हम नहीं करते। बाकी

746
00:50:25,760 --> 00:50:29,840
हम नहीं नहीं मैं बात नहीं कर रहा। उसने ये सब चालू किया कि मैं तेरी हम तेरी परंपरा

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00:50:29,840 --> 00:50:33,920
के छितड़े उड़ाएंगे। ये करेंगे वो करेंगे। ये सब उसने चालू कर दिया।

748
00:50:33,920 --> 00:50:38,000
यहां से जो कटाक्ष थे जी जी वो मुझे पता

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00:50:38,000 --> 00:50:42,160
चला वो प्रारंभ हो गए प्रारंभ हो गई वो मुझे पता चला कि भैया केवल

750
00:50:42,160 --> 00:50:46,400
हम किताबों में ही हम एक दूसरे पर कटाक्ष नहीं कर रहे हैं हमको व्यवहारिक

751
00:50:46,400 --> 00:50:50,480
रूप से भी एक दूसरे पर कटाक्ष करना पड़ेगा बिल्कुल अभी

752
00:50:50,480 --> 00:50:54,640
क्योंकि किताबों में तो कटाक्ष है वो मुझे पता है मगर व्यवहारिक रूप से हम

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00:50:54,640 --> 00:50:58,800
लोग कर रहे हैं कि नहीं वो मुझे नहीं पता था वो वहां से चालू हुआ जी जी जी

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00:50:58,800 --> 00:51:02,800
ठीक है बाकी बाकी जी मैं आपको बताता हूं बाकी तो अपना क्या है कि अगर आपका मत सही है

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00:51:02,800 --> 00:51:06,880
तो मैं बिल्कुल बिलकुल स्वीकार करने की तैयार हूं और मैं भी चाहूंगा कि अगर मेरा मत सही सिद्ध होता है तो आप भी इसे स्वीकार

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00:51:06,880 --> 00:51:10,880
करिए। हां, ठीक है। ठीक है। ठीक है। ठीक। बाकी बाकी मैं

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00:51:10,880 --> 00:51:14,880
आपको WhatsApp पे मैसेज कर दूंगा। ठीक है। और कब तक फ्री

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00:51:14,880 --> 00:51:19,200
हो जाएंगे आप? मैं अभी देखिए आधे घंटे में फ्री होऊंगा।

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00:51:19,200 --> 00:51:23,360
ठीक ठीक ठीक। तो फिर अगर मुझे आवश्यकता पड़ती है तो फिर मैं हम दोबारा कॉल पे बात कर लेंगे। नहीं तो लगभग

760
00:51:23,360 --> 00:51:29,360
लगभग तो हमारी बातचीत हो ही चुकी है। ठीक। जय श्री राम। ठीक है श्रीमान जी नमस्ते। जय श्री राम।

761
00:51:36,030 --> 00:51:40,030
[संगीत]
