1
00:00:01,040 --> 00:00:05,440
तो सभी को जय श्री राम। आशा करता हूं आप सभी कुशल पूर्वक

2
00:00:05,440 --> 00:00:09,840
होंगे। अ

3
00:00:09,840 --> 00:00:14,320
जैसा कि आप सभी को पता ही है और आप लोगों को आभास हो गया होगा

4
00:00:14,320 --> 00:00:18,560
कि आज इस लाइव में क्या होने वाला है। हमें

5
00:00:18,560 --> 00:00:23,680
काफी दिन से व्यस्त थे। अन्य कई सारे प्रकल्प हैं और

6
00:00:23,680 --> 00:00:28,720
बहुत सारे मोर्चे भी खोल रखे हैं। तो

7
00:00:28,720 --> 00:00:32,960
इस विषय के लिए हमें समय विशेष रूप से नहीं मिल

8
00:00:32,960 --> 00:00:37,520
पा रहा था। पर आज हमने कहा कि भाई रविवार का दिन है तो हम

9
00:00:37,520 --> 00:00:42,880
सार्वजनिक रूप से घोषणा कर देते हैं कि रामपाल

10
00:00:42,880 --> 00:00:46,880
जो जेल से बाहर आ गया है और से बाहर

11
00:00:46,880 --> 00:00:50,960
आने में क्या है कि हमारे लिए बड़ी सुविधा

12
00:00:50,960 --> 00:00:55,200
हो गई क्योंकि जब तक वह जेल में था

13
00:00:55,200 --> 00:00:59,440
तब तक उससे प्रश्न करना और ज्ञान

14
00:00:59,440 --> 00:01:03,520
चर्चा करना वो तथाकथित जो ये लोग किया

15
00:01:03,520 --> 00:01:07,840
करते हैं वो काफी मुश्किल मुश्किल था।

16
00:01:07,840 --> 00:01:11,920
वहां अंदर जाकर के उसके साथ ज्ञान चर्चा करना और उनके तथाकथित वह

17
00:01:11,920 --> 00:01:16,320
जो अड्डे हैं जहां पर यह दावा करते हैं कि

18
00:01:16,320 --> 00:01:20,320
अ हमारे साथ चलिए हम डायरेक्ट आपकी बात

19
00:01:20,320 --> 00:01:24,320
करा दें तो वहां पर आपके साथ क्या-क्या हो सकता है वो आप

20
00:01:24,320 --> 00:01:28,640
लोग समझ सकते हैं। वहां पर वहीं पर कुछ ऐसा हुआ था जिसके कारण

21
00:01:28,640 --> 00:01:33,760
मुकदमा चल रहा था और अभी भी चल ही रहा है और

22
00:01:33,760 --> 00:01:36,160
अ

23
00:01:36,160 --> 00:01:40,880
तो उन अड्डों में जाकर के और इनकी तथाकथित

24
00:01:40,880 --> 00:01:44,960
काल्पनिक वो प्रत्यक्ष वार्ता करना तो मुश्किल था। हमारे लिए तो

25
00:01:44,960 --> 00:01:48,960
संभव नहीं था। पर अब जब रामपाल बाहर आ गया है और जैसा कि

26
00:01:48,960 --> 00:01:53,120
उसने पूर्व में बड़ा डंका पीटा था कि भैया हमने

27
00:01:53,120 --> 00:01:57,600
जो है शंकराचार्यों को चैलेंज दिया है और कोई भी आया नहीं एक भी शंकराचार्य

28
00:01:57,600 --> 00:02:01,840
नहीं आया तो हम भी आज उसी प्रकार

29
00:02:01,840 --> 00:02:06,800
से एक चुनौती सार्वजनिक रूप से दे रहे हैं रामपाल को यद्यपि

30
00:02:06,800 --> 00:02:10,880
कोर्ट में कारवाई तो चल ही रही है अगर ऐसे नहीं तो वहां तो आना ही है तुमको

31
00:02:10,880 --> 00:02:15,520
जवाब देने के लिए आज नहीं तो कल बकरे की मां कब तक खैर मनाएगी

32
00:02:15,520 --> 00:02:19,600
वो कहते हैं ना रामपाल का हाल अब वो है आसमान से गिरा

33
00:02:19,600 --> 00:02:23,760
और खजूर पर अटका वाला क्योंकि वो जमानत पर बाहर

34
00:02:23,760 --> 00:02:28,080
आया है। जमानत पर वही आर्य समाज ब्रह्मा कुमारी और रामपाल का जो मोक्ष

35
00:02:28,080 --> 00:02:31,360
है जहां से वापस आते हैं तो जमानत पर

36
00:02:31,360 --> 00:02:36,000
वो आया है और

37
00:02:36,000 --> 00:02:40,000
अब क्या है कि बहुत से लोग और ऐसे

38
00:02:40,000 --> 00:02:44,240
भी लोग जो पूरी तरीके से प्रामाणिक नहीं है मतलब परंपरा

39
00:02:44,240 --> 00:02:48,400
प्राप्त आचार्यों की शरण में नहीं परंतु वो रामपाल के कंपैरेटिवली

40
00:02:48,400 --> 00:02:52,560
अधिक बुद्धिमान है अधिक तार्किक हैं और अधिक शास्त्रों

41
00:02:52,560 --> 00:02:56,880
का अध्ययन किए हुए हैं अधिक संस्कृतज्ञ हैं। तो ऐसे

42
00:02:56,880 --> 00:03:00,880
जितने भी लोग हैं वह सब रामपाल पर भारी पड़ने

43
00:03:00,880 --> 00:03:04,880
वाले हैं। रामपाल किसका किसकी चुनौती स्वीकार करेगा? हम

44
00:03:04,880 --> 00:03:08,880
तो खैर ऑथेंटिक रूप से भी उसको चुनौती दिए हुए हैं। वो नोटिस तो गया ही

45
00:03:08,880 --> 00:03:12,880
था ना जेलर के पास। तो वो तो अगर वो हमारी चुनौती

46
00:03:12,880 --> 00:03:16,880
को स्वीकार नहीं भी करता है तो जेल वहां क्या कहते हैं? हाई कोर्ट में

47
00:03:16,880 --> 00:03:21,520
तो उसको उत्तर प्रस्तुत करने आना ही पड़ेगा। आज नहीं तो कल। वह तो एक अलग बात है।

48
00:03:21,520 --> 00:03:25,680
मगर अभी मैं देख रहा हूं कि बहुत सारे लोग हैं जो उसको चुनौती दे रहे हैं

49
00:03:25,680 --> 00:03:29,840
और अब देखना यह है यह चुनौती को स्वीकार कर रहा है कि नहीं कर रहा है। है

50
00:03:29,840 --> 00:03:33,920
ना? अच्छा हमारी चुनौती की विशेषता क्या है वो आपको

51
00:03:33,920 --> 00:03:37,920
पता ही है। तो चुनौती में जो विषय हैं वो मैं अभी

52
00:03:37,920 --> 00:03:42,080
आपको बता देता हूं। पर इससे पहले एक चीज क्लियर कर दूं कि एक

53
00:03:42,080 --> 00:03:46,160
दिन ऐसा था जब ये लोग बड़ा डंका पीटते थे कि भैया

54
00:03:46,160 --> 00:03:46,660
हमने

55
00:03:46,400 --> 00:03:50,480
शंकराचार्यों को चुनौती दी थी। ज्ञान चर्चा की पर कोई आया

56
00:03:50,480 --> 00:03:55,440
नहीं कि भैया रामपाल

57
00:03:55,440 --> 00:04:00,240
जैसा कोई गवार बुद्धि ठोस बुद्धि व्यक्ति तत्वज्ञ

58
00:04:00,240 --> 00:04:04,560
जो मनीषी हैं शंकराचार्य और तत्वज्ञ

59
00:04:04,560 --> 00:04:08,640
कौन होता है ये इस पर आज हम बात करेंगे। आप ऐसा ना समझे कि केवल एक कोरी चुनौती का

60
00:04:08,640 --> 00:04:12,640
ही है। बहुत इनेटिव लाइव डिस्कशन होने वाला है यह। तो आप लोग

61
00:04:12,640 --> 00:04:16,720
ऐसा ना समझे कि केवल वह चुनौती ही है। इसमें एक प्रॉपर आप एक कुछ

62
00:04:16,720 --> 00:04:22,000
लेकर ही जाने वाले हैं। यहां से तो

63
00:04:22,000 --> 00:04:26,000
मतलब अंत तक बने रहे। कहने का अर्थ यह है। तो

64
00:04:26,000 --> 00:04:31,120
जब इसने यह सब डंका पीटा था तो सोचने वाली बात यह है कि

65
00:04:31,120 --> 00:04:35,600
शंकराचार्य जैसे तत्वज्ञ मनीषी इसके कहने पर

66
00:04:35,600 --> 00:04:39,600
तुरंत इससे संपर्क करें। हां हां भैया रामपाल जी आप कहां पे हो और हम आपके साथ जो

67
00:04:39,600 --> 00:04:43,680
है चर्चा करने को तैयार हैं। हम तो बैठे ही इसीलिए हैं आपके साथ

68
00:04:43,680 --> 00:04:47,760
ज्ञान चर्चा करने के लिए। जिसको अग्न्या का अर्थ नहीं पता

69
00:04:47,760 --> 00:04:52,000
है। अग्न्याया को बताता है वह अगन्या अगन्या

70
00:04:52,000 --> 00:04:56,160
कौन? वो हरियाणा में कहते हैं वो कुंवारी गाय

71
00:04:56,160 --> 00:05:01,360
हम बिन बाई जो बाई नहीं गई है। खैर

72
00:05:01,360 --> 00:05:05,360
तो ये इस तरह से इसको प्रस्तुत करते थे ये लोग

73
00:05:05,360 --> 00:05:09,520
कि भाई देखो जो है शंकराचार्य आए नहीं ज्ञान चर्चा के

74
00:05:09,520 --> 00:05:13,520
लिए इत्यादि इत्यादि। तो आज जो है इसको मैं कर

75
00:05:13,520 --> 00:05:18,480
रहा हूं। मैं चुनौती दे रहा हूं इसको ज्ञान चर्चा के लिए कि रामपाल

76
00:05:18,480 --> 00:05:22,880
भाई तू आ और तूने जितनी चीजें की है ना मैं अभी बिंदुगत

77
00:05:22,880 --> 00:05:26,960
तरीके से बता दूंगा बहुत शॉर्ट है मेरी लिस्ट बहुत ज्यादा ऐसी

78
00:05:26,960 --> 00:05:31,040
चीजें नहीं है कि पता नहीं कहां-कहां से कौन-कौन सा प्रहार आएगा बता

79
00:05:31,040 --> 00:05:35,120
के करूंगा तुझे बता दूंगा यह कर आकर के है

80
00:05:35,120 --> 00:05:37,360
ना सिद्ध तो भाई रामपाल

81
00:05:37,360 --> 00:05:41,360
तूने जो ये सब चीजें की हैं या फिर तेरी अनुपस्थिति में

82
00:05:41,360 --> 00:05:45,360
तेरे लोगों ने जो चीजें प्रस्तुत की हैं। उनको मैंने एक सूत्र

83
00:05:45,360 --> 00:05:49,360
में बांधा है। ऑपरेटर जी से मेरा अनुरोध है कि

84
00:05:49,360 --> 00:05:53,520
वह जरा जो आमंत्रण पत्र है प्रस्ताव पत्र वह

85
00:05:53,520 --> 00:05:59,520
यहां प्रदर्शित कर दें स्क्रीन पर तो मैं बता दूं।

86
00:06:01,920 --> 00:06:06,720
एक भाई साहब कह रहे हैं तू एक ऊंचे संत का

87
00:06:06,720 --> 00:06:11,040
ऊंचा शिष्य है शायद। भाई साहब पहले आप अपनी हिंदी थोड़ी ठीक करें। उषा शिष्य

88
00:06:11,040 --> 00:06:15,680
लिखा है आपने। अच्छा दूसरी बात यह है कि

89
00:06:15,680 --> 00:06:19,680
महाभारत में कहा गया है कि जो व्यक्ति जिस तरह की भाषा जानता हो उसको

90
00:06:19,680 --> 00:06:23,760
उसी तरह की भाषा में समझाना चाहिए। हां यह बात अवश्य है

91
00:06:23,760 --> 00:06:27,920
कि हम अपनी एक मर्यादा होती है शास्त्रों की सीमा

92
00:06:27,920 --> 00:06:32,080
उसके बाहर नहीं जाते। ऐसा नहीं है कि हम किसी को गाली दे रहे हैं। परंतु ऐसा

93
00:06:32,080 --> 00:06:36,480
भी नहीं है कि कोई हमारे देवी देवताओं को तू तड़ाक बोलेगा तो हम उसको तू तड़ाक ना बोले।

94
00:06:36,480 --> 00:06:40,560
ठीक है? और इस बात को भी हम शास्त्रों से सिद्ध कर सकते

95
00:06:40,560 --> 00:06:44,640
हैं। खैर तो अभी सबसे पहले हम चुनौती की बात कर लें

96
00:06:44,640 --> 00:06:49,680
कि हमारा जो चुनौती पत्र है रामपाल के लिए वह क्या है?

97
00:06:49,680 --> 00:06:52,480
तो चुनौती पत्र

98
00:06:52,480 --> 00:06:58,480
में क्या लिखा है? हम पढ़ देते हैं।

99
00:07:02,560 --> 00:07:06,960
यह तथ्य सर्वविदित है कि सतलोक आश्रम प्रमुख

100
00:07:06,960 --> 00:07:10,960
रामपाल को कारागार से प्रतिभ यानी प्रतिभ का अर्थ होता

101
00:07:10,960 --> 00:07:15,040
है बेल। तो प्रतिभ बेल पर मुक्त कर दिया गया

102
00:07:15,040 --> 00:07:19,440
है। उनकी इस मुक्ति के अंतर्नित कारण

103
00:07:19,440 --> 00:07:23,600
एवं उसकी सार्थकता के विषय में तो अलग

104
00:07:23,600 --> 00:07:28,160
से बात हो सकती है। उस कारण को पृथक करते हुए हम सर्वप्रथम

105
00:07:28,160 --> 00:07:32,240
रामपाल को ज्ञान मीमांसा ज्ञान चर्चा हेतु आमंत्रित

106
00:07:32,240 --> 00:07:36,560
करते हैं। वे इस विमर्श में उपस्थित होकर

107
00:07:36,560 --> 00:07:40,880
निम्नलिखित विषयों पर अपनी मान्यताओं को प्रमाण व युक्ति

108
00:07:40,880 --> 00:07:45,120
सहित सिद्ध करें। बहुत शॉर्ट में और सीधी बात करते हैं जब भी

109
00:07:45,120 --> 00:07:49,280
कुछ भी घुमा फिरा के बात नहीं करते हैं। ठीक है? अब क्या-क्या

110
00:07:49,280 --> 00:07:53,280
बातें हैं जो सिद्ध करनी है? सीधी बात स्प्राइट नहीं पीता

111
00:07:53,280 --> 00:07:57,440
पर करता सीधी बात। ठीक है? क्या है? तो पहला

112
00:07:57,440 --> 00:08:00,000
है

113
00:08:00,000 --> 00:08:05,600
भाई नीचे करो जरा। नीचे करिए इसको।

114
00:08:05,600 --> 00:08:09,840
हम पहला है क्या रामपाल के द्वारा

115
00:08:09,840 --> 00:08:13,840
पूजित होने वाला ईश्वर सर्वशक्तिमान है?

116
00:08:13,840 --> 00:08:17,920
सीधी बात सर्वशक्तिमान। ठीक है?

117
00:08:17,920 --> 00:08:22,400
क्या रामपाल द्वारा प्रतिपादित जीव का प्राप्तव्य

118
00:08:22,400 --> 00:08:26,560
जो उसको बताया गया कि तुमको सतलोक मिलेगा। सतलोक की

119
00:08:26,560 --> 00:08:31,120
सतलोक का अनंत जीवन मिलेगा। इत्यादि इत्यादि

120
00:08:31,120 --> 00:08:35,520
वह जो मोक्ष है वह प्रामाणिक है। वह युक्ति युक्त है। क्या वह मोक्ष

121
00:08:35,520 --> 00:08:39,600
ही है? क्या वह मोक्ष सिद्ध होता है? क्या वह

122
00:08:39,600 --> 00:08:43,760
वास्तविक प्राप्तव्य सिद्ध होता है? अच्छा इसमें एक बिंदु

123
00:08:43,760 --> 00:08:48,240
नीचे चला गया पर वो अगला बिंदु ही था। वह क्या है? अब

124
00:08:48,240 --> 00:08:52,240
यह दोनों चीजों में यदि रामपाल का वही है जो

125
00:08:52,240 --> 00:08:56,480
शास्त्रोक्त है, युक्ति युक्त प्रामाणिक है तो तो ठीक है। परंतु

126
00:08:56,480 --> 00:09:00,560
जहां तक हमको मालूम पड़ा है और हमने अभी तक जो मीमांसा की है

127
00:09:00,560 --> 00:09:05,280
उसके आधार पर ना तो रामपाल का ईश्वर वास्तविकता में सर्वशक्तिमान

128
00:09:05,280 --> 00:09:09,440
सिद्ध होता है और ना ही रामपाल द्वारा प्रतिपादित

129
00:09:09,440 --> 00:09:13,440
जो प्रतिपाद्य बताया गया है जीव के लिए मतलब तुमको यह प्राप्त होगा

130
00:09:13,440 --> 00:09:17,440
प्राप्तव्य वो मोक्ष सिद्ध होता है। तो अगर इसको भी वह

131
00:09:17,440 --> 00:09:21,280
मोक्ष कहते हैं। मान लो कि जैसे मैंने कहा

132
00:09:21,280 --> 00:09:25,280
कि भाई जो कबीर है वह माता के गर्भ से जन्म नहीं ले सकता है या अमुक अमुक

133
00:09:25,280 --> 00:09:29,840
कार्य नहीं कर सकता है। फिर उसका सर्वशक्तिमान होना सिद्ध नहीं होता। ठीक है?

134
00:09:29,840 --> 00:09:34,000
तो अब उसका सर्वशक्तिमान होना सिद्ध नहीं होता। तो अब ऐसे में

135
00:09:34,000 --> 00:09:38,000
रामपाल वाले कह नहीं इस कार्य को किए बिना भी हमारा ईश्वर

136
00:09:38,000 --> 00:09:42,000
सर्वशक्तिमान है। जैसे आर्य समाझी कहते हैं। ठीक है? तो हमारा

137
00:09:42,000 --> 00:09:46,400
ईश्वर सर्वशक्तिमान है। तो पहले तो सर्वशक्तिमान पर ही बात होगी।

138
00:09:46,400 --> 00:09:50,800
मोक्ष पर ही बात होगी। और फिर यदि उन्होंने इन दोनों पॉइंट्स

139
00:09:50,800 --> 00:09:54,800
में मतलब अपनी चीजों को सिद्ध नहीं कर पाए तो अब हम आगे चलेंगे।

140
00:09:54,800 --> 00:09:58,800
इस बारे में बात करेंगे कि जो उन्होंने माना है ईश्वर जो उन्होंने

141
00:09:58,800 --> 00:10:02,960
माना है मोक्ष। जो रामपाल ने जिसज रूप में

142
00:10:02,960 --> 00:10:07,120
ईश्वर को मान लिया। जैसे उन्होंने कहा कि हमारा ईश्वर अमुक अमुक कार्य नहीं

143
00:10:07,120 --> 00:10:11,280
कर सकता। परंतु है वह सर्वशक्तिमान है वह हमारा ईश्वर और हम उसकी पूजा

144
00:10:11,280 --> 00:10:15,600
करेंगे। या फिर रामपाल ने कहा कि हमारा जो प्राप्तव्य

145
00:10:15,600 --> 00:10:19,600
है वह मोक्ष सिद्ध नहीं होता है। मगर फिर भी हम उसी मोक्ष के

146
00:10:19,600 --> 00:10:24,080
लिए ईश्वर की पूजा करेंगे। तो मतलब

147
00:10:24,080 --> 00:10:28,400
परिभाषित करने पर ना मोक्ष सिद्ध हो ना ईश्वर सिद्ध हो। परंतु फिर भी

148
00:10:28,400 --> 00:10:32,640
जिस पदार्थ का सेवन वह कर रहे हैं, उस पदार्थ को सर्वशक्तिमान

149
00:10:32,640 --> 00:10:36,480
और मोक्ष नाम देते हुए वह अपनी चीजों को जारी

150
00:10:36,480 --> 00:10:40,480
रखना स्वीकार करता है। अब करेगा ही जाहिर सी बात है।

151
00:10:40,480 --> 00:10:44,640
तो फिर हमारा अगला प्रश्न आएगा यहां पर क्या रामपाल द्वारा

152
00:10:44,640 --> 00:10:46,800
प्रतिपादित

153
00:10:46,800 --> 00:10:50,880
कर जो ईश्वर है और जो धर्म है

154
00:10:50,880 --> 00:10:54,880
क्या उसका ईश्वर उसके ईश्वर और धर्म

155
00:10:54,880 --> 00:10:59,280
का अस्तित्व सिद्ध होता है? समझिए बात को। जब वह मोक्ष को

156
00:10:59,280 --> 00:11:03,440
वैसा मोक्ष सिद्ध नहीं कर पाएगा जो युक्ति और प्रमाण सहित

157
00:11:03,440 --> 00:11:07,680
हो। युक्ति भी है, तर्क भी है उसमें। और जब

158
00:11:07,680 --> 00:11:12,560
वह ईश्वर को युक्ति युक्त और प्रमाण युक्त सिद्ध नहीं कर पाएगा

159
00:11:12,560 --> 00:11:17,360
और मोक्ष को युक्ति युक्त और प्रमाण युक्त सिद्ध नहीं कर पाएगा

160
00:11:17,360 --> 00:11:21,360
यदि तब भी वह अपने उसी ईश्वर को ईश्वर मानने के विषय में

161
00:11:21,360 --> 00:11:25,440
अड़ा रहता है। यदि तब भी वह अपने उसी मोक्ष को मोक्ष मानने के विषय में

162
00:11:25,440 --> 00:11:29,440
अड़ा रहता है तो अगला जो स्टेप आएगा वो आएगा कि अब तुम अपने

163
00:11:29,440 --> 00:11:33,840
इस ईश्वर को सिद्ध कर दो कि वो है। समझ रहे हैं वह वाला

164
00:11:33,840 --> 00:11:37,840
असुतो मास सदगमयात सीधी सी अपनी हमारी जो रूपरेखा है

165
00:11:37,840 --> 00:11:42,080
वह बिल्कुल सीधी रहती है उसमें कोई यह नहीं होता है कि हम सामने

166
00:11:42,080 --> 00:11:46,160
वाले के साथ छल करने वाले हैं कोई कि कोई ऐसा प्रश्न लाने वाले हैं जिसकी

167
00:11:46,160 --> 00:11:50,160
वो तैयारी ना करें ना

168
00:11:50,160 --> 00:11:54,880
झूठे की हद तक और चोर के घर तक ऐसा नहीं करते ना हम

169
00:11:54,880 --> 00:11:57,440
तो

170
00:11:57,440 --> 00:12:01,600
अगर तुम्हारा ईश्वर युक्ति युक्त तुम वहां पर मौन हो गए

171
00:12:01,600 --> 00:12:05,680
निरुत्तर हो गए मगर फिर भी उस ईश्वर के पक्ष में खड़े हो तो अगला आएगा कि अब तुम

172
00:12:05,680 --> 00:12:10,000
अपने रहे सहे ईश्वर को ईश्वर रहे सहे मोक्ष को मोक्ष

173
00:12:10,000 --> 00:12:14,240
और रहे सहे धर्म को धर्म सिद्ध कर दो नहीं कर पाओगे उस

174
00:12:14,240 --> 00:12:18,720
ईश्वर का अस्तित्व ही सिद्ध नहीं होगा जो

175
00:12:18,720 --> 00:12:22,960
जो प्रामाणिक आचार्यों के द्वारा प्रतिपाद्य ईश्वर है उसके विरुद्ध खड़ा

176
00:12:22,960 --> 00:12:27,040
होगा ध्यान रखिए ये बात मैं ये बात पूछता क्यों हूं आपने कभी सोचा

177
00:12:27,040 --> 00:12:31,200
है मैं क्यों पूछता हूं यह बात किसी सामने वाले से जब वो वो

178
00:12:31,200 --> 00:12:35,360
हमारे ईश्वर को मान नहीं रहा होता है। वो अपना एक तथाकथित कपोल

179
00:12:35,360 --> 00:12:39,440
कल्पित मनमुखी ईश्वर को लादना चाहता

180
00:12:39,440 --> 00:12:43,600
है स्वयं को स्थापित करने के लिए। तो मैं मैं यह बात इसलिए

181
00:12:43,600 --> 00:12:47,840
पूछता हूं कि हमारे विरोध में जिस सनातनी ईश्वर

182
00:12:47,840 --> 00:12:52,000
के विरोध में जिस ईश्वर को वो स्थापित कर रहा है उसका वो अस्तित्व

183
00:12:52,000 --> 00:12:56,080
ही सिद्ध नहीं हो पाएगा। क्योंकि वो जीव की चाह का वास्तविक विषय नहीं

184
00:12:56,080 --> 00:13:00,160
होगा। वो इस सवाल का जवाब नहीं होगा। किस सवाल का जवाब? जिस

185
00:13:00,160 --> 00:13:04,320
सवाल के जवाब से ईश्वर की सिद्धि होती है। क्या

186
00:13:04,320 --> 00:13:05,280
है सवाल?

187
00:13:05,280 --> 00:13:09,760
असुतो मा सदगमया तमसो मा ज्योतिर्गमया मृत्युमा गम

188
00:13:09,760 --> 00:13:14,000
इस सवाल के जवाब से ही ईश्वर की सिद्धि होती है। अब

189
00:13:14,000 --> 00:13:18,720
क्योंकि इस सवाल का जवाब क्या है? सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रह्म।

190
00:13:18,720 --> 00:13:23,040
यह इस सवाल का जवाब है। और वह पूर्ण वाला जो हमारा मंत्र है

191
00:13:23,040 --> 00:13:27,120
यह इस सवाल का जवाब है। परंतु जब सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रह्म करेंगे

192
00:13:27,120 --> 00:13:31,520
और पूर्ण वाला करेंगे तो यह चीजें आर्य समाज के ईश्वर पर,

193
00:13:31,520 --> 00:13:36,400
रामपाल के ईश्वर पर, ब्रह्मा कुमारी के ईश्वर पर फिट नहीं होगी।

194
00:13:36,400 --> 00:13:40,560
जो भी इस सर्वशक्तिमान ईश्वर का पारिभाषिक रूप से शब्द

195
00:13:40,560 --> 00:13:44,640
को तो ले लिया पर परिभाषा अपनी दे दी। जो भी रामपाल के

196
00:13:44,640 --> 00:13:49,120
ईश्वर का जो भी सनातन ईश्वर का इस तरह से

197
00:13:49,120 --> 00:13:53,120
विरोध करेगा कि शब्द ले लिया। सनातन से जुड़े हुए शब्दों को ले लिया। मगर

198
00:13:53,120 --> 00:13:57,520
उसके अर्थ में घोल-मोल करके और जो है एक मनः कल्पित

199
00:13:57,520 --> 00:14:01,680
ईश्वर बना दिया। तो क्या होगा कि वह मनः कल्पित ईश्वर कभी भी यह सत्यम

200
00:14:01,680 --> 00:14:05,680
ज्ञानम अंतम ब्रह्म सिद्ध नहीं होगा। वह कभी भी असतो मा

201
00:14:05,680 --> 00:14:09,840
सद्गमया तमसो मा ज्योतिर्गमया मृत्यु मृतम गमया इस

202
00:14:09,840 --> 00:14:13,920
प्रश्न का जवाब उत्तर सिद्ध नहीं होगा। इसलिए तीसरे स्टेप पर यह

203
00:14:13,920 --> 00:14:18,240
प्रश्न आएगा कि क्या रामपाल द्वारा प्रतिपादित

204
00:14:18,240 --> 00:14:20,480
ईश्वर मोक्ष और धर्म का अस्तित्व

205
00:14:20,480 --> 00:14:24,560
सिद्ध होता है। ठीक है? ये थोड़ा सा करेक्शन होगा। कल ये डिस्पैच हो जाएगा

206
00:14:24,560 --> 00:14:28,640
लेटर आश्रम के लिए। अच्छा

207
00:14:28,640 --> 00:14:34,640
जी शास्त्रवाद जी बोले

208
00:14:35,040 --> 00:14:40,480
जी भैया जय श्री राम जय श्री राम

209
00:14:40,480 --> 00:14:44,480
जी भैया ये तो ऐसा देखेंगे अब ये लेटर

210
00:14:44,480 --> 00:14:48,640
जब जाएगा तो क्या परिणाम आता है कुछ नहीं वो आएगा नहीं मुझे

211
00:14:48,640 --> 00:14:53,040
पता है वो आएगा नहीं वो जब उसको घसीट के कोर्ट इत्यादि

212
00:14:53,040 --> 00:14:57,120
के द्वारा जब लाया जाएगा तभी वह आएगा ऐसे नहीं आएगा उसको मालूम है उसका यहां सब खत्म

213
00:14:57,120 --> 00:15:01,600
हो जाएगा। आएगा तो बाकी आ गया तो अच्छी बात है। आप लोगों को एक मनोरंजन

214
00:15:01,600 --> 00:15:05,920
मिलेगा। आनंद मिलेगा। आ गया तो है ना? बिल्कुल बिल्कुल

215
00:15:05,920 --> 00:15:10,000
बिल्कुल हां बाकी आप

216
00:15:10,000 --> 00:15:14,880
हां जी जी जी बोलिए

217
00:15:14,880 --> 00:15:19,360
बोल रहे हैं। आप ही बोलिए आप ही बोलिए। हां हां तो

218
00:15:19,360 --> 00:15:23,600
अब बात आती है कि हिंदुओं को यह सीखना चाहिए, समझना

219
00:15:23,600 --> 00:15:28,560
चाहिए कि किस

220
00:15:28,560 --> 00:15:32,560
दिशा में किसी धर्म विरोधी के समक्ष धर्म का

221
00:15:32,560 --> 00:15:36,640
पक्ष रखें। जो भी धर्म विरोधी है उसके पास

222
00:15:36,640 --> 00:15:40,880
तीन चीजें नहीं होंगी। जो भी धर्म विरोधी है उसके

223
00:15:40,880 --> 00:15:45,600
पास कभी भी तीन चीजें नहीं होंगी। क्या-क्या नहीं होगा? सर्वशक्तिमान ईश्वर,

224
00:15:45,600 --> 00:15:49,840
परम स्वतंत्र मोक्ष और शाश्वत धर्म। तो शुरुआत कैसे

225
00:15:49,840 --> 00:15:54,320
करेंगे अपने धर्म का पक्ष रखने की? क्या तुम्हारा ईश्वर सर्वशक्तिमान है?

226
00:15:54,320 --> 00:15:58,320
क्या तुम्हारे द्वारा मिलने वाला जो मोक्ष है मोक्ष है? शाश्वत मोक्ष

227
00:15:58,320 --> 00:16:02,400
है, शाश्वत मुक्ति है। हां। और तीसरा क्या

228
00:16:02,400 --> 00:16:06,480
जो इस इन दोनों चीजों को प्राप्त कराने के निमित्त

229
00:16:06,480 --> 00:16:10,480
जो तुम विधि दे रहे हो जिसमें शब्द प्रमाण की

230
00:16:10,480 --> 00:16:15,040
बहुत अत्यधिक आवश्यकता है। क्या वो शाश्वत विधि है?

231
00:16:15,040 --> 00:16:19,040
परंपरा प्राप्त विधि है। वो शाश्वतता के अंदर सब आ जाता है। परंपरा प्राप्त इत्यादि

232
00:16:19,040 --> 00:16:23,200
और उदाहरणार्थ वर्णाश्रम इत्यादि। तो यह आपका स्ट्रक्चरल

233
00:16:23,200 --> 00:16:27,280
वे होना चाहिए एक किसी भी विरोधी से बात करने का। तो

234
00:16:27,280 --> 00:16:29,920
हमारा वही है। पहले सर्वशक्तिमान ईश्वर

235
00:16:29,920 --> 00:16:34,240
परम स्वतंत्र मोक्ष और फिर आ गया शाश्वत धर्म सिद्ध करो।

236
00:16:34,240 --> 00:16:38,640
ठीक है? अब यह तो हो गए मुख्य बिंदु यहां पे इनका

237
00:16:38,640 --> 00:16:42,640
जो कोई भी धर्म विरोधी होगा उसकी चटनी बनने वाली है। यहां तक

238
00:16:42,640 --> 00:16:46,640
बन चुकी होगी। अब इसके बाद हम आगे अगला

239
00:16:46,640 --> 00:16:50,720
प्रश्न कह ये कहते हैं क्या रामपाल प्रामाणिक आचार्य है?

240
00:16:50,720 --> 00:16:55,520
ध्यान रखना हमने अभी यह नहीं पूछा है कि रामपाल तत्वदर्शी

241
00:16:55,520 --> 00:16:59,760
है कि नहीं? तत्वदर्शी की कहानी अलग है। अभी हमने चौथा प्रश्न डाला

242
00:16:59,760 --> 00:17:03,760
है। क्या रामपाल प्रामाणिक आचार्य है? तो

243
00:17:03,760 --> 00:17:07,840
प्रामाणिक आचार्य का मतलब है कि शास्त्रों के द्वारा बताए

244
00:17:07,840 --> 00:17:11,920
गए जो चिन्ह हैं प्रामाणिक आचार्य के लिए वही उसमें

245
00:17:11,920 --> 00:17:15,920
घटित होने चाहिए। तो क्या रामपाल प्रामाणिक आचार्य

246
00:17:15,920 --> 00:17:20,320
है? यह चौथा प्रश्न बनेगा। अब यह एक सेगमेंट

247
00:17:20,320 --> 00:17:24,320
हो गया। चार प्रश्न क्या कहते हैं? पांच

248
00:17:24,320 --> 00:17:28,800
प्रश्न एक साथ हो गए। हां, एक और है इसमें। क्या रामपाल

249
00:17:28,800 --> 00:17:32,880
द्वारा प्रतिपादित कर्तव्य और अकर्तव्य का निर्णय ही धर्म है?

250
00:17:32,880 --> 00:17:36,880
हालांकि यह जो प्रश्न है उसमें आ गया जो मैंने बोला अभी क्या

251
00:17:36,880 --> 00:17:40,960
रामपाल द्वारा प्रतिपादित ईश्वर मोक्ष और धर्म का अस्तित्व सिद्ध

252
00:17:40,960 --> 00:17:44,960
होता है। तो इसमें वो तीनों चीजें आ गई। वो अलग-अलग कर लेंगे तो मोक्ष मोक्ष

253
00:17:44,960 --> 00:17:48,960
तो ऊपर कह ही दिया है। धर्म का अस्तित्व सिद्ध वाला प्रश्न

254
00:17:48,960 --> 00:17:53,440
अलग से हो जाएगा। तो ये उसमें उसी में आ गया। अब जो अगला

255
00:17:53,440 --> 00:17:57,600
जो गुच्छा है वह कुछ इसकी जो तथाकथित फेंटसीज हैं

256
00:17:57,600 --> 00:18:01,680
इस पूरे ग्रुप के द्वारा बनाई गई। रामपाल के द्वारा उसका

257
00:18:01,680 --> 00:18:06,160
उसकी फुलझड़ी छोड़ी गई और फिर उसके द्वारा बहुत सारा इधरउधर

258
00:18:06,160 --> 00:18:10,480
वो किया गया कि भाई अरे ब्रह्मा विष्णु महेश

259
00:18:10,480 --> 00:18:14,560
के पिता कौन है? यह है वो है। हम ये

260
00:18:14,560 --> 00:18:18,960
सब बातें अब तो दूसरा वाला इसमें आ जाएगा।

261
00:18:18,960 --> 00:18:23,840
दूसरे वाले गुच्छे में ये सब चीजें आ जाएंगी। तो पहला प्रश्न क्या है दूसरे गुच्छे का?

262
00:18:23,840 --> 00:18:28,000
क्या रामपाल द्वारा प्रतिपादित नीति और अनीति ही सनातन

263
00:18:28,000 --> 00:18:32,960
धर्म है? ध्यान रखिए पहले हमने धर्म की सिद्धि की है।

264
00:18:32,960 --> 00:18:37,040
ठीक है? अब जो दूसरा सेगमेंट है उसमें

265
00:18:37,040 --> 00:18:41,200
यह कह रहे हैं क्या? अब इसमें शब्द प्रमाण की प्राथमिकता है।

266
00:18:41,200 --> 00:18:45,440
जो पहला वाला पार्ट है उसमें युक्ति की प्राथमिकता

267
00:18:45,440 --> 00:18:49,600
है और जो दूसरा वाला पार्ट चालू हुआ है इसमें शब्द प्रमाण की प्राथमिकता

268
00:18:49,600 --> 00:18:53,680
होगी। ठीक है? तो शब्द प्रमाण

269
00:18:53,680 --> 00:18:58,000
क्या है? कि भाई जो तुम बातें कह रहे हो कि ऐसा करो वैसा करो। चलो

270
00:18:58,000 --> 00:19:00,080
युक्ति से तो धर्म सिद्ध नहीं हो रहा है।

271
00:19:00,080 --> 00:19:04,320
मोक्ष को प्राप्त कराने वाला सिद्ध नहीं हो रहा है। सर्वशक्तिमान ईश्वर सिद्ध

272
00:19:04,320 --> 00:19:08,320
नहीं हो रहा है। और शाश्वत धर्म भी सिद्ध नहीं हो रहा है। फिर भी क्या

273
00:19:08,320 --> 00:19:12,480
जो तुम बोल रहे हो वह शास्त्रों से मैच करता है? तो

274
00:19:12,480 --> 00:19:16,880
ऐसे में पहला प्रश्न आएगा क्या तुम्हारे द्वारा

275
00:19:16,880 --> 00:19:21,280
बताई गई जो नीति और अनीति का विवेचना है क्या वो सनातन

276
00:19:21,280 --> 00:19:25,280
धर्म है क्या सनातन धर्म शास्त्रों के अनुसार कबीर

277
00:19:25,280 --> 00:19:29,840
ही भगवान और रामपाल उनका अवतार है

278
00:19:29,840 --> 00:19:34,000
ठीक है यह शब्द प्रमाण की प्राथमिकता चल रही है अब

279
00:19:34,000 --> 00:19:38,400
तीसरा क्या है क्या सनातन धर्म शास्त्रों के अनुसार

280
00:19:38,400 --> 00:19:42,400
रामपाल तत्वदर्शी अब देखो उसमें युक्ति थी आचार्य वाली कि

281
00:19:42,400 --> 00:19:46,560
लक्षण घटित होने चाहिए। आचार्य के जो लक्षण होने चाहिए वो लक्षण

282
00:19:46,560 --> 00:19:50,720
घटित होने चाहिए। अब यहां पर यह जो पर्टिकुलरली

283
00:19:50,720 --> 00:19:54,880
जो शब्द है तत्वदर्शी बहुत बड़ा और इस पर आज

284
00:19:54,880 --> 00:19:59,600
एक विस्तृत विवेचना मैं आपको बताने वाला हूं। बहुत बढ़िया अच्छा लगेगा। तो तत्वदर्शी

285
00:19:59,600 --> 00:20:03,920
है कि नहीं? तो तत्वदर्शी इस पर बात होगी। तीसरा प्रश्न दूसरे गुच्छे

286
00:20:03,920 --> 00:20:08,560
का तीसरा प्रश्न। चौथा प्रश्न है। अब यह जो

287
00:20:08,560 --> 00:20:12,640
दो मोटी चीजें मैंने देखी हैं। क्या सनातन धर्म

288
00:20:12,640 --> 00:20:15,920
शास्त्रों के अनुसार होने दिवाली

289
00:20:15,920 --> 00:20:20,240
भैया दूज रक्षाबंधन करवा चौथ महाशिवरात्रि श्राद्ध

290
00:20:20,240 --> 00:20:24,240
विवाह संस्कार इत्यादि धार्मिक अनुष्ठान

291
00:20:24,240 --> 00:20:28,480
पर्व त्यहार यह सब अशास्त्रीय हैं।

292
00:20:28,480 --> 00:20:32,480
इसमें भी प्राथमिकता आ गई कि हमारे पास शास्त्र है कि नहीं इनके संबंध में तो क्या यह

293
00:20:32,480 --> 00:20:36,480
सब अशास्त्रीय है इसको वह सिद्ध करे आ करके अशास्त्रीयता इनकी

294
00:20:36,480 --> 00:20:40,480
और इसी क्रम में आगे क्या सनातन धर्म शास्त्रों

295
00:20:40,480 --> 00:20:44,800
के अनुसार ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश एवं इसी

296
00:20:44,800 --> 00:20:49,040
क्रम में आगे उनके अवतारों पर लगाए जाने

297
00:20:49,040 --> 00:20:53,200
वाले रामपाल द्वारा लगाए जाने वाले जो

298
00:20:53,200 --> 00:20:57,200
आक्षेप हैं क्या वह प्रामाणिक हैं भाई नीचे कर दो स्लाइड नीचे कर

299
00:20:57,200 --> 00:21:01,360
दो लोगों को दिखे अगला अगला गुच्छा क्या वह प्रामाणिक

300
00:21:01,360 --> 00:21:05,600
हैं? तो और इसी में वह भी आ जाएगा कि

301
00:21:05,600 --> 00:21:09,680
जो आक्षेप है कि वो भगवान नहीं है वो भी इसमें आ जाएगा। तो यह

302
00:21:09,680 --> 00:21:13,760
कुल मोटे-मोटे 10 प्रश्न हैं। कोई ज्यादा नहीं है।

303
00:21:13,760 --> 00:21:18,080
मुझे लगता है कि भाई वह इतने ज्ञानी और सिद्ध महापुरुष

304
00:21:18,080 --> 00:21:22,160
हैं जो इनका जवाब जो है 5 से 10 मिनट में दे देंगे।

305
00:21:22,160 --> 00:21:26,400
मुझ जैसे अज्ञानी को जैसा कि लोग समझते हैं

306
00:21:26,400 --> 00:21:30,480
उनको जानने वाले तो भाई मैं तैयार हूं।

307
00:21:30,480 --> 00:21:31,120
है लिए

308
00:21:31,120 --> 00:21:35,440
हथियार दुश्मन ताक में बैठा उधर और हम तैयार

309
00:21:35,440 --> 00:21:39,520
हैं सीना लिए अपना इधर खून से खेलेंगे

310
00:21:39,520 --> 00:21:44,240
होली कल कर धर्म मुश्किल में है सरफरोशी

311
00:21:44,240 --> 00:21:48,320
की तमन्ना अब हमारे दिल में है ठीक है हाथ

312
00:21:48,320 --> 00:21:52,400
जिनमें हो जुनू कटते नहीं तलवार से सर जो उठ जाते

313
00:21:52,400 --> 00:21:56,560
हैं वह झुकते नहीं ललकार से जिंदगी तो अपनी महिमा मौत

314
00:21:56,560 --> 00:22:01,040
की महफिल में है सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे

315
00:22:01,040 --> 00:22:05,600
दिल में है। हम तो घर से निकले ही थे बांधकर सर पर कफन।

316
00:22:05,600 --> 00:22:09,600
जहां हथेली पर लिए लो बढ़ चले हैं एक कदम। दूर रह

317
00:22:09,600 --> 00:22:14,240
पाए जो हमसे दम कहां मंजिल में है। सरफरोशी की तमन्ना

318
00:22:14,240 --> 00:22:19,200
अब हमारे दिल में है। तो भैया हम तो तैयार हैं।

319
00:22:19,200 --> 00:22:23,200
सीना लिए अपना इधर। है ना? अब आपकी बारी है। आप दिखाओ

320
00:22:23,200 --> 00:22:27,200
कितना है वह। हमारे पीछे राम की सेना है। अब

321
00:22:27,200 --> 00:22:31,280
तुम देख लो तुम्हारे पीछे क्या है। कबीर दास जी की सेना है

322
00:22:31,280 --> 00:22:36,000
कि नहीं है? तुम्हारे वाले। हमारे वाले तो भगत थे।

323
00:22:36,000 --> 00:22:40,160
अब इसमें आगे हम कह रहे हैं कि यदि रामपाल को अपनी आध्यात्मिक

324
00:22:40,160 --> 00:22:44,240
मान्यताओं पर पूर्ण विश्वास है और वे हमारी इस चुनौती

325
00:22:44,240 --> 00:22:46,160
को स्वीकार करते हैं तो वह

326
00:22:46,160 --> 00:22:50,640
सार्वजनिक रूप से अपनी सहमति और स्थिति स्पष्ट करें। उनकी सहमति

327
00:22:50,640 --> 00:22:54,640
के आधार पर ही लक्ष्मण पुरी की पावन यानी

328
00:22:54,640 --> 00:22:59,040
लखनऊ की पावन धरा पर इस भव्य चर्चा का आयोजन

329
00:22:59,040 --> 00:23:03,360
सुनिश्चित किया जाएगा। जय श्री राम।

330
00:23:03,360 --> 00:23:07,520
वैसे इसकी कोई आवश्यकता नहीं थी पर मुझे लोग कह रहे थे कि भैया आप भी चुनौती दो।

331
00:23:07,520 --> 00:23:11,600
अब तो ठीक है दे दी। तो भैया जितने

332
00:23:11,600 --> 00:23:16,320
भी रामपाल को मानने वाले हैं अब वह अपने रामपाल से पूछे जाकर के

333
00:23:16,320 --> 00:23:20,400
कि गुरु जी शिवश

334
00:23:20,400 --> 00:23:24,480
ने तो आपको चुनौती दे दी है अब आप उससे ज्ञान चर्चा करके

335
00:23:24,480 --> 00:23:28,960
झंडे गाड़ दो अपने ज्ञान के तो अगर रामपाल

336
00:23:28,960 --> 00:23:33,280
वाकई में एक बुद्धिमान व्यक्ति होगा जो कि

337
00:23:33,280 --> 00:23:37,440
है भाई अपना इतना बड़ा तंत्र खड़ा करने में बुद्धिमता तो चाहिए तो

338
00:23:37,440 --> 00:23:41,680
यदि रामपाल वाकई में बुद्धि बुद्धिमान व्यक्ति होगा तो शिवश नारायण

339
00:23:41,680 --> 00:23:45,920
द्विवेदी से स्वयं को कम से कम 100 किलोमीटर

340
00:23:45,920 --> 00:23:50,480
दूर तो रखेगा। ठीक है? सच्ची

341
00:23:50,480 --> 00:23:54,480
बात है। यदि दोबारा से नोट कर लो जितने भी रामपाल

342
00:23:54,480 --> 00:23:58,720
वाले हैं। रामपाल में यदि वाकई

343
00:23:58,720 --> 00:24:01,200
में बुद्धि है। यदि रामपाल

344
00:24:01,200 --> 00:24:05,360
वाकई में बुद्धिमान है। और यह जो उसने जो जो

345
00:24:05,360 --> 00:24:09,440
हमारे देवी देवताओं के लिए अनर्गल प्रलाप किया है। यह

346
00:24:09,440 --> 00:24:13,520
सब उसने बुद्धि पूर्वक किया है। अबोध बालक वश नहीं

347
00:24:13,520 --> 00:24:17,520
किया है। वो जो बचपना होता है वह सब

348
00:24:17,520 --> 00:24:21,600
नहीं है। मूमति नहीं है और उद्देश्य पूर्वक किया है और यदि वह

349
00:24:21,600 --> 00:24:25,600
बुद्धिमान व्यक्ति है तो वह शिवश नारायण द्विवेदी

350
00:24:25,600 --> 00:24:30,160
से 100 किलोमीटर की दूरी बना करके रखेगा कम से कम

351
00:24:30,160 --> 00:24:35,360
और बाकी तो इससे ज्यादा ही रखेगा तो अगर

352
00:24:35,360 --> 00:24:40,080
थोड़ी बहुत भी बेकली हुई तो हो सकता है कि वह

353
00:24:40,080 --> 00:24:44,400
इस चीज को स्वीकार कर ले कि भैया मैं आ रहा हूं हम

354
00:24:44,400 --> 00:24:48,960
आएगा तो अभी हिंदुओं के हित में है। अच्छा है जितने भी सनातनी

355
00:24:48,960 --> 00:24:52,960
हैं और नहीं आएगा यदि नहीं आएगा तो

356
00:24:52,960 --> 00:24:57,520
वो तो वह भी हमारे हित में है। आएगा तो सामने से उसका पर्दाफाश

357
00:24:57,520 --> 00:25:01,600
होते हुए दिखाई देगा और नहीं आएगा तो थोड़ा सा थोड़ा कम आनंद आएगा

358
00:25:01,600 --> 00:25:05,680
परंतु परंतु उनको दिखेगा कि उनके बाबा

359
00:25:05,680 --> 00:25:11,680
जी में ज्ञान का कितना बल है। जी शास्त्रवाद जी

360
00:25:15,040 --> 00:25:19,040
सही कहा आपने अब देखते हैं कि यह चैलेंज एक्सेप्ट होता है

361
00:25:19,040 --> 00:25:23,120
या नहीं होता है इनकी तरफ से और यहां आते हैं कि नहीं सोचते कि यह

362
00:25:23,120 --> 00:25:27,440
कहीं सुनिश्चित होता है या नहीं। वैसे ये लोग नहीं आने वाले हैं।

363
00:25:27,440 --> 00:25:31,680
ये लोगों ने जो अभी खिचड़ी पका दिया है अब अब वो लोग

364
00:25:31,680 --> 00:25:36,480
खिचड़ी खाने में व्यस्त है।

365
00:25:36,480 --> 00:25:40,480
अच्छा ये जो स्ट्रक्चरल मैंने वो किया है

366
00:25:40,480 --> 00:25:44,720
ना क्योंकि इन्होंने बात क्या है कि बहुत सारे विवाद उखाड़ लाएंगे। यहां से ये निकालना

367
00:25:44,720 --> 00:25:48,720
है। इतनी सारी बातों पर कब तक बात करते रहेंगे? सीधे मूल की

368
00:25:48,720 --> 00:25:54,160
बात कर लो। सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म।

369
00:25:54,160 --> 00:25:58,320
तो वो स्ट्रक्चरल मैंने उसको तैयार किया है। बहुत ज्यादा इधर उधर

370
00:25:58,320 --> 00:26:01,600
की बातें नहीं।

371
00:26:01,600 --> 00:26:05,760
बिल्कुल टू द पॉइंट आपका क्वेश्चन है और देखते हैं कि आखिर

372
00:26:05,760 --> 00:26:10,160
इसका उत्तर वो देने के लिए आते भी है कि नहीं।

373
00:26:10,160 --> 00:26:14,160
तो जितने भी रामपाल के चित्र देख रहे हैं वो जाकर के अपने गुरु जी को यह

374
00:26:14,160 --> 00:26:18,160
संदेश पहुंचा दे। हम कि

375
00:26:18,160 --> 00:26:22,320
भाई अब आपके दिन पूरे हो गए हैं। या तो मौन

376
00:26:22,320 --> 00:26:27,120
रह के अपनी पराजय स्वीकार कर लो और या फिर जाकर के

377
00:26:27,120 --> 00:26:32,080
शंकराचार्य के उस अल्पज्ञ शिष्य से अपनी चटनी बनवा लो।

378
00:26:32,080 --> 00:26:37,120
द चॉइस इज योर।

379
00:26:37,120 --> 00:26:39,600
ठीक है?

380
00:26:39,600 --> 00:26:43,760
तो भाई आओ भाई तत्वदर्शी

381
00:26:43,760 --> 00:26:48,160
जिसके गुर्दा है उसी को यह कहने का हक है।

382
00:26:48,160 --> 00:26:52,400
तो अगर तत्वदर्शी हो तो आओ करो सामना।

383
00:26:52,400 --> 00:26:56,640
ठीक है? अब जरा मैं तत्वदर्शी पे आपको कुछ चीजें बता

384
00:26:56,640 --> 00:27:00,720
दूं। वैसे तो प्रामाणिक आचार्य कौन

385
00:27:00,720 --> 00:27:04,800
होता है? यह हमने अपने अनेक वीडियो में बताया हुआ है। शास्त्रों के

386
00:27:04,800 --> 00:27:09,040
अनुसार। अब जरा तत्वदर्शी की विवेचना कर दूं। एक स्ट्रक्चरल

387
00:27:09,040 --> 00:27:13,280
वे में आप लोग आए हैं तो देखिए रामपाल

388
00:27:13,280 --> 00:27:17,360
का कहना है कि वह तत्वदर्शी है। रामपाल के लोग यह दावा करते हैं कि

389
00:27:17,360 --> 00:27:21,600
वो तत्वदर्शी है। अब तत्वदर्शी कैसे है? कि भगवत गीता के 434

390
00:27:21,600 --> 00:27:25,760
में तत्वदर्शी से ज्ञान यज्ञ का ज्ञान लेने की बात की गई है। और इसी

391
00:27:25,760 --> 00:27:30,000
क्रम में आगे रामपाल यह दावा करता है कि गीता के अध्याय

392
00:27:30,000 --> 00:27:32,480
15

393
00:27:32,480 --> 00:27:36,480
श्लोक चार में तत्वदर्शी की पहचान बताई गई है।

394
00:27:36,480 --> 00:27:40,880
और यह बताया गया है वहां पर कि जो उल्टे वृक्ष

395
00:27:40,880 --> 00:27:45,120
की ठीक-ठीक व्याख्या कर देगा। संसार रूपी उल्टे वृक्ष की ठीक-ठीक व्याख्या

396
00:27:45,120 --> 00:27:49,120
कर देगा। वही वेदों को जानने वाला है। वहां पर तत्वदर्शी शब्द

397
00:27:49,120 --> 00:27:52,240
नहीं आया है। 434 पर तत्वदर्शी शब्द आया

398
00:27:52,240 --> 00:27:56,480
है और यहां पर वेदों को जानने वाला शब्द आया है। अब यदि यह इन दोनों

399
00:27:56,480 --> 00:28:00,640
श्लोकों में आपस में रिलेट करते हैं तो इससे सिद्ध होता है तत्वदर्शी

400
00:28:00,640 --> 00:28:04,640
कौन है? वेदों को जानने वाला। ठीक है? अब हम इससे आगे चलते

401
00:28:04,640 --> 00:28:09,040
हैं कि रामपाल के अनुसार

402
00:28:09,040 --> 00:28:13,200
ज्ञान यज्ञ से मुक्ति नहीं होगी। ज्ञान यज्ञ से मुक्ति

403
00:28:13,200 --> 00:28:17,360
नहीं होगी। तो 434 के अनुसार तत्वदर्शी कौन है? जो ज्ञान

404
00:28:17,360 --> 00:28:21,360
यज्ञ का ज्ञान देगा। यानी कि यदि रामपाल अपने आप

405
00:28:21,360 --> 00:28:25,360
को मोक्ष देने वाला मानता है तो फिर यहां वो तत्वदर्शी

406
00:28:25,360 --> 00:28:29,600
नहीं हो सकता। क्योंकि तत्वदर्शी तो ऐसा ज्ञान दे रहा है जिससे मोक्ष नहीं होगा। क्योंकि

407
00:28:29,600 --> 00:28:33,680
ज्ञान यज्ञ से मोक्ष नहीं होता। भगवत गीता के अनुसार प्रामाणिक

408
00:28:33,680 --> 00:28:38,240
आचार्यों के अनुसार ज्ञान यज्ञ से मुक्ति होती है। मगर रामपाल

409
00:28:38,240 --> 00:28:42,640
ने अपनी गीता 13 ज्ञान अमृत में कई जगह पर लिखा है कि ज्ञान यज्ञ से पांचों

410
00:28:42,640 --> 00:28:46,880
यज्ञ जो हैं पांच प्रकार के जो यज्ञ हैं उनमें से किसी से भी मुक्ति

411
00:28:46,880 --> 00:28:51,360
नहीं होगी। ज्ञान यज्ञ से भी मुक्ति नहीं होगी। और उसने ज्ञान

412
00:28:51,360 --> 00:28:55,520
यज्ञ से नाम दान इत्यादि को अलग करके रखा है कि जब तक तुम

413
00:28:55,520 --> 00:28:59,680
नाम नहीं लोगे तत्वदर्शी से तब तक तुम्हारी मुक्ति नहीं होगी।

414
00:28:59,680 --> 00:29:03,840
तो उसने अलग करके रखा है। अब बात यह आती है जब उसने अलग

415
00:29:03,840 --> 00:29:07,440
करके रखा है तो यानी ज्ञान यज्ञ से नाम

416
00:29:07,440 --> 00:29:11,840
लेना इत्यादि ये सब भक्ति करना यह सब अलग है। तो जब अलग है तो ज्ञान

417
00:29:11,840 --> 00:29:16,080
यज्ञ का ज्ञान देने वाला तत्वदर्शी और तत्वदर्शी से मुक्ति

418
00:29:16,080 --> 00:29:20,160
नहीं होगी क्योंकि ज्ञान यज्ञ से मुक्ति नहीं होगी। तो या तो

419
00:29:20,160 --> 00:29:24,160
सबसे पहले रामपाल अपने आप को यह मान ले कि वह जो है मोक्ष का ज्ञान देने

420
00:29:24,160 --> 00:29:28,640
वाला नहीं है और या फिर वह यह मान ले कि 434 के अनुसार वो तत्वदर्शी

421
00:29:28,640 --> 00:29:34,640
नहीं है। ठीक है? अब आगे चलते हैं।

422
00:29:35,840 --> 00:29:39,920
15.4 में संसार रूपी उल्टे वृक्ष की ठीक-ठीक व्याख्या

423
00:29:39,920 --> 00:29:44,080
करने वाले को वेदों को जानने वाला कहा गया है। ठीक है?

424
00:29:44,080 --> 00:29:49,520
जबकि देवी भागवत में देवी भागवत में

425
00:29:49,520 --> 00:29:53,760
छठव स्कंध में 11व अध्याय में

426
00:29:53,760 --> 00:29:58,640
36 से लेकर के 40 वे श्लोक के बीच वेदों

427
00:29:58,640 --> 00:30:02,640
को जानने वाला कौन है जो गायत्री मंत्र का जाप करता है

428
00:30:02,640 --> 00:30:06,400
देवी दर्शन के लिए

429
00:30:06,400 --> 00:30:10,640
अभिलाषा मन में रखकर देवी दर्शन की लालसा से युक्त होकर

430
00:30:10,640 --> 00:30:14,800
जो गायत्री मंत्र का जाप करता है इनके दिए हुए वो जो यह सब

431
00:30:14,800 --> 00:30:18,960
चोरी छुपे जो नाम इत्यादि जो कुछ देते हैं वह जो गायत्री

432
00:30:18,960 --> 00:30:22,480
मंत्र का जाप करता है वह वेदों को

433
00:30:22,480 --> 00:30:27,280
जानने वाला कहा गया है देवी भागवत में कहां पर छ 11

434
00:30:27,280 --> 00:30:32,160
36 से 40 ठीक है तो

435
00:30:32,160 --> 00:30:36,400
अगर तत्वदर्शी वेदों को जानने वाला है 15.4

436
00:30:36,400 --> 00:30:40,480
के अनुसार तो वेदों को जानने वाला कौन है जो गायत्री मंत्र का जाप कर रहा है

437
00:30:40,480 --> 00:30:44,480
मां भगवती के दर्शन की अभिलाषा मन में लेकर के और इस प्रकार से वेदों

438
00:30:44,480 --> 00:30:48,640
को जानने वाले के रूप में भगवान के अन्य स्वरूपों को भी भक्त

439
00:30:48,640 --> 00:30:52,720
बताया गया है। ठीक है? तो इसका मतलब

440
00:30:52,720 --> 00:30:56,880
ब्रह्मा, विष्णु, महेश, भगवती और गणेश इनको भगवान मानने

441
00:30:56,880 --> 00:31:01,120
वाला, इनके मंत्र का जाप करने वाला ही वेदों को जानने वाला है और

442
00:31:01,120 --> 00:31:05,840
वेदों को जानने वाला ही तत्वदर्शी है। ठीक है?

443
00:31:05,840 --> 00:31:09,920
और सुनिए और क्या है? अब ये सब क्या

444
00:31:09,920 --> 00:31:14,400
है ना ये बचपने बचपना लगता है ये सब बातें करने में। रामपाल के विषय में

445
00:31:14,400 --> 00:31:19,120
बहुत हल्के लेवल की इसकी बातें हैं निचले स्तर की पर क्या करें

446
00:31:19,120 --> 00:31:23,200
गटर को साफ करने के लिए गटर में उतरना जैसा होता है ना कि भाई गटर

447
00:31:23,200 --> 00:31:27,280
को साफ करना है तो गटर में उतरना पड़ेगा तो उसी तरीके से रामपाल के द्वारा फैलाई

448
00:31:27,280 --> 00:31:31,520
गई जो अज्ञानता है जो उसने मिथ्या फैलाई है जो हमारे देवी देवताओं

449
00:31:31,520 --> 00:31:35,760
के लिए अश्लील बातें कही है अपमान पूर्वक चीजें की है तो इन चीजों

450
00:31:35,760 --> 00:31:37,600
को साफ करने के लिए उसकी दुनिया में नीचे

451
00:31:37,600 --> 00:31:40,640
उतरना ही पड़ेगा

452
00:31:40,640 --> 00:31:45,920
हां अब इसमें और आगे चलते चलते हैं।

453
00:31:45,920 --> 00:31:50,000
भगवत गीता दो 16 के अनुसार सत और असत के भेद

454
00:31:50,000 --> 00:31:54,400
को बताने वाले सत और असत का भेद बताया गया ना कि सत का कभी भाव नहीं

455
00:31:54,400 --> 00:31:58,720
सत्य का कभी अभाव नहीं होता और असत का कभी भाव नहीं होता। यह जो

456
00:31:58,720 --> 00:32:02,960
व्याख्या की है इस व्याख्या को करने वाले को तत्वदर्शी कहा गया है।

457
00:32:02,960 --> 00:32:07,200
ठीक है? तो इस प्रकार से भगवत गीता का वक्ता जो हमारे

458
00:32:07,200 --> 00:32:11,200
अनुसार भगवान श्री कृष्ण है और रामपाल के अनुसार वो काल नाम का

459
00:32:11,200 --> 00:32:15,280
कोई राक्षस है तो वो जो वक्ता है वो इस भेद को जान रहा है और

460
00:32:15,280 --> 00:32:19,440
वो व्याख्या कर रहा है इसलिए वह तत्वदर्शी हो गया दो 16

461
00:32:19,440 --> 00:32:23,520
के अनुसार जो गीता का वक्ता है वो भी तत्वदर्शी सिद्ध होता

462
00:32:23,520 --> 00:32:27,680
है सुन ले भाई रामपाल इसको काम आएगी आने से पहले तैयारी करने में काम

463
00:32:27,680 --> 00:32:31,760
आएगी हालांकि पहली बॉल पर क्लीन बोल्ड हो तुम पहली बॉल

464
00:32:31,760 --> 00:32:35,920
पर क्लीन बोल्ड अभी बता दे रहा हूं। ठीक है?

465
00:32:35,920 --> 00:32:40,480
बाकी आना हो तो आ जाना। यदि मैच का

466
00:32:40,480 --> 00:32:44,560
मजा देना हो अपने दर्शकों को और विशेष रूप

467
00:32:44,560 --> 00:32:48,640
से जो सनातनी लोग हैं ना जो

468
00:32:48,640 --> 00:32:52,880
अभी भी अपने धर्म में आस्था रखते हैं। अगर उनको आनंद देने का मन हो

469
00:32:52,880 --> 00:32:57,280
तो आ जाना। बाकी अभी तुमने जो तुम्हारे

470
00:32:57,280 --> 00:33:01,280
लोग हैं वह फॉलो करते हैं हमारा चैनल देख रहे होंगे कैसे अधर्मियों की वाट लगती

471
00:33:01,280 --> 00:33:05,440
है पहले ही प्रश्न में वो मेरे ऊपर है कि मैं चर्चा को लंबा

472
00:33:05,440 --> 00:33:10,240
चलाना चाहता हूं या नहीं समझ रहे हैं शास्त्रवाद जी

473
00:33:10,240 --> 00:33:14,640
मैं चर्चा को लंबा चलाना चाहता हूं

474
00:33:14,640 --> 00:33:18,960
हां या नहीं ये हमारे ऊपर है ये

475
00:33:18,960 --> 00:33:24,960
हमारे ऊपर है समझ रहे हो ना कौन है हम

476
00:33:24,960 --> 00:33:27,760
अब आगे

477
00:33:27,760 --> 00:33:32,000
हां बड़ा वाला तो शास्त्रों में व्यास जी सहित अन्य

478
00:33:32,000 --> 00:33:36,240
कई ऋषि मुनियों को तत्वदर्शी कहा गया है रामपाल

479
00:33:36,240 --> 00:33:40,480
के ही ग्रंथों में जो कबीर वाणी के ऐसे कई

480
00:33:40,480 --> 00:33:44,720
अंश हैं रामपाल की छपी पुस्तकों में जहां पर

481
00:33:44,720 --> 00:33:48,800
वशिष्ठ जी इत्यादि को तत्वदर्शी तत्ववेता तत्वज्ञ इत्यादि

482
00:33:48,800 --> 00:33:52,880
कहा गया है। ले भाई यह है तेरा खंडन। ठीक है?

483
00:33:52,880 --> 00:33:56,960
और बता दूं आपको रामायण में बालकांड में

484
00:33:56,960 --> 00:34:01,200
प्रथम सर्ग में राम जी को तत्वदर्शी

485
00:34:01,200 --> 00:34:05,440
तत्ववेता तत्वज्ञ कहा गया है। ठीक है? हो गया

486
00:34:05,440 --> 00:34:08,800
टू स्टॉप द ट्रेन पुल द चैन।

487
00:34:08,800 --> 00:34:12,880
और आजकल आजकल क्या हो गया ना आप वो

488
00:34:12,880 --> 00:34:16,880
आर्काइव पे जाओ और जो भी ग्रंथ है उसमें जो है तत्वदर्शी

489
00:34:16,880 --> 00:34:21,360
तत्वता तत्वज्ञ इत्यादि शब्द डाल के ढूंढो। आपको द

490
00:34:21,360 --> 00:34:25,600
अनेकानेक प्रमाण मिल जाएंगे। जहां पर प्रामाणिक लोगों को रामपाल

491
00:34:25,600 --> 00:34:29,920
से भिन्न लक्षण वालों को तत्वदर्शी कहा जा रहा होगा जो हमारे अपने हैं।

492
00:34:29,920 --> 00:34:35,280
ठीक है? आप लोग ढूंढ सकते हो। यद्यपि ये तो स्वा अध्ययन के

493
00:34:35,280 --> 00:34:41,280
से जो बहुत पहले का लिखा हुआ वो है ये जो मैं आपको बता रहा हूं। अच्छा

494
00:34:42,080 --> 00:34:48,080
इसके बाद यदि वेदों को

495
00:34:49,600 --> 00:34:53,600
इसके बाद क्या है? श्रीमद् भागवत चार 18 तीन

496
00:34:53,600 --> 00:34:57,600
से पांच द्वारा प्राचीन ऋषियों को तत्वदर्शी

497
00:34:57,600 --> 00:35:01,760
कहा गया। जिनको यह कहता है कि अरे वो जानते नहीं थे। और यह कहा गया कि

498
00:35:01,760 --> 00:35:06,240
उनके द्वारा बताए गए मार्ग पर श्रद्धा पूर्वक भलीभांति आचरण

499
00:35:06,240 --> 00:35:10,400
करने वाला ही कल्याण प्राप्त कर पाता है। और उनसे विमुख

500
00:35:10,400 --> 00:35:15,040
होकर मनमाने आचरण करने वाला जो होता है उसके सभी प्रयास

501
00:35:15,040 --> 00:35:19,840
निष्फल होते हैं। यह कह दिया भागवत में। ठीक है?

502
00:35:19,840 --> 00:35:23,840
अच्छा यह तत्वदर्शी की व्याख्या है। केवल

503
00:35:23,840 --> 00:35:28,080
तत्वदर्शी क्यों नहीं है रामपाल? अब आगे आ जाते हैं।

504
00:35:28,080 --> 00:35:32,800
श्रीमद् भागवत एक दो अब यह बहुत बहुत ज्यादा इनेटिव

505
00:35:32,800 --> 00:35:37,360
चीज है। आप लोग इसको नोट कर लीजिएगा। श्रीमद् भागवत

506
00:35:37,360 --> 00:35:43,360
एक दो 10 से 11 के अनुसार। ठीक है?

507
00:35:43,360 --> 00:35:47,360
यहां पर बताया गया है कि तत्व क्या है? हमारे ग्रंथों

508
00:35:47,360 --> 00:35:51,520
में यह भी बताया गया अपने मन से नहीं तत्व किसे कहते हैं वह भी समझ

509
00:35:51,520 --> 00:35:56,000
लो तो और

510
00:35:56,000 --> 00:35:57,120
यहां पर भी यह

511
00:35:57,120 --> 00:36:01,280
बताने वालों को कि तत्व किसे कहते हैं? यह बताने वाले को

512
00:36:01,280 --> 00:36:05,440
यहां पर भी तत्वदर्शी कहा गया है। ठीक है? तो

513
00:36:05,440 --> 00:36:09,520
यहां पर धर्म का फल बताया गया है मोक्ष। धर्म वही है जो मोक्ष दे। अगर मोक्ष नहीं

514
00:36:09,520 --> 00:36:13,680
है तो धर्म नहीं है। ठीक है? पहली बात तो यह है। अभी मैं तत्व

515
00:36:13,680 --> 00:36:18,720
नहीं बता रहा और जो

516
00:36:18,720 --> 00:36:23,120
जीवन का जो वास्तविक फल है वह क्या है? तत्व

517
00:36:23,120 --> 00:36:27,440
को जानना। तत्व की जिज्ञासा ही जीवन

518
00:36:27,440 --> 00:36:31,520
का एकमात्र फल है। यानी ज्ञान।

519
00:36:31,520 --> 00:36:35,520
ठीक है? अपने स्वरूप का बोध। अब आ

520
00:36:35,520 --> 00:36:39,920
जाते हैं कि क्या बताया है? तत्व किसे कहा गया है? ज्ञाता

521
00:36:39,920 --> 00:36:44,160
और गेय यानी कि

522
00:36:44,160 --> 00:36:48,720
ज्ञान के द्वारा प्राप्त किए जाने जाना जाने वाला जो पदार्थ है

523
00:36:48,720 --> 00:36:52,800
ज्ञाता यानी कि जो ज्ञान

524
00:36:52,800 --> 00:36:56,800
प्राप्त करने वाला है और ज्ञान के रूप में जिसको प्राप्त किया

525
00:36:56,800 --> 00:37:00,960
जाना है। ज्ञान प्राप्त करने वाला और ज्ञान के रूप में जिसको प्राप्त किया जाने

526
00:37:00,960 --> 00:37:05,440
वाला है। इन दोनों के भेद से रहित

527
00:37:05,440 --> 00:37:10,000
इन दोनों के भेद से रहित जो अखंड अद्वय

528
00:37:10,000 --> 00:37:13,440
सच्चिदानंद स्वरूप ज्ञान है।

529
00:37:13,440 --> 00:37:17,840
जब ज्ञाता और गेय के बीच में

530
00:37:17,840 --> 00:37:22,080
भेद नहीं है। तब जो आपको जो भेद रहित

531
00:37:22,080 --> 00:37:26,240
जो ज्ञान है सच जिसको सत कहते हैं सच्चिदानंद स्वरूप

532
00:37:26,240 --> 00:37:30,480
कहते हैं वो ज्ञान ही उस ज्ञान को ही तत्व

533
00:37:30,480 --> 00:37:35,200
कहते हैं। ज्ञाता और गेय

534
00:37:35,200 --> 00:37:39,280
जाना जाने वाला पदार्थ जानने वाला पदार्थ और

535
00:37:39,280 --> 00:37:43,600
जाना जाने वाला पदार्थ इन दोनों में अभेद का जब

536
00:37:43,600 --> 00:37:47,600
जो ज्ञान है अभेद का ज्ञान उसी को तत्व कहा

537
00:37:47,600 --> 00:37:51,760
गया है भागवत ठीक है कहां पर है एक दो 10 से 11

538
00:37:51,760 --> 00:37:55,840
और अभी एक बंपर नाम और है यहां पर है ना एक और नाम

539
00:37:55,840 --> 00:38:00,160
लेते जाइए तो अब जो तत्वदर्शी

540
00:38:00,160 --> 00:38:04,160
वह कौन है जो ज्ञाता और गेय के बीच में

541
00:38:04,160 --> 00:38:08,400
अभेद वाला ज्ञान दे वही तो हो गया

542
00:38:08,400 --> 00:38:12,640
क्योंकि अभेद होना चाहिए। अभेद अद्वय भेद

543
00:38:12,640 --> 00:38:16,640
से रहित अखंड अद्वय सच्चिदानंद स्वरूप ज्ञान को

544
00:38:16,640 --> 00:38:20,880
ही तत्व कहते हैं। तो रामपाल से वो अखंड ज्ञान

545
00:38:20,880 --> 00:38:24,960
क्या है? कि कबीर यहां खड़ा है तो यहां क्या है? उसके बगल में क्या है? कबीर

546
00:38:24,960 --> 00:38:28,800
की शक्ति है तो फिर वह शक्ति और शक्तिमान अलग-अलग कैसे वह सब उसमें

547
00:38:28,800 --> 00:38:33,280
आ जाएगा कि उसको ज्ञान है कि नहीं वह सब अखंड ज्ञान है कि नहीं और बाकी

548
00:38:33,280 --> 00:38:37,360
भेद से रहित जो ज्ञान है

549
00:38:37,360 --> 00:38:41,360
वही तत्व है भेद से रहित ज्ञान है

550
00:38:41,360 --> 00:38:45,360
वही तत्व है और वो जो ज्ञान स्वरूप

551
00:38:45,360 --> 00:38:49,360
तत्व है उसी को अलग-अलग स्तरों पर यह

552
00:38:49,360 --> 00:38:53,600
बहुत बड़ी बात कहने जा रहा हूं उसी को बहुत अलग-अलग

553
00:38:53,600 --> 00:38:57,920
स्तरों पर ब्रह्म, परमात्मा और भगवान

554
00:38:57,920 --> 00:39:03,520
कहा जाता है। यह भी भागवत में लिखा है। यानी कि

555
00:39:03,520 --> 00:39:07,520
अलग से और ब्रह्म से ऊपर की कोई एंटिटी है

556
00:39:07,520 --> 00:39:11,760
ही नहीं। तत्व से किसे जानना है? ब्रह्म को। किसके

557
00:39:11,760 --> 00:39:15,840
माध्यम से जानना है? परमात्मा के माध्यम से। परमात्मा तक कैसे पहुंचेंगे?

558
00:39:15,840 --> 00:39:20,640
भगवान से। ठीक है? जानने योग्य क्या है? ब्रह्म।

559
00:39:20,640 --> 00:39:24,800
किसके द्वारा जानोगे? भगवान के द्वारा। परमात्मा के द्वारा। तो

560
00:39:24,800 --> 00:39:28,800
दो चीजें यहां क्लियर हो गई। तत्व क्या है और ब्रह्म परमात्मा और भगवान क्या है? ये

561
00:39:28,800 --> 00:39:32,800
लोग जो अंतर करते हैं ना ब्रह्म पर परमात्मा और भगवान में तत्व

562
00:39:32,800 --> 00:39:37,200
को ही अलग-अलग स्तरों पर ब्रह्म परमात्मा

563
00:39:37,200 --> 00:39:41,200
और भगवान कहते हैं। सगुण साकार में भगवान हो गए। सगुण निराकार में

564
00:39:41,200 --> 00:39:44,080
परमात्मा हो गए और निर्गुण निराकार

565
00:39:44,080 --> 00:39:47,520
में ब्रह्म हो गए। ठीक है?

566
00:39:47,520 --> 00:39:51,680
तो ये तो खैर एक जो अद्वैत की वो आ गई

567
00:39:51,680 --> 00:39:57,280
यहां पर। फिर भी तो ज्ञाता और ज्ञान के भेद से रहित

568
00:39:57,280 --> 00:40:02,000
जो अद्वय ज्ञान है उसी को तत्व कहते हैं।

569
00:40:02,000 --> 00:40:06,160
तो तत्वदर्शी कौन है? जो भेद से रहित ज्ञान को

570
00:40:06,160 --> 00:40:10,160
धारण करता है और उसका वक्ता होता है। तो आओ भैया बताओ

571
00:40:10,160 --> 00:40:15,520
भेद से रहित ज्ञान। भैया मैं इसे स्क्रीन पर दिखा दो क्या?

572
00:40:15,520 --> 00:40:19,760
हां दिखा सकते हो? दिखा दिखा दो। मैं यहां पे स्क्रीन

573
00:40:19,760 --> 00:40:25,760
शेयर कर रहा हूं। हां हां कर दो कर दो

574
00:40:40,000 --> 00:40:45,120
इसको मैं पूरा कर लूं क्या?

575
00:40:45,120 --> 00:40:49,920
मैं पूरा कर लेता हूं। आ गया। अच्छा ठीक है। दिखाइए।

576
00:40:49,920 --> 00:40:54,240
हम नहीं है 10 और 11

577
00:40:54,240 --> 00:41:00,240
हम बड़ा करिए इसको

578
00:41:03,840 --> 00:41:07,920
देखिए यहां क्या लिखा है ये लोग जो कहते हैं ना कि अरे वहां ये मिलेगा बादाम मिलेगा

579
00:41:07,920 --> 00:41:11,920
भोग विलास का फल इंद्रियों को तृप्त करना नहीं है उसका

580
00:41:11,920 --> 00:41:16,160
प्रयोजन है केवल जीवन निर्वाह ठीक है अब

581
00:41:16,160 --> 00:41:20,320
तत्ववेता लोक ज्ञाता और गे भेद से रहित अखंड

582
00:41:20,320 --> 00:41:24,560
अद्वितीय सच्चिदानंद स्वरूप ज्ञान को ही तत्व कहते हैं। तो तत्व

583
00:41:24,560 --> 00:41:28,880
की परिभाषा समझ लो भाई। ब्रह्म को ही जानने

584
00:41:28,880 --> 00:41:32,960
वाला तत्वदर्शी है। यदि तुम्हारे पास ब्रह्म से

585
00:41:32,960 --> 00:41:38,480
अलग कोई अलग चीज है तो उसको पहले तुम तत्व सिद्ध करो।

586
00:41:38,480 --> 00:41:43,520
उसी को कोई ब्रह्म, कोई परमात्मा और कोई भगवान कहता है।

587
00:41:43,520 --> 00:41:47,760
तो अगर तुम्हारे पास ब्रह्म से कोई अलग चीज है। हुआ क्या है कि

588
00:41:47,760 --> 00:41:51,840
जब भगवान ब्रह्म होते हुए

589
00:41:51,840 --> 00:41:55,280
कई रूपों में वहां पर है तो जिस रूप को प्रधान करना है उसको

590
00:41:55,280 --> 00:41:59,760
परम ब्रह्म कह दिया। अपेक्षाकृत वहां पर जो उनका जिस

591
00:41:59,760 --> 00:42:03,760
जिसकी वहां प्रधानता नहीं है गौ है जिसकी उपस्थिति

592
00:42:03,760 --> 00:42:07,840
उसको वहां पर जो है कह दिया मगर हमारे यहां पर परम ब्रह्म सूत्र

593
00:42:07,840 --> 00:42:11,840
तो नहीं लिखा गया व्यास जी के द्वारा ब्रह्म सूत्र लिखा गया

594
00:42:11,840 --> 00:42:16,000
और वही परम ब्रह्म ब्रह्म और प्राप्तव्य

595
00:42:16,000 --> 00:42:20,160
हमारा मोक्ष स्वरूप भगवान ईश्वर परमात्मा वही अलग-अलग स्तरों

596
00:42:20,160 --> 00:42:24,240
पे है। निरुक्त में भी ब्रह्म को बताया गया है। ब्रह्म और परम ब्रह्म में कोई

597
00:42:24,240 --> 00:42:28,560
अंतर नहीं है। अक्षर पुरुष में भी परम अक्षर पुरुष में भी कोई अंतर नहीं। अलग-अलग

598
00:42:28,560 --> 00:42:32,880
स्तर है उनके। ठीक है? एक ही तत्व को अलग-अलग स्तरों

599
00:42:32,880 --> 00:42:37,280
पर परम अक्षर, अक्षर इत्यादि कहा गया। एक ही तत्व को अलग-अलग

600
00:42:37,280 --> 00:42:41,360
स्तरों पर ब्रह्म, परम ब्रह्म इत्यादि कहा गया है।

601
00:42:41,360 --> 00:42:45,600
मगर वास्तविकता में जब देखेंगे तात्विक रूप से

602
00:42:45,600 --> 00:42:50,160
तो तत्व क्या है? ज्ञाता और गे से गे भेद से रहित सच्चिदानंद

603
00:42:50,160 --> 00:42:54,160
स्वरूप ज्ञान ही तत्व है। उसी तत्व

604
00:42:54,160 --> 00:42:58,160
को किसी स्तर पर ब्रह्म किसी स्तर पर परमात्मा

605
00:42:58,160 --> 00:43:02,160
और किसी स्तर पर भगवान कहा जाता है। ठीक है? तो ब्रह्म को

606
00:43:02,160 --> 00:43:06,160
जानने वाला ही तत्वदर्शी है। परम ब्रह्म अगर तुम्हारा ब्रह्म अलग है क्योंकि

607
00:43:06,160 --> 00:43:10,400
परम ब्रह्म और ब्रह्म एक ही है। ठीक है? परम ब्रह्म और ब्रह्म

608
00:43:10,400 --> 00:43:14,880
एक है। इस बात को नोट कर लो घंचों

609
00:43:14,880 --> 00:43:19,520
और अगर अलग है तो उसको तत्व सिद्ध करो।

610
00:43:19,520 --> 00:43:23,680
इससे अलग सिद्ध करो। तत्व सिद्ध करो। हमने तो तत्व की प्रामाणिक

611
00:43:23,680 --> 00:43:27,760
परिभाषा दे दी। तो ब्रह्म को जानने वाला, परमात्मा को

612
00:43:27,760 --> 00:43:32,000
जानने वाला, भगवान को जानने वाला ही तत्वदर्शी है।

613
00:43:32,000 --> 00:43:36,160
और क्योंकि तुम इनसे इतर किसी और की बात करते हो तो अगर

614
00:43:36,160 --> 00:43:40,160
उसको जानने वाले होने के रूप में तुम अपने आप को तत्वदर्शी कह

615
00:43:40,160 --> 00:43:45,040
रहे हो तो पहले जिसको तुम जानने का दावा कर रहे हो इनसे इतको

616
00:43:45,040 --> 00:43:49,200
तुम तत्व सिद्ध करके दिखाओ। ठीक है? इसको

617
00:43:49,200 --> 00:43:54,960
कहते हैं झूठे की हद तक चोर की तक। जी हटा दीजिए।

618
00:43:54,960 --> 00:43:59,040
अब इसमें

619
00:43:59,040 --> 00:44:04,560
इसको मिनिमाइज कर दें। हां। अब इसमें

620
00:44:04,560 --> 00:44:08,080
यदि

621
00:44:08,080 --> 00:44:12,160
अब इसमें कुछ एक तर्क और लेते जाइए। यदि हमें संसार

622
00:44:12,160 --> 00:44:16,320
रूपी उल्टे वृक्ष की ठीक-ठीक व्याख्या के आधार पर ही यह तय करना

623
00:44:16,320 --> 00:44:20,480
है कि तत्वदर्शी कौन है? तो इसके लिए सर्वप्रथम

624
00:44:20,480 --> 00:44:24,640
हमें स्वयं संसार रूपी उल्टे वृक्ष की ठीक ठीक व्याख्या ज्ञात होनी

625
00:44:24,640 --> 00:44:28,640
चाहिए। वही बात आ गई। जो ब्रह्म को जाने वो ब्राह्मण है। भाई

626
00:44:28,640 --> 00:44:32,800
मुझे कैसे पता चलेगा ये ब्राह्मण है कि नहीं? मैं भी ब्रह्म को जान लूं। अगर

627
00:44:32,800 --> 00:44:36,800
मैं भी स्वतंत्र रूप से ब्रह्म को जानने ही लगा फिर ब्राह्मण की

628
00:44:36,800 --> 00:44:41,120
उपयोगिता क्या रह गई? क्या जरूरत है फिर? जो ब्रह्म को जाने वो ब्राह्मण

629
00:44:41,120 --> 00:44:45,280
है। वही वाली बात कि जो संसार रूपी उल्टे वृक्ष

630
00:44:45,280 --> 00:44:49,680
की ठीक ठीक व्याख्या कर दे वही तत्वदर्शी है। हां

631
00:44:49,680 --> 00:44:53,680
तो यानी कि मुझे यह जानने के लिए कि यह तत्वदर्शी है कि नहीं? तो

632
00:44:53,680 --> 00:44:59,200
मुझे यह मालूम होना चाहिए ना कि इसकी ठीक ठीक व्याख्या है क्या?

633
00:44:59,200 --> 00:45:03,280
पहली बात। इसका मतलब इस बात के आधार पर उल्टे

634
00:45:03,280 --> 00:45:07,520
वृक्ष की विवेचना के आधार पर तत्वदर्शी तय

635
00:45:07,520 --> 00:45:10,000
नहीं किया जा सकता। कौन है? ठीक

636
00:45:10,000 --> 00:45:16,000
है। दूसरी बात कि

637
00:45:25,200 --> 00:45:29,360
इसके साथ ही साथ गीता प्रेस एवं अन्य कई ऐसे भाष्यकार हुए

638
00:45:29,360 --> 00:45:33,600
हैं भगवत गीता के जिन्होंने भगवत गीता पर भाष्य लिखते

639
00:45:33,600 --> 00:45:37,600
समय संसार रूपी उल्टे वृक्ष की व्याख्या की है। जैसे जय

640
00:45:37,600 --> 00:45:41,920
दयाल गोविंदका जी का जो भाष्य है उसमें भी उल्टे वृक्ष का चित्र देकर के उन्होंने बताया

641
00:45:41,920 --> 00:45:46,080
है। तो क्या उनको भी ये तत्वदर्शी मानते हैं?

642
00:45:46,080 --> 00:45:50,400
नहीं मानते। ऐसे में क्या रामपाल के अनुसार वह

643
00:45:50,400 --> 00:45:54,480
लोग तत्वदर्शी हैं? नहीं है। अच्छा अब अंत

644
00:45:54,480 --> 00:45:58,960
में एक और बात लेते जाओ। बाबा जी।

645
00:45:58,960 --> 00:46:03,280
रामपाल के अनुसार भगवत गीता में 4% ज्ञान काल

646
00:46:03,280 --> 00:46:07,280
का अपना मनमुखी ज्ञान है। चार नहीं पांच। भूल गया था मैं काफी

647
00:46:07,280 --> 00:46:12,080
दिन हो गए ना पहले एक दौर था वो

648
00:46:12,080 --> 00:46:16,560
हमारे वो क्या कहते हैं उसको होता

649
00:46:16,560 --> 00:46:20,640
है ना एक टॉप रेटेड चला करता है कि आजकल कौन

650
00:46:20,640 --> 00:46:24,800
चल रहा है अब कौन चल रहा है अचानक से वो बदलते रहते हैं है ना कि

651
00:46:24,800 --> 00:46:25,300
टॉप

652
00:46:25,200 --> 00:46:29,200
रेटेड किसी समय कोई चला किसी समय कोई चला आजकल इन

653
00:46:29,200 --> 00:46:33,200
दिनों आर्य समाजी सबसे ऊपर बने हुए हैं अलंकारी भाई

654
00:46:33,200 --> 00:46:36,400
जो हैं हां

655
00:46:36,400 --> 00:46:40,400
रामपाल के अनुसार भगवत गीता में 5% ज्ञान काल का

656
00:46:40,400 --> 00:46:44,480
अपना मनमुखी ज्ञान है। अर्थात वह प्रामाणिक नहीं है। ऐसे

657
00:46:44,480 --> 00:46:48,560
में भगवत गीता प्रदान करने वाले के प्रति अश्रद्धा उत्पन्न हो जाने

658
00:46:48,560 --> 00:46:52,720
की स्थिति में अश्रद्धा कि जो बोलने वाला है वो झूठ

659
00:46:52,720 --> 00:46:56,800
बोल सकता है। अब क्या होगा उत्पन्न अब पहली इसमें एक कैच

660
00:46:56,800 --> 00:47:01,040
और है कि आज तक यह नहीं बताया गया कौन-कौन से मंत्र है वह

661
00:47:01,040 --> 00:47:05,120
अगर 700 श्लोक हैं भगवत गीता में 700

662
00:47:05,120 --> 00:47:09,360
श्लोक हैं तो पांच% होते हैं 35

663
00:47:09,360 --> 00:47:13,440
श्लोक वो कौन-कौन से 35 श्लोक हैं ये आज तक अब ये बता

664
00:47:13,440 --> 00:47:17,760
भी नहीं पाएंगे इन्होंने इतनी खिचड़ी कर दी है ना ये बता भी नहीं पाएंगे

665
00:47:17,760 --> 00:47:21,920
खैर तो जब उन उसके प्रति भगवत गीता

666
00:47:21,920 --> 00:47:26,080
को कहने वाले के प्रति अश्रद्धा उत्पन्न हो गई तो भगवत गीता के

667
00:47:26,080 --> 00:47:30,160
ही किसी श्लोक के आधार पर आप किसी को तत्वदर्शी या परम संत

668
00:47:30,160 --> 00:47:34,480
इत्यादि नहीं कह सकते क्योंकि अभी तो भगवत

669
00:47:34,480 --> 00:47:38,480
गीता ही रडार पे है कि उसमें से कौन सी बात

670
00:47:38,480 --> 00:47:40,320
सही हो सकती है कौन सी नहीं जो

671
00:47:40,320 --> 00:47:46,320
झूठ बोल सकता है वो तो कहीं भी झूठ बोल सकता है

672
00:47:46,480 --> 00:47:50,800
ऐसे में भगवत गीता के प्रति प्रमाण्य बुद्धि सिद्ध नहीं होती अर्थात भगवत

673
00:47:50,800 --> 00:47:55,200
गीता के आधार पर किसी को अगर रामपाल के अनुसार चले

674
00:47:55,200 --> 00:47:59,280
तो रामपाल भगवत गीता के अनुसार तत्वदर्शी सिद्ध नहीं होंगे।

675
00:47:59,280 --> 00:48:03,360
दूसरी बात अगर यह कहा जाए कि क्योंकि

676
00:48:03,360 --> 00:48:07,440
रामपाल तत्वदर्शी है। जैसे एक व्यक्ति बोला

677
00:48:07,440 --> 00:48:12,080
कि भाई जोहरी होता है वह परख लेता है कि कौन सी चीज सही है कौन सी नहीं।

678
00:48:12,080 --> 00:48:16,400
तो रामपाल यदि यह कहा जाए क्योंकि रामपाल तत्वदर्शी है इसलिए

679
00:48:16,400 --> 00:48:20,400
उसे पता है कि भगवत गीता में कौन से मंत्र जो है कौन से श्लोक जो है

680
00:48:20,400 --> 00:48:24,400
वो सच्चे हैं और कौन से श्लोक जो है वो झूठे हैं उसको पता है

681
00:48:24,400 --> 00:48:28,720
वो क्योंकि तत्वदर्शी है तो भगवत गीता का तो अभी

682
00:48:28,720 --> 00:48:32,800
निस्तारण नहीं हुआ है कि उसमें कौन से श्लोक सच्चे

683
00:48:32,800 --> 00:48:37,120
हैं और कौन से झूठे हैं। उससे पहले रामपाल को तत्वदर्शी मानना

684
00:48:37,120 --> 00:48:41,200
पड़ेगा। वो किस आधार पर मानोगे? अगर

685
00:48:41,200 --> 00:48:45,200
रामपाल की चयनात्मक प्रक्रिया को अपनाना है भगवत

686
00:48:45,200 --> 00:48:49,520
गीता की प्रामाणिकता अथवा अप्रामाणिकता के विषय में

687
00:48:49,520 --> 00:48:53,760
तो भगवत गीता के बिना स्वतंत्र रूप से रामपाल को तत्वदर्शी

688
00:48:53,760 --> 00:48:55,520
मानना पड़ेगा वहां

689
00:48:55,520 --> 00:49:00,640
कौन सा शास्त्र होगा क्योंकि शास्त्र तो स्वयं अभी रडार पर है

690
00:49:00,640 --> 00:49:06,080
तो

691
00:49:06,080 --> 00:49:09,840
तो क्या है?

692
00:49:09,840 --> 00:49:14,160
तो यहां ध्यातव्य है कि रामपाल द्वारा गीता के श्लोकों की छटनी

693
00:49:14,160 --> 00:49:18,320
करने के संबंध में रामपाल के प्रति प्रमाण्य बुद्धि होना

694
00:49:18,320 --> 00:49:23,600
प्रमाणिक रूप से प्रमाणिक प्रमाण्य बुद्धि होने हेतु

695
00:49:23,600 --> 00:49:28,320
रामपाल का प्रमाणिक रूप से तत्वदर्शी होना आवश्यक है।

696
00:49:28,320 --> 00:49:32,320
ठीक है? तो वह तत्वदर्शी कैसे सिद्ध करोगे कि

697
00:49:32,320 --> 00:49:36,400
उसके आधार पर हम यह समझ पाए कि गीता में कौन से श्लोक जो कह रहा है सही है कौन

698
00:49:36,400 --> 00:49:40,560
से श्लोक गलत है वो तत्वदर्शी कहां से सिद्ध होगा तो यह पूरी आज

699
00:49:40,560 --> 00:49:44,560
हमने तत्वदर्शी की विवेचना सुन ली जी हर्ष जी अब आप बताएं और

700
00:49:44,560 --> 00:49:48,640
फिर से अंत में कहूंगा रामपाल यदि तुम में दम है

701
00:49:48,640 --> 00:49:52,640
यदि तुम में सामर्थ है तुमने यदि

702
00:49:52,640 --> 00:49:56,640
तुम्हें यह लगता है कि तुमने जो कुछ बकवास की है अपनी किताबों में

703
00:49:56,640 --> 00:50:01,120
अपने चैनल पर अपने वक्तव्यों में हमारे आराध्य

704
00:50:01,120 --> 00:50:05,120
जो देवी देवता हैं भगवान भगवत स्वरूप हैं उनके विषय में जो

705
00:50:05,120 --> 00:50:09,120
तुमने बकवास की है यदि तुम्हें लगता

706
00:50:09,120 --> 00:50:10,880
है कि उसमें जरा भी कुछ तंत्र

707
00:50:10,880 --> 00:50:14,880
पानी है उसमें कुछ तत्व है और तुम्हें लगता है कि

708
00:50:14,880 --> 00:50:19,040
तुम तत्वदर्शी हो तुम्हें लगता है कि कबीर भगवान है तुम्हें

709
00:50:19,040 --> 00:50:23,120
लगता है कि तुम्हारे द्वारा बताया जाने वाला धर्म धर्म है तुम्हें लगता है

710
00:50:23,120 --> 00:50:27,360
कि तुम ईश्वर के अस्तित्व को सिद्ध कर सकते हो अपनी

711
00:50:27,360 --> 00:50:31,680
व्याख्या के अनुसार तो आओ करो सामना शिवश

712
00:50:31,680 --> 00:50:36,400
नारायण द्विवेदी का तुम्हें चुनौती दी जाती है करो सामना

713
00:50:36,400 --> 00:50:40,400
ठीक है तो यह दो पक्ष हो गए तत्वदर्शी की हमने

714
00:50:40,400 --> 00:50:44,480
एक स्ट्रक्चरल वे में जान लिया और रामपाल को हमने चुनौती

715
00:50:44,480 --> 00:50:47,760
दे दी जी बताएं

716
00:50:47,760 --> 00:50:52,000
जी भैया बहुत बढ़िया तरीके से आपने चुनौती भी दे दिया है

717
00:50:52,000 --> 00:50:56,480
और उन लोगों तक ये बात पहुंच भी जाएगी बहुत जल्दी

718
00:50:56,480 --> 00:51:00,560
उनके शिष्य लोग ये ये कर ही देंगे उन

719
00:51:00,560 --> 00:51:05,280
तक पहुंचा करके सारा संदेश और वही

720
00:51:05,280 --> 00:51:09,520
जैसे बोलिए बोलिए बोलिए अभी कुछ दिन पहले शायद

721
00:51:09,520 --> 00:51:13,520
ही लाइव था शायद जब पहाड़ी जी के चैनल पर

722
00:51:13,520 --> 00:51:17,520
एक रामपाल वैसे आया था मैंने उससे तत्व के विषय में पूछा कि

723
00:51:17,520 --> 00:51:21,680
भाई तत्व क्या है तो वो बता नहीं सका था पर आज

724
00:51:21,680 --> 00:51:25,920
आपने जो है तत्व के विषय में बताया अब देख लो भाई सारे

725
00:51:25,920 --> 00:51:30,000
लोग तत्व किसे कहते सतर्द चिल्लाने से

726
00:51:30,000 --> 00:51:34,400
नहीं होता सत्य के विषय में पहले समझो तत्व क्या है

727
00:51:34,400 --> 00:51:39,440
वो बहुत सही है अभी पता चल गया लोगों को और

728
00:51:39,440 --> 00:51:43,840
बाकी आपका लाइफ तो बहुत बढ़िया से आपने समझा भी दिया तत्वदर्शी

729
00:51:43,840 --> 00:51:48,000
की पहचान बता दी तत्वदर्शी कौन है ये सब और

730
00:51:48,000 --> 00:51:52,000
मुख्य रूप से आपने उसे चैलेंज भी दे दिया है अब देखना है

731
00:51:52,000 --> 00:51:57,200
कि वो आता है कि नहीं वो नहीं आएगा

732
00:51:57,200 --> 00:52:01,440
भाई उसको तत्व ज्ञान नहीं है मगर उसको सामाजिक जो उसका जो आपराधिक

733
00:52:01,440 --> 00:52:05,520
उसका बैकग्राउंड उससे जुड़ा हुआ है केस चल रहे हैं तो उसको मालूम है ना

734
00:52:05,520 --> 00:52:09,600
कि उसको क्या करने से लाभ होगा क्या करने से नहीं होगा व्यवहारिक लाभ

735
00:52:09,600 --> 00:52:13,600
अंतत गतवा तो उसको लाभ भी नहीं है मगर उसको उस लाभ से कोई मतलब

736
00:52:13,600 --> 00:52:17,600
नहीं है उसको तो दैहिक वाली चीजों का ही पोषण

737
00:52:17,600 --> 00:52:22,480
करना है

738
00:52:22,480 --> 00:52:26,480
आप आप जो है ज्ञान वो हमने जो लेटर लेटर लिखा है। एक

739
00:52:26,480 --> 00:52:30,720
लोग कह रहे हैं तुम्हें बोलने का ढंग नहीं है। तो भाई जैसे तुम्हारा बाबा बोलता

740
00:52:30,720 --> 00:52:34,800
है वैसे ही उसको बोला बोला गया है। बाकी जो लेटर लिखा है उसमें उसके

741
00:52:34,800 --> 00:52:38,880
लिए तूतड़ा की भाषा का उपयोग नहीं किया गया है। उसमें उसके लिए उन उन

742
00:52:38,880 --> 00:52:43,200
उसका की जगह उन की बात की गई है। जैसे उसके की बजाय

743
00:52:43,200 --> 00:52:47,280
उनके तो जिस रूप में वो आएगा सामने उस रूप में ही उसका स्वागत किया

744
00:52:47,280 --> 00:52:51,440
जाएगा। बाकी उसने तू तड़ाक हमारे ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती गणेश सबके

745
00:52:51,440 --> 00:52:55,600
लिए किया है तो हम क्यों ना करें तमीज तो तुमको नहीं

746
00:52:55,600 --> 00:52:59,840
है तुम अगर अभी सामने आ जाओगे ना तो तुम

747
00:52:59,840 --> 00:53:03,920
मैं क्या बताऊं तुम्हारा क्या हाल होगा तुम अभी

748
00:53:03,920 --> 00:53:08,000
सामने आ जाओ आप जो है अपना ना धर्म सिद्ध कर पाओगे

749
00:53:08,000 --> 00:53:12,480
ना मानवता ठीक है तो इसलिए

750
00:53:12,480 --> 00:53:16,640
मत पड़ो चक्कर में कोई है नहीं टक्कर में हां जी लिंक

751
00:53:16,640 --> 00:53:20,800
दे दीजिए किसी को चेहरा दिखा के अगर चर्चा करनी है रामपाल के विषय में तो

752
00:53:20,800 --> 00:53:25,280
आ सकता है। चेहरा दिखाकर लिंक दे दीजिए।

753
00:53:25,280 --> 00:53:29,680
जी बोलिए शास्त्रवाद जी

754
00:53:29,680 --> 00:53:33,840
जी बिल्कुल आप लिंक दे दीजिए। आएंगे ये लोग चर्चा करने।

755
00:53:33,840 --> 00:53:38,000
कल तो आ रहे थे जी के चैनल पे तो आ रहे थे

756
00:53:38,000 --> 00:53:42,160
अपना नाम बदल बदल के अपने आइडेंटिटी को छुपा करके। अब अब ये

757
00:53:42,160 --> 00:53:46,240
लोग कह रहे हैं शंकराचार्य को बिठाओ। नहीं तो मुझसे दिन भर कमेंट किया करेंगे कि

758
00:53:46,240 --> 00:53:50,240
तुम वहां क्यों नहीं जा रहे हो धनाना धाम अब अब मामला

759
00:53:50,240 --> 00:53:54,400
फस गया है अब तो वह भी आ सकता है ना

760
00:53:54,400 --> 00:53:58,400
अब मुझसे कह रहे हैं कि अब शंकराचार्य को बिठाओ तो

761
00:53:58,400 --> 00:54:02,560
मैं फिर वही वाली बात जो एक बार आर्य समाजियों ने क्या किया था कि

762
00:54:02,560 --> 00:54:06,800
उन्होंने जो है पत्र भेजा मुझे कि भैया चर्चा कर लो तो चर्चा तय

763
00:54:06,800 --> 00:54:10,800
हुई चर्चा में कुछ चीजें उसने उन्होंने ऐसी कह दी कि भैया

764
00:54:10,800 --> 00:54:14,880
जो है रिकॉर्डिंग केवल हम करेंगे हमारा स्थान होगा वरना नहीं होगा। तो मैंने

765
00:54:14,880 --> 00:54:18,880
कहा स्थान भी तुम्हारा है, रिकॉर्डिंग भी केवल तुम्हारी तो यह तो गलत बात है। तो

766
00:54:18,880 --> 00:54:22,880
नहीं माने। अच्छा विषय भी अपने मन से कुछ का कुछ निकाल लिया।

767
00:54:22,880 --> 00:54:26,880
भाई हमारे सीधे सरल विषय हैं। ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध करो। इस पर चर्चा करो

768
00:54:26,880 --> 00:54:31,840
आके। नहीं नहीं ये तो आप बात कर चुके। बात कर चुके तो आंसर कहां मिला?

769
00:54:31,840 --> 00:54:36,160
आंसर थोड़ी ना मिला है। सबको सबकी सबकी बोलती बंद हुई है उसमें।

770
00:54:36,160 --> 00:54:40,240
तो फिर उन्होंने क्या किया? ऐसी शर्तें रखी विपरीत वाली कि भाई हम

771
00:54:40,240 --> 00:54:44,400
जा ही ना पाए, कर ही ना पाए। तो फिर हमने भी शर्त रखी। फिर हमने

772
00:54:44,400 --> 00:54:44,900
क्या शर्त

773
00:54:44,880 --> 00:54:49,200
रखी मालूम है आपको? क्या शर्त रखी हमने?

774
00:54:49,200 --> 00:54:53,920
हमने कहा कि ठीक है मैं आपकी शर्त मंजूर है और

775
00:54:53,920 --> 00:54:58,000
हम जो है आपसे चर्चा करने को तैयार हैं। आपकी समस्त चर्च

776
00:54:58,000 --> 00:55:04,000
शर्तों को स्वीकार करते हुए। आप जो है

777
00:55:04,320 --> 00:55:08,640
आप हमारी यह शर्त है कि जो हमसे चर्चा करने आएगा वो

778
00:55:08,640 --> 00:55:12,800
डायरेक्ट हेलीकॉप्टर से चर्चा स्थल पर उतरेगा। ठीक

779
00:55:12,800 --> 00:55:17,200
है? पहली शर्त। दूसरी शर्त उसने केवल

780
00:55:17,200 --> 00:55:21,440
लाल कलर का लंगोट पहना होगा और वो वो कौन

781
00:55:21,440 --> 00:55:25,520
सा था? जलेबी भाई या बदनाम वो फलानी की

782
00:55:25,520 --> 00:55:30,400
जवानी इन सब जो यह जो वो है ना

783
00:55:30,400 --> 00:55:34,480
एक तरीके से निचले स्तर के शब्दों वाले जो गीत हैं समाज

784
00:55:34,480 --> 00:55:38,560
में आजकल बड़े फेमस है इन पर वो नृत्य करेगा अगर ये वो

785
00:55:38,560 --> 00:55:43,760
करता है तो हम उसकी शर्तों को मानते हुए उसके साथ चर्चा करेंगे

786
00:55:43,760 --> 00:55:47,760
तब वो भाग गए फिर दोबारा नहीं आए सामने मतलब आप

787
00:55:47,760 --> 00:55:51,840
ही विपरीत शर्तें रखना जानते हो क्या है है

788
00:55:51,840 --> 00:55:56,160
ना? ये वाली बात है। अ

789
00:55:56,160 --> 00:56:00,400
ये भाई साहब अपना चेहरा दिखा रहे हैं। इनको लेते हैं। जी

790
00:56:00,400 --> 00:56:05,600
जी हरिवंश जी जी जी हरिवंश

791
00:56:05,600 --> 00:56:09,840
जी मैं मैं सर आपको बस इतना बताने आया था कि

792
00:56:09,840 --> 00:56:14,240
जैसे मैं जो गोविंद गुरुकुल जी है ना तो

793
00:56:14,240 --> 00:56:18,320
उनके साथ हम ज्ञान चर्चा करते हैं तो ये नॉर्मली जितने

794
00:56:18,320 --> 00:56:22,320
भी रामपाल वाले ये नॉर्मली मेरे को जानते हैं तो अब ये

795
00:56:22,320 --> 00:56:26,960
सब प्लानिंग कर रहे हैं कि आपकी मतलब जो आईडीज वगैरह उन पे

796
00:56:26,960 --> 00:56:31,440
स्ट्रीक वगैरह मार के और आपकी इसको ये बैन करवाना चाहते हैं। तो मैं सिर्फ इतना

797
00:56:31,440 --> 00:56:36,480
मतलब जरा बताने आते कि आप अपनी तरफ से थोड़ा प्रिपेयर रहे

798
00:56:36,480 --> 00:56:40,240
कि आप डिफेंस कर सके।

799
00:56:40,240 --> 00:56:45,120
नहीं एक तो हमारा बंद हुआ है सब के बहुत टाइम से

800
00:56:45,120 --> 00:56:49,280
जी बोलिए बोलिए जी जी अब

801
00:56:49,280 --> 00:56:53,360
तो अब तो ये भी चाह रहे हैं कि क्योंकि मेरे पास भी कई कमेंट्स आते हैं

802
00:56:53,360 --> 00:56:57,440
कि मतलब कई बार मैं आपका डायलॉग मारता हूं कि क्यों पड़े हो चक्कर में कोई नहीं

803
00:56:57,440 --> 00:57:01,600
है टक्कर में तो उससे ये ज्यादा चिढ़ जाते हैं। तो अब ये बोल

804
00:57:01,600 --> 00:57:05,840
रहे हैं कि जी तो अब ये बोल रहे है कि अब देखियो मतलब

805
00:57:05,840 --> 00:57:11,600
उनकी आईडी अगर बचा सको तो बचा लियो तो मैं आपको जरा आपको बताने आया था

806
00:57:11,600 --> 00:57:15,440
चलिए धन्यवाद आपने इतना वो प्रकट

807
00:57:15,440 --> 00:57:19,440
किया चिंता प्रकट की वैसे हमारे साथ श्री रघुनाथ तो किस

808
00:57:19,440 --> 00:57:23,760
बात की चिंता हमें और जो मैं आपको एक बात बताऊं

809
00:57:23,760 --> 00:57:28,000
कि Twitter Twitter मैं इसको कटिंग करके शॉट

810
00:57:28,000 --> 00:57:32,000
निकाल के डालना आप लोग हां जो अब मैं बोलने वाला हूं जो

811
00:57:32,000 --> 00:57:36,240
रामपाल है ना रामपाल और उसका जो तंत्र है उसका

812
00:57:36,240 --> 00:57:40,800
स्वरूपभूत लक्षण है क्या उसका प्रचार तंत्र

813
00:57:40,800 --> 00:57:45,280
Twitter Instagram YouTube Facebook

814
00:57:45,280 --> 00:57:49,520
ये जितने भी ऑनलाइन वो हैं मंच वो उसका प्रचार

815
00:57:49,520 --> 00:57:53,760
तंत्र है और यह प्रचार तंत्र उसका स्वरूप भूत लक्षण है। स्वरूप

816
00:57:53,760 --> 00:57:57,840
भूत लक्षण उसे कहते हैं जिसके बिना उस तत्व का उस पदार्थ

817
00:57:57,840 --> 00:58:02,000
का अस्तित्व ही सिद्ध ना हो। ठीक है। मगर हमारा

818
00:58:02,000 --> 00:58:06,080
स्वरूप भूत लक्षण ये सब नहीं है। हमारा स्वरूप भूत

819
00:58:06,080 --> 00:58:10,080
लक्षण है शंकराचार्य। हमारा स्वरूप भूत लक्षण है

820
00:58:10,080 --> 00:58:14,240
राम। ये सब हमसे अलग भी हो जाएगा।

821
00:58:14,240 --> 00:58:18,480
हमसे अलग भी हो जाएगा। तब भी तूफानी फैसला करेगा रोशनी

822
00:58:18,480 --> 00:58:22,560
का और दिया वो चलेगा जिसमें दम हो। ठीक है। जी जी।

823
00:58:22,560 --> 00:58:26,640
तो ये सब बातें नोट कर लें। वो मैं उदाहरण दे दूं एक बार फिर

824
00:58:26,640 --> 00:58:30,640
से मुझसे रहा नहीं जा रहा है कि इस तरह की बातें करने वाले

825
00:58:30,640 --> 00:58:34,720
जो लोग होते हैं तो उनको मैं इस समय बात कर रहा हूं

826
00:58:34,720 --> 00:58:38,960
जो इस तरह की भड़काऊ बातें करते हैं अनगढ़ प्रलाप करते हैं अश्लील बातें

827
00:58:38,960 --> 00:58:42,960
करते हैं हमारे देवी देवताओं के बारे में वो जो बड़ा वाला जानवर

828
00:58:42,960 --> 00:58:46,960
होता है ना वो बड़ा वाला एक जानवर होता

829
00:58:46,960 --> 00:58:50,960
है वो क्या कहते हैं उसको क्या कहते हैं शास्त्रवाद जी वो बड़े

830
00:58:50,960 --> 00:58:55,680
वाले को क्या कहते हैं हाथी हाथी हाथी

831
00:58:55,680 --> 00:58:59,920
हां अच्छा हाथी वो जी हाथी वो

832
00:58:59,920 --> 00:59:03,920
हम है और वो वो

833
00:59:03,920 --> 00:59:09,520
होता है ना वो कौन होता है कौन होता है वो

834
00:59:09,520 --> 00:59:13,920
वो कौन होता है हां

835
00:59:13,920 --> 00:59:18,240
वो तुम हो ठीक है कुत्ते

836
00:59:18,240 --> 00:59:22,240
जी तो इसीलिए कहता हूं मत पड़ो

837
00:59:22,240 --> 00:59:26,320
चक्कर में कोई है नहीं टक्कर में जी जी इनको इनको

838
00:59:26,320 --> 00:59:32,240
पता नहीं हमारे पास क्या हमारे पास ये है शक्ति के रूप में

839
00:59:32,240 --> 00:59:36,720
ऊंचे गुरु गुरु गोविंद और ग्रंथ है हमारे पास

840
00:59:36,720 --> 00:59:40,720
मैं मैं भी ये कई बार ये आते है ना मेरे पास डिबेट के लिए मैं इनको यही बोलता हूं कि

841
00:59:40,720 --> 00:59:44,720
सिर्फ पांच मिनट अगर पांच मिनट में आपको निरुत्तर नहीं कर दिया वो

842
00:59:44,720 --> 00:59:45,680
भी कि मैं स्टार्टिंग

843
00:59:45,680 --> 00:59:49,840
से आपकी और गोविंद जी की मैं वीडियो दोनों की देखता हूं तो उससे मेरे को इतना

844
00:59:49,840 --> 00:59:53,920
हो गया कि मैं इनको डायरेक्ट अब टक्कर देता हूं कि बस 5 मिनट अच्छी बात

845
00:59:53,920 --> 00:59:58,480
है अच्छी बात है एक आम बोएंगे तो लाखों आम पाएंगे

846
00:59:58,480 --> 01:00:02,480
है ना? जी जी जी बिल्कुल बिल्कुल बिलकुल और

847
01:00:02,480 --> 01:00:06,480
शायद आपने मेरे को जी शायद आपने मेरे को पहचाना नहीं कि

848
01:00:06,480 --> 01:00:10,560
मैं वही हूं जिसने आपके पास डीएम किया था कि गो

849
01:00:10,560 --> 01:00:14,880
समान आना विनय के लिए जो हम वो चला रहे हैं।

850
01:00:14,880 --> 01:00:19,680
अच्छा अच्छा जी जी जी हां भाई 27 अप्रैल को

851
01:00:19,680 --> 01:00:24,080
27 अप्रैल को सभी लोग अपनेप जिले में ये आह्वान क्रियान्वित

852
01:00:24,080 --> 01:00:28,080
है। सक्रिय है। गौ सम्मान आहान अभियान 27

853
01:00:28,080 --> 01:00:32,400
अप्रैल को सभी लोगों को अपने निकटतम इस अभियान के जो प्रबंधक

854
01:00:32,400 --> 01:00:36,480
हैं उन उनके साथ जुड़कर के वहां जाना है तहसील में और वहां

855
01:00:36,480 --> 01:00:40,880
हस्ताक्षर अपने करके देने हैं और वहां पर पूरे देश में करोड़ों

856
01:00:40,880 --> 01:00:44,960
लोग एकत्रित होने वाले हैं 27 अप्रैल के दिन तो जिनकी भी

857
01:00:44,960 --> 01:00:48,960
जो भी गौ भक्त हैं जो भी गाय के प्रति गाय

858
01:00:48,960 --> 01:00:53,280
माता के प्रति श्रद्धा रखते हैं वो इस अभियान से अवश्य जुड़े और

859
01:00:53,280 --> 01:00:57,280
27 अप्रैल के दिन अवश्य आवश्यक रूप से वह जो

860
01:00:57,280 --> 01:01:00,800
है अपने अपने जिले में तहसील कार्यालय पर जाए

861
01:01:00,800 --> 01:01:05,120
और अपना हस्ताक्षर करते हुए अपना जो

862
01:01:05,120 --> 01:01:09,520
अंश है वो प्रदान करें इस अभियान को। ठीक है?

863
01:01:09,520 --> 01:01:13,680
एक मांग की जा रही है कि गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित किया जाए। उसके

864
01:01:13,680 --> 01:01:17,760
संबंध में है। पूज्यपाद करपात्री जी महाराज कहते थे और जगुरु

865
01:01:17,760 --> 01:01:22,080
शंकराचार्य भगवान भी कहते हैं वर्तमान पूरी पीठाधीश्वर कि

866
01:01:22,080 --> 01:01:26,080
ठीक है आमूलचूल परिवर्तन जब तक नहीं होगा नहीं होगा

867
01:01:26,080 --> 01:01:30,080
कोई बात नहीं जैसे मूल में पानी डालने की बात करते हैं कि भाई

868
01:01:30,080 --> 01:01:35,280
जब तक मूल में पानी नहीं डालेंगे तब तक जो है

869
01:01:35,280 --> 01:01:39,440
चीजें सुधरेंग नहीं सही से ये कहते हैं। मगर फिर भी वो ये कहते हैं अगर

870
01:01:39,440 --> 01:01:43,440
किसी भी जगह खड़े होने से एक गाय की भी

871
01:01:43,440 --> 01:01:48,640
प्राण की रक्षा हो रही ना एक तो अवश्य होना

872
01:01:48,640 --> 01:01:52,880
एक गाय के भी प्राणों की रक्षा हो जाए तो अवश्य होना तो इतना बड़ा अभियान

873
01:01:52,880 --> 01:01:56,960
है तो जरूर उससे कुछ ना कुछ कहीं ना कहीं गौवंश की रक्षा होगी

874
01:01:56,960 --> 01:02:00,960
तो आप लोग अवश्य जुड़े उसमें यह ना सोें कि भाई इससे

875
01:02:00,960 --> 01:02:05,440
मैं दूर हूं या यह मेरा तंत्र नहीं है या यह अलग है

876
01:02:05,440 --> 01:02:10,240
ऐसा ऐसी भावना हटा के गाय माता के लिए एकजुट हूं।

877
01:02:10,240 --> 01:02:14,240
जी और मैं यह भी बताना चाहता हूं कि यह अभियान सिर्फ यहीं तक रही

878
01:02:14,240 --> 01:02:15,920
नहीं रुकेगा। अगर हमारी

879
01:02:15,920 --> 01:02:20,160
मांगे पूरी नहीं की जाती तो आगे चलकर शायद 26

880
01:02:20,160 --> 01:02:25,120
जो आने वाली जनवरी होगी उसको हमारे 3000 गौ रक्षक

881
01:02:25,120 --> 01:02:29,120
आंदोलन पर बैठ जाएंगे। पूरे 30 दिन के लिए जिनका खाना पीना

882
01:02:29,120 --> 01:02:33,280
दिल्ली की 7000 घरों से आएगा। तो अगर हमारी नहीं होती

883
01:02:33,280 --> 01:02:37,280
मांगे पूरी तो हम वो भी करेंगे।

884
01:02:37,280 --> 01:02:41,360
अगले स्टेज हैं। अगर इस स्टेज पर नहीं मानेंगे तो अगला है दिल्ली

885
01:02:41,360 --> 01:02:45,520
में धरना प्रदर्शन और उसके बाद उसके बाद फिर आमरण अनशन के

886
01:02:45,520 --> 01:02:49,760
लिए भी कुछ संतगण तैयार हुए हैं।

887
01:02:49,760 --> 01:02:53,840
वो ठीक है। तो बहुत व्यापक रूप से अभियान है। आप लोग इससे

888
01:02:53,840 --> 01:02:57,920
अवश्य जुड़े। इसमें आपको कुछ नहीं कोई और कुछ नहीं करना है। केवल

889
01:02:57,920 --> 01:03:02,080
आपका एक हस्ताक्षर चाहिए कि आप ये चाहते हैं कि गाय को

890
01:03:02,080 --> 01:03:06,080
राष्ट्रमाता घोषित कर दिया जाए। ठीक है जी

891
01:03:06,080 --> 01:03:11,440
जी जी जी जी अनिकेत जी जय श्री राम

892
01:03:11,440 --> 01:03:15,680
जय श्री राम भैया प्रणाम जय हो बताइए इसमें

893
01:03:15,680 --> 01:03:19,680
एक दिक्कत आता है भैया अगर हम किसी से कहते भी है ना

894
01:03:19,680 --> 01:03:23,760
तो कोई ना कोई किसी ना किसी पार्टी वाला समझ लेता है कि तुम इस पॉलिटिकल पार्टी

895
01:03:23,760 --> 01:03:27,760
से हो उस पॉलिटिकल पार्टी से तो उनसे थोड़ा टैकल करना मुश्किल हो जाता

896
01:03:27,760 --> 01:03:31,200
है तो उनको क्या उत्तर दिया जाए आपके अनुसार

897
01:03:31,200 --> 01:03:35,280
मैंने भी उत्तर दिया ना मैंने अभी दिया उत्तर वो चाहे

898
01:03:35,280 --> 01:03:39,360
कोई भी दल हो, कोई भी आरएसएस हो या आर्य समाज

899
01:03:39,360 --> 01:03:43,520
वाले ही क्यों ना हो, इस वाले ही क्यों ना हो, अगर कहीं पर भी

900
01:03:43,520 --> 01:03:47,680
खड़े होने के कारण एक गाय के प्राणों की भी रक्षा

901
01:03:47,680 --> 01:03:51,840
हो रही है तो हमें वहां पर खड़े होना ही चाहिए। ठीक है? यह ना

902
01:03:51,840 --> 01:03:55,840
देखते हुए कि भाई वह तंत्रों की विचारधारा अलग है। आइडियोलॉजिकली

903
01:03:55,840 --> 01:04:00,080
हम लोग अलग-अलग हैं। यह है वह है। यहां बात गाय माता की हो रही है।

904
01:04:00,080 --> 01:04:04,240
जो जो भी प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से गाय माता

905
01:04:04,240 --> 01:04:08,240
का भक्त है, गाय माता में श्रद्धा रखता है, उसको वहां

906
01:04:08,240 --> 01:04:12,320
पर एकजुटता दिखानी चाहिए। कितना भी

907
01:04:12,320 --> 01:04:18,320
वैचारिक मतभेद हो उसको अलग हटाकर गाय माता के लिए एक मंच पर आना चाहिए।

908
01:04:21,280 --> 01:04:27,280
मैं जरा इनको एक बार दिखाता हूं।

909
01:04:27,440 --> 01:04:31,600
ये जो है ये उनका ऑफिशियल है। तो इसमें हम

910
01:04:31,600 --> 01:04:35,680
सिग्नेचर वगैरह लेते हैं जो अपनीपनी सहमति देते हैं। तो

911
01:04:35,680 --> 01:04:40,000
अगर किसी को भी अगर ये चाहिए तो वो मेरे से कांटेक्ट

912
01:04:40,000 --> 01:04:44,080
कर सकता है। मैं जरा एक बार अपनी आईडी भी एक बार शो कर

913
01:04:44,080 --> 01:04:50,080
देता हूं कि जिसको चाहिए वह मेरे से कांटेक्ट कर सकता है।

914
01:04:51,920 --> 01:04:55,920
यह बेवकूफ क्या कह रहा है? जब जाकिर नायक यह कर रहा था, वह कर रहा था।

915
01:04:55,920 --> 01:05:00,000
यह बता तू कि जब बौद्ध ये मेरी

916
01:05:00,000 --> 01:05:04,000
आईडी है। उसप आप भेज सकते हो

917
01:05:04,000 --> 01:05:08,880
मेरे को अगर किसी को चाहिए तो हां बड़ी बड़ा कर दीजिए इनकी स्क्रीन।

918
01:05:08,880 --> 01:05:12,960
एक मिनट। क्या आप आप अपनी आईडी ना मुझे WhatsApp करिए। मैं यहां पे

919
01:05:12,960 --> 01:05:17,040
वो कर देता हूं। शो कर दूंगा। इजी पड़ेगा। ऐसे क्लियर दिख

920
01:05:17,040 --> 01:05:21,120
नहीं रहा। हां भैया आप कुछ बोल रहे थे कमेंट वाले को। मैं ये बोल रहा हूं। ये व्यक्ति बोल

921
01:05:21,120 --> 01:05:25,280
रहा है जाकिर नायक ने सारे शंकराचार्यों को चुनौती दी थी।

922
01:05:25,280 --> 01:05:29,360
फिर वही बात आ गई। पहली बात तो यह है कि कोई

923
01:05:29,360 --> 01:05:33,360
भी उठाई गिरा आकर के बोलने लगेगा तो वहां चले

924
01:05:33,360 --> 01:05:36,640
जाना चाहिए। तो अब तुम यह बहाना भी मत बनाना कि मैं शिवश के बुलाने

925
01:05:36,640 --> 01:05:40,800
पे नहीं जाऊंगा। यह बहाना तुमने खत्म कर दिया है बोल के। भाई

926
01:05:40,800 --> 01:05:44,880
थोड़ा सा स्पेस था कि भाई मैं नहीं जाऊंगा शिवश के बुलाने पे। हालांकि वह कोर्ट बुला लेगी नहीं

927
01:05:44,880 --> 01:05:49,040
आओगे तो। दूसरी बात यह है कि तुमने खंडन

928
01:05:49,040 --> 01:05:53,040
किया किस आधार पर? किस आधार पर किया? किस आधार पर किया? बताओ।

929
01:05:53,040 --> 01:05:57,200
वेद के आधार पर किया। वेद कहां से मिले? हवा

930
01:05:57,200 --> 01:06:01,440
से आ गए। कहां से आ गए तुम्हारे पास वेद? और तुम

931
01:06:01,440 --> 01:06:05,760
कहां थे? जब बौद्धों बौद्धों ने जो है पूरा नरक मचा रखा था। नास्तिकवाद

932
01:06:05,760 --> 01:06:10,000
फैला रखा था। कहां गए थे तुम? तुम थे ही नहीं। अभी पिछले 50

933
01:06:10,000 --> 01:06:14,240
साल का तुम्हारा इतिहास नहीं है। वही वाली बात। अरे हमने तुम्हें

934
01:06:14,240 --> 01:06:18,480
जब वेद दिए थे तब तुम्हारे सर पर तरपाल आई थी। बरसात से बचने

935
01:06:18,480 --> 01:06:24,480
की हैसियत नहीं तुम्हारी। गोलीबारी की बात करते हैं आप लोग।

936
01:06:24,560 --> 01:06:29,920
सही बात है। कमेंट कमेंट कमेंट हटा दो भाई।

937
01:06:29,920 --> 01:06:34,560
सही बात। भैया एक बार अपना नंबर बोलेंगे प्लीज।

938
01:06:34,560 --> 01:06:38,560
यह देखो यह क्या कह रहा है देखो ये अपनी खुजली इस तरह से मिटाने

939
01:06:38,560 --> 01:06:42,560
की कोशिश करते हैं। इनके खाज हो चुकी है। इससे खून

940
01:06:42,560 --> 01:06:46,720
बढ़ता है हम लोगों का भाई। नंबर बोलेंगे

941
01:06:46,720 --> 01:06:51,600
740 8301869

942
01:06:51,600 --> 01:06:54,800
740830

943
01:06:54,800 --> 01:06:57,920
18869

944
01:06:57,920 --> 01:07:02,080
मैंने तीर मार तो लिया भाई। यह देख ना तीर मैं डंके की चोट

945
01:07:02,080 --> 01:07:06,080
पर तेरे चीजों को बंद कर रहा हूं और क्या चाहिए तेरे कार्यालयों

946
01:07:06,080 --> 01:07:11,040
में जाकर के वहां पर खड़ा होके बंद करवा रहा हूं उसको अपने सामने

947
01:07:11,040 --> 01:07:15,120
लोग कह रहे हैं हम नहीं जानते रामपाल के तंत्र को और क्या चाहिए

948
01:07:15,120 --> 01:07:19,200
भाई तू आजा करके दिखा दे मेरे किसी मंदिर को बंद मैंने तो

949
01:07:19,200 --> 01:07:23,360
तेरा बंद करवा दिया ना तू मेरे किसी मंदिर

950
01:07:23,360 --> 01:07:28,080
को बंद करवा के दिखा दे इसको तेरे हिसाब से प्रमाणिक

951
01:07:28,080 --> 01:07:32,080
जो सब्जी वाले के पुलिस वाला ले चले गए थे ना कैसे

952
01:07:32,080 --> 01:07:36,560
सर्जिकल स्ट्राइक किया था वो सब्जी वाला जो इन लोग के बुक बेच रहा था

953
01:07:36,560 --> 01:07:40,560
कहां लिखा है कि गांव की रक्षा करनी है अब वो

954
01:07:40,560 --> 01:07:44,720
ठीक है अलग से बताएंगे गाय की रक्षा करनी है एक दिन में सारा घी

955
01:07:44,720 --> 01:07:48,720
मत पियो अभी तत्वदर्शी का घी पिया है ना सारा घी अभी एक ही दिन में मत

956
01:07:48,720 --> 01:07:52,800
पियो तुम तुम्हें लूज मोशन हो जाएंगे

957
01:07:52,800 --> 01:07:56,720
बंद करो

958
01:07:56,720 --> 01:08:00,960
तो बाबूलाल ये कह रहा है कि भाई तुमने क्या क्या तीर माल किया भाई तेरे

959
01:08:00,960 --> 01:08:05,200
गढ़ में खड़े होकर के तेरी चीजों को बंद करवाया है तू बंद करवाना

960
01:08:05,200 --> 01:08:09,600
है हमारी किसी चीज को हम दिखाएं

961
01:08:09,600 --> 01:08:15,600
वीडियो दिखाना है क्या

962
01:08:17,920 --> 01:08:22,960
हां किया आपने मैसेज वो चले गए क्या

963
01:08:22,960 --> 01:08:26,800
हां जी मैसेज किया आपने

964
01:08:26,800 --> 01:08:32,640
740830186 69

965
01:08:32,640 --> 01:08:36,640
अच्छा यहां पे ये लोग बेचारे अपनी वो मिटाया करते

966
01:08:36,640 --> 01:08:41,120
हैं जो उनको जो वो होती है ना तड़प क्या करूं मैं इसका

967
01:08:41,120 --> 01:08:45,200
सवाल का जवाब दे नहीं सकता हमारे बाबा जी ने वो तत्व ज्ञान दिया

968
01:08:45,200 --> 01:08:49,520
नहीं हमें पवन दास को याद है पवन दास एकदम जमीन

969
01:08:49,520 --> 01:08:53,680
के पैरों पैरों तले जमीन खिसक गई थी जब मैंने पूछा था कि कबीर

970
01:08:53,680 --> 01:08:57,680
जहां खड़े थे कंधा शुरू होता है यहां खत्म होता है उनके जो

971
01:08:57,680 --> 01:09:03,680
बगल की स्पेस थी वो किसने बनाई

972
01:09:04,480 --> 01:09:08,480
फिर वो इस पे आ गया मैं ये सब नहीं जानता मैं तो बस सीधे

973
01:09:08,480 --> 01:09:12,640
कहता हूं कि अगर मेरा भगवान असली भगवान है तो मैं आग में कूद जाऊंगा

974
01:09:12,640 --> 01:09:16,960
वो इस पर आ गया समझ रहे हो मतलब तर्क

975
01:09:16,960 --> 01:09:22,640
और प्रमाण सब खत्म अब जान की बाजी लगाओ 10 मंजिल से कूदो

976
01:09:22,640 --> 01:09:28,640
वो सिद्ध करेगा ज्ञान

977
01:09:29,520 --> 01:09:35,520
इन लोगों को याद दिलाना आवश्यक था। यह लोग भूल गए थे।

978
01:09:36,880 --> 01:09:41,520
ये भैया ये एसएमएस से इनविटेशन मांगा था। मैंने वो सेंड किया है।

979
01:09:41,520 --> 01:09:45,040
एसएमएस से इनविटेशन

980
01:09:45,040 --> 01:09:48,640
जी जी जी

981
01:09:48,640 --> 01:09:54,640
आपने मुझे मैसेज किया है मैंने जो नंबर बोला है उस पे

982
01:09:56,720 --> 01:10:02,400
7408301869

983
01:10:02,400 --> 01:10:07,920
बेचारे रामपालियों में बड़ा दर्द है।

984
01:10:07,920 --> 01:10:12,320
आप आ जाएंगे ऐसे बीच में तो फिर क्या होगा इनका सदमे

985
01:10:12,320 --> 01:10:17,520
लग जाते हैं इन लोगों को अच्छा इनको सबको मालूम है सबसे

986
01:10:17,520 --> 01:10:21,600
सबसे खतरनाक शत्रु इनका मैं ही हूं इनको सबको मालूम

987
01:10:21,600 --> 01:10:25,040
है ये बात

988
01:10:25,040 --> 01:10:29,120
अच्छा आपको पहचानते हैं भैया एक्चुअली जब वो बाहर आया ना रामपाल

989
01:10:29,120 --> 01:10:33,120
तो वो जो जितना भी वीडियो था ना उस मैंने वो लोग बहुत ये कर रहे

990
01:10:33,120 --> 01:10:37,200
थे जलने वाले जल रहे हैं ये वो सब मैंने बोला शिवाय नारायण द्विवेदी याद

991
01:10:37,200 --> 01:10:41,200
क्या तो सामने से उसने बोला कि शिवाय नारायण द्विवेदी केवल

992
01:10:41,200 --> 01:10:45,120
कुतर्क करता है मतलब वो जानता है

993
01:10:45,120 --> 01:10:49,520
आपको कुतर्क की कुतर्क की कुतर्क

994
01:10:49,520 --> 01:10:54,400
की शास्त्रीय परिभाषा क्या है वो भी बता दो फिर ये

995
01:10:54,400 --> 01:10:58,480
जब अपनी वीडियो ये जो अपनी वीडियोस वगैरह डालते हैं ना तो ये थंबनेल भी ऐसा लगाते

996
01:10:58,480 --> 01:11:02,560
हैं कि शिवांश नारायण द्विवेदी बीच डिबेट में भड़का शिवांश ने दी

997
01:11:02,560 --> 01:11:06,960
गाली ऐसी ऐसी तो ये वो लगाते हैं थंबनेल अरे आपने देखा नहीं

998
01:11:06,960 --> 01:11:11,200
भैया अभी तक आप देखोगे तो देखो ना लिखा है अगर तुम में हिम्मत

999
01:11:11,200 --> 01:11:15,280
है तो हरियाणा में चला जा वहां पे वहां से वापस

1000
01:11:15,280 --> 01:11:19,680
नहीं आएगा इस टाइम संत रामपाल जी महाराज को सब किसान सम्मानित

1001
01:11:19,680 --> 01:11:23,200
कर रहे हैं सही बात है वहां से वापस नहीं आएगा

1002
01:11:23,200 --> 01:11:27,600
जो जो जाएगा वापस नहीं आएगा वहां रामपाल रामपाल

1003
01:11:27,600 --> 01:11:31,920
के वो वो हथियार वाले वो देशद्रोह का मुकदमा चल रहा है ना AK-47

1004
01:11:31,920 --> 01:11:36,160
पता नहीं कौन-कौन से हथियार मिले थे वहां वापस

1005
01:11:36,160 --> 01:11:40,160
अच्छा ये बता तेरे रामपाल में वो नहीं है क्या हिम्मत वो नहीं आ सकता क्या

1006
01:11:40,160 --> 01:11:46,160
लखनऊ मेरे पास मेरे ऊपर तो देशद्रोह का मुकदमा भी नहीं है

1007
01:11:47,840 --> 01:11:52,000
जी भेजा आपने मुझे रहने दो आप मैं

1008
01:11:52,000 --> 01:11:56,320
आपको मैं आपको इंस्टा

1009
01:11:56,320 --> 01:12:00,400
पे भेजता हूं वहां से दिखा देना एक बार भेजो भेजो भेजो

1010
01:12:00,400 --> 01:12:03,120
जी

1011
01:12:03,120 --> 01:12:09,120
एक मिनट

1012
01:12:34,880 --> 01:12:38,960
यही खाली बोलते रहेंगे ये सब लोग कह रहे हैं

1013
01:12:38,960 --> 01:12:44,960
अपने किस नाम से आएगा

1014
01:12:45,680 --> 01:12:51,680
इतनी देर में तो बोल देते हम लोग

1015
01:12:52,400 --> 01:12:56,560
अरे हमारे शंकराचार्य ने उपनिषद में भाष्य किए भैया हमारे

1016
01:12:56,560 --> 01:13:00,960
शंकराचार्य ने पंचदशी लिखी है हमारे शंकराचार्य ने समर्थ

1017
01:13:00,960 --> 01:13:05,440
रामदास को खड़ा किया जो छत्रपति शिवाजी खड़े हुए

1018
01:13:05,440 --> 01:13:09,520
खड़े हुए हमारे शंकराचार्य ने रामसेतु का आंदोलन लड़ा है राम मंदिर का

1019
01:13:09,520 --> 01:13:13,520
आंदोलन लड़ा है हमारे शंकराचार्य ने गणित पर इतने ग्रंथ लिख दिए।

1020
01:13:13,520 --> 01:13:17,520
विदेशों से लोग पढ़ने आ रहे हैं। इसरो के साइंटिस्ट आ के वहां मार्गदर्शन

1021
01:13:17,520 --> 01:13:21,760
ले रहे हैं। और क्या-क्या बताऊं तुम्हें? कुछ पता

1022
01:13:21,760 --> 01:13:25,760
है? वो क्या था डायलॉग? लता तुझे कुछ नहीं पता।

1023
01:13:25,760 --> 01:13:29,760
ऐसे करके था कुछ।

1024
01:13:29,760 --> 01:13:34,000
जी जी। इसरो वाले आए थे जब उन्होंने 90

1025
01:13:34,000 --> 01:13:38,640
मिनट, 90 मिनट, 90 मिनट और 30 मिनट के चार सेशन लिए थे।

1026
01:13:38,640 --> 01:13:43,680
अच्छा ये देखो ये क्या कह रहा है? खूब लूटो खाओ।

1027
01:13:43,680 --> 01:13:49,680
यह लूटो खाओ देखो तुम्हारे यहां दान पात्र क्यों लगे बे हैं

1028
01:13:50,560 --> 01:13:54,560
उसमें क्या डाल के आते हो तुम उन दान

1029
01:13:54,560 --> 01:13:58,720
पात्रों में क्या डालते हो मैंने देखा है तुम लोग जहां

1030
01:13:58,720 --> 01:14:03,040
वो लंबलेट हो रहे होते हो वहां बगल में दान पेटी दान पेटी

1031
01:14:03,040 --> 01:14:09,040
हर हर फोटो के साथ बगल में दान पेटी ऐसे

1032
01:14:12,000 --> 01:14:16,480
ठीक है हटा दीजिए इनका कमेंट जी आपने भेजा मुझे इंस्टा पे

1033
01:14:16,480 --> 01:14:22,080
जी जी मैंने आपको इंस्टा पे भेज दिया है किस नाम से आएगा

1034
01:14:22,080 --> 01:14:26,240
ये होगा सर श्री राधा नाम से है प्रेमानंद जी महाराज

1035
01:14:26,240 --> 01:14:30,400
की डीपी है नागार्जुन के नाम से आया जी

1036
01:14:30,400 --> 01:14:34,400
जी जी वही है वही है वही है तो दूसरा नाम क्यों बता

1037
01:14:34,400 --> 01:14:38,560
रहे हो आप सर ये आईडी ये आईडी का नेम

1038
01:14:38,560 --> 01:14:44,320
था ना जो मैंने बताया अच्छा अच्छा श्री राधा

1039
01:14:44,320 --> 01:14:50,160
ऐसे करके हम कॉपी

1040
01:14:50,160 --> 01:14:56,160
और यह भेजा मैंने अपने जो ऑपरेटर हैं उनके पास

1041
01:14:58,960 --> 01:15:04,960
ऑपरेटर जी इसको जरा आप शो कर दीजिए इनकी आईडी है जो

1042
01:15:08,880 --> 01:15:13,200
मेरी भी भैया बहुत टाइम से इच्छा थी। मैं आपको देखता था तो मैं भी सोचता

1043
01:15:13,200 --> 01:15:17,200
कि एक बार तो मैं शिवान जी से मिलूं और आज

1044
01:15:17,200 --> 01:15:21,680
वो मेरे को वो हो ही गया कि आपसे भेंट हो ही गई।

1045
01:15:21,680 --> 01:15:27,680
अच्छी बात है ये तो

1046
01:15:33,520 --> 01:15:37,200
श्री

1047
01:15:37,200 --> 01:15:43,200
राधा

1048
01:15:45,680 --> 01:15:51,680
राधे जीरो जीरो

1049
01:15:59,600 --> 01:16:03,760
ये लो ये दिखा दो आप बस मैंने पेस्ट किया है यहां

1050
01:16:03,760 --> 01:16:08,160
इसको उसको कमेंट को शो कर दो आप

1051
01:16:08,160 --> 01:16:12,160
ऑपरेटर जी ये इनकी आईडी है वो वो दिखा

1052
01:16:12,160 --> 01:16:18,160
दो अभी एक मैसेज और किया है मैंने वो दिखा दो

1053
01:16:19,360 --> 01:16:24,240
तो अभियान से जुड़ने के लिए आप लोग इनसे संपर्क करें

1054
01:16:24,240 --> 01:16:27,360
श्री राधे

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01:16:27,360 --> 01:16:32,720
नाम से इनकी आईडी ये ये इनकी आईडी यही है ना है ना

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01:16:32,720 --> 01:16:36,960
जी जी जी जी बिल्कुल बिल्कुल जी जी

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01:16:36,960 --> 01:16:41,040
बहुत बढ़िया ठीक है तो आशा करता

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01:16:41,040 --> 01:16:45,200
हूं आज आज का ये जो सेशन है ये भी आप लोगों को अच्छा लगा और एक घोषणा

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01:16:45,200 --> 01:16:49,840
और कर रहा हूं वो जो रामपाल के जो भगवत गीता का वो था ना

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01:16:49,840 --> 01:16:53,840
पोस्टमार्टम पोस्टमार्टम वो दोबारा से वो जहां से छूटा

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01:16:53,840 --> 01:16:58,480
है वहीं से कंटिन्यू करने वाले हैं। कौन से चैनल पे करेंगे इंफॉर्मेशन दे दी जाएगी

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01:16:58,480 --> 01:17:02,720
और फिर से कह रहा हूं वैसे रामपाल बुद्धिमान है इस मामले में

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01:17:02,720 --> 01:17:06,720
भाई अपराधिक बैकग्राउंड रहा ही है उसका देशद्रोह

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01:17:06,720 --> 01:17:10,720
का मुकदमा चल ही रहा है तो बुद्धिमान इस मामले इन मामलों में है

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01:17:10,720 --> 01:17:14,880
तो वो दूर रहेगा आएगा नहीं फिर भी आ गया तो हिंदुओं के लिए अच्छी बात है

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01:17:14,880 --> 01:17:18,880
नहीं आया तो भी हिंदुओं के लिए अच्छी बात है और ये लोग देखेंगे कि उनका जो

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01:17:18,880 --> 01:17:23,200
भगवान है ना तथाकथित उसमें कितना तत्व ज्ञान

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01:17:23,200 --> 01:17:28,320
है ठीक है ठीक ठीक है शास्त्रवाद जी

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जी भैया जी और वैसे भी आपने जो लिंक दिया आज से कोई

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01:17:32,480 --> 01:17:34,560
भी नहीं आया चैनल लेकर मेरे

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01:17:34,560 --> 01:17:40,560
चैनल पे नहीं आते हैं ये लोग इधर उधर जाएंगे जहां इनको थोड़ा लगेगा

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01:17:41,840 --> 01:17:46,160
दूसरे चैनल पर जाकर के जहां इनको लगेगा

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01:17:46,160 --> 01:17:50,400
कि थोड़ा बहुत हम लोग थोड़ी बहुत देर तक

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01:17:50,400 --> 01:17:54,960
फूंक-फूक कर खा लेंगे है ना

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तो मेरे चैनल पे मैं देखता हूं मैं यही चीज नोटिस

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मैं ये चीज नोटिस करता हूं मैं देखूंगा पहाड़ी जी के यहां चले जाएंगे सबके

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यहां चले जाएंगे और सबने इनके इनके रामपाल को बहुत बड़ा भला

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01:18:07,600 --> 01:18:12,960
बुरा कहा होगा फिर भी चले जाएंगे मगर यहां कोई नहीं झांकने आता है

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यहां कोई नहीं आता है यहां पे बच निकल ले

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निकल ले निकल ले सब पिट रहे हैं बच के निकल ले वो वाले भाव रहते

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हैं क्राइम मास्टर गोगो

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01:18:26,320 --> 01:18:30,480
इनको शास्त्रों का खंडन इतना भारी नहीं लगता होगा जितना आपके ये

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सब जो तर्क और बातें है ना जितनी मिर्ची लगती होगी क्योंकि

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निकल के बराबर वही आता है इनकी अवस्था

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वर्तमान अवस्था

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ठीक है फिर भी मैं कहूंगा रामपाल ठीक है अगर तुम्हारे अंदर ये

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सामर्थ्य है इन विषयों में अपना पक्ष तुम स्पष्ट कर सकते हो तो

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आ जाओ और बाकी व्यक्तिगत गत परामर्श यही है जो मैं सबको देता

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हूं कि मत पड़ो चक्कर में कोई है नहीं टक्कर में जय श्री राम

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01:18:59,840 --> 01:19:03,920
कोई नहीं है टक्कर में जय श्री राम

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01:19:03,920 --> 01:19:07,920
जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम
