⬜ Not used yet · 00:00:01:25 – 00:28:50:00 (28:48)
00:00:01:25 राम जय श्री राम शिवश भाई बोलिए हमारी उनसे बात हुई आपने वो देखा तो है वीडियो नहीं देखा है पूरा 1 घंटा 4 मिनट कितना सेकंड का देखा है हां तो फिर अब क्या आपत्ति है हमने तो उन्होंने जो बोला वो हमने दिखा दिया नहीं वो ठीक है मैं कह रहा हूं जो आपने पहले एक 12 13 मिनट का वीडियो दिया है जो गुरु जी का उसके लिए कह रहा हूं मैं अब तो उसमें आपत्ति किस किन-किन चीजों को लेकर है आपको? देखिए पहला तो यह है मैं उनका एक भक्त हूं। उस भक्त के नाते कह रहा हूं। आप इसको अदरवाइज नहीं मत लीजिएगा। पहला तो यह है इतने बड़े संत है। सिद्ध संत है। जिस हिसाब से आपने उनका नाम उच्चारण किया है। उस पे मैं अपनी आपत्ति की बात कर रहा हूं। उस देखिए अगर बात तू तू शब्द की है ना तू तड़ा उनके की बजाय कि उसका बोला मैंने इस पे आपत्ति है ना जी जी तो इसमें तो जो तुलसीदास जी हैं उन्होंने कई बार अपनी चौपाइयों में तू करके और अपने ईश्वर को अपने गुरु को इस तरीके से भी संबोधित किया है तो उसको इतना ज्यादा उसको जगन्नाथ जी है ना उसको इतना ज्यादा उसको
00:01:17:03 इतना ज्यादा कई बार ईश्वर के लिए भी हे ईश्वर हे भगवान तेरी लीला अपरंपार ऐसे तेरी तो ये इस पर इतना ज्यादा फोकस ना करें ऑफेंसिव चीजें बताएं आरोप क्या-क्या आपको आपत्तिजनक लगे जो जो आपने बात उनकी किताबों से निकाल के बोला है उन बातों पे आपको शंकरानंद जी ने कुछ स्पष्टीकरण दिया है और मैंने भी पूज्य शंकराचार्य जी का एक वीडियो देखा था पहले फिर मैंने ढूंढ के आपको भी दिया है जो शुभंकर जी के साथ उनकी वार्तालाप है यही दिल्ली आए थे दिल्ली में मैं भी उनका तीनों दिन जाकर दर्शन किया था बसंत क्या नाम तो क्या क्या उसमें कहा था गुरुदेव ने निगमानंद जी बिल्कुल सही लिखे हैं जो भी लिखे एक तो जैसे आप वर्णाश्रम में आप उनके पे टिप्पणी किए हैं उसी वर्णाश्रम में पूज्य शंकराचार्य जी ने भी स्पष्टीकरण दिए हैं कि वर्णाश्रम तो है बट मान लो कोई ब्राह्मण होकर क्षत्रिय का आचरण करेगा तो उसको ब्राह्मण गौण हो जाएगा क्षत्रिय मुख्य हो जाएगा। तो ये उससे मतलब नहीं है। उसका जो एडजेक्टिव है वो बदलेगा नहीं। उसको ब्राह्मण ही कहा जाएगा पर पतित ब्राह्मण कहा जाएगा। हां जी हां जी यही बोला है उन्होंने।
00:02:32:07 हां तो ये तो मुझे ये तो हमें पता है। मगर ब्राह्मण क्षत्रिय थोड़ी ना बनेगा ना क्षत्रिय ब्राह्मण बनेगा। हां तो आपने यह बोला है ना कि निगमानंद जी यह जो जाति प्रथा को विरोध कर रहे हैं तो ये शंकरानंद जी ने तो बोला ना कि जैसे विश्वामित्र बन गए थे वैसे कोई बन सकता है जन्म जाति शूद्रा तो बोला तो है शंकरानंद जी ने नहीं एक्सैक्टली सेम चीज पूज्य शंकराचार्य जी ने भी बोले नहीं बोली है भाई साहब हम उनके हम उनके शिष्य हैं 50ों वीडियोस हैं उनके उन्होंने यह बात नहीं बोली है उन्होंने यह बोला है कि यदि कोई ब्राह ब्राह्मण क्षत्रिय का कार्य करने लगेगा तो उसको क्षत्रियोचित श्रेणी का ब्राह्मण माना जाएगा जो क्षत्रियोचित वृत्ति का आलंबन लेने लगा मगर वो ब्राह्मण शब्द नहीं हटेगा उसके नाम के आगे से वो क्षत्रिय नहीं बोला जाएगा मगर शंकर शंकरानंद जी ने तो बोला ना कि वो जैसे विश्वामित्र जी बन गए थे अब तर्क भी दिया अपने उसके संबंध में जी कि विश्वामित्र जी जैसे बन गए थे तो जबकि विश्वामित्र जी के जन्म जन्म का प्रयोजन और जन्म की जो कथा है वो सबको मालूम है। महाभारत में जो दी हुई है मैंने वहां पर उनको भी काउंटर किया। जी तो यानी कि नहीं देखिए पहले
00:03:47:10 एक बात समझिए देखिए पहले एक बात क्लियर कर लीजिए। शंकराचार्य जी ये नहीं कहते कि ब्राह्मण क्षत्रिय बन जाएगा। यह कहते हैं कि यदि कोई ब्राह्मण क्षत्रयोचित कार्य करेगा तो उसको क्षत्रयोचित ब्राह्मण कहेंगे और वह पतित माना जाएगा। जो क्षत्रिय उचित कार्य करने लगे अपना कर्तव्य छोड़ के दूसरी की वृत्ति का आलंबन ले लेगा तो पतित माना जाएगा जी ठीक है और वहां पर शंकरानंद जी ने यह कहा कि कोई अगर ले लेगा तो बन ही जाएगा दोनों में अंतर है। आलंबन लेना उस व्यक्ति का पतित हो जाना और ब्राह्मण का क्षत्रिय बन जाना इसमें अंतर है। और उन्होंने उस संबंध में वही विश्वामित्र जी की कहानी बताई। विश्वामित्र जी को ब्राह्मण घोषित किया था दैवीय लोगों ने। वो विश्वामित्र जी स्वयं दैवीय व्यक्तित्व वाले थे। दूसरी बात कि क्या कहते हैं ये उन्होंने उनकी माता जी ने खीर खाई थी बचपन में जिसमें कि उनको जो ब्राह्मण तत्व जन्म से प्राप्त था। जी और अंतत गतवा किसी इंसान ने ये कंसीडर नहीं किया कि वो ब्राह्मण हो गए। जी कंफर्म तो ब्रह्मा जी ने ही किया ना। जी जी वशिष्ठ जी ने तो मना कर दिया था 100 पुत्र मारेगा झगड़े में उनके। देखिए मेरा पॉइंट क्या है? तो कहने का मतलब है
00:05:02:14 कहने का मतलब है शंकरानंद जी ने अपने उसमें जो हमने क्लेम किया था कि कर्मणा वर्ण व्यवस्था को मानते हैं या वो यह मानते हैं कि जन्म जन्म से जो होगा वो बाद में जाकर के बदला जा सकता है। ठीक है? तो उसको उन्होंने माना। हमने उसको एज इट इज दिखाया भी है तो उससे वो हमारा जो क्रिया आने वाला क्लेम है वो पुष्ट हुआ है। बदला नहीं है वो और पुष्ट हुआ है। स्ट्रांग हुआ है वो कि हमने जो क्लेम किया था वही माना है इन्होंने शंकरानंद जी ने। मैं मैं ये कह रहा हूं रामकृष्ण देव ने बोला है जतो मत ततो पथ जितना मत है उतना देखिए एक एक बात क्लियर करिए पहले। अब मत की बात जब करेंगे कि जतो मत ततो पथ यह तो दूसरी बात हो जाएगी। फिर अभी बात यह क्लियर करिए कि वह मानते थे कि नहीं मानते थे कर्म के अनुसार बदल जाएगा। तो शंकरानंद जी ने माना है कि हां कहां कर्म के अनुसार बदल जाएगा और जो स्कॉन वाले जो थ्योरी देते हैं खट से और वो आर्य समाजी जो थ्योरी देते हैं वही थ्योरी उन्होंने दी है विश्वामित्र जी वाली। विश्वामित्र जी वाली थ्योरी मुझको बहुत लोग दे चुके हैं। जी तो पहले तो ये क्लियर करिए कि हां वो कर्म से मानते थे। इसका मतलब हमारा अपने वीडियो में ये कहना कि भाई वो कर्मणा वर्ण व्यवस्था को मानते थे। जन्म से नहीं मानते थे। बदल बदल जाना
00:06:17:22 मानते थे। तो हमारा ये कहना जन्म से नहीं मानते थे करके कहीं कहीं नहीं बोला उन्होंने। जन्म से नहीं मानते थे कि नहीं कह रहा हूं। जन्म से होने के बाद में बदल सकता है। ये मानते थे ना। जी और थ्योरी शास्त्र तो शास्त्र भी कहा है ना जैसे जन्मते शद्र जो बस बस अब आप आ गए वहीं पे जो शंकर जी बोल रहे थे ये बदलना शंकराचार्य ने स्वीकार नहीं किया है तो आपका यह कहना गलत है कि शंकराचार्य कहते हैं कि जन्म जाति शूद्रा के आधार पर उसको किसी का वर्ण बदल जाएगा। जन्म जाति शूद्रा पर गुरुदेव ने कहा था कि वहां पर आप पहली बात तो यह श्लोक पद्म पुराण में वह स्कंद पुराण के नागर खंड में है। जी और इसका अगर एज इट इज निकालेंगे जन्म जाति शद्रा का जो अर्थ निकालेंगे एज इट इज तो उसमें बहुत सी अन्य जो हमारे श्रुति स्मृति शास्त्रों में दी गई युक्तियां है प्रमाण है उनका खंडन हो जाएगा यहां यह मानना पड़ेगा कि जन्म से सभी शूद्रवत होते हैं जी और फिर उनमें संस्कार आता है संस्कार के द्वारा द्विजत्व का आदान होता है। मगर हम ये मान लेंगे कि जन्म से सब जन्म से शूद्र ही होते हैं। तो क्या अह ये
00:07:33:03 श्री राम जी को शूद्र कहा गया है क्या बचपन में? नहीं वो तो क्षत्रिय थे देखिए नहीं नहीं सुनिए तो मतलब अब अब देखिए अब यहां पे क्या हो रहा है पहले तो ये था कि वो नहीं मानते थे। अब आप स्वयं कह रहे हैं कि हां बदल सकता है। यह बदलना वह मानते थे ना निगमानंद जी कर्म के आधार पर व्यक्ति का वर्ण बदल जाना ये मानते थे निगमानंद जी यह जो है परंपरा प्राप्त आचार्यों के विरुद्ध थ्योरी है। और दूसरी थ्योरी और सुनिए। विदेश यात्रा को आपके यहां माना जा रहा है। माना जा रहा है ना। देखिए उन्होंने उस पर आपको कोई चीज बोला नहीं और मैं आधिकारिक नहीं हूं। मुझे इसके बारे में आईडिया भी नहीं है। आप यह बताइए कि जो निगमानंद जी के यहां के प्रामाणिक लोग कर रहे हैं, कह रहे हैं कि विदेश यात्रा कर सकते हैं तो हम उसको क्या माने? या तो यह माने कि यह लोग निगमंद जी के प्रामाणिक लोग नहीं हैं। और या फिर यह माने कि भैया ये वही करेंगे कहेंगे जो निगमंद जी ने कहा है। क्या करें? देखिए भारत देखिए मैं आपको एक दूसरे पॉइंट पे बोलना चाहूंगा। भारत विश्वगुरु बनेगा। ठीक है? हां विवेकानंद जी गए देखिए फिर आप वो सारी बातें
00:08:48:12 कर रहे हैं जो शंकराचार्य के विरुद्ध है। पहली बात विवेकानंद जी हमारे लिए प्रमाण नहीं है। शंकराचार्य जी को सुना है आपने विवेकानंद जी के बारे में आप तीन दिन दर्शन करने गए क्या कहते हैं शंकराचार्य जी विवेकानंद जी के बारे में नहीं मैंने सुना नहीं उनसे हां तो सुनिए सुनिए उन्होंने क्या कहा विवेकानंद जी के बारे में उन्होंने कहा है कि विवेकानंद जी के पास एक ही चमत्कृति थी कि वो वर्णाश्रम विरोधी थे अन्यथा हमारे ऐसे ऐसे बड़े-बड़े महापुरुष हुए उनका नाम क्यों नहीं लेती सरकार एक ही चमत्कृति थी उनके पास कि वर्णाश्रम विरोधी थे बाकी दर्श दार्शनिक धरातल में तो वो शंकराचार्य को ही मानते थे। वर्णाश्रम इत्यादि का त्याग कर दिया उन्होंने। और दूसरी बात यह है कि उन्होंने विदेश यात्रा में यह कहा है कि भारत को विश्व गुरु बनना है। सब बातें हैं। मगर हम नहीं जा सकते मगर वो तो यहां आ सकते हैं हमसे शिक्षा लेने। तो प्रामाणिक प्रामाणिक रीति यही है कि वह लोग आएंगे। हमारे यहां का द्विज बाहर जाएगा तो उसका द्विजत्व का हनन होगा। जी यह बात है। जो बस जो वसुधव कुटुंबकम जो वेद की वाणी है इसका मतलब यह भी खंडन हो गया हम कुटुंब नहीं मानते ये सिद्धांत ये सिद्धांत आप बताना पड़ेगा
00:10:03:18 कि यदि हम पढ़ाने के लिए वहां नहीं जा रहे बल्कि उनको यहां बुला के पढ़ा रहे हैं तो क्या इससे वसुदेव कुटुंबकम का खंडन होता है कि नहीं होता है इस संबंध में आपको सनातन सिद्धांत देना होगा। भाई कई बार लोग कह देते हैं सुनिए कई बार लोग कह देते हैं कि उसके यहां का भोजन हम नहीं करेंगे फलाने अमुक के यहां का। ठीक है? तो इसके आधार पर हम उसे नीच मानते हैं। यह कहां लिखा है कि जिसके यहां का हम भोजन नहीं करेंगे उसको हम नीच मानेंगे। हमारे घर पे कोई मेहमान आता है। ठीक है? उसको हम अपनी स्त्री से स्पर्श नहीं करने देंगे। तो वो नीच हो गया। जो मेहमान आया
00:10:44:12 नहीं हुआ ना तो ऐसे अपने मन से नहीं सोच लेना चाहिए डॉक्टर है डॉक्टर अंदर ऑपरेशन चल रहा है जिसका ऑपरेशन चल रहा है उसके ही परिजनों को बाहर गेट के रोक देता है अंदर नहीं जा सकते हो ऑपरेशन थिएटर में वो नीच हो गए क्या तो यह वसुदेव कुटुंबकम का खंडन कैसे हो रहा है इस आधार पर कि हमारे जो आचार्य गण है वो विदेश नहीं जा रहे बल्कि विदेशों से यहां पर आ रहे यह खंडन कैसे हो रहा है? यह आपको फिर सर पहले सनातन सिद्धांत खोल के दिखाने होंगे। तर्क और युक्ति से आपको सिद्ध करना पड़ेगा। नहीं मैं उतना अधिकारी नहीं हूं। हां जो मेरा देखिए मैंने आप आप हैं एक सभ्रांत व्यक्ति। इसमें कोई दो राय नहीं है। मगर क्या है कि आप किसी भी प्रकार से अपने पक्ष को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। क्या कर रहे हैं? किसी भी प्रकार से मतलब कि चाहे मुझको कुछ भी बोलना पड़ जाए। कुछ भी मतलब अपने सिद्धांतों को मानना पड़ जाए अथवा उनका विरोध करना पड़ जाए। कैसे? पहले आपने कहा कि जो शंकराचार्य जी मानते हैं वही उन्होंने कहा। जब और जब मैंने बताया कि नहीं भैया कर्म से चेंज नहीं होगा। शंकराचार्य कर्म से चेंज होना नहीं मानते तो आप कहने लगे नहीं नहीं ये तो शास्त्रों में लिखा है। फिर आप
00:11:59:13 शंकराचार्य की थ्योरी को कहां ले गए? हालांकि शास्त्रों के आधार पे ही शंकराचार्य बात करते हैं। परंतु आपने देखिए पहले अपनी चीज को कुछ कहा फिर कुछ कहा। उसके थोड़ी देर बाद आपने विदेश यात्रा पर क्या कहा? विदेश यात्रा पर आपने यह कहा कि भाई उसमें तो आपको कुछ कहा ही नहीं। उन्होंने अधिकारी जब मैंने वहां जोर दिया, तर्क दिया तो आप विदेश यात्रा का समर्थन करने लगे। अरे भाई एक आप तय कर लो ना आपका सिद्धांत क्या है? फिर उस पर बात करो आप। आप अपनी आप अपने सिद्धांतों को पहले कह रहे हैं कि हम नहीं मानते। फिर थोड़ी देर बाद उसका समर्थन कर रहे हैं। मैं फिर किस बात को लेकर के आपसे बात करूंगा? नहीं मेरा सिद्धांत यही है। से फिर आप इस पे आ गए कि ये जो है जतो मत जतो जतो जतो मत ये क्या बोला था आपने? जतो जतो मत ततो पथ हां जतो मत ततो सुनिए मेरा पॉइंट मेरा पॉइंट आप समझने की इसका अर्थ ये थोड़ी ना है कि हम कुरान को मानने लगेंगे जतो मत ततो पथ या बाइबल को मानने लगे जतो मत ततो पथ नहीं सिवा जी मैं आपको कुछ और कहना चाह रहा हूं। मैं ये कहना चाह रहा हूं हम मैं अपनी बात कर रहा हूं। मैं पूज्य शंकराचार्य जी को बहुत श्रद्धा सम्मान परंपरा में विश्वासी सनातन में विश्वासी इस पर मुझे
00:13:14:24 कोई दो राय नहीं है। चाहे कितना भी अड़चने आ जाए मेरा सिद्धांत यह हमारी एक मूलभूत चीज है यह ठीक है। दूसरी है हमारी सनातन में बहुत सारे महापुरुष आए हैं। सब यही मैं शंकर संप्रदाय की बात कर रहा हूं। मतलब यह दसनामा की बात कर रहा हूं। बहुत सारे आए हैं। उन्होंने अपनी साधन की सिद्धि के हिसाब से उन्होंने अपनेप चीजें ऐसा नहीं है जो मूल सिद्धांत हैं उनके विरोध में कोई नहीं चला गया। शंकराचार्य शंकराचार्य कई आए हैं। शंकराचार्य कई आए हैं किसी ने ये नहीं कह दिया की द्वैत है अद्वैत नहीं है। नहीं नहीं मेरा द्वैत पथ है मगर अद्वैत वो है उसका प्रात्तव्य। हां मेरा मेरा बात खत्म होने दीजिए। मैं क्या कह रहा हूं, की तरह-तरह की आए हैं और उन्होंने इसी साधन को लेते हुए जैसे अह हमारे गुरु जी हैं वो सच्चिदानंद जी से दीक्षा लिए हैं और आगे बड़े हैं और उन्होंने अपने सिद्धांत लिए हैं और उनको भी जो शंकर संप्रदाय की जो शंकराचार्य पूज्य हैं, जैसे श्रृंगरी के साथ भी उनका था और पूरी में रहते थे तो पूरी के साथ भी था। तो इनकी आपस में कोई अमेल नहीं है,
00:14:30:00 कोई मतभेद नहीं है। ठीक है? हम क्यों इस मतभेद को खड़ा करते हैं, मेरा इसमें क्या होगा जो सद्गुरु निगमानंद जी की अनुजाई है उनकी प्राण में ठोस आती है कि हमारे गुरु जी के बारे में कोई ऐसे बोला है तो आप इस पॉइंट को सोचिए। मैं देखिए आप शास्त्र जा रहे हैं। देखिए देखिए देखिए देखिए देखिए पहली बात तो यह है कि यदि कोई माता को पत्नी के रूप में मूर्ति बना करके स्थापित करेगा तो वो कोई भी हो पूरे संसार का हम उसको उसका विरोध करेंगे। ठीक है? दूसरी बात यह है कि ये बातें सत्य हैं कि पूरी तरीके से ये जो बाहर की संस्थाएं हमारे देश में आकर के काम कर रही हैं। चाहे वो आर्य समाज के रूप में हो, चाहे वो इस के रूप में हो। उसी तरीके से जब निगमानंद जी की भी संस्थाएं काम करेंगी उनके ग्रंथों में वही चीजें मिलेंग और उनके अनुयाई वही बातों को स्वीकार करेंगे कि हां विदेश यात्रा होनी चाहिए क्या दिक्कत है जन्म के अनुसार वो जन्म के बाद कर्म के अनुसार वर्ण बदल जाना चाहिए क्या दिक्कत है और ये जो मोहम्मद और ईशु हैं ये सब गौतम ऋषि के देह से उत्पन्न है इसमें क्या दिक्कत है ना तो फिर हम जब ऐसा होगा तो हम वहां भी प्रतिकार करेंगे क्योंकि मनुस्मृति में लिखा हुआ है कि मौन रहने से अच्छा होता है सत्य
00:15:45:13 बोलना और क्या कहते हैं जो व्यक्ति सामर्थ्य होते हुए भी धर्म की रक्षा नहीं करता है फिर धर्म उसका जो है नाश कर देता है तो हम यह बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे ना कि ऐसा होगा हमारे सामने अब रही बात शास्त्रार्थ की तो शास्त्रार्थ की बात हम तो ऐसा कुछ है नहीं शास्त्रार्थ करने बैठे हैं परंतु यदि कोई हमारी मां का अपमान करेगा हमारे सनातन सिद्धांतों का ऐसे इस तरीके से दुष्प्रचार करेगा तो उसमें सामने अच्छा हम पहुंचे कैसे आपके पास तक क्योंकि किसी व्यक्ति ने स्वयं को वर्णाश्रमी कहते हुए आपका आपकी परंपरा का हवाला दिया। समझ रहे हैं? नहीं तो उस संभवत हम पहुंचते ही ना। और वह व्यक्ति कह रहा है हम निगमानंद के निगमंद के शिष्य हैं। तो आपको दो चीजों पर कार्य करना चाहिए कि आप एक तो यह जो चैनल है जो निगमंद जी की फोटो इस तरीके से माता पत्नी के रूप में है और यह सब है इस सब पर आप रोक लगवाने के लिए कार्य करें। और दूसरा कम से कम उस व्यक्ति के लिए एक प्रेस नोट या जो भी है विज्ञप्ति वह करें कि निगमानंद के द्वारा स्थापित हमारा संस्थान है और यह अमुक अमुक हम यहां से स्थापित किया गया था इस सन में मतलब उसका जिससे पता लगे कि हां ये प्रामाणिक है निगमानंद जी की ओर से और एक व्यक्ति अपने आप को निगमानंद जी के किसी शिष्य का शिष्य बता
00:17:00:16 रहा है जो कि सरासर झूठ है। इस तरीके से पत्र आप जारी कर दीजिए। वो तो शंकरात शंकरानंद जी ने तो आपको बोले हैं ना क्या? कि हमारी जो 11 जने की उन्होंने कोई जिक्र किया है। नहीं नहीं पत्र वो लिखित रूप से ठोस प्रमाण आप जारी जारी कर दीजिए। वीडियो बना दीजिए एक छोटा सा कि भाई इस इस तारीख को यह मठ यहां पे स्थापित हुआ था। इसका यह प्रमाण है और हम उस हैसियत से उनके प्रामाणिक उत्तराधिकारी होने की हैसियत से बता रहे हैं कि उनका ऐसा कोई शिष्य नहीं है स्वामी अमृतानंद सरस्वती और ये जो ये जो दुष्प्रचार कर रहा है ये तो बिल्कुल भी नहीं है। नहीं उन्होंने आप गए थे। उन्होंने आपको उनके मठ से आप वीडियो बना के लाए हैं। उन्होंने खुद बोले हैं। इसके अलावा भी आपको और चाहिए। क्योंकि उन्होंने यह कह दिया ना कि हम किस-किस को रोके? मैंने जब उनको कहा था कि भाई ऐसे आपको रोकना चाहिए तो उन्होंने कहा था सोशल मीडिया पे हम किस किस को रोके ये क्या करें ये ऐसे कर दिया था वो देखो वो उन्होंने जो कहा है आप भी समझिए प्रैक्टिकिटी जो आपने बोले हैं कि कोई देवी को गुरु जी के बगल में बैठाए हैं तो अब देखिए किसी ने अब हम एक चीज बताऊं सही में ढूंढने भी चाहे कहां
00:18:15:27 उसको कौन है चैनल किसका है नंबर क्या है कहां नहीं बहुत आसान है बहुत आसान है आप YouTube पर आप कंप्लेन कर दीजिए ये ऐसेसे दिखा रहा है। बदनामी हो रही है। YouTube पे आप कंप्लेन कर दीजिए। वो कंप्लेन हमको उसके को वो जो आपने भेजा हो कंप्लेन नंबर वगैरह वो शेयर कर दीजिए। तो हम भी यहां अपने चैनल से शेयर करेंगे। भाई निगमानंद जी के मट की ओर से अच्छा कदम उठाया गया। हम उसकी प्रशंसा करेंगे। अभी आपकी जो 1 घंटे चार मिनट की बात हुई है इससे आपको नहीं लगता कि जो आपने जो गुरु जी के लिए 12 13 मिनट का वीडियो जारी किया उसको आप देखिए उसमें एक अगर आप वो तू तू वाली जो भाषा है तू वाली क्योंकि वो निगमानंद जी मेरे सामने तो थे नहीं तो हम उसे उसे एक व्यक्ति विशेष की तरीके से संबोधित किया मैंने बस उसमें अन्यथा ऐसा कुछ नहीं है जो आपके सिद्धांतों के विरोध में हो। आप उन सभी सिद्धांतों का यहां पर पक्ष ले रहे हो कि नहीं ले रहे हो जो मैंने उसमें क्वेश्चन रेज किए हैं उस वीडियो में भाई मैंने कहा मैंने कहा कि वो पत्नी देखते थे पत्नी में माता माता को पत्नी में देखते थे तो वो देखते थे ये आपकी बुक में लिखा है अब मैंने कहा कि वो जन्म जन्म के बाद कर्म के अनुसार बदल जाना मानते थे
00:19:31:13 तो आप खुद उसका पक्ष ले रहे मानते थे उनकी बुक में लिखा है आप भी मान रहे हो वहां उन्होंने शंकरानंद जी में भी माना मैंने उसमें वो क्वेश्चन उठाया था कि ये जो है ये मुसलमानों के साथ इस्लाम और इनके साथ जो है वह एकत्व दिखा रहे हैं सनातन का और ये इनका उत्पन्न होना बुद्ध जिससे हमारे चैतन्य महाप्रभु उत्पन्न हो रहे हैं और जिससे हमारे भगवान बुद्ध उत्पन्न हो रहे हैं उसी से आप जो है मोहम्मद को और उनको उत्पन्न दिखा रहे हैं। मतलब एक तरीके से और फिर उनको धर्मात्मा कह रहे हैं। कैसे आप धर्मात्मा कह देंगे भाई? अच्छा यह चीज जो है मैंने आपको जो पूज्य शंकराचार्य जी का जो वही शुभंकर मिश्रा वाला जो साक्षात्कार दिया है मैं मैं एक बात पूरी कर लूं। पहली पहले तो मैंने क्या कहा था? मैंने उसमें कहा कि भाई ये ऐसा ऐसा बता रहे हैं कि बुद्ध जो है वहां से उत्पन्न हुए और वो उत्पन्न तो वही शंकरानंद जी ने माना तो है। इसका मतलब हमने कोई भी फॉल्स क्लेम नहीं किया अपनी वीडियो में। हां एक बात है कि आपको आपत्ति है उसमें जो तू तड़ाक की भाषा शैली हुई है। ठीक है तो वह इतना मायने नहीं रखता और आगे हमने जब दोबारा बनाया है तो हमने वो जो भाषा शैली है उसको चेंज कर दिया है। नहीं नहीं वो खाली भाषा में नहीं है। हमारे जो जगन्नाथ
00:20:46:16 जी है ना पूरी आप गए थे। जगन्नाथ जी को कोई अभी तक तुम या आप नहीं बोले हैं। सारे तू बोलते हैं क्योंकि वो बड़े करीबी माने जाते हैं। बस बस बस बस आप पहुंच गए सही। जितनी उनकी भजन है हम सब तू से शुरू होती है। हां। ठीक है? तो वो एक दूसरी चीज है। देखो आप बच्चे को प्यार करते हो तू ही बोलते हो। आप पिताजी से क्या के साथ बड़ा अच्छा रिलेशनशिप हो गया तो कभी-कभी तो तू तो इसीलिए मैं कह रहा हूं। आप उस पर ध्यान ना दीजिए। बाकी बाकी हमारे वीडियो में कोई भी ऐसा पॉइंट नहीं है जो आपके यहां पर जाकर के उस वो मतलब झूठा सिद्ध हुआ हो बल्कि वहां एक दो पॉइंट और पुष्ट हुए हैं। जैसे कि यह जो भागवतानंद है इसने एक पूरा चैनल बना रखा है। उस पे एक मलेच्छराज नाम की सीरीज चलाई है। उस सीरीज में इसने यह बताया है कि भैया जो दुनिया का एक कोई राक्षस है जिसका नाम है मलेच्छराज। पूरी कॉमिक्स जैसी सीरीज है काल्पनिक। फिर दुनिया का एक राक्षस है जो है मलेचराज है। उसके द्वारा बनाई गई कोई संस्था प्रीमेशन और फ्रीशन से जुड़ा हुआ एनी बेसेंट का ये थियोसफिकल सोसाइटी। अब यह व्यक्ति थियोसफिकल सोसाइटी को एक राक्षस द्वारा संचालित सिद्ध
00:22:01:22 कर रहा है। हमें मतलब नहीं है। थियोसफिकल सोसाइटी के हम थोड़ी ना है। मगर यह व्यक्ति जरूर उसका पुरजोर विरोध कर रहा है कि भैया ये सनातन को नष्ट करने के लिए संस्था बनी है। मगर आपके यहां जाकर के और हमको क्या मालूम पड़ा कि थियोसोफिकल सोसाइटी से तो डायरेक्ट कनेक्टेड है निगमन जी। कैसे कनेक्टेड है कि भाई वो एनी बेसेंट उन्हीं की शिष्या है सुमेरू दास जी की और उसी उनहीं के शिष्य हैं। नहीं मैंने आपको जो कुछ राइटिंग भेजा है उसमें आप देखिए क्लियर क्लियर लिखा हुआ है कि जो सुमेरू दास जी है वो थियोसोफिकल सोसाइटी में उनकी इतना योगिक पावर था वो उनके पास जाके उनकी मत को परिवर्तन करके सनातन धारा में लाने की कोशिश करते हैं। हां मतलब फियोसफिकल सोसाइटी से डायरेक्ट जुड़े हुए थे ना निगमांद जी और हां सुमेरूस सुमेरू दास जी जुड़े हुए थे नहीं सुमेरू दास जी वो यहां पे उनकी जो सब जो मेंबर थे उनके उनके वहां पे जाके उनकी मत परिवर्तन करने की कोशिश करते थे। अरे भाई साहब ये तो बाद की बात है कि वहां होता क्या था? ये तो वहां क्या होता है? वहां क्या होता है? देखिए हम
00:23:17:06 स्वीकार देखिए विषय क्या है समझिए जैसे मैंने कहा कि ताजमहल अब ताजमहल से बात हो रही है कि मैं जुड़ा हुआ हूं कि नहीं अब ताजमहल में होता क्या था ये एक अलग विषय है ताजमहल से मैं जुड़ा हुआ हूं कि नहीं वो एक अलग विषय है वो तो अलग विषय हो जाएगा ना शिवाजी सुनिए मैं मान लो ताजमहल जाकर घूमके आ गया तो इसका मतलब यह थोड़ी ना है कि मैं ताजमहल की जो मतलब उसपे में मैं जुड़ा जुड़ा हो गया। अरे तो मैं इस बात को लेकर के आप पर आरोप थोड़ी ना लगा रहा हूं। मैं तो उस व्यक्ति को सुनिए मैं उस व्यक्ति को जवाब दे रहा हूं जो व्यक्ति यदि कोई महिला एक दिन के लिए किसी ऐसी संस्था की अध्यक्षा चुन ली जाती है जो संस्था उस व्यक्ति ने बनाई है जो व्यक्ति थियोसफिकल सोसाइटी या फिर फ्री मिशन से जुड़ा हुआ है। तो इस कारण से उस व्यक्ति के द्वारा बनाई गई जो संस्था है यूआईएसएफ़ उसमें एक कोई महिला एक दिन के लिए अगर अध्यक्ष चुन ली जाती है एक किसी प्रदेश की स्पोर्ट्स एकेडमी की स्पोर्ट्स फेडरेशन ये सब की तो उसको वो घोषित कर देता है कि मलेच्छराज द्वारा भेजी
00:24:32:16 गई लेडी है। एजेंट है ये शैतान की एजेंट है ये। तो यह मेरा प्रश्न उससे है कि भाई अगर तुम एक दिन के लिए किसी को अध्यक्ष बनाए जाने पर उसको घोषित कर रहे हो शैतान से भेजा शैतान के द्वारा भेजा हुआ तो तुम्हारे यहां तो ये सुमेरू दास जी और ये तुम्हारी एनी बेसेंट और ये एनी बेसेंट जिसने संस्था की स्थापना की थीसिकल सोसाइटी और ये तो ये देखो ये तो पूरा पूरी तरीके उससे कहीं ज्यादा आगे के स्तर पर जुड़े हुए लोग हैं तो यहां पर क्यों नहीं तुम ध्यान दे रहे हो अब इनको घोषित करो मलेच्छराजो का एजेंट मैंने थोड़ी ना कहा कि वो मलेच के एजेंट हो गए हो गए तो मैंने उससे प्रश्न किया है। मैंने इस बात को लेकर के कोई आरोप थोड़ी ना लगाया है। मैंने तो यह कहा है कि भाई यदि तुम मानते हो कि एक दिन के लिए किसी संस्था के साथ दिखाई दे जाने पर कोई शैतान का दूत माना जाएगा तो यह तो बहुत आगे के स्तर पर जुड़े हुए हैं। फिर इनको क्या मानोगे? इसमें तो मेरा क्योंकि इसमें मेरा अपना कोई वो है ही नहीं। स्टैंड मेरा अपना स्टैंड किसमें है? कर्मणा वर्ण व्यवस्था नहीं है। जन्म न जाते शद्रा के आधार पर वर्ण नहीं बदलेगा। हम और क्या कहते हैं जैसे स्कंद पुराण में लिखा हुआ है कि भैया जिसका गुरु नहीं है वो पशु पशु होता है। पशु तो वो पशु
00:25:47:22 होता है या पशु के समान होता है। पशु के समान ही मानना पड़ेगा ना। उसकी योनि थोड़ी ना चेंज हो जाएगी। जो पशु तो इसी तरीके से हम शिवान जी आप और हम जो है ना हम दोनों सनातनी हैं। हम एक जगह पे बैठे हुए हैं। ठीक है? लेकिन मेरा जो आपसे जो रिक्वेस्ट था मैं अपने गुरु जी को लेकर ही रिक्वेस्ट कर रहा हूं। तो मैं आपको पूछा तो मैंने आपके गुरु जी के विरोध में वो कौन सी बात बोली है जो आपको जो है आपत्तिजनक है। तू तड़क आपत्तिजनक है नहीं। जो मैंने उसमें क्वेश्चंस रेज किए वो सारे शंकरानंद जी ने उसको स्ट्रांग कर दिया। आप भी मान रहे हो ऑनलाइन तो अब दिक्कत क्या है खाली उतना नहीं है एक तो मेरा लास्ट रह गया क्योंकि आप थोड़ा सा इस पे खुद ही विचार कीजिए आप बहुत विचारवंत थे आप बहुत पढ़ाई करते हैं मैंने आपका दो-तीन वीडियो देखा हूं मैं आपके उसमें किसी पे मेरा कोई ऑब्जेक्शन नहीं है और यह जो पॉइंट आप लेके आ रहे हैं इस पर मेरा कोई नॉलेज नहीं है मैं एक लास्ट पॉइंट आपको बोलूंगा जो मैंने आपका शंकराचार्य जी का जो एक एक और भी वीडियो भेजा हूं जिसमें उन्होंने इस यहूद मतलब मुसलमान सलमान और उन्होंने मक्का का भी दिया है। वहां से जाके लोग शिवजी का लिंग भी ले आते हैं। और वो वाली वो वाली जो उनकी व्याख्यान है वो भी आप सुन लीजिए।
00:27:02:26 उसमें उससे क्या दिक्कत है? उससे यह है कि जो निगमानंद जी ने बोला है पूज्य शंकराचार्य जी ने वही बोला है। नहीं नहीं बोला है ना। देखिए जो गुरुदेव है वो सदैव कुरान का खंडन करते हैं। क्यों करते हैं? कुरान की सीमा का ईश्वर साक्षात अवतार नहीं ले सकता। जिनका ईश्वर जगत बनाता है वही ईश्वर वही जगत बनता भी है। वही साक्षात अवतार ले सकता है। तो वो कुरान का खंडन करते हैं। परंतु यहां पर कुरान का खंडन नहीं बल्कि मंडन हो रहा है। कैसे हो रहा है? कि जो मोहम्मद इत्यादि हैं वह धर्म संस्थापना के लिए आने वाले महापुरुष हैं और वह गौतम ऋषि से उत्पन्न हुए हैं। जैसे कि गौरांग हुए थे। चैतन्य महाप्रभु से तुलना हो गई। मोहम्मद मोहम्मद की और बाइबल वाले ईशु की और जो और जो मक्का की बात है शिवलिंग की बात है तो वो हम यहां ये क्लेम करते हैं कि वहां के लोगों को ये पता नहीं है कि वो जिसकी पूजा कर रहे हैं वो हमारे शिव ही हैं। वो यह नहीं कहते थे कि कुरान की जो व्याख्या है या मोहम्मद जो है वो धर्मपरायण थे। वो यह बताते हैं कि वह वहां पर जो जिसको वो काला पत्थर समझकर के पूजा कर रहे हैं वो हमारे भगवान शिव मक्केश्वर है। वो ये क्लेम करते हैं। क्या करूंगा
00:28:18:00 मैं अभी क्या करूंगा शंकराचार्य जी का जो मैं आपको भेजा हूं ना मैं पर्टिकुलरली वो वीडियो उतनी पोर्शन काट के और जो किताब आप मेंशन करके आप व्याख्या किए हो उसको मेंशन करके आपको मैं भेजूंगा आप पर्टिकुलरली वही देख लीजिएगा वार्ड की वार्ड मिला दीजिएगा सुनिए मिला दीजिएगा आपको लगता है कि नहीं अलग है फिर हम चर्चा करेंगे ठीक ठीक है ठीक जय श्री राम जय श्री राम ठीक है। [संगीत]
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निगमानंद मठ का निग्रह कब करेगा भागवतानंद
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