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प्रणाम। मेरा प्रश्न राष्ट्र के बारे में है। अगर

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भारत का जो हम बता रहे हैं कि हिमालय से कन्याकुमारी तक ही भारत है

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तो मिस्र और सुमेर क्या यह भारत के अंग नहीं है?

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उत्तर दक्षिण की सीमा को लेकर हिमालय से कन्याकुमारी तक भारत

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00:00:22,720 --> 00:00:26,800
कहा जाता है। तो मिश्र आदि जो है क्या वो भारत नहीं है।

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पश्चिम की बात कर रहे हैं जो उत्तर दक्षिण की बात है।

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क्या भारत नहीं आ सकते? बैठिए बैठे हुए हैं।

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बैठिए बैठे रहिए।

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जंबू दप भरत खंड सप्त दपाच मेदिनी

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00:00:46,960 --> 00:00:51,840
सात द्वीपों वाली पृथ्वी है। आजकल

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00:00:51,840 --> 00:00:56,640
क्षार सिंधु से व्यष्टित भूभाग ही सुलभ है।

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00:00:56,640 --> 00:01:01,040
शेष जो छह द्वीप है वो विलुप्त हो गए हैं।

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भारत में कुछ शाखा द्वीपी ब्राह्मण भी हैं।

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उनके पूर्वज कभी ना कभी शाकत द्वीप से आए होंगे।

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लेकिन आज तो जंबू द्वीप में जो भरत

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00:01:14,400 --> 00:01:18,800
खंड है तो जंबू द क्षार सिंधु से व्यस्त भूभाग ही

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हमको सुलभ है। शेष छह दप लुप्त हो गए हैं।

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मैं एक संकेत करता हूं। युधिष्ठिर जी

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की प्रेरणा से सहदेव दक्षिण भारत की विजय के लिए प्रस्थान

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कर चुके।

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लंका पहुंचे।

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उस समय राजा कौन थे?

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00:01:43,360 --> 00:01:47,920
विभीषण। करो कल्प भर राज।

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00:01:47,920 --> 00:01:52,240
विभीषण तो आज दृष्टिकोचर नहीं होते। वो लंका भी आजकल

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दृष्टिकोचर नहीं है। सहदेव ने कहा

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00:01:57,360 --> 00:02:02,000
अगर आपको युद्ध करना है तो युद्ध कीजिए। नहीं तो

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00:02:02,000 --> 00:02:06,720
भेंट लेकर आइए। हमारी अधीनता स्वीकार कीजिए।

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00:02:06,720 --> 00:02:10,880
उस समय विभीषण जी ने सोचा हमारे सामने कल का

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00:02:10,880 --> 00:02:14,880
ठुकरा है। अगर हम युद्ध में से जीत जाएंगे तो कोई हमारी

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00:02:14,880 --> 00:02:18,880
कीर्ति नहीं होगी। हार जाएंगे तो तो नहीं होगी। करूं तो

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00:02:18,880 --> 00:02:23,040
क्या करूं? उसने सोचा हमारे राम जी कृष्ण होकर

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00:02:23,040 --> 00:02:27,200
उत्पन्न हुए हैं। प्रकट हुए हैं। अच्छा है कि भेंट लेकर जाकर

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00:02:27,200 --> 00:02:31,200
अधीनता स्वीकार कर लूं। [संगीत]
