⬜ Not used yet · 00:00:01:22 – 01:09:37:00 (1:09:35)
00:00:01:22 तो सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे और काफी विलंब हो गया। तकनीकी जो पकड़ है वो बहुत ज्यादा ठीक से नहीं है। जिसके कारण ये ऐसा हुआ है आज फिल्म। हम लोग 6:00 बजे से आने की कोशिश कर रहे हैं और माइक या हेडफोन में प्रॉब्लम्स के चलते और उनमें भी कोई ऐसा अभाव नहीं है मगर कुछ तकनीकी चीजें समझ ना पाने के कारण ऐसा हो रहा है। तो हमारे साथ में एक मातृशक्ति हैं जो अभी बिल्कुल नवयुवक नवयुवा अवस्था में है और वो बंगाल से हैं।
00:00:49:10 अब इनके बारे में इससे आगे की चीजें हम आपके समक्ष उनको ले आते हैं। फिर हम धीरे-धीरे हम मैं भी जानूंगा और आप भी जानेंगे और फिर आज इस चर्चा को हम आगे बढ़ाएंगे। इसमें जो मूल विषय है वह है क्रिश्चियनिटी किस तरीके से प्रभाव डाल रही है लोगों पर और एक सामान्य व्यक्ति का उसमें किस-किस प्रकार का दौर होता है संघर्ष होता है और खासतौर पर इस प्रकार के जो नवयुवक विद्यार्थी हैं या अभी किशोरावस्था में हैं इनको किस तरह की चीजें फेस करनी पड़ती हैं और यह यहां पर आई हैं कि जो उनके द्वारा लगाए जाने वाले आक्षेप होते हैं। वह कौन-कौन से होते हैं जमीनी स्तर के? तो उनका हमारे पास क्या जवाब है आध्यात्मिक और दार्शनिक भाषा में?
00:01:43:27 जी स्वागत सर जी स्वागत है। हां आवाज आ रही है सबको मेरी? जी आपकी आवाज आ रही है। जी आपकी आवाज आ रही है। हां तो 2023 की बात है जब मेरी मम्मी इस से थोड़ा प्रभावित हुई थी और इस थोड़ा सा थोड़ा सा आप अपने बारे में अपने बारे में थोड़ा सा बता दीजिए कि आप कहां से मतलब थोड़ा बहुत जो भी आप बताना आपको सहज लगे वो बताते हुए फिर आप अपने जो मूल विषय है उसको फिर आप बताइए अपना परिचय देते हुए वेल आई एम आपको मेरी सरनेम देख के पता चल रहा होगा कि मैं ऐसी कम्युनिटी से बिलोंग करती हूं हूं और मैं कॉलेज से पास आउट एक स्टूडेंट हूं और मेरी पढ़ाई जब चल रही थी तब 2023 साल को मेरी मम्मी इस से बहुत प्रभावित थी और उसके बाद वो वहां पर जाया करती थी। अब बहुत दिन बीता और फिर 2026 के आसपास एक लेडी के साथ उनकी मुलाकात हुई और वह लेडी मुझे एक जगह से दीक्षित करती है। मैंने एक आपको
00:02:59:20 पिक्चर भेजा है। वहां पे कुछ लिखा है इस प्रकार के जहां से मैंने मेरी भी दीक्षा हुई है वहां से। तो मैं मतलब वो जो लेडी वो जो लेडी थी आपको वो इस मंदिर में मिली थी। आपकी माता जी को कहां पर मिली थी? वो इस की गैदरिंग्स में एक जगह मिली थी। मतलब इस में डायरेक्ट से नहीं एक क्या बताऊं मैं इस की जो गैदरिंग्स वगैरह होती है ना लेडीज की ऐसे गैदरिंग्स में मिली थी वो अच्छा इस की जो एक मीटिंग जैसी होती है गोष्ठी जिसे हम कहते हैं हां तो उसमें वो मिली थी वो इसॉन से नहीं थी क्या इस से ही थी नहीं नहीं वो इस से नहीं थी वो इस के द्वारा प्रभावित थी उसके पहले उसकी एक जगह वैष्णव दीक्षा हुई जहां पर आपकी माता जी की आपकी माता जी की वैष्णव दीक्षा हुई थी या फिर वो जो लेडी जो मिली है लेडी हां लेडी वो लेडी की एक जगह मतलब मैं बता 2023 में आपकी माताजी स्कॉन जाने लगती हैं और इस जाने पर किसी एक मीटिंग में उनको एक और महिला मिलती है जो पहले वैष्णव दीक्षा ले चुकी है कहीं से और अब वो स्कॉन में आपकी माता
00:04:14:21 जी से मिल रही है। अभी वो दीक्षित है या नहीं या केवल स्कॉन जा रही है केवल दोनों इस जा रहे हैं केवल ठीक है तो मेरी माता दीक्षित नहीं है ठीक है नहीं दीक्षित नहीं है तो फिर वहां से वो आती है और 2026 को मुझे वो माता वो जो मेरी मां की फ्रेंड थी वो जो महिला थी वो एक और जगह से मेरी दीक्षा कराती है और वो नित्यानंद परिवार के नाम से हम जानते हैं नित्यानंद परिवार अचुतानंद गोत्र और श्री चैतन्य मधवाचार्य संप्रदाय होता है। और यहां पर लिखा हुआ है कि ब्रह्मा जी से दीक्षा आई है उनकी। इस प्रकार से कुछ परंपरा हां पर परंपरा ये आप शो कर दीजिए ऑपरेटर जी जो इन्होंने भेजा है। एक बंगाली में है तो थोड़ा सा शायद ये हमें दिखाना चाहती हैं। है ना? इसको शो कर दें हम जो आपने हमें भेजा है। हां ठीक है। जी आप बताएं। अब 26 24 को हम जो है दीक्षा दीक्षा परम दीक्षा लेते हैं और ये ये स्क्रीन पर आ गया है। एक मिनट आप 2024 में दीक्षा लेने को यहां पर रोक करके थोड़ा सा इसको बड़ा
00:05:30:00 कर दीजिए। ऑपरेटर जी आप बताना चाहेंगे इसके बारे में कुछ? ये तो मतलब ये साउथ 24 परगना में ही दीक्षा हुआ था मेरा और मेरे जो गुरु थे वो नित्यानंद परिवार के वो तिलक लगाते थे और यह लाइक मैं क्या बताऊं इनको? यह इस से जुड़ा नहीं थे। जुड़े नहीं थे। इस से बाहर की है। ये उस महिला की है जो मेरी माता की फ्रेंड बनी थी। जब वो दोनों मिलकर इस जाने लगी। ठीक है? आपकी माताजी की फ्रेंड बनी एक महिला जो दो फिर वो दोनों मिलकर इस जाने लगी। यानी वो जो फ्रेंड बनी वो मंदिर के बाहर कहीं बनी। हां फ्रेंड मंदिर के बाहर बनी और फिर वो दोनों इस जाने लगी। नहीं आपने कहा ना कि एक मीटिंग हुई थी इसॉन में उसमें मिली वो वो मीटिंग में मतलब मैं क्या बताऊं बहुत लंबी कहानी है ना इसलिए वो मिली थी फिर वो दोनों मतलब कैसे बताऊं कि एक होता है ना कि प्रचार होता है इस का तो उसमें वो दोनों जाती है कुल मिलाकर के वो लेडी उनको इस से नहीं मिली मगर वो उनको लेकर के साथ में इस जाने लगी हां ऐसा है ठीक है ठीक है अब 204 वाली बात बताइए आप
00:06:45:13 2024 में फरवरी के आसपास बस मेरी वो दीक्षा हुई। उसके बाद सब कुछ ठीक-ठाक ही चल रहा था। अब दीक्षा आपकी दीक्षा आपकी इस से ही हुई ना? ना ना ये नित्यानंद परिवार से हुई है। यानी कि इस के बाहर से कहीं से हुई। हां इस के बाहर से हुई है। बट वो प्रभावित इस से इस के बुक्स वो पढ़ते हैं। ठीक है? ऐसा नहीं कि उन गुरुदेव की बुक्स पढ़ते हैं वो लोग। मतलब मैं तो मेरी गुरुदेव की कोई बुक नहीं पढ़। एक तरीके से अनऑफिशियली इस से ही दीक्षा ली आपने। इस के किसी अनुयाई से आपने दीक्षा ली। ऐसा मान सकते हैं। अ देखिए उनकी उनके द्वारा कोई किताब हम नहीं पढ़ते हैं। पढ़ते सब इसॉन की किताब ही है। मैं वही तो कह रहा हूं जब मतलब जो जो व्यक्ति आपको दीक्षा दे रहा है वो खुद इस को ही फॉलो करता है। बट ऑफिशियली इस नहीं नहीं उन्होंने कोई बुक्स बताया नहीं था और क्या है कि बस वहां से दीक्षा हो गया। उसके बाद से मेरी मां अपने मनमानी करने लगा। वो इस जाने लगा और वो इस की बुक्स पढ़ने लगा। ठीक है? उसके बाद हमारे साथ गुरुदेव की तो बहुत दिन तक कोई बात ही नहीं हुई है। मतलब वो तो यानी कि जो आपके गुरु हैं वो इस को फॉलो नहीं करते। इस की बुक्स को नहीं
00:08:00:14 पढ़ते-पढ़ाते। नहीं वो तो कोई रेकमेंड ही नहीं किए हैं। अभी तक उनके साथ बस एक ही बार मुलाकात हुआ। दीक्षा हुई बस उसके बाद हम फिर से इसॉन के बुक्स पढ़ने लगे। इस प्रकार से मैं क्या बताऊं आपको? नहीं मैंने देखिए इसमें क्लिटी करके चलना आगे अच्छा है तो मैं जो पूछ रहा हूं उस पर आप बताने का प्रयास करिए। आपने कहा कि आपकी माताजी और उनकी सहेली इस गई। ठीक है। इसन जाने के बाद 2024 में इस के बाहर किसी व्यक्ति से जो कि नित्यानंद परिवार के हैं आपके गुरु जी उनसे आपकी दीक्षा हुई। हां। वो इस से किसी भी प्रकार से कनेक्टेड नहीं है। गुरु जी नहीं है। नहीं है। नहीं है। नहीं है। आपने अभी एक बार कहा ना कि वो प्रभावित थे इस से। नहीं नहीं नहीं मेरी माता प्रभावित है। मेरी माता तो उन्होंने इस के बाहर हम मान लेते हैं कि गौडिया वैष्णव संप्रदाय से उन्होंने दीक्षा ली क्योंकि जो सिम्टम्स आप बता रही हैं नित्यानंद परिवार इत्यादि वो गौ वैष्णव का है। तो वहां से आपकी माताजी ने दीक्षा ली और अगेन वो मेरी भी कराई आपकी भी दीक्षा हो गई और वो सहेली जो थी उनकी उनकी दीक्षा पहले से वहां से थी और वो अच्छा तो
00:09:15:18 ठीक है तो अब जो है दीक्षा वहां से ले ली बट माता जी फॉलो इस को कर रही है हां हां सारे बुक सब इस के ठीक है ठीक है अब बताइए आगे आगे तो इस को फॉलो कर ही रही थी। अब 2025 की बात है। ये जो महिला फ्रेंड है मेरी माता की उनकी एक बेटे थोड़ा डिसेबल्ड है। ठीक है? थोड़ा डिसेबल्ड है। तो ऐसे में उनको एक मतलब पता नहीं उनको क्या हो गया था। उन्होंने यह डिसाइड किया। मेरी मां को भी आकर बोली कि हमारे घर में जो भी अशांति हो रही है या कोई बीमारी जो फैल रही है उसके लिए यहां एक जगह है। वहां पे जाना है। ठीक है? कि ईसाई उन्होंने मुझे पहले बताया नहीं था कि वो ईसाई है या नहीं है। मेरी मां मुझसे पूरी तरीके से वो बात छुपा रही थी। फिर उन्होंने कहा कि मुझे जा हम दोनों मिलकर वहां पे जाएंगे। ठीक है? तू और हम मतलब मैं और मेरी मां मुझे इनवाइट किया। मैं उस पता नहीं मुझे कुछ शक हुआ तो मैं वहां पे जाने से मना कर दिया। मेरी मां, वो लेडी फ्रेंड और उसकी उनकी बेटे तीनों मिलकर वो जगह पर गए और वो जगह पर जाकर
00:10:30:21 के अने मम्मी को फोन करना शुरू किया जब वो उस जगह पर गए थे। वो फोन नहीं उठा रहे थे। एक बार फोन उठाया फिर वहां पे हल्ला कल्ला हो रहा था और फिर मैं मेरी मुझे बाद में पता चला। उसके बाद पूरा डिस्कनेक्टेड हो गए हम। अब बहुत बार फोन किए बहुत बार फोन किए। फोन ही नहीं उठा रहे थे। फिर जब वह लौट के आती है, मैं उनके साथ बात करता हूं, मुझे एक अजीब सा स्मेल मिलता है। एक अजीब सा स्मेल मिलता है थोड़ा बहुत सा और बाद में मुझे पता करने पर पता चलता है वो लेडी फ्रेंड और उनकी बेटे से कि मेरी मां वहां पे फेंट हो गई थी। और वहां पे कुछ एक्सोर्सिज्म यानी कि भूत प्रेत को छुड़ाने वाला कुछ कार्यक्रम चल रहा था। और मेरी मां वहां क्या हो गई थी? आपकी माताजी वहां गिर गई थी। क्या हो गई थी? हां पेंट हो गई थी। हां मतलब अज्ञान हो गया था मतलब संज्ञा नहीं थी मतलब क्या बताऊं मैं ब्लैक होल ब्लैक होल ब्लैक होल जैसी स्थिति हो जाती ब्लैक आउट ब्लैक आउट ब्लैक आउट ब्लैक वो ब्लैक आउट हो गई थी पूरी तरीके से और वो लेडी फ्रेंड और उनकी बेटे आती है और कहती है कि तुम्हारे घर में शैतान है मेरे घर में मतलब हमारे घर में शैतान है इस प्रकार से वो कहती है और शैतान का कांसेप्ट
00:11:46:04 तो हमारे हिंदू धर्म में नहीं जितना मुझे मैंने शंखकारी का थोड़ा बहुत देखा है। दर्शन शास्त्र के बारे में जितना थोड़ा देखा है। तो दैत्यवाद के बारे में क्योंकि अब थोड़ा बहुत ये मधवाचार्य और दैत्यवाद के बारे में थोड़ा-थोड़ा सा शंख दर्शन के बारे में पता चल रहा था। तो शैतान के कांसेप्ट यहां है नहीं। तो वहां पे वो बता रही थी वो लेडी फ्रेंड कि तुम्हारे यहां शैतान की तुम्हारे घर में शैतान है। तो यह तो बहुत चौका देने वाली बात थी। मैं बहुत गुस्से में आया। मैंने बता बताया है आपको पहली बार फोन में कि किस तरीके से मैं अपने देश के कोई मैं यह नहीं चाहता कि मेरे देश विभाजित हो क्योंकि मुझे लगता है यह विदेशी शक्ति है। इस प्रकार से मैं बहुत चिंतित हो गई और कहीं ना कहीं मैं एक बात बताऊं मुझे लगने लगा कि यार जितना तक मुझे पता है ईसाहित अपने आपको सिर्फ वन एंड ओनली ट्रू रिलीजन बताता है। तो क्या मतलब भगवान वहां पे भी है यहां पे भी है क्या वह भी ट्रू है और फिर एक चीज मेरे दिमाग में चल रहा था कि शायद सिर्फ और सिर्फ अपने आप को ही सच्चाई मानती है बाकी किसी को नहीं मानती है तो यहां पर मेरा बहुत डाउट होने लगा उस समय क्योंकि वो बता वो ऐसी क्या बातें कर रहे
00:13:01:10 थे जिससे मतलब वो कुछ ऐसी बातें कर रहे होंगे कि हम कृष्ण को भी मानते हैं हम भगवान वो डायरेक्ट बात नहीं कर रहे थे वो वो एक्सोसिज्म की बात कर रहे थे वो डायरेक्ट धर्मांतर की बात नहीं कर रहे थे कि आप जिस देवता को मैं कह रहा हूं हां हां मैं ये कह रहा हूं कि वो इस तरह की बातें कर रहे होंगे कि हम भी हम भी जो है हिंदू बिलीफ्स को मानते हैं। हां हां हां वो ये नहीं डायरेक्ट नहीं बोल रहे थे कि आप धर्मांतर कर लीजिए वो लेडी जो है वो इतना [गला साफ़ करने की आवाज़] नहीं तो इसमें मैं इसमें थोड़ा सा पूछना चाहूंगा इसमें इस का क्या रोल है इस का रोल का इसन का रोल मुझे आप कहानी को आप कहानी को यहां से भी तो शुरू कर सकती हैं कि एक दिन ऐसा हुआ कि आपकी माताजी के पास उनकी एक फ्रेंड आई और वो चीजें सही करने के नाम पर उनको एक ऐसी जगह ले गई जहां धीरे-धीरे उनका ब्रेन वाश करने का प्रयास किया गया हम और वो लोग क्रिश्चियन थे कि इस का भूमिका यह है क्योंकि मेरे घर में जो चीजें बहुत सारी है जब से मेरी मां शाकाहारी इस से जुड़कर पहले से बनी है हम मांसाहार करते थे तो वो बहुत फनेटिकल हो गई थी और घर में एक चीज मैं कह सकता हूं कि वो बहुत समय तक पूजा पाठ किया करती
00:14:16:16 थी बहुत समय तक तो इससे क्या होता था कि ये जो अशांति वाली बात है ना ये अशांति हमारे घर में फैल रही थी। इसलिए मैंने इस को मेंशन किया। बहुत अशांति शांति फैल रही थी। अशांति फैल रही थी पूजा पाठ करने से क्योंकि वो बहुत टाइम लगाती थी। मतलब खाना नहीं बनाती थी। बहुत टाइम लगाती थी। ठीक है। मतलब सात आठ घंटे मान लीजिए मतलब एकदम से आपके घर में इस तरह के परिवर्तन आए जिसके कारण वो अस्त-व्यस्तता हो गई थी। हां। और हमारे घर में क्योंकि फिश खाए जाते हैं। फिश की थोड़ी प्रचलन है बंगाल से में तो वो छोड़ दिया। हम कुछ उनको डांटे नहीं कि मेरे पापा कभी उनको डांटे नहीं कि आप फिश छोड़ दिया। आप क्यों नहीं खाते हैं। उनके लिए अलग व्यवस्था मेरे घर में भी करा हुआ है। अलग ओवेंस सब कुछ व्यवस्था करा हुआ है। जब जिसका मन चाहे जो खाना खाना चाहते इस कारण से इस कारण से आपका मानना है कि वहां पर इतनी अशांति हो गई कि उस अशांति को आधार बनाकर आपकी माता जी का कन्वर्शन कराना आसान हो गया। जो क्रिश्चियन मिशनरीज है उनके लिए हां हां हां हां इसलिए मैं इस को मेंशन किया क्योंकि एक अव्यवस्था अव्यवस्था जो है ना उसको वो जन्म लिया घर पे और एक और बात मैं कहना चाहती हूं कि
00:15:32:02 मेरे घर में जो है पारंपरिक रूप से मेरी दादी जो है वो थोड़ा शिव और काली की तरफ ही झुका अवता क्योंकि हम बंगाली हैं और फिर धीरे-धीरे वो हर वक्त हर समय वो वह सिर्फ कृष्ण कृष्ण कृष्ण मतलब वह रहता था और फिर वह बहुत ही ज्यादा फनेटिकल वे में बिहेव करती थी। बहुत ही ज्यादा मतलब थोड़ी सी भी कोई गलती हो जाए, थोड़ी सी कोई समस्या हो जाए, हमारे घर में भी गोविंद है अगर आपने कभी देखा है वो फोटो भी मैंने आपको कहीं पर भेजा है इस क्कॉन की बुक्स के साथ। तो वो इतना ज्यादा फनेटिकल हो गई और एक और चीज वो वो अपने मन से जो भी तर्क आता था वो हमेशा देती रहती थी तो हम इससे थोड़ा विरक्त होते थे तो इसके चलते ये जो अव्यवस्था तैयार हुई उसके लिए उनको लगा कि मुझे यहां पे जाना चाहिए और जाके अपने आपको पता नहीं ठीक करना चाहिए इस प्रकार से तो इसलिए मैंने इस वाला पार्ट भी मेंशन किया [खांसने की आवाज़] इसमें मैं एक चीज कहना चाहूंगा कि इस के आने के कारण आपके घर परिवार में जो परिवर्तन आए उनके कारण होने वाली आपको जो अव्यवस्था है वो अव्यवस्था का कारण यह तो समझ
00:16:47:03 में आता है कि एकदम से जो आपके बिलीफ्स थे जैसे शिव और विष्णु को मानना और उस पर प्रहार हो जाना शिव और काली को मानना सॉरी उस पर प्रभाव हो जाना उसके विपरीत एकदम से बातें करना परंतु जो जीवन में जब भी कभी परिवर्तन आता है तो त्याग तो करना ही पड़ता है इसको केवल इसी बात से जोड़ेंगे अगर कि भाई क्योंकि इस गए थे हम लोग और इसलिए ऐसा हुआ था तो वह अनुचित होगा केवल इस इस आधार पर अगर हम देखें इस बात को कि स्कॉन के कारण ऐसा हुआ तो स्कॉन के कारण वो जो दूसरा वाला मामला है ना कि जो शिव और काली के प्रति वो था और उसके कारण हां यह और हो सकता है कि इस का जो स्ट्रेटजी है आपके जीवन में बदलाव लाने का वो कंपैटिबल नहीं है आपके लाइफस्टाइल के लिए उसको और सुधार करना चाहिए अपनी स्ट्रेटजी में कि किस तरीके से जिसके जिसके घर में इतना सब कुछ हो रहा है उसके घर में किस तरीके से परिवर्तन आए। बट जब भी कभी परिवर्तन आएगा तो हमें उसके लिए त्याग तो करना ही पड़ेगा। जैसे कि मान लीजिए कोई आधुनिक शहर है उसमें अगर मेट्रो की लाइन डलती है ना मेट्रो तो जब मेट्रो की लाइन डाली जाती है तो वहां पर अव्यवस्था फैलती है जाम लगता है रास्ते जाम हो जाते हैं आने जाने में प्रॉब्लम हो जाती है तो यह परिवर्तन का जो
00:18:02:04 समय होता है कठिन तो होता ही है बट इसका दोष दे देना कि उसकी वजह से ऐसा हुआ तो वो ठीक नहीं है। दूसरी वाली बात ठीक है। पहली वाली बात में थोड़ा सा स्ट्रेटजी और अच्छी होनी चाहिए। बट मैं फिर भी कहूंगा कितनी भी स्ट्रेटजी आप अच्छी बना लो किसी ना किसी को उस स्ट्रेटजी से प्रॉब्लम होगी ही है ना जब भी कभी हम चेंजेस लाते हैं। हां प्रॉब्लम होगी। मुझे उनकी नाम जप से कोई प्रॉब्लम नहीं था। मैं खुद भी करना चाहती थी नाम जप। समस्या एक आती थी कि एक और समस्या जो आते हमारे घर में आया करती है वो है कि मेरी मां को जब जैसा मन होता है वो उसी तरीके से शास्त्रों की व्याख्या कर देती है। मैं एक उदाहरण दूं कि उन्होंने एक बहुत ही क्या बताऊं कि किसी के स्नीज समझते हैं जब कोई हजता है मतलब जब सर्दी जुकाम होती है वो हां चीखता है वो हां वो चीखने पर किसी का मतलब वो उसके मन में मन में ऐसा भाव अचानक से आ गया कि कोई चीख रहा है तो हमारे घर में प्रॉब्लम होगी इस प्रकार से कुछ अजीबोगरीब चीज भी है और मैं आपके की बात मानता हूं। परिवर्तन सबको मान
00:19:17:08 लेना चाहिए। मेरे पापा भी मानते हैं और इसलिए उन्होंने अलग ओवन भी करवा दिए हैं मेरी मम्मी के लिए। तो ये समस्या के साथ-साथ और कुछ अचानक सी समस्या कहने का मतलब यह है कि एक तरीके से यह कहने देखने में आ रहा है कि आपकी माताजी कुछ सामान्य व्यवहार नहीं कर रही थी। कुछ असामान्य सा व्यवहार करने लगी थी। यह कहा जा सकता जैसे उनको मानसिक विकृति आ गई हो। कुछ मेंटली उनको डिस्टर्ब कर दिया गया इस तरह का हां हां वो और वो चीज वो ईसाई मिशनरी के जा बाद से और थोड़ा बढ़ा है मतलब मतलब मुझे लगता है कि अब अब ईसाई अब आप ईसाई मिशनरी पे आ जाइए फिर क्या हुआ हां तो वो गई थी वहां पर और वो तो डायरेक्ट कन्वर्शन की बात नहीं करी और उन्होंने कहा कि आप जो देवी देवता को मानते हैं आप मान लीजिए। फिर अ मेरी मम्मी पर पता नहीं क्या उन्होंने जादू टोना कुछ किया पता नहीं वो क्या किया वो पेंट कर ब्लैक आउट हो गई और फिर वो आके वो लेडी और मेरी माताजी काइंड ऑफ हेलो अ जीसस को एक देवता मानने लग गई वो लेडी जो
00:20:32:09 है वो बहुत झगड़ा कर रही थी अपने घर में जाकर के कि जीसस एक देवता है इस प्रकार से तो फिर वहां से वह इस आयत के बारे में थोड़ा बहुत मैं भी जानकारी रखने की कोशिश कर रही थी और मैं भी थोड़ा कंफ्यूज हो गई थी इस बात से दीक्षा होने के बाद भी क्योंकि वो जिस प्रकार से ईसाई जीसस के बारे में बोल रही थी कि भगवान का पुत्र है या कभी कबभार अवतार भी बता रहे थे तो इसलिए इस पर भी थोड़ा प्रकाश डालिएगा। इसका मतलब यह है कि आपकी भी दीक्षा करा दी गई क्या वहां से वह जो कन्वर्जन सेंटर है वहां से? नहीं नहीं वहां पे मैं गई नहीं थी। मुझे पता लग गया था पता नहीं कैसे बट मैं गई नहीं। इसका मतलब कहने का मतलब यह है कि वो अपने में आपको मिलाने के लिए यह तक मानने को तैयार है कि जीसस जो है वो जो सनातन धर्म है उसी के अनुसार एक देवता है। हां ऐसी बात तो लेडी तो बहुत झगड़ा की अपने घर में जाके हमारी मम्मी भी थोड़ा बहुत कह ही रही थी और लेडी जाके बहुत झगड़ा किया घर पे अपने घर पे और उनके वहां भी बहुत अशांति हुआ इसको लेकर के तो इसका जवाब आपको इस से नहीं मिल रहा वो लोग जो बातें कह रहे हैं इस
00:21:47:10 वालों का क्या कहना है इस बारे में इस वालों का तो कोई मेरी मम्मी के साथ बात ही नहीं होती थी सर मेरे पापा अशांति कर रहे थे इसलिए वहां जाना वो छोड़ दिया बस वो कन्वर्शन वाले वाले सेंटर में या वहां पे जो मीटिंग वगैरह गैदरिंग्स में जाना छोड़ दिया उससे तो कोई जवाब तो नहीं मिला अभी तक। एक मैं थोड़ा सा इसको स्ट्रक्चरल वे में समझा समझ लूं कि आप जो है सबसे पहले आपका आपकी दीक्षा होती है आपकी और आपकी माता जी की एक नित्यानंद परिवार के जो गुरु जी उनसे और उसके बाद से आप लोग इस से जुड़ जाते हैं। इस से जुड़कर जो है इस की चीजों को आप ग्रहण करते हैं। ऐसा करने पर आपके जीवन में बहुत ही अनइवन तरीके से चेंजेस आने लगते हैं। माता जी के मानसिक उसमें जो मानसिकता है उसमें बहुत ज्यादा आपको चेंजेस दिखाई देते हैं और अंतत गतवा उन चेंजेस के कारण जो आपके घर में अशांति इतनी हो जाती है कि एक दिन जब कोई आकर के ये कहता है कि फलानी जगह पर अशांति का उपाय मिल रहा है तो आपकी माता जी वहां चली जाती हैं। वहां पर उनके साथ वहां पर उनके साथ जो है ब्रेन वाश की प्रक्रिया चालू होती है। अब वो धीरे-धीरे उनकी बातों में आने लगती हैं।
00:23:02:28 है ना? हां एकदम सही है। और अब आपके घर में सिचुएशन यह है कि आपके पिताजी के कारण आपकी माताजी ने वहां जाना बंद किया परंतु मानसिक रूप से या आत्मिक रूप से वो वहां से डिस्कनेक्ट नहीं हुई है। नहीं आत्मिक रूप से तो डांट लगाने पर डिस्कनेक्ट हुई है। बहुत कोशिश करने के बाद अभी 2026 है तो बहुत डांट लगाने के बाद अब मैं क्या वो छुपा के रखी है यह नहीं पता पर हमारी माता के हमारी पिता कहती थी कि हमारे देश के सब कुछ छोड़कर जो भी है रिफॉर्म अगर जरूरी है लेकिन अपने देश के धर्मों को छोड़ के यह तो फिर बाहर के लोग हैं हमारे देश को बांट सकते हैं तो यह एक देशात्वोधक बात हमारे घर पर बहुत है तो इसके चलते शायद वह एक तरीके से उनका वो छूट गया है इस जुक्ति के कारण। तो अब क्या वो मन में मतलब शंका लेकर घूमती है जैसे कि मैं
00:24:06:26 मैं भी थोड़ा विभ्रांत हो जाती हूं कभी-कभी। इस प्रकार से मैं क्या कहूं आपको? देश पर तो पूरा भरोसा है कि वो विदेशी लोग हैं। ठीक है। अब अभी आपने हमसे संपर्क क्यों किया है? हमसे आपको क्या जानना है वो बताइए। आपने बहुत सारा प्रश्न जब आप इस ये सर्वशक्तिमान धर्म जो है उसके नीचे ही आपने बहुत सारा प्रश्न लिस्ट किया। वही सारे प्रश्नों का उत्तर दे दीजिए। लिस्ट क्या है ना आपने बहुत सारा क्या ईश्वर सर्वशक्तिमान है? यही यही प्रश्नों का उत्तर दे दीजिए एक-एक करके। तो आप अगर उसको इस तरह से मेरे समक्ष प्रस्तुत करें ना कि यह प्रश्न ईसाइयों की तरफ से आ रहा है जो आपको कन्वर्ट करना चाहते हैं तो वो ज्यादा अच्छे तरीके से मैं प्रस्तुत कर पाऊंगा। पहले तो मैंने कहा कि बहुत आपको तो दिखा ही होगा कि बहुत सारे जो मिशनरी है वो डायरेक्ट कन्वर्शन की बात नहीं करते। इसी तरीके से देवी देवता [गला साफ़ करने की आवाज़] को पहले वो आपके घर में पूजा पाठ करने देते हैं कि आप करिए अपने अपने अपना काम करिए। फिर वो धीरे-धीरे होता है ना। तो मैं एक सवाल करना चाहूंगा अवतारवाद को लेकर के। क्या वो अवतार है? क्योंकि वो रिलेट तो इस तरीके से ही करते
00:25:21:27 हैं। मतलब अवतार विष्णु के अवतार के रूप में जीसस को। हां। देखिए सबसे पहले आप यह समझिए अ कि धर्म क्या है यहां से शुरू करिए और इससे भी पहले आप एक स्टेप पीछे और आ जाइए धर्म क्या है समझने के लिए आपको समझना होगा ईश्वर है यह कैसे सिद्ध होता है बस सारी कहानी यहीं पर है सारी कहानी कहां पर है ईश्वर है यह कैसे सिद्ध होता है ठीक है तो अब बात आती है कि मैं आपको बहुत स्ट्रक्चरल वे में बता रहा हूं जो हमारे सिद्धांत है आप इसको यह वीडियो रहेगा तो आप कभी भी इसको दोबारा से अपने घर पर आप कभी भी देख सकती हैं लर्निंग हो जाएगी और जो भी लोग इस प्रकार के जो नेटवर्क चल रहे हैं सनातन के विरोध में उनको इस वीडियो से काफी सारी मदद मिलने वाली है। इसीलिए मैंने इस लाइव को लिया था। तो सबसे पहला कार्य यह है कि आपको जानना है कि धर्म क्या है? अगर हम व्यवहारिक रूप से देखें मतलब बिहेव क्या है? बिहेविरियल रूप से
00:26:37:13 तो धर्म का मतलब है डूस एंड डोंट्स। ठीक है। ये करना है और ये नहीं करना है। क्या मैं किसी नियमावली को क्या मैं इसको कर्तव्य और अकर्तव्य समझूं? हां जी। हां जी। यही यही यही धर्म है। कर्तव्य और अकर्तव्य। यह जो कर्तव्य और अकर्तव्य का पैरामीटर है वही धर्म है जो आपको बता रहा है कि यह करना है और यह नहीं करना है। अब धर्म आता कहां से है आपके जीवन में? आता है कहां से? जब जब हम चालू करते हैं यह सोचना कि भाई मैं धर्म को क्यों मानू? तो इसके लिए आपको जानना होगा इस प्रश्न पर आ जाइए आप सीधे। ईश्वर है यह सिद्ध कैसे होता है? ठीक है तो पहला पहला पहला स्टेप आ गया ईश्वर है यह सिद्ध कैसे होता है तो ऐसे होता है असतो मा सद्गमय तमसो मा ज्योतिर गमय मृत्यु मा मृतम गमय एक तीन 28 बदंडक उपनिषद तो इसके अनुसार एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी तीन तरह की चाह विद्यमान है प्यास पहली चाह है कभी ना मरने की चाह। इसको
00:27:52:14 कहते हैं सत। दूसरी चाह है ऑल नोइंग बन जाने की चाह। जिसको कहते हैं चित्त और इसी प्रकार से तीसरी चाह है अनंत आनंद प्राप्त कर लेने की चाह। जिसको कहते हैं आनंद। तो एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी सतित आनंद को प्राप्त कर लेने की चाह विद्यमान है। तो इसका अर्थ क्या हुआ कि संसार का कोई ऐसा व्यक्ति नहीं है जो सच्चिदानंद को ढूंढ नहीं रहा है। उसको सच्चिदानंद ही चाहिए। एसी में, टीवी में, फ्रिज में, कूलर में, कार में, कंप्यूटर में, बिल्डिंग में, मटेरियल में हर चीज में हम लोग इन तीन चीजों की ही तलाश कर रहे हैं। सतित आनंद अब बात यह है कि हमारे अंदर जो इनबिल्ट इच्छाएं हैं जिनसे हम अलग नहीं हो सकते वह हमें स्वरूप से ही प्राप्त है। स्वभाव से ही प्राप्त है। जैसे हमारे को भूख प्राप्त है जन्म से प्यास प्राप्त है जन्म से तो हमारे अंदर इनबिल्ट जो इच्छाएं हैं जो हमारे स्वभाव में ही है जिनसे हम अपने आप को अलग नहीं कर सकते। उनका विषय जो है उसका अस्तित्व सिद्ध है। भूख से यह सिद्ध है कि इस दुनिया में कुछ है जो भूख को मिटा सकता है। भोजन
00:29:07:22 है ना पानी के अस्तित्व से सिद्ध है। प्यास के अस्तित्व से सिद्ध है कि इस दुनिया में पानी है। तो जिस प्रकार एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी भूख होने से भोजन का अस्तित्व सिद्ध होता है। उसी प्रकार एक नास्तिक के अंदर भी व्याप्त सच्चिदानंद की प्यास से सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर का अस्तित्व सिद्ध होता है। इसका मतलब है कि इस दुनिया में सच्चिदानंद है और सच्चिदानंद है यानी कि एक तत्व है जो सच्चिदानंद है। उसी को ईश्वर कहते हैं। उस तत्व को जिसको प्राप्त करना जिसके साथ एक ही भूत हो जाना मतलब उसमें मिल जाना सच्चिदानंद को प्राप्त कर लेना हमारा हमारी चाह है जिससे हम अलग नहीं हो सकते कोई कहे कि मैं मरना चाहता हूं फिर भी कोई आत्महत्या करने भी जा रहा है तो इसलिए जा रहा है क्योंकि वो अनंत अनंतानंद चाहता है उसकी मौलिक इच्छा नहीं है कि वो मर जाए कोई जो सुसाइड करने भी जाता है उसका मौलिक स्वभाव नहीं वो अपने मौलिक स्वभाव के विरुद्ध जा रहा है। उस समय भी जिस समय वो मरने जा रहा है उस समय भी उसके साथ कुछ ऐसा हो सकता है जिससे उसका मौत से बचने का जो आचरण है वो सद्ध
00:30:22:28 हो जाए। जैसे कोई कहे कि मैं आत्महत्या करने जा रहा हूं और वो छत के ऊपर खड़ा हुआ है। हमने उसके ऊपर हाथ घुमाया पलक झपक जाएगी उसकी। इसका मतलब उसकी मौलिक चाह तो अभी भी यही है कि वो जो है मरना नहीं चाहता। तो अब हमें यह सिद्ध हो गया कि ईश्वर है। ठीक है? और हमारे अंदर की जो वास्तविक चाह है वह क्या है? ईश्वर को प्राप्त करने की चाह। सच्चिदानंद को प्राप्त करने की चाह वास्तविक है। तो यह एक ऐसी चाह है जिससे कोई व्यक्ति मुकर नहीं सकता कि उसको नहीं है। तो ये सर्वविदित बात है। अब बात ये आती है कि इस जो हमारा गंतव्य है हमें प्राप्त हमें पता चल गया भाई ईश्वर है। ईश्वर को प्राप्त करना है। अब कैसे प्राप्त करना है? तो यह जो विधि है जो विधि है इसका नाम धर्म है। अच्छा ईश्वर से ईश्वर सिद्ध हुआ और ईश्वर को प्राप्त करने के रूप में प्राप्त होने वाली जो विधि है उसको उसका रूप उसके द्वारा धर्म सिद्ध हो गया उसके रूप में। ठीक है? अब ये एक बाय प्रोडक्ट की बात होती है कि जब हम हमें ईश्वर तक जाना
00:31:38:04 है तो हमें यह नहीं करना है। ये करना है। तो ये आ गई हमारी मोरलिटी। ये क्या आ गई? मोरलिटी। हां कि हमें इसके साथ विवाह करना है। इसके साथ नहीं करना है। हमें यह पीना है। यह नहीं पीना है। यह आ गई मोरलिटी। ठीक है? तो ईश्वर [गला साफ़ करने की आवाज़] का अस्तित्व सिद्ध होने से धर्म का अस्तित्व सिद्ध हो गया। धर्म के अस्तित्व सिद्ध होने से मोरलिटी का अस्तित्व इंसानियत मानवता का अस्तित्व सिद्ध हो गया। तो इसीलिए कहते हैं धर्मे ना पशु भी समाना। क्योंकि
00:32:10:02 पशुओं में और हमारे बीच में एक ही अंतर है धर्म। है ना? पशुओं के पास धर्म नहीं है। अच्छा सर एक एक पॉइंट मैं बताना चाहती हूं। बहुत लोग ये कहते हैं कि सिर्फ इंसान सेल्फ कॉन्शियस है। और ये आपका बात मैं बिल्कुल मानता हूं। पशुओं में कोई धर्म नहीं है। पशु अपने बहन जो भी है विवाह के सूत्र में जो भी कुछ अपना मन चाहे करते हैं। तो सेल्फ कॉन्शियस भी एक डिफरेंस होता है। मतलब हम आत्मा अभिमानी हैं और वो नहीं है। सेल्फ कॉन्शस आत्माभिमानी आत्मा अभिमानी आत्मा अभिमानी कैसे नहीं है पशु? किस रूप में नहीं है? भाई वो जीना चाहते हैं। मरना नहीं चाहते हैं। वो खाना खाना चाहते हैं। आहार, निद्रा, भय, मैथुन चारों चीजें उनमें है। तो फिर कौन से वाले सेल्फ कॉन्शियसनेस की बात कर रही है? वो जो आप प्रज्ञा शक्ति की बात कर रही हो उसको शायद आपने इंग्लिश में टर्म दिया है तो उसी के कारण तो हम धर्म को ग्रहण कर पा रहे हैं। वो जो कॉन्शियसनेस है वो जो कॉन्शियसनेस है उसी के कारण तो हम ईश्वर को जानने के लिए अपनी यात्रा कर पा रहे हैं। तो पहली बात आ गई कि धर्म है। ठीक है?
00:33:26:19 ईश्वर है धर्म है। अब बात आती है कि हमने कहा था कि ईश्वर कौन है? जो सच्चिदानंद स्वरूप है। ठीक है? हमको ज्ञात कैसे हुआ था कि ईश्वर है क्योंकि हमारे अंदर कभी ना मरने की इच्छा है। हमारे अंदर हमारे अंदर इस संसार का सारा ज्ञान प्राप्त कर लेने की इच्छा अनंत ज्ञान हासिल प्राप्त कर है। तो अगर इन इच्छाओं का व्यवहारिक रूप हम देखें तो इसका मतलब यह है कि एक नास्तिक व्यक्ति भी विज्ञान के विरुद्ध जाते हुए कभी कई बार ऐसा सोचता है कि बारिश ज्यादा पड़ रही है तो कम हो जाए। धूप ज्यादा पड़ रही है तो कम हो जाए। इसका मतलब जो हमारी इच्छाओं का अस्तित्व सिद्ध हो रहा है। वो कहां से सिद्ध हो रहा है? हमारी इच्छा है इस प्रकृति के सभी बंधनों के परे। इस प्रकृति के सभी बंधनों पर कंट्रोल कर लेने की इच्छा। उसके विरुद्ध आचरण कर देने की इच्छा। मैं चाहूं तो उड़ सकूं। मैं उड़ क्यों नहीं सकता? मैं कभी-कभी इसलिए भी दुखी हूं। मैं वहां क्यों नहीं हो सकता? मैं कभी-कभी देश से बाधित हूं। मैं कभी-कभी काल से बाधित हूं। काल मतलब कि कल जो है जैसे आपने कल पूछा था मुझसे आपको मन में
00:34:41:22 काफी चिंता थी। आज जो इलेक्शन का रिजल्ट आने वाला था। थी ना? हां हां हां। तो इसका मतलब काल से बाधित थे वो भी आपकी एक परेशानी होती है। तो देश से, काल से और परिस्थिति से इन तीनों प्रकार की बाधाओं पर नियंत्रण पा लेना इन गतिविधियों से ही सिद्ध होता है कि हमारे अंदर सच्चिदानंद की चाह विद्यमान है। इसका मतलब क्या है? इसका मतलब यह है कि हमारा ईश्वर वह है जो देश कृत कालकृत परिस्थिति कृत किसी भी प्रकार की बाधा से मुक्त है। ठीक है? क्योंकि इनहीं इनहीं बाधाओं से मुक्त हो जाने की चाह से उसका अस्तित्व सिद्ध हो रहा है। तो इसका मतलब क्या हुआ? कि वो देश कृत काल कृत परिस्थिति कृत की बाधाओं से मुक्त है। इसीलिए हमारा ईश्वर सर्वशक्तिमान है। अब यहां पर आ गया सर्वशक्तिमान। ठीक है? अच्छा हां हां सर्वशक्तिमान है सर्वव्यापक है ऑल नोइंग है सच्चिदानंद स्वरूप है सच्चिदानंद घन ब्रह्म है ठीक है अभी मैं क्रिश्चियनिटी का वो दूंगा आपको तो इस ईश्वर का अस्तित्व सिद्ध हो सकता है केवल जो सर्वशक्तिमान है जो सच्चिदानंद है इसी ईश्वर
00:35:57:01 का अस्तित्व सिद्ध हो सकता है अन्यथा उपास्य के रूप में ईश्वर का अस्तित्व प्राप्तव्य के रूप में ईश्वर का अस्तित्व सिद्ध सिद्ध नहीं हो सकता। अगर वह सर्वशक्तिमान नहीं है तो सच्चिदानंद नहीं है तो ठीक है। सर्वव्यापक नहीं है तो अब बात ये आती है कि जब हमने यह कहा कि ईश्वर सर्वशक्तिमान है। किसी भी प्रकार की बाधा से रहित है तो फिर ईश्वर के द्वारा दिए गए ग्रंथों पर विश्वास कैसे हो? क्योंकि वह तो किसी भी प्रकार की बाधा से रहित है। उसमें तो सत असत सब कुछ है। भाई अगर हम समझ में नहीं आया। मैं बता रहा हूं। मैं बता रहा हूं। ये थोड़ा सा ये थोड़ा सा समझने वाली रोचक चीज होती है। ईश्वर जो है उसने सृष्टि बनाई है। उसने केवल वेद नहीं बनाए। उसने तो बाइबल भी बनाई है। उसने तो कुरान भी बनाई है। क्या कुरान उसकी सत्ता से बाहर बनी है? मान लीजिए कि कुरान कुरान जो है मोहम्मद के द्वारा आई और जो बाइबल है वो जीसस के द्वारा आई। पर क्या ये ईश्वर की सत्ता से बाहर का कार्य है? नहीं है। नहीं है। नहीं है। तो फिर कैसे विश्वास करें
00:37:12:04 कि उन्होंने वेदों में सही ज्ञान दिया है। हां। एक ये प्रश्न आता है। यह इस प्रश्न का जवाब संसार में किसी भी आईडियोलॉजी में नहीं है। सिर्फ सिवाय हमारे जो हमारे वैदिक ग्रंथ हैं वो यह क्लेम नहीं करते हैं कि उन्हें ईश्वर ने रचा है। ठीक है? उन्हें ईश्वर ने रचा नहीं है। वह ईश्वर की स्वास भूत है। स्वास भूत होता है जो हमारे हम दो प्रकार के कार्य करते हैं। एक जो हम प्रयास पूर्वक करते हैं, बुद्धि पूर्वक करते हैं और दूसरा जिसमें हमारी बुद्धि का प्रयोग नहीं होता है। जैसे कि मान लीजिए मेरे सामने अभी दो कमेंट्स आ रहे हैं नीचे। तो मैं चाहता हूं कि इनमें से एक कमेंट को मैं यहां
00:38:01:27 डिस्प्ले कर दूं। ठीक है? पर क्योंकि मैं चाहता हूं कुछ करना प्रयास पूर्वक तो मैं उनमें से किसी भी कमेंट को यहां पर प्रस्तुत कर सकता हूं। यह मेरी इच्छा है। हम परंतु कुछ कार्य ऐसे होते हैं जो मैं स्वभावगत करता हूं। जैसे कि सांस लेना। बच्चा माता के गर्भ से जन्म ले रहा है और सांस ले रहा है। तो इसका अर्थ क्या हुआ कि हमारे जो वेद है वह यह क्लेम नहीं करते कि उनको ईश्वर ने रचा है। पौरुषय ग्रंथ नहीं है। अपारुषय ग्रंथ है। ठीक है? हां। तो ईश्वर ने उन्हें रचा नहीं। ईश्वर की स्वास रूप में वो व्याप्त है। स्वास मतलब वही स्वभावगत जो कार्य है उनके रूप में। तो बुद्धि पूर्वक ना होने के कारण वह हमारे लिए प्रमाण है। अच्छा ठीक है तो श्रद्धा तो है ही आस्था तो है ही साथ में तर्क की पराकाष्ठा भी है कि हम उन ग्रंथों में आस्था रखते हैं हम उन ग्रंथों में श्रद्धा रखते हैं जो अपारुरुषय ग्रंथ है जिनको ईश्वर ने रचा नहीं है बुद्धि पूर्वक सर मैं एक बात बताऊं आप अपरुषय
00:39:16:28 तो मानते हैं लेकिन कभी अगर उनके साथ अगर हम डिबेट करने बैठे वो तो यह नहीं कभी नहीं मानेंगे कि अपय अपसेस है। वह तो कहेंगे मैंने आपको मैंने मैंने आपको दो बातें कही है। तर्क भी है और आस्था भी है। मैंने नहीं कहा आस्था नहीं है। आस्था है पर हमारी आस्था कहां पर है जो तर्क की पराकाष्ठा है। नहीं नहीं मैं अगर किसी के सामने बैठा हूं और मैं ये क्या बोले ओप से है मतलब सांस स्वरूप में मैं आपको बता मैं आपको बता रहा हूं। आप दुनिया में किसी भी आईडियोलॉजी पर बिलीव करोगे तो उसमें एक जगह पे आपको आस्था लेनी पड़ेगी। शुरुआती पैरामीटर। ठीक है? मगर वहां एक ड्रॉबक होगा। वहां ड्रॉबक यह होगा कि सामने वाले ने वो जो ग्रंथ आपको दे रहा है ना जिस पर आपको आस्था करने को कह रहा है। वो ग्रंथ खुद ये क्लेम कर रहे हैं कि उनको रचा गया है। किसके द्वारा? सर्वशक्तिमान ईश्वर के द्वारा। किसके द्वारा? जिसने झूठे लोगों को भी बनाया है। किसके द्वारा? जिसने अच्छाई बुराई दोनों को बनाया है। समझ गए? तो हम भी बिलीव करने को ही कह रहे हैं। बट उन पर जो यह नहीं कह रहे कि हमको रचा गया है। वो ये कह रहे हैं कि हम स्वास भूत हैं। ठीक है? बिलीव करने
00:40:32:02 को दोनों जगह कहा जा रहा है। मगर यहां पर लॉजिकली हम आगे हैं। ठीक है? मतलब वो लॉजिक तो वो मानेंगे नहीं ना। मैं यही कह रहा हूं। तो कोई और लॉजिक अगर आप देते तो अच्छा होता। मतलब मैंने कहा मैं लॉजिक भी दूंगा मैं लॉजिक दूंगा मैं आपको आगे आगे ले चलता हूं लॉजिक है इसमें अब बात आती है कि भाई कोई अगर यह कहे कि ठीक है हम कैसे मान ले कि अपौरुष है ये तो वेद में ही लिखा है तो जो चीज स्वयं जो है अभी विवाद का विषय है जिसकी अभी प्रामाणिकता अप्रामाणिकता हम लोग जांच रहे हैं तो फिर उसकी ही कही हुई किसी बात के आधार पर हम लोग कैसे मान लें तो फिर बात वहां पर यह आती है कि आपको फिर वहां पर क्योंकि जब वेद को नहीं मानेंगे तो ना ईश्वर सिद्ध हो पाएगा ना धर्म सिद्ध हो पाएगा ना मानवता सिद्ध हो पाएगी तो फिर आपको उसकी परदी से बाहर जाकर के धर्म को ईश्वर को और मनुष्य के प्राप्तव्य को सिद्ध करना पड़ेगा और अगर आप यह कहते हो कि हम ठीक है मैंने मान लिया कि दुनिया में कोई सच्चिदानंद है तो उसको प्राप्त करने वाली जो विधि है मैं स्वयं बताऊंगा तो वो जो विधि होगी वो शाश्वत नहीं होगी शाश्वत मतलब कि जो चली चली आ रही शाश्वत वो ऐसी नहीं होगी
00:41:47:18 जो हमको ये दिखाई दे रहा है कि उसका कर्ता कौन है जो ये क्लेम कर रहा है कि मैं वेदों के विपरीत जाकर के कुछ बना रहा हूं नियमावली और साथ ही साथ जब कोई वेद का विरोध करेगा तो सबसे पहली बात है कि सर्वशक्तिमान ईश्वर और परम स्वतंत्र मोक्ष को सिद्ध नहीं कर पाएगा अगर सिद्ध कर लिया तो वह वेद की कॉपी हो जाएगा अगर उसने तीन चीजें जो आवश्यक है सर्वशक्तिमान ईश्वर, परम स्वतंत्र मोक्ष और शाश्वत धर्म। पहली बात तो ऐसा संभव नहीं है। यदि सामने वाले ने यह सिद्ध भी कर लिया कि हम जो है आपको सर्वशक्तिमान ईश्वर, परम स्वतंत्र, मोक्ष शाश्वत धर्म दे रहे हैं तो वो वेद की कॉपी होगा। तो पहले तो उसको असंभव कार्य करके दिखाना होगा। और अंतत गत्वा यदि कर भी लिया तो प्राप्त क्या होगा? अंत में वेद। और अगर प्राप्त नहीं हो रहा है, वेद प्राप्त नहीं हो रहा है तो कहीं ना कहीं उसकी जो आईडियोलॉजी है वो ब्रेक हो जाएगी। और जब मतलब अकाट सिद्धांत आप सिद्ध नहीं कर सकते। ये फिर वेदों के बाहर जाने की परिधि में बात आती है। ठीक है? अब मैं थोड़ा सा टॉपिक पे आ जाऊं। तो अब हमने तीन चीजें प्राप्त कर ली। धर्म, ईश्वर और शास्त्र।
00:43:03:18 धर्म प्राप्त कर लिया, ईश्वर प्राप्त कर लिया और शास्त्र प्राप्त कर लिए। ठीक है? अब बात आती है यह शास्त्र हम तक आते कैसे हैं? करोड़ों वर्ष पूर्व के जो शास्त्र हैं प्राचीन समय के वो हम तक आते कैसे हैं? तो वो आते हैं गुरु शिष्य परंपरा से। ठीक है? ये सब मैं क्यों बता रहा हूं? अभी आपको आगे समझ में आने लगेगा। ठीक है ना? तो वो आते हैं गुरु शिष्य परंपरा से। तो इसका अर्थ यह है कि हमें चाहिए मुक्ति। मुक्ति मिलती है ईश्वर के साथ एक ही भूत होने पर। ठीक है? और एकीभूत हो पाते हैं हम धर्म का आलंबन लेने पर। और धर्म क्या है? यह ज्ञात होता है हमें वेद से। तो सबसे पहले थोड़ा सा एक बार मैं यहां पर धर्म की बता दूं एक स्ट्रक्चरल वे में कि जीव की चाह के वास्तविक विषय सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को जीव की चाह के वास्तविक विषय सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त करने के निमित्त
00:44:12:19 वेद आदि शास्त्रों द्वारा बताई गई विधि का नाम धर्म है। जीव की चाह के वास्तविक विषय सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त करने के निमित्त वेदा आदि शास्त्रों द्वारा बताई गई विधि का नाम धर्म है। ठीक है? धर्म। अब हम इससे आगे आते हैं कि ये जो वेदा आद शास्त्र है ये हमको प्राप्त कहां से हो रहे हैं? गुरु शिष्य परंपरा से। ठीक है? अब बात यहां पर आती है। अच्छा गुरु शिष्य परंपरा में फिर उसके बाद गुरु के और भी बहुत सारे पहचानने के वो है कि गुरु को आप किस किस तरह से पहचाने? शास्त्र में भी दिया हुआ है कि वो लक्षण संपन्न सन्यासी होना चाहिए। परंपरा से होना चाहिए। श्रुति स्मृति शास्त्रों में सामंजस्य की शिक्षा देने वाला होना चाहिए। और अंतत गत्वा अपने शिष्य का जो अज्ञानता रूपी अंधकार है। गु का मतलब अंधकार और रू का मतलब निकालने वाला। यानी कि वो अपने शिष्य को अंधकार से निकाल देने वाला होना चाहिए। यह हो गया गुरु। तो अब जैसे आपने जो बात कही है कि जीसस जो है वह विष्णु ही है। जीसस जो है वो विष्णु ही है। तो विष्णु कौन है? ये आपको कहां से पता चलता है? जो शास्त्र
00:45:28:21 हमें गुरु शिष्य परंपरा से प्राप्त हुए हैं। अब गुरु से आपने शास्त्र हैं। तो जो उस शास्त्र की व्याख्या है वो भी आपको गुरु से ही लेनी पड़ेगी। अगर हम यह सोचे कि गुरु के विपरीत जाकर के गुरु परंपरा के विपरीत जाकर के शास्त्र की व्याख्या करें या स्वीकार करें गुरु शिष्य परंपरा के विपरीत जाकर के यदि हम शास्त्र की व्याख्या स्वीकार करें तो क्या होगा कि हमारा उन शास्त्रों पर बिलीव करना ही सिद्ध नहीं होगा। जैसे कि कोई यह कह रहा है कि गुरु परंपरा से कहा जा रहा है कि जीसस जो है वो विष्णु नहीं है। ठीक है? मगर सामने वाला कह रहा है कि नहीं नहीं हम बता रहे हैं कि यहां पर जो है इन्होंने मिटा दिया है, प्रक्षिप्त कर दिया है, मिला दिया है, शास्त्रों का अर्थ बदल दिया है। पर हम बता रहे हैं कि इन शास्त्रों के अनुसार ही जीसस ही विष्णु है। ठीक है? तो बात ये आती है कि विष्णु का अस्तित्व आपको किसने दिया? शास्त्र ने। शास्त्र आपको किसने दिए? गुरु ने। तो आप अगर गुरु का विरोध कर रहे हो कि गुरु अज्ञानी है, झूठा है, लोभी है तो फिर उसके द्वारा दिए गए शास्त्री सामग्री पर आपका विश्वास होना सिद्ध नहीं होता। तो कोई भी आपको
00:46:44:02 परंपरा के विरुद्ध जाकर के यह नहीं कह सकता कि भैया विष्णु ही जीसस है या जीसस ही विष्णु है। क्यों नहीं कह सकता? क्योंकि वो गुरु शिष्य परंपरा के विरुद्ध है। दूसरी बात अब स्वतंत्र रूप से जीसस को देख लेते हैं। तो जीसस जो है वो सर्वशक्तिमान सिद्ध नहीं होते। कई प्रकार के ऐसे प्रकरण है जिससे कि जीसस का या बाइबल के ईश्वर का जीसस को तो छोड़ ही दो। वो सर्वशक्तिमान सिद्ध नहीं होते। क्यों नहीं होते? क्योंकि वह देश कृत बाधा से बाधित है। जीसस हर जगह नहीं है। सर्वव्यापक नहीं है। जीसस जो है या बाइबल का ईश्वर सर्व व्यापक नहीं है। वो तो कहते हैं कि ओमनीपोटेंट है। कहां लिखा? कहां लिखा है? मतलब वो बोल तो देते हैं। नहीं उनसे पूछिए आप कहां लिखा है बाइबल में? वो सर्व्यापक नहीं है। वो देश कृत काल देश कृत बाधा से बाधित है। वो सर्व्यापक हो जाएगा तो वह तो काफी इधर आ जाएगा। सर मैं एक बात पूछना चाहता हूं क्योंकि वो प्रचार करते हैं। कोई एक
00:47:59:06 एग्जांपल दे दीजिए जहां पर वो बाधित हो रहा है। एक एग्जांपल आप उनके ग्रंथ से दे सकते हैं जहां पर वह बाधित हो रहा है। मतलब सबसे पहली बात तो यही है। आप यही पूछ लीजिए। क्या ईश्वर झूठ बोल सकता है? यही बाधित हो जाएगा वो। अच्छा वो शैतान का कासेप्ट है। यही बाधित हो जाएगा। वो जीसस जो है वो झूठ बोल सकते हैं कि नहीं? यही बाधित हो जाएगा। अपारय ग्रंथ है नहीं। नहीं नहीं फिर तो वो कहेंगे कि भगवान कैसे झूठ बोल सकते हैं? फिर वो प्रश्न आ जाएगा। मैंने अभी आपको बताया ना जो जो सर्वशक्तिमान है वो किसी भी प्रकार की बाधा से रहित है। देश कृत कालकृत परिस्थिति कृत ये आप जो झूठ ना बोलने वाली बात बोल रही है परिस्थिति कृत बाधा है। ठीक है? हमारे भगवान कौन है जो श्री कृष्ण के रूप में मोहिनी का अवतार लेते हैं। छल करते हैं। करते हैं ना? काल्यावन को छल से काल्यावन को छल से मारते हैं तो किसी भी प्रकार की बाधा से बाधित नहीं है। अबाध्य सर्वशक्तिमान ईश्वर है। हां जो हमें जो ग्रंथ प्राप्त है वो अपषय ग्रंथ है। वो ईश्वर की स्वास भूत है। परंतु बाइबल का रचित होना सिद्ध है। किसके
00:49:14:16 द्वारा कहा गया है बाइबल? पॉल किसके द्वारा? पॉल द्वारा पॉल टीचिंग। हां जिसके भी द्वारा जिसके भी द्वारा मगर वो रचना सिद्ध होती है। पौरुष है। इसके अलावा बाइबल जब आप पढ़ेंगे, बाइबल जब आप पढ़ेंगे तो उसमें बहुत सी ऐसी चीजें आपको मिल जाएंगी जहां पर यह कहा जा रहा होगा कि ईश्वर हर एक के शरीर में नहीं है। हर एक के हृदय में नहीं है। या फिर अभी कुछ दिनों पहले जो है एक क्रिश्चियन लड़का ही आया था जिससे हमने पूछा था कि क्या ईश्वर सब जगह विद्यमान है? तो उसने कहा कि जो अच्छी जगह नहीं है वहां ईश्वर नहीं है। जो अच्छी जगह नहीं है वहां ईश्वर नहीं है। तो क्या वो ईश्वर केवल मतलब पृथ्वी में जो बुरी जगह है वो सत्ता से बाहर है। तो ये यही तो बात है। जो लोग जो लोग अपने ईश्वर को इस तरह से बाधित करते हैं। देश कृत बाधा से बाधित कर लेते हैं। अब वह ईश्वर तो वहां है नहीं। अब दिक्कत यह आएगी। वह कहेंगे यह कि फिर भी उसका कंट्रोल वहां है। कहेंगे ना जहां ईश्वर नहीं है वहां भी उसका कंट्रोल है। जब वो ऐसा कहेंगे
00:50:29:27 तो उनको यह मानना पड़ जाएगा कि ईश्वर नहीं है उसकी शक्ति वहां है। क्या मानेंगे? ईश्वर नहीं है। उनकी शक्ति वहां है। अब शक्ति मान ली। इसका मतलब ईश्वर तो एक हिस्से में है। उसकी शक्ति सर्वव्यापक है। अच्छा। ठीक है? अब जब सर्वव्यापक शक्ति हो गई और शक्ति और ईश्वर में अंतर है तो हमें यह मानना पड़ेगा कि जितना कंट्रोल ईश्वर का वहां पर है जहां पर वो स्वयं है उतना कंट्रोल ईश्वर का वहां नहीं है जहां पर वो नहीं उसकी शक्ति है। अच्छा हां तो बाधित हो गया। बाधित हो गया ना? क्योंकि जहां पर उसकी शक्ति है वहां वो वो सब कुछ नहीं कर सकता। जहां पर वह स्वयं है वह कर वहां कर सकता है। यही से बाधित हो गया। सर फिर एक सवाल आता है फिर वो जो आपने कहा तो प्रकृति और पुरुष में ये जो अंतर है ना मैंने वो शंककारिका को एग्जांपल दिया। बहुत लोग उसका भी इस्तेमाल कर देते हैं। तो उस पर भी थोड़ा प्रकाश डाल दीजिएगा। मैं आपको जिस स्ट्रक्चर में समझाने का प्रयास कर रहा हूं उसमें समझिए है ना अच्छा तो
00:51:44:28 इसमें बात ये आती है कि जीसस या बाइबल का ईश्वर कोई भी आप मान ले वो क्या कहते हैं उसको यहोवा या इस्लाम का ईश्वर वो सर्वव्यापक नहीं है और यहीं पर उसका खंडन हो जाता है जब वो सर्व्यापक नहीं है तो वह सर्वशक्तिमान सिद्ध नहीं होगा और अगर सर्वशक्तिमान सिद्ध करना है तो उसको आपको सर्व्यापक कहना होगा और यदि सर्व्यापक कहेंगे तो आपको कुरान और बाइबल की सीमा से बाहर आना पड़ेगा। कुरान और बाइबल की सीमा से बाहर आना पड़ेगा। इसके [गला साफ़ करने की आवाज़] अलावा यह जो परिस्थिति बाधाएं हैं कि ईश्वर ऐसा कर सकता है कि नहीं? वो किसी को भटका सकता है कि नहीं। तो बाइबल और कुरान दोनों में ही ईश्वर के द्वारा भटकाना भी सिद्ध है। ठीक है? मगर वह यही कहेंगे कि ईश्वर भटकाता नहीं है। यदि भटकाता नहीं है तो फिर भटकाने वाले लोगों को किसने बनाया? यदि ईश्वर भटकाता नहीं है तो भटकाने वाले लोगों को किसने बनाया? अच्छा जब वो बना जब वो बना रहा था भटकाने वालों को तो अगर वो कहे कि वो तो उन्होंने अपने मन से भटकाया। ईश्वर ने नहीं बनाया। जैसे एक तर्क दिया जाता है कि भैया फ्री विल फ्री विल
00:53:00:16 जैसे एक तर्क दिया जाता है कि तलवार बनाने वाले का कोई दोष नहीं है। उसको गलत तरीके से यूज करने वाले का दोष है। तो तलवार बनाने वाले का तब दोष होता है जब उसको ये ज्ञात है कि इस तलवार से इसको ले जाने वाला क्या करेगा। अच्छा है ना? तो या तो यह मान लो कि आपका जो ईश्वर है उसको मालूम नहीं है आगे क्या होने वाला है। तो यहां पे काल कृत बाधा से बाधित हो गया। और या फिर यह मानो कि उसको मालूम था कि तलवार से क्या होने वाला है। तो यहां पर जो है फिर वह लोग डाउन हो जाएंगे। अब हमारा क्या है यहां पर कि ईश्वर सत भी बना रहा है। सत भी बना रहा है। अच्छे बुरे सबको बना रहा है। तो हमारा कांसेप्ट यहां पर यह है कि वास्तविकता में यह सब कुछ माया है। प्रपंच है। वास्तविकता में कहीं किसी को कोई दुख है ही नहीं, तकलीफ है ही नहीं। तो इसलिए यहां पर होने वाली किसी भी गतिविधि का दोष ईश्वर को नहीं लगता क्योंकि उसको मालूम है यह सब कुछ माया है, नकली है, नाटक है। जैसे कई बार हमें क्यों दुख होता है? जैसे कई बार किसी जैसे कई बार किसी अप्राप्त चीज को देख के अप्राप्त वस्तु को
00:54:15:18 देख के एक बच्चे को दुख हो रहा होता है पर उसके माता-पिता हंस रहे होते हैं कि देखो फालतू की चीज के लिए रो रहा है तो इसी बात को भगवान कहते हैं नैन चिनती शस्त्राण नैन दति पावका ना चैनम क्लेो ना शोषति मारता ठीक है तो अब बात हमें दुख क्यों हो रहा है? क्योंकि हम अज्ञानता में फंसे हुए हैं। माया में मगर भगवान तो नहीं फंसे हुए हैं। उनको मालूम है कि माया है। जैसे मान लीजिए एक वीडियो गेम आप खेल रहे हैं तो वीडियो गेम की दुनिया को आप सच समझने लगे। तो आपको क्या होगा? वहां पर दुख होगा। दुख होगा। गट्टा आएगा तो आपको डर लगेगा। और यदि कोई ऐसा हो जिसने अभी उसको सच नहीं समझा है और वो सारा सब कुछ देख रहा है तो आप तो दुखी हो रहे हो उन गड्ढों से वो वो दुखी होगा क्या जिसको मालूम है कि वो वीडियो गेम है नहीं होगा नहीं होगा नहीं होगा तो तो हमारा कांसेप्ट ये है कि कहीं भी कुछ भी होने का दोष ईश्वर पे इसलिए नहीं लगता है समस्त कर्म कर्म कर्मों को करने वाला होते हुए भी तू मुझे अकर्ता जान समस्त कर्मों को करने वाला होते हुए भी तू मुझको अकर्ता
00:55:30:24 जानता। अकर्ता क्यों? क्योंकि उसे मालूम है कि यहां कुछ हो नहीं रहा है। इसलिए किसी भी कर्म के फल में वो आसक्त नहीं है। उसको कुछ चाहिए नहीं। क्योंकि मालूम है सब नाटक है। हम लोग कौन है जो इसको रियल समझ रहे हैं। अच्छा। अब यह जो बात है कि अभी तो हमको पता चल गया कि अनरियल है। फिर हमें दुख क्यों हो रहा है? क्योंकि अभी हमें शब्द प्रमाण से अनुमान प्रमाण से मालूम पड़ा है कि अनरियल है। कैसे मालूम पड़ा है? शब्द से किसी ने कहा तो हमने मान लिया कि अनरियल है या अनुमान लग गया। अभी तक हमें फील नहीं हो रहा है। यह अनरियल है। अनरियल फील करना मोक्ष है। अनरियल फील करना ही मोक्ष है। ठीक है ना? तो ये सारी चीजें जब आपको जब आप इन कसौटियों पर खरा उतारेंगे तो जो बाइबल का ईश्वर है वो सर्वशक्तिमान सिद्ध नहीं होगा। सर्वव्यापक सिद्ध नहीं होगा। इस प्रकार से वो ईश्वर ही सिद्ध नहीं होगा। अब मैं बता रहा हूं मैंने शुरू की चीजें क्यों बताई थी? जब वो सर्वशक्तिमान सिद्ध नहीं हुआ, सर्वव्यापक सिद्ध नहीं हुआ तो वो सच्चिदानंद स्वरूप सिद्ध नहीं हुआ। नहीं हुआ ना? तो इसका मतलब कि मनुष्य को जो चाहिए जो हम प्रूफ कर सकते
00:56:46:02 हैं कि तुझे यह चाहिए वो जो उसको जो चाहिए वो सिद्ध नहीं होता। बाइबल का ईश्वर, इस्लाम का ईश्वर सिद्ध नहीं होता। और जब वह सिद्ध नहीं होता तो फिर ऐसी चीज को प्राप्त करने के लिए बताई जाने वाली जो विधि है नियमावली डूस एंड डोंट्स जैसे मान लीजिए कि हमें चाहिए पानी। और पानी की जगह हमको कहा जाए कि मैं तुम्हें पेट्रोल दे रहा हूं। अच्छा। केरोसिन दे रहा हूं। मदिरा दे रहा हूं पर पानी नहीं दे रहा। ठीक है? आपको चाहिए पानी परंतु वह पानी की जगह पर और कोई लिक्विड पदार्थ दे रहा है। सरसों का तेल दे रहा है और बता रहा है कि तुम तुम जो है सरसों का तेल प्राप्त कर लो और जो है यही है जो भी है। तो हमें जब पानी चाहिए तो हम सरसों के तेल को प्राप्त कराने वाला मार्ग क्यों अपनाएंगे? आया [नाक से की जाने वाली आवाज़] आपको? इसी प्रकार से जब हमें सच्चिदानंद स्वरूप चाहिए, परमेश्वर चाहिए तो हम बाधित एंटिटीज को प्राप्त कराने के निमित्त बताई गई जो डस एंड डोंट्स की नियमावली जिसको आप रिलीजन कहते हो, जिसको आप मजहब कहते हो, जिसको आप दीन कहते हो, हम वो
00:58:01:06 क्यों एक्सेप्ट करेंगे? ठीक है? तो सर्वशक्तिमान सर्वव्यापक सिद्ध ना होने से वो ईश्वर ही सिद्ध नहीं होगा। जब वो ईश्वर ही सिद्ध नहीं होगा तो जीव की चाह का वास्तविक विषय सिद्ध नहीं होगा और जब वो जीव की चाह का वास्तविक विषय सिद्ध नहीं होगा तो उसके उसको प्राप्त करने के निमित्त बताए गए जो उनकी अपनी नियमावली है वो धर्म सिद्ध नहीं होगी ठीक है ठीक है और फिर वो जो आपके ग्रंथ है वो वाले वो आपके लिए व्यर्थ हो जाएंगे
00:58:35:06 तो ये एक स्ट्रक्चरल कांसेप्ट है किसी भी सनातन विरोधी जो पॉलिसी हो उसको नष्ट करने का तीन चीजें आपको रखनी है सामने सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म अच्छा इन दोनों चीजों को प्राप्त कराने के लिए हमें शाश्वत नियमावली चाहिए सर एक बार रिपीट करें सर्वशक्तिमान धर्म और परम शक्तिमान सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष और शाश्वत धर्म अच्छा ठीक है
00:59:15:13 जो जो यहोवा है उसमें एक बाधा नहीं है यहोवा या जो भी आप आजकल इन्होंने क्या कर दिया क्या करते हैं ये अपनी बाइबल को अपडेट करते रहते हैं जैसे कल तक वो सर्व्यापक नहीं था मगर आज आप बता रही है कि वो सर्व्यापक भी है। कल तक वो जो है अवतार नहीं लेता था। अब आप बता रही है कि वो लोग जीसस को अवतार बताने लगे हैं। है ना? परंतु जो वास्तविक क्रिश्चियनिटी है उसमें ना ही ईश्वर अवतार लेता है वो और ना ही वह सर्वव्यापक है क्योंकि उनका ये मानना है कि ईश्वर सर सन ऑफ गॉड तो अवतार ही नहीं है मतलब वो अलग है क्या सन ऑफ गॉड और अवतार का कांसेप्ट अलग है अवतार जब ईश्वर स्वयं आता है और सन ऑफ गॉड कि भाई उसने किसी को भेजा है बनाया है वो सन ऑफ गॉड हुआ ईश्वर स्वयं आता है और सन ऑफ गॉड में अंतर है। ठीक है? अच्छा वो स्वयं नहीं आता है। वो क्या ट्रायून गॉड है? मतलब वो अलग होता है क्या? मतलब सन सन एंड फादर क्या अलग होता है? ये इस सन ऑफ गॉड मतलब मतलब ये तो कहना पड़ेगा ना कि वो उसकी क्रिएशन है। वो स्वयं क्रिएटर नहीं है। सन ऑफ गॉड सन यानी कि क्रिएशन।
01:00:31:15 पुत्र। अच्छा। हां। अब वो बायोलॉजिकल पुत्र नहीं है बट है तो पुत्र ना अच्छा ठीक है तो ये चीजें आपको ध्यान रखनी है जिससे कि आप उनके समक्ष अपनी बातें रख पाओ कोई भी हो केवल क्रिश्चियनिटी की बात नहीं है संसार का कोई भी सनातन विरोधी तंत्र इन तीन चीजों से ही मात खा जाएगा केवल तीन चीजें सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष और इन दोनों को प्राप्त करने के निमित्त जो है धर्म जो होना चाहिए वह शाश्वत होना चाहिए। शाश्वत अब शाश्वत इसके बारे में भी बहुत गहरे गहरे वो है तर्क कि वेद जो है अपुरुष है क्योंकि उनका कर्ता सिद्ध नहीं होता। उनका कोई कर्ता है ही नहीं। कर्ता क्रिएटर रचने वाला सिद्ध ही नहीं है। अकर्ता कोई कर्ता नहीं है उनका। ठीक है सर वो तो कहा जाता है कि वेदव्यास जी ने रचा था नहीं रचा रचा नहीं व्याख्या की है व्याख्या की है लिपिबद्ध किया है रचा नहीं और और ऋषियों ने भी
01:01:46:16 जो इनको हमारे ब्रह्मा जी को स्वास भूत में प्राप्त होते हैं मतलब दर्शन करते हैं रचते नहीं है कि हमें ये सुनाई दिया या ऊपर वाले ने पैगाम भेजा है या ऐसा है वैसा है वो सब नहीं ठीक है सर और एक दो चीज बस क्लियर कर दीजिए भविष्य पुराण में क्या जीसस है भविष्य पुराण मिले मिलेच्छ धर्म को फैलाने वाले के रूप में मिलेच्छ मतलब जो धर्म साधना मतलब जिससे मोक्ष नहीं मिलेगा ऐसी चीजों को और क्या कभी निश्चय ऐसा है ऐसा ऐसा है घटनाओं का घटित होना प्रमाण नहीं होता है। उनको शास्त्रों द्वारा धर्म के रूप में स्वीकार किया जाना प्रमाण होता है। अब घटनाएं तो यह भी है कि रावण था रामायण में। तो रामायण में रावण के होने से क्या रावण के द्वारा कही और की जाने वाली चीजों को धर्म मान लेंगे। नहीं ना? तो धर्म किसे मानेंगे? जब राम को कहा जाएगा कि रामो विग्रहवान धर्मः तब उनके द्वारा की जाने वाली चीजों को हम धर्म
01:03:01:22 मानते हैं। ठीक है। हां सर पर एक और चीज है वो धीरे बहुत बार ये करते हैं कि हिंदू धर्म के बहुत सारे कांसेप्ट को ले लेते हैं। मतलब इस्लाम जो नहीं करता है वो ईसायत करता है। बहुत सारे कांसेप्ट को ले लेते हैं। मतलब यद्वैत पर भी बहुत सारे आपके अमेरिकन लेफ्टिस्ट आते होंगे या वह इस चीज को लेकर के अपना तर्क प्रस्तुत करते हैं। बहुत ऐसे भी लोग हैं आप जो कह रहे हो उसको लेकर के तर्क आप लाइए तो मैं तो मैं आपको बताऊं उसका उत्तर क्या है? उत्तर आप लाए तो सही। अच्छा ठीक है और मैंने एक दैत्य वाला कहा था जहां पर प्रकृति और ईश्वर थोड़ा वो अलग हो जाता है ना प्रकृति और पुरुष तो वहां पे वो दैतवाद को भी एक मैं यहां पे द्वैत हमारा व्यवहार है द्वैत हमारा व्यवहार है और अद्वैत हमारा प्राप्तव्य है व्यवहार क्या है कि जब तक हम अद्वैत को नहीं मानेंगे तब तब तक सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म यह सब सिद्धि नहीं होती। अच्छा तो हमारे अंदर यदि परम स्वतंत्र मोक्ष की
01:04:16:26 इच्छा आ रही है। उसी से अद्वैत की सिद्धि हो जाती है। सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर से ही अद्वैत की सिद्धि हो जाती है। तो यह तो एक अलग बात रही। मगर द्वैत और अद्वैत में अंतर इतना है कि हमें काम कैसे करना है? द्वैत के अनुसार कि भगवान और मैं अलग-अलग है। मैं भक्त हूं वह भगवान है। यह द्वैत हो गया। और फल स्वरूप प्राप्त क्या होगा? कि मैं भगवान में जाकर के मैंने भगवान में भगवान के संग एक ही भूत हो गया। ये उसका फल है। ठीक है? जैसे कि ठीक है। जैसे कि जैसे कि
01:04:54:21 जैसे कि हम जब हमें भूख लगती है तो हम भोजन की तलाश करते हैं। ठीक है? तो ये एक तरीके से हो गया व्यवहार। भोजन को तलाश करना। और प्राप्त क्या होता है? फल स्वरूप भोजन। कैलोरी। हां। कैलोरी। भूख हमारी किससे मिटती है? कैलोरी। कैलोरी से तो यह हो गया प्राप्तव्य। अब यह जो कैलोरी है यह सीधे-सीधे हमारे लिए व्यवहारिक नहीं हो सकती। सीधे-सीधे कैलोरी के लिए हाथ पैर मार सकते हैं क्या? नहीं मार सकते हैं। हां तो द्वैत के मार्ग पर चलके अद्वैत प्राप्त होता है। ठीक है ना? अच्छा नहीं। मेरा मेरा मतलब है कि आप यहां पे मैं वो इस वाला बात बताने वाला है जो अपने आपको मधुब संप्रदाय से बताते हैं। तो वो तो मतलब आपने भी बहुत सारे वीडियो बनाया है। वो विदेशी वाला पाठ छोड़ करके वह तो मतलब ईसायत के भगवान और उसको लेकर के वह दैत्यवाद वाला चुक्ति दिखाता है ना। इसलिए मैंने यह बात आपको बताया।
01:06:06:02 शंका क्या है? शंका यही है कि जब वो वो यह नहीं मानते हैं कि भगवान में लीन हो जाना है। वो मानते हैं कि आप भगवान के भक्त बन जाओगे और लीन नहीं होंगे। यह गलत बात है। देखिए देखिए ऐसा है कि यह एक चर्चा का एक अलग विषय हो जाता है। फिर वही वाली बात आ जाएगी कि ईश्वर कहीं पर ऐसी जगह है जो ईश्वर और जीव में स्थान का या देश कृत कालकृत या किसी परिस्थिति कृत भेद है। और जब ऐसा मानेंगे तो वहां पर बाधा आएगी। दूसरी बात यह है कि मैं मैं यह मान लेता हूं कि भगवान में लीन नहीं होंगे। ठीक है? अच्छा भगवान सामने खड़े हैं तो आपको मोक्ष हो गया कि नहीं हुआ? भगवान से दूर रह के भगवान के सामने पहुंच के मोक्ष को मानेंगे कि नहीं मानेंगे? मानेंगे। मानेंगे ना? मानेंगे। यानी कि भगवान वो सामने खड़े हैं और हमें सुख प्राप्त हो रहा है। हां। सच्चिदानंद हां सच्चिद प्राप्त हो रहा है। प्राप्त हो रहा है ना? इसका मतलब जो वो भगवान खड़े हैं वह आपका साधन मात्र है जो ऐसा कह रहे हैं क्योंकि उनके बिना आप सुखी
01:07:21:06 हो वो तो दूर है उनको देख के आप सुखी हो रहे हो भगवान क्या हो गए साधन साध्य थोड़ी ना हुए साधन ही तो हो गए मतलब कि वो आपका एक इंस्ट्रूमेंट हुए अच्छा भगवान आपके एक इंस्ट्रूमेंट सिद्ध हुए ना फिर जब उनके साथ एक ही भूत हुए बिना आप सुख का अनुभव कर रहे मतलब आपने जो भी किया है वह अपने लिए किया। आप सुखी हो गए। वह वहां खड़े हैं। और आपकी भक्ति तो तभी सिद्ध होती है जब आप अपने आप को भूल के उनमें समा गए। अच्छा ठीक है। है ना? तो वो चर्चा के अलग बहुत सारे विषय हो जाएंगे। आप हमारी क्लासेस में भी आ सकते हैं। निशुल्क क्लासेस चलती है। आपने अपना इशू बताया था बंगाल से। वो अभी मुझे थोड़ा काम पे जाना है। अगर बंगाल में अभी तो ठीक ही है परिस्थिति। बाद में मैं बात करता हूं। अभी थोड़ा काम है मेरा। थैंक यू। ठीक है। बहुत-बहुत आभार आपका। ठीक है। तो ये थी ये बहुत दिनों से संपर्क में थी और
01:08:45:27 काफी दिनों से संपर्क में थी ये और काफी रिक्वेस्ट कर रही थी कि भाई आए और इस तरह से इन्होंने अपनी बात को रखा था कि हमने इन्हें क्लासेस में लेने की बजाय यहां पर बुलाना उचित समझा जिससे कि इनकी जो वो क्रिश्चियनिटी वाली जो कहानी है वो थोड़ी सी आप लोगों को ज्ञात हो। बाकी ठीक रहा आज का समय देने के लिए सबको आभार। सभी को जय श्री राम।
01:09:35:20 [गला साफ़ करने की आवाज़]
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