1
00:00:01,520 --> 00:00:05,600
तो सभी को जय श्री राम। कभी

2
00:00:05,600 --> 00:00:11,600
बचपन में मैंने पढ़ा था कहीं पर कि

3
00:00:12,160 --> 00:00:16,160
मनुष्य के व्यक्तित्व का निर्माण वो साहित्य करता

4
00:00:16,160 --> 00:00:20,480
है जिस साहित्य को वो पढ़ता है और धीरे-धीरे

5
00:00:20,480 --> 00:00:24,480
जैसे-जैसे मैं बड़ा होता गया तो मैंने ये चीज देखी

6
00:00:24,480 --> 00:00:28,560
कि हम जिस प्रकार के साहित्य से घिरे होते हैं हमारा समाज

7
00:00:28,560 --> 00:00:33,200
भी वैसा ही निर्मित होता है। हमारा पर्टिकुलर हमारा

8
00:00:33,200 --> 00:00:38,720
जो व्यक्तित्व है वो उसी से ओतप्रोत होता है। सौभाग्यवश

9
00:00:38,720 --> 00:00:42,800
मुझे बचपन से वो साहित्य मिला जिसके कारण मैं

10
00:00:42,800 --> 00:00:48,320
राम को जान पाया, कृष्ण को जान पाया, हनुमान जी को जान पाया।

11
00:00:48,320 --> 00:00:52,960
तो जिसके पास जैसा साहित्य उपलब्ध हो जाता है

12
00:00:52,960 --> 00:00:57,200
उस व्यक्ति का निर्माण वैसा ही होने लगता है। और आप

13
00:00:57,200 --> 00:01:01,200
माने या ना माने आज का जो सबसे प्रासंगिक साहित्य है

14
00:01:01,200 --> 00:01:06,960
वो है टीवी, टेलीविजन, फिल्में, सीरियल्स

15
00:01:06,960 --> 00:01:11,440
और शायद इस व्यक्तित्व निर्माण के कारण ही

16
00:01:11,440 --> 00:01:15,760
सनातन धर्म में ईश्वर के इतने विभिन्न प्रकार के चरित्रों

17
00:01:15,760 --> 00:01:16,640
का चित्रण किया

18
00:01:16,640 --> 00:01:20,640
है, लीलाएं दिखाई है। कथाएं हैं हमारे पास जिनसे

19
00:01:20,640 --> 00:01:24,880
कि उन कथाओं को पढ़ करके उन्हीं से ओतप्रोत हमारे व्यक्तित्व

20
00:01:24,880 --> 00:01:28,320
का निर्माण हो और

21
00:01:28,320 --> 00:01:30,480
हम

22
00:01:30,480 --> 00:01:35,040
लगातार यदि हमारे मन में चिंतन भी चले तो बजाय फिल्मी

23
00:01:35,040 --> 00:01:39,280
टीवी सीरियलों की बजाय हमारे मन में चिंतन चले हमारे ईश्वर का हमारे

24
00:01:39,280 --> 00:01:44,080
ईस्ट का तो ये दोनों बातें आपस में कनेक्टेड करती है

25
00:01:44,080 --> 00:01:48,400
कि आप एक तरफ यह कहा जा रहा है कि जिस साहित्य का हम अध्ययन करते हैं वैसा

26
00:01:48,400 --> 00:01:52,560
हमारा व्यक्तित्व निर्माण होता है। और दूसरी तरफ हमारे धर्म शास्त्रों द्वारा

27
00:01:52,560 --> 00:01:56,800
बताया जा रहा है कि अध्ययन करिए। अपने शास्त्रों का अध्ययन करिए। शास्त्रों

28
00:01:56,800 --> 00:02:01,120
का अध्ययन करने से भगवान की कथाएं भगवान की लीलाएं पढ़ने से उन्हीं का चिंतन

29
00:02:01,120 --> 00:02:05,200
मन में होगा। और जितना परम तत्व का चिंतन आपके मन में होगा

30
00:02:05,200 --> 00:02:09,440
उतना ही परम तत्व में आपकी निष्ठा होगा उतना ही

31
00:02:09,440 --> 00:02:15,440
आप संसार रूपी प्रपंच में फैली हुई माया से बच पाएंगे।

32
00:02:15,600 --> 00:02:19,760
तो जैसा कि हमने एक बात जानी कि आज

33
00:02:19,760 --> 00:02:24,720
का जो सबसे प्रासंगिक साहित्य है वो है फिल्में

34
00:02:24,720 --> 00:02:29,280
टीवी सीरियल्स सबसे ज्यादा समाज को प्रभावित करने वाली

35
00:02:29,280 --> 00:02:31,680
जो सामग्री है वो आज के समय

36
00:02:31,680 --> 00:02:35,760
में फिल्में ही हैं। अभी फिलहाल यह बात करने

37
00:02:35,760 --> 00:02:39,920
का मेरा अभिप्राय प्रयोजन यही है कि वर्तमान

38
00:02:39,920 --> 00:02:44,880
में एक कांतारा नाम की फिल्म आई है।

39
00:02:44,880 --> 00:02:49,520
जिस पर कि जो फिल्म रिव्यूज करने वाले लोग थे

40
00:02:49,520 --> 00:02:53,760
उन्होंने अपनीप अपनेप रिव्यूज दिए हैं

41
00:02:53,760 --> 00:02:58,800
और वहां पर यह देखा जा रहा है कि

42
00:02:58,800 --> 00:03:02,800
कुछ लोग कुछ सही रिव्यूज को दबाने का

43
00:03:02,800 --> 00:03:06,800
प्रयास कर रहे हैं। मतलब उसमें दो पक्ष हो गए कांतारा मूवी

44
00:03:06,800 --> 00:03:10,960
को लेकर के। एक पक्ष ने अपने हिसाब

45
00:03:10,960 --> 00:03:14,960
से बिल्कुल अह निष्ठा पूर्वक और बिना

46
00:03:14,960 --> 00:03:19,440
किसी पक्षपात के रिवु दिया है। भले ही वह रिव्यु

47
00:03:19,440 --> 00:03:23,840
सकारात्मक हो अथवा नकारात्मक मगर दूसरा व्यक्ति

48
00:03:23,840 --> 00:03:28,000
यदि उसने नकारात्मक दिया है तो वह सकारात्मकता के नाम पर उसका दमन

49
00:03:28,000 --> 00:03:32,160
करने का प्रयास कर रहा है जिसने कि निष्ठा पूर्वक सही बात बोली है और यदि

50
00:03:32,160 --> 00:03:36,480
उसने नकारात्मक यदि उसने सकारात्मक किया तो नकारात्मक क्या

51
00:03:36,480 --> 00:03:40,560
नकारात्मकता के आधार पर उसका दमन करने का प्रयास कर रहा है जिसने सही बात

52
00:03:40,560 --> 00:03:44,560
बोली तो यह बात अब सामान्य हो गई है और बहुत स्पष्ट रूप से दिख

53
00:03:44,560 --> 00:03:46,800
रही है समाज में कि जिन

54
00:03:46,800 --> 00:03:50,960
लोगों को कहीं कहीं ना कहीं जो परंपरा प्राप्त और जिन

55
00:03:50,960 --> 00:03:54,960
तथाकथित या भटके हुए हिंदू या भटका हुआ समाज

56
00:03:54,960 --> 00:04:00,240
जिन्हें रूढ़िवादी कहता है। है ना? या फिर वह

57
00:04:00,240 --> 00:04:04,480
उस दृष्टिकोण से नहीं देखता कि समाज के उत्थान में काम आने वाले

58
00:04:04,480 --> 00:04:09,200
वही परंपरा प्राप्त आचार्य हैं जिनको कि आज का जो

59
00:04:09,200 --> 00:04:13,600
सामान्य जन है वो रूढ़िवादी इत्यादि के नजरिए

60
00:04:13,600 --> 00:04:18,160
से देख रहा है। नेगेटिव तरीके से देख रहा है। नकारात्मकता के साथ देख रहा है।

61
00:04:18,160 --> 00:04:22,320
तो वो जो समाज है उस समाज के अनुसार जो लोग रूढ़िवादी नहीं

62
00:04:22,320 --> 00:04:26,480
है। उस समाज के अनुसार जो लोग आज के समसामयिक

63
00:04:26,480 --> 00:04:30,960
वातावरण को लेकर चलने वाले हैं और वह उतने

64
00:04:30,960 --> 00:04:34,960
अह प्रबल कट्टर रूप से वर्णाश्रम के पक्षधर भी

65
00:04:34,960 --> 00:04:38,960
नहीं है। तो उस समाज के नजरिए से जो ऐसे

66
00:04:38,960 --> 00:04:43,040
लोग हैं जो उनके लिए सही हैं आज उनकी भी

67
00:04:43,040 --> 00:04:47,120
आवाज को दबाने का आज उनका भी दमन कर देने का

68
00:04:47,120 --> 00:04:51,520
प्रयास स्पष्ट रूप से सामने दिखने लगा है। जहां एक और

69
00:04:51,520 --> 00:04:55,760
अभी अजीत भारती ने किसी बात को लेकर के अमुक अमुक

70
00:04:55,760 --> 00:04:59,920
दल का विरोध किया तो उसकी आवाज को दबाने का प्रयास

71
00:04:59,920 --> 00:05:01,920
किया गया। वहीं पे कांतारा

72
00:05:01,920 --> 00:05:06,080
मूवी को लेकर के किसी ने निष्पक्षता के साथ अपनी बात को रखा तो वहां

73
00:05:06,080 --> 00:05:10,160
अजीत भारती जैसे लोगों द्वारा ही उसकी आवाज को दबाने का प्रयास किया गया।

74
00:05:10,160 --> 00:05:14,400
तो यहां पर क्या चल रहा है? हर बड़ी मछली छोटी मछली को खाने पर तुली

75
00:05:14,400 --> 00:05:19,120
हुई है। ऐसा ही तो दिखाई दे रहा है। खैर कांतारा

76
00:05:19,120 --> 00:05:23,520
मूवी में प्रतीक बोराणी ने निष्पक्षता

77
00:05:23,520 --> 00:05:28,880
पूर्वक एक रिव्यु दिया कि उस मूवी में

78
00:05:28,880 --> 00:05:32,960
जो भारतीय इतिहास है उसको गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया

79
00:05:32,960 --> 00:05:37,040
है और उसमें यह दिखाने का प्रयास किया जा रहा है कि

80
00:05:37,040 --> 00:05:41,040
भाई हमारे यहां तो जो पिछड़ा वर्ग था या जो आदिवासी

81
00:05:41,040 --> 00:05:45,120
वर्ग था या जिसको आज हम दलित कहते हैं उनका

82
00:05:45,120 --> 00:05:49,360
शोषण होता था हमारे यहां। हम और जो राजसत्ता होती थी वो शोषण

83
00:05:49,360 --> 00:05:53,360
कराती थी। अब प्रतीक बुरा ने तो अपना रिव्यु जो देना

84
00:05:53,360 --> 00:05:57,360
था दे दिया। उसने सिरे से फिल्म को नकार दिया। फिल्म भले

85
00:05:57,360 --> 00:06:02,400
ही कितनी भी अच्छी बनी हो फिल्म भले ही

86
00:06:02,400 --> 00:06:06,480
बहुत लागत से बनी हो या बहुत हिट हो रही हो या फिर उसको देखने

87
00:06:06,480 --> 00:06:10,560
बहुत सारे लोग जा रहे हो या फिर उसको बहुत सारे लोग हिंदुत्ववादी

88
00:06:10,560 --> 00:06:15,040
कह रहे हो। डजंट मैटर। उस व्यक्ति ने अपना निष्पक्षता पूर्ण

89
00:06:15,040 --> 00:06:19,120
पक्ष रख दिया जो बिल्कुल सही था क्योंकि

90
00:06:19,120 --> 00:06:24,000
यह रिवु देने से पहले मैंने खुद पहले वो मूवी जाकर के देखी

91
00:06:24,000 --> 00:06:28,240
मैंने समझा कि मामला है क्या उस मूवी में परोसा क्या गया है जो प्रतीक

92
00:06:28,240 --> 00:06:32,400
बोराडे जैसे आज की दुनिया में आज का जो जन सामान्य है जिसके अनुसार

93
00:06:32,400 --> 00:06:36,880
प्रतीक बोराडे एक वही सही व्यक्ति है जो बहुत कट्टर कट्टरता

94
00:06:36,880 --> 00:06:41,120
से वर्णाश्रम इत्यादि का पक्षधार नहीं है तो उस

95
00:06:41,120 --> 00:06:45,360
व्यक्ति के द्वारा दिया गया। रिव्यू भी आज

96
00:06:45,360 --> 00:06:50,320
स्वयं को बहुत बड़ा धर्म रक्षक तथाकथित

97
00:06:50,320 --> 00:06:54,320
या फिर राष्ट्र रक्षक बताने वाले लोग उस

98
00:06:54,320 --> 00:06:58,400
व्यक्ति का रिव्यु क्यों ठुकरा रहे हैं? आज ये कैसे दिखाई दे रहा है? जैसे कि कोई कई लोगों

99
00:06:58,400 --> 00:07:02,640
को यह चमत्कार दिखा होगा कि अजीत भारती ने सदैव बीजेपी का पक्ष लिया। आज बीजेपी

100
00:07:02,640 --> 00:07:06,640
की सरकार में ही अजीत भारती को कैसे पुलिस के द्वारा जो

101
00:07:06,640 --> 00:07:10,960
है बुलवाया जा रहा है। सबसे पहली बात तो यह है कि लन लल्लन टॉक जैसे जो चैनल

102
00:07:10,960 --> 00:07:16,800
है उनके द्वारा यह बताया जा रहा है कि भाई

103
00:07:16,800 --> 00:07:20,960
जो गवाही है उनके ऊपर जूता फेंका गया जो

104
00:07:20,960 --> 00:07:25,040
कि बहुत ही बड़ा गलत जो तो बहुत जो कि बहुत बड़ा

105
00:07:25,040 --> 00:07:29,040
अपराध है बिल्कुल अपराध है। बिल्कुल सही बात है।

106
00:07:29,040 --> 00:07:33,840
परंतु जिस प्रकार एक बिटिया के

107
00:07:33,840 --> 00:07:37,840
साथ अर्ध रात्रि में घर से बाहर रहने पर कोई कुकर्म हो

108
00:07:37,840 --> 00:07:41,840
जाता है, दुष्कर्म हो जाता है तो सामने वाले को सजा दी जाती है। ठीक है।

109
00:07:41,840 --> 00:07:46,240
बिल्कुल ठीक है। कि सामने वाला जो कुकर्म करने वाला है, दुष्कर्म

110
00:07:46,240 --> 00:07:50,480
करने वाला है, मौके का फायदा उठाते हुए, अवसर का फायदा उठाते हुए जो दुष्कर्म

111
00:07:50,480 --> 00:07:54,960
करने वाला व्यक्ति है, उसको सजा देनी चाहिए। बिल्कुल

112
00:07:54,960 --> 00:07:59,280
ठीक बात है। पर अपनी बिटिया को भी बाद में समझाया

113
00:07:59,280 --> 00:08:03,920
जाता है कि बिटिया तुमको रात को बाहर नहीं बाहर जाना चाहिए था।

114
00:08:03,920 --> 00:08:08,080
तुमको अर्ध रात्रि में घर के बाहर नहीं जाना चाहिए था। जाना चाहिए था। कोई इमरजेंसी

115
00:08:08,080 --> 00:08:12,400
थी तो अपने भाई को भेजना चाहिए था। अपने पिता को भेजना चाहिए था। किसी संगी

116
00:08:12,400 --> 00:08:16,560
साथी को साथ में लेना चाहिए था। उसी प्रकार से

117
00:08:16,560 --> 00:08:20,640
अजीत भारती की भी भाषा इत्यादि ऐसी नहीं है

118
00:08:20,640 --> 00:08:24,640
जो ग्राह हो। परंतु गवाही को कौन समझाने

119
00:08:24,640 --> 00:08:28,960
वाला है कि तुमने हिंदू धर्म का अपमान किया है? क्या लल्लन

120
00:08:28,960 --> 00:08:34,080
टॉप ने गवाही को समझाया?

121
00:08:34,080 --> 00:08:38,240
सुप्रीम कोर्ट को कौन समझाने वाला है कि भाई इस पक्ष पर भी तो ध्यान दो

122
00:08:38,240 --> 00:08:42,720
कि हिंदू धर्म की जो आस्था है, सनातनियों की जो आस्था है और

123
00:08:42,720 --> 00:08:46,960
मानव मात्र का एकमात्र कल्याण कर सकने

124
00:08:46,960 --> 00:08:52,080
वाले सिद्धांतों को तुम नष्ट कर देना चाहते हो। जीवन बचेगा कैसे?

125
00:08:52,080 --> 00:08:56,240
यह बात ध्यान रखना कि संसार में

126
00:08:56,240 --> 00:09:00,480
जब भी कोई व्यक्ति अपनी माता को माता की दृष्टि

127
00:09:00,480 --> 00:09:04,880
से देख रहा है। माता को माता मान रहा है।

128
00:09:04,880 --> 00:09:09,200
इसका मतलब समझ जाना कि वो सनातन धर्म के कारण है।

129
00:09:09,200 --> 00:09:13,840
जिस दिन सनातन धर्म को आप हटा लोगे ना इस तरीके से नष्ट करते चले जाओगे।

130
00:09:13,840 --> 00:09:18,400
उस दिन ये जो मानवता दिखाई दे रही ना जिसके नाम पर हल्ला मचा रहे हो ढिंढोरा

131
00:09:18,400 --> 00:09:22,400
पीट रहे हो। वो मानवता

132
00:09:22,400 --> 00:09:26,800
छिन्न भिन्न हो जाएगी पता नहीं लगेगा जो

133
00:09:26,800 --> 00:09:30,960
टुकड़ों में कर कर के कर कर के हत्या कर रहे हो मानवता

134
00:09:30,960 --> 00:09:35,200
की मानवता के मूल में अगर जाओगे तो सनातन

135
00:09:35,200 --> 00:09:39,520
धर्म मिलेगा और कुछ मिल ही नहीं सकता। सनातन

136
00:09:39,520 --> 00:09:44,160
का विरोध करने वाला मिल ही नहीं सकता वहां पे। तो इस प्रकार

137
00:09:44,160 --> 00:09:48,320
धीरे धीरे धीरे करके सनातन की छाती को छलनी कर कर

138
00:09:48,320 --> 00:09:52,800
के कर कर के किस ओर ले जा रहे हो आप मानवता के नाम पे मानवता

139
00:09:52,800 --> 00:09:57,360
से दूर ले जा रहे हो तो इस ओर ध्यान कौन देगा

140
00:09:57,360 --> 00:10:01,360
इस ओर ध्यान दिया गया नहीं दिया गया और जब इस ओर

141
00:10:01,360 --> 00:10:05,600
ध्यान नहीं दिया जाएगा बार-बार नहीं दिया जाएगा बार-बार नहीं दिया जाएगा तो

142
00:10:05,600 --> 00:10:09,600
ठीक है फिर ऐसे लोग क्रांतिकारी जैसे लोग खड़े होंगे फिर

143
00:10:09,600 --> 00:10:13,840
ऐसी सिचुएशन ऐसी परिस्थिति स्थितियां आप ही जैसे लोग तो क्रिएट

144
00:10:13,840 --> 00:10:18,000
कर रहे हो। जो मूल है उस समस्या पे ध्यान ना

145
00:10:18,000 --> 00:10:22,480
दे के बार-बार जो पत्ते निकल आते हैं उनको आप काटने का प्रयास कर लो।

146
00:10:22,480 --> 00:10:26,880
करते रहो। मूल पे ध्यान नहीं दोगे। खैर

147
00:10:26,880 --> 00:10:31,040
बैक टू द पॉइंट। अब कांतारा मूवी में प्रतीक बोराडे का जो

148
00:10:31,040 --> 00:10:35,120
कहना था जिससे मैं बिल्कुल सहमत हूं कि उसमें पूरी तरीके से एक पक्ष दिखाया गया

149
00:10:35,120 --> 00:10:37,760
कि हमारे यहां पर ऐसा होता था कि जो राजसत्ता

150
00:10:37,760 --> 00:10:42,880
होती थी वो पिछड़ों का दलितों का आदिवासियों का शोषण करती थी।

151
00:10:42,880 --> 00:10:46,880
जब मैंने वो फिल्म देखी तो मैंने बीच में यह देखा अच्छा इसमें प्रतीक

152
00:10:46,880 --> 00:10:51,040
बोराणी ने यह बात भी कही कि ऐसा नहीं है कि पर्टिकुलर किसी

153
00:10:51,040 --> 00:10:55,120
एक राजा को दिखाया गया हो कि वह ऐसा कर रहा है। नहीं पूरा का पूरा

154
00:10:55,120 --> 00:10:59,200
उस राजस सत्ता से जुड़ा हुआ जो समाज है यहां तक कि वहां की प्रजा

155
00:10:59,200 --> 00:11:03,360
भी वहां के ब्राह्मण पुरोहित सब लोग

156
00:11:03,360 --> 00:11:07,440
उस समर्थन में है। उसके समर्थन में है जो

157
00:11:07,440 --> 00:11:11,600
आदिवासियों पर अत्याचार कर रहा है। जहां पर दास प्रथाएं

158
00:11:11,600 --> 00:11:16,000
चल रही हैं। जहां पे यहां लोगों को बेचा जा रहा है। दास के रूप में

159
00:11:16,000 --> 00:11:20,000
जो कार्य मिशनरीज का था, जो कार्य विदेशी

160
00:11:20,000 --> 00:11:24,000
शक्तियों का था, वो कार्य हमारे भारतीय इतिहास से जोड़

161
00:11:24,000 --> 00:11:28,080
करके दिखाया जा रहा है। बिल्कुल ठीक बात थी। अब बात ये है कि जब

162
00:11:28,080 --> 00:11:32,080
मैंने वो फिल्म देखी तो उसमें थोड़ी देर तक ऐसा लगा कि नहीं नहीं

163
00:11:32,080 --> 00:11:36,720
प्रतीक बोराडे की यह वाली जो बात है ना कि

164
00:11:36,720 --> 00:11:41,440
भाई केवल एक राजा ऐसा नहीं था निरंकुश

165
00:11:41,440 --> 00:11:47,440
निर्दई बल्कि पूरा का पूरा समाज ही ऐसा था।

166
00:11:47,600 --> 00:11:51,600
तो जब मैंने वहां पर देखा तो मुझे बीच में ऐसा लगा फिल्म में कि भाई यह वाली बात तो

167
00:11:51,600 --> 00:11:52,880
गलत है। पर्टिकुलर

168
00:11:52,880 --> 00:11:57,040
कोई एक राजा है जो निर्दय है जो बुरा है क्योंकि उसमें

169
00:11:57,040 --> 00:12:01,200
दिखाया गया है कि जो राजा इस समय शासक है जो अपने बेटे को नियुक्त करता

170
00:12:01,200 --> 00:12:05,200
है राज करने के लिए वो बेटा शुरू में दिखाया गया है कि वो है

171
00:12:05,200 --> 00:12:09,360
अत्याचारी और राजा जो था जिसने नियुक्त किया था उसको बड़ा सौम्य सा दिखाया

172
00:12:09,360 --> 00:12:13,600
गया है। सामंजस्य स्थापित करने वाला दिखाया गया है। और उसकी एक बिटिया

173
00:12:13,600 --> 00:12:17,920
भी दिखाई गई है जिसको कि जो उसकी बहन है जिसको जिसका राजतिलक

174
00:12:17,920 --> 00:12:22,000
हुआ है। तो जो उसकी बहन है उसको भी सामंजस्य वाली दिखाया गया है।

175
00:12:22,000 --> 00:12:26,000
सहिष्णुता वाली दिखाया गया है कि वो भी सामंजस्यता चाहती है। वो भी निर्दयी नहीं

176
00:12:26,000 --> 00:12:30,400
है। अत्याचारी नहीं है। और वो जो लड़का है जिसको नियुक्त किया गया है। राज्याभिषेक

177
00:12:30,400 --> 00:12:34,960
किया गया है गद्दी पर। वो मदिरापान

178
00:12:34,960 --> 00:12:38,960
करते रहना और गरीबों का शोषण करना, व्यभचार में लिप्त रहना यह सब

179
00:12:38,960 --> 00:12:43,200
उसको दिखाया गया है। तो लगभग 70%

180
00:12:43,200 --> 00:12:47,440
तो मूवी में यही लगता है कि नहीं नहीं पूरा समाज वैसा नहीं है। पर्टिकुलर

181
00:12:47,440 --> 00:12:51,600
ये राजा और यह जो राजा है ये जिसको नियुक्त किया गया

182
00:12:51,600 --> 00:12:56,320
है और इसका जो दादा था यानी इसके इसका वो पिता

183
00:12:56,320 --> 00:13:00,320
जिसने इसको नियुक्त किया उसका जो पिता था वो निरंकुश था।

184
00:13:00,320 --> 00:13:04,480
यह दो लोग दादा और पोता यह दो लोग तो विलेन है

185
00:13:04,480 --> 00:13:08,160
मगर पूरे समाज को इसलिए नहीं घसीटा जा सकता क्योंकि

186
00:13:08,160 --> 00:13:12,320
देखो वहीं पे इसका जो पिता है वो गलत नहीं है और वहीं पे इसकी जो बहन

187
00:13:12,320 --> 00:13:16,960
है वो गलत नहीं है। वो शासन नहीं करना चाहती अत्याचार नहीं करना चाहती।

188
00:13:16,960 --> 00:13:21,520
यहां तक कि यह तक दिखाया गया है फिल्म में बीच में कि कुछ

189
00:13:21,520 --> 00:13:25,760
ये जो नियुक्त होने वाला जिसका राज्या अभिषेक हुआ है इसको

190
00:13:25,760 --> 00:13:30,160
कुछ विधि विधान करने के लिए जब वहां के पुरोहित

191
00:13:30,160 --> 00:13:34,320
आते हैं राजसत्ता के तो पुरोहित जब टीका

192
00:13:34,320 --> 00:13:38,480
वगैरह लगाने आते हैं तो वो उनका भी अपमान कर देता है तिरस्कार कर देता है उनका ब्राह्मणों का

193
00:13:38,480 --> 00:13:42,720
जो ब्राह्मण आते हैं त्रिपुणधारी ब्राह्मण थे वो तो यह दिखाया

194
00:13:42,720 --> 00:13:46,880
गया है 70% फिल्म में आपको ऐसा ही लगता रहेगा कि भाई पूरा

195
00:13:46,880 --> 00:13:51,280
समाज नहीं उसी मानसिकता का है जो आदिवासियों का शोषण करने वाली मानसिकता

196
00:13:51,280 --> 00:13:56,400
का पूरा समाज नहीं है बल्कि पर्टिकुलर यह जो

197
00:13:56,400 --> 00:14:00,800
ये जो यंग एक विलेन जैसा

198
00:14:00,800 --> 00:14:04,880
एक निर्दयी व्यक्ति है जिसको गद्दी पर

199
00:14:04,880 --> 00:14:09,440
बिठा दिया गया यह अत्याचारी है। यह आपको पूरी फिल्म में लगता रहेगा। मगर

200
00:14:09,440 --> 00:14:13,760
जब फिल्म खत्म होती है, खत्म होते होते होते असली

201
00:14:13,760 --> 00:14:18,000
रूप दिखाया जाता है कि वो जो राजा आपको सामंजस्य वाला लग रहा था वो जो बेटी आपको सामंजस्य

202
00:14:18,000 --> 00:14:23,200
वाली लग रही थी वो सब तो वो सबसे बड़े षड्यंत्रकारी थे।

203
00:14:23,200 --> 00:14:23,700
और

204
00:14:23,440 --> 00:14:28,160
इस प्रकार से दिखा करके सबसे बड़े षड्यंत्रकारी और उन षड्यंत्रकारियों

205
00:14:28,160 --> 00:14:32,320
का पोषण करने वाले उन षड्यंत्रकारियों को समर्थन देने वाले वहां के पुरोहित

206
00:14:32,320 --> 00:14:36,880
इत्यादि भी हो गए। जो षड्यंत्र में शामिल है। कुल मिलाकर के

207
00:14:36,880 --> 00:14:40,960
जो राजसत्ता समाज है और उससे जुड़ा हुआ वर्ग

208
00:14:40,960 --> 00:14:45,040
है पूरा का पूरा वो पूरा का पूरा वर्ग आदिवासियों जो

209
00:14:45,040 --> 00:14:49,360
आदिवासी जो जंगल में रहने वाले लोग हैं जो पिछड़ी जनजाति इत्यादि

210
00:14:49,360 --> 00:14:53,680
वाले लोग हैं उनका शोषण कर रहे हैं। उनकी जमीन हथियाना चाहते हैं। उनकी

211
00:14:53,680 --> 00:14:57,840
जमीन में उगने वाली चीजों को अपने व्यापार इत्यादि में

212
00:14:57,840 --> 00:15:02,320
उपयोग में लेना चाहते हैं। वहां की स्त्रियों के साथ दुर्व्यवहार

213
00:15:02,320 --> 00:15:06,640
दिखाया गया है। बहुत अत्याचार दिखाया गया है इस राज सत्ता के द्वारा।

214
00:15:06,640 --> 00:15:11,200
यह सब अंत तक आते-आते क्लियर हो जाता है। तो यानी कि कुल मिलाकर के प्रोपेगेंडा

215
00:15:11,200 --> 00:15:15,280
जो वो जो प्रतीक बोराण ने जो बताया वो बिल्कुल

216
00:15:15,280 --> 00:15:19,360
स्पष्ट हो जाता है कि हां भाई पूरी फिल्म में वही दिखाया जा रहा है। जो जय भीम मूवी

217
00:15:19,360 --> 00:15:23,600
में दिखाया गया था। जय भीम मूवी अगर किसी ने देखी हो साउथ की जो

218
00:15:23,600 --> 00:15:27,680
प्रोपेगेंडा जय भीम में दिखाया गया था। सेम वही प्रोपेगेंडा यहां पर दिखाया गया है।

219
00:15:27,680 --> 00:15:31,680
बस यहां पर पृष्ठभूमि चेंज कर दी गई है। इतना और ऐड कर दिया गया

220
00:15:31,680 --> 00:15:35,680
है कि जिसके साथ अत्याचार हो रहा है वो भी कहीं ना कहीं हिंदू

221
00:15:35,680 --> 00:15:38,640
धर्म से जुड़ा हुआ है। जो अत्याचार कर रहा है वो

222
00:15:38,640 --> 00:15:42,800
भी हिंदू धर्म से जुड़ा हुआ है। और ईश्वर में विश्वास रखने

223
00:15:42,800 --> 00:15:47,760
वाले दोनों हैं। हम ईश्वर जो वैदिक

224
00:15:47,760 --> 00:15:52,160
जो वैदिक ईश्वर है। अब आदिवासियों को तो वेदों का कितना ज्ञान होगा

225
00:15:52,160 --> 00:15:56,160
ये कल्पना नहीं की जा सकती। मगर कम से कम जो ये राज सत्ता है इसको वैदिक

226
00:15:56,160 --> 00:16:00,320
ईश्वर में विश्वास रखने वाला दिखाया गया। कुल मिलाकर के सनातनी विचारधारा

227
00:16:00,320 --> 00:16:04,400
का दिखाया गया है। और आदिवासी जो है वो भी सनातनी विचारधारा के

228
00:16:04,400 --> 00:16:08,560
क्यों सिद्ध होते हैं? क्योंकि वो शिवलिंग देवता पुनर्जन्म

229
00:16:08,560 --> 00:16:12,560
देवताओं का आना जाना मूर्ति पूजा शिव भगवान इन सब में विश्वास करते हैं।

230
00:16:12,560 --> 00:16:16,640
पार्वती माता इन सब में विश्वास करते हैं। तो वो भी वहां से सनातनी सिद्ध होते हैं।

231
00:16:16,640 --> 00:16:20,720
कुल मिलाकर के प्रोपेगेंडा क्या दिखाया गया है कि भाई ये

232
00:16:20,720 --> 00:16:24,720
हमारा हिंदू धर्म कैसा है जिसमें कि इतना भेदभाव है कि जो राज

233
00:16:24,720 --> 00:16:28,720
सत्ता है या फिर कह लीजिए क्षत्रिय जाति के हैं। ब्राह्मण लोग हैं। वो इस

234
00:16:28,720 --> 00:16:32,800
तरीके के जो शूद्र वर्ग वर्ण के हैं वही पिछड़े वर्ण वर्ग के

235
00:16:32,800 --> 00:16:36,960
हैं। दलित आज की भाषा में कहें तो दलित हैं, हरिजन हैं,

236
00:16:36,960 --> 00:16:41,360
आदिवासी हैं। उन सबका शोषण करना चाहते हैं।

237
00:16:41,360 --> 00:16:45,520
एट एनी कॉस्ट। उनकी चीजों को हथियाना चाहते हैं। उनको कुचल देना चाहते हैं। उसमें

238
00:16:45,520 --> 00:16:49,520
कई सारे डायलॉग भी हैं। वह स्पष्टता अस्पष्टता वाले जिनको बनाने का

239
00:16:49,520 --> 00:16:53,600
प्रयास वामपंथी विदेशी ताकतें सदैव से करती

240
00:16:53,600 --> 00:16:54,100
आई

241
00:16:53,840 --> 00:16:57,920
हैं। हमारे यहां जो स्पष्टता अस्पष्टता की निषिद्धता

242
00:16:57,920 --> 00:17:02,080
है। अमुक अमुक संदर्भों में ऐसी बातों

243
00:17:02,080 --> 00:17:06,240
का दुरुपयोग जिन बातों का दो जिन बातों के दो अर्थ निकल सकते हैं।

244
00:17:06,240 --> 00:17:10,240
उन बातों का दुरुपयोग करके वामपंथी विचारधाराओं वाले और जो सनातन

245
00:17:10,240 --> 00:17:14,240
को नष्ट करने आने वाले लोग हैं। वह सनातन को नष्ट करने

246
00:17:14,240 --> 00:17:18,240
के लिए इन बातों का प्रयोग करते चले आ रहे हैं और

247
00:17:18,240 --> 00:17:22,320
उनहीं भावनाओं को इस फिल्म में पुष्ट किया गया है और यही रिवु

248
00:17:22,320 --> 00:17:27,520
दिया था प्रतीक बोराडे ने अपने रिव्यु अब होता क्या है

249
00:17:27,520 --> 00:17:31,840
कि प्रतीक बोराडे ने ये कहा कि भाई जो क्रिश्चियन मिशनरीज

250
00:17:31,840 --> 00:17:35,920
फैलाना चाह रही हैं जो भावनाएं डालना चाह रही हैं हमारे

251
00:17:35,920 --> 00:17:40,000
समाज के मन में कि हमारे यहां तो ऐसा होता था मंदिर ऐसे बनते थे हमारे यहां मार

252
00:17:40,000 --> 00:17:44,320
मार के चाबुक से अत्याचार चार के द्वारा बनते थे हमारे यहां के मंदिर

253
00:17:44,320 --> 00:17:49,120
है ना यह दिखाने का प्रयास किया गया है जो कि उस फिल्म से प्रकट हो रहा है स्पष्ट

254
00:17:49,120 --> 00:17:53,920
तो ऐसे में अ

255
00:17:53,920 --> 00:17:58,000
जो दूसरे अब तक जो संघी साथी थे जैसे इन्होंने

256
00:17:58,000 --> 00:18:02,080
इस पर जो है कटाक्ष करना चालू किया इन्होंने प्रतीक बोराडे की भावनाओं का

257
00:18:02,080 --> 00:18:06,240
दमन करना चालू किया जो उसने निष्पक्षता के साथ अपना वो रिव्यु दिया

258
00:18:06,240 --> 00:18:10,240
था कांतारा को लेकर के उसका दमन करना इन लोगों ने चालू कर दिया क्यों कर

259
00:18:10,240 --> 00:18:14,320
दिया क्योंकि क्योंकि इनके मन में इनको लगता है कि धर्म रक्षा

260
00:18:14,320 --> 00:18:18,320
जो जिस तरीके से ये करना चाहते हैं अशास्त्रीय तरीके से धर्म

261
00:18:18,320 --> 00:18:22,320
क्या है? कहीं ना कहीं धर्म के मूल में शास्त्र है ना

262
00:18:22,320 --> 00:18:26,320
वेद है ना? तो जितना वेदों के बाहर जाकर

263
00:18:26,320 --> 00:18:30,320
के अपने द्वारा मन कल्पित सिद्धांतों के आधार पर यह लोग स्वयं को

264
00:18:30,320 --> 00:18:34,320
धर्म रक्षक धर्म रक्षक सिद्ध करने का प्रयास करने में लगे हुए हैं।

265
00:18:34,320 --> 00:18:38,400
अब इन्होंने देखा कि भैया उस फिल्म में तो शिवजी की इतनी वो

266
00:18:38,400 --> 00:18:42,960
दिखाई गई है। भारतीय हम लोग जिनकी पूजा करते हैं। खैर

267
00:18:42,960 --> 00:18:47,040
अंकुर आर्य को कैसे इसमें बिलीव हो रहा है वो तो मैं नहीं समझ पा रहा हूं। क्योंकि

268
00:18:47,040 --> 00:18:52,080
अंकुर आर्य तो आर्य समाज ही है सत्यार्थ प्रकाश भेजता है और उसके अनुसार

269
00:18:52,080 --> 00:18:56,320
मूर्ति पूजा करना पाप है। अधर्म है। तो वहां पर अंकुर आर्य

270
00:18:56,320 --> 00:19:00,480
के अनुसार किस तरीके से धर्म का प्रोत्साहन हो गया वो समझ में नहीं आ रहा है। मगर

271
00:19:00,480 --> 00:19:04,560
फिर भी ये मान लेते हैं दुर्योधन्या से कि अंकुर आर्य ये भावना

272
00:19:04,560 --> 00:19:08,960
लेकर के चलता है कि वो हमारी बात बाद में देखेंगे कि सत्यार्थ प्रकाश क्या कहती है।

273
00:19:08,960 --> 00:19:13,120
मगर मूर्ति पूजा कम से कम भारतीय पहचान है। सनातन की पहचान है।

274
00:19:13,120 --> 00:19:17,280
वो बात अलग है कि दयानंद जी ने ना मानी हो। उन्होंने उसको गालियां दी हो मूर्ति

275
00:19:17,280 --> 00:19:21,520
पूजा को। भरसक विरोध किया हो। मगर फिर भी चलो मान लेते हैं कि भैया

276
00:19:21,520 --> 00:19:25,760
वह कम से कम एक स्ट्रेटजी के साथ चल रहा है कि हम अपनी मान्यताओं को बाद में देख लेंगे।

277
00:19:25,760 --> 00:19:30,160
मगर हम अभी मूर्ति पूजा का अगर उत्थान हो रहा है तो हम उसका समर्थन

278
00:19:30,160 --> 00:19:34,560
करेंगे। ठीक है? अब बात यह आती है

279
00:19:34,560 --> 00:19:38,960
कि अगर भक्ति के नाम पर भक्ति

280
00:19:38,960 --> 00:19:43,360
दिखा दी गई कि भाई हां बहुत बहुत नो

281
00:19:43,360 --> 00:19:47,520
डाउट उसमें जो है भगवान की पावर दिखाई गई है कि भगवान

282
00:19:47,520 --> 00:19:52,000
की क्षमता कैसी होती है जब वो अपने गण भेज देते हैं वो चीजें दिखाई गई है। ठीक है?

283
00:19:52,000 --> 00:19:56,000
मगर वो दिखाने के चक्कर में आपने वो एक चीज दिखा दी

284
00:19:56,000 --> 00:20:00,240
जो लोगों को अच्छी लगे। हिंदुत्ववादी लोगों को अच्छी लगे। मगर उस दिखाने

285
00:20:00,240 --> 00:20:04,480
के साथ-साथ आपने इतना अत्याचार दिखा दिया शिवजी को मानने

286
00:20:04,480 --> 00:20:08,720
वाले वो भी हैं जो अत्याचार कर रहे हैं और शिवजी को मानने वाले वो भी हैं

287
00:20:08,720 --> 00:20:12,720
जो अत्या जिन पर अत्याचार हो रहा है तो फिर ये समाज

288
00:20:12,720 --> 00:20:17,120
पूरा शिवजी का ही हुआ ना जहां पर ये भेदभाव है जहां ये शोषण है

289
00:20:17,120 --> 00:20:21,600
श्रेष्ठ का निम्न के निम्न के साथ अगड़े का पिछड़े के साथ

290
00:20:21,600 --> 00:20:24,080
ऊंचे का नीचे के साथ

291
00:20:24,080 --> 00:20:28,400
यही तो दिखा रहे हो अब बात आती है कि हम समर्थन

292
00:20:28,400 --> 00:20:32,400
क्यों क्यों ना करें। नल की पत्नी जो थी दमयंती

293
00:20:32,400 --> 00:20:37,680
उसको अजगर खा जाने वाला था। पढ़ लेना जाकर। हां।

294
00:20:37,680 --> 00:20:41,920
एक व्याध ने अजगर को मारकर दमयंती के प्राणों की रक्षा

295
00:20:41,920 --> 00:20:46,000
की। और उसके बाद व्याध की कुद दृष्टि हो गई दमयंती

296
00:20:46,000 --> 00:20:50,320
पर। तो क्योंकि व्याध ने दमयंती के प्राणों की रक्षा की है

297
00:20:50,320 --> 00:20:54,400
तो क्या इस आधार पर

298
00:20:54,400 --> 00:20:58,640
उसको यह अधिकार प्राप्त हो जाता है कि अब वह जो है दमयंती का चीर हरण करे। उसकी

299
00:20:58,640 --> 00:21:04,400
गरिमा को भंग कर दे और इसमें अजीत भारती

300
00:21:04,400 --> 00:21:08,480
प्रतीक बोराडे का विरोध करते हुए क्या टिप्पणी दे रहे हैं? कुछ

301
00:21:08,480 --> 00:21:12,560
लोग बोल रहे थे कि यार उसमें एससी एसटी को एक क्षत्रिय जो सता रहा है इसको सेलिब्रेट

302
00:21:12,560 --> 00:21:16,640
किया गया। नहीं पहली बात नवीं शताब्दी में एससी एसटी नहीं होता था। जो भी आपको

303
00:21:16,640 --> 00:21:20,960
ये चूर्ण बांट रहा है उससे पूछेगा कि नाइंथ सेंचुरी में ये कहां से होता था या फिर क्रिश्चियन

304
00:21:20,960 --> 00:21:25,120
मिशनरी का? कह रहे हैं कि भैया उस समय क्रिश्चियन मिशनरीज कहां

305
00:21:25,120 --> 00:21:29,200
से आ जाएंगी? क्रिश्चियन तब होती नहीं थी। मतलब प्रदीप बोराडे

306
00:21:29,200 --> 00:21:33,280
ने यह कहा कि

307
00:21:33,280 --> 00:21:37,520
जो वामपंथी इतिहासकार वामपंथी इतिहासकार कैसे

308
00:21:37,520 --> 00:21:41,600
हैं? वामपंथी इतिहासकारों ने निषाद राज को लेकर के यह कहा है

309
00:21:41,600 --> 00:21:45,680
कि भैया निषाद राज जो था ना वो जातीय संघर्ष का प्रतीक था

310
00:21:45,680 --> 00:21:50,560
रामायण काल का। जबकि निषाद राज तो

311
00:21:50,560 --> 00:21:54,720
जातीय सामंजस्यता का प्रतीक था। कितना झूठ लिखा

312
00:21:54,720 --> 00:21:58,800
है इन वामपंथी विचारधारा वाले इतिहासकारों ने। प्रतीक बोराडे ने

313
00:21:58,800 --> 00:22:04,000
यह कहा कि जो वामपंथी विचारधाराएं जो क्रिश्चियन मिशनरीज

314
00:22:04,000 --> 00:22:08,160
वाले लोग और जो सनातन विरोधी तत्व जो भी हैं

315
00:22:08,160 --> 00:22:12,160
जो हमारी सभ्यताओं सभ्यता को नष्ट करना चाहते हैं सनातन संस्कृति को मिटा

316
00:22:12,160 --> 00:22:16,160
देना चाहते हैं जो भी हैं जो

317
00:22:16,160 --> 00:22:19,440
भावना समाज में यह लोग डालने

318
00:22:19,440 --> 00:22:23,520
का प्रयास करते चले आ रहे हैं जिसका हमने हमें हमने दबन

319
00:22:23,520 --> 00:22:27,680
करने का प्रण लिया हुआ है कि इन भावनाओं को हम नहीं फैलने देंगे

320
00:22:27,680 --> 00:22:32,000
कि भैया हमारे यहां तो अत्याचार होता था। तो उन भावनाओं

321
00:22:32,000 --> 00:22:36,240
को ही इस फिल्म में पुष्ट किया गया है। यह प्रतीक बुराडे का कहना था। प्रतीक बोराडे

322
00:22:36,240 --> 00:22:40,560
ने यह बात भी कही है कि भाई आप को अगर संघर्ष दिखाना था

323
00:22:40,560 --> 00:22:44,880
एक विलेन और एक एक समाज विलेन

324
00:22:44,880 --> 00:22:49,200
एक ग्रुप दिखाना था जो विलेन है और जो ये आदिवासी हैं जिनके पास उनके देवता

325
00:22:49,200 --> 00:22:53,200
हैं और देवताओं की शक्ति है तो इनके बीच

326
00:22:53,200 --> 00:22:57,360
में आपको संघर्ष दिखाना है तो इस ग्रुप को आप कोई विदेशी सत्ता के रूप में भी दिखा

327
00:22:57,360 --> 00:23:01,520
सकते थे। विदेशी आक्रमणकारी के रूप में दिखा सकते थे। इसी क्रम में प्रतीक बुराडे

328
00:23:01,520 --> 00:23:05,760
ने ये भी बात कही कि इस ग्रुप को आप जो है क्रिश्चियन मशीनरीज या इसके

329
00:23:05,760 --> 00:23:09,920
जैसा और कोई भी दिखा सकते थे। फिल्म में और भी विदेशी लोग दिखाए गए उनसे

330
00:23:09,920 --> 00:23:14,160
जोड़कर दिखा सकते थे। आप भारतीय सनातन धर्म को मानने

331
00:23:14,160 --> 00:23:18,240
वाले मूल के भारतीय मूल के शासक को

332
00:23:18,240 --> 00:23:22,240
ही विलियन क्यों बना रहे हो? यदि कल्पना कर रहे हो तो ऐसी

333
00:23:22,240 --> 00:23:26,400
कल्पना करो ना जिसमें कि जो वाकई में विलिलेन है

334
00:23:26,400 --> 00:23:30,400
वो विलेन दिखे बजाय उसके कि जो विलेन

335
00:23:30,400 --> 00:23:35,120
नहीं है और उनको विलेन बनाने का ठेका लिया हुआ है वामपंथियों ने

336
00:23:35,120 --> 00:23:39,200
ये प्रतीक बोराडे का कहना था तो इस पर कुतर्क करते हुए ये टिप्पणी आई

337
00:23:39,200 --> 00:23:43,360
अजीत भारती की कि भैया उस समय अह ईसाई ईसाई

338
00:23:43,360 --> 00:23:47,360
क्रिश्चियन मिशनरी अस्तित्व में ही नहीं थी तो एक ऐसे कर देंगे तो इस बात के

339
00:23:47,360 --> 00:23:51,680
दो मतलब निकलते हैं एक या तो अजीत भारतीय मानता है कि हमारे यहां पर यह शोषण

340
00:23:51,680 --> 00:23:55,920
हो रहा था तो फिर ये वामपंथियों का पक्षधर सिद्ध होता है वामपंथी

341
00:23:55,920 --> 00:24:00,000
विचारधारा फैलाने वालों का और अगर ये ये कह रहा है कि भैया वो

342
00:24:00,000 --> 00:24:04,080
कल्पना कैसे कर सकते थे जब उस उस सेंचुरी में वो हो ही नहीं सकती थी। भाई जब आप

343
00:24:04,080 --> 00:24:08,160
कल्पना करके यह दिखा रहे हो कि जिस शासक ने जो

344
00:24:08,160 --> 00:24:12,320
नहीं किया अत्याचार वो अत्याचार उससे जोड़ कर दिखा रहे हो तो कल्पना करके किसी

345
00:24:12,320 --> 00:24:16,480
और से जोड़ कर दिखा दो जो वाकई में विलेन है। एक नई

346
00:24:16,480 --> 00:24:21,920
आप जब कल्पना ही करनी है तो एक नई ब्रीड तैयार कर दो भाई।

347
00:24:21,920 --> 00:24:27,120
नहीं करेंगे। मैं कुछ फिल्मों के बारे में और बता देता हूं आपको। एक है लक्ष्मी।

348
00:24:27,120 --> 00:24:31,200
इस मूवी में इस मूवी को देखने के बाद कोई

349
00:24:31,200 --> 00:24:35,200
भी प्रबुद्ध व्यक्ति होगा तो वह यह समझ पाएगा कि यह

350
00:24:35,200 --> 00:24:39,440
मूवी अर्निंग के लिए नहीं बनाई गई है।

351
00:24:39,440 --> 00:24:43,520
फायदा या कमाई करने के लिए नहीं बनाई गई है। यह मूवी

352
00:24:43,520 --> 00:24:47,840
इसलिए बनाई गई थी कि जनसामान्य में ये धारणा व्याप्त

353
00:24:47,840 --> 00:24:50,160
हो कि हिंदू कितने गए गुजरे हैं

354
00:24:50,160 --> 00:24:53,920
और मुसलमान कितना अच्छा है।

355
00:24:53,920 --> 00:24:58,000
इस मूवी में पूरी मूवी में हिंदू

356
00:24:58,000 --> 00:25:02,080
को या तो विलेन दिखाया गया है, दिखाया गया है,

357
00:25:02,080 --> 00:25:07,280
कॉमेडियन दिखाया गया है, अत्याचारी दिखाया गया है

358
00:25:07,280 --> 00:25:11,280
और या फिर एक ही पूरी मूवी में केवल एक

359
00:25:11,280 --> 00:25:15,280
हिंदू ऐसा है जो आपको थोड़ा प्रबुद्ध दिखाई देगा। और वो

360
00:25:15,280 --> 00:25:19,280
हिंदू कौन है? फिल्म की अभिनेत्री जो एक मुस्लिम

361
00:25:19,280 --> 00:25:23,680
से विवाह करती है अपने घर वालों की इच्छा के विरुद्ध जाकर। केवल

362
00:25:23,680 --> 00:25:28,000
वह ऐसी हिंदू है पूरी फिल्म में जो थोड़ी सी आपको प्रबुद्ध

363
00:25:28,000 --> 00:25:33,120
दिखाई देगी। कैसे? इस मूवी ये मूवी

364
00:25:33,120 --> 00:25:37,520
उसका रिमेक है कंचना का। आप देखो

365
00:25:37,520 --> 00:25:41,680
सबसे पहला सीन है जो जहां पर एक बाबा होता

366
00:25:41,680 --> 00:25:46,240
है जो किसी मातृशक्ति पर अत्याचार कर रहा है।

367
00:25:46,240 --> 00:25:50,240
और यह कहते हुए कि ये चुड़ैल है। और उस बाबा का ढोंग कौन

368
00:25:50,240 --> 00:25:54,240
खोलता है? एक मुसलमान जो इसका हीरो है फिल्म का।

369
00:25:54,240 --> 00:25:58,320
ठीक है? इसके बाद फिल्म में दूसरा जो हिंदू है

370
00:25:58,320 --> 00:26:02,560
वो उस हीरोइन के घर के लोग हैं जो कॉमेडियन टाइप के सारे

371
00:26:02,560 --> 00:26:05,200
सारे के सारे जोकर जैसे हैं। ठीक है?

372
00:26:05,200 --> 00:26:09,600
तो सबसे पहले हिंदू क्या दिखा? बाबा के रूप में ढोंगी। दूसरे हिंदू

373
00:26:09,600 --> 00:26:13,600
वो अभिनेत्री के घर वाले नायिका के घर वाले जो जोकर

374
00:26:13,600 --> 00:26:17,600
हैं। कॉमेडियन है। मतलब बेवकूफ। ठीक। फिर तीसरा

375
00:26:17,600 --> 00:26:21,760
हिंदू कौन दिखता है? जो एक किन्नर

376
00:26:21,760 --> 00:26:25,760
जन्म लेता है कहीं पर तो उसको उसका पिता घर से भगा देता है

377
00:26:25,760 --> 00:26:29,840
किन्नर को। तो यह एक यह तो किन्नर हो गया। ठीक है? और

378
00:26:29,840 --> 00:26:34,080
किन्नर को भगा कौन रहा है? घर से उसका हिंदू पिता।

379
00:26:34,080 --> 00:26:38,080
इसके बाद उसने अपनी जिस संतान को भगा दिया था उसको शरण

380
00:26:38,080 --> 00:26:42,080
कहां मिलती है? मुस्लिम के घर। देखते जाइए आप

381
00:26:42,080 --> 00:26:46,640
किस तरह से प्रोपेगेंडा सेट किया गया फिल्म में। इसके बाद वो

382
00:26:46,640 --> 00:26:50,640
संतान जो है बड़ी होती है और उसका अपना कुछ वो अपना किसी

383
00:26:50,640 --> 00:26:54,640
तरीके से मेहनत करके कुछ बना लेते हैं तो उसकी जमीन उसकी प्रॉपर्टी

384
00:26:54,640 --> 00:26:58,640
पर कब्जा करके उसकी हत्या करके उसकी प्रॉपर्टी पर

385
00:26:58,640 --> 00:27:02,800
कब्जा कौन करता है एक हिंदू परिवार

386
00:27:02,800 --> 00:27:06,880
और इसके बाद जब इसकी हत्या हो गई और

387
00:27:06,880 --> 00:27:11,200
ये अपनी अपना बदला लेने के लिए पिशाच के रूप में भूत के रूप में घूमने लगा

388
00:27:11,200 --> 00:27:16,560
ये व्यक्ति जिसकी हत्या हुई है तो अब

389
00:27:16,560 --> 00:27:20,240
जो हिंदू पुजारी आते हैं वो यह पता तो लगा लेते

390
00:27:20,240 --> 00:27:24,240
हैं कि यहां पर भूत बाधा है यहां प्रेत है, पिशाच है, आत्मा है। ये पता लगा

391
00:27:24,240 --> 00:27:28,400
लेते हैं मगर वो खुद कह देते हैं कि हम इस इसका निराकरण हम नहीं कर पाएंगे।

392
00:27:28,400 --> 00:27:32,480
सोचिए अरे भैया ये सीन दिखाने की क्या आवश्यकता

393
00:27:32,480 --> 00:27:36,640
है कि जो पुजारी आया है हिंदू वो ये तो पता लगा

394
00:27:36,640 --> 00:27:40,640
पा रहा है कि आत्मा यहां पर है मगर वो एक ये भी कह

395
00:27:40,640 --> 00:27:44,960
रहा है कि हम इसका इंतजाम नहीं कर पाएंगे और इंतजाम कौन करेगा मुस्लिम

396
00:27:44,960 --> 00:27:49,280
बाबा तो मुस्लिम कौन है जिसने

397
00:27:49,280 --> 00:27:53,520
किसी उपेक्षित संतान को अपने घर में शरण दी मुस्लिम कौन

398
00:27:53,520 --> 00:27:58,000
है जो इतना दयावान है जो कि उस अह

399
00:27:58,000 --> 00:28:02,320
पिशाच के रूप में घूमने वाले की मदद कर रहा है। उसका

400
00:28:02,320 --> 00:28:06,880
उसका प्रतिकार उसका बदला दिलवा रहा है। उसको प्रतिशोध उसको दिलवा रहा है।

401
00:28:06,880 --> 00:28:11,120
और वो इतना दयावान और मुस्लिम कौन है? जो

402
00:28:11,120 --> 00:28:15,280
भूत का सही निराकरण जानते हैं। भूत को भगाने का सही

403
00:28:15,280 --> 00:28:19,360
तरीका सही तरीका जानते हैं। यह सब लोग मुस्लिम है। और

404
00:28:19,360 --> 00:28:23,840
हिंदू या तो कॉमेडियन है या ढूंढगी है, पाखंडी या विलेन है

405
00:28:23,840 --> 00:28:28,000
या निर्दयी है और या फिर वो है जो अपने

406
00:28:28,000 --> 00:28:32,320
घर वालों की इच्छा के विरुद्ध जाकर के किसी मुस्लिम

407
00:28:32,320 --> 00:28:35,600
से विवाह कर लेती है।

408
00:28:35,600 --> 00:28:39,760
वो प्रबुद्ध हिंदू है। तो ऐसे ही बहुत सारे अह

409
00:28:39,760 --> 00:28:44,320
नैरेटिव्स हैं जो फिल्मों के माध्यम से हमारे समाज में इंजेक्ट

410
00:28:44,320 --> 00:28:48,320
किए जाते हैं। इसी प्रकार से एक मुंजिया मूवी है जिसमें महाराष्ट्र की लोक

411
00:28:48,320 --> 00:28:52,480
कथा दिखाई गई है। वहां पर भी एक पादरी को दिखाया

412
00:28:52,480 --> 00:28:56,560
गया है कि वो जो है इंतजाम करता है भूत का।

413
00:28:56,560 --> 00:29:01,120
तो यह एक नैरेटिव लगातार सेट किया जा रहा है कि भैया जो व्यक्ति सामर्थ्यशाली

414
00:29:01,120 --> 00:29:05,440
है, जो व्यक्ति अच्छा है, दयावान है, वह सब मुसलमान है या फिर क्रिश्चियन

415
00:29:05,440 --> 00:29:10,080
है और हमारे हिंदू वो कुछ नहीं है।

416
00:29:10,080 --> 00:29:14,320
इस तरह का मानसिक वातावरण बनाने का प्रयास चल रहा है। ऐसे

417
00:29:14,320 --> 00:29:19,200
ही प्रयास पर प्रकाश डालने का कार्य किया प्रतीक बोराडे ने। परंतु

418
00:29:19,200 --> 00:29:23,360
अब प्रतीक बोराडे अपने अन्य रिव्यूज कैसे देते हैं, कैसे

419
00:29:23,360 --> 00:29:27,360
नहीं देते हैं, वह मुझे नहीं पता। मगर अपने

420
00:29:27,360 --> 00:29:31,520
इसी रिव्यू में प्रतीक बोराडे ने ट्रिपल

421
00:29:31,520 --> 00:29:35,920
आर मूवी का भरपूर समर्थन किया है। ठीक है?

422
00:29:35,920 --> 00:29:39,920
अब भरपूर समर्थन क्यों किया है? क्योंकि भाई वो देशभक्ति सिखाती है

423
00:29:39,920 --> 00:29:44,000
और उसमें कहीं ना कहीं जो सनातन संस्कृति की रक्षा की बात की गई।

424
00:29:44,000 --> 00:29:48,320
ठीक है। अच्छी बात है। मगर यदि प्रतीक बोराडे अजीत भारती

425
00:29:48,320 --> 00:29:50,640
जैसे लोगों से सहमत नहीं है।

426
00:29:50,640 --> 00:29:55,040
अंकुर आर्य जैसे लोगों से सहमत नहीं है। मैं प्रतीक बुराडे

427
00:29:55,040 --> 00:29:59,120
के इस रिव्यु से बिल्कुल सहमत हूं जो उसने ये वाला किया है कांतारा। मगर यदि

428
00:29:59,120 --> 00:30:03,360
प्रतीक बुराडे इस बात को मान के चलता है कि यदि किसी

429
00:30:03,360 --> 00:30:07,440
व्यक्ति ने कोई हिंदुत्व को प्रोत्साहित करने

430
00:30:07,440 --> 00:30:11,680
वाली चीजें अपनी फिल्म में दिखा दी तो इसका मतलब यह नहीं है कि फिर वो अब अपनी

431
00:30:11,680 --> 00:30:15,840
फिल्म में कुछ भी दिखाता रहे और हम कुछ ना बोले। अगर इस भावना को ले चलने

432
00:30:15,840 --> 00:30:20,240
वाले इंसान मनुष्य प्रतीक बुराडे हैं

433
00:30:20,240 --> 00:30:24,240
तो प्रतीक बुराडे को ट्रिपल आर मूवी में यह क्यों

434
00:30:24,240 --> 00:30:28,400
नहीं दिखाई दिया कि वहां पर जनेऊ धारण करने

435
00:30:28,400 --> 00:30:32,720
वाले यज्ञ पवीत को धारण करने वाले वो जो रामचरण

436
00:30:32,720 --> 00:30:36,880
है उसको एक सीन में दिखाया जाता है कि वो

437
00:30:36,880 --> 00:30:42,160
मुस्लिम के साथ एक ही थाली में मांस खा रहा है।

438
00:30:42,160 --> 00:30:47,680
ये सीन की क्या आवश्यकता थी उस फिल्म में? बताइए।

439
00:30:47,680 --> 00:30:51,680
हमारे बच्चे उस फिल्म को देख के क्या सीखेंगे कि मुस्लिम

440
00:30:51,680 --> 00:30:55,840
के साथ मांस खाओ। वो भी कौन से भले ही उनका जनेऊ

441
00:30:55,840 --> 00:30:58,640
हुआ हो।

442
00:30:58,640 --> 00:31:02,720
तो क्या आपने इस अपने रिव्यू में इस बात

443
00:31:02,720 --> 00:31:06,720
का विरोध किया? अगर नहीं किया तो आपको करना चाहिए था। यदि आप

444
00:31:06,720 --> 00:31:11,200
इस प्रकार से निष्पक्ष बोलने वाले व्यक्ति हैं। सबसे

445
00:31:11,200 --> 00:31:15,280
पहली बात तो अवधि पूर्वक मास ही ग्राह नहीं है सनातन धर्म

446
00:31:15,280 --> 00:31:19,280
में तो आप मांस का इस तरीके से प्रचार कैसे कर रहे हो? ऊपर से

447
00:31:19,280 --> 00:31:23,280
जिसको खाते हुए आप दिखा रहे हो उसने जनेऊ धारण कर रखा है। ऊपर

448
00:31:23,280 --> 00:31:28,000
से उसको म्लेच के साथ एक ही थाली में

449
00:31:28,000 --> 00:31:32,320
खाते हुए दिखा रहे हो और फिर प्रतीक बुराडे जो निष्पक्षता

450
00:31:32,320 --> 00:31:36,400
से अपना रिव्यु करता है वो वहां पर ट्रिपल आर का विरोध

451
00:31:36,400 --> 00:31:40,560
नहीं कर रहा है इस बात को लेकर के। भाई हमारे यहां कई बातों को

452
00:31:40,560 --> 00:31:44,640
लेकर के स्पर्श और अस्पश्यता का विधि निषेध है। ये ठीक वैसे

453
00:31:44,640 --> 00:31:49,200
ही है। जैसे ऑपरेशन थिएटर में जाने जाने से जिस

454
00:31:49,200 --> 00:31:53,760
जिस पेशेंट का इलाज चल रहा है उसको उसके घर वालों को भी रोक दिया जाता है।

455
00:31:53,760 --> 00:31:57,840
वो नीच होते हैं क्या? व्यवस्था मूलक है। हमारे

456
00:31:57,840 --> 00:32:02,000
यहां का विधि निषेध इत्यादि व्यवस्था मूलक है। घृणा मूलक

457
00:32:02,000 --> 00:32:02,800
नहीं है। यदि

458
00:32:02,800 --> 00:32:06,800
कोई उसका उपयोग घृणा मूलक कर रहा है तो वो व्यक्ति

459
00:32:06,800 --> 00:32:10,960
दोषी है। वो व्यवस्था दोषी नहीं है। मगर वहां तो ट्रिपल आर में तो

460
00:32:10,960 --> 00:32:14,960
जो है एक म्लेच्छ के साथ संसर्ग दिखा दे रहे हैं। एक ही थाली में

461
00:32:14,960 --> 00:32:19,200
खिलाकर वो भी मांस वो भी खाने वाला एक भी पीत धारी।

462
00:32:19,200 --> 00:32:23,440
मान लिया कि चलिए साउथ की सभ्यता है कि वहां मास इत्यादि है।

463
00:32:23,440 --> 00:32:27,520
यद्यपि धर्म शास्त्रों के अनुसार तो नहीं है। धर्म शास्त्रों के अनुसार

464
00:32:27,520 --> 00:32:32,240
तो अविधि पूर्वक मास सदाग्रह है। अमुक अमुक अंशों में अमुक अमुक

465
00:32:32,240 --> 00:32:37,040
विधियों के निमित्त जो है मास का कहीं-कहीं पर जो है

466
00:32:37,040 --> 00:32:41,200
निर्देश दे भी दिया गया। परंतु अवधि पूर्वक कहीं भी ग्राह नहीं है। मनुस्मृति

467
00:32:41,200 --> 00:32:45,440
में तो यह लिखा है कि जो व्यक्ति कसाई की दुकान से कटा हुआ मांस खाता

468
00:32:45,440 --> 00:32:49,520
है वो व्यक्ति नरक में जाता है। और रामायण में कहा गया

469
00:32:49,520 --> 00:32:53,520
है भरत जी कहते हैं कि जिस जिस किसी की वजह से मेरे

470
00:32:53,520 --> 00:32:58,480
भाई प्रभु श्री राम को वनवास भेजा गया है उसको वही सजा मिले।

471
00:32:58,480 --> 00:33:02,560
जो सजा मांस बेचकर

472
00:33:02,560 --> 00:33:06,640
अपना घर चलाने वाले व्यक्ति को मिलती है। यानी कि मांस बेचना

473
00:33:06,640 --> 00:33:10,720
और बेचने वाले से खरीद कर खाना दोनों ही चीजें अपराध की श्रेणी में

474
00:33:10,720 --> 00:33:14,880
सनातन धर्म के अनुसार ली गई है। तो फिर आप कैसे अवधि पूर्वक

475
00:33:14,880 --> 00:33:18,160
मांस खाता हुआ दिखा रहे हो उसको जिसको आप आदर्श

476
00:33:18,160 --> 00:33:22,240
बना रहे हो समाज का और फिर निष्पक्षता से रिव्यू करने

477
00:33:22,240 --> 00:33:26,240
वाले प्रदीप बुराड़े उसका समर्थन कर रहे हैं। चलो ठीक है। आप यह कहते हुए

478
00:33:26,240 --> 00:33:30,400
चलिए अज्ञानता वश की भैया सब लोग धर्म शास्त्रों के मर्मज्ञ नहीं है। अज्ञानता

479
00:33:30,400 --> 00:33:34,560
वश दिखा दिया तो इस चीज का उन्हें ध्यान रखना चाहिए। इतना तो बोलो

480
00:33:34,560 --> 00:33:38,560
तो आप अब आपने बोला है कि नहीं बोला है यह मैं नहीं जानता मगर आपने

481
00:33:38,560 --> 00:33:42,640
इसमें तो पुरजोर समर्थन किया है। दूसरी बात अभी नरसिम्हा

482
00:33:42,640 --> 00:33:46,960
मूवी आई थी। मैं नहीं जानता आपने क्या रिव्यू किया है।

483
00:33:46,960 --> 00:33:51,040
मगर यदि आपने उसका विरोध नहीं किया है नरसिम्हा मूवी में

484
00:33:51,040 --> 00:33:55,920
तो वहां भी तो विदेशी मानसिकता को यहां पर ठूसने का प्रयास किया जा रहा है।

485
00:33:55,920 --> 00:34:00,000
जो वहां पर एक देव वाद है कि भगवान के कई

486
00:34:00,000 --> 00:34:04,080
रूप नहीं हो सकते। उसी पर तथाकथित जो

487
00:34:04,080 --> 00:34:08,240
स्कॉन नामक संस्था है खड़ी हुई है। राम कृष्ण में भी

488
00:34:08,240 --> 00:34:12,800
भेद करती है। विष्णु कृष्ण में भी भेद करती है। हमारे यहां पर

489
00:34:12,800 --> 00:34:17,120
वैष्णव संप्रदाय हैं। मगर जिस प्रकार

490
00:34:17,120 --> 00:34:21,440
से यह संस्था अपना कार्य कर रही है। बहु देववाद में

491
00:34:21,440 --> 00:34:25,520
जहर घोल रही है। अन्य देवी देवताओं के लिए अपमानजनक बातें कर रही है।

492
00:34:25,520 --> 00:34:29,680
डेली गॉड कह रही है और यह सारी बातें उसमें प्रोत्साहित

493
00:34:29,680 --> 00:34:33,200
की गई है सारी सामग्री इन सभी बातों को नरसिम्हा मूवी

494
00:34:33,200 --> 00:34:37,280
में प्रोत्साहन मिला है अच्छा अब जरा उसकी पृष्ठभूमि पे

495
00:34:37,280 --> 00:34:41,440
बात कर लेता हूं बात चल रही है तो नरसिम्हा मूवी में क्या दिखाया

496
00:34:41,440 --> 00:34:45,440
है ऋषि की जो पत्नी है वो जब संतान प्राप्ति के लिए

497
00:34:45,440 --> 00:34:49,600
ऋषि के पास जाती है तो वो ये कहते हैं कि इस समय ये संध्या काल है

498
00:34:49,600 --> 00:34:53,680
और इस समय जो राक्षसों के देवता है वो विचरण

499
00:34:53,680 --> 00:34:57,680
कर रहे होते हैं और और इस समय जो है इसी क्रम में वो आगे कहते हैं

500
00:34:57,680 --> 00:35:01,840
कि इस समय जो है कोई अनिष्टकारी शक्ति आपकी वो गर्भ

501
00:35:01,840 --> 00:35:06,320
से जन्म ले सकती है। और इस प्रकार जो है आगे इसी क्रम में हिरण्यकश्यप

502
00:35:06,320 --> 00:35:10,720
का जन्म दिखाया है। ठीक है? हिरण्यकश्यप और जो हिरण्याक्षता

503
00:35:10,720 --> 00:35:15,360
इन दोनों का जन्म इसी क्रम में दिखाया है। तो यहां पे क्या प्रस्तुत किया गया?

504
00:35:15,360 --> 00:35:19,360
शिवजी के लिए कि शिवजी तो एकमात्र राक्षसों के देवता शिवजी

505
00:35:19,360 --> 00:35:23,440
हैं। ठीक? और दूसरी बात उनके कारण हिरण्याक्ष

506
00:35:23,440 --> 00:35:27,920
और ये हिरण्यकश्यप का जन्म हुआ।

507
00:35:27,920 --> 00:35:31,920
अब भागवत के अनुसार देखा जाए तो वहां पर शिवजी के बारे में

508
00:35:31,920 --> 00:35:36,080
कहा तो था ऋषि ने मगर क्यों कहा था? इसलिए कहा था

509
00:35:36,080 --> 00:35:40,400
कि शिवजी संबंधों से उनके साडू

510
00:35:40,400 --> 00:35:44,480
भाई लग रहे थे। मतलब जो यह भी दक्ष की पुत्री थी। ऋषि

511
00:35:44,480 --> 00:35:48,640
की जो पत्नी दिखाई है और पार्वती माता भी दक्ष की पुत्री है तो

512
00:35:48,640 --> 00:35:52,800
दोनों बहन है आपस में और एक के पति ऋषि हैं और पार्वती

513
00:35:52,800 --> 00:35:56,800
माता के प्रति शिव जी हैं। तो इस समय वो विचरण पे होते हैं। उनके उनका वो

514
00:35:56,800 --> 00:36:00,880
सब जगह देख रहे होते हैं। तो इस समय संतान प्राप्ति की

515
00:36:00,880 --> 00:36:04,960
जो लिए जो रमण आवश्यक है वो ना किया जाए। ये बात वो कह रहे

516
00:36:04,960 --> 00:36:08,960
थे। ये नहीं कह रहे थे कि उनके कारण जो है वो अनिष्टकारी शक्ति जन्म लेगी।

517
00:36:08,960 --> 00:36:13,120
मगर इस बात को नरसिम्हा भूमि में किस तरह प्रस्तुत किया गया

518
00:36:13,120 --> 00:36:17,360
जिससे कि हमें समाज में ये व्याप्त हो जाए कि शिवजी जो है राक्षसों

519
00:36:17,360 --> 00:36:21,520
के देवता है राक्षसों का जन्म जो है शिवजी के कारण होता है।

520
00:36:21,520 --> 00:36:25,520
अब उसमें बहुत सारी अलग अलग विवेचनाएं गहराई में जाओगे तो जिनका

521
00:36:25,520 --> 00:36:29,680
जन्म हुआ है अनिष्टिकारी राक्षसों के रूप में वो

522
00:36:29,680 --> 00:36:34,000
तो उनके और वो थे द्वारपाल जय विजय विष्णु भगवान

523
00:36:34,000 --> 00:36:38,000
के किसके तो कौन देवता सिद्ध हुए उनके जिनका जन्म हुआ

524
00:36:38,000 --> 00:36:42,240
मगर इसमें क्या दिखाया कि अनिष्टकारी शक्तियों का जो है जन्म हुआ किन

525
00:36:42,240 --> 00:36:46,240
के कारण शिवजी के कारण और एक जगह पर शब्द आ रहा

526
00:36:46,240 --> 00:36:50,880
है अंधकार तो उस समय शिवजी को दिखाया जा रहा है अंधकार के लिए

527
00:36:50,880 --> 00:36:54,960
मतलब शिव जी को कुल मिलाकर के राक्षस से बुराई से हर चीज से जोड़ दिया गया है

528
00:36:54,960 --> 00:36:59,440
फिल्म में और राक्षसों का या अधर्मियों

529
00:36:59,440 --> 00:37:03,760
का एकमात्र कोई शत्रु है तो वो विष्णु है अरे भाई विष्णु

530
00:37:03,760 --> 00:37:09,760
ही शिव है शिव ही विष्णु है ये बात भी तो बोल दो फिर साथ में

531
00:37:09,760 --> 00:37:14,560
और समय-समय पर वहां डेमी गॉड हमारे भगवान को

532
00:37:14,560 --> 00:37:18,720
जो विदेशी संस्करण है उस संस्करण में दिखाना और फिर

533
00:37:18,720 --> 00:37:22,800
और भी बहुत सारी आपत्तिजिनक चीजें हैं जो नरसिम्हा में की गई है। तो

534
00:37:22,800 --> 00:37:27,040
ठीक है अगर नरसिम्हा आपके हिसाब से प्रचार कर रही है हमारे हिसाब से तो वो जो

535
00:37:27,040 --> 00:37:31,120
एक देववाद है ना कि अल्लाह के सिवा और कोई नहीं यहोवा के सिवा

536
00:37:31,120 --> 00:37:35,120
और कोई नहीं उस धारणा को यहां पर जो सींचा जा रहा है कृष्ण के नाम

537
00:37:35,120 --> 00:37:39,200
पर बस इतना ही है। यहां तक कि इस तो यह भी बात करता है

538
00:37:39,200 --> 00:37:43,360
कि कृष्ण एंड क्राइस्ट आर सेम। ईश्वर अल्लाह एक है।

539
00:37:43,360 --> 00:37:47,440
कृष्ण और अल्लाह एक है। तो जिस बात के लिए गांधी की आलोचना

540
00:37:47,440 --> 00:37:51,600
करते हैं उसी बात के लिए हम जो है इस की इस धारणा को पोषित

541
00:37:51,600 --> 00:37:55,680
कर रहे हैं। और ऐसा नहीं है कि ये जो भावनाएं छुपी

542
00:37:55,680 --> 00:38:00,800
हुई रह गई हो फिल्म में। फिल्म स्टार्ट होते समय ही इस को थैंक्स बोला गया है।

543
00:38:00,800 --> 00:38:05,280
तो क्या नरसिम्हा मूवी को लेकर के इस सच्चाई के साथ

544
00:38:05,280 --> 00:38:10,000
प्रतीक बुराडे ने समीक्षा की? यह भी ध्यातव्य बिंदु है।

545
00:38:10,000 --> 00:38:14,240
तो कुल मिलाकर के कांतारा मूवी के विषय में प्रतीक बुराडे के साथ

546
00:38:14,240 --> 00:38:18,720
हम सहमत हैं और उन्होंने निष्पक्षता के साथ कांतारा

547
00:38:18,720 --> 00:38:19,220
का

548
00:38:18,800 --> 00:38:22,960
रिव्यु किया है और हम अपेक्षा करते हैं कि वो

549
00:38:22,960 --> 00:38:28,400
प्रत्येक फिल्म को लेकर के अपनी शार्प

550
00:38:28,400 --> 00:38:32,800
दृष्टि के द्वारा पैनी नजरों के द्वारा रिव्यू करें। यदि वो निष्पक्षता

551
00:38:32,800 --> 00:38:36,800
के साथ कर रहे हैं। हमें पसंद क्या आ रहा है? इस आधार पर कि

552
00:38:36,800 --> 00:38:40,800
हमें यह पसंद आ रहा है क्योंकि हम हम मनोरंजित हो गए

553
00:38:40,800 --> 00:38:44,880
या कोई हमारे मन में पहले से चुनी हुई बात क्योंकि इसमें कह दी गई

554
00:38:44,880 --> 00:38:48,880
है इसलिए हम जो है इसका केवल समर्थन करेंगे विरोध नहीं करेंगे

555
00:38:48,880 --> 00:38:53,040
तो आप भी वही बन जाएंगे जो बनने के लिए आप किसी और को दोष

556
00:38:53,040 --> 00:38:57,200
दे रहे हैं। ठीक है ना? आशा करता हूं सकारात्मक दृष्टिकोण

557
00:38:57,200 --> 00:39:03,000
से इस वीडियो को लेंगे। जय श्री राम।

558
00:39:03,000 --> 00:39:07,000
[संगीत]
