1
00:00:02,160 --> 00:00:06,240
तो हम लोग डिफरेंस करते हैं उसमें लेकिन डिफरेंस इसमें जरूरी है

2
00:00:06,240 --> 00:00:10,480
क्योंकि उसने मेहनत करी है तब उसको आईआईटी मिला है। लेकिन इसमें जन्मना

3
00:00:10,480 --> 00:00:14,480
वर्ण व्यवस्था ने मान लीजिए किसी की रुचि नहीं हुई। ब्राह्मण के बच्चे को ना रुचि

4
00:00:14,480 --> 00:00:18,640
हुई शास्त्र पढ़ने में तो मतलब होता नहीं है। डॉक्टर का बेटा जरूरी थोड़ी ना कि

5
00:00:18,640 --> 00:00:22,720
डॉक्टर बने। पहली बात यह है कि रुचि के ऊपर हम धर्म और अधर्म

6
00:00:22,720 --> 00:00:26,720
की व्याख्या नहीं करते हैं। किसी की रुचि अगर नहीं है अपनी बहन को

7
00:00:26,720 --> 00:00:31,920
बहन की तरह से देखने की तो क्या हम उसको वो स्वतंत्रता दे देंगे?

8
00:00:31,920 --> 00:00:36,000
धर्म और धर्म की व्याख्या रुचि के अनुसार नहीं होती। अगर हम वर्णा जन्मना

9
00:00:36,000 --> 00:00:40,160
वर्ण व्यवस्था पे ध्यान देंगे तो एक बच्चे को बचपन से ही वह संस्कार

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00:00:40,160 --> 00:00:44,320
मिलते हैं जो उसके घर में उसके पूर्वज करते चले आ रहे है। उसको उस

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00:00:44,320 --> 00:00:48,480
उस बच्चे के अंदर वो संस्कार जेनेटिक के द्वारा भी आते हैं

12
00:00:48,480 --> 00:00:52,720
और प्रायोगिक रूप से व्यवहारिक रूप से अह उसमें वो स्थापित

13
00:00:52,720 --> 00:00:57,280
करना भी बहुत सरल होता है। बजाय इसके कि किसी ऐसे बच्चे के अंदर जिसने

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00:00:57,280 --> 00:01:01,440
जिसके यहां पे मान लीजिए कि अह रक्षा प्रणाली की शिक्षाएं ना होती हो,

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00:01:01,440 --> 00:01:05,680
जहां क्षत्रिय ना हो, और उस बच्चे को जो है आप क्षत्रिय बनाने की कोशिश करेंगे,

16
00:01:05,680 --> 00:01:09,920
तो वहां आपकी मेहनत, वहां आपका धन और समय तीनों

17
00:01:09,920 --> 00:01:14,800
चीजें ऊर्जा, धन और समय तीनों चीजें अधिक होंगी।

18
00:01:14,800 --> 00:01:17,440
क्या कहते हैं? कंपैरेटिवली टू

19
00:01:17,440 --> 00:01:21,680
अ जहां पर पहले से ही क्षत्रिय घर में वो उत्पन्न होगा,

20
00:01:21,680 --> 00:01:25,920
उसके अनुवांशिकता में वही चीजें होंगी। तो उसके अंदर स्थापित करने के लिए। दूसरी

21
00:01:25,920 --> 00:01:29,920
बात यह नहीं कहा जा रहा है कि किसी के अंदर यदि वो गुण नहीं है तब भी उसको

22
00:01:29,920 --> 00:01:33,920
वही मानो। वो गुण नहीं है तो उसको पतित क्षत्रिय मानो। वो गुण नहीं है

23
00:01:33,920 --> 00:01:38,000
तो उसको पतित ब्राह्मण मानो। और जो ब्राह्मण के अनुसार होने वाले कर्म है

24
00:01:38,000 --> 00:01:42,160
उनसे उसको बहिष्कृत करो। अगर कोई ब्राह्मण अपने वर्ण के अनुसार कार्य

25
00:01:42,160 --> 00:01:46,800
नहीं कर रहा है तो जन्मना वर्ण व्यवस्था के अनुसार उसका त्याग कर देना चाहिए।

26
00:01:46,800 --> 00:01:51,120
उसको फिर जो सामान्य ब्राह्मणों में नहीं गिना जाना चाहिए।

27
00:01:51,120 --> 00:01:55,280
पहली बात। दूसरी बात यह है कि अगर हम जो

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00:01:55,280 --> 00:02:00,800
आप जिस वर्ण व्यवस्था की बात कर रहे हैं कि जिसके जिसका जो है

29
00:02:00,800 --> 00:02:04,800
जिसकी रूचि जिसमें हो गई जिसने जो योग्यता प्राप्त कर ली आपके अनुसार जो

30
00:02:04,800 --> 00:02:08,800
योग्यता उसने प्राप्त कर ली उसके अनुसार उसको मान लेना चाहिए। उसी का उसी

31
00:02:08,800 --> 00:02:12,880
का तो नतीजा हम झेल रहे है ना। कोई भी व्यक्ति अपने दायित्व से भागने के

32
00:02:12,880 --> 00:02:16,880
लिए स्वतंत्र है। अर्जुन नहीं भाग पाया। अर्जुन के मन में

33
00:02:16,880 --> 00:02:20,880
जब विरक्तता आई कि मैं सब छोड़ छाड़ के जंगल चला जाऊं तो भगवान ने उसको

34
00:02:20,880 --> 00:02:25,200
उसका धर्म याद दिलाया। तू क्षत्रिय है। तेरा कर्म है धर्म लड़ना

35
00:02:25,200 --> 00:02:29,360
और रक्षा करना। धर्म युक्त युद्ध मोक्ष का द्वार है एक क्षत्रिय

36
00:02:29,360 --> 00:02:32,720
के लिए। ये भगवान ने उसको याद दिलाया। वरना अगर कर्म

37
00:02:32,720 --> 00:02:36,800
के अनुसार होती तो उसकी तो रुचि हो रही थी। ब्राह्मणत्व में वो तो सन्यासी बनने

38
00:02:36,800 --> 00:02:41,520
जा रहा था। रुचि हो रही थी ना। भगवान ने उसकी रुचि काट दिया।

39
00:02:41,520 --> 00:02:45,680
कि तेरा धर्म भागना नहीं है। युद्ध छोड़ के जाना चाहिए। नहीं है क्योंकि

40
00:02:45,680 --> 00:02:49,920
जन्मना वर्ण व्यवस्था उचित है। आप ही बताइए अगर दायित्व से भागने

41
00:02:49,920 --> 00:02:53,920
को भी हम दायित्व का नाम दे देंगे तो दायित्व से भागने का दोष क्या

42
00:02:53,920 --> 00:02:58,160
रह जाएगा? अगर किसी को ड्यूटी दी गई है कि तुम यहां पर जो है रक्षा

43
00:02:58,160 --> 00:03:02,320
करो। इस एटीएम की रक्षा करो। इस बैंक की रक्षा करो। मुसीबत

44
00:03:02,320 --> 00:03:06,400
आने पर वो जो है भाग गया वहां से और टमाटर बेचने लगा। उसको हम ये

45
00:03:06,400 --> 00:03:10,560
नहीं कह सकते कि तुम अपने दायित्व से भागे हो। क्योंकि वो कहेगा

46
00:03:10,560 --> 00:03:16,480
मेरा दायित्व तो टमाटर बेचना है ना करुणा वर्ण व्यवस्था के अनुसार।

47
00:03:16,480 --> 00:03:20,720
तो दायित्व से भागने को भी दायित्व का नाम देना यही इसी पर आपत्ति

48
00:03:20,720 --> 00:03:25,280
है। उसी का उसी का वो है आज विप्लव संसार

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00:03:25,280 --> 00:03:29,280
सिस्टमेटिकली चल रहा है क्या नहीं चल रहा है। राम राज्य में

50
00:03:29,280 --> 00:03:33,280
हवा उतनी ही चलती थी जितनी चलनी चाहिए। धूप उतनी ही

51
00:03:33,280 --> 00:03:37,440
निकलती थी। निकलती थी जितनी निकलनी चाहिए। कोई अकाल मृत्यु नहीं

52
00:03:37,440 --> 00:03:41,440
पड़ता था। कोई त्रासदी नहीं होती थी। क्यों? क्योंकि

53
00:03:41,440 --> 00:03:45,760
व्यवस्था थी। क्योंकि व्यक्ति वो कार्य करता था जो उसके लिए है

54
00:03:45,760 --> 00:03:49,840
जिसके जो उसके लिए निश्चित और आप जो व्यवस्था

55
00:03:49,840 --> 00:03:54,080
दे रहे हैं समाज को उसमें यही तो हो रहा है। कोई पुलिस वाला अपने दायित्व

56
00:03:54,080 --> 00:03:58,400
से भागने के लिए स्वतंत्र है। नौकरी छोड़ देगा। स्वतंत्र है वो। डॉक्टर

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00:03:58,400 --> 00:04:02,400
अपने आप कह रहे हो इंजीनियर है। वो इंजीनियर कभी भी रेिग्नेशन देने

58
00:04:02,400 --> 00:04:06,480
के लिए स्वतंत्र है। भाई मगर जब व्यक्ति जन्म से होगा

59
00:04:06,480 --> 00:04:10,640
तो यदि वो छोड़ेगा तो उसको कृष्ण जैसे लोग याद दिलाएंगे।

60
00:04:10,640 --> 00:04:14,720
तेरा धर्म है रक्षा करना तू भाग नहीं सकता है ना

61
00:04:14,720 --> 00:04:18,800
तुझे युद्ध लड़ना ही होगा तो जहां पर आप उसको दोष याद

62
00:04:18,800 --> 00:04:22,880
दिला सके वो व्यवस्था अपनानी पड़ेगी ना

63
00:04:22,880 --> 00:04:27,280
तो मतलब ये कहना ये कहना है कि जो जन्म वर्ण व्यवस्था है वो भगवान

64
00:04:27,280 --> 00:04:31,280
ने दायित्व दिया है तो उसको निर्वाह पूरी जीवन भर करना है उसका

65
00:04:31,280 --> 00:04:31,920
जीवन

66
00:04:31,920 --> 00:04:36,080
उसका निर्वाह करना ही आपके लिए श्रेष्ठतम है जो आपको दायित्व

67
00:04:36,080 --> 00:04:40,160
मिला है सबसे बड़ी बात क्या है कि ब्राह्मण और शूद्र के विषय

68
00:04:40,160 --> 00:04:44,160
विषय में एक मिथ्या फैला दी गई है। शूद्र का मतलब अपराधी और

69
00:04:44,160 --> 00:04:48,160
ब्राह्मण का मतलब परोपकारी। नहीं ऐसा नहीं है।

70
00:04:48,160 --> 00:04:52,240
अगर ऐसा था तो रावण को क्यों रावण को अभी तक ब्राह्मण लिखा गया। उसको

71
00:04:52,240 --> 00:04:56,400
कहां शूद्र लिख दिया गया शास्त्रों में? तो शूद्र का अर्थ

72
00:04:56,400 --> 00:05:00,560
है गाली बना देना। ये प्रोपेगेंडा है। शूद्र अपराधी नहीं

73
00:05:00,560 --> 00:05:04,640
है। शूद्र भी मनुष्य है। वो भी अच्छा हो सकता है। किसने कहा

74
00:05:04,640 --> 00:05:08,880
कि शूद्र एक गाली है। आज समाजियों ने ये चीज बनाई है कि शूद्र होना

75
00:05:08,880 --> 00:05:12,960
तो पाप है। अच्छा देखा जाए तो आर्य समाजियों के यहां

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00:05:12,960 --> 00:05:16,960
पर विवाह किसका होता है? बताइए। किसका विवाह होता

77
00:05:16,960 --> 00:05:21,040
है? आर्य समाजियों के यहां पापियों का। क्योंकि जो लोग वहां

78
00:05:21,040 --> 00:05:25,200
पर लेकर के इस तरीके से पिता की आज्ञा के बिना

79
00:05:25,200 --> 00:05:29,520
मातृ शक्तियों को ले पहुंचते हैं विवाह करने के लिए। क्या उनका जनेऊ होता है?

80
00:05:29,520 --> 00:05:33,600
नहीं होता है। विवाह करा देते हैं पट से। यानी कि

81
00:05:33,600 --> 00:05:37,760
पापियों का अगर शूद्र पापी है। शूद्र का होना दुरा। सूद का अर्थ है दुराचारी

82
00:05:37,760 --> 00:05:42,160
तो जितने लोग आर्य समाज से विवाह कर रहे हैं रिकॉर्ड कर लो इस बात को जितने

83
00:05:42,160 --> 00:05:46,480
लोग आर्य समाज से विवाह कर रहे हैं वो सब पापी है जहां से उन्होंने विवाह

84
00:05:46,480 --> 00:05:47,280
किया है

85
00:05:47,280 --> 00:05:51,520
उसी के अनुसार पापी हो तुम सब लोग जिन्होंने आर्य समाज से विवाह

86
00:05:51,520 --> 00:05:55,520
किया है सच्चाई से मुंह कब तक फेरोगे

87
00:05:55,520 --> 00:05:59,600
तो शूद्र होना पाप नहीं है ब्राह्मण

88
00:05:59,600 --> 00:06:03,600
होना निर्दोष का वो नहीं है कि भैया ब्राह्मण है तो निर्दोष

89
00:06:03,600 --> 00:06:07,600
है ये उसने ब्राह्मण घर में जन्म लिया है। अब यदि वो अपने दायित्व

90
00:06:07,600 --> 00:06:11,600
से भागेगा तो वो भी दोषी है। और जिसने शूद्र के घर में जन्म लिया अगर वो

91
00:06:11,600 --> 00:06:16,000
अपने दायित्व से नहीं भागेगा तो वो भी प्रणम में है। वो भी आदर्श

92
00:06:16,000 --> 00:06:20,960
है। समाज का एक महत्वपूर्ण अंग है। ठीक है।

93
00:06:20,960 --> 00:06:26,060
धन्यवाद। जय सीताराम। जय श्री राम।

94
00:06:26,060 --> 00:06:30,060
[संगीत]
