1
00:00:01,920 --> 00:00:06,000
सभी को जय श्री राम। एक वक्तव्य हमें प्राप्त हुआ है

2
00:00:06,000 --> 00:00:10,880
हमारे ज्यष्ठ भ्राता का पुंडरिक जी का।

3
00:00:10,880 --> 00:00:14,960
उन्होंने कुछ कटाक्ष पूर्वक कुछ बातें कही हैं

4
00:00:14,960 --> 00:00:20,960
जगुरु शंकराचार्य पुरी पीठाधीश्वर जी के लिए। यद्यपि

5
00:00:21,440 --> 00:00:25,600
एक पिता और बड़े भाई के बीच

6
00:00:25,600 --> 00:00:30,240
में छोटे भाई को बोलने की कोई आवश्यकता नहीं होती है।

7
00:00:30,240 --> 00:00:34,320
पर यदि वहां पर मर्यादा का उल्लंघन करते हुए

8
00:00:34,320 --> 00:00:38,480
कुछ हो रहा होगा तो उसमें अवश्य ही मौन ना रहने के लिए कहा गया

9
00:00:38,480 --> 00:00:42,480
है धर्म शास्त्रों के द्वारा। शिव पुराण में भी लिखा हुआ

10
00:00:42,480 --> 00:00:46,480
है कि गुरुदेव की आज्ञा हो या ना हो

11
00:00:46,480 --> 00:00:50,720
गुरु के हित का कार्य सदैव करते रहना चाहिए।

12
00:00:50,720 --> 00:00:55,200
और मेरी जानकारी में लोग

13
00:00:55,200 --> 00:01:00,480
ऐसा कह सकते हैं कि मैंने जो भी कार्य किया है

14
00:01:00,480 --> 00:01:05,760
वह कहीं-कहीं पर लोगों को ऐसा दिख सकता है कि मैं अपने गुरु के लिए करता हूं। परंतु

15
00:01:05,760 --> 00:01:10,160
मेरी जानकारी में मेरे द्वारा किया गया प्रत्येक कार्य

16
00:01:10,160 --> 00:01:14,320
गुरुदेव के लिए नहीं होता है। वो धर्म संस्थापना के लिए होता है।

17
00:01:14,320 --> 00:01:17,440
और उसमें क्योंकि गुरुदेव की बहुत मुख्य भूमिका है।

18
00:01:17,440 --> 00:01:22,160
श्रीमद जगद्गुरु शंकराचार्य की बहुत मुख्य भूमिका है। इसलिए

19
00:01:22,160 --> 00:01:26,240
उन कार्यों को करते समय लोग देखने वाले

20
00:01:26,240 --> 00:01:30,240
लोगों को ऐसा लग सकता है कि वह पर्टिकुलरली ये अपने गुरु के लिए कोई कार्य

21
00:01:30,240 --> 00:01:33,680
कर रहा है। खैर

22
00:01:33,680 --> 00:01:37,760
पुंडरीिक जी यद्यपि पुंडरिक जी ने जो

23
00:01:37,760 --> 00:01:41,840
भी बातें कही है उसमें जो सैद्धांतिक विषय को लेकर के उन्होंने जो आपत्ति प्रकट की

24
00:01:41,840 --> 00:01:46,160
है उसकी वास्तविकता भी कुछ और है।

25
00:01:46,160 --> 00:01:50,240
संभवत पुंडरिक जी को ठीक से मालूम नहीं होगा कि

26
00:01:50,240 --> 00:01:54,720
पूरी के शंकराचार्य जी की मान्यता क्या है चैतन्य महाप्रभु को लेकर के

27
00:01:54,720 --> 00:01:58,880
पर यदि केवल सैद्धांतिक आपत्ति की ही बात होती तो भी

28
00:01:58,880 --> 00:02:03,360
मैं यह वीडियो ना बनाता वीडियो मुझे तब बनाना पड़ रहा है

29
00:02:03,360 --> 00:02:07,760
जब उपहास पूर्वक नकल पूर्वक मर्यादा का उल्लंघन

30
00:02:07,760 --> 00:02:12,160
करते हुए एक 83 वर्ष की आयु वाले वृद्ध

31
00:02:12,160 --> 00:02:18,160
सन्यासी शंकराचार्य की पीठ पर बैठने वाले का

32
00:02:18,320 --> 00:02:22,320
बैठने वाले पर आपने कटाक्ष किया तब मुझे वहां पर बोलना

33
00:02:22,320 --> 00:02:26,560
पड़ रहा है। तो सबसे पहली बात करते हैं क्योंकि बात जहां से शुरू

34
00:02:26,560 --> 00:02:30,960
आपने की है वहीं से मैं बात शुरू करता हूं।

35
00:02:30,960 --> 00:02:33,520
आपको आपत्ति है कि

36
00:02:33,520 --> 00:02:37,520
जगदगुरु शंकराचार्य चैतन्य महाप्रभु का नाम

37
00:02:37,520 --> 00:02:42,320
क्यों भूल गए? इस बात से आपको आपत्ति है। जगुरु शंकराचार्य

38
00:02:42,320 --> 00:02:46,320
पूरी पीठाधीश्वर क्या नाम है उनका?

39
00:02:46,320 --> 00:02:50,400
जी जगतगुरु श्री पूज्यपाद निशानंद सरस्वती जी

40
00:02:50,400 --> 00:02:54,480
महाराज कुछ महाप्रभु जी के नाम में भी उनको पूछना पड़ा था। इसलिए

41
00:02:54,480 --> 00:02:58,640
मैं भी थोड़ा सा पूछना पड़ा। मुझे क्षमा कीजिएगा। आपको

42
00:02:58,640 --> 00:03:02,720
यह संज्ञान में नहीं था कि चैतन्य महाप्रभु का जो वर्षगांठ

43
00:03:02,720 --> 00:03:08,080
उनकी जो आती है जयंती की प्रत्येक वर्ष जगुरु शंकराचार्य

44
00:03:08,080 --> 00:03:12,400
मनाते हैं। बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं और चैतन

45
00:03:12,400 --> 00:03:16,400
महाप्रभु जी की महिमा का गान करते हैं। तब आपने उन

46
00:03:16,400 --> 00:03:20,720
कार्यक्रमों के में नहीं देखा कि वो उनका नाम नहीं भूलते हैं।

47
00:03:20,720 --> 00:03:25,280
अच्छा दूसरी बात आपने अपने ही वक्तव्य को अपने ही द्वारा काट दिया।

48
00:03:25,280 --> 00:03:29,280
एक तरफ आपको आपत्ति है कि उन्होंने वह उनका वह

49
00:03:29,280 --> 00:03:33,280
नाम क्यों भूल गए जो कि अप्रासंगिक नाम है।

50
00:03:33,280 --> 00:03:37,440
चैतन्य महाप्रभु का जो प्रासंगिक नाम है वह चैतन्य महाप्रभु है। श्री

51
00:03:37,440 --> 00:03:41,920
कृष्ण चैतन्य भारती उनके सन्यास धारण पूर्वक जो उनको

52
00:03:41,920 --> 00:03:46,080
नाम प्राप्त हुआ है वो नाम है। उसको भूल जाने

53
00:03:46,080 --> 00:03:48,560
पर आपने आपत्ति प्रकट की और अपने ही

54
00:03:48,560 --> 00:03:52,640
वक्तव्य में अगले ही कुछ मिनटों के बाद

55
00:03:52,640 --> 00:03:56,640
अपने ही वक्तव्य में आपने इस बात पर आपत्ति प्रकट की

56
00:03:56,640 --> 00:04:01,040
कि उनको जो है शंकराचार्य परंपरा का सन्यासी क्यों माना जाए।

57
00:04:01,040 --> 00:04:05,120
उन्होंने निश्चित रूप से भारतीय परंपरा में सन्यास लिया। भगवान

58
00:04:05,120 --> 00:04:09,520
श्री राम ने भी रामेश्वरम की पूजा की है। इससे वो शव नहीं हो जाते।

59
00:04:09,520 --> 00:04:13,680
है ना? आपने उदाहरण भी दिया कि रामेश्वरम

60
00:04:13,680 --> 00:04:17,680
में शिव भगवान की पूजा कर देने से वो शैव नहीं हो जाते। श्री कृष्ण

61
00:04:17,680 --> 00:04:21,920
श्री कृष्ण द्वारा अगर शिव भगवान की पूजा हो जाएगी तो वो शैव नहीं हो जाते।

62
00:04:21,920 --> 00:04:25,920
वह बात अलग है कि श्री कृष्ण और श्री राम को शास्त्रों में परम शैव बताया

63
00:04:25,920 --> 00:04:29,920
गया हो। वह बात अलग है। मगर फिर भी आपने

64
00:04:29,920 --> 00:04:34,080
आपत्ति प्रकट की कि भाई चैतन्य महाप्रभु ने अगर सन्यास वहां

65
00:04:34,080 --> 00:04:38,080
से लिया है तो वह उस संप्रदाय के सन्यासी नहीं हो

66
00:04:38,080 --> 00:04:42,240
गए। या जो भी आपने आपत्ति प्रकट की आपने उस

67
00:04:42,240 --> 00:04:46,320
संबंध को प्रकट किए जाने पर आपत्ति प्रकट की कि उनका जो

68
00:04:46,320 --> 00:04:50,400
है सन्यास परंपरा अथवा शंकराचार्य परंपरा के अनुसार

69
00:04:50,400 --> 00:04:54,480
चैतन्य महाप्रभु के का सैद्धांतिक संबंध शंकराचार्य परंपरा

70
00:04:54,480 --> 00:04:58,720
से है। इस पर आपने आपत्ति प्रकट की और

71
00:04:58,720 --> 00:05:03,200
इसी संबंध के परिणाम स्वरूप जो उनका नाम है श्री कृष्ण चैतन्य

72
00:05:03,200 --> 00:05:03,920
भारती

73
00:05:03,920 --> 00:05:08,800
उसको ना प्रकट किए जाने पर भी आप आपत्ति प्रकट कर रहे हैं।

74
00:05:08,800 --> 00:05:12,960
तो पहले आप तय तो कर लो कि आपको आपत्ति किससे है। उनको शंकराचार्य

75
00:05:12,960 --> 00:05:17,040
परंपरा से संबंधित रूप में प्रस्तुत किए जाने से आपको आपत्ति है या

76
00:05:17,040 --> 00:05:21,040
शंकराचार्य परंपरा से संबंधित प्रकट ना किए जाने से आपको आपत्ति

77
00:05:21,040 --> 00:05:25,120
है। पहली बात। दूसरी बात यह आती

78
00:05:25,120 --> 00:05:29,280
है कि आपने उनकी नकल उतारी।

79
00:05:29,280 --> 00:05:33,440
यद्यपि आपको सोचना चाहिए था कि 83 वर्ष की आयु है। वह इतने

80
00:05:33,440 --> 00:05:37,520
प्रत्येक वर्ष जो है मनाते चले आ रहे हैं चैतन महाप्रभु की जयंती और आगे भी

81
00:05:37,520 --> 00:05:41,680
मनाएंगे और उसमें वो उनका नाम नहीं भूलते हैं। वो

82
00:05:41,680 --> 00:05:45,920
एक क्षणिक उनके विस्मृति का आयु

83
00:05:45,920 --> 00:05:50,000
आयुजन्य परिणाम था कि वो भूल गए और उन्होंने वो नाम

84
00:05:50,000 --> 00:05:54,240
पूछ लिया। फिर आपने उनकी नकल उतारी। नकल उतारते समय

85
00:05:54,240 --> 00:05:58,400
आपने उनका वही नाम भूल जाने का दिखावा किया

86
00:05:58,400 --> 00:06:02,720
जो प्रासंगिक नाम है। अगर आपको उनकी नकल उतार करके

87
00:06:02,720 --> 00:06:06,800
प्रकट करना था और उनकी नकल उतार करके उन पर कटाक्ष करना था तो

88
00:06:06,800 --> 00:06:10,960
आपको उनके उस नाम को लेना चाहिए था वहां पर नकल उतारते समय जो

89
00:06:10,960 --> 00:06:15,280
नाम अप्रासंगिक है। उनका वर्तमान का जो सन्यास

90
00:06:15,280 --> 00:06:19,760
धारण पूर्वक जो प्रासंगिक नाम है वर्तमान के वातावरण में

91
00:06:19,760 --> 00:06:23,840
वो वो है जो आपने लिया। जबकि उनका पूर्वाश्रम का

92
00:06:23,840 --> 00:06:28,720
नाम तो दूसरा है जो प्रासंगिक नहीं है।

93
00:06:28,720 --> 00:06:32,720
जबकि जो जगतगुरु शंकराचार्य

94
00:06:32,720 --> 00:06:36,960
लेना भूल गए थे जो उन्हें याद करना पड़ा था। किसी से पूछना

95
00:06:36,960 --> 00:06:40,960
पड़ा था। वह नाम वर्तमान का प्रासंगिक नाम नहीं है। चैतन्य

96
00:06:40,960 --> 00:06:45,120
महाप्रभु का। वह नाम चैतन्य महाप्रभु का ऐसा नाम है

97
00:06:45,120 --> 00:06:50,480
जो हमें साहित्यिक तौर पर प्राप्त होता है। ग्रंथों से प्राप्त होता है। परंतु

98
00:06:50,480 --> 00:06:54,720
जो लोगों के मुख पर वरबली रहता है वह चैतन्य महाप्रभु

99
00:06:54,720 --> 00:06:58,960
है और वह नाम उनको बखूबी याद था।

100
00:06:58,960 --> 00:07:03,360
तो पहली बात तो आपको अप्रासंगिक नाम के भूले जाने पर

101
00:07:03,360 --> 00:07:07,680
आपत्ति नहीं होनी चाहिए थी। फिर एक 83 वर्ष की आयु वाले वृद्ध

102
00:07:07,680 --> 00:07:11,760
के द्वारा भूले जाने पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए थी। और यदि आपत्ति

103
00:07:11,760 --> 00:07:15,760
थी अप्रसंगिक नाम को भूले जाने पर और कटाक्ष पूर्वक आपको नकल

104
00:07:15,760 --> 00:07:19,840
करनी थी। यह दिखाना था कि हमारे चैतन्य महाप्रभु का सिर्फ आपके ही है

105
00:07:19,840 --> 00:07:24,240
ना। आपने पेटेंट करा रखा है उन पर। तो यदि आपको आपत्ति

106
00:07:24,240 --> 00:07:28,560
थी ऐसा करने पर तो आपको जब नकल

107
00:07:28,560 --> 00:07:32,560
करनी थी तो उनका अप्रासंगिक नाम बताते कि यह मैं भूल गया था तब तो बात

108
00:07:32,560 --> 00:07:34,880
थी जो उनके पूर्वाश्रम के नाम है।

109
00:07:34,880 --> 00:07:38,880
कोई भी नाम आप ले लेते। खैर तो यह तो मैंने

110
00:07:38,880 --> 00:07:43,200
प्रयास किया यह स्पष्ट करने का कि आपका वह अप्रोच

111
00:07:43,200 --> 00:07:48,240
है जो कटाक्ष करना वो कितना तर्क तार्किक है।

112
00:07:48,240 --> 00:07:52,400
अब आगे आपने जो बात की है चैतन महाप्रभु को भगवान माने जाने की कि नहीं माने

113
00:07:52,400 --> 00:07:57,360
जाने की पूरी के शंकराचार्य जी के द्वारा।

114
00:07:57,360 --> 00:08:01,440
तो सबसे पहले तो इसमें आपको जानकारी का अभाव

115
00:08:01,440 --> 00:08:05,520
है और जानकारी के अभाव के चलते ही आपने जो है

116
00:08:05,520 --> 00:08:09,520
क्रोध में आकर के अपना वीडियो बनाया जबकि पूरी

117
00:08:09,520 --> 00:08:13,600
के शंकराचार्य जी सहर्ष चैतन्य महाप्रभु को

118
00:08:13,600 --> 00:08:17,760
भगवान के अवतार के रूप में ही स्वीकार करते हैं। वह वीडियो आपने देख लिया होगा

119
00:08:17,760 --> 00:08:21,920
ना राधा कृष्ण में जो प्रेम है उसको तुलसीदास

120
00:08:21,920 --> 00:08:26,480
जी के शब्दों में हम कह सकते हैं तत्व प्रेम भगवान

121
00:08:26,480 --> 00:08:30,640
रामभद्र और सीता में जो प्रेम है उसको तत्व प्रेम

122
00:08:30,640 --> 00:08:34,640
तत्व प्रेम कर मम और तोरा जानत प्रिया एक मन

123
00:08:34,640 --> 00:08:38,800
मोरा सो मन सदा रहत पाही जान प्रीत रस यत

124
00:08:38,800 --> 00:08:43,760
माही यहां भी समझना चाहिए कि श्री राधा कृष्ण का जो

125
00:08:43,760 --> 00:08:47,760
एक ही तत्व के दोनों अवतार तो एक दूसरे के प्रति जो प्रेम

126
00:08:47,760 --> 00:08:50,080
है उस प्रेम को हम तत्व प्रेम कह

127
00:08:50,080 --> 00:08:54,160
सकते हैं। उस तत्व प्रेम के ही अवतार श्री चैतन महाप्रभु को

128
00:08:54,160 --> 00:08:58,320
माना गया है। दूसरी बात यह है कि

129
00:08:58,320 --> 00:09:02,400
यदि दुर्जन तोष न्याय से मान भी लिया जाए कि आप चलिए मान लीजिए

130
00:09:02,400 --> 00:09:06,720
थोड़ी देर के लिए यद्यपि वो उनको भगवान के रूप में ही स्वीकार करते हैं। परंतु

131
00:09:06,720 --> 00:09:10,880
यदि मान भी लिया जाए कि वह उनको भगवान नहीं मानते हैं

132
00:09:10,880 --> 00:09:14,960
तो क्या उनके प्रति उनकी जो श्रद्धा है, उनका जो अनुकरण अनुसरण की

133
00:09:14,960 --> 00:09:19,040
उनकी भावना है वो क्या नकार दी जाए? वो क्या

134
00:09:19,040 --> 00:09:23,440
उनका अपमान करते हैं?

135
00:09:23,440 --> 00:09:28,880
और श्री राम कृष्ण

136
00:09:28,880 --> 00:09:32,960
शिव की पूजा करने से वह शैव नहीं हो जाते। इस प्रकार की बातों के लिए तो आपने कह

137
00:09:32,960 --> 00:09:37,120
ही दिया है कि शास्त्रार्थ इत्यादि के उसमें नहीं जाना है और मैं जाना

138
00:09:37,120 --> 00:09:41,120
भी नहीं चाहता। मुझे आपत्ति मर्यादा का उल्लंघन करते हुए

139
00:09:41,120 --> 00:09:45,200
अपनी बात रखने से है मात्र। बस उसी पर मुझे बात करनी है। अब यह

140
00:09:45,200 --> 00:09:49,520
सब तो यह रही। अब आपने आगे एक कटाक्ष और कर दिया

141
00:09:49,520 --> 00:09:53,600
कि पूरी में जहां पर गोवर्धन मठ है वहां

142
00:09:53,600 --> 00:09:57,600
पर जो है मांस बहुत खाया जाता है या मांसाहार हो

143
00:09:57,600 --> 00:10:02,800
रहा है। उसको आप नहीं नियंत्रित कर पा रहे हैं और यह हो रहा है वो हो रहा है।

144
00:10:02,800 --> 00:10:06,800
मुझे इस बात को लेकर बहुत हंसी आती है। कई लोग आए

145
00:10:06,800 --> 00:10:10,960
दिन मुझे पूछते हैं कि शंकराचार्यों ने किया क्या है? शंकराचार्यों ने किया क्या है?

146
00:10:10,960 --> 00:10:15,600
आए दिन पूछा करते हैं शंकराचार्यों ने किया क्या है?

147
00:10:15,600 --> 00:10:19,600
शंकराचार्यों ने क्या किया है यह आपको तब

148
00:10:19,600 --> 00:10:23,840
पता नहीं लगता है जब करपात्री जी महाराज के द्वारा राधा सुधा नामक ग्रंथ लिखा

149
00:10:23,840 --> 00:10:27,840
जाता है वो भी तब जब रास लीला को बैन कराने की बातें की जा रही होती

150
00:10:27,840 --> 00:10:30,480
है।

151
00:10:30,480 --> 00:10:34,560
शंकराचार्यों ने किया क्या है? यह तब आपको पता नहीं लगता है कि लोग आस्तिक

152
00:10:34,560 --> 00:10:38,800
बनते हैं और आप जो कथा वक्ता होते हैं, कथा

153
00:10:38,800 --> 00:10:42,800
व्यास होते हैं, उनकी कथाएं आकर के सुनते हैं। अरे

154
00:10:42,800 --> 00:10:47,040
भैया जो लोग आपकी कथाएं सुन रहे हैं, उन लोगों के अंदर कथा

155
00:10:47,040 --> 00:10:51,200
सुनने की भावना, ईश्वर के प्रति आस्तिकता की भावना किसने डाली है? जब

156
00:10:51,200 --> 00:10:57,200
कोई व्यक्ति नास्तिक नहीं है तभी तो वो आकर के कथा सुनेगा ना।

157
00:10:57,360 --> 00:11:00,560
अगर मैं बात करूं

158
00:11:00,560 --> 00:11:04,720
पूज्य गुरुदेव भगवान ने या अन्य शंकराचार्यों ने तो अपने अपने जीवन काल में ना जाने

159
00:11:04,720 --> 00:11:08,800
क्या-क्या करके रख दिया उसकी तो बात छोड़िए कि राम सेतु राम

160
00:11:08,800 --> 00:11:13,200
सेतु की लड़ाईयां कैसे लड़ी या राम मंदिर अयोध्या की लड़ाईयां कैसे लड़ी

161
00:11:13,200 --> 00:11:17,760
या नास्तिकों का खंडन आज भी कैसे कर रहे हैं पूरे भारतवर्ष में 83

162
00:11:17,760 --> 00:11:21,760
83 वर्ष की आयु में घूम घूम कर कैसे चल रहे हैं इन सब बातों

163
00:11:21,760 --> 00:11:25,760
को छोड़ भी दिया जाए शासन तंत्र से कैसे टकरा रहे

164
00:11:25,760 --> 00:11:31,760
सीधे तौर पर इन सब बातों को यदि छोड़ भी दिया जाए

165
00:11:31,840 --> 00:11:36,320
तो रामपाल को तो जानते ही होंगे ना आप उनके

166
00:11:36,320 --> 00:11:40,400
ही द्वारा शिक्षित उनके ही द्वारा दीक्षित उनके ही किसी

167
00:11:40,400 --> 00:11:45,360
शिष्य ने भगवत कृपा से मैं बता रहा हूं बस आपको

168
00:11:45,360 --> 00:11:49,520
लखनऊ के अंदर रामपाल की किताबें हैं जिसमें भगवान श्री

169
00:11:49,520 --> 00:11:53,760
कृष्ण से लेकर भगवान के हर विग्रह को कोसा

170
00:11:53,760 --> 00:11:54,260
गया

171
00:11:54,080 --> 00:11:58,640
है अश्लील टिप्पणियों से भरी पड़ी किताबें

172
00:11:58,640 --> 00:12:03,600
उसको रोक दिया हमने बिकने से मथुरा में बिक रही है आज भी

173
00:12:03,600 --> 00:12:07,680
मथुरा में तो आप जैसे सामर्थ्यवान और आपके साथ वाले और

174
00:12:07,680 --> 00:12:12,560
अन्य सामर्थवान कई लोग सक्रिय है ना

175
00:12:12,560 --> 00:12:18,400
तो क्यों बिक रही है मथुरा में तो उसका सेंटर अभी भी खुल रहा है

176
00:12:18,400 --> 00:12:22,480
तो इसका मतलब यह मान लिया जाए कि आप धर्म परायण नहीं है

177
00:12:22,480 --> 00:12:26,560
आप और आपके साथ जितने भी लोग मिलकर करके खड़े हुए हैं और रामपाल का अड्डा क्योंकि

178
00:12:26,560 --> 00:12:30,800
वहां खुला हुआ है अभी भी तो यह मान लिया जाए कि आप लोग सामर्थ्यवान

179
00:12:30,800 --> 00:12:34,000
नहीं है।

180
00:12:34,000 --> 00:12:39,520
यह माना जाए ना और उस इन बातों को लेकर आप पर आपत्ति जताई जाए।

181
00:12:39,520 --> 00:12:43,920
पूरी में मांसाहार ज्यादा है। मगर रील्स कहां पर बनती है ज्यादा?

182
00:12:43,920 --> 00:12:48,000
भक्ति के नाम पर। कहां पर ज्यादा कम कपड़े

183
00:12:48,000 --> 00:12:52,160
पहन के लोग दिखाई देते हैं मंदिरों के आसपास? धर्म का धर्म

184
00:12:52,160 --> 00:12:56,320
के नाम पर व्यापार कहां पर हो रहा है ज्यादा? आप बताइए के नहाने

185
00:12:56,320 --> 00:13:00,640
पर झाड़ू लगाती है, पोछा लगाती है, खाना बनाती है, गरम

186
00:13:00,640 --> 00:13:04,640
गरम। खुद नॉनवेज नहीं खाती लेकिन मेरे चिकन

187
00:13:04,640 --> 00:13:08,640
बनाती है। भूत जैसे हम दोनों भाई बहनों को जल्दी

188
00:13:08,640 --> 00:13:13,040
आना प्रभु भाई गणेशा

189
00:13:13,040 --> 00:13:16,880
तू रहना साथ हमेशा।

190
00:13:16,880 --> 00:13:21,200
बिहारी जी की सभी भक्तों को आप देख अभिनव अरोड़ा। यहां बिहारी

191
00:13:21,200 --> 00:13:25,200
जी आकर के ऐसे ही लोग देखिए यह सेवा भाव में लगे हुए हैं।

192
00:13:25,200 --> 00:13:29,600
जहां गंदगी है वहां गंदगी सफाई नहीं हो रही है। यह टच्च सेवा

193
00:13:29,600 --> 00:13:34,000
ये देखिए YouTube बनाने के लिए वीडियो के लिए वायरल होने के लिए

194
00:13:34,000 --> 00:13:39,120
देखो ये देखो यूबरों को वृंदावन में

195
00:13:39,120 --> 00:13:43,200
यूबर वृंदावन में आकर के आप देखिए हमारे में क्या होता है। जहां गंदगी है

196
00:13:43,200 --> 00:13:47,360
देखिए ये सफाई नहीं है। ये मेरा काम है। मैं आप अपना

197
00:13:47,360 --> 00:13:49,360
करो। ये देखिए हमारे वृंदावन

198
00:13:49,360 --> 00:13:53,440
में यूबरों का आ के आतंक एक सेकंड जो यहां सफाई कर रहे हैं ये भैया

199
00:13:53,440 --> 00:13:58,560
है प्रतिदिन यहां सफाई करते ये कोई बातें हैं

200
00:13:58,560 --> 00:14:02,880
कि अगर दुनिया में कहीं पर कुछ गलत हो रहा है तो भगवान को ही कोसने

201
00:14:02,880 --> 00:14:06,880
लगो भगवान है सनातन धर्म है तो दुनिया में पाप क्यों हो रहा है भगवान है

202
00:14:06,880 --> 00:14:11,120
तो वही वाली बात आर्य समाजियों की भाषा होती है ये तो ये

203
00:14:11,120 --> 00:14:15,200
तो आर्य समाजियों की भाषा है ना कि भगवान अगर

204
00:14:15,200 --> 00:14:19,440
आके बचाने वाले होते हैं धर्म वाले होते तो फिर क्यों नहीं आ रहा है भगवान

205
00:14:19,440 --> 00:14:23,520
निर्भय हत्या कांड में क्यों नहीं आए भगवान लो शंकराचार्य

206
00:14:23,520 --> 00:14:29,520
से ही क्यों पूछ रहे हो भगवान से पूछ लो फिर तो

207
00:14:30,560 --> 00:14:35,360
और रामपाल का अड्डा कब बंद करवा रहे हो अपने यहां बताइए आप

208
00:14:35,360 --> 00:14:39,520
चिंता ना करें जेष्ठ भ्राता रामपाल का अड्डा भगवान ने चाहा और आपका

209
00:14:39,520 --> 00:14:43,760
आशीर्वाद रहा जल्दी ही मथुरा वाला भी बंद हो जाएगा मगर मैं आपका ध्यान इस

210
00:14:43,760 --> 00:14:47,920
ओर आकर्षित कर रहा हूं कि शंकराचार्य के ऐसे ना जाने कितने इतने शिष्य हैं जो अपने

211
00:14:47,920 --> 00:14:51,920
प्राणों को भी न्योछावर करते हुए धर्म के लिए मर मिटने मर मिटने

212
00:14:51,920 --> 00:14:56,160
तक को तैयार हैं। इन शिष्यों को खड़ा करने वाले आप नहीं है।

213
00:14:56,160 --> 00:15:00,320
शंकराचार्य हैं। तो फिर आइए आप आज

214
00:15:00,320 --> 00:15:04,560
लखनऊ में ढूंढ के बताइए। अगर कोई पकड़ मिल

215
00:15:04,560 --> 00:15:10,400
गया ना रामपाल की किताबें बेचने वाला तो धरा जाएगा तुरंत।

216
00:15:10,400 --> 00:15:14,720
ये किया शंकराचार्य ने। और प्रत्यक्ष रूप से शंकराचार्य

217
00:15:14,720 --> 00:15:18,800
ने अगर कुछ किया हो या ना भी किया हो वो बात और है वह प्रत्यक्ष रूप से करने

218
00:15:18,800 --> 00:15:23,280
वाली जाने कितनी बातें हैं। प्रत्यक्ष रूप से शंकराचार्य

219
00:15:23,280 --> 00:15:27,360
ने कभी कुछ किया हो या ना किया हो। मगर अगर

220
00:15:27,360 --> 00:15:31,360
दुनिया में कहीं भी कोई व्यक्ति बल्ब जलाकर रोशनी प्राप्त कर रहा है

221
00:15:31,360 --> 00:15:35,360
ना तो उसको मानना पड़ेगा कि वह रोशनी उसके घर में थॉमस अलवा

222
00:15:35,360 --> 00:15:39,520
एडिसन के द्वारा आ रही है। अगर दुनिया में कोई कहीं भी आस्तिक

223
00:15:39,520 --> 00:15:43,520
बनके कहीं पर कथा का श्रवण सुन रहा है ना तो उसको मानना पड़ेगा कि आज

224
00:15:43,520 --> 00:15:45,600
भी वो नास्तिकता का खंडन कर सकने वाले

225
00:15:45,600 --> 00:15:50,800
सिद्धांत शंकराचार्य के द्वारा अपने रक्त से सींचे जा रहे हैं।

226
00:15:50,800 --> 00:15:55,120
तब जाकर के कोई व्यक्ति आस्तिक होता हुआ किसी की कथा सुनता है।

227
00:15:55,120 --> 00:15:59,440
इसी प्रकार से नास्तिक भी कुतर्क करता है कि भैया विदेशों में तो समझो

228
00:15:59,440 --> 00:16:03,520
सनातन शास्त्र नहीं पढ़ रहा है। वह भी अपनी बहन को बहन मान रहा है। वह कैसे मान

229
00:16:03,520 --> 00:16:07,600
रहा है? तो हम उसको यही कहते हैं कि जितने अंश में

230
00:16:07,600 --> 00:16:11,840
जो व्यक्ति धार्मिक है धर्म का कहीं पर भी कोई अनुसरण अनुकरण

231
00:16:11,840 --> 00:16:15,920
हो रहा है। उसके पीछे सनातन है। उतने अंश में वहां सनातन

232
00:16:15,920 --> 00:16:20,080
का सिद्धांत व्याप्त है। सीधे तौर पर नहीं तो अप्रत्यक्ष तौर पर। उसी

233
00:16:20,080 --> 00:16:24,160
प्रकार जिस प्रकार से यदि आपके घर में बल्ब जल रहा है

234
00:16:24,160 --> 00:16:28,320
तो उसका कारण प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से

235
00:16:28,320 --> 00:16:32,560
थॉमस अलवा एडिसन ही है। हम ये नहीं कह सकते कि हमने अगर बल्ब परचून की दुकान से खरीदा

236
00:16:32,560 --> 00:16:36,720
है इलेक्ट्रिक की दुकान से खरीदा है तो वो बल्ब हम तक थॉमस अलवा एडिसन ने नहीं पहुंचाया।

237
00:16:36,720 --> 00:16:40,800
उसी प्रकार यदि दुनिया में आज भी कोई आस्तिक

238
00:16:40,800 --> 00:16:44,800
है आज भी सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में अंतर कर पा रहा

239
00:16:44,800 --> 00:16:48,960
है कि किसको किस दृष्टि से देखना है माता बहन

240
00:16:48,960 --> 00:16:53,040
और पत्नी में उसका कारण उसकी आस्तिकता का कारण शंकराचार्य

241
00:16:53,040 --> 00:16:59,040
है। इन बातों पर आपको ध्यान देना चाहिए।

242
00:17:00,000 --> 00:17:04,080
सैद्धांतिक कोई मतभेद था ही नहीं। सैद्धांतिक आपने टिप्पणी की की

243
00:17:04,080 --> 00:17:08,240
होती तो मेरा कोई उसमें अधिकार नहीं था। मेरा कोई अधिकार नहीं था आपके

244
00:17:08,240 --> 00:17:12,320
और उनके बीच में बोलने का। यदि आपने मर्यादा ना लांगी होती।

245
00:17:12,320 --> 00:17:17,600
यदि आपने नाट्य रूपांतरण ना किया होता और वर्णाश्रम

246
00:17:17,600 --> 00:17:22,160
की धज्जियां उड़ाई जाती हैं। आपकी नाक के नीचे

247
00:17:22,160 --> 00:17:26,880
और आप उनका प्रतिकार कैसे करते हैं? थोड़ी सी जो

248
00:17:26,880 --> 00:17:31,360
जो वर्णाश्रम धर्म का पालन वेदों के बीच में किया गया

249
00:17:31,360 --> 00:17:35,520
कुछ एक मूल कारण ये वर्णाश्रम धर्म की वजह

250
00:17:35,520 --> 00:17:40,000
से मैंने कुछ लोगों से बातचीत करी है तो सबने एक जो महत्वपूर्ण

251
00:17:40,000 --> 00:17:44,240
कॉमन बिंदु बताया वो ये बताया कि जो वेद का वर्णाश्रम

252
00:17:44,240 --> 00:17:48,240
धर्म है हम देखो राधा रमण जी के उपासक है यहां भी हम सब लोग

253
00:17:48,240 --> 00:17:52,400
अह चार आश्रम सब वर्ण आदि का पालन करके भगवत सेवा

254
00:17:52,400 --> 00:17:56,800
करते हैं तो जो वर्णाश्रम धर्म धर्म का परष्कृतकरण है।

255
00:17:56,800 --> 00:18:01,040
उसको थोड़ा सा हमें और पुष्ट करने की आवश्यकता है।

256
00:18:01,040 --> 00:18:05,200
एक चीज इस कौन को जो है करनी

257
00:18:05,200 --> 00:18:09,360
चाहिए वर्णाश्रम पर ध्यान देना चाहिए। वर्णाश्रम

258
00:18:09,360 --> 00:18:15,360
का कितना महत्व बताया गया धर्म ग्रंथों में

259
00:18:15,360 --> 00:18:19,520
और वर्णाश्रम को लेकर के आप कितने चिंतित हैं वो तो दिखाई देता

260
00:18:19,520 --> 00:18:23,520
है। किस प्रकार के लोगों को आपने प्रश्रय दिया हुआ है। जिस दिन

261
00:18:23,520 --> 00:18:27,520
आप चाह ले उस दिन उनका सब नामोनिशान मिट जाए। मगर मजाल है

262
00:18:27,520 --> 00:18:31,680
कि आप चाह ले। आपकी लड़ाईयां भी हम जैसों को लड़नी पड़ रही

263
00:18:31,680 --> 00:18:36,080
है। और हमने आपका कभी नाम नहीं लिया।

264
00:18:36,080 --> 00:18:40,080
ठीक है? आपकी अपनी कोई प्रणाली होगी धर्म धर्म संस्थापना के लिए। ठीक है

265
00:18:40,080 --> 00:18:46,080
भाई। ठीक है। हमने आप पर कभी उंगली नहीं उठाई।

266
00:18:46,080 --> 00:18:50,240
आपसे सवाल नहीं किया कि भैया शिव और कृष्ण में तुम भेद

267
00:18:50,240 --> 00:18:54,640
का प्रचार कर रहे हो। कृष्ण को कभी भी शिव के समान ना समझना।

268
00:18:54,640 --> 00:18:59,200
शिव का अपमान करो। शिव का उपहास उड़ाओ। दुर्गा का उपहास उड़ाओ।

269
00:18:59,200 --> 00:19:03,200
दूसरे संतों का उपहास उड़ाओ। मगर कृष्ण और अल्लाह को

270
00:19:03,200 --> 00:19:08,640
एक बता दो। और ऐसे लोगों को आप प्रश्रय देते हो।

271
00:19:08,640 --> 00:19:13,200
दूसरे संतों का, मरती हुई मां का, अपमान

272
00:19:13,200 --> 00:19:17,280
करने वाले को आप प्रशय देते हो। तो शिव जी के उन्होंने साथ मीटिंग की। उन्होंने कहा शिव

273
00:19:17,280 --> 00:19:21,600
जी एक बड़ा इंपॉर्टेंट डिस्कशन करना है मेरे को। भाई तिलक का स्टाइल बदलो

274
00:19:21,600 --> 00:19:24,960
आप।

275
00:19:24,960 --> 00:19:29,200
ये राक्षस लोग हैं ना ये लोग भी उधु पुंडर ही लगाते हैं। इनका त्रिपुण

276
00:19:29,200 --> 00:19:33,200
कर दो आप। ठीक है जी। कर देंगे। तो उससे पहले शिवजी

277
00:19:33,200 --> 00:19:38,000
भी उध पुंडरक लगाया करते थे। कहते लेकिन क्योंकि एचओडी इनका मैं ही हूं

278
00:19:38,000 --> 00:19:42,480
तामसिक लोगों का तो इसीलिए मेरे को फिर वही करना पड़ेगा। लेकिन ठीक है आपकी अब सेवा के लिए

279
00:19:42,480 --> 00:19:46,880
अब सारे डिफिकल्ट सेवाएं तो इन्हीं को मिलनी है। तो फिर इन्होंने फिर सारे राक्षसों

280
00:19:46,880 --> 00:19:52,400
को बुलाया। कहते हैं देखो ये जो उर्ध पुंडरक है इससे हमारी शक्ति कम होती है बल्कि।

281
00:19:52,400 --> 00:19:56,640
अगर राक्षसों को अपनी शक्ति डबल करनी है तो उसके लिए एक बहुत ही विशेष

282
00:19:56,640 --> 00:20:00,720
तिलक है जो कि मैं सिद्ध करके वो तिलक मैंने डिजाइन किया है और

283
00:20:00,720 --> 00:20:03,360
वो है त्रिपुंड

284
00:20:03,360 --> 00:20:07,440
ये वाला अच्छा भाई शिवजी ने भाई नया तिलक

285
00:20:07,440 --> 00:20:12,960
का डिजाइन निकाला है फिर सब ने जो है अपना लिया और फिर

286
00:20:12,960 --> 00:20:18,240
शंकराचार्य की आदि शंकराचार्य जी की मरती हुई मां की एक्टिंग की

287
00:20:18,240 --> 00:20:22,240
अमोग लीला ने तब आपको दिखाई नहीं दिया

288
00:20:22,240 --> 00:20:26,320
अपमान हो रहा है ये आदि शंकराचार्य को की मरती हुई मां

289
00:20:26,320 --> 00:20:30,480
का इसने इनफॉर्म किया भाई आदि शंकराचार्य आपकी माता श्री बहुत बीमार है तो आप जाके आप अपनी माता

290
00:20:30,480 --> 00:20:34,480
से मिल लीजिए तो अपने शिष्यों के साथ ही पहुंच गए माता के पास कहते मां तुम बहुत

291
00:20:34,480 --> 00:20:38,720
बीमार हो हां बस प्राण निकलने ही वाले हैं तू मुझे उनके

292
00:20:38,720 --> 00:20:40,080
बारे में बता दे जिनका तू हृदय

293
00:20:40,080 --> 00:20:44,080
में भजन करता है शंकर कहते ठीक है मां

294
00:20:44,080 --> 00:20:48,560
ये निराकार ब्रह्म जो सर्वव्यापी है सर्वसाक्षी

295
00:20:48,560 --> 00:20:53,520
है निर्विकार है कहता है अरे शंकर कर। क्या कर रहा है तू?

296
00:20:53,520 --> 00:20:57,760
मैं कभी भी मर सकती हूं। कभी भी मेरे प्राण निकाल सकते। तू क्या कर रहा है?

297
00:20:57,760 --> 00:21:01,920
तू मुझे उनके बारे में क्यों नहीं बताता जिनका तू हृदय में भजन करता है। कहता है ठीक है मां।

298
00:21:01,920 --> 00:21:06,000
तो तू परमात्मा के बारे में सुन। क्योंकि उपदिष्टा है। अनुमता है।

299
00:21:06,000 --> 00:21:10,160
कहता है अरे शंकर मेरे कभी भी प्राण निकल सकते।

300
00:21:10,160 --> 00:21:15,120
तू क्या कर रहा है? तू मुझे उनके बारे में क्यों नहीं बताता जिनका तू हृदय में भजन करता है।

301
00:21:15,120 --> 00:21:19,200
कहता है ओह हो मां। तो सुनो शिष्यों आप लोग थोड़ा बाहर जाओ। आप

302
00:21:19,200 --> 00:21:23,280
लोग बाहर ध्यान लगाओ। निराकार ब्रह पे मैं अभी आ रहा हूं। इनको

303
00:21:23,280 --> 00:21:29,120
बाहर भेजा चुटकनी बंद की। कहता है मां अब तू राधा श्याम सुंदर के बारे में सुन।

304
00:21:29,120 --> 00:21:33,280
जितने परंपरा प्राप्त आचार्य हैं सबको इस बात पर आपत्ति

305
00:21:33,280 --> 00:21:37,840
है इस कौन की कि वर्णाश्रम का ध्यान क्यों नहीं रख रहा है? और आप क्या करते हो?

306
00:21:37,840 --> 00:21:42,000
उनको प्रश्रय देते हो। आपकी नाक के नीचे मथुरा

307
00:21:42,000 --> 00:21:46,560
से आवाज उठाई गई है आर्य समाझी के द्वारा किसी

308
00:21:46,560 --> 00:21:50,560
के मैं चुनौती देता हूं। मैं चैलेंज करता हूं। कोई

309
00:21:50,560 --> 00:21:55,600
भी भगवान का अवतार सिद्ध करके दिखा दे। साकार भगवान को सिद्ध करके दिखा दे।

310
00:21:55,600 --> 00:22:00,240
क्या किया आपने? क्यों नहीं उसका चैलेंज स्वीकार किया?

311
00:22:00,240 --> 00:22:04,960
चिंता ना करें भ्राता। आप कथा करें।

312
00:22:04,960 --> 00:22:09,280
आप लोगों को भक्ति कराएं। उनको आस्तिक हम बनाएंगे। भगवान

313
00:22:09,280 --> 00:22:13,280
के अवतार को हम सिद्ध करेंगे। भगवत कृपा से। अपने से कुछ

314
00:22:13,280 --> 00:22:18,160
नहीं। भगवत कृपा से।

315
00:22:18,160 --> 00:22:22,640
तो मैं ससम्मान आपको यह याद दिलाना चाह रहा हूं

316
00:22:22,640 --> 00:22:26,640
कि यदि हमने जापान नहीं देखा है तो

317
00:22:26,640 --> 00:22:30,800
इसका अर्थ यह नहीं है कि इस दुनिया में जापान है नहीं। यदि आपने नहीं

318
00:22:30,800 --> 00:22:35,040
देखा है कि पूरी के शंकराचार्य चैतन्य महाप्रभु को

319
00:22:35,040 --> 00:22:39,200
भगवान मानते हैं तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह उनको भगवान नहीं मानते हैं। तो

320
00:22:39,200 --> 00:22:43,280
पहले अपनी जानकारी पूरी बटोरिए। उसके बाद

321
00:22:43,280 --> 00:22:49,280
आप जो है कोई टीका टिप्पणी करें वह भी मर्यादा में रहकर

322
00:22:50,640 --> 00:22:55,600
मैंने देखा था आपने जब वीडियो बनाया था तो आपके अंदर कितना रोष था

323
00:22:55,600 --> 00:22:59,600
अधूरी जानकारी के चलते संभवत जिनको प्रश्ते

324
00:22:59,600 --> 00:23:05,040
हो उन्हीं ने आपको आगे करने के लिए वीडियो के लिए आपको जो है किसी प्रकार से

325
00:23:05,040 --> 00:23:09,040
जो है आधी अधूरी खबरें दे दी हो सकता है बिल्कुल ऐसा हो सकता है

326
00:23:09,040 --> 00:23:13,120
परंतु क्रोध में आकर के आपको निर्णय लेना नहीं चाहिए था वीडियो

327
00:23:13,120 --> 00:23:17,520
बनाने का क्योंकि जगतगुरु शंकराचार्य सिद्धांत

328
00:23:17,520 --> 00:23:22,320
बताते हैं भगवत गीता में भी आपने तो आप तो मुझसे कहीं ज्यादा ज्ञाता हैं

329
00:23:22,320 --> 00:23:26,720
शास्त्रों के भगवत गीता में भगवान ने कहा है ना कि क्रोध

330
00:23:26,720 --> 00:23:30,880
जो होता है मनुष्य की सोचने समझने की शक्ति को जला देता है।

331
00:23:30,880 --> 00:23:34,880
जहां से क्रोध अग्नि की तरह होता है। जहां से उत्पन्न होता है सबसे

332
00:23:34,880 --> 00:23:38,880
पहले उसी को जलाता है। तो क्रोध ने आपने जब वह

333
00:23:38,880 --> 00:23:42,960
क्लिप देखी गुरुदेव की तो उसके आगे यह देखना भूल गए कि गुरुदेव क्या कहना चाह

334
00:23:42,960 --> 00:23:47,280
रहे हैं कि चैतन्य महाप्रभु के नाम पर किस तरह से पाखंड फैलाया

335
00:23:47,280 --> 00:23:51,360
जा रहा है। वर्णाश्रम की धज्जियां उड़ाई जा रही है। भगवान के

336
00:23:51,360 --> 00:23:55,600
अन्य स्वरूपों का अपमान किया जा रहा है। अन्य संतों का अपमान किया जा रहा है। मगर भगवान श्री

337
00:23:55,600 --> 00:24:00,160
कृष्ण को अल्लाह के समान बता के प्रचारित किया जा रहा है।

338
00:24:00,160 --> 00:24:04,320
और ना जाने क्या-क्या किया जा रहा है। गौडिया वैष्णव सिद्ध

339
00:24:04,320 --> 00:24:05,680
का नाम ले लेकर के गौडिया

340
00:24:05,680 --> 00:24:10,240
वैष्णव सिद्धांतों का ही अपमान किया जा रहा है। जो विश्वनाथ

341
00:24:10,240 --> 00:24:15,120
पाद जी हैं उन्होंने स्पष्ट रूप से भगवत गीता चार 13 में लिखा है

342
00:24:15,120 --> 00:24:19,360
कि जन्म से वर्ण व्यवस्था होती है व्यवहार के लिए और

343
00:24:19,360 --> 00:24:24,720
कर्म से उसका परमार्थ सुनिश्चित होता है।

344
00:24:24,720 --> 00:24:28,800
चार 13 का क्या भाष्य गौडिया वैष्णव संप्रदाय का? और

345
00:24:28,800 --> 00:24:33,200
ये इस वाले क्या भाष्य करते हैं? क्या दिखाते हैं

346
00:24:33,200 --> 00:24:37,200
बात चैतन्य महाप्रभु की अगर कर ले तो चैतन्य महाप्रभु के जो सिद्धांत है

347
00:24:37,200 --> 00:24:41,280
उनकी उनका जो आदेश है उनकी अवेलना करके प्रचार करता है

348
00:24:41,280 --> 00:24:46,080
इस कौन यह अपमान नहीं है चैतन्य महाप्रभु का

349
00:24:46,080 --> 00:24:50,480
उनको तो आप प्रशय देते हैं उनकी तो आपने आज तक नकल नहीं उतारी जो खिलवाड़

350
00:24:50,480 --> 00:24:55,040
करके रख रहे हैं धर्म के साथ चैतन महाप्रभु के सिद्धांतों

351
00:24:55,040 --> 00:24:59,200
के साथ गड़िया वैष्णव संप्रदाय के सिद्धांतों के साथ वर्णाश्रम

352
00:24:59,200 --> 00:25:03,920
के साथ अन्य भगवत स्वरूप स्वरूपों के साथ अपमान

353
00:25:03,920 --> 00:25:08,240
करके रख रहे हैं संतों का। बाबे हैं, वैश्या

354
00:25:08,240 --> 00:25:12,400
है। यह सब बातें जो बोल रहे हैं उनका तो प्रतिकार आपसे

355
00:25:12,400 --> 00:25:16,880
नहीं हुआ। मगर एक 83 साल का वृद्ध प्रत्येक वर्ष

356
00:25:16,880 --> 00:25:21,120
चैतन्य महाप्रभु की जयंती बनाते बनाते एक इंटरव्यू के दौरान

357
00:25:21,120 --> 00:25:25,920
उनका चैतन महाप्रभु का ऐसा नाम भूल गया जो कि अप्रासंगिक

358
00:25:25,920 --> 00:25:30,000
है और आपके हिसाब से वह नाम तो बताया ही नहीं जाना

359
00:25:30,000 --> 00:25:34,320
चाहिए क्योंकि आपको आपत्ति है चैतन महाप्रभु का संबंध शंकर संप्रदाय

360
00:25:34,320 --> 00:25:38,960
से बताने पर ऐसा नाम लेना वह स्वयं भूल गए

361
00:25:38,960 --> 00:25:43,040
तो उसका बड़ा आपने अपमान पूर्वक वीडियो

362
00:25:43,040 --> 00:25:47,840
बना दिया कटाक्ष में तो मेरा निवेदन है

363
00:25:47,840 --> 00:25:51,920
आपका अनुज हूं। कोई बात अगर कठोर मेरी लग गई हो तो

364
00:25:51,920 --> 00:25:54,080
उसको

365
00:25:54,080 --> 00:25:58,480
गौण रूप से देखते हुए मेरे प्रति अनुज भाव रखते हुए

366
00:25:58,480 --> 00:26:02,640
मेरे इस वक्तव्य को देखें। मर्यादा और सिद्धांतों

367
00:26:02,640 --> 00:26:07,440
के लिए जो समर्पण की भावना

368
00:26:07,440 --> 00:26:11,840
से आपको अवगत कराने का प्रयास है उसको प्राथमिकता से देखें। इतना

369
00:26:11,840 --> 00:26:16,080
मेरा निवेदन है आदर पूर्वक है। आपके आदर में कहीं कोई वो नहीं है

370
00:26:16,080 --> 00:26:20,240
और ऐसा भी नहीं है कि अब यह वक्तव्य हो गया है तो आपके

371
00:26:20,240 --> 00:26:24,320
भविष्य में आपके प्रति किसी का कोई भाव बदलने वाला

372
00:26:24,320 --> 00:26:28,320
है पर जिन बिंदुओं पर ध्यान देना आवश्यक

373
00:26:28,320 --> 00:26:32,640
है उस पर ध्यान अवश्य दें और

374
00:26:32,640 --> 00:26:36,160
जहां पर आप रह रहे हैं वहां पर आपके अधिकार

375
00:26:36,160 --> 00:26:40,400
की सीमा में जो आ सकता है उस पर कार्य

376
00:26:40,400 --> 00:26:44,480
करने का प्रयास करेंगे तो भी अच्छा होगा या नहीं करेंगे

377
00:26:44,480 --> 00:26:48,560
तो मैं समझूंगा कि आपका धर्म संस्थापना के निमित्त

378
00:26:48,560 --> 00:26:52,720
और ना कोई ना कोई ऐसा प्रकल्प होगा जिसकी रक्षा के कारण आप ऐसा

379
00:26:52,720 --> 00:26:56,720
कर कर पाने में अभी सक्षम नहीं है या फिर आपका मंतव्य

380
00:26:56,720 --> 00:27:00,720
अभी ऐसा नहीं है।

381
00:27:00,720 --> 00:27:04,800
ज्वाला प्रसाद मिश्र जो ज्वाला प्रसाद शास्त्री करके जो

382
00:27:04,800 --> 00:27:08,880
व्यक्ति है जिसने मथुरा की धरती से अवतारवाद का खंडन करने का प्रयास किया है उसको हम

383
00:27:08,880 --> 00:27:12,970
देख लेंगे। जय श्री राम।

384
00:27:12,970 --> 00:27:16,970
[संगीत]
