1
00:00:03,040 --> 00:00:07,040
ऐसा कोई सगा नहीं जिसको हमने ठगा नहीं।

2
00:00:07,040 --> 00:00:11,200
आज से लगभग एक डेढ़ साल पूर्व की घटना है। शायद मुझे याद है।

3
00:00:11,200 --> 00:00:15,680
मैं अपने कई वीडियोस में उसका जिक्र कर चुका हूं। भागवतानंद

4
00:00:15,680 --> 00:00:19,840
के पास एक लड़की ने फोन किया था। जो भागवतानंद के एक प्रश

5
00:00:19,840 --> 00:00:24,080
प्रशंसक के द्वारा वहां पर उसको भागवतानंद का संपर्क सूत्र

6
00:00:24,080 --> 00:00:29,120
उपलब्ध कराया गया था। वह किसी भूत बाधा इत्यादि से पीड़ित थी और

7
00:00:29,120 --> 00:00:33,120
उसने भागवतानंद के किसी समर्थक तक वह पहुंच गई थी मदद के

8
00:00:33,120 --> 00:00:37,120
लिए क्योंकि वह भागवतानंद का समर्थक ज्योतिष पीठ के महाराज जी

9
00:00:37,120 --> 00:00:41,440
से भी जुड़ा हुआ था तो वो वहां ज्योतिष पीठ पहुंचने के कारण भागवतानंद के उस प्रशंसक तक

10
00:00:41,440 --> 00:00:45,520
पहुंच गई थी और उस प्रशंसक ने उस भूत बाधा इत्यादि

11
00:00:45,520 --> 00:00:49,760
के निमित्त उस मातृशक्ति को भागवतानंद का संपर्क सूत्र सुझा

12
00:00:49,760 --> 00:00:53,840
दिया था। मातृशक्ति ने उसको लगभग क्योंकि

13
00:00:53,840 --> 00:00:57,840
वह ऐसी परेशानी में थी। उसने रात को ही जैसे ही उसको नंबर प्राप्त हुआ उसने रात में

14
00:00:57,840 --> 00:01:02,080
ही 11:00 बजे मदद मांगने के लिए भागवतानंद को कॉल मिला दिया। उस

15
00:01:02,080 --> 00:01:06,560
भागवतानंद ने उसकी मदद तो नहीं की पर जो उस

16
00:01:06,560 --> 00:01:10,720
मातृशक्ति ने उसको अपनी व्यथा सुनाई थी कि मेरी मदद मुझे मदद

17
00:01:10,720 --> 00:01:14,960
करिए। मेरी सहायता करिए। मेरे मेरे साथ इस प्रकार की घटनाएं घटित

18
00:01:14,960 --> 00:01:18,080
हो रही हैं या जो भी हैं। अगले दिन भागवत आनंद ने

19
00:01:18,080 --> 00:01:22,080
उसको एक मसालेदार खबर बना करके कि देखो देखो मुझे फंसाने के लिए

20
00:01:22,080 --> 00:01:26,080
एक षड्यंत्र किया जा रहा है। इस प्रकार से किसी लड़की का मेरे पास फोन आ

21
00:01:26,080 --> 00:01:30,240
रहा है और आप लोग भी सतर्क हैं और मुझे इस तरह से तुम लोग फंसा नहीं पाओगे।

22
00:01:30,240 --> 00:01:34,320
और यह कहते हुए भागवत आनंद ने उस लड़की की जो ऑडियो क्लिप

23
00:01:34,320 --> 00:01:39,040
है वो वायरल वो सोशल मीडिया पर डाल दी। YouTube पर डाल दी।

24
00:01:39,040 --> 00:01:41,200
जब

25
00:01:41,200 --> 00:01:45,200
उस कन्या को मालूम पड़ा तो उसको यह लगा कि भाई मेरी मदद तो होना

26
00:01:45,200 --> 00:01:49,200
दूर की बात रही और जो है इस तरीके से तो

27
00:01:49,200 --> 00:01:53,440
मेरा मुझे जानने वाले होंगे जो उसी सर्किल के हैं

28
00:01:53,440 --> 00:01:57,600
जिस सर्किल की मैं हूं उसी सर्किल से सब लोग ज्योतिष पीठ से भी जुड़े हुए हैं। तो कहीं

29
00:01:57,600 --> 00:02:01,680
ना कहीं मेरी बदनामी होगी। तो उसने फिर पुनः निवेदन करने

30
00:02:01,680 --> 00:02:05,920
के लिए भी और दबाव बनाने के लिए भी भाई आप आप अगर मेरी मदद

31
00:02:05,920 --> 00:02:10,000
नहीं कर रहे हो तो मत करो ना मगर कम से कम इस तरह से मेरी

32
00:02:10,000 --> 00:02:14,080
अपकीर्ति क्यों कर रहे हो मेरे बारे में मुझे इस तरह से बदनाम क्यों कर रहे हो मैंने तुम्हारा क्या

33
00:02:14,080 --> 00:02:18,160
बिगाड़ा है भागवतानंद ने कैरी मिनाटी बनने के लिए मसाला

34
00:02:18,160 --> 00:02:22,400
उठाने के लिए यह क्लिप भी डाल दी इसके

35
00:02:22,400 --> 00:02:26,400
बाद उस मातृशक्ति की संभवत जो स्वास्थ्य

36
00:02:26,400 --> 00:02:30,560
है वो खराब होने लगा वो हॉस्पिटल तक पहुंची पहुंची आईसीयू तक पहुंची।

37
00:02:30,560 --> 00:02:33,120
उसके घरवाले केस भी नहीं कर पाए बदनामी के डर

38
00:02:33,120 --> 00:02:37,200
से। मगर जिस प्रशंसक ने भागवतानंद पर विश्वास करते हुए

39
00:02:37,200 --> 00:02:41,200
उस मातृ शक्ति को भागवतानंद का नंबर दिया था। उस प्रशंसक ने भी

40
00:02:41,200 --> 00:02:45,200
भागवतानंद को कॉल करके समझाने का प्रयास किया कि भाई मैंने ही तुम्हारा

41
00:02:45,200 --> 00:02:49,280
नंबर दिया था। तुम उसकी जो ऑडियो क्लिप है उसको मत इस तरीके

42
00:02:49,280 --> 00:02:53,680
से डालो। एक उसने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है। भागवतानंद ने अपने उस प्रशंसक

43
00:02:53,680 --> 00:02:57,920
की भी ऑडियो क्लिप डाल दी। जहां तक मेरे संज्ञान में है।

44
00:02:57,920 --> 00:03:02,640
इसका अर्थ क्या है कि भागवतानंद को इससे मतलब नहीं होता है

45
00:03:02,640 --> 00:03:06,800
कि कौन मेरा प्रशंसक है, कौन मेरा समर्थक है, कौन नहीं है।

46
00:03:06,800 --> 00:03:10,960
उसको बस इससे मतलब होता है कि मुझे चटपटी खबरें वो मनोहर

47
00:03:10,960 --> 00:03:15,120
कहानियां वाली कैसे मिले जो कि मैं सुनाऊं या वो सनसनी खेज वाले चैन

48
00:03:15,120 --> 00:03:19,360
से सोना हो तो जाग जाओ वाले। इस तरह की बातें मैं किस प्रकार से अपने YouTube चैनल

49
00:03:19,360 --> 00:03:23,520
पर बोलूं और उसके लिए वो लोगों को मोहरा बनाता है। वो मोहरा कोई भी हो सकता है।

50
00:03:23,520 --> 00:03:27,600
उसका कोई अपना भी हो सकता है। उसका कोई विरोधी भी हो सकता है। या फिर कोई ऐसा व्यक्ति भी

51
00:03:27,600 --> 00:03:31,600
हो सकता है जिससे आज तक उसने बात ही ना की हो। विजय श्री भी उनमें से एक

52
00:03:31,600 --> 00:03:36,080
थी। उसको पूरी पीठ के बारे में दुष्प्रचार

53
00:03:36,080 --> 00:03:40,160
करना था। और पूरी पीठ से जुड़ी हुई कोई कोई महिला जिसकी सोशल मीडिया

54
00:03:40,160 --> 00:03:44,400
आईडी उसे मिल गई। उसको उसने अपनी तरीके से जिस तरीके से वो जिन आंखों

55
00:03:44,400 --> 00:03:48,400
से वो दिखाना चाहता था अपने फॉलोअर्स को उस तरीके से उसने प्रस्तुत

56
00:03:48,400 --> 00:03:52,560
कर दिया। चटपटी मनोहर कहानियां बना दी और मनोहर कहानियां तो बनाता

57
00:03:52,560 --> 00:03:56,880
ही आ रहा है वो अपनी मलेश मलेशवा वाली सीरीज में। अब

58
00:03:56,880 --> 00:04:00,960
मैं अभी यह सब क्यों बता रहा हूं? क्योंकि एक व्यक्ति ने

59
00:04:00,960 --> 00:04:05,120
कल मुझे एक फोन किया कि वो यह

60
00:04:05,120 --> 00:04:09,440
चाहता है कि मेरे और भागवतानंद के बीच का युद्ध समाप्त

61
00:04:09,440 --> 00:04:13,520
हो जाए। यद्यपि अब यह युद्ध किसी ना किसी के परास्त होने पर

62
00:04:13,520 --> 00:04:17,600
ही समाप्त होना है। परंतु क्यों नहीं क्योंकि उसका धेय यह था कि इस

63
00:04:17,600 --> 00:04:21,600
प्रकार से धर्म को हानि हो रही है और उसको किसी आचार्य ने ये कहा

64
00:04:21,600 --> 00:04:25,600
था कि भाई इनके बीच में जो ये संघर्ष है ये नहीं होना चाहिए। तो तुम

65
00:04:25,600 --> 00:04:29,840
इन लोगों से संवाद स्थापित करके उसको सॉर्ट आउट कराने का प्रयास करो। उसके

66
00:04:29,840 --> 00:04:33,840
लिए उस व्यक्ति के दो प्रश्न थे कि ये पहला

67
00:04:33,840 --> 00:04:37,840
कि भाई इसकी मूल जड़ क्या है? क्या बात है? क्यों लड़ रहे हो आप लोग?

68
00:04:37,840 --> 00:04:42,000
तो जब उसने मेरे से यह प्रश्न किया तो मैंने उसको यथावत रूप से जो

69
00:04:42,000 --> 00:04:46,240
मेरे स्मरण शक्ति में आया मैंने 50 मिनट के लगभग

70
00:04:46,240 --> 00:04:50,320
उससे बातचीत की और उसको सत्य के साथ वो सारी चीजें यथोचित

71
00:04:50,320 --> 00:04:54,400
रूप से बता दी और उसको बहुत सहृदय सरलता

72
00:04:54,400 --> 00:04:58,400
का अनुभव भी हुआ मेरे से बात करते समय प्रथम बार जब उसने मुझे कॉल किया

73
00:04:58,400 --> 00:05:02,480
तो मेरी उससे क्या बातचीत हुई। उसने मेरा पक्ष समझ लिया कि मेरा क्या

74
00:05:02,480 --> 00:05:03,600
दृष्टिकोण है इस मामले

75
00:05:03,600 --> 00:05:08,000
को लेकर के और मैं मतलब क्या है मेरी ओर से क्या मूल

76
00:05:08,000 --> 00:05:12,000
कारण है इस युद्ध का इसके बाद वो व्यक्ति जाता है वो

77
00:05:12,000 --> 00:05:16,160
वो मेरे और उसमें अपेक्षाकृत मेरी अपेक्षाकृत

78
00:05:16,160 --> 00:05:20,240
भागवतानंद के प्रति ज्यादा श्रद्धावानता ज्यादा निष्ठावान था वो जाता

79
00:05:20,240 --> 00:05:24,320
है अपने गुरु जी के पास है ना पर गुरु जी तो ठहरे धार्मिक क्षेत्र के

80
00:05:24,320 --> 00:05:28,560
कैरी मिनाटी वो जाता है ये पूछने के लिए कि गुरुजी क्या कारण है आपका

81
00:05:28,560 --> 00:05:32,720
क्या इसमें मतलब मतलब वो है मूल कारण क्या है? क्या कोई संभावना

82
00:05:32,720 --> 00:05:36,800
है इसको युद्ध को रोकने की? तो गुरु जी जैसे ही सुनते हैं कि

83
00:05:36,800 --> 00:05:40,880
भैया शिवांश का किसी ने मुझे फोन करके नाम लिया है तो

84
00:05:40,880 --> 00:05:44,960
आप ना देखा ताव वो चालू हो जाते हैं जो वो भरे बैठे

85
00:05:44,960 --> 00:05:49,120
हैं शिवश के लिए उन्हें जो जो बोलना है जो शिवश ने अपने प्रासंगिक

86
00:05:49,120 --> 00:05:53,120
वीडियोस में सवाल उठाए हैं वो उन सवालों का उत्तर देने लगते हैं। यह जाने

87
00:05:53,120 --> 00:05:57,120
ये सोचे समझे बिना कि वो व्यक्ति शिवांश की ओर से ये कहने नहीं आया

88
00:05:57,120 --> 00:06:01,360
कि शिवांश आपके बारे में ये कह रहा है। इनका क्या उत्तर है आपके पास? यह जाने सोचे

89
00:06:01,360 --> 00:06:05,360
समझे बिना गुरु जी सुन लो चालू हो जाते हैं परी साधना वाले काली

90
00:06:05,360 --> 00:06:09,360
यजन वाले चालू हो जाते है की शिवश यह कह रहा है तो उसका यह उत्तर है यह कह रहा है तो वो

91
00:06:09,360 --> 00:06:13,360
उत्तर है यद्यपि वो कुतर्क है उसके उत्तर भी बाद में हम कभी ना कभी

92
00:06:13,360 --> 00:06:17,520
दे देंगे और आगे जो ऑडियो रिकॉर्डिंग है आपको सुनाई

93
00:06:17,520 --> 00:06:18,720
देगी उसमें आपको सुनाई दे

94
00:06:18,720 --> 00:06:23,040
जाएंगे मगर गुरु जी आप ना देखा था चालू हो जाते हैं और

95
00:06:23,040 --> 00:06:27,600
वो जो वस्तु विषय लेकर के आया था कि भाई इस

96
00:06:27,600 --> 00:06:32,240
युद्ध का कारण क्या है इस द्वंद का कारण क्या है? या

97
00:06:32,240 --> 00:06:36,560
यदि हम यह अपेक्षा कर सकते हैं कि यह युद्ध समाप्त

98
00:06:36,560 --> 00:06:40,640
हो सकता है तो किस प्रकार हम इस युद्ध की अपेक्षा कर सकते हैं समाप्त होने की। तो

99
00:06:40,640 --> 00:06:44,720
उसके जो ये दो प्रश्न थे वो तो गुरु जी ने सुनने ही नहीं पसंद मतलब सुनने

100
00:06:44,720 --> 00:06:48,880
पसंद किए। उन्होंने कहा कि बोलो बोलो बोलो। मगर वो बोलने से पहले वो इतना

101
00:06:48,880 --> 00:06:52,960
कुछ सुना चुके थे यह समझते हुए कि ये शिवांश की ओर से प्रश्न करने

102
00:06:52,960 --> 00:06:57,360
आया है या फिर शिवश की ओर से शिवश

103
00:06:57,360 --> 00:07:01,600
का नाम लेने वाला उनको एक श्रोता मात्र मिल गया था तो गुरुजी के अंदर जो भड़ास भरी

104
00:07:01,600 --> 00:07:05,680
पड़ी थी वो भड़ास उन्होंने उस व्यक्ति पर निकाल दी अब क्या

105
00:07:05,680 --> 00:07:09,680
होता है कि वो व्यक्ति इतना होचपौच हो जाता है क्योंकि निष्ठावान भी था

106
00:07:09,680 --> 00:07:13,680
उनके प्रति इतना होचपौच हो जाता है कि वो अपनी जो बात कहने गया था वह तो

107
00:07:13,680 --> 00:07:17,840
बिल्कुल वो ब्लैक आउट हो जाता है अब ब्लैक आउट होने के बाद वह

108
00:07:17,840 --> 00:07:22,080
अपनी बात जो यथावत रूप से दो बातें कह रही थी कि युद्ध क्यों है और किस तरह से समाप्त

109
00:07:22,080 --> 00:07:26,160
हो सकता है? क्या कोई इस पर चिंतन है? यद्यपि हम और वह जानते हैं कि इस युद्ध को

110
00:07:26,160 --> 00:07:30,400
समाप्त करने का एक ही तरीका है। दोनों में से कोई एक व्यक्ति पराजित हो जाए

111
00:07:30,400 --> 00:07:33,680
और वह होगा। मगर

112
00:07:33,680 --> 00:07:34,800
वो

113
00:07:34,800 --> 00:07:38,880
बेचारा मासूम सा एक लड़का नवयुवक जो यह सोच

114
00:07:38,880 --> 00:07:42,960
करके वहां गया था कि मैं किसी प्रकार से इन दोनों उसकी नजरों में मैं भी धर्म

115
00:07:42,960 --> 00:07:47,120
रक्षक था। वो भी धर्म रक्षक था। और कहीं ना कहीं वह आचार्य भी था उसकी नजरों में।

116
00:07:47,120 --> 00:07:51,120
निष्ठावान था उसके प्रति। तो वो इस दृष्टि इस

117
00:07:51,120 --> 00:07:55,120
इस धेय के साथ गया था कि भाई दोनों में किसी प्रकार से सामंजस्य हो जाए।

118
00:07:55,120 --> 00:07:59,360
ना कंप्रोमाइज करके दोस्ती करें तो कम से कम शांत तो हो जाएं। यह उसका

119
00:07:59,360 --> 00:08:03,360
धेय मुझे समझ में आया। इस व्यक्ति ने क्या किया? उसकी बात

120
00:08:03,360 --> 00:08:07,520
तो सुनी नहीं। अपनी बातें सुना सुनू के वह बेचारा ब्लैक आउट हो

121
00:08:07,520 --> 00:08:11,600
गया। और उसमें उस व्यक्ति की ऐसी कोई बात नहीं है जो कि

122
00:08:11,600 --> 00:08:15,760
कोई राज की बात हो या उससे कोई गलती हुई हो, कुछ भी नहीं। मगर

123
00:08:15,760 --> 00:08:19,840
इस व्यक्ति ने उस वीडियो को भी डाल दिया। उस ऑडियो को भी डाल

124
00:08:19,840 --> 00:08:24,080
दिया क्योंकि ऐसा कोई सगा नहीं जिसको इसने ठगा नहीं।

125
00:08:24,080 --> 00:08:28,160
अब वो व्यक्ति के पास मेरा फोन जाता है। मैं उसे अपनी चीजें बताता हूं। मुझसे कहता है

126
00:08:28,160 --> 00:08:32,240
भैया मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई। कि मैंने पहले तो यह निर्णय ले लिया

127
00:08:32,240 --> 00:08:36,320
कि आप दोनों के बीच की लड़ाई को शांत कराया जाए। उसके बाद मैंने दूसरा निर्णय

128
00:08:36,320 --> 00:08:40,320
ये ले लिया कि मैं जो है उनके पास चला गया। उन्होंने मेरी रिकॉर्डिंग ही डाल दी। यद्यपि

129
00:08:40,320 --> 00:08:44,400
उसने कॉल रिकॉर्डिंग के समय भी कहा था कि गुरुजी आपका जो मन करे आप

130
00:08:44,400 --> 00:08:48,480
कर सकते हैं। आप रिकॉर्डिंग डाल सकते हैं। वो उसका उसकी शरणागति थी। मगर एक

131
00:08:48,480 --> 00:08:50,160
सामान्य व्यक्ति जो नहीं चाहता

132
00:08:50,160 --> 00:08:54,560
है कि भैया जो इस तरह से पब्लिक प्लेटफार्म में अपने आप को इंट्रोड्यूस

133
00:08:54,560 --> 00:08:58,720
नहीं करना चाहता है तो आप उससे पूछे बिना उसकी अनुमति

134
00:08:58,720 --> 00:09:03,440
लिए बिना उसकी कोई गलती ना होने पर भी उसका कोई दोष ना होने पर भी

135
00:09:03,440 --> 00:09:07,520
उसकी इस तरह से अपने उसको इस तरीके से एक मोहरे

136
00:09:07,520 --> 00:09:12,080
के रूप में अपनी ख्याति अपने चैनल अपनी सक्सेस मसालेदार

137
00:09:12,080 --> 00:09:16,160
खबरें सनसनीखेज मामले या फिर अपने ओपोनेंट अपने

138
00:09:16,160 --> 00:09:20,400
विरोधी को जवाब देने के लिए उसको एक मोहरे की तरह यूज़ करते हो। मोहरा

139
00:09:20,400 --> 00:09:24,880
है वो तुम्हारे लिए। तुम्हारा प्रशंसक, तुम्हारा फॉलोअ एक मोहरा

140
00:09:24,880 --> 00:09:28,880
मात्र है ना कि बस मुझे एक मिल गया पॉइंट। इसके आधार पे अब

141
00:09:28,880 --> 00:09:33,040
मैं जो है यह प्रचार कर दूंगा। इसने शिवश का नाम ले लिया। इस व्यक्ति ने आकर

142
00:09:33,040 --> 00:09:37,200
के बस अब इसके आधार पे मैं शिवांश को जो उत्तर देने हैं वो उत्तर दे दूंगा। इस वीडियो के

143
00:09:37,200 --> 00:09:41,280
रिकॉर्डिंग को डाल दूंगा। अलग से वीडियो बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मेहनत बच जाएगी। यही

144
00:09:41,280 --> 00:09:45,280
तो किया। उसके चक्कर में हुआ क्या? सबसे पहले तो वह खुद

145
00:09:45,280 --> 00:09:49,520
हृदय विधारित मतलब उसको कुछ उसको कष्ट पहुंचा

146
00:09:49,520 --> 00:09:53,600
कि भाई इस तरीके से मैं तो इतनी निष्ठा रखता हूं मगर उन्होंने भावना देखा था

147
00:09:53,600 --> 00:09:57,840
मेरी रिकॉर्डिंग क्यों डाली मैंने ऐसा क्या कर दिया था जो रिकॉर्डिंग डालना आवश्यक

148
00:09:57,840 --> 00:10:01,920
हो गई थी यही सवाल उस लड़की का भी था उसने ऐसा क्या कर दिया

149
00:10:01,920 --> 00:10:05,200
था जो उसकी रिकॉर्डिंग डालना आवश्यक हो गई थी मदद मांगने पहुंची

150
00:10:05,200 --> 00:10:09,200
थी ना यह सुलह करवाने पहुंचा था ना ऐसा क्या कर दिया था इसने

151
00:10:09,200 --> 00:10:13,360
जो उसकी रिकॉर्डिंग डालना आवश्यक हो गई थी कोई जवाब नहीं है कुतर्क आएंगे सामने सामने

152
00:10:13,360 --> 00:10:17,360
से। खैर अब क्या होता है वो रात को मुझे मुझसे जब

153
00:10:17,360 --> 00:10:21,440
बातचीत होती है तो वह लड़का बताता है कि मैंने इस इन्होंने जब स्वामी जी

154
00:10:21,440 --> 00:10:25,440
ने रिकॉर्डिंग डाल दी है तो मैंने उनको रिक्वेस्ट की है कि भाई

155
00:10:25,440 --> 00:10:30,000
आप रिकॉर्डिंग प्लीज हटा दीजिए। मेरी नौकरी जा सकती है। बहुत दुखी था वो लड़का

156
00:10:30,000 --> 00:10:34,240
और सुबह उसकी खबर आती है मेरे पास कि उसकी नौकरी जा चुकी है।

157
00:10:34,240 --> 00:10:38,560
उसके ऑफिस में उसके जो जिन जिन अकाउंट्स के साथ वो सोशल

158
00:10:38,560 --> 00:10:42,880
मीडिया पे जाना जा रहा था। उसके ऑफिस में उसके कलीग्स थे। मुसलमान भी थे, दूसरे

159
00:10:42,880 --> 00:10:47,040
धर्मों के भी थे या सनातना आभासी भी थे। जानते थे कि यह व्यक्ति किस

160
00:10:47,040 --> 00:10:51,120
प्रकार की सोच रखता है। तो जैसे ही यह रिकॉर्डिंग आई और इस इसका

161
00:10:51,120 --> 00:10:55,440
इस तरीके से इस प्रकार की गतिविधियों में शामिल होना

162
00:10:55,440 --> 00:10:59,600
पता चला इसके आगे बॉस को तो इसने ही मुझे अभी दूसरे दिन फोन

163
00:10:59,600 --> 00:11:04,160
करके बताया कि भाई इसको निकाल दिया गया है। इसका इसको टर्मिनेशन

164
00:11:04,160 --> 00:11:08,320
लेटर दे दिया गया है या टर्मिनेट कर दिया गया है। तो इसीलिए

165
00:11:08,320 --> 00:11:12,320
जो भागवतानंद के फॉलोअर्स हैं उनको भी इन इस

166
00:11:12,320 --> 00:11:16,320
मामले पर ध्यान देना चाहिए कि परी साधना और जिनोपासक से आप किस

167
00:11:16,320 --> 00:11:20,240
तरह की अपेक्षा कर सकते हैं। ऐसा कोई सगा नहीं जिसको हमने

168
00:11:20,240 --> 00:11:26,240
ठगा नहीं। जय श्री राम। जय श्री राम। जय श्री राम भैया।

169
00:11:26,880 --> 00:11:31,040
आपकी रिकॉर्डिंग सुनी मैंने। जी जी भैया। भागवत

170
00:11:31,040 --> 00:11:35,600
से आपने बात की होगी। हां मेरी बात हुई थी उनसे

171
00:11:35,600 --> 00:11:39,760
फॉर्म में। तो यह बताइए कि

172
00:11:39,760 --> 00:11:43,920
आपका जो मूल विषय जो लेकर आप मेरे पास आए थे हां हां

173
00:11:43,920 --> 00:11:48,080
कि भाई हम लोगों के बीच में क्या झगड़ा है? किस बात का

174
00:11:48,080 --> 00:11:52,240
लेकर के में मुख्य विषय क्या है? जो जो मैंने आपको बताया भी

175
00:11:52,240 --> 00:11:57,200
था अपने सामर्थ्य के अनुसार। जी जी और

176
00:11:57,200 --> 00:12:01,360
इसके बाद फिर इसका आपका आपका उद्देश्य यह था यद्यपि

177
00:12:01,360 --> 00:12:05,440
मैं जानता हूं और वो जानता है कि अब इस ये ऐसा

178
00:12:05,440 --> 00:12:10,160
युद्ध है जो किसी एक के परास्त होने के बाद ही रुक सकेगा।

179
00:12:10,160 --> 00:12:15,120
पर आपका उद्देश्य ये अवश्य था कि अ

180
00:12:15,120 --> 00:12:19,280
युद्ध ना हो। हम जी जी बिल्कुल मेरा उद्देश्य कुछ ऐसा ही था। ऐसी

181
00:12:19,280 --> 00:12:23,360
भावना हो तो मैंने आपकी जो रिकॉर्डिंग सुनी है

182
00:12:23,360 --> 00:12:27,360
हम उसमें ज्यादातर में तो इस विषय में बात हुई नहीं

183
00:12:27,360 --> 00:12:32,800
है। उसमें तो जो हमारे जो प्रासंगिक जो मैंने जो

184
00:12:32,800 --> 00:12:36,160
आक्षेप उठाए हैं वह

185
00:12:36,160 --> 00:12:40,160
उनका निराकरण प्रस्तुत कर रहा है आपको सुनाते समय और अंत में

186
00:12:40,160 --> 00:12:44,320
अब अपना ये जो मूल विषय आपने रखा नहीं फोन कट गया कुछ ऐसा

187
00:12:44,320 --> 00:12:47,040
मैंने समझा

188
00:12:47,040 --> 00:12:51,040
तो क्या औचित्य रहा आपका उसके साथ वार्ता करने का आपके अनुसार

189
00:12:51,040 --> 00:12:55,360
मेरे अनुसार तो कोई औचित्य था ही नहीं जी देखिए मेरा

190
00:12:55,360 --> 00:13:01,360
हां ये अवश्य है कि उसने आपको मोहरा बना करके और जो है

191
00:13:04,960 --> 00:13:09,120
यह अवश्य है कि आपको आपको मोहरा बना करके उसने

192
00:13:09,120 --> 00:13:13,440
जो है ये सब बातें जो उसको बोलनी थी मेरे विरोध

193
00:13:13,440 --> 00:13:18,400
में वो सब बोल दी हम और आप

194
00:13:18,400 --> 00:13:22,480
एक तरीके से उसका एक श्रोता मिल गया जो उसे बोलनी थी वो श्रोता के

195
00:13:22,480 --> 00:13:26,960
रूप में उसने आपको यूज़ कर लिया हां लगभग सुनने

196
00:13:26,960 --> 00:13:30,960
से तो यही ही प्रतीत होता है। संभवत मैंने भी जब स्वयं को

197
00:13:30,960 --> 00:13:35,040
सुना तो संभवत मुझे भी और तो लगा और

198
00:13:35,040 --> 00:13:39,360
आपके साथ उसकी पर्टिकुलर आपको लेकर के तो उसकी कोई ऐसी चर्चा

199
00:13:39,360 --> 00:13:43,680
हुई नहीं है जो कि आपकी रिकॉर्डिंग को डालना आवश्यक था।

200
00:13:43,680 --> 00:13:48,480
हां उसको मेरा उत्तर देना था।

201
00:13:48,480 --> 00:13:51,520
यद्यपि वह उत्तर से कुतर्क है जो

202
00:13:51,520 --> 00:13:55,680
अब जैसे वो तो स्वामी जी ने जो भी विषय उठाए वह मेरा विषय

203
00:13:55,680 --> 00:14:00,080
नहीं थाचा का तो आप आप पर्टिकुलर आपकी रिकॉर्डिंग

204
00:14:00,080 --> 00:14:04,320
डालने का औचित्य तो मुझे समझ में आया नहीं कि उसने आपकी रिकॉर्डिंग डाली क्यों है

205
00:14:04,320 --> 00:14:08,320
भाई उसने मुझको उत्तर दिए हैं उस रिकॉर्डिंग में वो तो आपका विषय

206
00:14:08,320 --> 00:14:12,400
है नहीं आप तो उससे पूछने गए नहीं थे कि आपके ऊपर शिवश नारायण द्विवेदी

207
00:14:12,400 --> 00:14:16,640
ने अमुक अमुक आरोप लगाए तो वो टेप रिकॉर्डर की तरह चालू

208
00:14:16,640 --> 00:14:20,800
हो गया कि राम राम भद्राचार्य जी का खंडन नहीं करेगा। मेरा खंडन करेगा क्योंकि

209
00:14:20,800 --> 00:14:25,120
मेरे पास चार गुंडे नहीं है। इसका मतलब इसका मतलब उसके

210
00:14:25,120 --> 00:14:29,200
अनुसार और उसने उसमें यह भी कहा है कि ये और किसी संप्रदाय का खंडन नहीं करता।

211
00:14:29,200 --> 00:14:33,280
बस मेरा संप्रदाय मेरा खंडन करता है। तो इसका मतलब इसके अनुसार

212
00:14:33,280 --> 00:14:37,280
विद्या भास्कर जी महाराज, शंकराचार्य जी महाराज, राघवाचार्य जी

213
00:14:37,280 --> 00:14:41,680
महाराज सबके पास गुंडे हैं। रामभद्राचार्य जी के पास गुंडे हैं।

214
00:14:41,680 --> 00:14:45,680
यह सब गुंडे लेकर के चलते हैं। इसलिए मैं इनके खिलाफ इनके विरोध में नहीं

215
00:14:45,680 --> 00:14:50,080
बोलता हूं। और इस बेवकूफ को यह नहीं दिखाई देता कि इन सबसे बड़ा गुंडा रामपाल

216
00:14:50,080 --> 00:14:54,320
है जिसको पकड़ने के लिए ₹27 करोड़ खर्च हो गए थे सरकार

217
00:14:54,320 --> 00:14:58,400
के हम जी हैं। अवैध हथियार का आज तक उस पर मुकदमा चल रहा है

218
00:14:58,400 --> 00:15:02,560
देशद्रोह का। जी मुझे जान से मारने की वो लोग धमकी दे रहे हैं।

219
00:15:02,560 --> 00:15:06,720
अगर गुंडा गुंडे जिसके पास है मैं उसका खंडन नहीं

220
00:15:06,720 --> 00:15:11,680
करूंगा या उसका विरोध नहीं करूंगा तो मैं रामपाल का विरोध क्यों करता?

221
00:15:11,680 --> 00:15:15,920
कहां का कुतर्क है यह? देखिए अभी तो मैं यह

222
00:15:15,920 --> 00:15:19,920
कहना चाहूंगा कि मैंने जैसे प्रथम वार्ता में ही आपसे यह

223
00:15:19,920 --> 00:15:24,240
स्पष्ट किया था कि आपके जो धरातल के कार्य हैं मैं उनकी सराहना

224
00:15:24,240 --> 00:15:28,240
करता हूं और प्रथम मैं अगर

225
00:15:28,240 --> 00:15:32,240
अपने अनुभव से बताऊं तो निग्राचार्य जी स्वामी जी से पहले मैंने

226
00:15:32,240 --> 00:15:36,560
आपके जो कार्य हैं धरातल पे जो आर्य समाज से संबंधित है इस संबंधित

227
00:15:36,560 --> 00:15:40,880
है और रामपालियों से संबंधित है एवं अन्य अन्य

228
00:15:40,880 --> 00:15:45,360
जो ऐसे संस्थाने धर्म के

229
00:15:45,360 --> 00:15:49,360
जो स्वरूप है उसको विकसित करके दिखाते हैं। उनके खंडन को

230
00:15:49,360 --> 00:15:53,440
लेकर के जो आप कार्य कर रहे थे तो मैंने प्रथम बार देखा था। मुझे बड़ा अच्छा

231
00:15:53,440 --> 00:15:58,000
लगा और उसके समय से ही मैं कहीं ना कहीं मैं आपके चैनल से जुड़ा

232
00:15:58,000 --> 00:16:02,080
और मैंने इसके हिसाब से जैसे समय मिलता था वीडियो वगैरह देखता था उसका और

233
00:16:02,080 --> 00:16:06,320
उसी समय नहीं नहीं उसने काफी सारे कुतर्क भी किए हैं इस रिकॉर्डिंग में।

234
00:16:06,320 --> 00:16:10,320
मैंने मैं उससे आऊंगा मैं उससे आऊंगा। तो जैसे स्वामी

235
00:16:10,320 --> 00:16:14,400
जी का स्वामी जी को भी सुना है और उसी के प्रति मतलब यह

236
00:16:14,400 --> 00:16:18,640
मेरी भावना रही कि आप भी धरातल में अच्छा कार्य कर रहे हैं और स्वामी जी भी लगभग

237
00:16:18,640 --> 00:16:21,840
अच्छा कार्य कर रहे हैं। मतलब मेरी जितनी देखिए बहुत बड़ा शास्त्र

238
00:16:21,840 --> 00:16:25,920
का मर्म जो मैं भी नहीं हूं और सामान्य व्यक्ति को आचार्यों को

239
00:16:25,920 --> 00:16:30,080
सुनने में उपलब्ध श्रद्धा है। उनको उनके प्रति सम्मान

240
00:16:30,080 --> 00:16:34,080
की भावना है। इस भाव से मैंने जब प्रथम बार उनको सुना तो

241
00:16:34,080 --> 00:16:38,240
मेरे मन में भी उनके प्रति यही भावना आई कि आचार्य बिल्कुल अब बहुत सारी

242
00:16:38,240 --> 00:16:42,400
विषयों में जो जैसे आज काफी लोग चर्चा कर रहे हैं तो मुझे नहीं पता है क्योंकि

243
00:16:42,400 --> 00:16:46,400
संभव है कि मैं उतना उन विषयों में जुड़ा भी नहीं हूं। तो

244
00:16:46,400 --> 00:16:50,480
मेरी ये भावना हुई कि एक आचार्य हैं। मैं उनका नाम

245
00:16:50,480 --> 00:16:54,720
तो नहीं दोबारा लेना चाहूंगा क्योंकि उनसे जब वार्ता हुई तो उन्होंने

246
00:16:54,720 --> 00:16:59,120
स्वयं ही उनको शो होने लगा। तो मुझे लगा कि अब उनको क्योंकि मुझे तो घसीटा

247
00:16:59,120 --> 00:17:03,200
गया है उनको नहीं घसीटा जाना चाहिए। उनका नाम नहीं जाना चाहिए। तो उनके

248
00:17:03,200 --> 00:17:07,280
निर्देशानुसार यह था कि ये जो विवाद अनावश्यक विवाद जो

249
00:17:07,280 --> 00:17:11,280
है चल रहा है इसलिए वार्ता से भी समाप्त हो सकता है। इसकी आवश्यकता

250
00:17:11,280 --> 00:17:15,920
नहीं है और दोनों अच्छा कार्य कर रहे हैं। ऐसा उनका मानना था।

251
00:17:15,920 --> 00:17:19,920
तो मैंने कहा बिल्कुल मैं भी यही भावना रखता हूं और

252
00:17:19,920 --> 00:17:23,920
मुझे बात उनसे आचार्य जी से तो मैंने ये कह दिया पर

253
00:17:23,920 --> 00:17:28,000
जब यह हुआ कि अगर चर्चा कर सकते हो तो चर्चा करो तो मुझे

254
00:17:28,000 --> 00:17:32,240
भीतर से एक बार आया था कि पता नहीं मैं इस विषय के लिए उचित व्यक्ति हूं

255
00:17:32,240 --> 00:17:36,240
या नहीं मुझे मतलब ऐसा नहीं आप उचित व्यक्ति इसलिए नहीं थे क्योंकि वहां

256
00:17:36,240 --> 00:17:37,200
पर वो कुतर्क

257
00:17:37,200 --> 00:17:41,200
करता जा रहा है और आपको एक श्रोता के रूप में केवल

258
00:17:41,200 --> 00:17:45,280
वो उपयोग में ले रहा है और आपने उस वीडियो में कहा क्या है तो ना तो तो

259
00:17:45,280 --> 00:17:49,440
आप धर्म के पक्ष को सही से रख पाए वहां पर क्योंकि मुझे नहीं लगता आप उपयुक्त

260
00:17:49,440 --> 00:17:53,680
व्यक्ति थे उस चर्चा के लिए क्योंकि आप इतने ज्यादा प्रभावित

261
00:17:53,680 --> 00:17:57,680
हैं या फिर वो जो एक भाव होता है ना कि हम बोल नहीं

262
00:17:57,680 --> 00:18:01,840
पाएंगे तो आपका वहां पे वो भूमिका थी जो भी बात वहां

263
00:18:01,840 --> 00:18:06,160
वो बोलते जा रहे थे बोल आप अपना पक्ष बोल ही नहीं रहे हो कि मैं इस विषय में आया हूं आप

264
00:18:06,160 --> 00:18:10,320
शिवश का यहां पर खंडन या उत्तर प्रति उत्तर क्यों दे रहे हैं मैं तो अपनी

265
00:18:10,320 --> 00:18:14,480
ये बातें लेकर के आया हूं उन्होंने या आधे पौने घंटे तो अपना वही

266
00:18:14,480 --> 00:18:18,560
बताया कि भैया वह निगनंद को मानता नहीं है। निग्रचार को निग्रह

267
00:18:18,560 --> 00:18:22,720
परंपरा को नहीं मानता है। बाद में जो है वह निग्रह परंपरा को निग्रह शब्द

268
00:18:22,720 --> 00:18:26,880
को उसमें शास्त्र में देख रहा है। अरे भैया शास्त्र में हमने एक

269
00:18:26,880 --> 00:18:30,880
और पॉइंट उठाया कि यदि तुम्हारा तुमको भगवती

270
00:18:30,880 --> 00:18:34,240
आकर के देके गई।

271
00:18:34,240 --> 00:18:38,320
यह मान भी लिया जाए। तब भी जिस शास्त्र के आधार पर तुम

272
00:18:38,320 --> 00:18:42,880
अपने निग्रह संप्रदाय को ख्यापित कर रहे हो उस शास्त्र में तो निग्रह

273
00:18:42,880 --> 00:18:46,960
और निग्रह संप्रदाय नहीं लिखा है। निग्रह आगम लिखा है और अगर उसको मान भी

274
00:18:46,960 --> 00:18:51,280
लिया जाए कि वो संप्रदाय ही है तो वो पाखंड संप्रदायों में माना जाएगा

275
00:18:51,280 --> 00:18:52,400
क्योंकि वहां घोषणा

276
00:18:52,400 --> 00:18:56,400
हो रही है कि अब हम आठ संप्रदायों के नाम बता रहे हैं। पाखंड तंत्रों के नाम बता रहे

277
00:18:56,400 --> 00:19:00,480
हैं। अगर माना जाएगा तो ठीक है। तो एक

278
00:19:00,480 --> 00:19:04,480
तो ये वाली बात हो गई। तो अगर हमने यह क्वेश्चन

279
00:19:04,480 --> 00:19:08,960
उठा दिया कि जिस शास्त्र से तुम अपने निग्रह संप्रदाय को प्रमाणित कर रहे हो

280
00:19:08,960 --> 00:19:12,960
वहां से भी वो पाखंड तंत्र होता है स्थापित इसका मतलब ये थोड़ी ना

281
00:19:12,960 --> 00:19:17,040
है कि हमने ये मान लिया कि भगवती वहां आती है या हमने ये मान लिया कि

282
00:19:17,040 --> 00:19:21,120
तुम्हारे निग्रह का परंपरा काल्पनिक नहीं है। परंपरा काल्पनिक है।

283
00:19:21,120 --> 00:19:25,280
भगवती आती है। ये भी कल्पना है। मगर हम एक और पॉइंट उठा

284
00:19:25,280 --> 00:19:29,280
रहे हैं कि अगर उन दोनों को मान भी लिया जाए तो यहां ग्रंथ में आपका खंडन हो रहा

285
00:19:29,280 --> 00:19:33,440
है। और ऐसे ना जाने कितने जगह पर अलग-अलग पॉइंट पर आपका

286
00:19:33,440 --> 00:19:37,680
खंडन होता है। यदि आप निग्रह निग निगमानंद को मानते

287
00:19:37,680 --> 00:19:41,840
हो तो आपको शंकराचार्य को मानना पड़ जाएगा। आप अगर निगमानंद

288
00:19:41,840 --> 00:19:45,920
को मानते हो तो अगर निगमानंद के प्रामाणिक शिष्यों को नहीं

289
00:19:45,920 --> 00:19:50,160
मानते हो। आज उसने एक बात ये कही आपकी रिकॉर्डिंग में मैंने सुना कि

290
00:19:50,160 --> 00:19:54,480
भाई हमने किसी को भी अपना वक्ता या प्रतिनिधि नियुक्त

291
00:19:54,480 --> 00:19:58,640
नहीं किया है। इसका मतलब वो ये मानता है। हां। इसका मतलब

292
00:19:58,640 --> 00:20:02,960
वह यह मानता है कि जिसको जो नियुक्त करेगा अपने प्रतिनिधि

293
00:20:02,960 --> 00:20:07,120
के रूप में उसके संदर्भ से उसके

294
00:20:07,120 --> 00:20:07,680
प्रति

295
00:20:07,680 --> 00:20:12,160
नियुक्त उसके द्वारा नियुक्त प्रतिनिधि की बात ही प्रामाणिक मानी जाएगी।

296
00:20:12,160 --> 00:20:16,240
तो फिर निगमानंद के संबंध में जो उसके द्वारा नियुक्त जो लोग बोल रहे

297
00:20:16,240 --> 00:20:20,880
हैं कि निगमानंद ने बताया ईसा को भगवान कहा या वर्णाश्रम

298
00:20:20,880 --> 00:20:24,880
का इस तरह से विरोध किया और या फिर जो भी बातें जो

299
00:20:24,880 --> 00:20:28,880
उसकी किताबों में भी मिलती है उनकी व्याख्या जो निगमानंद के द्वारा नियुक्त लोग

300
00:20:28,880 --> 00:20:33,040
करते हैं वो मानी जाएगी कि कोई मन चला रहा गैरा नत्थू

301
00:20:33,040 --> 00:20:37,280
गहरा जो है हाथ में सांप का डंडा लेकर चलने वाला वो जो व्याख्या करेगा

302
00:20:37,280 --> 00:20:41,360
और वो कहेगा मैं निगमानंद को क्या कहते हैं निगमानंद की ओर से प्रामाणिक बात

303
00:20:41,360 --> 00:20:45,440
मैं मान म क्या कहते हैं मैं बताऊंगा उसको प्रमाणिक

304
00:20:45,440 --> 00:20:49,760
माना जाएगा। इसका मतलब दुनिया में कोई व्यक्ति

305
00:20:49,760 --> 00:20:54,320
अह इसका मतलब यह है कि जब तुम स्वयं

306
00:20:54,320 --> 00:20:58,480
के लिए तो यह चाहते हो कि तुम्हारी ओर से प्रमाणिक उसी को माना जाए जिसको तुमने

307
00:20:58,480 --> 00:21:02,720
नियुक्त किया हो। पर अन्यों के लिए तुम यह चाहते हो कि उनकी

308
00:21:02,720 --> 00:21:06,800
ओर से भी तुम्ही को प्रमाणिक माना जाए। जबकि तुमको उसने नियुक्त किया हो या ना किया

309
00:21:06,800 --> 00:21:11,920
हो इससे कोई मतलब नहीं है। यह तो सारे विषय

310
00:21:11,920 --> 00:21:15,920
शोध के हैं। मैं अपने अगर बात करूं तो इतना और

311
00:21:15,920 --> 00:21:19,920
इसको अब ये बताइए रामभद्राचार्य जी के पास ज्यादा बड़े गुंडे

312
00:21:19,920 --> 00:21:22,880
हैं या ज्यादा बड़े गुंडे रामपाल के पास

313
00:21:22,880 --> 00:21:27,520
ज्यादा हैं? किसके पास ज्यादा है? ये कुतर्क नहीं है।

314
00:21:27,520 --> 00:21:31,520
समर्थक रामपाल के पास ही होने चाहिए। और और क्या कह रहा है कि

315
00:21:31,520 --> 00:21:35,680
उसकी अगर औकात हो तो ये कर दे चारों शंकराचार्य को एक कर दे। मैं

316
00:21:35,680 --> 00:21:39,680
तो ये कह रहा हूं कि उसकी अगर औकात हो फिर यही कहने लगो फिर सीधे-सीधे

317
00:21:39,680 --> 00:21:44,400
इसी पे आ जाओ। उसकी अगर औकात हो तो सबको मोक्ष दिला दे। बात ही खत्म।

318
00:21:44,400 --> 00:21:48,880
हम सब हो गया। देखिए विषय

319
00:21:48,880 --> 00:21:53,520
हम जो माता के दूध की बात जो हम करते हैं वो वहां पे करते हैं।

320
00:21:53,520 --> 00:21:57,520
हम जब कोई व्यक्ति धर्म का पक्षधर होकर के टीका टिप्पणी कर

321
00:21:57,520 --> 00:22:01,600
रहा है तो हम जाकर के उसको जो है उसमें

322
00:22:01,600 --> 00:22:05,760
तो कह नहीं सकते हैं। हर हर एक का जो समाधान है वो कमेंट में जाके

323
00:22:05,760 --> 00:22:09,840
तो दे नहीं सकते उसको कि एक-एक व्यक्ति का समाधान कमेंट में ये खुद

324
00:22:09,840 --> 00:22:14,000
अपने वीडियो में बोला है कि एक-एक व्यक्ति का समाधान हम कमेंट में नहीं कर सकते। तो

325
00:22:14,000 --> 00:22:18,000
हम जब हम ये नहीं कर सकते हैं और कोई व्यक्ति ससर्यादित शब्दों में

326
00:22:18,000 --> 00:22:22,000
टिप्पणी करता है तो हम उसको जाकर के कह देते कम टू लाइव कम से

327
00:22:22,000 --> 00:22:26,000
कम उसको अवसर तो दे रहे हैं कि भैया लाइव आ जाओ और आमने सामने

328
00:22:26,000 --> 00:22:30,160
बैठकर के चर्चा कर दो क्योंकि क्योंकि समाधान कर देने पर भी वो बात

329
00:22:30,160 --> 00:22:34,960
वहां चर्चा आगे बढ़ती चली जाएगी। पता नहीं कितने और कमेंट करने पड़ जाएंगे।

330
00:22:34,960 --> 00:22:38,480
तो हम सीधे कह देते लाइव आ जाओ जिससे कि तुम जब विषय

331
00:22:38,480 --> 00:22:42,560
कर रहे होगे हम तुम्हें रोक लेंगे। तो हम कम से कम मौका तो

332
00:22:42,560 --> 00:22:47,760
दे रहे हैं। अवसर तो दे रहे हैं। हम तो केवल यह कह रहे हैं कि जो कार्य तुम यहां पर

333
00:22:47,760 --> 00:22:52,640
ऐसे कर रहे हो अपने नाम पहचान इत्यादि को छुपा करके तो जरा आओ सामना करो।

334
00:22:52,640 --> 00:22:57,200
सामने करके आओ। भाई हम जब अपनी पहचान इत्यादि को

335
00:22:57,200 --> 00:23:01,280
रिस्क पे रख के सामना करते हुए बात कर रहे हैं। धर्म का पक्ष रख

336
00:23:01,280 --> 00:23:05,360
रहे हैं। तो जो हमें हमारे को रोकने आया है उसको लगता है कि हम

337
00:23:05,360 --> 00:23:09,440
अधर्म कर रहे हैं। वह भी तो अपनी पहचान के साथ आए। उन उन चीजों का रिस्क ले।

338
00:23:09,440 --> 00:23:13,600
उन चीजों को दांत पे लगाए सत्य का पक्षधर है तो तो

339
00:23:13,600 --> 00:23:17,680
यह बात कहने के लिए हम वहां पर माता के दूत की बात कहते हैं और माता के दूत की

340
00:23:17,680 --> 00:23:21,760
बात जाने कितने आचार्यों ने और कितने लोगों ने अमुक अमुक समय

341
00:23:21,760 --> 00:23:26,240
पर कहते रहे उसमें ऐसी कोई अमर्यादा नहीं है।

342
00:23:26,240 --> 00:23:30,320
देखिए दोष वाला जो विषय है ना उससे मैं यही कहूंगा

343
00:23:30,320 --> 00:23:34,320
कि ठीक है लगभग आपने सभी को उत्तर दिया है तो हो सकता है संभव

344
00:23:34,320 --> 00:23:38,720
है आपने मुझे भी वो उत्तर दे दिया होगा तो सामान्य दृष्टि से क्योंकि मैं एक

345
00:23:38,720 --> 00:23:42,720
सामान्य व्यक्ति हूं तो मुझे थोड़ा सा मेरी भावनाओं को लगा था लेकिन

346
00:23:42,720 --> 00:23:46,720
ठीक है जब कहीं ना कहीं मैंने उसमें देखिए माता

347
00:23:46,720 --> 00:23:50,880
के माता के दूध की बात हम तभी किसी को कहते हैं जब वो कोई ज्यादा

348
00:23:50,880 --> 00:23:53,600
उपहास पूर्वक बोल रहा होता है। यदि

349
00:23:53,600 --> 00:23:57,680
कोई केवल प्रश्न ही पूछता है तो हम उसको सीधे कहते

350
00:23:57,680 --> 00:24:01,760
हैं भैया प्रत्यक्ष वार्ता कर लो कम टू लाइव। ये बड़ा सरल सा हमारे

351
00:24:01,760 --> 00:24:06,640
पास होता है। कम से कम वो मेरा वो मेरा विषय ही नहीं था। वो मेरा विषय नहीं था। हालांकि

352
00:24:06,640 --> 00:24:10,720
उसमें चर्चा में वो विषय भी आया है। लेकिन मेरा मूल विषय स्वामी जी से ये नहीं था।

353
00:24:10,720 --> 00:24:14,880
मेरा विषय यह था कि क्योंकि मैंने आपसे प्रथम वार्ता की तो

354
00:24:14,880 --> 00:24:19,120
आपसे चर्चा में यही हुआ कि ठीक है त्यौहार पूर्व

355
00:24:19,120 --> 00:24:23,120
अगर चाहे तो हो सकती है एटलीस्ट पक्ष किसका क्या है

356
00:24:23,120 --> 00:24:27,120
ये पता चले तो आपसे वार्ता हुई उसके बाद मैंने स्वामी जी से

357
00:24:27,120 --> 00:24:31,120
वार्ता की तो स्वामी जी से मैं अपनी बात यहां तो

358
00:24:31,120 --> 00:24:35,280
मैंने सरलता से सह आपको बिल्कुल सच सच एक-एक बात बताई

359
00:24:35,280 --> 00:24:39,360
उसने वहां कहती अपनी बात तो अपनी पूरी कर उसने कहा कि उसको

360
00:24:39,360 --> 00:24:43,600
अपने गुरुओं की लड़ाई लड़ाई नहीं लड़ रहा है। सनातन धर्म की लड़ाई नहीं लड़ रहा है। वो विजय

361
00:24:43,600 --> 00:24:47,600
श्री की लड़ाई लड़ रहा है। भैया जब जब धर्म धर्म की लड़ाई हुई है ना धर्म

362
00:24:47,600 --> 00:24:51,680
और अधर्म की लड़ाई हुई है। उसमें जो धर्म और अधर्म की लड़ाई का आधार बनी

363
00:24:51,680 --> 00:24:55,680
वो एक स्त्री बनी है। हम हम हां बनी है कि नहीं

364
00:24:55,680 --> 00:25:00,000
बनी? बताइए रामायण और रामायण और महाभारत में एक स्त्री बनी कि नहीं बनी? धर्म

365
00:25:00,000 --> 00:25:04,240
और धर्म के युद्ध का कारण तो वो एक आधार था बस कि किस

366
00:25:04,240 --> 00:25:08,480
तरीके से मैं उस युद्ध में कूद जाऊं और मैं उनके लिए मैं उस व्यक्ति

367
00:25:08,480 --> 00:25:08,980
के

368
00:25:08,640 --> 00:25:12,640
लिए नहीं बोलता था पहले पर वो दूर ही दूर

369
00:25:12,640 --> 00:25:16,720
से मैं देखता था कि अपना भाई है वर्णाश्रमी है ठीक है पर वो

370
00:25:16,720 --> 00:25:20,800
धीरे-धीरे मुझ तक आई और विजयश्री के बहाने मुझे उसमें

371
00:25:20,800 --> 00:25:24,800
जो कुछ जाना पड़ा आपको मैंने अपनी जो पहले वाली रिकॉर्डिंग

372
00:25:24,800 --> 00:25:29,040
है उसमें सुन लीजिएगा आपको भेज दूंगा ये सारी बातें बताई हम

373
00:25:29,040 --> 00:25:33,200
नहीं, वह तो मैं खुद ही सहमति कर रहा हूं। अब वह कह रहे हैं कि विजयश्री की लड़ाई

374
00:25:33,200 --> 00:25:37,200
है। विजयाश्री के कारण मैं उस जो जिस युद्ध से मैं दूर

375
00:25:37,200 --> 00:25:41,440
था, उसमें मुझे आना पड़ा। और जब आना पड़ा, तो पूरा युद्ध मेरा हो गया।

376
00:25:41,440 --> 00:25:45,600
विजयश्री केवल एक माध्यम बने उस युद्ध में आने का। वह जो जिस तरीके

377
00:25:45,600 --> 00:25:49,680
से कटाक्ष कर रहा था शंकराचार्यों पर और मैं तो इतना जानता भी नहीं

378
00:25:49,680 --> 00:25:53,840
था ना उसके बारे में कि वह क्या-क्या बोल रहा है। मोटे-मोटे तौर पर मुझे पता था और

379
00:25:53,840 --> 00:25:58,560
उसका कहना है कि जो है जो पहले से सार्वजनिक है वो बात जो है

380
00:25:58,560 --> 00:26:02,560
उसको सार्वजनिक चर्चा करने में क्या वो है? अरे भाई किसी स्त्री

381
00:26:02,560 --> 00:26:06,640
के ऊपर अगर लांछन लग गया है कोई दुष्कर्म हो गया है कोई

382
00:26:06,640 --> 00:26:11,120
घटना घटित हो गई वो सार्वजनिक हो गई है अगर तो उस पे अब जब भी कोई बयानबाजी

383
00:26:11,120 --> 00:26:15,120
होगी सब सार्वजनिक होगी। हम हां यह ध्यान ना रखते हुए

384
00:26:15,120 --> 00:26:19,120
कि यदि इसका जो दुराचार है वह सिद्ध हो या ना हो मगर

385
00:26:19,120 --> 00:26:23,280
जितनी बार इस तरह की चर्चा होगी सार्वजनिक रूप से उतनी बार इसका चीर हरण

386
00:26:23,280 --> 00:26:24,080
होगा वाचिक

387
00:26:24,080 --> 00:26:28,080
रूप से हम हम मतलब तो

388
00:26:28,080 --> 00:26:32,080
ये क्या कुतर्क है हां तो ये कोई ये कुतर्क नहीं है क्या

389
00:26:32,080 --> 00:26:36,160
कि कोई कोई चर्चा अगर सार्वजनिक है तो

390
00:26:36,160 --> 00:26:40,160
उसे और सार्वजनिक करो ये कोई बात है क्या और

391
00:26:40,160 --> 00:26:44,320
वो कह रहा है कि पीएन मिश्र जी वाले मामले में पीए पीएन मिश्र जी हे पीएन

392
00:26:44,320 --> 00:26:48,320
मिश्र जी क्या कहते हैं प्रचारित हो जाएंगे प्रसिद्ध हो

393
00:26:48,320 --> 00:26:52,880
जाएंगे ये केवल एक बात है कई बातों में से एक बात है

394
00:26:52,880 --> 00:26:56,880
अन्य बहुत सारी बातें हैं पीएन मिश्र जी

395
00:26:56,880 --> 00:27:01,200
कई अभियानों से जुड़े हुए व्यक्ति हैं। पीएन मिश्र जी

396
00:27:01,200 --> 00:27:05,200
क्या कहते हैं? पीएन मिश्र जी कितने प्रभावशाली व्यक्ति यह

397
00:27:05,200 --> 00:27:09,680
भी तो देखना आवश्यक है कि उनके लिए बोलना ही आवश्यक हो जाए।

398
00:27:09,680 --> 00:27:13,840
कितना कितने लोग कितना कल्ट चल रहा है उनके पीछे बताइए? जब

399
00:27:13,840 --> 00:27:18,240
हम अन्य ढेर सारे लोगों के लिए नहीं बोल पाए हैं। और

400
00:27:18,240 --> 00:27:22,320
हम तो कहते हैं भागवतानंद के बारे में नहीं बोल पाते। करपात्री जी का विरोध इसने जाने कब

401
00:27:22,320 --> 00:27:26,640
से कर दिया था। पूरी के शंकराचार्य जी का बुद्ध के विषय में विरोध जाने कब से कर दिया था।

402
00:27:26,640 --> 00:27:30,720
चारों शंकराचार्यों को आकर के वो एक करोड़ देकर के बुला लो।

403
00:27:30,720 --> 00:27:34,720
हम जाने कब से कर दिया था। अच्छा वो वो

404
00:27:34,720 --> 00:27:38,880
वो ये भी बता रहा था अपने वीडियो में आपसे जो ऑडियो में बात हुई

405
00:27:38,880 --> 00:27:39,380
है कि

406
00:27:39,280 --> 00:27:43,520
भैया मैं शूद्रों के यहां जाता हूं। शंकराचार्यों का आना बहुत कठिन होता है।

407
00:27:43,520 --> 00:27:47,680
कितने कार्यक्रम होते हैं शूद्रों के यहां होते हैं जो मतलब

408
00:27:47,680 --> 00:27:52,160
ये जो कर रहा है उसके आधार पर ये शंकराचार्यों को गलत ठहरा देगा।

409
00:27:52,160 --> 00:27:57,040
मतलब आप अगर शूद्रों के यहां कार्यक्रम कर रहे हो तो इससे शंकराचार्यों

410
00:27:57,040 --> 00:28:01,120
का कार्यक्रम करना या उनकी जो शैली है उनकी जो विधि है

411
00:28:01,120 --> 00:28:05,280
वो गलत हो गई। आप महान हो गए। आप यहां पर कैसे बोल

412
00:28:05,280 --> 00:28:09,360
रहे हो यह बताओ कि एक करोड़ लेते हैं वो कैसे सिद्ध हो

413
00:28:09,360 --> 00:28:13,600
रहा है? और जब सिद्ध नहीं है तो वो आरोप क्यों लगा रहे हो?

414
00:28:13,600 --> 00:28:18,560
जो सिद्ध नहीं कर तो आप प्रासंगिक ही लगी। हालांकि

415
00:28:18,560 --> 00:28:22,880
अह मैं सम्मान करता हूं उनका आचार्य हैं वो

416
00:28:22,880 --> 00:28:26,960
और आचार्य कैसे हैं भाई? कैसे आचार्य हैं? के किस

417
00:28:26,960 --> 00:28:30,960
प्रकार से आचार्य हैं? उसका निग्रचार्यत्व तो सिद्ध हुआ नहीं। उसका आचार्य

418
00:28:30,960 --> 00:28:34,960
तो भी नहीं सिद्ध होता। वो अपने वीडियो में कहता है कि विजय श्री के पास मेरे ऊपर

419
00:28:34,960 --> 00:28:38,960
और नीचे बहुत सी चीजें ऐसी जो मेरे पास नहीं है। ये आचार्य के लक्षण

420
00:28:38,960 --> 00:28:42,960
हैं। लथखोर कहना आचार्यों को लतखोर

421
00:28:42,960 --> 00:28:46,960
कहना और राघवाचार्य जी के लिए अभी आपसे होने वाली बातचीत में

422
00:28:46,960 --> 00:28:51,040
बोला कि लीपापोती करके निकल जाएंगे। यह श्री संप्रदाय के आचार्यों का

423
00:28:51,040 --> 00:28:54,320
सम्मान है उसके मन में। मतलब वो

424
00:28:54,320 --> 00:28:58,320
कौन है? विषय तो था ही नहीं मेरे चर्चा का या उनसे बात करने

425
00:28:58,320 --> 00:29:03,040
का बट आप आप यह देखो कि वो कहता है कि मैं निग्रहचार्य हूं।

426
00:29:03,040 --> 00:29:07,120
अरे भैया और मैं सब संप्रदायों को मैं यह निग्रह करूंगा कि वो

427
00:29:07,120 --> 00:29:11,280
अपनेप संप्रदाय के हिसाब से चल रहे हैं कि नहीं? अच्छा ये देखने

428
00:29:11,280 --> 00:29:15,600
के लिए आपको उनके यहां का परंपरा से प्रामाणिक शिष्य होना पड़ेगा कि नहीं?

429
00:29:15,600 --> 00:29:20,480
तो क्या आपने सबके यहां से परंपरा से प्रामाणिक ज्ञान प्राप्त कर लिया है?

430
00:29:20,480 --> 00:29:24,560
रामानुजाचार्य जी ने सिद्धांत क्या बताया

431
00:29:24,560 --> 00:29:29,440
है यह उनके प्रामाणिक शिष्य बताएंगे। अब उनके प्रामाणिक शिष्य

432
00:29:29,440 --> 00:29:34,080
प्रामाणिक सिद्धांत आगे प्रचारित कर रहे हैं कि नहीं कर रहे हैं

433
00:29:34,080 --> 00:29:38,240
और अगर कोई यह कह दे कि नहीं कर रहे हैं। इस स्थिति

434
00:29:38,240 --> 00:29:42,880
में आकर के कोई अगर उनका निग्रह करने का प्रयास करे तो यह कहां तक तर्कसंगत

435
00:29:42,880 --> 00:29:46,960
होगा? रामानुजाचार्य के विषय से विषय में उनके

436
00:29:46,960 --> 00:29:51,600
प्रामाणिक शिष्य ही तो बताएंगे। और कोई कोई

437
00:29:51,600 --> 00:29:55,600
व्यक्ति आकर के कह सकता है तुम रामानुजाचार्य का सिद्धांत गलत बता रहे हो। तो

438
00:29:55,600 --> 00:30:01,600
इस तरीके से कोई भी कह देगा कि रामानुजाचार्य ने विशिष्टा द्वैत नहीं द्वैत बताया था।

439
00:30:01,600 --> 00:30:05,840
भाई कैसे निर्णय होगा? बातें जो है पता है ये सब बातें

440
00:30:05,840 --> 00:30:09,440
मेरे विषय चर्चा का विषय ये पूरी के शंकराचार्य जी

441
00:30:09,440 --> 00:30:13,760
ने इसीलिए कहा था कि निग्रहचार्य केवल भगवान हो सकते हैं। बिल्कुल सही बात

442
00:30:13,760 --> 00:30:17,920
थी उनकी क्योंकि ये तर्कसंगत फिट ही नहीं होता है। क्योंकि आप निग्रह

443
00:30:17,920 --> 00:30:22,160
करने निकले सारे संप्रदायों का तो पहली बात तो ये कि आपके पास सारे संप्रदायों

444
00:30:22,160 --> 00:30:26,320
का उनके यहां का परंपरा से प्रामाणिक ज्ञान है। जो आप

445
00:30:26,320 --> 00:30:30,480
यह निर्णय करने जाएंगे ये अपने यहां का प्रामाणिक सिद्धांत सही बता रहे हैं कि गलत बता

446
00:30:30,480 --> 00:30:35,120
रहे हैं। दूसरी बात यह है कि आपका अपना सिद्धांत तो

447
00:30:35,120 --> 00:30:39,360
वेद का तात्पर्य है। आपका अद्वैत कैसा है? अद्वैत है। तो

448
00:30:39,360 --> 00:30:44,080
आपके अनुसार तो अद्वैत को ना मानने वाले सभी संप्रदाय अवैदिक हो जाएंगे।

449
00:30:44,080 --> 00:30:48,160
क्योंकि आप निग्रह करने निकल रहे हो ना। नहीं तो नहीं तो

450
00:30:48,160 --> 00:30:52,240
सम तत्व सहष्णुता का सत्य सहिष्णुता की क्रमिक

451
00:30:52,240 --> 00:30:56,320
अभिव्यक्ति में सबका सामंजस्य हो जाएगा। मगर आप तो निग्रह

452
00:30:56,320 --> 00:31:00,400
करने निकल रहे हो। हम तो और फिर उसका

453
00:31:00,400 --> 00:31:05,040
एक उसका यह प्रलाप कि मैं मैं जो है वो अनास्थावान

454
00:31:05,040 --> 00:31:09,040
बना रहा हूं। मैं कैसे बना रहा हूं? मैंने कितनों को दीक्षा दे दी है। मैंने कितने

455
00:31:09,040 --> 00:31:13,040
पूरी के शंकराचार्य के शिष्यों को सुनो। इस के लोगों से

456
00:31:13,040 --> 00:31:17,040
जब कहा जाता है ना कि तुम मुसलमान बना रहे हो? क्रिश्चियन बना रहे हो। तो

457
00:31:17,040 --> 00:31:21,120
इस के लोग यही कहते हैं बताओ कितनों का नाम बदल कितनों ने अपना नाम मुस्लिम कर

458
00:31:21,120 --> 00:31:24,640
लिया? कितनों ने अपना नाम क्रिश्चियन कर लिया। तो वहां पर बात

459
00:31:24,640 --> 00:31:28,880
ये होती है कि कोई भले ही नाम और स्वरूप से क्रिश्चियन

460
00:31:28,880 --> 00:31:33,040
या अथवा इस्लाम मुसलमान बना हो या ना बना

461
00:31:33,040 --> 00:31:37,600
हो बात ये होती है विचारों से विचारों से

462
00:31:37,600 --> 00:31:42,240
उनके अंदर जो है इस्लाम और क्रिश्चियनिटी पनप चुकी है।

463
00:31:42,240 --> 00:31:46,320
इसी प्रकार से इसी प्रकार से आप जिस प्रकार

464
00:31:46,320 --> 00:31:50,560
से अनास्था उत्पन्न करा रहे हो आचार्यों के विरुद्ध

465
00:31:50,560 --> 00:31:55,040
तो वो व्यवहारिक रूप से वो

466
00:31:55,040 --> 00:31:59,360
आज नहीं तो कल जो है दूर जाते हुए देख सकते हैं। मगर

467
00:31:59,360 --> 00:32:03,520
वैचारिक रूप से वो आज की आज ही अनास्थावान हो रहे हैं। भाई सीधी

468
00:32:03,520 --> 00:32:07,520
सी बात है। कितनों को कराया कितनों को नहीं कराया वह हम जानते हैं कि कितने

469
00:32:07,520 --> 00:32:12,480
अनास्थावान हो रहे हैं। कितने नहीं हो रहे हैं और हम होने से रोक भी तो रहे हैं।

470
00:32:12,480 --> 00:32:16,720
भाई तुम अनास्था बना रहे हो तो हम बचा रहे हैं और मेरे पास ऐसे मैसेजेस आए

471
00:32:16,720 --> 00:32:20,960
हैं जिसमें मातृ शक्ति थी एक बोली मुझसे मैसेज करके बोली

472
00:32:20,960 --> 00:32:24,960
आपको मैं बता रहा हूं मेरे मेरे पास एक मातृशक्ति ऐसी आए मैं बोला

473
00:32:24,960 --> 00:32:29,040
था जिनको गुरुदेव से दीक्षा लेनी थी कि मैं गुरुदेव से दीक्षा लेने वाली थी

474
00:32:29,040 --> 00:32:33,680
तभी मुझे भागवतानंद के वीडियोस दिखाई दिए और भागवतानंद के वीडियोस देख

475
00:32:33,680 --> 00:32:37,840
के जो है मेरा मन विचलित हो गया मुझे फिर तब जाकर के आपका वीडियो

476
00:32:37,840 --> 00:32:39,680
दिखाई दिया और तब जाकर के

477
00:32:39,680 --> 00:32:43,680
जब मैंने आपका वीडियो सुना हां तो उससे हृदय को संतोष मिला

478
00:32:43,680 --> 00:32:49,280
और उसके बाद उन्होंने दीक्षा ली गुरुदेव से

479
00:32:49,280 --> 00:32:53,840
ये सारी बातें जो है भैया ये मेरे विषय देखिए

480
00:32:53,840 --> 00:32:57,920
भाई सीधी सी बात है कोई कोई अगर सन्यासी है कोई सन्यासी

481
00:32:57,920 --> 00:33:01,920
है उस पे आप आरोप लगाओगे लालची है तो उसका सन्यास सब तो भंग हो रहा है

482
00:33:01,920 --> 00:33:06,480
ना हम तो आर्य समाज से इसी आधार पर लड़ते हैं ना कि हमारा जो

483
00:33:06,480 --> 00:33:10,640
आधा अर्थ है वह प्रामाणिक अर्थ है बिल्कुल हम

484
00:33:10,640 --> 00:33:15,360
हम अब वो कह रहा है कि सारे सारे संप्रदायों में एक वो करो

485
00:33:15,360 --> 00:33:19,440
क्या कहते हैं सारे संप्रदाय खंडन कर रहे हैं खंडन कर रहे होंगे

486
00:33:19,440 --> 00:33:23,520
मगर वैचारिक खंडन कर रहे हैं सैद्धांतिक खंडन कर रहे हैं और ब्रह्म

487
00:33:23,520 --> 00:33:27,840
ब्रह्म को लेकर के खंडन जो कोई धर्म को लेकर के खंडन

488
00:33:27,840 --> 00:33:32,080
नहीं है और तुम भी अगर शास्त्र की मर्यादा शास्त्र केवल शास्त्रीय

489
00:33:32,080 --> 00:33:36,800
खंडन करते तो बात अलग होती करते रहते हम कभी ना बोलते

490
00:33:36,800 --> 00:33:41,200
भाई 50ों लोग बोल रहे हैं तुम भी बोल देते उसमें में क्या हो जाता

491
00:33:41,200 --> 00:33:46,400
मगर तुमने क्या किया कि तुमने

492
00:33:46,400 --> 00:33:48,720
अ

493
00:33:48,720 --> 00:33:52,960
व्यक्तिगत रूप से अमर्यादित ढंग से असिद्ध आरोप

494
00:33:52,960 --> 00:33:55,120
लगाए ये किया तुमने

495
00:33:55,120 --> 00:33:59,120
तुमने कोई शास्त्रीय विरोध थोड़ी ना किया उनका क्या शास्त्र में लिखा

496
00:33:59,120 --> 00:34:03,120
है कि कौन वैश्यागामी है या कौन व्यभिचारी है ये

497
00:34:03,120 --> 00:34:06,880
सब शास्त्र में लिखा है क्या

498
00:34:06,880 --> 00:34:11,200
या शास्त्र में लिखा है कि कौन स्त्री वैश्या है या कौन या ये शास्त्र में लिखा

499
00:34:11,200 --> 00:34:15,280
है कि कौन जो कहते हैं भाई

500
00:34:15,280 --> 00:34:19,360
बहन है उनका आपस में गलत संबंध है। ये सब शास्त्र में वर्णित

501
00:34:19,360 --> 00:34:22,240
है क्या?

502
00:34:22,240 --> 00:34:26,400
तो ये सब उसके कुतर्क हैं। जो उसने जो उसको जहर उगलना था मेरे

503
00:34:26,400 --> 00:34:30,400
विरुद्ध उसने जहर आप आपको मोहरा बना करके उगला और आपने

504
00:34:30,400 --> 00:34:34,560
आपने वो सब सुना। आपका अपना विषय आपने क्या बोला वो तो मुझे समझ में नहीं आया। क्या

505
00:34:34,560 --> 00:34:38,880
बोला? मेरा देखिए विषय ऐसा था कि मेरी आपसे

506
00:34:38,880 --> 00:34:43,440
चर्चा हुई तोकि सौहार्दपूर्ण सकारात्मक भाव

507
00:34:43,440 --> 00:34:47,760
से ही मुझे यह आशा थी कि स्वामी जी क्योंकि इतने शास्त्रीय

508
00:34:47,760 --> 00:34:51,840
विषयों में चर्चा करते हैं तो हालांकि मैं उनको सुझाव देने

509
00:34:51,840 --> 00:34:56,160
योग्य नहीं हूं। मैं यह पहले ही उनको मैंने बोला था चर्चा

510
00:34:56,160 --> 00:35:00,160
में कई बार ये मैंने बोला है आप सुनेंगे रिकॉर्डिंग को ना तो उसमें स्पष्ट मैंने कहा

511
00:35:00,160 --> 00:35:04,400
है कि सुझाव देना या मेरी ऐसी योग्यता में नहीं है मैं बहुत छोटा

512
00:35:04,400 --> 00:35:08,480
व्यक्ति हूं तो पर फिर भीकि हम

513
00:35:08,480 --> 00:35:10,240
सनातन धर्मी हम ये देखते हैं

514
00:35:10,240 --> 00:35:14,320
कि कोई भी एक एक ही पक्ष के दो लोग आपस में अगर कोई विवाद है तो

515
00:35:14,320 --> 00:35:18,400
वो नहीं होना चाहिए इस भाव को रखते हुए मैंने चाहा था कि स्वामी जी

516
00:35:18,400 --> 00:35:22,480
से चर्चा करूं पर स्वामी जी ने विषय

517
00:35:22,480 --> 00:35:26,480
को शायद उनकी भावना में ये सब विषय रहे होंगे

518
00:35:26,480 --> 00:35:30,800
तो उसके चलते उन्होंने कहा और मैं क्योंकि उनका समर्थक

519
00:35:30,800 --> 00:35:35,680
रहा हूं कटक कट्टर समर्थक रहा हूं उनके विचारों का उनके

520
00:35:35,680 --> 00:35:39,840
शास्त्र के विषयों को तो मेरी मैंने दृष्टता

521
00:35:39,840 --> 00:35:43,920
नहीं की कि मैं उनसे प्रश्न करूं। हालांकि एक दो बार भी इशारा आया कि प्रश्न करो

522
00:35:43,920 --> 00:35:48,720
लेकिन मुझे लगा कि यह दोष लगेगा किसी भी आचार्य को इस तरह से रोकना

523
00:35:48,720 --> 00:35:52,880
और मैं सुनता गया उन सारे विषयों को और बाद में जब

524
00:35:52,880 --> 00:35:57,440
उन्होंने सार्वजनिक भी किया तो थोड़ा सा मुझे आपत्ति हुई थी इस विषय में कि

525
00:35:57,440 --> 00:36:01,440
शायद ये नहीं होना चाहिए था क्योंकि इतना कुछ महत्वपूर्ण मेरे चर्चा से तो

526
00:36:01,440 --> 00:36:05,520
कुछ निष्कर्ष निकला नहीं है कि मैंने कोई ऐसा विषय चर्चा में निष्कर्ष निकला है

527
00:36:05,520 --> 00:36:09,840
ना उसको जो जो उत्तर इधर-उधर करके देने थे वो सब उत्तर आपको मोहरा

528
00:36:09,840 --> 00:36:14,640
बना करके उसने मुझे दिए हैं वो वो कह रहा है वो क्या कह रहा है सुनिए

529
00:36:14,640 --> 00:36:18,720
सुनिए वो क्या कह रहा है कि मैंने उसको कभी व्यक्तिगत चर्चा के लिए कहा ही नहीं

530
00:36:18,720 --> 00:36:22,800
झूठ मैंने उसको उसी समय व्यक्तिगत चर्चा के लिए कहा था जिस समय मैंने

531
00:36:22,800 --> 00:36:25,280
उसको सार्वजनिक चर्चा के लिए मना किया

532
00:36:25,280 --> 00:36:29,360
था मैंने कहा था इस इन विषयों में सार्वजनिक

533
00:36:29,360 --> 00:36:33,360
चर्चा नहीं व्यक्तिगत चर्चा ही अपेक्षित है वही उचित है

534
00:36:33,360 --> 00:36:37,440
और उसके लिए स्वीकृति भी दी थी हमने वीडियो भी डाला है और वो कह रहा है मुझे तो ध्यान

535
00:36:37,440 --> 00:36:41,600
नहीं जब तुम्हें ध्यान ही नहीं है जब तुम्हारा वाकलन ही हो जाता है।

536
00:36:41,600 --> 00:36:45,760
बार-बार तुम्हारा वही हो जाता है। तुमसे पौरुष का दोषी हो जाता है।

537
00:36:45,760 --> 00:36:49,760
बार-बार तुम यही कह देते हो कि मुझे ध्यान नहीं है। अरे ध्यान नहीं के चक्कर

538
00:36:49,760 --> 00:36:54,640
में महाभारत का युद्ध हो गया। मुझे ध्यान नहीं है। ये कोई बात है क्या?

539
00:36:54,640 --> 00:36:58,720
हमने तो शुरुआत में ही कहा कि भाई व्यक्तिगत चर्चा कर लो। अब तुम्हें ध्यान नहीं तो इसमें हम

540
00:36:58,720 --> 00:37:02,720
क्या करें? मार डंडा मार डंडा। तुम्हारी माता जी को तुम्हें

541
00:37:02,720 --> 00:37:06,720
कूटना चाहिए था। तब तुम ध्यान रखिए कोई चीज। मुझे पता है मुझको

542
00:37:06,720 --> 00:37:10,720
भी हो रहा है कि मैंने विषय उखाया क्यों? हालांकि वह भी एक निर्देश

543
00:37:10,720 --> 00:37:14,800
था। वह भी एक आपकी चीज यह थी कि आप जो है उचित व्यक्ति नहीं

544
00:37:14,800 --> 00:37:18,880
थे इस कार्य के लिए। दोनों जगह जो है अब मुझे अब मुझे वो एहसास

545
00:37:18,880 --> 00:37:23,120
आपका उनके उसके प्रति आपका इतना झुकाव है कि आपने वहां बात ही नहीं बोली

546
00:37:23,120 --> 00:37:27,200
अपनी। वही बोलता रहा। वो भी वो बातें जिनसे आपका कोई मतलब

547
00:37:27,200 --> 00:37:31,280
नहीं था। आप वहां गए थे कि भाई आप वहां आपने

548
00:37:31,280 --> 00:37:35,440
मुझे यह बताया था कि भाई यह विवाद क्यों

549
00:37:35,440 --> 00:37:39,520
है और यह विवाद खत्म कैसे होगा? यह बात तो मैंने पूरे वीडियो में देखी नहीं

550
00:37:39,520 --> 00:37:40,480
ठीक तरीके से

551
00:37:40,480 --> 00:37:44,480
हम और वहां आधे वीडियो आधे से ज्यादा वीडियो में

552
00:37:44,480 --> 00:37:48,480
यह नजर आया कि मैंने किसी को भेजा है हमारा समझौता करा दो

553
00:37:48,480 --> 00:37:53,360
तो वहां पे वो मुझे जो है मेरे मेरे प्रतिनिधि को उत्तर दे रहा है।

554
00:37:53,360 --> 00:37:57,440
बाद में वो आपने उसको खुलासा किया कि भाई उसने मुझे ये नहीं कहा

555
00:37:57,440 --> 00:38:01,680
है बोलने के लिए। है ना? ये स्पष्टीकरण

556
00:38:01,680 --> 00:38:05,680
देना इसलिए आवश्यक हो गया क्योंकि स्वामी जी ने शुरू में ही जैसे जब मैंने

557
00:38:05,680 --> 00:38:09,680
कहा कि अह कोई भी सामान्य व्यक्ति जब किसी एक

558
00:38:09,680 --> 00:38:13,840
व्यक्ति से बात करेगा जहां पे इस तरह की संदिग्धता की बात होगी तो अपना पक्ष रखने

559
00:38:13,840 --> 00:38:18,000
के लिए वो अपने विश्वसनीयता की बात करेगा। तो मेरे कुछ शास्त्रीय विषय रहे हैं जिनका

560
00:38:18,000 --> 00:38:22,480
मार्गदर्शन के लिए मैंने स्वामी जी से पूर्व में अपने

561
00:38:22,480 --> 00:38:26,480
परिवार अपने संबंधियों के विषय में कई ऐसी महत्वपूर्ण जानकारियां

562
00:38:26,480 --> 00:38:30,640
साझा की है जो कि हम सामान्य तौर पे हम नहीं करते हैं तो उनसे

563
00:38:30,640 --> 00:38:34,800
मैंने कहा कि स्वामी जी आपको तो मैंने वंशावली संबंधित चीजें भी साझा

564
00:38:34,800 --> 00:38:38,960
की है तो आप मतलब विश्वास तो कर सकते हैं तो उन्होंने कहा कि आप

565
00:38:38,960 --> 00:38:43,120
सुनेंगे उसमें रिकॉर्डिंग वो स्वयं ही कह रहे हैं कि 50ों लोगों ने किया

566
00:38:43,120 --> 00:38:47,120
है 3600 समथिंग कोई तो होगा पता नहीं तो हम

567
00:38:47,120 --> 00:38:51,520
ऐसा उन्होंने उन मतलब उनका अह संदिग्ध जैसा भाव रहा संभवत

568
00:38:51,520 --> 00:38:55,760
इसलिए उन्होंने संभवत ऐसा कहा होगा नहीं तो आपको

569
00:38:55,760 --> 00:39:00,320
अंतत गतवा आपको क्या निष्कर्ष मिला आप हमारे पास आए थे

570
00:39:00,320 --> 00:39:04,320
धर्म को बचाने के लिए हमने आपको किस तरीके से व्यवहार

571
00:39:04,320 --> 00:39:08,480
था हमारा आपके साथ और उस व्यक्ति ने क्या किया

572
00:39:08,480 --> 00:39:12,640
आप उसके पास गए कि भैया ही हुई निराशा ही निकली नहीं

573
00:39:12,640 --> 00:39:16,800
आप उसके पास गए आपकी रिकॉर्डिंग िंग पहले हमारे पास थी। हमने

574
00:39:16,800 --> 00:39:20,880
तो नहीं डाली। उसने आपकी रिकॉर्डिंग डाल दी। आपको चर्चाओं का

575
00:39:20,880 --> 00:39:24,880
विषय बना दिया। एक बात मैं आपको कहूंगा कि आप कहीं ना

576
00:39:24,880 --> 00:39:29,760
कहीं आपकी जो सत्य निष्ठा है वो अमुक

577
00:39:29,760 --> 00:39:33,760
जिसको आप स्वामी जी कह रहे हो उसके प्रभाव के चलते आपकी सत्य

578
00:39:33,760 --> 00:39:37,920
निष्ठा मैंने प्रभावित होते हुए देखी। उसने जो है कई ऐसी चीजें

579
00:39:37,920 --> 00:39:42,000
की जो तर्कसंगत नहीं थी। मेरे लिए औकात इत्यादि शब्दों का

580
00:39:42,000 --> 00:39:46,720
प्रयोग किया आपके समक्ष। कुतर्क किए रामदर्

581
00:39:46,720 --> 00:39:50,880
हां रामभद्राचार्य इत्यादि को लेकर के कुतर्क किए मतलब उसका

582
00:39:50,880 --> 00:39:54,880
यह कहना है रामभद्राचार्य ज्यादा बड़े गुंडे हैं। पहली बात तो गुंडे हैं

583
00:39:54,880 --> 00:39:59,040
और फिर ज्यादा बड़े गुंडे हैं किससे? रामपाल से। जिस पे देशद्रोह

584
00:39:59,040 --> 00:40:03,200
का कानून कानूनी मुकदमा चल रहा है। हम हम है ना?

585
00:40:03,200 --> 00:40:07,200
यहां मुझे चाकुओं से गोद डालने की धमकियां आ रही हैं। बच्ची और घर की

586
00:40:07,200 --> 00:40:10,800
स्त्रियों के साथ दुष्कर्म कर देने की धमकी आ

587
00:40:10,800 --> 00:40:14,880
रही हैं। और जान को खतरा है। हम जो है उच्च न्यायालय से

588
00:40:14,880 --> 00:40:19,040
सुरक्षा मांग रहे हैं और उसके गुंडे

589
00:40:19,040 --> 00:40:23,040
कैसे थे और किस प्रकार के थे ये सर्वविदित बातें हैं और वो कह रहा

590
00:40:23,040 --> 00:40:27,360
है कि भैया वो इसलिए विरोध करता है मेरा क्योंकि

591
00:40:27,360 --> 00:40:31,680
जो है मेरे पास चार गुंडे नहीं है। तेरा विरोध इसलिए करते हैं

592
00:40:31,680 --> 00:40:35,680
यदि तूने धर्म की सीमा में रहते हुए मर्यादा में रहते हुए शास्त्रीय बातों पर

593
00:40:35,680 --> 00:40:39,680
विरोध किया होता तो हम कुछ ना बोलते। बहुत 50 लाख लोग रोज

594
00:40:39,680 --> 00:40:43,680
करते होंगे। 1 लाख लोग रोज करते होंगे शंकराचार्य का विरोध। तू भी उनमें से

595
00:40:43,680 --> 00:40:47,840
एक हो जाता। मगर तूने व्यक्तिगत आक्षेप किए

596
00:40:47,840 --> 00:40:52,000
और मर्यादा को लांगते हुए किए और

597
00:40:52,000 --> 00:40:56,000
असिद्ध आरोप लगाए। सिद्ध भी लगाता तब भी हम ये

598
00:40:56,000 --> 00:41:01,040
सोच लेते चलो भाई सिद्ध आरोप है। असिद्ध आरोप लगाए। इसलिए हम

599
00:41:01,040 --> 00:41:05,040
क्या कहते हैं? तुम तुमसे तुम्हारा प्रतिकार किया और जब करेंगे तो फिर

600
00:41:05,040 --> 00:41:09,520
तुम्हारी भी तो खाल उधेड़ेंगे ना। तुमसे भी तो पूछा जाएगा कि तुम्हारा निग्रचार्यत्व

601
00:41:09,520 --> 00:41:13,600
कहां से सिद्ध हो रहा है? तुम्हारा आचार्यत्व कहां से सिद्ध हो रहा है? जिसको तुम गुरु कह

602
00:41:13,600 --> 00:41:17,600
रहे हो वो जो है ईश्वर अल्लाह को एक कर रहा है। वर्णाश्रम का विरोध कर रहा है और उसके

603
00:41:17,600 --> 00:41:21,760
बारे में तुम कहां से हो जाओगे प्रमाणिक? तुम्हारे अनुसार जब तुम्हारे द्वारा

604
00:41:21,760 --> 00:41:26,400
नियुक्त व्यक्ति तुम्हारे संबंध संबंध में प्रमाणिक हो सकता है तो उसी प्रकार निगमानंद

605
00:41:26,400 --> 00:41:30,480
के संदर्भ से उसके द्वारा जो नियुक्त

606
00:41:30,480 --> 00:41:34,560
व्यक्ति है वही प्रमाणिक होगा और वो था दुर्गाचरण महंत

607
00:41:34,560 --> 00:41:38,800
जिसने निगमानंद के यद्यपि निगमानंद की जो मौलिक किताबें हैं उनमें

608
00:41:38,800 --> 00:41:43,120
भी वो सब लिखा हुआ है और उन्हीं चीजों से

609
00:41:43,120 --> 00:41:47,440
मिलती जुलती चीजें दुर्गाचरण महंत ने भी अपनी किताबों में लिखी है जो

610
00:41:47,440 --> 00:41:51,440
सारस्वत मठ या असम बंगाल मठ इत्यादि से छप रही है जिसमें ये

611
00:41:51,440 --> 00:41:55,600
सब ईश्वर अल्लाह एक वर्णाश्रम विरोध विदेश यात्रा और मां माता

612
00:41:55,600 --> 00:41:59,600
को पत्नी के रूप में देखा ये ये तक लिखा है

613
00:41:59,600 --> 00:42:03,600
कि माता जी आती थी और उसको जो है संतुष्ट करके जाती थी पत्नी के

614
00:42:03,600 --> 00:42:07,600
रूप में ये सब चीजें उसमें लिखी हुई है निगमंद की किताब

615
00:42:07,600 --> 00:42:11,600
जो श्री श्री ठाकुर निगमानंद हालांकि मैंने

616
00:42:11,600 --> 00:42:15,600
पढ़ा तो नहीं है पर थोड़ा अभी अभी धीरे-धीरे हम सब

617
00:42:15,600 --> 00:42:19,600
लिए बाहर ले आएंगे उसकी बुक्स सब निकल रही है अभी सब बाहर आएंगे

618
00:42:19,600 --> 00:42:23,600
नहीं और फिर एट द एंड निग्रह क्यों नहीं कर रहा

619
00:42:23,600 --> 00:42:27,680
भाई तू भाई निग्रह तू जब ज्योतिष पीठ वाले महाराज जी से

620
00:42:27,680 --> 00:42:31,920
ये बोल रहा है कि आप जो है मौन है तो इसका मतलब आपकी

621
00:42:31,920 --> 00:42:35,920
उसको स्वीकृति है तो तेरी स्वीकृति है क्या ये चल ठीक है

622
00:42:35,920 --> 00:42:39,920
तेरे अनुसार निगमानंद सही थे वो भाड़ में गया परंपरा

623
00:42:39,920 --> 00:42:41,680
वाला सिद्धांत

624
00:42:41,680 --> 00:42:45,760
ये मान लिया कि निगमानंद सही थे और उनके आज के लोग गलत कर रहे हैं

625
00:42:45,760 --> 00:42:50,560
और तेरी फिलॉसफी को मान लिया कि नियुक्त व्यक्ति वाला जो नियम है वो वो केवल

626
00:42:50,560 --> 00:42:54,720
भागवतानंद के लिए है। अन्यों के लिए कौन प्रमाणिक होगा, कौन नहीं

627
00:42:54,720 --> 00:42:58,800
होगा यह भी भागवतानंद डिसाइड करेगा। हां, भागवतानंद के विषय में तो

628
00:42:58,800 --> 00:43:02,880
ये नियम लागू हो जाएगा। भागवतानंद जिसको नियुक्त करेगा वही प्रमाणिक होगा।

629
00:43:02,880 --> 00:43:07,120
मगर मगर निश्चल मान लिया कि निगमानंद सही

630
00:43:07,120 --> 00:43:11,120
थे। मगर आज के लोग निगमानंद के नाम से तो काफी

631
00:43:11,120 --> 00:43:15,520
कुछ ऐसा कर रहे हैं ना जो विरोध में सनातन के। कब निग्रह करेगा?

632
00:43:15,520 --> 00:43:19,520
कब वीडियो बनाएगा तू? ये सब चीज ये

633
00:43:19,520 --> 00:43:24,720
सब विषय तो स्वामी जी ही जाने क्योंकि

634
00:43:24,720 --> 00:43:29,120
वहां पर भी मैं स्पीच हो गया था क्योंकि जिन

635
00:43:29,120 --> 00:43:33,200
विषयों का कोई संबंध ही नहीं है वो विषय स्वामी जी ने रखे थे तो ठीक है

636
00:43:33,200 --> 00:43:37,520
वो विषय तो नहीं था मेरा चर्चा का ठीक है सुन लिया अब

637
00:43:37,520 --> 00:43:41,600
क्या ही कहें अब बस ये चीजें हैं कि कहीं ना कहीं वीडियो जो

638
00:43:41,600 --> 00:43:45,600
सार्वजनिक हुआ है उसमें चर्चा का विषय नहीं

639
00:43:45,600 --> 00:43:50,640
था मैं लेकिन चर्चा का विषय बन गया हूं और जो कि

640
00:43:50,640 --> 00:43:54,720
ऑडियो में तो जरूर मैंने कहा कि आप इस बात का चिंतन करें कि कहां

641
00:43:54,720 --> 00:43:56,960
से आपको धर्म नियंत्रित

642
00:43:56,960 --> 00:44:01,200
व्यवहार प्राप्त हुआ। आपसे संबंधित उसमें ऐसी

643
00:44:01,200 --> 00:44:05,200
क्या बात आपने कर दी थी जिसको लोगों को बताना आवश्यक था। उसने

644
00:44:05,200 --> 00:44:09,200
जो जहर उगला है मेरे लिए जो जहर क्या उगला मतलब मैंने

645
00:44:09,200 --> 00:44:13,200
जो इस समय प्रासंगिक जो मेरे प्रश्न थे उसके संबंध में उसको निराकरण

646
00:44:13,200 --> 00:44:17,520
प्रस्तुत करना था। तो वो उसने किया। अच्छा एक बात और उसने बोली

647
00:44:17,520 --> 00:44:22,000
थी कि चर्चा में हम जो है बता के गए थे

648
00:44:22,000 --> 00:44:26,400
तो सब सारी दुनिया को पता है मगर उसको ही नहीं पता है।

649
00:44:26,400 --> 00:44:30,400
अरे भैया सारी दुनिया को पता होने से हमें ये थोड़ी ना ज्ञात है कि तू

650
00:44:30,400 --> 00:44:34,400
चर्चा करना चाहता है कि नहीं चाहता है। तेरा कहना है कि मैंने चर्चा के लिए बोल

651
00:44:34,400 --> 00:44:38,480
दिया था सार्वजनिक उसमें आ जाना। मगर तूने एट दी सेम टाइम विद्या भास्कर

652
00:44:38,480 --> 00:44:42,560
जी महाराज को मना भी तो किया है कि मैं चर्चा के लिए इच्छुक नहीं हूं। मेरा मन

653
00:44:42,560 --> 00:44:47,280
नहीं है। तूने कमेंट में मना भी तो किया तो हम इन दोनों में से कौन सी बात को तेरी मानेंगे?

654
00:44:47,280 --> 00:44:51,520
तो तू एक बार क्लियर कर दे कि यहां चर्चा में आ सकते हो यहां आना है तो। दूसरी

655
00:44:51,520 --> 00:44:55,600
बात हमारे मन में बैठने की कोई बात नहीं थी कि मैं कहां बैठूंगा और वो कहां

656
00:44:55,600 --> 00:44:59,600
बैठेगा। मैं तो खड़े होकर अपने प्रश्न कर लेता। मगर मेरे को

657
00:44:59,600 --> 00:45:03,600
चर्चा का स्वरूप तो पता हो कि मैं वहां जाऊंगा तो सभा में चर्चा

658
00:45:03,600 --> 00:45:07,600
होगी। जहां जहां तुम मंच पर बैठे होगे मैं नीचे मैं खड़े होकर के चर्चा।

659
00:45:07,600 --> 00:45:11,680
मुझे आपत्ति नहीं है पर मुझे पता तो हो। वहां चर्चा होगी या किसी

660
00:45:11,680 --> 00:45:12,640
अह एकांतिक

661
00:45:12,640 --> 00:45:16,720
कमरे में बैठकर चर्चा होगी। हैं या किस जो

662
00:45:16,720 --> 00:45:20,800
भी उसका स्वरूप हो वह क्लियर हो और समय इत्यादि का क्लियर करो।

663
00:45:20,800 --> 00:45:24,880
मैं तुम्हारे प्रवचन सुनने तो आऊंगा नहीं। मैं तो भाई वहां चर्चा करने

664
00:45:24,880 --> 00:45:28,880
आ रहा हूं तो आप मुझे वो समय बता दोगे कौन से समय पे आने आना सही

665
00:45:28,880 --> 00:45:32,880
रहेगा। अगर तुम चाहते हो कि सभा में आ कर के आना सही रहेगा। तो ठीक

666
00:45:32,880 --> 00:45:36,960
है सभा में आ करके कर लूंगा। अब मैं पहुंच जाऊं सभा के टाइम पर और वहां

667
00:45:36,960 --> 00:45:41,040
पर मैं अपने प्रश्न करूं और मुझे सभा वाले रोके या तुम रोको कि अभी

668
00:45:41,040 --> 00:45:45,680
मत करो बाद में करना। तो ये तो इसके लिए तो मैं नहीं जाऊंगा वहां पर।

669
00:45:45,680 --> 00:45:49,760
इसलिए मैं चाहता था कि तुम अपना स्पष्टीकरण दे दो। जब तुमने प्रथम

670
00:45:49,760 --> 00:45:54,080
बार चर्चा का प्रस्ताव रखा था तो तुमने स्पष्टीकरण दिया था ना कि इतने

671
00:45:54,080 --> 00:45:59,680
समय से पहले तक आप चर्चा कर लो। तो ये समय क्यों नहीं दिया?

672
00:45:59,680 --> 00:46:03,840
समय क्यों नहीं दिया? आपने विधि, समय, स्वरूप सब समझाया था।

673
00:46:03,840 --> 00:46:07,840
हम यह सब विषय तो स्वामी जी जाने क्योंकि

674
00:46:07,840 --> 00:46:12,240
कुछ नहीं कुल मिलाकर के और वो वो कहता है कि भाई इसमें तो रामपालियों

675
00:46:12,240 --> 00:46:16,240
जैसी बात कर रहा है भैया तो तू सामने से आके कर देना केवल एक

676
00:46:16,240 --> 00:46:20,320
तेरे निग्रहचार परंपरा के विषय में निग्रह परंपरा के

677
00:46:20,320 --> 00:46:24,400
खंडन के विषय में केवल एक वही बात थोड़ी ना है। उस पर

678
00:46:24,400 --> 00:46:27,920
तो मैंने ऑलरेडी यही कहा है कि भैया इसमें आप अपना पक्ष प्रस्तुत करें।

679
00:46:27,920 --> 00:46:32,320
तो हमने केवल अभी तक तो प्रश्न ही उठाया था कि जब यहां पर घोषणा

680
00:46:32,320 --> 00:46:36,640
हो रही है कि आगे में आठ पाखंड तंत्रों के नाम बताने

681
00:46:36,640 --> 00:46:40,720
जा रहे हैं। जिसमें से तीन तंत्र है और पांच उपतंत्र हैं। तो आगे

682
00:46:40,720 --> 00:46:44,800
वो आठ तंत्र आगे के आठ पाखंड तंत्रों के

683
00:46:44,800 --> 00:46:49,200
नाम तुम बता दो जो बुक में लिखे हो। वहां सब घुमा फिरा के इधर-उधर

684
00:46:49,200 --> 00:46:53,440
की बातें कर रहा है। मगर ये नहीं बता रहा है। वो आठ पाखंड तंत्र उसके बाद कहां

685
00:46:53,440 --> 00:46:57,520
लिखे हैं। हम ठीक है? और ये सारे

686
00:46:57,520 --> 00:47:01,680
विषय तो स्वामी जी ही जाने नहीं तो उसने आपसे बोले थे ना ये सारे विषय

687
00:47:01,680 --> 00:47:05,840
हां अब ये ये तो विषय हां हम

688
00:47:05,840 --> 00:47:09,840
ठीक है तो आप आनंद लीजिए अब चर्चा का विषय बनने का

689
00:47:09,840 --> 00:47:14,080
और क्या बताऊं क्या कहूं भैया स्थिति तो मेरी वैसे ही ये हो गई है

690
00:47:14,080 --> 00:47:18,080
मैं क्या कहूं मुझे दुख हो

691
00:47:18,080 --> 00:47:22,320
रहा है आपके लिए सच बता रहा हूं क्योंकि मैं जानता हूं कि आपका

692
00:47:22,320 --> 00:47:26,800
उद्देश्य तो यही था कि हमारे बीच में जो ये जो धर्म क्योंकि इस लड़ाई

693
00:47:26,800 --> 00:47:31,680
से जो चोट पहुंचती है वो धर्म को ही पहुंचती है।

694
00:47:31,680 --> 00:47:35,920
भैया मैं ना ही मैं सच कहूं मैं खुद बहुत व्यस्त रहता हूं। सॉफ्टवेयर

695
00:47:35,920 --> 00:47:39,920
इंजीनियर हूं मैं तो मुझे इतना पर्याप्त समय नहीं

696
00:47:39,920 --> 00:47:43,040
मिल पाता कि स्वामी जी के कई वीडियो आए हैं। मैंने नहीं देखे ना

697
00:47:43,040 --> 00:47:47,120
ही आपकी वीडियो देखे। जबकि मैं दोनों लोगों का देखना चाहिए। वीडियो देखते ही देखते ही देखता हूं।

698
00:47:47,120 --> 00:47:51,120
चाहिए श्रद्धा के चलते नहीं देख पाया कि अभी हाल फिलहाल में आपको देखना मुझे

699
00:47:51,120 --> 00:47:55,120
पर दया यह आ रही है कि आप जो है इसमें फंस गए खामा और

700
00:47:55,120 --> 00:47:59,120
कुछ ना होता अगर वो वीडियो ना डालता क्या मिल गया उसको वीडियो डाल के

701
00:47:59,120 --> 00:48:03,120
पता है उसको तो यह मिला ना कि उसने जो मेरा खंडन करना

702
00:48:03,120 --> 00:48:08,640
था खंडन उसके हिसाब से तो वो कर दिया उसने ये

703
00:48:08,640 --> 00:48:12,640
मैं तो देख रहा हूं ना कि आप एक अच्छे उद्देश्य से आए थे आपकी आपने

704
00:48:12,640 --> 00:48:16,880
भी जो कहा ना हां यह जरूर कहता हूं कि मैंने उनको यह उत्तर नहीं दिया शायद मेरी

705
00:48:16,880 --> 00:48:20,880
मर्यादा मेरी सीमा हां ये आप उनको उसको नहीं कह पाए

706
00:48:20,880 --> 00:48:25,040
सुनिए बात भी अभी भैया मेरी बात तो पूरी कर एक मिनट

707
00:48:25,040 --> 00:48:29,120
एक सेकंड एक सेकंड छोटी सी बात है कि जब वो मेरे उत्तर वहां पर आपको दे

708
00:48:29,120 --> 00:48:33,120
रहा था तो आप वहां ये नहीं कह पाए कि ये आप शिवश को

709
00:48:33,120 --> 00:48:37,120
कहिए मैं इस विषय में नहीं इन विषयों में नहीं आया हूं मैं तो यह देखने आया हूं क्या ये

710
00:48:37,120 --> 00:48:41,360
मैटर किसी तरीके से स्वामी जी सॉर्ट आउट हो सकता है क्या और जब आपके

711
00:48:41,360 --> 00:48:45,360
पास मौका आया चलो ठीक है बहुत लंबी-लंबी चर्चाएं उसने कर ली और जब

712
00:48:45,360 --> 00:48:49,360
लास्ट में मौके आए आए भी तो आप उसमें जो वो

713
00:48:49,360 --> 00:48:53,520
था कि भाई मैं कितना नगण्य हूं आपके समक्ष कितना नतमस्तक हूं

714
00:48:53,520 --> 00:48:57,760
कितना शरणागत हूं उसमें इतना टाइम लगाया कि वो फिर जो मुख्य

715
00:48:57,760 --> 00:48:58,260
बात

716
00:48:58,080 --> 00:49:02,160
थी आपकी अंत तक आतेआते बहुत धूमिल हो गई अब आप बताइए क्या कह रहे हैं हां मैं

717
00:49:02,160 --> 00:49:06,320
ये कह रहा था भैया कि देखिए जैसे मैंने आपसे कहा ना तो जिन

718
00:49:06,320 --> 00:49:10,320
विषयों को मैं नहीं जानता हूं ठीक है मैंने आपको उत्तर दे दिया मैंने आपको

719
00:49:10,320 --> 00:49:14,400
भाई समझ के उत्तर दिया आपके लिए पता नहीं आप सही किया

720
00:49:14,400 --> 00:49:18,640
मैंने नहीं किया मुझे यह भी नहीं पता पर मैंने आपको भाई समझ के ही उत्तर दिया कि ठीक है

721
00:49:18,640 --> 00:49:22,800
आपको मैं कह सकता हूं। मैं अपने बड़े भाई से भी इस तरह की बातें कर लेता हूं। मैंने आपको

722
00:49:22,800 --> 00:49:26,880
शुरू में ही स्पष्ट किया है। जब हमारी पहली वार्ता हुई है ना मैंने शुरू में ही

723
00:49:26,880 --> 00:49:31,040
स्पष्ट किया है। जितने सम्माननीय एक गुरु के तौर पे वो

724
00:49:31,040 --> 00:49:35,040
हैं उतने ही सम्मान नहीं है। आप एक बड़े भाई के तौर पे हैं। है ना? आपके कार्यों

725
00:49:35,040 --> 00:49:39,120
को देखा है मैंने और आपको अगर याद हो ना हो नहीं याद होगा कि एक

726
00:49:39,120 --> 00:49:43,200
मेरे जैसे बहुत सारे ऐसे लोग होंगे। मैंने Instagram में एक आध बार आपको मैसेज भी किया है

727
00:49:43,200 --> 00:49:47,600
जो आपका अकाउंट बैन हो चुका है। अच्छा मैंने मैं कार्यालय

728
00:49:47,600 --> 00:49:51,760
में मैं था और उन दिन उस समय मैंने वीडियो मैं देखता रहता था अक्सर

729
00:49:51,760 --> 00:49:56,080
आपके जो आर्य समाज की यहां तक कि इंदौर भी आप आए थे एक बार आइसकॉन के किसी

730
00:49:56,080 --> 00:50:00,640
उसमें उससे चर्चा करने के लिए तो वह

731
00:50:00,640 --> 00:50:04,880
विषयों को देख के मेरे बीच में जो आइसकॉन वाले लोग थे तो उनको

732
00:50:04,880 --> 00:50:09,120
मैंने वीडियो भेजा और वो लोग मुझसे भागने लगे क्योंकि

733
00:50:09,120 --> 00:50:13,600
उनके पास उत्तर नहीं था उन विषयों का तो मुझे भी अच्छा लगा कि चलो सनातन

734
00:50:13,600 --> 00:50:17,840
धर्म में कोई है जो इस तरह के विषय को उठा रहा है जो महत्वपूर्ण

735
00:50:17,840 --> 00:50:21,920
विषय है तो ऐसे विषय उठाना महत्वपूर्ण है धरातल पे उस

736
00:50:21,920 --> 00:50:26,160
दृष्टिकोण से आप भी सम्माननीय हैं रही बात निग्रह आचार्य स्वामी जी की

737
00:50:26,160 --> 00:50:30,400
तो धर्म की बहुत ऐसी गढ़ बातें हैं जो मुझे हो

738
00:50:30,400 --> 00:50:34,400
सकता है अन्य आचार्य भी सही होंगे मैं किसी को गलत नहीं कह रहा हूं मेरी योग्यता नहीं मैं आपको

739
00:50:34,400 --> 00:50:38,400
बता तो रहा हूं कि मेरी योग्यता नहीं है किसी को जज करने की पर जितना मैंने उनको सुना है तो

740
00:50:38,400 --> 00:50:42,880
मुझे उनका जो दृष्टिकोण है शास्त्र के पक्ष में मुझे उत्तम लगता है

741
00:50:42,880 --> 00:50:46,880
नहीं मगर आपको को एक बात बता दूं। चलिए वो बात तो एक

742
00:50:46,880 --> 00:50:51,040
अलग है मेरे भाई। मगर उनके और बीच में हमारी जो लड़ाई

743
00:50:51,040 --> 00:50:55,200
है ना उसमें उनका धर्म पक्ष उनका जो पक्ष है वो धर्म का नहीं

744
00:50:55,200 --> 00:50:59,360
है। जी जी ये बात प्रलय आने से पहले तक अगर मैं जीवित

745
00:50:59,360 --> 00:51:03,360
रहा तो मैं सिद्ध कर दूंगा। और मैं जब तक उनको

746
00:51:03,360 --> 00:51:07,360
नष्ट नहीं कर दूंगा। उनका जो यह

747
00:51:07,360 --> 00:51:11,440
दीमझाम है मैं रुकूंगा नहीं। जो भी कार्य मैंने

748
00:51:11,440 --> 00:51:15,760
आज तक हाथ में लिया है करिए आप भैया समझिए मेरी बात

749
00:51:15,760 --> 00:51:19,840
मैं आपको नहीं कह रहा हूं इसमें कहीं भी आप नहीं है मगर मेरा जो

750
00:51:19,840 --> 00:51:24,320
दृष्टिकोण है उसमें क्या है कि आप देखिए हमारा

751
00:51:24,320 --> 00:51:28,400
हमारी शैली क्या थी मैंने आपको बताया था हम लोग अकाट्य चीजों

752
00:51:28,400 --> 00:51:29,120
पर लड़ते

753
00:51:29,120 --> 00:51:33,120
हैं हम हम अकाट्य चीजें कैसे जैसे मुसलमान का

754
00:51:33,120 --> 00:51:37,200
जो ईश्वर है वो सर्वशक्तिमान नहीं है बिल्कुल

755
00:51:37,200 --> 00:51:41,280
उस उनका धर्म शाश्वत नहीं है बिल्कुल हम परम स्वतंत्र

756
00:51:41,280 --> 00:51:45,440
मोक्ष नहीं है। बिल्कुल ये तीन चीजें वहां नहीं है। हम इन्हीं

757
00:51:45,440 --> 00:51:49,440
तीन चीजों के इर्दगिर्द दुनिया का कोई भी सनातन विरोधी आएगा उसको

758
00:51:49,440 --> 00:51:53,440
5 मिनट के अंदर गिरा सकते हैं। तो अब क्या है

759
00:51:53,440 --> 00:51:57,520
कि जो ऐसे विषय हैं कि फलाने टाइम में कहीं पे बम ब्लास्ट

760
00:51:57,520 --> 00:52:01,600
हुआ था तो उसने कराया था कि नहीं कराया था। ये हुआ था नहीं कि

761
00:52:01,600 --> 00:52:07,200
नहीं हुआ था। ऐसा हुआ था कि नहीं हुआ था। देखो पहली बात तो ये है कि

762
00:52:07,200 --> 00:52:11,200
आप वो वाली रिकॉर्डिंग मैं भेजूंगा आपको ड्राइव में जो पहले हमारी और आपकी

763
00:52:11,200 --> 00:52:15,360
बात हुई है। हां हां पहली बात तो ये है कि यदि आपके घर की

764
00:52:15,360 --> 00:52:19,520
बात है यदि तो सबसे यदि मान लीजिए स्त्री पर लांछन

765
00:52:19,520 --> 00:52:24,080
लग गया कोई किसी ने आके कह दिया कि तुम्हारे यहां की अमुक स्त्री जो है व्यभचारणी

766
00:52:24,080 --> 00:52:29,440
है। मैंने वहां पर देखा था। तो आप पहले अनुसंधान करोगे ना।

767
00:52:29,440 --> 00:52:33,440
बिल्कुल अगर अनुसंधान होता हूं। हां अधिकृत होता हूं तो जो

768
00:52:33,440 --> 00:52:37,600
भी प्रक्रिया होगी तो तो आप अनुसंधान करोगे अच्छा क्या अनुसंधान इस

769
00:52:37,600 --> 00:52:41,760
प्रकार करोगे कि अखबार में छाप दो मेरी स्त्री पर ये आरोप लगे मैं अनुसंधान

770
00:52:41,760 --> 00:52:44,800
करना चाहता हूं नहीं

771
00:52:44,800 --> 00:52:49,040
आप अपने तौर पर जितना हो सकता है समाज से छुपाते हुए व्यक्तिगत

772
00:52:49,040 --> 00:52:53,200
तौर पर अनुसंधान करोगे तो पहली पहली

773
00:52:53,200 --> 00:52:57,280
बात तो अविश्वास प्रकट होना अपने आप में बड़ी बात है। हो भी

774
00:52:57,280 --> 00:53:01,520
गया तो अनुसंधान अंदरूनी तौर पर करिए। हम हम

775
00:53:01,520 --> 00:53:05,520
और ये कहना कि जो चीजें पहले से ही समाज में

776
00:53:05,520 --> 00:53:09,520
हैं और फिर मैं फिर उस पर व्यक्तिगत चर्चा क्यों तो ये तो

777
00:53:09,520 --> 00:53:13,760
बहुत ही एक निराधार तर्क है। क्यों?

778
00:53:13,760 --> 00:53:17,840
क्योंकि किसी भी स्त्री के साथ मान लीजिए कोई दुर्घटना घटित हो

779
00:53:17,840 --> 00:53:21,840
गई। अ क्या कहते हैं उसका मतलब दुष्कर्म हो गया उसके

780
00:53:21,840 --> 00:53:25,920
साथ। कितना भी अखबारों में छप गया। फिर भी क्या उसकी

781
00:53:25,920 --> 00:53:29,920
गवाही उसके बयान उसके उसके साथ

782
00:53:29,920 --> 00:53:34,160
क्या-क्या कैसे-कैसे घटित हुआ क्या ये सब बातें हम सार्वजनिक करेंगे

783
00:53:34,160 --> 00:53:38,240
भीड़ लगा के करेंगे या उसके साथ एकांत में बातें करेंगे

784
00:53:38,240 --> 00:53:42,400
में तो नहीं आता बिल्कुल नहीं आता हां तो जितना ज्यादा हो सकता है एकांतिक वार्ता

785
00:53:42,400 --> 00:53:46,560
करेंगे ना उससे इन विषयों में तो कम से कम अगर किसी के इस तरीके

786
00:53:46,560 --> 00:53:50,720
से चारित्रिक खंडन की बात है जो अभी सिद्ध भी नहीं हुआ है कि भैया

787
00:53:50,720 --> 00:53:54,880
पूरी पीठ के परिकर ऐसा गलत कर रहे हैं ये कर रहे हैं जो अभी

788
00:53:54,880 --> 00:53:59,040
सिद्ध नहीं हुआ है। ऐसे चारित्रिक खंडन के निमित्त अगर आपको बात करनी है

789
00:53:59,040 --> 00:54:00,080
तो आप सार्वजनिक

790
00:54:00,080 --> 00:54:04,160
मंच पे करोगे क्या? आज तक आपने देखा है कि हमारे सार्वजनिक मंच

791
00:54:04,160 --> 00:54:08,720
पर इस बारे में बात हुई हो कि इसका अवैध कहीं पर अफेयर था कि नहीं था?

792
00:54:08,720 --> 00:54:12,960
शास्त्रार्थ है क्या ये कोई? हम तो इस विषय

793
00:54:12,960 --> 00:54:17,120
में हमने कहा था कि भाई आप व्यक्तिगत बात कर लो। हम

794
00:54:17,120 --> 00:54:21,840
तो उस उनका कहना था कि नहीं सार्वजनिक ही करेंगे। तो इसका मतलब क्या हुआ?

795
00:54:21,840 --> 00:54:26,720
दृष्टि शोधन की नहीं है। दृष्टि फसाले की है।

796
00:54:26,720 --> 00:54:30,720
हम हम तो ये सारी चीजें हैं। अब

797
00:54:30,720 --> 00:54:34,960
उसकी अगर वो अगर बहुत अच्छा शास्त्रों का मर्मज्ञ है भी

798
00:54:34,960 --> 00:54:38,960
उसको विधि निषेध इत्यादि के बारे में अच्छी नॉलेज है भी तो इसका

799
00:54:38,960 --> 00:54:43,120
मतलब ये थोड़ी ना है कि वो किसी स्त्री के अंतर वस्त्रों की बातें करने लगेगा। वीडियो

800
00:54:43,120 --> 00:54:47,120
में और कुछ भी ना कहा जाए। भाई-बहन पे नैतिक संबंध का आरोप

801
00:54:47,120 --> 00:54:51,200
लगाने लगेगा। कोई कुछ भी ना कहा जाए। मेरे और विजय श्री को लेकर के मैं ही

802
00:54:51,200 --> 00:54:55,600
विजय श्री को लेकर के वहां गया। वो मेरी बहन के समान है। कितने-कितने

803
00:54:55,600 --> 00:54:59,600
भद्दे भद्दे इसने कमेंट किए। अगर ये शास्त्रों का मर्मज्ञ

804
00:54:59,600 --> 00:55:03,680
है तो इसको ये अधिकार मिल गया कि ये जो है भाई और बहन के रिश्ते को कलंकित

805
00:55:03,680 --> 00:55:07,760
करेगा। तो इसका हमने बहुत जांचने की कोशिश की। उसके बाद

806
00:55:07,760 --> 00:55:11,840
इस नतीजे पर पहुंचे कि भैया इसका उद्देश्य धर्म संस्थापना नहीं है।

807
00:55:11,840 --> 00:55:15,440
कुछ भी शोधन का कार्य नहीं है। इसका हम

808
00:55:15,440 --> 00:55:19,440
इसका कार्य है कहां से मसाला बने, कहां से मैं कैरी मिनाटी बनूं, कहां

809
00:55:19,440 --> 00:55:23,440
से ये बनूं और जैसे कई बार ऐसा होता है कि भाई

810
00:55:23,440 --> 00:55:27,600
अमुक आचार्य को भी बोलना चाहिए, अमुक आचार्य को भी बोलना चाहिए। गवई का

811
00:55:27,600 --> 00:55:32,000
विरोध किस माध्यम से करना है और किस माध्यम से करने पर

812
00:55:32,000 --> 00:55:36,400
वो बात वाकई में फलदायक होगी यह तय कौन करेगा?

813
00:55:36,400 --> 00:55:40,400
भागवत आनंद करेगा। हो सकता है किसी और आचार्य ने कोई

814
00:55:40,400 --> 00:55:44,400
और स्ट्रेटजी अपनाई हो, कोई और मोर्चा खोलना हो। मैं मतलब

815
00:55:44,400 --> 00:55:48,400
वो मंच पे बोलेगा तो ही वो कार्य माना जाएगा कि उसने किया

816
00:55:48,400 --> 00:55:52,400
वीडियो बना के। मतलब वो उसने ये मान लिया है कि वीडियो बना के निग्रह

817
00:55:52,400 --> 00:55:56,480
करना है। यद्यपि आज तक उससे किसी का निग्रह हुआ नहीं है। उसने ये मान

818
00:55:56,480 --> 00:56:00,560
लिया कि वीडियो बना करके निग्रह करना है। तो हर आचार्य वैसे ही करे। ऐसे

819
00:56:00,560 --> 00:56:04,560
नहीं होता है। हर आचार्य का अपना-अपना तरीका है काम करने का। अब

820
00:56:04,560 --> 00:56:08,720
गुरुदेव से कई लोग कहते हैं कि ये होना चाहिए, वो होना चाहिए। गुरुदेव कहते हैं मूल पे

821
00:56:08,720 --> 00:56:13,040
वार करो, हिंदू राष्ट्र बनाओ। जी सनातन

822
00:56:13,040 --> 00:56:17,120
संविधान से हो। वोट देने का अधिकार केवल हिंदुओं को गाय

823
00:56:17,120 --> 00:56:21,200
कटनी नहीं चाहिए। बिल्कुल हिंदू राष्ट्र बनाओ। मूल पे वार

824
00:56:21,200 --> 00:56:25,280
करो। छोटी-छोटी लड़ाईयां कब तक लड़ते रहोगे? बिल्कुल। तो वो कर

825
00:56:25,280 --> 00:56:29,280
रहे हैं। अब अब ऐसे अरे इन्होंने कहा क्यों नहीं? अरे भैया

826
00:56:29,280 --> 00:56:30,720
यहां पे रामपाल की किताबें बेची

827
00:56:30,720 --> 00:56:34,720
जा रही है। तुमने क्यों नहीं कुछ कहा? सीता माता का तो सीता माता का

828
00:56:34,720 --> 00:56:39,120
रूप धर के पार्वती माता राम जी के पास इसलिए जा रही है क्योंकि राम जी उन्हें संतुष्ट

829
00:56:39,120 --> 00:56:43,200
कर देंगे। ये सब बातें लिखी हुई है उन किताबों में। तुमने क्या करी? तुमने क्यों

830
00:56:43,200 --> 00:56:47,280
नहीं किया? ऐसे एक-एक बात एक-एक किताब पे चलोगे। ब्रह्मा कुमारीज की किताबों

831
00:56:47,280 --> 00:56:51,360
में भी है। जी। तो तो हर आचार्य का अपना-अपना

832
00:56:51,360 --> 00:56:55,360
वो है। अब जिसने नहीं कहा। अरे नहीं कहा उनका अपेक्षित है। तुम्हारे

833
00:56:55,360 --> 00:56:59,440
पास टाइम है। तुम्हारा काम ही यही है वीडियो बनाने का। तो तुम सोचते हो तुम वीडियो

834
00:56:59,440 --> 00:57:03,440
बना रहे हो तो सब वीडियो बनाए। तुम्हारी देखा देखी। जी। शाम

835
00:57:03,440 --> 00:57:07,520
में जानते हैं भैया मैं अपनी बात थोड़ा सा कह लूं हम स्वामी

836
00:57:07,520 --> 00:57:11,520
जी ने जैसे ही वीडियो डाला है मेरे कार्यालय में मूलत जो लोग

837
00:57:11,520 --> 00:57:15,920
हैं बौद्ध लोग हैं क्रिश्चियन लोग हैं और कुछ रामपाली

838
00:57:15,920 --> 00:57:19,920
भी हैं तो नाम लेके डाला है हां नाम ही

839
00:57:19,920 --> 00:57:24,160
नाम उसमें स्पष्ट समझ में आ रहा है मेरे बीच के लोग अच्छे से जानते

840
00:57:24,160 --> 00:57:28,160
हैं यहां तक कि बीच में एफआई वगैरह की स्थिति आप प्रचलित हो क्या आप वहां

841
00:57:28,160 --> 00:57:32,160
पे कि आपकी आईडी किस नाम से है ये सब हां मेरे संस्थान में सब

842
00:57:32,160 --> 00:57:36,640
जानते मेरे विचार को मेरे धर्म के तो आपको

843
00:57:36,640 --> 00:57:40,640
कहना चाहिए था कि महाराज जी मैंने कोई षड्यंत्र पूर्वक तो फोन नहीं किया है। आप क्यों डाल

844
00:57:40,640 --> 00:57:44,800
रहे हो? आपको फोन करें कि ना करें बताइए। बस मैंने नहीं

845
00:57:44,800 --> 00:57:45,760
कहा क्योंकि

846
00:57:45,760 --> 00:57:49,920
वही लग रहा है कि कहना नहीं कहना। ये दिक्कत है। इसीलिए

847
00:57:49,920 --> 00:57:54,160
आपको फोन नहीं करना। अब मेरे संस्थान में शाम को ही डीन जो है मेरा

848
00:57:54,160 --> 00:57:58,400
वो एक क्रिश्चियन है तो अब वो उसकोकि मौका चाहिए होता

849
00:57:58,400 --> 00:58:02,400
है बहुत बार ऐसे मौके आते हैं जहां अपनी कोई गलती भी नहीं होती और वो

850
00:58:02,400 --> 00:58:06,640
ढूंढ करके गलती अपने को मतलब परेशान करने का प्रयास करता है एक दो हिंदू

851
00:58:06,640 --> 00:58:10,720
हैं वहां पे तो उनके साथ ऐसा ही व्यवहार है और अब कर नौकरी

852
00:58:10,720 --> 00:58:14,720
है दूसरा रोजीरोटी का सवाल है इंसान परिवार के लिए सब कुछ

853
00:58:14,720 --> 00:58:18,800
करता है कर रहे हैं हम भी पर ये धर्म के विषय में भी हम उनके

854
00:58:18,800 --> 00:58:23,120
मत को हम स्वीकार नहीं रहे हैं हम जितना जितना हमसे हो पाता है हम विरोध करते हैं। हम

855
00:58:23,120 --> 00:58:27,120
तो शाम को ही मेरे जो सहकर्मी हैं हम उनका फोन

856
00:58:27,120 --> 00:58:31,120
आया कि ये तुमने कुछ किया क्या? तुम्हारा नाम जैसा लग रहा है। आवाज

857
00:58:31,120 --> 00:58:35,520
तुम्हारी लग रही है गोस्वामी और उसमें मतलब स्पष्ट समझ में ही आ रहा है। हालांकि

858
00:58:35,520 --> 00:58:39,520
और मैंने तो अपना नाम बोला भी था। तो कि तुमने

859
00:58:39,520 --> 00:58:43,680
क्या कर दिया है? डीन को जहां तक बात चली गई है तो वो तुम्हें

860
00:58:43,680 --> 00:58:47,680
इस तरह के विषयों में बाहर कर देंगे। तो डीन का भी थोड़ी देर बाद

861
00:58:47,680 --> 00:58:52,320
फोन आया। तो मैं खुद शाम से बहुत घबराया हुआ हूं कि इन सब के चक्कर में मेरी

862
00:58:52,320 --> 00:58:56,320
जो रोजी रोटी है अभी क्या बोलते हैं स्वास्थ्य मेरा दो चार महीने

863
00:58:56,320 --> 00:59:00,320
से बहुत अच्छा नहीं रहा है तो मैं छुट्टी पे भी काफी रहा और

864
00:59:00,320 --> 00:59:01,040
इस स्थिति

865
00:59:01,040 --> 00:59:05,040
में कहीं ना कहीं मानवीय तौर पे उन्होंने मुझे थोड़ी राहत दी थी पर इस

866
00:59:05,040 --> 00:59:09,200
तरह के विषय में जहां पे हालांकि मैंने किसी को कुछ गलत नहीं बोला है किसी

867
00:59:09,200 --> 00:59:13,200
के ऊपर ना ही गाली अपशब्द किसी को कुछ नहीं बोला है पर इस

868
00:59:13,200 --> 00:59:17,280
तरह के विषय में प्रचारित होना अनावश्यक तौर पे किसी संस्था के लिए अच्छा नहीं होता

869
00:59:17,280 --> 00:59:22,400
है मैं बता है क्या हम

870
00:59:22,400 --> 00:59:26,480
कल जहां तक है मुझे स्पष्टीकरण देना पड़ेगा मैं बाहर था तो

871
00:59:26,480 --> 00:59:30,480
मेरे पास मेरे सहकर्मी का फोन आया उन्होंने कहा कि भाई क्या हुआ तुम तो चर्चित हो गए

872
00:59:30,480 --> 00:59:34,640
ये सब क्या मैं घबरा गया मैंने क्या कुछ कर दिया तो उन्होंने लिंक

873
00:59:34,640 --> 00:59:39,200
भेजा तो देखा मैंने तो मेरा ऑडियो चल रहा था उन्होंने

874
00:59:39,200 --> 00:59:43,280
डाला है मालूम है मैंने मैसेज किया था स्वामी जी को तो वो बोले कि

875
00:59:43,280 --> 00:59:47,600
आपको यह पहले विचार करने करना चाहिए था तो मैंने कहा

876
00:59:47,600 --> 00:59:51,760
पहले विचार करना चाहिए था। स्वामी जी से मुझे लगा नहीं था कि इस तरह की छोटी बात

877
00:59:51,760 --> 00:59:56,400
को मतलब इतना दूर तक जाएगा। मतलब मेरी मेरी व्यक्तिगत

878
00:59:56,400 --> 01:00:00,480
भैया सही बता रहा हूं। ऐसी कोई भावना थी ही नहीं ना आपसे बात करके ना उनसे कि इस

879
01:00:00,480 --> 01:00:04,640
बात को इतना खींचा जाएगा। सही बता रहा हूं। मतलब मैं पोस्ट मैंने हटा

880
01:00:04,640 --> 01:00:08,640
दिया जो मैंने अभी हाल में

881
01:00:08,640 --> 01:00:12,720
ही एक पोस्ट डाला था। उनके उनके प्रति जो

882
01:00:12,720 --> 01:00:16,400
मेरी सद्भावनाएं थी कि

883
01:00:16,400 --> 01:00:20,400
कल देखिए मैं किसी भी आचार्य का कितना भी

884
01:00:20,400 --> 01:00:24,560
सम्मान करता हूं भैया लेकिन मेरा जो घर है जो रोजीरोटी है वो मेरे

885
01:00:24,560 --> 01:00:29,200
परिश्रम से मिलेगी जहां पे मैं काम करता हूं वहां से मिलेगी है ना

886
01:00:29,200 --> 01:00:33,360
और कल को अगर मेरे हाथ से वो रोजी रोटी

887
01:00:33,360 --> 01:00:37,920
चली जाती है तो मैं भूखा रहूंगा वो स्वीकार है मुझे मेरा परिवार भूखा रहेगा

888
01:00:37,920 --> 01:00:42,080
मैं मुझे ऐड बता हूं। एक मिनट एक मिनट मैं ये बात पूरी कर लूं

889
01:00:42,080 --> 01:00:47,280
बस। जी जी तो भीष्म और कुंभकरण

890
01:00:47,280 --> 01:00:51,360
जी ये दोनों ही लोगों ने संबंध

891
01:00:51,360 --> 01:00:55,760
का निर्वाह करने के लिए सिद्धांत का त्याग किया। द्रोणाचार्य

892
01:00:55,760 --> 01:01:00,000
हम तो ये अधर्म के पक्षधर

893
01:01:00,000 --> 01:01:04,240
कहलाए। चलाया ना जी जी और प्रह्लाद और श्री राम

894
01:01:04,240 --> 01:01:08,560
जी इन्होंने सिद्धांत

895
01:01:08,560 --> 01:01:12,720
का निर्वाह किया संबंध का त्याग कर दिया जी

896
01:01:12,720 --> 01:01:16,720
अपने पिता की अब आज्ञा नहीं मानी ठीक

897
01:01:16,720 --> 01:01:20,880
है और ओम सिद्धांत नारायण का नाम

898
01:01:20,880 --> 01:01:25,120
जपेंगे तो जपेंगे तो ये हमारे आज आदर्श है तो

899
01:01:25,120 --> 01:01:29,200
आपसे गलती बस इतनी हुई है कि जब आप वहां गए हैं

900
01:01:29,200 --> 01:01:31,520
ना जी आप वाक पटु

901
01:01:31,520 --> 01:01:35,760
भी हैं और मतलब आपके जो शब्दकोश

902
01:01:35,760 --> 01:01:39,920
है वह भी है आपके पास बोलने की क्षमता भी है

903
01:01:39,920 --> 01:01:44,240
परंतु आपने वहां संबंध का निर्वाह करने के लिए

904
01:01:44,240 --> 01:01:48,400
सिद्धांतों को गोली मार दी ये इससे ऐसा

905
01:01:48,400 --> 01:01:52,480
मत समझिए मैं आपको क्रिटिसाइज कर रहा हूं जी जी इस बात को अपने

906
01:01:52,480 --> 01:01:56,720
आत्मसात करिए चिंतन करिएगा आप वहां पे उसको रोक

907
01:01:56,720 --> 01:02:00,880
सकते थे उसने पता है वीडियो क्यों डाला उसने वीडियो इसलिए डाला

908
01:02:00,880 --> 01:02:04,960
है कि उसको जो उत्तर मुझे देने थे जो अलग से वो वीडियो

909
01:02:04,960 --> 01:02:09,040
बनाता उसने आपको आधार बना के वो उत्तर दे दिया। बिल्कुल हां वो

910
01:02:09,040 --> 01:02:13,840
मुझे भी ये महसूस हो रहा है कि मुझे महसूस हो रहा है चीज। हां और उसमें

911
01:02:13,840 --> 01:02:17,840
उसको कोई फायदा नहीं मिल रहा था आपकी आवाज डालने का। उसको ये होता

912
01:02:17,840 --> 01:02:23,280
है कि आप एक चीज और आपने नोटिस की क्या कि मैंने

913
01:02:23,280 --> 01:02:27,440
कितने सद्भावना से उनसे अपने भाव रखे। मतलब मैं

914
01:02:27,440 --> 01:02:31,600
कितने सद्भावना से उनसे भाव रख रहा हूं। लेकिन उसके बाद भी वो यह कह

915
01:02:31,600 --> 01:02:35,920
रहे हैं। यहां तक कि मैंने पता है जो मेरा एक विषय था जिसके चलते मैंने उनसे संपर्क

916
01:02:35,920 --> 01:02:39,920
किया था। वह जानने के लिए मैंने अपने वंशावली तक मैंने

917
01:02:39,920 --> 01:02:43,920
उनके साथ साझा की। ये मेरी वंशावली है।

918
01:02:43,920 --> 01:02:46,800
आप उसके बाद भी वो कह रहे हैं कि आपके

919
01:02:46,800 --> 01:02:50,960
अतिरिक्त और लोगों ने 50-50 वीडियो की वंशावली की

920
01:02:50,960 --> 01:02:55,120
है। तो मैं ये कह रहा हूं मैं ये कह रहा हूं कि आपने उनसे ऐसी

921
01:02:55,120 --> 01:02:59,120
कौन सी बात कही है जिसके कारण आपकी वीडियो ऑडियो डालना आवश्यक

922
01:02:59,120 --> 01:03:03,200
था। बताइए मुझे वही नहीं समझ में आ रही ना भैया। कौन

923
01:03:03,200 --> 01:03:07,520
सी ऐसी बात कही? वो ऑडियो डालना आवश्यक

924
01:03:07,520 --> 01:03:11,760
इसलिए था। अब मैं आपको बता रहा हूं। उसको मुझे उत्तर

925
01:03:11,760 --> 01:03:16,000
आपको ही जवाब देना था। मुझे उत्तर देने थे। उत्तर देने

926
01:03:16,000 --> 01:03:20,080
के लिए उसको एक अलग से वीडियो बनाना पड़ता। अलग से

927
01:03:20,080 --> 01:03:24,080
मेहनत लगती। भूमिका बनानी पड़ती। यहां पे भूमिका बनी बनाई मैंने। हां। यहां क्या हुआ?

928
01:03:24,080 --> 01:03:28,160
वो प्रसंग छिड़ गया। आपसे बात करतेकरते उसने सब बोल डाला और

929
01:03:28,160 --> 01:03:32,160
वो उत्तर उसने डाल दिया। अब उसमें आप गेहूं की तरह पिस गए।

930
01:03:32,160 --> 01:03:36,160
मैंने 4:26 पे आज शाम को मैसेज किया। गुरुदेव सादर चरण स्पर्श

931
01:03:36,160 --> 01:03:40,320
शिवश नारायण के साथ चल रहे विवाद पर कुछ चर्चा करना है फोन पर। मैं किस समय आपको

932
01:03:40,320 --> 01:03:44,480
फोन कर सकता हूं? तो कोई उत्तर नहीं आया। हालांकि उनका उत्तर बहुत कम ही आता है। तो फिर मुझे

933
01:03:44,480 --> 01:03:48,560
लगा कि फोन लगाऊं। तो दो बार फोन लगाने के बाद तीसरी

934
01:03:48,560 --> 01:03:52,800
बार उन्होंने फोन उठाया। तो उसके बाद ही पूरी चर्चा हुई। चर्चा होने के बाद जब

935
01:03:52,800 --> 01:03:57,120
ये उन्होंने सार्वजनिक कर दिए तो मुझे पता भी नहीं था। मैं बाहर था तब

936
01:03:57,120 --> 01:04:01,200
मुझे पता लगा। तो मैंने उनको फिर से मैसेज किया गुरुदेव मेरी नौकरी चली जाएगी। मुझे बिल्कुल अंदाजा

937
01:04:01,200 --> 01:04:01,920
नहीं था यह परिणाम

938
01:04:01,920 --> 01:04:05,920
होगा मेरे विरोधियों के द्वारा। पूरे विभाग के लोग पहले से ही पीछे

939
01:04:05,920 --> 01:04:10,640
पड़े हैं। मेरा उद्देश्य आपसे वार्तालाप करने का था। आपके विरोध में अब ऐसी

940
01:04:10,640 --> 01:04:14,800
स्थिति बन गई है। मैं धर्म के पक्ष में श्रुदड़ हूं। लेकिन नौकरी के से

941
01:04:14,800 --> 01:04:19,120
हाथ धोने के के कारण मेरा परिवार रोड पर आ जाएगा। कृपा करिए गुरुदेव

942
01:04:19,120 --> 01:04:23,120
मेरी आपके प्रति कभी भी दुर्भावना नहीं रही है। ये सत्य है। मेरी कभी दुर्भावना उनके प्रति नहीं

943
01:04:23,120 --> 01:04:27,360
रही है। ना ही आपके प्रति रही है। तो उन्होंने कहा यह बात आपको पहले ही सोचनी चाहिए

944
01:04:27,360 --> 01:04:31,760
थी। उसी दुश्मन को फोन करने जा रहे हैं क्या?

945
01:04:31,760 --> 01:04:35,840
हां। यह बात आपको पहले से ही सोचनी थी और उसी अनुसार

946
01:04:35,840 --> 01:04:39,920
बताना था। मैंने कहा पिछले कई महीनों से स्वास्थ्य से परेशान हूं। मुझे पता

947
01:04:39,920 --> 01:04:44,080
नहीं था मेरे विरोधियों को यह मौका मिलेगा। गुरुदेव मेरी प्रार्थना है रिकॉर्डिंग

948
01:04:44,080 --> 01:04:48,080
को हटा दीजिए। मेरी दंडवत प्रार्थना है। मेरे ऊपर लोन चल रहा है। गुरुदेव नौकरी

949
01:04:48,080 --> 01:04:52,320
जाने पर आत्महत्या के अतिरिक्त कोई सहारा नहीं है। गुरुदेव क्योंकि मेरे परिवार में देखिए

950
01:04:52,320 --> 01:04:56,480
मैं ही आमदनी का स्रोत जो है मैं ही हूं। तो उन्होंने

951
01:04:56,480 --> 01:05:00,720
कहा यदि आपकी उन्होंने उत्तर दिया यदि आपकी पारिवारिक और आर्थिक

952
01:05:00,720 --> 01:05:05,040
स्थिति इतनी दयनीय थी तो आपको यह सब में पड़ना ही नहीं था भाई।

953
01:05:05,040 --> 01:05:09,120
बताइए तो फिर मैंने कहा गुरुदेव आपके प्रति सद्भावना थी और कुछ नहीं

954
01:05:09,120 --> 01:05:13,200
गुरुदेव कभी मन क्रम वचन से मैंने अगर आपके प्रति दुर्भावना

955
01:05:13,200 --> 01:05:17,360
भी आया हो तो मेरे सभी पुण्यों का फल पाप में बदल जाए

956
01:05:17,360 --> 01:05:21,520
और मैंने अपने प्रोफाइल का लिंक उनको दिया कि मैंने वो प्रोफाइल

957
01:05:21,520 --> 01:05:26,320
देख सकते थे कि मैंने कभी उनके विरोध में कभी ऐसा कुछ कहा ही नहीं है आज तक

958
01:05:26,320 --> 01:05:30,480
फिर उनका ऑडियो नोट आया और ऑडियो नोट नोट में उन्होंने कहा कि

959
01:05:30,480 --> 01:05:35,920
ये सब पहले सोचना चाहिए था। मैं आपको ऑडियो नोट सुना भी देता हूं। हम

960
01:05:35,920 --> 01:05:40,240
यही सब जो है ना बहुत समस्या हो जाती है। आप स्वयं से निर्णय

961
01:05:40,240 --> 01:05:44,400
ले लिए कि आपको शिवश से बात करनी है। आप स्वयं से निर्णय ले लिए कि आपको हमसे

962
01:05:44,400 --> 01:05:48,880
भी बात करनी है। आप स्वयं से निर्णय ले लिए कि आप सार्वजनिक कर दीजिए

963
01:05:48,880 --> 01:05:53,040
और आप आप ही अब निर्णय ले रहे हैं कि आप डिलीट की कर दीजिए। तो

964
01:05:53,040 --> 01:05:57,200
ऐसे कैसे चलेगा बताइए? समय

965
01:05:57,200 --> 01:06:01,200
निर्णय आप ही लीजिएगा। बताइए। फिर आप कहिएगा कि

966
01:06:01,200 --> 01:06:05,280
हम इसमें आंख से पलटेंगे नहीं। धोखा नहीं देंगे। एक घंटा भी नहीं हुआ

967
01:06:05,280 --> 01:06:09,520
और आपकी परिस्थिति के कारण आपकी यही स्थिति हो गई भविष्य में तो और भी स्थिति

968
01:06:09,520 --> 01:06:14,000
आपकी अगर कोई ब्लैकमेल करे और धमकी दे तो फिर आप जाइएगा

969
01:06:14,000 --> 01:06:18,240
वो बताइए अरे तो भैया सवाल ये

970
01:06:18,240 --> 01:06:22,400
है कि ऐसी क्या बात है इस रिकॉर्डिंग में जो

971
01:06:22,400 --> 01:06:26,560
आपको लोगों को बतानी है बताइए क्या आवश्यक बात है मुझे

972
01:06:26,560 --> 01:06:30,800
वही तो भैया ये चीज समझ में नहीं आई आप एक बात बताओ से चिंता

973
01:06:30,800 --> 01:06:32,800
में हूं आप एक बात बताओ

974
01:06:32,800 --> 01:06:38,800
क्या इसको को आने वाले सभी फोन कॉल ये रिकॉर्ड करके डाल देता है।

975
01:06:38,880 --> 01:06:43,040
ये भी बिल्कुल सही कह रहे हैं। मतलब ऐसे कॉल्स आते होंगे ना

976
01:06:43,040 --> 01:06:47,120
जिनको ये रिकॉर्ड करके नहीं डालता होगा। हम तो इसका मतलब

977
01:06:47,120 --> 01:06:51,200
कोई ना कोई वजह होगी ना जो इसमें इसके कारण इसने डाला है और इसमें

978
01:06:51,200 --> 01:06:55,520
वजह एक ही है कि उसको जो मुझे उत्तर देने थे वो उत्तर उसने

979
01:06:55,520 --> 01:06:59,520
दे दिए। आपको देते हुए उसने रिकॉर्डिंग डाल

980
01:06:59,520 --> 01:07:03,520
और भी जानते हैं। उसके बाद भी मैं उनसे प्रार्थना ही कर रहा हूं। मैं

981
01:07:03,520 --> 01:07:07,600
आपको बता रहा हूं मैंने क्या मैसेज किया है। एक बात और कहूं गुरुदेव परिस्थिति कोई भी हो मैं आपके

982
01:07:07,600 --> 01:07:11,600
विपरीत नहीं जा सकता। मैंने उनको ये आश्वासन भी दिया। तो

983
01:07:11,600 --> 01:07:15,600
उन्होंने कहा कि समझने का प्रयास कीजिए। लिख करके बताया।

984
01:07:15,600 --> 01:07:19,600
मैंने कहा ठीक है गुरुदेव आपके शब्दों को उन सहमत हूं। मैं आपके साथ हूं।

985
01:07:19,600 --> 01:07:24,080
आप तो उन्होंने कहा आप ऐसे घबरा गए तो भविष्य में गृह युद्ध होने पर तो ऐसे ही बिनमारे

986
01:07:24,080 --> 01:07:28,080
बिनमारे मरेंगे आप अब एक बात बताइए गृह युद्ध तो ये भविष्य में होगा। वर्तमान की

987
01:07:28,080 --> 01:07:33,600
परिस्थिति जो आएगी मेरे ऊपर उसका सामना कौन करेगा?

988
01:07:33,600 --> 01:07:37,680
उसका सामना तो मैं ही ना करूंगा। हम और मैंने तो जो भावना

989
01:07:37,680 --> 01:07:41,920
रख के फोन किया था उसका उद्देश्य मेरा कोई निजी हित थोड़ी ना था भैया।

990
01:07:41,920 --> 01:07:45,920
ना आपसे बात करने का ना निग्रहचार्य जी से बात करने का। मेरा निजी हित हित

991
01:07:45,920 --> 01:07:47,840
या निजी कोई वो नहीं था।

992
01:07:47,840 --> 01:07:52,000
मैं अपनी रोजी रोटी जो छोटी सी नौकरी है मेरी उससे संतुष्ट हूं मैं। सारा समय उसमें

993
01:07:52,000 --> 01:07:56,000
जाता है। थोड़ा बहुत समय मिलता है तो देश दुनिया देख लेता है इंसान। तो

994
01:07:56,000 --> 01:08:00,080
इससे मुझे अपनी भूमिका बनाने का ऐसा कोई उद्देश्य था ही नहीं।

995
01:08:00,080 --> 01:08:04,320
बस इतनी भावना थी कि ये जो विषय चल रहे हैं तो थोड़ा शांत

996
01:08:04,320 --> 01:08:08,320
होना चाहिए। इस उद्देश्य से मैंने इसीलिए आपका वो

997
01:08:08,320 --> 01:08:13,200
चेहरा मुझे याद आया कि आप एक अच्छे उद्देश्य से आए थे मगर आप फंस गए।

998
01:08:13,200 --> 01:08:17,360
भैया मैं एक चीज आपको कह रहा हूं कि बहुत अपार श्रद्धा

999
01:08:17,360 --> 01:08:21,520
मेरी लेकिन आज बहुत कष्ट हो रहा है। कष्ट इस बात से हो रहा है कि मेरा जब

1000
01:08:21,520 --> 01:08:25,600
उद्देश्य गलत नहीं था तो उनको इस तरह सार्वजनिक नहीं करना चाहिए था। मतलब थोड़ा

1001
01:08:25,600 --> 01:08:29,760
भाई क्या ऐसा करना चाहिए था? क्या ऐसा आपने कर दिया जिसको सार्वजनिक उसे

1002
01:08:29,760 --> 01:08:33,520
करना ही था। हां

1003
01:08:33,520 --> 01:08:37,520
जो डीन है हमारा तो उसने

1004
01:08:37,520 --> 01:08:41,680
वह कल से फोन लगा रहा है। कल से तो फ़ उठाया नहीं मैंने। मेरे कलीग को उसने फोन लगा

1005
01:08:41,680 --> 01:08:47,200
करके बोला तो मैं ऑफिस गया। मैं घर से ही काम कर रहा था।

1006
01:08:47,200 --> 01:08:51,680
बहुत कष्ट हो रहा है भैया। बहुत कष्ट हो रहा है। सही बता रहा हूं। मुझे बहुत कष्ट हो रहा है।

1007
01:08:51,680 --> 01:08:55,920
क्योंकि अब ऐसी स्थिति बन गई है ना कि मेरे पास

1008
01:08:55,920 --> 01:09:00,480
लोन चल रहा है मेरा। मेरे परिवार की भी जिम्मेदारी मेरे ऊपर है।

1009
01:09:00,480 --> 01:09:02,960
और इस परिस्थिति में मेरा स्वास्थ्य भी

1010
01:09:02,960 --> 01:09:07,040
कई महीनों से खराब चल रहा था। अब इस परिस्थिति में मैं कहां जाऊंगा? किसके पास जाऊंगा? मुझे

1011
01:09:07,040 --> 01:09:12,000
कुछ समझ नहीं आ रहा था। मैं क्या करने आया था? क्या हो गया?

1012
01:09:12,000 --> 01:09:17,130
आपने गलत व्यक्ति पर विश्वास किया और क्या बताऊं मैं आपको?

1013
01:09:17,130 --> 01:09:21,130
[संगीत]
