1
00:00:01,840 --> 00:00:06,560
तो सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक हो

2
00:00:06,560 --> 00:00:10,800
और कल हमने एक चर्चा आयोजित की थी जो हो नहीं

3
00:00:10,800 --> 00:00:15,040
पाई थी। नेटवर्क की प्रॉब्लम थी जो रमेश जी हैं उनकी तरफ।

4
00:00:15,040 --> 00:00:19,440
तो आज जो है वो ऐसी जगह पर हैं जहां पर नेटवर्क

5
00:00:19,440 --> 00:00:23,520
की बाधा नहीं आएगी। तो आज हम

6
00:00:23,520 --> 00:00:27,200
इस चर्चा को

7
00:00:27,200 --> 00:00:31,280
करेंगे। तो सबसे पहले हम ले लेते हैं रमेश जी को साथ

8
00:00:31,280 --> 00:00:35,440
में। जी रमेश जी जय श्री राम। जय

9
00:00:35,440 --> 00:00:39,600
श्री राम जी। ओम शांति। जी। तो

10
00:00:39,600 --> 00:00:43,600
थोड़ा सा आप हमें अपना परिचय दे दीजिए एक संक्षिप्त कि आप

11
00:00:43,600 --> 00:00:47,760
ब्रह्मा कुमारी से के कहां से जुड़े हुए हैं? कब से जुड़े

12
00:00:47,760 --> 00:00:51,040
हुए हैं?

13
00:00:51,040 --> 00:00:56,240
मुझे लगभग हो गया 12 13 साल हो गया है लगभग

14
00:00:56,240 --> 00:01:01,600
और मैं ये नोएडा सेक्टर 26 से जुड़ा हुआ हूं

15
00:01:01,600 --> 00:01:06,320
हम अच्छा हां तो

16
00:01:06,320 --> 00:01:11,440
तो वहां पर जो मैं गृहस्थ में रहते हुए

17
00:01:11,440 --> 00:01:15,440
मैं गृहस्थ में रहते हुए ही अपना और परिवार में

18
00:01:15,440 --> 00:01:19,680
सिर्फ अकेले मैं ही चलता हूं बाकी और उतना इसको नहीं

19
00:01:19,680 --> 00:01:23,840
मानते। अच्छा तो वहां ये

20
00:01:23,840 --> 00:01:29,840
नोएडा से कौन सा बताया आपने नोएडा सेक्टर?

21
00:01:30,080 --> 00:01:34,800
26 महाशील दीदी और

22
00:01:34,800 --> 00:01:38,800
सुदेश दीदी है उनके सानिध्य में और राधा

23
00:01:38,800 --> 00:01:43,760
दीदी है उन लोगों के सानिध्य में है काम

24
00:01:43,760 --> 00:01:48,000
चल रहा है [नाक से की जाने वाली आवाज़] तो ठीक है फिर सीधे

25
00:01:48,000 --> 00:01:50,720
हम लोग

26
00:01:50,720 --> 00:01:54,160
ठीक है हम लोग सीधे मुख्य विषय पर आते हैं

27
00:01:54,160 --> 00:01:58,960
क्या ब्रह्मा कुमारीज के द्वारा पूजित होने वाला ईश्वर

28
00:01:58,960 --> 00:02:04,960
परिभाषित होने वाला ईश्वर सर्वशक्तिमान है या नहीं?

29
00:02:07,600 --> 00:02:11,840
है या नहीं तो जो भी है वो पूरी

30
00:02:11,840 --> 00:02:15,840
चर्चा में समझ में आ जाएगा। मगर आप क्या मानते

31
00:02:15,840 --> 00:02:20,720
हैं? मानते हैं कि है। मैं मानता हूं कि

32
00:02:20,720 --> 00:02:26,720
ठीक है। तो क्या वो अवतार ले सकता है?

33
00:02:28,240 --> 00:02:32,640
अवतार का मतलब क्या आप कहने का है कि अवतार

34
00:02:32,640 --> 00:02:37,040
का मतलब शरीर में जन्म ले सके। जन्म लेने से

35
00:02:37,040 --> 00:02:41,200
एक ऐसा रूप धारण करके हमें हमारे समक्ष आता है जो

36
00:02:41,200 --> 00:02:47,200
हमारे व्यवहार का विषय बन सके। आंखों का विषय बन सके।

37
00:02:48,800 --> 00:02:51,200
अच्छा

38
00:02:51,200 --> 00:02:55,360
तो ऐसा वो स्वयं को

39
00:02:55,360 --> 00:02:59,680
नहीं लेता है लेकिन वो एक्चुअल

40
00:02:59,680 --> 00:03:03,760
में क्यों नहीं लेता है ये आगे समझेंगे तो इस बात को समझ

41
00:03:03,760 --> 00:03:07,840
पाएंगे कि ले लेगा कि नहीं लेगा। एक एक करके

42
00:03:07,840 --> 00:03:12,560
चलेंगे। सबसे पहली बात यह है कि वह अनंत सामर्थ्यवान

43
00:03:12,560 --> 00:03:16,000
है या नहीं।

44
00:03:16,000 --> 00:03:19,680
अनंत सामर्थ्यवान

45
00:03:19,680 --> 00:03:23,840
देखिए अनंत को पहले आप अपने शब्दों में समझाएंगे क्या

46
00:03:23,840 --> 00:03:28,080
एक दो तीन चार करते हुए हम अनंत तक पहुंच जाएंगे अनंत

47
00:03:28,080 --> 00:03:32,240
अनंत का मतलब है कि ऐसा

48
00:03:32,240 --> 00:03:36,480
कोई कार्य ना हो जो वो ना कर सके अनंत सामर्थ्यवान सभी कार्यों

49
00:03:36,480 --> 00:03:40,480
को करने की जिसमें क्षमता हो ऐसा कुछ ऐसी दुनिया में

50
00:03:40,480 --> 00:03:45,520
ऐसी संसार में कोई क्रिया घटित नहीं हो रही हो जो वो ना कर सके।

51
00:03:45,520 --> 00:03:50,240
ऐसी किसी क्रिया का अस्तित्व ना हो संसार में जो वो ना कर सके।

52
00:03:50,240 --> 00:03:54,720
हां वो वो देखिए वो समझ में हमें तो आया है

53
00:03:54,720 --> 00:03:58,720
ऐसी कोई भी नहीं लेकिन ये सबको समझ में आएगा भाई जी

54
00:03:58,720 --> 00:04:02,800
ना तो सब तो फिर देखिए समझ में आपको क्या

55
00:04:02,800 --> 00:04:06,880
आया वो यहां का विषय नहीं है कि आपको समझ में क्या आया क्या नहीं आया।

56
00:04:06,880 --> 00:04:11,040
विषय यह है कि ब्रह्मा कुमारी जिसको ईश्वर बना के पुजवा

57
00:04:11,040 --> 00:04:15,280
रही हैं और वह कह रही है कि सर्वशक्तिमान है, अनंत सामर्थ्यवान है

58
00:04:15,280 --> 00:04:19,440
तो क्या वो उसको आगे निभाती हैं अपने इस क्लेम

59
00:04:19,440 --> 00:04:23,920
को जो उन्होंने क्लेम किया है, दावा किया है, वो इस क्लेम के अनुरूप

60
00:04:23,920 --> 00:04:28,320
ईश्वर की व्याख्या करती हैं या वो व्याख्या बदल जाती है आगे जाकर के। कैसे?

61
00:04:28,320 --> 00:04:31,200
जब हमने कहा कि वह अनंत सामर्थ्यवान है।

62
00:04:31,200 --> 00:04:35,200
तो वह अवतार नहीं

63
00:04:35,200 --> 00:04:39,280
ले सक रहा है। वो कई क्रियाएं ऐसी हैं दुनिया में जो बाधित हो

64
00:04:39,280 --> 00:04:43,360
रहा है। तो जब वो उसकी शक्तियां बाधित हो रही है कि जब उसकी

65
00:04:43,360 --> 00:04:47,360
शक्तियां बाधित हो रही हैं तो फिर यह क्लेम छोड़ना चाहिए कि ईश्वर

66
00:04:47,360 --> 00:04:51,440
अनंत सामर्थ्यवान है। ये क्लेम छोड़ना चाहिए ईश्वर सर्वशक्तिमान है।

67
00:04:51,440 --> 00:04:55,920
दूसरे क्लेम करो दूसरे क्लेम करो। आप ये कहो कि

68
00:04:55,920 --> 00:05:00,000
एक भाई साहब एक मिनट मुझे पूरा करने दीजिए। बात यह है कि

69
00:05:00,000 --> 00:05:04,160
जब हम यह कह रहे हैं कि उसमें अवतार लेने की क्षमता नहीं

70
00:05:04,160 --> 00:05:08,240
है। उसमें झूठ बोलने की क्षमता भी नहीं है। यह

71
00:05:08,240 --> 00:05:12,640
भी आप मानते हो। दुनिया में जो बुराई का अस्तित्व है वो अपने आप हो गया है। वो

72
00:05:12,640 --> 00:05:16,640
उसने नहीं बनाई है। जबकि हम यह मानते हैं कि उसके लिए सब

73
00:05:16,640 --> 00:05:20,640
बनाया है। सब उसी ने बनाया है। एक एक मिनट भाई साहब एक मिनट भाई साहब।

74
00:05:20,640 --> 00:05:24,880
एक मिनट एक मिनट हमारा यह मानना है कि ईश्वर के दृष्टिकोण

75
00:05:24,880 --> 00:05:29,120
से कुछ भी अच्छा या बुरा है ही नहीं। जो भी अच्छाई है बुराई है हमारे दृष्टिकोण से है।

76
00:05:29,120 --> 00:05:33,200
ईश्वर के लिए सब बराबर है। है ना? हम लोग क्योंकि बंधन में

77
00:05:33,200 --> 00:05:37,360
है तो हमारे लिए कुछ अच्छा और बुरा है। तब ईश्वर ने बताया कि ये जो बुरी चीज है

78
00:05:37,360 --> 00:05:41,600
इसके साथ ऐसा व्यवहार करो तो मुक्ति मिलेगी। ये जो अच्छी चीज है इसके साथ ऐसा व्यवहार

79
00:05:41,600 --> 00:05:45,920
करोगे तो मुक्ति मिलेगी। ईश्वर के लिए कुछ भी नहीं है। ईश्वर ने तो सब कुछ बनाया। हमारी नजरों

80
00:05:45,920 --> 00:05:46,420
में जो अच्छा

81
00:05:46,400 --> 00:05:50,880
बुरा है वो सब कुछ उसका जो मूल कारण है वो ईश्वर ही है।

82
00:05:50,880 --> 00:05:54,960
ठीक है? तो हमारी दृष्टि में तो यह है। आपकी दृष्टि में आपके लोग यह कहते

83
00:05:54,960 --> 00:06:00,400
हैं कि ईश्वर ने जो है झूठ बोलने वालों को नहीं बनाया।

84
00:06:00,400 --> 00:06:04,880
झूठ बोलने वालों को ईश्वर ने नहीं बनाया। बुराई को ईश्वर ने नहीं बनाया।

85
00:06:04,880 --> 00:06:09,120
एक तो यह बात हो गई। यहां बाधित है। फिर दूसरी जगह

86
00:06:09,120 --> 00:06:13,600
वो अवतार नहीं ले सकता। वहां बाधित है। और तमाम सारी जगह अवतार

87
00:06:13,600 --> 00:06:17,760
ले सकता है नहीं से ले सकता। इसको भी हम थोड़ा एक्सप्लेन कर दूंगा

88
00:06:17,760 --> 00:06:22,000
बाद में। आप एक्सप्लेन करिएगा। मैं अपनी चीजें बता दूं। आप एक्सप्लेन

89
00:06:22,000 --> 00:06:26,000
करिएगा। तो अब यहां बात आती है कि वो अवतार अवतार इसलिए

90
00:06:26,000 --> 00:06:30,080
नहीं लेता है। इसलिए नहीं लेता है कि जो हमारी

91
00:06:30,080 --> 00:06:34,160
पहली वाली बात है ना सर्वशक्तिमान वो किसी भी कारण से ना

92
00:06:34,160 --> 00:06:38,320
लेता हो। अगर यदि वह नहीं ले सकता है तो हमें यह क्लेम नहीं

93
00:06:38,320 --> 00:06:42,800
करना चाहिए कि वह सर्वशक्तिमान है। क्योंकि लोग सर्व

94
00:06:42,800 --> 00:06:47,120
ईश्वर को सर्वशक्तिमान समझ के ढूंढ रहे हैं, पूज रहे हैं।

95
00:06:47,120 --> 00:06:51,360
तो ऐसे में जब हमें जो वास्तव में सर्वशक्तिमान

96
00:06:51,360 --> 00:06:55,440
ईश्वर की जहां पर पूजा हो रही है उसके विरोध में अपनी पूजा को खड़ा करना है

97
00:06:55,440 --> 00:06:59,680
तो हमने वहां से शब्द तो ले लिया कि हम भी वैदिक है। हम भी सर्वशक्तिमान

98
00:06:59,680 --> 00:07:01,520
को पूज रहे हैं। हम भी जो है अनंत

99
00:07:01,520 --> 00:07:05,520
सामर्थ्यवान को पूज रहे हैं। वहां से शब्द तो ले लिया पर उस अमुक शब्द

100
00:07:05,520 --> 00:07:09,920
की व्याख्या अपनी दे दी तो ये धोखा है

101
00:07:09,920 --> 00:07:14,080
या तो आप उस शब्द को वो करिए सर्वशक्तिमान को आप अगर

102
00:07:14,080 --> 00:07:18,080
यह कहेंगे कि उसका कारण है वो नहीं लेता वो एक अलग चीज हो गई

103
00:07:18,080 --> 00:07:22,240
कारण किसी वजह से वो बाधित है एक मिनट भाई साहब किसी वजह

104
00:07:22,240 --> 00:07:26,480
से वो बाधित है किसी वजह से वो बाधित है। किसी वजह से वो अनंत

105
00:07:26,480 --> 00:07:30,640
नहीं है। किसी वजह से वो सर्वशक्तिमान नहीं है। वो वजह आपकी जायज है कि

106
00:07:30,640 --> 00:07:34,720
नहीं है वो हम बाद में देखेंगे। पहले आपको एक क्लेम छोड़ देना चाहिए कि वह अनंत

107
00:07:34,720 --> 00:07:39,280
सामर्थ्यवान है। वह सर्वशक्तिमान है। ठीक है? अब आप बताइए।

108
00:07:39,280 --> 00:07:42,000
जी

109
00:07:42,000 --> 00:07:46,000
देखिए सर्व को समझने के लिए सर्व समझे तो

110
00:07:46,000 --> 00:07:50,000
अनंत। अनंत समझे तो एक दो तीन चार पांच

111
00:07:50,000 --> 00:07:54,160
करते हुए एक करोड़ दो करोड़ करते हुए अनंत तक तो पहुंच नहीं पाएंगे।

112
00:07:54,160 --> 00:07:58,240
तो आप जो कुछ भी बोल रहे हैं वो सर्व में आ जाएगा।

113
00:07:58,240 --> 00:08:02,320
और सर्व में मेरा सर्व तो मैं जो बोल रहा हूं

114
00:08:02,320 --> 00:08:06,320
मेरा मन जहां तक जा रहा है आप समझिए जैसे कि मेरा मन

115
00:08:06,320 --> 00:08:10,720
अगर अमेरिका के बारे में कुछ जानकारी है जा रहा है वहां तक

116
00:08:10,720 --> 00:08:15,040
तो मेरा संसार मेरा सर्व तो वहीं तक है समझ

117
00:08:15,040 --> 00:08:19,040
गए ना और अगर मैं वहां गया हूं तो उसके बारे में और भी ज्यादा

118
00:08:19,040 --> 00:08:23,760
जाएगा। तो इस ब्रह्मांड में मेरा मन जहां तक जा रहा है

119
00:08:23,760 --> 00:08:27,920
मेरा स्वयं का सर्व जो है वही है। अब

120
00:08:27,920 --> 00:08:31,920
वो आपका सर्व कुछ हो सकता है लेकिन मेरा सर्व

121
00:08:31,920 --> 00:08:36,000
और मेरा शक्तिमान वो शिव बाबा है।

122
00:08:36,000 --> 00:08:40,080
ब्रह्मा कुमारी में सब इस चीज को कितना समझते

123
00:08:40,080 --> 00:08:44,240
हैं और कौन मानते हैं और कितना मानते हैं वो अलग भी हो सकता है।

124
00:08:44,240 --> 00:08:48,720
लेकिन मैं अपना बता समझ भी पाया वो बता रहा हूं आपको।

125
00:08:48,720 --> 00:08:53,360
ठीक है। ठीक है। ठीक है। ठीक है। इसका मतलब आपने

126
00:08:53,360 --> 00:08:57,040
मैं अब आपकी बात समझ गया। आपकी सोच जहां तक

127
00:08:57,040 --> 00:09:01,600
जा रही है वहां तक के सारे काम वो कर सकता है।

128
00:09:01,600 --> 00:09:05,600
हां वो कर सकता है मेरे स्वयं से। ठीक है। ठीक है। ठीक

129
00:09:05,600 --> 00:09:09,680
है। ठीक है। सबसे पहली बात ये हो गई कि ये आपकी सोच के

130
00:09:09,680 --> 00:09:13,840
अनुसार ईश्वर सर्वशक्तिमान है। पहली बात तो ये हो गई। हां।

131
00:09:13,840 --> 00:09:19,040
हो गई। ठीक। अब इसमें बात ये आती है। सर्वशक्तिमान है। हां।

132
00:09:19,040 --> 00:09:23,120
अब इसमें बात ये आती है कि आपकी सोच अभी तक अमेरिका तक नहीं जैसे

133
00:09:23,120 --> 00:09:28,320
अमेर अमेरिका तक जा रही है उसके बाद आगे आप गए नहीं तो आपका

134
00:09:28,320 --> 00:09:32,400
भाई साहब मैं आपके आपके बीच में इंटरप्ट नहीं कर रहा था अब आप इंटरप्ट ना करें मुझे

135
00:09:32,400 --> 00:09:36,400
बोलने दे आपने बोला ना पूरा ठीक है

136
00:09:36,400 --> 00:09:40,480
तो आप आपने कहा कि सर्व के अनुसार आप अमेरिका तक गए

137
00:09:40,480 --> 00:09:44,640
हैं तो इसलिए क्योंकि आपका ईश्वर अमेरिका अमेरिका तक जा रहा है तो इसलिए आपके

138
00:09:44,640 --> 00:09:50,000
लिए आपका ईश्वर सर्वशक्तिमान है पहली बात ठीक ठीक। तो

139
00:09:50,000 --> 00:09:54,080
क्या कहते हैं इसमें? सबसे पहली बात तो ये आ गई कि अगर

140
00:09:54,080 --> 00:09:58,320
आप अमेरिका तक जा सकते हैं तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप अमेरिका

141
00:09:58,320 --> 00:10:02,560
के आगे जा नहीं सकते। दिक्कत यहां है। जा नहीं सकते

142
00:10:02,560 --> 00:10:06,560
पे दिक्कत है। आप यह कहो कि हां अगर यह

143
00:10:06,560 --> 00:10:10,560
कहा जाएगा तो यह भी कर सकता है। ये कहा जाएगा तो ये भी कर सकता। यानी कि अमेरिका तक

144
00:10:10,560 --> 00:10:12,320
आपका जो मन जा रहा है

145
00:10:12,320 --> 00:10:16,320
उसके आगे यह नहीं आपने मान लिया कि अमेरिका के आगे मेरा मन जा ही नहीं सकता।

146
00:10:16,320 --> 00:10:20,400
ये मान लिया क्या ये मान लिया आपने? नहीं नहीं

147
00:10:20,400 --> 00:10:25,360
अनंत में तो है नहीं बाहर होगी।

148
00:10:25,360 --> 00:10:29,440
एक मिनट अनंत से बाहर कुछ कैसे हो सकता है? अनंत की जब कोई सीमा ही नहीं है। बाहर

149
00:10:29,440 --> 00:10:33,360
तो वो कहलाएगा ना जो सीमा हो कहीं

150
00:10:33,360 --> 00:10:37,440
बात है। एक मिनट भाई साहब एक मिनट।

151
00:10:37,440 --> 00:10:41,520
अब आपने एक तो अपने मन का उदाहरण दिया कि मेरा मन अमेर तक

152
00:10:41,520 --> 00:10:45,600
अमेरिका तक जा सकता है। मगर आपने अपने मन पर यह लगाम नहीं लगाई है कि

153
00:10:45,600 --> 00:10:49,600
मेरा मन अमेरिका के आगे तक नहीं जा सकता है। आपने यह कहा

154
00:10:49,600 --> 00:10:53,920
है कि अभी तक मेरा मन अमेरिका तक गया है। मगर यह लगाम नहीं लगाई कि अमेरिका

155
00:10:53,920 --> 00:10:58,320
के आगे नहीं जा सकता है। पहली बात। दूसरी बात ये आती है

156
00:10:58,320 --> 00:11:02,640
कि आपके ही मन के अनुसार वो अमेरिका तक नहीं गया था। ठीक है?

157
00:11:02,640 --> 00:11:06,960
मगर जब हम आए जब हम आए और हमने क्वेश्चन

158
00:11:06,960 --> 00:11:11,040
उठाया और जैसे ही वह क्वेश्चन आपने सुना आपका मन उसी

159
00:11:11,040 --> 00:11:15,200
समय अमेरिका से आगे जा चुका है। जैसे ही हमने वो क्वेश्चन आपने

160
00:11:15,200 --> 00:11:19,200
कभी उस क्वेश्चन पे ध्यान नहीं दिया कि ईश्वर अवतार ले सकता है

161
00:11:19,200 --> 00:11:23,280
कि नहीं ले सकता है। ठीक है? ईश्वर शरीर धारण कर सकता है कि नहीं

162
00:11:23,280 --> 00:11:27,440
कर सकता है। मगर जैसे ही हमने इस क्वेश्चन को आप उठाया और आपने

163
00:11:27,440 --> 00:11:31,600
सुन लिया समझ लिया हमारा क्वेश्चन। वैसे ही आपने अमेरिका को पार

164
00:11:31,600 --> 00:11:35,680
कर लिया। अब आपके मन में भी वह विचार है कि क्या मेरा ईश्वर

165
00:11:35,680 --> 00:11:39,680
फलाना काम कर सकता है कि नहीं जिस काम के बारे में हमें सुनने से पहले

166
00:11:39,680 --> 00:11:44,240
तक आपने नहीं सोचा था। समझ में आ रहा है? दो बातें।

167
00:11:44,240 --> 00:11:48,400
तीसरी बात तीसरी बात जब आपका ईश्वर आपके

168
00:11:48,400 --> 00:11:52,480
अनुसार ईश्वर है आपके अनुसार सर्वशक्तिमान है और आपको नहीं पता कि

169
00:11:52,480 --> 00:11:56,480
दूसरा अमेरिका तक गया है कि दूसरा इंग्लैंड तक गया है कि दूसरा चंद्रमा

170
00:11:56,480 --> 00:12:00,640
तक गया है। आपको पता ही नहीं है। तो आप दूसरे से क्यों कह रहे हो कि ईश्वर है इसकी पूजा

171
00:12:00,640 --> 00:12:04,800
कर चल के मेरे साथ। क्यों कह रहे हो? भाई पहले उससे

172
00:12:04,800 --> 00:12:08,880
पूछो कि तुम अमेरिका तक गए हो कि नहीं गए हो? अमेरिका से आगे तो नहीं

173
00:12:08,880 --> 00:12:12,960
गए हो। उससे पहले पूछो फिर उसको कहो कि हां अगर तुम अमेरिका

174
00:12:12,960 --> 00:12:16,960
तक वाले व्यक्ति हो तो ईश्वर है और चलो मेरे साथ पूजा करो।

175
00:12:16,960 --> 00:12:21,200
इसको कहते हैं जो आपने कहा जो ईश्वर है ना वो

176
00:12:21,200 --> 00:12:25,840
सच्चिदानंद उसकी परिभाषा है देश कृत देशकृत

177
00:12:25,840 --> 00:12:29,920
कालकृत परिस्थिति कृत किसी भी प्रकार की

178
00:12:29,920 --> 00:12:34,400
बाधा से बाधित ना हो उसको कहते हैं ईश्वर। आपने

179
00:12:34,400 --> 00:12:38,400
यहां पे परिस्थिति डाल दी। आपने यहां पर परिस्थिति डाल दी कि भाई मेरे

180
00:12:38,400 --> 00:12:43,120
अनुसार वो ईश्वर है तो आपके अनुसार वो ईश्वर है। आप रखो अपने ईश्वर को पूजो।

181
00:12:43,120 --> 00:12:47,760
फिर उसको सबका ईश्वर बना के क्यों चिपका रहे हो दुनिया को?

182
00:12:47,760 --> 00:12:51,760
और अगर चिपकाना भी है तो आप पहले जाकर के व्यक्ति से पूछिए

183
00:12:51,760 --> 00:12:55,840
कि तुम कहां तक गए हो? तुम अमेरिका से आगे तो नहीं चले गए। कहीं

184
00:12:55,840 --> 00:13:00,000
उस स्थिति से आगे तो नहीं चले गए जो स्थिति हमारी है। और यदि ऐसा

185
00:13:00,000 --> 00:13:04,000
है तो हमारा जो ईश्वर है वो तुम्हारा ईश्वर नहीं है। यह क्या हुआ? परिस्थितिक कृतृत

186
00:13:04,000 --> 00:13:08,320
बाधा से बाधित देश कृत बाधा से एक मिनट देश कृत बाधा

187
00:13:08,320 --> 00:13:13,120
से बाधित जी बोले

188
00:13:13,120 --> 00:13:18,080
एक्चुअल में भाई जी आप जो कह रहे हैं ना

189
00:13:18,080 --> 00:13:22,080
अ सब कुछ जान लेने के बाद देखो पहले तो

190
00:13:22,080 --> 00:13:26,080
सब कुछ शुरू में तो पता नहीं था थोड़ा तो थोड़ा पता चला उसी को

191
00:13:26,080 --> 00:13:30,880
हमने मान लिया कि अरे मैंने सब जान लिया फिर उसके आगे पता चल

192
00:13:30,880 --> 00:13:34,880
देखिए सुनिए सुनिए सुनिए आगे सुनिए मेरी भी मूल विषय है उसको मत

193
00:13:34,880 --> 00:13:39,120
हटाइए मैं मैं अभी सीधा मूल विषय आपको बता देता हूं आपको उत्तर किस बात पे देना है

194
00:13:39,120 --> 00:13:43,120
ये बताइए अब आपको मालूम चल गया ना कि ईश्वर अवतार लेने के विषय में भी क्वेश्चन

195
00:13:43,120 --> 00:13:47,200
हो सकता है ले सकता है कि नहीं ले सकता पहले आपने नहीं सोचा था

196
00:13:47,200 --> 00:13:51,440
समाधान में बताऊंगा ना हां तो अब अब बताइए कि अब आप अमेरिका

197
00:13:51,440 --> 00:13:57,120
से आगे सोच रहे हैं तो आपका ईश्वर अमेरिका से आगे है या नहीं है अब बताइए

198
00:13:57,120 --> 00:13:58,320
अनंत है हमारा

199
00:13:58,320 --> 00:14:02,800
ईश्वर सर्वशक्तिमान है भाई तो सांस ले सकता है कि नहीं अवतार

200
00:14:02,800 --> 00:14:06,800
ले सकता है कि नहीं?

201
00:14:06,800 --> 00:14:12,400
अवतार क्या वो अजन्मा है? हमें भी अजन्मा बना दिया है।

202
00:14:12,400 --> 00:14:16,400
अब हमें भी अजन्मा बना दिया। आपको भी अजन्मा बना दिया। ये

203
00:14:16,400 --> 00:14:21,040
बताओ ये बताओ अजन्मा कौन नहीं है? आप अजन्मे नहीं हो।

204
00:14:21,040 --> 00:14:25,040
आप भी अजन्मे हैं। आप अजन्मे हैं। अजन्मे है तो फिर

205
00:14:25,040 --> 00:14:29,280
यहां पर रूप धारण किया ना हमने? अजन्मा होते हुए भी

206
00:14:29,280 --> 00:14:33,520
तो रूप रूप तो सब उसी के रूप है। सब उसी

207
00:14:33,520 --> 00:14:37,680
के रूप है। उसी सब उसी के रूप है। अद्वैत हो गया। अब

208
00:14:37,680 --> 00:14:42,480
कुछ भी बोल हो गया। गलत बात है। तो कहते ही है।

209
00:14:42,480 --> 00:14:46,880
कौन कहता है? कौन कहता है? बाबा खुद ही कहते हैं कि

210
00:14:46,880 --> 00:14:51,120
हम अद्वैत अद्वैत में ले जाने आए हैं। सबको अद्वैत

211
00:14:51,120 --> 00:14:55,280
दो नहीं एक बनाने आए हैं। और अच्छा ये भाव

212
00:14:55,280 --> 00:14:59,360
मैं ब्राह्मण परिवार से मैं खुद ही था। नहीं वो

213
00:14:59,360 --> 00:15:03,760
वो सब बातें मत बताइए। आप किस तरह से भटके हैं वो वो मत बताइए। ब्राह्मण आप अपने व्यक्तिगत

214
00:15:03,760 --> 00:15:08,160
चीजों को वो मत दीजिए। आप ये बताइए कि एक ही ईश्वर सभी समस्त

215
00:15:08,160 --> 00:15:14,160
रूपों में प्रकट हुआ है। यह मानते हैं आप?

216
00:15:15,840 --> 00:15:21,280
एक ही है जहां एक अद्वैत हो गया ना फिर बोल

217
00:15:21,280 --> 00:15:25,280
हां तो अद्वैत जब द्वैत में आएंगे तो कुछ भी तीन

218
00:15:25,280 --> 00:15:29,840
13 करेंगे मतलब एक ही सत्ता एक ही

219
00:15:29,840 --> 00:15:35,840
एक ही सत्ता है जो समस्त रूपों में परिलक्षित हो रही है

220
00:15:39,280 --> 00:15:43,440
देखो ये उस स्थिति में चल के कहेंगे

221
00:15:43,440 --> 00:15:47,520
तो हां अगर उससे नीचे द्वैत में रह के देखना है

222
00:15:47,520 --> 00:15:51,520
हम दोनों ही द्वैत में है तब तो ना तब तो बाबा जो कह रहे

223
00:15:51,520 --> 00:15:55,920
हैं उसी को मानते चले क्योंकि मैं भी उसी को मानता हुआ चला

224
00:15:55,920 --> 00:16:01,600
मेरे को ये समझ बाबा ने अद्वैत की बात कहां कही है ये बताइए

225
00:16:01,600 --> 00:16:05,760
पूरी मुरली को जब सुनेंगे पूरे ज्ञान को सुनेंगे तो अद्वैत ही हो जाएगा

226
00:16:05,760 --> 00:16:09,760
फिर हमें जो अनुभव हुआ कोई

227
00:16:09,760 --> 00:16:14,400
एक कोई कोई एक वीडियो दिखाइए अद्वैत वाला

228
00:16:14,400 --> 00:16:18,400
वो अच्छा आप बाबा के सेंटर पे जाते आते

229
00:16:18,400 --> 00:16:22,480
हैं किसी और पे वहां पूछिएगा वो जो अरे तो मैं पूछ चुका

230
00:16:22,480 --> 00:16:26,560
हूं ना एक मिनट एक मिनट भाई साहब मैं पूछ चुका

231
00:16:26,560 --> 00:16:30,560
हूं वो यहां से आगे नहीं जाते हैं कि एक ही परम तत्व ये वाली बात आज आप

232
00:16:30,560 --> 00:16:31,060
पहली बार

233
00:16:30,960 --> 00:16:34,960
आप बोल रहे हो दूसरी बात ये है अगर आप अद्वैत को मानते हो तो सिद्धांत की तो

234
00:16:34,960 --> 00:16:39,120
दिक्कत है नहीं अब दिक्कत क्या आ गई कि सबसे बड़ी बात है

235
00:16:39,120 --> 00:16:43,120
आपने जो ये कहा कि वो वो रूप धारण नहीं कर सकता तो आपको मानना पड़ेगा

236
00:16:43,120 --> 00:16:47,680
वो रूप धारण कर सकता है।

237
00:16:47,680 --> 00:16:51,920
अरे एक ही है तो फिर रूप क्या सारे रूप ही एक है

238
00:16:51,920 --> 00:16:56,240
तो ये कहना गलत फिर सत्य असत्य भी नहीं बचा ना

239
00:16:56,240 --> 00:17:00,320
एक एक बचेगा ना आप भाई साहब आप

240
00:17:00,320 --> 00:17:04,640
भाई साहब अद्वती हो गए अच्छी बात है अब मैं ये पूछ रहा हूं जब वो

241
00:17:04,640 --> 00:17:08,640
रूप धारण कर सकता है तो यह प्रश्न क्यों किया जाता है कि वह परया प्रवेश

242
00:17:08,640 --> 00:17:12,640
ही करेगा यह प्रश्न क्यों किया जाता है? रूप

243
00:17:12,640 --> 00:17:17,520
धारण कर सकता है ना वो?

244
00:17:17,520 --> 00:17:21,520
रूप धारण क्या जब बात एक हो गया तो फिर तो

245
00:17:21,520 --> 00:17:25,680
सारे रूप वही उसी के हैं। भाई साहब क्या पूछ रहा हूं मैं? दो

246
00:17:25,680 --> 00:17:29,760
करते हैं तो फिर आपकी आपकी दीदियां

247
00:17:29,760 --> 00:17:33,920
क्या कहती है? पहले पता तो कर लो भैया। आपकी दीदी कहती है वो रूप

248
00:17:33,920 --> 00:17:38,000
धारण नहीं कर सकता। वो परकाया प्रवेश ही करता है

249
00:17:38,000 --> 00:17:42,160
तो वो समझाने के लिए हमें भी हम भी कहते हैं मैं भी यही तो आप

250
00:17:42,160 --> 00:17:46,160
आप मुझे प्रमाण दो ना कि कौन सी चीज को माना जाए कौन सी को नहीं माना जाए प्रमाण

251
00:17:46,160 --> 00:17:51,520
दो फिर उसके लिए आपकी चीजों का तो यहां पे

252
00:17:51,520 --> 00:17:56,080
सुने का कोर्स करें प्रमाण के लिए सुनिए

253
00:17:56,080 --> 00:18:00,080
सुनिए सुनिए सुनिए कि एक बात

254
00:18:00,080 --> 00:18:04,400
निश्चित हो गई कि ईश्वर अवतार ले सकता है और आप अद्वैत

255
00:18:04,400 --> 00:18:10,000
को भी मान गए। ठीक है? मान गए। हो गया।

256
00:18:10,000 --> 00:18:14,160
अंतिम अंतिम सत्य है। अंतिम अंतिम सत्य

257
00:18:14,160 --> 00:18:19,280
अंतिम सत्य अद्वैत है। ये आपने मान लिया। हां बस

258
00:18:19,280 --> 00:18:23,360
उसके बाद एक एक मिनट भाई साहब है।

259
00:18:23,360 --> 00:18:29,360
कुछ भी सत्य नहीं है। अवतार अवतार ले सकता है वो।

260
00:18:29,360 --> 00:18:33,440
अवतार ले सकता है वो। लेता ही है। समयसमय

261
00:18:33,440 --> 00:18:37,440
पर सब अवतार ही लेते हैं। उसी के रूप सब अवतार लेते हैं।

262
00:18:37,440 --> 00:18:41,520
बदल बदल बदल बदल परकाया प्रवेश

263
00:18:41,520 --> 00:18:47,520
जरूरी नहीं है वो परकाया प्रवेश ही करे।

264
00:18:47,600 --> 00:18:51,600
परकाया प्रवेश भी करते हैं और

265
00:18:51,600 --> 00:18:55,600
अवतार भी ले लेते हैं। मतलब जरूरी नहीं है ना कि परकाया प्रवेश

266
00:18:55,600 --> 00:18:59,680
करके ही ज्ञान दे। यह कह रहा हूं। डायरेक्ट खुद से भी दे

267
00:18:59,680 --> 00:19:03,680
सकते हैं।

268
00:19:03,680 --> 00:19:07,680
हमें तो ऐसे ही मिल रहा है। आप ही लोगों से मिल रहा है।

269
00:19:07,680 --> 00:19:12,880
मैं आपको क्या मैं ये कह रहा हूं कि आप

270
00:19:12,880 --> 00:19:16,880
जब ईश्वर रूप धारण कर सकता है तो वो जो है

271
00:19:16,880 --> 00:19:22,240
उसका मन कि वो परकाया प्रवेश करे या फिर वो खुद से ज्ञान दे। ठीक?

272
00:19:22,240 --> 00:19:26,400
ठीक है। ठीक। तो अब जो भगवान अब जो भगवान

273
00:19:26,400 --> 00:19:30,640
श्री कृष्ण ने भगवत गीता का ज्ञान दिया है वहां पर उन्होंने कहा है कि यदा

274
00:19:30,640 --> 00:19:34,800
यदा धर्मस भवती भारत अभत्तान धर्मस तद्मान

275
00:19:34,800 --> 00:19:39,120
सजामहम उन्होंने कहा मैं अपने रूप का सृजन करता हूं

276
00:19:39,120 --> 00:19:43,200
उन्होंने ये नहीं कहा परकाया प्रवेश ठीक है तो आप

277
00:19:43,200 --> 00:19:47,600
यहां क्या मानते हैं ईश्वर ने खुद खुद श्री कृष्ण के रूप में अवतरित

278
00:19:47,600 --> 00:19:51,840
होकर के ज्ञान दिया है या फिर उनके अंदर घुस के श्री कृष्ण

279
00:19:51,840 --> 00:19:56,160
अलग है वो देवी देवता हैं और उनके अंदर घुस के ईश्वर ने वो दिया ज्ञान।

280
00:19:56,160 --> 00:19:59,280
क्या मानते हैं?

281
00:19:59,280 --> 00:20:03,520
मैं जब शुरू में तो यही मानता था कि पर काया प्रवेश करके

282
00:20:03,520 --> 00:20:07,600
ज्ञान है। ब्रह्मा कुमारी क्या कहती है वो बताइए।

283
00:20:07,600 --> 00:20:12,160
हां ब्रह्मा कुमारी के ज्ञान में वो बताइए।

284
00:20:12,160 --> 00:20:16,320
शुरू के ज्ञान में तो मुझे ऐसे ही होता था। बाद में तो

285
00:20:16,320 --> 00:20:18,800
मुझे अपना जो पर्सनल अनुभव हुआ वो

286
00:20:18,800 --> 00:20:22,960
भी बहुत लंबा नहीं थोड़े ही समय अनुभव की यहां पर

287
00:20:22,960 --> 00:20:27,040
कोई बात नहीं भाई साहब आप पूरी तरीके से ब्रह्मा कुमारी की सारी आईडियोलॉजी

288
00:20:27,040 --> 00:20:31,600
के विरुद्ध जा रहे हैं और यहां पर यही होता है अक्सर जब व्यक्ति

289
00:20:31,600 --> 00:20:35,760
परेशान होने लगता है जिसका खंभा उसने पकड़ रखा है तो वो उसके नाम

290
00:20:35,760 --> 00:20:39,840
पर वही आने लगता है जहां पे हम खड़े हुए हैं। चाहे वह

291
00:20:39,840 --> 00:20:43,840
आर्य समाजी हो, चाहे वो स्कनी हो, चाहे वह ब्रह्मपाली हो, चाहे वह

292
00:20:43,840 --> 00:20:48,880
ब्रह्मा कुमारी हो। आप वही कर रहे हैं। अपने सिद्धांतों को छोड़कर चले आ रहे हो।

293
00:20:48,880 --> 00:20:52,880
सिद्धांत देखिए आपसे मैंने पूछा है। भाई साहब

294
00:20:52,880 --> 00:20:57,120
मैंने आपसे ये पूछा है कि श्री कृष्ण ने श्री कृष्ण स्वयं

295
00:20:57,120 --> 00:21:03,120
भगवान थे या उनके अंदर भगवान ने घुस के ज्ञान दिया था? यह बताइए।

296
00:21:06,160 --> 00:21:11,120
उनके अंदर भगवान ने प्रवेश करके ज्ञान दिया था।

297
00:21:11,120 --> 00:21:15,440
लेकिन लोगों को बाद में ऐसा नहीं एक एक मिनट

298
00:21:15,440 --> 00:21:19,520
भाई साहब एक मिनट मुझे बहुत ज्यादा एक्स्ट्रा बोलने की जरूरत ही

299
00:21:19,520 --> 00:21:24,080
नहीं। आपने कहा उनके अंदर भगवान ने घुस के ज्ञान दिया था। ये सवाल का जवाब हो गया। अब आप

300
00:21:24,080 --> 00:21:28,240
जब मैं उस पर कुछ एक्सप्लेनेशन मांगू तब आप एक्सप्लेनेशन दीजिए। जिस

301
00:21:28,240 --> 00:21:32,800
दिशा में मांगू उस दिशा में दीजिए। ठीक है? तो

302
00:21:32,800 --> 00:21:37,040
है क्या कि अब आपका जब ये मानना है कि भगवान अवतरित

303
00:21:37,040 --> 00:21:41,120
हो सकते हैं स्वयं से तो फिर आपका यहां पर यह क्यों मानना है कि नहीं वहां

304
00:21:41,120 --> 00:21:45,120
पर भगवान श्री कृष्ण नहीं थे बल्कि उनके अंदर भगवान ने घुस के वो दिया

305
00:21:45,120 --> 00:21:51,120
था ज्ञान। यह क्या आधार है इसका?

306
00:21:54,720 --> 00:21:59,120
देखिए बीच में जब हम लोग चलते रहे

307
00:21:59,120 --> 00:22:03,200
तो श्री कृष्ण को ही भगवान मान लिया। लेकिन

308
00:22:03,200 --> 00:22:07,840
उसके पीछे की जो भाई साहब मैंने क्या कहा है? मैंने क्या कहा है भाई साहब?

309
00:22:07,840 --> 00:22:12,080
जब ईश्वर खुद अवतरित हो सकता है किसी रूप में तो

310
00:22:12,080 --> 00:22:16,320
आपका यह बात मानने का आधार क्या है कि वहां पर श्री कृष्ण ने ज्ञान नहीं दिया बल्कि

311
00:22:16,320 --> 00:22:20,320
वहां पर जो है उनके अंदर घुस के और जो है ईश्वर ने

312
00:22:20,320 --> 00:22:24,320
अलग से ईश्वर अलग है श्री कृष्ण अलग है इसका आधार क्या है अच्छा

313
00:22:24,320 --> 00:22:28,720
ये बताइए ये बताइए कि जैसे हम

314
00:22:28,720 --> 00:22:32,880
मैं बोल रहा हूं या मेरे अंदर की वो चेतना वो बोल

315
00:22:32,880 --> 00:22:37,760
रहा है क्या देखेंगे जो देखेंगे उस हिसाब से उसको अपना अलग कर लीजिए

316
00:22:37,760 --> 00:22:42,080
जो मानना है वह मान लीजिए। शुरुआत समय

317
00:22:42,080 --> 00:22:46,320
इस समय इस समय मैं बोल रहा हूं या मेरी चेतना बोल रही है?

318
00:22:46,320 --> 00:22:50,400
कौन बोल रहा है? जैसे आप आप लोगों के हिसाब से ये बात आती

319
00:22:50,400 --> 00:22:54,480
है ना। मैं आपसे पूछ रहा हूं। भाई साहब मेरे पास मेरे पास

320
00:22:54,480 --> 00:22:58,960
व्यर्थ का समय नहीं है। आप प्लीज आप जो है विषय पर रहिए।

321
00:22:58,960 --> 00:23:03,760
मैं बोल रहा हूं या मेरी चेतना बोल रही है। यह बताइए आप। चेतना

322
00:23:03,760 --> 00:23:07,920
नहीं जैसे आप श्री कृष्ण के लिए कह रहे हो। तो वहां मैंने अभी

323
00:23:07,920 --> 00:23:09,840
अभी आपने पूछा ना कि

324
00:23:09,840 --> 00:23:14,240
आपने पूछा ना सबके अंदर से परमात्मा ही बोल रहा है अद्वैत

325
00:23:14,240 --> 00:23:18,400
के अनुसार मगर श्री कृष्ण के अंदर से विशेष रूप से परमात्मा बोल

326
00:23:18,400 --> 00:23:22,400
रहा है। अन्यों के अन्यों के रूप में वो जो है सामान्य जीव भाव से परमात्मा

327
00:23:22,400 --> 00:23:26,640
बोल रहा है। जीव दृष्टि से आत्मा दृष्टि से परमात्मा बोल रहा है। और

328
00:23:26,640 --> 00:23:30,640
यहां पर सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर की दृष्टि से परमात्मा बोल रहा है। श्री कृष्ण के

329
00:23:30,640 --> 00:23:35,920
अंदर से तो ये आप किस आधार पर मानते हैं? यह बताइए

330
00:23:35,920 --> 00:23:40,240
मतलब कि सबके अंदर परमात्मा ही है बोलने वाला। ठीक है?

331
00:23:40,240 --> 00:23:44,320
मगर यहां मेरे अंदर से वो जीव भाव से बोल रहा है। जीव भाव

332
00:23:44,320 --> 00:23:48,480
और आपका कहना है कि जब श्री कृष्ण के अंदर

333
00:23:48,480 --> 00:23:53,280
से परमात्मा ने बोला तो वो जीव भाव से नहीं बोला। ईश्वरीय भाव से बोला।

334
00:23:53,280 --> 00:23:57,280
तो यानी कि वहां पर वो जो आपका यह मानना है कि वो

335
00:23:57,280 --> 00:24:01,360
भी एक जीव जैसे ही थे। श्री कृष्ण भगवान और उसके अंदर जब

336
00:24:01,360 --> 00:24:06,320
परमात्मा ने बोला तो वह जो है जीव भाव से

337
00:24:06,320 --> 00:24:10,720
ईश्वर भाव से बोला इसका आधार क्या है

338
00:24:10,720 --> 00:24:14,720
ये समझाने के लिए समझने के लिए दो तीन चार

339
00:24:14,720 --> 00:24:18,720
कर दिया जाता है फिर बाद में जब आदमी चलता है मैं पूछ रहा

340
00:24:18,720 --> 00:24:22,720
हूं मैं पूछ रहा हूं मैं पूछ रहा हूं द्वैत में आ गए द्वैत में

341
00:24:22,720 --> 00:24:27,360
आ गए द्वैत में आ गए अब ईश्वर अलग है

342
00:24:27,360 --> 00:24:31,440
और हम लोग अलग आ गए हो गए। अब जो

343
00:24:31,440 --> 00:24:35,760
ईश्वर अलग है आपका कहना है कि वो श्री कृष्ण भगवान के अंदर घुसा

344
00:24:35,760 --> 00:24:41,520
ईश्वर और बोला श्री कृष्ण के अंदर घुस के अच्छा

345
00:24:41,520 --> 00:24:46,400
आपकी पिक्चर भाई साहब चिपक रही है। मैंने कहा

346
00:24:46,400 --> 00:24:50,480
कि ईश्वर ईश्वर अलग है और जीव अलग है। द्वैत में आ गए हम लोग।

347
00:24:50,480 --> 00:24:54,480
जीव अलग है ईश्वर अलग है। ठीक है? अब श्री कृष्ण भगवान के

348
00:24:54,480 --> 00:24:58,480
श्री कृष्ण जो आपके अनुसार देवता है उनके अंदर

349
00:24:58,480 --> 00:25:02,560
भगवान ईश्वर जो है वो घुसे द्वैत में ही कह रहा हूं द्वैत की बात

350
00:25:02,560 --> 00:25:08,400
कर रहा हूं अभी उनके अंदर भगवान घुसे और उन्होंने बोला

351
00:25:08,400 --> 00:25:12,560
बल्कि ऐसा नहीं था कि स्वयं ईश्वर ने ही श्री कृष्ण का अवतार रूप लिया

352
00:25:12,560 --> 00:25:16,560
हो ऐसा नहीं था ठीक है ले सकता है पर ऐसा

353
00:25:16,560 --> 00:25:20,640
किया नहीं उसने वो ईश्वर अलग था और ईश्वर उनके अंदर

354
00:25:20,640 --> 00:25:24,720
घुसा और उसने उसने जो है बोला तो

355
00:25:24,720 --> 00:25:28,880
इसका आधार क्या है आपके पास? क्यों मानते हैं ऐसा? कि श्री

356
00:25:28,880 --> 00:25:33,680
कृष्ण भगवान स्वयं भगवान नहीं थे। भगवान ने अपना एक रूप नहीं बनाया था बल्कि

357
00:25:33,680 --> 00:25:37,760
भगवान ने श्री कृष्ण भगवान के अंदर घुस के बोला था। ये क्यों मानते हैं?

358
00:25:37,760 --> 00:25:43,760
अब द्वैत द्वैत के अनुसार बात कर रहा हूं।

359
00:25:46,720 --> 00:25:50,960
क्यों मानते हैं? क्योंकि देखिए कहानी रिपीट होती है। हर ड्रामा

360
00:25:50,960 --> 00:25:55,040
रिपीट होता है। तो रिपीट यानी कि

361
00:25:55,040 --> 00:25:59,120
यानी कि यानी कि शब्द प्रमाण जो आपको शब्द

362
00:25:59,120 --> 00:26:04,400
मिल रहा है वो प्रमाण है। शब्द प्रमाण

363
00:26:04,400 --> 00:26:08,960
हो रहा है ना ये वही चीज चल रही है। ये आपका शब्द

364
00:26:08,960 --> 00:26:12,960
है। भाई साहब मैं समझ गया आपकी बात। पता नहीं क्यों आप लोगों को

365
00:26:12,960 --> 00:26:18,960
एक वो रहता है कि मैं एक लेक्चर दे दूं साथ में।

366
00:26:22,880 --> 00:26:26,960
मैं समझ गया हूं भाई साहब आपकी बात मैं समझ गया हूं आपको एक लेक्चर

367
00:26:26,960 --> 00:26:32,160
लेके साथ में चलने की क्या आवश्यकता है हां मैं जहां पे मैं

368
00:26:32,160 --> 00:26:36,240
आपकी बात को नहीं समझ पा रहा होगा तार्किक नहीं लग रही होगी फिर मैं आपको पूछूंगा कि ये

369
00:26:36,240 --> 00:26:41,040
कैसे फिर आप बोलिए

370
00:26:41,040 --> 00:26:47,040
हां मैं ये कह रहा हूं मैं यह कह रहा हूं कि

371
00:26:47,840 --> 00:26:52,160
आपका कहना है क्योंकि हमें शब्द प्रमाण ने बताया कि

372
00:26:52,160 --> 00:26:56,080
श्री कृष्ण

373
00:26:56,080 --> 00:27:00,080
के रूप के शरीर में परमात्मा ने प्रवेश किया था। इसलिए हम मानते

374
00:27:00,080 --> 00:27:05,040
हैं कि परमात्मा ने परमात्मा ने प्रवेश किया था। ठीक है?

375
00:27:05,040 --> 00:27:07,600
हां।

376
00:27:07,600 --> 00:27:10,960
एक मिनट।

377
00:27:10,960 --> 00:27:15,120
तो इसमें आपकी मुरलियां ही प्रमाण

378
00:27:15,120 --> 00:27:17,440
है।

379
00:27:17,440 --> 00:27:22,880
जी कि गीता भी प्रमाण है।

380
00:27:22,880 --> 00:27:27,040
नहीं मुरली ही बाबा की मुरली ही प्रमाण है। गीता प्रमाण

381
00:27:27,040 --> 00:27:31,680
नहीं है। नहीं अच्छा

382
00:27:31,680 --> 00:27:35,920
ठीक है। तो इसका मतलब ये हुआ कि हां

383
00:27:35,920 --> 00:27:39,920
हां बताइए बताइए। हां इसका मतलब ये हुआ

384
00:27:39,920 --> 00:27:43,920
कि आपका लेते रहते हैं। नहीं

385
00:27:43,920 --> 00:27:48,080
उदाहरण लेना प्रमाण मानना नहीं होता है। उदाहरण तो आप जो है आई एस आई एस का

386
00:27:48,080 --> 00:27:52,240
ले सकते हो। निठारी का ले सकते हो उदाहरण तो प्रमाण वो

387
00:27:52,240 --> 00:27:56,480
होता है जिसके जिसके एक अक्षर को भी हम मना ना करें वो प्रमाण

388
00:27:56,480 --> 00:28:00,560
है हमारे लिए। समझ गए? और यदि

389
00:28:00,560 --> 00:28:04,960
हम किसी और के आधार पर उसके अक्षरों में हम वो कर रहे हैं

390
00:28:04,960 --> 00:28:09,120
वो काउंटर दोष देख रहे हैं तो इसका मतलब वो हमारे

391
00:28:09,120 --> 00:28:14,640
लिए प्रमाण नहीं है। प्रमाण हमारा वो है पीछे वाला। ठीक है?

392
00:28:14,640 --> 00:28:18,800
जी। तो इसका मतलब भगवत गीता वेद आदि शास्त्र ब्रह्मा कुमारी

393
00:28:18,800 --> 00:28:24,800
के लिए प्रमाण नहीं है।

394
00:28:26,640 --> 00:28:31,040
मतलब अपमान या अस्वीकार जैसी कोई बात नहीं। चीजें तो

395
00:28:31,040 --> 00:28:35,200
वहां भी दिखती है वो चीजें। भैया मैं कह रहा हूं

396
00:28:35,200 --> 00:28:39,520
आप मैं कह रहा हूं मैं कह रहा हूं एक मनुष्य और कुत्ते में भी समानता होती

397
00:28:39,520 --> 00:28:43,600
है। जी जी मगर इसका मतलब ये नहीं है कि हम कुत्ते को अपना

398
00:28:43,600 --> 00:28:49,600
प्रमाण मानते हैं।

399
00:28:49,680 --> 00:28:53,920
तो प्रमाण मान आप देखिए देखिए सनातनी कौन है? इसको समझ

400
00:28:53,920 --> 00:28:58,000
लीजिए। सनातनी कौन है? जो सनातन धर्म शास्त्रों में निष्ठा रखता

401
00:28:58,000 --> 00:29:02,160
है। सनातन धर्म शास्त्र सनातन वैदिक आर्य हिंदू वैदिक

402
00:29:02,160 --> 00:29:06,160
तो आपके लिए वेद प्रमाण नहीं है। आपके लिए गीता प्रमाण नहीं

403
00:29:06,160 --> 00:29:10,400
है। सनातन धर्म शास्त्र आपके लिए प्रमाण नहीं है। मैं ये पूछ रहा हूं अभी आपसे

404
00:29:10,400 --> 00:29:15,040
है क्या? नहीं प्रमाण नहीं है। अभी तो अभी तो मेरे लिए पर्सनली

405
00:29:15,040 --> 00:29:19,680
ब्रह्मा कुमारी भाई साहब आप मुझे ब्रह्मा

406
00:29:19,680 --> 00:29:23,840
ब्रह्मा ब्रह्मा कुमारी की बात करिए। आप पर्सनली वाली बात मत बोलिए।

407
00:29:23,840 --> 00:29:27,920
ब्रह्मा कुमारी का क्या है मानना अपना अनुभव अपना अनुभव

408
00:29:27,920 --> 00:29:32,000
अपना अनुभव से जब मैं आपसे जब मैं आपसे जब मैं जब मैं आपसे

409
00:29:32,000 --> 00:29:36,000
पूछूं कि आपका अनुभव बताइए पर्सनल तब बताइए अभी हम ब्रह्मा कुमारी का

410
00:29:36,000 --> 00:29:40,160
पक्ष जानना चाह रहे हैं ब्रह्मा कुमारी का पक्ष क्या है और ब्रह्मा

411
00:29:40,160 --> 00:29:41,760
कुमारी को साथ में

412
00:29:41,760 --> 00:29:46,560
लेकर के यदि आपका अनुभव है तो वो बताइए अलग से नहीं ब्रह्मा कुमारी

413
00:29:46,560 --> 00:29:49,920
ब्रह्मा कुमारी का बताइए आप

414
00:29:49,920 --> 00:29:54,160
हां तो वो वो प्रमाण क्या मैं तो उतना आपको कहीं

415
00:29:54,160 --> 00:29:58,320
पढ़ा जाना समझा ही नहीं था। मैं तो श्रीमद् भगवत गीता को एक दो

416
00:29:58,320 --> 00:30:02,400
बार पढ़ा था। आपने पढ़ाई मैंने प्रश्न मैंने प्रश्न

417
00:30:02,400 --> 00:30:06,560
ये पूछा है वेद धर्म सनातन धर्म के अन्य शास्त्र

418
00:30:06,560 --> 00:30:10,880
स्मृति ग्रंथ इत्यादि और गीता रामायण ये सब ब्रह्मा

419
00:30:10,880 --> 00:30:16,880
कुमारी वालों के लिए प्रमाण है या नहीं?

420
00:30:16,880 --> 00:30:20,880
आखिर तक जातेते नहीं। अगर शुरू में कोई मान भी रहा

421
00:30:20,880 --> 00:30:25,200
होगा तो आखरी तक जाते जाते नहीं और बाबा तो भाई साहब

422
00:30:25,200 --> 00:30:29,440
शुरू में मानी जा सकती है कोई भी चीज शुरू में मानी जा सकती है

423
00:30:29,440 --> 00:30:35,040
कुत्ते के भी कुछ आचरण है जो माने जा सकते हैं कि हां ये हमारे जैसे ही है

424
00:30:35,040 --> 00:30:39,120
मगर आखरी तक जातेजाते हम उससे पृथक हो जाते हैं तो वो जो

425
00:30:39,120 --> 00:30:43,200
आखरी वाली बात है उसके जो आखरी वाली बात है उसके आधार पर तय

426
00:30:43,200 --> 00:30:47,200
होता है कि हम उससे अलग है या नहीं है हम उसको मानते हैं कि नहीं मानते हैं तो

427
00:30:47,200 --> 00:30:51,440
वो कंक्लूजन बताइए गीता वेद रामायण सनातन धर्म शास्त्र स्मृति

428
00:30:51,440 --> 00:30:56,800
ग्रंथ इत्यादि ब्रह्मा कुमारी वालों के लिए प्रमाण है या नहीं

429
00:30:56,800 --> 00:31:00,960
नहीं है नहीं है हां नहीं

430
00:31:00,960 --> 00:31:05,040
अच्छा ठीक है ठीक है अब एक बात हो गई आप अद्वैत को मानते हैं दूसरी बात

431
00:31:05,040 --> 00:31:09,600
हो गई कि ईश्वर अवतरित हो सकता है परंतु श्री कृष्ण के रूप में जो है

432
00:31:09,600 --> 00:31:13,600
ईश्वर ने घुस करके बोला था उनके शरीर में और तीसरी

433
00:31:13,600 --> 00:31:17,600
चौथी बात आ गई कि जो ब्रह्मा कुमारी है उसके लिए

434
00:31:17,600 --> 00:31:22,080
यह सारे हिंदू कान खोल करके सुन ले जो कहते हैं ना

435
00:31:22,080 --> 00:31:26,080
हिंदू हिंदू हिंदू हिंदू सनातन वैदिक

436
00:31:26,080 --> 00:31:30,160
कार्य हिंदू है ये ब्रह्मा कुमारी वाले क्लेम करते हैं ना तो वेद को मानते हैं ना

437
00:31:30,160 --> 00:31:32,000
गीता को मानते हैं ना रामायण को मानते हैं ना

438
00:31:32,000 --> 00:31:36,560
अन्य स्मृति ग्रंथों को मानते हैं ये मैं हिंदुओं से कह रहा हूं चलिए

439
00:31:36,560 --> 00:31:37,060
ठीक

440
00:31:36,800 --> 00:31:41,200
है अब इसमें आते हैं ये मैं आखरी बात कर रहा हूं आखरी

441
00:31:41,200 --> 00:31:45,200
में जाकर शुरुआत में चाहे जो चलता हो आखरी में

442
00:31:45,200 --> 00:31:49,280
जाके कोई कुछ नहीं की बात होती है। आखरी की बात होती

443
00:31:49,280 --> 00:31:53,360
है। आखरी की अभी शुरुआत में तो आप मुझे भी मान लोगे शुरुआत

444
00:31:53,360 --> 00:31:57,920
आखरी में तो हम ब्रह्मा कुमारी भी नहीं मानते हैं। आखरी में

445
00:31:57,920 --> 00:32:02,800
ब्रह्मा कुमारी भी नहीं मानते हैं। क्या मानते हो?

446
00:32:02,800 --> 00:32:07,680
क्या मानते हो बताओ? आखरी में तो हमें ब्रह्मा कुमारी से भी कोई

447
00:32:07,680 --> 00:32:12,000
अर्थ नहीं है। अर्थ नहीं अर्थ की बात नहीं है। ब्रह्मा कुमारी

448
00:32:12,000 --> 00:32:15,840
की बातें क्या झूठी मानते हो?

449
00:32:15,840 --> 00:32:20,080
ब्रह्मा कुमारी की बातें कभी झूठी होते

450
00:32:20,080 --> 00:32:23,520
सब झूठी हो जाती है

451
00:32:23,520 --> 00:32:28,160
भाई व्यवहार जगत की बात कर रहा हूं शब्दों का खेल यहां नहीं चल पाएगा

452
00:32:28,160 --> 00:32:32,560
हां व्यवहार जगत मिथ्या हो जाता है मिथ्या मिथ्या मैं कह रहा हूं व्यवहार जगत

453
00:32:32,560 --> 00:32:36,720
में रहते हुए मानते हो क्या मैं क्या कह रहा हूं खेलने

454
00:32:36,720 --> 00:32:40,720
आए हो ना यहां पे खेलने आए हो ना शब्दों का खेल

455
00:32:40,720 --> 00:32:44,880
मैं कह रहा हूं व्यवहार जगत में रहते हुए क्या मिथ्या हो जाएगा

456
00:32:44,880 --> 00:32:48,880
ब्रह्मा कुमारी का ज्ञान संसार में रहते

457
00:32:48,880 --> 00:32:51,920
हुए संसार में रहते हुए गीता

458
00:32:51,920 --> 00:32:56,720
वेद पुराण आपके लिए प्रमाण है या नहीं

459
00:32:56,720 --> 00:33:01,200
मेरा लक्ष्य यही है संसार में रहते हुए की बात

460
00:33:01,200 --> 00:33:05,440
है भाई साहब मैंने सवाल क्या पूछा है

461
00:33:05,440 --> 00:33:11,440
सवाल क्या पूछा है संसार में रहते हुए

462
00:33:11,440 --> 00:33:17,440
क्या ब्रह्मा कुमारी का ज्ञान आपके ये अप्रमाण है।

463
00:33:19,280 --> 00:33:23,280
अगर ऐसा हो जाए तो मेरा अहोभाग्य होगा। मैं तुरंत अभी इसी

464
00:33:23,280 --> 00:33:27,680
वक्त लेकिन इसी प्रयास में हूं। आप जा सकते हैं। भाई साहब मैं इसी प्रयास में हूं

465
00:33:27,680 --> 00:33:31,680
आपको जवाब देने का प्रमाण क्या पूछ रहा हूं? मैं

466
00:33:31,680 --> 00:33:37,440
क्या पूछ रहा हूं भाई साहब? मैं क्या पूछ रहा हूं? संसार में

467
00:33:37,440 --> 00:33:41,440
एक मिनट संसार में रहते हुए मुक्ति को प्राप्त करने के

468
00:33:41,440 --> 00:33:45,520
लिए मुक्ति को प्राप्त करने के लिए यानी कि

469
00:33:45,520 --> 00:33:49,920
मुक्ति से पहले ठीक मुक्ति को प्राप्त करने के लिए ब्रह्मा

470
00:33:49,920 --> 00:33:55,360
कुमारी का ज्ञान आपके लिए प्रमाण है या नहीं

471
00:33:55,360 --> 00:33:59,520
हां शुरुआत का अरे शुरुआत में ये तो मैं बता ही दिया शुरुआत ही

472
00:33:59,520 --> 00:34:03,760
तो सुनना ही नहीं चाहते वाला सुन लोगे मेरी

473
00:34:03,760 --> 00:34:07,920
आप शुरुआत ही सुनिए ना आप जा सकते हैं मैं समझ रहा हूं आप क्यों आए हैं

474
00:34:07,920 --> 00:34:13,440
यहां पर चटने आए हैं आप और कुछ नहीं कुछ नहीं

475
00:34:13,440 --> 00:34:17,440
इतना मेरे पास मैंने इतना घी नहीं पिया है आदमी

476
00:34:17,440 --> 00:34:23,440
अद्वैती बन के बात करने लगे

477
00:34:30,880 --> 00:34:35,600
आप भाई साहब इधर-उधर की बातें ना करें तो तो हम लोग चर्चा आगे बढ़ा पाए।

478
00:34:35,600 --> 00:34:40,160
ठीक है? जी। ठीक है ना? तो

479
00:34:40,160 --> 00:34:44,240
टॉपिक कहां तक और था? मैं बता रहा हूं। हमारा टॉपिक लगभग खत्म

480
00:34:44,240 --> 00:34:48,240
नहीं था। मैं बता रहा हूं। मैं बता रहा हूं भाई साहब। मैं बता रहा

481
00:34:48,240 --> 00:34:52,400
हूं। आपको टॉपिक मैं बता रहा हूं। ब्रह्मा कुमारी का ज्ञान मुक्ति के

482
00:34:52,400 --> 00:34:56,400
लिए आपके लिए प्रमाण है। और सनातन वैदिक आर्य हिंदू धर्म के

483
00:34:56,400 --> 00:35:00,400
जो धर्म शास्त्र है, वेद है, गीता है, रामायण है, ये मुक्ति के लिए

484
00:35:00,400 --> 00:35:04,480
आपके लिए प्रमाण नहीं है। यह मुक्ति के हेतु नहीं है। प्रमाण

485
00:35:04,480 --> 00:35:08,560
रूप में है। ब्रह्मा कुमारी का ज्ञान मुरली के रूप में जो प्राप्त होता है वो मुक्ति

486
00:35:08,560 --> 00:35:10,720
का हेतु है। प्रमाण रूप में आपके

487
00:35:10,720 --> 00:35:14,800
लिए ब्रह्मा कुमारी वालों के वहां से यहां शिफ्ट हुआ हूं। भाई जी मैं ब्राह्मण

488
00:35:14,800 --> 00:35:18,960
परिवार से था। वहां से यहां शिफ्ट हो भाई साहब आप जा सकते हैं करने आना ये दिखाना

489
00:35:18,960 --> 00:35:23,040
है कि भाई मैं ब्राह्मण था और ब्राह्मण हो के और जो है

490
00:35:23,040 --> 00:35:27,920
मैं यहां आ गया।

491
00:35:27,920 --> 00:35:32,160
ठीक है? तो ब्रह्मा कुमारी में जाने वाले लोग अपना देख लें। अगर

492
00:35:32,160 --> 00:35:38,160
यह थोड़ा सा ये फंसने वाली चीजें ना करते यदि

493
00:35:38,640 --> 00:35:43,360
होता क्या है कि व्यक्ति जब आता है तो अपनी कुछ

494
00:35:43,360 --> 00:35:47,920
कुछ नैरेटिव्स लेकर के आता है और वो चाहता है कि वो यहां मैं बोल दूं

495
00:35:47,920 --> 00:35:51,440
अपने नैरेटिव्स को

496
00:35:51,440 --> 00:35:55,440
और बोलने के बाद फिर वो हमारे लिए एक नई समस्या है कि वो नैरेटिव को

497
00:35:55,440 --> 00:35:59,440
हम ब्रेक करें। वह जो चर्चा चल रही है उसको छोड़े क्या करें

498
00:35:59,440 --> 00:36:03,440
यह होता है। कोई सोच के आया कि मुझे गाली बकनी है तो

499
00:36:03,440 --> 00:36:08,960
मैं गाली बक दूं। वह वाली बात है।

500
00:36:08,960 --> 00:36:14,960
लिंक दे दीजिए। किसी को अगर चर्चा में आना हो तो आ सकता है।

501
00:36:27,070 --> 00:36:33,070
[गला साफ़ करने की आवाज़] चेहरा चेहरे के बिना नहीं आना है। ध्यान रखिएगा।

502
00:36:54,240 --> 00:37:00,240
ठीक है।

503
00:37:05,040 --> 00:37:11,040
हम्म

504
00:37:32,320 --> 00:37:36,720
आप भाई साहब हो गई आपसे बातें। ठीक है आप कुछ

505
00:37:36,720 --> 00:37:41,040
धर्म पे और सुन लीजिए धर्म पे धर्म पे हां

506
00:37:41,040 --> 00:37:45,120
तो हमने बता हमने जो पूछ रहे हैं उसप तो बात करनी नहीं है आप जा

507
00:37:45,120 --> 00:37:50,240
सकते हैं भाई साहब नहीं उस अरे हमने आपसे पूछा

508
00:37:50,240 --> 00:37:54,480
हमने आपसे हमने आपसे पूछा क्या है भाई साहब क्या पूछा है आपसे

509
00:37:54,480 --> 00:37:58,480
ये आपके लिए ब्रह्मा सत्य है

510
00:37:58,480 --> 00:38:02,720
तो मैं कह रहा हूं कि मतलब जाइए आप जाइए

511
00:38:02,720 --> 00:38:08,720
आपको बातें इस तरह तरह से करनी है घुमा फिराया आपको जवाब तो देना नहीं है।

512
00:38:30,160 --> 00:38:35,360
हम

513
00:38:35,360 --> 00:38:41,360
धन्यवाद भाई आर्यवीर मुझे समझने के लिए

514
00:38:43,840 --> 00:38:48,000
गाली क्या होती है अभी आपको पता ही नहीं

515
00:38:48,000 --> 00:38:54,000
वो नकली दुनिया में हो ना आप इसलिए गाली क्या होती है पता नहीं आपको।

516
00:38:57,280 --> 00:39:03,280
अब देखो जो व्यक्ति आया है वह

517
00:39:05,200 --> 00:39:09,200
ब्रह्मा कुमारी के विरोध में सारी बातें बोल रहा है फिर

518
00:39:09,200 --> 00:39:13,280
उससे पूछा जा रहा है कि भैया तुम्हारे लिए सनातन धर्म शास्त्र प्रमाण है कि नहीं वो बोल

519
00:39:13,280 --> 00:39:17,520
रहा नहीं है और फिर अद्वैत का सहारा लेकर के कह रहा है कि वो भी मेरे लिए मिथ्या

520
00:39:17,520 --> 00:39:21,760
है। भाई जिस समय वो मिथ्या है ना जिस समय वो आप मिथ्या

521
00:39:21,760 --> 00:39:25,760
बोल रहे हो ना उस समय आपको किसी ग्रंथ

522
00:39:25,760 --> 00:39:30,080
की आवश्यकता ही नहीं है। जिस समय आप ब्रह्मा कुमारी को जिस समय आप क्लेम कर रहे हो

523
00:39:30,080 --> 00:39:34,320
मेरे लिए तो वो भी मिथ्या है। बात यह है कि जिस समय आपको किसी

524
00:39:34,320 --> 00:39:39,440
कर्म की आवश्यकता है, क्रिया की आवश्यकता है तो उस क्रिया को करने में

525
00:39:39,440 --> 00:39:43,760
कौन सी चीज आपके लिए प्रमाण है? कौन सी चीज आपके लिए मार्गदर्शन है, मार्गदर्शक

526
00:39:43,760 --> 00:39:48,640
है? तो उस संबंध में

527
00:39:48,640 --> 00:39:52,800
आपने कहा कि सनातन वैदिक आर्य जो हिंदू धर्म के ग्रंथ है वह आपके लिए प्रमाण नहीं

528
00:39:52,800 --> 00:39:57,120
है और जब आपने ब्रह्मा कुमारी इसको नकारा तो मोक्ष प्राप्त करके नकारा

529
00:39:57,120 --> 00:40:00,640
है। ठीक है?

530
00:40:00,640 --> 00:40:04,640
तो कोई चेहरा लेकर के बातचीत करने आना चाहता है तो वो आ

531
00:40:04,640 --> 00:40:08,720
सकता है। मैंने देखा है कि रामपालियों के

532
00:40:08,720 --> 00:40:12,800
यहां भी जाकर के ये जो अलंकारी हैं वो पिट

533
00:40:12,800 --> 00:40:17,280
के आ रहे हैं। और सबसे बड़ी बात है भाई तुम अलंकारियों के जा और रामपालियों

534
00:40:17,280 --> 00:40:21,360
के यहां जा सकते हो तो मेरे पास क्यों नहीं आ रहे हो?

535
00:40:21,360 --> 00:40:25,600
हां बताओ रामपालियों से पिट के चले आ रहे हो। रामपालियों के चैनल

536
00:40:25,600 --> 00:40:29,840
पर गए अलंकारी यही ये ऋषि मंतव्य वालों की जो

537
00:40:29,840 --> 00:40:34,240
छुटकैया पहलवान है वहां के तो वो गए वहां

538
00:40:34,240 --> 00:40:39,200
गाली गलौज भी कर दी माफी भी मांगा माफी भी मांगी।

539
00:40:39,200 --> 00:40:43,280
यह जो ऋषि मंतव्य वाले लोग हैं उसमें एक लड़का है ना

540
00:40:43,280 --> 00:40:48,080
जो अभी कुछ दिन पहले श्रुति मार्ग चैनल पर भी गया था

541
00:40:48,080 --> 00:40:52,080
तो वहां पे वो लड़का जो सनातन शंकर जी के

542
00:40:52,080 --> 00:40:56,080
चैनल पर भी आता है कई बार आ चुका है वो लड़का और शायद सूरज

543
00:40:56,080 --> 00:41:00,160
आर्य करके ये दोनों गए

544
00:41:00,160 --> 00:41:04,240
और दोनों जाकर के वहां पर उन्होंने नियोग पे

545
00:41:04,240 --> 00:41:08,560
और स्त्री में कई जगह इन्होंने दयानंद जी ने भी

546
00:41:08,560 --> 00:41:12,640
भेद दृष्टि दिखाई है ना धार्मिक दृष्टिकोण से

547
00:41:12,640 --> 00:41:14,800
तो

548
00:41:14,800 --> 00:41:19,040
उन विषयों पर इन्होंने प्रश्न पूछे इनसे तो

549
00:41:19,040 --> 00:41:23,120
ये बेचारे इधर उधर इधर उधर कर कर के कर कर के वहां भाई पंचाव

550
00:41:23,120 --> 00:41:27,280
प्रतिज क्या है तुम्हारी ये सब कर रहे थे वहां तुम्हारी प्रतिज क्या

551
00:41:27,280 --> 00:41:31,680
है वहां बहुत इनको शर्मनाक पराजय

552
00:41:31,680 --> 00:41:35,760
का चेहरा देखना पड़ा और फिर एक आध इनका इनके साथ गया था तो उसने गाली गलौज

553
00:41:35,760 --> 00:41:36,960
भी कर दी

554
00:41:36,960 --> 00:41:41,360
गाली गाली दे दी तो गाली के लिए लोग वहां माफी मांगे। ये

555
00:41:41,360 --> 00:41:46,080
तो इनकी स्थिति है। वही टीम है

556
00:41:46,080 --> 00:41:50,720
जिसका एक खिलाड़ी अपने आप को निर्भय कहने वाला

557
00:41:50,720 --> 00:41:54,960
और इस बात का उत्तर नहीं देता है कि ईश्वर ने सृष्टि की रचना

558
00:41:54,960 --> 00:42:00,960
की। कैसे बिना अवतार लिए?

559
00:42:21,920 --> 00:42:26,160
हां मैंने वह जो महेंद्र पाल करके हैं जो मलेच्छ से घर वापसी

560
00:42:26,160 --> 00:42:30,240
हुई है जिसकी मैंने नहीं देखा कि उसने कभी भी कोई ऐसी

561
00:42:30,240 --> 00:42:34,400
कोई तात्मिक बात की खैर एक भाई साहब

562
00:42:34,400 --> 00:42:40,400
अभी आए थे विजय करके

563
00:42:44,000 --> 00:42:49,120
ठीक है कोई है नहीं चर्चा के लिए फिलहाल इसको स्थगित करते हैं

564
00:42:49,120 --> 00:42:53,120
जो ब्रह्मा कुमारी की ओर से आए थे इनकी दीदियों ने

565
00:42:53,120 --> 00:42:57,440
अद्वैत को कहां पर माना है कहां नहीं माना अभी इनसे बहुत सारी चीजें हो सकती

566
00:42:57,440 --> 00:43:01,520
थी कि मुक्ति के बाद वापस आना पड़ता है कि नहीं आना पड़ता है ये सब चीजें हो

567
00:43:01,520 --> 00:43:05,600
सकती थी। पर यह बात को इस ओर ले जाना चाहते

568
00:43:05,600 --> 00:43:09,600
हैं कि किसी तरीके से जो हमारे सार्वभौम सिद्धांत है उन्हीं को

569
00:43:09,600 --> 00:43:13,840
ब्रह्मा कुमारी के नाम पर यहां प्रस्तुत कर दें। और वाह हमने

570
00:43:13,840 --> 00:43:17,760
बहुत बड़ा तीर मार लिया।

571
00:43:17,760 --> 00:43:23,680
[नाक से की जाने वाली आवाज़] [गला साफ़ करने की आवाज़]

572
00:43:23,680 --> 00:43:27,840
वो वीडियो मैंने पूरा देखा नहीं है। परंपरा के मामले

573
00:43:27,840 --> 00:43:32,000
में मैंने देखा। मुझे ज्ञात हुआ कि परंपरा के मामले में जो

574
00:43:32,000 --> 00:43:36,000
विपक्षी था वह मौन रहा और शिव

575
00:43:36,000 --> 00:43:40,080
जी वाले शिव और विष्णु में भेद वाले मामले में मौन रहा। फिर चर्चा को वो

576
00:43:40,080 --> 00:43:44,160
दार्शनिकता की ओर मोड़ कर ले गया जो उस चर्चा का विषय था नहीं। लव भारत जी ने

577
00:43:44,160 --> 00:43:48,240
कोई ऐसी तैयारी नहीं की थी मुझे ऐसा लगता है। और उसमें जो है काफी देर

578
00:43:48,240 --> 00:43:52,800
तक बातें उतरी। वहां पर और संतुष्टिजनक जवाब हो सकते थे। वो नहीं मिल पाए।

579
00:43:52,800 --> 00:43:56,800
तो यदि देखेंगे किस विषय पर चर्चा थी। उस विषय में तो भारत जी की ही

580
00:43:56,800 --> 00:44:01,120
विजय हुई। परंपरा के विषय में भी चारों खाने चित होना पड़ा

581
00:44:01,120 --> 00:44:06,240
सामने वाले को। खैर

582
00:44:06,240 --> 00:44:10,240
मैंने उस चर्चा को पूरी तरीके से देखा भी नहीं है। तो बहुत ज्यादा कुछ समीक्षा कर

583
00:44:10,240 --> 00:44:14,720
भी नहीं सकता।

584
00:44:14,720 --> 00:44:18,720
ठीक है। जय श्री राम सभी को।
