1
00:00:02,960 --> 00:00:08,560
सभी को जय श्री राम। धर्म और अधर्म

2
00:00:08,560 --> 00:00:12,640
कभी-कभी इसमें बहुत बारीक सा अंतर होता है जिसको पकड़

3
00:00:12,640 --> 00:00:17,120
पाना बहुत कठिन हो जाता है। आज

4
00:00:17,120 --> 00:00:21,280
विशेष रूप से वीडियो कुछ इसी विषय पर

5
00:00:21,280 --> 00:00:25,280
चर्चा के लिए बना रहे हैं क्योंकि अभी हाल

6
00:00:25,280 --> 00:00:29,680
ही में हमने संदीप देव जी के चैनल पर कुछ ऐसी सामग्री देखी

7
00:00:29,680 --> 00:00:33,760
है जिसके कारण हमें विवश होकर के यह वीडियो बनाना

8
00:00:33,760 --> 00:00:37,760
पड़ रहा है। अच्छा इसमें एक बात और है कि लोग हमसे

9
00:00:37,760 --> 00:00:42,080
कई बार आकर के पूछ रहे हैं भागवतंदी जो हैं कुछ अंधे फॉलोअर्स उसके

10
00:00:42,080 --> 00:00:46,080
कि भाई तुम बोल क्यों नहीं रहे पी एन मिश्र जी बोल रहे हैं या संदीप देव जी

11
00:00:46,080 --> 00:00:50,160
ऐसा बोल रहे हैं वैसा बोल रहे हैं तुम आकर के उनका प्रतिकार क्यों नहीं कर रहे तुम्हारे

12
00:00:50,160 --> 00:00:54,160
गुरु के लिए बोला जा रहा है तुम्हारी परंपरा के लिए बोला जा रहा है उन

13
00:00:54,160 --> 00:00:58,960
बेवकूफों से कोई यह नहीं पूछता और ना ही वह बेवकूफ

14
00:00:58,960 --> 00:01:03,760
दर्पण पर जाकर के स्वयं से प्रश्न करते हैं कि

15
00:01:03,760 --> 00:01:06,640
आज तुम्हारा

16
00:01:06,640 --> 00:01:10,640
यह विषय सामने आया है कि भागवतानंद

17
00:01:10,640 --> 00:01:14,800
और संदीप देव जी आपस में एक दूसरे का प्रतिकार कर रहे

18
00:01:14,800 --> 00:01:18,160
हैं। आज से पहले

19
00:01:18,160 --> 00:01:22,400
संदीप देव जी के चैनल पर भागवतानंद जाता था। संदीप

20
00:01:22,400 --> 00:01:26,480
देव जी उसे मंच देते थे। भागवतानंद से हमारी प्रत्यक्ष रूप

21
00:01:26,480 --> 00:01:30,640
से जो एक आमने सामने की जो

22
00:01:30,640 --> 00:01:35,120
विरोध है आमने सामने का वो लगभग मार्च से चल रहा है

23
00:01:35,120 --> 00:01:39,280
और बहुत सारी काफी पराकाष्ठा तक

24
00:01:39,280 --> 00:01:43,600
बातें हुई है उसमें एक दूसरे का प्रतिकार करते समय परंतु

25
00:01:43,600 --> 00:01:47,840
उसके बाद भी संदीप देव जी उसे मंच दे रहे हैं। उसको समर्थन

26
00:01:47,840 --> 00:01:51,840
प्रकट कर रहे हैं। तो हमने तब संदीप देव जी का विरोध नहीं

27
00:01:51,840 --> 00:01:55,920
किया तो यह भागवतानंद के फॉलोवर्स क्यों नहीं आए थे कि संदीप

28
00:01:55,920 --> 00:02:00,160
देव जी का विरोध क्यों नहीं कर रहे हो भागवतानंद स्वयं

29
00:02:00,160 --> 00:02:04,240
मार्च 2025 से पहले से शंकराचार्यों का विरोध

30
00:02:04,240 --> 00:02:08,560
करता चला आ रहा था निग्रह करेगा भाई वो निग्रह कर दूंगा

31
00:02:08,560 --> 00:02:12,560
तीन घंटे का वीडियो बना करके हां वो यह सब करता

32
00:02:12,560 --> 00:02:16,800
चला आ रहा था तो हमने तब भागवतानंद का कभी विरोध नहीं किया था

33
00:02:16,800 --> 00:02:20,960
वीडियो बना करके या किसी भी अन्य माध्यम से उसका विरोध प्रकट

34
00:02:20,960 --> 00:02:25,360
नहीं किया था, प्रतिकार नहीं किया था। तब ये जो मूर्ख

35
00:02:25,360 --> 00:02:29,440
लोग हैं आकर के प्रश्न नहीं करते थे कि भाई तुम भागवत

36
00:02:29,440 --> 00:02:33,200
का विरोध क्यों नहीं कर रहे हो? वो तुम्हारे गुरुओं के बारे में ऐसा ऐसा बोल रहा है। है

37
00:02:33,200 --> 00:02:37,280
ना अंधभक्ति भागवत ने क्या नहीं किया था? करपात्री

38
00:02:37,280 --> 00:02:42,000
जी का खंडन करने का प्रयास

39
00:02:42,000 --> 00:02:46,240
गुरुदेव का उपसया उसने दिव्यानुभूति वाले ग्रंथों

40
00:02:46,240 --> 00:02:50,320
पर। जबकि सभी जो मान्य आचार्य गण है स्वयं भागवतानंद

41
00:02:50,320 --> 00:02:54,480
भी उसके जीवन से भी ऐसी अलौकिक घटनाएं जुड़ी हुई है जिनका बैठकर के आर्य

42
00:02:54,480 --> 00:02:59,840
समाजियों की भाषा में बहुत अच्छे से मजाक उड़ाया जा सकता है। पर उसने उड़ाया।

43
00:02:59,840 --> 00:03:04,080
उसने हमारे जो मान्य आचार्य गण आचार्य गण हैं विशेष

44
00:03:04,080 --> 00:03:08,560
रूप से करपात्र धाम वाले जो आचार्य हैं उनके लिए लतखोर

45
00:03:08,560 --> 00:03:12,560
शब्द का प्रयोग किया। और यह सब जानते

46
00:03:12,560 --> 00:03:17,920
हुए भी उसके बाद भी उसको प्रश्न

47
00:03:17,920 --> 00:03:22,080
पर हमने कभी संदीप देव जी का नाम लेकर के ऐसा कोई वीडियो

48
00:03:22,080 --> 00:03:26,320
नहीं बनाया कि हम उनका जो है विरोध कर रहे हैं। वह

49
00:03:26,320 --> 00:03:30,320
भागवतानंद को प्रशय दे रहे हैं या या संदीप देव जी की और भी बहुत सी

50
00:03:30,320 --> 00:03:34,480
पहले की बातें कि भाई उत्तरकांड प्रक्षिप्त है या

51
00:03:34,480 --> 00:03:39,520
मुझे कंफर्म नहीं हूं मगर

52
00:03:39,520 --> 00:03:43,600
ये कर्मणा वर्ण व्यवस्था पे भी समर्थन किया है क्या ऐसा कुछ मुझे

53
00:03:43,600 --> 00:03:47,600
नहीं पता तो तब ये लोग आकर के नहीं पूछते थे

54
00:03:47,600 --> 00:03:51,680
कि भाई तुम क्यों नहीं विरोध कर रहे हो क्यों नहीं विरोध कर रहे हो क्यों प्रतिकार नहीं कर रहे हो

55
00:03:51,680 --> 00:03:55,920
वो बात और है कि किसी का भी प्रतिकार करना है कि नहीं करना करना

56
00:03:55,920 --> 00:04:00,160
है। यह संदीप देव जी भी स्वयं समझते होंगे कि किन स्थितियों

57
00:04:00,160 --> 00:04:04,160
में किसी का प्रतिकार करना आवश्यक हो जाता है और करना ही पड़ता है क्योंकि वह धरातल पर

58
00:04:04,160 --> 00:04:08,240
कार्य करते हैं। यह भागवतानंद की तरह तो नहीं है वो कि केवल वो

59
00:04:08,240 --> 00:04:12,320
रूम में बैठकर के वीडियो बनाना जानते हो। धरातल पर उतरते हैं, जाते हैं, कार्य करते

60
00:04:12,320 --> 00:04:17,040
हैं। तो

61
00:04:17,040 --> 00:04:21,040
यह ध्यान देना पड़ता है कि भाई किसका विरोध कब किन स्थितियों में

62
00:04:21,040 --> 00:04:25,120
आवश्यक है तो करना ही है और कब किन बातों को सह लेना पड़ेगा। जैसे कि

63
00:04:25,120 --> 00:04:29,120
ज्योति पीठ वाले महाराज जी ने कहा कि विधर्मियों को

64
00:04:29,120 --> 00:04:33,200
मौका ना मिल जाए, अवसर ना मिल जाए इसलिए कभी-कभी सहना भी पड़ता है हम लोगों

65
00:04:33,200 --> 00:04:37,840
को। अब बहुत बातें बोली जा सकती है लेकिन क्या बोलना?

66
00:04:37,840 --> 00:04:42,480
बोलेंगे तो जो विधर्मी हैं

67
00:04:42,480 --> 00:04:46,560
उनको मसाला मिलेगा। तो इसलिए उनको मसाला ना देने की दृष्टि से

68
00:04:46,560 --> 00:04:51,520
हम लोगों को सब कुछ सह लेना पड़ता है।

69
00:04:51,520 --> 00:04:55,760
पर आज यह वीडियो बनाने

70
00:04:55,760 --> 00:04:59,840
के लिए हमें विवश किया है संदीप देव जी से और मेरा निवेदन

71
00:04:59,840 --> 00:05:03,920
है कि मैं ऐसी अपेक्षा करता हूं संदीप देव जी से कि मुझे

72
00:05:03,920 --> 00:05:07,920
आगे इस विषय में बोलने का बोलने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी ना

73
00:05:07,920 --> 00:05:12,080
ही वह मुझे अवसर देंगे। तो संदीप देव जी के चैनल पर मुझे

74
00:05:12,080 --> 00:05:18,080
सबसे पहले तो एक वीडियो प्राप्त हुआ जिस जो कि संदीप देव जी ने

75
00:05:18,720 --> 00:05:23,040
इस विषय में बनाया था कि कुछ मान्य आचार्य गण शाक्य

76
00:05:23,040 --> 00:05:27,440
द्वीपीय ब्राह्मणों को ब्राह्मण ही कह रहे हैं। तो

77
00:05:27,440 --> 00:05:31,520
उसका उन बातों का प्रतिकार करने के लिए संदीप देव जी ने एक

78
00:05:31,520 --> 00:05:36,000
वीडियो बनाया था जिसमें वो विद्या भास्कर जी महाराज का भी नाम ले रहे हैं।

79
00:05:36,000 --> 00:05:40,320
मतलब परंपरा प्राप्तिक आचार्यों का नाम लेकर के शास्त्रीय

80
00:05:40,320 --> 00:05:45,440
विषय में उनका खंडन करने का प्रयास कर रहे हैं।

81
00:05:45,440 --> 00:05:49,520
और फिर अभी मैंने यह वीडियो बनाने से पहले कुछ देर

82
00:05:49,520 --> 00:05:53,600
पहले कल शाम तक मैंने यह भी देख लिया था कि संदीप देव जी ने कोई एक व्यंग चित्र

83
00:05:53,600 --> 00:05:57,920
बनाया है जिसमें कि भागवतानंद तो है ही। साथ

84
00:05:57,920 --> 00:06:00,720
ही साथ

85
00:06:00,720 --> 00:06:05,040
उसमें ऐसा लग रहा है कि वहां पर

86
00:06:05,040 --> 00:06:10,400
वैष्णवाचार्य जो हैं हमारे पूज्य विद्या भास्कर जी महाराज वह भी वहां पर हैं।

87
00:06:10,400 --> 00:06:14,320
तो

88
00:06:14,320 --> 00:06:19,120
मैं कहूंगा संदीप देव जी कि आप भागवतानंद

89
00:06:19,120 --> 00:06:23,440
से लड़ते लड़ते कारण कोई भी हो विषय कोई भी हो

90
00:06:23,440 --> 00:06:27,520
पर भागवतानंद से लड़ते लड़ते अगर आप भी

91
00:06:27,520 --> 00:06:31,760
भागवतानंद ही बन जाएंगे तो हमें क्या आवश्यकता है भागवतानंद

92
00:06:31,760 --> 00:06:35,920
से लड़ने की भागवतानंद की

93
00:06:35,920 --> 00:06:40,080
जो मूल त्रुटि है उसमें जो

94
00:06:40,080 --> 00:06:44,160
गलती है उसकी वह क्या है? प्रामाणिक आचार्यों का खंडन करने

95
00:06:44,160 --> 00:06:48,320
का प्रयास करना। प्रामाणिक आचार्यों के प्रति अनास्थावान

96
00:06:48,320 --> 00:06:53,200
बनाना सामान्य जन को यही तो उसका मूल वो है स्वभाव।

97
00:06:53,200 --> 00:06:57,200
जिससे हमें आपत्ति है। प्रामाणिक आचार्यों पर जब

98
00:06:57,200 --> 00:07:01,520
उंगली उठ जाएगी उंगली उठती है और जब उस उसकी उसने सीमाएं

99
00:07:01,520 --> 00:07:05,520
पार कर दी तब हमने उस पर बोलना शुरू किया। वो गुरुदेव पर बोलता रहा।

100
00:07:05,520 --> 00:07:09,520
काफी समय से करपात्री जी पर बोलता रहा। अन्य जगहों पर प्रेमानंद जी

101
00:07:09,520 --> 00:07:13,600
पर भी आपत्तिजनक बोला। क्या कहते हैं ये

102
00:07:13,600 --> 00:07:17,600
अन्य जो वृंदावन के कुछ आचार्य गण हैं उन

103
00:07:17,600 --> 00:07:22,400
पर भी बोला। राजेंद्र दास जी पर बोला हम मौन रहे।

104
00:07:22,400 --> 00:07:26,000
मगर एक सीमा

105
00:07:26,000 --> 00:07:30,000
का उल्लंघन हो जाने पर हमें फिर बोलना पड़ा। तो यदि आप

106
00:07:30,000 --> 00:07:34,720
भागवतानंद जैसे तुच्छ व्यक्ति से लड़ते लड़ते दुष्ट व्यक्ति से लड़ते लड़ते

107
00:07:34,720 --> 00:07:38,800
उसका प्रतिकार करते करते यदि आप में भी वो वही सारी चीजें

108
00:07:38,800 --> 00:07:43,120
रिफ्लेक्ट होने लगेंगी दिखाई देने लगेंगी तो अंतर

109
00:07:43,120 --> 00:07:47,200
क्या हुआ यह तो वही वाली बात हो गई कि बाढ़ का पानी

110
00:07:47,200 --> 00:07:51,280
खतरे के निशान तक आ गया है नेताजी तो नेताजी बोल रहे हैं कि खतरे का निशान 2 इंच

111
00:07:51,280 --> 00:07:55,360
और बढ़ा दो हम लोग विधर्मियों से इसलिए लड़ रहे हैं कि हमारे

112
00:07:55,360 --> 00:07:59,440
यहां बहनों से विवाह नहीं किया जाता है तो विधर्मियों से लड़ने

113
00:07:59,440 --> 00:08:03,600
के लिए हम अपने धर्म में परिवर्तन कर देते हैं कि बहनों

114
00:08:03,600 --> 00:08:07,600
से विवाह हो जाएगा। नहीं कर सकते ना। क्योंकि

115
00:08:07,600 --> 00:08:11,760
यदि हमने परिवर्तन कर दिया तो हमारा धर्म नहीं होगा। वो विधर्म होगा।

116
00:08:11,760 --> 00:08:15,760
बस वहां सामने से उठकर के वो आज हमारे अंदर आ गया होगा।

117
00:08:15,760 --> 00:08:21,200
अभी सीमा के उस तरफ है। फिर सीमा के इस तरफ आ गया होगा।

118
00:08:21,200 --> 00:08:26,160
तो इस बात का आप ध्यान रखें कि

119
00:08:26,160 --> 00:08:30,320
जो धर्म रक्षक होता है वह स्वतंत्र

120
00:08:30,320 --> 00:08:34,640
नहीं होता है। उसके पास धर्म की सीमा होती है।

121
00:08:34,640 --> 00:08:38,800
उसके पास धर्म की लगाम होती है। धर्म की मर्यादा होती है। उसको उसके

122
00:08:38,800 --> 00:08:41,360
अंदर रहते हुए ही अधर्म

123
00:08:41,360 --> 00:08:45,440
का नाश करना होता है। और अधर्म का ये प्लस पॉइंट होता है कि

124
00:08:45,440 --> 00:08:49,520
वह स्वयंभू होता है। उसके ऊपर कोई नहीं होता है। वह स्वयं निर्णय

125
00:08:49,520 --> 00:08:53,680
लेने वाला होता है। वह कुछ भी कर सकता है। वही वाली बात कि

126
00:08:53,680 --> 00:08:57,680
पुलिस वाले को गिन करके गोलियां मिलती है। इतनी ही गोली चलाओगे

127
00:08:57,680 --> 00:09:02,080
और जो क्रिमिनल्स हैं उनके पास अनेक

128
00:09:02,080 --> 00:09:06,800
गोलियां हैं। तो

129
00:09:06,800 --> 00:09:11,360
लड़िए, गिरिए मगर उस झरने की तरह

130
00:09:11,360 --> 00:09:15,520
जो गिरकर भी अपनी सुंदरता नहीं खोने देता। धर्म रक्षा

131
00:09:15,520 --> 00:09:19,680
करिए मगर धर्म की सीमा में रहकर रक्षा की तब तो बात

132
00:09:19,680 --> 00:09:23,760
है। यदि खुद भी अधर्मी हो गए खुद भी वही करने लगे जो

133
00:09:23,760 --> 00:09:27,840
भागवतानंद कर रहा था। तो फिर फायदा क्या हुआ? एक

134
00:09:27,840 --> 00:09:32,720
भाव भागवतानंद को आपने नष्ट कर दिया उसके शरीर को। मगर उसकी जो विचार है

135
00:09:32,720 --> 00:09:36,720
वो तो आपके अंदर आ गए कि समय आने पर जो है प्रामाणिक आचार्यों

136
00:09:36,720 --> 00:09:41,040
का भी खंडन कर देंगे। तो ये उचित नहीं है। अब प्रामाणिक आचार्यों का खंडन

137
00:09:41,040 --> 00:09:45,840
किया क्यों नहीं जा सकता। मैं इस पर थोड़ी सी बातें कर लूं।

138
00:09:45,840 --> 00:09:49,840
यदि सभी प्रामाणिक आचार्य एक तरफ

139
00:09:49,840 --> 00:09:53,840
से शाक्य द्वीपीय ब्राह्मणों को ब्राह्मण कह रहे हैं। अब्राह्मण

140
00:09:53,840 --> 00:09:56,480
नहीं मान रहे हैं। वो बोल रहे हैं पुरजोर

141
00:09:56,480 --> 00:10:00,720
तरीके से। तो आपको क्या आवश्यकता है एक उसी

142
00:10:00,720 --> 00:10:04,720
बात को लेकर के भागवतानंद के पीछे पड़ने की? क्या भागवतानंद के

143
00:10:04,720 --> 00:10:08,720
अंदर और बहुत सी शास्त्रोक्त दृष्टि से कमियां नहीं

144
00:10:08,720 --> 00:10:13,120
है। उसकी परंपरा क्या है? उसने कितने सारे अब तक झूठ परोसे

145
00:10:13,120 --> 00:10:17,200
हैं। गाली देने वाला व्यक्ति आचार्य कैसे हो सकता है?

146
00:10:17,200 --> 00:10:21,440
शास्त्रीय खंडन है। हमने निग्रह निकासिका बनाई है। उसमें सारे सवाल उठाए

147
00:10:21,440 --> 00:10:25,680
हैं तर्क और प्रमाण के साथ कि वो आचार्य है ही नहीं। निग्राचार्य

148
00:10:25,680 --> 00:10:29,840
है ही नहीं। भगवती ने दीक्षा दी। जब वो कुरान के मंत्र बांट

149
00:10:29,840 --> 00:10:33,920
रहा है लोगों को। खुदा के मंत्र बांट रहा है लोगों को तो वैदिक आचार्य

150
00:10:33,920 --> 00:10:38,000
कैसे हुआ? कौन सी परंपरा से उसको प्राप्त हुआ है? ये सारे सवाल हमने उठाए।

151
00:10:38,000 --> 00:10:42,160
क्या सन्मार्ग वाले जो आचार्य हैं, वह उसका खंडन नहीं कर रहे हैं शास्त्री

152
00:10:42,160 --> 00:10:46,320
सीमा में। वह तो इस बात का सहारा नहीं ले रहे हैं। वह शाकपी ब्राह्मण

153
00:10:46,320 --> 00:10:50,400
नहीं है। यानी कि क्या यह माना जाए कि आप

154
00:10:50,400 --> 00:10:54,560
भागवतानंद का विरोध तभी कर सकते हैं जब वो शाक द्वीपीय ब्राह्मण ब्राह्मण

155
00:10:54,560 --> 00:10:58,880
ना कहे जाए। यानी वह जब ब्राह्मण सिद्ध हो जाएगा तभी हम उससे

156
00:10:58,880 --> 00:11:03,360
उसको पराजित कर सकते हैं। यही संदेश प्राप्त हो रहा है।

157
00:11:03,360 --> 00:11:07,440
इस लड़ाई से तो मतलब सामने वाला

158
00:11:07,440 --> 00:11:11,440
सामने वाला जब निहत्ता होगा आप तभी उससे लड़ने जा सकते हो। यदि वो

159
00:11:11,440 --> 00:11:12,160
सशस्त्र

160
00:11:12,160 --> 00:11:16,160
है और उसके पास अपना दल बल है, सब कुछ है तो उस स्थिति में हम उससे

161
00:11:16,160 --> 00:11:20,640
नहीं लड़ेंगे। ये तो कायरता हो जाएगी।

162
00:11:20,640 --> 00:11:23,680
क्या नहीं होगी?

163
00:11:23,680 --> 00:11:27,680
तो क्या आवश्यकता है इस आधार पर लड़ाई लड़ने की जिस

164
00:11:27,680 --> 00:11:31,760
आधार में सभी प्रामाणिक आचार्य एक तरफ से हमारे पक्ष में नहीं

165
00:11:31,760 --> 00:11:35,840
है। कर्मणा वर्ण व्यवस्था के आप समर्थक है

166
00:11:35,840 --> 00:11:39,840
कि नहीं कि मुझे अभी क्लियर नहीं मालूम है। यदि है तो भाई एक तरफ

167
00:11:39,840 --> 00:11:43,840
से सारे आचार्य वर्ण व्यवस्था को जन्म से मानते हैं। और यदि आप

168
00:11:43,840 --> 00:11:48,080
कर्मणा वर्ण व्यवस्था के पक्ष में नहीं है इस वाली बात को मानते हैं कि जन्म होता

169
00:11:48,080 --> 00:11:52,080
है परंतु कर्म के आधार पर बदल जाता है तो उसमें भी बहुत सारे

170
00:11:52,080 --> 00:11:56,080
कंट्राडिक्शन आ जाएंगे। बात जमेगी नहीं। यही बातें तो आर्य समाज

171
00:11:56,080 --> 00:12:00,240
ही करते हैं। आचार्यों का खंडन ना किया होता

172
00:12:00,240 --> 00:12:04,640
अगर परंपरा प्राप्त आचार्यों का खंडन आर्य समाजियों ने तो आज ये रामपाल

173
00:12:04,640 --> 00:12:09,040
स्कॉन ब्रह्मा कुमारी जैसे कल्ट खड़े होकर के धर्मासी

174
00:12:09,040 --> 00:12:13,120
सनातना बनकर के हमारे सनातन को दीमक की तरह खा ना रहे

175
00:12:13,120 --> 00:12:16,240
होते।

176
00:12:16,240 --> 00:12:20,240
आज हम क्या कर रहे हैं? यदि हम परंपरा प्राप्त प्रामाणिक आचार्यों

177
00:12:20,240 --> 00:12:24,640
का खंडन कर रहे हैं। और आवश्यकता क्या है?

178
00:12:24,640 --> 00:12:28,800
क्या भागवतानंद से हम तभी जीत सकते हैं? आप जैसा योद्धा तभी जीत

179
00:12:28,800 --> 00:12:32,880
सकता है भागवतानंद से जब ये शाक्य रूपीय

180
00:12:32,880 --> 00:12:36,960
ब्राह्मण के रूप में वो अब्राह्मण से सिद्ध हो जाए। भले

181
00:12:36,960 --> 00:12:42,960
ही उसके लिए हमें परंपरा प्राप्त प्रमाणिक आचार्यों का विरोध करना पड़ जाए।

182
00:12:43,200 --> 00:12:47,520
तो आपके पास बहुत सारी एबिलिटीज हैं अन्य। आप उनका उपयोग

183
00:12:47,520 --> 00:12:52,320
करें। परंतु यह रास्ता नापना है कि जिसमें कि

184
00:12:52,320 --> 00:12:58,000
प्रामाणिक और मान्य आचार्यों का आपको विरोध करना पड़े। वह भी शास्त्रीय

185
00:12:58,000 --> 00:13:02,080
विषयों में और यहां तक कि यदि मुझे

186
00:13:02,080 --> 00:13:06,080
नहीं पता है कि आपने उन्हीं को आधार बनाया है। पूज्य विद्या भास्कर जी

187
00:13:06,080 --> 00:13:10,320
महाराज को पर जो फोटो मुझे दिखाई है, दिखाई गई है भागवतानंद

188
00:13:10,320 --> 00:13:14,880
के पेज पर उसमें साफ लग रहा है कि वह विद्या भास्कर जी महाराज का ही व्यंग बना है।

189
00:13:14,880 --> 00:13:19,040
यदि ऐसा है तो यह तो बिल्कुल अनुचित है। आप किस अधिकार

190
00:13:19,040 --> 00:13:23,440
से एक प्रामाणिक परंपरा प्राप्त वैष्णवाचार्य

191
00:13:23,440 --> 00:13:27,520
पर शास्त्रीय विषय में उंगली नहीं उठा सकते। इस तरह से व्यंग बनाना तो बहुत

192
00:13:27,520 --> 00:13:31,440
दूर की बात है। शास्त्रीय विषय में नहीं उंगली उठा

193
00:13:31,440 --> 00:13:35,600
सकते। मैं आगे विवेचना कर रहा हूं इस बात की। क्यों नहीं उठा सकते? कम से कम भागवतानंद

194
00:13:35,600 --> 00:13:39,600
ने इस बारे में नहीं सोचा होगा तो कम से कम आप सोचें। क्योंकि मुझे

195
00:13:39,600 --> 00:13:43,920
लगता है कि भागवतानंद को इस बात से कोई सरोकार नहीं है कि धर्म स्थापना

196
00:13:43,920 --> 00:13:48,080
होनी है कि नहीं होनी है। धर्म रक्षा होनी है कि नहीं होनी है। पर मुझे आपको देख

197
00:13:48,080 --> 00:13:52,240
के अवश्य लगता है कि भले ही कुछ अंशों में आपको उस उन

198
00:13:52,240 --> 00:13:56,320
कुछ विषयों में दिशा ना प्राप्त हो परंतु जितने में प्राप्त है उतने

199
00:13:56,320 --> 00:14:00,320
में आप कर्मठ होकर के अपना कार्य करते हैं।

200
00:14:00,320 --> 00:14:04,720
आपने सोचा है कभी कैसा सन्यासी का जीवन है? कैसे वह वहां पर

201
00:14:04,720 --> 00:14:09,840
बटों को पढ़ा रहे हैं। कैसे उनके भोजन की व्यवस्था कर रहे हैं। मैं खुद गया था अभी अयोध्या

202
00:14:09,840 --> 00:14:13,840
पूज्य विद्या भास्कर जी महाराज के पास। आप देखिए उनकी

203
00:14:13,840 --> 00:14:17,920
जीवन शैली कितनी कठिन होती है। और ऐसे में ऐसे सन्यासी

204
00:14:17,920 --> 00:14:23,920
का

205
00:14:26,290 --> 00:14:32,290
[संगीत]

206
00:14:38,490 --> 00:14:40,600
[प्रशंसा]

207
00:14:40,600 --> 00:14:46,600
[संगीत]

208
00:14:52,880 --> 00:14:57,200
इन लोगों ने हमारे धर्म को अपने रक्त से सीचा है।

209
00:14:57,200 --> 00:15:01,520
करपात्री जी महाराज,

210
00:15:01,520 --> 00:15:05,600
वैष्णवाचार्य, शंकराचार्य ये लोग हमारे धर्म की रीड की

211
00:15:05,600 --> 00:15:09,680
हड्डी है। इसको अगर हम लोग चोट पहुंचाएंगे तो हमारा धर्म

212
00:15:09,680 --> 00:15:13,840
नष्ट हो जाएगा। सनातन बिना परंपरा के सनातन का अस्तित्व नहीं

213
00:15:13,840 --> 00:15:18,800
है। परंपरा पे आप उंगली उठाएंगे खत्म हो जाएगा। सनातन।

214
00:15:18,800 --> 00:15:23,040
आर्य समाजी जब मुझसे बात करने आते हैं कि भाई वेद में यह लिखा है वह लिखा

215
00:15:23,040 --> 00:15:27,200
है। एक ही बात के चार मतलब निकाले जा रहे हैं। मेरा मतलब क्यों ना माना जाए? उनका

216
00:15:27,200 --> 00:15:31,360
मतलब क्यों माना जाए? उनका मतलब क्यों ना माना जाए? मेरा मतलब क्यों माना जाए? क्योंकि मैं जो

217
00:15:31,360 --> 00:15:35,360
बोल रहा हूं वो परंपरा से मिला है मुझे। अब परंपरा क्या है? वेद कहां

218
00:15:35,360 --> 00:15:39,840
से प्राप्त हुए आपको? आप आचार्यों का खंडन करेंगे।

219
00:15:39,840 --> 00:15:43,840
तो मैं पूछता हूं। यह वेद जिसके आधार पर तुम बता रहे हो।

220
00:15:43,840 --> 00:15:47,840
गो बैक टू द वेदास। यह वेद आए कहां से तुम्हारे हाथ में

221
00:15:47,840 --> 00:15:52,000
चुप हो जाते टू स्टॉप द ट्रेन पुल द च अभी

222
00:15:52,000 --> 00:15:56,160
जब राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा वाला जो मामला हुआ था उसमें मैंने चिल्ला चिल्ला कर

223
00:15:56,160 --> 00:16:00,560
लोगों को पूछा था तुम अपने शंकराचार्यों पर उंगली उठा रहे हो कल को जब जाकिर

224
00:16:00,560 --> 00:16:04,560
नायक आकर के पूछेगा कि

225
00:16:04,560 --> 00:16:09,280
ये वेद तुम्हें कहां से मिले क्या बोलोगे गीता प्रस से चौखंबा से

226
00:16:09,280 --> 00:16:13,760
क्या बोलोगे पुराण कहां से मिले बोलना पड़ेगा ना परंपरा प्राप्त आचार्यों

227
00:16:13,760 --> 00:16:16,880
से तो जिन परंपरा प्राप्त आचार्यों से आपको ग्रंथ

228
00:16:16,880 --> 00:16:21,280
मिल रहे हैं। यदि उनकी व्याख्या पर आपको विश्वास नहीं है,

229
00:16:21,280 --> 00:16:25,280
आपको लग रहा है कि अज्ञानता हो सकती है या वो आपको झूठ

230
00:16:25,280 --> 00:16:29,600
बोल सकते हैं, पक्षपाती हो सकते हैं। हां तो फिर आपको उनसे

231
00:16:29,600 --> 00:16:34,240
प्राप्त होने वाले ग्रंथों पर विश्वास कैसे है? कम से कम

232
00:16:34,240 --> 00:16:38,720
किसी एक वैष्णवाचार्य पर आपको विश्वास नहीं है तो किसी दूसरे परंपरा

233
00:16:38,720 --> 00:16:42,880
प्राप्त प्रमाणिक आचार्य का सानिध्य आपके पास होना चाहिए। कम से कम यदि

234
00:16:42,880 --> 00:16:46,880
किसी एक का आप खंडन करने जा रहे हैं। है आपके पास

235
00:16:46,880 --> 00:16:51,360
शंकराचार्य वैष्णवाचार्य विद्या भास्कर जी महाराज

236
00:16:51,360 --> 00:16:55,760
सन्यासी हैं। कौन होता है सन्यासी? जिनका

237
00:16:55,760 --> 00:16:59,920
मान मोह नष्ट हो चुका हो। जिन्होंने अपनी

238
00:16:59,920 --> 00:17:04,000
इंद्रियों पर विजय प्राप्त कर ली हो। वो है सन्यासी।

239
00:17:04,000 --> 00:17:08,000
वही तत्वदर्शी हो सकते हैं। वही धर्म का सही स्वरूप आपको

240
00:17:08,000 --> 00:17:12,240
बता सकते हैं। तो जब तक आपके पास किसी सन्यासी का आधार

241
00:17:12,240 --> 00:17:18,240
नहीं है पीछे तो आप किस आधार पर सन्यासी का खंडन करेंगे?

242
00:17:18,320 --> 00:17:22,400
सन्यासी मनुस्मृति में क्या कहा गया है? धर्म में संशय

243
00:17:22,400 --> 00:17:26,880
होने पर अधिष्ठाता ब्रह्मचारी को बना है। सन्यासी का ब्रह्मचर्य

244
00:17:26,880 --> 00:17:31,280
सिद्ध है कि नहीं? भरभर के भगवत गीता में जगह-जगह

245
00:17:31,280 --> 00:17:35,680
यही बोला गया। वैराग्य वैराग्य वैराग्य

246
00:17:35,680 --> 00:17:39,680
और वह अपनी पराकाष्ठा पर खड़े हुए हैं सन्यासी होते हुए और

247
00:17:39,680 --> 00:17:43,680
यदि आप यह कह रहे हैं ये भागवतानंद तो इन सब चीजों

248
00:17:43,680 --> 00:17:47,760
को सोचता नहीं क्योंकि उसको अपने घर से बाहर कभी नहीं निकलना है। उसको अपने

249
00:17:47,760 --> 00:17:51,760
घर के ही लोगों को सुनाना है सुनना है। हमें तो

250
00:17:51,760 --> 00:17:56,960
हमें आपको तो बाहर निकल कर के औरों से विधर्मियों से लोहा लेना है ना।

251
00:17:56,960 --> 00:18:02,160
यह सब बातें सोचनी पड़ेगी ना। सन्यासी कौन है?

252
00:18:02,160 --> 00:18:06,240
जिसके मन में राग द्वेष इत्यादि सब समाप्त हो चुके हो। अब आप अगर

253
00:18:06,240 --> 00:18:10,240
किसी का इस तरीके से शंकराचार्यों की आपने भी समीक्षा की पूरी

254
00:18:10,240 --> 00:18:14,240
के शंकराचार्य जी की भी की और आज विद्या भास्कर जी

255
00:18:14,240 --> 00:18:18,400
की समीक्षा कर रहे हैं तो आप जो एक गस्थ होते हुए जब समीक्षा कर रहे हैं तो आप सीधे

256
00:18:18,400 --> 00:18:22,480
कह रहे हैं कि उनके अंदर मान मोह है, राग द्वेष है,

257
00:18:22,480 --> 00:18:26,560
जितेंद्रिय नहीं है वो। क्या अर्थ है इसका? क्या आप

258
00:18:26,560 --> 00:18:30,880
उनका सन्यासत्व का ही खंडन कर रहे हैं? फिर इसके बाद भागवत

259
00:18:30,880 --> 00:18:33,360
जैसा व्यक्ति बोलता है मैंने तो यह कहा है मैंने तो

260
00:18:33,360 --> 00:18:37,440
उनके गलत कृत का खंडन करने की बात कही है। अरे भैया जिसके

261
00:18:37,440 --> 00:18:41,600
ऊपर तुमने राग द्वेष या लालच मान, मोह इत्यादि के

262
00:18:41,600 --> 00:18:46,320
आक्षेप लगा दिए तो उसका सन्यासी होने पर ही आपने प्रश्न खड़ा कर दिया ना।

263
00:18:46,320 --> 00:18:50,480
उसके तत्वदर्शी होने पर ही आपने प्रश्न खड़ा कर दिया ना। उसकी सन्यास

264
00:18:50,480 --> 00:18:54,960
की प्रमाणिकता पर ही आपने प्रश्न खड़ा कर दिया ना। तो

265
00:18:54,960 --> 00:18:58,960
इसका अर्थ है कि आपने बिना कहे ही उसके ऊपर पूर्ण रूप से

266
00:18:58,960 --> 00:19:03,520
अनास्था उत्पन्न कर दी। जो सन्यासी नहीं है वह सन्यासी बन के घूम रहा है।

267
00:19:03,520 --> 00:19:07,600
ऐसे नहीं होता है। और यह बात तो आपने भी अपने वीडियो में ली थी

268
00:19:07,600 --> 00:19:11,680
मुझे जहां तक याद है कि भाई हम व्यक्ति का खंडन नहीं। इसने जब ये बातें बोली

269
00:19:11,680 --> 00:19:15,680
थी कि हम व्यक्ति का खंडन नहीं कर रहे। हम तो उसके द्वारा किए जाने वाले गलत गलत कृत

270
00:19:15,680 --> 00:19:19,680
का खंडन कर रहे हैं। और जबकि यही व्यक्ति जब बागेश्वर वाले

271
00:19:19,680 --> 00:19:23,680
जाकर के मिलते हैं किसी ऐसे व्यक्ति से जो आपत्तिजनक है तो

272
00:19:23,680 --> 00:19:27,840
यह क्या कहता है देखो देखो बागेश्वर वालों से मिल रहे हैं पूरी के शंकराचार्य क्यों भाई

273
00:19:27,840 --> 00:19:32,080
तब यह नहीं सोच सकते हो कि तुमने बागेश्वर वालों का खंडन नहीं किया था बल्कि

274
00:19:32,080 --> 00:19:36,080
बागेश्वर वाले बागेश्वर वालों के उस गलत कृत

275
00:19:36,080 --> 00:19:40,160
का खंडन किया था बागेश्वर वालों का खंडन नहीं कर दिया इसलिए पूरी के शंकराचार्य जी अगर

276
00:19:40,160 --> 00:19:45,040
बागेश्वर वालों से उनके अच्छे कार्यों के लिए मिले तो वो गलत नहीं है।

277
00:19:45,040 --> 00:19:48,560
यह सब तर्क बुद्धि तो अपनी बेच खाया है। बेच खाया

278
00:19:48,560 --> 00:19:53,040
है यह व्यक्ति। मगर आप में तो है। आप उसका सदुपयोग

279
00:19:53,040 --> 00:19:57,280
करें। आपके पास यदि आप परंपरा प्राप्त आचार्यों का खंडन

280
00:19:57,280 --> 00:20:01,920
करने उतर आएंगे संदीप जी तो आपके पास उन ग्रंथों की प्रामाणिकता

281
00:20:01,920 --> 00:20:05,920
का ही आपके पास ये ग्रंथ प्रामाणिक होना ही

282
00:20:05,920 --> 00:20:10,480
सिद्ध नहीं होगा। खत्म हो जाएगी सारी कहानी। सनातन

283
00:20:10,480 --> 00:20:14,720
को समझिए। गुरु गोविंद और ग्रंथ केवल गुरु नहीं

284
00:20:14,720 --> 00:20:18,720
केवल ग्रंथ नहीं केवल गोविंद नहीं

285
00:20:18,720 --> 00:20:22,960
तीनों के मिश्रण से सनातन धर्म पनपता है। अगर आप गुरु का खंभा

286
00:20:22,960 --> 00:20:27,920
हटा देंगे कि हमारे पास ग्रंथ है पूछा जाएगा ना ग्रंथ कहां से आया? श्रुति

287
00:20:27,920 --> 00:20:32,080
श्रुति परंपरा मुंडकोपनिषद एक से चार तक ऋषियों की परंपरा

288
00:20:32,080 --> 00:20:36,240
बताई जा रही है कि विद्या कैसे आई? किस ऋषि से किस ऋषि तक आई? भगवत

289
00:20:36,240 --> 00:20:40,640
गीता में भगवान कह रहे हैं परंपरा से आ रहा है ज्ञान। भगवत गीता में कहा जा रहा है

290
00:20:40,640 --> 00:20:44,800
कि जो लोग परंपरा से प्राप्त होने वाले सिद्धांतों को नहीं का निर्वाह नहीं करते

291
00:20:44,800 --> 00:20:48,960
उन पर नहीं चलते वह फंसे रह जाते हैं। कहां कहां

292
00:20:48,960 --> 00:20:53,200
परंपरा की बात नहीं हो रही है? क्यों हो रही है परंपरा की बात? अगर हम परंपरा

293
00:20:53,200 --> 00:20:57,200
प्राप्त आचार्यों का खंडन करने लगेंगे तो हम अपने हाथों से अपने

294
00:20:57,200 --> 00:21:01,360
सनातन धर्म को नष्ट करेंगे। हमको अपने शब्द प्रमाण को बचा के रखना

295
00:21:01,360 --> 00:21:03,680
होगा। संदीप जी आप

296
00:21:03,680 --> 00:21:07,680
जैसे योद्धाओं की आवश्यकता है। और ये ये

297
00:21:07,680 --> 00:21:11,760
मच्छर जैसा यह भी अच्छा था। अगर यह अपना कैरी मिनाटी बनने

298
00:21:11,760 --> 00:21:15,760
का प्रयास ना करता तो काम आता धर्म के इसका अगर

299
00:21:15,760 --> 00:21:19,840
सिंगल पॉइंट एजेंडा अपने YouTube चैनल को बढ़ाना ना होता एक लड़की

300
00:21:19,840 --> 00:21:23,920
ने इसको रात में फोन किया उसके ऊपर किसी ने तंत्र

301
00:21:23,920 --> 00:21:28,000
बाधा की थी ऐसा उसका कहना था और किसी इसके फॉलोअर ने जो

302
00:21:28,000 --> 00:21:32,160
मेरी जानकारी में है इसके फॉलोअर ने जो इसका प्रशंसक

303
00:21:32,160 --> 00:21:36,240
था उस समय पहले की बात है उसके

304
00:21:36,240 --> 00:21:40,400
पास वो लड़की उसके पास उस मातृशक्ति का फोन फोन आया था कि

305
00:21:40,400 --> 00:21:44,400
मेरे को ऐसेसे कोई तंत्र बाधा इत्यादि है। मुझे आप मदद बताइए। और इसको

306
00:21:44,400 --> 00:21:48,400
इस पर इतना भरोसा था इस भागवतानंद पर इस फॉलोअर

307
00:21:48,400 --> 00:21:52,400
पर फॉलोअर को प्रशंसक को इतना भरोसा था कि उसने कहा कि

308
00:21:52,400 --> 00:21:56,720
आप इनसे बात कर लीजिए। बहुत पहुंचे हुए जो है कॉलम कॉल मार के आचार्य हैं।

309
00:21:56,720 --> 00:22:01,120
यह आपकी जो है सहायता करेंगे। और उस मातृशक्ति ने

310
00:22:01,120 --> 00:22:05,440
आव ना देखा था उसको क्योंकि उसकी ऐसी गंभीर स्थिति थी।

311
00:22:05,440 --> 00:22:09,520
उसने आधी रात में लगभग आधी रात में नहीं लगभग 11 12 बजे के

312
00:22:09,520 --> 00:22:13,680
आसपास उसको भागवतानंद को फोन कर दिया कि मैं ऐसी ऐसी समस्या में हूं

313
00:22:13,680 --> 00:22:17,840
तंत्र बाधा में हूं आप मेरी मदद कर दीजिए इस व्यक्ति ने सुबह

314
00:22:17,840 --> 00:22:18,720
उठते ही पता है क्या

315
00:22:18,720 --> 00:22:22,800
किया उसकी मदद इत्यादि कुछ नहीं की उसकी रिकॉर्डिंग लेकर के

316
00:22:22,800 --> 00:22:27,840
डाल दी ये देखो हमें फंसाने के लिए षड्यंत्र किया जा रहा है

317
00:22:27,840 --> 00:22:32,400
वो लड़की परेशान हो गई ये क्या हो गया

318
00:22:32,400 --> 00:22:36,720
उसने दोबारा फोन किया कि आप वो हटा दीजिए आप मेरी की मदद नहीं करना चाहते मत करिए

319
00:22:36,720 --> 00:22:40,800
प्लीज वो रिकॉर्डिंग हटा दीजिए मेरी बदनामी हो रही है मेरी मेरा विवाह

320
00:22:40,800 --> 00:22:46,800
नहीं होगा इसने वो रिकॉर्डिंग भी डाल दी निर्दय ने सोचिए

321
00:22:46,960 --> 00:22:51,040
और फिर जिस प्रशंसक को इन पर भरोसा था उस

322
00:22:51,040 --> 00:22:55,040
प्रशंसक ने इनको फोन किया कि भाई

323
00:22:55,040 --> 00:22:59,120
उसकी वो हटा दो ये कर दो वो कर दो मेरे संज्ञान में नहीं उसकी

324
00:22:59,120 --> 00:23:03,120
भी रिकॉर्डिंग डाली है कि नहीं डाली है प्रशंसक ने फोन किया कि मैं तुम्हें बहुत

325
00:23:03,120 --> 00:23:07,120
मानता हूं और तुम पर मुझे मुझे विश्वास था इसलिए इस मातृशक्ति को मैंने आपका नंबर

326
00:23:07,120 --> 00:23:11,600
दे दिया था। आप उसकी रिकॉर्डिंग हटवा दो

327
00:23:11,600 --> 00:23:15,680
और वह इतनी परेशान हो गई रिकॉर्डिंग डल जाने के

328
00:23:15,680 --> 00:23:19,680
कारण हॉस्पिटल में भी एडमिट हो गई वो लड़की तो इससे इसका

329
00:23:19,680 --> 00:23:24,080
उद्देश्य पता चलता है ना भाई मेरे जैसे किसी विरोधी का फोन जाए

330
00:23:24,080 --> 00:23:28,160
किसी और अन्य विरोधी का फोन जाए और ये रिकॉर्डिंग कर ले उसको अगले दिन डाल दे तो

331
00:23:28,160 --> 00:23:32,240
समझ में आता है। कोई मदद मांगने आ रहा है व्यक्ति, उसकी

332
00:23:32,240 --> 00:23:34,080
जो स्थिति है, उसको

333
00:23:34,080 --> 00:23:38,240
भी अपने व्यूज बढ़ाने और अपने फॉलोवर्स बढ़ाने में कैसे यूज़ करना

334
00:23:38,240 --> 00:23:42,400
है, इसका ये सिंगल पॉइंट एजेंडा रहता है। जब हमसे

335
00:23:42,400 --> 00:23:47,200
इसका विवाद शुरू हुआ था, तो मैंने इससे कहा था कि कुछ ऐसे किसी के व्यक्तिगत

336
00:23:47,200 --> 00:23:51,440
विषयों पर आप सार्वजनिक चर्चा ना करें। हां, व्यक्तिगत रूप से चर्चा अपेक्षित है।

337
00:23:51,440 --> 00:23:55,600
की जा सकती है। तो ये व्यक्ति को नहीं मुझे तो यही चर्चा करनी है।

338
00:23:55,600 --> 00:24:01,440
यानी कि इसको मसाले से मतलब था। मसाला सनसनीखेत मसाला

339
00:24:01,440 --> 00:24:05,600
तो हम और आप तो ऐसे नहीं है। हमें तो इस बात का ध्यान रखना

340
00:24:05,600 --> 00:24:09,920
है ना कि धर्म की स्थापना कैसे होगी।

341
00:24:09,920 --> 00:24:14,240
तो परंपरा प्राप्त आचार्यों पर यदि हम अनास्था

342
00:24:14,240 --> 00:24:16,400
दिखाएंगे

343
00:24:16,400 --> 00:24:20,400
अविश्वास दिखाएंगे तो हर दूसरा आर्य समाज हर दूसरा

344
00:24:20,400 --> 00:24:24,400
रामपाली खड़ा हो जाएगा कि नहीं ना तस प्रतिमा अस्ति का अर्थ है कि

345
00:24:24,400 --> 00:24:28,400
मूर्ति पूजा निषेध है। समझ रहे हैं आप मेरी बात? यदि

346
00:24:28,400 --> 00:24:32,640
हम परंपरा प्राप्तिक आचार्यों के भाष्य

347
00:24:32,640 --> 00:24:37,040
धर्म अधर्म की व्याख्या शास्त्रों के व्याख्यान पर ही उंगली उठाने लगेंगे।

348
00:24:37,040 --> 00:24:41,200
कि यहां पर परंपरा प्राप्त आचार्य जो है इस बात का गलत अर्थ बता रहे हैं। सही अर्थ यह

349
00:24:41,200 --> 00:24:46,240
है तो फिर हमें हमारे पास उनसे प्राप्त होने वाले

350
00:24:46,240 --> 00:24:50,560
जो ग्रंथ हैं उन पर हमारा विश्वास होना सिद्ध

351
00:24:50,560 --> 00:24:54,640
नहीं होगा और फिर हम आर्य समाजियों से नहीं पूछ पाएंगे कि

352
00:24:54,640 --> 00:24:58,800
तुम किस अधिकार से इसका वेद वेद का भाष्य कर रहे हो? किस परंपरा

353
00:24:58,800 --> 00:25:02,880
से तुमको वेद मिले हैं। कैसे पता कि यह वेद जो है ईश्वर से आने वाले ही

354
00:25:02,880 --> 00:25:07,120
शास्त्र हैं। कैसे पता? तुमको कहीं ना कहीं मानना पड़ेगा किसी परंपरा

355
00:25:07,120 --> 00:25:11,760
प्राप्त आचार्य से तुमको वेद मिले। उसने बताया ईश्वर की वाणी है। अपष

356
00:25:11,760 --> 00:25:15,920
ग्रंथ है। उसने बताया। यानी कि

357
00:25:15,920 --> 00:25:19,920
किसी एक अंश में तुमको परंपरा पर निर्भर होना पड़ेगा। और

358
00:25:19,920 --> 00:25:23,920
अगर तुम परंपरा पर निर्भर हो गए। तुमने उन किसी के शब्द प्रमाण

359
00:25:23,920 --> 00:25:25,200
से मान लिया कि वेद

360
00:25:25,200 --> 00:25:29,200
वेद में जो लिखा हुआ है ये जो ईश्वर प्रदत्त है तो फिर तुम

361
00:25:29,200 --> 00:25:33,360
उनके दिए हुए भाष्य का खंडन नहीं कर सकते। यह फंस जाते हैं। दुनिया

362
00:25:33,360 --> 00:25:37,520
का कोई व्यक्ति सनातन की जो परंपरा प्रणाली है इससे लड़ नहीं सकता

363
00:25:37,520 --> 00:25:41,760
है। जीत नहीं सकता है। भले ही वो मुसलमान हो, भले ही वो क्रिश्चियन

364
00:25:41,760 --> 00:25:46,800
हो, जाकिर नायक के रूप में आए, किसी भी रूप में आए।

365
00:25:46,800 --> 00:25:51,040
तो इसलिए परंपरा प्राप्त आचार्यों का शास्त्रीय विषय

366
00:25:51,040 --> 00:25:55,600
में खंडन करने का प्रयास ना करें। हां

367
00:25:55,600 --> 00:25:59,680
स्वयं प्रामाणिक आचार्य ही किसी तात्विक विषय में एक दूसरे से बात

368
00:25:59,680 --> 00:26:03,840
करें तो बात समझ में आती क्योंकि परंपरा प्राप्त है। प्रामाणिक

369
00:26:03,840 --> 00:26:06,960
आचार्य कर रहे हैं।

370
00:26:06,960 --> 00:26:11,200
और एक इसमें एक बात और आती है कि यदि गुरु भी ऐसा वही वाली बात

371
00:26:11,200 --> 00:26:15,200
उसने अपने पक्ष में भी वही वाली बात घुमाई है और फिर आप लोग भी वही बात

372
00:26:15,200 --> 00:26:21,200
कर रहे हो कि नहीं आवश्यकता पड़ जाए तो गुरु का भी वो किया जाता है। गुरु का

373
00:26:21,200 --> 00:26:25,760
प्रतिकार हम कर सकते हैं। जब गुरुदेव का आचरण

374
00:26:25,760 --> 00:26:30,080
जब गुरु का आचरण उनके द्वारा दी गई व्याख्या जो है धर्म और

375
00:26:30,080 --> 00:26:34,320
अधर्म की उसके विपरीत हो यदि उन्होंने बताया है कि यह मर्यादा

376
00:26:34,320 --> 00:26:38,560
है और स्वयं उनका आचरण विपरीत है तो उतने अंश में उन्हें उनका आचरण

377
00:26:38,560 --> 00:26:40,240
हमें ग्रहण नहीं करना है ये

378
00:26:40,240 --> 00:26:44,240
है उन बातों का मतलब मगर हम उनकी व्याख्या पर ही उंगली

379
00:26:44,240 --> 00:26:48,400
उठा देंगे तो हम किस आधार पर उनकी व्याख्या पर उंगली उठा

380
00:26:48,400 --> 00:26:52,880
रहे हैं वो हमारी परंपरा क्या है वो ज्ञान हमारे पास किस कहां से आ रहा है

381
00:26:52,880 --> 00:26:57,120
तो वो हमें परंपरा बतानी होगी ना कहां से आया भाई

382
00:26:57,120 --> 00:27:01,120
गीता प्रेस और चौखंबा पे आधारित है क्या हम लोग अपने धर्म और अधर्म

383
00:27:01,120 --> 00:27:05,280
के लिए क्या आवश्यकता है कि यदि हमारे

384
00:27:05,280 --> 00:27:09,440
मान्य आचार्य गण ये कह रहे हैं कि जो शाक द्वीपीय होते हैं ब्राह्मण

385
00:27:09,440 --> 00:27:13,680
ही होते हैं तो एक उसी आधार को पकड़ के पीछे चलना अरे भैया बहुत

386
00:27:13,680 --> 00:27:17,680
सारी बातें हैं लोग आपसे सवाल करेंगे

387
00:27:17,680 --> 00:27:21,760
तार्किक रूप से सवाल खड़ा होगा क्या खड़ा होगा कि भाई

388
00:27:21,760 --> 00:27:25,760
तुम अब तक इसको मंच देते थे अपने यहां। अब तुमसे कुछ मतभेद हो गया तो

389
00:27:25,760 --> 00:27:29,760
तुम इसकी पुरानी बातें खोद रहे हो। पहले कहां थे तुम? यदि

390
00:27:29,760 --> 00:27:33,760
आप यह कह देते मैंने एक वीडियो में सुना था आपका। यदि आप यह कह

391
00:27:33,760 --> 00:27:38,240
देते हैं कि मुझे पहले इसके बारे में पता नहीं था तो कैसे रिपोर्टर हैं आप?

392
00:27:38,240 --> 00:27:42,320
किसी को बिना जाने ही प्रशय दे देते हैं क्या? बिना

393
00:27:42,320 --> 00:27:46,400
जाने ताने ही आप बैठकर के शंकराचार्यों की समीक्षा करवाने लगते हैं अपने चैनल

394
00:27:46,400 --> 00:27:50,560
पर। यह सब सवाल नहीं खड़े होंगे। तो क्या

395
00:27:50,560 --> 00:27:56,400
आवश्यक है? अरे वो कुछ नहीं है।

396
00:27:56,400 --> 00:28:00,560
पीछे पड़ जाएंगे। उसका निस्त नाबूत कर देंगे आप अकेले ही।

397
00:28:00,560 --> 00:28:04,800
क्या आवश्यक है इन बातों को खोदना और प्रामाणिक आचार्यों को बीच में लाना।

398
00:28:04,800 --> 00:28:09,040
यही तो वो चाहता है। अरे यही तो वो चाहता है कि हमें अपने

399
00:28:09,040 --> 00:28:13,520
सभी परंपरा प्राप्त आचार्यों में अनास्था हो जाए

400
00:28:13,520 --> 00:28:17,760
हमारे मन में। और एकमात्र निग्रह निग्रह निग्रह वीडियो

401
00:28:17,760 --> 00:28:22,080
बना दूंगा। निग्रह कर दूंगा इस नाम पर। इस नाम

402
00:28:22,080 --> 00:28:27,600
पर एकमात्र वही बाबा कहलाया जाए। वही सबका प्रामाणिक आचार्य।

403
00:28:27,600 --> 00:28:31,680
यही तो वह चाहता है। एक एक करके आज आपके द्वारा विद्या भास्कर जी

404
00:28:31,680 --> 00:28:35,920
महाराज का करवा रहा है। अन्यों के द्वारा शंकराचार्यों का कराएगा। राजेंद्र

405
00:28:35,920 --> 00:28:40,000
दास जी का करेगा। इधर से कराएगा, उधर से कराएगा। सारे आचार्यों के लिए

406
00:28:40,000 --> 00:28:44,160
सनातन समाज में अनास्था उत्पन्न कर देगा। और

407
00:28:44,160 --> 00:28:50,160
उसका उद्देश्य क्या है? अपने चैनल का निर्माण, अपनी स्थापना,

408
00:28:50,160 --> 00:28:54,240
स्वयं को ख्यापित करना। परंतु वह यह नहीं देखेगा। उसको

409
00:28:54,240 --> 00:28:58,560
यह नहीं दिखाई देगा कि ऐसा करने से परंपरा प्राप्त आचार्य प्रामाणिक

410
00:28:58,560 --> 00:29:02,960
आचार्यों पर अनास्था उत्पन्न हो जाने से हमारे पास हमारे

411
00:29:02,960 --> 00:29:07,280
धर्म का शब्द प्रमाण नष्ट हो जाएगा। क्या

412
00:29:07,280 --> 00:29:11,360
शब्द प्रमाण है? कि यह वेद है,

413
00:29:11,360 --> 00:29:12,080
ईश्वरीय

414
00:29:12,080 --> 00:29:16,720
है, अपौरुषय हैं।

415
00:29:16,720 --> 00:29:20,720
वह शब्द प्रमाण नष्ट हो जाएगा हमारा तो कम से कम वह नहीं

416
00:29:20,720 --> 00:29:25,200
ध्यान दे रहा है। आप तो ध्यान दें और बिल्कुल

417
00:29:25,200 --> 00:29:29,440
वो जो व्यंग चित्र है अगर उसका आधार पूज्य विद्या भास्कर जी महाराज

418
00:29:29,440 --> 00:29:33,520
है तो मेरा आपसे बहुत विनम्र

419
00:29:33,520 --> 00:29:38,320
निवेदन है कि इसकी पुनरावृत्ति ना करें।

420
00:29:38,320 --> 00:29:42,400
अन्यथा मुझे आपके समक्ष खड़ा होना पड़ेगा। मुझे आप अपने

421
00:29:42,400 --> 00:29:47,120
मार्ग में पाएंगे। कुछ विषयों में लेकर के आंतरिक

422
00:29:47,120 --> 00:29:51,200
मतभेद है। कुछ विषयों में वैचारिक मतभेद

423
00:29:51,200 --> 00:29:55,360
है। परंतु मैं तो कभी नहीं आया आपके मार्ग में। कभी आपके लिए कोई वीडियो

424
00:29:55,360 --> 00:29:59,680
नहीं बनाया। और मैं अपेक्षा करता हूं कि आप मुझे ऐसा अवसर नहीं देंगे

425
00:29:59,680 --> 00:30:03,840
भविष्य में भी कि मुझे कोई वीडियो आपके लिए बनाना पड़े। इस विनम्र

426
00:30:03,840 --> 00:30:07,920
निवेदन के साथ मैं अपनी बात को यहां पर समाप्त कर रहा हूं। जय

427
00:30:07,920 --> 00:30:11,920
श्री राम। [संगीत]
