1
00:00:03,200 --> 00:00:07,200
सभी को जय श्री राम। जिस प्रकार दूध

2
00:00:07,200 --> 00:00:12,880
से दही बन सकता है पर दही से दूध नहीं। उसी प्रकार

3
00:00:12,880 --> 00:00:17,120
भगवान विष्णु तो शिव बन सकते हैं। भगवान कृष्ण तो

4
00:00:17,120 --> 00:00:21,600
शिव बन सकते हैं। परंतु शिव जी कृष्ण नहीं बन सकते।

5
00:00:21,600 --> 00:00:27,120
इस के द्वारा प्रचारित की जाने वाली इस बात के आधार पर

6
00:00:27,120 --> 00:00:31,600
कई बार मेरे समक्ष इसन के समर्थकों को सांप सूख गया।

7
00:00:31,600 --> 00:00:36,800
जब मैंने इससे रिलेट करते हुए यह पूछा कि भाई

8
00:00:36,800 --> 00:00:40,960
ईश्वर यदि सर्वशक्तिमान है, पूर्ण है तो जब वह

9
00:00:40,960 --> 00:00:45,040
शिव बन रहे हैं तो क्या वह बाधित हो जा रहे हैं? जिसके कारण

10
00:00:45,040 --> 00:00:49,280
वह शिव से पुनः कृष्ण नहीं बन पा रहे हैं। दूध तो

11
00:00:49,280 --> 00:00:53,440
बाधित होता है। दही बनने के बाद भी बाधित होता है। जिस कारण

12
00:00:53,440 --> 00:00:57,440
से वह दही बनने के बाद पुनः अपने मूल स्वरूप में नहीं आ

13
00:00:57,440 --> 00:01:01,440
सकता है। तो आप दूध दही का एग्जांपल देकर के सिद्ध क्या

14
00:01:01,440 --> 00:01:05,920
करना चाहते हैं कि इस के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर

15
00:01:05,920 --> 00:01:09,920
है वह बाधित है। सर्वशक्तिमान नहीं है। सनातन नहीं

16
00:01:09,920 --> 00:01:14,000
है। शाश्वत नहीं है। और

17
00:01:14,000 --> 00:01:18,000
इस बात के आधार पर ही हमारे चैनल पर कई प्रकार की चर्चाएं पड़ी

18
00:01:18,000 --> 00:01:18,500
हुई

19
00:01:18,240 --> 00:01:22,240
हैं जो आप देख सकते

20
00:01:22,240 --> 00:01:26,400
हैं कि किस तरीके से उनकी बोलती बंद हो जाती है जब यह वाला सवाल उनके सामने

21
00:01:26,400 --> 00:01:30,560
आता है। अब इस प्रकरण का आज के इस वीडियो

22
00:01:30,560 --> 00:01:34,000
से क्या संबंध है?

23
00:01:34,000 --> 00:01:38,240
मेरे बारे में एक मिथ्या फैलाई जा रही है कि मैं

24
00:01:38,240 --> 00:01:42,240
मां भगवती के अस्तित्व को नहीं मानता। उसे काल्पनिक

25
00:01:42,240 --> 00:01:46,400
कहता हूं। और सहानुभूति बटोरने

26
00:01:46,400 --> 00:01:50,800
के लिए यह अफवाह यह मिथ्या फैलाई जा रही है

27
00:01:50,800 --> 00:01:55,040
तथाकथित स्वषित आचार्य भागवतानंद

28
00:01:55,040 --> 00:01:59,360
के द्वारा तो भागवतानंद ने मिथ्या फैलाई

29
00:01:59,360 --> 00:02:03,520
कि भाई शिवश नारायण द्विवेदी हमारी देवी को काल्पनिक कह

30
00:02:03,520 --> 00:02:07,600
रहा है और उसने बहुत सारे प्रमाण

31
00:02:07,600 --> 00:02:11,920
दे दिए इस संबंध में कि भाई देखिए जो निग्रह

32
00:02:11,920 --> 00:02:16,000
देवी है उसका का वर्णन कहां-कहां पर है? शास्त्रों

33
00:02:16,000 --> 00:02:20,000
में वर्णित भगवती के किसी भी स्वरूप का मैंने कभी कोई खंडन किया

34
00:02:20,000 --> 00:02:24,000
ही नहीं। इस संबंध में मेरे पास एक फोन भी आया जो

35
00:02:24,000 --> 00:02:29,120
कि अभी रिकॉर्डिंग में आगे आप लोगों को सुनाने वाला हूं। क्या चर्चा हुई?

36
00:02:29,120 --> 00:02:33,360
पर क्या अगर मैं यह कहूंगा

37
00:02:33,360 --> 00:02:37,360
कि इस का ईश्वर बाधित है या इस

38
00:02:37,360 --> 00:02:41,440
का ईश्वर तथाकथित है तो क्या उसमें भगवान

39
00:02:41,440 --> 00:02:45,440
श्री कृष्ण का खंडन माना जाएगा इसन

40
00:02:45,440 --> 00:02:49,520
के द्वारा पूजित होने वाला जो कृष्ण भगवान जो ईश्वर है जिसे वह

41
00:02:49,520 --> 00:02:53,680
कृष्ण का नाम दे रहे हैं तो क्या अगर मैं यह कहूंगा कि

42
00:02:53,680 --> 00:02:57,840
इस के द्वारा पूजित होने वाला जो ईश्वर है वह बाधित है तो इससे यह

43
00:02:57,840 --> 00:03:02,400
मान लिया दिया जाएगा कि मैं कृष्ण भगवान का खंडन कर रहा हूं।

44
00:03:02,400 --> 00:03:06,560
मोहम्मद के पास यदि कोई जिब्राइल नाम का संदेशवाहक

45
00:03:06,560 --> 00:03:10,720
आया और हमने मोहम्मद के अनुसार बताई गई जो

46
00:03:10,720 --> 00:03:14,720
कथा है उसके अनुसार उस संदेश वाहक

47
00:03:14,720 --> 00:03:18,720
का अस्तित्व नहीं स्वीकार किया और हमने कहा कि मोहम्मद के

48
00:03:18,720 --> 00:03:23,120
पास आने वाला जो संदेश वाहक है वह तथाकथित संदेश

49
00:03:23,120 --> 00:03:27,200
वाहक है और तथाकथित ईश्वर के द्वारा भेजा गया है। तो इसका अर्थ यह

50
00:03:27,200 --> 00:03:31,280
हो गया कि हम ईश्वर को मानते ही नहीं है या ईश्वर के संदेश वाहक

51
00:03:31,280 --> 00:03:35,440
को मानते ही नहीं है। रामपाल के पास जब

52
00:03:35,440 --> 00:03:39,520
हम लोग उसका विरोध करने गए थे

53
00:03:39,520 --> 00:03:43,600
तो जिस स्ट्रेटजी से स्कॉन अपने आप को सुरक्षित करने

54
00:03:43,600 --> 00:03:47,600
का प्रयास करता है। हमारा जब उसके पास उत्तर नहीं होता है

55
00:03:47,600 --> 00:03:48,480
तो हमें कहता है

56
00:03:48,480 --> 00:03:52,880
कि तुम कृष्ण द्रोही हो। कृष्ण द्रोही क्योंकि हमने

57
00:03:52,880 --> 00:03:57,040
इस के द्वारा पूजित होने वाले ईश्वर में दोष बताए कि वह

58
00:03:57,040 --> 00:04:01,360
सनातन ईश्वर नहीं है। वह सर्वशक्तिमान ईश्वर नहीं है। तो इसलिए

59
00:04:01,360 --> 00:04:05,360
वो हमको कृष्ण कृष्ण द्रोही कहेगा। उसी प्रकार से

60
00:04:05,360 --> 00:04:08,160
जब हम

61
00:04:08,160 --> 00:04:12,320
सनातन से मिलताजुलता या सनातन का नाम लेकर अपना मनगढ़ंत

62
00:04:12,320 --> 00:04:16,560
ताना बाना बुने बुनने वाले रामपाल का विरोध करने गए और हमने यह

63
00:04:16,560 --> 00:04:20,560
कहा कि तुम हमारी मां का अपमान कर रहे

64
00:04:20,560 --> 00:04:24,560
हो भगवती का अपमान कर रहे हो तो वो वहां क्या बोल रहे हैं कि हमारी मां नहीं है

65
00:04:24,560 --> 00:04:29,200
क्या वो ये बोल रहे हैं तो इसका अर्थ क्या हुआ

66
00:04:29,200 --> 00:04:33,280
कि ये लोग सनातन से मिलते जुलते नाम इत्यादि लेकर

67
00:04:33,280 --> 00:04:37,440
के अपनी कहानियां गढ़ते हैं। उन कहानियों का जब खंडन

68
00:04:37,440 --> 00:04:42,000
होता है तो यह सहानुभूति बटोरने के लिए अपना ग्रुपिज्म

69
00:04:42,000 --> 00:04:46,160
बढ़ाने के लिए अपने समूह संख्या अपनी संख्या को बढ़ाने

70
00:04:46,160 --> 00:04:50,240
के लिए अपना संख्या बल बढ़ाने के लिए किन चीज किन बातों का सहारा लेते हैं?

71
00:04:50,240 --> 00:04:54,240
देखो देखो उसने तो हमारे हमारे जो है वेद शास्त्रों का

72
00:04:54,240 --> 00:04:58,400
खंडन कर दिया। क्यों? क्योंकि हमने उसकी तथाकथित गंदी और अश्लील

73
00:04:58,400 --> 00:05:02,800
किताबों को गलत कहा। ये तुम्हारे धर्म ग्रंथ नहीं है। ये तो

74
00:05:02,800 --> 00:05:03,840
अश्लील किताबें

75
00:05:03,840 --> 00:05:07,840
इनको फाड़ के फेंक देना चाहिए। तो देखो देखो भगवान का अपमान कर दिया। क्या

76
00:05:07,840 --> 00:05:12,000
उसमें कृष्ण की बातें नहीं लिखी है? क्या उसमें भगवान की बातें नहीं लिखी है? लिखी हैं।

77
00:05:12,000 --> 00:05:16,320
मगर उसके साथ-साथ ऐसा जहर तुमने लिखा है अपना मनगढ़न जिसके

78
00:05:16,320 --> 00:05:20,560
कारण वो जहर उस पर ऐसा हावी हो रहा है उसमें भगवान कृष्ण के नाम के साथ

79
00:05:20,560 --> 00:05:24,640
कि वो जहर बनके बाहर समाज को दूषित कर रहा है।

80
00:05:24,640 --> 00:05:28,720
विषाक्त बना रहा है वहां पर वो। और

81
00:05:28,720 --> 00:05:32,800
यही कार्य इस वाले करते हैं। अगर हम इस का विरोध कर रहे हैं तो

82
00:05:32,800 --> 00:05:37,520
भगवान के द्रोही हो गए। कृष्ण के द्रोही हो गए। और यही कार्य

83
00:05:37,520 --> 00:05:41,520
यही इस की स्ट्रेटजी यही रामपाल की स्ट्रेटजी अब आपके

84
00:05:41,520 --> 00:05:46,720
जो तथाकथित प्रामाणिक लक्षण संपन्न

85
00:05:46,720 --> 00:05:50,720
जो आचार्य जी हैं बाबा जी सांप वाले उन्होंने

86
00:05:50,720 --> 00:05:55,440
अब इसको अपना लिया। उन्होंने क्या अपना लिया कि भैया

87
00:05:55,440 --> 00:05:59,520
जो है देखो देखो शिवश नारायण द्विवेदी हमारी देवी

88
00:05:59,520 --> 00:06:03,520
को काल्पनिक कह रहा है तथाकथित कह रहा है। क्या मैंने वहां पर

89
00:06:03,520 --> 00:06:07,760
कभी भी उस देवी का नाम लेते हुए यह कहा

90
00:06:07,760 --> 00:06:12,640
कि अमुक अमुक शास्त्रों में वर्णित देवी काल्पनिक है? नहीं।

91
00:06:12,640 --> 00:06:16,880
मैंने उस देवी को काल्पनिक कहा जिसके द्वारा झूठा

92
00:06:16,880 --> 00:06:19,520
वरदान दिए जाने की कथा सुनाकर

93
00:06:19,520 --> 00:06:24,640
यह लोगों का समर्थन बटोरता है। झूठा वरदान कैसे?

94
00:06:24,640 --> 00:06:29,280
इसके अनुसार देवी ने इसको वरदान दिया है कि इसकी कर्मेंद्रियों

95
00:06:29,280 --> 00:06:33,760
से गलती नहीं होगी। होने वाली होगी तो इसका बुद्धि और विवेक उसका निग्रह

96
00:06:33,760 --> 00:06:38,400
कर लेगा। उसके बाद भी इसके जीवा से वाकस्लन

97
00:06:38,400 --> 00:06:42,560
होता है। उसके बाद भी यह गलती से टिप्पणियां

98
00:06:42,560 --> 00:06:47,840
कर देता है। पोस्ट डाल देता है। उसके बाद उसको हटा लेता है।

99
00:06:47,840 --> 00:06:51,840
हम और उसमें अपना पौरुष का दोष भी इसने

100
00:06:51,840 --> 00:06:55,840
स्वीकार किया। अरे भैया जब तुमको वरदान प्राप्त है कि तुमसे पौरुष्य

101
00:06:55,840 --> 00:07:00,080
का दोष नहीं होगा तुम्हारी कर्मेंद्रियों से गलती नहीं होगी तो गलत असत्य

102
00:07:00,080 --> 00:07:04,160
भाषण क्यों निकल रहा है तो इसका अर्थ है भगवती का वरदान झूठा है

103
00:07:04,160 --> 00:07:10,160
इस इसको आधार बनाते हुए और भी कई सारे मामले हैं जो हमने

104
00:07:10,240 --> 00:07:15,200
यह जो निग्रह निकासिका लिखी है इसमें हमने वह सारी बातें

105
00:07:15,200 --> 00:07:19,200
सारे प्रश्न उठाए इन सारी बातों को

106
00:07:19,200 --> 00:07:23,200
ध्यान में रखते हुए हम यह कहते हैं कि भागवतानंद के

107
00:07:23,200 --> 00:07:27,280
पास आने वाली तथाकथित देवी काल्पनिक देवी

108
00:07:27,280 --> 00:07:31,280
तो इसका अर्थ यह नहीं है कि हम जो है वो जिस जिस नाम से यह बता

109
00:07:31,280 --> 00:07:35,120
रहा है लोगों में कि मैं इसकी पूजा करता हूं वो काल्पनिक है।

110
00:07:35,120 --> 00:07:39,200
पूजा करता है कि नहीं करता है यह भी डाउटफुल है ना भाई वो

111
00:07:39,200 --> 00:07:43,280
तो वो बता रहा है कि मैं करता हूं। वो कितनी करता है कितनी नहीं करता है वो

112
00:07:43,280 --> 00:07:47,360
भी विचार का विषय है क्योंकि वो तो कालिया जिनकी पूजा भी करता है। परी साधना भी

113
00:07:47,360 --> 00:07:51,440
करता है करवाता है। उसने बोला है कि मुझे आवश्यकता थी तो मैं गया

114
00:07:51,440 --> 00:07:55,840
था। मैंने बात की थी। उसने बोला है कि मेरे पास समय नहीं था इसलिए मैं नहीं कर पाया।

115
00:07:55,840 --> 00:08:00,080
अब भले ही वह इस बात का डंका पीटता रहे कि मैंने कभी नहीं की कालिया जिनोपरी

116
00:08:00,080 --> 00:08:04,080
साधना की पूजा। तो भाई वो तो आंतरिक विषय है कि यह करता है कि नहीं

117
00:08:04,080 --> 00:08:08,080
करता। इसलिए कम से कम इस बात को तो कहना पड़ेगा कि कम से कम बताता तो

118
00:08:08,080 --> 00:08:12,320
है कि मैं अमुक अमुक देवी की पूजा करता हूं। जिसको शिवांश जो है नकार

119
00:08:12,320 --> 00:08:16,400
रहा है। काल्पनिक कह रहा है। नहीं। जिस प्रकार मैं

120
00:08:16,400 --> 00:08:20,560
इस के ईश्वर को काल्पनिक कह रहा हूं, बाधित कह रहा हूं

121
00:08:20,560 --> 00:08:24,560
या वह जो संदेश वाहक है वो

122
00:08:24,560 --> 00:08:28,640
जो शांतिप्रिय मजहब वाला उसके संदेशवाहक को यदि मैं

123
00:08:28,640 --> 00:08:33,200
काल्पनिक कह रहा हूं, तथाकथित कह रहा हूं या फिर मैं रामपाल

124
00:08:33,200 --> 00:08:37,200
के ग्रंथों को तथाकथित और काल्पनिक कह रहा हूं तो इसका मतलब यह नहीं है

125
00:08:37,200 --> 00:08:41,360
कि मैं कृष्ण का खंडन कर रहा हूं या मैं ईश्वर का खंडन कर रहा हूं

126
00:08:41,360 --> 00:08:45,440
या मैं शास्त्रों का खंडन कर रहा हूं। शास्त्रों के नाम पर

127
00:08:45,440 --> 00:08:49,600
तथाकथित गढ़े गए झूठे झूठी किताबों का खंडन

128
00:08:49,600 --> 00:08:50,640
कर रहा हूं।

129
00:08:50,640 --> 00:08:55,360
ईश्वर के नाम पर गढ़े गए तथाकथित संदेश वाक का खंडन कर रहा हूं।

130
00:08:55,360 --> 00:08:59,520
और इसी प्रकार से सनातन कृष्ण के नाम

131
00:08:59,520 --> 00:09:03,760
पर गढ़े गए तथाकथित बाधित ईश्वर का खंडन कर रहा हूं। और उसी

132
00:09:03,760 --> 00:09:07,760
प्रकार से मां भगवती के नाम पर मां

133
00:09:07,760 --> 00:09:12,160
भगवती के नाम पर गढ़ी गई तथाकथित झूठा

134
00:09:12,160 --> 00:09:16,240
वरदान देने वाली एक देवी की कहानी और उसमें

135
00:09:16,240 --> 00:09:20,480
देवी के रूप में उपस्थित पात्र का खंडन कर रहा हूं और तब

136
00:09:20,480 --> 00:09:24,880
मैं उस पर कटाक्ष करते हुए कहता हूं कि वह तथाकथित है।

137
00:09:24,880 --> 00:09:27,760
तो

138
00:09:27,760 --> 00:09:32,080
यह स्ट्रेटजी है ही है कि पूरा कॉपीकैट है। बस अपने आप को वर्णाश्रमी

139
00:09:32,080 --> 00:09:36,480
इसने कह दिया है। परंपरा को मानने का दावा तो है मगर परंपरा से संबंधित

140
00:09:36,480 --> 00:09:40,720
जो तार्किक प्रश्न है उस पर स्वयं ही उसका उसको

141
00:09:40,720 --> 00:09:44,720
जो है ध्वस्त करता है कि हम जो है जिस आचार्य से

142
00:09:44,720 --> 00:09:49,040
हमें ज्ञान मिला है उसका भी निग्रह कर देंगे। जिस आचार्य

143
00:09:49,040 --> 00:09:53,120
से हमें जिस आचार्य से हमें ग्रंथ प्राप्त हुए हैं हम उनका

144
00:09:53,120 --> 00:09:57,680
भी निग्रह कर देंगे। तो अभी पहले स्कॉन इत्यादि के रूप में

145
00:09:57,680 --> 00:10:02,080
हमारे जो सनातन है उसकी उसको क्षति पहुंचाने का कार्य किया गया।

146
00:10:02,080 --> 00:10:06,480
अब जो है जब सनात इनसे काम नहीं चला है इस आर्य समाज ब्रह्माकुमारी

147
00:10:06,480 --> 00:10:10,560
से तो अब एक नए रूप में आएगा भाई सनातनावास किस रूप में आएगा कि

148
00:10:10,560 --> 00:10:14,560
हम भैया हम तो वर्णाश्रमी भी हैं लो अब हम परंपराओं को नष्ट करेंगे

149
00:10:14,560 --> 00:10:18,720
इसके अन्य ऐसे और भी विरोधी हैं जो कॉल परंपरा

150
00:10:18,720 --> 00:10:22,720
से हैं और जो उनमें से कई इसके पहले समर्थक भी

151
00:10:22,720 --> 00:10:26,960
रह चुके हैं। क्या वह भगवती की उपासना नहीं करते? उसी भगवती

152
00:10:26,960 --> 00:10:31,120
की उपासना नहीं करते जिसकी यह करते हैं। परंतु जब वह

153
00:10:31,120 --> 00:10:36,320
इसको उत्तर देते हैं तो यह वहां भी सहानुभूति बटोरने लगता है कि

154
00:10:36,320 --> 00:10:40,400
भैया देखो देखो देवी को काल्पनिक कह दिया तथाकथित कह दिया। तो इस बात को

155
00:10:40,400 --> 00:10:43,120
आप ध्यान रखें। प्रबुद्ध जनों से बात कर रहा हूं। अंधे

156
00:10:43,120 --> 00:10:47,200
लोगों से बात नहीं कर रहा हूं। एक अंधा आया था बृजेश करके नाम था उसका। वो

157
00:10:47,200 --> 00:10:51,280
देख लो। वो कह रहा था कि भैया मैं मानूंगा ही नहीं कोई भी

158
00:10:51,280 --> 00:10:55,440
बात। उसने गाली दी है कि दी नहीं दी है यह भी नहीं मानूंगा। उसने किसी को कालियन

159
00:10:55,440 --> 00:10:59,680
की पूजा बताई है कि नहीं बताई है ये भी नहीं मानूंगा। परंतु उसके द्वारा उठाए

160
00:10:59,680 --> 00:11:03,840
गए सभी केवल कथन मान्य है कि अमुक ने व्यभचार

161
00:11:03,840 --> 00:11:07,840
किया, अमुक ने वैश्या गमन किया, अमुक ने जो है वो वैश्या है वो सब

162
00:11:07,840 --> 00:11:11,920
मान लेंगे। केवल उसकी कथनी के कारण यही है उसकी शास्त्र सम्मत कथनी।

163
00:11:11,920 --> 00:11:15,920
तो ऐसा एक आया था। तो मैं प्रबुद्ध जनों से कर कह रहा हूं कि आप थोड़ा

164
00:11:15,920 --> 00:11:20,080
बुद्धि और विवेक से निर्णय लें। अपने उसके

165
00:11:20,080 --> 00:11:24,080
द्वारा प्रायोजित जो कार्यक्रम चल रहे हैं

166
00:11:24,080 --> 00:11:28,240
यह यह वाले सब जिसमें वह सहानुभूति

167
00:11:28,240 --> 00:11:32,400
बटोरने के लिए हमारे बारे में मिथ्या प्रचार कर रहा है। उनसे

168
00:11:32,400 --> 00:11:36,400
प्रभावित होने से पहले अपने बुद्धि और विवेक के द्वारा निर्णय लें।

169
00:11:36,400 --> 00:11:40,480
जय श्री राम।

170
00:11:40,480 --> 00:11:44,800
क्या भागवतानंद को समर्थन कर रहे हैं? नहीं मैं

171
00:11:44,800 --> 00:11:48,880
समर्थन वो नहीं कर रहा। आपने वहां पे टिप्पणियां दी है ना लंबी-लंबी।

172
00:11:48,880 --> 00:11:52,960
जी जी हां तो बताइए समर्थन कर रहे हैं तो आप चर्चा

173
00:11:52,960 --> 00:11:57,040
कर लीजिए आ के सामने तो समर्थन कहने का मतलब कि मैं

174
00:11:57,040 --> 00:12:01,200
ये कह रहा हूं हम कि उन्होंने जो भी मतलब

175
00:12:01,200 --> 00:12:05,200
अभी तक जितना मैंने देखा है ठीक है हम उन्होंने जो

176
00:12:05,200 --> 00:12:09,280
भी उपदेश किए हैं या किसी उपदेश तो उपदेश तो अमुक

177
00:12:09,280 --> 00:12:13,440
अमुक अंशों में इस वाले भी करते हैं जो सही होते हैं। नहीं वो सही नहीं

178
00:12:13,440 --> 00:12:17,520
बोल रहे हैं। कहीं हमारा उनको सुनिए आप देखिए बात

179
00:12:17,520 --> 00:12:21,520
को या तो समझे नहीं है या समझकर भी अनजान बन रहे

180
00:12:21,520 --> 00:12:25,600
हैं। क्या हमारा उनसे रामचरितमानस के पाठ करने पर विवाद

181
00:12:25,600 --> 00:12:29,680
है? नहीं है। तो फिर आप यह बात बता क्यों रहे हैं हमें कि आप

182
00:12:29,680 --> 00:12:33,680
उनके उपदेशों को समर्थन करते हैं। दुनिया में कौन है जो

183
00:12:33,680 --> 00:12:37,680
वेद संवत वाणी बोलेगा और हम उसका हम उसका समर्थन नहीं कर रहे हैं।

184
00:12:37,680 --> 00:12:42,240
वो विरोध जैसे इस का आपका जो विरोध विरोध है। तो इस

185
00:12:42,240 --> 00:12:46,400
जितने अंश में वेद संवत बात कर रहा है उतने उतने अंश में हमने उसका

186
00:12:46,400 --> 00:12:50,800
विरोध किया है क्या? मैं मैं क्या कह रहा हूं कि इस कौन जिन बातों

187
00:12:50,800 --> 00:12:55,200
को कहता है मतलब जो विरोधी बातें कहते हैं उसका आप विरोध करते हैं। ठीक है तो

188
00:12:55,200 --> 00:12:55,700
विरोधी

189
00:12:55,600 --> 00:12:59,680
बातें क्या करता है? जैसे वर्णाश्रम धर्म पे उसका विरोध है। विरोधी बात यह करता

190
00:12:59,680 --> 00:13:03,920
है कि वह परंपरा से प्राप्त जो सिद्धांत हैं आचार्यों द्वारा दिए

191
00:13:03,920 --> 00:13:07,920
गए उन पर विरोध कर रहा है आचार्यों का। धर्म अधर्म के

192
00:13:07,920 --> 00:13:11,920
विषय में आचार्यों के ऊपर जाकर के अपनी व्याख्या लगाते

193
00:13:11,920 --> 00:13:16,000
हुए आचार्यों को गलत साबित कर रहा है। जी बिल्कुल ठीक है। तो

194
00:13:16,000 --> 00:13:20,080
ये ये चीज तो क्या कहते हैं कि जैसे कि बुद्ध के विषय में

195
00:13:20,080 --> 00:13:25,440
शबरी के विषय में उसने परंपरा प्राप्त आचार्यों का खंडन किस आधार पर किया?

196
00:13:25,440 --> 00:13:29,680
किसको इस किसने? किसकी

197
00:13:29,680 --> 00:13:34,240
पूछ रहे हैं कि वो क्या वर्णाश्रम का विरोध कर रहा है? आप किसके बारे में पूछ रहे हैं? जी

198
00:13:34,240 --> 00:13:38,320
क्या कौन तो विरोध करता है श्री भगवतानंद गुरु जो है

199
00:13:38,320 --> 00:13:42,480
ठीक है वो तो इन सब विषयों में क्या कहते हैं कि

200
00:13:42,480 --> 00:13:46,560
नहीं तो इन मैंने उन सब विषयों में थोड़ी ना हमारा विवाद है उनसे आपको विवाद

201
00:13:46,560 --> 00:13:51,040
मालूम होना चाहिए जब आप वहां टिप्पणी कर रहे हैं नहीं मैं वहां पे जो

202
00:13:51,040 --> 00:13:55,600
मतलब प्रकरण देख रहा हूं आप प्रकरण को पूरा समझिए भागवतानंद

203
00:13:55,600 --> 00:13:59,760
स्वयं को निग्रहचार्य बोलता है तो सबसे पहला प्रकरण यह

204
00:13:59,760 --> 00:14:04,000
हो गया कि उसकी गुरु परंपरा क्या है जी तो आपने

205
00:14:04,000 --> 00:14:08,240
जो प्रश्न किया है ठीक है गुरु परंपरा के देखिए मैं अगर

206
00:14:08,240 --> 00:14:11,360
इस संबंध में अगर आप सुनिए देखिए

207
00:14:11,360 --> 00:14:15,440
पहला आपने कहा कि मैं उनका समर्थन इसलिए करता हूं कि उनके

208
00:14:15,440 --> 00:14:19,680
उपदेश जो होते हैं वह शास्त्रीय होते हैं। तो मैंने आपकी गलतफहमी

209
00:14:19,680 --> 00:14:24,000
को दूर किया कि हम उपदेश के निमित्त यदि जो उसके उपदेश

210
00:14:24,000 --> 00:14:28,000
जो शास्त्रीय होते हैं तो उसके निमित्त मेरे उसमें विवाद नहीं है।

211
00:14:28,000 --> 00:14:32,080
ना उसको मुझसे कोई आपत्ति है ना हमको उससे कोई आपत्ति है।

212
00:14:32,080 --> 00:14:36,240
विवाद किन बातों पर है कि तुम स्वयं को परंपरा प्राप्त

213
00:14:36,240 --> 00:14:40,240
आचार्य कह रहे हो एक अलग से हम संप्रदाय बताते हुए

214
00:14:40,240 --> 00:14:44,400
निग्रहाचार्य तो यह संप्रदाय काल्पनिक

215
00:14:44,400 --> 00:14:48,720
है यह हमारा क्लेम है उसका क्लेम है काल्पनिक नहीं है इसको लेकर विवाद

216
00:14:48,720 --> 00:14:52,800
है सुनिए अब यह भी ना होता यह भी ना

217
00:14:52,800 --> 00:14:56,960
होता यदि वह परंपरा प्राप्त आचार्यों के ऊपर शासन

218
00:14:56,960 --> 00:15:01,760
करने ना लगता शासन करने का प्रयास ना कर रहा होता

219
00:15:01,760 --> 00:15:05,920
भाई जब आप परंपरा प्राप्त आचार्यों पर धर्म और अधर्म के विषय

220
00:15:05,920 --> 00:15:10,320
में व्याख्या उनकी की हुई व्याख्या पर उंगली उठाओगे

221
00:15:10,320 --> 00:15:14,400
तो फिर आपकी प्रामाणिकता पूछी जाएगी ना कि जिन

222
00:15:14,400 --> 00:15:18,560
शास्त्रों को का संदर्भ लेते हुए आप खंडन करने का प्रयास

223
00:15:18,560 --> 00:15:22,720
कर रहे हो वो शास्त्र आपको कैसे मिले किस

224
00:15:22,720 --> 00:15:26,960
परंपरा के आचार्यों द्वारा आप तक पहुंचे वह शास्त्र

225
00:15:26,960 --> 00:15:31,360
यह प्रश्न उठेगा तो तो यह जो दो विषय दो विषय हो गए

226
00:15:31,360 --> 00:15:35,360
कि आपने जब यह कमर कसी है कि हम

227
00:15:35,360 --> 00:15:39,600
कंट्रोलिंग बोर्ड हैं सभी संप्रदायों के तो फिर आपको अपने

228
00:15:39,600 --> 00:15:44,160
संप्रदाय की प्रामाणिकता सिद्ध करनी होगी। नहीं तो यदि आप

229
00:15:44,160 --> 00:15:48,320
यदि आप अपने वर्णाश्रम धर्म की रक्षा कर रहे हैं। आप जो है धर्म धर्म

230
00:15:48,320 --> 00:15:52,320
धर्म और ब्रह्म में परंपरागत जो प्रामाणिक आचार्य हैं उनके

231
00:15:52,320 --> 00:15:56,320
विरुद्ध नहीं है तो आप आराम से करिए। हम नहीं बोलने जाएंगे। मगर जब आप

232
00:15:56,320 --> 00:16:00,400
निग्रह करने निकलेंगे कंट्रोलिंग बोर्ड बनने निकलेंगे तो आपकी प्रमाणिकता हम पूछ

233
00:16:00,400 --> 00:16:04,480
लेंगे आपसे पहली बात दूसरी दूसरा हमारा जो विवाद है वह

234
00:16:04,480 --> 00:16:08,640
है असिद्ध आरोप लगाना किसी स्त्री

235
00:16:08,640 --> 00:16:12,880
को बिना किसी प्रत्यक्ष प्रमाण के ठोस प्रमाण के वैश्या

236
00:16:12,880 --> 00:16:17,200
कहना किसी पुरुष को वैश्यागामी कहना

237
00:16:17,200 --> 00:16:21,280
भाई-बहन क्या जहां पर पवित्र संबंध है वहां पर अनैतिक

238
00:16:21,280 --> 00:16:25,440
संबंध होने का आरोप लगाना इसको

239
00:16:25,440 --> 00:16:29,600
इन सब विषयों में आपको कह रहा हूं इन सब सुनिए इन

240
00:16:29,600 --> 00:16:34,640
सब विषयों में इन दो विषयों में हमारा उससे विवाद है।

241
00:16:34,640 --> 00:16:38,960
तो आपने जो कहा ना अब मैं मैं आपको मैं आपको

242
00:16:38,960 --> 00:16:42,560
मैं आपको मैं आपको मूल विषय पे लाके ही छोडूंगा।

243
00:16:42,560 --> 00:16:46,640
इन दो विषय बता रहा हूं कि मैं मैं आपको ला रहा हूं। तो मेरा इन

244
00:16:46,640 --> 00:16:50,960
दो विषयों पर उससे विवाद है। अब यदि इन दो विषयों में आपकी गति

245
00:16:50,960 --> 00:16:55,440
है उसके पक्ष में तो आप आ जाइए। हम लोग लाइव चर्चा कर लेंगे

246
00:16:55,440 --> 00:17:00,640
और इधर-उधर की बातें करने से कोई मतलब नहीं है। अब आप बताइए

247
00:17:00,640 --> 00:17:04,640
तो देखिए ये जो दो बातें बोले ना ठीक है एक जो उन्होंने मतलब

248
00:17:04,640 --> 00:17:08,720
जो दूसरा आरोप आपने लगाया कि किसी के ऊपर व्यक्तिगत टिप्पणी करने

249
00:17:08,720 --> 00:17:13,040
का ठीक है असिद्ध आरोप व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं है आप टिप्पणी

250
00:17:13,040 --> 00:17:17,040
भी करिए वो बाद की बात है मगर असिद्ध ना करिए ना आप

251
00:17:17,040 --> 00:17:21,280
किसी को अगर वैश्या कह रहे हैं तो आप उसका दिखाइए प्रमाण कहां उसने वैश्या गमन

252
00:17:21,280 --> 00:17:25,600
किया और कहां उसने वैश्या वाले आचरण किए तो तो जो असिद्ध आरोप

253
00:17:25,600 --> 00:17:29,680
आप बोले ना उसके ऊपर तो मैंने कुछ बोला नहीं है नहीं तो भाई आप

254
00:17:29,680 --> 00:17:33,840
क्यों बोल रहे हैं आप आप मेरी बात समझिए मेरी

255
00:17:33,840 --> 00:17:37,920
बात वहां पे क्या चल रहा था आप देखिए मेरी बात आप समझिए

256
00:17:37,920 --> 00:17:41,920
आप जब सुनिए मैं आप विवाद को जब जान नहीं रहे हैं तो फिर आप वो मत

257
00:17:41,920 --> 00:17:46,320
बोलिए फिर नहीं नहीं मैं जो कह रहा हूं सुनिए आपने बोला कि देवी काल्पनिक

258
00:17:46,320 --> 00:17:50,400
है मैंने कहां पे बोला है देवी काल्पनिक है एक वीडियो दिखाओ

259
00:17:50,400 --> 00:17:53,440
देवी काल्पनिक है

260
00:17:53,440 --> 00:17:57,760
आपके वीडियो में तो है ना कि देवीन कहां पे मैंने बोला देवी काल्पनिक है उसको

261
00:17:57,760 --> 00:18:01,840
जो वरदान देने आ रही है शक्ति यदि वह कोई है वो काल्पनिक

262
00:18:01,840 --> 00:18:05,920
है वो वो जिन देवी का नाम दे रहे हैं वो तो नाम मैंने नाम लेकर कहा

263
00:18:05,920 --> 00:18:10,000
है क्या ये निग्रह देवी काल्पनिक है नहीं नहीं आपने नहीं कहा है लेकिन वो

264
00:18:10,000 --> 00:18:14,080
जो कह रहे हैं कि तो आप पहले मेरे पक्ष को जानिए आपने कैसे कह दिया मैंने देवी

265
00:18:14,080 --> 00:18:18,080
काल्पनिक है आपने बोला ना कि वो जो जिस देवी को

266
00:18:18,080 --> 00:18:22,320
कह रही है वो देवी काल्पनिक है मैंने यह कहा है कि वो अगर

267
00:18:22,320 --> 00:18:26,880
कोई शक्ति उसको आकर दे रही है मंत्र

268
00:18:26,880 --> 00:18:31,360
अगर अगर कोई शक्ति उसको आकर के वरदान दे रही है तो वह काल्पनिक

269
00:18:31,360 --> 00:18:35,680
है क्योंकि हमारी जो देवी है जो वास्तविकता में जो देवी हैं जिनका

270
00:18:35,680 --> 00:18:40,080
शास्त्रों में वर्णन है वो झूठा वरदान थोड़ी ना देंगी

271
00:18:40,080 --> 00:18:44,160
उसका वरदान तो झूठा सिद्ध हो रहा है। उसकी परंपरा झूठी

272
00:18:44,160 --> 00:18:48,320
सिद्ध हो रही है। तो देवी ऐसे गालीबाज व्यक्ति को

273
00:18:48,320 --> 00:18:52,960
असिद्ध आरोप लगाने वाले अशास्त्रीय व्यक्ति को

274
00:18:52,960 --> 00:18:57,040
ऐसा वरद झूठ वरदान नहीं देगी और वरदान देगी तो कम से कम झूठा

275
00:18:57,040 --> 00:19:01,120
नहीं देगी। अगर वह है कोई शक्ति तो फिर वह देवी नहीं है। तो हम

276
00:19:01,120 --> 00:19:05,280
कह रहे हैं कि यह कपोल कल्पना है। जैसे कि

277
00:19:05,280 --> 00:19:09,520
मोहम्मद कहना मोहम्मद का कहना है कि उसके पास ईश्वर का भेजा

278
00:19:09,520 --> 00:19:13,120
गया संदेश-वाहक आया। मैसेज देने के लिए।

279
00:19:13,120 --> 00:19:17,280
सुन लीजिए। सुन लीजिए उदाहरण दे रहा हूं। मोहम्मद के पास ईश्वर

280
00:19:17,280 --> 00:19:21,440
का भेजा गया कोई मैसेंजर आया। अब भैया मोहम्मद ने हमको

281
00:19:21,440 --> 00:19:25,840
बताया तो हम उस मैसेंजर को काल तथाकथित कपोल कल्पित कहेंगे

282
00:19:25,840 --> 00:19:30,160
या क्या कहेंगे? अब अगर हमने अगर हमने कह दिया कि वह कपोल

283
00:19:30,160 --> 00:19:34,320
कल्पित है तो इसका मतलब हम यह मानते हैं कि ईश्वर का कोई मैसेंजर होता ही नहीं है।

284
00:19:34,320 --> 00:19:38,400
ईश्वर का कोई दूत होता ही नहीं है या ईश्वरी एक मिनट या

285
00:19:38,400 --> 00:19:42,400
ईश्वर होता ही नहीं है। हमने कहा कि वो जो कहानी कर रहा है

286
00:19:42,400 --> 00:19:46,480
उस कहानी के अनुसार जो मैसेंजर है, उस कहानी के अनुसार जो

287
00:19:46,480 --> 00:19:50,560
ईश्वर है वो काल्पनिक है। हमने ईश्वर को या उसके मैसेंजर को काल्पनिक नहीं

288
00:19:50,560 --> 00:19:53,200
कहा है।

289
00:19:53,200 --> 00:19:57,200
तो आपके कमेंट सेक्शन में जो चल रहा था जैसे वो देवी पर ही कमेंट चल

290
00:19:57,200 --> 00:20:01,360
रहा था। आपने देखिए पहला कमेंट तो आपने स्वतंत्र किया है।

291
00:20:01,360 --> 00:20:05,600
जी पहला तो फिर आप यह मत कहिए कि आपके कमेंट सेक्शन में क्या चल रहा था?

292
00:20:05,600 --> 00:20:09,680
वीडियो में इस वीडियो में किया है ना वीडियो में क्या तो

293
00:20:09,680 --> 00:20:14,400
उस वीडियो में हमने कौन से वक्तव्य में कहा है कि देवी काल्पनिक है बताइए।

294
00:20:14,400 --> 00:20:18,480
उसकी बातों में आकर के आप जैसे लोग प्रबुद्ध जन भी गुमराह

295
00:20:18,480 --> 00:20:22,560
होते हैं। हमने कभी नहीं कहा कि जो ये निग्रह जो

296
00:20:22,560 --> 00:20:26,720
जिनका शास्त्रों में वर्णन है वह भगवती हमारी काल्पनिक है। नहीं हमने

297
00:20:26,720 --> 00:20:28,160
कहा वो जो कहानी गढ़ता

298
00:20:28,160 --> 00:20:32,560
है कि हमको देवी ने आकर के दिया वो कोई देवी नहीं होगी। वो परी होगी। ये कटाक्ष

299
00:20:32,560 --> 00:20:35,520
है उसके ऊपर

300
00:20:35,520 --> 00:20:39,520
क्योंकि उसका वरदान झूठा सिद्ध होता है। वो कहता है कि मुझे वरदान मिला

301
00:20:39,520 --> 00:20:43,680
है कि मेरा जो है मेरे मेरी कर्मेंद्रिय कर्मेंद्रियों से अगर कोई गलती होने

302
00:20:43,680 --> 00:20:47,760
वाली होगी तो मेरा बुद्धि विवेक उसका उसको कंट्रोल कर लेगा। नहीं

303
00:20:47,760 --> 00:20:51,920
होने देगा गलती। ठीक? उसके बाद उसने हमारे बारे में

304
00:20:51,920 --> 00:20:56,000
अह विजयश्री के बारे में अन्य-अ लोगों के बारे में कई बार एक बातें बोली

305
00:20:56,000 --> 00:21:00,080
हैं जो उसने बाद में कहा कि वह गलत हो गया था। मुंह से निकल गया था। वाहक

306
00:21:00,080 --> 00:21:04,080
स््स्खलन हो गया था। तो वाक्य स्कलन कैसे हो गया जब देवी देवी ने वरदान दिया

307
00:21:04,080 --> 00:21:08,560
है तो। जीवा एक कर्मेंद्रिय है ना। जी

308
00:21:08,560 --> 00:21:12,720
बिल्कुल मैं आपकी बात को समझ गया। आप देखिए मैं मैं आपको

309
00:21:12,720 --> 00:21:16,960
मतलब यही बता रहा हूं। तो ये गलत गलतफहमियों को दूर करिए।

310
00:21:16,960 --> 00:21:21,360
हम कोई सुनिए गलतफहमियों को गलतफहमियों

311
00:21:21,360 --> 00:21:25,520
को सुनिए सुनिए उन्होंने जब कहा कि देवी उनको क्या

312
00:21:25,520 --> 00:21:29,600
कहते हैं वरदान दी या फिर दर्शन दी ठीक है तो इसको तो मैं पुष्ट

313
00:21:29,600 --> 00:21:34,160
नहीं कर सकता हूं वो तो या तो देवी पुष्ट कर सकती है या वो पुष्ट कर सकते हैं

314
00:21:34,160 --> 00:21:38,160
मैं ये नहीं कह रहा हूं आप लेकिन मेरी बात सुनिए मेरी बात सुनिए मैं

315
00:21:38,160 --> 00:21:42,320
ये नहीं कह रहा हूं आप अपनी गलतफहमियों को सही करने नहीं मैं आपको

316
00:21:42,320 --> 00:21:43,760
बता रहा हूं वो सुनिए

317
00:21:43,760 --> 00:21:47,760
कि वो जिस देवी के बारे में बता रहे हैं उस देवी के और भी उपासक

318
00:21:47,760 --> 00:21:51,760
हैं। उस देवी को हमने काल्पनिक नहीं कहा है भाई। क्यों खींच

319
00:21:51,760 --> 00:21:56,240
रहे हो उस बात को? अरे मेरी बात को पूरे पूरी सुनिएगा। पूरा करने दीजिएगा।

320
00:21:56,240 --> 00:22:00,320
उस देवी के और भी जो उपासक हैं उनका जो अनुभव रहा है और

321
00:22:00,320 --> 00:22:04,480
ये जो अपना अनुभव बताते हैं एकदम समान है। इस वजह से मैं कह रहा हूं।

322
00:22:04,480 --> 00:22:08,560
एकदम समान होने की वजह से हम लोग ये मान ले कि देवी ने उनको वरदान दिया।

323
00:22:08,560 --> 00:22:12,800
भले ही वरदान झूठा सिद्ध हो रहा है।

324
00:22:12,800 --> 00:22:16,800
वरदान झूठा सिद्ध हो रहा है। ये तो आप कह रहे हैं ना। आप बता दीजिए मुझे उसकी

325
00:22:16,800 --> 00:22:20,800
जीवा से गलत निकला है कि नहीं निकला है बताइए निकला है कि नहीं निकला उसने खुद

326
00:22:20,800 --> 00:22:24,800
स्वीकार किया वहां स्ख्खलन हो गया था वाह का

327
00:22:24,800 --> 00:22:28,960
स्कलन तो वो क्या कहते हैं कि इस अनुभव

328
00:22:28,960 --> 00:22:33,200
में तो कभी हम देखे नहीं है आप देखिए पहले नहीं

329
00:22:33,200 --> 00:22:37,280
अब एक मिनट रुको भाई इतना समय नहीं है मेरे पास एक-एक व्यक्ति के

330
00:22:37,280 --> 00:22:41,280
साथ मगजमारी करने के लिए अगर आपको वाहक स्कलन वाला संदर्भ नहीं

331
00:22:41,280 --> 00:22:45,280
पता है तो पहले जाके देख लो शॉट पड़ा हुआ है आपको मैं अभी WhatsApp

332
00:22:45,280 --> 00:22:49,440
आपको मैं अभी WhatsApp कर रहा हूं। भाई बोल रहे हैं। मैं अभी आपको

333
00:22:49,440 --> 00:22:53,840
WhatsApp कर रहा हूं। उसने स्वीकार किया मेरे वसे वाक स्कलन

334
00:22:53,840 --> 00:22:57,920
हो गया होगा। वाक स्कलन हो गया था और एक बार नहीं छह-छह

335
00:22:57,920 --> 00:22:58,880
बार 10-10 बार

336
00:22:58,880 --> 00:23:02,960
वाक्यस्कलन हुआ है। यह कैसा वरदान है देवी का? जो

337
00:23:02,960 --> 00:23:07,040
उसकी कर्मेंद्र का निग्रह नहीं हो रहा है। जबकि उसने बताया कि मुझे वरदान

338
00:23:07,040 --> 00:23:11,040
मिला है देवी से कि भैया मेरी मेरी कर्मेंद्रियों से अगर कोई गलती

339
00:23:11,040 --> 00:23:15,200
होने वाली होगी तो मेरे बुद्धि विवेक उसको निग्रह कर लेगा। कंट्रोल

340
00:23:15,200 --> 00:23:19,280
कर लेगा उसे रोक लेगा। यानी उससे गलती नहीं होनी है।

341
00:23:19,280 --> 00:23:23,840
यह उसको वरदान मिला है।

342
00:23:23,840 --> 00:23:28,000
तो वाकलन का जहां तक वो जब भी बोले हैं ना तो वो इस संदर्भ में नहीं

343
00:23:28,000 --> 00:23:32,080
बोले हैं। अरे किस संदर्भ में बोले हैं? ठीक है

344
00:23:32,080 --> 00:23:36,160
आप वीडियो भेजिए और जिस तो इसीलिए मैं कह रहा हूं इसीलिए कह

345
00:23:36,160 --> 00:23:40,160
रहा हूं कि आप सुनिए आप पहले पूरी जानकारी कर

346
00:23:40,160 --> 00:23:44,160
लीजिए उसके बाद आप किसी के पक्ष और किसी के विपक्ष में खड़े

347
00:23:44,160 --> 00:23:48,320
होइए। आपको ना तो यह पता है कि हम उसके द्वारा जो जिस देवी का

348
00:23:48,320 --> 00:23:52,480
नाम लिया जा रहा है उसको काल्पनिक कह रहे हैं। अब कोई व्यक्ति कह रहा है कि भाई मेरे

349
00:23:52,480 --> 00:23:56,720
पास ईश्वर ईश्वर आए थे। तो हम ईश्वर का ही खंडन

350
00:23:56,720 --> 00:24:00,720
थोड़ी ना कर रहे हैं। हम तो यह कह रहे हैं कि वह जो कल्पना के जो कहानी कर रहा

351
00:24:00,720 --> 00:24:05,040
है वह ईश्वर काल्पनिक है। हम ईश्वर का ही खंडन

352
00:24:05,040 --> 00:24:09,040
थोड़ी ना कर दे रहे हैं। नहीं तो आप तो आप यह बोलिए ना कि

353
00:24:09,040 --> 00:24:13,040
वो झूठ बोल रहे हैं। वो मतलब हम यही बोल रहे हैं और फिर कटाक्ष के रूप में

354
00:24:13,040 --> 00:24:14,160
कह रहे हैं। वो तथाकथित

355
00:24:14,160 --> 00:24:18,400
देवी है। तथाकथित देवी मतलब जो देवी जो देवी

356
00:24:18,400 --> 00:24:22,720
उसको वरदान दे रही है वो तथाकथित है। क्योंकि वो वरदान

357
00:24:22,720 --> 00:24:26,720
झूठा सिद्ध हो रहा है। नहीं आप यह बोलिए हमने नाम लेकर के

358
00:24:26,720 --> 00:24:30,720
कहीं पर भी नहीं कहा कि अमुक अमुक नाम की जो देवी है वो काल्पनिक

359
00:24:30,720 --> 00:24:34,800
है। आपको आपको एक काम करना चाहिए कि जब भी आप इस चीज का मतलब

360
00:24:34,800 --> 00:24:39,520
संदर्भ दें तो आप ऐसा है मैं कुछ भी कर लूंगा मगर मगर

361
00:24:39,520 --> 00:24:43,520
मैं कुछ भी करिए सुन लीजिए। आप आप मुझे यह

362
00:24:43,520 --> 00:24:47,680
राय दे रहे हैं। आपको एक काम करना चाहिए। मैं कुछ भी कर लूंगा फिर भी जब तक मेरे

363
00:24:47,680 --> 00:24:51,760
पक्ष को पूरी तरह से व्यक्ति ने देखा नहीं होगा तो वह इसी तरह

364
00:24:51,760 --> 00:24:56,000
से गलतफहमी का शिकार होगा। तो आप पहले पूरा पक्ष देखिए जाकर के

365
00:24:56,000 --> 00:25:00,160
हमारा क्या पक्ष है। जब वह उसको वरदान

366
00:25:00,160 --> 00:25:04,400
मिला है अगर देवी ने आकर के वरदान दिया तो हमारी

367
00:25:04,400 --> 00:25:08,480
हमारी सुन अरे भैया जितनी बार मैं बोलता हूं उतनी बार आप कुछ ना कुछ ना कुछ कर

368
00:25:08,480 --> 00:25:12,640
देते हैं। नहीं नहीं तो आप बोलिए उनको कि मतलब मैं बोलूंगा अभी अभी मैंने

369
00:25:12,640 --> 00:25:17,040
आपकी बात सुन ली मैं आपकी बात का उत्तर दे रहा हूं। हां जो

370
00:25:17,040 --> 00:25:21,120
आप यह बोलिए ना आपने मुझे हिदायत दे दी है वो हिदायत मैंने सुन

371
00:25:21,120 --> 00:25:25,600
ली है भाई साहब आपका परामर्श मैं सुन लिया है अब आपको मैं प्रतिक्रिया दे रहा हूं

372
00:25:25,600 --> 00:25:29,280
जी जो देवी की बात वो कर रहा है

373
00:25:29,280 --> 00:25:35,280
वो काल्पनिक इसलिए है कि हमारी देवी झूठा वरदान नहीं देगी

374
00:25:35,920 --> 00:25:40,080
हमारी देवी एक गालीबाज अ अरे भैया

375
00:25:40,080 --> 00:25:44,240
मेरी बात पूरी हो जाने दिया करो जो देवी जो

376
00:25:44,240 --> 00:25:48,640
हमारी देवी है। वह एक गालीबाज असिद्ध आरोप लगाने वाले को

377
00:25:48,640 --> 00:25:52,640
और स्वगोषित आचार्य को वरदान नहीं देगी। यह मेरा पक्ष

378
00:25:52,640 --> 00:25:56,800
है। तो मैं यह कहता हूं कि उसके द्वारा वर्णित कथा के अनुसार

379
00:25:56,800 --> 00:26:00,880
जो शक्ति है वह काल्पनिक है। जिसको वो देवी कहता

380
00:26:00,880 --> 00:26:04,880
है। देखिए और अगर आपको मेरा पक्ष पूरा नहीं पता है तो पहले

381
00:26:04,880 --> 00:26:09,200
जाके पक्ष पूरा देखिए। अभी आप शुरू में क्या कह रहे थे कि आपने तो देवी को काल्पनिक

382
00:26:09,200 --> 00:26:13,200
कहा। एक जगह बता दो जहां मैंने काल्पनिक कहा हो। आप वही कह रहे हैं ना कोई

383
00:26:13,200 --> 00:26:17,280
आदमी बोले कि हमको हनुमान जी वरदान दिए तो हम यही कहेंगे ना कि नहीं वो हनुमान जी नहीं है तुम झूठ

384
00:26:17,280 --> 00:26:21,440
बोल रहे हो तो हनुमान जी नहीं है तो ऐसे ही बोला है मैंने यही बोला सीधा

385
00:26:21,440 --> 00:26:25,440
यही सीधा यही यही सीधा यही बोला है क्या चेक करो

386
00:26:25,440 --> 00:26:29,520
मेरा वीडियो जो देवी के बारे में मैंने क्या कहा सीधा यही बोला है

387
00:26:29,520 --> 00:26:33,520
सीधा यही बोला है नहीं आपने बोला है वो देवी काल्पनिक है

388
00:26:33,520 --> 00:26:37,600
आपने बोला बोला है बताओ मुझे कौन सा वीडियो बोला है देवी काल्पनिक है अभी

389
00:26:37,600 --> 00:26:42,480
तो बोल रहे हैं अभी तो बोल रहे हैं अभी मैं बोल रहा हूं कि जो जिस

390
00:26:42,480 --> 00:26:44,320
कथा के अनुसार वो बात कर

391
00:26:44,320 --> 00:26:48,480
रहा है उस कथा में भागवतारण के अनुसार जो उसको वरदान

392
00:26:48,480 --> 00:26:52,560
देने वाली जो शक्ति है वो काल्पनिक है अगर वो उसको देवी कह रहा है तो

393
00:26:52,560 --> 00:26:58,560
वो देवी काल्पनिक है झूठी है वो वो देवी नहीं है हमारी

394
00:26:59,440 --> 00:27:03,600
आपको कुछ अता ना पता चले आए हम पक्ष में खड़े होंगे हम यहां खड़े होंगे

395
00:27:03,600 --> 00:27:07,600
हम वहां खड़े होंगे पहले पता करिए जाके देखिए नहीं पता का बात नहीं आप जो है

396
00:27:07,600 --> 00:27:12,240
ना वो मतलब इतना आप द्वेष से भरे हुए हैं कि बात ही नहीं सुन आप

397
00:27:12,240 --> 00:27:16,320
आप सुनिए मैं द्वेष से इसलिए भरा हुआ हूं क्योंकि पहली बात तो यह है

398
00:27:16,320 --> 00:27:20,480
कि आपको जब पता नहीं था शुरू में आपके क्लेम कुछ और थे फिर आपने कहा हमने देखा

399
00:27:20,480 --> 00:27:25,520
नहीं वीडियो

400
00:27:25,520 --> 00:27:30,160
जितनी बार मैं तर्कसंगत बात करने चलूंगा उतनी बार

401
00:27:30,160 --> 00:27:34,240
से बीच में बोलेंगे नहीं नहीं आप आप बोल रहे हैं देवी काल्पनिक आप

402
00:27:34,240 --> 00:27:39,280
बोलिए कि आप जिसको

403
00:27:39,280 --> 00:27:43,520
देने वाली जो के रूप में आने वाली देवी है वो काल्पनिक है।

404
00:27:43,520 --> 00:27:47,840
वो झूठी है। आप यह बोलिए नहीं आप यह बोलिए तो बोलिए हमने सब बोला है।

405
00:27:47,840 --> 00:27:51,920
आप जा के देखिए महाराज हमने सब बोला है। हमने यह भी बोला

406
00:27:51,920 --> 00:27:55,920
है। आप जाकर के देखिए। आप जाकर के देखिए। हमने

407
00:27:55,920 --> 00:28:00,160
सब बोला है। आप केवल भागवतंद की बातों को सुनकर

408
00:28:00,160 --> 00:28:04,320
यहां आए हैं। आपने अभी कहा थोड़ी देर पहले मैं वाक्य स्कलन

409
00:28:04,320 --> 00:28:08,400
वाला मामला नहीं देखा है। पहले देखिए जाकर। मैंने देखा है। वाकलन वाला

410
00:28:08,400 --> 00:28:12,480
मामला पूरी तरह से देखा है। क्यों मुझे वीडियो नहीं आपने क्यों कहा

411
00:28:12,480 --> 00:28:16,800
मुझे वीडियो भेजिए मैंने आपसे इसलिए कहा कि आप भेजिए ना आपका भी आपने अपने

412
00:28:16,800 --> 00:28:21,200
से कहा मैंने वाला वीडियो नहीं देखा है मैंने देखा है

413
00:28:21,200 --> 00:28:25,280
वाला वीडियो आपने क्यों कहा नहीं देखा है मैं इस रिकॉर्डिंग को मैं इस

414
00:28:25,280 --> 00:28:29,840
रिकॉर्डिंग को डालूंगा उसको रिपीट कर करके आप देख लीजिएगा आप डालिए

415
00:28:29,840 --> 00:28:33,840
आप आप देख लीजिएगा आपने कहा है कि नहीं ठीक है जब पूरा

416
00:28:33,840 --> 00:28:37,920
मामला मालूम ना हो तो मत बोला करो मैंने ये नहीं कहा है नहीं आपको

417
00:28:37,920 --> 00:28:40,640
नहीं मालूम है मैंने कभी कभी भी सुनो

418
00:28:40,640 --> 00:28:44,640
सुन लो आखरी बात मैं दोबारा बता दूं आपकी गलतफहमी को मैं

419
00:28:44,640 --> 00:28:48,960
दूर कर दूं मैंने कभी भी जो हमारे शास्त्रों में वर्णन

420
00:28:48,960 --> 00:28:52,960
है जिनकी आप बात कर रहे हैं कि अन्य उपासक भी है उस देवी को

421
00:28:52,960 --> 00:28:57,120
काल्पनिक नहीं कहा है भागवतानंद की कथा को काल्पनिक

422
00:28:57,120 --> 00:29:01,200
कहा है उसे वरदान देने अरे यार कितनी बार

423
00:29:01,200 --> 00:29:05,440
बोलने जाता हूं बीच में बोलते हो अरे तो आप सुनिए ना भागवतानंद

424
00:29:05,440 --> 00:29:09,440
के भागवतानंद की कथा को काल्पनिक कहा है भागवत ान ंद की

425
00:29:09,440 --> 00:29:13,520
कथा में आने वाली जो शक्ति है जो देवी जिसे वो कह रहा है

426
00:29:13,520 --> 00:29:17,600
उसको काल्पनिक कहा है और आगे भी कहूंगा आप आप ये

427
00:29:17,600 --> 00:29:22,160
कह रहे हैं कि नाम ले रहे हैं वो देवी काल्पनिक आप यही कह रहे हैं

428
00:29:22,160 --> 00:29:26,160
भागवतंद को वरदान देने वाली जो शक्ति है और जिसे

429
00:29:26,160 --> 00:29:30,160
वो देवी कह रहा है अमुक अमुक वो शक्ति काल्पनिक है हम ये कह रहे हैं तो

430
00:29:30,160 --> 00:29:34,240
तो जिसका वो नाम ले रहे हैं वो देवी है या नहीं है पहले ये बताइए वो

431
00:29:34,240 --> 00:29:38,320
देवी है बिल्कुल शास्त्रों में है मगर उसका वर्णन तो क्यों नहीं मानेंगे भाई तो आप

432
00:29:38,320 --> 00:29:42,320
आप ये बोलिए ना कि वो झूठ बोल रहे हैं। आप हमें मत बताइए। आप जाइए यहां से आपको

433
00:29:42,320 --> 00:29:46,400
समझना नहीं है कुछ भी। चलिए देखिए कुछ गलतफहमी

434
00:29:46,400 --> 00:29:51,200
हो रही है। आप संभवत इसलिए वहां खड़े हो रहे हैं सामने

435
00:29:51,200 --> 00:29:55,200
क्योंकि आपको ऐसा लग रहा है कि हम उन देवी का खंडन करते हैं जिनका

436
00:29:55,200 --> 00:29:55,760
शास्त्रों में

437
00:29:55,760 --> 00:30:00,000
वर्णन है। हम उन देवी का खंडन मैं आपकी गलतफहमी दूर कर दे रहा हूं।

438
00:30:00,000 --> 00:30:04,240
हम उन देवी का खंडन नहीं करते हैं। यदि आपको मेरे किसी शब्द

439
00:30:04,240 --> 00:30:08,960
से ऐसा लगा है तो वह उसके लिए आप मेरा और वीडियोस को देख लीजिए।

440
00:30:08,960 --> 00:30:12,960
हमने भाई देखा हर बार

441
00:30:12,960 --> 00:30:17,120
मेरी बात मैं मैं आपकी बात सुन लूंगा। एक मिनट नहीं पांच मिनट मैं आपको

442
00:30:17,120 --> 00:30:21,600
कहने के लिए कुछ फोन लगाया है। पूरी बात सुन लीजिए मैं क्या कह रहा हूं। उसके बाद आप असंतुष्ट

443
00:30:21,600 --> 00:30:25,760
हो तो आप अपनी बात रख लीजिएगा। ठीक बोलिए।

444
00:30:25,760 --> 00:30:29,760
जिनके अन्य उपासक हैं और जिस देवी का नाम हमारे शास्त्रों

445
00:30:29,760 --> 00:30:33,760
में वर्णित है मैं उनका कभी नहीं मैंने नाम लेकर ऐसे कहा कि वह देवी काल्पनिक है।

446
00:30:33,760 --> 00:30:37,920
हां मगर जो देवी इसको वरदान देने आती है इसको ज्ञान

447
00:30:37,920 --> 00:30:42,080
देने आती है इसकी कथा के अनुसार कटाक्ष के रूप में यह कहा मैंने कि वो

448
00:30:42,080 --> 00:30:46,080
देवी काल्पनिक है। नाम लेकर कभी किसी वीडियो में नहीं कहा कि अगर वो

449
00:30:46,080 --> 00:30:50,160
नाम जो है हमारे शास्त्रों में वर्णित है और जिनकी आप बात कर रहे हैं कि अन्य उपासक

450
00:30:50,160 --> 00:30:54,160
भी हैं तो नाम लेकर मैंने कभी यह नहीं कहा कि यह देवी काल्पनिक देवी है। इनका

451
00:30:54,160 --> 00:30:58,640
हमारे शास्त्रों में वर्णन नहीं है, ऐसा कभी नहीं कहा मैंने। मैंने कहा कि जो देवी,

452
00:30:58,640 --> 00:31:02,720
जो देवी वहां आ रही है, उसको वरदान देने और जो

453
00:31:02,720 --> 00:31:06,800
इसके परिसाधना वाले मंत्रों से जो खुश हो रही है जो देवी, है ना,

454
00:31:06,800 --> 00:31:11,200
अशा शास्त्रीय मंत्रों से, वो देवी काल्पनिक है। उसपे मैंने कटाक्ष

455
00:31:11,200 --> 00:31:15,200
किया है। तो अब मेरी बात सुन लीजिए। हम्म।

456
00:31:15,200 --> 00:31:19,520
जैसे जब आपने नाम लेकर ये नहीं बोला तो आपके जितने मतलब

457
00:31:19,520 --> 00:31:23,840
वीडियो देखने वाले व्यूअर्स हैं। ठीक है? उन्होंने उनका भी वीडियो देखा।

458
00:31:23,840 --> 00:31:28,080
उनका क्लेम सुना। अब वो डायरेक्ट उस देवी का नाम लेकर ही उपहास

459
00:31:28,080 --> 00:31:32,160
कर रहे हैं। यह मेरा ये था कि ये तो तो

460
00:31:32,160 --> 00:31:36,400
ये ये जो उपहास कर रहे हैं उनकी गलती है। और दूसरी बात ये गलती

461
00:31:36,400 --> 00:31:40,400
भागवतानंद की भी है। वो क्या है? सुन लीजिए। भागवतानंद क्या

462
00:31:40,400 --> 00:31:44,400
करता है? जब हम कहते हैं कि तुझको सपना देने वाली, तुझको वरदान देने

463
00:31:44,400 --> 00:31:48,720
वाली देनी देवी काल्पनिक है तो वो क्या करता है? सिंपैथी बटोरने के लिए आप जैसे

464
00:31:48,720 --> 00:31:52,800
लोगों की आप जैसे लोगों का समर्थन बटोरने के लिए अपनी

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00:31:52,800 --> 00:31:56,960
जो शास्त्रोक्त व्याख्या है देवी की जिनका शास्त्रों में वर्णन

466
00:31:56,960 --> 00:32:00,960
है वो वर्णन देखो देखो ये मेरी देवी को काल्पनिक कह रहा है तो क्या होता है

467
00:32:00,960 --> 00:32:05,040
कि यहां के विवर उससे नहीं भटकते भटकते किससे है जब मैंने उसको

468
00:32:05,040 --> 00:32:09,440
वरदान देने वाली देवी को काल्पनिक कहा और उसके उत्तर में उसने शास्त्र

469
00:32:09,440 --> 00:32:13,440
व्याख्या दे दी कि देखो देखो यहां यहां पर वर्णन है देवी का और यह व्यक्ति वो दे रहा

470
00:32:13,440 --> 00:32:17,440
है उससे भटक रहे हैं लोग वो क्यों कर रहा है ऐसी दूर ता उसको समझ

471
00:32:17,440 --> 00:32:21,520
में जब आ रहा है कि जब मैं उसको वरदान देने वाली देवी को काल्पनिक कह रहा हूं। आपको

472
00:32:21,520 --> 00:32:25,840
उसे फोन करना चाहिए कि जब वो आपके जब वो इस शास्त्रोक्त

473
00:32:25,840 --> 00:32:26,340
देवी का

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00:32:26,240 --> 00:32:31,040
नाम लेकर नहीं बोल रहे कि काल्पनिक है तो आप क्यों शास्त्री जवाब दे रहे हो भैया उसका

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00:32:31,040 --> 00:32:35,200
जब उसका वर्णन आपको वरदान देने के रूप में अगर देवी का वर्णन हो वहां पे

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00:32:35,200 --> 00:32:39,360
कि वो आपको वरदान देकर गई है तो आप शास्त्रों की व्याख्या पेश करो या

477
00:32:39,360 --> 00:32:43,360
फिर उन्होंने नाम लिया हो शिवश नारायण द्विवेदी ने कहां पे नाम लिया है कि ये

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00:32:43,360 --> 00:32:47,440
देवी जो है काल्पनिक है अमुक नाम से अरे तो आप वही

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00:32:47,440 --> 00:32:51,840
ना आप बोलिए मतलब अरे तो मैं तो मैं तो जब मेरे पास वो सामने

480
00:32:51,840 --> 00:32:55,840
चीज आएगी मैं तो अपने वक्तव्यों में अपने वीडियो में कई बार कह चुका हूं। अभी मेरी कल की

481
00:32:55,840 --> 00:33:00,320
पोस्ट पढ़ लीजिए। कल की पोस्ट पढ़ लीजिए। उसी में मैंने ये बात एक क्लेरिफिकेशन

482
00:33:00,320 --> 00:33:04,560
दिया है। आप मुझे कहेंगे कि मैं उसके द्वारा फैलाई

483
00:33:04,560 --> 00:33:08,880
जाने वाली मिथ्या को जाकर के क्लियर करूं। मगर आप उसको यह नहीं कहेंगे

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00:33:08,880 --> 00:33:13,200
कि भैया तुम ऐसी मिथ्या मत फैलाओ। ये कहां का न्याय है?

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00:33:13,200 --> 00:33:17,280
देखिए ऐसी बात नहीं है। मैं यही कह रहा हूं कि जब आप

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00:33:17,280 --> 00:33:21,680
आप जब भी मतलब कभी भी इस संदर्भ में बोल रहे हैं जब आप यह बोलेंगे कि

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00:33:21,680 --> 00:33:25,840
हमने अपने हिसाब से बिल्कुल एक्यूरेट बोला है। हमने

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00:33:25,840 --> 00:33:30,240
कोई गलत नहीं बोला है। उसने हमारे जवाब में शास्त्रोक्त

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00:33:30,240 --> 00:33:34,320
व्याख्या प्रस्तुत करके यह मिथ्या फैलाई है कि हम जो है

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00:33:34,320 --> 00:33:38,400
शास्त्रोक्त देवी का खंडन कर रहे हैं। समझ में आ रहा है आपको? तो

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00:33:38,400 --> 00:33:41,280
आप सही व्यक्ति के पास जाइए कि आप ऐसा ना करें।

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00:33:41,280 --> 00:33:45,280
देखिए आप आप क्या कह रहे हैं वो क्या कह रहे हैं वो तो अलग बात है लेकिन इस कारण जो

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00:33:45,280 --> 00:33:49,440
बाकी लोग अरे भैया मैं ठीक है मैं समझ गया आपकी बात

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00:33:49,440 --> 00:33:53,520
ठीक है बस हो गया वो वो नहीं समझ जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय

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00:33:53,520 --> 00:33:57,520
श्री राम [संगीत]
