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00:00:02:21 जय श्री राम। हां जय श्री सीताराम। कौन अमन बोल रहे हो? जी जी अमन बोल रहे हैं। काफी कार्य हम कॉल ना उठा पाने के कारण आज आज ही एक ऐसा है कि समय मिला है कि हम कॉल किए हैं। और वो भी आज नवरात्रि का आज पूर्व एक दिन है। आज के बाद फिर समय मिले ना मिले। ये आपने कहा था आप लाइव आओगे चर्चा में। क्यों नहीं आए? क्योंकि उस समय इसलिए नहीं आए कि हम मना कर दिया गया था किसी के वजह से कि ना यह सब मत करो कॉल मत करो ये सब मत करो तो ठीक है उस समय हां उस समय मतलब अब आ सकते हो मतलब क्या चर्चा करना है कहिए जो चर्चा आप विरोध में बना रहे हैं उन्हीं विषयों पर चर्चा करनी है कौन से विषय मतलब कौन सा ऐसा बात है जो आपको विरोध में लगा हो कहिए अच्छा कोई बात विरोध में नहीं है क्या आपकी अरे तो आप कोई बात उठाइए ना जैसे आप बात कहते हैं ना कुछ तो फिर वो चर्चा यही चालू हो जाएगी ना फिर हां तो कहिए चर्चा करिए तो वही तो हम वही तो हम कह रहे हैं कि लाइव में आकर करने में क्या आपत्ति है जब आप वीडियो बना रहे हो आप जो है अभी फोन पे करने को तैयार हो तो आमने सामने से करने में क्या आपत्ति है जैसे आमने सामने से ये आपत्ति है कि हम वो व्यवस्था मेरे

00:01:17:27 पास नहीं है आपके ग्रामीण क्षेत्र में होने के कारण जैसे हम बात ही कर रहे हैं कोई आकर कुछ खोलने लगा बोलने लगा कुछ डिस्टर्ब होना ही होना कौन सा ग्रामीण क्षेत्र मतलब जहां पूजन होने वाला है कहां पे बिहार क्षेत्र में नेटवर्क की प्रॉब्लम है नहीं नेटवर्क प्रॉब्लम नहीं मतलब जैसे हम बात ही कर रहे हैं जैसे कोई भी आ गया कुछ बोलने लगा उसको चुप कराओ की बात कर रहे हैं नहीं ऐसा प्रॉब्लम है नहीं तो ऐसा समय रख लिया जाएगा 10:00 बजे रात का जब सब सो जाते हैं तब कर ली जाएगी अरे तब कहिए ना फोन पर भी तो आप कह सकते हैं मतलब उसको अब सार्वजनिक कहना तो आप कहिए जो आपको कहना जो हमको कहना है वो हम कहीं रहे या फिर जो बोले हैं उसके विरोध में आज लगता नहीं तुम बहुत गलत बोले हो या फिर वह बता दीजिए वो हम नहीं कह रहे हैं जब आमनेसामने से चर्चा होती है तो उसका जो रीच होता है चर्चा का ज्यादा लोग जागरूत जागरूक होते हैं उसको देखकर और जो फोन के माध्यम से वार्ता होती है उसकी उसकी रीच कम होती है तो कम लोग उसमें उसके द्वारा जो है इन्फ्लुएंस हो पाते हैं। अरे आप तो रिकॉर्डिंग करते ही है सारी बातें तो मैंने दोनों बताया ना तो जैसे अभी भी बात है तो आपके पास रिकॉर्ड हो ही रहा होगा। नहीं तो आप सामने आने से क्यों पीछे हट रहे हैं? सामने

00:02:33:08 भाई ऐसा तो है नहीं कि किसी को आपकी आइडेंटिटी ना मालूम हो। नहीं नहीं आइडेंटिटी से डर होता तो पहले ही छुपा के बात नहीं करते। हां हां हां हां हां हां हां हां हां हां तो फिर सामने आने में कैसा भय? भय की बात यही जैसे कि जहां हम लोग जैसे पूजन ही कराते हैं वहां सुबह से शाम तक समय मिले तो बहुत मुश्किल है तो ग्रामीण क्षेत्रों में आप ग्रामीण क्षेत्रों में चले आपने पूजन करा दिया खाली पे हो गए तो फिर कुछ ना कुछ भजन कुछ गाना कुछ ना कुछ ऐसा बजा देंगे अरे तो अरे भैया रात में थोड़ी ना बजाएंगे आप ये बताइए वीडियो कब रिकॉर्ड करते हैं अपना हम वीडियो जैसे जब खाली हो गए बस बस जब खाली हो गए तो वीडियो वीडियो रिकॉर्ड करने का कोई तो समय होगा ना वीडियो रिकॉर्ड हम ऐसा कर लेंगे आज आपको पता है कि इतने बजे पूजन समाप्त हो जाएगा तो हम वीडियो रिकॉर्ड कर लेंगे या फिर ऐसा हो कि जीवन का कोई काम ही ना करते हो आप पूजन भजन के कारण नहीं नहीं कभी ऐसा होता है कि सोच लिए वो 20 दिन भी बीत गया कोई वीडियो से मतलब नहीं कोई बात नहीं अगर आप अगर आप निश्चित करेंगे तो आप जरूर समय निकाल पाएंगे उसके लिए क्योंकि पूजा भजन के अलावा बहुत से कार्यों के लिए समय तो निकालते ही होंगे ना नहीं समय तो सब निकलता ही है लेकिन दिक्कत ये है कि इतना पहले बता

00:03:49:06 कुछ प्रमाण परिणाम भी नहीं निकलने वाला है जैसे कुछ परिणाम निकलने वाला हो परिणाम परिणाम वीडियो बना के निकल रहा है विरोध खत्म हो जाए सबके बीच में पहले जिसका व्यवहार हो जाए ऐसा भी तो नहीं है परिणाम वीडियो बना के निकल रहा है क्या चीज वीडियो बना के परिणाम निकल रहा है कौन सा वीडियो कोई भी वीडियो आप जो बना रहे तो वीडियो बना के प्रमाण परिणाम निकल रहा है। हां हां क्यों नहीं? तो बस उसी प्रकार से लाइव चर्चा से निकलेगा। नहीं लेकिन जैसे कि वो जितना वीडियो हमने बनाया आज तक बनाया लेकिन इतना हम समझ गए हैं हमारा चैनल ही वीडियो के लिए नहीं शुरुआत हो रहा था। हां दो तरह की बातें हो रही हैं। एक तरफ कह रहे हो परिणाम नहीं निकलेगा लाइव चर्चा से। मगर वहीं पर वीडियो में उत्तर प्रतिउत्तर करने से परिणाम निकल रहा है। यह भी मान रहे हो। सामने सामने से उत्तर प्रति उत्तर में परिणाम नहीं निकलेगा। ये भी कह रहे हो

00:04:46:02 हम डोहरी बातें नहीं है। पा रहे हम कोई समय नहीं दे पा रहे हैं। इधर अच्छा समय नहीं है। अब ये बताओ पांच मिनट पढ़ गए जो हृदय की बातें बाहर निकालिए। लेकिन सामने आपका कोई भी वीडियो आधा घंटे से पहले तो कहूंगा नहीं। बातें होती है सामने से फायदा ये रहता है कि यदि मेरे द्वारा किए गए प्रश्न को आप बिना समझे अपना पक्ष रख रहे हो तो मैं आपको तुरंत ठीक करता हूं कि भाई मैंने यह पूछा आप इसको इस पर बोलो जैसे हां अगर खामखा आप वीडियो बना दो या मैं फिर मेरे पास तो इतना समय है नहीं कि मैं आपका भी उत्तर दूं आप अपना बना रहे हो तो बनाते रहो आप बताओ हमें लगता है काफी वीडियो 100 150 से तो ऊपर वीडियो होगा किस पे आपके चैनल पे नहीं 100 150 की बात नहीं है। मैं आपका उत्तर देने के लिए मेरे पास समय नहीं है वीडियो के द्वारा। तो मतलब आप उस लायक क्यों समझ रहे हैं कि आप हमको उत्तर दें। अरे मैंने एक बात मैंने एक बात कही है ना भाई बहुत हमारे जैसे तो बहुत लोग बक रहे हैं। बोलना मैंने मैंने एक बात कही है कि आप आपका जवाब देने का समय मैंने मेरे मुझे अभी नहीं लगता आवश्यक कि मुझे देना देना चाहिए। हां तो मैं ये कह रहा था ये पहला ये है कि अभी जो ये सीजन में विरोध शुरू किया है जी

00:06:01:20 उसमें ये बात कही आपने कि भाई मैं बहुत ही हां कहिए ये भागवतानंद जो है वो आचार्य पद के प्रति अनास्था जगा रहा है। मेरा यह कहना है आचार्यों के प्रति। जी। आपका कहना है कि नहीं वह तो व्यक्ति के कार्य का विरोध करते हैं। और यह भी आपने स्वयं ही स्पष्ट कर दिया है। यह भी आपने भी यह मैं कर मैं करेंगे। अब आप मुझे बताइए कि व्यक्ति की प्रति अनास्था बन किस प्रकार से होगा कि वह सिद्ध हो। कि व्यक्ति के प्रति अनास्थावान बनाया जा रहा है। नहीं ना हमारे मन में अनास्था आ रहा है ना। आप भी अरे मैं पूछ रहा हूं। मैं देखो मैं सवाल क्या किया मैंने? इसीलिए तो आमने सामने से करने के लिए कहता हूं। मैंने अभी पूछा कि किस प्रकार से माना जाएगा कि अनास्था व्यक्तिगत उत्पन्न हो रही है। किसी व्यक्ति के प्रति अनास्था उत्पन्न की जा रही है। वो कौन से कार्य होंगे? सब सबकी अलग-अलग परिभाषा होती है। जैसे कि हम देख रहे हैं कि जिसे हम मानते हैं। उसके सबकी अलग-अलग नहीं जो वो परिभाषा हो जिसको सार्वभौम रूप से सभी लोग स्वीकार करें। हम लोग सनातन धर्म के विषय में बात कर रहे हैं ना। सनातन

00:07:17:01 धर्म से जुड़े हुए विषयों में और हमारा हमारा वैचारिक मतभेद है ना आप भी अपने आप को धर्म का पक्षधर कह रहे हो मैं भी अपने आप को धर्म का पक्षधर कह रहा हूं तो धर्म के तो जो धर्म से निर्गत हुई हो वो चीज बताइए मुझे इसने वाले का एक पुस्तक है शब्दकोश उसको आपने पढ़ा है उसमें जो म अक्षर है जो म अक्षर में उस व्याख्या करते हुए लिखते हैं कि जो मायावत के खिलाफ में शंकरा जी के खिलाफ में बहुत अपशब्द लिखते हैं और बातों को घुमाते हुए बहुत सारी बातें करते कौन वाले प्रमाणिक नहीं है ना हमारे लिए आप भैया अपना अपना तर्क अपना पक्ष तो रखिए तब तो मैं देखूं कि आपका पक्ष वो गलत है या नहीं है अनास्था उत्पन्न करने वाले अनास्था कैसे उत्पन्न होता है वो परिभाषा जिस प्रकार इस वाले करते हैं एक भूमिका बनाते हुए तो भूमिका यह नहीं बनाई जा रही है कि मुल्लों के यहां जा रहे हैं जीसस को वैष्णव कह रहे हैं और वो जो है चार करोड़ लेते हैं ₹1 करोड़ लेते हैं ये भूमिका नहीं है क्या गलत नहीं है यानी कि डजंट मैटर कि अनास्था उत्पन्न हो ना हो बात हम यह कह रहे हैं कि वो गलत गलत है तो हम कहेंगे या यह कह दो नहीं जिसको हम जब देखिए बात ये चल रही है कि अनास्था उत्पन्न हो रही है कि नहीं हो रही है अब जब मैंने आपसे कहा कि भैया ये ये चीजें कही गई उसके बाद आपने कहा क्या यह गलत नहीं है आप पहले इसको क्लियर करो अनास्था इन चीजों से उत्पन्न हो रही है कि नहीं हो रही

00:08:32:16 जिसके हाथ में संप्रदाय का बागडोर है अगर उसके मुख से अरे भाई अभी वो गलत है और गलत है या सही है उस पर हम लोग बात करेंगे मगर अभी बात चल रही है अनास्था उत्पन्न हो रही है कि नहीं तो आप अनास्था कहो कि हां इससे अनास्था उत्पन्न नहीं होगी। शब्द को अनास्था शब्द को आपने इसमें डाला है। ठीक है। अरे भाई अभी आपने तर्क दिया कि जिस तरह से इस वाले को को प्रचार करते हैं वो होता है अनास्था उत्पन्न करने का तरीका। यह नहीं होता है। नहीं विवेकी तो कौन वाले प्रचार करते हैं। विवेकी जन तो जानते हैं कौन प्रमाणिक है। कौन अप्रमाणिक तो इसका मतलब तो इसका मतलब दुनिया में कोई किसी के प्रति अनास्था उत्पन्न करता ही नहीं है। जिसके मन में आना उत्पन्न होता है ऐसे व्यक्ति से हम कहते हैं कि बस ये व्यक्ति साइड है तो देखिए मूल विषयों की बात ना करके इधर-उधर की बात कर रहे हो। इधर उधर की बात कर रहे हैं। मैंने क्या कहा? हमसे करवा रहे हैं। मैंने क्या कहा? अनास्था उत्पन्न होती है तो किस प्रकार से होती है? वो प्रकार बता दो। मैंने आपने जिस प्रकार से इस में बताया कि ऐसा-ऐसा लिखते हैं। इस तरीके की बातें मैंने आपकी उनकी दिखा दी। अब आपका यह कहना है कि वह बातें गलत हैं। तो इसका मतलब हमारा मतलब इससे है कि जो गलत होगा वो हम कहेंगे। डजंट मैटर कि अनास्था उत्पन्न हो रही है कि नहीं हो रही। तो इसका मतलब यह बात खत्म हो जाती है कि हम अनास्था उत्पन्न नहीं कर रहे।

00:09:48:04 हां कर रहे हैं क्योंकि वह गलत है इसलिए कर रहे हैं। क्या आप फोन पे चर्चा करना चाहते हैं? तो अभी तो आपने कहा बताइए एक पॉइंट। फिर मैंने कहा चर्चा यहीं पे शुरू हो जाएगी तो आपने उसकी सहमति भी जताई कि शुरू हो गई शुरू कर लो यही यही बात कर लो ये शब्दों की व्याख्या परिभाषा के लिए तो मतलब आपसे बात करने का कॉल किया नहीं था हमने किया हमें पता था जिस अभी आप अभी तो आपने कहा ना कि भाई आप दूसरा पक्ष ले लीजिए अनास्था के लिए ही कोई सन्यासी है जिस पर आप यह कहोगे कि वह लालची है या फिर आसक्त है किसी के प्रति या फिर झूठ बोलता है तो क्या इससे उसका क्या सन्यासत्व के प्रति अनास्था नहीं उत्पन्न होगी? आपने अभी कहा कि क्या गलत नहीं है। जिसके आचरण गलत हो वो आचार्य कैसा तो उसके आचार्यत्व के प्रति अनास्था उत्पन्न नहीं होगी। तो यह कहना फिर सरासर गलत है वीडियो बना के। आप यह कहो कि गलत है। आप वीडियो में यह कहो कि ये मामला गलत है। मगर यह मत कहो कि वो अनास्था उत्पन्न नहीं हो रही। उससे अनास्था उत्पन्न नहीं कर रहे हैं। हम छाती ठोक-ठोक के आर्य समाजियों से जब बहस करते हैं या परंपरा विरोधियों से बहस करते हैं तो वह कहता है कि मेरा नातस प्रतिमा अस्ति का मेरा अर्थ माना जाए।

00:11:03:06 हम कहते हैं कि तुम्हारा अर्थ नहीं माना जाएगा कि क्यों नहीं माना जाएगा? क्योंकि हमारा अर्थ जो है प्रामाणिक आचार्यों का अर्थ है कि प्रामाणिक आचार्य के लक्षण क्या है? प्रामाणिक आचार्य जो परंपरा से प्राप्त हो चले जाते हैं? कहां चले जाते हैं? नहीं मैं आपको उपयोगिता बता रहा हूं। अनास्था की उपयोगिता बता रहा हूं। यह जो आस्था अनास्था है हम उसमें लक्षण बताते कि वह सन्यासी है वह परंपरा से है। अब वह कहेंगे कि भैया सन्यासी तो तुम्हारा सिद्धि नहीं होता। क्यों? क्योंकि वह करोड़ों रुपए लेता है भैया आने से पहले। वो तो अपने परिकरों के उसमें आसक्त है। वो तो झूठ बोलता है। वो तो मुसलमान वो तो वो तो ईसा को वैष्णव बनाकर गलत बात व्याख्या करता है सनातन धर्म की। तो जब सन्यासत्व भंग हो गया तो प्रमाणिकता भंग हो गई तो हम कैसे उनका नाम लेंगे फिर? आर्य समाजियों का अर्थ गलत बताते समय या जाकिर नायक का अर्थ गलत बताते उस समय भैया इतना काहे खींचते हैं किसी बात को जो यानी कि यानी कि यानी कि अच्छा कितना खींचना चाहिए और कितना नहीं खींचना चाहिए ये कहां लिखा है शास्त्र में सुनिए आप मतलब मतलब कुल मिलाकर के आपके पास वीडियो ही बनाना है और आपके पास कोई उत्तर नहीं है किसी बात का जब आपसे पूछा जाए बात भी करे तो कैसे करें आप बात चुप होने का नाम ही नहीं ले रहे हैं।

00:12:18:12 तो बताइए आपने आपने आपने लाइन क्या कही इतना क्यों खींचते हैं? मतलब वो जो कह दे वह मान के चुप हो जाए हम अपने प्रश्न करें तो तुम कहोगे इतना क्यों खींचते हैं? एक शब्द में एक वाक्य में भी कहा जा सकता है। इधर वो एक वाक्य हमें बता दो ना भाई। देखा एक वाक्य यही है कि अच्छा आपने जो विद्या भास्कर जी के लिए नाम पे जो कल वीडियो पटरी मत बदलिए। पहले आज देखिए इसीलिए दिक्कत होती है। पटरी मत बदलिए। बात के बात चल रही है क्या? आस्था अनास्था यद्यपि सुनिए सुनिए सुनिए मैं चाहता तो आपसे सबसे पहले इसकी भागवतानंद की परंपरा के विषय पर बात कर सकता था जिसमें आपके पास कुछ नहीं है कुछ नहीं है ठीक है मैं जानता हूं आपकी सबसे कमजोर कड़ी क्या है पर मैंने तो वो नहीं खो दीदी जिस पर आपने वीडियो बनाया और उस वीडियो में यही बात है आप बिल्कुल मतलब ना आपको सही से मतलब है ना गलत से मतलब अरे भाई तुम अपनी बात मेरी बात का उत्तर दो ना। जब मैंने पूछा आपने क्लेम किया है कि भागवत आनंद अनास्था उत्पन्न नहीं कर रहा है। तो फिर मैंने उस पे आपको काउंटर किया कि भैया ऐसे तो हो रही है अनास्था उत्पन्न। जब तुम सन्यासी को लालची दिखाओगे, भयभीत दिखाओगे या आसक्त दिखाओगे तो उसका सन्यासी होना सिद्धि

00:13:33:15 नहीं होगा। तो अनास्था नहीं उत्पन्न होगी फिर। और हम जैसे लोग जो उनका नाम ले करके लड़ाई लड़ते हैं। वहां वहां हमें दिक्कत आएगी। तो लड़ाई लड़ क्या रहे हैं? लड़ाई के नाम पर आप अपशब्द बोल रहे हैं मार देंगे पीट देंगे पूरा अरे मेरे भाई फिर तुम पटरी बदल रहे हो फिर तुम चलो ठीक है अब वो अनास्ता अनास्ता छोड़ दो अब तुमने कहा कि गलत नहीं है क्या गलत नहीं है क्या यह कहा तुमने हैं ये दूसरी वाली बात स्कूल है या शब्द जो आपने बोला अभी कि वह तुम गलत बात गलत शब्द बोल रहे हो स्कूल है कौन सा ले या फिर विद्या भास्कर जी महाराज की बात भी नहीं मान रहे किसको ले इनमें से टॉपिक तुम चुन एक मिनट एक मिनट हमारी हम दोनों की बात करते हैं 14 मिनट बीत गए हैं। 14

00:14:23:15 तो वही अच्छा रहेगा जैसा कि आपने कहा ठीक है हम सोचते हैं समय निकालकर सामने बात करना सही है ज्यादा नहीं तो अभी अभी इनमें से जो तुमने दो चार चीजें बोली हैं जैसे कि क्या चार करोड़ लेना गलत नहीं है या कहा ही नहीं चार करोड़ गलत नहीं है कि सही है जब मैंने आपको उदाहरण दिया कि भैया सन्यासी के लिए आप ऐसी बातें बोल रहे हो कि भैया चार करोड़ 4 करोड़ देके चार शंकराचार्य को बुला लो या फिर तुम बोल रहे हो कि वह अपने उनके इतना आत्म मुग्ध हो गया है यह व्यक्ति जो अपने परिकरों के प्रति आसक्त है यह है वो है तू तड़ाक कर रहे हो शंकराचार्य के लिए और उसके अलावा तुमने जो है यह भी कहा कि वह मुसलमानों से प्रेम कौन करता है यह सबको पता है यहां यह जाते हैं वह जो जाता है ईसा प्रेम वैष्णवी ईशा प्रेम यह सब बातें तुम कर रहे हो ना तो फिर आपने कहा यह सब क्या गलत नहीं भैया फोन को यही रख दिया जाए। हम आपसे बात करेंगे। कब करेंगे? अच्छा मैं कब अपेक्षा करूं आपसे बात होने की? अपेक्षा यही कीजिए जैसे कि कल भी कोई कार्य नहीं है। कल यही कह रहे हैं कि मैं 27 तक तो बाहर हूं। अच्छा 27 तक फिर 27 के बाद में तो बहुत ज्यादा व्यस्तता

00:15:39:06 है। तो दो को तो पूजा खत्म होगा। तीन को शंकराचार्य जी आ रहे हैं। आएंगे। हम भी यहीं रहेंगे। फिर चार को हम पटना आ जाएंगे। तो चार को तो एकदम खाली ही खाली है। हां तो चार को कर लो। हमसे बात कीजिए तो हमको नाचार जी जिस बात पर हमने विरोध किया बस उसी पे बात कीजिए। हम आपने जिस बात का विरोध जितनी बात आप बोल रहे हो उतनी बात पे ही मैंने किया है। हां ठीक है। उतनी बात पे ही किया और अब सुनो। अब सुनो आपने कहा कि आप आप अपनी गलत गलत भाषा मुझे लगता है कि आपका हृदय विदर्ण जरूर होता है जब मैं गलत तरीके से बोलता हूं। मुझे मेरी जानकारी में उसके लिए जो उपयुक्त भाषा है और वह भी मर्यादा के अंदर वही मैं यूज़ करता हूं। फिर भी आपका हृदय विदर्ण होता है। तो अब मैं उसप एक बात बताऊं। आपने संभवत हम लोगों के वीडियो शुरू से और पूरे-पूरे नहीं देखे हैं। जब इसने पहली बार इसके इसने कोई ऐसी बात कही थी जो सीधे तौर पर मुझसे जुड़ी हुई थी। यह व्यक्ति पहले भी शंकराचार्य का पूरी मठ का विरोध करता था। मगर मैं शांत रहता था। अपना काम करता रहता था क्योंकि यह वर्णाश्रमी था क्योंकि यह कहीं ना कहीं उनका पक्ष भी लेता था। परंपराओं का पक्ष लेता था और क्योंकि यह कहीं ना कहीं पाले के इस तरफ का व्यक्ति था। सनातना तरफ का नहीं था

00:16:54:09 ये व्यक्ति। ठीक है? तो मैं शांत रहता था। समाप्त हो जाए। मैं एक बात बता रहा हूं आपकी। ये पहले से ये सब बातें बोला करता था। मैं सुन के अनसुना कर देता था। जब सीधे तौर पर एक लड़की जिसको मठ में मैंने ही पहुंचाया। मैं उसकी यात्रा देख रहा हूं कि उसका पुराना जीवन कैसा था और वह उसने अपने आप को बदला। शंकराचार्य की शरण में जाकर के उसने दीक्षा प्राप्त की। अब यदि वहां पर जाने के कारण उसको मुसीबतें झेलनी पड़ेंगी। उसकी टांग खींची जाएंगी पुराने जीवन को लेकर के तो मैं उसके लिए केवल आया। उसके लिए बोलना पड़ा मुझे क्योंकि वह मुझसे ही होने जैसे आपके द्वारा कोई भागवतानंद से जुड़ जाए। मान लो भागवतानंद के अंदर आप अपना गुरु देखते हो और आपके द्वारा कोई बिल्कुल दूसरी दुनिया का व्यक्ति जो है आप जो है भागवतानंद के चरणों में ला करके उसको रख दो या विद्या भास्कर जी महाराज के चरणों में लाकर के रख दो। उसके बाद क्योंकि वह वहां पहुंचा इस कारण से कुछ लोग उसकी टांग खींचे। उसके बारे में अपशब्द कहें, बुराई करें, उसके पुराने जीवन को लेकर के हंसी ठट्टा करें, उल्टे सीधे निराधार आरोप लगाएं। तो फिर वहां पर आपको बोलना पड़ेगा। सीधे तौर पर और नहीं बोलेंगे तो ठीक है वीडियो में आकर फालतू कमेंट किए हैं किसी के नाम से लेकर आपने भाई साहब मैं आपको अपना एक पक्ष

00:18:09:13 बता रहा हूं जो आपने बातें सुनी नहीं है सुनिए हम तो मैंने जो है इस कारण से कि एक महिला को इस तरीके से आज अगर नहीं उसके लिए खड़े होंगे तो कोई भी व्यक्ति शंकराचार्यों से और परंपरावादियों से वर्णाश्रमियों के उसमें आने से डरेगा जो जो यह बातें जानेगा तो इसलिए मैंने उसको उसके लिए खड़ा हुआ और मैंने वीडियो जो पहला बनाया था भागवतानंद के विरोध में उस वीडियो में भागवतानंद का ना नाम लिया था ना भागवतानंद की पिक्चर दिखाई थी जिससे कि हमारी सीधे-सीधे आमने-सामने की चीजें ना समाज को दिखाई दें और जो अप्रत्यक्ष रूप से मैंने बोला है वह समझ लें और उस पर फिर आगे विवाद को ना बढ़ाएं और मैंने जी लगा करके और जो लोकाचार की दृष्टि से उसका नाम प्रसिद्ध है मैंने वही नाम बोला था निग्रचार्य जी निग्रचार्य जी पहले वीडियो में मैंने मैंने ये भी कहा था कि इस विवाद को हम आगे नहीं बढ़ाना चाहते हैं। जबकि उसने अपने वीडियो में इस लड़की को निराधार रूप से वैश्या इत्यादि तक कहा था। तो मैंने अपने शुरू के तीन वीडियो ऐसे बनाए जिसमें मैंने यह कहा कि विवाद को मत बढ़ाइए मत बढ़ाइए मत बढ़ाइए। ठीक है? और निग्राचार्य जी, निगराचार्य जी, निगराचार्य जी यह था मेरा बात करने का तरीका। उसके बाद निगराचार्य की तरफ से क्या आया? भागवत आनंद

00:19:24:19 की तरफ से क्या आया? तू अगर मुझे लाइव पर बुला लेता ना शिवश तेरा मैं करियर खा जाता। फचके खा लिए ना तूने इसलिए तुझे समझ में नहीं आ रहा है। स्त्री के मुंह में तू लंपट हो गया यह सब बातें किसने शुरू किया गलत भाषा का उपयोग और अगर आपको आप या तो आपको पहले देखना चाहिए या फिर आधी अधूरी जानकारी पर आपको आरोप नहीं लगाना चाहिए। यदि आप सत्य के पक्षधर हैं। अब यह बताइए कि मैंने कौन से अपने वीडियो में स्त्रियों को लेकर के गलत बातें कह दी हो? इसने क्या कहा है मालूम है कि विजय श्री की बढ़ाई ये इसलिए करता है क्योंकि उसके पास ऊपर और नीचे बहुत कुछ ऐसा है जो मेरे सब पास नहीं है।

00:20:09:15 ये भाषा अच्छी है क्या? जी ये सब मतलब देखिए कुछ दो मिनट बस हमारी बातें सुन लीजिए। हमने आपका सुन लिया। नहीं, आपने कहा ना गलत शब्दों का प्रयोग। अब यहां बताओ ना गलत शब्दों का प्रयोग पहले किसने किया? मैं तो आज भी उसके खिलाफ कोई अश्लील टाइप का आरोप नहीं लगाया उसके ऊपर। मैंने तू तड़ाक में केवल बात करना शुरू किया है। केवल तू तड़ाक जो कि मुझे मिला कि हां भाई इतना तो मैं कर सकता हूं। आज तक ना तो उसके घर की स्त्रियों को कभी घसीटा हो ना ही उसको कभी गाली गलौज दी हो ना ही उस उस पर कोई आरोप ऐसा लगाया हो कि फलाने के साथ तेरे अनैतिक संबंध है हां मैंने प्रश्न जरूर पूछा क्योंकि उसने कहा था कि भाई मेरे से सार्वजनिक प्रश्न पूछा करो तो उसके बारे में जो बातें उड़ रही हैं जिस डॉक्टर से वो इलाज करा रहा है यदि वो कुछ बातें बता रहा है तो हम प्रश्न तो पूछेंगे ना कि भैया ये हो रहा है तुम्हारे विरोध में अब बताओ इसको सच मान ले क्या सदैव मैंने यही कहा खैर वो बातें तो अलग मगर मैंने तू तड़ाक वगैरह कब की? जब उसने मेरे जो सब्र का बांध था उसको तोड़ दिया। तब उससे पहले मैंने कोई विरोधाभासी बात नहीं की कही थी। केवल यह कह रहा था भाई देखो वही चीजें बोलो जो सिद्ध कर पाओ। शंकराचार्य चार शंकराचार्य चार करोड़ लेते हैं। इसका मतलब प्रत्येक शंकराचार्य

00:21:24:21 ₹1 करोड़ तो लेता है। इस बात को कैसे सिद्ध करेगा? वह कोई स्त्री वैश्या है। यह क्या शास्त्र में लिखा हुआ है? तो यह सब चीजें उसने चालू की है और तुमको मुझे ऐसा लगता है कि तुमने शायद उनका वह पूरा वीडियो देखा नहीं हमारे पूरे वीडियो देखे नहीं आप जहां से पिक्चर में आए जहां से मेरे मेरे मेरी गलती आपको दिखाई दी वहीं से आपने बोलना शुरू कर दिया भाई पहले पीछे जाके देखो कहां पहला वीडियो बना था पूरा पूरा देखो शिवश कैसी भाषा में बात कर रहा है आदर और सम्मान के साथ इस वालों ने इसको इसके मुंह पे कुत्ता कुत्ते का चेहरा लगा करके बोला लगा दिया था। खराब लगा था मुझे। मैंने वीडियो बना करके इसका नाम लेकर के निगराचार्य जी कहते हुए और इसका नाम लेते हुए और मैंने इस वालों का विरोध किया था। यह सब शुरू होने से पहले

00:22:22:14 और यह क्या अंधापन है कि भाई शास्त्र में लिखा है चार करोड़ रुपए लेते हैं। शास्त्र से सिद्ध होगा क्या? इसीलिए मैं कहता था हम उन विषयों में लड़ते हैं जो अकाट्य हो। हम सीधे वहां मुसलमानों आर्य समाजियों के पास जाकर यह सब नहीं करते कि भैया तुमने उस दिन फलाने सन में ये किया वो किया। सीधे बताओ ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं तुम्हारा? सीधे बताओ वेद कहां से प्राप्त हुए? कौन सी परंपरा से वेद तुम्हें प्राप्त हो गया? हेलो हां बताइए अब दो मिनट आप हमारी बात सुन लीजिए। हम्म। आप हमसे क्या उम्मीद रखते हैं? भाई तुम जो जिन-जिन विषयों में तुम विरोध कर रहे हो मेरा उन विषयों में उत्तर दो। ये उम्मीद करते हैं हम आपसे। बस और उनका उत्तर देने के बाद आखिर में यदि तुम उसको प्रामाणिक आचार्य मान रहे हो तो फिर उसको सिद्ध करो। उसके गुरु कौन? अगर उसके गुरु निगमानंद की तरफ से आते हैं तो वो शंकराचार्य का शिष्य हुआ। निगमानंद की तरफ से आते हैं तो निगमानंद का तो विरोध हो रहा है। अच्छा जहां से निगमानंद की किताबें छपी हुई वह पढ़ रहा है वहीं से छपी हुई दूसरी किताबें क्यों नहीं मानेगा? जिन किताबों को वो पढ़ रहा है उसी में वो ईसा को भगवान कह रहा है निगमानंद। फिर वो कह रहा है कि दोश को त्याग दो। दोश

00:23:37:22 को त्याग कर तो पूरी दुनिया में कोई गलत नहीं होगा भाई। दोश को त्याग दो। प्रभुपाद गलत। प्रभुपाद सही है। दोषांश को त्याग दो मोहम्मद सही है। ठीक है। हम एक ही बार में आपसे बात करते हैं क्योंकि हम कुछ भी कहेंगे बिना आप सुनने वाले हैं नहीं जहां तक लग रहा है। अरे भाई मैं सुनने को तैयार तो हूं। आपने मुझसे प्रश्न पूछा अपेक्षा क्या है? तो मैंने बोला आपने ही तो प्रश्न आप मुझे उत्तर देने की बजाय प्रश्न कर रहे हो। आप मुझसे अपेक्षा क्या करते हो? अरे तो मतलब जैसे कि हमने वीडियो डाला आपको कोई ये दो तीन चीजों में मैंने निराकरण प्रस्तुत किया है। उसमें से किसी निराकरण के संबंध में अभी कोई बात कहनी है? नहीं अभी तो कोई बात हम नहीं कहना चाहते क्योंकि हम बस बैठे तो फिर जब आपके पास कोई बात है नहीं तो आप एक तरफफ़ा वीडियो क्यों बना रहे हो? क्यों अपनी फिल्म इसको तो मिट्टी कराना ही कहेंगे 10 मिनट में 10 मिनट में आपसे बातें आपसे कुछ बातें हो जाएगी उसके बाद में हम निकल लेंगे नहीं नहीं वीडियो तो आप बना रहे हो ना डेली इधर-उधर की चीजें करके और जो है अपशब्द कह रहा है ये बातें मर्यादित तौर पर हो सकती थी मर्यादित तौर पर तब बातें नहीं हो सकती थी जब वो कह रहा था कि भैया विजय श्री के पास ऊपर हो नीचे ऐसा बहुत कुछ है जो मेरे पास नहीं है इस बात को लेकर आप कब तक उनका अरे भैया ऐसी एक बात

00:24:53:01 नहीं है बहुत बातें हैं ये मैंने उदाहरण दिया है और तुम उत्तर दो ना इस बात को ले कब तक खींचोगे तो मैं भी तो कह सकता हूं उस बात को लेकर कब तक खींचोगे ठीक है हां जब तक न्याय नहीं मिलेगा तब तक उस अधर्मी का और उसके द्वारा किए गए अधर्म का विरोध होगा लो बहुत सुंदर कीजिए आप तो नहीं तो ये कोई बात है क्या इस बात को लेकर तुम उसको सही सिद्ध करो ना भाई ये क्या बात है इस बात को लेकर कब तक खीचोगे हम मतलब किसी को किसी के साथ कोई अपराध हुआ है वो छोड़ दे भूल जाए और फिर वो तू तड़ाक में बात ना करे तू ततक में हां हां बोलिए जैसे आपने कहा कि अगर सामने बात कीजिए ठीक है तो सामने बात कीजिए तो वीडियो क्यों बनाए भैया और कब आ रहे हो सामने मुझे उसी समय उसी समय आपसे जो प्रश्न करना है कीजिएगा हमसे ना हैं उसी समय आपको जो प्रश्न करना होगा कीजिएगा अरे तो तुम वीडियो तो बना चुके हो ना चलो ठीक है कौन से समय आओगे ये बताओ चलो जैसे आपने कहा कि आप 27 तक खाली नहीं रहने वाले है हां 27 तक खाली नहीं है अरे आप जो डेट दीजिए चाहे हमको जो करना पड़े हम तो उस दिन समय निकालेंगे आपको यही है कि आप चाहते हैं कि लाइव पर आए हां लाइव पे आओ हां ठीक लाइव पे आओ और हमसे वही बात होगी लेकिन वीडियो तब

00:26:08:04 बनाओ जब पूरी जांच पड़ताल कर ली हो किसने पहले बस भ्रष्ट भाषा बोली है जो इसने जो इसने जो लतखोर कहा था उसमें से एक हमारे शंकर शंकर परंपरा के आचार्य भी थे। यद्यपि अन्य परंपराओं के भी हो तो उनके लिए लखोर शब्द की क्या आवश्यकता तुम्हारा कहना यह है ना यह बात तो मर्यादित ढंग से भी कही जा सकती है तो जब तुम हमें मर्यादा याद दिला रहे हो कि मर्यादित ढंग से कही जा सकती है तो उसको क्यों नहीं दिला रहे हो भैया लाइव आएंगे आप हमको मुंह बंद करा दीजिएगा अपने जवाब से ठीक है हां तो लाइव लाइव पे कब आओगे बताओ आप कब तक खाली रहेंगे हेलो हां लाइव तुम कर लो जैसा कि आपने कहा कि 27 तक नहीं खाली रहेंगे आप 27 की शाम शाम को कर लो। 27 ठीक ठीक है। ठीक है। 27 ठीक है। 27 की शाम को करते हैं लाइव। तब तक आप कहां रहेंगे? 27 तक बाहर हूं मैं। होमटाउन में नहीं हूं। ठीक। 27 को मैं ट्रेन से पहुंचूंगा। समय पर आ गई तो 27 की शाम को कर लेंगे। अन्यथा फिर 29 की शाम को कर लेंगे। ये आशा कर हमारी बातें ना रिकॉर्ड करेंगे। बिना कहे अभी डालेंगे। नहीं रिकॉर्ड क्यों नहीं करेंगे? रिकॉर्ड करके डालेंगे। आपका व्यक्ति भी तो रिकॉर्ड करता है। तो

00:27:23:08 मतलब आप डाल देंगे मतलब जो आज बात हुआ है। बिल्कुल आज आज जो बात हुआ डालेंगे जिससे कि आप उस पे अपने उस पे भी रहे। पहली पिछली बार भी आपने कहा था कि मैं लाइव आऊंगा। मगर आज आज तक आपने खबर नहीं ली लाइव आने की। हम तो 6 महीने हो गए करीब। हम तो कह तो रहे हैं कि 29 को आ रहे हैं। वो कह तो रहे हैं कि आप वो तो अब वो तो अब आ रहे है ना। मैं इसलिए डालूंगा जिससे लोगों को पता चले कि अभी अभी की स्थिति क्या है। भाई आप आप अपने वीडियो थोड़ी ना हटा ले रहे हैं जो आपने विरोध किया है। तो उसके पक्ष में कम से कम मैं अपनी वीडियो तो डालूं अपना ऑडियो तो डालूं क्या आप लाइव में जवाब देंगे अभी फिलहाल आपने नहीं दिया। आने के बाद हमने सोचा कि चलो व्यक्ति ने इतना कॉल किया लेकिन समय हम नहीं निकाल पाए तो तो मैं आपकी बात सुन तो रहा हूं। आपका नाम क्या है? नाम क्या है? अमन हां अमन कुमार हां अमन जी मैं आपकी बातें सुन रहा हूं। आपके साथ कोई अमर्यादित व्यवहार किया मैंने? नहीं किया। लेकिन हमने यह नहीं इसलिए फोन नहीं किया था कि हम आपसे बात करें। आपने मैं जब रिकॉर्डिंग डालूंगा मैं जब रिकॉर्डिंग डालूंगा सुनिए मैं रिकॉर्डिंग डालूंगा तो आपने शुरू में दो बातें कही हैं कि चलो बात यहीं कर लो। क्या दिक्कत है? आप रिकॉर्डिंग तो डालेंगे ही। रिकॉर्ड तो करेंगे ही। यह आपने कहा ना शुरू में? बस यही बातें गड़बड़ हो जाती है। व्यक्ति अगर ठीक से बात करना भी

00:28:38:12 चाहे तो आप अरे भैया ठीक से बात यह तो फिर उसको भी समझाओ नहीं किया था कि मैं आपका फ़ इसलिए अच्छा यह बताओ जिस व्यक्ति का जो व्यक्ति मेरा मित्र बनके बात कर रहा था भागवतानंद से क्या उसने मुझसे कंफर्म किया था वो मेरा मित्र है अच्छा आपको पूछना चाहिए ना नंबर लेना चाहिए एक मिनट एक मिनट भाई साहब एक मिनट उसने आपत्ति जताई थी ना कि मेरा ऑडियो मत डालना तुम्हारे भागवतानंद ने उसकी बात मान ली क्या एक काम कीजिए आप जैसा अपेक्षा के कीजिएगा और थोड़ा हम निकलते हैं फिर बात होगा जय श्री राम जय सीता

00:29:17:06 [संगीत]

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 29:22 · 21 Sep 2025

भागतानंदी की तूति बंद निरुत्तर होने पर कहा इतना मत खींचों

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